Adultery Manhoos se mahan tak - Page 32 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 231



मेरे सामने मंजू म मेरे hi माता पिता और मेरी बचपन की तस्वीर खोले बैठी थी और मुझे उनके बारे में बता रही थी. और मेरी ज़ुबान जैसे लकवा hi मर गयी थी. जिस मंजू बुआ की तलाश मुझे थी वो इतने समय से मेरी आँखों क सामने थी और मैं उन्हें कभी पहचान hi न पाया . जब भी मैं उनसे मिलता था तो मुझे हमेशा ये एहसास होता था क मेरा उनके साथ सम्बन्ध काफी पुराण है . मैं सोचता था शायद ये पिछले जनम का सम्बन्ध होगा पर ये नहीं समझ पाया क सम्बन्ध इसी जनम का था . मैं पत्थर सा बना बस उन्हें hi देखे जा रहा था और वो तस्वीरें दिखते हुए पता नहीं क्या क्या बता दिया रही थी. उनकी आँखों से बात करते करते आंसू बह रहे थे और उन्हें जैसे एहसास hi नहीं था क उनके पास मैं भी बैठा हूँ. जबकि मैं उनको देख कर खुद को सँभालने की कोशिश कर रहा था . आखिर मुझे आज वो पहला शख्स मिला था जो मेरे पापा क परिवार से था . और वो भी उनकी वो सही बहिन जिस पर वो अपनी जान छिड़कते थे . जिसे वो अपने बच्चों की तरह प्यार करते थे . जिनके लिए वो माँ बाप भाई सब थे . जिसकी तलाश सब को थी पर कोई नहीं जनता था वो इसी शहर में थी मगर सब उससे अनजान थे . मुझे समझ hi नहीं आ रहा था क मैं क्या कहूं उन्हें. मेरी आँखों में रुके आंसुओं ने अपनी सीमा लाँघ ली थी और अब मेरे चेहरे पर लकीरें बनाते हुए नीचे गिर रहे थे .

मंजू : रट हुए ) मेरी दुनिया मेरे भैया भाभी और मेरा बिट्टू hi थे मगर भगवन ने एक पल में hi मुझसे सब चीन लिया . काश मैं भी अपने भैया भाभी और अपने बिट्टू क साथ hi मर जाती .

अमित : रट हुए ) आप ने कभी अपने बिट्टू को तलाशने की कोशिश क्यों नहीं की बाआआ

मेरे मुँह से ‘ बुआ ‘ सुनते hi मंजू म को झटका लगा और एक डैम से वो रोटी रोटी चुप हो गयी और मुझे हैरानी से देखने लगी .

मंजू : क्या कहा तुमने ?

अमित : रट हुए ) आपने अपने बिट्टू को तलाशने की कोशिश क्यों नहीं की ‘ बाआआ ‘

मंजू : शॉकेड ) यय ये ये ये तुम क्या कह रहे हो ? मेरा बिट्टू तो मर चूका है . मुझसे ऐसा मज़ाक .....

अमित : रट हुए ) आपका बिट्टू ज़िंदा है बुआ और आपके सामने बैठा है .

मंजू म मेरी बात सुनते hi झटके से कड़ी हुई और 2 कदम पीछे हैट गयी . अपने हाथों को अपने मुँह पर रखे वो बड़ी बड़ी आँखों से मुझे देख रही थी जैसे ये कोई अनहोनी हो रही हो जिस पर उन्हें यकीन नहीं हो रहा था .

मंजू : ये तुम क्या बोले जा रहे हो ? तुम्हे क्या हो गया है ? मेरे साथ ऐसा मज़ाक मत करो. मत करो ऐसा मेरे साथ

अमित :रट हुए ) ये मज़ाक नहीं है बुआ , मैं hi आपका बिट्टू हूँ. माँ पापा तो मुझे छोड़ गए पर आपने भी एक बार भी मुझ से मिलने की कोशिश क्यों नहीं की ? क्या उनके साथ मेरा वजूद भी ख़तम हो गया था आपके लिए ?

मंजू : ज़ोर से ) nahiiiiiiiiiiii ,,,,, ऐसा नहीं हो सकता . केहदो क तुम झूठ बोल रहे हो. ऐसा नहीं हो सकता ये सब झूठ है .

अमित : रट हुए ) जानती हैं न मेरे बर्थडे पर hi माँ पापा और नाना नानी की एक्सीडेंट में मौत हुई थी . उस दिन शायद सब मंदिर जा रहे थे मेरे लिए पूजा करवाने . मगर मैं उस एक्सीडेंट में बच गया था . पर आपको कैसे पता होगा , आपने तो कभी जानने की कोशिश hi नहीं की क आपका बिट्टू ज़िंदा भी है या मर गया.

मंजू : तो क्या ,,, तो क्या तुम सच में ??????

अमित : हाँ बुआ मैं hi आपका बिट्टू हूँ . आपके पन्नू भैया और दामिनी भाभी का बीटा . जिसे आपने मारा हुआ मन लिया था पर बदकिस्मती से मैं ज़िंदा बच गया था .

मेरे मुँह से ये सुनते hi मंजू बुआ ने भाग कर मुझे गले से लगा लिया और मेरे सर को दोनों हाथों में थामे मेरे चेहरे पर लगातार चूमने लगी . साथ hi वो रोये जा रही थी और बोलती जा रही थी .

मंजू :रट रट चूमते हुए ) तू इतने दिन कहाँ था ? किसी ने मुझे बताया क्यों नहीं की तुम ज़िंदा हो ? मैं इतने सैलून तक यही सोचती रही क तुम भी भैया भाभी क साथ .. ये मेरे साथ इतना बड़ा धोखा किसने किया ? किसने मुझे मेरे बिट्टू से दूर किया ? मुझे तो यही कहा गया था क तुम भी भैया भाभी क साथ उस एक्सीडेंट में करे गए . तुम अब तक कहाँ थे ? कहाँ थे अब तक? तुझे कभी अपनी इस बदनसीब बुआ की यद् नहीं आयी ? एक बार भी तुझे तरस नहीं आया अपनी बुआ पर ? बोल कहाँ था तू ? कहाँ था अब तक ?

अमित : रट हुए ) यही तो मैं आपसे जानना चाहता हूँ क आपने कभी कोशिश क्यों नहीं की मेरे बारे में जानने की ? मुझे मेरे मां ममी अपने साथ ले गए थे पर आपने एक बार भी उन लोगों से मिल कर कुछ जानना ठीक नहीं समझा? आखिर ऐसी क्या बात हो गयी थी जो आपको अपने बिट्टू की ज़रा भी यद् नहीं आयी ?

मंजू : कैसे आती मैं ? बड़े भैया ने कहा था क उन लोगों ने भैया भाभी की तुम्हारी लाश भी देखने नहीं दी. ऊपर से झगड़ा भी किया . वो तुम्हारे नाना नानी और तुम्हारी माँ की मौत का ज़िम्मेदार पन्नू भैया को ठहरा रहे थे . ऊपर से उनहोंने धमकी भी दी थी क अगर कोई कभी उनके घर आया तो वो जान से मर डालेंगे .

अमित : आप तो जानती थी न सब को ? क्या आपको लगता है वो लोग ऐसा कर सकते थे ? आपसे झूठ बोलै गया था बुआ . हाँ मैं ज़िंदा हूँ ये बात ज़रूर छिपाई गयी जिसकी शायद कोई वजह ज़रूर रही होगी . पर ये भी सच है क उन सब को आपका इंतज़ार था . बाबा ने बताया था मुझे आपके बारे में क आप पापा की लाडली थी और मुझसे भी कितना प्यार करती थी. और इसी लिए मैं आपसे मिलना चाहता था एक बार क आपसे पूछ सकूँ , आपने ऐसा क्यों किया ? काम से काम एक बार तो आप वहां आती मगर आप नहीं आयी और न hi कभी किसी से मिलने की कोशिश की .

मंजू : कैसे आती , कैसे आती मैं. मेरा दिल कई बार किया था आने को . पर हर बार मुझे रोक लिया गया और ऐसी ऐसी बातें बताई गयी क मेरे दिल में भी गुस्सा भर गया था उन सब क प्रति. पर वो भी तो बता सकते थे न क तुम ज़िंदा हो. आखिर उन लोगों ने ऐसा क्यों किया? क्यों तुम्हे मुझसे दूर रखा . अगर वो नहीं चाहते थे क तुम हमारे साथ रहो तो मुझे hi बता देते . मैं सब कुछ छोड़ कर अपने बिट्टू क पास चली आती.

अमित : मैंने कहा न बुआ , बाबा ने ये बात सब से छुपाई थी . यहाँ तक क मुझे भी नहीं पता था क मैं असल में उनका बीटा नहीं हूँ. उन्होंने हमेशा मुझे अपने सेज बेटे की तरह hi पला. और जब से मुझे अपने माता पिता क बारे में पता चला है मैं तब से hi तड़प रहा था आप से मिलने क लिए . और देखो इतने दिनों से आप मेरे सामने थी मगर मैं आपको पहचान नहीं पाया .

मंजू : पहचान तो मैं नहीं पायी तुझे , तुझे देखते hi मुझे पन्नू भैया का चेहरा नज़र अत था और तुम्हारी ऑंखें ,, तुम्हारी ऑंखें बिलकुल दामिनी भाभी जैसी हैं. मगर मैं कभी ये समझ hi नहीं पायी क तुम्ही मेरे बिट्टू हो. अब मैं तुझे अपने से दूर नहीं जाने दूंगी . अब से तू मेरे साथ hi रहेगा . अब मैं अकेली नहीं हूँ दुनिया में . मेरे पन्नू भैया का बीटा मेरे साथ है मेरी दामिनी भाभी का बीटा मेरे साथ है . मेरा बिट्टू मेरे साथ है .

इतना कह कर मंजू बुआ फिर से मुझे चूमने लगी . हम दोनों लगातार रोये जा रहे थे . हमारे अंदर क जज़्बात आंसू बन कर लगातार बह रहे थे और हम खुद को रोक hi नहीं प् रहे थे . मंजू बुआ कभी मुझे गले लगा लेती कभी चूमने लगती कभी ज़ोर ज़ोर से रोने लगती.

अमित : बस करो बुआ बस करो अब और नहीं . बहुत रो लिया आपने अब मैं आपको और रोने नहीं दूंगा . अब आप अकेली नहीं रहेंगी , अब से आप हमारे साथ रहेंगी . चलिए हूँ अभी घर चलते हैं. माँ बाबा आपको देख कर बहुत खुश होंगे .

मंजू : नहीं नहीं , मैं उनके सामने किस मुँह से जाउंगी ? एक बार भी मैं उनसे मिलने नहीं गयी . बल्कि उन्हें गलत समझती रही. वो तो मेरी शक्ल भी देखना पसंद नहीं करेंगे. मैं किस मुँह से उनके सामने जॉन.

अमित : आप गलत समझ रही हैं बुआ . वो ऐसे बिलकुल भी नहीं हैं. बल्कि वो तो खुद इस बात से हैरान थे क आप कभी मिलने क्यों नहीं आयी. वो आपको अपनी छोटी बहिन जैसे hi मानते हैं. जब उनको सचाई का पता चलेगा तो वो बिलकुल भी नाराज़ नहीं होंगे .

मंजू : नहीं , मैं नहीं जाउंगी उनके पास . फ़िलहाल अभी तो नहीं. मुझ में इतनी हिम्मत नहीं क उनका सामना कर सकूँ.

अमित : क्या मेरे लिए भी नहीं ?

मंजू : तेरे लिए तो मैं अपनी जान भी दे सकती हूँ . पर तुझे मेरी कसम मुझे मजबूर मत कर. तक़दीर ने पहले hi मेरे साथ इतना बड़ा खिलवाड़ कर दिया है. जिसे अपनी गॉड में खिलाया था उसी क साथ मैं ......

इतना कह कर मंजू बुआ मुझसे दूर हैट गयी और चेहरे दूसरी तरफ कर क रोने लगी. मैं समझ रहा था क वो हम दोनों क बीच बने संबंधों से अब आहत हो रही हैं . मैंने आगे बढ़ कर उनके कंधे पर हाथ रखा तो वो बिना मेरी तरफ देखे फिर से बोली .

मंजू : मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी , बहुत बड़ी गलती . भैया भाभी मुझे कभी माफ़ नहीं करेंगे . शायद उनके कहने से hi भगवन ने तुम्हे मेरे पास भेजा था और मैं वासना की आग में लिपटी तुम्हारे साथ ...... छींन ,,, मुझे तो भगवन भी माफ़ नहीं करेगा . अपने आप से hi नफरत हो रही है मुझे ये सोच कर क मैं अपने hi भतीजे क साथ वो सब करती रही.

अमित : वासनाआ ??? क्या वो सिर्फ वासना थी? नहीं बुआ वो वासना नहीं प्रेम था . ऐसा प्रेम जिसमे न कोई स्वार्थ था न कोई भूख . अपने दिल पर हाथ रख कर कहिये क आपने मेरे साथ दिल की गहराईयों से प्यार नहीं किया ?

मंजू : भगवन क लिए चुप हो जाओ अमित . मैं पहले hi पाप कर चुकी हूँ. मुझे और पापी मत बनाओ .

अमित : पाप ?? अब आप निश्छल प्रेम को पाप कहने लगी ? अभी कुछ देर पहले तक हम दोनों क बीच जो प्यार था वो एक सच जान लेने से से पाप हो गया ? अगर हमारे बीच का ये रिश्ता ज़ाहिर नहीं होता तो क्या तब भी आप उसे पाप hi कहती ?

मंजू : चुप हो जाओ प्लीज . तुम अछि तरह जानते हो क एक बुआ भतीजे क बीच ऐसा रिश्ता सिर्फ पाप hi कहलाता है. समाज में ऐसे रिश्तों को सिर्फ तिरस्कार की नज़रों से देखा जाता है. किसी को तो बाद में जवाब देता है इंसान , पर खुद को क्या जवाब दूँ मैं? क्या जवाब दूँ खुद को बोलो ? अपने hi सेज भतीजे क साथ मैं वो सब करती आयी हूँ . छींन ,, मुझे खुद से hi घिन आ रही है . इससे ाचा होता मैं मर hi जाती .

अमित : अनजाने में हुए पाप क लिए तो भगवन भी माफ़ कर देता है बुआ . और हमने तो कोई पाप भी नहीं किया . आप जिस समाज की दुहाई दे रही हैं , तब कहाँ था ये समाज जब अकेली ज़िन्दगी में दुखों का बोझ धो रही थी. तब तो ये समाज आपके दुःख दूर करने नहीं आया था . हम दोनों तो जानते भी नहीं थे क हम दोनों क बीच कोई रिश्ता और भी है . मैंने तो आपके दिल क दर्द को महसूस किया और जो मैं कर सकता था वो मैंने किया . हमारा मिलना भगवन की मर्ज़ी थी . वैसे भी तो दुनिया में सब कुछ उसी की मर्ज़ी से hi तो होता है न ? तो फिर इसमें आप दोषी कैसे हुई ? अगर आप खुद को दोष दे रही हैं तो फिर आपके साथ मैं भी बराबर का दोषी हुआ न . ऐसे तो फिर मुझे hi मर जाना चाहिए .....

मेरी बात ख़तम होने से पहल hi बुआ मेरे मुँह से मरने की बात सुन कर एक डैम से पालतू और मेरे मुँह पर हाथ रख लिया .

मंजू : रट हुए ) ख़बरदार जो मरने की बात भी की तो . भैया की तरह क्या तू भी मुझे छोड़ कर चला जायेगा , हाँ ? इससे तो ाचा है मुझे अपने हाथों से hi मर दे. ऐसी ज़िन्दगी से तो मौत हज़ार दर्जे अछि है , हज़ार दर्जे अछि है . मार दे मुझे अपने हाथों से , मार दे मुझे मार दे .

इतना सब कहते कहते बुआ रोटी हुई ज़मीन पर बैठ गयी थे कपडे नोचती नोचती. बुआ का रुदन और भी ज्यादा हो गया था . मैं उनके मन की व्यथा को महसूस कर रहा था क उनके दिल पर क्या बीत रही थी . अपने hi सेज भतीजे क साथ अपने जिस्मानी ताल्लुकात को यद् कर क वो खुद को दोषी मन रही थी. उनके लिए मुश्किल हो रहा था इस बात को एक्सेप्ट करना . हालाँकि वो सब अनजाने में हुआ था जिसके लिए न वो दोषी थी न मैं , दोषी था तो सिर्फ वक़्त . और अब हम उस दोराहे पर खड़े थे जहाँ से किस तरफ जाएँ हमें समझ नहीं आ रहा था . जहाँ हम दोनों क दिल खुश भी थे अपना असली रिश्ता जान कर वहीँ इससे पहले हमारे बीच बन चूका वो रिश्ता अब हमारे असल रिश्ते की पवित्रता पर दाग सा लग रहा था . इस सचाई क सामने आने से पहले तक मैं मंजू बुआ की दुनिया था और अब वो खुद से hi शर्मिंदा हो रही थी सिर्फ मेरी वजह से. हालाँकि मेरे लिए ये बड़ी बात नहीं थी पर क्यूंकि मैं पहले hi ऐसे रिश्तों में पद चूका था मगर बुआ क लिए ये बहुत बड़ी गलती बन गया था.

अमित : मुझे तो होश भी नहीं था जब मेरे माँ बाप अकेला मुझे छोड़ गए . और इतने सालों तक मैं इस सच से hi अनजान रहा . जब से मुझे मेरे माता पिता क बारे में पता चला मैं तब से hi खुद को अकेला समझने लग गया था . और फिर मुझे आपके बारे में पता चला . सब ने यही कहा क आप पापा की जान थी इस लिए आप को एक बार देखना चाहता तह , पूछना चाहता था क आखिर किस लिए आपने अपने इकलौते भतीजे क बारे में जानने की कोशिश तक नहीं की . और अब जब आप मेरे सामने हैं तो आप ऐसी बातें कर रही हैं. मैं जनता हूँ आपने ज़िन्दगी में बहुत दुःख देखे हैं. मैंने आपके हर दर्द को महसूस किया और हमारे बीच जो कुछ भी हुआ उसमे किसी की कोई गलती नहीं थी. फिर आप इसके लिए खुद को क्यों दोष दे रही हैं? ये भगवन की hi मर्ज़ी थी जो हम करीब आये. मैंने आपसे वडा किया था क आपको कभी दुखी नहीं होने दूंगा और आज आप फिर से दुखी हैं सिर्फ मेरी वजह से . मुझे समझ नहीं आ रहा क मैं अपनी बुआ क मिलने की ख़ुशी मानों या फिर जो हुआ उसके लिए दुःख मानों. पर इसमें न आपका दोष है न मेरा . हम दोनों ने hi एक दूसरे को दिल से मुहब्बत की है बुआ जिसमे ज़रा सी भी हवस नहीं थी. ये आप अछि तरह जानती हैं. चाहे ये सब अनजाने में हुआ पर ये पाप कभी नहीं था . फिर भी अगर आप इसे पाप समझ रही हैं तो ,,,, मैं कभी आपके सामने नहीं आऊंगा. क्यूंकि मुझे देख कर आपको बार बार दुःख होगा . और मैं नहीं चाहता क मेरी वजह से आप कभी दुखी हो. मैं जा रहा हूँ बुआ, सोचा था क हमेशा आपके साथ रहूँगा मगर ज़िन्दगी इस मोड़ पर ले आएगी ये नहीं जनता था . हो सके तो मुझे माफ़ कर देना . पर इतना ज़रूर यद् रखना क अगर आपने अपने साथ कुछ भी गलत करने की कोशिश की तो मैं भी खुद को ख़तम कर लूंगा मैं कसम खता हूँ.

बुआ लगातार रोये जा रही थी पर मेरी आखिरी बात सुन कर वो एक डैम शॉकेड सी मुझे देखने लगी . मगर अब मुझ में और हिम्मत नहीं थी क मैं वहां रुकूँ. मंजू बुआ को इस वक़्त समझाना शायद नामुमकिन था इस लिए मैं वहां से निकल आया . मुझे लगा क कहीं वो अपने साथ कुछ गलत न कर लें इस लिए मैंने ये सब कह दिया था . उनकी बातों से साफ़ ज़ाहिर था क वो कितनी ज्यादा दुखी हो रही हैं. और जितना ज्यादा वो इमोशनल थी उस वजह से मेरे दिल में एक दर सा था. जाते जाते ये सब कह कर मैंने उन्हें कुछ भी गलत करने से रोक तो दिया था . पर समस्या वहीँ क वहीँ थी. इतने सैलून बाद हम दोनों मिले भी तो किस मोड़ पर . अब बुआ क्या फैसला लेगी ये उन पर था मगर अब मैं उन्हें खोना नहीं चाहता था . बुआ क घर से निकल कर मैं खुद को संभालता हुआ पैदल hi चल पड़ा .

वहीँ मंजू अभी भी सदमे में थी. जाते जाते अमित ने जो कहा था वो सब सुन कर उसका दिल एक अनजाने दर से भर गया था. मगर उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था . तकदीर ने आज फिर से उसके साथ बहुत बड़ा धोखा किया था . मंजू की ज़िन्दगी बस दुःख दर्द की किताब बन कर hi रह गयी थी . बचपन में hi माँ बाप का साया चीन गया . उसके बाद जो उसकी दुनिया था उसका बड़ा भाई जो उसे माता पिता भाई बहिन दोस्त सबका प्यार देता था उसे भी तकदीर ने चीन कर बेसहारा कर दिया . सौतेले भाइयो ने उसे सर पर बोझ समझ कर हालत लोगों क हवाले कर दिया जहाँ उसे सिवाए दुखों क कुछ नहीं मिला . इतने सैलून बाद उसे अमित क रूप में थोड़ी सी खुशियां मिली थी . एक उम्मीद की किरण उसकी ज़िन्दगी में आयी थी. उसकी सुनी ज़िन्दगी में फिर से रंग भरने लगे थे मगर एक hi पल में सब फिर से ख़तम हो गया . जिसे वो अपनी ज़िन्दगी समझ रही थी जिसके साथ वो अपनी उम्र बिताना चाहती थी वो उसका अपना सागा भतीजा निकला . जिसे गॉड में खिलाया था उसी की गॉड में वो खेल रही थी इतने दिनों से. मंजू को जितनी ख़ुशी अपने भतीजे को ज़िंदा देख कर हुई उससे कहीं ज्यादा दुःख उसे अपने और अमित प्रेम सम्बन्धो पर हो रहा था . उसका दिल छह रहा था क अभी क अभी धरती फट जाये और वो उसमे समां जाये . या फिर वक़्त का पहिया पीछे घूम जाये और जो कुछ भी अभी कुछ देर में हुआ वो सब न हो. मगर दोनों hi नहीं हो सकते थे . मंजू मन hi मन इतना दुखी हो गयी थी क उसे ज़िन्दगी क इस भद्दे रूप से ज्यादा मौत अछि लग रही थी. मगर जाते जाते अमित ने खुद को मरने की जो धमकी दे दी थी उससे अब वो मर भी नहीं सकती थी. मंजू अमित को जाते हुए देखती रही वो उसे रोकना चाहती थी उसे गले लगाना चाहती थी मगर ऐसा करने की भी जैसे हिम्मत नहीं हो रही थी. सिवाए रोने क अब उसके पास और कुछ नहीं बचा था . ज़मीन पर बैठी वो रोये जा रही थी और बार बार भगवन से यही सवाल पूछ रही थी क आखिर उसकी कौन सी ऐसी खता थी जिसकी उसे इतनी बड़ी सजा मिली.

मैं मंजू बुआ क बारे में सोचता सोचता चला जा रहा था , मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था क मैं क्या करूँ . मंजू बुआ क मिलने की जो ख़ुशी होनी चाहिए थी अब उसकी जगह दर्द और पछतावे ने ले ली थी . जो भी हुआ अनजाने में हुआ था पर ज़िन्दगी क आईने में वो अक्स ऐसे दिखेगा ये सोचा भी नहीं था . मैं अपने hi ख्यालों में गम था क मेरा फ़ोन बजने लगा . ये फ़ोन मोहित का था जो मुझसे पूछ रहा था क मैं कहाँ हूँ . मैंने उसे बता दिया क मैं बस आ रहा हूँ और जल्दी से उसके घर की तरफ चल दिया . मंजू बुआ की जो हालत थी उसे देख कर मुझे उनका ज़िकर करना ठीक नहीं लग रहा था इस लिए मैंने सोच लिया क जब तक वो खुद नार्मल नहीं हो जाती तब तक मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगा . पर उनको नार्मल कैसे किया जाये ये भी एक पेचीदा मसला था . आखिर वो इस सचाई को कैसे एक्सेप्ट कर पाएंगी . मुझे बार बार उनकी चिंता हो रही थी. मेरा दिल बार बार एहि कह रहा था क मुझे उन्हें छोड़ कर नहीं आना चाहिए था कहीं वो अपने साथ कुछ कर न लें. मगर सचाई ये भी थी क मेरे सामने होने पर वो खुद को और भी ज्यादा दोष देती रहती इसी लिए मैं चला आया था . तभी मुझे ऋतू का ख्याल आया एक वो hi तो थी मंजू बुआ की सब कुछ उनकी दोस्त उनकी बहिन उनकी हमराज़ हमदर्द . मैंने जल्दी से फ़ोन निकला और ऋतू को फ़ोन किया . उन्होंने भी दूसरी hi रिंग पर फ़ोन उठा लिया

रीता : तो आ गयी हुज़ूर क अपनी कनीज़ की यद्. शुक्र है अपने बीमार का ख्याल तो आया जनाब को.

अमित : आप अभी कहाँ हैं ?

ऋतू : चौंकते हुए ) क्या बात है ? तुम कुछ परेशां लग रहे हो . क्या हुआ है ? सब ठीक तो है न ?

अमित : कुछ ठीक नहीं है. आपको अभी मंजू बुआ क पास जाना होगा वर्ण वो कहीं खुद को कुछ ....

ऋतू : क्या हुआ है मंजू को ? और वो खुद को कुछ क्यों करेगी ? ,,,,,, एक मिनट ,,, तुमने अभी अभी क्या कहा ? मंजू ‘ बुआ ‘ ???

( ऋतू एक डैम से शॉकेड हो गयी थी बुआ शब्द सुन कर . उसे अपने कानो पर जैसे यकीन नहीं हो रहा था )

अमित : हाँ बुआ ,,, क्यूंकि वो मेरी बुआ हैं. मैं उनके सेज भाई का बीटा हूँ और वो मेरी सही बुआ हैं. ये बात मुझे आज hi पता चली है. किस्मत ने बहुत बड़ा मज़ाक किया है हमारे साथ. मंजू बुआ रोये जा रही हैं. कहीं वो खुद को कुछ कर न ले. प्लीज आप अभी उनके पास चले जाइये. उन्हें बस आप hi संभल सकती हैं.

ऋतू : ओह माय गॉड , ओह माय गॉड . ओह सहित , ऐसा कैसे हो सकता है. क्या तुम सच कह रहे हो? कहीं तुम्हे कोई गलत फेहमी तो नहीं हुई?

अमित : मुझे कोई गलत फेहमी नहीं हुई है . प्लीज आप अभी क अभी बुआ क पास चले जाइये वर्ण कहीं वो खुद को कुछ कर न लें. अगर ऐसा हुआ तो मैं भी .....

ऋतू : स्टॉप , इससे आगे कुछ मत कहना , मंजू ऐसा कुछ नहीं कर सकती , मैं अभी उसके पास जाती हूँ. और प्लीज तुम भी खुद को संभालना . मुझे तो अब भी यकीन नहीं हो रहा जो तुमने अभी कहा. तुम अपना ख्याल रखना मैं उसके पास जा रही हूँ.

ऋतू से बात कर क मुझे कुछ तसल्ली हुई और मैं अपने मन को समझाता हुआ मोहित क घर पहुँच गया जहाँ सब मेरा hi इंतज़ार कर रहे थे .

रमा : कहाँ चले गए थे तुम ? हम कब से इंतज़ार कर रहे हैं .

अमित : वो एक दोस्त से मिलने गया था.

मोहित : चल आज यार साथ में खाना कहते हैं .

अमित : नहीं यार मेरा मन नहीं है .

रमा : ऐसे कैसे मन नहीं है . चुपचाप बैठो यहाँ .

आंटी की बात मानते हुए मैं बैठ तो गया पर मेरा मन बिलकुल भी नहीं था कुछ खाने का. मैंने अपने चेहरे से कुछ ज़ाहिर नहीं होने दिया क मैं किन हालातों से निकल कर आ रहा हूँ . मगर करिश्मा दीदी मुझे घूर कर देख रही थी . मेरी नज़र जब उनसे मिली तो खुद को ऐसे घूरता देख कर मैंने नज़रें चुरा ली.

अमित : निधि दीदी नज़र नहीं आ रही कहीं.

रमा : हाँ बीटा वो घर से फ़ोन आया था तो वो घर चली गयी . बोल कर गयी है क सुबह जल्दी आ जाएगी . लो खाना खाओ .

मन न होते हुए भी मैं चुप चाप खाना खाने लगा. बार बार मेरे दिमाग में बस मंजू बुआ का hi ख्याल था इस लिए मेरा हाथ खाना कहते कहते रुक जा रहा था. मोहित और आंटी मुझसे बात कर रहे थे पर मेरा बिलकुल भी ध्यान नहीं था.

रमा : अमित ,,,, अमित !! क्या हुआ तुम खाना क्यों नहीं खा रहे ? क्या बात है ? तुम्हारा ध्यान कहाँ है ?

अमित : हह हम्म्म , कुछ नहीं वो बस माँ की यद् आ रही थी.

रमा : क्यों ? क्या अब हमारा साथ तुम्हे ाचा नहीं लग रहा ?

अमित : नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है. वो बस ऐसे hi . माँ यद् कर रही होगी न .

रमा : कोई बात नहीं , कल तो तुम जा hi रहे हो गाओं. अब आराम से खाना खाओ.

मैंने जैसे तैसे बेमन से थोड़ा बहुत खाना खाया और थकावट का बहाना कर क अपने कमरे में चला गया . मोहित मुझसे बात करना चाहता था पर मैंने मन कर दिया और वो भी अपने कमरे में चला गया . कमरे में आते hi मैं बीएड पर पद गया और मंजू बुआ क बारे में सोचने लगा. तभी मेरे फ़ोन पर रीमा की कॉल आने लगी . रीमा का नाम देखते hi मेरे हाथ कॉल पिक करते करते रुक गए . रीमा मंजू बुआ की भतीजी यानि क मेरे चाचा की hi लड़की थी जिसे मैं dilo-jan से चाहता था और अब एक hi झटके में सब ख़तम हो गया . तकदीर ने क्या भद्दा मज़ाक किया था . जिस जिस क साथ प्यार की दुनिया बसने की सोच रहा था वो एक पल में hi पराये हो गए. कहाँ मैं अपने खोये हुए परिवार से मिलना चाहता था और अब ऐसी हालत हो गयी थी क सचाई बताने में भी शर्म आ रही थी . मैंने रीमा का फ़ोन बजने दिया , वो लगातार फ़ोन किये जा रही थी और मैं बस फ़ोन साइलेंट पर दाल कर सोच रहा था . रीमा मेरी बहिन थी रिश्ते में जिसे मैं अपनी पत्नी अपनी ज़िन्दगी बनाना छह रहा था . और रुपाली मेरी सही चची जिसके साथ भी मैं शारीरिक सम्बन्ध बना चूका था और शीना ,, मोंटी ,,, और तो और अपनी ताई क साथ मैंने कितना ब्रुचालल्य सेक्स किया था . ये सब सोच सोच कर मेरा सर दर्द से फैट जा रहा था. उन सब क सामने अब मैं कैसे जाऊंगा कैसे उन्हें कहूंगा क मैं उनका अपना हूँ. मैं तो इस काबिल भी नहीं रह गया था क उन्हें अपना सच बताऊँ. मोंटी की तो मैंने ज़िन्दगी hi बर्बाद कर दी थी . एक से एक सवाल मेरे दिमाग में घूमते जा रहे थे और मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी. सब से बड़ा सवाल तो मेरे प्यार का था . रीमा ,,, अब रीमा को मैं किस नज़र से देखूं? चाहे मैं अपनी मौसी की बेटियों क साथ भी सेक्स कर चूका था पर रीमा क साथ मैं ज़िन्दगी गुजरने क ख्वाब देख चूका था . और अब सब ख़त्म हो गया था . मैं कभी खुद को तो कभी अपनी तकदीर को कौस रहा था क ये मेरे साथ क्या हो गया. सच hi कहते थे सब क मैं हूँ hi मनहूस और फिर से एक बार मेरी मनहूसियत मेरे सामने hi आ गयी थी. एक बार फिर से मैं सब कुछ खो बैठा था . मेरी आँखों में नींद बिलकुल भी नहीं थी और दिल खून क आंसू रो रहा था . सब सपने ख़ाक हो गए थे , सब अरमान मिटटी हो गए थे . मेरा दिल रोने को हो रहा था पर रो कर भी क्या होना था . मुझे माँ की यद् आ रही थी . मेरा फ़ोन फ़्लैश कर रहा था मगर अब फ़ोन घर से आ रहा था . शायद माँ hi कर रही होगी . मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी क मैं फ़ोन उठाऊं मगर जब बार बार फ़ोन बजता रहा तो मुझे लगा क फ़ोन उठा लेना चाहिए वर्ण सब टेंशन में आ जायेंगे .

अमित : hello

‘ hello , कहाँ हो तुम ? फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे थे ? क्या हुआ है ? तुम बोलते क्यों नहीं ? ‘ फ़ोन पर माँ hi थी . माँ की आवाज़ सुनते hi मेरी आँखों से आंसू बहने लगे पर ज़ुबान थी की जैसे लकवा मर गयी हो.

गौरी : तुम बोलते क्यों नहीं बीटा , मेरा hi घबरा रहा है. बात क्या है कुछ तो बोल.

‘ मुझे दो भाभी , hello hello ,, hello अमित तुम सुन रहे हो न? प्लीज कुछ तो बोलो . मेरा दिल घबरा रहा है . प्लीज कुछ तो बात कर ‘

ये आवाज़ दिव्या मौसी की थी जिन्होंने माँ से फ़ोन ले लिया था और अब वो मुझसे बात कर रही थी . मगर मेरे कब नहीं खुल रहे थे . मगर मैं नहीं चाहता था क वो सब टेंशन में आएं इस लिए मैंने हिम्मत कर क बात की .

अमित : hello , हाँ हाँ मौसी मैं ठीक हूँ . वो आवाज़ नहीं आ रही थी शायद . आप कैसी हैं और माँ कैसी है ?

दिव्या : तू ठीक तो है न ? हम यहाँ सब ठीक हैं. हमें बड़ी बेचैनी हो रही है बीटा . सब ठीक तो है न? तू घर कब आ रहा है ?

अमित : मैं बिलकुल ठीक हूँ मौसी और यहीं हूँ मोहित क घर . आप मेरी चिंता मत करो.

दिव्या : कैसे चिंता न करूँ? मेरा दिल घबरा रहा है जैसे कुछ हुआ है तेरे साथ. तू जल्दी से अजा मैं तुझे देखना चाहती हूँ.

गौरी : बीटा जल्दी से अजा देख जब तक तुझे देख नहीं लुंगी मुझे चैन नहीं आएगा .

अमित : माँ मैंने कहा न सब ठीक है. आप और मौसी ऐसे hi चिंता कर रहे हो. मैं यहीं घर पर hi तो हूँ और कल वापिस आ रहा हूँ घर . ाचा अब मैं रखता हूँ . रत बहुत हो गयी है आप भी सो जाओ.

मैंने माँ को समझा बुझा कर फ़ोन काट दिया और साइड में रख दिया . दिव्या मौसी और माँ दोनों क hi दिल शायद मेरे साथ हुए इस हादसे को महसूस कर रहे थे मगर किसी को क्या पता था जो मेरे साथ हुआ . रत क 12 बज चुके थे मगर नींद तो जैसे आज आने hi नहीं वाली थी. मैं अँधेरे में hi बीएड पर बैठा हुआ था क मेरे कमरे का दरवाज़ा खुला और कोई चुपके से कमरे में दाखिल हुआ. दरवाज़ा धीरे से बंद कर क वो साया मेरी तरफ बढ़ा मुझे समझते देर नहीं लगी क हो न हो ये रमा आंटी hi होंगी. और मेरा अंदाज़ा सही साबित हुआ जब बीएड क करीब आ कर उन्होंने धीमी आवाज़ में मेरा नाम लिया .

रमा : अमित ,, अमित ,, सो गए क्या ?

उधर ऋतू घर पर आराम कर रही थी जब अमित का फ़ोन आया था और अपनी सबसे खास सहेली मंजू क बारे में सुन कर वो भी टेंशन में आ गयी और जल्दी से कपडे चेंज कर क अकेली hi निकल जाती है मंजू से मिलने . जब वो मंजू क घर पहुंची तो दरवाज़ा खुला हुआ था . ऋतू भागते हुए घर क अंदर घुसी तो मंजू ज़मीन पर hi लेती हुई थी जैसे उसे कुछ हो गया हो.



ऋतू : चिल्ला कर ) मंजूउउउउउ
 
दोस्तों सुख दुःख सब की ज़िन्दगी में अत जाता है . जिन दोस्तों ने मेरे इस बात को समझा उनका शुक्रिया और जिन लोगों को सिर्फ अपडेट से hi मतलब था उनका भी शुक्रिया . इंसान का अंतर्मन hi फैसला करता है उसकी अच्छी बुराई का. कहानी मैंने किसी वह वही क लिए नहीं लिखी फिर भी लोग बहुत सी बातें बनाते रहे मेरे कुछ दिन एब्सेंट होने से . उनके लिए इतना hi कहूंगा क भाई खुद hi कुछ लिख लो ताकि बाकि सब भी पढ़ सकें . किसी पर उंगली उठाना आसान होता है . पर खुद करना हो कुछ तो पता चलता है. बकवास यहाँ वही लोग करते हैं जो खुद कुछ नहीं करते . आप सब भाइयों को यही कहना चाहता हूँ क ज़िन्दगी में काम काज भी तो देखना है दोस्तों जितना वक़्त मिलता है मैं कोशिश करता हूँ लिखने की . कभी थोड़ा कभी ज्यादा कर क जैसे भी हो कहानी अंजाम तक ज़रूर पहुंचेगी
 
अपडेट 232



ऋतू : मंजूउउउ ,,, मंजूउउउ होश में आओ , होश में आओ मंजू .

ऋतू जब मंजू क घर पहुंची तो वो बेसुध फर्श पर पड़ी हुई थी. असल में वो तो रो कर बेसुध हो गयी थी. आत्मग्लानि से भरी मंजू खुद को दोष देती हुई रो hi रही थी जब से अमित उसके पास से गया था. वो छह कर भी अपने भतीजे को अपने साइन से नहीं लगा पायी क्यूंकि उसकी अंतरात्मा ने उसे दोषी बना दिया था . अपने hi सेज भतीजे क साथ प्यार और शारीरिक सम्बन्ध बनाने का . मंजू तो जैसे अब जीने की ीचा hi छोड़ चुकी थी . ज़िन्दगी ने आज ऐसा झटका दे दिया था क उसे अब ज़िन्दगी से hi नफरत हो गयी थी. शुरू से hi उसने गम देखे थे. जन्म क वक़्त hi माँ चल बसी और फिर पिता की मौत क बाद सौतेले भाइयों से घर से निकल दिया था. एक पवन भैया hi उसके सब कुछ थे और फिर उसे छोटी बहिन की तरह प्यार करने वाली उसकी दामिनी भाभी आयी जिसमे उसे माँ का भी प्यार मिला था. मगर वक़्त ने वो भी उससे चीन लिया. उसके बाद तो मनो ज़िन्दगी नरक hi बनती गयी थी और इतने सैलून बाद उसकी उजड़ी हुई ज़िन्दगी में अमित बहार बन क आया था जिसके साथ अब वो जीना चाहती थी मगर तकदीर ने आज वो भी चीन लिया . जिसे अपना सब कुछ मन चुकी थी और अपना सब कुछ दे चुकी थी वो उसका अपना सागा भतीजा निकला. ये आत्मग्लानि उसे जीने नहीं दे रही थी क अपने सेज भाई क बेटे क साथ hi उसने सब किया .

ऋतू : होश में आ मंजू ,, होश में आ. देख मैं ऋतू तेरी दोस्त . होश में आ मंजू .

ऋतू ने मंजू का सर अपनी गॉड में रख कर उसे होश में लेन की कोशिश की . ऋतू की आवाज़ का मंजू पर असर नहीं हो रहा था. मगर उसकी साँसे चल रही थी. ऋतू समझ गयी क उसकी ये हालत शॉक की वजह से हुई है. ऋतू ने जल्दी से पानी ला कर मंजू क मुँह पर छीटें मरे तो वो जैसे होश में आने लगी .

ऋतू : मंजू होश में आओ , देख मैं आयी हूँ ऋतू.

मंजू : मैंने बहुत बड़ा ,,,, पाप किया है . मैं बहुत गन्दी हूँ. अपने hi भतीजे क साथ मैंने ...

मंजू थोड़ा सा होश में आते hi फुट फुट कर रोने लगी. उसने ऋतू की तरफ देखा भी नहीं . ऋतू ने मंजू का चेहरा दोनों हाथों में थमा और उसे हकीकत में लेन की कोशिश करती हुई बोली .

ऋतू : खुद को संभल मंजू . तूने कुछ नहीं किया है. देख पहले रोना बंद के और मुझसे बात कर . मंजूउ

मंजू : मुझे छोड़ दे ऋतू मैं जीना नहीं चाहती , मैं जीना नहीं चाहती .

ऋतू : होश में आ मंजू , ये क्या बेवकूफों वाली बात कर रही है तू .

मंजू : तू नहीं जानती ऋतू मैंने कितना बड़ा पाप किया है . तुझे पता चलेगा तो तू भी मुझसे नफरत करेगी . मैं जीना नहीं चाहती , मैं जीना नहीं चाहती .

ऋतू : प्यार करना पाप कब से हो गया मंजू ?? तूने कोई पाप नहीं किया है . तू तो अमित से सच्चा प्यार करती है न और वो भी तुमसे इतना hi प्यार करता है फॉर ये पाप कैसे हुआ ?

मंजू : नाहीई , ये पाप है , क्यूंकि तुम नहीं जानती अमित मेरा .....

ऋतू : भतीजा है , यही न ?

ऋतू का जवाब सुन कर मंजू एक डैम से शॉकेड हो जाती है और रट रट चुप हो जाती है. वो बस ऋतू की आँखों में देखे जा रही थी .

ऋतू : ऐसे क्या देख रही है ? यही न क मुझे कैसे पता ?. मुझे अमित ने सब बता दिया है और उसी ने मुझे यहाँ भेजा है.

मंजू : सब कुछ जान कर भी तू कह रही है ये पाप नहीं है. अपने hi सेज भतीजे क साथ मैंने वो सब किया .

ऋतू : इसमें न तुम्हारी गलती है न अमित की. ये सब ऊपर वाले की गलती है. तो उसकी गलती क लिए तुम खुद को दोष क्यों दे रही हो? और फिर ये पाप कैसे हुआ बता मुझे .

मंजू : अपने hi सेज भतीजे क साथ वो सब करना क्या ये पाप नहीं ??

ऋतू : तुझे तो आज पता चला न क वो तुम्हारा भतीजा है पर आज से पहले क्या था ?? बता मुझे , इतनी जल्दी भूल गयी तू सब कुछ ? यद् है तुमने क्या कहा था अमित क बारे में . क तेरी ज़िन्दगी में जिस प्यार की कमी थी , जिस प्यार क लिए तू साडी ज़िन्दगी तरसती रही वो तुझे अमित क रूप में मिला . और वो भी तो तुझे सच्चे दिल से प्यार करता है न . तो फिर तू इसे पाप का नाम क्यों दे रही है ?

मंजू : तू ये कैसी बातें कर रही है . वो मेरा सागा भतीजा है . पन्नू भैया और दामिनी भाभी का बीटा है वो . मेरा बिट्टू है वो जिसे मैंने अपनी गॉड में खिलाया है .

ऋतू : उससे पहले वो एक मर्द है. एक ऐसा मर्द जिसने तेरी सुनी ज़िन्दगी में प्यार क रंग भर दिए . जिसने तुझे वो प्यार दिया जो तुझे कभी नहीं मिला था. जिसने तेरे दिल तेरी रूह को वो सुकून दिया जो तुम्हे कभी नहीं मिला था . तूने खुद hi कहा था न क तू सब कुछ छोड़ सकती है अमित क लिए . तो फिर इन रिश्तों की ज़ंजीर को क्यों नहीं तोड़ देती . देख मैं तेरी बेस्ट फ्रेंड हूँ और तुम्हे मुझसे ाचा कोई नहीं जनता . और मैंने तेरे अंदर जो ख़ुशी अमित की वजह से देखि है न वो भी नहीं देखि थी. तेरे सुनी ज़िन्दगी में प्यार क रंग भरने क लिए hi शायद भगवन ने ये सब किया था वर्ण सोच क्या तुम्हे वो प्यार मिल पता जो तुझे अमित ने दिया ? अरे आज कल तो दुनिया में सही भाई बहिन माँ बीटा बाप बेटी जीजा साली कौन से रिश्ते में जिस्मानी रिश्ते नहीं बन रहे . जो सिर्फ अपने जिस्म की भूख को मिटने क लिए है . और तुमने तो सच्चा प्यार किया है अमित से और उसने भी तुम्हे वैसा hi प्यार दिय है. फिर क्यों उस प्यार को गाली दे रही हो पाप कह कर?

मंजू : तू समझ क्यों नहीं रही वो मेरा सागा भतीजा है जिसे मैंने अपनी गॉड में खिलाया है. मैं क्या जवाब दूंगी अपने भैया को क मैंने उनके बेटे क साथ वो सब ....

ऋतू : मैंने पहले hi कहा न क भगवन शायद तुझे ज़िन्दगी की साडी खुशियां देना चाहता था इसी लिए उसने अमित को इस तरह तेरी ज़िन्दगी में भेजा . वर्ण तू अधूरी hi रह जाती. तू भूल क्यों नहीं जाती क वो तुम्हारा भतीजा है. समझ ले आज का दिन तुम्हारी ज़िन्दगी में आया hi नहीं. कल तक जैसे तू अमित को अपना सब कुछ मन कर छह रही थी वैसे hi चाहती रह न. वो बहुत ाचा लड़का है मंजू और तुम्हे दिल से प्यार करता है. मेरी बात मन तो अपने दिल से पाप ये वाली बात निकल दे .

मंजू : कैसे निकल दूँ ये बात अपने दिल से हाँ ? जिस बिट्टू को मैं मारा हुआ समझ रही थी वो ज़िंदा है. मेरा दिल छह रहा है क मैं उसे गले से लगा कर प्यार करूँ मगर मैंने जो पाप किया है वो मुझे जीने नहीं दे रहा . मैं छह कर भी उसे गले नहीं लगा सकती .

ऋतू : एनफ इस एनफ मंजू , हद्द है यार. लोगों को साडी ज़िन्दगी सच्चा प्यार नहीं मिलता और तुझे मिला है तो आज तू उसे पाप कह रही है सिर्फ इस लिए बी चांस वो तेरा खोया हुआ भतीजा निकल आया. क्या तू वो सब बदल सकती है जो हो चूका है ? ये ज़रा सोच तू खुद hi तो कहती थी न क तू साडी ज़िन्दगी अमित क साथ रहना चाहती है. तो इससे ाचा और क्या होगा क वो तेरा भतीजा है. कोई तुम्हे उससे अलग नहीं कर सकेगा . शादी तो वो पहले hi तुमसे कर नहीं सकता था और बिना शादी क साथ रहना बहुत बड़ी मुश्किल थी मगर अब तो तुम्हारे लिए भगवन ने रास्ता खोल दिया है. तू चाहे तो उसे भाई भतीजे वाला प्यार कर और चाहे तो ....

मंजू : ये तू कैसी बातें कर रही है ऋतू? तेरा दिमाग तो ख़राब नहीं हो गया न .

ऋतू : मेरा दिमाग बिलकुल ठीक है मगर लगता है तेरा दिमाग हिल गया है. देख मैं तेरी बेस्ट फ्रेंड हूँ और तेरे भले की hi बात करुँगी. ज़रा सोच इतने सैलून बाद जिस बिट्टू को भगवन ने तुझे लौटाया है क्या तू ऐसे hi उसे जाने देगी ? क्या तू चैन से रह पायेगी? और फिर ज़रा ये भी तो सोच क अगर तू उसके साथ रहेगी तो क्या तू वो सब भूल पायेगी जो सब तुम दोनों क बीच हो चूका है? नहीं मंजू ऐसा तू नहीं कर पायेगी क्यूंकि ऐसा हो hi नहीं सकता .

मंजू : इसी लिए तो मैं मरना चाहती हूँ .

ऋतू : तो फिर अमित का क्या ? क्या वो ज़िंदा रह पायेगा ? अगर तुम्हे कुछ हुआ तो इसका सारा दोष वो अपने ऊपर लेकर अपनी जान भी दे देगा तो क्या फिर तुम्हे ख़ुशी मिल जाएगी ? बोल

ऋतू की इस बात से मंजू क कानो में अमित क वो बोल गूंजने लग जाते हैं जो वो जाते जाते कह कर गया था क अगर आप ने खुद क साथ कुछ भी गलत किया तो वो भी ज़िंदा नहीं रहेगा . ये याद आते hi मंजू और भी ज्यादा फुट फुट कर रोने लगती है .

मंजू : मैं क्या करूँ मैं क्या करूँ . क्या थी दिन देखने क लिए मैं ज़िंदा थी .

ऋतू : तू ये किसी बातें कर रही है मंजू. तुम एक प्रोफेसर हो कर बच्चों जैसे बात कर रही हो . खुद इतनी समझदार हो कर नासमझी वाली बातें कर रही हो. देख मेरी बात मन जो हुआ उसे भूल जा . सबके लिए ठीक तो यही होगा क तू अमित को पहले की तरह hi प्यार करती रह और अब तो रिश्ता भी निकल आया है तो उसे बुआ भतीजे वाला प्यार भी दे दुनिया की नज़रों में . और अगर तेरा दिल मने तो बीवी वाला भी. आज कल दुनिया में ये आम बात हो चुकी है. अगर तेरा दिल नहीं मंटा उस प्यार क लिए तो काम से काम बुआ बन कर तो उसे प्यार कर hi सकती है न. आखिर वो तेरा पन्नू भैया की निशानी है. रही बात बीवी वाले प्यार की तो वो मैं कर लुंगी अगर तुझे ऐतराज़ न हो . आफ्टर आल तेरा भतीजा है और उस नाते तू मेरी बुआ सास हुई न ? ठीक कहा न बुआ जी .

ऋतू ने आखिरी बात जान बुझ कर थोड़ा मज़ाकिया लहजे में कही ताकि मंजू का मन बदल सके . और इसका असर हुआ भी मंजू क रट हुए चेहरे पर ऋतू क फेस इम्प्रेशंस देख कर एक बार हंसी आते आते रह गयी . उसकी आंसू बहती आँखों से आंसू रुक गए और उसने एक चपत ऋतू को लगा hi दी .

मंजू : शर्म नहीं आती , तू भी तो उसकी बुआ hi लगी . फिर भी ऐसी बातें कर रही है .

ऋतू : सॉरी यार पर इस मामले में मैं तुमसे अग्रि नहीं नहीं हूँ. मुझे बुआ भतीजे वाला प्यार नहीं चाहिए मुझे तो पलंग तोड़ प्यार चाहिए . वो इतना ाचा है क मैं उसे कभी खुद से दूर होने नहीं देना चाहती. पहले तो तेरी वजह से मैं थोड़ा दर रही थी मगर अब तो तू बन गयी है बुआ तो मतलब मेरी लाइन क्लियर है. अब तो मैं जैसे चाहे उससे प्यार करुँगी और तुम देखती रहना .

मंजू : जान ले लुंगी तेरी अगर मेरे भतीजे क साथ कुछ गलत किया तो .

ऋतू : वह जी वह , अब रिश्ता निकल आया तो मेरी जान लेने पर आ गयी . पहले तो खुद hi परमिशन दे दी थी जीजा बना कर और अब भतीजा बना रही हो . न बाबा न मुझे भतीजा नहीं चाहिए . पहले आधी घरवाली थी अब तो पूरी बनूँगी और तू बनेगी मेरी सास.

ऋतू की इस बात पर मंजू ने ऋतू को मरने क लिए हाथ उठाया तो वो उठ कर जल्दी से भागी उसके पीछे hi मंजू भी भागी और ऋतू मंजू को छलते हुए इधर उधर भागने लगी .

मंजू : ठहर तुझे मैं बताती हूँ. सास बोलती है मुझे . मैं तेरी जान ले लुंगी . रुक

ऋतू : भागते हुए ) सासु जी प्लीज मत मारिये न वर्ण मैं अमित की सेवा कैसे करुँगी . अगर आप भी मारेंगी तो अमित क मारने क लिए क्या बचेगा . आआह्ह्ह्हह छोड़ो न सासु जी .

ऋतू की चाल आखिर कामयाब हो hi गयी और लेन तारक वितरक क बाद आखिर मंजू क होंठों पर हंसी आ hi गयी थी. मगर अभी तक दिल से वो अमित क साथ रिश्ते पर कोई फैसला नहीं कर पायी थी . फ़िलहाल क लिए उसके दिल पर से बोझ काफी हैट गया था ऋतू की बातें सुन कर . मगर आगे अमित क साथ उसके रिश्ते का भविष्य क्या होगा ये तो समय क हाथों में hi था .

रमा : अमित ,, अमित ,,, उठो ,, सो गए क्या ?

आंटी ने मुझे सोया हुआ समझ कर हिलाया तो मैं उठ बैठा .

अमित : आंटी आप इस वक़्त यहाँ ?

रमा : क्यों ? क्या अब मैं तुम्हारे पास भी नहीं आ सकती ? क्या अभी तक नाराज़ हो मुझसे ?

अमित : नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं . मैंने आप से पहले भी कहा था क मैं किसी से नाराज़ नहीं हूँ .

रमा : तो फिर आज इसका सुबूत दो की तुम नाराज़ नहीं हो . इसी लिए मैं आयी हूँ यहाँ .

अमित : आंटी प्लीज बुरा मत मन्ना पर आज मेरा मूड बिलकुल भी नहीं है .

रमा : इसका मतलब तुम अभी भी नाराज़ हो न मुझसे .

अमित : नहीं आंटी ऐसी कोई बात नहीं है .

रमा : तो फिर मुझे प्यार करो न आज . तुम तो जानते हो तुम्हारे अंकल तो मुझे हाथ भी नहीं लगते अगर कभी ज़ोर देकर कहूं भी तो मुझे तड़पता छोड़ देते हैं. एक तुम hi तो हो जो मेरी ज़रूरत पूरी कर देते थे मगर तुम ने भी मुझसे मुँह देर लिया है. अब तुम hi बताओ मैं कहाँ जॉन. प्लीज आज एक बार कर दो न , मैं बहुत तड़प रही हूँ .

आंटी मेरे गले में बहन दाल कर मेरे साथ चिपक रही थी . वो सच में बहुत प्यासी लग रही थी मगर मैं तो पहले hi सोच सोच कर परेशां हुआ पड़ा था ऐसे में ये सब करना मेरे लिए पॉसिबल नहीं था इस लिए मैंने अपने गले से उनकी बाँहों को अलग किया .

अमित : प्लीज आंटी समझने की कोशिश कीजिये . मेरा बिलकुल भी मूड नहीं है . मैं आप से सच में नाराज़ नहीं हूँ. पर प्लीज मैं आज कुछ नहीं कर सकता .

रमा : आखिर बात क्या है ? क्या हुआ है जो तुम्हारा मूड नहीं है . मैं डिनर क वक़्त भी देख रही थी क तुम कुछ सोच रहे हो. बताओ मुझे आखिर हुआ क्या है जो तुम ऐसे बेहवे कर रहे हो. क्या किसी ने कुछ कहा है? या फिर हमारी किसी बात पर तुम नाराज़ हो ?

अमित : नहीं किसी ने कुछ नहीं कहा और न hi मैं आप से या किसी और से नाराज़ हूँ .

रमा : तो आखिर बात क्या है ?

अमित : प्लीज आंटी मैं अभी आपको कुछ नहीं बता सकता . अगर आप को मुझ पर भरोसा है तो अभी कुछ मत पूछिए . सही समय आने पर मैं खुद बता दूंगा .

रमा : ठीक है अगर तुम्हारी यही मर्ज़ी है तो यही सही . पर इतना यद् रखना राघव क बाद सिर्फ तुम हो जिसे मैंने दिल में जगह दी है जिसे मैंने अपना सब कुछ दिया है. अगर तुमने मुझे ठुकरा दिया तो मैं बिखर जाउंगी .

इतना कह कर आंटी तेज़ कदमो से बहार निकल गयी मगर उनकी आवाज़ में छलकता दर्द मैं महसूस कर प् रहा था . वो सच में तड़प रही थी मगर मैं भी क्या करता मेरा बिलकुल भी मन नहीं कर रहा था . मैं बस आंटी को जाता हुआ देखता रहा .

वहीँ रमा जब अमित क रूम में आयी थी तो सब को सावधानी से चेक कर क आयी थी मगर करिश्मा थी जो सोई नहीं थी और अमित क बारे में hi सोच रही थी. उसे उम्मीद थी क आज इतने दिनों बाद अमित यहाँ है तो शायद उसकी माँ आज अमित क पास जाये और हुआ भी ऐसा. करिश्मा को जैसे hi दरवाज़े की हलकी सी आवाज़ आयी तो घर क सन्नाटे में उसे पता चल गया था क उसकी माँ अमित क रूम में गयी है. दबे पाऊँ वो भी अमित क रूम क बहार पहुँच गयी और के होल से अंदर झाँकने लगी . उसी उम्मीद थी क अमित और अपनी माँ की रासलीला वो देखेगी. असल में अपने लैपटॉप पर वो कई बार अमित की वो वीडियोस देख चुकी थी जिसमे वो उसकी सास और ननद क साथ चुदाई कर रहा था. और वो वीडियोस देख देख कर करिश्मा इतना उत्तेजित हो जाती क उसे उंगली किये बिना नींद नहीं आती थी. और आज उसे उम्मीद थी क वो अमित को लाइव चुदाई करते हुए देख सकेगी अपनी माँ क साथ. असल में वो देखना चाहती थी क अमित उसकी माँ क साथ किस तरह चुदाई करता है . क्यूंकि उसकी सास और ननद क साथ तो उसने बहुत hi वाइल्ड चुदाई की थी. मगर उसकी साडी उम्मीदें धरी की धरी रह गयी जब अमित में बिना कुछ किये रमा को वापिस लौटा दिया. रमा क बहार निकलने से पहले वो वहां से निकल गयी थी ताकि किसी को पता न चले . आज उसे अमित का एक और रूप देखने को मिल रहा था . जहाँ वो मन में ये सोच बैठी थी क अमित कहीं न कहीं सेक्स का भूखा है आज वो भ्रम भी टूट गया था. वर्ण वो उसकी माँ को ऐसे लौटता नहीं . करिश्मा अपने बीएड पर लेती लेती अमित क बारे में सोचने लगी क आखिर वो है क्या . करिश्मा को हर बार hi वो गलत साबित कर देता था . करिश्मा अमित की तरफ इतनी ज्यादा अत्त्रक्ट हो चुकी थी क अब उसे अमित से अंदर hi अंदर hi इयार होता जा रहा था मगर अभी तक वो ये बात जानती नहीं थी. अमित की चुदाई की वीडियो देखना तो जैसे उसका रोज़ का hi काम बन गया था . मगर वो इसे सिर्फ पोर्न वीडियो की तरह hi मन कर देखती थी जबकि सचाई ये थी क वो अंदर hi अंदर अमित क साथ खुद को इमेजिन कर क उंगली करती थी. करिश्मा अपने बीएड पर लेती अमित क बारे में hi सोच रही थी और उसे डिनर करते वक़्त अमित क फेस इम्प्रेशंस याद आ रहे थे और उसके बाद जैसे अब उसने उसकी माँ को लौटा दिया था मतलब साफ़ था क कुछ तो हुआ है जो वो छुपा रहा है. करिश्मा मन hi मन अब अमित की उस टेंशन को जानना चाहती थी ताकि वो अमित की हेल्प कर सके .

उधर गाओं में दिव्या की नींद एक ख्वाब देखते देखते अचानक टूट गयी. ‘ नहीं नहीं मैं तुम्हे कहीं नहीं जाने दूंगी ‘ ऐसे hi बड़बड़ाते हुए दिव्या उठ बैठी थी . उसके पास इस वक़्त और कोई नहीं था क्यूंकि राधा तो आज कल्पना क साथ सो रही थी . दिव्या का गाला एक डैम से खुश्क हो गया था . पूरा चेहरा पसीने से भर चूका था . अभी अभी ख्वाब में उसने देखा था क कोई अमित को उससे दूर लिए जा रहा है . इस ख्वाब से दिव्या इतना ज्यादा दर गयी थी जैसे सच में hi ऐसा hi रहा हो. ये ख्वाब बिलकुल हकीकत क जैसा hi लग रहा था इस लिए दिव्या की धड़कन अभी तक संभल नहीं प् रही थी . कुछ पल उसे लगे हकीकत में आने में . और जब उसे अभाव हुआ क वो अपने रूम में है तो उसने जल्दी से अपना मोबाइल निकला जिसमे अमित की कुछ फोटोज दिव्या ने संभल राखी थी और उसे देखने लगी.

दिव्या : मैं तुम्हे कहीं नहीं जाने दूंगी . कोई तुम्हे मुझसे नहीं छीन सकता . तू दामिनी का बीटा है मेरी दामिनी का . तुम पर सिर्फ मेरा हक़ है. ज़रूर कोई तुम्हे मुझसे चीन ने की कोशिश कर रहा है पर मैं ऐसा नहीं होने दूंगी .

इतना कह कर दिव्या ने मोबाइल में मौजूद तस्वीर को अपने होंठों से चूमा और पानी का गिलास पि कर फिर से लेट गयी मगर फिर से वही ख्वाब आने क दर से वो अपनी आँखें बंद नहीं कर रही थी. दिव्या चाहे गुस्सा दिखती थी या कई बार खुद को अमित से दूर रखने की कोशिश करती थी पर असल में उसका दिल अमित से जुड़ा हुआ था . इसकी वजह दामिनी थी या फिर वो खुद . ये तो वो खुद भी नहीं समझ पायी थी अभी तक .

रत भर मैं सो नहीं पाया. रह रह कर मुझे मंजू बुआ क बारे में hi बुरे बुरे ख्याल आते hi रहे क कहीं वो कुछ गलत न कर दें अपने साथ पर एक उम्मीद भी थी क ऋतू सब संभल लेगी. जैसे तिसे सुबह क चार बजे तो मैं उठ कर चुप चाप घर से निकल गया मंजू बुआ क घर की तरफ . बहार अभी भी अँधेरा hi था. सर्दियों का मौसम था इस लिए दिन देरी से hi निकलता था . मैं पैदल hi मंजू बुआ क घर की तरफ दौड़ता हुआ चल दिया . जैसे hi मैं मंजू हुआ क घर पर पहुंचा तो वहां ऋतू की गाड़ी देख कर मुझे हौंसला हुआ . अभी तक आसमान का रंग नहीं बदला था . मंजू बुआ मुझे देख कर कैसे रियेक्ट करेगी यही सोच कर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी लाल बजने की . मैंने कुछ सोच कर ऋतू क फ़ोन पर फ़ोन किया तो 2 बार तरय करने क बाद ऋतू ने फ़ोन उठाया .

ऋतू : hello ,,,, इतनी सुबह सुबह कैसे फ़ोन कर दिया ? चैन से सोने नहीं डोज क्या तुम दोनों ?

ऋतू रुक रुक कर बोल रही थी जैसे गहरी नींद में हो .

अमित : hello , सॉरी मैंने आपको डिस्टर्ब किया , मैं बड़े जानना चाहता था क मंजू बुआ अब ठीक तो हैं न ?

ऋतू : हाँ बाबा ठीक है वो , बस वो गिलटी फील कर रही है . थोड़ा वक़्त लगेगा उसे.

अमित : आप उनका ध्यान रखना , आप hi उन्हें संभल सकती हैं. वैसे वो हैं कहाँ ? क्या मैं एक बार उन्हें देख सकता हूँ एक बार ?

ऋतू : वो अभी मेरे पास hi सो रही है , मगर तुम कैसे देखोगे उसे ?

अमित : मैं बहार hi खड़ा हूँ , आप आ कर दरवाज़ा खोलिये .

ऋतू : चौंकते हुए ) क्या ? सच में तुम बहार हो ? इतनी सुबह सुबह ? रुको मैं अति हूँ .

कुछ hi पलों में घर का दरवाज़ा खुला तो सामने ऋतू नाईट सूट में कड़ी थी जो मंजू बुआ का hi था . ठण्ड की वजह से वो अपने दोनों बाजु बंद कर क कड़ी थी और मुझे सामने देख कर उसने मुझे जल्दी से अंदर आने को कहा . मैं अंदर आया तो उन्होंने दरवाज़ा बंद कर दिया.

ऋतू : तुम इतनी सुबह यहाँ क्या कर रहे हो ?

अमित : क्या करता मुझे बुआ को लेकर टेंशन हो रही थी इस लिए रहा नहीं गया तो आ गया .

ऋतू : किसने कहा था टेंशन लेने को? मैं थी न यहाँ . एक मिनट , ,,, ये तुम्हारी ऑंखें इतनी लाल क्यों हैं ? क्या सोये नहीं तुम रात भर ?

मैंने उनकी बात का जवाब नहीं दिया और मंजू क रूम की तरफ बढ़ गया तो ऋतू ने मुझे पीछे से पकड़ लिया .

ऋतू : मेरी बात का जवाब नहीं दिया तुमने ? मैंने कुछ पूछा है

अमित : जब जवाब पता है तो सवाल पूछ hi क्यों रही हैं .

मैं हूँ ऋतू को इग्नोर कर क जब मंजू बुआ क बैडरूम की तरफ बढ़ा तो सामने मंजू बुआ बीएड पर बैठी हुई मेरी तरफ hi देख रही थी. उन्हें देख कर बिलकुल भी नहीं लग रहा था क वो सोई हों. मुझे देखते hi उनकी आँखें भीग गयी . मेरे पीछे hi ऋतू भी कमरे में आ गयी और हम दोनों को देखने लगी .

ऋतू : मंजू ,,, इसका मतलब तू भी नहीं सोई थी ??

मंजू : कैसे सो पति अपने बिट्टू को गले लगाने क लिए तड़प जो रही थी.

इतना कह कर मंजू बुआ ने अपनी बहन फैलाई तो मैं झटके से उनकी तरफ बढ़ा और उनके गले से लग गया. मंजू बुआ ने भी मुझे कास क गले से लगा लिया मेरा सर सहलाते हुए मेरे चेहरे को चूमने लगी .

मंजू : अपनी बुआ को छोड़ कर कहाँ चला गया था तू ? इतने सैलून बाद तू वापिस आया है मुझे तो यकीन hi नहीं हो रहा था तू मेरा बिट्टू है. तुझमे हमेशा पन्नू भैया की झलक नज़र आती थी पर मैं कभी समझ hi नहीं पायी क तू मेरा अपना बिट्टू है . अपनी बुआ को छोड़ कर अब तो नहीं जायेगा न ? बोल

अमित : नहीं बुआ अब मैं कहीं नहीं जाऊंगा . अब से आप मेरे साथ hi रहोगी हम सब क साथ. आपने बहुत सेह लिया , अब आप हमारे साथ रहोगी अपने परिवार क साथ. अब आप अकेली नहीं हो. हम सब हैं आपके अपने .

हम दोनों भुआ भतीजे एक दूसरे क गले लगे एक दूसरे को प्यार से गले लगाए रो भी रहे थे और खुश भी हो रहे थे. ऋतू हम दोनों को ऐसे गले लगते देख कर कमरे से बहार चली गयी . प्यार क इन पलों में हम बस एक दूसरे में खोये थे . जज़्बातों का सैलाब सा उमड़ आया था जो दोनों की आँखों से बह रहा था . हम दोनों एक दूसरे से अलग hi नहीं हो रहे थे . बुआ तो बस मुझे चुनती जा रही थी जैसे मैं कहूं खो जाऊंगा अगर वो मुझसे दूर हटी तो. हम दोनों प्यार क इस दरिया से बहार ए ऋतू की आवाज़ सुन कर .

ऋतू : अब खड़े खड़े hi सारा भारत मिलाप करोगे या बैठोगे भी. लो कॉफ़ी पि लो अपने हाथों से बना कर लायी हूँ

ऋतू की आवाज़ सुन कर बुआ और मैं अलग हुए तो देखा ऋतू हाथ में ट्रे पकडे कड़ी थी जिसमे तीनो क लिए कॉफ़ी क कप थे . मंजू बुआ ने मुझे बीएड पर बिठाया और अपने हाथ से कॉफ़ी का कप उठा कर मुझे दिया और मेरे साथ hi बैठ गयी .

ऋतू : अजीब हो यार तुम दोनों भी , न खुद सोये और न मुझे नींद पूरी करने दी .

मंजू : तू चुप रह , तू नहीं समझेगी

ऋतू : वह वह वह , साडी रत मेरा सर कहती रही और सुबह होते hi चुप रहने को कहने लगी . भलाई का तो ज़माना hi नहीं रहा .

अमित : थैंक यू वैरी मच , आप ने बुआ का ध्यान रखा मेरे लिए .

ऋतू : ोये ये नौटंकी बंद करो ाचा . थैंक्स कह कर मुझे पराया कर रहे हो ? ये मेरी बेस्ट फ्रेंड है और तुम तो ,,,,,,,, खैर अब तुम दोनों क इस नए रिश्ते से मेरा और मंजू का भी एक नया रिश्ता बन गया है . मैंने ठीक कहा न सासु जी .

ऋतू ने मज़ाक में इतनी बात कही तो मंजू बुआ उठ कर उन्हें मरने को बड़ी तो वो जल्दी से हस्ती हुई कैमरे से भाग गयी ये कहते हुए क तुम दोनों बुआ भतीजा बात करो मैं चली . और सच में वो चली गयी शायद वो हम दोनों को आपस में बात करने का मौका देना चाहती थी . ऋतू क जाने क बाद एक बार फिर हम दोनों में ख़ामोशी छ गयी जिसे मैंने hi तोडा .

अमित : बुआ , क्या अब भी आप नाराज़ हैं ?

मंजू : मुझे समझ नहीं आ रहा मैं क्या कहूं . मैं तुम्हारे साथ किस तरह ज़िन्दगी भर रहने का सोच रही थी और अब .... मैं वो सब अपने अंदर से निकल नहीं प् रही और शायद कभी निकल hi नहीं पाऊँगी. जाने अनजाने जो पाप कर चुकी हूँ वो कभी मुझे चैन से रहने नहीं देगा . इससे तो ाचा था क मैं .....

अमित : बुआ हमारे बीच जो कुछ भी हुआ वो पाप नहीं प्यार था बुआ . चाहे आज हमारे रिश्ते की सचाई हमें शर्मिंदा कर रही है पर ये भी सच है क हमारे बीच जो भी हुआ वो वासना नहीं प्यार था . क्या आप इस बात से इंकार कर सकती हैं?

बुआ कुछ देर मेरी आँखों में देखती रही . उनकी आँखों में हलकी नमी थी . वो मुँह से तो कुछ न बोली पर न में गर्दन हिलायी .

अमित : समाज और रिश्तों की मर्यादा क लिहाज़ से आप उसे पाप कह रही हैं. यकीनन उस नज़र से वो पाप है पर किसी ने मुझे समझाया था क जब इंसान अकेला और दुखी होता है तब न ये समाज उसका साथ देता है और न hi ये खोखले रिश्ते . जिस तरह भूखे को खाना खिलाना और प्यासे को पानी पिलाना पुण्य है . उसी तरह किसी टूटे हुए दुखी इंसान को प्यार का सहारा दे कर जीने की ताकत देना भी पुण्य है . फिर चाहे समाज क बनाये रिश्तों की नज़र में ये पाप hi क्यों न हो. आखिर ये नियम ये मर्यादा ये रिश्ते सब इंसान की भलाई क लिए hi तो बने हैं. मगर जब ये रिश्ते hi इंसान क लिए बोझ बन जाएँ तो फिर कोई कहाँ जाये ? आपने कभी जानवरों को देखा है ? उनमे कोई रिश्ते नहीं होते कोई नियम नहीं. इसी लिए वहां कोई अकेला नहीं कोई दुखी नहीं. और इंसान ? कहने को ऊपर वाले की बनाई सृष्टि में सब से श्रेष्ठ नस्ल पर बुरे वक़्त में कोई किसी का साथ देने क बजाये बस उसपे नियम का हवाला देकर उसके दुखों को और ज्यादा बढ़ाते हैं. तो फिर बताइये कौन श्रेष्ट हुआ ? वो जानवर जो बिना नियमो क प्रकृति की गॉड में प्यार से रहते हैं या इंसान जो लालच से भरा और नियमो क हवाले से शोषण करता है दूसरे का .

मैं जज़्बात में बेहटा पता नहीं क्या कुछ कह रहा था . वास्तव में ये सब बातें मैंने दीपिका ममी से प्रभावित होकर hi कहीं थी . क्यूंकि ये ज्ञान उन्हें का दिया हुआ था . मंजू बुआ एक तक मुझे देख रही थी.

अमित : आप कुछ बोलती क्यों नहीं बुआ , क्या मैंने कुछ गलत कहा ?

मंजू : तू इतना समझदार कैसे हो गया ? ज़िन्दगी का इतना बड़ा सच जो बड़े से बड़ा समझदार नहीं समझ पता वो तू इतनी सी उम्र में कैसे समझ गया ?

अमित : ज़िन्दगी सब सीखा देती है बुआ. अगर मैंने ये सब नहीं जाना होता तो बताइये मैं कैसे आपके दुःख को समझ पता और आपके करीब आ पता . मैं ये नहीं कहता क आप मेरे साथ पहले जैसे hi रहें. पर मैं इतना ज़रूर कहूंगा क वो सब पाप नहीं था प्यार था . इस लिए आज उसे पाप कह कर खुद को दुखी न करें. आगे आप जैसे चाहती हैं मैं वैसे hi रहूँगा . मैं बस आपको खुश देखना चाहता हूँ. आप तो पहले hi अपने बारे में सब कुछ बता चुकी हैं इस लिए मेरी नज़र में वो किसी भी कीमत पर पाप नहीं है. फाइन बस इतना hi चाहता हूँ क मेरी बुआ मेरे साथ रहे .

मंजू : मैं भी तेरे साथ रहना चाहती हूँ , मुझे तो पता hi नहीं था क मेरा बिट्टू इस दुनिया में है. इतने सैलून तक मैं यतीमो की तरह खुद छुपाती फिरती रही. अगर तू मेरे पास होता तो आज ज़िन्दगी कुछ और होती . खैर तू अब से मेरे साथ hi रहेगा .

अमित : हाँ बुआ अब से मैं आपके साथ रहूँगा पर पहले आप मेरे साथ चलिए . सब आपको देख कर बहुत खुश होंगे . माँ बाबा अजय मां कामिनी ममी छोटे मां और छोटी ममी . आप तो उनसे मिल भी चुकी हैं यद् है न ? और आपको पता है रजनी मौसी रीता मौसी दिव्या मौसी तीनो इसी शहर में तो हैं. राधा से तो आप मिल hi चुकी हैं और निधि दीदी से भी. और और राघव अंकल यद् हैं न आपको ?

मंजू : राघव भैया ? वो ,, वो कहाँ हैं ?

अमित : इसी शहर में तो हैं . मोहित उन्ही का तो बीटा है .

मंजू : क्या ? मोहित राघव भैया का बीटा है . पर ,,, मैं उन्हें इतने सैलून से मिली नहीं . वो तो मुझे भूल गए होंगे .

अमित : कैसी बातें कर रही हो बुआ . बल्कि वो तो आपको ढूंढ रहे हैं. जानती हैं अभी कल hi वो आपका पता लगाने को कह रहे थे .

मंजू : दिव्या दीदी कैसी हैं ? वो इसी शहर में थी और मैं आज तक उनसे मिल नहीं पायी. वो तो बिलकुल भाभी की हम शक्ल हैं . बहुत प्यार करती थी वो मुझसे बिलकुल भाभी की तरह . पता नहीं अब वो मेरे बारे में क्या सोचती होंगी.

अमित : आप उनसे मिलोगी तो आपको सब पता चल जायेगा . मज़े की बात तो ये है सब गाओं में hi हैं. मेरा जन्मदिन था न तो सब वहीँ आ गए थे. आप मेरे साथ चलिए वो सब बहुत खुश होंगे .

मंजू बुआ क चेहरे पर एक पल क लिए तो ख़ुशी आ गयी मगर अगले hi पल वो फिर से उदास हो गयी .

मंजू : नहीं नहीं , मैं किस मुँह से उनके सामने जाउंगी ? इतने सैलून में एक बार भी मैं उनसे मिलने नहीं गयी. काम से काम एक बार मुझे उनसे मिलना चाहिए था. साडी गलती मेरी है , मैंने अपने सौतेले भाइयों की बातों को सच मन लिया .

अमित : इसमें आपकी क्या गलती है बुआ ? जब ये बात सबको पता चलेगी तो देखना आपसे कोई भी नाराज़ नहीं होगा . आप चलो मेरे साथ .

मंजू : नहीं प्लीज मेरे अंदर हिम्मत नहीं है क मैं उनका सामना कर सकूँ.

अमित : ये क्या बात हुई बुआ . मैं हूँ न , क्या आपको मुझ पर भरोसा नहीं है ?

मंजू : तुझ पर तो अपने से भी ज्यादा भरोसा है पर अभी मेरे अंदर हिम्मत नहीं है उनका सामना करने की . प्लीज मेरी बात मन , कुछ दिनों बाद मैं खुद चलूंगी . मैं भी तो मिलना चाहती हूँ सब से .

अमित : ठीक है बुआ जैसे आपको ठीक लगे .

हम दोनों अभी बातें hi कर रहे थे क मेरा फ़ोन बजने लगा , ये रीमा का फ़ोन था. रत में रीमा ने कई बार फ़ोन किया था पर मैंने फ़ोन नहीं उठाया उसे भी नींद नहीं आयी होगी इसी लिए सुबह सुबह फ़ोन करने लगी. पर मैं भी उससे क्या बात करता .

मंजू : किसका फ़ोन है ? उठाते क्यों नहीं ?

अमित : किसी का नहीं बुआ.

मैंने कॉल कट कर क मोबाइल छुपा लिया पर फिर से कॉल बजने लगी तो बुआ ने फ़ोन मेरे हाथ से ले लिया . रीमा का नाम देख कर बुआ मेरी तरफ देखने लगी .

मंजू : रीमा तुम्हे क्यों फ़ोन कर रही है , वो भी इतनी सुबह ?

अमित : वो बुआ वो ,,,,

मंजू : बताओ भी

अमित : वो बुआ हम दोनों एक दूसरे को प्यार करते हैं. मैंने कहा था न क मैं एक लड़की को पसंद करता हूँ वो लड़की रीमा hi है. पर अब मैं उसे कैसे बताऊँ क मैं उसके चाचा का बीटा हूँ उसका भाई हूँ.

मंजू : तकदीर ने हम दोनों क साथ hi बहुत बुरा किया है. प्यार हुआ भी तो वहां जहाँ मुकम्मल नहीं हो सकता . ,,,,,,,.....,,,,,,, तूने अभी बताया तो नहीं क तुम कौन हो ?

अमित : नहीं

मंजू : बताना भी मत , वर्ण बलजीत भैया को पता चल जायेगा और फिर कहीं वो ,,,, नहीं नहीं तू किसी से कुछ नहीं कहेगा . समझ गए ??? तू किसी से कुछ नहीं कहेगा . विजय भैया ने सही किया था जो तुझे सबकी नज़रों से छुपा कर रखा . तेरी सचाई किसी क सामने नहीं आणि चाहिए .

अमित : पर आप इतना दर क्यों रही हैं उनसे ?

मंजू : तू नहीं जनता उसे , मैं जानती हूँ . तू बस किसी को कुछ नहीं बताएगा . वडा कर मुझसे .

अमित : पर बुआ ,, रीमा से मैं क्या कहूंगा?

मंजू : कुछ भी कह देना पर अपना सच मत बताना . मैं नहीं चाहती उस गंदे इंसान का साया कभी तुम पर पड़े .

अमित : पर बुआ

मंजू : पर वॉर कुछ नहीं , तू मेरी बात नहीं मानेगा ?

अमित : ठीक है बुआ. जैसे आप कहें.

मंजू : चल वो सब छोड़ इधर आ मेरी गॉड में सर रख कर लेट जा . रत भर से सोया नहीं है न तू ?

अमित : आप भी तो नहीं सोई बुआ .

मंजू : अब जी भर कर सोऊंगी , चल आ पहले मेरी गॉड में सर रख कर लेट जा . बचपन में मेरे साथ hi सोता था तू . मैं फिर से वो समय यद् करना चाहती हूँ. आजा

मंजू बुआ बीएड से टेक लगा कर बैठ गयी और मैं उनकी गॉड में सर रख कर लेट गया . वो सर को सहलाने लगी . मुझे उनकी गॉड में और रखते hi ऐसी नींद आयी मनो मैं कई दिनों से नहीं सोया हूँ जैसे .

‘ मैं 2 दिन शहर से बहार क्या गया इतना कुछ हो गया यहाँ ? आखिर ये सब हुआ कैसे ? ‘

बलजीत राइ शहर में वापिस आ चूका था और आते hi उसे पता चला क उसके दोस्त नारायण दस की मौत हो गयी है. वो हैरान था क आखिर ये सब हुआ कैसे .

‘ सर किसी को अभी तक कुछ नहीं पता , वहां पर एक भी आदमी ज़िंदा नहीं बचा . पुलिस जांच कर रही है . मैंने पता किया है क पुलिस को वहां गैर क़ानूनी हथियार और नशे क साथ साथ और भी बहुत कुछ मिला है . जो सब नारायण दास जी का hi बताया जा रहा है. अभी तक ये बात बहार नहीं निकली पर पुलिस को शक है क ये सब काले धंधे उन्ही क थे’

बलजीत राइ : आखिर ये हुआ कैसे ? किसकी इतनी हिम्मत हो गयी जो नारायण दास पर हाथ डाले ? ,,,,,,, कहीं ये पुलिस का hi काम तो नहीं .

‘ पर सर पुलिस वाले ऐसा क्यों करेंगे ? वैसे भी तो सब नारायण दास जी क वफादार hi हैं यहाँ .’

बलजीत राइ : यहाँ वफादार हैं पर वो नहीं. ज़रूर ये उसी का काम है .

‘ कौन सर , आप किसकी बात कर रहे हैं?’



बलजीत राइ : वही ऋतू सिंह , ज़रूर ये उसी का काम है. वही तो पीछे लगी हुई थी . मैंने कहा भी था ंद से क उससे मत उलझो. एक काम करो पता लगाओ क ऋतू सिंह तब कहाँ थी जब ये सब हुआ . और हाँ कोई भी गैर क़ानूनी काम हमारे साथ नहीं जुड़ना चाहिए . कहीं भी हमारी कंपनी का नाम नहीं आना चाहिए . वो बहुत खतरनाक है . और पहले से hi पीछे लगी हुई है हमारे. अगर ये उसी का किया धरा है तो अब उसका अगला टारगेट मैं hi हूँगा . साली ईमानदारी का कीड़ा है उसके अंदर , बच कर रहना होगा उससे .
 
अपडेट 233



‘ मोहित ,,,, मोहित ,,, जल्दी उठ . मोहित !!! ‘

मोहित आराम से अपने बीएड पर सो रहा था क रमा उसे झकझोर कर उठाने लगी. रमा क चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ़ नज़र आ रही थी . रमा क इस तरह चिल्ला कर मोहित को उड़ाने से वो भी कसमसाता हुआ उठने लगा .

मोहित : क्या हुआ माँ ? क्यों सुबह सुबह मेरी नींद ख़राब कर रही हो ? सोने दो न .

रमा : जल्दी से उठ देख अमित कहाँ है. वो घर से कहीं चला गया है बिना बताये और फ़ोन भी नहीं उठा रहा

ये सुन कर मोहित की नींद एक डैम से रफूचक्कर हो गयी. और वो अपनी ऑंखें माल्टा हुआ उठा बैठा .

मोहित : क्या ?? चला गया ,,, पर कहाँ ? आपने ऊपर जा कर देखा ? वो एक्सरसाइज कर रहा होगा .

रमा : नहीं वो ऊपर नहीं है और न hi घर पर कहीं है. मैंने कितनी बार फ़ोन किया है पर वो फ़ोन भी नहीं उठा रहा . तू जल्दी से पता कर न वो कहाँ गया है. मुझे बड़ी चिंता हो रही है.

मोहित : आप चिंता मत करो माँ . मैं अभी देखता हूँ. वो शायद स्टेडियम में गया होगा .

रमा : जा बीटा जल्दी जा कर देख . मुझे बेचैनी हो रही है .

मोहित : आप चिंता मत करो माँ मैं अभी जाता हूँ.

मोहित फुर्ती से उठा और हाथ मुँह धोकर अपनी कार में घर से निकल गया . अपनी माँ को इस तरह टेंशन में देख कर उसे भी चिंता होने लगी थी. वहीँ रमा अंदर hi अंदर दर भी रही थी. रत को अमित ने बताया भी था क वो किसी बात से परेशां है . ऊपर से रमा ने खुद भी उसे फाॅर्स किया था अपने साथ सेक्स करने को . रमा को ये भी दर सत्ता रहा था क कहीं वो उसकी इस हरकत से नाराज़ हो कर चला न गया हो. अगर ऐसा हुआ तो शायद कभी अमित दोबारा आये hi न उसके पास. अंदर hi अंदर ये दर उसे खाये जा रहा था . अभी सुबह क 9 hi बजे थे . रमा परेशां थी और परेशानी में वो वैसे hi अभी तक अपने नाईट सूट में थी. रत अछि तरह न सोने क कारन वो देर से उठी थी और उठते hi अमित क रूम में गयी थी पर वो वहां नहीं मिला उसके बाद उसने छत पर जाकर भी देखा मगर अमित नहीं मिला और फिर घर क बाकि हिस्सों में देखने क बाद जब उसने अमित को फ़ोन लगाया तो उसने फ़ोन भी नहीं उठाया. फ़ोन पर लगातार रिंग तो जा रही थी पर एक बार भी उसने फ़ोन रिसीव नहीं किया था. परेशानी क आलम में वो ऐसे hi हॉल में जाकर बैठ गयी और अमित क बारे में सोचने लगी. इतने में करिश्मा भी अपने रूम से तैयार हो कर नीचे आयी तो अपनी माँ को नाईट सूट में hi बैठा देख कर थोड़ा हैरान भी हुई वर्ण इस समय तक तो वो हमेशा तैयार हो जाता करती थी. जब वो अपनी माँ क पास आयी तो माँ को चिंता में डूबी देखा .

करिश्मा : माँ ,,, माँ ,, क्या बात है आप कुछ परेशां लग रही हो ?

करिश्मा क आवाज़ देने पर पहले तो रमा ने कोई रिएक्शन hi नहीं किया जैसे कुछ सुना hi न हो पर जब उसने हिलाया तो वो अपनी सोच से बहार आयी और अपनी बेटी को देखा . तब तक मैं करिश्मा अपनी का की आँखों में आयी नमी देख चुकी थी .

रमा : कक कुछ नहीं , कुछ नहीं बीटा वो ,, वो अमित अपने रूम में नहीं है. पता नहीं कहाँ चला गया है . फ़ोन भी नहीं उठा रहा .

ये सुनते hi करिश्मा को भी झटका लगा क्यूंकि उसने भी रत को अमित को परेशां देखा था और फिर अपनी माँ और अमित क बीच का सन भी देखा था क कैसे अमित ने उसकी माँ को खली हाथ वापिस लौट दिया था . उसे समझने देर न लगी क उसकी माँ क्यों परेशां है. अब करिश्मा को भी अमित की चिंता होने लगी थी. क कहीं वो फिर से नाराज़ तो नहीं हो गया .

करिश्मा : आप चिंता क्यों कर रही हैं माँ? शायद किसी काम से बहार गया हो . आपने मोहित से पूछा ?

रमा : उसे भी नहीं पता कुछ. अभी गया है वो उसे ढूंढने . मुझे बहुत चिंता हो रही है. तेरे पापा भी घर पर नहीं हैं. अगर कोई बात हो गयी तो ???

करिश्मा : आप ऐसे hi चिंता कर रही हो माँ. वो आ जायेगा . वैसे भी कहाँ जायेगा वो .

रमा: पता नहीं बेटी मुझे बहुत चिंता हो रही है .

करिश्मा अपनी माँ को हौंसला देते हुए उसके पास hi बैठ गयी. वो अपनी माँ को हौंसला दे तो रही थी पर अंदर से उसका मन भी इस बात से व्यथित हो रहा था . क कहीं वाकई में अमित नाराज़ हो और चला तो नहीं गया .

दूसरी तरफ मंजू अमित को अपनी गॉड में सुलाते सुलाते हुए खुद भी सो गयी थी और बीएड पर अमित क ऊपर hi अधलेटी अवस्था में पड़ी हुई थी. जिस वजह से उसके स्तन अपनी क मुँह पर गिरे हुए थे . अमित का फ़ोन साइलेंट पर था जिसे उसने खुद hi किया था . इस लिए फ़ोन बजने की कोई आवाज़ दोनों को डिस्टर्ब नहीं कर प् रही थी. रत भर जगे रहने क कारन दोनों hi गहरी नींद में थे . और नींद भी इतने सुकून से आ रही थी दोनों क दीं दुनिया की कोई खबर तक नहीं थी. 5 बजे से दोनों ऐसे hi सो रहे थे . बहार से आयी किसी आवाज़ से मंजू की नींद टूटी तो वो कसमसा कर उठने लगी . थोड़ा सा होश में आते hi उसे एहसास हुआ क वो अपने भतीजे क ऊपर गिरी पड़ी है और उसके स्तन अपने hi भतीजे क चेहरे पर लगे हुए थे . खुद को ऐसे देख वो शर्म से पानी पानी हो गयी. कहाँ तो अमित को पहले अपना प्रेमी अपना पति मन कर सब कुछ करने को तैयार रहती थी और कहाँ अब वो इस बात से शर्म से धरती के गढ़ी जा रही थी. जल्दी से वो अमित क ऊपर से हटी और अपने बाल दुरुस्त करते हुए उठने लगी तो उसकी नज़र अमित पर पड़ी जो चैन से सो रहा था और इस समय उसके चेहरे पर जो सुकून था उसे देख कर मंजू की निगाहें वहीँ ठहर गयी. जिस चेहरे में वो अपनी दुनिया देखती थी अब वहां उसे अपना भाई नज़र आ रहा था . कुछ पल अपने भतीजे को एक तक देखने क बाद वो झुकी और प्यार से उसका माथा चूम कर बीएड से उठ कड़ी हुई. मंजू ने बाथरूम में जाकर खुद को फ्रेश किया और कॉफ़ी बनाने क लिए किचन में चली गयी. घडी को देख मंजू को भी इस बात का ध्यान आया क अमित क घर से उतनी देर तक बहार रहने पर कहीं सब परेशां न हो तो वो कॉफ़ी बना कर अमित को जगाना चाहती थी. कॉफ़ी बना कर मंजू बैडरूम में आ गयी जहाँ अभी भी अमित सो रहा था और उसने कॉफ़ी साइड में रख कर अमित को इयार से जगाया .

मंजू : अमित ,,, अमित उठ जा बे.............

मंजू क शब्द उसके मुँह में hi रह गए. वो अमित को बीटा कहने वाली थी पर ज़ुबान ने साथ hi नहीं दिया . आखिर वो कैसे उसे बीटा कहे? रिश्ता चाहे अब बुआ भतीजे वाला बन गया था पर दिल में अभी भी उसका प्यार था . मंजू फिर से सोच में पद गयी थी . उसकी नज़र पास में पड़े अमित क फ़ोन पर पड़ी जहाँ मोहित का नाम फ़्लैश हो रहा था तो वो होश में आयी और फिर से अमित को जगाने लगी .

मंजू : अमित ,, अमित ,,, उठा जाओ . देखो टाइम क्या हो रहा है

अमित : सोने दो न बुआ

अमित क मुँह से अपने लिए बुआ सुन कर मंजू को बड़ी रहत महसूस हुई . और उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी.

मंजू : उठ जा अमित , देख टाइम क्या हो रहा है . और ये तेरे फ़ोन पर मोहित का फ़ोन आ रहा है . बात कर ले उससे.

मैं नींद में hi था जब मंजू हुआ मुझे जगा रही थी. मेरा उठने का बिलकुल भी मन नहीं था . आज इतनी सुकून से नींद आयी थी क मनो मैं आज hi पहली बार सुकून से सोया हूँ. मगर मोहित का नाम सुन कर मैं झटके से उठ बैठा और अपना मोबाइल देखा मगर तब तक कॉल काट चुकी थी . मैंने मोबाइल को चेक किया तो बहुत सरे मिस कॉल्स थे . एक नज़र देखने क बाद मैंने मोबाइल साइड में रख दिया और बुआ की तरफ देखा

अमित : गुड मॉर्निंग बुआ

मंजू : गुड मॉर्निंग, ले पहले कॉफ़ी पि ले फिर तैयार हो जाना . घर पर सब परेशान होंगे .

अमित : आप चिंता मत करो बुआ मैं देख लूंगा. अंकल आंटी को जब पता चलेगा क आप यहीं हो तो वो बहुत खुश होंगे.

मंजू : नहीं अमित अभी नहीं , मैंने कहा न मुझे थोड़ा टाइम दो फिर मैं खुद सब से मिलूंगी. मेरा भी दिल कर रहा है क मैं सब से मिलूं पर उन सब क सवालों का सामना भी तो करना पड़ेगा न मुझे .

अमित : आप ऐसे hi सोच रही हो बुआ कोई कुछ नहीं पूछेगा मैं सब को बता दूंगा

मंजू : प्लीज अमित मुझे थोड़ा टाइम चाहिए .

अमित : ठीक है बुआ पर ज्यादा टाइम नहीं. अब मैं आपको ऐसे अकेले नहीं रहने दूंगा . आपको हम सब क साथ hi रहना होगा .

मंजू : वो सब बाद में पहले कॉफ़ी पि अभी .

फिर हम दोनों ने साथ में कॉफ़ी पि और मैं बाथरूम में फ्रेश होने चला गया .

मोहित अमित को स्टेडियम में ढूंढता है पर वो वहां नहीं मिलता तो उसके दिमाग में मंजू म का ख्याल अत है और फिर वो सीधा मंजू म क घर पहुँच जाता है . घर की बेल्ल बजने पर मंजू दरवाज़ा खोलती है तो सामने मोहित को देख कर उसके चेहरे पर ख़ुशी आ जाती है . यूँ तो पहले भी मोहित कई बार मंजू क घर आ चूका था पर आज मोहित को देख कर मंजू बहुत खुश थी क्यूंकि अब वो जानती थी क मोहित भी उसका भतीजा है उसके मुँह बोले भाई का बीटा . मोहित को देखते hi मंजू ख़ुशी ख़ुशी दरवाज़ा खोल कर उसे अंदर बुलाती है .

मंजू : मोहित तुम ,, आओ आओ अंदर आओ . कैसे हो तुम ?

मोहित : मैं ठीक हूँ मम आप कैसी हैं ?

मंजू : मैं भी ठीक हूँ बीटा तुम अपनी सुनाओ. घर सब कैसे हैं. राघव भैया और रमा भाभी कैसी हैं और करिश्मा कैसी है?

मंजू ख़ुशी ख़ुशी में भूल गयी थी क अभी ये बात किसी को नहीं पता की वो असल में कौन है . पर मोहित मंजू क मुँह से अपनी फॅमिली क बारे में ऐसे शब्द सुन कर हैरान हो जाता है .

मोहित : सब ठीक हैं मम पर आप कैसे जानती हैं मेरे मम्मी पापा और दीदी को ?

मोहित क सवाल पर मंजू को अपनी गलती का एहसास होता है .

मंजू : वो ,,, वो ,, अमित ने बात करता रहता है न तुम्हारे और तुम्हारी फॅमिली क बारे में तो इसी लिए मुझे सब पता है.

मोहित : अमित ,,, हाँ मम मैं तो अमित को ढूंढते हुए यहाँ आया था . क्या वो यहीं है ?

मंजू : हाँ हाँ अंदर तो आओ , वो यहीं है .

मंजू मोहित को घर क अंदर ले आती है और उसे हॉल में बिठा कर अमित को आवाज़ लगाती है. मोहित अंदर से सोच में पद जाता है क माजरा क्या है. अमित मंजू म क घर hi क्यों अत है . मोहित को बिठा कर मंजू अंदर चली जाती है और अमित को आवाज़ दे कर किचन में चली जाती है .

मैं अभी बाथरूम में hi था क मंजू बुआ ने मुझे मोहित क आने क बारे में बताया और मैं जल्दी से फ्रेश हो कर मोहित क पास पहुँच गया .

अमित : कैसे हो मोहित ?

मोहित : मैं तो ठीक हूँ पर तू ये सब क्या कर रहा है ? काम से काम बता कर तो आया कर. घर पर माँ कितना परेशां हो रही है और तू फ़ोन भी नहीं उठा रहा किसी का .

अमित : सॉरी यार वो फ़ोन साइलेंट पर था इसी लिए पता hi नहीं चला .

मोहित : पर तू यहाँ क्या कर रहा है ?

अमित : कुछ नहीं बुआ से मिलने आया था .

मोहित : बुआ ??? कौन बुआ ?

मैं मोहित क सवाल का जवाब देता उससे पहले मंजू बुआ जूस का गिलास मोहित क लिए ले आयी.

मंजू : मेरी बात कर रहा है , मुझे बुआ hi तो कहता है ये .

मोहित : पर इसने तो आपको बड़ी बहिन बनाया था न ?

मंजू : तो क्या हुआ , बहिन hi तो हुई न . इसकी नहीं तो उसके पापा की. और उस नाते तुम भी मेरे भतीजे हुए . लो पहले ये जूस पि लो.

मैं मंजू बुआ की तरफ देख रहा था. उन्होंने मुझे चुप रहने का इशारा किया तो मैं भी चुप हो गया . मोहित ने जल्दी से जूस ख़तम किया और मुझे साथ चलने को कहने लगा . मेरा दिल तो नहीं कर रहा था पर बुआ ने मुझे जाने को कहा तो मैं भी मन गया .

अमित : ाचा बुआ मैं जा रहा हूँ. पर जल्दी आपको भी मेरे साथ चलना होगा .

मंजू : हाँ हाँ ज़रूर चलूंगी पर कुछ दिन रुक कर . अब जाओ सब इंतज़ार कर रहे होंगे . और मोहित तुम भी आया करो मैं तुम्हारी भी बुआ हूँ समझे .

मोहित : जी मम

मंजू : मम कॉलेज में , बहार सिर्फ बुआ . समझे ?

मोहित : जी मम ओह सॉरी ,, बुआ .

उसके बाद मैं और मोहित कार में बैठ कर बातें आपिस चल पड़े. रस्ते भर मोहित मुझे इस बात क लिए सुनाता रहा क मैंने गलत किया और मेरी वजह से आंटी परेशां हैं. वो मंजू बुआ क बारे में भी पूछ रहा था पर मैंने उस बारे में कोई बात नहीं की. हम जब घर पहुंचे तो आंटी हॉल में बेचैन बैठी हमारा hi इंतज़ार कर रही थी. उनके साथ करिश्मा दीदी भी थी. मुझे देखते hi आंटी दौड़ कर मेरे पास आ गयी .

रमा : कहाँ चले गए थे तुम? ये कोई बात है बिना बताये चले जाते हो. तुम्हे किसी परवाह है क नहीं?

अमित : सॉरी आंटी वो गलती से हो गया . सॉरी मुझे माफ़ कर दीजिये .

रमा : माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए , मेरी वजह से तुम नाराज़ हो कर गए थे न ?

अमित : ये आप कैसी बातें कर रही हो आप. आपसे किसने कहा क मैं आपसे नाराज़ हूँ.

करिश्मा : तो फिर किस बात से परेशां थे तुम कल? क्या उसी वजह से ऐसे चले गए थे ?

अमित : हाँ दीदी कल मैं कुछ परेशां था पर अब नहीं हूँ. अब सब ठीक हो गया है और अब मैं बहुत खुश हूँ.

रमा : ऐसी क्या बात है जो तू इतना खुश हो रहा है ?

अमित : है एक बात , जल्दी hi आप सब को भी पता चलेगी और जब आप को पता चलेगी तो आप भी खुश होंगी.

रमा : तो बता न क्या बात है ?

अमित : अभी नहीं , आप को थोड़ा वेट करना होगा .

रमा : तू खुश है न मेरे लिए इतना hi बहुत है. मैं तो सोच सोच कर परेशां हो रही थी कहीं मेरी वजह से तुम ......

अमित : आप भी न ऐसे hi परेशां होती रहती हैं. मैं तो बहुत बहुत बहुत खुश हूँ. और आपको भी खुश कर दूंगा .

आखिरी बात मैंने धीरे से आंटी क कानो में कही थी जिसे सुन कर वो शर्मा गयी. क्यूंकि उन्हें टेंशन में देख कर मुझे लगा क उन्हें भी थोड़ी ख़ुशी तो देनी hi चाहिए इस लिए मैंने ऐसा कहा .

रमा : शरमाते हुए ) चलो चलो बैठो मैं नाश्ता लगवाती हूँ.

आंटी इतना कह कर शर्माती हुई किचन की तरफ चली गयी. जबकि करिश्मा दीदी मुझे और आंटी को घूर घूर कर देख रही थी. मैं और मोहित खाना खाने क लिए टेबल पर बैठ गए और आंटी रानी क साथ ब्रेकफास्ट लगाने लगी. करिश्मा दीदी की नज़र मुझ पर hi थी. जब भी मेरी नज़र उन पर जाती तो हर बार खुद को hi देखता पता. आंटी क चेहरे पर फिर से ख़ुशी नज़र आ रही थी और वो मुस्कुराती हुई हमें खाना खिला रही थी. नाश्ता कर क अभी हम उठे hi थे क मेरा फ़ोन बजने लगा . मोबाइल पर माँ का नाम देखते hi मेरे चेहरे पर अपने आप ख़ुशी आ गयी .

अमित : hello , माँ

गौरी : कहाँ रह गयी अभी तक आये क्यों नहीं? मैं सुबह से तेरा रास्ता देख रही हूँ.

अमित : बस माँ आ hi रहा हूँ. मैं भी तुमसे मिलने को मचल रहा हूँ.

गौरी : ाचा !! बात क्या है? मेरा बीटा बहुत खुश लग रहा है

अमित : बस माँ समझ लो जैसे खोयी हुई अनमोल चीज़ वापिस मिल गयी है. मैं मिल कर बाटूंगा तुम्हे .

गौरी : तो जल्दी अजा , ऑंखें तरस गयी हैं तुम्हे अपने सामने देखने को.

इतना कह कर माँ ने फ़ोन काट दिया और मैं भी जल्दी से भाग कर अपने कमरे में गया . जल्दी से मैं नहाने क लिए बाथरूम में घुस गया . जैसे hi मैं नाहा कर बहार निकला तो कमरे में आंटी मौजूद थी. मैं सिर्फ टॉवल लपेट कर hi बहार निकल आया था तो आंटी प्यासी नज़रों से मेरी बॉडी को देखने लगी . मैं उनकी मनोदशा समझ रहा था पर अभी इसके लिए सही समय नहीं था .

आंटी : तो तुम जा रहे हो ?

अमित : हाँ आंटी , तीन दिन हो गए घर से निकले हुए . सब मेरा इंतज़ार कर रहे हैं.

आंटी : और मेरा क्या ? मैं तो कब से इंतज़ार कर रही हूँ .

आंटी की बात सुन कर मैं कपडे पहनता पहनता रुक गया और उनके करीब गया . वो आँखों में करुणा क भाव लिए मुझसे प्यार की विनती कर रही थी. मैंने उनके दोनों कन्धों क पास हाथ रखे और उनकी आँखों में देखता हुआ बोलै.

अमित : मैं समझ सकता हूँ आंटी आप क्या कह रही हैं. मैंने आप पर ध्यान hi नहीं दिया कुछ समय से. पर अब ऐसी कोई बात नहीं है. अभी उस सब क लिए समय नहीं है. पर मैं वडा करता हूँ जैसे hi समय मिलेगा आपके सरे गीले शिकवे दूर कर दूंगा . आप थोड़ा ुंतज़र और कर लेंगी न ?

आंटी : इंतज़ार तो कर hi रही हूँ थोड़ा और सही. मगर अब अगली बार मुझे ऐसे तरसा कर मत जाना .

अमित : बिलकुल भी नहीं .

इतना कह कर मैंने आंटी का गोरा चमकता चेहरा अपने हाथों में लिया और अपने होंठ उनके होंठों की तरफ बढ़ा दिए . आंटी ने भी ऑंखें बंद कर अपने होंठ आगे कर दिए और उनके नरम गुलाबी होंठों पर होंठ लगते hi मैंने उनके होंठों को अपने होंठों की गिरफ्त में ले लिया . हम दोनों एक दूसरे क होंठों को प्यार से चूम hi रहे थे क मुझे बहार से किसी क कदमो क आने की आहत हुई तो मैंने एक डैम से आंटी से अलग हो गया . अगले hi पल रूम में करिश्मा दीदी भी आ गयी. शुक्र था क मैंने वो आहत सुन ली थी वर्ण हम पकडे जाते . आंटी ने भी जल्दी से खुद को संभल लिया .

करिश्मा : अरे माँ आप यहाँ हो ?

रमा : हाँ वो ,, वो अमित जा रहा है तो मैंने सोचा देख लूँ अगर कोई सामान पैक करना हो तो मदद कर दूँ .

करिश्मा : ाचा ाचा , वैसे मैं बताने आयी थी क निधि दीदी का फ़ोन आया था अभी शायद तुम नाहा रहे थे . वो कह रही हैं क पापा क साथ उन्हें एक मीटिंग में जाना पद गया है तो वो लेट हो जाएँगी.

करिश्मा दीदी बात करते हुए बार बार मेरी कमर की तरफ देख रही थी तो मुझे एहसास हुआ क मैंने अभी पेण्ट तो पहनी hi नहीं थी और टॉवल भी पता नहीं कब कमर से खुल कर नीचे ज़मीन पर गिर गया था . ऊपर से मेरा लैंड भी अंडरवियर में तन कर खड़ा था . मैं जल्दी से पलटा और अपनी पेण्ट पहनने लगा. इतने में मोहित भी रूम में आ गया .

मोहित : ोये अभी तक तू तैयार नहीं हुआ . देख तेरे से पहले मैं तैयार हो गया हूँ और माँ हमेशा कहती है क मैं आपसी हूँ.

रमा : हाँ वो तो तू है hi. पर तू तैयार हो कर जा कहाँ रहा है?

मोहित : इसके साथ जा रहा हूँ और कहाँ जाऊंगा . अब बाइक तो यहाँ है नहीं फिर ये जायेगा कैसे?

रमा : वह ,, मेरा बीटा तो समझदार भी हो गया .

मैंने बातों बातों में कपडे पेहेन लिए और तैयार हो गया . फिर मैंने आंटी से इजाज़त मांगी तो उन्होंने फिर एक बार मुझसे सबके सामने गले लगा लिया और धीरे से मेरे कण में बोली .

रमा : कान में ) जल्दी आना मैं इंतज़ार करुँगी .

रमा : गाओं जा कर सब को मेरी तरफ से नमस्ते कहना .

अमित : जी आंटी

फिर मैं मोहित क साथ बहार निकलने लगा तो करिश्मा दीदी बोली .

करिश्मा : मुझसे नहीं मिलोगे ? या मुझसे नाराज़ हो ?

अमित : अरे नहीं नहीं दीदी ये आप कैसी बातें कर रही हैं .

इतना कह कर मैं दीदी क करीब हुआ उन्हें एक तरफ से गले लगने क लिए पर वो खुद hi सामने से मुझे गले लग कर मिली . मुझे अपनी छाती पर उनके सख्त चुके चुभते हुए महसूस हुए जैसे निप्पल सुई की तरफ अकड़े हुए हो. मेरे मन में इस चुभन से हलचल हुई इस लिए मैं जल्दी से उनसे अलग हो गया . उनकी नज़रों से नज़रें मिली तो मुझे कुछ अलग hi नज़र आया .

अमित : ाचा दीदी अब मैं चलता हूँ. आप भी गाओं आना .

करिश्मा : आउंगी पर अब तुम्हे भी हमारे पास रहने आना होगा पहले यद् रखना . तुम्हारे बिना माँ का दिल नहीं लगता.

ये बात करिश्मा दीदी ने आंटी की तरफ नज़र करते हुए कही. मुझे उनके इस तरह बात करने से झटका लगा . कहीं उन्होंने कुछ देख तो नहीं लिया. पर ये सिर्फ मेरा वहां hi था. मैं मोहित क साथ घर से निकल गया गाओं क लिए . दिल hi दिल मैं बहुत खुश हो रहा था . मंजू बुआ क मिलने की ख़ुशी में मैं फूला नहीं समां रहा था . मैं अपनी ये ख़ुशी सब से पहले दीपिका ममी और माँ से शेयर करना चाहता था. और बाकि सब का भी पहले मूड पता करना था क वो क्या सोच रहे हैं .

मोहित : क्या बात है , कब से देख रहा हूँ तू आज बड़ा खुश नज़र आ रहा है .

अमित : बात hi ख़ुशी की है .

मोहित : तो मुझे भी नहीं बताएगा ?

अमित : बुरा मत मन्ना यार पर मौन वडा किया है इस लिए नहीं बता सकता बस कुछ दिन वेट केले तुझे hi सबसे पहले बताऊंगा .

मोहित : हम्म्म कोई बात नहीं तू खुश है मैं इसी में खुश हूँ .

हूँ बातें करते हुए गाओं जा रहे थे . मेरा तो दिल कर रहा था क उड़ कर पहुँच जॉन पर ऐसा हो नहीं सकता था. आज गाओं जाने वाला रास्ता मुझे लम्बा नज़र आ रहा था जो ख़तम होने का नाम hi नहीं ले रहा था . जैसे hi हम घर पहुंचे तो मैं गाड़ी क रुकते hi जल्दी से उतर कर अंदर भगा . माँ आंगन में hi कड़ी थी शायद उन्हें पता था मैं पहुँचने वाला हूँ . माँ को देखते hi मैं दौड़ कर उनके गले जा लगा और उन्हें बाँहों में भर कर उन्हें ऊपर उठा लिया .

अमित : ो मा माआ माआ मेरी प्यारी माआ

गौरी : अरे अरे क्या कर रहा है नीचे उतर मैं गिर जाउंगी .

मैं माँ को ऐसे hi बाँहों में उठाये घूमा रहा था क आवाज़ सुन कर दीपिका ममी भी आ गयी जो किचन में hi थी.

गौरी : बस भी कर गिरायेगा क्या ?

मैंने माँ को नीचे उतरा तो तो मुझे गले से लगा कर वो प्यार से मुझ चूम कर बोली .

गौरी : लगता है आज मेरा बीटा बहुत खुश है. अपनी माँ को नहीं बताएगा अपनी इस ख़ुशी की वजह ?

अमित : हाँ माँ आज मैं बहुत खुश हूँ. इस लिए तो उड़ कर आ गया आपके पास .

गौरी : तो जल्दी से बता ऐसी कौन सी ख़ुशी है जो तू इतना खुश हो रहा है .

अमित : माँ आज मुझे मेरी खोई हुई ख़ुशी मिल गयी है. मेरा दिल नाचने को कर रहा है.

गौरी : अब बताएगा भी या पहेलियाँ बुझाता रहेगा . ऐसी कौन सी ख़ुशी थी जो खो गयी थी ?

दीपिका : कोई लड़की मिल गयी है क्या ?

अमित : आप क्या मुझे ऐसा समझती हो ममी ? मैं किसी और ख़ुशी की बात कर रहा हूँ .

गौरी : तो बता भी कौन सी ख़ुशी है .

मोहित : हाँ आंटी पूछिए मुझे भी नहीं बता रहा . पाऊँ लगे आंटी

मोहित ने अंदर आते हुए ये बात कही और माँ क पाऊँ चुने लगा .

गौरी : जीते रहो बीटा . तू भी नहीं जनता ? अब बता भी दे क्यों तंग कर रहा है . क्या अपनी माँ को भी नहीं बताएगा ?

अमित : बाटूंगा न माँ आपको hi तो बताऊंगा .

‘ तू आ गया , कहाँ चला गया था ? ‘

ये आवाज़ दिव्या मौसी की थी जो मुझे देख कर खुश होती तेज़ कदमो से मेरी तरफ बरही तो मैंने भी माँ से अलग हो कर दिव्या मौसी को बाँहों में भर लिया . दिव्या मौसी मुझसे ऐसे मिल रही थी मनो मैं बरसों बाद लौटा हूँ. वो मेरे चेहरे को दोनों हाथों के थामे मेरे माथे पर पूरे चेहरे पर चूमती जा रही थी .

दिव्या : कहाँ चला जाता है तू ऐसे ? तुझे ज़रा भी परवाह नहीं है क घर पर तेरा कोई इंतज़ार भी करता है .

अमित : सॉरी मौसी पर आप तो जानती hi हैं मैं .....

दिव्या : सब जानती हूँ. यहाँ से राघव भैया क साथ गया था और फिर वहां से गायब. कहाँ चला गया था तू? तुझे पता भी है हमारा क्या हल हो रहा था .

अमित : सॉरी मौसी

दिव्या : क्या सॉरी , पहले ऐसे करता है फिर सॉरी बोलता है. अच् सच बता तू कहाँ गया था किसके साथ था . मेरा दिल कितना घबरा रहा था कल. बता मुझे .

दिव्या मौसी क सवाल पर मैं सोच में पद गया . दिव्या मौसी सच में मेरी कितनी परवाह करती थी. उन्हें घर बैठे hi पता चल गया था क मैं कल टेंशन में था .

अमित : मम मैं तो कहीं नहीं गया था मौसी .

दिव्या : झूठ मत बोल , बता कहाँ गया था ?

गौरी : जाने दे दिव्या बाद में पूछ लेना पहले इससे ये तो पूछ क ये इतना खुश किस बात से है. बता hi नहीं रहा.

दीपिका : अब तो बताना hi पड़ेगा अब तो दिव्या दीदी भी हैं. चल जल्दी से बता .

मुझे दिव्या मौसी की मौजूदगी में मंजू बुआ क बारे में बताने से दर लग रहा था . क्यूंकि मैं जनता था क वो मेरे पापा को नापसंद करती थी. उसकी वजह तो मैं नहीं जान पाया था पर ऐसे में बुआ क बारे में उनके सामने बात करना सही नहीं लग रहा था .

अमित : वो वो बात ये है क वो

दिव्या : ये क्या वो वो लगा रखा है. बता न जो पूछा है

अमित : वो मैं , वो हाँ वो उस दिन मैं गया था न अंकल आंटी क साथ. उसी बात पर मैं खुश हूँ. मुझे वहां जा कर बहुत ाचा लगा . माँ जानती हो वहां कितना बड़ा अनाथाश्रम और ओल्ड आगे होम है. पापा ने बनवाया था जहाँ पर कितने hi बेसहारा बच्चों को सहारा मिला और मिल रहा है. मुझे ये जान कर बहुत ाचा लगा क मेरे पापा इतने नेक दिल इंसान थे .

मैं माँ को ये बात बता रहा था क देखा दिव्या मौसी पापा का नाम सुन कर गुस्सा होने लगी और नज़रें इधर उधर करने लगी. फिर बहाना कर क किचन में चली गयी. मुझे समझ आ गयी क पापा का बारे में सुन्ना उन्हें ाचा नहीं लग रहा .

गौरी : हाँ बीटा वो बहुत भला इंसान था न जाने कितने hi अचे काम उसने किये होंगे जो शायद कोई भी नहीं जनता होगा . वैसे उस जगह तो हम भी गए हैं एक बार .

अमित : सच माँ ? आपने देखि है वो जगह? वैसे इसके इलावा और भी एक बात हुई .

गौरी : ाचा ?

अमित : हाँ माँ , मुझे वहां अपना वो दोस्त मिला जिसने मेरी ज़रूरत में मदद की थी. और जानती हो वो भी कभी उसी अनाथाश्रम में रहता था. और पापा ने उसकी मदद की थी. मैंने उसे बताया नहीं कर वो मेरे पापा थे . मगर पापा क बारे में बताते हुए उसके चेहरे पर जो ख़ुशी थी उसे देख कर मुझे पापा पर गर्व महसूस हो रहा था . सच में पापा बहुत नेक दिल इंसान थे .

गौरी : और तेरी माँ भी , इसी लिए तो तू इतना ाचा है. बिलकुल अपने माता पिता पर गया है. चल अब बैठ यहाँ पहले कुछ खा पि ले. इतने दिन बाद घर आया है. पता नहीं कुछ खता भी था ठीक से या नहीं . छोटी , जा जल्दी से लेकर आ दोनों क लिए कुछ खाने को.

माँ की बात सुनते hi दीपिका ममी फ़ौरन किचन में चली गयी. मोहित भी मेरे साथ hi बैठ गया . घर में और कोई नज़र नहीं आ रहा था . मुझे इस बात पर हैरानी हो रही थी .

अमित : माँ क्या बात है कोई नज़र नहीं आ रहा . कहाँ गए हैं सब ?

गौरी : यहीं हैं सब , तेरे बाबा और कमलेश सब को खेत और बैग दिखने साथ ले गए हैं. कामिनी अंदर hi बाई कमरे में आरव और छोटू क साथ . ये तो दिव्या hi नहीं गयी , कह रही थी क मेरी तबियत ठीक नहीं और अब देख कैसे अछि भली है. तेरे आने का पता था न इसे , बहुत प्यार करती है तुझसे .

अमित : हाँ माँ जनता हूँ, मौसी मुझसे बहुत प्यार करती हैं. उनके गुस्से में भी मैंने हमेशा अपने लिए प्यार hi देखा है.

बात करते करते मेरी नज़र किचन की तरफ गयी तो दिव्या मौसी हमारे करीब hi आ चुकी थी. और शायद उन्होंने मेरी बात सुन भी ली थी इस लिए वो मुझे प्यार और स्नेह से देख रही थी. उनके चेहरे पर अलग हो ख़ुशी नज़र आ रही थी .

दिव्या : लो पहले लस्सी पि लो तुम दोनों .

दिव्या मौसी मुझे देख कर अंदर हो अंदर खुश हो रही थी जो उनकी आँखों में नज़र आ रहा था. और मैं तो पहले से hi खुश था मगर उनसे थोड़ा झिझक रहा था . इतने में मोहित ने लस्सी का गिलास ख़तम किया और जाने की इजाज़त मांगने लगा . थोड़ी न नुकुर क बाद माँ ने इजाज़त दे दी और वो मुझसे गले मिल कर चला गया . मोहित क जाने क बाद मैं अपना सामान रखने क लिए अपने कमरे में चला गया. मैं अभी अपना बैग खोला hi था क कोई दरवाज़े से अंदर आया और मेरे कानो में आवाज़ गूंजी .



‘ तुम क्या छुपा रहे हो ? सच सच बताओ. झूठ बोलने की कोशिश बिलकुल भी मत करना ‘
 
अपडेट 234



मैंने आवाज़ सुन कर पीछे मुद कर देखा तो दरवाज़े पर दीपिका ममी दोनों हाथ कमर पर रखे मेरी तरफ देख रही थी. दीपिका ममी को देख कर मैं तेज़ कदमो से उनके करीब आया और उन्हें अपनी बाँहों में भर लिया. दीपिका ममी को अपने साइन से लगाए मैं झूमता हुआ उन्हें दरवाज़े से कमरे क भीतर ले आया .

अमित : ो ममी ुम्माआठ आज बहुत खुश हूँ मैं. और सच बताऊँ तो मैं खुद तुमसे अकेले में मिलना चाहता था बस माँ और मौसी की वजह से कुछ बोलै नहीं.

दीपिका : ाचा पर बात क्या वो तो बताओ. कौन स खोयी हुई ख़ुशी मिल गयी है तुम्हे .

अमित : आप जानती हो न पापा की एक बहिन भी थी सगी बहिन यानि क मेरी बुआ . जिसे वो जान से ज्यादा प्यार करते थे .

दीपिका : हाँ मैंने सुना तो है पर कभी देखा नहीं. वैसे भी वो कभी आयी hi नहीं तेरे माता पिता क मरने क बाद . मगर तुम उनके बारे में क्यों बात कर रहे हो ?

अमित : इस लिए ममी क मुझे बुआ मिल गयी है. इतने दिनों से वो आँखों क सामने थी मगर कल hi मुझे पता चला क वो मेरी बुआ हैं.

दीपिका: सछह !!! ये तो बहुत अछि बात है . पर वो है कौन मतलब तूने अभी कहा वो इतने दिनों से सामने थी .

अमित : हाँ ममी वो इतने दिनों से सामने थी पर कभी जान hi नहीं पता और पता है आप भी उनसे मिल चुकी हैं.

दामिनी : मैं ??? मैं कब मिली ? तू किसकी बात कर रहा है ?

अमित : मेरी मंजू मैडम , यद् है जब आप हॉस्पिटल में थी तब वो मिलने आयी थी आपसे .

दीपिका : यद् करते हुए ) अरे हाँ वो तुम्हारी मैडम ,,,,,, इसका मतलब वो तुम्हारी मंजू बुआ है. ?

अमित : हाँ ममी और नहीं तो क्या? देखिये मैं इतने दिनों तक उनसे रोज़ मिलता रहा उनके घर भी जाता रहा मगर कभी न मैं जान पाया न वो. कल hi मुझे पता चला वो मेरी बुआ हैं जब मैंने माँ पापा की तस्वीर देखि .

दीपिका : मगर ,,,,,, तुम दोनों क बीच तो ......

अमित : सीरियस होते हुए ) हाँ ममी अनजाने में बहुत बड़ी गलती हो गयी मुझसे. और कल जब उन्हें पता चला क मैं उनका बुआ हूँ तो वो इसी बात पर बहुत रोटी वो तो मरने की बातें करने लगी थी. बहुत मुश्किल से संभाली हैं वो.

दीपिका : ये तो होना hi था. बहुत अछि है वो , एक hi बार मिली हूँ पर इतना तो पता चल hi गया था उसकी बातों से. ऐसा होना स्वाभाविक है. पर तू चिंता न कर धीरे धीरे सब ठीक हो जायेगा . पर तू उसे लेकर क्यों नहीं आया?

अमित : मैं तो लाना चाहता था और उन्हें कहा भी बहुत क मेरे साथ चले पर वो दर रही हैं. इतने सैलून से यहाँ नहीं आयी तो सब नाराज़ होंगे उनसे बस इसी बात से दर रही हैं. पर इसमें उनकी कोई गलती नहीं है ममी. उन्हें गलत बताया गया था और फिर कभी उन्हें इस तरफ आने hi नहीं दिया गया . उन्हें तो ये भी नहीं पता था क मैं ज़िंदा हूँ. उन्होंने बहुत दुःख देखें है ज़िन्दगी में. अकेली hi ज़िन्दगी गुज़र रही हैं सब कुछ सेहती हुई.

दीपिका : सब ठीक हो जायेगा. तू चिंता मत कर. मैंने कई बार बड़ी दीदी क मुँह से सुना था बड़े भैया और दीदी उसे बहुत प्यार करते थे और शायद आज भी करते हैं. वो कभी इस तरफ क्यों नहीं आयी ये बात उन्हें भी समझ नहीं आयी. पर अब उन्हें जब पता चला चलेगा क वो यहीं हैं तो देखना वो कितने खुश होंगे . तू उसे जल्दी ले आ.

अमित : एक प्रॉब्लम और है . बाकि सब तो एक्सेप्ट कर लेंगे मैं जनता हूँ. मगर दिव्या मौसी ,,,, वो तो पापा को भी पसंद नहीं करती तो फिर मंजू बुआ को वो कैसे .....

दीपिका : हाँ ये तो है. पर तू चिंता न कर उसका भी हल निकल आएगा. दिव्या दीदी जैसी भी है दिल की बहुत अछि है. देखना वो भी मन जाएगी.

अमित : हाँ ममी ऐसा hi होना चाहिए वर्ण मंजू बुआ इस घर में कैसे आएँगी.

दीपिका : सब हो जायेगा मैं हूँ न . अब ये बता क इतनी बड़ी ख़ुशी क मायके पर मुझे क्या मिलेगा .

दीपिका ममी ने बड़ी hi रोमांटिक अंदाज़ में मेरे गले में बहन दाल कर मेरी आँखों में देखते हुए कहा तो मेरे चेहरे पर एक फॉर से मुस्कान आ गयी . मैंने अपने हाथ उनकी कमर पर रखे तो नंगी कमर पर मेरा हाथ पड़ते hi दीपिका ममी की ऑंखें एक पल को बंद हो गयी और मुँह से सिसकी निकल गयी .

दीपिका : कक्कक्कक्कक्स अपनी दासी को अपने प्यार का प्रसाद दे दो .

अमित : दासी नहीं , आप मेरी दासी नहीं मेरी गुरु हैं. मेरे बचे की माँ हैं मेरी बीवी हैं.

दीपिका ममी ने मेरी बात सुन कर अपनी ऑंखें खोली और मेरी नज़रों से नज़रें मिला कर अपनी एड़ियां उठा कर मेरे होंठों क करीब अपने होंठ ले आयी.

दीपिका : तो आज अपनी बीवी पर अपने प्यार क बरसात कर दो. उम्मम्मम

हम दोनों क होंठ आपस में जुड़ गए और ऑंखें मदहोशी में बंद . दीपिका ममी मेरे गले में बहन दाल मेरे साथ चिपकी पड़ी थी और मेरे हाथ उनकी कमर पर थे . हम दोनों प्रेमियों की तरह अपनी दुनिया में hi खोये थे क बहार से सीढ़ियों पर चढ़ने और बातों की आवाज़ आयी तो मैं झटके से ममी से अलग हो गया. उसी वक़्त दरवाज़े से नैना दीदी और करुणा दीदी दौड़ते हुए अंदर आयी और मुझे देख कर ख़ुशी से उछालती हुई मेरे गले लग कर मिली. तब तक दीपिका ममी भी खुद को संभल चुकी थी.

नैना: आ गए तुम, एक दिन क लिए गए थे और 3 दिन लगा कर आये हो. ऐसे करते हैं क्या ? यहाँ घर पर मेहमान आये हैं और तुम हो क बहार घूम रहे हो.

करुणा : और नहीं तो क्या , पता कितना बोर हो गए थे हम सब तेरे यहाँ न होने की वजह से . अब तो तुम्हे इसकी सजा मिलेगी.

नैना दीदी करुणा दीदी क पीछे पीछे hi नेहा दीदी कल्पना और राधा भी आ गयी. मुझे देख कर वो तीनो भी खुश थी. मेरी नज़र राधा पर पड़ी तो नज़रें मिलते hi वो मुस्कान क साथ शर्मा स गयी.

अमित : जो आप कहें मुझे सब मंज़ूर है. जैसा कहेंगी वैसा होगा. अब से आपको शिकायत का मौका नहीं दूंगा . ठीक है ???

नैना : ोये होये , इस दरियादिली का राज़ क्या है? कुछ तो है जो तू इतना खुश नज़र आ रहा है. क्यों छोटी ममी ? आप hi कुछ बताइये

दीपिका : अब मैं क्या बताऊँ इस में ? तुम्हारा भाई है तुम खुद hi पूछ लो.

करुणा: तो बताओ मिस्टर भोंदू मॉल , आखिर कौन सा खज़ाना मिल गया जो इतने खुश लग रहे हो? कहीं कोई लड़की तो नहीं मिल गयी .

अमित : आप सब क होते मुझे और किसी की ज़रूरत hi क्या है जो मैं इस बारे सोचूं.

मेरी इस बात पर नैना दीदी और करुणा दीदी क गाल लाल हो गए और एक बार तो दोनों hi शर्मा गयी पर फिर से अपने स्टाइल में बोली .

करुणा : ज्यादा बातें मत बना , चलो चलो जल्दी से बताओ क बात क्या है .

फिर मैंने वही बताया जो मैंने माँ को बताया था और इस बात को सुन कर सब खुश हुए. दीपिका ममी काम का बहाना कर क नीचे चली गयी. मेरी बातें सुन कर सभी खुश थी नेहा दीदी मेरे करीब आयी और प्यार से मेरे चेहरे को अपने हाथों में लेकर देखने लगी.

नेहा : तुम जानते हो मौसी और मौसा जी की इतनी साडी अच्छाइयों का जीता जगता प्रमाण तुम खुद हो. मेरा भाई दुनिया का सबसे ाचा भाई है और सबसे ाचा इंसान भी. मैं खुशनसीब हूँ क मुझे तुम जैसा भाई मिला. भगवन मुझे हर जनम में तुम्हारी hi बहिन बनाये .

इतना कह कर नेहा दीदी ने मुझे गले लगा लिया . नेहा दीदी सच में सब से अलग थी और मुझसे बहुत hi प्यार करती थी. निधि दीदी क बस नेहा दीदी hi थी जो मुझे एक बहिन की तरह इतना प्यार करती थी. मैं भी उनके गले लग गया और उन्हें अपनी बाँहों में कास लिया .

अमित : मैं भी हर जनम में आपका भाई बनना चाहता हूँ दीदी. आप सच में बहुत अछि हैं.

हम दोनों कुछ देर भावुक हो कर गले लगे रहे फिर अलग हुए तो देखा सब हमें hi देख रहे थे . मेरी नज़र कल्पना से मिली तो उसकी ऑंखें भी जैसे भवनों का समुन्दर लिए थी अपने अंदर .

अमित : ऐसे क्या देख रही हो ?

कल्पना : देख रही हूँ आप सब में कितना प्यार है. और एक मैं हूँ जिसे ये सब नहीं मिला .

करुणा : इधर आ मेरी कल्पना डार्लिंग , कौन कहता है तुझे कुछ नहीं मिला. हम हैं न , साडी कमी दूर कर देंगी. वैसे एक बात तो है , तू मेरा भाई hi बन जा . अचे ाचों को धुल छठा सकती है तू लड़की काम और लड़का ज्यादा लगती है .

करुणा दीदी क इस मज़ाक से सब की हंसी छूट गयी और कल्पना भी झूठा गुस्सा दिखने लगी .

कल्पना : क्या दीदी आप मेरा मज़ाक उदा रही हैं. क्या मैं आपको लड़का दिखती हूँ ?

नैना : लड़का दिखती तो नहीं पर लड़कों की तरह बॉडी ज़रूर स्ट्रांग है तेरी. तेरे लिए तो कोई हत्ता कट्टा पहलवान hi ढूंढना पड़ेगा .

नैना दीदी की बात पर कल्पना झेंप गयी और मुझे शरमाते हुए देखने लगी .

करुणा : ोये तू क्यों चुप चाप कड़ी है मेरी माँ की गुड़िया . वैसे तो हर वक़्त उसे यद् करती रहती है और अब सामने खड़ा है तो बात भी नहीं कर रही .

करुणा दीदी ने राधा को देख कर ये बात कही तो मेरी नज़र भी उस पर पड़ी. राधा ने भी मुझे देखा और शर्मा गयी जैसे उसकी चोरी पकड़ी गयी हो.

राधा : मैं कक क्या .....

करुणा : अब देख कैसे घिग्घी बन रही है. ाचा हुआ तू आज वापिस आ गया वर्ण कल ये सबको लेकर तुझे ढूंढने चली आती तेरे पीछे पीछे . कभी हमें कभी मौसी कभी ममी कभी मां को. सबको तंग किये हुए थी पूछ पूछ कर क कब आएगा अमित. और अब देखो कैसे बट बानी कड़ी है.

नेहा : बस भी कर करुणा , क्यों तंग कर रही है उसे? राधा तू इधर आ मेरे पास .

नेहा दीदी ने राधा को अपने पास बिठा लिया . राधा बार बार शर्मा कर मुझे देख रही थी .

अमित : क्यों राधा इतना परेशां क्यों हो रही थी तुम ? मैं कहीं दूर तो नहीं गया था

राधा : दीदी ऐसे hi कह रही हैं. मैंने कब कुछ कहा .

अमित : जनता हूँ, दीदी बस तुम्हे परेशां कर रही हैं . ाचा दीदी माँ बता रही थी क आप सब खेत देखने गयी थी तो कैसे लगे खेत ?

नैना : अचे हैं पर इतना मज़ा नहीं आया .

करुणा : इस लिए हमने सोचा है कल तुम हमें खेत दिखने लेकर चलोगे .

करुणा दीदी ने ऑंखें खास अंदाज़ में घूमते हुए कहा जैसे नैना दीदी और उनके बीच कोई प्लानिंग पहले hi हो चुकी हो.

अमित : पर आज हो कर तो आयी हैं आप .

नैना : तो क्या हुआ , तू नहीं चल सकता क्या हमारे साथ ? वैसे भी माँ और मौसी साथ थे और मां भी . हम तो उनकी वजह से एन्जॉय कर hi नहीं पाए . इस लिए कल तू हमारे साथ चलेगा . और हमें खेत बाघ क साथ साथ नदी पर भी लेकर जायेगा .

नैना दीदी और करुणा दीदी की बातों से ज़ाहिर था क वो बहुत कुछ सोच कर बैठी हैं.

नेहा : पर आज गए तो थे हम , सब कुछ तो वही है फिर दोबारा जाकर क्या होगा ?

नैना : नेहा तुम न बिलकुल hi बोरिंग हो. तुम नहीं जाना चाहती तो मत जाना पर हमें तो जाना है . अगर किसी को भी नहीं जाना तो उसकी मर्ज़ी .

कल्पना : मैं भी चलूंगी

करुणा : राधा तुम भी घर पर hi रहोगी न ?

करुणा दीदी ने जैसे जान बुझ कर राधा को तंग करने क लिए ये पूछा तो वो छोटे बच्चों की तरह झट से बोल पड़ी .

राधा : मैंने कब कहा

राधा क इस तरह जवाब देने से करुणा दीदी खुल खिला कर हसने लगी. राधा को उनके मज़ाक का एहसास हुआ तो फिर से वो शर्मा गयी . हूँ यूँही बातें कर रहे थे क दीपिका ममी मुझे बुलाने आ गयी और मैं उनके साथ नीचे चला आया जहाँ बड़ी मौसी और रीता मौसी मेरा इंतज़ार कर रही थी. साथ में बाबा भी थे. मुझे देखते hi वो खुश हो गए . मैंने आगे बढ़ कर उनके पाऊँ छुए और फिर उन्हें भी वो सब बताया जो मैं पहले hi बात चूका था . सब खुश हुए और ऐसे दोपहर क खाने का वक़्त हो गया. फिर हम सब ने मिल कर खाना खाया और आराम करने अपने अपने कमरों में चले गए . इस दौरान फिर से रीमा की कॉल आ रही थी मगर मैंने उसका फ़ोन नहीं उठाया . मैं समझ रहा था क रीमा कितनी परेशां हो रही होगी और उससे ज्यादा मुझे भी दिल में दर्द हो रहा था . मगर समझ में नहीं आ रहा था क मैं किस मुँह से उसे बताऊँ क मैं उसका भाई हूँ. जिसके साथ ज़िन्दगी जीने क सपने देख लिए थे अब वो hi रिश्ते में भाई बहिन निकल आये तो झटका किसी सदमे से काम नहीं था . मैं रीमा क बारे में देर तक सोचता रहा . जब दिल बेचैन होने लगा तो घर से निकल कर टहलता हुआ खेतों की तरफ चल दिया . जहाँ बाबा और अजय मां मिल गए . मुझे देखते hi अजय मां भी खुश हो गए और मुझे सीने से लगा लिया . बाबा शायद पहले hi अजय मां को सब बता चुके थे इस लिए वो खुद hi वो बात करने लगे .

अजय : दो देख ए बीटा वो जगह जो तेरे पापा ने बनवायी थी ? कैसा लगा ?

अमित : बहुत ाचा लगा मां जी , मुझे पापा पर बहुत गर्व हो रहा है वो सब देखने क बाद .

विजय : होना भी चाहिए बीटा , वो सच में एक अचे इंसान थे .

अमित : बाबा क्या मैं एक बात पूछ सकता हूँ ?

विजय : पूछ न , इसके लिए ऐसे इजाज़त क्यों मांग रहा है .

अमित : वो पापा , मैं जानना चाहता था क आपने कभी मंजू बुआ को ढूंढने की कोशिश नहीं की ?

मेरी बात सुन कर मां और बाबा ने कहा क दूसरे को देखा फिर कुछ देर खामोश रहने क बाद बाबा बोले .

विजय : नहीं बीटा , हमने कभी किसी से मिलने की कोशिश hi नहीं की. उस वक़्त हालत ऐसे बन गए थे क हमने कभी न वहां जाने की कोशिश की न किसी से मिलने की. और न hi कभी कोई उस तरफ से यहाँ आया. बाकि सब का तो हमें पता hi था मगर मंजू बेटी पता नहीं क्यों कभी नहीं आयी . जबकि वो कितना प्यार करती थी तुम्हारी माँ और पापा से. वो तो हमारे लिए भी छोटी बची की तरह थी. बस ये hi बटुक हे आज तक सताती है क आखिर उसने ऐसा क्यों किया ?

अमित : अगर उन्हें यहाँ आने से रोका गया हो तो ? अगर उनसे ये कहा गया हो क आप सब ने उनसे नाता तोड़ लिया ? अगर उन्हें ये कहा गया हो क आप सब ने उनके भाई को भला बुरा कहा और उस एक्सीडेंट का ज़िम्मेदार उनके भाई को ठहराय ? अगर उन्हें ये कहा गया हो क उनके भाई की डेड बॉडी भी उनकी दिखने से आप लोगों ने मन किया ?

मेरी बातें सुन कर बाबा हैरान हो गए और मेरी तरफ हैरानी से देखने लगे .

विजय : ये तू क्या कह रहा है ?

अमित : अगर ऐसा हुआ हो तो क्या तो भी आप मंजू बुआ का कसूर निकालेंगे ? क्या आपको नहीं लगता क आपको एक बार उनसे मिलना चाहिए था? आप जानते थे क पापा क सौतेले भाई कैसे हैं फिर भी आपने उनकी सगी छोटी बहिन को उनके बीच छोड़ दिया ? एक बार भी नहीं सोचा क जिन सौतेले भाइयों ने पापा क साथ इतना गलत सलूक किया वो उनकी छोटी बहिन क साथ क्या क्या करेंगे ?

मेरी बात सुन कर बाबा एक डैम से खड़े हो गए जैसे उन्हें एहसास हो गया हो क उनसे बहुत बड़ी गलती हो गयी. उनकी आँखों में साफ़ नज़र आ रहा था .

विजय : हे भगवन मुझसे इतनी बड़ी भूल कैसे हो गयी. मैंने एक बार भी नहीं सोचा क उस बेचारी का क्या होगा . अपने माता पिता और बहिन क दुःख में मैं भूल hi गया क उस बेचारी का भी तो सब कुछ पवन दामिनी hi थे . ये मैंने क्या कर दिया . हमसे बहुत बड़ी गलती हो गयी अजय हमसे बहुत बड़ी गलती हो गयी .

बाबा की आँखों में नमी साफ़ झलक रही थी . अजय मां ने बाबा का कन्धा थमा और उन्हें हिम्मत देने लगे .

अजय : हिम्मत रखो भैया अब तो कुछ बदला नहीं जा सकता . हम उसे ढूंढने की कोशिश करेंगे .

विजय : पता नहीं वो किस हल में होगी और कहाँ होगी ? कहीं उसके साथ भी ..... भगवन करे वो जहाँ भी हो ठीक हो वर्ण हम क्या जवाब देंगे पवन को .

अजय : हिम्मत रखिये भैया सब ठीक होगा . हम उसे ढूंढ निकालेंगे .

विजय : हम उसका सामना कैसे करेंगे मेरे भाई ? उसका तो सब कुछ हम ने चीन लिया . पवन और दामिनी तो चल बेस और अमित को हमने चीन लिया . उस बेचारी का तो सब कुछ hi लूट गया . हम उसके गुनेहगार हैं , गुनेहगार हैं हम उसके.

अजय : भैया ये आप कैसी बातें कर रहे हैं. आप ने जो कुछ भी किया तब वो सब ज़रूरी था. ये हूँ सब जानते हैं. और मंजू भी उस बात को समझेगी. जब वो अमित को देखेगी तो वो ज़रूर हमें माफ़ कर देगी आप देख लेना .

विजय : शायद वो हमें माफ़ कर दे पर उसके साथ हो हमने किया है वो इतनी आसानी से माफ़ भी तो नहीं किया जा सकता. मगर पहले हमें उसे ढूंढना होगा . तू ,,, तू मंजू से मिला था क्या ??? तूने अचानक उसका ज़िकर क्यों किया ? बता क्या तू उसे कहीं मिला था ?

अजय मां से बात करते करते बाबा को यद् आ गया क मैंने आज मंजू बुआ का ज़िकर अचानक से क्यों किया.

विजय : बोलता क्यों नहीं ? क्या तू मंजू से मिला था ? तुझे कैसे पता चला क उसे वो सब कहा गया होगा ? बता वो कहाँ है ? कैसी है ? बता बीटा , मैं आज hi उससे जा कर माफ़ी मांगूंगा और उसे घर लेकर आऊंगा . बता बीटा कहाँ हैं मंजू ?

अमित : बाबा पहले आप मेरी बात सुनिए , मैं आपसे झूठ नहीं बोलूंगा . मैं मंजू बुआ से मिला हूँ और कल hi मुझे पता चला क वो मेरी मंजू बुआ हैं. मैं उन्हें घर लेकर आना चाहता था पर वो भी यहाँ आने में झिझक रही हैं. आपकी तरह वो भी ये सोच रही हैं क उनसे गलती हो गयी जो उन्होंने अपने सौतेले भाइयों की बात मन कर कभी आपसे मिलने की कोशिश नहीं की.

विजय : तू मुझे ले चल बीटा मैं खुद उससे माफ़ी मांगूंगा. इसमें उसकी क्या गलती है . वो तो नासमझ बची थी . हम तो समझदार थे गलती तो हमने की है. वो है कहाँ ? कहाँ रहती है वो? तुम्हे कैसे मिली वो? क्या तुमने उसे बताया क तुम कौन हो ?

अमित : हाँ बाबा मैंने उन्हें सब बताया . वो शहर में hi रहती हैं और हमारे hi कॉलेज में टीचर हैं. इतने दिनों तक वो मेरे सामने थी और मैं कभी उन्हें पहचान hi नहीं पाया. पहचानता भी कैसे उनकी कोई तस्वीर भी तो नहीं थी . और जो देखि थी वो भी उनके बचपन की थी .

विजय : कोई बात नहीं बीटा जो हुआ सो हुआ काम से काम उसका पता तो मिला . तुम्हे देख कर खुश तो बहुत हुई होगी वो . उसे तो पता भी नहीं होगा क तुम ज़िंदा हो वर्ण वो ज़रूर अति .

अमित : हाँ बाबा वो बहुत खुश थी और ख़ुशी क मरे कितनी देर तक रोटी भी रही. उन्होंने बहुत दुःख देखे हैं बाबा. वो मेरी बुआ हैं ये जानने से पहले hi मैं उनकी ज़िन्दगी क बारे में जान चूका था . वो बिलकुल अकेली हैं बाबा बहुत अकेली .

अजय : तो तुम उसे साथ क्यों नहीं लाये ?

अमित : मैंने बहुत कहा मां जी पर वो नहीं मणि . उन्होंने मुझसे कुछ वक़्त माँगा है. वो दर रही हैं क वो सबका सामना कैसे करेंगी.

विजय : गुनेहगार तो हम हैं बीटा फिर उसे डरने की क्या ज़रूरत है. तू चल मेरे साथ मैं उसे खुद घर लेकर आऊंगा .

अजय : हाँ अमित हम अभी चलते है उसे लेन क लिए .

अमित : नहीं बाबा पहले आप मेरी बात सुन लीजिये .

विजय : अब क्या बात है ?

अमित : बाकि सब तो हस्ते हस्ते उन्हें गले लगा लेंगे बाबा पर दिव्या मौसी का क्या ? मुझे नहीं लगता क वो इतनी आसानी से मानेंगी . वो किसी बात से गुस्सा हैं पापा से इसी लिए वो मंजू बुआ को एक्सेप्ट नहीं करेंगी. हमें पहले दिव्या मौसी को मानना होगा . वर्ण मंजू बुआ क यहाँ आने पर अगर मौसी ने गुस्से में कुछ कह दिया तो ??? मंजू बुआ शायद इस बात को दिल पर लगा लें. वो पहले hi बहुत दुखी हैं बाबा , हमें पहले दिव्या मौसी को मानना होगा .

विजय : पर दिव्या क्यों नाराज़ होगी ? वो तो दामिनी से hi सबसे ज्यादा प्यार करती थी. और दामिनी भी तो मंजू को कितना प्यार करती थी. दिव्या गुस्सा नहीं करेगी , तू ऐसे hi दर रहा है .

अमित : नहीं बाबा मैं जो कह रहा हूँ वो सच है. आप एक बार बात कर क तो देखो .

विजय : मैं कह रहा हूँ न , वो ऐसा कुछ नहीं करेगी.

अमित : प्लीज बाबा , आप की तरह मैं भी बुआ को घर लाना चाहता हूँ जल्द से जल्द पर दिव्या मौसी को नाराज़ भी तो नहीं किया जा सकता. आप भी जानते हैं उनकी नेचर को

अजय : अमित ठीक कह रहा है भैया , पहले एक बार दिव्या क मन की भी खबर ले लेनी चाहिए .

विजय : ठीक है , मैं आज hi बात करता हूँ .

उसके बाद बाबा हम तीनो घर की तरफ चल दिए . बाबा लगातार मंजू बुआ क बारे में hi पूछ रहे थे क वो कैसी दिखती है, उसे सबकी यद् है या नहीं , वो किसके बारे में क्या सोचती है . यही सब बातें करते करते हम घर आ गए. तब तक शाम ढल चुकी थी और सब लड़कियां बच्चों को खिला रही थी जबकि औरतें बातें करने क साथ रसोई का काम कर रही थी .

वहीँ शहर में मंजू उदास हो गयी थी. इतने सैलून बाद अपने मरे हुए भतीजे को ज़िंदा प् कर उसका दिल ख़ुशी से झूम उठा था मगर मन में उलझन की वजह से वो अमित को लेकर स्पष्ट नहीं हो प् रही थी. पर अब जब अमित गाओं जा चूका था तो उसे एक एक पल करना मुश्किल हो रहा था. उसी दिल भी अंदर से मचल रहा था क वो उन सब से मिले जो उसे कितना प्यार करते थे . चाहे सब क साथ वो ज्यादा नहीं रही थी पर उन चाँद सैलून क साथ में मंजू को सब से प्यार hi मिला था और उसी प्यार को यद् कर क मंजू उन सब से मिलने क लिए तड़पने लगी थी. जब घर का सूनापन उसे सताने लगा तो उसने फिर से अपनी हमदम अपनी खास दोस्त को अपने उस एकाकी पैन को दूर करने क लिए बुला लिया . ऋतू भी अपनी सहेली की मनोदशा अछि तरह जानती थी इस लिए अपने बिजी सचेडूले से समय निकल कर वो फिर से हाज़िर हो गयी अपनी बहिन जैसी दोस्त का सहारा बनने क लिए. ऋतू को वक़्त देर से hi मिला था मगर रत होने से पहले वो आ गयी थी. और अब दोनों एक साथ मंजू क बैडरूम में बैठी थी .

ऋतू : क्या बात है मंजू ? तू अभी भी सोच रही है ? मैंने तुझे कहा न अगर तू उसके साथ बुआ भतीजे वाला hi प्यार रखना चाहती है तो सब कुछ भुला कर नए सिरे से शुरू कर न. अगर ऐसे hi मन पर बोझ रखेगी तो न तू खुद खुश रह पायेगी न अमित .

मंजू : वो बात नहीं है ऋतू , मुझे समझ नहीं आ रही क मैं किसे सब क सामने जाउंगी. आखिर क्या कहूँगी मैं उन से ? वो सब मुझे कितना प्यार करते थे और मैंने एक बार भी उनसे मिलने की कोशिश नहीं की. अपने प्यारे भतीजे को फिर से पाने की ख़ुशी मैं बता नहीं सकती क कितनी है और अब वो पास नहीं है तो दिल कर रहा है क अभी उड़ कर उसके पास पहुँच जॉन मगर .....

ऋतू : ऐसे सोचने से कुछ होगा क्या ? आखिर तुम्हे सबके सामने जाना तो है hi . वैसे मुझे नहीं लगता क वो तुमसे नाराज़ होंगे . अमित सब ठीक कर लेगा . वो तुम्हे जल्द से जल्द अपने घर लेकर जाना चाहता है. और उसकी फॅमिली उससे बहुत प्यार भी करती है फिर वो कैसे नाराज़ रह सकते हैं? हाँ थोड़ा बहुत मन में जो शंका होगी भी वो दूर हो hi जाएगी बात करने से. समस्या चाहे कैसी भी हो उसका हल तो बात करने से hi निकलता है न .

मंजू : कहना आसान है ऋतू पर मेरी जगह खुद को रख कर ज़रा सोच क मैं किस मुश्किल में हूँ .

ऋतू : अब ज्यादा मत सोच , जो भी होगा ाचा hi होगा . तुझे खुश होना चाहिए क तुझे परिवार का सुख मिलने जा रहा है. मुझसे ाचा तुझे कौन जनता है . तू साडी ज़िन्दगी तरसती रही है अपनों क प्यार क लिए और जब ऊपर वाला तुझे सब लौटा रहा है तो तू ऐसे दुबक रही है .

मंजू : मैं भी चाहती हूँ सब से मिलना बस ......

ऋतू : बस अब और मत सोच. मैं तो कहती हूँ कल hi चली जा खुद hi. इससे पहले क वो सब यहाँ आएं. वैसे अगर तू कहे तो मैं भी चल सकती हूँ तेरे साथ. आखिर मैं भी तो मिलूं उन सब से जिन्होंने इतने अचे संस्कार दिए हैं अमित को. अमित आज जो भी है वो सब उनके hi संस्कार हैं.

मंजू : हाँ तुझे तो जल्दी होगी hi कामिनी , ससुराल जो देखना है तुझे .

ऋतू : हाँ तो , मेरा ससुराल है अपनी सासु माँ से मिलूंगी . बुआ सास से तो मिल लिया . वैसे ससुराल तो तेरा भी है एक किसम से .

मंजू : ऋतू को मरते हुए ) तू फिर शुरू हो गयी. मैंने कहा न मैं वो सब भूलना चाहती हूँ और तू बार बार मुझे फिर से यद् दिला देती है .

ऋतू : ाचा ?? तो क्या तू भूल सकती है वो प्यार जो तू उससे करती है ? मेरी जान तू खुद से झूठ बोल सकती है ,,, पर कितनी देर ?

मंजू : देख वो सब गलत है . ाचा यही होगा क मैं उसे भूल जॉन. ये सब गलत है . वो सब मैं दोबारा से नहीं कर सकती कभी भी नहीं .

इतना कह कर मंजू ऋतू की तरफ पीठ कर क लेट जाती है .



ऋतू ( मन में ) तू बहुत भोली है मंजू. एक न एक दिन वो प्यार तुझे फिर से अमित क पास आने को मजबूर कर hi देगा. तू लाख इंकार कर ले पर तेरा दिल अमित क नाम से hi धड़कता है . सब कुछ नार्मल होते hi तू खुद ये महसूस करेगी. फिर देखती हूँ तू खुद को कैसे रोक पति है. प्यार रिश्ते नहीं देखता समाज क उसूल , बंधन ये सब प्यार क आगे टिक नहीं सकते. तू मन चाहे न मन रहूंगी तो मैं तेरी सौतें hi . हे हे हे
 
अपडेट 235



‘ बड़े दोनों से मेरे दिल में एक ख्याल आ रहा है , आज आप सब यहीं हैं तो सोच रहा हूँ क आपको भी बता दूँ’

घर पर खाने क वक़्त जब साथ बैठे तो बाबा ने बात शुरू की. दीपिका ममी खाना परोस रही थी जिनका साथ नेहा दीदी और दिव्या मौसी दे रही थी . बाबा ने बात शुरू करते hi दिव्या मौसी को भी पास बुला लिया . रजनी मौसी रीता मौसी माँ और कामिनी ममी क साथ साथ अजय मां और कमलेश मां भी बैठे थे. बाकि सब लड़कियों की फ़ौज क साथ .

रजनी : आप किस बारे में बात कर रहे हैं ?

विजय : हमसे बहुत बड़ी गलती हो गयी है बहिन जो मेरे दिल पर बोझ बन गयी है. मैं उस गलती को ठीक करना चाहता हूँ.

गौरी : कैसी गलती ? आप किस बारे में बात कर रहे हैं जी?

रीता : हाँ भैया आप किस बारे में बात कर रहे है ? ऐसी कौन सी गलती हो गयी है आपसे जो आप परेशां हो रहे हैं

विजय : बहुत बड़ी गलती हुई है मुझसे मेरी बहिन और आप सब भी इसमें शामिल हो .

बाबा क इतना कहते hi सब क हाथ और मुँह खाना कहते कहते रुक गए और सब बाबा को देखने लगे .

रजनी : किस बारे में बात कर रहे हो भैया ? ऐसी कौन सी गलती हुई है जिसमे हम सब शामिल हैं ?

विजय : हमने एक मासूम को बेसहारा कर दिया , एक अनाथ बेसहारा मासूम लड़की को दौलत क भूखे भेड़ियों क हवाले कर दिया. एक बार भी नहीं सोचा क उस बेचारी का क्या होगा .

दिव्या : आप किसकी बात कर रहे हो भैया ? साफ़ साफ़ बताइये ये पहेलियाँ क्यों बुझा रहे हैं ?

विजय : मैं मंजू की बात कर रहा हूँ . दामिनी की ननद मंजू , अमित की बुआ मंजू .

मंजू बुआ का नाम सुनते hi सबके चेहरों पर अलग अलग एक्सप्रेशन आ गए . और खाना पीना भूल कर सब बाबा की और देखने लगे

गौरी : मंजू !!! आज आपको मंजू की यद् कैसे आ गयी ? आप साफ़ साफ़ बताइये क्या बात है ?

रजनी : हाँ भैया बताइये आखिर बात क्या है ?

विजय : मुझे किसी से मंजू क बारे में पता चला है . बेचारी क साथ बहुत बुरा हुआ है और जब से मुझे पता चला है मेरी आत्मा मुझे धुत कर रही है . मेरी वजह से उसके साथ बहुत बुरा हुआ है . मैं खुद को माफ़ नहीं कर प् रहा . मुझे उससे माफ़ी मांगनी है

दिव्या : आप ये सब क्यों सोच रहे हैं भैया ? वो तब छोटी बची थी , पर क्या वो आज भी छोटी बची है? क्या वो कभी बड़ी हुई hi नहीं ? इतने सैलून में एक बार भी उसने ये जानने की कोशिश की क हम सब कैसे हैं? क्या एक बार भी वो किसी से मिलने आयी ? वो भी अपने भाइयों जैसी hi निकली आखिर बहिन हो थी उनकी .

विजय : ये तुम क्या कह रही हो दिव्या

दिव्या : ठीक कह रही हूँ भैया , आज अचानक किसी ने आपको उसकी झूठी कहानी सुना दी तो आप ऐसी बातें कर रहे हैं . अगर उसके दिल में हम सब क लिए परवाह होती तो क्या वो खुद नहीं आ सकती थी ? जहाँ तक मुझे पता है उसने ऐशो आराम से अपनी ज़िन्दगी जी है. उसकी शादी पे राधा क पापा खुद गए थे . एक बड़े घर में उसकी शादी हुई थी और आप कह रहे हैं वो बहुत दुखी है. किसी ने आपको झूठ बोलै है और हो सकता है ये खबर उसने खुद hi भिजवाई हो. ज़रूर उसे पता चल गया है अमित क बारे में इसी लिए वो अब इस घर में घुसना चाहती है. मेरी एक बात अछि तरह सुन लो भैया. मैं उसे अमित क पास भी नहीं आने दूंगी. इतने सैलून में उसे इसकी यद् नहीं आयी और अब हक़ जताने चली है. जैसा भाई वैसी बहिन .

रजनी : ये तुम कैसी बातें कर रही हो दिव्या , सोच समझ कर बोलै करो. वो ऐसी नहीं है.

दिव्या : आप तो ऐसे बातें कर रही हैं जैसे आप उसे अचे से जानती हैं दीदी . क्या वो आप से मिली है कभी ? आप जब की बात कर रही हैं तब वो छोटी बची थी. वक़्त क साथ दौलत का रंग चढ़ गया होगा उस पर भी अपने भाइयों की तरह .

रजनी : बस कर दिव्या , आखिर तू क्यों ऐसे गुस्सा कर रही है? क्या तू भूल गयी क दामिनी कितना प्यार करती थी उससे और तू भी तो करती थी . अब क्या हो गया जो ऐसे बात कर रही है .

दिव्या : दामिनी का नाम मत लो दीदी , दामिनी ने तो उसे बहिन , भाभी , माँ सब का प्यार दिया था . पर उसने क्या किया ? एक बार भी वो रोने तक नहीं आयी उसके लिए. एक बार भी हम में से किसी से बात नहीं की उसने . और आज आप उसकी तरफदारी कर रहे हैं. ठीक है , अगर आप सब को उसकी इतनी hi फ़िक्र है तो फिर मैं यहाँ नहीं रहूंगी और न hi कभी दोबारा यहाँ आउंगी अगर वो यहाँ आयी तो .

गौरी / रजनी / रीता / कामिनी / विजय / अजय / कमलेश : दिव्या , दिव्या , दिव्या रुको दिव्या .

इतना कह कर दिव्या मौसी आंसू बहती हुई अपने कमरे की तरफ दौड़ गयी. सब उन्हें रोकने क लिए आवाज़ लगते रहे पर वो नहीं रुकी. दिव्या मौसी क इस तरह रोने से सब दुखी हो रहे थे . राधा भी उठ कर मौसी क पीछे चली गयी .

रजनी : ये क्या हो गया

गौरी : क्या ज़रूरत थी आपको मंजू का सुनकर करने की वो भी दिव्या क सामने ? आप जानते हैं न वो दामिनी की वजह से उन सब का नाम भी नहीं सुन्ना चाहती. फिर भी आप ??

विजय : तो बताओ मैं क्या करूँ ? जब से मंजू क बारे में सुना है मेरी आत्मा मुझे झकझोर रही है. दिव्या गुस्से में कुछ भी सुनने को तैयार नहीं वो इस बात को समझ hi नहीं रही क उसकी तरह मंजू ने भी बहुत दुःख झेले हैं. वो भी अकेले .

रीता : अकेले ? पर दिव्या ने तो अभी बताया न क उसकी शादी एक बड़े घर में हो गयी थी ?

विजय : हाँ हो गयी थी पर वो अकेली ज़िन्दगी बिता रही है . उसका पति कुछ देर बाद hi मर गया था .

रजनी : हे भगवन कितना बुरा हुआ उसके साथ. पर आपको ये सब कहाँ से पता चला ?

विजय : मैंने बताया न आज hi मुझे किसी से पता चला है. वो मंजू को अछि तरह जनता है.

गौरी : ऐसा कौन मिल गया आपको जो मंजू को जनता है? अभी दोपहर तक तो आप को कुछ भी पता नहीं था . इतनी जल्दी कौन मिल गया आपको ?

विजय : वो सब बाद में बताऊंगा पहले जाओ कोई दिव्या को सम्भालो . वर्ण रो रो कर वो बुरा हल कर लेगी .

रीता : मैं जाती हूँ उसके पास .

रजनी : मैं भी चलती हूँ साथ .

रजनी मौसी और रीता मौसी दोनों उठ कर दिव्या मौसी क कमरे की तरफ चल दी. मैं बस खामोश बैठा सब देख रहा था . नैना दीदी करुणा दीदी नेहा दीदी कल्पना सब मुझे hi देख रही थी. मुझे तो समझ नहीं आ रहा था क दिव्या मौसी की क डैम से इतनी ज्यादा गुस्से में क्यों आ गयी. वो नाराज़ होंगी ये तो मुझे अंदाज़ा था पर इतना ज्यादा होंगी ये अंदाज़ा नहीं था . खाना अब किसी से खाया नहीं जा रहा था . इस लिए सब खाना वैसे hi छोड़ कर उठ खड़े हुए. रजनी मौसी और रीता मौसी खली हाथ वापिस लौट आयी. दिव्या मौसी ने अपने कमरे का दरवाज़ा बंद कर लिया था और किसी से बात नहीं कर रही थी.

विजय : क्या हुआ रजनी दिव्या नहीं मणि क्या ?

रजनी : नहीं भैया आप जानते तो हैं उसका गुस्सा. अभी वो गुस्से में है इस लिए बात भी नहीं सुन रही. राधा क लिए भी दरवाज़ा नहीं खोला उसने तो.

गौरी : उसने तो खाना भी नहीं खाया जी , चलिए हम दोनों चलते हैं. आपके लिए तो दरवाज़ा खोलेगी hi .

रजनी : नहीं आप दोनों रहने दो. अभी वो किसी की नहीं सुनने वाली. मेरी बात मनो सुबह बात करेंगे उससे .

गौरी : वो रत भर भूखी रहेगी क्या ?

दीपिका : ऐसे कैसे भूखी रहेंगी , लो अमित ये खाना तुम लेकर जाओ दीदी क पास. वो चाहे किसी क लिए दरवाज़ा खोले न खोले , तुम्हारे लिए ज़रूर खोलेंगी.

दीपिका ममी ने खाने की प्लेट मेरे आगे करते हुए कहा .

रजनी : हाँ हाँ वो अमित को मन नहीं कर सकती . जा बीटा जा कर खाना खिला अपनी मौसी को वो तेरी बात ज़रूर मानेगी .

मां ममी बाबा माँ मौसी सब मुझे एक और में कहने लगे तो मैं उनकी बात मन कर खाने की प्लेट लिए दिव्या मौसी क कमरे की तरफ चल पड़ा. सीढ़ियां चढ़ कर जब ऊपर पहुँच तो नेहा दीदी राधा को गले लगाए कड़ी थी. राधा बेचारी तो रही थी. मुझे देख कर उसका रोना बंद हो गया जैसे उसे उम्मीद थी क मैं सब ठीक कर दूंगा .

अमित : दीदी आप राधा को अपने साथ ले जाओ . मौसी से मैं बात करता हूँ.

मेरी बात सुन कर नेहा दीदी राधा को अपने साथ ले गयी और बाकि सब भी अपने कमरे में चली गयी . मैंने दिव्या मौसी क कमरे का दरवाज़ा खटखटाया तो अंदर से कोई आवाज़ नहीं आयी .

अमित : मौसी ,, मौसी ,, मैं हूँ अमित. दरवाज़ा खोलिये . मुझे आपसे बात करनी है .

मेरी आवाज़ सुन कर भी दिव्या मौसी ने कोई जवाब न दिया तो मैं फिर से बोलै

अमित : मौसी क्या मुझसे भी नाराज़ हैं? आप तो मुझे सब से ज्यादा प्यार करती हैं न . तो क्या मेरे लिए दरवाज़ा नहीं खोलेंगी?

मैंने फिर से आवाज़ लगाई पर अभी भी कोई हरकत न दिखी तो मैंने एक बार फिर से दरवाज़ा खटखटाया और बोलै .

अमित : ठीक है मौसी , पता चल गया क आप मुझसे प्यार नहीं करती . मैं अब कभी आपको परेशां नहीं करूँगा .

मैंने अभी इतना hi कहा था क दरवाज़ा एक डैम से खुल गया और सामने दिव्या मौसी कड़ी थी. उनकी आँखों में अभी भी आंसू थे . मुझे देख कर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और अंदर खींच कर फिर से दरवाज़ा बंद कर दिया .

दिव्या : क्या कह रहा था तू ? मैं तुझसे प्यार नहीं करती ? क्या तू भी ये सोचता है क मैं तुझसे प्यार नहीं करती हाँ ??

मैंने खाने की प्लेट एक तरफ राखी और मौसी को गले से लगा लिया .

अमित : ी ऍम सॉरी मौसी , मैं जनता हूँ आप मुझे सब से ज्यादा प्यार करती हैं. आप दरवाज़ा नहीं खोल रही थी इस लिए मैंने वो सब कहा . आप मुझ पर तो गुस्सा नहीं है न ?

दिव्या : मैं किसी पर भी गुस्सा नहीं हूँ. पर जिसने मेरी दामिनी क साथ वफ़ा नहीं की मैं उसे इस घर में नहीं आने दूंगी. अगर वो यहाँ आयी तो मैं कभी इस घर में नहीं आउंगी .

अमित : ये घर आपका है मौसी , अगर आप नहीं चाहती क कोई इस घर में आये तो वही होगा. मगर पहले आप ये रोना बंद कीजिये. आपको ऐसे रोटा देख कर मुझे बहुत बुरा लग रहा है. प्लीज आप चुप हो जाइये .

दिव्या मौसी को मैंने कास क अपने सीने से लगा लिया , भावनाओं क इस भावुक पल में मुझे इस वक़्त दिव्या मौसी की सब से ज्यादा फ़िक्र हो रही थी. दिल hi दिल में मैं सोच रहा था क कहीं न कहीं मुझसे गलती हुई है. पहले मुझे दिव्या मौसी से बात करनी चाहिए थी. धीरे धीरे अगर मैं दिव्या मौसी को सब समझाता वो ज़रूर समझ जाती क्यूंकि वो दिल की बहुत अछि थी बस माँ क मामले में ज्यादा पोस्सेस्सिवे थी . धीरे धीरे दिव्या मौसी जब शांत हुई तो मैंने उनका चेहरा अपने हाथों में लिया और उनकी आँखों से आंसू साफ़ किये .

अमित : मेरी इतनी प्यारी मौसी की आँखों में ये आंसू बिलकुल भी अचे नहीं लगते . मैंने आपसे कितनी बार कहा है क आप बस मुस्कुराती रहा करो मगर आप हैं क मेरी बात hi नहीं मानती. अब सब छोड़ कर पहले मुस्कुरा क दिखाइए , चलिए शाबाश

दिव्या मौसी मेरी बात सुन कर मुस्कुराने की कोशिश करने लगी पर उनसे हो नहीं रहा था तो मैंने उनके पेट पर गुदगुदी की जिससे उनके चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी और वो खिलखिला क है पड़ी

दिव्या : हे हे हे बस कर हे हे हे बब बास और नहीं हे हे हे मैंने कहा न बस कर .

अमित : हाँ अब बानी न बात , बस ऐसे hi रहा कीजिये , मुझे मेरी प्यारी मौसी हमेशा ऐसे hi हस्ती नज़र आणि चाहिए .

दिव्या : तो फिर तू ऐसे hi मेरे पास रहा कर न. क्यों चला जाता है दूर ?

अमित : मैं तो हमेशा आपके पास hi हूँ मौसी . पास रहूं या दूर , आप हमेशा मेरे दिल में रहती हैं.

मेरी बात सुन कर दिव्या मौसी एक तक मुझे देखने लगी .

अमित : क्या हुआ ?

दिव्या : कुछ नहीं .

अमित : अब तो गुस्सा नहीं हैं न ? चलिए खाना खाइये .

दिव्या : मुझे भूख नहीं है .

अमित : ऐसे कैसे भूख नहीं है. देखिये मैं खाना लेकर आया हूँ और ये आपको खाना पड़ेगा . मैं सब को बोल कर आया हूँ क मौसी को मैं खाना खिला कर hi आऊंगा.

दिव्या : नहीं मुझे नहीं खाना .

अमित : मैं भी देखता हूँ आप कैसे नहीं कहती.

मैंने खाने की प्लेट हाथ में पकड़ी और निवाला तोड़ कर दिव्या मौसी क मुँह की तरफ किया तो वो मन करने लगी मगर मेरे ज़ोर देने पर चुप चाप खाने लगी. एक एक निवाला मैंने अपने हाथ से मौसी को खिलाया और वो बस मुझे देखती सब कहती रही . खाना ख़तम होते hi मैंने प्लेट साइड में राखी तो देखा दिव्या मौसी की आँखों में फिर से आंसू थे .

अमित : अब क्या हुआ ? आप फिर से रोने लगी .

दिव्या : आंसू पोंछते हुए ) कुछ नहीं मैं ठीक हूँ , ठीक हूँ मैं. वो बस ,,,,, दामिनी की यद् आ गयी. जब भी मैं गुस्सा हो जाती थी तो वो ऐसे hi मुझे अपने हाथों से खाना खिलाती थी.

अमित : माँ नहीं है तो क्या हुआ , मैं भी तो उनका hi बीटा हूँ न. मैं भला कैसे आपको ऐसे अकेला छोड़ सकता हूँ.

मेरे इतना कहते hi दिव्या मौसी ज़ोर से मेरे गले लग गयी. और गले लगे रोने लगी .

दिव्या : दामिनी की तरह मुझे अकेला तो नहीं छोड़ डोज न तुम ? मैं उसके बिना टूट गयी थी अब तुम कभी मुझसे दूर मत होना .

अमित : मैं कभी भी आपको छोड़ कर नहीं जाऊंगा . मैं वडा करता हूँ. अब से आप कभी माँ को यद् कर क उदास नहीं होंगी मुझसे वडा कीजिये .

मैं दिव्या मौसी को सहलाया हुआ उन्हें शांत करने की कोशिश करने लगा . काफी देर तक वो ऐसे hi मेरे गले लगी रही. और जब वो कुछ नार्मल हुई तो मैंने उन्हें बीएड पर लिटा दिया. मैं उठ कर जाने लगा तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया .

दिव्या : आज रत यहीं रुक जाओ न मेरे पास .

दिव्या मौसी क मासूम से चेहरे पर इल्तिजा देख कर मैं भी उन्हें मन नहीं कर पाया और उनके साथ वहीँ बीएड पर लेट गया. दिव्या मौसी मेरी तरफ करवट लिए मेरी बाजु पर सर रख कर लेट गयी और मुझे hi देखती रही. मैं ख़ामोशी से लेता रहा पर जब भी मैं मणि की तरफ देखता उनकी नज़र खुद पर hi पता . सच में वो मुझे दिल से अपना बीटा hi मानती थी जो इतना गुस्से में होने पर भी मेरे लिए शांत हो गयी और अब इतने स्नेह से मुझे देख रही थी. पता नहीं कब मेरी आँख लगी और मैं सो गया पर दिव्या मौसी शायद मेरे बाद hi सोई.

सुबह मेरी आँख जल्दी खुल गयी और मुझे अपने सीने पर कुछ वजन महसूस हुआ. मैंने होश में आते hi देखा तो दिव्या मौसी मेरे सीने पर सर रखे सो रही थी. उनके बाल मेरे ऊपर बिखरे हुए थे . दिव्या मौसी का चेहरा बालों में छिपा हुआ था. उनका एक हाथ मेरी बगल में था जैसे मुझे गले लगा क सोई हो. मैंने गौर किया तो मेरा भी एक हाथ उनकी पीठ पर था. जैसे hi मैंने अपना हाथ हिलाया तो मुझे माखन स कोमल त्वचा का एहसास हुआ. यानि मेरा हाथ दिव्या मौसी की नंगी पीठ पर था जो ब्लाउज की बैक साइड पर था. न चाहते हुए भी मेरा हाथ उनकी पीठ पर चलने लगा . मुझे अपने लैंड पर दबाव महसूस हुआ तो मैंने देखा दिव्या मौसी का डायन घुटना मेरे लैंड क ऊपर था मगर यहाँ का नज़ारा और भी ज्यादा जानलेवा था . क्यूंकि मौसी का घुटना निर्वस्त्र था . उनका पेटीकोट जांघ तक चढ़ा हुआ था जिससे उनका घुटना और जांघ का कुछ भाग नज़र आ रहा था. दूध वो गोरी चमड़ी खून गरम करने क लिए काफी थी. मैं अपनी नज़रें वह से हटाने की कोशिश करने लगा क्यूंकि मेरा लैंड पूरी तरह अकड़ गया था . मैंने लम्बी लम्बी सांस लेकर खुद को काबू करने की कोशिश की. मगर दिव्या मौसी नींद में hi कुनमुनाई जिससे उनका घुटना और भी ज्यादा मेरे लैंड पर डाब गया. मेरी बुरी हालत हो रही थी. अगर मैं दिव्या मौसी को अपने ऊपर से हिलता तो ज़रूर उनकी नींद खुल जाती. इस लिए मैं ऐसे पड़ा रहा. मुझे एक बात समझ नहीं आ रही थी क आखिर मौसी ने अपनी साडी कब निकली ? कम्बल भी एक साइड पर गिरा पड़ा था शायद इसी लिए ठण्ड से बचने क लिए वो नींद में hi मेरे साथ ऐसे चिपकी होंगी. मैंने दिव्या मौसी को अपने ऊपर से साइड हटाने की सोची और जैसे hi मैंने उन्हें अपने ऊपर से हटाने लगा तो मेरे मन में उनका चेहरा देखने का ख्याल आया . मैंने एक हाथ से उनके बिखरे बाल चेहरे से हटाए तो उनका सुन्दर मासूम सा चेहरा सामने आ गया . नींद में सुकून से सोई वो बहुत hi प्यारी लग रही थी. सच में राधा बिलकुल मौसी पर hi गयी थी. और इस उम्र में भी दिव्या मौसी राधा से काम नहीं थी. मैं उनकी सुंदरता में खोया था और मेरा हाथ उनके गालों पर था क किसी ने दरवाज़ा खटखटाया. आवाज़ सुनते hi मुझे ऐसे लगा जैसे किसी ने मेरी चोरी पकड़ ली हो. मैंने एक नज़र दरवाज़े की तरफ देखा .

‘ थक्क थक्क थक्क ‘

‘ दिव्या दीदी , दिव्या दीदी ‘ ये आवाज़ दीपिका ममी की थी . मुझे कुछ रहत महसूस हुई उनकी आवाज़ सुन कर . और जैसे hi मेरी नज़र वापिस दिव्या मौसी पर गयी तो मेरी हवा टाइट हो गयी. क्यूंकि दिव्या मौसी की ऑंखें खुली हुई थी. और मेरा एक हाथ अभी भी ुबके गलों पर था . उससे भी ज्यादा खतरे वाली बात ये थी क मौसी क घुटने क नीचे मेरा लैंड अकड़ा हुआ था.

अमित : आ आआप उठ गयी मौसी ?

दिव्या : हम्म्म गुड मॉर्निंग. उम्म्म्म

दिव्या मौसी ने इतना कहते hi लेते लेते थोड़ा ऊपर सरक कर मेरे माथे पर किश कर दी. मगर इसमें भी एक बात हो गयी. उनके मस्त सुडोल स्तन मेरी छाती से घिसते हुए मेरी थोड़ी तक आकर अपना असर दिखा गए . मौसी क बिखरे बाल मेरे पूरे चेहरे पर बिखर गए थे. चाँद पलों का ये चुम्बन एक जादुई एहसास दिला गया था . तभी फिर से दरवाज़े पर दस्तक हुई.

दीपिका : दीदी आप सो रही हैं क्या ? अमित को जगा देंगी क्या आप ?

दिव्या मौसी मेरी आँखों कुछ पल देखती रही और धीरे से मुस्कुरा कर पलट कर मेरे ऊपर से हैट गयी.

दिव्या : हाँ मैं जगा देती हूँ इसे .

दिव्या मौसी ने दीपिका ममी को जवाब दिया तो वो चाय लेन का बोल कर चली गयी. दिव्या मौसी को शायद अब अपनी हालत का अंदाज़ा हुआ था इस लिए वो मेरी तरफ पीठ कर क अपने कपडे ठीक करने लगी और बिना पीछे मुड़े वो अपनी साडी उठा कर लपेटने लगी. मैं भी जल्दी से उठा और जल्दी से कमरे से बहार निकलने लगा. जैसे hi मैंने दरवाज़ा की चिटकनी खोली तो मौसी बोली

दिव्या : थैंक्स अमित , मुझे सच में कल बहुत ज़रूरत थी . तुम्हारी वजह से मैं सुकून की नींद सो सकीय.

मैंने एक नज़र पीछे मुद कर मौसी की तरफ देखा तो वो चेहरे पर मुस्कान लिए मुझे देख रही थी. साडी अभी कमर पर hi लिपटी थी और छाती पर पल्लू नहीं था. एक पल मेरी नज़र वहां अटकी जो मौसी ने भी नोट कर लिया.

अमित : थैंक्स कैसा मौसी , आपके लिए तो मैं कुछ भी कर सकता हूँ और सच कहूं तो मुझे भी रत सुकून भरी नींद आयी.

इतना कह कर मैं कमरे से निकल गया. पर इतने में hi मेरी धड़कने बहुत तेज़ हो चुकी थी. मैं अपने कमरे में घुसा और जल्दी से बाथरूम में जा कर अपने चेहरे पर ठन्डे पानी क छींटे मरे. सुबह सुबह वो सब नज़ारा देख कर मेरा शरीर गरम हो गया था. फ्रेश हो कर मैं बाथरूम से बहार निकला तो दीपिका ममी दूध का गिलास हाथ में लिए कड़ी थी.

दीपिका : गुड मॉर्निंग, उठ गए जनाब . तो आखिर मन हो लिया दिव्या दीदी को .

अमित : गुड मॉर्निंग, वो तो बस उनका गुस्सा शांत किया है. पर अभी मंजू बुआ क बारे में मैंने कोई बात नहीं की .

मैंने बात करते हुए दीपिका ममी क करीब आया तो उन्होंने मुझे दूध का गिलास पकड़ा दिया .

दीपिका : हम्म्म वैसे एक बात तो तुम्हे समझ आ गयी होगी अब तक .

अमित : कौन सी बात ?

दीपिका : यही क अगर मंजू को यहाँ लाना चाहते हो तो दिव्या दीदी को तुम hi राज़ी कर सकते हो. वो किसी और की नहीं सुनेंगी. इस लिए जल्द से जल्द उनसे बात कर लो. अगर देरी करोगे तो उसका नुकसान तुम्हे hi होगा . इससे पहले क उन्हें कहीं से मंजू का पता चले खुद hi उन्हें राज़ी कर लो. वो प्यार से मन जाएँगी . दिव्या दीदी नाम क ताले की चाबी तुम हो , समझे ?

अमित : वो तो ठीक है पर मुझे थोड़ा दर भी लग रहा है. आपने देखा नहीं कल वो कैसे गुस्सा हो गयी थी.

दीपिका : हम्म ये बात तो मैंने भी नोटिस की थी. कोई बात है जो वो अपने अंदर छुपाये हुए हैं. और ये बात कोई और नहीं जनता वर्ण कोई कुछ तो कहता . ाचा तुम दूध ख़तम करो मैं जाकर किचन में काम देखती हूँ.

अमित : इतनी जल्दी भी क्या है , उम्मम्मम्म उम्म्म्म

दीपिका ममी कमरे से जाने क लिए मुड़ने hi लगी थी क मैंने उनकी कमर में हाथ दाल कर अपने पास खिंच कर उनके होंठों को अपने होंठों में जकड लिया . दीपिका ममी भी बिना देर किये मेरा साथ देने लगी और मेरे सर क पीछे हाथ रख कर पूरी तरह से मेरे साथ चिपक कर मेरे होंठ खुद hi निचोड़ने लगी . मैं तो पहले hi गरम हुआ पड़ा था इस लिए किश करता करता ममी क स्तनों को मसलने लगा . अभी थोड़ी देर hi हुई थी क ममी मुझसे अलग हो गयी.

दीपिका : तेज़ तेज़ साँसे लेते हुए ) हहहहह हहहह बस्स्स , बास खुद पर कण्ट्रोल करो वर्ण मैं खुद को रोक नहीं पाऊँगी.

दीपिका ममी ठीक कह रही थी उनकी साँसे उखड रही थी और ऑंखें भी लाल होने लगी थी. इससे पहले क मैं कुछ कहता वो अपने होंठ सदी क पल्लू से साफ करती शर्माती हुई कमरे से निकल गयी. मेरा लैंड फिर से अकड़ गया था . दीपिका ममी मेरे दिल क बहुत करीब थी मेरी ज़िन्दगी की पहली औरत मेरी गुरु जिसने मुझे प्यार करना सिखाया था . उनके करीब आते hi मैं बेकाबू होने लगता था . दीपिका ममी क जाते hi मैंने अपना ध्यान हटाने क लिए एक्सरसाइज करने का सोचा और छत पर hi खुले में एक्सरसाइज करने क लिए चला गया. अभी मैं वहां पहुंचा hi था क मेरी नज़र कल्पना पर पड़ी जो मुझसे पहले hi वहां आ कर एक्सरसाइज कर रही थी .

अमित : अरे वह , तुम भी एक्सरसाइज कर रही हो .

कल्पना : गुड मॉर्निंग, हाँ तो मैं नहीं करुँगी ? पता है न कम्पटीशन की तयारी भी करनी है. मगर तुम्हे तो कोई परवाह है hi नहीं .

अमित : गुड मॉर्निंग, किसने कहा मुझे परवाह नहीं है. वो तो मुझे अचानक जाना पर गया इस लिए कर नहीं पाया. अब से रोज़ अखाड़े में जा कर तयारी करूँगा जब तक घर हूँ.

कल्पना : मगर सर ने कहा था न क कॉलेज क इंडोर स्टेडियम का उसे हूँ कर सकते हैं तो वहां क्यों नहीं कर लेते हम ?

अमित : हम्म्म ये भी सही है. तुम्हार लिए तो वहां जाना ज़रूरी है मेरा तो यहाँ चल जायेगा. ऐसा करते हैं हम आज से कॉलेज में जाकर भी एक्सरसाइज कर लेंगे . कैसा रहेगा ?

कल्पना : बहुत बढ़िया रहेगा . सुबह यहाँ पर थोड़ा बहुत एक्सरसाइज तो कर hi लेते हैं. बाकि की प्रैक्टिस कॉलेज में हो जाएगी. और फिर वापिस घर. तो आज hi चलते हैं.

अमित : ठीक है तो नाश्ता कर क निकलते हैं.

कल्पना : मगर क्या नैना दीदी और करुणा दीदी नाराज़ नहीं होंगी ? उन्होंने आज तुम्हे बाघ ले जाने को कहा था .

अमित : वो तो वापिस आकर भी चले जायेंगे .

कल्पना: तो ठीक है मगर जायेंगे तुम्हारी बाइक पर hi . वैसे ये मंजू बुआ कौन हैं ? मतलब तुम जानते हो वो कहाँ हैं ?

कल्पना क सवाल पर मैं चुप हो गया तो वो फिर से बोली

कल्पना : दीदी और ममी ने मुझे बहुत कुछ बताया है तुम्हारी माँ डैड और फॅमिली क बारे में. सच में वो बहुत अचे होंगे इस लिए सब उन्हें इतना प्यार से यद् करते हैं. और तुम बिलकुल उन पर hi गए हो. छोटी ममी बता रही थी क तुम्हारी ऑंखें तुम्हारी माँ जैसी हैं. और दिव्या मौसी जुड़वाँ हैं तुम्हारी माँ की .

अमित : हम्म्म

कल्पना : वो भी तुम्हे उल्टा hi प्यार करती हैं इन फैक्ट सब से ज्यादा. तुम नहीं थे यहाँ तो मैंने उन्हें परेशां होते देखा है तुम्हारे लिए . वो तुम्हे बहुत मानती हैं न?

अमित : हाँ वो मुझे बहुत प्यार करती हैं.

कल्पना : एक बात कहूं , तुम्हारी फॅमिली बहुत hi अछि है. सब एक दूसरे को कितना प्यार करते हैं. मैं यहाँ आकर कितनी खुश हूँ मैं बता नहीं सकती. सब क सब तुम्हे बहुत प्यार करते हैं. चाहे वो ममी हो मौसी हो या दीदी . और जानते हो अब तो मुझे भी सब घर क सदस्य की तरह hi मानते हैं. काश मैं भी इस फॅमिली का हिस्सा बन सकूँ .

अमित : इसमें बनना क्या है , अब तो बन hi चुकी हो.

कल्पना : तुम समझे नहीं मैं क्या कह रही हूँ.

अमित : वो सब छोडो एक्सरसाइज पर ध्यान दो. फिर नाश्ता कर क निकलते हैं .

कल्पना ( मन में ) बुद्धू , समझाता hi नहीं क्या कहना चाहती हूँ मैं. सच में दुफर hi है . इन पहलवानों की अकाल घुटनो में hi होती है.

1 घंटा एक्सरसाइज करने क बाद हम अपने अपने कमरे में चले गए तैयार होने. जब मैं अपने रूम में तैयार हो रहा था तो राधा मेरे रूम में आ गयी. वो भी तैयार हो चुकी थी और अभी नाहा कर hi आ रही थी शायद. बिलकुल खिले गुलाब सी लग रही थी. मैंने उसे देखा तो एक पल उसे देखता hi रह गया .

राधा : गुड मॉर्निंग, ऐसे क्या देख रहे हो .

अमित : ओह्ह हह हाँ गुड,, गुड मॉर्निंग .

राधा : मुस्कुराते हुए ) मैं तुमसे कुछ कहने आयी थी.

अमित : हाँ हाँ कहो क्या कहना है .

राधा : थैंक्स

अमित : थैंक्स ? वो किस लिए ?

राधा : कल रत माँ को सँभालने क लिए . कल रत वो बहुत गुस्से में थी न. मगर तुमने उन्हें शांत कर दिया . इस लिए थैंक्स कहना था . उन्हें सिर्फ तुम hi संभल सकते हो. वो किसी और की नहीं सुनती. और अभी मैं उनसे मिल कर आ रही हूँ. जानते हो वो कितनी खुश नज़र आ रही हैं . जैसे कल रत कुछ हुआ hi नहीं. तुम हमेशा ऐसे hi संभालोगे न हमें हमेशा ?

अमित : ये तुम कैसी बातें कर रही हो राधा , तुम कोई पराये हो क्या ? थैंक्स कह कर तो मुझे तुम पराया कर रही हो . और रही बात मौसी की तो वो मेरी भी माँ hi तो है. फिर उन्हें क्यों नहीं सम्भालूंगा ?

राधा : और मैं ?

राधा मेरी आँखों में एक तक देख रही थी. राधा की आँखों में देख कर मैं जैसे कहीं और hi खो सा गया . उसकी मासूमियत भरी आँखों में देख कर मैं हमेशा hi ऐसे हैंग हो जाता था . एक मासूम गुड़िया सी थी वो जैसे पारी लोक की शहज़ादी.

अमित : तुम ...... तुम मेरी ......

मैं अभी कुछ कह पता उससे पहले hi करुणा दीदी और नैना दीदी कमरे में दाखिल हो गयी.

करुणा : ोये ये सुबह सुबह कहाँ जा रहे हो तुम दोनों ? कल्पना कह रही है क कॉलेज जाना है . ये क्या बात हुई , हमने कहा था न आज हमारे साथ बाघ देखने चलोगे .

दोनों क ऐसे अचानक आ जाने से मैं हड़बड़ा सा गया था और जैसे राधा क सम्मोहन से मैं बहार निकला . नहीं तो पता नहीं मैं क्या कहने जा रहा था. राधा भी दोनों क आ जाने से सकपका सी गयी थी.

अमित : हाँ वो प्रैक्टिस करने जाना है. दोपहर तक आ जायेंगे फिर शाम को चलते हैं.

नैना : हम सब यहाँ हैं और तुझे शहर जाने की पड़ी है. थिस इस नोट फेयर. राधा तुम क्या कर रही थी यहाँ ?

राधा : वो दीदी वो मैं वो .

करुणा : अरे इतना घबरा क्यों रही है मेरी गुड़िया . तू तो ऐसे दर रही है जैसे तूने कोई चोरी की हो.



‘ तुम लोग यहाँ क्या कर रहे हो ? चलो नीचे चल कर नाश्ते कर लो ‘ ये आवाज़ रीता मौसी की थी . कमरे में एते hi उन्होंने सब को निचे चलने को कहा तो मैं जान छुड़ा कर सबसे पहले बहार निकला . नीचे उतरा तो रजनी मौसी दिव्या मौसी दीपिका ममी क साथ नाश्ता बना रही थी. बाबा अजय मां माँ और कामिनी ममी आँगन में hi थे. मैंने अपना शहर जाने का प्रोग्राम बता दिया तो थोड़ा न नुकुर क बाद माँ ने परमिशन दे दी. इतने में ऊपर से बाकि सब भी नीचे आ गए और मैं जल्दी जल्दी नाश्ता कर क कल्पना क साथ शहर क लिए अपनी बाइक पर निकल गया .
 
अपडेट 236



‘ क्या बात है दिव्या आज बड़ी खुश नज़र आ रही हो? रत को तो इतनी गुस्से में थी क किसी से बात तक नहीं कर रही थी और अब देखो जैसे कुछ हुआ hi नहीं. और खुश तो ऐसे लग रही हो जैसे कुछ मिल गया हो ‘ खाने से निपटने क बाद जब सब इधर उधर बिजी हो गए तो रीता रजनी क कहने पर दिव्या क पास आयी. दिव्या अंदर hi अंदर कल रत में जो कुछ हुआ उसे यद् कर क खुश थी . और उन्ही पलों को यद् कर क अपने होंठों पर आ रही मुस्कान को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी. वास्तव में दिव्या को कल इस प्रेम की अनुभूति हुई थी जो वो कितने hi समय से अक्सर अपने सपनो में hi महसूस कर प् रही थी. वो निस्वार्थता प्रेम जो जीवन में कभी भी नहीं मिला था उसे . कल रत अमित ने जिस अपने पैन और प्रेम से दिव्या का गुस्सा न सिर्फ ठंडा किया था बल्कि उसे उन क्षणों में अपने प्यार का सहारा देकर उसके घायल मन को जैसे नई साँसे दे दी थी. कल रत उसने अमित को एक प्रेमी क रूप में hi महसूस किया था और उस अनुभूति में और क्या क्या हुआ ये सिर्फ दिव्या को hi पता था . अमित क सोने क बाद दिव्या ने अपने आप को जैसे अमित क ऊपर न्योछावर hi कर दिया था . सुबह उठ कर चाहे वो एक पल को शर्मा सी गयी थी अपनी हालत पर मगर उसका दिल मयूर की तरफ नाच रहा था. अपने प्रेमी की बाँहों में रत भर रहने क बाद . वास्तव में दिव्या क जीवन में ये पहली रत थी जब उसके दिल ने दिव्य प्रेम की अनुभूति की थी. ऐसा प्यार जो उसे कभी अपने पति क साथ कभी महसूस हुआ hi नहीं था . रत भर एक तरफ अपनी तरफ से किया गया मधुर मिलान और सुबह अमित की नज़रों की तपिश , ये सब hi तो था जो दिव्या को हकीकत से परे ख्वाबों की दुनिया में उलझाए हुए था. मगर अब अपनी बड़ी बहिन क सवाल पर वो ऐसे सकपका गयी जैसे किसी ने उसे रेंज हाथों चोरी करते पकड़ लिया हो.

दिव्या : कक कुछ भी तो नहीं दीदी आप कक क्या कह रही हैं .

रीता समझ गयी क कुछ तो ज़रूर हुआ है जो दिव्या इस तरह शर्मा रही है . रीता क दिमाग में एक hi बात चल रही थी क हो न हो अमित ने दिव्या का भी काण्ड कर hi दिया है. रत भर दोनों एक hi बिस्तर पर थे और सुबह से दिव्या का बदला हुआ रूप . ऊपर से अब ऐसे हड़बड़ाना रीता क मन में ये बात पक्की होती जा रही थी क अब अपनी तीसरी मौसी पर भी अमित क मुसल का ठप्पा लग गया है. मगर अमित से बात नहीं हो पाने की वजह से अभी वह कन्फर्म नहीं थी मगर अब दिव्या को छेड़ कर जैसे कन्फर्म करना छह रही थी .

रीता : ाचा , शर्मा तो ऐसे रही है जैसे शादी अगले दिन दुल्हन शर्माती है. मैं तो तेरी बहिन हूँ न तो क्या मुझे भी नहीं बताएगी तेरी इस ख़ुशी का राज़? आखिर एक रत में क्या मिल गया जो तू इतना बदली बदली नज़र आ रही है ?

दिव्या रीता क इस सवाल से अंदर तक हिल गयी. दुल्हन वाली बात कर क तो जैसे रीता ने जाता hi दिया था क वो क्या सोच रही है . मगर दिव्या बेचारी ने तो ऐसा कुछ किया hi नहीं था . हाँ नासमझ अल्हड लड़की की तरह जो थोड़ी बहुत उसने अपनी तरफ से मस्ती की थी बस उसी का सुरूर था और उसी बात से अब वो शर्मा भी रही थी .

दिव्या : ये आप कैसी बातें कर रही हैं दीदी ? आपको पता भी है आप क्या कह रही हैं ?

रीता : क्या जहा मैं ? मैं तो बस तेरे इस बदलाव की वजह पूछ रही हूँ. और तुम हो क बस बातें hi बनाये जा रही हो. कल रत अमित तुम्हारे साथ था न ? उसने ज्यादा तंग तो नहीं किया तुम्हे ?

ये एक और तीर छोड़ा था रीता ने चतुर मुस्कान क साथ . दिव्या अमित का ज़िकर इस तरह से किये जाने पर फिर से सकपका गयी.

दिव्या : नं नहीं तो , वो ,, वो भला क्यों तंग करेगा ? वो तो मुझे खाना खिला कर खुद सो गया था . हम दोनों जल्दी सो गए थे .

दिव्या घबराहट में जल्दी जल्दी जवाब तो दे रही थी अपनी बहिन क सवालों का मगर उसके जवाब से रीता की मुस्कान और गहरी हो गयी .

रीता : ाचा तो फिर इतनी देर तक क्यों सोई रही तुम? दीपिका को मैंने hi भेजा था तुम्हे जगाने क लिए मगर तू तो सो रही थी .

दिव्या फिर से रीता की बात में फास गयी और अपनी उंगलियां ऐसे मसलने लगी जैसे वो पकड़ी गयी हो.

दिव्या : वो , वो , गहरी नींद में थी तो देर से उठी.

रीता : हाँ नींद तो गहरी आती hi है फिर . चलो ाचा है अमित ने तुम्हे खुश तो कर दिया . वैसे है बहुत ाचा वो जो सबका ख्याल रखता है. और तुम्हारा तो कुछ ज्यादा hi ख्याल रखता है .

दिव्या मौसी रीता की बातों से शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी. इससे पहले क रीता और कुछ कहती दीपिका को देख कर दिव्या काम का बहाना कर क जल्दी से निकल गयी. दिव्या की हालत देख कर रीता मंद मंद मुस्कुरा रहे थी. उसे यकीन हो गया था क कुछ तो ज़रूर हुआ है और अब क्या हुआ है ये तो अमित hi बता सकता है. हम एक चीज़ जो कन्फर्म थी वो ये थी क अमित क नाम की मोहर दिव्या क मन में लग चुकी थी और अब ये मोहर और कहाँ लगी या लगने वाली थी ये देखने वाली बात थी .

मैं और कल्पना जैसे hi कॉलेज पहुंचे तो कॉलेज सुना पड़ा था . जहाँ बाकि क दिनों में इतनी हलचल होती थी आज वहां कोई नज़र तक नहीं आ रहा था . पार्किंग बिलकुल खली थी जबकि स्टाफ पार्किंग में भी 6-7 गाड़ियां hi कड़ी थी. गेट कीपर से पता चला की स्टाफ क कुछ मेंबर क्लेरिकल वर्क क लिए आये हुए हैं . प्रोफ वरिंदर कॉलेज में आये हुए थे ये हमें गेट कीपर ने बता दिया था . हम चूँकि बिना सर से बात किये आ गए थे इस लिए हम दोनों क इलावा और कोई स्टूडेंट स्पोर्ट्स वाला नज़र नहीं आ रहा था .

कल्पना : अब क्या करें ? लगता है यहाँ कोई नहीं आ रहा ? हम अकेले क्या करेंगे ?

अमित : चल कर देखते हैं. सर hi बताएँगे अब तो .

हम दोनों पहले वरिंदर सर क ऑफिस गए तो वो वहां नहीं थे. मुझे लगा शायद वो स्टेडियम में होंगे तो मैं कल्पना क साथ उधर hi चला गया . मगर यहाँ दरवाज़े पर टाला लगा हुआ था .

कल्पना : अब क्या करें सर तो यहाँ भी नहीं .

अमित : एक काम करते हैं. तुम यहाँ वेट करो मैं देख कर अत हूँ. सर हैं तो कॉलेज में hi शायद किसी और ऑफिस में बैठे हो.

कल्पना को वहीँ रुकने का कह कर मैं प्रिंसिपल सर क ऑफिस गया मगर वो वहां भी नहीं थे और न hi प्रिंसिपल सर ए थे. उसके बाद मैं स्टाफ रूम में गया मगर वहां भी सर नहीं था हाँ कुछ और स्टाफ क लोग वहां पेपर चेक करने बैठे हुए थे . मुझे लगा कहीं वो हमारे hi ब्लॉक में न हो क्यूंकि ऑफिस तो वहां भी था . इस लिए मैं उन्हें खोजता हुआ अपने ब्लॉक वाले ऑफिस में चला गया . हमारे ब्लॉक में जो ऑफिस था वो आपको यद् हो होगा क वहां प्रोफ बसरा प्रोफ वर्मा और चन्दर्कांता मम hi बैठा करते थे . मैं जिसे hi वहां पहुंचा तो ऑफिस का दरवाज़ा बंद था . हैरानी की बात ये थी की दरवाज़ा अंदर से बंद था . मैंने दरवाज़ा खोलने की कोशिश की मगर वो नहीं खुला अभी मैं वापिस पलटने hi वाला था क मुझे कुछ आवाज़ें सुनाई दी जो अंदर से hi आ रही थी. आवाज़ सुनते hi मेरे कान खड़े हो गए . क्यूंकि ये आवाज़ें नार्मल आवाज़ें नहीं थी बल्कि ये आवाज़ें चुदाई क दौरान निकलने वाली सिसकियों की आवाज़ें थी मतलब क दरवाज़े की पीछे चुदाई का खेल चल रहा था . आवाज़ ज्यादा ऊँची तो नहीं थी पर इतना अनुमान लगाने क लिए काफी थी क अंदर हो क्या रहा है .

अमित : मन में ) यहाँ ऑफिस में ये सब कौन कर रहा है ? पता लगाना पड़ेगा .

इस बात का पता लगाने क लिए क लिए मैं ब्लॉक क पीछे से घूम कर ऑफिस की बैक साइड में आ गया . किस्मत से पिछली खिड़की थोड़ी सी खुली हुई थी. इस तरफ पीछे कोई अत जाता नहीं था शायद इसी लिए ये खिड़की पूरी तरह बंद नहीं की गयी थी. मैं बिना आवाज़ किये खिड़की क पास पहुंचा तो अंदर से आ रही आवाज़ें अब साफ़ सुनाई देने लगी .

‘ आअह्ह्ह्हह सीसीसी आअह्ह्ह उम्म्म और तेज़ करो और ज़ोर से ाःह आअह्ह्ह और तेज़ उम्म्म्म ‘

ये आवाज़ औरत की थी और ये आवाज़ जनि पहचानी थी. ये आवाज़ किसकी है ये दिमाग में आते hi मेरे कान खड़े हो गए . मैंने बड़े ध्यान से उंगली से प्रेस करते हुए खिड़की को हलके से थोड़ा खोला तो अंदर का नज़ारा देख कर मेरी बच्चें खिल गयी. अंदर हमारी कड़क सख्त गुस्सैल चंद्रकांता मम टेबल पर झुकी हुई थी . उनकी सदी का पल्लू ढलका हुआ था और ब्लाउज क बटन भी आधे से ज्यादा खुले हुए थे . जिससे उनकी नंगी चूचियां बहार लटक रही थी. चन्दर्कांता की चूचियां भी मस्त गोरी चिट्टी थी और दशहरी आम की तरह लटक रही थी. टेबल पर झुकी चन्दर्कांता को कोई पीछे से छोड़ रहा था मगर नज़र नहीं आ रहा था . चन्दर्कांता की चुदाई देख कर मेरा लैंड अकड़ने लगा था .

‘ आह्हः आअह्ह्ह कक्कक्स उम्म्म्म और ज़ोर से कीजिये वर्मा जी आअह्ह्ह्हह उम्म्म मेरा हस्बैंड तो कुछ करता hi नहीं आपका hi सहारा है ककक और ज़ोर से कीजिये ‘

चन्दर्कांता मम क मुँह प्रोफ वर्मा का नाम सुन कर मैं चौंक गया . इसका मतलब चन्दर्कांता को पीछे से छोड़ने वाला इंसान प्रोफ वर्मा थे .

‘ हहहहहह मैडम कितनी मस्त हो अआप इतना मज़ा तो मेरी बीवी ने भी कभी नहीं दिया जितना आप देती हो ‘

तभी चन्दर्कांता थोड़ा नीचे झुकी तो मुझे प्रोफ वर्मा नज़र आये जिन्होंने ऊपर से तो कपडे पहने हुए थे मगर नीचे से शायद पेण्ट पाऊँ में गिरायी हुई थी.

ये सब देख कर मेरे दिमाग की बत्ती जाली और मैंने जल्दी से अपना मोबाइल निकल कर वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी.

अमित : मन में ) बहुत तंग किया है तूने , अब बताऊंगा तुझे .

‘ आअह्ह्ह उनममम वर्मा जी मज़े तो आप खूब लेते हो पर मेरा क्या ,,, कितने कितने दिन मुझे तड़पना पड़ता है कक्कक्स न मेरा हस्बैंड कुछ करता है न आप आते हो ‘

‘ क्या करूँ मैडम वो सारा बसरा पीछे पड़ा रहता है , अगर उसे पता चल गया तो वो भी आपके ऊपर चढ़ जायेगा . ‘

‘ उस भोसड़ी वाले कुछ नहीं होगा , एक बार मैंने हाथ लगाया था तो पेण्ट गीली कर दी थी उसने आआअह्ह्ह्हह ऐसे hi आअह्ह्ह्ह ‘

अमित : ये साली तो पक्की चुड़क्कड़ है

‘ क्या कहा ? आपने उस हरामी बसरा का पकड़ा था ?? बहुत कामिनी है तू साली हहहह हहहह ये ले हहहह ‘

‘ हाँ ऐसे hi ऐसे hi आअह्ह्ह्ह बहुत लाइन करता था क्या करती , सोचा उसको ठंडा करदूँ आप भी तो नहीं थे यहाँ और मेरा हस्बैंड भी बहार था तो मन मचल गया था . मगर साला वो तो हाथ लगते hi ढीला पद गया . उसके बाद मैंने कभी पास नहीं आने दिया . मगर अभी भी पीछे पड़ा है अह्ह्ह्हह कक्कक्स उनममम. ‘

‘ उसकी माँ की चुत , मैं हूँ न तेरी गर्मी ठंडी करने क लिए ‘

‘ तो कीजिये न और ज़ोर से करिये कब से कह रही हूँ घर पर आइये और आप हैं की आते hi नहीं कक्कक्स ‘

‘ क्या करूँ मेरी बीवी और वो बसरा मुझे छोड़े तो आऊं , शुक्र करो आज बसरा नहीं आया इस लिए मौका मिल गया . किसी दिन घर भी आऊंगा ‘

‘ अह्ह्ह आअह्ह्ह्ह उम्म्म्म और ज़ोर से करिये क्या कर रहे हो और ज़ोर लगाओ न उम्म्म , मेरा हस्बैंड बहार गया है घर पर अकेली hi होती हूँ आ जाओ न टाइम निकल कर ‘

‘ आऊंगा रानी जल्दी आऊंगा पहले अभी तो करने दे ‘

‘ तो करो न ज़ोर से और ज़ोर से करो आज कल कमज़ोर पद गए हो क्या और ज़ोर से करो अभी मेरा हुआ नहीं है हम्म्म्म और ज़ोर से करिये मेरी छूट की आग बुझा दो ‘

‘ हाँ हाँ ये ले ये ले हहह हहहह ‘

‘ नहीं अभी नहीं अभी मेरा नहीं हुआ नहीं ऐसा मत करो , कर दिया न कबाड़ा , अभी मेरा हुआ hi नहीं और तुम फिर से , कितनी बार कहा है दवा करवाओ अपनी ‘

‘ हहहह क्या करूँ तुम्हारी आग तो दिनों दिन बढ़ती जा रही है. हहहह तुम्हारी आग ठंडी करना किसी क बस में नहीं ‘

‘ तुम भी मेरे हस्बैंड की तरह अब ढीले हो गए हो जातो पीछे , ‘

चन्दर्कांता क मुँह पर गुस्सा साफ़ नज़र आ रहा था. अभी उसका काम नहीं हुआ था और प्रोफ वर्मा का पहले hi पानी निकल गया . चन्दर्कांता वहीँ चेयर पर बैठ कर अपनी टंगे उठा कर अपनी छूट में उंगली करने लगी . प्रोफ वर्मा वहीँ दूसरी चेयर पर बैठ के अपनी हालत ठीक करने लगे. अंदर का सन अब कहं हो चूका था इस लिए मैंने भी रिकॉर्डिंग बंद की और वहां से खिसक गया . एक बात तो पता चल गयी थी क गुस्सैल नज़र आने वाली चन्दर्कांता एक no. की चुड़क्कड़ औरत थी और अपनी छूट की आग शांत करने क लिए किसी क भी नीचे आ सकती थी. अपने पति से तो वो असंतुष्ट थी और उसका वर्मा भी उसकी आग ठंडी करने में असमर्थ था . चंद्रकांता देखने में मस्त थी अगर फिगर की बात की जाये तो चुकी 38 की और कमर 36 क साथ साथ 42 की मस्त गांड थी . ऊपर से गोरा रंग , देखने में मस्त थी मगर ज़ुबान ज़हरीली थी . मगर अब उसकी दुखती नब्ज़ मेरे हाथ आ चुकी थी. अब मुझे मौका मिल गया था अपना हिसाब चुकता करने का .

कल्पना : कहाँ थे तुम ? पता है वरिंदर सर कितनी देर यहाँ खड़े होकर चले भी गए और तुम हो क उन्हें ढूंढने गए और अब आ रहे हो.

अमित : वो मैं उन्हें hi ढूंढ रहा था पर वो मिले हो नहीं .

कल्पना : गौर से देख कर ) वैसे थे कहाँ अब तक ? कुछ तो छुपा रहे हो .

मैंने कालापन की नज़रों को देखा तो मुझे एहसास हुआ क मेरा लैंड लोअर में अभी तन कर खड़ा था. अंडरवियर में होने क बावजूद साफ़ पता चल रहा था . मैं जल्दी से जवाब देता हुआ अंदर जाने लगा

अमित : वो वो मैं बस सर को hi देखने गया था . चलो जल्दी

कल्पना : कहाँ चलो ? अभी कोई नहीं है यहाँ . सर ने कहा है क सब दोपहर क बाद hi आते हैं. अब यहाँ रुकने का कोई फायदा नहीं है चलो कहीं और चलते हैं.

अमित : चलो ठीक है फिर वापिस चलते हैं .

मैं अपने लैंड को कल्पना की नज़रों से चिपटा तेज़ कदमो से आगे बढ़ गया . कल्पना को चोर नज़रों से देखा तो वो मुस्कुरा रही थी मेरी हालत देख कर. खैर हम जल्दी से पार्किंग में वापिस आये और मैंने बुलेट स्टार्ट की और हम दोनों उस पर सवार हो कर चल पड़े .

कल्पना : तो अब कहाँ चलें ? अभी तो काफी टाइम है. मूवी देखने चलें ?

अमित : नहीं इससे ाचा घर चलते हैं. वैसे भी मेरा मूड ठीक नहीं है .

कल्पना: इतनी जल्दी मूड कैसे बदल गया तुम्हारा अभी तो कुछ देर पहले ाचा भला था . ऐसा क्या हो गया इतनी देर में ?

अमित : वो ,, कुछ नहीं बस मेरा मूड नहीं है. हम कल कर लेंगे प्रैक्टिस .

कल्पना : मन में ) कुछ तो छिपा रहे हो. मगर कॉलेज में ऐसा क्या देख लिया जो इतने एक्सीटेंड हो रहे हो ? कुछ तो ज़रूर हुआ है. कोई बात नहीं बच्चू देखती हूँ कब तक न करते हो. अब तो रोज़ ऐसे hi साथ रहूंगी जब तक छुट्टियां हैं.

हम कॉलेज से सीधा घर आ गए. वैसे तो मेरा मन था क मंजू बुआ से मिल कर hi वापिस घर जाऊंगा मगर चन्दर्कांता का सन देख कर मेरे अंदर खलबली मच गयी थी. अगर कल्पना साथ न होती तो मैं कुछ न कुछ जुगाड़ कर hi लेता . पर कल्पना की वजह से वापिस घर आना hi पड़ा. हम जैसे hi घर पहुंचे तो सभी नीचे hi साथ में बैठे हुए थे . दोनों बच्चों क साथ खेलते हुए बातों की महफ़िल गरम थी. मुझे देखते hi करुणा और नैना दीदी भाग कर आ गयी.

करुणा : इतनी जल्दी आ गए , वैरी गुड अब कोई बहन नहीं चलेगा . हम अभी तैयार हो कर एते हैं और चलते हैं घूमने .

अमित : दीदी शाम को चलते हैं मेरा मूड नहीं है .

नैना : क्यों मूड नहीं है? क्या हुआ तेरे मूड को? क्या कल्पना , कुछ हुआ है क्या ?

कल्पना : नहीं तो दीदी .

नैना : तो फिर कोई बहाना नहीं चलेगा . चलो जल्दी तैयार हो जाओ चलने क लिए .

अमित : दीदी प्लीज समझो न . मेरा मूड नहीं है .

इतना कह कर मैं ऊपर अपने कमरे में चला गया . मेरी आँखों क सामने चन्दर्कांता और वर्मा की चुदाई hi चल रही थी. चन्दर्कांता का मदमस्त बदन मेरी साँसों की गर्मी बढ़ा रहा था. अब तो मन में मेरा इरादा पक्का होता जा रहा था क अपने साथ किये सलूक का बदला अब मैं उसे छोड़ कर पूरा करूँगा . मेरा हाथ अपने आप मेरे लैंड पर चला गया और मैं उसे सहलाने लगा .

‘ अह्ह्ह अह्ह्ह , ये क्या हो रहा है ? ‘

मैं अपने में hi मस्त था क आवाज़ सुन कर अपने ख्यालों से बहार आया. दरवाज़े की तरफ देखा तो दीपिका ममी हाथ में पानी का गिलास लिए कड़ी थी. उन्हें देख कर एक पल क लिए तो मैं चौंका मगर अगले hi पल मेरे होंठों पर मुस्कान आ गयी. मैं जल्दी से उनकी तरफ बढ़ा और दरवाज़ा बंद कर उनके साथ से पानी का गिलास पकड़ कर एक तरफ रखा और उन्हें अपनी बाँहों में भर कर उन्हें होंठ अपने होंठों में जकड लिए . मैं दीपिका ममी को दीवार से लगा कर उन्हें किश करने लगा और साथ hi उनके चुके दबाने लगा . मुझसे अब अपने लैंड की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी .

दीपिका : ुम्माआअह क्या कर रहे हो रुको उम्म्म्म उम्मम्मम्माह्ह्ह पागल हो गए हो क्या रुकक्क उम्मम्मम उंम्माह्ह

मैं दीपिका ममी को बोलने भी नहीं दे रहा था . मगर फिर उन्होंने ज़ोर से मुझे पीछे धकेल hi दिया . मेरे ऊपर तो भूत hi सवार हो गया था और मुझसे बस अपनी गर्मी निकालनी थी. मुझे दीपिका ममी का इस तरह मुझे धकेलना ाचा नहीं लगा . इससे पहले क मैं उनकी तरफ बढ़ता कोई दरवाज़ा पीटने लगा . दीपिका ममी ने जल्दी से दरवाज़ा खोला तो नैना दीदी करुणा दीदी दोनों सीधा अंदर आ गयी. दीपिका ममी वहीँ दरवाज़े क पास hi कड़ी थी.

करुणा : देख अब कोई ड्रामा नहीं. अगर तू नहीं गया न तो फिर हम आज hi वापिस चले जायेंगे माँ क साथ .

अमित : ाचा ठीक है चलो .

मैंने है तो करदी पर मुझे दीपिका ममी की हरकत से गुस्सा भी आ रहा था . मैंने गुस्से से एक बार उनकी तरफ देखा तो उनहोंने नज़रें झुका ली . मैंने बाथरूम में जाकर अपने मुँह पर ठन्डे पानी क छींटे मरे और फिर नैना दीदी और करुणा दीदी क साथ नीचे आ गया .

रजनी : अरे उसे चाय तो पिने दो आते hi पीछे पद गयी तुम सब .

नैना : हम कौन सा दूर जा रहे हैं माँ, और चाय हम साथ hi ले जा रहे है . और किसी चीज़ की ज़रूरत होगी तो मंगवा लेंगे मां को फ़ोन कर क. अभी हमें डिस्टर्ब मत करो .

रजनी : अभी कल hi तो गए थे न और तुम लोगों को फिर से जाना है . क्या करना क्या है वहां .

गौरी : जाने दो न दीदी , अपने ननिहाल आयी हैं मौज करने दो. कल को शादी हो जाएगी तो फिर कहाँ वक़्त मिलेगा इन्हे. जाओ बीटा जाओ तुम सब, और अमित तुम सब का ध्यान रखना . कुछ भी ज़रूरत हो तो फ़ोन कर देना .

नैना दीदी करुणा दीदी कल्पना राधा सब चलने क लिए तैयार थी मगर नेहा दीदी नहीं मन रही थी पर मेरे कहने पर वो भी मन गयी और हम सब चल पड़े गाओं खेत घूमने.

अमित : दीदी पहले कहाँ चलना है ?

नैना : कहाँ मतलब ? तुम्हे कहा था न बाघ घूमेंगे , खेत तो हमने कल hi देख लिए . और गाओं का क्या है वो तो देखा hi हुआ है .

अमित : कल मां ने बाघ नहीं दिखाए थे क्या ?

करुणा : हमने कल नहीं घूमे बाघ , बस वो आम क बगीचे में माँ और मौसी लोगों क साथ गए थे . पर मज़ा नहीं आया. आज तू हमें बाकि क बाघ भी दिखा देना और नदी किनारे भी चलेंगे .

अमित : हम्म ठीक है .

मैं आगे आगे चल रहा था और बाकि सब मेरे पीछे . हम खेतों से पेडल hi निकल कर अपने बाघ में पहुँच गए . सर्दी का सीजन था तो आजकल यहाँ कोई खास हलचल नहीं थी न hi कोई मज़दूर बस इक्का दुक्का रखवाली क लिए जो पक्के लोग रहते थे वही थे . मैंने पहले भी बताया था क नदी क पास हमारे बगीचे थे और कुछ खेत भी. हमारी गाओं में अछि खासी ज़मीन थी. आज कल कोई फल का सीजन नहीं था इस लिए यहाँ किसी क आने का कोई सवाल नहीं था .

कल्पना : एक बात तो माननी पड़ेगी दीदी ऐसा नज़ारा शहरों में मिल hi नहीं सकता .

करुणा : यही तो बात है जाने मन इसी लिए तो हम यहाँ हैं.

अमित : अब बताइये यहाँ क्या करना है? फलों का तो अभी कोई मौसम नहीं है .

नैना : तो क्या हुआ , हम बाघ घूमने ए हैं और फल ज़रूरी नहीं क पेड़ों पर hi लटकते हो .

नैना दीदी ने ये बात करते करते मेरे लैंड की तरफ देखा और एक कामुक स्माइल दी. मुझे उनके इरादों पर शक होने लगा .

करुणा : सही कहा दीदी , एक फल तो मैं भी लुंगी.

करुणा : दीदी क्यों न हम एक गेम खेले ?

कल्पना : बिलकुल दीदी , ये सही रहेगा . इतनी अछि जगह है खेलने में मज़ा आएगा . वैसे हम खेलेंगे क्या ?

करुणा : छुप्पम छुपाई, देखो यहाँ कितने घने पेड़ हैं. हम इन पेड़ों क पीछे hi छुपेंगे .

अमित : ये क्या आप बच्चों को वाली बात कर रही हो दीदी, हम क्या अब छोटे बचे हैं.

नैना : हाँ कुछ ज्यादा hi बड़ा है न . मेरा मतलब अभी इतने भी बड़े नहीं हुए तुम. हम छुपम छुपाई खेलेंगे और तुम्हे भी खेलना होगा हमारे साथ.

करुणा : चलो चलो फिर , कल्पना पहले तुम हम ढूंढो .

नेहा : ये क्या बात हुई , कल्पना हमारी मेहमान है . उसकी जगह तुम खुद क्यों नहीं ढूंढती .

कल्पना : कोई बात नहीं दीदी मैं ढूंढती हूँ. आप सब छुपा.

करुणा : तो ठीक है कल्पना तुम उस पेड़ क पीछे जा कर 20 तक गिनो. तब तक हम सब छुपते हैं.

अब मैं क्या करता खेल में तो शामिल होना hi था. कल्पना क जाते hi हम सब पेड़ों क पीछे छिपने लगे . राधा मेरे साथ छिपने क लिए मेरे पीछे पीछे आ रही थी. जैसे hi मैं एक बड़े पेड़ क पीछे छिपा तो राधा भी मेरे साथ आ कर छिप गयी . पर तभी करुणा दीदी वहां आ गयी.

करुणा : तुम यहाँ क्यों कड़ी हो राधा ? यहाँ पकड़ी जाओगी, वो देखो वहां नेहा दीदी की तरफ जाओ.

राधा मन कर रही थी पर करुणा दीदी ने ज़बरदस्ती उसे दूसरी तरफ भेज दिया और खुद मेरा हाथ पकड़ कर मुझे खींचने लगी.

अमित : क्या कर रही हो दीदी ?

करुणा : चुप चाप मेरे साथ चलो .

करुणा दीदी की बात सुन कर मैं चुप हो गया और उनके पीछे चल दिया . बाघ में हूँ क बड़ा सा पेड़ था जिसका तना इतना चौड़ा था क पीछे 3-4 लोग भी खड़े हो तो नज़र न आये . करुणा दीदी मुझे लेकर उसके पीछे चली गयी. मैंने वहां से पलट कर देखा तो हमसे कुछ दूरी पर hi नैना दीदी भी एक पेड़ क पीछे कड़ी हमें देख रही थी और स्माइल कर रही थी. करुणा दीदी को उन्होंने कोई इशारा किया और फिर करुणा दीदी ने मुझे धक्का देकर पेड़ से लगा दिया और मेरे होंठों पर टूट पड़ी . मैं उन्हें हटाने की कोशिश कर रहा था मगर वो तो जैसे कुछ सुनने को hi तैयार नहीं थी. मेरे होंठों को चूमती हुई मेरे बालों को खिंच रही थी. मैं भी उनका साथ देने लगा और एक हाथ से उनके चुके मसलते हुए दूसरे हाथ से उनकी गांड दबाने लगा . मैं तो पहले से चन्दर्कांता की वजह से गरम हुआ पड़ा था इस लिए जल्दी रंग में आ गया . हम दोनों दीवाना वॉर एक दूसरे को चूमते हुए गरम हो रहे थे . मेरा लैंड पूरी तरफ अकड़ चूका था जिसे करुणा दीदी ने हाथ नीचे ले जाकर पकड़ लिया और मसलने लगी.

करुणा : उनमममम उम्म्म ुम्माआगह कक्कक्स उम्म्म्म आआह्ह्ह जल्दी इसे बहार निकालो , आज बहुत दिनों बाद मौका मिला है

अमित : उम्म्माह्ह्ह यहाँ रिस्क है दीदी खून किसी ने देख लिया तो.

करुणा : कुछ नहीं होगा दीदी नज़र रख रही हैं. तू जल्दी इसे बहार निकल .

इससे पहले क मैं कुछ करता करुणा दीदी खुद hi नीचे बैठ गयी और मेरा लोअर अंडरवियर क साथ नीचे खिंच कर मेरा लैंड बहार निकल लिया . लैंड पहले hi अकड़ा हुआ था दीदी ने उसे एक हाथ में पकड़ा और सुपडे को बिना वक़्त गवाए अपने होंठों में जकड लिया . मेरे मुंह से मस्ती में आअह्ह्ह्ह निकल गयी. करुणा दीदी मस्ती में मेरे लैंड को पकडे अपने होंठों में लेकर चूस रही थी और अपनी ज़ुबान को सुपडे पर फेर रही थी. मैं मस्ती में ऑंखें बंद किये सर पेड़ से लगाए खड़ा था . हूँ कहाँ हैं और आसपास क्या हो रहा है इस बात की कोई खबर hi नहीं थी. पता नहीं कितनी देर तक करुणा दीदी मेरा लैंड चुस्ती रही और मेरे हाथ उनके सर पर थे क अचानक करुणा दीदी झटके से कड़ी हुई और मुझे अपना अंडरवियर लोअर ऊपर करने को कहा

करुणा : जल्दी इसे ऊपर करो कल्पना आ रही है .

मैंने भी हड़बड़ा कर अपने कपडे ठीक किये मगर लैंड का क्या , वो तो रोड की तरह खड़ा था . अभी कुछ सेकण्ड्स हुए थे क कल्पना अचानक हमारे सामने आ गयी.



कल्पना : पकड़ लिया , मुझसे छुपना आसान नहीं दीदी देखा न पकड़ लिया सबको .
 
अपडेट 237



करुणा : हाँ हाँ जानती हूँ तू बहुत तेज़ है , वैसे अब किसकी बरी है ?

नैना : और किसकी , राधा hi तो पकड़ी गयी है पहले अब वो hi ढूंढेगी .

करुणा : चलो राधा अब तुम ढूंढो तब तक हम चिपटे हैं.

राधा बेचारी भोला सा मुँह बना कर चली गयी . वो ऐसे देख रही थी करुणा दीदी को जैसे उनकी वजह से hi वो पकड़ी गयी हो. उसके जाते hi करुणा दीदी कालापन को साथ लेकर दूसरी तरफ चली गयी और नेहा दीदी फिर से कहीं चुप गयी . इतने में नैना दीदी मेरे पास आयी .

नैना : मज़ा आया न , चल अब मेरे साथ थोड़ा और मज़ा करते हैं .

नैना दीदी मेरे हाथ पकड़ कर मुझे दूसरी तरफ ले गयी. जहाँ पर बाघ क साथ hi लगते गन्ने क खेत थे . नैना दीदी मुझे गन्ने क खेत क अंदर ले जा रही थी तो मैंने एक नज़र पीछे मुद कर देखा जहाँ करुणा दीदी हमें देख कर मुस्कुरा रही थी और मुझसे नज़र मिलते hi उन्होंने कामुक तरीके से आंख मर कर इशारा किया . नैना दीदी और मैं खेत क काफी अंदर चले गए जहाँ हमें कोई देख नहीं सकता था . एक जगह जहाँ दोनों क लिए खड़े होने की अछि खासी जगह थी वहां पहुँच कर नैना दीदी रुकी और जल्दी से घुटनो पर बैठ कर मेरा लोअर अंडरवियर नीचे किया और लैंड को अपने हाथों में पकड़ कर सहलाने लगी .

नैना : कितने दिनों बाद देख रही हूँ इसे . सोचा था यहाँ छुट्टियों में रोज़ इसे प्यार करुँगी मगर यहाँ तो मौका hi नहीं मिलता . बड़ी मुश्किल से आज मौका मिला है आज मुझे जी भर क प्यार करो. उम्मम्मम्म

इतना कहते hi नैना दीदी ने मेरा लैंड अपने मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दिया . मैं तो पहले hi करुणा दीदी द्वारा चूसै से मस्त था और अब नैना दीदी और ज्यादा मज़ा दे रही थी. मेरे हाथ नैना दीदी क सर पर चले गए और मैं धीरे धीरे अपनी कमर हिला कर उनके मुँह को छोड़ने लगा . नैना दीदी जानती थी क हमारे पास टाइम काम है इस लिए वो भी जल्दी से उठी और अपनी सलवार पेंटी क साथ झटके से घुटनो तक नीचे कर मेरे आगे घोड़ी बन गयी . नैना दीदी क गोर चूतड़ मेरे सामने आ गए और मेरा मन अब सब भूल

कर चुदाई करने को होने लगा . मैं नैना दीदी क गोल मटोल गोर चूतड़ छूने से खुद को रोक न सका और उन्हें सहलाने लगा .

नैना : आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स उम्म्म्म ये सब बाद में कर लेना अभी ज्यादा टाइम नहीं है जल्दी करो .

मैंने नैना दीदी की बात मानते हुए उनके थूक से लिथड़ा अपना लैंड नैना दीदी की शवेद टाइट छूट पर टिकाया और कमर थम कर हल्का धक्का मारा. मेरा लैंड छूट की फांकों को खोलता हुआ 3 इंच तक अंदर चला गया .

नैना : कक्कक्स आआअह्ह्ह्ह ऐसे hi ऐसे hi आराम से पूरा अंदर कर दो. आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह

मैंने हलके हलके 3-4 धक्के लगा कर पूरा लैंड छूट में गहराई तक घुसा दिया . नैना दीदी की छूट चाहे मैं खोल चूका था पर ज्यादा चुदाई न होने से अभी भी टाइट थी. नैना दीदी ने मेरे ढकों से आगे झुकते हुए दोनों हाथों से गन्ने पकड़ लिए और मज़े से ऑंखें बंद किये अपनी कमर पीछे धकेलने लगी .

नैना : ाःह आअह्ह्ह आअह्ह्ह्ह ककक उम्म्म और तेज़ करो और तेज़ उम्म्म जल्दी करो टाइम काम है उम्म्म कक्कक्स .

अमित : हहहह हहहह आप दोनों किसी दिन मरवा डौगी खुद पर काबू क्यों नहीं रखती ?

नैना : मरवा hi तो रही हूँ ुह्ह्ह्ह सीसीसी आअह्ह्ह आअह्ह्ह तू इतना डरता क्यों है हम सब अछि तरह देख कर hi करती हैं. जल्दी कर न कक्कक्स और तेज़ कर इससे पहले कोई इधर आये . आअह्ह्ह आअह्ह्ह आअह्ह्ह

मैंने अपनी स्पीड बढ़ाते हुए ताबड़तोड़ धक्के मरने शुरू कर दिए और देखते देखते 5 मिनट्स में hi दीदी का जिस्म अकड़ गया और उनकी टंगे कम्पनी लगी. उनकी छूट से भर भरा कर पानी निकलने लगा तो उनका खड़ा रहना मुश्किल हो गया और वो एक डैम से घुटनो पर गिर गयी. अभी तो मेरा टाइम बहुत दूर था . इस लिए मैं भी दीदी क पीछे घुटनो पर हो गया और उनको भी घुटनो पर चौपाया बनाने लगा तो वो मन करने लगी .

नैना : हहहह हहह क्या कर रहा है सांस तो लेने दे

अमित : आप का तो हो गया अब मेरा क्या ?

नैना : रुक तो ज़रा , हमें ज्यादा देर हो गयी तो किसी को शक हो जायेगा . मुझे जाने दे

अमित : ये क्या दीदी अभी मेरा हुआ नहीं और आप ऐसे कर रही हैं

नैना : तू रुक तो, मैं जाकर करुणा को भेजती हूँ वो इंतज़ार कर रही होगी .

नैना दीदी जल्दी से उठी और अपनी सलवार ऊपर करते हुए अपने कपडे ठीक किये और मेरे होंठों पर किश कर क स्माइल करती हुई मुझे वहीँ रुकने का कह कर बहार निकल गयी . नैना दीदी क जाने क थोड़ी देर बाद hi करुणा दीदी भी आ गयी और आते hi उन्होंने भी अपनी सलवार पेंटी घुटनो तक नीचे कर ली.

करुणा : मऊआआअह्ह्ह जल्दी करो ज्यादा टाइम नहीं है .

करुणा दीदी ने मुझे किश किया और आगे झुक गयी. अब खड़े लैंड का दिमाग कहाँ होता है . छूट देख कर बस झंडा गाडो ये hi उसूल है लैंड का . मैंने भी वही किया और आगे बढ़ कर करुणा दीदी की चिकनी छूट पर लैंड टिकाया और कमर थम कर धक्का पेल दिया . करुणा दीदी क मुँह से हलकी चीख निकल गयी. क्यूंकि उनकी छूट नैना दीदी क मुकाबले ज्यादा टाइट थी. अभी उन्हें मैंने 2-3 बार hi तो छोड़ा था वो भी इतना खुल क नहीं इस लिए लैंड छूट में फास फास कर जा रहा था .

करुणा : आअह्ह्ह्ह ककक आराम से आअह्ह्ह्ह धीरे करो ककक .

मैंने हलके हलके धक्के मर कर पूरा लैंड अंदर किया और धक्के मरने शुरू कर दिए . धीरे धीरे छूट में चिकनाई आ गयी और लैंड आसानी से अंदर बहार होने लगा . बस फिर मैं भी पूरी ले में आ गया और धक्कों की स्पीड तेज़ कर दी. करुणा दीदी भी अब मुझे और तेज़ करने को कहने लगी. गन्ने क खेत में अब करुणा दीदी की सिसकियों का संगीत बज रहा था . मैं जनता था नैना दीदी की तरह करुणा दीदी भी अपना काम होते hi भागने कोशिश करेंगी इस लिए मैंने अपनी स्पीड और तेज़ कर दी ताकि अपना काम जल्दी निपटा सकूँ .

करुणा : आअह्ह्ह आअह्ह्ह आह्ह्ह्ह आह्हः ीी उम्म्म सीसीसी उफ्फ्फ्फ़ आअह्ह्ह्ह मैं होने वाली हूँ उम्म्म कक्कक्स हहहह मैं गयी मैं गयी रुक जाओ प्लीज रुक जाओ ीीीी आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह रुक्खककक जूऊऊओ माआआ आआअह्हह्ह्ह्ह

करुणा दीदी की छूट ने पानी छोड़ दिया था और वो भी नैना दीदी की तरह मुझे छोड़ने को कहने लगी पर अब मेरा रुकना मुश्किल था . अगर मैं करुणा दीदी को छोड़ देता तो कलपद हो जाना था . इस लिए मैं बिना रुके धक्के पेलता गया . करुणा दीदी आगे को गिरने लगी मगर मैंने उन्हें कमर से मजबूती से पकडे रखा . वो आगे से पूरा झुक गयी और ज़मीन पर हाथ लग गए उनके मगर मैं अब अपना पानी निकलने तक रुकने वाला नहीं था. जोश में आकर मैंने करुणा दीदी की कमर पकड़े उन्हें ऊपर उठा लिया और उनके पाऊँ ज़मीन से उठ गए . अब वो अपने हाथों पर थी जो ज़मीन पर थे और उनका शरीर हवा में झूलने लगा था मेरे हाथों में .

करुणा : आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह अह्ह्ह्ह आह्हः मा छोड़ दो प्लीज आअह्ह्ह्हह माआ एआईईईई उफ्फ्फफ्फ्फ़

अमित : बस थोड़ी देर और बस थोड़ी देर मैं भी होने वाला हूँ हहहह हहहह

और कुछ hi पलों में मैंने भी जल्दी जल्दी अपना पानी निकल दिया . पानी निकलने से पहले मैंने लैंड छूट से निकल दिया था और दीदी को छोड़ दिया वो ज़मीन पर गिर गयी . सुबह से गर्मी चढ़ी हुई थी दिमाग में लैंड से पानी निकलते hi असीम शांति का अनुभव हो रहा था .

करुणा : माआ ाजहठ कमीने कहीं क ज़रा भी तरस नहीं आया मुझ पर देख क्या हल कर दिया है तूने मेरा आअह्ह्ह्ह मा . अब तो ठीक से चला भी नहीं जायेगा , जानवर हो पूरे जानवर .

अमित : सॉरी दीदी पर मैं क्या करूँ आप दोनों ने hi किया है ये सब .

करुणा : तो इसका मतलब ऐसे करोगे मेरे साथ ? अगर किसी को पता चल गया तो उईईई माँ देख क्या रहे हो उठाओ मुझे .

मैंने सहारा देकर दीदी को उठाया , उनकी टंगे कम्प रही थी. जैसे तैसे अपने कपडे ठीक करने क बाद वो चलने लगी तो उनके पाऊँ लड़खड़ा रहे थे . मैंने उन्हें सहर दिया और खेत क बहार आने तक उनको थामे रखा . जब हम बहार आने लगे तो नैना दीदी जल्दी से भाग कर हमारे पास आ गयी .

नैना : क्या हुआ करुणा तुम ठीक तो हो?

करुणा : ठीक हूँ दीदी कक्कक्स बस इस नमूने ने बुरी हालत कर दी आअह्ह्ह .

नैना : क्या ज़रूरत थी इतना ज़ोर से करने की ? अब क्या कहेंगे ? अब यहाँ खड़ा क्या है जल्दी से छुप जा कहीं और थोड़ा रुक कर आना .

मुझे तो कुछ बोलने का मौका hi नहीं दिया दीदी ने और करुणा दीदी को थम कर बाघ में पेड़ क पीछे छिप गयी . मैं थोड़ी देर वहीँ छुपा रहा और फिर बाघ में आ गया . तब तक सब एक साथ खड़े थे .

कल्पना : तुम कहाँ चले गए थे ? राधा 2 बार पारी दे चुकी है और तुम हो क पता hi नहीं कहाँ छुप गए थे जा कर?

अमित : वो मैं वो मुझे पेट में गड़बड़ हो गयी थी इस लिए पास क खेत में चला गया था .

मेरा जवाब सुन कर कल्पना को हंसी आ गयी.

कल्पना: ऐसा क्या खा लिया था जो पेट में गड़बड़ हो गयी. अचे भले तो थे अभी . और ये कार्य दीदी भी पता नहीं कहाँ गिर क आ गयी हैं देखो .

मैंने देखा तो करुणा दीदी नैना दीदी का सहर लेकर कड़ी थी. मैं समझ गया क वो एक्टिंग कर रही हैं वर्ण इतना ज्यादा तो प्रॉब्लम थी नहीं .

करुणा : अब मैं क्या करती पता hi नहीं चला गद्दे में पाऊँ फिसल गया . अब तो मुझसे खेला नहीं जायेगा . मुझे घर hi ले चलो .

नैना : हाँ एहि ठीक रहेगा , मेरा भी दिल नहीं और खेलने का , बहुत खेल लिया . मैं भी घर hi चलती हूँ.

नेहा : चलो फिर सब घर hi चलते हैं.

अभी हमें आये मुश्किल से एक डेढ़ घंटा hi हुआ था क हम वापिस चल पड़े घर को. राधा थोड़ी चुप चुप थी जैसे उसे ाचा नहीं लग रहा था .

अमित : क्या हुआ राधा तुम ऐसे चुप क्यों हो ?

राधा : कुछ नहीं , क्या मुझे गाओं दिखा डोज ? मैंने तो कभी ठीक से देखा भी नहीं .

अमित : बस इतनी सी बात ? चलो फिर आज मैं तुम्हे गाओं की सैर करवाता हूँ .

मेरी बात सुन कर राधा क चेहरे पर दिलकश मुस्कान आ गयी . हम दोनों पीछे थे और सब एक क़तर में चल रहे थे तो ये बात किसी और ने नहीं सुनी. कुछ देर में हम घर वापिस पहुँच गए . करुणा दीदी को नैना दीदी क साथ सहारा लेकर चलता देख रीता मौसी टेंशन में आ गयी.

रीता : चिंन्ता में ) क्या हुआ करुणा तुम ऐसे क्यों चल रही हो?

नैना : अरे कुछ नहीं हुआ मौसी ज़रा सी चोट है पाऊँ फिसल गया था .

रीता : कितनी बार कहा है इसे कुछ अकाल कर लिया कर. ये है क सुनती hi नहीं. हर जगह बस शरारत करनी है . बची नहीं हो तुम अब .

रजनी : अब उसे क्या डांटती रहोगी . जा जाकर गरम दूध ला हल्दी वाला. और तू ( नैना ) तू भी लगी होगी न , तू कौन सा काम है . देख क्या हल कर दिया बेचारी का

नैना : मुझे क्या कहती हो माँ सब तुम्हारे इस लादले का किया धरा है इसे कहो जो कहना है .

नैना दीदी ने नाराज़ होते हुए ये बात कही तो मेरी हवा टाइट हो गयी. मैं हैरानी से नैना दीदी को देखने लगा .

रजनी : क्यों उसे क्यों कहूं ? उसने क्या किया है ? ऐसे hi इलज़ाम मत लगाओ उस बेचारे पर .

करुणा : कुछ नहीं मौसी दीदी तो ऐसे hi कह रही है . ( धीरे से ) क्या कर रही हो दीदी . मरवाओगी क्या ?

गौरी : हे भगवन कहाँ से चोट लग गयी तुम्हे ? और तुम ( अमित ) क्या कर रहे थे वहां ? ध्यान नहीं रख सकते थे ?

नेहा : इसमें अमित की कोई गलती नहीं है ममी जी , करुणा को चोट अपनी गलती से लगी है.

इतने में दीपिका ममी भी जल्दी से किचन से निकल कर हमारे पास आ गयी . मगर मैं वहां से निकल गया अपने कमरे में .

नैना : कल्पना तुम ज़रा हेल्प करोगी हम करुणा को अपने कमरे में ले जाते हैं.

कल्पना : हाँ दीदी चलो

रजनी : अरे यहीं रहने दो न , क्या ज़रूरत है ऊपर जाने की .

करुणा : अरे मौसी थोड़ा आराम करुँगी तो ठीक हो जाउंगी आप ऐसे hi चिंता कर रहे हो.

कल्पना नैना और करुणा दीदी क साथ सीढ़ियां चढ़ कर दूसरे कमरे में चली गयी और मैं भी अपने कमरे से हो कर नीचे आ गया . असल में मैं अपने कमरे से बुलेट की चाबी लेने गया था .

अमित : चलें राधा ?

रजनी : अब तुम दोनों कहाँ जा रहे हो ?

अमित : वो क्या है न मौसी राधा को गाओं देखना है तो इसे गाओं दिखने लेकर जा रहा हूँ.

रजनी : हाँ हाँ ले जा इसे भी. ये बेचारी तो कहीं जातो hi नहीं.

गौरी : ध्यान से लेकर जाना कहीं इसे भी चोट न लगा देना वर्ण दिव्या गुस्सा हो जाएगी .

रजनी : कुछ नहीं होगा , अमित अचे से संभालता है सबको .

राधा : मौसी माँ कहाँ हैं ? मैं उनसे पूछ लेती हूँ

रजनी : मैंने कहा न तू जा , वो अभी कामिनी क पास है बच्चों को संभल रही है . मैं बता दूंगी उसे .

फिर मैंने अपनी बुलेट स्टार्ट की और राधा मेरे पीछे बैठ गयी . मेरे कंधे पर हाथ रख कर वो मेरे करीब हो कर बैठ गयी और मैंने बाइक आगे बढ़ा दी.

अमित : तो बोलो पहले कहाँ चलना चाहोगी ?

राधा : कहीं भी , जहाँ तुम्हारा दिल करे ले चलो .

राधा बात करते हुए मेरे और करीब हो गयी इतनी करीब क उसके होंठ मुझे अपने कान क पास महसूस हुए . आसमान में आज धुप नहीं बल्कि बदल थे . और वैसे भी सर्दी की वजह से मौसम ठंडा था तो मैं धीमी गति से बाइक चलता हुआ गाओं का चक्कर लगाने लगा .

अमित : वैसे तुमने पहले गाओं तो देखा hi हुआ है न ?

राधा : ुँहुँणन , पहले यहाँ आती hi कब थी, बस राखी पर hi तो आना होता था और तब भी बहार जाने का भी मौका नहीं मिलता था , न hi कभी मन हुआ. छोटी थी तो एक दो बार मां ने ज़रूर घुमाया है पर वो भी ठीक से यद् नहीं .

अमित : ये तो सही कहा तुमने , तुम आती hi नहीं थी और आती भी तो दूर दूर रहती थी .

राधा : दूर क्यों रहती थी अब तो तुम्हे पता hi है न. सच कहूं तो यहाँ से जाने क बाद मेरा भी मन नहीं लगता था . पर क्या करती

अमित : कोई बात नहीं अब तो पास hi हो , आज मैं तुम्हे अपना गाओं अचे दिखता हूँ .

मैं राधा को गाओं की गलियां बाजार चौपाल दिखता हुआ मंदिर की तरफ चल दिया.

राधा : ज़रा रुकना

अमित : क्या हुआ ?

राधा : मुझे मंदिर जाना है .

अमित : ाचा ठीक है .

मैंने बाइक रोकी और राधा को मंदिर जाने को कहा .

राधा : तुम भी साथ चलो वर्ण मैं भी नहीं जाउंगी .

अमित : मेरा आना ज़रूरी है क्या ? तुम चली जाओ .

राधा : नहीं मुझे तुम्हारे साथ hi जाना है .

राधा ने मासूम सा चेहरा बनाते हुए कहा तो मैं उसकी बात मन कर मंदिर चल पड़ा उसके साथ . राधा क चेहरे पर अलग hi ख़ुशी नज़र आ रही थी और उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा देख कर मुझे भी बहुत ाचा लग रहा था . दोपहर क वक़्त था इस लिए मंदिर में कोई था भी नहीं सिवाए मंदिर क पुजारी क. हम दोनों ने साथ में माथा टेका और बहार आ गए .

अमित : अब तो खुश हो न ?

राधा : बहुत खुश

अमित : तो अब कहाँ चलना है ?

राधा : नदी पर

अमित : नदी पर ? पर वहां क्या करेंगे ?पहले hi बता देती बाघ से उधर चले जाते

राधा : किसी ने पूछा था क्या तब ? मुझे वहां जाना है बस

अमित : चलो ठीक है .

फिर मैं राधा को बाइक पर बिठा कर नदी की तरफ चल दिया . इस वक़्त यहाँ भी कोई नहीं था .

अमित : देखा , कोई नहीं है यहाँ .

राधा : तो क्या हुआ , वैसे भी ाचा hi है वर्ण सब घूरते रहते .

राधा : चलो न वहां बैठते हैं , कितनी अछि जगह है न

राधा ने नदी किनारे लगे एक बड़े से पेड़ की छाया में बैठने क लिए उपयुक्त जगह की तरफ इशारा किया और मेरा हाथ पकडे मुझे खींचती हुई वहां ले गयी .

अमित : हम्म अब तो खुश हो न .

राधा : हम्म्म

अमित : तुम्हे भूख तो नहीं लगी ? खाने का वक़्त है और हम यहाँ आकर बैठ गए हैं .

राधा : मुझे अभी किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं है . सब कुछ भूल कर बस यहाँ बैठे रहो मेरे साथ बातें करो .

अमित : क्या बात करनी है बोलो .

राधा : एक बात पूछूं ?

अमित : हाँ हाँ पूछो

राधा : मंजू बुआ कहाँ रहती हैं ?

राधा क सवाल पर मैं चुप हो गया और उसे देखने लगा . वो भी मेरी नज़रों में देख रही थी. मैं समझ नहीं प् रहा था क उसे क्या जवाब दूँ. मगर जैसे वो सब जानती थी .

राधा : ऐसे क्या देख रहे हो ? मैं जानती हूँ तुम मंजू बुआ से मिल चुके हो . और मां जी को भी तुमने hi बताया है. वर्ण तुम इतने आराम से नहीं बैठे होते घर पर . अचे से जानती हूँ तुम्हे .

मैं तो राधा को बस एक तक देख रहा था क ये लड़की क्या है. मेरे दिल का हल बिना बात किये इसे कैसे पता चल गयी . खैर अब तो झूठ बोलने की कोई गुंजाईश hi नहीं थी.

अमित : हाँ मैं मिल चूका हूँ बुआ से और तुम भी मिल चुकी हो उनसे .

राधा : मैं ??? पर कहाँ ? ...... कहीं ,, कहीं वो मंजू मम ????

अमित : हाँ , मंजू मम hi मंजू बुआ हैं .

राधा : सच !!!! मंजू बुआ कितनी अछि हैं . पता है मैं जब भी उनसे मिलती थी वो हमेशा अपनी सी लगती थी. कितना प्यार करती हैं वो सब से . और तुम्हे भी तो कितना मानती हैं. जब उन्हें पता चला होगा तुम्हारे बारे में तो वो कितनी खुश हुई होंगी , है न ?

अमित : हाँ , वो बहुत खुश हुई थी मगर

राधा : मगर क्या ?

अमित : उनके साथ कितना कुछ गलत हुआ है ज़िन्दगी में और उनसे झूठ भी बोलै गया सब से दूर कर दिया गया . और अब देखो वो छह कर भी यहाँ नहीं आ सकती . वो सब से मिलना चाहती हैं उन्हें सबकी ज़रूरत है . मैं भी उन्हें यहाँ लाना चाहता हूँ पर ..

राधा : माँ की वजह से नहीं ला प् रहे , यही न ? माँ गुस्सा हैं इस लिए वो समझ नहीं रही . मैं उनसे बात करुँगी. वो दिल की बुरी नहीं हैं . वो ज़रूर समझेंगी. उन्हें मंजू बुआ क बारे में पता चलेगा तो वो ज़रूर मन जाएँगी बल्कि वो खुद उन्हें ले के आएंगी. दूसरे का दर्द वही समझ सकता है जो खुद वो दर्द झेल चूका हो.

राधा की इतनी गहरी बात सुन कर मुझे उस पर फख्र हो रहा था क वो कितनी समझदार है. मुझे राधा की बात सुन कर मन hi मन हौंसला मिला क दिव्या मौसी ज़रूर मन जाएगी .

अमित : थैंक यू राधा तुम बहुत अछि हो. मैं भी मौसी से बात करूँगा .

राधा : ठीक है तो आज hi कर लो , देखना वो ज़रूर मन जाएँगी . वैसे भी वो तुम्हारी बात नहीं ताल सकती. यकीन न हो तो आज़मा क देख लेना . वो तुम्हे बहुत प्यार करती हैं. शायद मुझसे भी ज्यादा .

राधा : ाचा एक बात पूछूं ?

अमित : तुम ये बार बार ऐसे क्यों पूछती हो? सीधा बात hi पूछा करो न .

राधा : ाचा ठीक है , तो फिर बताओ रीमा से किस बात पर नाराज़ हो तुम ?

राधा क सवाल पर मैंने उसकी तरफ देखा पर खामोश रहा अब उसे क्या जवाब देता

राधा : फ़ोन आया था मुझे उसका कल भी और आज भी . तुम उसका फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे ? पता है कितना बुरा फील कर रही है वो ? काम से काम ये तो बता दो क तुम किस बात से नाराज़ हो. वैसे अब तो रीमा तुम्हारी कजिन है न, उसे पता चलेगा तो कितनी खुश होगी .

अमित : मन में ) खुश होगी ? जब उसे पता चलेगा क मैं उसका कजिन हूँ तो मेरी तरह वो भी खून क आंसू रोयेगी. उसे ये बात बताने की मेरी हिम्मत नहीं है तो बात कैसे करूँ .

राधा : कहाँ खो गए ? उसे बताते क्यों नहीं क तुम उसके चाचा के बेटे हो ? उसकी साडी उड़ाई दूर हो जाएगी .

अमित : तुम खुद hi बता देना उसे .

राधा : ये क्या बात हुई? वो तुम्हारी कजिन है और तुम उसे खुद बता भी नहीं सकते ? एक मिनट ,,,,, कहीं तुम इस लिए तो उससे बात नहीं कर क वो तुम्हारे सौतेले ताऊ की बेटी है . मैंने माँ से सुना है क तुम्हारे पापा क सौतेले भाइयों में उनके साथ कितना बुरा सलूक किया था . जो सब हो चूका है उसे बदला तो नहीं जा सकता न ? और वैसे भी इसमें रीमा का तो कोई दोष नहीं फिर तुम उसे सजा क्यों दे रहे हो? शीना शिवानी और मोंटी को भी तो तुमने माफ़ कर दिया था न इतना सब होने क बाद तो फिर रीमा ने तो किया hi कुछ नहीं. प्लीज उसे ऐसे सजा मत दो. वो हमारी अछि दोस्त है. और मेरी बेस्ट फ्रेंड है , मुझसे मेरी बेस्ट फ्रेंड ऐसे मत छीनो .

अमित : ऐसा कुछ नहीं है , मैं तो बस बुआ की वजह से थोड़ा परेशां था . मैं कर लूंगा उससे बात .

राधा को परेशां होता देख कर मैंने उसे ताल दिया .

राधा : ठीक है तुम पहले बुआ वाली बात माँ से करो तब तक मैं भी रीमा को कुछ नहीं बताउंगी . पर ज्यादा टाइम मत लगाना आज hi माँ से बात कर लेना . और कल रीमा से .

अमित : ठीक है . अब चलें ?

राधा : थोड़ी देर और नहीं बैठ सकते क्या ? देखो कितनी अछि जगह है . कितने हरे भरे पेड़ हैं यहाँ , ये निर्मल बेहटा पानी ये ठंडी ठंडी हवा . ऐसा नज़ारा वहां शहर में कहाँ मिलता है .

अमित : ये नज़र यहाँ हर रोज़ मिलता है. रोज़ आकर देख लिया करो न .

राधा : रोज़ कहाँ होते हो तुम .

अमित : मैं ? मैं नहीं होता तो क्या बाकि सब तो हैं.

राधा : मैं किसी और क साथ यहाँ नहीं अति. तुम्हे ाचा नहीं लगता तो ठीक है चलो वापिस .

अमित : अरे अरे गुस्सा क्यों हो रही हो. मैंने तो बस ऐसे hi कहा था . चलो मेरे साथ तुम्हे कुछ और भी दिखता हूँ. इससे भी ाचा नज़ारा है वहां .

राधा : मुझे नहीं देखना अब .

अमित : अरे चलो तो सही , वहां कोई भी नहीं जाता . अपनी सीक्रेट जगह है वहां , चलो तुम्हे दिखता हूँ

राधा को नाराज़ होता देखा उसे मानाने क लिए मैं उसे उस तरफ ले गया जहाँ काफी वक़्त से मैं खुद भी नहीं गया था. असल में ये वही जगह थी जहाँ कभी मैं कजरी क साथ गया था या पूजा भाभी और कमलेश मां क मीणा क साथ चक्कर में .

राधा नाराज़गी का झूठा दारमा कर रही थी पर मैं उसे उसका हाथ थामे अपने साथ ले कर चल दिया जैसे कुछ देर पहले मेरा हाथ पकडे वो चल रही थी . मेरे इस तरह हाथ पकड़ के चलने से राधा बिलकुल खामोश हो गयी और मेरे साथ चलने लगी . नदी क किनारे से कुछ दूर जंगल की तरफ मैं राधा को लेकर चल दिया जहाँ एक जगह नदी का एक छोर भी था जहाँ पर पानी ठहरा हुआ सा लगता था और तीन तारीफ़ से ये जगह घने पेड़ों की छाँव में थी.

अमित : अब बताओ ये नज़ारा कैसा है ?

राधा ने जब वो नज़ारा देखा तो वो ख़ामोशी से बस एक तक देखती हुई मनो ख़ुशी से अंदर hi अंदर hi नाच रही थी. उसकी ऑंखें हैरत से बड़ी बड़ी हो गयी थी.

राधा : कितना खूबसूरत नज़ारा है , ये जगह तुम्हे कैसे मिली ? लगता है यहाँ पर तो कोई अत जाता भी नहीं . कितनी शांति हैं यहाँ और ये बरगद का पेड़ ,, कितना विशाल है . ये नदी जैसे इसी क लिए यहाँ तक आयी है . धुप तो यहाँ ज़मीन तक आती hi नहीं होगी न ?

अमित : बिलकुल नहीं , गर्मी की दोपहर में भी ये जगह ऐसे hi रहती है ठंडी और घनी छाया . ये जंगल का एक छोर है इस लिए जंगली जानवर यहाँ शाम को अक्सर एते हैं. इससे आगे उस तरफ एक झोंपड़ा भी है , मगर वहां कोई रहता नहीं.

राधा : तुम यहाँ पहले भी आते हो न ?

अमित : अत था पर अब नहीं . इस जगह से किसी की यद् जुडी है जो अब इस दुनिया में नहीं .

राधा : ी ऍम सॉरी , तुम्हारा दोस्त था ? सॉरी मेरी वजह से तुम्हे .....

अमित : it’s ok , तुम्हे सॉरी कहने की ज़रूरत नहीं . इसमें तुम्हारी क्या गलती है जो तुम ऐसे कह रही हो .

राधा : लगता है वो तुम्हारे काफी करीब था , पर तुमने कभी बताया नहीं. मैं तो बस राजू को hi जानती हूँ. उसके इलावा भी कोई तुम्हारा दोस्त था ये मैंने का सुना भी नहीं.

अमित : था एक बहुत hi प्यारा , मैं उसके लिए कुछ कर hi नहीं सका और अब यद् hi बन कर रह गया है हमेशा क लिए .

राधा : शह्ह्ह्हह्ह शांत हो जाओ बिलकुल शांत , कुछ मत बोलो , कुछ भी नहीं .

बात करते करते कजरी का चेहरा मेरी आँखों क सामने आ गया और मुझे खबर भी नहीं लगी कब मेरी ऑंखें नाम हो गयी. अचानक से राधा मेरे गले से लग गयी और मेरे दिल में उठते दर्द क उस तूफ़ान को शांत करने लगी जो कहीं डाब सा गया था . मुझे होश तब आयी जब राधा मेरे गले से लगी मुझे शांत कर रही थी .

राधा : कुछ भी मत कहो , मैं समझ सकती हूँ तुम अपने अंदर कितना दर्द छिपाये हुए हो. बहुत करीब था न वो तुम्हारे ? प्लीज शांत हो जाओ . कहते हैं जाने वाले को यद् कर क रोना नहीं चाहिए वर्ण उसकी आत्मा को दुःख होता है . बिलकुल शांत हो जाओ

कुछ देर राधा ऐसे hi मेरे गले लगी मेरी पीठ मेरे सर को सहलाती रही और मैंने भी उसे अपनी बाँहों में लिए बस चुप खड़ा रहा . जब दिल कुछ शांत हुआ तो मैं उससे अलग हुआ.

राधा : अब ठीक हो न ? चलो यहाँ बैठो मेरे साथ .

अमित : क्या कर रही हो छोडो .

राधा मेरे जीते खोलने लगी तो मैंने उसे रोका .

राधा : चुप , मुझे करने दो जो मैं कर रही हूँ.

राधा ने मेरे जुटे खोल कर उतर दिए और मुझे अपने साथ वहीँ नदी किनारे बिठा लिया और खुद भी अपनी जुटी उतर कर ठन्डे पानी में अपने पाऊँ उतर लिए और मुझे भी वैसे hi करने को कहा .

राधा : ाचा लग रहा है न ? इतनी अछि जगह पर बैठ कर ऐसे लग रहा है जैसे हम प्रकृति रूपी माँ की गॉड में बैठे हैं. जानते हो , माँ की गॉड में जब भी बचा अत है तो वो अपने प्यार और ममता से उसके सरे दुःख सब दर्द दूर कर देती है. तुम भी अपने सरे दुःख सरे दर्द भूल कर बस इसकी ममता को महसूस करो. ये जगह प्यार और ममता से भरी है . तुम्हारी यादें इस जगह से जो भी होंगी वो प्यार भरी hi होंगी इस लिए अब उन्हें यद् कर क अगर आंसू बहाओगे तो ये अपमान नहीं होगा उन यादों का ?

राधा की इतनी गहरी बातें सुन कर मैं उसे एक तक देखता रह गया . मासूम सी नज़र आने वाली राधा जिसे माँ की गुड़िया बुलाती थी बाकि सब वो इतनी समझदार भी हो सकती है .

राधा : ऐसे क्या देख रहे हो ? दिल में हमेशा अछि यादें hi रखनी चाहिए और जाने वालों को उन अचे पलों क साथ hi यद् करना चाहिए वर्ण सिवाए आंसुओं क और कुछ नहीं मिलता .

अमित : ये सब तुमने .....

राधा : माँ से सीखा है , वो आज भी मौसी को नहीं भूली हैं और न hi कभी भूल पाएंगी. उनकी दुनिया आज भी मौसी की यादों में hi है . इस लिए तुम्हे कह रही हूँ क कभी यादों म बह कर हकीकत से मत भागो . अब छोडो ये सब देखो पानी कितना ठंडा है , मेरे पाऊँ तो अभी से ठन्डे हो गए .

राधा ने मुस्कुरा कर ये कहा और अपने पाऊँ पानी से बहार निकल कर देखने लगी जो ठन्डे पानी से लाल गुलाबी नज़र आने लगे थे . राधा सच में निर्मल जल सी साफ़ पवित्र थी . भोली भली मगर समझदार. आज उसका ये अलग पहलु मुझे नज़र आया था .

राधा : कब तक चुप बैठोगे कुछ तो बोलो .

अमित : क्या बोलूं , तुम्हे देख कर तो मेरी बोलती hi बंद हो गयी है. मैं तो समझता था तुम सिर्फ किताबों में hi घुसी रहती हो मगर ज़िन्दगी की समझ शायद तुम्हे कहीं ज्यादा है .

राधा : इतनी भी नहीं है और दुनिया की तो बिलकुल भी नहीं . दर लगता है दुनिया से इसी लिए तो सिर्फ तुम पर भरोसा है मुझे. तुम साथ होते हो तो मुझे कोई परवाह नहीं होती फिर चाहे सामने मौत hi क्यों न कड़ी हो. तुम हमेशा मेरे साथ रहोगे न ?

राधा ने मेरा हाथ अपने दोनों हाथों में थम कर ये सवाल किया तो

अमित : हमेशा

राधा मेरा हाथ थामे कुछ देर मेरी आँखों में देखती रही और मेरी नज़रें भी मनो राधा की नज़रों में कैद सी हो कर रह गयी थी. हम दोनों hi खामोश थे मगर नज़रें जैसे कुछ कह रही थी. राधा क कोमल हाथों में मेरा हाथ था और प्रकृति की गॉड में बैठे हम दोनों जैसे किसी और hi दुनिया में खोये जा रहे थे . हमारे बीच की ये ख़ामोशी भांग हुई मेरे मोबाइल की रिंग टोन से . मैं आवाज़ सुन कर होश में आया और हड़बड़ा कर राधा क हाथों से अपना हाथ निकल कर मोबाइल जेब से निकल कर देखा तो घर से फ़ोन था .

अमित : hello

गौरी : कहाँ चले गए हो बीटा ? खाना भी खाने नहीं आये , दिव्या को चिंता हो रही है तुम दोनों की .

अमित : बस आ hi रहा हूँ माँ , वो राधा को बस गाओं दिखा रहा था .

गौरी : ठीक है जल्दी आ जाओ.

कॉल कट करने क बाद जब मैंने राधा को देखा तो उसके चेहरे से लगा जैसे उसे ाचा नहीं लगा मेरी जाने वाली बात सुन कर .

अमित : चले ?

राधा : और थोड़ी देर नहीं रुक सकते क्या ? कितना मज़ा आ रहा था .

अमित : मौसी टेंशन ले रही हैं . माँ ने इसी लिए फ़ोन किया था . अब चलो इससे पहले क फिर से फ़ोन आये .



राधा बेमन से उठी और हम दोनों ने अपने जुटे पहने और चल दिए वापिस उसी तरफ जहाँ से आये थे .
 
अपडेट 238



‘ क्या बात है बेटी , देख रही हूँ तू आज कल बुझी बुझी सी रहती है. आखिर बात क्या है ‘ रीमा की उदासी रुपाली से छिपी नहीं थी. हर बार वो ताल जातो थी पर आज रुपाली उसकी उदासी की वजह जानना चाहती थी. आखिर माँ जो थी , अपनी बेटी को परेशां कैसे देख सकती थी .

रीमा : कुछ नहीं माँ , वो बस दीदी की याद आ रही है.

रुपाली : ाचा ? रीना तो हर रोज़ फ़ोन पर बात करती है और तू तो उससे भी ठीक से बात नहीं कर रही आज कल . देख बेटी जब बेटियां बड़ी हो जाती हैं न तो माँ क साथ सहेली वाला रिश्ता हो जाता है. मैं जानती हूँ तू मेरी प्यारी बेटी है और कभी कुछ ऐसा नहीं कर सकती जो गलत हो. पर जो बात दिल में है उसे बता देना चाहिए . माँ क नाते न सही , सहेली समझ कर hi बता दे. तेरी चिंता का कोई न कोई हल तो निकल hi आएगा .

रीमा अपनी माँ की स्नेह भरी बातें सुन कर उसके चेहरे को देखने लगी. रुपाली ने भी महसूस कर लिया क उसकी बेटी अंदर से बहुत दुखी और उससे बात करना चाहती है पर शायद माँ बेटी क रिश्ते की वजह से शर्मा रही है .

रुपाली : ऐसे क्या देख रही है ? मैंने कहा न , सहेली समझ कर hi बता दे. तेरा मन हल्का हो जायेगा . तेरे इस मासूम से चेहरे पर ये उदासी मुझे बिलकुल भी अछि नहीं लग रही. इस उदासी की वजह तो मैं जानती हूँ पर नाम तोबतुझे hi बताना पड़ेगा न . या वो भी मैं बताऊँ ?

रीमा अपनी माँ की बात सुन कर हैरान भी हो रही थी क उसे कैसे पता वो किस लिए उदास है .

रीमा : आप क्या कह रही हैं मुझे कुछ .....

रुपाली : मैंने कहा न , सहेली समझ कर बात कर मुझसे . तू इतना दर क्यों रही है ? कौन है वो होकि वजह से तू ऐसे गुमसुम रहने लगी है ? नाम नहीं बताएगी मुझे ?

रीमा : आप किसकी बात कर रही हैं माँ ?

रुपाली : वही जिसने मेरी प्यारी बेटी का दिल चुराया है .

रीमा : नहीं ऐसी कोई बात नहीं है माँ.

रुपाली : ाचा , तो कैसी बात है ? किताबें खोल कर बैठी रहती है पर ध्यान कहीं और रहता है. कुछ कहती हूँ तो ठीक से तुझे सुनाई नहीं देता . रत को भी बेवजह जगती रहती है. हर वक़्त मोबाइल चेक करती रहती है . और अब अँधेरे में तकिया भी भिगोने लगी है. क्या मैं इतनी नासमझ हूँ क अपनी बेटी क दिल का हल भी नहीं समझूंगी . वैसे तू न भी बताये तो मुझे पता है क वो कौन है जिसकी तुझे इतनी यद् आ रही है .

रीमा : आप को कैसे ....

रुपाली : देखा , अब कैसे झट से ज़ुबान खुली. माँ हूँ तुम्हारी , मैंने तुझे पैदा किया है तूने नहीं , समझी. कॉलेज में छुट्टियां हैं इस लिए मिल नहीं प् रही और इसी वजह से तू इतना परेशां है. है न ? वैसे लड़का तो ाचा है और मुझे भी पसंद है .

रीमा : आप , आप किसकी बात कर रही हो माँ ?

रुपाली : वही तेरा हीरो , अमित . क्यों सही कहा न ?

रीमा : शरमाते हुए ) क्या माँ आप ....

रुपाली : ाचा तो वो नहीं है ? चलो कोई बात नहीं . मैं तो सोच रही थी मुझे घर बैठे इतना ाचा दामाद मिल गया . कोई बात नहीं अगर तुझे पसंद नहीं तो मैं तेरे लिए कोई और ाचा सा लड़का देख लुंगी .

रीमा : जल्दी से ) मैंने कब कहा क वो मुझे पसंद नहीं .

रीमा की हड़बड़ाहट देख रुपाली मुस्कुराने लगती है और रीमा को जब अपनी बात का एहसास होता है तो वो शर्मा कर चेहरा झुका लेती है . रुपाली रीमा की थोड़ी पर हाथ रख कर उसका चेहरा ऊपर उठायी है .

रुपाली : हम्म्म , अब बोल . अपनी माँ से छुपा रही थी. समझ तो मैं बहुत पहले hi गयी थी जब तू हर वक़्त उसके नाम की hi माला जपति रहती थी. आज कन्फर्म हो गया . चल अब सच सच बता क्या बात है जो इतनी गुमसुम हो?

रीमा : माँ वो , वो

रुपाली : हे भगवन , अभी भी इतना सोच रही हो? अब इससे ज्यादा और कैसे समझों तुझे ? मुझे भी वो पसंद है और मुझे कोई ऐतराज़ नहीं तुम दोनों क रिश्ते से तो फिर ऐसे क्यों कर रही है ?

रीमा : माँ वो बात ये है , वो 3 दिन से उसने मेरा फ़ोन नहीं उठाया . पहले कभी ऐसा नहीं हुआ .

रुपाली : बस इतनी सी बात ? बीटा हो सकता है वो कहीं बिजी हो .

रीमा : नहीं माँ , वो घर पर hi है . मैंने रद्द से भी पूछा था . वो तो मेरे मैसेज का भी कोई जवाब नहीं दे रहा . ज़रूर कोई बात हुई है माँ वर्ण वो ऐसा नहीं करता . कहीं वो मुझसे दूर तो नहीं चला गया न माँ ? मुझे यही दर सत्ता रहा है .

रीमा की आँखों में आयी नमी अपनी सीमाओं को लाँघ कर आँखों से बहार छलक आयी थी . बात करते करते वो अपने इमोशंस को संभल नहीं प् रही थी. रुपाली ने रीमा की आँखों से आंसू बहते देख उसे अपने सीने से लगा लिया .

रुपाली : रो मत बेटी , रो मत. हो सकता है वो किसी बात पर परेशां हो. तू इतनी कमज़ोर कैसे हो गयी ? बीटा रिश्तों में तो कई उतर चढ़ाव आते हैं ज़िन्दगी में . ऐसे हौंसला थोड़ी छोड़ना चाहिए . तू तो मेरी समझदार बहादुर बेटी है. तू इतनी कमज़ोर कैसे हो गयी ? उसे थोड़ा समय दो, मैं जानती हूँ उसे . वो छोड़ क जाने वालों में से नहीं है. वो अपनी ज़िम्मेदार अचे से निभाना जनता है . कितनी बार उसने हमारी मदद की है .

रीमा : मैं क्या करूँ माँ , मुझसे उसकी ये बेरुखी बर्दाश्त नहीं हो रही. मैं उसके बिना ज़िंदा नहीं रह सकती . मैं तन मन से उसे अपना सब कुछ मन चुकी हूँ माँ. प्लीज माँ आप उससे बात कीजिये वर्ण मैं .....

रुपाली : चुप्प्प्प , चुप हो जा. तू ऐसी बातें करेगी तो कैसे चलेगा ? क्या तुझे उस पर भरोसा नहीं है ? वो लाखों में एक है बेटी. सच कहूं तो ऐसा लड़का चिराग लेकर ढूंढें से भी कहीं नहीं मिलेगा. तूने कोई पुण्य किये होंगे पिछले जनम में जो वो तेरी ज़िन्दगी में आया . मैं बात करुँगी उससे , ज़रूरत पड़ी तो कान भी खींच लुंगी , मेरी बेटी को ऐसे रुलाता है . सासु माँ लगती हूँ न तो अपने दामाद क कान खींचने का भी हक़ है मुझे .

रुपाली की बात सुन कर रीमा के चेहरे पर मुस्कान आ गयी और साथ hi शर्म से वो अपनी माँ क गले से लग गयी अपना चेहरा छुपाते हुए .

रीमा : आपको शर्म नहीं आएगी उसके कान खींचते हुए ?

रुपाली : शर्म कैसी ? दामाद पर इतना हक़ तो जाता सकती हूँ न . कण पकड़ क तेरे पास ले आउंगी उसे .

रीमा : नहीं माँ आप उसे कुछ मत कहना . कहीं वो मुझसे नाराज़ हो गया तो ?

रुपाली : ओहु , कितनी फ़िक्र हो रही है अभी से, हाँ . तू चिंता मत कर मैं करुँगी बात उससे. चल अब ये अपना चेहरा ठीक कर और अब मुझे तू उदास नज़र नहीं आणि चाहिए . वर्ण मैं तेरे लिए कोई लड़का देखूंगी फिर .

रीमा : माआ , आप बहुत गन्दी हो .

रुपाली : ाचा ??? चल जल्दी से मुँह धो कर आ वर्ण अभी दामाद जी क कान पकड़ने चली जाउंगी , कह देती हूँ .

रीमा : उम्मम्मम्माआअह यू अरे थे स्वीटेस्ट माँ , ी लव यू माँ , ी लव यू , लव यू , लव यू , लव यू .

रीमा अपनी माँ को ज़ोर से चूम कर ये सब कहती भाग गयी बाथरूम में. उसकी साडी परेशानी मनो पल में hi दूर कर दी थी उसकी माँ ने. सच में , कितना प्यार होता है माँ में. अपने बच्चों की तकलीफ बिना कहे hi समझ जाती है. रीमा क जाने क बाद रुपाली खामोश बैठी अमित क बारे में सोचने लगी . अमित क साथ रुपाली खुद जिस्मानी ताल्लुकात बना चुकी थी और मेघा क साथ भी उसके सम्बन्ध से वो भलीभांति परिचित थी. रुपाली जानती थी क अमित ाचा लड़का है और मेघा क साथ उसका रिश्ता भी कैसे बना था ये उसे पता था और अब वो उससे नहीं मिलता था . रुपाली क साथ भी चाहे शुरुआत गलत हुई थी मगर बाद में अमित की अच्छाइयां उसके सामने आती गयी . अमित ने न सिर्फ उसे मोंटी क चंगुल से बचाया था बल्कि बलजीत राइ से भी सेफ कर रहा था . इसके इलावा रीना को जिस तरह बचाया और शीना को भी सही रस्ते पर लाया और कैसे उसकी ननद की ज़िन्दगी बदल दी थी . टूटे हुए रिश्ते फिर से जोड़ दिए थे . कुल मिलकर रुपाली की बदहाल ज़िन्दगी को उसने जाने अनजाने संवर दिया था . अमित की जो जगह रुपाली क दिल में बन चुकी थी वो किसी देवता से काम नहीं थी और वैसा hi उसकी बेटी क मन में भी थी. तो देवता को अपनी ज़िन्दगी की ये अनमोल भेंट देने में उसे कोई बुराई नहीं लग रही थी. मन में संकोच ज़रूर था क कैसे वो उसे दामाद की नज़र से देखेगी जबकि खुद hi वो अपनी मर्ज़ी से अब अपना जिस्म उसे सौंप चुकी थी. अपने जिस्म की ज़रूरत को पूरा करने क लिए वो अमित क पास खुद hi जा चुकी थी और अब उसे अपना दामाद बनाना . था तो ये वो मुश्किल फैसला पर अपनी बेटी की ख़ुशी क लिए उसे सब मंज़ूर था .

रीमा : क्या सोच रही हो माँ ?

रुपाली अपनी सोच में hi डूबी थी क रीमा फ्रेश हो कर वापिस भी आ गयी थी. रीमा क हिलने पर वो सोच से बहार आयी और रीमा को देख कर मुस्कुराने लगी .

रुपाली : सोच रही हूँ क ये खुश खबरि पहले तेरी बड़ी बहिन को सुना दूँ .

रीमा : क्या माँ आप भी . आपको इतनी जल्दी क्यों है ? अभी तो मैंने स्टडी करनी है और दीदी का no. मुझसे पहले है .

रुपाली : ाचा ? तुझे जल्दी नहीं है ? पर देख कर तो नहीं लग रहा . 3 दिन से बात नहीं हुई तो कैसे उखड़ी उखड़ी फिर रही है. क्या आगे इंतज़ार कर पाओगी ?

रीमा : क्यों नहीं करुँगी ? वैसे भी एक hi कॉलेज में तो हम दोनों. और उसने कहा था क स्टडी कम्पलीट कर क अपने पैरों पर खड़ा हो कर hi वो रिश्ते की बात करेगा. जब तक ज़िम्मेदारी उठाने क काबिल नहीं हो जाता तब तक हम किसी को नहीं बताएँगे .

रुपाली : तो फिर खुद को मजबूत बनाओ न , ऐसे करोगी तो कैसे चलेगा .

रीमा : क्या करूँ माँ ,, धीरे धीरे सब सीख जाउंगी. आपके जितनी हिम्मत नहीं है मुझ में .

रुपाली : ये तो तुझे करना hi पड़ेगा बेटी , मैं भी तेरे जैसी hi थी. ज़िन्दगी ने सब सीखा दिया है. भगवन करे तुझ वो सब न देखना पड़े जो मैंने देखा .

रीमा : क्या माँ , अभी मुझे समझा रही थी और अब खुद आंसू बहाने लगी . अब क्या मैं आपके दामाद को कहूं क वो आपके कान खींचे ?

रुपाली : ठहर जा तुझे मैं बताती हूँ .

रीमा : एआईई माँ छोड़ो माँ दर्द होता है एआई

रुपाली ने रीमा का कान पकड़ लिया था मुस्कुराते हुए जिससे रीमा दर्द का दिखावा करने लगी और रुपाली ने जल्दी से छोड़ भी दिया . ऐसी hi तो थी रुपाली , दिल से नरम , प्यार से भरी . और बहुत hi ज्यादा दर्द अपने सीने में दबाये जहाँ पिछले कुछ वक़्त में अमित नाम का मलहम लगा था . उसके रिश्ते हुए ज़ख्मो को कुछ रहत मिली थी और ज़िन्दगी में कुछ सुकून आया था .

रुपाली : अब करेगी अपनी माँ से मज़ाक ?

रीमा : अभी तो आपने कहा था आप मेरी सहेली हो तो क्या मज़ाक भी नहीं कर सकती ?

रुपाली : देख अब कैसे ज़ुबान चलने लगी , अभी थोड़ी देर पहले 12 बजे हुए थे चेहरे पर . चल रीमा को फ़ोन लगा , उसे भी खुश खबरि सुननी है. उसकी बहिन ने उसके लिए जीजा ढूंढ लिया है .

रीमा : माआ , अभी किसी को कुछ नहीं बताना है. और दीदी को मैं खुद बताउंगी जब वो वापिस आएँगी. ऐसे फ़ोन पर मज़ा नहीं आएगा .

उधर रीना लंदन में अपने कोर्स में बिजी थी . उसे यहाँ बाकि स्टूडेंट्स की तरह कॉलेज की पड़े नहीं करनी थी . बल्कि मेडिकल कॉलेज में डॉ क साथ रह कर hi नई टेक्नोलॉजी और नए नए तरीके सिखने क लिए भेजा गया था . जिससे की उसके हॉस्पिटल वाले लेटेस्ट टेक्नोलॉजी क साथ साथ बीमारियों क उपचार क नए तरीक इस्तेमाल कर सकें. आखिर यही तो उनका काम था . नए तरीके और मचिनेस से वर्ल्ड क्लास ट्रीटमेंट देना ताकि मोठे पैसे कमा सकें. रीना मब्ब्स डॉ थी इस लिए वो यहाँ लोगों का ट्रीटमेंट करते हुए hi सब सीख रही थी. वैसे तो उसे ये सब सीखना ज़रूरी नहीं था और न hi वो अब यहाँ आना चाहती थी . क्यूंकि पहली बार उसका दिल किसी क प्यार में धड़का था और उसी प्यार क कहने पर hi वो यहां आयी थी. वैसे तो वो सारा दिन बिजी रहती थी और शाम को भी कुछ किताबें और रिसर्च को स्टडी करती थी मगर एक हफ्ते से उसका मन अशांत था . उसने वडा लिया था अमित से क वो रोज़ फ़ोन पर बात करेगा मगर एक हफ्ता हो गया था न उसने खुद फ़ोन किया था न hi उसका फ़ोन उठाया था . और आज लंदन क खून जमा देने वाले मौसम में आज वो अपने साथ काम करने वाली 2-3 डॉ क साथ बहार आयी थी . लंदन क खुले माहौल में लड़के लड़कियों को सड़कों पर hi चुम्मा छाती करते देख उसे अमित की बहुत यद् आ रही थी. उसके साथ आयी एक डॉ को जब उसका बर्फ मिलने आया और आते hi दोनों एक दूसरे क साथ लिप लॉक कर एक दूसरे की ज़ुबान चूसने लगे तो ये देख रीना की साँसे अनियंत्रित होने लगी . वाशरूम का बहाना कर क वहां से दूर चली गयी और अमित को फ़ोन लगाया पर आज भी उसने नहीं उठाया . परेशां हो कर फिर उसने इस बारे में अपनी बहिन से hi पूछना ठीक समझा और उसे फ़ोन लगा दिया .

इधर माँ बेटी अभी बातें कर hi रही थी क रीना की कॉल आ गयी.

रीमा : देखो माँ दीदी का फ़ोन है

रुपाली : उठा जल्दी से , भगवन लम्बी उम्र करे मेरी बेटी की .

रीमा : पर वडा करो आप उनसे अमित क बारे कुछ नहीं कहोगी .

रुपाली : ठीक है बाबा , उठा तो सही . देख क्या कह रही है

रीमा : hello दीदी , कैसी हो आप ?

रीना : मैं ठीक हूँ , तू कैसी है ? और माँ कैसी है ?

रीमा : माँ भी ठीक है और मैं भी . अभी आपकी hi बात कर रहे थे .

रीना : ाचा , क्या बात कर रहे थे ?

रीमा : यही क आप में लंदन में अपने लिए कोई लड़का देखा या नहीं ? यहाँ तो आपको कोई पसंद नहीं आया .

रीना : तू न मर खायेगी मुझसे , मैं क्या यहाँ ढूंढूंगी अपने लिए लड़का ? मुझे तो अपने देश में hi अपना राजकुमार मिल गया है .

रीमा : क्या ??? सच दीदी ??? कौन है वो ? जल्दी बताइये , कौन है वो ?

रीना को एहसास हो गया क वो बातों बातों में क्या कह गयी है. वो अभी खुद इस बारे में किसी को बताना नहीं चाहती थी. क्यूंकि अभी तक तो उसने अपने दिल की बात उससे की hi नहीं थी .

रीना : मम मेरा मतलब था क मैं अपने देश में hi देखूंगी अपने लिए लड़का . जिसे रिश्तों की कदर हो . यहाँ तो पार्टनर ऐसे बदलते हैं जैसे कपडे .

रीमा : आप बात बदल रही हो दीदी , झूठ मत बोलो .

रीना : मैंने कहा न , जब कोई मिलेगा तो सब से पहले तुझे hi बताउंगी .

रीमा : ( मन में ) मैंने तो ढूंढ लिया है दीदी, आपका जीजा , जल्दी से आप वापिस आइये फिर आपको मिलवाउंगी उससे .

रीना : वैसे आजकल वो कहाँ है ?

रीमा : कौन वो दीदी ?

रीना : वही जिसने मुझसे यहाँ भेजा है और अब खुद फ़ोन भी नहीं उठा रहा .

रीमा : आप किसकी बात कर रही हो दीदी ?

रीना : वही तेरा ....., ( तेरा जीजा अमित , ज़ालिम फ़ोन पर अपनी आवाज़ तक नहीं सुना रहा . यहाँ मेरा क्या हल हो रहा है उसे पता भी नहीं .) ... तेरा दोस्त अमित.

रीमा : सिर्फ मेरा hi दोस्त है , आपका कुछ नहीं ? मुझसे पहले तो आप hi मिल चुकी हो उसे . और हाँ , मेरी भी बात नहीं हुई है उससे , शायद कहीं बिजी होगा .

रीना : तूने पता किया क्या किसी से उसके बारे में.?

रीमा : हाँ , वो आज कल गाओं में है. और उसकी कौसिन्स भी हैं सब वहां तो शायद ....

रीना : ये क्या बात हुई , मुझसे प्रॉमिस किया था क रोज़ बात करेगा और अब देखो. वापिस आ कर बताती हूँ इसे .

रीमा : दीदी आप वापिस कब आ रही हो ?

रीना : पता नहीं यार मैं तो खुद जल्दी से वापिस आना चाहती हूँ पर यहाँ ये लोग अपने सिस्टम से चलते हैं. पहले एक एक कर क डिटेल में सब समझायेंगे और फिर प्रैक्टिकल करवा कर hi वापिस भेजेंगे . कितनी भी कोशिश कर लूँ 4-5 महीने लग hi जायेंगे . कोई बात बतानी है क्या तुझे ??

रीमा : नहीं , आप पहले यहाँ आ जाओ फिर बताउंगी . लो माँ से बात करो ..

रुपाली : कैसी हो बेटी ?

रीना : ठीक हूँ माँ आप बताओ कैसी हो ?

रुपाली : बस ठीक हूँ बेटी . तुझे देखने को मन हो रहा था .

रीना : मेरा भी दिल करता है माँ पर भेजा भी तो आपने है न ज़बरदस्ती. तब तो आप मेरी सुन नहीं रही थी . ऊपर से उसे कह कर मुझे फसा दिया . वैसे वो आपसे मिलने अत है या नहीं. तब तो बड़ा कह रहा था क वो आपका ख्याल रखेगा .

रुपाली : तुम दोनों हाथ धोकर उसके पीछे hi पद गयी हो. अरे आ जायेगा , उसकी अपनी फॅमिली भी तो है . अब थोड़े दिन छुट्टियां हैं तो रहने दो न उसे चैन से अपनों क बीच. वैसे वो हलचल लेता रहता है मेरा और जब ज़रूरत होगी तो एक hi फ़ोन पर आ भी जायेगा तू उसकी चिंता मत कर. अब जल्दी से अपने लिए कोई ाचा सा लड़का देख ले . जब तक अकेले रहेगी ?

रीना : इसके बारे में हूँ आपिस आ कर बात करुँगी माँ. एक लड़का पसंद तो है पर अभी उससे कोई बात नहीं हुई.

रुपाली : खुश होते हुए ) क्याआ ,,, कौन है वो ? जल्दी बता मुझे . मैं खुद उससे बात करुँगी . कहाँ रहता है ? क्या करता है ?

रीना : अरे मेरी मदर इंडिया थोड़ा कण्ट्रोल करो अपने आप पर. मैंने कहा क मुझे पसंद है . पर उसे मैं पसंद हूँ क नहीं ये तो पता करने दो पहले .

रुपाली : तुझे कोई नापसंद कर सकता है क्या ? तू बस मुझे उसका नाम पता बता मैं खुद उससे बात करुँगी .

रीना : होल्ड होल्ड , क्या माँ आप भी ऐसे बच्चों जैसे बात कर रही हो. मैंने कहा न पहले मैं उससे खुद बात करुँगी . एक बार वो हाँ कर दे फिर आपसे भी मिलवा दूंगी .

रुपाली : पर वो है कौन काम से काम इतना तो बता दे .

रीना : बताउंगी तो आप उसके पीछे पद जाओगी. इतना सुन लो क आप उससे मिल चुकी हो और वो आपको पसंद भी आएगा . ाचा माँ अब मैं चलती हूँ. फिर बात करुँगी और उसे पहलवान को भी कहना क मैं नाराज़ हूँ उससे . Bye .

रीमा : दीदी क्या कह रही थी माँ ? कौन है वो जो दीदी को पसंद है ?

रुपाली : तेरी hi बड़ी बहिन है वो भी , कह रही थी आ कर बताएगी. चल अब जा कर देख खाना बना है क नहीं . दोनों एक जैसी hi हैं .

रीमा अपनी माँ क गाल चुम कर कमरे से बहार निकल गयी मुस्कुराती हुई . अब उस चेहरे पर पहले जैसे उदासी नहीं थी . माँ की ममता ने सब दर्दो गम काफूर कर दिए थे . और उसके पीछे रुपाली अपने मन में दोनों बेटियों क बारे में सोचती हुई खुश हो रही थी . आज उसकी बहुत बड़ी चिंता कुछ हलकी हो गयी थी अपनी बड़ी बेटी क मुँह से ये सुन कर क उसे एक लड़का पसंद है. वर्ण उसकी उम्र की सब लड़कियां शादी कर क अपने घर जा चुकी थी और ये थी की जिसे कोई पसंद hi नहीं अत था. ऊपर से डॉक्टरी को hi वो अपनी ज़िन्दगी बना चुकी थी . इतने सैलून में पहली बार उसे कोई पसंद आया था यकीनन वो लड़का भी खास hi होगा. रीना डॉ तो थी पर उसके साथ hi वो बाला की खूबसूरत थी रीमा से भी ज्यादा . इसी लिए रुपाली को दर सताता रहता था क कहीं बलजीत राइ या मोंटी उसे बर्बाद न कर दे . मगर आज एक उम्मीद उसे नज़र आयी थी. दोनों बेटियों ने अपने लिए लड़के पसंद कर लिए थे पर बेचारी को क्या पता था क वो दोनों ने जिसे पसंद किया है वो असल में एक hi है .

‘ कहाँ गए थे तुम दोनों ? ये कोई वक़्त है घर आने का ? दोपहर को खाना भी नहीं खाया . गाओं आ कर कुछ ज्यादा hi आज़ादी से घूम रही है तू. मैं कुछ कह नहीं रही तो नाजायज़ फायदा उठा रही है तू. ये बचपना कब छोड़ेही तू ? अपना नहीं तो इसका ख्याल कर लेती . पर तुझे तो बस अपनी पड़ी है . कल भी गयी थी न सबके साथ और पहले भी गयी थी फिर क्या रह गया था जो इसे खाना भी नहीं खाने दिया और बहार लेकर निकल गयी ‘

मैं और राधा घर पहुंचे hi थे क बाइक की आवाज़ सुन कर कामिनी ममी क रूम से दिव्या मौसी बहार निकली और गुस्से में राधा पर बिफर पड़ी. मैं पहली बार ऐसा देख रहा था क मुझे कुछ कहने क बजाये वो राधा को गुस्से में बोल रही थी. राधा बेचारी सर झुकाये मुजरिम की तरह कड़ी थी. अभी थोड़ी देर पहले वो कितनी खुश थी मेरे साथ और घर आते hi सब एक डैम से बदल गया .

अमित : इसमें राधा की गलती नहीं है मौसी , मैं hi इसे लेकर गया था . वो क्या है न , मैंने इसे कहा था क मैं इसे गाओं की सैर करवाऊंगा . मुझे भूख तो थी नहीं तो सोचा राधा को गाओं घुमा दूँ फिर पता नहीं टाइम कब मिले. आपको जो कहना है मुझे कह लीजिये . उल्टा मेरी वजह से आज ये भी भूखी रह गयी .

दिव्या : सब पता है मुझे तू ज्यादा पर्दा मत दाल इसकी गलती पर . जब सकते साथ दो सो बार घूम अति थी तो क्या ज़रूरत थी तुझे अकेले ऐसे लेकर जाने की? गाओं hi घूमना था तो घर में और भी लोग हैं.

दिव्या मौसी की आवाज़ सुन कर रजनी रीता मौसी क साथ माँ और दीपिका ममी भी आ गए थे . रजनी मौसी ने आ कर दिव्या मौसी को टोका .

रजनी : तू छोटी छोटी बात पर ऐसे गुस्सा क्यों करती रहती है? भूल गयी अपना टाइम ? तब तो खुद दामिनी क साथ कितनी कितनी देर घर से गायब बाघ में खेलती रहती थी . और इस बेचारी को ऐसे दन्त रही हो जैसे कोई गुनाह कर दिया हो. अमित क साथ hi थी न तो ऐसे क्यों गुस्सा कर रही है . इसके होते कैसा दर है तुझे ?

गौरी : तू भी न ऐसे hi दांत देती है इसे. ख़बरदार मेरी फूल सी बची को कुछ कहा तो. चल राधा तू मेरे साथ चल .

राधा को माँ अपने साथ ले गयी. बेचारी की आँखों में इतने में hi नमी आ गयी थी. रीता मौसी और रजनी मौसी दिव्या मौसी को समझने लगी . बाकि सब लड़कियां शायद अपने अपने कमरे में थी तो मैं भी अपने कमरे में चला गया . वैसे भी मेरा मन थोड़ा आराम करने का हो रहा था तो जाते हो सो गया .

‘ ोये सांड उठ भी जा कितना सोयेगा , उठ भी जा मां जी बुला रहे हैं तुझे . अरे उठ भी नहीं तो पानी दाल दूंगी तेरे ऊपर .’

मैं गहरी नींद में था जब मुझे झकझोर कर उठाया नैना दीदी ने . होश सँभालते हुए मैंने जब देखा तो नैना दीदी क साथ कल्पना भी कड़ी थी और दोनों हंस रही थी .

अमित : क्या हुआ दीदी

नैना : क्या हुआ का क्या मतलब ? रत होने को आ गयी और कितना सोयेगा ? चल सब खाने पर तेरा इंतज़ार कर रहे हैं .

कल्पना: अकेले अकेले घूमने निकल गए थे न तुम दोनों , कोई बात नहीं कल देखती हूँ तुम्हे. चलो अब जल्दी से नीचे .

मैं बीएड से उठा तो दोनों कमरे से चली गयी. टाइम देखा तो 8 बज रहे थे . मैं जल्दी से फ्रेश हुआ और नीचे चला गया . सब खाने की तयारी में hi लगे थे.

विजय : क्या बात है बीटा इतनी देर तक सो रहे थे वो भी शाम क वक़्त. तुम्हारी तबियत तो ठीक है न ?

अमित : मैं ठीक हूँ बाबा , वो बस आज ठोका थक गया था तो नींद आ गयी.

रजनी : अपनी बहनो को सारा दिन गाओं घूमता रहेगा तो थकेगा hi. नज़र न लगे मेरे बेटे को सबका कितना ध्यान रखता है .

रीता : सही कहा दीदी , सबका hi ध्यान रखता है ये तो.

अजय : रखेगा क्यों नहीं , भाभी ने इतने लाड प्यार से जो इसे पला है . वैसे भी गया तो हमारी दामिनी पर hi है . जैसी वो थी वैसा hi ये है .

अजय मां की बात सुन कर दिव्या मौसी ख़ामोशी से चेहरा छिपाये किचन में चली गयी पर मैंने उनकी आँखों में नमी देख ली थी. माँ की ज़िकर होते hi हर बार दिव्या मौसी का दर्द छलक पड़ता था .

गौरी : अब बस करो सब , चुपचाप खाना खाओ . सब मिल कर मेरे बेटे को नज़र लगा डोज आज hi?

नैना : इसे किसी की नज़र नहीं लग सकती ममी जी

गौरी : क्यों नहीं लग सकती ?

करुणा : इस लिए ममी जी क नज़र इंसानो को लगती और ये तो सांड है जंगली सांड .

करुणा दीदी की बात सुन कर सब को हंसी आ गयी पर ये बात उन्होंने मुझे देख कर इस तरह कही थी क जैसे खेत वाली चुदाई पर नाराज़गी दिखा रही हो .

रीता : ठहर जा तुझे मैं बताती हूँ. बहुत ज़ुबान चलने लग गयी है तेरी .

करुणा : आईई मां जी

विजय : अरे अरे , बची है , क्यों मर रही है उसे .

रीता : बची है ? इतनी उम्र में तो यहाँ बच्चों वाली हो जाती थी सब . और आपको बची लग रही है. इतनी बड़ी हो गयी है पर दिमाग अभी भी स्कूल में hi है.

रजनी : तू चुप कर कुछ मत कह उसे. यही तो हसने खेलने क दिन हैं. शादी क बाद तो मन मर्यादा hi देखने में उम्र निकल जाएगी .

रीता : इसे देख कर तो मुझे लगता है ये ज़रूर मुझे अपने ससुराल वालों क सामने शर्मिंदा करवाएगी . यही कहेंगे न क माँ ने कुछ सिखाया hi नहीं .

रजनी : कुछ नहीं होगा ऐसा वैसा . देख लेना इसी बेटी पर बाद में तुझे गर्व होगा. मैं जानती हूँ इसे अछि तरह.

नैना : वह वह , कभी मेरी तो तारीफ नहीं की माँ आपने ?

रजनी : तू चुप बैठ , सारा दिन उछाल कूद . कभी कोई काम भी किया है घर का .

रजनी मौसी ने जब नैना दीदी क लिए ऐसा कहा तो उनके जवाब पर सबको हंसी आ गयी. अभी तो वो करुणा दीदी की साइड ले रही थी और अब खुद नैना दीदी को बोलने लगी. दीपिका ममी क साथ दिव्या मौसी सबको खाना परोस रही थी . हंसी मज़ाक करते करते सब ने खाना खा लिया. खाना खाने क बाद बाबा में मुझे अकेले में बात कर क मंजू बुआ क बारे में पूछा तो मैंने उन्हें कह दिया क मैं दिव्या मौसी से बात करता हूँ अगर वो मन गयी तो कल hi हम बुआ क पास चलेंगे.

मैं अपने कमरे में लेता सोच रहा था क आखिर दिव्या को किस तरह समझों. अगर मैंने मंजू बुआ का नाम भी लिया तो वो बात नहीं सुनेंगी . मैं अपनी सोच में hi गम था क कमरे का दरवाज़ा खुला और दिव्या मौसी दूध का गिलास हाथ में लिए अंदर आ गयी .

अमित : अरे मौसी आप ? आपको क्या ज़रूरत थी इसे लेन की. दीपिका ममी ले आती .

दिव्या : क्यों मैं नहीं ला सकती ?

अमित : नहीं नहीं मैंने कब ऐसा कहा .

दिव्या : ले पहले दूध पि ले . दीपिका hi ला रही थी पर मैंने उससे ले लिया . सोचा कुछ देर अपने बेटे क पास बैठ कर बातें कर लूँ .

अमित : मुझे भी आपसे ढेर साडी बातें करनी है मौसी . क्या आप आज रत मेरे साथ सो सकती हैं.

दिव्या : क्यों नहीं सो सकती ? मुझे कोई मन है क्या यहाँ सोना ? ठीक है मैं आज यहीं तेरे साथ hi सो जाउंगी. तू दूध ख़तम कर मैं कपडे बदल क आती हूँ .

दिव्या मौसी इतना कह कर कमरे से निकल गयी और मैं दूध पिने लगा . दूध ख़तम कर क मैंने भी अपने कपडे बदल लिए और कुछ hi देर में मौसी भी आ गयी . आते hi मौसी ने दरवाज़ा बंद किया और जैसे hi मेरी तरफ मुड़ी तो एक बार मैं उन्हें देखता hi रह गया . क्यूंकि आज मौसी सदी की वजह मैक्सी पहन कर आयी थी. फुल लेंथ मैक्सी जो उनके पाऊँ तक थी . वैसे तो उनका पूरा जिस्म कपडे में ढाका हुआ था पर पता नहीं क्यों उन्हें इस परिधान में देख कर मेरे अंदर अलग hi फीलिंग आने लगी थी . मौसी ने भी मेरी नज़र को ताड़ लिया था. वो अपने बल संवारती हुई चल कर बीएड पर आ बैठी और कम्बल में घुस कर बीएड से तक लगा कर बैठ गयी .

दिव्या : अब क्या वहीँ खड़ा देखता रहेगा ? चला अजा यहाँ कम्बल में. बैठ कर बातें करते हैं.

दिव्या मौसी ने जिस तरह मुझे ये बात कही एक बार तो मुझे लगा क कैसे मेरा ऐसे देखना उन्हें ाचा नहीं लगा होगा पर जब मैंने उनका मुस्कुराता चेहरा देखा तो दिल को सुकून आया . मैं भी उनके साथ कम्बल में घुस कर बीएड से तक लगा कर बैठ गया .

दिव्या : हम्म , तो अब बोलो क्या बात करनी थी ?

अमित : वो बुआ , वो बात ऐसी है क मैं थोड़ा परेशां हूँ . इस लिए सोचा आपसे बात करूँ . क्यूंकि आप hi मुझे अछि सलाह दे सकती हो.

दिव्या : चिंतित होते हुए ) क्या बात है ? किस बात की चिंता है तुम्हे ? कहीं तुमने कुछ किया तो नहीं है ?

अमित : अरे नहीं मौसी , मैंने कुछ नहीं किया है. ये किसी और क बारे में है.

दिव्या : किस क बारे में ? तू किसकी बात कर रहा है ?

अमित : आप जानती हैं बुआ मेरे कॉलेज में मेरी एक मैडम है . मुझे इंग्लिश पड़ती हैं. मैं उनके बारे में बात करना चाहता हूँ. शायद मैंने पहले भी आपको बताया होगा उनके बारे में .

दिव्या : हाँ राधा ने भी बताया था क तुम्हारी एक मैडम है जो तुम्हे ट्यूशन भी पादरी है घर पर .

अमित : हाँ मौसी , उन्हें क बारे में बात करनी है मुझे .

दिव्या : क्या बात करनी है ?

अमित : वो बहुत अछि हैं मौसी , सबकी मदद करती हैं. गरीब बच्चों को मुफ्त में पड़ती हैं बल्कि उनकी फीस भी खुद भर देती हैं. मुझे हमेशा से hi वो बहुत मानती थी और अपने छोटे भाई की तरह hi ट्रीट करती थी . पर जब से उनकी ज़िन्दगी क बारे में सुना है . मुझे हर वक़्त उनका hi ख्याल रहता है . बहुत बुरा है उनके साथ . काश में उनके लिए कुछ कर पता

दिव्या : बहुत बुआ मतलब ? क्या हुआ है ?

अमित : बताता हूँ मौसी सब बताता हूँ. पर आप बीच में नहीं बोलेंगी वर्ण मैं सुना नहीं पाउँगा .



दिव्या : ठीक है , मैं बीच में नहीं बोलूंगी तू बता मुझे क्या बात है .
 
अपडेट 239



अमित : बुआ , मैडम ने आज तक अपने बारे में किसी को नहीं बताया और न की कभी मुझे बताया था . ये तो उन्होंने मुझे जब अपना छोटा भाई बनाया तो मैंने उन्हें अपनी कसम देकर सब जान लिया . उनका यहाँ कोई भी नहीं है. वो बिलकुल अकेली हैं. न कोई दोस्त न कोई रिश्तेदार शायद इसी लिए उन्होंने मेरे अंदर अपना भाई ढूंढ लिया .

दिव्या : तो क्या उनका कोई नहीं है दुनिया में ?

अमित : थे मौसी , सब थे पर तक़दीर ने उनसे सब छीन लिया . बचपन में hi माँ बाप गुज़र जाने क बाद बड़े भाई ने माँ और बाप दोनों का प्यार देकर बड़े नाज़ों से पला था उन्हें . उसके बाद उनके भाई की शादी हुई और माँ क रूप में उन्हें भाभी मिली. उनकी भाभी ने भी एक माँ , एक सहेली और भाभी बन कर उनको बहुत प्यार दिया . वो अपनी भाभी से बहुत आवर करती थी . क्यूंकि वो भी उन्हें अपनी छोटी बहिन की तरह मानती थी. उनका भाई और भाभी hi उनकी दुनिया थे . उनके होते उन्होंने कभी और कुछ न देखा न सोचा . और उनके भैया भाभी भी उन पर जान छिड़कते थे . फिर उनकी खुशियों और बढ़ गयी जब उनकी भाभी ने एक बेटे को जन्म दिया . अब तो जैसे वो सारा दिन अपनी भाभी और भतीजे क साथ hi गुज़रती. भतीजे क रूप में उन्हें एक खिलौना मिल गया था मगर तकदीर को जैसे उनकी खुशियां मंज़ूर नहीं थी . एक दिन उनके भैया भाभी और भतीजा दुनिया से चल बेस. उस वक़्त वो अपने कॉलेज की तरफ से स्टडी टूर पर गयी हुई थी. और जब तक वो वापिस लौटी सब कुछ ख़तम हो चूका था . उनके सौतेले भाइयों ने उन्हें उनके भैया भाभी और भतीजे क मरने तक की खबर तक न दी थी उन्हें . अपने भैया भाभी और भतीजे की खबर सुन कर वो बेचारी बेहोश hi हो गयी . उसकी दुनिया मनो एक पल में hi ख़तम हो गयी थी . जिस भाई ने उसे भाई और बाप दोनों का प्यार दिया था उसे वो आखिरी बार देख तक न पायी . जिस भाभी ने माँ बन कर उसकी ज़िन्दगी को संवारा वो एक झलक देख न सकीय और उसका खिलौन उसका भतीजा वो मासूम सी जान वो भी उससे छीन लिया गया . वो बेचारी रो रो कर पागल hi हो गयी उसे कुछ पता तक नहीं चल रहा था क वो ज़िंदा भी है या नहीं . ये सब एक बुरे सपने की तरह लग रहा था . वो यही सोचती रही क वो सपने में है और जब वो नींद से उठेगी तो सब ठीक हो जायेगा . इस लिए वो बार बार सोने की कोशिश करती ताकि वो नींद से जग सके और किसी तरह ये बुरा सपना ख़तम हो पर ऐसा हुआ नहीं . कुछ दिन तक तो उसे कुछ भी समझ नहीं आया मगर फिर जब उसे ये एहसास हो गया क ये सब सच है तो उसने उनकी मौत क बारे में जानने की कोशिश की और अपनी भाभी क मायके क बारे में जानने की . क्यूंकि उसकी भाभी का एक बड़ा परिवार था और वो सब उसे बहुत प्यार करते थे . मगर उसकी मौत क बाद उनके से कोई भी एक बार भी उससे मिलने नहीं आया. जब उसने उन लोगों से मिलने जाने की कोशिश की तो उसके सौतेले भाइयों ने बताया क उन लोगों ने उनसे नाता तोड़ लिया है. और उसके भाई क बारे में बहुत कुछ उल्टा सीधा कहा है. जाने क्या क्या कहा उन लोगों ने मैडम से और वो बेचारी उस वक़्त हालत की मरी समझ hi नहीं पई क इसमें कितने सचाई है. उसके बाद धीरे धीरे उस बेचारी ने जैसे तैसे जीना सीख लिया . मगर तक़दीर को जैसे उस पर रेहम आया hi नहीं था . उसके सौतेले भाइयों ने उसकी शादी अपनी पहचान क एक पैसे वाले आदमी से कर दी. तक़दीर का फैसला समझ कर उन्होंने इसे भी स्वीकार कर लिया मगर उसे बाद में पता चला असल में ये कोई रिश्ता नहीं बस एक सौदा था . अपने बिज़नेस को बढ़ाने क लिए किया गया सौदा . उसके सौतेले भाइयों ने उसकी शादी कर क न सिर्फ अपने बिज़नेस क बारे में सच्चा बल्कि उसे भी घर से निकल दिया था . शादी क बाद किसी ने एक बार भी उससे बात नहीं की . पति मिला वो भी उम्र में बढ़ा और बीमार . फिर भी बेचारी इसे अपनी तक़दीर मन कर सब कुछ मंज़ूर कर क अपना धरम निभाने की कोशिश करने लगी. पर कुछ hi महीनो में उसकी मांग सुनी हो गयी. उसका पति उसे छोड़ कर भगवन को प्यारा हो गया . मायका तो पहले hi सिर्फ नाम का था . किसी ने एक बार भी नहीं कहा क वो उनके पास आ जाये . बल्कि वो तो जैसे उसे मुसीबत समझते थे जिसे वो घर वापिस किसी कीमत पर नहीं लाना चाहते थे . अपने भाई और भाभी की यादों को दिल से लगाए वो बस रोटी रहती. अभी उसके आंसू सूखे भी नहीं थे क उसके देवर ने उस पर गन्दी नज़र डाली और उसे अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश की . उस अभागी पर शायद इस बार ऊपर वाले को थोड़ी सी दया आ गयी और उसकी अस्मत बच गयी . वो दुखियारी अपने ससुराल से भाग कर अपने मायके पहुंची पर उलटा उन लोगों ने उसे वापिस ससुराल जाने को कहा. उस बेचारी क लिए तो अब सरे दरवाज़े बंद हो चुके थे . फिर वो सब छोड़ कर कहीं दूर किसी दूसरे शहर में चली गयी . जहाँ उसे जानने वाला कोई न हो. और ऐसे hi अकेले रहते रहते उसने ज़िन्दगी जीना सीख लिया. मैं नहीं जनता क आखिर तकदीर को क्या मंज़ूर था जो उस दिन मैं उनसे मिला जब कुछ बदमाश उन्हें चाकू क डैम पर लूटने की कोशिश कर रहे थे . मैंने तो बस उनकी मदद की थी पर तकदीर को कुछ और hi मंज़ूर था और कॉलेज में उनसे दोबारा मुलाकात हो गयी. वो मेरी hi टीचर बन कर मुझे कॉलेज में मिल गयी और फिर धीरे धीरे मैं उनके करीब हो गया. वो बहुत अकेली और दुखी थी जब उन्होंने मुझे भाई बनाया तो मुझे उनके जीवन की सब चीज़ों का पता चला . कोई पत्थर hi होगा जिसको रोना नहीं आएगा उनकी कहानी सुन कर .

मैंने अपनी बात ख़तम कर क जब दिव्य मौसी को देखा तो उनकी आँखों से लगातार आंसू बह रहे थे . होंठ ऐसे थरथरा रहे थे मनो वो फफक फफक कर रो पड़ेंगी अभी .

अमित : क्या हुआ मौसी ?

दिव्या : कहाँ है वो ? कहाँ है मंजू ?

दिव्या मौसी क मुँह से बुआ का नाम सुन कर मैं हैरान भी हुआ और खुश भी. मैं बुआ का नाम लेने से दर रहा था और दिव्या मौसी ने खुद hi उनका नाम ले लिया था . और जिस तरह से वो बुआ क बारे में पूछ रही थी उनको देख कर मैं समझ गया क उनकी आँखों में आये आंसू बुआ क लिए hi हैं.

दिव्या : बोलता क्यों नहीं , कहाँ है मंजू?

अमित : मु ,,, मु ,,,मुझे क्या पता होगा मौसी .

दिव्या : दूध पीती बची नहीं हूँ मैं कोई , समझे? बता कहाँ है मंजू , मुझे उससे मिलना है .

दिव्या मौसी ने रट हुए थोड़ा गुस्सा दिखा कर ये बात कही तो मन hi मन मैं खुश हुआ पर अभी भी खुद पर काबू रखा .

अमित : पर आप तो कह रही थी क ....

दिव्या : पत्थर नहीं हूँ मैं , दामिनी क साथ साथ मैंने भी उसे उठा hi प्यार दिया था हमेशा . मैं तो समझी थी क वो भी अपने भाइयों जैसी hi निकली जो कभी पलट कर एक बार भी हमसे मिलने नहीं आयी और न hi कभी हमारे माता पिता और दामिनी की मौत पर अफ़सोस करने आयी . मुझे तो उससे ऐसी उम्मीद hi नहीं थी. पर आज सच जान कर खुद पर hi गुस्सा आ रहा है क आखिर मैं भी तो उससे जा कर मिल सकती थी. मगर क्या करती , दामिनी क इस तरह चले जाने से मैं इतना टूट गयी थी क और कुछ नज़र hi नहीं आया . यहाँ तक की तुझसे भी इतने साल मैं दूर रही जबकि मेरी सबसे पहली ज़िम्मेदारी तू था . मैं अपनी कोई भी ज़िम्मेदारी निभा नहीं पई , दामिनी को मैं क्या मुँह दिखाउंगी. मंजू बेचारी दामिनी को कितना मानती थी और मुझे भी मगर मैं ???? ऐन उसको समझ hi नहीं पायी . मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था . मुझे उसके पास ले चल , ले चल मुझे उसके पास .

दिव्या मौसी की आँखों से आंसू लगातार बहते जा रहे थे . मैंने आगे बढ़ कर मौसी क आंसू पोंछने की कोशिश की तो वो रोटी हुई मेरे गाल लग गयी. मैंने भी उन्हें अपनी बाँहों में भर लिया और एक हाथ से उनका सर और दूसरे हाथ से उनकी पीठ सहलाने लगा .

दिव्या : मैं बहुत बुरी हूँ , बहुत बुरी . मैं कभी दामिनी जैसी बन hi नहीं पायी . वो हमेशा मेरे साथ थी , कभी मुझे कुछ करने की ज़रूरत hi नहीं पड़ी और उसके जाने क बाद मैं उसकी hi ज़िम्मेदारियाँ निबाह न सकीय . मैं बहुत बुरी हूँ, उसको क्या मुँह दिखाउंगी मैं ,,,,, मैं कैसे उसका सामना करुँगी ,,, हहह ,,, हहहह

अमित : किसने कहा आप बुरी हो ? आप तो सब से अछि सबसे प्यारी मौसी हो. खबरदार जो मेरी प्यारी मौसी को बुरी कहा तो. एक बात जानती हो आप ? मैंने कभी माँ को तो नहीं देखा पर आपको देख कर हमेशा ऐसा hi लगता है क मेरी माँ मेरे सामने है. जब भी मैं अपने पास अत हूँ तो मुझे एक अलग hi कशिश महसूस होती है आपके साथ . जैसे कोई अदृश्य डोर मुझे खींचती है आपकी और . बचपन से आज तक चाहे आप मुझसे बात नहीं करती थी पर फिर भी कभी मेरे दिल में आप को लेकर गुस्सा नहीं आया . एक बार भी नहीं , आप चाहे कुछ भी कहती थी पर मुझे हमेशा आपका प्यार hi नज़र अत था उसमे भी . ये मेरी माँ का आपके लिए प्यार hi होगा जो मेरे अंदर भी है . और आप ऐसे रो रो कर मुझे भी रुला देंगी. जानती हो मौसी , बुआ आपसे मिल कर सबसे ज्यादा खुश होंगी . क्यूंकि आप hi तो माँ का जीता जगता रूप हो. वो आप में माँ को hi देखेगी. रही बात सही गलत की तो न आप गलत हैं न बुआ. यहाँ सब हालत और गलतफहमी का शिकार हुए हैं. जो हुआ उसे बदला नहीं जा सकता पर मैं बस इतना चाहता हूँ क बुआ को भी इस परिवार में जगह मिले . उन्होंने बहुत दुःख देखे हैं मौसी बहुत ज्यादा. क्या आप मेरे लिए ऐसा करेंगी न ?

दिव्या मौसी मेरी बात सुन कर मुझसे अलग हुई और मेरी आँखों में देख कर बोली .

दिव्या : उसका हक़ उसे मिलेगा पर तू पहले ये बता क तूने ये बात पहले क्यों नहीं बताई ?

अमित : मुझे भी कहाँ पता था क वो बुआ हैं . ये तो उस दिन मैं अंकल क घर जब रुका था तो उनसे मिलने उनके घर चला गया था . बस उसी दिन मैंने माँ पापा की तस्वीर वहां देखि तो मुझे पता चला . जब उन्हें मैंने पाने बारे में बताया तो वो कितनी hi देर बस रोटी रही , रोटी रही .

दिव्या : अब उसे और रोना नहीं पड़ेगा . जितना रोना था रो लिया . हम सुबह होते hi उसे लेने चलेंगे .

अमित : सच मौसी ?

दिव्या : क्या झूठ बोलूंगी मैं ? अगर अभी रत न होती तो अभी चलने को कहती. चल अब सो जा जल्दी से , सुबह जल्दी उठना है .

अमित : ी लव यू मौसी आप बहुत अछि हो. यू अरे थे बेस्ट मुहाआअह

खुश होते हुए मैंने मौसी क गाल को चूम लिया . दिव्या मौसी क चेहरे पर भी ख़ुशी नज़र आने लगी . हम दोनों ऐसे hi एक दूसरे क साथ बातें करते हुए लेट गए . मैंने मौसी को मंजू बुआ क बारे में बहुत कुछ बता दिया जो उन्हें बता सकता था . जब नींद आने लगी तो मैं मौसी की बाँहों में हो सो गया .

सुबह जब मेरी आंख खुली तो मैं और मौसी एक दूसरे से चिपके हुए थे . रत मैं इतना खुश था क मौसी को बाँहों में भर क hi सो गया था और मौसी भी मेरे साथ वैसे hi चिपकी हुई थी. नींद में hi मौसी क बाल खुल कर बिखर चुके थे . और इस वक़्त उनका मासूम सा सुन्दर चेहरा बहुत hi खूबसूरत लग रहा था . मैं कुछ देर उन्हें ऐसे hi निहारता रहा . आज मौसी पर मुझे बहुत प्यार आ रहा था क्यूंकि बुआ को एक्सेप्ट कर क उन्होंने मेरे दिल को बहुत सुकून दिया था . मैंने झुक कर उनके माथे को चूम लिया . और नींद में hi मौसी कसमसा कर मेरे साथ और भी ज्यादा चिपक गयी. मैंने भी उन्हें बाँहों में कास लिया . मुझे एक अलग hi सुकून महसूस हो रहा था अपने अंदर . मेरी ऑंखें अपने आप बंद हो गयी और मेरे होंठ मौसी की गर्दन पर जा लगे . मौसी क जिस्म में हलकी सी हलचल हुई और उनका हाथ मेरी पीठ पर कास गया . मेरी एक तंग मौसी की टांगों क ऊपर चढ़ गयी. हम दोनों करवट क बल hi लेते हुए थे . मेरी दायीं तंग मौसी की बायीं जांघ पर चढ़ गयी और अगले hi पल मुझे झटका लगा . मेरा लैंड सुबह सुबह स्टैंडिंग पोजीशन में था जो मेरे इस तरह मौसी से चिपकने क कारन मौसी क शरीर से टच हो गया . मुझे तो एहसास hi नहीं था क लैंड खड़ा है पर मौसी क जिस्म से टच होते hi मुझे एहसास हो गया और मैं एक डैम से पीछे हैट गया और मौसी से दूर होने लगा तो मौसी की हाथ अभी भी मेरी पीठ पर कैसा था . मैंने मौसी का हाथ हटाया और चुपके से कम्बल से बहार निकल कर खड़ा हो गया . एक नज़र अपने लैंड की तरफ देखा तो तम्बू बना हुआ था .

अमित : बच गया , कहीं मौसी को पता चल जाता तो ..... ये भी साला पता नहीं कब कहाँ सर उठा लेता है . बच गए बीटा आज नहीं तो मौसी ले लेती.

मैंने अपनी हालत दुरुस्त की और बाथरूम में चला गया . और जब वापिस लौटा तो मौसी बीएड पर उठ कर बैठी हुई थी और बाल भी बांध चुकी थी. मुझे देखते hi उनके खूबसूरत चेहरे पर मुस्कान आ गयी. पर मुझे एक बार को मन में झटका ज़रूर लगा कहीं मौसी पहले hi तो नहीं उठ गयी थी जब मेरा .....

दिव्या : गुड मॉर्निंग, तुम तो जल्दी उठ गए . मुझे लगा था क देर से उठोगे .

अमित : गुड मॉर्निंग,, हाँ मौसी वो बस अभी उठ कर बाथरूम गया था . पर आप कब उठी ?

दिव्या : बाथरूम क दरवाज़े की आवाज़ से मेरी आंख खुली तो मैं भी उठ गयी .

मौसी का जवाब सुन कर मैंने रहत की सांस ली .

दिव्या : नींद तो अछि आयी न रत को ?

अमित : अछि क्यों नहीं आएगी , आप जो साथ थी. मुझे ऐसा लगा जैसे माँ की गॉड में सो रहा हूँ.

दिव्या : मुझे भी बहुत अछि नींद आयी . तेरे साथ होती हूँ तो लगता है दामिनी मेरे साथ hi है. चल अब जल्दी से तैयार हो जा मैं भी तैयार होती हूँ. इससे पहले क बाकि सब लोग उठ कर बैठ जाएँ , हमें जाना है .

अमित : पर इतनी सुबह कहाँ जाना है मौसी?

दिव्या : मंजू को लेने और कहाँ , इतनी जल्दी भूल गया

अमित : पर वो तो बाद ....

दिव्या : बाद में नहीं अभी , किसी को पता चलने से पहले मुझे उसे यहाँ लाना है. भैया को मैंने नाराज़ कर दिया था न . वो देखेंगे तो कितना खुश होंगे .

अमित : सब से ज्यादा तो बुआ खुश होंगी. आप जल्दी से तैयार हो जाओ मौसी मैं तो 2 मिनट्स में तैयार हो जाऊंगा .

दिव्या : ठीक है मैं भी 5 मिनट्स में तैयार हो जाउंगी .

मौसी मुस्कुराती हुई उठी और मेरे गाल चुम कर कमरे से निकल गयी. मैं फिर से बाथरूम में घुसा और जल्दी अपने ऊपर पानी दाल कर कपडे बदले और नीचे जा कर बाइक को कपडा मर कर साफ़ कर चुपचाप बहार निकल लिया . सर्दी क मौसम की वजह से अभी ठीक से दिन भी नहीं चढ़ा था और मैं घर से बाइक बहार निकल कर रेडी हो गया . थोड़ी देर में दिव्या मौसी भी शाल लपेट कर आ गयी . बल अभी भी थोड़े गीले थे जो उन्होंने अचे से शाल में कवर कर लिए . उनका चेहरा ताज़े गुलाब सा खिल रहा था . एक अलग hi ख़ुशी नज़र आ रही थी उनके चेहरे पर शायद बुआ से मिलने की ख़ुशी या कुछ और .

दिव्या : ऐसे क्या देख रहा है ? चल जल्दी कर .

अमित : हह हाँ हाँ मौसी चलिए .

मैंने जल्दी से बाइक स्टार्ट की और मौसी मेरे पीछे बैठ गयी और मेरी बगल से हाथ निकल कर मेरे पेट पर रख लिया और करीब हो कर बैठ गयी .

‘ आप दोनों कहाँ जा रहे हो सुबह सुबह ? ‘ दीपिका ममी शायद बाइक की आवाज़ सुन कर समझ गयी थी क मैं कहीं जा रहा हूँ और देखने क लिए बहार आ गयी . दीपिका ममी की बात का जवाब दिव्या मौसी ने hi दिया .

दिव्या : एक काम से जा रहे हैं दोपहर से पहले आ जायेंगे . तुम राधा को बता देना . चलो अमित .

दीपिका ममी को बिना देखे मैं भी मंजू बुआ से मिलने की ख़ुशी में फटाफट बाइक लेकर चल दिया . सर्दी का असर था और अभी अभी नहाने की वजह से शायद मौसी को ज्यादा hi ठण्ड लग रही थी इस लिए उनका हाथ कम्पनी लगा था .

अमित : मौसी आपको सर्दी लग रही है . आप मेरे करीब हो कर बैठ जाओ .

दिव्या : हम्म्म

और इसके साथ hi मौसी मेरे साथ चिपक गयी और दूसरे हाथ को भी बगल से निकल कर आगे ले आयी. पर इस सब में मुझे एक और झटका लगा. मेरी पीठ पर मौसी क दोनों संतरे पूरे दबाव क साथ आ चिपके . मौसी को ठण्ड लग रही थी और मुझे गर्मी चढ़ने लगी . मैं अपना ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा था पर लैंड महाराज थे क कुछ और सोचने hi नहीं दे रहे थे . पेण्ट में hi फिर से सर उठाने लगा था मगर जीन्स की वजह से परेशानी होने लगी .

अमित : मौसी आप कहें तो थोड़ी बाइक देर रोक दूँ ?

दिव्या : नहीं अब ठीक है .

मौसी ने मेरे कण क पास अपना मुँह कर धीरे से ये कहा तो मेरी रीढ़ की हड्डी तक सिहरन हुई क्यूंकि बोलते वक़्त मौसी की गरम सांसे मुझे अपनी गर्दन पर महसूस हुई . मैं जैसे तैसे खुद को संभालता बाइक को काम स्पीड पर चला रहा था . मौसी भी पूरी तरह मेरे साथ चिपक गयी थी. मगर एक तरफ पाऊँ कर क बैठने से उन्हें भी दिक्कत हो रही थी इस लिए वो बीच बीच में थोड़ी हिलती तो मेरी पीठ पर उनके संतरे रगड़ बनाते . मौसी क उभर अभी भी किसी जवान लड़की की तरह कैसे गए थे इस बात का मुझे अचे से एहसास हो रहा था . लैंड महाराज दिमाग पर हावी हो रहे थे और मैं बार बार खुद को मन में गलियां देता ऐसा न सोचने क लिए समझा रहा था . दिन निकलते निकलते हम शहर पहुँच गए थे . पर सड़कें अभी भी वीरान hi लग रही थी . बस दूध और अख़बार वाले hi नज़र आये थे हमें यहाँ. मैं सीधा मंजू बुआ क घर पहुंचा तो वहां दो गाड़ियां कड़ी थी . देख कर hi मैं समझ गया क ज़रूर ऋतू भी यहीं होगी . मोबाइल पर टाइम देखा तो अभी 7 भी नहीं बजे थे .

दिव्या : मंजू यहीं रहती है ?

अमित : हाँ मौसी , चलिए . वो आप को देख कर बहुत खुश होंगी .

मैंने आगे बढ़ कर बेल्ल बजायी . ख़ुशी क मरे मुझे अपने हाथ कंपते महसूस हो रहे थे. मुझे यकीन था क बुआ भी इस सरप्राइज से बहुत खुश होंगी . मौसी को देख उनके चेहरे पर कैसे एक्सप्रेशंस होंगे मैं ये देखना चाहता था इस लिए बेल्ल बजा कर मौसी को दरवाज़े क सामने खड़ा कर मैं साइड में hi गया . थोड़ी देर में hi दरवाज़े की पीछे आहत हुई तो मैं एक्सीटेंड हो कर देखने लगा . जैसे hi दरवाज़ा खुला बुआ मैक्सी पहने हाथ में पतीला लिए कड़ी थी . शायद उन्होंने समझा होगा क दूध वाला आया है . मगर सामने देख कर वो स्टेचू hi बन गयी . जैसे कोई अनहोनी चीज़ देख ली हो. उनका मुँह खुला का खुला रह गया और हाथ से पतीला नीचे गिर गया .



मंजू : bhaaabhiiiiiiiiiiiiiiiiiii
 
Back
Top