Adultery Manhoos se mahan tak - Page 30 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 217



सुबह उठ कर मैंने एक बार अचे से रेविसिओं की और फिर नाश्ते क बाद दीदी मुझे कॉलेज छोड़ गयी. आज फाइनल ईयर वालों का भी एग्जाम था इस लिए शीना शिवानी और शालू भी आयी थी. तीनो से गेट पर hi मुलाकात हो गयी . वो मेरा hi वेट कर रही थीं . एक दूसरे को विश करने क बाद हम सब अपनी अपनी क्लास में चले गए . आज फिर चेकिंग क लिए प्रोफ वरिंदर hi आये ड्यूटी पर सब्जेक्ट कोई इतना मुश्किल नहीं था इस लिए पेपर बहुत hi ाचा गया . एग्जाम क बाद बहार निकलते hi मंजू म मिल गयी .

मंजू : कैसा हुआ पेपर ?

अमित : बहुत ाचा .

मंजू : कल कहाँ थे ? मैं इंतज़ार करती रही .

अमित : सॉरी मम वो पहले एग्जाम की तयारी करता रहा और फिर सबके साथ टाइम का पता hi नहीं चला .

मंजू : कोई बात नहीं, अब बोलो कब मिलवाओगे मुझे अपनी फॅमिली से? नन्हे मुन्ने मेहमानो को देखने को मेरा भी बहुत दिल कर रहा है .

अमित : आज hi मिलवाता हूँ न मम. आज शाम को मैं आपको ले चलूँगा सब से मिलवाने . सब यहीं हैं मोहित क घर .

मंजू : ओह ाचा , तो सब मोहित क घर पर hi हैं. फिर तो और भी ाचा है. ाचा अब तुम जाओ मैं भी चलती हूँ. शाम को आने से पहले एक बार फ़ोन कर देना.

अमित : जी मम

मंजू मम स्टाफ रूम में चली गयी और मैं वापिस अपने दोस्तों क पास .

शिवानी: तो , हमसे छुप छुप क पार्टियां हो रही हैं . थिस इस नॉट फेयर. अरे भाई हम कोई ज्यादा खा लेती क्या ? ये तो तुमने हमारी इंसल्ट करदी वो बड़े वाली .

शिवानी ने मुँह बनाते हुए कहा . जबकि शालू और शीना सर झुकाये अपनी हंसी छुपाने की कोशिश कर रही थी.

अमित : ओह तो इस बात पर गुस्सा हो रही हो आप . वैसे आपने ऐसा सोचा भी कैसे क आप मेरी ख़ुशी में शरीक नहीं हो? एक्साम्स की वजह से मैंने किसी को डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा वर्ण हम सब साथ में पार्टी करते. उस दिन आप लोग नहीं थे पर आज तो हो इस लिए हम अभी यहाँ से सीधा पार्टी करने चलेंगे . मगर ये तो छोटी मोती पार्टी है . जब हम गाओं में फंक्शन करेंगे तो वहां सब को आना पड़ेगा . चलो अब चलते हैं साथ में पार्टी करने .

मेरी बात सुन कर शिवानी क चेहरे पर भी ख़ुशी आ गयी . शीना और शालू तो पहले hi खुश थी. फिर मैं कल्पना मोहित शीना शिवानी और शालू साथ में रेस्टोरेंट पर गए और पार्टी की. इस दौरान मेरे एक तरफ शीना और एक तरफ शिवानी बैठी थी. और जब हम खाने पीने में लगे थे तो मुझे अपनी दायीं जांघ पर किसी का हाथ चलता महसूस हुआ मैंने देखा तो ये हाथ शिवानी का था . मैंने उसे देखा तो वो तिरछी नज़रों से मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. मैंने एक बार उसका हाथ हटाने की कोशिश की पर वो कहाँ पीछे हटने वाली थी. ये टेबल क नीचे से हो रहा था इस लिए किसी को कुछ पता नहीं चल रहा था . इस लिए मैंने भी ज्यादा कुछ नहीं कहा. अभी शिवानी का हाथ hi मेरी जांघ पर चल रहा था क मुझे दूसरी जांघ पर भी हाथ महसूस हुआ . मैंने दूसरी तरफ देखा तो ये शीना का हाथ था . मैंने उसे देखा तो वो बाकि सब से बात कर रही थी और बिना कुछ ज़ाहिर किये अपने हाथ से मेरी जांघ सेहला रही थी . मेरा तो खाना hi हलक में रुक गया . दोनों तरफ मुझ पर हमला हो रहा था . और वो भी दोनों एक से बाद कर एक खूबसूरत बालाएं . मुझे कुछ कुछ हो रहा था पर मैंने खुद को कण्ट्रोल किया और खाने में लगा रहा . दोनों ने कोई कसार नहीं छोड़ी थी मुझे गरम करने में . शिवानी ने तो मेरे लैंड पर हाथ रख कर एक बार कास क मेरा लैंड मसल भी दिया . दोनों सहेलियां मेरे साथ मस्ती कर रही थी मगर दोनों को एक दूसरे क बारे में पता नहीं था . मेरे माथे पर पसीना आने लगा था जो शालू और कल्पना ने अछि तरफ नोट कर लिया था . मगर टेबल क नीचे क्या चल रहा था ये उन्हें पता नहीं था . तभी शिवानी मेरे पास खिसकी और मेरे धीरे से बोली

शिवानी : सिर्फ इसी से काम नहीं चलेगा , मुझे कुछ और भी चाहिए . कितने दिन हो गए एक बार भी मेरे बारे में नहीं सोचा न तुमने ? एक्साम्स क बाद एक दिन पूरा का पूरा मुझे चाहिए . अगर नहीं दिया तो देख लेना सीधा गाओं आ जाउंगी तुम्हारे घर .

मैं शिवानी की बात सुन कर चौंक गया और उसकी तरफ देखने लगा . जबकि वो स्माइल करती हुई पीछे हैट गयी और मेरे लैंड को भी मसल दिया .

शालू : कान में क्या बातें कर रही हो हमें भी तो बताओ ?

शिवानी : कुछ भी तो नहीं , मैं तो थैंक्स कह रही थी अमित को , है न अमित ?

अमित : हह हाँ हाँ

मैंने जवाब तो दे दिया पर मेरा हड़बड़ाना कल्पना बड़े गौर से देख रही थी जबकि शालू नीचे मुँह कर क है रही थी . खाना ख़तम कर क हम उठे और मैंने पेमेंट की . जब हम बहार निकले तो शीना और मोहित कार लेने चले गए शिवानी कल्पना क साथ कोई बात कर रही थी तो शालू मेरे करीब आ गयी

शालू : तो क्या कह रही थी शिवानी?

अमित : क्या ? कुछ भी तो नहीं .

शालू : ाचा ? वैसे उसका हाथ कहाँ था मुझे सब पता है . वैसे भी वो कह रही थी मुझे पता है . उसने पहले hi बता दिया था मुझे . मुझे बस इतना कहना है क अगर हो सके तो थोड़ा सा टाइम तुम मुझे भी दे देना. अगर हो सके तो , मैं सिर्फ रिक्वेस्ट hi कर सकती हूँ . मेरी ज़िन्दगी में अब तुम्हारे सिवा और कुछ भी नहीं है. और मैं हमेशा hi तुम्हारा इंतज़ार करती रहूंगी जब भी तुम्हारा दिल करे बस मुझे आवाज़ दे देना . मैं चली आउंगी .

शालू ने मेरी आँखों में देख कर पूरी संजीदगी से ये बात कही . मैं पहले तो उसकी बात से चौंका क उसे शिवानी की हरकत क बारे में सब पता था पर उसकी आखिरी बात सुन कर मेरा दिल एक डैम से पिघल सा गया . शालू क साथ जब मैं उसके घर गया था और हमने जो किया था उस वक़्त भी शालू ने अपने जज़्बात ज़ाहिर किये थे . शालू दिल की बहुत अछि थी मगर ज़िन्दगी ने उसके साथ बहुत बुरा किया था. वो सब मैं बदल तो नहीं सकता था पर दिल कहता था क उसके लिए मैं जो भी कर सकूँ मुझे करना चाहिए. अब भी जब शालू ने ये कह कर अपने ज़ज़्बात ज़ाहिर किये तो मेरे दिल में अपने आप एक उबाल सा उठता महसूस हुआ . मेरा दिल किया क अभी उसे बाँहों में भर लूँ . शालू की सादगी उसका कोमल दिल एक अलग hi जगह बना चुके थे में मेरे दिल में. मैं उसकी आँखों में देखता रहा . हम दोनों खामोश थे पर नज़रें बातें कर रही थी . शालू क अंदर मुझे अपने लिए बेपनाह मुहब्बत महसूस हो रही थी .

शिवानी: चलना नहीं है क्या ? चलो वो दोनों आ गए हैं .

हम दोनों की तन्द्रा टूटी तो देखा सामने मोहित और शीना अपनी अपनी कार ले ए थे . हम सब कार्स में बैठ गए और चल पड़े मोहित क घर की तरफ . जब हम मोहित क घर पहुंचे तो सब हॉल में hi मौजूद थे . अंकल और करिश्मा दीदी को छोड़ कर बाकि सब यहीं थे . माँ बाबा अजय मां कामिनी ममी आंटी . मैंने शीना शिवानी और शालू को सब से मिलवाया .

विजय : ाचा हुआ तुम आ गए , हम तुम्हारा hi इंतज़ार कर रहे थे .

अमित : कोई काम था क्या बाबा ?

विजय : नहीं काम तो कोई नहीं था. तू बता तेरा आज का पेपर कैसा हुआ ?

अमित : बहुत ाचा हुआ बाबा

विजय : शाबाश , अब और कितने रह गए पेपर ?

अमित : बस एक और है बाबा .

विजय : उसके बाद गाओं आ रहा है न ? पेपर क बाद छुट्टियां हो जाएँगी न ?

अमित : जी

विजय : ाचा आज हम वापिस जा रहे हैं. सुबह जाने वाले थे पर तुझसे मिले बिना जाने को तुम्हारी माँ और ममी मन नहीं रही थी . तू आ गया है और मिल भी लिया. अब हम चलते हैं .

अमित : पर इतनी जल्दी क्यों ? अभी कुछ दिन और तो रुक जाते .

विजय : नहीं बीटा , गाओं में तेरा छोटा मां अकेला है और बेचारी दीपिका भी अकेली परेशां होगी . वैसे भी डॉ साहब ने तो छुट्टी दे hi दी है . कामिनी भी अब ठीक है . तो हमने सोचा अब चलते हैं. कब तक यहाँ बैठे रहेंगे.

आंटी : ये आप बहुत गलत कर रहे हैं भैया . ये क्या आपका घर नहीं है ? पता है राघव कितने नाराज़ होंगे जब वापिस आएंगे . वो तो ज़रूरी मीटिंग ाँ पड़ी वर्ण वो जाते नहीं. वो जब वापिस आएंगे तो मैं क्या जवाब दूंगी ?

गौरी : कुछ नहीं कहेगा . मेरी बात करवा देना उससे. घर में छोटी अकेली है और आरव तो अभी छोटा सा है . उसे भी तो हमारा साथ चाहिए न ? कामिनी भी अब जल्दी अपने घर वापिस जाना चाहती है . चाहे ये घर भी अपना है पर जहाँ साडी ज़िन्दगी गुज़री है अब दिल तो वहीँ रहता है न . गाओं जा कर तयारी भी तो करनी है. फिर तुम सब को गाओं आना पड़ेगा कह देती हूँ. और तुम सब भी आना बचो .

माँ ने हक़ सब को देख कर कहा . तो सब ने हाँ में सर हिला दिया . कुछ देर और बात चित क बाद गाड़ी में सामान रखवाने क बाद माँ बाबा अजय मां कामिनी ममी बचे क साथ गाओं क लिए रवाना हो गए . शालू शिवानी शीना और कल्पना भी अपने घर क लिए निकल गए . उसके बाद मैंने भी मोहित को मुझे रीता मौसी क घर मुझे ड्राप करने को कहा तो आंटी ने मुझे लंच कर क जाने को कहा . वैसे तो भूख नहीं थी . पर फिर भी थोड़ा बहुत तो खाना hi था . इस दौरान करुणा दीदी और रीता मौसी का 3-4 बार फ़ोन आ गया था. खाने क बार मोहित मुझे रीता मौसी क घर छोड़ गया . कुछ देर वो रुका और रीता मौसी नेहा दीदी करुणा दीदी से मिल कर गया .

रीता : तू कल क्यों नहीं आया ? मैं तो सोच रही थी क सब यहीं हैं तो कल hi आ जायेगा पर तू ...

अमित : मौसी वो कल निधि दीदी ने hi रोक लिया था . कहने लगी क पेपर की तयारी कर लो वर्ण रह जायेगा .

नेहा : ठीक कहा दीदी ने , वर्ण सच में रह जाता.

रीता : तयारी यहाँ भी तो हो सकती थी न . पता है कल कितना इंतज़ार किया हमने . और ये करुणा तो ....

रीता मौसी अभी बात कर hi रही थी क करुणा दीदी गुस्से से मुझे देखती हुई उठ कर अपने कमरे में चली गयी . जब से मैं आया था तब से hi वो मुझे गुस्से से देख रही थी और बात नहीं कर रही थी .

रीता : देखा , बहुत नाराज़ है तुमसे. उसे उम्मीद थी क कल तू आएगा . रत तो तेरा इंतज़ार करती रही मगर तू नहीं आया . जा अब जा कर बात कर ले उससे वर्ण खाना नहीं खायेगी गुस्से में.

मौसी की बात सुन कर मैं वहां से उठा और करुणा दीदी क रूम में चला गया . मैं कमरे में गया तो करुणा दीदी बीएड पर बैठी थी और मुझे देख कर दूसरी तरफ करवट कर क बैठ गयी . मैं दरवाज़ा लॉक कर क दीदी क पास गया . मुझे पता था क वो कैसे मानेंगी इस लिए मैं बीएड पर उनके साथ बैठ गया.

अमित : तो मेरी गफ नाराज़ है मुझसे , इतनी क अब बात भी नहीं करेगी. कोई बात नहीं , देखता हूँ क कितनी देर नाराज़ रहती है मुझसे.

करुणा : गफ ? आ गयी यद् ? मुझसे बात मत कर मुझे तेरी कोई बात नहीं सुन्नी.

दीदी ने गुस्से से मुझे कहा और फिर चेहरा दूसरी तरफ कर लिया.

अमित : ाचा , तो बात नहीं करनी? ठीक है बात मत करो मगर मैं तो प्यार करूँगा.

इतना कह कर मैंने करुणा दीदी को को पीछे से बाँहों में भर लिया मगर वो मेरी बाँहों से निकलने की कोशिश कर रही थी . मैंने उनकी गर्दन पर होंठ रख लिए और उन्हें चूमने लगा . दीदी एक डैम से खामोश हो गयी और मज़ा लेने लगी . मैंने उनकी गर्दन चूमते हुए उनके कण की लो को चुम कर दांतो में हल्का सा दबा दिया तो उनके मुँह से सिसकी निकल गयी .

करुणा : सीईईई

मैंने अपने हाथ उनके ठोस स्तनों पर रख दिए और मसलने लगा . करुणा दीदी एक डैम से निढाल हो गयी और अपना सर पीछे को गिरते हुए मेरी गर्दन पर दाल दिया . मगर मैं नहीं रुका और लगातार उनके स्तनों को मसलता रहा. दीदी खुद को और कण्ट्रोल नहीं कर पायी और एक डैम से मेरी बाँहों में घूम गयी और मेरे होंठों को अपने होंठों में जकड कर स्मूच करने लगे . मेरे सर और पीठ पर हाथ चलते हुए वो मेरी गॉड में बैठ गयी . मेरा लैंड गरम होकर खड़ा हो गया था जो अब दीदी की गांड क नीचे था . दीदी अपनी कमर हिला हिला कर मेरे लैंड पर अपने चूतड़ मसल रही थी . हम दोनों अपने में hi खोये थे क नीचे से मौसी की आवाज़ आयी और मैंने किश तोड़ी .

अमित : नीचे मौसी बुला रही हैं .

करुणा : तो क्या हुआ , मुझे कुछ नहीं पता . अभी मुझे प्यार करो. इतने दिनों बाद आये तो ऐसे नहीं जाने दूंगी .

अमित : अब तो मैं यहीं हूँ न. मौका देख कर आपको खूब प्यार करूँगा . अगर अभी निचे नहीं गए तो वो ऊपर आ जाएँगी .

करुणा : बड़े ख़राब हो , एक तो उतने दिनों बाद आये हो ऊपर से मुझे ऐसे तड़पा कर अब छोड़ रहे हो.

अमित : थोड़ा सबर रखिये , मैं आपकी साडी तड़प मिटा दूंगा. अब आ गया हूँ न . चलिए .

मैंने उठने लगा तो दीदी ने फिर से एक बार मेरे होंठों को अपने होंठों में जकड लिया और अचे से किश करने क बाद छोड़ दिया. अपनी हालत ठीक करने क बाद दीदी ने मेरी तरफ देखा और शर्मा गयी . मैं उन्हें hi देख रहा था .

करुणा : ऐसे क्या देख रहे हो ? चलो अब

हम दोनों नीचे आ गए और मौसी नेहा दीदी क साथ hi बैठ गए . करुणा दीदी मेरी बाजु पकड़ कर बैठी थी .

रीता : बस हो गयी नाराज़गी दूर ? अभी तो बड़ा गुस्सा दिखा रही थी .

करुणा : नाराज़ तो मैं अभी भी हूँ. और इससे पूरा हिसाब भी लुंगी . हाँ गुस्सा नहीं हूँ क्यूंकि इससे गुस्सा तो मैं हो hi नहीं सकती . आप बैठी क्यों हैं ? लेकर आइये न इसके लिए कुछ.

मौसी उठ कर जाने लगी तो मैंने मन कर दिया. फिर कुछ देर हूँ बातें करते रहे. नेहा दीदी और करुणा दीदी का कल एग्जाम था इस लिए नेहा दीदी करुणा दीदी को पड़ने का कह कर अपने साथ के गयी. करुणा दीदी जाना तो नहीं चाहती थी पर मौसी और मेरे कहने पर वो चली गयी. उसके बाद मैं और रीता मौसी hi वहां रह गए .

रीता : अमित ज़रा मेरे साथ आना मेरे कमरे में , कुछ काम है .

अमित : जी मौसी

मैं रीता मौसी क साथ उनके कमरे में चल दिया . कमरे में आते hi मौसी ने दरवाज़ा बंद किया और मुझ पर झपट पड़ी. मेरे चेहरे को दोनों हाथों में पकड़ कर मौसी ने मेरे होंठ अपने होंठों में जकड लिए . मैं पहले तो चौंका पर फिर मौसी का साथ देने लगा . रीता मौसी कितनी गरम हैं मैं अचे से जनता था और इतने दिनों बाद मिल रही थी तो ऐसा होना स्वाभाविक था . मैंने मौसी का साथ देते हुए अपने हाथ उनके बड़े बड़े चूतड़ों पर रख दिए और साडी की ऊपर से उनके बड़े चूतड़ मसलने लगा . मौसी पागलों की तरह मेरे होंठ चुम रही थी . मैंने उन्हें वहीँ दीवार क साथ लगा लिया और अब अपने हाथ उनके बड़े बड़े स्तनों पर रख कर ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा .

रीता : उम्म्म्म उनमममम उम्माह्ह्ह्हह्ह कक्कक्कक्स ुण्णं कक्कक्क्स उफ्फफ्फ्फ़ आराम से कक्कक्क्स इतना क्यों तड़पते हो ?? तुझे अपनी मौसी का ज़रा भी ख्याल नहीं अत . कक्कक्क्स

अमित : ख्याल तो अत है मौसी पर आप को भी तो पता है मैं टाइम निकल नहीं पता .

रीता : उफ्फ्फफ्फ्फ़ कक्कक्कक्स आइइइइइ ककक जानती हूँ इसी लिए तो इंतज़ार कर रही थी कल से . उफ्फ्फ्फ़ उम्म्म्म अब और इंतज़ार नहीं होता . जल्दी से एक बार मुझे ठंडी कर दे . बहुत आग लगी है .

अमित : मौसी क्या कह रही हो आप . दीदी घर पर हैं .

रीता : वो पढ़ रही हैं. जल्दी से एक बार कर दे ने

मैं मौसी को रुकने को कह रहा था पर मौसी कुछ ज्यादा hi गरम थी . वो जल्दी से घुटनो पर बैठ गयी और मेरी पेण्ट खोल कर अंडरवियर क साथ झटके से खिंच कर घुटनो तक कर दी और मेरा लैंड हाथ में पकड़ कर मसलने लगी .

रीता : कक्कक्स कितना तड़पती हूँ इसके लिए ,, अब तो तेरे मौसा जी क साथ करने का बिलकुल भी मन नहीं करता . उम्मम्मम उम्म्म्म

मौसी ने जल्दी से मेरा लैंड अपने होंठों में कैद कर लिया और उसे चूसने लगी . किसी लोली पॉप की तरह वो मज़े से मेरा लैंड चूसने लगी. मैं जो अभी मौसी को रोक रहा था अब खुद hi मौसी क इशारों पर नाचने लगा. मैं अपने मुँह से निकललन वाली मज़े की सिसकारियों को रोकने की कोशिश कर रहा था . मज़े में मेरी ऑंखें बंद हो गयी और मेरे हाथ मौसी क सर पर चले गए . मेरी ाड़ियाँ अपने आप उठ गयी और मैं मज़े की वादियों में उड़ने लगा .

रीता : उम्म्म उम्म्म्म उम्मम्मम ुम्माआठ कक्कक्क्स सारूउप सारूउप सारूउप उम्मम्मम उम्म्म्म

मौसी एक हाथ से मुठ मरती हुई मज़े से मेरा लैंड अपने मुँह में अंदर बहार कर रही थी . मैं उनका सर अपने लैंड पर दबाये जा रहा था . मौसी ने मेरा लैंड मुँह से बहार निकला और जल्दी से अपने साडी पेटीकोट कमर तक उठा कर अपनी पेंटी घुटनो तक कर क बीएड पर हाथ रख कर झुक गयी.

रीता : जल्दी से इसे दाल दे अंदर अब और बर्दाश्त नहीं होता .

मेरा लैंड अकड़ कर दर्द करने वाली हालत में आ गया था . मुझसे भी अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था मैंने आगे बढ़ कर मौसी क नंगे कूल्हों को एक बार मसला और घुटने बेंड कर कर एक हाथ से अपना लैंड पकड़ कर मौसी की रास बहती छूट पर रगड़ा. मौसी की छूट एक डैम साफचक थी . वो पहले से hi साडी तयारी कर क बैठी थी .

रीता : कक्कक्स अब दाल भी दे aaaaaaaaaahhhhhh mmmmmmmmmmmm

मैंने मौसी की बात पूरी होते हुए एक ज़बरदस्त धक्का मारा और मेरा लैंड एक hi बार में पूरा छूट में घुस गया . मौसी क मुँह से ज़ोरदार चीख निकलते मिलते रह गयी जिसे उन्होंने अपने हाथ से मुँह बंद करते हुए रोका. इतने दिनों बाद मौसी मेरा लैंड ले रही थी शायद उनकी छूट थोड़ी सिकुड़ गयी थी . मुझे भी अपने लैंड पर उनकी छूट का दबाव महसूस हुआ. पर छूट इतना पानी छोड़ रही थी और लैंड भी मौसी क थूक से गीला था क स्लिप करता हुआ पूरा अंदर घुस गया. मौसी आगे को गिरने काफी पर मैंने उनकी कमर को मजबूती से पकड़ा हुआ था . मौसी की चीख सुन कर मुझे एक अलग hi मज़ा भी आया क्यूंकि मौसी को ऐसी hi चुदाई पसंद थी और मुझे भी उनके साथ ऐसे मज़ा अत था . मैंने एक बार फिर से लैंड सुपडे तक बहार निकला और फिर से एक hi झटके में पूरा घुसा दिया . मौसी फिर से तदपि

रीता : उम्मम्मम्म मममममम ाआईईई धीरे आआह्ह्ह मरेगा क्या कक्कक्स मायआ

अमित : बहुत तड़प रही थी न आप , आज साडी तड़प मिटा दूंगा . ये लो

मैंने मौसी की कमर पकड़ कर ज़ोरदार धक्के मरने शुरू कर दिए . मौसी लगातार झटकों से हिल रही थी और कराह रही थी मगर उन्होंने मुझे न रुकने को कहा न लैंड बहार निकलने को . मतलब साफ़ था क उन्हें भी मज़ा आ रहा था . मैं लगातार मौसी की छूट को उधेड़ने में लगा हुआ था . मौसी लगातार सिसकियाँ छोड़ रही थी . मौसी कुछ ज्यादा hi प्यासी थी इस लिए जल्दी hi उनका पानी निकल . मौसी को टंगे कम्पनी लगी उनकी छूट से पानी का फव्वारा फुट पड़ा था जो बहकर उनकी जांघों से होता हुआ नीचे पाऊँ तक आने लगा और उनकी पेंटी भी भीग गयी .

रीता : मैं गयीईइ मैं गयीईइ आअह्ह्ह ककक रुऊ रूयकककककक जा बीटा कक्कक्कक्स ममममम

मौसी से खड़ा नहीं हुआ जा रहा था मगर मैं लगातार धक्के मर रहा था . क्यूंकि मेरा अभी नहीं हुआ था . मगर मौसी की हालत देख कर मैंने उनकी कमर को ढीला छोड़ दिया तो वो आगे को बिस्तर पर गिर कर औंधे मुँह लेट गयी. मौसी की नंगी टंगे मांसल जांघें और बड़े बड़े चूतड़ देख कर मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था . मैंने मौसी की टंगे पकड़ कर उन्हें बीएड क किनारे तक खिंचा और उन्हें पलट कर उनकी टंगे ऊपर उठा दी. उनकी घुटनो में अटकी पड़ी पेंटी मैंने उनके पाऊँ से बहार निकली और पाऊँ कंधे पर रख कर झुक कर फिर से लैंड छूट पर सेट कर क एक hi धक्के में पूरा जड़ तक घुसा दिया. अभी अभी झड़ी छूट पानी से लबा लैब थी और लैंड पूरी रवानी से मौसी क गर्भाशय से टकराया. मौसी क मुँह से दबी दबी मस्ती से भरी आह्हः निकली.

रीता : आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स थोड़ी देर रुक तो जाता कक्कक्क्स आज क्या हो गया है तुझे कक्कक्स फाड़ देगा क्या

अमित : आप hi तो कह रही थी बड़ा तदपि हो आप. तो अब आपकी साडी तड़प hi तो मिटा रहा हूँ.

मौसी की नंगी चिकनी टांगों को चूमता मसलता मैं तेज़ तेज़ धक्के मर रहा था . कुछ देर में hi मौसी फिर से गरम हो कर खुद hi अपने स्तन मसलती हुई गांड उठाने लगी.

रीता : और ज़ोर से कर ककक उफ्फ्फ्फ़ और तेज़ फाड़ दे इसी निगोड़ी को बहुत तड़पती है ककक अपने मुसल से फास दे आअज इसे . साडी गर्मी निकल दे इसकी सीसीसी आआह्ह्ह मायआ ककक मर दाल मुझे फाड़ दे और ज़ोर से कर

अमित : ये लो मौसी आज तेरी साडी गर्मी निकल दूंगा . ले और ले ...

मौसी क साथ चुदाई करते हुए मुझे सब कुछ भूल गया और मैं पूरी तरह मौसी पर सवार हो गया . मौसी क पाऊँ उसके सर की तरफ दबाता हुआ मैं पूरी तरह उनके ऊपर hi आ गया था . और कोई वक़्त होता तो मौसी की जान निकल जाती पर इस वक़्त तो वो जंगली बिल्ली बानी मुझे और उकसा रही थी . मैंने पूरी तरह उनके ऊपर आते हुए उनके दोनों कन्धों को जकड कर अपनी कमर ज़ोर ज़ोर से हिलाते हुए जड़ तक लैंड को छूट में पेल रहा था . मेरे तेज़ धक्कों से मौसी बुरी तरह हिल रही थी . वो खिसक कर 2 फ़ीट आगे चली गयी थी पर मैं इस वक़्त सिर्फ उनकी तसल्ली करवाने में लगा हुआ था . एक बार फिर से मौसी की छूट में उबाल आ गया और वो झड़ने लगी.

रीता : मार और ज़ोर से मार मैं गयी आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह ऐसे hi ज़ोर से कर मेरे घोड़े फाड़ दे मेरी आयआईईईई .

अमित : लो मौसी लो मेरा भी पानी अपनी छूट में ले लो बुझा लो अपनी प्यास . आअह्ह्ह

मौसी की छूट से पानी निकलते hi मैंने भी अपना पानी निकल दिया और आखिर क ज़ोरदार धक्के मरता हुआ मैं उनके ऊपर hi गिर गया . हम दोनों की साँसों का शोर कमरे में सुनाई दे रहा था . गर्मी ठंडी होते hi मौसी ने मुझे अपने से उतारते हुए बीएड पर एक तरफ पलटा दिया और खुद टंगे फैला कर लेती रही . कुछ देर बाद जब साँसे दुरुस्त हुई तो मैंने मौसी की तरफ देखा जो मुझे hi देख रही थी .

अमित : क्या देख रही हो मौसी ?

रीता : हो क्या गया था तुझे ? मेरी कमर दुखने लग गयी है तेरी वजह से . ी

अमित : खुद hi तो कह रही थी आप क और ज़ोर से करो . मैंने तो मन भी किया था आपको.

रीता : वो तो पता नहीं क्या क्या उस वक़्त मुँह से निकल जाता है . मुझ में अब इतनी हिम्मत कहाँ है क तुझ जैसे सांड को संभल सकूँ. कहीं कमर चटक जाती तो?

अमित : आपको क्या हुआ है? अभी भी पूरी जवान हो आप. अगर आपको ाचा नहीं लगा तो दोबारा नहीं कर.......

रीता : ख़बरदार ऐसा सोचा भी तो. तेरा hi तो सहारा है वर्ण मेरा क्या होगा. तेरे मौसा तो मुझे ठंडा करते नहीं . तू भी मेरे बारे में नहीं सोचेगा तो किसको कहूँगी?

अमित : मैं तो मज़ाक कर रहा था मौसी , आपको भला मैं छोड़ कर जा सकता हूँ. अगली बार मैं यहाँ से भी करूँगा तैयार रहना .

मैंने मौसी की गांड को मसलते हुए कहा तो वो मुस्कुराने लगी

रीता : तू इसी क पीछे क्यों पड़ा रहता है ? एक तो तेरा ये गधे जैसा मुसल आगे लेने में hi जान निकल जाती है और तू इसे पीछे घुसाने में लगा रहता है.

अमित : क्या करूँ मौसी , आप की बैक इतनी मस्त है क देख कर कण्ट्रोल करना मुश्किल हो जाता है. अब भी अगर दीदी लोग घर पर नहीं होते तो मैं पीछे से ज़रूर करता .

रीता : चल अब तू आराम कर मैं घर क काम भी देख लूँ. आआह्ह्ह्हह्ह ककक क्या करता है

मौसी उठने लगी तो मैंने उनके नंगे चूतड़ मसल दिए. जिससे उनके मुँह से सिसकी निकली. फिर मौसी धीरे धीरे बाथरूम की तरफ चली गयी. मौसी पाऊँ फैला कर चल रही थी . एक hi चुदाई में उनकी चल बदल गयी थी. मैंने उठ कर अपने कपडे सेट किये और मौसी क कमरे से निकल कर अपने कमरे में चला गया . चुदाई कर क मुझे अब नींद आ गयी थी . इस लिए बीएड पर पड़ते hi सो गया .

उधर निधि का दिल आज काम में नहीं लग रहा था. वो यही सोच रही थी क अब वो क्या करे. क्यूंक घर पर आज अमित नहीं होगा और अब उसे अमित क साथ hi अचे से नींद आती थी. वो बहाने सोच रही थी क किसी तरह वो अमित क पास चली जाये मगर घर पर क्या कहे ? ये hi उसे समझ नहीं आ रहा था . दूसरा रीता मौसी क घर वो अमित क साथ एक hi बीएड पर कैसे सो पायेगी. ये भी एक बड़ी समस्या थी.



रजनी भी आज घर वापिस आ गयी थी दिव्या क घर से . घर आ कर वो अमित क न होने से उदास नहीं थी बल्कि खुश थी. क्यूंकि अब अमित वहीँ था जहाँ रजनी खुल कर उसके साथ वो सब करने का सोच रही थी जो उसके मन में उसी दिन आ गया था जब पुलिस स्टेशन में इंस्पेक्टर की गन्दी नज़र से उसे अमित ने बचाया था.
 
अपडेट 218



‘ उठ भी जा मेरी जान कब तक सोयेगा? नीचे चल निधि दीदी आयी हैं और तेरा वेट कर रही हैं .’ मैं नींद में था क करुणा दीदी मेरी छाती पर लेती मुझे किश करती हुई जगा रही थी . करुणा दीदी क नरम मॉस क गोले मेरी छाती पर थे जो मुझे मज़ा दे रहे थे . मेरी आँख खुली तो मैंने पहले दरवाज़े की तरफ देखा

करुणा : क्या देख रहा है ? दरवाज़ा खुला रख कर ऐसे थोड़ा तेरे ऊपर होती. चल अब उठ कब से सो रहा है .

अमित : देख रहा था क मेरी गफ कितनी समझदार है. अब जब दरवाज़ा बंद hi है तो थोड़ा प्यार कर लिया जाये उम्मम्मम

मैंने दीदी क होंठ अपने होंठों में लिए और किश करते हुए अपने दोनों हाथ उनके नरम चूतड़ों पर रख कर उन्हें मसलने लगा . दीदी भी मुझे किश करने लगी पर ज्यादा देर उन्होंने ऐसा नहीं करने दिया और मेरे होंठों पर दांतों से काट दिया . मेरे मुँह से दर्द भरी आज निकली तो वो जल्दी से मेरी पकड़ से निकल कर हस्ती हुई कड़ी हो गयी .

करुणा : छू छू छू , दर्द हुआ मुन्ना को ? चल जल्दी से नीचे आजा . कब से कह रही हूँ निधि दीदी आयी है निचे और तुझे रोमांस की पड़ी है . अगर वो ऊपर आ गयी तो अभी सारा रोमांस निकल जायेगा . बुद्धू .....

इतने कह कर करुणा दीदी उछलती हुई दरवाज़ा खोल कर भाग गयी. मेरे चेहरे पर भी स्माइल आ गयी थी. फिर मैं झटके से उठा और अपनी हालत ठीक कर क नीचे भगा. निधि दीदी मेरा इंतज़ार कर रही थी और मैं अभी तक कमरे में था वो क्या सोच रही होंगी. मैं जल्दी से नीचे आया तो निधि दीदी सबके साथ बैठी थी . वो इस वक़्त सिंपल से कपड़ों में hi थी शायद घर से हो कर आयी थी. मुझे देखते hi उनके चेहरे पर स्माइल आ गयी और वो कड़ी हो गयी . मेरे आते hi वो मुझे गले लग कर मिली .

निधि : कॉलेज से सीधा यहीं आ गए , कपड़ों का ख्याल नहीं आया न ? ले आयी हूँ मैं .

अमित : सॉरी दीदी , मेरी वजह से आपको आना पड़ा .

निधि : मरूंगी अगर ऐसी बात कही तो . इसमें क्या है ? मैं hi तो तुम्हारी साडी ज़रूरतों का ख्याल रखूंगी न .

करुणा : दीदी साडी ज़रूरतों क ख्याल तो बीवी hi रख सकती है .

करुणा की बात सुन कर निधि का दिल झूम उठा. उसे ऐसा लगा जैसे करुणा ने उसे अभी अमित की बीवी hi कहा हो . वो खुश भी हुई और शर्मा भी गयी .

रीता : तू ये क्या बोल रही है? सोच समझ कर बोलै कर. देख निधि को कितनी परवाह है अपने छोटे भाई की . खुद यहाँ तक चली आयी उसके पीछे . और एक तू है जिसे अपनी hi फ़िक्र नहीं है . तुम दोनों खड़े क्यों हो गए ? बैठो .

अमित : दीदी आपको क्या ज़रूरत थी आने की ? और आप अकेली क्यों आयी हैं ?

निधि : इसमें कौन सी बड़ी बात है . एक hi शहर में तो हैं. और मैंने कौन सा रिक्शा या ऑटो से आना था. कार में आयी हूँ .

करुणा : वह दीदी मज़ा आएगा , अभी चलते हैं कार में घूमने .

रीता : टाइम देखा है ? 8 बज चुके हैं. चुपचाप मेरे साथ खाना बनाने में मदद करो .

निधि : मैं आती हूँ मौसी आपके साथ. और करुणा , हम खाना खा कर चलेंगे सब एक साथ.

निधि दीदी की बात सुन कर करुणा दीदी खुश हो गयी . मौसी दीदी को मन कर रही थी पर दीदी नहीं मणि और फिर दोनों खाना बनाने किचन में चली गयी . मैं वहीँ नेहा दीदी और करुणा दीदी क साथ बैठ गया . नेहा दीदी क हाथ में अभी भी किताब थी .

अमित : क्या दीदी , हर वक़्त किताबों में hi घुसी रहती हो आप . अभी सब साथ में हैं तो काम से काम अभी तो किताब को छोड़ दो .

मेरी बात सुन कर नेहा दीदी ने किताब को साइड में रख दिया और चश्मा उतर कर मेरी तरफ देखने लगी .

नेहा : कल एग्जाम है इसी लिए पढ़ रही थी. लो बंद कर दी किताब, तुमसे ज़रूरी मेरे लिए कुछ नहीं है भाई.

मुझे नेहा दीदी क संजीदा लहजे में कही गयी बात दिल पर लगी. वो सब से अलग थी पर उनके दिल में मेरे लिए प्यार बिलकुल निधि दीदी की तरह hi था.

अमित : सॉरी दीदी , मैंने तो ऐसे hi कहा था .

नेहा : सॉरी किस लिए ? इसमें कौन सा कुछ गलत कहा तुमने . मैं hi किताबों में ज्यादा घुसी रहती हूँ. अब तुम्हारा एग्जाम 2 दिन बाद है न ?

अमित : जी , आपको कैसे पता ?

करुणा : तुम्हारे बारे में सब पता होता है दीदी को. तुम बताओ या न बताओ ये क्या कर hi लेती हैं. जेम्स बांड हैं दीदी , ऐसे hi मत समझना . आखिर बहिन किसकी है .

नेहा : ऐसा कुछ नहीं है , वो तुम्हारी डेट शीट मेरे पास है . इस लिए पता है सब. वैसे एग्जाम तो सरे अचे hi हुए होंगे मैं जानती हूँ . अब लास्ट वाला भी अचे से करना और मेरी कोई हेल्प चाहिए तो बोल देना .

अमित : ज़रूर दीदी , कल राधा का भी एग्जाम है क्या ?

नेहा : हाँ हमारे लगभग सरे एग्जाम साथ में hi हैं. वैसे वो तुम्हे बहुत मिस करती है. लगता है तुम उससे बात नहीं करते आज कल.

अमित : नहीं ऐसा तो नहीं है दीदी. मैं तो करता रहता हूँ . हाँ आज नहीं हुई.

नेहा : चल पहले बात करले उसे भी ाचा लगेगा . सब से ज्यादा वो तुम्हारे साथ hi खुश होती है.

नेहा दीदी की बात सुन कर मुझे भी खुद पर गुस्सा आया क राधा बेचारी मेरे बारे में इतना सोचती है और मैं हूँ क ध्यान hi नहीं देता. जब से रीमा मेरी ज़िन्दगी में आयी है मैं राधा से ज्यादा बात नहीं कर रहा . मैंने फ़ौरन राधा को कॉल की और उसने तीसरी बेल्ल पर कॉल अटेंड कर ली.

अमित : कैसी हो राधा ?

राधा : अछि हूँ , तुम कैसे हो ? आज रीता मौसी क घर हो न ? पेपर कैसा हुआ ?

अमित : तुम्हे कैसे पता क मैं यहाँ हूँ ?

राधा : नेहा दीदी से बात हुई थी मेरी जब तुम सो रहे थे .

अमित : ाचा , मौसी कैसी हैं ?

राधा : अछि हैं , तूने बहुत यद् करती हैं.

अमित : मैं भी , कल तुम्हारा एग्जाम है न , बेस्ट ऑफ़ लक. मुझे पूरा यकीन है क तुम ज़रूर फर्स्ट आओगी .

राधा : थैंक यू . फर्स्ट आना मेरे हाथ में थोड़ा hi है .

अमित : मुझे तुम पर भरोसा है . लो दीदी से बात करो .

करुणा दीदी मुझे इशारा कर रही थी तो मैंने उन्हें फ़ोन पकड़ा दिया . फिर कुछ देर करुणा दीदी ने उससे बात की और फिर नेहा दीदी ने बात कर क फ़ोन बंद कर दिया . मैं बहाना बना कर अपने कमरे में गया और रीमा से भी बात की. वो भी नाराज़ हो रही थी , शीना ने बता दिया था आज जो भी हुआ . खैर उसके बाद खाना तैयार हो गया और फिर हमने साथ में खाना खाया . खाना दीदी ने hi बनाया था और सब ने तारीफ की .

निधि : ाचा मौसी मैं अब चलती हूँ .

अमित : आप अकेली कैसे जाएँगी मैं आपके साथ चलता हूँ .

रीता : कहीं जाने की ज़रूरत नहीं , मैं दीदी से बात कर लेती हूँ तू यहीं रहेगी .

रीता मौसी ने रजनी मौसी को फ़ोन कर क बता दिया क निधि उनके पास hi रुक रही है . रजनी मौसी ने भी मन नहीं किया .

रीता : सुना , अब तुम यहीं रहोगी. यहीं से ऑफिस जाना कल .

निधि दीदी क चेहरे पर ख़ुशी साफ़ नज़र आ रही थी . उनहोंने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराने लगी .

करुणा : चलो दीदी अब हम सब मिल कर आइस क्रीम खाने चलते हैं आपकी गाड़ी में .

नेहा : सुबह एग्जाम है अगर तबियत ख़राब हो गयी तो ?

रीता : नेहा ठीक कह रही है . कल पेपर दो पहले .

अमित : अरे मौसी इतनी सी बात क लिए आप मन कर रही हैं. हम सब साथ में चलते हैं और जल्दी आ जायेंगे . चलो न दीदी .

मैंने रीता मौसी और नेहा दीदी को चलने क लिए कहा तो दोनों ने हाँ कर दी. करुणा दीदी क चेहरे पर एक डैम से ख़ुशी आ गयी जहाँ अभी उदासी छ गयी थी . करुणा दीदी जल्दी से अपने रूम में भागी . रीता मौसी भी अपने रूम में गयी. निधि दीदी और मैं बहार आ गए . कुछ hi देर में रीता मौसी करुणा दीदी और नेहा दीदी को साथ लेकर आ गयी. करुणा दीदी ने तो कपडे बदल लिए थे और रीता मौसी भी हल्का सा सिंगार कर आयी थी . नेहा दीदी वैसी की वैसी hi थी. उन्हें इन सब बातों से कोई मतलब नहीं था. निधि दीदी ने मुझे अपने साथ आग बैठने को कहा तो मौसी ने भी यही कहा . इसलिए मैं दीदी क साथ आगे बैठ गया और करुणा दीदी नेहा दीदी मौसी क साथ पीछे बैठ गयी. हम सब मिल कर एक आइस क्रीम पार्लर गए जहाँ हमने आइस क्रीम खायी और फिर वापिस चल दिए. मैं ज्यादा टाइम नहीं लगाना चाहता था क्यूंकि नेहा दीदी और करुणा दीदी का सुबह एग्जाम भी था . जल्दी hi हम सब वापिस आ गए . नेहा दीदी तो जल्दी से सोने चली गयी . करुणा दीदी को भी मौसी ने अपने को कहा और वो भी चली गयी .

रीता : निधि तुम मेरे साथ hi सो जाओ .

निधि : अरे नहीं मौसी आप आराम से सो जाओ. मैंने अभी कुछ देर इससे बातें करनी हैं.

रीता : पर बीटा तुम अमित क साथ कैसे सो पाओगी ?

निधि : मौसी मैंने तो बातें करने का कहा है. जब नींद आएगी तब आपके पास आ जाउंगी . वैसे भी हमारे घर भी हम साथ में hi तो सोते थे .

रीता : पर वहां जगह काम है .

निधि : आप चिंता मत करो मैं देख लुंगी .

उसके बाद रीता मौसी भी अपने कमरे में चली गयी . निधि दीदी और मैं मेरे कमरे में आ गए. मेरा बैग दीदी ने उठाया और उसमे से मेरे कपडे निकल कर अलमीरा में सेट करने लगी .

अमित : अरे दीदी आप क्यों कर रही हैं? मैं कर लूंगा .

निधि : मैं कर रही हूँ न . वैसे भी ये काम मेरा है . लो ये पेहेन लो .

दीदी ने मेरे लिए ट्रॉउज़र और T-shirt निकल कर मुझे दे दी. मैंने उनके हाथ से कपडे लिए और जाने लगा तो मुझे दीदी का ख्याल आया .

अमित : आप क्या पहनेंगी दीदी ? नेहा दीदी को बोलूं ?

निधि : उसकी ज़रूरत नहीं है . मैं लायी हूँ .

दीदी ने मेरे कपड़ों वाले बैग में से hi अपने लिए ट्रॉउज़र और T-shirt निकल ली . मैंने देखा क मेरे कपड़ों क साथ दीदी क कुछ और कपडे भी पड़े हुए थे मतलब दीदी पहले से hi तैयार हो कर आयी थी यहाँ रुकने क लिए . खैर मैं चुपचाप कमरे से निकल गया और बाथरूम जा कर अपने कपडे चेंज कर लिए . वापिस लौटा तो दीदी T-shirt पेहेन कर उसे नीचे के रही थी. मेरी तरफ उनकी पीठ थी तो उनकी नंगी पीठ पर मेरी नज़र पद गयी . एक डैम दूध सी सफ़ेद पीठ और पतली कमर. नीचे से ट्रॉउज़र इतना टाइट मनो स्किन क साथ hi चिपक गया हो . T-shirt भी कुछ ऐसी hi फिटिंग की थी. एक बार तो मैं वहीँ अटक गया और मुँह खुला का खुला रह गया. इससे पहले क मैं वापिस जाता दीदी पीछे घूम गयी शायद उनको आवाज़ आ गयी थी. मगर दीदी ने गुस्सा नहीं किया बल्कि स्माइल करने लगी .

निधि : वहां क्यों खड़े हो ? अंदर आओ

अमित : सॉरी दीदी मैं वो ...

निधि : किस लिए सॉरी ? मैं तो कपडे कब क बदल चुकी हूँ . और इसमें सॉरी वाली क्या बात है ? तुम्हारे सामने कैसा पर्दा ? तुम तो सब .....

केते कहते दीदी रुक गयी और शर्मा कर चेहरा झुका लिया . मुझे उनकी बात समझ में नहीं आयी .

अमित : मैं क्या सब ??

निधि : मेरा मतलब था क ........ तुमसे मुझे कोई दर नहीं . तुम तो पहले भी मुझे ,,,,,, उस दिन जब तुम मुझे उस दरिंदे से बचने आये थे . तब भी तो मैं ......

दीदी बात साफ़ नहीं कर रही थी पर मैं उनकी बात का मतलब समझ गया था .

अमित : मैंने तब भी आपको नहीं देखा था दीदी , मैं तो बस उस दरिंदे को hi देख रहा था हो आपके साथ ज़बरदस्ती कर रहा था .

निधि : धीरे से ) तो अब देख लो

अमित : क्या ?

निधि : कुछ नहीं , चलो आओ अब लेट जाओ .

मुझे लगा तो था क दीदी ने कहा क अब देख लो पर मुझे लगा शायद मैंने गलत सुना . फिर मैं दीदी क साथ लेट गया.

अमित : दीदी , आप अपने कपडे साथ लेकर आयी हैं .

निधि : हम्म्म , सच कहूं तो मेरा दिल नहीं लग रहा था घर पर. तुम्हारे बगैर सुना सुना सा लग रहा था इस लिए चली आयी.

अमित : मेरी आदत मत डालिये दीदी वर्ण जब आप ससुराल जाएँगी तब क्या होगा आपका ?

निधि : मैं कहीं नहीं जाउंगी समझे. मैं वहीँ रहूंगी जहाँ तुम होंगे .

अमित : ऐसा कैसे हो सकता है .

निधि : ऐसा hi होगा अब छोडो ये सब . तुम्हे मेरी यद् नहीं आती? क्या तुम्हारा दिल नहीं करता मेरे साथ रहने को ?

अमित : करता है , पर ये पॉसिबल नहीं है न . अगर आपके घर hi रहूँगा तो बाकि सब नाराज़ हो जायेंगे .

निधि : इसी लिए तो मैं यहाँ चली आयी . अब तो ठीक है न ? अब से मैं वहीँ रहूंगी जहाँ तुम रहोगे .

अमित : पर ऐसा कैसे हो सकता है ? मौसी और मौसा जी नाराज़ होंगे

निधि : नहीं होंगे , बस मुझे अब तुम्हारे साथ hi रहना है. वैसे भी पर्सनल सेक्रेटरी हूँ तो मुझे तो बॉस क साथ रहना hi होगा न.

अमित : क्या दीदी आप भी ..... आप कब छोड़ेंगी ये बात ?

निधि : कभी नहीं .

ऐसे hi हम दोनों काफी देर तक बातें करते रहे और फिर सो गए . दीदी यहाँ भी मेरे साथ वैसे hi सोई जैसे घर पर सोती थी. मेरी बाजु पर सर रख कर .

अगली सुबह जब मेरी आंख खुली तो दीदी मेरे साथ चिपकी हुई थी. शायद सर्दी की वजह से मगर उनके मासूम से चेहरे को देख कर मैं कुछ देर उन्हें देखता रहा और फिर उनका माथा चुम कर उठ कर फ्रेश हुआ और ऊपर छत पर जा कर एक्ससरसीसे करने लगा . एक्साम्स की वजह से एक्ससरसीसे अचे से नहीं हो प् रही थी मगर आज जल्दी आँख खुल गयी तो सोचा अचे से एक्ससरसीसे कर लूँ. कोई 1 घंटे बाद निधि दीदी hi मुझे ढूंढती हुई ऊपर आयी . तब तक मैं पसीने में भीग चूका था . मुझे पसीने में भीगा देख कर दीदी मुझे गौर से देखने लगी .

निधि : गुड मॉर्निंग, आज बहुत जल्दी उठ गए थे तुम ? और ये क्या इतनी ठण्ड में पसीना ?

अमित : आँख जल्दी खुल गयी थी तो सोचा एक्ससरसीसे करलूं बस उसी का असर है .

निधि : मुझे लगा hi था यहीं ऊपर मिलोगे. चल अब जल्दी से आ जाओ मैं दूध गरम कर क लती हूँ तुम्हारे लिए .

इतना कह कर दीदी जाने लगी पर फिर पता नहीं क्या मन में आया क वापिस आयी और मेरे गलों पर किश कर क हस्ती हुई नीचे चली गयी. मैं पसीना पांच कर वापिस कमरे में आया तो दीदी दूध का गिलास ले आयी. अपने लिए उन्होंने चाय बनाई थी .

अमित : और कोई नहीं उठा ?

निधि : उठा दिया है करुणा को , नेहा तो पहले हो उठ गयी थी और मौसी भी नाहा रही हैं . वैसे तुम कब उठे थे ?

अमित : टाइम देखा नहीं बस अँधेरा था इतना पता है .

निधि : उठने से पहले क्या तुमने मुझे चूमा था ?

दीदी क इस सवाल से मैं हड़बड़ा गया .

अमित : मम मैं कक कब ???

निधि : इतना दर क्यों रहे हो ? मुझे लगा क तुमने मुझे माथे पर चूमा जैसे . मैं नींद में थी तो पता नहीं चला .

अमित : वो हाँ वो मैंने आपके माथे पर वो . सॉरी दीदी

निधि : सॉरी किस लिए ? अचे काम क लिए कोई सॉरी बोलता है क्या ? मुझे सच में बहुत ाचा लगा . और आगे से भी जब चाहो तुम मुझे चूम सकते हो मुझे ाचा लगेगा .

निधि ( मन में ) बुद्धू , माथे क इलावा भी तो कहीं और चूम लो . कब से तुम्हारा इंतज़ार है इस दिल को और तुम हो क समझते नहीं .

दीदी ने स्माइल करते हुए प्यार से कहा तो मुझे ाचा लगा . फिर दीदी चाय ख़तम कर नहाने चली गयी और कपडे चेंज कर लिए. धीरे धीरे सब तैयार होने लगे . करुणा दीदी और नेहा दीदी को एग्जाम देने जाना था और घर पर मैं और मौसी hi रहने वाले थे क्यूंकि निधि दीदी भी ऑफिस क लिए रेडी थी. मगर मेरा तो प्रोग्राम फिक्स था मोहित और कल्पना क साथ. करुणा दीदी निधि दीदी को उन्हें कॉलेज छोड़ने को कहने लगी तो दीदी उन्हें साथ लेकर चली गयी. नेहा दीदी को लेने कल्पना आ गयी . नेहा दीदी कल्पना क साथ जाने क लिए बहार जाने लगी तो मैं भी उनके साथ hi चल दिया . मौसी को मैंने बता दिया क मैं स्टडी क लिए जा रहा हूँ . वो खुश तो नहीं थी पर उन्होंने मन भी नहीं किया . नेहा दीदी क साथ कल्पना ने जब मुझे देखा तो एक डैम से खुश हो गयी

कल्पना : तुम ? मैं अभी फ़ोन करने hi वाली थी ाचा हुआ खुद hi आ गए वर्ण मोहित पता नहीं कब अत तुम्हे लेने . वैसे मुझे लगा था शायद तुम उसके घर hi होंगे.

अमित : नहीं मैं कल इधर hi आ गया था . चलो मैं साथ hi चलता हूँ तुम्हारे. राधा को लेने जाना है न अभी तुमने ?

कल्पना: राधा आज कल रीमा क साथ hi जाती है

अमित : तो रीमा नेहा दीदी को भी तो ले जा सकती है न.

नेहा : वो hi आती है लेने आज ये आयी है ताकि तुम्हे यहीं से साथ ले जाये

कल्पना: मैं तो आपके लिए आयी हूँ दीदी

कल्पना नेहा दीदी की बात पर जल्दी से बोली और फिर नज़रें चुराने लगी . जबकि नेहा दीदी मुस्कुरा रही थी . मैंने कुछ नहीं कहा और चुप चाप पीछे बैठ गया . कल्पना ने गाड़ी चलाई और कॉलेज क लिए निकल गए . कल्पना मिरर से मुझे देखती और जब मुझसे नज़र मिलती तो शर्मा कर नज़रें चुरा लेती . हम कॉलेज पहुंचे तो रीमा राधा भी वहीँ गेट पर hi मिल गयी . वो नेहा दीदी का वेट कर रही थी . मुझे साथ में देख कर दोनों क चेहरे पर स्माइल आ गयी . मैंने जा कर दोनों से हाथ मिलाया.

अमित : बेस्ट ऑफ़ लक , अचे से पेपर लिखना .

रीमा : थैंक यू

राधा : तुम यहाँ कैसे ?

अमित : सोचा तुम्हे खुद मिल कर विश कर दूँ . तुम भी तो करती हो न .

मेरी बात सुन कर राधा क चेहरे पर ख़ुशी साफ़ झलक रही थी. फिर तीनो अंदर चली गयी और मैं कल्पना क साथ चल दिया . कल्पना मुझे सीमा क घर ले जाने की बजाये अपने घर ले गयी .

अमित : ये क्या ? हम तो सीमा क घर जाने वाले थे न ?

कल्पना : हाँ वो उसका फ़ोन आया था क उसे थोड़ा काम है इस लिए वो एक घंटे तक फ्री होगी और मोहित भी तब hi आएगा . तब तक मैंने सोचा तुम्हे पापा से मिलवा दूँ .

अमित : अंकल से ? पर मैं तो उनसे मिल चूका हूँ न .

कल्पना : वो तुमसे मिलना चाहते हैं इस लिए . तुम्हे कोई ऐतराज़ है क्या ?

अमित : नहीं ऐसी बात तो नहीं है ,,,, ाचा ठीक है मिल लेते हैं . पर उन्हें मुझसे क्या काम है ?

कल्पना : खुद hi पूछ लेना .

गेट पर पुलिस वाले सिक्योरिटी में खड़े थे . कल्पना को देख कर उन्होंने दरवाज़ा खोला और गाड़ी को अंदर जाने दिया . अंदर जा कर गाड़ी को एक तरफ लगा कर कल्पना मुझे अपने साथ अंदर ले गयी . जब हम अंदर आये तो अंकल यानि क डिप्टी कमिश्नर विक्रम राठौर सोफे पर बैठे कोई फाइल देख रहे थे . कल्पना उछलती हुई उनके पास गयी

कल्पना : पापाआ , देखिये कौन आया है .

विक्रम : ओह्ह्ह अमित , hello यंग मन . कैसे हो तुम ?

अमित : पाऊँ छूटे हुए ) जी ठीक हूँ सर आप सुनाइए आप कैसे हैं .

विक्रम : शाबाश, बहुत अचे संस्कार दिए हैं तुम्हारे घर वालों ने . और मुझे सर नहीं अंकल कह सकते हो . यहाँ मैं कल्पना का बाप हूँ कोई अफसर नहीं .

कल्पना : पापा मैं कॉफ़ी लती हूँ .

इतना कह कर कल्पना जल्दी से उठ कर चली गयी .

अमित : अंकल कल्पना कह रही थी आपको मुझसे कोई काम था .

विक्रम : हाँ वो , बीटा तुम्हे तो पता hi है क कल्पना की माँ नहीं है और न hi कोई और रिश्तेदार यहाँ है . तुम्हारी फॅमिली क साथ कल्पना ाचा फील करती है . असल में मुझे कुछ दिनों क लिए दिल्ली जाना है . मैंने कल्पना से कहा था साथ. चलने को मगर वो जाना नहीं चाहती . वैसे भी ये एक ऑफिसियल टूर है तो वो बोर हो जाएगी. इस लिए मैंने सोचा है अगर तुम्हारी फॅमिली को ऐतराज़ न हो तो कुछ दिन वो तुम लोगों क साथ रह ले. मुझे ज्यादा टाइम नहीं लगेगा जल्दी hi लौट आऊंगा . ये सिर्फ एक रिक्वेस्ट है मैं फाॅर्स नहीं कर रहा . अगर तुम कहो तो मैं खुद उनसे बात कर लेता हूँ .

अमित : अरे इसमें इतना सोचें वाली कौन सी बात है अंकल . कल्पना को तो सब जानते हैं. वो जब चाहे हमारे घर आ सकती है पर .....

विक्रम : मैं जनता हूँ तुम क्या सोच रहे हो . मुझे तुम पर भरोसा है बीटा और तुम्हे देख कर मैं समझ सकता हूँ क तुम्हारी फॅमिली कितनी अछि होगी. वैसे भी कल्पना अक्सर तुम्हारी और तुम्हारी फॅमिली की बातें करती रहती है. सच कहूं तो जब से तुम लोगों से वो मिली है बिलकुल बदल गयी है. अब वो पहले की तरह खामोश और गुमसुम नहीं रहती. हमेशा खुश रहती है. इसी लिए मैं चाहता हूँ क वो अपनी छुट्टियां तुम लोगों क साथ बिताये . वो तुम लोगों क साथ सेफ भी रहेगी और खुश भी ऐसा मेरा मन्ना है .

अमित : अगर आपको इतना यकीन है तो ठीक है अंकल पर आपको भी एक बात माननी पड़ेगी .

विक्रम : हाँ हाँ बोलो

अमित : आपको भी हमारे घर आना पड़ेगा .

विक्रम : है है है , वैरी गुड . मुझे लगा पता नहीं क्या काम कहोगे पर तुम ने तो दिल hi जीत लिया . शाबाश , मैं ज़रूर आऊंगा पर अभी नहीं. मगर आऊंगा ज़रूर .

कल्पना : पापा कॉफ़ी

कल्पना हमारे लिए कॉफ़ी खुद ले कर आयी . अंकल जो पहले hi हंस रहे थे कल्पना को हाथ में ट्रे लिए देख कर एक डैम से रुके और फिर मुस्कुराने लगे .

विक्रम : अरे वह बेटी , तुम ये सब ....

कल्पना : क्यों मैं नहीं कर सकती क्या ? और ये कॉफ़ी मैं खुद अपने हाथों से बना कर लायी हूँ चेक कर क बतिये .

विक्रम : शॉकेड ) ये कॉफ़ी तुमने बनायीं है ? ये तुमने कब सीखी ?

कल्पना : मौसी ने सिखाई है . आप तो कुछ सीखने से रहे .

विक्रम : वह भाई वह , अमित प्लीज मेरी तरफ से अपनी मौसी को थैंक्स ज़रूर कहना . कल्पना को और भी कुछ सीखा सकें तो सीखा दें. एक माँ की कमी जो इसकी ज़िन्दगी में थी वो तो कुछ हद तक दूर हो रही है . शाबाश बेटी , खुश रहो. और छुट्टियों में तुम अमित क यहाँ जा सकती हो . मैंने बात कर ली है .

अंकल की बात सुन कर कल्पना ने मेरी तरफ देखा और खुश होते हुए शर्मा गयी . अंकल ने हमारे साथ कॉफ़ी पि और फिर मिलने का कह कर निकल गए .

अमित : तो ये सब तुमने hi कहा था न अंकल से ?

कल्पना : मैंने कब कहा ? वो तो .....

अमित : अछि तरह जनता हूँ. वो जिस तरह से बात कर रहे थे मुझे समझ आ गया था . ये सब तुमने hi प्लान किया था है न ?

कल्पना : नहीं नहीं मैंने नहीं , वो तो पापा ने खुद hi कहा था क अगर दिल्ली नहीं जाना तो मत जाओ .

अमित : ाचा ाचा सब जनता हूँ. अब चलो पड़े भी करनी है .

कल्पना ( मन में ) सब समझते हो बड़े आये समझदार. मेरे दिल की बात तो समझते नहीं .

अमित : अब चलो भी .

कल्पना : हह हाँ हाँ चलो .

फिर हम घर से निकले और सीमा क घर चले गए . वो घर पर hi थी . फिर कुछ देर में मोहित भी वहां आ गया और हूँ साथ में बैठ कर पड़ने लगे . कल्पना बहुत खुश नज़र आ रही थी . और उसकी ख़ुशी की वजह मैं जनता था . वो मेरी फॅमिली क साथ रहना चाहती थी जिसकी मंज़ूरी मिल गयी थी . इसी लिए वो बहुत खुश थी और बार बार मुझे देखती और स्माइल करती. कल्पना जैसी सख्त लड़की भी आज आम लड़कियों की तरह शर्मा रही थी जो उसके नेचर क हिसाब से बिलकुल अलग था . खैर ऐसे hi दोपहर तक हम साथ में बैठ कर पड़ते रहे . उसके बाद मोहित मुझे वापिस घर छोड़ने आ गया . कल्पना भी मेरे साथ आना छह रही थी पर मोहित ने पहले hi आने का कह दिया इस लिए कल्पना चुप कर गयी. मोहित मुझे घर ड्राप कर क निकल गया . मैं जब घर आया तो मौसी घर पर अकेली थी. मेरे घर में आते hi मौसी ने मुझे बाँहों में भर लिया और मुझे किश करने लगी.

रीता : उम्म्म्म उनममम कब से इंतज़ार कर रही थी. इतना ाचा मौका था तुमने गँवा दिया . अब जल्दी करो इससे पहले की वो दोनों वापिस आ जाएँ . उम्म्म्म

अमित : उनममम मौसी क्या कर रही हो . दीदी आती hi होगी .

रीता : मुझे कुछ नहीं पता जल्दी से एक बार कर लेते हैं उम्म्म्म

रीता मौसी मेरी बात सुनने को तैयार नहीं थी . वो जल्दी से घुटनो क बल बैठी और मेरी पेण्ट खोलने लगी . मैं उन्हें मन कर रहा था पर वो रुक नहीं रही थी . उन्होंने जल्दी से मेरा लैंड निकल कर मुँह में ले लिया और चूसने लगी . अभी मौसी ने लैंड चूसना शुरू hi किया था क बेल्ल बजने लगी. मैं एक डैम से पीछे हैट गया . मौसी भी घबरा गयी . फिर दरवाज़ा ज़ोर ज़ोर से बजने लगा . मौसी को खुद को सँभालते हुए उठी और अपनी हालत ठीक करती हुई दरवाज़ा खोलने चली गयी. मौसी ने दरवाज़ा खोला तो सामने करुणा दीदी थी .



करुणा : क्या हुआ माँ ? तुम्हारी साँसे क्यों फूली हुई हैं?
 
अपडेट 219



करुणा क सवाल से मौसी हड़बड़ा गयी . जबकि करुणा गौर से मौसी को देख रही थी. मेरी भी हालत ख़राब हो गयी थी क कहीं दीदी को शक तो नहीं हो गया .

रीता : कक कुछ नहीं वो ,,, वो मैं किचन में काम कर रही था न तो भाग कर आयी इस लिए . अजा बैठ मैं खाना लगाती हूँ .

रीता मौसी जल्दी से जवाब दे कर किचन की तरफ निकल गयी . करुणा दीदी अंदर आयी और मुझे गौर से देखने लगी .

करुणा : तू क्या कर रहा था ? दरवाज़ा तू नहीं खोल सकता था ?

अमित : वो मैं वो बाथरूम में था इस लिए .

करुणा : ठीक है ठीक है .

अमित : दीदी आप बैठो मैं अभी आया .

करुणा : अब तू कहाँ जा रहा है ?

अमित : यहीं हूँ दीदी वो ज़रा रूम में जा कर अत हूँ .

इससे पहले दीदी कुछ और कहती ता पूछती मैं भाग कर सीढ़ियां चढ़ गया . मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था . करुणा दीदी की नज़रों से मुझे दर लग रहा था . मैं अपने रूम में गया और एक बार बाथरूम में जाकर हाथ मुँह धोकर खुद को नार्मल करने की कोशिश की. उसके बाद मैं कपडे ठीक कर क बैठ गया . तभी नीचे से मौसी ने खाने की आवाज़ दे दी तो मैं नीचे आ गया और हमने साथ में लंच किया . नेहा दीदी भी आ चुकी थी उनका एग्जाम ाचा हुआ था . बात करते करते हमने खाना खाया और मैं अपने रूम में वापिस आ कर लेट गया . कुछ देर क लिए मैंने आराम करना ठीक समझा और लेट गया . पता नहीं कब मेरी आंख लग गयी . फिर मेरी आँख खुली फ़ोन की घंटी से. मैंने no. देखा और फ़ोन उठा लोट .

अमित : hello

मंजू : कहाँ रह गए ? तुम तो मुझे अपने मां ममी से मिलवाने वाले थे न ?

अमित : सॉरी सॉरी , मम वो हुआ ऐसा क कल एग्जाम क बाद जब मैं घर गया तो सब वापिस जा रहे थे गाओं . इस लिए फिर मैं नहीं आया आपके पास. अब आपको उन से मिलने घर hi चलना पड़ेगा .

मंजू : ओह्ह्ह्ह , ठीक है . पर अभी तो एक्साम्स चल रहे हैं. उसके बाद hi जा पाऊँगी .

अमित : हम्म्म , एक्साम्स क बाद hi चलेंगे जब आप फ्री हो .

मंजू : तुम्हारी तो तयारी है न ? लास्ट एग्जाम रह गया है. अगर कोई हेल्प चाहिए तो आ जाओ

अमित : ठीक है मम मैं अत हूँ .

उसके बाद मैंने फ़ोन काट दिया और उठ कर हाथ मुँह धो कर फ्रेश हुआ. टाइम देखा तो शाम क 5 बज रहे थे . मैंने सोचा यहाँ रहूँगा तो फिर कोई बात न हो इस लिए मंजू म क घर जाने का सोचा . नीचे आया तो मौसी hi थी हॉल में. करुणा दीदी और नेहा दीदी अपने रूम में आराम कर रही थी .

रीता : कहीं जा रहे हो ?

अमित : हाँ मौसी , वो एग्जाम को तयारी में एक हेल्प चाहिए थी मम की इस लिए उनके पास जा रहा हूँ .

रीता : ाचा ठीक है , पर जल्दी आ जाना . आज रत तू मेरे साथ सोयेगा .

अमित : मौसी आप मरवाओगी , आज तो करुणा दीदी को पता चल hi गया था .

रीता : सब तेरी गलती है . इतना ाचा मौका था और तू बहार चला गया . मैं भी क्या करूँ इतने दिन खुद को रोक क रखा अब तू सामने है तो कण्ट्रोल नहीं होता. दर तो मुझे भी लगा था पर शुक्र है सब ठीक रहा . अब चुप चाप टाइम पर आ जाना . इन सब को मैं देख लुंगी .

अब मौसी को मैं क्या कहता वो तो अपनी hi धुन में लगी थी . इस लिए मैं चुपचाप निकल गया . बाइक तो थी नहीं तो मौसी ने hi नेहा दीदी की स्कूटी ले जाने को कह दिया तो मैं स्कूटी से चला गया . मंजू म क घर पहुंचा तो वो में बैठी पेपर चेक कर रही थी . चेहरे पर हल्का नज़र का चश्मा लगाए वो सिंपल से कपड़ों में भी बाला की हसीं लग रही थी . मैं तो उन्हें देखता hi रह गया .

मंजू : ऐसे देख क्या रहे हो ? बैठो .

अमित : कुछ नहीं , आप बहुत खूबसूरत लग रही हैं .

मंजू : शरमाते हुए ) क्या लोगे ?

अमित : जो भी आप ख़ुशी से दे दें .

मंजू : मुस्कुराते हुए ) खैर तो है ? आज बड़ा रोमांटिक हो रहे हो .

अमित : आप को देख कर किसका मन नहीं करेगा रोमांस करने को .

मैं मंजू म क पास बैठता हुआ बोलै . उन्होंने अपना चश्मा उतर कर एक तरफ रख दिया और उठने लगी. शायद वो मेरी बातों से शर्मा रही थी और वहां से भाग जाना चाहती थी . वो उठने लगी तो मैंने उनका हाथ पकड़ कर वापिस बिठाते हुए उन्हें अपने गॉड में खिंच लिया . वो एक डैम से मेरी गॉड में बैठ गयी .

मंजू : छोडो मुझे , क्या कर रहे हो ? मैं तुम्हारे लिए कुछ लती हूँ .

अमित : किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं . आपके इन रसीले होंठों का शहद hi पीला दीजिये बस उम्मम्मम्म

मैंने मंजू म क सर क पीछे हाथ रख कर उनके सुर्ख गुलाबी होंठ अपने होंठों में कैद कर लिए और उन नरम नाज़ुक होंठों को प्यार से चूसने लगा . मंजू म ने भी कोई विरोध नहीं किया और मेरा साथ देने लगी . मेरे गले में बहन दाल कर उन्होंने खुद को सेट कर लिया मेरी तरफ थोड़ा सा घूम कर . मैंने भी उन्हें अपने बाज़ुओं में लपेट लिया और हूँ प्रेमियों को तरह एक दूसरे क होंठ चूमने लगे .

मंजू : उम्म्म उम्म्म्म उम्म्म्म आअह्ह्ह अब छोडो . मैं तुम्हारे लिए कुछ लती हूँ. पड़े करने आये हो न तो पड़े करो . ये सब एक्साम्स क बाद कर लेना . तब मन नहीं करुँगी , पर पहले पड़े .

इतना कह कर मंजू म मेरी गॉड से उठ गयी .

अमित : पर थोड़ी देर प्यार भी तो कर सकते हैं न .

मंजू : no बिलकुल नहीं . मैं नहीं चाहती क तुम स्टडी से कोम्प्रोमाईज़ करो. मैं तुम्हारी hi हूँ. जब चाहो जो चाहो कर लेना पर अभी नहीं.

इतना कह कर मंजू म किचन में चली गयी . मैं उन्हें जाता हुआ देखने लगा और सोचने लगा क वो मुझसे सच में दिल से पुर करती हैं. वासना तो बिलकुल भी नहीं है उनमे. ये सिर्फ प्यार है. मेरी माँ की तरह और फॅमिली क बाकि सदस्यों की तरह hi वो मेरी केयर करती हैं . मैं सोचता हुआ किताब खोल कर बैठ गया और कुछ देर में hi मम कॉफ़ी ले आयी .

मंजू : लो पहले कफ पियो फिर पड़े करना .

अमित : कॉफ़ी की क्या ज़रूरत थी . मैंने तो जो पीना था वो पि तो लिया था .

मंजू : शरमाते हुए ) कुछ ज्यादा hi रोमांटिक हो रहे हो बात क्या है ?

अमित : कुछ नहीं , बस आज दिल किया आपको प्यार करने का तो ,,, मगर आपका तो दिल hi नहीं है .

मैंने जान बुझ कर ऐसा कहा था मज़ाक में पर मंजू म एक डैम से सीरियस हो गयी .

मंजू: तुम्हे ऐसा लगता है ? तुमसे प्यार करने को मैं कितना तरसती हूँ ये सिर्फ मैं hi जानती हूँ. जो सुकून मुझे तुम्हारी बाँहों में मिलता है वो और कहूं नहीं है . मैं तो सपनो में भी बस तुम्हे hi देखती हूँ. इन नहीं चाहती क तुम्हारी स्टडी पर कोई असर हो इस लिए खुद को रोक रखा है और तुम ऐसा सोच रहे हो ? अगर तुम्हारे मार्क्स काम आये तो क्या मुझे ाचा लगेगा . क्या मैं नहीं जानती कॉलेज में तुम्हारे मार्क्स काम आने पर तुम्हारे साथ क्या हो सकता है ? फिर भी अगर तुम्हारा दिल है तो कर लो जो करने का दिल है मैं नहीं रोकूंगी .

मंजू म ने इतना सीरियस हो कर ये बात कही तो मेरा मन भी भर गया . मैंने तो ऐसे hi मज़ाक में कह दिया था और वो इतनी सी बात पर सीरियस हो गयी . मैं उठ कर उनके पास गया और उन्हें गले से लगा लिया .

अमित : मैंने तो ऐसे hi मज़ाक में कह दिया था प्लीज आप ऐसा मत सोचें . मैं जनता हूँ आप मेरे भले क लिए ये सब कर रही हैं . मेरा वो मतलब नहीं था .

मंजू की आँखों में नमी आ गयी थी . मैंने उनकी आँखों को साफ किया और दोनों आँखों को चूम लिया .

अमित : प्लीज ऐसा मत करिये , मैं आपको हमेशा हस्ता मुस्कुराता हुआ देखना चाहता हूँ. आपकी आँखों में ये आंसू मेरी जान ले .......

मंजू म ने मेरे होंठों पर हाथ रख दिया और मुझे कास क गले से लगा लिया .

मंजू : तुम्हारी जान जाने से पहले मेरी जान चली जाएगी . मेरी ज़िन्दगी में सिर्फ तुम hi तुम हो. अगर तुम नहीं तो मैं भी नहीं. दोबारा ऐसा सोचना भी मत. तुम पास होते हो तो लगता है मैं भी ज़िंदा हूँ वर्ण मेरी ज़िन्दगी में और है hi क्या . दिल को हमेशा ऐसा hi लगता है जैसे हमारा रिश्ता जन्मो का है . ज़रूर हम पहले भी मिले हैं .

अमित : मुझे भी ऐसा hi लगता है. हम आज नहीं बहुत पहले से एक दूसरे क हैं.

मंजू : चलो अब कॉफ़ी पि लो वर्ण ठंडी हो जाएगी .

अमित : ऐसे नहीं , पहले आप मुस्कुराओ.

मंजू म मेरी बात पर मुस्कुरा दिए तो उनकी मासूम सी मुस्कान देख कर मेरा दिल भी खुश हो गया . फिर हमने साथ में कॉफ़ी पि. उसके बाद मम मुझे कुछ इम्पोर्टेन्ट क़ुएस्तिओन्स बताने लगे और ऐसे hi 2 घंटे बीत गए . मैंने फ़ोन साइलेंट कर रखा था . जब किताब बंद कर क फ़ोन देखा तो करुणा दीदी निधि दीदी की मिस कॉल्स आयी हुई थी . मैं मंजू म से इज़ाज़त लेकर वापिस घर को निकल गया . घर पहुंचा तो निधि दीदी की कार बहार hi कड़ी थी . मैं समझ गया क दीदी आज भी यहीं रहेंगी . घर क अंदर आया तो हॉल में करुणा दीदी क साथ निधि दीदी और रीता मौसी बैठी हुई थी . निधि दीदी ऑफिस ड्रेस में hi थी . दीदी को देख कर मुझे ख़ुशी हुई और उनका भी वैसा hi रिएक्शन था .

करुणा : बाँदा काम से काम फ़ोन तो उठा लेता है . कितने फ़ोन किये तुझे .

अमित : वो मैं पढ़ रहा था तो फ़ोन साइलेंट पर किया हुआ था .

करुणा : ऐसा भी क्या पढ़ना क तुझे फ़ोन का भी नहीं पता. दीदी ने भी तुझे फ़ोन किये थे. पता है ?

निधि : छोड़ न करुणा , मुझे तो पता नहीं था वर्ण मैं करती hi नहीं . पढ़ाई भी तो ज़रूरी है न . आओ तुम खड़े क्यों हो ? बैठो .

रीता : तुझे तो पढ़ाई की चिंता है नहीं . उसे तो करने दे . आ बीटा बैठ मैं तेरे लिए कुछ लती हूँ .

अमित : अरे नहीं मौसी , ज़रूरत नहीं. अब बस एक बार खाना hi खाऊंगा . दीदी आप कब आयी ? कोई काम था क्या मुझसे ?

निधि : क्यों ? बिना काम क नहीं आ सकती ? वो मैं इधर अपनी एक फ्रेंड को छोड़ने आयी थी तो सोचा सब से मिल कर hi चलती हूँ .

मैं बात करता hi दीदी क साथ hi बैठ गया .

रीता : ाचा किया बीटा , आ जाया कर . तेरा अपना hi तो घर है . तुम दोनों ए हो तो घर में रौनक आ गयी है.

निधि : ये जहाँ जाता है रौनक आ hi जाती है. इसी लिए तो मैं भी चली अति हूँ.

करुणा : वह वह , ज्यादा चने क झाड़ पर मत चढ़ाओ इसे दीदी . वर्ण फिर खुद को हीरो समझने लगेगा .

निधि : इसमें समझना क्या , वो तो है hi.

रीता : और नहीं तो क्या , मेरा बीटा लाखों में एक है .

ऐसे hi कुछ देर हमने बातें की और फिर मौसी खाना बनाने किचन में चली गयी. निधि दीदी भी जल्दी से ऊपर रूम में गयी और कपडे चेंज कर क वापिस आकर मौसी की हेल्प करने लगी .

करुणा : अब क्या करेंगे ? लगता है दीदी आज भी यहीं रहेंगी. मैंने तो सोचा था आज रत हम ,,,, मेरी किस्मत hi ख़राब है. हर बार कोई न कोई पन्गा पद जाता है .

अमित : आप ऐसा क्यों सोचती हो. मैं हूँ न . आप जैसा कहेंगी वैसा hi होगा. वैसे भी एक्साम्स क बाद तो छुट्टियां हैं न . आप गाओं आ जाना .

करुणा : वो तो मैं वैसे भी आने वाली हूँ . पर यहाँ भी तो थोड़ा टाइम दे सकते हो न.

अमित : कोई बात नहीं , जैसे hi टाइम मिलेगा देख लेंगे .

करुणा : कल तो छुट्टी है न तुम्हारी भी तो क्यों न कल हूँ कहीं बहार चलें .

अमित : दीदी बस अब लास्ट एग्जाम hi तो रह गया है. उसके बाद जैसा आप कहें .

करुणा दीदी ने इस बात पर मुँह बना लिया . पर फिर मन भी गयी. हम आपस में बातें करते रहे . इतने में खाना बन गया और फिर नेहा दीदी को भी बुला लिया और हम सबने साथ में खाना खाया . रीता मौसी क चेहरे पर एक अलग hi मुस्कान थी. वो मुझे नज़रों में hi यद् दिला रही थी क आज रत मैंने उनके साथ सोना है . पर निधि दीदी क होने की वजह से मुझे ये मुश्किल लग रहा था . खैर खाना खाने क बाद सब अपने अपने कमरों में चले गए . निधि दीदी भी मेरे रूम में आ गयी . कुछ देर बाद मौसी हमारे पास आयी और अपने साथ मिल्क शेक लेकर आयी.

रीता : चलो बचो पहले ये मिल्क शेक पिलो . मैंने स्पेशल बनाया है .

निधि : मौसी मैं बाद में पीलूँगी.

रीता : बाद में क्यों? अभी पियो मेरे सामने. मैंने इतने प्यार से बनाया है .

निधि दीदी मन कर रही थी पर मौसी ने जिद कर क दीदी को मिल्क शेक पीला दिया . और मैंने भी पि लिया .

रीता : ाचा अब तुम दोनों आराम से सो जाओ मैं भी जा रही हूँ .

जाते जाते मौसी मुस्कुराती हुई आँखों hi आँखों में कुछ कहती हुई चली गयी . कुछ देर बाद दीदी मेरे साथ बीएड पर लेट गयी. उन्हें नींद आ रही थी . मैं अभी पड़ना चाहता था पर दीदी मेरी बाजु पर सर रख कर सोना चाहती थी तो मैं उनके साथ लेट गया . कुछ hi देर में दीदी को नींद आ गयी . मैं ऑंखें बंद कर क वैसे hi लेता था हुआ था क एक घंटे बाद मेरे कमरे का दरवाज़ा खुला . लाइट बंद थी तो मुझे पता नहीं चल रहा था क कौन है दरवाज़े पर . रीता मौसी ता करुणा दीदी में से hi कोई हो सकता था . मैंने अपनी तरफ से कोई सवाल नहीं किया और वैसे hi लेता रहा. दूसरा मुझे दर भी था क कहीं दीदी न उठ जाये . तभी वो साया बीएड क पास आया और अँधेरे में hi बिस्टेर पर ढूंढते हुए मेरे ऊपर हाथ रख कर अचे से मुझे चेक किया और फिर हिलाया .

‘ उठो अमित , सो गए क्या ? ‘ धीरे से hi फुसफुसाहट थी पर मैं पहचान गया क ये रीता मौसी हैं.

अमित : धीरे से ) क्या हुआ मौसी ? आप यहाँ क्यों आयी हैं ? दीदी यहीं हैं .

रीता : तुम्हे नहीं ओट मैं क्यों आयी हूँ? चलो जल्दी उठो और मेरे साथ चलो.

अमित : मौसी दीदी यहीं हैं प्लीज आप जाओ

रीता : उसकी चिंता मत करो. वो सुबह तक नहीं उठने वाली . मैंने दूध में नींद की दवा मिलकर पिलाई है सबको .

मैं मौसी की बात सुन कर हैरान था क मौसी क्या कर रही हैं. पर अब दीदी की तरफ से मैं निश्चिन्त था और इस लिए उठ गया . मेरे बीएड से उतारते hi रीता मौसी ने मुझे बाँहों में भर लिया और मुझे किश करने लगी .

रीता : उम्म्म्म उम्म्म्म मऊआअह आज की रत कोई मुझे इतना पुर दो क मेरी साडी प्यास बुझ जाये. दोपहर से आग लगी हुई है .

अमित : जैसा आप कहेंगी वैसा hi होगा. पर आज मैं यहाँ से भी करूँगा . चलिए अब .

रीता : ककक आअह्ह्ह्ह कर लेना अब चलो नीचे

मैंने रीता मौसी की एक हाथ से चुचो मसलते हुए दूसरे हाथ से उनके चूतड़ भी मसल दिए. हम दोनों नीचे मौसी क कमरे में आ गए. कमरे में आते hi मौसी ने अपने बदन पर लिपटी मैक्सी को एक झटके से उतर कर फेंक दिया और वो पूरी नंगी हो गयी. क्यूंकि नीचे उन्होंने कुछ नहीं पहना था . मौसी का दूधिया बदन नंगा देख कर एक झटके में मेरा लैंड खड़ा हो गया . मैंने आगे बढ़ कर मौसी को बाँहों में भर लिया और किश करते हुए उनके चुके और चूतड़ मसलने लगा . मौसी भी पागलों को तरह मुझसे किश करने लगी और मेरे होंठ करने लगी. वो अपनी टंगे मेरे साथ रगड़ रही थी. मैंने हाथ नीचे लेजाकर उनकी छूट पर रखा तो वो एक डैम भट्टी की तरह दे हक़ रही थी और पनिया गयी थी.

रीता : उम्म्म उम्मम्ममुआअह्ह्ह्ह जल्दी इसे बहार निकालो . मुझसे और नहीं रुका जाता .

मौसी ने मेरा लैंड लोअर क ऊपर से मसलते हुए कहा. और मेरे कोई जवाब देने से पहले जल्दी से घुटनो पर बैठ कर मेरा लोअर अंडरवियर क साथ नीचे खिंच दिया . लैंड तो पहले hi अकड़ चूका था . कपड़ों से बहार निकलते hi स्प्रिंग की तरह उछलने लगा. मौसी ने जल्दी से उसे हाथ में पीड़ा और अछि तरह मुठियाएँ क बाद सुपडे को मुँह में भर लिया . मौसी किसी प्रोफेशनल की तरह लैंड को चूसने लगी. कमरे में पूरी रौशनी थी और मौसी को ऐसे मस्ती में लैंड चूसते देख कर मेरे अंदर भी गर्मी बढ़ने लगी थी. मेरे हाथ मौसी क सर पर चले गए . मैं उनका सोर पकड़ कर उनके मुँह में धक्के लगाने लगा. मौसी भी आधे से ज्यादा लैंड अपने गले तक ले कर ज़बरदस्त सकिंग कर रही थी. मैं मस्ती में खोया हुआ था .

रीता : ुंग्गहह ुँघठ गुणन गुणन सारूउप सारूउप ओह्ह्ह उम्मम्मम मुहाहह कितना बड़ा और सख्त है ये . जितनी बार भी इसे अंदर लेती हूँ हर बार दर्द देता है पर फिर भी मज़ा अत है. काश मैं इसे रोज़ अंदर ले सकती. उम्म्म उंगगग ुँघठ

अमित : कक्कक्कक्स मौसी आप इतनी गरम कैसे हैं कक्कक्क्स ऊह्ह्ह्ह आप तो अभी भी पूरी आग हैं. पता नहीं मौसा जी आपके साथ कैसे करते होंगे .

रीता : ुँघठ ुँघठ मूकअहह अब उनसे कुछ नहीं होता . होता तो मैं तुम्हारे साथ ये सब नहीं कर रही होती. किस्मत अछि थी जो तुम मिल गए वर्ण मैं तो बहार किसी को ढूंढ रही थी अपनी आग बुझाने क लिए. उम्म्म्म उम्म्म्म कितना तड़पती थी मैं . बेटियों की परवाह थी तो घुट घुट क जीती रही वर्ण ये आग मुझे सड़क पर क जाती. उम्म्म्म उम्म्म अब तो तुम hi मेरी आग शांत कर सकते हो उम्म्म्म उम्म्म बोलो करोगे न अपनी मौसी को ठंडा ?

अमित : आअह्ह्ह्हह मौसी मेरे होते आपको तड़पने को ज़रूरत नहीं. आपको सेवा करना मेरा फ़र्ज़ है. ककक कोई बहार वाला आकर अगर ये सब करता तो कितनी बदनामी होती. मेरी बहनो की ज़िन्दगी बर्बाद हो सकती थी . मैं आपको साडी आग बुझा दूंगा कक्कक्स

रीता : चल अब जल्दी से उसे घुसा कर छोड़ दाल मुझे . जल्दी कर

इतना कह कर मौसी वहीँ मेरे सामने घोड़ी बन गयी और अपने हाथ बीएड पर रख लिए. मैंने जल्दी से अपने कपडे उतरे और मौसी गोल कातिल बड़ी गांड को मसलते हुए अपना लैंड पानी बहती छूट पर सेट कर क ज़ोरदार धक्का मारा .

रीता : आअह्ह्ह्हह कक्कक्स माआआ ये मुसल हर बार मेरी जान hi ले लेता है. आआह्ह्ह्हह

मौसी की बात सुन कर मैंने एक ज़ोरदार धक्का मर कर जड़ तक लैंड छूट में घुसा दिया जिससे मौसी चीख पड़ी . पर मैंने उनके चीखने की परवाह न करते हुए उनकी कमर पकड़ कर ज़ोरदार धक्के मरने शुरू कर दिए . मौसी को ऐसी hi चुदाई पसंद थी. और मैं वो hi कर रहा था . मौसी आज कुछ ज्यादा hi चीख चिल्ला रही थी. उन्हें भी शायद पता था क सब दवा की वजह से गहरी नींद में हैं. मैं मौसी क बाल पकड़ कर ऊपर खींचता हुआ ज़ोर ज़ोर से धक्के मर रहा था . मौसी क चूतड़ों से तकर कर मेरी झंगे अलग hi साउंड पैदा कर रही थी. मौसी क शोर और ढकों क साउंड क साथ कमरा गूँज रहा था . मौसी ज्यादा देर रुक नहीं पायी और उनकी छूट से पानी बहने लगा. मौसी झड़ते hi निढाल होने लगी तो मैंने उन्हें बिस्तर पर लेता दिया और उनकी टंगे उठा कर अपने कन्धों पर रख कर फिर से रेल गाडी चला दी. मैं मौसी की ऐसी धुआंधार चुदाई कर रहा था क उनकी साडी गरमी आज निकल दूँ. कुछ hi देर में मौसी एक बार फिर से झाड़ गयी तो मैंने लैंड बहार निकल लिया.

अमित : चलो मौसी घुटनो पर हो जाओ अब मैं तुम्हारी गांड फाड़ूंगा

रीता : आह्हः आअह्ह्ह्हह हहहह हहहहह सांस तो लेने दे बीटा. फिर फाड़ लेना . हहहह हहहह

मौसी की साँसे दुरुस्त होने तक मैंने इंतज़ार किया और फिर वो खुद hi घुटनो पर चौपाया हो गयी . मैंने मौसी क बड़े बड़े चूतड़ खोल कर सुराख़ को देखा . ब्राउन रंग का वो छेड़ छोटा सा लग रहा था पर यहाँ मैं पहले भी लैंड को घुसा चूका था इस लिए कोई मुश्किल नहीं थी. मौसी क छूट रास से भीगा हुआ लैंड मैंने गांड पर सेट किया तो मौसी बोली

रीता : बीटा आराम से डालना तेरा ये मुसल छूट में लेना hi मुश्किल होता है और जब तू पीछे डालता है तो 2 दिन ठीक से बैठ भी नहीं जाता

अमित : चिंता मत करो मौसी आराम से डालूंगा

इतना कह कर मैंने लैंड को हैंड क छेड़ पर दबाते हुए अंदर घुसना शुरू किया तो धीरे धीरे लैंड अंदर घुसने लगा. पर मौसी दर्द से सिसकने लगी थी. मैं आधा लैंड घुसने तक लगातार ज़ोर लगता रहा . फिर मैं रुका और मौसी की पीठ को झुक कर चूमने लगा . मौसी का बदन पसीने से भर गया था . साथ hi मैंने एक हाथ नीचे ले जा कर उनकी छूट को मसलना शुरू कर दिया . मौसी जब कुछ नार्मल हुई तो मैंने लैंड को बहार खिंच कर उतने से hi धक्के मरने शुरू कर दिए. धीरे धीरे मौसी को भी मज़ा आने लगा और वो खुद hi अपनी गांड पीछे धकेलने लगी.

रीता : उफ्फ्फ्फ़ ओह्ह्ह्ह कक्कक्क्स उम्म्म्म फ़क फ़क ज़ोर से करो पूरा दाल दो उम्म्म ककक मारो ज़ोर से फाड़ दो मेरी गांड और तेज़ करो .

मौसी मज़े में मुझे ज़ोर से करने को कहने लगी तो मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और ज़ोर से धक्के मरता हुआ पूरा लैंड गांड में घुसाने लगा . मौसी की गांड का कसाव मुझे चरम तक पहुँचाने लगा और मैं जानवर की तरह मौसी पर चढ़ कर उनकी गांड ज़ोर ज़ोर से मरने लगा .

रीता : आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह आअह्ह्ह एआइइइइ माआ मर गयीईइ आआह्ह्ह फाड़ डाली मेरी गांड ाःह और ज़ोर से मर्डरर आआह्ह्ह्ह माआ मर गयीईइ

अमित : ले मौसी और ले बहुत आग लगी है न तेरे अंदर आज तेरी साडी आग बुझा दूंगा अपने पानी से

रीता : बुझा दे आआह्ह्ह माआ फाड़ दाल निकल दे अपना ककक आआह्ह्ह्ह अपना पानी निकल दे मुझे पीला दे भर दे मेरी गांड में आअह्ह्ह माआआआआ

अमित : ले मौसी ये ले ,,,, ले ले सारा पानी अपनी गांड में आअह्ह्ह्ह

आखरी धक्के ज़ोर से मरता हुआ मैं मौसी क ऊपर hi गिर गया और जड़ तक लैंड मौसी की गांड में घुसा कर उनकी गांड को अपने पानी से भरने लगा. मौसी मेरा भर सेह नहीं पायी और बीएड पर hi गिर गयी. मैं मौसी क ऊपर था और हम दोनों hi हांफ रहे थे . मौसी की ऑंखें मज़े में बंद थी. मेरा भी हल कुछ ऐसा hi था. तभी मेरी नज़र खिड़की पर गयी जो थोड़ी खुली हुई थी. उसे देख कर मेरी जान hi निकल गयी.

अमित : डीडीई
 
भाई लोगो तबियत ठीक नहीं है कल से इस लिए कुछ लिख नहीं पाया . कोशिश करूँगा एक दो दिन में अपडेट दे सकूँ.
 
भाई लोगों कल अपडेट दूंगा . आज लिख रहा हूँ .
 
अपडेट 220



करुणा दीदी को खिड़की पर देख मेरे होश hi उड़ गए थे. कुछ पल को तो मेरी सोचने समझने की शक्ति जैसे शुन्य हो गयी थी. मैंने सपने में भी नहीं सोचा था क ऐसा मंज़र भी सामने आ सकता है. रीता मौसी तो मदहोश हुई पड़ी थी और मैं भी उनके ऊपर था. हम दोनों क जिस्म पसीने से भरे हुए थे मगर अब मुझे अपना जिस्म सार्ड पड़ता लग रहा था . मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा था क क्या करुणा क्या नहीं. होंठ मनो सील गए थे ऑंखें मनो पालक झपकना भूल गयी थी. और दिल की धड़कन मनो रुक रही थी. मैं एक तक दीदी को देख रहा था . हम दोनों की नज़रें मिली हुई थी . दीदी की आँखों में कुछ नमी थी और गुस्सा भी. तभी वो वहां से पीछे हैट गयी और गौण हो गयी. शायद वो ऊपर अपने कमरे में भाग गयी थी. दीदी क हटने क बाद मुझे होश आया और मैं जल्दी से मौसी क ऊपर से उठा. रीता मौसी तो सुध बुध खोये आनंद क सागर में डूबी पड़ी थी और यहाँ मेरी आँखों में अँधेरा छ रहा था. मौसी को कुछ कहने की मेरी हिम्मत नहीं हुई. मैंने जल्दी से अपने कपडे पहने , मुझे खुद पर गुस्सा आ रहा था क मैं इतना लापरवाह कैसे हो गया ? क्यों मैंने खिड़कियां दरवाज़े पहले चेक नहीं किये ? मौसी ने तो कहा था क सबको दूध में दवा मिला कर दी है तो फिर दीदी जग कैसे रही है ? ये भी एक बड़ा सवाल था . खैर मैंने मौसी क ऊपर बीएड शीट दाल दी और जल्दी से कमरे से निकल कर ऊपर की तरफ भगा. वैसे तो मेरी हिम्मत नहीं थी दीदी का सामना करने की पर दिल में ये भी आ रहा था क कहीं वो कुछ गलत न कर बैठें या फिर नेहा दीदी या निधि को न कुछ बता दें . वैसे तो करुणा दीदी मुझसे प्यार करती थी और हमारे बिच भाई बहिन वाला प्यार नहीं बल्कि बर्फ गफ वाला प्यार था मगर जैसा मैंने उनकी आँखों में गुस्सा देखा उसे देख कर मुझे दर लग रहा था. वैसे भी वो थोड़ा गुस्से वाली भी तो थी . मैं सीढ़ियां चढ़ कर जैसे hi ऊपर पहुंचा तो करुणा दीदी क कमरे का दरवाज़ा खुला हुआ hi था . मैं जैसे hi अंदर घुसा तो करुणा दीदी को बीएड पर बैठा पाया. उनका चेहरा दूसरी तरफ था और बीएड क किनारे बैठी थी . मैंने निचे बैठ कर उनके पाऊँ पकड़ लिए

अमित : मुझे माफ़ कर दो दीदी , प्लीज मुझे माफ़ कर दो .

करुणा : रट हुए ) तुझे शर्म नहीं आयी ? वो मेरी माँ है और तेरी मौसी . और तू उनके साथ ... छियई .

करुणा दीदी रो रही थी और उनकी आँखों से आंसू बहते देख मेरी ऑंखें भी भर आयी. दीदी क दुःख का कारन मैं था . चाहे हकीकत जो भी हो. चाहे हमारे बीच जो रिश्ता था वो समाज की नज़रों में स्वीकार्य नहीं था पर फिर भी उनकी नज़रों में आज मैं खुद अपनी नज़रों में hi दोषी ान गया था . करुणा दीदी अपनी जगह सही थी आखिर उन्होंने मुझे सब कुछ तो दे दिया था और फिर भी मैं मौसी क साथ वो सब कर रहा था. हालाँकि सचाई कुछ और थी पर फ़िलहाल मैं उनकी नज़रों में दोषी था. उसी समय में मुझे एक hi बात सही लगी और वो ये क सारा दोष मैं अपने ऊपर hi लेलूं. ताकि मौसी दीदी क नज़रों में गलत साबित न हो . वर्ण माँ बेटी क बीच का रिश्ता कड़वाहट भरा हो जाना था . और मैं ऐसा कटाई नहीं चाहता था . मैं तो कभी कभी उनके यहाँ अत था पर उन्हें तो हर रोज़ हर पल यहीं एक दूसरे क साथ रहना था

अमित : मुझे माफ़ कर दो दीदी . सब मेरी गलती है. मैं hi भटक गया था. मैं बहुत बुरा हूँ. मैं माफ़ी क भी लायक नहीं हूँ. पर इस सब में मौसी का कोई कसूर नहीं है. सब गलती मेरी hi है. मैंने hi उन्हें मजबूर किया था . आप को जो सजा देनी है मुझे दो मैं उफ़ नहीं करूँगा . मगर प्लीज मौसी को गलत मत समझना . मैं वडा करता हूँ क कभी आपको अपनी शकल भी नहीं ......

मेरी बात पूरी होने से पहले दीदी ने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया .

करुणा : एक डैम चुप , समझा ? तुझे क्या लगता है मुझे कुछ नहीं पता ? तू जो कहेगा मैं वो मन लुंगी ? सब जानती हूँ मैं .

दीदी की बात सुन कर मैं हिल गया. इसका मतलब दीदी को सब कुछ पता है . मैं हैरानी से दीदी को hi देख रहा था .

करुणा : दोपहर को hi मुझे लगा था क कुछ तो गड़बड़ है जब मैं कॉलेज से वापिस आयी थी. माँ मुझसे छुपाने की कोशिश कर रही थी पर उनकी लिपस्टिक गायब थी और उनकी हालत देख कर मुझे लग hi रहा था क वो कुछ और कर रही थी पर तुम्हारे साथ वो ये सब कर सकती हैं मैंने सोचा नहीं था. मगर तुम्हारी हालत भी कुछ वैसी hi देख कर मुझे शक हो गया. पेण्ट में तम्बू बना रखा था जो अपने आप तो नहीं बना होगा . सोचा तुझसे पूछूँगी पर तू घर से निकल गया . रत को भी दीदी आ गयी तो मैं पूछ नहीं पायी. मैं तेरे पास आ hi रही थी क माँ को ऊपर आते देखा तो मैंने बीएड पर सोने को एक्टिंग करने लगी. और वो मुझे देखने क बाद तेरे कमरे में चली गयी . मुझे लगा ज़रूर कुछ तो होगा जो मैं इतनी देर रत तेरे कमरे में आयी हैं. और तभी से मैं सब देख और सुन रही थी छुप छुप क . तुम दोनों में जो भी बातें हुई हैं मैंने सब सुनी है. इस लिए झूठ मत बोल. मैंने खुद सब सुना है क माँ ने hi खुद इस सब की शुरुआत की है. मगर तू कैसे राज़ी हो गया ये सब करने को ? तुझे ज़रा भी ख्याल नहीं आया क तेरा उनके साथ क्या रिश्ता है ? वो मेरी माँ है और मेरे साथ वो सब करने क बाद भी तूने उनके साथ ,,,,,,, क्या कमी थी मुझमे जो तू मुझे छोड़ कर उनके साथ ये सब करने लगा?

दीदी रोटी हुई मुझसे सवाल कर रही थी और मेरी तो हिम्मत hi नहीं हो रही थी क मैं कुछ कह भी सकूँ. उनकी तरह मेरी आँखों से भी आंसू बह रहे थे. मगर दीदी का ऐसे रोना और दुखी होना मेरी वजह से hi था . मैं हिम्मत कर क उनसे फिर बात करने की कोशिश की

अमित : दीदी आप प्लीज पहले चुप हो जाइये .

मैंने जैसे hi दीदी क आंसू पोछने की कोशिश की तो उन्होंने मेरे हाथ झटक दिए.

करुणा: हाथ मत लगा मुझे . और प्लीज मुझे अकेला छोड़ दे . मुझे कोई बात नहीं करनी अभी. तू जा यहाँ से .

अमित : पर दीदी मेरी ........

करुणा : मैं कहा न मुझे अकेला छोड़ दे . जा यहाँ से .

दीदी गुस्से में थी और मेरी बात सुनने को भी तैयार नहीं थी . मैं उन्हें और दुखी नहीं करना चाहता था इस लिए वहां से उठा और अपने कमरे में चला गया. मेरी आँखों से नींद गायब थी . समझ नहीं आ रही थी क क्या करुणा . दीदी मेरी वजह से दुखी थी . और अब तो मुझे देखना भी नहीं छह रही थी . मैं खुद को कोस्टा हुआ अपने कमरे में टहलता रहा . बीएड पर निधि दीदी आराम से सोई हुई थी. और अब मुझ में इतनी भी हिम्मत. है हो रही थी क उनके पास भी बैठ जॉन. मैं खुद को बहुत अकेला महसूस कर रहा था . जो भी हुआ उसके लिए मैं खुद को hi दोष दे रहा था . दीदी की एक एक बात सच थी जो मुझे चैन से बैठने नहीं दे रही थी . मैं ऐसे hi अपने आपको कोस्टा रहा और कमरे अब अँधेरे की जगह रौशनी होने लगी थी. सुबह हो रही थी और कुछ hi देर में सब जागने वाले थे मगर मेरे अंदर हिम्मत नहीं थी क मैं किसी का सामना करूँ. इस लिए मैं चुपचाप घर से निकल गया . मुझे पता नहीं था क मुझे कहाँ जाना है और क्या करना है . पर अब एक पल भी यहाँ ठहरना मुझे गवारा नहीं था. आखिर मैं कैसे सामना करता करुणा दीदी का . बस इसी लिए घर से निकल गया . मैं पैदल hi चला जा रहा था बस अपनी सोच में डूबा हुआ . चलते चलते मेरे कदम खुद hi मंजू म क घर की तरफ मुद गए . और जब मैं उनके दरवाज़े तक पहुंचा तो मुझे होश आया क मैं उनके घर पर पहुँच गया हूँ. मंजू म क घर का दरवाज़ा खटखटाने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी. आखिर मैं यहाँ क्यों आया और क्या कहूंगा मैं उनसे ? यही सोच कर मैं वापिस मुड़ने लगा तो मंजू म की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी .

मंजू : अमित , तुम यहाँ ? इतनी सुबह ? कहाँ जा रहे हो ?

मंजू म की आवाज़ सुन कर मैं पलटा तो वो दरवाज़े पर hi कड़ी थी . उनके चेहरे पर मुस्कान थी मगर मेरा चेहरा देखते hi एक डैम से वो मुस्कान गायब हो गयी और वो तेज़ी से मेरी तरफ बरही और मुझे गले से लगा लिया . मैंने खुद को रोकने को बहुत कोशिश की मगर उनके गले से लगते hi मेरी आँखों में रुका हुआ पानी अपनी सीमाएं तोड़ कर बहार निकल आया और जहर जहर बहने लगा .

मंजू : क्या हुआ है ? तुम ऐसे ,,,,,, अंदर आओ पहले .

मंजू म मुझे अपने साथ अंदर ले गयी . दरवाज़ा बंद करते हुए वो मुझे सहर देते हुए अपने कमरे में खिंच कर ले गयी और बीएड पर बिठा दिया .

मंजू : बैठो यहाँ , मैं तुम्हारे लिए पानी ले कर आयी.

मंजू म किचन में चली गयी. उन्हें मेरी फ़िक्र हो रही थी. मुझे समझ नहीं आ रही थी क आखिर मैं उनके पस क्यों आया ? मैं छह कर भी ये बात तो किसी से कह भी नहीं सकता था . और उनके सवालों का अब मैं कोई जवाब भी नहीं दे सकता था. मंजू म जल्दी से पानी का गिलास लायी और मेरी बगल में बैठ कर अपने हाथों से वो पानी का गिलास मेरे होंठों से लगा दिया . न चाहते हुए भी मुझे वो पानी पीना पड़ा हालाँकि मेरा बिलकुल भी मन नहीं था .

मंजू : अब बताओगे बात क्या है ? तुम्हारी ऑंखें क्यों लाल हैं ? और तुम्हारा ये उतरा हुआ चेहरा ? कुछ हुआ है क्या ? प्लीज मुझे बताओ . मेरा दिल बैठ जा रहा है.

अमित : प्लीज मम मुझसे अभी कुछ मत पूछिए . बस इतना hi कह सकता हूँ क कोई दर वाली बात नहीं है. बस मुझसे एक गलती हुई है जिससे कोई मेरा अपना मुझसे बहुत नाराज़ हो गया है. मैंने उसका दिल दुखाया है. और अब मेरी हिम्मत नहीं हो रही क मैं उसका सामना करूँ. कुछ समझ नहीं आ रहा था क कहाँ जॉन पता नहीं कैसे मैं यहाँ आ गया . सॉरी मैंने आपको डिस्टर्ब.......

मेरी बात ख़तम होने से पहले मंजू म ने मेरे होंठों पर अपना हाथ रख दिया.

मंजू : शहहहहह ,,, मैं और तुम्हारी वजह से डिस्टर्ब ??? ऐसा कभी सोचना भी मत . बल्कि मुझे इस बात से कितनी ख़ुशी मिली है ये मैं hi जानती हूँ क तुमने ऐसी हालत में मुझे यद् किया मुझ पर भरोसा किया और यहाँ चले आये. ख़ुशी तो हूँ किसी क साथ भी बाँट सकते हैं मगर गम सिर्फ उसी क साथ बाँट ते हैं जिस पर हम भरोसा करते हैं जो दिल क करीब होता है.

मंजू म ने मेरी आँखों में देखते हुए गंभीरता से ये बात कही हलकी सी मुस्कान होंठों पर सजाये. सच hi तो कहा था उन्होंने मैं खुद को अकेला महसूस कर रहा था और किसी क साथ अपना दर्द बाँटना छह रहा था अगर गाओं में होता तो तो छोटी ममी मेरे करीब होती पर आज उनकी कमी मंजू म पूरी कर रही थी और न जाने क्यों मैं उनमे वही अपना पैन महसूस कर रहा था. मैं खुद को रोक न पाया और मंजू म क गले लग गया. मंजू म ने भी मुझे बाँहों में कास लिया और मेरी पीठ सहलाने लगी

मंजू : रिलैक्स , तुम नहीं बताना चाहते तो मैं भी नहीं पूछूँगी पर इतना कह देती हूँ क जो अपने होते हैं वो कुछ पल क लिए चाहे नाराज़ हो जाएँ पर हमेशा क लिए नहीं होते. जो भी तुमसे नाराज़ है वो ज़रूर मन जायेगा क्यूंकि तुमसे कोई ज्यादा देर नाराज़ रह भी नहीं सकता . सब भूल कर खुद को शांत करो और थोड़ा समय दो. सब ठीक हो जायेगा . आओ यहाँ लेट जाओ. रत भर सोये नहीं न तुम ?

मैंने मम की बात का कोई जवाब नहीं दिया पर शायद वो मेरी हालत से सब समझ गयी थी. इसलिए उन्होंने मुझे बीएड पर लिटाया और मेरा सर सहलाते हुए मेरे साथ hi लेट गयी. मुझे बहुत सुकून मिल रहा था . पता hi नहीं चला क कब मेरी ऑंखें बंद हुई और मैं नींद की आगोश में चला गया .

उधर निधि जब उठी तो खुद को बिस्तर पर अकेला पाया . उसे लगा क अमित शायद जल्दी उठ कर एक्ससरसीसे कर रहा होगा इस लिए वो फ्रेश हुई और दूध का गिलास गरम कर क ऊपर छत पर गयी मगर अमित वहां नहीं था . अमित को वहां न पाकर वो निचे आयी और सभी कमरों में अमित को तलाश किया . मगर वो कहीं न मिला . तब तक रीता उठ कर किचन में चाय बनाने क लिए आ गयी .

निधि : मौसी आपने अमित को देखा ?

रीता : अमित ? नहीं तो , वो तो अपने कमरे में hi होगा .

निधि : नहीं मौसी वो वहां नहीं है . बल्कि मैं तो छत पर भी देख कर आ रही हूँ वो वहां भी नहीं है

रीता : शायद बहार कहीं गया होगा . जाकर देखो तो दरवाज़ा बंद है या खुला है

निधि जल्दी से बहार का दरवाज़ा देखने क लिए आयी तो दरवाज़ा खुला था . मतलब अमित बहार गया है. क्यूंकि बाकि सब तो घर में hi थे . निधि को कुछ तसल्ली हुई और वो वापिस आ कर तैयार होने लगी . मगर उसके तैयार होने तक भी अमित वापिस नहीं आया. फिर उसने अमित को फ़ोन किया तो उसका मोबाइल बीएड पर hi पड़ा मिला . जिसे देख कर निधि क मन में चिंता होने लगी . निधि अंदर से बेचैन होने लगी . हालाँकि कोई ऐसी बात नहीं थी जिससे क अमित परेशां हो पर फिर भी न जाने क्यों उसे घबराहट हो रही थी . हो भी क्यों न , उसका दिल तो हमेशा अमित को आँखों क सामने देखना चाहता था . खुद को समझते हुए क शायद अमित मोबाइल साथ ले जाना भूल गया होगा कहीं बहार पार्क में गया होगा. ऐसी तसल्ली देती वो नीचे आ गयी . तब तक नेहा भी उठ कर बहार आ चुकी थी . करुणा अभी भी अपने कमरे में थी . वो जग तो चुकी थी पर रत जो कुछ भी उसने देखा था वो फिर से उसकी आँखों क सामने घूम रहा था . रीता नाश्ता बना रही थी और नेहा निधि दोनों साथ बैठी हलकी दुलकी बातें कर रही थी .

नेहा : दीदी अमित कहाँ है ? वो तो जल्दी उठ जाता है .

निधि : उठ तो आज भी जल्दी गया है . पर वो घर में नहीं है. शायद बहार कहीं घूमने निकल गया होगा . उसका फ़ोन भी घर पर hi रह गया है. मैं तो खुद उसी क बारे में सोच रही थी .

नेहा : क्या ??? वो घर नहीं है? और फ़ोन भी घर पर है? पर ऐसा तो उसने कभी नहीं किया . आपने माँ से बात की ?

निधि : मौसी को भी बता कर नहीं गया .

नेहा : क्या ?? आपने किसी और से पूछा ? मैं अभी मोहित को फ़ोन करती हूँ तब तक आप राधा और नैना से पूछिए .

नेहा जो हमेशा शांत hi रहती थी और सिर्फ किताबों में घुसी रहती थी वो एक डैम से अधीर हो गयी थी अमित को इस तरह घर से बिना बताये गायब होने पर . वो जल्दी से अपने कमरे में गयी और मोहित को फ़ोन लगा दिया मगर मोहित से पता चला को अमित उसके साथ नहीं है और न hi दोनों में आज कोई बात हुई है. उसके बाद नेहा बरी बरी से सबको फ़ोन करने लगी . और निधि भी हरकत में आ गयी थी. उसने भी नैना और राधा से बात की मगर बिना कुछ ज़ाहिर किये. जवाब सब तरफ से एक hi था क अमित ने आज किसी से बात नहीं को और न hi उसका कोई ऐसा प्रोग्राम था . अब तो नेहा की आँखों में नमी आने लगी थी और ऐसा hi हल निधि का भी था . मगर वो अभी भी खुद को कण्ट्रोल किये हुए थी. जैसे जैसे समय बीत रहा था हर पल क साथ उनकी बेचैनी बढ़ रही थी.

नेहा : दीदी कुछ पता चला ?

निधि : नहीं , उसकी किसी से कोई बात नहीं हुई है . तुझे कुछ पता चला ?

नेहा : नहीं दीदी मैंने सबको फ़ोन कर क पूछा सभी फ्रेंड्स से मगर वो किसी क साथ नहीं है और न hi किसी से बात की है उसने . दीदी मुझे बहुत घबराहट हो रही है . प्लीज आप कुछ करो .

निधि : घबरा मत वो शायद कहीं दूर निकल गया होगा.

नेहा : नहीं दीदी वो ऐसा कभी नहीं करता ज़रूर कोई बात हुई है. क्या आपके साथ उसकी कोई बात हुई थी ?

निधि : नहीं तो

नेहा : फिर ? करुणा ,,,, हाँ शायद उसे पता होगा .

नेहा जल्दी से सीढ़ियां चढ़ कर ऊपर करुणा क कमरे की तरफ भागी और उसी क पीछे पीछे निधि भी भागी . अब तो उसका मन उसे संभल नहीं रहा था . चाहे वो खुद को मजबूत दिखा रही थी मगर वो अंदर से कितना घबरा रही थी ये वही जानती थी . नेहा जब करुणा क कमरे में गयी तो करुणा बीएड पर लेती हुई थी और रत का वाक्य यद् कर रही थी .

नेहा : करुणा अमित कहाँ है ?

करुणा जो अपने hi ख्यालों में गम थी वो एक डैम से होश में आयी और अपनी दोनों बड़ी बहनो क चेहरे पर चिंता की लकीरें और भीगी ऑंखें देख उसका दिल भी घबरा गया .

करुणा : क्या हुआ दीदी ?

नेहा : मैंने पूछा अमित कहाँ है ? वो घर पर नहीं है . क्या तूने उसे कुछ कहा था ?

ये सुनते hi करुणा अंदर से हिल गयी. नेहा की बात मनो बम बन कर टूटी थी उस पर जिससे उसका कलेजा फैट गया . अमित की रोनी सूरत उसकी आँखों क सामने आ गयी क कैसे वो माफ़ी मांग कर उसे मानाने की कोशिश कर रहा था और उसने उससे बात तक नहीं की बल्कि अपने कमरे से चले जाने को कह दिया था और नजाने गुस्से में क्या क्या कह गयी थी. हालाँकि बाद में सब कुछ सोचती समझती वो इस निष्कर्ष पर पहुंची थी क जो भी हुआ उसने अमित की कोई गलती नहीं थी. क्यूंकि उसने सब कुछ तो अपने कानो से सुना था. क कैसे उसकी माँ वासना की आग में जल रही थी जिसे उसके पापा बुझा नहीं प् रहे थे . और वो किसी बहार वाले क साथ भी ये सब करने को तैयार हो चुकी थी मगर अमित ने उनकी आग को शांत करते हुए उनके घर की इज़्ज़त को बचाया था . और यही सब तो वो खुद भी अमित क साथ कर चुकी थी ऐसे में अमित या नई माँ को किसी तरह का दोष देना अब उसे गलत लग रहा था . वो ये सब अमित को बताना चाहती थी खुद बात कर क मगर उससे पहले hi नेहा ने आकर जो बताया उसने करुणा को हिला कर रख दिया . नेहा की बात का जवाब देने की बजाये वो एक झटके से उठी और नंगे पाऊँ सीधा अमित क कमरे की तरफ भागी मनो अमित अभी भी वहीँ हो. मगर अमित का बिस्तर खली था . ये देख कर करुणा की ऑंखें भी भर आयी और उसे अपनी गलती पर पछतावा होने लगा . क उसने अमित क साथ सही नहीं किया. आखिर उसकी क्या गलती थी. उसने तो हर किसी को संतुष्ट hi किया था अपने प्यार से फिर उसने ऐसा कैसे कह दिया उसे ? अपने कहे हुए एक एक शब्द से अब वो खुद hi लज्जित हो रही थी अंदर से. करुणा खुद को संभल न पायी और एक डैम से नीचे गिरती हुई बेडशीट को पकड़ कर रोने लगी. नेहा और निधि जो करुणा क पीछे hi भगति हुई आयी थी अपनी नटखट बहिन को ऐसे रोटा हुआ देख कर वो भी हैरान हुई . निधि ने जल्दी से करुणा को उठे और उसके आंसू पोछने लगी .

निधि : चुप ,, चुप कर . ऐसे रो क्यों रही है ? वो यहीं कहीं होगा . अभी आ जायेगा . तू चुप कर .

करुणा : रट हुए ) नहीं दीदी सब मेरी गलती है . मैंने उसकी बात नहीं सुनी . सब मेरी गलती है . मैंने उसके साथ ाचा नहीं किया . वो मुझसे नाराज़ हो कर चला गया है . दीदी प्लीज उसे वापिस बुलाओ मैं उससे माफ़ी मांगूंगी . प्लीज दीदी मैंने गुस्से में उसे कह दिया था मगर मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था प्लीज दीदी उसे बुलाओ

निधि और नेहा दोनों hi करुणा की बात सुन कर एक डैम से चौंक गयी.

नेहा : गुस्से में ) क्या कहा तूने उसे ? बोल , क्या कहा तूने उसे ? वो तेरी वजह से hi चला गया है न ? क्या हुआ था ? क्या कहा था तूने उसे ?

नेहा गुस्से में करुणा को दोनों बाजुओं से पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से हिलती हुई पूछ रही थी. नेहा को कभी ऐसे गुस्सा नहीं अत था पर अब जैसे वो अआप से बहार हो रही थी. निधि ने नेहा को पीछे हटाया .

निधि : क्या कर रही है नेहा ? ऐसे गुस्सा क्यों कर रही है ? पहले बात तो सुन ले उसकी . करुणा मुझे बता क्या हुआ था ? क्या कहा था तुमने उसे .

निधि ने फिर एक बार बड़ी बहिन होने और एक परिपाक शख्सियत होने का सुबूत देते हुए दोनों को सँभालते हुए कण्ट्रोल करने की कोशिश की .

करुणा : रट हुए ) मैंने गुस्से में उसे अपने कमरे से चले जाने को कहा था दीदी हँ .........

नेहा : गुस्से में ) पर तूने उसे क्यों कहा था कमरे से चले जाने को ? बोल क्यों कहा था ? क्या हुआ था ?

अब इस सवाल पर करुणा फस्स गयी थी. उसे समझ नहीं आ रहा था क अब वो क्या जवाब दे . किसी भी तरह की बात मुँह से निकलने पर इसका अंजाम क्या हो सकता है ये उसे अचे से पता था

करुणा : वो मुझे तंग के रहा था तो मैंने उसे गुस्से से कह दिया क वो कमरे से निकल जाये .

निधि : पर वो तुम्हारे पास कब आया ? वो तो मेरे साथ था न . और ऐसा क्या कह दिया उसने क तुम इतना गुस्से हो गयी.

निधि करुणा क जवाब से हैरान हो गयी थी क अमित रत को उसके पास क्यों गया था

करुणा : वो दीदी ,, वो अमित रत को पानी पिने क बाद किचन से ऊपर आ रहा था तो मैंने उसे देख कर अपने लिए पानी लेन को कहा तो वो मुझे आलसी कहने लगा मुझे गुस्सा आ गया तो मैं उसे गुस्से से बोल कर अपने कमरे में आ गयी. वो मेरे पीछे पीछे आ गया . तब मैंने उसे अपने कमरे से चले जाने को कहा था .

निधि को करुणा की बात सुन कर बिलकुल भी यकीन नहीं हुआ. क्यूंकि इतनी छोटी सी बात पर तो अमित ऐसे गुस्सा हो hi नहीं सकता था. और न hi करुणा जैसी लड़की इतनी छोटी सी बात पर उसे ऐसे दन्त सकती थी

नेहा : इतनी छोटी सी बात क लिए तूने उसे निकल जाने को कहा ? तुझे ज़रा भी शर्म नहीं आयी ऐसा करते हुए ? तेरे लिए शायद वो नहीं होगा पर मेरे लिए मेरा भाई है वो. अगर तेरी वजह से वो यहाँ से गया तो मैं कभी तेरे बात नहीं करुँगी .

इतना कह कर नेहा गुस्से में कमरे से निकल गयी. करुणा अभी भी रोये जा रही थी. मगर निधि इस जवाब से संतुष्ट नहीं थी

निधि : करुणा , सचाई क्या है मुझे बता . मैं जानती हूँ तू झूठ बोल रही है. ज़रूर बात कोई और है .

करुणा निधि क सवाल से चुप हो गयी और घबरा भी गयी क अब वो क्या जवाब दे .

निधि : देख मैं किसी से नहीं कहूँगी , लेकिन मुझे सच सच बता बात क्या है.

करुणा : दीदी ...........

‘ ये तूने क्या किया , तुझे ज़रा भी शर्म नहीं आयी ये सब करते हुए ? तू ऐसा कैसे कर सकता है? ‘ मेरी माँ या दिव्या मौसी दोनों में से कौन थी ये तो मैं नहीं जनता पर वो रोटी हुई आँखों से मुझसे ये सवाल पूछ रही थी क मैंने कैसे रीता मौसी क साथ ऐसे सम्बन्ध बनाये. मैं खुद भी रो रहा था . और मेरे मुँह से आवाज़ तक नहीं निकल प् रही थी. मगर माँ / मौसी की आँखों में आंसू देख कर मैं भी दर्द से भर गया और तड़प कर उठ बैठा . मैंने खुद को बीएड पर पाया यानि क मैं सपना देख रहा था . मगर ऐसा लग रहा था जैसे सब हकीकत में हो रहा है .

‘ क्या हुआ तुम ऐसे चीखे क्यों ? कोई बुरा सपना देखा क्या ? ‘ शायद मेरे मुँह से आवाज़ निकली थी जिससे मंजू म ने मुझे अपने बाँहों में भर लिया और मुझे सहलाते हुए मुझसे पूछने लगी

अमित : शायद सपना देख रहा था मम .

मंजू : मैं तो घबरा hi गयी थी . क्या देख रहे थे सपने में किसे देख रहे थे ? तुम एक डैम से माँ कह कर क्यों चीखे ? क्या माँ का सपना देख रहे थे ?

अमित : हम्म्म , माँ का hi था . वो मुझसे नाराज़ थी . बस इसी लिए ...

मंजू : टेंशन में थे न इस लिए ऐसा सपना आया होगा. रिलैक्स सब ठीक है. लगता है माँ क साथ hi कोई बात हुई है. खैर माँ क साथ तो कभी नाराज़गी ज्यादा देर रहती नहीं है. अब उठो और फ्रेश हो कर खाना खा लो . इतना कह कर मम उठ कर कमरे से बहार जाने लगी

अमित : टाइम कितना हुआ है मम?

मंजू : 12 बजने वाले हैं . जल्दी फ्रेश हो कर आ जाओ तब तक मैं खाना लगाती हूँ .

मन की बात सुन कर मैं जल्दी से बीएड से उठा . मैं इतनी देर तक सोता रहा क आधा दिन गुज़र गया . मैंने जल्दी से बाथरूम में जा कर खुद को फ्रेश किया और हॉल में आ गया . मम ने हम दोनों क लिए खाना लगा दिए . वो अभी भी सिंपल से कपड़ों में थी घर में पहनने वाले .

अमित : नाम आज आप कॉलेज नहीं गयी ?

मंजू : तुम्हे ऐसे छोड़ कर भला मैं जा सकती थी ? मेरे लिए तुमसे ज़रूरी कुछ भी नहीं है.

अमित : सॉरी मम मेरी वजह से ....

मंजू : सॉरी कहे की ? ये तो मेरी ड्यूटी है क मैं तुम्हारा ख्याल रखूं . और ये मम मम क्या लग रखा है? नाम भी तो ले सकते हो न मेरा. चलो अब खाना खाओ .

मंजू म को इस तरह अपनी परवाह करते देखना मुझे बहुत ाचा लग रहा था. हम दोनों साथ में खाना खाने लगे . मंजू ने अपने हाथों से मुझे खिलाया. अछि नींद लेने से मैं एक डैम रिलैक्स हो चूका था और रत का किस्सा भी दिमाग से बहार था इस वक़्त. खाना खाने क बाद

मंजू : घर पर बता कर निकले थे या ऐसे hi आ गए थे बिना बताये ? एक बार बात करलो घर



मंजू की बात सुन कर मेरा दिमाग चला तो मैंने अपनी जेब में हाथ डाला मगर मोबाइल जेब में नहीं था वो तो घर hi रह गया था. एक पल में hi मुझे टेंशन होने लगी क मैं बिना बताये घर से निकल आया हूँ और मोबाइल भी मेरे पास नहीं है . मौसी और बाकि सब को टेंशन हो रही होगी . तभी दरवाज़े पर बेल्ल बजी . मंजू म ने दरवाज़ा खोला तो सामने मोहित और निधि दीदी थे .....
 
अपडेट 221



मंजू : मोहित तुम यहाँ ?

मोहित : मम वो अमित यहाँ आया था क्या ?

निधि : प्लीज मम बताइये क्या अमित यहाँ आया था ?

मंजू : तुम ????

मोहित : ये निधि दीदी हैं अमित की सिस्टर

मंजू : ओह्ह्ह ाचा , आओ आओ अंदर आओ . अमित यहीं है. वो कल एग्जाम है न तो पड़ने क लिए आया था .

मंजू म ने मोहित और निधि को अंदर आने का राटा दिया . निधि की ऑंखें तो बस अमित को hi ढूंढ रही थी . मंजू क मुँह से अमित क वहां होने क सुनते hi वो तेज़ कदमो से अंदर आयी और अमित को सामने देख कर वो सब कुछ भूल कर अमित क गले जा लगी. अपने अंदर से उमड़ रहे जज़्बात को छुपाने की कोशिश करती हुई वो अमित क गले लग गयी. लाख कोशिश क बाद भी उसकी आँखों में हलकी सी नमी आ hi गयी थी . मंजू और मोहित बस दर्शकों की तरह देख रहे थे .

निधि दीदी जिस तरह आ कर मेरे गले लगी ऐसा लग रहा था मनो क बरसों बाद वो मुझसे मिल रही हो . वो मेरे साथ कास क गले लग गयी थी और मैं उनकी तेज़ चलती धड़कनो को साफ़ महसूस कर रहा था . मैंने बोलने की कोशिश भी की पर ज़ुबान से जैसे शब्द hi न निकल सके .

अमित : दीदी .....

मेरे मुँह से इतना hi निकला था क दीदी मुझसे अलग हुई . और मेरी आँखों में नाराज़गी से देखने लगी.

निधि : क्यों करते हो ऐसे ? बिना बताये कहीं भी चले जाते हो . तुम्हारे पीछे बाकि सब का क्या हल होता है कभी सोचा है ? काम से काम बता कर तो आ सकते थे या अपना फ़ोन hi अपने पास रख लेते. हूँ सब पर क्या बीतेगी ज़रा भी नहीं सोचा ?

अमित : दीदी वो .....

निधि : चुप रहो . पहले गलती करते हो फिर माफ़ी मांगने लगते हो . अब ऐसा नहीं चलेगा हर बार तुम ऐसे hi करते हो. इस बार तो तुम्हे सजा मिलेगी.

अमित : जो आप चाहे मुझे सजा दे दें . मैं मन नहीं करूँगा .

निधि : मैं न तुम्हे ,,,,,, छोडो पहले घर चलो . नेहा और करुणा बेचारी का बुरा हल है .

दीदी क मुँह से नेहा दीदी और करुणा दीदी क बारे में सुन कर मुझे भी फील हो रहा था क मैंने गलत किया पर उस वक़्त मैं इतना दुखी और अकेला महसूस कर रहा था क मुझे और कुछ सुझा hi नहीं .

मंजू : अरे तुम लोग बैठो तो सही खड़े क्यों हो ? पहली बार मेरे घर आये हो तो क्या ऐसे hi चले जाओगे? और अमित को कुछ मत कही इसमें इसकी गलती नहीं है. असल में कल एग्जाम की वजह से मैंने hi आज इसे यहाँ आने को कहा था . गलती से इसका मोबाइल शायद घर रह गया होगा . और हमें भी टाइम का ख्याल नहीं रहा .

निधि : गौर से मुझे और मंजू मम को देखते हुए ) कोई बात नहीं मम , पर इसे काम से काम बता कर तो आना चाहिए था . पता नहीं क्या क्या सोच रहे थे हम .

मंजू : मैं समझ सकती हूँ . और इसके लिए तुम लोग इसे सजा भी ज़रूर देना इतना तो बनता hi है. ाचा तुम लोग बैठो मैं कॉफ़ी बना कर लती हूँ .

निधि : no थैंक्स मम it’s ok . फ़िलहाल तो इसे घर लेकर जाना है . घर पर भी कोई है जो टेंशन में है. ( मेरी तरफ देखते हुए ) अब चलें ?

मैं भला अब क्या कहता . मैं मोहित क साथ दरवाज़े की तरफ बढ़ा तो मंजू म निधि दीदी क साथ थी .

मंजू : अमित बहुत मंटा है तुम्हे कई बार इसने तुम्हारा ज़िकर किया था . आज मिलना हो hi गया . वाकई में तुम बहुत अछि हो और लगता है अमित को बहुत प्यार करती हो.

निधि : शरमाते हुए ) वो है hi ऐसा हर कोई उससे प्यार करता है . वैसे मुझे लगता है क जैसे हम पहले भी कहीं मिल चुके हैं . मुझे यद् नहीं आ रहा क कहाँ . क्या आपको यद् है ?

मंजू : नहीं , मुझे तो नहीं लगता. शायद मेरी शकल किसी से मिलती होगी .

निधि : हो सकता है शायद ऐसा hi हो. एनीवे , आप से मिल कर बहुत ाचा लगा मम. अमित से मैंने भी आपकी बहुत तारीफ सुनी थी . वो हमेशा कहता रहता है क अपने उसकी स्टडी में बहुत हेल्प की है और करती भी हैं . आपकी बहुत रेस्पेक्ट करता है वो और आप हो भी इस काबिल . आप वक़्त निकल कर कभी हमारे घर भी आना . हम यहीं रहते हैं इसी शहर में .

मंजू : ज़रूर आउंगी जब माइक मिलेगा और तुम भी चली आना. तुमसे बात कर कर क मुझे भी ाचा लगा . Bye निधि bye अमित ध्यान से रेविसिओं कर लेना कल एग्जाम है और तुम भी मोहित .

मोहित / अमित : जी मम

मंजू म ने जाते जाते मुझे स्टडी करने का यद् दिलाया कहीं मैं उसे भूल न जॉन. हम सब ने विदा ली और गाड़ियों क पास आ गए .

मोहित : क्या यार तू भी कैसे कैसे पंगे करता है. बता क नहीं आ सकता था. कितनी टेंशन हो गयी थी सबको.

अमित : सॉरी यार गलती से हो गया. माफ़ करदे . पर तू दीदी को साथ लेकर यहाँ कैसे आ गया ? तुझे कैसे पता चला मैं यहाँ हूँ ?

मोहित : तो क्या करता ? दीदी कितना परेशां थी तेरी वजह से . मुझे तो खुद समझ नहीं आ रहा था. उधर कल्पना भी परेशां हो रही थी. फिर मुझे लगा क कल एग्जाम है तो शायद तू मम से मिलने आया होगा फिर मैंने पता किया क मम आज लीव पर हैं तो यहीं आ गया .

अमित : सॉरी दीदी मेरी वजह से आप को इतनी परेशानी हुई .

निधि : घर चल क बात करते हैं .

मोहित : ाचा दीदी मैं भी अब चलता हूँ . इसके चक्का में आज रेविसिओं रह गयी. आप घर ले जाकर इसकी खातिरदारी करो .

मोहित अपनी और निधि दीदी अपनी कार लेकर आये थे . मुझे निधि दीदी ने अपने साथ बिठा लिया और मोहित अपनी कार में वापिस चला गया . मैं निधि दीदी को hi देख रहा था . वो मुझसे नाराज़ लग रही थी मगर मोहित क सामने उन्होंने कुछ नहीं कहा था . कार में भी वो चुपचाप ड्राइव कर रही थी तो मैंने hi बात शुरू की .

अमित : दीदी आप नाराज़ हो न मुझसे , आप हो चाहे सजा दे दो पर प्लीज मुझसे नाराज़ मत होना .

निधि : इतनी hi परवाह है तो फिर ऐसे काम करते hi क्यों हो ? अगर घरवालों को पता चल जाता तो उन पर क्या बिट टी ? कभी सोचा है ? हमने तो मौसी को भी नहीं बताया उन्हें यही कहा क तुम स्टडी करने गए हो वर्ण अब तक सब टेंशन में आ चुके होते . इतनी सी बात क लिए कोई ऐसे घर से चला जाता है क्या ?

अमित : इतनी सी बात ?

मैं मन में सोचने लगा क दीदी किस बारे में बात कर रही हैं ? इतनी बड़ी बात को वो इतनी सी बात कह रही हैं . ज़रूर वो कुछ और hi समझ रही हैं वर्ण इतना नार्मल रिएक्शन न देती .

निधि : मेरी तरफ देखते हुए ) बताया मुझे करुणा ने क तुम किस वजह से घर से ऐसे चले आये थे .

मैं हैरानी से दीदी की तरफ देखने लगा क करुणा दीदी ने उन्हें भी सब बता दिया और वो इसे छोटी सी बात समझ रही हैं . मुझे तो समझ नहीं आ रहा था क मैं क्या कहूं . मेरी ज़ुबान से अल्फ़ाज़ नहीं निकल रहे थे .

निधि : ऐसे क्या देख रहे हो ? मेरी तरह करुणा भी तो तेरी बहिन है . अगर उसने ज़िद की थी तो तू भी मन लेता . तुझे ऐसे करने की क्या ज़रूरत थी? मन क वो थोड़ी नटखट है ज़िद्दी है पर ये कोई ऐसी बात थोड़ा hi थी क तू ऐसे नाराज़ हो गया .

अमित : आप क्या कह रही हैं दीदी ?

निधि : क्या कह रही हूँ मतलब ? करुणा ने तुझे यही कहा था न क वो चाहती है तू उसके साथ सो जाओ रत को . वो तुझसे बातें करना चाहती थी . तूने उसे मन क्यों किया ? इतनी छोटी सी बात क लिए तूने उसका दिल दुख दिया और वो भी गुस्से में तुझे अपने कमरे से चले जाने को कह गयी . बिलकुल बचे हो तुम दोनों . कब बड़े होंगे ?

अब मुझे समझ आया क करुणा दीदी ने निधि दीदी को क्या कहानी सुनाई है . इसे सुन कर मुझे कुछ रहत मिली .

निधि : पता है नेहा कितना गुस्सा हुई है करुणा से आज ? वो बेचारी तो रोये जा रही थी . अपने कमरे में खुद को बंद कर क बैठी है . सुबह से कुछ भी नहीं खाया है उसने .

अमित : क्या ??? पर उन्हें क्या ज़रूरत थी ऐसा करने की ?

निधि : क्यों न करती ? वो भी तो तुझसे इतना प्यार करती है. वो तो करुणा ये तक कह रही थी क अगर तुम घर से गए तो वो कभी करुणा से बात तक नहीं करेगी .

दीदी की बात सुन कर अब मुझे नेहा दीदी दीदी की फ़िक्र होने लगी थी .

निधि : वैसे एक बात तो बताओ ? तुमने करुणा को मन क्यों किया ? वो भी तो मेरी तरह तुम्हारी कजिन है . फिर तुम मेरे साथ सो जाते हो तो उसके साथ क्यों नहीं ?

निधि ये सवाल पूछते पूछते अंदर से शर्मा भी रही थी . ये सवाल उसने इस लिए पूछा था क वो अमित क मुँह से सुन्ना चाहती थी की आखिर उसके दिल में क्या है . करुणा की बात सुनने क बाद निधि का दिल अब ये सोचने लगा था क हो न हो अमित क अंदर भी उसके लिए कोई न कोई फीलिंग ज़रूर है इसी लिए उसने करुणा को इंकार कर दिया और खुद मेरे साथ hi रहा .

अमित : तो क्या करता दीदी , अगर मैं आपको छोड़ कर उनके पास जाता तो क्या आपको ाचा लगता ? मैं अपनी बड़ी दीदी को कैसे नाराज़ कर सकता हूँ भला .

निधि अमित क इस जवाब से खुश हो गयी पर अपने लिए दीदी सुन्ना उसे ाचा नहीं लग रहा था . इसी बात से बचने क लिए तो उसने खुद hi कजिन कहा था . वो तो जैसे इस रिश्ते का ज़िकर तो नहीं करना चाहती थी अब .

निधि : क्या तुम सच में मुझसे इतना प्यार करते हो ?

अमित : इससे भी ज्यादा , बल्कि बहनो में सब से ज्यादा . आप तो मेरी फेवरेट हो .

निधि : अब ज्यादा माखन न लगाओ . अभी जा कर पहले नेहा और करुणा को मनाओ. बेचारी दोनों कितनी परेशां हैं . और ध्यान रखना मौसी को कुछ पता न चले वर्ण पन्गा हो जायेगा .

थोड़ी देर में hi हम घर पहुँच गए . गाड़ी की आवाज़ सुनते hi करुणा दीदी भाग कर दरवाज़े पर आ गयी . उनकी हालत देख कर hi लग रहा था क वो बहुत रोई होंगी . मुझसे नज़रें मिलते hi वो फिर से रोने लगी . मुझसे उनकी ये हालत देखि नहीं गयी . जैसे hi मैं गाड़ी से निकल कर उनकी तरफ बढ़ा तो वो भाग कर अंदर चली गयी.

निधि : देखा , कितनी नाराज़ है वो तुमसे . अब चलो जा कर दोनों को मन लो . मुझे भी ऑफिस जाना पड़ेगा . एक ज़रूरी काम था मगर तुम्हारे चक्कर में लेट गयी . ाचा अब चलती हूँ . वापिस आकर मिलूंगी .

दीदी ने एक बार मुझे हुग किया और गाड़ी में बैठ कर निकल गयी . मैं अंदर आया तो मौसी हॉल में hi बैठी थी . पहले तो वो मुझसे नाराज़ हुई क मैं बिना उन्हें बताये चला गया और नाश्ता भी नहीं किया . पर मैं उन्हें बहाना बना दिया . मैंने करुणा दीदी का पूछा तो मौसी बोली वो ऊपर गयी है अभी अभी . मैं ऊपर जाने लगा तो मुझे नेहा दीदी का ख्याल आया क्यूंकि उनका कमरा नीचे hi था . इस लिए मैं उनके कमरे में चला गया. मैं जैसे hi कमरे में घुसा तो देखा नेहा दीदी बीएड पर उलटी लेती हुई है तकिये में चेहरा छुपा कर. उन्होंने दरवाज़े की तरफ देखने की कोशिश भी नहीं की . मैं चल कर उनके करीब आया तो उन्हें जैसे अगर से महसूस हुआ क कोई आया है .

नेहा : मैंने कहा न मेरी तबियत ठीक नहीं है मुझे डिस्टर्ब मत करो

दीदी ने वैसे hi चेहरा छिपाये जवाब दिया . उनकी आवाज़ गंभीर थी गाला रुँधा हुआ . मुझे नेहा दीदी की हालत पर खुद पर शर्म आने लगी . क मेरी वजह से वो कितना दुखी हैं. वो जो हमेशा अपने में hi या किताबों में रहती थी और काम बोलती थी आज मेरी वजह से दुखी हो रही थी. होती भी क्यों न , वो मुझसे इतना प्यार हो करती थी . मैं hi तो एक मात्रा भाई था उनकी नज़र में . सेज भाई से भी बढ़कर .

अमित : मुझे माफ़ कर दो दीदी , ये सब गलती से हुआ . मैंने जान बुझ कर नहीं किया .

मेरी आवाज़ सुनते hi नेहा दीदी एक डैम से पलटी और मुझे देख कर उनकी रोटी हुई आँखों में ख़ुशी की किरण उमड़ आयी . वो जल्दी से बीएड से उठी और उछाल कर मेरे गले से लग गयी . मेरे गले में बहन दाल वो ज़ोर से मेरे साथ चिपक गयी.

नेहा : कहाँ चले गए थे तुम ? क्या तुझे ज़रा भी परवाह नहीं है हमारी ? एक बार भी नहीं सोचा क हम पर क्या बीतेगी? अगर करुणा ने तेरे साथ बदतमीज़ी की थी तो एक बार मुझसे कहता मैं उसे ठीक कर देती पर ये क्या बात हुई क तू ऐसे चला गया. देखना उससे तो मैं अब बात भी नहीं करुँगी. हर वक़्त बदमाशी करती रहती है . तू कहीं जायेगा तो नहीं न हमें छोड़ कर? तुझे पता है न मेरा सिर्फ तू hi एक भाई है. मुझे अकेला तो नहीं छोड़ रहा न ? अपनी इस दीदी को अकेला तो नहीं छोड़ेगा न ?

नेहा दीदी ने कास क मुझे गले से लगाया हुआ था और एक बार भी अपनी पकड़ ढीली नहीं की थी . उनकी बातों में बहिन का प्यार साफ़ झलक रहा था . मैंने भी नेहा दीदी को कास कर अपनी बाँहों में भींच लिया .

अमित : बिलकुल भी नहीं दीदी , मैं कभी भी आपको छोड़ कर नहीं जाऊंगा . अपनी इतनी प्यारी दीदी को छोड़ कर भला मैं कहीं जा सकता हूँ क्या ? प्लीज आप मुझे माफ़ कर दो मेरी वजह से आपको आँखों में आंसू आये .

नेहा : पागल माफ़ी क्यों मांग रहा है ? तूने क्या किया है? माफ़ी तो करुणा को मांगनी पड़ेगी तुमसे . उसकी हिम्मत कैसे हुई तुझे अपने कमरे से निकलने की .

अमित : नहीं दीदी करुणा दीदी ने ऐसा कुछ नहीं किया . वो तो वैसे hi मुझसे मज़ाक कर रही थी. और वैसे भी मैं उनकी वजह से थोड़ा कहीं गया था. मैं तो मम क पास गया था कल क एग्जाम की तयारी करने . वो गलती हो गयी क बात क नहीं गया और मोबाइल भी घर पर रह गया . और आप ऐसे hi करुणा दीदी पर गुस्सा हो रही हैं .

नेहा : तू सच कह रहा है ? करुणा ने तो कहा था की ....

अमित : क्या मैं नहीं जनता क करुणा दीदी कितना मज़ाक करती हैं मुझसे . वो तो गुस्से में भी कुछ कहें तो मैं तब भी बुरा न मानूं तो ये तो उनका बस मज़ाक था . आप ऐसे hi उनसे नाराज़ हो रही हैं. चलिए अब पहले अपनी हालत ठीक करिये. फिर करुणा दीदी से भी बात कर लीजिये बेचारी कितना बुरा फील कर रही होंगी .

नेहा : तू बैठ मैं अभी आयी .

अमित : आप आराम से फ्रेश हो जाइये और खाना भी खा लीजिये. मैं तब तक करुणा दीदी से भी बात कर लेता हूँ

इतना कह कर मैं नेहा दीदी क रूम से निकला और ऊपर करुणा दीदी क रूम की तरफ चल दिया . करुणा दीदी अपने रूम में hi थी जैसे hi मैं उनके कमरे में गया तो वो भाग कर मेरे गले से लग गयी और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी .

करुणा ( रट हुए ) ी ऍम सॉरी ी ऍम सॉरी , मुझे माफ़ कार्डो . मैं ऐसा कभी नहीं करुँगी . प्लीज मुझसे माफ़ कर दो .

अमित : शहहह ये आप क्या कह रही हैं . क्या किया है आपने ? गलती तो मेरी थी न फिर आप क्यों माफ़ी मांग रही हैं ? मुझे तो खुद पर शर्म आ रही है . मैं कैसे ......

करुणा : तुम क्यों मांगोगे माफ़ी ? तुमने क्या गलत किया है? सब गलती मेरी hi है. मैं hi समझ नहीं पायी क तुमने जो भी किया वो इस घर क लिए हमारे लिए किया . मैं hi सेल्फिश हो गयी थी. अपनी ज़रूरतों का तो पता है अपनी माँ की ज़रूरतों का ज़रा भी ख्याल नहीं. अगर मैं अपनी ज़रूरतों क लिए तुम्हारे साथ वो सब कर सकती हूँ तो माँ क्यों नहीं . और अगर वो कहीं बहार वो सब करेंगी तो इससे सब कुछ बर्बाद हो जायेगा इससे ाचा है क तुम hi उनकी ज़रूरतों को पूरा करो.

अमित : ये आप क्या कह रही हैं ? मैं अब ऐसा कुछ नहीं करने वाला .

करुणा : क्यों नहीं करोगे ? क्या तुम ये चाहते हो क माँ तड़पती रहे ? या वो कहीं बहार जाएँ और इस घर की इज़्ज़त मिटटी में मिल जाये ? क्या तुम ये सब देख सकोगे ? मैंने गुस्से में तुम्हे इतना कुछ कह दिया मगर बाद में मुझे एहसास हुआ क तुम गलत नहीं थे और न hi माँ. बल्कि ये तो ज़रूरत की बात थी. मैं अपने बिहेवियर पर शर्मिंदा हूँ. सब कुछ अपने कानो से सुन कर भी मैं समझ नहीं पायी. पर बाद में एहसास हुआ . मैं तो सुबह उठ कर तुमसे माफ़ी मांगना चाहती थी मगर तुम पहले hi चले गए ? क्या इतनी बड़ी सजा देना चाहते थे मुझे क घर से hi चले गए? माफ़ नहीं कर सकते मुझे ?

अमित : आप ऐसा क्यों सोच रही हैं ? बल्कि मैं तो खुद से hi शर्मिंदा हूँ क मैंने ये सब किया मगर आइंदा मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूँगा

करुणा. ; शह्ह्ह्ह कुछ नहीं किया तुमने. और ख़बरदार अगर ऐसा वैसा कुछ सोचा भी तो. अगर माँ को मेरे हिस्से का थोड़ा सा प्यार दे डोज तो तुम्हारा क्या घाट जायेगा ? क्या मैं तुम्हारी गफ नहीं हूँ ? अगर मुझसे प्यार करते हो तो मेरी माँ से भी प्यार करना होगा . मैं बिलकुल भी गुस्सा नहीं करुँगी . और अगर तुमने उनसे दूर जाने की कोशिश की तो फिर मैं खुद को सजा दूंगी .

अमित : ये आप .....

करुणा : आप नहीं करुणा कहो . और जो मैंने कहा उसे मन्ना पड़ेगा . वैसे भी गफ की माँ रिश्ते में सासु माँ होती हैं और अगर थोड़ा सा प्यार सासु माँ को देना पड़े तो इसमें हरा hi क्या है? बल्कि मैं तो कहती हूँ अगर दीदी भी चाहें तो उन्हें भी दे देना . आखिर साली का भी तो हल बनता है

करुणा दीदी ने ऐसे माहौल में भी ऐसी बात कह दी क किसी क भी पसीने छूट जाये . उनके चेहरे पर शरारती मुस्कराहट आ गयी थी. वैसे तो मुझे नेहा दीदी क बारे में ऐसी बात अछि नहीं लगी पर उनके चेहरे पर लौटी ख़ुशी देख कर मैं कुछ न कह पाया और फिर से उन्हें बाँहों में भर लिया

अमित : तुम न बहुत बदमाश हो. तुम्हारी बदमाशी को ठीक करना पड़ेगा . कोई गफ ऐसे बात करती है भला.

करुणा : मैं थोड़ा हैट क हूँ. और जैसे तुम्हारा दिल करे वैसे ठीक कर लो. मगर यद् रखना मेरी माँ को उसके हिस्से का प्यार मिलना बंद नहीं होना चाहिए. और अगर चांस हो तो मुझे फिर से लाइव शो दिखा देना . माँ को मस्ती करते देखना चाहती हूँ . वो तो अभी भी पूरी जवान हैं .

मैंने करुणा दीदी की इस बात पर उनके बाल पकड़ लिए जिससे उन्हें थोड़ा दर्द हुआ

करुणा : आआअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स

अमित : मस्ती करते देखना है ? अभी निकलता हूँ साड़ी मस्ती .



इससे पहले क मैं कुछ करता करुणा दीदी ने मेरे सर को पकड़ा और मुझे अपनी तरफ झुकाते हुए मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और मेरे होंठ चूसने लगी . मैं कुछ समझ पता उससे पहले hi वो मेरी पकड़ से निकल कर भाग गयी. मैं तो बस अपनी हालत पर और उनकी हरकत पर बस हैरान खड़ा रहा . कहाँ रत से सुबह तक मैं क्या क्या सोच रहा था और घर से चला गया था और कहाँ अब वो hi करुणा दीदी कैसे खुल कर मस्ती कर रही थी फिर से जो कल रत मुझसे नाराज़ हो रही थी . सच में वो और नैना दीदी दोनों हमारे पूरे परिवार में सब से ज्यादा हंसमुख थी . और आज इतनी बड़ी बात को भी कितनी आसानी से वो कह गयी थी . मेरे और मौसी क रिश्ते को उन्होंने कितनी आसानी से एक्सेप्ट कर लिया था . मैं तो सोच रहा था क अब मुझे रीता मौसी से दूर रहना चाहिए और अब करुणा दीदी ने फरमान सुना दिया था क मुझे उनको भी प्यार देना होगा वर्ण वो खुद को सजा देंगी. अपने सर पर हाथ मरता हुआ मैं नीचे चला गया
 
अपडेट 222



करुणा दीदी क पीछे पीछे मैं भी निचे आ गया. दीदी से बात कर क अब मूड बिलकुल ाचा हो गया था. मौसी किचन में थी नेहा दीदी ने जब करुणा दीदी को अपने सामने देखा तो उन्हें गले से लगा लिया . मैं सीढ़ियों से उतरता उतरता हुआ वहीँ रुक गया . दोनों बहनो को गले लगे देख कर मुझे और भी ाचा लग रहा था .

नेहा : ी ऍम सॉरी करुणा मैं गुस्से में तुम्हे पता नहीं क्या क्या कह गयी .

करुणा : ये क्या दीदी , आप क्यों सॉरी कह रही हैं. वैसे भी मेरी hi गलती थी , आपने वो hi किया जो एक बड़ी बहिन को करना चाहिए. मैं जानती हूँ आप अमित को कितना मानती हैं. मुझे आपसे कोई नाराज़गी नहीं बल्कि मैं तो खुश हूँ क मेरी दीदी कितनी अछि है. भगवन करे हर जनम में आप hi मेरी दीदी हो .

नेहा दीदी ने करुणा दीदी को कास क गले से लगा लिया और बोली

नेहा : तू तो इतनी समझदार हो गयी है और माँ अभी भी तुझे शर्माती लड़की समझती है . कितनी समझदारी की बातें करने लगी है .

करुणा : न दीदी मुझे वो hi रहने दो जो मैं हूँ. ये समझदारी वाला काम मेरे से नहीं होता. अभी तो मैं छोटी बची hi हूँ जिसे शरारत करने में hi मज़ा अत है. समझदार बन क मुझे इतनी जल्दी बूढी नहीं होना हे हे हे

नेहा : तू नहीं सुधरेगी .

तभी नेहा दीदी की नज़र मुझ पर पड़ी

नेहा : वहां खड़े क्या देख रहे हो. चलो इधर आओ , आज तो हमने नाश्ता तक नहीं किया बहुत भूख लग रही है.

अमित : मैं तो बस देख रहा था क आप दोनों में कितना प्यार है. और मेरी वजह से आप दोनों में झगड़ा हो गया

करुणा : ोये कौन सा झगड़ा ? ये तो हम दोनों की आपस की बात है. मेरी प्यारी दीदी मुझे कुछ भी कह सकती है. तू बन्दर की तरह अपनी तंग मत ऐडा बीच में वर्ण दोनों मिल कर तेरी टंगे तोड़ देंगी .

रीता : किचन से आते हुए ) तू सुधरेगी नहीं ? अगर उसे कुछ कहा तो मैं तेरी टंगे तोड़ दूंगी . चलो खाना खा लो .

करुणा : मेरी तरफ देख कर हस्ते हुए ) माँ आप तो इसकी पापा से भी ज्यादा फ़िक्र करती हो. लगता है पापा का पत्ता काटने वाला है .

करुणा क कहने का क्या मतलब था मैं अछि तरह समझ रहा था . मगर इस बात से मौसी और नेहा दीदी अनजान थी .

रीता : हाँ तो तुझे क्या ? मेरा भांजा है. मैं इसकी परवाह नहीं करुँगी तो कौन करेगा ? चल अब चुपचाप खाना खा

करुणा : आप का hi सब कुछ है और किसी ता कुछ भी नहीं , है न ? सारा प्यार आप hi कर लो और हम बस देखते रहें .

करुणा दीदी ने फिर मुझे देखते हुए शर्माती मुस्कान क साथ ये कहा .

नेहा : कैसी बातें कर रही है . वो हम सब का है . तू भी प्यार कर न उससे झगड़ा क्यों करती है ? चल अब खाना खा , अमित तुम भी आओ .

करुणा : उसी का तो मौका नहीं मिल रहा दीदी . पर लगता है आप को भी प्यार करना है अमित को जैसे मैं और माँ करती हैं .

करुणा दीदी की बात पर मैंने हैरानी से उन्हें देखा और ऑंखें बड़ी कर क उन्हें टोका .

नेहा : क्यों नहीं करूंगी ? क्या मैं कुछ नहीं लगती इसकी .

करुणा : बिलकुल करो दीदी पर ये आपको बहुत भरी पड़ने वाला है . बहुत बड़ा है ,,,, मेरा मतलब अब ये बहुत बड़ा हो गया है .

करुणा दीदी क मुँह से ऐसे शब्द निकलते hi एक बार तो मेरी हलक भी खुश्क हो गयी थी पर उन्होंने बात बदल दी.

रीता : अब चुप करोगी या नहीं. खाना खाओ चुपचाप. अमित तुम भी लो .

रीता मौसी ने थोड़ा गुस्से से कहा तो करुणा दीदी चुप चाप खाना खाने लगी. मुझे भूख तो नहीं थी पर नेहा दीदी और करुणा दीदी क लिए थोड़ा सा मैंने भी खा लिया और फिर अपने कमरे में जा कर कल क एग्जाम की तयारी करने लगा . शाम तक मैं अपने कमरे में बैठ पड़ता रहा जब तक क करुणा दीदी मुझे बुलाने नहीं आयी .

करुणा : ोये पढ़ाकू चल अब किता एक बंद भी कर ले क सारा आज hi पढ़ लेगा . नीचे चल माँ बुला रही है . ओह सॉरी सॉरी तुम्हारी मौसी छुम गफ

दीदी की बात सुन कर मैंने किताब बंद की और उनकी तरफ लपका. दीदी खिलखिलाती हुई बहार की तरफ भागने लगी पर मैंने पहले hi उन्हें लपक लिया .

अमित : कुछ ज्यादा hi ज़ुबान चल रही है न ,, अभी बताता हूँ .

करुणा : हे हे हे आअह्ह्ह ,,,, छोडो छोडो मुझे

मैंने दोनों हाथ करुणा दीदी की ठोस छातियों पर रख कर उन्हें मसलना शुरू कर दिया और उन्हें ऐसे hi दीवार से लगा दिया. करुणा दीदी मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी पर वो निकल नहीं प् रही थी. मैंने उन्हें पूछे से पकड़ा हुआ था और वो सामने से दीवार से लगी कड़ी थी

अमित : अब बोलो क्या बोल रही थी . कब से देख रहा हूँ बहुत तंग कर रही हो मुझे

करुणा : आआह्ह्ह्ह ककक छोड़ दो प्लीज ाः दर्द हो रहा है ककक आराम से करो वर्ण

अमित : वर्ण क्या

मैंने थोड़ी सी पकड़ ढीली की तो वो पलट गयी और मेरी आँखों में देखने लगी .

करुणा : वर्ण मैं तुम्हे पकड़ लुंगी और फिर मेरी माँ का पत्ता काट जायेगा हे हे हे

इतना कह कर वो निकलने लगी पर मैंने फिर से दबोच लिया और उन्हें उठा कर बीएड पर प्रक दिया और खुद उनके ऊपर चढ़ गया.

अमित : ऐसे नहीं मानोगी तुम . अब देखता हूँ तुम्हे .

इतना कह कर मैंने करुणा दीदी क होंठो को अपने होंठों में दबोच किया और उन्हें किश करता हुआ उनके चुके मसलने लगा. दीदी खुद hi मेरा साथ देने लगी और मेरे गले में बहन दाल कर अपनी टंगे खोल कर मेरी कमर पर लपेट ली. दीदी जल्दी hi गरम हो गयी और मेरी T-shirt ऊपर को खींचने लगी . मैं तो उन्हें तंग करने क लिए ये सब कर रहा था पर अब तो मुझे ये लग रहा था क अभी मैं नहीं रुका तो रुकना मुश्किल हो जायेगा और यहाँ कोई भी आ सकता था .

अमित : उम्म्माह्ह्ह बस , रुक जाओ वर्ण दोनों पकडे जायेंगे .

करुणा : हँ हँ तो किसने कहा था पकड़ने को . अब मुझे गरम कर क बीच में छोड़ रहे हो

अमित : मैं तो बस आपको तंग कर रहा था . आप बार बार मौसी का नाम लेकर तंग कर रही हो मुझे .

करुणा : ओहो हो हो , मैं तंग कर रही हूँ ? और तुम जो उनकी खुली कर रहे हो उसका क्या ? मैं तुम्हे रोक थोड़ा रही हूँ बल्कि मैं तो इस लिए ये सब कह रही थी ताकि तुम्हारे मन में कोई शक न रहे क मुझे कोई ऐतराज़ नहीं तुम दोनों क रिश्ते से.

अमित : पर ये कुछ ज्यादा hi हो रहा है . अगर किसी को शक हो गया तो ?

करुणा : उसकी चिंता मत करो जनि, करुणा को समझना इतना आसान भी नहीं है . तुम अपनी चिंता करो अगर मेरी जगह नेहा दीदी या निधि दीदी देख लेती सब तो ?

तभी मेरे दिमाग में बात आयी क मौसी ने तो दूध में दवा मिलायी थी फिर दीदी कैसे जगती रही .

अमित : मैं तो हमेशा hi ध्यान रखता हूँ पर आप बताइये आप किसे जग रही थी ?

करुणा : कैसे जग रही थी मतलब ? मैं तो सब क सोने का इंतज़ार कर रही थी ताकि तुम्हारे पास आ सकूँ. माँ मुझे दूध देकर गयी थी लेने को पर मेरा मन नहीं था तो मैंने दूध गिरा दिया. वर्ण वो ज़बरदस्ती मुझे पीला देती. और हुआ भी ऐसा hi माँ चेक करने आयी थी पर गिलास खली देख कर उसने सोचा मैंने पि लिया होगा और मैं भी जान बुझ कर सोने की एक्टिंग करने लगी .

दीदी की बात सुन कर अब समझ आयी क आखिर हुआ क्या था . मौसी खुद को होशिअरपुर समझती हैं और उनकी बेटी उनसे भी आगे है .

करुणा : आँखें नाचते हुए ) अब क्या इरादा है ? बेटी की प्यास बुझाओगे या माँ की ?

अमित : किसी की नहीं और ये क्या बार बार ऐसे मौसी का नाम ले रही हो . कुछ तो शर्म करो. अब हटो मुझे फ्रेश होने दो. कल एग्जाम है इस लिए आज सिर्फ पड़े करनी है .

करुणा : काम से काम एक अछि सी किश तो दे दे ज़ालिम उम्मम्माआहहह

मुझे गर्दन से पकड़ कर अपने ऊपर झुकाते हुए दीदी ने मेरे होंठों को अपने होंठो में पकड़ लिया . किश करने क बाद मैं फ्रेश होने चला गया और दीदी निचे चली गयी. हूँ सब बैठ कर चाय पि रहे थे तो इतने में निधि दीदी भी आ गयी . फिर कुछ खास नहीं हुआ . मैं दुबारा से पड़ने लगा अपने कमरे में . निधि दीदी खुश लग रही थी और बार बार मुस्कुरा कर मुझे देख रही थी पर मुझे पड़े करते देख उन्होंने मुझे डिस्टर्ब नहीं किया . फिर रत का खाना खाने क बाद हम सब अपने अपने कमरों में चले गए . मुझे अभी और पड़ना था क्यूंकि आधा दिन तो वास्ते हो गया था . जब तक मैं पड़ता रहा तब तक दीदी भी लैपटॉप कर काम करती रही . फिर 12 बजे दीदी ने लैपटॉप बंद किता और मेरे पास आ कर किताब बंद कर क साइड में रख दी.

निधि : बस अब बहुत हो गया , बाकि कल सुबह उठ कर देख लेना . अचे से नींद नहीं लोगे तो एग्जाम ठीक से कैसे डोज ? चलो उठो .

मैं अभी और पड़ना चाहता था पर दीदी को इंकार नहीं कर सका वो इतने प्यार से कह रही थी . मैं उनकी बात मन कर बीएड पर आ कर लेट गया . दीदी अपने नाईट सूट में थी . दरवाज़ा अचे से बंद कर क रूम की लाइट बंद करने क बाद जीरो लाइट बल्ब जगा कर वो बीएड पर आ गयी और कम्बल में मेरे साथ लेट कर मेरी बाजु पर सर रख कर वो मेरी तरफ करवट क बल लेट कर मुझे मुस्कुराते हुए देखने लगी .

अमित : क्या बात है , आज आप कुछ ज्यादा hi मुस्कुरा रही हो ?

निधि : क्यों , तुम्हे ाचा नहीं लग रहा ?

अमित : मुझे ाचा क्यों नहीं लगेगा ? आपकी मुस्कान तो मुझे बहुत प्यारी लगती है . मैं बस इस मुस्कान क पीछे की वजह जानना चाहता हूँ . नहीं बताएंगी क्या?

निधि : मेरी मुस्कान की वजह तो तुम hi हो. तुम पास होते हो तो सब ाचा लगता है .

अमित : फिर भी कुछ तो है जो अआप बता नहीं रही .

निधि : पहले ये बताओ तुमने मेरी वजह से करुणा को मन क्यों किया ?

अमित : बताया तो था .

निधि : वही तो , मन क्यों किया फिर से बताओ .

अमित : अगर मैं आपको छोड़ कर उनके पास चला जाता तो आपको बुरा लगता न बस इसी लिए मन किया था .

निधि : ाचा , तुम्हे मेरी इतनी परवाह है ? वो तुम्हारी बहिन है न .

अमित : वो तो आप भी हो .

निधि : नहीं , मैं तो तुम्हारी सेक्रेटरी हूँ बस .

अमित : क्या आप बार बार सेक्रेटरी कहती रहती हैं खुद को .

निधि : क्यूंकि मुझे ये ाचा लगता है . तुमने पूछा न मैं किस लिए इतना खुश हूँ , तो बस इसी लिए खुश हूँ क तुम मेरे साथ रहना पसंद करते हो . मुझे इससे कितनी ख़ुशी मिली ये मैं बता नहीं सकती. यू अरे सो स्वीट मुआअह

निधि दीदी ने थोड़ा सा ऊपर उठ कर मेरे गाल पर किश कर दी. किश करते हुए उनके नरम मांस क गोले मेरी छाती और बाजु पर अचे से चिपक गए थे और एक बार उनका नरम एहसास मेरे अंदर अलग hi एहसास करवा गया. मुझे उनके प्यार में करुणा दीदी और नैना दीदी वाले प्यार की झलक नज़र आयी . पर मैंने अपनी सोच को झटक दिया . क्यूंकि निधि दीदी उन दोनों जैसी बिलकुल भी नहीं थी वो तो सबसे अलग एक सुलझी हुई समझदार लड़की थी जो मुझे सबसे ज्यादा प्यार करती आयी थी बचपन से hi .

अमित : लगता है आज आपको कुछ ज्यादा hi प्यार आ रहा है .

निधि ( मन में ) काश क मैं बता सकती क मैं कितना प्यार करना चाहती हूँ तुम्हे . मगर तुम हो क हमेशा मुझे बहिन की नज़र से hi देखते रहते हो कभी समझने की कोशिश नहीं करते क मैं क्या चाहती हूँ और भगवन भी यही चाहता है .

निधि : प्यार तो हमेशा hi अत है मगर तुम्हे hi मुझ पर प्यार नहीं आता . कभी खुद से एक बार भी मुझे किश की है ?

अमित : लो ये भी कोई बात है , मैंने तो कई बार आपको चूमा है लो अभी चूम लेता हूँ फिर से .

मैंने दीदी का माथा चूमने क लिए उनकी तरफ झुका तो दीदी ने ऑंखें बंद कर क अपने होंठ आगे कर दिए . उनके ऐसा करने से एक बार तो मुझे झटका लगा पर मैंने खुद को काबू करते हुए उनके हसीं मासूम चेहरे को देख कर उनके माथे पर किश कर दी.

अमित : अब खुश ?

निधि : ुँहुँणन , ये क्या बड़े बुज़ुर्गों की तरह माथा चूमते रहते हो . कहीं और नहीं चुम सकते क्या ?

अमित : ओहो , ाचा ठीक है . उम्म्माह

मैंने दीदी क गलों पर एक किश कर दी . एक बार फिर दीदी की ऑंखें बंद थी और होंठ आगे . गाल पर चूमने क बाद मैं पीछे हो गया

अमित : अब तो खुश न ? अब आराम से सो जाइये .

दीदी ने ऑंखें खोल कर मुझे देखा और फिर मुस्कान होंठों पर सजाये मेरे साथ चिपक गयी और एक बाजु मेरे ऊपर दाल कर मेरी तरफ देखने लगी .

निधि : ऐसे hi मुझे प्यार किया करो न . मुझे ाचा लगता है. तुम नहीं जानते मुझे कितनी ख़ुशी मिलती है जब तुम ऐसे अपना प्यार दिखते हो .

( मन में ) काश इससे थोड़ा और आगे बरही और मुझे वो प्यार दो जो मैं कब से चाहती हूँ .

अमित : मैं तो हमेशा hi आपको प्यार देता रहूँगा दीदी. आपको ख़ुशी क लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ . अब सोते हैं बहुत देर हो गयी है .

उसके बाद हम दोनों सो गए . अगले दिन सुबह मैं जल्दी उठा तो दीदी पूरी तरह मेरे साथ चिपकी हुई थी . एक बाजु और एक तंग मेरे ऊपर डेल. मैंने उन्हें अपने से अलग किया और उठ कर फ्रेश हो कर फिर से पड़ने लगा. उसके बाद सब रूटीन से होता रहा और नाश्ता करने क बाद दीदी ने मुझे कॉलेज ड्राप किया. कल्पना ने मुझसे कल क बारे में सवाल किये और नाराज़गी भी जताई . ज्यादा कोई बात न कर क हूँ अपनी अपनी जगह जा कर बैठ गए और अचे से पेपर दिया. वरिंदर सर की वजह से मुझे किसी तरह की परेशानी नहीं हो रही थी. पेपर क बाद जब हम बहार निकल रहे थे वरिंदर सर ने मुझे अपने पास बुलाया .

प्रोफ व् : अमित , जैसे क आज तुम्हारे एग्जाम ख़तम हो गए हैं . अब मैं चाहता हूँ क तुम सिर्फ और सिर्फ अपनी प्रैक्टिस पर ध्यान दो. हमें तुमसे बहुत उम्मीदें हैं बीटा .

अमित : जी सर मैं ऐसा hi करुणा आप निश्चिन्त रहिये .

प्रोफ व् : मुझे तुमसे यही उम्मीद है बीटा . और एक बात केहनी थी तुमसे . कोच साहब ने तो कुछ दिन अभी छुट्टी दी हुई है एग्जाम क चलते पर अगर तुम चाहो तो यहाँ आ कर प्रैक्टिस कर सकते हो. नीरज से भी मेरी बात हुई थी वो भी प्रैक्टिस करने आएगा. तुम दोनों साथ में कर लेना. मैं खुद भी पर्सनली तुम लोगों क साथ रहूँगा .

अमित : जी शुक्रिया सर . मैं उनसे बात कर क आप को बता दूंगा .

प्रोफ व् : गुड अब तुम जाओ , मुझे भी ऑफिस में काम है .

उसके बाद मैं अपने दोस्तों क पास वापिस आ गया जो मेरा hi इंतज़ार कर रहे थे

कल्पना : क्या कह रहे थे सर ?

अमित : कुछ नहीं वो बस प्रैक्टिस करने को कह रहे थे . कह रहे थे क छुट्टियों में मैं चहुँ तो यहाँ प्रैक्टिस कर सकता हूँ वो खुद पर्सनली हमें अटेंड करेंगे .

मोहित : क्या ? छुट्टियों में भी ? काम से काम छुट्टियां तो आराम से बिता लो यार

कल्पना : ठीक कह रहे हैं सर . अगर प्रैक्टिस नहीं की तो परफॉरमेंस ख़राब हो जाएगी और उन्हें अमित से बहुत उम्मीदें हैं .

मोहित : तुम दोनों तो बस स्पोर्ट्स में hi घुसे रहते हो . काम से काम आज का दिन तो सेलिब्रेट करलो यार . फाइनली आज एग्जाम ख़तम हो गए हैं. पता भी है कितना बरदान था . अब पहले अचे से रेस्टोरेंट में चल कर पार्टी की जाये.

कल्पना : और तेरी लैला को पता चल गया क तू उसके बगैर गया है तो क्या जवाब देगा उसे ? बात तो ऐसे कर रहा है जैसे बड़ा टोपर हो .

मोहित : उसकी चिंता तुम मत करो . उसका अभी एक बाकि है. उस दिन मैं उसके साथ सेलिब्रेट कर लूंगा . अभी तुम्हे चलना है तो बोलो वर्ण हम दोनों चले जाते हैं

कल्पना : मैंने कब मन किया ? चलो .

उसके बाद हम सब रेस्टोरेंट में गए और छोटी सी पार्टी कर ली. कल्पना ने मुझे यद् दिलाया क उसके पापा से मेरी क्या बात हुई थी. तो मैंने उसे बता दिया क संडे को मैं गाओं जा रहा हूँ वो तैयार रहे . जिसे सुन कर कल्पना खुश हो गयी . फिर मोहित ने मुझे घर ड्राप कर दिया .

उधर नारायण दस् शिकस्त खाने क बाद अब फिर से एक नयी प्लानिंग कर रहा था इसके लिए उसने अपने पास एक आदमी को बुलाया था जिसके साथ एक लड़की भी थी

न. डी. : हम्म्म तो ये है वो लड़की ?

आदमी : जी बॉस , यही है . आप जो भी बोलोगे ये वो करेगी .

न. डी . : क्या इस पर भरोसा किया जा सकता है ? इसमें गलती कोई गुंजाईश नहीं है. अगर गलती हुई तो बहुत कुछ दांव पर लग जायेगा .

आदमी : फ़िक्र मत करो बॉस , इससे गलती नहीं होगी वर्ण ये जानती है इसके साथ फिर क्या होगा .

न. डी.: ऐ लड़की , ध्यान से सुन ले . अगर तूने मेरा काम कर दिया तो तुझे मालामाल कर दूंगा और गलती की तो सोच लेना तेरा हशर क्या होगा . गली क कुत्तों से भी छुड़वा दूंगा तुझे और तेरे खंडन की सब औरतों को .

लड़की : सेहमी हुई ) नहीं नहीं सर मैं वो hi करुँगी जैसा आप कहेंगे . प्लीज आप कुछ मत करना .

न. डी.: है है है , कुछ नहीं करूँगा अगर तूने मेरा काम अचे से कर दिया और अगर गलती हुई तो अंजाम कितना बुरा होगा ये खुद सोच लेना . ए इसे सब समझा दो क इसे क्या और कैसे करना है. ले जाओ इसे

वो आदमी उस लड़की को लेकर चला गया तो नारायण दस् अपने प्लान पर खुश होता हुआ खुद से hi कहने लगा .

न. डी.: अब देखता हूँ साली को , अपनी रखैल न बना दिया तो कहना . पहले मैं छोडूंगा फिर तुझे अपने सब आदमियों से छुडवाउंगा और फिर कोठे की रांड से भी बुरी हालत बना दूंगा तेरी. साली जिस वर्दी की अकड़ दिखती है उसे पहनने में भी शर्म आएगी तुझे . मुझसे पन्गा किया तूने साली मुझसे , मैं मिनिस्टर तो बन कर hi रहूँगा आज नहीं तो कल उससे पहले तुझे अपनी रांड बनाऊंगा है है है .

इधर रीता क घर पर रजनी दोपहर को hi आ गयी थी क्यूंकि उसे पता था क आज अमित का आखिरी एग्जाम है और पता नहीं था क कहीं वो कल hi अपने घर न चला जाये इस लिए आज hi वो मौका था जब वो अमित क साथ वो सब करना चाहती थी जिसे वो कितने दिनों से सोच कर बैठी थी . दोनों बहने रीता क कमरे में बैठी थी गुप्त चर्चा करती हुई

रीता : दीदी एक बार फिर से सोच लो. मैं तो कहती हूँ उसे सब सच सच बता hi दो अगर उसे पता चल गया तो पता नहीं वो कैसे रियेक्ट करेगा.

रजनी : पागल हो गयी हो तुम ? वो मेरे साथ ऐसा कभी भी नहीं करेगा . कितनी इज़्ज़त करता है मेरी. अगर उसे पता लगा की उसकी बड़ी मौसी जिसकी वो इतनी इज़्ज़त करता है खुद उसके साथ वो सब करना चाहती है तो वो क्या सोचेगा मेरे बारे में? नहीं नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकती .

रीता : पर दीदी आप समझ क्यों नहीं रही . वो मेरे साथ आजकल कुछ ज्यादा hi डर्टी हो गया है जिसकी वजह मैं hi हूँ शायद . ऐसे में वो आप को पहचान जायेगा जब आप वो सब न कर पई तो .

रजनी : तू कहना क्या चाहती है ? पहले भी तो मैंने किया है न . तब उसे कौन सा पता चला था . वैसे ऐसा क्या करती है तू उसके साथ जो वो पहचान लेगा

रीता : वो दीदी , वो ,,,, वो मेरे साथ वीलडली सेक्स करता है , मैंने hi उसे आदत दाल दी है क्यूंकि मुझे इसमें मज़ा अत है.

रजनी : वाइल्ड सेक्स ??? ठीक से बता तू क्या कह रही है

रीता : अब मैं कैसे समझों आपको . एक मिनट रुकिए .

रीता ने अपनी अलमारी में से अपने पति का लैपटॉप निकला और उसमे से एक वीडियो निकल कर प्ले कर दी . जो वाइल्ड सेक्स की थी . रजनी रीता क साथ बैठ कर वो देखने लगी . इतनी बुरी तरह से रफ़ सेक्स रजनी ने पहले न देखा था न सुना था करने की तो बात hi दूर की है. पर ये सब देख्ग्त हुए उसे भी ाचा ज़रूर लगा था और उसकी छूट में एक बार नमी आ गयी .

रीता : इसकी बात कर रही हूँ मैं . मेरी विश थी क मैं ऐसे सेक्स करूँ . इसकी आदत मुझे इन्होने hi डाली थी पर अब तो खुद फ्यूज ढीला हो गया है उनका. शुरू शुरू में तो ऐसे कर लेते थे पर अब नहीं होता कुछ भी उनसे . अमित क दमदार औज़ार को देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने ये सब उसके साथ भी किया . और अब तो इसी में मज़ा आने लगा है.

रजनी : तो इसका मतलब तुम दोनों ऐसे hi करते हो ? क्या वो ऐसे जंगली जानवर बन कर तेरे साथ .....

रीता : हाँ दीदी बिलकुल ऐसे hi . और मज़ा भी बहुत अत है . इसी लिए तो कह रही हूँ क वो पहचान जायेगा . और फिर आप ने तो कभी मुँह में भी नहीं लिया होगा मगर वो तो मुँह को भी छूट समझ कर करता है और छूट क साथ साथ पीछे से भी करना पसंद है उसे . मेरी तो खास कर क बच उसे बहुत पसंद है . और आपकी तो मुझसे भी बड़ी है. वो नहीं छोड़ेगा और मुझसे नहीं लगता क आप ने कभी जीजा जी को पीछे से करने दिया होगा .

रजनी : हे भगवन , ये तूने कैसी गन्दी आदत लगा दी है उस मासूम को. तूने ज़रा भी नहीं सोचा क वो अपनी ज़िन्दगी में आने वाली लड़की क साथ कैसा करेगा ? मैं तो सोच कर आयी थी क आज उसे दिल से खुश करुँगी . ताकि मुझे भी तसल्ली हो क मैंने अपनी इज़्ज़त बचने वाले को ख़ुशी दी. पर तेरी बातें सुन कर अब मुझे दर लगने लगा है

रीता : इसी लिए तो कह रही हूँ दीदी क उसे सब साफ साफ बता दो वर्ण आप पकड़ी जाओगी और फिर इसका अंजाम गलत भी हो सकता है

रजनी : नहीं मैं उसका सामना नहीं कर पाऊँगी. अब तो जो होगा देखा जायेगा . अब मैंने ठान लिया है . इतने दिनों से जो सोच कर बैठी हूँ अब उसे नहीं बदल सकती.

रीता : तो फिर अभी से तेल लगा लो दीदी वर्ण पूरा मोहल्ला तुम्हारी चीखें सुनेगा अगर उसने पीछे घुसा दिया तो .

रजनी : एक तो पहले hi मेरी जान निकल रही है ऊपर से तू मुझे डरा रही है. चल जा अब मुझे आराम करने दे. रत का इंतज़ाम ठीक से करना कोई गड़बड़ न हो

रीता : मेरी तरफ से तो नहीं होगी पर मुझे लगता है आप hi न गड़बड़ करवा देना . अब सो जाओ कुछ देर आप और पीछे भी तेल लगा लो थोड़ा ताकि रास्ता नरम पद जाये . वर्ण कच्चे रस्ते पर उसका ट्रक घुसा तो सब कुछ फाड़ क रख देगा हे हे हे

रजनी : तू जाती या नहीं .



रजनी ने गुस्से से रीता को घूरा तो वो हस्ती हुई कमरे से चली गयी. रजनी ऊपर से तो खुद को मजबूत दिखने की कोशिश कर रही थी पर रीता की बात कहीं न कहीं सच hi थी. अमित का लैंड छूट में लेने पर hi उसकी छूट का भूगोल बदल गया था तो अनछुई गांड में उसका मुसल लेना खुद ख़ुशी करने जैसा था . रजनी अंदर से दर रही थी . कहाँ वो इतने दिनों से इस पल का इंतज़ार कर रही थी और अपनी छूट को भी आज अचे से साफ़ कर क आयी थी मगर अब उसे दर लग रहा था. ऊपर से जो वीडियो उसने देखि थी अभी अभी वो मंज़र इमेजिन कर क hi उसे दिन में टारे नज़र आने लगे थे . मगर फिर भी वो ज़िद किये बैठी क वो कुछ भी करेगी क्यूंकि अमित ने जो उसपर एहसान किया था वो उसका बदला उतरना चाहती थी. कुछ देर बाद वो खुद को हौंसला देती हुई बाथरूम में घुस गयी और रीता की सलाह मानते हुए अपनी गांड में खुद hi तेल लगा कर उंगली करने लगी . वैसे तो वो अमित को अपनी छूट में झाड़ा लेने का सोच रही थी पर वो ये भी जानती की अमित का स्टैमिना कुछ ज्यादा hi है . ऐसे में उसकी गांड का बच पाना मुश्किल लग रहा था .
 
अपडेट 223



मैं जब घर पहुंचा तो रीता मौसी क साथ रजनी मौसी भी घर पर मौजूद थी. मुझे देखते hi मौसी ने कास क मुझे गले से लगा लिया .

रजनी : कैसा है ? आज ख़तम हो गए न तेरे पेपर ?

अमित : हाँ मौसी आज ख़तम हो गए और मैं ठीक हूँ . आप कैसी हैं ?

रजनी : तुझे देख लिया अब और भी अछि हो गयी हूँ . चल पहले खाना खा ले . रीता खाना लगाओ आज मैं अपने हाथों से खाना खिलाऊंगी अपने बेटे को .

रीता : हाँ हाँ आज तो कुछ ज्यादा hi प्यार आ रहा है आपको . सारा प्यार तो आप hi करेंगी न आज .

रजनी: ऑंखें निकलते हुए ) रोज़ तो तू hi करती है न ? एक दिन क लिए भी मैं नहीं कर सकती ? चल जल्दी कर .

रीता मौसी हस्ते हुए किचन में चली गयी . रजनी मौसी ने मुझे अपने साथ बिठा लिया और बातें करने लगी . नेहा दीदी और करुणा दीदी भी अपने रूम से बहार आ गयी जो शायद एग्जाम की तयारी कर रही थी . वैसे तो मैं बहार से खा कर आया था पर मौसी का इतना प्यार देख कर मैं मन नहीं कर पाया . रजनी मौसी ने अपने हाथों से मुझे खाना खिलाया . उसके बाद मैं कुछ देर आराम करने क लिए अपने कमरे में चला गया . बीएड पर लत ते hi मुझे नींद आ गयी और फिर शाम को अपने होंठों पर एक गीले गीले से एहसास मेरी आँख खुली .

करुणा : उम्म्माह्ह अब उठ भी जाओ जानेमन , कब तक सोते रहोगे ?

अमित : पागल हो गयी हो आप ? घर में मौसी और बड़ी मौसी भी हैं फिर भी ऐसे ....

करुणा : शहहहहह , प्यार किया तो डरना क्या . तुम कहो तो उनके सामने भी मैं ये सब कर सकती हूँ . अभी तुम जानते hi कहाँ हो मुझे .

अमित : आप खुद तो मरोगी मुझे भी मरवाओगी .

करुणा : मरवाउंगी तुमसे hi मरवाउंगी . आज ाचा मौका है . मैंने सुना है बड़ी मौसी आज यहीं रहने वाली हैं. तो आअज रत .....

अमित : क्या

करुणा : आज रत माँ तो मौसी क साथ बातें करेगी. तो क्यों न आज हम दोनों.....

अमित : बड़ी मौसी क यहाँ होते ऐसा रिस्क लेना पागलपन है . अब हटो मेरे ऊपर से इससे पहले क कोई और आ जाये .

करुणा : दिल तो नहीं कर रहा हटने का मेरे स्वीट जणू . पर अभी क लिए छोड़ देती हूँ तुम्हे रत को हिसाब बराबर कर लुंगी . मममुहाः . चलो अब जल्दी नीचे आ जाओ सब तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं .

इतना कह कर करुणा दीदी ने एक बार मुझे किश की और मेरी छाती पर अपने गुब्बारे मसलते हुए उठ कर हटी हुई कमरे से बहार चली गयी . मैं फ्रेश हुआ नीचे आ गया जहाँ हॉल में रजनी मौसी नेहा दीदी करुणा दीदी और रीता मौसी मौजूद थी. रीता मौसी ने सबको चाय दी और हम चाय पिटे हुए बातें करने लगे. थोड़ी देर में निधि दीदी भी आ गयी .

निधि : माँ आप यहाँ ?

रजनी : नैना ने बताया नहीं तुम्हे ? आज मैं यहीं रहने वाली हूँ . मैंने उसे कहा था क वो तुम्हे बता दे क आज मैं यहाँ रहने वाली हूँ तो तुम घर चली जाओ. नैना से खाना तो बनता नहीं है. सबको भूखा रहना होगा नहीं तो .

रीता : इतनी जल्दी क्या है दीदी . खाना यहीं से बना कर भेज देते हैं न . कहाँ बेचारी घर जा कर बनती रहेगी .

निधि : उदास होते हुए ) पर माँ मैं ....

( निधि कहना तो चाहती थी क वो अमित क साथ hi रहना चाहती है पर अपने दिल की बात अपने होंठों से कह न पायी . बस नज़र भर कर अमित की तरफ देखा हो उसके प्यार से अभी भी अनजान था . )

रजनी : बीटा तुम तो जानती हो नैना कितनी लापरवाह है. तू टाइम से जा कर खाना बना ले. यहाँ से लेकर जाने में देर हो जाएगी .

निधि : ठीक है माँ. मैं चलती हूँ . और तुम कल टाइम हो तो ऑफिस आ सकते हो ?

करुणा : ऑफिस ? पर ये वहां क्या करेगा ?

निधि : वो ... वो अंकल यद् कर रहे थे . उनको ज़रूरी काम था तो इस लिए उन्होंने कहा था आने को .

दीदी ने बात को संभल लिया वर्ण जवाब देना मुश्किल हो जाता मेरे लिए .

अमित : ठीक है दीदी मैं कोशिश करूँगा .

निधि : ाचा तो मैं चलती हूँ. अमित ,,,,, ज़रा बात सुनोगे ??

अमित : कहिये दीदी

मैं उठ कर दीदी क पास आ गया . शायद वो कुछ कहना चाहती थी . दीदी मुझे अपने साथ बहार ले गयी .

निधि : सोचा था आज भी तुम्हारे साथ रहूंगी पर जाना पद रहा है. मुझे नहीं पता था क माँ यहाँ आ रही हैं . सॉरी

( निधि अमित को बिलकुल ऐसे hi सफाई दे रही थी जैसे वो सच में पति पत्नी हो और अपने पति की मर्ज़ी बगैर वो कहीं जा रही हो .)

अमित : इसमें सॉरी वाली कौन सी बात है दीदी ? आप ऐसे क्यों सोच रही हैं ?

निधि : वो क्या है न , इतने दिनों से हम साथ में सो रहे हैं तो आज तुमसे अलग होना अजीब सा लग रहा है. मुझे तो रत को नींद hi नहीं आएगी . तुम्हारी आदत जो हो गयी है .

अमित : है है है , देखा दीदी मैंने कहा था न क आदत मत डालो. कल को शादी कर क जब आप अपने ससुराल जाओगी तो वहां कैसे रहोगी ?

निधि : मैं वहीँ रहूंगी जहाँ तुम रहोगे . आयी बात समझ में . कल ज़रूर आना ऑफिस. अब तो एक्साम्स भी हो गए हैं. मैं सोच रही थी क कल का दिन हम साथ में बिताएं . बहुत दिनों से मैं कहीं बहार नहीं गयी . इस लिए कल तुम्हारे साथ जाना चाहती हूँ . आओगे न ?

अमित : आपको भला मैं मन कर सकता हूँ ? आप बस आर्डर दिया कीजिये .

निधि : आर्डर कैसे दूँ ? आर्डर तो तुम्ही डोज . आखिर तुम्हे hi तो हक़ है आर्डर देने का . बॉस भी हो और ,,,,,,,,

अमित : ये आप बार बार ऐसी बात मत कहा करो. वर्ण मैं नाराज़ हो जाऊंगा फिर आपसे .

निधि : गले लगते हुए ) सॉरी बाबा सॉरी , नाराज़ मत होना. अगर तुम नाराज़ हो गए तो मैं क्या करुँगी. ाचा अब मैं चलती हूँ bye ,,, मममुहाः

निधि दीदी ने जाते जाते मेरे गलों पर एक किश की और मेरी आँखों में देखते हुए गाड़ी में बैठने लगी . मुझे उनका ये चुम्बन अलग hi एहसास दिला रहा था और उनकी नज़रें भी जैसे कुछ कह रही थी पर मैंने अपना सर झटक दिया ये सोच कर क ये सब मेरा बहिन है . दीदी क जाने क बाद मैं वापिस अंदर आ गया.

रीता : अमित ज़रा बात सुन्ना .

रीता मौसी ने अपने रूम एक जाते हुए मुझे बुलाया तो मैंने एक बार हॉल में बैठी नेहा दीदी रजनी मौसी और करुणा दीदी को देखा . करुणा दीदी शर्माती नज़रों से मुझे देख रही थी जैसे कह रही हो क उन्हें सब पता है माँ ने क्यों बुलाया है . मैं उनसे नज़रें चुराता हुआ मौसी क कमरे में गया तो मौसी ने दरवाज़ा बंद कर लिए और मुझे गले से लगा लिया .

अमित : क्या कर रही हो मौसी , मरवाओगी क्या ?

रीता : हाँ आज साडी रत मरवाउंगी . मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा . अब तो तुम्हारे एग्जाम ख़तम हो गए हैं. मैंने कल तुम्हे परेशां नहीं किया था पर आज रत मैं पूरे मज़े लेना चाहती हूँ .

अमित : मौसी क्या हो गया है आपको ? बड़ी मौसी यहीं हैं घर में और आप ... खुद को थोड़ा कण्ट्रोल कीजिये . वर्ण आपकी ये गलती सब कुछ बर्बाद कर देगी

रीता : सीधा सीधा क्यों नहीं कहता क तेरा मन भर गया है . यहाँ मैं इतना तड़प रही हूँ और तू बहाने बना रहा है. क्या मुझे नहीं पाया क दीदी यहाँ है मेरी दोनों बेटियां यहाँ हैं. मैं सब देख लुंगी बस तू तैयार रहना . देख कल तू चला जायेगा गाओं और फिर छुट्टियां भी हैं तेरी तो अब अगले साल hi आना होगा न तेरा . तो आज की रत क्या अपनी मौसी को प्यार नहीं कर सकता ? क्या इतना hi प्यार था अपनी मौसी से ?

रीता मौसी ने उदासी भरा चेहरा बनाते हुए कहा तो मैंने उन्हें बाँहों में भर लिया . मुझे रीता मौसी को ऐसे इंकार करना भी ाचा नहीं लग रहा था . पर मन में दर भी था क कहीं करुणा दीदी की तरह किसी और ने हमें पकड़ लिया तो .

अमित : मौसी ऐसी बात नहीं है . पर ज़रा सोचो अगर किसी को पता चल गया तो क्या होगा .

रीता : कुछ पता नहीं चलेगा . मैंने सब इंतज़ाम कर लिया है . तू बस रत को आ जाना टाइम से . दीदी को मैं गेस्ट रूम में सुला दूंगी .

रीता मौसी तो दिमाग में पहले hi सरे प्लान बना चुकी थी . मैं भी अब क्या करता . मौसी को मन भी नहीं कर प् रहा था वर्ण वो बुरा मन जाती . इस लिए हाँ करदी . रीता मौसी ने एक बार मेरे होंठों पर किश की और फिर हम बहार निकल आये . करुणा मौसी की नज़र अभी भी मुझ पर थी. मैं उनसे नज़रें चुराता हुआ ऊपर अपने कमरे में जाने लगा . करुणा दीदी भी मेरे पीछे आने लगी मगर रजनी मौसी ने उन्हें आवाज़ दे कर रोक लिया . खैर मैं अपने कमरे में आ गया और रहत की सांस ली . अभी मैं अपने रूम में बैठा hi था क गाओं से माँ का फ़ोन आ गया वो पूछ रही थी क मैं कल आ रहा हूँ क नहीं . मैंने उन्हें कल आने का कह दिया . मैं कुछ देर बातों में लगा रहा फिर नीचे से मौसी ने खाने क लिए आवाज़ दे दी. करुणा दीदी रीता मौसी और रजनी मौसी क साथ खाना लगा रही थी . खाना स्वादिष्ट बना था और टास्ते से hi मैं समझ गया क खाना रजनी मौसी ने बनाया होगा .

अमित : वह मौसी मज़ा आ गया . मैं दावे से कह सकता हूँ क खाना रजनी मौसी ने बनाया है .

रीता : तेरा कहने का क्या मतलब , मैं खाना ाचा नहीं बनती ?

रीता मौसी ने थोड़ा बनावटी गुस्सा दिखते हुए कहा जबकि रजनी मौसी क चेहरे पर मुस्कान तैर रही थी .

अमित : अरे नहीं मौसी मैंने ऐसा कब कहा ? मैं तो टास्ते की बात कर रहा था क आप दोनों क हाथों का टास्ते hi अलग है. बस इसी लिए पहचान लिया . वर्ण खाना तो आप भी उतना टेस्टी बनती हैं .

रीता : ाचा तुझे बड़ी पहचान है . मैं भी देखती हूँ कितनी परख कर सकता है तू .

रीता मौसी की बात मुझे समझ नहीं आयी. शायद कुछ और भी बना होगा जिसके बारे में वो कह रही थी .

रजनी : क्या रीता तुम भी , बच्चों क साथ बची बन जाती हो .

करुणा : सही कहा मौसी , माँ अभी भी बची hi तो है. इसी लिए तो अभी भी उछाल कूद करती रहती है .

करुणा दीदी ने मेरे तरफ नॉटी स्माइल करते हुए कहा तो मेरे खाना हलक में hi अटक गया. करुणा दीदी भी आफत hi थी को भी लपेट लेती थी .

रीता : ठहर जा तुझे मैं बताती हूँ. बड़ी आयी दादी अम्मा .

रीता मौसी अपनी अपनी चेयर से उठ कर करुणा दीदी की तरफ बड़ी तो वो जल्दी से उठ कर भाग गयी . माहौल बिलकुल खुश नुमा था . पर रत को मौसी जो करने वाली थी वो तो हम दोनों hi जानते थे . और करुणा दीदी को भी क्या पता था क उनकी माँ आज भी उछाल कूद करने वाली है . खैर कुछ देर बाद रीता मौसी ने दूध गरम कर दिया और रजनी मौसी खुद वो दूध लेकर आयी और हूँ सब को अपने साथ बिठा कर पिलाया और खुद भी पिया . रीता मौसी ने खुद दूध नहीं पिया था और मुझे भी अलग से दिया था . दूध पिने क बाद हम सब अपने कमरों में चल दिए . करुणा दीदी मेरे साथ मेरे रूम में hi आ गयी .

करुणा : ोये हीरो , आज रत सोना नहीं . मैं सब क सोने क बाद आउंगी. आज माँ टी नहीं आ सकेंगी इस लिए आज की तरह तुम सिर्फ मेरे हो. मुआअह्ह्ह

करुणा दीदी ने बात करते हुए मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए . वो रत का प्रोग्राम बना रही थी पर उन्हें क्या पता था उनकी माँ उनसे 21 hi हैं .

अमित : दीदी कण्ट्रोल करो अगर मौसी आ गयी तो ? अभी आप जाओ अपने कमरे में बाद में बात करते हैं .

करुणा : बात नहीं सिर्फ प्यार . मैं इंतज़ार करुँगी . मुहाः

एक और किश करने क बाद करुणा दीदी अपने कमरे में चली गयी . मैं जनता था मौसी ने दूध में दवा मिलायी है इसी लिए खुद नहीं पिया था और मुझे भी अलग से दिया था . मैं बीएड पर आराम से लेट गया और करीब 40’मिनट्स बाद मेरे फ़ोन पर ृत मौसी की मिस कॉल आयी मैं समझ गया वो मुझे अपने कमरे में बुला रही हैं. मुझे रजनी मौसी का दर तो था पर फिर मैंने सोचा क उन्होंने भी दूध पिता था इस लिए वो सो गयी होंगी . मैं धड़कते दिल क साथ अपने कमरे से निकला और पहले करुणा दीदी क रूम का जायज़ा लिया . मैं आज कोई गलती नहीं करना चाहता था . करुणा दीदी क रूम में जाकर मैंने उन्हें आवाज़ दे कर बुलाने की कोशिश की पर वो गहरी नींद में थी . मैंने एक बार उन्हें हिलाया भी पर कोई असर नहीं. मतलब साफ था क वो दवा क असर से गहरी नींद में थी . मैं उनके कमरे का दरवाज़ा लॉक कर क नीचे आ गया . घर में एक डैम सन्नाटा था . और लाइट्स भी ज्यादातर बंद hi थी . मैंने नेहा दीदी क कमरे को चेक किया तो वो भी लोच hi था और लाइट्स भी बंद मतलब वो भी सो चुकी थी. फिर मैंने गेस्ट रूम की तरफ बढ़ा जहाँ रजनी मौसी चादर में सर से पाऊँ तक लिपटी सो रही थी . मैंने उन्हें एक बार आवाज़ दे कर देखा पर उनकी तरफ से कोई रिएक्शन नहीं आया तो मैं तसल्ली करते हुए रीता मौसी क कमरे की तरफ बढ़ा . मैंने दरवाज़े पर हाथ रखा तो दरवाज़ा खुलता चला गया . कमरे में अँधेरा था . मैंने कमरे में आते hi दरवाज़ा लॉक किया और मौसी को देखने की कोशिश करने लगा जो नज़र नहीं आ रही थी .

अमित : मौसी कहाँ हो आप ? और ये सभी लाइट्स क्यों बंद कर दी ? काम से काम जीरो का बल्ब तो लगा लो .

मेरे इतना कहते hi चूड़ियों की खान खान हुई जो बीएड क ऊपर से आ रही थी . आवाज़ ऐसे की गयी थी जैसे वो मुझे इशारे से अपने पास बुला रही हो . मैं समझ गया क मौसी ज़रूर आज कुछ अलग करना चाहती हैं . इसी लिए मैं भी बीएड की तरफ बढ़ा. जैसे hi मैं बीएड क पास पहुंचा तो बीएड पर हाथ लगा कर मौसी को तलाशने की कोशिश की तो मेरे हाथ मौसी क पाऊँ से लगे . शायद वो टंगे सीधी कर क बैठी हुई थी . मेरे हाथ लगते hi मौसी ने ूँ खींचने की कोशिश की मगर मैंने उनके दोनों पाऊँ कास क पकड़ लिए .

अमित : क्या हुआ मौसी अब कहाँ भाग रही हो . खुद hi तो कह रही थी क आज रत आप जी भर क प्यार करना चाहती हो . इसी लिए तो आपने सब को नींद की दवा पिलाई है न ताकि कोई आपकी चीखें न सुन सके. चिंता मत करो आज मैं भी आपकी ऐसी चुदाई करुणा क आपको मेरी कमी महसूस नहीं होगी .

इतना कह कर मैंने नीचे खड़े खड़े मौसी क पाऊँ पकड़ कर अपनी तरफ खींचे. बीएड पर मौसी क गिरने की हलकी सी आवाज़ आयी . मगर वो बोली कुछ नहीं . मैंने उनको किनारे तक खिंच लिया . मैंने अपने हाथ पाऊँ से ऊपर उनकी पिंडलियों की तरफ बढ़ाये तो मौसी की नंगी टांगों का एहसास होते hi मेरा मन रोमांच से भर गया . मतलब आज मौसी पहली hi बिना कपड़ों क बैठी थी मेरे लिए . मेरे हाथ मौसी की नंगी पिंडलियों को सहलाते हुए उनके घुटनो तक आ गए . उनकी कोमल त्वचा मेरी उत्तेजना को बढ़ा रही थी . घुटनो से फिर नंगी कोमल मांसल जांघों पर आते hi मेरा लैंड एक डैम सख्त हो गया. मौसी क मांसल जांघें आज कुछ ज्यादा hi मांसल लग रही थी . बालों का तो नमो निशान नहीं था कहीं भी. मैं मौसी की मांसल जांघों को मसलने लगा तो मौसी क मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी और उनके हाथ मेरी कलाइयों पर कास गए .

रीता : कक्कक्कक्स उम्मम्मम कक्कक्कक्स

अमित : क्या बात है मौसी आज तो मेरे लिए पहले hi सब उतर कर बैठी हो. लगता है कुछ ज्यादा hi गर्मी लग रही है आज आपको . चिंता मत करो आज साडी गरमी निकल कर hi जाऊंगा . इतना कह कर मैंने मौसी की टंगे पूरी फैला दी और टांगों क बीच आते हुए टांगों क जोड़ की तरफ हाथ बढ़ाया जहाँ पहली रुकावट मुझे महसूस हुई जो एक रेशमी कपडे की थी मगर ये पेंटी क ऊपर hi एक और कपडा था . मतलब मौसी ने पेंटी क इलावा भी कुछ पहना हुआ था.

अमित : मौसी आज आपने ये क्या पहना हुआ है जो सिर्फ कमर तक hi है ? और ये अँधेरा क्यों कर रखा है , क्या दिखाना नहीं चाहती मुझे ?

( रजनी जो इस वक़्त रीता बानी हुई थी वो मुँह से कुछ बोल नहीं सकती थी और ऊपर से अमित की काम क्रीड़ाएं उसे मस्ती क उस बवंडर में खींच के आयी थी जहाँ वो खुद को खोटी जा रही थी. अमित से पहले भी वो मिलान कर hi चुकी थी और जो संतुष्टि उसे अमित से मिली थी वो जीवन में अद्वितीय थी. हमेशा मर्यादा की सीमा में रही रजनी ने अपने पति क सेवा कभी किसी दूसरे मर्द क साथ कोई रिश्ता नहीं रखा था . मगर अमित क साथ न चाहते हुए भी वो साडी हदें पर कर बैठी थी. चाहे इसकी शुरुआत अमित की तरफ से अनजाने में hi हुई थी मगर उसके अनजान पैन का फायदा उठा कर रजनी अब उस से बार बार वो संतुष्टि लेने लगी थी . वास्तव में अमित मोठे गाजे लैंड और उसके स्टैमिना ने रजनी को मन से उसका गुलाम बना दिया था. ये तो रिश्ते की शर्म थी जो आड़े आ रही थी वर्ण रजनी रीता की hi बड़ी बहिन थी और गर्मी भी उसकी 21 hi थी मगर परदे में. अमित ने उस दूँ जैसे रजनी की इज़्ज़त बचाई थी उस दिन से hi वो तो दासी की तरह अमित को पूरी तरह संतुष्ट करना चाहती थी हर तरह से और आज वो मौका आ गया था. रीता ने जो कुछ बताया था आज उसके बाद एक पल क लिए वो थोड़ा दरी ज़रूर थी मगर ये भी सच था क वो हर दर्द झेलने को तैयार थी आमिर को खुश करने क लिए . इसी लिए उसने आज एक भड़कीली निघ्त्य पहनी थी जो रीता की hi थी जिसमे उसका गदराया जिस्म मुश्किल से hi काबू में था . उसने इसे पहना था अमित को रिझाने क लिए पर शर्म और परदे की वजह से वो इसे दिखा नहीं प् रही थी अमित को वर्ण इस वेशभूषा में अगर उसे कोई भी देख लेता तो रपे hi कर देता . मगर फ़िलहाल वो अँधेरे में hi अपना काम देवी सा रूप छुपाये हुए थी. अमित की हरकतों से वो इतनी गरम हो चुकी थी क खुल कर बोलना चाहती थी पर बंधन में थी . )

अमित : मौसी आप कुछ बोल क्यों नहीं रही . वैसे तो इतना खुल कर सब करती हो और आज ऐसे चुप हो . कुछ तो बोलिये .

जब मौसी ने कोई जवाब न दिया तो मुझे लगा वो शायद घर में रजनी मौसी क होने की वजह से ऐसा कर रही हैं . मैंने ज़मीन पर घुटने तक कर अपना मुँह मौसी की जांघों क बीच कर दिया और उनकी पेंटी को दोनों तरफ से पकड़ कर खिंचा मौसी ने खुद hi अपनी कमर ऊपर उठा कर पेंटी को उतरने दिया . मौसी क टांगों से पेंटी उतरने क बाद मैंने उनकी जांघों को मसलते हुए चूमना शुरू कर दिया .

रीता : कक्कक्कक्स उम्मम्मम्म कक्कक्स

मौसी क मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी वो अपनी कमर हिलने लगी . मौसी ने अपनी जंगों में मेरा सर कास लिया . उनके पाऊँ मेरी पीठ पर थे और उनकी पायल हिलते हुए मधुर आवाज़ कर रही थी. मैंने उनकी जांघों को मसलते हुए अपने होंठ उनकी छूट पर रख दिए हो आज कुछ ज्यादा hi फूली हुई लग रही थी और गीली भी कुछ ज्यादा hi थी . मेरे होंठों और जीभ को अपनी छूट पर महसूस करते hi उनका बदन ऐंठने लगा . अभी मैंने 2 मिनट्स hi चूसा था क मौसी का जिसम झटके खाने लगा और भर भरा कर वो झड़ने लगी. छूट में कामर्स की मनो बाद स आ गयी . मेरा चेहरा उनके कामर्स से भर गया था . मौसी ने मेरा सर अपनी छूट पर ज़ोर से दबा दिया था . कमरे जूनियर म उनकी तेज़ चलती साँसों और सिसकियों से मनो संगीत बजने लगा था . मौसी क शांत होते hi मैं खड़ा हुआ और अपने कपडे उतरने लगा

अमित : क्या बात है मौसी आज आप कुछ ज्यादा hi गरम लग रही हो. इतना पानी कैसे निकला आज आपका अभी परसों hi तो मैंने तबियत से आपको ठंडा किया था .

मेरी बात पर मौसी ने फिर कोई जवाब न दिया बस ज़ोर ज़ोर से सांसे लेती रही . तब तक मैं पूरी तरह नंगा हो गया था . मौसी क इस तरह चुप रहने से मुझे एक शरारत सूझी. मैंने सोचा मौसी रजनी मौसी क होने से चुप हैं तो क्यों न उन्हें जैम कर रगडन और उनको मजबूर करदूँ बोलने क लिए . ये ख्याल आते hi मेरे लैंड ने झटका मारा. मौसी अभी भी वैसे hi बिस्तर पर पड़ी थी मैं उनको खींच के बीएड से नीचे उतरा और घुटनो पर बिठा दिया. उनके जिस्म पर जो कपडा था वो कमर तक hi था. मैंने उस दोनों सिरे से पकड़ा और ऊपर उठाते हुए उनके जिसका से अलग कर दिया . उसके नीचे मौसी ने ब्रा नहीं डाली हुई थी. मैंने मौसी क बालों से उनका सर पकड़ा और उनका मुँह अपने लैंड पर दबा दिया . मेरा लैंड सीधा उनके मुँह पर लगा . मौसी ने लैंड को मुँह में नहीं लिया तो मैं बोलै

अमित : क्या हुआ रीता डार्लिंग आज इसे प्यार नहीं करोगी ? देखो कितना तड़प रहा है ये तुम्हारे मुँह में जाने क लिए चलो जल्दी से इसे मुँह में लो . रोज़ तो खुद hi पीछे पड़ी रहती हो मुँह में लेने क लिए और आज नखरे दिखा रही हो .

रजनी ( मन में ) हे भगवन कैसे कैसे करवाती है ये रीता भी और कितना खुल कर ये ऐसे बात कर रहा है. सीधा नाम लेकर बात कर रहा है. रीता ने hi आदत डाली होगी. अब क्या करूँ , अगर रीता की तरह न किया तो इसे शक हो जायेगा . जो भी हो यही तो मैं करने आयी हूँ )

मौसी ने मेरी बात सुनते hi एक हाथ में मेरा लैंड पकड़ा और सीधा अपने होंठों में जकड लिया . मज़े की एक सिसकी मेरे मुँह से निकल गयी .

अमित : ाः मौसी ककक उफ्फ्फफ्फ्फ़ सच में तुम किसी पोर्नस्टार से काम नहीं हो . दिन रत बस मेरे लैंड को मुँह में लेने को तैयार रहती हो. अब ज़रा गले तक इसे अंदर लो जैसे हर बार करती हो .

रजनी ( मन में ) है भगवन इतना बड़ा मुँह में लेने क लिए hi मुँह पूरा खोलना पड़ता है . इसे गले तक लूंगी तो साँसे hi बंद हो जाएँगी . रीता ये तू क्या क्या करवाती रहती है कमीनी . बचा लेना भगवन )

मौसी ने अपना मुँह खोल कर धीरे धीरे आधा लैंड अंदर लिया और उसे अंदर बहार लेने लगी . मगर मुझे इसमें उतना मज़ा नहीं आ रहा था . मैंने मौसी क सर को पकड़ कर लैंड को उनके मुँह में और अंदर तक करने क लिए एक धक्का मारा तो मौसी ने एक डैम से मेरी जांघों को अपने दोनों हाथों की मुठियों में कास किया और मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी

अमित : अह्ह्ह्हह कक्कक्स एआईईईई क्या कर रही हो मौसी ऐसे काट क्यों रही हो

मौसी ने ज़ोर से मुट्ठियों में मेरी जांघों का मांस पकड़ लिया था जिससे उनके नाख़ून मेरी चमड़ी में घुस गए थे और मुझे दर्द महसूस हुआ . मैंने अपना लैंड मौसी क मुहे से बहार खिंच किया और वो ज़ोर ज़ोर से खांसने लगी

रीता : ाखुन ाखुन ाखुन आआआअह्ह्ह्ह ाखुन ाखुन ाखुन

अमित : क्या हुआ मौसी आज आप अचे से गले में नहीं ले रही हो . मैं पानी दूँ आपको ?

इतना कह कर मैं जैसे hi वहां से हटने लगा तो मौसी ने मेरा लैंड पकड़ लिया और मुझे रोक दिया . माईनस कुछ बोलता उससे पहले hi मौसी ने फिर से लैंड को मुँह में ले लिया . इस बार मौसी खुद hi जोश क साथ तेज़ तेज़ लैंड चूसने लगी.

रीता : सरूप साररूअप्प उम्मम्मम उम्म्म सरूओ सारूणो ाखह्ह्ह्हह्ह्ह्ह उम्मम्मम्म

मौसी खुद hi लैंड को गले तक ले जाने की कोशिश करने लगी. मौसी द्वारा ऐसे लैंड चूसै से मेरा लैंड एक डैम कड़क रोड बन गया था. अब तो नसें फटने वाली हालत में अकड़ा चूका था लैंड . मैंने मौसी को लैंड चूसने से रोका और उन्हें बाजुओं से पकड़ कर उठाया. मौसी क होंठों को मैंने अपने होंठों में जकड़ा और किश करते हुए उनके बड़े बड़े ख़रबूज़ों को मसलने लगा .

अमित : उम्म्म उम्म्म्म उम्मम्माह्ह्ह क्या बात है मौसी आज आपके ये गिनाते भी बड़े बड़े लग रहे हैं. आज आप कुछ अलग hi लग रही हो . कुछ खाया है क्या आपने ?

मौसी ने फिर कोई जवाब न दिया तो मैंने उन्हें बीएड पर धक्का दे कर गिरा दिया. मैंने मन में सोचा क मौसी आप कुछ बोल नहीं रही पर अब आपकी चीखें कमरे की दीवारें और छत सुनेगी.

मैंने मौसी को धक्का दिया जिससे वो पीठ क बल बीएड पर गिरी. मैंने उनकी टांगों को पकड़ क हवा में उठाया और घुटने मोड़ते हुए उनकी टांगों क बीच पोजीशन सेट कर क अपना लैंड उनकी छूट पर सेट कर क एक hi बार में भरपूर रक्त से धक्का मरते हुए जड़ तक लैंड उनकी छूट में घुसा दिया .

रीता : ummmmmmmmmmmmmm ummmmmmmmmmmmmm

मौसी की छूट में मैंने पूरे ज़ोर से वॉर किया था ताकि उनकी चीख निकल जाये मगर ऐसा नहीं हुआ शायद उन्होंने अपने हाथों से अपना मुँह बंद कर लिया था. मगर जिस तरह की दबी दबी दर्द भरी आवाज़ उनके बंद होंठ से आ रही थी उससे साफ़ ज़ाहिर था क उनको काफी दर्द हुआ है. मौसी की छूट आज कुछ ज्यादा hi टाइट लग रही थी मुझे . लैंड पूरा जकड़ा हुआ था छूट क अंदर.

अमित : क्या हुआ मौसी , आज मुँह क्यों नहीं खोल रही तुम? अगर अभी भी मुँह नहीं खोलोगी तो देखना क्या हाल करता हूँ तुम्हारा .

मौसी मेरी इस धमकी क बाद भी कुछ न बोली तो मैंने उनकी टंगे उनके कन्धों की तरफ दबाते hi ताबड़तोड़ ज़ोरदार धक्के पेलने शुरू कर दिए . जिससे उनके साथ साथ बीएड भी हिलने लगा . मौसी मेरे पेट पर हाथ रख कर मुझे रोकने की कोशिश कर रही थी जिससे उनकी पायल क साथ साथ उनकी चूड़ियों की भी खान खान आवाज़ करने लगी पर उन्होंने अभी भी अपना मुँह नहीं खोला .

( रजनी इस तरह ज़ोरदार चुदाई से दर्द में तड़प रही थी और चीखना चाहती थी पर मज़बूरी में अपने होंठ खुद hi दबाये इस असहनीय दर्द को झेल रही थी. अब उसे पता चल रहा था क वाइल्ड चुदाई क्या होती है )

मौसी को इस तरह ज़बरदस्त धक्के मरने क बाद भी वो न बोली तो मैंने उनके ऊपर झुक कर उनकी जांघों क नीचे से हाथ निकल कर उनकी कमर को लपेट लिया और झटके से अपने साथ लपेट ते हुए हवा में उठा लिया. गिरने क दर से मौसी ने मेरे गले में बहन दाल ली . मैं उन्हें ऐसे hi हवा में उठाये अपने लैंड पर उछलने लगा. मौसी मेरे साथ चिपक गयी अउ मैं उन्हें ऐसे hi छोड़ते हुए दीवार तक ले गया और दीवार क साथ लगा कर ज़ोरदार धक्के मरने लगा. मौसी मेरी गर्दन पर अपने दांत गाड़ने लगी.

अमित : कैसा लग रहा है मेरी जान मज़ा तो आ रहा है न . अब तो तब तक ऐसे गाडूंगा जब तक तुम अपना मुँह नहीं खोलती .

मैंने कुछ देर ऐसे hi उन्हें दीवार क साथ हवा में उठाये रखा फिर उनकी एक तंग को छोड़ कर एक तंग को अपनी बाजु में दबाये उन्हें एक पेअर पर खड़ा कर क छोड़ने लगा . दीवार क साथ लगी मौसी मेरे लैंड क वॉर से कहीं भी भाग नहीं सकती थी और मैं पूरे जोश से मौसी को छोड़ रहा था ताकि उनकी चीखें सुन सकूँ. पर मौसी भी पूरी हिम्मत दिखा रही थी . इस दौरान मौसी फिर से झाड़ गयी. मौसी की छूट गीली हो जाने से फच फच की आवाज़ें आने लगी थी. मैंने मौसी को छोड़ और उन्हें फिर से बीएड की तरफ लेट हुए बीएड पर झुका कर उन्हें घोड़ी बना दिया और पीछे से अपना लैंड उनकी छूट पर सेट किया . मुझे एक एक ख्याल आया क्यों न मौसी की गांड hi गाडी जाये. मैंने उनके भरी भरकम कूल्हों को अपने हाथों म दबोच कर फैलाया और लैंड को गांड क छेड़ पर सेट किया. मौसी की गांड पर चुकानी कुछ ज्यादा hi थी जैसे की वहां पर उन्होंने तेल वगैरह लगाया हो . मैंने एक हाथ से लैंड पकड़ कर सेट किया . मौसी एक हाथ पीछे कर क मुझे रोकने की कोशिश करने लगी . पर मैं कहाँ रुकने वाला था . मैंने जैसे hi लैंड को गांड में घुसाने की कोशिश की तो मौसी आगे को भागने लगी मगर मैंने उससे पहले hi धक्का पेल दिया जिससे मेरा लैंड मौसी की गांड में थोड़ा सा घुस गया. लैंड गांड में घुसते hi मौसी ज़ोर से चीख पड़ी .

‘ आयआईईई माआआआ मर्डर गईइइइइइइइ ‘



लैंड तो मौसी की गांड में घुसा था मगर उनकी चीख सुन कर मेरी भी गांड फैट गयी. क्यूंकि ये आवाज़ रीता मौसी की नहीं थी . ये आवाज़ तो रजनी मौसी की थी .
 
अपडेट 224



रजनी मौसी की चीख सुन कर मेरी हालत पतली हो गयी थी. मुझे समझ नहीं आ रहा था क्या करूँ . मैंने सोचा भी नहीं था क मैं जिसे रीता मौसी समझ कर इतनी बुरी तरह छोड़ रहा हूँ वो रजनी मौसी निकलेगी. मेरा दिल कर रहा था क चुपचाप अँधेरे में hi कमरे से निकल जॉन. पर मौसी की एक बार फिर आह निकली जिसे सुन कर आनन् फानन में मैंने कमरे की लाइट जला दी. कमरे में एक डैम रौशनी हो गयी और मेरी नज़र बीएड पेट क बल पड़ी मौसी पर बड़ी जो अपने हाथ इस से अपने चूतड़ों की दरार में मसल रही थी. मैं तो वहीँ जैम गया. मौसी का गदराया हुआ बदन दूध सा सफ़ेद था और रीता मौसी से कुछ ज्यादा hi मांसल. मौसी को ऐसी हालत में देख कर मैं भूल गया क मैं अभी यहाँ से भागने की सोच रहा था. रजनी मौसी की ऑंखें अभी बंद थी और शायद गांड में हो रहे दर्द से वो अभी तक कमरे में लाइट जलने को समझ नहीं पई थी. मौसी को दर्द में कराहता देख मैं उनके पास तो चला गया पर मेरा दिमाग अभी भी जैसे मेरे काबू में नहीं था . मैं बस ख़ामोशी से मौसी का जिस्म hi देख रहा था . कमरे में एक डैम से ख़ामोशी से शायद मौसी का ध्यान इस तरफ हुआ और कमरे में फैले उजाले से वो एक डैम से पलटी . मुझे खुद को घूरता प् कर मौसी को अपने नंगे जिस्म का अभाव हुआ और वो जल्दी से खुद को छुपाने क लिए बेडशीट से hi खुद को छुपाने लगी. हम दोनों hi खामोश थे और कोई कुछ बोल नहीं रहा था . तभी मेरे मुँह से निकला

अमित : मौसी आ ,, अआप ??

रजनी मौसी ने अपना सर ऊपर उठाया और मेरी आँखों में देखा और फिर नज़रें चुराने लगी

रजनी : मम मैं वो मैं .

रजनी मौसी को भी जैसे शब्द नहीं मिल रहे थे उनकी हालत भी मेरे जैसी hi थी .

अमित : मुझे माफ़ कर दीजिये मौसी मैंने आपके साथ ......

एक बार फिर हमारे बीच ख़ामोशी हो गयी. हम दोनों को hi समझ नहीं आ रहा था क बात कैसे की जाये . इस ख़ामोशी को इस बार मौसी ने भांग किया .

रजनी : माफ़ी किस लिए ? माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए क इस तरह बिना बताये मैं तुम्हारे साथ ये सब .

अमित : मुझे माफ़ कर दीजिये मौसी . मैंने कभी सोचा भी नहीं था क मैं ये सब .....

रजनी : तो क्या तू सिर्फ रीता को hi प्यार करता है मुझसे नहीं ? क्या तेरा थोड़ा सा प्यार मुझे नहीं मिल सकता ? क्या मैं तेरी कुछ नहीं ? या तू मुझे रीता की तरह अपना नहीं मंटा ?

रजनी मौसी ने ये सब कहा तो मैं थोड़ा हैरान भी हुआ मगर फिर उनकी तरफ देखने लगा . मुझे समझ नहीं आ रहा था क मैं क्या जवाब दूँ. मैं तो खुद उनसे शर्मिंदा हो रहा था क मैंने उनके साथ ये सब किया मगर उनके सवालों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया

रजनी : जवाब क्यों नहीं देते ? क्या तुम मुझसे प्यार नहीं कर सकते ? अपना थोड़ा सा प्यार मुझे नहीं दे सकते ? रीता की तरह मुझे भी तो तेरी ज़रूरत है.

मैं अभी भी मौसी की बातों पर सोच रहा था और उन्हें क्या जवाब दूँ मुझे समझ नहीं आ रहा था .

रजनी : समझ गयी , तू मेरे साथ प्यार नहीं करना चाहता . मैं तेरी नज़रों में शायद गिर गयी हूँ . पर मैं ऐसी बिलकुल भी नहीं हूँ. अपने पति क सिवा कभी मैंने किसी क साथ ऐसा वैसा कुछ नहीं किया . पर उस दिन तुझे रीता क साथ देख कर मैं खुद को रोक नहीं पायी. रोकती भी कैसे जब तू रीता समझ कर मुझे छू रहा था तो बसों से दबी मेरे अंदर की आग भड़क गयी. तू नहीं जनता पर तेरे मौसा जी तो मुझे हाथ भी नहीं लगते. बस इसी लिए मैं बहती चली गयी और खुद को रोक नहीं पायी . और उस दिन तूने जैसे मेरी इज़्ज़त बचायी थी उसके बाद मैं तुम्हे दिल खोल कर प्यार करना चाहती थी मगर शायद तुम ऐसा नहीं चाहते . तेरी मर्ज़ी जाने बगैर मैंने ये सब किया उसके लिए हो सके तो मुझे माफ़ करना . मैं आज क बाद कभी तुम्हे परेशां नहीं करुँगी .

इतना कह कर मौसी बीएड से उठ गयी और एक बार फिर मेरी तरफ देखा . मौसी की हालत तो मैं पहले hi जनता था . मगर इस तरह से अचानक ये सब होने से मैं थोड़ा सोच में पद गया था. पर मौसी ने अभी जो कुछ कहा उसने मुझे झकझोर दिया था . आखिर ठीक hi तो कह रही थी मौसी . जब मैं रीता मौसी क साथ ये सब कर सकता हूँ तो उनके साथ क्यों नहीं . तभी मैंने बीएड से नीचे गिरी हुई वो बिकनी उठायी जो मैंने मौसी क जिस्म से उतरी थी . काळा रंग की बेहद सेक्सी डिज़ाइन की वो बिकनी जो सिर्फ कमर तक hi थी. मैंने उस एक मात्रा कपडे को उठाया तो मेरे हाथों में वो कपडा देख कर मौसी ने निराशा में सर झुका लिया . जैसे उनकी आखिरी उम्मीद भी टूट गयी हो. मैंने वो कपडा मौसी की तरफ बढ़ाया तो उन्होंने चुपचाप हाथ आगे बढ़ा कर उसे पकड़ा मगर मैंने छोड़ा नहीं .

अमित : इसे पहन कर दिखाइए एक बार . मैं भी तो देखूं आप इसमें कैसी लगती हैं .

मेरी बात सुनते hi मौसी ने सर उठा कर मेरी आँखों में देखा जैसे उन्हें समझ न आया हो मैंने जो अभी अभी कहा .

अमित : दिखाइए न , अँधेरे में मैं कुछ देख hi नहीं पाया. मैं भी तो देखूं मेरी मौसी इसमें कितनी सेक्सी लगती है .

मैंने मुस्कुरा कर इतना कहा तो मौसी की आँखों में ख़ुशी क आंसू आ गए और वो मेरे गले लग गयी . उन्होंने जो बेडशीट पकड़ी हुई थी वो नीचे गिर गयी थी. अब हम दोनों नंगे एक दूसरे क साथ चिपके खड़े थे . मौसी का गदराया बदन मेरे जिस्म क साथ लगते hi मेरा मुरझाया लैंड फिर से अकड़ने लगा . मैंने भी मौसी क बदन को अपनी बाँहों में भींच लिया और उनकी गांड पर दोनों हाथ रख कर उन्हें मसलने लगा .

अमित : मौसी आप तो रीता मौसी से भी ज्यादा सेक्सी हैं. क्या एक बार मुझे पेहेन कर नहीं दिखाएंगी ?

रजनी : धत्त्त , शर्म नहीं आती ऐसे बोलते हुए .

अमित : अब कैसी शर्म मौसी. अब तो मैं आपको वैसा hi प्यार करूँगा जैसा रीता मौसी क साथ करता हूँ . तभी तो आपको पता लगेगा क आप मेरे लिए कितनी खास हो . चलिए जल्दी पेहेन कर दिखाइए .

मौसी शर्माती हुई मुझसे अलग हुई और मेरी तरफ पीठ कर कर जल्दी से वो बिकनी पेहेन ली जो उनके चूतड़ों से थोड़ा सा नीचे थी . बस चूतड़ hi छिप रहे थे मगर अपने बड़े साइज की वजह से बिकनी का सिरा उठाये हुए वो अपनी जगह बता रहे थे . बिकनी मौसी क बदन से पूरी तरह चिपकी पड़ी थी मनो पूरी फिटिंग की hi बानी हो उनके लिए . तभी मौसी धीरे से मेरी तरफ पलटी तो उनके कैसे हुए पहाड़ देख कर मेरी नज़रें वहीँ जैम गयी. दूधिया बदन काळा कपडे में कैसा लगता है ये तो आप जानते hi होंगे ऊपर से इतना गदराया हुआ जिस्म जो कपडे फाड़ कर बहाने को आतुर हो उसे देख कर मेरा लैंड स्प्रिंग की तरह उछलने लगा. ये शायद मौसी ने भी देख लिया और शरमाते हुए मेरी तरफ देख कर फिर से नज़रें झुका ली.

रजनी : ऐसे क्या देख रहे हो?

अमित : सुपर हॉटट , आप सच में अभी भी पूरी जवान हैं मौसी. और आपका ये हॉट फिगर किसी को भी पागल कर देगा .

रजनी : धत्त्त , झूठ बोलते शर्म नहीं आती तुझे .

मौसी शरमाते हुए ये सब कह रही थी मगर उनके चेहरे से साफ़ ज़ाहिर था क वो अंदर से अपनी तारीफ सुन कर कितनी खुश थी. उनके गोर गाल लाल हो रहे थे . मैंने हाथ आगे बढ़ा के मौसी को कमर से पकड़ा और खिंच कर अपने साथ लगा लिया .

अमित : कसम से मौसी , आप बहुत हसीं हो. मैंने कभी इस नज़र से आपको देखा hi नहीं था और अब देखो मेरी हालत क्या हो रही है .

इतना कह कर मैंने अपनी कमर को थोड़ा आगे को ठेला जिससे मेरा लैंड जो पहले उनके जिस्म से सत्ता हुआ था अब और ज़ोर से उनके गदराये बदन में धंस गया . मौसी भी इस चुभन को समझ गयी .

रजनी : कक्कक्स पहले क्यों नहीं देखा मुझे इस नज़र ? वर्ण तेरी मौसी इतना नहीं तड़पती. आज मेरी साडी तड़प ख़तम कर दे. बना ले मुझे अपना . अब से मैं सिर्फ तेरी hi हूँ . जैसा चाहे मेरे साथ कर बस मुझे तेरा प्यार चाहिए. जिस दिन से तूने मेरी इज़्ज़त बचायी है मैं मन से तेरी हो चुकी हूँ तन तो पहले hi तेरा हो चूका था . मुझे प्यार करो अमित मुझे प्यार करो उम्मम्मम

मौसी मदहोशी में मेरे साथ अपना बदन रगड़ने लगी और खुद hi मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर किश करने लगी . मौसी ने घुटना मोड़ कर एक तंग मेरे साथ रगड़नी शुरू की तो मैंने अपने दोनों हाथ उनके चूतड़ों पर कास कर उन्हें मसल दिया . जिससे मौसी को थोड़ा दर्द हुआ .

रजनी : ककक आआह्ह्ह्ह धीरे , अभी भी दर्द हो रहा है .

अमित : सॉरी मौसी मैंने वहां ,,,,,,, आपने पहले कभी नहीं किया न पीछे से ?

रजनी : सॉरी क्यों कहता है ? हाँ मैंने कभी नहीं किया पर ,,,,,,,

अमित : पर ??

रजनी : मेरी आँखों में देखते हुए ) पर आज तेरे साथ वहां से भी करुँगी . मैं जानती हुई तुझे वो पसंद है .

अमित : सच मौसी , फिर तो मज़ा hi आ जायेगा .

मौसी की बात सुन कर मैं ख़ुशी से झूम उठा और उनकी चूतड़ों को दोनों हाथों में थम कर उन्हें ऊपर उठा लिया . मौसी ने भी मेरे गले में बहन दाल कर मेरी कमर पर अपनी टाँगें लपेट ली.

रजनी : आह्ह्ह्हह गिरायेगा क्या ?

अमित : पहले गिराया था क्या ?

रजनी : हट बदमाश , मेरी क्या हालत कर दी थी तुमने ये मैं hi जानती हूँ . कोई ऐसे करता है क्या ? अभी भी कितना दुःख रही है .

अमित : क्या दुःख रही है मौसी ? ज़रा खुल क बोलो .

रजनी : जैसे तुझे कुछ पता hi नहीं. मेरी छूट और क्या . एक तो तेरा मुसल ऐसे hi अंदर लेना इतना मुश्किल है ऊपर से तूने आज ऐसे किया जैसे मार hi डालोगे .

अमित : सॉरी मौसी , मुझे लगा था क आप रीता मौसी और जान भूख कर आप बात नहीं कर रही जबकि हर बार इतना गन्दा गन्दा बोलती हो तो बस इसी लिए मैंने ऐसे किया .

रजनी : ये रीता भी न , उसकी वजह से मेरी हालत ख़राब कर दी तूने.

अमित : दिखाइए , मैं अभी ठीक कर देता हूँ .

मैंने मौसी को नीचे उतरा और बीएड पर लिटा कर उनकी टांगों क बीच में आ गया. मौसी शरमाते हुए अपनी छूट मुझसे छुपाने लगी . मैंने उनके हाथ उनकी छूट क ऊपर से हटाए तो हूँ बालों क चिकनी छूट मेरी आँखों क सामने आ गयी. मौसी क साफ़ बेदाग रंग की तरह उनकी छूट भी एक डैम बेदाग थी और गदराये जिस्म की तरह hi गदरायी हुई थोड़ी उभरी हुई. छूट क होंठ अभी भी गीले और थोड़े खुले हुए थे. जो कुछ देर पहले hi हुई घमासान चुदाई की वजह से थे. छूट थोड़ी सूजी हुई और लाल लाल लग रही थी ये मेरे द्वारा की गयी बेरहम चुदाई की वजह से हुआ था. मैं छूट की फैंको को फैला कर देखने लगा तो मौसी क मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी .

रजनी : कक्कक्क्स उफ्फ्फफ्फ्फ़ क्या कर रहा है ककक

अमित : देख रहा हूँ क मेरी मौसी की छूट कितनी हसीं है. बिलकुल आप की hi तरह ये भी बहुत सुन्दर है. मगर लगता है इसकी ऐसी हालत मेरी वजह से hi हुई है तो अब इसे ठीक करना भी मेरी ज़िम्मेदारी है.

इतना कह कर मैंने झुकते हुए अपने होंठ छूट की फैंको से जोड़ दिए और प्यार से उन्हें चुभलाने लगा . मौसी क हाथ मेरे सर पर आ गए . मौसी आँखें बंद किये मज़े की सिसकियाँ लेती हुई अपनी छूट चूसै का मज़ा लेने लगी.

रजनी : कक्कक्स उफ्फफ्फ्फ़ उम्म्म्म ये सब तूने कहाँ से सेईखठ्ठाआआंठ्ठ कक्कक्स. इतना मज़ा तो ज़िन्दगी में कभी नहीं मिला मुझे इसी लिए रीता तेरी इतनी दीवानी है. आअह्ह्ह्ह ककक

मैं अपने काम में लगा था और मौसी लगातार मेरा सर सहलाते हुए अपनी कमर उचका रही थी. मैं मौसी की छूट में अपनी एक उंगली दाल कर उनके डेन को अपनी जीभ से कुरेद रहा था . मौसी ज्यादा देर ये बर्दाश्त नहीं कर पायी और अपनी कमर ऊपर उठाते हुए मेरा सर ज़ोर से छूट पर दबती जहर जहर झड़ने लगी .

रजनी : आआह्ह्ह्ह माआआ मैं गयी आआआह्ह्ह्ह कक्ककक्कक्स मर gyiiiiiiiiii

मौसी की छूट ने तीसरी बार पानी छोड़ दिया था. मैंने उनके शांत होने तक छूट को अछि तरह से चूसा और फिर ऊपर उठते हुए मैं उनके मस्त बड़े बड़े चुके दबाता हुआ उनके होंठों को किस करने लगा .

अमित : उम्मम्मम उम्म्म्म उम्माह्ह्ह कैसा लगा मौसी ?

रजनी : बहुत ाचा , तेरे मौसा क साथ तो कभी भी इतना मज़ा नहीं आया था ज़िन्दगी में जितना तेरे साथ अत है . सच में तुझे अचे से पता है क औरत को कैसे संतुष्ट करना है . चल अब मुझे भी कुछ करने दे. आज मैं सोच कर आयी थी क तुझे भी वैसे hi खुश करुँगी जैसे रीता करती है .

इतना कह कर मौसी ने मुझे पोता और खुद उठ कर बैठ गयी . पहले उन्होंने अपनी बिकनी को अपने जिसका से उतरा और फिर मेरे लैंड पर झुक कर सीधा उसे अपने मुँह में ले लिया . मैं मज़े की वादियों में उड़ने लगा . मौसी एक हाथ से लैंड को पकडे किसी प्रोफेशनल की तरह लैंड को अपने मुँह में अंदर बहार कर रही थी और साथ hi अपनी जीभ सुपडे पर चलने लगती . मैं मस्ती में मौसी का सर सहलाने लगा. उनके काळा लम्बे बालों को खोलते हुए मैंने फैला दिया और उनका सर अपने लैंड पर दबाने लगा . मौसी एक हाथ से मेरे अंडकोष सेहला रही थी और आधा लैंड अपने गले तक अबदार कर रही थी . मुझसे ये सब बर्दाश्त नहीं हो रहा था . मैंने मौसी को अपने ऊपर हटाने की कोशिश की तो वो बोली

रजनी : चुपचाप लेते रहो जो करुँगी वो मैं खुद करुँगी.

इतना कह कर मौसी एक बार लैंड को अछि तरह से छठा और मेरे ऊपर आते हुए पूरी तरह मेरे ऊपर लेट गयी . वो अपना गदराया जिस्म मेरे साथ रगड़ने लगी और मुझे किस करने लगी .

रजनी : उम्म्म्माःह्ह्ह , रीता क साथ तो तुम जंगली पैन दिखते हो पर मुझे ये सब प्यार से करना ाचा लगता है . मैं तुम्हे बताती हूँ क कैसे करना है .

मेरे सीने पर अपने बड़े बड़े मांस गोले अछि तरह रगड़ने क बाद मौसी ऊपर उठी और मेरी कमर की दोनों तरफ घुटने बीएड पर टिका कर सीधी बैठ गयी . फिर एक हाथ से मेरे लैंड को पकडे वो थोड़ा ऊपर हुई और अपनी छूट क बीच लैंड को सेट कर क वो धीरे धीरे उसके ऊपर बैठने लगी . जैसे जैसे मौसी नीचे बैठ रही थी लैंड छूट में समां रहा था . मौसी मज़े से ऑंखें बंद किये धीरे धीरे लैंड पर बैठ कर सीढ़ी हो गयी . और मेरी छाती पर हाथ रख कर बिना ऊपर उठे अपनी कमर आगे पीछे हिलने लगी . मैंने हाथ उठा कर मौसी क बड़े बड़े स्तनों को अपने हाथों में थम लिया और मसलने लगा .

रजनी : उफ्फ्फ्फ़ ककक कितना बड़ा है तुम्हारा मुसल मेरे जैसी 3 बच्चों की माँ की हालत ख़राब कर देता है तो कुंवारी लड़की तो मर hi जाएगी कक्कक्क्स उम्मम्मम ऐसे hi मसलो मुझे प्यार करो

मैंने मौसी क स्तनों को मसलते हुए उन्हें खिंच कर अपने ऊपर झुकाया और उन्हें किश करने लगा. मौसी कुछ देर किश करने क बाद फॉर से सीधी बैठ गयी और मेरे लैंड पर ऊपर निचे होने लगी. अब वो पूरी गरम हो गयी थी और मस्ती में लैंड पर कूद रही थी . मेरा भी अब समय नज़दीक था तो मैंने मौसी को पलट कर अपने नीचे किया और उनके कन्धों को थामे पूरी तरह उनके साथ चिपक कर अपनी कमर हिलता हुआ उन्हें मज़े से छोड़ने लगा . रजनी मौसी क साथ मैं अलग तरीके से चुदाई कर रहा था जैसा क वो चाहती थी और वो भी मेरी कमर पर अपनी टाँगें लपेटे अपना जिस्म मेरे साथ रगड़ रही थी. मौसी की सिसकियाँ कमरे में गूँज रही थी . वो चरम पर पहुँच रही थी और मेरा भी होने वाला था इस लिए मैंने अपनी सा पीस तेज़ कर दी और कुछ hi देर में मैं मौसी की छूट को अपने वीर्य से भरने लगा . उसके साथ hi मौसी ने भी पानी छोड़ दिया .

रजनी : आआह्ह्ह्हह ककक. माआ मैं गयी मैं फिर से गयी आआह्ह्ह्ह कक्कक्स उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़

अमित : आअह्ह्ह मौसी अआप सच में कमल हो उफ्फ्फ्फ़ उम्म्म्म

मौसी ने मुझे पूरे ज़ोर से अपने साथ कास लिया था और मुझे चूम रही थी . हम दोनों की सांसे उखड़ी हुई थी और जिस्म पसीने से भीगे हुए. कुछ देर बाद जब साँसे कुछ संभाली तो मौसी ने अपनी पकड़ ढीली की और मैं भी मौसी क साथ लेट गया. मेरा वीर्य मौसी की छूट से अभी भी बह रहा था. मौसी ने हाथ लगा कर अपनी छोर से बेहटा हुआ लैंड रास देखा और वैसे hi छूट को दबाये हुए बीएड से उठी बाथरूम की तरफ जाने लगी. मेरी नज़र मौरी क भरी भरकम सुडोल कूल्हों पर पड़ी जो कम्पन कर रहे थे. मौसी की चल कुछ बदल गयी थी . वो धीरे धीरे पाऊँ फैला कर चल रही थी . मौसी की गांड देखते hi मेरे लैंड ने फिर से सर उठाना शुरू कर दिया . मुझे यद् आया क मौसी कह रही थी वो आज मेरे साथ पीछे से भी करेंगी बस इतना यद् आते hi मैं झटके से बीएड से उठा और मौसी क पीछे पीछे बाथरूम में घुस गया . मौसी भी अभी अंदर आयी hi थी और जैसे hi वो बैठने लगी तो मैंने उनके चूतड़ों को मसल दिया.

रजनी : ककक आआअह्ह्ह्हह क्या हुआ फिर से मन हो गया क्या ? अभी तो निकला है और फिर से

मौसी की नज़र मेरे खड़े लैंड पर गयी तो उन्होंने उसे हाथ में थम लिया .

अमित : उफ्फ्फ्फ़ कक्कक्स क्या करूँ मौसी आपकी ये मस्त गांड देख कर कण्ट्रोल नहीं हो रहा .

रजनी : थोड़ा सबर रखो मैं आज खुद तुम्हे ये सौंपने वाली हूँ जिसे आज तक मैंने अपने पति को भी नहीं सौंपा . अब सब कुछ तुम्हारा hi तो है. चल अब ज़रा बहार जा मैं अभी अति हूँ.

मौसी की बात सुन कर फिर से मेरे लैंड ने एक झटका मारा. दिल तो कर रहा था क मौसी को वहीँ फिर से छोड़ दूँ पर मैं उनकी बात मानते हुए वापिस कमरे में आ गया . कुछ देर बाद मौसी कमरे में वापिस आयी . अपनी छूट को अछि तरह से साफ़ करने क बाद मौसी फिर से तैयार थी मेरे साथ एक राउंड और खेलने को . मैं बीएड पर बैठा मौसी का hi इंतज़ार कर रहा था . मौसी क आते hi मैंने उन्हें बाँहों में भर लिया

रजनी : कक्कक्स क्या कर रहे हो इतने उतावले क्यों हो रहे हो? अब तो मैं यहीं हूँ तेरे पास .

अमित : क्या करूँ मौसी आपकी ये मदमस्त गांड मुझे पागल कर रही है .

रजनी : अब तो तेरे hi हवाले है सब कुछ. रीता क बताने पर hi मैं समझ गयी थी तू इसे लिए बिना खुश नहीं होगा इस लिए पहले hi तेल से अछि तरह मालिश कर क तैयार रखा था . मैंने सोचा इतनी म्हणत से शायद आराम से चला जायेगा पर ये तेरा मुआन मुसल घुसते hi ऐसे लगा जैसे जान निकल गयी हो. बीटा ज़रा आराम से करना मैंने कभी पहले वहां से किया नहीं है .

अमित : चिंता मत करो मौसी , वो तो रीता मौसी समझ कर मैंने अचानक से घुस दिया था क्यूंकि उनके साथ पहले भी कई बार कर चूका हूँ. आपको बिलकुल भी दर्द नहीं होने दूंगा और जो थोड़ा बहुत होगा वो आप बर्दाश्त के लेना .

रजनी : बर्दाश्त तो पहले भी कर लेती बीटा पर क्या करूँ तूने एक डैम से घुसाया तो न चाहते हुए भी चीख निकल गयी. अब ऐसा नहीं होगा .

बातें करते हुए मैंने मौसी को फिर से बीएड पर लिटा दिया और उनके चुके चूसते हुए उनके कूल्हों को मसलने लगा . मौसी भी मस्ती में आने लगी और एक हाथ से मेरा लैंड पकड़ कर मसलते हुए मुझे किश करने लगी . कुछ hi देर में मैं फिर से तैयार था मौसी की सवारी करने क लिए और इस बार मेरा टारगेट था उनकी कोरी गांड जहाँ मुझे अपने लैंड से अपनी मोहर लगनी थी . मैंने मौसी को घुटनो पर कुटिया बनाया और खुद उनके पीछे जा कर उनकी गांड को फैला कर उनका सुराख़ देखने लगा . वाकई मौसी की गांड का छेड़ बिलकुल छोटा सा था जहाँ कुछ देर पहले मेरे लैंड ने दस्तक दी थी . छेड़ क आसपास तेल की चिकनाहट साफ़ नज़र आ रही थी . मैंने अपनी एक उंगली गांड क अंदर डाली जो आराम से चली गयी चिकनाई की वजह से

रजनी : कक्कक्क्स आअह्ह्ह उम्म्म

मौसी की सिसकी सुन कर मैं समझ गया उन्हें दर्द नहीं मज़ा आ रहा है. फिर मैंने एक साथ दो उंगलियां घुसाई तो मौसी की गांड थोड़ा सा टाइट होने लगी जो मौसी खुद hi कर रही थी. पर फिर hi मेरी 2 उंगलियां गांड में अंदर बहार होने लगी . कुछ देर में मेरी उंगलियां आराम से अंदर बहार होने लगी और मौसी भी मज़े से सिसकती गांड को अब ढीला छोड़ चुकी थी . फिर मैंने अपनी उंगलियां बहार निकली और अपनी पोजीशन सेट करते हुए अपना लैंड गांड क छेड़ पर सेट कर दिया .

रजनी : बीटा आराम से करना

अमित : मौसी आप डरो मत मैं आराम से hi करूँगा बस आप अपनी गांड को ढीला छोड़ दो .

मैंने मौसी की गांड पर लैंड का दबाव देना शुरू किया तो थोड़ी म्हणत से सूपड़ा अंदर घुस गया .

रजनी : कक्कक्कक्कक्स माआआअह्ह्ह्हह

अमित : बस बस हो गया मौसी अब ज्यादा दर्द नहीं होगा आप चिंता मत करो बस गांड ढीली छोड़ दो .

मैंने हाथ आगे बढ़ा कर मौसी क लटकते आम पकड़ लिए और उन्हें मसलने लगा. फिर एक हाथ से मैंने मौसी की छूट में उंगली करनी शुरू कर दी. मौसी मज़े में जब खुद hi एक साथ से अपना दूसरा स्तन मसलने लगी तो मैंने मौका देख कर लैंड को और अंदर घुसा दिया . मौसी फिर से सिसकी और अपनी गांड टाइट कर ली. मैंने फिर से रुक कर उनकी छूट में उंगली करनी शुरू कर दी दो फिर से कुछ देर बाद लैंड को थोड़ा और अंदर कर दिया . अब मैंने इतने hi लैंड को अंदर बहार करना शुरू कर दिया . तेल की चिकनाहट से गांड में जल्दी hi लचीलेपन आ गया और आराम से लैंड ने अपनी जगह बना ली थी . मैं आराम से मौसी की कमर को दोनों हाथों से थम कर धक्के पेलने लगा और मौसी भी को भी अब मज़ा आने लगा था .

अमित : कैसा लग रहा है मौसी ? अब तो दर्द नहीं हो रहा न ?

रजनी : उम्म्म ककक अब तो मज़ा आ रहा है और ज़ोर से करो अब . मुझे पता hi नहीं था यहाँ भी मज़ा आता है . तुमने आज एक और मज़े से मुझे मिलवा दिया उम्म्म और तेज़ करो .

मेरा लैंड अब आसानी से मौसी की गांड में अंदर बहार हो रहा था पर अभी भी 2 इंच बहार hi था . मैंने धक्के मरते हुए आखरी 2 का सफर एक hi झटके में पूरा करते हुए एक ज़ोरदार झटका कर दिया जिससे लैंड पूरा जड़ तक मौसी की गांड में घुस गया . पर इस आखिरी धक्के से मौसी क मुँह से फिर दर्द भरी कराह निकल गयी . और वो बीएड पर आगे को गिर गयी मगर मैंने मौसी की कमर को थामे रखा जबकि उनका आगे का धड़ बीएड पर गिर चूका था .

रजनी : आआआहहहहह माआहहहहह मार दलाआआ आआह्ह्ह्हह्ह

अमित : बस मौसी पूरा घुस गया है अब और दर्द नहीं होगा . अब बस मज़ा hi आएगा .

मैंने बीएड पर पाऊँ टिकाये और मौसी की कमर को दोनों हाथो से थम कर उस पर झुक कर तेज़ तेज़ झटके मरने लगा . मौसी कुछ देर कराहती रही पर जल्दी hi वो मज़े की सिसकारियां लेने लगी . मैं ऐसे hi मौसी को और 15 मिनट्स तक छोड़ता रहा और फिर उन्हें पलट कर खुद बीएड पर लत कर उन्हें अपने ऊपर बिठा लिया . मौसी भी अब कमान सँभालते हुए खुद hi ऊपर निचे होने लगी. मैंने मौसी को अलग अलग पोजीशन में तन तक छोड़ा जब तक क मेरा पानी उनकी गांड में नहीं निकल गया . और उसके बाद भी मैंने एक राउंड और मारा जिसमे उनकी छूट और गांड दोनों का मज़ा लिया . मौसी बुरी तरह थक चुकी थी. मैंने जब टाइम देखा तो सुबह क 4 बजने वाले थे . उसके बाद मैंने मौसी को वहीँ बीएड पर आराम करने दिया और अपने कपडे पहन कर कमरे से बहार निकला . मैंने गेस्ट रूम में देखा तो वहां रीता मौसी सो रही थी मगर उनकी हालत बता रही थी क वो उंगली कर क सोई हैं मतलब उन्होंने सारा शो देखा होगा . मैंने रीता मौसी को जगाया नहीं तो उनकी हालत अगर दीदी देख लेती तो सब समझ जाती. उनकी सदी कमर तक उठी हुई थी और ब्लाउज क 2 बुट्टन खुले हुए थे .

अमित : उठो मौसी , जाओ आप कमरे में जाकर सो जाओ .

रीता : नींद से जागते हुए ) उम्म्म , कर दिया ठंडी अपनी बड़ी मौसी को ? अब ज़रा मेरा भी कुछ कर दे . तुम दोनों को देख कर मेरी हालत ख़राब हो गयी है .

अमित : वो तो दिख hi रहा है. पर अभी आप जाकर सो जाओ सुबह होने वाली है और मुझे भी सोना है. जाओ आप कमरे में

रीता : तुम नाराज़ तो नहीं हो न ?

अमित : नहीं , पर आपने ऐसा क्यों किया ?

रीता : तो क्या करती . तुम तो मैंने वाले नहीं थे और दीदी भी ज़िद कर क आयी थी आज .

अमित : जो भी हो आपको बताना चाहिए था. उसकी आपको सजा ज़रूर मिलेगी.

रीता : तो अभी दे दो न मैं तो तैयार हूँ .

अमित : सजा तो अब दोनों को hi एक साथ दूंगा फ़िलहाल आप जाकर सो जाओ और मौसी को भी कपडे पहना देना उन्हें तो होश भी नहीं है .

रीता : हाँ हाँ , होश कैसे होगा आज तो अचे से रगड़ा है तूने उन्हें . चलो अब तुम सो जाओ मैं भी चलती हूँ .

उसके बाद मौसी अपने कमरे में चली गयी और मैं अपने कमरे में आ गया . आते हुए मुझे ज़ोरों की नींद आ गयी और मैं बीएड पर गिरते hi सो गया . सुबह करुणा दीदी ने आकर मुझे जगाया पर मुझे बहुत नींद आ रही थी इस लिए वो क्या कह रही थी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था . पर इतना पता है क वो शिकायत कर रही थी . उसके बाद कॉलेज जाने से पहले एक बार नेहा दीदी और करुणा दीदी दोनों मुझसे मिलने आयी और मैंने भी उन्हें बेस्ट ऑफ़ लक कहा और फिर से सो गया . 10 बजे मुझे रीता मौसी ने जगाया और फिर मैं नाहा कर फ्रेश हुआ और नाश्ता करने नीचे चला गया . किचन में सिर्फ रीता मौसी hi थी रजनी मौसी कहीं दिखाई नहीं दे रही थी .

अमित : मौसी रजनी मौसी कहाँ हैं दिखाई नहीं दे रही ?

रीता : पूछ तो ऐसे रहा है जैसे कुछ पता hi न हो . तुझे नहीं पता रत तूने क्या हालत की है उनकी ? अभी उठी हैं वो भी. दर्द की दवा खा कर नहाने गयी हैं अभी अति hi होगी. आगे पीछे दोनों जगह कह रही थी दर्द हो रही है .

अभी हम बात hi कर रहे थे क रजनी मौसी भी किचन में आ गयी. वो फ्रेश लग रही थी मगर चल कुछ बदली हुई थी और गांड को थोड़ा बहार निकल कर धीरे धीरे चल रही थी . मुझसे नज़रें मिलते hi वो एक बार शर्मा गयी .

रीता : लो आ गयी दीदी भी . बताओ दीदी कैसी हालत है . इसे तुम्हारी चिंता हो रही है .

रजनी : शरमाते हुए ) शर्म नहीं आती तुझे ऐसे बोलते हुए ?

रीता : वह वह , साडी रत मज़े आपने लिए तो कोई बात नहीं और मैंने ज़रा सी बात क्या कर ली तो शर्म आने लगी .

रजनी : रीता मौसी क कान खींचते हुए ) अब मुझसे ऐसे बात करेगी तू ?

रीता : आअह्ह्ह्हह दीदी कान छोड़ो न प्लीज . क्या गलत कह दिया मैंने ? अब भी शरमाओगी क्या आप ? साडी रत तो कबाड़ी खेलती रही हो . तौबा इतना लम्बा मैच तो कभी मैंने भी नहीं खेला कभी उसके साथ जितना आप ने खेला कल रत . लगता है इसे आप कुछ ज्यादा hi पसंद आ गयी. आओगी भी क्यों नहीं . इतने बड़े आम और तरबूज़ तो मेरे पास भी नहीं हैं .

रीता मौसी ने रजनी मौसी से कान छुड़ाते हुए रजनी मौसी क बूब्स और चूतड़ों की तरफ इशारा करते हुए उन्हें फिर से छेड़ा तो रजनी मौसी फिर से उन्हें मरने को आगे बरही पर रीता मौसी मेरे पीछे छुप गयी .

रजनी : ठहर तुझे अभी बताती हूँ. तू पीछे हैट अमित मैं इसे ठीक करती हूँ .

रीता : नहीं अमित तू पीछे नहीं हटना . देख तेरे सामने कैसे मुझे मर रही हैं. लगता है ये तेरी रत की मर भूल गयी हैं ज़रा फिर से अपने डंडे से इनकी एक बार कुटाई कर दे .

रजनी : झूठा गुस्सा दिखते हुए ) रीता , तू आज मेरे हाथों से पिटेगी .

अमित : अरे बस बस मौसी , चलो पहले मुझे नाश्ता तो करवा दो बड़ी भूख लग रही है .

रजनी : हाँ मेरे बचे तू बैठ मैं अभी नाश्ता बनती हूँ .

रजनी मौसी झट से सब भूल कर नाश्ता बनाने लगी . एक पल में hi साडी शरारत भूल कर वो अपने वही पुराने रूप में आ गयी थी. और रीता मौसी भी मस्ती छोड़ कर नाश्ता बनाने में उनकी मदद करने लगी . कुछ देर में hi नाश्ता बन गया . और हमने साथ में खाना खाया. नाश्ता करते hi निधि दीदी की कॉल आ गयी. वो मुझसे पूछ रही थी क मैं कब आ रहा हूँ. मैंने उन्हें जल्दी आने का बोल दिया और फिर मौसी को बता कर मैं निधि दीदी से मिलने क लिए निकल गया . ऑफिस पहुँचते hi निधि दीदी मुझे देख कर खुश हो गयी और मुझे गले से लगा लिया .

निधि : तुम आ गए मुझे तो लगा था कहीं आज भी तुम किसी और काम में न फास जाओ .

अमित : अत कैसे नहीं दीदी , आप ने जो कहा था . कोई और कहता तो चाहे बहन बना देता पर आपको तो मन कर hi नहीं सकता .

इतना सुनते hi निधि दीदी क प्यारे से चेहरे पर फिर से मुस्कान आ गयी और उन्होंने मुझे फिर से गले लगा कर मेरे गलों को चूम लिया .

उधर सो ऋतू सिंह क मोबाइल पर एक अनजान कॉल आ गयी . इस समय वो अपने ऑफिस में अकेली बैठी कुछ फाइल्स देख रही थी .

ऋतू : hello हु इस थिस

‘ हह hello , क्या अआप सप ऋतू बोम रही हैं ?’ ये एक लड़की की आवाज़ थी जो कुछ दरी सेहमी लग रही थी

ऋतू : हाँ मैं ऋतू hi बोल रही हूँ. मगर तुम कौन हो और इतना दरी हुई क्यों हो ? क्या बात है ?

लड़की : धीमे स्वर में ) हह hello मैडम मैं क्सक्सक्सक्स शहर से बोल रही हूँ. प्लीज मुझे बचा लीजिये. मुझे नारायण दस् नाम क गुंडे ने अपने यहाँ बंधक बना रखा है . मेरे माँ बाप का कतल कर इसने मुझे अपने पास कैद कर रखा है और रोज़ मेरे साथ ज़बरदस्ती करता है मैडम. प्लीज मुझे बचा लीजिये सिर्फ आप hi मुझे बचा सकती हैं.

ऋतू : क्या कहा ? नारायण दस्? तुम मला नारायण दस् की तो बात नहीं कर रही ?

लड़की : हाँ मैडम मैं उसी की बात कर रही हूँ. प्लीज मैडम मुझे बचा लीजिये . प्लीज मैडम हेल्प में .

ऋतू : पर तुम दूसरे शहर में हो तुम्हे वहां किसी अफसर से बात करनी चाहिए

लड़की : नहीं मैडम आप नहीं जानती यहाँ की साडी पुलिस उस कमीने की जेब में है. मेरे पापा ने पुलिस पर भरोसा किया था और बदले में मेरे माता पिता दोनों को बेरहमी से मर दिया उस चांडाल ने. कोई उसके खिलाफ कुछ नहीं कर सकता मैडम. मैंने आपके बारे में सुना है इस लिए अंतिम बार मैं एक कोशिश करना चाहती हूँ मैडम . मेरे पास उसके खिलाफ कुछ सुबूत हैं जिसकी बिनाह पर आप उसे फांसी दिलवा सकती हैं. वो क्या क्या काम करता है उन सब क सुबूत हाँ मेरे पास एक फाइल में और मैं खुद भी गवाही देने को तैयार हूँ .

ऋतू : पर तुम्हारे साथ उसके खिलाफ सुबूत कहाँ से आये ? और अभी तो तुम कह रही थी क तुम उसकी कैद में हो ?

लड़की : हाँ मैडम मैं उसकी कैद में hi हूँ . यहाँ पर काम करने वाली एक औरत ने मुझे अपना मोबाइल दिया है बात करने को. और ये सरे सुबूत मेरे पापा ने hi इकठा किये थे. वो एक जौर्नालिस्ट थे . क्या आप मेरी मदद करेंगी ? मैं ज्यादा देर तक बच नहीं पाऊँगी . जब उसका मन भर गया वो मुझे भी बाकि लड़कियों की तरह या तो बेच देगा या मुझे मेरे माँ बाप की तरह कतल कर देगा

ऋतू : मैं तुम्हारी मदद करुँगी पर तुम हो कहाँ ? और मैं तुम तक कैसे पहुँच सकती हूँ ?

लड़की : मैं नारायण दस् क ख़ुफ़िया ठिकाने पर हूँ जिसका लोगों को पता नहीं है. मैं आपको इस जगह क बारे में बता देती हूँ. शहर से बहार जाते रस्ते पर एक पुराण मंदिर है उसके साथ hi एक कच्चा रास्ता है जहाँ कोई अत जाता नहीं है. पर 4 कम अंदर जाकर घने पेड़ों क बीच एक फार्महाउस है जहाँ पर मुझे कैद कर क रखा गया है. यहाँ पर बहुत सरे गुंडे भी हैं जो हमेशा हथियार रखते हैं. अगर यहाँ किसी ने आने की कोशिश की तो वो जान से मारा जायेगा . मैं किसी तरह उस पुराने मंदिर तक पहुँच जाउंगी मगर

ऋतू : मगर क्या ?

लड़की : मेरे पास सिर्फ एक hi मौका होगा यहाँ से निकलने का. इस लिए आपको वडा करना होगा क आप सही समय पर वहां होंगी वर्ण वो लोग मुझे ढूंढ कर मर डालेंगे . मुझे अपनी मौत का दर नहीं है मैडम. मैं तो पहले hi बर्बाद हो चुकी हूँ मर भी गयी तो क्या. पर मैं चाहती हूँ वो सरे सुबूत मैं आप तक पहुँच दूँ. ताकि उस कमीने को सजा मिल सके .

ऋतू : डरो मत तुम्हे कुछ नहीं होगा . मैं तुम्हे कुछ नहीं होने दूंगी . मैं अपनी पूरी फाॅर्स ले कर उन सब को ख़तम कर दूंगी .

लड़की : नहीं नहीं मैडम ऐसी गलती कभी मत करना . इस तरफ कोई भी अत जाता नहीं है. इस लिए अगर कोई भी इस तरफ अत दिखा तो वो लोग समझ जायेंगे और फिर सब ख़तम. आपको सिर्फ एक hi मौका मिलेगा मैडम या तो आपको जीत होगी या फिर मेरी मौत .

ऋतू : ठीक है, तुम बताओ तुम कब निकल सकती हो वहां से ?

लड़की : 2 दिन बाद यहाँ पर कुछ लोग बहार से आने वाले हैं मैडम कोई पार्टी सी है. वही समय होगा जब मैं यहाँ से निकल सकती हूँ . पर हमें ज्यादा समय नहीं मिलेगा मैडम इस लिए आपको वहां सही समय पर मौजूद होना होगा . और हाँ मेरे पिता जी का नाम क्सक्सक्सक्सक्स कुमार है . आप चाहें तो पता लगा सकती हैं ताकि आपको मुझ पर यकीन आ जाये . मैडम मैं फ़ोन रखती हूँ. प्लीज इस पर फ़ोन मत कीजियेगा जब तक क मैं खुद फ़ोन न करुणा . ाचा मैडम bye प्लीज आइयेगा ज़रूर ताकि उस कमीने को सजा मिल सके और मेरे माता पिता की आत्मा को शांति मिल सके



इतना कह कर उस लड़की ने कॉल डिसकनेक्ट कर दी. ऋतू साडी बात सुन कर अब इस पर सोच विचार करने लगी . एक पोलिसिअ दिमाग चलते हुए वो हर चीज़ अचे से समझने की कोशिश कर रही थी . वैसे तो बात सीधी सीधी थी पर उसका दिमाग ये भी सोच रहा था क कहीं ये कोई चल तो नहीं ? पर उस लड़की ने अपने पिता का नाम तक बता दिया था. जो एक स्ट्रांग पॉइंट था विश्वास करने क लिए. इस बात को वेरीफाई करने क लिए तुरंत ऋतू ने अपने लैंडलाइन फ़ोन का रिसीवर उठाया और किसी से बात कर क उस नाम क आदमी की डिटेल निकलने को कहा . साथ hi ऋतू इस बात पर भी विचार करने लगी क अगर वो लड़की सच बोल रही है तो उसे कैसे इस सिचुएशन को हैंडल करना चाहिए .
 
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