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‘ आ गए मिस्टर ? मुझे लगा कहीं आज hi गाओं न निकल जाओ . बुआ तुम्हारी वेट कर रही हैं अंदर .’
मैं मंजू बुआ क घर पहुंचा तो बाइक की आवाज़ सुन कर hi रीमा ने दरवाज़ा खोल दिया और मेरे आते hi मुस्कुराते हुए ये बात कही. उसकी आँखों में शरारत देख मुझे भी शरारत सूझी और मैंने वहीँ दरवाज़े पर hi तेज़ी से उसके होंठों पर किश कर दी.
अमित : उमंमाहहह ,, बुआ इंतज़ार कर रही थी , तुम नहीं ?
रीमा : गंदे ,,, अभी का या बुआ देख लेती तो?
अमित : देखने दो
रीमा : ाचा , इतनी हिम्मत . तो चलो चल क बुआ क सामने करो ये हरकत फिर देखती हूँ .
अमित : सोच लो , बाद में पछताना मत फिर
रीमा : तो क्या सच में तुम बुआ क सामने ये सब कर डोज ? बेशरम !
अमित : अब क्या करें , प्यार ने हमें बेशरम बना दिया है तो क्या किया जा सकता है . आज कुछ करो न यार , बड़ा मन कर रहा है आज .
दिव्या मौसी क साथ सुबह जो कुछ हुआ था उस वजह से आज सारा दिन hi मैं अंदर से गरमी महसूस कर रहा था इस लिए सोचा क रीमा से hi बात कर क देखूं .
रीमा : बिलकुल भी शर्म नहीं है न तुम्हे? वो सब शादी क बाद .
अमित : यार प्लीज एक बार , मुझसे आज कण्ट्रोल नहीं हो रहा
रीमा : क्यों ? आज ऐसा क्या हो गया ?
अमित : बस यार , कुछ कर दो न प्लीज .
रीमा : पर यहाँ मैं क्या कर सकती हूँ . माँ और बुआ दोनों घर hi हैं.
‘ अब क्या दरवाज़े पर hi खड़ा रखोगी उसे रीमा ? आ जाओ अब अंदर’
ये आवाज़ मंजू बुआ की थी जो हॉल से आ रही थी. बुआ की आवाज़ सुन कर रीमा जल्दी से दरवाज़ा लॉक कर क हॉल की तरफ हो ली और मैं उसके पीछे. टीशर्ट लोअर पहने रीमा कमल की लग रही थी. मतलब कमल की तो थी hi पर इन ढीले कपड़ों में उसके खास अंग काफी थिरक रहे थे जो मुझे अपनी तरफ खिंच रहे थे . हम दोनों हॉल में आये जहाँ बुआ और रुपाली चची बैठी हुई थी. मुझे देख कर दोनों क चेहरे पर स्माइल आ गयी. रीमा कॉफ़ी बनाने का कह कर किचन में चली गयी . रुपाली चची आज रॉयल ब्लू सूट में थी और कमल की लग रही थी . रीमा भी उनके आगे फेर की लग रही थी आज तो. खुले घुंघराले बाल और दूध से भी गोरा रंग जो इस नीले रंग में कहीं ज्यादा दमक रहा था . और उनके खूबसूरत चेहरे पर वो दिलकश स्माइल . जिसे देख मैं उसी में खो सा गया .
रुपाली : क्या हुआ कहाँ खो गए ? जवाब hi नहीं दे रहे ?
अमित : हह हाँ हांजी , जी आपने कुछ कहा ?
मंजू : हे हे हे, लगता है आज ज्यादा hi एक्सरसाइज करवा दी कोच सर ने . भाभी पूछ रही हैं घर सब कैसे हैं?
अमित : जी सब ठीक हैं , आप कैसी हैं ?
रुपाली : मैं भी ठीक हूँ. वैसे , क्या सच में ज्यादा थक गए हो ?
अमित : नहीं हाँ , मतलब कोई खास नहीं , आज कुछ ज्यादा बी एक्सरसाइज कर ली न .
मंजू : तो क्या सच में तुम कल गाओं जा रहे हो ?
अमित : जी
मंजू : इसका मतलब अब हफ्ते बाद बी मिलोगे ?
रुपाली : इतने दिन क लिए जा रहे हो ?
अमित : वो असल में कम्पटीशन तो मंडे से हैं पर और हमें एडवांस में ले क जा रहे हैं ता की सब रेस्ट कर क अचे से फ्रेश हो सकें कम्पटीशन से पहले .
मंजू : मैं तो सोच रही थी क अभी एक दिन और हो तुम यहां . पर तुम तो कल सुबह hi चले जाओगे
अमित: आप से तो मिल कर hi जाऊंगा न बुआ .
रुपाली : मुझसे नहीं मिलोगे जाने से पहले ?
अमित : आप क पास तो अभी आ गया हूँ देखिये .
रुपाली : बातें बनाना खूब अत है तुम्हे . ऊपर ऊपर से तो कह देते हो पर बाद में टाइम hi नहीं होता तुम्हारे पास किसी क लिए
मंजू : अब बेचारा करे भी तो क्या . इतने काम और अकेली जान . ऊपर से सब इसी शहर में हैं किस किस को टाइम दे.
रुपाली : बात तो तुम्हारी भी सही है.
इतने में रीमा कॉफ़ी ले आयी और सब कॉफ़ी पिने लगे . रीमा से जब भी मेरी नज़र मिलती तो वो शरारत भरी नज़रों से मुझे देख कर हंस देती. जैसे चिढ़ा रही हो. कुछ देर बाद रुपाली चची खाना बनाने का कह कर चल दी किचन में. रीमा को भी उन्होंने अपने साथ ले लिया . मैं यहाँ रीमा क साथ वक़्त बिताने का सोच रहा था मगर रुपाली चची तो उसे साथ hi ले गयी. रीमा भी मुझे बना कर चिढ़ाती हुई गयी.
मंजू : कितनी मजबूर हूँ मैं भी , तुम्हे अपने पास रखना चाहती हूँ मगर …..
मंजू बुआ ने रीमा और रुपाली चची क जाते hi एक डैम से सीरियस होते हुए कहा तो मैं उनकी तरफ गौर से देखने लगा . आखिर मैं भी तो चाहता था क उनके पास रहूं पर वो खुद hi तो चाहती थी क किसी को पता न चले मेरे बारे में .
अमित : मैं भी तो चाहता हूँ बुआ क आपके पास hi रहूं. माँ पापा क बारे में आपसे ढेर साडी बातें करूँ. पर आप खुद hi मुझे अपने से दूर रखे हुए हैं.
मंजू : तुझे मैं खुद से दूर तो छह कर भी नहीं कर सकती . तू चाहे मेरे सामने रहे या न रहे . मेरे दिल मेरे दिमाग में तू hi रहता है .
अमित : तो फिर मुझे अपने पास क्यों नहीं रहने देती. आपको किसी से डरने की ज़रूरत नहीं. मैं हूँ न .
मंजू : नहीं अमित , मुझ में इतनी हिम्मत नहीं क मैं तुम्हारे साथ कुछ गलत होता देख सकूँ. भाई क जाने क बस बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला था . पर ऊपर वाले को मुझ पर तरस आ गया जो तुम्हे फिर से मेरे पास भेज दिया . मैं अब तुम्हे फिर से खोना नहीं चाहती. किसी कीमत पर भी नहीं.
अमित : बुआ ,,, आप ऐसा क्यों सोचती हैं क कोई मुझे आपसे चीन लेगा ? मैं आपको छोड़ कर कहीं नहीं जाने वाला. बल्कि आप खुद hi मुझे अपने आप से दूर रख रही हैं. क्या मेरा दिल नहीं करता क मैं आपके साथ रहूं ? अपनी बुआ क साथ .
मंजू : अगर भाभी और रीमा की चिंता न होती तो क्या मैं तुम्हे कहीं और जाने देती ? तू अब कम्पटीशन पे जाने वाला है और देख मेरा अभी से बुरा हल हो रहा है जैसे तू मुझसे कहीं दूर जा रहा है , जैसे मुझसे मेरा दिल कोई चीन क लिए जा रहा है.
अमित : बाआ
बात करते करते मंजू बुआ की ऑंखें भर आयी थी . मैं भी भावनाओं में बह गया और बुआ को अपनी बाँहों में भर लिया . बुआ ने भी मेरी पीठ पर बहन कास ली. आज कितने hi दिनों बाद बुआ को मैंने गले लगाया था . बहुत hi ाचा लग रहा था मुझे बुआ को गले लगते हुए .
मंजू : चल अब छोड़ , आज रत यहीं रुक जा न मेरे पास . दिव्या दीदी बुरा तो नहीं मानेगी न ?
अमित : वो बुरा क्यों मानेंगी? वो भी तो आपसे प्यार करती हैं.
मैंने अपनी जेब से मोबाइल निकला और मौसी को फ़ोन लगा दिया . मैंने उन्हें बताया क आज मैं यहीं रुकने वाला हूँ. मौसी ने भी ज्यादा कुछ नहीं कहा और बुआ से बात भी की. जब बुआ मौसी से बात कर रही थी तो मैंने देखा रीमा छिप कर सब सुन रही थी और उसके चेहरे पर एक स्माइल थी. मैं बुआ को मौसी से बात करता छोड़ कर सीधा रीमा क पास गया और उसे बाँहों में जकड लिया .
रीमा : ये क्या कर रहे हो , हतोऊ ,, माँ आ जाएगी ,, छोडो मुझे .
अमित : अब बोलो जान , आज रत तो मैं यहीं रुकने वाला हूँ. अब तो तुम्हे मेरी बात माननी पड़ेगी . आज रत ……
रीमा : हतोऊ , तुम्हे तो बस एक hi कल अत है. गंदे बचे ,, और तुम मेरे लिए नहीं अपनी बुआ क लिए रुक रहे हो यहाँ. तो भी क पास सोना आराम से . मैं यहाँ अपनी माँ क साथ सोती हूँ समझे .
अमित : अब इतना ज़ुल्म तो मत करो, मैं कितना तड़प रहा हूँ तुम्हे ज़रा भी एहसास है ?
रीमा : अपनी तड़प अपने पास रखो मर . बुआ को या माँ को पता चल गया न सब ख़तम हो जायेगा समझे .
अमित : इसका मतलब तुम मुझे प्यार नहीं करती.
मैंने जान बुझ कर मुँह बनाते हुए कहा और रीमा को छोड़ दिया . रीमा एक डैम से हस्ती हस्ती सीरियस हो गयी .
रीमा : अगर तुम्हे मेरे प्यार को परखना है तो लो , कर लो जो करना है . मैं खुद hi अपने कपडे उतर देती हूँ.
रीमा अपनी T-shirt उतरने लगी तो मैंने उसे रोक दिया और उसे फिर से बाँहों में भर लिया . उसके इस तरह करने से मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ.
अमित : मुझे माफ़ कर दो रीमा . मैं तो बस ….. ी ऍम सॉरी
रीमा : फिर कभी ऐसा मत कहना क मैं तुम्हे प्यार नहीं करती . तुम कहोगे तो अपनी जान भी दे दूंगी. अपना सब कुछ तो पहले hi तुम्हे सौंप चुकी हूँ बस अब ये जान hi है , इस पर भी हक़ अब तुम्हारा hi है. मैं तुम्हे किसी चीज़ क लिए मन नहीं कर सकती . पर माँ और बुआ क सामने अगर ये बात आयी तो क्या होगा . मैं जानती हूँ तुम्हारा दिल है पर ,,,,, रत को माँ और बुआ क सोने क बाद छत पर मिलते हैं.
रीमा सच में कितना प्यार करती थी मुझसे जो मेरी ख़ुशी की लिए फिर से मन गयी. पर मैं अब उसे मजबूर नहीं करना चाहता था .
अमित : नहीं , हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे . तुमने कहा था न क अब शादी क बाद करेंगे तो अब शादी क बाद hi करेंगे . मैं कण्ट्रोल कर लूंगा .
रीमा : नहीं , मुझे ाचा नहीं लगेगा तुम मेरी वजह से तड़पते रहो. वैसे भी मैं तन मन से सिर्फ तुम्हारी hi तो हूँ . सब कुछ तुम्हारा है तो आज क्या और कल क्या .
अमित : मैं जनता हूँ सब मेरा है. पर मैं तुम्हारी ीचा क खिलाफ भी नहीं जाना चाहता . प्यार सिर्फ जिस्म को हासिल करने तक तो नहीं है न ? मुझे तुम्हारा प्यार चाहिए जिस्म नहीं. और अब और कोई बात नहीं . जाओ अब किचन में कुछ काम भी कर लो .
रीमा : भीगी आँखों से ) ी लव यू सो मच … उम्मम्मम्माह्ह्ह
रीमा ने भावुक हो कर एक प्यार भरी किश मेरे होंठों पर की और मुस्कुराती हुई अपनी ऑंखें साफ़ करती किचन में चली गयी. मैं भी मुस्कुराता उसे जाते हुए देख वापिस बुआ क पास आ गया . उनकी बातचीत भी ख़तम हो गयी थी और उन्होंने कॉल काट दी.
मंजू : दिव्या दीदी तो मान गयी पर मुझे लगता है वो चाहती थी क तुम उनके पास रहो.
अमित : इतने दिनों से तो उनके पास hi हूँ. आज अपनी बुआ क पास रह लूंगा
मंजू बुआ ने मुस्कुरा कर मेरे माथे को चूमा और मैंने भी उन्हें बाँहों में कास लिया . बुआ ने जल्दी hi मुझे पीछे हटा दिया और मुझसे नज़रें चुराने लगी .
मंजू : अमित ज़रा ध्यान रखा करो. भाभी को पता नहीं चलना चाहिए. तुम बैठो मैं ज़रा देख कर आयी खाना बना क नहीं .
बुआ जल्दी से उठ कर चली गयी. शायद वो रीमा और रुपाली चची की वजह से दर रही थी . फिर कुछ देर बाद खाना बन गया और रीमा बुआ क साथ खाना टेबल पर लगाने लगी. रुपाली चची भी उनके पीछे आ गयी हाथ में एक डिश पकडे हुए
रुपाली : शुक्र है आज तुम हमारे साथ खाना खाने क लिए रुक गए
मंजू : सिर्फ खाना hi नहीं , आज ये हमारे पास hi रुकने वाला है रत को
रुपाली : मेरी तरफ देखते हुए ) सच में ?? फिर तो ढेर साडी बातें करेंगे . कितने दोनों बाद मौका मिला है
मंजू : भाभी !!!! आप भी बच्चों क साथ बची बन गयी. कल सुबह इसे जल्दी गाओं क लिए भी निकलना है. देर से सोयेगा तो सुबह देर से उठेगा फिर .
रुपाली : तो क्या हुआ घर hi तो जाना है .
मंजू : चलिए पहले खाना तो खा लीजिये . भूखे रखना है क्या इसे आज ? वैसे आपने तो काफी कुछ बना डाला .
रुपाली : अब ये कहाँ रोज़ रोज़ हमारे साथ खाना खता है तो सोचा आज इसे अचे से खिला देते हैं.
अमित : अरे आंटी ऐसा भी नहीं है . मैं तो यहीं हूँ रोज़ hi आपके पास अत हूँ. एक hi बार में खिला देंगी तो मेरी हालत ख़राब हो जाएगी.
रुपाली : कुछ नहीं होता , अभी तो पूरे जवान हो और ऐसे दर रहे हो . चलो बैठो यहाँ पर जल्दी से . खाना खा कर बताना क कैसा बना है
रुपाली चची क हाथों में वाकई में जादू था . खाना बहुत hi स्वादिष्ट बना था . मैंने रुपाली चची की खूब तारीफ की और मज़े से खाना खाया. इस दौरान रीमा आँखों hi आँखों में मुझे इशारे करती और मुस्कुरा देती. बातों बातों में खाना हो गया और रुपाली चची क साथ रीमा किचन में काम ख़तम करवाने लगी. मंजू बुआ ने मुझे अंदर से दूसरे कपडे निकल कर दे दिए पहनने क लिए . और मेरा बिस्तर वहीँ हॉल में सेट कर दिया. क्यूंकि रीमा तो रुपाली चची क साथ सोने वाली थी और मुझे बुआ अपने पास सुला नहीं सकती थी चची की वजह से पर उनका मन था क मैं उनके पास hi रहूं. खैर कुछ देर सब साथ में बैठ कर बातें करते रहे और फिर बुआ क कहने पर रीमा रुपाली चची की साथ अपने कमरे में चली गयी और बुआ भी मुझे गुड नाईट बोल कर अपने कमरे में चली गयी . मैं अभी लेता hi था क मेरा फ़ोन बजने लगा . मैंने देखा तो राधा की कॉल थी. इतनी रत को राधा मुझे कॉल कर रही थी जबकि इस टाइम तो वो अपने कमरे में सो रही होती थी . मुझे लगा कहीं कोई गड़बड़ तो नहीं है . मैंने जल्दी से उसकी कॉल अटेंड की.
अमित : hello राधा , इस वक़्त , कोई परेशानी तो नहीं है न ?
राधा : हाँ , परेशानी है , इसी लिए इस वक़्त फ़ोन किया .
अमित : क्या हुआ क्या परेशानी है ? तुम ठीक तो हो न ? मौसी ठीक तो हैं ?
राधा : माँ ठीक है और मैं भी , परेशानी ये है क मुझे नींद नहीं आ रही .
अमित : ओह्ह तुमने तो मुझे डरा hi दिया था . पर तुम्हे नींद क्यों नहीं आ रही ?
राधा : पहले तुम बताओ तुम आज वहां क्यों रुक गए ? तुम्हे पता है न तुम कल जा रहे हो . काम से काम आज रत हमारे पास hi रुक जाते . मैंने सोचा था आज साडी रत तुम्हारे साथ बातें करुँगी
अमित : है है है, फिर तो ाचा hi हुआ न क मैं यहीं रुक गया . वर्ण तुम सुबह कॉलेज कैसे जाती ?
राधा : नहीं जाती तो क्या हो जाता ? वैसे भी तुम तो कल कॉलेज होंगे नहीं तो मेरा मन नहीं लगेगा .
अमित : अभी दोपहर में hi तो मैंने तुम्हे समझाया था और फिर से तुम वही बातें करने लगी .
राधा : मुझे नहीं पता , मुझे तुम्हारे साथ आज बातें करनी थी और तुम वहीँ रुक गए . तुम बहुत गंदे हो .
अमित : ाचा मैं गन्दा हूँ ? तो बात क्यों कर रही हो फिर मेरे साथ ?
राधा : क्यूंकि इस गंदे इंसान को ठीक भी मैंने hi करना है. नहीं तो सब मुझे hi कहेंगे क मैंने ध्यान नहीं रखा .
अमित : ाचा !! मगर तुम्हे कोई कुछ क्यों कहेगा ?
राधा : बुद्धू ,,, बुद्धू , बुद्धू , बुद्धू . एक no. क बुद्धू हो तुम. तुम्हे कुछ समझ अत hi नहीं . अब सुबह मुझे तुम hi आ कर उठाओगे वर्ण मैं कॉलेज नहीं जाने वाली पहले hi कह देती हूँ हाँ .
अमित : मैं क्यों आऊं उठाने ? अभी तो मुझे तुम बुद्धू बोल रही थी .
राधा : क्यूंकि तुम हो hi बुद्धू . और अगर सुबह न आये तो मैं तुमसे बात नहीं करुँगी देख लेना .
अमित : मैं नहीं आऊंगा, बुद्धू बोल रही हो न मुझे तो अब खुद hi उठना और खुद hi जाना कॉलेज .
राधा : तुम आओगे आओगे और ज़रूर आओगे . मुझे पता है. इस लिए अब टाइम से सो जाओ वर्ण देर से उठोगे और मुझे भी लेट करवाओगे. टाइम से आ जाना , तुम्हारे आने तक मैं ऑंखें नहीं खोलने वाले . कह देती हूँ. अब सो जाओ . गुड नाईट .
आर्डर देने वाले लहजे में राधा ने ये सब कहा और खुद hi कॉल काट दी जैसे वो कुछ और जवाब सुन्ना hi नहीं चाहती थी. मैं भी तो उसके साथ मज़ाक hi कर रहा था भला मैं राधा को किसी बात क लिए मन hi कब करता था . अभी मैं सोच में गम था क फिर से मेरा फ़ोन बीप हुआ . रीमा का मैसेज था . वो कह रही थी क वो मेरे पास आना चाहती है पर माँ जग रही है . खैर मैंने भी उसे आराम से सोने को कहा . कुछ देर हम चाट करते रहे और फिर एक दूसरे को गुड नाईट बोल दिया . आज मैंने बाकि सब क मैसेज भी देखे और उन सब को रिप्लाई भी किया . कल्पना नैना दीदी करुणा दीदी शिवानी शालू क मैसेज थे . और आज रीना को भी खुद से hi मैंने मैसेज कर दिया . कुछ hi देर में उसकी कॉल आ गयी.
रीना : आज सूरज पश्चिम से निकला है न ? मैं बिजी थी तो मैंने ध्यान नहीं दिया . पर पक्का पश्चिम से hi निकला होगा .
अमित : अब ऐसी बात भी नहीं है. एक तो खुद आज मैंने आप से बात करि और आप हैं क उल्टा मेरा मज़ाक उदा रही हैं. जाइये आप अपना काम करिये मैं सोने जा रहा हूँ.
रीना : अरे अरे , मैं मज़ाक भी नहीं कर सकती क्या ? ाचा छोडो , ये बताओ आज इतनी देर तक कैसे जग रहे हो ? और आज मेरी यद् कैसे आ गयी.
अमित : यद् तो उनको किया जाता है जिन्हे भूल जाये आदमी . और आप तो हमेशा मेरे दिल में हैं.
रीना ( मन में ) तो एक बार मुँह से कह दो न , सिर्फ एक बार . मैं तो कब से इंतज़ार में हूँ . कब ये कोर्स ख़तम हो और मैं तुम्हारे पास पहुँच सकूँ बस दिन hi तो गईं रही हूँ.
अमित : वैसे आप गेस करो मैं कहाँ हूँ इस वक़्त .
रीना : आए ,,, ममम ,, दिव्या मौसी क घर , राइट ?
अमित : no
रीना : क्या गाओं चले गए तुम 2 दिन पहले hi ?
अमित : no
रीना : तो रीता मौसी क घर ?
अमित : no .
रीना : रजनी मौसी ?
अमित : no .
रीना : ओह्ह्ह मतलब आज मोहित क घर हो ?
अमित : no
रीना : तो फिर कहाँ हो यार ? मैंने तो सब का नाम ले लिया . अब और कौन रह गया ?
अमित : मंजू बुआ को भूल गयी आप ?
रीना : तो क्या तुम मंजू बुआ क घर पर हो ? पर ये सब कैसे ? मतलब तुम्हारी तो वो मैडम हैं न ? वो कैसे मन गयी ?
अमित : क्यों आप भूल गयी क्या मेरी hi वजह से तो आप उनसे मिली हैं . वैसे आपको रीमा ने बताया hi होगा क हमारा एक रिश्ता भी है .
रीना : हाँ बताया है , और उस रिश्ते से हम बह रिश्तेदार हुए मगर दूर क. अब ये मत कह देना क हम कौसिन्स हैं क्यूंकि मैं पहले वाले रिश्ते से hi खुश हूँ और कोई दूसरा रिश्ता नहीं चाहिए मुझे .
कुछ देर और मैंने रीना क साथ की फिर उसने खुद hi मुझे सोने को कह दिया क्यूंकि इधर 12 बजे से ज्यादा टाइम हो गया था . मैंने कॉल काट कर अभी फ़ोन रखा hi था क मुझे हलकी सी आवाज़ सुनाई दी. घर में एक डैम सन्नाटा था. ऐसे में ज़रा सी भी आवाज़ सुनाई पद जाती है. मैं रीना क साथ धीमी आवाज़ में बात कर रहा था पर अब जो आवाज़ आयी थी उसे मैं सुन कर चौंक गया था. क्यूंकि ये किसके सिसकने की आवाज़ थी. इस वक़्त ये किसकी आवाज़ आ रही है ये सोचते hi मेरा दिमाग घूम गया . मैं जल्दी से उठा और नंगे पाऊँ hi चल दिया आवाज़ की दिशा में . बिना आवाज़ किये मैं आगे बढ़ रहा था और आवाज़ थोड़ी थोड़ी तेज़ हो रही थी . मुझे इतना तो समझ आ गया था क ये एक औरत क सिसकने की आवाज़ थी वो भी वासना से भरी . घर में अँधेरा था पर बाथरूम क दरवाज़े क नीचे से थोड़ी रौशनी बहार आ रही थी यानि क कोई बाथरूम में था . पर कौन ? मंजू बुआ या रुपाली चची. मैं धड़कते दिल क साथ आगे बढ़ा और बाथरूम क दरवाज़े तक पहुँच गया . मेरा दिल तेज़ धड़क रहा था पर लैंड महाराज तो ऐसे उठ क खड़े हो गए जैसे उनकी सरे दिन की गरमी निकलने का जरिया मिल गया हो. मैंने दरवाज़े से कान लगा कर आवाज़ सुनी तो सिसकियाँ तेज़ सुनाई दी. यानि क अंदर जो भी थी वो अपनी छूट से खेल रही थी. मैंने दरवाज़े पर हाथ रख थोड़ा सा ज़ोर लगाया तो दरवाज़ा खुलता चला गया. सामने का दृश्य देख कर मेरा लैंड बेकाबू हो गया . सामने कमोड पर बैठी रुपाली चची एक तंग उठे दीवार पर पाऊँ टिकाये अपनी मैक्सी को पेट तक उठा कर तेज़ी से अपने हाथ से अपनी छूट मसल रही थी और दूसरे हाथ से अपने बूब्स मसल रही थी. मज़े में उनकी ऑंखें बंद थी और वासना से दमकता चेहरा लाल हुआ पड़ा था . खुले घुँघराले बाल फैलाये वो किसी और hi दुनिया में थी. रुपाली चची का ये रूप देख मैं भी होश खोने लगा . एक डैम गोरी चिट्टी मांसल टंगे जो मुझे अपनी और आकर्षित कर रही थी और उनकी गुलाबी छूट जो उनकी उँगलियों को भिगो रही थी . मैं पहले तो सोच रहा था क मुझे वहां से हैट जाना चाहिए पर एक तरफ दिमाग ये भी कह रहा था क रुपाली चची की ज़रूरत और कौन पूरा करेगा. वो ऐसे hi तड़पती रहेंगी तो कहीं वो मज़बूरी में कोई गलत कदम न उठा लें. इस लिए रुपाली चची को थोड़ी ख़ुशी तो दे hi देनी चाहिए . पर रीमा का सोच दिल में एक आवाज़ ये भी आयी क ये गलत होगा . कहीं रीमा को पता चला तो ??? मैं इसी सोच में पद गया पर मैं दरवाज़े से अंदर आ चूका था मगर रुपाली चची को अभी तक एहसास न हुआ था . मेरे पाऊँ वहीँ जैम गए थे , मुझे आगे बढ़ाना है या वापिस जाना है ये फैसला नहीं हो प् रहा था पर लैंड महाराज कहाँ सुनते हैं किसी की . मैं रुपाली चची को देख कर फिर से सब भूल गया और आगे बढ़ कर मैंने उनका वो हाथ पकड़ लिया जिससे वो अपनी छूट मसल रही थी . मेरे हाथ पकड़ते hi रुपाली चची एक डैम से हड़बड़ा गयी और जल्दी से सीधी हो गयी. मुझसे नज़रें मिलते hi उन्होंने शर्म से नज़रें झुका ली
अमित : आप खुद को यूँ सजा क्यों दे रही हैं ? आपको ज़रूरत थी तो मुझे कह दिया होता .
रुपाली : मैं क क कक कैसे ,,, रर रीमा क्या …..
रुपाली चची की ज़ुबान लड़खड़ा रही थी . मैंने उन्हें होंठों पर उंगली रख कर उन्हें हुई करवा दिया .
अमित : रीमा को कुछ पता नहीं चलेगा . और न hi मैं आपको ऐसे तड़पने दूंगा .
इतना कह कर मैंने रुपाली चची की कमर में हाथ दाल उन्हें अपने साथ सत्ता लिया और उनके गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए . पहले तो रुपाली चची क होंठ बस थरथरा रहे थे पर जल्द hi वो भी साथ देने लगी . क्यूंकि गरम तो वो पहले से hi थी. मेरे बालों में हाथ चलते हुए वो मेरे साथ अपना जिस्म रगड़ती हुई मुझे किश कर रही थी . मेरे अंदर भी गर्मी एक डीएम से बढ़ गयी थी जो सुबह से hi भरी पड़ी थी. मेरा लैंड रुपाली चची की छूट क ऊपर hi ठोकर मर रहा था. मैंने अपने हाथ चची की गांड पर रखे और उन्हें मसलने लगा . चची भी पागलों की तरह अब मुझे किश कर रही थी
रुपाली : उम्मम्मम कक्कक्स उम्मम्मम मैं बहुत तड़प रही हूँ अमित मेरी ये तड़प मिटा दो उम्म्म्म कक्कक्कक्स उनममममम
अमित : आज आपकी साडी तड़प मिटा दूंगा उम्मम्मम
मैंने चची की गांड मसलते हुए उन्हें ऊपर उठा लिया और उनकी टंगे अपनी कमर पर लपेट ली. चची मेरे गले में बहन दाल पूरी तरह मेरी गॉड में सवार हो गयी और मैं उन्हें ऐसे hi गॉड में उठाये बाथरूम से निकल कर सीधा हॉल में ले आया और अपने बिस्तर पर लिटा दिया . चची बहुत ज्यादा गरम हो चुकी थी इस लिए लेट ते hi उन्होंने अपनी टंगे उठा ली और अपनी मैक्सी पेट पर इकट्ठी कर ली. मैंने भी जल्दी से अपने लोअर और अंडरवियर को नीचे किया और अपना लैंड चची की देहाती छूट पर रखा जो पानी बहा रही थी . मैंने ज्यादा समय ख़राब नहीं किया और हल्का सा धक्का लगा कर सुपडे को छूट में घुसा दिया . चची ने एक लम्बी सिसकी ली. मैं उनकी आवाज़ बंद करने क लिए उनके ऊपर झुका और उनके होंठ अपने होंठों में दबा लिए . अगले hi पल मैंने एक ज़ोर दर धक्का मर का पूरा लैंड एक hi बार में जड़ तक छूट में घुसा दिया . रुपाली चची एक डैम से चिहुंक पड़ी पर उनकी आवाज़ मेरे होंठों में hi कैद हो कर रह गयी. रुपाली चची ने मेरी कमर पर अपनी टंगे कास ली और मेरी पीठ पर अपने हाथ रख कास लिया. वो मुझे जैसे हिलने नहीं देना चाहती थी शायद काफी दिनों बाद मेरा लैंड ले रही थी तो उन्हें दर्द हुआ होगा. कुछ देर मैं हलके हलकी अपनी कमर हिलाया रहा और फिर रुपाली चची भी अपनी कमर हिलने लगी. अब उनके हाथ मेरी पीठ पर फिसल रहे थे और उनकी टांगों की पकड़ भी ढीली पद गयी थी. मैं भी अब खुल क उनकी चुदाई करना चाहता था . रुपाली चची की टंगे खोल कर मैं ऊपर उठा ली और दे दाना दान धक्के मरने लगा . रुपाली चची मज़े में सिसकियाँ लेती खुद hi अपने बूब्स दबा रही थी. मैं उनकी कोमल टैंगो को चूमता हुआ पूरे जोश में धक्के मर रहा था . रुपाली चची भी अपनी आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही थी पर फिर भी उनके मुँह से मज़े की सिसकियाँ निकल रही थी . मैंने रुपाली चची क दोनों पाऊँ अपने कंधे पर रखे और उनके ऊपर झुक गया. रुपाली चची क चूतड़ बीएड से थोड़ा ऊपर उठ गए और उनके घुटने उनके बूब्स पर आ गए . मैंने अपने पाऊँ बीएड पर टिका लिए और पूरी तरह रुपाली चची पर सवार हो कर उनके कंधे पाकर तूफानी रफ़्तार से गहरे और ज़ोरदार धक्के मरने लगा . कुछ hi पलों में रुपाली चची की छूट डैम तोड़ गयी और उनकी छूट भर भरा कर बहने लगी . अब उनसे मेरे धक्के सहने मुश्किल होने लगे तो मैंने उनके ऊपर से उतारते हुए लैंड छूट से निकल लिया जो उनके पानी से पूरा नहाया हुआ था . रुपाली चची काफी दिनों से प्यासी थी जो इतनी जल्दी और इतना ज्यादा झड़ी थी. मगर अब मेरा बुरा हल हो गया था और मैं अपना पानी निकलना चाहता था . रुपाली चची ऑंखें बंद कर क अपनी टंगे अपने पेट से समेटे लम्बी साँसे ले रही थी मैंने उन्हें पकड़ कर बिठाया और उनकी मैक्सी उनके जिस्म से अलग कर दी. चची बस वो किये जा रही थी जो मैं चाहता था . अगले hi पल मैंने उन्हें बीएड पर hi कुटिया बना लिया और पीछे से उनकी छूट में एक झटके में लैंड घुसा दिया . चची फिर से हल्का सा चीखी पर मैं नहीं रुका और तब तक उनकी छूट में धक्के पेलता रहा जब तक क मेरा कम न हो गया . आखिरी धक्के मैंने मरते हुए मैं इतना आवेश में आ गया क चची बीएड पर hi गिर कर पेट क बल लेट गयी और मैं उनके ऊपर सवार हो कर ज़ोरदार ढंग से उनकी छूट फाड़ने में लगा रहा . आखिर कर मेरे लैंड ने उनकी छूट में उलटी की तो मुझे कुछ चैन मिला और मैं उनके ऊपर hi गिर गया. रुपाली चची भी एक बार फिर से झाड़ गयी और कम्पनी लगी . वो लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी. मैं उनकी पीठ और गर्दन चूमता हुआ बस खुद को होश में लाने की कोशिश कर रहा था. कुछ देर लगी हम दोनों को सँभालने में . फिर मैं उनके ऊपर से अलग हुआ तो वो उठ कर बैठ गयी. मुझे किसी की आहत सुनाई दी पर जब देखा तो कोई नज़र नहीं आ रहा था . मुझे लगा शायद मेरा वहां हो गए. रुपाली चची मुझसे नज़रें नहीं मिला रही थी. वो चुपचाप बीएड से उठी और अपनी मैक्सी उठाने लगी तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया . मुझे उनका इस तरह चुप रहना सही नहीं लग रहा था .
अमित : आप मुझसे नाराज़ हैं क्या ?
रुपाली : नं नहीं तो
अमित : तो फिर मुझसे नज़रें क्यों चुरा रही हैं.
रुपाली : हम दोनों क बीच ये ……
अमित : मैंने कहा न , रीमा को कुछ पता नहीं चलेगा . आप भरोसा रखिये. और ये आपकी ज़रूरत है. अगर आप अपनी बॉडी की ज़रूरत को ज़बरदस्ती दबाएंगी तो इसका आप पर गलत भी हो सकता है. मैं नहीं चाहता क आप क ऊपर किसी किसम का गलत प्रभाव पड़े , इस लिए आपकी हर ज़रूरत का मैं ध्यान रखूँगा . आप ये कभी भी मत सोचियेगा क मैं आपका फायदा उठा रहा हूँ
रुपाली : ऐसा मैं कैसे सोच सकती हूँ , जबकि मैं तुम्हे अचे से जानती हूँ. फायदा उठाना होता तो तुम मेरा क्या मेरी बेटियों का भी उठा सकते थे पर तुमने ऐसा कुछ नहीं किया . पर कभी कभी मुझे लगता है मैं गलत कर रही हूँ. रीमा तुमसे प्यार करती है और मैं फिर भी ,,, जबकि उस नाते तुम मेरे …..
अमित : इस बारे में आपको सोच कर खुद को दोष देने की ज़रूरत नहीं. ये सिर्फ आपको ज़रूरत को पूरा करने क लिए है . आप किसी को धोखा नहीं दे रही जबकि अभी तक कोई रिश्ता बना hi नहीं. वैसे उस नए गलत तो मैं भी कर रहा हूँ पर मैं इतना जनता हूँ क आपको ज़रूरत है . और किसी का ज़रूरत में साथ देना गलत नहीं होता .
रुपाली : तुम सच में बहुत अचे हो, मैं खुश हूँ क तुम हमारे पास हो.
माहौल थोड़ा सीरियस हो गया था तो मैंने उसे हल्का करने क लिए थोड़ा सा मज़ाक कर दिया .
अमित : अगर आप सच में खुश हैं तो क्या आज पीछे से भी करने देंगी .
मेरी बात सुन रुपाली चची सच में शर्मा गयी और मुझसे हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगी
रुपाली : हट बदमाश कहीं क , अभी आगे से मेरी इतनी बुरी हालत कर क मन नहीं भरा जो अब पीछे से भी करना चाहते हो .
अमित : अब मैं भी क्या करूँ , आप क पीछे का नज़ारा देख कर मेरा खुद पर काबू hi नहीं रहता
रुपाली : तुम वहां से कितने एब्नार्मल हो तुम्हे पता भी है ? मैंने कैसे तुम्हे सहा था वहां पर , ये मैं hi जानती हूँ.
अमित : एक बार तो दर्द होना hi होता है और वो आप सेह चुकी हैं. अब तो उतना दर्द नहीं होगा. प्लीज मन जानिए न .
रुपाली : बहुत ज़िद्दी हो तुम , अपनी बात मनवा क रहते हो .
इतना कह कर रुपाली चची ने अपनी मैक्सी छोड़ दी और मेरी तरफ पीठ कर क थोड़ा आगे को झुक गयी और मुझे अपनी गांड लहरा कर दिखने लगी . मैं तो उन्हें बस छेड़ रहा था पर वो सच में मान जाएँगी ये मैंने सोचा भी नहीं था . पर अब सामने का नज़ारा देख मुर्दे का लैंड भी खड़ा हो जाये तो मैं क्या चीज़ हूँ. गोर मुलायम खरबूजे मेरे सामने लहरा रहे थे और मैं अपना काबू खो बैठा . मैं एक डैम से उठा और नीचे बैठ कर रुपाली चची क चूतड़ों को दोनों हाथों में पकड़ क मसलता हुआ उन्हें चूमने लगा .
रुपाली : आआअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स उम्म्म क्या कर रहे हो कक्कक्क्स
अमित : आप की ये गांड कितनी दिलकश है ये मैं hi जनता हूँ. देखने वाले तो बस तड़प कर hi रह जाते होंगे उम्म्म्म
रुपाली : सब कुछ तुम्हारे लिए है कोई तड़पता है तो तड़पे कक्कक्क्स पर मेरा सब कुछ तुम्हारे नाम हो चूका है ककक
अमित : और आपकी ये गांड ?
रुपाली : ये भी तुम्हारी है कक्कक्स बस प्यार से करना बहुत दर्द होता है ककक
अमित : प्यार से hi करूँगा आपके साथ उम्म्म्म
कुछ देर मैंने रुपाली चची की गांड को मसला और उनकी छूट को भी छठा . फिर मैंने अपने लैंड पर थूक लगा कर वहीँ रुपाली चची को बीएड पर झुकाते हुए अपना लैंड चची की गांड में धीरे धीरे घुसाने लगा . लैंड का सूपड़ा घुसते hi चची दर्द से सिसकने लगी पर मैं धीरे धीरे आगे बढ़ता गया. चची की कासी हुई गांड में लैंड ऐसे लग रहा था जैसे गन्ने का रास निकलने वाली मशीन में घुसा दिया हो . और सच पूछो तो मैं उनकी गांड मरने से इतना एक्ससिटेड हो चूका था क लग रहा था मैं अभी झाड़ जाऊंगा . रुपाली चची का दर्द से ऐंठता जा रहा था और वो किसी तरह ये सब बर्दाश्त कर रही थी पर उन्होंने मुझे रोकने की कोशिश नहीं की. पूरा लैंड जड़ तक घुसा कर मैं चची की पीठ पर लेट सा गया . हम दोनों को पसीना आ चूका था . चची दर्द में थी मैंने उन्ही नंगी पीठ को चूमते हुए अपना एक हाथ नीचे ले जाकर उनकी छूट को मसलना शुरू कर दिया और कुछ hi देर में चची की दर्द भरी कराहटें सिसकियों में बदल गयी . मैं अब धीरे धीरे लैंड को अंदर बहार करने लगा और सीधा हो कर चची क कंधे पकड़ कर अपनी स्पीड बढ़ने लगा .
रुपाली : आअह्ह्ह आअह्ह्ह आअह्ह्ह आह्हः ककक उम्म्म अब ाचा लग रहा है ककक ऐसे hi करते रहो उम्म्म्म कक्कक्स
मैं चची क कंधे थामे तेज़ तेज़ धक्के मरने लगा जिससे उनकी सिसकियाँ और भी तेज़ हो गयी. घर की शांति में इस वक़्त हमारी hi सिसकियों का शोर था . चची कुछ hi पलों में फिर से जवाब दे गयी और झटके कहते हुए उनकी छूट से रास बह निकला .
रुपाली : मैं गयी अमित आअह्ह्ह्ह ककक मैं गयी मुझे थाम लो आअह्ह्ह्ह
चची बुरी तरह कांप रही थी वो ज्यादा देर खुद को संभल नहीं पायी और बीएड पर लुढ़क गयी. मैं भी उनके साथ hi उनके ऊपर गिर गया और उनकी कमर क दोनों तरफ बीएड पर घुटने तक मैं तेज़ी से उनकी गांड में धक्के मरने लगा . चची की गांड की ताब मैं भी नहीं झेल प् रहा था और आखिर कर मैं तेज़ धक्के मरता हुआ जड़ तक लैंड उनकी गांड में घुसाए उनके ऊपर देह गया . मज़े की अधिकता के कुछ देर मेरा जिस्म झटके खता रहा . चची मेरे नीचे दबी हुई थी और मैं मदहोशी क आलम में ु की पीठ उनकी गर्दन चूमे जा रहा था . कुछ देर बाद चची कसमसाई और मेरे नीचे से निकलने की कोशिश करने लगी. मैं भी साइड में पलट गया. चची बीएड से नीचे उतर और अपनी मैक्सी पेहेन ली.
रुपाली : कर ली न मनमानी ? अब उठो और कपडे पेहेन लो. किसी ने इस हालत में देखा तो गज़ब हो जायेगा .
अमित : आपको ाचा नहीं लगा क्या ? अगर बुरा लगा तो सॉरी मैं आगे से ….
मेरी बात पूरी होने से पहले hi चची ने मेरे ऊपर झुक कर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और किश करने लगी .
रुपाली : तुम्हारे साथ मुझे हमेशा hi ाचा लगता है . तुम मेरा इस्तेमाल नहीं करते बल्कि मेरा सम्मान करते हो. इसी लिए तो लाख खुद को रोकने क बाद भी मैं तुम्हारी तरफ खींची चली आती हूँ. जब पता चला था क तुम विजय भैया क बेटे हो तो खुद को बुरा भला भी कहा क मैं तुम्हारे साथ ये सब कैसे कर सकती हूँ और कसम भी खाई थी क आगे से ऐसा नहीं करुँगी पर खुद को रोक hi नहीं पायी . तुम जब सामने होते हो तो मन बस यही चाहता है क तुम मुझे वही प्यार दो जो मेरी ज़िन्दगी में इतने साल नदारद था . मैं जानती हूँ रीमा तुमसे प्यार करती है और तुम भी. अपनी बेटी क प्यार पर डाका तो नहीं मर रही न मैं ? कहीं मेरी वजह से तुम दोनों क बीच ….
रुपाली चची एक डैम से सीरियस हो गयी थी और शायद आत्मग्लानि से भर भी गयी थी. पर मैंने उन्हें सांत्वना दी.
अमित : ये सच है क हम एक दूसरे से प्यार करते हैं. और ये भी सच है क वो आपसे भी बहुत प्यार करती है. आप क्या कुछ सेहती रही हैं वो ये नहीं जानती पर मैं जनता हूँ. इस लिए hi आपको जितना हो सके प्यार देने की कोशिश कर रहा हूँ. मैं कभी भी किसी पर ये बात ज़ाहिर नहीं होने दूंगा . और न hi मेरे प्यार में कभी कमी आएगी .
रुपाली : तुम सच में बहुत अचे हो जो इतनी कदर करते हो . काश क तुम ….
अमित : क्या ?
रुपाली : कुछ नहीं , तुम मेरी बेटी की ज़िन्दगी में आये ये hi बहुत है. जितना हो सके मैं कोशिश करुँगी खुद को समझने की. तुम बस रीमा को वो प्यार देना जो मुझे नहीं मिला.
मैंने उठ कर रुपाली चची को फिर से बाँहों में भर लिया .
अमित : आप चिंता मत करो और जो आप कहना छह रही थी वो भी मैं समझ गया . मैं रीमा को भी प्यार दूंगा और उसकी माँ को भी.
रुपाली चची मेरी बहिन से अलग हुई और झूठ मुठ मुझे मरते हुए बोली .
रुपाली : बेशरम , शर्म नहीं आती अपनी होने वाली सास पर लाइन मरते हुए ?
अमित : जब सास इतनी हसीं हो तो बाँदा लाइन कैसे न मरे. और आप तो चीज़ hi ऐसी हैं क लाइन क्या बहुत कुछ मरने को दिल करता है .
चची मेरी बात पर शर्मा गयी और फिर से मुझे झूठा गुस्सा दिखा कर मरते हुए बोली.
रुपाली : बड़े बेशरम हो, सब मर्द एक जैसे hi होते हैं. बस एक hi चीज़ नज़र आती है हर औरत में . तुम्हे तो मैं ठीक करुँगी , अगर मेरी बेटी को ज़रा भी तंग किया तो देखना
अमित : तो अभी दिखा दीजिये न , वैसे मैं उसे तंग नहीं करूँगा बल्कि खुली करूँगा जैसे आपकी की है .
रुपाली : बदमाआशःह्ह ,,, गंदे ,,,, चलो अब चुप चाप सो जाओ. सुबह उठना भी है. पता नहीं क्या क्या बोलते रहते हो .
फिर रुपाली चची मुस्कुराती हुई वापिस अपने कमरे में चली गयी और मैं भी कपडे पेहेन कर लेट गया. एक डैम से नींद भी आ गयी शायद 2 बार पानी निकलने की वजह से. जो भी हो अब पूरा सुकून था . जो आग सुबह से जल रही थी वो अब पूरी ठंडी हो चुकी थी .
सुबह मेरी नींद रोज़ाना से थोड़ा देरी से खुली . फ्रेश हो कर मैंने छत पर hi थोड़ी बहुत एक्सरसाइज की और नाहा कर तैयार हो गया क्यूंकि राधा से वडा किया था उसे मैं hi उठाऊंगा . इस लिए मुझे जल्दी निकलना था . घर पर अभी कोई उठा नहीं था पर मेरे तैयार होने तक बुआ उठ गयी . मुझे ऐसे सुबह सुबह तैयार देख कर वो हैरान हुई.
मंजू : तुम इतनी सुबह कहाँ जा रहे हो ?
अमित : वो आज गाओं जाना है न तो पहले मौसी क यहाँ से अपना बैग भी लेना है. इस लिए उधर जा रहा हूँ
मंजू : पर इतनी जल्दी भी क्या है , नाश्ता तो कर लेते .
अमित : नाश्ता फिर किसी दिन कर लूंगा बुआ , अभी मुझे जाना होगा . देर हो गयी तो सहमत आ जाएगी . ाचा बुआ मैं चलता हूँ .
मंजू : काम से काम दूध तो पि लो.
अमित : नहीं बुआ बाद में अभी प्लीज जाने दो आप .
मैं बुआ से गले लग कर मिला और निकल गया मौसी क घर की तरफ . 7:30 हो चुके थे. इतने समय तक मौसी तैयार हो जाती है और राधा भी उठ चुकी होती है. मुझे लग रहा था क आज तो राधा क हाथो सहमत आ hi जाएगी. जैसे hi मैं मौसी क घर पहुंचा तो मौसी ने hi दरवाज़ा खोला. मेहरून रंग की साडी पहने वो बहुत हसीं लग रही थी और उनके कन्धों पर गीले बाल बता रहे थे क वो अभी कुछ देर पहले hi नाहा कर तैयार हुई हैं. मुझे देखते hi उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी . मैंने उनके पिन छूने की कोशिश की तो उन्होंने मुझे कस क अपने सीने से लगा लिया . मुझे उनकी चूचियां सीने में धंसती हुई महसूस हुई . कल सुबह क बाद से अब मौसी क जिस्म से मैं लिप्त था और दिमाग में फिर से वो सब घूम गया . क्यूंकि उनके जिस्म से आती महक मेरी साँसों में घुल रही थी.
दिव्या : तुम आ गए ??? मुझे तो लगा था क तुम उधर से hi घर चले जाओगे .
अमित : ऐसे कैसे चले जाता मौसी ? आपसे मिले बिना मैं जा सकता हूँ भला
मेरी बात सुन कर मौसी की मुस्कान और गहरी हो गयी और फिर एक बार उन्होंने मुझे खुद से चिपका लिया .
दिव्या : सच में इतना प्यार करते हो मुझसे ? मैं कितनी खुश हूँ मैं बता नहीं सकती . ाचा अभी अंदर चलो मैं तुम्हारे लिए कुछ लेकर आती हूँ. अभी नाश्ता तो किया नहीं होगा .
मौसी मुझे अंदर लती खुद किचन में जाने लगी तो मैंने राधा क बारे में पूछा .
अमित : मौसी राधा नज़र नहीं आ रही ?
दिव्या : वो महारानी अभी तक बिस्टेर पर hi है. दो बार आवाज़ दे चुकी हूँ पर उठ hi नहीं रही. चाय भी ठंडी हो गयी उसकी तो . तुम बैठो मैं पहले तुम्हे दूध देती हूँ फिर से आवाज़ देती हूँ.
अमित : आप रहने दीजिये मैं उसे जगा देता हूँ.
मौसी किचन में गयी और मैं राधा क कमरे में . बिस्टेर पर करवट क बल लेती राधा एक तकिये को सीने से लगाए मस्त सो रही थी और एक मुस्कान उसके चेहरे पर थी . मैं इतना तो समझ गया क वो ज़रूर जाग रही होगी पर मेरे उठाने से hi उठेगी जैसा उसने कहा था . इस लिए मैं उसके पास बिस्टेर पर बैठ गया .
अमित : राधा ,,,,, मैं आ गया हूँ . अब उठ जाओ .
मैंने राधा को आवाज़ दी पर वो ज़रा भी नहीं हिली. मैं समझ गया क वो क्यों नहीं उठ रही. मैंने फिर से उसे हिलाते हुए आवाज़ दी पर वो फिर भी नहीं उठी . तब मैंने उसके ऊपर झुक कर धीरे से उसके माथे पर किश की. मेरा रोम रोम जैसे मदहोश हो रहा था इस तरह राधा को चूमते हुए . क्यूंकि मुझे पता था वो जग रही है और वो भी यही चाहती थी. राधा को चूम कर जैसे hi मैं सीधा हुआ तो देखा राधा ऑंखें खोले मुझे hi देख रही थी और मुस्कुरा रही थी .
अमित : गुड मॉर्निंग अब उठ जाओ मैडम वर्ण मौसी गुस्सा होंगी.
राधा : गुड मॉर्निंग, माँ गुस्सा नहीं होंगी , तुम जो आ गए हो. अगर न आते तो ज़रूर गुस्सा होती . क्यूंकि अगर तुम न आते तो मैंने आज उठना hi नहीं था .
अमित : वो क्यों भला ? कॉलेज नहीं जाना था क्या ?
राधा : तुम्हारे साथ , तुम्हारे बिना नहीं. तुम्हे कुछ समझ नहीं अत . निरे बुद्धू हो तुम . बुद्धू .
अमित : ये तुम बार बार मुझे बुद्धू क्यों कहती रहती हो?
राधा : क्यूंकि तुम हो hi बुद्धू. कुछ नहीं समझते. अब उठो कहीं माँ आ गयी तो …
मैं राधा की बात सुन एक डैम से उठ कर खड़ा हो गया जैसे मौसी hi आ गयी हो. राधा भी एक डैम से उठी और तेज़ी से मेरी गाल पर चुम कर बाथरूम में भाग गयी .
राधा : बुद्धू , डरपोक , भोंदू हे हे हे
राधा दरवाज़े पर रुक कर पलटी और ये सब कह कर खिलखिलाती हुई बाथरूम में घुस कर दरवाज़ा बंद कर दिया . मैं झूठा गुस्सा दिखा कर उसकी तरफ बढ़ा पर वो पहले hi दरवाज़ा बंद कर गयी. राधा में जिस गाल पर अभी अभी चूमा था मैं उसे सहलाते हुए मुस्कुरा दिया . राधा भी पता नहीं क्या क्या कहती रहती थी मुझे और अब तो शर्तें करने लगी थी मेरे साथ. ये भी ाचा hi लगा क्यूंकि अब वो थोड़ा खुलने तो लगी थी वर्ण पहले चुपचाप और दबी दबी सी रहती थी . मैं कमरे से निकल के बहार hi आ रहा था क मौसी अचानक से सामने आ गयी और हम टकरा गए. उनके हाथ में दूध का गिलास था जो छलक गया और हम दोनों पर hi दूध गिर गया. मेरी T-shirt पर गिरा तो मैं उसे झाड़ने लगा पर मौसी क ब्लाउज क ऊपर गरम दूध गिरा था जिससे एक डैम से उन्होंने अपनी साडी का पल्लू hi जल्दबाज़ी में गिरा दिया . उनका ब्लाउज गीला हो गया था और वो उसे हटाने की कोशिश कर रही थी . मेरी नज़र मौसी पर पड़ी तो नज़रें वही जैम सी गयी. क्यूंकि मौसी अपने ब्लाउज को दोनों हाथों से पकड़ कर खींचती हुई गरम दूध से खुद को बचा रही थी पर उनके ब्लाउज में से झांकते उनके दूध मुझे गरम कर रहे थे . एक डैम गोरी चूचियां काली ब्रा में कैद थी पर अब मुझे उन क बीच की लकीर पूरी नज़र आ रही थी. मैं तो सब भूल कर बस वहीँ देखे जा रहा था .
दिव्या : जाये दिया ,,, ककक जल गयी कक्कक्स
दिव्या मौसी को जलन हो रही थी गरम दूध की वजह से . मुझे कुछ न बोलता देख उनकी नज़र मुझ पर पड़ी तो मेरी नज़रों का पीछा कर वो समझ गयी क मैं कहा खोया हुआ हूँ.
दिव्या : अब देख क्या रहे हो , गरम दूध है ककक आग लगी हुई है कक्कक्स
मौसी की आवाज़ सुन मैं हड़बड़ा गया
अमित : स सॉरी मौसी मम मेरी अजब से आप …
दिव्या : इसमें तेरी क्या गलती है मैं hi बेध्यानी में थी. तेरे कपड़ों पर भी तो गिर गया है दूध जा जल्दी जा कर कपडे बदल ले मैं भी कपडे बदल क आती हूँ .
मैं तेज़ कदमो से भगा अपने कमरे में . मुझे ऐसे लग रहा था जैसे मौसी ने मुझे देख लिया है उनकी छाती को घूरते हुए. मैं कमरे में गया और जल्दी से अपने कपडे बदले . मेरी अंडरवियर में फिर से तम्बू बन गया था . आज फिर मौसी ने मेरी हालत ख़राब कर दी थी . मैं कपडे पहन कर थोड़ी देर में नीचे आया तो राधा तैयार हो कर बैठी थी नाश्ते क लिए . मौसी किचन से आयी तो वो इस वक़्त एक मैक्सी पहने हुए थी. मौसी टेबल पर खाना लगा कर जब मेरे पास आकर मेरी प्लेट में ऋतू डालने क लिए झुकी तो एक बार फिर से मैं हिल गया. उनकी मैक्सी का गाला खुला था और नीचे झुकते hi वहां से मुझे उनकी नंगी चूचियां झूलती हुई नज़र आयी. मौसी ने अब नीचे से ब्रा भी उतर दी थी. मैं तो पालक झपकना hi भूल गया . मौसी की पीठ राधा की तरफ थी और वो हम दोनों क बीच कड़ी थी इस लिए राधा मुझे देख नहीं सकती थी और न hi वो नज़ारा जो मैं देख रहा था. कुछ देर मौसी ऐसे hi झुकी रही और फिर मुस्कुराती हुई सीधी हो गयी .
दिव्या : कहाँ खो गए ? चलो नाश्ता करो .
मैं एक बार फिर सकपका गया और नज़रें झुका कर नाश्ता करने लगा . मौसी किचन में चली गयी . मैं जल्दी जल्दी नाश्ता करने लगा क्यूंकि नीचे फिर से टेंट बन चूका था और गर्मी बढ़ती जा रही थी. खाना कहते कहते मौसी जब मुझे परांठे देने आयी तो इस बार तो उन्होंने वो कर दिया जिससे मेरी हालत और भी ज्यादा पतली हो गयी . मौसी ने मेरे पीछे से hi मेरी प्लेट में परांठा रखने की कोशिश की और मेरे कंधे पर सात कर झुक गयी जिससे उनके नरम दूध मेरे चेहरे गाल गर्दन पर कुछ पल को अपनी नरमी का एहसास करवा गए . अब तो हालत ये हो गयी थी क निवाला भी हलक से नीचे नहीं उतर रहा था . जैसे तैसे मैंने जल्दी से खाना ख़तम किया और भाग कर अपने कमरे में गया. बाथरूम में जा कर मुँह पर ठंडा पानी मारा और फिर अपना बैग उठा कर बहार आ गया. मौसी मुझे बैग उठाये देख उदास सी हो गयी.
दिव्या : तुम जा रहे हो?
अमित : जी मौसी . पर जाने से पहले आप से मिल कर hi जाऊंगा. आपका आशीर्वाद लिए बिना थोड़ा hi जाऊंगा.
दिव्या : हमेशा खुश रहो , मैं इंतज़ार करुँगी . और ध्यान से जाना , पहुँच क्र फ़ोन ज़रूर कर देना .
फिर मैंने मौसी क पाऊँ छू कर आशीर्वाद लिया और उन्होंने मुझे अपनी छाती से लगा कर भींच लिया . एक बार फिर मेरी हालत पतली हो गयी . पर मैं खुद को कण्ट्रोल करता राधा को साथ लेकर कॉलेज क लिए निकल गया .
‘ आ गए मिस्टर ? मुझे लगा कहीं आज hi गाओं न निकल जाओ . बुआ तुम्हारी वेट कर रही हैं अंदर .’
मैं मंजू बुआ क घर पहुंचा तो बाइक की आवाज़ सुन कर hi रीमा ने दरवाज़ा खोल दिया और मेरे आते hi मुस्कुराते हुए ये बात कही. उसकी आँखों में शरारत देख मुझे भी शरारत सूझी और मैंने वहीँ दरवाज़े पर hi तेज़ी से उसके होंठों पर किश कर दी.
अमित : उमंमाहहह ,, बुआ इंतज़ार कर रही थी , तुम नहीं ?
रीमा : गंदे ,,, अभी का या बुआ देख लेती तो?
अमित : देखने दो
रीमा : ाचा , इतनी हिम्मत . तो चलो चल क बुआ क सामने करो ये हरकत फिर देखती हूँ .
अमित : सोच लो , बाद में पछताना मत फिर
रीमा : तो क्या सच में तुम बुआ क सामने ये सब कर डोज ? बेशरम !
अमित : अब क्या करें , प्यार ने हमें बेशरम बना दिया है तो क्या किया जा सकता है . आज कुछ करो न यार , बड़ा मन कर रहा है आज .
दिव्या मौसी क साथ सुबह जो कुछ हुआ था उस वजह से आज सारा दिन hi मैं अंदर से गरमी महसूस कर रहा था इस लिए सोचा क रीमा से hi बात कर क देखूं .
रीमा : बिलकुल भी शर्म नहीं है न तुम्हे? वो सब शादी क बाद .
अमित : यार प्लीज एक बार , मुझसे आज कण्ट्रोल नहीं हो रहा
रीमा : क्यों ? आज ऐसा क्या हो गया ?
अमित : बस यार , कुछ कर दो न प्लीज .
रीमा : पर यहाँ मैं क्या कर सकती हूँ . माँ और बुआ दोनों घर hi हैं.
‘ अब क्या दरवाज़े पर hi खड़ा रखोगी उसे रीमा ? आ जाओ अब अंदर’
ये आवाज़ मंजू बुआ की थी जो हॉल से आ रही थी. बुआ की आवाज़ सुन कर रीमा जल्दी से दरवाज़ा लॉक कर क हॉल की तरफ हो ली और मैं उसके पीछे. टीशर्ट लोअर पहने रीमा कमल की लग रही थी. मतलब कमल की तो थी hi पर इन ढीले कपड़ों में उसके खास अंग काफी थिरक रहे थे जो मुझे अपनी तरफ खिंच रहे थे . हम दोनों हॉल में आये जहाँ बुआ और रुपाली चची बैठी हुई थी. मुझे देख कर दोनों क चेहरे पर स्माइल आ गयी. रीमा कॉफ़ी बनाने का कह कर किचन में चली गयी . रुपाली चची आज रॉयल ब्लू सूट में थी और कमल की लग रही थी . रीमा भी उनके आगे फेर की लग रही थी आज तो. खुले घुंघराले बाल और दूध से भी गोरा रंग जो इस नीले रंग में कहीं ज्यादा दमक रहा था . और उनके खूबसूरत चेहरे पर वो दिलकश स्माइल . जिसे देख मैं उसी में खो सा गया .
रुपाली : क्या हुआ कहाँ खो गए ? जवाब hi नहीं दे रहे ?
अमित : हह हाँ हांजी , जी आपने कुछ कहा ?
मंजू : हे हे हे, लगता है आज ज्यादा hi एक्सरसाइज करवा दी कोच सर ने . भाभी पूछ रही हैं घर सब कैसे हैं?
अमित : जी सब ठीक हैं , आप कैसी हैं ?
रुपाली : मैं भी ठीक हूँ. वैसे , क्या सच में ज्यादा थक गए हो ?
अमित : नहीं हाँ , मतलब कोई खास नहीं , आज कुछ ज्यादा बी एक्सरसाइज कर ली न .
मंजू : तो क्या सच में तुम कल गाओं जा रहे हो ?
अमित : जी
मंजू : इसका मतलब अब हफ्ते बाद बी मिलोगे ?
रुपाली : इतने दिन क लिए जा रहे हो ?
अमित : वो असल में कम्पटीशन तो मंडे से हैं पर और हमें एडवांस में ले क जा रहे हैं ता की सब रेस्ट कर क अचे से फ्रेश हो सकें कम्पटीशन से पहले .
मंजू : मैं तो सोच रही थी क अभी एक दिन और हो तुम यहां . पर तुम तो कल सुबह hi चले जाओगे
अमित: आप से तो मिल कर hi जाऊंगा न बुआ .
रुपाली : मुझसे नहीं मिलोगे जाने से पहले ?
अमित : आप क पास तो अभी आ गया हूँ देखिये .
रुपाली : बातें बनाना खूब अत है तुम्हे . ऊपर ऊपर से तो कह देते हो पर बाद में टाइम hi नहीं होता तुम्हारे पास किसी क लिए
मंजू : अब बेचारा करे भी तो क्या . इतने काम और अकेली जान . ऊपर से सब इसी शहर में हैं किस किस को टाइम दे.
रुपाली : बात तो तुम्हारी भी सही है.
इतने में रीमा कॉफ़ी ले आयी और सब कॉफ़ी पिने लगे . रीमा से जब भी मेरी नज़र मिलती तो वो शरारत भरी नज़रों से मुझे देख कर हंस देती. जैसे चिढ़ा रही हो. कुछ देर बाद रुपाली चची खाना बनाने का कह कर चल दी किचन में. रीमा को भी उन्होंने अपने साथ ले लिया . मैं यहाँ रीमा क साथ वक़्त बिताने का सोच रहा था मगर रुपाली चची तो उसे साथ hi ले गयी. रीमा भी मुझे बना कर चिढ़ाती हुई गयी.
मंजू : कितनी मजबूर हूँ मैं भी , तुम्हे अपने पास रखना चाहती हूँ मगर …..
मंजू बुआ ने रीमा और रुपाली चची क जाते hi एक डैम से सीरियस होते हुए कहा तो मैं उनकी तरफ गौर से देखने लगा . आखिर मैं भी तो चाहता था क उनके पास रहूं पर वो खुद hi तो चाहती थी क किसी को पता न चले मेरे बारे में .
अमित : मैं भी तो चाहता हूँ बुआ क आपके पास hi रहूं. माँ पापा क बारे में आपसे ढेर साडी बातें करूँ. पर आप खुद hi मुझे अपने से दूर रखे हुए हैं.
मंजू : तुझे मैं खुद से दूर तो छह कर भी नहीं कर सकती . तू चाहे मेरे सामने रहे या न रहे . मेरे दिल मेरे दिमाग में तू hi रहता है .
अमित : तो फिर मुझे अपने पास क्यों नहीं रहने देती. आपको किसी से डरने की ज़रूरत नहीं. मैं हूँ न .
मंजू : नहीं अमित , मुझ में इतनी हिम्मत नहीं क मैं तुम्हारे साथ कुछ गलत होता देख सकूँ. भाई क जाने क बस बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला था . पर ऊपर वाले को मुझ पर तरस आ गया जो तुम्हे फिर से मेरे पास भेज दिया . मैं अब तुम्हे फिर से खोना नहीं चाहती. किसी कीमत पर भी नहीं.
अमित : बुआ ,,, आप ऐसा क्यों सोचती हैं क कोई मुझे आपसे चीन लेगा ? मैं आपको छोड़ कर कहीं नहीं जाने वाला. बल्कि आप खुद hi मुझे अपने आप से दूर रख रही हैं. क्या मेरा दिल नहीं करता क मैं आपके साथ रहूं ? अपनी बुआ क साथ .
मंजू : अगर भाभी और रीमा की चिंता न होती तो क्या मैं तुम्हे कहीं और जाने देती ? तू अब कम्पटीशन पे जाने वाला है और देख मेरा अभी से बुरा हल हो रहा है जैसे तू मुझसे कहीं दूर जा रहा है , जैसे मुझसे मेरा दिल कोई चीन क लिए जा रहा है.
अमित : बाआ
बात करते करते मंजू बुआ की ऑंखें भर आयी थी . मैं भी भावनाओं में बह गया और बुआ को अपनी बाँहों में भर लिया . बुआ ने भी मेरी पीठ पर बहन कास ली. आज कितने hi दिनों बाद बुआ को मैंने गले लगाया था . बहुत hi ाचा लग रहा था मुझे बुआ को गले लगते हुए .
मंजू : चल अब छोड़ , आज रत यहीं रुक जा न मेरे पास . दिव्या दीदी बुरा तो नहीं मानेगी न ?
अमित : वो बुरा क्यों मानेंगी? वो भी तो आपसे प्यार करती हैं.
मैंने अपनी जेब से मोबाइल निकला और मौसी को फ़ोन लगा दिया . मैंने उन्हें बताया क आज मैं यहीं रुकने वाला हूँ. मौसी ने भी ज्यादा कुछ नहीं कहा और बुआ से बात भी की. जब बुआ मौसी से बात कर रही थी तो मैंने देखा रीमा छिप कर सब सुन रही थी और उसके चेहरे पर एक स्माइल थी. मैं बुआ को मौसी से बात करता छोड़ कर सीधा रीमा क पास गया और उसे बाँहों में जकड लिया .
रीमा : ये क्या कर रहे हो , हतोऊ ,, माँ आ जाएगी ,, छोडो मुझे .
अमित : अब बोलो जान , आज रत तो मैं यहीं रुकने वाला हूँ. अब तो तुम्हे मेरी बात माननी पड़ेगी . आज रत ……
रीमा : हतोऊ , तुम्हे तो बस एक hi कल अत है. गंदे बचे ,, और तुम मेरे लिए नहीं अपनी बुआ क लिए रुक रहे हो यहाँ. तो भी क पास सोना आराम से . मैं यहाँ अपनी माँ क साथ सोती हूँ समझे .
अमित : अब इतना ज़ुल्म तो मत करो, मैं कितना तड़प रहा हूँ तुम्हे ज़रा भी एहसास है ?
रीमा : अपनी तड़प अपने पास रखो मर . बुआ को या माँ को पता चल गया न सब ख़तम हो जायेगा समझे .
अमित : इसका मतलब तुम मुझे प्यार नहीं करती.
मैंने जान बुझ कर मुँह बनाते हुए कहा और रीमा को छोड़ दिया . रीमा एक डैम से हस्ती हस्ती सीरियस हो गयी .
रीमा : अगर तुम्हे मेरे प्यार को परखना है तो लो , कर लो जो करना है . मैं खुद hi अपने कपडे उतर देती हूँ.
रीमा अपनी T-shirt उतरने लगी तो मैंने उसे रोक दिया और उसे फिर से बाँहों में भर लिया . उसके इस तरह करने से मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ.
अमित : मुझे माफ़ कर दो रीमा . मैं तो बस ….. ी ऍम सॉरी
रीमा : फिर कभी ऐसा मत कहना क मैं तुम्हे प्यार नहीं करती . तुम कहोगे तो अपनी जान भी दे दूंगी. अपना सब कुछ तो पहले hi तुम्हे सौंप चुकी हूँ बस अब ये जान hi है , इस पर भी हक़ अब तुम्हारा hi है. मैं तुम्हे किसी चीज़ क लिए मन नहीं कर सकती . पर माँ और बुआ क सामने अगर ये बात आयी तो क्या होगा . मैं जानती हूँ तुम्हारा दिल है पर ,,,,, रत को माँ और बुआ क सोने क बाद छत पर मिलते हैं.
रीमा सच में कितना प्यार करती थी मुझसे जो मेरी ख़ुशी की लिए फिर से मन गयी. पर मैं अब उसे मजबूर नहीं करना चाहता था .
अमित : नहीं , हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे . तुमने कहा था न क अब शादी क बाद करेंगे तो अब शादी क बाद hi करेंगे . मैं कण्ट्रोल कर लूंगा .
रीमा : नहीं , मुझे ाचा नहीं लगेगा तुम मेरी वजह से तड़पते रहो. वैसे भी मैं तन मन से सिर्फ तुम्हारी hi तो हूँ . सब कुछ तुम्हारा है तो आज क्या और कल क्या .
अमित : मैं जनता हूँ सब मेरा है. पर मैं तुम्हारी ीचा क खिलाफ भी नहीं जाना चाहता . प्यार सिर्फ जिस्म को हासिल करने तक तो नहीं है न ? मुझे तुम्हारा प्यार चाहिए जिस्म नहीं. और अब और कोई बात नहीं . जाओ अब किचन में कुछ काम भी कर लो .
रीमा : भीगी आँखों से ) ी लव यू सो मच … उम्मम्मम्माह्ह्ह
रीमा ने भावुक हो कर एक प्यार भरी किश मेरे होंठों पर की और मुस्कुराती हुई अपनी ऑंखें साफ़ करती किचन में चली गयी. मैं भी मुस्कुराता उसे जाते हुए देख वापिस बुआ क पास आ गया . उनकी बातचीत भी ख़तम हो गयी थी और उन्होंने कॉल काट दी.
मंजू : दिव्या दीदी तो मान गयी पर मुझे लगता है वो चाहती थी क तुम उनके पास रहो.
अमित : इतने दिनों से तो उनके पास hi हूँ. आज अपनी बुआ क पास रह लूंगा
मंजू बुआ ने मुस्कुरा कर मेरे माथे को चूमा और मैंने भी उन्हें बाँहों में कास लिया . बुआ ने जल्दी hi मुझे पीछे हटा दिया और मुझसे नज़रें चुराने लगी .
मंजू : अमित ज़रा ध्यान रखा करो. भाभी को पता नहीं चलना चाहिए. तुम बैठो मैं ज़रा देख कर आयी खाना बना क नहीं .
बुआ जल्दी से उठ कर चली गयी. शायद वो रीमा और रुपाली चची की वजह से दर रही थी . फिर कुछ देर बाद खाना बन गया और रीमा बुआ क साथ खाना टेबल पर लगाने लगी. रुपाली चची भी उनके पीछे आ गयी हाथ में एक डिश पकडे हुए
रुपाली : शुक्र है आज तुम हमारे साथ खाना खाने क लिए रुक गए
मंजू : सिर्फ खाना hi नहीं , आज ये हमारे पास hi रुकने वाला है रत को
रुपाली : मेरी तरफ देखते हुए ) सच में ?? फिर तो ढेर साडी बातें करेंगे . कितने दोनों बाद मौका मिला है
मंजू : भाभी !!!! आप भी बच्चों क साथ बची बन गयी. कल सुबह इसे जल्दी गाओं क लिए भी निकलना है. देर से सोयेगा तो सुबह देर से उठेगा फिर .
रुपाली : तो क्या हुआ घर hi तो जाना है .
मंजू : चलिए पहले खाना तो खा लीजिये . भूखे रखना है क्या इसे आज ? वैसे आपने तो काफी कुछ बना डाला .
रुपाली : अब ये कहाँ रोज़ रोज़ हमारे साथ खाना खता है तो सोचा आज इसे अचे से खिला देते हैं.
अमित : अरे आंटी ऐसा भी नहीं है . मैं तो यहीं हूँ रोज़ hi आपके पास अत हूँ. एक hi बार में खिला देंगी तो मेरी हालत ख़राब हो जाएगी.
रुपाली : कुछ नहीं होता , अभी तो पूरे जवान हो और ऐसे दर रहे हो . चलो बैठो यहाँ पर जल्दी से . खाना खा कर बताना क कैसा बना है
रुपाली चची क हाथों में वाकई में जादू था . खाना बहुत hi स्वादिष्ट बना था . मैंने रुपाली चची की खूब तारीफ की और मज़े से खाना खाया. इस दौरान रीमा आँखों hi आँखों में मुझे इशारे करती और मुस्कुरा देती. बातों बातों में खाना हो गया और रुपाली चची क साथ रीमा किचन में काम ख़तम करवाने लगी. मंजू बुआ ने मुझे अंदर से दूसरे कपडे निकल कर दे दिए पहनने क लिए . और मेरा बिस्तर वहीँ हॉल में सेट कर दिया. क्यूंकि रीमा तो रुपाली चची क साथ सोने वाली थी और मुझे बुआ अपने पास सुला नहीं सकती थी चची की वजह से पर उनका मन था क मैं उनके पास hi रहूं. खैर कुछ देर सब साथ में बैठ कर बातें करते रहे और फिर बुआ क कहने पर रीमा रुपाली चची की साथ अपने कमरे में चली गयी और बुआ भी मुझे गुड नाईट बोल कर अपने कमरे में चली गयी . मैं अभी लेता hi था क मेरा फ़ोन बजने लगा . मैंने देखा तो राधा की कॉल थी. इतनी रत को राधा मुझे कॉल कर रही थी जबकि इस टाइम तो वो अपने कमरे में सो रही होती थी . मुझे लगा कहीं कोई गड़बड़ तो नहीं है . मैंने जल्दी से उसकी कॉल अटेंड की.
अमित : hello राधा , इस वक़्त , कोई परेशानी तो नहीं है न ?
राधा : हाँ , परेशानी है , इसी लिए इस वक़्त फ़ोन किया .
अमित : क्या हुआ क्या परेशानी है ? तुम ठीक तो हो न ? मौसी ठीक तो हैं ?
राधा : माँ ठीक है और मैं भी , परेशानी ये है क मुझे नींद नहीं आ रही .
अमित : ओह्ह तुमने तो मुझे डरा hi दिया था . पर तुम्हे नींद क्यों नहीं आ रही ?
राधा : पहले तुम बताओ तुम आज वहां क्यों रुक गए ? तुम्हे पता है न तुम कल जा रहे हो . काम से काम आज रत हमारे पास hi रुक जाते . मैंने सोचा था आज साडी रत तुम्हारे साथ बातें करुँगी
अमित : है है है, फिर तो ाचा hi हुआ न क मैं यहीं रुक गया . वर्ण तुम सुबह कॉलेज कैसे जाती ?
राधा : नहीं जाती तो क्या हो जाता ? वैसे भी तुम तो कल कॉलेज होंगे नहीं तो मेरा मन नहीं लगेगा .
अमित : अभी दोपहर में hi तो मैंने तुम्हे समझाया था और फिर से तुम वही बातें करने लगी .
राधा : मुझे नहीं पता , मुझे तुम्हारे साथ आज बातें करनी थी और तुम वहीँ रुक गए . तुम बहुत गंदे हो .
अमित : ाचा मैं गन्दा हूँ ? तो बात क्यों कर रही हो फिर मेरे साथ ?
राधा : क्यूंकि इस गंदे इंसान को ठीक भी मैंने hi करना है. नहीं तो सब मुझे hi कहेंगे क मैंने ध्यान नहीं रखा .
अमित : ाचा !! मगर तुम्हे कोई कुछ क्यों कहेगा ?
राधा : बुद्धू ,,, बुद्धू , बुद्धू , बुद्धू . एक no. क बुद्धू हो तुम. तुम्हे कुछ समझ अत hi नहीं . अब सुबह मुझे तुम hi आ कर उठाओगे वर्ण मैं कॉलेज नहीं जाने वाली पहले hi कह देती हूँ हाँ .
अमित : मैं क्यों आऊं उठाने ? अभी तो मुझे तुम बुद्धू बोल रही थी .
राधा : क्यूंकि तुम हो hi बुद्धू . और अगर सुबह न आये तो मैं तुमसे बात नहीं करुँगी देख लेना .
अमित : मैं नहीं आऊंगा, बुद्धू बोल रही हो न मुझे तो अब खुद hi उठना और खुद hi जाना कॉलेज .
राधा : तुम आओगे आओगे और ज़रूर आओगे . मुझे पता है. इस लिए अब टाइम से सो जाओ वर्ण देर से उठोगे और मुझे भी लेट करवाओगे. टाइम से आ जाना , तुम्हारे आने तक मैं ऑंखें नहीं खोलने वाले . कह देती हूँ. अब सो जाओ . गुड नाईट .
आर्डर देने वाले लहजे में राधा ने ये सब कहा और खुद hi कॉल काट दी जैसे वो कुछ और जवाब सुन्ना hi नहीं चाहती थी. मैं भी तो उसके साथ मज़ाक hi कर रहा था भला मैं राधा को किसी बात क लिए मन hi कब करता था . अभी मैं सोच में गम था क फिर से मेरा फ़ोन बीप हुआ . रीमा का मैसेज था . वो कह रही थी क वो मेरे पास आना चाहती है पर माँ जग रही है . खैर मैंने भी उसे आराम से सोने को कहा . कुछ देर हम चाट करते रहे और फिर एक दूसरे को गुड नाईट बोल दिया . आज मैंने बाकि सब क मैसेज भी देखे और उन सब को रिप्लाई भी किया . कल्पना नैना दीदी करुणा दीदी शिवानी शालू क मैसेज थे . और आज रीना को भी खुद से hi मैंने मैसेज कर दिया . कुछ hi देर में उसकी कॉल आ गयी.
रीना : आज सूरज पश्चिम से निकला है न ? मैं बिजी थी तो मैंने ध्यान नहीं दिया . पर पक्का पश्चिम से hi निकला होगा .
अमित : अब ऐसी बात भी नहीं है. एक तो खुद आज मैंने आप से बात करि और आप हैं क उल्टा मेरा मज़ाक उदा रही हैं. जाइये आप अपना काम करिये मैं सोने जा रहा हूँ.
रीना : अरे अरे , मैं मज़ाक भी नहीं कर सकती क्या ? ाचा छोडो , ये बताओ आज इतनी देर तक कैसे जग रहे हो ? और आज मेरी यद् कैसे आ गयी.
अमित : यद् तो उनको किया जाता है जिन्हे भूल जाये आदमी . और आप तो हमेशा मेरे दिल में हैं.
रीना ( मन में ) तो एक बार मुँह से कह दो न , सिर्फ एक बार . मैं तो कब से इंतज़ार में हूँ . कब ये कोर्स ख़तम हो और मैं तुम्हारे पास पहुँच सकूँ बस दिन hi तो गईं रही हूँ.
अमित : वैसे आप गेस करो मैं कहाँ हूँ इस वक़्त .
रीना : आए ,,, ममम ,, दिव्या मौसी क घर , राइट ?
अमित : no
रीना : क्या गाओं चले गए तुम 2 दिन पहले hi ?
अमित : no
रीना : तो रीता मौसी क घर ?
अमित : no .
रीना : रजनी मौसी ?
अमित : no .
रीना : ओह्ह्ह मतलब आज मोहित क घर हो ?
अमित : no
रीना : तो फिर कहाँ हो यार ? मैंने तो सब का नाम ले लिया . अब और कौन रह गया ?
अमित : मंजू बुआ को भूल गयी आप ?
रीना : तो क्या तुम मंजू बुआ क घर पर हो ? पर ये सब कैसे ? मतलब तुम्हारी तो वो मैडम हैं न ? वो कैसे मन गयी ?
अमित : क्यों आप भूल गयी क्या मेरी hi वजह से तो आप उनसे मिली हैं . वैसे आपको रीमा ने बताया hi होगा क हमारा एक रिश्ता भी है .
रीना : हाँ बताया है , और उस रिश्ते से हम बह रिश्तेदार हुए मगर दूर क. अब ये मत कह देना क हम कौसिन्स हैं क्यूंकि मैं पहले वाले रिश्ते से hi खुश हूँ और कोई दूसरा रिश्ता नहीं चाहिए मुझे .
कुछ देर और मैंने रीना क साथ की फिर उसने खुद hi मुझे सोने को कह दिया क्यूंकि इधर 12 बजे से ज्यादा टाइम हो गया था . मैंने कॉल काट कर अभी फ़ोन रखा hi था क मुझे हलकी सी आवाज़ सुनाई दी. घर में एक डैम सन्नाटा था. ऐसे में ज़रा सी भी आवाज़ सुनाई पद जाती है. मैं रीना क साथ धीमी आवाज़ में बात कर रहा था पर अब जो आवाज़ आयी थी उसे मैं सुन कर चौंक गया था. क्यूंकि ये किसके सिसकने की आवाज़ थी. इस वक़्त ये किसकी आवाज़ आ रही है ये सोचते hi मेरा दिमाग घूम गया . मैं जल्दी से उठा और नंगे पाऊँ hi चल दिया आवाज़ की दिशा में . बिना आवाज़ किये मैं आगे बढ़ रहा था और आवाज़ थोड़ी थोड़ी तेज़ हो रही थी . मुझे इतना तो समझ आ गया था क ये एक औरत क सिसकने की आवाज़ थी वो भी वासना से भरी . घर में अँधेरा था पर बाथरूम क दरवाज़े क नीचे से थोड़ी रौशनी बहार आ रही थी यानि क कोई बाथरूम में था . पर कौन ? मंजू बुआ या रुपाली चची. मैं धड़कते दिल क साथ आगे बढ़ा और बाथरूम क दरवाज़े तक पहुँच गया . मेरा दिल तेज़ धड़क रहा था पर लैंड महाराज तो ऐसे उठ क खड़े हो गए जैसे उनकी सरे दिन की गरमी निकलने का जरिया मिल गया हो. मैंने दरवाज़े से कान लगा कर आवाज़ सुनी तो सिसकियाँ तेज़ सुनाई दी. यानि क अंदर जो भी थी वो अपनी छूट से खेल रही थी. मैंने दरवाज़े पर हाथ रख थोड़ा सा ज़ोर लगाया तो दरवाज़ा खुलता चला गया. सामने का दृश्य देख कर मेरा लैंड बेकाबू हो गया . सामने कमोड पर बैठी रुपाली चची एक तंग उठे दीवार पर पाऊँ टिकाये अपनी मैक्सी को पेट तक उठा कर तेज़ी से अपने हाथ से अपनी छूट मसल रही थी और दूसरे हाथ से अपने बूब्स मसल रही थी. मज़े में उनकी ऑंखें बंद थी और वासना से दमकता चेहरा लाल हुआ पड़ा था . खुले घुँघराले बाल फैलाये वो किसी और hi दुनिया में थी. रुपाली चची का ये रूप देख मैं भी होश खोने लगा . एक डैम गोरी चिट्टी मांसल टंगे जो मुझे अपनी और आकर्षित कर रही थी और उनकी गुलाबी छूट जो उनकी उँगलियों को भिगो रही थी . मैं पहले तो सोच रहा था क मुझे वहां से हैट जाना चाहिए पर एक तरफ दिमाग ये भी कह रहा था क रुपाली चची की ज़रूरत और कौन पूरा करेगा. वो ऐसे hi तड़पती रहेंगी तो कहीं वो मज़बूरी में कोई गलत कदम न उठा लें. इस लिए रुपाली चची को थोड़ी ख़ुशी तो दे hi देनी चाहिए . पर रीमा का सोच दिल में एक आवाज़ ये भी आयी क ये गलत होगा . कहीं रीमा को पता चला तो ??? मैं इसी सोच में पद गया पर मैं दरवाज़े से अंदर आ चूका था मगर रुपाली चची को अभी तक एहसास न हुआ था . मेरे पाऊँ वहीँ जैम गए थे , मुझे आगे बढ़ाना है या वापिस जाना है ये फैसला नहीं हो प् रहा था पर लैंड महाराज कहाँ सुनते हैं किसी की . मैं रुपाली चची को देख कर फिर से सब भूल गया और आगे बढ़ कर मैंने उनका वो हाथ पकड़ लिया जिससे वो अपनी छूट मसल रही थी . मेरे हाथ पकड़ते hi रुपाली चची एक डैम से हड़बड़ा गयी और जल्दी से सीधी हो गयी. मुझसे नज़रें मिलते hi उन्होंने शर्म से नज़रें झुका ली
अमित : आप खुद को यूँ सजा क्यों दे रही हैं ? आपको ज़रूरत थी तो मुझे कह दिया होता .
रुपाली : मैं क क कक कैसे ,,, रर रीमा क्या …..
रुपाली चची की ज़ुबान लड़खड़ा रही थी . मैंने उन्हें होंठों पर उंगली रख कर उन्हें हुई करवा दिया .
अमित : रीमा को कुछ पता नहीं चलेगा . और न hi मैं आपको ऐसे तड़पने दूंगा .
इतना कह कर मैंने रुपाली चची की कमर में हाथ दाल उन्हें अपने साथ सत्ता लिया और उनके गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए . पहले तो रुपाली चची क होंठ बस थरथरा रहे थे पर जल्द hi वो भी साथ देने लगी . क्यूंकि गरम तो वो पहले से hi थी. मेरे बालों में हाथ चलते हुए वो मेरे साथ अपना जिस्म रगड़ती हुई मुझे किश कर रही थी . मेरे अंदर भी गर्मी एक डीएम से बढ़ गयी थी जो सुबह से hi भरी पड़ी थी. मेरा लैंड रुपाली चची की छूट क ऊपर hi ठोकर मर रहा था. मैंने अपने हाथ चची की गांड पर रखे और उन्हें मसलने लगा . चची भी पागलों की तरह अब मुझे किश कर रही थी
रुपाली : उम्मम्मम कक्कक्स उम्मम्मम मैं बहुत तड़प रही हूँ अमित मेरी ये तड़प मिटा दो उम्म्म्म कक्कक्कक्स उनममममम
अमित : आज आपकी साडी तड़प मिटा दूंगा उम्मम्मम
मैंने चची की गांड मसलते हुए उन्हें ऊपर उठा लिया और उनकी टंगे अपनी कमर पर लपेट ली. चची मेरे गले में बहन दाल पूरी तरह मेरी गॉड में सवार हो गयी और मैं उन्हें ऐसे hi गॉड में उठाये बाथरूम से निकल कर सीधा हॉल में ले आया और अपने बिस्तर पर लिटा दिया . चची बहुत ज्यादा गरम हो चुकी थी इस लिए लेट ते hi उन्होंने अपनी टंगे उठा ली और अपनी मैक्सी पेट पर इकट्ठी कर ली. मैंने भी जल्दी से अपने लोअर और अंडरवियर को नीचे किया और अपना लैंड चची की देहाती छूट पर रखा जो पानी बहा रही थी . मैंने ज्यादा समय ख़राब नहीं किया और हल्का सा धक्का लगा कर सुपडे को छूट में घुसा दिया . चची ने एक लम्बी सिसकी ली. मैं उनकी आवाज़ बंद करने क लिए उनके ऊपर झुका और उनके होंठ अपने होंठों में दबा लिए . अगले hi पल मैंने एक ज़ोर दर धक्का मर का पूरा लैंड एक hi बार में जड़ तक छूट में घुसा दिया . रुपाली चची एक डैम से चिहुंक पड़ी पर उनकी आवाज़ मेरे होंठों में hi कैद हो कर रह गयी. रुपाली चची ने मेरी कमर पर अपनी टंगे कास ली और मेरी पीठ पर अपने हाथ रख कास लिया. वो मुझे जैसे हिलने नहीं देना चाहती थी शायद काफी दिनों बाद मेरा लैंड ले रही थी तो उन्हें दर्द हुआ होगा. कुछ देर मैं हलके हलकी अपनी कमर हिलाया रहा और फिर रुपाली चची भी अपनी कमर हिलने लगी. अब उनके हाथ मेरी पीठ पर फिसल रहे थे और उनकी टांगों की पकड़ भी ढीली पद गयी थी. मैं भी अब खुल क उनकी चुदाई करना चाहता था . रुपाली चची की टंगे खोल कर मैं ऊपर उठा ली और दे दाना दान धक्के मरने लगा . रुपाली चची मज़े में सिसकियाँ लेती खुद hi अपने बूब्स दबा रही थी. मैं उनकी कोमल टैंगो को चूमता हुआ पूरे जोश में धक्के मर रहा था . रुपाली चची भी अपनी आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रही थी पर फिर भी उनके मुँह से मज़े की सिसकियाँ निकल रही थी . मैंने रुपाली चची क दोनों पाऊँ अपने कंधे पर रखे और उनके ऊपर झुक गया. रुपाली चची क चूतड़ बीएड से थोड़ा ऊपर उठ गए और उनके घुटने उनके बूब्स पर आ गए . मैंने अपने पाऊँ बीएड पर टिका लिए और पूरी तरह रुपाली चची पर सवार हो कर उनके कंधे पाकर तूफानी रफ़्तार से गहरे और ज़ोरदार धक्के मरने लगा . कुछ hi पलों में रुपाली चची की छूट डैम तोड़ गयी और उनकी छूट भर भरा कर बहने लगी . अब उनसे मेरे धक्के सहने मुश्किल होने लगे तो मैंने उनके ऊपर से उतारते हुए लैंड छूट से निकल लिया जो उनके पानी से पूरा नहाया हुआ था . रुपाली चची काफी दिनों से प्यासी थी जो इतनी जल्दी और इतना ज्यादा झड़ी थी. मगर अब मेरा बुरा हल हो गया था और मैं अपना पानी निकलना चाहता था . रुपाली चची ऑंखें बंद कर क अपनी टंगे अपने पेट से समेटे लम्बी साँसे ले रही थी मैंने उन्हें पकड़ कर बिठाया और उनकी मैक्सी उनके जिस्म से अलग कर दी. चची बस वो किये जा रही थी जो मैं चाहता था . अगले hi पल मैंने उन्हें बीएड पर hi कुटिया बना लिया और पीछे से उनकी छूट में एक झटके में लैंड घुसा दिया . चची फिर से हल्का सा चीखी पर मैं नहीं रुका और तब तक उनकी छूट में धक्के पेलता रहा जब तक क मेरा कम न हो गया . आखिरी धक्के मैंने मरते हुए मैं इतना आवेश में आ गया क चची बीएड पर hi गिर कर पेट क बल लेट गयी और मैं उनके ऊपर सवार हो कर ज़ोरदार ढंग से उनकी छूट फाड़ने में लगा रहा . आखिर कर मेरे लैंड ने उनकी छूट में उलटी की तो मुझे कुछ चैन मिला और मैं उनके ऊपर hi गिर गया. रुपाली चची भी एक बार फिर से झाड़ गयी और कम्पनी लगी . वो लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी. मैं उनकी पीठ और गर्दन चूमता हुआ बस खुद को होश में लाने की कोशिश कर रहा था. कुछ देर लगी हम दोनों को सँभालने में . फिर मैं उनके ऊपर से अलग हुआ तो वो उठ कर बैठ गयी. मुझे किसी की आहत सुनाई दी पर जब देखा तो कोई नज़र नहीं आ रहा था . मुझे लगा शायद मेरा वहां हो गए. रुपाली चची मुझसे नज़रें नहीं मिला रही थी. वो चुपचाप बीएड से उठी और अपनी मैक्सी उठाने लगी तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया . मुझे उनका इस तरह चुप रहना सही नहीं लग रहा था .
अमित : आप मुझसे नाराज़ हैं क्या ?
रुपाली : नं नहीं तो
अमित : तो फिर मुझसे नज़रें क्यों चुरा रही हैं.
रुपाली : हम दोनों क बीच ये ……
अमित : मैंने कहा न , रीमा को कुछ पता नहीं चलेगा . आप भरोसा रखिये. और ये आपकी ज़रूरत है. अगर आप अपनी बॉडी की ज़रूरत को ज़बरदस्ती दबाएंगी तो इसका आप पर गलत भी हो सकता है. मैं नहीं चाहता क आप क ऊपर किसी किसम का गलत प्रभाव पड़े , इस लिए आपकी हर ज़रूरत का मैं ध्यान रखूँगा . आप ये कभी भी मत सोचियेगा क मैं आपका फायदा उठा रहा हूँ
रुपाली : ऐसा मैं कैसे सोच सकती हूँ , जबकि मैं तुम्हे अचे से जानती हूँ. फायदा उठाना होता तो तुम मेरा क्या मेरी बेटियों का भी उठा सकते थे पर तुमने ऐसा कुछ नहीं किया . पर कभी कभी मुझे लगता है मैं गलत कर रही हूँ. रीमा तुमसे प्यार करती है और मैं फिर भी ,,, जबकि उस नाते तुम मेरे …..
अमित : इस बारे में आपको सोच कर खुद को दोष देने की ज़रूरत नहीं. ये सिर्फ आपको ज़रूरत को पूरा करने क लिए है . आप किसी को धोखा नहीं दे रही जबकि अभी तक कोई रिश्ता बना hi नहीं. वैसे उस नए गलत तो मैं भी कर रहा हूँ पर मैं इतना जनता हूँ क आपको ज़रूरत है . और किसी का ज़रूरत में साथ देना गलत नहीं होता .
रुपाली : तुम सच में बहुत अचे हो, मैं खुश हूँ क तुम हमारे पास हो.
माहौल थोड़ा सीरियस हो गया था तो मैंने उसे हल्का करने क लिए थोड़ा सा मज़ाक कर दिया .
अमित : अगर आप सच में खुश हैं तो क्या आज पीछे से भी करने देंगी .
मेरी बात सुन रुपाली चची सच में शर्मा गयी और मुझसे हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगी
रुपाली : हट बदमाश कहीं क , अभी आगे से मेरी इतनी बुरी हालत कर क मन नहीं भरा जो अब पीछे से भी करना चाहते हो .
अमित : अब मैं भी क्या करूँ , आप क पीछे का नज़ारा देख कर मेरा खुद पर काबू hi नहीं रहता
रुपाली : तुम वहां से कितने एब्नार्मल हो तुम्हे पता भी है ? मैंने कैसे तुम्हे सहा था वहां पर , ये मैं hi जानती हूँ.
अमित : एक बार तो दर्द होना hi होता है और वो आप सेह चुकी हैं. अब तो उतना दर्द नहीं होगा. प्लीज मन जानिए न .
रुपाली : बहुत ज़िद्दी हो तुम , अपनी बात मनवा क रहते हो .
इतना कह कर रुपाली चची ने अपनी मैक्सी छोड़ दी और मेरी तरफ पीठ कर क थोड़ा आगे को झुक गयी और मुझे अपनी गांड लहरा कर दिखने लगी . मैं तो उन्हें बस छेड़ रहा था पर वो सच में मान जाएँगी ये मैंने सोचा भी नहीं था . पर अब सामने का नज़ारा देख मुर्दे का लैंड भी खड़ा हो जाये तो मैं क्या चीज़ हूँ. गोर मुलायम खरबूजे मेरे सामने लहरा रहे थे और मैं अपना काबू खो बैठा . मैं एक डैम से उठा और नीचे बैठ कर रुपाली चची क चूतड़ों को दोनों हाथों में पकड़ क मसलता हुआ उन्हें चूमने लगा .
रुपाली : आआअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स उम्म्म क्या कर रहे हो कक्कक्क्स
अमित : आप की ये गांड कितनी दिलकश है ये मैं hi जनता हूँ. देखने वाले तो बस तड़प कर hi रह जाते होंगे उम्म्म्म
रुपाली : सब कुछ तुम्हारे लिए है कोई तड़पता है तो तड़पे कक्कक्क्स पर मेरा सब कुछ तुम्हारे नाम हो चूका है ककक
अमित : और आपकी ये गांड ?
रुपाली : ये भी तुम्हारी है कक्कक्स बस प्यार से करना बहुत दर्द होता है ककक
अमित : प्यार से hi करूँगा आपके साथ उम्म्म्म
कुछ देर मैंने रुपाली चची की गांड को मसला और उनकी छूट को भी छठा . फिर मैंने अपने लैंड पर थूक लगा कर वहीँ रुपाली चची को बीएड पर झुकाते हुए अपना लैंड चची की गांड में धीरे धीरे घुसाने लगा . लैंड का सूपड़ा घुसते hi चची दर्द से सिसकने लगी पर मैं धीरे धीरे आगे बढ़ता गया. चची की कासी हुई गांड में लैंड ऐसे लग रहा था जैसे गन्ने का रास निकलने वाली मशीन में घुसा दिया हो . और सच पूछो तो मैं उनकी गांड मरने से इतना एक्ससिटेड हो चूका था क लग रहा था मैं अभी झाड़ जाऊंगा . रुपाली चची का दर्द से ऐंठता जा रहा था और वो किसी तरह ये सब बर्दाश्त कर रही थी पर उन्होंने मुझे रोकने की कोशिश नहीं की. पूरा लैंड जड़ तक घुसा कर मैं चची की पीठ पर लेट सा गया . हम दोनों को पसीना आ चूका था . चची दर्द में थी मैंने उन्ही नंगी पीठ को चूमते हुए अपना एक हाथ नीचे ले जाकर उनकी छूट को मसलना शुरू कर दिया और कुछ hi देर में चची की दर्द भरी कराहटें सिसकियों में बदल गयी . मैं अब धीरे धीरे लैंड को अंदर बहार करने लगा और सीधा हो कर चची क कंधे पकड़ कर अपनी स्पीड बढ़ने लगा .
रुपाली : आअह्ह्ह आअह्ह्ह आअह्ह्ह आह्हः ककक उम्म्म अब ाचा लग रहा है ककक ऐसे hi करते रहो उम्म्म्म कक्कक्स
मैं चची क कंधे थामे तेज़ तेज़ धक्के मरने लगा जिससे उनकी सिसकियाँ और भी तेज़ हो गयी. घर की शांति में इस वक़्त हमारी hi सिसकियों का शोर था . चची कुछ hi पलों में फिर से जवाब दे गयी और झटके कहते हुए उनकी छूट से रास बह निकला .
रुपाली : मैं गयी अमित आअह्ह्ह्ह ककक मैं गयी मुझे थाम लो आअह्ह्ह्ह
चची बुरी तरह कांप रही थी वो ज्यादा देर खुद को संभल नहीं पायी और बीएड पर लुढ़क गयी. मैं भी उनके साथ hi उनके ऊपर गिर गया और उनकी कमर क दोनों तरफ बीएड पर घुटने तक मैं तेज़ी से उनकी गांड में धक्के मरने लगा . चची की गांड की ताब मैं भी नहीं झेल प् रहा था और आखिर कर मैं तेज़ धक्के मरता हुआ जड़ तक लैंड उनकी गांड में घुसाए उनके ऊपर देह गया . मज़े की अधिकता के कुछ देर मेरा जिस्म झटके खता रहा . चची मेरे नीचे दबी हुई थी और मैं मदहोशी क आलम में ु की पीठ उनकी गर्दन चूमे जा रहा था . कुछ देर बाद चची कसमसाई और मेरे नीचे से निकलने की कोशिश करने लगी. मैं भी साइड में पलट गया. चची बीएड से नीचे उतर और अपनी मैक्सी पेहेन ली.
रुपाली : कर ली न मनमानी ? अब उठो और कपडे पेहेन लो. किसी ने इस हालत में देखा तो गज़ब हो जायेगा .
अमित : आपको ाचा नहीं लगा क्या ? अगर बुरा लगा तो सॉरी मैं आगे से ….
मेरी बात पूरी होने से पहले hi चची ने मेरे ऊपर झुक कर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और किश करने लगी .
रुपाली : तुम्हारे साथ मुझे हमेशा hi ाचा लगता है . तुम मेरा इस्तेमाल नहीं करते बल्कि मेरा सम्मान करते हो. इसी लिए तो लाख खुद को रोकने क बाद भी मैं तुम्हारी तरफ खींची चली आती हूँ. जब पता चला था क तुम विजय भैया क बेटे हो तो खुद को बुरा भला भी कहा क मैं तुम्हारे साथ ये सब कैसे कर सकती हूँ और कसम भी खाई थी क आगे से ऐसा नहीं करुँगी पर खुद को रोक hi नहीं पायी . तुम जब सामने होते हो तो मन बस यही चाहता है क तुम मुझे वही प्यार दो जो मेरी ज़िन्दगी में इतने साल नदारद था . मैं जानती हूँ रीमा तुमसे प्यार करती है और तुम भी. अपनी बेटी क प्यार पर डाका तो नहीं मर रही न मैं ? कहीं मेरी वजह से तुम दोनों क बीच ….
रुपाली चची एक डैम से सीरियस हो गयी थी और शायद आत्मग्लानि से भर भी गयी थी. पर मैंने उन्हें सांत्वना दी.
अमित : ये सच है क हम एक दूसरे से प्यार करते हैं. और ये भी सच है क वो आपसे भी बहुत प्यार करती है. आप क्या कुछ सेहती रही हैं वो ये नहीं जानती पर मैं जनता हूँ. इस लिए hi आपको जितना हो सके प्यार देने की कोशिश कर रहा हूँ. मैं कभी भी किसी पर ये बात ज़ाहिर नहीं होने दूंगा . और न hi मेरे प्यार में कभी कमी आएगी .
रुपाली : तुम सच में बहुत अचे हो जो इतनी कदर करते हो . काश क तुम ….
अमित : क्या ?
रुपाली : कुछ नहीं , तुम मेरी बेटी की ज़िन्दगी में आये ये hi बहुत है. जितना हो सके मैं कोशिश करुँगी खुद को समझने की. तुम बस रीमा को वो प्यार देना जो मुझे नहीं मिला.
मैंने उठ कर रुपाली चची को फिर से बाँहों में भर लिया .
अमित : आप चिंता मत करो और जो आप कहना छह रही थी वो भी मैं समझ गया . मैं रीमा को भी प्यार दूंगा और उसकी माँ को भी.
रुपाली चची मेरी बहिन से अलग हुई और झूठ मुठ मुझे मरते हुए बोली .
रुपाली : बेशरम , शर्म नहीं आती अपनी होने वाली सास पर लाइन मरते हुए ?
अमित : जब सास इतनी हसीं हो तो बाँदा लाइन कैसे न मरे. और आप तो चीज़ hi ऐसी हैं क लाइन क्या बहुत कुछ मरने को दिल करता है .
चची मेरी बात पर शर्मा गयी और फिर से मुझे झूठा गुस्सा दिखा कर मरते हुए बोली.
रुपाली : बड़े बेशरम हो, सब मर्द एक जैसे hi होते हैं. बस एक hi चीज़ नज़र आती है हर औरत में . तुम्हे तो मैं ठीक करुँगी , अगर मेरी बेटी को ज़रा भी तंग किया तो देखना
अमित : तो अभी दिखा दीजिये न , वैसे मैं उसे तंग नहीं करूँगा बल्कि खुली करूँगा जैसे आपकी की है .
रुपाली : बदमाआशःह्ह ,,, गंदे ,,,, चलो अब चुप चाप सो जाओ. सुबह उठना भी है. पता नहीं क्या क्या बोलते रहते हो .
फिर रुपाली चची मुस्कुराती हुई वापिस अपने कमरे में चली गयी और मैं भी कपडे पेहेन कर लेट गया. एक डैम से नींद भी आ गयी शायद 2 बार पानी निकलने की वजह से. जो भी हो अब पूरा सुकून था . जो आग सुबह से जल रही थी वो अब पूरी ठंडी हो चुकी थी .
सुबह मेरी नींद रोज़ाना से थोड़ा देरी से खुली . फ्रेश हो कर मैंने छत पर hi थोड़ी बहुत एक्सरसाइज की और नाहा कर तैयार हो गया क्यूंकि राधा से वडा किया था उसे मैं hi उठाऊंगा . इस लिए मुझे जल्दी निकलना था . घर पर अभी कोई उठा नहीं था पर मेरे तैयार होने तक बुआ उठ गयी . मुझे ऐसे सुबह सुबह तैयार देख कर वो हैरान हुई.
मंजू : तुम इतनी सुबह कहाँ जा रहे हो ?
अमित : वो आज गाओं जाना है न तो पहले मौसी क यहाँ से अपना बैग भी लेना है. इस लिए उधर जा रहा हूँ
मंजू : पर इतनी जल्दी भी क्या है , नाश्ता तो कर लेते .
अमित : नाश्ता फिर किसी दिन कर लूंगा बुआ , अभी मुझे जाना होगा . देर हो गयी तो सहमत आ जाएगी . ाचा बुआ मैं चलता हूँ .
मंजू : काम से काम दूध तो पि लो.
अमित : नहीं बुआ बाद में अभी प्लीज जाने दो आप .
मैं बुआ से गले लग कर मिला और निकल गया मौसी क घर की तरफ . 7:30 हो चुके थे. इतने समय तक मौसी तैयार हो जाती है और राधा भी उठ चुकी होती है. मुझे लग रहा था क आज तो राधा क हाथो सहमत आ hi जाएगी. जैसे hi मैं मौसी क घर पहुंचा तो मौसी ने hi दरवाज़ा खोला. मेहरून रंग की साडी पहने वो बहुत हसीं लग रही थी और उनके कन्धों पर गीले बाल बता रहे थे क वो अभी कुछ देर पहले hi नाहा कर तैयार हुई हैं. मुझे देखते hi उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी . मैंने उनके पिन छूने की कोशिश की तो उन्होंने मुझे कस क अपने सीने से लगा लिया . मुझे उनकी चूचियां सीने में धंसती हुई महसूस हुई . कल सुबह क बाद से अब मौसी क जिस्म से मैं लिप्त था और दिमाग में फिर से वो सब घूम गया . क्यूंकि उनके जिस्म से आती महक मेरी साँसों में घुल रही थी.
दिव्या : तुम आ गए ??? मुझे तो लगा था क तुम उधर से hi घर चले जाओगे .
अमित : ऐसे कैसे चले जाता मौसी ? आपसे मिले बिना मैं जा सकता हूँ भला
मेरी बात सुन कर मौसी की मुस्कान और गहरी हो गयी और फिर एक बार उन्होंने मुझे खुद से चिपका लिया .
दिव्या : सच में इतना प्यार करते हो मुझसे ? मैं कितनी खुश हूँ मैं बता नहीं सकती . ाचा अभी अंदर चलो मैं तुम्हारे लिए कुछ लेकर आती हूँ. अभी नाश्ता तो किया नहीं होगा .
मौसी मुझे अंदर लती खुद किचन में जाने लगी तो मैंने राधा क बारे में पूछा .
अमित : मौसी राधा नज़र नहीं आ रही ?
दिव्या : वो महारानी अभी तक बिस्टेर पर hi है. दो बार आवाज़ दे चुकी हूँ पर उठ hi नहीं रही. चाय भी ठंडी हो गयी उसकी तो . तुम बैठो मैं पहले तुम्हे दूध देती हूँ फिर से आवाज़ देती हूँ.
अमित : आप रहने दीजिये मैं उसे जगा देता हूँ.
मौसी किचन में गयी और मैं राधा क कमरे में . बिस्टेर पर करवट क बल लेती राधा एक तकिये को सीने से लगाए मस्त सो रही थी और एक मुस्कान उसके चेहरे पर थी . मैं इतना तो समझ गया क वो ज़रूर जाग रही होगी पर मेरे उठाने से hi उठेगी जैसा उसने कहा था . इस लिए मैं उसके पास बिस्टेर पर बैठ गया .
अमित : राधा ,,,,, मैं आ गया हूँ . अब उठ जाओ .
मैंने राधा को आवाज़ दी पर वो ज़रा भी नहीं हिली. मैं समझ गया क वो क्यों नहीं उठ रही. मैंने फिर से उसे हिलाते हुए आवाज़ दी पर वो फिर भी नहीं उठी . तब मैंने उसके ऊपर झुक कर धीरे से उसके माथे पर किश की. मेरा रोम रोम जैसे मदहोश हो रहा था इस तरह राधा को चूमते हुए . क्यूंकि मुझे पता था वो जग रही है और वो भी यही चाहती थी. राधा को चूम कर जैसे hi मैं सीधा हुआ तो देखा राधा ऑंखें खोले मुझे hi देख रही थी और मुस्कुरा रही थी .
अमित : गुड मॉर्निंग अब उठ जाओ मैडम वर्ण मौसी गुस्सा होंगी.
राधा : गुड मॉर्निंग, माँ गुस्सा नहीं होंगी , तुम जो आ गए हो. अगर न आते तो ज़रूर गुस्सा होती . क्यूंकि अगर तुम न आते तो मैंने आज उठना hi नहीं था .
अमित : वो क्यों भला ? कॉलेज नहीं जाना था क्या ?
राधा : तुम्हारे साथ , तुम्हारे बिना नहीं. तुम्हे कुछ समझ नहीं अत . निरे बुद्धू हो तुम . बुद्धू .
अमित : ये तुम बार बार मुझे बुद्धू क्यों कहती रहती हो?
राधा : क्यूंकि तुम हो hi बुद्धू. कुछ नहीं समझते. अब उठो कहीं माँ आ गयी तो …
मैं राधा की बात सुन एक डैम से उठ कर खड़ा हो गया जैसे मौसी hi आ गयी हो. राधा भी एक डैम से उठी और तेज़ी से मेरी गाल पर चुम कर बाथरूम में भाग गयी .
राधा : बुद्धू , डरपोक , भोंदू हे हे हे
राधा दरवाज़े पर रुक कर पलटी और ये सब कह कर खिलखिलाती हुई बाथरूम में घुस कर दरवाज़ा बंद कर दिया . मैं झूठा गुस्सा दिखा कर उसकी तरफ बढ़ा पर वो पहले hi दरवाज़ा बंद कर गयी. राधा में जिस गाल पर अभी अभी चूमा था मैं उसे सहलाते हुए मुस्कुरा दिया . राधा भी पता नहीं क्या क्या कहती रहती थी मुझे और अब तो शर्तें करने लगी थी मेरे साथ. ये भी ाचा hi लगा क्यूंकि अब वो थोड़ा खुलने तो लगी थी वर्ण पहले चुपचाप और दबी दबी सी रहती थी . मैं कमरे से निकल के बहार hi आ रहा था क मौसी अचानक से सामने आ गयी और हम टकरा गए. उनके हाथ में दूध का गिलास था जो छलक गया और हम दोनों पर hi दूध गिर गया. मेरी T-shirt पर गिरा तो मैं उसे झाड़ने लगा पर मौसी क ब्लाउज क ऊपर गरम दूध गिरा था जिससे एक डैम से उन्होंने अपनी साडी का पल्लू hi जल्दबाज़ी में गिरा दिया . उनका ब्लाउज गीला हो गया था और वो उसे हटाने की कोशिश कर रही थी . मेरी नज़र मौसी पर पड़ी तो नज़रें वही जैम सी गयी. क्यूंकि मौसी अपने ब्लाउज को दोनों हाथों से पकड़ कर खींचती हुई गरम दूध से खुद को बचा रही थी पर उनके ब्लाउज में से झांकते उनके दूध मुझे गरम कर रहे थे . एक डैम गोरी चूचियां काली ब्रा में कैद थी पर अब मुझे उन क बीच की लकीर पूरी नज़र आ रही थी. मैं तो सब भूल कर बस वहीँ देखे जा रहा था .
दिव्या : जाये दिया ,,, ककक जल गयी कक्कक्स
दिव्या मौसी को जलन हो रही थी गरम दूध की वजह से . मुझे कुछ न बोलता देख उनकी नज़र मुझ पर पड़ी तो मेरी नज़रों का पीछा कर वो समझ गयी क मैं कहा खोया हुआ हूँ.
दिव्या : अब देख क्या रहे हो , गरम दूध है ककक आग लगी हुई है कक्कक्स
मौसी की आवाज़ सुन मैं हड़बड़ा गया
अमित : स सॉरी मौसी मम मेरी अजब से आप …
दिव्या : इसमें तेरी क्या गलती है मैं hi बेध्यानी में थी. तेरे कपड़ों पर भी तो गिर गया है दूध जा जल्दी जा कर कपडे बदल ले मैं भी कपडे बदल क आती हूँ .
मैं तेज़ कदमो से भगा अपने कमरे में . मुझे ऐसे लग रहा था जैसे मौसी ने मुझे देख लिया है उनकी छाती को घूरते हुए. मैं कमरे में गया और जल्दी से अपने कपडे बदले . मेरी अंडरवियर में फिर से तम्बू बन गया था . आज फिर मौसी ने मेरी हालत ख़राब कर दी थी . मैं कपडे पहन कर थोड़ी देर में नीचे आया तो राधा तैयार हो कर बैठी थी नाश्ते क लिए . मौसी किचन से आयी तो वो इस वक़्त एक मैक्सी पहने हुए थी. मौसी टेबल पर खाना लगा कर जब मेरे पास आकर मेरी प्लेट में ऋतू डालने क लिए झुकी तो एक बार फिर से मैं हिल गया. उनकी मैक्सी का गाला खुला था और नीचे झुकते hi वहां से मुझे उनकी नंगी चूचियां झूलती हुई नज़र आयी. मौसी ने अब नीचे से ब्रा भी उतर दी थी. मैं तो पालक झपकना hi भूल गया . मौसी की पीठ राधा की तरफ थी और वो हम दोनों क बीच कड़ी थी इस लिए राधा मुझे देख नहीं सकती थी और न hi वो नज़ारा जो मैं देख रहा था. कुछ देर मौसी ऐसे hi झुकी रही और फिर मुस्कुराती हुई सीधी हो गयी .
दिव्या : कहाँ खो गए ? चलो नाश्ता करो .
मैं एक बार फिर सकपका गया और नज़रें झुका कर नाश्ता करने लगा . मौसी किचन में चली गयी . मैं जल्दी जल्दी नाश्ता करने लगा क्यूंकि नीचे फिर से टेंट बन चूका था और गर्मी बढ़ती जा रही थी. खाना कहते कहते मौसी जब मुझे परांठे देने आयी तो इस बार तो उन्होंने वो कर दिया जिससे मेरी हालत और भी ज्यादा पतली हो गयी . मौसी ने मेरे पीछे से hi मेरी प्लेट में परांठा रखने की कोशिश की और मेरे कंधे पर सात कर झुक गयी जिससे उनके नरम दूध मेरे चेहरे गाल गर्दन पर कुछ पल को अपनी नरमी का एहसास करवा गए . अब तो हालत ये हो गयी थी क निवाला भी हलक से नीचे नहीं उतर रहा था . जैसे तैसे मैंने जल्दी से खाना ख़तम किया और भाग कर अपने कमरे में गया. बाथरूम में जा कर मुँह पर ठंडा पानी मारा और फिर अपना बैग उठा कर बहार आ गया. मौसी मुझे बैग उठाये देख उदास सी हो गयी.
दिव्या : तुम जा रहे हो?
अमित : जी मौसी . पर जाने से पहले आप से मिल कर hi जाऊंगा. आपका आशीर्वाद लिए बिना थोड़ा hi जाऊंगा.
दिव्या : हमेशा खुश रहो , मैं इंतज़ार करुँगी . और ध्यान से जाना , पहुँच क्र फ़ोन ज़रूर कर देना .
फिर मैंने मौसी क पाऊँ छू कर आशीर्वाद लिया और उन्होंने मुझे अपनी छाती से लगा कर भींच लिया . एक बार फिर मेरी हालत पतली हो गयी . पर मैं खुद को कण्ट्रोल करता राधा को साथ लेकर कॉलेज क लिए निकल गया .