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बाबा तो गाओं वालों क साथ चले गए और इधर मैं घर में वापिस आ गया . ऋतू को इस वक़्त सब अपने बीच बिठाये बातें कर रहे थे . घर में केवल महिलाएं hi थी . ऋतू क चेहरे पर अगल hi ख़ुशी दिख रही थी जब वो नन्हे मुन्नो को गॉड में खिला रही थी. आरव को ऋतू ने गॉड में उठा रखा था तो छोटू को मंजू बुआ ने . दोनों hi ममता क सुख से अनजान थी पर इस वक़्त दोनों hi बहुत खुश नज़र आ रही थी . अचानक आरव ने अपना काम करते हुए ऋतू क ऊपर धार छोड़ दी और उसकी यूनिफार्म को गिला कर दिया .
ऋतू : ुयी माआ
दीपिका : है है है , लगता है आरव को आप कुछ ज्यादा hi पसंद आ गयी.
गौरी : लाइन मुझे दो , तुम जा कर कपडे बदल लो . कुछ देर में सुख जायेगा ये .
ऋतू : it’s ok
मंजू : तू इतना शर्मा क्यों रही है ? अपना hi घर है ये . चल जा , जा कर चेंज कर ले .
गौरी : अमित इन्हे अपने रूम में ले जाओ . कमरे में बाथरूम है तेरे hi. इन्हे सुविधा रहेगी . दीपिका तुम कोई कपडा दे दो तब तक पहनने क लिए .
माँ की बात सुन कर दीपिका ममी अपने रूम में चली गयी कपडा लेने और इधर ऋतू मेरे पीछे पीछे आ गयी . मैं ऋतू को अपने रूम में ले गया . ऋतू जैसे hi कमरे में आयी उसने मुझे पीछे से बाँहों में में भर लिया और उसके सख्त चुके मेरी पीठ पर दबने लगे .
ऋतू : ी लव यू अमित , तुम्हे बता नहीं सकती आज मैं कितनी खुश हूँ. ऐसे लग रहा है जैसे मुझे सब कुछ मिल गया है . भैया , भाभी, बहने, बचे पूरा सब एक साथ . ऐसे लग रहा है जैसे ऊपर वाले ने सब कुछ एक साथ दे दिया है . ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है . तुमने मुझे मेरी ज़िन्दगी लौटा दी . पहले मेरी बेस्ट फ्रेंड से मुझे मिलवाया फिर मुझे प्यार का एहसास करवाया और अब पूरा परिवार hi दे दिया. थैंक यू , थैंक यू वैरी मच .
ऋतू की आवाज़ भर आयी थी . मैंने उसकी नहीं से निकल क पलट कर जब उसे देखा तो सच में उसकी ऑंखें भीगी हुई थी . मैंने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके आंसू साफ़ किये
अमित : ये क्या , आप रो रही हैं. साडी दुनिया जिसका खौफ कहती है उसकी आँखों में आंसू ? नहीं , ये सब आप पर ाचा नहीं लगता . आप तो वैसे hi अछि लगती हैं रोअब दर गुस्सैल ईमानदार अफसर .
ऋतू : उससे पहले मैं इंसान भी तो हूँ और एक औरत भी . मैं अंदर से इतनी अकेली थी क ज़िन्दगी जीना hi भूल गयी थी . पर तुमने मुझे जीना सीखा दिया. अब तो मेरा दिल भी चाहने लगा है क मैं भी ......
अमित : मैं भी क्या ?
ऋतू : कुछ नहीं
अमित : समझ सकता हूँ आप क्या कहना छह रही हैं. यही न क आपकी गॉड में भी आरव जैसा आपका एक छोटा सा प्यार सा नाहा मुन्ना हो ?
ऋतू की नज़रें शर्म से झुक गयी और उसने हाँ में गर्दन हिला दी.
अमित : एक से काम चल जायेगा या जुड़वाँ बनाऊ?
ऋतू : मुझे मरते हुए ) गंदे , पूरे कमीने हो तुम . अभी बताऊँ जा कर माँ जी को ?
अमित : माँ जी ???? अभी तो उन्होंने आपको ननद बनाया है और अब आप का hi कहने लगी
ऋतू : अब तुम्हारी माँ हैं तो मेरे लिए भी तो वही हुई न . वैसे मुझे जितनी उम्मीद से उससे भी कहीं ाचा है मेरा ‘ ससुराल ‘ ी लव आईटी .
अमित : ो मैडम ज्यादा दूर की मत सोचो . आप शायद भूल गयी क आप क्या करने आयी थी .
ऋतू: पता है , पता है . अब हटो पीछे
ऋतू थोड़ा उखाड़ा सा मुँह बना कर जाने लगी तो इस बार मैंने पीछे से उसे दबोच लिया और अपने हाथ सीधा उसके सख्त चुचों पर रख कर उन्हें मसल दिया .
ऋतू : आअह्ह्ह कक्कक्कक्स छोडो मुझे ,, क्या कर रहे हो ,, छोडो .
ऋतू मुझे छोड़ने का कह रही था पर उसका विरोध सिर्फ जुबान से hi था. चुस्त यूनिफार्म में उसकी फिगर वैसे hi जानलेवा नज़र आती थी . एक तो गोरा रंग लम्बा कद और इतनी फिट बॉडी कोई पागल hi होगा जो मोहित नहीं होगा ऐसे जलवे पर . उसके सख्त चुके हाथ में थामे अलग hi मज़ा मिल रहा था . ऋतू की गर्दन पर अपने होंठ रख कर जैसे hi मैंने किश किया तो ऋतू क मुँह से सिसकी छूती. अपने स्तनों पर रखे हुए मेरे हाथों को उसने खुद hi दबा दिया और ऑंखें बंद किये मूरत बन गयी . अब मैं कहाँ रुकने वाला था . गर्दन को चूमने क बाद मैं अपनी ज़ुबान से उसकी गर्दन को लीक करता हुआ उसके कण की लौ तक पहुंचा और उसे मुँह में ले लिया . नीचे मेरा लैंड ऋतू की मस्त गांड से टकराता फटने की हद तक सख्त हो गया था . ऋतू को ऐसे यूनिफार्म में प्यार करना मुझे अलग hi किक दे रहा था . ऋतू लगातार सिसक रही थी .
ऋतू : कक्कक्स उम्म्म्म रु ,,, रुक जाओ उम्म्म वर्ण कक्कक्क्स उम्म्म्म
अपना एक हाथ चुचों से उठा के जैसे hi मैंने नीचे ले जाना चाहा बहार से किसी क आने की आहत स हुई तो मैं एक डैम से ऋतू को छोड़ 2 कदम पीछे हैट गया . ऋतू भी मेरे ऐसे पीछे हैट जाने से होश में आयी और पलट कर देखा . उसकी आँखों में लाल डोरे नज़र आ रहे थे और नज़रों में सवाल .
‘ ये लीजिये कपडे , शायद आपको पूरे आ जाएँ . लम्बाई थोड़ी काम हो सकती है . अगर न आये तो बता दीजियेगा . ‘ दीपिका ममी हाथ में एक जोड़ी कपडे लिए कमरे में दाखिल हुई. ऋतू को कपडे पकड़ते हुए दीपिका ममी ऐसे मुझे देख रही थी जैसे उन्होंने हमें देख लिया हो. पर वो कुछ बोली नहीं . वैसे भी वो मेरी सपोर्ट hi करती थी हर मामले में .
ऋतू : थैंक्स , मैं देख लुंगी .
अमित : ाचा मैं चलता हूँ , ममी आप देख लेना अगर किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो.
दीपिका : तुम कहाँ चले ? मुझे ज़रा किचन में काम है . खाना भी तो बनाना है . तुम यहीं रुको वैसे भी अभी कौन सा काम है . अगर ज़रूरत हुई तो मैं आवाज़ दे दूंगी . तब तक तुम इनका पूरा ख्याल रखो .
आखिरी लाइन दीपिका ममी ने इस अंदाज़ में कही क जैसे कह रही हो जो करना है करो वो नीचे ध्यान रखेंगी . दीपिका ममी जाते जाते मुझे शरारत भरी नज़रों से देखती बहार निकल गयी . इधर ऋतू भी अपने जुटे उतर हाथ में कपडे लिए चली गयी थी बाथरूम में . मैंने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और बाथरूम क दरवाज़े क पास पहुँच गया .
अमित : आप अंदर क्या कर रही हैं ? कपडे यहाँ भी तो बदल सकती थी न .
ऋतू : कुछ ज्यादा hi शरारत नहीं सूझ रही तुम्हे ? अभी पकडे जाते तो क्या जवाब देते तुम ?
अमित : तब की तब देखि जाती. वैसे तो बड़ा प्यार जताती हो क मैं तुम्हारे लिए ये कर सकती हूँ वो कर सकती हूँ . और अब मेरे घर में मेरे कमरे में आकर भी ऐसे मुझसे पर्दा कर रही हो . बस इतना hi प्यार करती हो ?
ऋतू : ाचा तो अब तुम्हे ये देखना है क मैं कितना प्यार करती हूँ कितना नहीं . सोच लो , घर तुम्हारा है , बाद में जवाब देता नहीं बनेगा तुमसे और अगर झूठ बोलै तो मैं सो हूँ छोडूंगी नहीं.
अमित : बना लो जो बहाने बनाने हैं . कितना प्यारी करती hi पता चल गया .
मैं जान बुझ कर ऋतू को उकसा रहा था . और मेरी बातों का असर तुरंत हुआ . एक झटके में hi बाथरूम का दरवाज़ा खुल गया . सामने का नज़ारा देख कर मेरी ऑंखें भी फटी की फटी रह गयी . सामने ऋतू काली ब्रा और काली पेंटी में एक ऐडा से कड़ी मेरी आँखों में hi देख रही थी. एक हाथ कमर पर रखे एक पाऊँ हल्का सा उठाये किसी मॉडल की तरह पोज़ देती वो बिजलियाँ गिरा रही थी . मैं तो उसे सर से पाऊँ तक निहार रहा था और दिमाग था क काम करना hi बंद कर चूका था . साक्षात् काम देवी hi सामने आ कर कड़ी हो गयी थी . गोर रंग पर काली ब्रा पेंटी और उसमे कैसे हुए बड़े बड़े और सख्त चुके , स्पॉट पेट और नीचे काली पेंटी में छिपी छूट जिसे एक जंग आगे कर क छुपाने की कोशिश कर रही थी . गोरी मजबूत टंगे और मांसल जांघें . साफ़ चिकनी पिंडलियाँ और गोर पाऊँ . हाथ पाऊँ पर न कोई नेल पोलिश थी न hi होंठों पर लिपस्टिक . पर सुर्ख होंठों को जैसे लाली की ज़रूरत hi नहीं थी . मैं तो बस इस कामिनी क माया जल में hi खोया था क ऋतू खुद hi मुझे वास्तविकता में वापिस लायी.
ऋतू : क्या कह रहे थे तुम ? मैं सिर्फ बातें करती हूँ प्यार नहीं ? तुम्हारा घर और तुम्हारा बैडरूम ? अब देखती हूँ क्या जवाब देते हो सबको .
इतना कह कर ऋतू तेज़ी मेरे साथ चिपक गयी और मेरे सर को दोनों हाथों में थामे मेरे होंठों को अपने होंठों में दबोच कर वीलडली किश करने लगी . मेरे बालों को सख्ती से खींचती वो मुझ पर हावी हो रही थी . दायी जांघ को मेरी टांगों पर लपेट कर वो पाऊँ से मेरी टांगों को सहलाती मुझे उत्तेजित करने लगी . मैं भी पूरी तरह उसके नशे में डूबता चला गया और मेरा हाथ खुद hi उसकी जांघ को सहलाता उसके चूतड़ों पर चला गया और उसे दबोच कर मसलने लगा . दूसरे हाथ से मैंने उसका कबूतर दबोच लिया . ऋतू मुझे पीछे धकेलती हुई बीएड तक ले आयी और मुझे गिरा कर खुद मेरे ऊपर आ गयी . अब मेरे दोनों हाथ उसके चूतड़ों पर थे . एक पल क लिए भी हमारे होंठ अलग न हुए थे . ऋतू मेरे मुँह के कभी अपनी ज़ुबान घुसती और कभी मेरी जुबान को अपने मुँह में लेती अब मेरे कपडे निकलने की कोशिश करने लगी . उसके ठोस स्तन मेरी छाती में धंस रहे थे . ऋतू को उकसा कर कहीं मैंने गलती तो नहीं कर ली अब मेरे दिमाग में ये hi बात चल रही थी . ऋतू मेरी कमर क दोनों तरफ घुटने बीएड पर जमाये घुड़सवार की तरह मेरे ऊपर सवार थी . मेरा लैंड तो जैसे उसकी छूट क नीचे बुरी तरफ फसा पड़ा था जिसे वो ज़ोर से रगड़ दे रही थी .
ऋतू : उनममम उम्म्म सीसीसी उम्म्म्म किश में उनममम उम्म्म पूछह पुछठ उम्म्म्म
अमित : उम्म्म उम्म्म्म रुक्खक्क उम्म्म्म उम्म्म रुक जुम्म्मम्म
ऋतू तो मुझे बोलने तक का मौका नहीं दे रही थी . मुझसे भी अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था . जब मैंने देखा क ऋतू नहीं रुक रही तो मैंने झटके से पलटी मरी और ऋतू को अपने नीचे कर क खुद ऊपर आ गया . मगर ऋतू ने जैसे मुझे अपने शिकंजे न निकलने देने की योजना बना राखी थी . अपनी लम्बी टांगों को मेरी कमर पर लपेट कर मेरे गले में बहन दाल उसने मुझे पूरा कास लिया था अपने साथ . मैंने किश तोड़ कर अपना मुँह अलग किया तो ऋतू मेरी आँखों में कामुक नज़रों से देखने लगी .
अमित : क्या कर रही हैं आप , खुद को कण्ट्रोल कीजिये . अगर कोई आ गया तो ?
ऋतू : क्यों अब क्या हुआ ? अभी तो मेरे प्यार का टेस्ट ले रहे थे और अब अपनी hi हवा टाइट हो गयी?
अमित : हवा मेरी नहीं आपकी टाइट हो जाएगी अगर आप नहीं रुकी तो . बहार जा कर क्या जवाब डौगी क चाल कैसे बदल गयी. और फिर साथ में पुलिस वाले भी तो हैं .
ऋतू : मुझे कुछ नहीं सुन्ना , तुम्हे मेरे प्यार का टेस्ट लेना है न . अब करो जो भी करना है मैं नहीं डर्टी किसी से . वैसे भी ये तुम्हारा कमरा है न. और तुम्हारे बिस्तर पर तुम्हारे कमरे में तुम्हारे घर में सब क होते हुए प्यार करना . कितनी एक्ससिटेमेंट हो रही है मुझे मैं बता नहीं सकती
अमित : खुद को कण्ट्रोल करो मैडम . नीचे जो बैठे हैं न वो बचे नहीं हैं. और एक तो स्वयं आपकी बेस्ट फ्रेंड है जिसे आलरेडी सब पता है .
ऋतू : उसे मैं देख लुंगी , वैसे भी अब तो मेरी बेस्ट फ्रेंड क साथ मेरी सास भी है . है है है
अमित : आप को मज़ाक सूझ रहा है ??
ऋतू : सूझ तो बहुत कुछ रहा है मगर तुम hi ढीले पद रहे हो ummmmmmmmmm
ऋतू ने एक बार फिर मेरे होंठों पर हमला कर दिया . मैंने भी उसका साथ देता हुआ उसके स्तनों का मर्दन करने लगा . ऋतू कुछ ज्यादा hi एक्ससिटेड थी , मुझे लगा क ये ऐसे नहीं मानेगी पर सेक्स करना भी खतरे से खली नहीं था . इस लिए मैं उसके बूब्स मसलता हुआ किश करने लगा और साथ hi अपने लैंड को छूट पर रगड़ने लगा . ऋतू भी अपनी कमर हिला रही थी . धीरे धीरे उसके जिस्म की हरकत बढ़ने लगी तो मैं उसके ऊपर से उठा और बीएड से नीचे उतारते हुए घुटनो पर हो कर झुक गया और ऋतू की पेंटी को उतर कर उसकी छूट पे अपने होंठ रख दिए . ऋतू की छूट एक डैम साफ सुथरी और चिकनी थी . जैसे आज hi बल साफ़ किये हो . छूट पर मेरे होंठ लगते hi ऋतू क मुँह से सिसकी निकली जिसे उसने बड़ी मुश्किल से दबाया .
ऋतू : ओह्ह्ह्ह कक्ककक्कक्स ीीीी उम्मम्मम्म
ऋतू की छूट जवान लड़कियों की तरह कासी हुई थी जिसे मैंने hi थोड़ा बड़ा किया था वो भी कई सालों तक बंद रहने क बाद . ऋतू पागलों की तरह खुद hi अपने चुके मसलती हुई ऐंठ रही थी और अपनी सिसकियाँ रोकने की कोशिश कर रही थी . मगर मैं अपना काम लगातार किये जा रहा था .
ऋतू : ओह्ह्ह्ह ककक उम्म्म्म आअह्ह्ह फ़क ममम फ़क ऐसे hi उम्मम्मम ी म क्युम्मिंग ी ऍम कम्मं उम्मम्मम्म. ककक आअह्ह्ह्हह उईईईईई माआआआ मैं gyiiiiiiiiii
ऋतू खुद को ज्यादा देर रोक न सकती और उसका कामर्स छूट की दीवारें लाँघ कर बहार आने लगा . वो नशे की हालत में पहुँच गयी थी . मैंने उसकी छूट से एक एक बूँद तक निचोड़ ली थी. ऋतू धीरे धीरे बिलकुल शांत हो कर ऑंखें बंद किये लेती थी . मैं उसके ऊपर से उठा और उसके पास बैठ कर उसे निहारने लगा . एक आकर्षक एथलेटिक मजबूत जिस्म की मालिक. एक सख्त और प्रभावशाली व्यक्तित्व की मालिक पुलिस की इतनी आला अफसर मेरे सामने इस हालत में पड़ी थी . ये देख कर मुझे अलग hi मज़ा आ रहा था . ऋतू क दिल में मेरे लिए सच में प्यार था जो वो हर बात को दरकिनार कर क मेरे लिए कुछ भी कर गुज़रती थी . ऋतू क गोर बदन पर लाली छ गयी थी और उसके कबूतर भी लाल गुलाबी हो गए थे जो ब्रा से बहार झांक रहे थे. मुझे उन पर बड़ा प्यार आया और झुक कर मैंने एक निप्पल को अपने होंठों में भर चूसा और अपनी जीभ से उसे कुरेदा . ऋतू तो अभी भी ऑंखें बंद किये थी. बरी बरी दोनों कबूतरों को प्यार करने क बाद मैं उसके कन्धों गर्दन पेट पर किश करता हुआ कमर से नीचे आ गया . उसकी टांगों को हवा में उठाये मैं उसकी जांघों को किश करता हुआ उसकी पिंडलियों तक जा पहुंचा . आम औरतों से कहीं बेहतर थी ऋतू इसका एहसास उसे चुने से hi हो जाता था . और ऐसे जिस्म को प्यार करना तो सच में अलग hi मज़ा देता था . पिंडलियों से जब मैं किश करता उसके पाऊँ तक पहुंचा तो ऋतू ने अपने पाऊँ खिंच लिए . मैंने उसे देखा तो वो मेरी आँखों में देख कर न में गर्दन हिलने लगी
अमित : क्या हुआ ?
ऋतू : तुम्हारी जगह मेरे पाऊँ में नहीं मेरे दिल में है . मेरा रोम रोम तुम्हारा है
अमित : वही तो मैं कर रहा हूँ . तुम्हारे रोम रोम पर अपने प्यार की मोहर लगा रहा हूँ.
ऋतू : ओह अमित ,, ी लव यू ,, ी लव वैरी मच उम्मम्मम
एक बार फिर से ऋतू ऊपर उठो और मुझे बाँहों में भर किश करने लगी . मैंने कुछ देर उसके होंठों को चूमा और फिर किश तोड़ते हुए उसे कपडे पहनने को कहा.
ऋतू : पर तुम
अमित : मैं ठीक हूँ वैसे भी मेरा जल्दी नहीं होता आपको पता hi है . अब उठो आप और कपडे पेहेन लो इससे पहले क कोई यहाँ आये .
ऋतू ने मेरे होंठो को हलके से किश किया और अपनी पेंटी उठा कर फिर से बाथरूम में घुस गयी . अपनी हालत ठीक करने क बाद वो वापिस आयी और ममी क दिए हुए कपडे पहनने लगी पर वो कुछ ज्यादा hi छोटे थे तो उसने उतर दिए . मैं कुछ कहता उससे पहले hi वो कमरे में पड़ी मेरी अलमारी क पास गयी और उसे खोल कर खुद hi मेरी एक टीशर्ट और लोअर निकल लिया . मेरे कपडे वैसे तो उसके लिए सही थे पर T-shirt कुछ ज्यादा hi खुली थी . जिसे वो खुद hi हाथो से पकड़ कर दिखने लगी .
ऋतू : तुम्हारा साइज तो कुछ ज्यादा hi बड़ा है ऊपर से भी और नीचे से भी .....
ये कहते हुए ऋतू ने मेरे लैंड की तरफ देखा और आँख मर दी .
अमित : वैसे इन कपड़ो में भी आप अछि लग रही हो .
ऋतू : अछि तो लगूंगी hi , कपडे जो मेरे बर्फ क हैं. वैसे इन कपड़ों में तुम्हारी खुशबु आ रही है . इन्हे तो मैं साथ hi ले जाउंगी अब .
ऋतू कपडे पेहेन कर मेरी तरफ आने लगी तो दरवाज़े पर दस्तक हुई . मैं जल्दी से खड़ा हो गया . इससे पहले की मैं दरवाज़ा खोलते ऋतू ने खुद hi आगे बढ़ कर दरवाज़ा खोल दिया . सामने मंजू बुआ कड़ी थी . वो पहले ऋतू को और फिर मुझे देखने लगी .
मंजू : इतनी देर कैसे लगा दी ? और ये तूने किसके कपडे पेहेन लिए अब ?
ऋतू : देर तो लगनी hi थी , जो कपडे दिए थे वो छोटे थे पहले उसे पहना फिर उतरा और अब ये अमित क पहने हैं.
मंजू बुआ ने फिर मेरी तरफ देखा और मुझे नीचे जाने को कहा . मैं चुपचाप उनके पास से बहार निकल गया . मगर मैं सीढियाँ नहीं उतरा क्यूंकि मुझे बुआ की बातें सुन्नी थी क आखिर वो क्या कहने वाली हैं .
मंजू : क्या कर रही थी इतनी देर से ? अगर की और आ जाता यहाँ तो ?
ऋतू : तो क्या होता ? मैं कौन सा कुछ कर रही थी . तुमने देखा क्या कुछ ?
मंजू : मुझे मत बना , इतनी देर से बातें तो कर नहीं होगी तू .
ऋतू : एक तू hi तो मुझे समझती है मेरी जान . सच में यार बड़ा मज़ा आया . सोचा नहीं था इतना ाचा स्वागत होगा ससुराल में मेरा .
मंजू : इसका मतलब तुम दोनों यहाँ .....
ऋतू : रिलैक्स यार रिलैक्स , ऊपर ऊपर से hi किया है तेरे भतीजे ने. और सिर्फ मेरे साथ hi . मुझे कुछ नहीं करने दिया . दिल तो बड़ा था मेरा पर खैर छोडो.
मंजू : दिमाग ख़राब तो नहीं हो गया तुम दोनों का .
ऋतू : ये इश्क नहीं ज़ालिम , एक आग का दरिया और डूब क जाना है . हम तो इश्क में डूब चुके हमसे कुछ न बोलिये .
मंजू : कुछ तो शर्म कर , भतीजा है वो मेरा . और यहाँ किसी को पता चला तो क्या होगा जानती है .
ऋतू : भतीजा बाद में है वो , पहले तो तुम्हारा सब कुछ बन चूका था न वो . और अब तू ऐसे मुँह फेर रही है उससे . प्यार को दिल से निकलना इतना आसान नहीं होता . ये मुझसे बेहतर कौन जान सकता है जो धोखा मिलने क बाद भी भुला न सकीय और उसने तो तुम्हे बराबर प्यार दिया है. फिर तू कैसे उसे भुला सकती है ?
मंजू : वो भतीजा है मेरा .
ऋतू : और तेरा पहला प्यार भी . इस सचाई को तू झुठला नहीं सकती . एक साथ दो दो रिश्ते भी निभाए जा सकते हैं मंजू. प्यार को ऐसे ठुकरा मत . भरोसा रख वो तुझे दोनों रिश्तों का बराबर प्यार दे सकता है . फिर भी मर्ज़ी तेरी . मैं तेरी दोस्त हूँ तुझे वही कह रही हूँ जो सही है .
मंजू : गलत है ये जिसे तू सही कह रही है
ऋतू : चल छोड़ अगर तू नहीं मन्ना चाहती . पर एक दिन ज़रूर मानेगी . अब चल नीचे चलते हैं .
मुझे लगा क अब दोनों बहार आने वाली हैं तो मैं जल्दी से नीचे उतर आया . पीछे पीछे बुआ और ऋतू भी आ गयी . दीपिका ममी मुझे देख कर स्माइल कर रही थी और ऋतू की तरफ इशारा भी कर रही थी . मैं बस मुस्कुरा दिया. माँ ने कपड़ों का पुछा तो ऋतू ने साफ़ कह दिया क वो कपडे बहुत छोटे थे . फिर दोपहर क खाने की भागदौड़ लग गयी. बाबा भी वापिस आ गए थे . अजय मां काम से शहर गए हुए थे और कमलेश मां भी घर नहीं आये थे खाना खाने. खाने क बाद ऋतू वापिस जाने क लिए तैयार हो गयी . माँ ने उसे रोकने की कोशिश की पर उसने ड्यूटी का बता दिया. फिर उसने मेरे कमरे में जा कर अपनी यूनिफार्म पहनी और जैसा उसने कहा था जो कपडे उसने पहने थे वो अपने साथ hi रख लिए ये कह कर क वो धुला कर hi वापिस देगी. माँ ने बहुत कहा पर वो नहीं मणि और मेरे कपडे अपने पास hi रख लिए . फिर वो जल्दी जल्दी में वापिस निकल गयी फिर कभी आने का वडा कर क . बाबा और माँ ने उन्हें भी शगुन दिया जिसे वो मन कर रही थी पर भाई का प्यार कह कर जब बाबा ने दिया तो नाम आँखों से उनसे रख लिया . ऋतू क जाने क कुछ देर बाद hi मोहित आ गया . दीपिका ममी मुझसे बात करना छह रही थी पर टाइम hi नहीं मिला . मोहित ने माँ बाबा को बता दिया क एक पार्टी राखी है दोस्तों ने तो मेरा जाना ज़रूरी है . माँ भी मन न कर सकीय. रीता मौसी को वापिस जाना था तो उन्होंने हमारे साथ hi वापिस शहर जाने की तयारी कर ली . नेहा दीदी को भी उन्होंने तैयार होने को कहा तो बुआ ने नेहा दीदी को रोक लिया . फिर हम तीनो मोहित की कार में शहर क लिए निकल लिए . पहले मौसी को घर छोड़ा और फिर मोहित मुझे अपने साथ घर लेकर आ गया . घर पर सिर्फ आंटी थी जो मुझे देख कर बहुत खुश हुई . कुछ देर मैं उनके साथ बातें करता रहा . 7 बजते hi हम घर से निकल गए . पहले हम मीनल क घर गए और उसे अपने साथ लेकर चल दिए जहाँ पार्टी राखी गयी थी . ये एक फार्म हाउस था जो शहर से बहार था . हम जब वहां पहुंचे तो हमारी उम्र क hi कुछ लड़के लड़कियां थे वहां . वो सब मोहित और मीनल क पुराने स्कूल फ्रेंड्स थे . सब क सब अमीर घरों क hi लग रहे थे . सब आपस में अचे दोस्त थे सिर्फ मुझे छोड़ कर . मोहित ने मुझे सबसे इंट्रोडस करवाया .
मोहित : फ्रेंड्स मीट माय बेस्ट फ्रेंड अमित . एक्चुअली दोस्त से कहीं बढ़ कर हैं हम. और अमित ये सब हमारे स्कूल मातेस हैं. आज क्रिसमस क मौके सब ने मिल कर रीयूनियन पार्टी राखी है . सोचा तुम्हे अपने सब दोस्तों से मिलवा दूँ .
‘ पर यार ये हमारे ग्रुप की रीयूनियन थी तू जनता है न ‘ एक लड़के ने मोहित की बात काट ते हुए कहा . शायद उसे मेरा आना पसंद नहीं आया था .
मोहित : देख कमल अमित मेरा जिगरी यार है. इसके बिना मैं कहीं नहीं जाता . अगर तुम लोगों को ऐतराज़ है तो मैं वापिस चला जाता हूँ .
‘ अरे अरे तू तो बुरा मन गया यार . तेरा यार है तो हमारा भी यार hi हुआ न . Hello अमित मेरा नाम सुनील है . और कमल तू भी हाथ मिला इधर आ कर भाई से . वैसे यार बॉडी तो बड़ी ज़बरदस्त बनाई है तुमने ‘ ये लड़का बाकियों से कुछ ज्यादा hi स्मार्ट और मजबूत दिख रहा था . जिस तरह उसकी बात पर सब ने सहमति दिखाई मतलब साफ़ था क उसकी सब मानते हैं.
मीनल : बॉडी की बात करते हो , हमारे कॉलेज में तो सब इसे जानते हैं. कॉलेज का डरा सिंह है ी मैं रेसलिंग का बेस्ट प्लेयर है . खुद प्रिंसिपल सर बड़ा मानते हैं इसे .
मीनल ने मेरी जब ऐसे तारीफ की तो वहां मौजूद बाकि सब लड़कियां भी बड़े गौर से मुझे देखने लगी .
सुनील : अगर मीनल कह रही है तो फिर तो तुम वाकई कमल क हो. ये ऐसे hi किसी की तारीफ नहीं करती. स्कूल में सबसे स्मार्ट ये hi तो थी.
कमल : सॉरी यार मेरी बात का बुरा मत मन्ना .
अमित : it’s ok भाई , तुमने तो कुछ गलत कहा hi नहीं .
‘ अचानक से बढ़ गयी है रौशनी चिरागों की , सुना है महफ़िल में वो तशरीफ़ लाये हैं ‘ एक आधुनिक सी दिखने वाली लड़की जिसने जांघों तक की ओने पीेछे ड्रेस पहनी हुई थी वो ऐडा से चलती हुई मोहित क गले लग गयी . मोहित उससे जैसे बचने की कोशिश कर रहा था . पर उस लड़की ने किसी की परवाह किये बिना न सिर्फ मोहित को गले लगाया बल्कि उसके गाल को चूम भी लिया . मेरी नज़र मीनल पर पड़ी तो उसके चेहरे पर गुस्सा आ रहा था उस लड़की को देख कर .
‘ कैसे हो मोहित , तुम तो मुझे भूल hi गए . कितनी बार कोशिश की तुमसे बात करने की पर तुम कभी रिस्पांस hi नहीं देते ‘ वो लड़की मोहित से hi बात कर रही थी जैसे वहां और कोई हो hi न .
मोहित : प्लीज रॉय ज़रा पीछे हैट क बात करो न . मुझे ये सब पसंद नहीं .
रॉय : कॉमन यार , कॉलेज में जा कर भी तुम अभी तक बदले नहीं . मुझे तो लगा था अब सब कुछ सीख गए होंगे .
मीनल : लगता है तुम कुछ ज्यादा hi सीख गयी हो जो आते hi चिपकने लग गयी .
रॉय : ओह तो तुम भी आयी हो . ड्रेस तो ाचा पहना है . मोहित ने दिलाया क्या ? नीस चॉइस .
सुनील : रॉय बेहवे योर सेल्फ , मीनल से तुम ऐसे बात नहीं कर सकती .
रॉय : ok ok , वैसे ये हैंडसम कौन है ? कोई मुझे भी तो मिलवाओ .
कमल : ये अमित है , मोहित का बेस्ट फ्रेंड.
रॉय : hi हैंडसम , यू लुक लिखे स्ट्रांग मन .
मोहित : हे इस . सुनील पार्टी का क्या प्रोग्राम है ?
सुनील : तुम लोग आ गए हो तो पार्टी hi पार्टी है . यहाँ लॉन में एक तरफ ड्रिंक्स हैं और खाने का सामान सब पड़ा है . No लिमिट ऑफ़ एनीथिंग . जो जितना चाहे जब तक चाहे एन्जॉय कर सकता है. सब पड़ा है इधर. डांस फ्लोर पर पहले डांस होगा फिर जो जिसका मन आये करे . हमारे इलावा उधर कोई नहीं है सुबह तक कोई आएगा भी नहीं . अंदर सब रूम्स रेडी हैं . जो भी आउट हो जाये अंदर जा कर सो जाये . जो यहाँ रुकना चाहे यहाँ रुके .
मोहित : ड्रिंक्स ? कौन सी ड्रिंक्स ?
सुनील : सॉफ्ट ड्रिंक्स और बियर हैं यार , लड़कियों क
लिए रेड वीने और वोडका भी है . अगर किसी को हार्ड ड्रिंक चाहिए तो वो भी सब है .
मोहित : ये कुछ ज्यादा hi नहीं हो रहा ?
रॉय : कॉमन डार्लिंग , इतने दिनों बाद आज मिल रहे हैं . काम से काम आज तो खुल कर एन्जॉय करो .
रॉय कुछ ज्यादा hi मोहित से चिपक रही थी जिसे देख देख मीनल को गुस्सा आ रहा था . शायद इसके पीछे कोई बात रही होगी वर्ण मीनल तो ऐसी नहीं थी .
सुनील : तुम अकेले बोर हो जाओगे यहाँ . रुको एक मिनट , मोना ,,,, मोनाआ के हेरे .
सुनील को मैंने मन करने की कोशिश की मगर उसने मेरी बात पर ध्यान न देते हुए एक लड़की को आवाज़ दी . वो लड़की शायद कोई ड्रिंक ले रही थी . आवाज़ सुनते hi उसने गिलास नीचे रखा और कैटवाक करती हुई हम लोगों क पास आ गयी. ये भी ओने पीेछे ड्रेस में थी जो शार्ट तो थी hi साथ में उसके बूब्स भी आधे बहार निकल रहे थे .
सुनील : मोना , मीट आवर फ्रेंड अमित . अमित ये है मोना. तुम दोनों hi अकेले आये हो तो एक दूसरे को कंपनी दो . आज यहाँ कोई भी बोर नहीं होना चाहिए . कमल , यार एक एक ड्रिंक तो ला सबके लिए फिर डांस शुरू करते हैं . मीनल क लिए इसके जैसी हॉट ड्रिंक लाना .
मीनल : no ी don’t नीड .
रॉय : या , शी can’t हैंडल थी प्रेसियस थिंग्स .
मीनल : समझती क्या हो तुम अपने आप को ? अब एक और लफ्ज़ भी मुँह से निकला न तो दन्त तोड़ दूंगी .
मीनल एक डैम से गुस्से में आकर मुक्का दिखने लगी तो मोहित ने उसे रोका .
मोहित : रिलैक्स मीनल, ऐसे गुस्सा क्यों कर रही हो ? देखो हम सब यहाँ एन्जॉय करने आये हैं न क लड़ाई झगड़ा करने .
मीनल शांत तो हो गयी पर अब वो मोहित को भी गुस्से से देख रही थी . जैसे उसे मोहित की बात पसंद न आयी हो .
सुनील : रॉय , एनफ इस एनफ . से सॉरी तो हेर. तुम्हे पता है न मीनल को ऐसी बातें पसंद नहीं .
रॉय : सॉरी
सुनील : नाउ फ्रेंड्स , हैवे योर ड्रिंक्स . मीनल प्लीज मेरी खातिर अपना गुस्सा ठंडा करलो . चलो न बैठ कर स्कूल क दिनों को यद् करते हैं. लो ड्रिंक भी आ गयी. अरे यार ये रहने दे मीनल नहीं लेगी ये .
पता नहीं वो कौन सी ड्रिंक थी जो कमल लेकर आया था . जिसे रॉय ने झट से उठा लिया मीनल
की तरफ दिखावे की हंसी हँसते हुए . सुनील ने कमल को उसे हटाने को कहा मगर मीनल ने गुस्से में वो ड्रिंक उठा ली और सीधा मुँह को लगा कर एक hi झटके में खली कर दिया .
मोहित : ये तुम क्या कर रही हो ?
मीनल : क्यों क्या हुआ मैं नहीं पि सकती क्या ?
मोहित : ये तुम कैसी बातें कर रही हो ?
सुनील : अरे रिलैक्स यार चिल करो आज . वैसे भी ये वोडका है बिलकुल लाइट . लो तुम भी ड्रिंक लो.
सुनील ने मोहित को ड्रिंक देनी चाही पर उसने नहीं ली. मगर रॉय ने एक गिलास मोहित क होंठों से लगा दिया . और ज़बरदस्ती उसे पीला भी दिया . ये देख कर तो मीनल और भी ज्यादा गुस्से में आ गयी और एक गिलास और ले कर फिर से गले क नीचे उतर लिया .
मुझे ये सब कुछ ठीक नहीं लग रहा था . मीनल और मोहित क बीच अनबन होती नज़र आ रही थी जिसे बाकि क लोग हवा दे रहे थे .
मोना : तुम क्या लोगे ?
अमित : मैं ड्रिंक नहीं लेता .
मोना : तो फिर क्या लेते हो ? जो चाहिए सब मिलेगा यहाँ . एक बार मांग कर तो देखो .
मोना ने अपने बूब्स कुछ ज्यादा hi उभर कर दिखते हुए कहा .
अमित : no थैंक्स , मुझे कुछ नहीं चाहिए .
मोना : ऐसे कैसे नहीं , कुछ तो लेना hi पड़ेगा . देखो सब ले रहे हैं. ये पार्टी का रूल है. कुछ न कुछ तो लेना hi पड़ेगा . अगर स्मोकिंग करते हो तो वो भी है उस तरफ.
मोना ने जिस तरफ इशारा किया था वहां कुछ लड़के लड़कियां हुक्का पि रहे थे जो बिलकुल नए स्टाइल का था जो मैंने पहले कभी नहीं देखा था. गाओं में तो बड़े बड़े हुक्के hi देखे थे पीतल क बेस और मिटटी की या पीतल की चिलम क. मगर यहाँ तो कांच क बने हुक्के थे और ऊपर बड़ी चिलम की जगह चंडी का वरक लगा था जिसके ऊपर एक छोटी स टिक्की स कोयले की तरह जल रही थी .
अमित : जो शुक्रिया पर मैं स्मोक भी नहीं करता .
मेरे जवाब से मोना जैसे निराश सी हो गयी फिर कुछ सोचते हुए बोली .
मोना : ठीक है , पर कुछ न कुछ तो आपको पीना hi पड़ेगा . मैं आपके लिए सॉफ्ट ड्रिंक लती हूँ .
अमित : अरे रहने दो आप , मुझे कुछ नहीं चाहिए .
मेरी बात सुने बगैर hi मोना वहां से उठ कर चली गयी और जिधर ड्रिंक्स थी उधर चली गयी. कमल भी उधर hi खड़ा था . मोना जाकर उससे कुछ बात करने लगी . एक बार कमल ने मुद कर मुझे देखा . उसके चेहरे क भाव कुछ अलग थे . मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया किया क्यूंकि इधर मेरी जान रीमा की कॉल जो आ गयी थी . यहाँ लॉन में म्यूजिक शुरू हो गया था तो रीमा से बात करने क लिए मैं बहार की तरफ चल दिया .
बाबा तो गाओं वालों क साथ चले गए और इधर मैं घर में वापिस आ गया . ऋतू को इस वक़्त सब अपने बीच बिठाये बातें कर रहे थे . घर में केवल महिलाएं hi थी . ऋतू क चेहरे पर अगल hi ख़ुशी दिख रही थी जब वो नन्हे मुन्नो को गॉड में खिला रही थी. आरव को ऋतू ने गॉड में उठा रखा था तो छोटू को मंजू बुआ ने . दोनों hi ममता क सुख से अनजान थी पर इस वक़्त दोनों hi बहुत खुश नज़र आ रही थी . अचानक आरव ने अपना काम करते हुए ऋतू क ऊपर धार छोड़ दी और उसकी यूनिफार्म को गिला कर दिया .
ऋतू : ुयी माआ
दीपिका : है है है , लगता है आरव को आप कुछ ज्यादा hi पसंद आ गयी.
गौरी : लाइन मुझे दो , तुम जा कर कपडे बदल लो . कुछ देर में सुख जायेगा ये .
ऋतू : it’s ok
मंजू : तू इतना शर्मा क्यों रही है ? अपना hi घर है ये . चल जा , जा कर चेंज कर ले .
गौरी : अमित इन्हे अपने रूम में ले जाओ . कमरे में बाथरूम है तेरे hi. इन्हे सुविधा रहेगी . दीपिका तुम कोई कपडा दे दो तब तक पहनने क लिए .
माँ की बात सुन कर दीपिका ममी अपने रूम में चली गयी कपडा लेने और इधर ऋतू मेरे पीछे पीछे आ गयी . मैं ऋतू को अपने रूम में ले गया . ऋतू जैसे hi कमरे में आयी उसने मुझे पीछे से बाँहों में में भर लिया और उसके सख्त चुके मेरी पीठ पर दबने लगे .
ऋतू : ी लव यू अमित , तुम्हे बता नहीं सकती आज मैं कितनी खुश हूँ. ऐसे लग रहा है जैसे मुझे सब कुछ मिल गया है . भैया , भाभी, बहने, बचे पूरा सब एक साथ . ऐसे लग रहा है जैसे ऊपर वाले ने सब कुछ एक साथ दे दिया है . ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है . तुमने मुझे मेरी ज़िन्दगी लौटा दी . पहले मेरी बेस्ट फ्रेंड से मुझे मिलवाया फिर मुझे प्यार का एहसास करवाया और अब पूरा परिवार hi दे दिया. थैंक यू , थैंक यू वैरी मच .
ऋतू की आवाज़ भर आयी थी . मैंने उसकी नहीं से निकल क पलट कर जब उसे देखा तो सच में उसकी ऑंखें भीगी हुई थी . मैंने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके आंसू साफ़ किये
अमित : ये क्या , आप रो रही हैं. साडी दुनिया जिसका खौफ कहती है उसकी आँखों में आंसू ? नहीं , ये सब आप पर ाचा नहीं लगता . आप तो वैसे hi अछि लगती हैं रोअब दर गुस्सैल ईमानदार अफसर .
ऋतू : उससे पहले मैं इंसान भी तो हूँ और एक औरत भी . मैं अंदर से इतनी अकेली थी क ज़िन्दगी जीना hi भूल गयी थी . पर तुमने मुझे जीना सीखा दिया. अब तो मेरा दिल भी चाहने लगा है क मैं भी ......
अमित : मैं भी क्या ?
ऋतू : कुछ नहीं
अमित : समझ सकता हूँ आप क्या कहना छह रही हैं. यही न क आपकी गॉड में भी आरव जैसा आपका एक छोटा सा प्यार सा नाहा मुन्ना हो ?
ऋतू की नज़रें शर्म से झुक गयी और उसने हाँ में गर्दन हिला दी.
अमित : एक से काम चल जायेगा या जुड़वाँ बनाऊ?
ऋतू : मुझे मरते हुए ) गंदे , पूरे कमीने हो तुम . अभी बताऊँ जा कर माँ जी को ?
अमित : माँ जी ???? अभी तो उन्होंने आपको ननद बनाया है और अब आप का hi कहने लगी
ऋतू : अब तुम्हारी माँ हैं तो मेरे लिए भी तो वही हुई न . वैसे मुझे जितनी उम्मीद से उससे भी कहीं ाचा है मेरा ‘ ससुराल ‘ ी लव आईटी .
अमित : ो मैडम ज्यादा दूर की मत सोचो . आप शायद भूल गयी क आप क्या करने आयी थी .
ऋतू: पता है , पता है . अब हटो पीछे
ऋतू थोड़ा उखाड़ा सा मुँह बना कर जाने लगी तो इस बार मैंने पीछे से उसे दबोच लिया और अपने हाथ सीधा उसके सख्त चुचों पर रख कर उन्हें मसल दिया .
ऋतू : आअह्ह्ह कक्कक्कक्स छोडो मुझे ,, क्या कर रहे हो ,, छोडो .
ऋतू मुझे छोड़ने का कह रही था पर उसका विरोध सिर्फ जुबान से hi था. चुस्त यूनिफार्म में उसकी फिगर वैसे hi जानलेवा नज़र आती थी . एक तो गोरा रंग लम्बा कद और इतनी फिट बॉडी कोई पागल hi होगा जो मोहित नहीं होगा ऐसे जलवे पर . उसके सख्त चुके हाथ में थामे अलग hi मज़ा मिल रहा था . ऋतू की गर्दन पर अपने होंठ रख कर जैसे hi मैंने किश किया तो ऋतू क मुँह से सिसकी छूती. अपने स्तनों पर रखे हुए मेरे हाथों को उसने खुद hi दबा दिया और ऑंखें बंद किये मूरत बन गयी . अब मैं कहाँ रुकने वाला था . गर्दन को चूमने क बाद मैं अपनी ज़ुबान से उसकी गर्दन को लीक करता हुआ उसके कण की लौ तक पहुंचा और उसे मुँह में ले लिया . नीचे मेरा लैंड ऋतू की मस्त गांड से टकराता फटने की हद तक सख्त हो गया था . ऋतू को ऐसे यूनिफार्म में प्यार करना मुझे अलग hi किक दे रहा था . ऋतू लगातार सिसक रही थी .
ऋतू : कक्कक्स उम्म्म्म रु ,,, रुक जाओ उम्म्म वर्ण कक्कक्क्स उम्म्म्म
अपना एक हाथ चुचों से उठा के जैसे hi मैंने नीचे ले जाना चाहा बहार से किसी क आने की आहत स हुई तो मैं एक डैम से ऋतू को छोड़ 2 कदम पीछे हैट गया . ऋतू भी मेरे ऐसे पीछे हैट जाने से होश में आयी और पलट कर देखा . उसकी आँखों में लाल डोरे नज़र आ रहे थे और नज़रों में सवाल .
‘ ये लीजिये कपडे , शायद आपको पूरे आ जाएँ . लम्बाई थोड़ी काम हो सकती है . अगर न आये तो बता दीजियेगा . ‘ दीपिका ममी हाथ में एक जोड़ी कपडे लिए कमरे में दाखिल हुई. ऋतू को कपडे पकड़ते हुए दीपिका ममी ऐसे मुझे देख रही थी जैसे उन्होंने हमें देख लिया हो. पर वो कुछ बोली नहीं . वैसे भी वो मेरी सपोर्ट hi करती थी हर मामले में .
ऋतू : थैंक्स , मैं देख लुंगी .
अमित : ाचा मैं चलता हूँ , ममी आप देख लेना अगर किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो.
दीपिका : तुम कहाँ चले ? मुझे ज़रा किचन में काम है . खाना भी तो बनाना है . तुम यहीं रुको वैसे भी अभी कौन सा काम है . अगर ज़रूरत हुई तो मैं आवाज़ दे दूंगी . तब तक तुम इनका पूरा ख्याल रखो .
आखिरी लाइन दीपिका ममी ने इस अंदाज़ में कही क जैसे कह रही हो जो करना है करो वो नीचे ध्यान रखेंगी . दीपिका ममी जाते जाते मुझे शरारत भरी नज़रों से देखती बहार निकल गयी . इधर ऋतू भी अपने जुटे उतर हाथ में कपडे लिए चली गयी थी बाथरूम में . मैंने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और बाथरूम क दरवाज़े क पास पहुँच गया .
अमित : आप अंदर क्या कर रही हैं ? कपडे यहाँ भी तो बदल सकती थी न .
ऋतू : कुछ ज्यादा hi शरारत नहीं सूझ रही तुम्हे ? अभी पकडे जाते तो क्या जवाब देते तुम ?
अमित : तब की तब देखि जाती. वैसे तो बड़ा प्यार जताती हो क मैं तुम्हारे लिए ये कर सकती हूँ वो कर सकती हूँ . और अब मेरे घर में मेरे कमरे में आकर भी ऐसे मुझसे पर्दा कर रही हो . बस इतना hi प्यार करती हो ?
ऋतू : ाचा तो अब तुम्हे ये देखना है क मैं कितना प्यार करती हूँ कितना नहीं . सोच लो , घर तुम्हारा है , बाद में जवाब देता नहीं बनेगा तुमसे और अगर झूठ बोलै तो मैं सो हूँ छोडूंगी नहीं.
अमित : बना लो जो बहाने बनाने हैं . कितना प्यारी करती hi पता चल गया .
मैं जान बुझ कर ऋतू को उकसा रहा था . और मेरी बातों का असर तुरंत हुआ . एक झटके में hi बाथरूम का दरवाज़ा खुल गया . सामने का नज़ारा देख कर मेरी ऑंखें भी फटी की फटी रह गयी . सामने ऋतू काली ब्रा और काली पेंटी में एक ऐडा से कड़ी मेरी आँखों में hi देख रही थी. एक हाथ कमर पर रखे एक पाऊँ हल्का सा उठाये किसी मॉडल की तरह पोज़ देती वो बिजलियाँ गिरा रही थी . मैं तो उसे सर से पाऊँ तक निहार रहा था और दिमाग था क काम करना hi बंद कर चूका था . साक्षात् काम देवी hi सामने आ कर कड़ी हो गयी थी . गोर रंग पर काली ब्रा पेंटी और उसमे कैसे हुए बड़े बड़े और सख्त चुके , स्पॉट पेट और नीचे काली पेंटी में छिपी छूट जिसे एक जंग आगे कर क छुपाने की कोशिश कर रही थी . गोरी मजबूत टंगे और मांसल जांघें . साफ़ चिकनी पिंडलियाँ और गोर पाऊँ . हाथ पाऊँ पर न कोई नेल पोलिश थी न hi होंठों पर लिपस्टिक . पर सुर्ख होंठों को जैसे लाली की ज़रूरत hi नहीं थी . मैं तो बस इस कामिनी क माया जल में hi खोया था क ऋतू खुद hi मुझे वास्तविकता में वापिस लायी.
ऋतू : क्या कह रहे थे तुम ? मैं सिर्फ बातें करती हूँ प्यार नहीं ? तुम्हारा घर और तुम्हारा बैडरूम ? अब देखती हूँ क्या जवाब देते हो सबको .
इतना कह कर ऋतू तेज़ी मेरे साथ चिपक गयी और मेरे सर को दोनों हाथों में थामे मेरे होंठों को अपने होंठों में दबोच कर वीलडली किश करने लगी . मेरे बालों को सख्ती से खींचती वो मुझ पर हावी हो रही थी . दायी जांघ को मेरी टांगों पर लपेट कर वो पाऊँ से मेरी टांगों को सहलाती मुझे उत्तेजित करने लगी . मैं भी पूरी तरह उसके नशे में डूबता चला गया और मेरा हाथ खुद hi उसकी जांघ को सहलाता उसके चूतड़ों पर चला गया और उसे दबोच कर मसलने लगा . दूसरे हाथ से मैंने उसका कबूतर दबोच लिया . ऋतू मुझे पीछे धकेलती हुई बीएड तक ले आयी और मुझे गिरा कर खुद मेरे ऊपर आ गयी . अब मेरे दोनों हाथ उसके चूतड़ों पर थे . एक पल क लिए भी हमारे होंठ अलग न हुए थे . ऋतू मेरे मुँह के कभी अपनी ज़ुबान घुसती और कभी मेरी जुबान को अपने मुँह में लेती अब मेरे कपडे निकलने की कोशिश करने लगी . उसके ठोस स्तन मेरी छाती में धंस रहे थे . ऋतू को उकसा कर कहीं मैंने गलती तो नहीं कर ली अब मेरे दिमाग में ये hi बात चल रही थी . ऋतू मेरी कमर क दोनों तरफ घुटने बीएड पर जमाये घुड़सवार की तरह मेरे ऊपर सवार थी . मेरा लैंड तो जैसे उसकी छूट क नीचे बुरी तरफ फसा पड़ा था जिसे वो ज़ोर से रगड़ दे रही थी .
ऋतू : उनममम उम्म्म सीसीसी उम्म्म्म किश में उनममम उम्म्म पूछह पुछठ उम्म्म्म
अमित : उम्म्म उम्म्म्म रुक्खक्क उम्म्म्म उम्म्म रुक जुम्म्मम्म
ऋतू तो मुझे बोलने तक का मौका नहीं दे रही थी . मुझसे भी अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था . जब मैंने देखा क ऋतू नहीं रुक रही तो मैंने झटके से पलटी मरी और ऋतू को अपने नीचे कर क खुद ऊपर आ गया . मगर ऋतू ने जैसे मुझे अपने शिकंजे न निकलने देने की योजना बना राखी थी . अपनी लम्बी टांगों को मेरी कमर पर लपेट कर मेरे गले में बहन दाल उसने मुझे पूरा कास लिया था अपने साथ . मैंने किश तोड़ कर अपना मुँह अलग किया तो ऋतू मेरी आँखों में कामुक नज़रों से देखने लगी .
अमित : क्या कर रही हैं आप , खुद को कण्ट्रोल कीजिये . अगर कोई आ गया तो ?
ऋतू : क्यों अब क्या हुआ ? अभी तो मेरे प्यार का टेस्ट ले रहे थे और अब अपनी hi हवा टाइट हो गयी?
अमित : हवा मेरी नहीं आपकी टाइट हो जाएगी अगर आप नहीं रुकी तो . बहार जा कर क्या जवाब डौगी क चाल कैसे बदल गयी. और फिर साथ में पुलिस वाले भी तो हैं .
ऋतू : मुझे कुछ नहीं सुन्ना , तुम्हे मेरे प्यार का टेस्ट लेना है न . अब करो जो भी करना है मैं नहीं डर्टी किसी से . वैसे भी ये तुम्हारा कमरा है न. और तुम्हारे बिस्तर पर तुम्हारे कमरे में तुम्हारे घर में सब क होते हुए प्यार करना . कितनी एक्ससिटेमेंट हो रही है मुझे मैं बता नहीं सकती
अमित : खुद को कण्ट्रोल करो मैडम . नीचे जो बैठे हैं न वो बचे नहीं हैं. और एक तो स्वयं आपकी बेस्ट फ्रेंड है जिसे आलरेडी सब पता है .
ऋतू : उसे मैं देख लुंगी , वैसे भी अब तो मेरी बेस्ट फ्रेंड क साथ मेरी सास भी है . है है है
अमित : आप को मज़ाक सूझ रहा है ??
ऋतू : सूझ तो बहुत कुछ रहा है मगर तुम hi ढीले पद रहे हो ummmmmmmmmm
ऋतू ने एक बार फिर मेरे होंठों पर हमला कर दिया . मैंने भी उसका साथ देता हुआ उसके स्तनों का मर्दन करने लगा . ऋतू कुछ ज्यादा hi एक्ससिटेड थी , मुझे लगा क ये ऐसे नहीं मानेगी पर सेक्स करना भी खतरे से खली नहीं था . इस लिए मैं उसके बूब्स मसलता हुआ किश करने लगा और साथ hi अपने लैंड को छूट पर रगड़ने लगा . ऋतू भी अपनी कमर हिला रही थी . धीरे धीरे उसके जिस्म की हरकत बढ़ने लगी तो मैं उसके ऊपर से उठा और बीएड से नीचे उतारते हुए घुटनो पर हो कर झुक गया और ऋतू की पेंटी को उतर कर उसकी छूट पे अपने होंठ रख दिए . ऋतू की छूट एक डैम साफ सुथरी और चिकनी थी . जैसे आज hi बल साफ़ किये हो . छूट पर मेरे होंठ लगते hi ऋतू क मुँह से सिसकी निकली जिसे उसने बड़ी मुश्किल से दबाया .
ऋतू : ओह्ह्ह्ह कक्ककक्कक्स ीीीी उम्मम्मम्म
ऋतू की छूट जवान लड़कियों की तरह कासी हुई थी जिसे मैंने hi थोड़ा बड़ा किया था वो भी कई सालों तक बंद रहने क बाद . ऋतू पागलों की तरह खुद hi अपने चुके मसलती हुई ऐंठ रही थी और अपनी सिसकियाँ रोकने की कोशिश कर रही थी . मगर मैं अपना काम लगातार किये जा रहा था .
ऋतू : ओह्ह्ह्ह ककक उम्म्म्म आअह्ह्ह फ़क ममम फ़क ऐसे hi उम्मम्मम ी म क्युम्मिंग ी ऍम कम्मं उम्मम्मम्म. ककक आअह्ह्ह्हह उईईईईई माआआआ मैं gyiiiiiiiiii
ऋतू खुद को ज्यादा देर रोक न सकती और उसका कामर्स छूट की दीवारें लाँघ कर बहार आने लगा . वो नशे की हालत में पहुँच गयी थी . मैंने उसकी छूट से एक एक बूँद तक निचोड़ ली थी. ऋतू धीरे धीरे बिलकुल शांत हो कर ऑंखें बंद किये लेती थी . मैं उसके ऊपर से उठा और उसके पास बैठ कर उसे निहारने लगा . एक आकर्षक एथलेटिक मजबूत जिस्म की मालिक. एक सख्त और प्रभावशाली व्यक्तित्व की मालिक पुलिस की इतनी आला अफसर मेरे सामने इस हालत में पड़ी थी . ये देख कर मुझे अलग hi मज़ा आ रहा था . ऋतू क दिल में मेरे लिए सच में प्यार था जो वो हर बात को दरकिनार कर क मेरे लिए कुछ भी कर गुज़रती थी . ऋतू क गोर बदन पर लाली छ गयी थी और उसके कबूतर भी लाल गुलाबी हो गए थे जो ब्रा से बहार झांक रहे थे. मुझे उन पर बड़ा प्यार आया और झुक कर मैंने एक निप्पल को अपने होंठों में भर चूसा और अपनी जीभ से उसे कुरेदा . ऋतू तो अभी भी ऑंखें बंद किये थी. बरी बरी दोनों कबूतरों को प्यार करने क बाद मैं उसके कन्धों गर्दन पेट पर किश करता हुआ कमर से नीचे आ गया . उसकी टांगों को हवा में उठाये मैं उसकी जांघों को किश करता हुआ उसकी पिंडलियों तक जा पहुंचा . आम औरतों से कहीं बेहतर थी ऋतू इसका एहसास उसे चुने से hi हो जाता था . और ऐसे जिस्म को प्यार करना तो सच में अलग hi मज़ा देता था . पिंडलियों से जब मैं किश करता उसके पाऊँ तक पहुंचा तो ऋतू ने अपने पाऊँ खिंच लिए . मैंने उसे देखा तो वो मेरी आँखों में देख कर न में गर्दन हिलने लगी
अमित : क्या हुआ ?
ऋतू : तुम्हारी जगह मेरे पाऊँ में नहीं मेरे दिल में है . मेरा रोम रोम तुम्हारा है
अमित : वही तो मैं कर रहा हूँ . तुम्हारे रोम रोम पर अपने प्यार की मोहर लगा रहा हूँ.
ऋतू : ओह अमित ,, ी लव यू ,, ी लव वैरी मच उम्मम्मम
एक बार फिर से ऋतू ऊपर उठो और मुझे बाँहों में भर किश करने लगी . मैंने कुछ देर उसके होंठों को चूमा और फिर किश तोड़ते हुए उसे कपडे पहनने को कहा.
ऋतू : पर तुम
अमित : मैं ठीक हूँ वैसे भी मेरा जल्दी नहीं होता आपको पता hi है . अब उठो आप और कपडे पेहेन लो इससे पहले क कोई यहाँ आये .
ऋतू ने मेरे होंठो को हलके से किश किया और अपनी पेंटी उठा कर फिर से बाथरूम में घुस गयी . अपनी हालत ठीक करने क बाद वो वापिस आयी और ममी क दिए हुए कपडे पहनने लगी पर वो कुछ ज्यादा hi छोटे थे तो उसने उतर दिए . मैं कुछ कहता उससे पहले hi वो कमरे में पड़ी मेरी अलमारी क पास गयी और उसे खोल कर खुद hi मेरी एक टीशर्ट और लोअर निकल लिया . मेरे कपडे वैसे तो उसके लिए सही थे पर T-shirt कुछ ज्यादा hi खुली थी . जिसे वो खुद hi हाथो से पकड़ कर दिखने लगी .
ऋतू : तुम्हारा साइज तो कुछ ज्यादा hi बड़ा है ऊपर से भी और नीचे से भी .....
ये कहते हुए ऋतू ने मेरे लैंड की तरफ देखा और आँख मर दी .
अमित : वैसे इन कपड़ो में भी आप अछि लग रही हो .
ऋतू : अछि तो लगूंगी hi , कपडे जो मेरे बर्फ क हैं. वैसे इन कपड़ों में तुम्हारी खुशबु आ रही है . इन्हे तो मैं साथ hi ले जाउंगी अब .
ऋतू कपडे पेहेन कर मेरी तरफ आने लगी तो दरवाज़े पर दस्तक हुई . मैं जल्दी से खड़ा हो गया . इससे पहले की मैं दरवाज़ा खोलते ऋतू ने खुद hi आगे बढ़ कर दरवाज़ा खोल दिया . सामने मंजू बुआ कड़ी थी . वो पहले ऋतू को और फिर मुझे देखने लगी .
मंजू : इतनी देर कैसे लगा दी ? और ये तूने किसके कपडे पेहेन लिए अब ?
ऋतू : देर तो लगनी hi थी , जो कपडे दिए थे वो छोटे थे पहले उसे पहना फिर उतरा और अब ये अमित क पहने हैं.
मंजू बुआ ने फिर मेरी तरफ देखा और मुझे नीचे जाने को कहा . मैं चुपचाप उनके पास से बहार निकल गया . मगर मैं सीढियाँ नहीं उतरा क्यूंकि मुझे बुआ की बातें सुन्नी थी क आखिर वो क्या कहने वाली हैं .
मंजू : क्या कर रही थी इतनी देर से ? अगर की और आ जाता यहाँ तो ?
ऋतू : तो क्या होता ? मैं कौन सा कुछ कर रही थी . तुमने देखा क्या कुछ ?
मंजू : मुझे मत बना , इतनी देर से बातें तो कर नहीं होगी तू .
ऋतू : एक तू hi तो मुझे समझती है मेरी जान . सच में यार बड़ा मज़ा आया . सोचा नहीं था इतना ाचा स्वागत होगा ससुराल में मेरा .
मंजू : इसका मतलब तुम दोनों यहाँ .....
ऋतू : रिलैक्स यार रिलैक्स , ऊपर ऊपर से hi किया है तेरे भतीजे ने. और सिर्फ मेरे साथ hi . मुझे कुछ नहीं करने दिया . दिल तो बड़ा था मेरा पर खैर छोडो.
मंजू : दिमाग ख़राब तो नहीं हो गया तुम दोनों का .
ऋतू : ये इश्क नहीं ज़ालिम , एक आग का दरिया और डूब क जाना है . हम तो इश्क में डूब चुके हमसे कुछ न बोलिये .
मंजू : कुछ तो शर्म कर , भतीजा है वो मेरा . और यहाँ किसी को पता चला तो क्या होगा जानती है .
ऋतू : भतीजा बाद में है वो , पहले तो तुम्हारा सब कुछ बन चूका था न वो . और अब तू ऐसे मुँह फेर रही है उससे . प्यार को दिल से निकलना इतना आसान नहीं होता . ये मुझसे बेहतर कौन जान सकता है जो धोखा मिलने क बाद भी भुला न सकीय और उसने तो तुम्हे बराबर प्यार दिया है. फिर तू कैसे उसे भुला सकती है ?
मंजू : वो भतीजा है मेरा .
ऋतू : और तेरा पहला प्यार भी . इस सचाई को तू झुठला नहीं सकती . एक साथ दो दो रिश्ते भी निभाए जा सकते हैं मंजू. प्यार को ऐसे ठुकरा मत . भरोसा रख वो तुझे दोनों रिश्तों का बराबर प्यार दे सकता है . फिर भी मर्ज़ी तेरी . मैं तेरी दोस्त हूँ तुझे वही कह रही हूँ जो सही है .
मंजू : गलत है ये जिसे तू सही कह रही है
ऋतू : चल छोड़ अगर तू नहीं मन्ना चाहती . पर एक दिन ज़रूर मानेगी . अब चल नीचे चलते हैं .
मुझे लगा क अब दोनों बहार आने वाली हैं तो मैं जल्दी से नीचे उतर आया . पीछे पीछे बुआ और ऋतू भी आ गयी . दीपिका ममी मुझे देख कर स्माइल कर रही थी और ऋतू की तरफ इशारा भी कर रही थी . मैं बस मुस्कुरा दिया. माँ ने कपड़ों का पुछा तो ऋतू ने साफ़ कह दिया क वो कपडे बहुत छोटे थे . फिर दोपहर क खाने की भागदौड़ लग गयी. बाबा भी वापिस आ गए थे . अजय मां काम से शहर गए हुए थे और कमलेश मां भी घर नहीं आये थे खाना खाने. खाने क बाद ऋतू वापिस जाने क लिए तैयार हो गयी . माँ ने उसे रोकने की कोशिश की पर उसने ड्यूटी का बता दिया. फिर उसने मेरे कमरे में जा कर अपनी यूनिफार्म पहनी और जैसा उसने कहा था जो कपडे उसने पहने थे वो अपने साथ hi रख लिए ये कह कर क वो धुला कर hi वापिस देगी. माँ ने बहुत कहा पर वो नहीं मणि और मेरे कपडे अपने पास hi रख लिए . फिर वो जल्दी जल्दी में वापिस निकल गयी फिर कभी आने का वडा कर क . बाबा और माँ ने उन्हें भी शगुन दिया जिसे वो मन कर रही थी पर भाई का प्यार कह कर जब बाबा ने दिया तो नाम आँखों से उनसे रख लिया . ऋतू क जाने क कुछ देर बाद hi मोहित आ गया . दीपिका ममी मुझसे बात करना छह रही थी पर टाइम hi नहीं मिला . मोहित ने माँ बाबा को बता दिया क एक पार्टी राखी है दोस्तों ने तो मेरा जाना ज़रूरी है . माँ भी मन न कर सकीय. रीता मौसी को वापिस जाना था तो उन्होंने हमारे साथ hi वापिस शहर जाने की तयारी कर ली . नेहा दीदी को भी उन्होंने तैयार होने को कहा तो बुआ ने नेहा दीदी को रोक लिया . फिर हम तीनो मोहित की कार में शहर क लिए निकल लिए . पहले मौसी को घर छोड़ा और फिर मोहित मुझे अपने साथ घर लेकर आ गया . घर पर सिर्फ आंटी थी जो मुझे देख कर बहुत खुश हुई . कुछ देर मैं उनके साथ बातें करता रहा . 7 बजते hi हम घर से निकल गए . पहले हम मीनल क घर गए और उसे अपने साथ लेकर चल दिए जहाँ पार्टी राखी गयी थी . ये एक फार्म हाउस था जो शहर से बहार था . हम जब वहां पहुंचे तो हमारी उम्र क hi कुछ लड़के लड़कियां थे वहां . वो सब मोहित और मीनल क पुराने स्कूल फ्रेंड्स थे . सब क सब अमीर घरों क hi लग रहे थे . सब आपस में अचे दोस्त थे सिर्फ मुझे छोड़ कर . मोहित ने मुझे सबसे इंट्रोडस करवाया .
मोहित : फ्रेंड्स मीट माय बेस्ट फ्रेंड अमित . एक्चुअली दोस्त से कहीं बढ़ कर हैं हम. और अमित ये सब हमारे स्कूल मातेस हैं. आज क्रिसमस क मौके सब ने मिल कर रीयूनियन पार्टी राखी है . सोचा तुम्हे अपने सब दोस्तों से मिलवा दूँ .
‘ पर यार ये हमारे ग्रुप की रीयूनियन थी तू जनता है न ‘ एक लड़के ने मोहित की बात काट ते हुए कहा . शायद उसे मेरा आना पसंद नहीं आया था .
मोहित : देख कमल अमित मेरा जिगरी यार है. इसके बिना मैं कहीं नहीं जाता . अगर तुम लोगों को ऐतराज़ है तो मैं वापिस चला जाता हूँ .
‘ अरे अरे तू तो बुरा मन गया यार . तेरा यार है तो हमारा भी यार hi हुआ न . Hello अमित मेरा नाम सुनील है . और कमल तू भी हाथ मिला इधर आ कर भाई से . वैसे यार बॉडी तो बड़ी ज़बरदस्त बनाई है तुमने ‘ ये लड़का बाकियों से कुछ ज्यादा hi स्मार्ट और मजबूत दिख रहा था . जिस तरह उसकी बात पर सब ने सहमति दिखाई मतलब साफ़ था क उसकी सब मानते हैं.
मीनल : बॉडी की बात करते हो , हमारे कॉलेज में तो सब इसे जानते हैं. कॉलेज का डरा सिंह है ी मैं रेसलिंग का बेस्ट प्लेयर है . खुद प्रिंसिपल सर बड़ा मानते हैं इसे .
मीनल ने मेरी जब ऐसे तारीफ की तो वहां मौजूद बाकि सब लड़कियां भी बड़े गौर से मुझे देखने लगी .
सुनील : अगर मीनल कह रही है तो फिर तो तुम वाकई कमल क हो. ये ऐसे hi किसी की तारीफ नहीं करती. स्कूल में सबसे स्मार्ट ये hi तो थी.
कमल : सॉरी यार मेरी बात का बुरा मत मन्ना .
अमित : it’s ok भाई , तुमने तो कुछ गलत कहा hi नहीं .
‘ अचानक से बढ़ गयी है रौशनी चिरागों की , सुना है महफ़िल में वो तशरीफ़ लाये हैं ‘ एक आधुनिक सी दिखने वाली लड़की जिसने जांघों तक की ओने पीेछे ड्रेस पहनी हुई थी वो ऐडा से चलती हुई मोहित क गले लग गयी . मोहित उससे जैसे बचने की कोशिश कर रहा था . पर उस लड़की ने किसी की परवाह किये बिना न सिर्फ मोहित को गले लगाया बल्कि उसके गाल को चूम भी लिया . मेरी नज़र मीनल पर पड़ी तो उसके चेहरे पर गुस्सा आ रहा था उस लड़की को देख कर .
‘ कैसे हो मोहित , तुम तो मुझे भूल hi गए . कितनी बार कोशिश की तुमसे बात करने की पर तुम कभी रिस्पांस hi नहीं देते ‘ वो लड़की मोहित से hi बात कर रही थी जैसे वहां और कोई हो hi न .
मोहित : प्लीज रॉय ज़रा पीछे हैट क बात करो न . मुझे ये सब पसंद नहीं .
रॉय : कॉमन यार , कॉलेज में जा कर भी तुम अभी तक बदले नहीं . मुझे तो लगा था अब सब कुछ सीख गए होंगे .
मीनल : लगता है तुम कुछ ज्यादा hi सीख गयी हो जो आते hi चिपकने लग गयी .
रॉय : ओह तो तुम भी आयी हो . ड्रेस तो ाचा पहना है . मोहित ने दिलाया क्या ? नीस चॉइस .
सुनील : रॉय बेहवे योर सेल्फ , मीनल से तुम ऐसे बात नहीं कर सकती .
रॉय : ok ok , वैसे ये हैंडसम कौन है ? कोई मुझे भी तो मिलवाओ .
कमल : ये अमित है , मोहित का बेस्ट फ्रेंड.
रॉय : hi हैंडसम , यू लुक लिखे स्ट्रांग मन .
मोहित : हे इस . सुनील पार्टी का क्या प्रोग्राम है ?
सुनील : तुम लोग आ गए हो तो पार्टी hi पार्टी है . यहाँ लॉन में एक तरफ ड्रिंक्स हैं और खाने का सामान सब पड़ा है . No लिमिट ऑफ़ एनीथिंग . जो जितना चाहे जब तक चाहे एन्जॉय कर सकता है. सब पड़ा है इधर. डांस फ्लोर पर पहले डांस होगा फिर जो जिसका मन आये करे . हमारे इलावा उधर कोई नहीं है सुबह तक कोई आएगा भी नहीं . अंदर सब रूम्स रेडी हैं . जो भी आउट हो जाये अंदर जा कर सो जाये . जो यहाँ रुकना चाहे यहाँ रुके .
मोहित : ड्रिंक्स ? कौन सी ड्रिंक्स ?
सुनील : सॉफ्ट ड्रिंक्स और बियर हैं यार , लड़कियों क
लिए रेड वीने और वोडका भी है . अगर किसी को हार्ड ड्रिंक चाहिए तो वो भी सब है .
मोहित : ये कुछ ज्यादा hi नहीं हो रहा ?
रॉय : कॉमन डार्लिंग , इतने दिनों बाद आज मिल रहे हैं . काम से काम आज तो खुल कर एन्जॉय करो .
रॉय कुछ ज्यादा hi मोहित से चिपक रही थी जिसे देख देख मीनल को गुस्सा आ रहा था . शायद इसके पीछे कोई बात रही होगी वर्ण मीनल तो ऐसी नहीं थी .
सुनील : तुम अकेले बोर हो जाओगे यहाँ . रुको एक मिनट , मोना ,,,, मोनाआ के हेरे .
सुनील को मैंने मन करने की कोशिश की मगर उसने मेरी बात पर ध्यान न देते हुए एक लड़की को आवाज़ दी . वो लड़की शायद कोई ड्रिंक ले रही थी . आवाज़ सुनते hi उसने गिलास नीचे रखा और कैटवाक करती हुई हम लोगों क पास आ गयी. ये भी ओने पीेछे ड्रेस में थी जो शार्ट तो थी hi साथ में उसके बूब्स भी आधे बहार निकल रहे थे .
सुनील : मोना , मीट आवर फ्रेंड अमित . अमित ये है मोना. तुम दोनों hi अकेले आये हो तो एक दूसरे को कंपनी दो . आज यहाँ कोई भी बोर नहीं होना चाहिए . कमल , यार एक एक ड्रिंक तो ला सबके लिए फिर डांस शुरू करते हैं . मीनल क लिए इसके जैसी हॉट ड्रिंक लाना .
मीनल : no ी don’t नीड .
रॉय : या , शी can’t हैंडल थी प्रेसियस थिंग्स .
मीनल : समझती क्या हो तुम अपने आप को ? अब एक और लफ्ज़ भी मुँह से निकला न तो दन्त तोड़ दूंगी .
मीनल एक डैम से गुस्से में आकर मुक्का दिखने लगी तो मोहित ने उसे रोका .
मोहित : रिलैक्स मीनल, ऐसे गुस्सा क्यों कर रही हो ? देखो हम सब यहाँ एन्जॉय करने आये हैं न क लड़ाई झगड़ा करने .
मीनल शांत तो हो गयी पर अब वो मोहित को भी गुस्से से देख रही थी . जैसे उसे मोहित की बात पसंद न आयी हो .
सुनील : रॉय , एनफ इस एनफ . से सॉरी तो हेर. तुम्हे पता है न मीनल को ऐसी बातें पसंद नहीं .
रॉय : सॉरी
सुनील : नाउ फ्रेंड्स , हैवे योर ड्रिंक्स . मीनल प्लीज मेरी खातिर अपना गुस्सा ठंडा करलो . चलो न बैठ कर स्कूल क दिनों को यद् करते हैं. लो ड्रिंक भी आ गयी. अरे यार ये रहने दे मीनल नहीं लेगी ये .
पता नहीं वो कौन सी ड्रिंक थी जो कमल लेकर आया था . जिसे रॉय ने झट से उठा लिया मीनल
की तरफ दिखावे की हंसी हँसते हुए . सुनील ने कमल को उसे हटाने को कहा मगर मीनल ने गुस्से में वो ड्रिंक उठा ली और सीधा मुँह को लगा कर एक hi झटके में खली कर दिया .
मोहित : ये तुम क्या कर रही हो ?
मीनल : क्यों क्या हुआ मैं नहीं पि सकती क्या ?
मोहित : ये तुम कैसी बातें कर रही हो ?
सुनील : अरे रिलैक्स यार चिल करो आज . वैसे भी ये वोडका है बिलकुल लाइट . लो तुम भी ड्रिंक लो.
सुनील ने मोहित को ड्रिंक देनी चाही पर उसने नहीं ली. मगर रॉय ने एक गिलास मोहित क होंठों से लगा दिया . और ज़बरदस्ती उसे पीला भी दिया . ये देख कर तो मीनल और भी ज्यादा गुस्से में आ गयी और एक गिलास और ले कर फिर से गले क नीचे उतर लिया .
मुझे ये सब कुछ ठीक नहीं लग रहा था . मीनल और मोहित क बीच अनबन होती नज़र आ रही थी जिसे बाकि क लोग हवा दे रहे थे .
मोना : तुम क्या लोगे ?
अमित : मैं ड्रिंक नहीं लेता .
मोना : तो फिर क्या लेते हो ? जो चाहिए सब मिलेगा यहाँ . एक बार मांग कर तो देखो .
मोना ने अपने बूब्स कुछ ज्यादा hi उभर कर दिखते हुए कहा .
अमित : no थैंक्स , मुझे कुछ नहीं चाहिए .
मोना : ऐसे कैसे नहीं , कुछ तो लेना hi पड़ेगा . देखो सब ले रहे हैं. ये पार्टी का रूल है. कुछ न कुछ तो लेना hi पड़ेगा . अगर स्मोकिंग करते हो तो वो भी है उस तरफ.
मोना ने जिस तरफ इशारा किया था वहां कुछ लड़के लड़कियां हुक्का पि रहे थे जो बिलकुल नए स्टाइल का था जो मैंने पहले कभी नहीं देखा था. गाओं में तो बड़े बड़े हुक्के hi देखे थे पीतल क बेस और मिटटी की या पीतल की चिलम क. मगर यहाँ तो कांच क बने हुक्के थे और ऊपर बड़ी चिलम की जगह चंडी का वरक लगा था जिसके ऊपर एक छोटी स टिक्की स कोयले की तरह जल रही थी .
अमित : जो शुक्रिया पर मैं स्मोक भी नहीं करता .
मेरे जवाब से मोना जैसे निराश सी हो गयी फिर कुछ सोचते हुए बोली .
मोना : ठीक है , पर कुछ न कुछ तो आपको पीना hi पड़ेगा . मैं आपके लिए सॉफ्ट ड्रिंक लती हूँ .
अमित : अरे रहने दो आप , मुझे कुछ नहीं चाहिए .
मेरी बात सुने बगैर hi मोना वहां से उठ कर चली गयी और जिधर ड्रिंक्स थी उधर चली गयी. कमल भी उधर hi खड़ा था . मोना जाकर उससे कुछ बात करने लगी . एक बार कमल ने मुद कर मुझे देखा . उसके चेहरे क भाव कुछ अलग थे . मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया किया क्यूंकि इधर मेरी जान रीमा की कॉल जो आ गयी थी . यहाँ लॉन में म्यूजिक शुरू हो गया था तो रीमा से बात करने क लिए मैं बहार की तरफ चल दिया .