Adultery Manhoos se mahan tak - Page 37 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 268



‘ क्या सोच रहे हो ? जब से आये हो देख रही हूँ बुझे बुझे से हो. ये तबियत ख़राब का भी बहाना बना रहे थे न ? अब सच सच बताओ क्या बात है? ‘

मैं बीएड पर लेता निधि दीदी क बारे में सोच रहा था क दिव्या मौसी फिर से कमरे में आ गयी . मैंने उठने की कोशिश की तो मौसी ने मुझे उठने नहीं दिया और खुद मेरे सर की तरफ बीएड पर बैठ गयी

दिव्या : लेता रह , उठने की ज़रूरत नहीं . अब बता. क्या बात है ?

अमित : कुछ नहीं मौसी .

दिव्या : देख , एक hi बात बार बार पूछने की मुझे आदत नहीं है . सीधे सीधे बताता है या नहीं ?

दिव्या मौसी ने हल्का गुस्सा दिखते हुए मुझसे फिर से पूछा तो मुझे लगा उन्हें कुछ न कुछ तो कहना hi पड़ेगा वर्ण वो ऐसे मानेंगी नहीं

अमित : वो मौसी आज ,,,,,, माँ की बहुत यद् आ रही थी. मैंने तो उन्हें देखा भी नहीं. फिर भी दिल है क उन्हें देखना चाहता है जबकि वो वापिस तो आ नहीं सकती .

मैंने जान बुझ कर माँ क बारे में बात कर दी क्यूंकि मैं जनता था इसके बाद मौसी और कोई सवाल पूछने नहीं वाली. पर मुझसे अनजाने में गलती हो गयी. क्यूंकि मेरी इतनी सी बात पर hi दिव्या मौसी की ऑंखें भर आयी.

दिव्या : नाम आँखों से ) मैं नहीं हूँ क्या ???? मैं भी तो तेरी माँ हूँ और मुझमे दामिनी में फरक hi क्या है??? क्या मुझमे तुझे दामिनी नज़र नहीं आती??? ख़बरदार जो कभी ऐसा दोबारा सोचा क तेरी माँ नहीं है..,,, वर्ण कभी बात नहीं करुँगी दोबारा तुझसे ,,,, एक तो पहले hi इतने साल मैं तड़पती रही हूँ तुझे दूर कर क और अब तू ऐसी दिल दुखने वाली बातें कर रहा है.

दिव्या मौसी का गाला भर आया था और उनकी आँखों से आंसू बह निकले. उनकी बातों में मेरे लिए जो प्यार था उससे मेरा भी मन भर आया और मैंने उठके उन्हें गले लगा लिया. बीएड पर बैठे बैठे hi हूँ एक दूसरे क गले लग गए. हालाँकि इस वक़्त ये प्यार माँ बेटे का प्यार था. मौसी मेरे गले लग कर आंसू बहा रही थी और मैं उन्हें रोक रहा था.

अमित : माफ़ कर दो मौसी ,,, दोबारा कभी ऐसा सोचूंगा भी नहीं. मैं भी कितना पागल हूँ , मेरी माँ तो मेरे सामने साक्षात् है और मैं फिर भी उसे परछाइयों में ढूंढ रहा हूँ. आप और में जब कोई फरक था hi नहीं तो आप hi तो मेरी माँ हुई न . अब आप चुप हो जाइये वर्ण मैं भी आपसे बात नहीं करूँगा .

दिव्या : तो पहले ऐसी बातें करता hi क्यों है. चल आराम से लेट जा.

मौसी ने प्यार से थपकी देते हुए मुझे लिटा दिया और मेरा सर अपनी गॉड में रख कर थपकी देने लगी. तभी उनकी नज़र दरवाज़े पर गयी और उनके बोलते hi मैंने भी दरवाज़े की तरफ देखा जहाँ दीपिका ममी कड़ी थी.

दिव्या : अरे दीपिका , तू वहां कड़ी क्या क्र रही है?

दीपिका : माँ बेटे का प्यार देख रही थी. सोचा बीच में डिस्टर्ब करना ठीक नहीं .

दिव्या : चल आजा अंदर , अब अपने बेटे को प्यार भी न करूँ मैं? तू इस वक़्त यहाँ क्या कर रही है ? तुझे अपने बेटे को प्यार नहीं करना ?

दीपिका : मैं तो देखने आयी थी क अमित को दूध मिल गया क नहीं. पता होता आप यहां हैं तो सोचने की ज़रूरत hi नहीं थी. आखिर माँ अपने बचे को दूध तो पिलाएगी hi.

दीपिका ममी ने ये बात एक शरारती मुस्कान क साथ मौसी को देखते हुए कही थी और उनकी डबल मीनिंग बात सुन कर दिव्या मौसी मुश्किल से खुद को रोक पायी शर्माने से

दिव्या : हाँ हाँ , मेरा बीटा है मैं देख लुंगी तू अपने बेटे की फ़िक्र कर . उसे दूध पीला .

दीपिका : मैं तो अपने बेटे को दूध पीला hi दूंगी आप भी ज़रा अपने बेटे को ताज़ा दूध पीला दीजिये .

इस बार तो दिव्या मौसी की बोलती hi बंद हो गयी और वो हकलाने hi लग गयी.

दिव्या : हह ,, है,, हाँ ,, हाँ मम ,, मैं पीला दूंगी. वो गिलास में रखा है . जा तू अपने बेटे को पीला ताज़ा दूध. अब जा जाकर उसे संभल , कमलेश भी तेरा इंतज़ार कर रहा होगा

दीपिका :( मेरी तरफ देखते हुए ) आरव क पापा का hi तो ख्याल रहता है मुझे . कहीं वो किसी बात पर परेशां न हो जाएँ. जो भी होगा सब ाचा hi होगा , भगवन हमेशा उनके साथ है और मैं भी .

दिव्या : ये तू क्या बात कर रही है. वो क्यों परेशां होगा ?

दीपिका : अब मुझे क्या पता, ाचा अब मैं चलती हूँ सुबह बात करुँगी .

दीपिका ममी ने आखिरी बात भी मुझे देख कर कही जैसे मुझे कह रही हो क सुबह मुझसे पूछेंगी मेरी परेशानी क्या है. बातों बातों में hi वो बता गयी क वो यहाँ मेरे लिए hi आयु थी और उन्हें मेरी कितनी परवाह है. ये बात तो मैं अचे से जनता था क वो मेरी सबसे ज्यादा परवाह करती हैं. और मुझे दुखी देख कर उनको भी चैन कहाँ होगा.

दिव्या : पता नहीं क्या क्या बोले जा रही थी , ये भी न ,, अभी तक बची hi है. जैसी भी है इस घर की रौनक यही तो है . चल उठ दूध पि ले वर्ण भूल जायेगा . फिर वो कहेगी क मैंने तुझे दूध नहीं पिलाया.

मौसी ने ये बात कह तो दी पर फिर खुद hi शर्मा गयी. मैंने उठ कर दूध का गिलास पकड़ा और एक पल में ख़तम कर क रख दिया . फिर मैं वापिस लेट गया और मौसी मेरा सर गॉड में रखे सहलाती रही. मौसी की गॉड में सच में बहुत सुकून मिल रहा था और पता नहीं कब मेरी आंख लग गयी .

उधर राधा निधि क कमरे में गयी तो दरवाज़ा अंदर से लॉक था . 2 बार खटकने पर निधि की धीमी मगर भरी गले से आवाज़ आयी.

निधि : प्लीज मेरी तबियत ठीक नहीं है मुझे रेस्ट करने दो.

राधा : दीदी मैं हूँ , प्लीज एक बार दरवाज़ा खोलिये .

निधि : राधा , प्लीज मैं सुबह बात करुँगी . अभी तुम जाओ.

राधा : दीदी वो मुझे अंदर से कुछ लेना है . प्लीज दरवाज़ा खोलिये .

कुछ पलों बाद दरवाज़ा खुला , निधि दरवाज़े क पीछे hi खुद को छिपाये थी बस ज़रा सा राधा को देखा और उसे अंदर आने क लिए जगह देकर पीछे मुद गयी. पर इतने में hi राधा ने निधि की आंसुओं से भरी आँखें देख ली थी. गलों पर नमकीन पानी की लकीरे बन गयी थी. निधि ने खुद को छुपाने की कोशिश तो की थी पर राधा ने उसके दर्द को देख लिया था . निधि राधा की तरफ पीठ कर क बीएड की तरफ बड़ी . उसने सोचा राधा अपना सामान लेकर चली जाएगी पर राधा ने दरवाज़ा फिर से बंद करते हुए चिटकनी लगा दी . चिरकानी की आवाज़ सुनते hi निधि ने पीछे मुद कर देखा तो राधा उसके करीब आ रही थी.

निधि : तुम तो सामान लेने आयी थी न , अब लो अपना सामान और जाओ.

राधा : मैं जानती हूँ दीदी आप अमित से नाराज़ हैं, मैं वजह नहीं पूछूँगी अगर बताना न चाहें. मगर इतना ज़रूर कहूँगी दीदी क आप जितना दुखी हैं उससे भी ज्यादा वो खुद दुखी है. आप तो जानती hi हैं वो सबसे ज्यादा आप hi से प्यार करता है . जितनी इज़्ज़त और परवाह वो आपकी करता है उतनी वो किसी की नहीं करता . पता नहीं किस वजह से उसने आप दिल दुखाया है पर यकीन मानिये जब तक आप दुखी रहेंगी तब तक वो भी खुश नहीं हो पायेगा. मैं गयी थी उससे बात करने , उसने मुझे कुछ नहीं बताया पर मैंने उसकी आँखों में दर्द देखा है. वो कैसा है ये आप भी अचे से जानती हैं. वो कभी अपना दर्द किसी से नहीं बाँट ता मगर दूसरों को खुशियां देने क लिए खुद अपनी झोली में दुःख समेत लेता है. उसकी तरफ से मैं आपसे माफ़ी मांगती हूँ. आप जो सजा देने चाहें मुझे दे दें. पर उससे नाराज़ मत होना. अगर आप उससे नाराज़ हो गयी तो फिर वो किसी क साथ hi खुश नहीं रह पायेगा और अंदर hi अंदर घुट ता रहेगा . प्लीज उसे माफ़ कर दीजिये .

राधा की बातें निधि ख़ामोशी से सुनती रही. निधि को तो अमित से नहीं बल्कि अपनी किस्मत से नाराज़गी थी और ऊपर वाले से जिसने पहले उसके मन में अमित क लिए वो भावनाएं पैदा की ऐसी घटना करवाई क जिससे वो अमित को पति मन बैठी और अब अमित उसका नहीं हो सकता ये बात उससे बर्दाश्त नहीं हो रही थी. ज़िन्दगी में पहली बार उसने किसी को चाहा था बल्कि उसे अपनी ज़िन्दगी hi मन लिया था और अब अपने मन में संजोये सपने मिटा पाना उसके बस में नहीं था . अपने आप पर काबू पति निधि राधा क मुरझाये चेहरे को अपने हाथों में लेकर उसे दुलार करती बोली

निधि : तू कब से इतनी बड़ी हो गयी जो इतनी परवाह करने लग गयी उसकी ? सब ऐसे hi तुझे माँ की गुड़िया कहते हैं. तू तो सबसे समझदार है. मैं उससे नाराज़ कैसे हो सकती हूँ भला , वो तो मुझे कारन से भी पहले प्यारा है. हाँ शायद उसकी ज़िन्दगी में बहुत लोग हैं मुझसे भी पहले . तू चिंता मत कर मैं सुबह उससे बात कर लुंगी. आ इधर मेरे साथ hi सो जा .

राधा : आप सच में उससे नाराज़ नहीं है न ?

निधि : नहीं

राधा : अछि बात है , मैं आपके लिए खाना लेकर आती हूँ. ऐसे भूखे पेट नींद थोड़ा आएगी ?

निधि : नहीं मुझे भूख नहीं है , सुन तो …..

राधा निधि की बात सुने बगैर कमरे से जल्दी से भाग गयी खाना लेने. क्यूंकि उसे पता था निधि फिर से मन करेगी इस लिए उसने बात hi नहीं सुनी. और अब उसे इस बात की ख़ुशी भी थी क निधि अमित से नाराज़ नहीं है. ये बात वो अमित को बताने क लिए गयी भी पर अमित उसकी माँ की गॉड में आराम से सो रहा था इस लिए उसने आवाज़ भी नहीं दी और चुपके से निकल ली. खैर निधि ने न न करते हुए भी राधा क हाथ से एक रोटी खा hi ली वर्ण राधा भी भूखे पेट सोने का कह रही थी. निधि का मन तो बेचैन था पर राधा क मासूम चेहरे और भोली बातों ने उसे कुछ हद तक हल्का कर दिया था.

सुबह मेरी आंख कुछ देर से खुली. रत मौसी ने जो माँ क प्यार का एहसास दिया था उसने मुझे हल्का कर दिया था . मैंने जब उठने की कोशिश की तो देखा मैं करवट क बल आधा मौसी क ऊपर था और उनका हाथ मेरे सर पर था . मैंने अपना सर थोड़ा सा उठाया तो मेरी ऑंखें फटी की फटी रह गयी. मेरा सर असल में दिव्या मौसी क स्तनों क ऊपर था. मौसी की सदी का पल्लू एक साइड में पड़ा था . ब्लाउज क ऊपर क दो हुक खुले हुए थे और उनके गोर स्तन आधे से ज्यादा नज़र आ रहे थे . मुझे यकीन नहीं हो रहा था क अभी मैं मौसी की नंगी छाती पर सर रख कर सो रहा था. शायद नींद में मौसी का पल्लू ढ़ालकंगया होगा पर ब्लाउज क हुक कैसे खुल गए ? कहीं नींद में ये मेरे से hi तो नहीं हो गया . मैं ये सोच कर दर गया और जल्दी से मौसी से दूर हो गया. फिर मेरी नज़र मौसी क नंगे चिकने पेट पर गयी जहाँ चर्बी नाम मात्रा भी नहीं थी . मौसी की साडी अस्त व्यस्त हो कर घुटनो तक ऊपर उठी हुई थी जिससे उनकी नंगी गोरी पिंडलियाँ नुमाया हो रही थी. ये सब देख कर मेरे खून में गर्मी आने लगी. पर मैंने खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश की. मौसी का चेहरा देखा तो वो सुकून से सो रही थी , उनके चेहरे पर संतुष्टि क भाव थे शायद कोई ाचा सपना देख रही होंगी. उनके चेहरे पर नज़र पड़ते hi मुझे एहसास हुआ क मैं कितना गलत सोच रहा था. वो मेरी माँ जैसे दिखती hi नहीं थी बल्कि माँ hi तो थी. उसी की तरह वो मुझे चाहती थी प्यार करती थी . मैंने मौसी की साडी का पल्लू जो एक तरफ गिरा था उसे वापिस मौसी क ऊपर दाल दिया और झुक कर उनके माथे को चूम लिया . फिर मैं उठा और बाथरूम से फ्रेश हो कर अखाड़े जाने की सोची तो टाइम देखने पर पता चला मैं लेट हो चूका था. अगर अखाड़े जाता तो वापिस आने में देर हो जाती और आज तो कॉलेज भी जाना था. इस लिए छत पर हो एक्सरसाइज करने का सोच कर जब मैं कमरे से बहार निकल कर खुली छत की तरफ गया तो कुछ hi पलों में दीपिका ममी मेरे पास आ गयी.

दीपिका : आज देर से उठे ? मैं कब से देख रही थी क अब निकलते हो कमरे से .

अमित : तो आप मेरा इंतज़ार कर रही थी ? कब से ?

दीपिका : और किसका इंतज़ार करुँगी ? तेरे जाने का टाइम मालूम है मुझे , तब से hi नज़र टिकाये बैठी थी क कब बहार आते हो. आज इतनी देर कैसे सोते रहे ? मौसी क पल्लू में नींद अछि आयी या सोये hi नहीं ?

अमित : क्या आप भी सुबह सुबह , आप को इतनी सुबह उठने की क्या ज़रूरत थी ? आराम से अपने टाइम पर hi उठती आप.

दीपिका : नींद आती तो उठती न , मैं तो साडी रत तेरे बारे ने hi सोचती रही. अब बता क्या बात हो गयी हो तू इतना दुखी था? ज़रूर ये बात निधि से जुडी हुई है . इसी लिए वो रत खाना नहीं खायी पर भला हो तेरी राधा का जो उसके लिए खाना ले गयी थी बाद में कुछ न कुछ खिला hi दिया होगा

दीपिका ममी क मुँह से ‘ तेरी राधा ‘ सुन कर दिल में अजीब से हलचल हुई और एक स्माइल अपने आप मेरे चेहरे पर आ गयी

अमित : वो सबका ध्यान रखती है. मेरे पास भी आयी थी वो कल रत . सच कहूं तो उससे बात कर क सुकून सा मिला था मुझे .

दीपिक : हम्म्म्म ,, वो तो मिलेगा hi. आखिर वो तेरी इतनी परवाह जो करती है. अब बात बता क्या है मुझे तो कल रत से चैन hi नहीं . जब पूरी बात सुन लुंगी तो चैन आएगा. इसी लिए रत मैं आयी भी थी पर दीदी की वजह से वापिस चली गयी .

अमित : आप पता नहीं क्या सोचेंगी पर यकीन मानिये मुझे इस मामले में कुछ भी नहीं पता था .

दीपिका : अब बताओ भी क्यों गोल गोल घुमा रहे हो

फिर मैंने निधि दीदी क साथ परसों रत क्या क्या हुआ और कल क्या बात हुई वो सब बता दिया . ये साडी बातें सुन कर दीपिका ममी अपने सर पर हाथ रख वहीँ बैठ गयी.

दीपिका : हे भगवन ,, ये सब क्या हो गया . तूने उसे समझाया नहीं क वो सब एक एक्सीडेंट था ? तूने जान बुझ कर थोड़ा hi उसकी मांग भरी और ये मंदिर वाली घटना भी तो एक्सीडेंट hi थी. इन सब बातों को ऐसे कैसे वो दिल पर ले गयी? आखिर भाई होने का फ़र्ज़ hi तो निभाया था तूने .

कुछ देर ममी खामोश रही और सोचने लगी. मैं उनके पास खड़ा उन्हें hi देख रहा था क वो मुझे कोई हल बताएं.

दीपिका : अब मुझे क्यों देख रहे हो ? खुद hi मुसीबतें मोल लेते हो तो हल भी खुद hi करो . पता नहीं और कितनी सौतने देखनी पड़ेंगी . तू कहीं रुकेगा भी ???

अमित : अब इसमें मेरी क्या गलती है ? मैंने तो कुछ भी जानबूझ कर नहीं किया था.

दीपिका : तेरी न किस्मत में hi ये सब झमेले लिख कर भेजे हैं भगवन ने इसी लिए एक जाता है तो दूसरा तैयार. निधि जैसी समझदार लड़की कोई भी फैसला अचानक नहीं ले सकती और दीदी की तरह वो भगवन को बहुत मानती है. जो कुछ एक्सिडेंटली हुआ उसने उसे भगवन की मर्ज़ी मान कर दिल से स्वीकार कर लिया और अब वो पीछे हटने वाली नहीं. अगर उसके साथ ज़बरदस्ती की गयी तो वो टूट जाएगी. वो चाहे विरोध न भी करे पर उसके बाद वो जीने की ीचा बी छोड़ देगी. वो बहुत भावुक है. इतनी देर तक वो अगर खामोश रही है तो ज़ाहिर है उसके दिल में तेरा प्यार बहुत गहरा बस चूका है. और तूने उसे सीधा सीधा इंकार कर दिया ??? एक बार भी नहीं सोचा उस मासूम क दिल पर क्या असर होगा ? अगर तुम ये सोचते हो क इस सब क बाद वो तुम्हे भूल जाएगी तो ये तुम्हारी गलत फेहमी है. हाँ तुम्हारी बातों से शायद वो अंदर hi अंदर इतना टूट जाये क हम इसे खो बैठें .

अमित : नहीं प्लीज ऐसा मत कहिये .

दीपिका : अब मैं खून या न कहूं पर तुमने जो किया है उसके बाद तो यही सब होने वाला है . निधि को समझाना आसान नहीं होगा . वो कोई दूध पीती बची नहीं और न hi नासमझ है . इस लिए बेहतर यही होगा क या तो उसकी बात मणि जाये या फिर भगवन क आगे हाथ जोड़ो क वो hi कोई हल निकले .

अमित : पर ऐसा किसे हो सकता है? आप जानती हैं ये बात कोई भी नहीं मानेगा और फिर रीमा का क्या होगा .

दीपिका : वैसे अगर देखा जाये तो रीमा क साथ भी तो तुम्हारा यही रिश्ता है न , तो उसके साथ भी शादी कोई कैसे मानेगा ?

अमित : रीमा क होते मैं निधि दीदी क साथ रिश्ता जोड़ूँ ??? आप होश में तो हैं?

दीपिका : तो क्या हुआ ? यहाँ तो राजे महाराजे 10 -10 शादियां करते रहे हैं . तुम्हारी तो 3-4 hi होनी हैं.

अमित : 3-4 ?

दीपिका : हाँ , एक रीमा , एक निधि और एक मैं . और इसके इलावा भी तुम्हारी कोई न कोई दीवानी आ hi जाएगी.

अमित : मज़ाक मत करिये आप , मेरा यहाँ सोच सोच कर सर फटा जा रहा है और आप मज़ाक कर रही हैं.

दीपिका : तुम्हारे सोचने से कुछ हो जायेगा क्या ? कोई और होता तो मैंने कुछ सोचती हल निकलने का पर निधि क मामले में मैं कुछ नहीं कर सकती. वो पहले hi इतनी समझदार है क उसे समझने की ज़रूरत नहीं. वैसे भी वो तुम्हे दिल से पति मान बैठी है और तुम्हे पूजती है तो वो कैसे पीछे हैट जाएगी अब ? मीरा भी तो मोहन की दीवानी थी क्या वो पीछे हैट पायी? चाहे साडी उम्र लोगों ने अपनी ने उसे दुत्कारा पर आखिर में उसने अपने सच्चे प्रेम से श्याम को प् hi लिया . निधि भी तुम्हारी मीरा बन चुकी है. अब ये तुम पर है क तुम कब उसे अपनाते हो.

दीपिका ममी की बातें सुन कर मुझे निधि दीदी क बारे में और भी ज्यादा बुरा लगने लगा था क मैं अनजाने में उनके दुःख की वजह बन बैठा हूँ .

दीपिका : अब ज्यादा सोचो मत , अगर निधि का सोचना सही है क ये सब भगवन की मर्ज़ी है तो हल भी वो hi निकालेंगे . इसके इलावा और क्या क्या हुआ इन 2 दिनों में मुझे वो सब बताओ. कुछ न कुछ तो और भी किया होगा तुमने. बिना कोई काण्ड किये तो तुम रहते नहीं .

अमित : पहले आप वडा करिये क नाराज़ नहीं होंगी

दीपिका : तो काण्ड कर hi दिया , नाराज़ तो मैं वैसे भी नहीं हो सकती अपने आरव क पापा क साथ. ाचा चलो वडा अब सब बताओ .

फिर मैंने करिश्मा दीदी क साथ कैसे वो सब हुआ और फिर रॉय वाला किस्सा और मीनल की बात भी बता दी .

दीपिक : तो आखिर बेटी भी माँ क नक़्शे कदम पर चल कर पहुँच hi गयी तुम्हारे बिस्तर तक. पता तो मुझे पहले hi था क ये होगा . जैसे वो तुम्हे देखती थी और वैसे भी तुमने उसकी ज़िन्दगी को नरक से निकला है. कोई भी लड़की होती तो ऐसा बहुत पहले हो चूका होता. खैर , ये रॉय क मामले में तुमने ाचा किया पर ये मीनल की शरत क्या है ? कहीं वो भी तो ….. ज़रा संभल के रहना , मुझे लगता है अब वो तुम्हारे सामने यही शरत रखने वाली है क तुम उसके साथ करो.

अमित : ये आप क्या कह रही हैं ? वो भला ऐसा क्यों करेगी ? वो तो मोहित से प्यार करती है.

दीपिका : मोहित ने क्या किया उसके साथ ???? कोई भी लड़की ये बर्दाश्त नहीं कर सकती क जिसे वो दिलो जान से चाहती है वो किसी और क साथ मज़े करे . और तुमने तो उसे बर्बाद होने से बचाया है तो इस लिए वो तुम्हारा एहसान भी तो चुकाना चाहेगी . तुम पर वो भरोसा कर सकती है और वैसे भी मोहित को लेके उसके मन में जो गुस्सा होगा वो ऐसे hi शांत होगा वर्ण वो मोहित क साथ पहले की तरह नहीं रह पायेगी .

अमित : तो मुझे क्या करना चाहिए? अगर मोहित को ये सब पता चला तो ….

दीपिका : अब सब मैं hi बताऊँ क्या ??? मोहित को न तुम बताने वाले हो न मीनल बताएगी. तो दर कैसा? हाँ उसे एक बार पर hi रोक देना वर्ण मुश्किल हो सकती है. हालाँकि वो रुकने वाली नहीं एक बार तुम्हारा लेने क बाद . तुम्हारे पास चीज़ hi ऐसी है.

अमित : एक बात पूछूं ?

दीपिका : अब पूछ कर सवाल क्यों कर रहे हो? मुझ पर तुम्हारा हक़ नहीं है क्या ?

अमित : आपको बुरा नहीं लगता जब मैं किसी और क साथ …..

दीपिका : नहीं ,, क्यूंकि मैं जानती हूँ क ऐसा नहीं हो सकता क तुम हमेशा मेरे पास रहो. वैसे भी तुमने जितने भी सम्बन्ध अब तक बनाये हैं वो सब दूसरों की ख़ुशी क लिए थे न की अपनी ीचा पूर्ती क लिए न हवस. अगर तुम कहीं गलत होते तो मैं ज़रूर तुम्हे रोकती . पर तुम गलत नहीं हो. तुम तो सुने दिलों में प्यार की बरसात कर रहे हो . उनकी बंजर ज़मीनो पर हल चला रहे हो. अब तुम्हारा हल hi इतना बड़ा है क एक बार जिसे जोट लेता है वो दुबारा खुद hi चली आती है . हे हे हे

अमित : आप फिर शुरू हो गयी .

दीपिका : अब शर्मा क्यों रहे हो , मैंने कुछ गलत तो नहीं कहा . ाचा अब मैं चलती हूँ . तुम भी इन सब से निपट कर तैयार हो जाओ. आज तुम्हे कॉलेज भी तो जाना है. मंजू कह कर गयी थी क यद् से तुम्हे कॉलेज भिजवा दूँ. तुम्हारा रिजल्ट भी आज से मिलना शुरू हो जायेगा.

दीपिका ममी जल्दी से एक छोटी सी किश मेरे होंठों पर करने क बाद नीचे चली गयी और मैं हलकी दुलकी एक्सरसाइज करने क बाद अपने कमरे में चला गया . बाकि सब भी उठ चुके थे और मौसी भी मेरे सामने hi अपने कमरे में चली गयी थी तैयार होने . मैं जल्दी से तैयार हो कर नीचे जाने लगा तो मुझे निधि दीदी का ख्याल आया. मुझे लगा क मुझे उनसे एक बार बात करनी चाहिए . इस लिए मैं उनके कमरे में चला गया . मैं बिना दरवाज़ा खटकाये दरवाज़ा धकेल कर अंदर घुस गया पर सामने का नज़ारा देख मैं उलटे पाऊँ वापिस हो गया . क्यूंकि सामने निधि दीदी पजामी पहने हुए कड़ी अपनी ब्रा की हुक लगा रही थी. उनका चेहरा दूसरी तरफ था इस लिए मैंने उन्हें पीछे से hi देखा पर मेरी धड़कने एक बार फिर से बढ़ गयी. इससे पहले क दीदी कुछ बोलती या कहती मौज भाग कर नीचे आ गया . कहाँ मैं उनसे बात करने गया था और अब मुझसे अनजाने में एक और गलती हो गयी . निधि दीदी मुझसे नाराज़ होंगी . यही सोच सोच मैं चुपचाप बैठा था . बाबा और माँ भी मेरे करीब थे और कॉलेज जाने क बारे में बात कर रहे थे पर मैं हूँ हाँ में hi जवाब दे रहा था . दीपिका ममी किचन में थी जबकि राधा और दिव्या मौसी अभी नीचे नहीं आयी थी .

गौरी : तेरा ध्यान किधर है ? मैं कुछ पूछ रही हूँ और तू हूँ हाँ किये जा रहा है ?

अमित : हाँ ,,, वो ,,, कुछ नहीं माँ वो मैं ,,, कॉलेज क बारे में सोच रहा था . आप क्या पूछ रही थी?

गौरी : मैं पूछ रही हूँ क शाम को वापिस तो आ जायेगा न ? वैसे भी आज शनिवार है कल तो छुट्टी hi है. और अगर आना हुआ तो मंजू को भी लेता आना . अब किसके पास रहने जाने वाला है इस बार तू?

‘ और कहाँ जायेगा भाभी ? मेरे साथ hi जायेगा और मेरे पास hi रहेगा . बाकि सब से मैं बात कर लुंगी . ‘ दिव्या मौसी ने कुर्सी पर बैठते हुए ये बात कही. उनके बगल में hi राधा और निधि दीदी भी आ कर बैठ गयी. निधि दीदी से मेरी नज़रें एक बार मिली , उनकी आँखों में अब भी उदासी थी पर मैं अभी कुछ देर पहले हुई अपनी गलती की वजह से शर्मिंदा था इस लिए मैंने अपनी नज़रें झुका ली.

गौरी : मंजू भी कह रही थी क अब से अमित उसके साथ रहेगा और बड़ी दीदी अलग से कह रही हैं. बोल रही थी क निधि का मन नहीं लगता है घर . अमित रहेगा तो काम से काम घर में उसका मन तो लग जायेगा .

दिव्या : मंजू से मैं बात कर लुंगी , अगर न मणि तो उसे hi कहूँगी क मेरे पास आ जाये . दीदी तो ऐसे hi ज़िद कर रही हैं. क्यों निधि तूने कहा था क्या दीदी से ??

दिव्या मौसी ने जब निधि दीदी से सवाल किया तो वो हड़बड़ा सी गयी. जैसे उन्हें नींद से जगाया हो .

निधि : हह हाँ ,, नहीं तो ,, मतलब ,,, जैसा आपको ठीक लगे . अमित की मर्ज़ी है वो अब हमारे घर आना चाहे या न .

निधि दीदी ने ये बात मेरी तरफ देख कर कही. उनका जवाब सुन कर मैंने उनकी तरफ देखा तो उनकी आँखों में उदासी मुझे शूल की तरह चुभ रही थी

राधा : वो तो आपके कहने की देर है फिर ये माँ की भी नहीं सुनने वाला . आखिर आप इसकी फवौरीते दीदी जो हो.

दिव्या : तू चुप कर , निधि बीटा अब तुझे अपना कण लगाने क लिए जमाई राजा की तलाश कर लेनी चाहिए . कब तक भाई से दिल लगाएगी?

निधि दीदी मौसी की बात सुन कर बस नज़रें झुका कर मायूस सी हो कर बैठ गयी. उनकी इस उदासी को मैं जनता था या दीपिका ममी जो परांठे लेकर किचन से आती हुई दिखी.

दीपिका : चलो पहले नाश्ता कर लो बातें बाद में , और रही बात जमाई राजा की तो मुझे पूरा यकीन है . भगवन ने इसके लिए जो भी लकड़ा चुना होगा वो लाखों में एक होगा . निधि , तुम भगवन पर भरोसा रखना , वही होगा जो तुम चाहोगी .

ममी की ये बात सुन कर मैं हैरान हुआ क वो सब जानती समझती हुई भी ऐसे कह रही हैं . दीपिका ममी ने मुझे देख कर एक स्माइल पास की और चली गयी . जबकि नीडबी दीदी ने फिर से मुझे देखा और इस बार उनके चेहरे पर पहले जैसे उदासी नहीं बल्कि उम्मीद थी .

जैसे तैसे बातों क साथ हमने नाश्ता किया और फिर दिव्या मौसी राधा का सामान मैंने कार में रखा . माँ बाबा ने दोनों को कुछ गिफ्ट दिए कुछ सामान और कुछ पैसे भी. मौसी मन कर रही थी पर बाबा कहाँ मैंने वाले थे. उधर मौसी माँ बाबा से बात कर रही थी इधर मैं सामान निधि दीदी की गाडी में रख रहा था . इस वक़्त यहाँ हम दोनों hi थे . मैं बैग रख कर वापिस अंदर जाने लगा तो दीदी ने मुझे आवाज़ दी.

नीडबी : अब मुझसे बात भी नहीं करोगे ? क्या इतनी बुरी बन गयी हूँ मैं?

अमित : ये आप क्या कह रही हैं? मैं भला क्यों नाराज़ होने लगा आप से? मुझे तो लगा आप नाराज़ हैं , इसी लिए तो रत आपने खाना भी नहीं खाया .

निधि : मैं नाराज़ नहीं हूँ. हाँ , दुखी ज़रूर हूँ. शायद मेरी किस्मत में अधूरे सपने hi लिखे हैं. एनीवे , बेस्ट ऑफ़ कुछ फॉर योर फ्यूचर. बस इतना hi कहूँगी की मुझसे कभी नाराज़ मत होना . थोड़ी सी जगह तो अपने दिल में मुझे दे hi सकते हो न . ज्यादा कुछ नहीं तो दोस्त समझ कर . मैं वडा करती हूँ तुम्हे परेशां नहीं करुँगी .

निधि दीदी की ऑंखें बात करते करते भर आयी थी. पर वो खुद पर काबू किये हुए थी और मुस्कुराने की कोशिश कर रही थी. उनको देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उन्हें अपनी बाँहों में भर लिया

अमित : ये आप कैसी बातें कर रही हैं दीदी , आप हमेशा मेरे दिल मेरी आत्मा में रहेंगी. मैं आपसे नाराज़ होने क सोच भी नहीं सकता और न hi आपको दुखी देख सकता हूँ . प्लीज आप ऐसे रोइये मत.

नीडबी : धत्त , रो खुद रहे हो और मुझे कह रहे हो. चल अब बस कर , मौसी आती होगी. और हाँ मैं तुमसे नाराज़ नहीं हूँ. बल्कि खुश हूँ क तुमने मुझसे सचाई पहले hi बता दी. इसमें तुम्हारी गलती तो है नहीं.

अमित : देखना दीदी आप को बहुत hi अच् राज कुमार सा लड़का मिलेगा जो आपको बहुत सारा प्यार देगा जिससे आप मुझे भूल जाएँगी.

निधि : नकली मुस्कान क साथ ) देखते हैं.

निधि ( मन में ) ऐसा कभी भी नहीं होगा अमित , मेरे दिल में तुम धड़कन बन कर समां चुके हो , जहाँ से अब सिर्फ मौत hi मुझे तुमसे जुड़ा कर सकती है.

अभी मैं कोई और बात करता इतने में दिव्या मौसी और राधा आ गए. उनके साथ बाबा और दीपिका ममी भी थे.

दिव्या : चलो चलो गाड़ी में बैठो , तुम दोनों कॉलेज भी जाना है फिर .

अमित : आप जाओ मौसी , मैं बाइक पर अत हूँ. वापिस भी तो आना है बाद में .

निधि : बैठ जाओ , मैं ले आउंगी न तुम्हे .

अमित : नहीं दीदी , मेरी वजह से आप परेशां होंगी .

विजय : हाँ निधि बीटा , तुम चिंता मत करो , ये कौन सा पहली बार जा रहा है.

राधा : माँ मैं भी अमित क साथ hi आ जाती हूँ बाइक पर. जाना तो कॉलेज hi है. इससे ये भी अकेला नहीं रहेगा .

दिव्या : हाँ , तुम ठीक कहती हो. ाचा तुम दोनों बाइक पर आओ और सीधा घर आना. और बाइक ज़रा ध्यान से चलना.

निधि दीदी दिव्या मौसी को साथ लिए चल दी और इधर मैंने भी बाइक निकल ली. मेरा बैग राधा ने अपनी गॉड में रखा और मेरी कमर में हाथ डाले पीछे बैठ गयी . फिर हम चल दिए कॉलेज की तरफ.

अमित : तुम्हे क्या ज़रूरत थी मेरे साथ आने की. आराम से गाड़ी में जाती.

राधा : ज़रूरत कैसे नहीं थी ? मैं तुम्हे अकेला नहीं छोड़ सकती . वैसे भी जाना तो साथ में hi था न कॉलेज .

राधा की बात का अब मैं क्या जवाब देता भला. कुछ देर हम खामोश रहे तो राधा इस बार बोली.

राधा : मैंने दीदी से बात की थी वो नाराज़ नहीं हैं तुमसे . कह रही थी क वो भगवन से नाराज़ हैं. अब भला इसमें भगवन कहाँ से आ गए. मुझे तो कुछ समझ में नहीं आया पर जो भी हो अब तुम्हे चिंता करने की ज़रूरत नहीं है.

अमित : हाँ अभी बात हुई थी मेरी उनसे. उनकी भगवन से नाराज़गी , दोनों की आपस की बात है . मुझे तो इतना पता है क दीदी मेरी वजह से दुखी हैं. चाहे वो मुझसे नाराज़ नहीं हैं पर उनके दुःख की वजह मैं हूँ.

राधा : उनकी ख़ुशी की वजह भी तुम hi हो. मैंने देखा है क वो तुम्हारे साथ कितनी खुश रहती हैं. अब अगर उन्हें खुश देखना चाहते हो तो वो करो जिनसे उन्हें ाचा लगे . देखना जब वो खुश होंगी तो तुम्हे भी ाचा लगेगा .

अब राधा को मैं क्या बताता क दीदी क्या चाहती हैं . जो वो चाहती हैं वो मेरे लिए कर पाना पॉसिबल hi नहीं है. ऐसे hi बातें करते हुए हम कॉलेज पहुँच गए . पार्किंग में बाइक लगा कर हम अंदर गए तो बहुत hi काम स्टूडेंट्स ए हुए थे . ऐसा लग रहा था जैसे छुट्टी हो . हमारी टीम का कोई भी अभी तक हमें नज़र नहीं आया था . हम चलते चलते कैंटीन की तरफ जाने लगे तो रीमा दौड़ती हुई हमारे पास आयी. सफ़ेद चूड़ीदार पजामी क साथ सफ़ेद सिल्की कमीज में खुले घुंघराले हलके भूरे बाल और वो ग्रे ऑंखें. मैं रीमा की खूबसूरती में खो सा गया . उसके चेहरे पर मुस्कान थी और मोतियों जैसे दांत चमक रहे थे . दिल तो किया क अभी रीमा को गले से लगा कर उसे ढेर सारा प्यार करूँ पर राधा की वजह से मजबूर था . रीमा भी मेरी हालत समझ रही थी , राधा को गले लगते हुए उसने मेरी आँखों में देख कर मुझे चिढ़ाते हुए मुँह बनाया. मनो कह रही हो क कुछ नहीं मिलने वाला .

राधा : कैसी हो रीमा ? तुम अकेली ? बाकि सब कहाँ हैं?

रीमा : मैं ठीक हूँ , तुम अपना सुनाओ. बाकि अभी तक तो कोई नहीं आया , मैं कब से बोर हो रही थी

राधा : तुम इतनी जल्दी कैसे आ गयी ?

रीमा : वो बुआ क साथ आ गयी थी . मैं उनके घर hi रह रही हूँ न . Hi , तुम कैसे हो ?

अमित : मैं भी ाचा हूँ. बुआ कैसी हैं?

रीमा : वो भी अछि हैं. चलो कैंटीन में बैठते हैं.

राधा : क्यों? क्लासेज में नहीं जाना ?

रीमा : फायदा तो है नहीं , आज पड़े नहीं होने वाली . बस हमारे पेपर हमें दिखाए जायेंगे . और हमारा पहला लेक्चर फ्री होने वाला है. क्यूंकि हमारे सर नहीं आये .

अमित : मुझे भी जाकर देख लेना चाहिए , कहीं फिर से फास न जॉन .

राधा : हाँ , तुम जाओ , कहीं वो मैडम तुम्हारे पीछे न पद जाये .

इतने में घंटी बजी और मैं भाग कर अपने बिलोक्सी में चला गया . मोहित अभी तक नज़र नहीं आया था . मैं क्लास में पहुंचा तो यहाँ भी स्टूडेंट्स बहुत hi काम थे . आधे से भी काम . खैर लेक्चर लेने कोई आया नहीं तो मैं वापिस चला गया . जाकर देखा तो मीनल तब तक आ चुकी थी और वो रीमा राधा क साथी बैठी थी. मुझे लगा मोहित भी आ गया होगा . क्यूंकि दोनों आते तो साथ hi थे .

अमित : कैसी हो मीनल ?

मीनल : मैं अछि हूँ तुम सुनाओ

अमित : मैं भी ाचा हूँ , तुम अकेली आयी हो ? मोहित नज़र नहीं आ रहा .

मीनल : हाँ आज मैं उसके साथ नहीं आयी. मेरा कजिन मुझे ड्राप करने आया था. वैसे तुम्हारा दोस्त भी अत hi होगा . मैंने देखा तो उसे गाडी में पीछे आते हुए .

मीनल की बात अभी ख़तम भी नहीं हुई थी क मोहित भी कैंटीन में आ गया. उसके चेहरे पर स्माइल थी और उसने गरम जोशी क साथ मुझसे हाथ मिलाया और गले मिला.

मोहित : कैसा है भाई?

अमित : मैं ठीक हूँ , तू सुना , घर पर सब कैसे हैं?

मोहित : सब ठीक हैं माँ और दीदी तुम्हे यद् कर रही थी.

मोहित बात तो मुझसे कर रहा था पर उसका ध्यान मीनल पर hi था . मीनल भी मोहित को देख रही थी. आखिर कितने दिनों बाद तो वो आमने सामने हुए थे.

मोहित : कैसी हो मीनल ?

मीनल : ठीक हूँ

मीनल ने संक्षिप्त सा जवाब दिया , उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे मनो वो बात करना न चाहती हो. मैं जनता था वो मोहित को तड़पना चाहती है जैसा क उसने कहा था. पर अब मुझे इस मामले से दूर रहने की हिदायत दी थी उसने . इस लिए मैं उन दोनों को इग्नोर कर रहा था .

‘ ोये तुम सब इधर बैठे हो , मैं क्लास में ढूंढ रही थी . चलो ाचा हुआ यहीं मिल गए वैसे भी लेक्चर तो फ्री है. और सुनाओ कैसे हो सब ? ोये मजनू , क्या हुआ ? लैला तेरी तरफ देख भी नहीं रही. कोई झगड़ा तो नहीं हो गया ?’

ये कल्पना थी जो आते hi सबको लपेट ते हुए राधा रीमा से गले मिलने क बाद मेरे साथ बैठ गयी.

कल्पना : बात क्या है ? दोनों में से कोई बोल क्यों नहीं रहा ? कोई सीरियस मटर है क्या ?

मीनल और मोहित को चुप देख कर कल्पना ने मुझसे वजह जननी चाही.

अमित : अब मैं क्या बोलूं , खुद hi पूछ लो.

मीनल : कोई ज़रूरत नहीं किसी को हमारे मटर में पड़ने की. अगर कोई इस बारे में बोलै या बीच बचाव करने की कोशिश की तो मैं उससे बात नहीं करुँगी . खुद को पता नहीं क्या समझ क रखा है , कुछ भी करोगे और कोई कुछ नहीं कहेगा ?

मोहित : मीनल सॉरी ……

मीनल : मैं तुमसे बात नहीं कर रही , मैं अपने दोस्तों से बात कर रही हूँ. जब मेरा गुस्सा ठंडा होगा मैं तब सोचूंगी तुमसे बात करनी है क नहीं. तब तक रुक अपना मुँह बंद रखो

मीनल ने गुस्से में ये सब कहा तो मोहित बेचारा सर झुका कर बैठ गया . मगर रीमा राधा और कल्पना तीनो मीनल क तेवर देख रही थी और इशारों में मुझसे पूछ रही थी क ये सब क्या है .

कल्पना : ोये ये सब चल क्या रहा है ? कोई हमें भी तो बताओ ? तुम दोनों लैला मजनू आखिर किस बात पर झगड़ रहे हो ?

मीनल : मैं उस बारे में बात नहीं करना चाहती . अगर तुम्हे ये सब बातें करनी है तो मैं चलती हूँ.

कल्पना : अरे अरे ,, बैठ मेरी जान , तू न गुस्से में अछि नहीं लगती. ज़रूर इसी ने कुछ गड़बड़ की होगी. ाचा है , इसे सजा मिलनी भी चाहिए . मेरी तरफ से भी दो लगा देना और अमित की तरफ से भी. दोस्त का एक्सीडेंट हो गया और ये इतना बिजी था क पता लेने भी न जा सका.

मीनल : एक्सीडेंट ? किसका ?

कल्पना : तुम्हे नहीं पता ? अमित को और अंकल को चोट लगी थी. और ये महाराज इतने बिजी थे क पहुँच hi नहीं पाए . हाँ वो बात अलग है क इनकी फॅमिली क बाकि सब मेंबर पहुँच गए थे .

मीनल : ओह , हाँ , मुझे बताया था अमित ने.

अमित : वो सब छोडो यार तुम भी क्या बातें ले के बैठ गयी. ाचा वो तुम्हारे कजिन की एडमिशन का क्या बना ? किस कॉलेज में एडमिशन ले रहा है ?

मैंने मीनल को शांत करने क लिए उसके कजिन की बात छेड़ ली . और इसका असर हुआ भी. उसके चेहरे क भाव पल में बदल गए

मीनल : हाँ वो मुझे ड्राप कर क कॉलेज देखने hi गया है अपने लिए. जो ाचा लगेगा उसमे चला जायेगा. तुम्हे तो पता hi है वो क्या कह रहा था .

कल्पना : अब ये कजिन बीच में कहाँ से आ गया ? और अमित को कैसे पता ? इसका मतलब ये मिल चूका है ? पर कहाँ ?

मीनल : वो अमित कल हमारे घर की तरफ से जा रहा था न तो वहीँ बहार hi मिल गया था . बस वहीँ ये मिला था माँ से और मेरे कजिन संजय से . तुम दोनों की तरह वो भी स्पोर्ट्समैन है . बॉक्सिंग का प्लेयर है.

कल्पना : ये तो अछि बात है. फिर उसे यहीं क्यों नहीं ले आयी?

मीनल : दरअसल वो नहीं चाहता क हम दोनों एक hi कॉलेज में पढ़ें.

कल्पना : वो क्यों भला ?

मीनल : यार वो दिल्ली से है और थोड़ा आज़ादी पसंद भी. एक hi कॉलेज में रहेंगे तो उसे दर है क मैं उसकी बातें घर पर बता दूंगी. बस इसी लिए दूसरे कॉलेज में जाना चाहता है.

कल्पना : है है है , यानि क कक्तव हो तुम उसके हिसाब से . बढ़िया है , वैसे तुम्हारा भी फायदा है. तुम दोनों भी खुल कर अपनी चोंच लड़ा सकते हो .

मोहित क चेहरे पर हलकी सी स्माइल आयी कल्पना की बात से पर मीनल ने उसे भी ठप्प कर दिया

मीनल : और कोई काम नहीं है क्या मुझे ? ये तो बड़े आदमी हैं , पैसे क डैम पर कुछ भी कर लेंगे . पर मुझे तो जवाब देना पड़ेगा न. आज से बस स्टडी पर hi ध्यान दूंगी मैं तो.

कल्पना : सच में ??? , , फिर तो बीटा आप भी अब अपनी किताबों पर थोड़ी मेहरबानी कर hi दीजिये . वर्ण चन्दर्कांता जी आपको वैसे भी बहार भेज hi देंगी .



ऐसे hi बातों में समय कह निकला पता hi न चला और अगले लेक्चर की बेल्ल बज गयी . ये लेक्चर मंजू बुआ का था इस लिए मैं कल्पना और मोहित क साथ लेक्चर अटेंड करने क लिए चल दिया. राधा रीमा और मीनल भी अपनी क्लास क लिए चल दिए.
 
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‘ मर बलजीत राइ कहाँ हैं ? ‘

सुबह होते hi पुलिस की चार गाड़ियां बलजीत राइ क महल नुमा आलिशान घर में घुस चुकी थी. गेट पर खड़े रहने वाले बॉडीगार्ड जो बंदूकें हाथ में रखते थे अब वो भी हाथ ऊपर कर क खड़े हो गए थे पुलिस क डंडे क दर से . पुलिस वाले दौड़ते हुए घर क अंदर घुसे और लाघबाहग सभी कमरों में बलजीत राइ को खोजते हुए इधर उधर भाग रहे थे . इस वक़्त घर में शीना उसकी माँ मेघा क इलावा घर क नौकर hi थे. शीना हॉल में hi थी , कॉलेज जाने क लिए वो रेडी hi हुई थी क पुलिस वाले घर में ऐसे ऐसे घुस आये जैसे वो किसी अपराधी को पकड़ने क लिए ए हो . शीना तो उस वक़्त हैरान हुई जब उसके सामने ऋतू सिंह यूनिफार्म आ कर कड़ी हो गयी. ऋतू क चेहरे पर गुस्सा और सख्ती क भाव देखते hi शीना समझ गयी क वो उसके पापा को लेकर hi जाएगी. जिस तरह ऋतू ने बिना किसी लग लपेट क सीधा सवाल किया था शीना समझ गयी क वो सिर्फ एक अफसर को हैसियत से यहाँ आयी है

शीना : पापा घर पर नहीं हैं , पर आप उन्हें किस मामले में खोज रही हैं? वो एक बिजनेसमैन हैं कोई अपराधी तो नहीं

ऋतू : किसी पर जानलेवा हमला करवाया है उन्होंने और ये कोई छोटा अपराध नहीं. हमारे पास उनके खिलाफ पुख्ता सबूत और गवाह भी हैं. इस लिए बेहतर होगा क हमें उनका पता दो. अगर छुपाने की कोशिश की तो ये ाचा नहीं होगा .

हालाँकि ऋतू शीना से भी प्यार करती थी पर उसके बाप पर गुस्से की वजह से वो थोड़ा रूडली बात कर रही थी या फिर ड्यूटी पर होने की वजह से. शीना भी समझ गयी थी क ज़रूर ये मामला अमित से जुड़ा है मगर उसे ऋतू का ऐसे बात करना भी बहुत खाला.

शीना : मैं क्यों छुपाउंगी बुआ ? सॉरी ,,, मैडम , वो कल से hi घर रही आये . और मुझे सच में नहीं पता क वो कहाँ हैं .

‘ हाउ डरे यू एंटर इन माय हाउस? तुम लोगों की हिम्मत कैसे हुई यहाँ आने की? क्या तुम नहीं जानते क ये किसका घर है? तुम्हे अंदर आने किसने दिया ? गार्ड !!!! गार्ड!!!! बहार निकालो इन सबको ‘

ये मेघा थी जो अभी अभी अपने कमरे से बहार निकली थी और अपने सामने पुलिस वालों को कुत्तों की तरह तलाशी लेते देख आग बबूला हो गयी . रोज़ की तरह कल रत भी मेघा नाईट क्लब से मौज मस्ती कर क देर रत वापिस आयी थी. इस लिए देर से hi जगी और कपडे अभी भी ऐसे थे क उसे खुद होश नहीं था अपनी हालत का. जबकि सब मर्दों की नज़र उसके hi अंगों पर थी. बिखरे बाल और आगे से खुली हुई निघ्त्य उसके आधे से ज्यादा स्तनों को दिखा रहे थे और जांघों तक hi उसका तन ढाका था नीचे से नंगी टंगे. मगर गुस्से में फुंकरति वो ऐसे पुलिस वालों पर दहाड़ रही थी जैसे ये घर किसी बड़े नेता को हो जहाँ पुलिस वाले घुसने की सोच भी नहीं सकते .

ऋतू : मंद योर लैंग्वेज मैडम , हम यहाँ ड्यूटी कर रहे हैं. और अगर हमें ड्यूटी करने से आपने रोका तो आपको भी अंदर कर देंगे . शायद आप खुद को कानून से भी ऊपर समझती हैं. पर आज आपकी साडी गलफहमी दूर हो जाएगी अगर एक शब्द भी और बोलै तो. मैं आपके हस्बैंड को अरेस्ट करने आयी हूँ और ये रहा अरेस्ट वारंट .

ऋतू ने सख्त लहजे में बात करते हुए साथ खड़े इंस्पेक्टर को इशारा किया जिसके हाथ में वारंट था और वो आगे बढ़ा मेघा की तरफ पर शीना ने उसके हाथ से वो वारंट लेकर एक नज़र देखा .

मेघा : ओह्ह्ह तो तुम हो ,,, बदला लेने आयी हो ,,,, हाँ लोगी क्यों नहीं ,, इतनी बड़ी अफसर हो तो अपनी वर्दी का रोअब तो दिखाओगी hi. पर तुमने बहुत बड़ी गलती कर दी. तुम्हारी ये वर्दी अब मैं उतरवा क रहूंगी. उस मंजू को और तुम्हे , दोनों को ऐसा मज़ा चखाउंगी …….

शीना : मायआ ,,,, चुप हो जाइये . ी ऍम सॉरी अफसर प्लीज आप अपना काम कीजिये .

मेघा को बीच में hi शीना ने खामोश करवा दिया . एक तो वो गलत बोल रही थी दूसरा ऋतू क खींचते जबड़े देख कर वो समझ गयी थी क वो उसकी माँ को भी नहीं छोड़ेगी. हालाँकि शीना को अब मेघा से माँ बेटी वाला लगाव तो रह नहीं गया था पर फिर भी वो नहीं चाहती थी क उसकी माँ क साथ पुलिस कोई सख्ती करे . ऋतू ने भी अपना गुस्सा किसी तरह काबू किया .

ऋतू : ये खाखी वर्दी किसी क बाप की जागीर नहीं और न hi किसी क तलवे चाट कर या बेईमानी से मिली है . इसकी कीमत तुम जैसे लोगों को क्या पता होगी जो खुद दूसरों की म्हणत की कमाई पर ऐश कर रहे हो. वो मंजू hi थी जो तुम लोगों क जुल्म चुपचाप सेहती रही. अब मैं तुम लोगों को दिखाउंगी क किसी मासूम क साथ गलत करने का अंजाम क्या होता है. इंस्पेक्टर ,,, अपने कुछ आदमी यहीं छोड़ दो . और बाकि सब चलो , देखें ज़रा किस बिल में छिपा बैठा है बलजीत राइ.

ऋतू ने बलजीत राइ का नाम दांत पीसते हुए लिया . मेघा उसकी आँखों में गुस्सा देख कर और उसकी बातें सुन कर अंदर से दर भी रही थी पर चेहरे पर गुस्से क भाव hi दिखा रही थी . ऋतू फ़ौरन अपनी टीम क साथ निकल गयी . वो सीधा अब D.P. इंटरनेशनल क मैं ऑफिस मैं गयी. बलजीत राइ इसी जगह था. ये ईमारत चार मंज़िला थी जहाँ कई सरे ऑफिस थे जो अलग अलग काम और ब्रांच देखते थे . पुलिस वालों ने जब रिसेप्शन से बलजीत राइ क ऑफिस क बारे में पुछा तो उन लोगों ने तीसरी मंज़िल पर बताया. पर साथ hi बलजीत राइ को भी खबर कर दी. वैसे तो उसे पहले hi खबर मिल चुकी थी क पुलिस आ रही है और वो तैयार था .

पुलिस जब तीसरी मंज़िल पर पहुंची तो बलजीत राइ वहां नहीं था . ऋतू का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया. कुछ पुलिस वाले नीचे गेट पर hi खड़े थे और कुछ उसके साथ थे. ऋतू में सबको बलजीत राइ को ढूंढने को कहा . एक एक ऑफिस में छे क करते करते आखिर एक घंटा ऐसे hi निकल गया . लास्ट में जब ऋतू बलजीत राइ तक पहुंची तो वो आराम से अपनी घूमने वाली चेयर बैठा हाथ में पेग पकडे घूम रहा था और मुस्कुरा रहा था .

ऋतू : तो यहाँ छिपे बैठे हो तुम . मैंने कहा था न अपनी हरकतों से बाज़ आ जाओ और अमित या उसकी फॅमिली की तरफ आँख उठा कर भी मत देखना पर तुम नहीं माने . अब मैं तुम्हे बताती हूँ क पुलिस क्या कर सकती है.

ऋतू गुस्से में बलजीत राइ को देखती हुई इंस्पेक्टर को इशारा करती है क वो उसे हथकड़ी लगाए . और वो इंस्पेक्टर आगे बढ़ता है

बलजीत राइ : इतनी जल्दी भी क्या है ऋतू जी , आज पहली बार मेरे ऑफिस में आयी हो तो कुछ ठंडा ले लो . गरम तो तुम पहले hi बहुत हो

ये बात बलजीत राइ ने ऋतू की बॉडी को देखते हुए बड़े hi घटिया तरीके से कही और कमीने हंसी हसने लगा .

ऋतू : लगता है अभी तक तुम्हारे दिमाग से नशा उतरा नहीं. जब तुम्हे यहाँ से घसीट कर पुलिस स्टेशन लेके जायेंगे तब देखूंगी क ये हंसी ऐसे hi रहती बैंक नहीं. और हाँ ,,, हमारी मेहमान नवाज़ी में कुछ ठंडा नहीं मिलने वाला .

बलजीत राइ : हम भी गरम क hi शौक़ीन हैं और तुमसे गरम और क्या होगा .

ऋतू बलजीत राइ की बातों का मतलब समझ रही थी और उसका गुस्सा आसमान छू रहा था . इंस्पेक्टर ने जब बलजीत राइ को हथकड़ी लगाने की कोशिश की तो पीछे से एक आवाज़ आयी .

‘ ठहरिये इंस्पेक्टर,,,, आप उन्हें गिरफतार नहीं कर सकते . ये लीजिये इनकी जमानत क कागज़ात. ‘

ऋतू क पीछे से 5 आदमी कला कोट पहने वकीलों वाली वेशभूषा में ऑफिस में आ गए . उनके हाथ में कागज़ात थे जो उन्होंने इंस्पेक्टर क हाथ में पकड़ा दिए . इंस्पेक्टर भी वो कागज़ चेक करने लगा और फिर ऋतू को वो कागज़ दिखने लगा . ये वकील कोई और नहीं सूरज बजाज था जो पहले पवन क साथ काम करता था और फिर बलजीत राइ क साथ शामिल हो गया . उसके साथ hi शहर क 2 और बड़े वकील भी थे .

ऋतू तो जमानत क कागज़ देख कर hi आगबबूला हो गयी . क्यूंकि आज सैटरडे था , आज अदालत बंद थी इसी लिए तो उसने आज का दिन चुना था बलजीत राइ को अरेस्ट करने क लिए क उसे जन्नत न मिले मंडे से पहले और वो उसकी अचे से खातिरदारी कर सके . पर ज़मानत क कागज़ात देख कर उसका दिमाग ख़राब हो रहा था. आखिर भ्रष्ट सिस्टम ने पैसों क आगे माथा तक दिया था .

ऋतू : हाउ !!!!!! तुम्हे आज ज़मानत कैसे मिल गयी???

सूरज : कागज़ ज़रा ध्यान से देखिये मैडम , खुद जज साहब ने ये आर्डर दिए हैं. सैटरडे को कोर्ट बंद होते हैं जज नहीं .

बलजीत राइ : अब तो खातिरदारी का मौका डौगी मुझे ??? मेरे घर से भी तुम ऐसे hi चली आयी . सुना है बहुत तेवर दिखा रही थी. अब समझ आ गया क किसकी क्या औकात है?? मैंने तुम्हे समझाया था क मेरे मामलों में मत पदों पर लगता है तुम कुछ ज्यादा hi ज़िद्दी हो. तुमने अपनी चल चल ली अब देख मैं क्या करता हूँ. तूने क्या समझा था क तू क्या कर रही है मुझे कुछ खबर नहीं? तेरी हर एक बात तेरे hi डिपार्टमेंट क लोग मुझे पहले hi बता देते हैं. और तू मुझे गिरफ्तार करने आयी थी , किस बिनाह पर ??? जाओ जाकर पहले अपने गवाह देख लो. बलजीत राइ क खिलाफ उठती आवाज़ खामोश कर दी जाती है.

बलजीत राइ की बातों में पूरी सचाई थी और उसकी पैसे की ताकत का अब जलवा खुद उसने देख hi लिया था क आज छुट्टी होते हुए भी जमानत मिल गयी थी उसे. पर आखिर में जो उसने कहा वो सुन कर ऋतू परेशां हो गयी. ये सीधी सीधी चेतावनी थी क ऋतू क पास जो गवाह हैं उन्हें वो खामोश कर देगा .

ऋतू : बहुत घमंड है न तुम्हे, एक न एक दिन तुम्हारा ये घमंड ज़रूर टूटेगा. उस दिन देखूंगी तुम्हारी हालत क्या होती है.

ऋतू इतना कह कर गुस्से से वहां निकल गयी . इधर बलजीत राइ ने उन वकीलों को चेक देकर रवाना किया और अब सिर्फ सूरज बजाज hi उसके साथ बैठा था

बलजीत राइ : शुक्र है तू टाइम पर पहुँच गया वर्ण थोड़ी देर और होती तो वो मुझे अरेस्ट कर hi लेती.

सूरज : अरे , तो क्या हो जाता. जमानत तो मिल hi गयी थी.

बलजीत राइ : बात अरेस्ट होने की नहीं , मेरी जो इंसल्ट होती वो ?? उसका क्या?? . जान से मर देता उस साली सप को.

सूरज : शांत भाई शांत ,, तू फिर से शुरू हो गया . अब पहले वाला बल्ली नहीं है , बलजीत राइ है. तेरे पास पैसे की ताकत है , अब उससे ऊपर कुछ है क्या ? ठन्डे दिमाग से सोचा कर. वैसे ये मामला है क्या ? तूने तो सब काम छोड़ दिए थे अब फिर शुरू हो गया . उन गवाहों का कुछ किया या नहीं ?

बलजीत राइ : उस सेल को तो हमेशा क लिए चुप करवा दिया है. मेरे खिलाफ गवाही देने चला था . जनता नहीं था क्या मेरे बारे में ,, खैर छोड़ . ये मामला ज़रा पर्सनल है. तू छोड़ उस बात को.

सूरज : अछि बात है , वैसे मैं यही कहूंगा क सीधा सीधा कोई गलत काम मत करो. उसके तेवर देख कर लग रहा है क ये इस मामले को पर्सनल ले रही है

बलजीत राइ : पर्सनल तो लेगी hi , मंजू की खास दोस्त है ये. और उस लड़के क साथ भी कुछ कनेक्शन है इसका. ंद की मौत क पीछे भी इसका hi हाथ है. इसे तो मैं छोडूंगा नहीं.

सूरज : क्याआ ??? ंद क पीछे ये है ?? और मंजू की सहेली ??? इसका मतलब तुझे मंजू का पता चल गया ???

बलजीत राइ : हाँ तो , यहीं है वो

सूरज : और ये किस लड़के की बात कर रहे हो तुम ?

बलजीत राइ : वो पवन का साला था न बड़ा , विजय ,, उसी का बीटा है . मुझे लगा था क मंजू फिर से उन लोगों क साथ मिलने लगी है तो सोचा था उन्हें ज़रा अकाल दे दूँ. पर साला सब उल्टा हो गया और अब ये यहाँ तक आ गयी है . खाई अब तो मैं उस मामले से पीछे हैट रहा हूँ. मेरी बेटी उसे दोस्त मानती है और उसकी वजह से मुझे छोड़ने को तैयार हो गयी थी. इससे पहले क बात बिगड़े मैंने बात को ख़तम करना hi ठीक समझा. मंजू तो वैसे hi कुछ लेने से रही और इसे मैं देख लूंगा.

सूरज : विजय इतने सैलून बाद कैसे सामने आ गया ? और मंजू भी उससे मिल रही है. खून ये लोग मिलकर कोई अड़चन न कड़ी कर दें. तुम जानते हो न क मंजू इस कंपनी की 50 % की मालिक है .

बलजीत राइ : आज ये बात ज़ुबान पर आयी है दुबारा न ए . उस वसीयत को देखा hi किसने है? जो चीज़ है hi नहीं उसकी बात क्यों करना. छोडो सब , लो पेग लगाओ.

सूरज ने बलजीत राइ क बदलते तेवर देख चुप चाप पेग थाम लिया . वैसे भी वो जनता था क उसकी बात को काटना उसके हिट में नहीं है इस लिए ख़ामोशी hi अछि है.

ऑफिस से ऋतू तेज़ी से वापिस हेडक्वार्टर की तरफ निकली , रस्ते में hi उसने फ़ोन पर जानकारी लेने की कोशिश की तो पता चला बिल्ला पर साथ बंद हवालातियों ने हमला कर दिया है जिससे वो गंभीर रूप से ज़ख़्मी हो गया है और उसे हॉस्पिटल ले जाया जा रहा है . ये सुनते hi ऋतू गुस्से में गलियां देने लगी उस पुलिस वाले को साडी जानकारी दे रहा था . हेडक्वार्टर जाने की बजाये अब वो सीधा हॉस्पिटल की तरफ चल दी जहाँ बिल्ला को ले जाया गया था . ऋतू क पहुँचने से पहले hi डॉ ने उसे मृत घोषित कर दिया . ये सुनते hi ऋतू ने ज़ोर से दीवार में मुक्का मर दिया . उसे दर्द तो बहुत हुआ पर जो दर्द उसके दिल में हो रहा था उसके सामने तो ये कुछ नहीं था .

ऋतू : आखिर ये हुआ कैसे ? क्या कर रहे थे तुम लोग? किसने किया ये ??

‘ मैडम वो ,, वो बिल्ला क साथ जो 3 लोग बंद थे वो सब आपस में झगड़ रहे थे और इसी में बिल्ला को भी चोट लग गयी ‘ एक पुलिस वाले ने डरते डरते बात बताई .

ऋतू : गधे हो तुम लोग ???? किसने कहा था बिल्ला को किसी क साथ बंद करने को ?? मैंने साफ़ कहा था क उसे सब से अलग रखा जाये . फिर उसके साथ उन बाकि बदमाशों को क्यों बंद किया गया था ??? ये कोई झगड़ा नहीं , it’s ा प्लांड मर्डर . कौन था वो ?? किसके आर्डर पर बिल्ला क साथ उन लोगों को बंद किया गया ??

‘ मैडम वो ,, श ,, श ,, शुक्ल जी ने बंद किये थे . वो मुन्ना और उसके साथी जो 6 महीने से भगोड़े थे लूटपाट और हत्या क जुर्म क मामलों में . कल रत हाथे चढ़ गए थे उनके . तो सीधा लॉकअप में लेकर बंद कर दिया . बाकि लॉकअप भरे हुए थे इस लिए बिल्ला क साथ बंद करना पड़ा ‘

ऋतू : तो शुक्ल है वो काली भेद ,,, जब अपने hi लोग गद्दार हो तो इंसाफ किसी को क्या ख़ाक मिलेगा . खान है शुक्ल ? उसे अभी क अभी मेरे ऑफिस में भेजो .

ऋतू गुस्से से पेअर पटकती हुई वहां से निकल गयी . उसके सरे मंसूबों पर पानी फिर चूका था . बिल्ला hi वो कड़ी थी जो बलजीत राइ को पकड़ने में हम थी और उसी को ख़तम कर दिया गया . उसके साथ पकडे बाकि बाकि साथियों को कोर्ट में उसके वकील हालत साबित कर hi देते ऐसे में डिपार्टमेंट की बदनामी अलग से होती. फ़िलहाल बलजीत राइ इस मामले से बच निकला था और ऋतू निराश थी.

‘ लगता है अभी भी सब नई ईयर सेलिब्रेट करने में बिजी हैं. अन्य वे , हैप्पी नई ईयर तो आल ऑफ़ यू . आज मैं आप को आप लोगों को अंसवेशीट्स दिखने वाली हूँ. ताकि आपको भी पता चले आपने एक्साम्स कैसे दिए थे. और अपनी गलतियों को देख कर उनके सुधर करो. ‘ मंजू बुआ ने क्लास में आते hi अपने साथ लती अंसवेरशीट्स खोल कर अपने टेबल पर रख दी और सबको अपने चोर परिचित अंदाज़ में बात बताने लगी . इससे पहले , क्लास रूम में आते हुए उनकी नज़र मेरी नज़र से मिली तो मैंने उन्हें आँखों से hi नमस्ते का इशारा किया . आज दो दिन बाद बुआ को देख रहा था और बुआ भी मुझे देख कर खुश हो गयी जो उनकी मुस्कान क फैलने से पता चल रहा था . मंजू बुआ आज पिली साडी में थी जिसमे उनका उजाला रंग और भी दमक रहा था . खैर स्टूडेंट्स तो काम hi थे और यहाँ हमारे मोहित महाराज भी नहीं आये थे. बुआ ने सबको अंसवेरशीट्स दी और उन्हें चेक करने को कहा . कल्पना और मैं साथ में hi बैठ कर अपनी अपनी अंसवेरशीट्स देख रहे थे . कल्पना को 100 में से 92 मिले थे और मुझे 97 .

कल्पना : तुम पड़ते कब हो? वैसे तो क्लास में भी नहीं आते और यहाँ इतने मार्क्स. लगता है बुआ भतीजे का खास ख्याल रखती हैं.

अमित : ऐसा कुछ नहीं है , वो बस मुझे अचे से पादरी हैं.

कालापन : तो मैंने क्या कुछ गलत कहा , मैं भी तो वो hi कह रही थी.

मोहित की अंसवेरशीट्स भी मैंने ले ली थी जिसके मार्क्स 84 थे. अपनी अपनी मार्कशीट्स देखने क बाद सब ने वापिस कर दी. फिर मैडम ने सबसे ु के मार्क्स पूछे और उनकी मिस्टेक्स क बारे में डिसकस किया . मेरी बरी आने पर उन्होंने बस इतना hi कहा क अगली बार और म्हणत करना . बुआ का लेक्चर हमेशा ऐसा hi लगता था क जैसे ये छोटा लेक्चर होता है बाकि सब क मुकाबले. पता hi नहीं चलता क कब ख़तम . खैर बेल्ल बजने क बाद सब स्टूडेंट्स बहार निकल रहे थे और बुआ अंसवेरशीट्स बांध रही थी. मैं और कल्पना भी जब बहार निकलने लगे तो बुआ ने मुझे आवाज़ दी.

मंजू : अमित ,,, ज़रा बात सुन्ना .

मैं बुआ की बात सुन कर रुक गया और कल्पना को बहार रुकने का इशारा कर क वापिस क्लास रूम में आ गया .

अमित : जी बुआ ,

मंजू : चन्दर्कांता मैडम क साथ तुम्हारी फिर से कुछ बात हुई है क्या ??

अमित : नहीं तो बुआ , बल्कि आज तो उन्होंने लेक्चर भी नहीं लगाया

मंजू : ाचा !!!

अमित : क्या बात है बुआ ??

मंजू : वो ,, तुम रहने दो मैं बात करती हूँ.

अमित : नहीं बुआ ,, आप मुझे बताइये क्या बात है. आपको मेरी कसम .

मुझे शक था क ज़रूर चन्दर्कांता ने कोई हरकत की है. बुआ शायद मुझसे बात छुपाना छह रही थी . इस लिए मैंने उन्हें अपनी कसम दे दी.

मंजू : तुझे कितनी बार कहा है अपनी कसम मत दिया कर. ,,,,,, वो चन्दर्कांता मैडम शायद अपना गुस्सा तुम पर निकलने क लिए तुम्हे फ़ैल करवाना छह रही हैं. उन्होंने सब टीचर्स को बोलै है क वो स्पेशलय तुम्हारी मार्किंग टाइट करें. और हो सके तो फ़ैल भी. पता नहीं क्या भरा पड़ा है उनके दिमाग में. तुम चिंता मत करो , मैं देख लुंगी. ज़रूरत पड़ी तो प्रिंसिपल सर से भी बात कर लुंगी.

मंजू बुआ क चेहरे पर मेरे लिए चिंता की लकीरें थी. पर उन्हें क्या पता था क चन्दर्कांता की गर्दन अब मेरे हाथ में आ चुकी थी. पिछले कुछ दिनों में मैं इतना बिजी रहा था क उस मामले में कुछ कर hi नहीं पाया पर अब तो पानी सर से ऊपर जा रहा था . अब तो ज़रूरी हो गया था क उसे अब अपने तरीके से समझों.

अमित : बस इतनी सी बात बुआ ?? अरे ये तो कोई बात hi नहीं है. मैं किसी को जनता हूँ वो चन्दर्कांता मैडम को खुद hi अचे से समझा देंगे और वो उनकी बात तालेंगी भी नहीं. देख लेना आज क बाद वो मेरे खिलाफ कुछ भी नहीं करेंगी . आप बिलकुल भी चिंता मत करो. और आप किसी से इस बारे में बात भी मत करना .

मंजू : पर वो ……

अमित : रिलैक्स बुआ , आप ज़रा भी चिंता मत करो. वैसे भी आपने मेरी इतनी तयारी करवाई थी उसके बाद तो कोई छह कर भी मुझे फ़ैल नहीं कर सकता . तो फिर दर कैसा? ाचा बुआ मैं चलता हूँ सब कैंटीन में मेरी वेट कर रहे हैं .

फिर मैं बुआ को निश्चिन्त कर क वापिस कल्पना क साथ कैंटीन में आ गया. मोहित मुँह लटकाये बैठा था . मीनल को उमा और राधा तीनो कैंटीन में आ गयी. मोहित मीनल को hi एक तक देख रहा था . मीनल ने एक नज़र उसे देखा और फिर सब क साथ बातें करने लगी. मोहित की हालत पर मुझे तरस भी आ रहा था और हंसी भी . मजनू बन कर बैठा हुआ था और मीनल थी क उसकी तरफ ध्यान hi नहीं दे रही थी. खैर , बातों में समय ाचा गुज़ारा , सब क पास बहुत साडी बातें थी पर वक़्त कहाँ रुकता है. पता hi नहीं चला कब बेल्ल बजी और फिर बाकि क लेक्चर भी अटेंड किये. मगर पड़े कुछ नहीं हुई , मोहित तो क्लास में गया hi नहीं. और हमें भी कोई फायदा नहीं हुआ. क्यूंकि और किसी ने हमें अंसवेरशीट्स नहीं दिखाई. बल्कि क्लास में बैठ कर वो चेकिंग करते रहे और लिस्ट बनाते रहे . छुट्टी होने क बाद मैंने मीनल से बात करने क लिए उसको एक तरफ बुलाया. मुझे मोहित पर बड़ा तरस आ रहा था .

मीनल : क्या है ?

अमित : यार अब तो उससे बात कर लो. सुबह से मुँह लटकाये बैठा है .

मीनल : मैंने कहा था न बीच में कोई मत पदों. उसे थोड़ा तड़पने तो दो. इतनी आसानी से उसे माफ़ कर दूँ भला ?

अमित : पर तुमने कहा था क तुम उसे माफ़ कर डौगी.

मीनल : हाँ तो मैंने ये भी कहा था क मेरी एक शरत है

अमित : तो बताओ न क्या है तुम्हारी शर्त.

मीनल : बाद में बताउंगी . अभी फ़िलहाल उसे थोड़ा तरसने दो.

अमित : पर उसे थोड़ा होंसला हो इसके लिए कुछ तो करो.

मीनल : ाचा ठीक है

फिर मीनल मोहित की तरफ गयी जो हमें hi देख रहा था . मैं भी जल्दी से उसके पीछे गया ताकि बात सुन सकूँ.

मीनल : ये बन्दर जैसी शकल क्यों बना राखी है तुमने ?

मोहित : वो ,, वो , मैं ,,, तुम

मीनल : ये क्या वो वो मैं लगा रखा है . घर नहीं जाना क्या ? चलो मुझे घर छोड़ कर आओ.

ये सुनते hi मोहित क चेहरे पर एक डैम से स्माइल आ गयी . और मेरे चेहरे पर भी. हालाँकि मीनल अभी भी गुस्सा दिखा रही थी. मोहित भागता हहआ गाड़ी की तरफ गया और कार ले आया . मीनल ने सब से हाथ मिलाया और मुझे आँखों से hi इशारा कर दिया क ‘ अब तो खुश ‘ . मोहित ने भी ख़ुशी छिपाते हुए आँखों से hi मुझे शुक्रिया कहा और मीनल को लेकर फुर्र हो गया . रीमा मंजू बुआ की वेट कर रही थी ताकि वो उनके साथ जा सके . तभी कल्पना ने राधा से पूछा क वो उसे घर छोड़ देती है तो राधा ने साफ़ बता दिया वो मेरे साथ जाने वाली है. फिर कल्पना में रीमा से पूछा तो उसने बुआ क साथ जाने का बताया . बुआ को अभी थोड़ा टाइम और लग्न था तो मैंने hi रीमा को कल्पना क साथ जाने को कह दिया और उसे बुआ को बताने को भी . फिर वो दोनों चली गयी. अब रह गए राधा और मैं.

अमित : अब चलें हम भी?

राधा : हाँ चलो , मैं तो कब से इंतज़ार कर रही हूँ

मैंने बाइक स्टार्ट की तो राधा जल्दी से मेरे पीछे बैठ गयी . पीछे बैठते hi राधा ने मेरी छाती पर हाथ रखा और मेरे कंधे पर मुँह टिका लिया .

राधा : आज गाओं वापिस तो नहीं जाओगे न ??

राधा ने बड़ी मासूमियत से मुझसे सवाल

पूछा .

अमित : आज सैटरडे है , और तुम्हे तो पता hi है.

राधा : इतने दिनों से घर hi तो थे वहां

अमित : तुम क्या चाहती हो ?

राधा : ( मन में ) मैं तो चाहती हूँ तुम हमेशा मेरे साथ रहो

अमित : चुप क्यों हो गयी ?? ाचा तो तुम्हे घर छोड़ कर चला जाता हूँ मैं

राधा : नहीं नहीं , मैंने कब कहा ? तुम आज हमारे साथ hi रहो न . माँ का भी दिल नहीं लगेगा आज घर पर. इतने दिनों से सब साथ हो थे और आज एक डैम से अकेले .

अमित : तो मौसी का मन नहीं लगेगा ,, तो आज तुम दोनों मौसी क यहाँ चले जाओ .

राधा : क्यों ??? तुम नहीं रुक सकते क्या हमारे साथ ? मुझे और किसी की ज़रूरत नहीं है बस तुम hi काफी हो .

अमित : सच में ?? पर इतने दिनों से हम साथ hi तो थे .

राधा : क्या साथ थे ?? जब देखो तब किसी न किसी क साथ बिजी या फिर घर से बहार. उससे तो ाचा यहाँ पर है. काम से काम एक हफ्ता साथ में तो रहते हो और बात भी करते हो . गाओं में कितनी बार बात हुई हमारी ???

राधा की बात पर मैं भी सोच में पद गया , बात तो ठीक थी उसकी. पर इसमें मैं भी क्या कर सकता था . जब सब एक साथ घर पर आ गए थे . खैर बातों बातों में हूँ घर पहुँच गए. मुझे देखते hi दिव्या मौसी क चेहरे पर मुस्कान आ गयी . मैंने अभी कुछ कहा भी नहीं था क उन्होंने मेरा हाथ पकड़ मुझे अंदर खिंच लिया .

दिव्या : चल अंदर चुप चाप, आज मैं तुझे गाओं नहीं जाने देने वाली . समझे ?

मौसी की बात पर राधा खिल खिला क हंस पड़ी .

दिव्या : तुझे क्या हुआ जो इतना है रही है?

राधा : कुछ नहीं माँ , रस्ते में मैं भी इसे यही कहते आ रही थी क आज तुम्हे हमारे साथ रहना होगा. और घर आते hi आपने भी वही कहा.

दिव्या : हाँ तो , गाओं में वक़्त hi कहाँ दिया इसने हमें . अब अगले शनिवार से पहले तो मैं नहीं जाने देने वाली तुझे कहीं भी . कोई नाराज़ होता है तो हो जाये कह देती हूँ.

इतना कह कर मौसी किचन में चली गयी जबकि राधा मुझसे देख कर ख़ुशी से हांसे जा रही थी .

अमित : अब तो हंसना बंद कर दो , और कितना हंसोगी मुझ पर .

राधा : तुम पर थोड़े hi हंस रही हूँ मैं. मैं तुम्हारे इन फेस एक्सप्रेशंस पर हंस रही हूँ. ऐसे मुँह बना रहे हो जैसे मज़बूरी में फंस गए हो.

अमित : मौसी का पता है न ? कब गुस्सा हो जाएँ. बस उनकी इसी बात से थोड़ा दर लगता है . और सुना तुमने क्या कहा उन्होंने ?

राधा : तुम न ऐसे hi डरते रहते हो माँ से. माँ तुम्हारे साथ अब बिलकुल भी गुस्सा नहीं करती है. भोंदू राम .

अमित : क्या कहा ?

राधा : कुछ नहीं

अमित : नहीं तुमने अभी मुझे कुछ कहा

राधा : क्या कहा ?

अमित : तुमने अभी कहा भोंदू राम

राधा : गलत कहा क्या ? हे हे हे

अमित : मेरा मज़ाक उड़ाती हो अभी तुम्हे बताता हूँ.

मैंने नकली गुस्सा दिखते हुए राधा की तरफ बढ़ा तो वो मुझसे बचने क लिए तेज़ी से भाग गयी. मैं उसके पीछे भगा तो वो अपने कमरे में घुस गयी . इससे पहले की वो कमरे में घुस कर दरवाज़ा बंद कर पति मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया और कमरे में घुस गया . पता नहीं मेरा पाऊँ किस चीज़ में अटक गया और मैं राधा को पकडे हुए ऐसे बीएड पर जा गिरा. राधा बेचारी मेरे नीचे hi डाब गयी.

राधा : आआह्ह्ह्हह्ह मर गयी कक्कक्स

राधा की चीख सुन कर मैं जल्दी से उसके ऊपर से उठाने लगा तो मुझे ध्यान आया मेरे हाथ राधा की नरम छाती पर कास गए थे . शायद गिरते हुए मैंने गलती से उसे वहां से पकड़ लिया था बेध्यानी में .

अमित : ओह्ह्ह सॉरी राधा मैं वो ,, वो

इतने में दिव्या मौसी भी जल्दी से भाग कर आ गयी शायद उन्होंने भी राधा की आवाज़ सुन ली थी.

दिव्या : क्या हुआ ??? तुम चीखी क्यों?

मौसी को देख कर तो एक बार मैं अंदर से घबरा गया . पर राधा ने बात को संभल लिया .

राधा : कुछ नहीं माँ वो , मैं भाग रही थी और अचानक से गिर गयी.

दिव्या : उछाल कूद करने को किसने कहा है तुझे? चलो जल्दी से हाथ मुँह धो लो फिर खाना कहते हैं.

दिव्या मौसी इतना कह कर जल्दी से निकल गयी . मैंने राधा की तरफ देखा जो नज़रें झुकाये हुए थी.

अमित : सॉरी राधा वो …

राधा : किस बात की सॉरी ?? कुछ हुआ है क्या ??? तुम ऐसे छोटी छोटी बातों पर सॉरी मत कहा करो. अब चलो हाथ मुँह धो लो .



इतना कह कर राधा ने एक नज़र मुझे देखा और स्माइल कर क चली गयी बाथरूम में. जबकि मैं वहां खड़ा हैरानी से उसकी को सोचने लगा . राधा ने इसे छोटी मोती बात कहा था . जबकि मैंने उसकी छाती को hi गलती से दबा दिया था. शायद वो नहीं चाहती क मैं ऐम्बर्रास फील करूँ. खैर मैं भी कमरे से निकला और हाथ धो कर खाना खाने क लिए हाज़िर हो गया .
 
भाई लोगो अपडेट कल मिलेगा , सॉरी फॉर डिले . गेस्ट अचानक आ गए और काम अधूरा रह गया.
 
अपडेट 270



‘ अमित , चलो उठो , उठ क चाय पि लो. रत को नहीं सोना है क्या ?’ खाना खाने क बाद कुछ देर आराम करने क लिए मैं लेता था क पता hi नहीं चला कब नींद आ गयी . और आँख खुली जब मौसी मुझे जगाने आयी. मैं जल्दी से उठा और हाथ मुँह धो कर फ्रेश हो क बैठ गया चाय पिने.

दिव्या : तुम्हारे कपडे मैंने अलमारी में रख दिए हैं. आते वक़्त गाओं से मैं ले आयी थी तुम्हारे लिए . आज तुम्हे जाना है न प्रैक्टिस क लिए ? वैसे कम्पटीशन पर कब जाना है?

मैं तो मौसी की बात सुन कर hi उन्हें देखने लग गया. उन्होंने मुझे यहाँ रोकने की पहली hi तयारी की हुई थी. मेरी ज़रूरत का पूरा ध्यान रखने लग गयी थी मौसी .

अमित : 10 तारिख को जाना है मौसी. आपको क्या ज़रूरत थी मेरे कपडे लेकर आने की. आप मेरी चिंता मत किया करो.

दिव्या : ाचा ! अब तू मुझे बताएगा मैं क्या करूँ क्या न करूँ ? एक hi तो बीटा है मेरा अब उसका ख्याल मैं नहीं रखूंगी तो कौन रखेगा ? चल ये चाय पि ले. तूने अभी का नहीं बताया क जाना है क नहीं?

मौसी ने ये सब कहते हुए पहले झूठा गुस्सा दिखाया और फिर मुस्कुराते हुए मेरे बालों में हाथ फेर कर सरे बाल बिखरा दिए

अमित : जाना है न मौसी , अभी वहीँ जाना है. जितने दिन रह गए हैं अब खूब प्रैक्टिस करनी पड़ेगी . राधा न पक्का नाराज़ होने वाली है. आज कल आप उस पर काम और मुझ पर ज्यादा ध्यान देने लगी हो

दिव्या : वो नाराज़ नहीं होगी वो तो खुद … ,,, होती है तो हो जाये , तू पहले मेरा बीटा है . वो मेरी बेटी बाद में है .

‘ इसका मतलब वो सब सच hi था , अमित आपका बीटा है और मैं दामिनी मौसी की बेटी. यही तय हुआ था न आप दोनों में?’ दिव्या मौसी की बात पूरी होते hi राधा ये सब कहती हुई हाथ में चाय का कप लिए मेरे पास आ कर बैठ गयी. वो इस वक़्त लोअर और T-shirt में थी. ऐसे कपडे वो अमूमन पहनती नहीं थी पर उन्हें इन कपड़ों में देख कर मेरी नज़रें कुछ पल उसी पर जैम सी गयी. ताज़ा धुला फ्रेश चेहरा और उसकी वो नेचुरल खूबसूरती. नज़रें क्या दिल भी थम जाये किसी का भी.

दिव्या : तुझे किसने बताया ?? हाँ तो , उसने तुझे अपनी बेटी मान लिया था और मैंने अमित को अपना बीटा . उसने कहा था क अमित मेरा बीटा है और तुझे वो एक दिन ले जाएगी अपने……. अरे मैं तो भूल hi गयी . चाय क साथ बिस्कुट भी रखे थे . मैं अभी लायी.

मौसी कहते कहते अचानक से बात बदल कर उठ गयी और जल्दी से किचन में चली गयी. उनको देख कर लगा क जैसे वो कोई बात छुपा रही हैं. मैंने राधा की तरफ देखा तो वो भी मुझे hi देख रही थी. मुझसे नज़रें मिलते hi उसने शर्मा कर नज़रें झुका ली और मुस्कुराते हुए चेहरा दूसरी तरफ कर लिया .

अमित : मौसी अचानक से बात बदल कर क्यों चली गयी? क्या कह रही थी वो ? माँ तुम्हे कहाँ ले कर जाने वाली थी?

राधा : नज़रें चुराते हुए ) मुझे क्या पता . खुद hi पूछ लेना उनसे.

अमित : अब बताओ भी , तुम्हे सब पता है. देखो मुझसे झूठ मत बोलो वर्ण मैं तुमसे बात नहीं करूँगा

इतने में दिव्या मौसी हाथ में बिस्कुट वाली प्लेट पकडे आ गयी. उन्हें देख कर लग रहा था जैसे वो अपना चेहरा धो कर आयी हैं .

दिव्या : क्या हुआ ? क्यों बात नहीं करोगे ? इसने तुम्हे कुछ कहा क्या ?

अमित : नहीं मौसी वो मैं पूछ रहा था क माँ इसे कहाँ ले जाना चाहती थी? और ये है क बता hi नहीं रही . अब आप hi बताओ मेरी माँ अगर उसे कहीं ले जाना चाहती थी तो अब मेरा फ़र्ज़ है न क इसे मैं लेकर जॉन. ये तो बता hi नहीं रही. आप hi बता दीजिये .

दिव्या : अरे कुछ नहीं बीटा वो तो बस ऐसे hi मज़ाक में कहा करती थी क तुम मेरे बेटे हो तो ये उसकी बेटी है. इस लिए वो तुम्हे यहाँ छोड़ कर इसे ले जाएगी .

राधा : पर रीता मौसी ने तो कहा था …….

दिव्या मौसी की बात राधा को जैसे पसंद नहीं आयी और वो जल्दी से बोल पड़ी पर दिव्या मौसी ने गुस्से भरी आँखों से उसे देखा और उसकी बोलती ये कहते हुए बंद कर दी.

दिव्या : तुझे एक बार में समझ नहीं आयी मेरी बात? चुप चाप अपनी पड़े पर ध्यान दो. दीदी ने तेरे साथ मज़ाक किया होगा उनसे तो मैं बात करुँगी.

राधा दिव्या मौसी की इस झिड़क पर मुँह लटका कर बे मन से चाय पिने लगी. पर मैं साफ़ देख रहा था क वो मौसी की बात पर नाराज़ हो गयी थी . और एक बार भी दोबारा नज़र उठा कर नहीं देखा . मैं भी चाय ख़तम कर क कपडे बदल कर स्टेडियम क लिए निकल गया . कॉलेज की तरह यहाँ भी आज काम hi लड़के थे. पर नीरज भाई मिल गया और हम ने साथ में खूब पसीना बहाया . प्रैक्टिस कर क फ्री हुआ तो देखा रीमा की मॉस्कल्स आयी हुई थी. पहले तो मैंने सोचा क उससे बात कर लूँ फिर सोचा क सीधा घर जा कर सरप्राइज hi दे देता हूँ . वैसे भी बुआ से भी तो मिलना था . तो मैं वहां से सीधा बुआ क घर पहुँच गया . बेल्ल बजने से पहले hi दरवाज़ा खुल गया और सामने मेरी जान रीमा कड़ी मुस्कुरा रही थी .

अमित : धत्त तेरी की , मैंने सोचा था सरप्राइज दूंगा पर तुम्हे तो पहले hi पता चल गया .

रीमा : मुस्कुराते हुए ) पता कैसे नहीं चलेगा . जब तुमने फ़ोन का जवाब नहीं दिया तब hi मैं समझ गयी थी तुम सीधा यहाँ hi आने वाले हो . क्यूंकि बुआ से मिले बिना तो तुम जाने वाले हो नहीं . और ये जो तुम्हारी बाइक है न ,, इसकी आवाज़ मैं दूर से hi पहचान लेती हूँ.

अमित : ाचा !! इतनी पहचान हो गयी है तुम्हे इसकी ?

मैंने रीमा क करीब जाते हुए धीमे लफ़्ज़ों में कहा और उसकी कमर में हाथ दाल कर उसे अपने साथ सत्ता लिया . रीमा की साँसे एक डैम से तेज़ हो गयी और उसने नज़रें नीची कर ली.

रीमा : माँ और बुआ अंदर hi हैं , कोई भी यहाँ आ सकता है.

रीमा की बात सही थी क दोनों में से कोई भी आ सकता था और वैसे भी हम खुले दरवाज़े में खड़े थे . मैंने जल्दी से झुक कर उसके होंठों पर एक छोटी सी किश की और उसे छोड़ दिया .

अमित : लगता है तुम्हे प्यार करने क लिए कहीं दूर ले जाना पड़ेगा. न कॉलेज में मौका मिलता है न यहाँ. चलो कोई बात नहीं , अब बुआ से और सासु माँ से मिल लेते हैं.

रीमा मेरी बात सुन कर पहले तो शरमाई फिर बोली

रीमा : शर्म नहीं आती , वो तुम्हारी चची भी हैं.

अमित : अब तुम खुद hi फैसला कर लो क मैं उन्हें क्या बनाऊ, चची या सास? चची बनाया तो फिर तुम्हे बहिन बनाना पड़ेगा .

रीमा कास कर एक मुक्का मेरी पीठ पर मर दिया .

रीमा : ाचा , बहिन बनाओगे मुझे ? तुम्हारी जान ले लुंगी मैं .

रीमा ने मेरी गर्दन पकड़ ली. मुझे उसकी इस हरकत पर हंसी आ रही थी और वो दोनों हाथों से मेरी गर्दन दबा रही थी. तभी किसी क कदमो की आवाज़ हुई तो रीमा जल्दी से मुझे छोड़ पीछे हैट गयी . सामने से बुआ नज़र आयी जो सलवार सूट पहने दरवाज़े की तरफ hi आ रही थी.

मंजू : तुम दोनों यहाँ क्या कर रहे हो ? इतनी देर से से यहीं पर खड़े हो , अंदर नहीं आ सकते ? चलो आओ .

मंजू बुआ मुझे अंदर आने को कह कर हॉल में चली गयी . रीमा और मैंने एक दूसरे को देखा और हंसी छूट गयी .

रीमा : लगता है तुम्हारी बाइक की पहचान बुआ को भी है इसी लिए तो बिना दरवाज़े की दस्तक क भी आ गयी जैसे उन्हें पता था क ये तुम hi हो. अब चल क बुआ क साथ बैठो, मैं माँ को बुला कर लती हूँ .

अमित : चची जी को

रीमा ने फिर से एक चपत मुझे लगा दी पीठ पर .

रीमा : सासु माँ को , अब दोबारा उन्हें चची कहा तो देख लेना .

मैं हॉल में बुआ क पास आ गया और रीमा शायद किचन में चली गयी. बुआ ने मुझे अपने पास बैठने का इशारा किया और मैं बिन उनके पास बैठ गया .

मंजू : भैया अब कैसे हैं? घर सब ठीक है न ?

अमित : हाँ बुआ सब ठीक है , बाबा भी अब पहले से काफी बेहतर हैं.

मंजू : तुम कॉलेज से घर क्यों नहीं आये ? कहाँ चले गए थे ?

अमित : मैं वो , दिव्या मौसी क घर हूँ बुआ. राधा क साथ hi चला गया था . मौसी कह रही हैं क मैं उनके पास रुकूँ. रुकना तो यहीं चाहता था पर सोचा यहाँ रीमा और आंटी हैं तो …

मंजू : अछि बात है , वैसे भी दीदी तुम्हे सबसे ज्यादा प्यार करती हैं. तो इस बार संडे यहीं पर हो ?

अमित : हाँ बुआ , अब इतने दिन से गाओं में hi था तो मौसी कह रही हैं क यहीं रुक जॉन .

‘ अरे अमित तुम ,,,, शुक्र है तुम नज़र तो आये . कैसे हो ? और घर सब कैसे हैं ? ‘ रुपाली चची हॉल में आती हुई मुझे देख कर खुश नज़र आ रही थी. वो इस वक़्त एक आसमानी रंग क सलवार कमीज में बहुत hi खूबसूरत लग रही थी.

अमित : मैं ठीक हूँ आंटी , आप सुनाइए .

रुपाली : मैं भी अछि हूँ . मैंने सुना था तुम्हे चोट लगी है और तुम्हारे पापा को भी. अब कैसी तबियत है?

अमित : सब ठीक है वो बस मामूली स चोट थी .

रुपाली : मैं खुद आना चाहती थी उनसे मिलने पर खैर ाचा हुआ तुम hi आ गए .

मंजू : अरे आप भी न भाभी , छोडो वो सब कोई और बात करो. रीमा कहाँ है?

रुपाली : वो कॉफ़ी बना रही है सबके लिए .

मैं देख रहा था क मंजू बुआ रुपाली चची को उस बारे में बात करने नहीं दे रही थी और न hi वो चाहती थी क वो मुझे घर क बारे में ज्यादा बात करें .

मंजू : आज प्रैक्टिस पर गए थे न ? प्रिंसिपल सर को तुमसे बहुत एक्सपेक्टेशंस हैं. ध्यान लगा कर प्रैक्टिस करना और वो चन्दर्कांता मैडम …..

अमित : वो मैं देख लूंगा आप उनकी चिंता मत करो. मैंने कहा था न मेरे पास कोई है जो उनको समझा देगा . कल उनसे hi बात होगी

इतने में रीमा कफ ले आयी और हम सब ने बातों बातों में कॉफ़ी ख़तम की. मंजू बुआ असहज थी रुपाली चची की वजह से तो मैं भी ज्यादा देर नहीं रुका और उनसे विदा ले कर घर को निकल गया . घर आया तो मौसी खाना बना रही थी और राधा उनकी मदद कर रही थी. राधा आज कल किचन में सब काम करने लग गयी थी या यूँ कहें क वो सब कुछ सीख रही थी शायद मेरी बातों को उसने सीरियस ले लिया था . राधा ने मुझे चाय पानी का पूछा पर मैंने मन कर दिया क्यूंकि मुझे फ्रेश होना था . फ्रेश हो जब तक मैं बहार आया तब तक खाना बन चूका था .

दिव्या : चलो आ जाओ अब खाना रेडी है . पहले खाना खा लो

अमित : वो तो ठीक है मौसी पर ये क्या है , आज आप राधा से काम करवा रही हैं? पहले तो आप खुद इसे मन करती थी

दिव्या : मन तो अब भी करती हूँ पर ये मेरी सुनती कहाँ है अब.

अमित : वैसे आभा hi है न मौसी, काम से काम आपका दामाद ये तो नहीं कहेगा क इसे कुछ अत नहीं . है है है

राधा : तुम न ज्यादा बातें मत बनाओ , तुम्हे कुछ करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, समझे .

राधा ने झूठा गुस्सा करते हुए कहा . जबकि मुझे हंसी आ रही थी

अमित : अब मैं भला क्यों कुछ करूँगा . मैं तो उसी लड़की से शादी करूँगा जिसे सब काम आते हो. ताकि वो माँ की सेवा कर सके , साडी उम्र वो hi काम करेंगी क्या .

दिव्या : कितना प्यारा है मेरा बीटा , भाभी कितनी खुशनसीब हैं क तू उनके लिए इतना सोचता है

राधा : बड़ी ममी तो मुझसे कितना प्यार करती हैं, मैं भी उन्हें उतना hi प्यार करती हूँ और करुँगी.

दिव्या : चल चल ज्यादा बातें न बना , बात कुछ हो रही और तू कुछ बोल रही है . चल खाना लगते हैं.

राधा को दिव्या मौसी किचन में ले गयी और जाती जाती मुझे मुँह बना कर दिखा रही थी. अभी भी उसका बचपना जैसे ख़तम नहीं हुआ था . कुछ देर में मौसी और राधा ने मिलकर खाना लगा दिया और हमने मिल कर खाया. उसके बाद दोनों बर्तन समेटने लगी और मैं उठ कर ालन कमरे में आ गया . रीमा का मैसेज आया था तो कुछ देर उससे चाट की. घर पर फ़ोन किया और उन्हें बताया क मैं मौसी क यहाँ hi हूँ और अगले हफ्ते hi आऊंगा जाने से पहले . ये सब करते 10 बज गए . मैं अपने कमरे में था क दरवाज़ा खुला और मौसी मेरे लिए दूध का गिलास ले आयी .

दिव्या : लो गरम गरम दूध पि लो.

अमित : अरे आप रहने देती .

दिव्या : क्यों रहने देती ? मेरे बेटे का ख्याल मैं नहीं रखूंगी तो कौन रखेगा .

अमित : राधा सो गयी क्या ?

दिव्या : नहीं , अभी दूध गरम कर क अपने कमरे में गयी है. तुम यहाँ अकेले सोओगे?

अमित : इसमें क्या है , घर पर भी तो अकेला सोता हूँ.

दिव्या : वहां की बात वहीँ रहने दो. यहाँ तुम अकेले नहीं सोओगे. तुम मेरे साथ मेरे कमरे में चलो. मैं अपने बेटे को अपने साथ सुलाना चाहती हूँ. मैं चेंज करती हूँ तब तक तुम दूध पि कर आ जाओ.

दिव्या मौसी इतना कह कर अपने कमरे में चली गयी और मैं दूध पिता हुआ उनके बारे में सोचने लगा . कितना चेंज आ गया था मौसी में. जहाँ पहले वो मुझे एक नज़र देखना भी पसंद नहीं करती थी अब मुझे कितना प्यार करने लगी थी. सच में वो अब मुझे एक माँ की तरह hi प्यार करने लगी थी. और सच ये भी था क मैं भी उन्हें जब देखता तो अपनी माँ hi नज़र आती थी. बेशक गौरी ममी ने मुझे बचपन से पला और माँ का प्यार दिया था. पर दिव्या मौसी में मैं अपनी जनम देने वाली माँ को देखता था . आखिर दोनों एक स तो थी. खैर कुछ देर बाद मैं मौसी क कमरे में चला गया . मौसी कमरे में नहीं थी तो मैं आराम से बीएड पर बैठ गया. तभी दरवाज़ा खुला और मौसी कमरे में आयी . शायद बाथरूम से चेहरा धो कर आती थी इस लिए चमक रहा था . मगर हैरानी की बात थी क उन्होंने आज एक लॉन्ग मैक्सी पहनी हुई थी जो उनके पाऊँ तक थी. वर्ण वो हमेशा सदी में hi नज़र आती थी. हाँ एक दो बार रीता मौसी की मैक्सी उन्होंने पहनी थी. पर यहाँ वो मेरे सामने मैक्सी में कड़ी थी और अनजाने में hi मैं उन्हें सर से पाऊँ तक गौर से देखने लगा जो मौसी ने भी नोट के लिया .

दिव्या : क्या देख रहे हो ? अछि लग रही है ? रीता दीदी तो ऐसे hi कपडे पहनती हैं सोचा मैं भी अब से यही पह्नु. सोते वक़्त मुश्किल नहीं होती. उन्हों ने दिलाई थी .

अमित : सही है मौसी , रत में सोते वक़्त खुले कपडे hi पहनने चाहिए . मैं भी तो खुले कपडे पहनता हूँ इसी लिए. और ये आप पर अछि भी लग रही है. आप ये hi पहना करो.

दिव्या : हाँ अब से यही पहनूंगी.

दिव्या मौसी ने दरवाज़ा बंद कर क चिरकानी लगा दी और आ कर बीएड पर मेरे करीब बैठ गयी.

दिव्या : तुम जानते हो ? जब तुम इतने से थे न तो मेरे पास hi सोते थे जब कभी दामिनी मेरे पास अति या मैं उधर जाती. जैसे hi तुम्हे अपने सीने से लगाती थी तो तुम्हे झट से नींद आ जाती थी. जबकि और किसी क पास तुम सोना तो दूर चुप कर क बैठते भी नहीं थे . इसी लिए दामिनी कहती थी हमेशा क तुम मेरे बेटे हो. और तुम्हे तो मैंने दू……. तुम्हे मैंने गॉड में खिलाया है.

मौसी दूध शब्द कहते कहते रुक गयी और हड़बड़ा कर बात बदल दी. जबकि उनकी नज़रों का झुकना बता रहा था क वो शर्मा गयी हैं अपनी hi बात पर. मैंने उन्हें नार्मल करने क लिए बात का जवाब दिया.

अमित : आप माँ hi तो हैं मौसी. वैसे भी आप में और माँ में फरक hi कहाँ था जितना मैंने सुना है. तो फिर आप ने मुझे वैसे hi प्यार दिया होगा जैसे माँ देती थी

दिव्या : हाँ , पर मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी तुझे खुद से जुड़ा कर क. मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था , मैंने एक बार भी तेरे बारे में नहीं सोचा. दामिनी मुझसे इस बात पर कितना नाराज़ होगी.

दिव्या मौसी बात करते करते रोने hi लग गयी थी . मैं उनके दिल की हालत अचे से जनता था .

अमित : ये क्या मौसी ? आप फिर से रोने लगी. मैंने पिछली बार भी आपको कहा था न क आप ऐसे नहीं रोयेंगी. लगता है मुझे देख कर आपको माँ की यद् कुछ ज्यादा hi अति है. इस लिए मैं कल hi चला जाऊंगा .

दिव्या : ख़बरदार जाने की बात दोबारा की तो. तुझे पता भी है मैं कितनी अकेली हो गयी थी? कितना टूट चुकी थी अंदर से ? मुझे लगता था क दामिनी क जाने से ऐसा हुआ है पर नहीं . अब मुझे समझ अत है क इसकी वजह दामिनी की मौत से ज्यादा मेरे तेरे साथ किया गया गलत व्यव्हार था . मेरा दिल हमेशा इसी लिए दुखी रहा क मैंने तुझे माँ का प्यार नहीं दिया . इतने साल मैंने जो दर्द झेला वो तेरे आने से ख़तम हुआ. तुम्हे मैं समझा नहीं सकती क जब से तुमसे मैं अचे से बात करने लगी हूँ तब से मेरे दिल को कितना सुकून है. दिल से जैसे बोझ सा उतर गया है . अब तो दिल बस यही चाहता है क तू हमेशा मेरे पास रहे और मैं तुम्हे हमेशा प्यार करती रहूं. इतने सैलून में जो प्यार तुझे नहीं दिया वो सारा प्यार अब दूँ.

दिव्या मौसी की बातों में ममता बरस रही थी और मुझे भी ये बहुत ाचा लग रहा था . मगर उनको गंभीर देख कर मैंने मज़ाक में बात को बदल दिया .

अमित : फिर तो पक्का राधा मेरा गाला दबा देगी . कहेगी क मैंने उससे उसकी माँ को छीन लिया .

मेरी बात सुन कर दिव्या मौसी क चेहरे पर एक पल क लिए मुस्कान आ hi गयी .

दिव्या : बिलकुल नहीं कहेगी वो ऐसा वैसा कुछ भी. और कहेगी भी तो मैं कह दूंगी क वो अपने लिए दूसरी माँ ढूंढ ले. मुझे मेरे बेटे से ढेर सारा प्यार करना है .

इतना कह कर मौसी हंस दी और उन्हें खुश देख कर मुझे भी ख़ुशी हुई.

अमित : आप ऐसे hi खुश रहा करो मौसी. आप जब ऐसे हस्ती हैं तो मुझे बहुत ाचा लगता है. आपके चेहरे पर उदासी मुझे बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं होती.

दिव्या : तेरे लिए मैं अब से क hi उदास नहीं हूँगी. पर तू भी वडा कर क अपनी इस माँ को कभी अकेला नहीं छोड़ेगा

अमित : मैं भला अपनी माँ को क्यों छोड़ने लगा ? बचपन से जिस प्यार क लिए तरस रहा था अब वो मुझे मिला है तो मैं भला कैसे छोड़ सकता हूँ.

मेरी बात सुन कर दिव्या मौसी भावुक हो गयी और कास क मुझे अपने सीने से लगा लिया .

दिव्या : अब से तेरी ये माँ तुझे इतना प्यार देगी तू सब भूल जायेगा, सब भूल जायेगा.

दिव्या मौसी क सीने से लिपटे मुझे सच में ऐस hi लग रहा था जैसे मैं माँ क सीने से लगा हूँ और मुझे इतनी जल्दी नींद आ गयी क पता hi नहीं चला.

.

दिव्या अमित को सीने से लगाए अपनी ममता उस पर छलका रही थी. वास्तव में ये सच hi था क जब से वो अमित को प्यार देने लगी थी उसका मन अब हल्का रहता था और अब तो वो अकेले बैठ कर वैसे रोटी भी नहीं थी जैसे क वो पहले खुद को कमरे में बंद करके रोया करती थी दामिनी की तस्वीर को सीने से लगाए . अमित तो उसकी बाँहों में आते hi सो गया पर दिव्या बहुत देर तक जगती रही और उसको सहलाती रही जैसे क छोटा बचा हो. और आखिर दिव्या को भी नींद आ गयी. अमित का सर दिव्या क सीने पर hi था . वो आधा दिव्या क ऊपर था . और सपने में आज एक बार फिर दिव्या को उसी प्रेम की अनुभूति हुई. उसी वही सपना फिर से आने लगा जिसमे वो अमित की बाँहों में होती थी और वो उसे एक प्रेमी की तरह प्रेम करता था . दिव्या क स्तनों पर अमित सर रखे सो रहा था और सपने में उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो उसके स्तनों को प्यार कर रहा है उन्हें दबा रहा है उन्हें चूस रहा है. दिव्या क जिस्म में दबी हुई वासना की चिंगारी फ्री से भड़क उठी. उसका जिस्म गरम हो गया और वो खुद hi उसे अपने सीने पर अपने स्तनों पर दबाने क साथ साथ अपनी टंगे उसकी टांगों से सहलाने लगी. ये एक ऐसा बंधन बांध गया था दिव्या का अमित क साथ जिसमे वो उसके करीब एक माँ बन कर तो आती पर उसका जिस्म जैसे उसको प्रेमी समझ लेता और अपनी दबी हुई इच्छाएं उससे पूरी करनी चाहता था . नींद में hi दिव्या अमित क बदन से खुद को रगड़ती रही और उसकी छूट ने एक बार फिर अपना बांध खोल कर सब कुछ गीला कर दिया . आज वो मैक्सी पेहेन कर सिटी थी जिस वजह से उसकी टंगे अमित क साथ घिसते घिसते जांघों तक नंगी हो गयी थी. पर उसे इस बात की न जानकारी थी न hi होश था .

.



सुबह मेरी आँख खुली तो मुझे अपने ऊपर जकड़न सी महसूस हुई. थोड़ा होश आया तो पता चला क मौसी ने मुझे जकड़ा हुआ था . मैंने उनका चेहरा देखा तो मज़े में सो रही थी. इस वक़्त मैं सीधा लेता हुआ था और करवट लिए मेरे साथ चिपकी हुई थी. उनका चेहरा मेरे इतना करीब था क उनकी साँसे मेरी गर्दन पर महसूस हो रही थी . नींद में hi मौसी ने मुझे ऐसे जकड़ा था क कहीं मैं भाग hi न जॉन. उनकी दायी बाजु मेरे सीने से होती हुई मेरी बगल में थी. मुझे उन्हें ऐसे देख बड़ा प्यार आया और मैंने धीरे से उनके माथे को चूम लिया. फिर मैंने उनकी बाजु को अपने ऊपर से हटाया तो मुझे अपनी कमर पर भी भर महसूस हुआ स्पेशलय मेरे लैंड पर . जहाँ थोड़ा दर्द भी महसूस हो रहा था . मुझे समझते देर नहीं लगी क ये उनकी तंग है और मेरा लैंड उनके घुटने क नीचे दबा है. सुबह की अकड़न और ऐसे दबाव से लैंड में दर्द हो रहा था. मैंने अपना हाथ नीचे ले जा कर मौसी की तंग हटाने की कोशिश की तो मुझे झटका लगा और मैं अंदर तक हिल गया . मेरा हाथ जहाँ पर जा लगा था उसका एहसास होते hi मेरी रीढ़ की हड्डी तक झनझना उठी . दिव्या मौसी की तंग बिलकुल नंगी थी , उनकी कोमल त्वचा हाथों में महसूस होते hi लैंड में तनाव से ऐसा झटका लगा क जैसे वो फट hi जायेगा . मेरा हाथ कम्कम्पा गया था . उस कोमल एहसास ने जैसे मुझ मूरत hi बना दिया और मेरा हाथ वहां से हिला hi नहीं. दिव्या मौसी नीचे से निर्वस्त्र है , अपनी इस सोच पर यकीन करने क मैंने हौले से सर उठा कर नीचे देखा तो वाकई ये सच था मगर पूरा नहीं . मौसी की टंगे नंगी तो थी पर आधी जांघ तक hi. उनकी मैक्सी जांघ क जोड़ की तरफ सर्कि हुई थी. दिव्या मौसी क रंग बाकि बहनो की तरह hi गोरा था पर उनकी जांघ कुछ ज्यादा hi गोरी थी . कपड़ों क अंदर ढंका रहने वाला जिस्म अधिक hi गोरा होता है . दिव्या मौसी रीता मौसी और रजनी मौसी क मुकाबले छरहरी काया की था मनो नई नई शादी क बाद जैसे किसी लड़की का जिस्म गदरा गया हो. उसी अनुपात में उनकी मांसल जांघ भी गदरायी हुई थी किसी लड़की से अधिक पर औरतों से थोड़ा काम. मैं मौसी की गोरी टांगों को देख कर एक पल क लिए कहीं खो सा गया मगर लैंड महाराज ने इतने में hi अपने जलवे दिखा दिए . मेरा दिमाग जैसे अब लैंड से सोच रहा था और मेरा हाथ मौसी की जांघ पर रेंगने लगा . क्या बताऊँ क्या एहसास हो रहा था . घुटने से लेकर जहाँ तक जांघ निर्वस्त्र थी वहां तक मेरा हाथ रेंग रहा था और लैंड मनो इससे ऊर्जा ले रहा था . मेरी साँसे गरम हो लेने लगी और तेज़ चलने लगी . मेरा हाथ जहाँ पहले हल्का हल्का रेंग रहा था अब वो मौसी की जांघ को मसलने लगा था . पहले ऊपर से hi पर इसमें उसे चैन कहाँ था इस लिए फिर हाथ नीचे की तरफ अंदरूनी जांघ पर चला गया जहाँ मांस कहीं ज्यादा मुलायम और नरम था . लैंड की अकड़न मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रही थी . इस लिए मैंने मौसी की तंग को घुटने से पकड़ कर थोड़ा अपनी तरफ सरका कर लैंड को घुटने क नीचे से निकला ताकि वो चैन की सांस ले सके पर ये क्या ,,, ऐसा करने से मुझे एक और झटका लगा . क्यूंकि लैंड बुरी तरह से अकड़ा हुआ था और सुपडे से 2 इंच आगे तक लैंड लोअर क ऊपर से बहार निकला हुआ था . ये किसे हुआ ये तो पता नहीं पर लैंड पर मौसी की नरम मुलायम झांग पड़ते hi दिल की धड़कन मनो चौगुनी हो गयी और मेरा हाथ जांघ को और ज़ोर से मसलने लगा . अब लैंड पर नंगी जांघ का एहसास इतना अधिक था क मैं ऑंखें बंद किये बस इस एहसास को जी रहा था . मेरी कमर खुद hi ऊपर उठने लगी और लैंड जांघ क साथ सरकता हुआ जांघ क जोड़ की तरफ बढ़ने लगा. मेरा हाथ भी अब जांघ को और आगे तक सहलाता हुआ मैक्सी क अंदर hi मौसी की पेंटी तक पहुँच गया और बिना देर की उनकी पीछे को उभरी हुई गांड तक पहुँच गया . ये एक अलग hi एहसास था इतना मज़ा तो और किसी क साथ भी शायद नहीं अत था जितना मुझे अब आ रहा था और वो भी बिना छूट में लैंड डाले . मैं मज़े की अधिकता में सब कुछ भूल कर बस अपने लैंड को मौसी क जिस्म से रगड़ रहा था और अपने हाथों से उनकी गांड को पलोस रहा था . धीरे धीरे मेरे हाथ की मजबूत पकड़ से शायद मौसी की कमर मेरी तरफ और ज्यादा सरक आयी और मेरा लैंड सीधा जांघ की जड़ में जा कर पेंटी क ऊपर से छूट पर जा भिड़ा . उफ्फ्फफ्फ्फ़ एक पल को तो जान hi निकल गयी जैसे . मैंने मौसी का एक चूतड़ पूरे हाथ में कास लिया हालाँकि वो हाथ की पकड़ से कहीं बड़ा था . मेरा डायन हाथ जो मौसी क नीचे था मैंने उसे ज़ोर दिया और मौसी को अपने ऊपर hi सरका लिया जिससे मौसी अब मेरे ऊपर थी. इसी पोजीशन में मौसी की टंगे मेरी दोनों तरफ फ़ैल गयी थी और उनकी छाती मेरी छाती पर थी. मैंने डायन हाथ भी मौसी गांड पर ले गया मगर वहां पर मैक्सी थी . एक सिरे को पकड़ कर मैंने पूरी hi मैक्सी अब उनकी कमर क ऊपर चढ़ा कर उनकी गांड को लगभग निर्वस्त्र कर दिया . अब तो मेरी हालत और भी ख़राब होने लगी . क्यूंकि मेरा लैंड अब सीधा मौसी की छूट क निचे दबा था . अपनी छाती पर मुझे उनके नरम मांस क गोलों का एहसास हो रहा था . मैंने अपने हाथ उनकी गांड पर कास लिए और उन्हें अपने लैंड पर दबाने लगा. लैंड की ऐसी हालत हो गयी थी क वो अभी फट पड़ेगा . मैं मौसी की गांड दोनों हाथों से मसल रहा था और साथ hi मैंने अपने हाथ ऊपर को ले जाने लगा जिससे मौसी नंगी कमर तक मेरे हाथ आ गए . अब तो उनकी आधी पीठ नंगी हो चुकी थी और मुझे लग रहा था क अभी लैंड से धार निकल जाएगी . ऐसे चरम इससे पहले कभी महसूस तक नहीं हुआ था . मैं खुद को रोकने की कोशिश कर रहा था पर मौसी क बदन से आ रही खुशबु मेरे नथुनों क रस्ते मस्तिष्क तक पहुँच रही थी . मैं अपनी कमर ऊपर उछलने लगा और मौसी की कमर को बाज़ू में लपेट कर उन्हें पूरी तरह अपने साथ कास के उनकी गांड मसाले जा रहा था . तभी मौसी क मुँह से सिसकी निकली , और उनके बदन में हरकत हुई. मैं एक डैम से दर गया और अपनी ऑंखें बंद कर क अपने हाथ वही. रोक लिए . मौसी की सबसे तेज़ हो गयी थी पर शायद वो नींद में hi थी जो अपना सर hi थोड़ा सा हिलाया और वैसे hi लेती रही . मगर अब मुझे अपनी और मौसी की हालत का अंदाज़ा हो गया था. अगर मौसी की नींद टूट जाती और मुझे अपने साथ ये सब करते देख लेती तो पता नहीं मेरा क्या हशर करती. मैं कुछ देर ऐसे बिना हिले लेता रहा और इंतज़ार किया क मौसी आराम से फिर से गहरी नींद में चली जाएँ. कुछ पलों बाद मैंने मौसी को धीरे से वापिस सरका कर बीएड पर लेता दिया और खुद उनके नीचे से निकल कर साइड में हो गया . अपने लैंड पर नज़र डाली तो वो ज़ोर ज़ोर से हिल रहा था जैसे कह रहा हो क उसे जल्दी से छूट में घुसा दो. मैं जल्दी से बीएड से नीचे उतर और खुद को कण्ट्रोल करते हुए अपना लोअर ठीक किया . जब मेरी नज़र फिर से मौसी की तरफ गयी तो मौसी एक घुटना मोड बीएड पर लेती थी और उनकी काली पेंटी में कैद गांड ऊपर को उठी हुई थी. साथ hi उनकी गोरी चिकनी टंगे एक डैम नंगी थी. मौसी को ऐसे देख दिल फिर से बेईमान होने लगा तो मैंने जल्दी से मौसी की मैक्सी जो कमर तक चढ़ी हुई थी उसे नीचे करने की कोशिश की. जो तंग ऊपर थी उधर से तो मैंने नीचे कर दिया पर घुटने तक hi कर पाया पर दूसरी तरफ से मैक्सी ज़रा भी नीचे नहीं हुई . क्यूंकि वो नीचे डाब गयी थी . मुझे अब दर लगने लगा क कहीं मौसी ने उठ कर अपनी ये हालत देख ली तो मेरे बारे में क्या सोचेंगी . पर अब किया भी क्या जा सकता था . अगर मैं मौसी को हिलता तो उनकी नींद उचट सकती थी. मैं अभी सोच hi रहा था क मौसी नींद में hi थोड़ा सा हिली. मुझे लगा क मौसी उठने वाली है तो मैं जल्दी से कमरे से बहार निकल गया . अपनी चोरी पकडे जाने क दर से धड़कन एक डैम रेल गाड़ी क इंजन की तरह तेज़ दौड रही थी और लैंड रोड की तरह तना हुआ था . खुद को सामान्य करने क लिए मैं बाथरूम में घुसा और अचे से हाथ मुँह धो कर जल्दी से जुटे पेहेन कर घर से बहार निकल गया . सोचा थोड़ा एक्सरसाइज कर लूँ और नज़दीक क पार्क में जा कर एक्सरसाइज करने लगा .
 
आज फिर चन्दर्कांता का जनता निकल दिया जाये ??
 
अपडेट 271

एक्सरसाइज कर क मैं जब घर लौटा तो मौसी मुझे नज़र नहीं आ रही थी . न हॉल में न किचन में , मेरे दिल में थोड़ी बेचैनी सी थी क मौसी को कहीं कुछ पता तो नहीं चला . वो कहते हैं न जिसके मन में चोर होता है वो हर बात से डरता है. मैंने डरते डरते मौसी क कमरे का दरवाज़ा खोला तो मौसी वहां भी नहीं थी. तभी बाथरूम से किसी क नहाने की आवाज़ आ रही थी तो मुझे अंदाज़ा हो गया क मौसी नाहा रही हैं. मैं अभी वहां खड़ा ये hi सब सोच रहा था . अचानक से किसी ने मुझे पीछे से मेरी गर्दन को बाँहों में भरा और झट से मेरे गलों पर किश कर दिया . मैंने हड़बड़ा कर देखा तो राधा मुझे देख कर हंस रही थी. शायद वो भी अभी अभी नाहा कर आयी थी क्यूंकि उसके बल अभी थोड़े थोड़े गीले थे. सलवार कमीज में वो अपनी कुदरती सुंदरता और गुलाबी रंग क साथ परियों सी खूबसूरत लग रही थी. पर मैं तो उसके इस हमले से एक बार को दर hi गया था .

राधा : गुड मॉर्निंग , कहाँ चले गए थे सुबह सुबह ?

अमित : वो ,, वो ,, मैं ,, वो एक्सरसाइज करने गया था . पर ये क्या था ? अगर मौसी देख लेती तो ?

राधा : तुम इतना दर क्यों रहे हो ? इसमें कौन सी गलत बात है? मैंने तो बस तुम्हे मॉर्निंग hi विश की है. उलट मुझे विश करने क तुम ऐसे सवाल पूछ रहे हो जैसे कोई पाप किया हो.

अमित : नहीं वो , ऐसी बात नहीं है . मैं तो दर hi गया था क कौन आ गया ऐसे .

राधा : और कौन आएगा यहाँ ? चलो अब जल्दी से तुम भी नाहा लो. माँ नाहा कर आती होगी मैं तुम्हारे लिए दूध गरम कर क लती हूँ.

‘ अरे तुम आ गए बीटा ,, मैं तो पहले टेंशन में hi आ गयी थी जब तुम्हे उठते hi बीएड से गायब देखा . मुझे लगा कहीं चला तो नहीं गया . पर बाइक देख कर तसल्ली हुई क तुम यहीं हो. ‘

मौसी बाथरूम से नाहा कर निकली और हमारी तरफ hi आ गयी. गीले बल तौलिये में बांध कर उन्होंने सर पर लपेटे हुए थे. इस वक़्त मौसी मेहरून रंग क ब्लाउज पेटीकोट में थी और ब्लाउज अभी भी कहीं कहीं से गीला था जिस वजह से उनकी छाती से चिपका हुआ था और सारा भूगोल अपनी स्थिति बता रहा था . अभी अभी नाहा कर निकली दिव्या मौसी का रूप कुछ ज्यादा hi दमक रहा था और एक बार फिर नज़रें मेरे काबू से बहार होती उन्हें सर से पाऊँ तक देखने लगी. किसी जवान लड़की की तरह ब्लाउज में तने हुए चूचक और उनके ऊपर उनकी गोरी छाती , ब्लाउज क नीचे मखमली सपाट पेट और नीचे पेटीकोट में कैद गदरायी कमर और जांघें. मैं तो जैसे उनके हुस्न क तिलिस्म में खो सा गया था .

दिव्या : राधा तुम जाओ दूध गरम करो मैं तब तक तैयार हो जाती हूँ फिर साथ में चाय पीते हैं. आज नाश्ते में क्या खाओगे ?? अमित ,, क्या लोगे नाश्ते में ?

दिव्या मौसी शायद मेरी स्थिति समझ गयी थी इस लिए वो राधा को किचन में भेज रही थी जबकि मैं वहीँ अटका था . मौसी ने जब मुझसे पुछा तो मुझे तो उनकी बात hi समझ नहीं आयी मगर उन्होंने दोबारा पूछा तो मैं जैसे नींद से जगा.

अमित : हह , हाँ , जी मौसी ,,, कुछ भी बना लीजिये . कुछ भी .

दिव्या : तुम्हारा ध्यान कहाँ है ? जाओ जा कर नाहा लो.

मौसी ने शायद मेरी नज़रों को ताड़ लिया था इसी वजह से मैं और भी शायद शर्मिंदा हो रहा था और उनसे नज़रें चुरा रहा था. उनकी बात का जवाब दिए बिना hi मैं भाग कर अपने बाथरूम में घुस गया . लैंड एक बार फिर से तन चूका था जिसका मुझसे एहसास hi नहीं हुआ था पर अब नज़र पड़ी तो सोच में पद गया क कहीं मौसी ने देख तो नहीं लिया . मैं खुद को गलियां देने लगा क ये मुझे क्या हो गया है. मैं अपनी माँ सामान मौसी को ऐसी नज़र से देख रहा हूँ. पर अब लैंड खान सुनता है कुछ. उसे तो बैठना hi था इससे पहले क राधा मेरे पास आये. मैं जल्दी से कपडे उतर कर नहाने लगा और ठन्डे पानी क असर से लैंड अब बैठ तो गया मगर वजसना का जो तूफ़ान सांसों में उमड़ रहा था वो कहाँ थमने वाला था . खैर मैं नाहा कर जल्दी से बहार निकला और कपडे पहनने लगा अभी मैंने अंडरवियर hi पहना था क राधा कमरे में घुस आयी हाथ में दूध क गिलास थामे. एक पल क लिए हम दोनों वहीँ जैम से गए. राधा एक तक मुझे देख रही थी और मैं उसे . न उसके मुँह से कुछ निकल रहा था न मेरे . दिव्या मौसी की पीछे से आवाज़ आयी जैसे वो राधा को बुला रही हो तो हम दोनों hi हड़बड़ा गए . मैंने जल्दी से राधा की तरफ पीठ की और कपडे पहनने लगा .

राधा : आए ,, एआईईईई मायआ .

राधा क मुँह से जैसे बड़ी मुश्किल से आवाज़ निकली और वो जल्दी से दूध का गिलास रख कर भाग गयी. मैंने भी तुरंत कपडे पहने और दूध पिने लगा . आज ये सब क्या हो रहा था मेरे साथ. मुझे समझ नहीं आ रहा था . खैर थोड़ी देर में मौसी और राधा मेरे कमरे में आ गयी अपनी चाय ले कर. राधा मुझसे शर्मा रही थी और नज़रें नहीं मिला रही थी . जबकि मौसी बातें कर रही थी और मैं उनसे नज़रें चुरा रहा था. कुछ देर बातें करने क बाद मौसी और राधा नाश्ता बनाने में लग गयी . मौसी ने मेरी पसंद क परांठे बनाये थे पर अपने अंदर की शर्मिंदगी की वजह से मैं खुल कर उसक भी मज़ा नहीं ले पाया. नाश्ता करने क तुरंत बाद मैं घर से निकलने को तैयार हो गया तो मौसी ने मुझे रोका .

दिव्या : कहाँ जा रहे हो ?

अमित : वो मौसी मुझे एक दोस्त से मिलना है , कम्पटीशन क लिए जाना है न तो उसी सिलसिले में बात करनी है .

दिव्या : पर वो तो कॉलेज में भी कर सकते हो कल. आज छुट्टी है काम से काम घर पर हमारे साथ रह लो.

अब मैं मौसी को क्या बताता क मेरी क्या हालत हो रही थी. मौसी और राधा दोनों से hi नज़रें मिलाने की तो हिम्मत नहीं हो रही थी. ऊपर से अपने अंदर वासना की गर्मी भी महसूस हो रही थी. अगर घर पर रहता तो पता नहीं और क्या क्या हरकत हो जाती इसी लिए मैं जाना चाहता था .

अमित : मैं 1-2 घंटे में आ जाऊंगा मौसी फिर यहीं पर hi हूँ.

दिव्या : चल ठीक है , फिर आ जाना टाइम से , खाना साथ में खाएंगे. और शाम को ज़रा मार्किट ले चलना . राधा का मन है घूमने जाने का .

अमित : ठीक है मौसी शाम को चलते हैं.

इतना कह कर मैं घर से निकलने लगा तो मेरी नज़र राधा पर पड़ी किचन क दरवाज़े पर कड़ी हमारी बातें सुन रही थी. जब हमारी नज़रें मिली तो वो शर्मा सी गयी और मुस्कुराती हुई किचन में वापिस घुस गयी. मैं बाइक उठा कर निकल लिया सीधा अपनी दुश्मन यानि क चन्दर्कांता मैडम क घर. आज उनको लाइन पर लाना hi था वर्ण वो अपनी ताकत का इस्तेमाल कर क मुझे फ़ैल करवाने क चक्कर में थी हालाँकि इतना भी आसान नहीं था ये . प्रिंसिपल और और वरिंदर सर तो थे hi मेरी सपोर्ट में ऊपर से मैंने एग्जाम भी अचे से दिए थे . पर जो भी था पहले दिन से hi उसका मेरे साथ 36 का आंकड़ा था और अब तो मेरे पास उसको दबाने का हथियार भी था , उसकी वीडियो. खैर कुछ hi देर में मैं चन्दर्कांता क घर क बाहिर था. शहर क पॉश इलाके में चन्दर्कांता ये बढ़िया माकन था . एक तो संडे था और ऊपर से अभी कुछ ज्यादा टाइम भी नहीं हुआ था तो लोग काम hi नज़र आये इस तरफ . मैंने जब चन्दर्कांत क घर की बेल्ल बजे तो अंदर से कोई आवाज़ नहीं आयी. 3 बार बेल्ल बजने पर किसी औरत की आवाज़ सुनाई दी जो बहार की तरफ आ रही थी.

‘ अरे रुक भी जाओ ,, आ रही हूँ. संडे को भी आराम नहीं करने देते . ‘

आवाज़ सुन कर hi मैं समझ गया क ये चन्दर्कांता hi थी जो दरवाज़ा खोलने आ रही थी. यानि क साफ था क घर पर कोई नौकर नहीं है इस वक़्त. ये मेरे लिए अछि बात थी. जैसे hi चन्दर्कांता ने गेट खोला तो मुझे सामने देख कर चौंक गयी और गुस्से में आ गयी.

चन्दर्कांता: तुम यहाँ क्या कर रहे हो? तुम्हे मेरे घर एड्रेस किसने दिया ?

अमित : गुड मॉर्निंग मम , वो क्या है मुझे आपसे एक ज़रूरी काम था इस लिए सीधा आपके घर hi चला आया. वैसे आपका एड्रेस पता करना इतना मुश्किल भी नहीं है.

चन्दर्कांता: तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे घर आने की? जो भी काम है कॉलेज में बात करना . अब जाओ यहाँ से .

चन्दर्कांता ने तो ताका सा जवाब दे दिया था मुझसे गुस्से में . गुस्सा तो मुझे भी बहुत आया पर अभी तो असली खेल बाकि था .

अमित : वो मैडम बात ऐसी है क अगर कॉलेज में बात की तो आपको नौकरी भी जा सकती है . आपको कॉलेज से निकला जा सकता है. इस लिए मुझे लगा क आपसे घर पर hi मिल कर बात करना सही रहेगा .

नौकरी जाने की बात सुन कर चन्दर्कांता क भाव एक डैम से बदल गए .

चन्दर्कांता: ये तुम क्या कह रहे हो? मेरी नौकरी क्यों जाएगी ? मैं डिपार्टमेंट की हेड हूँ . मुझे कोई ऐसे hi नौकरी से निकल देगा क्या ? सपने देखना छोड़ दो. अपनी फ़िक्र करो , तुम्हे कॉलेज से मैं निकलवा क दिखती हूँ.

अमित : है है है , आपको लगता है क आप कुछ भी कर सकती हैं और आपका कोई कुछ नहीं बिगड़ सकता . ठीक है तो फिर कल कॉलेज में hi मिलते हैं. खुद hi देख लीजियेगा क्या होता है . मुझे कॉलेज से निकला जाता है या आपको. वैसे आप अकेले hi नहीं निकलेंगी , आपके साथ प्रोफ़ेसर वर्मा भी निकले जायेंगे .

अब तो चन्दर्कांता की हवा एक पल क लिए टाइट हो hi गयी. और वो तुरंत आवाज़ नीची करते हुए बोली .

चन्दर्कांता: तुम आखिर कहना क्या चाहते हो ?

अमित : मेरे ख्याल से हमें अंदर चल कर बात करनी चाहिए. कहीं ऐसा न हो क नौकरी क साथ साथ आपको घर से भी निकलना पद जाये .

चन्दर्कांता को एक और झटका लगा . शायद उसे कुछ कुछ अंदाज़ा हो गया था . उसके चेहरे पर घबराहट साफ़ नज़र आ रही थी. चन्दर्कांता ने मुझे अंदर आने को कहा और गेट बंद कर दिया . वो मुझे पीछे आने का कह कर अंदर को चल दी. मैंने घर पर नज़र मारी तो चन्दर्कांता की कार क इलावा और कोई गाडी नहीं कड़ी थी. इसका मतलब था क वो घर पर अकेली hi है. मैं चन्दर्कांता क पीछे पीछे अंदर को चल दिया . चन्दर्कांता इस वक़्त एक फुल लेंथ निघ्त्य पेहेन हुए थी तवो पीेछे . ऊपर गाउन और अंदर मैक्सी टाइप . मेरे आगे वो अपने कूल्हे मटकती है रही थी और मैं उसकी मटकती गांड देख रहा था . चन्दर्कांता चाहे जैसी भी थी पर फिगर उसकी वाकई में मस्त थी और रंग से भी गौरी थी बस बेवजह चेहरे पर गुस्सा hi रहता था ज्यादा या शायद मेरे साथ hi ऐसा करती थी . हम दोनों चलते चलते जब अंदर हॉल में आ गए तो उसने मुझे बैठने का भी नहीं कहा और फिर से सवाल कर दिया .

चन्दर्कांता: अब बको क्या बात है ?

अमित : अरे , बैठने को भी नहीं कहेंगी ? आप तो टीचर हैं , काम से काम इतना तो शिष्टाचार होना hi चाहिए न .

चन्दर्कांता: मुझे तुम्हारी बकवास नहीं सुन्नी है . जो कहने आये हो वो कहो .

अमित : ाचा तो सीधा मुद्दे की बात hi करनी है आपको . ठीक है ऐसे hi सही. वैसे घर पर कोई और तो नहीं है न . वर्ण खामखा आपका बसा बसाया घर टूट जायेगा .

चन्दर्कांता: देखो , जो बात है साफ़ साफ़ करो. ये पहेलियाँ मत बुझाओ.

चन्दर्कांता की इतने कॉन्फिडेंस से भरी आवाज़ का मतलब साफ़ था क वो अकेली hi है घर पर . वर्ण वो लहजा नरम रखती .

अमित : तो ठीक है सीधा hi बात करता हूँ. मेरे पास कुछ है जो आप देखना पसंद करेंगी .

मैंने अपने मोबाइल में इस दिन की रिकॉर्डिंग निकली जब चन्दर्कांता कॉलेज में hi सेक्स कर रही थी. वीडियो चला कर मैंने चन्दर्कांता क हाथ में मोबाइल थमा दिया और जब उसने वो वीडियो देखो तो उसकी ऑंखें फटी की फटी रह गयी . उसकी हालत तो ऐसी हो गयी जैसे रेंज हाथों चोर को पकड़ लिया गया हो. उसके मुँह से आवाज़ hi नहीं निकल रही थी . पर कहते हैं न जो खुद को स्मार्ट समझते हैं वो अपनी होशियारी दिखने से बाज़ नहीं आते . उसने जल्दी से फ़ोन में से वो वीडियो डिलीट कर दिया . मैंने भी उसे नहीं रोका क्यूंकि मैं उसकी कॉपी पहले hi बना चूका था .

अमित : है है है , आपको क्या लगा क मैं इसकी कॉपी नहीं बनाऊंगा ? मेरे पास इसकी और भी कॉपी है और यही नहीं मैंने कंप्यूटर पर भी सेव की भी है .

चन्दर्कांता: ये ययय ,,, ययय ये सब क्या है ? तट त्तुम्म्मम्म मुझे ब्लैकमेल करने आये हो ?

अमित : ये सब क्या है ? इसका जवाब तो आपको देना चाहिए और अआप मुझसे पूछ रही हैं. वैसे लग तो कमल की रही हैं आप. जब कॉलेज क लड़के लड़कियां आपकी ये मूवी देखेंगे तो आप की वह वह तो ज़रूर करेंगे एक बार . उसके बाद बाकि स्टफ्फ्फ , प्रिंसिपल और फिर सारा शहर . और धीरे धीरे पूरी दुनिया देखेगी. आप तो रातों रातों फेमस हो जाएँगी. तो कहिये , अब कॉलेज से कौन निकलेगा ? आप या मैं ?

चन्दर्कांता: देखो ये सब झूठ है. तुमने ये सब एडिटिंग से बनाया है . मैं पुलिस में शिकायत दे दूंगी और तुम्हे जेल करवा दूंगी .

अमित : शौंक से कीजिये , जिसे भी शिकायत करनी है कीजिये. मैं यहीं बैठा हूँ. वैसे आप को तकलीफ करने की भी ज़रूरत नहीं. मैं अभी ऋतू जी को कॉल किये देता हूँ . सचाई तो वो खुद hi पता लगा लेती हैं. आप तो जानती hi हैं वो कितनी ऑनेस्ट हैं .

ऋतू का नाम सुन कर तो चन्दर्कांता की रही सही हिम्मत भी जवाब दे गयी. वो अपने हाथों की उँगलियों मरोड़े जा रही थी . शायद वो सोच रही थी अब वो क्या करे. क्यूंकि उसे पता था ऋतू मेरी कितनी सपोर्ट करती है. अगर उस तक बात पहुंची तो ये ाचा नहीं होगा .

चन्दर्कांता: देखो , तुम मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते. मैंने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा? ये मेरी पर्सनल लाइफ है. तुम्हे कोई हक़ नहीं इसमें दखल देने का .

अमित : ाचा !!! लगता है आप बहुत जल्दी भूल गयी . अभी अभी तो आप बहार कह रही थी क आप मुझसे कॉलेज से निकलवा डौगी . मैं आपका वो hi फेवरेट देहाती हूँ न जिसे आप आये दिन ज़लील करती रही हैं पहले दिन से hi . इतनी जल्दी भूल गयी आप ? मैंने तो सुना है आपके सब टीचर को खास हिदायत दी है क मेरी मार्किंग टाइट की जाये और मुझे फ़ैल किया जाये . और कहती हैं क आपने मेरा बिगाड़ा क्या है ? वो कहते हैं न 100 सुनार की 1 लोहार की. आपने कितने hi मौकों पर मुझे ज़लील किया और अब मेरी बरी है हिसाब चुकता करने की. अब ये वीडियो सारा कॉलेज सारा शहर देखेगा . फिर देखता हूँ आपकी अकड़ कहाँ जाती है . कॉलेज से तो आप जाएँगी hi और आपके वो दोनों चमचे भी , घर भी आपका सलामत नहीं रहेगा अगर आपका पति थोड़ा सा भी गैरतमंद है तो.

चन्दर्कांता क चेहरे पर हवाइयां hi उड़ने लगी थी मेरी बात सुन कर. मैंने थोड़े सार्ड लहजे में ये बात की थी और मेरी आँखों में गुस्सा देख वो समझ गयी क मैं जो कह रहा हूँ वो कर क रहूँगा .

चन्दर्कांता: देखो मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगती हूँ. तुम कहो तो तुम्हारे पाऊँ पद जाती हूँ प्लीज ये सब किसी को मत दिखाना. मेरी ज़िन्दगी बर्बाद हो जाएगी . मेरे पति मुझे घर से निकल देंगे . प्लीज मेरे साथ ऐसा मत करो. मैं वडा करती हूँ फिर तुम्हे कभी तंग नहीं करुँगी. मैं खुद तुम्हारे नंबर बढ़ा दूंगी . प्लीज ये सब डिलीट कर दो.

अमित : है है है , डिलीट कर दूँ? ये तो आपकी करनी का गाल है मैडम. अपने पति की पीठ पीछे आप hi तो दूसरों क साथ गुलछर्रे उदा रही हैं न. तो अगर वो आपको घर से निकल देते हैं तो इसमें गलत hi क्या है. अब हटिये एक तरफ मैं बस यही बताने आया था क आपने जो कुछ करना था कर लिया अब मेरी बरी है .

चन्दर्कांता: तुम्हे क्या मिलेगा ये सब कर क ? देखो तुम्हे पैसे चाहिए न ? बताओ कितने पैसे चाहिए ? मैं अभी तुम्हे पैसे दे देती हूँ.

अमित : है है है , पैसा और मुझे ?? अगर आप मेरी हैसियत जानती तो ऐसा बिलकुल नहीं कहती . हाँ कुछ और है आपके पास तो बताइये .

मैंने चन्दर्कांता को ऊपर से नीचे तक देखते हुए कहा तो वो अपनी नाईट क पल्लू बंद करते हुए गुस्से भरी नज़रों से मुझे देखती बोली .

चन्दर्कांता: देखो , अपनी हद में रहो.

अमित : अभी तक तो हद में hi हूँ मैडम , अगर हद से बहार जाता तो कब का आपको तारे दिखा चूका होता . वैसे हद्द पार करने में तो आप काफी आगे हैं. प्रोफ बसरा और प्रोफ वर्मा दोनों क साथ खूब मज़े कर रही हैं.

चन्दर्कांता: ज़ुबान संभल क बात करो .

अमित : ज़ुबान तो संभल लूँ पर कुछ और है जो नहीं संभल रहा . और अब उसे आप hi संभल सकती हैं. वैसे एक बात तो मैं अचे से समझ गया हूँ क वो दोनों भी आपको ठंडा नहीं कर पाए . कुछ ज्यादा hi गरमी है आप में .

चन्दर्कांता: अभी क अभी मेरे घर से बहार निकालो ज़लील इंसान .

अमित : ठीक है तो , मैं चलता हूँ और अभी थोड़ी देर में आपकी ये हॉट मूवी सबके मोबाइल पर रिलीज़ कर देता हूँ. Bye bye .

मैं इतना कह कर निकलने लगा क चन्दर्कांता ने जल्दी से मेरा हाथ पकड़ कर मुझे रोक लिया और मिन्नत करने लगी .

चन्दर्कांता: प्लीज मेरे साथ ऐसा मत करो , मैं बर्बाद हो जाउंगी. मैं बेहाल गयी थी , वो सब अचानक हो गया था . प्लीज ऐसा मत करो .

अमित : ये सब झूठ किसी और को सुनाइए मैडम शायद कोई यकीन कर ले. मैंने तो आपकी साडी बातें अपने कानो से सुनी है . आप तो उन दोनों को hi अपने इशारों पर नचा रही हैं और खूब मज़े कर रही हैं अपने पति की पीठ पीछे . वैसे इस वीडियो में भी आपकी बहुत साडी बातें हैं hi.

चन्दर्कांता ने अब लगभग हथियार दाल hi दिए थे . उसे समझ आ गयी थी क अब मेरी बात मैंने क सिवा उसके पास और कोई चारा नहीं बचा है .

चन्दर्कांता: क्या चाहते हो तुम ?

अमित : ज्यादा कुछ नहीं , जो काम आप वर्मा जी और बसरा जी क साथ कर रही हैं . मुझे भी वो सब करना है .

मेरी बात सुन कर चन्दर्कांता कुछ देर खामोश रही और फिर बुरा सा मुँह बना कर पास में जो डाइनिंग टेबल पड़ा था उसके ऊपर रख कर झुक गयी और खुद hi अपनी निघ्त्य कमर तक ऊपर उठा ली जिससे उसकी गोरी टंगे नंगी हो गयी. उसकी गांड काली पेंटी में कासी हुई बहुत hi प्यार लग रही थी . एक डैम बड़ी और कासी हुई . मेरा लैंड तो एक मिनट में hi औकात में आ गया . वैसे भी सुबह से तड़प रहा था . मौसी क साथ हुए इंसिडेंट की वजह से तो बुरी हालत थी hi अब तो उसे जैसे मौका मिलने वाला था अपनी गरमी निकलने का . आज तो मज़े क साथ बदला लेने का मायका हाथ आया था.

चन्दर्कांता: जल्दी करो जो करना है और यहाँ से दफा हो जाओ .

चन्दर्कांता ने एक बार फिर से मुझे कड़वे शब्द बोले तो मुझे गुस्सा आ गया . ये साली नहीं सुधर सकती . इतना सब कुछ होने क बाद भी अकड़ तो ऐसे दिखा रही है जैसे मैं इसका गुलाम हूँ. अब तो इसे सबक सीखना hi पड़ेगा . यही सब सोच कर मैंने भी जल्दी से अपना लोअर और अंडरवियर नीचे किया और एक बार अपने लैंड को मसल कर उसे जैसे तैयार रहने को कहा हमला करने क लिए दुश्मन पर. फिर मैंने चन्दर्कांता की काली पेंटी को एक झटके में उसके पाऊँ में गिरा दिया और थोड़ा और झुका दिया ताकि उसकी छूट थोड़ा पीछे को और उभर आये . चन्दर्कांता की छूट नज़र आने लगी , छूट क ऊपर थोड़े थोड़े बल थे . ज्यादा दिन नहीं हुए होंगे उसे बाल साफ़ किये हुए . छूट थोड़ी खुली हुई थी पर आज उसे उसकी औकात से ज्यादा खोलने वाला था मैं. क्यूंकि चन्दर्कांता ने जो लैंड कहते थे वो इतने बड़े नहीं थे जैसा की उसकी बातों से मैंने जाना था . तो अब वक़्त था उसकी छूट की धज्जियाँ उड़ाने का .

अमित : आप हमेशा मुझे देहाती कहती थी न ,, आज इस देहाती को अछि तरह से देख लो.

इतना कह कर मैंने एक हाथ से अपना लैंड पकड़ कर छूट क बीचो बीच सेट किया और उसकी कमर को दोनों हाथों से थम कर पूरे ज़ोर से अपना लैंड उसकी छूट में धकेल दिया . मेरा लैंड चन्दर्कांता की छूट को चीरता बुआ एक hi बार में पूरा अंदर घुस गया . चन्दर्कांता को तो अंदाज़ा भी नहीं था क वो किस लैंड से छोड़ने जा रही है और न hi उसने एक नज़र देखने की कोशिश की. मगर लैंड क घुसते hi उसे एहसास हो गया क उसका पला किस्से पड़ा है. और इस बात का सुबूत थी उसके मुँह से निकली दर्द भरी चीख जो शायद घर क बहार तक गयी होगी .

चन्दर्कांता: आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह maaaaaaaaaaaahhhhhhhhh निकाल बहार हरामी ,,,,. आअह्हह्ह्ह्ह क्या घुसा दिया कुत्ते aaaaaaaiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaa छोड़ मुझे बहनचोद साले हरामी कुत्ते aaaaaiiiiiiiiii माआआआ मर गईइइइइइइइ छोड़ दे मुझे कुत्ते माआआआ

चन्दर्कांता चीखती हुई मुझे गलियां दे रही थी और अंत में रोने hi लग गयी. कोई और वक़्त होता तो ऐसे गलियां देने पर शायद मैं उसका मुँह hi तोड़ देता पर इस वक़्त तो उसकी गलियां सुन कर मुझे और भी ज्यादा मज़ा आ रहा था . जैसे क म्हणत का इनाम मिल रहा हो. मैंने बिना उसकी परवाह किये अपना लैंड सुपडे तक बहार खींचा और धक्क्क से पेल दिया पूरे ज़ोर क साथ. लैंड जड़ तक छूट में समां गया और ज़रूर ये उसकी बच्चेदानी पर लगा होगा जो वो और ज्यादा ज़ोर से चीखी .

चन्दर्कांता: aaaaaiiiiiiiiii माआआआआ आह्ह्ह्हह कुत्त्तीीे ,,,,. छःठोड़ड़ड़ड़ड़ मुझे हरामीईईई aaaaaiiiiiiiiii ,,,, निकल बहार आआआहहहहह क्या घुसा दिया बहनचोद तूंबीएए आआआईईईई .

अमित : ये एक देहाती का लैंड है मेरी जाएं , तूने आज तक छोटी छोटी लुल्लिअन hi ली हैं आज असली लैंड का मज़ा ले . ये लो ,,, और ले ,, और चीख .

चन्दर्कांता: एआईईईई आआअह्ह्ह्हह एआईईईई आआआह्ह्ह्हह्ह निकल बहार बहनचोद आआह्ह्ह्हह्ह ,,, मैं कोई ,,,,, रनडीई नहीं हूँ एआईईईई जो ,,,, ऐसे मेरी चुत फ़ायद रहा है आयआईईईई निकल ले कुत्ते

चन्दर्कांता चीख रही थी गलियां दे रही और मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी . पर भला मेरी पकड़ से वो कहाँ निकल सकती थी. आगे टेबल पड़ा था जिस पर मैंने उसे झुकाया हुआ था और उसकी पीठ दबा कर उसे उठने भी नहीं दे रहा था . मैं लगातार उसकी छूट में ताबड़तोड़ धक्के मर रहा था जिससे की टेबल भी हिल रहा था . चन्दर्कांता ज़ोर ज़ोर से चिल्लाती रही पर मैंने कोई रेहम नहीं किया और अपना काम करता रहा . थोड़ी देर बाद इसकी चीखें बंद हो गयी और सिर्फ सिसकियाँ लेती वो मेरे धक्के बर्दाश्त करने लगी. लैंड ने छूट में जगह तो बना ली थी पर अभी भी छूट ने लैंड जकड़ा हुआ था . शायद चन्दर्कांता को अब मज़ा आने लगा था जिससे उसकी छूट में नमी आ गयी थी. मैंने एक हाथ नीचे ले जाकर उसकी छूट क दाने को मसलना शुरू कर दिया . जिससे चन्दर्कांता अब मैं लेती सिसकियाँ लेने लगी .

चन्दर्कांता: उम्मम्मम ककक आअह्ह्ह आअह्ह्ह्हह उम्मम्मम्म

अमित : क्यों , मज़ा आ रहा है न कुटिया ? देख अब कैसे रंडी की तरह खुद hi लैंड ले रही है .

चन्दर्कांता: उम्मम्मम कक्कक्स आअह्ह्ह्हह तूने मेरी चुत फाड़ दी है कुत्ते ,,,, आअह्ह्ह्ह कक्कक्स उम्म्म्म अब मज़ा भी न लूँ कक्कक्कक्स आअह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्ह आआअह्ह्ह आअह्ह्ह आराम से कर कुत्ते मैं कहीं भाग नहीं आआह्ह्ह्हह रही आह्ह्ह्ह आह्हः

मैंने अपनी स्पीड बात करते काम की थी जो फिर से तेज़ करदी जिससे चन्दर्कांता से सही से बोलै भी नहीं जा रहा था .

अमित : ये ले कुटिया और ले , अचे से मज़े ले . मैं जनता हूँ तेरी छूट में बहुत आग है जिसे न तेरा पति बुझा पता है न वो बसरा और वर्मा . आज एक देहाती लैंड तेरी आग ठंडी करेगा . ये ले ,,,, आज से तू मेरी कुटिया है मेरी रंडी ,, जब मेरा दिल करेगा जैसे दिल करेगा वैसे छोडूंगा तुझे . और ले , ये ले .

चन्दर्कांता: आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह मादरचोद आह्ह्ह्हह्ज फ़ायद देगा क्याआ आआह्ह्ह्हह ,, मार और ज़ोर से मार कुत्ते दिखा कितना डैम है आआह्ह्ह

अमित : मेरा डैम देखना है तुझे रंडी ?? आज तेरा वो हल करूँगा क खुद hi मेरे आगे पीछे घूमेगी लैंड लेने क लिए .

मैंने चन्दर्कांता की छूट क दाने को तेज़ तेज़ छेड़ना शुरू कर दिया जिससे जल्द hi उसकी छूट ने डैम तोड़ दिया और भरभरा कर बहने लगी . चन्दर्कांता और भी तेज़ी से चीखती सिसकारी झड़ने लगी और उसका पूरा शरीर कम्पनी लगा . उससे खड़ा रहना भी मुश्किल हो गया और वो टेबल पर hi गिर गयी.

चन्दर्कांता: आअह्ह्ह्हह कक्कक्कक्स उम्मम्मम कक्कक्कक्स उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़

अमित : क्यों कुटिया इतनी जल्दी हार गयी? अभी तो मेरा हुआ hi नहीं . चल ज़रा इसे मुँह में ले.

मैंने चन्दर्कांता क छूट से लैंड बहार निकला जिससे उसकी छूट का कामर्स बहार आने लगा और उसकी जाँघों क साथ बेहटा हुआ फर्श तक आ गया . पहले तो चन्दर्कांता मेरी बात सुन कर होली भी नहीं जैसे वो मदहोशी क आलम में हो . तब मैंने एक ज़ोरदार चांटा उसकी गांड पर मारा तो वो चीखी .

चन्दर्कांता: आआआईईईई ,,, मार क्यों रहा है कुत्ते आअह्ह्ह

अपने चूतड़ को सहलाती वो मुश्किल से उठी और घूम कर जब घुटनो पर बैठी तो मेरा लैंड देख कर उसकी ऑंखें फटी की फटी रह गयी. उसकी हालत देख कर मुझे हंसी आ गयी . उसने ऐसा लैंड कभी देखा नहीं था शायद. मेरा लैंड जो उसके कामर्स में लिथड़ा हुआ था मैंने उसे पकड़ कर ऊपर नीचे हिलाते हुए उसे अचे से दर्शन कराये .

चन्दर्कांता: ये ,, ये क्या है ?

अमित : क्यों ??? कभी लैंड नहीं देखा क्या ??

चन्दर्कांता: ये लैंड है ? ये तो मुसल है . तभी मैं कहूं इतना दर्द क्यों हो रहा है. इसे मैं पहले देख लेती तो ले hi न पति .

अमित : बिलकुल लेती और उछाल उछाल कर लेती. तू कितनी बड़ी रंडी है मुझे अचे से पता है. चल अब इसे मुँह में ले . तुझे तो लैंड चूसना बहुत पसंद है न , चल जल्दी कर .

चन्दर्कांता ने ज्यादा नखरा नहीं किया और मेरा लैंड दोनों हाथों में पकड़ लिया . वो लैंड पर ऐसे हाथ चला रही थी जैसे उसकी लम्बाई चौड़ाई नाप रही हो .

चन्दर्कांता: इतना बड़ा तो मैंने कभी देखा भी नहीं . मेरे पति का तो इससे आधा हो है लम्बाई में भी मोटाई में भी. और उन दोनों भावों का भी वैसा hi है . ये मेरे मुँह में नहीं जायेगा .

अमित : बिलकुल जायेगा , तुझ जैसी रांड क हर छेड़ में ये मुसल आराम से जा सकता है .

मैंने चन्दर्कांता क सर को दोनों हाथों में थाम कर लैंड पर दबाया और उसने पूरा मुँह खोल कर लैंड को मुँह में लेने की कोशिश की. सूपड़ा मुँह में जाते hi मैंने लैंड मुँह में पेल दिया जो उसके गले में जा लगा . एक बार तो उसकी सांस hi अटक गयी , मैंने कुछ देर लैंड को ऐसे hi रोका और फिर अंदर बहार करने लगा . चन्दर्कांता को इतना बड़ा लैंड चूसने में दिक्कत तो हो रही थी पर मुझे मज़ा आ रहा था और मैं उसे मुँह से लैंड निकलने नहीं दे रहा था . चन्दर्कांता की सांस बार बार अटक रही थी और उसके मुँह से थूक की लॉरेन टपक रही थी . कुछ देर लैंड चूसने क बाद मैंने उसे बालो से पकड़ कर खड़ा किया और उसके कपडे एक hi झटके में अलग कर दिए . उसने नीचे काली ब्रा पहनी हुई थी जिसे मैंने खिंच कर फाड़ दिया.

चन्दर्कांता: आअह्ह्ह्ह कपडे क्यों फाड़ रहे हो .

अमित : कपडे क्या आज तो तेरी छूट भी ऐसे hi फटेगी मेरी रांड .

मैंने चन्दर्कांता की बायीं तंग घुटने से पकड़ कर उठायी और थोड़ा झुक कर लैंड को छूट पर सेट किया . चन्दर्कांता ने गिरने से बचने क लिए मेरे गले में बहन दाल ली और खड़े खड़े hi मेरा आधा लैंड उसकी छूट में घुस गया . एक बार फिर से चन्दर्कांता चीखी .

चन्दर्कांता: आयआईईईई आराम से कर कुत्ते आआह्ह्ह

अमित : चुप कर रांड , अब तो तेरी छूट खुल चुकी है फिर क्यों नखरा कर रही है .

मैंने चन्दर्कांता की तंग ऐसे hi अपनी कमर पर लपेट कर धक्के मरने शुरू कर दिए और वो एक हाथ पीछे टेबल पर रख के सहारा लिए एक हाथ मेरी गर्दन पर रखे खुद hi मेरे धक्कों का मज़ा लेने लगी . इस तरह पूरा लैंड अंदर नहीं घुस रहा था तो मैंने उसकी दूसरी तंग भी उठा कर अपनी कमर पर लपेट ली और उसे पूरी तरह अपनी बाँहों में उठा लिया . उसके चूतड़ों को पकड़ कर मैं अब उसे अपने लैंड पर उछलने लगा और वो मेरे गले में बहन डाले सिसकने लगी .

चन्दर्कांता: आअह्ह्ह ककक आआह्ह्ह कक्कक्स उम्म्म ऐसे hi करो कक्कक्स आआह्ह्ह ऐसे तो आज तक मुझे किसी ने नहीं छोड़ा आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह

अमित : कभी मुझ जैसा देहाती तुझे मिला भी तो नहीं. अब बोल कैसा लग रहा है देहाती का लैंड ले के ?

चंद्रकांता: मज़ा आ रहा है ककक उम्म्म्म उम्मम्मम उम्म्म्म

चन्दर्कांता ने खुद hi मेरे होंठों को अपने होंठों में जकड लिया और किश करने लगी . मैं उसे किश करता हुआ अपने लैंड पर धीरे उछाल रहा था और उसकी गांड को मसल रहा था . चन्दर्कांता की गांड कुछ ज्यादा hi बहार को निकली हुई थी और उसके चूतड़ मांस क ऐसे गोले थे जिन्हे दबाने में बहुत मज़ा आ रहा था . अब गांड ऐसी हो तो दिल कैसे न करे उसे मारने का . मैं चन्दर्कांता को ऐसे hi उठाये एक तरफ बने कमरे में ले गया जो बैडरूम hi था . मैंने उसे बीएड पर लिटा दिया और उसकी टंगे उठा कर धक्के मरने लगा . चन्दर्कांता खुद hi अपने स्तन मसल मसल कर सिसकियाँ ले रही थी . मैंने झुक कर उसके एक स्तन को मसलते हुए दूसरे को मुँह में ले लिया . चन्दर्कांता क चूचक भी बड़े थे और गुन्डलियाँ ब्रोनिश थी . मेरे इस तरह करने से चन्दर्कांता खुद hi अपनी कमर उठाने लगी और मेरा सर अपनी छाती पर दबाने लगी . वो फिर एक बार गरम हो गयी थी और मुझे तेज़ धक्के मरने को कहने लगी . मैंने भी उसकी टंगे कंधे पर रख कर उसके सर की तरफ दबा दी और ताबड़तोड़ धक्के मरने लगा जिससे की उसकी पूरी बॉडी हिलने लगी . चन्दर्कांता का एक बार पानी निकल गया . मैंने उसे जल्दी से घुमा कर घुटनो पर किया और एक hi झटके में पूरा लैंड फिर से छूट में घुसा दिया .

चन्दर्कांता: आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स ज़ालिम ,,,, आराम से कर ले अब तो आआह्ह्ह्हह

अमित : क्यों रंडी , तुझे तो ऐसी hi चुदाई पसंद है न. आज तेरी साड़ी गरमी निकल दूंगा.

मैंने चन्दर्कांता क बल एक हाथ में पकडे जैसे घोड़े की लगाम पकड़ते हैं और उसे खिंच कर ज़ोर से धक्के मरने लगा . चन्दर्कांता बल खींचने से थोड़ा ऊपर को उठी और मैंने दूसरे हाथ से उसके चूतड़ों पर थप्पड़ बरसाने शुरू कर दिए .

अमित : मज़ा तो आ रहा है न कुटिया .

चन्दर्कांता: आअह्ह्ह्हह ,,, आराम से कर लो थोड़ा ,,,, कक्कक्कक्स मुझ में और हिम्मत नहीं है . कक्ककक्कक्स कब निकलेगा तुम्हारा पानी ??? आह्ह्ह्हह्ज आह्ह्ह्ह

अमित : जब तक तेरी छूट सुख नहीं जाती तब तक मैं ऐसे hi पेलता रहूँगा तुझे .

चन्दर्कांता; मुझसे और बर्दाश्त नहीं हो रहा आअह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह चुत में जलन होने लगी है आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

अमित : मैं रोक देता हूँ , पहले बोल तू मेरी रंडी है . और मैं जब चाहे जहाँ चाहे तुझे छोड़ सकता हूँ . तू मुझे मन नहीं करेगी

चन्दर्कांता: आआह्ह्ह्ह बस करो आआह्ह्ह मैं और नहीं झेल सकती निकल लो इसे .

अमित : चतत्ताआक्कक , मैंने एक ज़ोरदार थप्पड़ उसकी गांड पर मार दिया . बोल कुटिया जो मैंने अभी कहा वर्ण मैं ऐसे hi तुझे ठोकता रहूँगा

चन्दर्कांता: आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह माआ आह्ह्ह्ह हाँ ,,,, हाँ मैं तुम्हारी रंडी हूँ ाआईई आअज से मैं तुम्हारी रंडी हूँ. तुम जो भी कहोगे मैं करुँगी आअह्ह्ह जब चाहे मुझे को,,,,,, अह्ह्ह्हह हहहहहह अह्हह्ह्ह्ह हहहहहा छोड़ लेना .

अमित : ये हुई न बात चल अब तैयार हो जा .

मेरा भी अब काम होने वाला था तो मैंने अपनी स्पीड और तेज़ कर दी . चन्दर्कांता एक बार फिर से झाड़ गयी और झड़ते hi औंधे मुँह बीएड पर गिर गयी. मैंने भी जल्दी से लैंड हिला कर अपना पानी उसकी बड़ी गांड पर निकल दिया . चन्दर्कांता सिसकती ऑंखें बंद किये पड़ी थी. पर मेरे सामने चन्दर्कांता की उभरी हुई गांड थी जिसे देख कर मन ललचा रहा था . आज चन्दर्कांता की छूट की बुरी हालत कर दी थी तो सोचा गांड फिर कभी मर लूंगा वर्ण इससे तो कल कॉलेज भी नहीं जाया जायेगा . फिर भी मैंने उसकी गांड को पालोस्ते हुए उसके चूतड़ों पर गिरे अपने मॉल को उंगली से इकठ्ठा कर क उसकी गांड क छेड़ पर इकठ्ठा किया और अपनी एक उंगली गांड में घुसा दी जिससे चन्दर्कांता एक डैम से हिल गयी.

चन्दर्कांता: आअह्हह्ह्ह्ह कक्कक्स क्या कर रहे हो ,,, वहां मत हाथ लगाओ .

अमित : क्यों नहीं रांड , आज से तू मेरी रंडी है यद् है न? मुझे किसी बात क लिए तू मन नहीं कर सकती. तुम्हारी गांड देख कर किसी का भी लैंड खड़ा हो जाये . साडी में ढकी रहती है तो पता नहीं था क ये बिना कपड़ों क इतनी ज़बरदस्त है. आज तो छोड़ रहा हूँ पर फिर किसी दिन तुम्हारी ये गांड ज़रूर मरूंगा . इस लिए खुद hi तयारी कर क रखना अगर मैंने सीधा सीधा घुसा दिया तो तुम्हे ज्यादा दर्द होगा .

चन्दर्कांता: आगे से जितना मर्ज़ी कर लो मैं मन नहीं करुँगी . पर प्लीज पीछे नहीं. मैंने आज तक पीछे से कभी नहीं लिया .

अमित : ओह्ह्होऊ , इसका मतलब तुम्हे मेरा लैंड कुछ ज्यादा hi पसंद आ गया है जो आगे से इनविटेशन दे रही हो. पर मुझे तुम्हारी ये गांड ज्यादा पसंद आयी और ये तो अछि बात है न क उद्घाटन करने का मुझे मौका मिलेगा . एक बार मेरा लैंड गांड में ले लोगी तो फिर किसी का भी लेने में तकलीफ नहीं होगी. ाचा अब मैं चलता हूँ. कल मिलते हैं कॉलेज में

मैं बीएड से उतरा और अपने कपडे सेट किये . चन्दर्कांता अभी भी नंगी वैसे hi पड़ी थी . उसने अपनी टंगे ऐसे फैला क राखी हुई थी जैसे क हवा लगवा रही hi नीचे . मैंने गौर किया तो उसकी छूट लाल हो गयी थी शायद सूजन आ गयी थी . मेरे होंठों पर मुस्कान आ गयी. आज ज़िन्दगी में ये अलग hi एक्सपीरियंस हुआ था चुदाई क मामले में . मैंने चन्दर्कांता क साथ एक किसम की ज़बरदस्ती की थी जो गलत था पर उसने जो मेरे साथ किया था उसको देखते हुए मुझे अफ़सोस नहीं हो रहा था . वैसे भी वो कौन सा सटी सावित्री थी अगर वो अछि होती तो मैं ऐसा नहीं करता. पर जो भी हो उसका गलियां देना मुझे जोश दिला रहा था और मैंने भी अचे से बदला लिए था . एक नज़र चन्दर्कांता को नंगी बीएड पर पड़ी देख कर मैं वहां से निकल गया . सुबह से जो गर्मी दिलो दिमाग पर छायी हुई थी वो अब उतर चुकी थी और चन्दर्कांता का मसला भी अब हल हो गया था . अभी मैं वहां से निकला था क मेरा फ़ोन बजने लगा . देखा तो राधा की कॉल थी . मैंने उसे बता दिया क मैं आ रहा हूँ. घर पहुंचा तो खाना रेडी था . मौसी और राधा मेरा hi इंतज़ार कर रही थी . हमने साथ में खाना खाया और फिर मैं मौसी को कुछ देर आराम करने का कह कर अपने कमरे में आ कर लेट गया . चन्दर्कांता क साथ ज़ोर आज़माइश काफी हो गयी थी तो अब नींद आ रही थी. बीएड पर गिरते hi कब नींद आ गयी पता hi न चला .

‘ क्या बात है ? तू कुछ परेशां लग रही है ‘ आज संडे था और मंजू घर पर hi थी रुपाली रीमा क साथ. सुबह सुबह hi ऋतू नार्मल कपड़ों में उसके पास आ गयी थी. ऐसे वो तभी अति थी जब उसे कोई खास काम नहीं होता था या यूँ कहो क मन हल्का करने . रुपाली और रीमा से अलग दोनों अकेली बैठी थी . मंजू देख रही थी क ऋतू का मूड कुछ ाचा नहीं है . पर वो खुल कर बात नहीं कर रही थी .

ऋतू : कुछ नहीं यार , बस ऐसे hi मन नहीं लग रहा था तो तुम से मिलने चली आयी.

मंजू : तुझे अछि तरह जानती हूँ मैं समझी , अब बता क्या बात है जो तू इतनी परेशां है .

ऋतू : अब क्या बताऊँ , अमित कहाँ है आज कल ?

मंजू : ये अमित का ज़िकर क्यों आ गया अचानक ? क्या उससे तेरी कोई बात हुई है ?

ऋतू : नै , बस ऐसे hi पूछ रही हूँ. 2-3 दिन से फ़ोन पे भी बात नहीं हुई न . इस लिए पूछा , उसके तो कॉलेज भी शुरू हो गए हैं .

मंजू : बात को गोल गोल मत घुमा, असल बात क्या है वो बता.

ऋतू : अब क्या बताऊँ यार , वर्दी और पावर क होते हुए भी मैं कुछ नहीं कर सकती.

मंजू : तुम किस बारे में बात कर रही हो?

ऋतू : अमित से वडा कर क आयी थी मैं क जिन लोगों ने उस पर और उसके बाबा पर हमला किया है मैं उन्हें सजा दिलाऊंगी पर देख मेरी मज़बूरी . जिस कानून की हिफाज़त क लिए वर्दी पहनी है वो hi मेरे हाथ बांध रहा है .

मंजू : आखिर हुआ क्या है , साफ साफ बता न.

ऋतू : अमित और विजय भैया पर हमला तुम्हारे सो कॉल्ड बड़े भाई बलजीत राइ ने hi करवाया था .

ये सुन कर मंजू ज्यादा चकित नहीं हुई क्यूंकि उसका भी दिल जनता था क ये उसी का काम है

ऋतू : मैंने उन हमला करने वालों को तो पकड़ लिया पर बलजीत राइ फिर से मेरे हाथों से बच निकला . और उसने उस आदमी की भी हत्या करवा दी जिसकी गवाही से मैं उसे सजा दिलवा सकती थी.

ये सुन कर तो मंजू को झटका लग्न hi था. हत्या करवाने की बात सीधा मंजू क दिलो दिमाग पर लगी .

मंजू : मैंने तुझे कहा था न तू उससे मत उलझ वो बहुत बुरे हैं. इसी लिए मैंने खा था क मैं यहाँ से दूर चली जाती हूँ. कल को वो फिर से अमित पर हमला करवा देगा . मुझसे उसकी बात मन लेनी चाहिए थी. अगर कहीं उसने अमित को कुछ …….

ऋतू : होश से काम ले मंजू , ऐसा कुछ नहीं करेगा वो . उसे पता चल गया है क मेरी नज़र उसी पर है. और मैंने उसे साफ़ साफ़ कह भी दिया है क अगर तुम्हे या अमित को किसी तरह का नुकसान पहुँचाने की कोशिश की तो मैं कानून अपने हाथ में लेने से नहीं रुकूंगी.

मंजू : मुझे बहुत दर लग रह है ऋतू मैं अमित को फिर से खोना नहीं चाहती

ऋतू : बच्चों जैसे रोना बंद कर , मैंने खा न उसे कुछ नहीं होगा . अब वो ऐसा कुछ नहीं करेगा . अगर उसने ऐसा करने की सोची तो मैं सीधा उसे गोली मर दूंगी फिर चाहे जो मर्ज़ी होता रहे . चल छोड़ , अमित कहाँ है तूने बताया नहीं. बड़ा मन कर रहा है उसे देखने का पर उसके सामने कैसे जॉन समझ नहीं आ रहा . मैं अपना वडा पूरा नहीं कर पायी .

मंजू : वो ऐसा नहीं है , उसने क्या तुझे एक बार भी पूछा इसके बारे में ? तू ऐसे hi टेंशन ले रही है जबकि वो तो इस बात को भूल भी गया होगा . वो यहीं है , दिव्या दीदी क घर . तुझे मिलना है तो बुलाऊँ उसको?

ऋतू : नहीं नहीं , रहने दे , वैसे भी आज संडे है वो आराम कर रहा होगा .

ऋतू ने एक डैम से हड़बड़ा कर जवाब दिया तो मंजू को ऋतू का मूड ठीक करने क लिए शरारत सूझी

मंजू : ोये होये , इतनी परवाह है उसकी क उसको डिस्टर्ब भी नहीं करना चाहती. ाखि बात क्या है मेरी थानेदारनी

ऋतू : तू न मर खायेगी मुझसे . तुझे नहीं है उसकी परवाह जो मुझे कह रही है ?

मंजू : मुझे क्यों नहीं होगी ? बुआ हूँ उसकी . पर तुम तो परवाह ऐसे कर रही हो जैसे उसकी लुगाई हो .

ऋतू : ठहर जा तुझे मैं बताती हूँ. मुझे लुगाई बोलती है ,,, भूल गयी मुझसे पहले तू hi उसकी लुगाई थी और खूब मज़े से उसके डंडे पर झूल रही थी .

मंजू कहाँ ऋतू को छेड़ने चली थी अब उल्टा ऋतू ने hi उसे लपेट लिया . आखिर जिस बात को मंजू दिलो दिमाग से निकल देना चाहती थी वो बात फिर से ऋतू ने छेड़ कर जैसे जख्मो पर हाथ रख दिया हो . मंजू क चेहरे से एक डैम हंसी गायब हो गयी और एक पल को वो शुन्य में चली गयी. जैसे वो सरे मंज़र उसकी आँखों क सामने आ गए हो जब वो अमित क साथ प्यार किया करती थी . ऋतू ने मंजू क बदलते भाव देख लिए और उसे भी अपनी गलती का एहसास हुआ

ऋतू : सॉरी यार , गलती से मुँह से निकल गया . तू भी न अभी तक इतनी सी बात नहीं समझ प् रही क तेरा दिल उसे आज भी चाहता है. पर नहीं , तुझे तो रिश्ते और समाज की परवाह अपने से भी ज्यादा है. एक बार भी अमित से तूने पूछा क वो क्या चाहता है? बस फैसला कर लिया खुद hi और थोप दिया उस पर भी. चल अब छोड़ , चल चल क कॉफ़ी बनाते हैं.

मंजू : तू बार बार ये सब क्यों कहती है ऋतू ? तुझे पता है न वो मेरा सागा भतीजा है . मैं उसके साथ वो सब नहीं कर सकती .

ऋतू : ये बात न किसी और को बता जा कर मुझे न बता . तू उससे कितना प्यार करती है ये मुझे अचे से पता है . रिश्ता पहले तो नहीं था न ? और था भी तो दोनों को hi पता नहीं था . पर तुम दोनों एक दूसरे को जो प्यार दिया वो तो सच था न ? दिल से जो रिश्ते बनते हैं वो सबसे ज्यादा मजबूत होते हैं किसी भी और रिश्ते से कहीं ज्यादा . और तू उस रिश्ते पर दूसरा रिश्ता थोप रही है. एक न एक दिन तू खुद hi इस ओह्ह को उतर फेंकेगी देख लेना. वो तेरा प्यार है और तू उसके बिना नहीं रह पायेगी ज्यादा दिन

मंजू : ऐसा नहीं हो सकता मैं ……..

ऋतू : हाँ हाँ पता है पता है , तू क्या कहने वाली है. ये सब बातें मुझे मत सीखा. वैसे यार बड़ा मन कर रहा है उससे मिलने का . दिल चाहता है एक बार खुल क उसके साथ वो सब करूँ जो मेरे मन में है. जब उसके बारे में सोचती हूँ दिल करता है अपने सरे सपने पूरे कर लूँ जो भी दिल में है. पर उसके साथ टाइम hi नहीं मिल पता .

मंजू : शर्म नहीं आती मेरे सामने hi मेरी सहेली हो कर मेरे भतीजे क बारे में ऐसी बातें कर रही है.

ऋतू : ओह्ह्ह , सॉरी बुआ जी , मुझसे गलती हो गयी . उनसे मत कहियेगा .


ऋतू ने मुँह बनाते हुए ये बात कही और खिलखिला क है दी. उसके साथ मंजू को भी हंसी आ गयी और दोनों सहेलियां मिल कर किचन में कॉफ़ी बनाने चली गयी.
 
अपडेट 272

‘ उठो ोू ,,, ुथूऊऊ , उठो भी , कब तक सोते रहोगे? ‘

मैं आराम से नींद में डूबा था क मुझे किसी ने झकझोर क उठाया और मेरे कानो में सुरीली आवाज़ पड़ी . थोड़ी सी होश आयी तो देखा राधा मुझे हिला रही थी .

राधा : अब उठ भी जाओ , कितने देर तक सोते रहोगे ? कहाँ गए थे जो आकर इतनी गहरी नींद में खो गए ?

मुझे अब थोड़ी होश आयी तो राधा की बातें पल्ले पड़ी. सच में आज चन्दर्कांता को सजा देने क चक्कर में मैं इतना ज्यादा थक गया था क गहरी नींद में खो गया .

अमित : हह , हाँ , उठ तो गया हूँ . बोलो क्या बात है ? टाइम कितना हो गया वैसे ?

राधा : 4:30 बज गए हैं. कब से तुम्हे जहा रही हूँ. ये लो चाय पि लो पहले . भूल गए थे क्या क हमें बहार जाना है ?

अमित : वो यार नींद hi इतनी अछि आयी क पर hi नहीं चला . वैसे इतना भी टाइम नहीं हुआ . मौसी कहाँ हैं ?

राधा : माँ तैयार होने गयी है. वो भी साथ चल रही हैं. वैसे तुम गए कहाँ थे और क्या कर रहे थे जो इतनी नींद आ गयी तुम्हे ?

अब भला मैं क्या जवाब देता. बात को बदलना तो था hi सो कुछ न कुछ कहना ज़रूरी था .

अमित : अरे कुछ नहीं , वो जिस दोस्त क पास गया था उसी ने थका दिया चला चला कर. तुम ऐसे hi जाओगी ?

राधा घर पहनने वाले सिंपल से सूट में थी तो मैंने उसे देख कर पूछा .

राधा : ऐसे क्यों जाउंगी? मैं भी तैयार हो रही हूँ. तुम्हे उठाना था और चाय देनी थी इस लिए रुक गयी. अब तुम भी चाय पि कर अचे से तैयार हो जाओ. ऐसे hi मत चल पड़ना .

अमित : हाँ हाँ , ठीक है , पेहेन लूंगा दूसरे कपडे . कह तो ऐसे रही हो जैसे पार्टी पे जाना है

राधा : डरे पर जाना है , और कुछ ? अचे से तैयार हो जाना . वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा .

राधा हक़ से मुझे इतना कह कर चली गयी पर मैं उसकी बात पर हैरान था . हमेशा चुप चुप और अपने आप में खोयी रहने वाली ये chhui-mui सी लड़की अब बातें भी करने लगी है. खैर मैंने जल्दी से चाय पि और फ्रेश हो कर अपना लोअर T-shirt निकल कर कपडे बदलने लगा तो देखा एक जीन T-shirt पहले hi निकल कर रखे हुए हैं . ज़रूर ये राधा ने hi रखे होंगे . ‘ ये लड़की भी न , बिलकुल बच्चों जैसे ज़िद करने लगी है अब. ‘ अपने मन में राधा की कारिस्तानी पर सोचता हुआ मैं जल्दी से तैयार हो कर हॉल में आ गया . मौसी और राधा दोनों अभी भी अपने कमरों में थी. इन औरतों और लड़कियों को तैयार होने में हमेशा कुछ ज्यादा hi टाइम लगता है. कुछ देर मैं हॉल में बैठा रहा पर जब कोई न आया तो मैं राधा को आवाज़ देने उसके कमरे में चला गया . दरवाज़े पर हाथ रखा क वो खुलता चला गया . सामने राधा वाइट कलर की एक लॉन्ग स्कर्ट और ऊपर पिंक टॉप पहने शीशे सामने बाल संवर रही थी. मैं तो उसे देखता hi रह गया . ऐसे कपडे वो पहनती hi कहाँ थी.

राधा : क्या देख रहे हो ? बस 2 मिनट्स और .

राधा ने शीशे में hi मुझे देखा और जवाब दिया जबकि मैं नहीं भी निशब्द सा खड़ा देख रहा था . मेरे कदम अपने आप अंदर को चल पड़े और मैं राधा क पीछे जा के खड़ा हो गया . शीशे में hi हमने एक दूसरे को देखा और हमारी नज़रें मिली. राधा भी एक डैम खामोश स बस मुझे देख रही थी और मैं उसे . हूँ दोनों खामोश थे पर नज़रें जैसे कुछ कहना छह रही थी. मेरी धड़कन मुझे अपने कानो में सुनाई दे रही थी .

राधा : आहिस्ता से ) क्या देख रहे हो !

अमित : तुम इस ड्रेस बहुत प्यारी लग रही हो राधा .

मेरी बात पर राधा एक पल को शर्मा स गयी और उसका ये शर्माना भी मुझे बहुत भ रहा था . फिर वो नज़रें उठा कर मुझे देखते हुए धीमे स्वर में बोली

राधा : ये ड्रेस तुम्ही ने तो दिलाई थी , अछि क्यों नहीं लगूंगी.

राधा क गाल शर्म से गुलाबी हो रहे थे . उसके पास से आती महक मेरी साँसों में घुल रही थी. मन तो कर रहा था क उसे नहीं में भर लूँ पर ये गलत था . मैंने खुद पर काबू किया और उसके चेहरे से नज़रें हटा ली.

अमित : ये ड्रेस तुम पर जाँच रही है , पर इसका ये मतलब नहीं क तुम इस ड्रेस की वजह से प्यारी लग रही हो. तुम तो हो hi खूबसूरत . चलो अब चलते हैं.

राधा मेरे मुँह से तारीफ सुन कर फिर से शर्मा गयी . इससे पहले क मेरी ज़ुबान फिर से फिसलती मैं वहां से बहार आ गया , राधा को बहार आने का कह कर. 2 मिनट्स में राधा भी मेरे पीछे पीछे आ गयी अपने बालों को एक रबर बंद में समेत कर . राधा आज सच में बहुत खूबसूरत लग रही थी. मेरी नज़रें बार बार उस पर जा रही थी और वो भी मुझे देख रही थी. अभी हम खामोश खड़े एक दूसरे को चोरी चोरी देख रहे थे क मौसी क कमरे का दरवाज़ा खुला और मौसी बहार निकली. मौसी को देख कर तो मैं एक डैम से हैरान हो गया . मौसी ने आज साडी की जगह एक सलवार सूट पेहेन लिया था. वो भी पूरा फिटिंग वाला . और इन कपड़ों में वो बहुत आकर्षक लग रही थी. जिस्म और चर्बी तो उनके पहले hi नाम मात्रा थी , स्पॉट पेट और छरहरी काया. वो अपनी उम्र से कहीं ज्यादा जवाब दिख रही थी. आँखों में काजल लगाने से आँखें बड़ी बड़ी लग रही थी. नाक में एक छोटी स पिन जैसे क लड़कियां पहनती हैं. गुलाबी रंग की हलकी सी लिपस्टिक और कानो में छोटी छोटी बालियां , माथे पर नाम क लिए एक छोटी स बिंदी और मांग भी जैसे आज भरी नहीं थी उन्होंने . हाथों में सूट से मैचिंग करती चूड़ियां और वैसे hi नेल पोलिश . पाऊँ में जुटी भी वैसी जैसी लड़कियां पहनती थी. मैं मौसी को सर से पाऊँ तक स्कैन कर रहा था . दिव्या मौसी आज बिलकुल एक कॉलेज जाने वाली लड़की की तरह बन थान कर आयी थी और वो किसी मामले में राधा से काम नहीं लग रही थी बल्कि उसकी बड़ी बहिन hi लग रही थी . दिव्या ने मौसी ने आज बाल बंधे नहीं थे बल्कि खुले छोड़े हुए थे . मैं तो उनका ये रूप देख कर हैरान था hi राधा भी अपनी माँ को शायद पहली बार ऐसे देख रही थी .

राधा : माँ ,,, अआप ??

राधा को जैसे शब्द hi नहीं मिल रहे थे क वो क्या कहे . जबकि मेरी बोलती तो पहले hi बंद थी.

दिव्या : क्या हुआ ? अछि नहीं लग रही ?

राधा : अछि ? आप बहुत बहुत बहुत अछि लग रही हो माँ. आपको कोई ऐसे देखेगा तो पक्का यही कहेगा आप मेरी बड़ी बहिन हो.

दिव्या मौसी अपनी बेटी क मुँह से अपनी तारीफ सुन कर शर्मा गयी . दोनों माँ बेटी एक जैसी hi थी बिलकुल .

दिव्या : तुम्हे अछि नहीं लगी क्या ?

दिव्या मौसी ने मुझे देख कर पूछा तो पहले मैं समझ hi नहीं पाया क क्या जवाब दूँ पर फिर हिम्मत कर क बोल hi पड़ा .

अमित : आप सच में बहुत खूबसूरत लग रही हो मौसी. राधा ने सच hi कहा है , आप उसकी बड़ी बहिन hi लग रही हो. आज पक्का लड़के आप पर मर मिटेंगे .

हो गयी गड़बड़ , मौसी की तारीफ करने क चक्कर में ज़ुबान फिसल hi गयी. मौसी पक्का गुस्सा करेंगी पर अब क्या हो सकता था अब तो तीर कमान से निकल चूका था. पर उम्मीद से उलट मौसी क चेहरे पर गुस्सा आने की बजाये मुस्कान आ गयी .

दिव्या : धत्त बदमाश , शर्म नहीं आती अपनी मौसी को ऐसा कहते हुए . ,,,,,,, क्या सच में मैं अछि लग रही हूँ ?

कुछ देर खामोश रह कर मौसी ने जब ये सवाल पूछा तो मैं हैरानी से उन्हें देखने लगा .

राधा : बिलकुल माँ , अमित बिलकुल सही कह रहा है . आप बहुत अछि लग रही हैं.

दिव्या : बस बस , अब ज्यादा झूठी तारीफ मत करो. वैसे तुम ज्यादा खूबसूरत दिख रही हो इन कपड़ो में .

अब मौसी की बात पर राधा भी एक पल को शर्मा गयी .

दिव्या : अब चलना भी है या बस यहीं खड़े रहना है ?

अमित : चलिए चलिए , वैसे जाना कहाँ है?

राधा : कहूं भी , जहाँ तुम्हे ठीक लगे .

अमित : क्सक्सक्सक्स पार्क में चलते हैं. आज संडे और संडे को सब फैमिलीज़ क साथ वहां जाते हैं . झूले भी हैं और पार्क भी ाचा बना है .

दोनों मेरी बात पर सहमत थी और हम घर को लॉक लगा कर बहार आ गए . पर समस्या अब ये थी क हम तीन थे और मेरी बाइक पर तीनो का एक साथ बैठना सहज नहीं था . तो मैंने राधा को उसकी स्कूटी निकलने को बोलै .

अमित : एक बाइक पर तीनो कैसे बैठेंगे , आप दोनों को परेशानी होगी. एक काम करो राधा तुम अपनी स्कूटी निकल लो

दिव्या : हाँ ये ठीक रहेगा , मैं अमित क साथ बाइक पर आती हूँ तुम स्कूटी पे चलो .

राधा : वो ,,,, स्कूटी में तो पेट्रोल hi नहीं है माँ. इतने दिन से चलाई भी नहीं . मैं बीच में बैठ जाउंगी न . कुछ नहीं होता , कौन सा हमें दूर जाना है

अब दिव्या मौसी भी लाजवाब हो गयी . मैंने एक बार ऑटो पर चलने को कहा भी पर मौसी ने मन कर दिया और फिर हम तीनो मेरी बाइक पर सवार हो गए . चूँकि लेडीज एक तरफ टंगे कर क बैठती हैं तो इस तरह तीनो का बैठना पॉसिबल नहीं था तो राधा दोनों तरफ पाऊँ कर क लड़कों की तरह बैठ गयी और उसके पीछे दिव्या मौसी . हम तीनो फास कर बैठे थे, राधा ने अपने दोनों हाथ मेरी पीठ पर इस तरह रखे थे क उसके बूब्स मुझसे टच न हो. और मौसी साइड से हाथ निकल मेरी कमर को पकडे थी. हूँ चल दिए पार्क की तरफ , दिन ज्यादा बड़े नहीं थे इस लिए अँधेरा जल्दी हो रहा था. मैं संभल कर बाइक चलते हुए नार्मल गति से hi बाइक चला रहा था क मुझे महसूस हुआ राधा ने अपने दोनों हाथ धीरे धीरे मेरी पीठ से नीचे खिसका कर मेरी बगलों से आगे करते हुए मेरी छाती पर रख दिए और मेरे साथ चिपक गयी. मुझे अपनी पीठ पर जैसे hi राधा की नरम छाती का एहसास हुआ एक पल को तो मेरी रिड की हड्डी में सिहरन सी हुई. पर मैंने जैसे तैसे खुद को कण्ट्रोल किया . मगर राधा का जिस्म मुझे पल पल अपने साथ और भी ज्यादा चिपकता महसूस हो रहा था और उसकी साँसे मुझे अपनी गर्दन पर महसूस हो रही थी . मेरी साँसे इतने में हो तेज़ होने लगी थी. ऐसा लग रहा था क अब मैं और ज्यादा कण्ट्रोल नहीं कर पाउँगा . अपने आप बाइक की गति भी बढ़ाने लगी . राधा की जंघे मेरी जांघों क साथ अब लग गयी थी और मुझे अपने चूतड़ों पर राधा की जांघों का जोड़ महसूस होने लगा . इससे पहले क मैं काबू से बहार होता अचानक से पार्क सामने नज़र आया और मैंने बाइक रोक दी . बाइक रुकते hi राधा जल्दी से थोड़ा पीछे हो गयी और मौसी क साथ वो भी बाइक से उतर गयी . मेरी साँसे थोड़ा तेज़ चल रही थी और हालत भी ख़राब हो रही थी. पेण्ट में लैंड एक डैम टाइट हो गया था.

दिव्या : तुम्हे तो पसीना आ गया , लाओ मैं साफ़ कर देती हूँ .

मौसी ने जल्दी से अपने दुपट्टे से मेरे माथे से पसीना साफ़ किया . हालाँकि मैं उन्हें मन कर रहा था पर वो नहीं मणि. मेरी नज़र राधा पर पड़ी तो वो शर्मा रही थी जैसे उसे पता हो क ये उसी की वजह से हुआ है. मैंने मौसी को राधा क साथ पार्क क अंदर जाने को कहा और बाइक पार्किंग में लगाने चला गया. असल में मैं नहीं चाहता था क मौसी की नज़र मेरे खड़े लैंड पर पद जाये . खुद को सेट करने क बाद मैं पार्क में एंटर हुआ तो मौसी और राधा एक तरफ कड़ी मेरा hi इंतज़ार कर रही थी. जैसा क मैंने कहा था पार्क में काफी सरे लोग आये हुए थे अपने अपने परिवार क साथ . काफी रौनक नज़र आ रही थी. मेरे आते hi मौसी और राधा दोनों मेरे अगल बगल चल पड़ी . हम पार्क की सुंदरता को देखते हुए आगे बढ़ रहे थे . बहुत सरे रंग बिरंगी अलग अलग किसम क फूल यहाँ वहां लगे हुए थे . घास को भी सलीके से कटा हुआ था और बीच में चलने क लिए पत्थर क टुकड़ों से बनाया हुआ पथ जो घुमाव दर था और दोनों तरफ पार्क में खुली जगह जहाँ लोग बैठे थे . ज्यादातर जवान उम्र क hi लोग थे पर फिर भी यहाँ हर आगे का व्यक्ति मौजूद था . बचे तो झूलों क लिए पागल हुए पड़े थे . तरह तरह क झूले लगे थे जो हर उम्र क बचे क लिए थे . मौसी और राधा दोनों पार्क में इधर उधर देख कर खुश हो रही थी .

अमित : मौसी कैसा लग पार्क ? आप पहले यहाँ आयी हैं कभी ?

दिव्या : बहुत ाचा है , सच में , अपने शहर में भी इतनी अछि जगह है मुझे पता hi नहीं था . और मैं भला किसके साथ आउंगी ? तुम थे तो आ गयी वर्ण मेरा मन hi नहीं करता ऐसे कहीं जाने का

अमित : समझ सकता हूँ मौसी , मौसा जी यहाँ होते तो आप ज़रूर आती न .

मेरी बात सुन कर दिव्या मौसी कुछ पल खामोश रही फिर बोली

दिव्या : वो यहाँ होते भी तो मैं उनके साथ कहाँ जाती , उनके लिए तो मैं बस एक ज़िम्मेदारी हूँ.

दिव्या मौसी क खूबसूरत चेहरे पर एक एक उदासी देख मुझे एहसास हुआ क वो अंदर से कितनी अकेली हैं. उनकी बात से एक बात तो ज़ाहिर थी क मौसा जी क साथ उनका रिश्ता सिर्फ नाम का hi था . राधा ने भी अपनी माँ क चेहरे पर आयी मायूसी देखि और उनके गले लग गयी .

अमित : तो क्या हुआ , अब मैं हूँ न , मैं आपको सब जगह दिखाऊंगा . आपको मौसा जी की कमी महसूस नहीं होने दूंगा .

मैंने बात करते करते राधा और दिव्या मौसी दोनों को गले लगा लिया . क्यूंकि राधा भी उदास होने लगी थी . दिव्या मौसी ने मेरी बगल से बाजु मेरी पीठ पर कास दी और मेरे सीने से लग गयी .

दिव्या : मैं भी तो यही छाती हूँ क तुम मेरे पास रहो और मुझे किसी की कमी महसूस न हो. तुम hi मेरे लिए सब कुछ हो .

दिव्या मौसी को मैंने बाँहों में भर लिया. वो सच में मुझसे बहुत प्यार करती थी जो मेरे लिए ऐसा कह रही थी . अब मेरे दिल में भी उनके लिए प्यार या हमदर्दी कहो , बढ़ गया था . राधा हम दोनों क बीच में से साइड हो गयी और अपनी आँख में आये आंसू को साफ़ करने हुए हमें देखने लगी. दिव्या मौसी ने दूसरी बाजु भी मेरी पीठ पर कास ली और वो पूरी तरह मेरे सीने से लग गयी. वैसे तो ये एक भावुक पल था पर लैंड महाराज कहाँ सुनते हैं किसी की. दिव्या मौसी क बूब्स मेरे सीने में गढ़े हुए थे और उसका सीधा असर लैंड पर हुआ जो पेण्ट में फिर से तन गया . इससे पहले क मेरा खुद पर से काबू हैट ता मैंने मौसी को खुद से अलग किया .

अमित : ये क्या मौसी , हम यहाँ घूमने ए हैं और आप हैं क खुद भी तो रही हैं और इसे ( राधा ) भी रुला रही हैं. ऐसे कैसे मज़ा आएगा ? चलो जल्दी से मुस्कुराओ .

मैंने दिव्या मौसी क दोनों गलों को हाथ में बच्चों की तरह पकड़ उन्हें मुस्कुराने को कहा तो वो हंस दी और मुझे चपत मर कर राधा को अपनी बगल में दबा दी

दिव्या : ये पगली पता नहीं कब बड़ी होगी . कितनी बार कहा है क मेरे बारे में ज्यादा मत सोचा कर . मैंने तो अपनी ज़िन्दगी जैसे भी थी गुज़र ली काम से काम तू तो खुश रहा कर. देख तेरे कहने पर हम यहां आये हैं न और तू खुद hi ऐसे मुँह बना रही है. अमित आगे से इसे घर छोड़ कर हम दोनों hi घूमने जायेंगे .

राधा : जा कर तो दिखाइए मुझे घर छोड़ कर , मैं तो हमेशा आपको अपने साथ रखूंगी हमेशा हम साथ में रहेंगे .

आखिरी लाइन राधा ने मुझे देख कर ऐसे कही जैसे वो हम तीनो क साथ रहने की बात कह रही हो .

अमित : अब चलो भी , झूले लेने है क नहीं तुम्हे ?

राधा : क्यों नहीं लेने , चलो माँ , हम दोनों साथ में झूला झूलते हैं .

दिव्या मौसी की एक बाजु अपने साथ लगा वो उन्हें खींचती हुई आगे आगे चल दी और मैं पीछे पीछे . दिव्या मौसी क चेहरे पर भी ख़ुशी आ गयी थी . फिर राधा एक झूले पर बैठ गयी जो बड़ों क लिए hi था और साथ वाले में मौसी को बैठने को कहा . मौसी मन करने लगी तो मैंने उन्हें ज़बरदस्ती उस पर बिठा दिया . फिर क्या था , दोनों माँ बेटी झूला झूलने लगी . झूल क्या रही थी बल्कि आपस में अब रेस hi लगाने लगी थी. दोनों क चेहरों पर ख़ुशी देख मुझे बहुत hi ाचा लग रहा था . पर दिव्या मौसी की कही हुई बात मुझे खटक रही थी. ज़रूर ऐसा कुछ है जो वो सब से छुपाती हैं . मौसा जी भी घर काम hi आते हैं मतलब कुछ तो है जिस वजह से दोनों का रिश्ता सही नहीं है. खैर मैं अपनी सोच से बहार निकला दोनों माँ बेटी की खिलखिलाती आवाज़ों से .

राधा : बस माँ ? हर गयी क्या ? आप तो कहती थी दामिनी मौसी क साथ आप बहुत झूला झूलती रही हैं. मुझे हरा कर दिखाइए .

दिव्या : ऐसी बात है तो ले फिर .

इतना कह कर मौसी ने दोनों हाथों में रस्सियों को थामे पीछे को लगभग लेट ते हुए अपनी कमर का ज़ोर लगाया और तंगी को सीधे में कर क ऐसे किया क उनका झूला पहले से भी ज्यादा ऊँचा गया . और वो यहीं नहीं रुकी. हर बार वो और भी ज्यादा ज़ोर से करनी लगी जिससे क उनका झूला ऊपर को जयते जयते सेंटर पोल क बराबर हवा में ऊपर तक जाने लगा . मुझे तो दर लगने लगा क कहीं झूला टूट hi न जाये . राधा भी अब दिव्या मौसी से पिछड़ चुकी थी पर फिर भी वो कोशिश कर रही थी . मगर एक चीज़ इससे गलत हो गयी. वो थी राधा की स्कर्ट , जो उसके ज़्यादा ऊपर तक झूला ले जाने क चक्कर में उसकी टैंगो को बेपर्दा करने लगी थी. जब वो ऊपर को जाती तो स्कर्ट नीचे की तरफ होती जिससे उसकी टांगों का पिछले हिस्सा जांघों तक नज़र आने लगता . मेरी नज़र जब वहां पड़ी तो एक पल को झटका सा लगा . 2-3 बार नज़ारा करने क बाद मैंने वहां से ध्यान हटाना चाहा तो देखा क मेरे पीछे कुछ hi कदमो पर 3-4 लड़के खड़े राधा और दिव्या मौसी को hi ताड़ रहे थे . और उनकी नज़रें राधा की स्कर्ट में से झांकती टांगों पर hi थी. मुझे उनका इस तरह राधा को देखना खटक गया . मन तो हुआ क अभी क अभी सैलून की धुलाई कर दूँ. पर सोचा क जब सामने ऐसा नज़ारा देख कर मेरी नज़र भी वहां जा सकती है तो दूसरों की क्यों नहीं . इस लिए मैंने उन्हें कुछ न कह कर राधा को रोक्न की कोशिश की. और दोनों क सामने आ गया . वो बहुत तेज़ झुक रही थी इस लिए एक डैम से तो रुक नहीं सकती थी. मैंने उन्हें रुकने को कहा और राधा क झूले को आगे बढ़ कर पकड़ने की कोशिश की. 2-3 बार में hi उसका झूला मैंने रोक लिया पर उसे सामने से रोकने में मैं उसके इतने करीब आ गया क क्या hi कहूं. राधा क घुटने अलग हुए और मैं उसके घुटनो क बीच उसके इतना करीब क वो मेरे सीने से लग गयी . उसने रस्सी को छोड़ दिया था और सहारे क लिए मुझे थम लिया मैंने भी उसे बाँहों में भर कर झूले से नीचे ज़मीन पर खड़ा कर दिया . दिव्या मौसी ने भी अपना झूला रोक लिया और उतर गयी.

दिव्या : तो , देख लिया न ? तुम्हारी माँ भी किसी से काम नहीं है .

राधा : सच में माँ , आप कमल की हो. मन गए , आप सही कहती थी. आप दोनों ने बहुत झूला झूला है .

अमित : मौसी सच में आपको झूला झूलते देख ऐसा लग रहा था क आप अपने बचपन में वापिस लौट गयी हो. आप तो बहुत ऊपर तक जा रही थी . मुझे दर क आप नीचे न गिर जाओ.

दिव्या : ऐसे कैसे गिर जाती ? तुम दोनों को अंदाज़ा भी नहीं है क मैं और दामिनी कितने बड़े बड़े झूले झूलती रही हैं गाओं में. वो जो सबसे बड़ा पेड़ है न अपने बगीचे में . उसी पर झूला बंधवाती थी हम दोनों और फिर सब सहेलियों क साथ शरत लगा करती थी. हमेशा हम दोनों hi जीता करती थी वहां . दामिनी तो झूले पर कड़ी हो कर ज़ोर लगाती थी और मैं बैठ कर . वो भी क्या दिन थे .

राधा : वैसे तुमने बीच में आकर रोका क्यों ? कितना मज़ा आ रहा था .

अमित : अब क्या एक hi झूला झूलती रहोगी? और भी तो झूले हैं यहाँ .

मैंने राधा को महसूस नहीं होने दिया क मैंने किस वजह से उसे ऐसे बीच में रोक दिया. फिर हम तीनो आगे बढ़ गए दूसरे झूलों की तरफ . मैंने एक नज़र पीछे भी देखा तो वो लड़के पीछे पीछे hi आ रहे थे . ये देख कर मुझे गुस्सा आने लगा .

‘ क्या माल है यार , दोनों की दोनों एक डैम पटाखा हैं. शकल से तो लगता है दोनों सगी बहने हैं. क्या फिगर है यार ‘

मेरे कानो में ये आवाज़ पड़ी तो मेरी मुठियाँ भींच गयी. ये उन्ही लड़कों में से किसी की आवाज़ थी. वो हमारे काफी करीब आ गए थे . शायद वो कुछ हरकत करना चाहते थे .

‘ सही कह रहा है यार , शकल से तो दोनों बहने hi लगती हैं . बड़ी वाली का फिगर तो ज्यादा ज़बरदस्त है . बस एक बार हाँ करदे तो मज़ा आ जाये ‘

‘ तुझे बड़े वाली मस्त लग रही है , सेल छोटी वाली को तो देख . अभी कच्ची काली है . इसे फूल बनाने में मज़ा आएगा ‘

मेरे से बर्दाश्त नहीं हो रहा था मैं रुक कर पीछे घूमने लगा तो दिव्या मौसी ने मेरी बाज़ू कास क पकड़ ली.

दिव्या : धीरे से ) यहाँ पर कोई तमाशा मत बनाना , कुत्ते हैं भोंक कर चुप हो जायेंगे . तुम आगे चलो.

मैं गुस्से से भर गया था पर दिव्या मौसी सब सुन रही हैं ये देख मुझे और भी बुरा लग रहा था . मगर उन्होंने मुझे इस तरह रोक दिया जो मुझे बिलकुल ाचा नहीं लगा .

‘ यार ये सूट वाली का फिगर ता वाकई में ज़बरदस्त है .इसके सामने तो हम चारो पानी काम हैं. एक बार इसका हांलेवा हुस्न बेपर्दा हो गया न तो शरत लगा लो , देख कर hi कच्चे गीले हो जायेंगे . ‘

मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था . मन किया क सैलून क दांत तोड़ दूँ. पर मौसी ने मेरे हाथ hi बांध दिए थे . मगर इस बार वो हुआ जो मैंने सोचा भी नहीं था . दिव्या मौसी एक डैम से पलटी और तेज़ी से उन चरों की तरफ बरही और जाते hi चरों क गाल फाटक से सेक दिए .

दिव्या : घर में माँ बहिन नहीं है क्या ? क्या यही संस्कार दिए हैं तुम्हारे माँ बाप ने तुम्हे ? देखने में तो शरीफ और अचे घरों क लगते हो पर बातों से कोई बद्ज़ात. अपनी बहनो को भी ऐसी hi गन्दी नज़र से देखते हो?

मौसी गुस्से में पता नहीं क्या क्या बोले जा रही थी . उनकी आवाज़ कुछ ऊँची थी जिस वजह से आसपास क लोग भी इकठ्ठा हो गए और देखते hi देखते भीड़ लग गयी . मौसी की बातें सुन कर लोग समझ गए थे क क्या माजरा है और इस लिए कुछ आदमियों ने पकड़ कर उनको चांटे भी लगा दिए . वो बार बार माफ़ी मांग रहे थे शायद गुंडे नहीं थे बस लफंगे किस्म क लड़के थे मगर मौसी तो अब गुस्से में बेंड आईटी क्वीन बानी हुई थी . मेरे साथ राधा भी मौसी का ये रूप देख कर हैरान थी . मौसी को अब वहां पर कुछ औरतें शांत करवाने की कोशिश कर रही थी पर वो शांत नहीं हो रही थी . मज़े की बात तो ये थी क वो भी मौसी को काम उम्र की समझ कर उन्हें बीटा बीटा कह कर बात कर रही थी . जब मौसी चुप न हुई तो एक औरत ने राधा से hi कह दिया क ‘ बीटा अपनी दीदी को शांत करवाओ . उन लोगों को अब सजा मिल गयी है.’ खैर उन लड़कों को पार्क से बहार निकल दिया गया और राधा मौसी को साइड में ले गयी . मैं तो दोनों क पीछे hi था .

राधा : माँ शांत हो जाओ. उनको निकल दिया है न बहार अब तो .

दिव्या : समझते क्या हैं खुद को , जो मन में अत है बोले जा रहे हैं. औरतों की कोई इज़्ज़त hi नहीं है .

राधा : माँ प्लीज खुद को शांत करिये , आप क्यों अपना बप बढ़ा रही हैं.

कुछ देर दोनों खामोश रही. दिव्या मौसी अब नार्मल हो रही थी .

राधा : वैसे माँ , आप ये सब भी कर सकती हैं ये तो मैंने सोचा भी नहीं था .

अमित : और नहीं तो क्या , आज तो आप सच में फूलन देवी बन गयी थी .

मेरे मुँह से फूलन देवी सुन कर दिव्या मौसी क मुँह से एक डैम हंसी छूट गयी और हम तीनो hi इस बात पर हंसने लगे .

दिव्या : ज्यादा बातें मत बनाओ तुम दोनों. कब से उनकी बकवास सुने जा रही थी . सोचा अभी चुप होंगे , अभी चुप होंगे . पर लातों क भूत बातों से नहीं मानते .

अमित : अगर ये सब hi करना था तो अपने मुझे क्यों नहीं करने दिया ? मैं सिखाता न उनको सबक .

दिव्या : ये भी तो तुमने hi किया है , तुम साथ थे तो इतनी हिम्मत आ गयी वर्ण मैं अकेली कहाँ ये सब करती. और वैसे भी अगर तुम कुछ करते तो लोग यही समझते क ये ऐसी झगड़ा है . पर मेरे ऐसा करने से देखा सब ने उनको hi मारा .

राधा : देखा मेरी माँ कितनी समझदार है. तुम तो हर जगह बस हाथ पाऊँ चलने लग जाते हो.

दिव्या : ख़बरदार जो दोबारा ऐसा कहा तो , तू भी तो सुन रही थी न , क्या तू कुछ कर पति ? तू तो अभी भी ऐसे बन रही थी जैसे कुछ सुना नहीं. अमित था तो हिम्मत आ गयी वर्ण इन जैसे जानवरों का मुकाबले हम जैसी अबला कहाँ कर सकती हैं. अब चलो , अपना मूड ठीक करो .

दिव्या मौसी मेरी तारीफ कर रही थी और उनके मुँह से ये सब सुन कर मुझे बहुत ाचा लग रहा था . फिर हम तीनो आगे बढ़ गए. अँधेरा ज्यादा हो रहा था तो अब झूले तो ले नहीं सकते थे तो पार्क से घूम कर बहार आ गए. वहीँ पास में hi खाने पिने की कई सरे ठेले लगे हुए थे . राधा उनको देख कर छोटी बची की तरह ज़िद करने लगी. असल में वहां चाट पपड़ी और पानी पूरी की एक रेहड़ी थी जहाँ पर कई औरतें लड़कियां मज़े से पानी पूरी खा रही थी .

राधा : माँ चलो गोलगप्पे कहते हैं .

दिव्या : नज़र पड़ी नहीं की ज़ुबान पानी छोड़ने लगती है तेरी.

राधा : आप तो जैसे कहती hi नहीं , मुझसे ज्यादा तो आप को hi पसंद है. और मुझमे भी ये आदत आप से आयी है . आखिर बेटी भी तो आपकी हूँ .

दिव्या : चल चल , ज्यादा बातें मत बना . चल अमित तू भी साथ चल .

दोनों माँ बेटी का हल्का हंसी मज़ाक जैसे इन पलों को और भी खुशगवार बना रहा था . दोनों काम hi बहार निकलती थी अकेली होने की वजह से पर आज उनको ऐसे खुश देख मुझे ाचा लग रहा था . खैर दोनों क साथ मैं उस रेहड़ी पर आ गया . अब औरतें ऐसी जगह पर भला कहाँ बख्शती हैं . हर कोई पेट भर क खाने में लगी थी जिस कारन हमें इंतज़ार करना पड़ा . इस दौरान वहां पानी पूरी खा रही लड़कियां और औरतें मुझे hi घूर घूर कर देख रही थी. एक दो से नज़रें भी मिली पर मैंने नज़रें फेर ली. पर ये सब दिव्या मौसी और राधा ने भी देखा . राधा क चेहरे को देख कर लग रहा था क उसे गुस्सा आ रहा है जबकि दिव्या मौसी शांत थी मगर मुस्कान उनकी भी लुप्त हो गयी थी

राधा : तुम गोलगप्पे कहते हो न ?

अमित : नहीं , मैं ये सब नहीं खता. वैसे भी खट्टी चीजें खाना मन है हमें.

राधा : मुझे न ये सबसे ज्यादा पसंद है और माँ को भी. क्या हमारे लिए नहीं खाओगे?

दिव्या : तू न ज़िद्द न किया कर. अगर उसे नहीं पसंद है तो रहने दे.

राधा : ये भी तो ज़िद करता है जब उसे कुछ पसंद हो. मैं क्या मन करती हूँ इसे.

तभी रेहड़ी वाले ने मौसी और राधा को प्लेट्स दी . मैंने अपने लिए मन कर दिया. राधा और मौसी दोनों ने एक एक गोलगप्पा खाया hi था क वो तारीफ करने लगी . शायद उन्हें इसका टास्ते ज्यादा hi ाचा लगा. इतने में मेरी नज़र फिर से उस लड़की से जा मिली जो पहले से hi कड़ी गोलगप्पे खा रही थी पर अब वो ज्यादा समय लगा रही थी और ध्यान मुझ पर hi था . मैं भी उसे देखने लगा . वो लड़की मुझ अजीब नज़रों से देख रही थी और स्माइल दे रही थी . तभी राधा ने एक गोलगप्पा ज़बरदस्ती मेरे मुँह में ठूंस दिया .

राधा : मुँह खोलो , बताओ कैसा है .

अब मैं बोलता कैसे जब मुँह में इतना बड़ा गोलगप्पा भर दिया . राधा की नज़रों में थोड़ी नाराज़गी थोड़ा गुस्सा लग रहा था , यानि क उसने फिर से मुझे देख लिया था उस लड़की की तरफ देखते हुए .

दिव्या : अरे तू , ,, क्यों ज़बरदस्ती कर रही है जब उसे नहीं खाना तो .

राधा : हमारे साथ आया है तो हमारे साथ hi रहना चाहिए न . इधर उधर ध्यान रखने से ाचा है गोलगप्पे खाये.

अब तो साफ़ था क राधा किस बारे में बात कर रही है . मौसी ने तो कुछ माँ कहा पर मुझे लगा क राधा नाराज़ हो रही है तो मैंने बाकि बार खुद hi उसकी प्लेट से गोलगप्पा उठा क खा लिया . राधा ये देख कर चौंकी पर अगले hi पल मुस्कुरा दी. दिव्या मौसी क चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी .

दिव्या : अभी तो कह रहे थे कहते नहीं और अब ?

अमित : अब मैं राधा को नाराज़ भी तो नहीं कर सकता न मौसी. क्या पता फिर ये और क्या कर दे मेरे साथ .

राधा पहले तो शर्मा गयी पर फिर नाकामी गुस्सा दिखते हुए मेरे पेट में कोहनी से मर दिया . ये देख दिव्या मौसी भी मेरे साथ हंसने लगी . अब की बार मैंने दिव्या मौसी की प्लेट से भी एक गोलगप्पा उठा क खा लिया और वो भी मेरी इस हरकत पर मुस्कुरा दी . खैर दोनों ने अचे से पेट भर कर गोलगप्पे खाये. इस दौरान वो लड़की मायूस हो कर निकल गयी और मैंने भी अपनी नज़रें इधर उधर न दौड़ाई. उसके बाद हम वापिस चल दिए घर की तरफ . इस बार फिर से राधा पहले क जैसे बैठी और मेरी पीठ से इतना जुड़ कर बैठी थे क हालत ख़राब हो गयी घर तक आते आते . घर आ कर कुछ देर आराम करने क लिए मैं तो कमरे में चला गया मगर मौसी किचन में खाना बनाने में लग गयी . राधा भी कपडे चेंज करने गयी थी. मैं अभी बीएड पर ऑंखें मूँद कर लेता था क कमरे का दरवाज़ा खुला और राधा कमरे में आ गयी. वो अपने कपडे बदल कर अब एक कमीज और नीचे लोअर पहने हुए थी.

राधा : क्या कर रहे थे तुम वहां रेहड़ी पर ?

आते hi राधा ने ये सवाल दाग दिया . उसके चेहरे पर गंभीरता थी और आँखों में नाराज़गी.

अमित : मैं ? क्या कर रहा था ?

राधा : सब जानती हूँ मैं , उस लड़की क साथ बड़ा नैन मटक्का कर रहे थे

राधा ने मुँह बनाते हुए कहा . मुझे पहले तो हंसी आयी पर उसके मज़े लेने क लिए मैंने बात को मिर्च मसाला लगाने लगा .

अमित : अब सामने से कोई ऑफर दे रहा हो तो भला इंकार कैसे करे. वैसे भी मैं तो देख hi रहा था कुछ किया थोड़ी न . पर लड़की थी तो कमल की.

राधा मेरी बात सुन और ज्यादा गुस्से में आ गयी और गुस्से भरी नज़रों से मुझे देखने लगी .

राधा : इतनी hi पसंद आ गयी थी तो चले जाना था उसी क साथ . मेरे साथ क्यों आये ?

अमित : अब तुम्हे और मौसी को छोड़ क कैसे चला जाता . वैसे फिर अगर वो कहीं मिली तो पक्का उसका no. ले लूंगा .

राधा : तो जाओ उसी क पास , जा कर उसका नाम पता सब ले लो. कड़ी होगी वहीँ तुम्हारा इंतज़ार करते हुए . कोई ज़रूरत नहीं यहाँ आने की. मैं हूँ hi कौन .

राधा जैसे अंदर से भर गयी थी और मेरी बात पर वो फट पड़ी. उसका गाला रुंधने लगा था और आँखों में भी आंसू आ गए . गुस्से से ये सब कहती वो पलट कर कमरे से चली गयी. पता नहीं क्यों , राधा का ऐसे जाना मुझे ऐसे लगा जैसे कोई जान hi निकल कर ले गया हो. मैं तो उससे हंसी मज़ाक कर रहा था पर मेरी बात से वो इतना हर्ट हो जाएगी इस बात का अंदाज़ा भी न था . मैं जल्दी से उसकी पीछे भगा तब तक वो अपने कमरे में चली गयी थी . मैं भी उसके पीछे पीछे उसके कमरे में गया तो देखा वो बीएड पर उलटी पड़ी तकिये में मुँह छिपाये हुए थी. मैं राधा क करीब जा कर बीएड पर बैठा तो मुझे उसकी सिसकियाँ महसूस हुई. मैंने देखा क वो रो रही है. मुँह भले hi तकिये में छिपाये थी पर उसके रोने का पता चल रहा था . एक पल को मेरी साँसे भी जैसे अटक सी गयी दिल में एक दर्द सा उठा . मेरा हाथ अपने आप राधा क सर तक पहुँच गया . बाल इस तरह बिखरे थे क उसका चेहरा भी छिपा हुआ था . मैंने राधा कर सर सहलाते हुए उसे आवाज़ दी पर वो कुछ न बोली . मैंने उसके चेहरे से बाल हटाए तो बादलों से जैसे चाँद निकलता है ऐसा hi कुछ नज़ारा था मगर अफ़सोस क उसकी ऑंखें अश्रुधारा बहा रही थी. राधा की ये हालत मेरे दिल को छलनी कर रही थी.

अमित : राधा ,,,, राधा ,,, तुम ऐसे क्यों तो रही हो. मैं तो मज़ाक कर रहा था .

मैंने राधा क आंसू पोंछने की कोशिश की तो उसके चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया .

अमित : प्लीज राधा ऐसा मत करो , मैं कह रहा हूँ न मैं तो बस मज़ाक कर रहा था . अरे वो लड़की है hi क्या जो मैं उसे देखूं या उसके पीछे जॉन. भला तुम्हारे सामने वो क्या चीज़ है ? दुनिया की सबसे अछि लड़की तो तुम हो जो मेरी इतनी अछि दोस्त है. मैं कोई पागल हूँ जो किसी और को देखूंगा भी .

राधा : झूठ बोल रहे हो तुम , तुम तो उसे लाइन मर रहे थे वहां पर . मैं hi बीच में आ गयी न तुम्हारे .

राधा ने वैसे hi तकिये में मुँह दबाये दूसरी तरफ मुँह कर क कहा .

अमित : तुम्हे झूठ लग रहा है ? मैं अपनी कसम खा कर कहता हूँ क मैं सच कह रहा हूँ.

मेरी कसम वाली बात सुन कर राधा ने तुरंत अपना चेहरा मेरी तरफ घुमाया और एक तक मेरी आँखों में देखने लगी

अमित : मैं कसम खा कर कहता हूँ क तुम hi मेरी सबसे अछि दोस्त हो. तुम्हारे जगह कोई कभी भी नहीं ले सकता ,सच में . अभी भी यकीन न हो तो जो सजा देना चाहो मुझे दे सकती हो .

राधा ने मेरी बात सुन कर अपना चेहरा साफ़ किया और उठ कर बैठ गयी .

राधा : तो फिर उसे क्यों देख रहे थे ? तुम्हे पता है मुझे कितना बुरा लग रहा था ?

अमित : सॉरी बाबा गलती हो गयी अब ऐसा नहीं होगा कभी भी. वैसे तुम इतनी बात पर इतना नाराज़ क्यों हो रही हो ? ये भी कोई बात हुई ? और तुम तो छोटे बच्चों की तरह रोने hi लग गयी , पागल .

राधा : क्यों , मुझे गुस्सा क्यों नहीं आएगा जब तुम मेरे सामने किसी और को ऐसे देखोगे तो ?

अमित : वही तो , तुम्हे आखिर गुस्सा क्यों आ रहा है ?

राधा : क्यूंकि मैं तुमसे ,,,,,,,,, अब अगर कभी ऐसा दोबारा किया तो देख लेना . कभी बात नहीं करुँगी तुमसे .

राधा कहते कहते एक डैम खामोश हुई , उसकी आँखों में मुझे अलग hi कुछ नज़र आ रहा था जिसे मैं समझ कर भी समझना नहीं चाहता था . वो मेरे लिए इतनी पोस्सेस्सिवे हो रही थी जैसे कोई गफ अपने बर्फ क लिए और उसकी आँखों में मुझे प्यार भी नज़र आया . पर मैं ये बात मैंने को तैयार नहीं था .

अमित : ाचा बाबा अब नहीं करता ऐसा फिर कभी. अब खुश ? चलो अब अपना मुँह धो कर साफ़ कर क आओ , बिलकुल बंदरिया लग रही हो .

राधा ने मेरी बात सुन कर तकिया उठा कर ज़ोर से मुझे मारा .

राधा : तुम हो बन्दर , बुद्धू ,,,, अब देखना किसी को , ऑंखें निकल लुंगी . गंदे ,

इतने कह कर राधा मुँह बनती हुई बाथरूम में चली गयी और मैं हास्य हुआ उसे देखता रहा . राधा क चेहरे पर मुझे उदासी अछि नहीं लगती थी चाहे वो मुझसे लाडे या कुछ भी करे पर मैं उसे दुखी नहीं देख सकता था . मगर आज राधा की नज़रों ने एक बार फिर से मेरे दिल में हलचल पैदा कर दी थी. ये पहली बार नहीं था और मेरे दिल में भी इस बात का एहसास था पर न जाने क्यों मैं इस बात से हमेशा बचने की कोशिश करता था क कहीं दिव्या मौसी की नज़रों में मैं गिर न जॉन . राधा क बाथरूम जाने क बाद मैं वहां से उठा और वापिस अपने कमरे में आ गया . राधा भी मौसी क साथ किचन में काम करवाने लगी और देखते hi देखते डिनर का वक़्त हो गया . मौसी तो पार्क की hi बातें करती रही स्पेशलय उन लड़की की ठुकाई की. बातों का मज़ा लेते हुए हमने खाना खाया और वापिस कमरों में चले गए . खाने क दौरान राधा से कई बार मेरी नज़रें मिली और वो मुझे गहरी नज़रों से देख कर मुस्कुरा देती कभी शर्मा जाती. मैं आज रत मौसी क साथ नहीं सोना चाहता था इस लिए जल्दी से जा कर बीएड पर लेट गया और सोने क लिए ऑंखें बंद कर ली. कुछ देर बाद कमरे का दरवाज़ा खुला और मौसी कमरे में आ गयी

दिव्या : इतनी जल्दी सो भी गए ? चलो उठो और दूध पियो. मैं जानती हूँ तुम जग रहे हो . चलो उठो .

अब भला मैं क्या करता . मैं दूसरी तरफ करवट लेकर सो रहा था पर मौसी की बात सुन के उठाना hi पड़ा . मौसी ने दूध का गिलास मेरे हाथ में थमाया . मैंने देखा क मौसी ने कल वाली hi मैक्सी पहनी हुई थी .

अमित : वो आज थक गया हूँ माँ पार्क में जाकर तो नींद आ रही थी.

दिव्या : ऐसा क्या किया पार्क में जो थक गए ? ज्यादा बातें मत बनाओ. दूध पियो. तुम्हे मेरे साथ सोने में कोई प्रॉब्लम है जो यहाँ चले आये ?

ाव मौसी को मैं क्या बताता क आज सुबह क्या हुआ था . अगर वो जानती तो मुझे अपने साथ सोने को न कहती . मैं तो दर रहा था क कहीं दोबारा वैसा कुछ न हो पर मौसी मेरी मज़बूरी कहाँ जानती थी . वो तो मुझे इमोशनल ब्लैकमेल कर रही थी अपने साथ सोने को जबकि अंजाम मेरे लिए खतरनाक था .

अमित : ऐसा कुछ नहीं है मौसी , मुझे नींद आ रही थी बस इस लिए यहाँ आ गया

दिव्या : तो दूध ख़तम कर क मेरे कमरे में आ जाओ . मैं दरवाज़ा लगा कर आती हूँ.

इतना कह मौसी कमरे से निकल गयी और मैं दूध का गिलास ख़तम कर चल दिया मौसी क कमरे में . मन hi मन ऊपर वाले से हाथ जोड़ रहा था क आज कल जैसा कुछ न हो .

मैं जाकर बीएड पर लेता तो मौसी भी कमरे में आ गयी और कल की तरह दरवाज़ा बंद कर क जीरो लाइट का बल्ब जला दिया . मौसी मेरे पास hi बीएड से तक लगाए अधलेटी सी बैठ गयी

दिव्या : सो गए क्या ?

अमित : नहीं तो

दिव्या : आज बहुत मज़ा आया न ?

अमित : मज़ा तो आएगा hi , आज अपने अचे से धुलाई जो की उन चरों की . वैसे मैं नहीं जनता था क मेरी प्यारी मौसी इतनी खतरनाक भी है .

दिव्या : अब कोई इतनी गन्दी बातें करे तो गुस्सा तो आएगा hi न . अगर मैं कुछ न करती तो तुम ज़रूर उन सब क सर फाड़ देते और फिर मामला ज्यादा बिगड़ जाता इसी लिए मैंने ऐसा किया . तुम्हे पता है एक बार मैं और दामिनी मेला देखने गए थे . तब भी वहां ऐसा hi कुछ हुआ था . हम इंच की चूड़ियों वाले स्टाल से चूड़ियां देख रहे थे तो एक मनचला वहां मेरे साथ चिपकने लगा . मैं तो दर hi गयी थी और उससे दूर सरकने लगी पर वो धूर्त पीछे हटने की बजाये और ज्यादा चिपक रहा था . हद्द तो तब हो गयी जब उसने मेरा हाथ पकड़ कर कहा क ‘ इन गोर हाथों में चूड़ियां मैं पहना देता हूँ’ मैं इतनी दर गयी थी क कम्पनी hi लगी. मेरे मुँह में जैसे ज़ुबान hi नहीं थी . इससे पहले क वो कुछ और हरकत करता एक ज़ोरदार तमाचा उसके मुँह पर लगा जिसकी आवाज़ सुन कर आसपास खड़े सब हमें hi देखने लगे . ये तमाचा दामिनी ने मारा था उसके गाल पर और इतनी ज़ोर से क उसकी उंगलियां तक छाप गयी थी उसकी गाल पर .

अमित : ाचा ! माँ ने ऐसा किया ? फिर ?

दिव्या : फिर क्या था , दामिनी ने जो उसकी बजती की , लोग भी दामिनी की दलेरी से हैरान थे . उस लड़के ने दामिनी की कलाई पकड़ने की कोशिश की तो दामिनी ने घुटने का वॉर किया उसके पेट में . तब उसका एक साथी वहां आ गया और दामिनी क बाल पकड़ लिए . ये देख मुझमे पता नहीं खान से ताकत आ गयी क मैंने उसके बाल नोचते हुए उसका सर दुकान क लिए बंधी गयी बल्ली में मर दिया . हम दोनों लड़कियों क साथ उन लड़कों की हरकत देख आसपास क लोगों ने उन दोनों को पकड़ कर अचे से धुंआ . उस दिन दामिनी ने मुझे कहा था क ‘ तुम कमज़ोर नहीं हो और न hi कभी खुद को कमज़ोर समझना , तुम में भी ताकत है और तुम किसी का भी सामना कर सकती हो ‘ . उस दिन क बाद से मैं भी दामिनी की तरह निडर बन गयी पर उसके जाने क बाद जैसे मैं अपने आप को hi खो बैठी. पर आज ,, आज तुम साथ थे तो मुझ में फिर से हिम्मत आ गयी और….

अमित : और उन लड़कों की धुलाई कर दी. आप ऐसे hi निडर रहा कर मौसी. तभी तो राधा भी निडर बनेगी . देखा नहीं आपने वो कैसे दर जाती है ? . अगर आप मजबूत बनेंगी तो वो भी मजबूत बनेगी .

दिव्या : चाहती तो मैं भी हूँ . पर क्या करूँ , इतने साल से अकेली जैसे तैसे उसे संभल रही हूँ . तुम नहीं जानते अकेली औरत को लोग भूखे गिद्धों की नज़र से देखते हैं. और ऐसे लोगों में अपनी फूल सी बची को मैंने कैसे संभल कर रखा है , मैं hi जानती हूँ.

अमित : आप अकेली नहीं हो मौसी बस आपने खुद को अकेला कर लिया था . अब से आप कभी ये मत सोचना क आप अकेली हो . मैं हूँ न , आपका बीटा आपके साथ .

दिव्या मौसी मेरी बात सुन कर भावुक हो गयी और मुझे गले से लगा लिया . मैं लेता हुआ था और बात करते करते थोड़ा सा ऊपर उठ चूका था . पर फिर भी मौसी से थोड़ा नीचे था इस लिए जब मौसी मुझे गले लगाने लगी तो मेरे ऊपर hi आ गयी . जिससे उनकी नरम मांस से भरी छाती मेरी छाती पर आ गयी और ये एहसास मेरे अंदर हलचल पैदा करने लगा .

दिव्या : मेरे बेटे , तू कितना ाचा है . मैं hi तुझे खुद से दूर रखती रही . अब से तू मेरे पास hi रहेगा . तुझे मैं कहीं नहीं जाने दूंगी .

कुछ देर मौसी मेरे गले लगी रही . फिर वो मुझसे अलग हुई मगर अभी भी मेरे साथ सटी हुई थी . मौसी भावुक हो गयी थी तो उनका मूड ठीक करने क लिए मैंने उनसे मज़ाक किया .

अमित : वैसे मौसी , एक बात तो वो लड़के ठीक hi कह रहे थे .

दिव्या : चौंकते हुए ) कौन सी बात ?

अमित : यही क आप राधा की बड़ी बहिन लग रही थी.

मौसी ने हलके हाथ से मुझे मारा .

दिव्या : शरमाते हुए ) धत्त बदमाश ,

अमित : अरे सच मौसी , मैंने जब कहा था आपको यकीन नहीं हो रहा था . मगर अब तो आपको मन्ना पड़ेगा न क आप अभी भी राधा की बड़ी बहिन hi लगती हो. और पता है वहां एक आंटी थी जो राधा को कह रही थी क बेटी अपनी बहिन को शांत कराओ . अब बताओ , क्या वो सब भी झूठ बोल रहे थे ? आप सच में अभी भी 30 से ज्यादा की नहीं लगती.

दिव्या मौसी क चेहरे पर शर्म और मुस्कान दोनों hi थे. अपनी तारीफ सुन कर वो खुश भी हो रही थी और शर्मा भी रही थी.

दिव्या : बहुत बातें करने लग गया है तू , चल अब सो जा . आया बड़ा बड़ी बहिन वाला , और मैं तीस की नहीं 40 की होने वाली हूँ, बुद्धू राम .

मेरे माथे पर चपेट मर कर मौसी बीएड पर अचे से लेट गयी और मेरी तरफ करवट लेकर लेट गयी मगर अभी भी खुली आँखों से मुझे hi देख रही थी. मैंने उन्हें गुड नाईट कहा और ऑंखें बंद कर सोने लगा . मैं मौसी से थोड़ा फासला बना क रखे हुए था क नींद में कल रत की तरह उनके साथ कोई हरकत न कर बैठु.


नींद में hi किसी पहर मेरी नींद उचट गयी. मुझे अपने ऊपर ज़बरदस्त दबाव महसूस हो रहा था. मेरे चेहरे पर बाल बिखरे थे जिन्हे मैंने साइड में किया तो देखा दिव्या मौसी मेरे ऊपर लेती हुई थी. मेरी गर्दन क पास उनका सर था और वो पूरी की पूरी मेरे ऊपर थी. मुझे उनके जिस्म में हलचल होती महसूस हुई . वो लेते लेते अपनी कमर हिला रही थी और दबाव मुझे अपनी लैंड पर महसूस हो रहा था . मारा लैंड पूरा अकड़ा हुआ था और इस वक़्त मौसी की छूट लैंड क ऊपर दबी हुई थी. मेरे पसीने छूट गए . मैंने मौसी क चेहरे की तरफ गौर किया तो वो गहरी नींद में थी . शायद नींद में hi वो कोई सपना देख रही थी. मैंने मौसी को अपने ऊपर से हटाने क लिए उनको दोनों हाथों से कन्धों से पकड़ने की कोशिश की पर बात नहीं बानी तो मैंने उनकी कमर अपनी हाथ रखे पर फिर भी अपने ऊपर से हिला नहीं पाया . कारन था उनकी जंघे जो मेरी कमर क दोनों तरफ बीएड से लगी हुई थी यानि क मैं पूरी तरह मौसी की गिरफ्त में था . मैंने बयां हाथ नीचे कर मौसी का घुटना पकड़ने की कोशिश की तो मुझे झटका लगा . मौसी का घुटना एक डैम निर्वस्त्र था . मैंने अपना हाथ जांघ की तरफ सरकाया तो मेरी हैरानी की सीमा न रही . जांघ पर भी कपडा नहीं था . उत्तेजना वाश मैं हाथ चलता हुआ मौसी क कूल्हों तक पहुंच गया तो वहां पर सिर्फ पेंटी महसूस हुई पर मैक्सी नहीं. पेंटी पर हाथ फेरने क बाद मैक्सी की तलाश में हाथ और ऊपर किया तो मैक्सी पेंटी से भी थोड़ा और ऊपर सिलवटें लिए हुए मिली . इतनी ऊपर अपने आप तो आने से रही मैं ये सब सोचने की कोशिश करता पर उससे पहले लैंड महाराज ने दिमाग पर काबू कर लिया . मौसी की नंगी जांघ और चूतड़ सहलाने से hi मन बेहाल गया और मेरा डायन हाथ भी दूसरी जांघ पर रेंग कर चूतड़ों तक आ गया . मौसी की छूट फिर से लैंड पर दबी और मेरे हाथ मौसी क चूतड़ों पर कास गए . मुझे इतना मज़ा आ रहा था क मैंने मौसी क चूतड़ पकड़ कर उन्हें नीचे दबा दिया जिससे मौसी की छूट मेरे लैंड पर और कास गयी . मौसी का मुँह मेरी गर्दन क पास hi था . शायद वो भी कई सपना देख रही होंगी जो उन्होंने मेरी गर्दन को चूम लिया और इससे मेरी उत्तेजना और बढ़ गयी. अब मैं मौसी की गांड को पालोसने लगा . क्या नज़ारा था , मौसी की गांड का वो नरम मांस अपने हाथों में मींझने में इतना आनंद आ रहा था क मैं बिना मौसी की परवाह किये उनकी गांड मसल रहा था. मैं ये भी भूल गया क अगर उनकी नींद टूट गयी तो क्या होगा . मैं बस अपने आनंद में डूबा मौसी की गांड मसल रहा था और उनकी छूट मेरे लैंड पर रगड़ रही थी. मौसी क होंठ फिर से मेरी गर्दन पर लगे और मैं आनंद विभोर हो कर और भी ज़ोर से उनकी गांड मसलने लगा . मौसी क जिस्म में हलचल हुई और उनके हाथ मेरे बालों पर आ गए . मेरा सर सहलाती वो मेरी गर्दन चूम रही थी और अब मेरा एक हाथ उनकी कमर पर रेंगता हुआ मैक्सी क नीचे से उनकी नंगी मुलायम पीठ पे फिसलने लगा . मैं तो जैसे होश hi खोने लगा था इस मज़े में . अब नीचे से मैं भी ऊपर को कमर का ज़ोर लगा कर मौसी की छूट पर लैंड का दबाव बना रहा था . मौसी की कमर अब खुद hi थोड़ा तेज़ी से लैंड पर रगड़नी शुरू हो गयी , यकीनन वो सपने में कोई उत्तजित दृश्य देख रही थी. अचानक मौसी का सर थोड़ा ऊपर को सरका और उनके होंठ मेरे होंठों से आ लगे . एक बार मैंने ऑंखें खोल कर देखा क कहीं मौसी जग तो नहीं गयी पर नहीं , वो नींद में hi थी. मैंने भी अपने होंठ खोल कर मौसी क होंठ अपने होंठों में जकड लिए और उनका रास पीने लगा . उफ्फफ्फ्फ़ क्या मज़ा था , मौसी क होंठ चूसते हुए ऐसे लग रहा था मनो मैं हवा में उड़ रहा हूँ. मेरा हाथ मौसी की पीठ क ऊपर पूरी तरह से घूम रहा था मगर हैरानी की बात थी क मुझे वहां ब्रा की स्ट्रिप महसूस नहीं हुई , यानि क मौसी ने ब्रा नहीं पहनी थी. ये दिमाग में आते hi लैंड ने एक और झटका खाया . मैं मौसी की पूरी पीठ मादकता हुआ मैक्सी क अंदर से hi उनके कंधे और गर्दन तक ले आया और उनके सर को पकड़ कर उनके होंठों को और अचे से रास पीने लगा . मौसी की कमर भी और तेज़ हिलने लगी . मनो वो भी मज़े की इन्तहा पर पहुँच रही थी. मेरा दूसरा हाथ जो अभी तक पेंटी क ऊपर से मौसी क चूतड़ दबा रहा था मैंने उसे मौसी की पेंटी में घुसा दिया और उनके नंगे चूतड़ मेरे हाथ में आते hi मुझे झटका लगा और मौसी का जिस्म भी थरथरा गया . अगले hi पल मौसी की कमर और तेज़ी से हिलजुल करने लगी और झटके खरी हुई वो अकड़ कर ढीली हो गयी. शायद नींद में hi मौसी का पानी निकल गया था . मौसी की नंगी गांड और उनके पूरे शरीर को लगभग नंगा महसूस कर क मेरा भी बुरा हल था . मेरा भी काम होने वाला था तो मैं मौसी की गांड मसलता हुआ अपने लैंड को उनकी गीली छूट पर ज्यादा से ज्यादा रगड़ने लगा और कुछ hi पलों में मेरा भी पानी निकल गया . ये सब करते मैं भूल hi गया था क चाहे नींद में hi सही पर जब इंसान का काम हो जाता है तो वो एक बार होश में ज़रूर अत है पर मैं तो अपनी मस्ती में लगा हुआ था . मगर जब मेरा पानी निकला तो मुझे एहसास हुआ क मौसी क होंठ मेरे होंठों से अलग हो चुके हैं. मैं एक डैम से दर गया . मेरी ऑंखें मज़े से बंद थी पर ये सब महसूस करते मुझे लगा क मौसी जग गयी है और अब मेरी खैर नहीं. मैंने कुछ देर इंतज़ार किया पर मौसी की तरफ से जब कोई प्रतिक्रिया न हुई तो मैंने धीरे से आंख खोल कर देखा तो मौसी मेरी गर्दन पर सर लुढ़काये पहले की तरह hi पड़ी थी नींद में डूबी. मुझे हैरानी हुई की मौसी की नींद इतनी पक्की है क उन्हें कुछ पता नहीं चला , खैर मेरी तो जान बच गयी वर्ण पता नहीं वो करती . एक बार मैं फिर मैं खुद को कोसने लगा और मौसी को धीरे से अपने ऊपर से एक तरफ बीएड पर सरका दिया . अब मौसी पेट क बल बीएड पर थी . मैं जल्दी से उठा क्यूंकि अब मुझे बाथरूम जाने की ज़रूरत थी. पर मौसी पर नज़र पड़ी तो उनकी मैक्सी कमर से काफी ऊँची जा चुकी थी. मतलब आधी पीठ नंगी थी और उसके नीचे पाऊँ तक सिर्फ एक काली पेंटी. मैं उनके दूध से गोर बदन को न चाहते हुए भी फिर एक बार देखने लगा. पतली कमर उभरे हुए चूतड़ और केले क तने सी सफ़ेद गोलाकार जंघे , गोरी पिंडलियाँ और खूबसूरत पाऊँ. कुछ पल मैं ऐसे hi उन्हें निहारता रहा और फिर मुझे अपनी और मौसी की स्थिति का ज्ञान हुआ तो मैंने जल्दी से मौसी की मैक्सी नीचे करनी कोशिश की और बड़ी मुश्किल से उनकी बॉडी को सावधानी से थोड़ा थोड़ा मूव कर क जैसे तैसे मैक्सी को नीचे किया और चैन की सांस ली. फिर बाथरूम जा कर खुद को साफ़ किया और अपना अंडरवियर बदल कर खुद को गलियां देता वापिस आ कर लेट गया . नींद तो वैसे हराम हो गयी थी पर कहते हैं न वीर्य निकलने क बाद नींद ज़रूर अति है तो मुझे भी आ गयी .
 
अपडेट 273

निधि जब से वापिस आयी थी मन hi मन वो पीड़ा से भरी हुई थी. पीड़ा , पहले प्यार क सफल न हो पाने की . पीड़ा , किसी को अपना भगवन मन कर भी उसके द्वारा न अपना ये जाने की . पीड़ा , जिसे पति क रूप में मन से स्वीकार किया और भगवन ने खुद जिसे उसका पति बना दिया उसके द्वारा इस तरह बेरुखी से ठुकराए जाने की. मगर फिर भी उसे अमित पर ज़रा भी गुस्सा नहीं था . बल्कि उसके लिए मन में अभी भी वैसा hi प्यार था . चाहे उसने खुले शब्दों में ये बता भी दिया था क वो किसी और से प्यार करता है और उसी से शादी करना चाहता है पर फिर भी न जाने क्यों वो अमित को पति मैंने का ख्याल दिल से निकल hi नहीं प् रही थी. आखिर निकलती भी कैसे वो तो थी hi ऐसी . एक बार जिसे मन से पति मन लिया तो मन लिया अब चाहे कुछ भी हो. इसी लिए तो वो अमित से दिल की बात कह सकीय . वर्ण वो कहाँ ऐसी थी क किसी से इस तरह दिल की बात कहती और वो सब करती जो कर गुज़री. वो सरे रिश्ते नाते तोड़ कर सब कुछ छोड़ कर अमित संग जीवन बिताने को तैयार थी भले hi अंजाम कुछ भी हो. जबकि वो तो ऐसी नहीं थी आम ज़िन्दगी में. मगर उसके अंदर जो एक भारतीय नारी का दिल था उसके अंदर केवल एक hi भगवन हो सकता था और वो अमित को अपने मन मंदिर का भगवन बना चुकी थी. शनिवार का दिन तो निधि ने ऑफिस में hi निकल दिया और घर भी देर से आयी . उसकी बुझी बुझी सी शकल देख कर करिश्मा ने कारन जानने की कोशिश की पर निधि ने बहाने से ताल दिया . घर आ कर भी तबियत सही न होने का कह कर बिना खाये hi कमरे में खुद को बंद कर क सोने का बहाना कर साडी रत जगती रही और अंदर hi अंदर घुट घुट कर ऋतू रही. वो भगवन से एक hi सवाल पूछ रही थी क आखिर क्यों ? क्यों उसके मन में उसने अमित क लिए वो प्यार जगाया जो एक बहिन को भाई से नहीं होना चाहिए . क्यों उसके हाथों से उसकी मांग भरवाई अगर वो उसे पति क रूप में दे hi नहीं सकते थे . क्यों वो बार बार इशारा करता रहा क अमित hi उसका जीवन साथी है और क्यों वो सब हुआ जिसकी वजह से वो मजबूर हुई अमित क बारे में सोचने क लिए . मगर इस सब का जवाब कहाँ था और कौन देता ? जवाब तो केवल समय hi दे सकता था और समय क गर्भ में क्या छिपा है ये भला कोई इंसान कैसे जान सकता है . मगर इस अमित क इंकार कर देने से निधि क सामने अब कोई रास्ता नहीं बचा था. पिछले कुछ दिनों में उसकी माँ रजनी और पिता ने उस पर ज़बरदस्त इमोशनल दबाव बना दिया था लड़का देखने क लिए . वो लड़का जो उसके पिता ने उसके लिए पसंद किया था और रजनी भी उससे मिल चुकी थी . खैर संडे का दिन तो ऑफिस से ऑफ रहता है इस लिए आज निधि को घर hi रहना था और इस वजह से रजनी और उसके पति ने पूरा मन बनाया हुआ था क आज वो नीडबी को मन क रहेंगे . पर रोज़ की दिनचर्या क मुकाबले आज निधि जब देर तक कमरे से बहार न निकली तो रजनी को उसकी चिंता होने लगी. रत भी वो बिना खाये सो गयी थी और तबियत भी ख़राब होने क कह रही थी. रजनी ने जाकर दरवाज़ा खोलने की कोशिश की तो वो अंदर से बंद था जबकि निधि दरवाज़ा कभी ऐसे बंद नहीं करती थी. रजनी को चिंता में देख उसके पति ने उसे समझने की कोशिश भी क वो चिंता न करे पर माँ कहाँ मानती है. फिर भी कुछ देर क लिए वो मन गयी क शायद तबियत की वजह से आज वो देर तक सो रही है. पर सचाई तो ये थी क वो देर तक रोटी रही थी इस लिए अभी तक सो रही थी . पर जब 9 बजे तक भी दरवाज़ा न खुला तो इस बार रजनी क साथ खुद निधि क पापा भी दरवाज़ा पीटने लगे . ये देख नैना भी चिंता में पद गयी . पर खैर कुछ देर बाद नीडबी ने दरवाज़ा खोला . उसकी ऑंखें सुनी हुई थी जो रोने की वजह से थी पर सब ने यही समझा क तबियत की वजह से ऐसा हुआ है . मगर रजनी बेचारी तो रोने hi लग गयी क निधि को अचानक हो क्या गया है . माँ और पापा को चिंता में देख नीडबी भी अपना गम भूल उन्हें समझने की कोशिश करने लगी क वो ठीक है पर माँ कहाँ मानती वो तो अपनी बेटी को अपनी गॉड में सर रख कर लिटाने क बाद उसके सर की मालिश करने लगी. खाने का काम नैना क जिम्मे था जो उसने संभल लिया . बाप की भी चिंता ख़तम हो गयी क चलो बेटी ठीक है . मगर रजनी का मन कहाँ मन रहा था . खैर नाश्ता भी हो गया और अब निधि भी नाह कर फ्रेश हो चुकी थी. तब रजनी और निधि क पापा दोनों बैठ गए निधि को घेर कर .

रजनी : निधि बीटा , देख आज तुझे हमारी बात माननी पड़ेगी , हम तेरे दुश्मन थोड़ा हैं हम तेरे भले क लिए hi तो कह रहे हैं . तू एक बार उस लड़के से मिल ले . अगर तुझे पसंद न हो तो इंकार कर देना पर एक बार मिल तो ले .

निधि : माआ , मैंने आपको पहले भी कहा है क मैं अभी शादी नहीं करना चाहती . आप क्यों बार बार ये सब कह कर मुझे मजबूर कर रही हैं.

राजेश : बीटा कब तक ऐसे hi मन करती रहेगी? आखिर एक न एक दिन शादी तो करनी है न , फिर दिक्कत क्या है? हम तुम पर कोई दबाव नहीं बना रहे . तू एक बार बस मिल ले लड़के से. अगर तुझे पसंद न आये तो कहना . मैं उसे अचे से जनता हूँ मेरे साथ hi बैंक में काम करता है . सरकारी नौकरी है घर में भी उसके कोई नहीं है. लड़का बहुत ाचा है . बहुत संस्कारी है . तू बहुत खुश रहेगी . मैंने इतने सैलून में कभी तुझे मजबूर नहीं किया उसके लिए क्यूंकि मुझे खुद hi कभी कोई लड़का तुम्हारे काबिल नहीं लगा . मगर ये पहले लड़का है जो मुझे तुम्हारे लिए पसंद है. ऐसा रिश्ता तो ढूंढें से भी नहीं मिलता बेटी. तू बहुत खुश रहेगी. तू नहीं समझती बीटा क एक बाप क दिल में कितने अरमान होते हैं अपनी बेटी क लिए . अपने दिल क टुकड़े को भला कोई ऐसे hi किसी क हवाले कर सकता है ? मैंने जो लड़का पसंद किया है वो हीरा है हीरा . हर मामले में तेरे काबिल है. तू बस एक बार मिल ले , मुझे पूरा यकीन है क वो तुझे ज़रूर पसंद आएगा.

निधि: पापा प्लीज , मैं कैसे समझों आपको क मैं शादी नहीं करना चाहती . आप क्यों बार बार मुझे मजबूर कर रहे हैं.

रजनी : शादी नहीं करनी तो क्या साडी उम्र ऐसे hi हमारे सर पर बैठी रहेगी? हर लड़की को एक न एक दिन शादी कर क जाना hi पड़ता है . तू ये बात क्यों नहीं समझ रही ? शादी क बाद hi नए जीवन की शुरुआत होती है . अगर तू ऐसे करेगी तो हम लोगों को क्या जवाब देंगे ? कल को नैना की शादी भी तो करनी है . अगर तू hi शादी नहीं करेगी तो तेरे भाई बहनो का क्या होगा ? मैं तेरी माँ हूँ , तेरा बुरा तो नहीं चाहूंगी न ?

निधि : ठीक है माँ , अगर ये बात है तो मैं यहाँ से चली जाती हूँ. वैसे भी कंपनी की तरफ से मुझे फ्लैट तो मिला hi है , मैं वहीँ रह लुंगी आप लोगों को मेरी चिंता करने की ज़रूरत नहीं.

ये बात सुन रजनी को बहुत दुःख हुआ और वो रोने hi लगी.

रजनी : आखिर हो क्या गया है तुझे ? किसकी नज़र लग गयी है तुझे ? तू तो ऐसी नहीं थी . तू क्या हम पर बोझ है जो हम तुझे घर से निकलना चाहते हैं? अगर तुझे कोई और लड़का पसंद है तो हमें बता हम उसके साथ तेरी शादी करवा देंगे . तू एक बार बता तो सही .

निधि ( मन में ) मैं जिससे शादी करना चाहती हूँ उससे न तो आप कभी मेरी शादी करवाएंगे न अब ये शादी हो पायेगी. शायद अब अकेले रहना hi मेरी तक़दीर है क्यूंकि उसके इलावा तो अब मैं इस जनम में किसी की हो नहीं सकती .

निधि : माँ , क्या शादी करना इतना ज़रूरी है ? क्या मेरी कोई मर्ज़ी नहीं ? अगर मैं शादी नहीं करना चाहती तो क्या ज़रूरी है क इसके पीछे कोई लड़का hi हो? मैं शादी करना hi नहीं चाहती माँ . मैं बस अकेले रहना चाहती हूँ. मुझे ये सब पसंद नहीं है . अगर आप क लिए ज़रूरी है तो आप नैना की शादी करवा दीजिये . मैं अलग रह लुंगी जिससे कोई मसला न हो. आप लोगों को कुछ भी कह देना. वैसे भी बातें करने वाले तो कुछ न कुछ कहते hi रहेंगे. बस मैं शादी नहीं करना चाहती .

राजेश : बीटा ये कैसी बातें कर रही हो तुम? तुम आखिर किस वजह से शादी नहीं करना चाहती हमें कुछ तो बताओ? आखिर मैं खुद को कैसे समझों क मेरी फूल सी बची क्यों शादी क नाम से नफरत करने लगी है? एक बाप क लिए सबसे बड़ा बोझ उसकी बेटी को अचे घर में बेयहना होता है . अगर तू शादी नहीं करेगी तो तेरा ये बाप इसी गम में रो रो कर मर जायेगा क वो अपने बाप होने क फ़र्ज़ नहीं निभा सका . क्या तू चाहती है तेरा बाप ये बोझ अपने सीने पे लेकर मरे ?

अपने पिता को करुणा भरी बातें सुन कर निधि की ऑंखें भी बहने लगी थी जो पहले hi माँ का रोना बड़ी मुश्किल से बर्दाश्त कर रही थी

निधि : ठीक है पापा , अगर आप यही चाहते हैं तो ठीक है . आप जहाँ चाहते हैं मेरी शादी करवा दीजिये . पर इस घर से मेरी डोली नहीं मेरी अर्थी उठेगी. मैं ज़िंदा तो रहूंगी पर लाश बन कर .

इतना कह कर निधि तेज़ कदमो से घर निकल गयी अपने आंसू पोंछती हुई. पीछे रह गए राजेश और रजनी जो अपनी बेटी की कही आखिरी बात को सुन कर बुरी तरह से टूट गए . आखिर वो अपनी बेटी क दुश्मन तो थे नहीं जो उसके साथ ज़बरदस्ती करते . पर वो निधि क फैसले से भी सहमत नहीं हो सकते थे क वो अकेली अपनी ज़िन्दगी गुज़र दे . दोनों किया बीवी निधि को लेकर कितनी देर मन भर कर अंदर hi अंदर टूट कर बैठे रहे . रजनी तो बार बार रो hi देती पर राजेश अपनी आँखों की नमी को संभाले हुए था. निधि घर से निकल तो गयी थी पर जाती कहाँ? मगर अब उसके पास एक ठिकाना और था और वो था उसका वो फ्लैट जो उसे राघव ने दिया था . जहाँ वो अमित क साथ रहने क सपने सजा रही थी पहले दिन से hi पर अब वो कोई भी सपना सच तो होना नहीं था . इस लिए वो अपनी उजड़ी हुई सपनो की दुनिया में hi जा घुसी अपने आंसुओं से सपनो क मुरझाये हुए फूलों को नया जीवन देने की आस में . नैना मामले को देख रही थी समझ रही थी पर क्या करे ये उसे समझ नहीं आ रहा था . शाम तक जब निधि वापिस न लौटी तो सबको चिंता होने लगी . राजेश और रजनी का फ़ोन तो उसने उठाया hi नहीं पर नैना से बात ज़रूर कर ली और बता दिया क वो अपनी दोस्त क पास है. इससे परिवार को कुछ रहत तो मिली पर चिंता वहीँ की वहीँ थी . फिर नैना ने hi अपनी का को आईडिया दिया क वो मां ममी को निधि से बात करने क लिए बुलाये. शायद वो उनकी बात मन ले. क्यूंकि निधि अपने मां विजय की बहुत इज़्ज़त करती थी. रजनी को भी ये सही लगा और उसने विजय को सुबह घर आने को कहा और बता भी दिया क निधि शादी क लिए नहीं मन रही . विजय भी चिंता में पद गया , वो तो अभी आने का कहने लगा पर रजनी ने उसे सुबह आने को कहा . विजय ने जब ये बात गौरी और बाकि सब को बताई तो उनको भी निधि की चिंता होने लगी. दीपिका को तो अमित सचाई बता hi चूका था . इस लिए वो सारा माजरा समझ गयी . गौरी तो इस हालत में नहीं थिंक वो सफर कर सके . इस लिए दीपिका ने ये सुझाव दिया क वो विजय क साथ जाएगी निधि से बात करने . गौरी की हालत को देखते हुए सब ने इस बात पर हामी भर दी. दीपिक मन hi मन सोच रही थी क इस बात का हल अब क्या निकला जाये. आखिर निधि क मन को कोई और तो जनता नहीं था और जो जनता भी था वो मज़बूरी का पल्लू पकडे था . दीपिका निधि क साथ हमदर्दी रख रही थी. आखिर एक औरत क दिल का दर्द एक औरत hi बेहतर जान सकती है. दीपिका खुद भी अमित को पति मानती थी तो बेहतर जानती थी क निधि क मन की क्या दशा होगी . इस लिए उसने फैसला कर लिया था क वो खुल कर निधि से बात करेगी . आखिर ये ज़रूरी भी था , दोनों hi तो उसके अज़ीज़ थे . किसी एक को भी टूट ते हुए वो कैसे देख सकती थी. और वो ये भी अचे से जानती थी क जब अमित को ये पता चलेगा की निधि की हालत क लिए वो ज़िम्मेदार है तो वो भी टूट जायेगा . क्यूंकि वो भी तो दिल से प्यार करता था निधि को चाहे एक बहिन क रूप में .

शनिवार का दिन चाहे मीनल ने मोहित को तड़पा कर निकला पर उसकी तड़प भी मीनल सेह नहीं प् रही थी और मोहित का उतरा हुआ चेहरा देख उसने उसे थोड़ी हिम्मत देने क लिए गाडी से उतारते वक़्त एक किश कर दी जब वो उसे घर ड्राप करने आया था . मोहित की तो मनो लाटरी hi लग गयी थी क मीनल मान गयी पर मीनल ने गुस्सा दिखते हुए बस इतना hi कहा क जब तक उसका मूड ठीक नहीं होगा तब तक वो उसे पहले की तरह प्यार नहीं करेगी और इसके लिए मोहित को साबित करना होगा वाकई में वो उसी से प्यार करता है और उसका वफादार है . अब मरता क्या न करता , मोहित को यही तो चाहिए था बस एक मौजा जो खुद मीनल दे hi दिया . खैर इससे ज्यादा तो कुछ न हुआ और मोहित की गाड़ी से उतर कर मीनल घर आ गयी. मोहित भी वहां से चला गया पर ये सारा सन मीनल का कजिन संजय देख रहा था जो उसी वक़्त लौटा था अपने लिए एक कॉलेज सेलेक्ट करने क बाद . संजय घर आने क बाद सीधा मीनल क पास गया और उससे मोहित क बारे में पूछा . पहले तो मीनल ने मन किया पर फिर खुद hi मान गयी अपने और मोहित क रिश्ते क बारे में . संजय भी कमीना था पर इतना नहीं क मीनल का फायदा उठाये. इस लिए बात को ख़तम कर दिया . पर इसके बदले में अब मीनल को उसे शहर घूमना था . तो आज संडे का दिन मीनल ने संजय को शहर घुमाया . दोनों में अछि अंडरस्टैंडिंग थी दोस्तों की तरह. संजय ने उसे बताया क उसने अपने लिए कॉलेज देख लिया है जो उसे पसंद भी है. और था भी वो दूसरे no. का कॉलेज इस वाले कॉलेज क बाद जिसमे अपने सब बाबूराव पड़ते थे . मीनल ने फिर एक बार कहा क वो उसी क कॉलेज में आ जाये पर संजय का वो hi डायलाग क वो खुल कर मस्ती करना चाहता है. सारा दिन अचे से गुज़ारा और रत भी देर तक दोनों बात करते रहे . इस दौरान मीनल अपने मोबाइल से जब अपने कॉलेज फ्रेंड्स की तस्वीरें दिखा रही थी तो एक तस्वीर पर संजय की नज़रें जैम गयी. काळा सुनहरी घुंघराले बालों वाली हसीं पारी , संजय ने आज तक ऐसी खूबसूरत लड़की नहीं देखि थी. ऑंखें तो ऐसी क बस देखने वाला मदहोश hi हो जाये . झील सी आँखें थी रीमा की. उसके तो मुँह में पानी आ गया . मीनल का ध्यान बातों में था पर संजय तस्वीर को बड़ा कर क अचे से स्कैन करने लगा. पर इस तस्वीर में चेहरे क इलावा ज्यादा कुछ नज़र नहीं आ रहा था . और तस्वीरें आगे कर क इस हसीना को देखने क चक्कर में अब अगला चेहरा जो सामने आया वो राधा का था . रीमा की तरह hi निहायत hi खूबसूरत और अपने आप कुदरत की कारीगरी का बेजोड़ नमूना . सिंपल कपड़ों में भी क़यामत लगने वाली राधा भला किसे पसंद नहीं आएगी और संजय तो था hi रसिया . राधा पर भी उसका मन दिल गया . हर तस्वीर में राधा को सिंपल और शरमाते हुए प् कर संजय को समझ आ गयी ये एक सिंपल लड़की है मगर बेहद hi हसीं. अब उसका दिल रीमा क साथ राधा पर भी धड़कने लगा . कुछ तस्वीरों में शिवानी शीना शालू जैसे कातिल हुसैन भी नज़र आये पर संजय का काम अटक गया था इस दो हसीनाओं पर . मीनल क्या कह रही थी ये तो संजय सुन hi नहीं रहा था तो मीनल का ध्यान उसकी तरफ गया . और जब उसने तस्वीर देखि तो है पड़ी .

मीनल : क्यों ? आ गया न मुँह में पानी ? देखा बच्चू , मैंने कहा था न हमारा कॉलेज बेस्ट है . पर तुझे तो दूसरे कॉलेज में जाना है . सॉरी बाद लक .

मीनल ने मुँह बनाते हुए जब ये बात कही तो संजय को लगा जैसे वो उसका मज़ाक उदा रही हो. पर इस बात पर वो गुस्सा होने की बजाये उसकी खुशामद करने लगा

संजय : मेरी अछि बहिन , मेरी प्यारी बहिन , तू तो मेरी दोस्त है न . देख मैं तेरी बात बुआ को नहीं बताई और बताऊंगा भी नहीं पर तू मेरा एक काम कर दे . अपनी इस सहेली से मेरी सेटिंग करवा दे . लड़कियां तो दिल्ली में भी एक से एक मैंने पटायी हैं पर सच में यार ये तो किसी हेरोइन से काम नहीं. एक बार इसके साथ सेटिंग हो जाये कसम से फिर किसी और की तरफ देखूंगा भी नहीं.

मीनल : ओहूऊ , प्यारी बहिन ,,,, वैसे तो मेरे साथ हमेशा झगड़ा करता है मेरा मज़ाक उडाता है और अब प्यारी बहिन . और तू धमकी किसे दे रहा है ? तुझे बताना है तो बता दे मैं नहीं डर्टी. वैसे भी मोहित क लिए माँ डैड इंकार नहीं करने वाले .

संजय : देख तू मेरी बहिन भी है और दोस्त भी , तो क्या अपने भाई छुम दोस्त क लिए इतना भी नहीं कर सकती? मैंने आज तक तुझे कोई काम कहा है क्या ?

मीनल : ाचा !! और आज जो सारा दिन तुझे शहर घुमाया है वो क्या था ?

संजय : अरे वो तो बस मैंने शहर देखना था अब यहाँ रहना है तो ज़रूरी है न शहर घूमना भी . देख अगर तू मेरी बात इससे करवा देगी तो मैं तुझे शॉपिंग करवाऊंगा जितनी भी तू चाहे , no लिमिट्स.

मीनल : ाचा जी , बस फोटो देख कर hi पागल हो गए ? तुम तो कह रहे थे लड़कियां खुद चल कर तेरे पीछे आती हैं. अब क्या हुआ ?

संजय : अब छोड़ भी न वो सब , वो तो ऐसी वैसी कई साडी लड़कियां होती हैं पर ये कुछ खास है. मेरा तो दिल hi आ गया है इस पर. सच यार एक बार इससे मेरी बात करवा दे . कसम से इसे तेरी भाभी बनाऊंगा और जो तू कहेगी सब करूँगा .

अब मीनल ने तस्वीर को गौर से देखते हुए संजय क मज़े लेने शुरू किये . क्यूंकि उसे समझ आ गयी थी क संजय इसके लिए पागल हो गया है और वो भी ये बात से सहमत थी क रीमा जैसी सुन्दर लड़की पर तो कोई भी फ़िदा हो जायेगा .

मीनल : ाचा !!! काम बहुत मुश्किल है . ये तो किसी लड़के से सीधे मुँह बात भी नहीं करती . हमारे कॉलेज में शहर क ऑलमोस्ट सभी लड़के रईस परिवारों से हैं और हैंडसम भी पर ये किसी को घास तक डालती. और तो और कुछ लड़कों की तो इसमें सरे आम थप्पड़ मर कर बजती कर दी थी. पता भी है ये है कौन ? शीना की बहिन है रीमा , मेरे साथ hi है क्लास में पर ये नहीं पर्ने वाली और शीना से तो सारा कॉलेज डरता है. इस शहर क सबसे बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट बलजीत राइ की बेटी है. और रीमा उसकी चचेरी बहिन . न बाबा न , मैं नहीं पन्गा ले सकती , खुद प्रिंसिपल उनके सामने कुछ नहीं कर सकते और तू मुझे फंसा रहा है .

संजय : तो क्या हुआ किसकी भी बेटी हो या बहिन . है तो लड़की hi ? और मैं क्या काम हूँ जो तू ऐसे कह रही है .

मीनल : बच्चू एक बार हमारा कॉलेज अचे से देख लेते तो ये बात न कहते . तुम जैसे सैंकड़ों मिल जायेंगे वहां . कोई और लड़की है तो बता इसके मामले में मेरे हाथ खड़े हैं.

संजय को मीनल पर गुस्सा तो आ रहा था पर उसके तारक सुन कर उसे भी लगा क क्या पता वाकई में ये सही बात हो. फिर उसने दूसरी तस्वीर मीनल क आगे कर दी . जिसे देखते हुए मीनल फिर से चौंक गयी . क्यूंकि ये राधा थी.

संजय : अब ये तो किसी बड़े बाप की औलाद नहीं है न ? इसके कपड़ों से hi पता चल रहा है क ये मिडिल क्लास है हमारी तरह. काम से काम इससे तो बात करवा दे मेरी .

मीनल : तू जनता है ये कौन है ?

संजय : तू बताएगी तो पता चलेगा न .

मीनल : तू अमित से मिला है न ? वो hi हमारा डरा सिंह , अरे तू मिला तो था जब तू आया था यहीं पर .

संजय : हाँ हाँ , यद् आया , अब उसका इससे क्या कनेक्शन?

मीनल : ये उसकी कजिन है , और पूरे कॉलेज में किसी लड़के की हिम्मत नहीं जो राधा को गलत नज़र से देख भी ले . जिस किसी ने राधा का रास्ता रोकने की कोशिश की उसको दिन में तारे दिखाए हैं हमारे पहलवान ने . और तो और वो जो मोंटी था न शीना का भाई रीमा क कजिन , उससे सारा कॉलेज डरता था यहाँ तक क प्रोफ़ेसर भी. पर उसे hi पूरे कॉलेज क सामने पहले hi दिन थोक दिया था अमित ने . और ….

संजय : बस बस , तू मुझे इसके बारे में बता उस गैंडे की बड़ाई मत सुना . बस इसके बारे में अत , इसका कोई बर्फ तो नहीं है न ?

संजय तो जैसे खीज गया था अमित की बात आने पर क्यूंकि पहली मुलाकात से hi मीनल उसकी बड़ाई hi करती आ रही थी चाहे किसी भी टॉपिक पर बात हो .

मीनल : ये ऐसी वैसी लड़की नहीं है. लड़कों की तरफ देखती भी नहीं और तू भी इससे दूर hi रहना . तुझे मैं ये सब इस लिए बता रही थी क कहीं तू गलती से भी ऐसा वैसा कुछ कर न दे क बात अमित तक पहुंचे . वो दिल का ाचा है पर राधा क मामले में वो किसी की नहीं सुनता . राधा की आँख में ज़रा सा आंसू भी आ जाये तो वो गुस्से में पागल हो जाता है फिर उसे कोई नहीं रोक सकता. भगवन क लिए जो मर्ज़ी करना पर राधा क साथ कोई गलत हरकत मत करना वर्ण बहुत बुरा हो जायेगा. वो मेरा बहुत ाचा दोस्त है और मैं नहीं चाहती हमारी दोस्ती ख़राब हो.

संजय मन में अमित की बातें सुन सुन उससे जलन सी रखने लगा था . ये उसका स्वभाव था वो खुद को हमेशा सब से बेस्ट साबित करना चाहता था. और अब अमित उसके सामने एक चुनौती सा बनता जा रहा था . मिल तो वो चूका hi था और उसे किसी भी मामले में अमित अपने बराबर का नहीं लगा था . न पर्सनालिटी में न फैशन में न टूशन में न स्टाइल में हाँ शरीर से ज़रूर कुछ ज्यादा hi भरी लगता था पर इसे भी संजय उसकी कमी hi मंटा था क्यूंकि उसकी नज़र में तो हर लड़की को 6 पैक hi पसंद होते हैं जो उसने खूब बनाये हुए थे . ऊपर से दिल्ली जैसे शहर से वो स्टेट लेवल तक जीत क आया था तो अमित को वो मामूली सा गाओं का लड़का hi मन रहा था.

संजय : अरे यार तू भी क्या क्या सोचने लगती है. मैं तुझे क्या ऐसा लगता हूँ ? मैंने अभी तुझे क्या कहा , क मैं इस लड़की को तुम्हारी भाभी बनाऊंगा . तो भला मैं क्या उससे कोई गलत हरकत करूँगा ? बस ये समझ ले क तू अपनी भाई क लिए लड़की पसंद कर रही है . हम दोनों की जोड़ी कैसी रहेगी?

मीनल संजय की बात सुन कर बहुत खुश हुई. संजय क विचार नेक थे , वो राधा को गलत नज़र से नहीं बल्कि अछि नज़र से देख रहा था और ये जान कर उसे और भी ाचा लगा क वो उससे शादी तक करना चाहता है. मीनल अंदर से खुश हुई और फिर संजय से मज़ाक करने लगी.

मीनल : तो मेरा भाई अभी से सेहरा बांधना चाहता है और उसके लिए मेरी हेल्प चाहिए . ठीक है मैं कुछ करती हूँ पर बदले में मुझे क्या मिलेगा ?

संजय : अब तू मुझे ब्लैकमेल कर रही है ?

मीनल : अरे ब्लैकमेल कैसा ? फीस तो लगेगी न ? बोलो क्या मिलेगा मुझे ?

संजय ने अपना पर्स निकल कर उसके हाथ पर रख दिया .

संजय : ले सब तेरा , और जो भी तू कहेगी वो करूँगा . बस मेरी राधा क साथ सेटिंग करवा दे .

मीनल : ठीक है ठीक है , पर मुकरना नहीं अपनी बात से , कह देती हूँ, वर्ण सेटिंग रुस्वा भी दूंगी . हे हे हे ,,, ाचा एक प्रॉमिस तुम्हे भी करना होगा

संजय : हुकम करो

मीनल : प्रॉमिस करो क राधा की मर्ज़ी क खिलाफ कुछ नहीं करोगे , देखो वो बहुत सिंपल लड़की है और उसकी माँ भी बहुत अछि हैं . मैं उनकी पूरी फॅमिली की जानती हूँ , सब अचे हैं. इस लिए कभी ऐसा कुछ न करना क जिससे राधा को ठेस पहुंचे . मैं रीमा और राधा तीनो एक hi क्लास में हैं और बहुत अछि दोस्त हैं. तो प्लीज कुछ गलत मत करना .

संजय : अरे तुझे कहा न मैं कुछ भी गलत नहीं करूँगा . बल्कि बड़े प्यार से इज़्ज़त से राधा को तुम्हारी भाभी बनाऊंगा . और अमित को साला .

मीनल : आईये ( उंगली दिखते हुए ) गाली नहीं . ख़बरदार जो अमित को गली दी तो .

संजय : अरे मैंने कौन सा कुछ गलत बोलै ? रिश्ते में फिर वो मेरा साला hi तो लगेगा न . वैसे तुम इतना क्यों गुस्सा हो रही हो जो मैंने उसे गाली दी भी तो? तेरी तो मोहित क साथ है न फिर ये अमित का क्या सन है?

मीनल का दिल एक बार तो इस सवाल से अंदर से हिल hi गया हो जैसे किसी ने सचाई सामने रख दी हो. पर खुद को संभालती वो बोली

मीनल : वो मोहित का बेस्ट फ्रेंड है और मेरा भी वैसे भी रिश्ते में देवर तो बनेगा hi इस लिए वो खास है. मोहित उसको अपना भाई मंटा है. और पता है अमित ने मुझे आंटी जी से भी मिलाया था , मोहित की मम्मी से . और …..

संजय : बस बस , तू फिर शुरू हो गयी अमित का गुणगान करने . चल छोड़ , मुझे राधा क बारे में सब बता डिटेल में.

मीनल : पर तू पहले ये बता , तू तो एडमिशन ले रहा था क्सक्सक्सक्सक्स कॉलेज में अब तू मेरी सहेलियों क पीछे पड़ा है.

संजय : प्लान चेंज डिअर सीस , अब मर संजय थे माचो मन कल से तुम्हारे कॉलेज में आ रहा है.

मीनल : हे हे हे , माचो मन , शकल देखि है बन्दर कहीं का . तुझे हमारे कॉलेज में एडमिशन मिलेगी तब न.

संजय : कैसे नहीं मिलेगी ? झट से मिलेगी, सुबह देखना , जब तुम्हारे कॉलेज वालों को पता चलेगा क उनके कॉलेज में एडमिशन लेने दिल्ली का चैंपियन आ रहा है तो खुद प्रिंसिपल स्वागत करने आएगा .

मीनल : है है है ,,, है है है ,,, तू न बहुत बड़े बड़े बाइक मरता है सच में. दिल्ली का चैंपियन है है है ,,,,, माचो मन है है है ,,,, प्रिंसिपल स्वागत करने आएगा है है है ,,,,,

मीनल तो लोटपोट हो रही थी संजय की शेखियां सुन कर . मगर संजय अंदर से गुस्से से भर गया था पर फिर भी चेहरे पर मुस्कान सजाये था

संजय : है ले है ले , कल मैं जाउंगी तुम्हारी औरत देख कर जब एडमिशन लेकर तुम्हारी क्लास में बैठूंगा . मैं तो चल सोने कल सुबह कॉलेज जो जाना है .

मीनल को वहीँ जाता छोड़ कर संजय उठ कर अपने कमरे में चला गया और मीनल भी कुछ देर बाद आराम से सो गयी. मीनल ने भी मन में सोचा लिया था क वो राधा को संजय क लिए मानाने क लिए एक बार पूछेगी ज़रूर क्या पता वो मन जाये पर दबाव बिलकुल नहीं बनाएगी क्यूंकि अंजाम वो जानती थी अचे से .

सुबह मेरी आंख समय पर खुल गयी , मौसी अभी भी सो रही थी . मैं जल्दी से उठ कर फ्रेश हुआ और निकल गया एक्सरसाइज करने . एक्सरसाइज से लौटा तो मौसी किचन में थी और नाश्ता बना रही थी . मुझे आया देख कर वो मेरे लिए दूध ले आयी. कल रत वाले सन की वजह से मैं उनसे नज़रें चुरा रहा था पर मौसी क व्यव्हार से ऐसा कुछ न लगा क उन्हें मेरी किसी हरकत का कुछ पता चला हो. खैर नाहा धो कर रेडी हुआ तो राधा भी तैयार थी. और हमेशा की तरह बहुत प्यारी लग रही थी. हम ने साथ में नाश्ता किया और कॉलेज क लिए निकल गए . रीमा पहले hi पहुँच चुकी थी बुआ क साथ और हमारा इंतज़ार कर रही थी. हमेशा की तरह वो राधा से गले मिली और मुझसे हाथ मिलाया . पर उसकी आँखों में आज कुछ ज्यादा hi श्लोक hi थी जिसकी वजह मुझे समझ में न आयी पर इतना ज़रूर था क आज वो कुछ करने क मूड में है. कुछ देर में कल्पना भी आयी और मोहित भी आ गया पर वो थोड़ा मुरझाया हुआ सा था .

अमित : अबे तुझे क्या हुआ अब ? सुबह सुबह मुँह उतरा हुआ है?

कल्पना : लगता है इसकी लैला ने फिर से इसे ठेंगा दिखा दिया है . क्यों सही कहा न ?

मोहित : तू न ज्यादा चपड़ चपड़ मत किया कर. तेरी किसी से कोई रिलेशनशिप हो तो तुझे कुछ पता चले . मुफ्त का ज्ञान पलटी रहती है .

मोहित तो फट hi पड़ा कल्पना क मज़ाक पर . जिसे देख कर सबको हंसी आ गयी.

कल्पना : मामला ज्यादा hi बिगड़ा हुआ जान पड़ता है.

तभी बेल्ल बज गयी क्लास शुरू होने की. रीमा और राधा bye बोल कर निकल गयी और हम भी जा hi रहे थे क मीनल क साथ उसका कजिन संजय आता हुआ नज़र आया . स्टाइलिश कपडे पहने और आँखों पर चश्मा लगाए बड़े hi स्टाइल से चल रहा था . मीनल को देख मोहित क चेहरे पर ख़ुशी तो थी hi पर संजय को वो गुस्से से देख रहा था .

कल्पना : आज इतनी देर कैसे ? और ये कौन है तुम्हारे साथ ?

कल्पना ने मीनल से हाथ मिलते हुए संजय क बारे में पुछा तो मीनल क बोलने से पहले hi संजय बोल पड़ा

संजय : माय नाम संजय सक्ससेना , यू कैन कॉल में ओनली संजय और संजू , शार्ट नाम .

संजय ने स्टाइल मरते हुए कल्पना से कहा तो कल्पना ने फीकी सी मुस्कान क साथ उसे hi कहा . फिर उसने मोहित और मुझसे हाथ मिलाया .

मीनल : ये मेरा कजिन है संजय , दिल्ली से अभी अभी यहां शिफ्ट हुआ है. हम एक hi स्ट्रीम में हैं तो सोचा क्यों न एक hi कॉलेज में एडमिशन ले लें. वैसे ये भी स्पोर्ट्स में है.

कल्पना : ओह वैरी गुड , फिर तो तुम हमारी कंपनी क हुए . मैं कल्पना हूँ , जुडो खेलती हूँ. और ये …..

संजय : अमित से मैं मिल चूका हूँ. वैसे मैं बॉक्सिंग में स्टेट चैंपियन हूँ अपनी केटेगरी में और अपने कॉलेज का मर परफेक्ट. वहां तो दूसरे कॉलेज क प्रिंसिपल्स खुद मुझे कॉल कर कर क कहते थे क मैं उनके कॉलेज में एडमिशन लूँ पर क्या करें माँ डैड क फॉरेन चले जाने से मुझे यहाँ आना पड़ा. और सुना है ये कॉलेज यहाँ का बेस्ट है . इस लिए यहाँ चल आया , अब जाकर बस फाइल जमा करवानी है झट से एडमिशन

कल्पना : ाचा , गुड लक , अगर एडमिशन हो जाये तो फिर कैंटीन में पार्टी तुम्हारी तरफ से होगी.

संजय : दोने , पार्टी क लिए तैयार हो जाओ.

कल्पना : ाचा , इतना कॉन्फिडेंस है ? चलो देखते हैं. ाचा मीनल हम चलते हैं.

मीनल : ठीक है , मैं संजय क साथ ऑफिस की तरफ जा रही हूँ . कैंटीन में मिलते हैं.

मोहित : मैं साथ चलूँ?

मोहित ने मासूम सा बन कर सवाल पूछा तो मीनल उसे भी साथ ले गयी. इधर मैं और कल्पना क्लास की तरफ चल दिए . कल्पना जो पहले आराम से संजय से बात कर रही थी अभी वो अपना पेट पकड़ कर हसने लगी .

अमित : क्या हुआ ? ऐसे क्यों हंस रही हो ? क्या बात है ?

कल्पना : तुम्हे हंसी नहीं आ रही ? देखा नहीं उसे ? कितनी हीरो गिरी दिखा रहा था ? बातों से hi लग रहा है क घमंड कूट कूट क भरा हुआ है . उसे लग रहा है क इस कॉलेज क प्रिंसिपल भी बाकि प्रिंसिपल्स क जैसे हैं. अभी पता चल जायेगा , शर्त लगा लो इसकी एडमिशन नहीं होगी .

अमित : वो क्यों भला ?

कल्पना : अरे यार लास्ट में आ क प्रिंसिपल सर ऐसे hi किसी को थोड़ा hi ले लेंगे , कॉलेज की रेपुटेशन भी तो देखनी पड़ती है. वैसे भी जिस तरह ये बात कर रहा है वो तो कभी भी इसे एडमिशन न दें. अरे बाप रे , वो देखो तुम्हारी दुश्मन क्लास में पहुँच गयी जल्दी भागो.

सामने हमारी क्लास नज़र आयी जहाँ चन्दर्कांता एंटर हो रही थी. हम दोनों भागते हुए दरवाज़े तक पहुंचे , अंदर सभी स्टूडेंट्स खड़े थे कल्पना ने अंदर आने की परमिशन मांगी तो चन्दर्कांता की नज़र हम दोनों पर पड़ी और वो एक तक मुझे hi देखने लगी. उसके चेहरे को देख कर पता नहीं लग रहा था क वो गुस्से में है या कुछ और . खैर उसने अंदर आने दिया और मैं अपनी जगह आ कर बैठ गया . आज पारसी क मुकाबले स्टूडेंट्स ज्यादा थे पर फिर भी आखिरी रौ क 2-3 बेंच तो खली थे hi. चन्दर्कांता बार बार नज़रें उठा कर मुझे देखती और फिर इधर उधर देखने लगती. मैं भी उसे hi देख रहा था . कल की चुदाई क बाद उसके अंदर मेरे लिए गुस्सा है या वो डाब गयी है ये मुझे जानना था , पर कैसे ? मोहित क न होने से मैं अकेला hi था अपने सीट पर और साथ वाली दोनों रौ क बेंच खली थे. पीछे की दो रौ भी खली थी तो ये देख मेरे दिमाग में एक आईडिया आया जिससे पता चले क चन्दर्कांता अब मेरे वाश में है या अभी भी कसार है . मगर उससे पहले चन्दर्कांता ने सभी को उनकी अंसवेरशीट्स बाँट दी देखने क लिए . मुझे जब मेरी आंसर शीट मिली तो हैरानी से मुँह खुला hi रह गया. मेरे 99 मार्क्स थे , सेल इतने तो मैंने सपने में भी एक्सपेक्ट नहीं किये थे . मैंने चन्दर्कांता की तरफ देखा तो हमारी नज़रें मिली मगर उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे और वो दूसरी तरफ देखने लगी. पर मैं अंदर से उछाल रहा था क इतने मार्क्स , हर कोई अपनी अंसवेरशीट्स देख रहा था तो मैंने नज़र बचा कर चन्दर्कांता को अपने पास आने को कहा . उसने गुस्से भरी नज़रों से मुझे देखा . मुझे लगा क साली फिर से बिगड़ गयी. पर कुछ पलों बाद hi वो सबको एक नज़र देख कर सबको अछि तरह एक एक आंसर चेक कर क बुक से मिलाने का कहती हुई चलते चलते मेरे डेस्क क पास आ कर रुक गयी. अब उसका दर hi इतना था क कोई गर्दन उठा कर देखता भी नहीं था . इस लिए इस वक़्त इस तरफ कोई नहीं देख रहा था . एक आध ने देखने की कोशिश भी की तो चन्दर्कांता की तल्ख़ आवाज़ ने मुंडी सीधी करवा दी. चन्दर्कांता मेरे डेस्क क पास सामने को मुँह कर क कड़ी थी जिससे उसकी बैक मेरी तरफ थी और उसकी वो उभरी हुई गांड जिसे देख कर मेरा मन मचलने लगा . मैंने बिना समय गवाए डायन हाथ बढ़ा कर चन्दर्कांता का एक चूतड़ अपनी मुठी में भर कर मसल दिया और जल्दी से हाथ पीछे खिंच लिया . चन्दर्कांता क मुँह से एक सिसकी निकल गयी जिसे आसपास बैठे स्टूडेंट्स ने सुना और नज़र बचा कर देखा भी पर चन्दर्कांता ने जल्दी से खुद को संभल लिया और कुछ ज़ाहिर न होने दिया . फिर मेरी तरफ गुस्से से देखने लगी पर मैं मुस्कुरा रहा था . चन्दर्कांता गुस्से में मुझे देखती जब आगे जाने लगी तो मैंने उसका हाथ पकड़ कर रोक लिया ये सब मैं बड़ी सावधानी से कर रहा था जिससे किसी को कुछ पता न चले . चन्दर्कांता मुझसे हाथ छुड़ाने की कोशिश तो कर रही थी पर आवाज़ न हो इस लिए वो ज़ोर नहीं लगा रही थी. पर मैं कहाँ रुकने वाला था . चन्दर्कांता को इस तरह सताने में तो और भी मज़ा मिल रहा था . मेर पीछे खींचने पर चन्दर्कांता न चाहते हुए भी 2 कदम पीछे आ गयी .साडी में उसकी गांड इतनी तो न पता चलती थी पर मैं तो अब देख hi चूका था . मैंने दूसरे हाथ से अब चन्दर्कांता की कलाई पकड़ी और उसके करीब सरक कर डायन हाथ ब्लाउज और पेटीकोट क बीच नंगी कमर और पेट पर अपना हाथ फिरने लगा . चन्दर्कांता मचल गयी और मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी पर मैं तो पहले से तैयार था . चन्दर्कांता आँखों hi आँखों मुझे छोड़ने को कह रही थी पर मैं नहीं मन . मगर वो लगातार कोशिश किये जा रही थी तो मैंने उसकी कमर से हाथ हटा कर अपने जेब से मोबाइल निकल कर उसे दिखते हुए इशारा किया तो वो मेरा मतलब समझ कर चुपचाप कड़ी हो गयी . मैंने देखा क अब चन्दर्कांता नहीं हिलेगी तो मैंने आराम डायन हाथ उसकी बगल से निकल कर उसकी दायीं चुकी पर रख कर आराम से उसकी चुकी को मुठी में भर लिया .

चन्दर्कांता फिर से सिसकी और एक पल को उसकी ऑंखें बंद भी हुई पर जल्दी hi खोल ली. मैंने चन्दर्कांता को अपने पीछे वाले डेस्क क ऊपरी भाग पर बैठने क लिए इशारा किया तो वो मन लेने लगी . मगर मैंने ज़बरदस्ती उसका हाथ खींचते हुए वहां बैठा दिया . अब सन ये था क भरी क्लास में हम सबसे पीछे एक hi डेस्क पर थे . चाहे चन्दर्कांता पीछे वाले डेस्क पर बैठी थी पर उसके पाऊँ मेरी कमर क पास थे . वो कभी मुझे तो कभी बाकि स्टूडेंट्स को देख रही थी. दर उसके चेहरे पर साफ नज़र आ रहा था .

‘ मैडम इस क्वेश्चन में मेरा आंसर बुक क मुताबिक सही है पर आपने इसे गलत किया है ‘

एक स्टूडेंट ने उठ कर अपनी आंसर शीट हाथ में पकडे चन्दर्कांता से सवाल किया तो एक पल क लिए मैं भी स्टार्क हो गया .

चन्दर्कांता: तुम पहले पूरी आंसर शीट चेक करो फिर बाद में देखते हैं. सबके जो भी डाउट हो एक साथ बाद में देख लेंगे .

चन्दर्कांता ने फिर से मुझे नज़रों से उसे जाने देने को कहा पर मैं कहाँ मैंने वाला था . अभी तो मौका था अपनी इंसल्ट का बदला लेने का . तो चन्दर्कांता पिछले डेस्क क ऊपरी भाग पर बैठ कर जहाँ मैं बैठा था वहां पाऊँ टिकाये थी यानि क मेरी बगल में . मैंने उसका बयां पाऊँ थोड़ा ऊपर से पकड़ कर उठाया और उसकी जुटी निकल कर आराम से साइड में रख दी. चन्दर्कांता फिर से मुझे रोकने की कोशिश करने लगी. पर मैंने उसे झटक दिया . चन्दर्कांता का नंगा गोरा पाऊँ अब मेरे हाथ में था . मैंने उसे सहलाते हुए अपना हाथ सदी क अंदर उसकी पिंडली तक चलना शुरू कर दिया और उसकी चिकनी टांगों को धीरे धीरे मसलने लगा . चन्दर्कांता दर क मरे पीली पड़ती जा रही थी का अगर किसी ने देख लिया तो क्या होगा मगर मुझे तो फुल्ल ताऊ मज़ा आ रहा था . फिर मैंने एक हाथ से अपनी पेण्ट की ज़िप खोल कर लैंड को अंडरवियर से बहार निकल कर चन्दर्कांता का नंगा पाऊँ अपने लैंड पर रख कर उससे घिसने लगा . चन्दर्कांता अपना पाऊँ छुड़ाने की कोशिश कर रही थी पर अब मेरे नंगे लैंड क एहसास से शायद उसको भी मज़ा आ गया और उसके पाऊँ छुड़ाने की कोशिश बंद कर दी. ये देख मैंने और आगे बढ़ने की सोची और अपना हाथ उसकी सदी क अंदर घुटने से ऊपर सरका के उसकी जांघों को मसलने लगा . चन्दर्कांता की बैठे बैठे कमर थोड़ी थोड़ी हिलने लगी. उसकी हालत ख़राब होती जा रही थी. पर फिर भी वो खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रही थी . मेरा हाथ अब चन्दर्कांता की पेंटी तक पहुँच गया और वहां छोटे hi मुझे गीला पैन महसूस हुआ यानि चन्दर्कांता चूसने को मरी जा रही थी उसकी छूट पानी छोड़ रही थी. ये देख मेरे होंठों पर हंसी आ गयी . चन्दर्कांता का जो पेअर मेरे लैंड पर था अब वो खुद उससे मेरे लैंड को सेहला रही थी. जबकि मैंने अपनी उंगलियां को उसकी पेंटी की साइड से छूट में घुसा दिया. इसी क साथ चन्दर्कांता उछाल hi पड़ी और उसके मुँह से सिसकी निकल गयी जो कुछ ऊँची थी मगर उसी वक़्त प्ललेक्टुरे ख़तम होने की बेल्ल भी बज जाने से उसकी आवाज़ डाब गयी. मैंने तुरंत अपना हाथ उसकी सदी में से बहार निकला और अपना लैंड वापिस अंदर कर क ज़िप बंद कर ली. चन्दर्कांता ने जल्दी से अपनी जुटी पहनी और सबको आंसर शीट जमा करवाने को कह कर जल्दी से अपनी जगह वापिस पहुँच गयी. उसके चेहरे लाल हो चूका था और पसीने से भीग गया था . उधर से मंजू बुआ हाथ में रजिस्टर पकडे क्लास में आ गयी जबकि चन्दर्कांता से अभी तक उसका सामान नहीं सिमटा था . मंजू बुआ ने आ कर ह की मदद की .

मंजू : आप ठीक तो हैं मैडम ?

चन्दर्कांता : हह हाँ हाँ , मैं ठीक हूँ , तुम क्लास लो , वो टाइम का पता hi नहीं चला आज.

मंजू : होता है मैडम , लाइए मैं मदद करती हूँ.

मंजू बुआ ने उनका सारा सामान उनके साथ लग कर समेटा अंसवेरशीट्स , रजिस्टर और उनका बैग. चंदरकान्तापना सामान लपेट कर निकलने लगी तो जाते जाते मुझे आवाज़ लगा दी.

चन्दर्कांता: अमित तुम मेरे साथ चलो

अब मेरा चन्दर्कांता क साथ 36 का आंकड़ा था ये बात सब को पता थी और मंजू बुआ को तो उसके इरादे भी पता थे तो वो थोड़ा चिंता में पद गयी .

मंजू : मैडम कुछ काम था ? अभी इसकी क्लास …..

चन्दर्कांता: एक ज़रूरी काम है उसके बाद फ्री कर दूंगी इसे . तुम चलो मेरे साथ .

इतना कह चन्दर्कांता तो निकल गयी जबकि मंजू बुआ मुझे चिंता से देखने लगी और ऐसा hi कुछ हल कल्पना का भी था . मैंने उन्हें इशारे से hi कहा क चिंता न करें और निकल गया चन्दर्कांता क पीछे . पता नहीं अब ये क्या कहने वाली थी मुझे और कहाँ ले क जाने वाली थी. मैं क्लास से बहार आया तो चन्दर्कांता ज्यादा दूर नहीं थी मगर तेज़ कदमो से चल रही थी. मैं भी भाग कर उसके पास पहुँच गया . मैंने पूछा भी क क्या काम है पर उसने बस इतना कहा क चुपचाप चलो. हम सीधा H.O.D क ऑफिस में पहुँच गए जो की चन्दर्कांता का hi था . इस वक़्त यहाँ कोई भी नहीं था और होता भी कैसे दूसरा लेक्चर लगभग सभी बिजी होते हैं . चन्दर्कांता ने ऑफिस में घुसते hi अपना सामान एक तरफ पड़ी चेयर पर फेंका और मेरे अंदर आते hi दरवाज़ा लॉक कर लिया. मैं अभी भी खड़ा समझने की कोशिश कर रहा था क वो आखिर क्या चाहती है. वैसे तो लग रहा था क वो गरम हो चुकी है और छोड़ना चाहती है पर फिर भी मुझे उसकी नियत पर शक था .

चन्दर्कांता: खुद को समझते क्या हो ? जब तेरा दिल करेगा तब आ कर खून भी शुरू हो जायेगा तू मेरे साथ? तुझे पता भी है कल तूने मेरी क्या हालत की थी ? और आज फिर से शुरू हो गया ? अभी तुझे बताती हूँ मैं क्या कर सकती हूँ.

मुझे लगा क ये ज़रूर कोई लफड़ा करने वाली है जो अपने ऑफिस में लेकर दरवाज़ा बंद कर क ये सब बोल रही है. कहीं खुद क कपडे फाड़ कर मुझ पर कोई इलज़ाम न लगा दे . पर जो उसने किया वो देख कर तो मेरा मुँह खुला का खुला रह गया . चन्दर्कांता जल्दी से घुटनो पर बैठी और मेरी ज़िप खोल कर मेरा लैंड झटके से बहार निकल लिया जो अब तक सिकुड़ने लगा था. लैंड हाथ में आते hi चन्दर्कांता ने बिना देर किये उसे मुँह में ले लिया और अंदर बहार करने लगी . मेरी तो मज़े से ऑंखें hi बंद हो गयी मैं गिर hi जाता अगर मेरे पीछे टेबल न होता जिसका सहारा लेकर मैंने खुद को गिरने से रोका . चन्दर्कांता जल्दी जल्दी मेरे लैंड को अपने मुँह क अंदर तक लेने लगी और मेरे अंदर भी उत्तेजना फिर से बढ़ गयी जिससे लैंड एक डैम कड़क हो गया और अब चन्दर्कांता क गले तक लगने लगा . चन्दर्कांता ने मुँह से लैंड बहार निकल कर उसे अचे से देखा .

चन्दर्कांता: सच में ये मुसल hi है , आज तक मैंने कभी ऐसा लैंड नहीं देखा था असली में. कल तुमने जो मेरी हालत की थी वैसे तो पहली बार में भी न हुई थी. पर जो मज़ा कल तूने दिया वो भी लाजवाब था . अब मुझे ये लैंड मेरी छूट में चाहिए . जो आग तूने लगाई अब तू hi उसे बुझायेगा . तू मुझे अपनी रंडी बनाना चाहता है न तो ले बन गयी मैं तेरी रंडी अब जल्दी से अपनी रंडी को छोड़.

ये कहते हुए चाटने अपनी सदी कमर तक उठाई और जल्दी से अपनी पेंटी निकल कर अपनी टेबल पर hi टंगे उठा कर लेट गयी. अब मैं भला कैसे खुद को रोकता. कॉलेज में hi अपनी प्रोफेसर को उसी क ऑफिस में पेलने का सोच कर hi लैंड झटके मरने लगा था . मैंने जल्दी से अपनी पेण्ट अंडरवियर क साथ घुटनो तक की और चन्दर्कांता की कमर क करीब आकर लैंड को एक हाथ से पकड़ कर उसकी गीली छूट पर टिकाया .

चन्दर्कांता: आअह्ह्ह्हह कक्कक्कक्स आराम से डालना , अभी तक सूजन पूरी उतरी नहीं है

चन्दर्कांता सही कह रही थी , छूट में सूजन अभी भी लग रही थी . पर मुझे क्या , मैं तो उसे तड़पना hi चाहता था इस लिए उसकी साडी का पल्लू उसके मुँह में दे दिया वो भी समझ गयी क मैं क्या करने वाला हूँ और अपना मुँह सदी से बंद करती इल्तिजा भरी नज़रों से देखने लगी . पर मैंने कोई रेहम न करते हुए लैंड को एक hi धक्के में आधे से भी ज्यादा घुसा दिया .

चन्दर्कांता : हममममममममम hmmmmmmmmmm

अपना मुँह ज़ोर से दबाये चन्दर्कांता ने अपनी चीख तो रोक ली पर दर्द से वो तड़प उठी और इधर उधर हाथ मर कर टेबल पर पड़ा सामान सारा निचे गिरा दिया . मैंने बिना देर किये फिर से लैंड आधा बहार खिंचा और दुसरे धक्के में जड़ तक घुसा दिया . इसके बाद मैं रुका नहीं और ताबड़तोड़ धक्के पेलने लगा . चन्दर्कांता की टंगे अपने कंधो पर टिकाये मैं उसकी मांसल जांघों को मसलता अपनी गाड़ी तेज़ी से दौड़ा रहा था . समय काम था इस लिए फालतू में टाइम नहीं लगाना था तो अपना फोकस चन्दर्कांता की छूट भेदन पर hi रखा . चन्दर्कांता भी कुछ देर में मस्त हो गयी और खुद hi अपने ब्लाउज को खुल कर अपनी चूचियां मसलने लगी . साथ hi मुझे भी कामवासना से देखती अपनी चूचियां को दबाने क लिए इशारे कर रही थी . मैंने उसके दोनों स्तनों को ज़ोर दबाना शुरू कर दिया और धुआंधार धक्के भी साथ चला रहा था . चन्दर्कांता पहले hi क्लास में पूरी गरम हो चुकी थी इस लिए ज्यादा देर नहीं लगी उसे और पानी निकल गया . मैंने लैंड बहार निकल कर उसे टेबल से नीचे उतर कर घोड़ी बना दिया और एक hi झटके में लैंड छूट में घुसा कर उसके कंधे पकड़ कर धक्के मरने लगा . चन्दर्कांता भी खूब मज़े से अपनी कमर पीछे धकेल रही थी. फिर वो खुद hi टेबल से हाथ हटा कर अपने घुटनो पर रखे साथ hi साडी समेटे छोटे छोटे स्टेप लेती टेबल क दूसरी तरफ जाने लगी और मैं भी उसे धक्के पेलता साथ hi चलने लगा . अपनी चाय तक आने क बाद वो सीधी कड़ी हो गयी और लैंड छूट से निकल गया . फिर उसने मुझे T-shirt से पकड़ कर धक्का दे के अपनी चेयर पे बिठा दिया और खुद एक पाऊँ मेरी एक साइड में रखते हुए चेयर पर hi चढ़ गयी और दूसरा पाऊँ दूसरी तरफ रखती मेरी गॉड में बैठ गयी . लैंड को छूट में से कर क उसने एक hi बार में पूरा लील लिया था .

चन्दर्कांता: अह्ह्ह्हह कक्ककक्कक्स , सच में तुम असली मर्द हो , ऐसे मुसल से चूसने क लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ. अब से तू hi मुझे छोड़ेगा , जहाँ भी तू चाहे जब भी चाहे . मैं तुझे हर मज़ा दूंगी.

चन्दर्कांता मज़े में अब मेरी गॉड में उछलने लगी और उसकी बातें सुन कर मुझे भी पता चल गया क अब ये पूरी तरह मेरे वाश में है . मैंने भी मौके का फायदा उठाते हुए ें उंगली उसकी गांड में घुसा दी जिससे वो उछाल पड़ी .

अमित : फिर बोलो अपनी ये गांड कब से रही हो मुझे ?

चन्दर्कांता: आह्ह्ह्ह नहीं नहीं , तुम्हारा ये मुसल तो मेरी गांड hi फाड़ देगा .

अमित : तो क्या हुआ , एक बार तो फटनी hi होती है. सोच लो , अगर मेरा लैंड छूट में चाहिए तो मुझे गांड देनी hi पड़ेगी

चन्दर्कांता : अह्ह्ह्हह ुह्ह्हह्ह ुह्ह्ह्ह ठीक है , कर लेना वहां भी , पर अभी मेरी छूट को ठंडा करो. कल तुम्हारे जाने क बाद से hi ये निगोड़ी तुझे hi यद् कर रही थी. अब इसे ठंडा कर , एक बार से इसकी आग ठंडी नहीं होती.

अमित: लो मेरी जान

इतना कह कर मैंने चन्दर्कांता क चूतड़ ा पकड़ कर उसे अपने लैंड पर ज़ोर ज़ोर से पटकना शुरू कर दिया . और कुछ hi पलों में वो फिर एक बार झाड़ गयी. मैंने भी जल्दी से उसे नीचे उतरा और उसके मुँह में लैंड पेल दिया . टाइम काम था इस लिए जल्दी जल्दी मैं पानी निकलना चाहता था तो उसका मुँह hi छूट की तरह पेलने लगा . आखिर कुछ धक्कों बाद मेरा पानी निकल गया जो मैंने उसकी हलक में निकला. मज़बूरी में उसे सारा पानी पीना पड़ा. मगर इतने में hi उसकी हालत ख़राब हो गयी थी. पानी निकलते hi मैंने कपडे ठीक किये और जल्दी से वहां से निकल गया . ये भी नहीं देखा क चन्दर्कांता अभी तक संभाली क नहीं. वैसे भी वो उसी का तो ऑफिस था तो चिंता नहीं थी. मैं क्लास रूम की तरफ वापिस आ रहा था क बेल्ल बज गयी, शुक्र है क टाइम पर निपटा लिया वर्ण वर्मा या बसरा सर आ जाते . बेल्ल बजने क साथ hi मंजू बुआ बहार निकल आयी और सामने मुझे प् कर उन्होंने चिंता से पूछा .

मंजू : क्या काम था मैडम को ? कुछ कहा तो नहीं उन्होंने उल्टा सीधा ?

अमित : अरे नहीं बुआ , ऐसा कुछ नहीं है , आप चिंता मत करो. मैंने खा था न मैं किसी को जनता हूँ जिसकी बात वो मानती हैं. तो बस अब सब ठीक है . जानती हो मुझे उन्होंने 99 मार्क्स दिए हैं अपने सब्जेक्ट में .

ये सुन कर मंजू बुआ हैरान भी हुई और खुश भी.

मंजू : सच ??? मुझे विश्वास नहीं हो रहा . ी can’t बिलीव . वो इतनी जल्दी बदल गयी ? चलो ाचा हुआ , अब तुम्हे वो तंग नहीं करेंगी. चल अब जा तेरे दोस्त तेरा इंतज़ार कर रहे होंगे . शाम को घर पे बात करते हैं .

इतना कह मंजू बुआ चली गयी . पीछे कल्पना मेरा hi इंतज़ार कर रही थी.

कल्पना : किधर गए थे तुम उस खड़ूस क साथ ?

अमित : कुछ नहीं वो कुछ बात करनी थी , ऑफिस में थे हम.

कलपना : वैसे ये चल क्या रहा है तेरा उसके साथ ?

कल्पना क इस सवाल से मैं अंदर से दर hi गया क कहीं कल्पना ने कुछ देख तो नहीं लिया

अमित : कक क्या मतलब ? क्या चल रहा है ?

कल्पना : यही क हमेशा तेरे से खुन्नस खाने वाली , तुझे कॉलेज से निकलवाने की धमकियाँ देने वाली आज तेरे पास hi आ कर बैठ गयी और ऊपर से तुझे 99 मार्क्स भी दे दिए . कुछ तो कोचा है .

अमित : अब मुझे क्या पता , खुद hi पूछ ले न जाकर . मैं तो शुक्र मन रहा हूँ क जान छूती.


कल्पना : ये तो सही कहा , चल कैंटीन में चलते हैं. देखें तो ज़रा मर हीरो का क्या बना .
 
अपडेट 274

मीनल मोहित संजय को साथ लेकर एडमिशन करवाने गए तो थे पर किसी ने उनकी बात hi नहीं सुनी. संजय अपने सर्टिफिकेट्स दिखा कर अपने बारे में कितना कुछ बता भी चूका था पर उसकी बातों का किसी पर असर नहीं हुआ . फिर स्पोर्ट्स कोटे में एडमिशन की उम्मीद से वो प्रोफ़ेसर वरिंदर से भी मिले पर उन्होंने प्रिंसिपल सर से बात करने को कह दिया . जब प्रिंसिपल सर से बात की गयी तो उन्होंने साफ़ hi मन कर दिया . संजय ने लाख कोशिश की पर वो किसी बात से इम्प्रेस न हुए. उन्होंने साफ़ कह दिया क अगर कोई डायरेक्टर्स में से कह दे तो एडमिशन हो सकता है मतलब सिफारिश से hi बात बनेगी. तीनो मायूस हो कर वापिस आ गए. संजय की तो साडी हवा hi निकल गयी थी जो वो शेखियां मार मार क बोल रहा था . पर उसके उतरे चेहरे से मीनल भी मायूस हो गयी थी. संजय को एडमिशन न होने से ज्यादा दुःख इस बात का था क वो राधा और रीमा जैसी परियों से नहीं मिल पायेगा . कल रत से hi उसने पता नहीं क्या क्या सपने देख लिए थे और एक hi पल में सरे सपने टूट गए . इन दोनों क विपरीत मोहित ज़रूर खुश था क्यूंकि उसे लग रहा था क संजय कबाब में हड्डी बन सकता है पर एडमिशन न होने से वो भी दूर हो गया . तीनो वापिस कैंटीन में आ गए क्यूंकि अब यहीं तो मिलने वाले थे सब. कैंटीन में आते hi रीमा और रीमा दोनों अपनी पक्की जगह उसी टेबल पर बैठी थी . संजय की तो ज़ुबान hi मूतने लगी दोनों को देख कर. जबकि अभी अभी वो प्रिंसिपल और सरे स्टाफ को गलियां देता आ रहा था मन hi मन . मीनल को देख कर रीमा और राधा ने हाथ हिलाया और वो भी सीधा उनके पास जा के रुकी. संजय तो दोनों को सर से पाऊँ तक स्कैन hi कर रहा था . जितनी खूबसूरत तस्वीरों में देखा था उससे भी कहीं ज्यादा दोनों हकीकत में सुन्दर थी. संजय को ज़रा भी ख्याल नहीं था क वो कहाँ है किसके साथ है और किस सिचुएशन में है वो तो बस खो सा गया था . जबकि अपनी आदत क मुताबिक दोनों परियों ने एक बार भी उसकी तरफ न देखा था अभी तक क्यूंकि वो सिर्फ एक hi लड़के को देखना पसंद करती थी , अपने प्यार को.

रीमा : यार तुम कॉलेज आयी हो और क्लास में नहीं आयी ?

मीनल : मायूस हो कर ) क्या बताऊँ यार , संजय की एडमिशन करवानी थी अपनी क्लास में पर सर में साफ़ hi मन कर दिया . समझ नहीं आ रहा अब क्या करूँ.

रीमा : संजय ? कौन संजय ?

मीनल : ओह्ह्ह सोररीयय ,, मीट माय कजिन संजय , संजय इनसे मिलो , माय बेस्ट फ्रेंड एंड क्लास्स्मेटिस. रीमा और ये राधा .

संजय तो अभी तक ख्यालों में hi था मगर मीनल ने जब दोनों से इंट्रो करवाया तो वो होश में आया .

संजय : hi , ी ऍम संजय सक्सेना , मीनल क मां जी का बीटा . दिल्ली से हूँ, बीएससी फर्स्ट ईयर में और बॉक्सिंग का स्टेट चैंपियन हूँ. इसके इलावा मॉडलिंग भी करता हूँ . माँ बाप का कैला बीटा हूँ और अभी वो दोनों अमेरिका में हैं. इसी वजह से मुझे यहाँ आना पड़ा . यू बोथ अरे सो ब्यूटीफुल, नीस तो मीट यू.

एक hi सांस में संजय किसी रट्टू तोते की तरह सब बोल गया . उसकी ये हालत देख रीमा तो हैरान थी hi जबकि मीनल अंदर से हंस रही थी. जबकि राधा ने अभी तक ठीक से उसे देखा भी नहीं था . उसे जैसे कोई लेना देना hi नहीं था उससे. संजय ने हाथ आगे बढ़ाया था मिलाने क लिए पर बदले में रीमा ने हाथ जोड़ कर उसे नमस्ते hi किया . संजय स्माइल दिखता मन मसोस कर रह गया . जो दावे करता था क उसकी एक नज़र पर लड़कियां फ़िदा हो जाती हैं उसको इस तरह इग्नोर किया जाना उसे अंदर से बर्दाश्त नहीं हुआ था जबकि राधा ने तो देखा तक नहीं .

रीमा : थैंक्स फॉर कॉम्पलिमेंट, वैसे तुम भी स्मार्ट हो. तो तुम हमारी hi क्लास में आने वाले थे ? अब तो मुश्किल हो गया न .

संजय : मुझे लगता है यहाँ टैलेंट की कदर नहीं की जाती इसी लिए उन्होंने मुझे ऐसे इग्नोर कर दिया . वर्ण दूसरे कॉलेज तो खुद मुझे बुला रहे हैं. मैं क्सक्सक्सक्सक्स कॉलेज , क्सक्सक्सक्स कॉलेज और. क्सक्सक्सक्स कॉलेज में गया था वो तो मुझे उसी वक़्त एडमिशन दे रहे थे विथाउट अन्य फी पर यहाँ तो कोई कदर hi नहीं करता .

मोहित : वैसे वो क्सक्सक्सक्स कॉलेज भी बेस्ट है. हमारे कॉलेज क बाद उसी का नाम आता है. तुम वहां एडमिशन ले लो. अगले साल यहाँ आ जाना

संजय को मोहित क ये बात ज़रा भी पसंद न आयी पर वो उसकी बात को इग्नोर करते हुए राधा की तरफ हो लिया .

संजय : वैसे राधा जी आप किसी से बात करना पसंद नहीं करती क्या ? आप जैसी ब्यूटीफुल गर्ल को तो ऐसा नहीं करना चाहिए . मैं ीनता भी बुरा नहीं हूँ वैसे

राधा : अरे नहीं ऐसी कोई बात नहीं है. आप मीनल क भाई हैं तो मेरे भी भाई जैसे हैं . वैसे अगर आप को इस कॉलेज में एडमिशन लेना है तो एक बार अमित से बात कीजिये , वो ज़रूर कुछ न कुछ कर लेगा . प्रिंसिपल सर उसकी बात मानते हैं. और इस कॉलेज में टैलेंट की बहुत कदर है . जिसकी सबसे बड़ी एक्साम्प्ले अमित खुद है.

राधा क मुँह से भाई सुन कर संजय की तो झांटें hi जल गयी और उससे भी ज्यादा अमित की तारीफ सुन कर. उसके मन में तो पहले से hi अमित को लेकर कम्पटीशन की भवन लगी हुई थी ऊपर से अपने मन में हूँ सुंदरियों को बिठाये बैठा था अब वहां भी अमित का hi नाम सुन कर उसका दिल सुलगने लगा .

संजय : अब भला वो क्या कर लेगा जब प्रिंसिपल सर सुन hi नहीं रहे. वो तो किसी डायरेक्टर की सिफारिश मांग रहे हैं. और अमित तो एक स्टूडेंट hi तो है .

रीमा : तुम्हे शायद मीनल ने ठीक से बताया नहीं अमित क बारे में .

अब तो ज़ख़्म पर नमक वाला काम हो गया था जब रीमा ने भी अमित का नाम इस तरह से लिया . पर करता भी तो क्या और कुछ बोल कर वो इन परियों की नज़र में छोटा नहीं बनना चाहता था .

मीनल : अरे सब बताया है पर अभी इसे भरोसा नहीं है न . तुम रुको , वो अभी अत hi होगा . मैं उससे बात करती हूँ ज़रूर कुछ न कुछ हो जायेगा . मोहित प्लीज तुम भी उसे फाॅर्स करना . वो तुम्हारी बात ज़रूर मंटा है और राधा प्लीज तुम भी कहना हाँ. तुम्हे तो वो इंकार करता hi नहीं. रीमा तुम भी .

राधा और रीमा ने सर हाँ में हिला दिया पर मोहित तो मन hi मन पचता रहा था क ये मीनल क्यों पाऊँ में कुल्हाड़ी मार रही है .

इसी दौरान वहां शिवानी और शालू भी आ गयी. संजय की ऑंखें तो इनके हुसैन पर भी रोटियां सेकने लगी . आते hi वो सब से है क मिली और मीनल ने संजय से भी मिलाया . फिर उनको भी एडमिशन की बात की. तो शिवानी बोल पड़ी .

शिवानी : वैसे यार ये काम तो शीना भी करवा सकती है. उसके पापा भी ट्रस्टी हैं.

मीनल : हाँ , मैं तो भूल hi गयी थी. कहाँ हैं दीदी ?.

संजय का तो दिल hi ख़ुशी से झूम उठा ये बात सुन कर .

शिवानी : पर यार वो तो आज आयी hi नहीं. और उसका फ़ोन भी बंद है .

शालू : वैसे यार इतनी टेंशन लेने की ज़रूरत नहीं है. अमित कह देगा तो काम हो जायेगा . उसकी बात नहीं टालते सर .

एक बार फिर संजय की गांड सुलग उठी. ऊपर से मुस्कुरा रहा था पर अंदर से जल रही थी. मन hi मन वो सोच रहा था क इन सब की ज़ुबान पर एक दिन मेरा hi नाम होगा .

शिवानी : बात तो तेरी सही है , और अगर उसने शीना को भी कह दिया तो वो कैसे भी कर क अपने पापा से काम करवा hi लेगी. वैसे हैं कहाँ महाराज ? मुझे उसकी क्लास लगनी है .

संजय : लगता है शीना और अमित क बीच बहुत गहरी दोस्ती है .

संजय ने ये बात जिस तरह से कही थी उसका मतलब सब समझ गए जो किसी को भी पसंद न आया खास कर राधा को जो मन hi मन गुस्सा कर क रह गयी.

शालू : अमित की दोस्ती सभी से गहरी है. और वो जिसे जो भी कह देता है वो काम ज़रूर होता है. क्यूंकि वो खुद सबकी दोस्ती की परवाह करता है. तुम अभी जानते hi क्या हो उसके बारे में .

शिवानी : शी इस राइट , उसके सिर्फ एक बार कह देने से यहाँ जितने भी हम मौजूद हैं न , कुछ भी कर सकते हैं.

शालू : लीजिये आ गए महाराज.

इधर मैं और कल्पना बात करते हुए कैंटीन में पहुँच गए . सामने hi हमारा पूरा गैंग बैठा हुआ था और साथ में hi संजय भी था. मुझे देखते hi शिवानी गुस्से से उठ कर कड़ी हो गयी.

अमित : अरे शिवानी तुम आ गयी , मुझे ……

शिवानी : बात मत करो मुझसे तुम , बस यही है तुम्हारी दोस्ती ? एक फ़ोन तक नहीं किया तुमने पूरी छुट्टियों में .

(शिवानी जो अभी अभी अमित की इतनी तरफदारी कर रही थी एक डैम से भड़क पड़ी उस पर ये देख संजय अंदाज़ा लगाने लगा क ज़रूर इनमे कुछ न कुछ है. )

अमित : सॉरी यार , वो घर में इतना….

शिवानी: मुझे कुछ नहीं सुन्ना बस .

अमित : ाचा ! चलो तुम्हारी मर्ज़ी , मैं तो सोच रहा था हम साथ में मूवी देखने चलेंगे .

मैंने शिवानी का मूड ठीक करने क लिए जानबूझ कर ऐसा कहा और इसका असर भी हुआ. वो एक डैम से खुश हो गयी.

शिवानी : सच में? तो चलो अभी चलते हैं. वैसे भी कॉलेज में आज मन नहीं लग रहा .

शिवानी का जवाब सुन कर कल्पना और शालू दोनों हसने लगी . जिसे देख शिवानी बोली.

शिवानी : अब तुम दोनों क्यों है रही हो?

कल्पना : हसन नहीं तो और क्या करें दीदी. देख नहीं रही ये महाशय आपको खुश करने क लिए झूठ बोल रहे हैं और आप इतनी जल्दी बातों में भी आ गयी .

शिवानी ( मेरी तरफ देखते हुए ) तुमने झूठ बोलै था ?

मैं बस मुस्कुराया तो शिवानी में मेरी गर्दन दोनों हाथों में पकड़ ली.

शिवानी : ोुउउउउउउ , मैं तुम्हे छोडूंगी नहीं.

अमित : अरे अरे ,,, बात तो सुनो ,,, आअह्ह्ह मेरा गाला .

शिवानी में झट से मेरा गाला छोड़ दिया उसे लगा क सच में मुझे तकलीफ हो रही है.

अमित : इतना गुस्सा !!!! क्या यार , इतने दिनों बाद मिल रहे हैं और ऐसे मिल रही हो तुम. काम से काम कुछ तो इज़्ज़त करो . हमारे नए दोस्त पर मेरा गलत इम्प्रैशन दाल रही हो.

शिवानी : तुम्हे बड़ी पड़ी इम्प्रैशन की , और ये लड़का है कोई लड़की नहीं जो इम्प्रेस करोगे .

कल्पना : ाचा वो सब छोडो . पहले तो पार्टी लेनी है हमें. तो मर संजय पार्टी यहाँ डोज या बहार कहीं?

मीनल : कैसी पार्टी यार, एडमिशन हुआ कहाँ. उसी क लिए तो हम अमित का वेट कर रहे हैं.

कल्पना : क्या मतलब ?

मीनल : मतलब एडमिशन नहीं हुआ , प्रिंसिपल सर बोल रहे हैं क किसी की सिफारिश होगी तो hi एडमिशन होगी.

अमित : तो इसमें मैं क्या कर सकता हूँ?

मीनल : अब तुम hi कुछ कर सकते हो , तुम्हारी बात सर टालते नहीं हैं. प्लीज मेरी खातिर उनसे बात करो न . प्लीज

अमित : पर यार जब वो कह रहे हैं ऊपर से सिफारिश चाहिए तो भला मेरी भी कहाँ मानेंगे .

मीनल : तुम बात तो करो , मुझे पूरा यकीन है वो मन जायेंगे . मोहित तुम hi कहो न प्लीज.

मोहित : हाँ हाँ , देख भाई अगर कुछ हो सकता है तो .

अब मीनल और मोहित कह रहे थे तो मैंने भी सोचा क एक बार बात कर क देख लेता हूँ शायद मीनल मोहित क बीच सब अचे से सेटल हो जाये . इस लिए मैं मन गया .

अमित : का भाई अपनी फाइल दे , मैं बात करता हूँ .

संजय ( फाइल देते हुए ) पक्का वो तुम्हारी बात मन लेंगे . वैसे ये कह रही थी क शीना क पापा की सिफारिश चल सकती है . तो एक बार उनसे बात कर लेते .

अमित : शीना क पापा hi क्यों ? वो तो कल्पना क पापा भी करवा सकते हैं .

संजय : मतलब ?

अमित : मतलब ये क ये पूरा शहर इसके पापा क hi ज़िम्मे हैं. मर विराम राठौर आईएएस , इस शहर क कलेक्टर .

मेरी बात सुन कर संजय चौंक hi गया .

समय : क्या सच में ? मतलब तुम्हारे पापा सच में कलेक्टर हैं. फिर तो यार तुम अपने पापा का hi फ़ोन करवा दो .

संजय की बात सुन कर यहाँ कल्पना बड़े खास अंदाज़ में उठी और मेरे कंधे पर हाथ रख कर लड़कों की तरह कड़ी हो गयी.

कल्पना : हाँ , मेरे पापा हैं तो कलेक्टर पर वो अपनी पावर का कभी गलत इस्तेमाल नहीं करते . वैसे उनको कहने क लिए मेरे फ़ोन की ज़रूरत नहीं है . ये हैं न हमारे श्री मान जी , पापा भी आज कल इनकी सुनते हैं मुझसे भी ज्यादा. तो , अगर ये कहेंगे तो वो फ़ोन क्या , खुद भी आ जायेंगे यहाँ .

अब तो संजय का मुँह ऐसे हो गया था क जैसे उसके सामने कोई अनहोनी सी हो रही हो

अमित : ाचा ! ज्यादा बातें मत बनाओ . तुम्हारे पापा हैं वो , तुम्हारी hi सुनेंगे न की मेरी . अब ज़रा मुझे जाने दो , एक बार वरिंदर सर से बात तो करूँ .

इतने में बेल्ल बज गयी और रीमा राधा अपनी क्लास में चली गयी . जबकि बाकि वहीँ रुके रहे . मैं फाइल ले कर वरिंदर सर क पास चला गया . वरिंदर सर अपने ऑफिस में hi बैठे थे . मुझे देख कर पहले तो वो बहुत खुश हुए और मुझसे हल चल पूछा और तयारी क बारे में पूछा . फिर मैंने उन्हें संजय की एडमिशन का कहा और उन्हें उसके स्पोर्ट्स क बारे में ज्यादा बढ़ा चढ़ा कर कहा क वो एक बहुत ाचा प्लेयर है तो मेरी बात पर वो मान गए और बोले की उसका ट्रायल दिलवाओ बॉक्सिंग कोच क पास. अगर उन्होंने ok किया तो वो प्रिंसिपल सर से बात करेंगे . और भरोसा दिलाया क अगर लड़का सही है तो एडमिशन हो जायेगा . बस उसे अपना टैलेंट दिखाना पड़ेगा . साथ hi उन्होंने ये भी कहा क वो ये सब सिर्फ मेरे कहने पर कर रहे हैं वर्ण इस टाइम पे नई एडमिशन पॉसिबल नहीं . खैर मैं ख़ुशी ख़ुशी वापिस कैंटीन की तरफ आ गया . मुझे ज्यादा समय नहीं लगा था , मेरे इतनी जल्दी आने पर पक्का सबको ये hi लग्न था क बात नहीं बानी . और मैंने इसी बात का फायदा उठाने की सोची क चलो संजय क साथ थोड़ा मज़ाक hi किया जाये . मैं कैंटीन में पहुंचा तो मेरा hi इंतज़ार हो रहा था . मीनल फटाफट कड़ी हो गयी अपनी जगह पर . मगर मैंने मुँह लटका सा लिया था .

मीनल : क्या हुआ ? बात बानी ?

अमित : सॉरी यार , वो सर ……

मेरी बात पूरी होने से पहले hi संजय बोल पड़ा .

संजय : मैंने कहा भी था क शीना क पापा से फ़ोन करवा लो या इसके ( कल्पना ) पापा से. पर नहीं , ,,,,,,,

संजय झल्ला कर बोल पड़ा . मुझे उसका ऐसा बोलना ाचा तो नहीं लगा पर ऐसा तो होना hi था . मैं तो चुप रहा पर कल्पना तो जैसे फट hi पड़ी .

कल्पना : तुम कहना क्या चाहते हो ? इसने जान बुझ कर तुम्हारी एडमिशन नहीं कराई ? एक तो ये तुम्हारे लिए बात करें गया ऊपर ऐसे रियेक्ट कर रहे हो? अगर इतना hi अफ़सोस है तो खुद करना था न अपने डैम पर . सॉरी , डैम तो तुम्हारा पहले hi निकल गया , अब दूसरों क कंधो पर बन्दूक चला रहे हो . वैसे भी ऐसा हो hi नहीं सकता क सर ने इसकी बात न मणि हो . ( मुझसे ) क्या कहा सर ने ? बताओ सबको.

अमित : कलम डाउन यार तुम तो ज़रा सा मज़ाक भी नहीं करने देती. ( संजय से ) शाम को ट्रायल देना है तुम्हे स्टेडियम में आ जाना . बॉक्सिंग क कोच सर ट्रेल लेंगे और वरिंदर सर भी वही होंगे . अगर उन्होंने ok कर दिया तो एडमिशन हो जाएगी. अब इतना तो कर लोगे न ?

मेरी बात सुन कर मीनल क चेहरे पर एक डैम से ख़ुशी आ गयी. और संजय को भी जैसे यकीन न हुआ हो जो मैंने कहा.

संजय : सच ???? मेरी एडमिशन हो जाएगी? हाँ हाँ , मैं ट्रायल क्लियर कर लूंगा , समझो हो गया . सॉरी यार मैंने गुस्से में वो ….

अमित : it’s ok , मैं मज़ाक करना चाहता था पर तुम्हे बुरा लगा .

कल्पना : देखा ? अपनी जगह खुद बनानी पड़ती है , इसने भी अपने डैम पर बनाई है और आज प्रोफ़ेसर से लेकर प्रिंसिपल तक सब इसकी मानते हैं. थिस इस रियल स्पोर्ट्समैन स्पिरिट . दूसरों पर गुस्सा करने से कुछ नहीं होता .

संजय : सॉरी यार , गलती हो गयी, कल्पना प्लीज तुम भी गुस्सा मत करो यार . वो टेंशन में मुझसे गलती हो गयी . Let’s बे गुड फ्रेंड्स .

संजय ने हाथ आगे बढ़ाया तो मैंने उससे हैंड शेक किया और कल्पना ने भी . मगर कल्पना खुश नहीं लग रही थी. संजय तयारी करने का कह कर वापिस घर चला गया .

कल्पना : मीनल , तेरा ये भाई मुझे कुछ जमा नहीं . इंसान की पहचान टफ टाइम में hi होती है. और एक स्पोर्ट्समैन तो पहचाना hi ऐसे समय में जाता है . उसने जिस तरह से बात की ये बिलकुल भी सही नहीं है . और वो कुछ ज्यादा hi ओवर सम्राट बन रहा है . हमारे ग्रुप में कोई भी ऐसा नहीं है . अगर तुम उसे हमारे बीच रखना चाहती हो तो उसे समझा देना वर्ण हमसे दूर hi रखना . अगर उसने कुछ गलत किया तो फिर बाद में मुझसे मत कहना .

मीनल : अरे यार हो गयी न गलती और उसने सॉरी भी तो कहा . मैं उससे बात करुँगी . वो गलत लड़का नहीं है. बस थोड़ा ऐसा hi है बड़े शहर से जो आया है. तुम गुस्सा मत करो .

कल्पना : बात बड़े या छोटे शहर की नहीं , करैक्टर की है . उसने अमित की इंसल्ट की है , इसे नीचे दिखने की कोशिश की है. और दोस्तों में ऐसा नहीं होता कभी.

शिवानी : एक डैम सही कहा तुमने . मीनल मुझे भी वो थोड़ा ओवर स्मार्ट लग रहा है. अगर उसने शीना क सामने वो बात की होती तो पक्का उसके गाल सेक देती वो .

कल्पना : कौन सी बात ?

शालू : वो अमित और शीना क बीच दोस्ती को लेकर कमेंट कर रहा था .

कल्पना : देखा , मैं फिर कह देती हूँ उसे समझा देना. वर्ण …

अमित : अब छोडो भी यार , अभी उसे खान पता है किसी क बारे में . खुद hi समझ जायेगा . चलो छोडो सब , बताओ अब क्या करना है ?

शिवानी : मूवी देखने चलें ?

मोहित : चलो , मैं तो तैयार हूँ. मीनल तुम तो चलोगी न .

कल्पना : ो मजनू , आधा दिन तो निकल गया अभी , अब कहाँ जाना है ? 2 लेक्चर क बाद कॉलेज ऑफ हो जायेगा . वैसे भी रीमा और राधा क्लास में हैं. या तो यहीं बैठो या क्लास लगा लो. मूवी फिर किसी दिन देख लेना. अगर आपको जाना है तो आप ले जाओ इस सोशल वर्कर को.

कल्पना अभी भी उखड़ी उखड़ी लग रही थी. खैर मूवी तो क्या जाना था . कैंटीन में hi बैठ कर चाय पार्टी करने लगे हम . और बेल्ल बजने क बाद अगला लेक्चर अटेंड करने चले गए . बाकि क सब्जेक्ट्स क मार्क्स जो देखने थे .

कल्पना : तुम्हे क्या ज़रूरत थी उसकी एडमिशन करवाने की? देखा नहीं वो किस तरह से बात करता है. मुझे तो वो ज़रा भी ठीक नहीं लगा . कल को ये ज़रूर कोई प्रॉब्लम करेगा देख लेना .

लेक्टर्स ख़तम होने क बाद जब हम बहार ए तो कल्पना फिर से शुरू हो गयी.

अमित : अरे यार तुम ऐसे hi सोच रही हो. अभी उसे पता hi कहाँ है क कौन कैसा है . वैसे भी मैंने जो मज़ाक किया था उसकी वजह से वो थोड़ा गुस्से हो गया होगा .

कल्पना : एक तो तुम्हे कुछ समझ नहीं अत , तुम अचे हो तो इसका मतलब ये नहीं क साडी दुनिया hi अछि है. सुना नहीं शीना दीदी को लेकर भी उसने कमेंट किया .

अमित : अरे यार उसने मज़ाक किया होगा , छोडो तुम.

मोहित : यार सच कहूं तो मैं भी नहीं चाहता क वो हमारे कॉलेज में एडमिशन ले.

कल्पना : तो उस वक़्त मन क्यों नहीं किया ? तब तो बड़ा सिफारिश कर रहे थे सब क सामने .

मोहित : तो क्या करता यार , मीनल ने कहा था .

कल्पना : हाँ हाँ , सब समझती हूँ , वो इस कॉलेज में एडमिशन न ले ये भी तू मीनल की वजह से hi तो कह रहा है ताकि तुझे कोई दिक्कत न हो .

कल्पना गुस्से से मोहित को झिड़क कर बोली तो वो भी बगलें झाँकने लगा .

मोहित : ऐसा कुछ नहीं है वो ….

अमित : चलो छोडो यार , छोटी स बात का बतंगड़ मत बनाओ. और उसकी इतनी टेंशन क्यों ले रही हो तुम? अगर उसने कुछ उल्टा सीधा सोचा भी तो तुम उसकी वाट लगा डौगी मुझे पता है.

मेरी बात सुन कर एक पल क लिए कल्पना क चेहरे पर स्माइल आ गयी .

कल्पना : हाँ , मैं तो हुंडई हूँ न ?

अमित : गुंडई ,, वैसे ये भी नाम ाचा है , तुम पर सूट करेगा .

मैं ये कह कर भाग पड़ा तो कल्पना भी मुझे मरने क लिए दौड़ी.

कल्पना : ोुउउउउउउ , रुक तुझे अभी बताती हूँ . गुंडई बोलती हो मुझे .

एक पल में hi कल्पना सब भूल कर बस मुझे पकड़ने क लिए मेरे पीछे दौड़ पड़ी और हमारा हंसी मज़ाक चालू हो गया. मैं उसे खूब दौड़ाया और फिर उसने मुझे पकड़ लिया और मेरी गर्दन अपनी काच में दबा दी. जिससे मेरा सर एक तरफ से उसकी चुकी से जा लगा . कल्पना को तो एहसास hi नहीं था . पर मुझे उस नरम मांस का एहसास होते hi बेचैनी होने लगी. मेरी हंसी एक प् में hi रुक गयी. कल्पना क चुके आम लड़कियों से छोटे थे शायद स्पोर्ट्स की वजह से पर फिर भी थी तो वो लड़की hi. मैंने उसको छोड़ने को कहा तो वो छोड़ नहीं रही थी.

अमित : कल्पना , छोडो मुझे .

कल्पना : नहीं छोडूंगी , मुझे गुंडई बोलते हो न , अब देखो क्या करती है ये गुंडई.

अमित : अरे पागल छोड़ मुझे , ,,,, देख छोड़ दे मुझे वर्ण फिर तू पछ्तायेगी .

कल्पना : पहले मेरी पकड़ से निकल कर तो दिखा पहलवान .

कल्पना मुझे छोड़ने को तैयार नहीं थी . वैसे तो मैं ज़ोर लगा क्र भी उसकी पकड़ खोल सकता था पर मज़ाक मज़ाक में मैंने बिना सोचे समझे उसके बूब पर दांतों से काट दिया . हालाँकि मैंने ज्यादा ज़ोर से नहीं कटा था पर अपने बूब पर मेरे द्वारा काटे जाने से कल्पना एक डैम उछाल कर मुझसे दूर हो गयी. उसके मुँह से हलकी सी चीख भी निकली थी पर दर्द से ज्यादा वो शर्म से मरे जा रही थी. कल्पना ने मेरी तरफ पीठ कर ली थी . जिससे मैं देख नहीं प् रहा था क उसका क्या रिएक्शन है .

अमित : क्यों , अब बोलो क्या कह रही थी . देख छुड़ा लिया न मने .

कल्पना ने अपना चेहरा एक बार पीछे घुमा कर देखा . उसके चेहरे पर क्या भाव थे ये तो समझ में न आया पर अब वहां हंसी गायब थी. अगले hi पल कल्पना बहार की तरफ भाग गयी . मैंने उसे आवाज़ भी दी और उसने पीछे मुद कर नहीं देखा . इतने में मोहित भी आ पहुंचा

मोहित : अब इसे क्या हो गया ?

अमित : पता नहीं , मैं देख के अत हूँ.

मैं भाग कर कल्पना क पीछे भी गया पर वो कहीं नज़र नहीं आयी. मैं उसकी कार ढूंढने लगा तो वो मुझे पार्किंग से बहार जाती हुई दिखाई दी. अब मुझे अफ़सोस हो रहा था क मैंने गलत हरकत कर दी. कल्पना क साथ मुझे ऐसे नहीं करना चाहिए था . मेरी इस हरकत से कहीं मैं अपनी इतनी अछि दोस्त hi न खो दूँ. पर अब क्या हो सकता था अभी तो वो निकल गयी. मैंने उसे कॉल कर क बात करने की कोशिश भी की पर उसने फ़ोन नहीं उठाया. तब तक बाकि सब भी वहीँ आ गए क्यूंकि लेक्चर जो ख़तम हो गए थे उनके भी.

राधा : चलें ?

अमित : हाँ चलो

मीनल : सॉरी अमित , वो सनी ने …..

अमित : it’s ok यार कोई बात नहीं.

मीनल : मैं उसे समझा दूंगी और टाइम से भेज दूंगी . तुम प्लीज देख लेना .

अमित : हाँ ठीक है, पर अब तुम मोहित से अपनी नाराज़गी ख़तम कर लो .

मैंने जब ये बात कही तो मोहित खुश हो गया . मीनल ने एक बार उसे देखा और फिर मुझे साइड में ले गयी .

मीनल : उसे तो मैंने माफ़ कर दिया पर मैंने तुमसे कुछ कहा था यार है ?

अमित : बोलो , क्या शर्त है तुम्हारी ?

मीनल : अभी नहीं बाद में बताउंगी पर वडा करो तुम मेरी शर्त पूरी करोगे ?

अमित : अगर मेरे बस में बुआ तो ज़रूर करूँगा .

मीनल : तुम्हारे hi बस में है , वडा करो क करोगे .

अमित : ठीक है मैं वडा करता हूँ.

मीनल : ाचा अब मैं चलती हूँ , bye.

मीनल मोहित क पास गयी और उसका हाथ पकड़ उसे खिंच कर कार की तरफ ले गयी. मोहित की तो मनो चंडी हो गयी वो बार बार मुझे देख कर आँखों से hi थैंक्स कह रहा था . इधर शिवानी भी कल मिलने का कह कर शालू को साथ लेकर चली गयी. रीमा ने भी हम दोनों से हाथ मिलाया और आँखों से मुझे इशारा कर क चली गयी. उसे बुआ क साथ जाना था . राधा को बाइक पर बिठा कर में भी चल दिया घर की तरफ .

उधर निधि क घर पर सुबह सुबह hi विजय और दीपिक आ धमके . निधि रत को घर वापिस लौट आयी थी , आखिर वो ज्यादा परेशां भी तो नहीं कर सकती थी अपने माता पिता को. सुबह जल्दी उठ कर वो ऑफिस जाने को तैयार हो रही थी अपने कमरे में पर उसके निकलने से पहले hi उसके बड़े मां और छोटी ममी आ गए . आज राजेश ने भी छुट्टी ले ली थी काम से . नैना और कारन को कॉलेज जाने को कह दिया गया था . निधि बिना नाश्ता किये समय से पहले निकलने लगी तो सामने बड़े मां को देख उसके मुरझाये चेहरे पर मुस्कान आ गयी और वो उनके गले लग गयी.

निधि : मां जीई ,,,, आप अचानक ? इतनी सुबह ?

विजय : अपनी बेटी से मिलने का दिल कर रहा था तो चला आया . पर लगता है हमारी बेटी को कुछ ज्यादा hi जल्दी है बहार जाने की.

निधि : अरे नहीं ऐसा नहीं है मां जी . वो मैं ऑफिस जा रही थी.

विजय : बिना नाश्ता किये ? ये तो बहुत गलत बात है.

रजनी : रत को भी इसने खाना नहीं खाया और देखो आपके सामने है . बिना खाये जा रही है , मुझसे तो अब बात भी करना इसे ाचा नहीं लगता , खाना कहाँ से खायेगी .

रजनी ने आँख भरते हुए अपने भाई से कहा तो ये बात नीडबी को भी अछि नहीं लगी क उसकी वजह से माँ दुखी है.

निधि : ऐसी बात नहीं है माँ , वो मेरा मूड कुछ ठीक नहीं है.

दीपिका : क्या हुआ है मूड को ? हम अभी ठीक कर देते हैं.

नीडबी में जब दीपिका ममी को सामने देखा तो वो फिर से खुश हो गयी और उठ कर दीपिका से गले मिली .

निधि : आप भी आयी हैं ममी , आखिर आपको टाइम मिल hi गया यहाँ आने का .

दीपिका : इसमें टाइम की क्या बात है? ये भी तो अपना घर है . ले आरव को संभल ज़रा, और नाश्ता तू मेरे साथ hi करेगी.

दीपिका ने ज़बरदस्ती आरव को निधि की गॉड में दाल दिया और खुद किचन में चली गयी . रजनी को उसने पहले hi खाना बनाने से मन कर दिया था .

विजय : बीटा , तू तो मेरी सबसे समझदार बेटी है. फिर ये मैं क्या सुन रहा हूँ?

निधि : मां जी , आप hi समझौते न माँ को , मैं शादी नहीं करना चाहती तो ये क्यों ज़िद कर रही हैं? अगर मैं इन पर बोझ हूँ तो मैं अलग से रह लेती हूँ. वैसे भी मेरे पास कंपनी की तरफ से मिला फ्लैट है

रजनी : सुन लिया आपने ? अब उसको अपनी माँ hi दुश्मन लगने लगी है. आप hi बताओ बेटियां क्या बोझ होती हैं माँ बाप पर ? ये तो दुनिया का दस्तूर है हर लड़की को एक न एक दिन जाना hi पड़ता है .

विजय : चुप हो जा मेरी बहिन , मैं बात कर रहा हूँ न. हमारी बेटी बहुत समझदार है ये कभी किसी को दुःख नहीं दे सकती. अगर तू ऐसे रोयेगी तो क्या इसे ाचा लगेगा ? ,,, निधि बीटा , तुम्हारी माँ ठीक कह रही है. तुम किसी पर बोझ नहीं हो , ये तो दुनिया का रिवाज है. तुम्हारी माँ भी तो आयी थी न शादी कर क. क्या ये हम पर बोझ थी ? तुम समझने की कोशिश करो बेटी .

निधि : मां जी ,,, क्या मुझे अपनी ज़िन्दगी अपनी मर्ज़ी से जीन का अधिकार नहीं है ? अगर नहीं है तो कर दीजिये जहाँ मर्ज़ी जिसके साथ मर्ज़ी पर फिर आप अपनी बेटी को हमेशा क लिए खो देंगे .

रजनी : सुन लिया आपने ?? क्या कह रही है ???

रजनी फिर से रोने लग गयी निधि की बात सुन कर.

विजय : आखिर तुम ऐसा क्यों कह रही हो बेटी? तुम पर तो मुझे हमेशा गर्व रहा है और दुनिया को मैं हमेशा तुम्हारी मिसाल देता रहा हूँ. पर आज ये तुम्हे क्या हो गया है? मुझे सच सच बता आखिर बात क्या है? अगर तुझे कोई और लड़का पसंद है तो बीटा एक बार बता दे , हम वहीँ तेरी शादी करवा देंगे .

निधि : नहीं मां जी ऐसा कुछ नहीं है.

विजय : तो फ्री बात क्या है ?

निधि : मैं बस अकेले रहना चाहती हूँ. माँ , आप आरव को सम्भालो मुझे ऑफिस जाना है .

विजय : नहीं बीटा आज तुम कहीं नहीं जा रही , मैंने राघव से कह दिया है क तुम आज हमारे साथ हो.

निधि ये बात सुन कर कभी अपने मां तो कभी अपने माता पिता को देखने लगी. मतलब साफ़ था आज फिर से सारा दिन उसकी परेड होने वाली थी . थोड़ी देर में दीपिका ने नाश्ता बना दिया और सब ने मिल कर खाया . इस दौरान विजय और राजेश दोनों समाज क उसूल और नियमो की बात करते हुए निधि को समझने की कोशिश करते रहे . दीपिका की नज़र निधि पर hi थी और वो उसकी बातों से हिसाब लगा रही थी. नाश्ते क बाद भी बातों का सिलसिला जारी था . तब दीपिका ने विजय को साइड में बुलाया और उससे निधि क साथ अकेले में बात करने की इजाज़त मांगी. विजय ने ख़ुशी ख़ुशी उसे मौका दिया . दीपिका निधि को लेकर उसके कमरे में चली गयी और दरवाज़ा बंद कर क उसके पास आ कर बैठ गयी .

दीपिका : निधि , मैं तुम्हारी ममी की हैसियत से नहीं एक दोस्त की हैसियत से तुमसे बात करना चाहती हूँ अगर तुम ठीक समझो . हूँ दोनों में ज्यादा फफक तो नहीं है उम्र में लार एक रिश्ते की लाज है. ममी क साथ तुम खुल कर बात नहीं कर सकती और न hi मुझसे हो पायेगी. पर दोस्त तो खुल कर बार कर सकते हैं न . तो क्या हम दोस्त बन सकते हैं?

नीडबी : जी

दीपिका : तो फिर अपनी दोस्त को बताओ क तुम शादी क्यों नहीं करना चाहती ?

निधि : बस मेरा मन नहीं है , मैं अकेली रहना चाहती हूँ

दीपिका : ये तो कोई जवाब न हुआ , देखो मैंने अभी क्या कहा , हम दोस्त हैं और दोस्तों में कुछ भी छुपा नहीं होता. मैं चाहती हूँ तुम खुल कर बात करो . जो भी तुम्हारे दिल में है . मैं तुम्हे शादी क लिए फाॅर्स करने नहीं आयी हूँ. मैं बस वजह जाना चाहती हूँ , और मेरा यकीन करो , मैं तुम्हारा पूरा साथ दूँगी .

निधि कुछ देर दीपिका को देखती रही जैसे क वो इस बात पर मन hi मन फैसला कर रही हो क वो क्या कहे और कैसे कहे.

दीपिका : मुझ पर भरोसा करो . हूँ दोनों क बीच जो भी बात होगी वो मैं किसी को नहीं बताउंगी.

निधि अभी भी कुछ नहीं बोल रही थी. दीपिका समझ गयी ये ऐसे नहीं बोलेगी. क्यूंकि वो थी hi ऐसी.

दीपिका : तुम किसी से प्यार करती हो न ?

दीपिका का सवाल सुन कर निधि की ऑंखें बड़ी हो गयी और वो एक तक उसे देखने लगी .

दीपिका : ऐसे क्या देख रही हो ? तुम्हारी ऑंखें में जो दर्द है वो मैंने पहले hi देख लिया था गाओं से आते वक़्त . पर तब समय नहीं था बात करने का . मगर मैं तुम्हारी भावनाएं अचे से समझ रही हूँ. आखिर मैं भी तो एक औरत हूँ. तुम किसी को जी जान से चाहती हो पर शायद वो किसी और को चाहता है . है न ?

अब तो निधि की आँखों में एक एक नमी उतर आयी. और आँखों का बांध तोड़ कर उसका दर्द छल छल बहाने लगा . दीपिका ने तुरंत उसे गले से लगा लिया .

दीपिका : रो ले निधि , जितना चाहे रो ले . अपने अंदर से इस दर्द को बहार निकल दे . वर्ण ये तुझे जीने नहीं देगा . किसी एक इंसान की खातिर तू सब को ऐसे तो नहीं छोड़ सकती न. और वो भी तब जब वो किसी और को चाहता है.

निधि : मैं क्या करूँ ममी , मैं क्या करूँ. मैंने बहुत कोशिश की खुद को समझने की पर मैं खुद को रोक hi नहीं पायी और उसे चाहने लगी. मैं जानती थी क ये पॉसिबल नहीं है पर फिर भी मैं खुद को रोक नहीं पायी उसे चाहने से. इसमें उसका कोई दोष नहीं है , उसने कभी मुझसे नहीं कहा था क वो मुझसे चाहता है . पर ये दिल मन hi नहीं और उसी को भगवन बना बैठा. इंसान क पास तो एक hi दिल होता है न ममी ? अगर दो होते तो मैं किसी और क बारे में सोच भी लेती. पर क्या करूँ अब उसके सिवा मैं छह कर भी किसी और को नहीं सोच सकती . अगर माँ पापा ने मेरी किसी और से ज़बरदस्ती शादी करवा दी तो ये भी तो धोखा hi होगा न उस इंसान क साथ? और मैं खुद को कैसे समझाउंगी ? नहीं ममी , मैं किसी और को अपना पति नहीं मन सकती जब क उसे तन मन से अपना पति मन चुकी हूँ.

दीपिका निधि की बातें सुन कर उसका दर्द महसूस कर रही थी और उसकी ऑंखें भी नाम हो गयी . वो अमित का नाम लिए बगैर उसके बारे में बात कर रही थी टेक उसे पता न चले क वो सब जानती है. और उसकी कोशिश भी यही थी क किसी तरह निधि को समझा बुझा क मन ले. पर उसकी बातें सुन कर दीपिका को एहसास हो गया क निधि अब किसी और क साथ खुश रह hi नहीं सकती. इस तरह तो बेचारी की ज़िन्दगी नरक बन जाएगी . निधि को सहलाती चुप करवाती दीपिका फिर से बोली.

दीपिका : शह्ह्ह्ह , चुप , चुप कर जा निधि. देख मैं तेरी बात समझती हूँ , पर ये सब कैसे हुआ और वो लड़का कौन है ? मुझे सब कुछ बता .

निधि : मैं ,,,, मैं ,,, नहीं ममी , मुझसे नहीं होगा . मैं उसका नाम नहीं ले सकती .

दीपिका : तो तुम्हे उसकी इतनी परवाह बैंक उसका नाम भी नहीं ले सकती . ाचा ये तो बता , तूने उसे अपनी दिल की बात तो बताई थी न ?

निधि ने हाँ में सर हिला कर गर्दन झुका ली .

दीपिका : तो क्या कहा था उसने ?

निधि : वो किसी और को चाहता .

दीपिक : हम्म्म्म , किसी और को तो चाहता है पर तुम्हे चाहता है क नहीं , ये नहीं बताया ?

निधि : वो किसी और को चाहता है तो मुझे कैसे …..

दीपिका : ये किस किताब में लिखा है क एक को hi चाहा जा सकता है ? तुमने पढ़ा नहीं क्या कभी ? हमारे देश में पुराने समय में राजाओं की कितनी रानियां होती थी? तो फिर वो क्यों नहीं प्यार कर सकता 2 क साथ ?

निधि : ये आप क्या कह रही हैं ममी ?

दीपिका : वही जो तू सुन रही है. मुस्लिम लोगों में तो 3-4 शादियां आम बात है . और हमारे भी 2-3 शादियां करि जगह हो जाती हैं. और जब किसी औरत क बचा नहीं हो पता तब भाई उसका पति दूसरी शादी कर hi लेता है तो फिर तुम्हारे वाला क्यों नहीं कर सकता ? हाँ तू उसे किसी क साथ बाँट सकती है या नहीं ये तुझे देखना है. साडी उम्र उसका नाम ले ले कर रोने से ाचा है तू उसका प्यार बाँट ले . तेरे हिस्से में जितना अत है वो ले ले . काम से काम दिल को तो तसल्ली होगी .

निधि : पर ऐसा कैसे हो सकता है ? मैं अगर मन भी जॉन तो वो दूसरी लड़की राज़ी होगी या नहीं ये कैसे पता चलेगा ? और वो लड़का भी तो मुझे नहीं चाहता .

दीपिका : मतलब तू तैयार है ? तू एक बार उससे बात तो कर क देख , या फिर मुझे बता दे क मैं बात करूँ उससे .

निधि : आप ?? आप कैसे बात करेंगी उससे ? नहीं नहीं , मैं ,,, मैं खुद बात करुँगी उससे .

दीपिका : मतलब तू तैयार है अपनी सौतें क साथ रहने क लिए .

दीपिका ने अब ये बात है कर कही थी निधि को छेड़ते हुए . जिस पर निधि शर्मा गयी , अब उसके चेहरे पर दर्द नहीं था बल्कि शर्म थी .

निधि : क्या ममी आप भी …

दीपिका : देख देख , शर्मा तो ऐसे रही है क अभी तेरी शादी इससे हो रही है जैसे . इतना भी आसान नहीं है . जैसे तुझे समझने में टाइम लगा उसे भी लगेगा . पर पहल बात तो करनी पड़ेगी न. और तुझसे तो बात भी नहीं होगी. तू मुझे उसका नाम बता , मैं बात करती हूँ.

दीपिका अभी भी मज़े ले रही थी निधि क. जबकि उसे अचे से पता था क वो नाम नहीं बताएगी.

निधि : नहीं ममी , आप नहीं , मैं खुद बात करुँगी .

दीपिका : अब तो हम दोस्त हैं न ? तो फिर मुझे उसके बारे में बताने में अब कैसी शर्म ?

निधि : नहीं मणि , प्लीज , मैं नहीं बता सकती .

दीपिका : तो इसका मतलब वो हमारी जान पहचान वाला hi है कोई ?

दीपिका फिर से मज़े लेते हुई बोली , मगर उसकी बात सुन कर नीडबी की धड़कने बढ़ गयी .

निधि : नं ंन्न नहीं नहीं ममी वो नहीं है .

दीपिका : क्या नहीं है ? तेरी घबराहट सब बता रही है. ज़रूर हमारा कोई खास hi है जो तेरे दिल को चुराए बैठा है. पर ऐसा कौन हो सकता है जिस पर हमारी निधि जैसी इतनी समझदार इतनी खूबसूरत इतनी शर्मीली लड़की दिल हार जाये . हम्म्म

निधि अब दीपिका से नज़रें चुरा रही थी और भगवन से प्रार्थना कर रही थी क ममी को कुछ पता न चले . अपने हाथ की उँगलियों को मसलती वो बार बार उठने की कोशिश कर रही थी .

दीपिका : मेरी नज़र में तो एक hi लड़का है जो हर मामले में तुम्हारे लिए परफेक्ट है और तू उसे पसंद भी करती है.

निधि का दिल मनो धड़कना बंद hi करने वाला था . उसे दर लगने लगा क कहीं दीपिका अमित का नाम hi न ले ले .

निधि : कककक कौन , कौन ममी ?

दीपिका : वही जो मुझे तुम्हारी आँखों में नज़र आ रहा है . जिसे तू सबसे ज्यादा प्यार करती है .

निधि की ज़ुबान मनो लकवा hi मर गयी . अब उससे एक शब्द भी नहीं निकल प् रहा था .


दीपिका : क्या अभी भी नाम सुन्ना है उसका ?
 
अपडेट रत को मिलेगा भाई
 
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