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- Dec 5, 2013
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रामलाल की बीवी ने जैसे hi सुना की उसके पति ने शेठजी की बहु के साथ बद्द्तमीज़ी की है, वो रोटी हुई भीड़ को चीरते हुए आगे आयी . उसने गुस्से और डर में रामलाल के बाल पकड़ लिए और उसे zor-zor से मारने लगी,
"साला कमीना! ये अपनी आदत से बाज़ नहीं आएगा! इस कमीने के वजह से मेरे बच्चे भूखे मरेंगे!"
वो रट हुए उसे पीट रही थी और रामलाल दर्द से कराह रहा तहा .
तभी आरती का मोबाइल बज उठा. स्क्रीन पर 'अरविन्द' का नाम चमक रहा था. आरती डर कर नवाज़ की तरफ देखने लगी .

नवाज़ ने पूछा, "किसका है?"
आरती ने घबरा कर कहा,
"तुम्हारे छोटे मालिक का."
ये सुनते hi रामलाल की बीवी और zor-zor से रोने लगी और पहात से आरती के पैरों के पास बैठ गयी.
"मेमसाब, हमे बक्श दो! हमारे छोटे बच्चों की तरफ देखो!"
आरती एक अजीब सी सिचुएशन में फँस गयी थी, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा है की क्या करे .
तभी भीड़ में से एक औरत रामलाल की बीवी को देख कर बोली,
"अपने पति को कण्ट्रोल में नहीं रखा, देख अब!"
ये सुनकर रामलाल की बीवी और डरने लगी. आरती ने उसे संभालती हुई बोली,
"आप शांत हो जाओ."
फिर उसने घबरा कर नवाज़ की तरफ देखा और पूछा,
"इनको कैसे पता चला?"
भीड़ में से एक बुजुर्ग़ औरत ने कहा,
"बेटी, ये गाँव छोटा है. हर पति को पता चल hi जाता है की अपनी बीवी क्या कर रही है. और आप तोह गाँव के सबसे बड़े आदमी की बहु हो . इतना तमाशा हो गया, तोह कोई न कोई छोटे मालिक को बता hi दिया होगा."
आरती ने लाचार होकर नवाज़ की और देखते भी उससे पूछा,

"अब मई क्या बोलू?"
नवाज़ ने कुटिलता से मुस्कुरा कर कहा,
"करो, करो बात करिये आप."
आरती ने दररते हाथों से अरविन्द का कॉल उठाया,
"हाँ, बोलिये."
अरविन्द: "कहाँ हो तुम? घर पर नहीं लग रही हो."
आरती: "वो नीता का एक्सीडेंट हुआ है न, तोह उसे देखने जा रही हूँ."
अरविन्द: "किसके साथ?"
आरती: "नवाज़."
अरविन्द: "Ok अच्छा... कैसी तबियत है उसकी?"
आरती: "अभी तक पहुंची नहीं हूँ, रस्ते में हूँ."
अरविन्द: "ये शोर किस चीज़ का है?"
आरती: "एक मटर हुआ है यहाँ."
अरविन्द: "क्या हुआ?"
आरती: "एक आदमी ने मेरे साथ थोड़ी बद्द्तमीज़ी की."
अरविन्द का गुस्सा आसमान पर पहुँच गया,
"कौन कमीना है? और नवाज़ क्या कर रहा था?"
आरती: "उसने उसको मारा."
अरविन्द: "कौन है वो कमीना? क्या नाम है इसका?"
तभी नवाज़ ने बद्द्तमीज़ी से आरती के हाथ में से मोबाइल ले लिया और बोलै,
"छोटे मालिक, मैं नवाज़."
तब आरती बड़े आशर्य से नवाज़ की और देखने लगी

अरविन्द: "कौन है वो?"
नवाज़: "वो रामलाल."
अरविन्द: "वो मुर्गी वाला?"
नवाज़: "हाँ मालिक."
अरविन्द: "उसको पकड़ के मार! और मार!"
मालिक का हुकुम मिलते hi नवाज़ उसको और ज़ोरदार लाठों से मारने लगा . रामलाल की बीवी डर के मारे चिल्लाई और सीधे नवाज़ के हाथ से फ़ोन लपक कर बोलने लगी, "साहब, हम पर रहम करो!"
अरविन्द ने गुस्से में कहा,
"तुम्हारे पति के बारे में बहुत सुना था पर आज इसकी हिम्मत इतनी बढ़ गयी है की उसने मेरी पत्नी के साथ बद्द्तमीज़ी की!"
रामलाल की बीवी: "साहब माफ़ कर दो!"
अरविन्द: "मैं नहीं, अब पापा देख लेंगे."
रामलाल की बीवी: "साहब, शेठजी को मत बताएं... वो तोह जान से मार देंगे हमे!"
तभी आरती ने उस औरत के हाथ से मोबाइल वापस लिया और बोली,
"अरविन्द, इतना बड़ा मटर नहीं है... पापाजी को मत बोलो."
अरविन्द: "हमने नहीं बताया तोह उनको कही न कही से पता चल hi जायेगा... और तुम जानती हो उनका गुस्सा!"
तभी अचानक आरती के मोबाइल पर कॉल वेटिंग आने लगी. स्क्रीन पर 'पापाजी' का नाम चमक रहा था. आरती का जिस्म डर से ठंडा पद गया.
आरती ने अरविन्द से कहा,
"पापाजी का कॉल आ रहा है..."
अरविन्द: "पता लग गया शायद... बात करो उनसे."
आरती ने कांपते हुए अपने ससुर (दीपक अग्रवाल) का कॉल उठाया,
"Hello..."
शेठजी (भरी और कड़क आवाज़ में):
"आरती बीटा, अब कहाँ पर हो?"
आरती: "रस्ते में..."
शेठजी: "उस हरामी ने बद्द्तमीज़ी की क्या तुमसे?!"
आरती के गले से आवाज़ नहीं निकल रही थी. पूरी भीड़, रामलाल, उसकी बीवी और नवाज़ सब सांस रोके आरती की तरफ देख रहे थे की वो शेठजी को क्या जवाब देती है .
शेठजी की कड़क आवाज़ सुनकर आरती ने दररते हुए जवाब दिया,
"हां पापा... पर नवाज़ ने बहुत मारा उसे, अब वो माफ़ी मांग रहा है."
शेठजी ने गुस्से में कहा,
"उसको कॉल दो!"
आरती ने कांपते हाथों से फ़ोन रामलाल की तरफ बढ़ाया. रामलाल ने रट हुए फ़ोन लिया,
"जी... जी शेठजी..."
"तेरे इतनी हिम्मत?!"
शेठजी की आवाज़ फ़ोन से बहार तक गूँज रही थी.
रामलाल thar-thar कांपते हुए बोलै,
"शेठजी, मुझे पता नहीं था..."
"क्या पता नहीं था?!"
"की मेमसाब आपकी बहु हैं..."
शेठजी ने दांते हुए कहा,
"चुटिया मारना बंद कर दे पहले!"
"शेठजी, चुटिया नहीं मार रहा हूँ..."
रामलाल रोटा रहा
.
तभी शेठजी ने चिल्लाकर पूछा,
"नवाज़! ये क्या बोल रहा है?"
नवाज़ ने तुरंत फ़ोन के पास आकर कहा,
"मालिक, मैंने इससे बोलै की मेमसाब कौन हैं पता है क्या तुझे? तोह बोलने लगा कोई भी रहने दे, मैं इससे बताऊंगा बद्द्तमीज़ी क्या होती है."
तब आरती नवाज़ की और देखने लगी

शेठजी का गुस्सा आसमान पर पहुँच गया,
"नवाज़! 5-6 लड़के लेकर इसकी जगह खली करवा अभी के अभी!"
ये सुनते hi दुलारी (रामलाल की बीवी) jor-jor से रोने लगी और आरती के सामने हाथ जोड़ लिए,
"मेमसाब! बचाओ हमे!"
शेठजी ने फ़ोन पर दुलारी की आवाज़ सुनकर कहा,
"आरती बीटा, इस औरत को कुछ मत बोलो तुम. इसके saas-sasur ने बाबूजी की सेवा की थी, इसलिए फ्री में जगह दी थी. और इसके पति ने ये किया!"
रामलाल गिड़गिड़ा उठा,
"मालिक, इस बार माफ़ कर दो!"
"अब कुछ नहीं होगा!"
शेठजी ने साफ़ कह दिया.
दुलारी ने रोटी हुई आरती के पेअर पकड़ लिए,
"मेमसाब, आप कुछ करो न... मेरे बच्चे भूखे मरेंगे!"
आरती का दिल पिघल गया और उसने धीरे से कहा,
"पापा जी .. एक बार माफ़ कर दो इनको."
शेठजी ने समझते हुए कहा,
"बीटा, तुम इस रामलाल को नहीं जानती. एक नंबर का कमीना इंसान है. अब माफ़ी मांग रहा है, पर अपनी आदत से बाज़ नहीं आएगा."
"हाँ पापा, आप सही कह रहे हो,"
आरती ने दुलारी के बच्चों की तरफ देखते हुए कहा,
"पर इस औरत के बच्चे chote-chote हैं, ये कहाँ जायेंगे?"
शेठजी ने एक पल सोचकर पूछा,
"तोह तुम क्या चाहती हो?"
"एक बार इस औरत के लिए माफ़ कर देते हैं,"
आरती ने गुज़ारिश की.
दुलारी ने हाथ जोड़कर कहा,
"बड़ी मेहरबानी होगी मेमसाब आप की!"
शेठजी ने थोड़ा शांत होकर कहा,
"ठीक है बीटा, तुम कहती हो तोह माफ़ कर देते हैं. वैसे मैं तुम्हारी बात कभी नहीं टालता. अरविन्द से ज़्यादा तुम मेरे करीब हो. पर... इस औरत को माफ़ कर देंगे, पर..."
आरती ने पूछा,
"पर क्या पापा?"
शेठजी ने फ़ोन पर से hi पूछा,
"क्या नाम है तुम्हारा?"
दुलारी ने रट हुए जवाब दिया, "
दुलारी."
शेठजी ने कड़क लहजे में अपना फैसला सुनाया,
"दुलारी, तुझे तोह मैं माफ़ कर दूंगा पर तेरे पति को नहीं."
दुलारी थोड़ा हैरान हुई,
"मालिक, मैं समझी नहीं?"
शेठजी ने साफ़ किया, "अब तेरे पति के पास नहीं रहेंगे मुर्गे. ये सब तेरे नाम पर रहेंगे, और तेरे पति को इस गाँव से अभी के अभी निकाल दे!"
दुलारी ने रोटी हुई आखों से अपना सर झुकाया और कहा,
"जी..."
"साला कमीना! ये अपनी आदत से बाज़ नहीं आएगा! इस कमीने के वजह से मेरे बच्चे भूखे मरेंगे!"
वो रट हुए उसे पीट रही थी और रामलाल दर्द से कराह रहा तहा .
तभी आरती का मोबाइल बज उठा. स्क्रीन पर 'अरविन्द' का नाम चमक रहा था. आरती डर कर नवाज़ की तरफ देखने लगी .

नवाज़ ने पूछा, "किसका है?"
आरती ने घबरा कर कहा,
"तुम्हारे छोटे मालिक का."
ये सुनते hi रामलाल की बीवी और zor-zor से रोने लगी और पहात से आरती के पैरों के पास बैठ गयी.
"मेमसाब, हमे बक्श दो! हमारे छोटे बच्चों की तरफ देखो!"
आरती एक अजीब सी सिचुएशन में फँस गयी थी, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा है की क्या करे .
तभी भीड़ में से एक औरत रामलाल की बीवी को देख कर बोली,
"अपने पति को कण्ट्रोल में नहीं रखा, देख अब!"
ये सुनकर रामलाल की बीवी और डरने लगी. आरती ने उसे संभालती हुई बोली,
"आप शांत हो जाओ."
फिर उसने घबरा कर नवाज़ की तरफ देखा और पूछा,
"इनको कैसे पता चला?"
भीड़ में से एक बुजुर्ग़ औरत ने कहा,
"बेटी, ये गाँव छोटा है. हर पति को पता चल hi जाता है की अपनी बीवी क्या कर रही है. और आप तोह गाँव के सबसे बड़े आदमी की बहु हो . इतना तमाशा हो गया, तोह कोई न कोई छोटे मालिक को बता hi दिया होगा."
आरती ने लाचार होकर नवाज़ की और देखते भी उससे पूछा,

"अब मई क्या बोलू?"
नवाज़ ने कुटिलता से मुस्कुरा कर कहा,
"करो, करो बात करिये आप."
आरती ने दररते हाथों से अरविन्द का कॉल उठाया,
"हाँ, बोलिये."
अरविन्द: "कहाँ हो तुम? घर पर नहीं लग रही हो."
आरती: "वो नीता का एक्सीडेंट हुआ है न, तोह उसे देखने जा रही हूँ."
अरविन्द: "किसके साथ?"
आरती: "नवाज़."
अरविन्द: "Ok अच्छा... कैसी तबियत है उसकी?"
आरती: "अभी तक पहुंची नहीं हूँ, रस्ते में हूँ."
अरविन्द: "ये शोर किस चीज़ का है?"
आरती: "एक मटर हुआ है यहाँ."
अरविन्द: "क्या हुआ?"
आरती: "एक आदमी ने मेरे साथ थोड़ी बद्द्तमीज़ी की."
अरविन्द का गुस्सा आसमान पर पहुँच गया,
"कौन कमीना है? और नवाज़ क्या कर रहा था?"
आरती: "उसने उसको मारा."
अरविन्द: "कौन है वो कमीना? क्या नाम है इसका?"
तभी नवाज़ ने बद्द्तमीज़ी से आरती के हाथ में से मोबाइल ले लिया और बोलै,
"छोटे मालिक, मैं नवाज़."
तब आरती बड़े आशर्य से नवाज़ की और देखने लगी

अरविन्द: "कौन है वो?"
नवाज़: "वो रामलाल."
अरविन्द: "वो मुर्गी वाला?"
नवाज़: "हाँ मालिक."
अरविन्द: "उसको पकड़ के मार! और मार!"
मालिक का हुकुम मिलते hi नवाज़ उसको और ज़ोरदार लाठों से मारने लगा . रामलाल की बीवी डर के मारे चिल्लाई और सीधे नवाज़ के हाथ से फ़ोन लपक कर बोलने लगी, "साहब, हम पर रहम करो!"
अरविन्द ने गुस्से में कहा,
"तुम्हारे पति के बारे में बहुत सुना था पर आज इसकी हिम्मत इतनी बढ़ गयी है की उसने मेरी पत्नी के साथ बद्द्तमीज़ी की!"
रामलाल की बीवी: "साहब माफ़ कर दो!"
अरविन्द: "मैं नहीं, अब पापा देख लेंगे."
रामलाल की बीवी: "साहब, शेठजी को मत बताएं... वो तोह जान से मार देंगे हमे!"
तभी आरती ने उस औरत के हाथ से मोबाइल वापस लिया और बोली,
"अरविन्द, इतना बड़ा मटर नहीं है... पापाजी को मत बोलो."
अरविन्द: "हमने नहीं बताया तोह उनको कही न कही से पता चल hi जायेगा... और तुम जानती हो उनका गुस्सा!"
तभी अचानक आरती के मोबाइल पर कॉल वेटिंग आने लगी. स्क्रीन पर 'पापाजी' का नाम चमक रहा था. आरती का जिस्म डर से ठंडा पद गया.
आरती ने अरविन्द से कहा,
"पापाजी का कॉल आ रहा है..."
अरविन्द: "पता लग गया शायद... बात करो उनसे."
आरती ने कांपते हुए अपने ससुर (दीपक अग्रवाल) का कॉल उठाया,
"Hello..."
शेठजी (भरी और कड़क आवाज़ में):
"आरती बीटा, अब कहाँ पर हो?"
आरती: "रस्ते में..."
शेठजी: "उस हरामी ने बद्द्तमीज़ी की क्या तुमसे?!"
आरती के गले से आवाज़ नहीं निकल रही थी. पूरी भीड़, रामलाल, उसकी बीवी और नवाज़ सब सांस रोके आरती की तरफ देख रहे थे की वो शेठजी को क्या जवाब देती है .
शेठजी की कड़क आवाज़ सुनकर आरती ने दररते हुए जवाब दिया,
"हां पापा... पर नवाज़ ने बहुत मारा उसे, अब वो माफ़ी मांग रहा है."
शेठजी ने गुस्से में कहा,
"उसको कॉल दो!"
आरती ने कांपते हाथों से फ़ोन रामलाल की तरफ बढ़ाया. रामलाल ने रट हुए फ़ोन लिया,
"जी... जी शेठजी..."
"तेरे इतनी हिम्मत?!"
शेठजी की आवाज़ फ़ोन से बहार तक गूँज रही थी.
रामलाल thar-thar कांपते हुए बोलै,
"शेठजी, मुझे पता नहीं था..."
"क्या पता नहीं था?!"
"की मेमसाब आपकी बहु हैं..."
शेठजी ने दांते हुए कहा,
"चुटिया मारना बंद कर दे पहले!"
"शेठजी, चुटिया नहीं मार रहा हूँ..."
रामलाल रोटा रहा
.
तभी शेठजी ने चिल्लाकर पूछा,
"नवाज़! ये क्या बोल रहा है?"
नवाज़ ने तुरंत फ़ोन के पास आकर कहा,
"मालिक, मैंने इससे बोलै की मेमसाब कौन हैं पता है क्या तुझे? तोह बोलने लगा कोई भी रहने दे, मैं इससे बताऊंगा बद्द्तमीज़ी क्या होती है."
तब आरती नवाज़ की और देखने लगी

शेठजी का गुस्सा आसमान पर पहुँच गया,
"नवाज़! 5-6 लड़के लेकर इसकी जगह खली करवा अभी के अभी!"
ये सुनते hi दुलारी (रामलाल की बीवी) jor-jor से रोने लगी और आरती के सामने हाथ जोड़ लिए,
"मेमसाब! बचाओ हमे!"
शेठजी ने फ़ोन पर दुलारी की आवाज़ सुनकर कहा,
"आरती बीटा, इस औरत को कुछ मत बोलो तुम. इसके saas-sasur ने बाबूजी की सेवा की थी, इसलिए फ्री में जगह दी थी. और इसके पति ने ये किया!"
रामलाल गिड़गिड़ा उठा,
"मालिक, इस बार माफ़ कर दो!"
"अब कुछ नहीं होगा!"
शेठजी ने साफ़ कह दिया.
दुलारी ने रोटी हुई आरती के पेअर पकड़ लिए,
"मेमसाब, आप कुछ करो न... मेरे बच्चे भूखे मरेंगे!"
आरती का दिल पिघल गया और उसने धीरे से कहा,
"पापा जी .. एक बार माफ़ कर दो इनको."
शेठजी ने समझते हुए कहा,
"बीटा, तुम इस रामलाल को नहीं जानती. एक नंबर का कमीना इंसान है. अब माफ़ी मांग रहा है, पर अपनी आदत से बाज़ नहीं आएगा."
"हाँ पापा, आप सही कह रहे हो,"
आरती ने दुलारी के बच्चों की तरफ देखते हुए कहा,
"पर इस औरत के बच्चे chote-chote हैं, ये कहाँ जायेंगे?"
शेठजी ने एक पल सोचकर पूछा,
"तोह तुम क्या चाहती हो?"
"एक बार इस औरत के लिए माफ़ कर देते हैं,"
आरती ने गुज़ारिश की.
दुलारी ने हाथ जोड़कर कहा,
"बड़ी मेहरबानी होगी मेमसाब आप की!"
शेठजी ने थोड़ा शांत होकर कहा,
"ठीक है बीटा, तुम कहती हो तोह माफ़ कर देते हैं. वैसे मैं तुम्हारी बात कभी नहीं टालता. अरविन्द से ज़्यादा तुम मेरे करीब हो. पर... इस औरत को माफ़ कर देंगे, पर..."
आरती ने पूछा,
"पर क्या पापा?"
शेठजी ने फ़ोन पर से hi पूछा,
"क्या नाम है तुम्हारा?"
दुलारी ने रट हुए जवाब दिया, "
दुलारी."
शेठजी ने कड़क लहजे में अपना फैसला सुनाया,
"दुलारी, तुझे तोह मैं माफ़ कर दूंगा पर तेरे पति को नहीं."
दुलारी थोड़ा हैरान हुई,
"मालिक, मैं समझी नहीं?"
शेठजी ने साफ़ किया, "अब तेरे पति के पास नहीं रहेंगे मुर्गे. ये सब तेरे नाम पर रहेंगे, और तेरे पति को इस गाँव से अभी के अभी निकाल दे!"
दुलारी ने रोटी हुई आखों से अपना सर झुकाया और कहा,
"जी..."

















