अपडेट 7
राजू अमित का इंतज़ार कर क चला गया था उसने सोचा क अमित चला गया होगा,, अमित भी पसीने से भीगा हुआ तेज कदमो से घर पहुँच कर सीधा अपने कमरे में घुस जाता है
अब आगे-
अपने कमरे में बीएड पर लेता हुआ अमित छोटे मां और मीणा की चुदाई को यद् कर रहा था उसकी आँखों क सामने वो सब बार बार घूम रहा था. ज़िन्दगी में पहली बार आज उसने किसी औरत का नंगा जिस्म देखा था और चुदाई का मंजर तो उसकी आँखों क सामने अभी भी चल रहा था
अमित का खुद पर कण्ट्रोल नहीं था उसे समझ नहीं आ रहा था क उसकी बॉडी में इतनी बेचैनी क्यों हो रही है उसका लैंड तो जैसे फटा जा रहा था कितनी hi देर तक अमित आज क चुदाई सन को यद् करता अपने लैंड को मसलता रहता है , तभी उसके दिमाग में मीणा और कमलेश की बातें यद् अति हैं क मीणा कमलेश मां क बचे की माँ बनने वाली है और मीणा को खुश करने क लिए सोने का हार लाये थे
अमित : मन में). इसका मतलब छोटे मां हिसाब में गड़बड़ करके सारा पैसा मीणा पर लुटा रहे हैं अगर ऐसे hi चलता रहा तो मां सब कुछ लुटा देंगे और जब बड़े मां और अजय मां को पता चला तो घर टूट जायेगा,, फिर अमित की आँखों क सामने छोटी ममी का सूंदर क्यूट चेहरा आ जाता है, कितनी प्यारी है वो कितनी सुन्दर है मां का तो दिमाग ख़राब हो गया है जो ममी को छोड़ कर उस मीणा क चक्कर में घूम रहा है जब ममी को मां और मीणा का पता चलेगा तो उनके दिल पर क्या बीतेगी . उनकी तो दुनिआ hi तबाह हो जाएगी
अमित खुद से: नहीं नहीं मैं ऐसा नहीं होने दूंगा मुझे मां को कैसे भी रोकना होगा
फिर मां की बात उसे यद् अति है क छोटी ममी एक बचा नहीं पैदा कर सकती वो बाँझ है
अमित को ये बात बहुत बुरी लगती है और वो अपने कमरे से निकल कर सीधा छोटी ममी क कमरे की तरफ चल पड़ता है
कमरे में छोटी ममी अकेली बैठी कुछ सोच रही थी अमित देखता है क ममी किसी सोच में डूबी हुई है कहीं ममी को कुछ पता तो नहीं चल गया मां क बारे में
इस वक़्त ममी का चेहरा उदास था मगर फिर भी कितना क्यूट था अब तो अमित को अपने मां पर गुस्सा आने लगा था मगर फिर अमित आगे बढ़ता है और ममी को आवाज़ देता है
अमित : कहाँ खोयी हो ममी मैं कबसे आपको बुला रहा हूँ और आप हो क सुन hi नहीं रही
अमित की आवाज़ से दीपिका अपनी सोच से बहार अति है और हड़बड़ाकर जवाब देती है
दीपिका: क्या ... क्या कहा तुमने
अमित : मेरी प्यारी ममी किस सोच में गम हो
दीपिका: किसी सोच में नहीं मैं तो बस ऐसे hi बैठी हूँ
अमित: वैसे ममी आप मुझसे तो सब पूछ लेती हो दोस्ती क नाम पर मगर मुझे कुछ नई बताती
अब सच सच बताओ क्या बात है
दीपिका: नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं मैं बस वो अपने माँ पिताजी क बारे में सोच रही थी बड़े दिन हुए उनसे न बात हुई न कोई खबर
अमित समझ जाता है बात कुछ और है ममी बात को ताल रही है
अमित: तो ऐसा करे आप अपने मायके चक्कर लगा आएं मां को साथ लेकर
दीपिका अपने मन में: वो तो अब मेरी शकल भी देखना पसंद नहीं करते अब तुझे क्या बताऊ मेरी तो दुनिआ hi उजाड़ गयी है
दीपिका: वो क्या है न तेरे मां को बहुत काम रहता है आजकल इसलिए वो नहीं जा सकते, वैसे भी मुझे कोई जरुरत नहीं है मायके जाने की वो तो बस ऐसे hi आज उनकी यद् आ रही थी
अमित : ममी आपको मेरी कसम सच सच बताओ बात क्या है
दीपिका: अपनी कसम मत दे अमित प्लीज मुझे अकेला छोड़ दे
इतना कहकर छोटी ममी रोने लगती है
अमित से उनका रोना देखा नहीं जाता और वो आगे बढ़कर ममी को गले लगा लेता है और उन्हें चुप करवाने लगता है
अमित : ममी अगर आपकी नज़रों में मेरी कोई कीमत है तो प्लीज मुझे बताइये क आखिर क्या बात है अगर आप मुझे वाकई दोस्त मानती हैं तो दोस्त क नाते hi सही बता दीजिये, मैं आपकी आँखों में आंसू नहीं देख सकता प्लीज आपको मेरी कसम मुझे बताइये आखिर बात क्या है
दीपिका: रट हुए) मैं कैसे बताऊँ तुझे मेरी तो दुनिआ hi उजाड़ गयी है . मैं एक बाँझ हूँ बांझ्ठह. . जो एक बचा पैदा नहीं कर सकती मैं औरत क. नाम पर कलंक हूँ इस घर को एक वारिस तक नहीं दे पायी और इसी वजह से अब तेरे मां मेरे पास तक नहीं एते वो अब मेरी शकल भी देखना नहीं चाहते, मेरी ज़िन्दगी बर्बाद हो गयी अगर तेरे मां ने मुझे घर से निकल दिया तो मैं कहाँ जाउंगी मेरा क्या होगा, मैं तो मायके भी नहीं जा सकती वो बेचारे तो पहले hi दो वक़्त की रोटी मुश्किल से कहते हैं मैं अपना मनहूस चेहरा लेकर उनके पास भी नहीं जा सकती
इतना कहते हुए ममी और भी ज्यादा फुट फुट कर रोने लगती है
अमित का कलेजा फटा जा रहा था ममी की बातों को सुनते हुए और उसकी आँखों में खून उतर आया था अपने छोटे मां और मीणा क नाम पर
अमित : मेरे रहते ऐसा कुछ नहीं होगा मैं देखता हूँ कैसे मां आपको घर से निकलते हैं, और कौन कहता है क आप बाँझ हो आज कल दुनिआ में हर चीज़ का इलाज है आप डॉक्टर को दिखाइए देख लेना आप भी माँ बन जाओगी , आप तो पड़ी लिखी हैं फिर भी आप ऐसी बातों पर अपना दोष निकल रही हैं आप कल hi शहर जा कर अपना टेस्ट करवाइये
दीपिका क आंसू थमने लगते हैं और उसके दिमाग में भी ये बात घुस जाती है आखिर सही तो कहा था अमित ने आजकल भला किस बीमारी का इलाज नहीं होता, इतनी पड़ी लिखी होकर भी कैसे गवारों जैसा सोचने लगी थी वो
दीपिका: ( आंसू पोछते हुए) तू सही कह रहा है मैं जाउंगी डॉक्टर क पास ये बात पहले क्यों नहीं आयी मेरे दिमाग में
अमित : बिलकुल अभी आप रोना बंद करो क्यूंकि आप रोटी हुई बंदरिया लगती हैं
दीपिका अमित की बात सुनकर हसने लगती है और उसे हलके हाथ से मरते हुए
दीपिका

क्या कहा बंदरिया लगती हूँ ठहर तुझे अभी बताती हूँ मैं
अमित : अरे सॉरी सॉरी ममी जी सच तो ये है क आप क चाँद से चेहरे पर ये आंसू किसी ग्रहण से लगते हैं आप बस हस्ती रहा कीजिये जब आप हस्ती हैं तो लगता है जैसे गुलहन में बहार आ गयी हो
प्लीज आप इन आँखों में कभी आंसू मत लाया करो मेरे लिए आप हस्ती रहा करो
दीपिका: ( शर्मा कर) धत्त , ऐसी बातें तू सिर्फ मंजरी को सुनाया कर , मैं तेरी ममी हूँ गफ नहीं
अमित : अरे ममी िस्मी गफ वाली बात कहाँ से आ गयी मैं तो बस वही कहा जो सच है अगर आपको अपनी तारीफ अछि नहीं लगी तो आगे से नहीं करता
दीपिका: अपनी तारीफ भला किसे अछि नहीं लगती ऐसे तो तेरे मां ने भी कभी मेरी तारीफ नहीं की
वाकई में अमित तुम बहुत अचे हो आज से मैं अपनी हर बात तुमसे डिसकस करुँगी तुम आज से मेरे बेस्ट फ्रेंड hi
फिर दोनों हाथ मिलते हैं थोड़ी देर इधर उधर की बातें करने क डैड अमित राजू से मिलने का कहकर घर से निकल जाता है
अमित क जाने क बाद दीपिका सोचने लगती है क अमित कितना ाचा है और कितना हैंडसम भी है मंजरी अगर अमित से इतनी इम्प्रेस है तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं अमित क ऐसे नेचर और क्वालिटीज़ क कारन कोई भी लड़की कैसे खुद को रोक सकती है अमित को चाहने से , अमित क बारे में सोचते हुए मन hi मन दीपिका भी जैसे अमित को अब चाहने लगी थी
उधर अमित घर से निकल कर राजू क पास जाता है और राजू को लेकर नदी किनारे चला जाता है
राजू: अबे कुछ बताएगा भी क बात क्या है
अमित : कैसे बताऊँ यार बताने में भी शर्म आ रही है
राजू: ऐसी कौन स बात है जो तुझे मुझसे शर्म आ रही है
अमित : बात hi कुछ ऐसी है
राजू: दोस्तों से शर्माना अछि बात नहीं चल सीधा बात बता क्या लफड़ा है
अमित: तुझे मीणा का पता है ?
राजू: कौन मीणा
अमित: वही यार जो अपने खेतों क पास बने डेरे में रहती है, जिसका पति हमारे hi खेत में मजदूरी करता है
राजू: वो सांवली स . जिसकी गांड बहार को निकली रहती है, तेरा क्या माज़रा है उसके साथ
अमित: मेरा क्या माज़रा होगा उससे, मुझे लगता है वो चालु किसम की औरत है और छोटे मां को अपने चक्कर में फसकर लूट रही है
राजू : अरे बाप रे बाप, ये तू क्या कह रहा है, तुझे कैसे मालूम क्या तूने कुछ देखा है
अमित : आज जब हम नदी किनारे गए थे तब मैंने उसे मां क साथ जंगल में जाते देखा
और फिर अमित साडी बात राजू को बता देता है जो उसने देखा
राजू का मुँह खुला का खुला रह जाता है
राजू : साली छिनाल छूट क रस्ते पैसा जमा कर रही है इसका तो कुछ करना पड़ेगा
अमित : और वो मां को बोल रही थी क वो मां क बचे की माँ बनने वाली है
राजू : ( हैरानी से ) इसकी माँ की ... साली ये तो ऐसे तुम्हारे खेतों को अपने नाम करवा लेगी
अमित: यही तो मैं भी सोच रहा हूँ , मां तो उसके भोसड़े में hi सब कुछ देता जायेगा और बेचारी छोटी ममी की ज़िन्दगी बर्बाद हो जाएगी
और मैं जीते जी ये सब नहीं होने दूंगा
राजू: तू बस बोल क्या करना है फिर देखते हैं इस चैनल को कौन बचता है
अमित: सब से पहले तू एक काम कर आज से तू मीणा पर नज़र रख उसकी साडी डिटेल पता कर और हो सके तो किसी और से भी मदद ले लेना मगर मां क बारे में किसी को पता नहीं चलना चाहिए
राजू : तू फ़िक्र न कर तेरे घर की इज़्ज़त मेरी इज़्ज़त है मैं सब पता करता हूँ
अमित: मुझे सिर्फ तुम पर hi भरोसा है मेरे यार बड़े मां से भी कुछ नहीं कह सकता नहीं तो घर में लड़ाई झगड़ा हो जायेगा
राजू : मैं सब समझता हूँ तू चिंता न कर मैं इसकी पूरी कुंडली निकल कर तुझे बताऊंगा तू बस चिंता मत करना
अमित और राजू थोड़ा इधर उधर की बातें कर क घर लौट जाते हैं
इधर घर में दीपिका भी गौरी से बात करती है की वो एक बार डॉक्टर से अपना इलाज करवाना चाहती है ता की वो भी माँ बन सके . गौरी दीपिका को हामी भर देती है और दीपिका गौरी को उसके साथ कल शहर चलने को राज़ी कर लेती है
ऐसे hi दिन गुज़र जाता है और रत खाना खाने क बाद सब अपने कमरों में सो जाते हैं
अगले दिन सुबह अपनी रूटीन क मुताबिक अमित अखाड़े से लौटकर खाना खा कर स्कूल चला जाता है और पीछे से गौरी दीपिका क साथ शहर चली जाती है
स्कूल में मंजरी लंच ब्रेक में अमित से मिलती है दोनों अलग अलग क्लास में थे इसलिए लंच ब्रेक hi मिल सकते थे
मंजरी: सुनिए आप क्या आज मुझे नदी किनारे मिलेंगे दोपहर को
अमित : कोई काम था क्या , यहीं बता दो
मंजरी: वो . वो मुझे आपसे कुछ बात करनी थी
अमित: बात तो तुम अब भी बता सकती हो, कहो क्या बात है
मंजरी: आप समझिये न, वो बात यहाँ नहीं बता सकती
अमित : ऐसी कौन स. बात है जो यहाँ नहीं बता सकती
मंजरी: दरअसल मैं आपसे अकेले में मिलना चाहती हूँ
अमित : तो ये बात है, मतलब फिर से मुझे गले लग्न चाहती हो
मंजरी शर्मा जाती है
अमित: मैं नहीं आऊंगा मिलने
मंजरी : ( चौंक कर) क्यों? क्यों नहीं आओगे ?
अमित : क्यूंकि तुम तो वहां भी ऐसे hi शर्माती रहोगी तो फिर बात क्या करोगी
मंजरी: ( शर्मा कर) आप मुझे तंग कर रहे हैं न
अमित: ाचा ाचा ठीक है आ जाऊंगा मगर मेरी एक शर्त है
मंजरी: वो क्या
अमित: मुझे एक पप्पी देनी होगी तभी मैं आऊंगा
मंजरी: शर्मा कर) भला ऐसी बात करता है कोई
अमित : मंजूर है तो बोलो वर्ण मैं नहीं आऊंगा
मंजरी: उठते हुए ) टाइम से आ जाइएगा
इतना कहकर भाग जाती है और अमित मंजरी की मासूम अदाओं को सोचकर मुस्कुराने लगता है और इसके साथ hi लंच ओवर हो जाता है
छुट्टी क बाद अमित घर अत है तो उसे बड़ी ममी और छोटी ममी दोनों hi घर नज़र नहीं अति तो उनका पूछने क लिए अमित कामिनी ममी क कमरे में चला जाता है दरवाज़ा खुला था इसलिए सीधा अंदर घुस जाता है
अंदर घुसते hi अमित का मुँह खुला रह जाता है सामने कामिनी ममी अपनी साडी बदल रही थी इस वक़्त उसके जिस्म पर केवल पेटीकोट और ब्लाउज था दरवाज़े की तरफ उसने पीते की हुई थी अमित अभी उसे देख hi रहा था क कामिनी अपने पेटीकोट का नाडा खोल देती है और पेटीकोट उसके पाऊँ में गिर जाता है पेटीकोट क अंदर उसने लाल पेंटी पहनी हुई थी, क्या गांड थी उभरी हुई लाल पेंटी में क़ातिलाना लग रही थी निचे गोरी गोरी जांघें अमित क निचले हिस्से में मनो फायर करने क लिए मिसाइल रेडी पोजीशन में थी, अमित का बाबूराव तो सामने का नज़ारा देखकर बहार आने को मारा जा रहा था
और अमित की हालत तो ऐसी थी जैसे सांप सूंघ गया हो मुँह खुला था आँखें बहार
सामने कामिनी नीचे झुक कर पेटीकोट उठती है जिससे उसकी गांड और भी उभर अति है अमित से अब अपने पाऊँ पर खड़ा होना मुश्किल हो जाता है अपनी हिम्मत को इकठा कर क वो जल्दी से कमरे से निकल जाता है मगर कामिनी को एहसास हो जाता है क अभी कोई जैसे कमरे से भाग कर गया हो वो झट से बाहर निकल कर देखती है तो अमित उसे घर से बहार जाता दिख जाता है
कामिनी: मन में ) मनहूस हरामी कहीं का मुझे नंगी देख रहा था आज तुझे बताती हूँ, तेरी खाल न उधेड़ दी तो मेरा नाम कामिनी नहीं
उधर अमित घर से भाग कर सीधा नदी किनारे पहुँच जाता है उसका दिल मनो राजधानी से भी तेज भाग रहा था चेहरा पसीने से भीग गया था उसकी आँखों में अभी भी कामिनी ममी की गांड और मखमली जाँघे नज़र आ रही थी क्या खूबसूरत गांड थी, अगर घोड़ी देर और ठहर जाता तो क्या पता ममी पेंटी भी उतर देती
फिर तो आज हार्ट hi फ़ैल हो जाना था उसका कितनी ज़बरदस्त गांड है ममी की, ममी जितना मुझसे उखड़ी रहती है उससे कहीं ज्यादा भगवन से उसे सुन्दर बनाया है
पता नहीं कब तक अमित अपने खयालो में hi खोया था क अचानक उसे किसी ने हिलाया और वो जैसे दुनिआ में लौट आया
मंजरी: क्या हुआ आपको कब से आवाज़ दे रही हूँ आप जवाब hi नहीं दे रहे
अमित: कोऊ कक्क. कुछः भी तो नहीं
मंजरी: झूठ मत बोलिये मैं कब से आवाज़ दे रही थी आप सुन hi नहीं रहे थे
अमित: अरे कुछ नहीं मैं तो बस तुम्हारे hi बारे में सोच रहा था
मंजरी: ( शर्मा कर ) मेरे बारे में
अमित: हाँ सच
मंजरी: मेरे बारे में क्या सोच रहे थे
अमित: यही क आज तुम मुझे होंठो पर पप्पी डौगी तो कितना मज़ा आएगा
मंजरी: हआ , बेशर्म जाइये मैं नई बात करती आपसे मैं जा रही हूँ
इतना कहकर मंजरी मुड़ने लगती है तो अमित उसका हाथ पकड़ कर खिंच लेता है और अपने साइन से लगा लेता है
अमित: बस इतना hi प्यार है मुझसे एक किश तक नहीं दे सकती मुझे, ठीक है तो जाओ मैं भी चलता हूँ
इतना कहकर अमित मंजरी को छोड़ कर आगे बढ़ने लगता है तो मंजरी अमित क पाऊँ में गिर जाती है और कहती है
मंजरी: नाम आँखों से) मैं तो मज़ाक कर रही थी ये दिल ये जिस्म सब आपका hi तो है मैं आपको भला कैसे मना कर सकती हूँ
मंजरी की ये बात सुनकर और उसकी आँखों की नमी देखकर अमित पिघल जाता है और उसे उठाकर गले से लगा लेता है
अमित: पागल मैं तो मज़ाक कर रहा था तुम तो रोने लगी
मंजरी: आप नहीं जानते मैं आपको कितना प्यार करती हूँ आप अगर मुझसे रूठ गए तो मेरा क्या होगा
अमित : अरे पगली तुमसे भला कोई रूठ सकता है
इतना कहकर अमित मंजरी को कास क अपने साइन में भींच लेता है
दोनों यूँ hi कुछ पल एक दूसरे क प्यार में डूबे एक दूसरे क गले मिले खड़े रहते हैं
अमित : तो अब मुझे मेरा इनाम मिलेगा या नहीं
मंजरी : मुझे शर्म अति है आप hi ले लीजिये
अमित: पक्का ले लूँ, नाराज़ तो नहीं होगी फिर
मंजरी: बिलकुल भी नहीं
अमित मंजरी को थोड़ा पीछे हटाकर उसके चेहरे को दोनों हाथों में थम लेता है और धीरे धीरे अपना चेहरा उसके चेहरे पर झुकाने लगता है मंजरी की ऑंखें अभी बंद hi थी अमित क होंठ मंजरी क होठों क पास एते जाते हैं मंजरी को अमित की गरम साँसे महसूस होने लगती हैं और उसका जिस्म कांपने लगता है तभी उसे अपने होंठो पर अमित क गरम होंठो का एहसास होता है
ये उसके जीवन का प्रथम चुम्बन था मंजरी तो मनो हवा में उड़ रही थी उसे कुछ एहसास hi नहीं था क वो कहाँ है कहाँ नहीं वो तो बस मज़े की वादिओं में खोटी जा रही थी
अमित ने भी पहली बार ऐसा नरम और दिलकश एहसास महसूस किया था मंजरी क होंठ मनो स्ट्रॉबेरी की तरह मुलायम और रसीले थे अमित तो बस मज़े से उसके होंठो का रास निचोड़ने में लगा हुआ था दोनों तब तक एक दूसरे क होंठ चूसते रहे जब तक की उनकी साँसे नहीं उखड गयी
जब सांस लेने क लिए दोनों अलग हुए तो जैसे उन्हें होश आया, मंजरी खुद को सँभालते हुए जल्दी से वहां से हस्ती मुस्कुराती हुई भाग जाती है और अमित उसे जाता हुआ देखता रहता है और सोचता है
अमित :कितनी भोली और चंचल है मंजरी, इसकी मासूमियत पे तो सब कुर्बान करदु
फिर अमित राजू से मिलने चला जाता है और उससे मीणा क काम क बारे पूछता है मगर अभी कुछ पता नहीं चला था
शाम होने से पहले अमित घर लौट अत है घर एते hi कामिनी ममी डंडे से अमित की पिटाई शुरू कर देती है घर पर इस समय और कोई नहीं था मां लोग खेरसों में थे और बड़ी ममी और छोटी ममी कहीं बहार गयी थी
कामिनी तो जैसे आज अगला पिछले सारा हिसाब कर देना चाहती थी, अमित चिल्लाता रहता है मगर कामिनी उसकी एक नहीं सुनती वैसे तो अमित कामिनी से कहीं ज़्यादा ताकतवर था मगर उसके संस्कार उसे प्रतिरोध करने नहीं दे रहे थे
मगर कामिनी तो जैसे उसकी हड्डी पसली तोड़ देना चाहती थी वो लगातार मरती जा रही थी और अमित जोर जोर से चिल्ला रहा था
अमित : ममी प्लीज मत मारो प्लीज आखिर मर क्यों रही हो मैंने ऐसी क्या गलती करदी मत मारो ममी प्लीज मत मारो
कामिनी: कमीने हरामज़ादे शर्म नहीं अति मुझे नंगा देखता है हरामी आज तुझे बताती हूँ मनहूस कहीं क मेरी ज़िन्दगी बर्बाद कर क रखड़ी तूने और अब मुझ पर गन्दी नज़र रखता है
ये ले और ले
इतना कहकर दे दाना दान फिर से डंडे से पीटने लगती है, कामिनी की बातों से अमित इतना तो जान गया था क ममी को पता चल गया क दोपहर को मैंने उन्हें कपडे बदलते देखा है
तभी बहार का गेट खुलता है और गौरी और दीपिका घर में घुसती हैं
सामने का नज़ारा देखकर दोनों क होश उड़ जाते हैं अमित निचे ज़मीं पर पड़ा था और कामिनी डंडे से उसे ऐसे पीट रही थी जैसे कोई कपडे धोता है डंडे से
दीपिका भाग कर कामिनी क हाथ रोक लेती है और गौरी अमित को सीने से लगा लेती है
दीपिका: गुस्से से ) ये क्या कर रही हो दीदी, दिमाग तो ठीक है आपका क्यों मर रही हो बेचारे को
कामिनी: ( गुस्से में) बीच में से हैट जा छोटी आज में इसकी खाल उधेड़ दूंगी, ये बेचारा नहीं हवस का भूखा भेड़िए है
दीपिका: हैरानी से) आप ये क्या कह रही हैं? आप होश में तो हैं
कामिनी: हाँ मैं होश में हूँ पूरी होश में हूँ पूछ इससे मुझे नंगी देख रहा था क नहीं पूछ इससे मेरे कमरे में चुपचाप घुसा था क नहीं, घर में अकेली पाकर पता नहीं क्या करना चाहता था ये मेरे साथ
दीपिका: चुप कीजिये आप जो मुँह में अत है बोले जा रही हैं आप, अमित हमारा बचा है हमारे संस्कार है इसमें ये ऐसा कुछ सोच भी नहीं सकता
कामिनी: तो क्या मैं झूठ बोल रही हूँ, तुम लोगो की आँखों पर पट्टी बांध राखी है इसने तुम्हे कहाँ नज़र आएगा
गौरी: ( रट हुए) मेरा बीटा ऐसा नहीं कर सकता तुम झूठ बोल रही हो
कामिनी: मैं झूठ बोल रही हूँ तो पूछो इससे ये मेरे कमरे में आया था क नहीं? पूछो इससे क मुझे नंगी देख रहा था क नहीं? पूछो इससे क्या करने वाला था ये मेरे साथ
गौरी: रट हुए) बता अमित सच क्या है तुझे मेरी कसम बता तूने ऐसा किया था क्या
कामिनी: बोल कमीने माँ कहता है न दीदी को, खा माँ की कसम क तूने मुझे नंगा देखा क नहीं देखा
गौरी: बोल बीटा बता जो ये पूछ रही है
अमित तो बेचारा कसम में फस्स गया था अब झूठ बोलकर कसम नहीं तोड़ सकता था क्यूंकि उसे माँ का प्यार तो बड़ी ममी ने hi दिया था
अमित : ये सच है माँ पर
इससे आगे कुछ कहता गौरी ने गुस्से में अमित क मुँह पर 3/4 थप्पड़ कास क जड़ दिए और रोटी हुई अपने कमरे में भाग गयी
कामिनी ने फिर से डंडे से अमित की पिटाई करनी चाही मगर दीपिका ने उसे रोक लिया और उसे उसके कमरे में भेज दिया
उसके बाद अमित को सहारा दे कर अपने कमरे में ले आयी , कामिनी ने बुरी तरह मारा था अमित को जिसकी वजह से उसके सरे शरीर में सूजन आ गयी थी
अभी जो कुछ भी हुआ था दीपिका को उस पर यकीन नहीं था मगर पहले अमित को संभालना ज़रूरी था इस लिए दीपिका उसे अपने बीएड पर लेता देती है और उसके शरीर की सिकाई क लिए पानी गरम कर क लती है और सिकाई करने लगती है
गरम एहसास होते hi अमित कराहने लगता है और दीपिका उसे दिलासा देती है
थोड़ी देर तक उसकी सिकाई करने क बाद दीपिका हल्दी वाला गरम दूध अमित को देती है
अमित मन करता है पर दीपिका क जोर देने पर पिने लगता है
दीपिका: अब बता बात क्या है? ये सब क्या और कैसे हुआ
अमित: रट हुए) मैंने कुछ नई किया ममी मैं निर्दोष हूँ वो सब अचानक हो गया मैंने जान बूझकर नहीं किया
दीपिका: मुझे पूरी बात बता
फिर अमित शुरू से लेकर साडी बात बता देता है जिसे सुनकर दीपिका को कामिनी पर गुस्सा आने लगता है
दीपिका: तो तूने दीदी क सामने ये सब बोलै क्यों नहीं चुप क्यों था तू
अमित : रट हुए ) मुझे बात पूरी करने hi कहाँ दी माँ ने
दीपिका: तू आराम कर मैं दीदी से बात करती हूँ जाकर
दीपिका अमित की चोटों पर मलहम लगा कर उसे आराम करने का बोलती है और कमरे से निकल जाती है
दीपिका क मन में एक बात थी क कामिनी दीदी ने ज़रा स बात को इतना बड़ा कर क बताया और अमित का क्या हल कर दिया कोई बहुत बड़ा राज़ है जो कामिनी दीदी बताती नहीं है और हरवक्त अमित पर भड़ास निकलती रहती है मुझे पहले ये राज पता करना hi होगा