Adultery Manhoos se mahan tak - Page 2 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 9



दोनों दोस्त चुप चाप वहां से निकलकर वापिस घर आ जाते हैं अमित चुपचाप बिना कोई आवाज़ किये अपने कमरे में चला जाता है जहाँ पहले से hi कोई उसका इंतज़ार कर रहा था जैसे hi अमित अपने कमरे में घुसता है सामने देखकर हड़बड़ा जाता है

अब आगे-

सामने छोटी ममी बीएड पर बैठी अमित का hi इंतज़ार कर रही थी जिसे देखकर अमित हड़बड़ा गया

अमित को समझ नहीं आ रही थी क अब मामी क सवालों का क्या जवाब देगा, वहीँ दीपिका मन में ये सोच रही थी क इतनी रत को घर से बहार चोरों की तरह जाने का क्या कारन है कहीं अमित कुछ गलत तो नहीं कर रहा जो भी हो आज पूछना hi पड़ेगा क्या पता ऐसा कब से चल रहा हो

दीपिका: इतनी रत को कहाँ गया था ? तू कब से रातों को बहार जाने लग गया है? ऐसा कौन सा काम है जो तू रत क अँधेरे में करने लग गया है?

अमित : वो मैं वो वो बहार सैर करने गया था मेरे पेट में गैस हो रही थी

दीपिका: ाचा गैस है,, अब मुझसे झूठ बोलेगा क्या इतनी hi इज़्ज़त रह गयी है मेरी अब? सच सच बता कहाँ था किसके साथ था?

अमित: ममी ऐसा न कहो मैं आपकी कितनी इज़्ज़त करता हूँ मेरे दिल से पूछो

दीपिका: तो सच क्यों नहीं बताता, बोल कहना गया था?

अमित : संजीदा होते हुए) ममी प्लीज ऐसा मत कहिये मैं आपको सब सच सच बताऊंगा मगर अभी नहीं बता सकता आपको मेरी कसम अभी कोई सवाल मत पूछिए मैं वक़्त आने पर खुद बता दूंगा वडा करता हूँ बस इतना सुन लीजिये मैं कुछ भी गलत नहीं कर रहा हूँ जो कर रहा हूँ इस घर की भलाई क लिए कर रहा हूँ

दीपिका अमित की आँखों में सच्चाई और संजीदगी देखकर चुप कर जाती है और कमरे से बिना कोई बात किये निकल जाती है, अमित सोचने लगता है क ममी पता नहीं क्या क्या सोचेगी मेरे बारे में पर उन्हें सच्चाई भी तो नहीं बता सकता अगर उन्हें सचाई पता लगी तो उनका दिल टूट जायेगा

मगर उस मीणा का मुझे जल्द hi कुछ करना पड़ेगा कैसे छोटे मां को बेवक़ूफ़ बना कर उन्हें लूट रही है, यूँही सोचते सोचते अमित की आँख लग जाती है

दूसरी और दीपिका भी परेशां थी मगर उसे इस बात की तसल्ली थी क अमित कुछ गलत नहीं कर रहा है मगर बात ज़रूर कोई बड़ी है जो उसने अपनी कसम देदी सवाल न पूछने क लिए

सुबह सुबह अमित अपनी रूटीन से अखाड़े चला जाता है घर में दीपिका तैयार हो कर गौरी क कमरे में जाती है

दीपिका: दीदी आप तैयार हैं? जल्दी कीजिये हम कहीं लेट न हो जाएँ

गौरी अपने बीएड पर चादर तान कर लेती हुई थी दीपिका की आवाज़ सुनकर दीपिका की तरफ साइड करती है

गौरी: अरे छोटी मुझे माफ़ करना मैं नहीं जा सकुंगी तेरे साथ आज नहाते वक़्त पाऊँ फिसल गया था ज़रा पाऊँ में मोच आ गयी है तू कामिनी को लेजा साथ

दीपिका गौरी की आवाज़ से अंदाज़ा लगा लेती है वाक़ई वो तकलीफ में थी

दीपिका: दीदी ये कैसे हो गया अपने मुझे आवाज़ क्यों नहीं दी

गौरी: बस अचानक पाऊँ फिसल गया था और आवाज़ क्या देती तब तुम्हारे जेठ जी यहीं थे वही मुझे यहाँ तक ले ए, तू मेरी चिंता न कर मैंने गोली खा ली है तू कामिनी क साथ चली जा

दीपिका: नहीं दीदी आपको देखभाल की ज़रूरत है मैं आपको ऐसे छोड़कर नहीं जा सकती हम फिर चले जायेंगे जब आप ठीक हो जायेंगे

गौरी: नहीं छोटी तू जा ऐसे कामो में देरी नहीं करते मैं अपना ध्यान रख लुंगी तू जा ये मेरा हुकम है

दीपिका: अगर कामिनी दीदी भी मेरे साथ चले गए तो घर का खाना कौन देखेगा? आपका ध्यान कौन रखेगा? नहीं नहीं आप रहने दीजिये

गौरी: नहीं छोटी तेरा जाना ज़रूरी है तू एक काम कर तू अमित को साथ लेजा उसको बोल आज स्कूल से छुट्टी करले

दीपिका: पर दीदी

गौरी: पर वॉर नहीं तू अभी उसे जा कर बोल दे देख आ गया होगा वो भी

दीपिका: ाचा दीदी मैं देखती हूँ

दीपिका अमित क कमरे में जाती है जहाँ अमित यूनिफार्म पहनकर तैयार हो रहा था स्कूल क लिए

दीपिका उसे जाकर बता देती है क कपडे बदल ले आज स्कूल से छुट्टी कर आज तुझे मेरे साथ शहर जाना है, इतना कहकर दीपिका रसोई में अमित को नाश्ता बनाकर देने चली जाती है

अमित : मन में ) लगता है छोटी ममी कल रत की बात क लिए गुस्सा हैं और मुझसे आज उसी क बारे में बात करेंगी अब कैसे समझों इनको जो मैं कर रहा हूँ इन्ही क लिए कर रहा हूँ

थोड़ी देर में अमित कपडे बदल कर रसोई में नाश्ता करते है और दीपिका उसे जल्दी करने को कहती है, दोनों जल्दी से बस स्टॉप जाते हैं और शहर क लिए बस पकड़ लेते हैं बस में अभी भीड़ नहीं थी सो दोनों को सीट मिल जाती है और दोनों शहर को निकल जाते हैं

रस्ते में दोनों में से कोई बात नहीं कर रहा था फिर इस चुप्पी को अमित hi तोड़ता है

अमित : हम ऐसे अचानक कहाँ जा रहे हैं ममी? सब ठीक तो है?

दीपिका: हाँ हाँ सब ठीक है ऐसी कोई बात नहीं है, असल में आज दीदी जाने वाली थी मेरे साथ मगर उनके पाऊँ में मोच आ गयी सुबह सुबह इस लिए उनकी जगह तुम्हे ले जा रही हूँ

इतना सुनकर अमित चैन की सांस लेता है फिर उसे अचानक बात पर ध्यान जाता है और हड़बड़ा कर पूछता है

अमित: क्या माँ को मोच आ गयी मगर कैसे? किसी ने मुझे बताया क्यों नहीं

दीपिका: मुझे भी अभी थोड़ी देर पहले hi बताया उन्होंने , वक़्त नहीं था इस लिए नहीं बता पायी , वैसे घबराने वाली बात नहीं है तू चिंता मत कर घर पर कामिनी दीदी हैं उनके पास

अमित: वैसे हम शहर किस लिए जा रहे हैं अगर माँ को मोच आ गयी थी रहने देते शहर जाना

दीपिका: मैंने तो कहा था मगर दीदी नहीं मने, असल में पिछली बार हम दोनों जब शहर ए थे डॉक्टर ने मेरी जाँच करने क लिए टेस्ट लिए थे आज उनकी रिपोर्ट्स देनी थी उन्होंने इसलिए जाना ज़रूरी था, इसीलिए दीदी ने तुझे साथ लेजाने को कह दिया

अमित: चिंता से पूछता है ) आपको क्या हुआ है किस चीज़ का टेस्ट करवाया था अपने?

दीपिका: अरे कुछ नहीं हुआ मुझे बस है कोई टेस्ट वो मैं नहीं बता सकती तुझे अब बस कोई और बात करो

दोनों ऐसे hi इधर उधर की बातें करते शहर पहुँच जाते हैं जहाँ से ऑटो कर क दोनों डॉक्टर क क्लिनिक पहुँच जाते हैं आधे घंटे की वेट क बाद दीपिका को डॉक्टर केबिन में बुलाती है ये एक लेडीज डॉक्टर थी जो बेऔलाद लोगों का इलाज करती थी दीपिका अमित को बहार hi रुकने का बोलकर अंदर चली हटी है

डॉ. : आइये दीपिका जी बैठिये

दीपिका: गुड मॉर्निंग डॉ प्लीज बताइये मेरी रिपोर्ट्स कैसी हैं? मैं माँ तो बन सकती हूँ न

डॉ. : अरे बैठिये तो सही

देखिये मैंने आपकी साडी रिपोर्ट्स चेक कर्ली हैं आप बिलकुल परफेक्ट हैं आप में कोई कमी नहीं है आप पूरी तरह से हेअल्थी हैं

मुझे लगता है क कमी आपके पति में है आप एक बार उन्हें मेरे क्लिनिक ले आइये हम उनको चेक करलेंगे

दीपिका: अपनी रिपोर्ट्स क बारे सुनकर खुश हो जाती है क वो माँ बन सकती है मगर डॉ की दूसरी बात सुनकर उसका चेहरा उतर जाता है

‘ नहीं डॉक्टर वो कभी नहीं मानेंगे भला कौन मरद अपनी कमजोरी मानेगा और मेरे हस्बैंड तो वैसे भी बहुत ज़िद्दी हैं ‘

डॉ. : देखिये मैडम आपकी रिपोर्ट्स क बिनाह पर मैं 100% सूरे हूँ कमी आपमें नहीं आपके पति में है ऐसे में माँ बनने क दो hi रस्ते हैं आपके पास

दीपिका: बताइये डॉ मैं कुछ भी करुँगी प्लीज आप मुझे माँ बना दीजिये बताइये कितने पैसे लगेंगे

डॉ. : देखिये ये तो ज़ाहिर है क आपके पति क वीर्य में hi कमी होगी इसीलिए आप माँ नहीं बन प् रही ऐसे में सेकंड ऑप्शन एहि होती है क किसी दूसरे क वीर्य को आपकी बच्चेदानी में इम्प्लांट कर क आपको माँ बनाया जाये

और इस काम क लिए मेडिकल साइंस ने आजकल बहुत तरक्की कर्ली है

एक छोटे से ऑपरेशन क ज़रिये आपकी बच्चेदानी में वीर्य डाला जायेगा और आपको प्रेग्नेंट किया जायेगा

दीपिका: डॉ इसमें कोई रिस्क तो नहीं होता?

डॉ. : नहीं रिस्क वाली कोई बात नहीं, हाँ कई बार एक बार की कोशिश से कुछ औरतें मिस भी हो जाती हैं तो उन्हें फिर से एक मौका दिया जाता है

दीपिका: डॉ इससे बचा तो स्वस्थ होता है न

डॉ. : देखिये बचे में गन तो उसके माँ बाप से hi एते हैं, जैसे गन उसके माता पिता में होंगे वैसे hi बचे में होंगे अब हम इसके बारे में तो गारंटी नहीं दे सकते न

दीपिका: डॉ इसमें कितना खर्च आएगा?

डॉ. : यही कोई 1.5 लाख से 2 लाख रूपए

दीपिका डॉ से ऑपरेशन की फीस सुनकर हैरान हो जाती है और उसे सोचकर बताने का कहकर बहार निकल अति है,, बहार अमित ममी का वेट कर रहा था जब वो बहार अति है तो अमित चुपचाप उसके साथ चल पड़ता है

दीपिका ख़ामोशी से चिंता में डूबी चली जा रही थी साथ में अमित भी चला जा रहा था,

अमित ने डॉ क केबिन क बहार खड़े होकर डॉ की बातें सुनली थी मगर वो शो नहीं करता और न hi कोई सवाल करता है वो जनता था ममी टेंशन में है इसलिए वो ममी का मूड ठीक करने क लिए कहता है

अमित : क्या ममी आप भी बस भागे जा रही हैं आइये कुछ खा लेते हैं

दीपिका: नहीं अमित मेरा मूड नहीं है तुझे भूख लगी है तो तू खा ले

अमित : ऐसे कैसे मूड नहीं है आपको भी मेरे साथ चलना होगा, भूल गयी आप उसदिन आपने क्या कहा था ?

दीपिका: कब ? क्या कहा था?

अमित : अरे मेरे जन्मदिन पर आपने कहा था न क आपको पार्टी चाहिए ! आज तो मौका है चलिए आज मैं पार्टी देता हूँ अपनी खास दोस्त को

दीपिका: नहीं अमित फिर कभी आज हम घर चलते हैं

अमित नहीं मंटा और अपना वास्ता देकर दीपिका को साथ ले जाता है एक रेस्टोरेंट में दीपिका भी उसका मन रखने क लिए चल पड़ती है

जहाँ दोनों हल्का फुल्का खा लेते हैं फिर अमित दीपिका को लेकर मार्किट में चला जाता हैं जहाँ उसे अपनी पसंद की सुन्दर स चप्पल लेकर देता है जब दोनों शॉप पर चप्पल लेने जाते हैं तो दुकानदार अमित से कहता है आइये भाईसाहब अपने लिए लेंगे या भाभी की लिए अमित शर्मा जाता है मगर दीपिका बात संभल लेती है

असल में अमित पहलवानी करने क कारन अपनी उम्र से बड़ा लगता था शरीर से बलिष्ठ था और दीपिका अभी 24/25 की दिखती थी अपनी सुंदरता क कारन

उसके बाद दोनों बस स्टॉप बस पकड़ने चले एते हैं, दीपिका अपने मन में अमित को लेकर बहुत खुश थी क वो कितना ाचा कितना केयरिंग है कैसे अपनी बातों में लगाकर उसने साडी टेंशन hi भुला डी और उसे पता है क अपने साथी को कैसे खुश रखना है कितनी अंडरस्टैंडिंग नेचर है काश कमलेश भी ऐसा होता

कुछ देर बाद दोनों बस में सवार हो जाते हैं बस में बहुत भीड़ थी दोनों को सीट नहीं मिलती मज़बूरी में खड़े होकर सफर करना पड़ता है

दीपिका: देखा मैंने कहा था न वापिस चलते हैं अब देख कितनी भीड़ है अगर उस वक़्त एते तो भीड़ न होती

अमित: ममी जी ये भीड़ तो हर बस में मिलेगी hi, ज़रा सोचिये हमने आज क्या क्या किया खाना पीना भी हो गया शॉपिंग भी और बातें भी

दीपिका: रहने दे रहने दे मुझे मत समझा वैसे थैंक्स मैं बहुत खुश हूँ तूने मुझे शॉपिंग करवाई और खाना भी खिलाया रेस्टोरेंट में

अमित: अरे क्या ममी हम तो दोस्त भी हैं न तो इसमें थैंक्स कैसा आपको पार्टी तो देनी hi थी

दोनों ऐसे बातें करते रहते हैं फिर नेक्स्ट स्टॉप से और लोग बस में घुस एते हैं भीड़ बाद जाती है और न चाहते हुए भी अमित पीछे से दीपिका क साथ चिपक जाता है, दीपिका भी समझती है क भीड़ hi इतनी है तो कोई क्या करे

ऐसे बस चलती रहती है बस को झटका लगता है जिससे की अमित दीपिका क ऊपर गिरने को होता है, दीपिका अमित क भर से थोड़ा आगे झुक जाती है और अमित का लैंड दीपिका क छुटड़ो क दरम्यान पहुँच जाता है दोनों जब सीधे होते हैं तो अमित का लैंड दीपिका को अपनी गांड क बीच महसूस होता है

वास्तव में गांड की गर्मी से अमित का बाबूराव उठ गया था मगर अमित का अभी इस तरफ ध्यान नहीं गया था

दीपिका मन में सोचने लगती है क अब क्या करे उसे शर्म आने लगती है अमित को कैसे कहे धीरे धीरे अमित क लैंड में सख्ती बढ़ती जाती है और वो पूरा लोहे की रोड जैसे सख्त सीधा दीपिका की गांड क बीच घुस रहा था

दीपिका लैंड की सख्ती से छुडासी होने लगती है आखिर कितने हफ्तों से वो चूड़ी नहीं थी लैंड की गर्मी पाकर छूट ने रोना शुरू कर दिया था

दीपिका से गर्मी बर्दाश्त नहीं होती न चाहते हुए भी वो काम वासना में बहने लगती है

दीपिका अपनी गांड को थोड़ा ऊपर उठाने क पाऊँ की एडीएन उठा लेती है और आगे को थोड़ा झुकने की कोशिश करते हुए छूट को लैंड क मुँह पर सेट करती है

अमित को भी अपने लैंड पर जब दबाव महसूस होता है तो उसे ख्याल अत है क उसका लैंड पूरा टैंकर खड़ा है और ममी क चूतड़ों में घुसा हुआ है

अमित पसीने में भीगने लगता है और मन में डरने लगता है क ममी क्या सोचेगी कितना गन्दा हूँ मैं जो ऐसे उनका फायदा उठा रहा हूँ मगर लाख कोशिशों क बाद में अमित का अपने आप पर काबू नहीं था उसका बाबूराव तो मनो बगावत पर उतर आया था

दीपिका अपनी छूट पर दमदार मूसल को महसूस कर क लगातार दबाव बनाये जा रही थी उसे तो किसी भी कीमत पर चुदाई चाहिए थी एक दमदार लैंड से अपनी छूट की ठुकाई चाहती थी वो उसका पति तो उसे हाथ भी नहीं लगा रहा था आखिर वो करे तो क्या करे

अमित खुद को रोक नहीं प् रहा था इस लिए उसने अपनी ऑंखें बंद कर्ली थी मगर अंदर hi अंदर उसे भी मज़ा आने लगा था और उसने भी अपनी कमर को आगे धकेलना शुरू कर दिया था

ऐसे दोनों काम वासना में डूबते जा रहे थे दीपिका से अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था और कुछ hi पल में उसकी छूट का बाँध टूट गया उसकी पेंटी उसके काम रास से भीग गयी उसका जिस्म झटके खाने लगा और उसे खड़ा रहना मुश्किल हो गया तभी साथ वाली सीट खली हो जाती है और दीपिका बेसुध स वहीँ सीट पर गिर जाती है

दीपिका अपने इस स्खलन का आनंद ले रही थी उसकी आंखे बंद थी और मुँह से दबी दबी सिसकीअन छूट रही थी

अमित बस हैरानी से उसे देखे जा रहा था मुँह पर पसीना देखकर अमित चिंता से पूछता है ममी आप ठीक तो हैं

दीपिका खुद को सँभालने की कोशिश करती हुई जवाब देती हैं

‘ हाँ मैं ठीक हूँ बस खड़े खड़े थक गयी थी तो ज़रा चक्कर आ गया ‘

कुछ पल में दीपिका नार्मल हो जाती है पर उसकी पंतय से उसका कामर्स बहने लगता और उसकी जांघो और चूतड़ों को चिपचिपा कर देता है, दीपिका क मन में कई साडी बातें चल रही थी जो उसे चैन से बैठने नहीं दे रही थी

एक तरफ उसे डॉ की बातें यद् आ रही थी क कमी उसके पति में है , ऑपरेशन पर 2 लाख खर्च आएगा जो वो इकठा नहीं कर पायेगी अगर कर भी लिया तो इतनी बड़ी रकम क्या कहकर देगी उसका पति पकड़ लेगा

ऊपर से पता नहीं किस आदमी का वीर्य डालेंगे कैसी औलाद होगी पता नहीं क्या क्या सोच रही थी

फिर उसका मन अमित को कपड़े करने लगता है क अमित कितना ाचा है हैंडसम है कितना गाभरू जवान है कितना केयरिंग है हर एक गन उसमे है जो एक परफेक्ट लड़के में होने चाहिए अगर अमित का वीर्य मिल जाये तो उसका और अमित का बचा कितना क्यूट होगा कितना समझदार होगा

इतना सोचते hi उसे अमित क लैंड का एहसास अपनी छूट पर होने लगता है और वो सोचती है क अगर अमित का hi वीर्य इम्प्लांट करवाना है तो डॉ क पास जाने की क्या ज़रूरत है क्यों न मैं खुद अमित का वीर्य डायरेक्ट अपने अंदर लेलु इसतरह पैसे भी बच जायेंगे और किसी को पता भी नहीं चलेगा

मगर अमित कभी नहीं मानेगा वो तो मेरी इतनी इज़्ज़त करता है

दीपिका: हाय हाय ये मैं क्या सोचने लगी ये गलत है ऐसा नहीं हो सकता ये पाप है चिन्ह

अमित भी अपने मन में बहुत स बातें सोच रहा था मीणा की बातों और डॉ की बातों से एक बात कन्फर्म थी क कमलेश मां बाप नहीं बन सकते ऐसे में दीपिका ममी बेचारी की ज़िन्दगी बाँझ क तानो को सुन सुन कर तबाह हो जाएगी ऊपर से मां बहार मुँह मरता फिरता है

फिर अमित क दिमाग में आईडिया अत है क कमलेश क मीणा क पीछे जाने की वजह शायद बचा न होना है क्यों न मां को किसी तरह राज़ी किया जाये क वो ममी का और अपना इलाज करवाए अपना तो वो मानेंगे नहीं ममी का hi करवा दे तो काम से काम एक ऑपरेशन से ममी माँ बन जाएगी और फिर मां भी मीणा क चक्कर में नहीं फसेंगे

ऐसे hi दोनों अपने विचारों में खोये घर पहुँच जाते हैं

घर आने क बाद थोड़ी देर रेस्ट कर क अमित राजू से मिलने को निकल जाता है और दीपिका भी गौरी क पास चली जाती है

गौरी: छोटी क्या कहा डॉ ने?

दीपिका: कुछ नहीं दीदी डॉ ने कहा है क मैं माँ बन सकती हूँ मुझमे कोई कमी नहीं है कमी कमलेश में hi है

गौरी: सच? इसका मतलब तुम माँ बन सकती हो

दीपिका: कहाँ दीदी, कमलेश hi जब मुझे माँ नहीं बना सकते तो मैं अकेली माँ कैसे बन सकती हूँ

गौरी: अरे उसका कोई उपाए तो बताया होगा डॉ ने

दीपिका: आपको तो पता ये मानेंगे नहीं

गौरी : कैसे नहीं मानेगा, मैं समझाउंगी उसे तेरे जेठ जी से कहलवाती हूँ, बचे क नाम पर देखना कैसे नहीं मंटा

दीपिका मन में ( नहीं दीदी वो नहीं मानेगा अब तो वो मुझे हाथ भी नहीं लगता पता नहीं कहाँ जाता है रत रत

उधर अमित राजू से मिलकर मीणा को कैसे काबू करना है इसपर विचार करने लगते हैं मगर कोई रास्ता नहीं मिल रहा था उन्हें

ऐसे hi रत होने लगती है सब अपने अपने कमरों में खाना खाकर सोने लगते हैं कमलेश अभी घर नहीं आया था

अमित सोचता है क क्यों न माँ की तबियत का पता करूँ उनके पाऊँ में मोच आयी है काम से काम उनकी मालिश तो कर hi सकता हूँ अखाड़े में किसी न किसी को मोच तो अति रहती है उस्ताद जी ने जो सिखाया है उसका इस्तेमाल घर पे भी तो किया जा सकता है

इसी विचार से अमित तेल की बोतल साथ लिए गौरी क रूम में चला जाता है

विजय: आओ बेटे कैसे आना हुआ इस वक़्त?

अमित : मैं तो अपनी माँ क पाऊँ की मोच ठीक करने आया हूँ बाबा, मेरे होते हुए माँ क पाऊँ में मोच आ जाये क्या फायदा मेरी पहलवानी का मैं अभी मालिश कर क ठीक करदूंगा

विजय: हस्ते हुए) देख लेना कहीं कसरती मालिश कर क पाऊँ को तोड़ hi न देना औरतें नाज़ुक होती हैं पहलवान

गौरी: कैसी बातें करते हैं आप एक बीटा भला माँ को चोट पहुंचा सकता है और मेरा बीटा तो लाखों में एक है, कितनी फ़िक्र है इसे मेरी

विअज्य: हाँ भाई इसे hi फ़िक्र है और तो किसी को है नहीं

अमित: अरे बाबा आप ये क्या कह रहे हैं मैं तो आप दोनों की hi फ़िक्र करता हूँ कहिये तो आपकी भी मालिश कर देता हूँ

विजय: अरे नहीं भाई मैं ठीक हूँ तू मुझे माफ़ कर बस अपनी माँ की सेवा कर

इतना कहकर विजय दूसरी तरफ मुँह कर क लेट जाता है और अमित गौरी क पाऊँ क पास बैठ जाता है

अमित: माँ साडी थोड़ा ऊपर करलो तेल से ख़राब न हो जाये

गौरी अपनी साडी को थोड़ा ऊपर खींच लेती है और अमित पाऊँ में तेल लगाकर मालिश शुरू कर देता है दोनों हाथों से

गौरी ने पाऊँ में पायल डाली हुई थी जो उसके सुन्दर पाऊँ को चार चाँद लगा रही थी रंग गोरा होने से अमित को ये नज़र बहुत hi प्यारा लग रहा था हालाँकि उसने मन में कोई गन्दा ख्याल नहीं था

गौरी को भी मालिश से आनंद मिलता है थोड़ी देर की मालिश क बाद वो अमित को अब सोने को बोल देती है, अमित गौरी क कमरे से निकलता है तो उसे कमलेश मां नशे में झूमता अपने कमरे में जाता हुआ दीखता है, अमित क मन में जाने क्या अत है क वो कमलेश मां क कमरे क पास उनकी बातें सुनने चला जाता है

दीपिका: आप शराब पीकर आये हो? अब ये भी काम शुरू कर दिए आपने?

कमलेश: चुप साली बाँझ कहीं की तेरे बाप क पैसों से नहीं पि है अपने पैसों से पि है वो तो साला भिखारी है मादरचोद सेल बूढ़े ने मेरी ज़िन्दगी बर्बाद करदी

बाँझ को मेरे पल्ले बांध दिए

ये सुनकर दीपिका रोने लगती है

दीपिका: रट हुए ) मेरे माता पिता को क्यों गली देते हैं आप? उनका क्या दोष है अगर मैं माँ नहीं बानी तो कसूर आपका भी तो है

कमलेश : क्या कहा मेरा कसूर है,, साली कुटिया ज़ुबान चलती है

इतना कहकर 3/4 थप्पड़ दीपिका क गलों पर रख देता है

अमित से बर्दाश्त नहीं होता वो अंदर जाना चाहता था मगर इस समय किसी क बैडरूम में में बीवी क बीच जाना भी सही नहीं होता

कमलेश: साली कमी तुझमे hi है जितना मैंने तुझे छोड़ा है अगर भैंस को भी छोड़ता तो वो माँ बन जाती तू मुझमे कसूर निकलती है

रुक जा थोड़े दिन फिर इस घर में बीटा आएगा जो मेरे खून से मेरे लैंड की धार से पैदा होने वाला है ,,

तू तो साली बाँझ है मगर दुनिआ की सब औरतें बाँझ नहीं है मैंने अपने लिए दूसरी ढून्ढ ली है और जल्द hi वो मेरे बेटे को पैदा करने वाली है

एक बार मेरा बीटा आ जाये फिर तुझे इस घर से लात मरकर निकल दूंगा

दीपिका कमलेश की बातों को बर्दाश्त नहीं कर पति उसे लगता है क अब उसकी दुनिआ लूट गयी सब ख़तम हो गया अब वो जी कर क्या करेगी थोड़ी देर रोटी रहती है फिर अचानक वो अपनी ज़िन्दगी को ख़तम करने क इरादे से कमरे से बहार निकलकर भगति है

कमलाह को उसकी कोई परवाह नहीं थी वो आराम से बीएड पर सो जाता है

अमित कमरे में दोनों की बातचीत ख़तम समझकर अभी अपने कमरे की तरफ जा hi रहा था क उसे बहार का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ अति है वो एक डैम पलट कर देखता है तो उसे छोटी ममी बहार जाती दिखती है

अमित जल्दी से सिडियन उतारकर बहार की तरफ भागता है उसे थोड़ी hi दूर ममी भगति हुई नज़र आ जाती है अमित जल्दी से से उसके पीछे भागता है

दीपिका रोटी बिलखती भागी जा रही थी उसकी तो दुनिआ hi उजाड़ गयी थी अब वो किस मुँह से इस घर में रहेगी थोड़े दिनों में कमलेश उसे घर से वैसे भी निकलने वाला है तो वो कहाँ जाएगी वो अबला नारी बेचारी बस मरने क लिए नदी की तरफ भागे जा रही थी

अमित उसे रुकने क लिए आवाज़ देता है मगर दीपिका को तो जैसे कोई आवाज़ नहीं सुन रही थी

अमित तेजी से उसका पीछा कर रहा था मगर दोनों में जो फैसला था वो इतना जल्दी कवर नहीं हो रहा था फिर भी अमित पूरा जोर लगा रहा था

जैसे hi दीपिका नदी किनारे पहुँचती है और छलांग लगाने लगती है अमित पीछे से उसे पकड़ लेता है

अमित: ये क्या कर रही हो ममी आपका दिमाग ख़राब हो गया है क्या

दीपिका: रट हुए) छोड़ मुझे जाने दे मुझे, मैं जीना नहीं चाहती मैं उजाड़ गयी मैं लूट गयी मैं एक बाँझ हूँ मुझे मर जाने दे

अमित: पागल मत बनो ममी ये क्या अनाप शनाप बाके जा रही हो कौन कहता है आप बाँझ हो भूल गयी डॉ ने क्या कहा था? आप माँ बन सकती हो

दीपिका: वो सब झूठ है डॉ कुछ नहीं जनता मैं बस मर जाना चाहती हूँ तू मुझे जाने दे

अमित ममी को शांत होता न देखकर एक थप्पड़ जोर से मर देता है और दीपिका इतने जोर से थप्पड़ पड़ने से बेहोश हो जाती है

अमित घबरा जाता है और नदी से पानी लेकर दीपिका क मुँह पर डालता है जल्दी hi दीपिका होश में आ जाती है

अमित : मुझे माफ़ कार्डो ममी मगर मैं क्या करता आप होश में नहीं थी

दीपिका: सुबकते हुए) तूने मुझे क्यों रोका अमित अब मेरा सबकुछ लूट गया है मैं जीना नहीं चाहती

अमित: आपको मेरी कसम आप शांत हो जाइये और ख़बरदार अगर दोबारा मरने की बात की तो

क्या एक पल भी अपने सोचा क मेरा क्या होगा माँ का क्या होगा घर की कितनी बदनामी होगी आप बस चली आयी मरने

वैसे तो मुझे दोस्त कहती हो क्या इतना भी भरोसा नहीं था मुझपर , अरे मां तो नशे में अनाप शनाप बोल रहे थे आप तो होश में हो

दीपिका: अमित को सवालिया नज़रों से देखने लगती है

अमित: मैंने सब सुन लिया है, और मैं पहले से जनता था ये सब मगर एक बात आप भी सुनलो कमलेश मां एक साजिश का शिकार हैं वो जिसे अपना बचा समझ रहे हैं वो इनका नहीं किसी और का है और कल रत मैं इसी बात का पता लगाने गया था बाकि बातें मैं आपको बाद में बताऊंगा पहले आप घर चलो

दीपिका अमित की बातों को सुनकर अवाक थी , अमित को सब कुछ पता है पहले hi और ये भी क कमलेश जिसे अपना बचा समझ रहा है वो कमलेश का नहीं,,

दीपिका क मन में कई सवाल थे मगर फ़िलहाल वो चुप चाप अमित क साथ घर लौट अति है मगर उसका अपने कमरे में जाने का दिल नहीं करता उसे नफरत हो गयी थी कमलेश से आज उसने न सिर्फ उसे गलियन दी थी न सिर्फ उसपर हाथ उठाया था बल्कि उसके माता पिता को भी गलियन दी थी जो कोई भी लड़की बर्दाश्त नहीं करती

इसलिए दीपिका अमित क साथ उसीके क कमरे में चली जाती है, अमित बहुत कोशिश करता है मगर दीपिका नहीं मानती

अमित हारकर इसलिए भी मन जाता है कहीं वो फिर से न बहार भाग जाये

दीपिका और अमित दोनों अमित क कमरे में एते हैं
 
भाई लोगो आज अपडेट आ जायेगा मैं ज़रा बिजी था सो लिख नई पाया अब लिख रहा हूँ
 
अपडेट 10

दीपिका क मन में कई सवाल थे मगर फ़िलहाल वो चुप चाप अमित क साथ घर लौट अति है मगर उसका अपने कमरे में जाने का दिल नहीं करता उसे नफरत हो गयी थी कमलेश से आज उसने न सिर्फ उसे गलियन दी थी न सिर्फ उसपर हाथ उठाया था बल्कि उसके माता पिता को भी गलियन दी थी जो कोई भी लड़की बर्दाश्त नहीं करती

इसलिए दीपिका अमित क साथ उसीके क कमरे में चली जाती है, अमित बहुत कोशिश करता है मगर दीपिका नहीं मानती

अमित हारकर इसलिए भी मन जाता है कहीं वो फिर से न बहार भाग जाये

दीपिका और अमित दोनों अमित क कमरे में एते हैं

अब आगे-

कमरे में आकर अमित छोटी ममी को बीएड पर बैठता है, उसे समझ नहीं आ रही थी क वो इस सिचुएशन में ममी को कैसे समझाए, ज़िन्दगी में पहली बार आज उसने छोटी ममी को रट हुए देखा था वो चेहरा जो आजतक हमेशा हस्ता hi देखा था उसने आज उसे देखकर अमित का दिल दर्द में डूब गया था

कितनी व्यथा थी दीपिका की आँखों में उसकी एक एक बात सच थी, आखिर कमलेश मां द्वारा उसे घर से निकले जाने की सूरत में उसके पास कोई और ठिकाना भी तो नहीं था,, उसके माँ बाप पहले hi कितने गरीब हैं,

अमित को मीणा पर तो गुस्सा था hi अब उसे कमलेश मां भी किसी मुजरिम से काम नहीं लग रहे थे मगर अब जो हालत बन गए थे उनसे कैसे निपटा जाये, अगर मीणा का कोई इलाज ढून्ढ भी लिया जाये तो इसका क्या भरोसा क कमलेश मां फिर किसी दूसरी औरत क पीछे नहीं जायेगा , वैसे भी इतना आसान नहीं होगा उससे पीछा छुड़ाना मां तो उसके पेट में जो बचा है उसे अपना hi समझ रहा है

अमित अपनी सोच में hi गम था क दीपिका ने इस ख़ामोशी को तोडा

दीपिका: ये तुमने ाचा नहीं किया अमित , आखिर क्यों बचाया तुमने मुझे ? क्यों नहीं मर जाने दिया मुझको? अब इस घर मेरा रह hi क्या गया है? मेरी ज़िन्दगी तो पहले hi नरक बन गयी है काम से काम मुझे इस नरक से आज़ाद तो होने देते , बताओ आखिर मुझे मरने नहीं दिया तुमने?

दीपिका रोटी हुई चीख चीख कर पूछ रही थी अमित उसके आंसुओं में डूबे चेहरे को देखे जा रहा था

अमित : भरे गले से) क्या मां क इलावा इस घर में आपका और कोई नहीं? क्या आप हमें अपना नहीं मानती? मां ने अगर गलती की है तो क्या उसकी सजा आप हमें देंगी? बस एक पल में हम सबको पराया कर दिया

दीपिका: तू नहीं समझेगा अमित क मैं किस नरक को जी रही हूँ, एक औरत अपने पति क सहारे साडी दुनिआ से लड़कर भी हंसी ख़ुशी ज़िन्दगी जी सकती है, औरत को सिर्फ सच्चा प्यार करने वाला पति चाहिए होता है फिर चाहे हालत कैसे भी हो वो गुज़ारा कर लेती है ,

पति क बाद अगर औरत की ज़िन्दगी में किसी की एहमियत है तो वो है उसकी औलाद अगर पति से प्यार न भी मिले तो औरत अपने बच्चों को देखकर hi जी लेती है

मगर मैं ऐसी अभागिन हूँ जिसे न पति का प्यार hi मिला न hi भगवन ने मुझे माँ बनने का सुख दिया, तू hi बता आखिर मैं ऐसी ज़िन्दगी का क्या करूँ

अमित: ऐसा क्यों कहती हो ममी क आप माँ नहीं बन सकीय, क्या मैं आपका बीटा भी हूँ? क्या मैंने आपको एक माँ क जितना सम्मान नहीं दिया?

मां अगर गलत चक्करों में फास गए हैं तो इसका मतलब ये तो नहीं क वो आपको प्यार नहीं करते

दीपिका: तुमने तो मुझे हमेशा प्यार और इज़्ज़त दी है मगर एक औरत क माथे पर बाँझ होने का कलंक उसे जीने नहीं देता ये समाज बाँझ को कभी इज़्ज़त नहीं देता कोई मुँह पर न कहे मगर पीठ पीछे हर कोई बात बनता है

और तू क्या जनता है अपने मां क बारे में तुमने देखा hi क्या है? मैं हमेशा से चुप रही मगर क्या मैं नहीं जानती थी क तेरा मां अपने दोस्तों क साथ क्या क्या करता फिरता है, मगर मैं तो सब कुछ बर्दाश्त करती रही,

अब तो हद्द हो गयी है वो मुझे बाँझ होने का ताना मरता है, मेरी शकल देखना उसे पसंद नहीं ऊपर से अब मुझे घर से निकलने वाला है और निकल भी देगा कोई कुछ नहीं कर पायेगा

अमित : क्या आपको हम सब पर भरोसा नहीं क्या आपको लगता है माँ बाबा उन्हें ऐसा करने देंगे

दीपिका : नहीं अमित अगर वो मुझे घर पर रख भी ले तो कमलेश मुझे अपनाएगा नहीं मेरी इस घर में वैल्यू एक नौकरानी की hi रह जाएगी, मैं अछि तरह जानती हूँ कमलेश को वो कितना जीडी है

अमित : आप चिंता मत करो ममी सब ठीक हो जायेगा,

मां को मैं सीधे रस्ते पर ला कर रहूँगा कैसे भी

और रही बात आपके माँ बनने की तो डॉ ने जैसा कहा है आप ऑपरेशन करवा ले फिर मां आप को छोड़कर बहार नहीं जायेंगे

दीपिका: नहीं अमित मैं अब ऐसा कुछ नहीं करने वाली एक तो इसमें इतना पैसा लगेगा दूसरा कमलेश नहीं मानेगा अगर मैं ऐसे माँ बन भी गयी तो वो उस बचे को एक्सेप्ट नहीं करेगा,

अमित: ऐसा नहीं होगा आप एक काम करना आप उन्हें इसके बारे में बताना hi मत

दीपिका: नहीं अमित मेरी ज़िन्दगी में अब एक hi रास्ता बचा हुआ है और वो है मौत , और मैं अब ज़िंदा रहना भी नहीं चाहती

अमित: बस इतना hi प्यार है आपको मुझसे जो मेरी कसम क बाद भी आप मरना चाहती हैं, क्या यही थी आपकी दोस्ती बस इसी लिए मुझे दोस्त बनाया था? दोस्त तो हर अचे बुरे वक़्त में साथ निभाते हैं और आप एक hi झटके में मेरा साथ छोड़ रही हैं

दीपिका: तो तू hi बता क्या करूँ मैं? क्या तू मेरे माथे से इस कलंक को मिटा सकता है बोल करेगा मेरी मदद?

दोस्त कहता है न मुझे बता मेरी मदद करेगा? बनाएगा मुझे माँ? भरेगा मेरी सुनी कोख को? या तो मुझे माँ बना दे या मुझे मरने दे फैसला अब तेरे हाथ में है

दीपिका ने जज़्बात में बहते हुए अमित को अपना फैसला सुना दिया था मगर दीपिका की इन बातों ने अमित क सर पर बम फोड़ दिया था,

अमित क पास इस बात का कोई जवाब नहीं था आखिर वो कैसे ये सब कर सकता है, वो तो ये सब सुनकर बट hi बन गया था

दीपिका: नहीं कर सकता न? बातें करना आसान होता है दूसरे क दुःख में बातों से सांत्वना तो सब देने आ जाते हैं मगर साथ कोई नहीं देता.

बातों से किसी का दुःख काम नहीं हो जाता अमित तो इन फज़ुल की बातों में फसकर मुझे इस नरक में जीने को मजबूर मत करो लोग सिर्फ उपदेश देते हैं बड़ी बड़ी बातें करते हैं तुमने अभी दुनिआ नहीं देखि मैंने देखि है

इस लिए कान खोलकर सुन लो मैं यहाँ से बहुत दूर चली जाउंगी जहाँ से मेरी खबर तक तुम लोगों तक न पहुंचे और तुम्हे मेरी कसम अगर तूने मुझे रोका या किसी को बताया तो मेरा मारा हुआ मुँह देखो

अमित को तो जैसे सांप सूंघ गया दीपिका ने उसे अपनी कसम देदी थी किसी को न बताने की और अब वो रुकेगी भी नहीं एक hi पल में जैसे सरे रस्ते उसने बंद कर दिए थे अब अमित क पास कोई रास्ता नहीं बचा था

अमित की आँखों से गंगा जमुना बहने लगी थी आखिर कितना बेबस कर दिया था दीपिका ने उसे कसम देकर और खुद दीपिका क दिल पर क्या बीत रही होगी इसका भी उसे अंदाज़ा था

कुछ पल यूँही दोनों खामोश आंसू बहाये जा रहे थे फिर दीपिका पीछे पलट कर कमरे से बहार जाने लगती है

दीपिका को जाता देख अमित को लगता है मनो दीपिका हमेशा हमेशा क लिए उससे दूर जा रही थी, जैसे उसके सेज माँ बाप की तरह छोटी ममी भी उसे छोड़कर जा रही थी इस घर में गौरी क बाद दीपिका hi थी जो उसके इतने करीब थी , कितना प्यार झलकता था उसके हर अंदाज़ में कितनी हंसमुख कितनी चुलबुली थी दीपिका मगर आज वही दीपिका दुनिआ भर गम अपने अंदर समाये जैसे इस दुनिआ को अलविदा कहकर जाने वाली थी, अमित का दिल चीख चीख कर उसे रोकने क लिए कह रहा था

अब तो एक hi रास्ता बचा था उसे रोकने का और वो था दीपिका को माँ बनाना जो क सरासर गलत था, अमित क संस्कार इस बात की बिलकुल भी इजाज़त नहीं देते थे आखिर वो कैसे अपनी hi ममी क साथ ये सब कर सकता था

जिस ममी को हमेशा माँ क सामान इज़्ज़त डी हो कैसे उसके साथ वो सब कर सकता है मगर एक सच ये भी था क किसी भी कीमत पर अमित को दीपिका का यूँ जाना बर्दाश्त नहीं था, इस पल में मनो पूरी ज़िन्दगी का फैसला करना था उसे जिसे कल पर टाला नहीं जा सकता था क्यूंकि उसे कोई मोहलत तक तो नहीं दी थी उसने सोचने की

दीपिका जैसे hi आगे बढ़ने लगी अचानक अमित ने उसका हाथ पकड़ लिया

अमित : इस घर में आप डोली में आयी थी न ? और लोग कहते हैं औरत जिस घर में डोली में बैठकर अति है फिर उस घर से अर्थी में hi निकलती है, और मेरे होते आप को मैं कुछ होने नहीं दूंगा

मैं आपकी ज़िन्दगी की कमी को पूरा करूँगा

मैं आपके माथे से इस कलंक को मिटाऊंगा

मैं आपको “माँ” बनाऊंगा

ये कहते हुए अमित का गाला भर आया था और आँखों से लगातार आंसू जारी थे

वहीँ दीपिका क कानो से होते हुए एक एक शब्द सीधा उसके दिल में उतर गया था कितनी तड़प कितना प्यार था अमित क एक एक शब्द में

वाकई में उसका प्यार निर्मल था उसके मुँह निकले प्यार से सरोबार इन शब्दों ने दीपिका को पिघला दिया और एक डैम पलट कर अमित क सीने से लगकर रोने लगी

दीपिका: कितना प्यार करता है मुझसे पगले, इतने प्यार से अगर तू रोकेगा तो मैं यमराज को भी लौटा दूंगी

मैं धन्य हूँ हो गयी तुझे पाकर , धन्य है वो माँ जिसने तुझे जन्म दिया

मैं तेरे आगे हाथ जोड़ती हूँ अपने इस अपर प्यार का थोड़ा सा अंश मुझे देकर मुझे माँ बना दे मुझे माँ बना दे

दोनों hi एक दूसरे से गले मिले रोये जा रहे थे मगर अब तो आगे बढ़ना hi था अब अमित को दीपिका को वो देना hi होगा जिसकी उसे सबसे ज्यादा ज़रूरत थी

तभी अमित दीपिका को अपने अलग करता है

अमित : मैं आपको कैसे जाने दे सकता हूँ इन आँखों में मैंने हमेशा हंसी देखि है मस्ती देखि है इन आँखों में मैं आंसू नहीं देख सकता

ये कहकर अमित दीपिका क आंसू पोंछता है

अमित: आपको मैं इतना प्यार दूंगा क आप हर गम भूल जाएँगी, मैं आपको कहीं नहीं जाने दूंगा मगर एक मुश्किल है

दीपिका चौंक जाती है क आखिर अमित को क्या दिक्कत है

अमित दीपिका की आँखों में सवाल देख कर कहता है

अमित: मैं इस बारे में कुछ नहीं जनता जो करना होगा वो आप को hi करना होगा

दीपिका अमित की बात सुनकर शर्मा जाती है और चेहरा झुका लेती है

दोनों खामोश हो जाते हैं मगर किसी को तो शुरुआत करनी थी और अमित ने साफ़ कह दिया था क उसे कुछ नहीं अत जो करना है दीपिका को hi करना है

तब दीपिका मन में हिम्मत जुटती है और चेहरा ऊपर उठाकर अमित की आँखों में देखने लगती है

अमित समझ नहीं प् रहा था दीपिका की नज़रों में एक बदलाव आ गया था जो पहले उसने कभी नहीं देखा था

फिर दीपिका आगे बढ़ती है और अमित क सर क पीछे हाथ रखकर उसके सर को झुकाती है और अपने लरज़ते हुए होंठो को अमित क होंठो से मिला देती है

उम्मम्मम अहम्म्म्म उम्मम्मम

दोनों में किश शुरू हो जाती है अमित अलग hi दुनिआ में आनंद में डूबा जा रहा था दीपिका क नाज़ुक मुलायम होंठो का एहसास उसे रोमांचित कर रहा था ऐसा मज़ा तो मंजरी क साथ भी नहीं आया था

उम्मम्मम मममममुहाः उम्मम्मम्म सीररराआप उम्मम्मम्म मम्मुआअह्ह्ह

दोनों एक दूसरे क होंठो को चूस रहे थे इस किसिंग की कमांड दीपिका क हाथों में थी मगर अमित भी बराबर साथ दे रहा था जैसे होनहार स्टूडेंट जल्दी से टीचर की हर बात को समझता है वैसे hi अमित भी कर रहा था

थोड़ी देर किश करने क बाद दीपिका ने सांस लेने क लिए चेहरा पीछे किया तो उसने महसूस किया क उसके होंठ पूरी तरह दोनों क थूक से भीग गए थे अमित तो पूरा मदहोश हो चूका था दीपिका की नज़रें फिर अमित की नज़रों से फिर मिली और बिना एक पल गवाए दोनों क होंठ फिर जुड़ गए दीपिका अमित का कभी निचला होंठ चूस रही थी कभी ऊपर वाला और फिर उसने अपनी जीभ अमित क मुँह में दाल दी

वास्तव में दीपिका कॉलेज में पड़ी लिखी थी उसने शहर की दुनिआ देखि थी हिंदी फिल्मो की तरह वो भी खुलकर रोमांस करना चाहती थी मगर अपनी इज़्ज़त की खातिर उसने कोई बर्फ नहीं बनाया था और कमलेश से कभी वो खुलकर रोमांस कर नहीं पायी थी मगर अमित क साथ उसका दिल कह रहा था क वो अपने हर ख्वाब को जी ले क्यूंकि अमित की आँखों में उसने सच्चा प्यार देखा था

दीपिका अमित की जीभ को चूस रही थी और अमित दीपिका को फॉलो कर रहा था फिर अमित ने भी दीपिका की जीभ को चूसना शुरू कर दिया

उम्म्म्म सूररेरुप मममुहा उम्मम्मम्म


Amit sirf deepika ko follow kar rha tha fir deepika ne amit ka ek hath pakadkar apne stano par rakh diya aur halke se dabakar use ishara kiya ।(

Amit bhi deepika ka ishara samjh gya aur usne deepika k thos stano ko dabana shuru kar diya, deepika k boobs ab bhi kathor the kyunki na to wo abhi tak maa bani thi aur na hi kamlesh uske sath jyada foreplay karta tha

Amit pehle dheere dheere fir zor se boobs ko press karne lga jiski wajah se deepika ko thoda dard bhi hua aur uske muh se siskariyan nikalne lagi magar usne roka nhi amit ko balki wo is mithe mithe dard ko enjoy karne lagi

“ aah unhhh aaah cccccc ooohhh ccccc aaaahhh aise hi dabao inhe aaaahhhhh ccccc dusra bhi dabao ooohhhhh hmmmmm aaaaahhh ccccc kas kar dabao ooohhhhhh ccccc uuiiii maaaaa’

Amit dono hatho se boobs dabane laga aur kas k meenjne lga mano aaj hi dheele kar dena chahta ho

Deepika ki chut me pani aa gya tha aur uski uttejna ab teji se bad rhi thi

Fir deepika ne jaldi se Amit ki kameez utar di fir banyan utar kar Amit k chode seene par hath firane lagi aur uski chhati par kiss karne lagi, Amit to is naye ehsas me khota chala ja rha tha usse ye sab control nhi ho rha tha

Deepika kiss karti hui neeche badne lagi aur Amit k pajame k naade ko khol diya jisse amit ka pajama niche gir gya uske underwear se hi uske land ka ubhaar saf jhalak rha tha jo is bat ka gawah tha k Amit is waqt anand k sagar me dooba hua tha

‘ aaahhhh cccccc maaammmmmiiiii oooooohhhhh kyaaaaa kaarrrrr rhiiiii haaiiiinnnnn aaaapppppp ooooohhhhhhh cccccc ‘

Amit k muh se siskiyan nikal rhi thi agle hi pal deepika ne amit ka underwear bhi neeche khinch diya aur Amit ka baburao uchhalta hua bahar aa gya

‘ hhaaaa , ye kya hai? Itna bada bhi hota hai kisi ka? Haaye ye to mujhe maar hi daalega, ‘

Deepika ek bar to dar hi gyi thi amit ka land dekhkar, dare bhi kyun na Amit ka land koi mamuli land nhi tha balki 8.5 inch lamba aur 4 inch mota musal tha jo kamlesh k 5 inch lambe aur 2 inch mote land se lagbhag doguna tha

Deepika k man me dar baith gya tha magar dusre hi pal wo sochne lagi k agar wo is musal ko jhel gyi to ye maza bhi bahut dega usne apni saheliyon se kai bar suna tha college k dino me k land jitna tagda ho utna hi maza deta hai

Amit to chup chap deepika ko dekh rha tha kyunki use to chudai ka koi gyan nhi tha jo bhi karna tha deepika ne karna tha

Amit : kya hua mami koi gadbad hai kya kuch kami hai mujhme kya

Deepika: nhi nhi kuch bhi to nhi tum me koi kami nhi hai darasal tumhare land ka akar bahut bada hai tumhare mama ka to isse adha hai main soch rhi thi k main kaise ise jhelungi

Fir deepika himmat kar k land ko pakad leti hai aur masalne lagti hai jisse land ka tanav aur bad jata hai aur uspar nasen ubharne lagti hain

Amit ka land bahut garam tha jiska ehsas deepika ko ache se ho rha tha amit k land me ek sab se khas bat thi aur wo thi uska rang,

Amit ka land gora chita tha aur uske land ka agla bhag mashroom k jaise bada chhatri ki tarah faila hua tha

Deepika ki choot bahut jyada pani chhodne lagi thi wo land ko muh me lena to chahti thi magar wo sharma rhi thi kahin amit uske bare me galat na soche

Fir deepika apni saadi utarne lagti hai aur fir kamre ki light ko band kar k chota balab jga deti hai taki thoda bahut nazar aa sake deepika Amit k samne nanga hone me sharma rhi thi magar use aage badna tha

Fir chupke se apna petticoat aur blouse utar kar bed par sirf bra penti me late jati hai

Deepika ko bahut sharam aa rhi thi isliye usne apni aankhen band karli thi

Amit deepika k sangmarmar se safed tarashe hue badan ko dekhkar mantra mugdh ho gya tha uska muh apne aap khul jata hai aur halak khushk hone lagta hai kitni haseen thi deepika koi bhi dekhe to pagal ho jaye pta nhi kamlesh kis mitti ka bna tha jo aisi apsra ko chhodkar bahar ghum rha tha

Jab Amit kuch der deepika k pass nhi ata to deepika ankhen kholkar dekhti hai k Amit to bas ankhen faade uske badan ko dekhe ja rha tha,

Deepika ko apne aap par garv mehsus hone lagta hai k amit jaisa gabhru jawan is umar me bhi uske jism ki khubsurti me kho gya hai

Fir wo Amit ko pass bultai hai

Amit uski awaz se neend se jagta hai aur bed par chla jata hai

Ab Amit poora nanga tha jabki deepika sirf penti bra me thi

Deepika: ab tum mere ye akhri kapde apne hatho se utaro

Amit deepika ka hukam mankar deepika ki bra ko kholne ki koshish karta hai magar uske hath kaanp rhe the aur use samajh nhi aa rha tha k wo kaise is khole khair deepika uski madad karti hai aur bra khul jati hai

Bra khulte hi boobs uchhalkar bahar aa jate hain

Kya haseen nazara tha doodh se safed aur perfect shape k thos sudol boobs jinpar brown color k chhote chhote nippal the jo is bat k gawah the k unko jyada chheda nhi gya hai

‘ aah ccccc Amit ab inhe maslo pyar se inhe dabao inhe muh me leke chooso ‘

Amit farmabadaar gulam k jaise aadesh sunkar dono hatho se doodh ko dabane lagta hai aur fir ek doodh ka nipple muh me le k choosne lagta hai fir thodi der baad dusre nipple ko muh me leta hai pehle wale ko dabane lgta hai

Deepika to anand k sagar me doobti ja rhi thi itna maza use kabhi nhi aya tha

‘ aaaahhhhhh oooohhhhh cccccccc aaaaaahhhhh uuuuiiiiiii ummmmmmm aaaaaaahhhhhh aise hi aaaaaahhhhhhh oooooohhhhhhh shabash aise karo aaaahhhhhh oooohhhhhhh maaaaaaa aaaaaiii cccccccc’

‘ ab meri penty bhi utaro jaldi se ‘

Amit doodh ko chhodkar deepika ki penty kheench kar utarne lagta hai jisme deepika kamar uthakar uski madad karti hai

Deepika ki penti poori kamras se bheegi hui thi jise amit ek bar gaur se dekhta hai aur sunghta hai, ek alag hi khushbu use mehsus hoti hai

Deepika ye dekhkar sharma jati hai magar ab usse apni choot ki aag bardasht nhi ho rhi thi

‘ Amit ab tumhe dheere dheere apna land isme ghusana hai ‘

Deepika apni choot Amit ko dikhati hai

‘ dekho amit tumhara land bahut bada hai main ise asani se jhel nhi paungi is liye zara aram se daalna agar main kahun ruk jao to ruk jana aur jab poora chala jaye to fir aage piche karna ‘

Amit han me sir hila deta hai

‘ ab tum meri taango k beech me aa jao ‘

Deepika apni taange utha kar khol deti hai aur amit iski tango k beech ghutno par baith jata hai magar Amit ki position sahi nhi thi use samajh nhi ata k akhir kaise ghusega kyunki deepika ki choot se uske land ka level nhi ban rha tha, deepika samajh jati hai k ise kuch bhi nhi pta hai

‘Lo ye takiya meri kamar k niche rakho aur khud thoda niche ho jao ghutne failakar ‘

Amit deepika ki kamar k niche takiya rakhta hai aur khud bhi ghutne failakar neeche ho jata hai ab land ka topa choot k samne tha

Deepika apne muh se thoda thook lagakar land par apne hath se lagati hai aur land ko pakadkar choot par set karti hai

‘Ab ghusao aram se ‘

Amit apne land par zor deta hua land ko andar ghusane ki koshish karta hai magar amit land k tope k mukable choot ka muh chhota tha deepika ko takleef mehsus hone lagti hai

Amit lagatar zor bda rha tha pukk ki awaz se land ka agla hissa choot me gus jata hai

‘ aaaahhhhhh cccccc oooooohhhhhh maaaa marrrrr gyiiiiiii oooohhhhhhh ccccc cc’

Deepika ko dard hone lagta hai uski choot ekdam kas gyi thi aur aise lag rha tha jaise koi khanjar daalkar uski choot ko faad rha ho

Amit deepika k chehre ko dekhkar samjh jata hai k use bahut takleef ho rhi hai isliye wo ruk jata hai

‘Aaahhhhh cccccc tum rukkkk kyunnn gyeeee aage badaooooooo dheere dheere ccccccc oooohhhhh’

Amit fir se land par zor dene lagta hai aur ek inch aur land andar ghus jata hai ab tak 3 inch hi land andar gya tha magar deepika ki to jaise jaan hi nikal rhi thi

‘Amittttt cccccccc sath me mere doodh bhi dabao isse mujhe thoda aram milega ‘

Amit jhat se doodh dabane lagta hai deepika thodi relax hoti hai to Amit ko jhatke se land andar karne ko kahti hai, amit uski bat mankar ek halka jhatka mar deta hai aur land 2 inch aur andar ghus jata hai magar deepika ki jaan halak me aa jati hai

Yahan tak to wo pehle bhi land le chuki thi magar Amit ka land usse dugna mota tha

‘ ooohhhhh aaaaaahhhhhh maaaaaa cccccccc oooohhhhh maaarrrrrr gyiiiii cccccccc ooohhhhh ‘

Thodi der Amit deepika k doodh dabata rehta hai jisse 5 minutes baad deepika thoda normal ho jati hai aur amit ko itne hi land ko andar bahar karne ko kehti hai

Amit utne hi land ko dheere dheere andar bahar karne lgta hai pehle to deepika ko takleef hoti hai magar fir dheere dheere land apni jagah bna leta hai aur use acha lagne lgta hai

Amit to ankhen band larke mza le rha tha aur sath me doodh dba rha tha deepika bhi ab rang me aane lagi thi

‘ aaaahhhhh cccccc ummmmmm ooohhhhhhh aaaahhhhhh ccccc aise hi karoooooo aaahhhhh mmaaaaa aur tej dhakke maro aaaahhhh cccccc’

Amit deepika ki awaz sunkar apni gati bda deta hai aur tez dhakke marne lagta hai

‘ aise hiii aaaahhhhh oooohhhhhh mmaaaaa reeee aur zzzzzooooorrrrrr sseeeee maaaroooo aaaahhhhh

Poooraa ghussaaa dooo aaahhhhh meri parwaaahhhhh cccccccc oooohhhh mat karooooo ummmmm ghusa do poooraaaaa cccccc ooohhh’

Amit deepika ki awaz sunkar ek tez dhakka marta hai aur uska land 1.5 inch aur andar ghus jata hai

Deepika k muh se cheekh nikal jati hai

‘Aaaiiiiii mmmmaaaaaaaaa. Aaaaahhhhhh’

Amit jaldi se uske muh par hath rakh deta hai

‘Kya kar rhi ho mami koi jag jayega awaz sunkar ‘

Deepika ki ankhon se aansoo behne lage the jise dekhkar amit ruk jata hai aur uske muh se hath hatata hai

‘ kya karun tumhara musal meri jaan lelega aisa lag rha hai kisi ne khanjar ghusa diya hai pet me aaaahhhh maaaaa ‘

Amit fir se deepika k doodh dabane lagta hai aur 5 minutes me halke dhakko se aur doodh dabane se ab wo normal ho gyi thi ab amit itne hi land se deepika ki choot me dhakke marne lagta hai aur deepika bhi anand me doob jati hai

‘ aaahhhh aaahhhh aaaahhhh cccccc ooohhhhh aisee hiii aaaahhhh zor se karoooo aaahh shabash zor lagao aaahhhhh ccccc ummmmm aaaaa’

Amit ne apni gati aur bda di thi deepika se aur bardasht nhi hota aur uski choot sikudne lagti hai 2 minute bad hi uska paani nikalne lagta hai

‘ aaahhhhh main aaaaaaa rhiiiiii huuuunnnnnnn aaaaaahhhhhh maaaaaaa maaainnnnn gyyyyiiiiiii

Ohhhhhhh mmmmmmmaaaaaa’

Amit dekhta hai k deepika teji se kamar uthane lagi hai to moka dekhkar akhri bacha hua land bhi tej dhakke se choot me ghusa deta hai aur sath hi deepika k muh ko dba deta hai jisse uski cheekh muh me hi dab jati hai

Deepika ki ankhen palatne lagti hai ye aakhri dhakka usse bardasht nhi hua tha anand ki charam seema me amit ne aakhri prahar kar k choot ki dhajjian uda di thi

Amit ka land deepika ki bachedaani me ghus gya tha aur land ki sakhti ki vajah se use asehniye pida ho rhi thi use lag rha tha wo nhi bachegi choot se bhi khoon behne lga tha

Deepika ka jism sir kati murgi ki tarah fadfadane laga tha deepika besudh ho gyi thi

Amit deepika ki aisi halat dekhkar bed k sirhane pade gilas se pani jaldi se deepika k chehre par dalta hai aur deepika ko hosh ata hai

‘ aaaahhhhhh maaaaa nikaloooooo baharrrr maaaaa aaaiiii main mar jaaungiii ccccc aaaaaaah please nikalo bahar aaaaaaa fattttt gyi meriiiii choooot aaaaaahhhhhhh ccccccc maaaaa nikalo ise ‘

Amit chupchap bas deepika k doodh dabaye ja rha tha use aur kich nhi pta tha k wo kya kare kuch der baad deepika ka dard kuch kam hota hai magar wo abhi bhi siskar rhi thi

‘ ccccc oooohhhhhh aaaaaahhhhhh aur kitna baki hai? Maaaa cccccc. Main aur nhi le paungi ccccccc aaaaiiiii’

‘ poora chla gya hai mami ji ab aur baki nhi hai aap kaho to nikal lun bahar ?’

‘ kyaaaaaa??? Poooraaa challlaaaaa gyaaaa? Oooohhhhh cccccccc kya sach me aaaaaahhhhh ccccc’

‘ khud hi dekhlo ‘

Deepika hath lagakar dekhti hai wakai poora chla gya tha

Fir deepika Amit ko dhakke marne ko bolti hai

Amit dhakke marne shuru kar deta hai deepika ki choot ek bar pani chhod chuki thi jis vajah se ab land aram se andar bahar hone laga tha land ne choot ko apne hisab se khol diya tha

‘Aaaahhhhh uuuummmmmm aaaaaaahhhhh cccccccc shaabaash ccccc aaaissseee hiiiii maaaa rreeeee ccc. Aaaah zor se maroooo aaaahhhhh’

‘Ye lo mami aur lo aur zor se ye lo ab to kahin nhi jaogi na mujhe chhodkar?’

‘ aaahhhhh mmmaaaaa aaissseeee hiiii cccc mmaaaa,

Nhi kahinnnn nhiii aaaaaaahhhhhhh ccccc maaaa

Kahin nhi jaungi cccccc ooooohhhhhh

Ab to main is musal ki gulam ho gyi hun aaaaaa cccccc aur Zoor seee maaaro

Ab to main isi land se chudungi har roz

Aaaahhhhhh ccccccc maaaaa bol chodega na mujhe aaaahhhhh ccccc bol chodega na mujhe?’

‘ tum jo kahogi wo karunga maaami ccccc bas mujhe chhodkar kahin mat jana ‘

‘ kahin nhi jaungi cccccc aaaahhhhh aur tez karo cccccc mmaaaa ummmmmm aaaaahhhhh ab to main teri gulam ho gyi hun aaj se is chut me sirf tera land hi jayega aaaaahhhhh cccccc’

10 minutes k bad fir se deepika charam par pahunch gyi thi magar amit abhi bhi lga hua tha

‘ aaaaahhhhhh aur tez karo aaaaahhhh maaaaa ccccccc ummmmmm oooohhhhhh aur tezzzzzz aaaaaahhh main aaaaaa rhiiii hunnnnn aaahhhhh’

Deepika jhatke lete hui pani chhod deti hai

Magar amit abhi laga hua tha dono paseene me nahaye hue the ab amit bhi bardasht se bahar ho rha tha

Amit aur tez tez jhatke maarne lagta hai amit ki bechaini badne lagti hai

Amit deepika ki taango ko dono hatho se pakad kar deepika k doodh par uske ghutne lga deta hai deepika k paon uske sir k paas aa gye the uski paon ki payal uske chehre k pass chhann chhann ka madhur sangeet bja rhi thi jo amit ki uttejna ko charm par le jate hain

Amit poora zor lgakar dhakke marne lagta hai

Deepika se itni tabadtod chudai bardasht nhi hoti aur ek bar fir se uski choot pani chhodne k liye fadfadane lagti hai

‘ aaahhhhh mmmaaaaaa meri kamarrrrrr ooohhhhh main gyiiiii ‘

‘ mera peshab nikalne wala hai mami ji ‘

‘Wo peshab nhi hai use nikalne de mere andar hi nikal use ‘

‘ nikalne wala hai mami ji aaahhhh cccc ooohhhh’

‘ aaane de aaahhhh ccccc jaldi kar main aur jhel nhi paungi jaldi kar aaaahhhhh ‘

Isi ki sath Amit ka land dam tod deta hai aur uske land se ultian hone lagti hain

Amit ka land poora choot me ghusa hua tha Amit ka jism akad gya tha aur uske land ka ras seedha deepika ki bachedaani me gir rha tha

Bachedaani me ras k girte hi deepika ne bhi fir se paani chhod diya tha

Deepika is chudai se poori past ho gyi thi

Amit deepika k upar hi let gya tha aur dono apni sanso ko durust kar rhe the

Deepika se amit k jism ka bhar bardasht nhi ho rha tha wo amit ko side me the palta deti hai aur apni taange sidhi kar k amit ko bahon me kas leti hai rat k 2:30 baj gye the chudai ki thakawat ki vajah se dono ki aankh kab lag gyi pta hi na chala
 
अपडेट 11

दीपिका से अमित क जिस्म का भर बर्दाश्त नहीं हो रहा था वो अमित को साइड में थे पलटा देती है और अपनी टाँगे सीधी कर क अमित को बाँहों में कास लेती है रत क 2:30 बज गए थे चुदाई की थकावट की वजह से दोनों की आँख कब लग गयी पता hi न चला

अब आगे-

दमदार तूफानी चुदाई क बाद दीपिका और अमित दोनों थकावट में चूर सोये पड़े थे

सुभह सार दीपिका की आँख खुल जाती है उसे बहुत तेज़ पेशाब लगी थी, दीपिका जल्दी से बीएड से उठ कर जैसे hi बाथरूम जाने क लिए कड़ी होने लगती है तो उसे तेज़ दर्द महसूस होता है और वो झटके से बीएड पर वापिस बैठ जाती है

रत अमित की दमदार चुदाई ने दीपिका का अंग अंग ढीला कर दिया था अब उसे अपनी छूट में तेज़ दर्द महसूस हो रहा था मगर पेशाब को रोकना मुश्किल था इसलिए हिम्मत कर क उठकर धीरे धीरे लंगड़ाती हुई बाथरूम में घुस जाती है और जब बैठकर पेशाब करने लगती है

पेशाब सिटी की आवाज़ से निकल रहा था मगर दीपिका को अंदर दर्द महसूस होने लगता है उसकी छूट में तीस उठ रही थी , पेशाब करने क बाद दीपिका कमरे में अति है तो उसकी नज़र बीएड पर सो रहे अमित पर पड़ती है जो बिलकुल नंगा सो रहा था, सोते हुए कितना मासूम लग रहा था , दीपिका को रत की चुदाई यद् आ जाती है

‘ उफ़ पूरा सांड है, कितना तगड़ा लैंड है मेरे जैसी चूड़ी हुई औरत की छूट से भी खून निकल दिया अगर किसी कुवारी पर चढ़ जाये तो उसका बचना मुश्किल है ‘

फिर उसकी नज़र बीएड पर उसकी छूट से निकले खून क धब्बे नज़र एते हैं जिससे देखकर उसे ऐसा महसूस होता है जैसे कल रत hi उसकी सुहागरात थी

दीपिका आगे बढ़कर बीएड से अपनी ब्रा पेंटी उठाकर पहन लेती है और फिर अपने बाकि कपडे पहनकर अमित को चादर से धक् देती है और एक किश उसके माथे पर देकर चुपके से अपने कमरे में चली जाती है जहाँ कमलेश बेसुध सोया पड़ा था

कमलेश को देखकर दीपिका को पहले गुस्सा अत है मगर फिर वो खुद को समझकर चुपचाप बीएड पर लेट कर सो जाती है

सुबह गौरी और कामिनी रसोई में नाश्ता बना रही थी मगर दीपिका अभी तक नज़र नहीं आयी थी

गौरी: अभी तक छोटी नज़र नहीं आयी रोज़ तो मुझसे भी पहले रसोई घर में आ जाती है आज क्या बात है , जा कामिनी ज़रा देख तो क्या बात है

कामिनी: जी दीदी अभी देखती हूँ

कामिनी रसोई से निकल कर दीपिका क कमरे में जाती है तो देखती है क दीपिका अभी भी सो रहा था जबकि कमलेश उठकर बहार जा चूका था

कामिनी: महारानी जी उठ जाइये सूरज सर पर आ गया है और आप अभी तक बीएड से नहीं उठी

कामिनी क जगाने से दीपिका नींद से जगती है और अंगड़ाई लेती है मगर अभी भी उसके जिस्म में रत की धुआंधार चुदाई का मीठा मीठा दर्द महसूस हो रहा था, आँखों में लाल रेशे नज़र आ रहे थे

कामिनी : लगता है रत देवर जी ने सोने नहीं दिया इसीलिए अभी तक सो रही थी

दीपिका: क्या दीदी आप भी कैसी बातें करती हैं

कामिनी: ाचा! मैं बातें कर रही हूँ ज़रा आईने में खुद को देखो अभी तक आँखे लाल है चलो अब उठ जाओ दीदी कब से पूछ रही हैं, मुझे देखने भेजा है

दीपिका : दीदी मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं है लगता है बुखार है पूरा जिस्म दर्द कर रहा है

कामिनी: तौबा ऐसा क्या कर दिया देवर जी ने रत को

दीपिका : नहीं दीदी ऐसा कुछ नहीं है, सच में मेरी तबियत ठीक नहीं है

कामिनी : चिंता से) ाचा तूने दवा ली या नहीं , तू आराम कर मैं तेरे लिए चाय नाश्ता लती हूँ फिर तू दवा ले लेना

कामिनी रसोई घर में जाकर गौरी को बता देती है और दीपिका क लिए नाश्ता बर्तन में डालती है जिसे गौरी लेकर जाती है दीपिका क पास जाती है

गौरी: दीपिका क्या बात है क्या हुआ तुझे

दीपिका: कुछ नहीं दीदी बस हल्का सा बुखार है और जिस्म दर्द कर रहा है

गौरी: तू ये नाश्ता करले और फिर दवा खा लेना , और ख़बरदार जो कोई काम किया तो, आज तू बस आराम करेगी

थोड़ी देर बातें करने क बाद गौरी फिरसे रसोई में आ जाती है

इसी दौरान अमित भी उठ गया था बाथरूम से फ्रेश होकर नहा धोकर जब बीएड को देखता है तो चादर पर खून क धब्बे देखकर उसके मन में चिंता होने लगती है

‘ खून!! लगता है ममी को रत को चोट लग गयी है इसी लिए मुझसे नाराज़ हो कर बिना बात किये चली गयी हैं, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था ‘

अमित को चिंता होने लगी थी क ममी को कितना दर्द हो रहा होगा कहीं वो नाराज़ हो गयी तो? कहीं वो घर छोड़ कर चली गयी तो

इसी चिंता में डूबा अमित जल्दी से कमरे से निकलने लगता है मगर उसे चादर पर लगे खून क धब्बे यद् आ जाते हैं फिर वो पहले चादर को उठा क बाथरूम में जाकर पानी में भिगो देता है और जल्दी से रसोई में जाता है

गौरी: आ गया मेरा लाल, आज देर करदी

अमित : गले लगते हुए) वो क्या है न माँ आज संडे है तो स्कूल तो जाना नहीं है इसलिए आराम से तैयार हुआ

फिर अमित कामिनी क पाऊँ छूटा है मगर कामिनी बेमन से आशीर्वाद देकर निकल जाती है वो गौरी क सामने कुछ बोलती नहीं थी अमित को

अमित दीपिका को न पाकर मन hi मन घबराने लगता है

Amit:maa आज छोटी ममी कहाँ है दिखाई नहीं दे रही?

गौरी : बीटा उसे बुखार है मैंने उसे आराम करने का कहा है

अमित दीपिका की तबियत का सुनकर और ज्यादा चिंतित हो जाता है और जल्दी से दीपिका को देखने उसके कमरे में चला जाता है

जहाँ दीपिका अभी दवा खाकर आँखें बंद किये लेती हुई थी

अमित समझता है शायद वो सो रही है इसलिए बिना डिस्टर्ब किये वापिस लौट जाता है

अमित रसोई में बैठकर नाश्ता करता है और माँ को बोलकर राजू क पास चला जाता है

दोनों दोस्त मिलकर नदी किनारे चले जाते हैं

राजू: बोल क्या बात है सुबह सुबह यहाँ ले आया?

अमित : तुझे तो सब पता है यार वही मीणा और मां का चक्कर, कुछ तो करना पड़ेगा मां तो अब ममी से झगड़ा करने लगा है और मीणा की बातों से भी लगता है क मां सब कुछ उसी पर लुटा देगा

राजू: बात तो तेरी सही है मगर साला हम करें भी तो क्या

एक काम कर तू बड़े मां को सच बता दे

अमित : कैसी बातें करता है यार अगर ऐसा किया तो झगड़ा हो जायेगा भाइयों में उल्टा बात बाद गयी तो बदनामी हो जाएगी और इस सब में ममी का क्या होगा अगर मां ने उन्हें छोड़ दिया तो

राजू: तो फिर तू ममी को hi बता दे शायद वो hi सीधा करदे मां को

अमित: ममी बेचारी कुछ नहीं कह सकती मां को उल्टा मां उनको घर से निकल देंगे

राजू: तो तू hi सोच क क्या करें

अमित : कुछ ऐसा करना होगा क मीणा की असलियत मां क सामने आ जाये तभी वो मीणा का पीछा छोड़ेंगे

राजू: मगर ऐसा कैसे होगा? मां तो हमारी बात नहीं मानेंगे

अमित : यही तो सोचना है क कैसे मीणा का सच सामने लाये

तू एक काम कर अपने उस दोस्त को बोल क वो मीणा पर नज़र रखे और फिर जब वो
आदमी आये तो हमें बता दे

राजू
: उसकी चिंता मत कर काम हो जायेगा

फिर ऐसे hi दोनों दोस्त बातें करते रहते हैं और दोपहर क वक़्त अमित घर लौट अत है

दीपिका अभी भी कमरे से नहीं निकली थी माँ और कामिनी ममी रसोई में दोपहर का खाना बना रही थी विजय और अजय खाना खाने घर आये हुए थे

विजय: और बीटा क्या चल रहा है? पड़े तो मन लगा क कर रहा है न?

अमित : जी बाबा

विजय: तूने अभी तक बताया नहीं क तुझे क्या चाहिए जन्मदिन क तोहफे में

अमित : बाबा मुझे क्या चाहिए सब तो है पहले से hi बस आपका आशीर्वाद hi बहुत है

विजय: जीतो रो बीटा वो तो हमेशा तेरे साथ hi है मगर तुझे मैं जन्मदिन का तोहफा ज़रूर दूंगा

अजय: हाँ बड़े भैया ये तो मना करता hi रहेगा मगर आप ने जो सोचा है वो इसे लेना hi पड़ेगा आप इसकी बात मत सुनो

दोनों मां अमित क साथ मिलकर खाना कहते हैं और खेतो में चले जाते हैं

कुछ देर अमित से बातें करने क बाद गौरी भी अपने कमरे में रेस्ट करने चली जाती है कामिनी भी दीपिका को खाना खिलाकर अपने रूम में जा चुकी थी

अमित सब क जाने क बाद दीपिका क कमरे में चला जाता है उसका हाल जानने और बात करने

अमित : ममी मुझे माफ़ कार्डो मेरी वजह से आप को चोट लग गयी

दीपिका : ये तुम क्या कह रहे हो किस बात की माफ़ी कौन स चोट लगी है मुझे ?

अमित : मैं जनता हूँ कल रत आपको चोट लग गयी है मैंने देखा है बीएड पर खून था

दीपिका अमित बात सुनकर शर्मा जाती है

दीपिका: बिलकुल बुद्धू है तू भी तुझे किसने कहा मुझे चोट लगी है वो तो........

दीपिका फिर से शर्मा जाती है आखिर क्या जवाब दे वो अमित को

अमित: बताओ न ममी तुम्हे क्या हुआ है आखिर वो खून कैसे निकला कहाँ चोट लगी है आपको

दीपिका: तुझे नहीं पता वो खून कहाँ से आया है?

अमित : वही तो पूछ रहा हूँ आप बताइये न

दीपिका: अरे तू सांड की तरह किसी औरत पर चढ़कर अपने मुसल से उसकी कुटाई करेगा ता खून नहीं निकलेगा क्या वो मैं हूँ जो झेल गयी मंजरी होती तो रत में hi राम नाम सत्य हो जाता उसका

अमित दीपिका की बात का मतलब समझकर शर्मा जाता है

अमित : मगर आपकी तबियत तो ख़राब हो गयी न आप मुझसे नाराज़ तो नहीं प्लीज मुझे माफ़ कर दीजिये आप मुझे छोड़कर कहीं मत जाइएगा

दीपिका: अरे पगले ये तकलीफ तो हर औरत हर लड़की को पहली बार झेलनी पड़ती है मैं तो खुशनसीब हूँ क मुझे तुमने फिर से इस दर्द का एहसास करवा दिया

मैं अब तुझे कहीं छोड़कर नहीं जाउंगी अमित आज से मैं सिर्फ तेरे लिए इस घर में रहूंगी और तेरी दासी बनकर रहूंगी तू मुझसे वडा कर क तू कभी मुझे छोड़ेगा नहीं और हमेशा मुझे प्यार देगा

अमित : ममी जी ये आप क्या कह रही हैं आप मेरी माँ सामान हैं आप मेरी दासी नहीं हैं और मैं हमेशा से आपको प्यार करता हूँ और हमेशा करता रहूँगा

दीपिका: मैं माँ बेटे वाला प्यार नहीं कह रही , मैं तो कल रत वाले प्यार की बात कर रही हूँ

अमित: शॉकेड) क्या? नहीं ममी ये सब गलत है आपको माँ बनाने क लिए मैंने कल रत आपकी बात मानली थी मगर और नहीं

दीपिका: इसका मतलब तू मुझसे प्यार नहीं करता? तू भी अपने मां क जैसे मुझे ठुकरा रहा है

मैं किसके आसरे रहूंगी इस घर में

इतना कहकर दीपिका रोने लगती है

अमित: नहीं ममी ऐसा मत कहो मैं आपके लिए कुछ भी कर सकता हूँ आप ऐसे आंसू मत बहाइये

अपने वडा किया था क अगर मैं आपको माँ बना दूँ तो आप कहीं नहीं जाएँगी

दीपिका: तभी तो कह रही हूँ क मुझ तेरा कल रत वाला प्यार चाहिए

अमित : मगर कल हो तो गया न अब आप माँ बन जाएँगी

दीपिका: ऐसे एक बार में कोई माँ थोड़ा बन जाती है, ये तो बार बार करना पड़ता है जब तक औरत क पेट में गर्भ न ठहर जाये

और तुझे मेरी कसम सच सच बता क्या रत को तुझे मज़ा नहीं आया था ?

अमित : अमित शर्माते हुए हां में गर्दन हिला देता है

दीपिका: अब शर्माता क्यों है रत को तो मेरा अंग अंग ढीला कर दिया ऐसे भी कोई करता है

सच hi कहा है किसी ने ‘अनादि का खेलना, खेल का सत्यानाश ‘

दीपिका अमित को शर्माता देखकर अब उसके मज़े लेने लगी थी

अमित को भी पता चल जाता है क दीपिका उसके मज़े ले रही है

अमित : अगर ऐसी बात है तो हो जाये एक और मुकाबला देखते हैं खिलाडी कौन है

दीपिका: न बाबा न अभी तो बिस्तर से उठने की हिम्मत नहीं है अभी मुझे माफ़ करो मगर जल्द hi मैं तुझे दिखाउंगी खिलाडी कौन है

दोनों कुछ देर यूँही बातें करते हैं और फिर अमित घर से खेतों की तरफ निकल जाता है

दीपिका अमित क जाने क बाद सोचने लगती है क अमित को अपने हुस्न का जलवा दिखाना होगा ताकि वो खुद उसे छोड़ने क लिए तैयार रहे और मुस्कुराने लगती है

अमित खेतों में जाता है तो वहां अजय मां बैठे थे चारपाई पर

अजय : आओ अमित बैठो, और बता कहाँ से आ रहा है

अमित : कुछ नहीं मां जी बस सोचा आपके पास बैठ कर हिसाब किताब का काम hi कर लेता हूँ

अजय: हाँ ये ठीक किया तुमने, उसदिन तुमने वो जो हिसाब में फरक निकला था तो मैंने बड़े भैया को बताया था वो कल जायेंगे साहूकार क पास

एक काम कर तू बही कहते में देखकर मजदूरों का भी हिसाब देख दाल किसकी तरफ कितना पैसा निकलता है और किसे कितना देना है

अमित बही खता देखता है तो एक मजदुर की तरफ 30000 जमा था मगर पिछले एक साल से उसने कोई पैसा लौटाया नहीं था

अमित : मां जी ये रघु कौन है इसने 30000 रूपए लिए थे मगर अभी तक एक भी पैसा लौटाया नहीं

अजय: क्या? एक साल से पैसा नहीं लौटे मगर कमलेश तो कह रहा था वो खुद लेलेगा अब तो इस बात को भी 6 बहुत वक़्त हो गया है

अमित : मां जी ये अभी काम कर रहा है हमारे पास ?

अजय: हाँ यहीं है खेतो में

अमित : बुलाइये उसे ज़रा और पूछिए कहाँ है पैसे तनखाह तो समय पर ले रहा है

अजय रघु को बुलवाता है

अजय: क्यों रघु क्या बात है तू पैसे नहीं लोटा रहा तुमने तो बोलै था 2000 रूपए हर महीने कटवाएगा

रघु: अरे साहब क्या बताऊँ मीणा की तबियत ठीक नहीं रहती ऊपर से अब वो पेट से हो गयी है अब मैं अकेला कैसे पैसा कमाने वाला हूँ बस जैसे hi मीणा खेतों में मजदूरी पर आने लगेगी तो मैं पैसे कटवा दूंगा छोटे मालिक ने कहा था क जब तक मीणा को बचा नहीं हो जाता उसे खेतो में नहीं लाना

अमित साडी बात समझ गया था

अमित : ठीक है ठीक है अगर छोटे मां ने कहा है तो ठीक है मगर यद् रखना ये पैसे तुम पर क़र्ज़ हैं , अब तुम जाओ

अमित सोचने लगता है क कमलेश मां तो हर जगह गड़बड़ कर रहे हैं ऐसे तो सब कुछ बिगड़ जायेगा , कुछ देर खेतों में बिताकर शाम को दोनों मां भांजा घर आ जाते हैं विजय भी आ गया था मगर कमलेश नहीं आया था

सब मिलकर खाना कहते हैं और अपने अपने कमरों में सोने चले जाते हैं

गौरी सोने hi जा रही थी क बहार क दरवाजे की आवाज़ अति है गौरी देखने जाती है क इस वक़्त कौन आ गया, उसकी नज़र कमलेश पर पड़ती है जो झूमता हुआ अपने कमरे में घुस जाता है

गौरी समझ जाती है को नशे में है फिर वो सोचती है क दीपिका तो ठीक नहीं खामखा खाने क लिए ये अब उसे तंग करेगा मैं hi पूछ लेती हूँ और वो दीपिका क कमरे की तरफ जाती है, अचानक अंदर की आवाज़ें सुनकर वो ठिठक जाती है

कमलेश: चल उठ ऐसे क्या बीएड पर लेती आराम कर रही है चल उठकर मुझे खाना दे

बचे तो पैदा कर नहीं सकती रानी बन क बैठी है बाँझ कहीं की

चल उठ मेरे जुटे निकल

दीपिका: रट हुए) क्यों बार बार मुझे बाँझ कहते हो भगवन ने चाहा तो मैं भी माँ बन जाउंगी

कमलेश: है है है है ख्वाब देखना छोड़ दे साली तू एक बाँझ है और बाँझ hi रहेगी

दीपिका: मैं बाँझ नहीं , मर्द अपनी कमज़ोरी पर पर्दा डालने क लिए औरत पर बाँझ का तना कसता है

इतना सुनते hi कमलेश दीपिका क मुँह पर तीन चार थप्पड़ मर देता है

कमलेश: साली तू मुझे नामर्द बोल रही है तू देख इस घर में मैं बच्चों की लाइन लगा दूंगा और तुझे घसीट कर बहार निकलूंगा

इतना कहकर वो दीपिका को लत मर कर बीएड से नीचे फेंक देता है और खुद आराम से बीएड पर लेट जाता है

बहार कड़ी गौरी दीपिका क हाल पर आंसू भ रही थी मगर इस वक़्त कमलेश नशे में था और ऐसे में उससे बात नहीं की जा सकती अपने दिल पर पत्थर रखकर गौरी अपने कमरे में चली जाती है और साडी रत दीपिका क बारे में सोचती हुई सो जाती है

अगले दिन सुबह अमित रूटीन से अखाड़े में कसरत कर क घर अत है और नाश्ता कर क स्कूल चला जाता है, विजय पैसे लेकर शहर चला जाता है और अजय और कमलेश भी चले जाते हैं

गौरी सुबह सुबह कोई बात नहीं करना चाहती थी इस लिए वो खामोश थी मगर सब क जाने क बाद वो दीपिका क पास उसके कमरे में जाती है

गौरी: छोटी क्या चल रहा है तुम दोनों क बीच

दीपिका घबरा जाती है कहीं दीदी को मेरा और अमित का पता तो नहीं चल गया

दीपिका: कक्क. किंनन्न ददोन्नननो क बीच? आप क्या कह रही हैं?

गौरी: मैं तेरी और कमलेश की बात कर रही हूँ

दीपिका चैन की सांस लेती है

दीपिका: क्यों क्या हुआ दीदी सब ठीक तो है

गौरी: झूठ मत बोलो मैंने रत को सब सुना है अपने कानो से

दीपिका रोने लगती है तो गौरी उसे अपने गले लगा लेती है

गौरी: बस बस रो मत मैं हूँ न, तूने मुझे बताया क्यों नहीं कब से चल रहा है ये सब बता मुझे

Deepika:(rote हुए) कुछ नहीं दीदी वो बचा न होने का कसूरवार मुझे मानते हैं, आप hi बताइये मैं क्या करूँ क्या इसमें मेरी गलती है

गौरी: पता नहीं क्या हो गया है इसे जाने किन घटिया लोगो क साथ बैठने लगा है मैं आज hi तेरे भैया को बोलती हूँ वो समझायेंगे इसे अपने तरीके से

दीपिका: नहीं दीदी इससे कमलेश और भड़क जायेंगे

गौरी: तो तुम क्या चाहती हो वो तुम्हारे साथ जानवरों जैसा सलूक करे और मैं कुछ न करूँ?

दीपिका: मुझे भगवन पर भरोसा है वो मेरी ज़रूर सुनेगा

गौरी: तुमने मुझे बताया नहीं क्या कहा था डॉ ने

दीपिका: डॉ ने कहा है क बस कुछ दिन दवाई कहानी पड़ेगी फिर मैं माँ बन सकती हूँ

गौरी: क्या सच !!! ये तो बहुत ख़ुशी की बात है तुमने कमलेश को क्यों नहीं बताया खामखा उसके ताने सुन रही है,

आने दे ज़रा उसे घर मैं कान खींचती हूँ उसके

दीपिका: नहीं दीदी अगर मैं उन्हें बताती तो वो यकीन नहीं करते वैसे भी रत को कहाँ वो होश में थे

अब वो जब घर आएंगे तो आप बताना क आप मुझे लेकर डॉ क पास गयी थी और डॉ ने दवा दी है जिससे मैं माँ बन सकती हूँ


( अगर मैं कहूँगी तो कभी यकीन नहीं करेगा वो, उसकी नाक क निचे मैं अमित क लैंड की धार से माँ बनूँगी और अमित क बचे को उसका बताकर चुटिया बनाउंगी उसे यही मेरा बदला है)

गौरी: हम्म्म्म , तू ठीक कहती है मैं उसे अछि तरह समझा दूंगी और तेरा ख्याल रखना होगा उसे वर्ण कान पकड़ क बहार करदूंगी उसे

दीपिका: उसकी ज़रूरत नहीं पड़ेगी दीदी, वैसे मैं चाहती हूँ क मेरा बचा अमित जैसा हो उसी क जैसा बने बड़ा होकर, अमित कितना प्यारा है न कितना ख्याल रखता है हम सबका

गौरी: हाँ ये तूने बिलकुल ठीक कहा भगवन ने अमित को मेरी झोली में डालकर मेरे दिल से बाँझ होने का दुःख मिटा दिया काश हर जनम में वो मेरा hi बीटा बने

दीपिका: और मुझे आप हमेशा ऐसे hi सास बन क हर जनम मिले

गौरी: क्या कहा?

दीपिका: अरे दीदी मैंने तो सास ससुर को देखा नहीं आप घर की बड़ी हैं तो मेरे लिए तो आप hi सास हैं और बड़े भैया ससुर सामान हैं


( मन में- आपका बीटा अमित मुझे माँ बनाएगा तो हुई न मैं आपकी बहु और आप मेरी सास)

गौरी: हाँ ये तो ठीक है

चल अब तू चिंता मत करना और जैसे hi कमलेश घर ए तो मुझसे बात करवाना

दीपिका: जी दीदी

दोनों ऐसे hi कुछ और बातें करती हैं और गौरी घर क कामों में लग जाती है, दीपिका आगे क बारे में सोचने लगती है क कैसे कमलेश को इस बात पर राज़ी करवाना है क ये बचा उसीका है हालाँकि अभी तो उसे खुद पता नहीं था वो प्रेग्नेंट है या नहीं मगर उसे पूरा भरोसा था क अमित का तगड़ा मूसल वो कमल दिखा देगा जो कमलेश नहीं दिखा सका
 
अपडेट 12

दोनों ऐसे hi कुछ और बातें करती हैं और गौरी घर क कामों में लग जाती है, दीपिका आगे क बारे में सोचने लगती है क कैसे कमलेश को इस बात पर राज़ी करवाना है क ये बचा उसीका है हालाँकि अभी तो उसे खुद पता नहीं था वो प्रेग्नेंट है या नहीं मगर उसे पूरा भरोसा था क अमित का तगड़ा मूसल वो कमल दिखा देगा जो कमलेश नहीं दिखा सका

अब आगे-

स्कूल में लंच टाइम में मंजरी अमित से गिला करती है क वो उससे मिलने नहीं अत और वो अमित से रूठने का ड्रामा भी करती है फिर अमित उसे बताता है क कैसे वो ममी क साथ शहर गया था और घर क कुछ मसलों में और खेत क कामो में वो बिजी था अमित क समझने पर वो मन जाती है

अमित उससे वडा करता है क वो आज उसे दोपहर को नदी किनारे मिलेगा फिर दोनों क्लास में चले जाते हैं

स्कूल से छुट्टी होने क बाद अमित घर आ कर खाना खता है और फिर दोपहर को नदी किनारे मंजरी को मिलने चला जाता है

दोनों प्रेमी 3 दिन बाद मिल रहे थे अकेले में आज मंजरी खुद पहल करती है किश करने में वहीँ अमित तो छोटी ममी की चुदाई कर क चुदाई क आनंद को जान चूका था

किश करते हुए अमित मंजरी क दूध दबाने लगता है

मंजरी क दूध अभी छोटे थे टेनिस बोल क जैसे मगर थे बहुत ठोस जिन्हे दबाने में अमित को असीम आनंद मिल रहा था, मंजरी क लिए ये न्य एहसास था आजतक किसी ने उसके दूध को छुआ नहीं था

मंजरी इस अनोखे एहसास में डूबती जा रही थी मस्ती में उसकी ऑंखें बंद हो जाती हैं और उसकी सिसकीअन निकलने लगती है

‘ आआह्ह्ह्हह्ह. कक्कक्क्स. ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह उम्मम्मम्म माआआआ आआह्ह्ह्हह्ह कक्कक्कक्कक्स मममममममम कक्कक्कक्कक्स’

अमित मज़े से उसके दूध दबाये जा रहा था अब उसपे वासना हव्य होने लगती है और अपना एक हाथ मंजरी की गांड पर लेजाकर उसे मसलने लगता है, मंजरी इस दोहरे हमले को बर्दाश्त नहीं कर प् रही थी वो अपनी एडीएन उठा कर अमित से चिपकने लगती है और फिर से अमित क होंठ अपने होंठो में कैद कर लेती है

‘ उम्म्म ममममम ह्म्म्मम्म सीसीसी. सर्र्रउपपपपप सारूऊऊऊप्प्प्पप हम्म्म्म ुआमममम ‘

दोनों मस्ती में खोये हुए थे तभी उन्हें किसी की आहत सुनाई देती है कोई उनकी तरफ आ रहा था

मंजरी घबराकर जल्दी से वहां से निकल जाती है, अमित झाडिओं में छुप जाता है थोड़ी देर में गाओं की कुछ औरतें कपडे उठाये नदी किनारे धोने आती हुई दिखती हैं अमित फिर उनके दूर जाते hi वहां से निकल कर खेतों में चला जाता है जहाँ अजय मां उसे मिलते हैं

फिर कुछ खास नहीं होता और शाम होने से पहले दोनों घर आ जाते हैं

घर पर एते hi विजय अमित को आँगन में hi बैठा मिलता है जिसके चेहरे पे ख़ुशी थी

विजय: क्यों बरखुरदार कहाँ से आ रहे हो?

अमित : जी वो मां जी क पास खेतों में था

विजय: तो तुमने बताया नहीं क तुझे क्या चाहिए जन्मदिन क तोहफे में

अमित : बाबा अपने सब तो पहले hi दे रखा है

विजय: मगर फिर भी बहुत चीज़ों की कमी है जो मैं जनता हूँ तुझे चाहिए

इतना कहकर विजय चुप हो जाता है और अमित की नज़रों में देखने लगता है

अमित : नहीं बाबा मेरे लिए आपका प्यार hi सबकुछ है वैसे भी मैं तो अभी स्कूल में पड़ता हूँ भला मुझे किस चीज़ की ज़रूरत होगी

विजय: अरे बेटे हमारा प्यार तो हमेशा तेरे साथ है मगर आजकल क ज़माने क साथ चलना चाहिए इसी लिए मैं और तेरी माँ ने तेरे लिए एक तोहफा लिया है जो तुझे लेना पड़ेगा

अमित : ठीक है बाबा अगर आप दोनों ने मेरे लिए कुछ लिया है तो मैं इंकार कैसे कर सकता हूँ

विजय: शाबाश मेरे शेर चल आ तुही दिखाऊं

विजय और गौरी अमित को घर क बहार ले जाते हैं जहाँ पर एक ब्रांड नई बुलेट बाइक कड़ी थी ब्लैक कलर की अमित ने एते हुए देखा तो था मगर उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया था

विजय : ये है तेरा तोहफा हमारी तरफ से ये ले चाबी पकड़

अमित की आँखों में ख़ुशी से आंसू आ जाते हैं और वो विजय को कास क गले लगा लेता है

विजय: अरे बस कर अपनी पहलवानी मुझपर मत दिखा कहीं हड्डियन चटक गयी तो

इतना कहकर विजय हसने लगता है और अमित भी अपनी पकड़ ढीली कर क पीछे हैट ता है

अमित : बाबा आपने मेरे लिए इतना महंगा तोहफा लिया आप रहने देते मुझे अभी इसकी ज़रूरत नहीं थी आपके पास है तो सही कहीं आने जाने क लिए बाइक

विजय: अरे तोहफा महंगा सस्ता नहीं होता वैसे भी तुझ जैसे पहलवान क लिए एहि hi ठीक है अब चल मुझे चला क दिखा

अमित बाइक को स्टार्ट करता है और विजय उसके पीछे बैठ जाता है फिर दोनों गाओं का चक्कर लगा कर एते हैं

फिर अमित गौरी को बाइक पर बिठाकर चक्कर लगा कर अत है फिर अजय मां को बिठाकर चक्कर लगता है

कामिनी कमर दर्द का बहाना बनाकर कमरे में चली जाती है वो तो अंदर से जल गयी थी अमित को ऐसा तोहफा मिलने से कमलेश अभी आया नहीं था अब रह गयी थी दीपिका जो बहुत खुश थी

असल में दीपिका ने hi गौरी को मनाया था अमित को बाइक दिलवाने क लिए और जब बाइक सेलेक्ट करनी थी तो दीपिका क कहने पर hi विजय ने बुलेट बाइक ली थी

दीपिका: आज तो पार्टी बनती है मगर उससे पहले मुझे एक बड़ा सा चक्कर लेना है नई बाइक पर, चल जल्दी कर

अमित : जी ममी जी चलिए

दीपिका अमित क पीछे बैठ जाती है वो अंदर से बहुत खुश थी ये बाइक वाकई में अमित की पर्सनालिटी से मैच करती थी और बाइक पर अमित क पीछे बैठी वो खुद को उसकी बीवी hi समझ रही थी

दीपिका: चल गाओं से दूर लम्बा सा एक चक्कर लेकर एते हैं

अमित : घर पल सब इंतज़ार कर रहे हैं वो चिंता करेंगे

दीपिका: वो मैं देख लुंगी तू चल मुझे लम्बा चक्कर लेना है

गाओं से थोड़ा दूर एते hi दीपिका पीछे से अमित को कास क गले लगा लेती है जिससे उसके दूध अमित की पीठ पर चुभने लगते हैं

अमित : ये क्या कर रही हो आप कोई देख लेगा

दीपिका: तू दर मत अँधेरा हो रहा है कोई नहीं देखेगा मुझे बस ये पल तेरे साथ एन्जॉय करने हैं तू नहीं जनता मैं कितनी खुश हूँ

अमित : अगर किसी को पता चल गया तो?

दीपिका: तू चुपचाप बाइक चला

इतना कहकर दीपिका अमित की गर्दन पर किश करने लगती है और अपनी जीभ निकल कर उसकी गर्दन पर फिरने लगती है, अमित क अंदर वासना बढ़ने लगती है और उसके लैंड में तनाव आ जाता है

अमित को बाइक चलना मुश्किल लगने लगता है और वो बाइक साइड में रोक लेता है

बाइक रोक कर वो बाइक से निचे उतर जाता है

दीपिका सवाल भरी नज़रों से अमित को देखने लगती है

वास्तव में अमित ने आज मंजरी क साथ भी मस्ती की थी ऊपर से दीपिका ने भी उसकी वासना को भड़का दिया था मगर अमित को झिझक महसूस हो रही थी आखिर वो ममी क साथ कैसे पहल करे

मगर अब उससे ये बर्दाश्त नहीं हो रहा था

दीपिका समझती है शायद अमित बुरा मन गया है मगर वो अमित को खुद से दूर होने नहीं देना चाहती थी इसी लिए आगे बढ़कर वो अमित क होंठो पर अपने होंठ रख देती है

अमित तो पहले hi इसी तलाश में था वो भी टूट पड़ता है ममी क होंठो पर

‘ हम्म्म्म उम्म्माःह्ह्ह कक्कक्स ह्म्म्मम्म मममम ककक सारूउपपपप सार्र्र्रऊउउप ममममम उम्मम्मम ‘

दोनों का किश अब जंगली तरीके से होने लगा था वासना दोनों क सर चढ़ गयी थी अमित से दमदार चुदाई करके दीपिका अमित की कायल हो गयी थी एक दिन रेस्ट कर क उसकी छूट फिर से चुदाई चाहती थी और अब पानी पानी हो रही थी

अमित क हाथ अब दीपिका क दूध पर थे और कस कस क दोनों दूध को मसल रहा था दीपिका क मुँह से सिसकारियां निकलने लगती हैं

‘ cccccccccc आआअह्हह्ह्ह्हह मममममम आआआह्ह्ह्ह. कक्ककक्कक्स ऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह हम्मम्मम्मम्म कक्ककक्कक्स हॉँण्णन कक्कक्क्स’

अमित तो जैसे आज दूध को मसल क उखड hi देना चाहता था दीपिका क अंदर आग बढ़ती जा रही थी मगर ऐसे रस्ते पर ये सब करना खतरनाक था इसीलिए वो अमित को खुद से दूर करती है

अमित सवालिया निगाहों से ममी को देखता है

दीपिका: चल अब घर चल वो सब इंतज़ार कर रहे होंगे

अमित को भी दीपिका की बात समझ आ जाती है और वो चुपचाप बाइक स्टार्ट कर क वापिस चल पड़ता है

दोनों घर एते हैं तो गौरी पहले अमित को मिठाई खिलाकर उसका मुँह मीठा करवाती है

और फिर अमित सब को मिठाई खिलने लगता है जब लास्ट में दीपिका को खिलने लगता है तो

दीपिका: ऐसे hi नहीं चलेगा मुझे तो पार्टी चाहिए

अमित : बताइये क्या खाएंगी कैसी पार्टी चाहिए आपको

दीपिका: मुझे तो पार्टी चाहिए और खाउंगी मैं अपनी पसंद की चीज़

अमित : कब चाहिए पार्टी?

दीपिका: (धीरे से) आज रत को तैयार रहना मैं अपनी पार्टी लेलूँगी और अपनी पसंद की चीज़ भी खा लुंगी

इतना कह कर वो अमित को आँख मर देती है , अमित सकपका जाता है और जल्दी से गौरी क पास चला जाता है

अजय: भैया आप वो लाये जो मैंने बोलै था?

विजय: अरे हाँ वो तो भूल hi गया था, गौरी वो मेरा बैग तो लाना ज़रा

गौरी विजय को कमरे से बैग लेकर देती है, विजय बैग में से एक बॉक्स निकल कर अजय को देता है

विजय: ये लो जैसा तूने बोलै था चेक करले, मगर तेरे पास तो पहले से hi है न?

अजय: जी भैया मेरे पास तो है, ये वाला तो अमित क लिए है

अमित ये ले बीटा मेरी तरफ से तेरा जन्मदिन का तोहफा

इतना कहकर अजय वो बॉक्स अमित को देता है

अमित वो बॉक्स देखकर समझ जाता है क इसमें मोबाइल है

अमित : मां जी इसकी क्या ज़रूरत थी भला मुझे क्या ज़रूरत है इसकी

अजय: बीटा मुझे जो सही लगा मैंने दे दिया अब तू जान तेरा काम जाने

हाँ मगर पड़े पर असर नहीं होना चाहिए ये जान ले

गौरी: ये क्या अजय तुझे क्या ज़रूरत थी ये सब करने की?

अजय : क्यों भाभी? क्या अमित मेरा कुछ नहीं लगता?

गौरी: नहीं ऐसी बात नहीं है ये बाइक इसे मिल तो गयी है इसकी क्या ज़रूरत थी क्या हमने तुम्हे कभी खुद से अलग समझा है ये बाइक भी तो तेरी तरफ से hi है

अजय: नहीं भाभी मैं जो देना चाहता था मैंने दे दिया, गाओं में सब लड़को क पास मोबाइल हैं और हमारा बीटा इस क बिना रहे इतना पैसा जमीन जायदाद होते हुए भी क्या ये ाचा लगता है आखिर ये किसके लिए है

अब और कोई बात नहीं होगी, और अमित तू चुपचाप रखले वर्ण मैं तुझसे बात नहीं करूँगा

अमित अजय को गले लगा लेता है

अमित: शुक्रिया मां जी आप सब मुझे कितना प्यार करते हैं

थोड़ी देर बाद सब खाना खा कर अपने अपने कमरों में चले जाते हैं, कमलेश आज घर नहीं लौटा था

कामिनी अपने कमरे में अजय की क्लास ले रही थी

कामिनी: पद गयी कलेजे में ठंडक आपके? कर ली अपनी मर्जी? कुछ रह गया हो तो वो भी करलो

पता नहीं आपको क्या दीखता है उस मनहूस में

कितनी बार कहा है उससे दूर रहा करो मगर नहीं आपको तो सब कुछ लूटना है उसपर

अजय: तुम गुज़री बातों को भूल क्यों नहीं जाती , क्यों उसे कोसती रहती हो , आखिर हमारा सबकुछ उसी का तो है

कामिनी: भूल जॉन? कैसे भूल जॉन, मेरी ज़िन्दगी नरक बन गयी उसकी वजह से, मेरी कोख उजाड़ गयी सुहागन होते हुए भी विधवा हो गयी और आप कहते हैं भूल जॉन

सपोले को कितना भी दूध पिलाओ वो बदले में ज़हर hi देगा

अजय: जो भी हुआ वो सब हादसा था भगवन की मर्ज़ी थी इसमें उस बेचारे का क्या कसूर है

तुम बेवजह उसे कोसती हो अरे कभी अपनी नफरत को एक तरफ रखकर देख वो कितना मासूम कितना ाचा है कितना प्यार करता है सबको कभी किसी बात पर किसी को इंकार नहीं करता कितना संस्कारी है और तू उसे कोसती है

कामिनी: बंद करो उसकी तरफदारी, अगर मेरा बस चले तो एक पल में उसे धक्के दे कर निकल दूँ

मैं बता देती हूँ आपको अगर आप बाज नहीं आये तो देख लेना मैं खुदखुशी कर लुंगी फिर देखते रहना

अजय चुप हो जाता है और चुपचाप सो जाता है

वहीँ दीपिका अपने कमरे में सबके सोने का इंतज़ार कर रही थी उसे कमलेश का भी इंतज़ार था कहीं वो लेट घर लौट न ए

आज दीपिका की छूट मचल रही थी चुदाई क लिए अब उससे इंतज़ार नहीं हो रहा था

रत 12 दीपिका चुपके से अपने कमरे से निकलती है वो देख लेती है क सब सो चुके हैं और कमलेश भी अब आने वाला नहीं इस लिए दबे पाऊँ अमित क कमरे में पहुँच जाती है जहाँ अमित बीएड पर लेता नए मोबाइल को देख रहा था

दीपिका दरवाज़ा अंदर से बंद कर क अमित क पास आती है

दीपिका: क्या हो रहा है?

अमित: आइये ममी जी बैठिये, मैं बस मोबाइल चलकर देख रहा था

दीपिका: वो छोड़ मुझे मेरी पार्टी दो

अमित: कहिये क्या चाहिए

दीपिका अमित क सर को पकड़ कर उसके होंठो पर अपने होंठ रख देती है किश करने लगती है

‘ उम्म्म्म हम्म्म्म उम्मम्मम आआअह्म्म्म्म ुमाए सुर्र्ररऊऊप्प्प्प सेईररररऊऊप्प्प्प उम्म्म्म हम्म्म्म’

अमित भी जोश में आ गया था और वो भी ममी क होंठो को चूसने लगा था

दोनों में किश करते हुए जोश बढ़ता जा रहा था अमित बीएड पर लेट गया था और दीपिका उसके ऊपर लेट गयी थी अमित क दोनों हाथ दीपिका की गांड को बुरी तरह मसल रहे थे

किश करते हुए अमित ममी को पलटकर निचे कर लेता है और ज़ोर ज़ोर से उसके दूध मींझने लगता है,

दीपिका की कामुकता चरम पर पहुँचने लगती है और उसके मुँह से सिसकारियां निकलने लगती हैं

‘ कक्कक्क्स आआआहहहहहहह उम्मम्मम अअअअअ कक्ककक्कक्स मायआ कक्कक्कक्स ऐसे hi कक्कक्कक्कक्स ऑरररर जज़्ज़ुर्ररररर से दबावूओ ममममम. कक्कक्कक्स आआह्ह्हह्ह्ह्ह ोुह्ह्ह्हह्ह ममममममम ccccccccccc आआआअह्हह्ह्ह्ह’

दीपिका लेते लेते अमित क कपडे खोलने लगती है अमित भी उसकी मदद करता है और उसके ऊपर से उठकर अपना पायजामा उतरता है दीपिका भी जल्दी से उठकर साडी निकल देती है और पेटीकोट का नाडा खोल देती है

नाडा खुलते hi पेटीकोट पाऊँ में गिर जाता है

आज कमरे में पूरी लाइट जल रही थी दूधिए रौशनी में ममी की गौरी चिकनी झंगो को देखकर अमित पागल होने लगता है और जल्दी से आगे बढ़कर घुटनो पर बैठ जाता है और ममी की जाँघों को दोनों हाथों से मसलते हुए चाटने लगता है

चाट ते हुए दांतो से काटने लगता है जिससे दीपिका तड़प उठती है

‘ कक्कक्क्स आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह उउउउइइइइइइइइ खा जाओ खा जउओ मेरे राजा कक्कक्कक्स आआअह्ह्ह्हह उम्मम्मम खा जाओ सब कुछ तुम्हारा hi है कक्कक्कक्स आआआह्ह्ह्हह्ह ‘

अमित जोर शोर से ममी की झंगो को चाट और काट रहा था फिर वो ममी की पेंटी खींच कर उतर देता है

पेंटी उतारते hi दीपिका की गुलाबी छूट सामने आ जाती है जो बहुत प्यारी लग रही थी, छूट पर कामर्स की बूंदे बता रही थी क वो कितनी छुडासी हो रही थी

अमित छूट को हाथों से खोलकर देखने लगता है जो अंदर लाल गुलाबी थी

अमित को छूट का ये नज़र बहुत दिलकश लगता है और वो उसकी सुंदरता में खोया हुआ आगे बढ़कर छूट क होंठो को चुम लेता है

अमित क होंठो को छूट पर महसूस करते hi दीपिका की बॉडी कांपने लगती है उससे ये वासना बर्दाश्त नहीं होती और उसके हाथ अमित क सर को छूट पर दबाने लगते हैं

‘कक्ककक्कक्स आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मम्माआआआ कक्कक्कक्स ये कककक कककयाआआ ककककाररररर रहहहहहीइ होओओओओओओ कक्कक्कक्स मममममअअअअअअअ rreeeeeeeeee आआआहहहहहहह

खा जाऊओऊ कक्कक्कक्स हहहहहाआनंनं ऐसे hi कक्ककक्कक्स म्मम्माआआआ मैं गयीईइ मैं गईइइइइइ आआआअह्ह्ह्हह’

दीपिका का जिस्म झटके लेने लगता है और उसका पानी निकल जाता है

अमित अभी इस खेल में न्य था उसे पता नहीं था ममी उसके सर को छूट पर दबा देती है तभी छूट से पानी बहने लगता है जो अमित क होंठो से होता हुआ उसके मुँह में चला जाता है

अमित को पानी का सवाद अजीब सा लगता है मगर फिर उसे ाचा लगने लगता है और वो छूट चाट कर साफ कर देता है

दीपिका का जसम निढाल हो गया था उसके जीवन में छूट चटाई का ये पहला अवसर था आज तक कमलेश ने कभी उसकी छूट को अचे से छुआ तक नहीं था और अमित ने तो डायरेक्ट उसकी छूट को चाट कर उसका पानी निकल दिया था

दीपिका निढाल होकर पीछे बीएड पर गिरकर अपनी सांसे ठीक करने लगती है

अमित अभी भी छूट चाट रहा था उसे इसमें बहुत मज़ा आ रहा था

अमित क छूट चाटने से 2 मिनट्स में hi दीपिका फिर से गरम होने लगती है

अमित क सर को खींच कर वो दूर हटती है और अमित को बीएड पर गिराकर उसके अंडरवियर को खिंच कर उतर देती है

अंडरवियर निकलते hi अमित का मुसल निकल कर मिसाइल की तरह छत की तरफ मुँह किये खड़ा था दीपिका जल्दी से उसे दोनों हाथो में थम लेती है और लैंड की कैप को चूम लेती है

अमित द्वारा छूट चटाई से दीपिका क अंदर की काम वासना भड़क गयी थी उसकी आँखे वासना से लाल थी, कमलेश ने कई बार दीपिका को अपना लैंड चुसाया था ज़बरदस्ती मगर उसके काळा भद्दे लैंड को देखकर दीपिका को घिन अति थी

मगर अमित क लैंड को देखकर उसे बहुत प्यार आ रहा था इसी लिए झुक कर वो लैंड को 2 इंच मुँह में लेकर चूमने चाटने लगती है

ऐसा करते hi अमित क जिस्म में मज़े की लहर दौड़ जाती है उसकी रिड की हड्डी तक इस मज़े से गंगना गयी थी , अमित खुद को हवा में उड़ता हुआ महसूस कर रहा था

लैंड चाट ते चाट ते दीपिका भी मज़े में अमित को तड़पते देखकर और ज़्यादा मस्ती से लैंड को चूस रही थी

दीपिका पहली बार लैंड को चाटने में इतना आनंद महसूस कर रही थी

‘ आअह्ह्ह कक्कक्स ऊऊह्ह्हह्ह माम्म्मीईई ये कक ककयाआ जादूओ कर रही होओओओ कक्कक्स आआह्ह्ह्हह ‘

दीपिका अमित को और तड़पने क लिए उसके लैंड क छेड़ में जीब घुसाने लगती है जिससे अमित का जिस्म लरज जाता है

अमित जल्दी से ममी क सर क बाल पकड़ कर उसको ऊपर खींचता है और पलट कर उसे नीचे गिरा लेता है

अब अमित दीपिका की टांगो क बीच था, दीपिका क जिस्म पर सिर्फ ब्लाउज hi बचा था जिसे अमित जोश में खींच कर फाड़ देता है और उसके दूध को जोर जोर से दबाने लगता है

दूध को दबाते हुए वो फिर से दीपिका क होंठो को चूसने लगता है और दीपिका भी उसका बराबर जवाब देती है

5 मिनट दूध दबाने क बाद अमित जल्दी से लैंड को छूट क निशाने पर रखकर धक्का मर देता है जिससे लैंड आधा अंदर घुस जाता है जिससे दीपिका क मुँह से चीख निकल जाती है

वास्तव में अभी दीपिका की छूट एक hi बार अमित क मुसल से चूड़ी थी इस लिए अभी वो लैंड क हिसाब से खुली नहीं थी

‘ आआआह्ह्ह्हह्ह ममअअअअअअअ आआआहहहहहहह माअररर्र दद्दाआलललआआआ कक्ककक्कक्स आआह्ह्ह्हह्ह ढीरी ककककरोओओओ आआअह्ह्ह्हह’

अमित को दीपिका की चीख सुनकर और ज्यादा जोश अत है और वो लैंड को थोड़ा बहार खींच कर एक और दमदार झटका मार देता है

‘. Aaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh. म्मम्माआआआआ बहार निकालो आआअह्हह्ह्ह्हह माअररररर गयीईईईई. माआआ रिइइइइइइइइ आआआह्ह्ह्हह्ह’

दीपिका की आँखों में आंसू आ जाते हैं

अमित का लैंड जड़ तक छूट में फसा हुआ था उसे ऐसे लग रहा था जैसे किसी शिकंजे में लैंड को जकड दिया हो किसी ने

दीपिका से भी अमित क झटके बर्दाश्त नहीं हो रहे थे उसकी छूट ककड़ी की तरह चीयर क रख दी थी अमित क मुसल ने

‘ आअह्ह्ह्ह कोई ऐसे करता है क्या आआह्ह्ह्हह ककक माआ मर hi डालोगे क्या माआ ‘

अमित को भी अब एहसास हुआ क उसने जोश में कुछ ज्यादा hi ज़ोर लगा दिए, फिर वो दीपिका क दूध दबाने लगता है और उसके होंठो को चूसने लगता है

5 मिनट्स बाद दीपिका को कुछ आराम मिलता है अब वो भी अपनी कमर को हिलती है तो अमित धीरे धीरे लैंड हिलने लगता है

दीपिका: अब करो और धक्के लगाओ

अमित ममी का सिग्नल मिलते hi धक्के देने लगता है और दीपिका मस्ती में सिसकारने लगती है

‘ हम्म्म्म अअअअअ. कक्कक्कक्स ऊऊह्ह्ह्हह्ह उम्मम्मम आआअह्ह्ह्हह और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ आआह्ह्ह्हह

ऑरररर तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ कारोओओओओ’

अमित अपनी स्पीड और तेज़ कर देता है

थप थप थप थप थप

आअह्ह्ह्ह कक्कक्कक्स ममममम आआआ और तेज़ज़्ज़ज़ मेरे राजा ममममम ाऑर्डरर ज़ोर से करो आआह्ह्ह्हह छोड़ड़ड़ड़ दो मुझेईई आआह्ह्हह्ह्ह्ह कक्ककक्कक्स ऐसे hi ऐसे hi करो माआ रीई फ़ायद डालो मेरी छूट को बना दो मुझे अपनी दासी आआआहहहहह कक्कक्स ोुह्ह्ह्ह

ऐसी आवाज़ों से कमरा गूँज रहा था 5 मिनट्स की दमदार चुदाई में hi दीपिका की छूट ने पानी छोड़ दिया था मगर अमित अभी भी पूरे जोश में लगा हुआ था

2 मिनट में hi दीपिका फिर से गरम हो जाती है और अमित को पलट देती है अब अमित लेता हुआ था और दीपिका घुटनो पर अमित क लैंड की सवारी कर रही थी

अमित ने चुदाई का ये दूसरा न्य तरीका देखा था जो उसे बहुत मज़ेदार लग रहा था

दीपिका क उछलने से उसके दूध गुबारों की तरह उछाल रहे थे जिसे अमित हाथों में थाम कर मसलने लगा था

‘ ऊऊह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्हह ममममम कक्कक्कक्स आआह्ह्ह्हह तुम मुझे पहले क्यों नहीं मिले आआअह्ह्ह्हह मेरे राजा ऐसे hi मुझे रोज़ छोड़ना ऐसे hi हाँ आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स मममममम ोुह्ह्ह्हह्ह

मैं आज से तेरी गुलाम हूँ मुझे अब खुद से दूर मत करना आअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स मुझे अपने बच्चों की मा बनादो आअह्ह्ह्हह मममममम कक्कक्स ओह्ह्ह्हह

बोलो छोड़ोगे न मुझे ऐसे hi रोज़ आआह्ह्ह्ह कक्कक्स बोलो

अमित : हाँ ममी जी मैं आपको रोज़ hi छोडूंगा जब आप कहेंगी कक्कक्स हम्म्म्म तब छोडूंगा

दीपिका: मुझे अपने बच्चों की माँ बनाओगे न बोलो बनाओगे न आआह्ह्ह्हह्ह कक्कक्स मममममम

अमित: हाँ मैं आपको माँ बनाऊंगा अपने बचो की माँ बनाऊंगा हम्म्म्म आआह्ह्ह्ह

दीपिका: तुम ऐसे hi मेरी चुदाई करते रहना तुम जब कहोगीीी मममममम आआअह्ह्ह्हह मैं तुम्हारे आगे नंगी हो कर छुडवाउंगी जहाँ बोलोगे आअह्ह्ह वहां छुडवाउंगी कक्कक्स ह्म्म्मम्म आआआअह्हह्ह्ह्ह

अमित: ममी जीई मेरा होने वाला है आअह्ह्ह्ह ककक

अमित जल्दी से दीपिका को पलट देता है और दीपिका की टैंगो को उसके पेट पर दबा कर ज़ोरदार धक्के मरने लगता है

‘आअह्ह्ह्ह मैं आआ रहा हूँ ममी आआअह्ह्ह’

दीपिका ‘ मैं भी आ रही हुन्न्न कक्ककक्कक्स आअह्ह्ह्ह और तेज़ज़्ज़ज़ हम्म्म्म मेरे अंदर hi छोड़ दो अपना अनमोल पानी आअह्ह्ह्हह ककक

और अमित झटके लेता हुआ अपना पानी दीपिका की बच्चेदानी में छोड़ देता है

अपनी छूट में अमित क लैंड से निकले वीर्य को महसूस करते hi दीपिका फिर से डिस्चार्ज हो जाती है

दोनों का जिस्म पसीने में भीग गया था दमदार चुदाई क बाद दोनों एक दूसरे को ऐसे hi गले लगाए साँसे ठीक करने लगते हैं

थोड़ी देर बाद दीपिका अमित को साइड में लुढ़का देती है और खुद बाथरूम चली जाती है आधे घंटे बाद खुद को फ्रेश कर क जब वो वापिस अति है तो देखती है क अमित सो गया है तब वो अपने कपडे पहनकर चुपके से कमरे में चली जाती है और जा कर नींद की हसीं वादिओं में चली जाती है
 
अपडेट 13

दोनों का जिस्म पसीने में भीग गया था दमदार चुदाई क बाद दोनों एक दूसरे को ऐसे hi गले लगाए साँसे ठीक करने लगते हैं

थोड़ी देर बाद दीपिका अमित को साइड में लुढ़का देती है और खुद बाथरूम चली जाती है आधे घंटे बाद खुद को फ्रेश कर क जब वो वापिस अति है तो देखती है क अमित सो गया है तब वो अपने कपडे पहनकर चुपके से कमरे में चली जाती है और जा कर नींद की हसीं वादिओं में चली जाती है

अब आगे-

सुबह अमित अपने टाइम से उठकर अखाड़े जाता है और अपने उस्ताद डरा को बताता है क उसे तोहफे में मोबाइल और बाइक मिली है, डरा उसके लिए खुश होता है और साथ में ये हिदायत भी देता है क अपना ध्यान कसरत में hi रखना कहीं इन चीज़ों में अपना वक़्त बर्बाद मत करना

फिर डरा अखाड़े में सब पहलवानी कर रहे लड़को को बताता है की इस बार बैसाखी पर कुश्ती क मुकाबले पास क गाओं में हो रहे हैं जहाँ राज्य क मंत्री और बड़े लोग आएंगे जितने वाले को बड़ा इनाम दिया जायेगा इसके इलावा ये मुकाबला दोनों गाओं की आपसी स्पर्धा क लिहाज़ से भी इम्पोर्टेन्ट है

डरा अमित से मुक़ाबले में हिस्सा लेने क बारे में पूछता है मगर अमित साफ साफ बता देता है की उसे कुश्ती मुक़ाबले में हिस्सा लेने की परमिशन घर से नहीं मिलेगी क्यूंकि माँ ने पहले hi इसके लिए मना कर रखा है

अमित घर आकर त्यार हो कर स्कूल चला जाता है

स्कूल में अमित मंजरी को बाइक और मोबाइल क बारे में बताता है जिसे सुनके मंजरी खुश हो जाती है

अमित मंजरी से कहता है क किसी दिन मैं तुम्हे बाइक पर घुमाऊंगा , मंजरी खुश हो जाती है

स्कूल क बाद अमित राजू क पास जा कर उसे भी अपनी ख़ुशी बताता है जिसे सुनके राजू भी बहुत खुश होता है

राजू: तेरी तो निकल पड़ी यार मोबाइल भी मिल गया अब बता पार्टी कब देगा

अमित : जब तू बोले

राजू: चल ठीक है इस बार भी शहर चलते हैं

अमित : मगर इस बार रेनू और मंजरी को मत बुलाना

राजू : क्यों बे, अब वो तेरी होने वाली भाभी है उसके बिना मैं कैसे पार्टी कर सकता हूँ और वैसे भी मंजरी भी तो खुश होगी न तेरे साथ क्या तेरा दिल नई करता उसके साथ वक़्त बिताने का?

अमित : वो बात नहीं है यार, वो लड़कियां है उनकी इज़्ज़त पर दाग नहीं लग्न चाहिए सोच अगर किसी को पता चल गया तो

राजू : हम पिछली बार की तरह अलग अलग जायेंगे किसी को पता नहीं चलेगा

थोड़ी बहस क बाद अमित मन जाता है और फिर उसे अपनी बाइक पर थोड़ा घूमता है और खेतो में चला जाता है

वहीँ दूसरी और आज कमलेश जब सुबह घर आया था तो गौरी उसे अपने पास बुलाती है बात करने क लिए

गौरी: कमलेश तू कब से रत रत भर बहार रहने लग गया है ये कौन सी संगती बना ली है तूने?

कमलेश: अरे भाभी वो मेरा एक दोस्त कितने सैलून क बाद बहार देश से आया है पास hi क गाओं में रहता है बस उसी क साथ आजकल वक़्त बिता रहे हैं हम दोस्त मिलकर कुछ दिनों में वो लौट जायेगा

गौरी: ाचा और तू ये शराब पीकर कब से घर आने लगा है क्या तुझे घर क बड़ो का लिहाज़ नहीं रहा

कमलेश: वो भाभी वो बस दोस्तों ने ज़बरदस्ती पीला दी थी ( ज़रूर दीपिका ने शिकायत की है आज बताता हूँ उसे)

गौरी: ाचा तुमसे एक ज़रूरी बात करनी है, मैं दीपिका को लेकर बड़ी डाक्टरनी क पास गयी थी उसने जांचने क बाद कहा है क वो माँ बन सकती है बस कुछ वक़्त तक दवाई कहानी पड़ेगी इस लिए तू अब उसका ध्यान रखा कर और उसको दवाई दिलवा दे ताकि इस घर में नन्हे मुन्ने बच्चों की किलकारी गूंजे और तू भी बाप बन सके

एक पल को तो कमलेश खुश हो जाता है मगर फिर सोचता है क शायद ये दीपिका की कोई चल है

कमलेश: हाँ मैं देख लूंगा आप चिंता मत करो, ये भी कर क देख लेते हैं

इसके बाद कुछ और बातें करने क बाद कमलेश खाना खा कर फिर निकल जाता है

गौरी दीपिका को कहती है क वो अपनी दवाई डॉ से ले आये

दीपिका क मन में विचार अत है क्यों न अमित क साथ शहर जाये और घूम कर ए कुछ वक़्त दोनों साथ बिताये

दीपिका: दीदी अगर आप आज्ञा दे तो मैं अमित को साथ ले जाती हूँ कल, इनका (कमलेश) तो भरोसा नहीं कितने दिन ऐसे hi निकल दे और अब मुझसे और इंतज़ार नहीं होता प्लीज आप आज्ञा दे दीजिये हम बाइक से जायेंगे और जल्दी आ जायेंगे

गौरी: ठीक है चली जाना मगर बाइक से क्यों जाना इतना लम्बा सफर है बस से जाओ कहीं कुछ हो गया तो

दीपिका: आप भी न दीदी, अमित बहुत अछि बाइक चलता है और वैसे भी बस में जाने से सारा दिन निकल जाता है सफर में बाइक से जायेंगे तो जल्दी आ जायेंगे

गौरी दीपिका की बातों में आ कर हाँ कर देती है और दीपिका खुश हो कर उसे गले लगा लेती है

शाम को सब मिलकर खाना कहते हैं आज कमलेश घर पर hi था सुबह भाभी ने जो कहा था

खाना खाने क बाद सब अपने अपने कमरों में चले जाते हैं

कमलेश: तुमने भाभी से मेरी शिकायत की थी

दीपिका: जी नहीं तो, वो दीदी ने कल रत आपको एते वक़्त देखा था सुबह मुझसे पूछ रही थी मैंने कुछ नहीं बताया

कमलेश: और ये डॉ का क्या ड्रामा है ये भी तेरी कोई चल है

दीपिका: जी नहीं वो तो दीदी मुझे लेकर गयी थी कुछ दिन पहले डॉ क पास तो उसने जाँच कर क बताया क मैं माँ बन सकती हूँ बस थोड़ी दवा कहानी पड़ेगी जो बहार से अति है जिससे कई औरतें माँ बन चुकी हैं इससे औरतों में जो कमी होती है वो दूर हो जाती है,

दवा ज़रा महंगी है इसी लिए मैं ला नहीं पायी इतने पैसे दीदी क पास भी नहीं थे

अब आप hi कुछ कीजिये मैं बस माँ बनना चाहती हूँ

कमलेश: कितने पैसे लगेंगे?

दीपिका: जी डॉ ने कहा था हफ्ते की दवा 4000 की आएगी

कमलेश: और कितनी देर खाने का बोलै है?

दीपिका: जी डॉ ने कहा है क काम से काम 3 महीने तो कहानी पड़ेगी

कमलेश: इतने पैसे लगेंगे, ये तो बहुत ज़्यादा है

दीपिका: क्या आप नहीं चाहते क मैं माँ बनु

कमलेश : लेकिन अगर दवा क बाद भी माँ नहीं बानी तो ?

दीपिका: जी डॉ ने कहा है क आज तक जिसने भी दवा खाई है वो माँ ज़रूर बानी है

और हम वहां कई औरतों से भी मिले थे जिन्होंने वहां से दवा खाई थी और वो माँ बानी

कमलेश: ठीक है ठीक है मगर यद् रखना अगर ऐसा न हुआ तो फिर मुझसे बुरा कोई नहीं होगा

फिर कमलेश दीपिका को 10000 रूपए दे देता है दवा क लिए और दोनों सो जाते हैं

दीपिका अंदर से बहुत खुश थी की कमलेश उसकी बातों में आ गया है अब बस इसे आगे चुटिया कैसे बनाना है यही सोच रही थी

उधर अमित अपने बीएड पर लेता मीणा क बारे में सोच रहा था क उसकी हकीकत कैसे मां क सामने लाये फिर सोचते सोचते उसका ध्यान कल रत को ममी क साथ हुई दमदार चुदाई की तरफ चला जाता है और उसका बाबूराव सर उठाने लगता है

अब तो शेर क मुँह को खून लग गया था अब अमित का बाबूराव छूट की डिमांड कर रहा था

अमित मन hi मन खुद को समझाता है क नहीं ये सब गलत है वो बस छोटी ममी की हेल्प कर रहा है माँ बनने क लिए और जब वो चाहेंगी तभी ये सब होगा मगर उसका बाबूराव नहीं मन रहा था , फिर उसे यद् अत है क कैसे कल रत चुदाई क वक़्त ममी कह रही थी को जब चाहेगा जहाँ चाहेगा वो मुझसे चुदाई करवाएगी

यूँही लैंड को मसलता हुआ अमित सो जाता है

नेक्स्ट डे अपनी रूटीन क मुताबिक अमित अखाड़े से होकर अत है और जैसे hi अपने कमरे में त्यार होने जाता है दीपिका उसके कमरे में चली हटी है

दीपिका: जल्दी से अचे कपडे पहन ले आज तुझे मेरे साथ शहर चलना है स्कूल से आज छुट्टी कर

अमित : शहर? आज कुछ खास बात है?

दीपिका: पास आकर मुस्कुराती हुई) आज हम दोनों शहर घूमेंगे साथ में मगर घर पर कुछ नहीं बोलना मैं सब खुद संभल लुंगी

अमित समझ जाता है ममी आज उसके साथ मस्ती करना चाहती है, इस लिए वो भी नज़दीक हो कर एक हाथ ममी की कमर पर रखकर उसे अपने साथ लगा लेता है

अमित: लगता है आज सुबह सुबह आपकी नियत कुछ ख़राब है

दीपिका: नियत तो ठीक है मगर लगता है तुम्हारी नियत ठीक नहीं

अमित: आपको देखकर तो किसी की भी नियत बिगड़ जाये

इतना कहकर अमित अपने होंठ दीपिका क होंठो से चिपका देता है और एक हाथ उसके सर क पीछे रखकर एक हाथ कमर पर चलने लगता है

‘ उम्मम्मम हम्म्म्म सेरुऊप सारूउप उम्म्म्म ह्म्म्मम्म मुहाः ह्म्म्मम्म’

दोनों की किसिंग वाइल्ड होने लगती है

अमित तो कल रत से hi गरम था और दीपिका को भी अब अमित का hi मस्त लैंड हर वक़्त चाहिए था इस लिए वो भी गरम होने लगती है

5 मिनट्स यूँही किसिंग क बाद दीपिका अमित को खुद से दूर करती है और अपना हुलिया ठीक कर क बहार जाने से पहले अमित को जल्दी तैयार होकर निचे आने को बोलती है

आधे घंटे में नाश्ता कर क दोनों रेडी थे जाने क लिए दीपिका अमित को बाइक निकलने का बोलती है तो अमित खुश हो जाता है क आज वो पहली बार अपनी नई बाइक से शहर जायेगा

दोनों बुलेट पर बैठकर निकल पड़ते हैं गाओं से बहार निकलते hi दीपिका पीछे से अमित क साथ चिपक जाती है और अपने दूध अमित की पीठ पर चुभने लगती है

अमित भी मस्त होने लगता है

अमित : तो बताइये आज क्या इरादा है? कहाँ चलना है

दीपिका: आज सारा दिन बस तुम्हारे साथ बिताना चाहती हूँ, आज का दिन खास बनाना चाहती हूँ, आज मैं अपनी ज़िन्दगी खुल क जीना चाहती हूँ

अमित: बताइये मैं कैसे आपका ये दिन यादगार बना सकता हूँ मुझे क्या करना होगा

दीपिका: मेरे दिल में हमेशा से एक तमन्ना थी क मैं भी प्रेमिकाओं की तरह अपने प्रेमी क साथ घूमूं फिरूं मस्ती करूँ प्यार करूँ मूवी देखने जॉन शॉपिंग करूँ होटल में खून पार्क जॉन

अमित : अरे बस बस, इतनी लम्बी लिस्ट ये सब एक दिन में कैसे होगा?

चलिए कोई बात नहीं मैं आज आपका दिन हसीं बनाने की पूरी कोशिश करूँगा

दीपिका: क्या सच में तुम ऐसा करोगे?

अमित : आपके लिए इतना तो कर hi सकता हूँ

दीपिका: ये क्या आप आप लगा रखा है अगर तू वाकई मुझे ख़ुशी देना चाहता है तो आज तू सारा दिन मुझे मेरे नाम से पुकारेगा जैसे एक प्रेमी प्रेमिका को बुलाता है

अमित : मगर मैं कैसे आपको नाम से बुला सकता हूँ आप मेरी ममी हो

दीपिका: ममी घर पर हूँ सब क सामने अकेले में तो मैं तेरी दासी हूँ तेरे होने वाले बचो की माँ, अब मुझे कुछ नहीं सुन्ना तू बस मुझे मेरे नाम से बुलाएगा

अमित दीपिका को इंकार नहीं कर सकता था आखिर उसकी ख़ुशी का सवाल था

फिर दोनों शहर पहुँच जाते हैं पहले दीपिका अमित को मेडिकल शॉप पर लेकर चलती है और अमित को वहां से कुछ दवाइयां लेने को बोलती है

अमित: ये किस चीज़ की दवा है?

दीपिका: इसमें नींद की गोलियन हैं

अमित : वो किस लिए?

दीपिका: तेरे मां क लिए ताकि मैं आराम से तेरे पास आ सकूँ हर रत

दवाइयां लेने क बाद दोनों शॉपिंग करने जाते हैं जहाँ दीपिका अमित को जीन्स और टीशर्ट लेकर देती है

दीपिका: इन कपड़ो में तू बिलकुल हीरो लगेगा

अमित : आप भी अपने लिए कुछ लो वर्ण मुझे नहीं चाहिए ये सब

फिर अमित दीपिका को भी एक साडी दिलवाता hai,uske बाद दोनों रेस्टोरेंट में ाचा खाना कहते हैं फिर कुछ समय वो दोनों पार्क में जाते हैं जहाँ दोपहर को सिर्फ कुछ कॉलेज कपल्स hi थे जो तन्हाई में अपने प्यार का मज़ा ले रहे थे, उनको देखकर दीपिका का मन भी मचलने लगता है और वो अमित बाँहों में बहन डालकर एक प्रेमिका की तरह चलने लगती है

पार्क क अंदर घने पेड़ क नीचे दोनों को एक प्रेमी जोड़ा नज़र अत है जो एक दूसरे क होंठो को चूसने में लगा था और लड़का लड़की क दूध मसल रहा था, दीपिका की आँखों में लालजी आ जाती है और उसके जिस्म में वासना हावी होने लगती है और वो कसकर अमित का बाजु पकड़ लेती है

अमित समझ जाता है और वो दीपिका को एक पेड़ क पीछे ले जाता है और उसे किश करने लगता है दीपिका की वासना बढ़ती जा रही थी मगर ये जगह सही नहीं थी इस लिए दोनों अपने मन को समझकर बहार निकल जाते हैं

दीपिका: अब हमें चलना चाहिए काफी वक़्त हो गया है जल्दी घर चलो

फिर दोनों गाओं की तरफ निकल पड़ते हैं मगर पार्क में हुए वाक्यात से दोनों क अंदर वासना की आग भड़क चुकी थी इसका परिणाम ये होता है क पीछे बैठी दीपिका अपना एक हाथ नीचे लेजाकर अमित क लैंड पर रख देती है

हाथ लगते hi अमित का बाबूराव सर उठाकर चुदाई को ललकारने लगता है और दीपिका लगातार उसे मसले जा रही थी

दिन ढलने लगा था अमित भी कल रत से गरम था ऊपर से सुबह की किसिंग फिर पार्क का सन और अब दीपिका का लैंड को मसलना उससे बर्दाश्त नहीं होता और वो सुनसान जगह देखकर बुलेट सड़क से नीचे उतर देता है और पेड़ों क पीछे ले जाता है

दीपिका: क्या हुआ यहाँ किधर ले आया बाइक को

अमित कुछ नई बोलता बस बाइक साइड लगाकर दीपिका को खींचकर पेड़ क साथ लगा देता है और उसके होंठो को चूसने लगता है

‘ हम्म्म्म उम्मम्मम उम्म्म्म ाह्ममममम हम्म्म सारूउप सरररूउप्पप्प उम्म्म्म ‘

दीपिका भी गरम थी वो भी वीलडली जवाब देने लगती है

उम्म्म्म हम्म्म्म सारूउप हम्म्म्म उम्म्म्म

अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा दीपिका मेरे अंदर आग लगी है

दीपिका: उम्म्म्म कक्कक्स सारूउप हम्म्म ुम्माआ मेरा भी यही हल है मगर अभी पहले घर तो चलो

अमित : घर जाने तक तो मैं इस आग में जल जाऊंगा

इतना कहकर अमित दीपिका क दूध ज़ोर ज़ोर से मसलने लगता है और दीपिका क मुँह से सिसकीअन निकलने लगती हैं

दीपिका: कक्कक्स आआअह्हह्ह्ह्हह मममममम आआह्ह्ह्हह कक्कक्कक्स उउउउइइइइइइइ आआह्ह्ह्ह

अमित जनता था ये जगह ये वक़्त सही नहीं था मगर अब उससे ये गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी वो जल्दी से दीपिका को घूमता है और दीपिका को झुका देता है

दीपिका न न करते हुए भी झुक जाती है और पेड़ को पकड़ लेती है

अमित जल्दी से उसकी सदी कमर तक उठता है और उसकी पेंटी घुटनो तक नीचे कर देता है और अगले hi पल अपने लैंड को दीपिका की छूट क मुँह पर सेट कर क उसकी कमर को पकड़ कर एक ज़ोरदार धक्का मरता है

इस ज़ोरदार धक्के क साथ पूरा लैंड एक hi बार में अंदर घुस जाता है और सीधा दीपिका की बच्चेदानी में लगता है

दीपिका इस धक्के को सेह नहीं पति और दर्द की वजह से एक तेज़ चीख उसके मुँह से निकल जाती है

दीपिका: आआअह्हह्ह्ह्हह माआआ मार दालायआ आआह्ह्हह्ह्ह्ह मरररररर ग्ग्ग्ग्य्ययययययययय मममममअअअअअअ आआआह्ह्ह्हह्ह

अमित को जैसे इस बात की कोई परवाह नहीं थी उसके सर पर तो सेक्स का भूत सवार था और वो तेजी से धक्के मरने शुरू कर देता है

दीपिका: ाः ाः ाः ाः ाः आआहाह आह मममममम कक्ककक्कक्स आआह्ह्ह्हह कक्कक्क्स आआह्ह्ह्ह ुउउइइइइइइ ाः आआह

अमित तेज़ धक्के मरते जा रहा था 5 मिनट्स में hi दीपिका की छूट में पानी आने लगता है और उसे भी अब चुदाई का मज़ा आने लगता है

एक तरफ उसे दर था क कहीं कोई आ न जाये दूसरी तरफ ऐसे खुले में चुदाई करने से उसे मज़ा भी बहुत आ रहा था जिसकी वजह से जल्दी उसकी छूट डिस्चार्ज हो जाती है और उसकी टाँगे कांपने लगती है मगर अमित तो लगातार धक्के मरता जा रहा था उसे बस अपना पानी निकलना था

अमित ऐसे hi 20 मिनट्स की धुआंदार चुदाई कर क अपना पानी निकल देता है और दीपिका जल्दी से अपनी हालत ठीक कर लेती है

दोनों घर की तरफ चल पड़ते हैं, घर आकर दीपिका जल्दी से अपने कमरे में घुस जाती है कहीं किसी को शक न हो जाये और फिर ऐसे hi रत हो जाती है , रत का खाना खाकर सब अपने कमरों में चले जाते हैं दीपिका कमलेश को दवाइयां दिखाकर कहती है क वो दवा ले आयी है और डॉ ने एक गोली आपको भी खाने को कहा है

कमलेश चुपचाप गोली खा लेता है जो क असल में नींद की गोली थी कुछ देर दीपिका रसोई में बर्तन धोने का बोलकर चली जाती है और जब वो वापिस अति है तो देखती है क कमलाह बेसुध सोया पड़ा था

कमलेश को अछि तरह चेक करने क बाद दीपिका अमित क कमरे में चली जाती है

दीपिका: क्यों जनाब आज बहुत गर्मी चढ़ रही थी बहार आपको अब देखती हूँ तुम्हे

अमित : मुस्कुराकर) वो गर्मी भी तो अपने hi लगाई थी

दीपिका: तो चलो आओ फिर तुम्हारी पूरी गर्मी निकलती हूँ

इसके बाद दोनों फिर से शुरू हो जाते हैं और डेढ़ घंटे तक चुदाई चलती है दोनों में चुदाई ख़तम होने क बाद जब दीपिका जाने लगती है तो अमित उसे रोक लेता है

अमित : ममी जी रुकिए मुझे आपसे बात करनी है

दीपिका: क्या बात है?

अमित : वो असल में मुझे कमलेश मां क बारे में बात करनी है

दीपिका: छोडो उसे वो जो करते हैं करने दो मुझे अब उनसे कोई मतलब नहीं मुझे सिर्फ अब तुमसे hi मतलब है

अमित : ममी जी ये सीरियस मेटर है अगर हमने कुछ नहीं किया तो मां जी सब कुछ लुटा देंगे

दीपिका: क्या मतलब

अमित फिर मीणा क बारे में सब बताता है और जो उसने मीणा क मुँह से सुना था वो भी बताता है

दीपिका: इसका मतलब वो हरामज़ादी अपनी छूट दिखाकर सब कुछ ऐंठना चाहती है और तेरा मां चुटिया बनकर सब लुटा रहा है

अमित: हाँ ममी जी ज़रा सोचिये अगर मां ने सब ऐसे लुटा दिया तो आपके बच्चों को क्या मिलेगा और ये घर भी तबाह हो जायेगा

दीपिका: नहीं अमित ये सब तेरा है तू hi इस साडी जायदाद का वारिस है मेरे बचे भी तो तेरे होंगे मुझे कुछ नहीं चाहिए ये सब तेरे लिए है और मैं तेरी अमानत किसी को बर्बाद नहीं करने दूंगी, उस हरामज़ादी को पहले ठीक करना होगा और तेरे मां को तो एक झटके में लाइन पर ले आउंगी

तूने अपने कानो से सब कुछ सुना था न?

अमित : जी ममी

दीपिका: वो आदमी उसका कोई रिश्तेदार है जिसका बचा मीणा क पेट में है

अमित : जी ममी

दीपिका: अब सबसे ज़रूरी है क इस बात का ठोस सबूत इकठा करना और इसके लिए उनके मुँह से निकलवाना होगा

कुछ देर सोचकर

दीपिका: एक रास्ता तो है मगर है थोड़ा मुश्किल

अमित : आप बताइये मैं करूँगा

दीपिका: देख तूने देखा है न मीणा को अपने उस भाई से चुदाई करते हुए

अमित : मैंने बताया तो है अभी आपको

दीपिका: तू एक काम कर तेरे पास अब तो न्य मोबाइल है इसमें तो रिकॉर्ड कर सकता है सब कुछ

जब अगली बार वो अपने भाई से चुदाई कर रही हो तू उसकी रिकॉर्डिंग कर लेना

और अपने मां पर भी नज़र रखना ये भी जब मीणा क साथ चुदाई कर रहे हों तो रिकॉर्ड कर लेना

अमित : मीणा का तो समझ आया मगर मां की क्यों

दीपिका: वो इस लिए क अगर कहीं तेरा मां कोई होश्यारी करे तो उसे डरने क लिए हमारे पास साबुत होना चाहिए

अमित : ठीक है ममी जी मगर रिकॉर्डिंग करने क बाद क्या करना है

दीपिका: वो बाद में देखेंगे पहले तू ये काम कर और जल्दी करना क्या पता वो छिनाल तब तक कोई और काण्ड न कर दे

फिर दीपिका अमित को किश कर क अपने कमरे में चली जाती है और अमित भी सो जाता है

अगली सुबह अमित स्कूल जाने से पहले राजू से मिलता है और उसे अपना मोबाइल देकर कहता है क वो छोटे मां पर नज़र रखे अगर वो कहीं मीणा क साथ कुछ करें तो रिकॉर्ड कर लेना

राजू से मिलकर अमित स्कूल चला जाता है
 
अपडेट 14

अगली सुबह अमित स्कूल जाने से पहले राजू से मिलता है और उसे अपना मोबाइल देकर कहता है क वो छोटे मां पर नज़र रखे अगर वो कहीं मीणा क साथ कुछ करें तो रिकॉर्ड कर लेना

राजू से मिलकर अमित स्कूल चला जाता है

अब आगे-

स्कूल में कुछ खास नहीं हुआ अमित घर वापिस अत है और खाना खाकर राजू क पास जाता है जो घर पर hi था, राजू अमित को बताता है क मां आज गाओं में नहीं है कहीं बहार गया है और मीणा अपने घर पर hi है और उसने अपने दोस्त को नज़र रखने को बोल दिए है

अमित फिर राजू क साथ थोड़ी देर बातें कर क अपना मोबाइल वापिस लेकर घर आ जाता है

घर आने पर दीपिका उससे पूछती है क काम बना तो वो कह देता है क नहीं उसके बाद अमित खेतों में चला जाता है

खेतों में भी आज कुछ खास नहीं था तो फिर शाम को अमित अजय क साथ वापिस आ जाता है कमलेश भी घर लौट अत है और फिर रत को सब अपना अपना कमरे में सोने चले जाते हैं

अमित ममी का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था अब उसे भी चुदाई का चस्का लग गया था जब काफी देर तक दीपिका नहीं अति तो वो उसके कमरे में जाने का सोचता है मगर फिर खुद को रोक लेता है और करवट बदलता बदलता सो जाता है

सुबह उठकर अखाड़े से होकर अमित जब घर वापिस अत है तो दीपिका भी उसके पीछे पीछे कमरे में आ जाती है

दीपिका: आ गए कसरत कर क

अमित दीपिका को एक नज़र देखता है फिर अपना काम करने लगता है मगर कोई जवाब नहीं देता

दीपिका: लगता है मुझसे नाराज़ हो

अमित फिर जवाब नहीं देता असल में वो रत को दीपिका क न आने से नाराज़ था रत उसे चुदाई की तालाब थी मगर दीपिका नहीं आयी और न hi उसे बताना ज़रूरी समझा उसने

दीपिका: मैं क्या करती तेरे मां रत को सो hi नहीं रहे थे ऊपर से मैं भी ज्यादा थक गयी थी कल कपडे धोने की वजह से पता hi चला कब आँख लग गयी

अमित तो जैसे सुन hi नहीं रहा था वो अपने कपडे उतर कर नहाने क लिए जैसे hi बाथरूम की तरफ जाने लगता है तो दीपिका भागकर पीछे से उससे लिपट जाती है

दीपिका: ऐसे मुझसे नाराज़ होकर मेरी जान मत निकालो मेरे राजा तुम नहीं जानते मैं तुम्हे कितना चाहती हूँ, तुम्हारी ये चुप्पी मेरी जान ले लेगी, तुम क्या जानो मैं कितना तड़पती हूँ तुम्हारी बाँहों में आने क लिए प्लीज मन जाओ न

अमित भी ज्यादा देर नाराज़ नहीं रह पता क्यूंकि उसका दिल था hi ऐसा जल्दी hi पिघल जाता था

अमित दीपिका की बाँहों का घेरा खोलकर पलट जाता है और दीपिका क होंठो पर अपने होंठ रख देता है, दीपिका भी जवाब में अमित क होंठो को चूसने लगती है

‘ उम्म्म हम्म्म्म मुआअह्ह्ह्ह ाहहममम उम्म्म्म सरररररुपपपप साररूउपपपपप उम्मम्मम आअह्ह्ह्ह उम्मम्मम’

दोनों का किश वाइल्ड होने लगता है और अमित एक हाथ से ममी क दूध मसलने लगता है और दूसरे हाथ से उसकी गांड को दबाने लगता है

दीपिका: कक्कक्कक्स आआह्ह्ह्हह्ह ऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह मममममम कक्कक्क्स ह्म्म्मम्म उम्मम्मम्म कक्कक्कक्स

अमित किश करता हुआ दीपिका को धकेलकर दिवार क साथ लगा लेता है और दीपिका की साडी को ऊपर उठाने लगता है, दीपिका की साडी जाँघों तक उठ जाती है और अमित दीपिका की एक टांग को घुटने से पकड़ कर ऊपर उठाने लगता है दीपिका भी मस्ती में आंखे बंद किये अमित को फुल सपोर्ट कर रही थी

अमित दीपिका की जांघ पर हाथ चलने लगता है और धीरे दीपिका क चूतड़ों तक ले जाता है और उसकी पेंटी में हाथ डालकर चूतड़ों की लाइन में हाथ घूमने लगता है

दीपिका की छूट रत से hi प्यासी थी और ऐसे वाइल्ड एक्शन से वो और भी छुडासी हो गयी थी

तभी घर क बहार वाले गेट की आवाज़ अति है दीपिका एक डैम से अमित को पीछे हटा देती है और साडी निचे कर लेती है

दीपिका: लगता है बहार कोई आया है तुम नहा धोकर तैयार हो जाओ और नाश्ता कर लो आकर फिर तुम्हे स्कूल भी जाना है

अमित : मुझे कुछ नहीं पता मुझे अभी आपको प्यार करना है मैं और कोई बात नहीं सुनूंगा

दीपिका अमित को समझने की कोशिश करती है मगर वो नहीं मंटा और अपने कमरे क दरवाज़े क पास hi ममी को झुका देता है और उसकी साडी कमर तक उठाकर जल्दी से उसकी पेंटी घुटनो तक उतर देता है और जल्दी से अपना लैंड अंडरवियर में से निकलकर ममी की छूट पर टिका कर एक ज़बरदस्त झटका मरता है दीपिका ने एक हाथ मुँह पर रखा था अपनी चीख दबाने क लगे मगर उतावलेपन में अमित ने बहुत ज़ोर से धक्का मर दिया था जिसकी वजह से दीपिका आगे को गिरने लगती है और उसका सर दरवाज़े में जा लगता है

दीपिका: आआह्ह्हह्ह्ह्ह माआ माअररररर ग्ग्ग्ग्य्ययययययययय आआआहहहहहहह उउउउउइइइइइइइइइ मम्मायररररर डड्डालललुगगगगी ककककययय्यआआअ आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

अमित का पूरा लैंड एक hi बार में जड़ तक छूट में जा कर फस्स गया था दीपिका की छूट एक hi वॉर से जैसे फट गयी थी

अमित : अपने कहा था जब कहूंगा कहाँ कहूंगा आप छुड़वा लेंगी तो फिर ऐसे नखरे क्यों कर रही हैं अगर दोबारा कभी इंकार किया तो मैं कभी आपकी चुदाई नहीं करूँगा

दीपिका: ऐसा मत कहो मेरे राजा कक्कक्स. आआअह्ह्ह्हह अब तो मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती ोुह्ह्ह्हह्ह ुउउइइइइ कक्कक्स मुझसे गलती हो गयी मगर क्या करूँ घर में बाकि लोग भी तो कक्कक्स आअह्ह्ह्ह कक्कक्स बाकि लोग भी तो हैं कहीं किसी को पता चल गया तो हमारा क्या होगा

कक्कक्स

अमित : बाकि सबका ख्याल है मेरे इस लैंड का ख्याल नहीं है

दीपिका: ऐसा मत कहो मैं तो इस लैंड की गुलाम हूँ कक्कक्क्स प्लीज उम्म्म्म माफ करदु

अमित तेजी से धक्के मरने लगता है

दीपिका: आठ आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह हम्म्म आअह्ह्ह कक्कक्स आआह्ह्ह्ह

ऐसे hi मारो मेरे राजा ऐसे hi कक्कक्स

कमरे में दीपिका की सिसकारिआं गूंजने लगती है, अमित दोनों हाथो से ममी की कमर को थाम कर तूफानी धक्के मरने लगता है

दीपिका अमित क धक्कों को झेल नहीं पति और जल्दी डिस्चार्ज होने लगती है उसकी टाँगे कम्पनी लगती हैं मगर अमित बिना किसी बात की परवाह क जानवरों की तरह दीपिका को चोदे जा रहा था 5 मिनट्स में दीपिका फिर गरम हो जाती है और फिर कुछ देर में फारिग हो जाती है अमित भी चरम पर था

आखरी धक्के अमित इतनी ज़ोर से मरता है क दीपिका की चूलें तक हिल जाती हैं

अमित आखरी धक्का मर कर लैंड को बच्चेदानी में घुसकर अपना पानी छोड़ देता है , दीपिका को ऐसे लगता है जैसे छूट क रस्ते अमित खुद hi उसकी छूट में घुस जायेगा

डिस्चार्ज होते hi अमित लैंड छूट से निकलकर पीछे हैट जाता है और दीपिका धड़ाम से निचे गिर हटी है और अपनी सांसे ठीक करने लगती है

अमित बाथरूम में घुसकर नहाने लगता है अमित क आने तक दीपिका कमरे से जा चुकी थी

अमित नाश्ता करने जब रसोई में अत है तो दीपिका भी आ जाती है रसोई में दीपिका क बल गीले थे

गौरी: अरे दीपिका ये क्या फिर से नहा कर आयी है?

दीपिका: वो वो क्या है न दीदी मेरे ऊपर वो गन्दा पानी गिर गया था तो बदबू आने लगी थी कपड़ो से इसलिए मैंने कपडे भी बदल लिए और नहा भी लिया

इतना कहते हुए दीपिका अमित की तरफ देखती है दोनों की नज़रें मिलती हैं दीपिका की नज़रो में शिकायत थी मगर अमित उसे देखकर मुस्कुराने लगता है

दीपिका रोटी देते वक़्त जब अमित क पास से गुज़रती है तो अमित एक हाथ से उसकी गांड मसल देता है और वो चिहुंक उठती है

अमित जल्दी से नाश्ता कर क स्कूल चला जाता है और रस्ते में फिर राजू को कल की तरह अपना मोबाइल देकर हटा है

स्कूल में रोज़ की तरह लंच में मंजरी से मिलता है मंजरी आज अमित क लिए घर से हलवा बना कर लायी थी ऐसे hi स्कूल से घर आ जाता है कोई खास बात नहीं होती दोपहर का खाना खा कर अमित राजू क घर जाता है मगर वो घर नहीं था अमित फिर खेतो में चला जाता है

शाम को सब घर आ जाते हैं खाना खा क सब अपने कमरों में जाने लगते हैं क बहार का गेट को खत खटता है

अमित जा कर गेट खोलता है तो सामने राजू था

अमित उसे इस वक़्त देख कर हैरान हो जाता है

राजू कोई बात नहीं करता और जल्दी से अमित को मोबाइल देकर कहता है जल्दी इसे देख लेना और फिर फटाफट राजू वापिस निकल जाता है

अमित गेट बंद कर क अपने कमरे में जाता है उसे राजू क ऐसे बर्ताव से चिंता हो रही थी इस लिए वो जल्दी अपने कमरे का दरवाज़ा बंद करता है और मोबाइल खोलकर देखने लगता है

मोबाइल में वीडियो देखते देखते जब वो आवाज़ बड़ा कर बातें सुनता है तो उसके पाऊँ क नीचे से ज़मीं निकल जाती है

अमित : ये छोटे मां का दिमाग ख़राब हो गया है अब तो जल्दी कुछ करना होगा वर्ण सब कुछ बिगड़ जायेगा, तुझे तो अब ऐसी सजा दूंगा क तुझे अफ़सोस होगा खुद पर मीणा

रत 12 बजे दीपिका कमलेश को नींद की दवा देकर सुला कर अमित क पास अति है और दरवाज़ा बंद कर क जब अमित क पास अति है तो देखती है क अमित किसी बात से परेशां है

दीपिका: क्या हुआ अमित किस बात से परेशां हो? मुझे बताओ क्या हुआ

अमित कुछ नहीं बोलता और वीडियो प्ले कर क ममी को पकड़ा देता है

वीडियो देखते हुए दीपिका का चेहरा भी गुस्से से लाल हो जाता है

दीपिका: तो ये कुछ हो रहा है और तेरा चुटिया मां सब कुछ लुटाने को तैयार बैठा है

वीडियो आज सुबह की थी जो राजू ने जंगल वाले झोंपड़े में कमलेश और मीणा क चुदाई करते समय रिकॉर्ड की थी जिसमे मीणा और कमलेश जो बातें कर रहे थे वो ज्यादा चिंता वाली थी अमित और दीपिका क लिए

मीणा: आप अपने बेटे क लिए कुछ करेंगे या नहीं 3 महीने में आपका बीटा इस दुनिआ में आ जायेगा, आप क्या चाहते हैं आपका बीटा उस झोंपड़े में पीला

बाप इतना बड़ा ज़मीदार और बीटा भिखारी क्या यही चाहते हैं आप

कमलेश: तू चिंता क्यों करती है मेरी रानी मैं मेरे बचे को ऐसे थोड़ा रहने दूंगा मैंने सब सेटिंग कर ली है मैं कल गया था शहर तुझे तेरे पति से तलाक दिलवाडुंगा और नदी क पास वाले जो अपने बाग़ और ज़मीं है मेरे हिस्से की वो मैं तेरे नाम करवाडुंगा और एक घर तेरे लिए बनवा दूंगा, जैसे hi हमारा बीटा इस दुनिआ में आएगा मैं भी अपनी बीवी को छोड़कर तेरे hi साथ रहने लगूंगा

मीणा: मगर कब होगा मैंने आपको बताया न क अब ज्यादा समय नहीं है

कमलेश: अरे तू चिंता क्यों करती है अगले हफ्ते का बोलै है वकील ने सब काम हो जायेगा

ऐसे hi बातों क साथ दोनों चुदाई करने लगते हैं

दीपिका: अमित हमें जल्दी कुछ करना होगा तूने मीणा की उसके भाई क साथ चुदाई रिकॉर्ड की या नहीं?

अमित : मैंने बोलै हुआ है ममी जी वो जब आएगा हम रिकॉर्ड कर लेंगे ये तो भला हो राजू का जो आज ये सब रिकॉर्ड कर क लाया है

दीपिका: राजू जनता है सब? अगर उसने किसी को बता दिए तो

अमित : चिंता मत करो ममी जी वो मेरा जिगरी यार है वो कभी ऐसा नहीं करेगा

दोनों टेंशन में बैठे और नए आइडियाज सोच रहे थे दोनों का hi मूड अब ठीक नहीं था इस लिए दीपिका बिना चुदाई क hi लौट जाती है और अमित भी सोचता सोचता सो जाता है अगला दिन भी यूँही गुज़र जाता है मगर कुछ खास नहीं होता शाम को राजू अमित को खबर देता है क मीणा का भाई आज दोपहर को आ गया है इस लिए हमें आज रत hi जाना होगा, अमित राजू को पैसे देता है और कहता है क अपने उस दोस्त की सेवा कर देना और राजू रत को मिलने का बोलकर निकल जाता है
 
फ्रेंड्स थोड़ा बिजी हूँ आज अपडेट नहीं दे पाउँगा
 
अपडेट 15

दोनों टेंशन में बैठे और नए आइडियाज सोच रहे थे दोनों का hi मूड अब ठीक नहीं था इस लिए दीपिका बिना चुदाई क hi लौट जाती है और अमित भी सोचता सोचता सो जाता है अगला दिन भी यूँही गुज़र जाता है मगर कुछ खास नहीं होता शाम को राजू अमित को खबर देता है क मीणा का भाई आज दोपहर को आ गया है इस लिए हमें आज रत hi जाना होगा, अमित राजू को पैसे देता है और कहता है क अपने उस दोस्त की सेवा कर देना और राजू रत को मिलने का बोलकर निकल जाता है

अब आगे-

रत को खाना खाने क बाद सब अपने अपने कमरों में चले जाते हैं और अमित छोटी ममी को बता कर चुपके से निकल जाता है राजू क घर की तरफ

राजू: तुमने सोचा है क आगे क्या करना है?

अमित : पहले तो हमें उन दोनों की बातों और हो सके तो चुदाई को रिकॉर्ड करना है उसके बाद आगे का सोचेंगे

राजू: अगर आज कोई ऐसी बात न हुई तो फिर क्या करेंगे

अमित : मेरा दिल कहता है क वो सेल चुदाई ज़रूर करेंगे , मीणा का भाई उसे छोड़ने hi तो अत है अब ज्यादा बात नहीं चल जल्दी

दोनों दोस्त निकल पड़ते हैं मीणा क घर की तरफ जहाँ राजू का दोस्त उनका इंतज़ार कर रहा था

अमित उन दोनों को साथ लेजाकर मीणा क घर क पास छुपकर अंदर देखने लगता है अभी दोनों क बीच कोई खास बात नहीं हो रही थी इस लिए अमित राजू और उसके दोस्त क साथ अँधेरे में छुपकर बैठ जाता है तीनो चुप चाप बैठे थे

आधे घंटे क बाद मीणा बच्चों को सुलाकर अपने उस भाई क पास आ जाती है

आदमी: आ मेरी रानी कब से इंतज़ार कर रहा हूँ तेरी मस्त छूट का

मीणा: मेरी छूट भी तो कब से पानी बहा रही है तेरे लैंड क लिए

अमित जैसे hi अंदर दोनों की बातें सुनता है वो जल्दी से अपना मोबाइल निकल कर वीडियो बनाने लगता है

आदमी: अब जल्दी से अपना खूबसूरत जिस्म दिखा मुझे

मीणा: अपने हाथो से करदे मुझे नंगी तेरे हाथो से नंगा होना ाचा लगता है

आदमी: कितने साल हो गए तुझे छोड़ते हुए मगर आज भी ऐसे hi लगता है क जैसे पहली बार छोड़ रहा हूँ कितनी मस्ती से चुदवाती है तू एक मेरी लुगाई है साली मज़ा hi नहीं देती और एक तू है क दिल करता है बस तुझे रगड़ता hi रहूं

मीणा: मुझे भी तो तेरे साथ hi मज़ा अत है, तेरे इलावा किसी में डैम नहीं वैसे भी मेरी छूट को तो तेरा hi लैंड पसंद है

आदमी: तेरे पास तो लैंड की कमी नहीं, तेरा मरद भी है और वो तेरा मालिक भी तो है

मीणा: उन दोनों क लाँडो में डैम नहीं है, मेरा मरद तो थक कर सो जाता है और वो कमलेश बाबू खुद को बड़ा तीस मारखां समझता है साला मेरा पानी तो निकल नहीं माता हर बार उंगली करनी पड़ती है

आदमी: ये बता तूने मुझे इतनी जल्दी क्यों बुला लिया

बातों क साथ साथ दोनों नंगे हो गए थे और एक दूसरे को गरम करने लगे थे

मीणा: वो कमलेश चुटिया अगले हफ्ते नदी क पास वाले जो उसके हिस्से क खेत हैं वो मेरे नाम लिखवाने वाला है तू जल्दी से खरीद दर ढून्ढ क रख फिर हम वो खेत बेचकर जल्दी से यहाँ से भाग जायेंगे

आदमी: क्या सछह!!! तुमने ये बात बताकर खुश कर दिया मेरी रानी तू सच में एक no. की रंडी है

ये सब हुआ कैसे

मीणा: कैसे क्या वही, भादवा तो बचे क लिए मारा जा रहा है उसे यही लग रहा है क ये उसका बचा है हीहीहीहीही

आदमी: अगर कहीं उसे पता लग गया तो फिर क्या होगा सोचा है?

मीणा: आज तक मेरे मरद को पता चला क्या क ये बचे उसके नहीं तेरे हैं? तो उस भड़वे को कहाँ से पता चलेगा की ये बचा किसका है

ये तो औरत hi बता सकती है क उसके पेट में बचा किसका है और ये बचा सिर्फ तेरा है मेरे राजा

इतना बोलकर मीणा लैंड चूसने लगती है

आदमी: आअह्ह्ह्ह साआली क्या लैंड चुस्ती है हम्म्म्म

मीणा: आह्ह्हम्म्म्म हम्म्म्म उम्म्म्म सारूउप सरआप उम्म्म्म आआह्ह्ह्ह कक्कक्स उम्म्म्म

आदमी: मैं कल hi पता करता हूँ खरीददार का नदी क पास की ज़मीन तो अचे भाव में बिकेगी ममममम आआह्ह्ह्ह

इसके बाद वो आदमी मीणा को लेता कर उसकी टाँगे उठाकर अपने कंधे पर रख लेता है और एक ज़ोरदार धक्का मरता है

मीणा: आअह्ह्ह्ह मररररर गयी कक्कक्क्स आअह्ह्ह्हह मार डालेगा क्या आआह्ह्ह्हह

आदमी: चुप कर साली इतने साल हो गए अभी तक तेरी आदत नहीं गयी चीखने की

मीणा: आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स तू ऐसे ज़ोरदार धक्के मरेगा अपने लैंड से कक्कक्कक्स आआह्ह्ह्ह चीख तो निकलेगी hi ममममायआ कक्कक्क्स

आदमी: ज़मीन बेचकर आगे क्या इरादा है कहाँ जायेंगे

मीणा: ककक ममममम पैसा लेकर बच्चों को साथ लेकर रातो रत हम दोनों कहीं दूर देस निकल जायेंगे

मा ज़ोररररर सीए काअरररओओओओओ

आदमी: ले और ज़ोर से ले आह्हः

तेरे मरद का क्या? मालिक तो उसकी जान लेलेगा

मीणा: उम्म्म्म आआह्ह्ह्ह मरने दे ाचा है कोई पीछे नहीं आएगा आअह्ह्ह कक्कक्स

दोनों अंदर चुदाई में मस्त थे अमित मीणा की बातें सुनकर गुस्से में लाल हो रहा था

आदमी: अगर कमलेश हमारे पीछे आ गया तो ?

मीणा: उसे पता लगने से पहले हम निकल जायेंगे कक्कक्क्स आआह्ह्ह्हह ज़ुर्रररर सीए

जब उसे पता चलेगा शर्म से डूब मरेगा भादवा नामर्द बाप न बन पाने क गम में hi पागल हो जायेगा और उसकी जोरू किसी और क साथ भाग जाएगी

अमित छोटी ममी क बारे में सुनते hi गुस्से में अपना आप खो बैठता है और मोबाइल को जेब में डालकर झोंपड़े में घुस जाता है

मीणा और वो आदमी अमित को अचानक देखकर हैरान हो जाते हैं

आदमी: तू कौन है भोसड़ी क निकल बहार

अमित : मैं तेरा बाप हूँ कुत्ते

मीणा अमित को देखकर दर गयी थी उसने खेतों में कई बार अमित को देखा था, मीणा का रंग उड़ जाता है

आदमी: क्या कहा हरामज़ादे

इतना कहकर वो आदमी अमित को मरने को दौड़ता है

अमित तो पहले hi पहलवानी क सरे दांव पेच जनता था वो उस आदमी का उठा हुआ बाजू पकड़ कर घुमा देता है और तेज़ी से घूमकर उसे धोबी पटका दे देता है

अचानक हुए इस्वर से वो आदमी चित हो जाता है इतनी देर में राजू और उसका दोस्त भी अंदर आ गए थे

अमित उस आदमी को कोई मौका दिए बगैर फिर से उठाकर पटक देता है अमित को गुस्से में देखकर राजू उसे रोकता है और शांत करने की कोशिश करता है

राजू अपने दोस्त क साथ मिलकर उस आदमी को कपड़ो क साथ hi बाँध देता है

अब तीनो क सामने सिर्फ मीणा थी वो भी नंगी , अमित की नथुने गुस्से से फूल रही थी और आँखों में खून उतर आया था

गुस्से से मीणा को देखते हुए

अमित : हरामज़ादी जिस थाली में खाया उसी में छेड़ किया, तू मां को बेवक़ूफ़ बनाकर लूटेगी और कोई कुछ नहीं कर पायेगा मैं तेरे टुकड़े टुकड़े कर दूंगा

अमित को गुस्से में देखकर मीणा की तो गांड hi फट गयी थी

अमित आगे बढ़कर मीणा की गर्दन दबोच लेता है

मीणा की सांस फूलने लगती है और आँखें बहार आने लगती हैं

राजू अमित को जल्दी से रोकता है और उसे पीछे हटाता है

राजू: पागल हो गया है क्या अगर इसे मर देगा तो हम सब फास जायेंगे ऊपर से तेरा मां भी तेरा दुश्मन बन जायेगा

अमित खुद को शांत करने की कोशिश करता है, खुद को शांत करने क बाद अमित अपने प्लान पर फोकस करता है आखिर अब उनके पास साबुत तो था hi अब वो मीणा की सचाई को सामने ला सकता था मगर मीणा ने छोटी ममी को बीच में लेकर अमित को गुस्सा दिला दिया था वास्तव में अमित जब से छोटी ममी को छोड़ने लगा था तब से उसके दिल में ममी क लिए प्यार जयादा hi बाद गया था

अमित : इस हरामज़ादी को तो ऐसी सजा दूंगा क इसके खंडन में भी कोई ऐसा काम करने से डरेगी

मीणा को तो अमित यमराज नज़र आने लगा था वो जल्दी से अमित क पाऊँ पकड़ कर गिड़गिड़ाने लगती है

मीणा: मुझे माफ़ कार्डो छोटे मालिक मुझसे बड़ी गलती हो गयी लालच की वजह से मैं अंधी हो गयी थी

अमित : लालच की वजह से या तेरे भोसड़े की वजह से अब तो तुझे नंगी गाओं में घुमाऊंगा और कुत्तों से छुडवाउंगा

मीणा: रेहम मालिक रेहम कीजिये मैं आपके पाऊँ पड़ती हूँ मुझे माफ़ कर दीजिये मैं कल hi यहाँ से दूर चली जाउंगी फिर कभी अपनी शकल भी नहीं दिखाउंगी

अमित : अब तो तुझे सजा मिलके रहेगी बहुत लूट लिया तूने मां को सबका हिसाब देना होगा

मीणा: मैं सब लौटा दूँगी मालिक मुझे बक्श दो मुझे माफ़ कर दो

अमित : चल निकल जो कुछ लूटा है मां से

मीणा जल्दी से झोंपड़े क कौन में hi कपड़ो क संदूक क निचे ज़मीन में गाड़ क रखे हुए सोने क हर को निकल कर दे देती है

अमित : वो सरे पैसे कहाँ हैं जो तूने लिए हैं मां से

मीणा: साहब वो पैसे तो खरच हो गए मैंने इसके हाथो घर को भिजवाए कुछ इसे दे दिए

अमित : अब उसका हिसाब तो तुझे देना hi पड़ेगा

अमित क दिमाग में एक आईडिया अत है क छोटे मां की नज़र में मीणा को इक रंडी साबित कैसे किया जा सकता है ताकि वो नफरत करने लगे

अमित : राजू चल अपने कपडे उतर और इस छिनाल को रंडी की तरह छोड़ अभी क अभी

राजू अमित की बात पर हैरान हो जाता है और मीणा का मुँह खुला रह जाता है

राजू : अबे क्या बोल रहा है

अमित : तूने सुना नहीं क्या चल जल्दी इसे छोड़ और कोई रेहम नहीं करना इसपर इसकी चीखे मुझे सुन्नी चाहिए

मीणा फिर से माफ़ी मांगने लगती है

अमित : चुप कर रंडी ज्यादा ड्रामा नहीं, तेरे भोसड़े में बहुत आग है न चल दिखा आज और अगर कोई ड्रामा किया तो छुड़ेगी तू फिर भी मगर फिर तुझे गाओं क कुत्ते छोड़ेंगे सब क सामने

मीणा की गांड फट गयी मरता क्या न करता वो चुप चाप तैयार हो जाती है

राजू अभी भी त्यार नहीं था मगर उसका वो दोस्त मीणा को नंगी देखकर लैंड हिला रहा था वो राजू को कुछ न करता देख कर अमित से कहता है क वो भी करना चाहता है मीणा क साथ, अमित उसे इजाज़त दे देता है

राजू का दोस्त मीणा को घोड़ी बनाकर पीछे से लैंड घुसा देता है और धक्के मरने लगता है

मीणा भी चुदाई करवाते हुए धीरे धीरे मस्त होने लगती है और उसके मुँह से सिसकारियां निकलने लगती हैं

राजू दोनों की चुदाई देखकर गरम हो जाता है और लैंड निकलकर मीणा क मुँह क आगे खड़ा हो जाता है और उसके मुँह में लैंड घुसा देता है

अब राजू का दोस्त मीणा की पीछे से छूट मर रहा था और राजू मीणा का मुँह छोड़ रहा था

अमित जल्दी से मोबाइल निकलता है और वीडियो बनाने लगतह है

मीणा चुदाई से मस्त होने लगती है पहली बार वो एक साथ दो लाँडो से चुद रही थी

5 मिनट्स में hi राजू का दोस्त पानी निकल देता है फिर राजू उसकी जगह मीणा को छोड़ने लगता है

मीणा कक्कक्स. आआअह्ह्ह्ह ममममम ऊऊह्ह्हह्ह आआह्ह्ह्ह

आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह कर क चुदाई का मज़ा ले रही थी अमित उसे मज़ा लेता देखकर सोचता है

अमित : छिनाल साली ये सजा तो इसका मज़ा बन गयी इसका कुछ करना पड़ेगा

5 मिनट्स में राजू भी पानी निकल देता है और पीछे हैट जाता है

अमित तो मीणा की चींखे सुन्ना चाहता था मगर वो तो सिसकारियां ले रही थी

अमित अपना लैंड बहार निकल कर मीणा क बाल खींचकर उसका मुँह अपने लैंड क पास लता है

अमित : चल रंडी चूस मेरा लैंड कुटिया

मीणा अमित का लैंड देखकर हैरान थी इतना बड़ा लैंड उसने कभी नहीं देखा था वो जल्दी से लैंड को मुँह में ले लेती है

अमित मीणा क मुँह में धक्के मरने लगता है जिससे उसका लैंड मीणा की हलक में जाकर लगता है

मीणा: ुखुन ुखुन्ण आअह्ह्ह्हह उन्हहहह ुखुन्ण ुखुन्ण

मीणा की सांस टूटने लगती है और आँखों से पानी आने लगता है मगर अमित रुकता नहीं वो लैंड कभी बहार निकलता है कभी हलक में दाल देता है

5 मिनट्स तक मुँह को छोड़ने क बाद अमित मीणा क पीछे अत है और उसकी छूट पर लैंड लगता है

मीणा की छूट राजू और उसके दोस्त क पानी से लिथड़ी हुई थी अमित को उसकी छूट देखकर मन नहीं होता उसे छोड़ने का वैसे भी थी तो वो रंडी औरत उसे क्या फरक पड़ेगा जितने मर्ज़ी लैंड दाल दो

अमित अपने लैंड को छूट में डालने की बजाये मीणा की गांड पर लगा कर धक्का मर देता है

मीणा ने आजतक गांड नहीं मरवाई थी और अमित का लैंड था भी मुसल

गांड पर लैंड लगते hi वो दर जाती है और अमित को छूट मरने का कहने लगती है मगर अमित उसकी एक भी बात नहीं सुनता और लैंड को गांड क सुराख़ में ज़बरदस्ती घुसा देता है पहले झटके में लैंड 2 इंच अंदर घुस जाता है गांड सुखी थी और टाइट थी अमित क मोठे लैंड से एक डैम चिर जाती है

मीणा: ाआईईईईई मममममअअअअअअअअ मररररररर गयीईईईई निकककाललल्लूऊऊ बआहहहारररररर aaaaaaaaaa म्मम्माआआआ

अमित उसकी चीख सुनकर खुश हो जाता है और बिना रुके एक और ज़बरदस्त धक्का मर देता है

मीणा: मम्माआर्डर डायललललाहा हरररराममममममीएइ

Aaaaaaaaaa. Uuuuuuiiiiiiiiii ममममममअअअअअअ

दो झटको में 5 इंच लैंड गांड में घुस चूका था अमित को भी ऐसा लग रहा था क उसका लैंड जैसे छील गया है मगर वो रुका नहीं और लैंड को थोड़ा पीछे खींच कर सांस भर क एक और ज़ोरदार धक्का मर डाला , इस धक्के क साथ hi लैंड पूरा गांड क अंदर घुस जाता है और मीणा बेसुध होकर आगे गिर जाती है अमित उसके ऊपर hi गिर जाता है पर लैंड निकलने नहीं देता

मीणा दर्द से बेहोश हो गयी थी राजू उसका दोस्त और मीणा का भाई तीनो अमित और मीणा को hi देख रहे थे

अमित राजू को पानी लेन को कहता है

राजू जल्दी से पास में पड़े घड़े से पानी निकलकर अमित को देता है

अमित मीणा क मुँह पर पानी डालता है और मीणा को थोड़ा होश अत है

मीणा: आआअह्हह्ह्ह्ह ममममायआ कक्कक्कक्स अअअअअअअ ाआईईईईई मुझे छोड़ दो आआआहहहहह मैं मर जाउंगी आयआईईईई

अमित लैंड को बहार खींचता है तो उसके लैंड क साथ मीणा की गांड से खून भी निकलने लगता है और मीणा कक्कक्क्स कक्कक्स एआइइइइ करने लगती है

लैंड आधा बहार निकलने क बाद अमित फिर से पूरा अंदर दाल देता है

मीणा फिर से चीखती है मगर अमित नहीं रुकता बल्कि धीरे धीरे धक्के मरने लगता है

मीणा चीखती हुई आंसू बहती छोड़ने लगती है

अमित भी अपनी स्पीड बड़ा देता है वो मीणा पर कोई रेहम नहीं करना चाहता था

धीरे धीरे अमित तूफानी धक्के मरने लगता है

मीणा: एआईईईई अअअअअअअ आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्हह ुउउइइइइइइइ मममममअअअअअ ाआईईई माररररर गईइइइइइ आयआईईई

अमित लगातार धक्के मरता जा रहा था उसका लैंड और मीणा की गांड खून से साणे थे

20 मिनट्स तक गांड का भुर्ता बनाने क बाद अमित अपना पानी गांड में hi निकल देता है

पानी निकलने क बाद मीणा क कपड़ो से लैंड को साफ़ करता है

अमित : अगर ज़िन्दगी प्यारी है तो मेरे मां से दूर hi रहना वर्ण खाल खिंच लूँगा

अमित जाते जाते मीणा क भाई की पसलियों में खींच कर एक लात मर देता है , उसकी तो जान hi जैसे निकल जाती है अमित राजू और उसका दोस्त तीनो चले जाते हैं

अमित राजू को घर छोड़कर अपने घर लौट अत है और चुप चाप कमरे में घुस जाता है जहाँ उसकी छोटी ममी उसका इंतज़ार कर रही थी

दीपिका: क्या हुआ कोई काम बना?

अमित मीणा की धुआंदार चुदाई से थक गया था वो ज्यादा बात नहीं करता और अपने मोबाइल में वीडियो प्ले कर क ममी को देदेता है और खुद लेट जाता है

दीपिका वीडियो देखती और बातें सुनती गुस्से में अति है

दीपिका: तो ये सब सोच कर बैठे थे ये दोनों, अब देखती हूँ इसे

गाओं से न निकलवा दिया तो देखना अब इस सबूत को तेरे मां को दिखाना होगा ताकि उसकी आँखें खुल जाएँ

अमित : मगर कैसे ममी जी क्या कहेंगे कैसे ये वीडियो मिली किसने बनायीं

दीपिका : हाँ ये बात तो है मैं तो दिखा नहीं सकती ऐसी वीडियो

एक काम कर तू hi ये वीडियो दिख अपने मां को और किसी को भी तो हम नहीं बता सकते

अमित : मैं कैसे दिखाऊं वो क्या सोचेंगे मेरे बारे में

दीपिका: अरे जब ये सब वो देखेंगे तो सब से पहले गुस्से से उनका दिमाग ख़राब होगा और तेरे बारे में वो सोच hi नहीं पाएंगे

अमित : हम्म्म

दीपिका: हरामज़ादी कितने आराम से लूटने की तैयारी कर क बैठी थी अब देखती हूँ मेरा बस चले तो जान से मर दू काश क अपने हाथो से सजा दे पति इस रंडी को मैं

अमित : चिंता मत करो ममी जी आपका ये काम मैंने कर दिया है

दीपिका: चौंकते हुए!! क्या मतलब क्या किया तूने?

अमित : अमित दूसरी वीडियो शुरू कर क दिखने लगता है जिसमे राजू और उसका दोस्त मीणा को छोड़ रहे थे

दीपिका वीडियो देखकर चौंक जाती है और अमित की तरफ देखती है

अमित : मैंने सोचा मां की नज़र में इसे पूरी तरह रंडी सबत कर दू ताकि उनके दिल में इसके लिए कोई भी जगह न बचे

दीपिका: ये तूने ाचा किया मगर ये दोनों लड़के कौन हैं इनका चेहरा क्यों नहीं आ रहा

अमित : वो दोनों मेरे अपने हैं इस लिए उनका चेहरा रिकॉर्ड hi नहीं किया मैंने ताकि उनकी बदनामी न हो

दीपिका: ये ाचा किया तूने

दीपिका चुदाई वीडियो देखकर गरम हो गयी थी इस लिए वो अमित से लिपटने लगती है मगर अमित क लैंड में दर्द हो रहा था

जैसे hi दीपिका अमित क लैंड को कपडे क ऊपर से पकड़ती है अमित क मुँह से दर्द भरी सिसकारी निकल पड़ती है

मीणा: घबरा कर!! क्या हुआ

अमित : कुछ नहीं वो मुझे ज़रा दर्द है

मीणा: दर्द कैसे हुआ क्या चोट लगी है तुझे दिखा मुझे

मीणा जल्दी से अमित का पायजामा निकल देती है और अंडरवियर भी

मीणा: हे भगवन ये कैसे हुआ ये कैसे छील गया

अमित : वो कुछ नहीं ममी जाने दो

दीपिका: तुझे मेरी कसम बता क्या हुआ इसे चोट कैसे लगी

अमित : क्या ममी आप ज़रा स बात पर कसम दे देती हैं

दीपिका: तो बता सच सच क्या हुआ है

अमित : वो मैंने मीणा की गांड मरी ज़बरदस्ती इस लिए छील गया है

दीपिका: कियाआ!!! तुझे क्या पड़ी थी उसके साथ करने की तेरा दिमाग तो ठीक है वो तो रंडी है तूने उसके साथ क्यों किया अगर तुझे कोई बीमारी लग गयी तो कभी सोचा है तुमने

अमित : मेरा दिमाग ख़राब हो गया था जब उसने आपके बारे में उल्टा बोलै मैं बस उसे सजा देना चाहता था मेरा बस चलता तो उसे जान से मर देता ये तो राजू ने रोक लिया मुझे

दीपिका: नाम आँखों से!! इतना प्यार करता है मुझसे क मेरे बारे में कुछ उल्टा सुन भी नहीं सकता

अमित : आप नहीं जानती ममी आप मेरे लिए क्या हैं

इतना कहकर अमित दीपिका को गले लगा लेता है और दीपिका भी उसे अपनी बाँहों में कास लेती है

दीपिका: मैं भी तुझे बहुत प्यार करने लगी हूँ मेरा बस चले तो तुझे दुनिआ से कहीं दूर ले चलूँ जहाँ हम दोनों हो और कोई न हो

अमित ममी की बातें सुनकर और कास लेता है उसे अपनी बाँहों में

कुछ देर बाद दीपिका अमित को खुद से अलग करती है

दीपिका: ख़बरदार अगर फिर कभी इसे दोबारा ज़ख़्मी किया तो अब ये मेरी अमानत है

इतना कहकर दीपिका अमित क लैंड को पकड़ कर हिलती है और किश कर देती है फिर बाथरूम से तेल की बोतल लेकर अति है और लैंड की तेल से मालिश करने लगती है

दीपिका: अब जबतक ये ठीक नहीं होता बिलकुल कुछ नहीं करना इसके साथ कहीं फिर से ये छील न जाये

अमित : अब आपके इलावा मैं किसी और क साथ थोड़ा hi कुछ करता हूँ

दीपिका : तो फिर उस मीणा क साथ क्यों किया ?

अमित : वो तो आपको बताया न बस गुस्से में हो गया

दीपिका: ाचा उसके साथ तो गुस्से में हो गया मगर किसी क साथ प्यार से हो गया तो?

अमित सवालिया नज़रो से देखता है

दीपिका: मैं मंजरी की बात कर रही हूँ

अमित शर्मा जाता है

अमित : क्या ममी आप भी वो तो बस उसे एक दो बार किश hi किया है इससे ज्यादा नहीं

दीपिका: वक़्त का क्या पता कब लोहा गरम हो और चोट लग जाये

अमित फिर से शर्मा जाता है और कुछ नहीं बोलता

दीपिका: एक बात का ध्यान रखना वो एक कुवारी लड़की है जब भी उसके साथ करो तो बड़े प्यार और सबर से करना तेरा इतना बड़ा मुसल कोई भी कुवारी लड़की झेल नहीं पायेगी अगर तूने ज़बरदस्ती किया तो उसकी हालत ख़राब हो जाएगी

पता नहीं मीणा की गांड का क्या हाल किया होगा तूने

अमित : वो तो अब बिस्तर से नहीं उठेगी कुछ दिन

अमित दीपिका को मीणा से लिया हुआ हर दे देता है जो कमलेश ने दिया था मीणा को

हार देखकर दीपिका को बहुत ख़ुशी होती है और वो अमित क होंठो क चूसने लगती है

थोड़ी देर यूँही बातें करने क बाद दीपिका अमित को एक किश देती है और उसे सोने का कहकर अपने कमरे में चली जाती है

दीपिका और अमित दोनों को चैन की नींद अति है दोनों को इस बात की तसल्ली थी क अब कमलेश को रस्ते पर ले आएंगे
 
अपडेट 16

थोड़ी देर यूँही बातें करने क बाद दीपिका अमित को एक किश देती है और उसे सोने का कहकर अपने कमरे में चली जाती है

दीपिका और अमित दोनों को चैन की नींद अति है दोनों को इस बात की तसल्ली थी क अब कमलेश को रस्ते पर ले आएंगे


अब आगे-

सुबह अमित अपनी रूटीन से अखाड़े से हो कर घर अत है और नाश्ता कर क स्कूल चला जाता है आज उसके मन को बहुत सकूं था पिछले कुछ दिनों से जो मां और मीणा का चक्कर उसके सर का दर्द बना हुआ था अब उसका अंत करने का वक़्त आ गया था मगर एक टेंशन अभी भी उसके मन में थी क आखिर वीडियो मां को कैसे दिखाए और क्या बात करे और फिर मां का क्या रिएक्शन होगा मगर फिर भी कैसे भी ये काम तो करना hi होगा

स्कूल में कुछ खास नहीं होता लंच ब्रेक में मंजरी से थोड़ी देर बात होती है और फिर छुट्टी क बाद अमित घर लौट अत है

खाना खाने क बाद अमित ममी से कमलेश मां क बारे में पूछता है तो वो बताती है क मां खेतो का hi बोलकर गए हैं

अमित घर से खेतों को निकल जाता है खेत में आज कमलेश मां अजय मां क साथ बैठा हुआ था

अजय : आओ अमित बैठो आज तो कमलेश भी बैठा है आजा पुछले इससे जो पूछना है हिसाब कहते क बारे में

कमलेश: क्या पूछना है भैय्या सब लिखा तो रहता है?

क्यों अमित क्या पूछना था तुम्हे?

अमित : मां जी वो बस ऐसे hi मां जी ने कहा था क हिसाब खता देख लिया करूँ मैं तो जब मैं देख रहा था हिसाब तो रघु क नाम पर कुछ पैसे हैं जो लगभग एक साल से खड़े हैं और वो न पैसे दे रहा है न ब्याज कटवा रहा है जब उससे पूछा तो आपका नाम लेकर बोल रहा था क अपने बोलै पैसे अभी न देने का

अमित ने मौका देखकर जानबूझ कर रघु की बात छेड़ डी थी क्यूंकि रघु मीणा न का घरवाले था इसलिए कमलेश से मीणा तक बात करने क लिए उसे यही सही मौका लगा

कमलेश: वो वो वो उसकी बीवी बीमार रहती है बेचारी ऊपर से माँ बनने वाली है तो इस लिए बेचारे पर तरस खाकर मैंने hi कहा था अभी वो पैसे न दे

( ये साला बही खता भैय्या ने कब और क्यों अमित को दे दिया चेक करने को, कहीं इसे सब पता hi न चल जाये)

कमलेश क हकलाने और सोच में पद जाने की वजह से अमित समझ गया था क निशाना सही लगा है

अमित : मां जी वो तो बात सही है मगर मैं चाहता हूँ क हम रघु और मीणा का हिसाब कर क उन्हें यहाँ से चलता करे

ये बात कमलेश क सर पर बम क जैसे गिरी, वो किसी भी कीमत पर मीणा को कहीं जाने नहीं दे सकता था आखिर वो उसके बचे की माँ बनने वाली थी

कमलेश : गुस्से में) अब तू इतना बड़ा हो गया है क मुझे बताएगा क क्या करना है क्या नहीं अब तू फैसले करेगा क कौन यहाँ काम करेगा कौन नहीं

तुझे यही शिक्षा मिली है क एक लचर महिला को ऐसी हालत में हम घर से निकल दे

अमित : मां जी मैं तो आपका बचा हूँ मैं भला क्या सिखाऊंगा मैं तो खुद आपसे सीखता हूँ और रही बात उस औरत की तो मुझे कुछ लोगों ने बताया है क उस औरत का करैक्टर सही नहीं है इस लिए उसे निकल देने को कहा है नहीं तो कल को हमारी बदनामी हो सकती है

कमलेश गुस्से में अमित को थप्पड़ मर देता है भला वो कैसे बर्दाश्त करता क कोई मीणा पर उंगली उठाये उसकी नज़र में तो मीणा बड़ी hi पाक साफ़ थी जो अक्सर ये कहती थी क वो तो अपने पति को भी हाथ लगाने नहीं देती और सिर्फ कमलेश से hi चुदती है और उसी क बचे को जन्म देगी बिना किसी मिलावट क

कमलेश: बदजुबान तेरी हिम्मत कैसे हुई मीणा क बारे में ऐसी गन्दी बात करने की , यही है तेरे संस्कार यही सीखा है तूने पद लिख कर?

कसूर हमारा hi है जो तुझे अपने पास ले ए सड़ने दिया होता तुझे वहीँ तेरे रिश्तेदारों में

अमित की तो धड़कन मनो रुक गयी एक पल में hi उसके दिल क लाखों टुकड़े हो गए एक पल में hi कमलेश मां ने उसे पराया कर दिया एक गन्दी औरत क लिए और ऊपर से ताना मर दिया

सब से बड़ी बात जो उसको आज कमलेश क गुस्से की वजह से पता चली थी वो थी क अमित क और भी रिश्तेदार हैं जिनका आजतक किसी ने ज़िकर तक नहीं किया था वो यही सोचता था क उसके माता पिता क बस एहि रिश्तेदार हैं यानि क मां और मासियां मगर अब उसे अनजाने में पता चल गया था क उसकी और भी फॅमिली है

इन सब बातों क दौरान अमित की आँखों से लगातार आंसू बहते जा रहे थे उसके गाल पर जो थप्पड़ लगा था उसका उसे एहसास भी नहीं था बल्कि उसका तो दिल मां की बातों से छलनी हो गया था

अजय: ये क्या हरकत है कमलेश, अमित कोई छोटा बचा नहीं है अगर उसने कुछ कहा है तो ज़रूर इसके पीछे कोई वजह होगी

और तू एक बेगानी औरत क लिए हमारे बेटे पर हाथ उठा रहा है

कमलेश: इसने क्या कहा अपने सुना नहीं, क्या एहि संस्कार हैं हमारे खंडन क , आखिर खून रंग दिखा hi देता है

अजय: जुबान को लगाम दे छोटे तू जनता है तू क्या कह रहा है? ये हमारा बीटा है इसे संस्कार हमने दिए हैं और मैं अछि तरह जनता हूँ गौरी भाभी और विजय भैय्या क संस्कार कितने उत्तम हैं, तू अपना दिमाग और हाथ काबू में रख

कमलेश: आप इसकी तरफदारी कर रहे हैं , सब ने सर चढ़ा रखा है इस लिए इसके हौसले बाद गए हैं और ज़ुबान चलने लगी है

सही कहती है भाभी ये है hi मनहूस

पहले अपने माँ बाप को खा गया और हमें भी यतीम कर दिया

और अब हमारे घर को ग्रहण लगा रखा है एक बचा तक नहीं हुआ घर में जब से ये हमारे घर में आया है इतना मनहूस है ये

अजय: ज़ुबान संभल कमलेश और दफा हो जा यहाँ से कहीं विजय भैया ने सुन लिया तो तुझे घर से निकल देंगे

कमलेश: देख लूंगा कौन क्या कहता है मगर सचाई बदल नहीं जाएगी ये मनहूस था और मनहूस रहेगा

इतना कहकर कमलेश गुस्से से पेअर पटकता हुआ चला जाता है

अमित की आँखों से आंसू लगातार बह रहे थे वो क्या करने आया था और क्या हो गया

अजय अमित को गले लगा लेता है और उसके आंसू पोंछता है

अजय: चुप हो जा मेरे बेटे चुप हो जा, तेरे छोटे मां का दिमाग कहरब हो गया है तू चुप कर, तू तो हमारा समझदार और बहादुर बीटा है देख ऐसे रट नहीं

अजय अमित को चुप करवाता है और अमित भी जल्दी खुद को संभल लेता है

अजय: अब बता तूने मीणा क बारे में ऐसा क्यों कहा आखिर क्या बात है?

अमित सोच में पद जाता है क अजय को कैसे बताये कमलेश की बात और थी उसे तो अकेले में खुल क बात की जा सकती थी मगर अजय मां को अगर बात पता चली तो बात बिगड़ जाएगी

अमित : वो मां जी वो बात कुछ ऐसी है क मैं कैसे बताऊँ समझ नहीं आ रहा

अजय: जो भी है खुल क बता मैं तेरा मां हूँ और तू मुझसे दर मत अब तू जवान है मुझसे दोस्तों की तरह खुल क बात कर मैं गुस्सा नहीं करूँगा

अमित : मां जी बात hi ऐसी है कैसे बताऊँ

असल में मुझे मेरे दोस्तों ने बताया है क मीणा का कई लोगो से चक्कर है और वो उनसे पैसे भी लेती है

अजय : शॉकेड) क्याआ ? तू जनता है तू क्या कह रहा है वो रघु की बीवी है और ऐसी बात हमने कभी नहीं सुनी उसके बारे में

अमित : ये सच है मां जी मेरे पास पक्की खबर है

अजय: किसी क कहने पर आँख बंद कर क यकीन नहीं किया जाता बीटा हर बात का कोई न कोई सबूत तो होना चाहिए और ऐसी बात बिना सबूत क नहीं की जा सकती

अमित : सबूत है मां जी

अजय: सबूत, कैसा सबूत?

अमित : वो मैं आपको दिखा सकता हूँ, मैं जनता था क बिना सबूत क कोई मानेगा नहीं इस लिए मैंने अपने खबरि से इसका सबूत मंगवा लिया था

अजय: दिखा क्या सबूत है

अमित अपनी पॉकेट से मोबाइल निकल कर वीडियो चला कर अजय को मोबाइल थमा देता है जिसमे राजू और उसका दोस्त मीणा को एक साथ छोड़ रहे थे

अजय देखते hi समझ जाता है क अमित ने जो भी कहा था सब सच था क्यूंकि जैसे मीणा वीडियो में चुदाई करवा रही थी ऐसे तो कोठे की रैंदिआं hi कर सकती है

अजय जल्दी से वीडियो बंद कर देता है और अमित से कहता है

अजय : ये सब क्या है तू मोबाइल का इस्तेमाल इन चीज़ों क लिए करता है?

अमित : माफ़ कीजिये मां जी अब सबूत तो ऐसे hi लिया जा सकता था और किसी बात को कोई मंटा नहीं

अजय: ठीक है मगर इसे हटा दे मोबाइल से

अमित : मां जी मैं निकल दूंगा पहले कमलेश मां को तो यकीन दिलवाना होगा वर्ण वो नहीं मानेंगे

अजय: कैसे नहीं मानेगा मैं आज hi रघु और मीणा को निकल देता हूँ और बड़े भैया को भी बताऊंगा

अमित: नहीं नहीं मां जी अगर आप ने उनको बताया तो फिर इस वीडियो क बारे में भी बताना पड़ेगा और फिर उन्हें जब पता चला तो वो मुझसे नाराज़ हो जायेंगे

अजय: वो मैं देख लूंगा तू चिंता न कर और अब जा घर पर और हाँ कमलेश की बातों को दिल पे मत लेना तू हमारा बीटा है हमने कभी तुझे महसूस होने दिया आजतक ?

अब जा घर और आराम कर जा क

अमित अजय क पास से उठ कर चल पड़ता है मगर उसके मन में एक तूफ़ान सा उठा हुआ था

कमलाह ने आज गुस्से में जो भी कहा हो वो कामिनी से तो कई बार मनहूस और अपने माता पिता नाना नानी की मौत का इलज़ाम सुन चूका था मगर आज कमलेश ने उसके रिश्तेदारों का नाम लेकर ये बता दिया था क उसकी और भी फॅमिली है

मगर आज तक किसी ने उसे इस बारे में बताया क्यों नहीं

अब उसे खुद hi पता करना होगा

छोटी ममी? शायद वो कुछ मदद कर सकें

मगर जो भी था कमलेश की बातों ने अमित क दिल को ठेस पहुंचे थी जो उसे चैन से बैठने नहीं दे रही थी इस लिए वो घर जाने की बजाये नदी की और चल पड़ा

उसका मन बिलकुल भी नहीं था क वो किसी की कोई बाटे सुने या करे

अमित चुप चाप जा कर नदी किनारे जंगल क पास में बैठ जाता है , यहाँ कोई नहीं अत था ये काफी हैट क इलाका था

अमित अपनी तन्हाई में बैठा अपनी ज़िन्दगी क बारे में सोचता रहता है आखिर उसका क्या कसूर था जो बचपन में hi उससे उसके माता पिता को छीन लिया गया है

आखिर क्यों उसके माथे पर मनहूस का कलंक लगा दिया गया

इन सब बातों का जवाब तो भगवन क पास hi था

मगर एक सवाल का जवाब अब उसे खुद ढूंढ़ना था क आखिर उसकी दूसरी फॅमिली कहाँ है और अगर है तो किसी ने कभी उससे मिलने की कोशिश क्यों नहीं की और न hi आजतक किसी ने उनका ज़िकर किया आखिर कौन?

अमित का सोच सोच कर सर फटा जा रहा था और छोटे मां की वास् बातें जब उसे यद् अति तो उसका दिल खून क आंसू बहाने लगता

पहले क्या कामिनी काम थी मनहूस कह कर तने देने वाली जो अब मां भी शुरू हो गए

अमित जाने कब से कितनी देर से बैठा था उसे कोई ख्याल नहीं था कब दिन ढला कब अँधेरा हो गया

उधर अजय जब खेतों से घर लौटा तो गौरी ने आते hi उसे अकेला घर एते देखकर उससे अमित क बारे में पुछा

गौरी: देवर जी आप अकेले? अमित कहाँ रह गया? कहीं भेजा है उसे काम से क्या?

अजय: क्या? अमित घर नहीं लौटा?

मगर मैंने तो कब का उसे घर भेज दिया था

गौरी: मगर वो तो नहीं आया

अजय: शायद वो अपने दोस्त क पास न गया हो

गौरी: हाँ हो सकता है मैं अभी तुम्हारे बड़े भैया को बोलती हूँ वो पूछ क एते हैं उसके घर

अजय: नहीं रहने दो भाभी मैं जाता हूँ अभी उसे लेकर अत हूँ

अजय राजू क घर चला जाता है, राजू तो घर पर hi था मगर उसने अजय को बताया की आज तो वो अमित से मिला hi नहीं और न hi वो उनके घर आया

अजय क मन में चिंता होने लगी थी उसे आज की साडी बातों से लगने लगा कहीं अमित ने गुस्से में कोई गलत कदम तो नहीं उठा लिया

‘ हे भगवन कहीं अमित , नहीं नहीं वो तो समझदार है वो ऐसा नहीं कर सकता

मगर क्या पता जवान खून है कहीं बातों को दिल पर लगा कर कहीं चला गया तो भाभी का क्या होगा

नहीं नहीं ऐसा नहीं होने दूंगा

फिर अजय को ख्याल अत है क उसके पास तो मोबाइल था चलो उसे कॉल लगता हूँ

मगर उसका फ़ोन भी स्विच ऑफ आ रहा था

राजू को भी कुछ गड़बड़ लगती है और वो अजय से पूछता है मगर अजय कुछ बताता नहीं और उसे इतना hi कहता क वो जाये और पता करे क अमित गाओं में कहाँ कहाँ जाता है शायद कहीं किसी से मिलने गया हो

राजू बात को समझते हुए जल्दी से निकल जाता है अमित को ढूंढ़ने और अजय घर लौट अत है

जो भी है ये बात अब छुपाना गलत होगा काम से काम बड़े भैय्या को तो बताना होगा अगर कुछ गलत हो गया तो वो क्या जवाब देगा

अजय जल्दी से घर अत है और विजय क पास चला जाता है

अजय को ऐसे चिंता में डूबे और सीधा विजय क पास जाते गौरी की टेंशन बाद जाती है उसके दिल में बुरे ख्याल आने लगते हैं कहीं कुछ हुआ तो नहीं

विजय: क्या हुआ अजय तू इतना घबराया क्यों हुआ है?

अजय: भैया बात hi ऐसी है आप जल्दी मेरे साथ चलिए

विजय: मगर बात क्या है कुछ बताएगा

तभी गौरी कमरे में आ जाती है

गौरी: क्या हुआ देवर जी आप तो अमित को लेन गए थे कहाँ है वो और आप घबराये हुए क्यों हैं

अजय: वो वो क क कुछ नहीं भाभी अमित राजू क साथ hi गया है कहीं

मैं तो बस भैया को बुलाने आया हूँ वो बहार किसी का झगड़ा हो गया है

गौरी: आप इतना क्यों घबरा रहे हैं क्या अमित का झगड़ा तो नहीं हो गया है कहीं उसे कुछ हुआ तो नहीं

अजय: अरे नहीं भाभी मैंने बताया न वो राजू क साथ गया है

भैया जल्दी कीजिये

विजय: चल मगर जहहदा हुआ किसका है?

अजय: आप चलिए रस्ते में बताता हूँ

दोनों भाई बहार निकल जाते हैं मगर गौरी क मन में बेचैनी बढ़ने लगती है उसका दिल किसी उन्होनी क दर से कांपने लगता है

दीपिका गौरी क पास आकर उसकी परेशानी क बारे में पूछती है

दीपिका: क्या हुआ दीदी आप के चेहरे का रंग क्यों उदा हुआ है क्या हुआ है?

गौरी: पता नहीं छोटी मेरा दिल बहुत घबरा रहा है अमित अभी तक नहीं आया अजय कह रहा है क वो कब का घर क लिए निकल चूका है

अभी राजू क यहाँ बुलाने गया था मगर वहां से भी खली हाथ लौटा है और कह रहा है क अमित राजू क साथ खाएं गया है जबकि उसके चेहरे की परेशानी देखकर मुझे लगता है बात कोई और है जो वो छुपा रहा है

दीपिका भी गौरी की बात सुनकर चक्र जाती है उसके मन में भी चिंता क बदल मंडराने लगते हैं मगर वो खुद को संभालती है

दीपिका: अरे दीदी कुछ नहीं होता आप ऐसे hi घबरा रही हैं अगर कोई बात होती तो जेठ जी बता नहीं देते क्या? वैसे भी हमारा अमित कोई छोटा बचा नहीं वो तो एक पहलवान हो गया है उसे कुछ नहीं हो सकता

दीपिका गौरी को तसल्ली तो दे रही थी मगर अंदर से उसे भी चिंता हो रही थी

घर से निकलने क बाद विजय फिर से अजय को पूछता है क बात क्या है तो अजय आसपास देखकर आज खेत में जो कुछ हुआ सब बता देता है जिसे सुनकर विजय क चेहरे पर गुस्से और चिंता क भाव उभर एते हैं

विजय: ये सब क्या हो गया, तूने रोका क्यों नहीं छोटे को आखिर वो कैसे इतना कुछ बोल गया, क्या उसे इतना भी ख्याल नहीं रहा क अमित हमारी hi फूल सी लाड़ली बहिन की एकलौती निशानी है जिसे हमने अपनी पलकों पे बिठाकर रखा है हमेशा अगर उसने नादानी में कुछ गलत कर लिया तो मैं क्या जवाब दूंगा गौरी को जो उसके बिना एक पल नहीं रह सकती

तूने रोका क्यों नहीं कमलेश को

अगर अमित को कुछ हुआ तो मैं कभी माफ़ नहीं करूँगा कमलेश को

अजय: भैया ये सब इतनी जल्दी हुआ क मुझे मौका hi नहीं मिला कुछ करने का और मैंने कमलेश को डांटा भी था अमित को भी समझाया था

मुझे क्या पता था अमित ऐसे चला जायेगा

विजय: तुझे उसे अकेला नहीं भेजना चाहिए था पता नहीं कहाँ गया होगा मेरा बचा

चल जल्दी उसके दोस्तों को ढून्ढ शायद किसी क पास हो या किसी को पता हो

अजय: भैया मैंने राजू से पता किया है , अमित आज उससे नहीं मिला अब वो भी पता लगाने गया है हम भी चलते हैं

विजय: एक काम कर तू घर मोटरसाइकिल ले और बस स्टॉप पर पता कर और आखरी बस कब गयी कौन उसमे गया वो दुकान वाले से पता कर उसे पता होगा अगर अमित वहां गया था, मैं भी किसी को साथ लेकर गाओं में पता करता हूँ और पास क गाओं में भी जाना पड़ा तो जायेंगे

दोनों भाई निकल जाते हैं अमित की तलाश में

कमलेश भी अभी तक घर से बहार hi था मगर घर में गौरी की चिंता हर गुज़रते पल क साथ बढ़ती जा रही थी

दीपिका गौरी को संभल तो रही थी मगर अंदर से उसका भी दिल बैठा जा रहा था मगर एक शख्स इन सब बातों से खुश था और वो थी कामिनी मगर ऊपर ऊपर से दिखावा कर रही थी चिंतित होने का

रत क 10 बज गए थे मगर अभी तक अमित का कुछ पता नहीं था राजू अजय और विजय खली हाथ लौट एते हैं

गौरी राजू को देखकर बिफर पड़ती है और उससे अमित क बारे में पूछती है

गौरी: राजू कहाँ है अमित कहाँ हैं मेरा बीटा

राजू बेचारा क्या जवाब देता मगर गौरी की आँखों से बहते आंसू देखकर विजय आगे बढ़कर गौरी को थाम लेता है और उसे गले लगा कर चुप करवाते हुए कहता है

विजय: खुद को सम्भालो गौरी हमारे बेटे को कुछ नहीं होगा वो आ जायेगा कहीं बहार गया होगा ज़रूरी काम से उसे बताने का वक़्त नहीं मिला होगा

गौरी: आप झूठ बोल रहे हैं ज़रूर कोई बात हुई है आप मुझसे छुपा रहे हैं, आजतक उसने कभी ऐसा नहीं किया

कहाँ है वो क्या हुआ है मुझे बताओ

विजय: खुद को सम्भालो गौरी क्या वो सिर्फ तेरा बीटा है क्या वो मेरा कुछ नहीं है? कुछ नहीं हुआ है वो शायद किसी काम से गया होगा वो आ जायेगा हौसला रखो तुम

गौरी: नहीं ऐसा नहीं है वो कभी ऐसा नहीं करता आजतक उसने ऐसा नहीं किया

आप जाइये उसे ढूंढ़कर लाइए मैं उसके बिना नहीं रह सकती

दीपिका बेचारी कौन में कड़ी आंसू बहा रही थी वो समझ गयी थे क कोई तो बात हुई है जो उसके दोनों जेठ छुपा रहे हैं कहीं अमित को कुछ हुआ तो नहीं है उसके मन में अनेको विचार आ रहे थे मगर जवाब किसी क पास नहीं था

दीपिका अमित को अपना पति hi मैंने लगी थी उसे अब कमलेश से कोई लगाव नहीं था जितनी फ़िक्र उसकी अमित करता था उतनी कभी कमलेश ने नहीं की थी

अपने तन मन और आत्मा पर अब वो केवल अमित का hi अधिकार समझती थी

सब की ऑंखें नाम थी सिवाए कामिनी क

वो तो मन में खुश हो रही थे क ाचा हुआ मनहूसियत ताली

घर क आँगन में सबका रोना धोना चल hi रहा था क दरवाज़ा खुलता है और एक शख्स अंदर अत है, सबकी निगाहें उसकी तरफ मुद जाती हैं
 
Back
Top