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‘ क्या सोच रहे हो ? जब से आये हो देख रही हूँ बुझे बुझे से हो. ये तबियत ख़राब का भी बहाना बना रहे थे न ? अब सच सच बताओ क्या बात है? ‘
मैं बीएड पर लेता निधि दीदी क बारे में सोच रहा था क दिव्या मौसी फिर से कमरे में आ गयी . मैंने उठने की कोशिश की तो मौसी ने मुझे उठने नहीं दिया और खुद मेरे सर की तरफ बीएड पर बैठ गयी
दिव्या : लेता रह , उठने की ज़रूरत नहीं . अब बता. क्या बात है ?
अमित : कुछ नहीं मौसी .
दिव्या : देख , एक hi बात बार बार पूछने की मुझे आदत नहीं है . सीधे सीधे बताता है या नहीं ?
दिव्या मौसी ने हल्का गुस्सा दिखते हुए मुझसे फिर से पूछा तो मुझे लगा उन्हें कुछ न कुछ तो कहना hi पड़ेगा वर्ण वो ऐसे मानेंगी नहीं
अमित : वो मौसी आज ,,,,,, माँ की बहुत यद् आ रही थी. मैंने तो उन्हें देखा भी नहीं. फिर भी दिल है क उन्हें देखना चाहता है जबकि वो वापिस तो आ नहीं सकती .
मैंने जान बुझ कर माँ क बारे में बात कर दी क्यूंकि मैं जनता था इसके बाद मौसी और कोई सवाल पूछने नहीं वाली. पर मुझसे अनजाने में गलती हो गयी. क्यूंकि मेरी इतनी सी बात पर hi दिव्या मौसी की ऑंखें भर आयी.
दिव्या : नाम आँखों से ) मैं नहीं हूँ क्या ???? मैं भी तो तेरी माँ हूँ और मुझमे दामिनी में फरक hi क्या है??? क्या मुझमे तुझे दामिनी नज़र नहीं आती??? ख़बरदार जो कभी ऐसा दोबारा सोचा क तेरी माँ नहीं है..,,, वर्ण कभी बात नहीं करुँगी दोबारा तुझसे ,,,, एक तो पहले hi इतने साल मैं तड़पती रही हूँ तुझे दूर कर क और अब तू ऐसी दिल दुखने वाली बातें कर रहा है.
दिव्या मौसी का गाला भर आया था और उनकी आँखों से आंसू बह निकले. उनकी बातों में मेरे लिए जो प्यार था उससे मेरा भी मन भर आया और मैंने उठके उन्हें गले लगा लिया. बीएड पर बैठे बैठे hi हूँ एक दूसरे क गले लग गए. हालाँकि इस वक़्त ये प्यार माँ बेटे का प्यार था. मौसी मेरे गले लग कर आंसू बहा रही थी और मैं उन्हें रोक रहा था.
अमित : माफ़ कर दो मौसी ,,, दोबारा कभी ऐसा सोचूंगा भी नहीं. मैं भी कितना पागल हूँ , मेरी माँ तो मेरे सामने साक्षात् है और मैं फिर भी उसे परछाइयों में ढूंढ रहा हूँ. आप और में जब कोई फरक था hi नहीं तो आप hi तो मेरी माँ हुई न . अब आप चुप हो जाइये वर्ण मैं भी आपसे बात नहीं करूँगा .
दिव्या : तो पहले ऐसी बातें करता hi क्यों है. चल आराम से लेट जा.
मौसी ने प्यार से थपकी देते हुए मुझे लिटा दिया और मेरा सर अपनी गॉड में रख कर थपकी देने लगी. तभी उनकी नज़र दरवाज़े पर गयी और उनके बोलते hi मैंने भी दरवाज़े की तरफ देखा जहाँ दीपिका ममी कड़ी थी.
दिव्या : अरे दीपिका , तू वहां कड़ी क्या क्र रही है?
दीपिका : माँ बेटे का प्यार देख रही थी. सोचा बीच में डिस्टर्ब करना ठीक नहीं .
दिव्या : चल आजा अंदर , अब अपने बेटे को प्यार भी न करूँ मैं? तू इस वक़्त यहाँ क्या कर रही है ? तुझे अपने बेटे को प्यार नहीं करना ?
दीपिका : मैं तो देखने आयी थी क अमित को दूध मिल गया क नहीं. पता होता आप यहां हैं तो सोचने की ज़रूरत hi नहीं थी. आखिर माँ अपने बचे को दूध तो पिलाएगी hi.
दीपिका ममी ने ये बात एक शरारती मुस्कान क साथ मौसी को देखते हुए कही थी और उनकी डबल मीनिंग बात सुन कर दिव्या मौसी मुश्किल से खुद को रोक पायी शर्माने से
दिव्या : हाँ हाँ , मेरा बीटा है मैं देख लुंगी तू अपने बेटे की फ़िक्र कर . उसे दूध पीला .
दीपिका : मैं तो अपने बेटे को दूध पीला hi दूंगी आप भी ज़रा अपने बेटे को ताज़ा दूध पीला दीजिये .
इस बार तो दिव्या मौसी की बोलती hi बंद हो गयी और वो हकलाने hi लग गयी.
दिव्या : हह ,, है,, हाँ ,, हाँ मम ,, मैं पीला दूंगी. वो गिलास में रखा है . जा तू अपने बेटे को पीला ताज़ा दूध. अब जा जाकर उसे संभल , कमलेश भी तेरा इंतज़ार कर रहा होगा
दीपिका
मेरी तरफ देखते हुए ) आरव क पापा का hi तो ख्याल रहता है मुझे . कहीं वो किसी बात पर परेशां न हो जाएँ. जो भी होगा सब ाचा hi होगा , भगवन हमेशा उनके साथ है और मैं भी .
दिव्या : ये तू क्या बात कर रही है. वो क्यों परेशां होगा ?
दीपिका : अब मुझे क्या पता, ाचा अब मैं चलती हूँ सुबह बात करुँगी .
दीपिका ममी ने आखिरी बात भी मुझे देख कर कही जैसे मुझे कह रही हो क सुबह मुझसे पूछेंगी मेरी परेशानी क्या है. बातों बातों में hi वो बता गयी क वो यहाँ मेरे लिए hi आयु थी और उन्हें मेरी कितनी परवाह है. ये बात तो मैं अचे से जनता था क वो मेरी सबसे ज्यादा परवाह करती हैं. और मुझे दुखी देख कर उनको भी चैन कहाँ होगा.
दिव्या : पता नहीं क्या क्या बोले जा रही थी , ये भी न ,, अभी तक बची hi है. जैसी भी है इस घर की रौनक यही तो है . चल उठ दूध पि ले वर्ण भूल जायेगा . फिर वो कहेगी क मैंने तुझे दूध नहीं पिलाया.
मौसी ने ये बात कह तो दी पर फिर खुद hi शर्मा गयी. मैंने उठ कर दूध का गिलास पकड़ा और एक पल में ख़तम कर क रख दिया . फिर मैं वापिस लेट गया और मौसी मेरा सर गॉड में रखे सहलाती रही. मौसी की गॉड में सच में बहुत सुकून मिल रहा था और पता नहीं कब मेरी आंख लग गयी .
उधर राधा निधि क कमरे में गयी तो दरवाज़ा अंदर से लॉक था . 2 बार खटकने पर निधि की धीमी मगर भरी गले से आवाज़ आयी.
निधि : प्लीज मेरी तबियत ठीक नहीं है मुझे रेस्ट करने दो.
राधा : दीदी मैं हूँ , प्लीज एक बार दरवाज़ा खोलिये .
निधि : राधा , प्लीज मैं सुबह बात करुँगी . अभी तुम जाओ.
राधा : दीदी वो मुझे अंदर से कुछ लेना है . प्लीज दरवाज़ा खोलिये .
कुछ पलों बाद दरवाज़ा खुला , निधि दरवाज़े क पीछे hi खुद को छिपाये थी बस ज़रा सा राधा को देखा और उसे अंदर आने क लिए जगह देकर पीछे मुद गयी. पर इतने में hi राधा ने निधि की आंसुओं से भरी आँखें देख ली थी. गलों पर नमकीन पानी की लकीरे बन गयी थी. निधि ने खुद को छुपाने की कोशिश तो की थी पर राधा ने उसके दर्द को देख लिया था . निधि राधा की तरफ पीठ कर क बीएड की तरफ बड़ी . उसने सोचा राधा अपना सामान लेकर चली जाएगी पर राधा ने दरवाज़ा फिर से बंद करते हुए चिटकनी लगा दी . चिरकानी की आवाज़ सुनते hi निधि ने पीछे मुद कर देखा तो राधा उसके करीब आ रही थी.
निधि : तुम तो सामान लेने आयी थी न , अब लो अपना सामान और जाओ.
राधा : मैं जानती हूँ दीदी आप अमित से नाराज़ हैं, मैं वजह नहीं पूछूँगी अगर बताना न चाहें. मगर इतना ज़रूर कहूँगी दीदी क आप जितना दुखी हैं उससे भी ज्यादा वो खुद दुखी है. आप तो जानती hi हैं वो सबसे ज्यादा आप hi से प्यार करता है . जितनी इज़्ज़त और परवाह वो आपकी करता है उतनी वो किसी की नहीं करता . पता नहीं किस वजह से उसने आप दिल दुखाया है पर यकीन मानिये जब तक आप दुखी रहेंगी तब तक वो भी खुश नहीं हो पायेगा. मैं गयी थी उससे बात करने , उसने मुझे कुछ नहीं बताया पर मैंने उसकी आँखों में दर्द देखा है. वो कैसा है ये आप भी अचे से जानती हैं. वो कभी अपना दर्द किसी से नहीं बाँट ता मगर दूसरों को खुशियां देने क लिए खुद अपनी झोली में दुःख समेत लेता है. उसकी तरफ से मैं आपसे माफ़ी मांगती हूँ. आप जो सजा देने चाहें मुझे दे दें. पर उससे नाराज़ मत होना. अगर आप उससे नाराज़ हो गयी तो फिर वो किसी क साथ hi खुश नहीं रह पायेगा और अंदर hi अंदर घुट ता रहेगा . प्लीज उसे माफ़ कर दीजिये .
राधा की बातें निधि ख़ामोशी से सुनती रही. निधि को तो अमित से नहीं बल्कि अपनी किस्मत से नाराज़गी थी और ऊपर वाले से जिसने पहले उसके मन में अमित क लिए वो भावनाएं पैदा की ऐसी घटना करवाई क जिससे वो अमित को पति मन बैठी और अब अमित उसका नहीं हो सकता ये बात उससे बर्दाश्त नहीं हो रही थी. ज़िन्दगी में पहली बार उसने किसी को चाहा था बल्कि उसे अपनी ज़िन्दगी hi मन लिया था और अब अपने मन में संजोये सपने मिटा पाना उसके बस में नहीं था . अपने आप पर काबू पति निधि राधा क मुरझाये चेहरे को अपने हाथों में लेकर उसे दुलार करती बोली
निधि : तू कब से इतनी बड़ी हो गयी जो इतनी परवाह करने लग गयी उसकी ? सब ऐसे hi तुझे माँ की गुड़िया कहते हैं. तू तो सबसे समझदार है. मैं उससे नाराज़ कैसे हो सकती हूँ भला , वो तो मुझे कारन से भी पहले प्यारा है. हाँ शायद उसकी ज़िन्दगी में बहुत लोग हैं मुझसे भी पहले . तू चिंता मत कर मैं सुबह उससे बात कर लुंगी. आ इधर मेरे साथ hi सो जा .
राधा : आप सच में उससे नाराज़ नहीं है न ?
निधि : नहीं
राधा : अछि बात है , मैं आपके लिए खाना लेकर आती हूँ. ऐसे भूखे पेट नींद थोड़ा आएगी ?
निधि : नहीं मुझे भूख नहीं है , सुन तो …..
राधा निधि की बात सुने बगैर कमरे से जल्दी से भाग गयी खाना लेने. क्यूंकि उसे पता था निधि फिर से मन करेगी इस लिए उसने बात hi नहीं सुनी. और अब उसे इस बात की ख़ुशी भी थी क निधि अमित से नाराज़ नहीं है. ये बात वो अमित को बताने क लिए गयी भी पर अमित उसकी माँ की गॉड में आराम से सो रहा था इस लिए उसने आवाज़ भी नहीं दी और चुपके से निकल ली. खैर निधि ने न न करते हुए भी राधा क हाथ से एक रोटी खा hi ली वर्ण राधा भी भूखे पेट सोने का कह रही थी. निधि का मन तो बेचैन था पर राधा क मासूम चेहरे और भोली बातों ने उसे कुछ हद तक हल्का कर दिया था.
सुबह मेरी आंख कुछ देर से खुली. रत मौसी ने जो माँ क प्यार का एहसास दिया था उसने मुझे हल्का कर दिया था . मैंने जब उठने की कोशिश की तो देखा मैं करवट क बल आधा मौसी क ऊपर था और उनका हाथ मेरे सर पर था . मैंने अपना सर थोड़ा सा उठाया तो मेरी ऑंखें फटी की फटी रह गयी. मेरा सर असल में दिव्या मौसी क स्तनों क ऊपर था. मौसी की सदी का पल्लू एक साइड में पड़ा था . ब्लाउज क ऊपर क दो हुक खुले हुए थे और उनके गोर स्तन आधे से ज्यादा नज़र आ रहे थे . मुझे यकीन नहीं हो रहा था क अभी मैं मौसी की नंगी छाती पर सर रख कर सो रहा था. शायद नींद में मौसी का पल्लू ढ़ालकंगया होगा पर ब्लाउज क हुक कैसे खुल गए ? कहीं नींद में ये मेरे से hi तो नहीं हो गया . मैं ये सोच कर दर गया और जल्दी से मौसी से दूर हो गया. फिर मेरी नज़र मौसी क नंगे चिकने पेट पर गयी जहाँ चर्बी नाम मात्रा भी नहीं थी . मौसी की साडी अस्त व्यस्त हो कर घुटनो तक ऊपर उठी हुई थी जिससे उनकी नंगी गोरी पिंडलियाँ नुमाया हो रही थी. ये सब देख कर मेरे खून में गर्मी आने लगी. पर मैंने खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश की. मौसी का चेहरा देखा तो वो सुकून से सो रही थी , उनके चेहरे पर संतुष्टि क भाव थे शायद कोई ाचा सपना देख रही होंगी. उनके चेहरे पर नज़र पड़ते hi मुझे एहसास हुआ क मैं कितना गलत सोच रहा था. वो मेरी माँ जैसे दिखती hi नहीं थी बल्कि माँ hi तो थी. उसी की तरह वो मुझे चाहती थी प्यार करती थी . मैंने मौसी की साडी का पल्लू जो एक तरफ गिरा था उसे वापिस मौसी क ऊपर दाल दिया और झुक कर उनके माथे को चूम लिया . फिर मैं उठा और बाथरूम से फ्रेश हो कर अखाड़े जाने की सोची तो टाइम देखने पर पता चला मैं लेट हो चूका था. अगर अखाड़े जाता तो वापिस आने में देर हो जाती और आज तो कॉलेज भी जाना था. इस लिए छत पर हो एक्सरसाइज करने का सोच कर जब मैं कमरे से बहार निकल कर खुली छत की तरफ गया तो कुछ hi पलों में दीपिका ममी मेरे पास आ गयी.
दीपिका : आज देर से उठे ? मैं कब से देख रही थी क अब निकलते हो कमरे से .
अमित : तो आप मेरा इंतज़ार कर रही थी ? कब से ?
दीपिका : और किसका इंतज़ार करुँगी ? तेरे जाने का टाइम मालूम है मुझे , तब से hi नज़र टिकाये बैठी थी क कब बहार आते हो. आज इतनी देर कैसे सोते रहे ? मौसी क पल्लू में नींद अछि आयी या सोये hi नहीं ?
अमित : क्या आप भी सुबह सुबह , आप को इतनी सुबह उठने की क्या ज़रूरत थी ? आराम से अपने टाइम पर hi उठती आप.
दीपिका : नींद आती तो उठती न , मैं तो साडी रत तेरे बारे ने hi सोचती रही. अब बता क्या बात हो गयी हो तू इतना दुखी था? ज़रूर ये बात निधि से जुडी हुई है . इसी लिए वो रत खाना नहीं खायी पर भला हो तेरी राधा का जो उसके लिए खाना ले गयी थी बाद में कुछ न कुछ खिला hi दिया होगा
दीपिका ममी क मुँह से ‘ तेरी राधा ‘ सुन कर दिल में अजीब से हलचल हुई और एक स्माइल अपने आप मेरे चेहरे पर आ गयी
अमित : वो सबका ध्यान रखती है. मेरे पास भी आयी थी वो कल रत . सच कहूं तो उससे बात कर क सुकून सा मिला था मुझे .
दीपिक : हम्म्म्म ,, वो तो मिलेगा hi. आखिर वो तेरी इतनी परवाह जो करती है. अब बात बता क्या है मुझे तो कल रत से चैन hi नहीं . जब पूरी बात सुन लुंगी तो चैन आएगा. इसी लिए रत मैं आयी भी थी पर दीदी की वजह से वापिस चली गयी .
अमित : आप पता नहीं क्या सोचेंगी पर यकीन मानिये मुझे इस मामले में कुछ भी नहीं पता था .
दीपिका : अब बताओ भी क्यों गोल गोल घुमा रहे हो
फिर मैंने निधि दीदी क साथ परसों रत क्या क्या हुआ और कल क्या बात हुई वो सब बता दिया . ये साडी बातें सुन कर दीपिका ममी अपने सर पर हाथ रख वहीँ बैठ गयी.
दीपिका : हे भगवन ,, ये सब क्या हो गया . तूने उसे समझाया नहीं क वो सब एक एक्सीडेंट था ? तूने जान बुझ कर थोड़ा hi उसकी मांग भरी और ये मंदिर वाली घटना भी तो एक्सीडेंट hi थी. इन सब बातों को ऐसे कैसे वो दिल पर ले गयी? आखिर भाई होने का फ़र्ज़ hi तो निभाया था तूने .
कुछ देर ममी खामोश रही और सोचने लगी. मैं उनके पास खड़ा उन्हें hi देख रहा था क वो मुझे कोई हल बताएं.
दीपिका : अब मुझे क्यों देख रहे हो ? खुद hi मुसीबतें मोल लेते हो तो हल भी खुद hi करो . पता नहीं और कितनी सौतने देखनी पड़ेंगी . तू कहीं रुकेगा भी ???
अमित : अब इसमें मेरी क्या गलती है ? मैंने तो कुछ भी जानबूझ कर नहीं किया था.
दीपिका : तेरी न किस्मत में hi ये सब झमेले लिख कर भेजे हैं भगवन ने इसी लिए एक जाता है तो दूसरा तैयार. निधि जैसी समझदार लड़की कोई भी फैसला अचानक नहीं ले सकती और दीदी की तरह वो भगवन को बहुत मानती है. जो कुछ एक्सिडेंटली हुआ उसने उसे भगवन की मर्ज़ी मान कर दिल से स्वीकार कर लिया और अब वो पीछे हटने वाली नहीं. अगर उसके साथ ज़बरदस्ती की गयी तो वो टूट जाएगी. वो चाहे विरोध न भी करे पर उसके बाद वो जीने की ीचा बी छोड़ देगी. वो बहुत भावुक है. इतनी देर तक वो अगर खामोश रही है तो ज़ाहिर है उसके दिल में तेरा प्यार बहुत गहरा बस चूका है. और तूने उसे सीधा सीधा इंकार कर दिया ??? एक बार भी नहीं सोचा उस मासूम क दिल पर क्या असर होगा ? अगर तुम ये सोचते हो क इस सब क बाद वो तुम्हे भूल जाएगी तो ये तुम्हारी गलत फेहमी है. हाँ तुम्हारी बातों से शायद वो अंदर hi अंदर इतना टूट जाये क हम इसे खो बैठें .
अमित : नहीं प्लीज ऐसा मत कहिये .
दीपिका : अब मैं खून या न कहूं पर तुमने जो किया है उसके बाद तो यही सब होने वाला है . निधि को समझाना आसान नहीं होगा . वो कोई दूध पीती बची नहीं और न hi नासमझ है . इस लिए बेहतर यही होगा क या तो उसकी बात मणि जाये या फिर भगवन क आगे हाथ जोड़ो क वो hi कोई हल निकले .
अमित : पर ऐसा किसे हो सकता है? आप जानती हैं ये बात कोई भी नहीं मानेगा और फिर रीमा का क्या होगा .
दीपिका : वैसे अगर देखा जाये तो रीमा क साथ भी तो तुम्हारा यही रिश्ता है न , तो उसके साथ भी शादी कोई कैसे मानेगा ?
अमित : रीमा क होते मैं निधि दीदी क साथ रिश्ता जोड़ूँ ??? आप होश में तो हैं?
दीपिका : तो क्या हुआ ? यहाँ तो राजे महाराजे 10 -10 शादियां करते रहे हैं . तुम्हारी तो 3-4 hi होनी हैं.
अमित : 3-4 ?
दीपिका : हाँ , एक रीमा , एक निधि और एक मैं . और इसके इलावा भी तुम्हारी कोई न कोई दीवानी आ hi जाएगी.
अमित : मज़ाक मत करिये आप , मेरा यहाँ सोच सोच कर सर फटा जा रहा है और आप मज़ाक कर रही हैं.
दीपिका : तुम्हारे सोचने से कुछ हो जायेगा क्या ? कोई और होता तो मैंने कुछ सोचती हल निकलने का पर निधि क मामले में मैं कुछ नहीं कर सकती. वो पहले hi इतनी समझदार है क उसे समझने की ज़रूरत नहीं. वैसे भी वो तुम्हे दिल से पति मान बैठी है और तुम्हे पूजती है तो वो कैसे पीछे हैट जाएगी अब ? मीरा भी तो मोहन की दीवानी थी क्या वो पीछे हैट पायी? चाहे साडी उम्र लोगों ने अपनी ने उसे दुत्कारा पर आखिर में उसने अपने सच्चे प्रेम से श्याम को प् hi लिया . निधि भी तुम्हारी मीरा बन चुकी है. अब ये तुम पर है क तुम कब उसे अपनाते हो.
दीपिका ममी की बातें सुन कर मुझे निधि दीदी क बारे में और भी ज्यादा बुरा लगने लगा था क मैं अनजाने में उनके दुःख की वजह बन बैठा हूँ .
दीपिका : अब ज्यादा सोचो मत , अगर निधि का सोचना सही है क ये सब भगवन की मर्ज़ी है तो हल भी वो hi निकालेंगे . इसके इलावा और क्या क्या हुआ इन 2 दिनों में मुझे वो सब बताओ. कुछ न कुछ तो और भी किया होगा तुमने. बिना कोई काण्ड किये तो तुम रहते नहीं .
अमित : पहले आप वडा करिये क नाराज़ नहीं होंगी
दीपिका : तो काण्ड कर hi दिया , नाराज़ तो मैं वैसे भी नहीं हो सकती अपने आरव क पापा क साथ. ाचा चलो वडा अब सब बताओ .
फिर मैंने करिश्मा दीदी क साथ कैसे वो सब हुआ और फिर रॉय वाला किस्सा और मीनल की बात भी बता दी .
दीपिक : तो आखिर बेटी भी माँ क नक़्शे कदम पर चल कर पहुँच hi गयी तुम्हारे बिस्तर तक. पता तो मुझे पहले hi था क ये होगा . जैसे वो तुम्हे देखती थी और वैसे भी तुमने उसकी ज़िन्दगी को नरक से निकला है. कोई भी लड़की होती तो ऐसा बहुत पहले हो चूका होता. खैर , ये रॉय क मामले में तुमने ाचा किया पर ये मीनल की शरत क्या है ? कहीं वो भी तो ….. ज़रा संभल के रहना , मुझे लगता है अब वो तुम्हारे सामने यही शरत रखने वाली है क तुम उसके साथ करो.
अमित : ये आप क्या कह रही हैं ? वो भला ऐसा क्यों करेगी ? वो तो मोहित से प्यार करती है.
दीपिका : मोहित ने क्या किया उसके साथ ???? कोई भी लड़की ये बर्दाश्त नहीं कर सकती क जिसे वो दिलो जान से चाहती है वो किसी और क साथ मज़े करे . और तुमने तो उसे बर्बाद होने से बचाया है तो इस लिए वो तुम्हारा एहसान भी तो चुकाना चाहेगी . तुम पर वो भरोसा कर सकती है और वैसे भी मोहित को लेके उसके मन में जो गुस्सा होगा वो ऐसे hi शांत होगा वर्ण वो मोहित क साथ पहले की तरह नहीं रह पायेगी .
अमित : तो मुझे क्या करना चाहिए? अगर मोहित को ये सब पता चला तो ….
दीपिका : अब सब मैं hi बताऊँ क्या ??? मोहित को न तुम बताने वाले हो न मीनल बताएगी. तो दर कैसा? हाँ उसे एक बार पर hi रोक देना वर्ण मुश्किल हो सकती है. हालाँकि वो रुकने वाली नहीं एक बार तुम्हारा लेने क बाद . तुम्हारे पास चीज़ hi ऐसी है.
अमित : एक बात पूछूं ?
दीपिका : अब पूछ कर सवाल क्यों कर रहे हो? मुझ पर तुम्हारा हक़ नहीं है क्या ?
अमित : आपको बुरा नहीं लगता जब मैं किसी और क साथ …..
दीपिका : नहीं ,, क्यूंकि मैं जानती हूँ क ऐसा नहीं हो सकता क तुम हमेशा मेरे पास रहो. वैसे भी तुमने जितने भी सम्बन्ध अब तक बनाये हैं वो सब दूसरों की ख़ुशी क लिए थे न की अपनी ीचा पूर्ती क लिए न हवस. अगर तुम कहीं गलत होते तो मैं ज़रूर तुम्हे रोकती . पर तुम गलत नहीं हो. तुम तो सुने दिलों में प्यार की बरसात कर रहे हो . उनकी बंजर ज़मीनो पर हल चला रहे हो. अब तुम्हारा हल hi इतना बड़ा है क एक बार जिसे जोट लेता है वो दुबारा खुद hi चली आती है . हे हे हे
अमित : आप फिर शुरू हो गयी .
दीपिका : अब शर्मा क्यों रहे हो , मैंने कुछ गलत तो नहीं कहा . ाचा अब मैं चलती हूँ . तुम भी इन सब से निपट कर तैयार हो जाओ. आज तुम्हे कॉलेज भी तो जाना है. मंजू कह कर गयी थी क यद् से तुम्हे कॉलेज भिजवा दूँ. तुम्हारा रिजल्ट भी आज से मिलना शुरू हो जायेगा.
दीपिका ममी जल्दी से एक छोटी सी किश मेरे होंठों पर करने क बाद नीचे चली गयी और मैं हलकी दुलकी एक्सरसाइज करने क बाद अपने कमरे में चला गया . बाकि सब भी उठ चुके थे और मौसी भी मेरे सामने hi अपने कमरे में चली गयी थी तैयार होने . मैं जल्दी से तैयार हो कर नीचे जाने लगा तो मुझे निधि दीदी का ख्याल आया. मुझे लगा क मुझे उनसे एक बार बात करनी चाहिए . इस लिए मैं उनके कमरे में चला गया . मैं बिना दरवाज़ा खटकाये दरवाज़ा धकेल कर अंदर घुस गया पर सामने का नज़ारा देख मैं उलटे पाऊँ वापिस हो गया . क्यूंकि सामने निधि दीदी पजामी पहने हुए कड़ी अपनी ब्रा की हुक लगा रही थी. उनका चेहरा दूसरी तरफ था इस लिए मैंने उन्हें पीछे से hi देखा पर मेरी धड़कने एक बार फिर से बढ़ गयी. इससे पहले क दीदी कुछ बोलती या कहती मौज भाग कर नीचे आ गया . कहाँ मैं उनसे बात करने गया था और अब मुझसे अनजाने में एक और गलती हो गयी . निधि दीदी मुझसे नाराज़ होंगी . यही सोच सोच मैं चुपचाप बैठा था . बाबा और माँ भी मेरे करीब थे और कॉलेज जाने क बारे में बात कर रहे थे पर मैं हूँ हाँ में hi जवाब दे रहा था . दीपिका ममी किचन में थी जबकि राधा और दिव्या मौसी अभी नीचे नहीं आयी थी .
गौरी : तेरा ध्यान किधर है ? मैं कुछ पूछ रही हूँ और तू हूँ हाँ किये जा रहा है ?
अमित : हाँ ,,, वो ,,, कुछ नहीं माँ वो मैं ,,, कॉलेज क बारे में सोच रहा था . आप क्या पूछ रही थी?
गौरी : मैं पूछ रही हूँ क शाम को वापिस तो आ जायेगा न ? वैसे भी आज शनिवार है कल तो छुट्टी hi है. और अगर आना हुआ तो मंजू को भी लेता आना . अब किसके पास रहने जाने वाला है इस बार तू?
‘ और कहाँ जायेगा भाभी ? मेरे साथ hi जायेगा और मेरे पास hi रहेगा . बाकि सब से मैं बात कर लुंगी . ‘ दिव्या मौसी ने कुर्सी पर बैठते हुए ये बात कही. उनके बगल में hi राधा और निधि दीदी भी आ कर बैठ गयी. निधि दीदी से मेरी नज़रें एक बार मिली , उनकी आँखों में अब भी उदासी थी पर मैं अभी कुछ देर पहले हुई अपनी गलती की वजह से शर्मिंदा था इस लिए मैंने अपनी नज़रें झुका ली.
गौरी : मंजू भी कह रही थी क अब से अमित उसके साथ रहेगा और बड़ी दीदी अलग से कह रही हैं. बोल रही थी क निधि का मन नहीं लगता है घर . अमित रहेगा तो काम से काम घर में उसका मन तो लग जायेगा .
दिव्या : मंजू से मैं बात कर लुंगी , अगर न मणि तो उसे hi कहूँगी क मेरे पास आ जाये . दीदी तो ऐसे hi ज़िद कर रही हैं. क्यों निधि तूने कहा था क्या दीदी से ??
दिव्या मौसी ने जब निधि दीदी से सवाल किया तो वो हड़बड़ा सी गयी. जैसे उन्हें नींद से जगाया हो .
निधि : हह हाँ ,, नहीं तो ,, मतलब ,,, जैसा आपको ठीक लगे . अमित की मर्ज़ी है वो अब हमारे घर आना चाहे या न .
निधि दीदी ने ये बात मेरी तरफ देख कर कही. उनका जवाब सुन कर मैंने उनकी तरफ देखा तो उनकी आँखों में उदासी मुझे शूल की तरह चुभ रही थी
राधा : वो तो आपके कहने की देर है फिर ये माँ की भी नहीं सुनने वाला . आखिर आप इसकी फवौरीते दीदी जो हो.
दिव्या : तू चुप कर , निधि बीटा अब तुझे अपना कण लगाने क लिए जमाई राजा की तलाश कर लेनी चाहिए . कब तक भाई से दिल लगाएगी?
निधि दीदी मौसी की बात सुन कर बस नज़रें झुका कर मायूस सी हो कर बैठ गयी. उनकी इस उदासी को मैं जनता था या दीपिका ममी जो परांठे लेकर किचन से आती हुई दिखी.
दीपिका : चलो पहले नाश्ता कर लो बातें बाद में , और रही बात जमाई राजा की तो मुझे पूरा यकीन है . भगवन ने इसके लिए जो भी लकड़ा चुना होगा वो लाखों में एक होगा . निधि , तुम भगवन पर भरोसा रखना , वही होगा जो तुम चाहोगी .
ममी की ये बात सुन कर मैं हैरान हुआ क वो सब जानती समझती हुई भी ऐसे कह रही हैं . दीपिका ममी ने मुझे देख कर एक स्माइल पास की और चली गयी . जबकि नीडबी दीदी ने फिर से मुझे देखा और इस बार उनके चेहरे पर पहले जैसे उदासी नहीं बल्कि उम्मीद थी .
जैसे तैसे बातों क साथ हमने नाश्ता किया और फिर दिव्या मौसी राधा का सामान मैंने कार में रखा . माँ बाबा ने दोनों को कुछ गिफ्ट दिए कुछ सामान और कुछ पैसे भी. मौसी मन कर रही थी पर बाबा कहाँ मैंने वाले थे. उधर मौसी माँ बाबा से बात कर रही थी इधर मैं सामान निधि दीदी की गाडी में रख रहा था . इस वक़्त यहाँ हम दोनों hi थे . मैं बैग रख कर वापिस अंदर जाने लगा तो दीदी ने मुझे आवाज़ दी.
नीडबी : अब मुझसे बात भी नहीं करोगे ? क्या इतनी बुरी बन गयी हूँ मैं?
अमित : ये आप क्या कह रही हैं? मैं भला क्यों नाराज़ होने लगा आप से? मुझे तो लगा आप नाराज़ हैं , इसी लिए तो रत आपने खाना भी नहीं खाया .
निधि : मैं नाराज़ नहीं हूँ. हाँ , दुखी ज़रूर हूँ. शायद मेरी किस्मत में अधूरे सपने hi लिखे हैं. एनीवे , बेस्ट ऑफ़ कुछ फॉर योर फ्यूचर. बस इतना hi कहूँगी की मुझसे कभी नाराज़ मत होना . थोड़ी सी जगह तो अपने दिल में मुझे दे hi सकते हो न . ज्यादा कुछ नहीं तो दोस्त समझ कर . मैं वडा करती हूँ तुम्हे परेशां नहीं करुँगी .
निधि दीदी की ऑंखें बात करते करते भर आयी थी. पर वो खुद पर काबू किये हुए थी और मुस्कुराने की कोशिश कर रही थी. उनको देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उन्हें अपनी बाँहों में भर लिया
अमित : ये आप कैसी बातें कर रही हैं दीदी , आप हमेशा मेरे दिल मेरी आत्मा में रहेंगी. मैं आपसे नाराज़ होने क सोच भी नहीं सकता और न hi आपको दुखी देख सकता हूँ . प्लीज आप ऐसे रोइये मत.
नीडबी : धत्त , रो खुद रहे हो और मुझे कह रहे हो. चल अब बस कर , मौसी आती होगी. और हाँ मैं तुमसे नाराज़ नहीं हूँ. बल्कि खुश हूँ क तुमने मुझसे सचाई पहले hi बता दी. इसमें तुम्हारी गलती तो है नहीं.
अमित : देखना दीदी आप को बहुत hi अच् राज कुमार सा लड़का मिलेगा जो आपको बहुत सारा प्यार देगा जिससे आप मुझे भूल जाएँगी.
निधि : नकली मुस्कान क साथ ) देखते हैं.
निधि ( मन में ) ऐसा कभी भी नहीं होगा अमित , मेरे दिल में तुम धड़कन बन कर समां चुके हो , जहाँ से अब सिर्फ मौत hi मुझे तुमसे जुड़ा कर सकती है.
अभी मैं कोई और बात करता इतने में दिव्या मौसी और राधा आ गए. उनके साथ बाबा और दीपिका ममी भी थे.
दिव्या : चलो चलो गाड़ी में बैठो , तुम दोनों कॉलेज भी जाना है फिर .
अमित : आप जाओ मौसी , मैं बाइक पर अत हूँ. वापिस भी तो आना है बाद में .
निधि : बैठ जाओ , मैं ले आउंगी न तुम्हे .
अमित : नहीं दीदी , मेरी वजह से आप परेशां होंगी .
विजय : हाँ निधि बीटा , तुम चिंता मत करो , ये कौन सा पहली बार जा रहा है.
राधा : माँ मैं भी अमित क साथ hi आ जाती हूँ बाइक पर. जाना तो कॉलेज hi है. इससे ये भी अकेला नहीं रहेगा .
दिव्या : हाँ , तुम ठीक कहती हो. ाचा तुम दोनों बाइक पर आओ और सीधा घर आना. और बाइक ज़रा ध्यान से चलना.
निधि दीदी दिव्या मौसी को साथ लिए चल दी और इधर मैंने भी बाइक निकल ली. मेरा बैग राधा ने अपनी गॉड में रखा और मेरी कमर में हाथ डाले पीछे बैठ गयी . फिर हम चल दिए कॉलेज की तरफ.
अमित : तुम्हे क्या ज़रूरत थी मेरे साथ आने की. आराम से गाड़ी में जाती.
राधा : ज़रूरत कैसे नहीं थी ? मैं तुम्हे अकेला नहीं छोड़ सकती . वैसे भी जाना तो साथ में hi था न कॉलेज .
राधा की बात का अब मैं क्या जवाब देता भला. कुछ देर हम खामोश रहे तो राधा इस बार बोली.
राधा : मैंने दीदी से बात की थी वो नाराज़ नहीं हैं तुमसे . कह रही थी क वो भगवन से नाराज़ हैं. अब भला इसमें भगवन कहाँ से आ गए. मुझे तो कुछ समझ में नहीं आया पर जो भी हो अब तुम्हे चिंता करने की ज़रूरत नहीं है.
अमित : हाँ अभी बात हुई थी मेरी उनसे. उनकी भगवन से नाराज़गी , दोनों की आपस की बात है . मुझे तो इतना पता है क दीदी मेरी वजह से दुखी हैं. चाहे वो मुझसे नाराज़ नहीं हैं पर उनके दुःख की वजह मैं हूँ.
राधा : उनकी ख़ुशी की वजह भी तुम hi हो. मैंने देखा है क वो तुम्हारे साथ कितनी खुश रहती हैं. अब अगर उन्हें खुश देखना चाहते हो तो वो करो जिनसे उन्हें ाचा लगे . देखना जब वो खुश होंगी तो तुम्हे भी ाचा लगेगा .
अब राधा को मैं क्या बताता क दीदी क्या चाहती हैं . जो वो चाहती हैं वो मेरे लिए कर पाना पॉसिबल hi नहीं है. ऐसे hi बातें करते हुए हम कॉलेज पहुँच गए . पार्किंग में बाइक लगा कर हम अंदर गए तो बहुत hi काम स्टूडेंट्स ए हुए थे . ऐसा लग रहा था जैसे छुट्टी हो . हमारी टीम का कोई भी अभी तक हमें नज़र नहीं आया था . हम चलते चलते कैंटीन की तरफ जाने लगे तो रीमा दौड़ती हुई हमारे पास आयी. सफ़ेद चूड़ीदार पजामी क साथ सफ़ेद सिल्की कमीज में खुले घुंघराले हलके भूरे बाल और वो ग्रे ऑंखें. मैं रीमा की खूबसूरती में खो सा गया . उसके चेहरे पर मुस्कान थी और मोतियों जैसे दांत चमक रहे थे . दिल तो किया क अभी रीमा को गले से लगा कर उसे ढेर सारा प्यार करूँ पर राधा की वजह से मजबूर था . रीमा भी मेरी हालत समझ रही थी , राधा को गले लगते हुए उसने मेरी आँखों में देख कर मुझे चिढ़ाते हुए मुँह बनाया. मनो कह रही हो क कुछ नहीं मिलने वाला .
राधा : कैसी हो रीमा ? तुम अकेली ? बाकि सब कहाँ हैं?
रीमा : मैं ठीक हूँ , तुम अपना सुनाओ. बाकि अभी तक तो कोई नहीं आया , मैं कब से बोर हो रही थी
राधा : तुम इतनी जल्दी कैसे आ गयी ?
रीमा : वो बुआ क साथ आ गयी थी . मैं उनके घर hi रह रही हूँ न . Hi , तुम कैसे हो ?
अमित : मैं भी ाचा हूँ. बुआ कैसी हैं?
रीमा : वो भी अछि हैं. चलो कैंटीन में बैठते हैं.
राधा : क्यों? क्लासेज में नहीं जाना ?
रीमा : फायदा तो है नहीं , आज पड़े नहीं होने वाली . बस हमारे पेपर हमें दिखाए जायेंगे . और हमारा पहला लेक्चर फ्री होने वाला है. क्यूंकि हमारे सर नहीं आये .
अमित : मुझे भी जाकर देख लेना चाहिए , कहीं फिर से फास न जॉन .
राधा : हाँ , तुम जाओ , कहीं वो मैडम तुम्हारे पीछे न पद जाये .
इतने में घंटी बजी और मैं भाग कर अपने बिलोक्सी में चला गया . मोहित अभी तक नज़र नहीं आया था . मैं क्लास में पहुंचा तो यहाँ भी स्टूडेंट्स बहुत hi काम थे . आधे से भी काम . खैर लेक्चर लेने कोई आया नहीं तो मैं वापिस चला गया . जाकर देखा तो मीनल तब तक आ चुकी थी और वो रीमा राधा क साथी बैठी थी. मुझे लगा मोहित भी आ गया होगा . क्यूंकि दोनों आते तो साथ hi थे .
अमित : कैसी हो मीनल ?
मीनल : मैं अछि हूँ तुम सुनाओ
अमित : मैं भी ाचा हूँ , तुम अकेली आयी हो ? मोहित नज़र नहीं आ रहा .
मीनल : हाँ आज मैं उसके साथ नहीं आयी. मेरा कजिन मुझे ड्राप करने आया था. वैसे तुम्हारा दोस्त भी अत hi होगा . मैंने देखा तो उसे गाडी में पीछे आते हुए .
मीनल की बात अभी ख़तम भी नहीं हुई थी क मोहित भी कैंटीन में आ गया. उसके चेहरे पर स्माइल थी और उसने गरम जोशी क साथ मुझसे हाथ मिलाया और गले मिला.
मोहित : कैसा है भाई?
अमित : मैं ठीक हूँ , तू सुना , घर पर सब कैसे हैं?
मोहित : सब ठीक हैं माँ और दीदी तुम्हे यद् कर रही थी.
मोहित बात तो मुझसे कर रहा था पर उसका ध्यान मीनल पर hi था . मीनल भी मोहित को देख रही थी. आखिर कितने दिनों बाद तो वो आमने सामने हुए थे.
मोहित : कैसी हो मीनल ?
मीनल : ठीक हूँ
मीनल ने संक्षिप्त सा जवाब दिया , उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे मनो वो बात करना न चाहती हो. मैं जनता था वो मोहित को तड़पना चाहती है जैसा क उसने कहा था. पर अब मुझे इस मामले से दूर रहने की हिदायत दी थी उसने . इस लिए मैं उन दोनों को इग्नोर कर रहा था .
‘ ोये तुम सब इधर बैठे हो , मैं क्लास में ढूंढ रही थी . चलो ाचा हुआ यहीं मिल गए वैसे भी लेक्चर तो फ्री है. और सुनाओ कैसे हो सब ? ोये मजनू , क्या हुआ ? लैला तेरी तरफ देख भी नहीं रही. कोई झगड़ा तो नहीं हो गया ?’
ये कल्पना थी जो आते hi सबको लपेट ते हुए राधा रीमा से गले मिलने क बाद मेरे साथ बैठ गयी.
कल्पना : बात क्या है ? दोनों में से कोई बोल क्यों नहीं रहा ? कोई सीरियस मटर है क्या ?
मीनल और मोहित को चुप देख कर कल्पना ने मुझसे वजह जननी चाही.
अमित : अब मैं क्या बोलूं , खुद hi पूछ लो.
मीनल : कोई ज़रूरत नहीं किसी को हमारे मटर में पड़ने की. अगर कोई इस बारे में बोलै या बीच बचाव करने की कोशिश की तो मैं उससे बात नहीं करुँगी . खुद को पता नहीं क्या समझ क रखा है , कुछ भी करोगे और कोई कुछ नहीं कहेगा ?
मोहित : मीनल सॉरी ……
मीनल : मैं तुमसे बात नहीं कर रही , मैं अपने दोस्तों से बात कर रही हूँ. जब मेरा गुस्सा ठंडा होगा मैं तब सोचूंगी तुमसे बात करनी है क नहीं. तब तक रुक अपना मुँह बंद रखो
मीनल ने गुस्से में ये सब कहा तो मोहित बेचारा सर झुका कर बैठ गया . मगर रीमा राधा और कल्पना तीनो मीनल क तेवर देख रही थी और इशारों में मुझसे पूछ रही थी क ये सब क्या है .
कल्पना : ोये ये सब चल क्या रहा है ? कोई हमें भी तो बताओ ? तुम दोनों लैला मजनू आखिर किस बात पर झगड़ रहे हो ?
मीनल : मैं उस बारे में बात नहीं करना चाहती . अगर तुम्हे ये सब बातें करनी है तो मैं चलती हूँ.
कल्पना : अरे अरे ,, बैठ मेरी जान , तू न गुस्से में अछि नहीं लगती. ज़रूर इसी ने कुछ गड़बड़ की होगी. ाचा है , इसे सजा मिलनी भी चाहिए . मेरी तरफ से भी दो लगा देना और अमित की तरफ से भी. दोस्त का एक्सीडेंट हो गया और ये इतना बिजी था क पता लेने भी न जा सका.
मीनल : एक्सीडेंट ? किसका ?
कल्पना : तुम्हे नहीं पता ? अमित को और अंकल को चोट लगी थी. और ये महाराज इतने बिजी थे क पहुँच hi नहीं पाए . हाँ वो बात अलग है क इनकी फॅमिली क बाकि सब मेंबर पहुँच गए थे .
मीनल : ओह , हाँ , मुझे बताया था अमित ने.
अमित : वो सब छोडो यार तुम भी क्या बातें ले के बैठ गयी. ाचा वो तुम्हारे कजिन की एडमिशन का क्या बना ? किस कॉलेज में एडमिशन ले रहा है ?
मैंने मीनल को शांत करने क लिए उसके कजिन की बात छेड़ ली . और इसका असर हुआ भी. उसके चेहरे क भाव पल में बदल गए
मीनल : हाँ वो मुझे ड्राप कर क कॉलेज देखने hi गया है अपने लिए. जो ाचा लगेगा उसमे चला जायेगा. तुम्हे तो पता hi है वो क्या कह रहा था .
कल्पना : अब ये कजिन बीच में कहाँ से आ गया ? और अमित को कैसे पता ? इसका मतलब ये मिल चूका है ? पर कहाँ ?
मीनल : वो अमित कल हमारे घर की तरफ से जा रहा था न तो वहीँ बहार hi मिल गया था . बस वहीँ ये मिला था माँ से और मेरे कजिन संजय से . तुम दोनों की तरह वो भी स्पोर्ट्समैन है . बॉक्सिंग का प्लेयर है.
कल्पना : ये तो अछि बात है. फिर उसे यहीं क्यों नहीं ले आयी?
मीनल : दरअसल वो नहीं चाहता क हम दोनों एक hi कॉलेज में पढ़ें.
कल्पना : वो क्यों भला ?
मीनल : यार वो दिल्ली से है और थोड़ा आज़ादी पसंद भी. एक hi कॉलेज में रहेंगे तो उसे दर है क मैं उसकी बातें घर पर बता दूंगी. बस इसी लिए दूसरे कॉलेज में जाना चाहता है.
कल्पना : है है है , यानि क कक्तव हो तुम उसके हिसाब से . बढ़िया है , वैसे तुम्हारा भी फायदा है. तुम दोनों भी खुल कर अपनी चोंच लड़ा सकते हो .
मोहित क चेहरे पर हलकी सी स्माइल आयी कल्पना की बात से पर मीनल ने उसे भी ठप्प कर दिया
मीनल : और कोई काम नहीं है क्या मुझे ? ये तो बड़े आदमी हैं , पैसे क डैम पर कुछ भी कर लेंगे . पर मुझे तो जवाब देना पड़ेगा न. आज से बस स्टडी पर hi ध्यान दूंगी मैं तो.
कल्पना : सच में ??? , , फिर तो बीटा आप भी अब अपनी किताबों पर थोड़ी मेहरबानी कर hi दीजिये . वर्ण चन्दर्कांता जी आपको वैसे भी बहार भेज hi देंगी .
ऐसे hi बातों में समय कह निकला पता hi न चला और अगले लेक्चर की बेल्ल बज गयी . ये लेक्चर मंजू बुआ का था इस लिए मैं कल्पना और मोहित क साथ लेक्चर अटेंड करने क लिए चल दिया. राधा रीमा और मीनल भी अपनी क्लास क लिए चल दिए.
‘ क्या सोच रहे हो ? जब से आये हो देख रही हूँ बुझे बुझे से हो. ये तबियत ख़राब का भी बहाना बना रहे थे न ? अब सच सच बताओ क्या बात है? ‘
मैं बीएड पर लेता निधि दीदी क बारे में सोच रहा था क दिव्या मौसी फिर से कमरे में आ गयी . मैंने उठने की कोशिश की तो मौसी ने मुझे उठने नहीं दिया और खुद मेरे सर की तरफ बीएड पर बैठ गयी
दिव्या : लेता रह , उठने की ज़रूरत नहीं . अब बता. क्या बात है ?
अमित : कुछ नहीं मौसी .
दिव्या : देख , एक hi बात बार बार पूछने की मुझे आदत नहीं है . सीधे सीधे बताता है या नहीं ?
दिव्या मौसी ने हल्का गुस्सा दिखते हुए मुझसे फिर से पूछा तो मुझे लगा उन्हें कुछ न कुछ तो कहना hi पड़ेगा वर्ण वो ऐसे मानेंगी नहीं
अमित : वो मौसी आज ,,,,,, माँ की बहुत यद् आ रही थी. मैंने तो उन्हें देखा भी नहीं. फिर भी दिल है क उन्हें देखना चाहता है जबकि वो वापिस तो आ नहीं सकती .
मैंने जान बुझ कर माँ क बारे में बात कर दी क्यूंकि मैं जनता था इसके बाद मौसी और कोई सवाल पूछने नहीं वाली. पर मुझसे अनजाने में गलती हो गयी. क्यूंकि मेरी इतनी सी बात पर hi दिव्या मौसी की ऑंखें भर आयी.
दिव्या : नाम आँखों से ) मैं नहीं हूँ क्या ???? मैं भी तो तेरी माँ हूँ और मुझमे दामिनी में फरक hi क्या है??? क्या मुझमे तुझे दामिनी नज़र नहीं आती??? ख़बरदार जो कभी ऐसा दोबारा सोचा क तेरी माँ नहीं है..,,, वर्ण कभी बात नहीं करुँगी दोबारा तुझसे ,,,, एक तो पहले hi इतने साल मैं तड़पती रही हूँ तुझे दूर कर क और अब तू ऐसी दिल दुखने वाली बातें कर रहा है.
दिव्या मौसी का गाला भर आया था और उनकी आँखों से आंसू बह निकले. उनकी बातों में मेरे लिए जो प्यार था उससे मेरा भी मन भर आया और मैंने उठके उन्हें गले लगा लिया. बीएड पर बैठे बैठे hi हूँ एक दूसरे क गले लग गए. हालाँकि इस वक़्त ये प्यार माँ बेटे का प्यार था. मौसी मेरे गले लग कर आंसू बहा रही थी और मैं उन्हें रोक रहा था.
अमित : माफ़ कर दो मौसी ,,, दोबारा कभी ऐसा सोचूंगा भी नहीं. मैं भी कितना पागल हूँ , मेरी माँ तो मेरे सामने साक्षात् है और मैं फिर भी उसे परछाइयों में ढूंढ रहा हूँ. आप और में जब कोई फरक था hi नहीं तो आप hi तो मेरी माँ हुई न . अब आप चुप हो जाइये वर्ण मैं भी आपसे बात नहीं करूँगा .
दिव्या : तो पहले ऐसी बातें करता hi क्यों है. चल आराम से लेट जा.
मौसी ने प्यार से थपकी देते हुए मुझे लिटा दिया और मेरा सर अपनी गॉड में रख कर थपकी देने लगी. तभी उनकी नज़र दरवाज़े पर गयी और उनके बोलते hi मैंने भी दरवाज़े की तरफ देखा जहाँ दीपिका ममी कड़ी थी.
दिव्या : अरे दीपिका , तू वहां कड़ी क्या क्र रही है?
दीपिका : माँ बेटे का प्यार देख रही थी. सोचा बीच में डिस्टर्ब करना ठीक नहीं .
दिव्या : चल आजा अंदर , अब अपने बेटे को प्यार भी न करूँ मैं? तू इस वक़्त यहाँ क्या कर रही है ? तुझे अपने बेटे को प्यार नहीं करना ?
दीपिका : मैं तो देखने आयी थी क अमित को दूध मिल गया क नहीं. पता होता आप यहां हैं तो सोचने की ज़रूरत hi नहीं थी. आखिर माँ अपने बचे को दूध तो पिलाएगी hi.
दीपिका ममी ने ये बात एक शरारती मुस्कान क साथ मौसी को देखते हुए कही थी और उनकी डबल मीनिंग बात सुन कर दिव्या मौसी मुश्किल से खुद को रोक पायी शर्माने से
दिव्या : हाँ हाँ , मेरा बीटा है मैं देख लुंगी तू अपने बेटे की फ़िक्र कर . उसे दूध पीला .
दीपिका : मैं तो अपने बेटे को दूध पीला hi दूंगी आप भी ज़रा अपने बेटे को ताज़ा दूध पीला दीजिये .
इस बार तो दिव्या मौसी की बोलती hi बंद हो गयी और वो हकलाने hi लग गयी.
दिव्या : हह ,, है,, हाँ ,, हाँ मम ,, मैं पीला दूंगी. वो गिलास में रखा है . जा तू अपने बेटे को पीला ताज़ा दूध. अब जा जाकर उसे संभल , कमलेश भी तेरा इंतज़ार कर रहा होगा
दीपिका
दिव्या : ये तू क्या बात कर रही है. वो क्यों परेशां होगा ?
दीपिका : अब मुझे क्या पता, ाचा अब मैं चलती हूँ सुबह बात करुँगी .
दीपिका ममी ने आखिरी बात भी मुझे देख कर कही जैसे मुझे कह रही हो क सुबह मुझसे पूछेंगी मेरी परेशानी क्या है. बातों बातों में hi वो बता गयी क वो यहाँ मेरे लिए hi आयु थी और उन्हें मेरी कितनी परवाह है. ये बात तो मैं अचे से जनता था क वो मेरी सबसे ज्यादा परवाह करती हैं. और मुझे दुखी देख कर उनको भी चैन कहाँ होगा.
दिव्या : पता नहीं क्या क्या बोले जा रही थी , ये भी न ,, अभी तक बची hi है. जैसी भी है इस घर की रौनक यही तो है . चल उठ दूध पि ले वर्ण भूल जायेगा . फिर वो कहेगी क मैंने तुझे दूध नहीं पिलाया.
मौसी ने ये बात कह तो दी पर फिर खुद hi शर्मा गयी. मैंने उठ कर दूध का गिलास पकड़ा और एक पल में ख़तम कर क रख दिया . फिर मैं वापिस लेट गया और मौसी मेरा सर गॉड में रखे सहलाती रही. मौसी की गॉड में सच में बहुत सुकून मिल रहा था और पता नहीं कब मेरी आंख लग गयी .
उधर राधा निधि क कमरे में गयी तो दरवाज़ा अंदर से लॉक था . 2 बार खटकने पर निधि की धीमी मगर भरी गले से आवाज़ आयी.
निधि : प्लीज मेरी तबियत ठीक नहीं है मुझे रेस्ट करने दो.
राधा : दीदी मैं हूँ , प्लीज एक बार दरवाज़ा खोलिये .
निधि : राधा , प्लीज मैं सुबह बात करुँगी . अभी तुम जाओ.
राधा : दीदी वो मुझे अंदर से कुछ लेना है . प्लीज दरवाज़ा खोलिये .
कुछ पलों बाद दरवाज़ा खुला , निधि दरवाज़े क पीछे hi खुद को छिपाये थी बस ज़रा सा राधा को देखा और उसे अंदर आने क लिए जगह देकर पीछे मुद गयी. पर इतने में hi राधा ने निधि की आंसुओं से भरी आँखें देख ली थी. गलों पर नमकीन पानी की लकीरे बन गयी थी. निधि ने खुद को छुपाने की कोशिश तो की थी पर राधा ने उसके दर्द को देख लिया था . निधि राधा की तरफ पीठ कर क बीएड की तरफ बड़ी . उसने सोचा राधा अपना सामान लेकर चली जाएगी पर राधा ने दरवाज़ा फिर से बंद करते हुए चिटकनी लगा दी . चिरकानी की आवाज़ सुनते hi निधि ने पीछे मुद कर देखा तो राधा उसके करीब आ रही थी.
निधि : तुम तो सामान लेने आयी थी न , अब लो अपना सामान और जाओ.
राधा : मैं जानती हूँ दीदी आप अमित से नाराज़ हैं, मैं वजह नहीं पूछूँगी अगर बताना न चाहें. मगर इतना ज़रूर कहूँगी दीदी क आप जितना दुखी हैं उससे भी ज्यादा वो खुद दुखी है. आप तो जानती hi हैं वो सबसे ज्यादा आप hi से प्यार करता है . जितनी इज़्ज़त और परवाह वो आपकी करता है उतनी वो किसी की नहीं करता . पता नहीं किस वजह से उसने आप दिल दुखाया है पर यकीन मानिये जब तक आप दुखी रहेंगी तब तक वो भी खुश नहीं हो पायेगा. मैं गयी थी उससे बात करने , उसने मुझे कुछ नहीं बताया पर मैंने उसकी आँखों में दर्द देखा है. वो कैसा है ये आप भी अचे से जानती हैं. वो कभी अपना दर्द किसी से नहीं बाँट ता मगर दूसरों को खुशियां देने क लिए खुद अपनी झोली में दुःख समेत लेता है. उसकी तरफ से मैं आपसे माफ़ी मांगती हूँ. आप जो सजा देने चाहें मुझे दे दें. पर उससे नाराज़ मत होना. अगर आप उससे नाराज़ हो गयी तो फिर वो किसी क साथ hi खुश नहीं रह पायेगा और अंदर hi अंदर घुट ता रहेगा . प्लीज उसे माफ़ कर दीजिये .
राधा की बातें निधि ख़ामोशी से सुनती रही. निधि को तो अमित से नहीं बल्कि अपनी किस्मत से नाराज़गी थी और ऊपर वाले से जिसने पहले उसके मन में अमित क लिए वो भावनाएं पैदा की ऐसी घटना करवाई क जिससे वो अमित को पति मन बैठी और अब अमित उसका नहीं हो सकता ये बात उससे बर्दाश्त नहीं हो रही थी. ज़िन्दगी में पहली बार उसने किसी को चाहा था बल्कि उसे अपनी ज़िन्दगी hi मन लिया था और अब अपने मन में संजोये सपने मिटा पाना उसके बस में नहीं था . अपने आप पर काबू पति निधि राधा क मुरझाये चेहरे को अपने हाथों में लेकर उसे दुलार करती बोली
निधि : तू कब से इतनी बड़ी हो गयी जो इतनी परवाह करने लग गयी उसकी ? सब ऐसे hi तुझे माँ की गुड़िया कहते हैं. तू तो सबसे समझदार है. मैं उससे नाराज़ कैसे हो सकती हूँ भला , वो तो मुझे कारन से भी पहले प्यारा है. हाँ शायद उसकी ज़िन्दगी में बहुत लोग हैं मुझसे भी पहले . तू चिंता मत कर मैं सुबह उससे बात कर लुंगी. आ इधर मेरे साथ hi सो जा .
राधा : आप सच में उससे नाराज़ नहीं है न ?
निधि : नहीं
राधा : अछि बात है , मैं आपके लिए खाना लेकर आती हूँ. ऐसे भूखे पेट नींद थोड़ा आएगी ?
निधि : नहीं मुझे भूख नहीं है , सुन तो …..
राधा निधि की बात सुने बगैर कमरे से जल्दी से भाग गयी खाना लेने. क्यूंकि उसे पता था निधि फिर से मन करेगी इस लिए उसने बात hi नहीं सुनी. और अब उसे इस बात की ख़ुशी भी थी क निधि अमित से नाराज़ नहीं है. ये बात वो अमित को बताने क लिए गयी भी पर अमित उसकी माँ की गॉड में आराम से सो रहा था इस लिए उसने आवाज़ भी नहीं दी और चुपके से निकल ली. खैर निधि ने न न करते हुए भी राधा क हाथ से एक रोटी खा hi ली वर्ण राधा भी भूखे पेट सोने का कह रही थी. निधि का मन तो बेचैन था पर राधा क मासूम चेहरे और भोली बातों ने उसे कुछ हद तक हल्का कर दिया था.
सुबह मेरी आंख कुछ देर से खुली. रत मौसी ने जो माँ क प्यार का एहसास दिया था उसने मुझे हल्का कर दिया था . मैंने जब उठने की कोशिश की तो देखा मैं करवट क बल आधा मौसी क ऊपर था और उनका हाथ मेरे सर पर था . मैंने अपना सर थोड़ा सा उठाया तो मेरी ऑंखें फटी की फटी रह गयी. मेरा सर असल में दिव्या मौसी क स्तनों क ऊपर था. मौसी की सदी का पल्लू एक साइड में पड़ा था . ब्लाउज क ऊपर क दो हुक खुले हुए थे और उनके गोर स्तन आधे से ज्यादा नज़र आ रहे थे . मुझे यकीन नहीं हो रहा था क अभी मैं मौसी की नंगी छाती पर सर रख कर सो रहा था. शायद नींद में मौसी का पल्लू ढ़ालकंगया होगा पर ब्लाउज क हुक कैसे खुल गए ? कहीं नींद में ये मेरे से hi तो नहीं हो गया . मैं ये सोच कर दर गया और जल्दी से मौसी से दूर हो गया. फिर मेरी नज़र मौसी क नंगे चिकने पेट पर गयी जहाँ चर्बी नाम मात्रा भी नहीं थी . मौसी की साडी अस्त व्यस्त हो कर घुटनो तक ऊपर उठी हुई थी जिससे उनकी नंगी गोरी पिंडलियाँ नुमाया हो रही थी. ये सब देख कर मेरे खून में गर्मी आने लगी. पर मैंने खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश की. मौसी का चेहरा देखा तो वो सुकून से सो रही थी , उनके चेहरे पर संतुष्टि क भाव थे शायद कोई ाचा सपना देख रही होंगी. उनके चेहरे पर नज़र पड़ते hi मुझे एहसास हुआ क मैं कितना गलत सोच रहा था. वो मेरी माँ जैसे दिखती hi नहीं थी बल्कि माँ hi तो थी. उसी की तरह वो मुझे चाहती थी प्यार करती थी . मैंने मौसी की साडी का पल्लू जो एक तरफ गिरा था उसे वापिस मौसी क ऊपर दाल दिया और झुक कर उनके माथे को चूम लिया . फिर मैं उठा और बाथरूम से फ्रेश हो कर अखाड़े जाने की सोची तो टाइम देखने पर पता चला मैं लेट हो चूका था. अगर अखाड़े जाता तो वापिस आने में देर हो जाती और आज तो कॉलेज भी जाना था. इस लिए छत पर हो एक्सरसाइज करने का सोच कर जब मैं कमरे से बहार निकल कर खुली छत की तरफ गया तो कुछ hi पलों में दीपिका ममी मेरे पास आ गयी.
दीपिका : आज देर से उठे ? मैं कब से देख रही थी क अब निकलते हो कमरे से .
अमित : तो आप मेरा इंतज़ार कर रही थी ? कब से ?
दीपिका : और किसका इंतज़ार करुँगी ? तेरे जाने का टाइम मालूम है मुझे , तब से hi नज़र टिकाये बैठी थी क कब बहार आते हो. आज इतनी देर कैसे सोते रहे ? मौसी क पल्लू में नींद अछि आयी या सोये hi नहीं ?
अमित : क्या आप भी सुबह सुबह , आप को इतनी सुबह उठने की क्या ज़रूरत थी ? आराम से अपने टाइम पर hi उठती आप.
दीपिका : नींद आती तो उठती न , मैं तो साडी रत तेरे बारे ने hi सोचती रही. अब बता क्या बात हो गयी हो तू इतना दुखी था? ज़रूर ये बात निधि से जुडी हुई है . इसी लिए वो रत खाना नहीं खायी पर भला हो तेरी राधा का जो उसके लिए खाना ले गयी थी बाद में कुछ न कुछ खिला hi दिया होगा
दीपिका ममी क मुँह से ‘ तेरी राधा ‘ सुन कर दिल में अजीब से हलचल हुई और एक स्माइल अपने आप मेरे चेहरे पर आ गयी
अमित : वो सबका ध्यान रखती है. मेरे पास भी आयी थी वो कल रत . सच कहूं तो उससे बात कर क सुकून सा मिला था मुझे .
दीपिक : हम्म्म्म ,, वो तो मिलेगा hi. आखिर वो तेरी इतनी परवाह जो करती है. अब बात बता क्या है मुझे तो कल रत से चैन hi नहीं . जब पूरी बात सुन लुंगी तो चैन आएगा. इसी लिए रत मैं आयी भी थी पर दीदी की वजह से वापिस चली गयी .
अमित : आप पता नहीं क्या सोचेंगी पर यकीन मानिये मुझे इस मामले में कुछ भी नहीं पता था .
दीपिका : अब बताओ भी क्यों गोल गोल घुमा रहे हो
फिर मैंने निधि दीदी क साथ परसों रत क्या क्या हुआ और कल क्या बात हुई वो सब बता दिया . ये साडी बातें सुन कर दीपिका ममी अपने सर पर हाथ रख वहीँ बैठ गयी.
दीपिका : हे भगवन ,, ये सब क्या हो गया . तूने उसे समझाया नहीं क वो सब एक एक्सीडेंट था ? तूने जान बुझ कर थोड़ा hi उसकी मांग भरी और ये मंदिर वाली घटना भी तो एक्सीडेंट hi थी. इन सब बातों को ऐसे कैसे वो दिल पर ले गयी? आखिर भाई होने का फ़र्ज़ hi तो निभाया था तूने .
कुछ देर ममी खामोश रही और सोचने लगी. मैं उनके पास खड़ा उन्हें hi देख रहा था क वो मुझे कोई हल बताएं.
दीपिका : अब मुझे क्यों देख रहे हो ? खुद hi मुसीबतें मोल लेते हो तो हल भी खुद hi करो . पता नहीं और कितनी सौतने देखनी पड़ेंगी . तू कहीं रुकेगा भी ???
अमित : अब इसमें मेरी क्या गलती है ? मैंने तो कुछ भी जानबूझ कर नहीं किया था.
दीपिका : तेरी न किस्मत में hi ये सब झमेले लिख कर भेजे हैं भगवन ने इसी लिए एक जाता है तो दूसरा तैयार. निधि जैसी समझदार लड़की कोई भी फैसला अचानक नहीं ले सकती और दीदी की तरह वो भगवन को बहुत मानती है. जो कुछ एक्सिडेंटली हुआ उसने उसे भगवन की मर्ज़ी मान कर दिल से स्वीकार कर लिया और अब वो पीछे हटने वाली नहीं. अगर उसके साथ ज़बरदस्ती की गयी तो वो टूट जाएगी. वो चाहे विरोध न भी करे पर उसके बाद वो जीने की ीचा बी छोड़ देगी. वो बहुत भावुक है. इतनी देर तक वो अगर खामोश रही है तो ज़ाहिर है उसके दिल में तेरा प्यार बहुत गहरा बस चूका है. और तूने उसे सीधा सीधा इंकार कर दिया ??? एक बार भी नहीं सोचा उस मासूम क दिल पर क्या असर होगा ? अगर तुम ये सोचते हो क इस सब क बाद वो तुम्हे भूल जाएगी तो ये तुम्हारी गलत फेहमी है. हाँ तुम्हारी बातों से शायद वो अंदर hi अंदर इतना टूट जाये क हम इसे खो बैठें .
अमित : नहीं प्लीज ऐसा मत कहिये .
दीपिका : अब मैं खून या न कहूं पर तुमने जो किया है उसके बाद तो यही सब होने वाला है . निधि को समझाना आसान नहीं होगा . वो कोई दूध पीती बची नहीं और न hi नासमझ है . इस लिए बेहतर यही होगा क या तो उसकी बात मणि जाये या फिर भगवन क आगे हाथ जोड़ो क वो hi कोई हल निकले .
अमित : पर ऐसा किसे हो सकता है? आप जानती हैं ये बात कोई भी नहीं मानेगा और फिर रीमा का क्या होगा .
दीपिका : वैसे अगर देखा जाये तो रीमा क साथ भी तो तुम्हारा यही रिश्ता है न , तो उसके साथ भी शादी कोई कैसे मानेगा ?
अमित : रीमा क होते मैं निधि दीदी क साथ रिश्ता जोड़ूँ ??? आप होश में तो हैं?
दीपिका : तो क्या हुआ ? यहाँ तो राजे महाराजे 10 -10 शादियां करते रहे हैं . तुम्हारी तो 3-4 hi होनी हैं.
अमित : 3-4 ?
दीपिका : हाँ , एक रीमा , एक निधि और एक मैं . और इसके इलावा भी तुम्हारी कोई न कोई दीवानी आ hi जाएगी.
अमित : मज़ाक मत करिये आप , मेरा यहाँ सोच सोच कर सर फटा जा रहा है और आप मज़ाक कर रही हैं.
दीपिका : तुम्हारे सोचने से कुछ हो जायेगा क्या ? कोई और होता तो मैंने कुछ सोचती हल निकलने का पर निधि क मामले में मैं कुछ नहीं कर सकती. वो पहले hi इतनी समझदार है क उसे समझने की ज़रूरत नहीं. वैसे भी वो तुम्हे दिल से पति मान बैठी है और तुम्हे पूजती है तो वो कैसे पीछे हैट जाएगी अब ? मीरा भी तो मोहन की दीवानी थी क्या वो पीछे हैट पायी? चाहे साडी उम्र लोगों ने अपनी ने उसे दुत्कारा पर आखिर में उसने अपने सच्चे प्रेम से श्याम को प् hi लिया . निधि भी तुम्हारी मीरा बन चुकी है. अब ये तुम पर है क तुम कब उसे अपनाते हो.
दीपिका ममी की बातें सुन कर मुझे निधि दीदी क बारे में और भी ज्यादा बुरा लगने लगा था क मैं अनजाने में उनके दुःख की वजह बन बैठा हूँ .
दीपिका : अब ज्यादा सोचो मत , अगर निधि का सोचना सही है क ये सब भगवन की मर्ज़ी है तो हल भी वो hi निकालेंगे . इसके इलावा और क्या क्या हुआ इन 2 दिनों में मुझे वो सब बताओ. कुछ न कुछ तो और भी किया होगा तुमने. बिना कोई काण्ड किये तो तुम रहते नहीं .
अमित : पहले आप वडा करिये क नाराज़ नहीं होंगी
दीपिका : तो काण्ड कर hi दिया , नाराज़ तो मैं वैसे भी नहीं हो सकती अपने आरव क पापा क साथ. ाचा चलो वडा अब सब बताओ .
फिर मैंने करिश्मा दीदी क साथ कैसे वो सब हुआ और फिर रॉय वाला किस्सा और मीनल की बात भी बता दी .
दीपिक : तो आखिर बेटी भी माँ क नक़्शे कदम पर चल कर पहुँच hi गयी तुम्हारे बिस्तर तक. पता तो मुझे पहले hi था क ये होगा . जैसे वो तुम्हे देखती थी और वैसे भी तुमने उसकी ज़िन्दगी को नरक से निकला है. कोई भी लड़की होती तो ऐसा बहुत पहले हो चूका होता. खैर , ये रॉय क मामले में तुमने ाचा किया पर ये मीनल की शरत क्या है ? कहीं वो भी तो ….. ज़रा संभल के रहना , मुझे लगता है अब वो तुम्हारे सामने यही शरत रखने वाली है क तुम उसके साथ करो.
अमित : ये आप क्या कह रही हैं ? वो भला ऐसा क्यों करेगी ? वो तो मोहित से प्यार करती है.
दीपिका : मोहित ने क्या किया उसके साथ ???? कोई भी लड़की ये बर्दाश्त नहीं कर सकती क जिसे वो दिलो जान से चाहती है वो किसी और क साथ मज़े करे . और तुमने तो उसे बर्बाद होने से बचाया है तो इस लिए वो तुम्हारा एहसान भी तो चुकाना चाहेगी . तुम पर वो भरोसा कर सकती है और वैसे भी मोहित को लेके उसके मन में जो गुस्सा होगा वो ऐसे hi शांत होगा वर्ण वो मोहित क साथ पहले की तरह नहीं रह पायेगी .
अमित : तो मुझे क्या करना चाहिए? अगर मोहित को ये सब पता चला तो ….
दीपिका : अब सब मैं hi बताऊँ क्या ??? मोहित को न तुम बताने वाले हो न मीनल बताएगी. तो दर कैसा? हाँ उसे एक बार पर hi रोक देना वर्ण मुश्किल हो सकती है. हालाँकि वो रुकने वाली नहीं एक बार तुम्हारा लेने क बाद . तुम्हारे पास चीज़ hi ऐसी है.
अमित : एक बात पूछूं ?
दीपिका : अब पूछ कर सवाल क्यों कर रहे हो? मुझ पर तुम्हारा हक़ नहीं है क्या ?
अमित : आपको बुरा नहीं लगता जब मैं किसी और क साथ …..
दीपिका : नहीं ,, क्यूंकि मैं जानती हूँ क ऐसा नहीं हो सकता क तुम हमेशा मेरे पास रहो. वैसे भी तुमने जितने भी सम्बन्ध अब तक बनाये हैं वो सब दूसरों की ख़ुशी क लिए थे न की अपनी ीचा पूर्ती क लिए न हवस. अगर तुम कहीं गलत होते तो मैं ज़रूर तुम्हे रोकती . पर तुम गलत नहीं हो. तुम तो सुने दिलों में प्यार की बरसात कर रहे हो . उनकी बंजर ज़मीनो पर हल चला रहे हो. अब तुम्हारा हल hi इतना बड़ा है क एक बार जिसे जोट लेता है वो दुबारा खुद hi चली आती है . हे हे हे
अमित : आप फिर शुरू हो गयी .
दीपिका : अब शर्मा क्यों रहे हो , मैंने कुछ गलत तो नहीं कहा . ाचा अब मैं चलती हूँ . तुम भी इन सब से निपट कर तैयार हो जाओ. आज तुम्हे कॉलेज भी तो जाना है. मंजू कह कर गयी थी क यद् से तुम्हे कॉलेज भिजवा दूँ. तुम्हारा रिजल्ट भी आज से मिलना शुरू हो जायेगा.
दीपिका ममी जल्दी से एक छोटी सी किश मेरे होंठों पर करने क बाद नीचे चली गयी और मैं हलकी दुलकी एक्सरसाइज करने क बाद अपने कमरे में चला गया . बाकि सब भी उठ चुके थे और मौसी भी मेरे सामने hi अपने कमरे में चली गयी थी तैयार होने . मैं जल्दी से तैयार हो कर नीचे जाने लगा तो मुझे निधि दीदी का ख्याल आया. मुझे लगा क मुझे उनसे एक बार बात करनी चाहिए . इस लिए मैं उनके कमरे में चला गया . मैं बिना दरवाज़ा खटकाये दरवाज़ा धकेल कर अंदर घुस गया पर सामने का नज़ारा देख मैं उलटे पाऊँ वापिस हो गया . क्यूंकि सामने निधि दीदी पजामी पहने हुए कड़ी अपनी ब्रा की हुक लगा रही थी. उनका चेहरा दूसरी तरफ था इस लिए मैंने उन्हें पीछे से hi देखा पर मेरी धड़कने एक बार फिर से बढ़ गयी. इससे पहले क दीदी कुछ बोलती या कहती मौज भाग कर नीचे आ गया . कहाँ मैं उनसे बात करने गया था और अब मुझसे अनजाने में एक और गलती हो गयी . निधि दीदी मुझसे नाराज़ होंगी . यही सोच सोच मैं चुपचाप बैठा था . बाबा और माँ भी मेरे करीब थे और कॉलेज जाने क बारे में बात कर रहे थे पर मैं हूँ हाँ में hi जवाब दे रहा था . दीपिका ममी किचन में थी जबकि राधा और दिव्या मौसी अभी नीचे नहीं आयी थी .
गौरी : तेरा ध्यान किधर है ? मैं कुछ पूछ रही हूँ और तू हूँ हाँ किये जा रहा है ?
अमित : हाँ ,,, वो ,,, कुछ नहीं माँ वो मैं ,,, कॉलेज क बारे में सोच रहा था . आप क्या पूछ रही थी?
गौरी : मैं पूछ रही हूँ क शाम को वापिस तो आ जायेगा न ? वैसे भी आज शनिवार है कल तो छुट्टी hi है. और अगर आना हुआ तो मंजू को भी लेता आना . अब किसके पास रहने जाने वाला है इस बार तू?
‘ और कहाँ जायेगा भाभी ? मेरे साथ hi जायेगा और मेरे पास hi रहेगा . बाकि सब से मैं बात कर लुंगी . ‘ दिव्या मौसी ने कुर्सी पर बैठते हुए ये बात कही. उनके बगल में hi राधा और निधि दीदी भी आ कर बैठ गयी. निधि दीदी से मेरी नज़रें एक बार मिली , उनकी आँखों में अब भी उदासी थी पर मैं अभी कुछ देर पहले हुई अपनी गलती की वजह से शर्मिंदा था इस लिए मैंने अपनी नज़रें झुका ली.
गौरी : मंजू भी कह रही थी क अब से अमित उसके साथ रहेगा और बड़ी दीदी अलग से कह रही हैं. बोल रही थी क निधि का मन नहीं लगता है घर . अमित रहेगा तो काम से काम घर में उसका मन तो लग जायेगा .
दिव्या : मंजू से मैं बात कर लुंगी , अगर न मणि तो उसे hi कहूँगी क मेरे पास आ जाये . दीदी तो ऐसे hi ज़िद कर रही हैं. क्यों निधि तूने कहा था क्या दीदी से ??
दिव्या मौसी ने जब निधि दीदी से सवाल किया तो वो हड़बड़ा सी गयी. जैसे उन्हें नींद से जगाया हो .
निधि : हह हाँ ,, नहीं तो ,, मतलब ,,, जैसा आपको ठीक लगे . अमित की मर्ज़ी है वो अब हमारे घर आना चाहे या न .
निधि दीदी ने ये बात मेरी तरफ देख कर कही. उनका जवाब सुन कर मैंने उनकी तरफ देखा तो उनकी आँखों में उदासी मुझे शूल की तरह चुभ रही थी
राधा : वो तो आपके कहने की देर है फिर ये माँ की भी नहीं सुनने वाला . आखिर आप इसकी फवौरीते दीदी जो हो.
दिव्या : तू चुप कर , निधि बीटा अब तुझे अपना कण लगाने क लिए जमाई राजा की तलाश कर लेनी चाहिए . कब तक भाई से दिल लगाएगी?
निधि दीदी मौसी की बात सुन कर बस नज़रें झुका कर मायूस सी हो कर बैठ गयी. उनकी इस उदासी को मैं जनता था या दीपिका ममी जो परांठे लेकर किचन से आती हुई दिखी.
दीपिका : चलो पहले नाश्ता कर लो बातें बाद में , और रही बात जमाई राजा की तो मुझे पूरा यकीन है . भगवन ने इसके लिए जो भी लकड़ा चुना होगा वो लाखों में एक होगा . निधि , तुम भगवन पर भरोसा रखना , वही होगा जो तुम चाहोगी .
ममी की ये बात सुन कर मैं हैरान हुआ क वो सब जानती समझती हुई भी ऐसे कह रही हैं . दीपिका ममी ने मुझे देख कर एक स्माइल पास की और चली गयी . जबकि नीडबी दीदी ने फिर से मुझे देखा और इस बार उनके चेहरे पर पहले जैसे उदासी नहीं बल्कि उम्मीद थी .
जैसे तैसे बातों क साथ हमने नाश्ता किया और फिर दिव्या मौसी राधा का सामान मैंने कार में रखा . माँ बाबा ने दोनों को कुछ गिफ्ट दिए कुछ सामान और कुछ पैसे भी. मौसी मन कर रही थी पर बाबा कहाँ मैंने वाले थे. उधर मौसी माँ बाबा से बात कर रही थी इधर मैं सामान निधि दीदी की गाडी में रख रहा था . इस वक़्त यहाँ हम दोनों hi थे . मैं बैग रख कर वापिस अंदर जाने लगा तो दीदी ने मुझे आवाज़ दी.
नीडबी : अब मुझसे बात भी नहीं करोगे ? क्या इतनी बुरी बन गयी हूँ मैं?
अमित : ये आप क्या कह रही हैं? मैं भला क्यों नाराज़ होने लगा आप से? मुझे तो लगा आप नाराज़ हैं , इसी लिए तो रत आपने खाना भी नहीं खाया .
निधि : मैं नाराज़ नहीं हूँ. हाँ , दुखी ज़रूर हूँ. शायद मेरी किस्मत में अधूरे सपने hi लिखे हैं. एनीवे , बेस्ट ऑफ़ कुछ फॉर योर फ्यूचर. बस इतना hi कहूँगी की मुझसे कभी नाराज़ मत होना . थोड़ी सी जगह तो अपने दिल में मुझे दे hi सकते हो न . ज्यादा कुछ नहीं तो दोस्त समझ कर . मैं वडा करती हूँ तुम्हे परेशां नहीं करुँगी .
निधि दीदी की ऑंखें बात करते करते भर आयी थी. पर वो खुद पर काबू किये हुए थी और मुस्कुराने की कोशिश कर रही थी. उनको देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उन्हें अपनी बाँहों में भर लिया
अमित : ये आप कैसी बातें कर रही हैं दीदी , आप हमेशा मेरे दिल मेरी आत्मा में रहेंगी. मैं आपसे नाराज़ होने क सोच भी नहीं सकता और न hi आपको दुखी देख सकता हूँ . प्लीज आप ऐसे रोइये मत.
नीडबी : धत्त , रो खुद रहे हो और मुझे कह रहे हो. चल अब बस कर , मौसी आती होगी. और हाँ मैं तुमसे नाराज़ नहीं हूँ. बल्कि खुश हूँ क तुमने मुझसे सचाई पहले hi बता दी. इसमें तुम्हारी गलती तो है नहीं.
अमित : देखना दीदी आप को बहुत hi अच् राज कुमार सा लड़का मिलेगा जो आपको बहुत सारा प्यार देगा जिससे आप मुझे भूल जाएँगी.
निधि : नकली मुस्कान क साथ ) देखते हैं.
निधि ( मन में ) ऐसा कभी भी नहीं होगा अमित , मेरे दिल में तुम धड़कन बन कर समां चुके हो , जहाँ से अब सिर्फ मौत hi मुझे तुमसे जुड़ा कर सकती है.
अभी मैं कोई और बात करता इतने में दिव्या मौसी और राधा आ गए. उनके साथ बाबा और दीपिका ममी भी थे.
दिव्या : चलो चलो गाड़ी में बैठो , तुम दोनों कॉलेज भी जाना है फिर .
अमित : आप जाओ मौसी , मैं बाइक पर अत हूँ. वापिस भी तो आना है बाद में .
निधि : बैठ जाओ , मैं ले आउंगी न तुम्हे .
अमित : नहीं दीदी , मेरी वजह से आप परेशां होंगी .
विजय : हाँ निधि बीटा , तुम चिंता मत करो , ये कौन सा पहली बार जा रहा है.
राधा : माँ मैं भी अमित क साथ hi आ जाती हूँ बाइक पर. जाना तो कॉलेज hi है. इससे ये भी अकेला नहीं रहेगा .
दिव्या : हाँ , तुम ठीक कहती हो. ाचा तुम दोनों बाइक पर आओ और सीधा घर आना. और बाइक ज़रा ध्यान से चलना.
निधि दीदी दिव्या मौसी को साथ लिए चल दी और इधर मैंने भी बाइक निकल ली. मेरा बैग राधा ने अपनी गॉड में रखा और मेरी कमर में हाथ डाले पीछे बैठ गयी . फिर हम चल दिए कॉलेज की तरफ.
अमित : तुम्हे क्या ज़रूरत थी मेरे साथ आने की. आराम से गाड़ी में जाती.
राधा : ज़रूरत कैसे नहीं थी ? मैं तुम्हे अकेला नहीं छोड़ सकती . वैसे भी जाना तो साथ में hi था न कॉलेज .
राधा की बात का अब मैं क्या जवाब देता भला. कुछ देर हम खामोश रहे तो राधा इस बार बोली.
राधा : मैंने दीदी से बात की थी वो नाराज़ नहीं हैं तुमसे . कह रही थी क वो भगवन से नाराज़ हैं. अब भला इसमें भगवन कहाँ से आ गए. मुझे तो कुछ समझ में नहीं आया पर जो भी हो अब तुम्हे चिंता करने की ज़रूरत नहीं है.
अमित : हाँ अभी बात हुई थी मेरी उनसे. उनकी भगवन से नाराज़गी , दोनों की आपस की बात है . मुझे तो इतना पता है क दीदी मेरी वजह से दुखी हैं. चाहे वो मुझसे नाराज़ नहीं हैं पर उनके दुःख की वजह मैं हूँ.
राधा : उनकी ख़ुशी की वजह भी तुम hi हो. मैंने देखा है क वो तुम्हारे साथ कितनी खुश रहती हैं. अब अगर उन्हें खुश देखना चाहते हो तो वो करो जिनसे उन्हें ाचा लगे . देखना जब वो खुश होंगी तो तुम्हे भी ाचा लगेगा .
अब राधा को मैं क्या बताता क दीदी क्या चाहती हैं . जो वो चाहती हैं वो मेरे लिए कर पाना पॉसिबल hi नहीं है. ऐसे hi बातें करते हुए हम कॉलेज पहुँच गए . पार्किंग में बाइक लगा कर हम अंदर गए तो बहुत hi काम स्टूडेंट्स ए हुए थे . ऐसा लग रहा था जैसे छुट्टी हो . हमारी टीम का कोई भी अभी तक हमें नज़र नहीं आया था . हम चलते चलते कैंटीन की तरफ जाने लगे तो रीमा दौड़ती हुई हमारे पास आयी. सफ़ेद चूड़ीदार पजामी क साथ सफ़ेद सिल्की कमीज में खुले घुंघराले हलके भूरे बाल और वो ग्रे ऑंखें. मैं रीमा की खूबसूरती में खो सा गया . उसके चेहरे पर मुस्कान थी और मोतियों जैसे दांत चमक रहे थे . दिल तो किया क अभी रीमा को गले से लगा कर उसे ढेर सारा प्यार करूँ पर राधा की वजह से मजबूर था . रीमा भी मेरी हालत समझ रही थी , राधा को गले लगते हुए उसने मेरी आँखों में देख कर मुझे चिढ़ाते हुए मुँह बनाया. मनो कह रही हो क कुछ नहीं मिलने वाला .
राधा : कैसी हो रीमा ? तुम अकेली ? बाकि सब कहाँ हैं?
रीमा : मैं ठीक हूँ , तुम अपना सुनाओ. बाकि अभी तक तो कोई नहीं आया , मैं कब से बोर हो रही थी
राधा : तुम इतनी जल्दी कैसे आ गयी ?
रीमा : वो बुआ क साथ आ गयी थी . मैं उनके घर hi रह रही हूँ न . Hi , तुम कैसे हो ?
अमित : मैं भी ाचा हूँ. बुआ कैसी हैं?
रीमा : वो भी अछि हैं. चलो कैंटीन में बैठते हैं.
राधा : क्यों? क्लासेज में नहीं जाना ?
रीमा : फायदा तो है नहीं , आज पड़े नहीं होने वाली . बस हमारे पेपर हमें दिखाए जायेंगे . और हमारा पहला लेक्चर फ्री होने वाला है. क्यूंकि हमारे सर नहीं आये .
अमित : मुझे भी जाकर देख लेना चाहिए , कहीं फिर से फास न जॉन .
राधा : हाँ , तुम जाओ , कहीं वो मैडम तुम्हारे पीछे न पद जाये .
इतने में घंटी बजी और मैं भाग कर अपने बिलोक्सी में चला गया . मोहित अभी तक नज़र नहीं आया था . मैं क्लास में पहुंचा तो यहाँ भी स्टूडेंट्स बहुत hi काम थे . आधे से भी काम . खैर लेक्चर लेने कोई आया नहीं तो मैं वापिस चला गया . जाकर देखा तो मीनल तब तक आ चुकी थी और वो रीमा राधा क साथी बैठी थी. मुझे लगा मोहित भी आ गया होगा . क्यूंकि दोनों आते तो साथ hi थे .
अमित : कैसी हो मीनल ?
मीनल : मैं अछि हूँ तुम सुनाओ
अमित : मैं भी ाचा हूँ , तुम अकेली आयी हो ? मोहित नज़र नहीं आ रहा .
मीनल : हाँ आज मैं उसके साथ नहीं आयी. मेरा कजिन मुझे ड्राप करने आया था. वैसे तुम्हारा दोस्त भी अत hi होगा . मैंने देखा तो उसे गाडी में पीछे आते हुए .
मीनल की बात अभी ख़तम भी नहीं हुई थी क मोहित भी कैंटीन में आ गया. उसके चेहरे पर स्माइल थी और उसने गरम जोशी क साथ मुझसे हाथ मिलाया और गले मिला.
मोहित : कैसा है भाई?
अमित : मैं ठीक हूँ , तू सुना , घर पर सब कैसे हैं?
मोहित : सब ठीक हैं माँ और दीदी तुम्हे यद् कर रही थी.
मोहित बात तो मुझसे कर रहा था पर उसका ध्यान मीनल पर hi था . मीनल भी मोहित को देख रही थी. आखिर कितने दिनों बाद तो वो आमने सामने हुए थे.
मोहित : कैसी हो मीनल ?
मीनल : ठीक हूँ
मीनल ने संक्षिप्त सा जवाब दिया , उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे मनो वो बात करना न चाहती हो. मैं जनता था वो मोहित को तड़पना चाहती है जैसा क उसने कहा था. पर अब मुझे इस मामले से दूर रहने की हिदायत दी थी उसने . इस लिए मैं उन दोनों को इग्नोर कर रहा था .
‘ ोये तुम सब इधर बैठे हो , मैं क्लास में ढूंढ रही थी . चलो ाचा हुआ यहीं मिल गए वैसे भी लेक्चर तो फ्री है. और सुनाओ कैसे हो सब ? ोये मजनू , क्या हुआ ? लैला तेरी तरफ देख भी नहीं रही. कोई झगड़ा तो नहीं हो गया ?’
ये कल्पना थी जो आते hi सबको लपेट ते हुए राधा रीमा से गले मिलने क बाद मेरे साथ बैठ गयी.
कल्पना : बात क्या है ? दोनों में से कोई बोल क्यों नहीं रहा ? कोई सीरियस मटर है क्या ?
मीनल और मोहित को चुप देख कर कल्पना ने मुझसे वजह जननी चाही.
अमित : अब मैं क्या बोलूं , खुद hi पूछ लो.
मीनल : कोई ज़रूरत नहीं किसी को हमारे मटर में पड़ने की. अगर कोई इस बारे में बोलै या बीच बचाव करने की कोशिश की तो मैं उससे बात नहीं करुँगी . खुद को पता नहीं क्या समझ क रखा है , कुछ भी करोगे और कोई कुछ नहीं कहेगा ?
मोहित : मीनल सॉरी ……
मीनल : मैं तुमसे बात नहीं कर रही , मैं अपने दोस्तों से बात कर रही हूँ. जब मेरा गुस्सा ठंडा होगा मैं तब सोचूंगी तुमसे बात करनी है क नहीं. तब तक रुक अपना मुँह बंद रखो
मीनल ने गुस्से में ये सब कहा तो मोहित बेचारा सर झुका कर बैठ गया . मगर रीमा राधा और कल्पना तीनो मीनल क तेवर देख रही थी और इशारों में मुझसे पूछ रही थी क ये सब क्या है .
कल्पना : ोये ये सब चल क्या रहा है ? कोई हमें भी तो बताओ ? तुम दोनों लैला मजनू आखिर किस बात पर झगड़ रहे हो ?
मीनल : मैं उस बारे में बात नहीं करना चाहती . अगर तुम्हे ये सब बातें करनी है तो मैं चलती हूँ.
कल्पना : अरे अरे ,, बैठ मेरी जान , तू न गुस्से में अछि नहीं लगती. ज़रूर इसी ने कुछ गड़बड़ की होगी. ाचा है , इसे सजा मिलनी भी चाहिए . मेरी तरफ से भी दो लगा देना और अमित की तरफ से भी. दोस्त का एक्सीडेंट हो गया और ये इतना बिजी था क पता लेने भी न जा सका.
मीनल : एक्सीडेंट ? किसका ?
कल्पना : तुम्हे नहीं पता ? अमित को और अंकल को चोट लगी थी. और ये महाराज इतने बिजी थे क पहुँच hi नहीं पाए . हाँ वो बात अलग है क इनकी फॅमिली क बाकि सब मेंबर पहुँच गए थे .
मीनल : ओह , हाँ , मुझे बताया था अमित ने.
अमित : वो सब छोडो यार तुम भी क्या बातें ले के बैठ गयी. ाचा वो तुम्हारे कजिन की एडमिशन का क्या बना ? किस कॉलेज में एडमिशन ले रहा है ?
मैंने मीनल को शांत करने क लिए उसके कजिन की बात छेड़ ली . और इसका असर हुआ भी. उसके चेहरे क भाव पल में बदल गए
मीनल : हाँ वो मुझे ड्राप कर क कॉलेज देखने hi गया है अपने लिए. जो ाचा लगेगा उसमे चला जायेगा. तुम्हे तो पता hi है वो क्या कह रहा था .
कल्पना : अब ये कजिन बीच में कहाँ से आ गया ? और अमित को कैसे पता ? इसका मतलब ये मिल चूका है ? पर कहाँ ?
मीनल : वो अमित कल हमारे घर की तरफ से जा रहा था न तो वहीँ बहार hi मिल गया था . बस वहीँ ये मिला था माँ से और मेरे कजिन संजय से . तुम दोनों की तरह वो भी स्पोर्ट्समैन है . बॉक्सिंग का प्लेयर है.
कल्पना : ये तो अछि बात है. फिर उसे यहीं क्यों नहीं ले आयी?
मीनल : दरअसल वो नहीं चाहता क हम दोनों एक hi कॉलेज में पढ़ें.
कल्पना : वो क्यों भला ?
मीनल : यार वो दिल्ली से है और थोड़ा आज़ादी पसंद भी. एक hi कॉलेज में रहेंगे तो उसे दर है क मैं उसकी बातें घर पर बता दूंगी. बस इसी लिए दूसरे कॉलेज में जाना चाहता है.
कल्पना : है है है , यानि क कक्तव हो तुम उसके हिसाब से . बढ़िया है , वैसे तुम्हारा भी फायदा है. तुम दोनों भी खुल कर अपनी चोंच लड़ा सकते हो .
मोहित क चेहरे पर हलकी सी स्माइल आयी कल्पना की बात से पर मीनल ने उसे भी ठप्प कर दिया
मीनल : और कोई काम नहीं है क्या मुझे ? ये तो बड़े आदमी हैं , पैसे क डैम पर कुछ भी कर लेंगे . पर मुझे तो जवाब देना पड़ेगा न. आज से बस स्टडी पर hi ध्यान दूंगी मैं तो.
कल्पना : सच में ??? , , फिर तो बीटा आप भी अब अपनी किताबों पर थोड़ी मेहरबानी कर hi दीजिये . वर्ण चन्दर्कांता जी आपको वैसे भी बहार भेज hi देंगी .
ऐसे hi बातों में समय कह निकला पता hi न चला और अगले लेक्चर की बेल्ल बज गयी . ये लेक्चर मंजू बुआ का था इस लिए मैं कल्पना और मोहित क साथ लेक्चर अटेंड करने क लिए चल दिया. राधा रीमा और मीनल भी अपनी क्लास क लिए चल दिए.