Adultery " रेल, रात और वो ..." - SexBaba
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Adultery " रेल, रात और वो ..."

hotaks

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Hello एव्री ओने,

देखो भाई बहुत दिनों बाद एक स्टोरी लिखने की कोशिश कर रहा हूँ, और पहली बार अडुल्टेरी तरय कर रहा हूँ. इस स्टोरी में क्या होगा मुझे खुद नहीं पता. ये स्टोरी लॉन्ग तो नहीं है, लेकिन पूरी जरूर लिख ली है. तो बीच में अधूरा छोड़ने का सवाल hi नहीं है. मेरी पहली कोशिश है. अगर पसंद न आये तो माफ़ करियेगा. अगली स्टोरी फीडबैक के हिसाब से लिख दूंगा. वैसे, ये एडल्ट स्टोरी है, रोमांस नहीं है. इसे पढ़िए और फीडबैक जरूर dijiye::akshay:


तो बने रहिये... धन्यवाद

इमेजिन थे करैक्टर लिखे थिस - :डी





 
अपडेट - 1

सपना ने प्लेटफार्म पर लगी पुराणी, धुंदली घडी की तरफ देखा. सुइंयाँ जैसे उसके दिल पर चल रही थी. दिल्ली की शाम थी, लेकिन हवा में ठंडक का naam-o-nishaan नहीं था. प्लेटफार्म नंबर 5 पर लोगों का समंदर उमड़ रहा tha….chaiwalon की चीखें, इंजन की भरी ‘thak-thak’, और लाउडस्पीकर पर गूंजती be-jaan आवाज़.



उसका गाला सूख रहा था. उसने पर्स में राखी पानी की बोतल को टटोला, मगर निकालने की हिम्मत नहीं हुई. सांसें तेज़ चल रही थी. घर से फ़ोन आया था …. दादी की हालत बहुत नाज़ुक है. हर हाल में निकलना ज़रूरी था. रिजर्व्ड टिकट का सपना टूट चूका था. वेटिंग लिस्ट 150 पर अटकी रही. अब सिर्फ जनरल डिब्बा बचा था....

ट्रैन ने एक भयानक हॉर्न दिया. सपना की उँगलियाँ बैग के हैंडल पर इतनी कास गयी की नाखून सफ़ेद पद गए.

“अभी नहीं… अभी मत छूटो प्लीज…” उसने धीमे से बुदबुदाया.

जैसे hi जनरल डिब्बा सामने आया, लोगों का हुजूम उस पर टूट पड़ा. सपना ने गहरी सांस ली और भीड़ में कूद पड़ी. यह सफर नहीं, जुंग थी. धकेल, ठोकर, किसी का बैग सीने पर, किसी का हाथ कंधे पर ….हर तरफ प्रेशर था.

उसका रेशमी दुपट्टा किसी के टिफ़िन से उलझ गया. सपना ने एक झटके से उसे खींचा, परवाह नहीं की पहात भी जाये. कैसे भी अंदर पहुंची. डिब्बे के अंदर का मंज़र नरक जैसा था .. सीट पर paanch-paanch लोग, ऊपर बर्थ पर लोग लेते हुए, फर्श पर भी जगह नहीं. पसीने और थकान की हुई बू हवा में घुली हुई थी.

सपना बाथरूम के पास एक छोटी सी जगह पर रुक गयी. उसके बाल चेहरे से चिपक गए थे, सूट पसीने से पीठ पर चिपक चूका था. थक कर उसने आँखें बंद की.

“यहीं… यहीं ठीक है,” उसने मैं hi मैं सोचा.

ट्रैन ने झटका लिया और प्लेटफार्म छोड़ दिया. पहले आधे घंटे तक सपना ने खुद को बचाने की पूरी कोशिश की …. बैग को सीने से चिपकाये, शरीर को छोटा करके. पर अगले स्टेशन पर और लोग चढ़ गए. अब हालत यह थी की सपना चरों तरफ मर्दों की दीवार से घिर चुकी थी.

उसकी पर्सनल स्पेस अब ख़तम हो चुकी थी….

पीछे कोई खड़ा था. बहुत करीब. इतना करीब की उसकी शर्ट के बटन्स सपना की पीठ पर महसूस हो रहे थे. शुरू में उसने सोचा …. भीड़ है, मजबूरी है. उसने थोड़ा साइड मुड़ने की कोशिश की, पर वहां भी किसी की कोहनी उसके पेट में घुस रही थी.

Dheere-dheere डिब्बे की गर्मी बढ़ने लगी. सपना की गर्दन पर पसीने की लकीरें बनने लगी. उसने गहरी सांस ली, मगर हवा गरम और भरी थी.

तभी… उसने महसूस किया.

पीछे वाले शक़्स ने अपना पूरा वज़न उसकी तरफ शिफ्ट कर दिया था. प्रेशर हैट नहीं रहा था. वह जवान लड़का अब बिलकुल उससे चिपक गया था. उसके कंधे सपना की पीठ को छू रहे थे.

ट्रैन एक बड़े झटके से हिली…..

और उस झटके ने साड़ी दूरियां मिटा दी. लड़का पूरी तरह सपना की पीठ से लग गया. सपना का बदन पत्थर जैसा सख्त हो गया. उसकी सांस रुकी सी गयी. उसने बैग को इतनी ज़ोर से पकड़ा की उँगलियों के जोड़ दर्द करने लगे.

झटका गुज़र गया, लेकिन लड़का पीछे नहीं हटा….

अब वह dheere-dheere, बहुत महीन तरीके से अपनी कमर को सपना की पीठ और नितम्भों पर रगड़ रहा था. यह हादसा नहीं था. यह jaan-bujh कर की जा रही बात थी.

सपना की आँखें khud-ba-khud बंद हो गयी. उसका दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था की उसे डर लग रहा था कहीं वह लड़का उसकी धड़कन न सुन ले. उसकी गर्दन और कान लाल पद गए. जिस्म में एक अजीब सी गर्मी फैलने लगी …. थकान से नहीं, बल्कि एक अनजानी, शर्मीली तड़प से.

मैं चिल्लाऊं?

लेकिन क्या कहेगी? भीड़ इतनी टाइट थी की चिल्लाने का मतलब भी नहीं था. लोग कहते, “बहनजी, जनरल डिब्बा है…”

ट्रैन अब पूरी रफ़्तार में थी. बहार अँधेरा गहरा हो चूका था. डिब्बे की लाइट्स धुंदली पद चुकी थी.

सपना अब हिल भी नहीं सकती थी. वह पीछे खड़े उस लड़के के स्पर्श की क़ैदी बन चुकी थी. वह लड़का अब और हिम्मती होता जा रहा था. उसने अपने जिस्म को सपना की कर्तव्य पीठ पर और गहरा धसना शुरू कर दिया था.

सपना chup-chaap कड़ी थी.

आँखें बंद.

होंठ जोर से बंधे हुए.

पर उसके अंदर एक लड़ाई शुरू हो चुकी थी ….मर्यादा और उस अनजाने एहसास के बीच. हर ‘thak-thak’ के साथ वह लड़ाई कमज़ोर पड़ती जा रही थी….

रात अभी शुरू हुई थी…



और सपना का सफर एक अनजान समर्पण की तरफ बढ़ रहा था…….

तो बे कॉन्टिनोएड....
 
अपडेट - 2

सपना ने जब आँखें खोली, तोह दुनिया बदल चुकी थी. ट्रैन की खिड़कियों के बहार का धुंदला शाम का मंज़र अब एक गहरे, काले अँधेरे में तब्दील हो गया था. वह अँधेरा इतना गहरा था की डिब्बे की पुराणी पीली लाइट्स भी उससे हार रही थी. लेकिन सपना को लग रहा था की सबसे गहरा अँधेरा उसके अपने अंदर फ़ैल रहा था ....एक ऐसा अँधेरा जिसमे डर, शर्म, गुस्सा और एक अनजानी सी तड़प घुली हुई थी.



उसने फिर से कोशिश की. बैग को सीने से कास कर दबाया और थोड़ा आगे बढ़ने की जुर्रत की.

“ज़रा… साइड देना…” उसकी आवाज़ इतनी धीमी और टूटी हुई थी की उसे खुद भी मुश्किल से सुनाई दी. किसी ने सुना नहीं. जनरल डिब्बे में जगह नाम की चीज़ hi नहीं बची थी.

पीछे से वही एहसास अब और ज़्यादा साफ़, और ज़्यादा गहरा था. वह सिर्फ टच नहीं था ....वह एक jaan-boojh कर बढ़ता जा रहा प्रेशर था. हर बार ट्रैन ‘dhadak-dhadak’ करती, पीछे खड़ा लड़का उसके जिस्म से बिलकुल सात जाता. सपना ने अपनी रीढ़ की हड्डी सीढ़ी कर ली, कंधे टेंस किये, जैसे अपने आप को एक दीवार बना रही हो.

लेकिन यह दीवार सिर्फ उसके अंदर hi टूट रही थी.



यह क्या हो रहा है? यह सिर्फ भीड़ तोह नहीं… वह jaan-boojh कर कर रहा है…



उसकी उँगलियाँ बैग के हैंडल पर इतनी कास गयी थी की नाखून उसकी हथेली में गड रहे थे. उसका दिल zor-zor से धड़क रहा था. हर धड़कन उसे याद दिला रही थी की उसका जिस्म अब उसके कण्ट्रोल में नहीं रहा था.

डिब्बे की गर्मी अब उसके लिए सजा बन चुकी थी. पसीने की बूँदें उसकी गर्दन से फिसल कर सूट के अंदर तक जा रही थी. एक बूँद उसकी क्लीवेज में उत्तरी तोह उसने महसूस किया की उसका बदन उसके दिमाग से बगावत कर रहा था. दुपट्टा पसीने से चिपक कर उसकी स्किन से बिलकुल लग गया था, जैसे उसे और ज़्यादा बेबस करना चाहता हो.

मैं चिल्लाऊं?


पर क्या कहूँगी? “पीछे वाले लड़के ने मुझे छुआ है”? सब हसेंगे. जनरल डिब्बा है… यहाँ ऐसा होता है…

उसने हिम्मत जूता कर गर्दन हलकी सी घुमाई. इस बार उसकी नज़र सीढ़ी लड़के की आँखों से टकरा गयी.

एक पल.

सिर्फ एक पल.

लड़के की आँखों में हिचकिचाहट थी, थोड़ा सा डर और एक ऐसी भूख थी जो उसे खुद को शर्मिंदा कर रही थी. उसने तुरंत नज़र हटा लिया, पर वह पल सपना के अंदर कुछ टूट गया था ….

अब यह सिर्फ स्पर्श नहीं रहा था. अब यह एक कनेक्शन बन चूका था….

ट्रैन ने एक तेज़, गहरा झटका लिया. सपना का बैलेंस बिगड़ा और वह पीछे की तरफ झुक गयी. उसकी गांड उस लड़के के सख्त, गरम उभर से टकरा गयी. उसकी सख्ती इतनी मजबूत थी की सपना के पूरे जिस्म में करंट दौड़ गया. उसकी छूट में एक गहरी, गीली सी झनझनाहट महसूस हुई जो उसे खुद से hi घृणा दिलाने लगी….

यह गलत है… बहुत गलत… मैं क्यों हैट नहीं रही? क्या मैं इतनी कमज़ोर हूँ?

पर उसने हटने की कोशिश नहीं की. वह बस कड़ी रही ....आँखें आधी बंद, होठ तिघ्टलय भींचे हुए, सांसें गहरी और अनियमित..

अब उसकी मानसिक स्थिति एक गहरे टकराव में डूब चुकी थी…

एक तरफ उसका मैं चिल्लाने को कह रहा था, रोकर मदद मांगने को कह रहा था...

दूसरी तरफ उसका जिस्म dheere-dheere उस लड़के के रदम के साथ सिंक हो रहा था. हर झटके पर उसकी गांड थोड़ी सी पीछे की तरफ हिल रही थी ....बिलकुल छोटी सी, ऑलमोस्ट अनजानी हरकत, जो उसे खुद को और ज़्यादा शर्मिंदा कर रही थी….

अचानक सपना ने अपना सर हल्का सा साइड की तरफ झुकाया. उसने खुद नहीं समझा की यह क्यों किया. शायद उसकी गर्दन khud-ba-khud उस लड़के के गरम सांस के पास जा रही थी.

इस बार लड़के ने नज़र नहीं हटाई. वह सीधा उसके पसीने से चमकते गर्दन के नरम हिस्से को तक रहा था ….

सपना का दिल एक पल के लिए रुक सा गया… फिर इंजन की तरह तेज़ धोड़ाकने लगा. उसकी उँगलियाँ बैग पर कास गयी, फिर dheere-dheere धीमी पद गयी. जैसे उसने अंदर hi अंदर अपनी आखरी लड़ाई में हार मान ली हो.

अब उसके लिए दुनिया बहुत दूर हो चुकी थी….

बच्चों का रोना, फेरी वालों की पुकार, लोगों की बातें ....सब बैकग्राउंड नॉइज़ बन चुके थे.

सिर्फ दो हक़ीक़तें बची थी………….

उसकी अपनी तेज़, गरम, बेचैन सांसें…

और पीछे खड़े उस अजनबी लड़के की वह jaan-boojh कर बढ़ती जा रही, सुलगती हुई नज़दीकी.

ट्रैन बहार तेज़ रफ़्तार से दौड़ रही थी.



अंदर सपना dheere-dheere अपने अंदर के अँधेरे में डूब रही थी.

तो बे कॉन्टिनोएड.....
 
अपडेट - 3

ट्रैन अँधेरे को चीरती हुई किसी अनजान मंज़िल की तरफ तेज़ रफ़्तार से भागी जा रही थी. खिड़कियों के बहार का मंज़र काले रंग के समंदर जैसा था, जहाँ kabhi-kabhi किसी door-daraz गाओं की रौशनी एक नन्ही सी लौ की तरह चमकती और अगले hi पल उस घने अँधेरे में दफ़न हो जाती. ट्रैन की 'dhadak-dhadak' की आवाज़ अब सपना के दिल की धड़कन से कदम मिला कर चल रही थी.



जनरल कोच की हवा गरम और भारी थी. पसीने, भीड़ और थकन की mili-juli खुशबू साँसों में उतर कर नशा पैदा कर रही थी. हर तरफ जिस्मों का दबाव tha—kisi का कन्धा, किसी की कोहनी, किसी की सांस… सब एक दूसरे में घुले हुए थे. सपना ने धीरे से आँखें खोली. उसका चेहरा हल्का लाल हो चूका था और बिखरे बाल गर्दन से चिपक गए थे. उसने एक गहरी सांस ली, मगर उसके अंदर की घबराहट काम नहीं हुई.

पीछे खड़े लड़के की मौजूदगी अब उसके लिए महज भीड़ का हिस्सा नहीं रही थी… वह उसके जिस्म में एक गहरी, नम्म और ताप्ती हुई जलन बन चुकी थी. सपना ने महसूस किया की उसकी छूट अब halke-halke झटके ले रही है. हर बार जब ट्रैन पटरी बदलती, उसकी जाँघों के बीच की नरमी और भी नम्म होती जा रही थी. उसकी पंतय अब उस चिपचिपे द्रव से तर हो चुकी थी, जो उसके भीतर उठते जिस्म के सैलाब का सबूत था. उसने महसूस किया की उसकी छूट के होंठ अब फूलने लगे हैं, मनो वह उस अनजान स्पर्श का स्वागत करने के लिए तैयार हो रहे हों.

"यह ठीक नहीं है… मैं इसे और नहीं सेह सकती," सपना ने अपने मैं को समझाया, मगर उसका जिस्म किसी और hi रस्ते पर निकल पड़ा था. उसने कोशिश की की वह थोड़ी मर्यादा बनाये रखे और अपनी रीढ़ की हड्डी सीढ़ी की, जिससे उसकी मुलायम और गोल गांड थोड़ी सी पीछे की तरफ निकल आयी. कंधे तनय हुए थे, मगर सूट का पतला फैब्रिक उसके भरी उभारों पर इतनी ज़ोर से कास गया था की उसके निप्पल्स सख्त होकर कपडे को छेड़ने को बेताब नज़र आ रहे थे.

उसके चूचियां पसीने से lath-path थे. हर एक सांस के साथ जब उसका सीना फूलता, निप्पल्स उस खुरदरे फैब्रिक से रगड़ कहते, जिससे पूरे जिस्म में एक मीठी dard-bhari लहर दौड़ जाती. उसने अपने आप को सँभालने के लिए अपनी कोहनी पीछे की तरफ सेट की; उसे लगा ये एक बाउंड्री का काम करेगी. कोहनी लड़के के पेट के पास टिक गयी. उसने महसूस किया की लड़के का पेट सख्त था, और उसकी सांसें अब तेज़ हो रही थी.

कुछ पलों के लिए लगा की शायद वह पीछे हैट गया है, दबाव काम हुआ. सपना ने एक गहरी सांस ली hi थी की गर्दन पर जमा पसीने की एक बूँद धीरे से फिसल कर उसकी गहरी क्लीवेज में समां गयी, जहाँ पहले hi गर्मी उबाल मार रही थी. उस बूँद का रास्ता उसके सीने की ठंडक और गर्मी के बीच एक अजीब सी झनझनाहट पैदा कर गया.

मगर नियति को कुछ और hi मंज़ूर था. ट्रैन ने अचानक एक तेज़ झटका खाया. पूरी भीड़ ताश के पत्तों की तरह ek-dusre पर गिर पड़ी. सपना का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया. उसने बैग पकड़ने की कोशिश की, मगर पीछे से आते हुए प्रचंड दबाव ने उसे पूरी ताक़त से लड़के की तरफ धकेल दिया.

उसकी पूरी पीठ अब उस लड़के की छाती से पूरी तरह सात गयी थी. उसके नरम और भरे हुए गांड उस लड़के के सख्त और उभरे हुए लुंड पर बिलकुल डाब गए थे. वह लुंड... अब महज एक अंग नहीं, बल्कि एक सुलगते हुए लोहे के सरिये की तरह महसूस हो रहा था. कपड़ों की परतों के बावजूद, उसकी कठोरता सपना की गांड की दरार के बीच बिलकुल कास गयी थी.

सपना के पूरे बदन में एक भयंकर करंट दौड़ गया. उसने महसूस किया की उसकी छूट के अंदर से एक गरम रास का फव्वारा छूटा है, जिसने उसकी पंतय को पूरी तरह tar-batar कर दिया. उसकी टांगें एक पल के लिए काँप गयी और घुटने ढीले पद गए. अगर पीछे से वह सख्त सहारा न होता, तोह शायद वह वहीँ ढेर हो जाती.

लड़के की गरम सांस अब उसकी गर्दन के पीछे थी और उसके होंठ सपना के बिखरे बालों में छुप गए थे. लड़के के हाथ बैग के पास थे, मगर उनकी तपिश सपना की कमर के पास आग की तरह सुलग रही थी. उसने महसूस किया की लड़के की उँगलियाँ हलकी सी हिली हैं, मनो वह उसके बदन की बनावट को समझने की कोशिश कर रही हों.

"ओह्ह गॉड… यह बहुत सख्त है…" सपना का दिमाग सुन्न हो रहा था. उसके अंदर शर्म और हवस का एक ऐसा तूफ़ान उठा, जिसने उसकी सोचने की शक्ति को निचोड़ लिया. यहाँ सपना की गांड अपने आप थोड़ी सी पीछे डाब गयी. सिर्फ एक milli-meter की हरकत, मगर उसने लड़के के लुंड को उसकी दरार में और भी ज़ोर से रगड़ दिया. सपना को उसकी धड़कन अपनी गांड पर महसूस हो रही thi—woh हर 'धड़क' को अपने मॉस में गहरा उतरता हुआ महसूस कर सकती थी.

उसने एक आखरी कोशिश में कोहनी पीछे टिकाई, मनो कह रही हो.......'बस... और नहीं.' लड़के ने प्रेशर काम किया, मगर सपना की सांसें अब तेज़ थी और उनमें गुस्सा नहीं था. उसके अपने hi जिस्म ने उसे धोखा दे दिया था. उसने महसूस किया की उसकी छूट के होंठ अब और भी ज़्यादा गीले और पहले हुए हैं, और हर रगड़ एक नया नशा पैदा कर रही है.

उसकी छूट अब इतनी गीली थी की उसे वहां एक अजीब सी थरथराहट महसूस हो रही थी. हर झटके के साथ उसकी फूली हुई क्लीट पंतय से रगड़ कहती और बिजली दौड़ जाती. रात गहरी थी और भीड़ be-jaan, मगर सपना के लिए वह जगह अब दुनिया का सबसे छोटा और उत्तेजना से भरा कमरा बन चुकी थी. उसने अपनी आँखें मूँद ली और लड़के के जिस्म की गर्मी को अपने अंदर उतरने दिया. उसका दिल कह रहा था रुक जाओ, मगर उसका बदन उस लुंड की सख्ती पर और ज़ोर से दबने के लिए मचल रहा था.

बहार से वह एक मासूम मुसाफिर दिख रही थी, मगर अंदर उसका जिस्म बगावत कर रहा था. उसकी गांड अब भी उस लुंड की सख्ती को महसूस कर रही thi—woh एहसास अब उसकी रगों में खून की तरह दौड़ रहा था. उसने फैसला कर लिया था की अब वह लड़ेगी नहीं, बल्कि बस महसूस करेगी. उसने अपने बैग को थोड़ा और निचे सरका diya—yeh उसका 'साइलेंट' इनविटेशन था, एक इशारा की अब रस्ते में कोई रूकावट नहीं है.



दुनिया पीछे छूट रही थी, स्टेशन एक धुंधली रौशनी की तरह गुज़र रहे थे, मगर सपना के लिए वक़्त वही थम्म गया था जहाँ उसकी गांड उस सख्त लुंड से टकराई थी. उसका नया सफर अब शुरू हुआ था….. जहाँ ट्रैन की 'thak-thak' अब उसकी दबी हुई सिसकियों का पर्दा ban-ne वाली थी....

तो बे कॉन्टिनोएड..........
 
अपडेट - 4

ट्रैन अब तेज़ रफ़्तार पकड़ चुकी थी. पटरियों पर दौड़ते लोहे के पहियों की dhun........'thak-thak, ghad-ghad'....poore डिब्बे में किसी संगीत की तरह गूँज रही थी. डिब्बे की पुराणी पीली लिघ्तें, जो धुल और मक्खियों से ढकी थी, कभी वोल्टेज काम होने पर मद्धम पद जाती तोह कभी झटके के साथ तेज़ हो उठती. इस झिलमिलाती रौशनी ने उस तंग जगह में एक रहस्यमयी और मडक्ति सी छाया बना दी थी, जहाँ हर चेहरा धुंधला था मगर हर स्पर्श आग जैसा साफ़ महसूस हो रहा था.



सपना का पूरा बदन पसीने से tar-ba-tar हो चूका था. गरम पसीने की एक बूँद उसकी नरम गर्दन से फिसली और उसकी पीठ की दरार पर एक गीली लकीर बनती हुई नीचे की तरफ सरकने लगी. वह बूँद वही जा कर रुकी जहाँ पीछे खड़े लड़के का सख्त, तन्ना हुआ लुंड उसकी गांड पर पूरी शिद्दत से दबा हुआ था. उस पसीने की ठंडक और लुंड की ताप्ती हुई गर्मी का वह मिलान सपना के rom-rom में एक गहरा तूफ़ान खड़ा कर रहा था.

उसकी छूट में अब एक अजीब सी कसक उठने लगी थी. ट्रैन की हर थरथराहट उस बूँद को और नीचे धकेलती, जो अब उसकी गांड की दरार से फिसल कर उसकी पंतय की उस गीली जगह से जा मिली थी, जहाँ पहले hi चिपचिपा रास उबाल मार रहा बा. सपना ने महसूस किया की उसकी सांसें अब दबी हुई सिसकियों में बदल रही हैं, जिन्हे ट्रैन का शोर बड़ी बेरहमी से दबाये जा रहा था.

सपना की चूचियां अब बर्दाश्त से ज़्यादा भरी और सेंसिटिव हो चुकी थी. कुर्ते के पतले फैब्रिक के अंदर, बिना किसी सहारे के, उसके निप्पल्स किसी कांटे की तरह खड़े हो गए थे. हर बार जब ट्रैन झटका लेती, सपना का सीना आगे की तरफ दबता और पीछे मुड़ते वक़्त उस लड़के की छाती के सख्त मांस से रगड़ खता…..

हर रगड़ सपना के निप्पल्स में एक ऐसी मिठास पैदा कर रही थी, जो किसी बिजली के करंट की तरह सीधा नीचे उसकी छूट तक पहुँच रही थी. उसने अपना निचला होठ अपने डेंटन के नीचे इतनी कास कर दबा लिया की शायद खून निकल आता. उसकी सांसें अब कण्ट्रोल से बहार thi….gehri, भरी …..वह हर सांस के साथ उस लड़के की महक और अपने पसीने की गंध को पीय रही थी, जो उसके दिमाग में एक अजब सा नशा घोल रही थी.

उसकी गांड अब भी लड़के के लुंड पर किसी चुम्बक की तरह चिपकी हुई थी. ट्रैन की हर थरथराहट के साथ, जब सख्त लुंड उसकी दरार में रगड़ खता, तोह सपना का पूरा वजूद काँप उठता. उसे लग रहा था की उसकी छूट से निकलने वाला गरम रास अब उसकी जाँघों से होता हुआ घुटनो तक पहुँच जायेगा. उसने महसूस किया की अब वह सिर्फ भीड़ में कड़ी एक मुसाफिर नहीं थी, बल्कि उस लड़के के जिस्म और ट्रैन की रफ़्तार की घुलम बन चुकी थी….

पीछे खड़ा लड़का अब पूरी तरह समझ चूका था की सपना की ख़ामोशी उसकी 'न' नहीं, बल्कि उसकी 'हाँ' है. उसका हौसला अब बढ़ गया था. उसने अपने निचले पेट को और ज़ोर से सपना के गोल और मुलायम गांड पर चिपका दिया. उसका मोटा, गरम और पूरा सख्त लुंड अब उसकी गांड की दरार के बिलकुल बीच में दबा हुआ था, जैसे वही उसकी असली जगह हो.

फिर शुरू हुई असली ragad…..dheere-dheere, और गहरी होती गयी…..

लड़के ने अपनी कमर को अब धीरे धीरे से हिलना शुरू किया. वह अपना लुंड सपना की गांड की नरम दरार में upar-neeche रगड़ने लगा. हर धक्के के साथ उसका गरम सूपड़ा सपना के नितम्भों के गहरे हिस्से को छू रहा था. सपना ने अब शर्म की दीवार गिरा दी थी; उसने अपने नितम्भों को थोड़ा और पीछे की तरफ झटका दिया, ताकि वह उसकी सख्ती को और गहराई से महसूस कर सके.

लड़के ने भी ज़ोर बढ़ा दिया. अब उनके बीच की रगड़ तेज़ और लगातार हो चुकी थी. सपना की गांड के नरम मांस उस मोठे लुंड को अपनी गर्माहट में लपेट रहे थे. हर रगड़ पर सपना के अंदर से एक गरम, गीला रास निकलता जा रहा था, जो उसकी पंतय और सलवार को चिपचिपा बना रहा था. ट्रैन की 'thak-thak' अब उनके जिस्मों की इस रगड़ से taal-mel बिठा चुकी थी, और सपना उस सख्ती के बीच पूरी तरह पिघल रही थी.

उसकी क्लीट अब फूल कर पंतय के खुरदरे कपडे से zor-zor से रगड़ खा रही थी. हर बार जब लड़का पीछे से दबाव बनता, सपना की क्लीट पर एक तेज़ करंट दौड़ता जो उसे पागल कर रहा था. उसने महसूस किया की उसकी जांघें गीली होकर आपस में चिपक रही हैं. उसकी चूचियां अब हवस और दर्द से इतनी भर गयी थी की उसे लग रहा था जैसे कोई उन्हें पूरी ताक़त से चूस रहा ho….yeh एहसास इतना असली था की उसकी आँखें आधी बंद हो गयी और मुंह से एक दबी हुई 'अह्ह्ह' निकल गयी.

लड़के ने अब एक नया दांव खेला. उसने अपना डायन घुटना सपना की दोनों टांगों के बीच और गहरा फसा दिया. अब उसका सख्त घुटना सपना की गीली छूट पर halka-halka प्रेशर दे रहा था, जिसने रगड़ की तीव्रता को दुगना कर दिया था. सपना का संतुलन अब सिर्फ उस लड़के के भरोसे था.

“थोड़ा… जगह… दीजिये…” सपना ने बहुत धीमी और कांपती आवाज़ में कहा. मगर उस आवाज़ में कोई सख्ती नहीं थी, सिर्फ एक कमज़ोर इल्तिजा थी जो लड़के को और उकसाने का काम कर रही थी.

लड़के ने उसकी बात सुनी, मगर हटने के बजाये अपने लुंड को उसकी गांड की दरार में और ज़ोर से भींचा. उसने सपना के कान के पास झुक कर एक भरी सांस छोड़ी, जिसकी गर्मी ने सपना के जिस्म में आग लगा दी. अब उनके बीच भीड़ की मर्यादा पूरी तरह राख हो चुकी थी; अब वहां सिर्फ दो जिस्म थे जो ट्रैन की रफ़्तार के साथ ek-dusre में समां जाने को बेताब थे.

लड़के ने कोई जवाब नहीं दिया. उसने अपने बाएं हाथ को धीरे से सपना की कमर से नीचे सरका दिया. उसका अंगूठा कुर्ते के ऊपर से hi उसकी नाभि के aas-paas की नरम और पसीने से गीली चमड़ी को dheere-dheere घूमते हुए दबाने लगा. सपना के पेट के अंदर जैसे बिजली दौड़ गयी. उसकी छूट ने एक झटका लिया और रास का एक सैलाब बहने लगा, जो अब उसकी जाँघों को भिगोता हुआ नीचे सरक रहा था.

ट्रैन अब एक लम्बी लोहे की पल पर से गुज़र रही थी. ‘Ghad-ghad-ghad-ghad’ की तेज़ और भरी आवाज़ ने पूरे डब्बे को अपनी गिरफ्त में ले लिया. यह शोर उन दोनों के लिए एक पर्दा बन गया. भीड़ की नज़रों से दूर, इस शोर की आड़ में लड़के ने अपना पूरा बदन सपना पर थोप दिया.

अब उसकी झटके मरने की स्पीड और तेज़ होने लगी. उसका मोटा लुंड सपना की गांड की दरार में zor-zor से upar-neeche हो रहा था. कभी वह गांड के नरम मांस को दबोचा, तोह कभी दरार के बिलकुल बीच में गहरा धक्का देता. सपना ने अब अपनी गांड को उसके रदम के साथ सिंक कर लिया था. वह अब सिर्फ बर्दाश्त नहीं कर रही थी, वह हर धक्के का स्वागत कर रही थी; उसकी गांड अब खुद लड़के के लुंड की सख्ती को ढूंढते हुए पीछे झटके मार रही थी.

उसकी सांसें अब दबी हुई कराहों में बदल चुकी थी. ट्रैन की हर थरथराहट उसके जिस्म की आग को और भड़का रही थी. सपना को महसूस हो रहा था की वह किसी गहरी खाई में गिरती जा रही है, जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं tha…aur वह चाहती भी नहीं थी की यह सफर कभी ख़त्म हो….

सपना की सांसें अब उखाड़ने लगी थी. उसकी गर्दन पीछे की तरफ झुक गयी. लड़के ने तुरंत मौका देखा और अपना चेहरा उसकी पसीने से गीली गर्दन में छुपा लिया. उसके गरम होठ सपना की नरम चमड़ी पर पड़े, जिससे उसके पूरे जिस्म में बिजली दौड़ गयी. फिर उसने वहां एक गहरा, चूसने वाला किश दिया और अपनी गरम जीभ से उस नरम चमड़ी को हल्का सा छाता.

“आआअह्ह्ह्हह… मममममम… स्स्स्सस्छ्हःहः!”

सपना के मुंह से एक लम्बी और मडक्ति सिसकी निकल गयी जो ट्रैन के शोर में कहीं खो गयी. उसकी आँखें पूरी तरह बंद हो गयी और उसने अपना सर पीछे लड़के के कंधे पर टिका दिया. अब उनके बीच दुनिया, भीड़ और मर्यादा बिलकुल ख़तम हो चुकी थी. सिर्फ दो भूखे जिस्म बचे the….jo इस गरम, पसीने और हवस भरी रात में ek-dusre को पूरी तरह निचोड़ लेना चाहते थे.

सपना की छूट अब सुलग रही थी. उसने महसूस किया की उसकी छूट के होंठ अब इतने फूल चुके हैं की हर झटका सीधा उसकी क्लीट के aar-paar हो रहा है. उसकी गांड लड़के के लुंड की रगड़ के साथ एक रदम में नाच रही थी. लड़के ने अपनी रगड़ और तेज़ कर दी, उसका लुंड अब सपना की गांड की दरार के हर एक हिस्से को बेरहमी से मसल रहा था.



रात अभी बहुत लम्बी थी… और उनकी बेचैनी अब एक ऐसे जूनून में बदल चुकी थी जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं बचा था. सपना अब बस उस 'अंत' का इंतज़ार कर रही थी जहाँ उसका जिस्म पूरी तरह राख हो जाये. ट्रैन की 'thak-thak' अब उनके जिस्मों की धड़कन बन चुकी थी, और हर झटका उन्हें उस एक आखरी सैलाब के करीब ले जा रहा था.

तो बे कॉन्टिनोएड........
 
अपडेट- 5
ट्रैन पूरी रफ़्तार से दौड़ रही थी. पत्थरों और पटरियों के बीच होने वाला लोहे का भयंकर टकराव एक ऐसी ‘thak-thak’ पैदा कर रहा था जो कानो में नहीं, बल्कि सीधा रगों में दौड़ रही थी. सपना के लिए अब भीड़ में वो गर्मी, लोगो का पसीना और जनरल डिब्बे की वो dam-ghontu dhakka-mukki एक धुंधली पर्दा बन चुकी थी. उसका ध्यान अब दुनिया से पूरी तरह काट चूका था; उसका हर सेंस, हर एहसास सिर्फ एक hi जगह tha—uski पीठ से चिपका हुआ वो अनजान, जवान और be-baak शक़्स.



सपना ने एक गहरी और भरी सांस ली. हवा में पुराने लोहे की तेज़ mahak,aur भीड़ का पसीना मिला हुआ था, लेकिन उस लड़के की साँसों की गर्मी उसकी नंगी गर्दन पर एक अलग hi नशा घोल रही थी. उसने महसूस किया की ट्रैन jab-jab कोई मोड़ लेती या झटका कहती, उस लड़के का जिस्म किसी मैग्नेटिक फाॅर्स की तरह उसके जिस्म में थोड़ा और गहराई तक धंस जाता था. वो लड़का कोई मामूली मुसाफिर नहीं लग रहा था; उसके स्पर्श में एक ऐसी शिद्दत और एक ऐसी भूक थी जो सपना ने अपनी पूरी shadi-shuda ज़िन्दगी में पहले कभी महसूस नहीं की थी. यह स्पर्श उसे डरता भी रहा था और अंदर hi अंदर पिघला भी रहा था.

लड़के का हाथ जो पिछले काफी वक़्त से उसके पेट पर ठहरा हुआ था, अब सिर्फ एक सहारा नहीं रहा था. उसकी उँगलियों ने अब एक खतरनाक हरकत शुरू कर दी थी. सपना ने निचे dekha—bheed इतनी टाइट थी की कोई देख नहीं सकता tha—ki उस लड़के ने बड़ी चालाकी से सपना के कुर्ते के नीचे से दुपट्टा हटा दिया था. अब उसके नरम पेट की चमड़ी और लड़के की गरम हथेली के बीच सिर्फ एक पतला सा सूती कपडा बचा था. लड़के ने अपनी उँगलियों को फैलाया और सपना के पेट की उस थरथराहट को महसूस किया जो उसके अंदरूनी दर और चाहत की वजह से पैदा हो रही थी.

सपना का दिल बैठ गया. उसकी छूट में एक ऐसी हलचल हुई जैसे कोई धीरे से उसके जिस्म की तार छेड़ रहा हो. उसने एक बार फिर nam-matra की कोशिश की आगे होने की. सामने खड़े एक bhari-bharkam आदमी की पीठ पर उसने अपने हाथ टिका दिए, मगर भीड़ का दबाव इतना था की वह सिर्फ एक सेंटीमीटर भी आगे नहीं बढ़ पायी. इस धक्के ने उसे वापस और भी ज़ोर से लड़के की 'गॉड' में गिरा दिया. लड़के ने इस मौके का पूरा फायदा उठाया और अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर उसकी पतली कमर को दोनों तरफ से इतनी कास कर पकड़ा की सपना के मुंह से एक दबी हुई सिसकी निकल गयी.

अब सपना पूरी तरह उसके क़ैद में थी. लड़के का मोटा, गरम और सख्त लुंड अब साफ़ तौर पर उसकी गांड की दरार में महसूस हो रहा था. ट्रैन जब भी मोड़ लेती, वह सख्त हिस्सा सपना के नरम गांड पर रगड़ खता, जिससे उसके पूरे बदन में एक ऐसी बिजली दौड़ जाती जो उसकी टांगों को ढीला कर रही थी.

डब्बे की पुराणी और धुल से भरी लाइट एक बार फिर farr-farr करके बंद हो गयी. पूरा डिब्बा एक दम से सियाह अँधेरे में डूब गया. सिर्फ बहार से आती चांदनी की हलकी लकीरें खिड़कियों की लोहे की जालियों से झांक रही थी. उस अँधेरे ने लड़के को और भी be-baak बना दिया. उसने बिना वक़्त जाया किये अपना चेहरा सपना की नंगी गर्दन में छुपा लिया.

उसकी नाक की नोक सपना की नरम और पसीने से गीली गर्दन पर dheere-dheere सरक रही थी. "तुम काँप क्यों रही हो?" उसने बहुत धीमी और भरी आवाज़ में फुसफुसाया. वो आवाज़ इतनी रसीली थी की सपना के कान के परदे लरज गए. सपना ने कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन उसने अपना सर पीछे की तरफ झुका diya—yeh उसका मूक समर्पण था. लड़के ने मौका पाते hi उसकी गर्दन पर अपने गरम होठ रख दिए. एक हलकी सी चुम्बन, जो शुरुआत में नरम थी मगर सपना के लिए जला देने वाली थी. उसने महसूस किया की लड़का उसकी स्किन को हलके से डेंटन से कुरेद रहा है.

सपना की आँखें बंद थी. उसने महसूस किया की उसकी चूचियां अब भरी होकर दुखने लगी हैं. वो कुर्ते के अंदर इतनी तन्नी हुई थी जैसे किसी स्पर्श का इंतज़ार कर रही हों. लड़के का एक हाथ पेट से dheere-dheere ऊपर की तरफ सरका. हर मिलीमीटर का नशा लेते हुए उसका हाथ ऊपर बढ़ा. जब उसकी हथेली उसके उभारों के बिलकुल नीचे रुकी, तोह सपना की सांस hi अटक गयी.

लड़के ने अपने अंगूठे से उसके नरम उभारों को नीचे से सहलाया. सपना ने अपने होठों को इतनी ज़ोर से काट लिया की दर्द महसूस होने लगा, ताकि कोई आवाज़ भीड़ में बहार न जाये. ट्रैन के शोर ने उसकी दबी हुई सिसकियों को ba-khubi छुपा लिया था. लड़के ने अब पूरी हथेली उसकी एक चूची पर रख दी और उसे हल्का सा दबाया.

"आह्हः..." सपना के मुँह से एक सरसराहट निकली जो ट्रैन की 'ghad-ghad' में मिल गयी. उसने महसूस किया की उसके निप्पल्स सख्त होकर कपडे से टकरा रहे हैं. लड़के ने अपने अंगूठे और उँगलियों के बीच उस सख्त निप्पल को पकड़ा और उसे कुर्ते के ऊपर से hi मसलना शुरू किया. हर एक मसलन सपना के जिस्म में एक लहर पैदा कर रही थी जो सीधा उसकी छूट में जा कर धमाका करती. उसकी छूट अब गीली हो चुकी थी, और उसकी सलवार उसके जांघ के बीच चिपकने लगी थी.

लड़के का दूसरा हाथ अब नीचे की तरफ बढ़ा. उसने सपना की कमर को पीछे से पकड़ा और अपने लुंड को और ज़ोर से उसकी गांड पर दबाया. वो इतना सख्त था की सपना को लग रहा था की वो कपडे पहाड़ कर अंदर दाखिल हो जायेगा. लड़के ने अपने जिस्म को एक रदम में हिलना शुरू किया, जैसे ट्रैन की हर झटके के साथ वो सपना को पीछे से 'राइड' कर रहा हो. वह रगड़ इतनी गहराई से हो रही थी की सपना की गांड के मांस में गर्माहट उबलने लगी थी.

स्टेशन नज़दीक था, मगर उन दोनों का नशा अपने चरम पर पहुँच चूका भीड़ का डर अब मिट चूका था. लड़के ने अब उसके कुर्ते के नीचे से अपना हाथ दाखिल करने की कोशिश की. जब उसकी गरम और खुरदरी हथेली सपना की नंगी पीठ और कमर की चमड़ी से टकराया, तोह सपना का पूरा जिस्म एक बार झटक खा गया .हुए उसे एक ठंडक और गर्मी का अजीब मिलान का एहसास हुआ...

"रोको मत..." लड़के ने उसके कान में दोबारा फुसफुसाया, उसकी ज़बान सपना के लोब को छू रही थी, "कोई नहीं देख रहा... सब अपने में मस्त हैं."

सपना ने अपना हाथ पीछे किया और लड़के की मज़बूत ब्याह (एआरएम) को पकड़ लिया. मगर वह उसे हटा नहीं रही थी, बल्कि उसे और अपने जिस्म के करीब खिंच रही थी, जैसे वह डर रही हो की कहीं वह दूर न हो जाये. उसने अपनी गांड को पीछे की तरफ थोड़ा और उछाला, ताकि लड़के का वह मोटा औज़ार और गहराई से उसकी दरार में बैठ सके. लड़के ने एक लम्बी सांस ली और उसकी गर्दन पर एक गहरा 'love-bite' छोड़ दिया.

ट्रैन की सीटी goonji….Station आ चूका था. डिब्बे में हलचल हुई, लोग उतरने और चढ़ने के लिए ek-dusre को धकेलने लगे, लेकिन उन दोनों के लिए वक़्त वही थम्म गया था. भीड़ की थकन और गर्मी अब एक जूनून बन चुकी थी. सपना को पता था की ये सफर शायद अगले स्टेशन पर कंही ख़त्म हो जाये, लेकिन उसके जिस्म पर जो निशाँ और उसकी छूट में जो तड़प इस अजनबी ने छोड़ी थी, वो उसे ज़िन्दगी भर एक राज़ की तरह याद रहेगी.

सपना ने आँखें मूंदी रही, उसने महसूस किया की लड़के का लुंड अब लगातार उसकी गांड पर झटके मार रहा था, मनो वह भी उस सैलाब को रोकने की कोशिश कर रहा हो जो अब बहने को बेताब था.


तो बे कॉन्टिनोएड....
 
अपडेट - 6

ट्रैन की रफ़्तार अब स्टेशन के नज़दीक पहुँचते hi dheere-dheere सुस्त पद रही थी. पटरियों की वो तेज़ ‘thak-thak’ अब एक भरी और धीमी ‘ghad-ghad’ में तब्दील हो चुकी थी, मगर डब्बे के अंदर का टेम्परेचर भीड़ के दबाव और जिस्मों की गर्मी से लगातार बढ़ता जा रहा था. सपना को महसूस हो रहा था जैसे उसकी गोरी चमड़ी और उसके पीछे खड़े अजनबी लड़के के कपड़ों के बीच अब कोई फासला नहीं बचा था.



लड़के का मज़बूत सीना सपना की नरम पीठ पर इतना कास कर दबा था की जब वो लम्बी सांसें लेता, तोह सपना को उसके फेफड़ो की हर हरकत अपनी रीढ़ पर महसूस होती. सपना की हालत ऐसी थी की वो डर और मज़े के बीच एक पतली लकीर पर चल रही थी. उसका दिमाग baar-baar उसे समझा रहा था की भीड़ में किसी अनजान लड़के का अपना सख्त लुंड इस तरह रगड़ना गलत है, sharam-naak है. मगर उसका जिस्म? उसका जिस्म अब उस अजनबी की गर्मी समझ रहा था. उसने महसूस किया की उसकी सलवार के अंदर उसकी छूट अब सिर्फ गीली नहीं थी ….बल्कि एक अजीब सी जलन, एक प्यास और एक मीठे दर्द से भर गयी थी जिसे सिर्फ वो पीछे खड़ा लड़का hi शांत कर सकता था.

अचानक डब्बे की पुराणी धुंदली लाइट्स एक बार फिर झटके से बुझ गयी. इस बार का अँधेरा पहले से ज़्यादा घाना और लम्बा था. जैसे hi रौशनी गयी, पूरा डिब्बा एक सन्नाटे में डूब गया ….सिर्फ ट्रैन के पहियों का शोर था. इस अँधेरे ने लड़के को नया लाइसेंस दे दिया. उसने अपनी पकड़ और भी तेज कर दी…..

लड़के ने अपने दोनों गरम हाथ सपना के कुर्ते के नीचे दाल दिए. सपना का पूरा बदन एक झटके से कमान की तरह तन गया जब उसने अपने नंगे पेट पर लड़के की सख्त, थोड़ी खुरदरी और ताप्ती हुई हथेलियों का पहला स्पर्श महसूस किया. वह स्पर्श किसी बिजली के झटके की तरह उसके पूरे जिस्म में दौड़ गया. लड़के की उँगलियाँ किसी शिकारी की तरह उसके पेट की नरम चमड़ी पर रेंगती हुई dheere-dheere ऊपर की तरफ बढ़ने लगी. सपना ने इस डर और मज़े के समंदर में डूबते हुए अपनी पीठ को पीछे की तरफ पूरी ताक़त से धकेला, जिससे लड़के का सख्त और तन्ना हुआ लुंड उसकी गांड की दरार में और भी गहराई से धंस गया.

“उफ़…” सपना के मुंह से एक दबी हुई सिसकी निकली जो ट्रैन के शोर में कहीं खो गयी.

लड़के ने इसका फायदा उठाते हुए सपना के कान के बिलकुल पास अपनी गरम ज़बान से एक हल्का सा, भीगा स्पर्श किया. “तुम्हे पसंद आ रहा है न?” उसने धीमी और भरी आवाज़ में फुसफुसाया. उसकी आवाज़ में एक ऐसी शैतानी मिठास थी जो सपना के जिस्म को माँ की तरह पिघला रही थी. सपना ने कोई जवाब नहीं दिया ….उसके पास शब्द hi नहीं थे …. लेकिन उसने अपनी गर्दन और ज़्यादा टेढ़ा कर दिया, पूरा रास्ता दे दिया ताकि लड़का उसकी नरम गर्दन के हर हिस्से को अपने होठों से चूम सके.

अब लड़के के हाथ उसके कुर्ते के अंदर काफी ऊपर सरक चुके थे और सीधा सपना की भरी चूचियों तक पहुँच गए. जैसे hi लड़के की खुरदरी हथेलियों ने उसके नरम, गरम और भरी मांस को बिना किसी परदे के छूना शुरू किया, सपना को लगा जैसे उसके पूरे जिस्म में धमाका हो गया हो.

लड़के ने अपने बड़े हाथों से दोनों चूचियों को पूरी तरह मुट्ठी में भर लिया. उसका हर दबाव, हर मसलन सपना की साँसों को और तेज़ और अनियमित कर रहा था. उसने अपने अंगूठे से सपना के निप्पल्स को मसलना शुरू किया. सपना के निप्पल्स इतने सख्त और तन्नी हुए थे की वो लड़के की हथेलियों में किसी कांटे की तरह चुभने लगे. हर रगड़ पर सपना के पेअर काँप रहे थे और उसे लग रहा था की वो अभी फर्श पर ढेर हो जाएगी.

“तुम्हारी ये चूचियां… इतनी नरम और भरी हैं,” लड़के ने उसके कान में अपनी गरम सांस छोड़ते हुए कहा. उसने एक हाथ से उसकी एक चूची को कास कर पकड़ा और दुसरे हाथ को dheere-dheere उसके पेट से होते हुए नीचे सलवार के नाड़े की तरफ ले गया. हर इंच का सफर सपना के लिए एक नया इम्तेहान था.

सपना का दिल अब किसी ढोल की तरह उसकी छाती में बज रहा था. उसने महसूस किया की लड़के की उँगलियाँ अब उसकी सलवार के ऊपर से hi उसकी छूट के ऊपरी हिस्से पर, उसकी क्लीट पर दबाव बना रही हैं. ठीक उसी वक़्त ट्रैन ने एक झटका लिया, जिससे पूरा डब्बा एक तरफ झुका. उसी झटके का फायदा उठाते हुए लड़के ने अपना पूरा वज़न सपना पर वापस थोप दिया.

लस्का अब अपना मोटा और सख्त लुंड सपना की गांड के निचले हिस्से पर पूरी शिद्दत से रगड़ रहा था. सपना ने अब साड़ी मर्यादाओं को तक पर रख दिया. उसने अपने हाथ पीछे करके लड़के की कमर और जीन्स को कास कर पकड़ लिया और खुद को पूरी ताक़त से उसके ऊपर पीछे की तरफ खींच लिया. अब उनके बीच कोई पर्दा नहीं बचा था ….सिर्फ कपड़ों की एक पतली तेह थी जो उनकी जिस्मों से निकली आग को रोकने की कोशिश कर रही थी.

लड़के की उँगलियाँ अब सलवार के अंदर सरकने की कोशिश कर रही थी. सपना को अच्छी तरह पता था की अगर वो यहाँ रुकी नहीं तोह ये सफर उसे कहाँ ले जायेगा. मगर उसकी छूट से निकलता गीलापन और उसकी नरम जाँघों के बीच उठती तपन उसे समर्पण करने पर मजबूर कर रही थी. उसने दर्द और मज़े के उस चरम पर अपने दांतों से लड़के के कंधे को हल्का सा काट लिया …. यह कोई गुस्सा नहीं था, यह एक ‘हाँ’ थी, एक हामी थी की अब वो उसके जिस्म के साथ जो चाहे कर सकता है.

बहार लाउडस्पीकर पर स्टेशन का एलान और तेज़ हो गया था, भीड़ में हलचल बढ़ने लगी थी. “यात्री कृपया ध्यान दें…” की आवाज़ गूँज रही थी.

लेकिन सपना के लिए दुनिया का सारा शोर, साडी भीड़ और साडी फ़िक्र उस लड़के की भरी और ताप्ती हुई साँसों में सिमट कर रह गयी थी. लड़के ने अपना चेहरा उसकी पसीने से गीली गर्दन से हटा कर उसके कान के बिलकुल पास लाया और भरी आवाज़ में कहा, “अगला स्टेशन आ रहा है… वहां भीड़ और बढ़ेगी. लोग चढ़ेंगे, जगह और काम होगी… और हमें ….ज़्यादा मौका मिलेगा.”

सपना ने एक लम्बी और कांपती हुई सांस ली. उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी ….नशा था…., डर और एक प्यास का रंग जो उसने पहले कभी नहीं देखा था. ट्रैन की रफ़्तार अब बिलकुल धीमी हो रही थी. प्लेटफार्म की लाइट्स डब्बे के अंदर झांक रही थी, जो baar-baar उनके नंगे स्पर्शों को be-parda कर रही थी. लड़के ने एक आखरी बार उसके निप्पल्स को अपनी मुट्ठी में ज़ोर से भींच दिया और अपना लुंड उसकी गांड पर एक आखरी बार जोर से रगड़ा.

सपना को ऐसा लगा जैसे वो किसी गहरे और तपते समुन्दर से बहार निकल रही हो. उसने धीरे से अपनी आँखें खोली, जिस्म पसीने में लथपथ था, मगर उसने पीछे मुद कर नहीं देखा. उसे पता था की स्टेशन आते hi लोग बदलेंगे, भीड़ का रुख बदलेगा, पर वो लड़का वही रहेगा …. उसकी पीठ से चिपका हुआ, उसकी गांड से सत्ता हुआ, उसका खामोश हमसफ़र.

ट्रैन प्लेटफार्म पर आकर रुकी…..



और सपना ने महसूस किया की उसका असली सफर तोह अब शुरू होने वाला था.

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट - 7

ट्रैन स्टेशन के प्लेटफार्म पर दाखिल हो रही थी. प्लेटफार्म की रोशनियों और भीड़ की आवाज़ों के बीच, अचानक लोहे के पहियों पर ब्रेक लगते hi भयानक 'cheen-cheen-cheen' की तेज़ आवाज़ पूरे डब्बे में गूँज उठी. ब्रेक इतनी अचानक थी की पूरा जनरल डब्बा एक ज़ोर के झटके के साथ आगे की तरफ फेका गया. सब कुछ एक पल के लिए रुक सा गया, फिर तेज़ से हिलने लगा.



सपना, जो पहले hi लड़के के साथ बिलकुल चिपकी हुई थी, उस झटके की वजह से उसके चौरी सीने पर जैसे किसी पिचकी हुई चीज़ की तरह और भी ज़ोर से धकेल दी गयी. उसका पूरा नरम जिस्म उस लड़के के सख्त, मज़बूत शरीर से टकराया. उसकी badi-badi चूचियां उसके सीने से बिलकुल मसल गयी, सिर्फ दो पतली कपड़ों की तेह उनके बीच बाकि थी.

उनके जिस्मों के बीच अब कोई दूरी नहीं बची थी. लड़के की छाती सपना के चूचूं पर, उसका पेट उसके पेट से, और उसकी जांघें उसकी जांघों से बिलकुल सत्ता हुआ था. लड़के ने इस कुदरती मौके का पूरा फायदा उठाया. उसने अपने शरीर का बैलेंस बनाये रखने के बहाने, अपना राइट कनी थोड़ा सा ऊपर उठाया और मोड़ दिया. फिर उसने उसको सपना की दोनों टांगों के बीच, उसकी naram-garam जांघों के बिलकुल ऊपर, उसकी छूट के निचे फसा दिया.

सपना की सांस जैसे उसके साइन में hi अटक कर रह गयी. उसका पूरा वजूद एकदम से थरथरा उठा. उसकी आँखें बड़ी हो गयी. उसने महसूस किया की लड़के के लुंड का वह सख्त, गरम और मोटा ehsaas….jo अब तक उसकी छूट की दरार में ज़ोर से दबा हुआ था…. उस झटके की वजह से थोड़ा सा निचे की तरफ सरक गया था.

वह गरम सरिया अब उसकी छूट की नरम चर्बी को फिसलता हुआ सीधा निचे आ रहा था. हर एक सरकते हुए मिलीमीटर के साथ सपना के शरीर में बिजली सी दौड़ रही थी. अब वह गरम टोपा उसकी गीली पंतय के बिलकुल ऊपर, उसकी छूट के नरम और बहुत सेंसिटिव हिस्से पर प्रेशर बना रहा था. पंतय का पतला कपडा भी उस ज़ोर को रोक नहीं प् रहा था. सपना को ऐसा लगा जैसे उसके अंदर आग लग गयी हो. उसकी छूट से और ज़्यादा रास निकलने लगा था, पंतय अब पूरी तरह गीली और चिपचिपी हो चुकी थी.

लड़के का हौसला अब साड़ी हदों को पार कर चूका था. उसने अपना वह हाथ, जो अब तक सपना के पेट पर dheere-dheere घूम रहा था, और निचे की तरफ सरकाना शुरू किया. उसकी गरम, मज़बूत हथेली सपना के नरम पेट पर से गुज़रती हुई उसकी नाभि को छूती हुई आगे बढ़ी. सपना का पेट अंदर की तरफ धंस गया, सांस रुक सी गयी.

हथेली ने सलवार के पतले कपडे के ऊपर से hi उसकी छूट के उभरे हुए, नरम हिस्से पर जाकर पूरा दबाव दाल दिया. लड़के ने अपनी हथेली का पूरा ज़ोर वहां लगा दिया …. उसकी उँगलियाँ थोड़ी सी फैली हुई, और उसकी मध्य ऊँगली बिलकुल उसके छूट के स्लिट के ऊपर प्रेशर दे रही थी.

सपना का पूरा जिस्म धनुष की तरह तन गया. उसकी उँगलियाँ उसके बगल में खड़े आदमी के कपड़ों को कास कर पकड़ ली. उसके अंदर से एक गहरी, मीठी सी चीख निकलने को थी ….“आआह्ह्ह…” — मगर चरों तरफ भीड़ और लोगों के डर से उसने उस चीख को अपने गले के अंदर hi दबा लिया. सिर्फ एक धीमी, कांपती हुई सिसकी उसके होठों से निकल पायी.

उसकी टांगें काँप रही थी. लड़के का घुटना और उसका लुंड …..दोनों उसकी छूट के दोनों तरफ से उसको दबोच रहे थे. हर तरफ से उसको मादक एहसास मिल रहा था. उसकी छूट अब कण्ट्रोल में नहीं थी ….. वह फूल रही थी, और उसके रास से लड़के की हथेली भी गीली होने लगी थी सलवार के ऊपर से hi.

“लोग... लोग उतर रहे हैं… कोई... कोई देख लेगा,” सपना ने बहुत hi धीरे, कांपती हुई आवाज़ में फुसफुसाया. उसकी आवाज़ में डर साफ़ महसूस हो रहा था, लेकिन उसमे मन करने की कोई ताकत नहीं बची थी. वह सिर्फ एक रस्म ऐडा कर रही थी, जैसे उसका दिमाग अब भी कुछ कह रहा हो, जबकि उसका पूरा जिस्म उस लड़के के स्पर्श का घुलम बन चूका था. उसकी साँसें तेज़ और छोटी हो गयी थी, और हर शब्द के साथ उसकी छूट और भी गीली होती जा रही थी.

लड़के ने उसके कान के बिलकुल पास अपना मुंह ले जाकर, गहरी आवाज़ में कहा, “अँधेरा है… और भीड़ बहुत है… कोई नहीं देखेगा.”

उसकी गरम सांस सपना की नरम गर्दन पर पड़ी, और फिर उसने अपनी गीली, गरम जुबां बहार निकाल कर उसकी गर्दन पर एक लम्बी सी लकीर बनाए दी …. कान के नीचे से शुरू करके उसके कंधे की तरफ. वह लकीर इतनी नाम थी की सपना के पुरे शरीर में एक करंट दौड़ गया. उसकी गर्दन पर रोंगटे खड़े हो गए और उसकी आँखें धीरे से बंद हो गयी.

वो लड़का अब तरह do-tarfa हमला कर रहा था…..

उसका लेफ्ट हाथ सपना के कुर्ते के अंदर घुस चूका था. उसने उसकी एक भारी, नरम चूची को पूरी तरह अपनी हथेली में भर लिया tha.aur उसे zor-zor से मसल रहा tha….kabhi पूरे हाथ से, कभी सिर्फ उँगलियों से. उसकी ऊँगली का अंगूठा उसके सख्त निप्पल को baar-baar घुमा रहा था, भींचा रहा था और हलके से खिंच रहा था. हर मसलने के साथ सपना के शरीर में बिजली सी दौड़ती, और उसकी चूची और भी टाइट हो जाती.

उसका राइट हाथ नीचे सलवार के कपडे के ऊपर से hi उसकी छूट पर पड़ा था. उसने अपनी हथेली को पूरी तरह उसके उभारो पर दबा रखा था. उसकी मध्य ऊँगली सलवार के पतले कपडे के ऊपर से hi उसकी छूट की दरार में धंसी हुई थी, zor-zor से upar-neeche रगड़ रही थी. गीलापन इतना ज़्यादा था की सलवार का कपडा अब उसकी छूट के शेप को साफ़ दिखा रहा था. हर रगड़ने के साथ “छपपप… छपपप…” जैसा हल्का सा आवाज़ भी आ रहा था.

सपना के पेअर अब बिलकुल जवाब दे रहे थे. उसकी टांगें काँप रही थी और dheere-dheere फैल रही थी, जैसे खुद hi उस लड़के के कनी और हाथ के लिए जगह बना रही हो. उसका पूरा नरम जिस्म लड़के के सख्त शरीर पर ढेर होने लगा था. उसकी पीठ उसके सीने से लग गयी, उसकी गांड उसके लुंड पर और ज़ोर से रगड़ने लगी, और उसका सर उसके कंधे पर तकिया की तरह तक गया.

ट्रैन अब स्टेशन पर रुकने की आखरी सरसराहट ले रही थी. पहियों की धीमी “ghar-ghar” की आवाज़ और प्लेटफार्म पर उतारते लोगों की आवाज़ बहार से आ रही थी, लेकिन अंदर उन दोनों के बीच का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा था.

लड़के ने सपना की गर्दन पर एक हल्का सा काट लिया और फिर से उसके कान में फुसफुसाया,

“अभी और लोग उतरेंगे… तब तक तू अपनी छूट को मेरी उँगलियों पर और गीला कर दो…”

सपना सिर्फ एक धीमी सी सिसकी भर पायी — “ुम्मःहः…” ….और उसका जिस्म उसके हाथों में और भी रिलैक्स हो गया, उसने पूरी तरह सरेंडर दिया था .

प्लेटफार्म पर लोगों का shor-shaba शुरू हो गया था. प्लेटफार्म की रोशनियां खिड़कियों से अंदर aane-jaane लगी थी, जिससे दबे के अंदर अँधेरे और चमकती रौशनी का एक सेडक्टिव खेल शुरू हो गया. कभी अँधेरा गहरा हो जाता, कभी सुद्दीन लाइट सपना के चेहरे और उसके उभरे हुए जिस्म पर पड़ती. लोग उनके बिलकुल बगल से गुज़र रहे थे …. धक्के मारते हुए, थैलों को घसीटते हुए, आवाज़ करते हुए. मगर किसी को भी इस बात का अंदाज़ा नहीं था की उनके बिलकुल पास, इस घने अँधेरे में, क्या चल रहा है………

लड़के ने अपनी उँगलियों से सपना की छूट के ऊपर एक टाइट घेरा बनाया और उसको हल्का सा, मगर तेज़ दबाव के साथ मसलने लगा. सपना का पूरा बदन एक झटके के साथ अकड़ गया. उसकी टांगें काँप उठी, उसने अपना सर पीछे करके लड़के के गले और कंधे के बीच छुपा लिया. उसकी सांस बहुत तेज़ हो गयी थी. उसे महसूस हो रहा था की उसकी छूट से निकलने वाला गीलापन अब उसकी पंतय को अंदर से पूरी तरह भिगो चूका था और dheere-dheere सलवार के कपडे तक फ़ैल रहा था.

लड़के ने अपने लुंड को एक बार फिर ज़ोर से उसकी गांड पर रगड़ा. इस बार उसने अपनी कमर को थोड़ा निचे किया और हिप्स को आगे की तरफ धकेल दिया, ताकि उसके लुंड का सबसे मोटा और सख्त हिस्सा सपना की दोनों गांड के बीच की गरम दरार में बिलकुल फिट बैठ जाये. सपना ने साफ़ महसूस किया की अब वह लड़का khule-aam उसपर चढ़ा हुआ था ….उसका मोटा लुंड उसकी छूट की छेद पर zor-zor से upar-neeche रगड़ रहा था, जैसे अंदर घुस्सने की कोशिश कर रहा हो.

“सुनो…” लड़के ने पहली बार इतनी गहरी और मजबूत आवाज़ में उससे कहा.

ये शब्द सुनते hi सपना के जिस्म में एक तेज़ सिहरन दौड़ गयी. उसकी छूट और भी गीली हो गयी.

लड़के ने अब हिम्मत दिखाई और अपना हाथ सपना की सलवार के अंदर सरका दिया. उसका गरम, खुरदरा और मज़बूत हाथ सीधा उसकी नंगी छूट पर पहुँच गया. उसकी उँगलियाँ उसके नरम, भीगे हुए बालों से टकराई. सपना ने अपने होठों को इतने ज़ोर से काटा की उनमे से खून निकलने को हो गया. दर्द और आनंद का mila-jula एहसास था ये... उसने अपना अगला हिस्सा और ज़ोर से लड़के के लुंड पर दबा दिया, जैसे उसको और अंदर महसूस करना चाहती हो.

अब लड़के की उँगलियाँ उसकी छूट की नरम, फूली हुई पंखुड़ियों को खोल रही थी, उन्हें टटोल रही थी और उनके रास में भीग रही थी. जब उसने अपनी एक मोती ऊँगली उसके गीलापन में भिगोकर धीरे से अंदर सरकाने की कोशिश की, तोह सपना ने एक गहरी, दबी हुई चीख लड़के के कान में hi छोड़ दी — “आआह्ह्ह… उफ्फ्फ्फ्ममम…”

“उफ़… कितनी गीली हो गयी हो तुम,” लड़के ने बेहोश कर देने वाली गरम आवाज़ में कहा, उसकी ऊँगली अब अंदर बहार होने लगी थी.

ट्रैन अब स्टेशन पर पूरी तरह रुक चुकी थी. बहार प्लेटफार्म पर नए मुसाफिरों की bhari-bharkam भीड़ दरवाज़ों पर टूट पड़ी थी. Dhakka-mukki इतनी तेज़ थी की डब्बे के अंदर लोगों का सांस लेना मुश्किल हो रहा था. एक bhari-bharkam औरत, जिसके हाथों में bade-bade थैले थे, धकेलती हुई उन दोनों के बिलकुल पास आ कर कड़ी हो गयी. उसका कन्धा सपना के चेहरे से टकरा रहा था, उसकी सांस सपना के चेहरे पर पद रही thi.isi धक्का मुक्की के बीच अब फिर से वो लड़का ..सपना के पीछे आ गया..

लेकिन इस भयानक भीड़ और खतरे के बावजूद, लड़के ने अपना हाथ सपना की सलवार के अंदर से नहीं निकला. उसका गरम हाथ अब उसकी नंगी चमड़ी पर पूरी हुकूमत जमा चूका था. उसने दो उँगलियाँ अंदर दाल दी थी और उन्हें andar-bahar कर रहा था, जबकि उसकी अंगूठी उसकी क्लीट को zor-zor से रगड़ रही थी. हर मूवमेंट में अलग hi दुनिअय में सपना कोमल जा रहा tha….Piche से उसका मोटा, लाल और सख्त लुंड सपना की गांड की दरार में लगातार ज़ोर की ठोकर मार रहा था.

सपना को अब दुनिया की कोई परवाह नहीं बची थी. शर्म, दर, लोग ….सब कुछ भूल चुकी थी. उसका जिस्म सिर्फ उस स्पर्श को चाहता था. उसका पूरा बदन धनुष की तरह तन गया. सांसें उखाड़ने लगी. उसकी उँगलियाँ पीछे करके लड़के की जीन्स को इतनी ज़ोर से पकड़ ली की कपडे में नाख़ून के निशाँ पद गए. उसने अपनी गांड को उसके लुंड पर पूरी ताक़त से दबा दिया और अपने जिस्म से एक अनजाना सा करार कर लिया ….“और ज़ोर से… मत रुको…”

लड़के ने उसकी मूक पुकार समझ ली. उसने अपने लुंड को एक आखरी बार पूरी मर्दानगी से उसकी गांड की दरार में रगड़ा और अपनी उँगलियों को सपना की छूट के सबसे सेंसिटिव पॉइंट पर ज़ोर से दबा दिया, andar-bahar तेज़ रफ़्तार से.

ठीक उसी पल, सपना का पूरा जिस्म एक लम्बी, भयानक और गहरी कंपकपी के साथ एकदम से ढीला पद गया. उसकी छूट से एक तेज़, गीली लहर फूटी और उसके रास ने लड़के की उँगलियों को, उसकी पंतय को और सलवार को पूरी तरह भिगो दिया. उसका ओर्गास्म इतना तेज़ और गहरा था की उसके घुटने बिलकुल जवाब दे गए. वह पूरी तरह लड़के के सहारे, उसके सीने पर ढेर हो कर कड़ी रह गयी. उसका सर पीछे उसके कंधे पर तक गया, आँखें पथराई हुई, होठ खुले हुए और सांसें टूटी हुई.

ट्रैन ने एक लम्बी, kaan-faadu सीटी मारी. स्टेशन छोड़ कर फिर से रफ़्तार पकड़ने लगी. भीड़ अब और भी घनी हो गयी थी. लड़के ने बड़ी होशियारी से धीरे से अपना गीला हाथ सपना की सलवार से बहार निकला और उसको उसकी कमर पर रख दिया, जैसे कुछ हुआ hi न हो. उसका चेहरा शांत था, लेकिन सपना की उखड़ी सांसें, उसकी कांपती टांगें और उसकी जाँघों के बीच की गीली ठंडक सब कुछ बयां कर रही थी.

“अभी सफर बाकि है … अभी तोह शुरुआत है,” लड़के ने सपना के कान में इतनी धीमी phusphusaya…jise सिर्फ वही सुन सकती थी ….



सपना की छूट अब भी धड़क रही थी. उसका रास dheere-dheere ठंडा पद रहा था, सलवार में एक गीली सरसराहट पैदा कर रहा था. उसका दिल इंजन की तरह तेज़ धड़क रहा था. उसे एहसास हो चूका था की अब इस भीड़ में रहना उसके लिए बहुत मुश्किल होने वाला था ….. क्यूंकि उसके जिस्म को अब और ज़्यादा, और गहरा ……..स्पर्श चाहिए था.

तो बे कॉन्टिनोएड
 
अपडेट - 8

लड़के ने सपना के कान के बिलकुल पास अपना गरम चेहरा लाया. उसकी गरम सांस उसकी नरम गर्दन पर पद रही थी. फिर उसने धीरे से अपने होठों से उसकी गर्दन को छुआ और हलके से काट लिया ........बहुत धीरी से…, ताकि सपना के जिस्म में एक करंट दौड़ जाये.

“यहाँ बहुत भीड़ है… और लोग देख रहे हैं,” उसने धीमी, गरम आवाज़ में कहा. “चलो, एक दबे की तरफ सरकते हैं… क्या पता मेरा लक साथ दे jaye…i.”

सपना ने कुछ नहीं बोलै. उसने सिर्फ एक लम्बी, कांपती सांस ली और धीरे से सर हिला दिया. उसकी आँखों में शर्म भी थी, दर भी था, और उसके साथ बेचैनी भी. उसने अपने बैग sambhala….Ladka उसके बिलकुल पीछे साये की तरह चिपका हुआ था. हर कदम पर उसका मोटा, सख्त लुंड सपना की गांड से टकराता, रगड़ता खा रहा था … जैसे उसको रास्ता दिखा रहा हो और अपनी भूक जाता रहा हो.

जनरल डब्बे से निकल कर, स्लीपर कोच के टाइट कोर्रिडोर्स से गुज़रते हुए, वह दोनों एक कोच तक पहुँच गए. यहाँ हवा ठंडी थी, लेकिन उनके जिस्मों की तपन इतनी तेज़ थी की एक की ठंडी हवा भी उन पर गरम लग रही थी. कॉरिडोर में काफी खली था, सिर्फ ट्रैन की “ghad-ghad… ghad-ghad” की तेज़ आवाज़ गूँज रही थी.

एक कोच के टॉयलेट का दरवाज़ा थोड़ा साफ़ और बड़ा था. लड़के ने आगे बढ़कर एक टॉयलेट का दरवाज़ा खोला और सपना की तरफ इशारा किया. सपना का दिल zor-zor से dhak-dhak कर रहा था. उसकी टांगें काँप रही थी. जैसे hi वह अंदर दाखिल हुई, लड़का भी तुरंत उसके पीछे घुसा और दरवाज़े को अंदर से “खुट” की आवाज़ के साथ बंद कर दिया. दरवाज़ा लॉक करते hi उसने चिटकनी घुमा दी.

अंदर आते hi लड़के ने सपना को झटके से घुमा दिया और उसको दीवार से कास कर चिपका दिया. टॉयलेट की हलकी पीली रौशनी में सपना ने पहली बार उस लड़के का चेहरा saaf-saaf dekha….uske शार्प फीचर्स, थोड़ी सी दादी, और आँखों में वह भूक जो ट्रैन के जनरल डब्बे में थी. उसकी आँखें सपना के जिस्म को छोड़ने को तैयार नहीं थी.

लड़के ने बिना एक पल भी वास्ते किये, सपना के होठों पर अपने होठ रख दिए. यह उनका पहला किश था. उसने सपना के नरम, पहले हुए होठों को अपने मुंह में भर लिया जैसे कोई मीठा फल हो उसे वो ज़ोर से चूसने लगा, होंठो को अपनी ज़ुबान से सहलाता, उनके रास को पीटा. सपना के होठ इतने गीले और नरम थे की उनके चूसने से दोनों के मुंह में एक madhur.....shor मचने लगा “चुप्प्प… चप्प्प… chup…hhmmmm”

फिर उसकी ज़ुबान सपना के मुंह के अंदर घुस गयी. ….उसने सपना की ज़ुबान को अपने से लपेट लिया, उससे खेलने लगा, उसको चूसने लगा जैसे उसमें डूब जाना चाहता हो. सपना की सांस तेज़ हो गयी. उसके सीने में एक गहरी सिसकी उभरी और उसने अपने दोनों हाथों से लड़के के घने, काले बालों को मुट्ठी में भर लिया. ज़ोर से खींच कर उसको और गहरे किश में घसीट लिया.

लड़का अब और भी एग्रेसिव हो गया. उसने एक हाथ सपना की पीठ पर रख कर उसको अपने से और कास लिया, जिससे उसके टाइट, भरे हुए सीने उसके सीने से रगड़ रहे थे. दोनों की ज़ुबानें एक दूसरे में उलझ रही थी, एक दूसरे को चूस रही थी, एक दूसरे का स्वाद लेकर पागल हो रही थी. सपना के मुंह से सिर्फ सिसकियाँ और आवाज़ें hi निकल रही थी ........ “मममहह… ahhh…ahhhhhhh....hmmmmmm”

उनके किश में अब भूख दिख रही थी... लड़के के होठ सपना के होठों को दबोच रहे थे, काट रहे थे, फिर से चूस रहे थे. सपना भी पीछे नहीं हैट रही थी. उसकी ज़ुबान उसके मुंह में घुस कर उसकी ज़ुबान को ज़ोर से चूस रही थी, जैसे वह भी उसको पूरा निगल लेना चाहती हो.

दोनों के होंठों पर थोड़ी सी लार की गहरी चमक आ गयी थी. उनकी गरम सांसें एक दूसरे में मिल रही थी….. किश इतना गहरा और गहरा होता जा रहा था की दोनों को बाहरी दुनिया भूल सी गयी थी … सिर्फ एक दूसरे के मुंह की geeli…garam, ज़ुबानों का नाच और उस मधुर “chup-chup” की आवाज़ बाकी थी.

लड़के ने किश के बीच hi सपना को अपने से और कास लिया. उसकी एक हाथ उसके कुर्ते के अंदर घुस गया और dheere-dheere उसको ऊपर की तरफ उठाने लगा. जैसे hi कुरता उसकी कमर से ऊपर हुआ, सपना का नंगा, गरम पीठ टॉयलेट की thandi…deewar से टकराया. उसके मुंह से एक madhosh…karah निकल गयी .... “उफ्फ्फफ्फ्फ़… अह्ह्ह!”

लड़के ने कुरता को उसके गले तक लपेट दिया, उसके दोनों बहुत भारी, गोल और गोरी चूचियों को बिलकुल आज़ाद कर दिया. वह दोनों चूचियां अब बिलकुल नंगी, उभरी हुई और निप्पल्स सख्त हो कर खड़े थे. लड़के ने उन्हें देखा और फुसफुसाया, “बहुत खूबसूरत हैं…”

उसने तुरंत अपना मुंह एक चूची पर रख दिया. पूरा निप्पल और उसके aas-paas का नरम हिस्सा अपने गरम, गीले मुंह में भर लिया और zor-zor से चूसने लगा. उसकी ज़ुबान निप्पल के चरों तरफ घूम रही thi….kabhi हलके से लपेट कर सेहला रही थी, कभी ज़ोर से चूस रही थी. Beech-beech में वह हल्का सा काट भी लेता, फिर से ज़ोर से चूसने लगता. दूसरी चूची पर उसने अपनी उँगलियों का जादू चलाया …. उन्हें मसलता, पिंच करता, निप्पल को ऊँगली के बीच में पकड़ कर halke-halke घूमता.

सपना ने अपना सर पीछे दीवार पर टिका दिया, आँखें बंद कर ली और अपना लोअर लिप काट लिया. उसका एक हाथ लड़के के पेट पर से नीचे की तरफ गया और उसकी जीन्स के ऊपर से उसके सख्त लुंड को सहलाने लगी.

सपना ने कांपते हाथों से उसकी ज़िप पकड़ी और dheere-dheere नीचे खोल दी. जैसे hi ज़िप खुली, लड़के का मोटा, लाल और पूरी तरह तन्ना हुआ लुंड एक ज़ोर के झटके के साथ बहार आ गया. वह बहुत ज़्यादा गरम था, नसें उभरी हुई थी और टोपा चमक रहा था. सपना ने पहली बार उसको साफ़ देखा. उसकी आँखें थोड़ी सी बड़ी हो गयी. उसने अपनी नरम, गरम मुट्ठी में उस मोटा लुंड को भर लिया और धीरे से upar-neeche हिलने लगी.

लड़के की सांस और तेज़ हो गयी. वह अभी भी सपना की चूचियों को छोड़ने को तैयार नहीं tha.Woh एक चूची को ज़ोर से चूस रहा था, दूसरी को मसल रहा था, kabhi-kabhi दोनों को एक साथ दबोच कर उन्हें अपने मुंह की तरफ खींच लेता. उसकी ज़ुबान उनके बीच में घूम रही थी, उन्हें गीला कर रही थी. सपना के हाथ में उसका लुंड और भी सख्त होता जा रहा था, हर स्ट्रोक के साथ और फूलता जा रहा था.

लड़के ने सपना की सलवार की नाडा को एक झटके से खोल दिया और उसको उसकी गोर, नरम जाँघों पर से घुटनो तक निचे गिरा दिया. सलवार अब उसके पैरों के अराउंड लटक रही थी. सपना अब बिलकुल नंगी कड़ी थी, सिर्फ उसका कुरता उसके गले तक लपेटा हुआ था. उसकी भारी चूचियां, नरम पेट और गीली, फूली हुई छूट टॉयलेट की हलकी पीली रौशनी में चमक रही थी.

लड़के ने किश और चूचियों को चूसते हुए भी अपना हाथ नीचे की तरफ सरकाया…. उसने सपना की सलवार की नाडा को एक ज़ोर के झटके से खिंच कर खोल दिया. नाडा खुलते hi सलवार ढीली पद गयी और लड़के ने उसको उसकी गोर, नरम जाँघों पर से एक झटके में घुटनो तक नीचे गिरा दिया. सलवार अब उसके पैरों के बीच लटक रही थी, बिलकुल बेकार…..

सपना अब बिलकुल नंगी कड़ी थी …. सिर्फ उसका कुरता उसके गले तक लपेटा हुआ था. उसकी भारी, उभरी हुई चूचियां, नरम और छोटी सी पेट की गोलाई, और सबसे नीचे उसकी गीली, फूली हुई छूट टॉयलेट की हलकी पीली रौशनी में चमक रही थी. उसके छूट के होंठ बड़े हुए थे, बिलकुल गुलाबी और रास से तर, क्लीट थोड़ी सी उभरी हुई और चमकदार. उसकी जांघें भी हलकी सी गीली हो चुकी थी अपने hi रास से…..

लड़के ने एक कदम पीछे होकर उसको देखा और उसकी आँखों में की वासना की लहर दिखाई दी. उसने तुरंत अपने दोनों हाथों से सपना की कमर और भारी, गोल गांड को पकड़ लिया. उसकी उँगलियाँ उसकी गांड के मांस में धीरे से धंस गयी. एक हलके से झटके में उसने सपना को ऊपर उठा लिया जैसे वह बिलकुल हलकी हो.

“उठ जा…” उसने हलकी आवाज़ में कहा.

जैसे hi उसकी नंगी, गरम गांड ठन्डे स्टील के काउंटर पर लगी, सपना के मुंह से एक मदहोश सिसकी निकल गयी .....“उफ्फ्फफ्फ्फ़… अह्ह्ह!” ठंडी मेटल की सर्दी ......उसके गरम जिस्म के अंदर बिजली दौड़ा गया. उसका बदन एक पल के लिए कम्प उठा……

लड़के ने उसको काउंटर पर सही से बिठा दिया. सपना ने तुरंत अपने दोनों नंगी, मुलायम टांगों को लड़के की कमर के चारों तरफ लपेट लिया. उसकी टांगों की गरम चमड़ी उसकी कमर और पीठ से कास कर जकड गयी. अब उनके जिस्म बिलकुल एक दूसरे से चिपके हुए थे ….उसकी भारी चूचियां लड़के के सीने से रगड़ रही थी, उसकी गीली छूट उसके जीन्स के ऊपर से hi उसके सख्त लुंड के बिलकुल सामने थी.

सपना ने अपने हाथों को लड़के की गर्दन के पीछे ले जाकर उसको और खींच लिया. दोनों की गरम सांसें एक दूसरे के चेहरे पर पद रही थी …. …... लड़के का मोटा, तन कर खड़ा लुंड अब उसकी छूट के बिलकुल ऊपर तक पहुँच चूका था, सिर्फ कुछ मिलीमीटर के फासले पर. हर सांस के साथ उसका लुंड उसकी गीली छूट के होंठों को हलके से छू रहा था.

सपना की आँखें मदहोश थी. उसने अपना लोअर लिप काट लिया और धीरे से उसके कान में फुसफुसाया, “अब और नहीं …….”

लड़के ने उसकी गांड को दोनों हाथों से और ज़ोर से पकड़ लिया, उसकी कोमल त्वचा.. को मसलते हुए…. अपनी और खींच लिया. अब उनके जिस्म एक दूसरे में घुलने को बेचैन थे.

“अब रुका नहीं जा रहा…” लड़के ने सिसकते हुए, मादक लहज़े में कहा. उसकी आवाज़ में वासना भरी पड़ी थी…

लड़के ने अपने एक हाथ से अपना मोटा लुंड पकड़ा. फिर उसकी चमकदार टोपी को सपना की गीली, गरम और खुली हुई छूट के मुंह पर रखा. वह सिर्फ हल्का सा रगड़ रहा था, फिर भी उसकी गीली पंखुड़ियां उस मोती चीज़ को अंदर खींचने के लिए बेचैन हो रही थी….

गीलापन इतना ज़्यादा था की लुंड की टोपी तुरंत उसके रास से चमकने लगी.

लड़के ने एक गहरी सांस ली, सपना की आँखों में देखा और फिर एक ज़ोर का…. झटका मारा......

एक hi धक्के में उसका पूरा मोटा लुंड सपना की टाइट छूट की गहराई तक उतर गया…. पूरा का पूरा, एक इंच भी बहार नहीं छोड़ा.

“Aaaahhhhhhhhhhh!”

एक hi धक्के में उसका पूरा मोटा लुंड सपना की टाइट, गरम छूट की गहराई तक उतर गया… पूरा का पूरा, एक इंच भी बहार नहीं छोड़ा. सपना की चीख टॉयलेट की छोटी दीवारों से टकरा कर गूँज उठी. उसकी आँखें एक पल के लिए बंद हो गयी, मुँह खुला रह गया और उसकी गर्दन पीछे मुद गयी. दर्द और मज़ा का वह अनोखा mila-jula एहसास उसके पुरे जिस्म में बिजली की तरह दौड़ गया. उसकी छूट इतनी टाइट थी की लड़के को भी एक झटका लगा …. उसकी अंदर की नरम दीवारें उसके लुंड को kas-kas कर जकड रही थी, जैसे उसको अंदर hi निगल लेना चाहती हो.

ट्रैन बहार तेज़ रफ़्तार से चल रही थी, लेकिन उस बंद टॉयलेट के केबिन में अब उनका अपना तूफ़ान शुरू हो चूका था. लड़के ने अपनी कमर को तेज़ धक्के से हिलना शुरू किया. हर धक्के के साथ उसका मोटा लुंड सपना की छूट के सबसे गहरे हिस्से तक पहुँच रहा था और बहार निकल कर फिर से अंदर घुसा जा रहा था. सपना के नाज़ुक नाख़ून उसके कन्धों और पीठ में घुस रहे थे. हर धक्के के साथ वह अपने डेंटन से उसकी स्किन को काट लेती, गहरे लाल निशाँ छोड़ती जा रही थी. उसकी भारी चूचियां zor-zor से उछाल रही थी, उसके सीने पर लहराती हुई. निप्पल्स सख्त और गुलाबी थे, पसीने से चमक रहे थे.

.“थप… थप… thap…ahhhh….ahhhh…mmmhh” की सिसकियाँ ….बाथरूम में गूँज रही थी…

सपना ने अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ वाशबेसिन के स्टील किनारो पर कास कर पकड़ लिया. उसकी उँगलियाँ इतने ज़ोर से भींच रही थी की उनके नाख़ून नील पड़ने लगे थे. हर धक्के के साथ उसका पूरा जिस्म upar-neeche हिल रहा था, उसकी भारी चूचियां zor-zor से उछाल रही थी.

लड़के ने सपना की कमर को अपने दोनों मज़बूत हाथों से पकड़ लिया और उसको थोड़ा और अपनी तरफ खींचा. अब उसका लुंड उसकी छूट के बिलकुल आखरी चोर तक पहुँच रहा था. हर एक ज़ोर के धक्के के साथ सपना का सर पीछे दीवार से टकराता, लेकिन उसको दर्द का कोई एहसास नहीं था … सिर्फ एक गहरी, सुलगती हुई जलन और लाजवाब आनंद था जो उसके पेट के अंदर से उबाल रहा था….

.टॉयलेट का छोटा सा केबिन अब एक सुलगता hua…..sex की खुशबू से भरा जहाँ बन चूका था. ट्रैन की “ghad-ghad” की आवाज़ अब उनकी मादक सिसकियों… चुदाई की आवाज़ों में बिलकुल खो चुकी थी.

लड़के ने अपने दांतों टेल अपने होठ दबाते हुए, पसीने से तर चेहरे के साथ गरम सांस में कहा, “तुम… तुम तो बहुत टाइट हो… …… मुझे अंदर hi जकड के रखने का इरादा है क्या….”

उसकी आवाज़ bhar-bhari और कांपती हुई थी. उसके माथे, गर्दन और सीने पर पसीने की चमकती बूँदें थी जो हर धक्के के साथ सपना के नंगे, उभरी हुई चूचूं पर, उसके नरम पेट पर और उसकी चूचियों के बीच में टपक रही थी. वह गरम बूँदें उसकी स्किन पर गिर कर और भी कातिलाना एहसास दे रही थी….

सपना ने अपने दोनों पैरों की पकड़ लड़के की कमर पर और भी सख्त कर ली. उसकी मुलायम, गोर टांगें उसकी कमर को कास कर जकड रही थी, जैसे उसको अपने अंदर hi समां लेना चाहती हो. उसने धीरे से अपनी आँखें खोली और लड़के की आँखों में seedha….dekha. उसकी आँखों में अब कोई शर्म नहीं, कोई लाज नहीं थी ….सिर्फ एक भूख थी….. एक प्यास thi…sirf वासना की…..

“ धीयड़ी… se..ahhhhhh… ह्ह्ह्हम्म्म्म…” उसने टूटी हुई, मदहोश आवाज़ में कहा.

सपना ने अपनी कमर को भी आगे की तरफ उछाला, हर धक्के का पूरा साथ देने लगी. अब वह खुद उसके धक्कों से टकरा रही थी. जब उसका मोटा, लाल लुंड पूरी तरह अंदर तक घुसता, तोह उसकी भारी अंडकोष उसकी गीली छूट के नीचे ज़ोर से टकराते. हर टकराहट पर एक चिकनी आवाज़ गूंजती …… “पहच… पहच… पहच… पहच…पहच… पहच… पहच… पहच…

यह मदहोश आवाज़ पूरे टॉयलेट केबिन में गूँज रही थी, ट्रैन की dhak-dhak को भी दबोच लेती थी…..

सपना की छूट से निकलने वाला गरम, चिकना रास अब बहुत ज़्यादा हो चूका था. हर धक्के के साथ वह लड़के के मोठे लुंड पर…. उसके भरी अंडकोषों पर, उसकी जाँघों पर और वाशबेसिन के काउंटर पर टपक रहा tha…..Woh रास इतना ज़्यादा था की उनके जिस्म के बीच का हर स्पर्श अब fis-lan भरा हो चूका था. हर बार जब लुंड बहार निकलता, तोह उसके साथ उसका चमकता रास भी बहार आता, फिर से अंदर घुसते hi एक और “पहच” की आवाज़ के साथ अंदर चला जाता.

दोनों के जिस्म पसीने से tar-tar थे. उनके बीच पसीने की एक चिकनी लेयर बन गयी थी जो उनकी स्किन को और भी ज़्यादा सेंसिटिव बना रही थी. टॉयलेट की छोटी सी दीवारों पर उनकी गरम, भरी साँसों की आवाज़, जिस्म की टकराहट और उनकी चुदाई की “phach-phach” आवाज़ें गूँज रही थी. केबिन में सिर्फ सेक्स की खुशबू … और मदहोशी hi …. फैली हुई थी.

लड़के ने अपनी पकड़ सपना की गांड पर और मज़बूत की, उसकी गांड को अपनी उँगलियों से मसलता हुआ और उसको हर धक्के में और गहरे तक खींचने लगा. सपना की धीमी कराहहह अब सिसकियों में बदल चुकी thi…..har धक्के के साथ एक नयी.. “अह्ह्ह… Ahhhhh...hmmm,,,shhhhhh… और आरामममम सीई…” निकल रहा था............


तो बे कॉन्टिनोएड====>
 
अपडेट - 9

इमेजिन थे करैक्टर ------>









लड़के ने अपने झटकों का सिलसिला जारी रखा, लेकिन अब उसका पूरा ध्यान सपना की उन भरी हुई, उछलती हुई चूचियों पर चला गया था. हर तेज़ धक्के के साथ वह दोनों गोरी, नरम चूचियां zor-zor से upar-neeche हिल रही थी ……. जैसे उन्हें भी इस चुदाई का गहरा मज़ा मिल रहा हो. उनकी चमकदार गोरी चमड़ी पसीने से भीग चुकी थी, और हर हिलने के साथ उनके भारी, गोल निप्पल्स और भी सख्त हो कर khade,laal और फूल गए थे….

लड़के ने अपना लेफ्ट हाथ सपना के नरम, मुलायम गले पर रख दिया ……. हल्का सा दबाव, इतना की उसकी सांस रुक न जाए, मगर उसको उसकी ताक़त का एहसास भी हो जाए………. उसकी उँगलियाँ उसकी गर्दन की नरम चमड़ी में हलके से धंस गयी थी, और सपना की आँखें एक पल के लिए बंद हो गयी, फिर खुल gayi……….Uski नज़रों में लालच और बेबसी का नशा था, जैसे वह उसकी इस ताकत के नीचे पूरी तरह से पिघल रही हो………….

दूसरे हाथ से उसने उसकी एक भारी चूची को कास कर पकड़ लिया, उसकी नरम चमड़ी को अपनी उँगलियों में भींचते हुए zor-zor से मसलने लगा. उसकी उँगलियाँ उसके सॉफ्ट, भरे हुए फलेश को गहराई तक दबा रही थी, कभी ऊपर से नीचे, कभी चारो तरफ घुमाती हुई. सपना की चूची उसके हाथ में बिलकुल बॉल सी लग रही थी ….. नरम, गरम और बिलकुल उसके कण्ट्रोल में.

उसने अपना मुंह निचे किया और उसके सख्त, पहले हुए निप्पल को अपने गरम, गीले होठों के बीच ले लिया. पहले डेंटन से हलके से खींचा, फिर ज़ुबान से गहरा घुमाया, और फिर ज़ोर से चूसने लगा …. जैसे उसको अंदर तक चूसना चाहता हो. उसकी ज़ुबान उसके निप्पल के चारो तरफ tez-tez घूम रही थी, कभी हल्का सा काट रहा था, कभी ज़ोर से चूस रहा था.

“आआह्ह्ह… जान निकल जाएगी मेरी!” सपना ने मदहोश आवाज़ में हुए कहा. उसकी आवाज़ में दर्द और लज़्ज़त का mila-jula नशा था ….. एक ऐसी चीख जो उसके गले से निकल कर केबिन की दीवारों तक टकरा रही थी.

लड़के ने अपनी कमर को और गहरा धकेलना शुरू कर दिया. हर बार वह अपना मोटा, सख्त लुंड सपना की छूट के बिलकुल गहरायी तक घुसेड़ देता, फिर धीरे से बहार निकलता, और फिर से एक ज़ोर ka…………dhakka मार देता. हर धक्के के साथ उसका लुंड उसकी अंदर की नरम दीवारों को खोल देता, उसके सेंसिटिव स्पॉट को रगड़ देता……...

“Uuuunnhhh…!Ahhhhhhhhhhh” सपना की एक गहरी, कांपती सिसकी निकली. उसकी आँखें बंद हो गयी, मुँह थोड़ा सा खुला, और उसकी गर्दन पीछे की तरफ झुक गयी.

“ाःह… हाय्यय… बहुत अंदर जा रहा है…” उसने सिसकते हुए कहा, उसकी आवाज़ अब बिलकुल टूटी हुई और मदहोश थी.

हर धकेल के साथ उसकी छूट से इतना गीलापन निकल रहा था की लड़के का पूरा लुंड चमकदार हो चूका था. Andar-bahar होने की गीली “puch-puch… puch-puch…” आवाज़ केबिन में एक मदहोश संगीत की तरह गूँज रही थी ……..

लड़के ने अब अपनी रफ़्तार और तेज़ कर दी. उसकी कमर के हर धक्के में अलग hi ताक़त बसी थी … हर बार जब वह अंदर तक पूरा उतरता, सपना के मुँह से एक नयी चीख निकल पड़ती.

“ऊऊह्ह्ह मा… aahhhhh…ssshhhhh…uhhhssshhh… आअह्ह्ह!”

“ाःह… और अंदर… हाँ… और aaramm…sesss…..se ढकी… दो मुझे…”

सपना का पूरा बदन हर धक्के के साथ थरथरा उठ रहा था. उसकी चूचियां zor-zor से उछाल रही थी, उसका पेट andar-bahar हो रहा था और उसकी छूट के अंदर एक ऐसी गर्मी और जलन फ़ैल रही थी जैसे उसके अंदर बिजली सी दौड़ रही हो. उसकी टांगें वाशबेसिन के किनारे को कास कर पकडे हुए थी, पर अब वह भी काँप रही थी.

“उफ्फ्फ्फ़… बहुत अंदर जान ले लोगे तुम… आआह्ह्ह!” सपना की आवाज़ अब रुक नहीं रही थी. हर dhakke…l के साथ उसकी सिसकियाँ और चीखें और भी मदहोश और बेशरम होती जा रही थी.

“हाँ… और ज़ोर से… प्लीज… मत रुको…”

उसकी छूट अब लड़के के लुंड को अंदर से kas-kas कर जकड रही थी, जैसे उसको अपने अंदर hi समेत लेना चाहती हो. हर बार जब उसका मोटा टोपा उसकी छूट के सबसे सेंसिटिव हिस्से को रगड़ता, सपना के जिस्म में एक नया करंट दौड़ जाता …. garam……sulagta हुआ.

लड़के ने अब अपनी रफ़्तार और तेज़ कर दी. हर धक्का इतना ज़ोर का, इतना गहरा था की सपना की पीठ दीवार से टकराती जा रही थी. उसकी भारी चूचियां जोर से ऊपर निचे उछाल रही थी, निप्पल्स बिलकुल सख्त और लाल हो गए थे…...

उसे लग रहा था जैसे उसके पेट के नीचे कोई बिजली सी कौंध रही हो ….garam…sulagti हुई जलन dheere-dheere उबाल रही थी और उसके पूरे जिस्म को लपेट रही थी.

“मैं… मैं निकलने वाली हूँ…” सपना ने लड़के के कंधे पर अपने डेंटन से ज़ोर से काट लिया. उसकी सांसें इतनी तेज़ और टूटी हुई थी की उसका सीना धोंकनी की तरह upar-neeche हो रहा था. उसकी उँगलियाँ सीट के किनारे को इतने ज़ोर से पकडे हुए थी की उसके हाथ काँप रहे थे और नाख़ून स्टील में धंस रहे थे.

लड़के ने भी महसूस कर लिया था की उसका वक़्त आ चूका है. उसने सपना की गांड को दोनों मज़बूत हाथों से कास कर पकड़ा, उसको सीट से थोड़ा ऊपर उठाया और उसे दीवार से बिलकुल चिपका दिया. अब सपना का पूरा नंगा जिस्म उसके सहारे था …. उसकी टांगें उसकी कमर के अराउंड लिपटी हुई, उसकी चूचियां उसके सीने से रगड़ रही थी.

फिर उसने पूरी ताक़त से आखरी कुछ धक्के मारे …………

धप्प …धप्प… Dhapp….Dhapp…Dhapp…Dhapp…

हर धक्का पहले से भी ज़्यादा गहरा, ज़्यादा ज़ोर का और गहराई तक था. सपना की चीख अब कभी रुक नहीं रही थी.

“आआह्ह्ह…! Aaaahhh…Aaaahhh…oouhhhh…shhhh…mmmmhhhhh… ऊऊह्ह्ह!”

उसका सख्त लुंड सपना की छूट के अंदर और भी फूल गया था, उसकी अंदर की हर दिवार को रगड़ रहा था.

“मेरा भी… मैं तुम्हारे अंदर hi निकलने वाला हूँ…” लड़के ने एक भरी, गहरी और कांपती कराह के साथ कहा, उसकी आवाज़ अब पूरी तरह से उखड चुकी थी….

एक आखरी….. बहुत ज़ोर का धक्का ……….

सपना का पूरा जिस्म एकदम से अकड़ गया. उसकी छूट लड़के के लुंड को kas-kas कर जकड ली जैसे उसको अंदर hi निगल लेना चाहती हो. फिर एक तेज़, गरम फवारे की तरह उसका पानी लड़के के लुंड पर छूटा …………एक के बाद एक तेज़ी के साथ.

“आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह…! … हायययययययय maaaaaaaaaaaa…aAaaaaahhhhhhhhh…!”

उसकी चीख रुक सी गयी, मुँह खुला रह गया, आँखें उल्ट गयी और उसका पूरा जिस्म zor-zor से कांपने लगा. उसकी छूट के अंदर के ऐंठन इतने तेज़ थे की लड़के को भी रोकना मुश्किल हो गया.

ठीक उसी पल लड़के ने भी अपना गरम, गाढ़ा माल सपना की छूट की गहराईयों में भरना शुरू कर दिया.

“उफ्फ्फ्फ़… ले लो… पूरा ले लो…” उसने कराह कर कहा…..

लड़के के लुंड के हर छोटा झटका गरम झाड़ियों की तरह उसके अंदर माल भर रहा था. सपना को महसूस हो रहा था जैसे उसके पेट के अंदर कोई गरम jwala-mukhi पहात गया हो. गरम और इतना ज़्यादा की उसकी छूट से बहार तक निकलने लगा…….

दोनों के जिस्म एक साथ काँप रहे थे, दोनों के मुँह से सिर्फ मदहोश सिसकियाँ और टूटी हुई सांसें निकल रही थी. सपना की छूट अब भी लड़के के लुंड को halke-halke झटके से जकड रही थी, जैसे हर बूँद को अंदर hi रखना चाहती हो.

दोनों वही चिपके हुए खड़े थे ….सपना की पीठ दीवार से लगी, लड़के का जिस्म उसके सामने, उसका लुंड अब भी उसके अंदर धड़क रहा था. दोनों lambi-lambi, टूटी हुई सांसें ले रहे थे. सिर्फ ट्रैन की तेज़ “ghad-ghad” और उनके दिल की तेज़ धड़कन सुनाई दे रही थी. टॉयलेट में पसीने, सेक्स और उनकी गरम साँसों की खुशबू फ़ैल चुकी थी…..

कुछ मिनट बाद, जब उनके जिस्म थोड़े शांत हुए, लड़के ने धीरे से अपना लुंड बहार निकला. वह अब भी adh-sakht था और सपना के रास और अपने गाढ़े माल से बिलकुल चमक रहा था. कुछ बूँदें सपना की छूट से बहार टपक कर टॉयलेट सीट पर गिरी.

सपना सीट से निचे उतरा , लेकिन उसके पेअर अब भी काँप रहे थे. उसने अपनी सलवार ऊपर की, लेकिन उसकी छूट अब भी बहुत गीली थी. अंदर बहार से निकलने वाला mila-jula रास उसकी पंतय और सलवार को पूरी तरह भिगो चूका था….

लड़के ने अपना रुमाल निकला और प्यार से सपना के चेहरे, गर्दन और चूचियों से पसीना पोंछने लगा. दोनों ने एक दूसरे की आँखों में देखा. कोई शब्द नहीं निकला, लेकिन उनकी आँखों mein..unki आँखों में वो शब्द देखे जा सकते the….jo वो एक दूसरे से कहना छह रहे थे

दरवाज़ा खोला. एक कोच की ठंडी हवा उनके गरम चेहरों पर टकराई. दोनों बहार निकले..... बहार से बिलकुल नार्मल, जैसे कुछ हुआ hi न हो. मगर सपना के चलने में एक नयी मादकता थी, उसकी टांगों के बीच एक गीली ठंडक और लड़के की नज़रों में भी अलग hi नशा छाया हुआ था …

ट्रैन अब भी तेज़ रफ़्तार से अँधेरी रात को चीरती हुई आगे बढ़ रही थी…

तो बे कॉन्टिनोएड ==>
 
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