Adultery Manhoos se mahan tak - Page 39 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 280

‘ आ गए मिस्टर ? मुझे लगा कहीं आज hi गाओं न निकल जाओ . बुआ तुम्हारी वेट कर रही हैं अंदर .’

मैं मंजू बुआ क घर पहुंचा तो बाइक की आवाज़ सुन कर hi रीमा ने दरवाज़ा खोल दिया और मेरे आते hi मुस्कुराते हुए ये बात कही. उसकी आँखों में शरारत देख मुझे भी शरारत सूझी और मैंने वहीँ दरवाज़े पर hi तेज़ी से उसके होंठों पर किश कर दी.

अमित : उमंमाहहह ,, बुआ इंतज़ार कर रही थी , तुम नहीं ?

रीमा : गंदे ,,, अभी का या बुआ देख लेती तो?

अमित : देखने दो

रीमा : ाचा , इतनी हिम्मत . तो चलो चल क बुआ क सामने करो ये हरकत फिर देखती हूँ .

अमित : सोच लो , बाद में पछताना मत फिर

रीमा : तो क्या सच में तुम बुआ क सामने ये सब कर डोज ? बेशरम !

अमित : अब क्या करें , प्यार ने हमें बेशरम बना दिया है तो क्या किया जा सकता है . आज कुछ करो न यार , बड़ा मन कर रहा है आज .

दिव्या मौसी क साथ सुबह जो कुछ हुआ था उस वजह से आज सारा दिन hi मैं अंदर से गरमी महसूस कर रहा था इस लिए सोचा क रीमा से hi बात कर क देखूं .

रीमा : बिलकुल भी शर्म नहीं है न तुम्हे? वो सब शादी क बाद .

अमित : यार प्लीज एक बार , मुझसे आज कण्ट्रोल नहीं हो रहा

रीमा : क्यों ? आज ऐसा क्या हो गया ?

अमित : बस यार , कुछ कर दो न प्लीज .

रीमा : पर यहाँ मैं क्या कर सकती हूँ . माँ और बुआ दोनों घर hi हैं.

‘ अब क्या दरवाज़े पर hi खड़ा रखोगी उसे रीमा ? आ जाओ अब अंदर’

ये आवाज़ मंजू बुआ की थी जो हॉल से आ रही थी. बुआ की आवाज़ सुन कर रीमा जल्दी से दरवाज़ा लॉक कर क हॉल की तरफ हो ली और मैं उसके पीछे. टीशर्ट लोअर पहने रीमा कमल की लग रही थी. मतलब कमल की तो थी hi पर इन ढीले कपड़ों में उसके खास अंग काफी थिरक रहे थे जो मुझे अपनी तरफ खिंच रहे थे . हम दोनों हॉल में आये जहाँ बुआ और रुपाली चची बैठी हुई थी. मुझे देख कर दोनों क चेहरे पर स्माइल आ गयी. रीमा कॉफ़ी बनाने का कह कर किचन में चली गयी . रुपाली चची आज रॉयल ब्लू सूट में थी और कमल की लग रही थी . रीमा भी उनके आगे फेर की लग रही थी आज तो. खुले घुंघराले बाल और दूध से भी गोरा रंग जो इस नीले रंग में कहीं ज्यादा दमक रहा था . और उनके खूबसूरत चेहरे पर वो दिलकश स्माइल . जिसे देख मैं उसी में खो सा गया .

रुपाली : क्या हुआ कहाँ खो गए ? जवाब hi नहीं दे रहे ?

अमित : हह हाँ हांजी , जी आपने कुछ कहा ?

मंजू : हे हे हे, लगता है आज ज्यादा hi एक्सरसाइज करवा दी कोच सर ने . भाभी पूछ रही हैं घर सब कैसे हैं?

अमित : जी सब ठीक हैं , आप कैसी हैं ?

रुपाली : मैं भी ठीक हूँ. वैसे , क्या सच में ज्यादा थक गए हो ?

अमित : नहीं हाँ , मतलब कोई खास नहीं , आज कुछ ज्यादा बी एक्सरसाइज कर ली न .

मंजू : तो क्या सच में तुम कल गाओं जा रहे हो ?

अमित : जी

मंजू : इसका मतलब अब हफ्ते बाद बी मिलोगे ?

रुपाली : इतने दिन क लिए जा रहे हो ?

अमित : वो असल में कम्पटीशन तो मंडे से हैं पर और हमें एडवांस में ले क जा रहे हैं ता की सब रेस्ट कर क अचे से फ्रेश हो सकें कम्पटीशन से पहले .

मंजू : मैं तो सोच रही थी क अभी एक दिन और हो तुम यहां . पर तुम तो कल सुबह hi चले जाओगे

अमित: आप से तो मिल कर hi जाऊंगा न बुआ .

रुपाली : मुझसे नहीं मिलोगे जाने से पहले ?

अमित : आप क पास तो अभी आ गया हूँ देखिये .

रुपाली : बातें बनाना खूब अत है तुम्हे . ऊपर ऊपर से तो कह देते हो पर बाद में टाइम hi नहीं होता तुम्हारे पास किसी क लिए

मंजू : अब बेचारा करे भी तो क्या . इतने काम और अकेली जान . ऊपर से सब इसी शहर में हैं किस किस को टाइम दे.

रुपाली : बात तो तुम्हारी भी सही है.

इतने में रीमा कॉफ़ी ले आयी और सब कॉफ़ी पिने लगे . रीमा से जब भी मेरी नज़र मिलती तो वो शरारत भरी नज़रों से मुझे देख कर हंस देती. जैसे चिढ़ा रही हो. कुछ देर बाद रुपाली चची खाना बनाने का कह कर चल दी किचन में. रीमा को भी उन्होंने अपने साथ ले लिया . मैं यहाँ रीमा क साथ वक़्त बिताने का सोच रहा था मगर रुपाली चची तो उसे साथ hi ले गयी. रीमा भी मुझे बना कर चिढ़ाती हुई गयी.

मंजू : कितनी मजबूर हूँ मैं भी , तुम्हे अपने पास रखना चाहती हूँ मगर …..

मंजू बुआ ने रीमा और रुपाली चची क जाते hi एक डैम से सीरियस होते हुए कहा तो मैं उनकी तरफ गौर से देखने लगा . आखिर मैं भी तो चाहता था क उनके पास रहूं पर वो खुद hi तो चाहती थी क किसी को पता न चले मेरे बारे में .

अमित : मैं भी तो चाहता हूँ बुआ क आपके पास hi रहूं. माँ पापा क बारे में आपसे ढेर साडी बातें करूँ. पर आप खुद hi मुझे अपने से दूर रखे हुए हैं.

मंजू : तुझे मैं खुद से दूर तो छह कर भी नहीं कर सकती . तू चाहे मेरे सामने रहे या न रहे . मेरे दिल मेरे दिमाग में तू hi रहता है .

अमित : तो फिर मुझे अपने पास क्यों नहीं रहने देती. आपको किसी से डरने की ज़रूरत नहीं. मैं हूँ न .

मंजू : नहीं अमित , मुझ में इतनी हिम्मत नहीं क मैं तुम्हारे साथ कुछ गलत होता देख सकूँ. भाई क जाने क बस बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला था . पर ऊपर वाले को मुझ पर तरस आ गया जो तुम्हे फिर से मेरे पास भेज दिया . मैं अब तुम्हे फिर से खोना नहीं चाहती. किसी कीमत पर भी नहीं.

अमित : बुआ ,,, आप ऐसा क्यों सोचती हैं क कोई मुझे आपसे चीन लेगा ? मैं आपको छोड़ कर कहीं नहीं जाने वाला. बल्कि आप खुद hi मुझे अपने आप से दूर रख रही हैं. क्या मेरा दिल नहीं करता क मैं आपके साथ रहूं ? अपनी बुआ क साथ .

मंजू : अगर भाभी और रीमा की चिंता न होती तो क्या मैं तुम्हे कहीं और जाने देती ? तू अब कम्पटीशन पे जाने वाला है और देख मेरा अभी से बुरा हल हो रहा है जैसे तू मुझसे कहीं दूर जा रहा है , जैसे मुझसे मेरा दिल कोई चीन क लिए जा रहा है.

अमित : बाआ

बात करते करते मंजू बुआ की ऑंखें भर आयी थी . मैं भी भावनाओं में बह गया और बुआ को अपनी बाँहों में भर लिया . बुआ ने भी मेरी पीठ पर बहन कास ली. आज कितने hi दिनों बाद बुआ को मैंने गले लगाया था . बहुत hi ाचा लग रहा था मुझे बुआ को गले लगते हुए .

मंजू : चल अब छोड़ , आज रत यहीं रुक जा न मेरे पास . दिव्या दीदी बुरा तो नहीं मानेगी न ?

अमित : वो बुरा क्यों मानेंगी? वो भी तो आपसे प्यार करती हैं.

मैंने अपनी जेब से मोबाइल निकला और मौसी को फ़ोन लगा दिया . मैंने उन्हें बताया क आज मैं यहीं रुकने वाला हूँ. मौसी ने भी ज्यादा कुछ नहीं कहा और बुआ से बात भी की. जब बुआ मौसी से बात कर रही थी तो मैंने देखा रीमा छिप कर सब सुन रही थी और उसके चेहरे पर एक स्माइल थी. मैं बुआ को मौसी से बात करता छोड़ कर सीधा रीमा क पास गया और उसे बाँहों में जकड लिया .

रीमा : ये क्या कर रहे हो , हतोऊ ,, माँ आ जाएगी ,, छोडो मुझे .

अमित : अब बोलो जान , आज रत तो मैं यहीं रुकने वाला हूँ. अब तो तुम्हे मेरी बात माननी पड़ेगी . आज रत ……

रीमा : हतोऊ , तुम्हे तो बस एक hi कल अत है. गंदे बचे ,, और तुम मेरे लिए नहीं अपनी बुआ क लिए रुक रहे हो यहाँ. तो भी क पास सोना आराम से . मैं यहाँ अपनी माँ क साथ सोती हूँ समझे .

अमित : अब इतना ज़ुल्म तो मत करो, मैं कितना तड़प रहा हूँ तुम्हे ज़रा भी एहसास है ?

रीमा : अपनी तड़प अपने पास रखो मर . बुआ को या माँ को पता चल गया न सब ख़तम हो जायेगा समझे .

अमित : इसका मतलब तुम मुझे प्यार नहीं करती.

मैंने जान बुझ कर मुँह बनाते हुए कहा और रीमा को छोड़ दिया . रीमा एक डैम से हस्ती हस्ती सीरियस हो गयी .

रीमा : अगर तुम्हे मेरे प्यार को परखना है तो लो , कर लो जो करना है . मैं खुद hi अपने कपडे उतर देती हूँ.

रीमा अपनी T-shirt उतरने लगी तो मैंने उसे रोक दिया और उसे फिर से बाँहों में भर लिया . उसके इस तरह करने से मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ.

अमित : मुझे माफ़ कर दो रीमा . मैं तो बस ….. ी ऍम सॉरी

रीमा : फिर कभी ऐसा मत कहना क मैं तुम्हे प्यार नहीं करती . तुम कहोगे तो अपनी जान भी दे दूंगी. अपना सब कुछ तो पहले hi तुम्हे सौंप चुकी हूँ बस अब ये जान hi है , इस पर भी हक़ अब तुम्हारा hi है. मैं तुम्हे किसी चीज़ क लिए मन नहीं कर सकती . पर माँ और बुआ क सामने अगर ये बात आयी तो क्या होगा . मैं जानती हूँ तुम्हारा दिल है पर ,,,,, रत को माँ और बुआ क सोने क बाद छत पर मिलते हैं.

रीमा सच में कितना प्यार करती थी मुझसे जो मेरी ख़ुशी की लिए फिर से मन गयी. पर मैं अब उसे मजबूर नहीं करना चाहता था .

अमित : नहीं , हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे . तुमने कहा था न क अब शादी क बाद करेंगे तो अब शादी क बाद hi करेंगे . मैं कण्ट्रोल कर लूंगा .

रीमा : नहीं , मुझे ाचा नहीं लगेगा तुम मेरी वजह से तड़पते रहो. वैसे भी मैं तन मन से सिर्फ तुम्हारी hi तो हूँ . सब कुछ तुम्हारा है तो आज क्या और कल क्या .

अमित : मैं जनता हूँ सब मेरा है. पर मैं तुम्हारी ीचा क खिलाफ भी नहीं जाना चाहता . प्यार सिर्फ जिस्म को हासिल करने तक तो नहीं है न ? मुझे तुम्हारा प्यार चाहिए जिस्म नहीं. और अब और कोई बात नहीं . जाओ अब किचन में कुछ काम भी कर लो .

रीमा : भीगी आँखों से ) ी लव यू सो मच … उम्मम्मम्माह्ह्ह

रीमा ने भावुक हो कर एक प्यार भरी किश मेरे होंठों पर की और मुस्कुराती हुई अपनी ऑंखें साफ़ करती किचन में चली गयी. मैं भी मुस्कुराता उसे जाते हुए देख वापिस बुआ क पास आ गया . उनकी बातचीत भी ख़तम हो गयी थी और उन्होंने कॉल काट दी.

मंजू : दिव्या दीदी तो मान गयी पर मुझे लगता है वो चाहती थी क तुम उनके पास रहो.

अमित : इतने दिनों से तो उनके पास hi हूँ. आज अपनी बुआ क पास रह लूंगा

मंजू बुआ ने मुस्कुरा कर मेरे माथे को चूमा और मैंने भी उन्हें बाँहों में कास लिया . बुआ ने जल्दी hi मुझे पीछे हटा दिया और मुझसे नज़रें चुराने लगी .

मंजू : अमित ज़रा ध्यान रखा करो. भाभी को पता नहीं चलना चाहिए. तुम बैठो मैं ज़रा देख कर आयी खाना बना क नहीं .

बुआ जल्दी से उठ कर चली गयी. शायद वो रीमा और रुपाली चची की वजह से दर रही थी . फिर कुछ देर बाद खाना बन गया और रीमा बुआ क साथ खाना टेबल पर लगाने लगी. रुपाली चची भी उनके पीछे आ गयी हाथ में एक डिश पकडे हुए

रुपाली : शुक्र है आज तुम हमारे साथ खाना खाने क लिए रुक गए

मंजू : सिर्फ खाना hi नहीं , आज ये हमारे पास hi रुकने वाला है रत को

रुपाली : मेरी तरफ देखते हुए ) सच में ?? फिर तो ढेर साडी बातें करेंगे . कितने दोनों बाद मौका मिला है

मंजू : भाभी !!!! आप भी बच्चों क साथ बची बन गयी. कल सुबह इसे जल्दी गाओं क लिए भी निकलना है. देर से सोयेगा तो सुबह देर से उठेगा फिर .

रुपाली : तो क्या हुआ घर hi तो जाना है .

मंजू : चलिए पहले खाना तो खा लीजिये . भूखे रखना है क्या इसे आज ? वैसे आपने तो काफी कुछ बना डाला .

रुपाली : अब ये कहाँ रोज़ रोज़ हमारे साथ खाना खता है तो सोचा आज इसे अचे से खिला देते हैं.

अमित : अरे आंटी ऐसा भी नहीं है . मैं तो यहीं हूँ रोज़ hi आपके पास अत हूँ. एक hi बार में खिला देंगी तो मेरी हालत ख़राब हो जाएगी.

रुपाली : कुछ नहीं होता , अभी तो पूरे जवान हो और ऐसे दर रहे हो . चलो बैठो यहाँ पर जल्दी से . खाना खा कर बताना क कैसा बना है

रुपाली चची क हाथों में वाकई में जादू था . खाना बहुत hi स्वादिष्ट बना था . मैंने रुपाली चची की खूब तारीफ की और मज़े से खाना खाया. इस दौरान रीमा आँखों hi आँखों में मुझे इशारे करती और मुस्कुरा देती. बातों बातों में खाना हो गया और रुपाली चची क साथ रीमा किचन में काम ख़तम करवाने लगी. मंजू बुआ ने मुझे अंदर से दूसरे कपडे निकल कर दे दिए पहनने क लिए . और मेरा बिस्तर वहीँ हॉल में सेट कर दिया. क्यूंकि रीमा तो रुपाली चची क साथ सोने वाली थी और मुझे बुआ अपने पास सुला नहीं सकती थी चची की वजह से पर उनका मन था क मैं उनके पास hi रहूं. खैर कुछ देर सब साथ में बैठ कर बातें करते रहे और फिर बुआ क कहने पर रीमा रुपाली चची की साथ अपने कमरे में चली गयी और बुआ भी मुझे गुड नाईट बोल कर अपने कमरे में चली गयी . मैं अभी लेता hi था क मेरा फ़ोन बजने लगा . मैंने देखा तो राधा की कॉल थी. इतनी रत को राधा मुझे कॉल कर रही थी जबकि इस टाइम तो वो अपने कमरे में सो रही होती थी . मुझे लगा कहीं कोई गड़बड़ तो नहीं है . मैंने जल्दी से उसकी कॉल अटेंड की.

अमित : hello राधा , इस वक़्त , कोई परेशानी तो नहीं है न ?

राधा : हाँ , परेशानी है , इसी लिए इस वक़्त फ़ोन किया .

अमित : क्या हुआ क्या परेशानी है ? तुम ठीक तो हो न ? मौसी ठीक तो हैं ?

राधा : माँ ठीक है और मैं भी , परेशानी ये है क मुझे नींद नहीं आ रही .

अमित : ओह्ह तुमने तो मुझे डरा hi दिया था . पर तुम्हे नींद क्यों नहीं आ रही ?

राधा : पहले तुम बताओ तुम आज वहां क्यों रुक गए ? तुम्हे पता है न तुम कल जा रहे हो . काम से काम आज रत हमारे पास hi रुक जाते . मैंने सोचा था आज साडी रत तुम्हारे साथ बातें करुँगी

अमित : है है है, फिर तो ाचा hi हुआ न क मैं यहीं रुक गया . वर्ण तुम सुबह कॉलेज कैसे जाती ?

राधा : नहीं जाती तो क्या हो जाता ? वैसे भी तुम तो कल कॉलेज होंगे नहीं तो मेरा मन नहीं लगेगा .

अमित : अभी दोपहर में hi तो मैंने तुम्हे समझाया था और फिर से तुम वही बातें करने लगी .

राधा : मुझे नहीं पता , मुझे तुम्हारे साथ आज बातें करनी थी और तुम वहीँ रुक गए . तुम बहुत गंदे हो .

अमित : ाचा मैं गन्दा हूँ ? तो बात क्यों कर रही हो फिर मेरे साथ ?

राधा : क्यूंकि इस गंदे इंसान को ठीक भी मैंने hi करना है. नहीं तो सब मुझे hi कहेंगे क मैंने ध्यान नहीं रखा .

अमित : ाचा !! मगर तुम्हे कोई कुछ क्यों कहेगा ?

राधा : बुद्धू ,,, बुद्धू , बुद्धू , बुद्धू . एक no. क बुद्धू हो तुम. तुम्हे कुछ समझ अत hi नहीं . अब सुबह मुझे तुम hi आ कर उठाओगे वर्ण मैं कॉलेज नहीं जाने वाली पहले hi कह देती हूँ हाँ .

अमित : मैं क्यों आऊं उठाने ? अभी तो मुझे तुम बुद्धू बोल रही थी .

राधा : क्यूंकि तुम हो hi बुद्धू . और अगर सुबह न आये तो मैं तुमसे बात नहीं करुँगी देख लेना .

अमित : मैं नहीं आऊंगा, बुद्धू बोल रही हो न मुझे तो अब खुद hi उठना और खुद hi जाना कॉलेज .

राधा : तुम आओगे आओगे और ज़रूर आओगे . मुझे पता है. इस लिए अब टाइम से सो जाओ वर्ण देर से उठोगे और मुझे भी लेट करवाओगे. टाइम से आ जाना , तुम्हारे आने तक मैं ऑंखें नहीं खोलने वाले . कह देती हूँ. अब सो जाओ . गुड नाईट .

आर्डर देने वाले लहजे में राधा ने ये सब कहा और खुद hi कॉल काट दी जैसे वो कुछ और जवाब सुन्ना hi नहीं चाहती थी. मैं भी तो उसके साथ मज़ाक hi कर रहा था भला मैं राधा को किसी बात क लिए मन hi कब करता था . अभी मैं सोच में गम था क फिर से मेरा फ़ोन बीप हुआ . रीमा का मैसेज था . वो कह रही थी क वो मेरे पास आना चाहती है पर माँ जग रही है . खैर मैंने भी उसे आराम से सोने को कहा . कुछ देर हम चाट करते रहे और फिर एक दूसरे को गुड नाईट बोल दिया . आज मैंने बाकि सब क मैसेज भी देखे और उन सब को रिप्लाई भी किया . कल्पना नैना दीदी करुणा दीदी शिवानी शालू क मैसेज थे . और आज रीना को भी खुद से hi मैंने मैसेज कर दिया . कुछ hi देर में उसकी कॉल आ गयी.

रीना : आज सूरज पश्चिम से निकला है न ? मैं बिजी थी तो मैंने ध्यान नहीं दिया . पर पक्का पश्चिम से hi निकला होगा .

अमित : अब ऐसी बात भी नहीं है. एक तो खुद आज मैंने आप से बात करि और आप हैं क उल्टा मेरा मज़ाक उदा रही हैं. जाइये आप अपना काम करिये मैं सोने जा रहा हूँ.

रीना : अरे अरे , मैं मज़ाक भी नहीं कर सकती क्या ? ाचा छोडो , ये बताओ आज इतनी देर तक कैसे जग रहे हो ? और आज मेरी यद् कैसे आ गयी.

अमित : यद् तो उनको किया जाता है जिन्हे भूल जाये आदमी . और आप तो हमेशा मेरे दिल में हैं.

रीना ( मन में ) तो एक बार मुँह से कह दो न , सिर्फ एक बार . मैं तो कब से इंतज़ार में हूँ . कब ये कोर्स ख़तम हो और मैं तुम्हारे पास पहुँच सकूँ बस दिन hi तो गईं रही हूँ.

अमित : वैसे आप गेस करो मैं कहाँ हूँ इस वक़्त .

रीना : आए ,,, ममम ,, दिव्या मौसी क घर , राइट ?

अमित : no

रीना : क्या गाओं चले गए तुम 2 दिन पहले hi ?

अमित : no

रीना : तो रीता मौसी क घर ?

अमित : no .

रीना : रजनी मौसी ?

अमित : no .

रीना : ओह्ह्ह मतलब आज मोहित क घर हो ?

अमित : no

रीना : तो फिर कहाँ हो यार ? मैंने तो सब का नाम ले लिया . अब और कौन रह गया ?

अमित : मंजू बुआ को भूल गयी आप ?

रीना : तो क्या तुम मंजू बुआ क घर पर हो ? पर ये सब कैसे ? मतलब तुम्हारी तो वो मैडम हैं न ? वो कैसे मन गयी ?

अमित : क्यों आप भूल गयी क्या मेरी hi वजह से तो आप उनसे मिली हैं . वैसे आपको रीमा ने बताया hi होगा क हमारा एक रिश्ता भी है .

रीना : हाँ बताया है , और उस रिश्ते से हम बह रिश्तेदार हुए मगर दूर क. अब ये मत कह देना क हम कौसिन्स हैं क्यूंकि मैं पहले वाले रिश्ते से hi खुश हूँ और कोई दूसरा रिश्ता नहीं चाहिए मुझे .

कुछ देर और मैंने रीना क साथ की फिर उसने खुद hi मुझे सोने को कह दिया क्यूंकि इधर 12 बजे से ज्यादा टाइम हो गया था . मैंने कॉल काट कर अभी फ़ोन रखा hi था क मुझे हलकी सी आवाज़ सुनाई दी. घर में एक डैम सन्नाटा था. ऐसे में ज़रा सी भी आवाज़ सुनाई पद जाती है. मैं रीना क साथ धीमी आवाज़ में बात कर रहा था पर अब जो आवाज़ आयी थी उसे मैं सुन कर चौंक गया था. क्यूंकि ये किसके सिसकने की आवाज़ थी. इस वक़्त ये किसकी आवाज़ आ रही है ये सोचते hi मेरा दिमाग घूम गया . मैं जल्दी से उठा और नंगे पाऊँ hi चल दिया आवाज़ की दिशा में . बिना आवाज़ किये मैं आगे बढ़ रहा था और आवाज़ थोड़ी थोड़ी तेज़ हो रही थी . मुझे इतना तो समझ आ गया था क ये एक औरत क सिसकने की आवाज़ थी वो भी वासना से भरी . घर में अँधेरा था पर बाथरूम क दरवाज़े क नीचे से थोड़ी रौशनी बहार आ रही थी यानि क कोई बाथरूम में था . पर कौन ? मंजू बुआ या रुपाली चची. मैं धड़कते दिल क साथ आगे बढ़ा और बाथरूम क दरवाज़े तक पहुँच गया . मेरा दिल तेज़ धड़क रहा था पर लैंड महाराज तो ऐसे उठ क खड़े हो गए जैसे उनकी सरे दिन की गरमी निकलने का जरिया मिल गया हो. मैंने दरवाज़े से कान लगा कर आवाज़ सुनी तो सिसकियाँ तेज़ सुनाई दी. यानि क अंदर जो भी थी वो अपनी छूट से खेल रही थी. मैंने दरवाज़े पर हाथ रख थोड़ा सा ज़ोर लगाया तो दरवाज़ा खुलता चला गया. सामने का दृश्य देख कर मेरा लैंड बेकाबू हो गया . सामने कमोड पर बैठी रुपाली चची एक तंग उठे दीवार पर पाऊँ टिकाये अपनी मैक्सी को पेट तक उठा कर तेज़ी से अपने हाथ से अपनी छूट मसल रही थी और दूसरे हाथ से अपने बूब्स मसल रही थी. मज़े में उनकी ऑंखें बंद थी और वासना से दमकता चेहरा लाल हुआ पड़ा था . खुले घुँघराले बाल फैलाये वो किसी और hi दुनिया में थी. रुपाली चची का ये रूप देख मैं भी होश खोने लगा . एक डैम गोरी चिट्टी मांसल टंगे जो मुझे अपनी और आकर्षित कर रही थी और उनकी गुलाबी छूट जो उनकी उँगलियों को भिगो रही थी . मैं पहले तो सोच रहा था क मुझे वहां से हैट जाना चाहिए पर एक तरफ दिमाग ये भी कह रहा था क रुपाली चची की ज़रूरत और कौन पूरा करेगा. वो ऐसे hi तड़पती रहेंगी तो कहीं वो मज़बूरी में कोई गलत कदम न उठा लें. इस लिए रुपाली चची को थोड़ी ख़ुशी तो दे hi देनी चाहिए . पर रीमा का सोच दिल में एक आवाज़ ये भी आयी क ये गलत होगा . कहीं रीमा को पता चला तो ??? मैं इसी सोच में पद गया पर मैं दरवाज़े से अंदर आ चूका था मगर रुपाली चची को अभी तक एहसास न हुआ था . मेरे पाऊँ वहीँ जैम गए थे , मुझे आगे बढ़ाना है या वापिस जाना है ये फैसला नहीं हो प् रहा था पर लैंड महाराज कहाँ सुनते हैं किसी की . मैं रुपाली चची को देख कर फिर से सब भूल गया और आगे बढ़ कर मैंने उनका वो हाथ पकड़ लिया जिससे वो अपनी छूट मसल रही थी . मेरे हाथ पकड़ते hi रुपाली चची एक डैम से हड़बड़ा गयी और जल्दी से सीधी हो गयी. मुझसे नज़रें मिलते hi उन्होंने शर्म से नज़रें झुका ली

अमित : आप खुद को यूँ सजा क्यों दे रही हैं ? आपको ज़रूरत थी तो मुझे कह दिया होता .

रुपाली : मैं क क कक कैसे ,,, रर रीमा क्या …..

रुपाली चची की ज़ुबान लड़खड़ा रही थी . मैंने उन्हें होंठों पर उंगली रख कर उन्हें हुई करवा दिया .

अमित : रीमा को कुछ पता नहीं चलेगा . और न hi मैं आपको ऐसे तड़पने दूंगा .

इतना कह कर मैंने रुपाली चची की कमर में हाथ दाल उन्हें अपने साथ सत्ता लिया और उनके गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए . पहले तो रुपाली चची क होंठ बस थरथरा रहे थे पर जल्द hi वो भी साथ देने लगी . क्यूंकि गरम तो वो पहले से hi थी. मेरे बालों में हाथ चलते हुए वो मेरे साथ अपना जिस्म रगड़ती हुई मुझे किश कर रही थी . मेरे अंदर भी गर्मी एक डीएम से बढ़ गयी थी जो सुबह से hi भरी पड़ी थी. मेरा लैंड रुपाली चची की छूट क ऊपर hi ठोकर मर रहा था. मैंने अपने हाथ चची की गांड पर रखे और उन्हें मसलने लगा . चची भी पागलों की तरह अब मुझे किश कर रही थी

रुपाली : उम्मम्मम कक्कक्स उम्मम्मम मैं बहुत तड़प रही हूँ अमित मेरी ये तड़प मिटा दो उम्म्म्म कक्कक्कक्स उनममममम

अमित : आज आपकी साडी तड़प मिटा दूंगा उम्मम्मम

मैंने चची की गांड मसलते हुए उन्हें ऊपर उठा लिया और उनकी टंगे अपनी कमर पर लपेट ली. चची मेरे गले में बहन दाल पूरी तरह मेरी गॉड में सवार हो गयी और मैं उन्हें ऐसे hi गॉड में उठाये बाथरूम से निकल कर सीधा हॉल में ले आया और अपने बिस्तर पर लिटा दिया . चची बहुत ज्यादा गरम हो चुकी थी इस लिए लेट ते hi उन्होंने अपनी टंगे उठा ली और अपनी मैक्सी पेट पर इकट्ठी कर ली. मैंने भी जल्दी से अपने लोअर और अंडरवियर को नीचे किया और अपना लैंड चची की देहाती छूट पर रखा जो पानी बहा रही थी . मैंने ज्यादा समय ख़राब नहीं किया और हल्का सा धक्का लगा कर सुपडे को छूट में घुसा दिया . चची ने एक लम्बी सिसकी ली. मैं उनकी आवाज़ बंद करने क लिए उनके ऊपर झुका और उनके होंठ अपने होंठों में दबा लिए . अगले hi पल मैंने एक ज़ोर दर धक्का मर का पूरा लैंड एक hi बार में जड़ तक छूट में घुसा दिया . रुपाली चची एक डैम से चिहुंक पड़ी पर उनकी आवाज़ मेरे होंठों में hi कैद हो कर रह गयी. रुपाली चची ने मेरी कमर पर अपनी टंगे कास ली और मेरी पीठ पर अपने हाथ रख कास लिया. वो मुझे जैसे हिलने नहीं देना चाहती थी शायद काफी दिनों बाद मेरा लैंड ले रही थी तो उन्हें दर्द हुआ होगा. कुछ देर मैं हलके हलकी अपनी कमर हिलाया रहा और फिर रुपाली चची भी अपनी कमर हिलने लगी. अब उनके हाथ मेरी पीठ पर फिसल रहे थे और उनकी टांगों की पकड़ भी ढीली पद गयी थी. मैं भी अब खुल क उनकी चुदाई करना चाहता था . रुपाली चची की टंगे खोल कर मैं ऊपर उठा ली और दे दाना दान धक्के मरने लगा . रुपाली चची मज़े में सिसकियाँ लेती खुद hi अपने बूब्स दबा रही थी. मैं उनकी कोमल टैंगो को चूमता हुआ पूरे जोश में धक्के मर रहा था . रुपाली चची भी अपनी आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही थी पर फिर भी उनके मुँह से मज़े की सिसकियाँ निकल रही थी . मैंने रुपाली चची क दोनों पाऊँ अपने कंधे पर रखे और उनके ऊपर झुक गया. रुपाली चची क चूतड़ बीएड से थोड़ा ऊपर उठ गए और उनके घुटने उनके बूब्स पर आ गए . मैंने अपने पाऊँ बीएड पर टिका लिए और पूरी तरह रुपाली चची पर सवार हो कर उनके कंधे पाकर तूफानी रफ़्तार से गहरे और ज़ोरदार धक्के मरने लगा . कुछ hi पलों में रुपाली चची की छूट डैम तोड़ गयी और उनकी छूट भर भरा कर बहने लगी . अब उनसे मेरे धक्के सहने मुश्किल होने लगे तो मैंने उनके ऊपर से उतारते हुए लैंड छूट से निकल लिया जो उनके पानी से पूरा नहाया हुआ था . रुपाली चची काफी दिनों से प्यासी थी जो इतनी जल्दी और इतना ज्यादा झड़ी थी. मगर अब मेरा बुरा हल हो गया था और मैं अपना पानी निकलना चाहता था . रुपाली चची ऑंखें बंद कर क अपनी टंगे अपने पेट से समेटे लम्बी साँसे ले रही थी मैंने उन्हें पकड़ कर बिठाया और उनकी मैक्सी उनके जिस्म से अलग कर दी. चची बस वो किये जा रही थी जो मैं चाहता था . अगले hi पल मैंने उन्हें बीएड पर hi कुटिया बना लिया और पीछे से उनकी छूट में एक झटके में लैंड घुसा दिया . चची फिर से हल्का सा चीखी पर मैं नहीं रुका और तब तक उनकी छूट में धक्के पेलता रहा जब तक क मेरा कम न हो गया . आखिरी धक्के मैंने मरते हुए मैं इतना आवेश में आ गया क चची बीएड पर hi गिर कर पेट क बल लेट गयी और मैं उनके ऊपर सवार हो कर ज़ोरदार ढंग से उनकी छूट फाड़ने में लगा रहा . आखिर कर मेरे लैंड ने उनकी छूट में उलटी की तो मुझे कुछ चैन मिला और मैं उनके ऊपर hi गिर गया. रुपाली चची भी एक बार फिर से झाड़ गयी और कम्पनी लगी . वो लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी. मैं उनकी पीठ और गर्दन चूमता हुआ बस खुद को होश में लाने की कोशिश कर रहा था. कुछ देर लगी हम दोनों को सँभालने में . फिर मैं उनके ऊपर से अलग हुआ तो वो उठ कर बैठ गयी. मुझे किसी की आहत सुनाई दी पर जब देखा तो कोई नज़र नहीं आ रहा था . मुझे लगा शायद मेरा वहां हो गए. रुपाली चची मुझसे नज़रें नहीं मिला रही थी. वो चुपचाप बीएड से उठी और अपनी मैक्सी उठाने लगी तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया . मुझे उनका इस तरह चुप रहना सही नहीं लग रहा था .

अमित : आप मुझसे नाराज़ हैं क्या ?

रुपाली : नं नहीं तो

अमित : तो फिर मुझसे नज़रें क्यों चुरा रही हैं.

रुपाली : हम दोनों क बीच ये ……

अमित : मैंने कहा न , रीमा को कुछ पता नहीं चलेगा . आप भरोसा रखिये. और ये आपकी ज़रूरत है. अगर आप अपनी बॉडी की ज़रूरत को ज़बरदस्ती दबाएंगी तो इसका आप पर गलत भी हो सकता है. मैं नहीं चाहता क आप क ऊपर किसी किसम का गलत प्रभाव पड़े , इस लिए आपकी हर ज़रूरत का मैं ध्यान रखूँगा . आप ये कभी भी मत सोचियेगा क मैं आपका फायदा उठा रहा हूँ

रुपाली : ऐसा मैं कैसे सोच सकती हूँ , जबकि मैं तुम्हे अचे से जानती हूँ. फायदा उठाना होता तो तुम मेरा क्या मेरी बेटियों का भी उठा सकते थे पर तुमने ऐसा कुछ नहीं किया . पर कभी कभी मुझे लगता है मैं गलत कर रही हूँ. रीमा तुमसे प्यार करती है और मैं फिर भी ,,, जबकि उस नाते तुम मेरे …..

अमित : इस बारे में आपको सोच कर खुद को दोष देने की ज़रूरत नहीं. ये सिर्फ आपको ज़रूरत को पूरा करने क लिए है . आप किसी को धोखा नहीं दे रही जबकि अभी तक कोई रिश्ता बना hi नहीं. वैसे उस नए गलत तो मैं भी कर रहा हूँ पर मैं इतना जनता हूँ क आपको ज़रूरत है . और किसी का ज़रूरत में साथ देना गलत नहीं होता .

रुपाली : तुम सच में बहुत अचे हो, मैं खुश हूँ क तुम हमारे पास हो.

माहौल थोड़ा सीरियस हो गया था तो मैंने उसे हल्का करने क लिए थोड़ा सा मज़ाक कर दिया .

अमित : अगर आप सच में खुश हैं तो क्या आज पीछे से भी करने देंगी .

मेरी बात सुन रुपाली चची सच में शर्मा गयी और मुझसे हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगी

रुपाली : हट बदमाश कहीं क , अभी आगे से मेरी इतनी बुरी हालत कर क मन नहीं भरा जो अब पीछे से भी करना चाहते हो .

अमित : अब मैं भी क्या करूँ , आप क पीछे का नज़ारा देख कर मेरा खुद पर काबू hi नहीं रहता

रुपाली : तुम वहां से कितने एब्नार्मल हो तुम्हे पता भी है ? मैंने कैसे तुम्हे सहा था वहां पर , ये मैं hi जानती हूँ.

अमित : एक बार तो दर्द होना hi होता है और वो आप सेह चुकी हैं. अब तो उतना दर्द नहीं होगा. प्लीज मन जानिए न .

रुपाली : बहुत ज़िद्दी हो तुम , अपनी बात मनवा क रहते हो .

इतना कह कर रुपाली चची ने अपनी मैक्सी छोड़ दी और मेरी तरफ पीठ कर क थोड़ा आगे को झुक गयी और मुझे अपनी गांड लहरा कर दिखने लगी . मैं तो उन्हें बस छेड़ रहा था पर वो सच में मान जाएँगी ये मैंने सोचा भी नहीं था . पर अब सामने का नज़ारा देख मुर्दे का लैंड भी खड़ा हो जाये तो मैं क्या चीज़ हूँ. गोर मुलायम खरबूजे मेरे सामने लहरा रहे थे और मैं अपना काबू खो बैठा . मैं एक डैम से उठा और नीचे बैठ कर रुपाली चची क चूतड़ों को दोनों हाथों में पकड़ क मसलता हुआ उन्हें चूमने लगा .

रुपाली : आआअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स उम्म्म क्या कर रहे हो कक्कक्क्स

अमित : आप की ये गांड कितनी दिलकश है ये मैं hi जनता हूँ. देखने वाले तो बस तड़प कर hi रह जाते होंगे उम्म्म्म

रुपाली : सब कुछ तुम्हारे लिए है कोई तड़पता है तो तड़पे कक्कक्क्स पर मेरा सब कुछ तुम्हारे नाम हो चूका है ककक

अमित : और आपकी ये गांड ?

रुपाली : ये भी तुम्हारी है कक्कक्स बस प्यार से करना बहुत दर्द होता है ककक

अमित : प्यार से hi करूँगा आपके साथ उम्म्म्म

कुछ देर मैंने रुपाली चची की गांड को मसला और उनकी छूट को भी छठा . फिर मैंने अपने लैंड पर थूक लगा कर वहीँ रुपाली चची को बीएड पर झुकाते हुए अपना लैंड चची की गांड में धीरे धीरे घुसाने लगा . लैंड का सूपड़ा घुसते hi चची दर्द से सिसकने लगी पर मैं धीरे धीरे आगे बढ़ता गया. चची की कासी हुई गांड में लैंड ऐसे लग रहा था जैसे गन्ने का रास निकलने वाली मशीन में घुसा दिया हो . और सच पूछो तो मैं उनकी गांड मरने से इतना एक्ससिटेड हो चूका था क लग रहा था मैं अभी झाड़ जाऊंगा . रुपाली चची का दर्द से ऐंठता जा रहा था और वो किसी तरह ये सब बर्दाश्त कर रही थी पर उन्होंने मुझे रोकने की कोशिश नहीं की. पूरा लैंड जड़ तक घुसा कर मैं चची की पीठ पर लेट सा गया . हम दोनों को पसीना आ चूका था . चची दर्द में थी मैंने उन्ही नंगी पीठ को चूमते हुए अपना एक हाथ नीचे ले जाकर उनकी छूट को मसलना शुरू कर दिया और कुछ hi देर में चची की दर्द भरी कराहटें सिसकियों में बदल गयी . मैं अब धीरे धीरे लैंड को अंदर बहार करने लगा और सीधा हो कर चची क कंधे पकड़ कर अपनी स्पीड बढ़ने लगा .

रुपाली : आअह्ह्ह आअह्ह्ह आअह्ह्ह आह्हः ककक उम्म्म अब ाचा लग रहा है ककक ऐसे hi करते रहो उम्म्म्म कक्कक्स

मैं चची क कंधे थामे तेज़ तेज़ धक्के मरने लगा जिससे उनकी सिसकियाँ और भी तेज़ हो गयी. घर की शांति में इस वक़्त हमारी hi सिसकियों का शोर था . चची कुछ hi पलों में फिर से जवाब दे गयी और झटके कहते हुए उनकी छूट से रास बह निकला .

रुपाली : मैं गयी अमित आअह्ह्ह्ह ककक मैं गयी मुझे थाम लो आअह्ह्ह्ह

चची बुरी तरह कांप रही थी वो ज्यादा देर खुद को संभल नहीं पायी और बीएड पर लुढ़क गयी. मैं भी उनके साथ hi उनके ऊपर गिर गया और उनकी कमर क दोनों तरफ बीएड पर घुटने तक मैं तेज़ी से उनकी गांड में धक्के मरने लगा . चची की गांड की ताब मैं भी नहीं झेल प् रहा था और आखिर कर मैं तेज़ धक्के मरता हुआ जड़ तक लैंड उनकी गांड में घुसाए उनके ऊपर देह गया . मज़े की अधिकता के कुछ देर मेरा जिस्म झटके खता रहा . चची मेरे नीचे दबी हुई थी और मैं मदहोशी क आलम में ु की पीठ उनकी गर्दन चूमे जा रहा था . कुछ देर बाद चची कसमसाई और मेरे नीचे से निकलने की कोशिश करने लगी. मैं भी साइड में पलट गया. चची बीएड से नीचे उतर और अपनी मैक्सी पेहेन ली.

रुपाली : कर ली न मनमानी ? अब उठो और कपडे पेहेन लो. किसी ने इस हालत में देखा तो गज़ब हो जायेगा .

अमित : आपको ाचा नहीं लगा क्या ? अगर बुरा लगा तो सॉरी मैं आगे से ….

मेरी बात पूरी होने से पहले hi चची ने मेरे ऊपर झुक कर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और किश करने लगी .

रुपाली : तुम्हारे साथ मुझे हमेशा hi ाचा लगता है . तुम मेरा इस्तेमाल नहीं करते बल्कि मेरा सम्मान करते हो. इसी लिए तो लाख खुद को रोकने क बाद भी मैं तुम्हारी तरफ खींची चली आती हूँ. जब पता चला था क तुम विजय भैया क बेटे हो तो खुद को बुरा भला भी कहा क मैं तुम्हारे साथ ये सब कैसे कर सकती हूँ और कसम भी खाई थी क आगे से ऐसा नहीं करुँगी पर खुद को रोक hi नहीं पायी . तुम जब सामने होते हो तो मन बस यही चाहता है क तुम मुझे वही प्यार दो जो मेरी ज़िन्दगी में इतने साल नदारद था . मैं जानती हूँ रीमा तुमसे प्यार करती है और तुम भी. अपनी बेटी क प्यार पर डाका तो नहीं मर रही न मैं ? कहीं मेरी वजह से तुम दोनों क बीच ….

रुपाली चची एक डैम से सीरियस हो गयी थी और शायद आत्मग्लानि से भर भी गयी थी. पर मैंने उन्हें सांत्वना दी.

अमित : ये सच है क हम एक दूसरे से प्यार करते हैं. और ये भी सच है क वो आपसे भी बहुत प्यार करती है. आप क्या कुछ सेहती रही हैं वो ये नहीं जानती पर मैं जनता हूँ. इस लिए hi आपको जितना हो सके प्यार देने की कोशिश कर रहा हूँ. मैं कभी भी किसी पर ये बात ज़ाहिर नहीं होने दूंगा . और न hi मेरे प्यार में कभी कमी आएगी .

रुपाली : तुम सच में बहुत अचे हो जो इतनी कदर करते हो . काश क तुम ….

अमित : क्या ?

रुपाली : कुछ नहीं , तुम मेरी बेटी की ज़िन्दगी में आये ये hi बहुत है. जितना हो सके मैं कोशिश करुँगी खुद को समझने की. तुम बस रीमा को वो प्यार देना जो मुझे नहीं मिला.

मैंने उठ कर रुपाली चची को फिर से बाँहों में भर लिया .

अमित : आप चिंता मत करो और जो आप कहना छह रही थी वो भी मैं समझ गया . मैं रीमा को भी प्यार दूंगा और उसकी माँ को भी.

रुपाली चची मेरी बहिन से अलग हुई और झूठ मुठ मुझे मरते हुए बोली .

रुपाली : बेशरम , शर्म नहीं आती अपनी होने वाली सास पर लाइन मरते हुए ?

अमित : जब सास इतनी हसीं हो तो बाँदा लाइन कैसे न मरे. और आप तो चीज़ hi ऐसी हैं क लाइन क्या बहुत कुछ मरने को दिल करता है .

चची मेरी बात पर शर्मा गयी और फिर से मुझे झूठा गुस्सा दिखा कर मरते हुए बोली.

रुपाली : बड़े बेशरम हो, सब मर्द एक जैसे hi होते हैं. बस एक hi चीज़ नज़र आती है हर औरत में . तुम्हे तो मैं ठीक करुँगी , अगर मेरी बेटी को ज़रा भी तंग किया तो देखना

अमित : तो अभी दिखा दीजिये न , वैसे मैं उसे तंग नहीं करूँगा बल्कि खुली करूँगा जैसे आपकी की है .

रुपाली : बदमाआशःह्ह ,,, गंदे ,,,, चलो अब चुप चाप सो जाओ. सुबह उठना भी है. पता नहीं क्या क्या बोलते रहते हो .

फिर रुपाली चची मुस्कुराती हुई वापिस अपने कमरे में चली गयी और मैं भी कपडे पेहेन कर लेट गया. एक डैम से नींद भी आ गयी शायद 2 बार पानी निकलने की वजह से. जो भी हो अब पूरा सुकून था . जो आग सुबह से जल रही थी वो अब पूरी ठंडी हो चुकी थी .

सुबह मेरी नींद रोज़ाना से थोड़ा देरी से खुली . फ्रेश हो कर मैंने छत पर hi थोड़ी बहुत एक्सरसाइज की और नाहा कर तैयार हो गया क्यूंकि राधा से वडा किया था उसे मैं hi उठाऊंगा . इस लिए मुझे जल्दी निकलना था . घर पर अभी कोई उठा नहीं था पर मेरे तैयार होने तक बुआ उठ गयी . मुझे ऐसे सुबह सुबह तैयार देख कर वो हैरान हुई.

मंजू : तुम इतनी सुबह कहाँ जा रहे हो ?

अमित : वो आज गाओं जाना है न तो पहले मौसी क यहाँ से अपना बैग भी लेना है. इस लिए उधर जा रहा हूँ

मंजू : पर इतनी जल्दी भी क्या है , नाश्ता तो कर लेते .

अमित : नाश्ता फिर किसी दिन कर लूंगा बुआ , अभी मुझे जाना होगा . देर हो गयी तो सहमत आ जाएगी . ाचा बुआ मैं चलता हूँ .

मंजू : काम से काम दूध तो पि लो.

अमित : नहीं बुआ बाद में अभी प्लीज जाने दो आप .

मैं बुआ से गले लग कर मिला और निकल गया मौसी क घर की तरफ . 7:30 हो चुके थे. इतने समय तक मौसी तैयार हो जाती है और राधा भी उठ चुकी होती है. मुझे लग रहा था क आज तो राधा क हाथो सहमत आ hi जाएगी. जैसे hi मैं मौसी क घर पहुंचा तो मौसी ने hi दरवाज़ा खोला. मेहरून रंग की साडी पहने वो बहुत हसीं लग रही थी और उनके कन्धों पर गीले बाल बता रहे थे क वो अभी कुछ देर पहले hi नाहा कर तैयार हुई हैं. मुझे देखते hi उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी . मैंने उनके पिन छूने की कोशिश की तो उन्होंने मुझे कस क अपने सीने से लगा लिया . मुझे उनकी चूचियां सीने में धंसती हुई महसूस हुई . कल सुबह क बाद से अब मौसी क जिस्म से मैं लिप्त था और दिमाग में फिर से वो सब घूम गया . क्यूंकि उनके जिस्म से आती महक मेरी साँसों में घुल रही थी.

दिव्या : तुम आ गए ??? मुझे तो लगा था क तुम उधर से hi घर चले जाओगे .

अमित : ऐसे कैसे चले जाता मौसी ? आपसे मिले बिना मैं जा सकता हूँ भला

मेरी बात सुन कर मौसी की मुस्कान और गहरी हो गयी और फिर एक बार उन्होंने मुझे खुद से चिपका लिया .

दिव्या : सच में इतना प्यार करते हो मुझसे ? मैं कितनी खुश हूँ मैं बता नहीं सकती . ाचा अभी अंदर चलो मैं तुम्हारे लिए कुछ लेकर आती हूँ. अभी नाश्ता तो किया नहीं होगा .

मौसी मुझे अंदर लती खुद किचन में जाने लगी तो मैंने राधा क बारे में पूछा .

अमित : मौसी राधा नज़र नहीं आ रही ?

दिव्या : वो महारानी अभी तक बिस्टेर पर hi है. दो बार आवाज़ दे चुकी हूँ पर उठ hi नहीं रही. चाय भी ठंडी हो गयी उसकी तो . तुम बैठो मैं पहले तुम्हे दूध देती हूँ फिर से आवाज़ देती हूँ.

अमित : आप रहने दीजिये मैं उसे जगा देता हूँ.

मौसी किचन में गयी और मैं राधा क कमरे में . बिस्टेर पर करवट क बल लेती राधा एक तकिये को सीने से लगाए मस्त सो रही थी और एक मुस्कान उसके चेहरे पर थी . मैं इतना तो समझ गया क वो ज़रूर जाग रही होगी पर मेरे उठाने से hi उठेगी जैसा उसने कहा था . इस लिए मैं उसके पास बिस्टेर पर बैठ गया .

अमित : राधा ,,,,, मैं आ गया हूँ . अब उठ जाओ .

मैंने राधा को आवाज़ दी पर वो ज़रा भी नहीं हिली. मैं समझ गया क वो क्यों नहीं उठ रही. मैंने फिर से उसे हिलाते हुए आवाज़ दी पर वो फिर भी नहीं उठी . तब मैंने उसके ऊपर झुक कर धीरे से उसके माथे पर किश की. मेरा रोम रोम जैसे मदहोश हो रहा था इस तरह राधा को चूमते हुए . क्यूंकि मुझे पता था वो जग रही है और वो भी यही चाहती थी. राधा को चूम कर जैसे hi मैं सीधा हुआ तो देखा राधा ऑंखें खोले मुझे hi देख रही थी और मुस्कुरा रही थी .

अमित : गुड मॉर्निंग अब उठ जाओ मैडम वर्ण मौसी गुस्सा होंगी.

राधा : गुड मॉर्निंग, माँ गुस्सा नहीं होंगी , तुम जो आ गए हो. अगर न आते तो ज़रूर गुस्सा होती . क्यूंकि अगर तुम न आते तो मैंने आज उठना hi नहीं था .

अमित : वो क्यों भला ? कॉलेज नहीं जाना था क्या ?

राधा : तुम्हारे साथ , तुम्हारे बिना नहीं. तुम्हे कुछ समझ नहीं अत . निरे बुद्धू हो तुम . बुद्धू .

अमित : ये तुम बार बार मुझे बुद्धू क्यों कहती रहती हो?

राधा : क्यूंकि तुम हो hi बुद्धू. कुछ नहीं समझते. अब उठो कहीं माँ आ गयी तो …

मैं राधा की बात सुन एक डैम से उठ कर खड़ा हो गया जैसे मौसी hi आ गयी हो. राधा भी एक डैम से उठी और तेज़ी से मेरी गाल पर चुम कर बाथरूम में भाग गयी .

राधा : बुद्धू , डरपोक , भोंदू हे हे हे

राधा दरवाज़े पर रुक कर पलटी और ये सब कह कर खिलखिलाती हुई बाथरूम में घुस कर दरवाज़ा बंद कर दिया . मैं झूठा गुस्सा दिखा कर उसकी तरफ बढ़ा पर वो पहले hi दरवाज़ा बंद कर गयी. राधा में जिस गाल पर अभी अभी चूमा था मैं उसे सहलाते हुए मुस्कुरा दिया . राधा भी पता नहीं क्या क्या कहती रहती थी मुझे और अब तो शर्तें करने लगी थी मेरे साथ. ये भी ाचा hi लगा क्यूंकि अब वो थोड़ा खुलने तो लगी थी वर्ण पहले चुपचाप और दबी दबी सी रहती थी . मैं कमरे से निकल के बहार hi आ रहा था क मौसी अचानक से सामने आ गयी और हम टकरा गए. उनके हाथ में दूध का गिलास था जो छलक गया और हम दोनों पर hi दूध गिर गया. मेरी T-shirt पर गिरा तो मैं उसे झाड़ने लगा पर मौसी क ब्लाउज क ऊपर गरम दूध गिरा था जिससे एक डैम से उन्होंने अपनी साडी का पल्लू hi जल्दबाज़ी में गिरा दिया . उनका ब्लाउज गीला हो गया था और वो उसे हटाने की कोशिश कर रही थी . मेरी नज़र मौसी पर पड़ी तो नज़रें वही जैम सी गयी. क्यूंकि मौसी अपने ब्लाउज को दोनों हाथों से पकड़ कर खींचती हुई गरम दूध से खुद को बचा रही थी पर उनके ब्लाउज में से झांकते उनके दूध मुझे गरम कर रहे थे . एक डैम गोरी चूचियां काली ब्रा में कैद थी पर अब मुझे उन क बीच की लकीर पूरी नज़र आ रही थी. मैं तो सब भूल कर बस वहीँ देखे जा रहा था .

दिव्या : जाये दिया ,,, ककक जल गयी कक्कक्स

दिव्या मौसी को जलन हो रही थी गरम दूध की वजह से . मुझे कुछ न बोलता देख उनकी नज़र मुझ पर पड़ी तो मेरी नज़रों का पीछा कर वो समझ गयी क मैं कहा खोया हुआ हूँ.

दिव्या : अब देख क्या रहे हो , गरम दूध है ककक आग लगी हुई है कक्कक्स

मौसी की आवाज़ सुन मैं हड़बड़ा गया

अमित : स सॉरी मौसी मम मेरी अजब से आप …

दिव्या : इसमें तेरी क्या गलती है मैं hi बेध्यानी में थी. तेरे कपड़ों पर भी तो गिर गया है दूध जा जल्दी जा कर कपडे बदल ले मैं भी कपडे बदल क आती हूँ .

मैं तेज़ कदमो से भगा अपने कमरे में . मुझे ऐसे लग रहा था जैसे मौसी ने मुझे देख लिया है उनकी छाती को घूरते हुए. मैं कमरे में गया और जल्दी से अपने कपडे बदले . मेरी अंडरवियर में फिर से तम्बू बन गया था . आज फिर मौसी ने मेरी हालत ख़राब कर दी थी . मैं कपडे पहन कर थोड़ी देर में नीचे आया तो राधा तैयार हो कर बैठी थी नाश्ते क लिए . मौसी किचन से आयी तो वो इस वक़्त एक मैक्सी पहने हुए थी. मौसी टेबल पर खाना लगा कर जब मेरे पास आकर मेरी प्लेट में ऋतू डालने क लिए झुकी तो एक बार फिर से मैं हिल गया. उनकी मैक्सी का गाला खुला था और नीचे झुकते hi वहां से मुझे उनकी नंगी चूचियां झूलती हुई नज़र आयी. मौसी ने अब नीचे से ब्रा भी उतर दी थी. मैं तो पालक झपकना hi भूल गया . मौसी की पीठ राधा की तरफ थी और वो हम दोनों क बीच कड़ी थी इस लिए राधा मुझे देख नहीं सकती थी और न hi वो नज़ारा जो मैं देख रहा था. कुछ देर मौसी ऐसे hi झुकी रही और फिर मुस्कुराती हुई सीधी हो गयी .

दिव्या : कहाँ खो गए ? चलो नाश्ता करो .

मैं एक बार फिर सकपका गया और नज़रें झुका कर नाश्ता करने लगा . मौसी किचन में चली गयी . मैं जल्दी जल्दी नाश्ता करने लगा क्यूंकि नीचे फिर से टेंट बन चूका था और गर्मी बढ़ती जा रही थी. खाना कहते कहते मौसी जब मुझे परांठे देने आयी तो इस बार तो उन्होंने वो कर दिया जिससे मेरी हालत और भी ज्यादा पतली हो गयी . मौसी ने मेरे पीछे से hi मेरी प्लेट में परांठा रखने की कोशिश की और मेरे कंधे पर सात कर झुक गयी जिससे उनके नरम दूध मेरे चेहरे गाल गर्दन पर कुछ पल को अपनी नरमी का एहसास करवा गए . अब तो हालत ये हो गयी थी क निवाला भी हलक से नीचे नहीं उतर रहा था . जैसे तैसे मैंने जल्दी से खाना ख़तम किया और भाग कर अपने कमरे में गया. बाथरूम में जा कर मुँह पर ठंडा पानी मारा और फिर अपना बैग उठा कर बहार आ गया. मौसी मुझे बैग उठाये देख उदास सी हो गयी.

दिव्या : तुम जा रहे हो?

अमित : जी मौसी . पर जाने से पहले आप से मिल कर hi जाऊंगा. आपका आशीर्वाद लिए बिना थोड़ा hi जाऊंगा.

दिव्या : हमेशा खुश रहो , मैं इंतज़ार करुँगी . और ध्यान से जाना , पहुँच क्र फ़ोन ज़रूर कर देना .


फिर मैंने मौसी क पाऊँ छू कर आशीर्वाद लिया और उन्होंने मुझे अपनी छाती से लगा कर भींच लिया . एक बार फिर मेरी हालत पतली हो गयी . पर मैं खुद को कण्ट्रोल करता राधा को साथ लेकर कॉलेज क लिए निकल गया .
 
भाई अगले उपदटेस क लिए 2-3 दिन इंतज़ार करना होगा थोड़ा काम में दिक्कत है
 
भाई लोगो समस्या किसी को भी आ सकती है , अगर मैं इस वक़्त मुश्किल में हूँ तो आप सब को थोड़ा सबर रखना चाहिए . जिसे ाचा नहीं लग रहा भाई वो मुझे माफ़ करे . मैंने बताया था क एक दिक्कत आ गयी है. पर फिर भी आप लोग समझते नहीं.
 
अपडेट 281

कॉलेज जाते वक़्त राधा चुप चाप बैठी थी और मेरी पीठ पर अपना मुँह टिकाये जैसे मेरे पीछे छिपी हुई थी. किसी छोटे बचे की तरह उसने दाहिनी बाजु मेरे पेट पर ऐसे लपेटी हुई थी जैसे क मैं कहीं भाग जाऊंगा. राधा की ये ख़ामोशी मुझे विचलित कर रही थी तो आखिर मैं बोल hi पड़ा

अमित : राधा तुम ऐसे खामोश क्यों हो ? कुछ तो बात करो.

राधा : क्या बात करूँ ? तुम जा रहे हो आज और पता नहीं कितने दिन बाद आओगे . मेरा दिल बिलकुल भी नहीं लगेगा .

अमित : तुम फिर से वो hi सब कहने लगी. मैंने कहा था न ऐसे उदास मत हो . तुम्हे उदास देख कर क्या मैं जा पाउँगा.

राधा : पर मैं भी क्या करूँ , तुम्हारे बिना कुछ ाचा नहीं लगता मुझे यहाँ पर .

अमित : बस एक हफ्ते की hi तो बात है. मैं कहीं दूर देश तो जा नहीं रहा. वापिस आ hi जाऊंगा न. और फिर यहाँ तो सब हैं. तुम्हारा दिल लगा रहेगा .

राधा : मेरा दिल नहीं लगता किसी क साथ. तुम नहीं होते तो किसी से बात करना भी ाचा नहीं लगता . ऐसा नहीं हो सकता क तुम मुझे अपने साथ …….. ये कम्पटीशन दूसरे शहरों में hi क्यों होते हैं. यहाँ भी तो हो सकते हैं न.

अमित : तुम भी न पूरी बची hi बन जाती हो . बस 4-5 दिन की तो बात यही . रीमा शीना मीनल शालू शिवानी और मोहित भी तो है न यहाँ पर. तुम बस फ्री टाइम किताबों की जगह दोस्तों क साथ बिता लिया करो. मैं नहीं हूँ तो क्या बलि सब तो हैं hi न. वो भी तो हमारे दोस्त हैं. तुम खुश रहोगी तो मुझे ाचा लगेगा , तुम उदास रहोगी तो मैं भी कहाँ अचे से खेल पाउँगा फिर .

इतने में हम कॉलेज पहुँच गए . मैंने गेट पर राधा को उतरा इतने में रीमा भी आ गयी शायद वो हमारा hi इंतज़ार कर रही थी .

रीमा : गुड मॉर्निंग

अमित : गुड मॉर्निंग

रीमा : तो जा रहे हो गाओं ?

अमित : हाँ , बस राधा को छोड़ने आया था . एक काम करोगी रीमा

रीमा : तुम्हे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं है , मैं जानती हूँ तुम क्या कहना चाहते हो. Don’t वोर्री , राधा मेरी बेस्ट फ्रेंड है इसका ध्यान मैं अचे से रखूंगी . और तुम ( राधा ) भी ऐसे उदास चेहरा मत बनाओ नहीं तो ये तुम्हारे बारे में hi सोचता रहेगा और कम्पटीशन में हर जायेगा . क्या तुम यही चाहती हो?

राधा : मैं क्यों ऐसा चाहूंगी भला , मैं ठीक हूँ. तुम ( अमित ) जीत क आना मैं इंतज़ार करुँगी तुम्हारी जीती हुई ट्रॉफी का .

अमित : सब से पहले तुम्हे hi लेकर दूंगा अगर जीता तो.

राधा : तुम hi जीतोगे मुझे पता है.

‘ हमसे मिले बिन hi चले जाओगे ? ‘ हम तीनो बात कर रहे थे क मोहित मीनल संजय भी वहीँ आ पहुंचे . और पीछे hi कल्पना भी आ रही थी.

अमित : हाँ यार बस जा hi रहा था . तुम लोगों को मिलने hi आया हूँ.

मोहित : ाचा किया , अगर बिना मिले चला जाता तो मैं तुमसे बात भी नहीं करता .

मीनल : ऐसे कैसे चले जाता , आखिर बेस्ट फ्रेंड हो तुम दोनों. बी थे वे , मुझे पार्टी चाहिए वापिस आने पर.

कल्पना : इसे तो बस पार्टी की hi पड़ी रहती है. थोड़ा पड़े पर भी ध्यान दे लिया करो कभी. तो तुम ( अमित ) जा रहे हो , ध्यान से जाना और कल टाइम से पहुँच भी जाना .

अमित : हाँ हाँ पहुँच जाऊंगा . तुम आज राधा को ड्राप कर डौगी न ?

कल्पना : ये भी कोई कहने की बात है

संजय : अरे यार तुम टेंशन क्यों लेते हो. मेरे पास भी है न बाइक , राधा और मैं वैसे भी एक hi क्लास में hi तो हैं. मैं छोड़ आऊंगा राधा को.

मीनल : और क्या , साथ में hi लेक्चर ख़तम होने हैं तो तुम ( कल्पना ) क्यों वेट करोगी ? संजय छोड़ आएगा . वैसे भी कल से तो तुम भी जा hi रही हो .

कल्पना : आज तू हूँ न यहाँ , कल की कल देखेंगे .

‘ शुक्र है अभी तुम यहीं हो. मुझे लगा था क बिना मिले hi चले जाओगे .’

शीना शालू और शिवानी तीनो एक साथ हमारे पास आ गयी . तीनो ने एते hi मेरे साथ हाथ मिलाया . शीना मुझे देखते हुए कहा और मेरे साथ hi कड़ी हो गयी .

अमित : ाचा हुआ तुम लोग बह यहीं मिल गए . मैं सोच hi रहा था क एक बार मिलता चलूँ सब से . वैसे तो कल भी मिल कर hi जाऊंगा. आज गाओं जा रहा हूँ घर . कल भी जाते वक़्त मिऊँगा. तुम लोग बस मेरे पीछे राधा का ….

शीना : don’t वोर्री , राधा मेरी भी तो बहिन है . तुम इसकी चिंता मत करो , मेरे होते राधा को कोई दिक्कत नहीं हो सकती .

कुछ देर और हम बात करते रहे . लेक्चर की बेल्ल भी बज चुकी थी मगर सब ने अपना लेक्चर मिस कर दिया . मैंने कहा भी पर कोई जाने को तैयार नहीं था . गेट क पास खड़े खड़े hi आधा घंटा हो गया था तो मैं कल मिलने का कह कर वहां से गाओं क लिए निकल गया .

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दिव्या घर पर अकेली बैठी पिछले कुछ दिनों में जो जो हुआ उसके बारे में सोच रही थी. कैसे वो अपनी मर्यादा की सीमा लाँघ कर अमित को अपनी तरफ आसक्त करने क लिए उसे धीरे धीरे अपने हुस्न क जलवे दिखा रही थी. हो काम उसने अपनी पूरी ज़िन्दगी में नहीं किया था वो पिछले कुछ दिनों में hi सिर्फ अमित क लिए कर गुज़री थी. उसे खुद पर hi आश्चर्य भी हो रहा था क किस तरह वो इतनी ज्यादा आगे बढ़ गयी क उसके बारे में सोच सोच कर hi उसे खुद पर गुस्सा भी आ रहा था पर दिल में कहीं न कहीं उसे ये भी काम hi लग रहा था . वो बस अमित को पाना चाहती थी जैसे क वो उसके जीवन की अंतिम आस हो. वैसे तो ज़िन्दगी में उसने कभी किसी गैर मर्द को देखा तक नहीं था उस नज़र से पर अमित की बात और थी. उसे हमेशा ये hi लगता ठगा क जैसे वो उसका अपना है उसी क लिए है. और दामिनी भी तो बार बार उसे अमित क साथ प्यार करने को कह रही थी सपने में आकर . अमित की ऑंखें जो उसकी माँ जैसी थी उन्हें देख कर दिव्या को दामिनी hi नज़र अति थी और शायद ये भी एक वजह थी क वो अमित को अपना बनाने पर उतारू थी . इसी लिए तो वो मन मर्यादा और अपने सरे उसूल खुद hi तोड़ कर आगे बढ़ गयी थी. कल रत वो सोच चुकी थी क वो अपना अंतिम डैन चल hi देगी . जो काम एक मर्द को करना चाहिए वो खुद करने को मन पक्का कर चुकी थी पर उसकी बुरी किस्मत क मंजू ने अमित को कल रत अपने घर रोक लिया. इस बात पर मन hi मन दिव्या ने मंजू को बहुत बुरा भला भी कहा पर क्या कर सकती थी अब वो . बार बार इशारा देने क बाद भी अमित कुछ समझ नहीं रहा था पर सामने से पर उसे सोई हुई समझ कर जितनी बार भी अमित ने उसके जिस्म क साथ अपना जिस्म रगड़ा था दिव्या क तन बदन में आग भड़क उठी थी. वो चाहती थी क अमित अंतिम सीमा भी लाँघ दे और उसमे समां जाये पर हर बार वो उसे अधूरा hi छोड़ दे रहा था . इस लिए दिव्या की आग कहीं ज्यादा भड़क चुकी थी. कल रत शायद भगवन ने hi ये किया था वर्ण वो अमित को कल रत प् hi लेती. पर अब दिन क उजाले में वो फिर से सब सोच रही थी क कहीं वो गलत तो नहीं कर रही. कहीं ऐसा न हो क अमित उसे गलत समझ ले . पर अपने दिल क हाथों वो इतना मजबूर हो चुकी थी क उसके डिंगा का हर तारक वो खुद hi निरस्त कर देती . अभी भी वो यही सोच रही थी क उसे अमित क बाप यानि क पवन की यद् आ गयी. अचानक उसकी आँखों में गुस्से की ज्वाला भड़कने लगी .

दिव्या : नहीं , वो बिलकुल भी उसके जैसा नहीं है . चेहरा मिलने से क्या होता है , उसमे मेरी दामिनी का खून भी तो है. उसे दामिनी ने पैदा किया है. वो दामिनी जैसा है. इसी लिए सब से इतना प्यार करता है. इसी लिए वो मुझसे भी इतना प्यार करता है . मेरी कितनी इज़्ज़त करता है . कोई और होता तो अब तक …. वो अपने बाप जैसा बिलकुल भी नहीं है. मैं उसे उसके जैसा बनने भी नहीं दूंगी. वो मेरा है मेरी दामिनी का है. मैं उसे कभी उसके घटिया बाप जैसा नहीं बनने दूंगी. पर वो समझ क्यों नहीं रहा क मैं क्या चाहती हूँ? मैं अब क्या करूँ कैसे उस बुद्धू को समझों .

दिमाग : तू ये कैसे सोच सकती है ? तू पागल हो गयी है? वो तेरा बीटा है , तूने उसे अपना दूध पिलाया है. भूल गयी क्या तू ?

मन : तो क्या हुआ ? अभी भी तो मैं उसे दूध hi पीला रही हूँ. और उस पर मेरा हक़ है खुद दामिनी ने मुझे ये हक़ दिया है. क्या मुझे प्यार करने का हक़ नहीं है जो तू मुझे समझा रही है

दिमाग : प्यार का हक़ है पर एक माँ की तरह , तू तो उसकी प्रेमिका बन रही है. मत भूल क दामिनी ने उसके लिए राधा को चुना था . तो क्या अब तू अपनी बेटी क हिस्से पर hi डाका डालेगी ? एक माँ हो कर अपनी hi बेटी क होने वाले सुहाग को लूटना चाहती है

मन : चुप कर , उस पर पहले मेरा हक़ है . राधा तो अभी बची है. और तू दामिनी की बात कर रही है ? दामिनी ने hi तो कहा है क मैं उसके साथ प्यार करूँ. जो प्यार मुझे साडी ज़िन्दगी नहीं मिला वो प्यार मुझे मेरे सपनो का राजकुमार मेरा अमित hi मुझे देगा .

दिमाग : दामिनी को गए हुए हुए 18 साल होने को आये और तू कह रही क उसने तुझे कहा है? मत भूल वो उसका बीटा है. क्या जवाब देगी तू दामिनी को ? तूने उसके hi बेटे क साथ ये सब किया?

मन : दामिनी हमेशा मेरे साथ थी और है. हम दोनों एक hi हैं. वो मेरे अंदर है और उसी ने मुझे कहा है. नहीं तो बार बार वो मेरे सपनो में नहीं अत . हमेशा से जो मेरे सपनो में अत रहा है अब उसका चेहरा मुझे दिखने लगा है . और ये सब मेरी मर्ज़ी से नहीं हो रहा . ये सब मेरी दामिनी चाहती है उसे पता है क उसकी बहिन को सच्चा प्यार सिर्फ उसी का अंश दे सकता है. वो प्यार जिसमे खुद दामिनी भी शामिल है . मैं अमित को हर हल में पाकर रहूंगी . चाहे जो भी हो, राधा जब बड़ी होगी तब उसके बारे में सोचूंगी अभी तो मुझे सब से ज्यादा ज़रूरत है अमित की. आखिर मैं भी तो एक औरत हूँ क्या मुझे खुश रहने का हक़ नहीं है ? अब तू अपनी बकवास बंद कर और जो मैं करना चाहती हूँ मुझे करने दे.

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‘ क्या बात है तूने आज मुझे ऐसे क्यों बुला लिया , वो भी कॉलेज टाइम में hi ? कुछ प्रॉब्लम हुई है क्या ?’

फ्री लेक्चर में आज मंजू ने ऋतू सिंह को कॉलेज में hi बुला लिया था. वैसे तो ऋतू क पास टाइम नहीं होता पर वो मंजू क लिए अपने सरे काम छोड़ कर चली आयी थी क्यूंकि उसे पता था क ऐसे hi मंजू उसे इस तरह नहीं बुलाती जब तक क मामला गड़बड़ न हो . मंजू भी परेशां सी अपने हाथों की उंगलियां hi मसले जा रही थी क वो बात कैसे शुरू करे. कल रत उसने जो कुछ भी देखा था वो न तो भूल प् रही थी और न hi बर्दाश्त कर प् रही थी और मुश्किल ये थी क वो कुछ कर भी नहीं प् रही थी .

मंजू : क्या बताऊँ यार समझ नहीं आ रही क कैसे शुरू करूँ

ऋतू : अब इतना भी क्या सोच रही है , जो भी है बस बोल दाल. हम दोनों में कोई राज़ है क्या ? दिल खोल कर बता क्या बात तुझे परेशां कर रही है .

मंजू : अब कैसे बताऊँ ,, ,,, कल रत अमित मेरे पास hi रुका था तुझे पता है न

ऋतू : हाँ तूने बताया था रत को , कुछ हुआ क्या ? कहीं उसने कल तेरी सुखी ज़मीन पर बरसात तो नहीं कर दी हे हे हे

मंजू : शर्म नहीं आती तुझे , कितनी बार कहूं क वो सब अनजाने में हुआ था और अब दोबारा नहीं होगा . वो मेरा भतीजा है , मैं उसके साथ वो सब कैसे कर सकती हूँ. ऐसी बात तो सोचना भी पाप है .

ऋतू : भतीजा तो वो रुपाली भाभी का भी है न . वो तो पूरे मज़े ले रही है और तू उन्हें मज़े करते देख अब जल रही है .

मंजू : मैं क्यों जलने लगी ? मैं तो तो ये सोच रही हूँ क अमित रुपाली भाभी क साथ वो सब कैसे कर सकता है. रुपाली भाभी को तो बस इतना hi पता है क वो विजय भाई साहब का बीटा है पर अमित तो सचाई जनता है न. फिर वो सब कैसे कर सकता है. उसे ज़रा भी शर्म नहीं आयी .

ऋतू : किस बात क लिए शर्माए वो ? भूल गयी क वो मेरे साथ भी कर चूका है जब की उसे पता है हम दोनों बहनो जैसे हैं. फिर तुझे इस बात पर ऐतराज़ क्यों नहीं हुआ ? और रही बात रुपाली भाभी की तो ज़रा उनके नज़रिये से भी देख. वो भी अकेली हैं , उन्हें भी प्यार की ज़रूरत तो है न. खुद पर कोई कितनी ी काबू रख सकता है. बेटियों की वजह से वो बहार किसी क साथ कुछ करेगी तो बदनामी का दर और बेटियों की ज़िन्दगी बर्बाद . ऐसे में अमित से बेस्ट ऑप्शन उनके पास और क्या है. वैसे भी अमित क साथ जो मज़ा है वो किसी और क साथ तो आ hi नहीं सकता . ये बात मैं पर्सनली कहती हूँ , मैं तो खुद उसके साथ समय बिताना चाहती हूँ पर मज़बूरी है ड्यूटी की. मेरा बस चले तो आज तो आज hi उससे शादी कर लूँ. और तू भी खुद को और धोखा मत दे . तुझे भी उसकी ज़रूरत है तेरा दिल भी उसके साथ प्यार करना चाहता है मगर तू दिमाग की सुन रही है. और जो ये तू सही गलत का भाषण दे रही है न ये खुद को सही साबित करने क लिए दे रही है वर्ण दिल तो बस प्यार hi चाहता है और तू अमित से कितना प्यार करती है ये तू भी जानती है और मैं भी. मैं तो कहती हूँ ज्यादा न सही पर कभी कभी तू भी उसके साथ थोड़ा प्यार कर लिया कर . फिर देखना तू कितनी खुश रहेगी . तुझे इससे ज्यादा ख़ुशी मिलेगी एक तो तू उससे प्यार करती है और दूसरा वो तेरा अपना है. अगर रुपाली भाभी इस उम्र में भी अमित की बाँहों में आरा तलाश रही है तो तू क्यों नहीं ? तू तो अभी उनसे भी कहीं ज्यादा जवान है.

मंजू कुछ देर क लिए खामोश हो गयी पर फिर अपनी बात पर अडिग रहते हुए वो बोली.

मंजू : नहीं यार , ये सब सही नहीं है. किसी को पता चला तो वो क्या कहेगा क मैं अपने hi भतीजे क साथ ये वो सब ….. हर कोई थूकेगा मुझ पर

ऋतू : बात तो तू ऐसे कर रही है जैसे वो तेरे नाम क पोस्टर छपने वाला है . रुपाली भाभी ने तो इस बात की परवाह नहीं की और न hi मैंने . क्यूंकि हमें उस पर भरोसा है वो कभी ये बात किसी को नहीं बताएगा . और तू तो उसकी बुआ है. फिर वो कैसे तुझे बदनाम होने देगा. और तुझे कौन सा कहीं बहार जाना है , घर पर hi तो सब करना है . अगर फिर भी तुझे मेरी कोई हेल्प चाहिए तो बता देना , जगह का इंतज़ाम मैं कर दूंगी हे हे हे .

मंजू : तू क्यों बार बार ये सब कह रही है . तुझे ज्यादा ज़रूरत है तो तू चली जा उसके पास. तेरी आग ठंडी कर देगा वो .

ऋतू : मैं तो कब से इंतज़ार में हूँ. इस बार पूरा वसूल करुँगी और टाइम भी खुला रखूंगी ताकि पूरे मज़े ले सकूँ. सरे सपने पूरे नहीं हो सकते पर जितने भी हो सकते हैं उसी क साथ hi पूरे करने हैं. तुझे आग में जलना है तो जल मैं तो उसके पानी की बरसात में ठंडी होने को बेकरार हूँ .

मंजू : शर्म तो नहीं आती तुझे मेरे भतीजे क बारे में ऐसी बातें करते हुए .

ऋतू : जिसने की शर्म उसके फूटे करम. मेरी मन तो तू भी अपने दिमाग से सही गलत का भूत उतर दे. वर्ण अंदर अंदर hi जलती रहेगी. समय कभी वापिस नहीं अत , जो समय तू बर्बाद क्र रही है न ये फ़िज़ूल की बातों के ये सब बाद में तुझे hi दुःख देगा. जब भी तू अमित को किसी क साथ देखेगी तो तुझे जलन hi होगी और अगर तू खुद उसके साथ प्यार कर लेगी तो ये तेरी जलन भी ख़तम हो जाएगी. रुपाली भाभी से hi कुछ सिख ले , नहीं तो बोल मैं तुझे अपना लाइव सन दिखा दूँ हे हे हे

मंजू : पता नहीं तुझे पुलिस अफसर किसने बना दिया , तुझे तो पोर्न स्टार होना चाहिए था गन्दी लड़की.

ऋतू : तू भी थोड़ी गन्दी हो जा और अपनी जवानी का मज़ा ले ले मेरी जान. एक बार बुढ़ापा आ गया न तो फिर नहीं जायेगा हे हे हे . ाचा अब मुझे जाना होगा मैं चलती हूँ. और ज़रा गौर करना मैंने जो भी कहा वर्ण तुम्हारी ये जलन तुम्हे सुकून से रहने नहीं देगी .

इतना बोल ऋतू मंजू क गले मिल उससे विदा लेकर चली गयी और पीछे मंजू अकेली रह गयी ऋतू की बातों को सोचती और रत का मंज़र यद् करती हुई . रत जिस तरह से उसने रुपाली को पूरे मज़े क साथ अमित संग चुदाई करते देखा था उससे मंजू को गुस्सा भी आया था पर साथ में उसके अंदर की प्यास भी जाग उठी थी. क्यूंकि दोनों hi तो उसके अपने थे . अमित से जहाँ वो बेइंतहा प्यार करती थी वहीँ रुपाली से भी उसे बहुत प्यार था क्यूंकि वो hi तो एक मात्रा सहारा रही थी पवन और दामिनी क बाद . लेक्चर की बेल्ल बजते hi मंजू भी अपनी सोच की लड़ी तोड़ती हुई निकल गयी क्लास लेने .

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‘ आप मुझसे बात क्यों नहीं कर रही हैं ? कब से देख रहा हूँ आप मेरी तरफ देख क भी अनदेखा कर रही हैं. आखिर किस लिए ऐसा कर रही हैं आप ? आखिर हुआ क्या है ? कुछ तो बताइये ? ‘

घर आने क बाद मैं माँ क पास बैठा रहा . वो मेरे आने से बहुत खुश थी. बाबा अजय मां और कमलेश मां तीनो hi घर नहीं थे. घर पर माँ कामिनी ममी और दीपिका ममी hi थी. माँ तो मुझे देख इतनी खुश हुई क अपने हाथों से बना कर मुझे कहाँ खिलाना चाहती थी पर मैंने उन्हें आराम करने को कहा और ज़बरदस्ती बीएड पर लिटा दिया. उनका आठवां महीना चल रहा था . इस लिए मैं उन्हें आराम करने को कह रहा था . मेरे आने से वो कितनी खुश थी ये उनकी आँखों उनके हावभाव से पता चल रहा था . दीपिका ममी सिर्फ दो बार hi कमरे में आयी थी इस दौरान. एक बार पानी देने और दूसरी बार चाय देने. पर दोनों बार hi उन्होंने मुझसे नज़रें नहीं मिलायी और उनके एक्सप्रेशन से लग रहा था क वो मुझसे नाराज़ हैं. माँ क साथ 1 घंटा बातें करने क बाद मैं बहाना बना कर दीपिका ममी क पास आ गया हो अभी किचन में खाना बनाने की तयारी कर रही थी. कामिनी ममी दोनों बच्चों को संभल रही थी एक बार मैं उनसे भी मिल आया था .

दीपिका : तुम जा कर बड़ी दीदी क पास बैठो. उन्हें तुम्हारी ज़रूरत है. और किसी की तो परवाह तुम करते hi नहीं .

अमित : ये सब आप क्यों कह रही हैं? क्या किया है मैंने किसकी परवाह नहीं की? आखिर आप कहना क्या चाहती हैं?

दीपिका: तुम्हे तो कुछ पता hi नहीं . छोडो रहने दो , कोई जिए या मरे तुम्हे क्या. तुम बस रिश्तों क पीछे छिपते रहो , कोई मरता है तो मर जाये .

दीपिका ममी की बातें सुन कर मैं झुंझला गया और उन्हें बाज़ुओं से कास क पकड़ कर अपनी तरफ घुमा लिया.

अमित : साफ़ साफ़ बताइये आप किस बारे में बात कर रही हैं. यूँ घुमा फिर कर बात क्यों कर रही हैं.

दीपिका: बचे नहीं हो तुम जो इतना भी नहीं समझ रहे क मैं किस बारे में बात कर रही हूँ. मैं निधि की बात कर रही हूँ. तुम्हे ज़रा भी उसकी हालत का अंदाज़ा है ? वो किस कदर घुट घुट क मर रही है क्या तुम्हे नज़र नहीं आ रहा ? वो शादी क लिए मान गयी ये सबको पता है पर वो क्यों मन गयी किस लिए मन गयी ये तूने सोचा है ? वो तुझे अपना सब कुछ मन बैठी है अपना पति अपना देवता और अब उसे किसी और क साथ शादी करनी पड़ेगी . एक औरत क दिल में एक hi इंसान होता है , एक मंदिर में एक hi देवता होता है. ऐसे में वो खुद को मर कर कैसे किसी और को अपना सब कुछ सौंप देगी तूने ज़रा भी सोचा इस बारे में ? वो मर जाएगी घुट घुट क , मर जाएगी . तुम बस अपने रिश्ते निभाते रहना , सबको खुश करने क चक्कर में इस मासूम स जान की बलि दे देना रिश्तों की वेदी पर. मैं गयी थी उसे समझने उससे बात करने और जो कुछ उसने मुझे बताया वो सब सुन कर तो पत्थर भी पिघल जाये और तू , तू पता नहीं किस मिटटी का बना है जो तुझे उस पर ज़रा भी तरस नहीं आ रहा . मैं तो समझती थी तुम्हारे दिल में सबके लिए प्यार है तुम सबकी परवाह करते हो पर नहीं , तुम्हे तो बस रिश्ते निभाने है. एक आदर्श इंसान बनना है . क्या करोगे ऐसा बन कर ? क्या निधि को जीते जी मरता देख तुम चैन से रह पाओगे ? क्या उसकी मुस्कान क पीछे छिपे दर्द को अनदेखा कर पाओगे ? और उस दिन क्या करोगे जिस दिन वो तुम्हारी इस महान सोच पर कुर्बान हो कर इस दुनिया से चली जाएगी . है कोई जवाब तुम्हारे पास ? तुम्हारे पास कोई जवाब नहीं है . जानते हो क्यों ? क्यूंकि तुम्हे सिर्फ ाचा बनना है सबकी नज़रों में सबको प्यार देना है महान बनना है . जब रीमा क साथ तू रिश्तों को टाक पर रख कर उसको अपना बनाने को तैयार है तो निधि को क्यों नहीं ? रिश्ता तो दोनों क साथ एक जैसा है न. फिर उसके साथ ये नाइंसाफी क्यों ? अगर बात सही गलत की है तो दुनिया की नज़रों में कुछ भी सही नहीं है , जो कुछ भी तुमने किया चाहे मेरे साथ दीदी क साथ बड़ी दीदी क साथ अपनी मौसियों क साथ या अपनी बहनो क साथ. कुछ भी कभी भी समाज की नज़रों में सही नहीं कहा जायेगा पर तूने वो hi किया जिससे दूसरों को ख़ुशी मिली. और अब निधि की बात आयी तो तू सही गलत देखने लग गया ? उसने तुझे सच्चे मन से प्यार किया और तूने उसे ऐसे ठुकरा दिया जैसे वो तुम्हारी लिए कुछ है hi नहीं. मैं तुम्हे प्यार का देवता मान रही थी पर तुम भी इस दुनिया में रह कर इस जैसे पत्थर बन गए हो , यू अरे हैरतलेस , हैरतलेस .

इतना सब कह कर दीपिका ममी रोटी हुई रसोई घर से निकल गयी. मैं वहीँ बस बट बना खड़ा रहा . दीपिका ममी की एक एक बात शूल की तरह मेरे दिल में चुभी थी मुझे गुस्सा भी आया और मैं जवाब भी देना चाहता था पर उन्होंने तो मुझे मौका तक न दिया . आखिर निधि दीदी क साथ मैं क्या गलत कर रहा था . मैंने तो कभी ऐसा सोचा भी नहीं था क दीदी क साथ मेरा कोई ऐसा रिश्ता हो भी सकता है. जो कुछ भी हुआ इसमें किसका दोष था किसका नहीं ये तो भगवन hi जनता है पर ममी ने तो सीधा सीधा मुझे hi दोषी बना दिया था . निधि दीदी से मैं सब से ज्यादा प्यार करता था क्यूंकि वो भी शुरू से hi मुझे प्यार करती आयी थी पर एक भाई बहिन की तरह और आज तकदीर किस मोड़ पर ले आयी थी . मुझे भी एहसास था क वो मेरी वजह से दुखी हो रही हैं पर अगर मैं उनके साथ कोई रिश्ता बनता तो रीमा का क्या होता और बाकि सब का क्या ? आखिर किस तरह मैं सबको ठेस पहुंचा सकता था . दीपिका ममी तो चली गयी पर उनकी कही बातों की वजह से मेरी ऑंखें खुद hi छलक आयी थी. निधि दीदी का दुःख जहाँ दीपिका ममी को इतना दुखी कर गया क वो मुझ पर बरस पड़ी वहीँ मैं भी अब और ज्यादा टूट रहा था . आखिर मैं किस तरह निधि दीदी क साथ न्याय करूँ. मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था . मेरी मदद तो हमेशा दीपिका ममी करती थी और आज वो खुद hi मुझे ऐसे सुना कर निकल गयी. मगर मैं जाता भी तो किसके पास. आखिर किस्से पूछता क मुझे क्या करना है. खुद से तो मुझे समझ hi नहीं आ रहा था क मुझे क्या करना चाहिए . मैं एक उम्मीद से फिर से दीपिका ममी क पास गया. वो अपने कमरे में hi थी और बीएड पर बैठी आंसू बहा रही थी. मुझे एक बार देख कर उन्होंने मुँह दूसरी तरफ कर लिया .

अमित : आप ने जो कुछ भी कहा वो सब सही है पर ये तो बताइये क इसका हल क्या है ? आखिर मैं किसे उन्हें वो दूँ जो वो मुझ से चाहती हैं? आप जानती हैं न इसका अंजाम क्या होगा फिर भी आप मुझसे ये सब कह रही हैं. तो बताइये मुझे क मैं क्या करूँ , आप जो भी कहेंगी मैं सब मानूंगा . मैं कोई पत्थर दिल नहीं इंसान hi हूँ और दूसरों क दर्द को अचे से समझता हूँ. मुझे महान नहीं बनना पर किसी को मनहूस कहने का भी मौका नहीं देना चाहता . आप मेरा ाचा बुरा सब अचे से समझती हैं. आज भले hi आप मुझे कुछ और समझ रही हो पर मैं आज भी आपको उतना hi प्यार करता हूँ जितना पहले करता था पर शायद आप बदल गयी हैं.

दीपिका : ख़बरदार जो दोबारा ऐसा कहा तो , मैं बदली नहीं पर नीडबी को ऐसे तड़पते देखना भी मुझसे नहीं होता. मैं उसकी तड़प अचे से समझ रही हूँ. वो मुझसे भी कहीं ज्यादा तुम्हे चाहती है. शायद सब से ज्यादा . तुम जिस बात से डरते हो वो मुझसे भी पता है और निधि को भी. पर इसका हल भी तो निकला जा सकता है न. तुम तो उससे मुँह hi फेर कर आ गए .

अमित : पर रीमा क साथ ये धोखा नहीं होगा क्या ?

दीपिका : रीमा क साथ कैसा धोखा ? उसे उसके हिस्से का प्यार तुम दे रहे हो न. अगर वो भी सच्चे दिल से तुम्हे चाहती है तो वो इस बात को समझेगी . निधि भी तो हर हल में तुम्हारे साथ रहना चाहती है न तो रीमा क्यों नहीं कर सकती ऐसा . वैसे भी अभी उसे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं. बस निधि को बचाना है , अगर उसकी शादी किसी और से हो गयी तो वो जीते जी मर जाएगी . वो किसी और क साथ खुश रह hi नहीं पायेगी . उन रिश्तों का भी क्या फायदा जो बेमन से बनाये जाएँ और ज़िन्दगी भर उनका बोझ लिए इंसान अपनी अर्थी खुद hi उठता फायर.

अमित : इस उलझन का जवाब मेरे पास नहीं है ममी जी , आप हमेशा मेरी मदद करती रही हैं. इस बार भी जवाब आप को hi ढूंढना है . मैं किसी को दुःख नहीं देना चाहता . निधि दीदी क साथ कोई और रिश्ता बनाने पर सब पर इसका क्या असर होगा और उसका अंजाम क्या होगा ये बात मुझे कुछ भी सोचने से रोकती है. वर्ण मैं निधि दीदी से कितना प्यार करता हूँ ये आप भी जानती हैं. उम्मीद करता हूँ क आप मुझे पत्थर से इंसान बनने का मौका ज़रूर देंगी .

इतना कह कर मैं ममी क कमरे से निकल गया . ममी मुझे रोकना चाहती थी पर मैं तेज़ कदमो से निकल कर अपने कमरे में चला गया और जा कर अपने बिस्तर पर लेट गया. मुझे समझ नहीं आ रहा था क अब मैं क्या करूँ. आखिर निधि दीदी को मैं किस तरह वो ख़ुशी दूँ जो वो मुझसे चाहती हैं. नींद तो नहीं आ रही थी पर मैंने खुद को शांत करने की कोशिश करता ऑंखें मूंदे बस लेता रहा.

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‘ यार ये सब राधा को अकेला क्यों नहीं छोड़ते. जब देखो कोई न कोई उसके साथ चिपका hi रहता है. फ्री लेक्चर में मैंने उसे कैंटीन में आने को कहा तो वो रीमा उसके साथ लाइब्रेरी में चली गयी और अब ये कल्पना उसे अपने साथ ले गयी. मैं तो सोचा था आज उसे घर छोड़ने जाऊंगा तो थोड़ा टाइम मिल जायेगा अकेले में बात करने का . मगर उसे तो किसी राजकुमारी की तरह हर कोई गार्ड कर रहा है .’

कॉलेज से घर लौटने पर संजय मीनल क पास अपनी भड़ास निकल रहा था . मीनल उसकी बात सुन कर खिलखिला कर हंसने लगी. जिससे संजय को और बह गुस्सा आने लगा .

मीनल : सॉरी सॉरी , पर क्या करूँ तुम्हारी रोंदू सी शकल देख कर हंसी रोक नहीं पायी. क्या कह रहे थे तुम , लड़कियां खुद तुम्हारे पीछे आती हैं. अब देखो यहाँ एक लड़की से बात तक नहीं कर प् रहे हे हे हे.

संजय : तुम मेरा मज़ाक उदा रही हो? भूल गयी अपनी क्या डील हुई थी ? अगर मेरी मदद करोगी तो मैं तुम्हारी मदद करूँगा . तुम तो कुछ कर hi नहीं रही हो .

मीनल : अब मैं इसमें क्या करूँ तुम खुद hi बताओ. सब तुम्हारे सामने है. देखा न सब राधा का कितना ध्यान रखते हैं. और ये इस लिए नहीं क राधा खास है बल्कि इस लिए क राधा अमित की खास है. राधा क लिए वो कुछ भी कर सकता है और इसी लिए राधा की सब इतनी केयर करते हैं.

संजय : अब है तो बहिन hi न उसकी , कोई न कोई तो उसकी किस्मत में लिखा hi होगा तो मैं क्यों नहीं ? तुम बस इन मधुमक्खियों को दूर हटाओ. देखना राधा कैसे खुद hi मेरे प्यार में पागल हो जाती है. बस उसके साथ अकेले में अगर थोड़ा टाइम मिल जाये तो बात आगे बढ़े .

मीनल : थोड़ा सबर भी राखी इतने उतावले क्यों हो रहे हो? अभी तो आये हो और आते hi तुम्हे राधा चाहिए. कल्पना कल जा hi रही है. उसके बाद शीना शिवानी और रीमा hi हैं जो राधा को ड्राप करने जा सकती हैं. रीमा तो आजकल खुद मन क साथ आ रही है तो शीना और शिवानी का hi कुछ करना पड़ेगा. वैसे तो मुश्किल है पर फिर भी मैं कोशिश करती हूँ कुछ .

संजय : कल तो अमित और कल्पना जा hi रहे हैं तो क्यों न कल कहीं बहार जाने का प्रोग्राम बनाओ कोई मूवी या किसी पार्क में जाने का. तुम मोहित क साथ टाइम स्पेंड करना और मैं राधा क साथ. क्या कहती हो?

मीनल : राधा नहीं मानेगी यार , वो अमित क बिना कहीं नहीं जाती.

संजय : यार कुछ तो करो मेरी खातिर , तुम मेरी प्यारी बहिन नहीं हो. बदले में तुम्हे शॉपिंग करवाऊंगा .

मीनल : रिश्वत दे रहे हो ? ठीक है कोशिश करती हूँ कल. मोहित से कहती हूँ राधा उसकी बात मन सकती है .

संजय: हाँ ये hi सही रहेगा . उससे कहना क सिर्फ हम चार hi चलेंगे. बाकि सब को तैयार न करे .

मीनल : ाचा ाचा कह दूंगी. पर तुम खुद पर ज़रा काबू रखना. कोई गलत हरकत नहीं .

संजय : पागल समझा है क्या . मैं तो बस उसके साथ थोड़ा अकेले में टाइम चाहता हूँ .

मीनल : तो ठीक है कल चलते हैं फिर मूवी देखने.

मीनल इतना कह कर अपने रूम में चली गयी और संजय मन hi मन ख़ुशी से झूम उठा क कल उसे मौजा मिलने वाला है राधा क साथ अकेले में बात करने का .

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‘ क्या बात है तू कब से अपने कमरे में अकेला बैठा है ? कोई परेशानी है क्या ? ‘

मैं दीपिका ममी क रूम से आने क बाद से अपने कमरे में hi था. ऑंखें बंद कर क सोने की कोशिश तो बहुत की पर नींद कहाँ आणि थी. करीब 2 घंटे बाद कामिनी ममी ने आ कर मुझे बताया क माँ बुला रही है तो मैं उनसे मिलने चला आया उनके कमरे में . माँ बीएड पर बैठी थी और मुझे भी अपने पास hi बैठा लिया . मैं मुस्कुरा कर छुपाया तो बहुत पर शायद माँ समझ गयी. आखिर वो मुझे अचे से जानती थी.

अमित : वो कल मैं जा रहा हूँ न , एक हफ्ता अब बहार hi निकल जायेगा . ऐसे समय में मुझे आपके पास होना चाहिए और मैं हूँ क आपके पास बैठता भी नहीं .

गौरी : ाचा ! आज बड़ी फ़िक्र हो रही है मेरी ? सच बता बात क्या है ? मुझे पता है तू कुछ परेशां है.

अमित : आप न बिना बोले hi समझ जाती हैं.

गौरी : माँ जो हूँ , जब तुझे बोलना नहीं अत था न तब भी मैं समझ जाती थी. अब बता क्या बात है.

अमित : कुछ नहीं माँ बस एहि सोच रहा था क मैंने जो कुछ भी किया या जो कुछ भी कर रहा हूँ अगर उससे कल को सब नाराज़ हो गए तो . सब को बहुत दुःख होगा न . क्या मुझे माफ़ किया जायेगा या फिर मुझे सजा दी जाएगी .

मेरी बात सुन कर माँ एक डैम से सीधी हो कर बैठ गयी और गंभीरता उनके चेहरे पर नज़र आने लगी . मुझे गौर से देखते हुए वो प्यार से मेरा चेहरा सहलाते हुए बोली.

गौरी : तू कभी किसी क साथ गलत कर hi नहीं सकता. मुझे तुझ पर पूरा भरोसा है. तू जो भी करेगा दूसरों की ख़ुशी क लिए hi करेगा. अगर किसी की ख़ुशी क लिए कोई काम दूसरों की नज़र में गलत भी हो तो क्या हुआ , इंसान का अपना मन तो सही गलत सब जनता है न. और फिर मन में hi तो ईश्वर है , जिसे दुनिया बहार ढूंढती है वो कहीं दूर तो नहीं . हमारे अंदर hi है. और मन से किसी की ख़ुशी क लिए किया गया काम कभी गलत नहीं होता.

अमित : पर मैं ाचा इंसान नहीं हूँ माँ. मैंने बहुत कुछ गलत किया है. जो आप भी नहीं जानती और इससे बुरा क्या होगा क मैंने अपनी माँ क साथ hi ………

गौरी : शह्ह्हह्ह्ह्ह ,,,,, तूने कुछ गलत नहीं किया . वो सब भगवन की मर्ज़ी थी. चाहे मुझे भी वो सब गलत लगा था पर तब मैं सचाई नहीं समझ पायी थी. पर जब एहसास हुआ क तूने मेरी जान बचने क लिए वो सब किया तो मुझे एहसास हुआ क तूने तो वो hi किया जो मेरी जान बचने क लिए ज़रूरी था . और तूने भी क्या किया ये सब तुझसे उसी भगवन ने hi करवाया वर्ण तू ऐसा कुछ सोच भी नहीं सकता मुझे पता है. भगवन ने hi सब खेल रचाया था . और उसी क कारन तो मैं इस ख़ुशी को महसूस कर प् रही हूँ. माँ होने का एहसास तो तूने मुझे पहले hi करवा दिया था मेरी गॉड में आकर . बस एक एहसास हो गर्भ में पल रहे बचे से माँ को होता है वो नहीं था और वो भी तेरे कारन आज मुझे मिल पाया है. कोई चाहे कुछ भी कहे , चाहे साडी दुनिया तेरे खिलाफ क्यों न हो पर मैं हमेशा तेरे साथ रहूंगी. क्यूंकि मैं जानती हूँ तू किसी क साथ गलत कर hi नहीं सकता . इस लिए अब मन छोटा मत कर . और ख़ुशी ख़ुशी जा , मैं तुझे जीत ते हुए देखना चाहती हूँ चाहे वो खेल का मैदान हो या ज़िन्दगी का

माँ की बात सुन कर मेरा मन भर आया और मैं माँ की गॉड में hi सर रख कर उनसे लिपट गया . माँ भी प्यार से मेरा सर सेहला रही थी .

अमित : मैं आपकी गॉड से पैदा क्यों नहीं हुआ माँ , मैं आपकी गॉड से पैदा क्यों नहीं हुआ.

गौरी : इस लिए क तू मेरी गॉड भर सके , अब बच्चों की तरह रोना बंद कर . तू मेरा बीटा है और हमेशा मेरा बीटा रहेगा . तेरी जगह ये नन्हा शैतान भी नहीं ले पायेगा जो तेरे जैसा hi है. बेवजह परेशां करने लगा है आजकल

माँ ने गंभीरता में ये बात मज़ाक से कही मुझे हलके हाथों से चपत मरते हुए . मैं उनको मुस्कुराता देख मन hi मन बहुत खुश हुआ और माँ क पेट को चूम लिया.

अमित : काश ये मेरे जैसा न हो, इसे आप अपने जैसा बनाना माँ. मेरे जैसा बना तो ये कहीं आपको शर्मिंदा न कर दे .

गौरी : एक लगाउंगी तुझे अब दोबारा कुछ और कहा तो. तेरे जैसा बीटा तो किस्मत से मिलता है. मुझे नहीं चाहिए ये भी. मुझे सिर्फ तू hi बहुत है. चल अब उठ और बुला दीपिका को , कुछ बनाया भी है क नहीं. कल तू जा रहा है काम से काम आज तो ाचा खाना खा घर का. बुला ज़रा उसे .


माँ की बात सुन मैं उठा और अपना चेहरा साफ़ करते हुए एक बार माँ क गले मिला और फिर छोटी ममी को बुलाने चला गया .

अपडेट अब हफ्ते में एक दिन hi आएगा दोस्तों .
 
भाई लोगो मैं ये कहानी यहीं रोक रहा हूँ.
 
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