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- Dec 5, 2013
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" भैया, तुम बहुत दुष्ट हो”
" भैया, तुम बहुत दुष्ट हो, एकदम बदमाश "
भाई बिना जवाब दिए बहन के मीठे मालपुआ जैसे गाल चूमता चूसता रहा,
" बदमाश, बदमाश, इतना इन्तजार क्यों कराया इसके लिए, मेरा कबसे मन कर रहा था "
प्यार से बहन बोली, बिना एक इंच भी खूंटा बाहर निकले थोड़ा सा उठ के सीधे, अपनी बहन बुच्ची के भोले भोले चाँद ऐसे चेहरे को देखता सूरजु बोला,
"बुच्चिया, तुझे दर्द बहुत हुआ न? "
सूरजु के चेहरे पर प्यार भी था, थोड़ी परेशानी भी।
और दस मुक्के गिन के उसकी छाती पर पड़े,
"सच कहते हैं, अखाड़ा लड़ने से बुद्धि कम हो जाती है। हफ्तों भर बाद दुलहिनिया आएगी तो क्या उसको दर्द नहीं होगा ? अरे लड़की का जन्म और दर्द बराबर, लेकिन मैं ऊपर से लिखवा के लाई थी कि ये दर्द मेरा बुद्धू भाई देगा। अरे पागल कभी भी करवाती तो दर्द तो होता ही "
बुच्ची खिलखिलाते हुए बोली, और हलके से चूतड़ उछाल के भाई को इशारा किया, " कर न "
जैसे तूफ़ान के बाद हलकी हवा चले, धक्के हलके लग रहे थे और बुच्ची भी जैसे भाभियों ने सिखाया था मरद चाहता है की लौंडिया साथ दे, मजे ले म मजे दे, तो बस बुच्ची भी कभी कमर उचकाती,, कभी चूमती, कभी नाख़ून धंसा देती और कभी गरिया के भैया को उकसाती।
और अब सूरजु का भी मुंह खुल गया था, आधा खूंटा बाहर कर के एक जोर का धक्का मारते हुए अपनी छोटी बहन से पूछा
" मजा आ रहा है? "
मजा तो बुच्ची की देह से छलक रहा था, चेहरे से टपक रहा था। अब तक न जाने कितने बार वो औरत को चुदते देख चुकी थी, बचपन में घर में ही कितनी बार, माई के साथ ही सोती थी तो, माई भी बिना बिटिया के सोने का इन्तजार किये, गपागप
और फिर शीलवा की चौकीदारी में इसी गाँव के दर्जनों लौंडो के साथ
और आज अपनी बड़ी मौसी, और सूरजु भैया की बूआ कांती बूआ, और मामी को, और हर बार चुदवाती हुयी के चेहरे पे जो ख़ुशी वो देखती, बुच्ची को बहुत जलन होती, लेकिन आज उसे उन सब से कई कई गुना ज्यादा ख़ुशी हो रही थी।
" तोहके आ रहा है की नहीं " भैया के धक्के का जवाब नीचे से धक्के से देते वो बोली।
" मन तो कर रहा है बुच्ची तोहें खा जाऊं " सूरजु ऊपर से कस के पेलते बोलै
" तो खा लो न, भैया " और अपनी छोटी-छोटी हवा-मिठाई भाई के मुँह में ठेलकर उसका मुँह बंद कर दिया।
इमरतिया ने सूरजु को सिखया था मरद जब ऊपर होता है तो भी पांच छह तरीके से कम से कम पोजीशन बदल बदल के चोद सकता है,
शरू में दोनों टांग उठा के अपने कंधे पे रख के, जब झिल्ली फाड़ना हो, एकदम अंदर तक घुसेड़ना हो तो एकदम दुहर कर के, और गिरते समय भी इससे बीज सीधे बच्चेदानी में जाता है। और दोनों टाँगे, टाँगे टाँगे, लड़की भी तक जायेगी और तुम भी तो एक टांग एक बार जब पूरा घुस चूका हो नीचे लिटा भी सकते हो, या फिर घुटने से दोनों टाँगे मोड़ के,
और सूरजु पोजीशन बदल बदल के कभी तेज कभी धीमे अपनी बहिनिया को पेल रहे थे, और नीचे से बुच्ची उसे छेड़ रही थी,
" ताकत तो बहुत है तुममे भैया, बस बुद्धि और हिम्मत नहीं है, लड़की की आँख नहीं समझ पाते हो "
मरद जब जवाब नहीं दे पाता है औरत को तो सिर्फ एक काम करता है, पिटाई और अपने बांस से क्या पिटाई की सूरजु ने, और दोनों टाँगे भी बुच्ची की सिकोड़ दी,
चमड़ी छिल रही थी, रगड़ते, दरेतते मोटा शेर अंदर अपनी गुफा में जा रहा था और बुच्ची अब चीख रही थी, कहर रही थी, मजे से भी दर्द से भी और ऊपर से छिले पर नमक छिड़कने का मजा कौन भौजाई छोड़ेगी तो इमरतिया चिढ़ाते बोली,
" अरे मोटा शेर खाली देखने में अच्छा नहीं लगता, दहाड़ता भी है। सबके सामने रगड़ रही थी न हल्दी के बहाने, अब बिना चीरे फाड़े नहीं छोड़ेगा "
" तो न छोड़े न भौजी, कर ले अपनी मन मर्जी, मेरा प्यारा भाई है "
दर्द के बावजूद नीचे से धक्का लगाते बुच्ची बोली, और इमरतिया समझ गयी ये पक्की छिनार बनेगी, इस गाँव का, घर का कोई मरद नहीं छोड़ेगी बिना घोंटे ।
सूरजु ने दूसरी ट्रिक अपनायी, करीब करीब बाहर निकाल के खूंटा रोक दिया, और बदमशी भरी मुस्कान से अपनी जवान हो रही छोटी बहन को देखने लगा,
" करो न भैया " निहोरा कर के बुच्ची बोली, पर सूरजु पे असर नहीं पड़ा,
बाहों में बाँध के बड़ी बड़ी आँखों से देखते वो फिर से बोली, " करो न भैया, इतना अच्छा लग रहा था, कर न यार क्यों तड़पाता है "
" क्या करूँ बुच्ची बोल साफ़ साफ़ " चिढ़ाते हुए बिना कुछ किये सूरजु बोला और बुच्ची समझ गयी, वो स्साला क्या सुनना चाहता है, तो कस के उसे चूम के खुल के बोली,
" चोद अपनी बहन को, बहन चोद, पेल दे लंड अपना अपनी बहिनिया के बुर में दे न अपना मोटा लंड मुझे अपनी बुच्ची को चोद कस कस के "
" अरे यह तेरा भाई सिर्फ बहन चोद ही नहीं मादरचोद भी है पक्का " इमरतिया ने टुकड़ा लगाया
फिर क्या था, क्या धुनिया रुई धुनेगा, जिस तरह से सूरजु बुच्ची को रगड़ रगड़ के चोद रहा था, हर धक्का सीधे बच्चेदानी पे, हर धक्के पे चीख निकलती थी , दस बारह मिनट के इस तूफ़ान के बाद पहले बुच्ची किनारे लगी, उसकी चूत कस कस के अपने भाई का लंड भींच रही थी और साथ में अब भाई ने भी झड़ना शुरू किया।
जैसे थोड़ी देर पहले बूँद बूँद खून टपक रहा था अब गाढ़ी रबड़ी मलाई, रिस रही थी, लेकिन सरजू अंदर बाहर करते रहे फिर थोड़ी देर बाद कटे पेड़ की तरह बुच्ची पे गिर पड़े।
बुच्ची ने प्यार से उसे बाँहों में बाँध लिया । देर तक भाई बहन चिपके रहे, फिर धीरे धीरे सूरजु ने खूंटा बाहर निकाला
बुच्ची ने दोनों हाथों के सहारे उठने की कोशिश की, पर नहीं उठ पाई। एक हाथ इमरतिया ने पकड़ा और दूसरा सूरजु ने फिर धीरे धीरे किसी तरह उठी और दीवार का सहारा लेकर भैया के बगल में बुच्ची बैठ गयी।
बाहर से बूआ को गरियाने के गानों की आवाज आ रही थी। लावा भूजने की रस्म अभी चल ही रही थी। उस किशोरी की जाँघे फटी जा रही थीं, गुलाबी राजकुमारी धक्का खा के फूल गयी थी और खून और मलाई से नहायी थी, यहाँ तक की सूरजु की छोटी बहन की गोरी गोरी जाँघों पर भी दहकते हुए गुड़हल के फूल खिल आये थे , खूब अच्छी तरह फटी थी, सूरजु की बहिनिया की। इमरतिया ने एक गीले कपडे से बुच्ची की जाँघे साफ़ करने की कोशिश की तो बुच्ची ने मना कर दिया,
" रहे दा न भौजी, कुछ देर तक तो भैय्या क बदमाशी क निशानी रहे, केतना तंग किये अपनी छोटी बहन को " और दुलराते हुए बगल में बैठे सूरजु से चिपक गयी।
इमरतिया ने चिढ़ाते हुए सूरजु से कहा तोहार बहिनिया पक्की छिनार है, एक साथ दस दस भतार करेगी और जिस तौलिये पे लेट के वो अपने भैया से पहली बार चुदी थी, उसे सम्हाल के लपेट लिया।
एकदम खून से सराबोर था और अब ढेर सारा उसे भैया का बीज भी उसकी फटी बुर से रिस रिस के गिरा था।
इमरतिया इसे मुन्ना बहू को, कुल भरौटी वालियों को, अपने नाऊ टोला वालियों को दिखाएगी,
अरे सब को मालूम तो पड़े , उस द कुल्हड़ में सूरजु की मलाई भी तो मुन्ना बहू को दिखाई थी और कोहबर में सब भौजाइयों ने मिल के बुच्ची को पिलाई थी, रसगुल्ले के शीरे में मिलाकर, लेकिन उसे इन्तजार था इस खून वाली तौलिया को बड़की ठकुराइन को दिखा के नेग माँगने का।
उनके बेटे ने जिंदगी में पहली बार किसी बारी कुँवारी की झिल्ली फाड़ी है और वो इतनी हचक के, जबरदस्त नेग लूंगी। जोड़ा कंगन जो अपनी समधन के लिए बनवायी है उसी की जोड़ का तो पहले ही बोल चुकी हैं
पर नेग में अपने देवर के लिए उनकी महतारी मांगूगी, और और वो भी एक दो बार के लिए नहीं, और चोरी छुपा नहीं, खुलल्मा खुल्ला, आम की गझिन बगिया में, मरद तो कोई जाते नहीं उधर, लेकिन सूरजु की मामी, मौसी, बूआ चाची के साथ, कुल लड़कियां, कहारिन नाउन भी रहेंगी, गपागप गपागप,
बुच्ची खूब अपने भैया से दुलारा रही थी, उनके सोये थके खूंटे को देख के चिढ़ा रही थी, इमरतिया से कह कह के,
" देख भौजी तोहार देवर क शेर, इतना बोल रही थी न चीर फाड़ देगा, अब कैसा बेचारा दुबक के सो रहा है "
और बुच्ची उस खूंटे के ऊपर से थपकी देते हुए बोल रही थी, सो जाओ, सो जाओ, बहुत थक गए हो न ,
चिढ़ा तो रही थी लेकिन मन ही मन सोच रही थी की उसकी सहेली के यारो का चूसने, मुठियाने के बाद जितना बड़ा होता है उससे बड़ा तो उसके प्यारे प्यारे मीठे भैया का अभी भी है। जब शीलवा और बाकी लड़कियां संगी सुनेगी, बुच्ची ने इतना लम्बा बांस पूरा निगल लिया तो सालियों की फट जायेगी। सहलाते हुए उसने नाप लिया, सोते हुए भी छह अंगुल का था।
सूरजु बहुत ललचायी निगाह से अपनी बहन को देख रहा था, इतनी सुंदर थी वो, रूप जोबन और कैसे चिपक के बैठी थी और सूरजु ने कंधे पर हाथ रख दिया, उस टीनेजर ने खींच के अपने भैया का हाथ अपने जोबन पे रख दिया और चिढ़ाते हुए पुछा, " कैसा है भैया "
अब सूरज के भी बोल फूट रहे थे। कल रात औरतों की खुली मस्ती देख के उनकी भी झिझक ख़तम हो रही थी , कस के मसलते बोले " मेरी बहन का है ,मस्त है " और खींच के अपनी गोद में बैठा लिया।
बहन भाई के गोद में ठसके से बैठ गयी और इमरतिया के मन में हो रहा था देख बबुआ जल्द ही सबके सामने एही तरह तोहार महतारी के भी तोहरे खूंटे पे बैठाऊंगी, वरना जिंदगी भर ताना देगी, इमरतिया तूने अकेले अकेले मजा ले लिया। अरे आज ही बड़की ठकुराइन दो दो का घोंट के आयीं, गयी थीं, अपने जवान ननदोई को हल्दी लगाने,उलटे वही निहुरा के लगा दिया और सूरजु के मौसा भी मौका पा के चौक्का मार दिए।
बुच्ची भी अब खुल के मुठिया रही थी, और इमरतिया ने चिढ़ाया " हे बबुनी देख शेर जग गया है "
" तो डरती हूँ का , अरे न आपके देवर से डरती हूँ न उसके शेर से। बहुत होगा तो क्या करेगा, चोद देगा, तो चोद ले " हंस के बुच्ची बोली।
" भैया, तुम बहुत दुष्ट हो, एकदम बदमाश "
भाई बिना जवाब दिए बहन के मीठे मालपुआ जैसे गाल चूमता चूसता रहा,
" बदमाश, बदमाश, इतना इन्तजार क्यों कराया इसके लिए, मेरा कबसे मन कर रहा था "
प्यार से बहन बोली, बिना एक इंच भी खूंटा बाहर निकले थोड़ा सा उठ के सीधे, अपनी बहन बुच्ची के भोले भोले चाँद ऐसे चेहरे को देखता सूरजु बोला,
"बुच्चिया, तुझे दर्द बहुत हुआ न? "
सूरजु के चेहरे पर प्यार भी था, थोड़ी परेशानी भी।
और दस मुक्के गिन के उसकी छाती पर पड़े,
"सच कहते हैं, अखाड़ा लड़ने से बुद्धि कम हो जाती है। हफ्तों भर बाद दुलहिनिया आएगी तो क्या उसको दर्द नहीं होगा ? अरे लड़की का जन्म और दर्द बराबर, लेकिन मैं ऊपर से लिखवा के लाई थी कि ये दर्द मेरा बुद्धू भाई देगा। अरे पागल कभी भी करवाती तो दर्द तो होता ही "
बुच्ची खिलखिलाते हुए बोली, और हलके से चूतड़ उछाल के भाई को इशारा किया, " कर न "
जैसे तूफ़ान के बाद हलकी हवा चले, धक्के हलके लग रहे थे और बुच्ची भी जैसे भाभियों ने सिखाया था मरद चाहता है की लौंडिया साथ दे, मजे ले म मजे दे, तो बस बुच्ची भी कभी कमर उचकाती,, कभी चूमती, कभी नाख़ून धंसा देती और कभी गरिया के भैया को उकसाती।
और अब सूरजु का भी मुंह खुल गया था, आधा खूंटा बाहर कर के एक जोर का धक्का मारते हुए अपनी छोटी बहन से पूछा
" मजा आ रहा है? "
मजा तो बुच्ची की देह से छलक रहा था, चेहरे से टपक रहा था। अब तक न जाने कितने बार वो औरत को चुदते देख चुकी थी, बचपन में घर में ही कितनी बार, माई के साथ ही सोती थी तो, माई भी बिना बिटिया के सोने का इन्तजार किये, गपागप
और फिर शीलवा की चौकीदारी में इसी गाँव के दर्जनों लौंडो के साथ
और आज अपनी बड़ी मौसी, और सूरजु भैया की बूआ कांती बूआ, और मामी को, और हर बार चुदवाती हुयी के चेहरे पे जो ख़ुशी वो देखती, बुच्ची को बहुत जलन होती, लेकिन आज उसे उन सब से कई कई गुना ज्यादा ख़ुशी हो रही थी।
" तोहके आ रहा है की नहीं " भैया के धक्के का जवाब नीचे से धक्के से देते वो बोली।
" मन तो कर रहा है बुच्ची तोहें खा जाऊं " सूरजु ऊपर से कस के पेलते बोलै
" तो खा लो न, भैया " और अपनी छोटी-छोटी हवा-मिठाई भाई के मुँह में ठेलकर उसका मुँह बंद कर दिया।
इमरतिया ने सूरजु को सिखया था मरद जब ऊपर होता है तो भी पांच छह तरीके से कम से कम पोजीशन बदल बदल के चोद सकता है,
शरू में दोनों टांग उठा के अपने कंधे पे रख के, जब झिल्ली फाड़ना हो, एकदम अंदर तक घुसेड़ना हो तो एकदम दुहर कर के, और गिरते समय भी इससे बीज सीधे बच्चेदानी में जाता है। और दोनों टाँगे, टाँगे टाँगे, लड़की भी तक जायेगी और तुम भी तो एक टांग एक बार जब पूरा घुस चूका हो नीचे लिटा भी सकते हो, या फिर घुटने से दोनों टाँगे मोड़ के,
और सूरजु पोजीशन बदल बदल के कभी तेज कभी धीमे अपनी बहिनिया को पेल रहे थे, और नीचे से बुच्ची उसे छेड़ रही थी,
" ताकत तो बहुत है तुममे भैया, बस बुद्धि और हिम्मत नहीं है, लड़की की आँख नहीं समझ पाते हो "
मरद जब जवाब नहीं दे पाता है औरत को तो सिर्फ एक काम करता है, पिटाई और अपने बांस से क्या पिटाई की सूरजु ने, और दोनों टाँगे भी बुच्ची की सिकोड़ दी,
चमड़ी छिल रही थी, रगड़ते, दरेतते मोटा शेर अंदर अपनी गुफा में जा रहा था और बुच्ची अब चीख रही थी, कहर रही थी, मजे से भी दर्द से भी और ऊपर से छिले पर नमक छिड़कने का मजा कौन भौजाई छोड़ेगी तो इमरतिया चिढ़ाते बोली,
" अरे मोटा शेर खाली देखने में अच्छा नहीं लगता, दहाड़ता भी है। सबके सामने रगड़ रही थी न हल्दी के बहाने, अब बिना चीरे फाड़े नहीं छोड़ेगा "
" तो न छोड़े न भौजी, कर ले अपनी मन मर्जी, मेरा प्यारा भाई है "
दर्द के बावजूद नीचे से धक्का लगाते बुच्ची बोली, और इमरतिया समझ गयी ये पक्की छिनार बनेगी, इस गाँव का, घर का कोई मरद नहीं छोड़ेगी बिना घोंटे ।
सूरजु ने दूसरी ट्रिक अपनायी, करीब करीब बाहर निकाल के खूंटा रोक दिया, और बदमशी भरी मुस्कान से अपनी जवान हो रही छोटी बहन को देखने लगा,
" करो न भैया " निहोरा कर के बुच्ची बोली, पर सूरजु पे असर नहीं पड़ा,
बाहों में बाँध के बड़ी बड़ी आँखों से देखते वो फिर से बोली, " करो न भैया, इतना अच्छा लग रहा था, कर न यार क्यों तड़पाता है "
" क्या करूँ बुच्ची बोल साफ़ साफ़ " चिढ़ाते हुए बिना कुछ किये सूरजु बोला और बुच्ची समझ गयी, वो स्साला क्या सुनना चाहता है, तो कस के उसे चूम के खुल के बोली,
" चोद अपनी बहन को, बहन चोद, पेल दे लंड अपना अपनी बहिनिया के बुर में दे न अपना मोटा लंड मुझे अपनी बुच्ची को चोद कस कस के "
" अरे यह तेरा भाई सिर्फ बहन चोद ही नहीं मादरचोद भी है पक्का " इमरतिया ने टुकड़ा लगाया
फिर क्या था, क्या धुनिया रुई धुनेगा, जिस तरह से सूरजु बुच्ची को रगड़ रगड़ के चोद रहा था, हर धक्का सीधे बच्चेदानी पे, हर धक्के पे चीख निकलती थी , दस बारह मिनट के इस तूफ़ान के बाद पहले बुच्ची किनारे लगी, उसकी चूत कस कस के अपने भाई का लंड भींच रही थी और साथ में अब भाई ने भी झड़ना शुरू किया।
जैसे थोड़ी देर पहले बूँद बूँद खून टपक रहा था अब गाढ़ी रबड़ी मलाई, रिस रही थी, लेकिन सरजू अंदर बाहर करते रहे फिर थोड़ी देर बाद कटे पेड़ की तरह बुच्ची पे गिर पड़े।
बुच्ची ने प्यार से उसे बाँहों में बाँध लिया । देर तक भाई बहन चिपके रहे, फिर धीरे धीरे सूरजु ने खूंटा बाहर निकाला
बुच्ची ने दोनों हाथों के सहारे उठने की कोशिश की, पर नहीं उठ पाई। एक हाथ इमरतिया ने पकड़ा और दूसरा सूरजु ने फिर धीरे धीरे किसी तरह उठी और दीवार का सहारा लेकर भैया के बगल में बुच्ची बैठ गयी।
बाहर से बूआ को गरियाने के गानों की आवाज आ रही थी। लावा भूजने की रस्म अभी चल ही रही थी। उस किशोरी की जाँघे फटी जा रही थीं, गुलाबी राजकुमारी धक्का खा के फूल गयी थी और खून और मलाई से नहायी थी, यहाँ तक की सूरजु की छोटी बहन की गोरी गोरी जाँघों पर भी दहकते हुए गुड़हल के फूल खिल आये थे , खूब अच्छी तरह फटी थी, सूरजु की बहिनिया की। इमरतिया ने एक गीले कपडे से बुच्ची की जाँघे साफ़ करने की कोशिश की तो बुच्ची ने मना कर दिया,
" रहे दा न भौजी, कुछ देर तक तो भैय्या क बदमाशी क निशानी रहे, केतना तंग किये अपनी छोटी बहन को " और दुलराते हुए बगल में बैठे सूरजु से चिपक गयी।
इमरतिया ने चिढ़ाते हुए सूरजु से कहा तोहार बहिनिया पक्की छिनार है, एक साथ दस दस भतार करेगी और जिस तौलिये पे लेट के वो अपने भैया से पहली बार चुदी थी, उसे सम्हाल के लपेट लिया।
एकदम खून से सराबोर था और अब ढेर सारा उसे भैया का बीज भी उसकी फटी बुर से रिस रिस के गिरा था।
इमरतिया इसे मुन्ना बहू को, कुल भरौटी वालियों को, अपने नाऊ टोला वालियों को दिखाएगी,
अरे सब को मालूम तो पड़े , उस द कुल्हड़ में सूरजु की मलाई भी तो मुन्ना बहू को दिखाई थी और कोहबर में सब भौजाइयों ने मिल के बुच्ची को पिलाई थी, रसगुल्ले के शीरे में मिलाकर, लेकिन उसे इन्तजार था इस खून वाली तौलिया को बड़की ठकुराइन को दिखा के नेग माँगने का।
उनके बेटे ने जिंदगी में पहली बार किसी बारी कुँवारी की झिल्ली फाड़ी है और वो इतनी हचक के, जबरदस्त नेग लूंगी। जोड़ा कंगन जो अपनी समधन के लिए बनवायी है उसी की जोड़ का तो पहले ही बोल चुकी हैं
पर नेग में अपने देवर के लिए उनकी महतारी मांगूगी, और और वो भी एक दो बार के लिए नहीं, और चोरी छुपा नहीं, खुलल्मा खुल्ला, आम की गझिन बगिया में, मरद तो कोई जाते नहीं उधर, लेकिन सूरजु की मामी, मौसी, बूआ चाची के साथ, कुल लड़कियां, कहारिन नाउन भी रहेंगी, गपागप गपागप,
बुच्ची खूब अपने भैया से दुलारा रही थी, उनके सोये थके खूंटे को देख के चिढ़ा रही थी, इमरतिया से कह कह के,
" देख भौजी तोहार देवर क शेर, इतना बोल रही थी न चीर फाड़ देगा, अब कैसा बेचारा दुबक के सो रहा है "
और बुच्ची उस खूंटे के ऊपर से थपकी देते हुए बोल रही थी, सो जाओ, सो जाओ, बहुत थक गए हो न ,
चिढ़ा तो रही थी लेकिन मन ही मन सोच रही थी की उसकी सहेली के यारो का चूसने, मुठियाने के बाद जितना बड़ा होता है उससे बड़ा तो उसके प्यारे प्यारे मीठे भैया का अभी भी है। जब शीलवा और बाकी लड़कियां संगी सुनेगी, बुच्ची ने इतना लम्बा बांस पूरा निगल लिया तो सालियों की फट जायेगी। सहलाते हुए उसने नाप लिया, सोते हुए भी छह अंगुल का था।
सूरजु बहुत ललचायी निगाह से अपनी बहन को देख रहा था, इतनी सुंदर थी वो, रूप जोबन और कैसे चिपक के बैठी थी और सूरजु ने कंधे पर हाथ रख दिया, उस टीनेजर ने खींच के अपने भैया का हाथ अपने जोबन पे रख दिया और चिढ़ाते हुए पुछा, " कैसा है भैया "
अब सूरज के भी बोल फूट रहे थे। कल रात औरतों की खुली मस्ती देख के उनकी भी झिझक ख़तम हो रही थी , कस के मसलते बोले " मेरी बहन का है ,मस्त है " और खींच के अपनी गोद में बैठा लिया।
बहन भाई के गोद में ठसके से बैठ गयी और इमरतिया के मन में हो रहा था देख बबुआ जल्द ही सबके सामने एही तरह तोहार महतारी के भी तोहरे खूंटे पे बैठाऊंगी, वरना जिंदगी भर ताना देगी, इमरतिया तूने अकेले अकेले मजा ले लिया। अरे आज ही बड़की ठकुराइन दो दो का घोंट के आयीं, गयी थीं, अपने जवान ननदोई को हल्दी लगाने,उलटे वही निहुरा के लगा दिया और सूरजु के मौसा भी मौका पा के चौक्का मार दिए।
बुच्ची भी अब खुल के मुठिया रही थी, और इमरतिया ने चिढ़ाया " हे बबुनी देख शेर जग गया है "
" तो डरती हूँ का , अरे न आपके देवर से डरती हूँ न उसके शेर से। बहुत होगा तो क्या करेगा, चोद देगा, तो चोद ले " हंस के बुच्ची बोली।