- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 31,768
अपडेट- 10
एक कोच के कॉरिडोर की ठंडी हवा ने उनके सुलगते जिस्मों को थोड़ा ठंडा करने की कोशिश तोह की, मगर अंदर की आग अभी बुझी नहीं थी. पहले राउंड ने प्यास मिटने की जगह उसे और भड़का दिया था. सपना ने jaldi-baazi में अपना कुरता ठीक किया और बिखरे बालों को उँगलियों से संवारा, मगर उसकी आँखों की सुर्खी और होंठों की सूजन सब कुछ बयान कर रही थी.
वह दोनों कॉरिडोर में थोड़ी दूर चले. सपना आगे थी और लड़का उसके बिलकुल पीछे, इतना करीब की उसकी सांसें अब भी सपना की नंगी गर्दन पर टकरा रही थी. सपना को लगा की उसका जिस्म अब भी भरी है, उसकी छूट में अब भी एक मीठी सी जलन हो रही थी जो उसे चैन से चलने नहीं दे रही thi.Har कदम के साथ उसकी टांगें थरथरा रही थी और उसकी गीली सलवार उसकी छूट से टकराती हुई एक अजीब सी सरसराहट पैदा कर रही थी.
अचानक लड़के ने आगे बढ़कर सपना की कलाई को कास कर पकड़ लिया और एक झटके से उसे रोक दिया. सपना के मुँह से एक हलकी सी सिसकी निकली. उसने तुरंत सपना को घुमाया और कॉरिडोर की दीवार से सत्ता दिया. अब सपना की पीठ ठंडी दीवार से लगी हुई थी और उसका नरम जिस्म लड़के के सख्त शरीर के बिलकुल सामने था.
"तुम्हे क्या लगता है, इतनी जल्दी पीछा छूट जायेगा?" उसने बहुत धीमी और भरी आवाज़ में कहा. उसका एक हाथ सपना की कमर पर गया और उसको पीछे से कास कर भींच लिया, ताकि उसकी छूट उसके अभी भी सख्त लुंड से बिलकुल सटी रहे. सपना ने महसूस किया की उसका लुंड फिर से खड़ा होने लगा था और उसकी सलवार के ऊपर से hi उसकी छूट की दरार में प्रेशर बना रहा था.
सपना ने लम्बी सांस ली, उसका सीना ऊपर निचे होने लगा. "कोई देख लेगा..." उसने नज़रें चुराते हुए कहा, मगर उसने लड़के की ब्याह को कास कर पकड़ लिया था.
"कोई नहीं है यहाँ पे…” लड़के ने कहा और उसकी आँखों में देखा. उसने सपना का हाथ अपने हाथ में ले लिया और उसको धीरे से, लेकिन मज़बूती के साथ दूसरे टॉयलेट की तरफ ले जाने लगा. यह टॉयलेट कॉरिडोर के एन्ड में, थोड़े अँधेरे कोने में था. एक की ठंडी हवा में भी उन दोनों के जिस्मों की गर्मी बढ़ रही थी. सपना के पेअर अब भी काँप रहे थे.
जैसे hi वह दूसरे बाथरूम के अंदर दाखिल हुए, लड़के ने दरवाज़ा बंद करते hi तुरंत सपना को घुमा दिया. उसके हाथों की एक तेज़ टी मूवमेंट से सपना की पीठ दरवाज़े से टकराई. वह उसके बिलकुल सामने खड़ा हो गया, उसकी सांसें तेज़ और गरम थीं. कोई इंतज़ार नहीं, कोई प्यार भरी नज़ाकत नहीं थी इस बार – सिर्फ एक भूक और जलन थी जो कण्ट्रोल से बहार हो चुकी थी.
लड़के ने दोनों हाथों से सपना का कुरता पकड़ा और तेज़ी से ऊपर की तरफ खींच दिया. कपडा उसके पेट, उसके चूचियों और उसके कन्धों पर से गुज़रता हुआ उसके गले तक लपेट दिया गया. अब सपना ऊपर से बिलकुल नंगी थी, उसके टाइट और भरी चूचे खुले हुए थे, निप्पल्स सख्त हो कर उभर आये थे. उसने एक सेकंड भी वास्ते नहीं किया और नीचे हाथ बढ़ाया. सपना की सलवार का नाडा एक hi झटके में खोल दिया और पूरी सलवार को उसके गोर, स्मूथ जांघों पर से निचे खींच दिया. सलवार अब उसके घुटनों तक लटक रही थी, और उसकी गीली पंतय भी उसके साथ hi नीचे आ गयी थी.
सपना अब बिलकुल नंगी कड़ी थी दरवाज़े से चिपकी हुई, सिर्फ उसका कुरता उसके गले और ऊपर के हिस्से में फसा हुआ था. उसकी छूट पहले वाले मिलान के रास से चमक रही thi….gehri, गीली और थोड़ी फूली हुई. ठंडी हवा उसके नंगे जिस्म पर लगी तोह उसके शरीर पर एक सरसराहट दौड़ गयी.
लड़के ने अपनी ज़िप खोली और अपना लुंड बहार निकाल लिया. वह अब पहले से भी ज़्यादा लाल, मोटा और सख्त हो चूका था ….नसें उभरी हुई, टोपा चमकदार और बिलकुल तैयार. उसने सपना की लेफ्ट टांग को अपने हाथ से पकड़ा, उसे ऊपर उठाया और अपनी कमर पर लपेट दिया. इससे सपना की छूट खुल गयी... सपना ने दरवाज़े के हैंडल को दोनों हाथों से कास कर पकड़ लिया, उसकी उँगलियाँ वाइट पद गयी थीं, क्यूंकि उसको पता था की अब जो होने वाला है वह बहुत तेज़ होने वाला है.
फिर उसने सपना की आँखों में बेचैनी भरी नज़र से देखा
“इस बार… मैं कोई रेहम नहीं करूँगा,” उसने गरम सांस के साथ कहा. और अगले hi पल उसने अपना पूरा लुंड एक hi ज़ोरदार धक्के में सपना की टाइट, गीली छूट में उतार दिया — एकदम गहराई तक, एक hi स्ट्रोक में पूरा का पूरा.
“ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह!” सपना का मुंह खुल गया; उसके हलक़ से एक लम्बी, धीमी सी चीख निकली जो दर्द और मज़े के बेहिसाब एहसास से भरी थी. उसके पूरे जिस्म ने एक झटका खाया, आँखें बंद हो गयी, और उसकी टांग लड़के के कमर पर कांपने लगी.
लड़के ने तुरंत अपना मुंह आगे बढ़ाया और अपने गरम, भूखे होठ सपना के खुले हुए होठों पर रख दिए. उसने उसकी चीख को अपने मुंह में समेत लिया, उसके होठों को ज़ोर से चूसने लगा और अपनी जुबां उसके मुंह के अंदर दाल दी. सपना की चीख अब उसके गले में hi डाब गयी, सिर्फ धीमी सी सिसकियाँ और “मममहहह… मममहहह” की आवाज़ बहार आ रही थी.
उसके अंदर लुंड पूरा घुसा हुआ था, जो उसकी छूट के हर हिस्से को स्ट्रेच कर रहा था. दर्द की एक तेज़ लहार और उसके साथ hi गहरा मज़ा सपना के पूरे जिस्म में फैल गया था. लड़के का मोटा लुंड उसके अंदर धड़क रहा था, और अब वह बिलकुल रुकने वाला नहीं था.
टॉयलेट का छोटा सा, dam-ghontu कमरा अब उनके लिए एक अलग hi दुनिया बन चूका था. अँधेरे में सिर्फ ट्रैन की तेज़ ‘dhadak-dhadak’ और उनके जिस्मों की मडक्ति आवाज़ें गूँज रही थीं.
लड़के ने सपना को पीछे से पकड़ कर khade-khade hi ज़ोर से ठोकना शुरू कर दिया था. उसने उसकी कमर को अपने मज़बूत हाथों से कास कर पकड़ रखा था. हर धक्का इतना गहरा और तेज़ था की सपना का पूरा बदन सामने वाले लोहे के दरवाज़े से टकरा जा रहा था.
“अह्ह्ह्हह… ahhh….ssshaaah… ममहहह!”
सपना के मुंह से एक लम्बी, कांपती सिसकी निकल गयी.
हर झटके के साथ लड़के का मोटा, गरम लुंड उसकी गीली छूट को पूरी तरह भर देता. ‘थप… थप… थप…’ की मादक आवाज़ छोटे कमरे में गूँज रही थी. ट्रैन की रफ़्तार के साथ उनका रदम भी तेज़ होता जा रहा था. लड़का अब और गहरे और ज़ोर के धक्के लगा रहा था, जैसे उससे पूरा अंदर उतरना चाहता हो.
“अहह… अहह… अह्हह्ह्ह्ह!” सपना की सिसकियाँ हर धक्के के साथ तेज़ होती जा रही थी.
लड़के ने अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाये और सपना की भरी, पसीने से चमकती चूचियों को दोनों हाथों में भर लिया. वह उन्हें kas-kas कर मसलने लगा, उन्हें ऊपर की तरफ खींचते हुए.
“ऊऊऊह्ह्हह्ह… हाआअह… धीरे… अह्ह्ह!”
सपना ने अपना सर पीछे की तरफ पटक दिया. उसकी चूचियां अब बहुत सेंसिटिव हो चुकी थी. लड़के ने एक चूची को अपने हाथों में दबोच कर उसके सख्त निप्पल को उँगलियों से घुमाया और दबाया.
फिर उसने झुक कर सपना की गर्दन पर गहरा किश किया और उसके कान में गरम सांस फेंकते हुए धीरे से उसकी चूची को और ज़ोर से मसला.
“मममहहहह… अह्ह्ह… हैं… वहीँ…” सपना की आवाज़ काँप रही थी. उसकी आँखें बंद थीं और होठ खुले हुए थे. हर बार जब लड़का उसकी चूचियों को मसलता और नीचे से ज़ोर का धक्का मरता, सपना का पूरा जिस्म एक मडक्ति लहार में बहने लगता.
लड़के का रदम अब और तेज़ और गहरा हो गया था. वह पीछे से zor-zor से andar-bahar कर रहा tha—kabhi धीरे और गहरे धक्के देता, तोह कभी तेज़ और छोटे. सपना की छूट अब इतनी गीली हो चुकी थी की हर धक्के के साथ एक मादक, गीला ‘thap-thap’ का आवाज़ आ रहा था.
“अह्हह्ह्ह्ह… ओह्ह्ह गॉड… ममहहहह… हैं!”
सपना के मुंह से लगातार सिसकियाँ निकल रही थीं. उसका बदन अब पूरी तरह लड़के के सहारे था. उसकी टांगें काँप रही थीं और उसकी छूट उसके लुंड को अंदर से kas-kas कर जकड रही थी.
लड़के ने उसकी दोनों चूचियों को और ज़ोर से मसला, निप्पल्स को उँगलियों के बीच पकड़ कर हल्का सा पिंच किया. सपना का बदन एक झटके में सिहर उठा.
“स्स्स्सस्छ्हः… अह्ह्ह्हह… बहुत गहरा… ahh-ahh-ahhhhh!”
उसकी सांसें अब रुकने लगी थीं. उसका रास लगातार बह रहा tha….ladke के लुंड और उसकी टांगों पर फिसल रहा था. सपना ने दरवाज़े की कुण्डी को दोनों हाथों से इतनी ज़ोर से पकड़ लिया की उसके नाखून लोहे में गड रहे थे.
अब सिर्फ उनका गहरा जिस्मों का utaar-chadhav बाकी था …. ट्रैन की तेज़ रफ़्तार, उनके मादक ‘thap-thap’ की आवाज़ें, और सपना की धीमी, मडक्ति सिसकियाँ.
उसने ज़ोर से उसे पलट कर लोहे के दरवाज़े की तरफ मुंह करके झुका दिया. सपना के हाथ थरथराते हुए ठंडी दीवार पर टिक गए. उसने अपनी गांड को पूरी तरह पीछे की तरफ उठा दिया जो की खामोश समर्पण की मुद्रा जैसी लग रही थी...
लड़के ने उसकी पसीने से चमकती, भरी गांड को देखा और अपने मज़बूत हाथ से दोनों नितम्भों पर एक ज़ोर का थप्पड़ मारा …….. ठप्प!
“Ahhhhhhhhhh…!”
सपना के मुंह से एक लम्बी, तेज़ सिसकी निकल गयी.
लड़के ने अपना मोटा, तप्त हुआ लुंड उसकी गीली छूट पर सेट किया और एक hi बेहद ज़ोर के झटके में पूरा अंदर धकेल दिया.
थपप्पपपपप!
“अह्हह्ह्ह्ह! अहह… अह्हह्ह्ह्ह! Ahhhhhhhh…shhhhhhhhhhh… ओह्ह्ह माआ!”
सपना की चीख निकल गयी. उसकी आँखें खुल गयी और फिर तुरंत बंद हो गयी.
लड़का अब पीछे से धक्के मरने लगा. हर धक्का इतना ज़ोर का और गहरा था की सपना का पूरा बदन दीवार से टकरा रहा था.
“थप… थप… थप… थप… थप!”
“अहह! अहह! अह्हह्ह्ह्ह… haaan…Ahhhhhhhh… ohhhhhhhhhhh……mmmhhhh!”
सपना की सिसकियाँ लगातार निकल रही थी. हर धक्के के साथ उसकी आवाज़ तेज़ होती जा रही थी.
लड़के ने दोनों हाथ आगे बढ़ाये और सपना की भरी, टाइट चूचियों को कास कर पकड़ लिया. वह उन्हें zor-zor से मसलने लगा, निप्पल्स को उँगलियों में पकड़ कर घूमने लगा.
“ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह… हआ… चूचियां मत छोडो… ahhh-ahhh-ahhhhh! बहुत मज़ा आ रहा है… स्स्स्सस्ठ्ठ!”
लड़के की स्पीड अब और तेज़ हो गयी. वह पीछे से झटके मरता जा रहा था — कभी धीरे और गहरे, तोह कभी तेज़ और छोटे. सपना की गीली छूट उसके लुंड को zor-zor से जकड रही थी.
“Ahhhhhh…ssshhhhhh…mmmmm…Ahhhhh…ohhhhh… हैं… मममहहहह… ओह माय गॉड… ahh-ahh-ahh-ahhhhh!”
लड़के ने एक हाथ से सपना के लम्बे बाल पकड़ कर उसका सर पीछे खिंचा. उसकी गर्दन पूरी तरह तन्नी हुई थी. उसने अपना मुंह उसके कान के पास लाया और भरी आवाज़ में बोलै:
“बताओ… कौन थोक रहा है तुम्हे इतनी ज़ोर से?”
सपना की सांसें रुक रही थीं. उसकी छूट से गीला रास लगातार बह रहा था. उसने toot-ti हुई आवाज़ में सिसकते हुए जवाब दिया:
“तुम्हारा… अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह! …तुम्हारा लू… ओह्ह्ह… आराम… से मुझे… हैं… ahh-ahh-ahhhhh… अह्ह्ह… धीरे से… प्लीज!”
लड़के ने उसकी चूचियों को और कास कर मसला और नीचे से और तेज़ धक्के मरने लगा. टॉयलेट की छोटी सी जगह उनके जिस्मों की गीली ‘thap-thap’ आवाज़ों और सपना की मडक्ति सिसकियों से भर चुकी थी.
“Ahhhhhh…Ahhhhhh… मममहहहह… हैं… और… और… ओह्ह्ह hhhh….main… मैं नहीं संभल प् रही… ahh-ahh-ahhhhhhh!”
सपना का पूरा बदन अब लड़के के सहारे लरज़ रहा था. उसकी टांगें काँप रही थीं, चूचियां उसके हाथों में डाब रही थीं और उसकी छूट उसके हर धक्के के साथ और गीली होती जा रही थी.
“अह्ह्ह्हह… हैं… थप… थप… थप्प्प्प्प… ओह्ह्ह मा… बहुत अच्छा लग रहा है… स्स्स्सस्छ्हः… और मत रुकना… ahh-ahh-ahhhhh!”
अब सिर्फ उनका गहरा, be-reham और मादक जिस्मों का utaar-chadhav बाकी था — ट्रैन की तेज़ रफ़्तार के साथ मिल कर.
ट्रैन अब तेज़ मोड़ ले रही थी, और केबिन के अंदर उनका तूफ़ान अपने चरम पर था. लड़के की रफ़्तार अब इतनी तेज़ हो गयी थी की सपना को लग रहा था उसका जिस्म टुकड़ों में बिखर जायेगा. हर ज़ोर के धक्के में उसका पूरा बदन ऊपर की तरफ उठ जा रहा था.
“अह्ह्ह्हह… हैं… स्स्स्सस्छ्हः… ओह्ह्ह गोड्ढ… shhhh….mmmhhhh… और तेज़… ahh-ahh-ahhhhh!” सपना के मुंह से हर झटके के साथ एक मडक्ति और toot-ti हुई सिसकी निकल रही थी, उसकी आँखें बंद थीं और होठों से लगातार सिसकियाँ निकल रही थी.
लड़के का चेहरा सपना की गर्दन में छुपा हुआ था, उसके दांत उसकी नरम चमड़ी पर halke-halke काट रहे थे. उसकी सांसें गरम और भरी हुई थीं. सपना ने महसूस किया की लड़के का पूरा जिस्म dheere-dheere अकड़ रहा है — उसकी पीठ पर मसल्स टाइट हो रहे थे, उसके कंधे सख्त हो गए थे और उसका लुंड उसके अंदर और भी मोटा और सख्त हो चूका था.
“अह्हह्ह्ह्ह… स्स्स्सस्छ्हः… ..ahhh….main… मैं खलास होने वाली हूँ… ओह्ह्ह मा… ममहहहह… निकल… निकल रहा है… ahh-ahh-ahhhhhhh!” सपना की सेंसुअल और कांपती हुई आवाज़ टॉयलेट की ठंडी हवा में गूँज रही थी, क्यूंकि वह अब बिलकुल झड़ने के क़रीब थी.
“मैं… मैं फिर से…” सपना टूटी हुई आवाज़ में kaha….aur उसका जिस्म बुरी तरह कांपने लगा. उसकी छूट ने लड़के के लुंड को इतनी ज़ोर से अंदर से भींचा की लड़का भी अपना कण्ट्रोल खो बैठा.
आअह्ह्ह… hhhhh……Ahhhhh!” लड़के ने उसके कान में कराह कर कहा.
लड़के ने एक आखरी, सबसे गहरा झटका मारा और अपना गरम माल सपना के अंदर पिचकारियों की तरह छोड़ने लगा. एक… दो… तीन… लगातार गरम झाड़ियां उसकी योनि की गहराईयों में भर रही थीं. सपना का पूरा जिस्म एक झटके में अकड़ गया, उसके हलक़ से एक बेहोश कर देने वाली धीमी सिसकी निकली, “अह्ह्ह्हह… ahhhhh……sshhhh….ohhh मा…” उसको लगा जैसे उसके अंदर कोई गरम, पिघला हुआ सैलाब उतर गया हो, जो उसकी छूट की दीवारों को अंदर तक सेहला रहा था.
वह दोनों लोहे के दरवाज़े से चिपके हुए हांप रहे थे. उनका पसीना, जिस्मों की गर्मी और दोनों का रास एक दुसरे में मिल कर बह रहा था. सपना का जिस्म लड़के के जिस्म से इस क़दर कास कर जकड गया था की दोनों के बीच हवा की भी जगह नहीं थी; उसकी उँगलियाँ लड़के के कन्धों पर नाख़ून गड़ाए हुए काँप रही थीं, जबकि नीचे उसका लुंड अब भी सपना की गीली, थरथराती हुई छूट में पूरा धसा हुआ था और अंदर hi अंदर धड़क रहा था.
बहार कॉरिडोर में किसी के चलने की आवाज़ आयी, कपड़ों की सरसराहट हुई, मगर उन्हें कोई परवाह नहीं थी. वह इस वक़्त दुनिया से परे, सिर्फ ek-doosre के जिस्मों की तपिश में डूबे हुए थे.
सपना का सर धीरे से लड़के के कंधे पर टिक गया. उसकी आँखें अब भी बंद थीं, पलों पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं और उसके गीले होठ halke-halke से काँप रहे थे. लड़के ने उसकी गर्दन पर, जहाँ पसीने की एक धार बह रही थी, वहां अपने गरम होठ रखे, एक नरम और थका हुआ चुम्बन किया, और फिर उसके कान के बिलकुल पास अपनी भरी, मडक्ति आवाज़ में फुसफुसाया:
“अभी तोह शुरुआत है, जानेमन..… अभी बहुत कुछ बाकी है.”
एक कोच के कॉरिडोर की ठंडी हवा ने उनके सुलगते जिस्मों को थोड़ा ठंडा करने की कोशिश तोह की, मगर अंदर की आग अभी बुझी नहीं थी. पहले राउंड ने प्यास मिटने की जगह उसे और भड़का दिया था. सपना ने jaldi-baazi में अपना कुरता ठीक किया और बिखरे बालों को उँगलियों से संवारा, मगर उसकी आँखों की सुर्खी और होंठों की सूजन सब कुछ बयान कर रही थी.
वह दोनों कॉरिडोर में थोड़ी दूर चले. सपना आगे थी और लड़का उसके बिलकुल पीछे, इतना करीब की उसकी सांसें अब भी सपना की नंगी गर्दन पर टकरा रही थी. सपना को लगा की उसका जिस्म अब भी भरी है, उसकी छूट में अब भी एक मीठी सी जलन हो रही थी जो उसे चैन से चलने नहीं दे रही thi.Har कदम के साथ उसकी टांगें थरथरा रही थी और उसकी गीली सलवार उसकी छूट से टकराती हुई एक अजीब सी सरसराहट पैदा कर रही थी.
अचानक लड़के ने आगे बढ़कर सपना की कलाई को कास कर पकड़ लिया और एक झटके से उसे रोक दिया. सपना के मुँह से एक हलकी सी सिसकी निकली. उसने तुरंत सपना को घुमाया और कॉरिडोर की दीवार से सत्ता दिया. अब सपना की पीठ ठंडी दीवार से लगी हुई थी और उसका नरम जिस्म लड़के के सख्त शरीर के बिलकुल सामने था.
"तुम्हे क्या लगता है, इतनी जल्दी पीछा छूट जायेगा?" उसने बहुत धीमी और भरी आवाज़ में कहा. उसका एक हाथ सपना की कमर पर गया और उसको पीछे से कास कर भींच लिया, ताकि उसकी छूट उसके अभी भी सख्त लुंड से बिलकुल सटी रहे. सपना ने महसूस किया की उसका लुंड फिर से खड़ा होने लगा था और उसकी सलवार के ऊपर से hi उसकी छूट की दरार में प्रेशर बना रहा था.
सपना ने लम्बी सांस ली, उसका सीना ऊपर निचे होने लगा. "कोई देख लेगा..." उसने नज़रें चुराते हुए कहा, मगर उसने लड़के की ब्याह को कास कर पकड़ लिया था.
"कोई नहीं है यहाँ पे…” लड़के ने कहा और उसकी आँखों में देखा. उसने सपना का हाथ अपने हाथ में ले लिया और उसको धीरे से, लेकिन मज़बूती के साथ दूसरे टॉयलेट की तरफ ले जाने लगा. यह टॉयलेट कॉरिडोर के एन्ड में, थोड़े अँधेरे कोने में था. एक की ठंडी हवा में भी उन दोनों के जिस्मों की गर्मी बढ़ रही थी. सपना के पेअर अब भी काँप रहे थे.
जैसे hi वह दूसरे बाथरूम के अंदर दाखिल हुए, लड़के ने दरवाज़ा बंद करते hi तुरंत सपना को घुमा दिया. उसके हाथों की एक तेज़ टी मूवमेंट से सपना की पीठ दरवाज़े से टकराई. वह उसके बिलकुल सामने खड़ा हो गया, उसकी सांसें तेज़ और गरम थीं. कोई इंतज़ार नहीं, कोई प्यार भरी नज़ाकत नहीं थी इस बार – सिर्फ एक भूक और जलन थी जो कण्ट्रोल से बहार हो चुकी थी.
लड़के ने दोनों हाथों से सपना का कुरता पकड़ा और तेज़ी से ऊपर की तरफ खींच दिया. कपडा उसके पेट, उसके चूचियों और उसके कन्धों पर से गुज़रता हुआ उसके गले तक लपेट दिया गया. अब सपना ऊपर से बिलकुल नंगी थी, उसके टाइट और भरी चूचे खुले हुए थे, निप्पल्स सख्त हो कर उभर आये थे. उसने एक सेकंड भी वास्ते नहीं किया और नीचे हाथ बढ़ाया. सपना की सलवार का नाडा एक hi झटके में खोल दिया और पूरी सलवार को उसके गोर, स्मूथ जांघों पर से निचे खींच दिया. सलवार अब उसके घुटनों तक लटक रही थी, और उसकी गीली पंतय भी उसके साथ hi नीचे आ गयी थी.
सपना अब बिलकुल नंगी कड़ी थी दरवाज़े से चिपकी हुई, सिर्फ उसका कुरता उसके गले और ऊपर के हिस्से में फसा हुआ था. उसकी छूट पहले वाले मिलान के रास से चमक रही thi….gehri, गीली और थोड़ी फूली हुई. ठंडी हवा उसके नंगे जिस्म पर लगी तोह उसके शरीर पर एक सरसराहट दौड़ गयी.
लड़के ने अपनी ज़िप खोली और अपना लुंड बहार निकाल लिया. वह अब पहले से भी ज़्यादा लाल, मोटा और सख्त हो चूका था ….नसें उभरी हुई, टोपा चमकदार और बिलकुल तैयार. उसने सपना की लेफ्ट टांग को अपने हाथ से पकड़ा, उसे ऊपर उठाया और अपनी कमर पर लपेट दिया. इससे सपना की छूट खुल गयी... सपना ने दरवाज़े के हैंडल को दोनों हाथों से कास कर पकड़ लिया, उसकी उँगलियाँ वाइट पद गयी थीं, क्यूंकि उसको पता था की अब जो होने वाला है वह बहुत तेज़ होने वाला है.
फिर उसने सपना की आँखों में बेचैनी भरी नज़र से देखा
“इस बार… मैं कोई रेहम नहीं करूँगा,” उसने गरम सांस के साथ कहा. और अगले hi पल उसने अपना पूरा लुंड एक hi ज़ोरदार धक्के में सपना की टाइट, गीली छूट में उतार दिया — एकदम गहराई तक, एक hi स्ट्रोक में पूरा का पूरा.
“ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह!” सपना का मुंह खुल गया; उसके हलक़ से एक लम्बी, धीमी सी चीख निकली जो दर्द और मज़े के बेहिसाब एहसास से भरी थी. उसके पूरे जिस्म ने एक झटका खाया, आँखें बंद हो गयी, और उसकी टांग लड़के के कमर पर कांपने लगी.
लड़के ने तुरंत अपना मुंह आगे बढ़ाया और अपने गरम, भूखे होठ सपना के खुले हुए होठों पर रख दिए. उसने उसकी चीख को अपने मुंह में समेत लिया, उसके होठों को ज़ोर से चूसने लगा और अपनी जुबां उसके मुंह के अंदर दाल दी. सपना की चीख अब उसके गले में hi डाब गयी, सिर्फ धीमी सी सिसकियाँ और “मममहहह… मममहहह” की आवाज़ बहार आ रही थी.
उसके अंदर लुंड पूरा घुसा हुआ था, जो उसकी छूट के हर हिस्से को स्ट्रेच कर रहा था. दर्द की एक तेज़ लहार और उसके साथ hi गहरा मज़ा सपना के पूरे जिस्म में फैल गया था. लड़के का मोटा लुंड उसके अंदर धड़क रहा था, और अब वह बिलकुल रुकने वाला नहीं था.
टॉयलेट का छोटा सा, dam-ghontu कमरा अब उनके लिए एक अलग hi दुनिया बन चूका था. अँधेरे में सिर्फ ट्रैन की तेज़ ‘dhadak-dhadak’ और उनके जिस्मों की मडक्ति आवाज़ें गूँज रही थीं.
लड़के ने सपना को पीछे से पकड़ कर khade-khade hi ज़ोर से ठोकना शुरू कर दिया था. उसने उसकी कमर को अपने मज़बूत हाथों से कास कर पकड़ रखा था. हर धक्का इतना गहरा और तेज़ था की सपना का पूरा बदन सामने वाले लोहे के दरवाज़े से टकरा जा रहा था.
“अह्ह्ह्हह… ahhh….ssshaaah… ममहहह!”
सपना के मुंह से एक लम्बी, कांपती सिसकी निकल गयी.
हर झटके के साथ लड़के का मोटा, गरम लुंड उसकी गीली छूट को पूरी तरह भर देता. ‘थप… थप… थप…’ की मादक आवाज़ छोटे कमरे में गूँज रही थी. ट्रैन की रफ़्तार के साथ उनका रदम भी तेज़ होता जा रहा था. लड़का अब और गहरे और ज़ोर के धक्के लगा रहा था, जैसे उससे पूरा अंदर उतरना चाहता हो.
“अहह… अहह… अह्हह्ह्ह्ह!” सपना की सिसकियाँ हर धक्के के साथ तेज़ होती जा रही थी.
लड़के ने अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाये और सपना की भरी, पसीने से चमकती चूचियों को दोनों हाथों में भर लिया. वह उन्हें kas-kas कर मसलने लगा, उन्हें ऊपर की तरफ खींचते हुए.
“ऊऊऊह्ह्हह्ह… हाआअह… धीरे… अह्ह्ह!”
सपना ने अपना सर पीछे की तरफ पटक दिया. उसकी चूचियां अब बहुत सेंसिटिव हो चुकी थी. लड़के ने एक चूची को अपने हाथों में दबोच कर उसके सख्त निप्पल को उँगलियों से घुमाया और दबाया.
फिर उसने झुक कर सपना की गर्दन पर गहरा किश किया और उसके कान में गरम सांस फेंकते हुए धीरे से उसकी चूची को और ज़ोर से मसला.
“मममहहहह… अह्ह्ह… हैं… वहीँ…” सपना की आवाज़ काँप रही थी. उसकी आँखें बंद थीं और होठ खुले हुए थे. हर बार जब लड़का उसकी चूचियों को मसलता और नीचे से ज़ोर का धक्का मरता, सपना का पूरा जिस्म एक मडक्ति लहार में बहने लगता.
लड़के का रदम अब और तेज़ और गहरा हो गया था. वह पीछे से zor-zor से andar-bahar कर रहा tha—kabhi धीरे और गहरे धक्के देता, तोह कभी तेज़ और छोटे. सपना की छूट अब इतनी गीली हो चुकी थी की हर धक्के के साथ एक मादक, गीला ‘thap-thap’ का आवाज़ आ रहा था.
“अह्हह्ह्ह्ह… ओह्ह्ह गॉड… ममहहहह… हैं!”
सपना के मुंह से लगातार सिसकियाँ निकल रही थीं. उसका बदन अब पूरी तरह लड़के के सहारे था. उसकी टांगें काँप रही थीं और उसकी छूट उसके लुंड को अंदर से kas-kas कर जकड रही थी.
लड़के ने उसकी दोनों चूचियों को और ज़ोर से मसला, निप्पल्स को उँगलियों के बीच पकड़ कर हल्का सा पिंच किया. सपना का बदन एक झटके में सिहर उठा.
“स्स्स्सस्छ्हः… अह्ह्ह्हह… बहुत गहरा… ahh-ahh-ahhhhh!”
उसकी सांसें अब रुकने लगी थीं. उसका रास लगातार बह रहा tha….ladke के लुंड और उसकी टांगों पर फिसल रहा था. सपना ने दरवाज़े की कुण्डी को दोनों हाथों से इतनी ज़ोर से पकड़ लिया की उसके नाखून लोहे में गड रहे थे.
अब सिर्फ उनका गहरा जिस्मों का utaar-chadhav बाकी था …. ट्रैन की तेज़ रफ़्तार, उनके मादक ‘thap-thap’ की आवाज़ें, और सपना की धीमी, मडक्ति सिसकियाँ.
उसने ज़ोर से उसे पलट कर लोहे के दरवाज़े की तरफ मुंह करके झुका दिया. सपना के हाथ थरथराते हुए ठंडी दीवार पर टिक गए. उसने अपनी गांड को पूरी तरह पीछे की तरफ उठा दिया जो की खामोश समर्पण की मुद्रा जैसी लग रही थी...
लड़के ने उसकी पसीने से चमकती, भरी गांड को देखा और अपने मज़बूत हाथ से दोनों नितम्भों पर एक ज़ोर का थप्पड़ मारा …….. ठप्प!
“Ahhhhhhhhhh…!”
सपना के मुंह से एक लम्बी, तेज़ सिसकी निकल गयी.
लड़के ने अपना मोटा, तप्त हुआ लुंड उसकी गीली छूट पर सेट किया और एक hi बेहद ज़ोर के झटके में पूरा अंदर धकेल दिया.
थपप्पपपपप!
“अह्हह्ह्ह्ह! अहह… अह्हह्ह्ह्ह! Ahhhhhhhh…shhhhhhhhhhh… ओह्ह्ह माआ!”
सपना की चीख निकल गयी. उसकी आँखें खुल गयी और फिर तुरंत बंद हो गयी.
लड़का अब पीछे से धक्के मरने लगा. हर धक्का इतना ज़ोर का और गहरा था की सपना का पूरा बदन दीवार से टकरा रहा था.
“थप… थप… थप… थप… थप!”
“अहह! अहह! अह्हह्ह्ह्ह… haaan…Ahhhhhhhh… ohhhhhhhhhhh……mmmhhhh!”
सपना की सिसकियाँ लगातार निकल रही थी. हर धक्के के साथ उसकी आवाज़ तेज़ होती जा रही थी.
लड़के ने दोनों हाथ आगे बढ़ाये और सपना की भरी, टाइट चूचियों को कास कर पकड़ लिया. वह उन्हें zor-zor से मसलने लगा, निप्पल्स को उँगलियों में पकड़ कर घूमने लगा.
“ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह… हआ… चूचियां मत छोडो… ahhh-ahhh-ahhhhh! बहुत मज़ा आ रहा है… स्स्स्सस्ठ्ठ!”
लड़के की स्पीड अब और तेज़ हो गयी. वह पीछे से झटके मरता जा रहा था — कभी धीरे और गहरे, तोह कभी तेज़ और छोटे. सपना की गीली छूट उसके लुंड को zor-zor से जकड रही थी.
“Ahhhhhh…ssshhhhhh…mmmmm…Ahhhhh…ohhhhh… हैं… मममहहहह… ओह माय गॉड… ahh-ahh-ahh-ahhhhh!”
लड़के ने एक हाथ से सपना के लम्बे बाल पकड़ कर उसका सर पीछे खिंचा. उसकी गर्दन पूरी तरह तन्नी हुई थी. उसने अपना मुंह उसके कान के पास लाया और भरी आवाज़ में बोलै:
“बताओ… कौन थोक रहा है तुम्हे इतनी ज़ोर से?”
सपना की सांसें रुक रही थीं. उसकी छूट से गीला रास लगातार बह रहा था. उसने toot-ti हुई आवाज़ में सिसकते हुए जवाब दिया:
“तुम्हारा… अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह! …तुम्हारा लू… ओह्ह्ह… आराम… से मुझे… हैं… ahh-ahh-ahhhhh… अह्ह्ह… धीरे से… प्लीज!”
लड़के ने उसकी चूचियों को और कास कर मसला और नीचे से और तेज़ धक्के मरने लगा. टॉयलेट की छोटी सी जगह उनके जिस्मों की गीली ‘thap-thap’ आवाज़ों और सपना की मडक्ति सिसकियों से भर चुकी थी.
“Ahhhhhh…Ahhhhhh… मममहहहह… हैं… और… और… ओह्ह्ह hhhh….main… मैं नहीं संभल प् रही… ahh-ahh-ahhhhhhh!”
सपना का पूरा बदन अब लड़के के सहारे लरज़ रहा था. उसकी टांगें काँप रही थीं, चूचियां उसके हाथों में डाब रही थीं और उसकी छूट उसके हर धक्के के साथ और गीली होती जा रही थी.
“अह्ह्ह्हह… हैं… थप… थप… थप्प्प्प्प… ओह्ह्ह मा… बहुत अच्छा लग रहा है… स्स्स्सस्छ्हः… और मत रुकना… ahh-ahh-ahhhhh!”
अब सिर्फ उनका गहरा, be-reham और मादक जिस्मों का utaar-chadhav बाकी था — ट्रैन की तेज़ रफ़्तार के साथ मिल कर.
ट्रैन अब तेज़ मोड़ ले रही थी, और केबिन के अंदर उनका तूफ़ान अपने चरम पर था. लड़के की रफ़्तार अब इतनी तेज़ हो गयी थी की सपना को लग रहा था उसका जिस्म टुकड़ों में बिखर जायेगा. हर ज़ोर के धक्के में उसका पूरा बदन ऊपर की तरफ उठ जा रहा था.
“अह्ह्ह्हह… हैं… स्स्स्सस्छ्हः… ओह्ह्ह गोड्ढ… shhhh….mmmhhhh… और तेज़… ahh-ahh-ahhhhh!” सपना के मुंह से हर झटके के साथ एक मडक्ति और toot-ti हुई सिसकी निकल रही थी, उसकी आँखें बंद थीं और होठों से लगातार सिसकियाँ निकल रही थी.
लड़के का चेहरा सपना की गर्दन में छुपा हुआ था, उसके दांत उसकी नरम चमड़ी पर halke-halke काट रहे थे. उसकी सांसें गरम और भरी हुई थीं. सपना ने महसूस किया की लड़के का पूरा जिस्म dheere-dheere अकड़ रहा है — उसकी पीठ पर मसल्स टाइट हो रहे थे, उसके कंधे सख्त हो गए थे और उसका लुंड उसके अंदर और भी मोटा और सख्त हो चूका था.
“अह्हह्ह्ह्ह… स्स्स्सस्छ्हः… ..ahhh….main… मैं खलास होने वाली हूँ… ओह्ह्ह मा… ममहहहह… निकल… निकल रहा है… ahh-ahh-ahhhhhhh!” सपना की सेंसुअल और कांपती हुई आवाज़ टॉयलेट की ठंडी हवा में गूँज रही थी, क्यूंकि वह अब बिलकुल झड़ने के क़रीब थी.
“मैं… मैं फिर से…” सपना टूटी हुई आवाज़ में kaha….aur उसका जिस्म बुरी तरह कांपने लगा. उसकी छूट ने लड़के के लुंड को इतनी ज़ोर से अंदर से भींचा की लड़का भी अपना कण्ट्रोल खो बैठा.
आअह्ह्ह… hhhhh……Ahhhhh!” लड़के ने उसके कान में कराह कर कहा.
लड़के ने एक आखरी, सबसे गहरा झटका मारा और अपना गरम माल सपना के अंदर पिचकारियों की तरह छोड़ने लगा. एक… दो… तीन… लगातार गरम झाड़ियां उसकी योनि की गहराईयों में भर रही थीं. सपना का पूरा जिस्म एक झटके में अकड़ गया, उसके हलक़ से एक बेहोश कर देने वाली धीमी सिसकी निकली, “अह्ह्ह्हह… ahhhhh……sshhhh….ohhh मा…” उसको लगा जैसे उसके अंदर कोई गरम, पिघला हुआ सैलाब उतर गया हो, जो उसकी छूट की दीवारों को अंदर तक सेहला रहा था.
वह दोनों लोहे के दरवाज़े से चिपके हुए हांप रहे थे. उनका पसीना, जिस्मों की गर्मी और दोनों का रास एक दुसरे में मिल कर बह रहा था. सपना का जिस्म लड़के के जिस्म से इस क़दर कास कर जकड गया था की दोनों के बीच हवा की भी जगह नहीं थी; उसकी उँगलियाँ लड़के के कन्धों पर नाख़ून गड़ाए हुए काँप रही थीं, जबकि नीचे उसका लुंड अब भी सपना की गीली, थरथराती हुई छूट में पूरा धसा हुआ था और अंदर hi अंदर धड़क रहा था.
बहार कॉरिडोर में किसी के चलने की आवाज़ आयी, कपड़ों की सरसराहट हुई, मगर उन्हें कोई परवाह नहीं थी. वह इस वक़्त दुनिया से परे, सिर्फ ek-doosre के जिस्मों की तपिश में डूबे हुए थे.
सपना का सर धीरे से लड़के के कंधे पर टिक गया. उसकी आँखें अब भी बंद थीं, पलों पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं और उसके गीले होठ halke-halke से काँप रहे थे. लड़के ने उसकी गर्दन पर, जहाँ पसीने की एक धार बह रही थी, वहां अपने गरम होठ रखे, एक नरम और थका हुआ चुम्बन किया, और फिर उसके कान के बिलकुल पास अपनी भरी, मडक्ति आवाज़ में फुसफुसाया:
“अभी तोह शुरुआत है, जानेमन..… अभी बहुत कुछ बाकी है.”