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नवाज़ उसके दोनों मम्मी को भींच कर उनका रास निकलने मई लगा था .. पर असली रास तो उसकी छूट से निकल रहा था .. चेयर मई वो जैसे बैठे थी उस वजह से उसके आम तन कर खड़े हुई थे.. वो अब मस्त हो चुकी थी.
नवाज़ सिसकारी मरते हुई बोलै
एआरटीई….. ssssssssssssss…. …… ाऔउर कहा कहा किश करू.. सुखक करू…
जवाब मई आरती बोली..
कहींईईई.. nahiiiiiiiiiiiiiiii...
नवाज़ ने फिर से पूछा
कहहआ… sssssssssssssss…. बोल ना
मस्ती मई आपने आँखे आरती ने बंद किये हुई थे.. आरती भी उसके बातो मई आ गयी और धीरे बोल पड़ी
मेरे नैक पर ..

फिर नवाज़ ने वह किश किया
ssssssssssssssss….. आआअह्ह्हा…
सिर्फ यही निकला आरती के मू से
और फिर कहा ..
मेरे नवल पर
कहा .. आरती .. ठीक से बोल न..
फिर आरती खुद hi आपने एक हाथ अपनी नवल पर रखती है …
यहाँ..
नवाज़ वह किश करता है…
आआआआह्ह्हह्हह्हआआआ….
जीभ से चतु क्या
आआअह्हह्हआआ… मुझे नहीं पता..
फिर नवाज़ जीभ से चाटने लगा … उसकी सप्पड़ अब बाद गयी..
और कहा डार्लिंग..
आरती आँखे खोलकर नवाज़ की तरफ सेक्सी अड्डा के साथ देखते हुई कहती है..
और कही नहीं…
सच..
हाँ ..सच..
उसके नवल से चाटते हुई नीचे आकर कहता है
तुम्हारी … पुस्सीय ..को…
कमीने…
और वह मू रखता है ..

जैसे ही नवाज़ ने आपने मू आरती के छूट पर रखा वैसे hi आरती के मुँह से मस्ती भरी आह निकल गए….
आरती – ोूछ नवाज़ क्या कर रहे हो ..
अह्ह्ह्हह्हह उन्घ्ठ्ठ ओह्ह्ह्हह्ह
उसके छूट पर किश करते hi आरती फिरसे सिसक उठी
आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ….. स्स्स्सस्छ्हःहः….
Kamineeeeeeeeeeeeeee…. न्यूऊऊ..
नवाज़ उसके छूट को चाटने लगा ...

Aaaaaaahhhhhhhhhhaaaaa… शह्ह्ह्ह…. ोुह्ह्ह्होऊ… एससससससससस…. ऐसे .. होई... माय बाबीयीय..
नवाज़ चेहरा उप्पर निकल कर कहता है..
माय बेबी.. हांण..
आरती शर्माकर कहती है..
बेशरम...
अब क्या करू..
ओनली छतो आप क .. जीभ से…
नवाज़ फिर से आरती के छूट को चाटने लगा .. आरती अब आहे बरने लगी..
अब आरती को बहकते हुई देखकर नवाज़ बोल पड़ा
उम्मम्मम्मम… आरती… कैसा लगा मेरे साथ किश करते हुई .. तेरे मम्मी को जब मई चूस रहा था .. तब कैसे लगा तुजे
.. आरती के आँखों के सामने अब फिर से थोड़े देर पहले वाला सन याद आ गया..
हांलाकि इससे पहले वो आपने हस्बैंड को किश कर चुकी थी पर ऐसा जबरदसर वाला किश .. जिस मई सामने से ज्यादा रिस्पांस मिले वो पहली बार था..
फिर भी नखरा दिखते हुई वो कहती है..
नवाज़ बहुत कमीने हो आप
बोल न कैसा लगा ..
शरमाते हुई आरती कहती है
अच्छा लगा
सिर्फ अच्छा लगा .. या मज़ा भी आया तुम
मज़ा आया
सिर्फ मज़ा या बहुत मज़ा
मुझे बेशर्म करने पे तुले हुई हो क्या..
बोल न
बहुत मज़ा आया .. अब कुश ..
ये सुनकर नवाज़ चहक उठा .. और जोश मई आकर आपने अंगूंठा आरती के छूट मई दाल दिया…
आआआआह्ह्हह्हह्हआआआआ…. कामिनी…. लकी … बास्टर्ड… क्या क्या करेगा … मेरे साथ तू… बहुत कुश किया है आज आपने ..
कुश तो हम तेरे छूट मरने पर hi होंगे..
कमीने.. चुप करो..
ऐसा कह के उसका अंगूंठा आपने छूट से उसने बहार निकल दिया..
अब नवाज़ उसके झाँगो को सहला रहा था ..वह दबा रहा था..
अब उसने हाथ थोड़ा और उप्पर किया.. जैसे hi उसके हाथ की उंगली आरती के छूट के द्वार पर राखी तब आरती के मू से एक बार फिर सिसकारी निकल गयी..
ssssssssssssshhhhhhhhhhhhh…
uuuuuuuummmmmmmmmmm…
इस बार उसके सिसकारी मई मादकता ज्यादा thi..nawaz के उंगली को आपने छूट के द्वार पर महसूस होते hi उसका शरीर कपङे लगा.. आरती की आँखे बंद थी.. अब नवाज़ ने उसके छूट के द्वार पर सहलाना शुरू कर दिया..
आआह्ह्ह्हआ….. naaaaaaaaaaa….. wwaaaa….zzzzz…. मत करूऊ…. Plzzzzzzzzzzzzzz…
वो न कह रही थी … पर उसके न मई कोई दम नहीं था.. जैसे जैसे नवाज़ की उंगली आरती के छूट के द्वार से उसके छूट की तरफ जा रही थी एक अजीब से तपिश का एहसास आरती को हो रहा था..
कैसा लग रहा है आरती ..
जो भी आरती के साथ नवाज़ कर रहा था उससे उसे मज़ा तो बहुत आ रहा था पर लज़्ज़ा के मरे, शर्म के चलते वो नवाज़ को बोल नहीं सकती..
मुझे नहीं पता
इधर नवाज़ तो सातवे आसमान पर था.. उसके मैं की मुराद आज पूरी होने जा रही थी..
नवाज़ सिसकारी मरते हुई बोलै
एआरटीई….. ssssssssssssss…. …… ाऔउर कहा कहा किश करू.. सुखक करू…
जवाब मई आरती बोली..
कहींईईई.. nahiiiiiiiiiiiiiiii...
नवाज़ ने फिर से पूछा
कहहआ… sssssssssssssss…. बोल ना
मस्ती मई आपने आँखे आरती ने बंद किये हुई थे.. आरती भी उसके बातो मई आ गयी और धीरे बोल पड़ी
मेरे नैक पर ..

फिर नवाज़ ने वह किश किया
ssssssssssssssss….. आआअह्ह्हा…
सिर्फ यही निकला आरती के मू से
और फिर कहा ..
मेरे नवल पर
कहा .. आरती .. ठीक से बोल न..
फिर आरती खुद hi आपने एक हाथ अपनी नवल पर रखती है …
यहाँ..
नवाज़ वह किश करता है…
आआआआह्ह्हह्हह्हआआआ….
जीभ से चतु क्या
आआअह्हह्हआआ… मुझे नहीं पता..
फिर नवाज़ जीभ से चाटने लगा … उसकी सप्पड़ अब बाद गयी..
और कहा डार्लिंग..
आरती आँखे खोलकर नवाज़ की तरफ सेक्सी अड्डा के साथ देखते हुई कहती है..
और कही नहीं…
सच..
हाँ ..सच..
उसके नवल से चाटते हुई नीचे आकर कहता है
तुम्हारी … पुस्सीय ..को…
कमीने…
और वह मू रखता है ..

जैसे ही नवाज़ ने आपने मू आरती के छूट पर रखा वैसे hi आरती के मुँह से मस्ती भरी आह निकल गए….
आरती – ोूछ नवाज़ क्या कर रहे हो ..
अह्ह्ह्हह्हह उन्घ्ठ्ठ ओह्ह्ह्हह्ह
उसके छूट पर किश करते hi आरती फिरसे सिसक उठी
आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ….. स्स्स्सस्छ्हःहः….
Kamineeeeeeeeeeeeeee…. न्यूऊऊ..
नवाज़ उसके छूट को चाटने लगा ...

Aaaaaaahhhhhhhhhhaaaaa… शह्ह्ह्ह…. ोुह्ह्ह्होऊ… एससससससससस…. ऐसे .. होई... माय बाबीयीय..
नवाज़ चेहरा उप्पर निकल कर कहता है..
माय बेबी.. हांण..
आरती शर्माकर कहती है..
बेशरम...
अब क्या करू..
ओनली छतो आप क .. जीभ से…
नवाज़ फिर से आरती के छूट को चाटने लगा .. आरती अब आहे बरने लगी..
अब आरती को बहकते हुई देखकर नवाज़ बोल पड़ा
उम्मम्मम्मम… आरती… कैसा लगा मेरे साथ किश करते हुई .. तेरे मम्मी को जब मई चूस रहा था .. तब कैसे लगा तुजे
.. आरती के आँखों के सामने अब फिर से थोड़े देर पहले वाला सन याद आ गया..
हांलाकि इससे पहले वो आपने हस्बैंड को किश कर चुकी थी पर ऐसा जबरदसर वाला किश .. जिस मई सामने से ज्यादा रिस्पांस मिले वो पहली बार था..
फिर भी नखरा दिखते हुई वो कहती है..
नवाज़ बहुत कमीने हो आप
बोल न कैसा लगा ..
शरमाते हुई आरती कहती है
अच्छा लगा
सिर्फ अच्छा लगा .. या मज़ा भी आया तुम
मज़ा आया
सिर्फ मज़ा या बहुत मज़ा
मुझे बेशर्म करने पे तुले हुई हो क्या..
बोल न
बहुत मज़ा आया .. अब कुश ..
ये सुनकर नवाज़ चहक उठा .. और जोश मई आकर आपने अंगूंठा आरती के छूट मई दाल दिया…
आआआआह्ह्हह्हह्हआआआआ…. कामिनी…. लकी … बास्टर्ड… क्या क्या करेगा … मेरे साथ तू… बहुत कुश किया है आज आपने ..
कुश तो हम तेरे छूट मरने पर hi होंगे..
कमीने.. चुप करो..
ऐसा कह के उसका अंगूंठा आपने छूट से उसने बहार निकल दिया..
अब नवाज़ उसके झाँगो को सहला रहा था ..वह दबा रहा था..
अब उसने हाथ थोड़ा और उप्पर किया.. जैसे hi उसके हाथ की उंगली आरती के छूट के द्वार पर राखी तब आरती के मू से एक बार फिर सिसकारी निकल गयी..
ssssssssssssshhhhhhhhhhhhh…
uuuuuuuummmmmmmmmmm…
इस बार उसके सिसकारी मई मादकता ज्यादा thi..nawaz के उंगली को आपने छूट के द्वार पर महसूस होते hi उसका शरीर कपङे लगा.. आरती की आँखे बंद थी.. अब नवाज़ ने उसके छूट के द्वार पर सहलाना शुरू कर दिया..
आआह्ह्ह्हआ….. naaaaaaaaaaa….. wwaaaa….zzzzz…. मत करूऊ…. Plzzzzzzzzzzzzzz…
वो न कह रही थी … पर उसके न मई कोई दम नहीं था.. जैसे जैसे नवाज़ की उंगली आरती के छूट के द्वार से उसके छूट की तरफ जा रही थी एक अजीब से तपिश का एहसास आरती को हो रहा था..
कैसा लग रहा है आरती ..
जो भी आरती के साथ नवाज़ कर रहा था उससे उसे मज़ा तो बहुत आ रहा था पर लज़्ज़ा के मरे, शर्म के चलते वो नवाज़ को बोल नहीं सकती..
मुझे नहीं पता
इधर नवाज़ तो सातवे आसमान पर था.. उसके मैं की मुराद आज पूरी होने जा रही थी..





























