Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION .... - Page 37 - SexBaba
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Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION ....

तब नुसरत को फिर से कुछ याद आटा है तब वो फिर से नवाज़ को कॉल लगाती है

"झगड़ा उनके वजह से hi तोह हुआ न?"

नुसरत ने अगला सवाल दागा.

नवाज़ ने सफाई दी,

"नहीं, नीता के साथ झगड़ा उनके वजह से कैसे होगा?"

"मैं नीता की नहीं, उस मॉल की पार्किंग वाले झगडे के बारे में बोल रही हूँ,"

नुसरत ने साफ़ किया.

नवाज़ ठिठक गया.

"आपको किसने बोलै?"

"किसने भी बोलै हो... पर बात सच है न?"

नुसरत की आवाज़ में फ़िक्र थी.

नवाज़ कुछ नहीं बोलै. उसने देखा की आरती उसे शक भरी नज़रों से देख रही है.





नवाज़ ने बात ख़तम करने की कोशिश करते हुए कहा,

"आप, अब मैं रखता हूँ, रस्ते में हूँ."

उसने तुरंत फ़ोन काट दिया और एक गहरी सांस ली. रात की ठंडी हवा में अब थोड़ी गर्मी आ गयी थी.

आरती ने फ़ोन पर्स में रखते हुए पूछा,

"नुसरत आप को मॉल वाली बात कैसे पता चली? और वो मेरे बारे में ऐसा क्यों बोल रही थी?"

नवाज़ ने बाइक की रफ़्तार बधाई और कुटिल मुस्कान के साथ उसके गाल को किश करते हुई बोलै,





"दुनिया है रानी... लोगों का काम है बोलना. तू बस परसो का याद रख."

कोण है साथ .. मेमसाब है न

नहीं है

ठीक है मई वीडियो कॉल करती हु

तू जानती है न मेरा छोटा मोबाइल है उसमे वीडियो नहीं होता

what's अप्प मई तो होता है न

मैंने नया मोबाइल लिया है .. अभी तक उसमे व्हाटप्प डाउनलोड नहीं किया है

मुझसे झूट मत बोल

झूट नहीं सच

कोनसा लिया है

ीफोने

उसके मू से निकल गया तब आरती आपने सर को मार लेती है

पर नुसरत आप कहाँ मैंने वाली थी, उनका शक यक़ीन में बदल रहा था. उसने फिर से कॉल किया

"फ़ोन क्यों रखा मेरा ! पहले बता कौन है साथ... मेमसाब है न तेरे साथ?"

"नहीं है आप, क्यों baar-baar वही बोल रही हो,"

नवाज़ ने ढीठपन से झूट बोलै.

"ठीक है, अगर नहीं है तोह मई वीडियो कॉल करती हूँ, दिखा मुझे अपना दोस्त,"

नुसरत ने सीधा चैलेंज दे दिया.

नवाज़ थोड़ा हड़बड़ाया पर दिमाग चलाया,

"आप, तू जानती है न मेरा छोटा मोबाइल है, उसमें वीडियो कॉल नहीं होता."

नुसरत ने तुरंत पकड़ लिया,

"व्हाट्सप्प में तोह होता है न? आज कल सबके पास है होता है what's अप्प."

नवाज़ ने फास्ट हुए देख नया बहाना बनाया,

"आप, मैंने नया मोबाइल लिया है... अभी तक उसमें व्हाट्सप्प डाउनलोड नहीं किया है."

"मुझसे झूट मत बोल नवाज़!

झूठ नहीं बोल रहा हु

बता कौनसा मोबाइल लिया है?"

नुसरत ने सख्ती से पूछा.

नवाज़ की जुबां फिसल गयी और उत्तेजना में उसके मुंह से निकल गया,

"ीफोने!"

जैसे hi उसने 'ीफोने' कहा, आरती ने शर्म और गुस्से में अपना सर पीट लिया. उसे पता था की अब नवाज़ बुरी तरह फस गया है. ीफोने बोलते hi नुसरत आप का शक पक्का हो गया की एक नौकर के पास इतना मेहेंगा फ़ोन कहाँ से आया.

"ीफोने?!"

नुसरत की आवाज़ हैरानी से पहात गयी.

"तेरे पास इतने पैसे कहाँ से आये? और अगर ीफोने है तोह उसमें वीडियो कॉल क्यों नहीं हो सकता? नवाज़, तू पक्का मेमसाब के साथ है! वो तुझे बिगड़ रही हैं."

आरती ने नवाज़ की कमर पर एक ज़ोर की चुटकी काटी और धीरे से घुरैया,

"पागल हो क्या? ीफोने क्यों बोलै?"

नवाज़ ने घबरा कर फ़ोन काट दिया और बाइक की रफ़्तार और तेज़ कर दी. उसका चेहरा पसीने से तर था.

"अरे रानी, गलती से निकल गया... अब आप पीछा नहीं छोड़ेगी."

आरती ने परेशानी में कहा,

"अब कल कंचन और सब लोग मुझसे सवाल करेंगे. आपकी एक गलती हमें मुसीबत में दाल देगी."

नवाज़ ने जब 'ीफोने' बोलै तोह नुसरत आप का शक यक़ीन में बदल गया. उन्होंने तुरंत अगला सवाल दागा,

"ीफोने किसने दिया? मेमसाब ने?"

नवाज़ ने हड़बड़ाते हुए संभाला,

"पागल हो क्या आप? मेमसाब क्यों देंगी? मैंने अपनी कमाई से लिया है."

नुसरत आप कहाँ मैंने वाली थी, उन्होंने ज़िद्द पकड़ ली,

"ठीक है, मैं वीडियो कॉल करती हूँ, ीफोने में तोह होता hi है. दिखा मुझे कौन है तेरे साथ."

नवाज़ ने देखा की अब बचने का कोई रास्ता नहीं है. उसने तुरंत बाइक साइड में रोकी. आरती घबरा गयी,

"नवाज़ जी, ये क्या कर रहे हो? वो मुझे देख लेंगी!"

नवाज़ ने कुटिल मुस्कान के साथ आरती को थोड़ा बाजु किया और उसे अँधेरे में पेड़ के पीछे छुपने का इशारा किया. फिर उसने नुसरत आप का वीडियो कॉल उठाया.

"देख लिया आप? मेमसाब नहीं है यहाँ,"

नवाज़ ने कैमरा चरों तरफ घुमाया, पर आरती को इतनी सफाई से बचाया की वो फ्रेम में नहीं आयी.

नुसरत आप ने स्क्रीन पर घूरा,

"ठीक है, मेमसाब नहीं है... पर तेरा वो दोस्त कहाँ है जिसके बारे में बोल रहा था?"

नवाज़ ने बिना सोचे तुरंत ढीठपन से जवाब दिया,

"वो... वो मूतने गया है! अब क्या उसका भी वीडियो दिखाऊं?"

नुसरत आप थोड़ा शर्मा गयी और चिढ कर बोली,

"बेशरम! चल रखती हूँ अब."

फ़ोन kat-te hi नवाज़ ने चैन की सांस ली और आरती को अँधेरे से बहार बुलाया. आरती भांपते हुए आयी और उसके सीने पर हाथ मार कर बोली,

"आप तोह एक नंबर के झूठे हो! मूतने गया है... कुछ भी बोल देते हो!"

नवाज़ ने हस्ते हुए उसे फिर से बाइक पर बिठा लिया और बोलै,

"रानी, तुम्हारे लिए तोह पूरी दुनिया से झूट बोल दूँ. चलो अब, रास्ता साफ़ है."
 
नवाज़ ने बाइक की रफ़्तार बधाई hi थी की 10 मिनट बाद ीफोने फिर से बजने लगा. आरती ने स्क्रीन देखि और थोड़ा चिढ कर बोली,

"फिर से आप का hi कॉल है!"

नवाज़ ने एक गहरी सांस ली और झल्लाकर बोलै,

"उठा... देख अब क्या चाहिए उन्हें."

आरती ने फ़ोन कान से लगाया और स्पीकर ों कर दिया.

"हाँ बोलो आप, अब क्या हुआ?"

नवाज़ ने थोड़ा थके हुए लहज़े में पूछा. दूसरी तरफ से नुसरत आप की आवाज़ आयी, जो थोड़ी परेशां लग रही थी

"नवाज़, मैं असली काम तोह तुझे बताना भूल hi गयी थी."

"कौनसा काम?"

"अब्बू के दवाखाने से उस डॉक्टर का कॉल आया था,"

आप ने बताया.

नवाज़ का दिल थोड़ा बैठ गया.

"क्या बोल रही थी डॉक्टर?"

"पैसा जमा करने को बोल रही थी. पिछले काफी दिनों का बिल बाकी है," .

नुसरत ने सीधे मुद्दे की बात की.

नवाज़ ने बाइक चलते हुए थोड़ा उखड़े हुए लहज़े में कहा,

"हाँ... मुझे पता है. मुझे भी कॉल कर रही थी वो डॉक्टर."

"कब?"

आप ने हैरत से पूछा.

"आज नहीं... 2-4 दिन पहले किया था उन्होंने,"

नवाज़ ने सच बताया.

नुसरत आप ने ताना मारा,

"तूने उठाया नहीं होगा उनका कॉल, हमेशा की तरह."

नवाज़ ने थोड़ा ढीठपन और बेबसी दिखते हुए कहा,

"पैसे नहीं हैं तोह उठाकर क्या बोलता? डॉक्टर को बातों से थोड़ी न बेहला सकता हूँ."

नुसरत आप ने मौका देख कर वही दुःखिति राग पर हाथ रख दिया,

"ीफोने लेने के लिए तोह तेरे पास पैसे हैं, पर अब्बू के इलाज के लिए नहीं? शर्म कर नवाज़!"

नवाज़ ने तुरंत सफाई दी,

"आप, ीफोने लोन पर लिया हुआ है... एमी पे! उसके लिए एक साथ पैसे नहीं दिए मैंने."

आरती ने ये सुना तोह अपना सर पकड़ लिया. उसे पता था की नवाज़ हर बार किसी न किसी नए झूट में फास्ट जा रहा है. उसने नवाज़ की कमर पर हल्का सा हाथ रखा जैसे उसे शांत रहने को कह रही हो.

नुसरत ने गुस्से में कहा,

"लोन हो या कुछ भी, अब्बू के लिए पैसे का इंतज़ार कर. कल तक मुझे बता क्या करना है."

फ़ोन काट गया. माहौल में अब सन्नाटा था. नवाज़ थोड़ा परेशां लग रहा था क्यूंकि

अब्बू की बीमारी और हॉस्पिटल का खर्चा उसके सर पर बोझ था.

नवाज़ के चेहरे पर छायी फ़िक्र देखकर आरती का दिल पिघल गया. उसे पता था की नवाज़ भले hi gunda-badmash बनता हो, पर अपने अब्बू के लिए वो अंदर से परेशां है.

आरती ने उसके कंधे पर अपना सर टिकाया और धीरे से उसके कान के पास फुसफुसाई,

"नवाज़ जी, आप फ़िक्र मत कीजिये... अब्बू के इलाज के लिए जितने पैसे चाहिए, मैं दे दूँगी. आप डॉक्टर से बात कर लो."

नवाज़ ने हैरत से आईने में आरती को देखा.

"नहीं रानी, मैं तुमसे पैसे कैसे ले सकता हूँ? मेमसाब हो तुम मेरी."

आरती ने थोड़ा हक़ से उसका हाथ दबाया और बोली,

"मेमसाब बाद में, पहले अपनी रानी समझो. और परसो हमारा इतना बड़ा दिन है, मैं नहीं चाहती आप किसी भी तनाव में रहो. कल hi मैं पैसे का इंतेज़ाम कर दूँगी."

नवाज़ की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गयी. उसने बाइक की रफ़्तार काम की और एक सुनसान, अँधेरी सड़क के किनारे बाइक रोक दी.

"थैंक यू रानी... तूने मेरा बहुत बड़ा बोझ हल्का कर दिया,"

नवाज़ ने भरी आवाज़ में कहा.

आरती मुस्कुरा कर बोली,

"बस 'थैंक यू' से काम चल जायेगा?"

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी और बिना कुछ बोले आरती को टंकी से उठाकर अपने बिलकुल करीब खिंचा. उसने आरती के चेहरे को दोनों हाथों में भरा और उसके लबों पर टूट पड़ा.





ये किश पहले से ज़्यादा जुनूनी था .. आरती के गुलाभी नरम होंटो का नवाज़ रसपान कर रहा था .. रसपान करते हुई उसने आरती को आपने उप्पर खिंच लिया और नवाज़ आरती के होंटो को वैसे चूसने लगा ..

होंठ चूसते चूसते नवाज़ बीच बीच मई आरती के मुंह मई नवाज़ अपनी जीभ घुसा कर आरती के नाज़ुक जीभ को चाटने लगा ..तब आरती भी जोश मई आके जोर से उसको किश करने लगी ..





होंठ चूसते हुई नवाज़ आरती के मम्मी को दबाने लगा ..जिस से आरती को बड़ा मज़ा आने लगा .. ..
 
होंठ चूसते हुई नवाज़ आरती के मम्मी को दबाने लगा ..जिस से आरती को बड़ा मज़ा आने लगा .. ..क्यूंकि उसके मम्मी बोहोत सेंसिटिव the…Hontho को अचे से चूसने के बाद नवाज़ ने आरती के होंटो को छोड़ा और उसके गोर और गुलाबी गालो पैर किस्सेस की बरसात केर di….uske गालो को नवाज़ ने ऐसे चूसा के आरती के गाल और ज़्यादा लाल हो गए….

फिर आरती ने नवाज़ के काळा गले पैर किश किया हलके से gently…fir उसके काळा गालो per….fir…ramu के शर्ट के बटन खोल के फिर से उसके काळा नैक per…fir उसके शोल्डर्स per….fir रामु के काळा बालो से भरी काली चेस्ट पैर हलके हलके किश किया और थोड़ा सा छठा भी …लकिन इतना इंटेंस नहीं जितना नवाज़ ने थोड़े देर पहले किया था…. फिर नवाज़ के काळा पेट पर .. फिर उसके नाभि पैर किश kiya…aisa करते हुए आरती को नवाज़ के जिस्म से पसीने की बदबू भी आ रही thee….wahin आरती के चूसते वक़्त नवाज़ को उसके जिस्म से परफ्यूम की खुशबु आयी thee…lakin आरती ने बदबू की परवाह नहीं की और नवाज़ के काळा जिस्म को चूमती और चाट टी rahi….wahi इस दौरान नवाज़ का हाथ आरती के सेर की बैक पैर आरती के रेशमी बालो को सहलाता जा रहा था और उसको गाइड करता जा रहा thaa…ki कब कहाँ कितना चूमना और चाटना है….

फिर आरती ने नवाज़ के लुंड तरफ देखा …और फिर नवाज़ की आँखों में देखने लगी जैसे पूछ रही हो क्या मई इससे देखु क्या …

आरती रानी .. ऐसे क्या देख रही ho….ye तुम्हारा ही hai…tum चाहो तोह इसको छू सकती ho…agar तुम्हारा दिल चाहे तोह…

तब शरमाते हुई आरती कहती है





नहीं.. वो मैं ऐसे ही देख रही
 
अरे घबराओ नहीं खुलकर kaho….kya सोच रही ho….Ab हम दोनों के बीच भला कैसा पर्दा …हम दोनों के बीच जो तेह हुआ hai…usse मैं कभी बहार नहीं jaunga…isliye बेफिक्र रहो …. तुम्हारी इजाज़त के बगैर मेरा ये लौड़ा तुम्हारी छूट के अंदर नहीं jaayega….isliye बेफिक्र होकर कहो क्या सोच रही थी ??

Wo..wo मैं ये सोच रही थी ki…kaise कहूं??

कहो कहो डरो मत

वो मैं सोच रही थी के इतना बड़ा आपका ye…neeta ने कैसे ले लिया????

अरे रानी …इसमें हैरानी की क्या बात है??? उसने आपने छूट मई भी ले लिया ..गांड मई भी लिया था और मू मई भी

तब आरती शर्मा जाती है





तुमने भी तो आपने मू मई लिया था न

तब आपने नॉटी स्माइल के साथ वो नवाज़ को देखने लगी..





आपने बहुत जिद की न इस वजह से

रानी मुझे बोहत मज़ा आया तेरे लुंड चूसने se….lakin एक काम तोह तुमने किया ही nahi…meri लौड़े को तोह तुमने चूसा … पर पानी नहीं निकला

ऐसा कहते ही नवाज़ ने आरती का हाथ पकड़ केर अपने लौड़े पैर रख दिया…

आरती (स्माइल करते हुए)-

कंचन के फ्रेंड के घर मई इतना सारा किया .. आपका मैं नहीं भरा क्या ???

तुजसे तोह कभी मैं भर ही नहीं सकता मेरी rani…mera बास चले तोह तुझे कमरे से बहार निकलने ही न du…bass दिन रात तेरी चुदाई ही करता राहु….

ऐसा कहते ही नवाज़ ने आरती के गुलाबी नरम होंठो पैर अपने काळा भद्दे होंठ रख दिए और उसको चूसने laga…nawaz के किश से आरती फिरसे मदहोश होने lagi….aur वो भी किश का रेस्पोंद करने lagi…aisa करते करते नवाज़ बाइक से निचे उतर गया और आरती को अपनी गॉड में उठ लिया …और आपने ऊपर लेके ग्रास मई लेट गया ..

सुनसान सड़क के किनारे …. आरती को शर्म तोह बोहत आ रही थी …लकिन मज़ा भी बोहत आ रहा था …क्यूंकि ऐसा hi रोमांस वो अक्सर वो अपनी लाइफ में चाहती thi…jo उसको अपने पति से नहीं बल्कि अपने नौकर से मिल रहा tha…sath साथ उसको डर भी लग रहा था की कहीं किसी ने देख लिया तो

नवाज़ जी यहाँ नहीं plzzz…yaha रोड पाई कोई भी आ सकता hai…agar किसी ने देख लिया तोह बोहत गड़बड़ हो जाएगी…

यहाँ रात के इस समय कोण आने वाला है

आ सकता है ..रोड है ..और अगर हम ज़्यादा देर यहाँ रुक्के तोह पापा जी को या अरविन्द को शुक्क़ हो जायेगा…

ठीक है मेरी जान अभी चलते है … पर एक बार मेरा पानी निकल न .. मई कमरे मई तेरा पानी तो निकला पर तूने मेरा पानी नहीं निकला

तब आरती शर्मा जाती है

आरती मेरी जान जब तुमने मेरा लुंड चूसा tha….tab बहुत मज़ा आया था .. अब फिरसे चूस दे मेरी jaan….kab से तड़प रहा है मेरा lund…aur पानी निकल दे ..

नहीं





कह के नाराज़गी मई गर्दन न न मई हिलाते है

क्यों रानी

वो मैं नहीं केर सकती…..

पर क्यों

मुझे वो बहुत गन्दा लगता है

एक बार तो किया था न तूने ..

वो आप की वजह से

फिर एक बार कर मेरे वजह से

मुझसे नहीं होगा…

अरे रानी कोशिश तोह ker….na मुमकिन कुछ नहीं hai….tu बास कोशिश तोह ker…tu एक बार कोशिश ker…shuruwat में थोड़ा अजीब lagega…ekk दो बार केर legi…fir तुझे भी मज़ा आएगा चूसने me…aur मुझे चुसवाने me….jaise तुझे मज़ा आया था अपनी छूट चुसवाने में….

तब बुरा सा मू करके कहती है

...





लकिन मुझे बोहत गन्दा लगता hai…plzzz आप ज़ोर न दीजिये ..

मैं कोई ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं केर रहा सिर्फ तुझसे रिक्वेस्ट केर रहा hu…acha एक बार केर le….agar तुझे ाचा नहीं लगा तोह मैं दोबारा तुझे कभी नहीं कहूंगा चूसने के लिए…

तब आरती थोड़ा पीछे हुई और अपना फेस नवाज़ के काळा नाग की तरफ ले जाने लगी….





उसने रामु का लुंड पकड़ा पंत की उप्पर से .. जिससे नवाज़ का मोटा लुंड आरती के हाथ में आ गया… नवाज़ का लुंड इतना मोटा था की आरती के हाट की गृप में फुल नहीं आ रहा था..

पंत के उप्पर से वो नॉवज़ का लौड़ा ऊपर नीचे करने लगी…….

आह्ह्ह्ह रानी

फिर वो नवाज़ के लुंड के टॉप पैर पहले किश किया….

पंत से बहार से तो निकल

तब वो नवाज़ की और देखते हुई





उसके पंत के बटन निकल के पंत निचे करके ुंदरपनत निचे करके उसके लुंड को फिर से चुम लेती है

आह्हः रानी

टॉप को अपने मुँह में लेकर लोल्लयपोप की तरह चूसने lagi…dheere धीरे और ज़्यादा लुंड मुँह में लेने lagi….lakin क्यूंकि लुंड बोहत ज़्यदा बड़ा और मोटा thaa…isliye लुंड क टॉप से थोड़ा सा हे ज्यादा वो मुँह में ले paayi….adha लुंड भी अचे से मुँह में नहीं ले पायी…
 
फिर वो किसी पोर्न मूवी के हीरोइन की तरह आरती नवाज़ के लुंड को चूमने lagi….nawaz तोह जैसे जन्नत में पोहंच गया …ऐसी हसीं पारी के मुँह से अपना लुंड चुसवा केर जिस पारी से उसके कॉलेज के लड़के बात करने में भी नर्वस हो जाते the…gaanv मई कोई उसके पास आने मई डरता था .. ऐसे पारी से लुंड चुसवाना से नवाज़ जन्नत मई गया था ..

लुंड चूसना आरती को शुरू में थोड़ा अजीब लगा thaa…lekin अब वो नार्मल होने लगी thi…itna भी बुरा नहीं thaa…jitna उसने सोचा thaa….upper से नवाज़ के मुँह से निकलती सिसकिया आरती के दिल में और जोश भर रही thee…aur वो और जोश से नवाज़ का लुंड चूसने lagi…lund चूसते चूसते आर्ट ने नवाज़ की बॉल्स को भी sehlaya…jisse नाकज पागल hogya….nawaz भी अपने होश खोने laga…ek पल के लिए तोह उसका दिल किया की आरती को रगड़ रगड़ केर छोड़ daaale….lekin उसने खुद पैर काबू रखा…….

….लुंड चूसते चूसते आरती नवाज़ के लुंड के टॉप पैर अपनी जीभ भी फेरने लगी thi…jis से नवाज़ मज़े से पागल हुई जा रहा था…

आरती ने जब नवाज़ का लुंड अपने मुँह से निकला तोह आरती की सांस तेज़ होने लगी ..

एक बात बोलू रानी ?? भले hi तुमने पहली बार लौड़ा चूसा हो ....लेकिन मुझे तुमसे अपना लुंड चुसवा केर बोहत मज़ा आया.... तुम यकीन नहीं करोगी लेकिन इतना मज़ा तोह मुझे नीता को अपना लुंड चुसवाते वक़्त भी नहीं आया था जितना मज़ा तुमसे चुसवा केर आया....

नवाज़ के मुँह से ऐसे गन्दी तारीफ सुनने के बाद आरती को बोहत शर्म आयी और उसने नवाज़ की काळा बालो से भरी काली चेस्ट पैर अपना फेस शर्म से छुपा लिया... आरती का यु शर्माना नवाज़ का मज़ा दोगुना केर रहा था....

आरती को बोहत शर्म आने लगी.... आरती ने कभी अपने ख्वाबो खयालो में भी नहीं सोचा था की वो कभी किसी का लुंड चूसेगी.... वो भी एक काळा बदसूरत नौकर का तोह उसने कभी नही सोचा था … और वो भी रस्ते पाई ..

आरती की हिम्मत नहीं हो रही थी नवाज़ के फेस की तरफ देखने ki...usko बोहत शर्म आ रही thee....aur इस बात को नवाज़ भी समझ रहा था की पहली बार लुंड चूसने की वजह से आरती शर्मा रही है....

फिर नवाज़ ने आरती के मासूम और क्यूट फेस पैर उसके गालो को अपने दोनों हाथो से पकड़ केर अपने फेस के सामने केर diya...jisse नवाज़ की नज़र आरती की शर्मीली नज़र से मिली...

आरती रानी तुमने सचमुच मुझे बोहत मज़ा दिया है.... भले ही नीता जैसे तुमने मुझसे चुदाई न करवाई ho...fir भी मुझे बोहत मज़ा आया और शायद तुम्हे भी बोहत मज़ा aaya....lakin मेरा पानी अभी तक तुमने नहीं निकला ..

तब आरती ने फिर से नवाज़ का लुंड लेके उसके लुंड को चूसने लगी .. उसके मुँह से फिरसे सिसकारियां निकलने लगी....

और इधर नवाज़ अपने हाथ से आरती के मम्मी को दबाने laga...halke हलके........ आरती की साँसे फिरसे तेज़ होने lagi...fir नवाज़ ने आपने एक हाथ पीछे लेजाकर आरती की गांड पर रख दिया और अपनी उंगली आरती के गांड के छेद पर रख के वह वो रब करने laga...jisse आरती को बोहत मज़ा आने लगा

और उसकी सिसकारियां तेज़ होने lagi....halaki आरती ने कई बार आपने पति के साथ सेक्स किया था ....लेकिन नवाज़ की काली मोटी फिंगर तोह अलग ही सेंसेशन पैदा केर रही थी आरती की जिस्म me....wo तोह जैसे बिन पानी की मछली की तरह झटपटाने lagi....wahi आगे से नवाज़ के लुंड को वो जोर जोर से चूसने लगी ..
 
नवाज़ का लम्बा मोटा लुंड आरती अच्छे से चूस रही थी .. जोर जोर से चूस रही थी …नवाज़ तोह जैसे जन्नत की सैर केर रहा था .... आरती के चूसने से नवाज़ चरम सुख के करीब पोहंच गया था

..इस बात का एहसास नवाज़ को भी हुआ था ...नवाज़ ने आरती के रेशमी बालो को अपने हाथो से सहलाना शुरू केर दिया.....

और थोड़े देर रानी ..अब मेरा होनेवाली hi है

तब आरती नवाज़ का लुंड जोर जोर से चूसने लगी .. ....... लगातार आरती द्वारा नवाज़ के लुंड को चूसने से नवाज़ का लुंड छूटने के करीब पोहंच गया... आरती लगातार नवाज़ का लुंड चूसने जा रही थी और तभी नवाज़ के लुंड ने पानी छोड़ दिया.. उस पानी की पहली धार सीधा आरती के मू मई गयी तब आरती ने नवाज़ का लुंड छोड़ diya….jaise hi लुंड बहार आया उस का पानी आरती के प्यारे मासूम गोर चेहरे पैर जा giri....jahan उसने आरती के आँखे उसके गाल उसके होंठ सब कुछ भिगो दिया... तभी आरती ने अपनी आँखे बंद केर लिए और मू साइड कर लिया

तभ उसके लुंड की धार आरती के गोर मम्मी और उसके क्लीवेज पैर जा गिरी ...वो पानी क्लीवेज से होता हुआ आरती की ब्लाउज के अंदर तक पोहंच गया....

तब नखरे से आरती कहती है

ये क्या किया आपने

कुछ नहीं होता रानी

ऐसा बोल के उसको आपने बहो मई लेके लेट गया और आरती भी उसके छथि से चिपक के लेट गयी ..

कुछ 20 मिनट वो वैसे hi लेते रहे

जब आरती ने आँख खोली तब नवाज़ के चेहरे पर छायी फ़िक्र देखकर आरती का दिल पिघल गया. उसे पता था की नवाज़ भले hi gunda-badmash बनता हो, पर अपने अब्बू के लिए वो अंदर से परेशां है.

आरती ने उसके कंधे पर अपना सर टिकाया और धीरे से उसके कान के पास फुसफुसाई,

"नवाज़ जी, आप फ़िक्र मत कीजिये... अब्बू के इलाज के लिए जितने पैसे चाहिए, मैं दे दूँगी. आप डॉक्टर से बात कर लो."

नवाज़ ने हैरत से आरती को देखा.

"नहीं रानी, मैं तुमसे पैसे कैसे ले सकता हूँ? मेमसाब हो तुम मेरी."

आरती ने थोड़ा हक़ से उसका हाथ दबाया और बोली,

"मेमसाब बाद में, पहले अपनी रानी समझो. और परसो हमारा इतना बड़ा दिन है, मैं नहीं चाहती आप किसी भी तनाव में रहो. कल hi मैं पैसे का इंतेज़ाम कर दूँगी."

नवाज़ की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गयी.

"थैंक यू रानी... तूने मेरा बहुत बड़ा बोझ हल्का कर दिया,"

नवाज़ ने भरी आवाज़ में कहा.

आरती मुस्कुरा कर बोली,

"बस 'थैंक यू' से काम चल जायेगा?"

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी और उसने आरती के चेहरे को दोनों हाथों में भरा और उसके लबों पर टूट पड़ा. ये किश पहले से ज़्यादा जुनूनी था.

नवाज़ ने इस 'थैंक यू' के बहाने अपनी साड़ी परेशानी आरती के जिस्म की गर्मी में भुलाने की कोशिश की.

आरती ने भी उसके बालों में अपनी उँगलियाँ फसा दी और उसके इस बेबाक रोमांस में खो गयी. रात के सन्नाटे में सिर्फ उनकी साँसों की आवाज़ आ रही थी. नवाज़ ने किश karte-karte hi आरती की गर्दन पर अपना चेहरा छुपाया और गहरा निशान छोड़ दिया.

"अब चलें? वर्ण यहीं सड़क पर सब शुरू हो जायेगा,"

आरती ने भांपते हुए नवाज़ को थोड़ा दूर dhakela.aarti फटाफट उठी और आपने साडी ठीक करने लगी .... आरती के चेहरे पर एक सटिस्फैक्शन वाली मुस्कान थी वही नवाज़ के चेहरे पैर भी एक सटिस्फैक्शन वाली कमीनी मुस्कान thee...ek दिन मई hi 2 बार उसका लुंड इस बड़े घर की बहु ने चूसा था .. वो भी बिना किसी ज़ोर ज़बरदस्ती के....

नवाज़ ने हस्ते हुए बाइक स्टार्ट की और बोलै,

"ये तोह बस शुरुआत है रानी... असली 'थैंक यू' तोह परसो खेत में बोलूंगा, पूरी रात भर!"
 
उधर नुसरत आप का गुस्सा अब आसमान छू रहा tha.usne फिर से नवाज़ को कॉल किया

"नवाज़, ीफोने लेने के लिए तेरे पास पैसे हैं, पर अब्बू के लिए नहीं? शर्म कर! अगर कल तक पैसे नहीं भरे, तोह हॉस्पिटल वाले अब्बू को निकाल देंगे!"

आरती, ये सब सुन रही थी, अब उससे रहा नहीं गया. उसने नवाज़ के कान के पास अपना मुँह किया और फ़ोन में hi धीरे से पूछा,

"कितने पैसे देने हैं?"

नवाज़ ने तुरंत इशारे से उसे मन किया और आप से बोलै, "आप, ... मैं कर लूंगा इंतेज़ाम. ीफोने लोन पर है बोलै न."

उसने दबी आवाज़ में आरती से कहा,

"तुम रहने दो रानी... तुमने मुझे कपडे दिए, इतना मेहेंगा ीफोने दिया, अब ये नहीं."

लेकिन आरती अब ज़िद पर अड़ गयी थी. उसने नवाज़ की आँखों में देखते हुए हक़ से कहा,

"आपके अब्बू मेरे कोई नहीं हैं क्या? और मेरे पैसे क्या आपके नहीं हैं?"

नुसरत आप ने फ़ोन पर ये सुन लिया पर उसे लगा नवाज़ किसी दोस्त से बात कर रहा है.

"नवाज़! कौन है वहां? क्या वो तुझे पैसे दे रहा है?"

नवाज़ ने हड़बड़ाकर कहा,

"नहीं आप, कोई नहीं है!"

तभी आरती ने थोड़ा ज़ोर से, ताकि आप को सुनाई दे, बोल दिया,

"मैं देती हूँ न पैसे!"

नुसरत आप की आवाज़ में अब शैतानी मुस्कान थी.

"ओहो! तोह तेरी वह नयी गर्लफ्रेंड साथ में है?"

नवाज़ ने तुरंत झूट बोलै,

"कौन गर्लफ्रेंड आप? पागल मत बनो."

"वही... सॉरी, तेरी वह 'फ्रेंड', आरती अग्रवाल! उससे ले लेना पैसे, वह तोह तुझ पर बहुत मेहरबान लगती है,"

नुसरत ने हँसते हुए कहा और बिना नवाज़ का जवाब सुने कॉल काट दिया.

माहौल में एक दम सन्नाटा छ गया. आरती शर्म के मारे paani-paani हो गयी. उसने अपना चेहरा नवाज़ के पीछे छुपा लिया.

"आप को सब पता चल गया है नवाज़ जी... अब मैं उन्हें क्या मुँह दिखाउंगी?"

नवाज़ ने बाइक की रफ़्तार काम की और एक कुटिल मुस्कान के साथ बोलै,

"आप तोह हमेशा से तेज़ हैं रानी, पर उन्हें लगता है तुम सिर्फ मेरी 'फ्रेंड' हो. उन्हें क्या पता की परसो खेत में हमारी सुहागरात होने वाली है."

आरती ने शरमाते हुए उसकी पीठ पर एक मुक्क़क मारा,

"धत बेशरम! चलिए अब जल्दी, घर पहुंचना है."

नवाज़ ने थोड़ा चिल्लाते हुए पूछा,

"तुझे इतने ज़ोर से बोलने की क्या ज़रुरत थी? आप ने सब सुन लिया."

आरती ने मासूमियत से जवाब दिया,

"आप मन कर रहे थे, इस वजह से मेरे मुँह से निकल गया. अब चलिए, किसी एटीएम के पास रुकिए, मैं निकल कर देती हूँ."

नवाज़ ने aas-paas देखा, रात काफी हो चुकी थी.

.

"अब इस वक़्त एटीएम कहाँ मिलेगा?"

"देखते हैं न, कहीं तोह होगा,"

आरती ने हौसला दिया.

नवाज़ ने फ़िक्र जताई,

"तू अपने पति और ससुर को क्या बोलेगी इतने पैसे निकलने पर?"

आरती ने बेफिक्री से कहा,

"मैं बोल दूँगी कुछ न कुछ, आप उसका टेंशन मत लो."

वो दोनों एटीएम ढून्ढ hi रहे थे की अचानक आरती को याद आया. जब वो हॉस्पिटल में अपनी दादी को देखने गयी थी, तब उसके भाई ने उसे 50,000 रुपये कॅश दिए थे. उस वक़्त उसने मन किया था, पर भाई ने ज़बरदस्ती उसके पर्स में दाल दिए थे. आज उसे पहली बार लगा की वो पैसे लेकर उसने बहुत अच्छा किया.

"नवाज़ जी, एटीएम की ज़रुरत नहीं है. मेरे पास कॅश है! मेरे भाई ने दिए थे जब मैं दादी से मिलने हॉस्पिटल गयी थी,"

आरती ने ख़ुशी से बताया.

नवाज़ हैरान रह गया.

"इतने पैसे तेरे पास हैं?"

"हाँ, चलिए डायरेक्ट हॉस्पिटल... अभी अब्बू का बिल भर देते हैं,"

आरती ने नवाज़ का कन्धा थपथपाते हुए कहा.

नवाज़ के दिल में आरती के लिए इज़्ज़त और बढ़ गयी. उसने बाइक की रफ़्तार बधाई और सीधा हॉस्पिटल की तरफ निकल पड़ा. रात के सन्नाटे में नवाज़ ने एक बार फिर आईने में आरती को देखा और मुस्कुराया. उसका बर्थडे आज सच में यादगार बनता जा रहा था.

नवाज़ ने हॉस्पिटल के गेट पर पहुँचते hi ज़ोर से हॉर्न बजाय. आरती झट से बाइक से उत्तरी और अपनी साड़ी संभालती हुई कड़ी हो गयी. गेट पर तैनात वॉचमन ने पहचान लिया और मुस्कुरा कर बोलै,

"अरे नवाज़ भाई! आप इस वक़्त?"

नवाज़ ने ढीठपन से जवाब दिया,

"हाँ, उस बूढ़े को देखना है."

ये सुनते hi आरती ने तुरंत नवाज़ के कंधे पर एक हलकी मुक्की मारी और धीरे से घूरते हुए बोली,

"क्या आप भी न... अब्बू कहो न उन्हें! हर बार 'budhha-budhha' क्यों बोल रहे हो जी? अच्छा नहीं लगता."

फिर दोनों अंदर दाखिल हुए. आरती ने थोड़ा फ़िक्र जताते हुए पूछा,

"वैसा आपके अब्बू को हुआ क्या है जी? कौनसी बीमारी है?"

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी और बिना किसी शर्म के बोलै,

"देख नहीं रही? ये दारू छुड़ाने वाला नशाबंदी हॉस्पिटल है. बुद्धा बहुत दारू पीटा है, घर वालों का जीना हराम कर रखा था, इसलिए यहाँ पटक दिया."

आरती हैरानी से उसे देखने लगी, पर नवाज़ ने वही ढीठपन जारी रखा. जब वो वॉचमन से थोड़ा आगे निकल कर कॉरिडोर में आये, तोह आरती ने फिर टोका,

"फिर से बुद्धा बोलै आपने?"

नवाज़ ने मौका देख कर आरती की कमर में हाथ डाला और उसे अपने करीब खींचते हुए फुसफुसाया,

"आदत है रानी... प्यार से बोलता हूँ उसे."

अंदर रिसेप्शन पर एक स्टाफ खड़ा था. नवाज़ ने वहां पहुँचते hi बड़े रॉब से पूछा,

"मेरा बुद्धा कहाँ है?"

आरती ने शर्म के मारे अपना सर पीट लिया और फिर से नवाज़ के कंधे पर मारा. स्टाफ वाला उन्हें अजीब नज़रों से देखने लगा, पर नवाज़ को तोह बस अपनी रानी के साथ इस वक़्त का मज़ा लेना था

नवाज़ के ढीठपन की अब कोई हद्द नहीं थी. जैसे hi वो दोनों अब्बू के वार्ड में पहुंचे, नवाज़ ने उनकी हालत देखते hi पूछा,

"कैसे है अब्बू?"

"अच्छा हूँ रे," अब्बू ने थोड़ा थके हुए लहज़े में जवाब दिया, फिर उनकी नज़र नवाज़ के बिलकुल पास कड़ी आरती पर पड़ी. आरती ने बड़े hi लिहाज़ से अपना पल्लू सर पर थोड़ा सा खिंचा था.

"ये कौन है?"

अब्बू ने हैरानी से पूछा.

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ आरती की तरफ देखा और थोड़ा टशन में बोलै,

"पहचाना नहीं क्या?"

"नहीं,"

अब्बू ने सर हिलाया.

नवाज़ ने आरती की कमर पर हल्का सा हाथ रखा और बेशर्मी से बोलै,

"आप की बहु!"

आरती का चेहरा एक दम से तमतमा गया, वो शर्म के मारे paani-paani हो गयी. उसने नवाज़ को घर कर देखा तब नवाज़ ने तुरंत बात संभाली,

"बहु... मतलब सेठ जी की बहु! अरविन्द मालिक की बीवी. सेठ जी और आप दोस्त हैं न ... इसलिए आपकी बहु हुई रिश्ते में."

अब्बू थोड़ा हैरान हुए पर फिर मुस्कुरा कर बोले,

"अच्छा... वैसा क्या? सेठ जी तोह बहुत बड़े आदमी हैं... वो मुझ गरीब को दोस्त मानते हैं, ये उनका बड़प्पन है."

आरती ने अब्बू के पेअर छू कर आशीर्वाद लिया. उसने देखा की नवाज़ पीछे खड़ा कुटिलता से मुस्कुरा रहा है, जैसे उसे मज़ा आ रहा हो आरती को ऐसी मुश्किल में डालने में.

अब्बू ने थोड़ी फ़िक्र के साथ नवाज़ का हाथ पकड़ा और पूछा,

"बीटा, बिल का क्या? हॉस्पिटल वाले baar-baar बोल रहे हैं."

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ आरती की तरफ इशारा किया और बड़े फख्र से बोलै,

"आप फ़िक्र क्यों करते हो अब्बू? आपकी ये बहु आपका बिल भरने hi तोह आयी है."

तब आरती कहती है

"अब्बू, आप फ़िक्र मत कीजिये, हम अभी बिल भरने आये हैं,"

आरती ने नरम लहज़े में कहा और अपने पर्स से वो 50,000 रुपये निकाले.

अब्बू ने नम्म आँखों से आरती को देखा और नरम आवाज़ में बोले,

"बड़े मेहरबान बेटी है तेरी, नवाज़. इतना कौन करता है आज कल."

आरती ने बड़े hi लिहाज़ से अपना पल्लू थोड़ा और आगे खिंचा और नरम लहज़े में बोली,

"नहीं चाचा, ये तोह मेरा फ़र्ज़ है. आप हमारे बड़े हैं, आपका ख्याल रखना हमारा काम है."

इतना कह कर आरती ने झुक कर अब्बू के फिर से पाँव छुए. अब्बू ने उसके सर पर हाथ रखा और दिल से दुआ देते हुए बोले,

"जीती रहो बेटी... हमेशा सुखी रहो."

नवाज़ ने देखा की उसकी रानी ने सच में उसकी इज़्ज़त और उसके अब्बू की जान दोनों बचा ली हैं. उसने अब्बू से नज़र बचा

कर आरती की तरफ एक आँख मारी ..

तभी पीछे से एक सख्त आवाज़ आयी,

"आ गए तुम!"

नवाज़ ने पलट कर देखा तोह सामने डॉक्टर साहिबा कड़ी thi—ek 55 साल की महिला जो थोड़ी थकी हुई पर रोबदार लग रही थी.

नवाज़ ने अपने वही पुराने ढीठपन में कहा,

"आप डॉक्टर साहिबा? आप अभी तक ज़िंदा हैं?"

डॉक्टर ने थोड़ा चिढ कर और चश्मा ठीक करते हुए जवाब दिया,

"लगता है तुम्हारे जैसे पेशेंट के रिलेटिव्स होंगे तोह जल्द hi मर जाउंगी!"

नवाज़ ने तुरंत बात पलटी,

"अरे... मारें आपके दुश्मन! मैं तोह बस ये कह रहा था की रात के इस वक़्त भी आप जगी हुई हैं... ये पूछना चाहता था."

"हाँ, तेरे लिए hi जगी हूँ और तेरे अब्बू के बिल के लिए,"

डॉक्टर ने सीधा मुद्दे पर आते हुए कहा.

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ उन्हें ऊपर से नीचे देखा और मक्खन लगते हुए बोलै,

"वैसे डॉक्टर मैडम... आप क्या कहती हैं ये ज़रा बता सकती हैं क्या? इस उम्र में... इतनी रात को भी आप Masha'Allah लग रही हो!"

आरती ने ये सुना तोह अपनी हंसी नहीं रोक पायी और धीरे से नवाज़ के कंधे पर मारा. डॉक्टर साहिबा ने एक ठंडी सांस भरी और बोली,

"ज़्यादा मस्का मत लगा नवाज़... अब मैं तेरे झांसे में नहीं आने वाली. पहले ये बता, बिल कब भरने वाला है?"

आरती ने तुरंत आगे बढ़कर अपना पर्स खोला और नरम लहज़े में पूछा,

"मैडम, कितना पेमेंट करना है?"

"25,000 रुपये (25क),"

डॉक्टर ने बताया.

आरती ने बिना देर किये पर्स से कॅश निकाला और डॉक्टर के हाथ में थमा दिया. डॉक्टर साहिबा हैरत से आरती को देखने lagi—unhe यकीन नहीं हो रहा था की नवाज़ के साथ इतनी सुन्दर और अमीर लगने वाली औरत है जो इतनी आसानी से बिल भर रही है.

नवाज़ ने एक विजयी मुस्कान दी और आरती की तरफ देख कर आँख मारी, जैसे कह रहा

हो की उसकी रानी ने आज मैदान मार लिया.

आरती जब नवाज़ के साथ हॉस्पिटल से बहार निकलती है, तभी नवाज़ के ीफोने की घंटी फिर से बजती है. स्क्रीन पर नुसरत आप का नाम देखकर आरती थोड़ा चिढ जाती है.

नवाज़ ने जैसे hi फ़ोन उठाया, आरती ने नवाज़ की बांह पकड़ते हुए थोड़ा गुस्से और नखरे में कहा,

"नवाज़ जी, ये नुसरत आप क्यों इतना डिस्टर्ब कर रही हैं? अभी तोह उनसे बात हुई थी!"

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी और आरती को शांत रहने का इशारा किया. उसने फ़ोन कान से लगाया,

"हाँ आप, अब क्या हुआ? बिल तोह भर दिया है न."

दूसरी तरफ से नुसरत आप की आवाज़ थोड़ी शक्ति थी,

"बिल भर दिया? इतनी जल्दी 25 हज़ार कहाँ से आये तेरे पास? नवाज़, सच बता, तू उस आरती अग्रवाल के साथ hi है न? वो तेरे साथ हॉस्पिटल गयी थी?"

नवाज़ ने हड़बड़ाकर आरती की तरफ देखा, जो अब ध्यान से बातें सुन रही थी.

"अरे आप, क्या कुछ भी बोल रही हो! मेमसाब अपने घर पे होंगी, वो मेरे साथ हॉस्पिटल क्यों आएँगी?"

नुसरत ने ताना मारा,

"तोह फिर ये 'बहु' बनकर किसने अब्बू के पाँव छुए? हॉस्पिटल के वॉचमन ने मुझे फ़ोन किया था की तेरे साथ एक बहुत सुन्दर और अमीर औरत आयी है!"

आरती ने जब सुना की वॉचमन ने सब बता दिया है, तोह उसने अपना सर पीट लिया. उसने धीरे से नवाज़ के कान में फुसफुसाया,

"देखा? मैंने कहा था न ये सब मत करो! अब क्या जवाब डोज?"

नवाज़ ने ढीठपन से जवाब दिया,

"आप, वो... वो मेरी एक पुराणी दोस्त है, तू नहीं जानती उसे. फ़ोन रख अब, मैं रस्ते में हूँ."

नवाज़ ने फ़ोन काट दिया और आरती की कमर में हाथ डालकर उसे बाइक की तरफ ले जाने लगा.

"फ़िक्र मत कर रानी... आप को लगता है की तू मेरी गर्लफ्रेंड है, और सच तोह ये है की परसो तू मेरी खेत वाली सुहागरात की रानी बनने वाली है."

आरती शर्मा गयी पर उसने थोड़ा डरते हुए पूछा,

"पर अगर उन्होंने अरविन्द को बता दिया तोह?"

नवाज़ ने उसके लबों पर एक हल्का सा किश किया और बोलै,

"नहीं बताएगी... उससे कह दूंगा की अगर अरविन्द को बताया तोह अब्बू का इलाज रुक जायेगा. चल अब, परसो की तयारी करते हैं."
 
नवाज़ ने बाइक की रफ़्तार थोड़ी काम की और आईने में आरती की फ़िक्र भरी आँखों में देखा. आरती उससे सात कर बैठी थी, उसके दिमाग में अभी भी नुसरत आप का डर घूम रहा था.

"फिर भी नवाज़ जी... अगर नुसरत ने हमें प्रॉब्लम किया तोह क्या करेंगे?"

आरती ने उसके कंधे पर अपना सर टिकते हुए पूछा.

"वो बहुत सवाल कर रही हैं, और अगर उन्होंने गलती से भी अरविन्द या ससुर जी से कुछ कह दिया तोह?"

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी और आरती का हाथ पकड़ कर अपने लबों से लगा लिया.

"अरे रानी, तू इतनी फ़िक्र क्यों करती है? नुसरत आप को मैं अच्छे से जानता हूँ. वो थोड़ी ज़िद्दी हैं, पर बेवक़ूफ़ नहीं."

आरती ने थोड़ा शका करते हुए पूछा,

"मतलब?"

नवाज़ ने समझते हुए कहा,

"देख, उन्हें पता है की अब्बू का इलाज तेरे पैसों से हो रहा है. अगर वो अरविन्द को कुछ बताएंगी, तोह तेरा घर तोह ख़राब होगा hi, पर साथ में अब्बू का इलाज भी रुक जायेगा. वो इतना बड़ा रिस्क कभी नहीं लेंगी."

आरती ने गहरी सांस ली,

"पर उन्हें हमारे बारे में इतना सब पता चल गया है... हॉस्पिटल वाला किस्सा, ीफोने... वो चुप कैसे रहेंगी?"

नवाज़ ने शरारत से उसकी कमर थोड़ी और कसके पकड़ी और फुसफुसाया,

"उन्हें लग रहा है की तू मेरी 'अमीर गर्लफ्रेंड' है जो मुझ पर लट्टू है. उन्हें सच थोड़ी पता है की परसो खेत में हमारी सुहागरात होने वाली है! मैं उन्हें बातों में फसा लूंगा, तू बस परसो की तयारी कर."

आरती थोड़ा शर्मा गयी पर उसके मैं का बोझ हल्का हो गया. उसने नवाज़ के सीने पर हाथ रखा और बोली,

"आप बहुत बड़े खिलाडी हो नवाज़ जी... सबको अपने इशारों पर नाचते हो."

नवाज़ ने बाइक की रफ़्तार बधाई और बोलै,

"सिर्फ तुझे नहीं रानी... तुझे तोह मैं खेत में अपने ऊपर नचाउंगा!"

आरती ने शर्मा कर अपना चेहरा उसकी पीठ में छुपा लिया और बोली,

"धत बेशरम!"

आरती ने नवाज़ के कंधे पर अपना सर टिकाया और थोड़ा फ़िक्र भरी आवाज़ में बोली,

"नवाज़ जी, फिर भी... मुझे लग रहा है की नुसरत आप तकलीफ देंगी. वो आपकी बड़ी बहन हैं और रिश्ते में मेरी नानन्द लगेंगी... उन्हें थोड़ा रेस्पेक्ट देकर बात किया कीजिये."

नवाज़ ने बाइक की रफ़्तार थोड़ी काम की और आईने में आरती की तरफ देखा. उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गयी.

"ओहो रानी! अभी से nanand-bhabhi वाला प्यार जग गया? मान लिया न की तू मेरी बेगम है?"

आरती थोड़ा शर्मा गयी और उसकी पीठ पर एक हलकी चुटकी काटी.

"मज़ाक मत कीजिये! मैं सच बोल रही हूँ. वो बड़ी हैं, और अगर उन्हें लगा की हम उन्हें धोखा दे रहे हैं, तोह वो गुस्से में सब बिगड़ देंगी. उन्हें इज़्ज़त डोज तोह शायद वो हमारा साथ दें."

नवाज़ ने गहरी सांस ली और आरती का हाथ पकड़ कर अपने लबों से लगाया.

"ठीक है रानी, तेरी बात सर आँखों पर. अब से उनसे बड़ी तमीज से बात करूँगा. उन्हें लगेगा की उनका भाई सुधर गया है, पर उन्हें क्या पता की ये सब तेरी वजह से हो रहा है."

आरती ने सुकून की सांस ली.

"हाँ, उन्हें बस ये लग्न चाहिए की आप एक अच्छे रस्ते पर हो. और रही बात परसो खेत वाले प्लान की... उसके बारे में उन्हें kaano-kaan खबर नहीं होनी चाहिए."

नवाज़ ने शरारत से पूछा,

"क्यों? क्या नानन्द को अपनी भाभी की सुहागरात का पता नहीं चलना चाहिए?"

आरती ने शर्मा कर अपना चेहरा उसकी पीठ में छुपा लिया और बोली,

"धत बेशरम! चलिए अब जल्दी, घर पहुंचना है."

आरती की फ़िक्र जायज़ थी. नवाज़ ने बाइक की रफ़्तार थोड़ी काम की और आईने में आरती की आँखों में देखते हुए एक कुटिल मुस्कान दी.

आरती ने उसके कंधे पर थोड़ा दबाव बनाते हुए पूछा,

"नवाज़ जी, अगर नुसरत आप ने हमें baar-baar डिस्टर्ब किया तोह हमारा खेत वाला प्लान तोह चौपट हो जायेगा न? वो हर थोड़ी देर में फ़ोन करती हैं."

नवाज़ ने एक गहरी सांस ली और आरती का हाथ पकड़ कर अपने लबों से लगाया.

"अरे रानी, तू फ़िक्र क्यों करती है? नुसरत आप को हैंडल करना मुझे अच्छे से आता है. परसो के लिए मैंने एक सॉलिड बंदोबस्त सोचा है."

आरती ने हैरानी से पूछा,

"क्या?"

नवाज़ ने शरारत से फुसफुसाया,

"परसो जब हम खेत में होंगे, तोह मैं अपना फ़ोन 'स्विच ऑफ' कर डूंगस. और उन्हें पहले hi बोल दूंगा की मैं किसी ज़रूरी काम से गाँव से बहार जा रहा हूँ जहाँ नेटवर्क नहीं मिलता."

आरती ने थोड़ा सुकून महसूस किया पर फिर बोली,

"पर वो आपकी बड़ी बहन हैं, थोड़ा डर तोह लगता है. वो बहुत तेज़ हैं, कहीं हमारा पीछा न करने लगें."

नवाज़ ने हस्ते हुए बाइक की रफ़्तार बधाई,

"पीछा कैसे करेंगी? उन्हें तोह पता भी नहीं की हमारा खेत कहाँ है! और वैसे भी, वो अब्बू की देखभाल में इतनी बिजी रहेंगी की उन्हें हमारे लिए वक़्त hi नहीं मिलेगा."

आरती ने नवाज़ के सीने पर अपना सर टिका दिया. उसे अब थोड़ा भरोसा होने लगा था.

"ठीक है नवाज़ जी, पर याद रखना... उस दिन कोई डिस्टर्ब नहीं होना चाहिए. मैं चाहती हूँ हमारी वो सुहागरात सिर्फ हमारी हो."

नवाज़ ने उसकी कमर और कसके पकड़ी और बोलै,

"वही होगा रानी... परसो सिर्फ तू होगी, मैं होऊंगा और वो सुनसान खेत!"
 
फिर भी इस नुसरत का कुछ नहीं हो सकता क्या

नवाज़ ने बाइक की रफ़्तार थोड़ी और काम की और आईने में आरती की आँखों में आँखें दाल कर, थोड़े गुस्से और गंभीरता से कहा:

"फिर भी क्या रानी? वो नुसरत मेरी बड़ी बहन है और रिश्ते में तेरी 'नानन्द' लगती है... थोड़ी रेस्पेक्ट देकर बात कर, समझी?"

नवाज़ के लहज़े में अचानक आयी सख्ती ने आरती को थोड़ा हैरान कर दिया.

आरती ठिठक गयी. उसे उम्मीद नहीं थी की नवाज़, जो अभी तक उससे इतनी ठरक और रोमांस भरी बातें कर रहा था, अपनी बहन के लिए इतना स्टैंड लेगा. उसे एहसास हुआ की नवाज़ भले hi गुंडा हो, पर अपने खून के रिश्तो के लिए उसके दिल में बहुत इज़्ज़त है.

आरती ने थोड़ा सेहम कर और अपनी नज़रें झुका कर धीरे से जवाब दिया,

"जी..."

नवाज़ ने बाइक की रफ़्तार थोड़ी और काम कर दी और आईने में आरती की आँखों में बड़े hi गहरी नज़रों से देखते हुए कहा,

"तू एक बात अपने ज़हन में बिठा ले आरती..."

आरती ने थोड़ा हैरान होकर पूछा,

"जी? कौनसी बात नवाज़ जी?"

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी और उसकी कमर पर अपनी पकड़ और मज़बूत करते हुए बड़े रूब से बोलै,

"तू सच में मेरी 'बेगम' बनना चाहती है न?"

आरती का दिल एक पल के लिए रुक गया. उसने नवाज़ की आँखों में वही पुराणी 'ठरक' और जूनून देखा जो उसे हमेशा पागल कर देता था. उसने शर्म से अपनी नज़रें झुका ली और नवाज़ के सीने से थोड़ा और चिपक कर बैठ गयी.

"कैसी बातें करते हैं आप रस्ते में... कोई सुन लेगा,"

आरती ने नरम आवाज़ में कहा.

नवाज़ ने हस्ते हुए बाइक की रफ़्तार बधाई और बोलै,

"सुनने दे रानी! अगर बेगम बनना है तोह बेगम जैसा जिगर भी रखना पड़ेगा. नुसरत आप मेरी बहन है, इसलिए उन्हें रेस्पेक्ट देना सीख, तभी तोह तू घर की 'बड़ी बेगम' बन पायेगी."

आरती ने सुकून की सांस ली और फुसफुसाई,

"मान लिया मेरे राजा... अब से उन

हे पूरी इज़्ज़त दूँगी.

नवाज़ ने उसकी ख़ामोशी महसूस की और उसका गुस्सा थोड़ा ठंडा हुआ. उसने आरती का हाट, जो उसके कंधे पर था, थोड़ा नरम से दबाया और नरम आवाज़ में बोलै,

"देख रानी, मैं जानता हूँ वो तुझे डिस्टर्ब कर रही है, पर वो परेशां है. अब्बू की बीमारी ने उसे थोड़ा chid-chida बना दिया है. तू फ़िक्र मत कर, मैं उसे समझा दूंगा, पर तू उन्हें बुरा मत मान."

आरती ने नवाज़ की पीठ पर अपना सर टिका दिया और फुसफुसाई,

"माफ़ कीजिये नवाज़ जी, मैं तोह बस हमारे परसो के खेत वाले प्लान को लेकर डर रही थी. मैं नहीं चाहती हमारी सुहागरात में कोई भी रुकावट आये."

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी और बाइक की रफ़्तार बढ़ाते हुए बोलै,

"नहीं आएगी रानी... परसो का दिन सिर्फ तेरा और मेरा होगा. अब्बू का बिल भर दिया है, अब नुसरत आप भी सुकून से रहेंगी और हम भी."

ठीक है बस आप परसो हमारी वो सुहागरात खेत में यादगार बना देना.

नवाज़ ने एक शैतानी मुस्कराहट के साथ जवाब दिया,

"यादगार? रानी, मैं तुझे ऐसा मज़ा चखाउंगा की तू अरविन्द को हमेशा के लिए भूल जाएगी!"
 
आरती और नवाज़ thake-hare घर पहुंचे .. मैं गेट खोल के वो अंदर दाखिल हुए. हॉल की हलकी रौशनी चालू थी .. गाड़ी की आवाज़ सुनकर शेठ जी ने मैं दूर खोला .. शेठ जी के चेहरे पर थोड़ी चिंता और थोड़ी रहत दिख रही थी.

"नमन बता रहा था की तुम लोग निकल चुके हो, पर इतनी देर कर दी ,"

शेठ जी ने दूर ओपन करते हुए कहा.

आरती अंदर आते हुई नवाज़ की तरफ इशारा करते हुए बोली,

"पापा जी, हम निकल तो जल्दी गए थे पर सच में बहुत परेशानी हो गयी. इनकी गाडी सुनसान रस्ते पर ख़राब हो गयी थी. रात के दो बज रहे थे, door-door तक कोई गेराज खुला नहीं मिला. नवाज़ जी ने खुद hi सारा औज़ार निकल कर घंटों म्हणत की तब जाकर गाडी स्टार्ट हुई."

नवाज़ ने थोड़ा झिझकते हुए सर झुका लिया,

"सॉरी शेठ जी, आपको जागना पड़ा."

शेठ जी ने मुस्कुराकर नवाज़ के कंधे पर हाथ रखा और कहा,

"कोई बात नहीं बीटा, गाडी तोह मशीन है, कभी भी धोखा दे सकती है. पर तुम दोनों sahi-salamat पहुँच गए, वही बड़ी बात है. चलो अब जल्दी से haath-muh धो लो..

आरती खाना धक् कर रखा है

, गरम करके सब को परोस दो. नवाज़, तुम थक गए होंगे, पहले थोड़ा पानी पियो.

आरती किचन की तरफ बढ़ गयी, जबकि नवाज़ अभी भी थोड़ा ावक्वार्ड फील कर रहा था. शेठ जी ने उसकी हालत समझते हुए माहौल को हल्का करने की कोशिश की.

"बैठो नवाज़, परेशान मत हो,"

शेठ जी ने सोफे की तरफ इशारा करते हुए कहा.

"आरती बता कह रही थी की तुमने खुद hi गाडी ठीक की. आज कल के लड़कों को तोह इंजन खोलना भी नहीं आता, तुमने तोह कमाल कर दिया."

नवाज़ ने हलकी मुस्कराहट के साथ जवाब दिया,

"बस थोड़ा बहुत शौक है शेठ जी, वही काम आ गया."

तभी आरती किचन से आवाज़ लगाती है, "पापा जी, नवाज़ जी को ज़्यादा मक्खन मत लगाइये, वर्ण ये कल फिर से पुराणी रस्ते से गाडी ले जायेंगे!"

सब हंसने लगे, और घर का तनाव ख़तम हो गया.

फिर आरती बहार आयी

पापा जी नवाज़ जी हमरे नौकर है क्या मई उन नवाज़ जी और आप कह के बुला सकती हु क्या

आरती के सवाल ने शेठ जी को थोड़ा सोचने पर मजबूर कर दिया, पर उनकी आँखों में एक गर्मी थी. उन्होंने नवाज़ की तरफ देखा, जो अब भी ख़ामोशी से बैठा था.

शेठ जी ने आरती की बात kaat-te हुए कहा,

"बीटा, रिश्ते कागज़ की नौकरी से नहीं, इंसानियत और लिहाज़ से बनते हैं. नवाज़ भले hi हमारा काम देखता हो, पर आज रात उसने जो ज़िम्मेदारी निभाई है, वह किसी घर के सदस्य से काम नहीं थी."

नवाज़ ने नज़रें झुका कर कहा,

"आरती मेमसाब, आप मुझे सिर्फ नवाज़ भी कहेंगी तोह मुझे बुरा नहीं लगेगा. मैं तोह बस अपना फ़र्ज़ निभा रहा था."

आरती ने मुस्कुराते हुए पलट कर जवाब दिया,

"फ़र्ज़ तोह सब निभाते हैं नवाज़ जी, पर 'अपनापन' koi-koi दिखता है. पापा जी ने सही कहा, इज़्ज़त देने से काम नहीं होती

आरती के चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कराहट आ गयी. उसने महसूस किया की शेठ जी के दिल में नवाज़ के लिए कितनी इज़्ज़त है.

डिनर टेबल पर बैठते hi आरती ने नवाज़ की थाली में garma-garam रोटी राखी और कहा,

"नवाज़ जी, पापा जी ठीक कह रहे हैं. आपने जिस तरह उस सुनसान रस्ते पर हिम्मत दिखाई, वो कोई मामूली बात नहीं थी. मुझे तोह दर लग रहा था, पर आप बिलकुल शांत थे."

नवाज़ ने रोटी का निवाला तोड़ते हुए शेठ जी की तरफ देखा,

"शेठ जी ने hi सिखाया है की मुश्किल वक़्त में दिमाग ठंडा रखना चाहिए. अगर मैं घबरा जाता, तोह आरती मेमसाब और डर जातीं."

शेठ जी ने एक गहरी सांस ली और बोले,

"नवाज़ सिर्फ मेरा नौकर या ड्राइवर नहीं है आरती. इसके बाप ने मेरे लिए वो किया था जो शायद कोई सागा भाई भी न करे. इसका हक़ इस घर पर उतना hi है जितना तुम्हारा."

नवाज़ की आँखें नाम हो गयीं. माहौल थोड़ा इमोशनल हो गया था, पर उन तीनो के बीच की पुराणी दीवार अब गिर चुकी थी. अब वो सिर्फ एक मालिक और नौकर नहीं, बल्कि एक परिवार की तरह लग रहे थे.

फिर तीनो ने खाना ख़तम किया .. नवाज़ आपने कमरे मई चला गया और सो गया ..इधर आरती भी आपने कमरे मई जेक सो गयी ..
 
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