Adultery " रेल, रात और वो ..." - Page 2 - SexBaba
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Adultery " रेल, रात और वो ..."

अपडेट- 10

एक कोच के कॉरिडोर की ठंडी हवा ने उनके सुलगते जिस्मों को थोड़ा ठंडा करने की कोशिश तोह की, मगर अंदर की आग अभी बुझी नहीं थी. पहले राउंड ने प्यास मिटने की जगह उसे और भड़का दिया था. सपना ने jaldi-baazi में अपना कुरता ठीक किया और बिखरे बालों को उँगलियों से संवारा, मगर उसकी आँखों की सुर्खी और होंठों की सूजन सब कुछ बयान कर रही थी.

वह दोनों कॉरिडोर में थोड़ी दूर चले. सपना आगे थी और लड़का उसके बिलकुल पीछे, इतना करीब की उसकी सांसें अब भी सपना की नंगी गर्दन पर टकरा रही थी. सपना को लगा की उसका जिस्म अब भी भरी है, उसकी छूट में अब भी एक मीठी सी जलन हो रही थी जो उसे चैन से चलने नहीं दे रही thi.Har कदम के साथ उसकी टांगें थरथरा रही थी और उसकी गीली सलवार उसकी छूट से टकराती हुई एक अजीब सी सरसराहट पैदा कर रही थी.

अचानक लड़के ने आगे बढ़कर सपना की कलाई को कास कर पकड़ लिया और एक झटके से उसे रोक दिया. सपना के मुँह से एक हलकी सी सिसकी निकली. उसने तुरंत सपना को घुमाया और कॉरिडोर की दीवार से सत्ता दिया. अब सपना की पीठ ठंडी दीवार से लगी हुई थी और उसका नरम जिस्म लड़के के सख्त शरीर के बिलकुल सामने था.

"तुम्हे क्या लगता है, इतनी जल्दी पीछा छूट जायेगा?" उसने बहुत धीमी और भरी आवाज़ में कहा. उसका एक हाथ सपना की कमर पर गया और उसको पीछे से कास कर भींच लिया, ताकि उसकी छूट उसके अभी भी सख्त लुंड से बिलकुल सटी रहे. सपना ने महसूस किया की उसका लुंड फिर से खड़ा होने लगा था और उसकी सलवार के ऊपर से hi उसकी छूट की दरार में प्रेशर बना रहा था.

सपना ने लम्बी सांस ली, उसका सीना ऊपर निचे होने लगा. "कोई देख लेगा..." उसने नज़रें चुराते हुए कहा, मगर उसने लड़के की ब्याह को कास कर पकड़ लिया था.

"कोई नहीं है यहाँ पे…” लड़के ने कहा और उसकी आँखों में देखा. उसने सपना का हाथ अपने हाथ में ले लिया और उसको धीरे से, लेकिन मज़बूती के साथ दूसरे टॉयलेट की तरफ ले जाने लगा. यह टॉयलेट कॉरिडोर के एन्ड में, थोड़े अँधेरे कोने में था. एक की ठंडी हवा में भी उन दोनों के जिस्मों की गर्मी बढ़ रही थी. सपना के पेअर अब भी काँप रहे थे.

जैसे hi वह दूसरे बाथरूम के अंदर दाखिल हुए, लड़के ने दरवाज़ा बंद करते hi तुरंत सपना को घुमा दिया. उसके हाथों की एक तेज़ टी मूवमेंट से सपना की पीठ दरवाज़े से टकराई. वह उसके बिलकुल सामने खड़ा हो गया, उसकी सांसें तेज़ और गरम थीं. कोई इंतज़ार नहीं, कोई प्यार भरी नज़ाकत नहीं थी इस बार – सिर्फ एक भूक और जलन थी जो कण्ट्रोल से बहार हो चुकी थी.

लड़के ने दोनों हाथों से सपना का कुरता पकड़ा और तेज़ी से ऊपर की तरफ खींच दिया. कपडा उसके पेट, उसके चूचियों और उसके कन्धों पर से गुज़रता हुआ उसके गले तक लपेट दिया गया. अब सपना ऊपर से बिलकुल नंगी थी, उसके टाइट और भरी चूचे खुले हुए थे, निप्पल्स सख्त हो कर उभर आये थे. उसने एक सेकंड भी वास्ते नहीं किया और नीचे हाथ बढ़ाया. सपना की सलवार का नाडा एक hi झटके में खोल दिया और पूरी सलवार को उसके गोर, स्मूथ जांघों पर से निचे खींच दिया. सलवार अब उसके घुटनों तक लटक रही थी, और उसकी गीली पंतय भी उसके साथ hi नीचे आ गयी थी.

सपना अब बिलकुल नंगी कड़ी थी दरवाज़े से चिपकी हुई, सिर्फ उसका कुरता उसके गले और ऊपर के हिस्से में फसा हुआ था. उसकी छूट पहले वाले मिलान के रास से चमक रही thi….gehri, गीली और थोड़ी फूली हुई. ठंडी हवा उसके नंगे जिस्म पर लगी तोह उसके शरीर पर एक सरसराहट दौड़ गयी.

लड़के ने अपनी ज़िप खोली और अपना लुंड बहार निकाल लिया. वह अब पहले से भी ज़्यादा लाल, मोटा और सख्त हो चूका था ….नसें उभरी हुई, टोपा चमकदार और बिलकुल तैयार. उसने सपना की लेफ्ट टांग को अपने हाथ से पकड़ा, उसे ऊपर उठाया और अपनी कमर पर लपेट दिया. इससे सपना की छूट खुल गयी... सपना ने दरवाज़े के हैंडल को दोनों हाथों से कास कर पकड़ लिया, उसकी उँगलियाँ वाइट पद गयी थीं, क्यूंकि उसको पता था की अब जो होने वाला है वह बहुत तेज़ होने वाला है.

फिर उसने सपना की आँखों में बेचैनी भरी नज़र से देखा

“इस बार… मैं कोई रेहम नहीं करूँगा,” उसने गरम सांस के साथ कहा. और अगले hi पल उसने अपना पूरा लुंड एक hi ज़ोरदार धक्के में सपना की टाइट, गीली छूट में उतार दिया — एकदम गहराई तक, एक hi स्ट्रोक में पूरा का पूरा.

“ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह!” सपना का मुंह खुल गया; उसके हलक़ से एक लम्बी, धीमी सी चीख निकली जो दर्द और मज़े के बेहिसाब एहसास से भरी थी. उसके पूरे जिस्म ने एक झटका खाया, आँखें बंद हो गयी, और उसकी टांग लड़के के कमर पर कांपने लगी.

लड़के ने तुरंत अपना मुंह आगे बढ़ाया और अपने गरम, भूखे होठ सपना के खुले हुए होठों पर रख दिए. उसने उसकी चीख को अपने मुंह में समेत लिया, उसके होठों को ज़ोर से चूसने लगा और अपनी जुबां उसके मुंह के अंदर दाल दी. सपना की चीख अब उसके गले में hi डाब गयी, सिर्फ धीमी सी सिसकियाँ और “मममहहह… मममहहह” की आवाज़ बहार आ रही थी.

उसके अंदर लुंड पूरा घुसा हुआ था, जो उसकी छूट के हर हिस्से को स्ट्रेच कर रहा था. दर्द की एक तेज़ लहार और उसके साथ hi गहरा मज़ा सपना के पूरे जिस्म में फैल गया था. लड़के का मोटा लुंड उसके अंदर धड़क रहा था, और अब वह बिलकुल रुकने वाला नहीं था.

टॉयलेट का छोटा सा, dam-ghontu कमरा अब उनके लिए एक अलग hi दुनिया बन चूका था. अँधेरे में सिर्फ ट्रैन की तेज़ ‘dhadak-dhadak’ और उनके जिस्मों की मडक्ति आवाज़ें गूँज रही थीं.

लड़के ने सपना को पीछे से पकड़ कर khade-khade hi ज़ोर से ठोकना शुरू कर दिया था. उसने उसकी कमर को अपने मज़बूत हाथों से कास कर पकड़ रखा था. हर धक्का इतना गहरा और तेज़ था की सपना का पूरा बदन सामने वाले लोहे के दरवाज़े से टकरा जा रहा था.

“अह्ह्ह्हह… ahhh….ssshaaah… ममहहह!”

सपना के मुंह से एक लम्बी, कांपती सिसकी निकल गयी.

हर झटके के साथ लड़के का मोटा, गरम लुंड उसकी गीली छूट को पूरी तरह भर देता. ‘थप… थप… थप…’ की मादक आवाज़ छोटे कमरे में गूँज रही थी. ट्रैन की रफ़्तार के साथ उनका रदम भी तेज़ होता जा रहा था. लड़का अब और गहरे और ज़ोर के धक्के लगा रहा था, जैसे उससे पूरा अंदर उतरना चाहता हो.

“अहह… अहह… अह्हह्ह्ह्ह!” सपना की सिसकियाँ हर धक्के के साथ तेज़ होती जा रही थी.

लड़के ने अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाये और सपना की भरी, पसीने से चमकती चूचियों को दोनों हाथों में भर लिया. वह उन्हें kas-kas कर मसलने लगा, उन्हें ऊपर की तरफ खींचते हुए.

“ऊऊऊह्ह्हह्ह… हाआअह… धीरे… अह्ह्ह!”

सपना ने अपना सर पीछे की तरफ पटक दिया. उसकी चूचियां अब बहुत सेंसिटिव हो चुकी थी. लड़के ने एक चूची को अपने हाथों में दबोच कर उसके सख्त निप्पल को उँगलियों से घुमाया और दबाया.

फिर उसने झुक कर सपना की गर्दन पर गहरा किश किया और उसके कान में गरम सांस फेंकते हुए धीरे से उसकी चूची को और ज़ोर से मसला.

“मममहहहह… अह्ह्ह… हैं… वहीँ…” सपना की आवाज़ काँप रही थी. उसकी आँखें बंद थीं और होठ खुले हुए थे. हर बार जब लड़का उसकी चूचियों को मसलता और नीचे से ज़ोर का धक्का मरता, सपना का पूरा जिस्म एक मडक्ति लहार में बहने लगता.

लड़के का रदम अब और तेज़ और गहरा हो गया था. वह पीछे से zor-zor से andar-bahar कर रहा tha—kabhi धीरे और गहरे धक्के देता, तोह कभी तेज़ और छोटे. सपना की छूट अब इतनी गीली हो चुकी थी की हर धक्के के साथ एक मादक, गीला ‘thap-thap’ का आवाज़ आ रहा था.

“अह्हह्ह्ह्ह… ओह्ह्ह गॉड… ममहहहह… हैं!”

सपना के मुंह से लगातार सिसकियाँ निकल रही थीं. उसका बदन अब पूरी तरह लड़के के सहारे था. उसकी टांगें काँप रही थीं और उसकी छूट उसके लुंड को अंदर से kas-kas कर जकड रही थी.

लड़के ने उसकी दोनों चूचियों को और ज़ोर से मसला, निप्पल्स को उँगलियों के बीच पकड़ कर हल्का सा पिंच किया. सपना का बदन एक झटके में सिहर उठा.

“स्स्स्सस्छ्हः… अह्ह्ह्हह… बहुत गहरा… ahh-ahh-ahhhhh!”

उसकी सांसें अब रुकने लगी थीं. उसका रास लगातार बह रहा tha….ladke के लुंड और उसकी टांगों पर फिसल रहा था. सपना ने दरवाज़े की कुण्डी को दोनों हाथों से इतनी ज़ोर से पकड़ लिया की उसके नाखून लोहे में गड रहे थे.

अब सिर्फ उनका गहरा जिस्मों का utaar-chadhav बाकी था …. ट्रैन की तेज़ रफ़्तार, उनके मादक ‘thap-thap’ की आवाज़ें, और सपना की धीमी, मडक्ति सिसकियाँ.

उसने ज़ोर से उसे पलट कर लोहे के दरवाज़े की तरफ मुंह करके झुका दिया. सपना के हाथ थरथराते हुए ठंडी दीवार पर टिक गए. उसने अपनी गांड को पूरी तरह पीछे की तरफ उठा दिया जो की खामोश समर्पण की मुद्रा जैसी लग रही थी...

लड़के ने उसकी पसीने से चमकती, भरी गांड को देखा और अपने मज़बूत हाथ से दोनों नितम्भों पर एक ज़ोर का थप्पड़ मारा …….. ठप्प!

“Ahhhhhhhhhh…!”

सपना के मुंह से एक लम्बी, तेज़ सिसकी निकल गयी.

लड़के ने अपना मोटा, तप्त हुआ लुंड उसकी गीली छूट पर सेट किया और एक hi बेहद ज़ोर के झटके में पूरा अंदर धकेल दिया.

थपप्पपपपप!

“अह्हह्ह्ह्ह! अहह… अह्हह्ह्ह्ह! Ahhhhhhhh…shhhhhhhhhhh… ओह्ह्ह माआ!”

सपना की चीख निकल गयी. उसकी आँखें खुल गयी और फिर तुरंत बंद हो गयी.

लड़का अब पीछे से धक्के मरने लगा. हर धक्का इतना ज़ोर का और गहरा था की सपना का पूरा बदन दीवार से टकरा रहा था.

“थप… थप… थप… थप… थप!”

“अहह! अहह! अह्हह्ह्ह्ह… haaan…Ahhhhhhhh… ohhhhhhhhhhh……mmmhhhh!”

सपना की सिसकियाँ लगातार निकल रही थी. हर धक्के के साथ उसकी आवाज़ तेज़ होती जा रही थी.

लड़के ने दोनों हाथ आगे बढ़ाये और सपना की भरी, टाइट चूचियों को कास कर पकड़ लिया. वह उन्हें zor-zor से मसलने लगा, निप्पल्स को उँगलियों में पकड़ कर घूमने लगा.

“ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह… हआ… चूचियां मत छोडो… ahhh-ahhh-ahhhhh! बहुत मज़ा आ रहा है… स्स्स्सस्ठ्ठ!”

लड़के की स्पीड अब और तेज़ हो गयी. वह पीछे से झटके मरता जा रहा था — कभी धीरे और गहरे, तोह कभी तेज़ और छोटे. सपना की गीली छूट उसके लुंड को zor-zor से जकड रही थी.

“Ahhhhhh…ssshhhhhh…mmmmm…Ahhhhh…ohhhhh… हैं… मममहहहह… ओह माय गॉड… ahh-ahh-ahh-ahhhhh!”

लड़के ने एक हाथ से सपना के लम्बे बाल पकड़ कर उसका सर पीछे खिंचा. उसकी गर्दन पूरी तरह तन्नी हुई थी. उसने अपना मुंह उसके कान के पास लाया और भरी आवाज़ में बोलै:

“बताओ… कौन थोक रहा है तुम्हे इतनी ज़ोर से?”

सपना की सांसें रुक रही थीं. उसकी छूट से गीला रास लगातार बह रहा था. उसने toot-ti हुई आवाज़ में सिसकते हुए जवाब दिया:

“तुम्हारा… अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह! …तुम्हारा लू… ओह्ह्ह… आराम… से मुझे… हैं… ahh-ahh-ahhhhh… अह्ह्ह… धीरे से… प्लीज!”

लड़के ने उसकी चूचियों को और कास कर मसला और नीचे से और तेज़ धक्के मरने लगा. टॉयलेट की छोटी सी जगह उनके जिस्मों की गीली ‘thap-thap’ आवाज़ों और सपना की मडक्ति सिसकियों से भर चुकी थी.

“Ahhhhhh…Ahhhhhh… मममहहहह… हैं… और… और… ओह्ह्ह hhhh….main… मैं नहीं संभल प् रही… ahh-ahh-ahhhhhhh!”

सपना का पूरा बदन अब लड़के के सहारे लरज़ रहा था. उसकी टांगें काँप रही थीं, चूचियां उसके हाथों में डाब रही थीं और उसकी छूट उसके हर धक्के के साथ और गीली होती जा रही थी.

“अह्ह्ह्हह… हैं… थप… थप… थप्प्प्प्प… ओह्ह्ह मा… बहुत अच्छा लग रहा है… स्स्स्सस्छ्हः… और मत रुकना… ahh-ahh-ahhhhh!”

अब सिर्फ उनका गहरा, be-reham और मादक जिस्मों का utaar-chadhav बाकी था — ट्रैन की तेज़ रफ़्तार के साथ मिल कर.

ट्रैन अब तेज़ मोड़ ले रही थी, और केबिन के अंदर उनका तूफ़ान अपने चरम पर था. लड़के की रफ़्तार अब इतनी तेज़ हो गयी थी की सपना को लग रहा था उसका जिस्म टुकड़ों में बिखर जायेगा. हर ज़ोर के धक्के में उसका पूरा बदन ऊपर की तरफ उठ जा रहा था.

“अह्ह्ह्हह… हैं… स्स्स्सस्छ्हः… ओह्ह्ह गोड्ढ… shhhh….mmmhhhh… और तेज़… ahh-ahh-ahhhhh!” सपना के मुंह से हर झटके के साथ एक मडक्ति और toot-ti हुई सिसकी निकल रही थी, उसकी आँखें बंद थीं और होठों से लगातार सिसकियाँ निकल रही थी.

लड़के का चेहरा सपना की गर्दन में छुपा हुआ था, उसके दांत उसकी नरम चमड़ी पर halke-halke काट रहे थे. उसकी सांसें गरम और भरी हुई थीं. सपना ने महसूस किया की लड़के का पूरा जिस्म dheere-dheere अकड़ रहा है — उसकी पीठ पर मसल्स टाइट हो रहे थे, उसके कंधे सख्त हो गए थे और उसका लुंड उसके अंदर और भी मोटा और सख्त हो चूका था.

“अह्हह्ह्ह्ह… स्स्स्सस्छ्हः… ..ahhh….main… मैं खलास होने वाली हूँ… ओह्ह्ह मा… ममहहहह… निकल… निकल रहा है… ahh-ahh-ahhhhhhh!” सपना की सेंसुअल और कांपती हुई आवाज़ टॉयलेट की ठंडी हवा में गूँज रही थी, क्यूंकि वह अब बिलकुल झड़ने के क़रीब थी.

“मैं… मैं फिर से…” सपना टूटी हुई आवाज़ में kaha….aur उसका जिस्म बुरी तरह कांपने लगा. उसकी छूट ने लड़के के लुंड को इतनी ज़ोर से अंदर से भींचा की लड़का भी अपना कण्ट्रोल खो बैठा.

आअह्ह्ह… hhhhh……Ahhhhh!” लड़के ने उसके कान में कराह कर कहा.

लड़के ने एक आखरी, सबसे गहरा झटका मारा और अपना गरम माल सपना के अंदर पिचकारियों की तरह छोड़ने लगा. एक… दो… तीन… लगातार गरम झाड़ियां उसकी योनि की गहराईयों में भर रही थीं. सपना का पूरा जिस्म एक झटके में अकड़ गया, उसके हलक़ से एक बेहोश कर देने वाली धीमी सिसकी निकली, “अह्ह्ह्हह… ahhhhh……sshhhh….ohhh मा…” उसको लगा जैसे उसके अंदर कोई गरम, पिघला हुआ सैलाब उतर गया हो, जो उसकी छूट की दीवारों को अंदर तक सेहला रहा था.

वह दोनों लोहे के दरवाज़े से चिपके हुए हांप रहे थे. उनका पसीना, जिस्मों की गर्मी और दोनों का रास एक दुसरे में मिल कर बह रहा था. सपना का जिस्म लड़के के जिस्म से इस क़दर कास कर जकड गया था की दोनों के बीच हवा की भी जगह नहीं थी; उसकी उँगलियाँ लड़के के कन्धों पर नाख़ून गड़ाए हुए काँप रही थीं, जबकि नीचे उसका लुंड अब भी सपना की गीली, थरथराती हुई छूट में पूरा धसा हुआ था और अंदर hi अंदर धड़क रहा था.

बहार कॉरिडोर में किसी के चलने की आवाज़ आयी, कपड़ों की सरसराहट हुई, मगर उन्हें कोई परवाह नहीं थी. वह इस वक़्त दुनिया से परे, सिर्फ ek-doosre के जिस्मों की तपिश में डूबे हुए थे.

सपना का सर धीरे से लड़के के कंधे पर टिक गया. उसकी आँखें अब भी बंद थीं, पलों पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं और उसके गीले होठ halke-halke से काँप रहे थे. लड़के ने उसकी गर्दन पर, जहाँ पसीने की एक धार बह रही थी, वहां अपने गरम होठ रखे, एक नरम और थका हुआ चुम्बन किया, और फिर उसके कान के बिलकुल पास अपनी भरी, मडक्ति आवाज़ में फुसफुसाया:

“अभी तोह शुरुआत है, जानेमन..… अभी बहुत कुछ बाकी है.”
 
अपडेट - 11
Dono ka jism thakan se choor-choor tha, saansein ab bhi tez aur tooti hui thin, lekin unki niyat abhi bilkul bhari nahi thi. Sapna ne jab ladke ki aankhon mein dekha aur uski nazar paseene se tar-tar bheege jism par padi toh jaise uske sharir par kisi ne namak laga diya ho ….ek tez si jalan aur sarsarahat unke sharir mein phail gayi. Har saans ke saath unki chamdi aur bhi sensitive ho rahi thi. toh usko samajh aa gaya ki yeh raat abhi bahut lambi hai……

Ladke ne Sapna ke chehre ko dono haathon se apni taraf ghumaya. Uski aankhon mein ab thakan ke saath ek naya shurur tha. Is baar usne usko seedha khada nahi rehne diya. Usne Sapna ki gardan par halka sa pressure diya aur use toilet ke kone ki taraf ishara kiya.

“Ghutno ke bal baitho,” usne dheemi par mazboot awaaz mein hukum diya.

Sapna ki aankhein hairat, sharam aur nashe se bhari thin. Usne bina kuch kahe, dheere se ghutno ke bal baith gayi. Uski salwar ab bhi ghutnon tak neeche thi aur uski geeli…choot hawa mein khuli hui thi. Baithte hi uski choochiyan thodi si jhuk gayi thin aur uski gardan upar ki taraf uthi hui thi.

Ladke ne apne lund ko, jo ab bhi poori tarah sakht, laal aur Sapna ke ras se chamak raha tha, uske chehre ke bilkul qareeb le aaya. Woh mota, dhadakta hua lund Sapna ke hothon se sirf kuch inch door tha. Uski nasein ubhari hui thin aur topa ab bhi uske aur ladke ke mile hue ras se bilkul chamakdar tha.

Sapna ne use dekha. Woh pehle se bhi zyada bhayankar, mota aur sakht lag raha tha. Uski saans tez ho gayi. Usne apne dono naram haathon se use thama …..ek haath ne uske base ko pakda aur doosre haath se uske andkoshon ko halke se sehlaya. Phir usne apni geeli, garam zubaan bahar nikaali aur dheere se uske neele-baingani, chamakdar tope par pheri.

“Aahhh… saali…” ladke ke munh se ek gehri, madhosh karah nikli.

Uski awaaz sun kar Sapna ko aur himmat mili. Usne apna munh khola, apne naram hoth uske lund ke tope par rakhe aur dheere-dheere andar lene lagi. Pehle sirf topa, phir dheere-dheere aadha lund uske garam munh mein samane laga. Uski zubaan neeche se uske lund ko lagatar sehla rahi thi.

Ladke ne Sapna ke baalon mein apni ungliyan phansa lin aur zor se uska sir apni taraf kheench liya. Sapna ki aankhein band ho ganeen, uska gala bhara hua tha, lekin woh poore junoon se use choosne lagi. Uska munh ab uske lund par aage-peeche hone laga tha …. kabhi gehraai tak le ja rahi thi, toh kabhi bahar nikaal kar tope ko zor se choos rahi thi.

“Uffff… bahut achha… aur andar lo…” ladke ne karah kar kaha aur uske baalon ko aur kas kar pakad liya.

Sapna ke munh se “gluck… gluck… gluck…” ki geeli awaazein nikal rahi thin. Uski laar uske lund par se tapak rahi thi, uski thoddi chin par gir rahi thi. Woh ab poori tarah uske lund ki gulami kar rahi thi ….kabhi zor se choos rahi thi, kabhi zubaan se uski nason ko chaat rahi thi, toh kabhi use apne gale tak andar le ja rahi thi.

Ladke ka chehra be-inteha maze se tan gaya tha. Uski taangein thodi si kaanp rahi thin. Woh Sapna ke munh mein apna lund dheere-dheere andar-bahar kar raha tha, kabhi-kabhi use uske gale tak dhakel deta.

Sapna ki aankhon mein aansu aa gaye the gehraai ki wajah se, lekin usne rukne ki koi koshish nahi ki. Uski choot ab bhi geeli ho rahi thi ….sirf uske munh mein lund lene se hi usko itna mazaa aa raha tha.

Ladke se ab aur ek second bhi sabr nahi ho raha tha. Uski aankhon hawas thi….bhookh thi. Usne Sapna ke baalon ko ek haath se pakda aur usko dheere se neeche ki taraf dhakela.

“Ghutno pe ho jao,” usne bhari awaaz mein kaha.

Sapna ne kuch nahi bola, sirf kaanpti hui saans li aur toilet ke thande, thode geele farsh par apne ghutno aur haathon ke bal ho gayi. Doggy style mein uski bhari hui, gol-gol gaand upar ki taraf tanni hui thi. Uski choot peeche se bilkul saaf dikhai de rahi thi …. phooli hui, laal aur abhi bhi ladke ke maal aur uske ras se chamak raha tha. Uske ras ki boondein lagatar tapak rahi thin aur farsh par gir rahi thin.

Ladke ne apne ghutne farsh par tikaaye aur peeche se Sapna ki kamar ko dono haathon se itni zor se pakad liya ki uske naakhun uski naram, gori chamdi mein gadh gaye. Uski bhaari gaand ab uske haathon mein thi. Usne apne mote, laal aur poore sakht lund ko haath mein pakda, uski geeli choot ki daraar par ragda aur bina kisi warning ke ek hi zordar jhatke mein poora ka poora andar ghusa diya.

“Ufffff… Mar gayi main!!!” Sapna ka sir ekdum se upar uth gaya. Uski aankhein phail gayi aur munh se ek lambi, dard-bhari cheekh nikal gayi. Itna gehra aur itna zor ka dhakka tha ki usko laga jaise uski choot phat jayegi.

Is baar ladke ke dhakke gehre, bahut tez aur be-reham the. Woh ab kisi janwar ki tarah uspar chadha hua tha. Har dhakke ke saath uski bhari gaand zor-zor se hil rahi thi aur uski choot ke andar tak uska mota lund andar tak jaakar takrata tha.

Dhapp… Dhapp… Dhapp… Dhapp…

“Aaahhh…! Zor se mat… haaayyy… arrammmm…sseee…hmmm..Ahhhhh ..Ohhhhmmm…!” Sapna ki cheekhein farsh par girti ja rahi thin. Har dhakke ke saath uska poora jism aage ki taraf dhakel diya ja raha tha. Uski bhaari choochiyan neeche ki taraf latak kar zor-zor se jhool rahi thin.

Train jab tez mod leti, toh unki ragad aur bhi zyada gehri aur mazedaar ho jati. Ek mod ke time ladke ne poori taqat se dhakka maara aur uska lund Sapna ki choot ke bilkul end tak jaakar takraya. Sapna ke munh se sirf “Aaaaaahhhh…!” ki awaaz nikli.

Sapna ne apne hothon ko itne zor se kaat liya ki unmein se halka khoon aa gaya. Uski aankhon se aansu beh rahe the — na darr ke, na dard ke, balki us hadd se guzarne ke aansu jo usne kabhi socha bhi nahi tha. Har dhakke ke saath uski choot aur bhi geeli ho rahi thi. Geeli “phach-phach… phach-phach…” ki awaaz toilet ke chhote cabin mein goonj rahi thi.

Ladke ne uski kamar ko aur bhi kas kar pakda aur apni raftaar badha di. Ab woh poori tarah jaanwar ban chuka tha. Uski saansein garam hawa ki tarah Sapna ki peeth par pad rahi thin. Kabhi woh uski gaand par zor se thappad maarta, toh kabhi uske baal kheenchta aur kabhi uski kamar ko pakad kar aur gehra dhakel deta.

Sapna ki taangein kaanp rahi thin. Uski choot ab poori tarah uske lund ke aaspas (around) jakad chuki thi. Har baar jab woh bahar nikalta aur phir se ekdum se andar ghusta, Sapna ke munh se besharam siskiyan nikal padtin …….

“Uffff… Ahhhh…..ahhhhh….aaraam se… haaan… aur aaraam se… Ahhhh…!”

Ladke ne Sapna ke kurte ko ek haath se pakda aur usko aur upar kheench diya, uske kandhon tak lapet diya. Ab uski poori peeth, uski komal gardan aur uski smooth chamdi bilkul nangi ho chuki thi. Uski paseene se tar chamdi halki roshni mein chamak rahi thi.

Usne jhuk kar apna garam seena Sapna ki peeth se sata diya aur apne garam, bhookhe hothon se uski peeth par gehre chumban karne laga. Phir usne apne daanton se uski naram chamdi ko halke-halke kaatna shuru kar diya …. pehle dheere, phir zor se. Ek ke baad ek laal nishaan uski peeth par banne lage.

Sapna ke munh se sirf “Uffff…” ki siski nikal rahi thi.

“Batao…” ladke ne uski peeth par hi munh lagakar garam saans phoonkte hue dheemi awaaz mein poochha, “Kaisa lag raha hai?”

Sapna ki awaaz nikalna bahut mushkil ho raha tha. Uski saansein tooti hui thin, gale mein kuch atak raha tha. Har dhakke ke saath uska poora jism aage ki taraf hil raha tha.

“Bahut… bahut mota hai…” usne haanpte hue, tooti hui awaaz mein kaha, “aaraam se karo… ahhhhh… aaahhh… bahut andar ja raha hai… Uffff!”

Uski choot ki deewarein ladke ke lund ko itni zor se bheenchi hui thin jaise usko apne andar hi samet lena chahti hon. Har baar jab woh bahar nikalta, uski yoni uske lund ko kas kar pakad leti aur jab woh andar dhakel deta toh ek geeli, madhosh “phuchhh…” ki awaaz nikalti.

Ladke ne ab apni raftaar ko aur tez kar diya. Uski kamar ab machine ki tarah chal rahi thi. Har dhakke ke saath uski bhari gaand par uski jaanghon ki “phat-phat-phat” awaaz poore toilet cabin mein goonj rahi thi. Kabhi woh uski gaand par zor se thappad maarta, toh kabhi uski kamar ko pakad kar aur gehra dhakel deta.

Phat! Phat! Phat! Phat!

Sapna ka poora jism ab poori tarah surrender kar chuka tha. Uski aankhein band thin, munh khula hua tha aur uske hoth kaanp rahe the. Woh sirf un jhatkon ko mehsoos kar rahi thi jo uske dimaag ki har nas ko sunn kar rahe the. Har dhakke ke saath uski choochiyan neeche ki taraf jhool rahi thin aur uski peeth par ladke ke daant ke nishaan aur gehre hote ja rahe the.

“Aaahhh… zor se… aur zor se… haan… aaraam se…….Ahhhhh!!…” Sapna khud ko rok nahi pa rahi thi. Uski awaaz ab besharam aur madhosh ho chuki thi.

Ladke ne uske baal pakad kar uska sir thoda upar kheencha aur uske kaan mein garam awaaz mein bola,

“Abhi toh aur bhi andar daalunga… poori raat tumhari choot meri hone wali hai.”

Sapna sirf kaanp kar reh gayi. Uski choot aur bhi geeli ho gayi aur uske andar ek naya selaab ubalne laga था.

Train ne ek bahut tez aur lambi seeti maari, jaise woh bhi unke is junoon ka saath de rahi ho. Usse ek pal ke liye poore station ka sannaata bhi toot gaya.

Ladke ne Sapna ki dono gaand ke phaadon ko apne mazboot haathon se phaila diya, uski choot ko poori tarah khol diya. Uski laal aur phooli hui yoni ab bilkul exposed thi, andar tak chamak rahi thi. Usne apne mote, laal aur abhi bhi hard lund ko uski daraar par rakha aur ek aakhri, poori taqat wala dhakka maara.

Ek hi jhatke mein uska poora lund Sapna ki sabse gehraai tak utar gaya.

“Aaaaaaaaahhhhhhhhhhh…!!!”

Sapna ka munh khul gaya, uski aankhein ulat gayeen aur uska poora jism ekdum se akad gaya. Use laga jaise uske sharir ke hazaron tukde ek saath bikhar gaye hon. Uski choot ne ladke ke lund ko itni zor se bheencha ki uski bhi saans rukne lagi. Is baar uska paani itni zabardast nikla ki uski dono taangein seedhi ho gayeen, uski peeth ek dhanush ki tarah tan gayi aur uske poore badan mein ek tez, gehri kampkapi daud gayi.

“Uffff… nikal raha hai… haaayyy maaa… bahut zor se… Aaaahhhh!”

Sapna ke munh se sirf tooti-tooti siskiyan aur cheekhein nikal rahi thin. Uski yoni ke andar ke jhatke itne tez the ki har jhatke ke saath uska garam ras ladke ke lund ke aaspas around se bahar tapak raha tha.

Ladke ne bhi ab apna poora control kho diya. Uska chehra laal ho chuka tha, gardan par nasein ubhar aayi thin. Usne Sapna ki kamar ko dono haathon se kas kar pakda, apni kamar ko aage ki taraf dhakel diya aur apna poora garam, gaadha maal Sapna ki choot ke sabse gehre hisse mein udelna shuru kar diya.

“Le… poora le le… Uffff…!”

Uske lund ke har jhatke ke saath garam jhadiyon ki tarah maal uske andar bhar raha tha. Itna zyada aur itna garam ki Sapna ko mehsoos ho raha tha jaise uske pet mein aag bhar di gayi ho. Dono ke jism ek saath kaanp rahe the …. ek doosre se bilkul chipke hue.

Jab unka climax khatam hua, toh dono ka jism ekdum se dheela pad gaya. Ladke ne Sapna ko apne seene se lagaye rakha aur dheere se dono farsh par dher ho gaye.

Sapna ka sir ladke ke ghutno par tik gaya. Uski saansein ab bhi bahut tez thin, munh khula hua tha aur uske hoth kaanp rahe the. Ladka deewar se tika hua tha, uski saansein bhi tooti hui thin. Uska ek haath ab bhi Sapna ki gaand par tha, jise woh halke-halke sehla raha tha.

Toilet ki halki peeli roshni unke paseene se chamakte, laal hue jismon par pad rahi thi. Dono ke jism dheere-dheere thande pad rahe the, lekin unke andar ab bhi bijli si daud rahi thi. Sapna ki choot se unka mila-jula ras abhi bhi tapak raha tha aur farsh par ek chhota sa geela nishaan bana raha tha.

Kuch der tak sirf train ki “ghad-ghad… ghad-ghad…” aur unki dheemi saanson ki awaaz hi sunai de rahi thi.

Sapna toilet ke thande farsh par wahi dher ho gayi. Uske pairon mein ab itni jaan nahi bachi thi ki woh turant khadi ho sake. Uske jism ka ek-ek hissa, khaas kar uski choot, us gehri aur be-reham chudai ki thakan se choor-choor tha, magar us thakan mein ek aisi mithaas thi jo usne pehle kabhi mehsoos nahi ki thi.

Ladka wahi darwaze se tik kar khada ho gaya. Uski t-shirt paseene se bheeghi hui thi jo uske mazboot badan ki har lakeer ko ubhaar rahi thi. Saansein ab bhi thodi ukhdi hui thin, lekin uski aankhon mein pehle wali shikari bhookh ab bilkul nahi thi. Uske badle ek sukoon aur garv tha .. jaise usne kisi anmol, chhupe hue khazane ko apne haathon mein sambhal liya ho. Woh chup-chaap Sapna ko dekh raha tha, bina kuch bole. Uski nazron mein ab sirf woh aurat nahi thi jise usne abhi abhi choda tha, balki woh aurat thi jiske har hisse ko usne apna bana liya tha.

Usne dekha ki kaise Sapna ki choot se uska maal dheere-dheere riss kar farsh par gir raha tha. Sapna ne jab apni nazrein upar uthayi, toh usne dekha ki woh anjaan ladka ab use ek ajnabi ki tarah nahi, balki us shaqs ki tarah dekh raha tha jisne uske wajood ke sabse gehre raaz ko chhoo liya ho.

Sapna ne apne bikhre hue baalon ko kaan ke peeche kiya aur pehli baar uski aankhon mein aankhein daal kar ek halki, dabi hui muskan di. Woh muskan ek iqraar thi …. is baat ka ki jo kuch bhi hua, woh uski marzi se tha,aur use usme bahut hi majaa aaya…..

Kuch der baad, ladke ne apna haath aage badhaya aur Sapna ko sahara dekar uthaya. Uske jism ko apne seene se lagaya, taaki woh sambhal sake. Phir bahut hi dhyan se, usne Sapna ki salwar ko upar kheencha. Uske geele, chipchipe andaroonee hisse ko chhupa diya, lekin haath uski jaanghon par thoda zyada der tak raha……. jaise woh usmein ab bhi kuch chhodna chahta ho. Uske kurte ki silvaton ko theek kiya, haathon se uske seene aur kamar par se dhool aur paseena jhaad diya… Toilet ka woh band cabin ab unke us gande aur haseen raaz ka gawah ban chuka tha.

Dono bahar nikle aur wapas corridor se hote hue apne general dibbe ki taraf badhne lage. AC coach ki thandi hawa ab Sapna ko sukoon de rahi thi. Jab woh wapas bheed bhare dibbe mein pahunche, toh mahaul wahi tha …. shor, garmi aur bheed. Magar Sapna ke liye sab kuch badal gaya tha.

Woh phir se apni jagah par aakar khadi ho gayi, jahan bheed ab bhi use dhakke de rahi thi, magar ab use farq nahi pad raha tha. Ladka uske saamne wahi paas khada ho gaya. Train ki 'thak-thak' ab unki saanjhi dastaan sun rahi thi. Sapna ne khidki se bahar andheri raat ko dekha aur mehsoos kiya ki uski choot mein ab bhi woh garam selaab maujood hai, jo use har pal us ajnabi ki yaad dila raha tha.

Raat lambi thi, aur aage ka safar……………………………………….?

सफर को यहीं ख़त्म करें या आगे बढ़ाएं... सब कुछ आप लोगों के रिप्लाई पर देपेंद करता है.
 
अपडेट - 12

जनरल डब्बे में वापस आने के बाद, भीड़ पहले से भी ज़्यादा घनी लग रही थी. हर झटके के साथ लोग एक दूसरे पर गिर रहे थे, लेकिन सपना के लिए यह भीड़ अब सिर्फ एक बहाना बन चुकी थी.

उसकी सलवार का कपडा अंदर से पूरी तरह गीला हो चूका था. वह उसकी छूट से निकलने वाले रास और लड़के के वीर्य के mil-jul से चिपक कर उसकी नरम जाँघों से लिप्त हुआ था. हर बार जब ट्रैन कोई झटका लेती, उसकी फूली हुई छूट के होंठों पर गीला कपडा रगड़ता और एक मीठी सी जलन पैदा करता. वह जलन उसको तुरंत याद दिला देती थी ….उस मोटा, सख्त लुंड का, जो कुछ देर पहले उसकी छूट के अंदर तक zor-zor से धक्के मार रहा था.

लड़का उसके बिलकुल सामने खड़ा था. भीड़ की वजह से उसका एक घुटना सपना की दोनों टांगों के बीच फास गया था. वह दोनों अब किसी अजनबी की तरह नहीं देख रहे थे. …बल्कि ऐसे ….जैसे अब वह एक दूसरे के शरीर के हर राज़ से वाक़िफ़ हो चुके हों.

लड़के ने धीरे से अपना सर झुकाया और अपना मुँह सपना के कान के बिलकुल पास ले आया. उसकी गरम सांस उसके कान के परदे को छू रही थी.

“अभी तोह सफर बहुत लम्बा है, …” उसने धीमी, bhar-bhari आवाज़ में फुसफुसाया, “थक गयी क्या? या अभी और मांग रही हो?”

सपना ने नज़रें ऊपर उठायी. उसकी आँखों में थकन थी, लेकिन उससे ज़्यादा बेचैनी थी…. उसका दिल zor-zor से धड़क रहा था. उसने कोई जवाब नहीं दिया. बस धीरे से अपने दोनों पैरों को थोड़ा और फैला दिया.

जैसे hi उसने पेअर फैलाये, लड़के का घुटना उसकी छूट के ऊपरी हिस्से पर ....उसकी उभरी हुई क्लीट पर ….और ज़ोर से डाब गया. गीला कपडा और उसका सख्त घुटना दोनों मिल कर उसकी सेंसिटिव नुब पर प्रेशर बना रहे थे.

सपना के मुंह से एक हलकी सी सिसकी निकल गयी …….. “मममहह…”

उसकी छूट फिर से जेल होने लगी. वह महसूस कर रही थी की उसका रास नए सिरे से बहना शुरू हो गया है. हर झटके के साथ लड़के का घुटना उसकी क्लीट को upar-neeche रगड़ रहा था. वह छोटी सी स्टिमुलेशन उसके पुरे शरीर में करंट दाल रही थी.

लड़के ने हलके से मुस्कुराते हुए अपना घुटना थोड़ा और ऊपर की तरफ दबाया, जैसे jaan-boojh कर उसको तड़पा रहा हो. उसने फिर से उसके कान में कहा, आवाज़ में एक पोस्सेस्सिवे गरम लहार के साथ:

“वहां टॉयलेट में तूने जितना ज़ोर से चूड़ी थी मुझसे… अब यहाँ सबके सामने chup-chup कर अपनी छूट को मेरे घुटने पर रगड़ रही है. कितनी गन्दी हो तुम, सपना.”

सपना ने अपना लोअर लिप काट लिया. उसकी सांस तेज़ हो गयी थी. वह jaan-boojh कर अपनी कमर को हल्का सा आगे की तरफ झुकाती, ताकि उसका क्लीट उसके घुटने पर और अच्छे से रगड़ सके. उसकी आँखें half-closed थी और चेहरे पर एक मदहोशी थी.

अंदर hi अंदर वह सोच रही थी …. यह सिर्फ शुरुआत थी… के मैं अब इस नशा से कभी बहार नहीं निकल पाऊँगी.

अभी वह जनरल डब्बे की गैलरी में खड़े थे. भीड़ इतनी तेज़ थी की लोग एक दूसरे से चिपके हुए थे. हर तरफ धक्के, गालियां और ट्रैन की “ghad-ghad” की आवाज़ थी, लेकिन सपना और लड़के के बीच का सिलसिला अब बिलकुल अलग दुनिया में चल रहा था.

भीड़ का पूरा फायदा उठाते हुए, लड़के ने अपना हाथ धीरे से नीचे किया और सपना की दुपाते के पीछे छुपा लिया. उसके फिंगर्स सपना की सलवार के ऊपर पहुँच गए. जैसे hi उसने उँगलियाँ राखी, सपना ने एक गहरी, कम्पटी सांस ली और अपनी नज़रें खिड़की के बहार भागती हुई ज़मीन पर जमा कर ली. उसके चेहरे कोई एक्सप्रेशन नहीं था …जैसे कुछ हो hi नहीं रहा हो.

लेकिन अंदर hi अंदर उसका जिस्म जल रहा था.

लड़के ने महसूस किया की सपना की सलवार का कपडा पहले से hi गीला और गरम था. टॉयलेट में हुए सेक्स का सबूत अभी भी उसके कपड़ों में मौजूद था. उसने अपनी उँगलियों से वहां एक छोटा सा घेरा बनाया और dheere-dheere, प्रेशर के साथ दबाना शुरू कर दिया.

सपना का पूरा बदन एक बार फिर से थरथरा उठा. उसकी टांगें हलकी सी काँप रही थी.

“ममहह…” एक बहुत हलकी, दबी हुई सिसकी उसके होठों से निकल गयी, जो भीड़ के शोर में खो गयी.

लड़के की उँगलियाँ अब और कॉंफिडेंट हो चुकी थी. वह उसकी छूट के ऊपर के हिस्से को सर्कुलर मोशन में रगड़ रहा था, कभी दबाता, कभी हल्का सा सहलाता. फिर उसने अपना अंगूठा उसकी सलवार के ऊपर से hi उसकी उभरी हुई क्लीट पर रखा और उसको dheere-dheere, लेकिन प्रेशर के साथ रगड़ने लगा.

सपना की मुट्ठी सीट के लोहे के हैंडल को इतनी ज़ोर से पकड़ चुकी थी की उसके कनखलेस सफ़ेद पद गए थे. उसकी सांस तेज़ हो रही थी, लेकिन वह खिड़की के बहार देखते हुए अपने होठों को बंद किये हुए थी. हर बार जब ट्रैन झटका लेती, लड़के का अंगूठा उसकी क्लीट पर ज़ोर से रगड़ जाता और उसकी छूट के अंदर एक नया करंट दौड़ जाता.

उसको लग रहा था की उसकी छूट फिर से एकदम गीली हो चुकी है. सलवार का कपडा अब उसके रास से और भी चिपक गया था.

लड़के ने अपना मुँह उसके कान के बिलकुल पास ले जाकर गरम सांस में फुसफुसाया, “कितनी गीली हो तुम अभी भी… टॉयलेट में जितना माल छोड़ा था, उसके बाद भी और निकल रहा है क्या?”

सपना ने जवाब नहीं दिया. बस उसने अपने पैरों को थोड़ा और फैला दिया ताकि लड़के की उँगलियाँ और अच्छे से पहुँच सके. उसकी आँखें अब half-closed थी. वह सबके बीच कड़ी थी, लेकिन उसका मैं बिलकुल अलग जगह था …उसके अंदर बेचैनी …और नशा फ़ैल रहा था.

लड़के ने अपनी उँगलियों की स्पीड धीरे से बढ़ा दी. अब वह उसकी छूट के होंठों को भी फील कर रहा था ….कपडे के ऊपर से hi उसकी फूली हुई छूट की दरारे महसूस हो रही थी. सपना की क्लीट इतनी सेंसिटिव हो चुकी थी की हर रगड़ के साथ उसके पेअर काँप रहे थे.

उसको लग रहा था… अगर यह सिलसिला और थोड़ी देर चलता रहा, तोह वह सबके सामने, इसी भीड़ में, फिर से zor-zor से झाड़ जाएगी. उसकी सांस रुकने लगी थी. उसकी छूट अब कण्ट्रोल से बहार होती जा रही थी.

लड़के ने मुस्कुराते हुए उसके कान में कहा,

“झड़ना चाहती हो क्या… यहीं… सबके सामने?”

“ स्टेशन अभी दूर है…” लड़के ने धीमी, bhar-bhari आवाज़ में कहा. उसकी नज़रें सपना के कुर्ते पर टिक्की हुई थी. हर सांस के साथ उसकी भारी, उभरी हुई चूचियां upar-neeche हो रही थी, और कुर्ते के थीं कपडे के अंदर से उसके सख्त निप्पल्स साफ़ दिखाई दे रहे थे.

सपना ने महसूस किया की उसकी चूचियां फिर से भरी और गरम हो रही हैं. उनके निप्पल्स अब बिलकुल खड़े हो चुके थे, और टॉयलेट में लड़के के zor-zor से चूसने और काटने के निशाँ अभी भी उन पर महसूस हो रहे थे … हर बार जब ट्रैन झटका लेती, उसकी चूचियां कपडे से रगड़ती और उसकी छूट में एक नया करंट दौड़ जाता.

सपना ने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया और भीड़ की आड़ में लड़के की जीन्स के ऊपर से उसके लुंड को पकड़ लिया. वह अब भी पूरा सख्त और गरम था ….जैसे चौथे राउंड के लिए तैयार हो. उसकी मोटाई और नसें कपडे के ऊपर से भी क्लेअर्ल्य महसूस हो रही थी.

उसने अपनी नरम मुट्ठी में उस मोटा लुंड को भर लिया और हल्का सा, लेकिन मज़बूत दबाव दिया. लड़के की सांस एकदम से अटक गयी. उसका पूरा बदन टेंस हो गया.

वह तुरंत सपना की गर्दन की तरफ झुक गया और अपना चेहरा उसकी मुलायम गर्दन में छुपा लिया. उसकी गरम, तेज़ सांसें सपना की स्किन पर पद रही थी, कभी उसके कान को छू रही थी. हर सांस के साथ उसका लुंड सपना की मुट्ठी में और भी सख्त होता जा रहा था.

“तुम… बहुत बेशरम हो गयी हो….,” लड़के ने उसकी गर्दन में hi मुस्कुराते हुए कहा, आवाज़ में मज़ा और हैरानी का mila-jula एहसास था.

सपना ने पहली बार उसकी तरफ पलट कर देखा. उसकी आँखों में शर्म की जगह एक चमक थी. उसने उसके लुंड को और ज़ोर से पकड़ा, उँगलियों को उसके अराउंड लपेट कर halke-halke हिलाया और धीरे से जवाब दिया:

“तुमने hi बनाया है मुझे ऐसा…”

उसकी आवाज़ में be-sharmi सी थी. जैसे वह अपनी नयी पहचान को एक्सेप्ट कर चुकी हो …वह औरत जो ट्रैन के टॉयलेट में नंगी होकर चूड़ी थी, और अब भीड़ के बीच khade-khade को लुंड पकड़ रही थी.

लड़के ने उसकी गर्दन पर हल्का सा किश किया और फुसफुसाया, “तोह अब यह बेशरम औरत क्या चाहती है?”

सपना ने कोई जवाब नहीं दिया. बस उसने अपनी मुट्ठी और टाइट की और dheere-dheere upar-neeche हिलने लगी, जैसे भीड़ के बीच भी उसको याद दिलाना चाहती हो की अब उसका शरीर सिर्फ उसके कण्ट्रोल में नहीं रहा था.

उसकी चूचियां अब और भी सख्त हो चुकी थी. उसकी छूट फिर से रास से तर होने लगी थी. और उसके चेहरे पर एक halki…muskan आ गयी थी ….जो सिर्फ लड़के को दिखाई दे रही थी.

भीड़ के शोर, धक्के और ट्रैन की आवाज़ के बीच दोनों एक दूसरे को chupke-chupke तड़पा रहे थे…

ट्रैन एक लम्बे, सीधे रस्ते पर पहुँच गयी और डब्बे में एक बार फिर से घाना अँधेरा छ गया. सिर्फ बहार की हलकी सी रेलवे लाइट्स kabhi-kabhi अंदर झांक कर उनके चेहरों को रोशन कर जाती थी.

इस बार सपना ने इंतज़ार नहीं किया. उसने लड़के का हाथ पकड़ा और बिना किसी हिचकिचाहट के सीधा अपनी सलवार के अंदर, उसकी पंतय के अंदर दाखिल कर दिया. जैसे hi उसकी गरम, मज़बूत उँगलियाँ उसकी गीली और सुलगती हुई छूट से टकराई, सपना का सर पीछे की तरफ गिर गया और सीधे उसके लड़के के कंधे से टकरा गया.

“उफ्फ्फ्फ़…” उसके होठों से एक धीमी, मादक सिसकी निकली.

लड़के ने एक पल भी वास्ते नहीं किया. उसने अपनी दो उँगलियाँ सीधे उसकी टाइट, ras-se-tar छूट के अंदर धकेल दी. वह उँगलियाँ बिलकुल गीली हो चुकी थी. फिर उसने तेज़ रफ़्तार से उन्हें andar-bahar करना शुरू कर दिया ………..तेज़ धक्कों के साथ.

सपना का पूरा जिस्म कम्प उठा. उसकी टांगें काँप रही थी. उसने तुरंत अपने दुपट्टे का पल्ला मुँह में दबा लिया और दांतों से कास कर पकड़ लिया, ताकि उसकी चीखें पूरे दबे में न गूँज उठें.

अँधेरा उनका साथी tha………..Bheed उनका पर्दा थी.

और ट्रैन की “thak-thak… thak-thak” उनकी kam-leela का संगीत बन चुकी थी.

लड़के की उँगलियाँ अब उसकी छूट के अंदर बिलकुल गहराई तक जा रही थी. वह उन्हें अंदर घुसा कर घूमता, फिर तेज़ धक्कों से बहार निकल कर फिर से अंदर पेल देता. हर धक्के के साथ एक गीली “puch-puch” आवाज़ उसकी उँगलियों और सपना के रास के मिलने से बन रही थी, जो सिर्फ उन दोनों को hi सुनाई दे रही थी.

सपना की छूट की नरम दीवारें उसकी उँगलियों को kas-kas कर जकड रही थी, जैसे उन्हें अंदर hi निगल लेना चाहती हो. उसकी क्लीट इतनी उभरी हो चुकी थी की हर बार जब लड़के का अंगूठा उस पर रगड़ता, उसके पुरे जिस्म में बिजली दौड़ जाती.

उसकी आँखें बंद थी, होठ दुपट्टे में दबा हुए थे, और उसके सीने की उभर tez-tez upar-neeche हो रही थी. हर धक्के के साथ उसकी छूट से और ज़्यादा रास निकल रहा था, लड़के की उँगलियों और उसकी जाँघों पर बह रहा था.

लड़के ने उसके कान में गरम सांस के साथ फुसफुसाया, “देखो… कितनी भूखी हो तुम्हारी छूट. मेरी उँगलियों को अंदर hi जकड रही है जैसे मेरा लुंड मांग रही हो.”

सपना सिर्फ और ज़ोर से दुपट्टा काट टी रही थी. उसका बदन अब कण्ट्रोल से बहार होता जा रहा था. वह जान रही थी की अगर यह सिलसिला और थोड़ी देर चलता रहा, तोह वह इसी अँधेरे में, इसी भीड़ के बीच, zor-zor से झाड़ जाएगी….

लड़के ने स्पीड और बढ़ा दी. अब वह अपनी तीसरी ऊँगली भी अंदर दाल कर उसकी छूट को zor-zor से छोड़ रहा था. उसके अंगूठा लगातार उसकी उभरी हुई क्लीट पर तेज़ सर्कल्स बना रहा था. हर धक्के के साथ एक चिकनी, गीली “puch-puch-puch” आवाज़ उसकी उँगलियों और सपना के रास के मिलने से बन रही थी.

“अंडररर….. और andar….haan…” लड़के ने उसके कान में गरम सांस के साथ फुसफुसाया.

सपना की आँखें बंद हो गयी. उसका दिमाग बिलकुल खली हो चूका था. सिर्फ एक hi बात महसूस हो रही थी …..उसकी छूट के अंदर एक गहरा, सुलगता हुआ तूफ़ान उबाल रहा था.

उसकी सांसें बहुत तेज़ और टूटी हुई थी. दुपट्टा उसके मुँह में पूरा भरा हुआ था, फिर भी उसके गले से dheemi-dheemi मदहोश सिसकियाँ निकल hi रही थी ….“मममहह… मममहह… अह्ह्ह!”

अचानक उसकी छूट की अंदर की दीवारें लड़के की उँगलियों को बहुत ज़ोर से कसने लगी. उसका पूरा शरीर एक पल के लिए सख्त हो गया. उसने अपने दोनों हाथों से लड़के की कमर को कास कर पकड़ लिया, जैसे बैलेंस रखने के लिए सहारा चाहिए हो.

फिर वह टूट पड़ी.

“ुह्ह्हह्हह्ह्ह्ह… mmmmmffff!!...Ahhhhhh……Uhhhh!!..shhhh..Ahhh!!”

एक ज़बरदस्त ओर्गास्म उसके अंदर फूट पड़ा. उसकी छूट लड़के की उँगलियों पर zor-zor से चिपकने लगी. गरम, पतला रास उसकी छूट से तेज़ी से बहार निकल कर लड़के की उँगलियों पर, उसकी जाँघों पर और सलवार के अंदर बहने लगा. उसका जिस्म thar-thar काँप रहा था, जैसे बिजली की करंट दौड़ रही हो.

सपना ने पूरी ताकत से दुपट्टा को मुँह में दबा रखा था, फिर भी उसके गले से एक लम्बी, धीमी सी चीख निकली जो ट्रैन की thak-thak में खो गयी. उसकी आँखें उल्ट गयी, आँखों के सामने सितारे चमकने लगे. उसकी चूचियां बहुत ज़ोर से upar-neeche हो रही थी और निप्पल्स इतने सख्त हो चुके थे की दर्द कर रहे थे.

लड़के ने उँगलियाँ अंदर hi रखे हुए उसकी छूट की झटके को महसूस किया. वह मुस्कुराया और धीरे से उँगलियाँ अंदर घूमता रहा, उसके ओर्गास्म को पूरा निकालने तक….

सपना के पेअर पूरी तरह से काँप रहे थे. उसकी छूट से इतना रास निकला की उसकी सलवार की अंदर की गीली हो चुकी थी. उसके घुटने बेंड हो गए और वह लड़के के सीने पर सर रख कर zor-zor से सांस लेने लगी.

लड़के ने धीरे से अपनी उँगलियाँ बहार निकली. वह पूरी तरह चमक रही थी ….सपना के रास से tar-tar.

दोनों के चेहरों पर पसीना चमक रहा था. लड़के ने अपना हाथ बहार निकला, जो सपना के रास से बिलकुल lath-path था. उसने अपनी उँगलियाँ अपने होठों से लगायी और सपना को देखा.

सपना अब पूरी तरह थक चुकी थी, मगर उसका मैं अब भी भरा नहीं tha…..Sapna ने अपनी आँखें बंद कर ली और लड़के के कंधे पर अपना सर टिका दिया. ट्रैन अब अगले स्टेशन की तरफ बढ़ रही थी. रात गहरी हो रही थी, भीड़ सो रही थी, मगर उन दो जिस्मों के बीच का तूफ़ान अभी थमा नहीं tha….lekin सुस्त पद गया था

ये सफर सपना की ज़िन्दगी का सबसे गन्दा और सबसे हसीं सफर बन चूका था. उसकी छूट में अब भी लड़के के लुंड की तपन महसूस हो रही थी,..........

तो बे कॉन्टिनोएड...
 
अपडेट - 13
ट्रैन की तेज़ी सीटी गूंजी और उसकी रफ़्तार dheere-dheere काम होने लगी. बहार की लाइट्स अब साफ़ दिखने लगी थी ….स्टेशन आ चूका था.

सपना का दिल एक बार फिर ज़ोर से धड़कने लगा, लेकिन इस बार उसमें नशा काम और डर ज़्यादा था. उसकी टांगें अभी भी हलकी सी काँप रही थी. सलवार अंदर से पूरी तरह गीली और चिपकी हुई थी. उसकी छूट अभी भी halke-halke झटके ले रही थी, जैसे abhi-abhi उसके अंदर से गुज़रे इंटेंस ओर्गास्म की याद दिलाती हो.

लड़के ने अपना बैग कंधे पर उठाया और उसके बिलकुल करीब आ गया. उनकी आँखें एक दूसरे से मिली. एक पल के लिए दोनों कुछ नहीं बोलेफिर उसने अपना मुँह सपना के कान के बिलकुल पास ले जाकर गरम सांस के साथ फुसफुसाया:

“ये मेरा नंबर है… अगर आज रात की याद आये, अगर शरीर जलने लगे, या नींद न आये… तोह कॉल करना.,,,.”

उसने एक छोटे से कागज़ का टुकड़ा सपना की नरम मुट्ठी में दबा दिया. उसकी उँगलियाँ एक पल के लिए सपना की उँगलियों से लिपट गयी ….सपना ने कुछ नहीं कहा. बस उसने उस कागज़ को अपनी मुट्ठी में कास कर पकड़ लिया. लड़का पीछे हटा, उसकी तरफ एक आखिरी बार नज़र डाली और अगले hi पल भीड़ में घुस कर गायब हो गया.

सपना वही कड़ी रह गयी.

उसके हाथ में सिर्फ वह कागज़ का टुकड़ा था, लेकिन उसके जिस्म में अभी भी उस लड़के की उँगलियों की गर्मी, उसके लुंड की मोटाई और उसके ज़ोर के धक्कों की याद थी. उसकी छूट अभी भी गीली थी, चूचियां अभी भी सख्त थी, और उसकी गर्दन पर उसके गरम साँसों का एहसास अभी भी महसूस हो रहा था.

ट्रैन रुक गयी.

लोग उतरने लगे. सपना ने धीरे से अपनी दुपट्टे अपने शरीर पर सही की, अपने बिखरे बालों को सेट किया और एक गहरी सांस ली.

उसकी आँखों में एक अजब सी कसक थी ……कुछ खोने का डर, नए नशा की प्यास, और कुछ अपनी बदली हुई पहचान का एहसास.

वह जानती थी की अगर उसने इस नंबर को सेव किया, तोह यह सिर्फ एक कॉल नहीं होगा… यह उसकी पूरी ज़िन्दगी को बदल सकता था.

सपना ने मुट्ठी खोली और कागज़ के टुकड़े को देखा. नंबर साफ़ लिखा हुआ था.

उसकी उँगलियाँ उस पर धीरे से फेरी गयी.

फिर उसने हलके से मुस्कुराते हुए उस कागज़ को अपने बैग के andar…chhupa लिया

15 दिन बिट गए थे.

सपना ने अपना सब काम निपटा लिया था. घर, पति, फॅमिली …..सब कुछ ठीक चल रहा था. बहार से वह बिलकुल नार्मल दिखती थी, लेकिन अंदर hi अंदर वह जल रही थी. हर रात वह ट्रैन की उसी रात को याद करती, उस लड़के की उँगलियाँ, उसका मोटा लुंड, उसकी be-sharam बातें… और हर बार उसकी छूट गीली हो जाती. कई बार उसने खुद को टच किया था, लेकिन हाथ से जो मज़ा आता, वह काफी नहीं था.

आज वह वापस लौट रही थी. जैसे hi ट्रैन उसी स्टेशन पर रुकने लगी जहाँ वह लड़का उतरा था, सपना का पूरा जिस्म थरथरा उठा. उसकी सांसें तेज़ हो गयी. वह खिड़की से बहार देखती रही ….उसी प्लेटफार्म को, जहाँ वह उस रात भीड़ में गायब हो गया था.

उसकी छूट में फिर से वह पुराणी मीठी, सुलगती जलन जग उठी. उसकी निप्पल्स सख्त हो गए और सलवार के अंदर उसकी छूट फिर से जेल होने लगी.

उसने न चाहते हुए भी अपना पर्स खोला और उस छोटे से कागज़ का टुकड़ा निकला, जिसे उसने 15 दिन से छुपकर रखा था. उसकी उँगलियाँ काँप रही थी.

“बस एक बार…” उसने दिल में सोचा, “सिर्फ सुन लुंगी उसकी आवाज़…”

लेकिन जैसे hi उसने नंबर डायल किया और फ़ोन कान से lagaya,....Do घंटियां गयी.

“जानता था तुम कॉल करोगी,” लड़के की वही भरी आवाज़ आयी.

सपना की सांस एक पल के लिए रुक गयी. उसकी गर्दन तक गर्मी चढ़ गयी.

“मैं… मैं अभी स्टेशन पर हूँ,” उसने कांपते हुए कहा.

लड़के ने एक पल भी वक़्त वास्ते नहीं किया. बिना किसी सवाल के उसने एक एड्रेस बता दिया .....स्टेशन से सिर्फ आधे घंटे की दूरी पर था…

सपना ने फ़ोन काट कर तुरंत अपने पति को कॉल किया. उसकी आवाज़ में एक बेचैनी थी, जो उसने छुपाने की पूरी कोशिश की.

“Suno….Saloni यहीं रहती है. अचानक उससे बात हो गयी और वह बहुत ज़ोर दे रही है मिलने के लिए. इतनी दूर दुबारा जल्दी आने का मौका शायद न मिले… मैं एक दिन रुक जाउंगी. कल शाम की ट्रैन से आ जाउंगी.”

उसने ने थोड़ा सा भी शक नहीं किया. उसने नार्मल बात की और विश कर दिया. कॉल कट करते hi सपना को अपने झूठ का एहसास हुआ, लेकिन उसके साथ एक अजीब सी एक्ससिटेमेंट भी थी.

उसकी छूट अब बहुत ज़्यादा गीली हो चुकी थी.

सपना ने स्टेशन के बहार एक ऑटो बुक किया और उस एड्रेस की तरफ चल पड़ी जो लड़के ने बताया था. सिटी का यह हिस्सा अभी डेवेलोप हो रहा था ....चरों तरफ खली प्लॉट्स, ुनफिनिशद बिल्डिंग्स और घनी झाड़ियां थी. रास्ता सुनसान और खली था. Jaise-jaise वह दूर जा रही थी, उसका दिल zor-zor से धड़कने लगा.

जब वह बताये हुए पॉइंट पर पहुंची, लड़का वही खड़ा था. ब्लैक t-shirt और जीन्स में, हाथों में सिगरेट, उसकी आँखों में वही पुराणी भूख. उसे देखते hi सपना के पुरे जिस्म में बिजली सी दौड़ गयी. उसकी छूट एकदम से संकुचित हो गयी और रास उसकी पंतय में बहने लगा.

लड़के ने मुस्कुराते हुए इशारा किया. वह दोनों पैदल hi उसके कमरे की तरफ बढ़ गए, जो वहां से लगभग 1 कम दूर था. रास्ता खली था, सिर्फ दूर दूर से कोई ट्रक की आवाज़ आ रही थी.

Chalte-chalte सपना का कण्ट्रोल बिलकुल ख़तम होने लगा. इतने दिन की तड़प, हर रात की मुठ, और अब यह लड़का सामने खड़ा tha.....uski छूट इतनी गीली और भूखी हो चुकी थी की हर कदम के साथ उसको लग रहा था की उसका रास उसकी सलवार के बहार तक बह जायेगा.

उसने और तेज़ कदम चलने की कोशिश की, लेकिन उसकी टांगें काँप रही थी. आखिरकार उसने रुक कर भांपते हुए कहा,

"रुको… मुझे वाशरूम जाना है. कण्ट्रोल नहीं हो रहा…"

लड़के ने उसकी तरफ देखा. उसकी आँखों में समझ आ चुकी थी. वह चरों तरफ देखा .....aas-paas बिलकुल सुनसान था. एक बड़ा खली प्लाट था जहाँ घनी झाड़ियां और कुछ छोटे पेड़ थे.

“वाशरूम?” उसने हलकी सी मुस्कान के साथ कहा. “यहाँ कोई पब्लिक टॉयलेट नहीं है. वहां झाड़ियों के पीछे चली जाओ… कोई नहीं देख रहा.”

सपना ने उसकी तरफ हैरानी और शर्म से देखा. उसका चेहरा लाल हो गया. “यहाँ… बहार?”

लड़के ने उसके करीब आकर उसकी कमर पर हाथ रख दिया और गरम आवाज़ में बोलै, “अब शर्मा क्यों रही हो? ट्रैन के टॉयलेट में जो कुछ हुआ था, उसके बाद यह क्या बात है? जाओ… जल्दी. मैं यहीं खड़ा हूँ.”

लड़का सिर्फ कुछ कदम दूर खड़ा था और उसकी तरफ देख रहा था. …सपना की टांगें काँप रही थी. “जल्दी करो…” लड़के ने धीमी आवाज़ में कहा, “वर्ण मैं भी अंदर आ जाऊंगा.”

सपना ने एक बार aas-paas देखा. कोई इंसान नज़र नहीं आ रहा था. उसकी छूट अब इतनी ज़्यादा तड़प रही थी की उसको सच में कण्ट्रोल नहीं हो रहा था. उसने धीरे से प्लाट की तरफ बढ़ते हुए झाड़ियों के अंदर घुस गयी.

जैसे hi वह झाड़ियों के पीछे छुप गयी, उसने अपनी सलवार और पंतय को जल्दी से घुटनो तक नीचे कर दिया. उसकी छूट बिलकुल गीली, चमकती हुई और फूली हुई थी. उसने एक हाथ से झड़ी पकड़ी और दूसरे हाथ से अपनी छूट को छुआ.

बस छूने भर की देर थी.

जैसे hi उसने कण्ट्रोल छोड़ा, एक गरम, तेज़ धार उसकी छूट से ज़ोर से निकलने लगी. “स्स्स्सस्स्स्शह्ह्हह्ह…” की आवाज़ सुनसान जगह में गूँज उठी. पेशाब की पतली, चमकती धार ज़मीन पर पद कर छींटे उदा रही थी. उसकी गोर, नरम तइस पर भी कुछ गरम बूँदें गिरी और चमकने लगी.

रुक रुक कर भरी तड़प, बेचैनी और अब यह सुनसान जगह… उसका शर्म से चेहरा लाल हो रहा था, लेकिन साथ hi एक अजीब सी मस्ती भी शरीर में फ़ैल रही थी. वह jaan-boojh कर अपनी टांगों को और थोड़ा फैला रही थी, जैसे इस एहसास को महसूस करना चाहती हो .

पेशाब की धार dheere-dheere काम हुई और बंद हो गयी. सपना सांस लेने लगी, उसकी छूट अभी भी गीली थी ….अब पेशाब और उसके रास का mila-jula गीलापन उसकी जाँघों पर चमक रहा tha.Lekin जैसे hi वह रहत की सांस ले कर उठने की कोशिश कर रही थी, उसने पीछे से खड़खड़ाहट सुनी.

कुछ झाड़ियां हिल रही थी.

वह पलट कर देखने से पहले hi समझ गयी थी की वह आ चूका है.

लड़के की आँखों में वही भूख थी, जो उसने ट्रैन में देखि थी. उसने देखा ….सपना घुटनो के बल बैठी हुई थी, सलवार और पंतय घुटनो तक नीचे, उसकी नंगी, गोल गांड पीछे की तरफ उभरी हुई और उसकी छूट अभी भी खुली हुई थी. उसके गीले, चमकते हुए जांघ पर पेशाब की कुछ बूँदें अभी भी चमक रही थी.

लड़के ने एक पल भी वास्ते नहीं किया. उसने जल्दी से अपनी ज़िप खोली और बहार निकाल लिया अपना मोटा, लाल और पूरा सख्त लुंड. उसकी टोपी चमक रही थी, नसें उभरी हुई थी और वह बिलकुल तैयार खड़ा था ….जैसे इतने दिन से इस पल का इंतज़ार कर रहा हो.

“उठ,” उसने आदेश देने वाले अंदाज़ में कहा.

सपना कुछ बोलने से पहले hi कड़ी हो गयी. उसकी टांगें काँप रही थी. उसने आगे एक टूटी हुई अधूरी दीवार का सहारा लिया और अपने आप को आगे झुका दिया. उसकी भारी, गोल गांड पीछे की तरफ उभर आयी, बिलकुल खुली हुई.

लड़के ने दोनों हाथों से उसकी मुलायम गांड के फैंको को ज़ोर से पकड़ा और फैला दिया. उसकी छूट अब पूरी तरह खुली और गीली थी ….

बिना किश, बिना फोरप्ले, बिना एक शब्द के …..लड़के ने अपने मोठे लुंड की चमकती टोपी उसकी छूट के मुंह पर राखी और एक ज़बरदस्त धक्का मारा.

“आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह…!”

सपना की चीख सुनसान मैदान में डाब गयी…. उसकी आँखें बंद हो गयी, मुँह खुला रह गया और उसका पूरा जिस्म एकदम से अकड़ गया. लड़के का मोटा लुंड एक hi धक्के में उसकी टाइट छूट को पूरा भर गया था. उसकी अंदर की दीवारें ज़ोर से फैल रही थी. दर्द और मज़ा का तीखा, गहरा एहसास हो रहा था.

लड़के ने उसकी कमर को दोनों हाथों से कास कर पकड़ा और एक और गहरा धक्का दिया. उसका पूरा लुंड अब तक उसके अंदर चला गया था …..बिलकुल लास्ट तक.

“बहुत टाइट है अब भी… इतने दिन बाद भी वैसी hi छूट लग रही है,” उसने सपना के कान के पास सांस छोड़ते हुए कहा.

फिर उसने अपनी कमर हिलना शुरू किया ….पहले dheere…..phir तेज़ …..फिर और तेज़. हर धक्के के साथ सपना की गांड ज़ोर से हिल रही थी और उसकी छूट से puch-puch… puch-puch… की गीली आवाज़ें निकल रही थी.

सपना की चीखें अब dheere-dheere मदहोश सिसकियों में बदल रही थी.

“अह्ह्ह… अह्ह्ह… ahhhh…..ahhhhh….shhhhhh ……ुमंम्हह!”

लड़के ने एक हाथ आगे बढ़ाया, उसके कुर्ते के अंदर हाथ दाल कर उसके भारी, नंगे बूब्स को कास कर जकड लिया और zor-zor से मसलने लगा. दूसरे हाथ से उसकी कमर पकड़ कर वह अब पूरी तरह से उसको छोड़ रहा था …..

हर धक्के के साथ उसकी गांड से टकराहट की आवाज़ गूँज रही थी. सपना की छूट अब उसके लुंड को अंदर hi अंदर kas-kas कर जकड रही थी, जैसे उसको छोड़ना hi न चाहती हो.

झाड़ियों के पीछे यह सुनसान जगह अब उनके इस जूनून और चुदाई की गवाह बन चुकी थी. सिर्फ उनकी साँसों की तेज़ आवाज़ें, जिस्म की टकराहट और सपना की मदहोश सिसकियाँ hi गूँज रही थी.

“Phuchhh…..Ahhhhh…..Ummmm…Ahhh…shhhh…..Phuchh…Phuchh…

इतने दिन की तड़प और खुले मैदान की सुनसान आज़ादी ने दोनों के अंदर का हद्द पार कर दिया था. लड़का सपना को पीछे से इतनी ज़ोर से थोक रहा था की उसके पेअर ज़मीन से उठने लगे थे. हर झटके के साथ उसका पूरा जिस्म आगे की तरफ झूल रहा था. उसकी उभरी हुई निप्पल्स झाड़ियों के छोटे काँटों से halka-halka टकरा रहे थे, जो दर्द और मज़ा का एक अजीब सा सिलसिला बना रहे थे.

लड़के ने उसके लम्बे बाल एक मुट्ठी में पकड़ लिए और उसका सर धीरे से पीछे खिंच दिया. उसके सीने की गोलाई और भी उभर आयी.

“बड़ी जल्दी कॉल किया… इतनी तड़प रही थी?” उसने पीछे से धक्के मारते हुए, उसके कान के पास गहरी आवाज़ में पुछा.

सपना ने कुछ नहीं कहा. सिर्फ उसके मुँह से एक धीमी, टूटी हुई सिसकारी निकल गयी.

Ahhhh…umuummm…hhh….”

उसकी आँखें बंद थी, होंठ कैसे हुए थे. उसकी छूट उसके मोठे लुंड को अंदर kas-kas कर ले रही थी, जैसे उससे छोड़ना hi न चाहती हो.

लड़के ने उसकी कमर को और मज़बूती से पकड़ लिया और रफ़्तार बढ़ा दी. अब उसके धक्के और भी तेज़ और गहरे हो गए थे. खुले आसमान के नीचे, झाड़ियों की आड़ में, सपना का पूरा शरीर उसके हर झटके के साथ हिल रहा था. उसकी छूट से निकलने वाला गीला रास उसके रणन से होते हुए ज़मीन पर टपक रहा था. हर धक्के के साथ हलकी “puchhh-puchhhh” की आवाज़ हो रही थी.

सपना के मुँह से सिर्फ मदहोशी भरी सिसकारियां और धीमी चीखें निकल रही थी. “अह्ह्ह… अह्ह्ह… हैं…” वह baar-baar अपना मुँह झाड़ियों की तरफ मोड़ लेती, जैसे अपनी आवाज़ को रोकना चाहती हो, लेकिन उसके जिस्म का हर हिस्सा उस लड़के के लुंड के सामने बेकाबू हो चूका था.

अंत में लड़के ने उसको पूरी ताक़त से अपने सीने से चिपका लिया. उसका मोटा लुंड उसकी छूट के सबसे गहरे हिस्से तक धंसा हुआ था. उसने एक ज़ोर का धक्का दिया और गरम माल की धारें उसके अंदर भरने लगी.

सपना का पूरा जिस्म एकदम से सख्त हो गया. “आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह…!” उसकी उँगलियाँ झड़ी की दीवार को ज़ोर से पकड़ ली, आँखें बंद, मुँह खुला रह गया. उसकी साँसें रुक सी गयी, फिर एक लम्बी, कांपती हुई, गहरी सिसकारी निकल गयी .........“उम्म्म्मफफ्फ्फ़… हाआनंनं…!” वह वही झाड़ियों के बीच ढेर हो गयी. उसकी टांगें हिल रही थी, सीना zor-zor से upar-neeche हो रहा था और उसकी छूट अभी भी लड़के के लुंड को अंदर kas-kas कर जकड रही थी.

उसकी सलवार अब भी घुटनो के पास उलझी हुई थी. उसकी छूट अभी भी सूजी और खुली हुई थी, जिसमे से लड़के का गरम माल dheere-dheere निकल कर उसके रणन पर से होते हुए मिटटी में मिल रहा था.

सपना वही लेती रही, हानपति हुई, आँखें बंद किये. उसका चेहरा पसीने से भीगा हुआ था. उसके हाथों में अब भी हलकी सी काँप थी. वह कुछ बोल नहीं रही थी, सिर्फ उसके जिस्म की हर धड़कन उस लड़के के लुंड की याद को अंदर समेत रही थी.

लड़का उसके पास बैठ गया. उसने धीरे से सपना के पसीने से भीगे बालों को उसके चेहरे से हटाया और उसके माथे पर एक हल्का सा किश किया. सपना ने आँखें खोल कर उसकी तरफ देखा .....उसकी नज़रों में शर्म भी थी, तड़प भी थी और छुपा हुआ इक़रार भी......

तो बे कॉन्टिनोएड.....
 
अपडेट - 14

लड़के ने धीरे से अपनी ज़िप बंद की और सपना की तरफ झुक कर उसको सहारा दिया. उसने एक हाथ से उसकी कमर पकड़ ली और दूसरे हाथ से उसको उठाने में मदद की. सपना की टांगें अभी भी काँप रही थी, जैसे वह अपना बैलेंस hi नहीं रख प् रही हो.

उसने अपने जेब से रुमाल निकला और नज़ाकत से उसके गीले रणन और छूट के बहार बाह रहे अपने माल को साफ़ करने लगा. उसकी उँगलियाँ उसकी सेंसिटिव स्किन पर घूम रही thi…..dheere, लेकिन एक हलकी सी जल्दी के साथ, जैसे अभी भी उसको छोड़ने का मैं नहीं हो रहा हो. रुमाल के साथ उसके गरम माल को पोंछते हुए वह मुस्कुराया.

“अभी तोह रास्ता बहुत बाकी है, सपना,” उसने उसके कान के पास गरम सांस छोड़ते हुए धीरे से फुसफुसाया.

सपना ने कुछ नहीं कहा. वह सिर्फ कंपते हाथों से अपनी सलवार ऊपर खींची और कुर्ते को ठीक किया. उसका चेहरा अभी भी पसीने से भीगा हुआ था और उसकी सांसें अभी भी भरी हुई थी. उसका पूरा जिस्म halka-halka थरथरा रहा था, जैसे अभी भी उसके अंदर वह तेज़ी से धक्के महसूस हो रहे हों.

दोनों सुनसान, adh-viksit एरिया की कच्ची सड़क पर चलने लगे. शाम की सुर्ख रौशनी dheere-dheere गहरे अँधेरे में बदल रही थी. हर कदम के साथ सपना को अपनी छूट के अंदर लड़के का गरम, चिपचिपा माल महसूस हो रहा था. वह अंदर से बहुत गीली थी ,उसका माल और अपना रास मिल कर उसकी छूट को और भी चिपचिपा बना रहा थे.

चलते वक़्त उसकी सलवार के अंदर से एक हलकी सी “chapat-chapat” की गीली आवाज़ आ रही थी. वह अपनी टांगें थोड़ी सी कास कर चल रही थी, लेकिन हर कदम उसको याद दिला रहा था की उसके अंदर अभी भी वह लड़का मौजूद है ….

उसकी छूट अभी भी halke-halke झटके ले रही थी. हर कदम पर उसकी सूजी क्लीट सलवार के कपडे से रगड़ रही थी, जिससे उसके शरीर में nayi-nayi सिहरन दौड़ रही थी. उसकी चूचियां अभी भी सख्त थी और हर सांस के साथ कपडे से रगड़ रही थी.

सपना chup-chaap उसके साथ चल रही थी, लेकिन उसके मैं में एक तूफ़ान था. वह जानती थी की यह सिर्फ शुरुआत थी. कमरे पे पहुँचते hi यह लड़का उसको फिर से छोड़ने वाला है…. इस बार पूरी रात, बिना किसी रुकावट के.

लड़के ने उसकी कमर पर हाथ रख कर उसको अपने से थोड़ा और खींच लिया और धीरे से बोलै,

“जल्दी चलो… मुझे फिर से तुम्हे छोड़ना है.”

सपना ने सिर्फ अपने होठ काट लिए और चुप रह गयी, लेकिन उसकी छूट ने उसके अंदर एक नया रास निकाल कर उसको बता दिया की उसका जिस्म उस लड़के के हर शब्द के लिए तैयार है.

लगभग दस मिनट chalte-chalte वह एक ऐसी बिल्डिंग के पास पहुंचे जो अभी पूरी तरह बानी नहीं थी. Aas-paas बिलकुल सन्नाटा था …..कोई aata-jaata नहीं दीखता था. लड़का उसको दूसरी मंजिल पर ले गया. वहां एक कोने में उसका छोटा सा कमरा था.

जैसे hi दरवाज़ा खुला, सपना को मरदाना पसीने और सिगरेट की हलकी सी महक आयी. उसके दिल की धड़कन और तेज़ हो गयी. लड़के ने दरवाज़ा बंद किया और तुरंत कुण्डी लगा दी.

कमरे में सिर्फ एक पुराण गद्दा बिछा हुआ था और ऊपर एक हलकी नीली बल्ब जल रही थी, जो कमरे को एक अजीब सी मदहोशी भरी रौशनी दे रही थी.

जैसे hi दोनों कमरे में दाखिल हुए, सपना ने मुड़कर कुछ कहना चाहा …..शायद “थोड़ा रुक… धीरे…” या कुछ और — लेकिन लड़के ने उसको मौका hi नहीं दिया. उसने एक ज़बरदस्त झटके से सपना को दरवाज़े से चिपका दिया. उसके दोनों मज़बूत हाथों ने उसके कुर्ते को पकड़ा और एक hi ज़ोर के झटके में बीच से पहाड़ दिया.

“आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह!”

सपना की एक छोटी सी, दबी हुई चीख निकल गयी. उसका नरम, गोरा और पसीने से चमकता बदन नीली रूम लाइट में एकदम से चमक उठा. वह बिना ब्रा के थी. उसकी भारी, गोल और भरी हुई चूचियां एक साथ बहार आ गयी …..बिलकुल नंगी, उभरी हुई और हिलती हुई. उनके गुलाबी निप्पल्स अभी भी सख्त और खड़े थे, ट्रैन और झाड़ियों वाले मिलान के दांतों के निशाँ अभी भी उन पर लाल और चुभे हुए दिखाई दे रहे थे.

सपना ने शर्म से तुरंत अपने हाथों को सीने पर रखने की कोशिश की, लेकिन लड़के ने उसके दोनों नाज़ुक कलाइयों को पकड़ कर ऊपर की तरफ कर दिया और उन्हें दरवाज़े के साथ दबोच दिया. अब वह बिलकुल बेकाबू था …… सपने के हाथ ऊपर, चूचियां खुली हुई, और उसका बदन उसके सीने से बिलकुल सत्ता हुआ.

उसकी सांसें बहुत तेज़ और भरी हुई थी. उसका चेहरा लाल हो चूका था. वह आँखें नीचे किये हुए थी, लेकिन उसके जिस्म की हर धड़कन, हर सांस बता रही थी की उसके अंदर अभी भी वही आग सुलग रही है…

लड़के ने उसके एक निप्पल को अपनी उँगलियों के बीच पकड़ कर हल्का सा दबाया, फिर उसको घुमाया. सपना के मुँह से फिर से एक मदहोश, धीमी सिसकारी निकल गयी ….“मममहहहह…”

उसकी छूट फिर से गीली होने लगी. उसकी सलवार के अंदर का कपडा अब दोबारा गीला होने लगा था, जिसमे अभी भी उसका पहले वाला माल चिपका हुआ था.

लड़के ने उसकी गर्दन पर अपना मुँह रखा, उसको हल्का सा काटा और गरम सांस छोड़ते हुए बोलै, “अब क्या शर्मा रही हो? ट्रैन में, झाड़ियों में… और अब यहाँ भी? तुम मेरी बन चुकी है….”

सपना कुछ नहीं बोली. सिर्फ उसकी सांसें और उसकी सख्त चूचियां उसके लिए जवाब बन गयी थी.

अब वह दोनों बिलकुल अकेला था …..एक सुनसान, adh-viksit बिल्डिंग के छोटे से कमरे में, जहाँ कोई उन्हें रोकने वाला नहीं था. बहार अँधेरा हो चूका था और अंदर सिर्फ उनके जिस्म की गर्मी और बेचैनी hi बची थी…..

लड़के ने सपना के होठों को इतनी शिद्दत से अपने मुंह में भर लिया की सपना को अपने hi खून का हल्का ज़ायक़ा महसूस होने लगा. वह उसको चुम नहीं रहा था ……वह उसको खा रहा था. उसकी ज़ुबान उसके मुंह के अंदर घुस कर उसकी ज़ुबान को ज़ोर से जकड रही थी, उसके नरम होठों को काट रही थी और चूस रही थी. सपना के होठ सूज कर लाल से होने लगे थे .

उसकी सांसें उसके मुंह में hi घुल रही थी.

लड़के के दोनों हाथ तुरंत उसकी bhari-bhari चूचियों पर पहुँच गए. उसने उन्हें अपनी बड़ी, मज़बूत मुट्ठियों में कास कर भर लिया और zor-zor से मसलने लगा. उसकी उँगलियाँ उसकी नरम, गोले चाचियों में गहरे धंस गयी. सपना के मुँह से एक धीमी, कांपती सिसकारी निकल गयी ….“मममहहहह… अह्ह्ह!”

उसकी चूचियां लड़के के हाथों में डाब रही थी, उनकी शेप बदल रही थी. निप्पल्स अब बिलकुल सख्त और खड़े हो चुके थे, चुभते हुए. हर ज़ोर के दबाव के साथ उसके जिस्म में दर्द और मज़े का मिलान फ़ैल रहा था.

“इतने दिन…” लड़के ने उसकी एक चूची को मुँह से छोड़कर कहा, “इतने दिन से मैं सिर्फ इनके बारे में सोच रहा था. रात को उन्हें याद करके कितनी बार मुठ मारी है मैंने…”

उसने तुरंत उसकी एक चूची को पूरी तरह अपने गरम मुंह में भर लिया. उसकी ज़ुबान निप्पल के चरों तरफ घूम रही थी, फिर उसने डेंटन से उसको halka-halka काटना शुरू कर दिया. सपना की पीठ पीछे की तरफ झुक गयी और उसके मुँह से एक तेज़ सिसकी निकल गयी.

सपना ने लड़के की शर्ट के बटन्स की परवाह नहीं की. उसने ज़ोर से खिंच कर कुछ बटन्स तोड़ दिए और उसके नंगे, मज़बूत सीने पर अपने नाज़ुक नाख़ून गहरे गदा दिए. लाल निशाँ बन गए. उसने झुक कर लड़के की बेल्ट की बुखले खोली और ज़िप नीचे की.

जैसे hi उसकी पंत खुली, लड़के का मोटा लुंड जैसे गुस्से में भरे सांप की तरह बहार उछाल पड़ा. वह अब पहले से भी ज़्यादा भयंकर लग रहा था ….लाल, पूरी तरह तन कर खड़ा, मोटाई , उभरी हुई नसों वाला और टोपा चमकदार प्रेकम से गीला. उसका लुंड zor-zor से उछाल रहा था, जैसे सपना की छूट के अंदर घुसने के लिए बेचैन हो.

सपना की आँखें उस मोटा लुंड को देख कर थोड़ी सी फैल गयी. उसकी छूट ने अंदर से एक नया गरम झोंका महसूस किया.

लड़के ने उसकी गर्दन पकड़ कर उसको फिर से किश किया और बोलै,

“अब देखो… इतने दिन की तड़प अब तुझे भुगतनी पड़ेगी.”

लड़के ने सपना को कमर से पकड़ कर उठाया और ज़ोर से गड्ढे पर पटक दिया. उसकी भारी चूचियां ज़ोर से उछाल पड़ी. सपना ने खुद hi अपने दोनों पैरों को फैला दिया …..टांगें चौड़ी करके घुटने मोड़ कर. उसकी छूट अब पूरी तरह खुली हुई, गीली और लड़के के लिए बिलकुल हाज़िर थी. उसकी फूली हुई पंखुड़ियां चमक रही थी और अंदर से गीलापन बहार आ रहा था.

लड़का तुरंत उसके ऊपर चढ़ गया. उसका बदन सपना के ऊपर छाया हुआ था. उसने बिना किसी किश, बिना चूचियों को चूसे, बिना एक भी फोरप्ले के अपना मोटा, लाल लुंड सपना की छूट के मुंह पर रखा. उसकी चमकती टोपी उसकी गीली छूट के होंठों को छू रही थी.

"तैयार हो?" उसने गहरी आवाज़ में पूछा. उसकी आँखों में आग सी जल रही थी.

सपना ने आँखें बंद करते हुए जवाब दिया,

“Hannnnnnnnnn… बस अंदर दाल दो… प्लेसस्ससे… …”

लड़के ने एक पल भी इंतज़ार नहीं किया. उसने अपनी पूरी ताक़त से एक ज़बरदस्त झटका मारा.

“AAAAAHHHHHHHHHH…!”

सपना की चीख कमरे की दीवारों से टकरा गयी. लड़के का मोटा लुंड एक hi धक्के में उसकी छूट को पूरा छोड़ता हुआ अंदर तक उतर गया. उसकी टाइट, गीली दीवारें ज़ोर से फैल गयी. सपना का पूरा बदन धनुष की तरह अकड़ गया. उसकी उँगलियाँ गड्ढे की चादर को इतनी ज़ोर से पकड़ रही थी की उनके नाख़ून अंदर धंस गए.

लड़के ने रफ़्तार बढ़ा दी. वह अब उसको किसी दुश्मन की तरह छोड़ रहा था …..zor-zor se,.....gehre धक्कों के साथ. हर धक्का इतना मज़बूत और गहरा था की सपना को सच में लग रहा था की उसका पेट पहात जायेगा.

“थप… थप… थप… थप…”

गीली, मादक आवाज़ें कमरे में गूँज रही थी. सपना की भारी चूचियां हर धक्के के साथ zor-zor से उछाल रही थी. उसकी आँखें उलटी हुई थी, मुँह खुला था और उसके होठ काँप रहे थे.

“अह्ह्ह… ohhhhh…..ahhhhh…..aur ….. गहरा… और ज़ोर से… haaan…shhhhhh…mmmm…hhhahhhh!!”

लड़के ने उसकी टांगों को और ऊपर की तरफ खींचा और और भी गहरे धक्के मरने लगा. उसका मोटा लुंड हर बार उसकी छूट की सबसे अंदर तक टकरा रहा था. सपना की छूट अब उसके लुंड के अराउंड kas-kas कर जकड रही थी, जैसे उसको अंदर hi निगल लेना चाहती हो.

सपना का चेहरा पसीने से बिलकुल तर था. उसके बाल उसके माथे और गर्दन से चिपक गए थे. उसकी आँखें adh-khuli थी और उनमें सिर्फ नशा था. उसकी सांसें टूटी हुई थी और हर सांस के साथ उसकी भारी चूचियां zor-zor से upar-neeche हो रही थी.

लड़के ने उसके दोनों पैरों को उठा कर अपने कन्धों पर रख दिया. इस पोजीशन में सपना की छूट पूरी तरह खुल गयी ….फूली हुई, गीली और बिलकुल नंगी. उसकी लाल पंखुड़ियां खुली हुई थी और अंदर का गीलापन चमक रहा था.

लड़के ने पीछे हैट कर अपने मोठे लुंड को उसकी छूट के मुंह पर रगड़ा और फिर एक ज़बरदस्त धक्का मारा.

“ऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह…!”

सपना के मुंह से एक लम्बी, गहरी और मदहोश चीख निकल गयी. उसका पूरा बदन एक पल के लिए अकड़ गया. लड़के का मोटा लुंड इस नयी पोजीशन में और भी गहरा उतर गया था, उसकी छूट की हर सिलवट को छेड़ता हुआ.

लड़के ने अपना चेहरा उसके कान के बिलकुल पास ले जाकर गरम सांस छोड़ते हुए पुछा,

“कैसा लग रहा है? ट्रैन वाला मज़ा… या यह वाला?”

सपना ने आँखें बंद करके, टूटी हुई आवाज़ में भांपते हुए जवाब दिया,

“ये… ये जान ले लेगा मेरी …अह्ह्ह… धीरे see…zor से… और अंदर….. प्लीज… …mujhhheee…..nhiiii..ptaaaa..ahhhhh!!!”

उसकी छूट से लगातार पानी निकल रहा था. हर धक्के के साथ एक “पूछह” की आवाज़ के साथ उसका रास गड्ढे पर गिर रहा था. उसकी छूट अब इतनी गीली हो चुकी थी की लड़के का लुंड andar-bahar आसानी से फिसल रहा था, लेकिन उसकी तिघटनेस अभी भी उसको कास रही थी.

लड़के ने रुकने का नाम नहीं लिया. उसने सपना को झटके से घुमा दिया. अब वह उसके पेट के बल थी. उसने उसकी कमर को पकड़ कर उसकी गांड ऊपर की तरफ उठा दी, ताकि उसकी छूट और गांड दोनों बिलकुल खुली हुई और ऊपर की तरफ हो.

सपना की गांड अब बिलकुल उभरी हुई थी. लड़के ने दोनों हाथों से उसकी गांड के फैंको को फैलाया और अपना मोटा लुंड फिर से उसकी छूट के अंदर एक ज़ोर के धक्के से घुसा दिया.

“ाआईईई… हैं…!”

सपना का सर गड्ढे में धंस गया. उसकी उँगलियाँ चादर को कास कर पकड़ रही थी. लड़का अब उसको पीछे से छोड़ रहा था …किसी जानवर की तरह, zor-zor से, गहरे धक्कों के साथ. हर धक्के के साथ उसकी गांड हिल रही थी और उसकी चूचियां गड्ढे से रगड़ रही थी.

अब यह सिर्फ चुदाई नहीं थी… ये एक नशा थे …जो सपना और उस लड़के पे छाया हुआ था ….

अब वह पीछे से उसपर चढ़ा हुआ था. लड़के ने सपना की कमर को इतनी ज़ोर से पकड़ लिया की उसकी उँगलियों के गहरे निशाँ उसकी गोरी चमड़ी पर पद गए. उसने अपना मोटा, लाल लुंड दोबारा उसकी छूट में घुसा दिया …..एक hi झटके में पूरा का पूरा अंदर तक.

‘Ahhhhhhhh…shhhhhh!!!!’

इस पोजीशन में उसकी धक्कों की ताकत और भी बढ़ गयी थी. हर धक्का पहले से ज़्यादा गहरा, तेज़ हो रह था. उसकी गांड हर बार उसके पेट से टकरा रही थी और “thap-thap-thap” की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थी.

सपना की सिसकियाँ अब चीखों में बदल चुकी थी.

“अह्ह्ह… हैं… ahhhhh…mmmhhhshhhh…!”

“thap….thap…..thap…..ahhhhh..ahhhh….”

“अह्हह्ह्ह्ह…. अह्हह्ह्ह्ह… thap….thap…..thap..ahhhhh…. अह्ह्ह्हहसष्ठ!”

लड़के ने उसके लम्बे बालों को एक मुट्ठी में भर लिया और उसका सर पीछे की तरफ खिंच लिया. सपना की पीठ एकदम से आर्च हो गयी, उसकी चूचियां zor-zor से हिलने लगी. वह अब पूरी तरह बेकाबू थी ….उसका जिस्म सिर्फ उसके धक्कों के रदम में हिल रहा था.

दोनों अब इंसान नहीं, आग के दो गोले बन चुके थे ….एक दूसरे को जला रहे थे, एक दूसरे में जल रहे थे.

जब उनका क्लाइमेक्स क़रीब आया, तोह कमरे का तापमान जैसे सौ डिग्री पहुँच गया हो. लड़के ने सपना की गांड को दोनों हाथों से हिलाया, उसके फैंको को ज़ोर से फैलाया और अपने लुंड को आखरी बार पूरी ताकत से उसकी गहरी से गहरी गहराई तक धंसा दिया.

सपना का पूरा जिस्म एकदम से सख्त हो गया. उसकी आँखें नशे और मजे में बंद हो गयी और उसके मुँह से एक lambi…si चीख निकल गयी — “Aaaaaahhhhhhhhhh… मैं… aaahhh…ahhhhhh…uuuhhhhhhh..hmmmmm!”

उसका पानी फवारे की तरह zor-zor से निकलने लगा. उसकी छूट लड़के के लुंड को kas-kas कर जकड रही थी, जैसे उसको अंदर hi निगल लेगी. उसके रास की गहरी धार उसके लुंड पर और गड्ढे पर बहने लगी.

ठीक उसी पल, लड़के ने भी एक ज़ोर की गहरी सिसकी ली और उसने अपना गरम, गाढ़ा माल सपना की छूट की दीवारों पर zor-zor से उड़ेल दिया. दोनों के जिस्म एक साथ thar-thar काँप रहे थे. लड़के का लुंड उसके अंदर hi उछाल रहा था, हर झटके के साथ और माल भर रहा था.

दोनों वही गड्ढे पर ढेर हो गए.

कमरे में सिर्फ उनकी bhari-bhari, टूटी हुई साँसों की आवाज़ गूँज रही थी. सपना का सर लड़के के सीने पर था. उसकी छूट अभी भी halke-halke झटके ले रही थी और दोनों का mila-jula रास उसकी जाँघों से बाह रहा था.

गद्दे पर बिखरी हुई, पसीने में शराबोर सपना की सांसें जब dheere-dheere थमी, तोह कमरे की उस नीली रौशनी में एक अजीब सा सन्नाटा छ गया. यह वह सन्नाटा था जो अक्सर तूफ़ान के बाद आता है …..भयानक, गहरा और सवालों से भरा हुआ.

सपना जानती थी… यह रात अभी ख़त्म नहीं हुई थी.

यह तोह सिर्फ शुरुआत थी उनकी us,...........haseen और खतरनाक दास्ताँ की.

तो बे कॉन्टिनोएड...........
 
अपडेट कल दूंगा ..वीकेंड पे मजा क्र रहा था अपुन तो नहीं दे पाया :दारू: :चियर्स:
 
अपडेट - 15

सपना ने धीरे से अपनी आँखें खोली और छत की तरफ देखने लगी. वहां एक पुराण, धीमा पंखा 'kari-kari' की आवाज़ के साथ घूम रहा था, जैसे उनके पिछले तूफ़ान का मज़ाक उदा रहा हो.

उसकी छूट अभी भी लड़के के गाढ़े, गरम माल से भरी हुई थी. हर सांस के साथ उसके अंदर एक halka-halka दर्द और मीठी जलन महसूस हो रही थी. उसकी जांघें अभी भी गीली थी, और उसका जिस्म पसीने और सेक्स की खुशबू से सराबोर था. लेकिन उसके जिस्म की यह थरथराहट, अब उसके दिमाग के तूफ़ान के सामने कुछ भी नहीं थी.

"मैंने यह क्या कर दिया…?"

यह सवाल उसके ज़ेहन में हतोड़े की तरह बजने लगा……

वह सपना, जो रोज़ सुबह घर में पति के लिए चाय बनती थी... जिसे सब "अच्छी बहु" कहते थे... जो अपनी फॅमिली की इज़्ज़त का चेहरा thi…….aaj वह यहाँ नंगी पड़ी थी. एक अनजान मर्द के साथ. एक सुनसान, अधूरी बिल्डिंग के कमरे में. उसकी सलवार और फाड़ा हुआ कुरता ज़मीन पर बिखरा पड़ा था………..

सपना ने अपने बिखरे हुए कपड़ों को dekha….uska वह कुरता जो अब बीच से पहात चूका था, बिलकुल उसकी इज़्ज़त की तरह. वह फटा हुआ कपडा ज़मीन पर यूं पड़ा था, जैसे उसकी पुराणी ज़िन्दगी का कोई टुकड़ा हो. यह देखकर उसकी आँखें भर आयी.

उसने अपने pati….se झूट बोलै था. उसने अपनी मर्यादा को ताक पर रख दिया था. उसने अपनी इज़्ज़त, अपनी wafadari….sab कुछ सिर्फ एक रात की …..प्यास के लिए कुर्बान कर दिया था… जो उस ट्रैन के डब्बे में शुरू हुई थी.

एक गहरी सी कसक उसके सीने में उठी. आँखों में आंसू तैर आये, लेकिन ठीक उसी वक़्त उसकी छूट ने एक हल्का सा झटका liya….jaise उसके शरीर को अभी भी यह सब पसंद आ रहा हो.

वह दो अलग दुनियाओं के बीच फास गयी थी: एक तरफ वह शरीफ और सीधी पत्नी जो घर लौटना चाहती थी, और दूसरी तरफ वह औरत... जो अभी भी इस मर्द के लुंड की तड़प महसूस कर रही थी.

उसे महसूस हुआ की वह कितनी बुरी तरह फिसल चुकी थी. ट्रैन का वह पहला किश, वह भीड़ की मजबूरी, वह टॉयलेट का सेक्स… सब कुछ सिर्फ बहाने थे. असलियत तोह यह थी की उसके अंदर एक ऐसी औरत छुपी हुई थी जो इस be-parda, be-lagaam चुदाई के लिए तरस रही थी. एक ऐसी औरत... जो इस लड़के के सामने घुटनो के बल बैठना चाहती थी, जो अपनी गांड ऊपर करके छोड़वाने चाहती थी, जो अपनी इज़्ज़त को पैरों टेल कुचल कर मज़ा लेना चाहती थी!

सपना ने अपने हाथों से अपना चेहरा धक् लिया और एक ठंडी सांस ली ….और अपनी आँखें बंद कर ली उसके अंदर एक हिस्सा रो रहा था, जबकि दूसरा हिस्सा... फिर से उस लड़के के लुंड की तड़प महसूस कर रहा था.

लेकिन अंदर hi अंदर वह जानती थी… अब वापस जाने का रास्ता बहुत मुश्किल हो चूका है.

अचानक सपना की आँखों से एक आंसू निकल कर उसके कान के पास से गुज़र कर गड्ढे पर गिर गया. वह रोना चाहती थी, सच में रोना चाहती थी… लेकिन हैरत की बात यह थी की उसके दिल में पश्चाताप से कहीं ज़्यादा एक अजीब सी, तृप्ति महसूस हो रही थी. उसका जिस्म अभी भी उस लड़के की तलाश कर रहा था. उसकी छूट अभी भी halke-halke झटके ले रही थी, जैसे अभी भी उसके अंदर उसका गरम माल महसूस कर रही हो.

उसे शर्म आ रही थी लेकिन ग्लानि से भरी हुयी शर्म….

मैं इतनी गन्दी कैसे हो सकती हूँ? गुनाह करने के बाद भी उसको सुकून क्यों मिल रहा है? यह सुकून उसकी मनोदशा को और ज्यादा हिला रहा था ….

उसने अपने पति की याद की. उसने हमेशा उसको एक अच्छी बीवी और शरीफ औरत की तरह देखा था. वो उसको छुड़ा भी तोह प्यार से, इज़्ज़त से, जैसे कोई कोमल फूल हो. लेकिन इस लड़के ने उसको एक ‘औरत’ की तरह समझा…... उसने उसको मसला था, उसकी चूचियों को दबोच कर उन्हें अपना बनाया था, उसकी छूट को अपनी मर्ज़ी से छोड़ा था. उसने उसकी अंदर की वह औरत को जगाया था जो हमेशा से चैन की नींद सोई हुई थी.

सपना को अब समझ आ रहा tha…uske पति ने उसको हमेशा “अच्छी बीवी” बनाये रखा, लेकिन इस लड़के ने उसको पूरी तरह “औरत” बनाया था. एक औरत जिसे थोक सकते हैं, जिसे नंगा कर सकते हैं, जिसे रोने और चीखने पर मजबूर कर सकते हैं… और जो यह सब होने के बावजूद फिर भी और मांगती है.

उसकी आँखों से एक और आंसू निकल आया, लेकिन उस बार वह आंसू शर्म का नहीं, उस नयी पहचान का tha….jo उसको द्र भी रहा था और उसको बेचैनी से उत्तेजित भी कर रहा था.

वह धीरे से पलटी और लड़के की तरफ देखि, जो उसके पास में hi खिड़की के पास खड़ा हुआ था. उसकी छूट में अभी भी हलकी सी जलन और तृप्ति का mila-jula एहसास था……

सपना ने लड़के की तरफ देखा जो अब एक सिगरेट जला कर खिड़की के पास खड़ा था. वह शक़्स उसका कोई नहीं था, न उसका नाम उसे ढंग से पता था, न उसका घर. फिर भी, उसने सपना को उसके अपने जिस्म के उस हिस्से से मिलवा दिया था जिससे वह खुद दरर्ति थी.

"मुझे... मुझे जाना होगा," सपना ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा, उसकी आवाज़ में एक कपकपी थी.

उसने अपने फटे हुए कुर्ते को समेटा. उसे पता था की जब वह अब घर लौटेगी, तोह वह पहले वाली सपना नहीं होगी. उसकी आँखों में अब एक राज़ होगा, और उसकी छूट में उस अजनबी की महक. वह फिसल तोह चुकी थी, मगर इस फिसलन में जो नशा था, वह उसे शायद दोबारा यहाँ खिंच लाया था...

उसने अपनी सलवार पहनी, मगर उसे महसूस हो रहा था की उसकी 'ज़िम्मेदारी' का बोझ अब पहले से कहीं ज़्यादा भरी हो गया है, सपना ने अपने फटे हुए कुर्ते को देखा और फिर उस लड़के की तरफ. उसने सोचा था की वह तुरंत निकल जाएगी, मगर उसके पैरों की थकन और जिस्म की सुस्ती उसे वहीँ रोके हुए थी. वो लड़का , जो मुश्किल से 20-21 साल का एक gora-chitta नौजवान था, खिड़की के पास खड़ा सिगरेट के धुंए के साथ खेल रहा था. उसका शरीर कसरती था, और उसकी उम्र के हिसाब से उसका लुंड hairat-angez तौर पर लम्बा और मोटा tha….ek ऐसा औज़ार जिसने सपना की बरसों की 'शरीफ' दुनिया को पल भर में उजाड़ दिया था.

"जाना तोह चाहती हो, मगर जा नहीं पाओगी," लड़के ने सिगरेट के धुंए का एक परफेक्ट चला बनाते हुए कहा और मुद कर सपना की तरफ एक शरारती मुस्कान दी. "पहले कुछ खा लेते हैं. भूक तोह तुम्हे भी लगी होगी… और सिर्फ एक hi तरह की भूक थोड़ी होती है."

सपना ने शर्मा कर नज़रें झुका ली. उसके गाल लाल हो गए थे. उसने कुछ नहीं कहा, बस धीरे से सर हिला दिया.

रूद्र ने अपनी ालमिरह से एक पुराणी लेकिन साफ़ ब्लैक t-shirt और एक ग्रे पजामा निकला और उसकी तरफ बढ़ाया. सपना ने वह कपडे पेहेन लिए. T-shirt उसके बदन पर थोड़ा लूसे था, लेकिन उसकी भारी चूचियों के कारन उसके ऊपर से उसकी शेप साफ़ दिखाई दे रही थी. पजामा उसकी कमर पर ढीला था और हर कदम के साथ उसकी गांड की गोलाई को हाईलाइट कर रहा था.

दोनों निचे उतरे और बिल्डिंग के पास एक छोटे से dhabe-numa रेस्टोरेंट में खाना खाने चले गए. खाने के दौरान दोनों काम hi बोले. सपना सिर्फ chup-chaap रोटी तोड़ रही थी, जबकि रूद्र उसको देखता जा रहा tha…….jaise एक शिकारी अपने शिकार को निहार रहा हो.

वापस लौटते वक़्त, सुनसान कच्ची सड़क पर उनके बीच ख़ामोशी टूट गयी.

“वैसे… मेरा नाम रूद्र है,” उसने अचानक कहा.

सपना ने धीरे से नाम दोहराया, जैसे उसमें नशा लेने की कोशिश कर रही ho….“Rudra…”

रूद्र ने हलके से मुस्कुराते हुए कहा, “और तुम्हारा पति… उसको क्या कहती हो तुम?”

सपना ने जवाब नहीं दिया. बस नज़रें नीचे कर ली.

रूद्र उसके और करीब आ गया. उसने अपना हाथ उसकी कमर पर रख कर धीरे से उसकी कमर पर चुटकी काटी और गरम आवाज़ में बोलै, “वैसे… अगर तुम्हारे पति को पता चल जाये की उनकी ‘bhali-manas’, ‘शरीफ’ और ‘पतिव्रता’ बीवी आज रात एक 21 साल के लड़के के साथ, इस सुनसान सड़क पर, उसके पहने हुए कपड़ों में घूम रही है… तोह क्या होगा?”

सपना का दिल ज़ोर से धड़क उठा. उसने रूद्र की तरफ देखा. उसकी आँखों में शर्म थी, दर था, लेकिन साथ hi एक उत्तेजना भी थी.

रूद्र ने उसकी कमर को और खींच कर उसके कान में फुसफुसाया, “मैं तोह सोच रहा हूँ… की तुम्हे डिफरेंट डिफरेंट एंगल से छोड़ू ताकि भी ज़्यादा मज़ा आये... तुम क्या कहती हो?”

सपना ने कुछ नहीं कहा. सिर्फ उसकी सांस तेज़ हो गयी और उसकी छूट में फिर से वह पुराणी जलन जागने लगी.

अँधेरा और गहरा होता जा रहा था…

सपना का दिल एक पल के लिए बैठ गया. रूद्र के शब्दों ने उसके अंदर एक करंट दौड़ दिया. लेकिन जब उसने उसकी आँखों में देखा, वहां कोई दर नहीं tha….sirf बदमाशी, be-sharami और भूख थी.

“तुम बहुत बेशरम हो, रूद्र,” सपना ने हलके से मुस्कुरा कर उसके सीने पर एक हल्का सा धक्का दिया. उसकी आवाज़ में शर्म और उत्तेजना का mila-jula एहसास था. “मैंने उनसे झूट बोलै है… और तुम यहाँ मज़े ले रहे हो?”

रूद्र ने धीरे से मुस्कुराते हुए उसके कान के पास मुँह ले जाकर फुसफुसाया, उसकी गरम सांस उसकी स्किन पर पद रही थी: “मज़े तोह तुम भी बहुत ले रही थी… जब झाड़ियों के पीछे घुटनो के बल बैठी अपनी छूट से पेशाब निकल रही थी और ‘aah-ooh’ कर रही थी. याद है न?”

सपना का चेहरा तमतमा उठा. उसकी गर्दन तक लाली चढ़ गयी. वह शर्मा कर नज़रें झुका लेती, लेकिन रूद्र ने उसको आगे नहीं होने दिया.

“वैसे एक बात बताओ…” रूद्र ने उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए पुछा, “तुम्हारे पति का इतना लम्बा और मोटा है जितना मेरा है?”

सपना की आँखें फैल गयी. उसने उसके सीने पर हल्का सा थप्पड़ मारा और कांपते हुए कहा, “चुप करो! तुम्हारी उम्र क्या है और बातें देखो… बिलकुल बेशरम हो!”

रूद्र ज़ोर से हँसा. उसकी हंसी में एक मस्ती थी. उसने सपना का हाथ पकड़ कर उसको अपने सीने से कास कर खींच लिया. अब उनके चेहरे सिर्फ कुछ इंच दूर थे. उसकी आँखों में एक चमक थी.

“उम्र पर मत जाओ, काम पर जाओ,” उसने उसके होठों के बिलकुल पास बोलते हुए कहा. “मैं तुम्हे दिखा दूंगा की उम्र से फर्क नहीं पड़ता… बस तड़प और मर्दानगी चाहिए.”

फिर उसने उसकी कमर को और खींच कर उसके कान में गरम आवाज़ में फुसफुसाया, “अभी कमरे पर चलते हैं. रोहन कल दोपहर तक नहीं आएगा. पूरी रात हमारे पास है… और मैं वादा करता हूँ, इस रात तुम्हे अपने पति का नाम भी भूल जाएगा.”

सपना ने कुछ नहीं कहा. सिर्फ उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी और उसकी छूट में फिर से वह पुराणी बेचैनी जागने लगी थी. वह जानती थी की यह लड़का उसको आज रात पूरी तरह तोड़ने वाला है… और सबसे बड़ी baat….woh खुद भी यही चाहती है.

सपना ने उसको रोकने की कोशिश नहीं की. डिनर के दौरान कुछ बातें, कुछ हसी और रूद्र का वह बेबाकपन उसके अंदर के डर को काफी हद तक काम कर चूका था. गुनाह की वह गहरी फीलिंग अभी भी थी, लेकिन उसके साथ अब एक अजीब सी मस्ती भी जुड़ गयी थी. रूद्र का यह खुला, बेशरम और तैसिंग वाला अंदाज़ उसको पसंद आ रहा था. वह जानती थी की वह बहुत बुरी तरह फिसल चुकी है, लेकिन इस फिसलन में अब उसको 'आज़ादी' जैसा एहसास हो रहा tha….ek ऐसी आज़ादी जो उसने कभी नहीं महसूस की थी.

सीढ़ियां चढ़ते हुए सपना ने धीरे से पूछा, “रूद्र… तुम हमेशा से इतने hi बेशरम हो?”

रूद्र सीढ़ियों पर रुक गया. उसने पीछे मुद कर सपना की तरफ देखा. उसकी आँखों में वही शैतानी चमक थी. वह एक कदम नीचे उतर कर उसके बिलकुल करीब आ गया, उसकी गर्दन के पास मुँह ले जाकर गरम सांस छोड़ते हुए बोलै:

“सिर्फ उनके साथ जो ट्रैन के डब्बे में मेरे लुंड को अपनी गरम मुट्ठी में भर लेती हैं… और बाद में झाड़ियों के पीछे घुटनो के बल बैठ कर अपनी छूट से पेशाब निकलती हैं.”

सपना का चेहरा फिर से लाल हो गया. उसके जिस्म में एक करंट दौड़ गया. उसकी छूट ने हल्का सा झटका लिया और फिर से गीली होने लगी. वह कुछ बोल नहीं पायी, सिर्फ उसकी सांसें तेज़ हो गयी.

रूद्र ने मुस्कुराते हुए उसका हाथ पकड़ा और उसको ऊपर की तरफ खींच लिया.

दरवाज़ा खुला. कमरे में वही हलकी नीली रौशनी उनका इंतज़ार कर रही thi….sulagti हुई, सेडक्टिव …..सपना अंदर घुसी तोह उसको एहसास हो गया की अभी रात बहुत लम्बी है. और वो पूरी रात रूद्र के हाथों में थी.

रूद्र ने दरवाज़ा बंद किया और बोल्ट चढ़ाया. फिर वह उसके पीछे आ कर उसकी कमर से चिपक गया. उसने उसके कान में धीरे से कहा, “अब बताओ… तुम्हे सच में चैन से सोने देना चाहिए क्या?”

सपना ने कुछ नहीं कहा. बस उसने अपनी आँखें बंद कर ली और रूद्र के सीने पर सर तीखा दिया. उसकी छूट में फिर से वह जलन जग चुकी थी.

यह रात अब सिर्फ उनकी थी………..

तो बे कॉन्टिनोएड.....
 
अपडेट - 16
सपना गड्ढे पर बैठ गयी. उसकी टांगें अभी भी थोड़ी काँप रही थी. रूद्र ने फैन ों किया, जो dheere-dheere घूमने लगा और कमरे में ठंडी हवा का एक हल्का झोंका फैला दिया. फिर उसने टेबल पर राखी ठंडी बोतल उठायी और लम्बे लम्बे घूंट में पानी पीने लगा. सपना उसे ग़ौर से देख रही थी.

रूद्र की जवानी उसके चेहरे से टपक रही थी — उसकी जवळीने, पसीने से चमकती गर्दन और उसकी छाती पर halke-halke बाल. उसका गोरा, मज़बूत बदन अभी भी उस रात के म्हणत से थोड़ा लाल था. सपना को खुद पर गुस्सा आ रहा था, फिर भी उसकी नज़रें उसके बदन से हैट नहीं प् रही थी.

“तुमने बताया नहीं…” सपना ने बात शुरू की, शायद वक़्त बिताने के लिए, “तुम करते क्या हो ?”

रूद्र ने बोतल राखी और मुस्कुराते हुए सपना के पास बैठ गया. उसका थिगह उसके थिगह से लग रहा था. “कुछ खास नहीं ..कभी padayi..kabhi part-time ...अभी रोहन के साथ हूँ वह गाओं गया है…” उसने थोड़ा पॉज लिया, फिर एक शरारती स्माइल के साथ बोलै, “उसे क्या पता की उसके पीछे यहाँ इतनी खूबसूरत… मेहमान आयी है.”

सपना के गाल फिर से लाल हो गए.

रूद्र ने धीरे से अपना हाथ उसके कंधे पर रखा और उसके कान के बिलकुल पास झुक गया. उसकी गरम सांस उसकी स्किन को छू रही थी.

“वैसे… अगर रोहन यहाँ होता, तोह शायद उसको भी तुम पर तरस आ जाता… तुम्हारी यह हालत देख कर ….पहाड़ी हुई छूट, पसीने से तर बदन और अभी भी अंदर मेरा माल भरा हुआ.”

“तुम… तुम बहुत बेकार इंसान हो रूद्र!” सपना ने उसके सीने पर हल्का सा धक्का दिया. उसकी आवाज़ में नाराज़गी नहीं, बल्कि एक दबी हुई, मदहोश तड़प थी. “तुम हर बात को वहीँ क्यों ले जाते हो?”

“क्यूंकि तुम्हारे जिस्म की खुशबु hi वही कह रही है,” रूद्र ने उसकी गर्दन पर हल्का सा किश करते हुए मुस्कुराया. उसकी उँगलियाँ सपना के पाजामे के नाड़े पर पहुँच चुकी थी. उसने dheere-dheere नाडा खोलना शुरू किया और पजामा को उसकी गोर, नरम जाँघों पर से निचे सरकने लगा.

“डिनर तोह कर लिया…” उसने उसकी छूट की तरफ देखते हुए गरम आवाज़ में कहा, “अब डिजर्ट की बारी है.”

सपना की सांस तेज़ हो गयी. उसकी छूट फिर से गीली होने लगी थी. वह जानती थी की यह लड़का उसको आज रात चैन से नहीं सोने देगा… और वह खुद भी अब चैन से सोना नहीं चाहती थी.

इस बार सपना ने रोकने की कोशिश नहीं की. उसकी आँखों में अब समर्पण था.

रूद्र ने उसकी t-shirt को धीरे से ऊपर की तरफ उठाया और उसके नंगे, पसीने से चमकते जिस्म को नीली रौशनी में देखा. सपना की भारी चूचियों पर उसके होठों और डेंटन के गहरे निशाँ अब नीले पड़ने लगे थे. वह उन निशानों को देख कर शर्मा नहीं रही थी …. बल्कि उन्हें देख कर उसकी छूट में एक नया झोंका महसूस हो रहा था.

रूद्र ने उसको कमर से पकड़ कर गड्ढे पर लिटाया. फिर उसने उसके होठों को इतनी शिद्दत और भूख से अपने मुंह में भर लिया की सपना की सांसें अटक गयी. उसकी ज़ुबान उसके मुंह के अंदर घुस कर उसकी ज़ुबान से लिपट गयी, उसको चूसने लगी. किश इतना गहरा था की सपना के होठ सूजन कर लाल हो जाये.

रूद्र का हाथ धीरे से नीचे की तरफ गया. उसने सपना की सलवार के अंदर हाथ दाल कर उसकी छूट को टटोला. उसकी उँगलियाँ उसकी गीली, गरम और फूली हुई छूट पर पड़ी. वह अभी भी उतनी hi तर और भूखी थी, जैसे इतने दिनों का इंतज़ार अभी भी पूरा नहीं हुआ हो.

“अभी तक इतनी गीली हो?” रूद्र ने हैरानी और मज़ा लेते हुए पूछा, उसकी आँखों में एक शरारती चमक थी.

सपना ने भांपते हुए, शर्म और तड़प के mila-jula एहसास से कहा,

“तुमने… तुमने मुझे इस हाल में छोड़ दिया था न… ट्रैन से लेकर अब तक… मुझे चैन hi नहीं आया. हर पल तुम hi …याद आ रहे थे.”

रूद्र ने मुस्कुराते हुए अपनी पंत उतरी. जैसे hi उसने पंत निचे की, उसका मोटा, लाल और पूरा तन कर खड़ा लुंड बहार आ गया. वह बहुत hi भयंकर लग रहा था …मोटाई में गहरा, लम्बाई में लाजवाब, उभरी हुई नसों वाला और टोपा चमक रहा था.

सपना की आँखें उसको देख कर फैल गयी. उसका मुँह थोड़ा सा खुला रह गया. यह किसी मर्द का लुंड नहीं, बल्कि किसी जानवर का औज़ार लग रहा था ….इतनी काम उम्र में इतना मोटा……

रूद्र ने उसका हाथ पकड़ा और लुंड को सपना की नरम मुट्ठी में दे दिया.

“इसे तोह चैन दे सकती हो न?” उसने गहरी आवाज़ में कहा.

सपना ने उस सख्त, गरम लुंड को अपनी मुट्ठी में भर लिया. उसकी उँगलियाँ उसके अराउंड लपेट गयी. वह बहुत गरम और शख्त था. उसने dheere-dheere उसको upar-neeche हिलना शुरू किया, halke-halke घूमते हुए. उसकी तपन उसकी हथेलियों को जला रही थी. हर स्ट्रोक के साथ रूद्र की सांस तेज़ होती जा रही थी.

सपना की आँखों में अब शर्म काम और भूख ज़्यादा थी. उसकी छूट से नया रास निकल कर उसकी जाँघों पर बहने लगा था.

रूद्र ने उसके बाल पकडे और उसके कान में फुसफुसाया,

“अब सिर्फ हाथ से नहीं… मुँह में भी लेना पड़ेगा अब…..”

सपना ने रूद्र के मोठे लुंड को अपनी नरम, गीली मुट्ठी में और टाइट पकड़ा और धीरे से अपना मुँह खोल कर उसकी चमकती टोपी को अपने होठों के बीच ले लिया. जैसे hi उसका गरम, सख्त लुंड उसके मुंह के अंदर घुसने लगा, उसकी आँखें बंद हो गयी और उसके मुँह से एक गहरी, मदहोश सिसकी निकली — “मममहहहह…” उसकी ज़ुबान उसके लुंड के नीचे घूम रही थी, उसको चूस रही थी, और वह dheere-dheere उसको अंदर ले जा रही थी. उसका चेहरा लाल हो चूका था, आँखों के कोने से आंसू निकल आये the,lekin उसकी रफ़्तार एक hi ले में चली जा रही थी . रूद्र के हाथ उसके बालों में गहरे धंस गए थे, उसकी सांसें तेज़ और भरी हुई थी, उसके चेहरे पर एक बेचैनी चमक रही थी. “हाँ… ऐसे hi… बहुत अच्छा चूस रही हो,” रूद्र ने कांपते हुए कहा, उसकी आवाज़ में कंकंपी था. सपना अब zor-zor से लुंड मुँह में ले रही थी, उसके लुंड के upar-neeche अपना सर हिलाते हुए, कभी उसकी टोपी को ज़ोर से चुस्ती, कभी गहरे तक अंदर ले लेती, जिससे उसके गले से “ग्लुक… ग्लुक…” की गीली आवाज़ें निकल रही थी. उसकी छूट अभी भी गीली और तड़प रही थी, जबकि रूद्र उसके मुँह को छोड़ने के लिए बेचैन होता जा रहा था.

रूद्र ने सपना के दोनों पैरों को बहुत ज़्यादा फैला कर उसके कन्धों की तरफ धकेल दिया, जिससे उसकी छूट पूरी तरह खुल गयी और बिलकुल बेखबर हो गयी. उसने अपने मोठे लुंड की चमकती टोपी को उसकी गीली दरार पर रखा और बिना किसी वार्निंग के, एक ज़बरदस्त ज़ोर का झटका मारा.

“Aaaaaahhhhhhhhhh! रुद्रा…!”

सपना का पूरा बदन गड्ढे से ऊपर उठ गया. उसका सर पीछे दीवार से टकराया और उसके मुँह से एक तेज़, dard-bhari सिसकी निकल गयी जो कमरे की दीवारों से टकराकर वापस लौट आयी. उसकी आँखें फैल गयी, मुँह खुला रह गया और उसका चेहरा एक पल के लिए दर्द और मजे से सिकुड गया.

“शांत… शांत …..शहहह” रूद्र ने तुरंत उसके होठों को अपने मुंह में भर कर उसकी सिसकी को चुम कर दबोच लिया. फिर वह मशीन की तरह उसको छोड़ने लगा …..तेज़, गहरे धक्कों के साथ. हर धक्का इतना ज़ोर का था की पुराण गड्ढा ‘choon-choon-choon’ की आवाज़ करने लगा था. सपना को सच में लग रहा था की रूद्र का मोटा लुंड उसकी अंतड़ियों तक पहुँच रहा है.

उसकी छूट अब पूरी तरह फूल चुकी थी, लेकिन यह दर्द उसके अंदर एक नए नशे को जगा रहा था. सपना ने रूद्र की पीठ पर अपने नाज़ुक नाख़ून गहरे गदा दिए, लाल निशाँ बनाते हुए. हर धक्के के साथ उसकी चूचियां zor-zor से उछाल रही थी.

रूद्र ने झुक कर उसकी एक भारी चूची को पूरा अपने गरम मुंह में भर लिया और डेंटन से उसके निप्पल को हलके से काटने लगा. सपना का पूरा जिस्म बिजली की तरह काँप उठा. उसकी छूट ने रूद्र के लुंड को अंदर hi अंदर कास कर जकड लिया, जैसे उसको छोड़ना hi न चाहती हो.

“अह्ह्ह… रूद्र… और अंदर ….Ahhhh…andaarr..… हाँ… ार्रम्म… se…Ahhhh…Ohhh!” सपना की सिसकियाँ अब रुक नहीं रही थी, हर धक्के के साथ और तेज़ होती जा रही थी.

“तुम… तुम मेरा बुरा हाल कर डोज…” सपना ने सिसकियों और टूटी हुई साँसों के बीच कांपते हुए कहा.

“वही तोह करने बुलाया है तुम्हे,” रूद्र ने मुस्कुराते हुए पीछे हैट कर एक और ज़बरदस्त गहरा धक्का मारा. उसका मोटा लुंड उसकी छूट की गहराई तक पूरा उतर गया.

फिर उसने सपना को झटके से घुमा दिया और ‘69’ पोजीशन में ला दिया. सपना पहली बार इतनी बोल्ड और be-sharam पोजीशन में थी. उसका मुँह रूद्र के मोठे लुंड के बिलकुल सामने था और उसकी गीली, फूली हुई छूट रूद्र के मुँह के ऊपर. सपना ने शर्म से एक पल हेसिताशन किया, लेकिन रूद्र ने उसकी कमर पकड़ कर उसको नीचे की तरफ खींच लिया.

सपना ने अपने नरम, गीले होठ खोल कर रूद्र के मोठे लुंड को अपने मुंह में भर लिया. उसका गरम, सख्त लुंड उसके गले तक पहुँच रहा था. साथ hi रूद्र ने उसकी छूट पर अपनी ज़ुबान फेर दी ….zor-zor से, गहरे स्ट्रोक्स में उसकी क्लीट को चूसने और उसकी गीली दरार को चाटने लगा.

कमरे में सिर्फ उनकी गीली, मदहोश आवाज़ें गूँज रही थी — “चुप… चुप… ग्लुक… ग्लुक…” की आवाज़ें.

सपना को महसूस हो रहा था की वह पूरी तरह फिसल चुकी है. उसकी ‘ज़िम्मेदारी’, उसकी ‘मर्यादा’, उसकी पतिव्रता पत्नी वाली इमेज…. सब कुछ इस नीली रौशनी में धुंधला पड़ता जा रहा था. उसका मुँह रूद्र के लुंड से भरा हुआ था, उसकी ज़ुबान उसके लुंड को चाट रही थी, जबकि रूद्र उसकी छूट को ऐसे चूस रहा था जैसे उसमें डूब जाना चाहता हो.

उसकी आँखों से आंसू निकल आये थे ….न सिर्फ शर्म के, बल्कि उस नए, बेचैन करने वाले नशे के जो उसकी छूट के जरिये हो रहा था…..

रूद्र ने उसकी गांड को दोनों हाथों से ज़ोर से पकड़ कर उसकी छूट को और गहरे से अपने मुंह में भर लिया और zor-zor से चूसने लगा. सपना की सिसकियाँ अब उसके लुंड के अंदर डाब रही थी, फिर भी उसके जिस्म की हर हिलती हुई मुस्कले बता रही थी की वह अब पूरी तरह उसके कण्ट्रोल में है.

रूद्र ने सपना को दोबारा अपने निचे दबोच लिया. इस बार वह और भी ज़्यादा be-reham और भूखा हो चूका था. उसने सपना के दोनों हाथों को उसके सर के ऊपर कास कर पकड़ लिया, उन्हें गड्ढे पर दबोच दिया और पूरी ताक़त से धक्के मरने लगा. हर धक्का इतना ज़ोर का और गहरा था की सपना की सांसें रुकने को थी. उसकी छूट अब पूरी तरह फूल चुकी थी और हर धक्के के साथ उसके अंदर एक तेज़ी से तूफ़ान उबाल रहा था.

“रूद्र… मैं… मैं निकलने वाली हूँ… ऊऊह्ह्हह्ह!” सपना ने अपने होठ दांतों टेल दबा लिए, लेकिन उसकी सिसकी फिर भी निकल गयी. उसकी छूट ने रूद्र के लुंड को इतनी ज़ोर से कास कर भींचा की रूद्र भी अपने आप पर काबू नहीं रख पाया.

उसने do-teen और बहुत तेज़, गहरे धक्के मारे और फिर एक ज़ोर की सिसकी के साथ अपना गरम, गाढ़ा माल सपना की गहराईयों में भर दिया. सपना का पूरा जिस्म एकदम से सख्त हुआ, उसकी आँखें उलटी पद गयी और उसने भी zor-zor से झड़ना शुरू कर दिया. दोनों का रास एक साथ मिल कर उसकी छूट से बहार निकलने लगा.

वह दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए गड्ढे पर ढेर हो गए. पसीने की बूँदें उनके जिस्मों से टपक कर चादर को भिगो रही थी. उनकी सांसें अभी भी तेज़ और भरी हुई थी.

रूद्र ने सपना के पसीने से भीगे माथे को हलके से चूमा और उसके कान में धीरे से कहा,

“ कल सुबह तक तुम मेरी क़ैद में हो….” और कहकर वो धीर धीरे थक कर नींद के आगोश में चला गया…

रूद्र ने अपनी कोहनी का सहारा लेकर खुद को थोड़ा उठाया. वह सपना को देख रहा था. सपना गहरी नींद में थी, मगर उसका चेहरा अब पहले जैसा 'शांत' नहीं था. उसके होठों पर एक हलकी सी सूजन थी, और उसकी गर्दन पर मौजूद लाल निशाँ सुबह की रौशनी में और भी बेबाक लग रहे थे.

चादर उसके पेट के नीचे तक सरक चुकी थी. रूद्र की नज़रें उसके गोर पेट पर ठहर गयी, जो हर सांस के साथ dheere-dheere oopar-neeche हो रहा था. उसने देखा की सपना की नंगी चूचियों पर अब भी उसकी उँगलियों के निशाँ नीले पद रहे थे. रात भर का निशान उनके जिस्मों पर एक दास्ताँ की तरह लिखा हुआ था.

रूद्र ने अपना हाथ बढ़ाया. उसने सपना को छुए नहीं, बस अपनी हथेली को उसके पेट के थोड़ा ऊपर रखा. सपना के जिस्म की गर्मी उसकी हथेली को महसूस हो रही थी. रूद्र ने महसूस किया की उसकी कच्चे के अंदर उसका मोटा लुंड अब पूरी तरह अंगड़ाई ले चूका है. वह लोहे की तरह सख्त होकर उसके पेट से टकरा रहा था.

रूद्र ने अपनी उँगलियों के पिछले हिस्से से सपना की नरम, गोर तइस को बहुत dheere-dheere छुआ. उसकी उँगलियाँ उसकी स्किन पर जैसे एक पंखुड़ी की तरह फेर रही थी. सपना ने नींद में hi एक करवट ली, उसके दोनों पेअर थोड़े से फ़ैल गए. उसके इस अनजाने मूवमेंट ने रूद्र के सामने उसकी छूट का वह मादक नज़ारा खोल दिया, जिसने उसे इतने दिन तक सोने नहीं दिया था.

उसकी छूट अभी भी थोड़ी सूजी हुई और सुर्ख गुलाबी थी. रात भर की चुदाई के बाद वह अभी भी थोड़ी खुली हुई थी और उसके बीच से उनका mila-jula गरम माल एक पतली, चमकती लकीर बन कर dheere-dheere बहार आ रहा था.

रूद्र ने अपना सर झुकाया और अपनी नाक उसकी जाँघों के अंदरूनी हिस्से पर ले गया. वह उस गरम, नमकीन और nasha-aawar खुशबु को गहरी सांस में अंदर भरना चाहता था. फिर उसने अपनी ज़ुबान की नोक से सपना की जांघ के अंदरूनी हिस्से पर एक लम्बी, गीली लकीर खींची.

“उम्म्म… रूद्र…” सपना ने नींद में hi धीमी, मदहोश आवाज़ में फुसफुसाया. उसकी आँखें अभी भी बंद थी, लेकिन उसकी सांसें dheere-dheere तेज़ होने लगी थी. उसकी छूट ने हल्का सा झटका लिया.

रूद्र ने कोई जवाब नहीं दिया. वह अब बिलकुल चुप था. उसने अपने होठों को उसकी छूट के बिलकुल पास ले जाकर अपनी गरम सांसें उसकी सेंसिटिव स्किन पर छोड़ दी. सपना का पूरा बदन एक झटके के साथ थरथरा उठा. उसकी टांगें काँप उठी.

Dheere-dheere सपना ने अपनी आँखें खोली. सबसे पहले उसको नीली रौशनी दिखी, फिर उसके पैरों के बीच रूद्र का चेहरा ….जो उसके सबसे नाज़ुक और गीले हिस्से पर झुका हुआ था. उसकी आँखों में नींद की धुंध, हैरानी और एक नयी उत्तेजना का mila-jula एहसास था.

रूद्र ने उसकी आँखों में देखा, उसके होठों पर एक हलकी, भूखी मुस्कान थी और उसने धीरे से कहा,

“सुबह हो गयी है… और तुम्हारी छूट अभी भी इतनी भूखी है.”

तो बे कॉन्टिनोएड.....
 
अपडेट - 17
“रूद्र… अभी तोह पांच बज रहे हैं,” सपना ने भरी हुई, नींद से बोझ्लि आवाज़ में कहा. मगर उसकी बातों के बिलकुल उल्टा, उसने अपने दोनों हाथों से रूद्र के घने बालों को पकड़ लिया और उसके सर को और गहरे से अपनी छूट पर दबोच दिया.

रूद्र ने मुस्कुराते हुए अपनी ज़ुबान बहार निकली. वह jaan-boojh कर dheere-dheere काम कर रहा था. सबसे पहले उसने अपनी गरम सांस सपना की फूली हुई छूट पर छोड़ी, जिससे उसकी स्किन थरथरा उठी. फिर उसने अपनी ज़ुबान की नोक से उसकी उभरी हुई क्लीट पर एक बहुत हल्का सा, गीला स्पर्श किया ....जैसे कोई मुलायम सा पंख छू कर गुज़र गया हो.

सपना का सर झटके से पीछे गिर गया. उसकी पीठ गड्ढे पर टेडी हो गयी और उसके मुंह से एक धीमी, दबी हुई मदहोश सिसकी निकल गयी ......“उफ्फ्फ्फ़… अह्ह्ह!”

रूद्र ने रुक कर उसकी रिएक्शन का मज़ा लिया, फिर फिर से झुक गया. इस बार उसने अपनी ज़ुबान को थोड़ा और गहरा किया और सपना की क्लीट के चरों तरफ dheere-dheere गोल गोल घूमने लगा. वह चूसने की बजाये पहले सिर्फ चाट रहा था ......

“अहह… रूद्र… धीरे…” सपना की सांस तेज़ हो गयी. उसकी टांगें काँप रही थी. उसने अपने हाथों से गड्ढे की चादर को कास कर पकड़ लिया.

रूद्र ने अब अपनी ज़ुबान को थोड़ा और नीचे ले जाकर उसकी छूट के होंठों को भी चाटना शुरू कर दिया. वह उसके रास को पीने लगा, उसकी गीली पंखुड़ियों को अपनी ज़ुबान से alag-alag करता हुआ. कभी वह उसकी क्लीट को हलके से चूस लेता, कभी उसकी छूट के अंदर ज़ुबान दाल कर गहरे से चाटने लगता.

“मममहह… हैं… अह्ह्ह!” सपना की सिसकियाँ अब रुक नहीं रही थी. हर चाटने के साथ उसकी आवाज़ और तेज़ होती जा रही थी. उसकी छूट से naya-naya रास निकल कर रूद्र की ज़ुबान पर आ रहा था.

“अभी तोह पूरी रात की थकन भी नहीं उत्तरी… और तुम फिर से शुरू…” सपना हांप रही थी, उसकी आवाज़ में शिकायत के साथ एक गहरी तड़प थी.

रूद्र ने उसकी छूट पर ज़ुबान फेरते हुए गरम, भूखी आवाज़ में कहा,

“ये थकन नहीं है सपना… ये वह नशा है जो सिर्फ सुबह के वक़्त और गहरा चढ़ता है.”

उसने अपनी ज़ुबान को अब और तेज़ कर दिया. वह अब उसकी क्लीट को zor-zor से चूस रहा था, कभी हल्का सा काट भी लेता, और फिर तुरंत गीली ज़ुबान से सेहला देता. सपना की टांगें उसके कन्धों पर काँप रही थी और उसके मुंह से लगातार मदहोश सिसकियाँ निकल रही थी ....“अह्ह्ह… रूद्र… हाँ… वही… और चाटो… मममहहह!”..

रूद्र ने उसके बालों में हाथ फेरते हुए धीरे से कहा,

“अब बताओ… सुबह में चैन चईये या लुंड..?”

सपना ने सिसकते हुए लुंड की तरफ देखा ….रूद्र नज़रो से hi इशारा समझ गया …

रूद्र ने तुरंत अपना कच्चा निचे गिरा दिया. उसका लम्बा, मोटा और सुबह के वक़्त और भी सख्त लुंड झटके के साथ बहार आ गया. सुबह की हलकी रौशनी में वह किसी laal-bhure, चमकते सरिये की तरह दिखाई दे रहा था ....नसें फूली हुई, स्किन टाइट और टोपा बिलकुल लाल और चमकदार.

सपना ने उस भयंकर, खूबसूरत औज़ार को देखा. उसकी आँखें थोड़ी सी फैल गयी. उसने अपने होठों पर ज़बान फेरी, जैसे उसकी भूख खुद hi उसको बेबस कर रही हो. उसने धीरे से अपना हाथ आगे बढ़ाया और उस मोठे, गरम लुंड को अपनी नरम मुट्ठी में भर लिया. वह इतना गरम और शख्त था की उसकी हथेली को लगा जैसे वो ठण्ड में आग के करीब बैठी है ...

सपना ने धीरे से अपना सर झुकाया. सबसे पहले उसने अपनी गरम सांस उसके लुंड पर छोड़ी, फिर अपनी नरम ज़ुबान को बहार निकलकर उसकी टोपी के चरों तरफ एक लम्बी, गीली लकीर खींची. रूद्र का लुंड एक झटके से उछाल गया.

“मममहह…” सपना ने हलकी सी सिसकी ली और फिर से झुक गयी. इस बार उसने अपनी ज़ुबान को उसके लुंड के नीचे वाले हिस्से पर रखा और बहुत dheere-dheere ऊपर की तरफ चाटने लगी .....जैसे कोई मीठी ice-cream हो. उसकी ज़ुबान उसकी उभरी हुई नसों पर घूमती रही, हर एक नस को alag-alag सहलाती हुई.

“अह्ह्ह… अह्ह्ह्ह..” रूद्र ने जोर की सिसकी भरी और उसकी उँगलियाँ सपना के बालों में गहरे धंस गयी.

सपना ने अब अपने होठ खोल कर उसकी लाल टोपी को अपने मुंह में लिया. वह dheere-dheere उसको अंदर ले जा रही थी, अपनी ज़ुबान को लुंड के चरों तरफ घूमती हुई. उसका मुँह पूरा गीला था. वह कभी उसकी टोपी को ज़ोर से चुस्ती, कभी उसको बहार निकाल कर उसके लुंड के पूरे लेंथ पर lambi-lambi चाटें देती.

“सलरपपपप… मममहह… ग्लुककककक…” गीली आवाज़ें कमरे में गूँज रही थी.

सपना की आँखें बंद थी, उसके गाल अंदर की तरफ धंस रहे थे जब वह उसको गहरे तक ले जा रही थी. उसकी छूट अभी भी गीली और तड़प रही थी. हर बार जब रूद्र का लुंड उसके गले तक पहुँचता, उसके मुँह से एक धीमी, कांपती सिसकी निकलती ….“ममंफ़फ़फ़फ़… अह्ह्ह…”

रूद्र ने उसके बाल पकड़ कर उसके सर को थोड़ा कण्ट्रोल किया और धीरे से upar-neeche हिलने लगा. सपना ने उसको रोकने की कोशिश नहीं की. बल्कि उसने अपनी ज़ुबान को और भी एक्टिव किया, उसके लुंड के नीचे वाले हिस्से को zor-zor से चाटने लगी.

“बहुत अच्छा चूस रही हो सपना…” रूद्र की आवाज़ काँप रही थी, “जैसे इसके लिए hi तड़प रही थी सुबह से.”

सपना ने सिर्फ एक गहरी सिसकी ली और उसके लुंड को और गहरे तक अपने मुंह में ले लिया, अपनी गर्दन को आगे की तरफ झुकाते हुए.

“Gluck-gluck-gluck… अहह… ग्लूखक!”

हर गहरे स्ट्रोक के साथ उसके गले से वह madhosh..awaaz निकल रही थी. उसका मुँह पूरा गीला हो चूका था, उसके होठ रूद्र के लुंड के अराउंड टाइट हो रहे थे और उसके मुँह के कोने से थोड़ी सी लार बहार निकल कर उसके चीन पर गिर रही थी. वह कभी उसको गहरे तक ले जाती, जिससे उसका गाला भरता हुआ महसूस होता, कभी बहार निकाल कर उसकी लाल टोपी को ज़ोर से चूस लेती.

“ममंगठ… ग्लुक… ग्लूखक… हाँह!”

सपना की सिसकियाँ अब उसके लुंड के अंदर डाब रही थी. उसकी छूट से भी लगातार रास बह रहा था. हर बार जब वह उसको गले तक लेती, उसके पुरे जिस्म में एक करंट दौड़ जाता, जैसे उसके अंदर भी कुछ खुल रहा हो.

रूद्र के हाथ उसके बालों में गहरे धंस गए थे. वह dheere-dheere उसके मुँह में धक्के दे रहा था और उसकी सिसकियों के मज़े ले रहा था …कुछ देर ऐसे hi करने के बाद उसका लुंड पूरी तरह से शख्त हो चूका था ..और उसे अब छूट की गहरायी में घुसना था ..

रूद्र ने सपना को उठाया और उसको दीवार के सहारे खड़ा कर दिया. सपना अब बिलकुल नंगी थी, उसके बिखरे हुए बाल उसकी पीठ पर फ़ैल गए थे. रूद्र ने उसके लेफ्ट पेअर को उठाकर अपने कमर पर रख लिया. इस पोजीशन में सपना की छूट पूरी तरह खुल गयी थी ….जैसे किसी ने एक फूल की पंखुड़ियों को ज़ोर से alag-alag कर दिया हो. उसकी फूली हुई, लाल और अभी भी रात के माल से गीली छूट बिलकुल बेखबर थी.

रूद्र ने अपने मोठे लुंड की चमकती टोपी को उसकी छूट की दरार पर रखा और dheere-dheere अंदर सरकने लगा.

“आह… रूद्र… धीरे… अभी बहुत दर्द हो रहा है,” सपना ने सिसकते हुए…. कांपते हुए कहा. उसकी आँखें बंद थी और उसके होठ काँप रहे थे.

लेकिन रूद्र को अब ‘धीरे’ शब्द समझ नहीं आ रहा था. उसने सपना की कमर को दीवार से और ज़ोर से चिपकाया, उसकी गांड को दोनों हाथों से पकड़ लिया और एक ज़बरदस्त झटका मारा.

“आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह…!”

उसका पूरा लम्बा और मोटा लुंड एक hi धक्के में सपना की गहरी से गहरी गहराई तक उतर गया. सपना की आँखें पहात गयी, उसके मुँह से आवाज़ तक नहीं निकली ….सिर्फ एक गहरी, फांसी हुई सांस उसके गले में अटक गयी. उसकी छूट ज़ोर से फैल गयी थी और अंदर की दीवारें उसके लुंड को kas-kas कर जकड रही थी.

“15 दिन…” रूद्र ने उसके कान के पास गरम सांस छोड़ते हुए कहा, “15 दिन मैंने हर पल पर, हर रात तुम्हे याद किया है… और तुम्हारी इस टाइट छूट को.”

उसने पीछे हैट कर एक और गहरा धक्का मारा. फिर एक और. वह अब किसी पिस्टन की तरह सपना को ठोंक रहा था ….tez…dhakkon के साथ. हर धक्के के साथ सपना की पीठ दीवार से zor-zor से टकरा रही थी. उसकी भारी चूचियां ज़ोर से उछाल रही थी और उसके मुँह से अब लगातार टूटी हुई सिसकियाँ निकल रही थी.

“अहह… अह्ह्ह… रूद्र… ……हैं… ..ahhhh..hmmm..shhh….!”

रूद्र ने उसकी कमर को और मज़बूत पकड़ लिया और अपनी रफ़्तार और तेज़ कर दी. हर धक्के के साथ उसका मोटा लुंड उसकी छूट की अंतिम किनारे तक टकरा रहा था. सपना की टांगें काँप रही थी, उसकी छूट से गीला रास उसके लुंड पर और जाँघों पर बह रहा था.

अब यह सिर्फ चुदाई नहीं थी …यह अब भूक थी , इतने दिन का इंतज़ार था जो अब पूरी तरह से सपना के शरीर पर उतर रहा था…..

सपना ने अपने दोनों हाथों को रूद्र के गले में दाल दिया और अपने पूरा जिस्म उसपर छोड़ दिया. अब वह बिलकुल बेकाबू और समर्पित थी. उसकी टांगें उसकी कमर के चारों तरफ लपेट गयी थी. वह डर और शर्म के उस पार पहुँच चुकी थी. उसे गहरे से गहरा एहसास हो रहा था की यह रात, यह सुबह, और यह पल उसकी ज़िन्दगी का वह मोड़ है जहाँ से वापसी नामुमकिन है. उसके अंदर की वह पुराणी Sapna….woh शरीफ, ज़िम्मेदार और पतिव्रता बीवी ….अब dheere-dheere खो रही थी.

रूद्र ने उसकी समर्पण को महसूस किया और उसकी रफ़्तार बढ़ा दी. अब उसके धक्के और भी तेज़ और गहरे हो गए थे. उसकी गांड से टकराहट की सख्त आवाज़ ‘phat-phat-phat-phat’ पूरे सुनसान कमरे में गूँज रही थी. हर धक्के के साथ सपना की पीठ दिवार पर ज़ोर से टकरा रही थी और उसकी भारी चूचियां zor-zor से उछाल रही थी.

सपना की सांसें अब तेज सिसकियों में बदल चुकी थी.

“अह्ह्ह… रूद्र… हैं… और ज़ोर से!”

“Ahhhh…ohhh…ahhh..sshhhh..hmmm….ahhh..ahhhh…!”

रूद्र का चेहरा पसीने से बिलकुल तर था. उसके माथे और गर्दन से पसीने की बूँदें टपक रही थी. उसने सपना को और कास कर पकड़ लिया, जैसे उसको अपने अंदर समां लेना चाहता हो…. उसकी कमर को दोनों मज़बूत हाथों से जकड लिया और अपनी पूरी ताक़त से उसको छोड़ने लगा…. उसकी सांसें भरी हुई थी और हर धक्के के साथ उसकी आवाज़ bhar-bharati जा रही थी.

सपना की आँखें बंद थी, उसके होठ काँप रहे थे. उसकी छूट अब पूरी तरह उसके लुंड के अराउंड जकड चुकी थी. हर गहरे धक्के के साथ उसके मुँह से dheemi-dheemi सिसकियाँ निकल रही थी …..“अहह… अह्ह्ह… ahhhh…ahhhhh…haan…”

रूद्र की रफ़्तार और तेज़ होती गयी….. जब क्लाइमेक्स क़रीब आया, रूद्र ने सपना को झटके से गड्ढे पर पटक दिया….. उसकी टांगें उठायी और दोनों को अपने कन्धों पर रख दिया. इस पोजीशन में सपना की छूट और भी खुल गयी थी.

“आअह्ह्ह… ahhh…ahhh..… रूद्र… मर जाउंगी मैं…” सपना की सिसकी छूट गयी.

रूद्र ने पूरी शिद्दत से अपना लुंड अंदर धकेल दिया. हर धक्का अब उसकी गहराईयों तक पहुँच रहा था. सपना की छूट zor-zor से कास रही थी, जैसे उसको अंदर hi निगल लेना चाहती हो. उसकी सांसें रुक रही थी. उसकी उँगलियाँ गड्ढे की चादर को कास कर पकड़ रही थी.

“मैं… मैं निकलने वाली हूँ… अह्ह्ह… रुद्राआआ… ahhhh..hmmmm..ahhh..shhhh..zor से… haaa….n!”

उसका पूरा जिस्म एकदम से सख्त हो गया. उसकी पीठ गड्ढे से ऊपर उठ गयी. उसकी छूट ने रूद्र के लुंड को इतनी ज़ोर से भींचा की रूद्र भी अपने आप पर काबू नहीं रख पाया.

रूद्र ने एक गहरी सिसकी ली और अपनी पूरी ताक़त से उसके अंदर अपना गरम, गाढ़ा माल उड़ेल दिया. एक… दो… तीसरा झटका. हर झटके के साथ उसका गरम वीर्य सपना की गहराईयों में भर रहा था.

सपना का जिस्म थरथरा कर उठा. उसकी आँखें उलटी पद गयी और उसके मुँह से एक लम्बी, बेहोश, मदहोश सिसकी निकल गयी …“आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… मैं… aaahhh…aahhhh…shhh..mhhhh… nikaaaalll....rahiiiii hooonnnn…ahhhhhh!”

उसकी छूट ने zor-zor से झटके लेने शुरू किये. उसका पानी फवारे की तरह निकल कर रूद्र के लुंड पर और गड्ढे पर बहने लगा. दोनों का माल एक साथ मिल कर उसकी फूली हुई छूट से बहार निकल रहा था ….गरम, गीला और चमकता हुआ.

सपना वही थक कर ढेर हो गयी. उसकी आँखें बंद थी, मुँह थोड़ा सा खुला हुआ था और सांसें अभी भी टूटी हुई थी. उसकी छूट से निकलने वाला उनका mila-jula गरम माल सुबह की हलकी रौशनी में सफ़ेद, चमकती लकीरों के रूप में उसकी जाँघों पर बह रहा था. उसकी फूली हुई, लाल छूट अभी भी halke-halke झटके ले रही थी, जैसे अभी भी उस लुंड की तड़प महसूस कर रही हो.

रूद्र उसके ऊपर लेट गया और उसके पसीने से भीगे माथे को चुम लिया. कमरे में सिर्फ उनकी भरी साँसों और सुबह की ठंडी हवा की आवाज़ बाकी रह गयी थी.

तो बे कॉन्टिनोएड --->
 
Hi एवरीवन, मल्टीप्ल उपदटेस विल के टुमारो, सो प्लीज स्टे तुनेड :चियर्स:
 
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