Adultery Manhoos se mahan tak - Page 36 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट रत को मिलेगा भाई लोगी थोड़ा सा काम बाकि है. निधि का पर्पस और नशे का रिएक्शन
 
अपडेट 263



‘ अरे यार लो इसे , शर्मा क्यों रहे हो? कुछ नहीं होता एक आध से , वैसे भी आज मौका भी है दस्तूर भी. एक एडवाइस देता हूँ, 2 हलके हलके लगा लो. बाद में इसका फायदा hi मिलेगा लव मेकिंग में ‘ मैं निकलेगा क साथ जब बार काउंटर की तरफ गया तो नीलेश ने खुद hi आर्डर देकर 2 पेग बनवा लिए और एक मेरी तरफ बढ़ा कर आँख दबा कर मुझे लगाने को कह रहा था. साफ़ ज़ाहिर था क वो किस बारे में बात कर रहा है. मैं शराब को पसंद नहीं करता था इस लिए उसे साफ़ मन कर रहा था मगर वो तो उल्टा ऐसे ज्ञान झाड़ रहा था जैसे बहुत बड़ा एक्सपर्ट हो.

अमित : सॉरी भाई पर मैंने न कभी पि है और न कभी पियूँगा. वैसे भी आप जिस फायदे की बात कर रहे हैं उसके लिए ये सब ज़रूरी नहीं. बल्कि उल्टा नुकसान hi होता है .

नीलेश : बात तो ऐसे कर रहे हो जैसे बहुत बड़े खिलाडी हो तुम इसमें . कितनी पटायी हैं आज तक ? वैसे ये मैं इस लिए भी कह रहा हूँ क निधि जैसी खूबसूरत लड़की क आगे तो बाँदा कण्ट्रोल खो hi देगा चाहे कोई भी हो. एक बार वो बिना कपड़ों क सामने आ गयी तो साडी मर्दानगी हवा हो जाएगी .

निधि दीदी क बारे में ऐसी बात सुन कर मेरे जांदे भींच गए . मैं गुस्से में उसका कलर पकड़ने hi वाला था क उधर से निधि दीदी और साक्षी दोनों आ गयी .

साक्षी : तो यहाँ बैठ कर एन्जॉय कर रहे हो तुम दोनों . क्या नीलेश , तुम अकेले hi लगा रहे हो . अमित को क्यों नहीं दिया ?

नीलेश : अरे यार मैं तो कब से कह रहा हूँ. पर ये मन hi नहीं रहा . तुम hi कह कर देख लो या शायद निधि क कहने पर hi मने ये .

निधि : अमित ये सब नहीं करता और न hi मैं उसे इसके लिए फाॅर्स करने वाली हूँ.

साक्षी : थोड़ा सा तो ले सकता है न कंपनी क लिए. वैसे भी आज हम कितनी देर बाद मिले हैं और पता नहीं दोबारा कब मिलना होगा . तो काम से काम आज की शाम क नाम एक छोटा सा तो बनता hi है .

अमित : किसी पल को यादगार बनाने क लिए ये सब ज़रूरी तो नहीं ? और भी कई तरीके हैं जिससे हम किसी खास पल को यादगार बना सकते हैं.

साक्षी : ाचा !! जैसे की??

अमित : ये तो देपेंद करता है क आप किसके साथ हैं और सिचुएशन क्या है

साक्षी : अब यहाँ हम सब दोस्त hi तो हैं. नीलेश मेरा बर्फ है और तुम निधि क. और हम जिस जगह हैं वहां हर तरफ यही सब तो चल रहा है. वैसे भी हर काम जब पहली बार किया जाता है तो वो यद् रहता hi है. इससे अछि और क्या सिचुएशन होगी लाइफ में पहली बार ड्रिंक करने क लिए . एक ख़ुशी भरा पल . कौन सा मैं दोबारा करने को कह रही हूँ. आज की शाम क नाम , प्यार क नाम. क्यों निधि , तुम तो मेरा साथ डौगी न ?

निधि दीदी असमंजस भरी नज़रों से मुझे देखने लगी. अब भला मैं क्या कहता. दीदी मुझसे बड़ी थी और ाचा भला अचे से जानती थी.

साक्षी : अरे यार अब उसकी तरफ क्या देख रही हो? क्यों अमित तुम्हे कोई ऐतराज़ है क्या अगर निधि अपनी दोस्त क साथ एक टकीला शॉट ले ले तो ?

नीलेश : कॉमन यार एक एक तो लगा hi सकते हो तुम दोनों. यहाँ हर कोई ये कर रहा है . और तुम हो क ऐसे कर रहे हो जैसे भाई बर्फ गफ नहीं भाई बहिन हो

नीलेश की बात सुन कर निधि दीदी और मैंने एक दूसरे को देखा.

निधि : ठीक है बस एक , अमित को फाॅर्स मत करो , मैं एक लगा लुंगी .

साक्षी : that’s ग्रेट , don’t वोर्री , अमित क लिए सॉफ्ट ड्रिंक ले लेते हैं. तुम दोनों वहां चल कर बैठो मैं नीलेश क साथ ड्रिंक ले कर अति हूँ.

अमित : आप जाइये मैं ले अत हूँ न नीलेश भाई क साथ .

साक्षी : it’s ok , वे अरे होस्ट , तुम अपनी गफ क साथ बैठो. कहीं अकेली देख कर कोई और न लाइन मरने लग जाये . वैसे भी आज इतनी हॉट बन कर आयी है क सब इसे hi देख रहे हैं. साक्षी की बात पर निधि दीदी शर्मा गयी . मैं निधि दीदी क साथ उस तरफ चल दिया जहाँ हम पहले बैठे थे .

अमित : ये क्या दीदी , आप को क्या ज़रूरत थी हाँ करने की. अगर कुछ हो गया तो?

निधि : कुछ नहीं होगा , साक्षी ने मुझे बहुत बार बताया है. वोडका क एक छोटे से पेग से कुछ नहीं होता. वैसे भी नैना कई बार पि चुकी है अपनी सहेलियों क साथ. मैंने कभी तरय नहीं किया और वो दोनों इतना कह रहे हैं तो मन कर क मैं उन्हें नाराज़ नहीं करना चाहती . वैसे भी तुम हो न मेरे साथ अगर कुछ हो भी जाये तो.

अमित : आप न आज मुझे शॉक पे शॉक दे रही हो. पहले ये ड्रेस और अब ये ,, और पता नहीं क्या क्या सरप्राइज डौगी.

निधि : ाचा नहीं लग रहा क्या तुम्हे ?? बस एक और सरप्राइज देना है ,, ी होप क तुम्हे पसंद आये .

अमित : कौन सा सरप्राइज ?

इतने में साक्षी और नीलेश ड्रिंक्स और कुछ स्नैक्स ले आये अपने साथ .

साक्षी : तंन्त्र तेनाआ ,,,, ये लो तुम्हारे और मेरे लिए वोडका और ये अमित क लिए एनर्जी ड्रिंक .

नीलेश : और ये खाने में चीज़ चिल्ली क साथ रोस्टेड चिकन.

साक्षी ने निधि दीदी और मेरे सामने ड्रिंक रखते हुए कहा . दीदी क सामने रखे ड्रिंक में बर्फ क टुकड़े और पानी जैसी ड्रिंक थी जिसे वोडका कह रही थी वो . जबकि मेरे सामने जो ड्रिंक रखा था उसका रंग गहरा था . नीलेश क लिए भी गहरे रंग का पेग था जो व्हिस्की का था शायद . साक्षी और नीलेश ने अपना अपना पेग उठाया और हम दोनों को भी पेग उठाने को कहा . दीदी ने एक बार मुझे देखा और फिर अपना पेग उठा लिया.

साक्षी : कॉमन अमित इतना सोच क्या रहे हो? ये सिर्फ एनर्जी ड्रिंक है अब हमारी कंपनी क लिए इतना तो कर हो सकते हो न ?

नीलेश : अब उठा भी ले यार देख तेरी गफ ने भी उठा लिया है अब तो.

उन दोनों की बात मानते हुए मैंने भी अपना गिलास उठा लिया .

नीलेश : तो फ्रेंड्स एक जैम आज की शाम और आने वाले नए कल क नाम. मई वे आल हैवे हैप्पी लव लाइफ अहेड . Let’s बॉटम्स उप. चिरस्सस्स्स्स

साक्षी और नीलेश ने अपने अपने गिलास मुँह को लगाए और अंदर जातक लिए . निधि दीदी ने भी ऐसे मुँह बनाया जैसे दवा पि रही हो और एक hi घूँट में पूरा गिलास खली कर दिया . मैंने भी उन्हें देखते हुए ठीक वैसा hi किया . मुझे ड्रिंक का स्वाद कुछ कड़वा और मीठा लगा पर गिलास मैंने भी खली कर दिया . असल में मैंने कभी एनर्जी ड्रिंक नहीं पिया था इस लिए जनता नहीं था क टास्ते कैसा होता है.

अमित : ये कड़वा सा क्यों लग रहा है ?

नीलेश : ो कॉमन यार , पहली बार पि रहे हो क्या ? थोड़ा सा होता hi है .

साक्षी : वो निधि , ग्रेट , तुमने भी एक hi बार में खली कर दिया

निधि : जल्दी कुछ दो मेरा गला,,,,, बहुत जलन हो रही है .

साक्षी : रिलैक्स यार , ले इसे खा ले अभी सब ठीक हो जायेगा .

नीलेश : तो , आज रत का क्या प्लान है तुम दोनों का ? भाई मैं और साक्षी तो नई ईयर चढ़ते hi यहाँ से सीधा होटल में जायेंगे . वहां अचे से सेलिब्रेट करेंगे. तुम दोनों कहाँ जाने वाले हो ?

नीलेश की इस बात पर मैं नज़रें hi चुराने लगा क अब निधि दीदी क सामने मैं ऐसी बात का जवाब क्या दूँ भला . अगर कुछ उल्टा सीधा कहा तो साक्षी की इंसल्ट हो जाएगी और ये निधि दीदी को ाचा नहीं लगेगा .

निधि : हमें होटल जाने की ज़रूरत नहीं है , ये हमारा अपना शहर है .

साक्षी : वो निधि , तुम तो बहुत कूल हो गयी हो यार , मतलब अब सीधा घर पर hi ले जाओगी इसे या रुक इसके घर जाओगी

निधि दीदी ने तो बात का तरीके से जवाब दे दिया था पर साक्षी ने अब ज्यादा hi लपेट लिया उन्हें.

निधि : पागल हो गयी हो क्या जो मैं अपने घर जाउंगी ? हम तो अपने अपने घर जायेंगे .

नीलेश : हद्द है यार , ये तो तुम ज़ुल्म कर रही हो अमित पर. इतना ाचा मौका है काम से काम आज तो बेचारे पर थोड़ा तरस खाओ . बेचारे ने पता नहीं दिल में क्या क्या अरमान सजाये होंगे .

अमित : ऐसा कुछ नहीं है .

नीलेश : अब छोडो भी यार , इतनी हसीं गफ जब ऐसे हॉट बन कर सामने बैठी हो तू किस्से कण्ट्रोल होता है.

साक्षी : बातें बहुत हो गयी , चलो अब चल कर थोड़ा डांस करते हैं यार .

साक्षी की बात सुन कर नीलेश तुरंत खड़ा हुआ और साक्षी का हाथ थम कर हमारी तरफ देख कर हमें भी आने को कहा और डांस फ्लोर की तरफ चल दिया . निधि दीदी भी कड़ी हुई और मैं भी उनके साथ चल दिया . डांस फ्लोर पर बहुत सरे कपल्स डांस कर रहे थे. यहाँ लाइट्स नहीं थी बस कुछ लेज़र लाइट्स hi चल रही थी म्यूजिक क साथ बदलती हुई. डांस कर रहे सब कपल्स बड़े hi रोमांटिक वे में डांस कर रहे थे . एक दूसरे क साथ चिपके एक दूसरे को सहलाते हुए . नीलेश भी साक्षी की कमर में हाथ डेल डांस करने लगा . मैंने निधि दीदी की तरफ देखा क क्या करना है. निधि दीदी ने मेरा हाथ पकड़ा और मेरे पास सरक कर धीरे धीरे थिरकने लगी. मैं भी धीरे धीरे उनकी तरह Hi डांस करने लगा. फिर दीदी ने खुद hi मेरे हाथ अपनी कमर पर रखे और मेरे कन्धों पर हाथ रख डांस करने लगी. दीदी क चेहरे पर मुस्कान थी और वो सिर्फ मुझे hi देख रही थी. मैंने उनकी आँखों में देखा तो एक कशिश सी नज़र आयी . मैं आसपास का सब भूल कर बस दीदी की आँखों में देखता उनके साथ hi थिरकने लगा . माहौल कुछ ज्यादा hi उत्तेजक था हर तरफ पर हम दोनों सब क बीच अपनी hi दुनिया में थे . तभी नीलेश और साक्षी ने हमारा ध्यान अपनी तरफ खींचा .

असल में साक्षी क मुँह से एक सिसकी निकली जो कुछ तेज़ थी. वो दोनों हमारे बगल में hi थे तो ध्यान उधर जाना लाज़मी hi था. मैंने और दीदी ने का साथ जब उन दोनों को देखा तो नीलेश क हाथ साक्षी की गांड पर कैसे थे जिसे वो दबा रहा था और उसके होंठों को किश करने की कोशिश कर रहा था . साक्षी क हाथ भी नीलेश की T-shirt को मुठी में भींचे थे . दोनों खुले में ऐसे सबके बीच इस तरह उत्तेजित थे. उन्हें देख कर तो मुझे भी गर्मी महसूस होने लगी. जब मैंने निधि दीदी की तरफ देखा तो वो भी उन दोनों को hi देख रही थी . निधि दीदी का चेहरा लाल होने लगा था . तभी उन्होंने मेरी तरफ देखा और हमारी नज़रें मिली. मुझे दीदी की ऑंखें लाल होती दिखी. इस माहौल में मुझे समझ नहीं आ रहा था क मैं क्या रियेक्ट करूँ. निधि दीदी बिलकुल भी ऐसी नहीं थी जैसा माहौल इस वक़्त वो देख रही थी और शायद वो भी समझ नहीं प् रही थी क वो क्या करे.

नीलेश : तुम दोनों ऐसे क्या देख रहे हो ? भाई तुम भी कुछ करलो या देखने hi आये हो बस ?

साक्षी : कॉमन निधि लेटस हैवे फन यार , लव योर लव . उम्मम्मम

साक्षी एक बार फिर से नीलेश को किश करने लगी और इधर निधि दीदी और मैं समझ नहीं प् रहे थे क्या करें .

अमित : चलो हम वहां बैठते हैं .

निधि : हम्म्म

निधि दीदी कुछ बोली नहीं बस मेरे साथ वहां से वापिस उसी जगह आ गयी जहाँ हम पहले बैठे थे . हम दोनों में एक ख़ामोशी सी छ गयी थी. न मैं कुछ बोल रहा था न निधि दीदी . बस नज़रें hi चुरा रहे थे एक दूसरे से. कुछ देर में साक्षी और नीलेश फिर से वापिस आ गए हमारे पास

नीलेश : ये क्या यार तुम दोनों कुछ कर hi नहीं रहे . अजीब लोग हो , देखो सब लव बर्ड्स कैसे एन्जॉय कर रहे हैं और तुम दोनों ऐसे बैठे हो.

साक्षी : निधि अरे यू ok ? कोई प्रॉब्लम तो नहीं है न ?

निधि : हाँ सब ठीक है , ज़रा मेरे साथ चलोगी ?

साक्षी : हाँ चलो .

फिर दोनों उठ कर चली गयी. मुझे लगा शायद उन्हें वाशरूम जाना होगा . दोनों क जाते hi नीलेश फिर से शुरू हो गया .

नीलेश : क्या यार कैसे लड़के हो तुम. इतनी ज़बरदस्त पटाखा लड़की तुम्हारे साथ है और तुम कुछ कर hi नहीं रहे . पहले कभी कुछ किया नहीं है क्या ?

अमित : नहीं वो ,, निधि ऐसी लड़की नहीं है . मैं उसके साथ ऐसा वैसा कुछ नहीं कर सकता .

नीलेश : सब ऐसी hi होती हैं दोस्त , ऊपर ऊपर से मन करती हैं पर अंदर से दिल सबका करता है . तुझे क्या लगता है निधि का दिल नहीं कर रहा ? ज़रा उसकी ऑंखें तो देखा, वो जिस तरह हमें देख रही थी उसे देख कर लग रहा था क वो भी ये सब करना चाहती है. मेरी मन तो दर मत सीधा उसके होंठों को किश करदे.

अमित : नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकता .

नीलेश : क्यों ? कोई प्रॉब्लम है क्या ? देखने में तो इतना हत्ता कट्टा है फिर भी ???

नीलेश ने सवाल मेरी मर्दानगी पर hi उठा दिया था अब उसे क्या कहता क वो जिस क साथ मुझे वो सब करने को कह रहा है वो मेरी बड़ी दीदी है .

उधर निधि साक्षी का हाथ थम कर उसे कार्नर में ले गयी

साक्षी : अब बता भी क्या बात है ?

निधि : यार मुझसे हिम्मत नहीं हो रही .

साक्षी : तू भी न ,,, देख ज़रा खुद को , क्या लग रही है तू. यहाँ किसी को भी ज़रा सा इशारा कर देगी न तो तेरे पीछे लार टपकता भगा चला आएगा. मुझे तो लगता है ये तेरा बर्फ hi फत्तू है. इतने गरम माहौल में भी उसने कुछ नहीं किया. उसको उकसाने क लिए hi तो मैं और नीलेश वो सब कर रहे थे . पता नहीं किस मिटटी का बना है . कहीं उसमे कोई फिजिकल प्रॉब्लम तो नहीं है न ? बाद में पता चले तूने अपनी ज़िन्दगी ख़राब कर ली.

निधि : चुप ,, उसमे कोई कमी नहीं है समझी.

साक्षी : तुझे बड़ा पता है , जो आइए माहौल में भी तुझे किश तक नहीं कर सका वो कैसा होगा .

निधि : वो ऐसा hi है थोड़ा शर्मीला है , इस लिए तो मेरी भी हिम्मत नहीं हो रही यार . अब क्या करूँ?

साक्षी : लगता है एक पेग से तेरे पर असर नहीं हुआ . चल एक और लगा लेते हैं. वैसे भी डांस करने क बाद तो ज़रूरत महसूस होने लगी है .

साक्षी निधि को लेकर बार काउंटर पर गयी और वहां अपने और निधि क लिए वोडका आर्डर करने क साथ नीलेश क लिए व्हिस्की का पेग और अमित क लिए अलग से आर्डर किया .

साक्षी : ओने एनर्जी ड्रिंक मिक्स विथ वोडका

निधि : ये तू किसके लिए आर्डर कर रही है ?

साक्षी : तेरे फत्तू क लिए , शायद कुछ गर्मी आ जाये उसने और वो खुद hi कुछ कर ले . दिया तो पहले भी ऐसे hi था पर लगता है असर नहीं हुआ .

निधि : क्या ?? पर वो ड्रिंक नहीं करता . कहीं उसके ऊपर इसका गलत असर हो गया तो ?

साक्षी : रिलैक्स मेरी जान , ये सब तेरे लिए hi कर रही हूँ . मुझे पता है तुझसे हिम्मत नहीं हो रही पर अगर वो खुद से hi कुछ कर ले तो तुझे भी आसानी होगी. इसे पीकर उसका खून गरम होगा और शायद वो हिम्मत कर hi ले अगर तुझसे न हुई तो.

निधि : पर उसे पता चल गया तो?

साक्षी : तू तो ऐसे दर रही है जैसे कोई क्राइम कर रहे हैं हम. चल , बन गए ड्रिंक , अब चुप चाप उसे पीला और थोड़ा हिम्मत दिखा अब .

मैं और नीलेश बात कर hi रहे थे क साक्षी और निधि दीदी दोनों आ गयी और साक्षी क हाथ में फिर से ड्रिंक्स थी.

साक्षी : लो नीलेश ये तुम्हारे लिए और अमित ये तुम्हारे लिए एनर्जी ड्रिंक .

साक्षी ने एक पेग निधि दीदी को भी थमाया पहले की तरह.

अमित : नहीं मुझे नहीं चाहिए .

नीलेश : ले ले भाई , तुझे एनर्जी की ज्यादा ज़रूरत है .

साक्षी : सिर्फ एनर्जी ड्रिंक hi तो है , निधि तो वोडका का दूसरा ले रही है और तुम एनर्जी ड्रिंक से परहेज़ कर रहे हो.

निधि दीदी ने एक बार मेरी तरफ देखा और चुप चाप अपना ड्रिंक उठा कर एक hi बार में जातक लिया और ऐसे एक्सप्रेशंस बनाने लगी जैसे कड़वी दवा ले ली हो. मैंने भी अपना ड्रिंक उठा लिया और उसे पिने लगा . इस बार मैं आराम से थोड़ा थोड़ा पि रहा था और मुझे फिर से टास्ते अलग सा लग रहा था . पर फिर भी मैंने ख़तम कर लिया जबकि नीलेश और साक्षी ने तो एक hi बार में खली कर दिया था . ड्रिंक क बाद एक बार दिर साक्षी और नीलेश दोनों डांस करने क लिए उठ खड़े हुए और हमें भी चलने को कहा . मैं तो मन करना चाहता था और दीदी की तरफ देखा तो उन्होंने हाँ कर दी . अब भला मैं क्या करता इस लिए चुप चाप उनके साथ हो लिया. दीदी क चेहरे की रंगत अब लाल गुलाबी होने लगी थी . शायद उन पर अब असर होने लगा था और वो नाचते वक़्त भी कुछ ज्यादा hi थिरक रही थी और उनकी ऑंखें भी बोझिल सी होने लगी थी. वो मेरे साथ पूरी तरह चिपक गयी और उनके ठोस स्तन मेरे साइन से लग रहे थे. उधर साक्षी और नीलेश पहले की तरह hi मस्ती में एक दूसरे का मज़ा ले रहे थे .

निधि : उम्म्म्म ,,,, जानते हो ,,,,,,, मैं पहली बार नाईट क्लब में आयी हूँ ,,,,,,, और आज पहली बार hi वो पि है ,,,,,, ये कपडे भी मैंने पहली बार पहने है ,,,,,, और पता है क्या कुछ किया है ??,,,,, सब पहली बार ,,,, तुम मुझसे नाराज़ तो नहीं हो न ?,,,,, सोररीयय ,,,, आप नाराज़ तो नहीं हो न ???

दीदी पर अब असर होने लगा था वोडका का , इस लिए वो मदहोशी भरी आवाज़ में रुक रुक कर बोल रही थी . साथ hi वो मेरे साथ पूरी तरह चिपकती कभी मेरे कंधे पर सर रखती कभी मेरे चेहरे क साथ सत्ता देती कभी दूसरे कंधे पर सर रख देती. अब डांस की जगह वो सिर्फ मुझसे चिपक कर हिल hi रही थी.

अमित : शायद आपको वोडका का असर हो गया है. हमें चलना चाहिए .

निधि : नाहीइ ,,, हम कहीं नहीं जा रहे ,,,, और आप भी कहीं नहीं जायेंगे जब तक ,,,, जब तक मैं अपनी बात न कर लूँ ,,,,, आज आपको मेरी बात सुन्नी hi होगी,,,,, मैं और ज्यादा नहीं सेह सकती …

दीदी क्या कहना छह रही थी मुझे समझ नहीं आ रहा था. पर शायद कोई ज़रूरी बात वो करना चाहती थी. मगर उनके ऊपर वोडका का असर था इस लिए मुझे लगा क उन्हें अब घर ले जाना चाहिए

अमित : हम घर चल कर बात करेंगे न,, अभी आप होश में नहीं हो.

निधि : किसने कहा मैं होश में नहीं हूँ ?? मैं पूरी होश में हूँ ? ,,,, आज आपको मेरी बात सुन्नी हो होगी .

अमित : ाचा ठीक है कहिये क्या बात है और ये आप मुझे बार बार आप क्यों कह रही हैं?

निधि : क्यूंकि आप मेरे ,,,,, ,,,,,,, एक मिनट यहीं रुकिए मैं अभी आयी

दीदी अपनी बात कहते कहते रुक गयी जैसे वो कुछ सोच रही हो. और फिर मुझे रुकने क कह कर बार की तरफ चली गयी. मैं उन्हें वहीँ से देख रहा था . दीदी ने जा कर एक ड्रिंक आर्डर किया और वहीँ उसे एक सांस में जातक लिया . मैं तो ये देख कर hi हैरान हो गया . दीदी फिर से मेरी तरफ वापिस आयी और आते hi मेरे सीने से लग गयी. दीदी ने मुझे पूरी तरह आलिंगन में ले लिया था. और मैंने भी उन्हें अपनी बाँहों में भर लिया .

निधि : ी लव यू ,,,, ी लव यू अमित ,,, मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ ,,,,,

अमित : ी लव यू तू दी ,,,, अब क्या हम घर चलें ?

मुझे लगा दीदी कुछ इमोशनल हो रही हैं और वोडका भी असर है इस लिए अपने भाई पर कुछ ज्यादा hi प्यार जाता रही हैं.

निधि : don’t कॉल में दी ,,,,,, आप मुझे ऐसा कैसे कह सकते हैं ,,,,,, आप तो ,,,,, आप तो मेरे पति हैं ..

दीदी की ये बात सुन कर मेरे कान गरम हो गए . मनो कानो से धुआं निकलने लगा हो . दीदी पूरी तरह नशे में चली गयी थी शायद .

अमित : ये आप क्या कह रही हैं. आपको नशा हो गया है , हमे अब चलना चाहिए .

निधि : न्यू ,,, आपको आज सुन्ना होगा ,,,, यू हैवे तो लिसेन एंड अंडरस्टैंड तहत ,,,,,, ी ऍम योर वाइफ एंड यू अरे माय हस्बैंड,,,,,, पता है? ,,,, भगवन भी यही चाहता है ,,,,,,, इसी लिए तो उसने खुद हमें आशीर्वाद दिया है ,,, हहहह ,,

दीदी की बात सुन कर मैं तो दांग था . वो मेरे साथ चिपकी अपनी बात कह रही थी . बिना मेरी तरफ देखे . और अब उन्हें जब हिचकी आयी तो मुझे लगा अब हमें जाना चाहिए दीदी ओवर हो रही है .

अमित : ये आप क्या कह रही हैं ,, आप होश में नहीं हैं , चलिए हम घर चलते हैं .

निधि : न्यू ,,,,, माय लवली हुब्बी ,,, तुम बहुत hi भोले हो ,,,,, उम्मम्मम्म ,,,,, मैं कब से कहना छह रही थी पर हिम्मत hi नहीं हुई ,,,, इस लिए मैं आज आपको अपने साथ यहाँ लेकर आयी हूँ,,,,, तो अरे सो स्वीट ,,,,, ी ऍम सो लकी ,,, मुझे आप जैसा पति मिला ,,,, पर आप हैं क कुछ समझते hi नहीं ,,,,, अपनी बीवी को थोड़ा सा भी पति वाला प्यार नहीं देते ,,,, ये कोई अछि बात है क्या ???? चलिए मैं खुद hi ले लेती हूँ आज ,, उम्मम्मम्मम्म

दीदी ने बात करते करते एक पौसे लिया और अपना चेहरा उठा कर सीधा मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए . मैं तो एक पल क लिए प्रहार hi हो गया . मुझे समझ hi नहीं आया क मैं क्या करूँ. सब क बीच दीदी ऐसे मेरे होंठ चुम रही थी . उनकी फ्रेंड बगल में hi थी और दीदी बिना किसी दर या परवाह क मुझे किश कर रही थी. दीदी की ऑंखें बंद थी और वो बस मुझे किश किये जा रही थी. पता नहीं क्यों पर मेरे अंदर भी गर्मी बढ़ चली थी और मेरे हाथ दीदी की कमर पर चले गए और अमिन दीदी क फूलों से मुलायम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूमने लगा .

‘ वह वह वह ,,, ग्रेट ,, तो आखिर भीगी बिल्ली शेरनी बन hi गयी ,,, ‘

हम दोनों एक दूसरे को किश किये जा रहे थे और पता नहीं कितनी देर मैंने निधि दीदी क रास भरे मुलायम होंठों को चूमा. दीदी भी ऐसे चुम रही थी जैसे वो अलग होना hi न चाहती हो. पर साक्षी की आवाज़ सुन कर हम दोनों की किश टूटी .

नीलेश : वह दोस्त , तुम दोनों तो किसिंग में मास्टर हो. इतना पैशनेट किश तो साक्षी अउ मैं भी नहीं कर पाए . तुम दोनों तो जैसे कई और hi दुनिया में थे .

दोनों की बातें सुन कर मैं तो शर्मिंदा सा होने लगा था . ये भी भूल गया क उन्हें क्या पता हम भाई बहिन नहीं हैं.

निधि : ये म्यूजिक क्यों बंद कर दिया ????

दीदी की बात पर मेरा ध्यान भी म्यूजिक क बंद होने पर गया

साक्षी : तुम दोनों को तो होश hi नहीं था तो पता कैसे चलता . बस अपने में hi लगे कैसे चोंच लड़ा रहे थे . वो देखे काउंटिंग हो रही है . नया साल चढ़ने वाला है

क्लब में एक तरफ बड़ी से स्क्रीन लगी थी जिस पर उलटी गिनती चल रही थी और अब सब ज़ोर शोर से उसके साथ hi काउंटिंग करने लगे .

8 ,,,,, 7 ,,,,, 6 ……….1

‘ हैप्पी नई ईयर ‘

सब तरफ हैप्पी नई ईयर का शोर मच गया और फिर से म्यूजिक बजने लगा . साक्षी और नीलेश ने एक दूसरे को बाँहों में भरा और किश करने लगे . इधर निधि दीदी ने भी फिर से मेरे गले में बहन डाली और मुझे किश करने लगी . मैं उन्हें रोकना तो चाहता था पर बजाये इसके मैं खुद hi उनके होंठ चूमने लगा . निधि दीदी क होंठ चूमते हुए मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. बहुत hi मुलायम और नाज़ुक होंठ थे माखन की तरह. जिनमे से शहद रिस रहा था . मैं दीदी को अपनी बाँहों में कस लिया और उन्हें ऊपर उठा लिया . दीदी क पाऊँ ज़मीन से उठ गए और वो मुझे बस चूमे जा रही थी मेरे साथ चिपकी हुई. दीदी का रुई सा बदन अपनी बाँहों में भींच कर मुझे मज़ा आ रहा था . उनके स्तन रुई क गोलों की तरह मेरे सीने में धंस रहे थे . हम एक दूसरे क होंठ चूम रहे थे कभी ऊपर वाला तो कभी नीचे वाला . हम सब से बेखबर बस एक दूसरे में खोये थे. मेरे दिमाग की नसें भी ऐसे ढीली पद चुकी थी क जैसे वो साइलेंट मोड पर जा कर आराम कर रही हो और जिस्म में आग जलने लगी थी. पता नहीं कितनी देर हमने एक दूसरे को चूमा और फिर एक बार साक्षी ने हमें टोका .

साक्षी : अरे बस भी करो क सारा प्रोग्राम यहीं सबके सामने करना है ? चलो न निधि एक साथ hi चलते हैं. हम दोनों तो होटल में जा रहे हैं , तुम भी साथ चलो . वैसे भी इस हालत में घर तो नहीं जाओगी तुम .

निधि : चलो ,,,,, आज मैं आज़ाद हूँ ,,,,, चलिए न ,,, हम भी साथ चलते हैं.

दीदी ने मेरा हाथ खींचते हुए उन दोनों क साथ चलने को कहा . मैं हो थोड़ी देर पहले किसी सम्मोहन में फंस गया था फॉर से होश में आया .

अमित : नहीं ,, हमें घर चलना चाहिए .

साक्षी : क्या ये सही होगा ? निधि ऐसी हालत में …

अमित : निधि मेरे साथ जाएगी .

नीलेश : शाबाश ,,, ये हुई न बात ,, बेस्ट ऑफ़ लक दोस्त . हैवे ा लवली एंड स्वीट नाईट .

निधि दीदी मेरे सीने में मुँह छिपाने लगी नीलेश की इस बात पर . मैंने नीलेश को कोई जवाब देने से बेहतर एक स्माइल पास की और दीदी की कमर में हाथ डेल बहार को चल दिया .

निधि : थैंक यू माय हुब्बी ,,,, ी लव यू ,,, थैंक्स फॉर एव्री थिंग ,,, उम्मम्मम्मम

दीदी बहार आते हुए भी मदहोशी में मेरे साथ चिपकती पता नहीं क्या क्या बोले जा रही थी . वो बार बार मुझे अपना पति क्यों कह रही थी मेरी समझ से बहार था . और सड़क में पर फिर एक बार उनहोंने मुझे किश करना शुरू कर दिया. मैंने उनको अलग किया और उन्हें गाडी की तरफ ले गया. दीदी तो होश में थी नहीं , कार की चाबी पहले hi उन्होंने मुझे दे दी थी. सो मैं उन्हें गाड़ी में बिठाया और दूसरी तरफ से कार में बैठने लगा तो नीलेश फिर एक बार आ गया .

नीलेश : बेस्ट ऑफ़ लक दोस्त ,, आज की रात तो काफी रंगीन होने वाली है तुम्हारी. ी होप आज की रत न तुम खुद सोगे न निधि को सोने डोज .

नीलेश की गाड़ी भी पास में hi थी और साक्षी दूसरी तरफ कड़ी थी . मैंने उससे पीछा छुड़ाने क लिए बस हाँ हूँ कहा और उसे bye बोल कर गाड़ी में बैठा और गाड़ी ले के चल दिया वापिस .

दीदी की ऑंखें बंद हो चली थी पर बीच बीच में वो ऑंखें थोड़ी सी खोल मुझे देखती और मेरी तरफ खिसक कर मेरे कंधे पर सर रख मुझे कभी किश करने की कोशिश करती तो कभी मेरे सीने पर हाथ चलती . दीदी ज्यादा hi ओवर हो गयी थी. 12 से ऊपर टाइम हो चला था और सड़के खली थी. मैं गाडी तेज़ रफ़्तार में दौड़ता मोहित के घर की तरफ बढ़ चला. एक हाथ से मैं दीदी को सँभालने की कोशिश कर रहा था और दूसरे से ड्राइव . कुछ देर में हूँ घर पहुँच गए . गार्ड में गेट खोला और मैं गाड़ी अंदर ले आया . दीदी को मैंने सहर देकर गाड़ी से निकला और अंदर चल दिया. दरवाज़ा पर पहुँचते hi दरवाज़ा अपने आप खुल गया और सामने करिश्मा दीदी कड़ी थी निधि दीदी तो अब जैसे होश में थी hi नहीं बस सहारे से थोड़ा बहुत चल रही थी .

करिश्मा : ये दीदी को क्या हुआ ??? ड्रिंक की है इन्होने??? मेरे कमरे में ले चलो .

निधि दीदी की हालत का अंदाज़ा लगा कर करिश्मा दीदी ने खुद hi दूसरी तरफ से उन्हें सहर दिया और हूँ करिश्मा दीदी क कमरे की तरफ चल दिए . घर की ज्यादा तर लाइट्स बंद थी. शायद सब सो चुके थे .

अमित : वो पार्टी में गलती से इन्होने पि ली ,, सब सो गए क्या ?

करिश्मा : हाँ , , यहाँ लेता दो इन्हे. लगता है दीदी ने पहली बार hi ऐसा कुछ किया है. और ये ऐसे कपडे ??? एनीवे ,, मैं कर लुंगी .



करिश्मा दीदी ने निधि को अचे से बीएड पर लिटाया और उन पर चादर ओढ़ा दी. मैं कमरे से निकल कर ऊपर अपने कमरे की तरफ चल दिया . पहले मोहित क कमरे में झाँका तो देखा वो आराम से सोया पड़ा था. फिर मैं अपने कमरे में आ कर अपने कपडे खोलने लगा . मेरे बदन में गर्मी कुछ ज्यादा hi महसूस हो रही थी और लैंड महाराज भी सर उठाये थे . शायद निधि दीदी क साथ किश ने मुझे अंदर से ज्यादा hi गरम कर दिया था. इस वक़्त दिमाग कुछ सोचने समझने की हालत में नहीं थी . आंटी को मैंने रत को मिलने का कहा था तो सोचा अब अपने लैंड की गरमी उन्ही पर उतरता हूँ. पर वो तो सो गयी थी , इस लिए मैंने उनके कमरे में खुद जाने का सोचा . मैंने कपडे बदल कर लोअर और T-shirt पहना और लाइट बंद कर क बहार निकलने hi वाला था क दरवाज़ा खुला और आंटी अँधेरे में hi सामने कड़ी थी. मेरे दिल की मुराद पूरी हो गयी और मैंने बिना देर किये उनका हाथ पकड़ उन्हें अंदर खिंचा और उनके होंठों को चूमने लग गया .
 
अपडेट कल मिलेगा भाई अभी थोड़ा काम बाकि है
 
अपडेट 264



मैं आंटी क होंठों को अपने होंठों में दबाये बस चूमे जा रहा था. पता नहीं मुझ पर कीड़ा असर हो रहा था क मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था . आंटी मेरी बाँहों में थी और मैंने उन्हें बाँहों में कास कर बस चूमे जा रहा था . आंटी कुछ नहीं कर रही थी पर मैं अपने कम में लगा था. अब मेरे हाथ उनके स्तनों पर पहुँच गए उन्हें मैं मुर्गियों में कास कर भींचने लगा . आंटी दर्द से सिसकी शायद मैंने जोश में ज्यादा hi ज़ोर से दबा दिया था . आंटी क स्तन आज ज्यादा सख्त और कुछ छोटे लग रहे थे पर मुझे कहाँ इस बात की परवाह थी. कुछ देर में hi आंटी का हाथ मेरे और पर आ गया और अब वो भी मुझे किश करने लगी मेरे बालों में हाथ चलते हुए. मैंने आंटी क चूतड़ों पर हाथ ले जाकर उन्हें ऊपर उठा लिया और बीएड की तरफ चल दिया. लाइट्स मैंने अभी अभी बंद की थी जाने क लिए और अब उसे जगाने की कोई ज़रूरत भी नहीं थी. मैंने आंटी को बीएड पर पटक दिया और उनके पाऊँ पकडे , पाऊँ में पहने जुटे मैंने उतर दिए और उनके नाईट सूट क पाजामे को कमर से पकड़ कर खिंच कर उतर दिया. अगले hi पल मैंने अपने कपडे भी एक झटके में उतर दिए , मुझसे तो एक पल भी अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था. नसों में जैसे गर्मी भर चुकी थी जिसे मैं जल्दी से निकल देना चाहता था . रमा आंटी बीएड पर लेती थी मैंने अँधेरे में टटोल कर उनके पाऊँ पकडे और उन्हें घसीट कर उन्हें बीएड क किनारे ले आया और खुद घुटनो पर नीचे बैठ गया . अँधेरे में दिख तो नहीं रहा था पर मुझे इसकी परवाह कहाँ थी. मैंने आंटी क पाऊँ पकड़ कर फैलाये और उनकी नरम जांघों को मसल कर चूमा . छूट पर हाथ लगाया तो वहां पेंटी थी . मैंने तुरंत उसे भी खींच कर उतर दिया . मैंने छूट पर जैसे hi हाथ रखा तो छूट क ऊपर झांटें थी .

अमित : ये क्या ??? आपको पता था न आज रत मैं आपकी छूट मरूंगा फिर ये बाल साफ़ क्यों नहीं किये ?

आंटी ने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया . मुझे ाचा नहीं लगा उनकी छूट पर बालों का होना . मैंने फिर भी एक बार उनकी छूट को फैलाया और दो उंगलियां अंदर डाली. आंटी तो पहले से hi पूरी तरह तैयार थी उनकी छूट पूरी गीली थी पर थोड़ी कासी हुई लग रही थी. मैंने उँगलियों को अंदर बहार किया तो आंटी तड़पने लगी और उनका बदन ऐंठने लगा . उनके मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी मगर दबी दबी , जैसे वो अपना मुँह खुद hi दबा कर आवाज़ बंद कर रही थी अपनी . मुझसे और देर रुकना मुश्किल था इस लिए मैंने जल्दी से अपनी पोजीशन सेट की और खड़े होकर अपने घुटने बेंड करके थोड़ा नीचे झुका . आंटी की छूट अभी भी लैंड से थोड़ा सा नीचे थी तो मैंने जल्दी से तकिया पकड़ कर उनकी कमर क नीचे रखा और लैंड छूट पर सेट कर क हल्का धक्का मारा. 3-4 इंच लैंड छूट में घुस गया. हैरानी की बात थी आंटी की छूट आज लैंड पर कड़ी हुई लग रही थी जबकि मैं तो उन्हें कई बार छोड़ कर छूट को खोल चूका था. आंटी क मुँह से दबी दबी सिसकी निकली जैसे उन्हें दर्द हुआ हो.

‘ मममममममम मममममम ममममम’

अमित : आज क्या किया है आपने , आपकी छूट कुछ ज्यादा hi टाइट लग रही है .

आंटी कुछ नहीं बोली , मैं उनके ऊपर hi झुक गया और उनके स्तनों को दबोच लिया जो अभी कपड़ों में थे . एक बार फिर से मैंने धक्का पेलता और इस बार पूरी ताकत से धक्का मारा जिस से मेरा लैंड पूरा जड़ तक छूट में समां गया और मुझे ऐसा लगा जैसे लैंड तंग गुफा में फस्स गया हो. और इस धक्के से आंटी कुछ ज्यादा hi तड़प उठी .

‘ मममममममम मममममममम ममममममम ‘

आंटी अपनी तंग सिकोड़ने की कोशिश करने लगी और मेरे नीचे से निकलने की. पर निकलती कैसे मैंने उन्हें पूरा जकड रखा था

अमित : क्या हुआ जान , तुम कुछ ज्यादा hi टाइट लग रही हो आज . क्या किया है तुमने अपनी छूट क साथ ? कोई बात नहीं अभी इसे खुल्ला करता हूँ.

मैंने आंटी क स्तनों को दबोचे हुए अपनी कमर हिलनी शुरू की और आंटी लगातार सिसकने लगी . लैंड छूट में फास फास क आ जा रहा था पर छूट में पर्याप्त चिकनाई की वजह से लैंड बिना रोक टोक आने जाने लगा और अपना रास्ता बनाने लगा . आंटी कुछ भी बोल नहीं रही थी बस दबी दबी सिसकियाँ निकल रही थी. मैंने उनकी कमीज पर हाथ डाला और उसे खींच कर निकलने लगा . आंटी ने इसमें मेरी मदद की और अगले hi पल उनकी ब्रा भी मैंने निकल दी . अब वो पूरी तरह से नंगी थी और मैं झुक कर उनके एक स्तन को मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरे को मसलने लगा. कुछ देर मैं ऐसे hi उनकी छूट को पेलता रहा और उनके स्तन बरी बरी से चुस्त रहा . फिर मैंने उनकी टांगों को पकड़ कर उनके सर की तरफ दबा दिया और ज़ोरदार धक्के मरने लगा . आज आंटी की छूट छोड़ने में कुछ ज्यादा hi मज़ा आ रहा था . हैरानी की बात तो ये हुई की आंटी कुछ hi मिनटों में झाड़ गयी . शायद वो कुछ ज्यादा hi गरम थी और ज्यादा देर खुद को रोक न पायी जबकि उनका स्टैमिना मेरी चुदाई से बढ़ चूका था . छूट से पानी निकलने पर मैंने लैंड बहार निकल लिया और खुद बीएड पर लेट गया . आंटी तो बस अपने स्खलन का मज़ा लेने में लगी थी और उनका बदन कांप रहा था . मैंने उन्हें पकड़ कर घुमाया और अपने ऊपर कर लिया .

अमित : आज क्या बात है आप इतनी जल्दी झाड़ गयी ? चलो अब मेरे ऊपर आ कर सवारी करो .

आंटी बिना बोले मेरी कमर क दोनों तरफ घुटने बीएड पर टिका कर मेरी छाती पर हाथ रख कर सीधी बैठ गयी और फिर धीरे से थोड़ा ऊपर उठ कर छूट पर लैंड सेट कर क नीचे बैठने लगी . लैंड आराम से फिर एक बार जड़ तक छूट में समां गया. मैंने हाथ बढ़ा कर आंटी क दोनों रसीले आप पकडे और उन्हें दबाने लगा. आंटी धीरे धीरे अपनी कमर हिलने लगी. मगर मुझे मज़ा नहीं आ रहा था . आंटी आज कुछ ढीली ढीली सी लग रही थी चुदाई में जबकि उन्हें तो मेरी आदत हो चुकी थी तेज़ चुदाई की . मैंने खुद hi अपनी कमर उछालनी शुरू कर दी और छूट में लैंड दाना दान पेलने लगा . आंटी अपनी कमर को थोड़ा हवा में उठाये जैसे धक्कों से बचने की कोशिश कर रही थी. उनके हाथ उनके मुँह पर थे . मैंने उनके स्तनों को पकड़ कर खिंचा और उन्हें अपने ऊपर झुका लिया . एक हाथ उनके सर क पीछे ले जाकर उनको अपने मुँह पर झुकाया और उनके होंठ चूमने की कोशिश की तो उनके हाथ बीच में आ गए .

अमित : ये क्या रमा डार्लिंग ? मुँह पर हाथ क्यों रखा है ?

आंटी ने हाथ हटाया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए . मैंने उनके होंठ चुस्त नीचे से कमर उछलने लगा . मेरी स्पीड कुछ ज्यादा hi तेज़ हो रही थी. मुझे आज ज्यादा hi मज़ा आ रहा था और अभी मेरे लैंड से पानी निकलना बहुत दूर था . मैंने आंटी की कमर से हाथ नीचे ले जाते हुए उनके चूतड़ों पर ले गया और उन्हें मसल मसल कर अपनी एक उंगली गांड क सुराख़ पर ले गया. ताज्जुब था क गांड का सुराख़ भी पूरा टाइट हो रखा था . उंगली भी अंदर नहीं जा रही थी पर मैंने ज़ोर लगा कर उंगली अंदर घुसा दी. आंटी ने एक हाथ पीछे ले जा कर मेरा हाथ हटाने की कोशिश की पर मैं कहाँ मैंने वाला था. गांड में उंगली करने से फिर एक बार आंटी का बदन ऐंठने लगा और उनकी छूट फिर से पास्ट हो गयी . आंटी ने किश करते हुए hi मेरे होंठ अपने डेंटन में दबा दिए शायद मज़े क आलम में . आंटी झटके खरी हुई पास्ट हो कर मेरे ऊपर लेट गयी पर मेरा अभी कहाँ हुआ था. मैंने आंटी को अपने ऊपर से उतरा और उन्हें घुटनो पर कर कुटिया बना लिया . अपनी पोजीशन लेने क बाद मैंने एक हाथ से लैंड पर अकड़ कर छूट पर सेट किया और एक ज़बरदस्त झटका मर कर जड़ तक लैंड छूट में घुसा दिया. आंटी क मुँह से फिर से चीक निकली पर उन्होंने बीच में hi दबा दी. तकिये में मुँह छुपा कर वो अपनी आवाज़ दबाने की कोशिश कर रही थी और इधर मैं पूरा मस्त हो कर तेज़ धक्के पेलने लगा . मेरे खून की रवानी बढ़ती जा रही थी और मैं अपनी गर्मी निकलने क लिए ज़ोरदार चुदाई करने लगा . आंटी का बदन ऐसे हिल रहा था जैसे वाइब्रेशन पर लग गया हो. वो अपना एक हाथ पीछे ला कर मुझे रोकने की कोशिश करने लगी . पर मैं अब कहाँ रुकने वाला था .

अमित : क्यों रमा डार्लिंग , मज़ा तो आ रहा है न ? आज तुम्हारी छूट कुछ ज्यादा hi पानी छोड़ रही है.

मैंने आंटी की गांड में फिर से उंगली डाली और वो कुछ hi धक्कों में फिर से पास्ट हो गयी . अब मेरा भी होने वाला था . आंटी तो पास्ट हो कर आगे बीएड पर गिर क पसर गयी. मैंने सोचा क छूट कुछ ज्यादा hi पानी बहा चुकी है तो क्यों न गांड hi मरी जाये. वैसे भी आज आंटी की गांड कुछ ज्यादा hi टाइट लग रही थी . मैं आंटी क ऊपर hi लेट गया और एक हाथ से लैंड पकड़ कर गांड क सुराख़ पर रख कर दबाव देने लगा . तभी आंटी एक डैम से घबरा कर चीखती हुई मेरे निचे से निकलने की कोशिश करने लगी

आंटी : नहीं नहीं , पीछे नहीं प्लीज ,, मैं बर्दाश्त नहीं कर सकती वहां ,, प्लीज

आंटी की आवाज़ सुनते hi मेरे होश एक पल में hi गम हो गए . क्यूंकि ये आवाज़ आंटी की नहीं बल्कि करिश्मा दीदी की थी. मैंने जल्दी से बीएड क साइड में लगे केम्प को ों किया जिससे कमरे में रौशनी हो गयी . मेरी नज़र शामे करिश्मा दीदी पर गयी तो मैं वहीँ बूत बन गया . करिश्मा दीदी एक डैम नंगी मेरे सामने थी , इसका मतलब मैं जिसे आंटी समझ कर इतनी देर से छोड़ रहा था वो आंटी नहीं करिश्मा दीदी थी . कमरे में एक डैम से ख़ामोशी छ गयी थी. न मैं कुछ बोल रहा था न दीदी और अपनी अपनी जगह बस बूत बने खड़े थे .

अमित : आप ,,,,,, आप यहाँ ,,,, कक,, कैसे ,,,, मुझे पता नहीं था ,,, आप …..

मुझे समझ नहीं आ रहा था क क्या बात करूँ . मैंने तो उनके आते hi उन पर सवार हो गया था . आंटी समझ कर मैं बस अपनी हवस मिटने में लग गया , ये भी नहीं सोचा क कोई और भी हो सकता है . अब करिश्मा दीदी से ये भी तो नहीं कह सकता था क मैं यहाँ तुम्हारी माँ का इंतज़ार कर रहा था चाहे उन्हें पता भी था हमारे बारे में

करिश्मा : वो ,,, मैं तुमसे पूछने आयी थी क तुम्हे कुछ ,,,,, तुम्हे शायद माँ का इंतज़ार था ??,,,

मैंने करिश्मा दीदी की बात सुन कर नज़रें उठा कर उनको एक बार देखा तो वो मेरी आँखों में hi देख रही थी.

अमित : आप जानती थी ??? सॉरी ,,, वो ,,, मैं ,,, मैंने आपके साथ ….

करिश्मा : सॉरी मत कहो ,, मैं खुद कब से ये चाहती थी ,,, पर हिम्मत नहीं हो पायी कभी कहने की. सच कहूं तो तुम पहले मर्द हो मेरी लाइफ जिसको मैं दिल से चाहने लगी हूँ. जानती हूँ ये गलत है पर तुमने जिस तरह मुझे उस नरक से निकला और मुझे फिर से जीने का मौका दिया , उसके बाद तो इस दिल में तुम्हारे सिवा और कुछ आया hi नहीं. मैं जानती हूँ तुम मुझसे नाराज़ हो जो मैंने तुम्हारे साथ किया . तुमने तो मुझे माफ़ कर दिया पर मैं खुद को कभी माफ़ नहीं कर पायी . आज जब तुमने मुझे माँ समझ कर प्यार करना शुरू किया तो मैं खुद को रोक hi न पायी .

अमित : पर मैं आपके साथ ये सब नहीं करना चाहता था .

करिश्मा : क्यों ????? मुझमे क्या कमी है ? या फिर तुमने मुझे अभी तक माफ़ नहीं किया ??? जब मेरी माँ क साथ कर सकते हो तो मेरे साथ क्यों नहीं ? क्या मैं सुन्दर नहीं हूँ ?

अमित : आंटी को जब पता चलेगा तो उन पर क्या बीतेगी ? वो मुझे hi गलत समझेंगी न , और अगर गलती से ये बात किसी और को पता चली तो ?

करिश्मा : किसी को कुछ पता नहीं चलेगा, क्या तुम्हारे और माँ क बारे में किसी को पता चला ? रही बात माँ की तो वो मैं देख लुंगी वैसे भी वो तुमसे नाराज़ नहीं हो सकती , वो तुमसे बहुत प्यार करती हैं.

अमित : पर फिर भी ये सब गलत है.

करिश्मा : दुनिया की नज़र में चाहे गलत हो पर मुझे तुम्हारा सहारा चाहिए . मैं अब कभी शादी नहीं करुँगी ज़िन्दगी में , एक बार जो कुछ ज़िन्दगी ने दिखा दिया अब वो मैं दोबारा देखना नहीं चाहती. अगर तुम मुझसे थोड़ा सा भी प्यार करते हो तो क्या मेरी सुनी ज़िन्दगी के प्यार क थोड़े से रंग नहीं भर सकते क्या ? माँ को तो तुमने प्यार दे दिया क्या मेरी कोई जगह नहीं तुम्हारे दिल में ??

करिश्मा दीदी की बातों का मैं क्या जवाब दूँ मुझे समझ नहीं आ रहा था . कुछ देर खामोश रहने के बाद करिश्मा दीदी खुद hi मेरी तरफ सरक कर आ गयी और हाथ बढ़ा कर मेरा लैंड थम लिया जो सुस्त पड़ने लगा था.

अमित : ये आप क्या ,,,,, कक्कक्कक्स

मेरी बात बीच में hi रह गयी जब करिश्मा दीदी ने झुक कर मेरे लैंड पर किश कर दी .

करिश्मा: अब जो हो चूका है उसे दोबारा करने में इतना क्यों सोच रहे हो ??? मैं बता नहीं सकती तुमने आज मुझे कितनी सटिस्फैक्शन दी है. जब से तुम्हे अपने ननद सास और माँ क साथ सेक्स करते देखा है मैं कितना तड़प रही थी ये मैं hi जानती हूँ. सच में ये बहुत खास है ,, इसी लिए तो माँ इसकी दीवानी है . अब ज़रा इसे भी रिलैक्स कर दूँ वर्ण ये तुम्हे सोने नहीं देगा .

करिश्मा दीदी ने 3-4 बार छोटे छोटे किश किये और फिर सुपडे को होंठों में कास लिया. उन्हें शायद ये सब अत नहीं था पर फिर भी वो 3-4 इंच लैंड मुँह में ले कर चूसने लगी. एक बार फिर लैंड महाराज अकड़ में आ गए. अब मैं भी सब भूल कर मज़ा लेने लगा और मेरी ऑंखें अपने आप बंद हो गयी . दीदी बीएड पर मेरे सामने घुटनों पर बैठी , झुक कर लैंड चूस रही थी. कुछ देर बाद वो भी थक गयी .

करिश्मा : और कितनी देर लगेगी इसे ? तुम चाहो तो आगे से कर लो , मैंने कभी पीछे नहीं लिया है .

दीदी की बात सुन कर मैंने ऑंखें खोली और उनकी आँखों में इल्तिजा देखि तो मुझे उनके मासूम चेहरे पर प्यार आ गया

अमित : कोई बात नहीं , वो तो मैं आंटी समझ कर करने लगा था , खैर कोई बात नहीं . मैं आगे से hi करूँगा .

करिश्मा दीदी पीठ क बल लेट गयी और अपनी जांघें फैला दी. मैंने घुटनो पर हो कर अपनी पोजीशन सेट की और उनकी टंगे उठा ली . एक हाथ से लैंड को छूट पर सेट करने लगा तो नज़र उनकी छूट पर गयी. करिश्मा दीदी रमा आंटी की तरह दूध सी गोरी थी और फिगर भी कमल की थी . 34-30-36 छूट एक डैम गुलाबी थी और अभी अभी मेरे लैंड की मर से औकात से ज्यादा खुल कर लाल हुई पड़ी थी. मैंने लैंड से छूट पर 4-5 ठोकर मरी और फिर लैंड को छूट में घुसा दिया . दीदी की सिसकी निकल गयी आधा लैंड अंदर लेने से hi. अगले झटके में मैंने पूरा लैंड छूट में जड़ तक घुसा दिया और दीदी क मुँह से दर्द और मज़े की मिली जुली सिसकी निकली .

करिश्मा : आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स उम्म्म्म अमित आअह्ह्ह ,,, ये बहुत बड़ा है ,,,, ककक पता नहीं माँ कैसे झेलती है इसे ,,, कक्कक्स आगे लेने में hi जान निकल रही है और माँ इसे पीछे भी ले लेती है ????

अमित : उन्हें पता है मुझे उनकी बैक पसंद है इस लिए वो भी मन नहीं करती. पहली बार तो आगे भी दर्द होता है न ??? आप बहुत ज्यादा टाइट हो .

मैंने करिश्मा दीदी की आँखों में देख कर ये सब कहा तो वो शर्मा गयी और मुँह फेर लिया

करिश्मा : तुम्हारा hi घोड़े जैसा है तो सब टाइट hi लगेंगी न .. तुम्हे क्या पीछे से करना सच में इतना पसंद है ??? कक्कक्स हनननन ऐसे hi उम्मम्मम कक्कक्क्स उन्हें और प्यार करो उम्म्म्म कक्कक्क्स माआआ

मैंने दीदी क चुके को मुँह में भर कर दूसरे को दबाना शुरू कर दिया और दीदी मचल के खुद hi मेरा सर अपनी छाती पर दबाने लगी. मेरी स्पीड एक बार फिर से तेज़ हो गयी और मैं तूफानी धक्के पेलता हुआ दीदी की छूट खोलने लगा . दीदी ने अपनी टंगे मेरी कमर पर लपेट ली थी. मैं पिछले आधे घंटे से दीदी की चुदाई कर रहा था . अब मेरा लावा भी टूटने वाला था और आखिर क ज़ोरदार धक्के मर कर मैंने दीदी की छूट में hi अपना वीर्य गिरा कर खुद भी उनके ऊपर गिर गया. इस दौरान दीदी भी एक बार और झाड़ चुकी थी. हम दोनों hi थक गए थे , इस लिए पता hi न चला कब आँख लग गयी .

दूसरी तरफ पुलिस पार्टी बिल्ला और उसके साथियों को लेकर वापिस लौट आयी थी. ऋतू क कहे मुताबिक उन्हें एक अलग जगह पर ले जाया गया जो क पुलिस स्टेशन नहीं थी. पहले अचे से खातिरदारी की गयी सबकी फिर ऋतू वहां पहुंची . ऋतू को देखते hi सबकी हवा टाइट हो गयी .

ऋतू : तो ये हैं वो बहादुर जिन्होंने ऋतू सिंह से पन्गा लेने की कोशिश की .

ऋतू की रोआबदार आवाज़ और उसके तेवर देख कर सबकी बीच में hi फट गयी . एक तो पुलिस वाले उन लोगों को ऐसे सुनसान जगह पर लेकर आये थे ऊपर से ऋतू क तेवर. वो सब अंदर hi अंदर दर रहे थे क कहीं पुलिस उन लोगों को टपका hi न दे. बिल्ला क आदमी तो रोंगटे हुए हाथ hi जोड़ने लगे .

बिंदु : मैडम हमें छोड़ दीजिये हमने कुछ नहीं किया . हम आपसे पन्गा कैसे ले सकते हैं. भगवन क लिए हमें छोड़ दीजिये .

ऋतू : तुम जैसों क लिए भगवन भी कुछ नहीं करता समझे , और क्या कहा तुमने ? तुम लोगों ने कुछ नहीं किया ? ऐसा कौन सा क्राइम है जो तुम लोगों ने नहीं किया . मगर गलती कर दी ये हरकत कर क. तुम्हे पता होना चाहिए था जिस पर तुम हाथ दाल रहे हो वो मेरे अपने हैं. क्या मेरा खौफ नहीं था तुम्हे ? कोई बात नहीं , अब तुम्हारे साथ जो होगा उसके बाद कोई हिम्मत नहीं करेगा फिर से ऐसा करने की. इंस्पेक्टर, इन लोगों की एंट्री तो नहीं डाली तुम लोगों ने ?

इंस्पेक्टर: नहीं मैडम , जैसा अपने कहा था , ये पूरा ऑपरेशन कहीं भी दर्ज नहीं किया गया . किसी को कुछ पता नहीं चलेगा क इन लोगों को किसने गायब किया है .

बिल्ला और उसके साथियों की अब तो सच में फट गयी. जिस बात क दर था वही होने वाला था अब .

बिल्ला : ऐसा मत करो मैडम , आप ऐसा नहीं कर सकती हमारे साथ . हमने किसी की जान थोड़ा hi ली है . आप हमारा एनकाउंटर नहीं कर सकती

ऋतू : ाचा ???? तो तुम मुझे कानून सिखाओगे ? मैं क्या कर सकती हूँ अभी पता चल जायेगा तुम लोगों को. और एनकाउंटर कौन कर रहा है. ये तो आपसी मुठभेड़ hi कहलाएगी पुलिस फाइल्स में . गैंग वॉर क बाद मिली डेड बॉडीज

बिल्ला : मैडम माफ़ कर दीजिये , माफ़ कर दीजिये हमें . हम सच में नहीं जानते थे क वो लोग आपके पहचान वाले हैं. हम तो बस उन लोगों क हाथ पाऊँ तोड़ने गए थे .

ऋतू : तो जानना चाहिए था , अब गलती कर दी तो सजा भुगतो. इंस्पेक्टर, ले जाओ इनको और शूट कर दो.

ऋतू की बात सुनते hi सब क सब ऐसे रोने गिड़गिड़ाने लगे जैसे सच में सामने यमराज खड़ा हो और उनकी आत्मा निकलने वाला हो. अब तक ऋतू ने एक भी सवाल नहीं किया था . जबकि बिल्ला ये सोच रहा था क यहाँ उससे सिर्फ पूछताछ होगी. मगर पूछताछ तो दूर यहाँ तो सीधा उसका टिकट hi काटने वाला था

‘ हमें माफ़ कर दो मैडम , आप जो बोलेंगी हम वही करेंगे . हम अपने सारे गुनाह कबूल करेंगे . ‘

सब क सब एक hi सुर में गिड़गिड़ाते हुए हाथ जोड़ भीख मांग रहे थे अपनी ज़िन्दगी की . एक ईमानदार पुलिस अफसर की दहशत क्या होती है आज उनकी आँखों में साफ़ नज़र आ रही थी जो पुलिस और कानून को अपनी जेब में रखते थे कुछ भ्रष्ट लोगों को रिश्वत खिला कर.

ऋतू : इतने में hi मूट निकल गया हिजड़ों का? इंस्पेक्टर इन सब को ले जाओ और उनके गुनाह कबूल करवा कर जज क सामने पेश कर दो. इस बिल्ला को यहीं छोड़ दो .

बिल्ला क सब साथी खुश हो गए. सामने कड़ी मौत से ज़िन्दगी की भीख मिलने पर वो ख़ुशी से झूम उठे थे और खुद hi पुलिस वालों क साथ निकलने क लिए उठ खड़े हुए अपने दर्द की परवाह न करते हुए जो उन्हें ज़बरदस्त ठुकाई से मिला था . जबकि बिल्ला ऋतू की बात पर और भी ज्यादा दर गया था. मतलब साफ़ था क अब उसे कोई नहीं बचा सकता .

बिल्ला : मुझे भी इन सब क साथ जाने दो मैडम , मैं भी अपने सब जुर्म कबूल करूँगा. मुझे भी जेल में दाल दो .

ऋतू : अरे अरे , तू तो ऐसे hi दर रहा है. तुझे तो मैं आज़ाद करने वाली हूँ. कहाँ तू जेल में चक्की पिसेगा , तुझे तो तेरी नरक भरी ज़िन्दगी की कैद से आज मैं हमेशा क लिए आज़ाद करने वाली हूँ.

बिल्ला : नहीं मैडम , भगवन क लिए छोड़ दीजिये , मैं अपने सरे गलत काम बंद कर दूंगा . मैं कसम खता हूँ आज क बाद कोई भी गलत काम नहीं करूँगा . आप जो बोलेंगी वो करूँगा . मुझे माफ़ कर दो मैडम

ऋतू : अगर तू इतना समझदार होता तो बिना कहे hi समझ जाता क मैं क्या चाहती हूँ. इंस्पेक्टर, ले जाओ इसे . और ध्यान रखना , सीधा मौत नहीं , तड़प तड़प कर मरना चाहिए ये .

बिल्ला : नहीं नहीं मैडम , आप जो बोलोगी मैं करूँगा मैडम. एक बार हुकम कीजिये मैं आपकी हर बात मानूंगा . एक बार मुझे मौका दीजिये

ऋतू : अब भी नहीं समझे क मैं क्या चाहती हूँ? बता तूने ये सब किसके कहने पर किया था ? किसने पैसे दिए थे तुझे ?

बिल्ला : वो मुझे मार देगा मैडम

ऋतू : वो तुझे मरेगा या नहीं वो बाद की बात है. अभी तुझे ज़िंदा रहना है तो सब सच सच बता और सरकारी गवाह बन जा. पता तो मुझे है hi क इसके पीछे कौन है. अगर तू गवाह बन जायेगा तो उसे भी जल्दी से सलाखों क पीछे दाल दूंगी. फिर वो तेरा कुछ नहीं कर पायेगा . तब तक तू पुलिस की हिफाज़त में रहेगा. अब उसके सारे काळा कर नाम एक एक कर क बता .

बिल्ला : आप मुझे बचा लेंगी न मैडम ?

ऋतू : तुझे अब भी शक है ?

बिल्ला : ठीक है मैडम , मैं सब बताता हूँ. पर उसकी पहुँच बहुत ऊपर तक है. अगर आप उसका कुछ न बिगड़ पायी तो वो मुझे मरवा देगा .

ऋतू : वो मैं देख लुंगी , कहाँ तक उसकी पहुँच है. उसका पैसा रिश्वत खोर लोगों पर hi धौंस जमा सकता है. मुझ पर नहीं .

बिल्ला ने फिर बलजीत राइ क बारे में अपनी ज़ुबान खोल दी और उसके सरे कारनामे जो उसे पता थे वो एक एक कर क बताने लगा . ऋतू अंदर से बहुत खुश हो रही थी क अब उसका हाथ बलजीत राइ क गिरहे बाण तक पहुँच गया था . ऋतू चेहरे पर सख्ती क भाव रखे अपने अंदर की ख़ुशी दबती कुछ देर बिल्ला क इकबाल जुर्म को सुनती रही और फिर चली गयी. अब उसे बलजीत राइ को अरेस्ट करने क लिए अपनी बिसात भी तो बिचानी थी जिसके लिए उसे कई लोगों से बात करनी ज़रूरी थी. आखिर इतने बड़े आदमी पर हाथ डालना आसान तो नहीं होने वाला था . कहीं न कहीं से प्रेशर तो पड़ना hi था

सुबह मेरी जब आँख खुली तो मेरा सर थोड़ा भरी सा लग रहा था. मैं उठ कर बैठ गया और कुछ पल खुद को होश में लेन की कोशिश करता रहा . जब कुछ नार्मल हुआ तो मेरी नज़र बगल में लेती करिश्मा दीदी पर पड़ी. जो अभी भी बिलकुल नंगी पेट क बल लेती सो रही थी. एक तंग आगे की तरफ बेंड करने से उनका एक चूतड़ कुछ ज्यादा hi ऊपर उठा हुआ था. दूध सी गोरी काया और परफेक्ट फिगर किसी को भी मस्त कर देने क लिए काफी था . मेरा लैंड भी अपने आप पूरा तन कर खड़ा हो गया. मेरी नज़रें उनके ऊपर से हैट hi नहीं रही थी. चूतड़ उठे हुए थे और उनके साथ hi नीचे की तरफ ढलान पर उनकी गुलाबी छूट की फांके थी जो कुछ सूज चुकी थी. पहली बार जो इतना बड़ा लैंड लिया था उन्होंने . गुलाबी छूट को देखते हुए मेरे हाथ अपने आप उस तरफ बढ़ गए और एक बार चूतड़ों को स्पर्श करने क बाद मैं छूट की फांकों को सेहला कर देखने लगा . नंगी गोरी पीठ , ऊपर बिखरे हुए काले बल , खरबूजे जैसे मस्त चूतड़ और गुलाबी छूट. मेरा मन बहकाने लगा था . एक उंगली मैंने छूट में घुसा कर देखने की कोशिश की तो करिश्मा दीदी कसमसा गयी और नींद में hi कुलबुलाई.

करिश्मा : ककक उम्मम्मम सोने दो न उम्म्म्म ..

मैंने अपना हाथ पीछे खिंच लिया जैसे कोई चोरी पकड़ी गयी हो. हालाँकि रत को मैं उनकी चुदाई कर चूका था पर मैंने ऐसा बिलकुल भी नहीं सोचा था कभी. ये सब अचानक हुआ था. और अब मुझे इस बात को लेकर पश्चाताप सा हो रहा था . मैं बीएड से उठा और अपनी हालत देखि. मैं भी पूरा नंगा था . मैंने जल्दी से अपने कपडे पहने . रत की बातें यद् करने लगा तो यद् आया निधि दीदी ने कल रत जो कुछ खा था , वो भी किसी शॉक से काम नहीं था . मेरा दिमाग इन सब बातों पर सोच सोच फटने लगा और सर भरी होने लगा . पता नहीं रत को क्या हो गया था. मैं भी पूरे होश में नहीं था वर्ण ऐसा नहीं होता. मगर अब सुबह हो चुकी थी और कोई भी इस कमरे में आ सकता था . मैंने जल्दी से दीदी को हिलाया .

अमित : दीदी ,, दीदी ,, उठिये ,, सुबह हो गयी है. कहीं आंटी ने इस हालत में हमें देख लिया तो बवाल हो जायेगा. उठिये दीदी ,,

करिश्मा : उम्म्म्म क्या है ,,, सोने दो न ,,,

अमित : दीदी उठिये ,, कोई आ गया तो दोनों मरे जायेंगे .

करिश्मा दीदी मेरे लगातार हिलने से उठ कर बैठ गयी. और थोड़ी सी होश आने पर जब उनकी नज़र खुद पर पड़ी थी तो जल्दी से उन्होंने बीएड शीट से खुद को धक् लिया .

करिश्मा : सुबह हो गयी ? माँ तो नहीं आयी ?

अमित : नहीं , अभी तो नहीं नहीं आयी . आप जल्दी से अपने कपडे पहन कर अपने कमरे में जाइये . इससे पहले क कोई यहाँ आ जाये . एंड सॉरी कल रत पता नहीं मुझे क्या हो गया था .

करिश्मा दीदी ने एक नज़र मुझे देखा और मैं उनकी तरफ पीठ कर क खड़ा हो गया. दीदी बीएड से उठी और उन्होंने अपने कपडे पेहेन लिए . फिर वो कमरे से जाने लगी और जाते जाते रुक गयी. दरवाज़े तक जाने क बाद वो पलटी और चल कर मेरे सामने आ कर कड़ी हो गयी.

करिश्मा : सॉरी किस लिए कह रहे हो ? कल रत जो भी हुआ वो मैं कब से चाहती थी. तुम उस बात पर शर्मिंदा हो कर मुझे भी शर्मिंदा कर रहे हो . अगर तुम माँ क साथ कर सकते हो तो मेरे साथ क्यों ऐसे बेहवे क्र रहे हो ? कल रत जो भी हुआ , वो मैं हमेशा यद् रखूंगी. और उम्मीद करती हूँ अगली बार तुम सॉरी नहीं कहोगे .



जब दीदी ने इतना कहा तो मैंने नज़रें उठा कर उनको देखा . करिश्मा दीदी क चेहरे पर स्माइल आ गयी और उन्होंने आगे बढ़ कर मेरे होंठों पर किश कर दी. छोटी सी किश करने क बाद वो मुस्कुराती हुई कमरे से निकल गयी. मैं वहां खड़ा सोचता रह गया . ये जो कुछ हो रहा है वो सही है या गलत . पता नहीं मेरी ज़िन्दगी किस और जा रही है. अपने मन में ये सब बातें सोचता मैं बाथरूम में घुस गया और नाहा कर तैयार होने लगा .
 
भाई लोगो 3 दिन से आउट ऑफ़ स्टेशन था अभी लौटा हूँ . कल से काम शुरू करूँगा अगले अपडेट का.
 
अपडेट कल देने की पूरी कोशिश रहेगी मित्रो , काम जारी है .
 
अपडेट 265



तैयार होने क बाद मैं मोहित क रूम में गया जो अभी सो रहा था . मुझे उससे बात करनी थी तो मैंने उसे नींद से जगाया . वो आज भी उखाड़ा हुआ सा बात कर रहा था पर मैंने उसे आज का दिन मेरी बात मैंने को कहा . वो राज़ी हो गया . फिर मैं नीचे आया तो आंटी नाश्ता तैयार करवा रही थी. करिश्मा दीदी और निधि दीदी अभी तक बहार नहीं निकली थी. मैं चुपचाप नाश्ते क लिए टेबल पर बैठ गया. आंटी मेरे लिए दूध का गिलास दे कर वापिस किचन में चली गयी. कल रत क बारे में उन्होंने कोई बात नहीं की क वो रत को क्यों नहीं आ सकीय. मैं भी करिश्मा दीदी वाली बात की वजह से चुप hi रहा . आज मैं रॉय से मिलने वाला था इस लिए मैं अपना ध्यान उस तरफ लगा रहा था क ये सब कैसे ठीक किया जाये.

उधर करिश्मा अमित क पास से आ तो गयी थी पर उसकी चाल कुछ बदल सी गयी थी. वजह थी उसका बड़ा लैंड जिसने करिश्मा की छूट को इतना खोल दिया था क अब उसकी फांकें सूज चुकी थी और चलने पर वहां जलन हो रही थी . बिना पेंटी क बस नाईट सूट में वो पाऊँ फैला कर चलती हुई अपने बैडरूम में पहुंची थी. बैडरूम में आते hi पहले अपनी हालत पर शर्माती हुई और रत का सन यद् करती वो शर्म से लाल हो रही थी फिर उसकी नज़र बीएड पर औंधे मुँह लेती निधि पर पड़ी. घुटनो तक की ड्रेस में वो अभी भी सो रही थी. आज तक निधि को ऐसे कपड़ों में उसने कभी नहीं देखा था और रत को भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया था पर अब जब दिन क उजाले में उसकी नज़र निधि क खूबसूरत बदन पर पड़ी तो उसकी नज़रें वहीँ जैम सी गयी. मन में इर्षा ज़रूर आयी एक बार निधि की खूबसूरती देख कर पर अगले hi पल वो मुस्कुरा दी. आखिर वो बड़ी बहिन जैसी hi तो थी और अब तो एक तरह से उसके भाई से चुद कर वो भाभी hi बन गयी थी. यानि क निधि उसकी बड़ी ननद बन गयी थी . निधि को कुछ पल निहारने क बाद उसने निधि को नींद से जगाना hi ठीक समझा .

करिश्मा : दीदी ,,,, दीदी ,,,,, उठिये न , देखिये टाइम क्या हो गया है ???

निधि करिश्मा क हिलने से थोड़ा कसमसाई और बंद आँखों को खोलने की कोशिश करती वो अस्तव्यस्त होती बीएड से तक लगा थोड़ी सी उठ के बैठ गयी. असल में निधि को जल्दी उठने की आदत थी पर रत की वोडका की वजह से उसका सर कुछ भरी था और ऑंखें खुलने का नाम नहीं ले रही थी. उसके काळा रेशमी बल चेहरे पर बिखरे पड़े थे .

निधि : गऊओऊद मॉर्निन्न्नन्ननगगगग ,,,, हुआअआआह्ह्ह्हह्ह ,,,, क्या टाइम ,,,, हो गया है ?

नींद से उठने का प्रयास करती निधि अलसाई सी बिना अपनी हालत देखे करिश्मा से मुखातिब हुई.

करिश्मा : 8 बज चुके हैं दीदी और आप अभी तक सो रही हैं. रत को कुछ ज्यादा hi एन्जॉय कर लिया था क्या ?? वैसे मन्ना पड़ेगा दीदी , इन कपड़ों में आप पूरी हेरोइन hi लग रही हैं. रत को तो आपने महफ़िल लूट ली होगी .

करिश्मा की बात पर निधि दीदी क दिमाग में एक डैम से बिजली का झटका लगा और वो तुरंत सही हो कर बैठ गयी. अपने ऊपर नज़र डाली तो रत वाली ड्रेस में hi खुद को देख वो शर्म से पानी पानी हो गयी और जल्दी से कम्बल खुद पर ौड लिया . ये देख करिश्मा क चेहरे पर मुस्कान आ गयी .

निधि : मम ,, मैं ,,, मैं यहाँ कैसे आयी ???

करिश्मा : आप ने पहले बार ड्रिंक की थी न कल ??? होता है ,, पहली बार ऐसा hi होता है. वैसे आप अमित क साथ hi यहाँ आयी थी और चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है. ये बात कोई और नहीं जनता . और मैं अपनी दीदी का ये राज़ किसी को बताने से रही.

निधि क चेहरे पर परेशानी देख करिश्मा ने खुद hi ये कह कर उसकी चिंता दूर करने की कोशिश की. निधि ये सुन कर वाकई कुछ निश्चिन्त सी हुई.

निधि : थैंक्स ,, अमित ….

करिश्मा : वो ऊपर अपने कमरे में है , तैयार हो कर निचे आ जायेगा . तब तक आप भी तैयार हो जाइये . मैं भी नाहा लेती हूँ फिर आपके लिए कॉफ़ी लती हूँ. अगर पहले चाहिए तो आप आवाज़ लगा दो. कपडे वहां कप्बोर्ड में हैं .

निधि : कोई बात नहीं , साथ में hi पिएंगे .

करिश्मा नहाने क लिए बाथरूम में घुस गयी . उसकी बदली चल पर निधि की नज़र गयी hi नहीं क्यूंकि उसे तो अपनी टेंशन हो रही थी . करिश्मा क बाथरूम में घुसते hi निधि तेज़ी से उठी और पहले दरवाज़े को कुण्डी लगाने क बाद जल्दी से उसने कप्बोर्ड से करिश्मा की लॉन्ग निघ्त्य निकली और वो पेहेन ली. साथ एक आराम दायक ड्रेस जो वो पेहेन सके . करिश्मा बाथरूम खूब रगड़ रगड़ क नहीं और रत अमित द्वारा मसली गयी अपनी चूचिओं को हाथ लगते hi उसके मुँह से सिसकी निकल गयी. छूट पर तो हाथ ले जाने की भी हिम्मत न हुई उसकी. अमित को यद् करते करते कुछ ज्यादा hi देर तक वो नहीं और उसके बाद निधि भी बाथरूम में नहाने घुस गयी. निधि भी नहाते वक़्त अमित को यद् कर रही थी . उसे रत की बातें यद् थी पर आखिरी पेग क बाद जो कुछ भी हुआ वो बस धुंधला सा यद् था . यानि क अमित क साथ जो उसने किश किया था और जो दिल की बातें की थी वो यद् तो थी पर ऐसे लग रहा था जैसे वो सपना था शायद . निधि जल्द जल्द से अमित से मिलना चाहती थी . उससे मिल कर hi पता चल सकता क उसने सच में अपने दिल की बात की है या ये महज़ एक सपना है . और अगर सच में उसने अपने दिल की बात कह दी है तो अमित का क्या जवाब है ये भी तो जानना था . निधि ने नहाने क बाद करिश्मा क कपडे पेहेन लिए . जिस पर करिश्मा ने उसे कहा भी क वो पहले वाले कपड़ों में ज्यादा खूबसूरत लग रही थी पर निधि ने उस बात को चूमा दिया . करिश्मा भी ढीले कपडे पेहेन कर तैयार थी ताकि वो अपनी हालत छुपा सके.

मैं नाश्ते क टेबल पर अभी दूध पि कर बैठा था क करिश्मा दीदी और निधि दीदी कमरे से निकलती दिखाई दी. मेरी नज़र जब उन पर पड़ी तो दोनों की नज़र मुझे देख कर hi झुक हुई. करिश्मा दीदी तो नै नवेली दुल्हन की तरह शर्मा रही थी जबकि निधि दीदी भी एक बार मुझे देख कर नज़रें चुराती दिखी. दोनों धीमे कदमो क साथ चलती मेरे करीब आयी और चेयर्स पर बैठ गयी. करिश्मा दीदी क चेहरे पर दर्द क भाव दिखे . अपने होंठ दांतों में दबती वो बखूबी इस बात को छुपाने की कोशिश कर रही थी क उन्हें बैठने में तकलीफ हो रही है. इतने में आंटी किचन से दोनों क लिए कॉफ़ी ले आयी.

रमा : उठ गयी तुम दोनों ? कैसी हो निधि बीटा ? आज तुम भी देर से उठी ? रत पार्टी तो अछि थी न ?

निधि : जी आंटी , सब ठीक था , वो रत को देर से आँख लगी थी तो सुबह देर हो गयी.

रमा : कोई बात नहीं , अपना hi तो घर है . नए साल की ढेर साडी शुभकामनाएं, भगवन करे ये साल सबके लिए खुशियों भरा हो.

हम सब ने एक दूसरे को हैप्पी नई ईयर विश किया . आंटी कॉफ़ी देने क बाद उठ कर फिर से किचन में चली गयी.

करिश्मा : वैसे दीदी , कल रत पार्टी थी कहाँ पर ? मैं तो सच में हैरान हो गयी थी आपको देख कर . एक तो ऐसे कपडे पहने मैंने पहली बार आपको देखा ऊपर से आप ने ड्रिंक …

निधि : वो ,, पता नहीं कैसे ,,, शायद किसी ने मज़ाक में ऐसा किया होगा मेरे साथ. मेरी दोस्त ने पार्टी दी थी इस लिए जाना पड़ा और वो कपडे पहनने ज़रूरी थे पार्टी क हिसाब से ,, उसने स्पेशलय कहा था . इसी लिए मैं अमित क साथ गयी थी

दीदी करिश्मा दीदी की बात पर नज़रें चुराती हुई जवाब दे रही थी और बीच में 2 बार मुझे भी देखा . अब सचाई तो मुझे पता hi थी और दीदी किस लिए झूठ बोल रही थी ये भी समझ में आ रहा था .

करिश्मा : लगता है आपकी बहुत खास फ्रेंड है जिसके लिए आप इतना कुछ कर गयी. वैसे मन्ना पड़ेगा , आप बहुत हॉट लग रही थी. पार्टी में तो आग लगा दी होगी पक्का .

निधि : ऐसा कुछ नहीं है ,,,, हाँ वो मेरी बेस्ट फ्रेंड है . हम साथ में थे कॉलेज में .

करिश्मा : अरे मन लो दीदी , जितनी हॉट आप लग रही थी न कोई भी लड़का एक बार में hi लट्टू हो जाता आप पर. ाचा किया जो अमित को साथ ले गयी थी आप वर्ण पता चलता घर क बहार लड़कों की लाइन लगी पड़ी है.

निधि : अब बस भी करो , , एक तो मुझे पहले hi ऐम्बर्रास्मेंट हो रही है कल रत की वजह से ऊपर से तुम मज़ाक कर रही हो मेरे साथ

करिश्मा : मैं कोई मज़ाक नहीं कर रही , जो कह रही हूँ सच कह रही हूँ. यकीन न हो तो इसी से पूछ लीजिये . ये तो आपके साथ hi था न .

करिश्मा दीदी की बात सुन कर निधि ने मेरी तरफ देखा पर बोली कुछ नहीं. मैं भी उनकी आँखों में देखने लगा जहाँ कुछ सवाल थे.

करिश्मा : बोल न , ऐसे क्या देख रहा है ? कल रत क्या क्या हुआ पार्टी में ? कैसी लग रही थी दीदी ?

रत पार्टी वाली बात पर मेरे सामने वो सन चलने लगा जब मैं दीदी को बाँहों में भर कर किश कर रहा था . फिर दीदी की कही वो बातें दिमाग में घूमने लगी तो मेरी धड़कन तेज़ हो गयी .

अमित : वो ,,, ये तो सब जानते hi हैं क दीदी कितनी खूबसूरत है अब मैं क्या तारीफ करूँ. कल रत तो और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी और सबकी नज़र दीदी पर hi थी .

मेरे मुँह से अपनी तारीफ सुन कर दीदी क गाल गुलाबी होने लगे और शर्मा कर एक बार उन्होंने नज़रें झुका ली .

करिश्मा : देखा मैंने कहा था न , अब तो यकीन हो गया .

उधर किचन से आंटी रानी को साथ लेकर हमारे लिए नाश्ता ले आयी .

रमा : ज़रा मुझे भी तो बताओ किस बारे में बात हो रही है .

करिश्मा : दीदी की बात कर रहे हैं हम , कल रत दीदी कुछ ज्यादा hi हॉट ,,,, मेरा मतलब है खूबसूरत लग रही थी

निधि दीदी ने करिश्मा दीदी को बात पूरी करने hi नहीं दी जब वो हॉट बोली और उनकी कलाई कास क पकड़ ली तो करिश्मा दीदी ने बात को बदला .

रमा : अब जो है सो है , लाखों में एक है हमारी निधि . भगवन से यही प्रार्थना है क इसके लिए कोई योग्य वॉर hi भेजे .

आंटी की बात सुन निधि दीदी शर्मा कर नज़रें झुका ली.

रमा : लो , अब शर्माने लगी ,, यहाँ कौन सा कोई पराया है ? चलो अब नाश्ता कर लो . बातें बाद में कर लेना .

हम सब नाश्ता करने लगे और आंटी भी साथ में बैठ गयी नाश्ता करने . इस दौरान निधि दीदी और करिश्मा दीदी चोरी चोरी मुझे देखती तो कभी मेरी नज़र भी उनसे मिल जाती. निधि दीदी क चेहरे से साफ़ ज़ाहिर था क वो मुझसे बात करना चाहती हैं. पर मैं इस बात से बचना छह रहा था . और वैसे भी आज रॉय से भी मिलना था . नाश्ता करने क बाद आंटी तो किचन में चली गयी जबकि मैं मोहित क रूम में भाग गया. निधि दीदी बेचारी खामोश थी जिसे करिश्मा दीदी बातों में उलझा रही थी. मोहित को मैंने शाम तक शराब पिने से मन किया . क्यूंकि उसका होश में रहना ज़रूरी था मेरे प्लान क हिसाब से. अब बस किसी तरफ रॉय को शामिल करना था अपने आप कब में. मोहित से बात करने क बाद मैंने रॉय को फ़ोन लगाया जिसे उसने एक hi बेल्ल पर उठा लिया . वो मुझसे मिलने क लिए एक्ससिटेड थी . रॉय ने मुझे अपने एक फार्म हाउस पर बुला लिया मिलने क लिए . मैं जब घर से निकलने लगा तो निधि दीदी ने मुझे रोक लिया .

निधि : कहाँ जा रहे हो ?

अमित : मुझे एक ज़रूरी काम है

निधि : मुझे भी तुमसे ज़रूरी बात करनी है

अमित : मैं आ कर आपसे बात करता हूँ दीदी. अभी मेरा जाना ज्यादा ज़रूरी है.

निधि : पर मुझे …..

आमिर : मैं जनता हूँ आप कल रत क बारे में बात करना चाहती हैं. मुझे भी बात करनी है उस बारे में , पर अभी मैं जहाँ जा रहा हूँ वो ज्यादा ज़रूरी है. मैं चलता हूँ दीदी .

निधि दीदी बस ख़ामोशी से मुझे देखती रही और मैं गाड़ी लेकर निकल गया . रॉय ने जो जगह बताई थी वो शहर से बहार की तरफ थी . कोई आधे घंटे में मैं वहां पहुँच गया . बहार गेट पर एक वॉचमन था पर अंदर सिर्फ एक नौकरानी थी जिसकी उम्र कोई 22-23 साल की होगी. उसने मेरे लिए दरवाज़ा खोला और मुझे अंदर हॉल में बिठा दिया . मुझे पानी का गिलास देकर वो एक कमरे में गयी और कुछ hi पलों में वहां से रॉय निकल कर सामने आ गयी. एक बार तो मैं भी रॉय की खूबसूरती को देखता hi रह गया . छाती से लेकर जांघों तक की शार्ट ड्रेस जिसमे उसका खूबसूरत गोरा बदन दमक रहा था . कंधे पूरी तरफ निर्वस्त्र थे. पैरों में ऊँची एड़ी क संदेल पहने रॉय कामुक नज़रों से मुझे देखती कैटवाक करती मेरे करीब आ कर कड़ी हो गयी. मैं उसे और से पाऊँ तक गौर से देख रहा था. रॉय भी अपना सीना ऐसे उठाये थी जैसे क वो खुद कह रही हो क साइज अचे से देख लो.

रॉय : तो आखिर कर तुम आ hi गए .

अमित : अब इतना खूबसूरत बुलावा हो तो कोई मन कैसे कर सकता है .

रॉय : हम्म्म बहुत रोमांटिक लगते हो बातों से .

अमित : काम से भी रोमांटिक हूँ , एक बार आज़मा कर तो देखो

रॉय : शर्म नहीं आती अपने दोस्त की गफ पर लाइन मर रहे हो.

अमित : जब दोस्त की गफ इतनी हॉट हो तो कौन भला लाइन नहीं मरेगा .

रॉय : अगर दोस्त को पता चल गया तो ? जानते हो क्या होगा ?

अमित : दोस्त को पता तो तन चलेगा जब उसे कोई बताएगा . न उसे मैं बताने वाला हूँ न तुम . अब सोच लो क क्या करना है

रॉय : मैं तो चाहती हूँ तुम मेरा साथ दो मोहित को अपना बनाने में .

अमित : उसके बदले में तुम्हे भी मेरे लिए कुछ करना होगा .

रॉय : क्या ??

अमित : अब इतनी नासमझ तो तुम हो नहीं .

रॉय : पार्टी में तुम्हे देख कर लगा नहीं था तुम इतने स्मार्ट हो. लगता है तुम्हारे साथ अछि जमने वाली है मेरी. एनीवे, क्या लोगे ?

अमित : जो लेने आया हूँ बस वही लूंगा , और किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं.

मैं रॉय क जिस्म को निहार रहा था बातों क साथ साथ और वो भी मेरे इरादे अचे से जानती थी.

रॉय : इतनी जल्दी किस बात की है ? कहीं जाना है क्या ?

अमित : जब इतनी सॉलिड आइटम सामने हो तो किसी और चीज़ क बारे में सोचना बेवकूफी है. वैसे भी जितना टाइम गलती क कामो में लगाना है , उसमे 1-2 राउंड और लग जायेंगे .

रॉय : तो जनाब इतने खतरनाक इरादे लेकर आये हैं. चलिए फिर देखते हैं क्या क्या इरादे हैं आपके .

रॉय ने अपनी नौकरानी को कुछ समझाया और फिर मुझे अपने पीछे आने का इशारा कर क सीढ़ियां चढ़ कर ऊपर जाने लगी . मैं भी उसके पीछे पीछे हो लिया. रॉय कुछ ज्यादा hi अपनी गांड मटका कर चल रही थी. उसकी गांड थी भी ज़बरदस्त , काम से काम 38 की रही होगी. जिस तरह वो चल रही थी उस वजह से उसकी गांड क कटाव इतने जानलेवा लग रहे थे क कमज़ोर लैंड वाले तो देख कर hi पानी छोड़ दे. हाई हील की वजह से उसके चूतड़ कुछ ज्यादा hi बहार को निकले हुए लग रहे थे . रॉय मुझे अपने साथ एक रूम में ले आयी और दरवाज़ा बंद कर दिया .

रॉय : तो ,,, इससे पहले क हम आगे बढ़ें मुझ कुछ बात करनी है .

अमित : बोलो

रॉय : मैं चाहती हूँ क मोहित की ज़िन्दगी से मीनल बहार निकल जाये और सिर्फ मैं hi रह जॉन. यानि क मोहित सिर्फ मेरा हो जाये .

अमित : समझो हो गया , मैं तुम्हे उसकी ज़िन्दगी क्या उसके घर में भी परमानेंट फिक्स कर दूंगा. आंटी अंकल और करिश्मा दीदी मुझे सब मानते हैं. मैं चहुँ तो तुम्हे उस घर की बहु भी बना सकता हूँ.

रॉय : खुश होते हुए ) सच !!!

अमित : और नहीं तो क्या ,,, पर उसके लिए तुम्हे मुझे खुश करना होगा . वो भी पूरी तरह से.

रॉय : तो फिर डील !!!! मैं तुम्हे आज वो मज़ा दूंगी जो तुम्हे कभी नहीं मिला होगा . उस मीनल से भी नहीं .

इतना कह कर रॉय मेरे ऊपर झपट पड़ी और मुझे किश करने लगी. साथ hi मेरे हाथ खुद hi अपने बूब्स पर ले जा कर दबाने लगी और फिर मेरे लैंड पर अपना हाथ ले कर उसे मसलने लगी. मैं भी कहाँ पीछे रहने वाला था , मैं भी रॉय को किश करते हुए एक हाथ से उसके कबूतर मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसके चूतड़ दबाने लगा . आअह्ह्ह्ह क्या मज़ा आ रहा था. रॉय क मस्त चूतड़ दबाने में कुछ ज्यादा hi मज़ा आ रहा था . रॉय शायद सेक्स क मामले में ज्यादा hi गरम थी. वो मेरे होंठ पागलों की तरह नोचते हुए मेरे लैंड को मसल रही थी और साथ hi अपनी जीभ मेरे मुँह में देने की कोशिश कर रही थी. मैंने उसकी शार्ट ड्रेस को उसके बूब्स से निचे खिसका दिया और पीछे से उसके चूतड़ नंगे करते हुए उसकी ड्रेस ऊपर खिंच दी.

रॉय : उम्मम्मम्हाआआह्ह्ह्ह that’s लिखे ा बैल ,,, तुम्हे देखते hi तुम पर चढ़ जाने का मन बना लिया था मैंने . आज देखती हूँ तुम कितने बड़े मर्द हो. हथियार तो काफी मजबूत लग रहा है.

अमित : ऐसा मर्द पहले तुम्हे कभी नहीं मिला होगा और हथियार तो ऐसा है क आज क बाद और किसी का पसंद आएगा hi नहीं. तुम्हारे सरे छेड़ आज न खुल दिए तो कहना.

रॉय : मुझे भी ऐसी hi चुदाई पसंद है ‘ वाइल्ड ‘ उम्मम्मम्म

रॉय लगातार मुझे गर्म किये जा रही थी. मेरा लैंड भी पूरा तन कर खड़ा हो चूका था . रॉय ने जल्दी से नीचे बैठ कर मेरी पेण्ट की ज़िप खोली और हाथ अंदर दाल कर मेरा लैंड बहार निकल लिया . लैंड देखते hi उसकी ऑंखें बड़ी हो गयी . उसके चेहरे से लग रहा था क उसने ऐसा तगड़ा लैंड कभी नहीं देखा .

रॉय : ओह माय गॉड ,,, सो हूजे ,,, ये रियल में है ??? मुझे तो लगा था ऐसा सिर्फ फिल्मो में hi होता है निग्रोस का. ये तुमने इतना बड़ा कैसे किया ???

अमित : ये असली लैंड है डार्लिंग , गाओं की मिटटी से तैयार . आज तुम्हे असली लैंड मिलने वाला है , तुम्हारी छूट का भोसड़ा न बना दिया तो कहना .

रॉय : मुझे भी ऐसे hi लैंड की तलाश थी. काश मोहित का भी ऐसा hi होता . कोई बात नहीं , अब तो ये भी मेरा hi है .

रॉय हाथ से मेरा लैंड मसल रही थी और उसकी लम्बाई चौड़ाई नाप रही थी.

अमित : चलो ज़रा इसे प्यार तो करो. देखता हूँ कितना मज़ा देती हो इसे तुम

रॉय : इसे तो आज मैं खा hi जाउंगी . गुललप्प्प ाककककक ाकककककक ाकककककक सुरररूउप सुर्र्रउपपप

रॉय मेरे लैंड को एक hi बार में अपने गले तक ले गयी और फिर उतने लैंड को अंदर बहार कर चूसने लगी. मैंने रॉय क सर पर हाथ रखा और उसके गले तक लैंड पेलने लगा . जब मैंने रॉय क सर पकड़ कर धक्के मरने शुरू किये तो कुछ hi पलों में उसका चेहरा लाल पद गया उसके मुँह से थूक निचे गिरने लगी और साँसे फूलने लगी . मैंने कुछ देर उसकी हलक में लैंड घुसा कर रखा और फिर बहार निकल लिया कहीं उसकी सांस hi न रुक जाये . लैंड बहार निकलते hi रॉय लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी अपने सीने पे हाथ रख कर .

रॉय : अखुनण अख्यूं अखूनण हहहहहहहह ,,,, आज तो सच में ,,,,, मज़ा आने वाला है

अमित : मज़ा तो आएगा डार्लिंग और ऐसा मज़ा आएगा क तुमने कभी सोचा भी नहीं होगा.

मैंने रॉय को खड़ा किया और एक झटके में उसकी नाम मात्रा ड्रेस उसके बदन से जुड़ा करदी . अब उसके बदन पर सिर्फ एक ब्लैक पेंटी hi थी . उसे भी मैंने एक झटके में उतर फेंका और रॉय को बीएड पर धक्का देकर उसकी टंगे ऊपर उठा दी. रॉय की एक डैम चिकनी गुलाबी छूट मेरे सामने थी. छूट की फांके थोड़ी खुली हुई थी साफ़ ज़ाहिर था क ये काफी लैंड ले चुकी है पर ऐसा लैंड उसने कभी नहीं लिया था और आज उसकी क्या हालत होने वाली थी ये रॉय नहीं जानती थी. मैंने रॉय को जांघों से पकड़ कर बीएड क किनारे घसीटा और झुक कर अपना लैंड छूट पर सेट किया और बिना देर किये झटका मर दिया .

रॉय : अह्ह्ह्हह कक्ककक्कक्स उम्मम्मम क्या दमदार हथियार है कक्कक्कक्स ममममम आज लग रहा है क सही मर्द से पला पड़ा है ाआईईईईई maaaaaaaaaa आआआअह्ह्ह्हह

रॉय की छूट मेरे लैंड का पहला झटका आसानी से झेल गयी थी पर फिर भी लैंड छूट में पूरा टाइट था. मज़े में सीस करती रॉय जब आगे बोलने लगी तो उसी पल मैंने दूसरा ज़ोरदार झटका पेल दिया . मैं रॉय को अपने लैंड की ताकत दिखाना चाहता था इस लिए झटका कुछ ज्यादा hi ज़ोर से पेल दिया जिससे लैंड जड़ तक छूट में घुस गया और रॉय ज़ोर से चीख पड़ी. पर मैं रुका नहीं और रॉय की टंगे अपने कंधे पर टिका के उसके ऊपर झुक कर उसकी बूब्स मसल या हुआ धक्के पेलने लगा . रॉय को दर्द हो रहा था पर मैंने उसकी कोई परवाह नहीं की और अपना काम करता रहा .

रॉय : आइआइइइइ माआ ककक रुक जाओ कक्कक्स एआईई थोड़ा धीरे करो ककक मैं कहीं भागी नहीं जा रही उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ माहाहहहहहह थोड़ा रुक जाओ न कक्कक्स मेरी छूट को फाड़ डोज क्या आइइइइइइइइ .

अमित : क्या हुआ रॉय डार्लिंग अभी से रुकने को बोलने लगी , अभी तो शुरुआत है , आगे आगे देखो तुम्हे कितना मज़ा अत है . आज तुम्हारी छूट का भोसड़ा न बना दिया तो कहना .

रॉय : प्लीज आआअह्ह्ह थोड़ी देर क लिए रुक जाओ न ममममम कक्कक्क्स मैं मन थोड़ा कर रही हूँ ाआईईई आअह्हह्ह्ह्ह आआह्ह्ह आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह आअह्ह्ह

मैं रॉय की परवाह किये बगैर लगातार धक्के मरता गया. सारा बीएड धक्कों की वजह से हिलने लगा था . कुछ देर में लैंड ने अपनी जगह छूट में बना ली . वैसे भी छूट तो पहले hi पता नहीं कितने लैंड खा चुकी थी तो ज्यादा मुश्किल नहीं हुई उसे . मैं रॉय क स्तनों को ज़ोर ज़ोर से मसल रहा था और वो भी अब पूरे लाल हो गए थे . 10 मिनट मैंने इसी तरह रॉय की छूट की धज्जियाँ उड़ाई और उसका एक बार पानी भी निकल दिया . फिर मैं बीएड पर लेट गया और रॉय को अपने ऊपर ले लिया . रॉय अब जोश में आ गयी थी और खुद hi मज़े ले कर लैंड पर कूद रही थी.

रॉय : उम्म्म उम्म्म आअह्ह्ह उम्म्म आह्हः अह्ह्ह आह्हः तुम वाकई में बहुत स्ट्रांग हो उम्म्म उम्म्म्म उम्म्म्म आह्हः आह्हः हहहह इतनी देर तो कोई भी नहीं टिक पता मेरे आगे हहहह उम्म्म्म आह्हः आह्हः आह्हः मज़ा आएगा . मोहित क साथ साथ तुम्हारा लैंड भी मिलता रहेगा मुझे उससे शादी कर क उम्म्म्म उम्म्म आह्हः आह्हः आह्हः

अमित : तुम्हे तो मैं अपनी रांड बना कर रखूँगा , क्या मस्त फिगर है तुम्हारा . बोल बनेगी न मेरी रांड

रॉय : हाँ बनूँगी हहहह हहहहह उम्म्म्म अब से मैं तुम्हारी रांड हूँ , तुम्हारा लैंड रोज़ अपनी छूट में लुंगी उम्म्म उम्म्म्म

अमित : छूट hi क्यों , अब ये लैंड तुम्हारे हर छेड़ में जायेगा , तुम्हारे मुँह में तुम्हारी गांड में . अब से तू मेरी रंडी बन कर रहेगी .

रॉय : छूट मारो या मुँह में डालो मगर गांड नहीं ,,,

अमित : गांड में क्यों नहीं ??? मैंने कहा था न मुझे खुश करो पूरी तरह , तुम्हारी गांड मरे बगैर अब मुझे मज़ा नहीं आएगा . इतनी सेक्सी गांड भला कोई कैसे छोड़ सकता है

रॉय : नहीं ,, छूट चाहे कितनी मर्ज़ी मत लो पर गांड नहीं ,,, मैंने कभी गांड नहीं मरवाई आअह्ह्ह्ह आआह्ह्ह आह्ह्ह्ह मैं गयी गयी आअह्हह्हींईईईई

रॉय मज़े से लैंड पर कूद रही थी तो मैंने उसकी छूट का दाना अंगूठे से छेड़ना शुरू कर दिया . जिससे रॉय खुद को रोक नहीं पायी और एक बार फिर से उसकी छूट से काम रास बह निकला . मैंने रॉय को पलटा और उसे कुटिया बना कर उसके पीछे आ गया .

अमित : गांड तो तुम्हे मारवणी hi पड़ेगी वर्ण मैं तुम्हारा साथ नहीं दूंगा . सोच लो , अगर मेरा साथ चाहिए तो गांड देनी hi पड़ेगी. वैसे भी हर काम एक न एक दिन पहली बार hi होता है . बस एक बार hi दर्द होगा

रॉय : प्लीज मन जाओ न , तुम्हारा बहुत बड़ा है मैं नहीं ले पाऊँगी

अमित : आराम से ले लोगी डार्लिंग , तुम्हारे जैसी गरम रांड तो कुछ भी ले सकती है. बस थोड़ा हौंसला रखो मैं आराम से करूँगा

रॉय : नहीं प्लीज aaaaaaaaaaaaaAhhhhhhhhhhhh

रॉय क मन करने क बावजूद मैंने उसकी गांड पर अपना लैंड टिकाया और बिना समय गंवाए ज़बरदस्त धक्का पेल दिया . लैंड तो पहले hi छूट रास से भीगा हुआ था इस लिए ज्यादा मुश्किल नहीं हुई और सुपडे क साथ 2 इंच और लैंड रॉय की टाइट गांड में घुस गया. रॉय इस धक्के को बर्दाश्त नहीं कर पायी और दर्द से बिलबिला उठी. उसने मेरी पकड़ से निकलने की कोशिश की पर मैं कहाँ मैंने वाला था . मैंने एक और झटका पेल दिया .

रॉय : आआअह्हह्ह्ह्हह माआआ मर गईइइइइइइइइ कमीने निकाआल बहार aaaaaaaaaaaaahhhhh माआआआ छोड़ दे मुझे मैं नहीं ले पाऊँगी आआआईईईई मैं मर गईइइइइइइइ aaaaaaaaaahhhhhh

मैंने कोई रेहम न करते हुए 3 धक्के और पेल दिए और मेरा लैंड जड़ तक रॉय की गांड में घुस गया . रॉय दर्द से तड़प रही थी पर मुझे उस पर कोई तरस नहीं आ रहा था. आखिर वो मेरे दोस्त की ज़िन्दगी बर्बाद कर रही थी तो मैं भला उसे किसे छोड़ देता. यही सजा थी उसकी . रॉय से दर्द से तड़पती अश्मरी सी हो कर निढाल हो गयी. शायद उस पर बेहोशी छ गयी थी और उसकी गांड भी किनारों से छील गयी थी जिससे खून टपक पड़ा था . मगर मैं नहीं रुका और उसकी टाइट गांड को ढीला करने में लगा रहा . जब लैंड गांड में रवानी से आने जाने लगा तो मैंने पास में पड़ी पानी की बोतल से थोड़ा पानी रॉय पर फेंका और वो होश में आयी

रॉय : आआअह्हह्ह्ह्ह मायआ मर गयीईइ साले किस बात का बदला ले रहा है आआअह्ह्ह्ह छोड़ दे मुझे कमीने आआआईईई आआअह्ह्ह्ह गांड फाड़ दी तूने मेरी माआआआ

अमित : बस डार्लिंग अब तो हो गया . देखो पूरा लैंड तुम ले चुकी हो , अब तो बस मज़ा hi मज़ा है.

रॉय : मज़ा या सजा छोड़ दे मुझे मैं मर जाउंगी . आआआअह्ह्ह्ह नहीं लेना मुझे तेरा लैंड एआईईईई मैं खुद hi मोहित को पता लुंगी आआअह्ह्ह्हह आअह्ह्ह्ह माआ

अमित : बस डार्लिंग अब तो दर्द नहीं होगा बस मेरा भी होने वाला है. देखो तुम्हारी गांड ने मेरा पानी निकल दिया आआह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह हहहहहहहह

मैंने जल्दी से तेज़ तेज़ धक्के मर कर अपना पानी रॉय की गांड में निकल दिया और उसके ऊपर hi लेट गया. मेरा लैंड अभी भी उसकी गांड में था और वो दर्द से सिसक रही थी. कुछ देर साँसे सँभालने क बाद मैं रॉय को चूमने लगा .

अमित : उम्म्म्म उम्म्म्म , अब कैसा लग रहा है ?

रॉय : आअह्ह्ह्ह बहुत दर्द हो रहा है ,, छोड़ मुझे , निकल मेरे ऊपर से . आअह्ह्ह्ह जाएं hi निकल दी …

अमित : जो भी कहो मुझे मज़ा बहुत आया तुम्हारी गांड मरने में. तुम वाकई कमल की हो. अब तो तुम्हे मोहित की बीवी बनने से कोई नहीं रोक सकता . बस इसी तरह मुझे खुश करती रहना .

रॉय को मैंने ऐसा जान बुझ कर कहा ताकि वो अपना दर्द भूल जाये और ऐसा हुआ भी.

रॉय : पक्का न ,,, आइइइइइ ,, देख मैंने अपनी कुंवारी गांड भी तुझे दे दी. अब तू मुकर नहीं सकता .

अमित : अरे लानत है हो इतना सब मिलने क बाद भी मुकर जाये , अब तो कुछ भी हो जाये तुम्हे मैं उसकी बीवी बना कर रहूँगा. बस मुझे हमेशा तुम्हारी छूट और गांड मिलती रेहनी चाहिए .

मैं रॉय क ऊपर से उठा और अपना लैंड उसकी गांड से बहार निकला . रॉय की गांड जो पहले पूरी तरह बंद नज़र आ रही थी अब वो 2 रूपए क सिक्के जितनी खुली नज़र आ रही थी. गांड क छेड़ क आसपास बहुत सारा खून लगा हुआ था और मेरे लैंड क ऊपर भी . कुछ धब्बे बीएड शीट पर भी पड़े थे . रॉय तो वैसे hi लेती रही मगर मैंने उसे गॉड में उठाया और वाशरूम में ले गया . उसे बाथटब में बिठा कर मैं वापिस बीएड पर आ कर आराम करने लगा . आधा घंटा मैं ऑंखें बंद किये आराम करता रहा . फिर रॉय ने मुझे आवाज़ दी और मैं जल्दी से उठ कर वाशरूम में गया. रॉय को गॉड में उठा कर वापिस बीएड पर ले आया . चूतड़ बीएड पर पड़ते hi रॉय दर्द से चटपटा उठी.

रॉय : उईईई मायआ ,,,, देखो क्या हालत कर दी है तुमने मेरी .

अमित : मज़े क लिए थोड़ा दर्द तो सहना hi पड़ता है न डार्लिंग. अगली बार दर्द नहीं होगा और तुम खुद hi उछाल उछाल कर अपनी गांड में मेरा लैंड लोगी .

रॉय : न बाबा न , तुम्हारा ये मुसल अब गांड में कभी नहीं लुंगी . मरते मरते बची हूँ .

अमित : अब छोडो भी नखरा , क्या मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकती.

रॉय : जान है तो जहाँ है , तुम तो पूरे जानवर बन जाते हो.

अमित : तुम्ही ने तो कहा था तुम्हे वाइल्ड चुदाई पसंद है. सच बताओ मज़ा नहीं आया क्या ?

रॉय : मज़ा तो आया पर गांड मर कर तुमने सब मज़ा ख़राब कर दिया

अमित : ाचा अगली बार आराम से करूँगा , वैसे एक बात तो बताओ , तुम मोहित को पाना चाहती थी इस लिए पार्टी में वो सब तुमने किया पर उन दो चुरियों का क्या सन है. साले मेरे साथ उलझ रहे थे पार्टी में . वो भी तुम्हारे साथ हैं क्या ????

रॉय : सुनील की बात कर रहे हो ?? तुम्हे क्या कह दिया उन लोगों ने ?

अमित : कुछ नहीं , साले मेरे से उलझ रहे थे. मीनल क साथ वो काण्ड कर क वीडियो बना रहे थे तो मैंने पटक दिया. मुझे लगता है वो मेरे साथ फिर से पन्गा लेंगे. अगली बार अचे से गांड मरूंगा उनकी .

रॉय : हे हे हे , गांड मरने का ज्यादा hi शोक है तुम्हे. उनकी चिंता मत करो उन्हें मैं संभल लुंगी . अब वो तुमसे नहीं उलझेंगे. वैसे भी उन्हें बस मीनल चाहिए और वो आज नहीं तो कल उनके नीचे आ hi जाएगी.

अमित : वो कैसे ???

रॉय : वो ऐसे …….

फिर रॉय ने मुझे साडी बात बताई क कैसे उसने और सुनील ने मिल कर पार्टी का प्लान किया था और उसमे किस तरह दोनों को नशे में लाया गया . उसके बाद रॉय ने मोहित और सुनील ने मीनल को सडके कर क चुदाई करनी थी जिसमे रॉय तो कामयाब हो गयी पर मीनल मेरी वजह से बच गयी. रॉय ने ये भी बताया क उस दिन क बाद से hi वो मोहित क साथ टच में थी और मोहित को शराब में डूबा देख उसने फिर से उसके साथ सेक्स किया और फिर रोज़ hi उसके साथ चुदाई का खेल खेल कर उसे सोने वाश में कर लिया . ये hi नहीं रॉय अपनी और मोहित की चुदाई की नयी नयी वीडियोस सुनील क थ्रू मीनल तक पहुंचा रही थी और सुनील भी मीनल को अपने जाल में फंसा रहा था . ये सब सुन कर मेरा दिमाग ख़राब हो रहा था . इसका मतलब साफ़ था क मीनल भी अब इन लोगों क जल में फंस चुकी थी.

अमित : तो क्या सुनील भी मीनल क साथ ….

रॉय : आज नहीं तो कल आ hi जाएगी , कब तक बचेगी . फिर देख लेना उसे रंडी बना देंगे . तुमने तो मीनल क साथ मज़े किये हैं न ? कैसी हो वो बीएड पर ? मेरे से अछि है क्या ? उसकी भी गांड मरी होगी तुमने ?

अमित : वैसे ये सुनील मुझे कुछ ठीक नहीं लगा . वो ज़रूर पन्गा लेगा मेरे साथ.

रॉय : वो ऐसा कुछ नहीं करेगा , मुझ पर भरोसा रखो . तुम अगर मीनल को उसके नीचे ला दो तो देखना वो तुम्हारा बेस्ट फ्रेंड बंद जायेगा और जितनी कहो इतनी लड़कियां तुम्हारे नीचे ला देगा . बहुत मस्त है वो इस मामले में . रुको मैं उसे बताती हूँ क अब तुम हमारी तरफ हो , देखना वो कितना खुश होगा मीनल क नाम पर.

रॉय ने अपना मोबाइल उठाया और सुनील को फ़ोन लगा दिया . रॉय ने उसे बता दिया क अब मैं उनकी तरफ हूँ और मीनल को सेट करने में मदद भी करूँगा . पहले तो वो फ़ोन मर hi मेरा नाम सुनते hi गलियां देने लगा पर जब मीनल क बारे में बताया तो वो तुरंत मन गया और फिर रॉय को मुझे साथ लेकर उसके फार्म हाउस पर आने को कहा .

रॉय : देखा , मैंने कहा था न वो मीनल क नाम पर मन जायेगा . अब चलो हमें जाना है उसके फार्म हाउस पर . आअह्ह्ह एक तो तुमने बुरी हालत कर दी है ऊपर से वहां गए तो वो भी चढ़ जायेगा . अब जाना तो पड़ेगा hi वर्ण वो बुरा मन जायेगा .

अमित : तो रहने दो , तुम उससे इतना डर्टी क्यों हो ?

रॉय : तुम अभी उसे नहीं जानते , उसकी बात न मनो तो साला पागल हो जाता है और उसके बाप की पहुँच बड़े लोगों क साथ है . कुछ भी करवा सकता है . दोनों बाप बीटा हरामी हैं . तुम भी उसके साथ मत उलझना. मुझे तो कह रहा था क तुम्हे मरवा hi देगा पर अब मीनल क नाम पर वो सब भूल कर तुम्हे अपना दोस्त बनाने क लिए तैयार है.



रॉय को मैंने सहारा दे कर कपडे पहनने में मदद की और फिर मैंने भी कपडे पहने. मैंने अपना मोबाइल उठाया और फिर हम चल दिए सुनील को मिलने .
 
अपडेट 266

आज नया साल शुरू हो गया था और अब कॉलेज की छुट्टियां भी ख़तम हो गयी थी. पहले दिन की वजह से छुट्टी बढ़ा दी गयी थी वैसे भी 1-2 दिन स्टूडेंट्स एते नहीं थे कॉलेज. अब स्टूडेंट्स आये या न आये स्टाफ को तो जाना hi पड़ता है. इस लिए मंजू को भी कॉलेज जाना था और वो गाओं में सब से मिलने क बाद अपनी गाड़ी में वापिस शहर निकल गयी . कल्पना करुणा नेहा सब वापिस चली गयी थी सिवाए राधा क. वैसे तो राधा को भी कॉलेज क हिसाब से वापिस जाना hi था मगर वो अमित को साथ लेकर या यूँ कहिये अमित क साथ hi जाना चाहती थी और ऐसा hi कुछ ख्याल दिव्या क मन में भी था. वो भी यही चाहती थी क यहाँ से अमित सीधा उसके घर hi जाये . इसी लिए तो वो न चाहते हुए भी रुक गयी थी यहाँ . वहीँ ऋतू ने आज राठौर और सुशिल कुमार से बात कर क बलजीत राइ को अरेस्ट करने क बारे में जानकारी दे दी थी . मुजरिम जो खुद गवाह बन गया था उसकी बिनाह पर अब बलजीत राइ को दबोचना आसान था और इतने पक्के सुबूत और ऋतू क विश्वास को देख कर राठौर भी पूरी तरह सहमत था उससे. सुशिल कुमार तो ऋतू क हर मामले में उसकी सपोर्ट करने की hi कसम खा चूका था . अब दोनों से हरी झंडी मिलने क बाद ऋतू भी अंदर बहुत ज्यादा खुश थी , अब उसका दुश्मन जिसने उसकी दोस्त को सताया और उसके प्यार पर हमला किया अब वो जल्द hi उसकी पकड़ में आने वाला था . वैसे तो ऋतू को आज hi परमिशन मिल गयी थी पर उसने आज की बजाये कल बलजीत राइ को अरेस्ट करने का फैसला किया . क्यूंकि कल सैटरडे था और सैटरडे को बैल मिलना मुश्किल था कोर्ट में छुट्टी होने की वजह से.

शाम क वक़्त मैं और रॉय सुनील क फार्महाउस पर पहुँच गए. जैसा की उम्मीद थी वहां पर सुनील क साथ कमल और मोना भी मौजूद थे. मुझे देखते hi कमल गुस्से में जांदे भींचने लगा और सुनील क चेहरे क भाव भी कुछ वैसे hi थी पर अगले hi पल एक बनावटी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गयी .

सुनील : अरे आओ आओ रॉय , मैं कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रहा था . वेलकम माय फ्रेंड , अफ़सोस है क हम पहले अचे से नहीं मिले थे वर्ण इतना कुछ नहीं होता .

रॉय से गले मिलने क बाद सुनील ने मुझसे हाथ मिलाया तो मैंने भी वैसा hi किया.

अमित : सॉरी यार , मुझे भी कहाँ पता था क तुम लोग इतने दिलदार हो . वर्ण मैं मैं वैसा कुछ नहीं करता . सॉरी कमल , सॉरी मोना .

मैंने सुनील क साथ मोना और कमल से भी सॉरी कहा पर उन दोनों ने तो मुँह hi फेर लिया . फिर सुनील खुद hi उनको खिंच कर मेरे करीब ले आया .

सुनील : अब छोड़ भी दो गुस्सा यार , देख वो सब अनजाने में हुआ इस लिए उसे भूल जाते हैं और एक नै शुरुआत करते हैं. आज से अमित भी हमारा दोस्त है . इसका ख्याल रखना तुम दोनों ( रॉय मोना ) की ज़िम्मेदारी है. किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए . वैसे ये तू ऐसे क्यों चल रही है ?

रॉय : अब क्या बताऊँ , ( मेरी तरफ देखते हुए ) एक पागल जंगली घोडा पीछे से टकरा गया और सत्यानाश कर दिया मेरा बस .

सुनील ने मोना की गांड मसलते हुए मेरी तरफ धकेला और वो मेरे गले लग गयी. फिर मैंने कमल से भी हाथ मिलाया .

अमित : मैं जनता हूँ तुम मुझसे नाराज़ हो , पर अब किया भी क्या जा सकता है . फिर भी तुझे जो कहना है कह ले.

सुनील : अरे कुछ कहने सुनने की ज़रूरत नहीं है , तुम बस हमारा एक काम कर दो फिर सब ठीक हो जायेगा . रॉय ने तुम्हे बता hi दिया होगा फिर भी मैं खुद तुम्हे बता देता हूँ. मीनल मुझे चाहिए किसी भी कीमत पर . अगर तू उसे मेरे नीचे लिटा दे तो फिर जो तू कहेगा वो तुझे मिलेगा . ये रॉय भी तेरी और ये मोना भी. बस वो मीनल हमारी रंडी बन कर रहेगी .

अमित : लगता है तुम्हारा उसके साथ कुछ ज्यादा hi पन्गा है. आखिर क्या वजह है , मैं जान सकता हूँ ?

सुनील : अब तू भी हमारा दोस्त बन गया है तो बता देता हूँ. उस हरामज़ादी ने सबके सामने मुझे थप्पड़ मारा था . मुझे ,, सुनील को ,,, जिसके एक इशारे पर लड़कियां कपडे उतर देती थी , जिसके एक इशारे पर टीचर तक की धुलाई हो जाती थी . उसने स्कूल में सबके सामने मुझ पर हाथ उठा कर मेरी बेइज़्ज़ती की थी. वो तो मैं अपने बाप क कहने पर रुक गया था वर्ण साली का रपे hi कर देता. पर अब समझ आ गया है क गुस्से में कुछ भी नहीं करना चाहिए . इस लिए इतना सोच समझ कर प्लान बनाया था और पूरा भी हो गया था मगर ऐन मोके पर तुमने खेल बिगाड़ दिया . चलो जो हुआ सो हुआ , अब तू hi सब ठीक भी करेगा . मुझे यकीन है तुम ये काम कर डोज .

रॉय : हाँ हाँ , क्यों नहीं करेगा , आखिर इसे इतना कुछ हो दे दिया है मैंने . मीनल बनेगी तुम्हारी रंडी और मोहित मेरा .

सुनील : तू साली पता नहीं क्यों उसके पीछे पड़ी है , हम लोगों से तेरी आग नहीं बुझती क्या ?

रॉय : देखो सुनील मैंने पहले hi कहा था , मैं मोहित से शादी करना चाहती हूँ.

सुनील : तो कर लेना शादी हमने कब मन किया है . वैसे भी मुझे तुम्हारी छूट से मतलब है वो तो तू शादी क बाद भी देती रहेगी.

कमल : पर ये मीनल को हमारे नीचे कैसे लाएगा ? क्या इस पर भरोसा किया जा सकता है?

सुनील : ये तो अब ये खुद hi बताएगा . और रही बात भरोसे की तो मैं बस इतना hi कहूंगा क मेरे बाप में मुझे एक hi बात सिखाई है. क जो भी चाहिए उसे हासिल करो चाहे कैसे भी और जो तुम्हारा साथ दे उसका साथ दो और जो धोखा दे उसे दोबारा ऐसी गलती करने क लिए छोडो मत.

अमित : वैसे तुम्हारे पिता जी करते क्या हैं ?

रॉय : गवर्नमेंट कॉन्ट्रैक्टर्स हैं , और उसके साथ क्या क्या करते हैं ये तो कोई भी नहीं जनता . हाँ पहुँच बहुत ऊपर तक है.

सुनील : अभी तो आये हो , धीरे धीरे सब जान जाओगे . चलो यार आज हमारी दोस्ती क नाम एक जाम hi हो जाये .

सुनील और कमल वहीँ एक कार्नर में बने बार काउंटर की तरफ चले गए जहाँ बहुत साडी बॉटल्स कांच क फ्रेम क पीछे पड़ी नज़र आ रही थी. इधर रॉय मुझे सोफे पर बिठा कर मोना को मेरी गॉड में धक्का दे कर मुस्कुरा दी.

रॉय : मोना डार्लिंग , आज ज़रा तू भी असली लैंड का मज़ा ले ले. ऐसा लैंड तूने कभी लिया नहीं होगा . बस अपनी बैक बचा कर,, हे हे हे

रॉय स्माइल करती हुई सुनील की तरफ hi चल दी जहाँ वो तीनो पेग बनाते हुए बातें करने लगे . उनको देख के लग रहा था क वो मेरे बारे में hi बातें कर रहे हैं. इधर मोना मेरी गॉड में बैठ गयी थी और अब उसके चूतड़ों की गर्मी से मेरा लैंड अकड़ने लगा था . मैंने भी मोना क बड़े बड़े चुके मसलने शुरू कर दिए . मोना अपनी गांड मेरे लैंड पर हिला हिला कर मुझे और गरम करने की कोशिश कर रही थी. उधर कुछ देर बाद तीनो लोग हाथ में गिलास थामे हमारी तरफ आ गए और सुनील में एक गिलास मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा .

सुनील : लो , हमारी दोस्ती क नाम , आज क बाद तू मेरा दोस्त है .

अमित : सॉरी यार पर मैं शराब नहीं पिता.

कमल : तो क्या दूध पिता है ?

अमित : हाँ दूध पिता हूँ , और आज इन दोनों का hi दूध पियूँगा .

सुनील : वैसे तूने मीनल क साथ कुछ किया है क्या ?

मैं सुनील की बात पर चुप रहा तो फिर से बोलै

सुनील : तूने जवाब नहीं दिया . मीनल की ली है तूने पहले ?

अमित : देख यार मैं जिसे अपना दोस्त मंटा हूँ न उसके खिलाफ मैं कुछ नहीं करता और न hi उसे धोखा देता हूँ. वैसे भी दोस्त की गफ पर नज़र डालने वाले हरामी लोग दोस्ती क काबिल नहीं होते .

कमल : गुस्से में ) ज़बान संभल क बात कर वर्ण

अमित : वर्ण क्या बे , झंडू सेल , कल को तेरी बहिन बीवी भी तेरा ये हरामी दोस्त hi पलेगा और मज़े से पिलवायेगा. क्यूंकि तू वो हरामी है जो अपनी माँ छुड़वा लेते हैं लालच क चक्कर में.

मेरी बात सुन कर कमल गुस्से में मुझे मरने दौड़ा तो मैं मोना को धकेल कर एक डैम से उठा और उसका हाथ हवा में hi रोक कर उसकी बाजु मरोड़ दी और पीठ पर घुटने से वॉर किया . एक hi वॉर में वो बिलबिलाता हुआ दूर जा गिरा. इतने में सुनील ने कांच का गिलास फेंक कर मुझे मारा हो मेरे सर पर लगा , फिर वो मुझ पर कूद मुझे घुसा मरने क लिए पर मैंने उसे पकड़ कर घुमा कर दूर देनी दिया और वो सोफे पर गिरा जिससे सोफे भी पीछे को उलट गया. रॉय और मोना तो ये सब आँखें फाड़े देख रही थी. दोनों क चेहरे पर दर क भाव थे . मैं फिर से कमल की तरफ बढ़ा और उसे बालों से पकड़ कर उठाया और उसके मुँह पर 5-6 ज़ोर ज़ोर से चांटे मरे . इतने में सुनील फिर से उठा और साइड में पड़ा एक स्टेचू उठा कर मेरे ऊपर फेंका . मैंने कमल को उसके आगे के दिया और वो उसके सर पर लगा . मैंने कमल को घुमा कर दूर फेंका और सुनील की तरफ बढ़ा . सुनील ने फिर से मुझे मरने क लिए इधर उधर देखा और एक फूलदान उठा कर मेरी तरफ फेंका पर मैंने अपना बचाव कर लिया और सुनील को दबोच लिया . तभी मुझे मोहित की आवाज़ सुनाई दी .

‘ ऐसे नहीं ,, हरामज़ादी मेरे साथ खेल रही थी तू और अब मेरे यार को मरना चाहती है . तुझे तो मैं …’

असल में रॉय ने पीठ पीछे शराब की बोतल उठा कर मेरे सर पर मरने की कोशिश की. मेरा इस तरफ ध्यान नहीं था पर उसके ऐसा करने से पहले hi मोहित वहां पहुँच गया और उसका हाथ हवा में hi रोक दिया . मोहित को देख कर तो रॉय क रंग hi उड़ गया जबकि मोहित में उसके हाथ से बोतल छीन कर एक ज़ोरदार थप्पड़ उसे दे मारा जिससे वो घूम कर फर्श पर जा गिरी. इधर सुनील मेरी पकड़ में था . मोहित ने एक ज़ोरदार घूंसा सुनील क मुँह पर दे मारा और उसके नाक से खून बहने लगा .

मोहित : हरामजादो , तुम लोगों ने क्या समझा था क तुम कुछ भी कर लोगे ? मुझे बर्बाद कर डोज ? मीनल को बर्बाद कर डोज ? मेरी मीनल को ??? ऐसा बिलकुल भी नहीं हो सकता ,, जानते हो क्यों ??? क्यूंकि मेरे पास अमित जैसा दोस्त है . भाई से भी बढ़ कर , इसके होते कोई मेरा कुछ भी नहीं बिगड़ सकता. ,,,, सॉरी यार , मेरा दिमाग ………

अमित : अबे चुप कर साले , अब ये ड्रामा बंद कर . ये बता इतनी देर कैसे हो गयी तुझे ? मैं कब से यहाँ बोर हो रहा था .

मोहित और मैं एक दूसरे क गले लग गए . असल में रॉय की चुदाई क बाद जो कुछ भी मैंने उससे पूछा था वो इसी लिए पुछा था क मैं वो सब रिकॉर्ड कर सकूँ . और मैंने वो सब मोबाइल में रिकॉर्ड कर क मोहित को भेज भी दिया था . सुनील क फार्म हाउस का मोहित को मैंने मैसेज पर बता दिया था ताकि वो खुद भी अपने अपने कानो से सुन सके .

मोहित : सॉरी यार आने में थोड़ा देरी हो गयी. आज तूने मेरी आँखें खोल दी वर्ण मुझे पता hi नहीं चलता मेरे साथ कितना बड़ा खेल खेला जा रहा था

अमित : सब तेरी hi गलती है , मीनल ने गुस्सा किया था तो तेरा फ़र्ज़ था उसे मानना चाहे कितने बार भी मानना पड़े पर तू उल्टा गुस्सा कर क शराब पिने बैठ गया . बस इतना hi प्यार था ?

मोहित : मैं क्या करता वो मीनल ने खुद hi मुझे कहा था क वो मेरी शक्ल भी नहीं देखना चाहती .

अमित : अब उसने गुस्से में कह दिया तो तू चला गया इसके पास ,, अब तेरी इसके साथ सब वीडियो वो देख चुकी है. अब तो वो तेरी क्या मेरी शक्ल भी नहीं देखेगी . चल अब चल क देखते हैं.

मोहित : प्लीज यार , अब तू hi कुछ कर , मुझे तो समझ नहीं आ रही क मैं कैसे उसके सामने जॉन.

अमित : दर मत , सच्चा प्यार इतना कमज़ोर नहीं होता क ज़रा सी बात पर टूट जाये . जब उसे पता चलेगा क तेरे साथ ये सब खेल खेला गया है तो वो सब समझ जाएगी और तुझे माफ़ कर देगी

मोहित : वो माफ़ कर तो देगी न.

रॉय : ये तुम क्या कह रहे हो मोहित ? तुम तो मुझसे प्यार करते हो न , तुमने वडा किया था तुम हमेशा मेरे बन कर रहोगे

मोहित : अबे चुप साली ,,, तू कितनी बड़ी रांड मैं जान गया हूँ. और कौन सा वडा ?? साली मुझे शराब पीला कर जो वडा लिया था जाओ उसे उसी शराब में ढूंढो. अब कभी मेरे सामने गलती से भी आ गयी न तो जान ले लूंगा तेरी .

मोहित ने सच में रॉय की गर्दन hi दबोच ली थी जैसे वो सच में उसे मर देगा . मैंने रॉय को छुड़ाया और मोहित को पीछे किया .

अमित : चल छोड़ न , क्यों दिमाग ख़राब कर रहा है . चल घर चलें.

मैं मोहित को धकेल कर बहार की तरफ जाने लगा तो सुनील और कमल फिर से उठ कर खड़े हो गए . कमल क हाथ में बसेबत जैसी चीज़ और सुनील क हाथ में लोहे की रोड थी.

सुनील : बहुत चर्बी है न तुझ में , पिछली बार तो तू बच गया था आज देख तेरा क्या हल करता हूँ.

इतना कह कर सुनील ने मेरे ऊपर हमला किया और कमल ने मोहित पर . मैंने सुनील का वॉर तो रोक लिया पर साला लोहे की रोड थी हाथों में एक डैम से तेज़ दर्द हुआ पर मैंने परवाह न करते हुए सुनील की गर्दन पर एक हाथ दाल उसे ज़ोर से ज़मीन की तरफ पटका तो उसके घुटने ज़मीन पर लग गए और मैंने घुटने से उसके मुँह पर वॉर किया जिससे वो पीछे की तरफ गिर गया. मोहित भी कमल क साथ हाथापाई में लगा था. इधर सुनील को मौका दिए बगैर मैंने उसकी रोड उसके हाथ से चीक कर उसके घुटने पर ज़ोर से मरी और वो दर्द से चिल्ला उठा . सुनील इतनी ज़ोर से चीखा था क सबकी नज़रें उसकी तरफ hi हो गयी. अपने घुटने पर हाथ रखे सुनील वहीँ फर्श पर लौटने लगा .

अमित : अब अगर दोबारा कुछ भी गलत करने की कोशिश की तो पाऊँ पर खड़े होने लायक भी नहीं छोडूंगा. यद् रखना .

मुझे गुस्से में देख बाकि सबकी हवा टाइट हो गयी. मोहित ने भी कमल को पटक उसकी भी धुलाई कर दी. मोना की तो बिना चूड़े hi गांड फैट गयी थी मंज़र देख कर जबकि रॉय भी ऑंखें फाड़े बस देखे जा रही थी. उसकी साडी प्लानिंग पल में मिटटी हो गयी थी. मोहित और मैं वहां से बहार निकलने लगे तो मुझे रॉय का ध्यान आया और मैं उसके पास गया .

अमित : सच कहूं तो भाभी आपकी पीछे से सेवा करने में मज़ा आया , अगर दोबारा कभी मेरी ज़रूरत हो तो यद् ज़रूर करना . ाचा चलता हूँ , और हाँ आप ( मोना ) भी अधूरा काम पूरा करना चाहें तो मिल लीजियेगा. और इन दोनों को भी अचे से समझा दीजियेगा क इतने में hi सबक समझ जाएँ वर्ण अगली बार ये तो थूकेंगे इनके बाप दादा जो भी कोई खुद को टॉप समझता है उसे भी नहीं छोडूंगा .

मैंने चेहरे पर स्माइल ला कर दर्द आवाज़ में ये बात कही तो रॉय और मोना दोनों की hi गांड फैट गयी और वो दर क पीछे हटने लगी. फिर मैं मोहित क साथ वहां से बहार निकल गया .

मोहित : बहुत बड़ी गलती हो गयी यार , मीनल तो अब बिलकुल भी बात नहीं सुनेगी मेरी .

अमित : तुझे hi चस्का चढ़ा था शराब और शबाब का अब भुगत खुद hi.

मोहित : ऐसा न बोल यार एक तू hi तो मेरा यार है. अगर तू hi मेरा साथ नहीं देगा तो कौन देगा

अमित : ाचा !!! अब दोस्त यद् आ गया ?? और जो कल बोल रहा था वो ??

मोहित : मेरा दिमाग जागरण कर दिया था रॉय ने , साला मैं hi पागल था जो उसकी बातों में आ गया . मुझे तू जो भी सजा दे मुझे मंज़ूर है. चाहे तो जुटे से मार्ले पर एक बार माफ़ कर दे यार.

अमित : बात वो नहीं है , बात ये है क तुझे मुझ पर ज़रा भी भरोसा नहीं था ? किसी ने कुछ भी कहा और तू मन गया ? कल को फिर कुछ ऐसा वैसा hi गया तो ?? तब भी तू ऐसा hi करेगा ?

मोहित : बिलकुल नहीं , माँ कसम , ऐसा दोबारा कभी नहीं होगा. बस इस बार माफ़ कर दे. तू जो कहेगा मैं वो करूँगा .

अमित : साले ऐसे माफ़ी मीनल से मांगता तो वो भी मन जाती. पर तू ज़रूर वहां भी अकड़ दिखा कर आया होगा

मोहित : उसने मेरी कोई बात सुनी hi कहाँ , बस एक hi बात बार बार बोलती रही क मैं तुम्हारी शकल भी नहीं देखना चाहती. वो मुझसे दोबारा बात नहीं करेगी .

अमित : क्यों नहीं करेगी ? मैं बात करूँगा उससे . देखता हूँ कैसे मन लेती है. चल अब सीधा उसके पास hi चलते हैं.

मेरी बात सुन कर मोहित की आँखों में चमक आ गयी और उसने गाडी मीनल क घर की तरफ घुमा ली. कुछ देर में हूँ वहां पहुँच गए . मोहित तो मीनल क सामने जाने से भी दर रहा था इस लिए वो मुझे उसके घर क पास छोड़ कर खुद दूर कहीं छिप गया . मैंने मीनल को फ़ोन किया तो उसने मेरा फ़ोन hi नहीं उठाया . 3-4 बार लगातार फ़ोन करने पर भी जब उसने फ़ोन नहीं उठाया तो मैंने उसके घर की बेल्ल बजा दी. अछि किस्मत रही क दरवाज़ा मीनल में hi खोला पर मुझे सामने देख उसके चेहरे पर ख़ुशी नहीं थी .

मीनल : तुम यहाँ क्यों आये हो ?

अमित : अरे अरे , न hi न hello सीधा सवाल ? अब मैंने क्या कर दिया जो मुझ पर भड़क रही हो. क्या हम दोस्त नहीं हैं ?

मीनल : दोस्त तो तुम सिर्फ मोहित क हो और मैं जानती हूँ उसी क लिए आये हो तुम यहाँ . इस लिए चले जाओ , मैं उसके बारे में कोई बात नहीं सुन्ना चाहती .

अमित : अछि दोस्त हो यार , दरवाज़े से hi भगा रही हो . काम से काम मैं घर आया हूँ तो चाय पानी hi पूछ लो. और तुम्हे किसने कहा मैं मोहित की बात करने आया हूँ? मुझे कुछ और बात करनी है .

मीनल : और क्या बात करनी है तुम्हे ?

अमित : अब अंदर आने डौगी तो बात करूँगा न. ऐसे यहाँ बहार खड़े खड़े क्या बात करूँगा? उल्टा लोग गलत सोचेंगे मुझे यहाँ देख कर .

मीनल : ठीक है , अंदर आओ , पर मैं पहले hi कह देती हूँ मुझे मोहित क बारे में कोई बात नहीं करनी .

मीनल क तेवर देख कर लग रहा था क मैंने अगर सीधा सीधा उसकी बात की तो वो पक्का मुझे बहार निकल देगी . मीनल ने मुझे अंदर आने को कहा और मैं उसके पीछे पीछे अंदर आ गया .

अमित : घर पर कोई नहीं है क्या ? कोई नज़र नहीं आ रहा .

मीनल : पापा और भैया काम गए हैं और माँ स्टेशन गयी हैं मेरे कजिन को लेने .

अमित : कजिन ? मतलब गेस्ट आ रहे हैं.

मीनल : हाँ , अब बोलो क्या बात करनी है ?

अमित : काम से काम पानी hi पीला दो या बैठने भी नहीं डौगी अब ?

मीनल ने मुझे थोड़ा गुस्से से देखा और मुझे सोफे पर बैठने का कह कर किचन में चली गयी .

मीनल : लो पानी पियो , अब बोलो .

अमित : अरे रुको , ज़रा सांस तो लेने दो.

मुझे समझ नहीं आ रहा था बात कैसे शुरू करूँ. मीनल मुझे hi एक तक देखे जा रही थी सर पर कड़ी .

अमित : तुम उस रत पार्टी क बाद मिली hi नहीं , काम से काम एक फ़ोन तो कर लेती . उल्टा मेरा फ़ोन भी नहीं उठा रही .

मीनल : अब क्या रह गया है बात करने को? इतना सब होने क बाद अब मैं क्या बात करुँगी. अपने दोस्त की करतूत तो तुम्हे भी पर चल hi गयी होगी?

अमित : मैं तो बस ऐसे बोल रहा था क तुमने बात hi नहीं की मुझसे. वैसे तुम किस करतूत क बारे में बात कर रही हो ?

मीनल : बनो मत , मैं जानती हूँ तुम सब जानते हो.

अमित : अरे सच में , मैं नहीं जनता तुम किस बारे में बात कर रही हो. मैं तो तुम दोनों को उस दिन पार्टी से घर लेकर गया था और फिर तुम्हे भी तुम्हारे घर छोड़ा. उसके बाद तो मेरा भी यहाँ आना नहीं हुआ . और तुम्हे पता भी है क मेरे साथ क्या क्या हुआ ? काम से काम एक बार बात hi कर लेती तो पता चलता . मैं तो हमेशा तुम्हे दोस्त समझ कर दोस्ती निबाहता रहा और तुमने एक बार भी मेरा हल जानने की कोशिश नहीं क ज़िंदा भी हूँ या मर गया .

मीनल : तुम्हे क्या होगा

अमित : तुम्हे पता है मुझ पर हमला हुआ था और मेरे बाबा को कितनी चोट आयी थी? यहीं हॉस्पिटल में रहना पड़ा था एक रत . बात करती हो

मीनल : हमला ?? किसने किया ?? क्या हुआ था ??

मैंने मीनल को फिर उस घटना क बारे में बताया और मेरी बातें सुनते सुनते मीनल का गुस्सा शांत हुआ और अब वो एक दोस्त की तरह हमदर्दी से बात करने लगी .

मीनल: मुझे किसी ने बताया hi नहीं , मगर ऐसा कौन करेगा ?

अमित : अब मुझे क्या पता , दोस्ती निभाने क चक्कर में दुश्मन जो बना लिए थे . क्या पता ये उन दोनों का hi काम हो जिनको मैंने पार्टी में पिता था तुम्हे बचने क लिए .

मीनल : मुझे बचने क लिए ? कब ?

अमित : देखा , तुम्हे तो यद् भी नहीं है . इस रत पार्टी में क्या हुआ था , तुम्हे कुछ भी यद् नहीं ?? ज़रा दिमाग पर ज़ोर डालो

मीनल उस रत नशे में थी पर कुछ भी यद् न हो ऐसा तो हो नहीं सकता . या फिर वो जान बुझ कर ऐसा शो कर रही थी. मगर अब वो नज़रें चुराने लगी जिसका मतलब था उसे कुछ कुछ यद् है

मीनल : मुझे कुछ यद् नहीं है . उस रत मैं होश में नहीं थी. वैसे भी तुम्हारे उस धोखेबाज़ दोस्त ने उस रत जो कुछ किया उसके बाद मेरा दिमाग ख़राब हो गया था .

अमित : और दिमाग ख़राब होने क बाद तुम भी वही सब करने लगी जो उसने अनजाने में किया था ????

मीनल : अनजाने में ?? कुछ अनजाने में नहीं सब जान बुझ कर किया था उसने और अभी भी वो कर रहा है. सब खबर है मुझे शायद तुम्हे नहीं या फिर उसकी साइड लेने आये हो.

अमित : अपने बारे में क्या कहोगी ? क्या तुमने वो जान बुझ कर किया था ? क्या तुम भी जान बुझ कर सुनील क पास गयी थी ? अगर मैं वहां टाइम पर न पहुँचता तो क्या होता ?

मेरे इस सवाल पर मीनल खामोश हो गयी और नज़रें झुका ली.

अमित : तुम्हे पता भी है तुम्हारे साथ क्या होने वाला था उस दिन ? लो खुद देख लो .

मैंने अपने मोबाइल में वो वीडियो क्लिप चला दी जो मैंने कमल क पास बरामद की थी उस रत. मीनल उस वीडियो को देखने लगी और देखते देखते उसकी आँखों में आंसू आ गए.

अमित : जानती हो ये वीडियो मुझे कहाँ से मिली ? ये वो कमल रिकॉर्ड कर रहा था बहार से. और इसके ज़रिये वो दोनों बाद तुम्हे ब्लैकमेल करने वाले थे. सोचो फिर वो तुम्हारे साथ क्या क्या करते . क्या तुम खुद को बचा पति ?

मीनल : रास्कल्स ,,, इतना सब कुछ कर रहे थे वो लोग !!!! तुमने मुझे उन लोगों से बचाया और मैं तुम्हे hi गलत कह रही थी . ी ऍम सॉरी , मुझे माफ़ कर दो. मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी. मैं तुम्हारा ये एहसान कैसे चुकाऊँगी .

अमित : दोस्ती में एहसान नहीं होता , मैंने वही किया जो मुझे करना चाहिए था. उस रत जो कुछ भी हुआ वो सब उन लोगों का प्लान था. मोहित को बहकना भी उनका hi प्लान था . वर्ण तुम खुद सोचो वो तुमसे इतना प्यार करता है . तुमसे शादी करना चाहता है. क्या वो तुम्हारे साथ ऐसा कुछ कर सकता है .

मीनल : मन लिया ोनुस रत उसे बहकाया गया था पर उसके बाद ??? वो उस दिन क बाद से लगातार उस रॉय क साथ गुलछर्रे उदा रहा है. इस पर भी तुम यही कहोगे क उसे बहकाया गया ??? गलती एक बार होती है बार बार नहीं.

अमित : इसकी कसूरवार तुम भी हो, जब वो तुमसे माफ़ी मांगने आया था तो तुमने क्या किया ??? उसे मौका दिया अपनी सच्चाई बताने का ? लो इसे भी देखो .

मैंने दूसरी वीडियो जो आज रिकॉर्ड की थी अपने मोबाइल से जिसमे रॉय सब कुछ बता रही थी मुझे वो प्ले कर क उसके हाथ में दे दी . मीनल ख़ामोशी से उसे देख रही थी.

अमित : अब क्या कहोगी ? क्या अब भी तुम मोहित को hi कसूरवार ठहराओगी ? हाँ उससे गलती ज़रूर हुई है पर गलती तो तुमने भी की है. मगर गलतियां मायने नहीं रखती. प्यार सच्चा हो तो हर गलती माफ़ हो जाती है .

मीनल कुछ देर खामोश बैठी रही , उसके चेहरे से साफ़ ज़ाहिर था क उसे भी अपनी गलती का एहसास हो रहा था .

अमित : तुम्हारे साथ उस रत जो कुछ भी हुआ उस बारे में मोहित को कुछ नहीं पता और न hi उस वीडियो क बारे में . मैंने सिर्फ ये तुम्हे सचाई दिखने क लिए hi राखी थी . अब इन दोनों वीडियोस को मैं डिलीट कर दूंगा. उम्मीद करता हूँ तुम दोनों क बीच अब सब कुछ पहले जैसे ठीक हो जायेगा

मैंने उठ कर मीनल क हाथ से मोबाइल लेने क लिए हाथ बढ़ाया तो वो एक झटके में उठी और मेरे गले लग कर रोने लगी . मैं उसे सांत्वना दे कर चुप करवाने की कोशिश कर रहा था . आखिर कुछ देर बाद वो चुप हुई तो मैंने उसे खुद से जुड़ा किया .

मीनल : मैं तुम्हारा किस तरह शुक्रिया ऐडा करूँ. तुमने मुझे पाप करने से बचा लिया . अगर तुम न होते तो मैं बर्बाद हो जाती . प्लीज मुझे माफ़ कर दो मैं आइंदा कभी भी तुम पर शक नहीं करुँगी .

एक बार फिर मीनल मेरे गले लग गयी. इस बार उसने कुछ ज्यादा hi कास कर मुझे गले लगा लिया था और इस वजह से उसके बूब्स मुझे अपनी छाती पर अछि तरह से महसूस हो रहे थे.

अमित : अब बस भी करो , मोहित ने तुम्हे ऐसे मेरे साथ देख लिया तो पता नहीं क्या सोचेगा .

मीनल : जो सोचता है सोचे , वो इतना कुछ कर सकता है तो मैंने अभी किया hi क्या है . क्या एक बार मैं ये गलती नहीं कर सकती

इतना कह कर मीनल मुझसे अलग हुई और एक बार मेरे गाल पर किश भी कर दी .

अमित : अब तो तरस खाओ उस बेचारे पर , पता है कितना तड़प रहा बाई तुमसे मिलने क लिए .

मीनल : तड़पने दो उसे कुछ दिन और , उसे भी तो पता चले उसने क्या किया है. उसकी सजा तो देनी hi पड़ेगी न ताकि दोबारा ऐसा न करे .

अमित : चलो काम से काम तुम अब उससे नाराज़ तो नहीं हो. तो अब सब ठीक है न ? अब तो पहल की तरह उसके साथ रहोगी न ? पता है मैं तो आंटी को बता भी चूका हूँ क तुम hi उनकी होने वाली बहु हो .


मीनल : शरमाते हुए ) जानती हूँ तुमने hi उनसे कहा है वर्ण मोहित तो इस मामले में फत्तू है. और मैं मोहित क साथ पहले जैसे hi रहूंगी पर मेरी एक शर्त है …..
 
अपडेट थोड़ा देरी से आएगा पर आएगा ज़रूर
 
अपडेट 267



अमित : शर्त ?? कैसी शर्त ??

मीनल : मैं ……

मीनल अभी कुछ आगे बोलती उससे पहले hi बहार घंटी बज उठी. यानि क कोई घर आया था

मीनल : लगता है माँ आ गयी , तुम बैठो मैं अभी आयी .

मीनल झट से बहार निकल गयी . अब मुझे समझ नहीं आ रहा था क मैं आंटी से कैसे मिलूं. घर में मीनल अकेली थी ऐसे में मुझे यहाँ देख कर पता नहीं वो क्या सोचती . मैं यही सब सोच रहा था क मीनल आंटी क साथ अंदर आ गयी और उनके साथ एक और लड़का भी था. देखने में स्मार्ट था और मेरा हमउम्र hi लग रहा था .

मीनल : माँ ये है अमित , मेरा फ्रेंड , ये मोहित का क्लास मात है दोनों बेस्ट फ्रेंड भी हैं.

मैंने आगे बढ़ कर आंटी क पाऊँ छुए और उन्होंने भी मुझे आशीर्वाद दिया .

आंटी : जीते रहो बीटा , मोहित नहीं आया ? वो कहाँ है आज कल? बहुत दिनों से देखा नहीं .

अमित : वो छुट्टियां थी न तो अंकल क साथ बिज़नेस देख रहा था .

आंटी : कुछ चाय नाश्ता दिया क नहीं ? बिना खाये पिए नहीं जाने देना. वैसे किसी काम से आये थे क्या ?

मीनल : हाँ माँ वो मैंने hi बुलाया था , राधा को तो आप जानती hi हैं वो अमित की कजिन है न और आजकल इसी क घर पर है वो. उसे कुछ देना था तो मैंने सोचा अमित ले जायेगा .

आंटी : ाचा तो राधा तुम्हारी बहिन है , बहुत hi प्यारी बची है . उसे लेकर आना यहाँ . मैं तो इसे कई बार कह चुकी हूँ क उसे लेकर आये पर ये कहती है क वो आती hi नहीं. अब भला सहेली क घर जाने में कैसी शर्म.

अमित : जो वो ऐसी hi है , कहीं भी नहीं जाती. फिर भी मैं उसे कह दूंगा .

मीनल : ओह्ह सॉरी सॉरी , मैं तो मिलाना भूल hi गयी. अमित इससे मिलो , मेरा कजिन मैंने बताया था न माँ इसी को लेने गयी थी. मेरे मां का बीटा संजय . संजय अमित

मैंने संजय से हाथ मिलाया और उसने भी ख़ुशी से हाथ मिलाया . संजय को देख कर hi लग रहा था क वो ांचे घर से है मतलब पैसे वाले . कपडे भी ऐसे पहन रखे थे जैसे मॉडल हो. कद काठी भी मेरे जितनी थी .

मीनल : संजय भी फर्स्ट ईयर कर रहा है साइंस में . मां जी और ममी विदेश जा रहे हैं तो अब से ये महाराज यहीं रह कर अपनी स्टडी कंटिन्यू करेंगे.

संजय : तू क्यों इतना दर रही है? तुझे परेशां नहीं करने वाला मैं. मैं किसी दूसरे कॉलेज में एडमिशन लूंगा ताकि तुझसे दूर रह सकूँ वर्ण तू मेरी शिकायत करती रहेगी

मीनल : ओहो हो हो , अभी तक हीरोगिरी का भूत उतरा नहीं लगता है. यहाँ पर लड़कियों क चक्कर में अगर स्टडी ख़राब की न तो मां जी को सब बता दूंगी .

संजय : इसी लिए ,, इसी लिए तेरे साथ तेरे कॉलेज नहीं जाना चाहता मैं. तू हमेशा शिकायत लगाती रहती है .

मीनल : तुझे हमारे कॉलेज में एडमिशन मिलेगी तो जायेगा न . अमित ये न हमेशा से ऐसा hi है. देखने में ठीक थक तो है hi ऊपर से बॉक्सिंग क प्लेयर हैं जनाब. बस इसी चक्कर में लड़कियां इनकी फैन बन जाती हैं और ये …..

संजय : है है है , एडमिशन नहीं मिलेगा ?? अरे मुझे तो झक मर क कोई भी कॉलेज एडमिशन दे देगा. ये मेरी मर्जी हैं मैं किस कॉलेज जाऊंगा. मेरी परफॉरमेंस देख कर तो मेरे पीछे भागेंगे तेरे कॉलेज वाले. दिल्ली में सरे कॉलेज वाले मुझे अचे से जानते थे.

अमित : तो आप भी स्पोर्ट्समैन हैं , बहुत ख़ुशी हुई जान कर.

संजय : मतलब तुम भी स्पोर्ट्स में हो? वैसे देखने में तो काफी हेअल्थी हो फिर कौन सी स्पोर्ट्स कर रहे हो ? कहीं कर्रम तो नहीं खेलते है है है .

संजय ने मेरा मज़ाक उड़ने की कोशिश की तो मैं बस मुस्कुरा दिया पर मीनल ने तुरंत उसे जवाब दिया .

मीनल : वैरी फनी ,,, पता है अमित हमारे कॉलेज का हीरो है. रेसलिंग में इसके बराबर का कोई नहीं . खुद प्रिंसिपल सर अमित को पर्सनली सपोर्ट करते हैं .

संजय : ओह सॉरी सॉरी , पर तुम्हारी हेल्थ बॉडी देख कर मुझे ऐसा लगा . वैसे थोड़ा गयम जाया करो और मेरी तरह बॉडी बनाओ . लड़कियों को ऐसी hi बॉडी पसंद है .

अमित : सॉरी दोस्त पर मैं ये सब किसी को इम्प्रेस करने क लिए नहीं करता. एक खिलाडी क लिए नाम और इज़्ज़त ज्यादा मायने रखती है. लड़कियों क चक्कर में पडूंगा तो फिर कुछ भी नहीं कर पाउँगा .

संजय : ऐसा कुछ नहीं होता , मेरी तरफ देखो , मैं तो गेम क साथ साथ एन्जॉय भी करता हूँ. अपने कॉलेज का बेस्ट प्लेयर था मैं. अब यहाँ आ गया हूँ तो जल्दी hi इस शहर को भी मेरे बारे में पता चल जायेगा और ….

मीनल : पता है पता है जो तुम कहना चाहते हो . अमित तुम इसकी बातें मत सुनो वर्ण ये तुम्हे भी अपने जैसा बना देगा .

इतने में आंटी ने आवाज़ दी , उन्होंने हमारे लिए चाय बना दी थी. फिर मैंने उनके साथ बैठ कर चाय पि और वापिस जाने की इजाज़त मांगी . मीनल मुझे छोड़ने क लिए बहार तक आयी .

मीनल : अपने दोस्त से कह देना उसके साड़ी करतूतें मुझे पता है. और उसे इसकी सजा भी मिलेगी .

अमित : पर तुमने तो कहा था क तुम अब नाराज़ नहीं हो.

मीनल : नाराज़ नहीं हूँ पर उसे कुछ दिन तड़पने दो ताकि उसे भी पता चले क उसने क्या किया है. और हाँ तुम्हे मेरी शरत भी माननी पड़ेगी.

अमित : कैसी शर्त

मीनल : बाद में बताउंगी अभी तुम जाओ.

फिर मीनल से हाथ मिला कर मैं पैदल hi उसके घर से चल पड़ा . अभी कुछ कदम hi चल था क मोहित की कार मेरे आगे आकर रुक गयी और उसने मुझे बैठने को कहा .

मोहित : कैसी है मीनल ? वो ठीक तो है न ? क्या कहा मीनल ने ?? वो मुझसे बात करेगी ? तूने उसे सब बता तो दिया न ? उसे यकीन तो हो गया न ?

मेरे गाड़ी में बैठते hi मोहित ने सवालों की झड़ी लगा दी. वो कितना उतावला हो रहा था मुझे देख कर हंसी आ गयी

अमित : अरे रुक जा मेरे बाप कितने सवाल पूछेगा एक बार में hi ?? ठीक है वो और मेरी बात हो गयी है उससे .

मोहित : क्या कहा उसने बता तो सही ? उसे सच्चाई बता तो दी न तुमने ? वो नाराज़ तो नहीं है न ?

अमित : खुद hi करते बात जा क,,, मुझे कुछ बोलने भी देगा ??

मोहित मेरी बात सुन कर चुप हो गया . मुझे फिर से हंसी आ रही थी पर मैंने खुद पर काबू किया.

अमित : तेरी और रॉय की साडी वीडियोस वो सेल भेज रहे थे मीनल को. अब ऐसी वीडियो देख कर किसे गुस्सा नहीं आएगा . बहुत गुस्से में थी वो , पहले तो बात hi नहीं सुन रही थी और मुझे भी घर से बहार निकल रही थी . पर शुक्र मन क मैंने बात संभल ली. उसे मैंने सब सच बता दिया है . और उसे यकीन भी हो गया है. पर तू खुद सोच जो कुछ तूने किया है उसके बाद उसका गुस्सा जायज़ है क नहीं ?

मोहित : जनता हूँ यार , मेरा hi दिमाग ख़राब हो गया था. एक बार मीनल मन जाये दुबारा किसी की तरफ देखूंगा भी नहीं .

अमित : चिंता मत कर मन जाएगी , उसे थोड़ा टाइम दे और तब तक कोई गलती मत करना . वर्ण फिर मुझे मत कहना .

मोहित : वो सच में मन जाएगी न ?

अमित : सेल मुझ पर यकीन नहीं है तुझे ?

मोहित : तुझ पर hi तो यकीन है. मैं तेरा शुक्रिया किस तरह ऐडा करूँ. मुझे समझ नहीं आ रहा .

अमित : चल चल अब बस कर पहले घर चलते हैं फिर मुझे गाओं वापिस जाना है.

मोहित : गाओं ? मगर क्यों ? नहीं तू आज यहां रहेगा.

अमित : अबे कल से कॉलेज जाना है क नहीं? मुझे जा कर अपनी तयारी भी तो करनी है.

मोहित : तो यहीं से चले जायेंगे यार वैसे भी अभी कौन सा पड़े होनी है .

अमित : जो भी हो , मुझे घर जाना होगा. कल भी तो यहीं था न .

मोहित : कल तो ….. आज भी रहले न यार

अमित : अब सब ठीक हो तो गया है अब क्यों ऐसे कर रहा है. तू आज रत मीनल क सपने देख फिर कल उसे कॉलेज में मिल भी लेना . और मुझे आज घर जाने दे.

बातें करते करते हम घर पहुँच गए. मोहित क चेहरे पे ख़ुशी साफ़ झलक रही थी. शाम का वक़्त था और अँधेरा हो चला था. घर पहुंचे तो सामने करिश्मा दीदी रमा आंटी और निधि दीदी बैठी हमारा hi इंतज़ार कर रही थी.

रमा : कहाँ थे तुम दोनों ? तुम ( अमित ) तो काम का कह कर गए थे और सारा दिन hi बहार निकल दिया . ये भी तुम्हारे साथ था ?

अमित : वो जिस काम से गया था वहीँ देर हो गयी. मोहित भी वहीँ आ गया था और तब से हम साथ में hi हैं.

मोहित : माँ जल्दी से एक बढ़िया सी कॉफ़ी पिलाओ फिर महाशय को वापिस गाओं जाना है .

रमा : गाओं जाना है ? नहीं आज तुम यहीं रहो. कल चले जाना .

अमित : नहीं आंटी आज जाना पड़ेगा , कल से कॉलेज शुरू हो रहे हैं इस लिए तयारी भी करनी है.

रमा आंटी ने ज्यादा ज़ोर नहीं दिया और मेरी बात समझते हुए किचन में चली गयी . करिश्मा दीदी मोहित को देख कर खुश थी और मेरी तरफ देख आँखों hi आँखों में पूछ रही थी इस बारे में . मैंने उन्हें स्माइल देकर आंख दबाकर इशारा किया क सब ठीक है . मेरा इशारा समझते hi उनकी आँखों में ख़ुशी क आंसू आ गए और उन्होंने आगे बढ़ कर मोहित को गले लगा लिया .

मोहित : क्या हुआ दीदी ,,,, आप रो रही हैं.

करिश्मा : ये तो ख़ुशी क आंसू हैं. मेरा भाई आज वापिस आ गया है

करिश्मा दीदी की बात का मतलब मोहित समझ गया और उसको भी एहसास हो गया क पिछले कुछ दिनों में वो कितना कुछ गलत कर गया था. फिर उसने भी करिश्मा दीदी को कास क गले लगा लिया. निधि दीदी और मैं दोनों को देख रहे थे. दीदी को तो समझ नहीं आ रहा था क आखिर चल क्या रहा है

मोहित : मैंने आपको बहुत दुःख दिया न दीदी , ी ऍम सॉरी . मुझे माफ़ कर दो

करिश्मा : कोई बात नहीं , जो भी हुआ उसे भूल जा. मेरा भाई मुझे वापिस मिल गया बस इतना hi काफी है.

इतने में आंटी भी कॉफ़ी ले कर आ गयी. अपने दोनों बच्चों को प्यार से गले लगे देख वो भी कुछ पल उन्हें देखती रही फिर बोली

रमा : चलो चलो कॉफ़ी पि लो वर्ण ठंडी हो जाएगी . आज क्या बात है , बड़ा प्यार है बहिन पर. माँ क साथ तो अचे से बात भी नहीं करता .

मोहित ने जब आंटी की ये बात सुनी तो करिश्मा दीदी से अलग हो कर रमा आंटी को साइड से अपनी बाँहों में भर लिया जो कॉफ़ी रख रही थी टेबल पर .

मोहित : सॉरी माँ , मैंने आपको हर्ट किया न ??

रमा : आज तुझे हुआ क्या है ? ( मेरी तरफ देखते हुए ) तुम दोनों कहाँ गए थे ? क्या जादू कर दिया है तुमने आज इस पर .

अमित : मैंने तो कुछ भी नहीं किया आंटी

करिश्मा : ये है hi जादूगर माँ , सब ठीक कर देता है ये. सबको प्यार देता है हमेशा .

करिश्मा दीदी ने ये बात मेरी आँखों में देख कर कही तो मैंने नज़रें झुका ली. इतने में रमा आंटी मेरे करीब आयी और मुझे गले से लगा लिया . फिर धीरे से मेरे कण में बोली.

रमा : थैंक यू , मुझे और मेरे बच्चों को सँभालने क लिए .

आंटी ने बहुत धीमे से मेरे कण में कहा था जिसे किसी ने नहीं सुना . पर जब वो मुझसे अलग हुई तो मैंने उनकी आँखों में देखा. उन्होंने मुझे स्माइल दी और फिर कॉफ़ी पिने को कहा . निधि दीदी ख़ामोशी से बस मुझे देख रही थी और कभी करिश्मा दीदी को. कॉफ़ी ख़तम होते hi मैंने गाओं जाने की इजाज़त मांगी तो निधि दीदी तुरंत कड़ी हो गयी. जैसे वो इसी का इंतज़ार कर रही थी. पहले मैं मोहित से गले मिला और कल कॉलेज मिलने का कहा. फिर आंटी से मिला तो उन्होंने गले मिलते वक़्त अपने स्तन मेरी छाती में कुछ ज्यादा hi दबा दिए और कण में बोली क जल्दी आना. फिर मैं गाड़ी क पास गया तो करिश्मा दीदी जो निधि दीदी क साथ कार तक आयी थी . मुझे गाडी में बैठता देख वो जल्दी से मेरे सीने से लग गयी. मोहित और आंटी थोड़ा पीछे खड़े थे . करिश्मा दीदी मेरे कण में बोली.

करिश्मा : थैंक यू फॉर एवरीथिंग, तुमने मोहित को संभल लिया . तुम बहुत अचे हो. जल्दी आना मैं तुम्हारा इंतज़ार करुँगी.

करिश्मा दीदी क चेहरे पर स्माइल थी. उनकी बात का मतलब मैं समझ रहा था पर मैंने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया और गाड़ी में बैठ गया . फिर हम दोनों गाओं की तरफ वापिस चल दिए . कुछ देर तक गाड़ी में ख़ामोशी रही. न मैं कुछ बोल रहा था न दीदी. फिर दीदी ने hi बात शुरू की

निधि : ये मोहित का क्या चक्कर था ? मैं जानती हूँ क कुछ तो गड़बड़ थी जो तूने सेटल की है. इसी लिए करिश्मा तुम्हे थैंक यू कह रही थी . है न ?

निधि : वो मोहित थोड़ा अपसेट था दीदी , उसका उसकी गफ क साथ थोड़ा झगड़ा हो गया था. मैंने बस दोनों का वो झगड़ा ख़त्म करवा दिया इस लिए मोहित खुश हो गया . और उसको खुश देख कर करिश्मा दीदी और आंटी भी खुश थी .

निधि : तुम सुबह से इसी काम में लगे थे क्या ?

अमित : हाँ दीदी

निधि : मैंने सोचा था आज तुम्हारे साथ रहूंगी सारा दिन. चलो कोई बात नहीं , ये भी तो ाचा hi हुआ जो तुमने उन दोनों का झगड़ा ख़तम करवा दिया . वैसे किस बात को लेकर झगड़ा हुआ था ?

अमित : कुछ नहीं दीदी , वो पार्टी में मोहित को किसी ने धोखे से शराब पीला दी थी और फिर एक लड़की ने मोहित क साथ फ़्लर्ट किया जिस वजह से दोनों में झगड़ा हो गया था .

निधि : कल रत मैंने भी तो थोड़ी सी पि ली थी न ,,,,,,, मैंने कुछ ,,,,,

निधि दीदी ने अचानक कल रत वाली बात छेड़ दी , वो बात करने से जैसे संकोच भी कर रही थी शायद दर रही थी या कुछ और पर वो मेरी तरफ देखने से बच रही थी. मुझे समझ नहीं आ रहा था क मैं किस तरह दीदी से वो बात करूँ जो दीदी कल रत मेरे साथ कर रही थी . शायद वो मुझे कुछ और समझ कर वो सब कह दी होंगी . अब अगर मैं उस बात का ज़िकर करूँ तो शायद उन्हें ाचा न लगे .

अमित : मुझे आप से इस बारे में बात करनी थी. आप को क्या ज़रूरत थी कल रत ड्रिंक करने की. आप तो होश में hi नहीं थी रत.

निधि : वो बस हो गया ,,, मेरी फ्रेंड ने मुझे चलेंगे किया था और मैं कर गयी. जानते हो मैंने पहली बार वो सब किया है. तुम किसी को ….

अमित : जनता हूँ दीदी , आप ऐसी नहीं हो निश्चिन्त रहिये मैं ये बात किसी को नहीं बताऊंगा. वैसे आप कल किसे यद् कर रही थी ?

निधि : किसे मतलब ???

अमित : आप नशे में मुझे कोई और समझ कर कुछ कह रही थी .

निधि : क्या समझ रही थी?

निधि दीदी एक डैम से बोली, उनकी हड़बड़ाहट देख मैं बात करते करते रुक गया .

अमित : कुछ नहीं जाने दीजिये जो हुआ सो हुआ

निधि : प्लीज बताओ न , मैं क्या समझ रही थी तुम्हे ? मैंने कुछ कहा था क्या तुमसे ?

अमित : क्या आप को सच में यद् नहीं ?

दीदी ने न में गर्दन हिलायी . मैं अभी भी इस बात को कहने में शर्म महसूस कर रहा था . वैसे भी अभी तक दीदी ने ऐसी कोई बात नहीं की थी क जिससे लगे क कल रत जो उन्होंने कहा वो मुझे hi कहा .

अमित : शायद आप मुझे कोई और समझ रही थी.

निधि : क्या कहा था मैंने ? प्लीज साफ़ साफ़ कहो और सच कहना तुम्हे मेरी कसम.

निधि ( मन में ) इसका मतलब वो सपना नहीं था मैंने सच में अपने दिल की बात कह दी थी कल रत. प्लीज बोल दो अमित क मैंने तुमसे वो सब कहा था . मुझमे और हिम्मत नहीं है प्लीज भगवन क लिए कह दो वो सब सच था .

अमित : आप ये कसम देने क बगैर बात नहीं कर सकती क्या मेरे साथ ? मैं कभी आप से झूठ बोलता हूँ क्या ? ,,,,, तो सुनिए ,,,, मुझे लगा कल रत आप मुझे वो लड़क समझ रही थी जो आपको पसंद है और आप बता नहीं रही जिसके बारे में . आप मुझे कह रही थी क मैं आपका ,,,

निधि : आपका ???

अमित : आपका ,,,आपका पति हूँ. ऐसी बात आप मुझे तो नहीं कह सकती न , अब बताइये कौन है वो जिसे आप अपना पति मानती हैं. कहीं आपने चुपके से किसी क साथ ……

निधि : वो तुम hi हो

निधि दीदी ने जब ये बात कही तो मुझे झटका लगा और मैंने ऑंखें फाड़े उन्हें देखने लगा . मुझे तो यकीन नहीं हो रहा था क दीदी ऐसी बात कह सकती हैं वो भी पूरे होशो हवास में .

अमित : ये आप क्या कह रही हैं ? आप होश में तो हैं? कहीं आप ने फिर से ड्रिंक तो नहीं की है?

निधि : मैं पूरे होश में हूँ और जो कह रही हूँ वो सच है. यू अरे माय हस्बैंड, तुम मेरे पति हो .

अमित : आप मज़ाक कर रही हैं न ?? लगता है आपकी रत की अभी तक नहीं उतरी.

निधि : मैं कोई मज़ाक नहीं कर रही अमित. ी लव यू , मैं जानती हूँ तुम मुझ पर यकीन नहीं करोगे . पर ये सच है , ी लव यू फ्रॉम बॉटम ऑफ़ माय हार्ट. और ये भाई बहिन वाला प्यार नहीं ये वो प्यार है जो एक लड़की लड़के से करती है.

अमित : दीदी आप ये क्या कह रही हैं …

निधि : प्लीज अमित मुझे बीच में मत रोको वर्ण मैं अपनी बात नहीं कह पाऊँगी. मैं पहले तुम्हे अपना छोटा भाई hi मानती थी और एक बहिन की तरह hi प्यार करती थी. पर फिर वो सब हुआ , जब तुमने मेरी ज़िन्दगी तबाह होने से बचाई . उस वक़्त जब मेरी दुनिया मुझे उजड़ती नज़र आ रही थी तब तुम भगवन बन कर वहां आये और न सिर्फ मेरी इज़्ज़त बचाई बल्कि मेरी ज़िन्दगी भी बचाई. क्यूंकि उस क बाद मैं अपनी ज़िन्दगी खुद hi ख़तम कर लेती. मगर तुमने आ कर मुझे बचा लिया . तुमने शायद वो सब एक भाई होने क नाते किया और मैं जानती हूँ तुम मुझे बहिन क रूप में hi प्यार करते हो. पर तुमने हो किया उसके बाद कौन लड़की होगी जिसके दिल में प्यार नहीं उमड़ेगा उस लड़के क लिए जिसने उसकी इज़्ज़त बचने क लिए अपनी जान दांव पर लगा दी. मैंने तो तुम्हे कुछ बताया भी नहीं था फिर भी तुमने मेरी उदास आँखों में मेरी ख़ामोशी में मेरा दर्द देख लिया . मेरा सागा भाई मेरा परिवार जो न देख सका वो न सिर्फ तुमने देखा बल्कि मुझे उस नरक से बचा लिया . तुम्हे तो पता भी नहीं होगा क तुमने कब मेरी मांग भर दी , पर मैं उसी वक़्त तुम्हारी पत्नी बन गयी थी. पहले मुझे लगा क शायद मैं गलत हूँ जो बजने में हुई उस घटना को भगवन की मर्ज़ी समझ रही हूँ पर फिर जब हम दोनों उस दिन मंदिर में गए थे तब खुद भगवन ने मेरी मांग भर दी और मेरी झोली में तुम्हे दाल दिया . अब तुम खुद hi बताओ जो रिश्ता खुद भगवन ने जोड़ा है मैं उसे कैसे न मनु. मैं तो उसी दिन से तुम्हे अपना पति मन रही हूँ मगर तुम hi ध्यान नहीं दे रहे थे. तुम धीरे धीरे मेरी ज़िन्दगी संवारते गए पर मेरी आँखों में छिपी मेरे दिल की बात नहीं देखि . पहले नौकरी फिर इतनी ऊँची पोस्ट , बहिन जैसी दोस्त , इतनी अछि कंपनी , इतने अचे अंकल आंटी , और क्या क्या गिनाऊँ. तुमने मुझे वो सब दे दिया जो किसी को किस्मत से मिल सकता है. मुझे अब अपनी ज़िन्दगी में तुम्हारे सिवा और कुछ नहीं चाहिए . मैं तुमसे कब से अपने दिल की बात करना चाहती थी पर हिम्मत नहीं कर प् रही थी. इस लिए अपनी दोस्त क साथ मिल कर अल रत वो सब मैंने hi प्लान किया था वर्ण मैं कभी तुमसे कह नहीं पति क मैं तुम्हे कितना चाहती हूँ. चाहे कल मैंने नशे की हालत में अपनी दिल की बात कही पर वो सब सच था . तुम hi मेरे सब कुछ हो और मैं अब तुम्हारे सिवा किसी और की नहीं हो सकती .

निधि दीदी ने इतना सब कुछ मुझे कह दिया क मेरा दिमाग ये सब सुन कर चक्कर में पद गया . ऐसा लग रहा था मनो वक़्त रुक सा गया है. गाडी कब से सड़क किनारे कड़ी थी मुझे इस बात का भी ख्याल नहीं था . अँधेरे में गाओं क सुन सं रस्ते पर हम इस तरह आमने सामने थे. दीदी क खामोश होते hi ऐसी चुप्पी हम दोनों में आ गयी मनो दुनिया में कोई आवाज़ अब बाकि नहीं रही . दीदी की कही हुई हर बात मेरे दिमाग में घूम रही थी. और फिर उस दिन वाली घटना क बाद से दीदी का मेरे साथ रवैया और मेरी ज्यादा परवाह करना हर बार मुझे गहरी निगाहों से देखना मेरे करीब आना . मेरे साथ सोना और जिस तरह वो नींद में लिपट तो थी अब एक एक सन आँखों क सामने घूमने लगा. मतलब वो सब अनजाने में नहीं था वो सब दीदी खुद कर रही थी क मैं उनकी तरफ ध्यान दूँ.

निधि : कुछ तो बोलो , तुम्हारी ये चुप्पी मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रही. क्या तुम मुझे अपने दिल में जगह नहीं दे सकते ? क्या मैं इस काबिल नहीं क तुम्हारा प्यार प् सकूँ ?

दीदी की बातों से उनकी तड़प साफ़ झलक रही थी. बात करते करते उनकी आँखें भर आयी तो मेरा दिल भी तड़प उठा आखिर वो मेरी सबसे प्यारी दीदी थी .

अमित : आप तो कुदरत का वो नायब नमूना हैं जो किसी किस्मत वाले को hi मिल सकता है. दुनिया में कोई भी ऐसा इंसान नहीं होगा जो आप जैसी अप्सरा को पाना नहीं चाहेगा . पर आप जानती हैं ये पॉसिबल नहीं है. आप जो कह रही हैं उस रिश्ते को कोई भी नहीं मानेगा .

निधि : मुझे किसी की परवाह नहीं है , कोई क्या कहेगा, क्या सोचेगा मुझे इससे लेना देना नहीं. मैंने तुम्हे अपने मन से पति मन लिया है. अब मैं किसी और क साथ जीवन जीने क बारे में सोच भी नहीं सकती . मैं जानती हूँ इस रिश्ते क लिए कोई नहीं मानेगा इस लिए मैंने सब सोच लिया है. हम अलग रह लेंगे . वैसे भी अंकल ने मुझे एक फ्लैट दे दिया है और मेरी सैलरी बहुत होगी घर चलने क लिए .

अमित : दीदी ये सब आप क्या बोल रही हैं. आप होश में तो हैं? घर से अलग रह लेंगी पर क्या अपनी से अलग रह पाएंगी? सब आपसे नाता तोड़ लेंगे . फिर आप भला कैसे खुश रह पाएंगी? मौसी पर क्या बीतेगी ? क्या वो ये सब बर्दाश्त कर पाएंगी ? माँ बाबा क्या वो इस रिश्ते को मानेंगे ? आप चाहती हैं एक रिश्ते क लिए बाकि सब रिश्तों को सूली पर चढ़ा दिया जाये ? आप तो सब से समझदार हैं अगर आप hi ऐसा काम करेंगी तो बाकि सब पर क्या असर होगा और जो परिवार की बदनामी होगी वो अलग

निधि : मगर मैं अब तुम्हारे सिवा किसी क साथ शादी नहीं करने वाली. अब चाहे कोई इस बात क लिए मने या न मने .

निधि दीदी का स्पष्ट जवाब सुन कर मैं सोच में पद गया. आखिर ये कैसे संभव था . एक तो हम रिश्ते में भाई बहिन थे ऊपर से वो मुझसे बड़ी भी थी. अगर वो मुझसे सिर्फ प्यार की बात करती तो एक बार क लिए मैं मन भी जाता क्यूंकि कल रत क इंसिडेंट क बाद मेरे दिल में भी कहीं न कहीं दीदी क हुस्न का जादू चल गया था पर शादी ?? ये तो ायम्भव था , कोई भी इस बात क लिए कभी राज़ी हो hi नहीं सकता था . वैसे भी मेरी ज़िन्दगी में रीमा थी और उससे शादी करना पहले hi एक चुनौती था अब दीदी .

अमित : आप जो कह रही हैं वो नहीं हो सकता दीदी , इस बात क लिए कोई भी कभी राज़ी नहीं होगा. आप खुद hi सोचिये अगर ये बात किसी को पता भी चली क हम एक दूसरे से प्यार करते हैं तो सारा दोष मुझ पर hi आएगा . आप तो हमेशा hi सबकी प्यारी रही हैं . आप कुछ ऐसा कर सकती हैं ऐसा कोई सोच भी नहीं सकता , इस लिए हर कोई मुझे hi दोष देगा क मैंने अपनी hi बहिन पर गलत नज़र डाली. बचपन से hi मैं कितने hi ताने सुनता आया हूँ और एक बार फिर से मुझे सब सुन्ना पड़ेगा. माँ पर क्या बीतेगी ये पता चलने पर . और मौसी क बारे में तो सोचिये , वो मुझे इतना प्यार करती हैं जब उन्हें पता चलेगा क मैंने उनकी बेटी क साथ hi …. वो तो जीते जी मर जाएँगी. क्या आप चाहती है मैं सबकी नज़रों में गिर जॉन ? सब रिश्ते शर्मसार कर दूँ ? इस शादी क लिए कोई कभी भी नहीं मानेगा .

निधि : मुझे कुछ नहीं पता , मैं मन में तुम्हे अपना पति बना चुकी हूँ. अगर तुम मुझे नहीं अपना सकते तो ठीक है , मैं दबाव नहीं बनाउंगी तुम पर . पर तुम्हारे सिवा मैं किसी और क शादी कर लूँ , ये भी नहीं होगा . फिर चाहे मुझे घर छोड़ना पड़े या दुनिया . अब मेरी ज़िन्दगी में कोई आएगा तो सिर्फ तुम वर्ण कोई नहीं. और रही बात तुम पर दोष आने की तो मैं खुद सबको बता दूंगी क ये मेरा फैसला है . तुम मेरे पति हो मेरी इज़्ज़त क रखवाले , तुम पर मैं कोई आंच नहीं आने दूंगी .

निधि दीदी तो अपने फैसले पर पूरा अटल थी अब उन्हें कैसे मानों मुझे समझ नहीं आ रहा था .

अमित : आप ज़िद कर रही हैं दीदी , छोड़ दीजिये ये ज़िद . आप मेरी सबसे अछि सबसे प्यारी दीदी हैं. आपके लिए तो कोई राजकुमार आएगा जो आपकी तरह बहुत ाचा होगा . मैं तो आपके काबिल हूँ hi नहीं. आप मेरे बारे में जानती hi क्या हैं दीदी . अगर मेरी सचाई आपको पता चलेगी तो आप मेरी शकल भी देखना पसंद नहीं करेंगी. आप नहीं जानती , मेरा कई लोगों क साथ सम्बन्ध है. मैं खून से भी आपके काबिल नहीं हूँ.

निधि : मुझे कोई परवाह नहीं तुम्हारा किस्से सम्बन्ध है किस्से नहीं . इन सब बातों को सुन कर मैं अपना फैसला नहीं बदलने वाली. तुम क्या हो ये मेरा दिल जनता है और मैं अपने दिल की सुनती हूँ. आँखों देखा भी गलत हो सकता है कानो सुना भी गलत हो सकता है पर दिल जो कहता है वो कभी गलत नहीं होता . और मुझे यकीन है क जिस किसी क साथ भी तुमने सम्बन्ध जोड़ा होगा उसकी भी कोई न कोई वजह रही होगी. वर्ण तुम किसी क साथ कुछ गलत कर hi नहीं सकते . उस दिन जब मैं कपड़ों क बिना थी तुमने तो तब भी मुझे नज़र उठा कर नहीं देखा था . इस लिए ये सब बता कर अगर तुम ये सोच रहे हो क मेरी नज़र में तुम गिर जाओगे तो ऐसा नहीं होगा . और मैं ऐसा कुछ सुन्ना भी नहीं चाहती

अमित : पर मेरी ज़िन्दगी में पहले से hi कोई है दीदी , और मैं उससे बहुत प्यार करता हूँ. हम दोनों शादी करना चाहते हैं. अब आप hi बताओ मैं कैसे आपसे शादी कर सकता हूँ

मेरी बात सुन कर निधि दीदी खामोश हो गयी और एक तक मुझे देखती रही. उनकी आँखों में नमी आणि शुरू हो गयी . जिसे देख मेरा दिल भी अंदर से पसीज गया पर अब ये ज़रूरी था क मैं उन्हें सचाई बता कर ठेस पहुंचाऊं ताकि वो मेरे बारे में अपना नजरिया बदले .

अमित : मैंने ये बात किसी को नहीं बताई पर आज आपको बता रहा हूँ. मैं किसी से प्यार करता हूँ और उसी से शादी करूँगा मैं उसे वडा कर चूका हूँ. वो भी दिलो जान से मुझे चाहती है. क्या आप चाहती हैं क मैं उसे धोखा दूँ या आपको धोखे में रखूं? मैं ऐसा नहीं कर सकता दीदी.

कुछ देर हम दोनों hi खामोश रहे . दीदी की आँखों से आंसू बह रहे थे . मैं छह कर भी उन्हें चुप नहीं करवा रहा था . क्यूंकि उन्हें ये दर्द देना ज़रूरी था ताकि वो संभल सकें . कुछ देर बाद दीदी ने अपने आंसू पोंछे और बोली.

निधि : कौन है वो ?

अमित : रीमा .

उसके बाद दीदी ने न कुछ पुछा न कुछ कहा और न मैं hi कुछ बोल सका . मैं उनसे नज़रें चुरा रहा था क्यूंकि उनकी आँखों में देखने की अब मुझमे हिम्मत नहीं थी. दीदी ने खुद को संभाला और कार स्टार्ट कर क गाओं की तरफ बढ़ा दी. घर पहुँच कर दीदी सर दर्द का बहाना कर क सोने चली गयी. मन मेरा भी दुखी था तो मैंने भी तबियत सही न होने क बहाना बना दिया और अपने कमरे में चला गया . पर दीपिका ममी मेरी नज़रों को शायद समझ गयी थी. माँ अपने कमरे में थी मैं उनसे और बाबा से मिल लिया पर उन्हें कुछ ज़ाहिर नहीं होने दिया. अजय मां और कामिनी ममी को भी शकल दिखा दी. पर दिव्या मौसी जैसे मेरी बात पर सहमत नहीं हुई और मेरे पीछे hi कमरे में आ गयी.

दिव्या : क्या हुआ तेरी तबियत को ? बुखार तो नहीं है . कैसा लग रहा है ?

दिव्या मौसी ने आते hi मेरे माथे पर हाथ लगा कर बुखार चेक किया और मुझसे पूछने लगी.

अमित : बस शरीर टूट रहा है , थकावट सी लग रही है और नींद भी आ रही है

दिव्या : मैं खाना लती हूँ , पहले खाना खा ले वर्ण तबियत और ख़राब हो जाएगी.

अमित : नहीं मौसी मन नहीं है .

दिव्या : चुप चाप बैठ , मैं खाना लती हूँ.

दिव्या मौसी माँ की तरह मेरा ध्यान रख रही थी और मुझे आर्डर देकर चली गयी . उनके जाते hi राधा कमरे में आ गयी. उसके चेहरे पर भी चिंता साफ़ नज़र आ रही थी.

राधा : तुम्हे क्या हुआ है ?

अमित : कुछ नहीं बस थकावट है शायद .

राधा : दीदी को क्या हुआ है ? दोनों की hi तबियत एक साथ ख़राब हो गयी ? आखिर बात क्या है ?

मैं राधा की आँखों में देखा तो अपने लिए चिंता साफ़ नज़र आयी. मैं खुद को रोक नहीं प् रहा था . ऐसा लग रहा था क अभी आँखों से आंसू बह निकलेंगे . आज मैंने अपनी सबसे प्यारी दीदी को दुखी किया था . मुझे कुछ न कहता देख जैसे राधा मेरी आँखों की भाषा समझ गयी और उसकी आँखों में भी मुझे दर्द का एहसास हुआ. वो चल कर मेरे पास आयी और मेरा चेहरा दोनों हाथों में थम कर बोली.

राधा : सब ठीक हो जायेगा , भगवन सब ठीक कर देगा. मैं जानती हूँ कुछ तो ज़रूर हुआ है जो तुम अंदर से दुखी हो पर शायद बताना नहीं चाहते . मैं पूछूँगी भी नहीं , पर भगवन से दुआ करुँगी क सब ठीक हो जाये.

राधा की बात सुन कर पता नहीं मुझे क्या हुआ और मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया . मेरी आँखों से आंसू अपने आप छलक पड़े . राधा भी मेरे साइन में छिप गयी और मेरी पीठ पर अपने हाथ कास लिए . मेरी छाती पर कान लगा जैसे वो मेरी धड़कनो को सुन रही थी महसूस कर रही थी.

अमित : मैं बहुत बुरा हूँ राधा , बहुत बुरा हूँ. आज मैंने निधि दीदी को रुला दिया . मैं बहुत बुरा हूँ. उनकी आँखों में आज मेरी वजह से आंसू हैं. मेरी वजह से

राधा : शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ,, शांत हो जाओ , बिलकुल शांत. तुम किसी को कभी दुःख दे hi नहीं सकते. क्यूंकि तुम्हे पता है क दर्द का एहसास कैसा होता है. और फिर निधि दीदी से तो तुम सबसे ज्यादा प्यार करते हो . ये सब कैसे हुआ क्यों हुआ ये मैं नहीं जानती पर तुमने ऐसा कुछ भी जान बुझ कर नहीं किया होगा. तुम खुद को दोष मत दो , कभी कभी हालत इंसान से ऐसा करवा देते हैं क उसे अपनों क दुःख की वजह बनना पड़ता है. पर वो मायने नहीं रखता , मायने रखता है तो हमारा उद्देश्य, और तुम तो कभी उनका बुरा सोच भी नहीं सकते . तुम बस खुद को सम्भालो , दीदी से मैं बात करुँगी. सब ठीक हो जायेगा .

राधा ने मेरे सीने से लग कर जो कुछ भी कहा उसके बाद मुझे ऐसा लगा मनो साइन से बहुत भरी बोझ उतर गया हो. मैं राधा को ऐसे hi अपने साइन से लगाए मनो अपना दर्द हल्का करने में लग गया. मेरी आँखों अपने आप बंद हो गयी. पता नहीं राधा में क्या जादू था क वो हमेशा मुझे दर्द भुला देती थी. राधा ने भी मुझसे अलग होने की ज़रा भी कोशिश नहीं की. सीढ़ियों पर किसी क पाऊँ की आवाज़ सुन कर हम दोनों अलग हुए और राधा मुझे स्माइल देकर मुस्कुराने को कह कर कमरे से निकल गयी. तभी दिव्या मौसी हाथ में खाने की थाल लिए आ गयी.

दिव्या : चलो बैठो यहाँ , मैं अपने हाथों से तुम्हे खाना खिलाती हूँ. पता नहीं कहाँ कहाँ घूमता रहता है , अपना ख्याल रखे तो ऐसी नौबत क्यों आये . मुँह खोलो .



राधा ने मेरा मन हल्का कर दिया था और अब मौसी मेरा पेट भरने आ गयी. दिव्या मौसी की मीठी झिड़क और उनकी ममता को देख मुझे एक सुकून सा मिला और मैं बैठ कर चुपचाप खाना खाने लगा . दिव्या मौसी कब्बी झिड़क देती कभी दुलार करती मुझे अपने हाथ से खाना खिलाती रही. खाना खिलने क बाद वो मुझे आराम करने का कह कर निचे चली गयी. मैं भी कपडे बदल कर बीएड पर लेट गया और दीदी क बारे में सोचने लगा .
 
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