Adultery Manhoos se mahan tak - Page 34 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 250



बाबा तो गाओं वालों क साथ चले गए और इधर मैं घर में वापिस आ गया . ऋतू को इस वक़्त सब अपने बीच बिठाये बातें कर रहे थे . घर में केवल महिलाएं hi थी . ऋतू क चेहरे पर अगल hi ख़ुशी दिख रही थी जब वो नन्हे मुन्नो को गॉड में खिला रही थी. आरव को ऋतू ने गॉड में उठा रखा था तो छोटू को मंजू बुआ ने . दोनों hi ममता क सुख से अनजान थी पर इस वक़्त दोनों hi बहुत खुश नज़र आ रही थी . अचानक आरव ने अपना काम करते हुए ऋतू क ऊपर धार छोड़ दी और उसकी यूनिफार्म को गिला कर दिया .

ऋतू : ुयी माआ

दीपिका : है है है , लगता है आरव को आप कुछ ज्यादा hi पसंद आ गयी.

गौरी : लाइन मुझे दो , तुम जा कर कपडे बदल लो . कुछ देर में सुख जायेगा ये .

ऋतू : it’s ok

मंजू : तू इतना शर्मा क्यों रही है ? अपना hi घर है ये . चल जा , जा कर चेंज कर ले .

गौरी : अमित इन्हे अपने रूम में ले जाओ . कमरे में बाथरूम है तेरे hi. इन्हे सुविधा रहेगी . दीपिका तुम कोई कपडा दे दो तब तक पहनने क लिए .

माँ की बात सुन कर दीपिका ममी अपने रूम में चली गयी कपडा लेने और इधर ऋतू मेरे पीछे पीछे आ गयी . मैं ऋतू को अपने रूम में ले गया . ऋतू जैसे hi कमरे में आयी उसने मुझे पीछे से बाँहों में में भर लिया और उसके सख्त चुके मेरी पीठ पर दबने लगे .

ऋतू : ी लव यू अमित , तुम्हे बता नहीं सकती आज मैं कितनी खुश हूँ. ऐसे लग रहा है जैसे मुझे सब कुछ मिल गया है . भैया , भाभी, बहने, बचे पूरा सब एक साथ . ऐसे लग रहा है जैसे ऊपर वाले ने सब कुछ एक साथ दे दिया है . ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है . तुमने मुझे मेरी ज़िन्दगी लौटा दी . पहले मेरी बेस्ट फ्रेंड से मुझे मिलवाया फिर मुझे प्यार का एहसास करवाया और अब पूरा परिवार hi दे दिया. थैंक यू , थैंक यू वैरी मच .

ऋतू की आवाज़ भर आयी थी . मैंने उसकी नहीं से निकल क पलट कर जब उसे देखा तो सच में उसकी ऑंखें भीगी हुई थी . मैंने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके आंसू साफ़ किये

अमित : ये क्या , आप रो रही हैं. साडी दुनिया जिसका खौफ कहती है उसकी आँखों में आंसू ? नहीं , ये सब आप पर ाचा नहीं लगता . आप तो वैसे hi अछि लगती हैं रोअब दर गुस्सैल ईमानदार अफसर .

ऋतू : उससे पहले मैं इंसान भी तो हूँ और एक औरत भी . मैं अंदर से इतनी अकेली थी क ज़िन्दगी जीना hi भूल गयी थी . पर तुमने मुझे जीना सीखा दिया. अब तो मेरा दिल भी चाहने लगा है क मैं भी ......

अमित : मैं भी क्या ?

ऋतू : कुछ नहीं

अमित : समझ सकता हूँ आप क्या कहना छह रही हैं. यही न क आपकी गॉड में भी आरव जैसा आपका एक छोटा सा प्यार सा नाहा मुन्ना हो ?

ऋतू की नज़रें शर्म से झुक गयी और उसने हाँ में गर्दन हिला दी.

अमित : एक से काम चल जायेगा या जुड़वाँ बनाऊ?

ऋतू : मुझे मरते हुए ) गंदे , पूरे कमीने हो तुम . अभी बताऊँ जा कर माँ जी को ?

अमित : माँ जी ???? अभी तो उन्होंने आपको ननद बनाया है और अब आप का hi कहने लगी

ऋतू : अब तुम्हारी माँ हैं तो मेरे लिए भी तो वही हुई न . वैसे मुझे जितनी उम्मीद से उससे भी कहीं ाचा है मेरा ‘ ससुराल ‘ ी लव आईटी .

अमित : ो मैडम ज्यादा दूर की मत सोचो . आप शायद भूल गयी क आप क्या करने आयी थी .

ऋतू: पता है , पता है . अब हटो पीछे

ऋतू थोड़ा उखाड़ा सा मुँह बना कर जाने लगी तो इस बार मैंने पीछे से उसे दबोच लिया और अपने हाथ सीधा उसके सख्त चुचों पर रख कर उन्हें मसल दिया .

ऋतू : आअह्ह्ह कक्कक्कक्स छोडो मुझे ,, क्या कर रहे हो ,, छोडो .

ऋतू मुझे छोड़ने का कह रही था पर उसका विरोध सिर्फ जुबान से hi था. चुस्त यूनिफार्म में उसकी फिगर वैसे hi जानलेवा नज़र आती थी . एक तो गोरा रंग लम्बा कद और इतनी फिट बॉडी कोई पागल hi होगा जो मोहित नहीं होगा ऐसे जलवे पर . उसके सख्त चुके हाथ में थामे अलग hi मज़ा मिल रहा था . ऋतू की गर्दन पर अपने होंठ रख कर जैसे hi मैंने किश किया तो ऋतू क मुँह से सिसकी छूती. अपने स्तनों पर रखे हुए मेरे हाथों को उसने खुद hi दबा दिया और ऑंखें बंद किये मूरत बन गयी . अब मैं कहाँ रुकने वाला था . गर्दन को चूमने क बाद मैं अपनी ज़ुबान से उसकी गर्दन को लीक करता हुआ उसके कण की लौ तक पहुंचा और उसे मुँह में ले लिया . नीचे मेरा लैंड ऋतू की मस्त गांड से टकराता फटने की हद तक सख्त हो गया था . ऋतू को ऐसे यूनिफार्म में प्यार करना मुझे अलग hi किक दे रहा था . ऋतू लगातार सिसक रही थी .

ऋतू : कक्कक्स उम्म्म्म रु ,,, रुक जाओ उम्म्म वर्ण कक्कक्क्स उम्म्म्म

अपना एक हाथ चुचों से उठा के जैसे hi मैंने नीचे ले जाना चाहा बहार से किसी क आने की आहत स हुई तो मैं एक डैम से ऋतू को छोड़ 2 कदम पीछे हैट गया . ऋतू भी मेरे ऐसे पीछे हैट जाने से होश में आयी और पलट कर देखा . उसकी आँखों में लाल डोरे नज़र आ रहे थे और नज़रों में सवाल .

‘ ये लीजिये कपडे , शायद आपको पूरे आ जाएँ . लम्बाई थोड़ी काम हो सकती है . अगर न आये तो बता दीजियेगा . ‘ दीपिका ममी हाथ में एक जोड़ी कपडे लिए कमरे में दाखिल हुई. ऋतू को कपडे पकड़ते हुए दीपिका ममी ऐसे मुझे देख रही थी जैसे उन्होंने हमें देख लिया हो. पर वो कुछ बोली नहीं . वैसे भी वो मेरी सपोर्ट hi करती थी हर मामले में .

ऋतू : थैंक्स , मैं देख लुंगी .

अमित : ाचा मैं चलता हूँ , ममी आप देख लेना अगर किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो.

दीपिका : तुम कहाँ चले ? मुझे ज़रा किचन में काम है . खाना भी तो बनाना है . तुम यहीं रुको वैसे भी अभी कौन सा काम है . अगर ज़रूरत हुई तो मैं आवाज़ दे दूंगी . तब तक तुम इनका पूरा ख्याल रखो .

आखिरी लाइन दीपिका ममी ने इस अंदाज़ में कही क जैसे कह रही हो जो करना है करो वो नीचे ध्यान रखेंगी . दीपिका ममी जाते जाते मुझे शरारत भरी नज़रों से देखती बहार निकल गयी . इधर ऋतू भी अपने जुटे उतर हाथ में कपडे लिए चली गयी थी बाथरूम में . मैंने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और बाथरूम क दरवाज़े क पास पहुँच गया .

अमित : आप अंदर क्या कर रही हैं ? कपडे यहाँ भी तो बदल सकती थी न .

ऋतू : कुछ ज्यादा hi शरारत नहीं सूझ रही तुम्हे ? अभी पकडे जाते तो क्या जवाब देते तुम ?

अमित : तब की तब देखि जाती. वैसे तो बड़ा प्यार जताती हो क मैं तुम्हारे लिए ये कर सकती हूँ वो कर सकती हूँ . और अब मेरे घर में मेरे कमरे में आकर भी ऐसे मुझसे पर्दा कर रही हो . बस इतना hi प्यार करती हो ?

ऋतू : ाचा तो अब तुम्हे ये देखना है क मैं कितना प्यार करती हूँ कितना नहीं . सोच लो , घर तुम्हारा है , बाद में जवाब देता नहीं बनेगा तुमसे और अगर झूठ बोलै तो मैं सो हूँ छोडूंगी नहीं.

अमित : बना लो जो बहाने बनाने हैं . कितना प्यारी करती hi पता चल गया .

मैं जान बुझ कर ऋतू को उकसा रहा था . और मेरी बातों का असर तुरंत हुआ . एक झटके में hi बाथरूम का दरवाज़ा खुल गया . सामने का नज़ारा देख कर मेरी ऑंखें भी फटी की फटी रह गयी . सामने ऋतू काली ब्रा और काली पेंटी में एक ऐडा से कड़ी मेरी आँखों में hi देख रही थी. एक हाथ कमर पर रखे एक पाऊँ हल्का सा उठाये किसी मॉडल की तरह पोज़ देती वो बिजलियाँ गिरा रही थी . मैं तो उसे सर से पाऊँ तक निहार रहा था और दिमाग था क काम करना hi बंद कर चूका था . साक्षात् काम देवी hi सामने आ कर कड़ी हो गयी थी . गोर रंग पर काली ब्रा पेंटी और उसमे कैसे हुए बड़े बड़े और सख्त चुके , स्पॉट पेट और नीचे काली पेंटी में छिपी छूट जिसे एक जंग आगे कर क छुपाने की कोशिश कर रही थी . गोरी मजबूत टंगे और मांसल जांघें . साफ़ चिकनी पिंडलियाँ और गोर पाऊँ . हाथ पाऊँ पर न कोई नेल पोलिश थी न hi होंठों पर लिपस्टिक . पर सुर्ख होंठों को जैसे लाली की ज़रूरत hi नहीं थी . मैं तो बस इस कामिनी क माया जल में hi खोया था क ऋतू खुद hi मुझे वास्तविकता में वापिस लायी.

ऋतू : क्या कह रहे थे तुम ? मैं सिर्फ बातें करती हूँ प्यार नहीं ? तुम्हारा घर और तुम्हारा बैडरूम ? अब देखती हूँ क्या जवाब देते हो सबको .

इतना कह कर ऋतू तेज़ी मेरे साथ चिपक गयी और मेरे सर को दोनों हाथों में थामे मेरे होंठों को अपने होंठों में दबोच कर वीलडली किश करने लगी . मेरे बालों को सख्ती से खींचती वो मुझ पर हावी हो रही थी . दायी जांघ को मेरी टांगों पर लपेट कर वो पाऊँ से मेरी टांगों को सहलाती मुझे उत्तेजित करने लगी . मैं भी पूरी तरह उसके नशे में डूबता चला गया और मेरा हाथ खुद hi उसकी जांघ को सहलाता उसके चूतड़ों पर चला गया और उसे दबोच कर मसलने लगा . दूसरे हाथ से मैंने उसका कबूतर दबोच लिया . ऋतू मुझे पीछे धकेलती हुई बीएड तक ले आयी और मुझे गिरा कर खुद मेरे ऊपर आ गयी . अब मेरे दोनों हाथ उसके चूतड़ों पर थे . एक पल क लिए भी हमारे होंठ अलग न हुए थे . ऋतू मेरे मुँह के कभी अपनी ज़ुबान घुसती और कभी मेरी जुबान को अपने मुँह में लेती अब मेरे कपडे निकलने की कोशिश करने लगी . उसके ठोस स्तन मेरी छाती में धंस रहे थे . ऋतू को उकसा कर कहीं मैंने गलती तो नहीं कर ली अब मेरे दिमाग में ये hi बात चल रही थी . ऋतू मेरी कमर क दोनों तरफ घुटने बीएड पर जमाये घुड़सवार की तरह मेरे ऊपर सवार थी . मेरा लैंड तो जैसे उसकी छूट क नीचे बुरी तरफ फसा पड़ा था जिसे वो ज़ोर से रगड़ दे रही थी .

ऋतू : उनममम उम्म्म सीसीसी उम्म्म्म किश में उनममम उम्म्म पूछह पुछठ उम्म्म्म

अमित : उम्म्म उम्म्म्म रुक्खक्क उम्म्म्म उम्म्म रुक जुम्म्मम्म

ऋतू तो मुझे बोलने तक का मौका नहीं दे रही थी . मुझसे भी अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था . जब मैंने देखा क ऋतू नहीं रुक रही तो मैंने झटके से पलटी मरी और ऋतू को अपने नीचे कर क खुद ऊपर आ गया . मगर ऋतू ने जैसे मुझे अपने शिकंजे न निकलने देने की योजना बना राखी थी . अपनी लम्बी टांगों को मेरी कमर पर लपेट कर मेरे गले में बहन दाल उसने मुझे पूरा कास लिया था अपने साथ . मैंने किश तोड़ कर अपना मुँह अलग किया तो ऋतू मेरी आँखों में कामुक नज़रों से देखने लगी .

अमित : क्या कर रही हैं आप , खुद को कण्ट्रोल कीजिये . अगर कोई आ गया तो ?

ऋतू : क्यों अब क्या हुआ ? अभी तो मेरे प्यार का टेस्ट ले रहे थे और अब अपनी hi हवा टाइट हो गयी?

अमित : हवा मेरी नहीं आपकी टाइट हो जाएगी अगर आप नहीं रुकी तो . बहार जा कर क्या जवाब डौगी क चाल कैसे बदल गयी. और फिर साथ में पुलिस वाले भी तो हैं .

ऋतू : मुझे कुछ नहीं सुन्ना , तुम्हे मेरे प्यार का टेस्ट लेना है न . अब करो जो भी करना है मैं नहीं डर्टी किसी से . वैसे भी ये तुम्हारा कमरा है न. और तुम्हारे बिस्तर पर तुम्हारे कमरे में तुम्हारे घर में सब क होते हुए प्यार करना . कितनी एक्ससिटेमेंट हो रही है मुझे मैं बता नहीं सकती

अमित : खुद को कण्ट्रोल करो मैडम . नीचे जो बैठे हैं न वो बचे नहीं हैं. और एक तो स्वयं आपकी बेस्ट फ्रेंड है जिसे आलरेडी सब पता है .

ऋतू : उसे मैं देख लुंगी , वैसे भी अब तो मेरी बेस्ट फ्रेंड क साथ मेरी सास भी है . है है है

अमित : आप को मज़ाक सूझ रहा है ??

ऋतू : सूझ तो बहुत कुछ रहा है मगर तुम hi ढीले पद रहे हो ummmmmmmmmm

ऋतू ने एक बार फिर मेरे होंठों पर हमला कर दिया . मैंने भी उसका साथ देता हुआ उसके स्तनों का मर्दन करने लगा . ऋतू कुछ ज्यादा hi एक्ससिटेड थी , मुझे लगा क ये ऐसे नहीं मानेगी पर सेक्स करना भी खतरे से खली नहीं था . इस लिए मैं उसके बूब्स मसलता हुआ किश करने लगा और साथ hi अपने लैंड को छूट पर रगड़ने लगा . ऋतू भी अपनी कमर हिला रही थी . धीरे धीरे उसके जिस्म की हरकत बढ़ने लगी तो मैं उसके ऊपर से उठा और बीएड से नीचे उतारते हुए घुटनो पर हो कर झुक गया और ऋतू की पेंटी को उतर कर उसकी छूट पे अपने होंठ रख दिए . ऋतू की छूट एक डैम साफ सुथरी और चिकनी थी . जैसे आज hi बल साफ़ किये हो . छूट पर मेरे होंठ लगते hi ऋतू क मुँह से सिसकी निकली जिसे उसने बड़ी मुश्किल से दबाया .

ऋतू : ओह्ह्ह्ह कक्ककक्कक्स ीीीी उम्मम्मम्म

ऋतू की छूट जवान लड़कियों की तरह कासी हुई थी जिसे मैंने hi थोड़ा बड़ा किया था वो भी कई सालों तक बंद रहने क बाद . ऋतू पागलों की तरह खुद hi अपने चुके मसलती हुई ऐंठ रही थी और अपनी सिसकियाँ रोकने की कोशिश कर रही थी . मगर मैं अपना काम लगातार किये जा रहा था .

ऋतू : ओह्ह्ह्ह ककक उम्म्म्म आअह्ह्ह फ़क ममम फ़क ऐसे hi उम्मम्मम ी म क्युम्मिंग ी ऍम कम्मं उम्मम्मम्म. ककक आअह्ह्ह्हह उईईईईई माआआआ मैं gyiiiiiiiiii

ऋतू खुद को ज्यादा देर रोक न सकती और उसका कामर्स छूट की दीवारें लाँघ कर बहार आने लगा . वो नशे की हालत में पहुँच गयी थी . मैंने उसकी छूट से एक एक बूँद तक निचोड़ ली थी. ऋतू धीरे धीरे बिलकुल शांत हो कर ऑंखें बंद किये लेती थी . मैं उसके ऊपर से उठा और उसके पास बैठ कर उसे निहारने लगा . एक आकर्षक एथलेटिक मजबूत जिस्म की मालिक. एक सख्त और प्रभावशाली व्यक्तित्व की मालिक पुलिस की इतनी आला अफसर मेरे सामने इस हालत में पड़ी थी . ये देख कर मुझे अलग hi मज़ा आ रहा था . ऋतू क दिल में मेरे लिए सच में प्यार था जो वो हर बात को दरकिनार कर क मेरे लिए कुछ भी कर गुज़रती थी . ऋतू क गोर बदन पर लाली छ गयी थी और उसके कबूतर भी लाल गुलाबी हो गए थे जो ब्रा से बहार झांक रहे थे. मुझे उन पर बड़ा प्यार आया और झुक कर मैंने एक निप्पल को अपने होंठों में भर चूसा और अपनी जीभ से उसे कुरेदा . ऋतू तो अभी भी ऑंखें बंद किये थी. बरी बरी दोनों कबूतरों को प्यार करने क बाद मैं उसके कन्धों गर्दन पेट पर किश करता हुआ कमर से नीचे आ गया . उसकी टांगों को हवा में उठाये मैं उसकी जांघों को किश करता हुआ उसकी पिंडलियों तक जा पहुंचा . आम औरतों से कहीं बेहतर थी ऋतू इसका एहसास उसे चुने से hi हो जाता था . और ऐसे जिस्म को प्यार करना तो सच में अलग hi मज़ा देता था . पिंडलियों से जब मैं किश करता उसके पाऊँ तक पहुंचा तो ऋतू ने अपने पाऊँ खिंच लिए . मैंने उसे देखा तो वो मेरी आँखों में देख कर न में गर्दन हिलने लगी

अमित : क्या हुआ ?

ऋतू : तुम्हारी जगह मेरे पाऊँ में नहीं मेरे दिल में है . मेरा रोम रोम तुम्हारा है

अमित : वही तो मैं कर रहा हूँ . तुम्हारे रोम रोम पर अपने प्यार की मोहर लगा रहा हूँ.

ऋतू : ओह अमित ,, ी लव यू ,, ी लव वैरी मच उम्मम्मम

एक बार फिर से ऋतू ऊपर उठो और मुझे बाँहों में भर किश करने लगी . मैंने कुछ देर उसके होंठों को चूमा और फिर किश तोड़ते हुए उसे कपडे पहनने को कहा.

ऋतू : पर तुम

अमित : मैं ठीक हूँ वैसे भी मेरा जल्दी नहीं होता आपको पता hi है . अब उठो आप और कपडे पेहेन लो इससे पहले क कोई यहाँ आये .

ऋतू ने मेरे होंठो को हलके से किश किया और अपनी पेंटी उठा कर फिर से बाथरूम में घुस गयी . अपनी हालत ठीक करने क बाद वो वापिस आयी और ममी क दिए हुए कपडे पहनने लगी पर वो कुछ ज्यादा hi छोटे थे तो उसने उतर दिए . मैं कुछ कहता उससे पहले hi वो कमरे में पड़ी मेरी अलमारी क पास गयी और उसे खोल कर खुद hi मेरी एक टीशर्ट और लोअर निकल लिया . मेरे कपडे वैसे तो उसके लिए सही थे पर T-shirt कुछ ज्यादा hi खुली थी . जिसे वो खुद hi हाथो से पकड़ कर दिखने लगी .

ऋतू : तुम्हारा साइज तो कुछ ज्यादा hi बड़ा है ऊपर से भी और नीचे से भी .....

ये कहते हुए ऋतू ने मेरे लैंड की तरफ देखा और आँख मर दी .

अमित : वैसे इन कपड़ो में भी आप अछि लग रही हो .

ऋतू : अछि तो लगूंगी hi , कपडे जो मेरे बर्फ क हैं. वैसे इन कपड़ों में तुम्हारी खुशबु आ रही है . इन्हे तो मैं साथ hi ले जाउंगी अब .

ऋतू कपडे पेहेन कर मेरी तरफ आने लगी तो दरवाज़े पर दस्तक हुई . मैं जल्दी से खड़ा हो गया . इससे पहले की मैं दरवाज़ा खोलते ऋतू ने खुद hi आगे बढ़ कर दरवाज़ा खोल दिया . सामने मंजू बुआ कड़ी थी . वो पहले ऋतू को और फिर मुझे देखने लगी .

मंजू : इतनी देर कैसे लगा दी ? और ये तूने किसके कपडे पेहेन लिए अब ?

ऋतू : देर तो लगनी hi थी , जो कपडे दिए थे वो छोटे थे पहले उसे पहना फिर उतरा और अब ये अमित क पहने हैं.

मंजू बुआ ने फिर मेरी तरफ देखा और मुझे नीचे जाने को कहा . मैं चुपचाप उनके पास से बहार निकल गया . मगर मैं सीढियाँ नहीं उतरा क्यूंकि मुझे बुआ की बातें सुन्नी थी क आखिर वो क्या कहने वाली हैं .

मंजू : क्या कर रही थी इतनी देर से ? अगर की और आ जाता यहाँ तो ?

ऋतू : तो क्या होता ? मैं कौन सा कुछ कर रही थी . तुमने देखा क्या कुछ ?

मंजू : मुझे मत बना , इतनी देर से बातें तो कर नहीं होगी तू .

ऋतू : एक तू hi तो मुझे समझती है मेरी जान . सच में यार बड़ा मज़ा आया . सोचा नहीं था इतना ाचा स्वागत होगा ससुराल में मेरा .

मंजू : इसका मतलब तुम दोनों यहाँ .....

ऋतू : रिलैक्स यार रिलैक्स , ऊपर ऊपर से hi किया है तेरे भतीजे ने. और सिर्फ मेरे साथ hi . मुझे कुछ नहीं करने दिया . दिल तो बड़ा था मेरा पर खैर छोडो.

मंजू : दिमाग ख़राब तो नहीं हो गया तुम दोनों का .

ऋतू : ये इश्क नहीं ज़ालिम , एक आग का दरिया और डूब क जाना है . हम तो इश्क में डूब चुके हमसे कुछ न बोलिये .

मंजू : कुछ तो शर्म कर , भतीजा है वो मेरा . और यहाँ किसी को पता चला तो क्या होगा जानती है .

ऋतू : भतीजा बाद में है वो , पहले तो तुम्हारा सब कुछ बन चूका था न वो . और अब तू ऐसे मुँह फेर रही है उससे . प्यार को दिल से निकलना इतना आसान नहीं होता . ये मुझसे बेहतर कौन जान सकता है जो धोखा मिलने क बाद भी भुला न सकीय और उसने तो तुम्हे बराबर प्यार दिया है. फिर तू कैसे उसे भुला सकती है ?

मंजू : वो भतीजा है मेरा .

ऋतू : और तेरा पहला प्यार भी . इस सचाई को तू झुठला नहीं सकती . एक साथ दो दो रिश्ते भी निभाए जा सकते हैं मंजू. प्यार को ऐसे ठुकरा मत . भरोसा रख वो तुझे दोनों रिश्तों का बराबर प्यार दे सकता है . फिर भी मर्ज़ी तेरी . मैं तेरी दोस्त हूँ तुझे वही कह रही हूँ जो सही है .

मंजू : गलत है ये जिसे तू सही कह रही है

ऋतू : चल छोड़ अगर तू नहीं मन्ना चाहती . पर एक दिन ज़रूर मानेगी . अब चल नीचे चलते हैं .

मुझे लगा क अब दोनों बहार आने वाली हैं तो मैं जल्दी से नीचे उतर आया . पीछे पीछे बुआ और ऋतू भी आ गयी . दीपिका ममी मुझे देख कर स्माइल कर रही थी और ऋतू की तरफ इशारा भी कर रही थी . मैं बस मुस्कुरा दिया. माँ ने कपड़ों का पुछा तो ऋतू ने साफ़ कह दिया क वो कपडे बहुत छोटे थे . फिर दोपहर क खाने की भागदौड़ लग गयी. बाबा भी वापिस आ गए थे . अजय मां काम से शहर गए हुए थे और कमलेश मां भी घर नहीं आये थे खाना खाने. खाने क बाद ऋतू वापिस जाने क लिए तैयार हो गयी . माँ ने उसे रोकने की कोशिश की पर उसने ड्यूटी का बता दिया. फिर उसने मेरे कमरे में जा कर अपनी यूनिफार्म पहनी और जैसा उसने कहा था जो कपडे उसने पहने थे वो अपने साथ hi रख लिए ये कह कर क वो धुला कर hi वापिस देगी. माँ ने बहुत कहा पर वो नहीं मणि और मेरे कपडे अपने पास hi रख लिए . फिर वो जल्दी जल्दी में वापिस निकल गयी फिर कभी आने का वडा कर क . बाबा और माँ ने उन्हें भी शगुन दिया जिसे वो मन कर रही थी पर भाई का प्यार कह कर जब बाबा ने दिया तो नाम आँखों से उनसे रख लिया . ऋतू क जाने क कुछ देर बाद hi मोहित आ गया . दीपिका ममी मुझसे बात करना छह रही थी पर टाइम hi नहीं मिला . मोहित ने माँ बाबा को बता दिया क एक पार्टी राखी है दोस्तों ने तो मेरा जाना ज़रूरी है . माँ भी मन न कर सकीय. रीता मौसी को वापिस जाना था तो उन्होंने हमारे साथ hi वापिस शहर जाने की तयारी कर ली . नेहा दीदी को भी उन्होंने तैयार होने को कहा तो बुआ ने नेहा दीदी को रोक लिया . फिर हम तीनो मोहित की कार में शहर क लिए निकल लिए . पहले मौसी को घर छोड़ा और फिर मोहित मुझे अपने साथ घर लेकर आ गया . घर पर सिर्फ आंटी थी जो मुझे देख कर बहुत खुश हुई . कुछ देर मैं उनके साथ बातें करता रहा . 7 बजते hi हम घर से निकल गए . पहले हम मीनल क घर गए और उसे अपने साथ लेकर चल दिए जहाँ पार्टी राखी गयी थी . ये एक फार्म हाउस था जो शहर से बहार था . हम जब वहां पहुंचे तो हमारी उम्र क hi कुछ लड़के लड़कियां थे वहां . वो सब मोहित और मीनल क पुराने स्कूल फ्रेंड्स थे . सब क सब अमीर घरों क hi लग रहे थे . सब आपस में अचे दोस्त थे सिर्फ मुझे छोड़ कर . मोहित ने मुझे सबसे इंट्रोडस करवाया .

मोहित : फ्रेंड्स मीट माय बेस्ट फ्रेंड अमित . एक्चुअली दोस्त से कहीं बढ़ कर हैं हम. और अमित ये सब हमारे स्कूल मातेस हैं. आज क्रिसमस क मौके सब ने मिल कर रीयूनियन पार्टी राखी है . सोचा तुम्हे अपने सब दोस्तों से मिलवा दूँ .

‘ पर यार ये हमारे ग्रुप की रीयूनियन थी तू जनता है न ‘ एक लड़के ने मोहित की बात काट ते हुए कहा . शायद उसे मेरा आना पसंद नहीं आया था .

मोहित : देख कमल अमित मेरा जिगरी यार है. इसके बिना मैं कहीं नहीं जाता . अगर तुम लोगों को ऐतराज़ है तो मैं वापिस चला जाता हूँ .

‘ अरे अरे तू तो बुरा मन गया यार . तेरा यार है तो हमारा भी यार hi हुआ न . Hello अमित मेरा नाम सुनील है . और कमल तू भी हाथ मिला इधर आ कर भाई से . वैसे यार बॉडी तो बड़ी ज़बरदस्त बनाई है तुमने ‘ ये लड़का बाकियों से कुछ ज्यादा hi स्मार्ट और मजबूत दिख रहा था . जिस तरह उसकी बात पर सब ने सहमति दिखाई मतलब साफ़ था क उसकी सब मानते हैं.

मीनल : बॉडी की बात करते हो , हमारे कॉलेज में तो सब इसे जानते हैं. कॉलेज का डरा सिंह है ी मैं रेसलिंग का बेस्ट प्लेयर है . खुद प्रिंसिपल सर बड़ा मानते हैं इसे .

मीनल ने मेरी जब ऐसे तारीफ की तो वहां मौजूद बाकि सब लड़कियां भी बड़े गौर से मुझे देखने लगी .

सुनील : अगर मीनल कह रही है तो फिर तो तुम वाकई कमल क हो. ये ऐसे hi किसी की तारीफ नहीं करती. स्कूल में सबसे स्मार्ट ये hi तो थी.

कमल : सॉरी यार मेरी बात का बुरा मत मन्ना .

अमित : it’s ok भाई , तुमने तो कुछ गलत कहा hi नहीं .

‘ अचानक से बढ़ गयी है रौशनी चिरागों की , सुना है महफ़िल में वो तशरीफ़ लाये हैं ‘ एक आधुनिक सी दिखने वाली लड़की जिसने जांघों तक की ओने पीेछे ड्रेस पहनी हुई थी वो ऐडा से चलती हुई मोहित क गले लग गयी . मोहित उससे जैसे बचने की कोशिश कर रहा था . पर उस लड़की ने किसी की परवाह किये बिना न सिर्फ मोहित को गले लगाया बल्कि उसके गाल को चूम भी लिया . मेरी नज़र मीनल पर पड़ी तो उसके चेहरे पर गुस्सा आ रहा था उस लड़की को देख कर .

‘ कैसे हो मोहित , तुम तो मुझे भूल hi गए . कितनी बार कोशिश की तुमसे बात करने की पर तुम कभी रिस्पांस hi नहीं देते ‘ वो लड़की मोहित से hi बात कर रही थी जैसे वहां और कोई हो hi न .

मोहित : प्लीज रॉय ज़रा पीछे हैट क बात करो न . मुझे ये सब पसंद नहीं .

रॉय : कॉमन यार , कॉलेज में जा कर भी तुम अभी तक बदले नहीं . मुझे तो लगा था अब सब कुछ सीख गए होंगे .

मीनल : लगता है तुम कुछ ज्यादा hi सीख गयी हो जो आते hi चिपकने लग गयी .

रॉय : ओह तो तुम भी आयी हो . ड्रेस तो ाचा पहना है . मोहित ने दिलाया क्या ? नीस चॉइस .

सुनील : रॉय बेहवे योर सेल्फ , मीनल से तुम ऐसे बात नहीं कर सकती .

रॉय : ok ok , वैसे ये हैंडसम कौन है ? कोई मुझे भी तो मिलवाओ .

कमल : ये अमित है , मोहित का बेस्ट फ्रेंड.

रॉय : hi हैंडसम , यू लुक लिखे स्ट्रांग मन .

मोहित : हे इस . सुनील पार्टी का क्या प्रोग्राम है ?

सुनील : तुम लोग आ गए हो तो पार्टी hi पार्टी है . यहाँ लॉन में एक तरफ ड्रिंक्स हैं और खाने का सामान सब पड़ा है . No लिमिट ऑफ़ एनीथिंग . जो जितना चाहे जब तक चाहे एन्जॉय कर सकता है. सब पड़ा है इधर. डांस फ्लोर पर पहले डांस होगा फिर जो जिसका मन आये करे . हमारे इलावा उधर कोई नहीं है सुबह तक कोई आएगा भी नहीं . अंदर सब रूम्स रेडी हैं . जो भी आउट हो जाये अंदर जा कर सो जाये . जो यहाँ रुकना चाहे यहाँ रुके .

मोहित : ड्रिंक्स ? कौन सी ड्रिंक्स ?

सुनील : सॉफ्ट ड्रिंक्स और बियर हैं यार , लड़कियों क

लिए रेड वीने और वोडका भी है . अगर किसी को हार्ड ड्रिंक चाहिए तो वो भी सब है .

मोहित : ये कुछ ज्यादा hi नहीं हो रहा ?

रॉय : कॉमन डार्लिंग , इतने दिनों बाद आज मिल रहे हैं . काम से काम आज तो खुल कर एन्जॉय करो .

रॉय कुछ ज्यादा hi मोहित से चिपक रही थी जिसे देख देख मीनल को गुस्सा आ रहा था . शायद इसके पीछे कोई बात रही होगी वर्ण मीनल तो ऐसी नहीं थी .

सुनील : तुम अकेले बोर हो जाओगे यहाँ . रुको एक मिनट , मोना ,,,, मोनाआ के हेरे .

सुनील को मैंने मन करने की कोशिश की मगर उसने मेरी बात पर ध्यान न देते हुए एक लड़की को आवाज़ दी . वो लड़की शायद कोई ड्रिंक ले रही थी . आवाज़ सुनते hi उसने गिलास नीचे रखा और कैटवाक करती हुई हम लोगों क पास आ गयी. ये भी ओने पीेछे ड्रेस में थी जो शार्ट तो थी hi साथ में उसके बूब्स भी आधे बहार निकल रहे थे .

सुनील : मोना , मीट आवर फ्रेंड अमित . अमित ये है मोना. तुम दोनों hi अकेले आये हो तो एक दूसरे को कंपनी दो . आज यहाँ कोई भी बोर नहीं होना चाहिए . कमल , यार एक एक ड्रिंक तो ला सबके लिए फिर डांस शुरू करते हैं . मीनल क लिए इसके जैसी हॉट ड्रिंक लाना .

मीनल : no ी don’t नीड .

रॉय : या , शी can’t हैंडल थी प्रेसियस थिंग्स .

मीनल : समझती क्या हो तुम अपने आप को ? अब एक और लफ्ज़ भी मुँह से निकला न तो दन्त तोड़ दूंगी .

मीनल एक डैम से गुस्से में आकर मुक्का दिखने लगी तो मोहित ने उसे रोका .

मोहित : रिलैक्स मीनल, ऐसे गुस्सा क्यों कर रही हो ? देखो हम सब यहाँ एन्जॉय करने आये हैं न क लड़ाई झगड़ा करने .

मीनल शांत तो हो गयी पर अब वो मोहित को भी गुस्से से देख रही थी . जैसे उसे मोहित की बात पसंद न आयी हो .

सुनील : रॉय , एनफ इस एनफ . से सॉरी तो हेर. तुम्हे पता है न मीनल को ऐसी बातें पसंद नहीं .

रॉय : सॉरी

सुनील : नाउ फ्रेंड्स , हैवे योर ड्रिंक्स . मीनल प्लीज मेरी खातिर अपना गुस्सा ठंडा करलो . चलो न बैठ कर स्कूल क दिनों को यद् करते हैं. लो ड्रिंक भी आ गयी. अरे यार ये रहने दे मीनल नहीं लेगी ये .

पता नहीं वो कौन सी ड्रिंक थी जो कमल लेकर आया था . जिसे रॉय ने झट से उठा लिया मीनल

की तरफ दिखावे की हंसी हँसते हुए . सुनील ने कमल को उसे हटाने को कहा मगर मीनल ने गुस्से में वो ड्रिंक उठा ली और सीधा मुँह को लगा कर एक hi झटके में खली कर दिया .

मोहित : ये तुम क्या कर रही हो ?

मीनल : क्यों क्या हुआ मैं नहीं पि सकती क्या ?

मोहित : ये तुम कैसी बातें कर रही हो ?

सुनील : अरे रिलैक्स यार चिल करो आज . वैसे भी ये वोडका है बिलकुल लाइट . लो तुम भी ड्रिंक लो.

सुनील ने मोहित को ड्रिंक देनी चाही पर उसने नहीं ली. मगर रॉय ने एक गिलास मोहित क होंठों से लगा दिया . और ज़बरदस्ती उसे पीला भी दिया . ये देख कर तो मीनल और भी ज्यादा गुस्से में आ गयी और एक गिलास और ले कर फिर से गले क नीचे उतर लिया .

मुझे ये सब कुछ ठीक नहीं लग रहा था . मीनल और मोहित क बीच अनबन होती नज़र आ रही थी जिसे बाकि क लोग हवा दे रहे थे .

मोना : तुम क्या लोगे ?

अमित : मैं ड्रिंक नहीं लेता .

मोना : तो फिर क्या लेते हो ? जो चाहिए सब मिलेगा यहाँ . एक बार मांग कर तो देखो .

मोना ने अपने बूब्स कुछ ज्यादा hi उभर कर दिखते हुए कहा .

अमित : no थैंक्स , मुझे कुछ नहीं चाहिए .

मोना : ऐसे कैसे नहीं , कुछ तो लेना hi पड़ेगा . देखो सब ले रहे हैं. ये पार्टी का रूल है. कुछ न कुछ तो लेना hi पड़ेगा . अगर स्मोकिंग करते हो तो वो भी है उस तरफ.

मोना ने जिस तरफ इशारा किया था वहां कुछ लड़के लड़कियां हुक्का पि रहे थे जो बिलकुल नए स्टाइल का था जो मैंने पहले कभी नहीं देखा था. गाओं में तो बड़े बड़े हुक्के hi देखे थे पीतल क बेस और मिटटी की या पीतल की चिलम क. मगर यहाँ तो कांच क बने हुक्के थे और ऊपर बड़ी चिलम की जगह चंडी का वरक लगा था जिसके ऊपर एक छोटी स टिक्की स कोयले की तरह जल रही थी .

अमित : जो शुक्रिया पर मैं स्मोक भी नहीं करता .

मेरे जवाब से मोना जैसे निराश सी हो गयी फिर कुछ सोचते हुए बोली .

मोना : ठीक है , पर कुछ न कुछ तो आपको पीना hi पड़ेगा . मैं आपके लिए सॉफ्ट ड्रिंक लती हूँ .

अमित : अरे रहने दो आप , मुझे कुछ नहीं चाहिए .



मेरी बात सुने बगैर hi मोना वहां से उठ कर चली गयी और जिधर ड्रिंक्स थी उधर चली गयी. कमल भी उधर hi खड़ा था . मोना जाकर उससे कुछ बात करने लगी . एक बार कमल ने मुद कर मुझे देखा . उसके चेहरे क भाव कुछ अलग थे . मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया किया क्यूंकि इधर मेरी जान रीमा की कॉल जो आ गयी थी . यहाँ लॉन में म्यूजिक शुरू हो गया था तो रीमा से बात करने क लिए मैं बहार की तरफ चल दिया .
 
अपडेट आज मिलेगा भाई लोगो , बिजी था कल तो कम्पलीट नहीं कर पाया
 
अपडेट 251



‘ let’s डांस , यहाँ हम सब एन्जॉय करने आये हैं न क झगड़ा करने . यद् है न स्कूल मैं कैसे धमाल किया करते थे . अब चलो भी पता नहीं कब दोबारा मौका मिले . ‘ सुनील ने सबको डांस करने का न्योता दिया . मगर यहाँ मोहित और मीनल छोटी स बात पर hi मुँह फुलाया बैठे थे . वैसे तो ये नार्मल बात थी ऐसा अक्सर हो जाता था और बाद में दोनों एक दूसरे को मन भी लेते थे . पर यहाँ बात अलग थी . मोहित और मीनल दोनों ने hi गुस्से में ड्रिंक ले ली थी और एक क बाद एक और लगा कर अब तीसरे को हाथ में पकड़ा रहा . वैसे तो बियर या सिंपल वोडका का इतनी जल्दी कोई सुरूर नहीं होता पर दोनों की ड्रिंक वैसी नहीं थी जैसे नोर्मल्ली होती है . दोनों को हार्ड ड्रिंक्स दी गयी थी और गुस्से में इस बात पर दोनों में से किसी ने ध्यान hi न दिया . डांस फ्लोर पर जाते hi मोहित को हाथ पकड़ कर नाचती हुई रॉय कुछ ज्यादा hi चिपक रही थी . खुद hi मोहित का हाथ उसने अपनी गांड पर रख दिया और अपनी छाती को मोहित की छाती से सटाकर घिसने लगी . मोहित की नज़रें मीनल पर और मीनल की नज़रें मोहित पर थी . दोनों एक दूसरे को देख रहे थे मगर सुरूर हावी होता जा रहा था . रॉय की हरकत पर पहले तो मोहित का ध्यान न गया पर मीनल को ये देख कर और ज्यादा गुस्सा आ गया और उसने गुस्से से देखते हुए मुँह फेर लिया. जिस पर मोहित को भी बुरा लगा.

रॉय : तुम ऐसे तो न थे मोहित , जानते हो पूरे स्कूल में तुम hi सबसे ज्यादा हैंडसम थे . सब लड़कियां तुम पर मरती थी और तुम.... कितने बदल गए हो आज , तुम इतना क्यों डरते हो उससे ? तुम पर तो कोई भी लड़की मर मिटेगी. फिर क्यों उसे इतना भाव दे रहे हो. मैं तुम्हारी बाँहों में हूँ और तुम मुझे देखने की बजाये उसे देख रहे हो .

मोहित : ऐसा कुछ नहीं है , तुम जानती हो रॉय क हम एक दूसरे क लिए क्या फीलिंग रखते हैं.

रॉय : जानती हूँ इसी लिए कह रही हूँ. तुम्हे नहीं लगता तुमने गलत फैसला कर लिया है ? मैं तो आज भी तुम्हारे लिए रेडी हूँ तुम एक बार आज़मा कर तो देखो .

मोहित को रॉय की बातें अछि नहीं लग रही थी. असल में स्कूल टाइम में रॉय सबसे सुन्दर और मॉडर्न लड़की हुआ करती थी बेशक आज भी थी. रॉय ने कई लड़कों क साथ दोस्ती बनाई पर ज्यादा देर किसी क साथ रिश्ता रखती नहीं थी . मोहित क साथ भी उसका रिलेशन बना था पर बदकिस्मती से मोहित ने रॉय को सुनील क साथ भी देख लिया था और उसके बाद से वो रॉय से दूर हो गया था .

इधर मोहित रॉय से पीछा छुड़ाने का सोच रहा था उधर मीनल क पास कमल आ गया .

कमल : कॉमन मीनल तुम भी डांस करो न . देखो तो सब एन्जॉय कर रहे हैं . मोहित भी खूब मज़े ले रहा है .

मीनल तो अंदर से पहले hi जान भून रही थी रॉय को मोहित से चिपकता देख. हो भी क्यों न एक तो उसे रॉय और मोहित क बारे में पहले से hi पता था. ऊपर से खुल्लम खुला ऐसे भड़कीले कपड़ों में जैसे वो मोहित से चिपक रही थी इस बात ने आग में घी डालने का काम किया था. गुस्से और नशे क सुरूर में भरी मीनल भी कोमल क साथ सत्कार डांस करने लगी . मीनल असल में मोहित को जलना चाहती थी जैसे वो जल रही थी . पर इस बात का असर कुछ ज्यादा hi हो गया मोहित पर . उसका गुस्सा और ज्यादा बढ़ गया . जहाँ वो पहले रॉय से पीछे हटने का सोच रहा था अब उसके हाथ खुद बा खुद रॉय की कमर पर कास गए और रॉय को अपने साथ सत्ता कर वो डांस करने लगा . इधर मीनल उधर मोहित , दोनों एक दूसरे को जलने क चक्कर में ये भूल गए क वो दोनों किसी और hi पार्टनर क साथ हैं. पार्टी धीरे धीरे अपने रंग में आती जा रही थी . लड़खड़ाते कदमो क साथ अब डांस कुछ ज्यादा hi सेक्सी होने लगा था जहाँ लड़कियां अपना अंग अंग हिला रही थी वहीँ लड़के नशे में डूबे उनके मस्त अंगों को मसलने लगे थे. रॉय ने खुद hi मोहित क हाथ अपने चूतड़ों और कबूतरों पर रखे थे जिन्हे मोहित ने मसलना शुरू कर दिया. मीनल ये देख कर आग बबूला हो गयी. कमल ने मौका सही जान कर अपना हाथ मीनल की कमर पर रखा तो मीनल उसे झटके से खुद से दूर कर दिया . शायद उसे ये सब मंज़ूर न था. सुनील की नज़र इस बात पर पद गयी थी. इससे पहले क मीनल कुछ और करती सुनील हाथ में जैम लिए उसके करीब आया

सुनील : अरे मीनल तुम खली क्यों कड़ी हो . लो इसे लो .

मीनल : सुरूर में ) नू ,, मुझे नहीं लेना

सुनील : बस एक सिर्फ एक मेरी खातिर , हमारी पुराणी दोस्ती की खातिर .

मीनल : ठीक है

सुनील ने कमल को पीछे हटने का इशारा किया और मोना को पास बुला लिया . मोना अपना काम जानती थी . अब कमल की जगह मोना मीनल क साथ डांस करने लगी और उसके साथ चिपक कर उसके अंगों को सहलाने लगी . डांस फ्लोर पर अँधेरा कर दिया गया था . जिस वजह से सब पार्टनर एक दूसरे को कुछ ज्यादा hi चिपक चिपक कर मसलने लगे . रॉय ने भी मोहित को सुरूर में लेन क लिए एक स्ट्रांग पेग लगवा दिया था . अब मोहित सब भूल कर रॉय क मस्त चूतड़ और बूब्स मसल मसल कर उसके साथ चिपक रहा था . रॉय ने भी उसके होंठ अपने होंठों में ले कर स्मूच करना शुरू कर दिया . रॉय ने मोहित पर पूरी तरह काबू कर लिया था . मोके का फायदा उठा कर रॉय अँधेरे में से मोहित को हाथ पकड़ खींचती एक तरफ बने कमरों में ले गयी . मोहित इस वक़्त नशे में जा चूका था उसे होश hi नहीं था क वो क्या कर रहा है और किसके साथ . एक एक कर क कई कपल यहाँ से खिसक गए और कुछ ज्यादा नशे की वजह से उधर hi ढेर हो गए . मोना ने भी मीनल को पूरा गरम कर दिया था और नशे का भी मीनल पर पूरा असर था . अब मोना मीनल से दूर हो गयी और उसकी जगह सुनील आ गया था . सुनील ने मदहोशी में डूबी मीनल

की कमर पर हाथ रख कर उसे अपने साथ कास लिए और मीनल क होंठों पर अपने होंठ रख दिए . अभी कुछ देर पहले मोना भी मीनल

क होंठ ऐसे hi चूस रही थी इस लिए उसे अंदाज़ा तक नहीं हुआ क अब उसके होंठ कौन चूस रहा है. वो तो बस हलके कदमो में थिरकती साथ दिए जा रही थी . सुनील क हाथ अब मीनल क चूतड़ों पर थे जिसे वो मसलता हुआ अपना लैंड मीनल की छूट पर दबा रहा था . ये देख कर कमल भी मोना क साथ मस्ती करने लगा . सुनील ने मीनल की ड्रेस पीछे से उठा कर अपना हाथ उसकी पेंटी में दाल दिया. मीनल को झटका लगा और वो नशे की हालत में भी इस बात से खफा होती पीछे हटी और आँखों को पूरा खोल कर देखने की कोशिश करने लगी .

मीनल : कक कौन ,,, कौन ,,, सुनिललललल ,, हौववव डरे यू ????

सुनील : कॉमन बेबी let’s एन्जॉय , हूँ सब यहाँ एन्जॉय करने hi तो आये हैं . जिसका जिसके साथ भी दिल करे . मोहित वहां रॉय क साथ एन्जॉय कर रहा है तो हम भी आपस में कर सकते हैं न .

मीनल : कक क्याआ ??? शुत्टट उप ,,,,, वेयर इस हे ,,, बास्टर्ड ,,, छोडूंगी नहीं उसे मैं . रॉय बितछःह ,, ी विल किल यू ...

मीनल नशे की हालत में भी गुस्से से भर गयी थी . सुनील क होंठों पर मुस्कान थी जैसे उसका काम बनने वाला हो .

सुनील : यू वांनै सीए , लेट में शो यू . खुद hi देख लो कैसे मज़े ले रहे हैं दोनों .

मीनल लड़खड़ाती हुई सुनील का हाथ थामे उसके साथ चल पड़ी . फार्म हाउस में दो मंज़िला था कुछ कमरे ग्राउंड फ्लोर पर और कुछ फर्स्ट फ्लोर पर थे . यहाँ जितने भी कपल आये थे मौज मस्ती क लिए वो एक एक कमरे में जा चुके थे . सुनील को पता था क रॉय और मोहित किस कमरे में हैं . और कहाँ से मीनल

को सब दिखाना है सब पहले से hi तय था . मीनल को पीछे की तरफ बानी खिड़की क सामने लेकर जब सुनील ने खड़ा किया तो अंदर का नज़ारा देख कर मीनल की ऑंखें फटी की फटी रह गयी . खिड़की से पर्दा पूरा बता हुआ था और बैडरूम का पूरा नज़ारा साफ़ साफ़ नज़र आ रहा था . जहाँ मोहित और रॉय बिना कपड़ों क थे . मोहित बीएड पर लेता हुआ था और रॉय उसके लैंड पर सवारी कर रही थी . मोहित की ऑंखें बंद थी और उसकी हालत से लग रहा था जैसे वो होश में है hi नहीं. पर ये देख कर मीनल अपने होश खो बैठी और एक डैम से गुस्से में आग बबूला हो गयी . वो कुछ करती उससे पहले hi सुनील ने उसके मुँह पर हाथ रखा और उसे खिंच कर दूर ले गया .

सुनील : क्या कर रही हो मीनल , वो दोनों एन्जॉय कर रहे हैं तो करने दो न उन्हें . देख नहीं रही कितना मज़ा कर रहे हैं दोनों .

मीनल : छोडो मुझे , मैं अभी उस धोखेबाज़ को देखती हूँ .

सुनील : कॉमन यार , अगर वो एन्जॉय करना चाहते हैं तो करने दो न . वैसे भी दोनों इतने पुराने दोस्त हैं और कितना प्यार भी है दोनों में. कहने को रॉय मेरी गफ है पर मज़ा मोहित क साथ ले रही है . बुरा तो मुझे भी लग रहा है पर किया भी क्या जा सकता है .

मीनल : किया क्यों नहीं जा सकता , मैं इन दोनों को छोडूंगी नहीं .

सुनील : रुको यार , ऐसे नहीं . देखो जैसे को तैसा करना चाहिए तभी अकाल ठिकाने अति है . जो उन दोनों ने हमारे साथ किया है हमें भी उनके साथ वैसे hi करना चाहिए . तुम दोनों को सजा देना चाहती हो न . तो चलो हम भी वही करते हैं और उन्हें दिखते हैं क हम भी काम नहीं .

मीनल : हाँ हाँ , अगर वो धोखेबाज़ मज़े कर सकता है तो मैं क्यों नहीं . चलो भी करते हैं उनके सामने करेंगे

सुनील : तो चलो . , दिखा दो तुम भी किसी से काम नहीं

मीनल सुनील क साथ उसी जगह जाने क लिए बरही पर सुनील ने मीनल को बाँहों में भर लिए और उसे किश करने लगा. मीनल गुस्से और बदले की भावना में सुनील क साथ किश करना शुरू कर दिया . नशा तो पहले hi हावी था, अब सुनील क साथ किसिंग और उसके हाथों द्वारा स्तनों का मर्दन उसके जिस्म में काम ज्वर बढ़ाने लगा . मीनल क हाथ स्वतः hi सुनील क बालों में चलने लगे . सुनील ने मीनल क चूतड़ मसलते हुए उसे गॉड में hi उठा लिया और वहां से बहार निकल

कर पीछे सर्वेंट क्वार्टर की तरफ चल दिया . कमल ये देख कर उसके पीछे hi आ गया अपने लैंड को मसलता हुआ . मीनल तो अपने होश हवस लगभग खो hi चुकी थी और सुनील का पूरा साथ दे रही थी. सुनील की कमर पर टाँगें बंधे वो उसे किश कर रही थी . एक रूम में पहुँच कर मीनल को बिस्तर पर लिटा कर सुनील ने रूम में रौशनी कर दी . मीनल तो जैसे किश टूटने पर मचल उठी थी और बिस्तर से उठने लगी तो सुनील ने जल्दी से अपने ऊपरी कपडे जल्दी से निकल दिए और फिर से मीनल पर सवार हो गया . अब सुनील क हाथ सीधा मीनल की छातियां मसल रहे थे . मीनल सुरूर में डूबी खुद hi कमर उठा उठा के अपनी छूट सुनील क लैंड पर मसल रही थी . बहार खड़ा कमल सब देख रहा था और अपना लैंड मसल रहा था.

रीमा क साथ काफी देर तक मैं बात करता रहा और बात करते करते मैं फार्म हाउस से काफी दूर निकल आया था . सड़क बिलकुल सुनसान थी , बातों बातों में पता hi न चला क मैं खान हूँ. रीमा क साथ प्यार भरी बातें काफी दिनों बाद जो कर रहा था फ़ोन पर . लगभग एक घंटा हमारी बातचीत में hi निकल गया और जब मैं वापिस फार्महाउस पहुंचा तो बत्तियां लगभग बुझ चुकी थी और डांस फ्लोर पर भी रौशनी नाम मटर थी जहाँ 3-4 लड़के और इतनी hi लड़कियां नशे की हालत में बस गिर hi रहे थे . म्यूजिक की आवाज़ भी मद्धम सी थी . मैं जब डांस फ्लोर की तरफ आया तो मोहित मीनल को वहां न प् कर मुझे हैरानी हुई . मैंने जेब से मोबाइल निकल कर मोहित को कॉल की तो वो उठा नहीं रहा था. मोहित की कार अभी भी वहीँ कड़ी थी मतलब वो गया नहीं था. मैं उसे ढूंढने क लिए अंदर की तरफ जाने लगा तो पता नहीं किधर से मोना रस्ते में आ गयी

मोना : अरे तुम , कहाँ चले गए थे ? चलो आओ थोड़ा डांस करते हैं.

अमित : जी शुक्रिया , मुझे डांस करना नहीं अत . क्या अपने मोहित और मीनल को कहीं देखा है .

मोना : कहीं एन्जॉय कर रहे होंगे , तुम उनकी चिंता क्यों कर रहे हो . आओ न मैं भी अकेली हूँ , दोनों साथ में थोड़ा एन्जॉय करते हैं

मोना मेरे साथ चिपकने की कोशिश कर रही थी. मैं पीछे हाथ गया क्यूंकि वो नशे में लग रही थी और दूसरा मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था

अमित : देखिये मुझे वापिस जाना है इस लिए प्लीज बता दो वो कहाँ हैं.

मोना : क्यों ? मैं अछि नहीं लगी तुम्हे ? क्या कमी है मुझ में ?

अमित : आप में कोई कमी नहीं है पर मुझे ज़रूरी जाना है. फिर कभी आप क साथ फुर्सत में बात होगी , अभी आप मुझे उन दोनों क बारे में बता दीजिये

मोना : ऐसे नहीं पहले मेरे साथ थोड़ा सा डांस तो करना hi होगा. रुको मैं तुम्हारे लिए सॉफ्ट ड्रिंक लती हूँ

मोना एक साइड में बने बार काउंटर पर गयी और खुद hi मेरे लिए गिलास में डालने लगी . उसने जिस बोतल से ड्रिंक निकली थी वो पहले hi साइड में छिपा कर राखी गयी बोतल थी जिसे देख कर मुझे अजीब लगा . मोना वापिस आयी और आते hi ज़बरदस्ती मेरे होंठों से लगाती मुझे पिने को मजबूर करने लगी . मुझे ये ठीक नहीं लग रहा था इस लिए मैंने उसके हाथ से वो गिलास नीचे गिरा दिया .

मोना : ये क्या किया तुमने ? सारा नीचे गिरा दिया .

अमित : ओह ी ऍम सॉरी गलती से नीचे गिर गया .

मोना : रुको अभी मैं दूसरा लती हूँ .

मोना फिर से ड्रिंक लेने गयी पर वो बोतल खली हो चुकी थी फिर इधर उधर देखते हुए उसने एक और बोतल से ड्रिंक निकली पर साथ hi एक व्हिस्की की बोतल उठा कर उसमे से भी थोड़ी सी बीच में दाल दी . काळा रंग की वजह से पता लगाना मुश्किल था पर मैं तो देख hi रहा था . मुझे लगा ये मेरे साथ कुछ करना चाहती है इस लिए ऐसा कर रही है . वो फिर से मेरे पास आ गयी हाथ में गिलास पकडे और मेरे होंठों से लगाने लगी

मोना : लो अब इसे पियो

अमित : ऐसे नहीं पहले आप अपने खूबसूरत होंठों से इसे छुआ तो दीजिये .

मेरी तारीफ पर मोना क चेहरे पर स्माइल आयी और मेरे इस तरह मन जाने से उसे लगा क बात बन गयी . मेरे हाथों से hi उसने अपने होंठों क साथ गिलास लगाया थोड़ा सा पिने क लिए पर मैंने गिलास उसके होंठों से लगा कर उसे पूरा खली करने क इरादे से पलटने की कोशिश की. मोना ने पूरा तो नहीं पिया पर गिलास तो मैंने खली कर hi दिया उसके ऊपर hi गिरा कर

मोना : ओह्ह्ह ये क्या कर दिया तुमने

अमित : ओह्ह ी ऍम रियली सॉरी मोना जी. आप को कुटनी अछि ड्रेस मेरी वजह से ख़राब हो गयी . चलिए चल कर ड्रेस चेंज कर लीजिये. मैं आपके साथ चलता हूँ .

मैंने मोना को अपनी बाँहों में लेकर अपने साथ लगते हुए कहा तो वो मेरी आँखों में एक बार देखि और स्माइल करती मेरे साथ उन कमरों की तरफ चल दी . आसपास की लाइट्स बंद hi थी और अँधेरे में कुछ नज़र नहीं आ रहा था . मेरी नज़र पीछे की तरफ बने कमरे पर गयी जहाँ हलकी रौशनी जल रही थी और बहार कोई खड़ा अंदर देखने की कोशिश कर रहा था . शायद ये सेरवेटंट्स क लिए बनाये गए कमरे थे. मोना ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे खींचती हुई अंदर ले गयी . यहाँ कुछ कमरे थे जिनके दरवाज़े बंद थे . मोना ने एक एक कर क दरवाज़े चेक किये पर सब क सब लॉक थे तो वो मुझे सीढ़ियों से ऊपर की तरफ ले जाने लगी. ऊपर भी 4 कमरे थे जिनमे से एक का दरवाज़ा थोड़ा खुल था तो मोना मुझे उसी कमरे में ले गयी और कमरे का दरवाज़ा बंद कर क मेरे साथ चिपक कर मुझे किश करने लगी . मैंने उसका साथ दिया पर जल्द hi उसे अलग कर दिया .

अमित : जाओ पहले तुम अपने कपडे चेंज कर लो मैं यहीं हूँ.

मोना : कॉमन , कपडे तो वैसे भी अब उतरने hi हैं . किश में उम्म्म

अमित : नहीं ऐसे नहीं , तुम फ्रेश हो जाओ. तुम पर ड्रिंक गिरी है , ऐसे में मज़ा नहीं आएगा. तुम नाहा क्यों नहीं लेती फिर मज़े करेंगे .

मोना : क्या ??? इस वक़्त . ाचा ठीक है तुम यहाँ बैठो मैं बस अभी आयी . अगर साथ नहाने का मन है तो आ जाओ . नहाते नहाते भी मज़ा कर सकते हैं.

अमित : वो भी करेंगे मगर बाद में . मैं यहीं बैठा हूँ .

मोना एक सेक्सी स्माइल देती हुई अपने कपडे उतरने लगी और वहीँ मेरे सामने उसने अपनी ड्रेस उतर दी . मोना की फिगर लाजवाब थी . काली ब्रा पेंटी में वो बहुत hi सेक्सी लग रही थी. मन हुआ क अभी पटक कर छोड़ डालूं पर मेरे दिमाग में मोहित और मीनल hi घूम रहे थे . मोना जैसे hi बाथरूम में घुसी मैं कमरे से निकला और दरवाज़ा बहार से लॉक कर क मोहित को ढूंढने क लिए साथ वाले कमरों में गया . दरवाज़े तो लॉक थे पर टेरेस की तरफ से विडोस थी मैं वहां से झाँकने लगा. तीनो कमरों में एक एक कपल था . 2 तो नंगे hi बीएड पर सो गए थे चुदाई करने क बाद और एक अभी चुदाई में लगा था . ये सब देख कर इतना तो पता चल गया क सब क सब यहाँ यही सब कर रहे हैं . मोहित और मीनल भी तो आपस में सब करते थे . मुझे लगा शायद वो भी ऐसे hi मज़ा कर रहे होंगे . मुझे ऐसे उन्हें खोजना नहीं चाहिए . पर मोना की हरकतों ने दिमाग में शक पैदा कर दिया था इस लिए अपने दिमाग से शक का कीड़ा निकलने क लिए मैं नीचे आया और बाकि क कमरों में भी झाँकने लगा . वहां भी वही सन थे , कोई अभी चुदाई में लगा था और कोई सो रहा था . एक कमरे में मुझे मोहित भी मिल गया जो सो रहा था बिना कपड़ों क . उसे देख मुझे तसल्ली हुई . उसके साथ hi शायद मीनल भी थी जो बिना कपड़ो क hi थी . मीनल की नंगी कमर और चूतड़ hi नज़र आ रहे थे क्यूंकि उसका मुँह दूसरी तरफ था . मीनल को नंगी देख कर अंदर से फीलिंग तो आयी पर मैंने मन को काबू किया और वहां से जाने लगा पर मन में जैसे अभी शंका थी. जो कुछ अभी तक देखा था वो दिमाग को शांत होने नहीं दे रहा था . मैं एक बार फिर से अंदर देखने लगा . गौर किया तो ऐसे लगा जैसे ये लड़की मीनल नहीं है . किस्मत से उसने उसी वक़्त करवट बदली और जैसे hi मैंने उसका चेहरा देखा मैं हैरान हो गया . वो लड़की रॉय थी .

अमित : ( मन में ) अगर ये मीनल नहीं है तो फिर मीनल कहाँ है ?

मीनल को वहां न पाकर मुझे चिंता होने लगी . मैंने जल्दी से हॉल और किचन में जाकर देखा मगर मीनल वहां नहीं थी और न hi सुनील और कमल कहीं दिखे थे अब तक. तभी मुझे यद् आया पीछे की तरफ बने कमरों क बहार खड़ा वो लड़का . किसी अनहोनी का दिमाग में ख्याल एते hi मैं बहार की तरफ भगा . अँधेरा होने क कारन आपस का कुछ पता तो नहीं चल रहा था . पर उस तरफ हलकी सी रौशनी काफी थी मंज़िल ढूंढने क लिए . मैं भाग कर वहां पहुंचा तो देखा बहार खड़ा लकड़ा कमल था जो एक हाथ से अपने मोबाइल पर वीडियो बना रहा था और दूसरे हाथ से अपना लैंड सेहला रहा था . मैंने चुपके से विंडो से अंदर झाँका तो अंदर बीएड पर मीनल लेती हुई थी और सुनील अपने कपडे उतर कर उसकी चुदाई करने hi वाला था . मीनल की टंगे उठाये वो उन्हें चूमता हुआ उसकी छूट की तरफ जा रहा था . एक हाथ से वो छूट को सेहला रहा था . मीनल की छूट एक डैम नंगी थी पेंटी उतरी जा चुकी थी . कमर से नीचे मीनल पूरी नंगी थी. साफ़ गोरा बदन रौशनी में चमक रहा था . उसकी ड्रेस कमर से ऊपर चढ़ी हुई थी और उसके गोर चुके भी ड्रेस से बहार थे . हैरानी की बात तो ये थी क मीनल कोई विरोध नहीं कर रही थी बल्कि वो ऑंखें मूंदे मज़ा ले रही थी और खुद hi अपने स्तन मसल रही थी . सुनील ने अपने बचे खुचे कपडे जल्दी से उतरे और मीनल की टंगे फैला कर बीच में अपनी जगह बना कर बैठने लगा . मैं मीनल को ऐसे देख कर hi स्तब्ध सा था . मुझे होश तब आया जब कमल ने मुझे धक्का मारा .

कमल : क्यों बे तू यहाँ क्या कर रहा है ? चल भाग यहाँ से .

कमल क रवैये से साफ़ ज़ाहिर था क वो सुनील क साथ शामिल है . अंदर सुनील मीनल की चुदाई करने वाला था और मुझे उसे रोकना था . कमल क एवरेज सा लड़का था जो मेरे से 5-6 इंच काम hi था . मुझे धक्का मरते हुए जिस तरह उसने मुझे जाने को कहा , गुस्सा तो मुझे भी बहुत आया और मैंने दाएं हाथ से उसकी गर्दन को कास क पकड़ लिया . वो हाथ पाऊँ मर कर मुझसे अपनी गर्दन छुड़ाने लगा . पर मैंने उसे एक हाथ से hi हवा में उठा दिया . उसकी गर्दन की नसें उभरने लगी और चेहरा लाल होने लगा . ऑंखें कुछ ज्यादा hi उभर आयी तो मैंने उसे दूसरा हाथ लगा कर सर क ऊपर हवा में उठाया और ज़ोर से फिर ज़मीन पर पटक क मारा . एक ज़ोरदार चीख उसके मुँह से निकली और वो निढाल हो गया . उसके सर से खून की धरा बहने लगी थी. ये आवाज़ अंदर सुनील तक भी पहुंची होगी . मैंने ज़ोर से लात मर कर दरवाज़ा खोला तो सुनील घुटनो पर आसान जमाये मीनल की छूट में लैंड घुसाने hi वाला था क चीख सुन कर उसने पलट कर दरवाज़े की तरफ देखा जहाँ मैं खड़ा था . गुस्से से वो तिलमिला उठा .

सुनील : मादरचोद तू यहाँ क्या लेने आया है. चल भाग यहाँ से .

सुनील ने तेवर दिखते हुए मुझे गलियां देकर कहा . सुनील वैसे तो देखने में ठीक थक था और अपने ग्रुप में शायद सब से ज्यादा ताकतवर होगा जो भी ो सबका बॉस बना फिरता था . मुझे तो उसके ऊपर पहले hi गुस्सा आ गया था और अब उसने मुझे माँ की गली दे दी . मैं गुस्से में उसकी तरफ बढ़ा तो वो फिरती से बीएड से नीचे उतरा और मुझे मरने क लिए मुझ पर हाथ उठाया जिसे मैंने हवा में hi रोक लिया और दूसरे हाथ से एक उलटे हाथ कर ज़ोरदार मुक्का मारा उसके मुँह पर . सुनील एक वॉर में hi हिल गया मगर उसने फिर से कोशिश करते हुए मुझे किक मरी जिसे मैंने फिर से रोक दिया और इस बार उसे अपनी तरफ खिंच कर पलटी मरते हुए उसे ज़ोर से पीछे की दीवार पर दे मारा . एक चीख उसके मुँह से निकली और वो ज़मीन पर गिर गया . मगर साला इतनी जल्दी हर कहाँ मैंने वाला था . वो फिर से उठा और वहां साइड के पड़ी कांच की बोतल मेरे ऊपर फेंक क मरी . मैंने बचने की कोशिश की पर फिर भी मेरी कलाई पर बोतल लगी और कुहनी क पास मुझे चोट लग गयी .

सुनील : तेरी माँ की साले मुझ पर हाथ उठाया तूने . ये ले ,,,,,, आआह्ह्ह्हह्ह सेल आआआअह्ह्ह्ह

बोतल क वॉर से मेरी कलाई से खून निकलने लगा था . सुनील उठ कर फिर से गली देने लगा तो मैं गुस्से से भरा उस पर तेज़ी से टूट पड़ा . एक पंच उसके मुँह पर ज़ोर से मारा तो उसकी गांड ज़ुबान से चीख निकली. फिर उसका सर दोनों हाथों से पकड़ मैंने ज़ोर से उसे दीवार में दे मारा और वहीँ उसके सर से खून की धरा बहने लगी. बेसूद हो कर वो वहीँ गिर पड़ा . मैंने एक बार फिर गुस्से से उसके पेट में लती मरी पर उसकी तरफ से कोई खास हरकत न प् कर मैं समझ गया क अब ये गया कुछ देर क लिए

अमित : उठ सेल , बोल क्या बोल रहा था .

अब मेरा ध्यान मीनल की तरफ गया तो वो गुस्से से मेरी तरफ hi देख रही थी . वो अभी भी वैसे hi अधनंगी बीएड पर थी . मैं उसके पास गया और उसे उठाने की कोशिश की तो उसने मेरा हाथ गुस्से में झटक दिया .

मीनल : हाउ डरे यू , तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई .

मीनल की तरफ से मुझे ऐसी उम्मीद नहीं थी .मैं तो उसके ऐसे बेहवे से हैरान hi हो गया .

अमित : ये तुम क्या कह रही हो मीनल ? वो तुम्हारे साथ .......

मीनल : वो मेरे साथ मेरी मर्ज़ी से कर रहा था . तुम होते कौन हो हमें रोकने वाले . यू ासशोले , जाओ जा कर अपने उस धोखेबाज़ दोस्त क साथ रंडीबाज़ी करो .

मीनल की बातों पर गुस्सा तो मुझे आ रहा था पर मोहित का ज़िकर सुन कर मैं समझ गया क उसने मोहित को रॉय क साथ देख लिया है इसी लिए इतना गुस्से में है .

अमित : देखो मीनल तुम अभी होश में नहीं हो हम ......

मीनल : जा न भड़वे , तू भी जा कर कहीं मुँह मर ले . मेरे सामने ज्ञान न पेल . इतना hi ज्ञान है तो उसे देना था न जो दूसरों क साथ मुँह कला कर रहा है .

अमित : तो तुम यहाँ क्या कर रही थी अभी ? अभी मैं न अत तो .....

मीनल : क्यों ? मज़ा सिर्फ तुम लोग hi कर सकते हो? लड़का जो चाहे करे और लड़कियां बस देखती रहे . अगर उसे मेरी परवाह नहीं है तो मुझे भी उसकी परवाह नहीं है .

अमित : समझने की कोशिश करो मीनल , वो नशे में था .

मीनल : नशे में था तो क्या कुछ भी करेगा ? और तुम जानते क्या हो उन दोनों क बारे में ? मुझे पहले से hi पता था , स्कूल में भी दोनों का चक्कर था . आज अपनी आँखों से देख भी लिया .

अमित : हम इस बारे में सुबह बात करेंगे अभी तुम कपडे पेहेन लो .

मीनल : नहीं ,, मुझे कुछ नहीं सुन्ना . उसने जो किया अब मैं भी कर क रहूंगी. ,,,,,, तुमने इसकी क्या हालत कर दी है . अब मेरी आग कौन बुझायेगा ? ,,,,,,,,, तुम ,,, हाँ अब तुम hi मेरी आग बुझाओगे .

मीनल ने सुनील को बेहोश देखा तो उठ कर मेरे कलर पकड़ कर मुझे खींचने लगी .

अमित : होश में तो हो मीनल ? ये कैसी बातें कर रही हो .

मीनल : मुझे कुछ नहीं पता , कॉमन फ़क में . मुझे अभी इसी वक़्त छोड़ो . फ़क में .

मीनल मेरे साथ चिपकने लगी और मुझे किश करने की कोशिश करने लगी . मैंने उसे फॉर से धक्का दिया और वो बीएड पर गिर गयी .

अमित : होश में आओ मीनल , ये क्या बोले जा रही हो .

मीनल : क्यों ? खड़ा नहीं होता क्या तुम्हारा ? इतनी सुन्दर लड़की देख कर भी तुम्हारा खड़ा नहीं होता . हिजड़े हो क्या ? इसी लिए तुम गफ नहीं बनाते न ? शो में , तुम असली मर्द हो या गे हो . दिखाओ मुझे .

मीनल फिर से उठी और मेरी पेण्ट खोलने लगी तो मैंने उसे पीछे हटाने क लिए फिर से धक्का मारा मगर वो फिर से उठ कर मेरे लैंड को पकड़ने लगी. मीनल इस वक़्त होश में नहीं थी . इस लिए बहस करने का फायदा नहीं था . मैंने एक थप्पड़ उसके मुँह पर मर दिया जिससे वो बेसुध हो कर गिर गयी . मीनल को हिलता न देख मुझे टेंशन हो गयी और मैंने उसे जल्दी से पलट कर देखा तो उसके होंठों से थोड़ा सा खून निकल आया था . मैंने जल्दी से रुमाल निकल कर उसका खून साफ़ किया . अब यहाँ रुकना ठीक नहीं था . मैंने मीनल की ड्रेस कमर से निचे कर क सही की . उसकी पेंटी मुझे नज़र नहीं आयी थी कहीं . फिर मैंने उसकी छाती से ड्रेस ठीक करने की कोशिश की तो उसके बूब्स ब्रा और ड्रेस से बहार निकले हुए थे जिन्हे वापिस डालने क लिए मुझे उन्हें हाथ में लेना पड़ा . बहुत hi कोमल और रुई से मुलायम थे . उन्हें पकड़ते hi एक बार मेरे अंदर भी झुरझुरी हुई पर खुद पर काबू कर क मैंने वापिस उसके स्तनों को ड्रेस क अंदर किआ और उसे अपने कंधे पर लाड कर कमरे से बहार निकला . बहार कमल वहीँ बेसुध पड़ा था . उसके पास hi उसका फ़ोन पड़ा था . मैंने उसका मोबाइल उठाया और उसमे से मेमोरी कार्ड निकल लिया . मीनल को लिए मैं कार क पास आ गया पर चाबी तो मोहित क पास थी. मीनल को वहीँ छोड़ कर मैं मोहित वाले रूम में गया . जहाँ वो अभी भी नशे की हालत में सो रहा था . मैंने उसके मुँह पर पानी मारा और उसे होश में लेन की कोशिश की पर वो कुछ ज्यादा hi नशे में था . जैसे तैसे मैंने उसे उसके कपडे पहनाये और उसे साथ लेकर कार तक आ गया . मोहित की जेब से चाबी निकल कर मैंने दोनों को गाड़ी में डाला और खुद कार स्टार्ट कर क भगवन का नाम लेकर गाड़ी चलनी शुरू की . शिवानी क साथ जो थोड़ा बहुत सीखा था उसी हिसाब से गाड़ी चलकर मैं वापिस मोहित क घर की तरफ चल दिया . दोनों नशे की हालत में थे ऐसे में मीनल को उसके घर लेकर जाना तो सही था hi नहीं पर दोनों को और कहाँ लेकर जाता . घर पहुंचा तो शायद आंटी और करिश्मा दीदी सो चुके थे . पहले मैंने आंटी क पास जाने का सोचा पर फिर सोचा क मीनल उनकी होने वाली बहु है . कहीं उसे ऐसी हालत में देख कर वो उसे गलत hi न समझ बैठे इस लिए मैं करिश्मा दीदी क पास चला गया . रत क 12 बजने वाले थे . मैंने दरवाज़ा खटखटाया तो कुछ देर में करिश्मा दीदी की आवाज़ आयी .

करिश्मा : कौन है ?

अमित : मैं हूँ दीदी , अमित .

अगले hi पल दरवाज़ा खुल गया और करिश्मा दीदी घुटनो तक की निघ्त्य में मेरे सामने कड़ी थी. उनके चेहरे पर ख़ुशी साफ नज़र आ रही थी . मगर मेरी नज़र निघ्त्य में से झांकते उनके यौवन पर चली गयी. क्यूंकि घुटनो से नीचे उनकी गोरी टंगे नंगी थी और ऊपर भी उनके कबूतर आधे से ज्यादा बहार निकल रहे थे . शायद वो लेती हुई थी इस लिए निघ्त्य अस्तव्यस्त हुई पड़ी थी. मैं जब कुछ न बोलै तो करिश्मा दीदी भी मेरी नज़रों को समझ गयी और अपने कपडे ठीक करते हुए बोली .

करिश्मा : अमित तुम यहाँ इस वक़्त ? ( करिश्मा क मन में कुछ कुछ होने लगा था अमित की नज़रों का निशाना समझ कर . एक पल में hi सैकड़ों बार उसका दिल धड़क उठा था . जब से उसे अपनी माँ से अमित क बड़प्पन का पता चला था तब से वो लगातार अमित की तरफ खींचती चली जा रही थी . मगर वो उसे इग्नोर hi करता जा रहा था . उसकी सेक्स क्लिप्स देख देख कर पता नहीं कितनी बार अपनी छूट में उंगली कर चुकी थी और खुद को अमित क नीचे इमेजिन कर क कितनी बार पानी बहा चुकी थी. अपने जिस्म पर पड़ती अमित की नज़रों ने उसे एक ऐसी ख़ुशी दी थी जिसकी उम्मीद hi नहीं थी )

अमित : वो ,,, वो ,, आप सो रही थी क्या ? मैंने आपको डिस्टर्ब तो नहीं किया ?

करिश्मा : बिलकुल नहीं , मैं अभी जग hi रही थी . तुम कहो क्या बात है ?

अमित : आपको मेरे साथ आना होगा .

करिश्मा : हाँ हाँ चलो ( साथ आने की बात पर करिश्मा क मन में एक आवाज़ आयी क कहीं अमित उसे अपने साथ अपने बैडरूम में तो नहीं ले जाना चाहता )

मैं करिश्मा दीदी को साथ लिए बहार कार क पास आ गया .

करिश्मा : हम कहाँ जा रहे हैं?

अमित : दीदी प्लीज इस बारे में आंटी को मत बताइयेगा , ये देखिये .

करिश्मा दीदी ने जब गाडी में मीनल और मोहित दोनों को बेहोश देखा तो वो भी घबरा गयी .

करिश्मा : ये ,, ये सब क्या है ? क्या हुआ है मोहित को और ये मीनल .

अमित : वहां पार्टी में दोनों की ड्रिंक में किसी में शरारत से शराब मिक्स कर दी थी इस लिए ये दोनों नशे में हैं. अगर आंटी को पता चल गया तो वो बहुत नाराज़ होंगी . क्या आप मीनल

को संभल लेंगी ?

करिश्मा : है हाँ , ठीक है तुम इसे मेरे कमरे में ले चलो .

मैंने मीनल को गॉड में उठाया और करिश्मा दीदी क पीछे पीछे उनके कमरे में आ गया . मीनल को बीएड पर लिटा कर मैं वापिस आया और फिर मोहित को उठा कर उसके कमरे में ले गया. अभी मैं थोड़ा रिलैक्स होने अपने कमरे में गया hi था क करिश्मा दीदी मेरे रूम में आ गयी.

करिश्मा : इन दोनों क साथ ये सब किया किसने?

अमित : पता नहीं दीदी , इनके स्कूल क hi दोस्त थे मैं तो जनता भी नहीं .

करिश्मा : तुम ठीक कैसे हो तुम ने ड्रिंक नहीं की थी ?

अमित : नहीं मैं ड्रिंक नहीं करता .

करिश्मा : तुम्हे इन दोनों की वजह से बहुत दिक्कत हुई न .

अमित : दिक्कत कैसी ? अपने दोस्तों क लिए क्या इतना भी नहीं कर सकता .

करिश्मा : तुम सच में बहुत अचे हो , सबका ख्याल रखते हो . क्या मैं कुछ कर सकती हूँ तुम्हारे लिए . तुम्हे कुछ चाहिए ?

अमित : नहीं दीदी , रत बहुत हो गयी है . आप भी जा कर आराम करो . मैं भी अब सोता हूँ .

करिश्मा : ठीक है , अगर कुछ चाहिए हो तो मुझे बोल देना . गुड नाईट .

करिश्मा दीदी इतना बोल कर मुस्कुराती कमरे से चली गयी . मैं उनको जाते हुए देख रहा था क मेरी नज़र उनकी थिरकती गांड पर गयी . एक बार फिर मेरा लैंड दिमाग पर हावी हो गया . पहले मोना फिर मीनल और अब करिश्मा दीदी , लैंड ने तो दिमाग की माँ बहिन कर दी थी . पर खुद को

काबू करता मैं आँखें बंद कर क सोने की कोशिश करने लगा.

आधा घंटा भी नहीं हुआ था क कमरे का दरवाज़ा खुला और कोई कमरे में दाखिल हुआ. मैं हलकी नींद में था , अँधेरे में चल कर कोई मेरे करीब आया और मुझे धीमी आवाज़ में पुकारा



‘ अमित ,, अमित ,, सो गए क्या ‘ उस साये ने जब मुझे हिलाया तो मैं होश में आ गया . इससे पहले क मैं कुछ कहता वो मेरे ऊपर छाती चली गयी और होंठों पर उसके होंठ आ लगे.
 
अपडेट 252



‘ तुम इतना चुप चुप क्यों रहती हो नेहा ? किसी से भी बात नहीं करती . वैसे तो राधा भी काम बोलती है पर फिर भी वो सब से बात कर लेती है और शामिल रहती है सब में पर तुम , तुम इतनी अलग क्यों हो ? करुणा और रीता दीदी को देख कर तो लगता hi नहीं तुम उनकी फॅमिली से हो . इस सब की वजह क्या है ? ‘ आज मंजू ने अपने साथ सोने क लिए नेहा को कहा था . दिव्या राधा क साथ दूसरे कमरे में थी. वैसे तो दिव्या hi मंजू क साथ सोने वाली थी पर मंजू ने उससे कहा था क वो नेहा से कुछ बातें करना चाहती है इस लिए आज सोने का प्लान बदल गया था .

नेहा : कोई वजह नहीं है बुआ जी बस मैं शुरू से ऐसी hi हूँ .

मंजू : ाचा ! पर तुम जैसी इतनी इंटेलीजेंट और इतनी अछि नेचर की लड़की ऐसे चुप चुप रहे तो ाचा थोड़ा hi लगता है. अक्सर लोग वही शांत होते हैं जो अंदर से बहुत अकेले होते हैं या जिन्होंने बहुत दुःख देखे हो .

नेहा : उसने भी तो कितना कुछ सहा है , कितना अकेला रहा है पर वो तो ऐसा नहीं है .

मंजू : तुम किसकी बात कर रही हो ?

नेहा : अमित की , आपने अभी कहा न लोग वही शांत होते हैं जो बहुत अकेले रहे हो या जिसने दुःख देखे हो . पर क्या अमित मेरी तरह चुप रहता है ? वो तो सब क सब हस्ता खेलता है . वो अपने अंदर क्या कुछ छुपाये है इसका तो किसी को अंदाज़ा भी नहीं है .

मंजू अमित क बारे में नेहा की बातें सुन कर हैरान हो रही थी . क्यूंकि इस बारे में उसे किसी ने ऐसा कुछ नहीं बताया था . और न hi वो खुद ये सब जान पायी थी . अमित ने तो पहले भी खुद मंजू क दुःख को hi समझ कर उसके ज़ख़्मी दिल पर अपने प्यार का मलहम लगाया था पर उसके अपने जीवन में ऐसा कुछ है ये उसे पता नहीं था . है अमित ने उसे कजरी क बारे में ज़रूर बताया था

मंजू : तुम कहना क्या चाहती हो नेहा

नेहा : यही की हर इंसान की अपनी एक अलग नेचर है, कुछ लोग दुःख सेह कर भी मुस्कुराते हैं और कुछ खुश होते हुए भी दुखी नज़र आते हैं. शायद मैं भी ऐसी हूँ जो दुःख न होते हुए भी दुखी नज़र अति हूँ.

मंजू : मैं अमित क बारे में पूछ रही हूँ .

नेहा : क्या जानना चाहती हैं आप बुआ ? वैसे मैं भी ज्यादा नहीं जानती . कभी कभार hi तो आना होता था और मेरी नेचर तो आपको पता चल hi गयी है. पहले भी ऐसे hi थी . शायद इससे भी ज्यादा चुप रहती थी पर अब अमित की वजह से थोड़ा बहुत बात करने लगी हूँ.

मंजू : फिर भी कुछ तो जानती होगी न जो तुम उसके बारे में ऐसे कह रही हो .

नेहा : छोड़िये न बुआ , वैसे भी अब सब ठीक हो चूका है . उसने अपने प्यार से सबको बदल दिया है . जो कल तक उससे नफरत करते थे आज उस पर जान वर्ते हैं. वो है hi ऐसा , सबको अपना बना लेता है.

मंजू : प्लीज नेहा , साफ़ साफ़ बताओ . मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी . मैं बस उसके बारे में जानना चाहती हूँ .

नेहा : मैंने कहा न बुआ , मैं भी ज्यादा नहीं जानती . जितना जानती हूँ उतना बता तो दूंगी पर वडा करिये आप किसी से खफा नहीं होंगी . क्यूंकि अब पहले जैसा कुछ भी नहीं है .

मंजू : मैं वडा करती हूँ

नेहा : बचपन से लेकर अब तक हम यहाँ साल में छुट्टियों या फिर राखी पर hi आया करते थे वो भी थोड़े टाइम क लिए . इस लिए ज्यादा तो मुझे भी पता नहीं . पर इतना ज़रूर पता है क वो शुरू से hi अकेला रहा है . उसके दोस्त न क बराबर थे . बस एक ये राजू hi है बचपन से उसका दोस्त . बड़ी ममी ने उसे बहुत प्यार किया और कभी उसे ऐसा लगने hi नहीं दिया क वो उनका अपना बीटा नहीं है. बड़ी मौसी और माँ भी उसे बहुत प्यार करती हैं आज भी. पर कामिनी ममी किसी बात पर उससे नफरत करती थी . उसे मनहूस समझती थी . इसकी वजह तो नहीं पता पर कुछ भी होता तो वो उसे मनहूस कह कर डांटा करती थी. हालाँकि वो ये सब किसी क सामने नहीं कहती थी पर मैंने कई बार उन्हें ऐसे करते देखा था . और अमित भी ये बात कभी किसी से नहीं कहता था पता नहीं वो ऐसा कैसे कर लेता था . पर वो ये सब चुपचाप सेहत रहा शायद इसी वजह से वो ऐसा बन गया . दुनिया में अगर कहूं दुःख मिले तो लोग सुकून क लिए घर आते हैं पर घर पर hi दुःख मिले तो इंसान कहाँ जा सकता है ? मगर वो सब कुछ ऐसे सेहत रहा जैसे ये सब कुछ नार्मल था उसके लिए . ममी उसे बहुत तने देती थी पर उसने कभी पलट कर कुछ नहीं कहा . दिव्या मौसी शायद दामिनी मौसी की वजह से आमिर से दूर हो गयी थी और उसे मनहूस समझ कर उसे देखना तक पसंद नहीं करती थी. कभी आती भी तो उसे बिना मिले जाने की कोशिश करती. राधा भी तो बेचारी मौसी की वजह से इतने साल अमित से ठीक से बात तक नहीं की . पर देखिये आज वही ममी है वही मौसी और वही अमित . आज क टाइम में कामिनी ममी और दिया मौसी से ज्यादा शायद hi कोई उसे प्यार करता हो. पर इतने साल अमित ने क्या कुछ नहीं सहा होगा . उसका दिल कितना रोटा होगा ताने सुन कर . कितना अकेला पता होगा वो खुद को पर उसे देख कर क्या कोई कह सकता है उसने ऐसा कुछ सहा होगा ?

ये सब सुन कर मंजू का दिल तो अंदर से रोने hi लगा था और उसकी आँखों में नमी आ गयी थी पर वो मुँह से कुछ बोली नहीं. बस अमित क बारे में सोचने लगी . उसे अपने दुःख का अंदाज़ा था पर अब उसे लग रहा था क जो कुछ उसने सहा है उसके बिट्टू ने भी वैसा hi कुछ सहा है . मंजू को खामोश देख नेहा बोली

नेहा : बुआ आप ठीक तो हैं ? मैं इसी लिए नहीं बताना चाहती थी आपको .

मंजू : ऑंखें साफ करते हुए ) मैं ठीक हूँ , बस अमित क बारे में सोचने लगी थी . ये सब तो किसी ने बताया hi नहीं मुझे और मैं भी इस बात को देख hi नहीं पई .

नेहा : देखती कैसी जब ऐसा कुछ है hi नहीं . मैंने कहा न अब सब बदल चूका है . आप भी इस बारे में कुछ मत सोचियेगा . वो वैसे भी अपने दुःख किसी क साथ बाँट ता नहीं मगर दूसरों क दुःख खरीदने लगा रहता है . उसे तो ये भी ख्याल नहीं रहता क दूसरे क दुःख दूर करने में वो खुद भी दुखी हो सकता है . अगर कहीं किसी रोज़ अपनी इस आदत से वो लोगों की नज़र में गिर गया तो क्या होगा ? ये बात वो नहीं समझता .

मंजू : जो दूसरों क साथ गलत नहीं करते उनके साथ भी गलत नहीं होता .

नेहा : पर वो समाज क नियम नहीं समझता बुआ . मुझे इसी बात का दर है अगर कहीं किसी रोज़ ऐसा हुआ तो पता नहीं क्या होगा . भगवन ने मुझे भाई नहीं दिया पर अमित क रूप में मुझे भाई भी मिला और दोस्त भी . उससे बाद कर मुझे कुछ नहीं है . मैं जानती हूँ मैं ज्यादा बात नहीं करती पर उसके सिवा मुझे किसी से बात करने का मन hi नहीं करता. वो आपको बहुत प्यार करता है . आप उसे हमेशा संभालना , उसे टूटने मत देना .

मंजू : मैं हमेशा उसके साथ रहूंगी और मैं hi क्यों . तुम भी तो हो. वो सच में किस्मत वाला है जो उसे इतना प्यार करने वाली बहने मिली हैं .

नेहा : और बुआ भी . आप सच में बहुत अछि हैं. अमित से पहले भी आपके बारे में कई बार सुना था पर अब तो इतने दिनों में आपको अचे से देख भी लिया .

मंजू : और मैंने भी , वो तुम्हारी और राधा निधि की भी बातें अक्सर करता रहता था जब मेरे पास अत था पड़ने .

नेहा और मंजू एक दूसरे से बातें कर क एक दूसरे को जान रही थी और बहुत खुश हो रही थी. वहीँ दूसरी तरफ शहर में अमित क रूम में अलग hi मंज़र था.

मेरी आंख अभी बंद hi हुई थी मगर नींद नहीं आती थी जब अँधेरे में hi कोई मेरे कमरे में घुसा और मेरे ऊपर पूरी तरह लिपट कर मुझे चूमने लगा . मैं चौंका ज़रूर पर मैं जनता था क ऐसे कौन आ सकता है इस लिए ऑंखें बंद किये hi किसिंग में साथ देता हुआ अब अपने हाथ उस कोमल बदन पर घिसते हुए उन मुलायम पाठों पर ले गया और उन मुलायम पहाड़ों को मसलने लगा . ये कोमल जिस्म वाली कामुक अप्सरा और कोई नहीं बल्कि रमा आंटी hi थी .

रमा : ुम्माआअह्ह्ह सीधा मेरे कमरे में क्यों नहीं आये? तुमसे कहा था न वापिस आओगे तो सीधा मेरे पास आना .

अमित : मुझे लगा आप सो रही होगी . इसी लिए आपको नहीं जगाया .

रमा : ऐसे कैसे सो सकती हूँ , कितने दिनों बाद तो तुमने आज वडा किया था प्यार करने का . वैसे करिश्मा यहाँ क्यों आयी थी ?

अमित : आप देख रही थी ? वो बस पूछने आयी थी क मुझे कुछ चाहिए तो नहीं और गुड नाईट बोल कर चली गयी

रमा : जब मैं आ रही थी तब वो जा रही थी मगर उसने नहीं देखा था मुझे . चलो अब बातें बहुत हो गयी . आज मुझे इतना प्यार करो क मैं उसके सहारे कुछ दिन और अचे से रह सकूँ .

अमित : जो हुकुम रमा डार्लिंग

रमा : रमा डार्लिंग ??? सीधा रमा डार्लिंग , ाचा है , मुझे नाम से hi बुलाया करो जब हम ऐसे अकेले हो . उम्मम्मम

आंटी फिर से मुझे किश करने लगी और मैंने भी उन्हें चूमता हुआ अपने नीचे ले आया और उनके बूब्स मसलने लगा . आंटी अपनी टांगों में मुझे कैसे हुए अपने पाऊँ से मेरी टंगे सेहला रही थी . मैं तो पहले से hi चार्ज था कुछ देर की चुम्मा छाती क बाद मैंने अपने और आंटी क कपडे उतर दिए और उनके बूब्स चाटने लगा. आंटी की फिटनेस लड़कियों वाली hi थी बहुत ध्यान रखती थी वो और डेली योग करती थी . इसी वजह से उनकी छरहरी काया को मसलने में उतना hi मज़ा अत था . कुछ देर मैंने उनके स्तनों को अचे से रगड़ा और फिर उनकी छूट को भी प्यार किया . आंटी आज अचे से अपनी छूट साफ़ कर क आयी थी . एक भी बाल नहीं था वहां पर . आंटी की छूट छत कर मैंने उनका पानी निकल दिया फिर उन्होंने मुझे लिटा के मेरा लैंड अचे से चूसा .

रमा: उनममम उनममम उनममम सुररूउप सारूउप उम्म्म्म अब जल्दी करो अमित और बर्दाश्त नहीं होता .

अमित : तो चलो शुरू करते हैं जल्दी से घोड़ी बन जाओ

रमा : आज टंगे नहीं उठाओगे ?

अमित : नहीं आज मुझे रमा घोड़ी की सवारी करनी है . आपकी मस्त गांड देख कर चुदाई करने में ज्यादा मज़ा अत है

रमा : लगता है आज पीछे से भी करने का इरादा है .

अमित : सही समझी आप अब जल्दी से तैयार हो जाओ सवारी करवाने क लिए

आंटी जल्दी से बीएड पर hi घुटनो पर हो गयी और अपनी कमर अंदर को दबा कर अपने चूतड़ और उभर लिए . ऐसी कामुक ऐडा में उनकी छूट खूब उभर आयी थी और गांड का छेड़ भी नज़र आने लगा था . मैं बीएड से नीचे उतर और आंटी को बीएड क किनारे तक खिंच लिया और अपने लैंड को छूट पर सेट कर क एक धक्का मारा जिससे आधा लैंड एक बार में hi घुस गया .

रमा : आअह्ह्ह कक्कक्क्स उम्म्म

आंटी क मुँह से सिसकी निकली. मैंने एक और धक्का मारा और पूरा लैंड छूट में जड़ तक घुस गया . आंटी फिर से सिसकी और मैंने धक्के मरने शुरू कर दिए . आंटी मज़े से सिसक रही थी और मैं उनकी कमर को थामे धक्के मर रहा था . धक्के मरते मरते मेरी ऑंखें मज़े से बंद थी और मेरी आँखों क सामने मीनल नज़र आने लगी . उसका मुझे हिजड़ा कहना और मेरी मर्दानगी को ललकारना मुझे यद् आने लगा . मुझे गुस्सा आ गया और मेरी गति तेज़ हो गयी . मीनल की बातें बर्दाश्त से बहार थी चाहे उस वक़्त मैंने खुद को काबू कर लिया था पर अब जैसे आंटी की जगह मीनल hi आ गयी थी ख्यालों में मेरे आगे और मैं अपना गुस्सा निकलता पूरे ज़ोर से सुपडे तक लैंड बहार खिंच कर ज़बरदस्त धक्के मरने लगा .

रमा : ाःह आह्हः आअह्ह्ह आह्ह्ह्ह आअह्ह्ह रुक जाओ आअह्ह्ह आह्हः मा आअह्ह्ह प्लीज धीरे आअह्ह्ह ाःह

रमा आंटी अपनी पीठ ऊपर कर क कमान सी बन गयी और अपनी छूट को लैंड क वॉर से बचने की कोशिश करने लगी पर मैं कहाँ परवाह कर रहा था उनके चीखने की. उनकी दोनों कलाइयों को पकड़ कर मैंने पीछे खिंचा जिससे उनका धड़ ऊपर उठ गया और मेरे ज़बरदस्त धक्कों से उनका बदन कम्पनी लगा

रमा : आअह्ह्ह मा मर गईइइइइइ आअह्ह्ह्हह छोड़ दो मायआ रुक जउओ कक्कक्स माआ क्याआ हो गया है रुक जूऊऊ कक्कक्क्स नाहीई माआआ ाआईईई

मैं कहा सुन रहा था मीनल क शब्द मेरे कानो में गूँज रहे थे . मैंने धक्के मरते हुए रमा आंटी को और पीछे खिंच लिया जो आगे होने की कोशिश कर रही थी . बीएड से नीचे खिसकते वो नीचे बैठने की कोशिश करने लगी पर मैं उनकी कमर थम ली . आंटी की छूट से पानी निकलने लगा और वो कम्पनी लगी . उनकी सिसकियाँ और चीखें पूरे कमरे में गूँज रही थी . जब उनके पाऊँ खड़े रहने में जवाब देने लगे तो मैंने उन्हें बीएड पर गिराया और उनके पाऊँ अपने कंधे पर रख कर एक बार hi जड़ तक लैंड घुसा दिया . आंटी फिर से चीखी पर मैं दाना दान उन्हें छोड़ने लगा . आंटी की परवाह किये बिना मैं बस अपना गुस्सा शांत करने में लगा था . आंटी लगातार सिसकती रही और मैं तब रुका जब मेरा गरम लावा आंटी की भट्टी में निकल गया . तब तक आंटी की भी हालत पतली हो चुकी थी . हम दोनों hi पसीने में भीग चुके थे. हालाँकि मैं आंटी की गांड मरने का सोचा था पर मीनल की बातों ने दिमाग इतना गरम कर दिया क मुझे और कुछ यद् hi नहीं रहा . आंटी की हालत कुछ ज्यादा hi ख़राब हो गयी थी . वो तो बेसुध सी पड़ी थी जब मेरा पानी निकला. मैं वहीँ ऑंखें बंद कर क आंटी क बगल में लेट गया और कब मेरी आँख लगी पता नहीं चला .

उधर कमरे क बहार भी कोई था जो सारा नज़ारा देख रहा था . करिश्मा मन में अमित क साथ कुछ वक़्त बिताने की छह लिए एक बार फिर आयी थी मगर उससे पहले उसकी माँ यहाँ आ चुकी थी और अमित क साथ खेल शुरू कर चुकी थी. करिश्मा वहां से हैट जाना चाहती थी पर उसके मन में ये सब देखने की ीचा भी तीव्र हो चुकी थी. वीडियो देख देख कर तो कई बार खुद को शांत किया था और आज लाइव सन देख कर उसकी छूट लगातार बहती रही जब तक क अमित शांत न हुआ . अपनी की ऐसी ज़बरदस्त चुदाई देख कर करिश्मा को उस पर तरस भी आ रहा था दूसरी तरफ उसे ऐसी दमदार चुदाई की ीचा भी हो रही थी जो उसके साथ कभी नहीं हुई थी. वो खुद को अपनी माँ की जगह इमेजिन कर क खुद hi अपने स्तनों को मसलती रही और छूट से पानी बहती रही . लास्ट में उसकी हालत ऐसी हो गयी थी क उससे पाऊँ पर खड़ा रहना भी मुश्किल हो गया था. छूट से बेहटा पानी पाऊँ तक और नीचे फर्श पर भी घेरा बना चूका था . किसी तरह से खुद को संभालती वो वापिस अपने कमरे तक आयी और बाथरूम जाकर खुद की हालत ठीक की और कपडे बदल कर वहीँ मीनल क करीब बीएड पर लेट गयी चेहरे पर स्माइल और आँखों में हसीं ख्वाब लिए .

सुबह मैं आदत अनुसार जल्दी उठा तो अपनी हालत देखि . मैं अभी भी नंगा hi था , बगल में देखा तो आंटी वहीँ नंगी सो रही थी. आंटी को देख कर मुझे रत का सन यद् आ गया . मैंने रत को कुछ ज्यादा hi जोश दिखा दिया था . आंटी की हालत ज़रूर ख़राब हो गयी होगी वर्ण वो अपने कमरे में लौट जाया करती थी . इससे पहले क कोई उठ कर कमरे में आये मैंने आंटी को जगा कर उनके कमरे में भेजने का सोचा . आंटी को मैं जगाने लगा तो वो कसमसाई और थोड़ा सा हिलने पर hi उनके मुँह से सिसकी निकली .

रमा : कक्कक्क्स माआ मत तंग करो प्लीज सोने दो उन्नमनं

मेरी नज़र आंटी की छूट पर गयी तो वो फूल कर कृपा बानी पड़ी थी . छूट की फांके लाल हो चुकी थी और सूजी हुई लग रही थी . मैं बाथरूम गया और गरम पानी से बाथटब को भर कर वापिस आया और आंटी को बाँहों में उठा कर बाथरूम में लेजा कर बाथटब में बिठा दिया . आंटी जो अभी भी नींद से जग नहीं रही थी , पानी में गिरते hi उछाल पड़ी .

रमा : आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स ये क्या , तुमने मुझे पानी मि क्यों दाल दिया .

अमित : इस लिए क सुबह हो गयी है और आपको ज़रूरत भी है इसकी . माफ़ कर दीजिये रत को कुछ ज्यादा hi हो गया था .

रमा : ज्यादा ????? जानवर बन गए थे तुम पूरे . ऐसा क्या हो गया था जो तुमने ऐसे किया कल रत ?

अमित : इतने दिनों बाद कर रहे थे न तो कुछ ज्यादा hi जोश आ गया था . अब आप थोड़ी देर आराम कीजिये यहाँ . आपको आराम मिलेगा और फिर बाद में अपने कमरे में चली जाना इससे पहले क कोई और यहाँ आये . तब तक मैं थोड़ा एक्सरसाइज कर लेता हूँ.

आंटी को वहीँ छोड़ कर मैं तैयार हुआ और बहार चला गया थोड़ा रनिंग और एक्सरसाइज करने क लिए . जब मैं वापिस घर लौटा तो करिश्मा दीदी को कार से जाते हुए देखा उनके साथ कोई और भी था पर मैं देख नहीं पाया . खैर मैं वापिस लौटा और नाहा धो कर तैयार हो कर मोहित क कमरे में गया . आंटी तब तक अपने कमरे में जा चुकी थी . मोहित क रूम में आया तो वो सर पकड़ कर बैठा हुआ था .

अमित : आ गया होश या अभी भी रत की उतरी नहीं ?

मोहित : सर पकडे हुए ) बहुत दर्द हो रही है यार सर में ? ज़रा कॉफ़ी तो माँगा दे नीचे से.

अमित : वो तो मंगवा देता हूँ पर सेल तुझे यद् भी है तूने कल रत क्या किया था ?

मोहित : क्या किया मैंने ?

अमित : तुझे क्या यद् है पहले बता .

मोहित : मैं वहां डांस कर रहा था और मेरे साथ रॉय थी . और मीनल वहां सुनील क साथ ..... ओह सहित मीनल कहाँ है

अमित : उसके बाद का यद् नहीं तुझे ?

मोहित : नहीं , पर मीनल कहाँ है ?

अमित : अब उसकी यद् कैसे आ गयी तुझे ? रत को तो रॉय क साथ मज़े ले रहा था . तब यद् नहीं आयी थी ?

मोहित : क्या ??? मैं रॉय क साथ . क्या कह रहे हो तुम ?

अमित : सेल मैंने अपनी आँखों से देखा था तू उसके साथ नंगा सो रहा था . मैं hi उठा कर लाया हूँ तुम्हे उसके पास से रत को.

मोहित : ओह शित्त्त , शित्त्त . पता नहीं क्या पीला दिया था साली ने रत को . सर अभी तक घूम रहा है. मुझे लगा मैं मीनल क साथ था . मीनल कहाँ है ? उसे तो पता नहीं चला ?

अमित : उसने भी देख लिया था और बहुत गुस्से में थी रत को . तुझे ज़रा भी शर्म नहीं आयी मीनल क वहां होते किसी दूसरी क साथ वो सब करते ?

मोहित : मुझे कहाँ होश था यार , ये सब रॉय ने hi किया है . मुझे मीनल से बात करनी होगी .

अमित : पहले खुद को संभल फिर बात करना उससे . वैसे ये सुनील और कमल का क्या सन है ?

मोहित : तू क्यों पूछ रहा है ?

अमित : इस लिए क वो मीनल क साथ कुछ ज्यादा hi चिपक रहे थे कल रत . मैंने भी दो हाथ लगा दिए दोनों को .

मोहित : क्या ??? उनकी माँ की ..... हरामज़ादे सुधरे नहीं .

अमित : सुधरे नहीं क्या मतलब?

मोहित : वो सुनील स्कूल में मीनल क पीछे था . मीनल उसे हाँ भी करने वाली थी पर उससे पहले मेरी मीनल क साथ सेटिंग हो गयी . सुनील बड़ा हरामी किसम का लड़का है . स्कूल में उसके कई लड़कियों क साथ चक्कर थे और कमल उसका पक्का साथी है .

अब मुझे समझ आया क सारा प्लान इन दोनों का hi होगा और रॉय मोना दोनों ने उनका साथ दिया . मैं मीनल क बारे में बता कर मोहित को दुखी नहीं करना चाहता था इस लिए उस बात को दबा गया .

अमित : और ये रॉय ?

मोहित : रॉय मॉडर्न लड़की है , उसे नए नए बर्फ बनाने का शोक है. पहले मैं भी उसके चक्कर में पद गया था . फिर मैंने उसे किसी और क साथ देखा तो मैं पीछे हैट गया . पर मैंने उसके बाद कभी उसकी तरफ देखा भी नहीं . हालाँकि उसने कई बार मुझसे मिलने की कोशिश की. कल रत पता नहीं ये सब कैसे हो गया . ज़रूर उसके कुछ मिलाया होगा .

मैंने मन में सोचा मिलावट तो दोनों क गिलासों में की गयी है . खैर अब जो होना था हो गया . अब मीनल का क्या रिएक्शन होगा ये देखना था . मैंने मोहित क लिए कॉफ़ी मंगवाई और खुद मीनल को देखने करिश्मा दीदी क कमरे में गया पर वहां दोनों hi नहीं थी . यानि की करिश्मा दीदी मीनल को साथ लेकर hi गयी होंगी .

करिश्मा : मुझे देखने ए थे ?

मैं करिश्मा दीदी क रूम से निकल hi रहा था क करिश्मा दीदी सामने आ कड़ी हुई.

अमित : आप कहाँ गयी थी ? मैं वो बस देखने आया था मीनल का क्या हल है

करिश्मा : उसका मूड ऑफ था और सर भी भरी था . रत को क्या हुआ था ? लग रहा है दोनों में झगड़ा हुआ है रत ? उखड़ी उखड़ी सी लग रही थी. मैंने कॉफ़ी पिने को कहा तो मुझे घर छोड़ कर आने का कहने लगी . अभी वहीँ से आ रही हूँ . बताओगे कुछ मुझे ?

अमित : ज्यादा तो मुझे भी नहीं पता , मैं फ़ोन पर बात करने में लगा था , पीछे क्या हुआ मुझे कुछ नहीं पता . मोहित hi बता सकता है कुछ .

करिश्मा : दोस्त की साइड ले रहे हो न , लगता है मुझ पर भरोसा नहीं तुम्हे .

अमित : ये आप क्या कह रही हैं दीदी . मैं सच में नहीं जनता क्या हुआ है . हाँ दोनों में झगड़ा ज़रूर हुआ है पर मैं वहां मौजूद नहीं था यही सच है . वर्ण मैं ऐसा कुछ नहीं होने देता . आप भरोसा नहीं होता तो मैं उसे यहाँ क्यों लता आपके कमरे में . मोहित को भी अभी तक नहीं पता क मीनल यहाँ थी रत भर. अब आप खुद उससे पूछ लो जाकर सच क्या है .

करिश्मा : सॉरी , मुझे लगा तुम मुझसे छुपा रहे हो . वैसे रत को नींद तो अचे से आयी न ?

अमित : जी अचे से आयी .

करिश्मा : माँ से मिले थे तुम ?

अमित : नं नहीं तो , मैं तो सुबह एक्सरसाइज करने चला गया था और अभी नीचे आया हूँ मोहित से मिल कर . आंटी को मैंने नहीं देखा बस कल hi मिला था जब आया था मोहित क साथ .

करिश्मा ( मन में ) सब जानती हूँ बच्चू क क्या क्या कर रहे थे तुम रत भर . जानवर हो पूरे , पता नहीं माँ कैसे झेल रही थी तुम्हारे मुसल को. मैं होती तो ..... उफ्फफ्फ्फ़ ये मैं क्या सोच रही हूँ .

करिश्मा: ाचा ठीक है तुम बैठो मैं माँ को देखती हूँ और फिर नाश्ता करते हैं साथ में.

करिश्मा दीदी आंटी क रूम में चली गयी और मैं बहार डाइनिंग टेबल पर बैठ गया .

उधर गाओं में मंजू सुबह उठी तो किचन में दीपिका अकेली काम में लगी थी. काम काम होने की वजह से दीपिका ने उसे आराम करने को कहा था . वैसे भी आठवां महीना चल रहा था उसका तो दीपिका उसे ज्यादा काम करने नहीं देती थी. उसका पूरा ध्यान रखा जाता था . अभी दिव्या नीचे नहीं आयी थी और कामिनी भी दोनों बच्चों को संभल रही थी. मंजू किचन में दीपिका को काम करते देख उसके पास आ कर काम करने लगी .

मंजू : सरे घर की जिम्मेदारी आप पर hi आ गयी है अकेली पर .

दीपिका : अरे तुम रहने दो न मैं कर लुंगी . वैसे इतना भी कोई काम नहीं है . ये तो रोज़ hi करते हैं हम लोग . बड़ी दीदी ने हमेशा सब खुद hi संभाला है और अब भी ज़बरदस्ती उन्हें बिठाना पड़ता है ऐसी हालत में भी वो काम करने से बाज़ नहीं अति. कामिनी दीदी ने भी मुझे कभी काम करने नहीं दिया . अब बचे छोटे हैं तो उनको सँभालने की जिम्मेदार दी है . वैसे भी कोई न कोई साथ में कम करवा hi देता है पर भैया गुस्सा होंगे तुमको यहाँ काम करता देख कर .

मंजू : कुछ नहीं कहेंगे भैया , और कहेंगे तो मैं भी कह दूंगी क मायका है मेरा ये तो मायके में काम करने से कैसे रोक सकते हैं वो मुझे .

दीपिका : ये भी सही है पर अमित को पता लगा क मैंने उसकी बुआ से काम करवाया है तो मुझसे नाराज़ हो जायेगा . उसकी नाराज़गी मैं मोल नहीं ले सकती .

मंजू : बहुत प्यार करती हैं न आप उससे ? वो भी आपको बहुत मंटा है .

दीपिका : प्यार तो तुम भी उससे बहुत करती हो उससे . हम दोनों का प्यार कोई अलग नहीं .

मंजू : मैं तो अभी कुछ दिन पहले उससे मिली हूँ. पर आप ने इतने सैलून तक उसे संभाला है . उसका बचपन देखा है , उसे बढ़ते हुए देखा है . आप उसे ज्यादा जानती हैं .

दीपिका : हाँ शायद , कह सकती हो तुम . पर प्यार वो तुमसे भी मेरे जितना hi करता है . पर लगता है तुम कुछ दुविधा में हो जो उससे दूर भाग रही हो .

मंजू : मैं दूर भाग रही हूँ ? किसने कहा ? मैं तो यहीं हूँ. और मुझे यहाँ वही तो लेकर आया है.

दीपिका ( मन में ) दूर hi तो भाग रही हो. इतना प्यार करने क बाद कोई कैसे रिश्ता बदल सकता है वो भी तब जब दोनों का प्यार निर्मल निर्दोष हो . तुम खुद को धोखा दे रही हो मंजू

दीपिका: सही कहा , पर मुझे लगता है जैसे तुम कहीं खोयी खोयी सी रहती हो . क्या बताओगी मुझे क ऐसा क्या हुआ है ? वैसे तुम मुझे अपनी दोस्त समझ सकती हो .

मंजू : ऐसा कुछ नहीं है . वैसे दोस्त वाली बात मुझे पसंद आयी . सब से ाचा रिश्ता यही होता है . अब हम दोस्त बन गए हैं तो क्या मैं कुछ पूछ सकती हूँ ?

दीपिका : दोस्त मानती हो तो फिर ऐसे इजाज़त क्यों मांग रही हो ? सीधा सीधा पूछो न .

मंजू : अमित को आप कितना अचे से जानती हैं ? मतलब वो आपसे सब कुछ शेयर करता है क्या ?

दीपिका : मैं उसे कितना जानती हूँ ये मैं कैसे कह सकती हूँ , हाँ शायद यहाँ जितने हैं उनमे से सबसे ज्यादा मैं जानती हूँ बड़ी दीदी को छोड़ कर . क्यूंकि उन्होंने माँ की तरह पला है उसे . मेरे करीब तो वो अभी हुआ है कुछ महीनो पहले . हाँ वो काफी कुछ मुझसे शेयर करता है . और अपनी मंजू मम क बारे में भी वो मुझे बताता रहता था जब भी बात होती थी .

मंजू ( घबरा कर ) कक क्या , क्या बताया था मेरे बारे में उसने ?

दीपिका ( मुस्कुरा कर ) यही क उसकी मंजू मम दिल की बहुत अछि हैं और उसकी मदद करती हैं पड़े में . एक बात उसने काम बताई थी तुम्हारे बारे में .

मंजू : क्या ?

दीपिका : उसने कहा था क तुम खूबसूरत हो . जबकि तुम खूबसूरत नहीं बहुत बहुत बहुत खूबसूरत हो. अगर उसके बराबर की होती तो पक्का वो तुम्हारे पीछे घूम रहा होता .

दीपिका की ये बात सुन मर मंजू की धड़कन तेज़ हो गयी और शर्म से उसके गाल लाल हो गए. दीपिका ने मंजू क भाव अचे से नोट किये थे .

मंजू : ये आप कैसी बातें कर रही हैं. मैं उसकी बुआ हूँ.

दीपिका : तब उसे कहाँ पता था क वो अपनी बुआ की तारीफ कर रहा है . वैसे एक बार दिल में जिसकी जो जगह बन जाती है वो हम छह कर भी बदल नहीं सकते . बाद में चाहे वक़्त कोई भी रिश्ता सामने ले ए . किसी क लिए दिल में प्यार हो तो वो वक़्त क साथ बढ़ता hi है काम नहीं होता .

‘ मंजू तुम यहाँ ? मुझसे कह देती कुछ चाहिए था तो ‘ दिव्या किचन में मंजू को देख कर बोली. वो भी दीपिका क साथ काम करवाने यहां आ गयी थी अपनी रूटीन से . दीपिका जो अभी और भी कुछ कहने जा रही थी एक डैम से दिव्या की बात पर मुस्कुराने लगी और बात बदल दी .

दीपिका : अभी आयी है दीदी , मैंने कहा भी क रहने दो पर ये मन hi नहीं रही

मंजू : क्यों न करूँ काम ? क्या ये मेरा घर नहीं ? आप hi बताओ दीदी , मैं काम क्यों नहीं कर सकती ?

दिव्या : इतने दिनों बाद आयी तो थोड़े दिन यहाँ बस आराम करो न . बाद में करती रहना . हम मन थोड़ा hi करेंगे .

दीपिका: देखा , अब जाओ जा कर बहार बैठो . बाद में बात करेंगे काम ख़तम कर क . मुझे भी तुमसे बहुत साडी बातें करनी है . लगता है आज टाइम मिल जायेगा बात करने का

दिव्या : करती रहना बातें , चाहो तो अभी चली जाओ . काम मैं कर लुंगी. वैसे अमित कब तक आने वाला है ? कुछ बताया उसने ?

दीपिका : नहीं अभी तो फ़ोन नहीं आया पर कह रहा था आज कॉलेज से हो कर hi शाम में वापिस आएगा .

दिव्या : ाचा , चलो कोई बात नहीं . मंजू ज़रा राधा को देखना वो तैयार हुई क नहीं .

मंजू : जी दीदी



इतना कह कर मंजू कमरे से निकल गयी और दीपिका दिव्या दोनों नाश्ता बनाने में लग गयी.
 
सॉरी भाई लोगो पर्सनल लाइफ में कुछ प्रोब्लेम्स हैं इस लिए बिजी हूँ थोड़ा . 1-2 दिन में अपडेट मिल जायेगा .
 
अपडेट कल मिलेगा दोस्तों , आज उसी पर काम शुरू किया है . कल तक पक्का मिल जायेगा . देरी क लिए माफ़ करना . हालत अचे नहीं हैं काम काज और घर की परेशानी में फंसा हूँ. अभी पता नहीं और कितना समय लगेगा पर आप सब को ज्यादा देर इंतज़ार करवाना भी ाचा नहीं लग रहा
 
अपडेट 253



‘ क्या बात है माँ आप ऐसे क्यों चल रही हैं? कोई प्रॉब्लम है क्या ? ‘ रमा आंटी थोड़ा धीमे चल रही थी और उनके चेहरे पर दर्द क भाव भी उभर रहे थे जिन्हे वो छुपाने की कोशिश कर रही थी .

रमा : नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं , वो सुबह बाथरूम में पाऊँ फिसल गया था तो लगता है थोड़ी मोच आ गयी है .

करिश्मा : मुस्कुरा कर ) इस उम्र में मोच आना अछि बात नहीं माँ , थोड़ा ध्यान रखा करिये काम करते वक़्त .

करिश्मा ने अपनी माँ क मज़े लेते हुए ये बात कही . वो तो जानती hi थी क उसकी माँ की चल क्यों बिगड़ी हुई है . मन में कसक सी थी क पाऊँ में मोच का बहाना कुंवारी लड़कियों को करना पड़ता है और यहाँ उसकी माँ कर रही है . सच में कितना दमदार हथियार है जिसने दो बच्चों की माँ और इतनी परिपाक औरत की ऐसी हालत कर दी .

रमा : हो जाता है बीटा कभी कभी कण्ट्रोल से बहार.

रमा आंटी ने ये बात मेरी तरफ देखते हुए कही . मैं तो उनको देख कर बस मुस्कुरा दिया. हम दोनों को करिश्मा दीदी ने भी देखा और मुस्कुरा कर किचन में चली गयी . कुछ देर में नाश्ता बन गया और हम सब ने मिलकर नाश्ता किया . मोहित ने सर दर्द का बहाना बना दिया था करिश्मा दीदी जब उससे पूछने गयी थी. इसी तरह नाश्ता किया और मैं मोहित क पास उसके कमरे में गया .

अमित : नाश्ता करने क्यों नहीं आया तू निचे ?

मोहित : यहाँ मेरा दिमाग फटा जा रहा है और तुझे नाश्ते की पड़ी है .

अमित : मज़े भी तो तू hi कर रहा था न उसके साथ , वो क्या नाम था उसका ,, हाँ रॉय . काफी मज़े किये तुमने तो . वैसे थी तो मस्त आइटम

मोहित : हंसी आ रही है तुझे ? यहाँ मेरी गांड फटी पड़ी है . पता नहीं मीनल को अब कैसे मानों .

अमित : अब बड़ी चिंता हो रही है तुझे उसकी . अगर तेरी तरह वो भी कल रत किसी क साथ …..

मोहित : गुस्से में ) बकवास बंद कर , ,,,,, वो ऐसी नहीं है. वो ऐसा कभी नहीं कर सकती . सॉरी ,, मीनल क बारे में ऐसी बात मुझे बर्दाश्त नहीं

मोहित ने गुस्से में मेरा कलर पकड़ लिया था. मुझे पता था वो मीनल से कितना प्यार करता है. मैं भी जान बुझ कर उसे कुरेद रहा था.

अमित : इतनी परवाह थी तो पहले सोचना था न. सोच उसपर क्या बीती होगी. गुस्सा तो उसे भी आया होगा न और गुस्से में इंसान कुछ भी कर सकता है

मोहित : यही सोच सोच कर तो दिमाग फटा जा रहा है. मैं उसका सामना कैसे करूँगा .

अमित : सोचना बंद कर और उससे जा कर बात कर . ऐसे दूर रहने से तो बात सही नहीं होगी न. वो गुस्सा होगी लड़ेगी बुरा भला कहेगी पर बात करने से hi तो हल निकलेगा .

रीमा क मामले में मैंने यही गलती की थी . उसी को यद् करते हुए मैंने मोहित को ये बात कही.

मोहित : वो मुझसे बात नहीं करेगी यार

अमित : गलती तूने की है इस लिए तुझे hi सुधर करना है अब. वो गुस्सा है पर तू अगर उसे मनाएगा नहीं तो वो और भी गुस्सा करेगी. तू अगर ऐसे hi दर क बैठा रहा तो कहीं वो तुझे छोड़ कर ….

मोहित : नहीं नहीं , ऐसा मत बोल यार. मीनल क बिना मैं नहीं रह सकता . मैं उससे बहुत प्यार करता हूँ.

अमित : तो फिर उसे जा कर मन पहले . इससे पहले क देर हो जाये

मोहित : तू भी साथ चल न , वो तेरी बात ज़रूर सुनेगी. तू उसे बताना क इसमें मेरी गलती नहीं है .

अमित : पहले तू जा कर उससे बात कर , ये तुम दोनों का मामला है . इसमें किसी तीसरे का कोई काम नहीं है. मैं भी उससे बात करूँगा पर पहले तू जा

मुझे तो पता था क मीनल अब शायद मेरी बात भी न सुने . मैंने भी तो कल रत उसे थप्पड़ मारा था . उसके बाद तो वो अब मेरी शकल भी शायद न देखे .

मोहित : मुझे नहीं लगता वो मेरी बात भी सुनेगी

अमित : अब यहाँ बैठा बकचोदी hi करता रहेगा या उसे मनाएगा ? यहाँ बैठे रहने से कुछ नहीं होने वाला . चल जा अब और पहले अपना हुलिया ठीक कर . मजनू बना हुआ है .

मोहित को मैंने ज़बरदस्ती उठा कर बाथरूम में धकेल दिया और खुद बहार आ गया . वैसे तो अब यहाँ मेरा कोई काम नहीं था पर कॉलेज प्रैक्टिस करने का सोच कर मैंने शाम को गाओं वापिस जाने का सोचा . मैं नीचे हाल में सोफे पर बैठा था और आंटी शायद अपने रूम में गयी थी आराम करने . इतने में करिश्मा दीदी तैयार हो कर आ गयी. घुटनो तक की शार्ट और ऊपर शर्ट पहने शायद वो ऑफिस जाने क लिए निकल रही थी. मुझे देख कर वो मेरे पास hi आ गयी .

करिश्मा : चलो चले

अमित : मैं ? कहाँ ?

करिश्मा : हाँ तुम , ऐसे हैरान क्यों हो रहे हो ? तुम्हे किसी से मिलवाना है .

अमित : किस्से ?

करिश्मा : तुम जानते हो उनको , जा कर देखोगे तो पता चल जायेगा . ये सरप्राइज है तुम दोनों क लिए .

अमित : पर मेरा दिल नहीं है .

करिश्मा : मुझे कुछ नहीं पता अब चुप चाप चलो वर्ण मैं निधि दीदी को फ़ोन कर क बता दूंगी तुम मेरी बात नहीं मानते .

करिश्मा दीदी ने नकली गुस्सा दिखते हुए कहा तो मैं मुस्कुरा कर चुप चाप उठ गया .

अमित : अरे उन्हें क्यों आप परेशां करती हैं. मैं चल रहा हूँ न . चलिए कहाँ चलना है . पर मैं पहले hi कह देता हूँ , दोपहर को मुझे कॉलेज जाना है.

करिश्मा : ाचा ाचा , वो बाद में देखेंगे पहले चलो .

करिश्मा दीदी क साथ उनकी कार में सवार हो कर मैं चल दिया . करिश्मा दीदी ड्राइव करते हुए बार बार मुझे देख रही थी और मुस्कुरा रही थी . हम अंकल क ऑफिस में में पहुँच गए . रिसेप्शनिस्ट हम दोनों को देख कर कड़ी हो गयी और विश किया .

रिसेप्शनिस्ट: मैडम मैंने उन्हें आपके ऑफिस में बिठा दिया है .

करिश्मा : ठीक है , तुम कॉफ़ी आर्डर कर दो और अभी किसी को मत भेजना ऑफिस में .

इतना कह कर करिश्मा दीदी आगे बढ़ गयी और मैं उनके साथ लिफ्ट में पहुँच गया .

अमित : हूँ किस्से मिलने वाले हैं ?

करिश्मा : अभी पता चल जायेगा . तुम बस चुप रहना और पीछे रहना .

मैं फिर खामोश हो गया पता नहीं किस्से मिलाने वाली थी दीदी जो ऑफिस में मुझे साथ लेकर आयी थी . खैर हम लिफ्ट से निकल कर करिश्मा दीदी क ऑफिस में पहुंचे . कांच का दरवाज़ा खोल कर दीदी आगे बरही और मैं उनके पीछे . चिर पर कोई लेडी बैठी थी जो फॉर्मल ड्रेस में hi थी. इससे पहले क वो कड़ी होती करिश्मा दीदी ने उन्हें बैठे बैठे hi पीछे से हुग कर लिया .

करिश्मा : कैसी हो दीदी ? आखिर आप को टाइम मिल hi गया यहाँ आने का.

‘ आना तो था hi , तुम तो आने से रही . वैसे भी आज कल ऑफिस भी ऑफ है तो सोच खुद hi मिल आऊं . ‘ उस लड़की ने बैठे बैठे hi कहा . जिस तरह दोनों मिल रही थी मुझे लगा क ज़रूर कोई जान पहचान वाली होंगी पर कौन? आवाज़ तो मुझे जनि पहचानी लगी पर समझ नहीं आ रहा था .

करिश्मा : तो , किसी और से भी मिलना चाहोगी आप ?

‘ सब से मिलना चाहूंगी , पर अंकल तो यहाँ हैं नहीं. अब तू hi बता किस्से मिलवाओगी ‘

करिश्मा : अगर मैं आपको उससे मिलवा दूँ जिससे मिलने आप यहाँ आयी हैं तो ?

‘ किसकी बात कर रही हो तुम ?’

करिश्मा : अब ज्यादा मत बनिए , वही जिसकी वजह से आप नाराज़ हो रही थी क अचे से बात नहीं की और चला भी गया .

‘ अमित की बात कर रही हो ? पर उसके तो कॉलेज ऑफ हैं न . और तुमने खुद hi बताया था क वो गाओं गया हुआ है ‘

करिश्मा : अगर मिलवा दूँ तो ?

करिश्मा दीदी ने मुझे आँखों से hi इशारा किया आगे आने का तो मैं दूसरी तरफ से घूम कर सामने आ गया . अब तक तो अंदाज़ा मुझे हो चूका था क ये कोई और नहीं सुमन बजाज है . जैसे hi मैं सामने आया तो मुझे देख कर उनकी ऑंखें बड़ी हो गयी और चेहरे पर ख़ुशी आ गयी . फिर उन्होंने एक बार करिश्मा दीदी की तरफ देखा जो मुस्कुरा रही थी .

करिश्मा : देखा , कहा था न मैंने . अब खुद hi शिकायत कर लो और जो भी गलियां देनी है दे लो

सुमन : करिश्मा दीदी को मरते हुए ) मैंने कब गलियां दी जो अब दूंगी . कैसे हो अमित ? तुम उस दिन कहाँ गायब हो गए थे ? अचे से बात भी नहीं हो पायी अपनी . मैंने कितनी देर इंतज़ार किया था तुम्हारा . पर तुम तो ऐसे गए जैसे लौटोगे hi नहीं . काम से काम आने से पहले एक बार मिल लेते .

करिश्मा : अरे बस बस दीदी , उसे भी तो बोलने दो कुछ .

सुमन : हाँ तो मैंने कब मन किया है. तुम भी बोलो कुछ ऐसे देखते hi रहोगे क्या ?

अमित : कैसी हैं आप ?

सुमन : अछि हूँ

करिश्मा : और अब तो और भी अछि हो गयी हैं. पता है उस दिन क बाद से जितनी बार भी बात हुई हर बार एक hi बात क उस दिन तुम कहाँ चले गए थे और आने से पहले मिले क्यों नहीं . ये तो मेरे साथ नाराज़ हो हो गयी थी जब मैंने बताया क मैं गाओं गयी थी और तुमसे बात नहीं करवाई .

सुमन : बस बस ज्यादा बातें न बना ऐसा कुछ नहीं है . तुम भी तो कुछ बोलो ये तो ऐसे hi कह रही है .

अमित : अब मैं क्या कहूं , वैसे आपके पास भी तो मेरा no. था न ? आप खुद hi बात कर लेती .

सुमन : मुझे लगा तुम बिजी होंगे गाओं में तो इस लिए नहीं किया .

इतने में कॉफ़ी लिए पेओन आ गया और हम कॉफ़ी पिने बैठ गए . करिश्मा दीदी खूब हंसी मज़ाक कर रही थी जिसमे सुमन भी उनका साथ दे रही थी और कहीं कहीं वो झूठी नाराज़गी भी दिखा देती . मैं कॉलेज जाना चाहता था पर करिश्मा दीदी और सुमन दोनों ने hi जाने न दिया . उसके बाद लंच का प्लान बना और मुझे उनके साथ जाना पड़ा . सुमन जी ने बताया की वो यहाँ अपना एक ऑफिस खोलने की तयारी कर रही हैं जिसमे करिश्मा दीदी उनकी मदद कर रही थी . 4 बजे तक तो मैं इन दोनों क साथ hi बिजी रहा .

उधर मोहित कल रत की वजह से परेशां था . अनजाने में hi उसने बहुत बड़ी गलती के दी थी . वो जनता था क मीनल कैसी है और वो मीनल क इसी नेचर से डरता भी था . वो प्यार भी बहुत करती थी पर जब गुस्सा करती थी तो मोहित क पसीने छूट जाते थे उसे मानाने में. मोहित की हिम्मत नहीं हो रही थी मीनल का सामना करने की पर जाना तो था hi . हिम्मत कर क उसने मीनल से मिलने का सोचा और घर से निकल गया . उसने कई बार मीनल का फ़ोन तरय किया पर वो स्विच ऑफ आ रहा था . घर क no. पर भी उसने तरय किया मगर फ़ोन उसकी माँ ने उठाया जिस वजह से मोहित ने बिना बात किये hi फ़ोन काट दिया. मीनल से बात करने की जब कोई सूरत नज़र न आयी तो उसने अपनी दोस्त का सहारा लिया जो स्कूल से hi दोनों की दोस्त थी पर कल रत वाली पार्टी में वो नहीं थी और न hi उन लोगों से उसका कोई वास्ता था . उसे दोनों की फ्रेंडशिप क बारे में पता था . मोहित ने उसे बताया क मीनल उससे नाराज़ हो गयी है और अब वो उसे मानना चाहता है . इस बात पर वो भी राज़ी हो गयी और मीनल को मिलने क लिए बुलाया पर मीनल क मूड तो कल रत से hi ऑफ था इस लिए उसने मन कर दिया . जब वो आने को मन कर दी तो मोहित में उसकी मिन्नत कर क मीनल को किसी तरह लेकर आने को कहा . मोहित की हालत देख उसने भी हामी भर दी और मीनल को लेने उसके घर चली गयी . मीनल ने तो साफ़ मन कर दिया उसके साथ कहीं जाने को पर घर पर किसी मज़बूरी का हवाला देकर वी मीनल को किसी तरह ले आयी. मोहित दोनों का इंतज़ार कर रहा था अपने दोस्त क बंद पड़े फ्लैट पर जिसकी चाबी उसके पास होती थी . वैसे तो उसका अपना भी फ्लैट था पर उसकी चाबी उसके पास नहीं उसकी माँ क पास थी जो की आगे अमित क पास पहुँच चुकी थी जिसका उसे पता नहीं था .

खैर मोहित फ्लैट पर मीनल का वेट कर रहा था . चलने से पहले उस लड़की ने मोहित को बता दिया था क वो आ रहे हैं . मीनल जब उस फ्लैट पर पहुंची तो उसे पता चल गया क ये सब मोहित की चल है . क्यूंकि वो मोहित क साथ पहले भी यहाँ आ चुकी थी कई बार .

मीनल : तुमने मुझसे झूठ बोलै ? ये सब मोहित क कहने पर कर रही है न तू ?

‘ सॉरी यार पर तुम दोनों hi मेरे दोस्त हो . तुम दोनों क बीच जो भी मिसुन्दरस्टण्डींग हुई है एक बार बात कर क उसे सोल्वे कर लो न ‘

मीनल : तू जानती भी है क्या किया है उसे धोखेबाज़ ने ?

‘ प्लीज यार तू एक बार उससे बात कर ले . वो बेचारा बहुत अपसेट है ‘

मीनल : होने दो , मुझे उससे क्या .

‘ प्लीज यार एक बार उससे बात कर ले . देख मेरी खातिर एक बार बात कर ले उससे ‘

मीनल : फाइन , अगर उसे अपनी बजती hi करवानी है तो ठीक है .

इतना कह कर मीनल गुस्से में फुंकरति फ्लैट का दरवाज़ा खोल कर अंदर घुस गयी. जहाँ मोहित उसका इंतज़ार कर रहा था . वो लड़की तो मीनल क तेवर देख कर बहार hi रुक गयी. उसे अंदाज़ा हो गया था क मामला गंभीर है और कहीं मीनल उसे hi न पेल दे . फ्लैट में मोहित जो कब से बेसबारा हो कर मीनल का इंतज़ार कर रहा था . मीनल क आते hi वो उठ कर खड़ा हो गया और मीनल की तरफ देखा . मीनल क चेहरे पर आज प्यार या स्माइल की जगह गुस्सा था. उसकी ऑंखें गुस्से से देहात रही थी . ऐसा लग रहा था क मीनल मोहित का सर hi फोड़ देगी .

मोहित : मीनल ी ऍम सो……..

मीनल : गुस्से में ) बात मत करो मुझसे , खुद को समझते क्या हो तुम ? कुछ भी करोगे और मैं चुप रहूंगी ? किसी क भी साथ गुलछर्रे उड़ाओगे ?

मीनल : मेरी बा…….

मीनल : मुँह बंद रखो अपना , आज मैं बोलूंगी तुम सुनोगे . मुझे बेवक़ूफ़ बना रहे थे इतने दिनों से ? सुनील में सच hi कहा था क तुम दोनों का आज भी चक्कर चल रहा है . मेरे साथ प्यार का नाटक कर रहे थे और मेरी पीठ पीछे रॉय क साथ मज़े कर रहे थे . ाचा हुआ कल तुम्हारा असली चेहरा सामने आ गया . वर्ण मुझे पता hi नहीं चलता क तुम्हारा असली रूप क्या है . तुम जैसा कमीना मैंने आज तक नहीं देखा . मेरे साथ झूठी कस्मे कहते रहे प्यार क झूठे वेड करते रहे . और एक पल भी नहीं सोचा उसके साथ मज़े करते हुए क मेरे ऊपर क्या बीतेगी ?

मोहित : मीनल प्लीज मेरी ……

मीनल : मुझे नहीं सुन्नी तुम्हारी कोई बकवास , तुम्हारी हर एक बात झूठी है तुम झूठे हो . पैसे का घमंड है न तुम्हे ? मैं थूकती हूँ तुम्हारे पैसे पर . मैंने सोचा था क तुम एक अचे लड़के हो पर तुम भी बाकियों जैसे निकले .

मोहित : तुम गलत समझ रही हो मैं ….

मीनल : मुझे कुछ नहीं सुन्ना , अगर ये hi सब मैंने किसी क साथ किया होता तो तुम क्या करते ? क्या देख पते मुझे किसी और की बाँहों में वो सब करते हो तुम कल कर रहे थे ? तुमने मेरा इस्तेमाल किया है . मैं सिर्फ इस्तेमाल की चीज़ हूँ तुम्हारे लिए . आज क बाद मुझे कभी अपनी शकल मत दिखाना . तुम जाओ अपनी उस रॉय क पास . मुझे तुम्हारी ज़रूरत नहीं . मैं अपने लिए कोई और ढूंढ लुंगी . जो तो हेलल

इतना कह कर मीनल पाऊँ पटकती गुस्से में फ्लैट का दरवाज़ा ज़ोर से मारती हुई निकल गयी . मोहित की तो हिम्मत भी नहीं हुई क वो आगे बढ़ कर मीनल को रोक ले. मीनल की कड़वी बातें सुन कर उसकी आँखों में आंसू आ गए थे . वो मीनल से प्यार करता था और मीनल ने उसे इतना कुछ सुना दिया . अब वो खुद को कोस रहा था क उसने आखिर रॉय क साथ वो सब क्यों किया . मीनल , जिसे वो अपनी ज़िन्दगी जनता था और उसी क साथ तमाम उम्र बिताना चाहता था वो आज उसे छोड़ कर चली गयी. मोहित अपने सर दोनों हाथों में पकडे वहीँ बैठ गया और अपने आपको गलियां देने लगा .

उधर गाओं में दोपहर क खाने क बाद कुछ वक़्त खली होता था तो सब अपने अपने कमरों में आराम कर रहे थे . राधा और नेहा को आरव क साथ बिठा कर दीपिका मंजू क कमरे में चली गयी .

दीपिका : सो तो नहीं रही थी ?

मंजू : अरे आप , आओ आओ , मैं बस अभी लेटने hi वाली थी .

दीपिका : मैं भी आराम करने वाली थी पर फिर सोचा अभी फ्री टाइम है तो अपनी नयी दोस्त क साथ थोड़ी बहुत बातें कर लूँ . इसी बहाने एक दूसरे क बारे में कुछ और पता चलेगा .

मंजू : बिलकुल सही , मैं भी बात करना चाहती थी आपसे .

दीपिका : ये आप आप कहना छोडो दोस्त बोलै है तो दोस्त की तरह hi बात करो . वैसे भी हम दोनों की आगे में ज्यादा फरक नहीं है और मैं इतनी जल्दी बूढी नहीं होना चाहती .

मंजू : हस्ते हुए ) क्या आप भी ,,,,, सॉरी , तुम ,, अब ठीक है न ?

दीपिका : हाँ अब बात भी करो कुछ .

मंजू : तुम कहाँ से बूढी हो गयी भला ? अछि भली जवान हो . भैया तो अभी भी तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ते होंगे . इसी लिए तो इतने सैलून बाद भी बचा पैदा कर लिया .

मंजू की बात सुन कर दीपिका क चेहरे पर आयी हंसी एक पल रुकी पर अगले hi पल उसने चेहरे पर फिर से मुस्कान सजा ली.

दीपिका : बचा तो तुम भी पैदा करने क लिए पूरी तरह तैयार हो. मैं तो कहती हूँ एक आध तुम भी कर hi लो.

मंजू : ये आप क्या कह रही हैं , मैं कैसे , मतलब ,,,,,,

दीपिका : क्यों इसमें इतना घबराने वाली कौन सी बात है ? यही सोच रही हो न क पति क बिना कैसे ? तो ढूंढ लो अपने लिए एक . अभी तुम्हारी उम्र hi क्या है . वैसे भी इतनी जवान दिखती हो क कॉलेज जाने वाले लड़के भी आहें भरते होंगे . अमित जैसा कोई देख लो अपने लिए .

दीपिका ने जान बुझ कर अमित का नाम लिया था और अब वो मंजू क चेहरे पर आते भाव देखने लगी .

मंजू : मुझे ज़रूरत नहीं है , मैं ऐसे hi ठीक हूँ . वैसे भी अब अमित तो है hi मेरे पास

दीपिका : हाँ हाँ वो तो है hi पर इतने बड़े बचे को गॉड में तो नहीं खिला सकती न . उल्टा वो तुम्हे गॉड में खिला सकता है .

दीपिका ने एक और वॉर कर दिया था मंजू पर और मंजू भी इस बात से असहज हो गयी थी . उसके मन में अमित की वही छवि आ गयी जब उसने सच में मंजू को अपनी गॉड में उठा कर उसकी दमदार चुदाई की थी .

मंजू : आरव भी तो है न और छोटू भी और थोड़े दिनों में एक और आ जायेगा बड़ी भाभी का भी .

दीपिका : वो तो है , फिर तो 3-3 हो जायेंगे . वैसे अपनी कोख से औलाद पैदा करने का अपना hi एक खास एहसास होता है जो और कहीं से नहीं मिल सकता . तुम्हे इस बारे में सोचना चाहिए .

मंजू : छोड़िये न इस बात का कोई और बात कीजिये .

दीपिका : तो तू hi बता क्या बात करनी है तुझे .

मंजू : मैं कुछ पूछूं तो क्या आप मुझे सच सच बताएंगी ?

दीपिका : अभी तक भरोसा नहीं हुआ क्या मुझ पर ?

मंजू : नहीं मतलब भरोसा तो है पर पैट नहीं आप बताना चाहे या न

दीपिका : अमित क बारे में कुछ पूछना है तुम्हे ? पूछो जो पूछना चाहती हो. मैं जो भी जानती हूँ बता दूंगी .

मंजू : वो मैं जानना चाहती थी क ,,,,, आप ने तो उसे बचपन से देखा है न . ऐसी कौन सी वजह थी क उसे मनहूस कहा जाता था ?

मंजू ने रुकते रुकते सोच सोच कर आखिर सवाल पूछ hi लिया जो उसे परेशां कर रहा था. मगर उसने किसी का नाम नहीं लिया था . शायद वो दीपिका क सामने इस बात को खोलना नहीं चाहती थी क उसे पता है कामिनी और दिव्या की नफरत क बारे में

दीपिका : तो तुम्हे पता चल गया इस बारे में , अछि बात है . वैसे ऐसी बातें जान कर कोई फायदा नहीं होता पर परिवार में अचे और बुरे दोनों hi पहलु होते हैं हैं जो परिवार क हर सदस्य को पता होने चाहिए . इसी से तो उन्हें एहसास होता है क वो परिवार का अटूट हिस्सा हैं . अक्सर बुराई बहार वालों से hi छुपाई जाती है . पर तुम इस परिवार का हम हिस्सा हो अब . अमित तो बचपन से hi बहुत प्यारा रहा है समझदार , शांत , आगे करि और सबसे प्यार करने वाला . ऐसे बचे से भला कोई प्यार कैसे न करेगा? मैं खुद उसके साथ बहुत खेला करती थी . दीदी ने उसे बहुत प्यार दिया जिससे उसे कभी लगा hi नहीं क वो उनका बीटा नहीं. और मुझे भी दीदी उसी क साथ लगाए रखती थी छोटी थी न सबसे. पर ये उसकी बदकिस्मती hi थी क कुछ लोग उससे कटे कटे से रहते थे पर इसमें उस मासूम का तो कोई कसूर था hi नहीं. कसूर था तो किस्मत का जो वो अनजाने hi ये सब झेलता रहा. तुम कामिनी दीदी और दिव्या दीदी क बारे में hi बात कर रही हो न? मगर उनका नाम नहीं लिया तुमने . वैसे भी आज अगर कोई उसे सबसे ज्यादा मानती हैं तो वो ये दोनों hi हैं. अगर जरुरत पड़ी तो वो दोनों जान भी दे देंगी उसके लिए .

मंजू जो नाम नहीं ले रही थी वो खुद दीपिका ने hi बता दिए तो मंजू उसका चेहरा गौर से देखने लगी

मंजू : तो ऐसी क्या वजह थी जो वो दोनों उससे नफरत करती थी पहले ?

दीपिका : मैंने कहा न , किस्मत . किस्मत का hi खेल था सारा जो उस एक्सीडेंट में तुम्हारे भैया भाभी और अमित क नाना नानी चल बेस . मगर वो अकेला बच गया . उस दिन उसका जन्मदिन था बस यही बात दिव्या दीदी क मन में बैठ गयी और वो उसे इसके लिए जिम्मेदार मानती रही इतने बरस .

मंजू : और कामिनी भाभी ?

दीपिका : उनका अलग किस्सा है पर उससे पहले तुमने और बहुत कुछ जानना है . बस इतना समझ लो क इस घर में जो आज इतनी खुशियां हैं न . वो सब अमित की वजह से हैं . और उसने hi अपने प्यार से सबको बदल दिया है . जहाँ पहले नफरत थी आज वहां उसके लिए प्यार hi प्यार है . वैसे तुम बताओ , अमित तुम्हारा भतीजा है ये बात जानने से पहले अमित की क्या जगह थी तुम्हारी ज़िन्दगी में ?

दीपिका ने अब एक ऐसा सवाल पूछ लिया था जिसने मंजू क दिल की धड़कने एक पल में hi तेज़ कर दी . अब मंजू कैसे बताती क अमित उसकी ज़िन्दगी बन चूका था इससे पहले . वो तो अमित को अपना सब कुछ मन चुकी थी और उसे अपना सब कुछ सौंप चुकी थी . एक प्रेमी एक पति या यूँ कहो जीने की छह .

मंजू : मैं तो बहुत खुश हूँ क वो मेरा अपना hi निकला . हमेशा hi उसे देख कर दिल से आवाज़ आती थी क वो मेरा अपना hi है . मगर सचाई देर से सामने आयी .

दीपिका : कितनी देर से ?

दीपिका क इस सवाल से मंजू अंदर से हिल गयी . मंजू क चेहरे पर बदले भाव दीपिका ने भी देखे . वो जानती तो सब कुछ थी पर वो मंजू का मन कुरेद रही थी .

मंजू : कक क क्या मतलब कितनी देर से ?? अभी तो पता चला न .

दीपिका : मेरे पूछने का मतलब क इससे पहले अमित की क्या जगह बन चुकी थी तुम्हारे मन में ? देखो मुझे दोस्त मन है तो सच बताना .

मंजू : मैंने बताया तो , इसके इलावा और कुछ नहीं है .

दीपिका : इसका मतलब तुम मुझे अभी तक अपना दोस्त नहीं मन रही वर्ण तुम ऐसे सचाई नहीं छुपाती . तुम्हे मुझ पर भरोसा हो न हो पर मुझे तुम पर है . और इसी लिए मैं तुम्हे कुछ बताना चाहती हूँ .

मंजू तो बस दीपिका का चेहरा देखे जा रही थी. दीपिका की बात सही थी इसी लिए मंजू मन में खुद को दोष भी दे रही थी और ये भी सोच रही थी क अगर उसकी ज़ुबान पर सचाई आयी तो पता नहीं दीपिका उसके बारे में क्या सोचेगी .

दीपिका : जानती हो मंजू अमित की मेरी ज़िन्दगी में क्या जगह है ? शायद मैं ठीक से समझा भी न पौन पर इतना समझ लो क मेर जीने की वजह वो hi है . या यूँ कहो क मेरी ज़िन्दगी उसी की दी हुई है .

मंजू : हैरान होते हुए ) क्या मतलब ???

दीपिका : मतलब ये क अगर आज मैं ज़िंदा हूँ तो उसी की वजह से और मेरी ख़ुशी मेरी हंसी सब उसी की दी हुई है . तुमने अभी ज़िकर किया था न इनका ( कमलेश ) तो उसके जवाब भी सुन लो. उन्होंने खुद मुझे मर पिट कर घर से निकल दिया था ये कह कर क मैं कहीं जा कर मर जॉन . मुझे छोड़ कर बहार बाज़ारू औरतों क साथ और न जाने किस किस क साथ मुँह कला कर रहे थे . मैं तो बस यहाँ जैसे सजा hi काट रही थी. दिखावे क लिए हंस लेती थी ताकि किसी को पता न चले मेरी हालत का . मेरा और कोई ठिकाना भी तो नहीं जहाँ मैं चली जॉन . गरीब माता पिता खुद कैसे जीवन काट रहे हैं ऐसे में उनके सर पर बोझ बन जाती क्या ? और वो कैसे ज़िंदा रहते अपनी बेटी को अपने अपना ससुराल छोड़ कर मायके रहती देख कर ? इस घर की इज़्ज़त बचने की खातिर मैं सब कुछ चुपचाप सेहती रही . इस घर में सब अचे हैं तो भला एक की गलती की सजा सबको कैसे देती मैं ? मेरा कसूर hi क्या था ? मुझे तना देते थे क मैं उन्हें एक बचा नहीं दे पई . जबकि कमी खुद में थी . मगर मैं फिर भी चुप रही . और जब मैंने उनके नाजायज़ संबंधों क बारे में सवाल उठाया तो शराब क नशे में मुझे मारा पिता ज़लील किया और धक्के मर कर आधी रत को घर से निकल दिया . मैं तो मरने hi जा रही थी पता नहीं अमित को कैसे पता चल गया शायद उसने सब कुछ देख लिया था . उस दिन उसने मुझे न सिर्फ मरने से बचाया बल्कि नयी ज़िन्दगी भी दी . और आज मेरे पास जो भी खुशियां हैं वो सब उसी की दें हैं . मैं मर कर भी उसका ये क़र्ज़ नहीं उतर सकती . ये समाज ये रिश्ते कुछ मायने नहीं रखता मंजू . ज़िन्दगी जीने क लिए प्यार की ज़रूरत होती है . वो प्यार हो हमें जीने की छह दे सके फिर चाहे वो इंसान रिश्ते में आपका कुछ भी लगता हो उससे फरक नहीं पड़ता . समाज क नियमो की चक्की में खुद को पिस्टे देखने से ाचा है उस प्यार को अपना कर हर सांस में पूरी ज़िन्दगी जी लेना . क्या पता किस्मत उस प्यार का साथ कब तक नसीब करे

दीपिका की ऑंखें नाम हो चुकी थी . गंभीर चेहरे पर भी मुस्कान थी जो अमित की वजह से hi थी . अपनी ज़िन्दगी क इस कड़वे सच को बयां करते करते दीपिका और hi किसी दुनिया में पहुँच गयी थी .

‘ ममी वो आरव तो रहा है शायद उसे भूख लगी है ‘ अभी कमरे में एक ख़ामोशी सो छाती थी दीपिका क रुकते hi और मंजू भी जैसे कहीं खो सी गयी थी . राधा ने दरवाज़े पर आ कर आरव क बारे में बताया तो दीपिका चेहरे पर मुस्कान सजाये उसके साथ hi उठ कर चल दी . जाते जाते मंजू को फिर आने का कह कर मुस्कुराती हुई वो चली गयी . मंजू तो बस उसे देखती hi रह गयी . अभी अभी दीपिका कितनी गंभीर और कितनी दुखी लग रही थी अपने दुखी ज़िन्दगी क बारे में बताते हुए और अब कैसे अचानक से वो चेहरे पर मुस्कान ले आयी . सच में एक दक्ष अभिनेत्री hi थी वो जो चेहरे से कहीं से भी ज़ाहिर नहीं होने देती थी कुछ भी . मंजू तो समझती थी क वो बहुत सुखी है . हर वक़्त उसके चेहरे पर ख़ुशी hi तो देखि थी मुस्कान क रूप में . पर अब जैसे मंजू वो हर पल यद् करने लगी थी जब जब उसने दीपिका को मुस्कुराते देखा . पता नहीं कितनी hi बार वो दुखी होगी मगर उसके कभी ये बात ज़ाहिर नहीं होने दी . मंजू खुद दर्द भरी ज़िन्दगी जी कर आयी थी कुछ समय पहले तक इस लिए उसे दीपिका क साथ कुछ ज्यादा hi सहानुभूति होने लगी थी एक पल में hi. और साथ hi उसकी बातें सुन कर उसे अमित पर मान भी हो रहा था . दीपिका क मुताबिक अमित उसके जीने की वजह था और उसकी हर ख़ुशी का कारन भी . ऐसा hi कुछ तो खुद मंजू भी फील करती थी कुछ दिन पहले hi . सोचते सोचते मंजू क दिमाग में दीपिका की एक बात यद् आयी और उसकी ऑंखें बड़ी हो गयी . दीपिका ने कहा था की कमी कमलेश में थी जो वो माँ नहीं बन पायी तो फिर वो माँ बानी कैसे ????

‘ शीना बीटा तुम आज कल कहीं घूमने नहीं जा रही क्या बात है ? आज कल तो कॉलेज भी बंद है तुम्हारा ‘ बलजीत राइ घर आया तो एक बार फिर उसे शीना रुपाली क पास मिली. अंदर से तो झुंझला hi गया पर ज़ाहिर नहीं किया .

शीना : मेरा कहीं जाने का मन नहीं है पापा . वैसे भी चची और रीमा क साथ ाचा लगता है मुझे .

बलजीत राइ : बीटा यही तो दिन हैं तुम्हारे मौज मस्ती करने क और तुम ऐसे घर पर बैठी रहती हो . मुझे ाचा नहीं लगता , आखिर इस दौलत शोहरत का क्या फायदा जब मेरे बचे hi इसका मज़ा नहीं ले सकते .

शीना : दौलत शौहरत से क्या होता है पापा , इंसान की पहचान उसके कर्मो से hi तो होती है . रही बात मज़े की तो वो यहीं है अपनी क साथ .

बलजीत राइ : अगर तुम्हे बहार किसी क साथ जाना ाचा नहीं लगता तो काम से काम रीमा को hi कहीं घुमा ले आओ . वो तो तुम्हारी छोटी बहिन है . उसका hi ख्याल कर लो

शीना : उससे पूछ लीजिये पापा पर वो भी यही जवाब देगी .

बलजीत राइ : ये तो कोई बात नहीं हुई , तुम उसे लेकर जाओ कहीं बहार घूम आओ किसी हिल स्टेशन पर या कहीं बहार .

शीना : आप hi कह कर देख लो पापा और अगर आप इतना hi ज़ोर दे रहे हैं तो फिर मेरे साथ रीमा क साथ चची भी जाएँगी .

बलजीत राइ अंदर से पूरा गुस्से से पागल हो रहा था पर फिर भी कण्ट्रोल कर रहा था . रुपाली तो बस मन hi मन शीना का धन्यवाद् दे रही थी .

बलजीत राइ : कभी अपनी माँ क साथ भी तो थोड़ा टाइम स्पेंड किया करो . क्या उसके साथ तुम्हे ाचा नहीं लगता ?

शीना : उनको फुर्सत hi कहाँ है पापा . उनकी किटी पार्टीज hi बहुत हैं. वैसे भी बचपन से चची ने hi तो माँ का प्यार दिया है मुझे और दूसरी बुआ .

बलजीत राइ : तो फिर अपनी बुआ को क्यों नहीं ले आती ? मैंने तुम्हे पहले भी कहा था.

मंजू : बुआ यहाँ नहीं हैं , और वो खुश हैं जहाँ भी हैं. वो यहाँ आना hi नहीं चाहती तो कोई क्या कर सकता है .

बलजीत राइ : फिर भी , हम उसके अपने हैं . क्या हम से पहले भी कोई है उसके लिए ? तुम उसे लेकर नहीं आ सकती क्या ?

शीना : मैं कोशिश कर चुकी हूँ पापा . वो नहीं आएंगी और अब आपको कैसे यद् आ गया क हम उनके अपने हैं ? अगर इस बात का आपको ख्याल होता तो वो आज हमारे साथ होती .

बलजीत राइ : षीणाआ ,,,,,, तुम अपने बाप से बात कर रही हो इतना भी यद् नहीं .

शीना : सॉरी पापा , पर सच यही है . आपकी वजह से hi वो यहाँ नहीं आना चाहती . अगर आप अब भी नहीं बदले तो शायद आप एक दिन अकेले रह जायेंगे .

बलजीत राइ : दिमाग ख़राब हो गया है तुम्हारा . मेरे लाड प्यार का गलत फायदा उठा रही हो तुम . मंजू को यहाँ आना hi होगा , मैं उसे यहाँ लेकर दिखाऊंगा तुम्हे . और तुम ( रुपाली) ये सब बातें तुम hi दाल रही हो न इसके दिमाग में. इसका अंजाम ाचा नहीं होगा .

शीना : चची को कुछ मत कहिये पापा वर्ण ाचा नहीं होगा . अगर चची को अपने कुछ भी कहा तो इनके साथ मैं भी आपका ये महल छोड़ कर चली जाउंगी . फिर ले आना अपने पैसों से एक बेटी .

बलजीत राइ शीना की बात सुन कर गुस्से में पागल हो गया . पर शीना क तेवर देख कर वो बिना कुछ कहे गुस्से से कमरे से बहार निकल गया . बलजीत राइ क जाते hi रुपाली और शीना दोनों की hi ऑंखें नाम हो गयी .

रुपाली : शीना मेरे लिए तुम ……

शीना : कुछ मत कहिये चची , मेरे होते कोई आपका कुछ नहीं बिगड़ सकता . अगर किसी ने आपको कुछ भी कहा तो आपके साथ मैं भी हमेशा क लिए ये घर छोड़ दूंगी . वैसे भी ये घर सिर्फ आपकी वजह से hi है . वर्ण यहाँ दौलत का घमंड और सोने चंडी की खनक hi है . पत्थर की ये दीवारें घर नहीं एक कैद खाना है . जहाँ प्यार और इमोशंस है hi नहीं .

रुपाली : शीनाआ मेरी बची ,,,,,, तू मेरी कोख से पैदा क्यों नहीं हुई . मेरी बची



रुपाली ने रट हुए शीना को गले से लगा लिया और शीना भी उसके सीने से लग गयी .
 
अपडेट 254



‘ मोहित कहाँ है आंटी ? ‘ करिश्मा दीदी क साथ जब मैं घर आया तो मोहित घर नहीं था . मैंने उसके बारे में आंटी से पूछा

रमा : पता नहीं सुबह से कहाँ गायब है . फ़ोन भी बंद है . आने दो आज इसकी अचे से खबर लेती हूँ .

अमित : फ़ोन बंद है ?

मोहित तो मीनल से मिलने गया था फिर फ़ोन क्यों बंद है . लगता है दोनों में ज़रूर झगड़ा हुआ होगा तभी साला फ़ोन बंद कर क कहीं बैठा होगा .

करिश्मा : आ जायेगा जायेगा कहाँ , गया होगा किसी से मिलने .

करिश्मा दीदी ने मेरी तरफ देख कर कहा और मुस्कुरा दी जैसे कह रही हो उन्हें पता है वो किधर गया है . यानि क मीनल से मिलने .

रमा : तुम बैठो मैं कॉफ़ी लती हूँ

अमित : अरे नहीं आंटी रहने दीजिये अभी बहार से खा पि के hi तो आ रहे हैं .

रमा : आअह्ह्ह वैसे गए कहाँ थे तुम दोनों ?

करिश्मा : कुछ नहीं माँ वो सुमन दीदी आयी थी तो उन्ही से मिलने गए थे . उस दिन भी ये गायब हो गया था तो वो मिलना चाहती थी इससे . वैसे एक गुड न्यूज़ है वो इसी शहर में अपना ऑफिस खोलने वाली हैं .

रमा : ये तो बहुत अछि बात है . इसी बहाने तू भी थोड़ा बहार तो आये जाएगी वर्ण घर से ऑफिस तक hi रह गयी है तू . अमित कुछ समझा इसे क ज़िन्दगी में अब आगे बढ़ने क बारे में भी सोचे .

करिश्मा : माँ आप ऐसे hi चिंता करती हो . मुझे थोड़ा टाइम दो . मैंने पहले भी आप से और पापा से कहा था .

रमा : हाँ हाँ कहा था , पर काम से काम थोड़ा घूम फिर तो लिया कर . तू तो किसी से मिलती भी नहीं .

अमित : आंटी ठीक कह रही हैं दीदी . आपको थोड़ा एन्जॉय भी करना चाहिए . वर्ण आप कभी आगे बढ़ hi नहीं पाएंगी

करिश्मा दीदी मेरी तरफ देख रही थी पर कोई जवाब नहीं दिया .

अमित : ाचा आंटी मैं अब चलता हूँ वर्ण देर हो जाएगी

रमा : रुक नहीं सकते क्या एक दिन ?

अमित : नहीं आंटी आप तो जानती हैं घर पर भी रहना ज़रूरी है .

रमा : पर जाओगे कैसे ?

करिश्मा : मैं छोड़ आती हूँ .

अमित : पर आप वापिस अकेली कैसे आएंगी वापिस

करिश्मा : वो मैं देख लुंगी .

रमा : वापिस आते रत हो जाएगी बीटा तुम वहीँ रुक जाना . सबके साथ रहोगी ाचा लगेगा .

मैंने एक बार फिर मन करने की कोशिश की करिश्मा दीदी को पर मेरी बात दोनों ने नहीं सुनी और करिश्मा दीदी ने कपडे चेंज कर क कार निकल ली . हम दोनों कार में बैठे और निकल लिए गाओं की तरफ

करिश्मा : तो , तुम्हे क्या लगता है मीनल मान जाएगी ? वैसे कोई ज्यादा सीरियस बात तो नहीं है न ?

अमित : मुझे नहीं लगता मत क वो इतनी जल्दी मानेगी . अगर मन जाती तो मोहित अभी आपकी जगह कार चला रहा होता .

करिश्मा : क्या पता वो मान गयी हो और दोनों अब कहीं मौज कर रहे हो.

करिश्मा दीदी ने ये बात सामने देखते हुए कही और उनके चेहरे पर एक स्माइल भी थी. उनके कहने का मतलब मैं समझ रहा था . पर उनसे उम्मीद नहीं थी वो ऐसे बात करेंगी

करिश्मा : चुप क्यों हो गए ? कॉमन , इतना शर्माओ मत . तुम तो दोनों को अचे से जानते हो , मैं बस अंदाज़ा लगा रही हूँ . बाकि तुम अचे से जानते हो क उनका रिलेशन कैसा है .

अमित : दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार करते हैं. पर मीनल कल रत की वजह से कुछ ज्यादा hi नाराज़ होगी शायद वर्ण वो ऐसे गुस्से में नहीं जाती सुबह

करिश्मा : हाँ मुझे भी लगा था , अब इतने नखरा तो उठाने hi पड़ते हैं लड़कियों क . वैसे तुम्हारी गफ का क्या नाम है ? कभी बताया नहीं तुमने .

अमित : कोई है hi. है बताऊंगा क्या .

करिश्मा : झूठे , कोई न कोई तो होगी . तुम्हे कोई लड़की कैसे नापसंद कर सकती है. तुम्हे तो कोई भी पहली नज़र में hi पसंद कर लेगी. वैसे तुम्हे कैसी लड़कियां पसंद हैं .

अमित : अब मैं क्या कहूं इस बारे में

करिश्मा : वैसे तुम्हे लड़कियां पसंद तो हैं न ? कहीं तुम्हे बड़ी उम्र की औरतें hi तो ……

करिश्मा दीदी सवाल सवाल पूछते पूछते रुक गयी और नज़रें चुराने लगी . उनके इस सवाल से मैं भी खामोश हो गया . वो ज़रूर आंटी क बारे में सोच कर ऐसा सवाल पूछ रही थी . जिससे मुझे शर्मिंदगी महसूस होने लगी.

करिश्मा : ी ऍम सॉरी

अमित : आप क्यों माफ़ मांग रही हैं . गलत तो मैं हूँ.

करिश्मा : प्लीज ऐसा मत सोचो . वो मैं बस तुम्हारी पसंद जानना चाहती थी .

फिर हम दोनों में कोई बात नहीं हुई और हम घर पहुँच गए . करिश्मा दीदी को देख कर सब खुश हुए . राधा और नेहा दीदी क साथ करिश्मा दीदी आरव क साथ खेलने में लग गयी. माँ और कामिनी ममी उनके साथ hi छोटू को लेकर बैठ गयी. मैं कुछ देर आराम करने का सोच कर अपने कमरे में चला गया . मैं अभी अपने कपडे बदल hi रहा था क मंजू बुआ मेरे लिए दूध का गिलास ले आयी .

मंजू : आ गए तुम , ये लो दूध पि लो.

अमित : अरे बुआ आप , आप रहने देती . ममी ले आती न मेरे लिए .

मंजू : क्यों? मैं नहीं ला सकती ?

अमित : मैंने कब कहा क नहीं ला सकती , लाइए .

मैंने बुआ क हाथ से दूध का गिलास पकड़ा और पीने लगा . बुआ मेरे पास बैठ कर मेरा सर सेहला रही थी और मुझे प्यार से देख रही थी

अमित : क्या बात है बुआ ऐसे क्या देख रही हैं आप

मंजू : कुछ नहीं बस ऐसे hi, इतने साल तुमसे दूर रही हूँ न . पता नहीं इतने साल तुमने कैसे गुज़ारे होंगे क्या कुछ सहा होगा . मैं तेरा बचपन देख hi न पायी.

मंजू क मन में बस वही सब बातें चल रही थी जो उसने नेहा और दीपिका से सुनी थी क अमित को क्या क्या कहा जाता रहा और कैसे उसे इग्नोर किया जाता रहा या नफरत मिली .

अमित : सब ाचा था बुआ , देखा नहीं सब कितना प्यार करते हैं मुझे . हाँ बस एक बुआ का प्यार hi नहीं मिला था यहाँ .

मंजू : वो कमी भी अब पूरी कर दूंगी . अब तो मैं आ गयी हूँ न . अब कभी तुमसे दूर नहीं जाउंगी .

अमित : जाने भी नहीं दूंगा मैं

‘ क्या बातें हो रही हैं बुआ भतीजे में ज़रा हमें भी तो सुनाओ ‘ दिव्या मौसी भी कमरे में आ गयी और हमारे पास hi बैठ गयी .

मंजू : कुछ नहीं दीदी , बस ऐसे hi . इतने साल मैं इससे दूर थी न तो सोच रही थी पता नहीं क्या क्या हुआ होगा इन सालों में . कभी किसी ने इसे डांटा भी होगा बुरा भी कहा होगा .

मंजू की इस बात पर दिव्या को भी एहसास हुआ क वो भी तो इतने साल अमित से कटी कटी रही और उससे नफरत करती रही .

अमित : ऐसा कुछ नहीं है बुआ , आप hi बताओ न मौसी . यहाँ मुझे सब कितना प्यार करते हैं

दिव्या : तुझसे कोई नफरत कर भी कैसे सकता है . वो लोग पागल hi होंगे जो तुझे प्यार नहीं करेंगे . जिनसे गलतियां हुई हैं अब तो उन्हें भी अकाल आ गयी है .

दिव्या मौसी की बात सुन कर मैंने उनका चेहरा देखा तो वो झूठी मुस्कान दिखा कर अपने भाव छिपाने लगी

मंजू : जो भी हुआ सो हुआ पर मैं खुश हूँ क आप सब ने इसे इतना प्यार दिया . इतना प्यार तो मैं भी न दे पति इसे .

दिव्या : प्यार कभी कम या ज्यादा नहीं होता मंजू. हर किसी की अपनी एहमियत होती है जिसकी तुलना नहीं की जा सकती . चलो नीचे आ जाओ भाभी बुला रही हैं. और तुम अब क्या लेने वाले हो

अमित : अभी तो थोड़ा आराम करना चाहता हूँ अगर आपकी इजाज़त हो तो

दिव्या : ठीक है करले आराम वैसे भी अभी कुछ खास काम नहीं है .

इतना कह कर बुआ और मौसी नीचे चली गयी . और मैं कपडे बदल कर बीएड पर पसर गया . अखाड़े में तो अब जाना पॉसिबल नहीं था क्यूंकि देर हो चुकी थी तो सोचा आराम hi कर लिया जाये . बीएड पर लेते लेते मेरी आंख लग गयी नींद खुली जब राधा ने मुझे आ कर जगाया .

राधा : उठो ,,, उठो न कब तक सोते रहोगे . नीचे सब तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं .

राधा क जगाने से मैं उठा और घडी देखि तो 8 बज चुके थे यानि क रत क खाने का टाइम था .

अमित : बाप रे इतना टाइम हो गया .

राधा : अब चलो नीचे , मां जी बुला रहे हैं . खाना नहीं खाना ?

अमित : तुम चलो मैं अत हूँ

राधा : नहीं , ममी ने कहा क साथ लेकर आना . क्या पता तुम फिर से सो जाओ

अमित : ाचा बाबा ठीक है , मैं हाथ मुँह धोकर आया .

हाथ मुँह धोकर मैं राधा क साथ hi नीचे आया और फिर सबके साथ खाना खाया . थोड़ी बहुत बातें चलती रही . बाबा और माँ तो करिश्मा दीदी को hi बीच में बिठा कर उनकी खातिर दरी करते रहे घर परिवार की बातों क साथ . इधर मंजू बुआ मेरे साथ बैठी मुझे प्यार से खिला रही थी. उनके व्यव्हार में मैं फरक देख रहा था . खाने क बाद सब अपने अपने कमरों में चले गए . नेहा दीदी और राधा एक कमरे में सो गयी और करिश्मा दीदी को मंजू बुआ क साथ सोने को बोल दिया गया . मैं भी अपने कमरे में जा कर लेट गया . अभी थोड़ी देर hi हुई थी क दिव्या मौसी मेरे लिए दूध का गिलास ले कर आ गयी .

दिव्या : लो दूध पि लो

अमित : मौसी आप ? मुझे आवाज़ दे देती

दिव्या : मैं ले आयी तो क्या हो गया . चल अब दूध पि ले और मैं आज यहीं सोने वाली हूँ तेरे साथ. कोई दिक्कत तो नहीं है न ?

अमित : नहीं नहीं मुझे क्या दिक्कत होगी .

मैंने दूध का गिलास खली किया और बीएड पर लेट गया . जबकि मौसी बीएड पर तक लगा कर बैठ गयी . कमरे में इस वक़्त जीरो लाइट का बल्ब रोशन था . घर में सब अपने अपने कमरों में जा चुके थे .

अमित : क्या हुआ मौसी , नींद नहीं आ रही क्या ?

दिव्या : नींद कैसे आएगी जब मन में बेचैनी हो

मौसी की बात सुन कर मुझे लगा मौसी कुछ परेशां हैं तो मैं भी उठ कर उनके साथ बैठ गया .

अमित : क्या बात है मौसी आप कुछ परेशां लग रही हैं .

दिव्या : नहीं ऐसी कोई बात नहीं है वो बस

अमित : मुझे नहीं बताएंगी?

दिव्या : तेरी hi तो बात है तो बताउंगी क्यों नहीं , वो आज मंजू ने जो बात कही उसे सुन कर मुझ खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा है क मैंने तेरे साथ इतने बरस कितना गलत किया .

अमित : आप ने कुछ गलत नहीं किया मौसी और वैसे भी अब तो आप मेरे साथ हैं न . और मैं जनता हूँ मुझे सब से ज्यादा प्यार आप hi करती हैं .

दिव्या : कितनी आसानी से कह देता है तू ये सब , क्या तुझे कभी मुझ पर गुस्सा नहीं अत था जब मैं तेरे साथ ऐसे गुस्से से नफरत से बात करती थी ?

अमित : मुझे तो कभी ऐसा नहीं लगा क आप मुझसे नफरत करती थी. मैं शुरू से hi जनता था आप मुझसे से बहुत प्यार करती हैं इसी लिए तो आप मेरी हर बात पर नज़र रखती थी चाहे आप मुझसे बात करे या न करे .

दिव्या : फिर भी मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था तेरे साथ . मैं बहुत बुरी हूँ .

अमित : ख़बरदार जो मेरी प्यारी मौसी को आपने बुरा कहा तो. मेरी दिव्या मौसी दुनिया में सब से प्यारी हैं और सब से ज्यादा प्यार मुझे करती हैं . राधा से भी ज्यादा

मेरी बात पर मौसी की आँखों में जो आंसू रुके हुए थे वो छलक पड़े और उन्होंने मेरी तरफ केवट लेकर मुझे गले से लगा लिया .

दिव्या : बहुत बुरी हूँ मैं बहुत बुरी , तुझसे इतने साल दूर रही . तुझे जो प्यार देना चाहिए था वो नहीं दिया .

अमित : तो अब दे दीजिये , अब कौन सा देर हुई है.

मेरी बात पर मौसी बोली तो कुछ नहीं पर उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में और कास लिए और मेरे चेहरे पर चुम्बनों की बरसात कर दी . मौसी की आँखों से बहते आंसू भी मेरे चेहरे को भीगा रहे थे और साथ hi उनके गीले होंठ. मैं तो बस उनके प्यार में खोता जा रहा था उनकी ममता छलक रही थी मुझ पर .

अमित : बस बस मौसी , इतना गीला कर डौगी तो नहाना पड़ेगा

दिव्या : धत्त , ज्यादा बातें मत बना , अभी तो कह रहा था प्यार करने को और अब बातें बनाने लगा .

अमित : अब इतना प्यार एक दिन में हज़म नहीं होगा न मौसी . थोड़ा थोड़ा कर क रोज़ कर लिया करो . अब आराम से लेट जाओ वर्ण ऐसे hi सुबह हो जाएगी .

दिव्या : तू रोज़ मेरे पास रहा कर तुझे रोज़ hi इतना प्यार करुँगी. चल अब सोते हैं अपनी बाज़ू इधर कर मुझे तकिया चाहिए

अमित : तो तकिया ले लो न

दिव्या : ये hi मेरा तकिया है चल कर इधर

मौसी ने लेट ते हुए मेरी बाज़ू फैलाई और उस पर सर रख कर मेरी तरफ करवट लेकर लेट गयी. उनका एक हाथ मेरी छाती पर था और वो मुझे hi देख रही थी . मौसी क प्यार से मेरा मन भी संतुष्ट सा हो गया था और मेरी आंख भी उन्हें देखते हुए लग गयी .

कितने hi दिनों बाद आज फिर एक बार दिव्या का मन भर गया था और वो अमित क साथ थी . इसे सोया हुआ दिमाग कहें या उसकी अधूरी इच्छाएं जो केवल अमित को hi अपने प्यार क रूप में देखती थी. नींद में अमित क साथ करवट क बल सो रही दिव्या सपनो में खोयी उसके जिस्म से ऐसे लिपट रही थी जैसे चन्दन से सांप. रत को सोने से पहले मैक्सी में लेती दिव्या का जिस्म जैसे किसी भी हरकत क लिए फ्री था . एक हाथ अमित क ऊपर डाले वो सोई थी और अब नींद में hi उनकी दायीं तंग भी अमित क ऊपर थी और घुटना उसके काम दंड को अनजाने में hi दबा रहा था जिससे उसमे भी हरकत होने लगी और वो जाग उठा . अमित क साथ लिपट ते हुए वो इतनी ज्यादा करीब आ गयी क अपनी छूट को उसी जांग से रगड़ने लगी और खुद लगभग उसके ऊपर hi सवार होने को थी . कुछ देर तक तो उसका अकेली का hi जिस्म हरकत कर रहा था पर नींद से जगे लैंड ने अपना असर दिखाया और अमित का जिस्म भी हरकत में आ गया . शायद वो भी अब ऐसा hi कोई सपना देखने लग गया था . दिव्या क मुँह अमित क मुँह क करीब hi था और नींद में hi वो उसकी गर्दन पर चुम रही थी . अमित नींद में hi थोड़ा सा पलटा और दिव्या को आगोश में ले कर उसे चूमने लगा . इस तरह करवट क बल होने से अब उसका लैंड जो दिव्या की तंग क नीचे था वो अब आगे बढ़ कर छूट क सामने आ गया और चिपकने से छूट पर दस्तक देने लगा . इतने में hi दिव्या और मचल उठी और अपनी कमर को आगे धकेल कर अपनी छूट उस काम दंड पर रगड़ने लगी . ये सब नींद में hi हो रहा था पर ऐसा लग रहा था जैसे काम कला क दो माहिर अपना जलवा दिखा रहे हो जो बिना सेक्स क hi पानी निकलने में माहिर हो . अमित क हाथ अपने आप उन उभरे हुए पहाड़ों पर आ कर कास गए जिससे छूट का दबाव और भी ज्यादा लैंड पर बढ़ गया और नींद में ऐसे लगा जैसे अमित लैंड को छूट में धकेलने वाला हो . दिव्या का डायन चूतड़ अमित क बाएं हाथ में था और दिव्या की दायीं तंग भी पूरी तरह अमित क ऊपर चढ़ गयी थी . मैक्सी खिसक कर घुटने से भी ऊपर आ गयी थी जिससे उसकी नंगी जांघ बहार आने को उतावली थी . दोनों की ऑंखें बंद थी पर होंठ एक दूसरे को ढूंढते हुए आखिर आपस में जुड़ गए और दोनों प्रेम क्रीड़ा में डूबे एक दूसरे को चूमने लगे . दिव्या क चुके अमित की छाती में धंस रहे थे . काम वासना में वो थोड़े ठोस हो गए थे और अपना दबाव अमित की छोड़ी छाती पर बना रहे थे पर इससे भी दिव्या क जिस्म की गर्मी और ज्यादा बढ़ रही थी . दिव्या जो पता नहीं कितने बरस पहले चूड़ी थी इस लिए ज्यादा देर खुद को रोक नहीं पति थी चाहे वो सपना hi देख रही हो. अब भी वैसे hi हुआ और उसका जिस्म अकड़ गया और झटके लेने लगा . अगले hi पल छूट ने अपना फाटक खोल दिया और छूट रास भर भर क बहार बहने लगा . सपने में hi अमित क साथ चुदाई करती दिव्या की इस स्खलन से आँख खुल गयी और जब उसके अपनी हालत देखि तो जैसे खुद को अभी भी सपने में hi पाया . अमित क होंठों से जुड़े होंठ उसके एक पल अलग किये और अगले hi पल खुद hi उन्हें चूमने लगी और ऐसे चूसने लगी क जैसे कभी अपने पति क भी कभी नहीं चूमे थे . उसका जिस्म अभी भी झाड़ रहा था और छूट से निकले पानी ने पेंटी क साथ साथ मैक्सी को भी पूरा गिला कर दिया था . छूट क आसपास जांघें तक चिपचिप हो गयी थी . अपने चूतड़ पर अमित क हाथ का जब उसे एहसास हुआ तो उसका जिस्म जैसे झाड़ता हुआ और भी ज्यादा उत्तेजित होने लगा . वो खुद से hi अपने स्तनों को और ज्यादा अमित की छाती में रगड़ने लगी . कुछ देर अपनी कामवासना में अमित क साथ अपना जिस्म रगड़ने क बाद जब उसका काम ज्वर कुछ काम हुआ और उसे अपनी दशा का भान हुआ तो वो अमित से पीछे सरकने लगी . अमित तो नींद में hi था इस लिए ज्यादा परेशानी नहीं हुई पर पीछे हैट कर जब दिव्या की नज़र अमित क लोअर में बने तम्बू पर गयी तो नज़रें वहीँ जैम सी गयी . अमित का लोअर वहां से कुछ गीला सा लग रहा था दिव्या को जब उस गीले पैन का एहसास हुआ तो उसने अपनी मैक्सी को देखा जो छूट क आगे से ऐसे भीग चुकी थी जैसे उसका पेशाब बीच में hi निकल गया हो . अपनी हालत पर खुद hi शर्मिंदा होती वो बीएड से उतरी और एक बार फिर अमित को निहार कर शर्माती हुई बाथरूम में घुस गयी .

दिव्या : मन में ) ये मुझे क्या हो जाता है जब भी उसके साथ होती हूँ . मेरी बेचैनी कब शांत होगी . ये मुझे पागल कर देगी. उसे तो पता भी नहीं क उसने अभी अभी क्या कर दिया है . मेरी नींद उदा कर खुद चैन से सो रहा है . ये मुझे क्या होता जा रहा है .

खुद को पानी से अछि तरफ साफ़ करने क बाद दिव्या वापिस कमरे में आयी और अमित को होंठों पर चूम कर अपने कमरे में चली गयी क्यूंकि अब उसे कपडे बदलने थे .

उधर मोहित देर से घर आया , आज घर पर केवल रमा hi थी और किस्मत से वो उस वक़्त कमरे में थी इस लिए उसे मोहित की हालत का पता न चला . मोहित नशे में चूर था . मीनल क नाराज़ होने की वजह से उसने आज शराब पि थी वो भी होश खोने तक . घर भी किसी और क साथ hi पहुंचा था वो . लड़खड़ाते कदमो से वो अपने कमरे तक पहुंचा और बीएड पर गिरते hi सो गया . उसके ज़ेहन में मीनल क इलावा कुछ और नहीं था और नींद में भी वो उसे hi पुकार रहा था .

‘ उस साले को मैं छोडूंगा नहीं मादरचोद ने सारा प्लान चौपट कर दिया . ाचा भला मीनल को लाइन पे ले आया था मैं और छोड़ने hi वाला था क पता नहीं कहाँ से वो गांड मरवाने आ गया बीच में . तू बहनचोद बहार क्या कर रहा था . तू रोक नहीं सकता था उसे ? ‘ सुनील की हालत कुछ ठीक नहीं थी पर डॉ से मलहम पट्टी करवा कर अब वो अपनी सिकाई करवा रहा था क उसकी सूजन कुछ काम हो जाये और उसके साथ hi रॉय मोना और कमल मौजूद थे . सुनील कमल पर भड़क रहा था जबकि उसकी भी हालत कुछ अछि नहीं थी .

कमल : मैं क्या करता , साला पता नहीं कब पीछे से आ गया और मुझे उठा कर पटक दिया . था भी तो साला भैंसा , मुझे मौका hi नहीं मिला और मैं बेहोश हो गया .

सुनील : चुप कर सेल अब बातें न बना . एक काम तुझे दिया था पर तू तो बहार लैंड हिलने में लगा होगा . तुझे कैसे पता चलता कुछ . साला वीडियो भी बनाई तो वो भी ऐसे hi जाने दी और तू साली वैसे तो बड़ी बड़ी बातें करती है उसे काबू में नहीं कर पायी . तेरे भोसड़े में तो कील ठोंक दूंगा मैं . अब आना कभी मेरे पास फिर बताऊंगा तुझे .

मोना : अब इसमें मेरी क्या गलती है , मैंने तो पूरी कोशिश की थी पर साला कुछ ज्यादा hi तेज़ निकला . मुझसे ऐसे लिपट रहा था क मुझे लगा वो लाइन पर आ गया और फिर मुझे कमरे में धक्का देकर बहार से दरवाज़ा बंद कर दिया .

सुनील : चुप कर साली चैनल , तुझे कहा था उसे बेहोश कर देना पर तू तो अपनी छूट चुदाई में लग गयी . रंडी साली

रॉय : कूल डौन सुनील इसे क्यों ऐसे बोल रहे हो

सुनील : तू भी चुप कर रंडी , तूने तो मज़े कर लिए न उस हरामज़ादे मोहित क साथ . लौड़े तो मेरे लग गए . साला इतना ाचा प्लान बनाया था इन दोनों चूतियों की वजह से फ़ैल हो गया .

रॉय : अपना दिमाग ठीक करो , शायद वो भी हिल गया है . खुद तो बड़े हीरो बनते फिरते हो फिर तुम क्यों मार खा गए उससे ? मेरी तरह सीधे अपना काम करते पर नहीं तुम दोनों को तो पूरी फिल्म बनानी थी न . पूरे मज़े मरने थे अब भुगतो.

सुनील : बकवास बंद कर साली , मैंने सोचा था मीनल को हमेशा क लिए अपनी रंडी बना लूंगा वीडियो बना कर . वो तो पूरी तैयार भी हो गयी थी छोड़ने क लिए पर सेल उस हरामी ने सरे प्लान पर पानी फेर दिया

रॉय : अब तक तो वो सब समझ गया होगा और उसने मोहित को भी बता दिया होगा . तुम्हारी वजह से अब वो मुझसे भी नहीं मिलेगा . पर हैरानी की बात है अभी तक मोहित ने हम में से किसी को फ़ोन क्यों नहीं किया .

मोना : हो सकता है उसे लगा हो ये सब नार्मल है क्यूंकि मैंने उसे तुम्हारे और मोहित क बारे में बता दिया था .

रॉय : तेरा दिमाग बस चुदाई में hi चलता है. इतना भी बुद्धू नहीं वो वर्ण पहले तेरे मज़े न लेता वो . ज़रूर उसने ये बात मोहित को नहीं बताई या फिर हो सकता है वो समझ रहा हो सिर्फ सुनील और कमल hi गलत काम कर रहे थे . अगर ऐसा है तो फिर मैं कहीं से भी गलत नहीं हो सकती . तुमने ( मोना ) उसे फ़साने की कोशिश की थी इस लिए वो तुम पर भी शक करेगा . अगर उसे सजा देनी है तो मैं कुछ कर सकती हूँ .

सुनील : तू क्या करेगी अब

रॉय : देखते जाओ , पहले मोहित से मिल कर पता लगाती हूँ क उसे कुछ पता है या नहीं . अगर उसे कुछ न पता हुआ तो फिर समझ लो उस पहलवान को मैं काबू कर hi लुंगी. एक बार वो काबू आ गया तो फिर मोहित और मीनल भी काबू आ जायेंगे . वैसे भी साला था तगड़ा , अगर मोहित न होता तो उसे hi अपने ऊपर चढ़ा लेती मैं. एक बार तो अब उसे टेस्ट करने क देखना hi पड़ेगा क क्या चीज़ है वो .

सुबह मेरी आंख जल्दी खुली और मैं अखाड़े चला गया . कल शाम की छुट्टी हो गयी थी इस लिए दुगनी म्हणत की और खूब पसीना बहाया .

‘ सुबह सुबह तुम दोनों किधर जा रही हो तैयार हो कर ? ‘ घर आ कर मैं सब क साथ नाश्ता करने बैठा तो दिव्या मौसी क इस सवाल से मेरा ध्यान राधा और नेहा दीदी पर गया जो ऐसे कपडे पेहेन कर बैठी थी जैसे बहार जा रही हो कहीं.

करिश्मा : मौसी जी इन दोनों को मैं अपने साथ ले जा रही हूँ. देखिये न नैना और करुणा दोनों कितनी मस्ती करती हैं और ये दोनों घर से निकलती hi नहीं . अब तो निधि दीदी भी बहार चल पड़ती हैं कभी कभी मेरे साथ ऑफिस से hi. तो मैंने सोचा आज इन दोनों को अपने साथ ले जाती हूँ . थोड़ा घूम फिर भी लेंगे और शॉपिंग भी हो जाएगी . वैसे भी तो छुट्टियां hi हैं आज कल .

विजय : ये तो तुमने बहुत ाचा सोचा बेटी , वाकई में ये दोनों घर से निकलती hi नहीं. निधि भी अब नौकरी की वजह से निकलने लगी है या तुम्हारे साथ की वजह से . वर्ण वो भी ऐसी hi थी . तुम इन दोनों को साथ ले जाओ और साथ में इसे भी ले जाओ . अकेली लड़कियों का जाना ठीक नहीं

बाबा ने मुझे भी साथ जाने का फरमान सुना दिया था . अब मैं मन कैसे कर सकता था वैसे भी मुझे खुद ाचा लग रहा था क राधा और नेहा दीदी आज बहार निकल रही हैं. दोनों की दुनिया तो जैसे किताबों और घर की चारदीवारी में hi थी.

मंजू : बिलकुल सही कहा भैया मैंने भी देखा है ये दोनों ज्यादा बात भी नहीं करती और कुछ मांगती भी नहीं कभी किसी से. इनके बारे में तो खुद hi सोचना पड़ेगा . पता नहीं ज़िन्दगी कैसे गुज़रेंगी ये दोनों

गौरी : दोनों इतनी अछि हैं क कोई राजकुमार hi भेजेगा का भगवन इनके लिए . और मंजू तू घर पर क्या करेगी , तू भी साथ चली जा इनके .

दिव्या : हाँ हाँ , तुम भी चली जाओ

मंजू : नहीं नहीं मैं नहीं

अमित : ये क्या बात हुई बुआ आप क्यों नहीं चल सकती ? आप को भी चलना होगा .

मेरी बात का समर्थन करिश्मा दीदी नेहा दीदी और राधा ने भी किया . और बाकि सब ने भी .

मंजू : नहीं फिर कभी , अभी तुम सब बचे मिल कर घूम आओ फिर हम सब बड़े चलेंगे .

कामिनी : मंजू तू चली आज , हम लोगों का पता नहीं . तू चाहे यो दिव्या को भी साथ ले जा .

मंजू : नहीं भाभी आज इनको जाने दो. हम साथ होंगे तो बात तो वही रहेगी न . ये हम लोगों क दायरे से बहार निकलेंगे hi नहीं फिर खुद फैसले कैसे लेंगे . मैं अगली बार पक्का चलूंगी . अभी तुम लोग जाओ .

बुआ नहीं मणि पर उनकी बात भी सही थी इस लिए बाकि सब ने भी समर्थन किया . बाबा ने मुझे कमरे में बुला कर अपनी तरफ से शॉपिंग और खरच क लिए पैसे दे दिए . फिर हम चारो करिश्मा दीदी क साथ उनकी कार में निकल गए शहर घूमने. पहले हम सीधा मॉल में गए और वहां शॉपिंग शुरू की.

करिश्मा : ये कैसा रहेगा ?

करिश्मा दीदी ने एक टॉप राधा क लिए सेलेक्ट किया पर राधा उस पर कोई जवाब hi नहीं दे रही थी तो मैं hi बोलै .

अमित : दीदी , इन दोनों को वेस्टर्न पसंद नहीं है . अगर आपको इनके लिए शॉपिंग करनी है तो इंडियन ड्रेसेस hi देखो .

मेरी बात समझ कर करिश्मा दीदी फिर वहां ले गयी जहाँ इंडियन ड्रेसेस थी पर उनमे नए नए डिज़ाइन और फेशिओं की ड्रेसेस थी . करिश्मा दीदी क साथ मैं भी अपनी पसंद से ड्रेस देखने लगा. मैंने एक एक ड्रेस दोनों क लिए सेलेक्ट की जिसे दोनों ने ख़ुशी ख़ुशी रख लिया. कुछ ड्रेस करिश्मा दीदी ने भी दोनों को लेकर दी . करिश्मा दीदी क लिए भी दोनों में ड्रेस पसंद की. नेहा दीदी को तो करिश्मा दीदी अपने साथ ले कर कपडे देख रही थी पर राधा को तो जैसे इन सब में इंटरेस्ट hi नहीं था. वो मेरे पास hi आ गयी.

अमित : तुम यहाँ क्या कर रही हो , जाओ जाकर तुम भी देख लो.

राधा : तुम ने लेकर तो दे दो और क्या देखूं मैं. वैसे भी तुम्हारी दी हुई ड्रेसेस अभी पड़ी हैं.

अमित : लड़कियां तो शॉपिंग क नाम पर कभी थकती नहीं और एक तुम हो क जिसे शोक hi नहीं

राधा : मुझे ज़रूरत नहीं इस सब की, तुम हो न मेरी पसंद का ख़याल रखने क लिए .

अमित : फिर भी

राधा : मेरा कॉफ़ी पिने को मन कर रहा है चलो न कहीं बैठ कर कॉफ़ी पिटे हैं .

अमित : पर उन दोनों को तो आने दो

राधा : ठीक है

इतने में करिश्मा दीदी और नेहा दीदी भी आ गयी और हम बिल बनवाने क लिए काउंटर पर हुए और बिल बनवाया . करिश्मा दीदी बिल देने लगी तो मैंने मन कर दिया . बाबा ने जो पैसे दिए थे वो काम पद गए तो मैंने अपने कार्ड से पेमेंट की जो मुझे कंपनी क शेयर की वजह से पैसे मिलते थे अंकल की वजह से .

करिश्मा: अब कहीं चल कर कुछ कहते हैं.

अमित : मैं भी यही कहने वाला था चलिए वैसे भी टाइम हो गया है खाने का .

हम वहां से निकले और खाने क लिए रेस्टोरेंट की और चल दिए गाडी में.

उधर गाओं में मंजू आज फिर दीपिका क साथ बात करने का मन बना कर बैठी थी इसी लिए उसने बहाना बना कर मन कर दिया था शॉपिंग क लिए . कुछ देर तो घर क कामो में hi बिजी रही दीपिका और जब वो फ्री हुई तो मंजू उसे अपने कमरे में ले गयी .

दीपिका : क्या बात है ? मुझे यहाँ क्यों ले आयी

मंजू : मुझे आपसे बात करनी थी इस लिए .

दीपिका : क्या बात करनी थी ज़रा हमें भी तो पता चले .

मंजू : वो कल आप बता रही थी न

अभी मंजू बात कर hi रही थी क उसके फ़ोन पर फ़ोन आ गया . No. देख कर न चाहते हुए भी उसे फ़ोन उठाना पड़ा

मंजू : hello

सामने से : ********

मंजू : क्याआ ऐसा कैसे कर सकते हैं वो

सामने से : *********

मंजू : मैं आती हूँ अभी निकलती हूँ .

दीपिका : क्या बात है किसका फ़ोन था

मंजू : मुझे जाना होगा आ कर बताउंगी अभी तो मुझे भी पता नहीं

दीपिका : पर जाना कहाँ है हुआ क्या है कुछ तो बताओ

मंजू : शहर जा रही हूँ अपने घर . एक ज़रूरी काम है .

दीपिका : तो किसी को साथ ले जाओ

मंजू : उसकी ज़रूरत नहीं

दीपिका : मैं अमित को फ़ोन कर देती हूँ वो तो वहीँ है पहुँच जायेगा .

मंजू : रहने दीजिये अगर ज़रूरत होगी तो मैं खुद hi फ़ोन कर लुंगी .



मंजू जल्दी जल्दी अपना पर्स साथ लेकर अपनी कार लेकर घर से निकल गयी. सब ने उसे रोका भी पर उसने किसी को कुछ नहीं बताया . अब ये फ़ोन किसका था और क्या बात हुई ये आगे पता चलेगा .
 
अपडेट 255



‘ आप ठीक तो हैं भाभी ? मैं कब से आपको फ़ोन कर रही हूँ और आप फ़ोन नहीं उठा रही . ‘ मंजू शहर पहुँच कर सीधा अपने घर गयी थी. रुपाली क बारे उसे फ़ोन पर कोई सुचना दी गयी थी जिस वजह से वो शहर आयी थी. रुपाली को कितनी बार वो फ़ोन लगा चुकी थी पर वो फ़ोन नहीं उठा रही थी. जिस वजह से वो चिंता में थी. शीना और रीमा भी फ़ोन नहीं उठा रही थी. हर कर वो अब उस घर में जाने का मन बना रही थी जहाँ वो जाना नहीं चाहती थी पर उससे पहले घर की बेल्ल बजी और जब गेट खोला तो सामने रुपाली hi कड़ी थी.

रुपाली : मुझे तो कुछ नहीं हुआ , मैं बिलकुल ठीक हूँ.

‘ हम आपको सरप्राइज देना चाहते थे इस लिए फ़ोन नहीं उठाया. कैसी हो बुआ आप ‘ रुपाली की बात ख़तम होने से पहले hi पीछे से शीना और रीमा सामने आ गयी और मंजू क गले लग गयी .

मंजू : ऐसा भी कोई करता है , मैं कितनी घबरा गयी थी .

शीना : सॉरी बुआ पर मैं क्या करती आपके तो दर्शन hi नहीं हो रहे इतने दिनों से. अभी कुछ देर पहले पता चला क आप घर आ रही हैं तो मैंने सोचा आपको सरप्राइज दिया जाये .

बातें करते करते चारो हॉल में आ गयी . मंजू क चेहरे पर अभी भी चिंता थी .

मंजू : पर मुझे तो किसी का फ़ोन आया था क आप को …..

रुपाली : किसका फ़ोन ? और क्या कहा उसने ?

शीना : हाँ बुआ आप कुछ टेंशन में हैं . बताइये क्या बात है ?

मंजू : मन में ) शायद किसी ने मेरे साथ भद्दा मज़ाक किया है . पर ऐसा कौन कर सकता है ?

मंजू : वो ,,, वो तुम लोग मेरा फ़ोन नहीं उठा रहे थे तो मुझे टेंशन हो गयी थी . तुम लोग बैठो मैं चाय बनती हूँ.

रीमा : रहने दो बुआ आप बैठो , वो मैं कर लुंगी .

रीमा उठ कर किचन में चली गयी. रुपाली को मंजू का चेहरा देख कर चिंता हो रही थी .

रुपाली : बात क्या है मंजू ? तू ऐसे अचानक से आ गयी और इतनी टेंशन में लग रही है . तू तो गाओं में थी न .

मंजू : क… क कुछ नहीं भाभी . सब ठीक है .

शीना : वैसे बुआ आप वहां क्या कर रही हैं अमित क गाओं ?

‘ अपने भाइयों का घर छोड़ कर उन लोगों क घर जा कर रह रही हो जिन्होंने हमें बे इज्जत कर क निकला था वहां से . एक बार भी ख्याल नहीं आया तुम्हे क तुम क्या कर रही हो. हमारा न सही काम से काम पवन का hi मन रख लेती’ बलजीत राइ अचानक से हॉल में आ गया जिसकी खबर तक न थी किसी को. रुपाली और शीना तक हैरान थी उसे यहाँ देख कर .

मंजू : अब आप यहाँ क्या लेने आये हो ? भाई होने क फ़र्ज़ तो आप अछि तरह निभा चुके हैं. रही बात मेरे वहां जाने की तो सचाई अब सामने आ चुकी है जिसे आप इतने सैलून तक मुझसे छुपाते रहे. शर्म आणि चाहिए थी आपको झूठ बोलते हुए. आखिर क्या बिगाड़ा था उन लोगों ने आपका . चले जाइये यहाँ से मैं आपकी शकल तक देखना नहीं चाहती .

शीना और रुपाली तो हैरान थी क किस बारे में बात हो रही है . मगर मंजू का गुस्सा देख कर दोनों चुप थी.

बलजीत राइ : मैंने वही किया जो मुझे सही लगा . तुम उन लोगों की बातें सुन कर मुझे झूठा कह रही हो . झूठ तो उन लोगों में बोलै है तुम्हारे सामने सच्चे बनने क लिए . मैं भला झूठ क्यों बोलूंगा ? तुम्हारा भाई हूँ मैं . वो तुम्हारे क्या लगते हैं?

मंजू : भाई ?????? इसका मतलब भी जानते हैं आप ? आपने मुझे बहिन समझा hi कब था? भूल गए जब दौलत की खातिर आपने पवन भैया को घर से निकल दिया था . तब तो आपने मुझे नहीं रोका था न उन्हें घर से जाने से . और बाद में सब कुछ लिटा कर आ गए थे रट हुए बच्चों को साथ लेकर . मगर भैया ने फिर भी भाई होने का फ़र्ज़ निभाया था आपको सहारा देकर. बदले में आप ने क्या किया ? आखिरी बार मुझे उनका चेहरा तक न देखने दिया . और झूठ बोल दिया क उनके ससुराल वालों ने आपको और भैया को बुरा भला कहा . वो तो आज भी मुझे अपनी छोटी बहिन की तरह मानते हैं. जानते हो कितना प्यार मिला मुझे वहां जा कर? इतने सैलून में कभी आपने मुझे बहिन कह कर गले से लगाया ? एक बार ,,, एक बार भी आपको ये लगा क मैं बहिन हूँ आपकी ? आपने तो मुझे ऐसे आदमी संग ब्याह दिया जो पहले से hi ठीक नहीं था . घर से निकलने की जल्दी थी न आपको . और उसके बाद कभी मेरा हाल जानने तक की कोशिश नहीं की. बात करते हो भाई होने की , रिश्ते क्या होते हैं ये समझने क लिए आपको एक और जनम लेना पड़ेगा शायद .

बलजीत राइ : मैंने क्या नहीं दिया तुझे ? तुझे पढ़ाया लिखाया , अमीर खंडन में शादी की. और क्या चाहिए था तुझे. सौतेला होने क बावजूद तेरे लिए इतना किया क्या ये काम है? दुनिया में मेरी इज़्ज़त है शौहरत है , लोग राइ साहब कह कर सलाम ठोकते हैं और तुम मुझे शर्मिंदा करना चाहती हो ऐसे अकेली रह कर

मंजू : जिस दौलत शोहरत पर आप इतरा रहे हो ये भी मेरे भाई की कमाई हुई है आपकी नहीं . एहसान तो उनका मानिये क आपके इतना सब करने क बाद भी उन्होंने आपको सहारा दिया था . और शर्मिंदा मैं कर रही हूँ आपको ? इतने साल आपको मेरा ख्याल नहीं आया एक बार भी , मैं कैसे अकेली जी रही थी . क्या कुछ नहीं सहा मैंने . आज आपको इतनी चिंता होने लगी अचानक से . ये घड़ियाली आंसू किसी और को दिखाइए जा कर . जो आपका सागा भाई था आपने तो उसको हो नहीं बख्शा .

मंजू ने रुपाली की तरफ देख कर ये अंतिम बात कही . रुपाली की आँखों में भी आंसू उतर आये थे . शीना भी अपनी बुआ की एक एक बात गौर से सुन रही थी . बलजीत राइ तो गुस्से से आग बबूला हो गया ये सब सुन कर.

बलजीत राइ : बकवास बंद करो अपनी , पता नहीं क्या क्या बातें तुम्हारे दिमाग में घुसा दी हैं उन हरामजादों ने . अब मैं तुम्हे यहाँ और नहीं रहने दूंगा . तुम्हे अभी मेरे साथ चलना होगा . तुम अब से हमारे साथ रहोगी हमारे घर पर .

मंजू : मैं कहीं नहीं जाने वाली , उस घर से मेरा कोई नाता नहीं है और न hi आपसे. आप चले जाओ यहाँ से .

बलजीत राइ : तो अब तुम्हे वो लोग सेज हो गए हैं ?

मंजू : बची नहीं हूँ मैं जो अपने पराये को नहीं जानती .

बलजीत राइ : मैंने कहा तुम्हे मेरे साथ चलना होगा तो चलना होगा . अपनी मर्ज़ी से चलो तो ाचा होगा वर्ण मुझे ज़बरदस्ती करनी पड़ेगी .

‘ ऐसा सोचना भी मत वर्ण वो हाल करुँगी क सारा शहर थूकेगा तुम पर मर. बलजीत राइ ‘ अचानक से इन सब क बीच ऋतू सिंह आ गयी थी अपनी पोलिसिअ यूनिफार्म में . और उसके सख्त तेवर देख कर बलजीत राइ की तो बोलती बंद हो गयी . मंजू ने जब ऋतू को देखा तो भरी आँखों से दौड़ कर ऋतू क गले लग कर आंसू बहाने लगी . दरअसल मंजू ने ऋतू को पहले hi फ़ोन कर क बुला लिया था जब उसके फ़ोन का रुपाली रिस्पांस नहीं दे रही थी. उसे दर था क कहीं बलजीत राइ ने रुपाली क साथ कुछ गलत न कर दिया हो. जैसी क उसे सूचना दी गयी थी फ़ोन पर .

बलजीत राइ : ये हमारा फॅमिली मटर है. तुम कौन होती हो बीच में बोलने वाली .

ऋतू सिंह : ये मेरी दोस्त भी है और बहिन भी , इसकी फॅमिली मैं हूँ अंडरस्टैंड? इसकी तरफ नज़र उठा कर भी देखा तो अपना अंजाम सोच लेना आप . अभी तक चुप हो क आपका एक रिश्ता है इसके साथ. अगर कोई हरकत की तो फिर मुझसे कोई नहीं बचा पायेगा आपको

बलजीत राइ : तुम्हे तो मैं देख लूंगा , और तुम ( मंजू ) उन हरामजादो को इसका अंजाम भुगतना होगा . पहले तो मैंने छोड़ दिया था पर इस बार नहीं. और उस विजय क सपोले को भी नहीं छोडूंगा .

इतना कह कर बलजीत राइ दांत पिस्ता हुआ तेज़ कदमो से घर से निकल गया . जबकि मंजू बलजीत राइ की आखिरी बात पर और ज्यादा घबरा गयी. बलजीत राइ का इशारा अमित की तरफ था ये साफ़ ज़ाहिर था .

मंजू : ऋतू ,,, ऋतू सुना तुमने . अमित …..

ऋतू : शह्ह्ह्ह , चुप एक डैम चुप , कुछ नहीं कर सकते ये . उसकी तरफ आँख उठा कर भी देखा तो मैं क्या ऐसे hi जाने दूंगी . तू चिंता मत कर इनकी अकाल तो मैं ठिकाने लगाती हूँ .

शीना : ये सब क्या था बुआ ? ये विजय कहीं अमित क पापा तो नहीं ? पापा उनका नाम क्यों ले रहे थे ?

रुपाली भी अमित का ज़िकर होने पर मंजू की तरफ सवालिया नज़रों से देख रही थी . विजय न नाम सुन कर वो इतना तो समझ गयी थी क वो कौन है . अब अमित उनका बीटा है तो मतलब वो दामिनी का भतीजा हुआ

मंजू : विजय भैया तुम्हारी दामिनी चची क बड़े भाई हैं . तुम तो जा चुकी हो न वहां

शीना : क्या सच में वो चची की फॅमिली है ? पर वो लोग तो इतने अचे हैं फिर पापा ऐसे क्यों कह रहे हैं

रुपाली : क्या तुम अभी भी नहीं समझी बेटी ? वो बहुत भले लोग हैं. मैं अचे से जानती हूँ पर ये नहीं पता था क अमित उनका बीटा है.

ऋतू ने मंजू की तरफ सवालिया नज़रों से देखा तो उसने इशारे से चुप रहने को कहा.

शीना : मतलब अमित भी हमारा रिश्तेदार hi हुआ न

मंजू : भाई है वो तुम लोगों का. और उतने hi अचे संस्कार दिए हैं उन लोगों ने

रुपाली : तुम्हे कैसे पता चला उन लोगों क बारे में ? और कैसे हैं वो सब? इतने साल बाद मिलने पर उन्होंने कुछ कहा तो नहीं?

मंजू : कहा न भाभी , वही जो बड़ा भाई कहता है इतने साल की बेरुखी क बाद . मैं तो शर्मिंदगी से रो hi पड़ी थी क मैंने एक बार भी उनसे मिलने की कोशिश नहीं की जबकि वो मुझे अपनी छोटी बहिन मानते थे. एक झूठ क कारन मैंने इतने साल उन लोगों से दूर रह कर उनको नहीं खुद को hi सजा दी है .

रुपाली : क्या तुम मुझे उन लोगों से मिलने ले चलोगी ? मैं भी उनसे माफ़ी मांगना चाहती हूँ. आखिर मैंने भी तो गलती की है

मंजू : आप ने कोई गलती नहीं की भाभी , सच का आपको भी कहाँ पता था . वो लोग आपसे मिल कर खुश होंगे . अमित से तो आप मिल hi चुकी हैं उनसे भी मिल लीजियेगा .

शीना : मैं नहीं जानती थी क वो हमारे रिश्तेदार हैं. बहुत अचे लोग हैं मैं तो जा भी चुकी हूँ वहां . पर जब उन्हें पता चलेगा क मैं किसकी बेटी हूँ तो क्या वो मुझे आने देंगे अपने घर

मंजू : जवाब तो अभी तुमने खुद hi दे दिया न क वो बहुत अचे हैं तो फिर वो भला क्यों तुम्हे उस बात की सजा देंगे जो तुमने की hi नहीं. पर तेरे पापा तुम्हे वहां जाने नहीं देंगे .

रीमा : बुआ कॉफ़ी , आप भी लीजिये ऋतू बुआ

ऋतू : रीमा तुम भी यहीं हो , लाओ दो मुझे

मंजू : तुमने सब सुना न रीमा ? अमित तुम्हारा भाई है

रीमा : हाँ मैंने सब सुना बुआ , लीजिये कॉफ़ी लीजिये. अछि बात है न वो हमारे अपने हैं. अब तो वो घर भी मेरा अपना hi हुआ

मंजू ने जान बुझ कर अमित को भाई कह कर रीमा को इशारा करने की कोशिश की थी अपनी तरफ से क वो अमित क बारे में वो फीलिंग न रखे जैसा की अमित ने बताया था दोनों क बीच जो रिश्ता है पर रीमा ने आगे से जो जवाब दिया वो रीमा की तरफ से स्पष्ट जवाब था एक किसम से क वो उस घर को अपना ससुराल मन चुकी है .

बलजीत राइ क साथ हुई बहस क बाद अब विजय और उसके परिवार का रिश्ता सामने आ चूका था पर अमित का सच अभी भी केवल मंजू और ऋतू को पता था. मंजू को ये नहीं पता था क रीमा को अमित पहले hi सचाई बता चूका है . वहीँ शीना क मन में दोहरे भाव थे एक तो ये क अमित उनका रिश्तेदार है चाहे वो उसे प्यार करती थी और दूसरा ये क वो परिवार खून न कहीं उससे जुड़ा है तो वो उन लोगों से और मिलने का सोच रही थी पर अपने बाप की बातें भी उसे सोच में डाले थी. इतना तो वो जान hi चुकी थी क उसका बाप ाचा इंसान नहीं है और यहाँ भी उसकी hi गलत बातें सामने आयी थी . रुपाली भी डबल माइंडेड हो गयी थी. अमित क साथ उसने किस हद तक रिश्ता बढ़ा लिया था और अब वो उस परिवार से है जिससे उसका एक रिश्ता है ये जान कर उसे शर्म भी आ रही थी और अपनी बेटी क प्यार क लिए भी उसे एक उम्मीद थी क ये रिश्ता परवान हो सकता है पर मंजू और उनका परिवार ये मंज़ूर करे तो. मंजू ऋतू रुपाली रीमा और शीना क साथ बातें कर क अभी अभी बलजीत राइ द्वारा दिए गए आघात से उबरने की कोशिश कर रही थी . वहीँ घर से आग बबूला हो कर निकला बलजीत राइ अब ऋतू क साथ साथ विजय और उसके बेटे यानि क अमित को नुकसान पहुँचाने क बारे में सोच रहा था .

‘ चलो अब घर चलते हैं , माँ बहुत खुश होंगी तुम दोनों को यहाँ देख कर ‘ खाने क बाद जैसे hi हम फ्री हुए तो करिश्मा दीदी घर चलने क लिए कहने लगी .

नेहा : नहीं दीदी प्लीज अगर अभी हम घर गए तो रत यहीं रुकना पड़ेगा . टाइम भी तो देखिये . मेरे ख्याल से हमें घर hi चलना चाहिए .

करिश्मा : थोड़ी देर क लिए चल पड़ते हैं , गाओं मैं खुद छोड़ कर आउंगी न .

राधा : नहीं दीदी प्लीज , आप भी जानती हैं अगर हम अभी आपके घर गए तो आंटी हमें ऐसे hi तो जाने नहीं देंगी . फिर बाद में अगर आप गाओं क लिए उन्हें मन भी ले तो तब तक बहुत देर हो जाएगी और फिर घर पर सब परेशां होंगे

मेरे कुछ कहने से पहले नेहा दीदी और राधा ने खुद hi बात को संभल लिया था अगर मैं कुछ कहता तो पक्का दीदी मेरे से नाराज़ होती

करिश्मा : तुम दोनों इतनी पत्थर दिल तो नहीं हो इसके जैसे . अब मैं क्या जवाब दूँ , ऐसे तो फिर मैं भी बहाना बना सकती हूँ न.

राधा : दीदी हम कोई बहाना तो नहीं बना रहे . आप कोई परायी थोड़ा न हैं जो हम बहाना बनाये . पर आप भी जानती हैं हमारी छुट्टियां ख़तम हो रही हैं तो आखिर क कुछ दिन घर में hi रहना चाहते हैं. जब वापिस यहाँ आ जायेंगे तो जब चाहे आप बुला लेना मैं प्रॉमिस करती हूँ मन नहीं करुँगी .

करिश्मा : वैसे तो सब तुम्हे माँ की गुड़िया बुलाते हैं पर हो नहीं तुम. सब जवाब पहले से hi हैं तुम्हारे पास . ाचा चलो ठीक है गाओं hi चलते हैं. पर यद् रखना तुमने प्रॉमिस किया है .

राधा : पक्का दीदी

करिश्मा : और यही प्रॉमिस तुम्हारी तरफ से भी चाहिए मुझे नेहा .

नेहा दीदी ने सर हिला कर सहमति जताई और फिर हम गाओं की तरफ निकल पड़े .

‘ क्या बात है तुम इतनी खोयी खोयी सी क्यों रहने लगी हो ? ‘ यहाँ निधि राघव और कुछ स्टाफ क साथ किसी पार्टी क साथ प्रोजेक्ट मीटिंग क लिए दूसरे शहर में आये हुए थे . वैसे तो निधि काम को अचे से हैंडल कर रही थी . राघव क बाद वही सब कुछ देख रही थी या फिर करिश्मा अब देखने लगी थी. पर यहाँ स्टाफ में दूसरी ब्रांच से एक और लड़की थी जो निधि की हम उम्र थी और दोनों में दोस्ती हो गयी थी साथ में काम करते हुए . चाहे निधि पोजीशन में सीनियर थी पर निधि उसे दोस्त मानती थी दोनों फ्री टाइम में दोस्तों की तरह hi बात करती थी . अभी भी मीटिंग से फ्री होने क बाद दोनों साथ में बैठी थी. निधि क चेहरे पर छाये चिंता क बदल उस लड़की ने देख लिए थे .

निधि : घर वाले मेरे लिए रिश्ता देख रहे हैं शीतल , माँ डैड का फ़ोन आया था बोल रहे थे क जल्दी वापिस आऊं और आ कर एक बार लड़के से मिल लूँ.

शीतल : तो इसमें हर्ज hi क्या है ? वैसे भी शादी की उम्र तो हो hi गयी है. घरवालों को टेंशन तो होगी hi . तुम इतनी स्मार्ट और सेक्सी हो तुम्हे तो एक से एक लड़के मिल जायेंगे . एक बार जाकर देख लो. पसंद न आये तो मन कर देना इसमें कौन सी बड़ी बात है . वैसे यार तुम हो बड़ी अजीब , आज कल तो लड़कियां इशारों पर लड़कों को बचती हैं , कोई भी देख लो. तीन चार बर्फ तो होते hi हैं. और फिर जो बेस्ट ऑप्शन हो उसके साथ शादी . मैंने भी लव मैरिज hi की है. तुम इतनी परफेक्ट हो ऊपर से इतनी अछि जॉब फिर भी तुम्हारा कोई बर्फ नहीं. मतलब यार तुम न अजूबा hi हो सच्ची

निधि : मैं ऐसी नहीं हूँ , मैंने कभी कोई बर्फ नहीं बनाया . और न hi मैं ये शादी करना चाहती हूँ.

शीतल : उम्र भर कुंवारी रहने का इरादा है क्या ?

निधि : ये मैंने कब कहा

शीतल : तो फिर और क्या इरादा है , बूढी होने पर ाचा रिश्ता नहीं मिलने वाला फिर .

निधि : उसकी ज़रूरत नहीं , भगवन ने मेरे लिए पहले से hi देख रखा है .

शीतल : क्या मतलब ,,,, ओह तेरी की ,, इसका मतलब तुमने अपने लिए लड़का देख रखा है . कौन है वो क्या करता है ? कहाँ रहता है ? अपनी कंपनी में है क्या ?

निधि : अरे रुक जा ठहर जा एक बार में hi इतने सवाल

शीतल : बता न कौन है वो , अब इतने भाव क्यों खा रही है. तुम तो बड़ी छिपी रुस्तम निकली यार . मैं तो सोच रही थी क तुम्हारी ज़िन्दगी में कोई है hi नहीं

निधि : है एक , बहुत hi प्यारा है वो . ऊपर वाले ने उसे खुद मेरे नाम लिखा है . सच कहूं तो मैं उसे मन से अपना सब कुछ मन चुकी हूँ . बस उससे अभी तक अपने दिल की बात कही नहीं है .

शीतल : क्याआ ? अभी तक कहा नहीं ? मतलब अपने hi दिल में एक तरफा प्यार क सपने सजा रही हो. अरे यू माध? आज कल क ज़माने में ऐसा कौन करता है . अरे यहाँ कल का नहीं पर और तुम ऐसे सोच क बैठी हो जैसे उसकी लाइफ में और कोई आ hi नहीं सकती . अगर किसी और ने फांस लिया तो ??? फिर बाद में रोटी रहना अकेली बैठ कर

निधि : घबरा कर ) ऐसा मत बोल यार , क्यों ऐसी बातें करती है . वो ऐसा बिलकुल भी नहीं है . मैं अचे से जानती हूँ उसे .

शीतल : वो ऐसा है या नहीं पर दूसरों का क्या . क्या पता कोई और बाज़ी मर ले और तू सोचती रह जाये . मेरी मन तो जल्द से जल्द उसे अपने दिल की बात बता दे वर्ण हाथ मल्टी रह जाएगी

निधि : पर कैसे बताऊँ यार , उसके सामने हिम्मत hi नहीं होती . एक तो वो मुझसे छोटा है उम्र में ऊपर से वो अभी पढ़ रहा है.

शीतल : क्याआ ? हे भगवन , तुम्हारा केस भी अजीब है . तुम न दुनिया का एनरिके पीेछे हो . पता नहीं किस ज़माने की हो तुम और किस ज़माने में पैदा हो गयी . ऊपर से लड़का भी ढूँढा तो अपने से छोटा . चलो वो बात अलग है इश्क़ में उम्र कौन देखता है पर काम से काम इज़हार तो कर एक बार

निधि : तू hi मेरी एक दोस्त है जिसके साथ मैंने ये बात शेयर की है . वर्ण मैंने तो अपनी बहिन तक को न बताया . और अब तू hi मेरा मज़ाक उदा रही है . उसके सामने ज़ुबान को टाला hi लग जाता है तो इज़हार कैसे करूँ. पता नहीं वो क्या सोचेगा मेरे बारे में

शीतल : कब तक ऐसा सोचती रहेगी? घर वालों को कब तक मन करेगी? और दूसरा भी तो सोच क किसी और लड़की ने बाज़ी मर ली तो ? दोस्त हूँ इसी लिए बोल रही हूँ क एक बार बात कर ले वर्ण देर हो गयी तो रोटी रहेगी .

निधि : पर करूँ कैसे कुछ समझ में नहीं आ रहा मुझे .

शीतल : एक काम कर , तुझे हौंसला hi चाहिए न ? तो उसे किसी दिन डांस पार्टी में किसी पब वगैरह में ले जा . वहां का माहौल ऐसा होता है क खुद बा खुद हिम्मत आ जाती है . अगर फिर भी बात न बने तो एक दो शॉट वोडका क मर लेना . इससे बेस्ट और कोई रास्ता नहीं है

निधि : छी , मैं हाथ भी नहीं लगाती ऐसी चीज़ों को . और मैं कभी पब नहीं जाती .

शीतल : मेरी जान इश्क़ में तो लोग क्या कुछ नहीं कर गुज़रते और तुम वोडका से दर रही हो . एक बार ज़रा खुद को देख मेरी जान सर से पाऊँ तक क़यामत हो . एक बार सेक्सी ड्रेस पेहेन कर उसके सामने ज़रा लटके झटके मरोगी न तो वो खुद को रोक hi नहीं पायेगा . तुम अपना ये जानलेवा हुस्न जो छुपाये रहती हो न ज़रा इसके दर्शन करवाओ उसको .

निधि : ये तू कैसी बातें कर रही है , वो ऐसा नहीं है और न मुझसे होगा .

शीतल : मर्द तो है न वो या वो भी नहीं है ? गर्मी हर किसी में होती है , एक बार उसे जलवा दिखा तो सही फिर देखना क्या असर होता है और कहाँ होता है . मेरी बात मन तो देर न कर और ये काम कर ले . तुम जैसी लड़की को कोई अँधा hi इग्नोर कर सकता है और तूने तो कोई अँधा देखा नहीं होगा अपने लिए . अब जल्द से जल्द उसे अपना बना और मुझे खुश खबरि सुना .

निधि : मुझसे नहीं होगा ये सब

शीतल : फिर तो भगवन hi कुछ करे तो करे . चल अब रूम में चल क सोते हैं . वैसे भी बंद बजी पड़ी है सुबह से .

मोहित सुबह देर से उठा था आज पर उसने कल क बारे में अपनी माँ से कुछ भी नहीं कहा बस दोस्तों का बहाना बना कर उसे ताल दिया . रमा तो पहले से hi उसके पुराने दोस्तों से खुश नहीं थी इस लिए उसने थोड़ा बहुत सुना भी दिया . मगर मोहित क दिल का हाल तो वही जनता था . मीनल का फ़ोन उसने आज भी कई बार तरय किया पर उसने नहीं उठाया बल्कि बलोच लिस्ट में hi दाल दिया . घर में दिल कहाँ लग्न था इस लिए बेमन से थोड़ा बहुत खाने क बाद फिर से निकल गया अपना दिल जलने क लिए . रमा को शक तो हो रहा था क जैसे मोहित कुछ ठीक नहीं लग रहा पर उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया . वैसे भी अभी तक उसकी अपनी हालत पूरी तरह से ठीक नहीं हुई थी.

वहीँ रॉय ने आज अमित क बारे में पता लगाने की कोशिश की और मोहित से मिलने की भी किस्मत से उसे इतना पता चल गया क मीनल और मोहित दोनों का आपस में झगड़ा हो गया है और इतना hi काफी था उसके लिए. अब उसका एक hi टारगेट था और वो था अमित. असल में उसे मीनल और सुनील की परवाह नहीं थी . उसे तो उससे कोई मतलब hi नहीं था . रॉय तो सोच रही थी क सुनील जाये भाड़ में . उसे मीनल मिले या न मिले बस उसे मोहित चाहिए था. आखिर वो इतने पैसे वाले बाप की औलाद जो था . रॉय को वो अपने लिए बेस्ट ऑप्शन लगती थी . मगर उसे दर था तो इस बात क कहीं अमित सुनील क प्लान में जो कुछ जान चूका था उसमे वो रॉय को भी न घसीट ले . ऐसा होने पर उसके अरमानो पर पानी फिर सकता था . अब कैसे भी कर क उसे अमित को काबू करना था . इस लिए वो कोशिश कर रही थी क कोई ऐसा मिल जाये जो उसे अमित तक पहुंचा दे .

जब हम गाओं वापिस लुटे तो घर जा कर मुझे बुआ क शहर जाने का पता लगा . मैंने जब फ़ोन पर उनसे बात की तो उन्होंने मुझे साडी बात बतायी . मुझे सुन कर गुस्सा भी आया पर बुआ ने मुझे शांत रहने को कहा . बुआ ने बताया क रुपाली रीमा और शीना उनके साथ hi हैं आज और ऋतू भी आज उनके घर hi रुकने वाली थी . इस लिए वो आज घर वापिस नहीं आने वाली थी. मेरा मन तो कर रहा था क मैं भी उनके पास शहर चला जॉन पर उन्होंने में मुझे गाओं में hi रुकने को कहा था. खैर ज्यादा और कुछ नहीं हुआ , मैंने अचे से आराम किया और अखाड़े में कुछ देर एक्सरसाइज भी की. घर आकर रत का खाना खाया और अपने कमरे में सोने चला गया . नेहा दीदी और राधा ने जो शॉपिंग की थी घर की सब औरतें तो उसी में लगी रही . इसी तरह दिन ख़तम हुआ और मैं अपने कमरे में आ कर लेट गया. आज फिर से दिव्या मौसी मेरे कमरे में आ गयी सोने क लिए . कल की तरह आज भी मौसी मेरी बाजु पर सर रख कर सोई.



‘ मेरे सामने बोलने की आज तक उसकी हिम्मत नहीं हुई और उन लोगों क घर जा कर उसमे इतनी हिम्मत आ गयी क मुझे आँखें दिखने लगी . अब तो कुछ न कुछ करना hi पड़ेगा . मेरा दर ख़तम हो रहा है इन सब क मनो से . अब दिखाऊंगा इन सब को क बलजीत राइ क्या कर सकता है . ोये फ़ोन लगा बिल्ला को . उसे बोल मैंने बुलाया है जल्दी आ ‘ बलजीत राइ अपने फार्म हाउस में शराब क मोठे मोठे पेग लगता हुआ गुस्से को ठंडा करने की कोशिश कर रहा था उस ठन्डे तेज़ाब से . मगर अंदर से उतना hi कलेजा जल रहा था . एक तो मंजू पहली बार उसके सामने ऐसे बोली थी और ऊपर से ऋतू की धमकी . बलजीत राइ तो बेआबरू सा हो कर लौटा था अपनी hi बेटी भतीजी और रुपाली क सामने जिसे वो अपनी अय्याशी का सामान hi समझता था . एक गेहरारा आघात hi था ये उसके हम पर और अब वो एक पल में शांत नहीं हो प् रहा था . गुस्से और बदले की आग अंदर जल रही थी . अब इसे ठंडा करने क लिए उसने खतरनाक इरादे बना लिए थे .
 
अपडेट 256



‘ तू तो फ़ोन पर कुछ और बता रही थी फिर ये सब क्या है ? ‘ रत में खाने क बाद ऋतू और मंजू एक hi रूम में थी. आज ऋतू मंजू क पास hi रुक गयी थी उसके मन में दर की वजह से .

मंजू : मुझे किसी का फ़ोन आया था क बड़े भैया ने रुपाली और रीमा को घर से निकल दिया है इसी लिए मैं भागी भागी आ गयी थी.

ऋतू : फ़ोन किसका था ? तुझे कुछ पता है ?

मंजू : नहीं , उसने अपना नाम नहीं बताया था पर घर से hi किसी ने किया था शायद किसी नौकर ने किया होगा .

ऋतू : कोई नौकर तुझे क्यों फ़ोन करने लगा और उसके पास तेरा no. कैसे आया ? ज़रूर ये तेरे बड़े भाई की hi चल होगी तुझे यहाँ बुलाने क लिए वर्ण वो यहाँ कैसे आया और शीना ने भी तो कहा क उसे उसके बाप ने hi कहा था तुम घर पर हो .

मंजू : तुम ठीक कह रही हो .

ऋतू : वैसे तुम अमित क बारे में सच क्यों नहीं बता देती ?

मंजू : तुमने देखा नहीं वो क्या क्या कह रहे थे ? अब वो विजय भैया को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करेंगे जबकि उन्होंने कुछ किया भी नहीं . दौलत क लिए उन्होंने क्या कुछ नहीं किया पहले भी . ये साडी दौलत पवन भैया की कमाई हुई है जिस पर ये आज इतना अकड़ रहे हैं. अगर उन्हें पता चल गया उसका असली वारिस ज़िंदा है तो कहीं वो उसे कुछ कर न दें .

ऋतू : तू इतना क्यों डर्टी है ? मैं हूँ न , मैं तो कहती हूँ क अमित को सामने ला कर इसे धक्के मर कर बहार करो अपनी प्रॉपर्टी से .

मंजू : नहीं ऋतू , तू नहीं जानती वो कितने घटिया इंसान हैं. पैसों क लिए कुछ भी कर सकते हैं. मेरे लिए मेरी दौलत सिर्फ अमित है मुझे कुछ नहीं चाहिए . अगर उनको भनक भी लगी क अमित पवन भैया क बीटा है तो वो ज़रूर उसे ….

ऋतू : मेरे होते ऐसा कुछ भी नहीं होगा.

मंजू : मैं उस पर कोई खतरा नहीं चाहती ऋतू इसी लिए मैं नहीं बता रही किसी को. और तू भी इस बात का ध्यान रखना क ये राज़ राज़ hi रहे .

ऋतू : कब तक ? एक न एक दिन तो सच सामने आ hi जायेगा तब क्या करोगी ? तुम्हे तैयार रहना होगा उसका सामना करने क लिए . और मैं हूँ न तेरे साथ .

मंजू : तू hi तो मेरा सहारा है

ऋतू : वैसे तूने अमित को कुछ बताया ?

मंजू : नहीं मैंने उसे कुछ नहीं बताया अभी बात हुई थी मेरी तो मैंने बस रुपाली भाभी क बारे में hi बात की . वो तो आना चाहता था पर मैंने hi मन कर दिया.

ऋतू : वैसे थो कहाँ ? घर पर होता तो तुझे आने नहीं देता ऐसे .

मंजू : वो यहीं था , शॉपिंग करने लेकर आया था नेहा और राधा को साथ लेकर और करिश्मा भी थी साथ में .

ऋतू : वो यहाँ था तो एक बार मुझे बता hi देती. काम से काम उसे मिल तो लेती चाहे थोड़ी देर क लिए hi सही

मंजू : तुझे बहुत पड़ी उससे मिलने की शर्म कर

ऋतू : शर्म !!! वो किस लिए ? प्यार किया तो डरना क्या . मैं तो न डर्टी किसी से. अगर इस वर्दी की परवाह न होती तो उसके साथ hi घूमती उसकी बाइक क पीछे बैठ कर .

मंजू : शर्म कर , अब तू कोई कॉलेज पड़ने वाली लड़की नहीं है जो ऐसे घूमेगी उसके साथ

ऋतू : तुझे जलन क्यों हो रही है ? मैं तो जो मन में आएगा वो करुँगी. सोच रही हूँ किसी दूसरे शहर जा कर अपनी ये मुराद भी पूरी कर लूँ. खुल कर जियूं उसके साथ . बीता वक़्त तो वापिस नहीं आ सकता पर अभी जितना जवानी बच गयी है काम से काम उसके मज़े तो खुल कर ले लूँ .

मंजू : खुद पर थोड़ा काबू रख , मज़े लेने क चक्कर में कहीं पेट से न हो जाना . फिर उस बेचारे को फंसा देगी

ऋतू : बेचारा ??? बेचारा नहीं है वो , अचे अचे को नानी यद् दिला दे ऐसा भयंकर जानवर है वो . तुझे तो पता hi है अचे से .

एक दूसरे क साथ मज़ाक करते करते ऋतू ने जिस तरह मंजू को लपेटा था एक पल के लिए तो मंजू को वो मंज़र याद आ गए जब जब वो अमित क साथ अंतरंग पलों में थी. मगर फिर उसे यद् आ गया क वो उसकी बुआ है और वो हकीकत में लौट आयी और खुद को hi कोसने लगी

मंजू : प्लीज ऋतू उस बारे में मैं बात नहीं करना चाहती . जब जब वो सब यद् करती हूँ तो खुद से नफरत हो जाती है

ऋतू : ी ऍम सॉरी मंजू पर इसमें तेरी क्या गलती है ? वैसे भी तुम उससे प्यार करती थी अब वो तुम्हारा भतीजा निकला तो इसमें तेरी क्या गलती. और प्यार ऐसे hi ख़तम नहीं हो जाता . मेरी तरफ देख , चाहे मुझे प्यार में धोखा hi मिला पर आज तक भूली नहीं हूँ उसे . और फिर अमित ने तो तुझे बदले में प्यार hi दिया था वो भी इतना क तुझे साडी ज़िन्दगी न मिला . फिर भला तू कैसे वो सब भुला सकती है . मैंने पहले भी कहा था क तुम चाहो तो दोहरा रिश्ता भी रख सकती हो उसके साथ . इसमें कोई हर्ज़ नहीं है . बल्कि आज कल ……

मंजू : प्लीज ऋतू मैं सब नहीं सोचना चाहती. रत बहुत हो गयी है अब हमें सोना चाहिए .

मंजू ने करवट बदल कर ऋतू की तरफ पीठ कर ली और सोने की कोशिश करने लगी . मगर ऋतू मंजू को hi देख रही थी. उसे अपनी इस बहिन जैसी सहेली क दिल की हालत अचे से पता थी और वो जानती थी क मंजू जितना वो सब भूलने की कोशिश करेगी उतना hi वो दुखी होगी. आखिर पहली बार तो उसे प्यार मिला था वो भी सच्चा . ऋतू तो यही चाहती थी क मंजू अमित को बुआ और प्रेमिका दोनों का प्यार दे यही एक रास्ता था उसकी ख़ुशी का .

‘ यार ये बात मुझे समझ नहीं आयी , अमित ने बताया था क विजय अंकल और गौरी आंटी उसके असली माता पिता नहीं हैं और वो राधा नैना करुणा क माँ को मौसी बोलता है . इस रिश्ते से तो वो ,,,,,, क्या चची की कोई और बहिन भी थी ?’ इधर दूसरे कमरे में रीमा और शीना रुपाली क सोने क बाद भी बातों में लगी हुई थी. शीना क मन में जो सवाल था आखिर उसने रीमा से hi डिसकस किया , मंजू बुआ से तो उसने पूछना ठीक नहीं समझा क्यूंकि वो अचे मूड में नहीं थी और दूसरा कोई जनता नहीं था . शीना की इस बात पर रीमा क माथे पर बल पद गए . आखिर शीना ने सही पॉइंट पकड़ा था .

रीमा : क्या पता शायद हो , मैं कौन सा जानती हूँ.

शीना : हाँ तुझे कैसे पता होगा , तू भी तो मेरे जितना hi जानती है. पर उसने तुझे कभी तो बताया होगा न ?

रीमा : नं नहीं तो

शीना : तू कुछ छुपा रही है?

रीमा : नहीं ऐसी कोई बात नहीं

शीना : ठीक है तो फिर नैना दीदी को फ़ोन कर क पूछती हूँ .

शीना अपना फ़ोन उठा कर नैना का no. मिलने लगी तो रीमा ने उसे रोक दिया .

रीमा : रुको दीदी मुझे कुछ कहना है .

शीना : बोल

रीमा : यहाँ नहीं , मेरे साथ आओ आप

रीमा शीना को अपने साथ आने का कह कर दबे पाऊँ कमरे से बहार निकली और सीढ़ियां चढ़ कर ऊपर जाने लगी . शीना रीमा क इस तरह उसे ऊपर ले जाने पर हैरान थी क आखिर कौन सी बात है जो वो इस तरह छुप कर बताना चाहती है . छत पर पहुँच कर रीमा एक कोने में जाकर कड़ी हो गयी और अपने हाथों की उँगलियों को मसलने लगी . उसे समझ नहीं आ रहा था क वो कैसे बताये और शीना का क्या रिएक्शन होगा. अमित ने उसे मन किया था किसी से भी कहने को पर अब और कोई चारा नहीं था वर्ण शीना पता लगा hi लेती और फिर ये बात पूरी तरह खुल जनि थी .

शीना : अब बोल भी कुछ , ऐसे क्या चुप कर क कड़ी है ?

रीमा : दीदी पहले वडा करो आप ये बात किसी से भी नहीं करोगी

शीना : पर बात क्या है

रीमा : प्लीज दीदी वडा करो

शीना : ाचा ठीक है वडा करती हूँ.

रीमा : दीदी मैं जो बताने जा रही हूँ उसे सुन कर आपको यकीन नहीं होगा. पर ये सच है और ये बात खुद अमित ने किसी को भी बताने से मन किया है क्यूंकि बुआ ये नहीं चाहती. अमित कोई और नहीं , चाचा जी का बीटा है .

शीना : शॉकेड ) क्याआ ???? तू ये क्या बोल रही है ,,,,, मतलब वो हमारा भाई है ???? क्या ये सच है ????

रीमा : हाँ दीदी यही सच है , मुझे खुद अमित ने बताया है .

शीना : हे भगवन ,, ऐसा नहीं हो सकता ,,, इसका मतलब मैं अपने hi भाई क साथ !!!!!

कुछ देर दोनों क बीच ख़ामोशी रही . शीना अपने और अमित क बीच जो कुछ भी हो चूका था उसके बारे में सोचने लगी. कैसे उसने उसे अपना सब कुछ सौंप दिया कैसे वो सभी सीमाएं लाँघ गयी. अमित उसके जीवन का पहला और अधूरा प्यार था जिसे उसने अपनी छोटी बहिन क लिए कुर्बान कर दिया था . ये सब सोचते हुए उसे रीमा का ख्याल आया . वो तो अमित से बेइंतहा मुहब्बत करती है

शीना : तो अब तुम क्या करोगी ?

रीमा : पता नहीं दीदी ,,,, पर उसके सिवा मैं किसी और क बारे में सोच hi नहीं सकती . अब क्या होगा क्या नहीं ये तो भगवन hi जनता है पर मैं आखिरी साँस तक उसी की रहूंगी .

शीना ने रीमा की बात सुनी और उसके दिल की हालत को समझते हुए उसे अपने गले से लगा लिया .

शीना : जब ये बात सबको पता चलेगी तब क्या होगा ??? जो भी हो रीमा कोई साथ दे न दे मैं तेरे साथ हूँ. अमित से तेरी बात हुई ? उसका क्या कहना है ???

रीमा : उसी ने मन किया है इस बारे में किसी को कुछ बताने से और वो अब भी मुझे प्यार करता है दीदी .

शीना : आज तक हमें किसी ने चाचा चची को बारे में बताया क्यों नहीं ? मुझे यद् है बचपन में कभी कभी बुआ बताती थी थोड़ा बहुत पर माँ उन्हें रोक देती थी . अब तो मैं बुआ से सब जान कर hi रहूंगी उनके बारे में .

रीमा : पर दीदी आपने देखा न बड़े पापा का क्या रिएक्शन था . मेरे ख्याल से बुआ उन्ही की वजह से अमित क बारे में सच नहीं बताना चाहती

शीना : तुम ठीक कह रही हो, पर मैं बुआ से इसके बारे में जान कर रहूंगी.

रीमा : यद् रहे दीदी अमित का सच आप अपनी जुबान पर मत लाना किसी क सामने भी नहीं

शीना : चिंता मत करो मैं ध्यान रखूंगी

सुबह ऋतू तो जल्दी उठ कर नाश्ता कर क अपने ऑफिस क लिए निकल गयी . अब घर में मंजू रुपाली रीमा और शीना क साथ रह गयी . नाश्ता करते हुए शीना ने hi बात शुरू की .

शीना : बुआ कल आपने चाचा चची और चची की फॅमिली क बारे में कहा था न . क्या आप हमें बताएंगी चाचा जी और बाकि सब क बारे में ? हम तो कुछ जानते hi नहीं उनके बारे में न hi घर में कोई उनके बारे में बात करता है

मंजू : बात करेगा भी कौन , जब तुम्हारे पापा hi नहीं चाहते क उनका कोई नाम भी ले. सौतेले भाई जो थे . पर मेरे लिए वो सब कुछ थे . माता पिता भाई दोस्त सरे रिश्ते उन्होंने अकेले hi निभाए मेरे साथ . वो इंसान नहीं देवता hi थे जो सबकी मदद करते थे. और भाभी भी बिलकुल वैसी hi थी बिलकुल किसी देवी जैसी. काश मैं तब उनके साथ hi होती और उनके साथ hi मर जाती.

शीना : बाआआ

मंजू की आँखों में आंसू छलक आये थे तो शीना उठ कर उसके गले लग गयी उसे सांत्वना देते हुए.

शीना : प्लीज बुआ शांत हो जाइये , मैं समझ सकती हूँ आप उनसे बहुत प्यार करती थी पर आप नहीं बताएंगी तो हमें कैसे पता चलेगा उनके बारे में .

मंजू : क्या करूँ , जब भी उनको यद् करती हूँ तो खुद को रोक hi नहीं पति. मुझे अनाथ कर क वो रोने क लिए अकेला छोड़ गए .

रुपाली : मैं मानती हूँ मंजू तुम्हारे साथ बहुत बुआ हुआ पर क्या मुझे भी तू बाकि सब की तरह पराया समझती है? मैंने तो हमेशा तुम्हे छोटी बहिन hi मन है. और तेरे लिए अपने पति की नाराज़गी भी सही थी. उन पर तो अपने भाई का रंग चढ़ा हुआ था पर फिर भी वो इतने बुरे नहीं थे.

मंजू : मैं ऐसा सोच भी नहीं सकती भाभी , आप न होती तो मैं ज़िंदा hi न रह पति उस घर में . मैं जानती हूँ आपकी वजह से hi मैं इतना पढ़ पायी थी . आपने मेरी खातिर क्या कुछ सहा है मुझे सब पता है .

रुपाली की ऑंखें भी नाम हो गयी थी अपनी ज़िन्दगी क वो गुज़ारे पल यद् कर क जब वो अपने पति से मंजू की सिफारिश करती थी और उसे कई बार मार भी कहानी पड़ी थी . पर फिर भी उसने कभी मंजू का साथ नहीं छोड़ा और पति क साथ साथ जेठानी की तरफ से बहुत कुछ सुन्ना सहना पड़ा .

रीमा : क्या पापा भी बुरे थे माँ ???

रीमा क इस मासूम से सवाल पर तो रुपाली की आँखों से आंसू बहार आने लगे पर रुपाली की लाचारी पर मंजू ने hi जवाब दिया .

मंजू : वो बुरे नहीं थे रीमा पर अपने बड़े भाई को सांगत में वो भटक गए थे . इसी लिए तो सौतेले होने की वजह से मुझ से और तुम्हारे चाचा से कभी प्यार नहीं कर पाए.

शीना : बुआ आप सौतेली उनके लिए हो सकती हैं हमारे लिए नहीं. और जितना आपको जानती हूँ उससे तो लगता है क हमारे चाचा जी भी बहुत अचे होंगे . आप प्लीज उनके बारे में बताइये न ,, प्लीज .

मंजू : सब बताउंगी तुम्हे , सब बताउंगी. तू ( रीमा ) भी सुन अपने चाचा क बारे में .

इसके बाद मंजू ने अपने बचपन से लेकर हो कुछ भी उसे यद् था या जो पता था उसने एक एक कर क सब बताना शुरू कर दिया . साडी बातें सुनते सुनते शीना को अपने माता पिता पर गुस्सा आने लगा था . सब कुछ सुनने का बाद जब एक ख़ामोशी स छ गयी थी माहौल में तो शीना अंतर्मन में दुःख से भरी बोल hi पड़ी

शीना : इसका मतलब ये सब कुछ चाचा जी का है ??? और पापा ने दौलत की खातिर उनके साथ और आपके साथ इतना बुआ किया ???? मैं सोच भी नहीं सकती थी वो इतने बुरे हो सकते हैं. शर्म आ रही है मुझे अपने आप पर . मैं कभी माफ़ नहीं कर सकती पला को. वो तो इस काबिल भी नहीं क उन्हें पापा कह कर बुलाऊँ

मंजू : ऐसा मत कहो शीना , वो जैसे भी हैं तुम्हारे पिता हैं

शीना : ये आप कह रही हो बुआ ? इतना कुछ सहने क बाद भी ???

मंजू : जो हो चूका है उसे बदला तो नहीं जा सकता न. ये मेरी किस्मत थी शायद. पर तुम हो सके तो इतना करना क उन्हें कुछ गलत करने से रोकना . वो तुमसे बहुत प्यार करते हैं.

शीना : मैं उन्हें अब कुछ गलत नहीं करने दूंगी बुआ. जब तक मैं हूँ वो अमित का बाल भी बांका नहीं कर पाएंगे . अगर उन्होंने ऐसा किया तो वो हमेशा क लिए अपने बेटी खो देंगे .

मंजू : शीना मेरी बची

मंजू ने कास क शीना को गले से लगा लिया और दोनों बुआ भतीजी आंसू बहते हुए प्यार दिखने लगी

शीना : अब मैं चलती हूँ बुआ ,, मुझे पापा से बात करनी है. चची आप चलेंगी या कुछ दिन यहाँ रहेंगी?

मंजू : इन्हे यही रहने दे मेरे पास. और तू भी प्यार से समझाना अपने पापा को .

शीना : ठीक है बुआ ,, अब मैं चलती हूँ.

शीना विदा लेकर वहां से चली गयी. अब रुपाली और रीमा मंजू क पास hi रुक गयी. मंजू नहीं चाहती थी रुपाली बलजीत राइ की पास जाये और रुपाली ने भी यहीं रुकना सही समझा क्यूंकि यहाँ वो सेफ थी . पर उसके मन में अमित से मिलने की ीचा हो रही थी ये जानने क बाद क वो उसकी देवरानी का भतीजा है . दामिनी की वो भी दिल से इज़्ज़त करती थी.

उधर करिश्मा गाओं से घर वापिस आ गयी थी आज . पहले अमित भी उसके साथ hi आने वाला था मंजू से मिलने क लिए पर मंजू क मन करने पर वो वहीँ रुक गया . करिश्मा घर तो लौट आयी थी पर उसका मन अभी भी अमित क साथ बिताये खुशनुमा पलों में hi खोया था. अमित ने जो अपनी पसंद से उसके लिए सूट लिया था उसे पेहेन कर वो महसूस कर रही थी उस प्यार को जो उसके दिल में उसके लिए था चाहे एक तरफा hi सही पर ये प्यार करिश्मा की सुनी ज़िन्दगी में रंग भरने वाला था .

‘ वह ,, इस सूट में तो बहुत प्यारी लग रही है मेरी बेटी . ये कब लिया ?’ रमा जब करिश्मा क कमरे में आयी तो उसे शीशे क सामने बैठ कर खुद को निहारती प् कर उसने जब गौर किया तो इस नए परिधान को देख वो भी खुश हुई जो करिश्मा पर बहुत जाँच रहा था . हरे रंग का वो डिज़ाइनर सूट जो आज कल लड़कियां पहनती थी करिश्मा क गोर रंग फिगर पर बहुत जाँच रहा था . अपनी माँ की आवाज़ सुन करिश्मा जैसे खवाबों ख्यालों से बहार आयी और एक मुस्कराहट क साथ अपनी को देखा .

करिश्मा : कल hi लिया है माँ एक्चुअली लिया नहीं मिला है . अमित ने लेकर दिया है ये अपनी तरफ से . ाचा लग रहा है न ?

रमा : अमित ने लेकर दिया है ???? उसने कब लेकर दिया ??? वैसे बहुत जाँच रहा है . एक डैम परफेक्ट.

करिश्मा : कल हम शॉपिंग करने गए थे न तब hi लेकर दिया था. वो नेहा और राधा को शॉपिंग लेकर जाना था तो उनके साथ उसने मुझे भी ये लेकर दिया.

रमा : शॉपिंग ??? पर वहां गाओं में तो कहीं ऐसा कुछ है नहीं. इसका मतलब तुम लोग यहाँ आये थे और मुझे बताया भी नहीं ? काम से काम उन्हें घर तो ले आती.

करिश्मा : मैंने बहुत कहा था माँ पर वो नेहा और राधा कह रही थी क अब छुट्टियां ख़तम होने वाली हैं तो वो वहीँ रहना चाहती हैं. बाद में वो यहाँ आएँगी.

रमा : ये ाचा नहीं किया तुमने , चलो कोई बात नहीं. वैसे सच में ये बहुत ाचा लग रहा है तुम पर. ऐसे hi अचे अचे कपडे पहना करो. बिलकुल कॉलेज क दिनों जैसी लग रही हो

करिश्मा : उसकी पसंद है hi इतनी अछि माँ , आप ने भी तो की है न उसके साथ शॉपिंग

रमा करिश्मा की इस बात और कहने क तरीके से शर्मा hi गयी थी अंदर hi अंदर. पर बात करिश्मा से नज़रें चुराती हुई वो पलट कर जाने लगी .

रमा : हाँ की है और वो सच में इस सब में बहुत ाचा है . चल अब बहार अजा कॉफ़ी पिटे हैं

करिश्मा : इसी लिए आप उससे इतना प्यार करती हैं न ,, पापा से भी ज्यादा ?

रमा : जा के देख तेरा भाई क्या कर रहा है अभी तक नीचे नहीं आया.

रमा अपनी बेटी की बात पर शर्म से पानी पानी हो गयी थी और जल्दी से कमरे से बहार निकल गयी. करिश्मा भी अपनी माँ की हालत पर मुस्कुरा उठी और फिर अपने मन में hi कुछ सोचती खुश होती ऊपर चल दी अपने भाई क कमरे में. करिश्मा जब मोहित क कमरे में पहुंची तो वो अभी भी बिस्तर पर hi था. जैसे hi करिश्मा उसे बीएड से उठाने क लिए आवाज़ देने लगी तो उसे शराब की दुर्गन्ध आयी. पास से उसने सूंघ कर देखा तो ये दुर्गन्ध मोहित क पास से hi आ रही थी. उसकी हालत से पता चल रहा था क वो रत को ऐसे hi बिस्तर पर गिर गया होगा क्यूंकि पाऊँ में अभी भी जुटे वैसे hi थे . करिश्मा को समझते देर न लगी क मोहित शराब में टल्ली हो कर घर आया होगा रत को.

करिश्मा ( मन में ) ये शराब कब से पिने लगा ? उस दिन तो अमित कह रहा था क किसी ने जान बुझ कर इसे धोखे से पिलाई थी पर अब क्यों ? कहीं ये मीनल की वजह से तो नहीं ? मुझे बात करनी होगी अगर माँ डैड को पता चला तो उन्हें बहुत दुःख होगा .

करिश्मा : मोहित ,,, मोहित ,,, चल उठ ,, कितना सोयेगा , देखा दोपहर होने को आ गयी . मोहित !!!! मैं पानी दाल दूंगी तेरे ऊपर . उठता है क नहीं .

मोहित : क्या बात है दीदी क्यों चिल्ला रही हो ,, सोने दो न .

करिश्मा : उठता है क पानी डालूं. और ये शराब कब से पिने लगा है तू . माँ को बुलं क्या ???

करिश्मा की ये बात सुन कर मोहित को अंदाज़ा हुआ अपनी हालत का और वो झटके से उठ बैठा . अपनी बहिन से नज़रें चुरा कर वो बाथरूम में जाने लगा तो करिश्मा फिर बोली

करिश्मा: नाहा धो कर जल्दी से आ मुझे तुझसे बात करनी है .

मोहित अंदर से दर भी रहा था पर बिना अपनी बहिन की तरफ देखे वो बाथरूम में घुस गया . करिश्मा कुछ देर सोचती रही फिर चुपचाप उठ कर नीचे चली गयी अपने कमरे में . अपने मोबाइल से उसने अमित को फ़ोन करने का सोचा पर फिर कुछ और सोच कर रुक गयी और बहार अपनी माँ क पास आ कर बैठ गयी . अभी वो खुद एक बार मोहित से बात करने का सोच रही थी अमित को कुछ बताने से पहले .

दूसरी तरफ बलजीत राइ ने कल बिल्ला को काम सौंप दिया था विजय और उसके बेटे क हाथ पाऊँ तोड़ने का . उन दोनों की जान लेना कोई ज़रूरी नहीं था इस लिए उसने बस हाथ पाऊँ तोड़ने का hi कहा. वैसे भी वो बात को इतना बढ़ाना नहीं चाहता था क वो किसी झमेले में फंस जाये . बिल्ला जो एक बदमाश था वो अपने आदमियों को साथ लेकर विजय क गाओं पहुँच गया और उसके बारे में पता लगाने लगा. देहाती वेशभूषा में दो लोग विजय क बारे में जानने लगे और उसके बेटे क बारे में . किस्मत से विजय नज़दीक क गाओं गया हुआ था और अमित घर पर hi था . इस लिए ये लोग गाओं में hi इधर उधर टहल कर सही जगह का चुनाव कर रहे थे . एक आदमी जो विजय क बारे में जानकारी जुटाने गया था वो बिल्ला क पास वापिस आया .

‘ उस्ताद , ये विजय तो साला कोई बड़ा टॉप है . वो चाय वाले क पास लोग बता रहे थे क इसकी पहुँच बहुत ऊपर तक है. कलेक्टर राठौर खुद यहाँ आया था . और वो साली सप ऋतू सिंह भी इनकी कोई सेज वाली है . मैं तो कहता हूँ उस्ताद निकल लेते हैं . अगर उसे पता चला तो साली सीधा थोक hi देगी . ‘

बिल्ला : अबे चुप भोसड़ी क , पता है कितना पैसा मिल रहा है सेठ से . उसको मन नहीं कर सकते नहीं तो वो दोबारा काम नहीं देगा . वैसे भी हमें कहा उसे जान से मरना है . वैसे भी किसी को कुछ पता नहीं चलने वाला . छुप चाप काम कर क निकल लेते हैं कुछ दिन शहर से दूर hi रहेंगे. उसके लड़के का कुछ पता चला ?

‘ वो साला बाप से भी आगे है. एक तो खुद पहलवान है साला . सुना है कुश्ती क कई मुकाबले जीत चूका है. कलेक्टर और ऋतू सिंह से सीधी बात है उसकी. राठौर की बेटी तो उसके साथ hi पड़ती है कालेज में .

बिल्ला : कुछ भी हो साला हमें क्या . डरने की ज़रूरत नहीं है . बड़े बड़े पहलवान गिर जाते हैं अचानक हमले से . तुम बिंदु को बोल क वो गाओं क बहार वाले रस्ते पर नज़र रखे . सूरज ढलने क बाद hi काम करेंगे . बिंदु उधर से विजय को घेरेगा और इधर तू उसके घर जाना उसके बेटे को बुलाने क लिए . फिर उसे भी लपेट लेंगे .



बिल्ला क समझने क बाद उसका आदमी अपने साथियों को बताने क लिए निकल गया . और इधर बिल्ला बीड़ी सुलगा कर सर पे गमछा लपेटे सुता लगता घूमने लगा गली में .
 
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