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रूद्र धीरे से बिस्तर से उठा. उसकी जींस की ज़िप की आवाज़ कमरे की ख़ामोशी में हलकी सी गूंजी. वह कुछ पल तक सपना को देखता रहा ….वह अभी भी गहरी नींद में डूबी हुई थी. उसका नंगा बदन चादर के एक हिस्से से ढाका हुआ था, बाल बिखरे हुए, चेहरा थकान और तृप्ति से भरा हुआ. रात भर की मस्ती के निशाँ अभी भी उसके जिस्म पर मौजूद थे ….चूचियों पर लाल निशाँ, गर्दन पर काटने के मार्क्स, और जाँघों पर सुख चुके रास की हलकी लकीरें.
रूद्र झुका और सपना के पसीने से नाम माथे पर एक नरम, प्यार भरा किश किया. फिर उसने उसके कान के बिलकुल पास मुँह ले जाकर धीरे से, शरारत भरी आवाज़ में फुसफुसाया:
“सुनो… मुझे काम पे निकलना है. तुम भी उठ कर वक़्त से निकल जाना. और हाँ…” उसने थोड़ा रुक कर मुस्कुराते हुए कहा, “जल्दी से कपडे पहन लेना. रोहन आने वाला है. अगर उसने तुम्हे इस हाल में देख लिया न ….. ….तोह फिर तुम्हे उसके साथ भी वही सब करना पड़ेगा जो मेरे साथ किया है… शायद उससे भी ज़्यादा. :डी”
सपना ने नींद में हलके से होठ हिलाये. उसकी आँखें आधी खुली, मगर थकन इतनी गहरी थी की उसने रूद्र की बात को सिर्फ एक धीमी सी सिसकी के साथ अनसुना कर दिया. वह बस थोड़ा सा करवट ले कर पेट के बल लेट गयी. चादर उसकी गोल गांड पर से सरक गयी, उसकी पीठ और भारी चूचियां अभी भी नंगी थी. वह फिर से गहरी नींद में डूब गयी ….जैसे उसका जिस्म अभी भी कल रात के नाशे में hi बंधा हुआ हो.
रूद्र कुछ पल तक उसको देखता रहा. उसकी आँखों में एक शरारती मुस्कान थी. उसने धीरे से दरवाज़ा खोला, एक अंतिम नज़र सपना पर डाली और कमरे से बहार निकल गया.
कमरे में अब सिर्फ सपना की धीमी सांसें और सुबह की ठंडी हवा की सरसराहट बाकी रह गयी थी.
कुछ देर बाद सपना को हल्का सा होश आने लगा. यह नींद से जगाने वाला होश नहीं था ….यह उसके जिस्म में सुलगती हुई एक गहरी हलचल की वजह से था. वह अभी भी पेट के बल लेती हुई थी, उसका गोरा नंगा बदन चादर से सिर्फ आधा ढाका हुआ. सुबह की धुप dheere-dheere कमरे में नीली रौशनी को पीछे धकेल रही थी और एक नरम, सुन्दर उजाला फैला रही थी.
अचानक उसे महसूस हुआ की उसकी छूट की नरम दरारों पर कोई गरम, सख्त चीज़ dheere-dheere रगड़ खा रही थी. वह अभी पूरी तरह अंदर नहीं घुसी थी ……बस उसकी गीली, फूली हुई पंखुड़ियों के bahar-bahar फिसल रही थी. कभी ऊपर की तरफ उसकी क्लीट को छू जाती, कभी नीचे उसकी दरार को सेहला देती.
सपना की सांस एक पल के लिए रुक गयी. उसको लगा रूद्र अभी भी गया नहीं है और निकलने से पहले एक बार फिर उसकी प्यास बुझाने आया है.
उसने jaan-boojh कर आँखें बंद राखी और नींद का नाटक करने लगी, ताकि यह एहसास poora-pura महसूस कर सके. उसकी छूट में फिर से वह पुराणी गर्माहट दौड़ने लगी. उसकी नरम पंखुड़ियां उस मोती, गरम टोपी के स्पर्श से और भी गीली होने लगी. वह धीरे से अपनी कमर को ऊपर उठाने लगी …..सिर्फ थोड़ा सा, जैसे चुपके से उस औज़ार को अंदर आने का रास्ता दे रही हो.
जैसे hi उसने कमर उठायी, वह मोटा गरम लुंड एक hi सरसराहट के साथ उसकी गीली दरारों को चीरते हुए सीधा अंदर घुस गया.
“Uhhhhhh…mmmmmmm!”
सपना के मुंह से एक गहरी, कांपती सिसकी निकल गयी. उसकी आँखें एकदम से खुल गयी. उसकी छूट रात भर की चुदाई से अभी भी थोड़ी टाइट और सेंसिटिव थी, इसलिए यह अचानक गहरा पेनेट्रेशन उसके पूरे जिस्म में बिजली की तरह दौड़ गया. उसकी उँगलियाँ चादर को कास कर पकड़ ली और उसकी पीठ अपने आप टेडी हो गयी.
पहले hi do-chaar झटकों में सपना को कुछ अजीब सा लगा. यह एहसास रूद्र जैसा नहीं था. रूद्र का लुंड लम्बा और तेज़ था, लेकिन यह औज़ार उससे काफी ज़्यादा मोटा महसूस हो रहा था. इसकी रगड़ उसकी छूट की दीवारों पर एक अलग hi तरह की झनझनाहट पैदा कर रही थी.
स्टाइल बिलकुल अलग था ….स्लो, गहरा और dhire-dhire अंदर तक उतरता हुआ. हर धक्का इतना गहरा था की सपना को अपनी छूट के हर इंच का नशा alag-alag महसूस हो रहा था. उसे हर एक इंच को पूरा फील करने का वक़्त मिल रहा था.
सपना ने सोचा शायद रूद्र subah-subah थोड़ा सेंसुअल मूड में है. इसलिए उसने पीछे मुद कर देखने की कोशिश नहीं की. बस आँखें और कास के बंद कर ली और उस नए, गहरे सुकून में खोने लगी.
Dheere-dheere उसे अपनी नंगी पीठ पर एक bhari-bharkam वज़न महसूस होने लगा. कोई उसके ऊपर पूरी तरह लेट चूका था. Garam-garam, भरी सांसें उसके कान के पास टकरा रही थी. वह सांसें गहरी और भरी थी, लेकिन उनकी महक रूद्र से बिलकुल अलग थी.
सपना का दिल एक पल के लिए ज़ोर से धड़का ……क्या यह रोहन है?
सपना को शक हो चूका था की यह रूद्र नहीं है, लेकिन उसने पीछे मुद कर देखने की कोशिश भी नहीं की. उसका जिस्म इस वक़्त इतना गरम और प्यासा हो चूका था की अब उसे फ़र्क़ नहीं पद रहा था की पीछे कौन है. उसे सिर्फ उस मोठे लुंड की गहरी चुदाई चाहिए थी ….वह लुंड जो उसकी छूट के kone-kone को सेहला रहा था.
सपना पेट के बल गड्ढे पर लेती हुई थी. उसकी सांसें अभी भी रूद्र के साथ बितायी रात की थकन से भरी थी, मगर यह नया स्पर्श उसे किसी और hi दुनिया में ले जा रहा था. वह मोटा औज़ार जो उसकी छूट के होठों को चीरते हुए अंदर घुस रहा था, रूद्र के लुंड से कहीं ज़्यादा भरी था.
हर धक्का लगते hi सपना को लगता जैसे उसकी छूट की दीवारें पहात जाएँगी. मगर उस खिंचाव में जो मज़ा था, वह उसे और ज़्यादा पागल कर रहा था. उसने महसूस किया की उस ने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर गड्ढे पर टिका रखे थे, जिससे उसका पूरा वज़न उसकी नंगी पीठ पर पद रहा था. वह बहुत हैवी और मज़बूत लग रहा था.
सपना ने अपने दोनों हाथ तकिये के नीचे दबाये और मुट्ठियां कास ली. जैसे hi वह मर्द अपना लुंड बहार खींचता, उसे एक गहरा khaali-pan महसूस होता. उस khaali-pan को भरने की तड़प में वह अपनी कमर इतनी ऊपर उठा देती की उसकी गांड हवा में तन्नी हुई नज़र आती.
और फिर...
'फैट!'
वह पूरी ताक़त से वापस अंदर धंस जाता. सपना की कमर झटके से नीचे गिरती और वह गड्ढे से बिलकुल चिपक जाती. इस बार धक्का इतना गहरा था की उसे महसूस हुआ की उस मोटा सर उसकी बच्चादानी से ज़ोर से टकराया है.
"उफ्फ्फ्फ़... aaaahhh...ahmmmm"
सपना के मुंह से एक लम्बी, कांपती सिसकी निकली जो गड्ढे में hi ढबाक गयी.
उसने महसूस किया की पीछे खड़ा मर्द (जो शायद रोहन था) अपनी रफ़्तार jaan-bujhkar स्लो रखे हुए था. हर धक्के के बाद वह थोड़ा रुक जाता, अपने मोठे लुंड को उसकी छूट के अंदर hi घूमता, जैसे उसकी हर एक नस और हर एक दीवार को टटोल रहा हो.
सपना का पूरा जिस्म थरथरा रहा था…….
वह मर्द अब और निचे झुक गया. उसका नंगा सीना सपना की नरम पीठ से बिलकुल चिपक गया. उसके सीने के सख्त बाल सपना की चमड़ी में चुभ रहे थे. उसने अपना चेहरा उसके कान के बिलकुल पास ले आया. कुछ बोलै नहीं, बस उसकी गरम और भरी सांसें सपना की गर्दन पर पसीने की बूँदें गिरा रही थी.
सपना ने आँखें बंद राखी रही. वह डर रही थी की अगर उसने पीछे मुद कर देखा तोह यह नशा टूट जायेगा. या फिर शायद उस शर्म का सामना न कर पायेगी जो मज़े के नीचे डाब रही थी. उसने डेंटन से चादर का कोना पकड़ लिया और ज़ोर से भींचने लगी.
हर धक्का अब और भी ज़बरदस्त हो रहा था. वह सपना की गांड के नरम मॉस को दोनों हाथों से कास कर पकड़ रहा था और दोनों तरफ फैला रहा था, ताकि उसका मोटा लुंड बिना रुकावट के गहरे andar-bahar घुसे. सपना को महसूस हो रहा था की उसकी छूट अब पूरी तरह फूल चुकी है. रात भर की चुदाई के बाद वह हिस्सा पहले से hi बहुत सेंसिटिव था, और अब यह नया दवाब उसे पागल कर रहा था.
Dheere-dheere उसका स्लो और डीप स्टाइल बदलने लगा. वह अब रफ़्तार बढ़ा रहा था. हर धक्के के साथ सपना का सर तकिये पर झटके खा रहा था.
"रूद्र... ओह्ह्ह... तुम इतने... बदल कैसे गए..." सपना ने होश और बेहोशी के बीच महकते हुए कहा, हालाँकि वह जानती थी की यह रूद्र नहीं है.
उसने कोई जवाब नहीं दिया. बस उसने सपना की कमर को दोनों हाथों से कास कर पकड़ा और उसे ऊपर उठा लिया. अब सपना घुटनो और हाथों के बल थी ……डोगग्य स्टाइल में. मगर उसने अब भी पीछे नहीं देखा. वह पीछे से उसे थोक रहा था.
हर रगड़ पर सपना को लग रहा था की उसका पानी निकलने वाला है. उसकी छूट से गीली ‘chapat-chapat’ की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी. वह इतनी शिद्दत से धक्के मार रहा था की सपना के दोनों उभार नीचे लटक कर बुरी तरह उछाल रहे थे.
"मैं... मैं झड़ने वाली हूँ... प्लीज... और ज़ोर से!" सपना अब चिल्ला रही थी. उसे किसी की परवाह नहीं थी.
उस मर्द ने सपना के बाल पीछे से पकडे और उसका सर ऊपर खिंच लिया. फिर उसने teen-chaar भयंकर ठोकरें मारी. सपना का पूरा जिस्म अकड़ गया. उसकी छूट ने उस मोठे लुंड को जानवर की तरह भींचा और उसी पल उसने भी अपना गरम, गाढ़ा माल सपना की गहराईयों में भर दिया.
सपना का पानी और उसका माल मिल कर गड्ढे पर रिससने लगे. दोनों एक दूसरे पर ढेर हो गए. सपना हांप रही थी, उसकी आँखों से मज़े के आंसू बह रहे थे. उसने महसूस किया की उसने उसके कान पर हलकी सी किश की और धीरे से अपना लुंड बहार निकाल लिया.
दस मिनट तक दोनों सिर्फ अपनी भरी साँसों को सुनते रहे. जब होश आया, तोह दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा. कोई chilla-pukari नहीं, कोई माफ़ी नहीं. रोहन ….जो रूद्र से उम्र में थोड़ा बड़ा था, पतला, लम्बा और गहरी आँखों वाला ….सपना को ग़ौर से देख रहा था.
सपना को फर्क नहीं पद रहा था की यह कौन है. रोहन की आँखों में एक ऐसी कशिश थी जो उसे अपनी तरफ खिंच रही थी. रोहन थोड़ा सेहमा हुआ था. वह तोह बस कमरे में आया था, लेकिन इतनी गोरी, और नंगी लड़की देख कर उसका नशा जाग उठा था और वह खुद पर कण्ट्रोल नहीं रख पाया. अब उसे लग रहा था की शायद सपना नाराज़ होगी, मगर सपना की आँखों में शिकायत नहीं, सिर्फ एक नशा था.