अपडेट - 9
इमेजिन थे करैक्टर ------>


लड़के ने अपने झटकों का सिलसिला जारी रखा, लेकिन अब उसका पूरा ध्यान सपना की उन भरी हुई, उछलती हुई चूचियों पर चला गया था. हर तेज़ धक्के के साथ वह दोनों गोरी, नरम चूचियां zor-zor से upar-neeche हिल रही थी ……. जैसे उन्हें भी इस चुदाई का गहरा मज़ा मिल रहा हो. उनकी चमकदार गोरी चमड़ी पसीने से भीग चुकी थी, और हर हिलने के साथ उनके भारी, गोल निप्पल्स और भी सख्त हो कर khade,laal और फूल गए थे….
लड़के ने अपना लेफ्ट हाथ सपना के नरम, मुलायम गले पर रख दिया ……. हल्का सा दबाव, इतना की उसकी सांस रुक न जाए, मगर उसको उसकी ताक़त का एहसास भी हो जाए………. उसकी उँगलियाँ उसकी गर्दन की नरम चमड़ी में हलके से धंस गयी थी, और सपना की आँखें एक पल के लिए बंद हो गयी, फिर खुल gayi……….Uski नज़रों में लालच और बेबसी का नशा था, जैसे वह उसकी इस ताकत के नीचे पूरी तरह से पिघल रही हो………….
दूसरे हाथ से उसने उसकी एक भारी चूची को कास कर पकड़ लिया, उसकी नरम चमड़ी को अपनी उँगलियों में भींचते हुए zor-zor से मसलने लगा. उसकी उँगलियाँ उसके सॉफ्ट, भरे हुए फलेश को गहराई तक दबा रही थी, कभी ऊपर से नीचे, कभी चारो तरफ घुमाती हुई. सपना की चूची उसके हाथ में बिलकुल बॉल सी लग रही थी ….. नरम, गरम और बिलकुल उसके कण्ट्रोल में.
उसने अपना मुंह निचे किया और उसके सख्त, पहले हुए निप्पल को अपने गरम, गीले होठों के बीच ले लिया. पहले डेंटन से हलके से खींचा, फिर ज़ुबान से गहरा घुमाया, और फिर ज़ोर से चूसने लगा …. जैसे उसको अंदर तक चूसना चाहता हो. उसकी ज़ुबान उसके निप्पल के चारो तरफ tez-tez घूम रही थी, कभी हल्का सा काट रहा था, कभी ज़ोर से चूस रहा था.
“आआह्ह्ह… जान निकल जाएगी मेरी!” सपना ने मदहोश आवाज़ में हुए कहा. उसकी आवाज़ में दर्द और लज़्ज़त का mila-jula नशा था ….. एक ऐसी चीख जो उसके गले से निकल कर केबिन की दीवारों तक टकरा रही थी.
लड़के ने अपनी कमर को और गहरा धकेलना शुरू कर दिया. हर बार वह अपना मोटा, सख्त लुंड सपना की छूट के बिलकुल गहरायी तक घुसेड़ देता, फिर धीरे से बहार निकलता, और फिर से एक ज़ोर ka…………dhakka मार देता. हर धक्के के साथ उसका लुंड उसकी अंदर की नरम दीवारों को खोल देता, उसके सेंसिटिव स्पॉट को रगड़ देता……...
“Uuuunnhhh…!Ahhhhhhhhhhh” सपना की एक गहरी, कांपती सिसकी निकली. उसकी आँखें बंद हो गयी, मुँह थोड़ा सा खुला, और उसकी गर्दन पीछे की तरफ झुक गयी.
“ाःह… हाय्यय… बहुत अंदर जा रहा है…” उसने सिसकते हुए कहा, उसकी आवाज़ अब बिलकुल टूटी हुई और मदहोश थी.
हर धकेल के साथ उसकी छूट से इतना गीलापन निकल रहा था की लड़के का पूरा लुंड चमकदार हो चूका था. Andar-bahar होने की गीली “puch-puch… puch-puch…” आवाज़ केबिन में एक मदहोश संगीत की तरह गूँज रही थी ……..
लड़के ने अब अपनी रफ़्तार और तेज़ कर दी. उसकी कमर के हर धक्के में अलग hi ताक़त बसी थी … हर बार जब वह अंदर तक पूरा उतरता, सपना के मुँह से एक नयी चीख निकल पड़ती.
“ऊऊह्ह्ह मा… aahhhhh…ssshhhhh…uhhhssshhh… आअह्ह्ह!”
“ाःह… और अंदर… हाँ… और aaramm…sesss…..se ढकी… दो मुझे…”
सपना का पूरा बदन हर धक्के के साथ थरथरा उठ रहा था. उसकी चूचियां zor-zor से उछाल रही थी, उसका पेट andar-bahar हो रहा था और उसकी छूट के अंदर एक ऐसी गर्मी और जलन फ़ैल रही थी जैसे उसके अंदर बिजली सी दौड़ रही हो. उसकी टांगें वाशबेसिन के किनारे को कास कर पकडे हुए थी, पर अब वह भी काँप रही थी.
“उफ्फ्फ्फ़… बहुत अंदर जान ले लोगे तुम… आआह्ह्ह!” सपना की आवाज़ अब रुक नहीं रही थी. हर dhakke…l के साथ उसकी सिसकियाँ और चीखें और भी मदहोश और बेशरम होती जा रही थी.
“हाँ… और ज़ोर से… प्लीज… मत रुको…”
उसकी छूट अब लड़के के लुंड को अंदर से kas-kas कर जकड रही थी, जैसे उसको अपने अंदर hi समेत लेना चाहती हो. हर बार जब उसका मोटा टोपा उसकी छूट के सबसे सेंसिटिव हिस्से को रगड़ता, सपना के जिस्म में एक नया करंट दौड़ जाता …. garam……sulagta हुआ.
लड़के ने अब अपनी रफ़्तार और तेज़ कर दी. हर धक्का इतना ज़ोर का, इतना गहरा था की सपना की पीठ दीवार से टकराती जा रही थी. उसकी भारी चूचियां जोर से ऊपर निचे उछाल रही थी, निप्पल्स बिलकुल सख्त और लाल हो गए थे…...
उसे लग रहा था जैसे उसके पेट के नीचे कोई बिजली सी कौंध रही हो ….garam…sulagti हुई जलन dheere-dheere उबाल रही थी और उसके पूरे जिस्म को लपेट रही थी.
“मैं… मैं निकलने वाली हूँ…” सपना ने लड़के के कंधे पर अपने डेंटन से ज़ोर से काट लिया. उसकी सांसें इतनी तेज़ और टूटी हुई थी की उसका सीना धोंकनी की तरह upar-neeche हो रहा था. उसकी उँगलियाँ सीट के किनारे को इतने ज़ोर से पकडे हुए थी की उसके हाथ काँप रहे थे और नाख़ून स्टील में धंस रहे थे.
लड़के ने भी महसूस कर लिया था की उसका वक़्त आ चूका है. उसने सपना की गांड को दोनों मज़बूत हाथों से कास कर पकड़ा, उसको सीट से थोड़ा ऊपर उठाया और उसे दीवार से बिलकुल चिपका दिया. अब सपना का पूरा नंगा जिस्म उसके सहारे था …. उसकी टांगें उसकी कमर के अराउंड लिपटी हुई, उसकी चूचियां उसके सीने से रगड़ रही थी.
फिर उसने पूरी ताक़त से आखरी कुछ धक्के मारे …………
धप्प …धप्प… Dhapp….Dhapp…Dhapp…Dhapp…
हर धक्का पहले से भी ज़्यादा गहरा, ज़्यादा ज़ोर का और गहराई तक था. सपना की चीख अब कभी रुक नहीं रही थी.
“आआह्ह्ह…! Aaaahhh…Aaaahhh…oouhhhh…shhhh…mmmmhhhhh… ऊऊह्ह्ह!”
उसका सख्त लुंड सपना की छूट के अंदर और भी फूल गया था, उसकी अंदर की हर दिवार को रगड़ रहा था.
“मेरा भी… मैं तुम्हारे अंदर hi निकलने वाला हूँ…” लड़के ने एक भरी, गहरी और कांपती कराह के साथ कहा, उसकी आवाज़ अब पूरी तरह से उखड चुकी थी….
एक आखरी….. बहुत ज़ोर का धक्का ……….
सपना का पूरा जिस्म एकदम से अकड़ गया. उसकी छूट लड़के के लुंड को kas-kas कर जकड ली जैसे उसको अंदर hi निगल लेना चाहती हो. फिर एक तेज़, गरम फवारे की तरह उसका पानी लड़के के लुंड पर छूटा …………एक के बाद एक तेज़ी के साथ.
“आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह…! … हायययययययय maaaaaaaaaaaa…aAaaaaahhhhhhhhh…!”
उसकी चीख रुक सी गयी, मुँह खुला रह गया, आँखें उल्ट गयी और उसका पूरा जिस्म zor-zor से कांपने लगा. उसकी छूट के अंदर के ऐंठन इतने तेज़ थे की लड़के को भी रोकना मुश्किल हो गया.
ठीक उसी पल लड़के ने भी अपना गरम, गाढ़ा माल सपना की छूट की गहराईयों में भरना शुरू कर दिया.
“उफ्फ्फ्फ़… ले लो… पूरा ले लो…” उसने कराह कर कहा…..
लड़के के लुंड के हर छोटा झटका गरम झाड़ियों की तरह उसके अंदर माल भर रहा था. सपना को महसूस हो रहा था जैसे उसके पेट के अंदर कोई गरम jwala-mukhi पहात गया हो. गरम और इतना ज़्यादा की उसकी छूट से बहार तक निकलने लगा…….
दोनों के जिस्म एक साथ काँप रहे थे, दोनों के मुँह से सिर्फ मदहोश सिसकियाँ और टूटी हुई सांसें निकल रही थी. सपना की छूट अब भी लड़के के लुंड को halke-halke झटके से जकड रही थी, जैसे हर बूँद को अंदर hi रखना चाहती हो.
दोनों वही चिपके हुए खड़े थे ….सपना की पीठ दीवार से लगी, लड़के का जिस्म उसके सामने, उसका लुंड अब भी उसके अंदर धड़क रहा था. दोनों lambi-lambi, टूटी हुई सांसें ले रहे थे. सिर्फ ट्रैन की तेज़ “ghad-ghad” और उनके दिल की तेज़ धड़कन सुनाई दे रही थी. टॉयलेट में पसीने, सेक्स और उनकी गरम साँसों की खुशबू फ़ैल चुकी थी…..
कुछ मिनट बाद, जब उनके जिस्म थोड़े शांत हुए, लड़के ने धीरे से अपना लुंड बहार निकला. वह अब भी adh-sakht था और सपना के रास और अपने गाढ़े माल से बिलकुल चमक रहा था. कुछ बूँदें सपना की छूट से बहार टपक कर टॉयलेट सीट पर गिरी.
सपना सीट से निचे उतरा , लेकिन उसके पेअर अब भी काँप रहे थे. उसने अपनी सलवार ऊपर की, लेकिन उसकी छूट अब भी बहुत गीली थी. अंदर बहार से निकलने वाला mila-jula रास उसकी पंतय और सलवार को पूरी तरह भिगो चूका था….
लड़के ने अपना रुमाल निकला और प्यार से सपना के चेहरे, गर्दन और चूचियों से पसीना पोंछने लगा. दोनों ने एक दूसरे की आँखों में देखा. कोई शब्द नहीं निकला, लेकिन उनकी आँखों mein..unki आँखों में वो शब्द देखे जा सकते the….jo वो एक दूसरे से कहना छह रहे थे
दरवाज़ा खोला. एक कोच की ठंडी हवा उनके गरम चेहरों पर टकराई. दोनों बहार निकले..... बहार से बिलकुल नार्मल, जैसे कुछ हुआ hi न हो. मगर सपना के चलने में एक नयी मादकता थी, उसकी टांगों के बीच एक गीली ठंडक और लड़के की नज़रों में भी अलग hi नशा छाया हुआ था …
ट्रैन अब भी तेज़ रफ़्तार से अँधेरी रात को चीरती हुई आगे बढ़ रही थी…
तो बे कॉन्टिनोएड ==>