Adultery Manhoos se mahan tak - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

hotaks

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Dec 5, 2013
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दोस्तों मैं कोई राइटर नहीं बस एक कहानी जो किसी लाइफ से जुडी है उसे थोड़ा रोमांचक बना कर पेश कर रहा हूँ अगर कहीं स्टोरी ट्रैक से हेट तो मुझे गाइड कीजियेगा जल्द hi पहला अपडेट दूंगा​
 
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अपडेट 1

ये कहानी एक गाओं की है जहाँ एक बड़ा सा घर है घर दो मंज़िला है जिसमे तीन भाई रहते हैं तीनो भाई शादीशुदा हैं मगर अफ़सोस है क तीनो क कोई औलाद नहीं. गाओं में इनके परिवार का ाचा खासा रसूख है हर कोई इनकी इज़्ज़त करता है खेती बाड़ी की काफी ज़मीन है जो ये खुद खेती क लिए इस्तेमाल करते हैं खेती से अछि इनकम है इसलिए घर में किसी चीज़ की कमी नहीं है. तीनो भाइयों की पड़े गाओं से hi हुई है खेती क कारन ज्यादा पड़ने में इनको इंटरेस्ट नहीं था इसलिए ये ज्यादा पड़े नहीं हलाकि तीनो की बिवीजन एक से बढ़कर एक सुन्दर हैं मगर हैं पूरी शरीफ और इज़्ज़तदार. घर में तीन भाइयों और इनकी बीविओं क इलावा एक शख्स और है जो क इस कहानी का मुख्या किरदार है जिसे क कुछ लोग मनहूस समझते हैं मगर ये मनहूस एक दिन सब से महँ इंसान बनेगा मगर कैसे आइये जानते हैं.

इस कहानी क ज़रूरी किरदारों से आपका तारूफ करवाता हूँ

विजय शंकर: उम्र 45 साल किसान हैं गाओं में सब इनकी इज़्ज़त करते हैं अपने बाप क मरने क बाद घर क मुखिया एहि हैं और सब इनका हुकम मानते हैं बहुत hi सुलझे हुए इंसान हैं भगवन का दिया सब है बस कमी है तो औलाद की जो इनके मन को हमेशा दुःख देती रहती है. हलाकि ये कभी किसी पर ज़ाहिर नहीं होने देते गाओं में सब लोग इनको मुखिया मानते हैं और हर काम इनसे पूछ कर करते हैं ये अपने परिवार से बहुत प्यार करते हैं. इन्हे उस मासूम से सब से ज्यादा मुहोब्बत है जिसे कुछ लोग मनहूस मानते हैं.

गौरी: उम्र 40 साल साइज 38 क बूब्स 33 कमर और 40 की गांड एक डैम कैसा हुआ शरीर घर क काम करने की वजह से रंग दूध क जैसे सफ़ेद और कातिल नैन नक्श चेहरे पर एक नूर सा है और सवभाव शीतल ममता की मूरत सब का ख्याल रखने वाली हर कोई इसके नेचर की वजह इसे इज़्ज़त देता है. ये विजय की वाइफ है एक पति व्रत नारी है कभी ज़िन्दगी में किसी दुसरे मर्द का कभी सोचा भी नहीं. वह तक माँ नहीं बन पाने का इसे दुःख तो है मगर कभी जताती नहीं या यूँ कहो की ये अपने हीरो को अपना hi बीटा मानती है उसे माँ का प्यार देती है और अपनी ममता को ठंडा करती है ये भगवन को बहुत मानती है इसकी दोनों देवराणीअ और फॅमिली की और सभी औरतें इनका hi अनुसरण करती हैं .

अजय शंकार: ये विजय का छोटा भाई है उम्र 43 साल अपनी बीवी से थोड़ा डरता है या यूँ कहो क जोरू का गुलाम है बचा न होने क कारन बीवी से ताने सुनता रहता है मगर किसी से कहता नहीं इसे यही लगता है क इसीमे कोई कमी है इस लिए घर पे काम और खेतो में ज़्यादा रहता है

कामिनी: ये अजय की बीवी है बहुत hi सुन्दर उम्र 39 साल बूब्स 36 क . ज़्यादा म्हणत नहीं की इनपर अजय ने कमर 32 की गांड 38 की ये अजय को दबा कर रखती है अपना हर काम निकलवा लेती है हालाँकि ये बहुत कामिनी है मगर कभी इसने इज़्ज़त को ख़राब नहीं किया इसे हीरो से सख्त नफरत है और उसे मनहूस कहती है हालाँकि अपने घर पर जेठानी और जेठ की वजह से चुप रहती है मगर गाओं की औरतों से ढिंढोरा पीटती है क ये मनहूस है और उसे अपने पास भी आने नहीं देती इसकी वजह आगे पता चलेगी

कमलेश शंकर: ये तीनो भाइयों में सब से छोटा है उम्र 38 ये भी अपने भाइयों क साथ hi खेती करता है और उनको मंटा है अपनी बीवी से बहुत प्यार करता है इसे सेक्स की बहुत आग है नए नए तरीके से सेक्स करता है मगर बहार की औरतों से गाओं में इसका चक्कर है किसी औरत से. सेक्स की इतनी नॉलेज होने क बाद भी ये अभी तक बाप नहीं बना

दीपिका : ये कमलेश की बीवी है घर में सब से ज्यादा पढ़ी लिखी है उम्र 33 बूब्स 36 कमर 28 गांड 36 मस्त फिगर दूध सी सफ़ेद चमकता चेहरा कामुक बदन पढ़ी लिखी है शहर में b.a. कर क आयी थी कॉलेज से घरवालों ने कमलेश से शादी करदी हालाँकि इसका कभी किसी से कोई चक्कर नहीं रहा मगर है खुले स्वभाव की अपनी दोनों जेठानिओं को मानती है सबसे छोटी है इसलिए सब की लाड़ली भी है चुलबुली है सब से मज़ाक भी करती रहती है अपने हीरो को ये ज्यादा प्यार तो नहीं करती मगर नफरत भी नहीं उल्टा ये कामिनी को टोक देती है क बेचारा मासूम है उससे नफरत मत करो काम से काम. कमलेश इससे बहुत सेक्स करता था नए नए तरीको से जिसकी वजह से ये बीएड पर वाइल्ड सेक्स की आदि बन गयी मगर बचा न होने से धीरे धीरे कमलेश इससे सेक्स काम करता गया और बहार ज़्यादा मुँह मरने लगा. सेक्स की कमी इसके शरीर को खलती है मगर सब से ज्यादा इसे माँ न बन पाने का गम है हालाँकि पढ़ी लिखी होने की वजह से ये गाओं की औरतों की तरह इसे भगवन की मर्ज़ी नहीं मानती बल्कि ये जानती है क आजकल साइंस इतनी तरक्की कर गयी है क औरत किसी भी उम्र में माँ बन सकती है हर कमी को दूर किया जा सकता है.

रजनी: उम्र 44 बूब्स 38 कमर 34 गांड 41 विजय से छोटी है मगर बाक़िओं से बड़ी सब इसकी इज़्ज़त करते हैं नेचर से काफी प्रभावी हैं सब इनके आगे अपनी ज़ुबान बंद hi रखते हैं. रंग एक डैम गोरा और कामुक चेहरा हालाँकि ये नेचर से कामुक नहीं क्यूंकि इनके हस्बैंड बैंक में जॉब करते हैं उन्हें सेक्स में जयादा इंटरेस्ट नहीं इसलिए रजनी ने अपने अंदर सेक्स को दबा दिया है. अपने भाई बहनो से बहुत प्यार करती है इसे अक्सर चिंता रहती है क इसकी भाबीआं अभी तक घर को कोई चिराग नहीं दे पायी मगर ये कभी किसी को दोष नहीं देती.

ये भी अपने हीरो को बहुत प्यार करती है

इसके तीन बचे हैं दो बेटियन निधि और नैना और एक बीटा कारन

राजेश शर्मा: उम्र 50 साल ये रजनी क पति हैं बैंक में जॉब करते हैं सिंपल लाइफ जीते हैं सेक्स को कभी एन्जॉय नहीं किया जस्ट ड्यूटी समझ कर किया हमेशा और अब वो भी महीने में एक बार रह गया है वो भी जब रजनी ज्यादा फाॅर्स करे

निधि : उम्र 24 साल नेचर से गंभीर पड़े में अव्वल कॉलेज ख़तम कर क अभी जॉब कर रही है इसने ब किया है ख़ूबसूरती में हीरोइन से काम नहीं मगर अपने परिवार की इज़्ज़त को कभी दाग नहीं लगाया कभी किसी से फ्रेंडशिप नहीं की हालाँकि दिल से ये भी एन्जॉय करना चाहती थी मगर इज़्ज़त को गवाना नहीं चाहती थी बहुत hi ज़बरदस्त फिगर है इसका 36क बूब्स 26 कमर 36 गांड जो भी देखे दीवाना हो जाये. अपनी माँ से बहुत प्यार करती है. छोटी बहिन और भाई पर कण्ट्रोल रखती है . इसे अपने हीरो से बहुत हमदर्दी है इसलिए उसे जब भी मिलती है बहुत सी बातें करती है और उसके साथ वक़्त बिताती है

नैना : उम्र 22 M.A. कर रही है नेचर से मस्त है बहुत हसी मज़ाक करती है मगर कभी ऐसा कुछ नहीं करती जिससे क इसकी दीदी नाराज़ हो निधि hi इसकी बेस्ट बडी है और उसी की तरह ये भी बहुत खूबसूरत है 34 क चूचे 26 कमर और गांड 36 ये भी हीरो से बहुत हमदर्दी रखती है.

कारन : उम्र 20 B.A कर रहा है ये फॅमिली में ज्यादा इंटरेस्ट नहीं लेता इसे बस अपने दोस्तों से मतलब है हालाँकि की इसकी कोई बुरी सांगत नहीं है

रीता : उम्र 42 साल बूब्स 38 कमर 32 गांड 38 ये विजय रजनी और अजय से छोटी है ये अंदर से बहुत कामुक है मगर शो नहीं करती इसके हस्बैंड जॉब करते हैं प्राइवेट जॉब होने क कारन इसको ज्यादा वक़्त नहीं दे पते इसलिए ये छुडासी रहती है मगर कभी भी किसी दूसरे मर्द क बारे में नहीं सोचा इसलिए खुद को उंगली कर क ठंडा कर लेती है. ये भी अपने भाई बहनो और अपने परिवार से प्यार करती है हीरो क लिए इसके दिल में बहुत जगह है.

सिद्धार्थ दुबे : उम्र 48 साल रीता क पति . प्राइवेट जॉब करते हैं ज्यादा वक़्त अपनी जॉब को hi देते हैं क्यूंकि इनके कंधो पर hi भर है फॅमिली का

नेहा : उम्र 22 साल बूब्स 34 कमर 28 गांड 36 M.Sc कर रही है . बहुत खूबसूरत अपनी माँ की तारथ .नेचर से शांत और पड़े पर hi फोकस करती है इसे कुछ और नहीं पड़े क इलावा हालाँकि ये फॅमिली को बहुत प्यार करती है मगर काम बात करती है

करुणा : उम्र 20 साल B.A कर रही है अपनी माँ बहिन की तरह ये भी खूबसूरत है बूब्स 34 कमर 28 गांड 36 नेचर से मस्त है फ्रेंड्स क साथ हसी मज़ाक करती है और फॅमिली में भी सब का दिल लगा कर रखती है इसकी सब से ज्यादा बनती है अपनी मौसी की बेटी नैना से दोनों खूब मस्ती करती हैं और हीरो को भी छेड़ती है जब भी मिले

दिव्या : उम्र 36 साल बूब्स 38 कमर 29 गांड 38 ख़ूबसूरती क मामले में ऐश्वर्या राइ चाँद क जैसी किसी को भी दीवाना बना दे नेचर से बहुत hi गंभीर और गुस्सैल ये हीरो से नफरत करती है जिसकी एक ख़ास वजह है. हीरो को मनहूस मान कर ये कभी उसकी शकल देखना पसंद नहीं करती इसी लिए मायके नहीं जाती ताकि वो सामने न आ जाये. इसका बस चले तो उसे घर से निकल दे हालाँकि बड़ी बहनो और भाइयों क कारन कुछ कह नहीं पति.

कभी ये बहुत चुलबुली हुआ करती थी मगर आज ये पूरी चेंज हो चुकी है इसकी वजह हीरो से जुडी है. इसकी एक hi बेटी है जिसे ये दिलो जान से चाहती है बस अपनी बेटी क आगे ये सब भूल जाती है. इसके हस्बैंड विदेश में नौकरी करते हैं साल में एक महीने क लिए एते हैं. दिव्या अपने आप को अपने अंदर कहीं खो बैठी है पति बहार रहता है मगर फिर भी इसे कोई फरक नहीं पड़ता नहीं किसी मर्द की कभी ज़रूरत महसूस करती है.

दीपक त्रिवेदी: उम्र 42 साल विदेश पैसा कमाने गए थे मगर यहाँ ऐसे उलझे क वापिस जाना भूल से गए जब भी जाते हैं एक महीने क अंदर वापिस आ जाते हैं जिसकी वजह यहाँ की रंगीन दुनिआ भी है

राधा: ये है हमारी हेरोइन उम्र 18 साल खूबसूरत इतनी क देखने वाला खुद को hi भूल जाये चेहरे पर दुनिआ भर की मासूमियत. अपनी माँ पर गयी है नेचर से बहुत hi कोमल है मगर अपनी माँ दिव्या क कारन ये भी हीरो से नफरत करती है फिगर बहुत hi क़ातिलाना है मगर मासूमियत ऐसी है क चेहरे से नज़रें नहीं हटती तो फिगर कोई क्या देखे.

अमित : ये है अपना हीरो उम्र 18 साल बचपन से अपने नाना क घर hi पला बड़ा इसने अपने माँ बाप को नहीं देखा न hi अपने नाना नानी को अपनी बड़ी ममी गौरी से बहुत प्यार करता है. अमित क लिए गौरी hi इसकी माँ है जितना प्यार गौरी ने इसे दिया है कभी कभी ये सोचता है क उसकी अपनी माँ भी शायद उससे इतना प्यार न दे पति. तीनो मां इससे प्यार करते हैं बड़े मां विजय तो इसके लिए पिता सामान hi हैं मगर अजय मां अपनी बीवी की वजह से इसे ज्यादा पास नहीं आने देते.

अमित नेचर से शांत है हैंडसम है. गौरी अक्सर hi कहती है क तुम्हारी ऑंखें अपनी माँ पर गयी हैं और उसी की तरह गोरा रंग है. अमित फॅमिली क कई मेंबर्स क बेहवे से हैरान तो है मगर कभी जान नहीं पाया क इसकी वजह क्या है हालाँकि उसके मन में किसी को लेकर कोई मेल नहीं. कभी कभी कामिनी ममी क जले कटे शब्दों से इसका दिल ज़रूर टूट जाता है मगर फिर गौरी का प्यार और स्नेह इसे सब भूल जाने को मजबूर कर देता है. गाओं में इसके ज्यादा दोस्त नहीं हैं जिसकी वजह इसकी रिज़र्व और शाय नेचर है मगर गाओं की कई लड़कियां इससे दोस्ती करने को तरसती हैं. सबको इज़्ज़त देता है इसलिए हर कोई कहता है क बीटा हो तो अमित जैसा मगर दूसरी और कई औरतें कामिनी से सुन सुन कर इसे मनहूस hi मानती हैं और अपने बच्चों को इससे मिलने से मना करती हैं नतीजा स्कूल में आजतक कोई इसे दोस्त बनाना नहीं चाहता.

इस साल स्कूल se12th पास कर क अब आगे की स्टडी क लिए शहर जाना चाहता है मगर ये जनता है क कोई उसे पड़ने शहर नहीं भेजेगा क्यूंकि करनी तो खेती hi है एहि सोचकर तो मां नहीं पड़े तो वो अमित को क्यों पड़ने देंगे वैसे भी गौरी अमित को खुद से दूर नहीं होने देती एक दिन भी.

अकेला होने क कारन अमित ने अपना वक़्त खेलकूद क बजाये खेतो और गाओं क अखाड़े में बिताया है घर क अपने पशु होने और खान पीना संपन्न होने से आज अमित 18 साल का होकर भी 23 का लगता है शारीरक बनावट किसी पहलवान की तरह मगर नेचर से एक डैम शांत. इसे बस एक hi खलिश है क इसके माथे से मनहूस होने का जो दाग है वो मिट जाये.

राजू: गाओं में अमित का एक मात्रा दोस्त उम्र 19 खुद को बहुत तीस मारखां समझता है मगर है बुद्धू. अमित क साथ वक़्त गुज़रता है और गाओं की हर खबर इसको रहती है. लड़कियों को ताड़ता रहता है अमित से दोस्ती करवाने क नाम पर लड़किओं से खुद दिल्लगी करता है. मगर है फत्तू

मंजरी: जब से अमित को देखा है तब से उसी पर मरती है मगर अमित इसे भाव नहीं देता अमित क लिए इसने राजू से दोस्ती कर राखी है इस लिए कभी कभी अमित इससे बात कर लेता है मगर बस ज़रूरत क hi लफ्जों क साथ. माजरी रंग से तो ज्यादा गोरी नहीं मगर फिगर से ज़बरदस्त है बूब्स 36 कमर 26 गांड 36 कैसे भी ये अमित से छोड़ना चाहती है मगर वो तो देखता भी नहीं

कहानी में और बहुत से किरदार आएंगे जिनका वक़्त क साथ इंट्रो दिया जायेगा फ़िलहाल कहानी क अभी तक एहि किरदार हैं
 
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अपडेट 2



अमित सुबह की कसरत करके और अखाड़े में पसीना बहाने क बाद घर वापिस आ रहा था रस्ते में उसे राजू मिल गया पूरे गाओं में राजू hi अमित का खास दोस्त था या यूँ कहें एकलौता

राजू : जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक मेरे यार भगवन करे तुझे मेरी भी उम्र लग जाये

अमित : शुक्रिया मेरे यार. साले तुझे मालुम था क आज मेरा जन्मदिन है?

राजू : कैसी बात करता है साले मुझे नहीं पता होगा तो किसे पता होगा वो छोड़ बता आज पार्टी कहाँ और कैसे देगा

अमित : अबे तू जो बोलेगा जैसे बोलेगा वैसे पार्टी करेंगे मगर आज नई कल तुझे तो पता है आज घर पे नाना नानी की बरसी होती है तो उनका शोक मानते हैं सब ऐसे में मेरा जन्मदिन मानना ाचा नई लगता

राजू : ठीक है ठीक है वो मैं जनता हूँ मगर कल कोई बहाना नहीं चलेगा

अमित : हाँ हाँ कल पार्टी पक्का वैसे भी अभी तो छुट्टिआं हैं बोल कहाँ करनी है पार्टी

राजू: गाओं में तो ढंग की कोई जगह है नई मैं सोच रहा था कल सिनेमा देखने शहर चले उधर hi खा पी क मौज कर क वापिस आ जायेंगे शाम तक

अमित : अबे साले मरवाएगा क्या तुझे पता है माँ मुझे कहीं जाने नहीं देती और तू शहर जाने की बात करता है

राजू: देख भाई अब तू पलटी मत मर साल में एक दिन तो अत है उसपे भी तुझ बहाने सूझते हैं मैं कुछ नई सुनूंगा कल शहर चल रहे हैं तो बस चल रहे हैं

अमित : यार तू समझता नई, माँ से क्या कहूंगा क्यों जाना है शहर

राजू : वो तू सोच मुझे कुछ नई पता

अमित: चल कोई रास्ता निकलता हूँ मगर अगर माँ न मणि तो फिर मैं कुछ नई कर सकता पहले hi बोल देता हूँ

राजू : मुझे कुछ नई सुन्ना अगर मुझे दिल से दोस्त मंटा है तो तू कल शहर चलेगा वर्ण मैं समझूंगा मेरी कोई कीमत नई तेरी नज़र में

अमित : एक झापड़ दूंगा मुँह पे कुछ भी बकवास करता है चल मैं करता हूँ कुछ

राजू : हीहीही... कसम से यार तू जब ऐसे गुस्सा करता है बड़ा मज़ा अत है

अमित : दूँ क्या कान क निचे फुल मज़ा आएगा

राजू : अबे नई नई पहलवान मुझे अभी अपने लिए लड़की पत्नी है तू तो ब्रह्मचारी मरेगा मगर मुझे तो शादी करनी है मेरा इतना ख्याल रखा कर

अमित : चल चल ड्रामा बंद कर अब देर हो रही है घर भी जाना है माँ रास्ता देख रही होगी

राजू : ठीक है चल .

फिर दोनों घर की तरफ चल पड़ते हैं दोनों क घर पास में hi हैं . थोड़ी देर में अमित घर पहुँच जाता है घर में सब तैयार बैठे थे और पंडित जी का इंतज़ार कर रहे थे तीनो भाई सफ़ेद कुर्ते पाजामे में थे आज क दिन घर में पंडित जी से हवन करवाते हैं अपने माता पिता की आत्मा की शांति क लिए.

अमित चुप चाप घर में घुसता है और जल्दी से बरामदे से साइड में निकल कर सिडियन चढ़ कर अपने रूम में जाता है तैयार होने अभी अखाड़े की मिटी और पसीने की बदबू उसके जिस्म से आ रही थी. जल्दी से रूम में जाकर कपडे उतर कर बाथरूम में घुस जाता है नहाने के लिए . नहाने क बाद टॉवल बांध कर रूम में अत है तो सामने बीएड पर वाइट कुरता पजामा देख कर समझ जाता है क ये माँ ने आज क लिए रखे है और जल्दी से कपडे पहन कर रूम से बहार निकालता है सीधा माँ क रूम में जाता है

गौरी: आ गया मेरा लाल (कहकर सीधा अमित को गले लगा लेती है और अपनी ममता की बारिश उसपर करती हुई उसके माथे को चूमती है )

गौरी : जग जग जियो मेरे लाल हमेशा खुश रो तुझे मेरी भी उम्र लग जाये जन्मदिन मुबारक हो

अमित : नहीं माँ आपकी उम्र नहीं चाहिए मुझे मैं तो साडी उम्र आपके पास रहना चाहता हूँ

गौरी: खुश रो बीटा . आज इतनी देर कहाँ लगा आया मैं कब से तेरा इंतज़ार कर रही थी तुझे तो पता hi है आज घर पे हवन पूजा भी है और बता आज तुझे क्या चाहिए जन्मदिन पर

अमित : अरे माँ मुझे सब यद् है वो बस रस्ते में राजू मिल गया था बस बैरन में थोड़ा लेट हो गया. और मुझे कुछ नई चाहिए जन्मदिन पर सब तो है मेरे पास फिर क्या मांगू

गौरी: बीटा तू आज 18 साल का हो गया है कुछ तो तेरे दिल में अत होगा कोई तो ख्वाहिश होगी तेरी बता क्या चाहिए तुही

अमित : नहीं माँ मुझे कुछ नहीं चाहिए बस आपका प्यार चाहिए हमेशा हमेशा

गौरी इतना सुनकर फिर से गले लगा लेती है अमित को उसकी आँखे नाम हो जाती हैं और दिल में सोचती है क भगवन ने शायद इसी लिए उसे माँ नहीं बनाया क्यूंकि अमित मेरे लिए hi तो भेजा है भगवन ने

गौरी: चल जल्दी कर पंडित जी आने वाले हैं और जा कर पहले अपने बाबा से बाकि सब से मिल ले सबका आशीर्वाद लेले

अमित : जी माँ मैं अभी जा रहा हूँ

फिर अमित अपने बाबा यानि विजय शंकर क पास जाता है

अमित : बाबा पाऊँ Laage,ashirwad दीजिये मुझे क आप का नाम रोशन करूँ

विजय: आ गया मेरा शेर जग जग जियो खूब तरक्की करो, तुझे देखता हूँ तो सीना छोड़ा हो जाता है मेरा गर्व से पूरे गाओं में क्या आस पास क किसी भी गाओं में तुम्हारे जैसा होनहार संस्कारी लड़का कोई नहीं

अमित : बाबा ये सब आपका और माँ का आशीर्वाद है मैं जो भी हूँ सब आपकी hi तपस्या और आशीर्वाद है

विजय: जीते रो बीटा . बता आज क्या चाहिए मेरे शेर को जन्मदिन पर

अमित : अरे नहीं बाबा सब तो है मेरे पास फिर क्या मांगू, मुझे कुछ नहीं चाहिए बस आप मेरे सर पर अपना हाथ रखो और कुछ नई चाहिए

विजय : मुझे पता है तू यही कहता रहेगा मगर मैंने जो सोचा है वो मैं ज़रूर दूंगा

अमित: बाबा आप यूँही सोच रहे हैं मुझे कुछ नई चाहिए

विजय: वो छोड़ जा जल्दी पहले सब से मिल ले पंडित जी बस आ रहे हैं फिर हवन में बैठना है तुझे हमारे साथ

अमित : जी बाबा मैं अभी जाता हूँ

फिर अमित अपने मंझले मां क पास जाता है जो हवन की व्यवस्था कर रहे थे

अमित: पाऊँ लागे मां जी

अजय: अरे आज्ञा बीटा जीते रो सदा खुश रो बता क्या चाहिए तुझे जन्मदिन पर

अमित : अरे मां जी बस आपका आशीर्वाद hi काफी है और कुछ नई चाहिए

अजय : ऐसे कैसे नहीं चाहिए

इतना कहकर अपनी जेब से कुछ रूपए निकल कर अमित की जेब में दाल देता है अमित मन करता है मगर अजय ज़बरदस्ती पैसे दे देता है . फिर अमित अपने छोटे मां कमलेश क पास जाता है जो क अभी अपने रूम में hi था

अमित : पाऊँ लगे मां जी

कमलेश: आ गया मेरा शेर जन्मदिन मुबारक हो बोल आज क्या तोहफा चाहिए तुझे

अमित : अरे मां जी क्या पहले आपने कोई कमी राखी है जो मानगो कुछ

कमलेश: अरे अब तू जवान हो गया है आज 18 साल का हो गया है बता क्या चाहिए कुछ भी मांग ले

अमित : अरे नहीं मां जी कितना भी बड़ा हो जॉन रहूँगा तो आपका बचा hi

तभी कमलेश की बीवी यानि की दीपिका आ जाती है और हस्ते हुए कहती है

छोटी ममी: आज तो गाओं की सब लड़कियां मर hi जाएँगी हमारे हीरो को देखकर . खेर नहीं किसी की आज, मैं तो कहती हूँ आज आप अमित घर से बहार hi न जाने देना क्या पता किसीकी की लड़की इसे देखकर बेहोश हो गयी आज तो आप को hi बोलेंगे सब गाओं वाले क भांजे को संभल कर रखो

छोटी ममी : हैप्पी बर्थडे अमित मान्य मान्य हैप्पी रिटर्न्स ऑफ़ थे डे और तू अपने मां की जेब ढीली करवा दिल खोल कर तुझसे खर्च नहीं होंगे तो मैं कर लुंगी हीहीहीही

अमित : थैंक्स ममी जी मगर आप ऐसे hi मेरी टांग खींचती रहती हो लड़किओं की बात कर क मुझे नहीं देखना किसी को . और पैसे मेरे पास पहले hi हैं आप सब देते रहते हैं मगर मैं खर्च करूँ भी तो कहाँ ऐसे hi पड़े रहते हैं

छोटी ममी: ( हैरानी से ) क्या.. तू पैसे खर्च नहीं करता . अरे बुद्धू हम तुझे देते हैं खर्च करने को और तू ऐसे रखे रहता है चल बच्चू अब मैं बताती हूँ तुझे क खर्च कैसे करते हैं अगले हफ्ते तू तुझे शहर लेजाकर शॉपिंग करवाती हूँ

कमलेश: ले जाना ले जाना और जितना पैसा चाहिए हो मेरी जेब से ले जाना मगर अभी बातें छोडो पंडित जी आ रहे होंगे चलो जल्दी

फिर तीनो रूम से निकल कर बरामदे में आने लगते हैं तो अमित कामिनी ममी से मिलने का बोलकर उनके रूम की तरफ निकल जाता है

रूम का दरवाज़ा खुला था अमित जैसे hi रूम में घुसने लगता है अचानक वो कामिनी से टकरा जाता है जिससे कामिनी गिर जाती है , कामिनी क हाथ में बर्तन पकडे थे जो कामिनी क ऊपर hi गिर जाते हैं और उसकी साडी गन्दी हो जाती है , कामिनी इस सब से अचानक गुस्से में आ जाती है और कहती है

कामिनी: अँधा है क्या देखकर नहीं चल सकता मेरे कपडे ख़राब कर दिए कितनी बार कहा है सुबह सुबह अपनी मनहूस शकल मुझे मत दिखाया कर, जब भी सामने अत है कुछ न कुछ नुकसान हो जाता है. पता नहीं कब पिच छूटेगा महूस से

अमित ये सुनकर दुखी हो जाता है वो तो आशीर्वाद लेने आया था और ये क्या हो गया उसकी अपनी गलती है क्यों इतनी जल्दी में आया क्या हो जाता देखकर आराम से चलना चाहिए था.

अमित : ममी जी गलती हो गयी माफ़ कर दीजिये मैं तो आपसे आशीर्वाद लेने आया था आज जन्मदिन है मेरा

कामिनी: (गुस्सा से )गलती हो गयी ... अरे गलती तो हमसे हुई है क तुझे इस घर में ले ए ज़िन्दगी नरक बना दी तूने मेरी. और कौन सा जन्मदिन कैसा आशीर्वाद अपने जन्मदिन पर hi अपने नाना नानी को और अपने माँ बाप को खा गया और मुझसे आशीर्वाद मांग रहा है मनहूस कहीं का

ये बात सुनकर मनो अमित का कलेजा फैट गया जैसे उसके कानो में किसी ने जलता हुआ तेल दाल दिया हो उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं मुँह से एक शब्द नहीं निकलता उसकी टाँगे मनो उसका अपना hi वजन उठाने में नाकामयाब हो रही थी उसका दिल किया क अभी उसे धरती निगल ले ये सब बातें अमित क इलावा किसी और ने भी सुन ली थी जो अमित क पीछे hi आ रहा था वो थी अमित की छोटी ममी दीपिका जो कामिनी को लेने hi आ रही थी दरअसल उसे पता था क सुबह सुबह कामिनी को अमित का चेहरा देखना पसंद नहीं आज अमित का जन्मदिन है कहीं कामिनी कुछ उल्टा सीधा न कह दे और वही हुआ जो वो नहीं चाहती थी क हो . दीपिका भाग कर कामिनी को शांत करवाती है

दीपिका: दीदी शांत हो जाइये प्लीज घर में हवन है पंडित जी आ गए हैं किसी ने सुन लिया तो खामखा घर का माहौल बिगड़ जायेगा आप प्लीज शांत हो जाइये. अमित तो चल मेरे साथ और दीदी आप जल्दी आइये बहार

दीपिका जानती थी क कामिनी की बातें सुनकर अमित क दिल पर क्या बिट रही होगी बेचारा बिना किसी कसूर क कामिनी से ऐसी जाली कटी सुनता रहता है मगर अभी फ़िलहाल इसे किसी भी तरह संभालना होगा. अमित को लेके अपने रूम में जाती है

दीपिका: अमित चुप हो जा अब तू छोटा बचा नहीं पूरा गाभरू जवान हो गया है . क्या ाचा लगता है तेरे जैसे हट्टे काटते पहलवान की आँखों में आंसू चुप हो जा

अमित तो बस आँखों से आंसू बहाये जा रहा था मुँह से एक Shan’s नहीं निकल रहा था उसके कानो में कामिनी क शब्द गूँज रहे थे

दीपिका: देख आज तेरा जन्मदिन है आज क दिन कोई रोटा है क्या जल्दी से चुप हो जा अपना हुलिए ठीक कर दीदी ने देख लिया तो पता नहीं क्या होगा प्लीज चुप हो जा

मगर अमित तो जैसे अभी भी उन्ही शब्दों क जाल में फसा हुआ था उसे छोटी ममी की कोई बात सुन hi नहीं रही थी फिर दीपिका अमित को पानी का गिलास पिलाती है

छोटी ममी: अमित प्लीज कण्ट्रोल योरसेल्फ अगर दीदी ने देख लिया तो उनके दिल पे क्या बीतेगी मेरी नहीं तो दीदी की परवाह करले थोड़ी स . क्या बीतेगी उनके दिल पर तुझे यूँ रोटा देखकर तुझे दीदी की कसम चुप हो जा

इतना सुनते hi जैसे अमित नींद से जगता है और अपने आंसू पोंछता हुआ कहता है

अमित: नहीं ममी जी मैं बिलकुल नहीं रोऊँगा माँ को मैं दुखी नहीं देख सकता वो तो मेरा सबकुछ हैं

छोटी ममी : ( थोड़ा हसकर) अच्छाआ मतलब मैं कुछ नहीं . वह भाई वह हम तो यूँही समझ रहे थे क हम भी उनके अपने हैं और वो हमें अजनबी कर गए

इतना सुनते hi अमित क चेहरे पर एक स्माइल आ जाती है वो जनता था क ममी ऐसे hi हंसी मज़ाक करती है सब से. इस लिए अमित मुस्कुरा क कहता है

अमित : ऐसे मत कहो ममी जी आप तो मेरी सब से खास हैं बिलकुल मेरी दोस्त की तरह माँ क बाद आप hi तो हैं जो मेरा इतना ख्याल रखती है

छोटी ममी: बस बस माखन मत लगा जल्दी हुलिया ठीक कर पंडित जी आ गए हैं जल्दी चल वर्ण तेरे साथ मुझे भी दांत पड़ेगी चल जल्दी

फिर हुलिया ठीक कर क अमित और दीपिका पंडित जी क पास आ जाते हैं जहाँ सब पहले hi बैठे थे कामिनी को छोड़ कर

गौरी: अरे छोटी कामिनी कहाँ रह गयी उसे बुला तो जल्दी पूजा शुरू होनेवाली है

इतने में कामिनी भी आ जाती है पंडित जी हवन करते हैं और चले जाते हैं उसके साथ hi अमित सर दर्द का बहाना बना कर अपने रूम में चला जाता है सोने
 
अपडेट 3

इतने में कामिनी भी आ जाती है पंडित जी हवन करते हैं और चले जाते हैं उसके साथ hi अमित सर दर्द का बहाना बना कर अपने रूम में चला जाता है सोने

अब आगे-

अमित अपने कमरे में सो रहा था तीनो भाई अपने अपने काम निकल गए उसके बाद तीनो औरतें मिल कर दोपहर का खाना बनाने लगती हैं गौरी क मन में अमित की तबियत को लेकर चिंता थी िसिये वो देखने जाती है उसके रूम में मगर अमित सो रहा था गौरी दूर से hi उसे सोता देखकर लोट अति है

वहीँ दीपिका क मन में एक hi बात चल रही थी क

आखिर क्या वजह है जो कामिनी इतनी नफरत करती है अमित . मन hi मन उसने फैसला कर लिया था क वो पता लगा क रहेगी पहले भी कई बार उसने पुछा था मगर कभी सही जवाब नहीं मिला कोई तो बात ज़रूर है जो कामिनी इतना कोसती है अमित को वर्ण अमित इतना प्यारा है क कोई उससे नफरत कर hi नहीं सकता इतने मासूम लड़के को आखिर कामिनी क्यों मनहूस बोल बोल कर इतनी मानसिक पीड़ा देती है.

तभी उसके मन में अत है क अमित को आज बहुत बुरा लगा था बेचारा किसी से अपने मन की पीड़ा कह भी तो नहीं सकता कितना दर्द था आज उसकी आँखों में कहीं किसी दिन कोई गलत कदम न उठा ले उसीकी की वजह से घर में थोड़ी बहुत रौनक है अगर उसने कुछ गलत कर लिया तो हम सबका क्या होगा

दीपिक:( खुद से) नहीं नहीं मैं उसे ऐसा नहीं करने दूंगी मैं उसे समझाउंगी उसका कोई दोस्त नहीं मैं उसकी दोस्त बनूँगी उसके मन को पड़ना होगा और उसे समझाना होगा

इतना सोचकर दीपिका इरादा कर लेती है क अब से वो अमित क साथ दोस्त बनकर रहेगी ताकि वो अपने मन से साडी बातें बहार निकल सके दोपहर का खाना बना कर फ्री हो कर दीपिका पहले कामिनी क पास जाती है ताकि सच जान सके मगर इस बार भी कामिनी कोई सही जवाब नहीं देती फिर वो उठकर अमित को देखने जाती है अभी तक अमित दोपहर का खाना खाने भी नई निकला था कमरे से . जब दीपिका अमित क रूम में जाती है देखती है अमित आँखें बंद किये सो रहा है वो वापिस पलटने को होती है क उसका ध्यान अमित की आँखों पर जाता है उसकी पलकें थोड़ी गीली थी मतलब क वो रो रहा था यानिकि वो सोया नहीं है सोने का नाटक कर रहा है . एक डैम से दीपिका दरवाज़ा बंद कर क अमित क पास बीएड पर बैठ जाती है और उसे आवाज़ देती है

दीपिका : वह जी वह जनाब लम्बी तान क सोये पड़े हैं बर्थडे की पार्टी देने क बजाये बहाना बना कर नींद पूरी की जा रही है , चल चल बहुत हो गया ड्रामा मुझे पता है तो जग रहा है

इतना कहकर वो अमित क बालों में हाथ फेरती है

मगर अमित कोई रिस्पांस नहीं देता उसे लगता है अगर वो जवाब नहीं देगा तो खुद hi छोटी ममी लोट जाएगी मगर दीपिका तो जान गयी थी

दीपिका: चल उठ भी जा मेरे शेर और मुझे पार्टी दे मैं कोई बहाना नहीं सुनूंगी ये ड्रामा दीदी क आगे करना मुझे पता है तू जाग रहा है

ये सुनकर अमित सोचता है क ममी को कैसे पता चला मगर फिर सोचता क ऐसे hi बोल रही होगी

दीपिका: उठता है या दीदी को बुलाकर लॉन और वो खुद देखले क उनका लाडला जन्मदिन पर रो रहा है

इतना सुनकर अमित एकदम उठ जाता है

अमित : नहीं नहीं ममी जी माँ को मत बुलाना

दीपिका: फिर रो क्यों रहा है तुझे समझाया था न मैंने फिर भी तू बच्चों क जैसे रोये जा रहा है अगर दीदी की इतनी hi चिंता है तो खुद को संभालता क्यों नहीं अगर उन्हें पता चला तो क्या बीतेगी उनपर

अमित : तो आप hi बताओ ममी जी मैं क्या करूँ आखिर मेरा कसूर क्या है जिसकी मुझे इतनी सजा दी जा रही है क्यों कामिनी ममी मुझे मनहूस कहती रहती है क्यों मुझे धुत्कारती है क्यों वो मेरा चेहरा देखना भी पसंद नहीं करती मैं तो हमेशा उन्हें माँ क सामान hi इज्जत दी है फिर किस लिए मेरे साथ ऐसा सलूक हो रहा है मेरा दिल करता है मैं मर जॉन या कहीं दूर चला जॉन जहाँ कोई मुझे पहचान भी न सके

इतना कहकर अमित फुट फुट कर रोने लगता है और दीपिका आगे बढ़कर उसे गले से लगा कर चुप करवाती है

दीपिका : कभी सोचा है तेरे जाने क बाद दीदी का क्या होगा जिसका दिन शुरू नहीं होता तेरे बगैर जिसको नींद नहीं अति जब तक तू न सो जाये जो हर वक़्त तेरे बारे में hi सोचती रहती है, क्या होगा जिन्हे तू बाबा कहता है जो आज तुझे देखकर सीना छोड़ा किये फिरते हैं क्या होगा तेरे अजय मां तेरी छोटे मां का इस घर की खुशिओं की ज़रा भी परवाह नहीं तुझे . तू इतना सेल्फिश कब से हो गया कभी सोचा है क मुझ पर क्या बीतेगी क मैं सब जानकर भी चुप रही और तुझे समझा नहीं पायी

अरे गुस्सा नाराज़गी तो हर रिश्ते में होता है मगर हमें तो उसे दूर करने की कोशिश करनी चाहिए ऐसे दूर चले जाने से रिश्ते टूट जाते हैं. वो इंसान hi क्या जो दूसरों की गलती को माफ़ न कर सके और तू तो इतना समझदार है फिर भी ऐसी बातें कर रहा है

अमित: (रट हुए) मैं भी तो इंसान हूँ ममी जी पत्थर तो नहीं जब से होश संभाला है कामिनी ममी ने कभी हसकर मुझसे एक शब्द भी न बोलै हर वक़्त बस नफरत भरी निगाहों से देखती है कब तक मैं बर्दाश्त करूँ आखिर कब वो मुझे है क गले लगाएंगी कब मुझे अपना बीटा कहेंगी आखिर मेरा गुनाह क्या है काम से काम इतना तो बतादे फिर चाहे जान भी लेले मुझे गम न होगा

दीपिका: यही तो मैं भी जानना चाहती हूँ क आखिर वजह क्या है . वैसे तो कामिनी दीदी दिल की इतनी अछि हैं फिर क्यों तुम्हारे साथ hi इतना बुरा सलूक करती हैं और जब भी वजह पूछूं बताती भी नहीं है. कौन बता सकता है आखिर वजह क्या है बड़ी दीदी को भी कुछ नहीं पता आखिर ऐसा क्या राज़ है

एनीवे वो सब छोड़ और तू आज सुबह कह रहा था क तेरे दोस्त नहीं और तू मुझे दोस्त समझता है तो चल आज से हम दोस्त बन जाते हैं, बोल करेगा दोस्ती

अमित: ( मुस्कुरा कर) क्या ममी, आप मेरी टांग खींचने क लिए बोल रही हैं , आप कैसे दोस्त बन सकती हैं आप तो मेरी ममी हैं मैं तो बस दोस्त की तरह आपसे बात करना चाहता हूँ

दीपिका :( मज़े लेते हुए) ाचा वैसे बातों क इलावा और क्या करना चाहता है तू दोस्त क साथ

अमित: (शर्मा जाता है) जाओ मैं आपसे बात नई करता आप मेरी टांग खींचने आ गयी हैं सब छोड़कर भला और क्या करते हैं दोस्तों क साथ

दीपिका: ( हस्ते हुए) लो भाई दोस्त बनाने चला है और इतना भी नहीं पता क दोस्त क साथ क्या करते हैं. अरे बुद्धू दोस्तों क साथ सिर्फ बातें hi नहीं होती, हंसी मज़ाक भी होता है लड़ाई झगड़ा भी होता है, कोई रूठता है कोई मनाता है, मस्ती करते हैं घूमते हैं पार्टी करते हैं और शॉपिंग भी करवाते हैं, और आज से हम दोस्त हैं तो सबसे पहले तू आज मुझे जन्म दिन की पार्टी देगा और शॉपिंग भी करवाएगा वो भी शहर से

अमित सर पर हाथ रखकर

अमित : हे भगवन इतना कुछ मुझे तो लगता है क आप की दोस्ती बहुत मेहेंगी पड़ने वाली है. न बाबा न माफ़ करो

दीपिका: ( हस्ते हुए ) बस दर गया निकल गयी हवा दोस्त बनाने हैं इतना पता है और कुछ नई अत

तू टेंशन न ले हमारा सब कुछ तेरा hi तो है जितने चाहिए मुझसे लेलेना पैसे

अमित : कैसी बात करती हो ममी जी मैं तो ऐसे hi बोलै था वैसे भी जो आप सब मुझे देते रहते हैं पैसे मैं वो भी कहाँ खर्च कर पता हूँ, बोलिये आप कब चलना है शॉपिंग पर

दीपिका: (हस्ते हुए ) ये हुई न बात पहले तो हुलिया ठीक कर और चल खाना खले फिर आगे का प्लान करते हैं . जल्दी अजा मैं खाना लगाती हूँ

इतना कहकर दीपिका चली जाती है और अमित भी तैयार हो कर खाना खाने निचे आ जाता है

खाना दोनों मिलकर कहते हैं तभी गौरी भी आ जाती है

गौरी: अब तबियत कैसी है बीटा

आकर अमित क माथे पर हाथ लगा कर चेक करती है

अमित : बिलकुल ठीक जस्ट हल्का सा सर दर्द था अभी एक डैम फ्रेश हूँ

इतना कहकर मुस्कुरा देता है

गौरी: (नकली गुस्सा दिखाकर दन्त ते हुए) किसने कहा है इतनी सुबह सुबह जाकर अखाड़े में कसरत करने को, सूरज बाद में निकलता है तू पहले निकल जाता है , कपडे निकल कर नंगा घूमता है उधर नज़र लग गयी होगी इसी लिए सर दर्द हुआ होगा

दीपिका को देखते हुए जा छोटी रसोई से मिर्ची लेकर आ इसकी नज़र उतारें पहले पता नई किसने नज़र लगा दी मेरे बेटे को

दीपिका: ( हस्ते हुए ) अरे दीदी मिर्ची से क्या होगा आपका बीटा इतना हैंडसम है क हर कोई इसे नज़र hi लगाएगी मैं तो कहती हूँ एक काम और भी करो आप

गौरी: ( हैरानी से देखकर ) वो क्या

दीपिका: इसके गले में निम्बू मिर्ची दोनों लटका दो ताकि नज़र न लगे

गौरी: ठहर तू ज़रा मेरे बेटे का मज़ाक उड़ाती है अभी बताती हूँ तुझे

इतना कहकर दीपिका को पकड़ने को होती है तो दीपिका उठकर रसोई में भाग जाती है

अमित :अरे माँ तुम भी क्या बाटे करती हो ऐसा कुछ नई है आओ बैठो मेरे पास, बताओ आज मेरा जन्मदिन है तो क्या लॉन आपके लिए बाजार से

गौरी: अमित क बालों में हाथ घुमाकर) आज तो तेरा जन्मदिन है तू बोल क्या चाहिए तुझे , मेरा पेट तो तुझे देखकर भर जाता है

अमित कसकर गौरी को गले लगा लेता है और मन में सोचता है सच में कितना प्यार माँ क दिल में अगर मैं कहीं चला गया तो कैसे रहेगी मेरे बिना

तभी दीपिका मिर्ची लेकर आ जाती है और उससे मिर्ची लेकर गौरी अमित की नज़र उतरती है . गौरी मिर्ची लेकर रसोई में चली जाती है

दीपिका: तो बता क्या प्लान है , करवाएगा मुझे शॉपिंग आज

अमित : अब तो जाना मुश्किल है अब अगर गए तो बस में आने जाने में रत हो जाएगी फिर किसी दिन का प्रोग्राम बनाते हैं

दीपिका : हम्म बात तो सही है अगर अपनी गाड़ी होती तो बात और थी बस में आना जाना बहुत टाइम ख़राब करने वाला काम है

तू एक काम क्यों नहीं करता बाइक चलना सिखले मैं तेरे मां को बोलकर तुझे बाइक दिलवा देती हूँ

अमित : ममी जी अब इतनी सी बात क लिए क्यों बाइक लेनी बस है तो सही शहर जाने को

दीपिका: वैसे अगर गाडी चलना सिख लेगा तो क्या चला जायेगा तेरा कहीं कभी मुश्किल पद जाये तो काम आ जाता है

अमित : हम्म बात तो आपकी भी सही है, मैं सिख लूंगा किसी से आप चिंता न करो मगर अभी बाइक नहीं लेनी मैंने अभी इस साल पड़े का बोर्ड का साल है 12तह का ये पास कर क लूंगा बाइक

दीपिका: पढाई तो होती रहेगी मैं हूँ न जब कभी ज़रूरत हो मुझसे पूछ लिया कर मगर अब जल्दी से बाइक सिख और फिर बाइक लेनी है थॉट्स फाइनल और बहस नहीं

अमित : हाथ जोड़ते हुए) जो आज्ञा माते

और दोनों हसने लगते हैं तभी गौरी आ जाती है

अमित : माँ मैं कल शहर जाना चाहता हूँ राजू क साथ

गौरी: क्यों क्या हुआ क्या काम आ गया वहां पर

अमित: ( हड़बड़ा कर) वो वो वो माँ वो राजू की मौसी की बेटी की तबियत थोड़ा ख़राब है उसका पता लेने जाना है

गौरी : बीटा तो इसमें तुम्हारा क्या काम राजू क माता पिता चले जायेंगे

अमित को कोई जवाब नहीं सूझता तो अमित दीपिका की तरफ रिक्वेस्ट भरी नज़रो से देखता है, दीपिका समझ जाती है क बात कुछ और है अमित बता नई प् रहा

दीपिका: अरे दीदी जाने दो न होगी कोई बात क राजू क माता पिता न जा प् रहे हों, दोनों दोस्त हैं और जवान हैं होकर आ जायेंगे , वैसे भी दुनिआ देखने दो इसे अगर पल्लू से बाँध कर रखोगी तो दुनिआ को कैसे समझेगा

गौरी: रहने दू तू ज्यादा तरफदारी मत कर, और क्या दुनिआ देखेगा शहर में कैसे कैसे लोग रहते हैं ये कितना भोला है किसी ने कुछ कर दिया तो, देखा नहीं कैसे नज़रें लगा देते हैं गाओं क hi लोग इसे , शहर वाले तो खा hi जायेंगे मेरे चाँद से बचे को

दीपिका: ो हो दीदी आप न अमित को बुधुराम बना डौगी अगर ऐसे hi रहा तो कोई भी इसे बेवकूफ बना कर लूटकर चला जायेगा, मैं कहती हूँ अभी से इसे दुनिआ देखने दो 18 साल का तो हो गया है क्या साडी उम्र ऐसे hi रखोगी इसे

गौरी थोड़ा नाराज़ होते मानते हुए आखिर हाँ कर hi देती है मगर एक कंडीशन क साथ क दोपहर तक वापिस आना होगा और अमित भी हामी भर देता है . माँ से इजाज़त मिलने क बाद अमित ये बात राजू को बताने निकल पड़ता है

पीछे से गौरी दीपिका से कहती है

गौरी: देख छोटी तेरे कहने पर मैंने इजाज़त तो देदी है मगर मेरा दिल नहीं मंटा

दीपिका: अरे दीदी भरोसा रखो हमारा बीटा कभी कुछ गलत नहीं करेगा और न hi उसके साथ कुछ गलत होगा हमारा प्यार है न उसकी हिफाज़त करने को आप उसे थोड़ा दुनिआ को भी देखने का मौका दो ताकि वो सब समझ सके दुनिआ को देखकर

उधर अमित राजू को मिलने जा hi रहा था क राजू बहार hi मिल गया

अमित : अरे तू बहार hi रहता है क्या हमेशा या घरवालों ने निकल दिया

राजू: हाँ हाँ तू तो मुझे घर से hi निकलवाना चाहता है

अमित: अबे चुप नौटंकी न कर, ाचा सुन मैं बताने आया था क माँ से मंजूरी मिल गयी है कल सुबह शहर जाने की

राजू : ( ख़ुशी से उछलकर) हुर्रे .. अब आएगा मज़ा अपनी तो निकल पड़ी कल खूब मस्ती करेंगे

अमित : अबे इतना मत उछाल एक कंडीशन भी है दोपहर तक वापिस आना है इसलिए जल्दी निकलना पड़ेगा

राजू : वो बाद में देखेंगे तू रुक मैं अभी आया

इतना कह कर राजू भाग जाता है

राजू से मिलकर अमित घर आ जाता है, हल में कोई नहीं था तो अमित अपने रूम में चला जाता है थोड़ी देर में hi दीपिका वहां आ जाती है

दीपिका :क्या चल रहा है किधर जा रहा है कल, डेट आते है क तेरी किसी क साथ, बता मुझे मैं तुझे गाइड करुँगी

अमित : (शर्मा कर) क्या ममी आप फिर टांग खींचने लगी, आपको पता तो है लड़की क्या मैं तो किसी लड़के से भी बात नई करता

दीपिका: अरे बुद्धू यही तो उम्र है दोस्त बना और गर्लफ्रेंड भी बना और नहीं तो बूढ़ा होकर बनाएगा

अमित: मुझे नहीं ज़रूरत किसी की आप हैं तो सही मेरे पास मैंने और किसी को क्यों दोस्त बनाना है

दीपिका: ( मज़े लेते हुए ) ाचा तो क्या गर्लफ्रेंड भी मुझे hi बना लेगा बेशरम

अमित : क्या मामी आप भी, मुझे नहीं चाहिए कोई गफ

दीपिका: क्यों ! क्यों नहीं चाहिए ज़िन्दगी भर क्या अकेला hi रहना है

अमित: मैं कहाँ अकेला हूँ आप सब हैं तो मेरे पास

दीपिका : चल ये छोड़ अब बता क कल कहाँ जा रहा है और किसके साथ और क्या करने

अमित : ाचा तो आप ये पता लगाने आयी हैं, वैसे मैं कल राजू क साथ शहर जा रहा हूँ उसे सिनेमा दिखाना है , मेरे बर्थडे की पार्टी देनी है उसे

दीपिका: हम्म तो जनाब अकेले अकेले पार्टी देते फिरते हैं और हमे पूछते भी नहीं

अमित : अरे ऐसी बात नहीं आपको भी दूंगा न कल आते वक़्त आपके लिए और बाकि सब क लिए कुछ न कुछ लेता आऊंगा . आप बस हुकम कीजिये

दीपिका : रहने दे रहने दे दूसरों को फिल्म दिखता है और मुझे समोसा खिला कर सस्ते में निपटना चाहता है ऐसे नहीं चलेगा

अमित: तो बताइये फिर क्या चाहिए

दीपिका: मुझे भी मूवी देखने जाना है मगर अभी तू राजू क साथ फिर किसी दिन चले जायेंगे

अमित : ठीक है ममी जी जो हुकम

इसके बाद और इधर उधर की बातें करने क बाद दीपिका अपने रूम में चली जाती है

वहीँ दूसरी और राजू अमित से मिलकर भागता हुआ मंदिर क पास जाता है किसी से मिलने और कहता है कल वो मेरे साथ सुबह 7 बजे की बस में चलेगा तुम टाइम से सही जगह पहुँच जाना , और हाँ! मेरा काम भी हो जाना चाहिए तुम्हारा तो मैंने कर दिया अब अगर मेरा काम न बना तो भूल जाओ सब इतना कहकर राजू वहां से निकल जाता है और वो दूसरा शख्स खुश हो कर कल का प्लान बनाने लगता है क ऐसा मौका फिर नहीं मिलेगा कल कैसे भी कर क अपना काम करना होगा
 
अपडेट 4

वहीँ दूसरी और राजू अमित से मिलकर भागता हुआ मंदिर क पास जाता है किसी से मिलने और कहता है कल वो मेरे साथ सुबह 7 बजे की बस में चलेगा तुम टाइम से सही जगह पहुँच जाना , और हाँ! मेरा काम भी हो जाना चाहिए तुम्हारा तो मैंने कर दिया अब अगर मेरा काम न बना तो भूल जाओ सब इतना कहकर राजू वहां से निकल जाता है और वो दूसरा शख्स खुश हो कर कल का प्लान बनाने लगता है क ऐसा मौका फिर नहीं मिलेगा कल कैसे भी कर क अपना काम करना होगा

अब आगे-

सुबह अमित उठ कर अपनी रूटीन से अखाड़े में जाता है मगर आज वक़्त से पहले लौट अत है क्यूंकि आज राजू क साथ शहर जाना था घर आ कर जल्दी से तैयार होता है गौरी को भी मालूम था जल्दी जायेगा तो उसके लिए नाश्ता पहले hi से बना देती है नाश्ता कर क अमित घर से निकलने को त्यार होता है क गौरी उसे अपने कमरे में बुलाती है

गौरी: अमित ये ले कुछ पैसे रखले खली हाथ जायेगा क्या शहर

इतना कहकर वो अमित की जेब में पैसे दाल देती है

अमित : माँ इसकी कोई ज़रूरत नहीं है मेरे पास तो पहले hi इतने पैसे हैं मैं भला क्या करूँगा इतने पैसों का

गौरी: बस चुप कर जो बोल रही हूँ वो सुन वहां जाकर कहीं आवारागर्दी मत करना किसी अनजान आदमी से ज्यादा बात नई करना न किसी कुछ लेकर खाना और हाँ अगर वक़्त हो तो अपनी मौसी क यहाँ भी चक्कर लगा आना

अमित: ठीक है माँ जो हुकम मगर मौसी क यहाँ नई जा पाउँगा अगर वहां गया तो रात हो जाएगी एते एते

गौरी : ाचा ाचा रहने देना मगर टाइम से वापिस आ जाना

अमित: ठीक है माँ अब चलता हूँ

इतना कहकर अमित रूम से निकलता है तभी छोटी मामी मिल जाती है

दीपिका: अमित बात सुन, ये ले कुछ पैसे रखले और अचे से पार्टी देना अपने दोस्तों को कोई कंजूसी नई

इतना कहकर वो अमित की जेब में पैसे दाल देती है

अमित : अरे ये क्या ममी पहले hi माँ ने इतने पैसे दे दिए हैं और मेरे पास अपने भी तो हैं

दीपिका: बस बस पता है मुझे, पैसा जितना हो ाचा है. और हाँ टाइम से लौट आना ये न हो दीदी तेरे पीछे शहर hi न पहुँच जाये

फिर अमित घर से निकल कर राजू की तरफ जाने लगता है तो राजू सामने से अत हुआ दीखता है और दोनों दोस्त बस स्टॉप की तरफ निकल पड़ते हैं

बस स्टॉप पर कोई खास भीड़ नहीं थी इस टाइम में बस में नार्मल hi भीड़ होती थी दोनों दोस्त बस पकड़ लेते हैं और अपनी सीट पर बैठ जाते हैं अमित की नज़र मंजरी पर पड़ती है जो आज खूब तैयार हो कर लाल सलवार सूट में अपनी सहेली क साथ बैठी थी एक पल तो अमित की नज़र उसपर रुक गयी आज वो बहुत खूबसूरत लग रही थी. अमित जनता था क मंजरी उसे पसंद करती है मगर अमित क दिल में ऐसा कुछ नई था, उधर मंजरी भी अमित को देख रही थी जब दोनों की नज़र मिलती है तो दोनों मुस्कुरा देते हैं

अमित : अबे सेल मंजरी इतनी सुबह कहाँ जा रही है तैयार हो कर

राजू : देख भाई बुरा मत मन्ना जो भी बोलना हो बाद में बोल लेना दरअसल मैं मंजरी की सहेली रेनू को पसंद करता हूँ और उससे शादी करना चाहता हूँ, बड़े हाथ पेअर जोड़कर मैंने मंजरी को मनाया है क तू अपने जन्मदिन की पार्टी दे रहा है और तूने मंजरी को भी बुलाया है और रेनू को साथ लेन को कहा, तू तो जनता है उसका बाप साला उसे घर से कहीं बहार निकलने नई देता तो किसी तरह मंजरी की हेल्प से आज मैं अपने दिल की बात करने वाला हूँ रेनू से, अब अपने यार की ख़ुशी क लिए तू इतना भी नई कर सकता

( दरअसल कल राजू भागकर मंजरी क पास hi गया था उसने मंजरी की हेल्प का सौदा किया था अमित क साथ उसकी सेटिंग करवाने में बदले में मंजरी राजू की सेटिंग रेनू से करवाएगी)

अमित: चुप सेल बंद कर अपना इमोशनल ड्रामा तू अपने चक्कर में मुझे क्यों फसा रहा है तुझे पता है न मैं लड़कियों से दूर रहता हूँ और तू मेरा नाम लेकर मंजरी को बुला लिया, क्या तेरे को नई पता वो कैसे मुझे देखती है अब तो वो समझेगी क मैंने उसे बुलाया मतलब मैं उसे पसंद करता हूँ

राजू: देख भाई अगर वो तुझे पसंद करती है तो तू भी उसे पसंद कर ले न वैसे भी उससे खूबसूरत लड़की पूरे गाओं में नहीं, कब तक ब्रह्मचारी बना फिरेगा यही तो दिन है जवानी क , मैं तो बोलता हूँ तू भी उसे आज लपक ले वो तो कब से तैयार बैठी है एक तू है ऐसे hi भाव खाये जा रहा है

अमित : बकवास बंद कर तुझे पता है न मैं इन सब बातों में नहीं पड़ने वाला

राजू: यार देखले मेरी ज़िन्दगी का सवाल है मैं रेनू से शादी करना चाहता हूँ अब अगर तू मेरी मदद नई करेगा तो और कौन करेगा

वैसे भी मंजरी कौन सा तुझे खा जाएगी बातें hi तो करनी है मुझे थोड़ा वक़्त मिल जायेगा रेनू से बात करने का

अमित: ाचा ठीक है मगर गाओं में अगर किसी को पता चल गया तो सोचा है कितनी बदनामी होगी मेरे घरवाले मुझे घर से निकल देंगे

राजू: अरे गाओं में किसी को कुछ पता नई चलेगा वो अलग जा रही हैं हम अलग हम सीधा सिनेमा में hi मिलेंगे

अमित : चल ठीक है यारी क नाम पर ये भी मंज़ूर है मगर अगर कोई लफड़ा हुआ तो अपना सोच लेना

राजू: (हसकर) तेरे लिए जान हाज़िर है मेरे यार

यूँ hi बातें करते हुए एक घंटे में बस रूकती चलती शहर पहुँच जाती है फिर दोनों दोस्त और दोनों सहेलियन अलग अलग ऑटो से सिनेमा पहुँच जाती हैं अमित टिकट लेने क लिए लाइन में लगता है तो देखता है मंजरी भी टिकट की लाइन में थी अमित राजू को इशारा कर क मंजरी को टिकट लेने से रोकने को कहता है फिर अमित टिकट्स ले कर राजू क साथ मंजरी की तरफ जाता है

मंजरी: ( मंजरी आज गुलाब की तरह खिली खिली लग रही थी लाल सूट में वो आज पक्का इरादा कर क आयी थे क आज अमित से दिल का हाल बयां कर क hi रहेगी , अमित को गुलाब का फूल देते हुए)

जन्मदिन मुबारक हो भगवन करे आप हमेशा यूँही हस्ते खेलते रहें आपको वो हर ख़ुशी मिले जो आप चाहते हैं

अमित : ( थोड़ा नर्वस हो जाता है क क्या कहे क्या करे) शुक्रिया मंजरी इसकी क्या ज़रूरत थी तुम इतना रिस्क लेकर क्यों आयी शहर अगर किसी को पता चला तो कितनी बदनामी होगी

मंजरी : तो क्या हुआ आपका जन्मदिन था तो कैसे न अति आपके लिए सब कबूल है

अमित हैरानी से मंजरी को देखने लगता है , तभी राजू बिच में बोलता है

राजू : चलो यार जल्दी करो नहीं तो पिक्चर निकल जाएगी

फिर चरों अंदर हॉल में जाते हैं सुबह का शो था इसलिए ज्यादा रश नई था चरों की सीट साथ में hi थी पहले अमित बैठ जाता है उसके साथ मंजरी बैठ जाती है फिर रेनू फिर राजू, अमित राजू की तरफ देखता है तो राजू आँखों से रिक्वेस्ट करता है इशारे से, अमित भी चुप कर क बैठ जाता है. मंजरी क दिल में आज खुशिओं की शहनाइयां बज रही थी जाने कब से वो अमित क साथ वक़्त बिताना चाहती थी ताकि वो अपना हाल -e-dil बयां कर सके पता नई कब से वो अमित को अपना सब कुछ मन चुकी थी और एक अमित था क उसे इग्नोर करता रहता था

थोड़ी देर में लाइट्स बुझ जाती हैं और मूवी शुरू हो जाती है ये एक रोमांटिक लव स्टोरी की हिंदी मूवी थी और आप तो जानते हैं क बॉलीवुड की फिल्मो में किश करना तो आम बात है ऐसे hi फिल्म में जब किसिंग सन अत है हीरो हीरोइन क लबों पर अपने लैब रखता है तो अमित क दिल में हलचल होने लगती है आखिर था तो वो भी गाभरू जवान वहीँ मंजरी क दिल में भी तूफ़ान उठने लगते हैं उसकी आँखों में लाल डोरे आने लगते हैं और वो अचानक अमित का हाथ कास क पकड़ लेती है

अमित मंजरी को देखता है दोनों की निगाहें मिलती हैं दोनों में से कोई नहीं बोलता मगर दोनों क hi दिल मचल रहे थे अमित अपना चेहरा सीधा कर लेता है और खुद को कण्ट्रोल करने लगता है ऐसे hi थोड़े बहुत गरमा गर्म सन फिल्म में एते हैं और इंटरवल हो जाता है अमित सबके खाने क लिए स्नैक्स लता है थोड़ी देर में मूवी फिर स्टार्ट हो जाती है . थोड़ी देर क बाद फिल्म में एक बैडरूम सन अत है जिसे देखते देखते अमित का प्राइवेट part अकड़ने लगता है और मंजरी का भी बुरा हाल था वो भी कामवासना में जलने लगी थी अमित बस ऑंखें बंद कर क खुद को संभालता है मंजरी का हाथ अभी भी अमित क हाथ पर था

ऐसे hi वक़्त बिट जाता है मूवी ख़तम हो जाती है चरों बहार एते हैं अमित भगवन का शुक्रिया ऐडा करता है क फिल्म ख़तम हुई

राजू : क्यों कैसी लगी पिक्चर तुझे

अमित: ( गुस्से से देखकर) बकवास

राजू : मुझे तो बहुत मज़ा आया इतना बोलकर वो रेनू को देखता है और रेनू शर्मा जाती है

अमित समझ जाता है क राजू ने कुछ तो किया है मगर चुप रहता है वहीँ मंजरी चुप थी और अमित को देख रही थी

अमित : अब चलें घर

राजू: अबे पार्टी तो अभी रहती है न चल कुछ खा पीकर एते हैं

अमित गुस्से से राजू को देखता है मगर राजू फिर रिक्वेस्ट करता है इशारे से

अमित : बता फिर कहाँ चलें क्या खाना है

राजू: मंजरी रेनू तुम भी तो बताओ क्या करना है कहाँ चलना है

मंजरी : शहर क बारे में हमें क्या मालूम आप hi देखलो

फिर चरों एक ऑटो करते हैं उसे बताते हैं क किसी अचे से रेस्टोरेंट में छोड़ दे

फिर चरों रेस्टोरेंट में जा कर थोड़ा बहुत खा कर वापिस चलने का इरादा करते हैं

मंजरी दिल में सोच रही थी क कैसे बात कहे अपने दिल की मगर अमित था क उसे देख hi नहीं रहा था तभी मंजरी राजू और रेनू को इशारा करती है तो रेनू बाथरूम जाने का बोलकर उठ जाती है और राजू भी उठ जाता है उनके जाते hi मंजरी अपनी कमीज से हाथ डालकर एक कागज़ निकल कर अमित को देती है और कहती है क एक बार पढ़ लेना प्लीज इतना मुझ पर एहसान कर देना

अमित अवाक् सा उसे देखता रहता है मगर मंजरी क मासूम चेहरे को देखते हुए उसकी आँखों में इल्तेज़ा की नज़र देखकर वो कागज़ पकड़कर जेब में रख लेता है. मंजरी को थोड़ी तसल्ली होती है क अमित ने कागज़ पकड़ लिया मतलब उसका चांस है क्या पता उसका प्रेम पात्र पढ़कर अमित को उसपे तरस आ hi जाये

इस पात्र में मंजरी ने अपने दिल का सारा हाल बयां कर दिया था कितने हफ़्तों से लिख लिख कर कागज़ फाड़ फाड़ कर फाइनली एक प्रेम पात्र लिखा था, इतने ज्यादा जज़्बात उसने लिख दिए थे शब्दों में क कोई पत्थर भी हो तो पिघल जाये मगर अमित पिघलेगा क नहीं ये पता नई

थोड़ी देर में रेनू और राजू आ जाते हैं और बिल अमित पाय करता है फिर सब निकल पड़ते हैं बस स्टॉप की तरफ . यहाँ से बस स्टॉप दूर नहीं था इसलिए पेडल hi निकल लिए

अभी रस्ते में जा hi रहे थे एक गली से से एक औरत क चीखने की आवाज़ अति है

औरत: बचाओ नाचोस कोई मेरी मदद करो आअह्ह्ह्ह

बचाओ बचाऊओऊ

अमित आवाज़ सुनकर आवाज़ की दिशा में भागता है गली सुनसान थी और आगे से बंद थी इस तरफ कोई घर दुकान कुछ भी नहीं था शायद किसी होटल की बक्सीडे थी,

अमित तेजी से भागता हुआ जाता है तो एक अँधेरे कोने में उसे तीन गुंडे दीखते हैं जो एक औरत पकडे हुए थे उनके हाथों में चाकू थे वो कोई लुटेरे लग रहे थे जो औरत से चाकू की नोक पर गहने उतरवा रहे थे

अमित तेजी से भागते हु रस्ते में पड़ी हुई एक ईंट उठा कर मरता है जो सीधा एक गुंडे क सर में लगती है और खून की धार उसके सर से फुट पड़ती है

दूसरा गुंडा चाकू लेकर अमित को मरने को होता है क अमित उसका बाजु हवा में hi पकड़ लेता है और बाजु मरोड़ कर उस गुंडे को दूसरे हाथ का इस्तेमाल कर क हवा में उठा क पटक देता है

तभी तीसरा गुंडा तेजी से चाकू लेकर हमला करता है और एक वॉर उसका अमित क बाजु पर लग जाता है मगर अमित तो पहलवान था वो इसकी परवाह किये बगैर तीसरे गुंडे को भी पकड़ कर जोर से दिवार में उसका सर मर देता है और वो भी ढेर हो जाता है

तीनो को निपटा कर अमित औरत की तरफ मुड़ता है वो देखता है क सामने एक हुसैन की देवी कड़ी है बिलकुल दूधिए रंग चमकता चेहरा शरबती आँखें उस औरत को देखकर तो अमित को हेमामालिनी यद् आ गयी ड्रीम गर्ल क्या ज़बरदस्त फिगर था साडी में तो और भी हसीं लग रही थी बाल सर पर बंधे हुए थे उम्र का अंदाज़ा लगाना मुश्किल शायद 30 क अस्सपस्स की होगी

अमित एक तक उसे देख रहा था

औरत : ( मन में इसका चेहरा मुझे अपना सा क्यों लग रहा है आखिर कौन है ये ऐसे लग रहा है ये मेरा अपना है) शुक्रिया बेटे तुमने मेरी जान बचायी मैं बहुत एहसान मंद हूँ , क्या नाम है तुम्हारा?

अमित : ( होश में अत हुआ) जी जी वो अमित मम है मेरा

और प्लीज आप शुक्रिया मत कहिये एक तरफ मुझे बीटा बोल रही हैं और फिर शुक्रिया कहकर मुझ पर पाप चढ़ा रही हैं

औरत : तुम वाकई एक अचे और संस्कारी घर से हो यकीनन तुम्हारी माँ कोई देवी होगी जिसने तुम्हारे जैसा बीटा पैदा किया

अमित : अरे आप ऐसे hi मेरी बड़ाई करने लगी मैंने तो बस अपना फ़र्ज़ ऐडा किया है

औरत: नहीं अमित आज कल क ज़माने में कोण किसी की मदद करता है और तुमने तो अपनी जान की बाज़ी लगा दी अगर तुम्हे कुछ हो जाता तो

तभी उस औरत की नज़र अमित की बाज़ू पर लगे ज़ख़्म पर पड़ती है वो जल्दी से अपनी साडी का पल्लू फाड़ कर अमित क बाजू पे बाँध देती है

ये सब होते हुए राजू भी वहां पहुँच चूका था और सब देख रहा था उसे भी अमित क ज़ख़्म को देखकर टेंशन हो जाती है

राजू : अरे ये क्या इतनी चोट लग गयी तुझ

अमित: कुछ नहीं यार बस खरोंच है हलकी स तू टेंशन न ले

राजू : चल डॉक्टर क पास चलते हैं

अमित : अरे ज़रा स तो चोट है इतनी तो लगती hi रहती है

औरत: तुम्हारा दोस्त सही कह रहा है चलो डॉक्टर क पास पट्टी करवालो

अमित : अरे अपने पट्टी तो करदी है अब आपके प्यार और स्नेह से बढ़कर कोई दवा थोड़ी हो सकती है

वैसे भी हम लेट हो रहे हैं हमें गाओं वापिस जाना है अगर लेट हो गए तो घरवाले परेशां होंगे

औरत: अरे ऐसे कैसे चले जाओगे तुमने मेरी इतनी मदद की है मुझे कुछ तो मौका दो सेवा का

अमित : अरे नहीं मैडम प्लीज हमें सचमुच देरी हो रही है फिर कभी मुलाकात हुई तो ज़रूर आपके हाथ की चाय पियूँगा

औरत:( हस्ते हुए ) ठीक है यद् रखना वैसे मेरा नाम मैडम नहीं मंजू है

अमित : ( मुस्कुरा कर ) ठीक है मंजू जी अब चल ते हैं इजाज़त दीजिये

फिर अमित और राजू चल पड़ते हैं गली से बहार निकलते हैं तो सामने मंजरी और रेनू घबराई हुई स कड़ी थी जब से अमित भागकर गया था मंजरी का दिल दर क मरे बैठा जा रहा था ऊपर से राजू दोनों को पीछे आने से मन कर क गया था

मंजरी जब अमित को देखती है और उसकी बाजु पर पट्टी देखती है जिसमे खून लगा हुआ था वो भागकर अमित क साइन से चिपक जाती है और रोने लगती है, अमित क दिल को एक मीठा सा एहसास होता है मगर अगले hi पल वो मंजरी को खुद से अलग कर क चुप करवाता है

अमित : अरे मंजरी तुम क्यों बच्चों की तरह रो रही हो बस ज़रा स खरोंच है कुछ नई हुआ प्लीज चुप हो जाओ

मंजरी : ( रट हुए आंसूं पोंछती हुई ) क्या ज़रूरत थी ऐसे मुसीबत में फसने की अगर तुम्हे कुछ हो जाता तो मेरा क्या होता

अमित क दिल में ये बात बहुत असर करती है क ‘ मेरा क्या होता “

एक पल को सोच में पद जाता है क मंजरी कितने हक़ से इतनी बात कह गयी जो सीधा अमित क दिल पर असर कर गयी

फिर अमित उसे चुप करवाता है और बस स्टॉप की तरफ चल पड़ते हैं चारो

बस स्टॉप पर थोड़ी hi देर में बस आ जाती है बस की सीट्स फुल थी इसलिए चरों खड़े हो जाते हैं सबसे आगे राजू फिर रेनू फिर मंजरी फिर अमित

बस चल पड़ती है नेक्स्ट स्टॉप पर और लोग चढ़ जाते हैं बस में और भीड़ हो जाती है अमित न चाहते हुए भी मंजरी से चिपक जाता है

बस क बार बार ब्रेक मरने से अमित बार बार मंजरी से टकरा रहा था जिससे क अमित क निचले हिस्से में मूवमेंट शुरू हो गयी थी

मंजरी की गांड क साथ टकरा कर अमित का बाबूराव सर उठाने लगा अमित को शर्मिंदगी होने लगती है क ये उसके साथ क्या हो रहा है मंजरी क्या सोचेगी मेरे बारे में

वहीँ मंजरी को भी अमित का लैंड अपने चूतड़ों पर महसूस होने लगता है

एक मीठा सा एहसास उसे होता है उसकी मुनिअ भी पनिअ जाती है और मंजरी खुद पर कण्ट्रोल खोने लगती है अब मंजरी भी अपने चूतड़ जानबूझकर अमित क लैंड पर दबाने लगती है और मज़ा लेने लगती है ये उसकी ज़िन्दगी न्य एहसास था जो उसे बड़ा मज़ा दे रहा था

वहीँ अमित खुद को कण्ट्रोल करने की पूरी कोशिश कर रहा था उसका चेहरा लाल टमाटर बन गया था और पसीने से भीग गया था

अमित पीछे हटने की बहुत कोशिश करता है मगर भीड़ की वजह से पीछे नहीं हैट पता

गांड क एहसास ने बाबू रओ की नींद तोड़ दी थी और अब वो उस गांड से टक्कर मर रहा बदला लेने क लिए. अमित का लैंड पूरे जोबन पर आ गया था जो लोहे की रोड की तरह मंजरी क अंदर घुस जाना चाहता था

मंजरी लैंड की मोटाई और लम्बाई अपने चूतड़ों में फील कर क पूरी पनिया गयी थी और अपनी गांड को दबाये जा रही थी लैंड पर उसे समझ नई आ रहा था वो क्या करे ये उसकी ज़िन्दगी पहला एहसास था अपने चूतड़ों पर किसी मर्द क लैंड का

अमित खुद को रोक नहीं प् रहा था अभी तक की ज़िन्दगी में उसे ये एहसास कभी नहीं मिला था, होता भी कैसे पहलवानी में तो एहि सिखाया जाता है औरतों से जितना दूर रो उतना ाचा है मगर आज अमित का खुद पर काबू नहीं था अब उसे भी ये एहसास मज़ा देने लगा और थोड़ी देर में वो भी जोर लगाकर लैंड को मंजरी की गांड में घुसाने लगा

मंजरी ज्यादा देर खुद को रोक नहीं पायी और वहीँ खड़े खड़े झाड़ गयी अब उससे खड़ा नहीं हुआ जा रहा पसीने से चेहरा भीग गया था तभी बस रूकती है और दो सीट खली हो जाती हैं अमित रेनू और मंजरी को वहां बिठा देता है और अपनी शर्ट बहार निकलकर अपने अकड़े हुए लैंड को छुपा देता है

ऐसे hi एक घंटे का सफर ख़तम हो जाता है और चरों गाओं पहुँच जाते हैं

मंजरी अमित से नज़रें नहीं मिला पति और चुपचाप रेनू क साथ निकल जाती है अमित भी बस में हुई घटना से शर्मिंदा था इसलिए जल्दी जल्दी वो भी निकल जाता है राजू क साथ

रस्ते में अमित राजू को कहता है जल्दी चल आज तो दांत पड़ेगी 5 बज गए माँ गुस्सा करेगी

तब दोनों अपने अपने घर पहुँच जाते हैं

गौरी घर में परेशां इधर से उधर घूम रही थी और सोच रही थी क उसे अमित को जाने hi नहीं देना चाहिए था अगर अमित को कुछ हो गया तो

वो कई बार दीपिका से भी गुस्से में कह चुकी थी सब तेरी वजह से हुआ है अभी तक नई आया अगर उसे कुछ हो गया तो मैं देख तेरा क्या हल करती हूँ

इतने में दरवाज़ा खुलता है
 
अपडेट 5

गौरी घर में परेशां इधर से उधर घूम रही थी और सोच रही थी क उसे अमित को जाने hi नहीं देना चाहिए था अगर अमित को कुछ हो गया तो

वो कई बार दीपिका से भी गुस्से में कह चुकी थी सब तेरी वजह से हुआ है अभी तक नई आया अगर उसे कुछ हो गया तो मैं देख तेरा क्या हल करती हूँ

इतने में दरवाज़ा खुलता है

अब आगे

अमित जैसे hi घर में घुसता है सामने गौरी कड़ी थी जो दौड़कर अमित को गले लगा लेती है और प्यार से उसे गुस्सा दिखाकर डांटने लगती है

गौरी : कहाँ रह गया था इतनी देर से कहाँ था ? तुझे कहा था न क दोपहर तक लौट आना तुझे मेरी कोई परवाह है क नई? बोल कहाँ रह गया था ?

गौरी को ऐसे हल में देखकर अमित भी उसकी ममता को देखकर उसके चेहरे को hi देखे जा रहा था मुँह से कोई शब्द नहीं निकल रहे थे

वो सोचने लगा अभी थोड़ा देर से hi आया तो यह हल है अगर मैं कहीं दूर चला जॉन तो कहीं माँ जुदाई में hi मर जाएगी

कितनी करुणा कितनी ममता थी गौरी की आँखों में

तभी पीछे कड़ी दीपिका की नज़र अमित क बाज़ू पर बंधी पट्टी पर जाती है जो खून से थोड़ी लाल हो राखी थी

दीपिका मन में सोचती है क अगर दीदी ने देख लिया तो सब की सहमत आ जाएगी सब से ज्यादा तो उसीको की वाट लगेगी और फिर गौरी दोबारा कभी अमित को शहर जाने भी नई देगी.

इसलिए वो जल्दी से आगे बढ़ती है और गौरी से कहती है

दीपिका : क्या दीदी दरवाज़े पर hi क्लास लगा डौगी अब सुबह से घर से गया है इतना सफर कर क आया है थक गया होगा पता नई कुछ खाया भी है या नहीं. अपने लाल को पहले कुछ खिला पीला दो फिर करती रहना बातें

इतना कहकर दीपिका अमित क उस बाजु को कवर कर लेती है जहाँ चोट लगी थी और अमित को कमरे में लेजाने लगती है

गौरी भी ममता में डूबी जल्दी से रसोई में जाती है अमित क लिए कुछ खाने को लेन अभी तक उसकी नज़र अमित की चोट पर नहीं गयी थी

दीपिका :( जल्दी से अमित को रूम में लेजाकर कहती है ) तुम्हारी क्लास तो मैं बाद में लूंगी जा पहले अपनी शर्ट चेंज कर अगर ये जखम दीदी ने देख लिया दीदी सारा घर सर पे उठालेगी

अमित को भी यद् अत है वो कैसे भूल गया काम से काम पट्टी उतर देता फिर अमित तेजी से अपने कमरे की और भागता है और जा कर शर्ट चेंज कर क वापिस छोटी ममी क पास आकर बैठ जाता है

इतने में गौरी गरमा गरम दूध और खाने क लिए पिन्निआन ले अति है

अमित : अरे माँ मेरा पेट भरा हुआ है ज़रूरत नहीं किसी की

गौरी : चुप चाप दूध पि और ये पिन्निआन खा

पता है मुझे भूख है क नई

अमित चुप चाप दूध का गिलास पकड़ कर पिने लगता है और पिन्निआन खता है

गौरी: ये मत सोचना क मैं नाराज़ नहीं हूँ

तुझे इतनी आसानी से नई छोडूंगी तू जो मस्ती मरता फिरता है बहार मुझे सब पता है

तभी गौरी का ध्यान अमित की शर्ट पर जाता है

गौरी: अभी तो तूने दूसरी शर्ट पहनी थी ये कब बदल ली

गौरी की बात सुनकर अमित हड़बड़ा जाता है मगर दीपिका बीच में बोल पड़ती है

दीपिका : वो क्या है न दीदी वो मेरे हाथ से टेल की बोतल अमित क ऊपर गिर गयी थी एते hi तो इसलिए मैंने कहा क जा पहले शर्ट चेंज करले

इतना सुनकर अमित चैन की सांस लेता है और नज़रों से छोटी ममी को थैंक्स कहता है बात सँभालने क लिए

गौरी : अब बता पहले क इतना वक़्त कहाँ लग गया तुझे?

अमित : वो वो.. माँ .. वो क्या है न क तुम्हे पता है न क बस दो घंटे बाद चलती है शहर से गाओं क लिए, वो दोपहर वाली बस 2 मिनट पहले निकल गयी थी इसलिए वो छूट गयी और हम 2 घंटे बस स्टॉप पर नेक्स्ट बस क इंतज़ार में बैठे रहे बस ऐसे देर हो गयी

गौरी : तो ध्यान रखना चाहिए था न टाइम का अब आगे से ऐसी गलती दोबारा नहीं होनी चाहिए

अमित : माँ मैं आगे से ध्यान रखूँगा

दीपिका : दीदी मैं क्या कहती हूँ क हम अमित को एक बाइक ले दें ताकि बस का झंझट hi ख़तम हो

वैसे भी अगर कहीं कभी ज़रूरी जाना पद जाये तो अमित हमें ले जा सकेगा और कोई काम भी हो तो देख लेगा अब तो बड़ा हो गया है

गौरी: फिर तो महाराज घर पर बैठेंगे hi नहीं ऐसे hi घूमते रहेंगे

दीपिका: क्या दीदी तुम भी ! क्या तुम्हे भरोसा नहीं अपने बेटे पर

अमित : छोटी ममी मुझे ज़रूरत नहीं है ,

वैसे भी मां क पास बाइक तो है न

दीपिका : तू चुप रह , तेरे मां क पास तो वक़्त hi नहीं होता हमारे लिए

काम से काम तू hi हमारे छोटे छोटे काम कर दिया करेगा

अमित: तो आपको ये बाइक अपने लिए चाहिए न की मेरे लिए

दीपिका बड़ी बड़ी ऑंखें निकलती है अमित को देखकर

दीपिका : है ऐसा hi समझ ले क्या तू क्या हमारा काम नई करेगा बोल

अमित : अरे ऐसा भला हो सकता है कभी आप सब तो मेरे लिए सब से पहले हैं

गौरी: मेरा बचा ( अमित को गले लगते हुए ) तू तो इस घर की जान है सब कुछ तेरा hi तो है

ऐसे hi थोड़ी बहुत बातों क बाद शाम का खाना बनाने का वक़्त हो जाता है और तीनो मिलकर खाना बनती हैं

तीनो मां भी लौट एते हैं और रत का खाना खाने क बाद सब अपने अपने कमरों में चले जाते हैं

रत को कमलेश दोस्त ज़रूरी काम का बहाना बना कर अपने दोस्त मिलने निकल जाता है तो दीपिका सोचती है क अभी सब अपने कमरों में हैं एहि सही समय है अमित से पूछने का क आखिर उसे चोट कैसे लगी

दीपिका धीरे धीरे चुपके से अमित क कमरे में चली जाती है तो देखती है क अमित बीएड. पर लेता छत को देख रहा था ,

असल में अमित आज मंजरी क साथ हुई बस की घटनाओं क बारे में सोच रहा था क आखिर क्यों वो खुद पर कण्ट्रोल नहीं कर प् रहा था वो क्या सोच रही होगी मेरे बारे में

तभी दीपिका कमरे में दाखिल होती है और दरवाज़ा बंद कर क अमित क पास अति है

दीपिका: तो बता आज क्या कर क आया है, और कहाँ से चोट लगी है ?

अमित ख्यालों की दुनिआ से बहार अत है और छोटी ममी को देखकर चौंक जाता है

अमित : अरे ममी इस वक़्त आप यहाँ

दीपिका: क्यों क्या नहीं आ सकती मैं यहाँ

अमित : अरे नहीं नहीं मेरा वो मतलब नहीं

दीपिका : तो मेरी बात का जवाब दे पहले क कहाँ से चोट लगी है दिखा मुझे कितनी चोट है

अमित मन करता रहता है पर दीपिका अमित की शर्ट उतरवा कर बाजु देखने लगती है

पट्टी हटा कर जब ज़ख़्म देखती है तो उसे एक कट नज़र अत है

अमित : अरे कुछ नहीं ममी वो बस ऐसे बस में खरोंच लग गयी थी दरवाज़े से

दीपिका अमित की आँखों को पड़ने की कोशिश करती है, अमित ज़रूर कुछ छुपा रहा है

दीपिका : ाचा ममी से बोलने में दर रहा है तो दोस्त को hi बोलदे

दोस्तों से कोई बात छुपाई नहीं जाती

अमित : अरे ममी कुछ भी तो नहीं ऐसी कोई बात नहीं

दीपिका उठ जाती है बीएड से और बहार जाने को मुड़ती है

दीपिका : ठीक है अगर तू मुझे अपना दोस्त नहीं समझता तो मैं चलती हैं

अमित एक डैम उठकर ममी का हाथ पकड़ कर वापिस खिंच कर बीएड पर बिठा लेता है

अमित : ाचा बाबा बताता हूँ मगर पहले वडा करो ये बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए और न hi आप गुस्सा करोगी

दीपिका: प्रॉमिस! मैं किसी को नहीं बताउंगी और न गुस्सा करुँगी

फिर अमित साडी घटना बता देती है क कैसे उसने लेडी की मदद की और चोट लगी

दीपिका हैरानी से देखकर मुँह पर हाथ रखकर कहती है

दीपिका: हा .. अगर तुझे कुछ हो जाता तो कभी सोचा है.

क्या ज़रूरत थी हीरो बनने की अगर चोट कहीं और लग जाती तो, अगर तुम्हारी जान पर बन आती तो

सोचा है क दीदी का क्या होता

तुम्हारे ज़रा लेट होने पर सारा घर सर पे उठा लिया था

सोच उनका क्या होता

अमित : ममी जी ये भी तो सोचिये अगर उस औरत की जगह आप होती या माँ होती या कामिनी ममी होती तो क्या मैं ऐसा नहीं करता

दीपिका चुप हो जाती है आखिर अमित एक संस्कारी लड़का था फिर वो कैसे बर्दाश्त करता क उसके सामने किसी औरत क साथ अन्याय हो जाये

दीपिका: तो तो लाखों में एक है भगवन सब को तेरे जैसा बीटा दे

ाचा ये तो बता फिर क्या क्या किया सारा दिन कौन कौन था साथ

अमित सोच में पद जाता है क क्या जवाब दे , मंजरी क बारे में बताये या नहीं

अमित को सोचते देखकर दीपिका बोलती है

दीपिका : इतना सोचने की क्या बात है , जो भी है दिल खोलकर बता मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी

कोई तो बात ज़रूर है तेरे दिल में जो तू ऐसे सोच में गम था,, चल बता जल्दी सोच मत

अमित फिर मंजरी और रेनू क साथ जाने क बारे में बता देता है और ये भी क ये प्लान राजू का था रेनू क साथ उसकी सेटिंग करने का

अमित को मंजरी का लेटर यद् आ जाता है और वो जल्दी से अपने कपडे जो वो बदल चूका था उसमे से लेटर निकलकर दिखता है

दीपिका मंजरी का लेटर अमित से लेकर पड़ने लगती है

लेटर पड़ते पड़ते दीपिका की ऑंखें नाम हो जाती हैं, अमित हैरानी से छोटी ममी को देखता जा रहा था क ऐसा क्या लिखा है लेटर में

थोड़ी देर बाद दीपिका लेटर पद कर अपनी आँखों को साडी क पल्लू से साफ़ कर क अमित को देखती है और कहती है

दीपिका: तुमने ये लेटर पढ़ा था या नहीं ?

अमित न में गर्दन हिला देता है

दीपिका : इस खत का एक एक लफ्ज़ उसने अपने दिल क खून से लिखा है, बहुत प्यार करती है वो तुम्हे प्लीज उसका दिल मत तोडना ऐसा प्यार तो लाखों में किसी किसी को मिलता है

कल hi जा कर उसे हाँ बोल दे मेरी पूरी सपोर्ट है

मैं सब देखलूँगी तू चिंता मत करना

अमित हैरानी से दीपिका की बातें सुन रहा था

अमित : ये आप क्या कह रही हो ममी आपको तो पता है मैं इनसब से दूर रहता हूँ और आप खुद मुझे ये करने को बोल रही हैं

दीपिका : हाँ मैं कह रही हूँ, तू क्या समझेगा सच्चा प्यार किसे कहते हैं, तू क्या जाने एक लड़की जब किसी को अपने मन मंदिर का देवता बना लेती है तो फिर और किसी को स्वीकार नहीं करती

तू बस उसे हाँ करदे उसके प्यार की लाज रखले अगर मेरी बातों की कोई वैल्यू है तो उसे निराश मत करना

इतना कहकर छोटी ममी अपनी आँखों क आंसू पोछती कमरे से निकल जाती है, अमित अकेला बैठा जाने कब तक मंजरी और ममी की बातों क बारे में सोचता रहता है और ऐसे hi सो जाता है

दीपिका अपने कमरे में बीएड पर लेती मंजरी क खत को देखती हुई सोचती रहती है क मंजरी कितनी अछि लड़की है और सुन्दर भी है और कितना प्यार करती है अमित को उसके खत का एक एक लफ्ज़ इस बात की गवाही दे रहा है यूँ hi देर तक सोचती रहती है कमलेश भी घर नहीं लोटा था

अचानक दीपिका को यद् अत है क अमित को तो चोट लगी है ऊपर से कोई दवा भी तो नहीं लगाई उसने कहीं आधी रत को उसे दर्द होने लगा तो

इतना सोचकर दीपिका एक पैन किलर ले कर अमित क कमरे की तरफ बढ़ती है हर तरफ अँधेरा था रत क 2 बज रहे थे दीपिका चिंता में खोई फटाफट अमित क रूम की तरफ जाती है क शायद अभी जग रहा हो

दीपिका जब अमित क रूम में पहुँचती है लाइट जला कर जैसे hi अमित की तरफ देखती है तो उसका हलक खुश्क हो जाता है

दरअसल आज दिन की घटनाओं से अमित का बाबूराव गुस्से में सर उठाये खड़ा था

अमित तो सो रहा था मगर बाबूराव गुस्से में फुंकार रहा था शायद अमित सपने में बस वाला सन देख रहा था

दीपिका एक तक अमित क पाजामे क उभर को देख रही थी , पाजामे क उभर से उसे अंदाज़ा हो गया था क ये कोई मामूली लैंड नहीं है , ये तो एक तगड़ा मूसल है . इतनी छोटी उम्र में ऐसा तगड़ा लैंड बहुत हैरानी की बात है मगर हो भी क्यों न बॉडी भी तो कितनी बनाई हुई है अमित ने पहलवानी करता है तो लैंड कैसे न तगड़ा हो

ऐसा लैंड अगर मंजरी जैसी कुवारी लड़की की छूट में जायेगा तो वो बेचारी परलोक सिधार जाएगी

मंजरी क्या अगर मेरे जैसी शादीशुदा औरत की छूट में घुस जाये तो भोसड़ा बना कर hi निकलेगा

इतना सोचते hi दीपिका की छूट गीली होने लगती है

तभी उसके मन में दूसरा विचार अत है क हाय हाय ये मैं क्या सोचने लगी अमित तो मेरे बेटे जैसा ऐसा सोचना भी पाप है

इतना सोचते hi दीपिका जल्दी से लाइट बंद कर क अपने कमरे में भाग जाती है

अपने कमरे में आकर बीएड पर लेट जाती है और सोने की कोशिश करती है मगर बार बार उसकी आँखों क सामने अमित क लुंड का उभर आने लगता है

कितना फरक था कमलेश और अमित क लैंड में

कहाँ कमलेश का 5’ का पतला सा लैंड कहाँ अमित का मोटा तगड़ा मूसल

न चाहते हुए भी वो दोनों क लैंड का कपरिसों करने लगती है और छुडासी होने लगती है

कब उसका हाथ निचे छूट पर चला गया उसे पता hi नहीं चला

धीरे धीरे साडी को कमर तक चढ़ा कर एक हाथ से छूट को सहलाने लगती है

इस वक़्त उसे चुदाई की सख्त ज़रूरत महसूस होने लगती है मगर कमलेश तो घर पर नहीं था

वैसे भी कई हफ़्तों से कमलेश ने दीपिका को छोड़ा नहीं था जबकि शादी क बाद डेली कमलेश 2/3 बार उसे छोड़ देता था मगर पिछले एक साल से अब कमलेश बहुत ज़ोर डालने पर hi दीपिका की चुदाई करता था

अमित क लैंड को यद् करते करते दीपिका अपनी छूट को ज़ोर ज़ोर से सहलाती जा रही थी

दीपिका : ऊऊऊओ आआआआआ आआआह कितना बड़ा लुंड है स्स्सस्स्स्स आआआअह्हह्ह्ह्हह एक बार में hi छूट का भोसड़ा बना देगा कक्ककक्कक्स आआआअह्ह्ह

कहाँ रह गया कमलेश. ाऊओऊ छोड्दुओ मुझे देखो मेरी छूट कैसे आँसुओ बहा रही है कक्कक्क्स आआआहहहहहहह कहाँ चले गए कमलेश. Ccccccccccc आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

जल्दी आओ छोड़ो मुझी कक्ककक्कक्स ोुह्ह्ह्हह्ह

कितना बड़ा मूसल है कक्ककक्कक्स आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

और तेजी से उंगली अपनी छूट में चलने लगाती है

आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आआअह्हह्ह्ह्हह. फ़क मीटी

आआअह्हह्ह्ह्ह कक्ककक्कक्स ऊऊह्ह्हह्ह फफ्फूऊक्ककककककक में ffffuckkkkkkkkkkk

छोड़ो मुझे amitttttttttt. Aaaahhhhhhhhhh

Cccccccccc कस क रररग्ग्गद्द्दोऊऊऊओ मुझे ाआअह

ऐसे उंगली करते उसका पानी निकल जाता है और वो ठंडी पद जाती है

जैसे hi ठंडी होती है तो उसे ख्याल अत है क उसने अभी अपने भांजे का नाम लेकर पानी निकला उसके लैंड को यद् करके वो झड़ी है तो खुद से hi शर्मिंदा होने लगती है काफी देर बाद उसकी भी आँख लग जाती है
 
अपडेट 6

जैसे hi ठंडी होती है तो उसे ख्याल अत है क उसने अभी अपने भांजे का नाम लेकर पानी निकला उसके लैंड को यद् करके वो झड़ी है तो खुद से hi शर्मिंदा होने लगती है काफी देर बाद उसकी भी आँख लग जाती है

अब आगे-

अगली सुबह अमित अखाड़े से हो कर घर अत है . अमित आज सुबह से hi मंजरी और छोटी ममी की बातों को लेकर सोच में डूबा हुआ था क आखिर उसे क्या करना चाहिए. क्या उसे मंजरी क प्यार को कबूल कर लेना चाहिए या फिर अपनी कसरत और पड़े पर फोकस करना चाहिए. यूँही ख्यालों की दुनिआ में फसा हुआ अमित नाश्ता कर क घर से निकल जाता है

अमित ने इरादा कर लिया था क वो मंजरी से इस बारे में एक बात करेगा यही सोचकर वो मंदिर की तरफ चल पड़ता है क्यूंकि मंजरी का घर मंदिर क पास hi था. खुशकिस्मती से मंजरी घर से कपडे धोने क लिए नदी पर जाने क लिए घर से निकल hi रही थी तो अमित उसे इशारा करता है और मंजरी भी इशारे से उसे नदी पर चलने का बता देती है

मंजरी तो मन hi मन खुश हो रही थी क अमित खुद उससे मिलने आया है मतलब उसने उसके प्यार को काबुल कर लिया

थोड़ी देर में hi दोनों नदी किनारे पहुँच जाते हैं , मंजरी जान बुझ कर आज थोड़ा दूर निकल आयी थी उस जगह से जहाँ सब औरतें कपडे धोती थी ता की कोई उन्हें देख न सके

अमित जब देखता है क अस्सपस्स कोई नहीं है तो वो मंजरी से बातचीत शुरू करता है

अमित : मंजरी क्या तुम सचमुच मुझसे प्यार करती हो?

मंजरी : क्या अभी भी यकीन नहीं तुम्हे ? क्या तुम्हे मेरे प्यार पे कोई शक है ? तो बताओ मैं तुम्हे कैसर यकीन दिलवाएं

अमित : मेरे कहने का मतलब है क तुम्हे कैसे पता चला क तुम्हे मुझसे प्यार है जबकि मेरे दिल में तो ऐसी कोई भावना नहीं है

मंजरी : मैंने जब से होश संभाला है बस तुम्हारे सिवा और किसी को न देखा न सोचा है , मेरे दिलो दिमाग में सिर्फ तुम्हारी hi परछाई है, तुम्हारे बगैर मैं ज़िन्दगी जीने का सोच भी नई सकती

अमित : ऐसे मत कहो मंजरी ज़िन्दगी किसी एक क लिए नहीं होती हमें सबके लिए खुद की खुशिओं को कुर्बान कर क भी जीना पड़ता है, तुम मेरे लिए यूँ ज़िन्दगी बर्बाद मत करो मेरा क्या है अपने मामाओं क रहमो करम पर हूँ, मेरी ज़िन्दगी क फैसले मैं नहीं ले सकता और ऊपर से अभी मुझे और पड़ना है बड़ा आदमी बनना है अभी से शादी बिआह क चक्कर में मैं फसना नहीं चाहता

मंजरी: मैं ये तो नहीं कह रही क तुम मुझसे शादी करलो अभी मैं तो बस इतना चाहती हूँ क तुम मुझे थोड़ा सा अपना प्यार देदो मुझे अपने दिल में थोड़ी जगह देदो

अमित : मंजरी अगर किसी को पता चल गया तो गाओं में बदनामी हो जाएगी

मंजरी : मुझे कुछ नई पता मुझे बस तुम्हारा प्यार चाहिए फिर चाहे मुझे मौत hi क्यों न आ जाये

अमित : ( एक डैम से मंजरी क मुँह पर हाथ रखकर) नहीं नहीं ऐसा मत कही मंजरी तुम्हे तो मेरी भी उम्र लग जाये, वाकई मैं किस्मत वाला हूँ क मुझे इतना प्यार करने वाली लड़की मिली

इतना सुनते hi मंजरी का रोम रोम पुलकित हो उठता है और वो अमित क गले लग जाती है , दोनों ऐसे hi एक दूसरे क प्यार को महसूस कर क एक दूसरे से गले मिले इस अनोखे एहसास में खोये जाने कितनी देर यूँही एक दूसरे की बाँहों में झूलते खड़े रहते हैं

फिर अमित थोड़ा पीछे हैट कर मंजरी क चेहरे को दोनों हाथो में पकड़ता है और मंजरी की आँखों में देखने लगता है, फिर प्यार से मंजरी क माथे को चूम लेता है

मंजरो तो जैसे सपनो में खोयी हुई थी उसे ऐसा लग रहा था जैसे ये कोई सपना hi है मगर जल्दी hi सपना टूट जाता है जंगल की तरफ से आहत सुनकर अमित मंजरी को अलग कर देता है और उसे कहता है क जाओ जहाँ सब कपडे धोते हैं उसी जगह कपडे धोवो तुम भी जाकर, लगता है इस तरफ कोई आ रहा है

मंजरी वहां से दूसरी जगह चली जाती है अमित वहीँ खड़ा रहता है थोड़ी देर ता की मंजरी पहले वहां पहुँच जाये, अभी अमित वहीँ खड़ा hi था क उसे जंगल की तरफ से छोटे मां यानि क कमलेश निकलता हुआ दिखाई देता है .

अमित वहीँ साइड में छुप जाता है और कमलेश वहां से निकल जाता है, अमित मन में सोचने लगता है छोटे मां को भला जंगल में क्या काम इस तरफ तो कोई भी नहीं अत

अभी अमित सोच hi रहा था क पीछे से एक और शख्स की आहत सुनाई देती है और अमित छुप कर देखने लगता है, वो शख्स एक औरत थी गाओं में hi रहती थी जिसका नाम मीणा था इसका पति मां क खेतों में मजदूरी करता था

मीणा : उम्र 36 साल बूब्स 38 कमर 34 गांड 40 और रंग सांवला

अमित सोचने लगता है ये जंगल से आ रही है अभी मां निकले हैं मतलब कुछ तो गड़बड़ है पता लगाना पड़ेगा आखिर माजरा क्या है

मीणा क जाने क बाद अमित वहां से निकल कर खेतों में चला जाता है जहाँ अजय मां पेड़ क निचे खटिया पर बैठे थे अमित उनके पास चला जाता है

अजय : आओ आओ बरखुरदार कहाँ से आ रहे हो

अमित : बस घर से hi आ रहा हूँ मां जी सोचा आपका हाथ बता दूँ

अजय: ये ाचा किया तुमने , बड़े भैया को तो पंचायत वाले hi आराम से बैठने नहीं देते कभी कहीं कभी कहीं ले जाते हैं फैसलों पर या मीटिंग्स पर और कमलेश पता नहीं कहाँ आजकल दोस्तों क साथ निकल जाता है

अमित : क्या बात कर रहे हैं मां जी छोटे मां खेतों में नहीं आते आपके साथ

अजय : अरे अत तो है मगर पता नहीं कहाँ कौन से दोस्तों से मिलने निकल जाता है

अमित : ( मन में सोचता है इसका मतलब छोटे मां रोज़ मीणा क साथ जंगल में जाते हैं) मां जी क्या अपने कभी नहीं पुछा क कौन से दोस्तों क पास जाते हैं

अजय: अब वो कोई बचा तो है नहीं क मैं उससे पूछूं वो सब छोड़ तू तो पड़ने लिखने में होशिआर है ये ले बही खता ज़रा फसल का हिसाब तो लगा क कितना खर्चा हुआ कितनी आमदन हुई और साहूकार क कहते से अपना खता मिला कर देख मैं तो पड़ा काम हूँ मुझे समझ नहीं अत पहले बड़े भैया करते थे हिसाब उनके पास वक़्त नहीं होता अब ज़िम्मेदारी कमलेश की है मगर वो भी गायब रहता है, तू hi चेक करले

अमित बही खता पकड़ कर हिसाब करने लगता है और साथ में साहूकार क कहते को मिलता है काफी देर तक हिसाब किताब करने क बाद अमित को कहते में कुछ गड़बड़ लगती है

अमित : मां जी क्या इस साल खाद पिछले साल से ज्यादा डाली है खेतो में

अजय : नहीं तो , खाद तो उतनी hi डाली है

अमित : मगर यहाँ तो खाद पिछले साल क मुकाबले 50000 हज़ार रूपए ज्यादा बता रहा है

अजय : ( चौंक कर ) क्या! ! मगर हमने तो खाद उतनी hi मंगवाई थी

अमित : खाद कौन लेने जाता है

अजय : वो काम तो कमलेश hi करता है

अमित : और ये डेढ़ लाख रूपए साहूकार से अपने किस लिए , लिए थे

अजय : हैरानी से अमित को देखता हुआ) हमने तो कोई पैसा नहीं लिया साहूकार से इस साल, ज़रा ध्यान से देख कहीं कोई गलती तो नहीं हुई

अमित : नहीं मां जी ये खता अपने जो दिया ये यही बता रहा है

अजय: ये कैसे हो सकता है? लगता है साहूकार को कोई गलती लग गयी है मैं कमलेश को बोलूंगा क खता ठीक करवा कर ए साहूकार क पास जा कर

अमित मन में सोचता है हो न हो ये पैसों की गड़बड़ छोटे मां hi कर रहे हैं और कहीं न कहीं मीणा इसमें शामिल है मुझे पता लगाना होगा

यूँही कुछ वक़्त बाद अमित घर की तरफ चल पड़ता है, घर आकर खाना खता है तो उसके मन में विचार अत है क आज सुबह से छोटी ममी नहीं दिखी उनसे मिलता हूँ और उनसे पता लगाने की कोशिश करता हूँ छोटे मां की हरकतों का

अमित खाना खा कर छोटी ममी क कमरे में जाता है जहाँ छोटी ममी अपनी सोच में गम आईने क सामने बैठी थी

अमित : अब बस भी कीजिये ममी जी क्या खुद को नज़र लगाएंगी

दीपिका हड़बड़ा जाती है एकदम से

दीपिका: अमित तुम कब ए

अमित : मैं तो कितनी देर से खड़ा देख रहा हूँ क ममी जी खुद को hi देखे जा रही हैं आईने में

दीपिका : अरे ऐसी कोई बात नहीं आ बैठ क्या काम था बता

अमित : काम तो कुछ नहीं मैं तो देखने आया था क छोटी ममी आज सुबह से नज़र नहीं आयी बात क्या है

दीपिका मन में सोचती है क अब क्या बताऊँ मैं तो खुद से hi शर्मिंदा हूँ कल रत की हरकत की वजह से

दीपिका : अरे कुछ नई मैं तो यहीं थी

अमित : ाचा ये बताइये ममी जी क कमलेश मां आजकल कहाँ बिजी रहते हैं खेतों में भी काम जाते हैं

दीपिका: क्या ?? खेतों में नहीं जाते तो फिर कहाँ जाते हैं?

अमित : अजय मां बता रहे थे क आजकल दोस्तों क साथ ज्यादा मेल जॉल बड़ा रखा है मां ने

दीपिका: हाँ कई बार रत को भी निकल जाते हैं दोस्तों क साथ पार्टी का बहाना बना कर कल रत भी घर नहीं थे

अमित छोटी ममी क जवाब से चौंक जाता है मतलब मां साडी रत घर नहीं थे और सुबह जंगल से निकल रहे थे कुछ तो गड़बड़ है मुझे पता लगाना hi होगा और ये दोस्त और कोई नहीं मीणा hi है जिसके पास जाते हैं मां

अमित : ाचा वो बात छोडो आप मुझे ये बताओ क मंजरी क साथ मुझे क्या करना चाहिए

दीपिका: क्या करना चाहिए मतलब! तू चुपचाप सीधे सीधे उसके प्यार को एक्सेप्ट करले पागल ऐसा प्यार नसीब से मिलता है

अमित : अब आप इतना इसरार कर रही हैं तो भला मैं कैसे इंकार कर सकता हूँ

दीपिका: इसका मतलब तू उसे हाँ बोलडेगा

अमित: हाँ बोलडूँगा नहीं, हाँ बोल्दिया

दीपिका:( हैरानी से देखती हुई) क्या मतलब

अमित : मतलब ममी जी मैं उससे मिलकर आ रहा हूँ और मैंने उसे हाँ बोल दिया है

दीपिका: ाचा !! तो क्या कहा उसने उसका रिएक्शन क्या था

अमित: वो तो बेचारी बहुत भोली है अगर थोड़ी देर और उसे न बताता तो शायद रोने hi लगती मगर जब मैंने उसके प्यार को कबूल करने की बात कही तो वो मेरे गले लग गयी और पता नहीं कब तक हम गले मिले रहे

दीपिका: वह मेरे शेर गले भी लगा लिया पहली hi मुलाक़ात में, कुछ और भी किया या नहीं

अमित : और भला क्या करता मैं

दीपिका : अरे बुद्धू लड़किआं कुछ नहीं करती जो करता है लड़का hi करता है, तूने उसे किश किया ?

अमित: शर्मा कर) किया न

दीपिका: (मज़े लेते हुए) कहाँ किश किया

अमित : कहाँ करता? उसके माथे पर और कहाँ

दीपिका: तू बुद्धू hi रहेगा, प्रेमिका को भला माथे पर किश करते हैं , उसे तो गलों पर और होंठों पर किश करते हैं

इतना सुनकर अमित शर्मा कर नज़रें नीची कर लेता है वहीँ दीपिका भी बोल तो गयी थी मगर अब उसे एहसास होता है क उसने क्या कह दिया और वो भी झेंप जाती है

अमित : क्या ममी आप हर वक़्त मेरी खिचाई करती रहती हो

दीपिका: ( मज़े लेते हुए) क्या करूँ हमारा हीरो है hi इतना क्यूट क सताने में मज़ा अत है

अमित: क्या ममी मैं अब कोई छोटा बचा थोड़ा हूँ अब मैं बड़ा हो गया हूँ

दीपिका: हाँ हाँ मुझे पता है तू कितना बड़ा हो गया है

इतना कहते hi दीपिका की आँखों क सामने कल रात वाला अमित क लैंड का उभर आ जाता है और न चाहते हुए भी उसकी नज़र अमित की पेण्ट पर लैंड वाली जगह पर चली जाती है और लैंड क उभर को खोजने लगती है मगर अभी तो लैंड महाराज सो रहे थे

अमित : ाचा ममी में चलता हूँ कल से स्कूल शुरू हो रहे हैं ज़रा राजू से मिलकर अत हूँ

इतना कहकर अमित उठकर चला जाता है और दीपिका फिर से खुद को कोसने लगती है अपनी इस हरकत पर

यूँही दिन निकल जाता है और रत का खाना खा कर सब अपने अपने कमरों में चले जाते हैं

दीपिका: सुनिए जी कितने दिन हो गए आज कुछ कीजिये न

कमलेश: चुपचाप सो जाओ मुझे नींद आ रही है

दीपिका: आप ऐसे hi हर बार बहाना बना देते हैं मेरा भी तो सोचिये मैं क्या करूँ मेरी भी ज़रूरतें हैं

कमलेश: मैंने कहा न मुझे सोने दो मैं थका हुआ हूँ मुझे नींद आ रही है

दीपिका : और मेरा क्या, मेरे प्रति आपका कोई फ़र्ज़ नहीं? मैं दिन रत तड़पती रहती हूँ और मुझे हाथ भी नहीं लगते ,

पहले तो पीछे hi पड़े रहते थे अब तो पास भी नहीं आते

कमलेश : बच्चों जैसी बात मत करो चुपचाप सो जाओ

दीपिका : आखिर क्या बात है आज मैं पूछ कर रहूंगी, आखिर क्यों मेरे पास नहीं आते आप बताइये

कमलेश : मैंने कहा न सो जाओ मुझे नींद आ रही है

दीपिका: आज आपको बताना hi पड़ेगा आखिर क्या वजह है

कमलेश: वजह जननी है तुम्हे वजह जननी है तो सुन तू एक बाँझ है एक बचा नई दे सकीय मुझे इतने सालो में, मेरी तो किस्मत hi ख़राब है जो तू मेरे पल्ले पद गयी , इसीलिए तेरे पास नहीं अत मैं मुझे कोई इंटरेस्ट नहीं तुझमे

इतना कहकर कमलेश ने मनो दीपिका क सर पर बम फोड़ दिया हो, उसकी आँखों से जहर जहर आंसू बहने लगते हैं आखिर थी तो ये सचाई क इतने सैलून में दीपिका माँ नहीं बन पायी थी मगर कमी किस्मे है इसका फैसला कौन करेगा दुनिआ तो औरत को hi दोष देती है कमी चाहे मर्द में क्यों न हो , इसके बाद दीपिका और कुछ नहीं कह पति बस चुप चाप आंसू बहती रहती है और जाने कब रो रो कर आखिर सो जाती है

अगली सुबह अमित अपनी रूटीन से उठकर अखाड़े जाता है और वापिस आ कर नाश्ता कर क तैयार हो कर स्कूल चला जाता है, दिसंबर एक्साम्स की छुट्टिओं क बाद आज स्कूल खुले थे आज सब को उनके पेपर भी दिखाए जाने थे और अमित भी अपनी स्टडी प्रोग्रेस की रिपोर्ट कार्ड देखने को व्याकुल था हालाँकि पड़े में वो हमेशा अव्वल hi रहता था

उधर घर पर सुबह से दीपिका कमरे से नहीं निकली थी गौरी को उसकी फ़िक्र हो रही थी इसलिए गौरी दीपिका क कमरे में जाती है

गौरी: क्या बात है महारानी साहेबा आज बीएड से उठना नहीं है क्या कहीं देवर जी ने रत को जगाये तो नहीं रखा

गौरी की आवाज़ सुनकर जैसे hi दीपिका गौरी की तरफ घूमती है गौरी उसकी आँखों की सूजन देखकर सेहम जाती है और जल्दी से दीपिका क चेहरे को हाथों में पकड़ कर बोलती है

गौरी : क्या हुआ छोटी तूने ये क्या हल बना रखा है

दीपिका: ( खुद को सँभालते हुए) कुछ नहीं दीदी. कुछ भी तो नहीं हुआ भला मुझे क्या होगा

गौरी : झूठ मत बोल तेरी ऑंखें बता रही हैं तू रत भर रोटी रही है, बता मुझे आखिर क्या बात है क्या कमलेश ने तुम पर हाथ उठाया है बता मुझे क्या बात है

दीपिका: नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं है

गौरी: देख छोटी अगर तेरे दिल में मेरी ज़रा स भी इज़्ज़त है तो बता क्या बात है

दीपिका: ऐसे मत कहो दीदी मैंने आपको हमेशा अपनी बड़ी बहिन मन है आपसे नहीं कहूँगी तो किस्से कहूँगी

गौरी : तो बता क्या बात है किस लिए तेरी आँखों में आंसू हैं

दीपिका: दीदी मेरी किस्मत hi ख़राब है इतने सैलून में मैं इस घर को एक वारिस नहीं दे पायी बस इसी लिए ये मुझसे नाराज़ हैं और कल रत को मुझे बाँझ कह दिया उन्होंने अब तो मेरे पास भी नहीं एते

इतना कहकर दीपिका फिर आंसू बहाने लगती है

गौरी: ( गुस्से में ) क्या उसकी इतनी हिम्मत, उसे कोई लिहाज नहीं कोई मर्याद नहीं रिश्तों की, ये तो ऊपर वाले का करम है जिसे चाहे बचा दे चाहे न दे इसमें तेरी गलती क्या है

मैं और कामिनी भी तो माँ नहीं बन पायी मगर हमारे पतिओं ने कभी हमसे ऐसी बात नहीं की ,

आने दे कमलेश को मैं कान खींचती हूँ उसके

दीपिका: रहने दो दीदी इससे बात बाद जाएगी वो मुझमे hi दोष निकल रहे हैं अगर आप बात करेंगी तो भी मुझ पर hi इल्जाम लगाएंगे,

मैं नहीं चाहती क घर का माहौल ख़राब हो

गौरी: मगर ऐसा कैसे चलेगी कब तक तू यूँही घुटती रहेगी अंदर hi अंदर मुझे बात करने दे उससे

दीपिका: नहीं दीदी आपको मेरी कसम आप कुछ नहीं कहेंगी

गौरी चुप हो जाती है और दीपिका को फिर ऐसे hi तसल्ली देती रहती है उसका मन हल्का करने क लिए

उधर स्कूल में सब को पेपर्स दिखा दिए गए थे इस बार भी अमित अपनी क्लास में टॉप पर था

अमित अपनी रिपोर्ट कार्ड ले कर रख लेता है सिग्न करवाने क लिए

स्कूल से छुट्टी क बाद अमित और राजू घर जाने क लिए निकल hi रहे थे क राजू उसे नदी पर चलने को बोलता है मगर अमित इंकार कर देता है

राजू नहीं मंटा और ज़बरदस्ती अमित को साथ ले कर नदी पर चल पड़ता है, दरअसल राजू यहाँ रेनू से मिलने आया था इस लिए अमित को साथ लाया था क वो ध्यान रख सके

अमित रेनू को देखकर समझ जाता है मगर कहता कुछ नहीं,

राजू: देख यार तेरी भाभी से थोड़ी देर अकेले में बात करनी है तू ज़रा ख्याल रखना मैं अभी आया

अमित : सेल मुझे चोकीदार बना कर लाया है यहाँ मैं चला घर

राजू: अमित प्लीज यार अगर तू नई मदद करेगा तो कौन करेगा प्लीज मन जा

अमित: ok ok ड्रामा बंद कर मगर 10 मिनट्स से ज्यादा मैं नई रुकूंगा इस लिए जल्दी आ जाना

राजू: मैं बस अभी आया

इतना कहकर राजू रेनू क पास चला जाता है, अमित यूँही अकेला खड़ा था क उसे मीणा दिखती है जंगल की तरफ जाती हुई और उसके पीछे कुछ hi दूरी पर छोटे मां भी आ रहे थे

अमित छुप कर देखने लगता है और सोचता है क आज ाचा मौका है पता लगाने का, उन दोनों क जाते hi अमित भी सावधानी से उनके पीछे चलने लगता है

आगे जाकर जंगल काफी घाना हो जाता है और सूरज की रौशनी भी काम नज़र अति है

यूँही चलते चलते उसे जंगल क बीचो बिच एक झोंपड़ी नज़र अति है और मीणा तथा छोटे मां उस झोंपड़ी में घुस जाते हैं

अमित झोंपड़ी क चारो तरफ घूमकर अंदर देखने की जगह तलाशता है तो उसे एक जगह मिल जाती है जहाँ से वो अंदर देख सकता था

अमित जैसे hi अंदर देखता है उसकी हलक खुश्क हो जाती है अंदर उसका छोटा मां और मीणा दोनों पूरे नंगे थे अमित पहली बार किसी औरत को यूँ नंगी देख रहा था उसे पसीना आने लगता है और इस नज़ारे से उसका बाबूराव गुस्से से फुंकारता उठ जाता है

अंदर छोटे मां मीणा क बूब्स को कास क मसल रहे थे और मीणा ककक. आह्ह्ह्हह कर क सिसकारिआं निकल रही थी

मीणा : आआह्ह्ह्हह्ह मालिककककक ऐसे hi मसलोवू आआह्ह्ह्हह्ह जोर से मस्लोवू तभी तो दूध उतरेगा इनमे आअह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह कक्कक्क्स

कमलेश : चिंता न कर मीणा इनमे इतना दूध भर दूंगा क कभी कमी नहीं होगी बचे को दूध की

मीणा : आआह्ह्ह्हह कक्कक्क्स ओह्ह्ह्ह मालिक ऐसे hi रगड़ूऊ आह्ह्ह्हह्ह कमी नहीं होनी चाहिए अअअअअ कक्ककक्कक्स आपके होने वाले बचे को दूध की कमी नहीं होने दूंगी आआह्ह्ह्हह्ह कक्कक्क्स ओह्ह्ह्हह ऐसे hi मसलो

मीणा की बात सुनकर अमित हैरान हो जाता है

अमित : मन में ‘ ये क्या ड्रामा है क्या मीणा मां क बचे की माँ बनने वाली है मगर ये तो पहले से hi शादीशुदा है

कमलेश: हाँ मेरी रानी मेरे बचे को कोई कमी नहीं होनी चाहिए देखना बीटा hi होगा

तू मुझे मेरे खंडन का वारिस दे मैं तुझे मोशन में टोल दूंगा

मीणा : आह्ह्ह्ह कक्कक्स. बातें hi करते हो करते कुछ नहीं आआह्ह्ह्हह्ह कक्कक्क्स ऊऊह्ह्हह्ह

मैं आपके लिए इतना कर रही हूँ आपके लिए बीटा पैदा करुँगी मगर आप मेरा ख्याल hi नहीं रखते

ोुह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह कक्कक्क्स

कमलेश: बोल क्या चाहिए तुझे, तेरे एक हुकम पर हर चीज़ तेरे कदमो में लेकर रखदूंगा

मीणा: रहने दो बातें आअह्ह्ह्ह कक्कक्स ओह्ह्ह्ह तुम तो कह रहे थे तुम्हे सोने का हर दूंगा वो तो आया नहीं अभी तक

कमलेश: हार तो ले आया हूँ मेरी रानी, तेरा हुकम हो और मैं पूरा न करूँ

इतना कहकर कमलेश अपने कपड़ो से सोने का हर निकलता है और मीणा को पहना देता है

मीणा : कितना प्यारा है यह

देखने आपके भी ऐसा hi चमकदार पैदा होगा मेरी इस छूट से

इतना कहकर मीणा टंगे फैलाकर अपनी छूट रगड़ कर दिखने लगती है

वहीँ अमित क तो होश hi गम थे मीणा की अदाओं को देखकर अमित का हाथ अपने आप लैंड पर चला जाता है और वो उसे मसलने लगता है

कमलेश : हाँ मेरे होने वाले बच्चों की माँ हमारा बीटा ऐसा hi चमकदार होगा तेरी ये छूट लाजवाब है इसी छूट से मेरा बीटा पैदा होगा

इतना कहकर कमलेश मीणा की छूट को मसलने लगता है

मीणा : आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स ोुह्ह्हह्ह आआह्ह्ह्हह बस भी करो अब बर्दाश्त नहीं होता जल्दी से मुझे ठंडा करो और अपने बेटे को ताकत दो

कमलेश मीणा को वहीँ राखी चारपाई पर लिटा कर उसकी टांगो को ऊपर उठाकर उसकी छूट में लैंड घुसा देता है

मीणा : आअह्ह्ह्हह कक्ककक्कक्स धीरे करो आपका मूसल तो जान निकल देता है ोुह्ह्हह्ह कक्कक्स पता नई आपकी जोरू कैसे लेती है इसे

कमलेश : उसकी बात मत कर बाँझ साली इतने सैलून में एक बचा नहीं दे पायी मुझे

मीणा : आअह्ह्ह ककक आअह्ह्ह्हह ऐसे hi ज़ोर से करो और ज़ुर्ररर से आअह्ह्ह्हह कक्कक्स ऊऊह्ह्ह्ह

कमलेश : ले मेरी रानी और ज़ोर से ये ले ठप्प्प थापपप थापपपप

ऐसी आवाज़ें गूंजने लगती हैं अमित को और बर्दाश्त नहीं होता और वो उलटे पाऊँ भाग जाता है

राजू अमित का इंतज़ार कर क चला गया था उसने सोचा क अमित चला गया होगा,, अमित भी पसीने से भीगा हुआ तेज कदमो से घर पहुँच कर सीधा अपने कमरे में घुस जाता है
 
अपडेट 7

राजू अमित का इंतज़ार कर क चला गया था उसने सोचा क अमित चला गया होगा,, अमित भी पसीने से भीगा हुआ तेज कदमो से घर पहुँच कर सीधा अपने कमरे में घुस जाता है

अब आगे-

अपने कमरे में बीएड पर लेता हुआ अमित छोटे मां और मीणा की चुदाई को यद् कर रहा था उसकी आँखों क सामने वो सब बार बार घूम रहा था. ज़िन्दगी में पहली बार आज उसने किसी औरत का नंगा जिस्म देखा था और चुदाई का मंजर तो उसकी आँखों क सामने अभी भी चल रहा था

अमित का खुद पर कण्ट्रोल नहीं था उसे समझ नहीं आ रहा था क उसकी बॉडी में इतनी बेचैनी क्यों हो रही है उसका लैंड तो जैसे फटा जा रहा था कितनी hi देर तक अमित आज क चुदाई सन को यद् करता अपने लैंड को मसलता रहता है , तभी उसके दिमाग में मीणा और कमलेश की बातें यद् अति हैं क मीणा कमलेश मां क बचे की माँ बनने वाली है और मीणा को खुश करने क लिए सोने का हार लाये थे

अमित : मन में). इसका मतलब छोटे मां हिसाब में गड़बड़ करके सारा पैसा मीणा पर लुटा रहे हैं अगर ऐसे hi चलता रहा तो मां सब कुछ लुटा देंगे और जब बड़े मां और अजय मां को पता चला तो घर टूट जायेगा,, फिर अमित की आँखों क सामने छोटी ममी का सूंदर क्यूट चेहरा आ जाता है, कितनी प्यारी है वो कितनी सुन्दर है मां का तो दिमाग ख़राब हो गया है जो ममी को छोड़ कर उस मीणा क चक्कर में घूम रहा है जब ममी को मां और मीणा का पता चलेगा तो उनके दिल पर क्या बीतेगी . उनकी तो दुनिआ hi तबाह हो जाएगी

अमित खुद से: नहीं नहीं मैं ऐसा नहीं होने दूंगा मुझे मां को कैसे भी रोकना होगा

फिर मां की बात उसे यद् अति है क छोटी ममी एक बचा नहीं पैदा कर सकती वो बाँझ है

अमित को ये बात बहुत बुरी लगती है और वो अपने कमरे से निकल कर सीधा छोटी ममी क कमरे की तरफ चल पड़ता है

कमरे में छोटी ममी अकेली बैठी कुछ सोच रही थी अमित देखता है क ममी किसी सोच में डूबी हुई है कहीं ममी को कुछ पता तो नहीं चल गया मां क बारे में

इस वक़्त ममी का चेहरा उदास था मगर फिर भी कितना क्यूट था अब तो अमित को अपने मां पर गुस्सा आने लगा था मगर फिर अमित आगे बढ़ता है और ममी को आवाज़ देता है

अमित : कहाँ खोयी हो ममी मैं कबसे आपको बुला रहा हूँ और आप हो क सुन hi नहीं रही

अमित की आवाज़ से दीपिका अपनी सोच से बहार अति है और हड़बड़ाकर जवाब देती है

दीपिका: क्या ... क्या कहा तुमने

अमित : मेरी प्यारी ममी किस सोच में गम हो

दीपिका: किसी सोच में नहीं मैं तो बस ऐसे hi बैठी हूँ

अमित: वैसे ममी आप मुझसे तो सब पूछ लेती हो दोस्ती क नाम पर मगर मुझे कुछ नई बताती

अब सच सच बताओ क्या बात है

दीपिका: नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं मैं बस वो अपने माँ पिताजी क बारे में सोच रही थी बड़े दिन हुए उनसे न बात हुई न कोई खबर

अमित समझ जाता है बात कुछ और है ममी बात को ताल रही है

अमित: तो ऐसा करे आप अपने मायके चक्कर लगा आएं मां को साथ लेकर

दीपिका अपने मन में: वो तो अब मेरी शकल भी देखना पसंद नहीं करते अब तुझे क्या बताऊ मेरी तो दुनिआ hi उजाड़ गयी है

दीपिका: वो क्या है न तेरे मां को बहुत काम रहता है आजकल इसलिए वो नहीं जा सकते, वैसे भी मुझे कोई जरुरत नहीं है मायके जाने की वो तो बस ऐसे hi आज उनकी यद् आ रही थी

अमित : ममी आपको मेरी कसम सच सच बताओ बात क्या है

दीपिका: अपनी कसम मत दे अमित प्लीज मुझे अकेला छोड़ दे

इतना कहकर छोटी ममी रोने लगती है

अमित से उनका रोना देखा नहीं जाता और वो आगे बढ़कर ममी को गले लगा लेता है और उन्हें चुप करवाने लगता है

अमित : ममी अगर आपकी नज़रों में मेरी कोई कीमत है तो प्लीज मुझे बताइये क आखिर क्या बात है अगर आप मुझे वाकई दोस्त मानती हैं तो दोस्त क नाते hi सही बता दीजिये, मैं आपकी आँखों में आंसू नहीं देख सकता प्लीज आपको मेरी कसम मुझे बताइये आखिर बात क्या है

दीपिका: रट हुए) मैं कैसे बताऊँ तुझे मेरी तो दुनिआ hi उजाड़ गयी है . मैं एक बाँझ हूँ बांझ्ठह. . जो एक बचा पैदा नहीं कर सकती मैं औरत क. नाम पर कलंक हूँ इस घर को एक वारिस तक नहीं दे पायी और इसी वजह से अब तेरे मां मेरे पास तक नहीं एते वो अब मेरी शकल भी देखना नहीं चाहते, मेरी ज़िन्दगी बर्बाद हो गयी अगर तेरे मां ने मुझे घर से निकल दिया तो मैं कहाँ जाउंगी मेरा क्या होगा, मैं तो मायके भी नहीं जा सकती वो बेचारे तो पहले hi दो वक़्त की रोटी मुश्किल से कहते हैं मैं अपना मनहूस चेहरा लेकर उनके पास भी नहीं जा सकती

इतना कहते हुए ममी और भी ज्यादा फुट फुट कर रोने लगती है

अमित का कलेजा फटा जा रहा था ममी की बातों को सुनते हुए और उसकी आँखों में खून उतर आया था अपने छोटे मां और मीणा क नाम पर

अमित : मेरे रहते ऐसा कुछ नहीं होगा मैं देखता हूँ कैसे मां आपको घर से निकलते हैं, और कौन कहता है क आप बाँझ हो आज कल दुनिआ में हर चीज़ का इलाज है आप डॉक्टर को दिखाइए देख लेना आप भी माँ बन जाओगी , आप तो पड़ी लिखी हैं फिर भी आप ऐसी बातों पर अपना दोष निकल रही हैं आप कल hi शहर जा कर अपना टेस्ट करवाइये

दीपिका क आंसू थमने लगते हैं और उसके दिमाग में भी ये बात घुस जाती है आखिर सही तो कहा था अमित ने आजकल भला किस बीमारी का इलाज नहीं होता, इतनी पड़ी लिखी होकर भी कैसे गवारों जैसा सोचने लगी थी वो

दीपिका: ( आंसू पोछते हुए) तू सही कह रहा है मैं जाउंगी डॉक्टर क पास ये बात पहले क्यों नहीं आयी मेरे दिमाग में

अमित : बिलकुल अभी आप रोना बंद करो क्यूंकि आप रोटी हुई बंदरिया लगती हैं

दीपिका अमित की बात सुनकर हसने लगती है और उसे हलके हाथ से मरते हुए

दीपिका:( क्या कहा बंदरिया लगती हूँ ठहर तुझे अभी बताती हूँ मैं

अमित : अरे सॉरी सॉरी ममी जी सच तो ये है क आप क चाँद से चेहरे पर ये आंसू किसी ग्रहण से लगते हैं आप बस हस्ती रहा कीजिये जब आप हस्ती हैं तो लगता है जैसे गुलहन में बहार आ गयी हो

प्लीज आप इन आँखों में कभी आंसू मत लाया करो मेरे लिए आप हस्ती रहा करो

दीपिका: ( शर्मा कर) धत्त , ऐसी बातें तू सिर्फ मंजरी को सुनाया कर , मैं तेरी ममी हूँ गफ नहीं

अमित : अरे ममी िस्मी गफ वाली बात कहाँ से आ गयी मैं तो बस वही कहा जो सच है अगर आपको अपनी तारीफ अछि नहीं लगी तो आगे से नहीं करता

दीपिका: अपनी तारीफ भला किसे अछि नहीं लगती ऐसे तो तेरे मां ने भी कभी मेरी तारीफ नहीं की

वाकई में अमित तुम बहुत अचे हो आज से मैं अपनी हर बात तुमसे डिसकस करुँगी तुम आज से मेरे बेस्ट फ्रेंड hi

फिर दोनों हाथ मिलते हैं थोड़ी देर इधर उधर की बातें करने क डैड अमित राजू से मिलने का कहकर घर से निकल जाता है

अमित क जाने क बाद दीपिका सोचने लगती है क अमित कितना ाचा है और कितना हैंडसम भी है मंजरी अगर अमित से इतनी इम्प्रेस है तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं अमित क ऐसे नेचर और क्वालिटीज़ क कारन कोई भी लड़की कैसे खुद को रोक सकती है अमित को चाहने से , अमित क बारे में सोचते हुए मन hi मन दीपिका भी जैसे अमित को अब चाहने लगी थी

उधर अमित घर से निकल कर राजू क पास जाता है और राजू को लेकर नदी किनारे चला जाता है

राजू: अबे कुछ बताएगा भी क बात क्या है

अमित : कैसे बताऊँ यार बताने में भी शर्म आ रही है

राजू: ऐसी कौन स बात है जो तुझे मुझसे शर्म आ रही है

अमित : बात hi कुछ ऐसी है

राजू: दोस्तों से शर्माना अछि बात नहीं चल सीधा बात बता क्या लफड़ा है

अमित: तुझे मीणा का पता है ?

राजू: कौन मीणा

अमित: वही यार जो अपने खेतों क पास बने डेरे में रहती है, जिसका पति हमारे hi खेत में मजदूरी करता है

राजू: वो सांवली स . जिसकी गांड बहार को निकली रहती है, तेरा क्या माज़रा है उसके साथ

अमित: मेरा क्या माज़रा होगा उससे, मुझे लगता है वो चालु किसम की औरत है और छोटे मां को अपने चक्कर में फसकर लूट रही है

राजू : अरे बाप रे बाप, ये तू क्या कह रहा है, तुझे कैसे मालूम क्या तूने कुछ देखा है

अमित : आज जब हम नदी किनारे गए थे तब मैंने उसे मां क साथ जंगल में जाते देखा

और फिर अमित साडी बात राजू को बता देता है जो उसने देखा

राजू का मुँह खुला का खुला रह जाता है

राजू : साली छिनाल छूट क रस्ते पैसा जमा कर रही है इसका तो कुछ करना पड़ेगा

अमित : और वो मां को बोल रही थी क वो मां क बचे की माँ बनने वाली है

राजू : ( हैरानी से ) इसकी माँ की ... साली ये तो ऐसे तुम्हारे खेतों को अपने नाम करवा लेगी

अमित: यही तो मैं भी सोच रहा हूँ , मां तो उसके भोसड़े में hi सब कुछ देता जायेगा और बेचारी छोटी ममी की ज़िन्दगी बर्बाद हो जाएगी

और मैं जीते जी ये सब नहीं होने दूंगा

राजू: तू बस बोल क्या करना है फिर देखते हैं इस चैनल को कौन बचता है

अमित: सब से पहले तू एक काम कर आज से तू मीणा पर नज़र रख उसकी साडी डिटेल पता कर और हो सके तो किसी और से भी मदद ले लेना मगर मां क बारे में किसी को पता नहीं चलना चाहिए

राजू : तू फ़िक्र न कर तेरे घर की इज़्ज़त मेरी इज़्ज़त है मैं सब पता करता हूँ

अमित: मुझे सिर्फ तुम पर hi भरोसा है मेरे यार बड़े मां से भी कुछ नहीं कह सकता नहीं तो घर में लड़ाई झगड़ा हो जायेगा

राजू : मैं सब समझता हूँ तू चिंता न कर मैं इसकी पूरी कुंडली निकल कर तुझे बताऊंगा तू बस चिंता मत करना

अमित और राजू थोड़ा इधर उधर की बातें कर क घर लौट जाते हैं

इधर घर में दीपिका भी गौरी से बात करती है की वो एक बार डॉक्टर से अपना इलाज करवाना चाहती है ता की वो भी माँ बन सके . गौरी दीपिका को हामी भर देती है और दीपिका गौरी को उसके साथ कल शहर चलने को राज़ी कर लेती है

ऐसे hi दिन गुज़र जाता है और रत खाना खाने क बाद सब अपने कमरों में सो जाते हैं

अगले दिन सुबह अपनी रूटीन क मुताबिक अमित अखाड़े से लौटकर खाना खा कर स्कूल चला जाता है और पीछे से गौरी दीपिका क साथ शहर चली जाती है

स्कूल में मंजरी लंच ब्रेक में अमित से मिलती है दोनों अलग अलग क्लास में थे इसलिए लंच ब्रेक hi मिल सकते थे

मंजरी: सुनिए आप क्या आज मुझे नदी किनारे मिलेंगे दोपहर को

अमित : कोई काम था क्या , यहीं बता दो

मंजरी: वो . वो मुझे आपसे कुछ बात करनी थी

अमित: बात तो तुम अब भी बता सकती हो, कहो क्या बात है

मंजरी: आप समझिये न, वो बात यहाँ नहीं बता सकती

अमित : ऐसी कौन स. बात है जो यहाँ नहीं बता सकती

मंजरी: दरअसल मैं आपसे अकेले में मिलना चाहती हूँ

अमित : तो ये बात है, मतलब फिर से मुझे गले लग्न चाहती हो

मंजरी शर्मा जाती है

अमित: मैं नहीं आऊंगा मिलने

मंजरी : ( चौंक कर) क्यों? क्यों नहीं आओगे ?

अमित : क्यूंकि तुम तो वहां भी ऐसे hi शर्माती रहोगी तो फिर बात क्या करोगी

मंजरी: ( शर्मा कर) आप मुझे तंग कर रहे हैं न

अमित: ाचा ाचा ठीक है आ जाऊंगा मगर मेरी एक शर्त है

मंजरी: वो क्या

अमित: मुझे एक पप्पी देनी होगी तभी मैं आऊंगा

मंजरी: शर्मा कर) भला ऐसी बात करता है कोई

अमित : मंजूर है तो बोलो वर्ण मैं नहीं आऊंगा

मंजरी: उठते हुए ) टाइम से आ जाइएगा

इतना कहकर भाग जाती है और अमित मंजरी की मासूम अदाओं को सोचकर मुस्कुराने लगता है और इसके साथ hi लंच ओवर हो जाता है

छुट्टी क बाद अमित घर अत है तो उसे बड़ी ममी और छोटी ममी दोनों hi घर नज़र नहीं अति तो उनका पूछने क लिए अमित कामिनी ममी क कमरे में चला जाता है दरवाज़ा खुला था इसलिए सीधा अंदर घुस जाता है

अंदर घुसते hi अमित का मुँह खुला रह जाता है सामने कामिनी ममी अपनी साडी बदल रही थी इस वक़्त उसके जिस्म पर केवल पेटीकोट और ब्लाउज था दरवाज़े की तरफ उसने पीते की हुई थी अमित अभी उसे देख hi रहा था क कामिनी अपने पेटीकोट का नाडा खोल देती है और पेटीकोट उसके पाऊँ में गिर जाता है पेटीकोट क अंदर उसने लाल पेंटी पहनी हुई थी, क्या गांड थी उभरी हुई लाल पेंटी में क़ातिलाना लग रही थी निचे गोरी गोरी जांघें अमित क निचले हिस्से में मनो फायर करने क लिए मिसाइल रेडी पोजीशन में थी, अमित का बाबूराव तो सामने का नज़ारा देखकर बहार आने को मारा जा रहा था

और अमित की हालत तो ऐसी थी जैसे सांप सूंघ गया हो मुँह खुला था आँखें बहार

सामने कामिनी नीचे झुक कर पेटीकोट उठती है जिससे उसकी गांड और भी उभर अति है अमित से अब अपने पाऊँ पर खड़ा होना मुश्किल हो जाता है अपनी हिम्मत को इकठा कर क वो जल्दी से कमरे से निकल जाता है मगर कामिनी को एहसास हो जाता है क अभी कोई जैसे कमरे से भाग कर गया हो वो झट से बाहर निकल कर देखती है तो अमित उसे घर से बहार जाता दिख जाता है

कामिनी: मन में ) मनहूस हरामी कहीं का मुझे नंगी देख रहा था आज तुझे बताती हूँ, तेरी खाल न उधेड़ दी तो मेरा नाम कामिनी नहीं

उधर अमित घर से भाग कर सीधा नदी किनारे पहुँच जाता है उसका दिल मनो राजधानी से भी तेज भाग रहा था चेहरा पसीने से भीग गया था उसकी आँखों में अभी भी कामिनी ममी की गांड और मखमली जाँघे नज़र आ रही थी क्या खूबसूरत गांड थी, अगर घोड़ी देर और ठहर जाता तो क्या पता ममी पेंटी भी उतर देती

फिर तो आज हार्ट hi फ़ैल हो जाना था उसका कितनी ज़बरदस्त गांड है ममी की, ममी जितना मुझसे उखड़ी रहती है उससे कहीं ज्यादा भगवन से उसे सुन्दर बनाया है

पता नहीं कब तक अमित अपने खयालो में hi खोया था क अचानक उसे किसी ने हिलाया और वो जैसे दुनिआ में लौट आया

मंजरी: क्या हुआ आपको कब से आवाज़ दे रही हूँ आप जवाब hi नहीं दे रहे

अमित: कोऊ कक्क. कुछः भी तो नहीं

मंजरी: झूठ मत बोलिये मैं कब से आवाज़ दे रही थी आप सुन hi नहीं रहे थे

अमित: अरे कुछ नहीं मैं तो बस तुम्हारे hi बारे में सोच रहा था

मंजरी: ( शर्मा कर ) मेरे बारे में

अमित: हाँ सच

मंजरी: मेरे बारे में क्या सोच रहे थे

अमित: यही क आज तुम मुझे होंठो पर पप्पी डौगी तो कितना मज़ा आएगा

मंजरी: हआ , बेशर्म जाइये मैं नई बात करती आपसे मैं जा रही हूँ

इतना कहकर मंजरी मुड़ने लगती है तो अमित उसका हाथ पकड़ कर खिंच लेता है और अपने साइन से लगा लेता है

अमित: बस इतना hi प्यार है मुझसे एक किश तक नहीं दे सकती मुझे, ठीक है तो जाओ मैं भी चलता हूँ

इतना कहकर अमित मंजरी को छोड़ कर आगे बढ़ने लगता है तो मंजरी अमित क पाऊँ में गिर जाती है और कहती है

मंजरी: नाम आँखों से) मैं तो मज़ाक कर रही थी ये दिल ये जिस्म सब आपका hi तो है मैं आपको भला कैसे मना कर सकती हूँ

मंजरी की ये बात सुनकर और उसकी आँखों की नमी देखकर अमित पिघल जाता है और उसे उठाकर गले से लगा लेता है

अमित: पागल मैं तो मज़ाक कर रहा था तुम तो रोने लगी

मंजरी: आप नहीं जानते मैं आपको कितना प्यार करती हूँ आप अगर मुझसे रूठ गए तो मेरा क्या होगा

अमित : अरे पगली तुमसे भला कोई रूठ सकता है

इतना कहकर अमित मंजरी को कास क अपने साइन में भींच लेता है

दोनों यूँ hi कुछ पल एक दूसरे क प्यार में डूबे एक दूसरे क गले मिले खड़े रहते हैं

अमित : तो अब मुझे मेरा इनाम मिलेगा या नहीं

मंजरी : मुझे शर्म अति है आप hi ले लीजिये

अमित: पक्का ले लूँ, नाराज़ तो नहीं होगी फिर

मंजरी: बिलकुल भी नहीं

अमित मंजरी को थोड़ा पीछे हटाकर उसके चेहरे को दोनों हाथों में थम लेता है और धीरे धीरे अपना चेहरा उसके चेहरे पर झुकाने लगता है मंजरी की ऑंखें अभी बंद hi थी अमित क होंठ मंजरी क होठों क पास एते जाते हैं मंजरी को अमित की गरम साँसे महसूस होने लगती हैं और उसका जिस्म कांपने लगता है तभी उसे अपने होंठो पर अमित क गरम होंठो का एहसास होता है

ये उसके जीवन का प्रथम चुम्बन था मंजरी तो मनो हवा में उड़ रही थी उसे कुछ एहसास hi नहीं था क वो कहाँ है कहाँ नहीं वो तो बस मज़े की वादिओं में खोटी जा रही थी

अमित ने भी पहली बार ऐसा नरम और दिलकश एहसास महसूस किया था मंजरी क होंठ मनो स्ट्रॉबेरी की तरह मुलायम और रसीले थे अमित तो बस मज़े से उसके होंठो का रास निचोड़ने में लगा हुआ था दोनों तब तक एक दूसरे क होंठ चूसते रहे जब तक की उनकी साँसे नहीं उखड गयी

जब सांस लेने क लिए दोनों अलग हुए तो जैसे उन्हें होश आया, मंजरी खुद को सँभालते हुए जल्दी से वहां से हस्ती मुस्कुराती हुई भाग जाती है और अमित उसे जाता हुआ देखता रहता है और सोचता है

अमित :कितनी भोली और चंचल है मंजरी, इसकी मासूमियत पे तो सब कुर्बान करदु

फिर अमित राजू से मिलने चला जाता है और उससे मीणा क काम क बारे पूछता है मगर अभी कुछ पता नहीं चला था

शाम होने से पहले अमित घर लौट अत है घर एते hi कामिनी ममी डंडे से अमित की पिटाई शुरू कर देती है घर पर इस समय और कोई नहीं था मां लोग खेरसों में थे और बड़ी ममी और छोटी ममी कहीं बहार गयी थी

कामिनी तो जैसे आज अगला पिछले सारा हिसाब कर देना चाहती थी, अमित चिल्लाता रहता है मगर कामिनी उसकी एक नहीं सुनती वैसे तो अमित कामिनी से कहीं ज़्यादा ताकतवर था मगर उसके संस्कार उसे प्रतिरोध करने नहीं दे रहे थे

मगर कामिनी तो जैसे उसकी हड्डी पसली तोड़ देना चाहती थी वो लगातार मरती जा रही थी और अमित जोर जोर से चिल्ला रहा था

अमित : ममी प्लीज मत मारो प्लीज आखिर मर क्यों रही हो मैंने ऐसी क्या गलती करदी मत मारो ममी प्लीज मत मारो

कामिनी: कमीने हरामज़ादे शर्म नहीं अति मुझे नंगा देखता है हरामी आज तुझे बताती हूँ मनहूस कहीं क मेरी ज़िन्दगी बर्बाद कर क रखड़ी तूने और अब मुझ पर गन्दी नज़र रखता है

ये ले और ले

इतना कहकर दे दाना दान फिर से डंडे से पीटने लगती है, कामिनी की बातों से अमित इतना तो जान गया था क ममी को पता चल गया क दोपहर को मैंने उन्हें कपडे बदलते देखा है

तभी बहार का गेट खुलता है और गौरी और दीपिका घर में घुसती हैं

सामने का नज़ारा देखकर दोनों क होश उड़ जाते हैं अमित निचे ज़मीं पर पड़ा था और कामिनी डंडे से उसे ऐसे पीट रही थी जैसे कोई कपडे धोता है डंडे से

दीपिका भाग कर कामिनी क हाथ रोक लेती है और गौरी अमित को सीने से लगा लेती है

दीपिका: गुस्से से ) ये क्या कर रही हो दीदी, दिमाग तो ठीक है आपका क्यों मर रही हो बेचारे को

कामिनी: ( गुस्से में) बीच में से हैट जा छोटी आज में इसकी खाल उधेड़ दूंगी, ये बेचारा नहीं हवस का भूखा भेड़िए है

दीपिका: हैरानी से) आप ये क्या कह रही हैं? आप होश में तो हैं

कामिनी: हाँ मैं होश में हूँ पूरी होश में हूँ पूछ इससे मुझे नंगी देख रहा था क नहीं पूछ इससे मेरे कमरे में चुपचाप घुसा था क नहीं, घर में अकेली पाकर पता नहीं क्या करना चाहता था ये मेरे साथ

दीपिका: चुप कीजिये आप जो मुँह में अत है बोले जा रही हैं आप, अमित हमारा बचा है हमारे संस्कार है इसमें ये ऐसा कुछ सोच भी नहीं सकता

कामिनी: तो क्या मैं झूठ बोल रही हूँ, तुम लोगो की आँखों पर पट्टी बांध राखी है इसने तुम्हे कहाँ नज़र आएगा

गौरी: ( रट हुए) मेरा बीटा ऐसा नहीं कर सकता तुम झूठ बोल रही हो

कामिनी: मैं झूठ बोल रही हूँ तो पूछो इससे ये मेरे कमरे में आया था क नहीं? पूछो इससे क मुझे नंगी देख रहा था क नहीं? पूछो इससे क्या करने वाला था ये मेरे साथ

गौरी: रट हुए) बता अमित सच क्या है तुझे मेरी कसम बता तूने ऐसा किया था क्या

कामिनी: बोल कमीने माँ कहता है न दीदी को, खा माँ की कसम क तूने मुझे नंगा देखा क नहीं देखा

गौरी: बोल बीटा बता जो ये पूछ रही है

अमित तो बेचारा कसम में फस्स गया था अब झूठ बोलकर कसम नहीं तोड़ सकता था क्यूंकि उसे माँ का प्यार तो बड़ी ममी ने hi दिया था

अमित : ये सच है माँ पर

इससे आगे कुछ कहता गौरी ने गुस्से में अमित क मुँह पर 3/4 थप्पड़ कास क जड़ दिए और रोटी हुई अपने कमरे में भाग गयी

कामिनी ने फिर से डंडे से अमित की पिटाई करनी चाही मगर दीपिका ने उसे रोक लिया और उसे उसके कमरे में भेज दिया

उसके बाद अमित को सहारा दे कर अपने कमरे में ले आयी , कामिनी ने बुरी तरह मारा था अमित को जिसकी वजह से उसके सरे शरीर में सूजन आ गयी थी

अभी जो कुछ भी हुआ था दीपिका को उस पर यकीन नहीं था मगर पहले अमित को संभालना ज़रूरी था इस लिए दीपिका उसे अपने बीएड पर लेता देती है और उसके शरीर की सिकाई क लिए पानी गरम कर क लती है और सिकाई करने लगती है

गरम एहसास होते hi अमित कराहने लगता है और दीपिका उसे दिलासा देती है

थोड़ी देर तक उसकी सिकाई करने क बाद दीपिका हल्दी वाला गरम दूध अमित को देती है

अमित मन करता है पर दीपिका क जोर देने पर पिने लगता है

दीपिका: अब बता बात क्या है? ये सब क्या और कैसे हुआ

अमित: रट हुए) मैंने कुछ नई किया ममी मैं निर्दोष हूँ वो सब अचानक हो गया मैंने जान बूझकर नहीं किया

दीपिका: मुझे पूरी बात बता

फिर अमित शुरू से लेकर साडी बात बता देता है जिसे सुनकर दीपिका को कामिनी पर गुस्सा आने लगता है

दीपिका: तो तूने दीदी क सामने ये सब बोलै क्यों नहीं चुप क्यों था तू

अमित : रट हुए ) मुझे बात पूरी करने hi कहाँ दी माँ ने

दीपिका: तू आराम कर मैं दीदी से बात करती हूँ जाकर

दीपिका अमित की चोटों पर मलहम लगा कर उसे आराम करने का बोलती है और कमरे से निकल जाती है

दीपिका क मन में एक बात थी क कामिनी दीदी ने ज़रा स बात को इतना बड़ा कर क बताया और अमित का क्या हल कर दिया कोई बहुत बड़ा राज़ है जो कामिनी दीदी बताती नहीं है और हरवक्त अमित पर भड़ास निकलती रहती है मुझे पहले ये राज पता करना hi होगा
 
अपडेट 8

दीपिका अमित की चोटों पर मलहम लगा कर उसे आराम करने का बोलती है और कमरे से निकल जाती है

दीपिका क मन में एक बात थी क कामिनी दीदी ने ज़रा स बात को इतना बड़ा कर क बताया और अमित का क्या हल कर दिया कोई बहुत बड़ा राज़ है जो कामिनी दीदी बताती नहीं है और हरवक्त अमित पर भड़ास निकलती रहती है मुझे पहले ये राज पता करना hi होगा

अब आगे-

दीपिका कामिनी क कमरे में गयी तो वो अपने बीएड पर बैठी थी चेहरे को देख कर लग रहा था मनो गुस्सा अभी भी ठंडा नहीं हुआ था

दीपिका: क्या दीदी आप हमेशा उसे कोसती रहती हैं और आज तो आप उसे मर hi डालती अगर हम न आते तो बेचारे की क्या हालत करदी अपने, ऐसा भी कोई करता है भला? अगर उससे गलती हो गयी थी तो आप उससे बात करती उससे पूछती पहले आपने तो सीधा उसे मरना पीटना शुरू कर दिया, क्या आपके दिल में ममता नाम की कोई चीज़ नहीं इतना मासूम है वो आपको ज़रा तरस नहीं अत उसपर?

कामिनी: (गुस्से में) मासुम हैं मासुममम किसे मासूम कह रही है तू? मासूम नहीं मनहूस है वो मनहाऊससस

समझी? और ममता की बात कर रही हो तुम? तो सुन मेरे अंदर की ममता की हत्या उसी मनहूस ने की है जिसे तू मासूम कह रही है

ये बात सुनकर दीपिका क सर पर मनो बम hi फुट गया हो, भला अमित ने ऐसा क्या कर दिया जो कामिनी ऐसा कह रह है

दीपिका: हैरानी से) क्या कहा अपने? ऐसा क्या कर दिया उसने जिससे आपकी ममता मर गयी?

कामिनी: चिल्लाकर) उसी मनहूस की वजह से मैं माँ नहीं बन पायी आजतक

दीपिका: क्याआ ...... अमित की वजह से आप माँ नहीं बन पायी? वो कैसे ?

कामिनी: वो मनहूस मेरी हस्ती खेलती ज़िन्दगी में ग्रहण बन कर आया और मेरा सबकुछ तबाह हो गया

इतना कहकर कामिनी रोने लगती है

दीपिका भी हैरान हो जाती है क आखिर ऐसा क्या हो गया अमित क हाथो जो कामिनी माँ नहीं बन पायी आजतक

दीपिका सबकुछ जानना चाहती थी मगर कामिनी ने रोना शुरू कर दिया था

दीपिका जानती थी अगर आज अगर वो नहीं जान सकीय तो शायद फिर कभी मौका न मिले क्यूंकि आज कामिनी गुस्से में सब बता सकती है जो आजतक छुपाती रही है

दीपिका: आखिर उसने ऐसा क्या कर दिया क आप माँ नहीं बन सकीय वो तो खुद मासूम सा बचा है बचपन से आपके पास है वो भला आपकी ज़िन्दगी को कैसे बिगड़ सकता है

कामिनी: रट हुए चिल्लाकर) मासूम नहीं मनहूस है वो मनहूस, तुम्हारे लिए होगा वो मासूम मेरे लिए तो मनहूस hi है

तू जानती है मैं आजतक माँ क्यों नहीं बन सकीय? जानना चाहती है तो सुन

बात तब की है जब मैं शादी कर क इस घर में ख़ुशी ख़ुशी अजय क साथ ज़िन्दगी बिता रही थी

हम दोनों बहुत खुश थे गौरी दीदी को कोई बचा नहीं था इस लिए अजय चाहते थे क मैं जल्दी से इस घर को वारिस दूँ ताकि इस घर का आंगन खुशिओं से महके, फिर एक दिन मुझे पता चला क मैं प्रेग्नेंट हूँ हम सब बहुत खुश थे

अचानक एक दिन इस मनहूस क जन्मदिन पर हमारे सास ससुर इसका जन्मदिन मानाने क लिए गए हुए थे साथ में अजय भी थे मैं प्रेगनेंसी की वजह से घर पर hi रुकी थी और दीदी भी मेरे साथ घर थी, रत को खबर आयी की सब कार एक्सीडेंट में मरे गए हैं बस ये मनहूस hi बचा था

अपने जन्मदिन क दिन hi ये मनहूस अपने माता पिता और नाना नानी को खा गया वो तो अजय पता नहीं कैसे ज़िंदा बच गए मगर आधे अधूरे

एक्सीडेंट की खबर सुनते hi हमारी तो दुनिआ hi उजाड़ गयी मैं चक्कर खा कर सीडीओं से गिर पड़ी और मेरा बचा पेट में hi मर गया

मुझे जब होश आया मैं हॉस्पिटल में थी डॉक्टर ने बताया क मेरा बचा गिरने की वजह से मर गया मैं बहुत रोइ मैं कितनी खुश थी क मैं माँ बनूँगी मगर इस मनहूस की वजह से सब उजाड़ गया.

उधर अजय भी हॉस्पिटल में एडमिट थे विजय भैया इस मनहूस को घर ले ए कुछ दिनों बाद जब अजय घर ए हॉस्पिटल से तो एक और केहर मुझ पर टूट पड़ा , अजय ने बताया क अब वो कभी बाप नहीं बन सकेंगे क्यूंकि उनका लिंग एक्सीडेंट में डैमेज हो गया था ये सुनते hi मैं तो मर hi गयी थी

तुम hi बताओ एक औरत कैसे रह सकती है पति क प्यार क बिना ?

तब से लेकर आजतक मैं कैसे जी रही हूँ ये सिर्फ मैं hi जानती हूँ ऐसी कोई रत नहीं जब मैं कांटो पर न लेती हूँ सिर्फ इस मनहूस की वजह से

मेरा बचा मारा गया सिर्फ इस मनहूस की वजह से

मैं सुहागन होते हुए भी विधवा हो गयी सिर्फ इस मनहूस की वजह से

इसे मनहूस नहीं तो क्या कहूँ?

मेरा तो जी चाहता है क इसे जान से मर दूँ ये तो अजय ने अपनी कसम दे राखी है वर्ण कब की इसे मरकर फांसी चढ़ जाती

दीपिका को तो मनो सांप सूंघ गया था कामिनी की बातें सुनकर कितनी नफरत करती है कामिनी अमित से उन बातों क लिए जिसमे उसका कोई हाथ था hi नहीं, भला वो मासूम सा बचा कैसे किसी का बुरा कर सकता था , दीपिका अभी कामिनी की बातों को सुनकर अपनी hi सोच में गम थी

कुछ वक़्त तक दोनों चुप रहती हैं तभी दीपिका इस साइलेंस को तोड़ती है

दीपिका: दीदी दुनिआ में ऐसा कौन सा बीटा होगा जो अपनी माँ की जान लेले भला कैसे कोई अपने माता पिता को मर सकता है, दुनिआ में जो भी होता है सब भगवन की मर्ज़ी से होता है इसमें किसी का क्या दोष

अपने सिर्फ अपना दुःख देखा कभी ये नहीं सोचा तक़दीर ने जिससे उसके माँ बाप एक झटके में छीन लिए उस मासूम क दिल पर क्या बीती होगी

अगर अपने अपना बचा खोया था तो आप अमित को अपनाकर उसे hi अपना बीटा बना लेती उसे भी माँ बाप का प्यार मिल जाता

मगर आप ने तो उसे उस अपराध क लिए अपराधी मान लिया जो उसने किया hi नहीं था

ज़रा सोचिये आखिर वो उस वक़्त खुद गोद में खेलने वाला छोटा बचा था उसे क्या मालूम था क क्या हो रहा है और आप उसे दोषी मानती हैं

ज़रा ठन्डे दिमाग से सोचियेगा आखिर इसमें उसका या किसी का क्या दोष है ये तो सब तक़दीर का खेल है

रही बात माँ बनने की, वो तो बड़ी दीदी भी नहीं बन पायी और न hi मैं अभी तक बन पायी तो इसमें हम किसको दोष दे बताइये?

क्या हम भी यही सोचें क किसी और की वजह से हम माँ नहीं बन प् रही?

ये तो अपनी अपनी तक़दीर है मैं और कुछ नहीं कह सकती आप खुद समझदार हैं

हाँ मगर इतना ज़रूर कहूँगी क आज जो अपने किया वो सरासर गलत था वो बेचारा तो आपसे हमारे बारे में जानने क लिए आया था, गलती तो आपकी थी जो आप दरवाज़ा खुला छोड़कर कपडे बदल रही और अपने उसपर कैसे कैसे इलज़ाम लगा दिए ऊपर से उसे इतनी बुरी तरह मारा

कभी सोचा है अपने इस घर वो hi तो अकेला वारिस है क्या होगा अगर वो किसी दिन आपके इस रवैये से तंग आकर घर छोड़कर चला गया बड़ी दीदी तो मर hi जाएगी और बाकि सबका दिल भी टूट जायेगा फिर ये घर घर नहीं रहेगा

ज़रा सोचियेगा आखिर आप उसे किस जुर्म की सज़ा दे रही हैं ? उसने क्या कभी आपको कुछ कहा? क्या उसने आप बड़ी दीदी की तरह प्यार नहीं दिया सोचियेगा

इतना कहकर दीपिका कमरे से निकल जाती है मगर उसकी बातें अभी भी कामिनी क दिमाग में घूम रही थी और उसे यद् आने लगा क कैसे अमित जब छोटा था तो अपनी तोतली ज़ुबान में उसे माँ कहकर उससे लिपट जाता था मगर वो उसे दूर हटा देती थी

कैसे बचपन से लेकर आजतक वो कामिनी क प्यार को तरसता रहा मगर उसने कभी अमित को प्यार नहीं दिए बल्कि नफरत hi दी

मगर फिर उसे अपने बचे और पति क साथ हुई हादसे की यद् आ जाती है और उसके मुँह से निकलता है

‘कोई चाहे कुछ भी कहे मगर मेरे लिए तो वो मनहूस hi है सब उसी की वजह से हुआ है मैं उसे कभी माफ़ नहीं करुँगी ‘

दीपिका कामिनी क कमरे से निकलकर गौरी क कमरे में जाती है जहाँ गौरी जाने कब से रोये जा रही थी चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ था

दीपिका जब गौरी की हालत देखती है तो जल्दी से गौरी को गले लगाकर चुप करवाने की कोशिश करती है

दीपिका : ये क्या कर रही हैं दीदी बच्चों की तरह रोये जा रही हैं, सम्भालिये खुद को

गौरी: (रट हुए) ये सब क्या हो गया छोटी तूने देखा नहीं कामिनी ने क्या कहा, मेरा बीटा ऐसा नहीं कर सकता वो ऐसा कभी नहीं कर सकता मैंने उसे जन्म नहीं दिया मगर उसे मैंने अपने बेटे जैसे hi पला है उसपर उठी हुई उंगली उसपर नहीं मुझपर उठी है, नहीं वो ऐसा कब्बी नहीं कर सकता

Deepika:!chup हो जाइये दीदी चुप हो जाइये मैं जानती हूँ वो ऐसा नहीं कर सकता और न hi उसने ऐसा किया है, कामिनी दीदी को गलती लग गयी है

इतना सुनकर गौरी एकदम चुप हो जाती है और दीपिका को देखने लगती है

दीपिका: हाँ दीदी, मैंने अमित से और कामिनी दीदी से बात की है दरअसल अमित हम दोनों को घर न पाकर कामिनी दीदी से पूछने गया था और उस वक़्त कामिनी दीदी कपडे बदल रही थी कमरे में बस ये सब अनजाने में हुई घटना है इसमें किसी का कोई दोष नहीं है

गौरी: तू सच कह रही है?

दीपिका : हाँ दीदी , अमित भी यही कहना चाहता था मगर अपने सुना hi नहीं और उस बेचारे को मरने लगी

गौरी: ( रट हुए ) मैंने अपने फूल से बचे पर हाथ उठाया मेरे हाथ क्यों नहीं टूट गए कितनी बुरी तरह मारा उसे कितनी चोट लगी होगी उसे, कहाँ है वो मुझे उसके पास जाना है, मुझे उसके पास ले चलो

दीपिका: वो यहीं है मेरे कमरे में है मैंने उसे दवा लगा दी है और उसे पैन किलर देदी है अभी वो रहा है

गौरी उठकर दीपिका क कमरे में भगति हुई जाती है जहाँ अमित बीएड पर उल्टा सो रहा था

गौरी उसे एकटक देखि जा रही थी और आंसू बहाये जा रही थी पीछे पीछे दीपिका भी आ जाती है

दीपिका गौरी को आंसू बहते देखती है तो उसे चुप करवाने लगती है

ऐसे रत होने को अति है विजय और अजय घर लौट एते हैं कामिनी और दीपिका खाना बना देती हैं कमलेश आज फिर काम का बहाना बना कर निकल गया था बहार से hi गौरी अमित क पास hi बैठी रहती है जब विजय अमित क बारे में पूछता है तो कोई उसे असलियत नहीं बताता बस इतना hi कहते हैं क आज वो जल्दी सो गया

फिर दीपिका गौरी को उसके कमरे में वापिस भेज देती है ये कहकर क अगर वो न गयी तो विजय भैया को सच पता चल जायेगा जिससे घर का माहौल बिगड़ सकता है क्यूंकि विजय अमित से बहुत प्यार करता था गौरी भी बात मानकर अपने कमरे में चली जाती है मगर उसका दिल नहीं था इस लिए विजय क सोने क बाद वो फिर लौट अति है

रत भर दोनों जागती रहती हैं और अमित का ध्यान रखती हैं

गौरी अपने मन में सोच रही थी क अमित क्या सोचेगा उसके बारे में क मैं कैसी माँ हूँ बिना उसकी बात सुने उसे मरने लगी अगर उसकी सगी माँ होती तो भला ऐसा करती कहीं वो मुझसे रूठ तो नहीं जायेगा

अगर वो नाराज़ हो कर मुझसे दूर चला गया तो मेरा क्या होगा ‘ नहीं नहीं मैं उसे कहीं नहीं जाने दूंगी वो मेरा बीटा है मैं उसके बिना नहीं जी सकती ‘

दीपिका अपने मन में सोच रही थी क अमित कितना ाचा है सबका ख्याल रखता है सबकी बात मंटा है मगर कामिनी दीदी उससे कितनी नफरत करती है वो भी उस बात क लिए जो शायद उसे पता भी नहीं और आज कितना मारा भी है इसे कितना अभागा है बेचारा इतने प्यारे मासूम पर भगवन को कोई दया नहीं अति क्या कोई कुछ भी कहे जब तक मैं हूँ अमित को किसी को हाथ भी नहीं लगाने दूंगी आज से इसे मैं प्रोटेक्ट करुँगी इसे सब समझाउंगी सिखाऊंगी और हुशिआर बनाउंगी

ऐसे hi रत भी गुज़र जाती है सुबह अमित की आंख खुलती है तो देखता है क माँ उसके सर क पास बैठी सो रही है वो समझ जाता है माँ साडी रत यहीं बैठी रही होगी फिर उसकी नज़र पाऊँ की तरफ जाती है जहाँ छोटी ममी सर रखकर सो रही थी

अमित की ऑंखें भर अति हैं दोनों क दिल में अपने लिए प्यार देखकर वो चुप चाप उठने लगता है मगर दीपिका की आँख खुल जाती है क्यूंकि उसका सर अमित क पाऊँ पर hi था,

वो देखती है क अमित उठना छह रहा है तो जल्दी से अमित को सहारा देती है

दीपिका कुछ बोलने hi वाली थी क अमित इशारे से उसे चुप करवा देता है ताकि गौरी की नींद न ख़राब हो

दीपिका अमित को सहर देकर कमरे से बहार ले चलती है अभी अमित को चलने में थोड़ी दिक्कत थी क्यूंकि उसके पाऊँ और तखनो में सूजन ज्यादा थी

अमित को बाथरूम जाना था तो दीपिका उसे सहारा देकर बाथरूम में ले जाती है

अमित अपनी चोट और सूजन क कारन तीन दिन तक घर से बहार नहीं निकलता इस दौरान दीपिका और गौरी अमित की हर पल खातिरदारी करती हैं और उसकी हर ज़रूरत का ध्यान रखती हैं तीन दिन क बाद सूजन काम हो जाती है तो अमित स्कूल जाने की तैयारी करता है गौरी मन कर रही थी मगर अमित नहीं मंटा और स्कूल चला जाता है

स्कूल में मंजरी अमित को लंच ब्रेक में जब देखती है तो भागकर उसके पास चली अति है और आंसू बहाने लगती है

मंजरी: कहाँ चले गए थे आप बिना बताये? पता है मेरा क्या हल था किस बात से नाराज़ थे आप एक बार बता तो देते मैंने सब से पूछा मगर किसी ने नहीं बताया राजू को आपके घर भी भेजा मगर आप वहां भी नहीं मिले

अमित: वो मैं अचानक किसी जरुरी काम से शहर चला गया था जल्दी में बता नहीं स्का, कल hi लौटा हूँ

मंजरी: ये आपके चेहरे पर सूजन कैसी है?

अमित : वो मैं वो गिर गया था ज़रा स चोट है बस

मंजरी: आप सच बोल रहे हैं न?

अमित: क्या तुम्हे यकीन नहीं मुझपर?

मंजरी: अपने से ज्यादा है

इतने में बेल्ल बज जाती है मंजरी मिलने का पूछती है मगर अमित अभी मिलना नहीं चाहता था क्यूंकि अभी मंजरी को उसकी छोटो का पता चल सकता था इस लिए मन कर देता है मंजरी मायूस हो कर क्लास में चली जाती है

स्कूल क बाद अमित राजू क पास जाता है

राजू: अबे कहाँ गायब था मैं तेरे घर भी गया था? मंजरी से मिला क नहीं बेचारी कितनी परेशां थी ?

अमित: हाँ उससे मिला था स्कूल में, मैं ज़रा ज़रूरी काम से कहीं गया था बहार मां क साथ तो कल hi आया हूँ

तू सुना तुझे जो बोलै था वो किया?

राजू: हाँ वो काम हो गया समझ ये मीणा तो छिनाल है साली मैंने अपने एक दोस्त को उसपे नज़र रखने का बोलै था जो उसके घर क साथ रहता है उसने बताया है क मीणा पहले खेतों में मजदूरी क लिए जाती थी मगर अब नहीं जाती और उसके रिश्ते का कोई भाई उससे मिलने बहुत अत है आजकल

तू बिलकुल सही टाइम पर आया है आज उसका वो भाई आने वाला है आज हम रत को सब छुप कर देखेंगे मेरा वो दोस्त कह रहा था क साला हर 15 दिन में अत है 3/4 दिन क लिए और जब वो अत है मीणा का घरवाले रत खेतों में रहता है और पीछे दोनों रत को रासलीला करते हैं

अमित : हैरानी से ) क्या मतलब? मीणा अपने भाई क साथ भी चुदाई करती है

राजू: अबे रत को सब पता चल जायेगा तो आ जाना मेरे पास मिलकर चलते हैं और पता करते हैं साली आखिर करती क्या फिरती है

अमित: मगर रत को माँ आने नहीं देगी

राजू: अबे साले ऐसा मौका हाथ से जाना नहीं चाहिए तू कैसे भी करके आ जाना

अमित: ठीक है मैं 9:30 बजे आ जाऊंगा

फिर अमित घर लौट जाता है ऐसे है शाम हो जाती है कमलेश शाम को घर आ जाता है अमित जनता था आज छोटे मां घर पर होंगे इसका मतलब था राजू की खबर पक्की थी

रत 9:30 बजे जब सब अपने कमरों में सोने चले गए तो अमित चुप चाप घर से निकल जाता है मगर दो ऑंखें उसे देख रही थी

घर से निकल कर अमित सीधा राजू की तरफ जाता है जो उसे बहार hi मिल जाता है और दोनों दोस्त मिलकर मीणा क घर की तरफ चल पड़ते हैं खेतो क रस्ते , रास्ता सुनसान था मगर अमित को तो आज जैसे किसी बात की परवाह नहीं थी वहीँ राजू की गांड फैट रही थी मगर अमित क साथ होने से वो भी शेर बना हुआ था

थोड़ी देर में दोनों दोस्त मीणा क घर क पास पहुँच जाते हैं जहाँ राजू का दोस्त उनका इंतज़ार कर रहा था राजू उसे देखते hi जेब से शराब का पौआ निकलता है जिसे देखकर वो लड़का खुश हो जाता है

लड़का: वह राजू भाई आप आ गए मैं कब से इंतज़ार कर रहा था

राजू : ये ले तेरे लिए है जा मौज कर और सुन वो मीणा अभी किधर है

लड़का: वो अभी उस झोपड़े में है उसका मरद खेतों में है आज उसका वो भाई आया हुआ है

राजू : ाचा तू जा मैं देखता हूँ

लड़का: शुक्रिया राजू भाई और कोई काम हो तो बताना

इतना कहकर वो लड़का बोतल लेकर निकल जाता है अपने रस्ते

अमित: अबे ये क्या तू दारू का काम कबसे करने लगा

राजू: अबे चुप कर ये सब तो अपना काम करवाने की कीमत है और कुछ नहीं अब तू चुप कर पहले अपना काम करते हैं फिर बात कर लेना

दोनों दोस्त फिर झोपड़े क पास चले जाते हैं और अंदर देखने की कोशिश करते हैं ,

झोपड़े क अंदर लालटेन जल रही थी जमीं पर बिस्तर बिछा हुआ था जिसपर मीणा कमर से निचे नंगी लेती हुई थी उसके ऊपर एक आदमी चढ़ा हुआ था वो भी कमर से निचे नंगा था

मीणा: आआअह्हह्ह्ह्ह ....... कक कक्कक्कक्स. ऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. ज़ोर से करो और जूऊऊर से ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह आआअह्ह्ह्हह cccccccccc

आदमी: ज़ोर से hi तो कर रहा हूँ मेरी रंडी तेरी छूट तो साली हर वक़्त गीली hi रहती है कितनी आग तेरे अंदर

मीणा : क्या करूणूंणन्न ccccccccccc आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ये अअअअअअगगगगगगगग बुझती hi नहीइइइइइइइ cccccccccc

आदमी: क्यों तेरे पास तो यहाँ दो दो मरद हैं एक तेरा खसम और दूसरा वो भादवा मालिक

मीणा : काहे क मरद साले दोनों भड़वे हैं

आआअह्ह्ह्हह कक्ककक्कक्स ऊऊह्ह्हह्ह ज़ज़्ज़ज़्ज़वूर से करूऊऊ एक तो खेतों में मजदूरी कर क थक जाता है और आ क सो जाता है दूसरा वो भादवा मालिक आग तो बुझा नहीं पता उल्टा और भड़का क चला जाता है हर बार उंगली करनी पड़ती है बाद में आआआहहहहहहह और जुएररररर सीई

आआआह्ह्ह्ह ऐसी हीईई ाआईईई ऊऊओह्ह्ह्हह्ह

मायआ

आदमी: क्यों उसके लैंड में डैम नहीं है क्या

मीणा: लैंड है hi कहाँ उसके पास 5’ की नुनी है लैंड तो तेरे पास है आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कक्कक्कक्कक्स ऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह और जोरर सीईई

आदमी: तो क्यों जाती है फिर उसके पास

मीणा: तू भी भादवा है साला अगर उसके पास नहीं जाउंगी तो उसे चुटिया कैसे बनाउंगी ऊऊह्ह्हह्ह आआअह्ह्ह्हह कक्कक्कक्स मायआ आयआईईई

साला बाप बनने क काबिल है नहीं और बचा ढूंढ़ता फिरता है मैं ये बात समझ गयी थी बस इसी लिए उसके निचे लेट गयी अब देखना तेरे बचे को उसका बचा बताकर मैं उसके हिस्से की जायदाद हमारे बचे क नाम करवालुंगी यानि क हमारे नाम फिर देखना हम भी अमीर हो जायेंगे फिर सब बेचकर कहीं दूर चले जायेंगे और नई ज़िन्दगी शुरू करेंगे

आआअह्हह्ह्ह्ह ोुह्ह्ह्हह्ह और teeejjjjjjjjjjj मेरा होने वाला है ऐसे hi ऊऊह्ह्हह्ह माआ

आदमी: साली कितनी बड़ी रांड है तू सबको चुटिया बना रही है अगर उसे पता चल गया तो

मीणा: किसी को पता नहीं चलेगा कौन बताएगा बोल क्या कभी तेरे बारे में किसी को पता चला है

आअह्ह्ह आआब्बब्ब बातें बंद कररररर ोुर्ररर ढक्की पीवलललललल आआह्ह्ह्हह माआआ ऐसी हीई

ऐसे hi थोड़ी देर में चुदाई प्रोग्राम ख़तम हो जाता है मगर अमित तो कहीं गम सा हो गया था उसकी आँखों क सामने छोटी ममी का चेहरा घूम रहा था बेचारी की ज़िन्दगी बर्बाद हो जाएगी

राजू तो अपना लैंड हिला रहा था अंदर का चुदाई सन देखकर मगर अमित अपने hi ख्यालों में खोया था और आगे की प्लानिंग कर रहा था क क्या किया जाये

दोनों दोस्त चुप चाप वहां से निकलकर वापिस घर आ जाते हैं अमित चुपचाप बिना कोई आवाज़ किये अपने कमरे में चला जाता है जहाँ पहले से hi कोई उसका इंतज़ार कर रहा था जैसे hi अमित अपने कमरे में घुसता है सामने देखकर हड़बड़ा जाता है
 
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