- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 31,768
नवाज़ ने जब आरती की घबराहट देखि, तोह उसने आमलेट का आखरी टुकड़ा मज़े से चबाया और दारू का एक गहरा घूँट भरा. उसके कान के पास बड़े इत्मीनान से फुसफुसाया:
"कोई दिक्कत नहीं होगी रानी... कोई आएगा तोह मैं अपनी रानी को उठा कर सीधा अंदर बैडरूम में ले जाऊंगा... अपनी इन मज़बूत बाहों में. मैं थोड़ा न किसी को अपनी रानी को इस हाल में देखने दूंगा?"
आरती की सांसें जो दर के मारे अटक गयी थीं, नवाज़ के इस 'मरदाना' भरोसे से थोड़ी शांत हुई. उसने नवाज़ की आँखों में देखा, जहाँ शैतानी के saath-saath एक गहरा सुकून था.
नवाज़ ने आपने हाथ उसके ब्लाउज के ऊपर से hi उसके सीने पर अपना दबाव बनाया.
"अरे... उन्हें आने तोह दो. जब तक वह हॉल में होंगे, तब तक तोह मैं तुम्हे अपने सीने से चिपका कर कमरे में पहुंचा चूका हूँगा. वहां... वहां कोई पर्दा नहीं रहेगा,"
नवाज़ ने बेहद सेडक्टिव आवाज़ में कहा.
आरती ने हम्पते हुए नवाज़ के गले में अपने हाथ दाल दिए. उसे अब न तोह 'उन लोगो ' का डर था और न hi अपनी 'खुली' हालत की शर्म. वह बस नवाज़ की बाहों में मेहफ़ूज़ महसूस कर रही थी.
आरती ने शर्मा कर अपना चेहरा नवाज़ के चौड़े सीने में छुपा लिया. उसके गजरे की bachi-kuchi खुशबु नवाज़ को और भी पागल कर रही थी.
बता, क्या इस पेटीकोट की डोरी को भी आज़ाद कर दूँ?"
ऐसा कहते हुई नवाज़ ने आरती की थरथराती हुई गर्दन पर अपना nasha-bhara चेहरा झुका दिया. उसके लबों में स्कॉच की गर्मी थी और आरती की नंगी चमड़ी पर उसकी जीभ का स्पर्श किसी बिजली के झटके जैसा था.
नवाज़ ने गर्दन से शुरू किया, वहां जहाँ आरती के झुमके उसकी हर सिसकी के साथ चीख रहे थे. नवाज़ dheere-dheere अपनी ज़बान से निशाँ बनता हुआ निचे की तरफ सरकने लगा. आरती ने प्लेटफार्म के किनारे को अपने नरम हाथों से कास के पकड़ लिया, उसकी नंगी टांगें हवा में बेचैनी से हिल रही थीं.
नवाज़ ने अपना मुँह अब आरती के ब्लाउज के ऊपर टिका दिया. ब्लाउज की पतली डोरी और कपडे के नीचे से आरती के सांसें साफ़ महसूस हो रही थीं. नवाज़ ने ब्लाउज के कपडे के ऊपर से hi उसके उभारों पर अपने लबों का दबाव बनाया.
आरती का सर पीछे की तरफ झुक गया था. उसने अपनी आँखें ज़ोर से बंद कर ली थीं और उसके मुंह से एक दबी हुई, नशीली आवाज़ निकली,
"नवाज़ जी... उफ़... ये क्या कर रहे हैं... प्लीज रुकिए..."
पर उसके हाथ khud-ba-khud नवाज़ के बालों को और ज़ोर से अपने सीने की तरफ खींच रहे थे.
नवाज़ ने ब्लाउज के कपडे को hi अपने दांतों में हलके से दबा लिया, ठीक वहां जहाँ आरती के निप्पल्स सख्त होकर उसके मरदाना स्पर्श का इंतज़ार कर रहे थे. आरती का पूरा बदन एक झटके में अकड़ गया. उसने महसूस किया की नवाज़ का एक हाथ अब भी उसकी नंगी कमर और खुले पेटीकोट के अंदर सरक रहा है.
नवाज़ ने ब्लाउज के ऊपर से hi एक गहरा किश किया और भरी आवाज़ में फुसफुसाया,
"अभी तोह ये पर्दा हटना बाकी है रानी... बता, क्या आज इस ब्लाउज को भी हमेशा के लिए भूल जाओगी?"
आरती ने हम्पते हुए सिर्फ एक लम्बी सिसकी ली. उसका गजरा अब पूरी तरह ज़मीन पर बिखर चूका था और किचन की गर्मी उन दोनों के जिस्म से निकलने वाले पसीने में घुल गयी थी.
नवाज़ ने उसके लबों पर एक आखरी nasha-bhara किश किया और उसे प्लेटफार्म से उठाते हुए बोलै,
"अब बोलो रानी... क्या अब भी खेत का इंतज़ार करना है, या यही किचन प्लेटफार्म हमारी सुहागरात का गवाह बनेगा?"
आरती ने सिर्फ अपनी आँखें बंद कर ली, उसका जिस्म अब पूरी तरह नवाज़ की मुट्ठी में था.
नवाज़ ने अपनी उँगलियाँ पेटीकोट के डोरी के फंदे में फसा ली और उसे बड़े सुकून से, dhire-dhire खींचने लगा. आरती ने घबरा कर नवाज़ के मज़बूत हाथों को पकड़ लिया, उसकी आँखों में शर्म और एक अनोखी रिक्वेस्ट थी.
"नवाज़ जी... रुकिए... ये... ये ठीक नहीं है,"
आरती ने हम्पते हुए फुसफुसाया, पर उसकी आवाज़ में कोई दम नहीं था.
नवाज़ ने एक शैतानी मुस्कराहट दी और उसके कान के पास झुक कर बोलै,
"रानी, मैंने कहा था न... आज मेरे बर्थडे पर कोई पर्दा नहीं रहेगा. जब अंदर से तुम आज़ाद हो, तोह ये डोरी क्यों बंधी रहे?"
नवाज़ ने जैसे hi पेटीकोट की डोरी खींची, आरती ने एक गहरी सिसकी ली और प्लेटफार्म के किनारे को और ज़ोर से जकड लिया. आरती वहां बैठी थी, इसलिए पेटीकोट निचे तोह नहीं गिरा, पर डोरी खुलने की वजह से वह उसकी कमर पर ढीला हो गया.
नवाज़ ने शैतानी मुस्कराहट के साथ अपना हाथ पेटीकोट के अंदर डाला और उसे dheere-dheere आरती की जाँघों से नीचे सरकने लगा ..पर आरती ने उसे जैम के पकड़ लिया ..
नवाज़ ने जब महसूस किया की आरती ने अपने दोनों हाथों से पेटीकोट को ज़ोर से पकड़ लिया है, तोह उसकी शैतानी मुस्कराहट और गहरी हो गयी. आरती किचन प्लेटफार्म पर बैठी थरथरा रही थी; उसकी उँगलियाँ पेटीकोट के कपडे को इतनी सख्ती से भींचे हुए थीं की उसके नरम नाख़ून सफ़ेद पद गए थे.
उसकी आँखों में शर्म की एक ऐसी लहार थी जो नवाज़ के जोश को और बढ़ा रही थी. वह जानती थी की निचे पंतय नहीं है, और अगर पेटीकोट थोड़ा भी और निचे सरका, तोह उसका आखरी पर्दा भी गिर जायेगा.
नवाज़ ने दारू का मज़ा लेते हुए अपना चेहरा उसके कान के पास लाया और भरी आवाज़ में फुसफुसाया:
"क्यों रोक रही हो रानी? जब डोरी मैंने खोल दी है, तोह ये पकड़ कब तक बरकरार रहेगी? मेरे बर्थडे पर अपनी इस रानी को पूरा आज़ाद देखने का हक़ है मुझे."
नवाज़ ने अपना मज़बूत हाथ आरती के उन नरम हाथों पर रखा जो पेटीकोट को थामे हुए थे. उसने dheere-dheere आरती की उँगलियों को ek-ek करके हटाना शुरू किया. आरती की सांसें उखाड़ने लगी थीं; उसका जिस्म नवाज़ की मरदाना गर्मी और स्कॉच की तीखी महक में डूबा हुआ था.
"नवाज़ जी... प्लीज... थोड़ी तोह शर्म कीजिये,"
आरती ने हम्पते हुए दबी आवाज़ में कहा, पर उसके जिस्म का हर एक इंच नवाज़ के स्पर्श के लिए तड़प रहा है.
नवाज़ ने उसके हाथों को हटाकर उन्हें प्लेटफार्म पर टिकाया और पेटीकोट को उसकी जाँघों से थोड़ा और निचे सरकने में मदद की. अब आरती उस प्लेटफार्म पर पूरी तरह be-parda होने की कगार पर थी.
जैसे hi वो जान गयी की पेटीकोट पूरा निकलने वाला है वैसे hi उसने पेटीकोट जोर से पकड़ लिया ..नवाज़ को देखते हुई .. और एक तक उसे घूरने लगी.....

नवाज़ भी आरती को देखे जा रहा tha...aur उसकी आखो में झांक कर ये समझने की कोसिस में लगा था की उसके मंद में चल क्या रहा है....
नवाज उसे ऊपर से नीचे तक देखता हुआ सुखद आनंद की अनुभूति में डूबता जा रहा tha.....aur नवाज़ के ऐसे देखने से आरती शर्माने लगी और उसने नजरे झुका ली....
आरती (शरमाते हुए)- ऐसे क्या देख रहे हो.. पहले बार देख रहे हो क्या
उसके आँखों मई देखते हुई वो बोल पड़ा
अब तुम मुझे सुबह से ज्यादा खूबसूरत दिख रही हो …
धत!!! कुछ भी मत बोलो!!!
सच बोल रहा हु लौंडे
लौंडे बोल ने से वो और ज्यादा शर्मा गए.. और शरमाते हुई उसने कहा..
अभी तो मैंने कुछ किया hi नहीं ..सुबह का hi मेक उप किया हुआ है
अब इतने सुन्दर दिख रही हो तो पुरे सजाने सबरने के बाद कितने सूंदर दिखोगे..
धत्त!!! मेरे तारीफ बहुत हो गए..
शयद बिना साड़ी के वजह से
धत बेशरम
अब रहा नहीं जा रहा है
थोड़ा साबरा करो मेरे राजा
वैसे hi नवाज़ उसके एक आम पर हाथ रख के उसके आम पर कब्ज़ा kiya..taise hi आरती ने उसका हाथ को पकड़ लिया और उसके वही हाथ को वही रोक दिया ..
दोनों की नज़ारे मिली
नहीं नवाज़ जी .. ये मत करो
क्यों
आरती जानती थी की उसके क्यों का वो जवाब नहीं दे पाएंगे
फिर नवाज़ ने उसके आम को दबाने कोशिश की
मन क्यों कर रही हो
नवाज़ के ऐसे कहने से आरती का चेहरा तमतमा गया.. आरती को पता था की जब भी नवाज़ शुरू करेगा तब उसे रोकना मुश्किल हो जायेगा.. और खुद को भी .. फिर भी वो बोली..
नहीं न मेरे राजा ..आप जानते हो न ..मई हम लोगो के बीच का पहला सेक्स यादगार बनाना चाहती हु
पहला सेक्स तुम यादगार बनाना चाहती हो पर उससे पहले बाकि सब तो हम कर सकतें है na..wo करने मई क्या पॉब्लम है
नवाज़ जी वो सब हमने सुबह से दो बार किया है और करने मई भी कोई पॉब्लम नहीं है पर वो सब करते करते हमारा कण्ट्रोल hi नहीं रहता न.. इसलिए अभी थोड़ा दूर hi रहते है..
उसकी फ़िक्र तुम न करो.. जब नौबत वह तक आएंगे तो मई खुद hi मन कर दूंगा .. मई भी तुम्हारे साथ आपने पहला सेक्स यादगार बनाना चाहता हु.. हस्बैंड वाइफ के जैसा..
इसलिए तो कह रही हु.. थोड़ा साबरा karo..Sirf 2 दिन की तो बात है न नवाज़ जी
साबरा तो नहीं है न जान
साबरा तो करना पड़ेगा न राजा नहीं तो बात बिगड़ जायेगे
नहीं बिगड़ेंगे
पर
पर वॉर कुछ नहीं.. मैंने कहा न मई खुद रोक दूंगा.. और तुम भी तो हो.. थोड़ा कण्ट्रोल तो तुम्हे भी होगा न खुद पर.. एंड ी प्रॉमिस अगर मई बहक गया तो तुम्हारे कहने पर मई वही रुक जाऊंगा..
अभी बाथरूम मई मेरे और आप के बीच मई जो हुआ उससे मई एक बात समाज चुकी हु की एक बार आपने खेल सुरु हो गया तो मेरा खुद पाई कण्ट्रोल नहीं रहता.. मेरा क्या शयद किसी का भी नहीं रहता.. शयद आप का भी नहीं रहता.. और वो मई देख चुकी हु.. सेक्स का ये खेल है hi ऐसा मजेदार.. इसलिए मई डर रही हु.. और दूसरे बात अब मई भी चामरे जैसे hi कोई डिस्टर्बेन्स नहीं चाहती..
नवाज़ आरती की इन् बड़े बड़े बातो को बड़े ध्यान से सुन रहा था .. आरती को लगा की नवाज़ उसकी बात को समाज गया hai..(Par नवाज़ आखिर नवाज़ hi था… उसके हाथ की पकड़ अभी भी उसके आम पर जो की त्यों थी.. जब तक वो ढीली नहीं पड़ेगे तब तक नवाज़ ढिल्ला नहीं पड़ेगा..) इसलिए उसने आगे कहा
इसलिए मई कह रही हु वैसा मान जाओ मेरे राजा
हाँ मेरे रानी.. पर हम बाकि का कर सकते है
फिर से करना है आप को ..
हाँ
कितने बार करोगे एक दिन मई
क्यों.. तू अब अपनी पर्सनल प्रॉपर्टी है..
अच्छा जी
कोई शक
शक तो नहीं है पर ( गले मई का मंगलसितरा आपने हाथ मई लेके) इस प्रॉपर्टी आलरेडी किसी ने खरीद ली है..
खरीद लेने दे.. रजिस्ट्री उसके नाम की होंगे पर प्रॉपर्टी पाई कब्ज़ा मेरा होगा.. उस प्रॉपर्टी मई रहुगा तो सिर्फ मई hi
उसके सर पाई हलके से आरती मरती है..
बदमाश!!!
दोनों की नज़रे मिली.. पर कोई कुछ न बोलै..
कुछ देर तक पूरी सिचुएशन को अच्छी तरह से समजने के बाद आरती थोड़े कॉंफिडेंट सी हो गए और ऐसे स्थिति मई किसी दूसरे के किचन मई आपने नौकर के साथ खड़े होने पर उसकी हंसी निकल गए.. और वो बोली..
आप को पता है हम कहा है इस वक़्त .. और इस हालत मई
अछि तरह से पता है.. हम इस वक़्त कहा खड़े है.. तुम क्या मुझे बुद्धू समजते हो क्या..
आरती का चेहरा थोड़ा शरारती हो उठा.. वो अपनी कमर को मटकती हुई बड़े hi सेक्सुअल स्टाइल मई किचन प्लेटफार्म मई hi थोड़ी आगे आये और बोली…
अच्छा जी.. तो मेरा राजा बुद्धू नहीं है.. उसे सब पता है.. अच्छा तो बताओ.. मेरे बुद्धू राजा.. हम इस वक़्त कहा खड़े है और हम क्या कर रहे है..
हम इस वक़्त मेरे डार्लिंग आरती रानी के नानन्द के फ्रेंड के घर के किचन मई है और मेरे डार्लिंग आरती रानी मुझे मज़ा दे रही है..
आप की डार्लिंग आरती रानी सिर्फ आप की डार्लिंग आरती रानी नहीं है.. किसी की बीवी है और किसी की बहु भी है..
उसका मुझे ख्याल
आप को नहीं तो मुझे है
वैसे hi नवाज़ ने उसे आपने बहो मई खिंच लिया .. वैसे hi आरती का चेहरा दमक उठा.. नवाज़ ने फिर उसके एक आम को जोर से दबा दिया..
ारे धीरे न बाबा
धीरज तो नहीं है न मुज मई
और फिर उसके गले को बेतहाशा चूमने लगा..
फिर उसके गालो par..phir माथे और आँखों पर.. फिर एक गहरी सांस लेकर उसने आपने हूंठ आरती के शरबती हूंतो पर रख दिए और उसे जोर जोर से चूमने लगा
वो चुम्बन इतना गहरा और नशे से भरा था की आरती आपने होश खो baithi..Nawaz ने आरती के हूंतो को चूस चूका था पर आरती के साथ आज यादगार सेक्स करने की बात आरती के मू से सुनकर उसे बहुत ज्यादा जोश आ चूका था ..वो आरती के नाज़ुक हूंतो का शहद पि रहा था और आरती भी पीछे नहीं thi..wo पुरे ताकत से नवाज़ के हूंतो को चूस रही थी.. उसे आपने रास पीला रही thi..aur उसका निकल रही thi..aisa करते हुई वो बड़े बेहरमी से आपने नोके वाली चठिया नवाज़ के सीने पर रगड़ रही थी.. उनमे हो रही खुजली को वो उसके छोड़े साइन से घिस कर मीठा रही थी ..
"कोई दिक्कत नहीं होगी रानी... कोई आएगा तोह मैं अपनी रानी को उठा कर सीधा अंदर बैडरूम में ले जाऊंगा... अपनी इन मज़बूत बाहों में. मैं थोड़ा न किसी को अपनी रानी को इस हाल में देखने दूंगा?"
आरती की सांसें जो दर के मारे अटक गयी थीं, नवाज़ के इस 'मरदाना' भरोसे से थोड़ी शांत हुई. उसने नवाज़ की आँखों में देखा, जहाँ शैतानी के saath-saath एक गहरा सुकून था.
नवाज़ ने आपने हाथ उसके ब्लाउज के ऊपर से hi उसके सीने पर अपना दबाव बनाया.
"अरे... उन्हें आने तोह दो. जब तक वह हॉल में होंगे, तब तक तोह मैं तुम्हे अपने सीने से चिपका कर कमरे में पहुंचा चूका हूँगा. वहां... वहां कोई पर्दा नहीं रहेगा,"
नवाज़ ने बेहद सेडक्टिव आवाज़ में कहा.
आरती ने हम्पते हुए नवाज़ के गले में अपने हाथ दाल दिए. उसे अब न तोह 'उन लोगो ' का डर था और न hi अपनी 'खुली' हालत की शर्म. वह बस नवाज़ की बाहों में मेहफ़ूज़ महसूस कर रही थी.
आरती ने शर्मा कर अपना चेहरा नवाज़ के चौड़े सीने में छुपा लिया. उसके गजरे की bachi-kuchi खुशबु नवाज़ को और भी पागल कर रही थी.
बता, क्या इस पेटीकोट की डोरी को भी आज़ाद कर दूँ?"
ऐसा कहते हुई नवाज़ ने आरती की थरथराती हुई गर्दन पर अपना nasha-bhara चेहरा झुका दिया. उसके लबों में स्कॉच की गर्मी थी और आरती की नंगी चमड़ी पर उसकी जीभ का स्पर्श किसी बिजली के झटके जैसा था.
नवाज़ ने गर्दन से शुरू किया, वहां जहाँ आरती के झुमके उसकी हर सिसकी के साथ चीख रहे थे. नवाज़ dheere-dheere अपनी ज़बान से निशाँ बनता हुआ निचे की तरफ सरकने लगा. आरती ने प्लेटफार्म के किनारे को अपने नरम हाथों से कास के पकड़ लिया, उसकी नंगी टांगें हवा में बेचैनी से हिल रही थीं.
नवाज़ ने अपना मुँह अब आरती के ब्लाउज के ऊपर टिका दिया. ब्लाउज की पतली डोरी और कपडे के नीचे से आरती के सांसें साफ़ महसूस हो रही थीं. नवाज़ ने ब्लाउज के कपडे के ऊपर से hi उसके उभारों पर अपने लबों का दबाव बनाया.
आरती का सर पीछे की तरफ झुक गया था. उसने अपनी आँखें ज़ोर से बंद कर ली थीं और उसके मुंह से एक दबी हुई, नशीली आवाज़ निकली,
"नवाज़ जी... उफ़... ये क्या कर रहे हैं... प्लीज रुकिए..."
पर उसके हाथ khud-ba-khud नवाज़ के बालों को और ज़ोर से अपने सीने की तरफ खींच रहे थे.
नवाज़ ने ब्लाउज के कपडे को hi अपने दांतों में हलके से दबा लिया, ठीक वहां जहाँ आरती के निप्पल्स सख्त होकर उसके मरदाना स्पर्श का इंतज़ार कर रहे थे. आरती का पूरा बदन एक झटके में अकड़ गया. उसने महसूस किया की नवाज़ का एक हाथ अब भी उसकी नंगी कमर और खुले पेटीकोट के अंदर सरक रहा है.
नवाज़ ने ब्लाउज के ऊपर से hi एक गहरा किश किया और भरी आवाज़ में फुसफुसाया,
"अभी तोह ये पर्दा हटना बाकी है रानी... बता, क्या आज इस ब्लाउज को भी हमेशा के लिए भूल जाओगी?"
आरती ने हम्पते हुए सिर्फ एक लम्बी सिसकी ली. उसका गजरा अब पूरी तरह ज़मीन पर बिखर चूका था और किचन की गर्मी उन दोनों के जिस्म से निकलने वाले पसीने में घुल गयी थी.
नवाज़ ने उसके लबों पर एक आखरी nasha-bhara किश किया और उसे प्लेटफार्म से उठाते हुए बोलै,
"अब बोलो रानी... क्या अब भी खेत का इंतज़ार करना है, या यही किचन प्लेटफार्म हमारी सुहागरात का गवाह बनेगा?"
आरती ने सिर्फ अपनी आँखें बंद कर ली, उसका जिस्म अब पूरी तरह नवाज़ की मुट्ठी में था.
नवाज़ ने अपनी उँगलियाँ पेटीकोट के डोरी के फंदे में फसा ली और उसे बड़े सुकून से, dhire-dhire खींचने लगा. आरती ने घबरा कर नवाज़ के मज़बूत हाथों को पकड़ लिया, उसकी आँखों में शर्म और एक अनोखी रिक्वेस्ट थी.
"नवाज़ जी... रुकिए... ये... ये ठीक नहीं है,"
आरती ने हम्पते हुए फुसफुसाया, पर उसकी आवाज़ में कोई दम नहीं था.
नवाज़ ने एक शैतानी मुस्कराहट दी और उसके कान के पास झुक कर बोलै,
"रानी, मैंने कहा था न... आज मेरे बर्थडे पर कोई पर्दा नहीं रहेगा. जब अंदर से तुम आज़ाद हो, तोह ये डोरी क्यों बंधी रहे?"
नवाज़ ने जैसे hi पेटीकोट की डोरी खींची, आरती ने एक गहरी सिसकी ली और प्लेटफार्म के किनारे को और ज़ोर से जकड लिया. आरती वहां बैठी थी, इसलिए पेटीकोट निचे तोह नहीं गिरा, पर डोरी खुलने की वजह से वह उसकी कमर पर ढीला हो गया.
नवाज़ ने शैतानी मुस्कराहट के साथ अपना हाथ पेटीकोट के अंदर डाला और उसे dheere-dheere आरती की जाँघों से नीचे सरकने लगा ..पर आरती ने उसे जैम के पकड़ लिया ..
नवाज़ ने जब महसूस किया की आरती ने अपने दोनों हाथों से पेटीकोट को ज़ोर से पकड़ लिया है, तोह उसकी शैतानी मुस्कराहट और गहरी हो गयी. आरती किचन प्लेटफार्म पर बैठी थरथरा रही थी; उसकी उँगलियाँ पेटीकोट के कपडे को इतनी सख्ती से भींचे हुए थीं की उसके नरम नाख़ून सफ़ेद पद गए थे.
उसकी आँखों में शर्म की एक ऐसी लहार थी जो नवाज़ के जोश को और बढ़ा रही थी. वह जानती थी की निचे पंतय नहीं है, और अगर पेटीकोट थोड़ा भी और निचे सरका, तोह उसका आखरी पर्दा भी गिर जायेगा.
नवाज़ ने दारू का मज़ा लेते हुए अपना चेहरा उसके कान के पास लाया और भरी आवाज़ में फुसफुसाया:
"क्यों रोक रही हो रानी? जब डोरी मैंने खोल दी है, तोह ये पकड़ कब तक बरकरार रहेगी? मेरे बर्थडे पर अपनी इस रानी को पूरा आज़ाद देखने का हक़ है मुझे."
नवाज़ ने अपना मज़बूत हाथ आरती के उन नरम हाथों पर रखा जो पेटीकोट को थामे हुए थे. उसने dheere-dheere आरती की उँगलियों को ek-ek करके हटाना शुरू किया. आरती की सांसें उखाड़ने लगी थीं; उसका जिस्म नवाज़ की मरदाना गर्मी और स्कॉच की तीखी महक में डूबा हुआ था.
"नवाज़ जी... प्लीज... थोड़ी तोह शर्म कीजिये,"
आरती ने हम्पते हुए दबी आवाज़ में कहा, पर उसके जिस्म का हर एक इंच नवाज़ के स्पर्श के लिए तड़प रहा है.
नवाज़ ने उसके हाथों को हटाकर उन्हें प्लेटफार्म पर टिकाया और पेटीकोट को उसकी जाँघों से थोड़ा और निचे सरकने में मदद की. अब आरती उस प्लेटफार्म पर पूरी तरह be-parda होने की कगार पर थी.
जैसे hi वो जान गयी की पेटीकोट पूरा निकलने वाला है वैसे hi उसने पेटीकोट जोर से पकड़ लिया ..नवाज़ को देखते हुई .. और एक तक उसे घूरने लगी.....

नवाज़ भी आरती को देखे जा रहा tha...aur उसकी आखो में झांक कर ये समझने की कोसिस में लगा था की उसके मंद में चल क्या रहा है....
नवाज उसे ऊपर से नीचे तक देखता हुआ सुखद आनंद की अनुभूति में डूबता जा रहा tha.....aur नवाज़ के ऐसे देखने से आरती शर्माने लगी और उसने नजरे झुका ली....
आरती (शरमाते हुए)- ऐसे क्या देख रहे हो.. पहले बार देख रहे हो क्या
उसके आँखों मई देखते हुई वो बोल पड़ा
अब तुम मुझे सुबह से ज्यादा खूबसूरत दिख रही हो …
धत!!! कुछ भी मत बोलो!!!
सच बोल रहा हु लौंडे
लौंडे बोल ने से वो और ज्यादा शर्मा गए.. और शरमाते हुई उसने कहा..
अभी तो मैंने कुछ किया hi नहीं ..सुबह का hi मेक उप किया हुआ है
अब इतने सुन्दर दिख रही हो तो पुरे सजाने सबरने के बाद कितने सूंदर दिखोगे..
धत्त!!! मेरे तारीफ बहुत हो गए..
शयद बिना साड़ी के वजह से
धत बेशरम
अब रहा नहीं जा रहा है
थोड़ा साबरा करो मेरे राजा
वैसे hi नवाज़ उसके एक आम पर हाथ रख के उसके आम पर कब्ज़ा kiya..taise hi आरती ने उसका हाथ को पकड़ लिया और उसके वही हाथ को वही रोक दिया ..
दोनों की नज़ारे मिली
नहीं नवाज़ जी .. ये मत करो
क्यों
आरती जानती थी की उसके क्यों का वो जवाब नहीं दे पाएंगे
फिर नवाज़ ने उसके आम को दबाने कोशिश की
मन क्यों कर रही हो
नवाज़ के ऐसे कहने से आरती का चेहरा तमतमा गया.. आरती को पता था की जब भी नवाज़ शुरू करेगा तब उसे रोकना मुश्किल हो जायेगा.. और खुद को भी .. फिर भी वो बोली..
नहीं न मेरे राजा ..आप जानते हो न ..मई हम लोगो के बीच का पहला सेक्स यादगार बनाना चाहती हु
पहला सेक्स तुम यादगार बनाना चाहती हो पर उससे पहले बाकि सब तो हम कर सकतें है na..wo करने मई क्या पॉब्लम है
नवाज़ जी वो सब हमने सुबह से दो बार किया है और करने मई भी कोई पॉब्लम नहीं है पर वो सब करते करते हमारा कण्ट्रोल hi नहीं रहता न.. इसलिए अभी थोड़ा दूर hi रहते है..
उसकी फ़िक्र तुम न करो.. जब नौबत वह तक आएंगे तो मई खुद hi मन कर दूंगा .. मई भी तुम्हारे साथ आपने पहला सेक्स यादगार बनाना चाहता हु.. हस्बैंड वाइफ के जैसा..
इसलिए तो कह रही हु.. थोड़ा साबरा karo..Sirf 2 दिन की तो बात है न नवाज़ जी
साबरा तो नहीं है न जान
साबरा तो करना पड़ेगा न राजा नहीं तो बात बिगड़ जायेगे
नहीं बिगड़ेंगे
पर
पर वॉर कुछ नहीं.. मैंने कहा न मई खुद रोक दूंगा.. और तुम भी तो हो.. थोड़ा कण्ट्रोल तो तुम्हे भी होगा न खुद पर.. एंड ी प्रॉमिस अगर मई बहक गया तो तुम्हारे कहने पर मई वही रुक जाऊंगा..
अभी बाथरूम मई मेरे और आप के बीच मई जो हुआ उससे मई एक बात समाज चुकी हु की एक बार आपने खेल सुरु हो गया तो मेरा खुद पाई कण्ट्रोल नहीं रहता.. मेरा क्या शयद किसी का भी नहीं रहता.. शयद आप का भी नहीं रहता.. और वो मई देख चुकी हु.. सेक्स का ये खेल है hi ऐसा मजेदार.. इसलिए मई डर रही हु.. और दूसरे बात अब मई भी चामरे जैसे hi कोई डिस्टर्बेन्स नहीं चाहती..
नवाज़ आरती की इन् बड़े बड़े बातो को बड़े ध्यान से सुन रहा था .. आरती को लगा की नवाज़ उसकी बात को समाज गया hai..(Par नवाज़ आखिर नवाज़ hi था… उसके हाथ की पकड़ अभी भी उसके आम पर जो की त्यों थी.. जब तक वो ढीली नहीं पड़ेगे तब तक नवाज़ ढिल्ला नहीं पड़ेगा..) इसलिए उसने आगे कहा
इसलिए मई कह रही हु वैसा मान जाओ मेरे राजा
हाँ मेरे रानी.. पर हम बाकि का कर सकते है
फिर से करना है आप को ..
हाँ
कितने बार करोगे एक दिन मई
क्यों.. तू अब अपनी पर्सनल प्रॉपर्टी है..
अच्छा जी
कोई शक
शक तो नहीं है पर ( गले मई का मंगलसितरा आपने हाथ मई लेके) इस प्रॉपर्टी आलरेडी किसी ने खरीद ली है..
खरीद लेने दे.. रजिस्ट्री उसके नाम की होंगे पर प्रॉपर्टी पाई कब्ज़ा मेरा होगा.. उस प्रॉपर्टी मई रहुगा तो सिर्फ मई hi
उसके सर पाई हलके से आरती मरती है..
बदमाश!!!
दोनों की नज़रे मिली.. पर कोई कुछ न बोलै..
कुछ देर तक पूरी सिचुएशन को अच्छी तरह से समजने के बाद आरती थोड़े कॉंफिडेंट सी हो गए और ऐसे स्थिति मई किसी दूसरे के किचन मई आपने नौकर के साथ खड़े होने पर उसकी हंसी निकल गए.. और वो बोली..
आप को पता है हम कहा है इस वक़्त .. और इस हालत मई
अछि तरह से पता है.. हम इस वक़्त कहा खड़े है.. तुम क्या मुझे बुद्धू समजते हो क्या..
आरती का चेहरा थोड़ा शरारती हो उठा.. वो अपनी कमर को मटकती हुई बड़े hi सेक्सुअल स्टाइल मई किचन प्लेटफार्म मई hi थोड़ी आगे आये और बोली…
अच्छा जी.. तो मेरा राजा बुद्धू नहीं है.. उसे सब पता है.. अच्छा तो बताओ.. मेरे बुद्धू राजा.. हम इस वक़्त कहा खड़े है और हम क्या कर रहे है..
हम इस वक़्त मेरे डार्लिंग आरती रानी के नानन्द के फ्रेंड के घर के किचन मई है और मेरे डार्लिंग आरती रानी मुझे मज़ा दे रही है..
आप की डार्लिंग आरती रानी सिर्फ आप की डार्लिंग आरती रानी नहीं है.. किसी की बीवी है और किसी की बहु भी है..
उसका मुझे ख्याल
आप को नहीं तो मुझे है
वैसे hi नवाज़ ने उसे आपने बहो मई खिंच लिया .. वैसे hi आरती का चेहरा दमक उठा.. नवाज़ ने फिर उसके एक आम को जोर से दबा दिया..
ारे धीरे न बाबा
धीरज तो नहीं है न मुज मई
और फिर उसके गले को बेतहाशा चूमने लगा..
फिर उसके गालो par..phir माथे और आँखों पर.. फिर एक गहरी सांस लेकर उसने आपने हूंठ आरती के शरबती हूंतो पर रख दिए और उसे जोर जोर से चूमने लगा
वो चुम्बन इतना गहरा और नशे से भरा था की आरती आपने होश खो baithi..Nawaz ने आरती के हूंतो को चूस चूका था पर आरती के साथ आज यादगार सेक्स करने की बात आरती के मू से सुनकर उसे बहुत ज्यादा जोश आ चूका था ..वो आरती के नाज़ुक हूंतो का शहद पि रहा था और आरती भी पीछे नहीं thi..wo पुरे ताकत से नवाज़ के हूंतो को चूस रही थी.. उसे आपने रास पीला रही thi..aur उसका निकल रही thi..aisa करते हुई वो बड़े बेहरमी से आपने नोके वाली चठिया नवाज़ के सीने पर रगड़ रही थी.. उनमे हो रही खुजली को वो उसके छोड़े साइन से घिस कर मीठा रही थी ..




































