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सुबह उठ कर मैंने एक बार अचे से रेविसिओं की और फिर नाश्ते क बाद दीदी मुझे कॉलेज छोड़ गयी. आज फाइनल ईयर वालों का भी एग्जाम था इस लिए शीना शिवानी और शालू भी आयी थी. तीनो से गेट पर hi मुलाकात हो गयी . वो मेरा hi वेट कर रही थीं . एक दूसरे को विश करने क बाद हम सब अपनी अपनी क्लास में चले गए . आज फिर चेकिंग क लिए प्रोफ वरिंदर hi आये ड्यूटी पर सब्जेक्ट कोई इतना मुश्किल नहीं था इस लिए पेपर बहुत hi ाचा गया . एग्जाम क बाद बहार निकलते hi मंजू म मिल गयी .
मंजू : कैसा हुआ पेपर ?
अमित : बहुत ाचा .
मंजू : कल कहाँ थे ? मैं इंतज़ार करती रही .
अमित : सॉरी मम वो पहले एग्जाम की तयारी करता रहा और फिर सबके साथ टाइम का पता hi नहीं चला .
मंजू : कोई बात नहीं, अब बोलो कब मिलवाओगे मुझे अपनी फॅमिली से? नन्हे मुन्ने मेहमानो को देखने को मेरा भी बहुत दिल कर रहा है .
अमित : आज hi मिलवाता हूँ न मम. आज शाम को मैं आपको ले चलूँगा सब से मिलवाने . सब यहीं हैं मोहित क घर .
मंजू : ओह ाचा , तो सब मोहित क घर पर hi हैं. फिर तो और भी ाचा है. ाचा अब तुम जाओ मैं भी चलती हूँ. शाम को आने से पहले एक बार फ़ोन कर देना.
अमित : जी मम
मंजू मम स्टाफ रूम में चली गयी और मैं वापिस अपने दोस्तों क पास .
शिवानी: तो , हमसे छुप छुप क पार्टियां हो रही हैं . थिस इस नॉट फेयर. अरे भाई हम कोई ज्यादा खा लेती क्या ? ये तो तुमने हमारी इंसल्ट करदी वो बड़े वाली .
शिवानी ने मुँह बनाते हुए कहा . जबकि शालू और शीना सर झुकाये अपनी हंसी छुपाने की कोशिश कर रही थी.
अमित : ओह तो इस बात पर गुस्सा हो रही हो आप . वैसे आपने ऐसा सोचा भी कैसे क आप मेरी ख़ुशी में शरीक नहीं हो? एक्साम्स की वजह से मैंने किसी को डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा वर्ण हम सब साथ में पार्टी करते. उस दिन आप लोग नहीं थे पर आज तो हो इस लिए हम अभी यहाँ से सीधा पार्टी करने चलेंगे . मगर ये तो छोटी मोती पार्टी है . जब हम गाओं में फंक्शन करेंगे तो वहां सब को आना पड़ेगा . चलो अब चलते हैं साथ में पार्टी करने .
मेरी बात सुन कर शिवानी क चेहरे पर भी ख़ुशी आ गयी . शीना और शालू तो पहले hi खुश थी. फिर मैं कल्पना मोहित शीना शिवानी और शालू साथ में रेस्टोरेंट पर गए और पार्टी की. इस दौरान मेरे एक तरफ शीना और एक तरफ शिवानी बैठी थी. और जब हम खाने पीने में लगे थे तो मुझे अपनी दायीं जांघ पर किसी का हाथ चलता महसूस हुआ मैंने देखा तो ये हाथ शिवानी का था . मैंने उसे देखा तो वो तिरछी नज़रों से मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. मैंने एक बार उसका हाथ हटाने की कोशिश की पर वो कहाँ पीछे हटने वाली थी. ये टेबल क नीचे से हो रहा था इस लिए किसी को कुछ पता नहीं चल रहा था . इस लिए मैंने भी ज्यादा कुछ नहीं कहा. अभी शिवानी का हाथ hi मेरी जांघ पर चल रहा था क मुझे दूसरी जांघ पर भी हाथ महसूस हुआ . मैंने दूसरी तरफ देखा तो ये शीना का हाथ था . मैंने उसे देखा तो वो बाकि सब से बात कर रही थी और बिना कुछ ज़ाहिर किये अपने हाथ से मेरी जांघ सेहला रही थी . मेरा तो खाना hi हलक में रुक गया . दोनों तरफ मुझ पर हमला हो रहा था . और वो भी दोनों एक से बाद कर एक खूबसूरत बालाएं . मुझे कुछ कुछ हो रहा था पर मैंने खुद को कण्ट्रोल किया और खाने में लगा रहा . दोनों ने कोई कसार नहीं छोड़ी थी मुझे गरम करने में . शिवानी ने तो मेरे लैंड पर हाथ रख कर एक बार कास क मेरा लैंड मसल भी दिया . दोनों सहेलियां मेरे साथ मस्ती कर रही थी मगर दोनों को एक दूसरे क बारे में पता नहीं था . मेरे माथे पर पसीना आने लगा था जो शालू और कल्पना ने अछि तरफ नोट कर लिया था . मगर टेबल क नीचे क्या चल रहा था ये उन्हें पता नहीं था . तभी शिवानी मेरे पास खिसकी और मेरे धीरे से बोली
शिवानी : सिर्फ इसी से काम नहीं चलेगा , मुझे कुछ और भी चाहिए . कितने दिन हो गए एक बार भी मेरे बारे में नहीं सोचा न तुमने ? एक्साम्स क बाद एक दिन पूरा का पूरा मुझे चाहिए . अगर नहीं दिया तो देख लेना सीधा गाओं आ जाउंगी तुम्हारे घर .
मैं शिवानी की बात सुन कर चौंक गया और उसकी तरफ देखने लगा . जबकि वो स्माइल करती हुई पीछे हैट गयी और मेरे लैंड को भी मसल दिया .
शालू : कान में क्या बातें कर रही हो हमें भी तो बताओ ?
शिवानी : कुछ भी तो नहीं , मैं तो थैंक्स कह रही थी अमित को , है न अमित ?
अमित : हह हाँ हाँ
मैंने जवाब तो दे दिया पर मेरा हड़बड़ाना कल्पना बड़े गौर से देख रही थी जबकि शालू नीचे मुँह कर क है रही थी . खाना ख़तम कर क हम उठे और मैंने पेमेंट की . जब हम बहार निकले तो शीना और मोहित कार लेने चले गए शिवानी कल्पना क साथ कोई बात कर रही थी तो शालू मेरे करीब आ गयी
शालू : तो क्या कह रही थी शिवानी?
अमित : क्या ? कुछ भी तो नहीं .
शालू : ाचा ? वैसे उसका हाथ कहाँ था मुझे सब पता है . वैसे भी वो कह रही थी मुझे पता है . उसने पहले hi बता दिया था मुझे . मुझे बस इतना कहना है क अगर हो सके तो थोड़ा सा टाइम तुम मुझे भी दे देना. अगर हो सके तो , मैं सिर्फ रिक्वेस्ट hi कर सकती हूँ . मेरी ज़िन्दगी में अब तुम्हारे सिवा और कुछ भी नहीं है. और मैं हमेशा hi तुम्हारा इंतज़ार करती रहूंगी जब भी तुम्हारा दिल करे बस मुझे आवाज़ दे देना . मैं चली आउंगी .
शालू ने मेरी आँखों में देख कर पूरी संजीदगी से ये बात कही . मैं पहले तो उसकी बात से चौंका क उसे शिवानी की हरकत क बारे में सब पता था पर उसकी आखिरी बात सुन कर मेरा दिल एक डैम से पिघल सा गया . शालू क साथ जब मैं उसके घर गया था और हमने जो किया था उस वक़्त भी शालू ने अपने जज़्बात ज़ाहिर किये थे . शालू दिल की बहुत अछि थी मगर ज़िन्दगी ने उसके साथ बहुत बुरा किया था. वो सब मैं बदल तो नहीं सकता था पर दिल कहता था क उसके लिए मैं जो भी कर सकूँ मुझे करना चाहिए. अब भी जब शालू ने ये कह कर अपने ज़ज़्बात ज़ाहिर किये तो मेरे दिल में अपने आप एक उबाल सा उठता महसूस हुआ . मेरा दिल किया क अभी उसे बाँहों में भर लूँ . शालू की सादगी उसका कोमल दिल एक अलग hi जगह बना चुके थे में मेरे दिल में. मैं उसकी आँखों में देखता रहा . हम दोनों खामोश थे पर नज़रें बातें कर रही थी . शालू क अंदर मुझे अपने लिए बेपनाह मुहब्बत महसूस हो रही थी .
शिवानी: चलना नहीं है क्या ? चलो वो दोनों आ गए हैं .
हम दोनों की तन्द्रा टूटी तो देखा सामने मोहित और शीना अपनी अपनी कार ले ए थे . हम सब कार्स में बैठ गए और चल पड़े मोहित क घर की तरफ . जब हम मोहित क घर पहुंचे तो सब हॉल में hi मौजूद थे . अंकल और करिश्मा दीदी को छोड़ कर बाकि सब यहीं थे . माँ बाबा अजय मां कामिनी ममी आंटी . मैंने शीना शिवानी और शालू को सब से मिलवाया .
विजय : ाचा हुआ तुम आ गए , हम तुम्हारा hi इंतज़ार कर रहे थे .
अमित : कोई काम था क्या बाबा ?
विजय : नहीं काम तो कोई नहीं था. तू बता तेरा आज का पेपर कैसा हुआ ?
अमित : बहुत ाचा हुआ बाबा
विजय : शाबाश , अब और कितने रह गए पेपर ?
अमित : बस एक और है बाबा .
विजय : उसके बाद गाओं आ रहा है न ? पेपर क बाद छुट्टियां हो जाएँगी न ?
अमित : जी
विजय : ाचा आज हम वापिस जा रहे हैं. सुबह जाने वाले थे पर तुझसे मिले बिना जाने को तुम्हारी माँ और ममी मन नहीं रही थी . तू आ गया है और मिल भी लिया. अब हम चलते हैं .
अमित : पर इतनी जल्दी क्यों ? अभी कुछ दिन और तो रुक जाते .
विजय : नहीं बीटा , गाओं में तेरा छोटा मां अकेला है और बेचारी दीपिका भी अकेली परेशां होगी . वैसे भी डॉ साहब ने तो छुट्टी दे hi दी है . कामिनी भी अब ठीक है . तो हमने सोचा अब चलते हैं. कब तक यहाँ बैठे रहेंगे.
आंटी : ये आप बहुत गलत कर रहे हैं भैया . ये क्या आपका घर नहीं है ? पता है राघव कितने नाराज़ होंगे जब वापिस आएंगे . वो तो ज़रूरी मीटिंग ाँ पड़ी वर्ण वो जाते नहीं. वो जब वापिस आएंगे तो मैं क्या जवाब दूंगी ?
गौरी : कुछ नहीं कहेगा . मेरी बात करवा देना उससे. घर में छोटी अकेली है और आरव तो अभी छोटा सा है . उसे भी तो हमारा साथ चाहिए न ? कामिनी भी अब जल्दी अपने घर वापिस जाना चाहती है . चाहे ये घर भी अपना है पर जहाँ साडी ज़िन्दगी गुज़री है अब दिल तो वहीँ रहता है न . गाओं जा कर तयारी भी तो करनी है. फिर तुम सब को गाओं आना पड़ेगा कह देती हूँ. और तुम सब भी आना बचो .
माँ ने हक़ सब को देख कर कहा . तो सब ने हाँ में सर हिला दिया . कुछ देर और बात चित क बाद गाड़ी में सामान रखवाने क बाद माँ बाबा अजय मां कामिनी ममी बचे क साथ गाओं क लिए रवाना हो गए . शालू शिवानी शीना और कल्पना भी अपने घर क लिए निकल गए . उसके बाद मैंने भी मोहित को मुझे रीता मौसी क घर मुझे ड्राप करने को कहा तो आंटी ने मुझे लंच कर क जाने को कहा . वैसे तो भूख नहीं थी . पर फिर भी थोड़ा बहुत तो खाना hi था . इस दौरान करुणा दीदी और रीता मौसी का 3-4 बार फ़ोन आ गया था. खाने क बार मोहित मुझे रीता मौसी क घर छोड़ गया . कुछ देर वो रुका और रीता मौसी नेहा दीदी करुणा दीदी से मिल कर गया .
रीता : तू कल क्यों नहीं आया ? मैं तो सोच रही थी क सब यहीं हैं तो कल hi आ जायेगा पर तू ...
अमित : मौसी वो कल निधि दीदी ने hi रोक लिया था . कहने लगी क पेपर की तयारी कर लो वर्ण रह जायेगा .
नेहा : ठीक कहा दीदी ने , वर्ण सच में रह जाता.
रीता : तयारी यहाँ भी तो हो सकती थी न . पता है कल कितना इंतज़ार किया हमने . और ये करुणा तो ....
रीता मौसी अभी बात कर hi रही थी क करुणा दीदी गुस्से से मुझे देखती हुई उठ कर अपने कमरे में चली गयी . जब से मैं आया था तब से hi वो मुझे गुस्से से देख रही थी और बात नहीं कर रही थी .
रीता : देखा , बहुत नाराज़ है तुमसे. उसे उम्मीद थी क कल तू आएगा . रत तो तेरा इंतज़ार करती रही मगर तू नहीं आया . जा अब जा कर बात कर ले उससे वर्ण खाना नहीं खायेगी गुस्से में.
मौसी की बात सुन कर मैं वहां से उठा और करुणा दीदी क रूम में चला गया . मैं कमरे में गया तो करुणा दीदी बीएड पर बैठी थी और मुझे देख कर दूसरी तरफ करवट कर क बैठ गयी . मैं दरवाज़ा लॉक कर क दीदी क पास गया . मुझे पता था क वो कैसे मानेंगी इस लिए मैं बीएड पर उनके साथ बैठ गया.
अमित : तो मेरी गफ नाराज़ है मुझसे , इतनी क अब बात भी नहीं करेगी. कोई बात नहीं , देखता हूँ क कितनी देर नाराज़ रहती है मुझसे.
करुणा : गफ ? आ गयी यद् ? मुझसे बात मत कर मुझे तेरी कोई बात नहीं सुन्नी.
दीदी ने गुस्से से मुझे कहा और फिर चेहरा दूसरी तरफ कर लिया.
अमित : ाचा , तो बात नहीं करनी? ठीक है बात मत करो मगर मैं तो प्यार करूँगा.
इतना कह कर मैंने करुणा दीदी को को पीछे से बाँहों में भर लिया मगर वो मेरी बाँहों से निकलने की कोशिश कर रही थी . मैंने उनकी गर्दन पर होंठ रख लिए और उन्हें चूमने लगा . दीदी एक डैम से खामोश हो गयी और मज़ा लेने लगी . मैंने उनकी गर्दन चूमते हुए उनके कण की लो को चुम कर दांतो में हल्का सा दबा दिया तो उनके मुँह से सिसकी निकल गयी .
करुणा : सीईईई
मैंने अपने हाथ उनके ठोस स्तनों पर रख दिए और मसलने लगा . करुणा दीदी एक डैम से निढाल हो गयी और अपना सर पीछे को गिरते हुए मेरी गर्दन पर दाल दिया . मगर मैं नहीं रुका और लगातार उनके स्तनों को मसलता रहा. दीदी खुद को और कण्ट्रोल नहीं कर पायी और एक डैम से मेरी बाँहों में घूम गयी और मेरे होंठों को अपने होंठों में जकड कर स्मूच करने लगे . मेरे सर और पीठ पर हाथ चलते हुए वो मेरी गॉड में बैठ गयी . मेरा लैंड गरम होकर खड़ा हो गया था जो अब दीदी की गांड क नीचे था . दीदी अपनी कमर हिला हिला कर मेरे लैंड पर अपने चूतड़ मसल रही थी . हम दोनों अपने में hi खोये थे क नीचे से मौसी की आवाज़ आयी और मैंने किश तोड़ी .
अमित : नीचे मौसी बुला रही हैं .
करुणा : तो क्या हुआ , मुझे कुछ नहीं पता . अभी मुझे प्यार करो. इतने दिनों बाद आये तो ऐसे नहीं जाने दूंगी .
अमित : अब तो मैं यहीं हूँ न. मौका देख कर आपको खूब प्यार करूँगा . अगर अभी निचे नहीं गए तो वो ऊपर आ जाएँगी .
करुणा : बड़े ख़राब हो , एक तो उतने दिनों बाद आये हो ऊपर से मुझे ऐसे तड़पा कर अब छोड़ रहे हो.
अमित : थोड़ा सबर रखिये , मैं आपकी साडी तड़प मिटा दूंगा. अब आ गया हूँ न . चलिए .
मैंने उठने लगा तो दीदी ने फिर से एक बार मेरे होंठों को अपने होंठों में जकड लिया और अचे से किश करने क बाद छोड़ दिया. अपनी हालत ठीक करने क बाद दीदी ने मेरी तरफ देखा और शर्मा गयी . मैं उन्हें hi देख रहा था .
करुणा : ऐसे क्या देख रहे हो ? चलो अब
हम दोनों नीचे आ गए और मौसी नेहा दीदी क साथ hi बैठ गए . करुणा दीदी मेरी बाजु पकड़ कर बैठी थी .
रीता : बस हो गयी नाराज़गी दूर ? अभी तो बड़ा गुस्सा दिखा रही थी .
करुणा : नाराज़ तो मैं अभी भी हूँ. और इससे पूरा हिसाब भी लुंगी . हाँ गुस्सा नहीं हूँ क्यूंकि इससे गुस्सा तो मैं हो hi नहीं सकती . आप बैठी क्यों हैं ? लेकर आइये न इसके लिए कुछ.
मौसी उठ कर जाने लगी तो मैंने मन कर दिया. फिर कुछ देर हूँ बातें करते रहे. नेहा दीदी और करुणा दीदी का कल एग्जाम था इस लिए नेहा दीदी करुणा दीदी को पड़ने का कह कर अपने साथ के गयी. करुणा दीदी जाना तो नहीं चाहती थी पर मौसी और मेरे कहने पर वो चली गयी. उसके बाद मैं और रीता मौसी hi वहां रह गए .
रीता : अमित ज़रा मेरे साथ आना मेरे कमरे में , कुछ काम है .
अमित : जी मौसी
मैं रीता मौसी क साथ उनके कमरे में चल दिया . कमरे में आते hi मौसी ने दरवाज़ा बंद किया और मुझ पर झपट पड़ी. मेरे चेहरे को दोनों हाथों में पकड़ कर मौसी ने मेरे होंठ अपने होंठों में जकड लिए . मैं पहले तो चौंका पर फिर मौसी का साथ देने लगा . रीता मौसी कितनी गरम हैं मैं अचे से जनता था और इतने दिनों बाद मिल रही थी तो ऐसा होना स्वाभाविक था . मैंने मौसी का साथ देते हुए अपने हाथ उनके बड़े बड़े चूतड़ों पर रख दिए और साडी की ऊपर से उनके बड़े चूतड़ मसलने लगा . मौसी पागलों की तरह मेरे होंठ चुम रही थी . मैंने उन्हें वहीँ दीवार क साथ लगा लिया और अब अपने हाथ उनके बड़े बड़े स्तनों पर रख कर ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा .
रीता : उम्म्म्म उनमममम उम्माह्ह्ह्हह्ह कक्कक्कक्स ुण्णं कक्कक्क्स उफ्फफ्फ्फ़ आराम से कक्कक्क्स इतना क्यों तड़पते हो ?? तुझे अपनी मौसी का ज़रा भी ख्याल नहीं अत . कक्कक्क्स
अमित : ख्याल तो अत है मौसी पर आप को भी तो पता है मैं टाइम निकल नहीं पता .
रीता : उफ्फ्फफ्फ्फ़ कक्कक्कक्स आइइइइइ ककक जानती हूँ इसी लिए तो इंतज़ार कर रही थी कल से . उफ्फ्फ्फ़ उम्म्म्म अब और इंतज़ार नहीं होता . जल्दी से एक बार मुझे ठंडी कर दे . बहुत आग लगी है .
अमित : मौसी क्या कह रही हो आप . दीदी घर पर हैं .
रीता : वो पढ़ रही हैं. जल्दी से एक बार कर दे ने
मैं मौसी को रुकने को कह रहा था पर मौसी कुछ ज्यादा hi गरम थी . वो जल्दी से घुटनो पर बैठ गयी और मेरी पेण्ट खोल कर अंडरवियर क साथ झटके से खिंच कर घुटनो तक कर दी और मेरा लैंड हाथ में पकड़ कर मसलने लगी .
रीता : कक्कक्स कितना तड़पती हूँ इसके लिए ,, अब तो तेरे मौसा जी क साथ करने का बिलकुल भी मन नहीं करता . उम्मम्मम उम्म्म्म
मौसी ने जल्दी से मेरा लैंड अपने होंठों में कैद कर लिया और उसे चूसने लगी . किसी लोली पॉप की तरह वो मज़े से मेरा लैंड चूसने लगी. मैं जो अभी मौसी को रोक रहा था अब खुद hi मौसी क इशारों पर नाचने लगा. मैं अपने मुँह से निकललन वाली मज़े की सिसकारियों को रोकने की कोशिश कर रहा था . मज़े में मेरी ऑंखें बंद हो गयी और मेरे हाथ मौसी क सर पर चले गए . मेरी ाड़ियाँ अपने आप उठ गयी और मैं मज़े की वादियों में उड़ने लगा .
रीता : उम्म्म उम्म्म्म उम्मम्मम ुम्माआठ कक्कक्क्स सारूउप सारूउप सारूउप उम्मम्मम उम्म्म्म
मौसी एक हाथ से मुठ मरती हुई मज़े से मेरा लैंड अपने मुँह में अंदर बहार कर रही थी . मैं उनका सर अपने लैंड पर दबाये जा रहा था . मौसी ने मेरा लैंड मुँह से बहार निकला और जल्दी से अपने साडी पेटीकोट कमर तक उठा कर अपनी पेंटी घुटनो तक कर क बीएड पर हाथ रख कर झुक गयी.
रीता : जल्दी से इसे दाल दे अंदर अब और बर्दाश्त नहीं होता .
मेरा लैंड अकड़ कर दर्द करने वाली हालत में आ गया था . मुझसे भी अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था मैंने आगे बढ़ कर मौसी क नंगे कूल्हों को एक बार मसला और घुटने बेंड कर कर एक हाथ से अपना लैंड पकड़ कर मौसी की रास बहती छूट पर रगड़ा. मौसी की छूट एक डैम साफचक थी . वो पहले से hi साडी तयारी कर क बैठी थी .
रीता : कक्कक्स अब दाल भी दे aaaaaaaaaahhhhhh mmmmmmmmmmmm
मैंने मौसी की बात पूरी होते हुए एक ज़बरदस्त धक्का मारा और मेरा लैंड एक hi बार में पूरा छूट में घुस गया . मौसी क मुँह से ज़ोरदार चीख निकलते मिलते रह गयी जिसे उन्होंने अपने हाथ से मुँह बंद करते हुए रोका. इतने दिनों बाद मौसी मेरा लैंड ले रही थी शायद उनकी छूट थोड़ी सिकुड़ गयी थी . मुझे भी अपने लैंड पर उनकी छूट का दबाव महसूस हुआ. पर छूट इतना पानी छोड़ रही थी और लैंड भी मौसी क थूक से गीला था क स्लिप करता हुआ पूरा अंदर घुस गया. मौसी आगे को गिरने काफी पर मैंने उनकी कमर को मजबूती से पकड़ा हुआ था . मौसी की चीख सुन कर मुझे एक अलग hi मज़ा भी आया क्यूंकि मौसी को ऐसी hi चुदाई पसंद थी और मुझे भी उनके साथ ऐसे मज़ा अत था . मैंने एक बार फिर से लैंड सुपडे तक बहार निकला और फिर से एक hi झटके में पूरा घुसा दिया . मौसी फिर से तदपि
रीता : उम्मम्मम्म मममममम ाआईईई धीरे आआह्ह्ह मरेगा क्या कक्कक्स मायआ
अमित : बहुत तड़प रही थी न आप , आज साडी तड़प मिटा दूंगा . ये लो
मैंने मौसी की कमर पकड़ कर ज़ोरदार धक्के मरने शुरू कर दिए . मौसी लगातार झटकों से हिल रही थी और कराह रही थी मगर उन्होंने मुझे न रुकने को कहा न लैंड बहार निकलने को . मतलब साफ़ था क उन्हें भी मज़ा आ रहा था . मैं लगातार मौसी की छूट को उधेड़ने में लगा हुआ था . मौसी लगातार सिसकियाँ छोड़ रही थी . मौसी कुछ ज्यादा hi प्यासी थी इस लिए जल्दी hi उनका पानी निकल . मौसी को टंगे कम्पनी लगी उनकी छूट से पानी का फव्वारा फुट पड़ा था जो बहकर उनकी जांघों से होता हुआ नीचे पाऊँ तक आने लगा और उनकी पेंटी भी भीग गयी .
रीता : मैं गयीईइ मैं गयीईइ आअह्ह्ह ककक रुऊ रूयकककककक जा बीटा कक्कक्कक्स ममममम
मौसी से खड़ा नहीं हुआ जा रहा था मगर मैं लगातार धक्के मर रहा था . क्यूंकि मेरा अभी नहीं हुआ था . मगर मौसी की हालत देख कर मैंने उनकी कमर को ढीला छोड़ दिया तो वो आगे को बिस्तर पर गिर कर औंधे मुँह लेट गयी. मौसी की नंगी टंगे मांसल जांघें और बड़े बड़े चूतड़ देख कर मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था . मैंने मौसी की टंगे पकड़ कर उन्हें बीएड क किनारे तक खिंचा और उन्हें पलट कर उनकी टंगे ऊपर उठा दी. उनकी घुटनो में अटकी पड़ी पेंटी मैंने उनके पाऊँ से बहार निकली और पाऊँ कंधे पर रख कर झुक कर फिर से लैंड छूट पर सेट कर क एक hi धक्के में पूरा जड़ तक घुसा दिया. अभी अभी झड़ी छूट पानी से लबा लैब थी और लैंड पूरी रवानी से मौसी क गर्भाशय से टकराया. मौसी क मुँह से दबी दबी मस्ती से भरी आह्हः निकली.
रीता : आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स थोड़ी देर रुक तो जाता कक्कक्क्स आज क्या हो गया है तुझे कक्कक्स फाड़ देगा क्या
अमित : आप hi तो कह रही थी बड़ा तदपि हो आप. तो अब आपकी साडी तड़प hi तो मिटा रहा हूँ.
मौसी की नंगी चिकनी टांगों को चूमता मसलता मैं तेज़ तेज़ धक्के मर रहा था . कुछ देर में hi मौसी फिर से गरम हो कर खुद hi अपने स्तन मसलती हुई गांड उठाने लगी.
रीता : और ज़ोर से कर ककक उफ्फ्फ्फ़ और तेज़ फाड़ दे इसी निगोड़ी को बहुत तड़पती है ककक अपने मुसल से फास दे आअज इसे . साडी गर्मी निकल दे इसकी सीसीसी आआह्ह्ह मायआ ककक मर दाल मुझे फाड़ दे और ज़ोर से कर
अमित : ये लो मौसी आज तेरी साडी गर्मी निकल दूंगा . ले और ले ...
मौसी क साथ चुदाई करते हुए मुझे सब कुछ भूल गया और मैं पूरी तरह मौसी पर सवार हो गया . मौसी क पाऊँ उसके सर की तरफ दबाता हुआ मैं पूरी तरह उनके ऊपर hi आ गया था . और कोई वक़्त होता तो मौसी की जान निकल जाती पर इस वक़्त तो वो जंगली बिल्ली बानी मुझे और उकसा रही थी . मैंने पूरी तरह उनके ऊपर आते हुए उनके दोनों कन्धों को जकड कर अपनी कमर ज़ोर ज़ोर से हिलाते हुए जड़ तक लैंड को छूट में पेल रहा था . मेरे तेज़ धक्कों से मौसी बुरी तरह हिल रही थी . वो खिसक कर 2 फ़ीट आगे चली गयी थी पर मैं इस वक़्त सिर्फ उनकी तसल्ली करवाने में लगा हुआ था . एक बार फिर से मौसी की छूट में उबाल आ गया और वो झड़ने लगी.
रीता : मार और ज़ोर से मार मैं गयी आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह ऐसे hi ज़ोर से कर मेरे घोड़े फाड़ दे मेरी आयआईईईई .
अमित : लो मौसी लो मेरा भी पानी अपनी छूट में ले लो बुझा लो अपनी प्यास . आअह्ह्ह
मौसी की छूट से पानी निकलते hi मैंने भी अपना पानी निकल दिया और आखिर क ज़ोरदार धक्के मरता हुआ मैं उनके ऊपर hi गिर गया . हम दोनों की साँसों का शोर कमरे में सुनाई दे रहा था . गर्मी ठंडी होते hi मौसी ने मुझे अपने से उतारते हुए बीएड पर एक तरफ पलटा दिया और खुद टंगे फैला कर लेती रही . कुछ देर बाद जब साँसे दुरुस्त हुई तो मैंने मौसी की तरफ देखा जो मुझे hi देख रही थी .
अमित : क्या देख रही हो मौसी ?
रीता : हो क्या गया था तुझे ? मेरी कमर दुखने लग गयी है तेरी वजह से . ी
अमित : खुद hi तो कह रही थी आप क और ज़ोर से करो . मैंने तो मन भी किया था आपको.
रीता : वो तो पता नहीं क्या क्या उस वक़्त मुँह से निकल जाता है . मुझ में अब इतनी हिम्मत कहाँ है क तुझ जैसे सांड को संभल सकूँ. कहीं कमर चटक जाती तो?
अमित : आपको क्या हुआ है? अभी भी पूरी जवान हो आप. अगर आपको ाचा नहीं लगा तो दोबारा नहीं कर.......
रीता : ख़बरदार ऐसा सोचा भी तो. तेरा hi तो सहारा है वर्ण मेरा क्या होगा. तेरे मौसा तो मुझे ठंडा करते नहीं . तू भी मेरे बारे में नहीं सोचेगा तो किसको कहूँगी?
अमित : मैं तो मज़ाक कर रहा था मौसी , आपको भला मैं छोड़ कर जा सकता हूँ. अगली बार मैं यहाँ से भी करूँगा तैयार रहना .
मैंने मौसी की गांड को मसलते हुए कहा तो वो मुस्कुराने लगी
रीता : तू इसी क पीछे क्यों पड़ा रहता है ? एक तो तेरा ये गधे जैसा मुसल आगे लेने में hi जान निकल जाती है और तू इसे पीछे घुसाने में लगा रहता है.
अमित : क्या करूँ मौसी , आप की बैक इतनी मस्त है क देख कर कण्ट्रोल करना मुश्किल हो जाता है. अब भी अगर दीदी लोग घर पर नहीं होते तो मैं पीछे से ज़रूर करता .
रीता : चल अब तू आराम कर मैं घर क काम भी देख लूँ. आआह्ह्ह्हह्ह ककक क्या करता है
मौसी उठने लगी तो मैंने उनके नंगे चूतड़ मसल दिए. जिससे उनके मुँह से सिसकी निकली. फिर मौसी धीरे धीरे बाथरूम की तरफ चली गयी. मौसी पाऊँ फैला कर चल रही थी . एक hi चुदाई में उनकी चल बदल गयी थी. मैंने उठ कर अपने कपडे सेट किये और मौसी क कमरे से निकल कर अपने कमरे में चला गया . चुदाई कर क मुझे अब नींद आ गयी थी . इस लिए बीएड पर पड़ते hi सो गया .
उधर निधि का दिल आज काम में नहीं लग रहा था. वो यही सोच रही थी क अब वो क्या करे. क्यूंक घर पर आज अमित नहीं होगा और अब उसे अमित क साथ hi अचे से नींद आती थी. वो बहाने सोच रही थी क किसी तरह वो अमित क पास चली जाये मगर घर पर क्या कहे ? ये hi उसे समझ नहीं आ रहा था . दूसरा रीता मौसी क घर वो अमित क साथ एक hi बीएड पर कैसे सो पायेगी. ये भी एक बड़ी समस्या थी.
रजनी भी आज घर वापिस आ गयी थी दिव्या क घर से . घर आ कर वो अमित क न होने से उदास नहीं थी बल्कि खुश थी. क्यूंकि अब अमित वहीँ था जहाँ रजनी खुल कर उसके साथ वो सब करने का सोच रही थी जो उसके मन में उसी दिन आ गया था जब पुलिस स्टेशन में इंस्पेक्टर की गन्दी नज़र से उसे अमित ने बचाया था.
सुबह उठ कर मैंने एक बार अचे से रेविसिओं की और फिर नाश्ते क बाद दीदी मुझे कॉलेज छोड़ गयी. आज फाइनल ईयर वालों का भी एग्जाम था इस लिए शीना शिवानी और शालू भी आयी थी. तीनो से गेट पर hi मुलाकात हो गयी . वो मेरा hi वेट कर रही थीं . एक दूसरे को विश करने क बाद हम सब अपनी अपनी क्लास में चले गए . आज फिर चेकिंग क लिए प्रोफ वरिंदर hi आये ड्यूटी पर सब्जेक्ट कोई इतना मुश्किल नहीं था इस लिए पेपर बहुत hi ाचा गया . एग्जाम क बाद बहार निकलते hi मंजू म मिल गयी .
मंजू : कैसा हुआ पेपर ?
अमित : बहुत ाचा .
मंजू : कल कहाँ थे ? मैं इंतज़ार करती रही .
अमित : सॉरी मम वो पहले एग्जाम की तयारी करता रहा और फिर सबके साथ टाइम का पता hi नहीं चला .
मंजू : कोई बात नहीं, अब बोलो कब मिलवाओगे मुझे अपनी फॅमिली से? नन्हे मुन्ने मेहमानो को देखने को मेरा भी बहुत दिल कर रहा है .
अमित : आज hi मिलवाता हूँ न मम. आज शाम को मैं आपको ले चलूँगा सब से मिलवाने . सब यहीं हैं मोहित क घर .
मंजू : ओह ाचा , तो सब मोहित क घर पर hi हैं. फिर तो और भी ाचा है. ाचा अब तुम जाओ मैं भी चलती हूँ. शाम को आने से पहले एक बार फ़ोन कर देना.
अमित : जी मम
मंजू मम स्टाफ रूम में चली गयी और मैं वापिस अपने दोस्तों क पास .
शिवानी: तो , हमसे छुप छुप क पार्टियां हो रही हैं . थिस इस नॉट फेयर. अरे भाई हम कोई ज्यादा खा लेती क्या ? ये तो तुमने हमारी इंसल्ट करदी वो बड़े वाली .
शिवानी ने मुँह बनाते हुए कहा . जबकि शालू और शीना सर झुकाये अपनी हंसी छुपाने की कोशिश कर रही थी.
अमित : ओह तो इस बात पर गुस्सा हो रही हो आप . वैसे आपने ऐसा सोचा भी कैसे क आप मेरी ख़ुशी में शरीक नहीं हो? एक्साम्स की वजह से मैंने किसी को डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा वर्ण हम सब साथ में पार्टी करते. उस दिन आप लोग नहीं थे पर आज तो हो इस लिए हम अभी यहाँ से सीधा पार्टी करने चलेंगे . मगर ये तो छोटी मोती पार्टी है . जब हम गाओं में फंक्शन करेंगे तो वहां सब को आना पड़ेगा . चलो अब चलते हैं साथ में पार्टी करने .
मेरी बात सुन कर शिवानी क चेहरे पर भी ख़ुशी आ गयी . शीना और शालू तो पहले hi खुश थी. फिर मैं कल्पना मोहित शीना शिवानी और शालू साथ में रेस्टोरेंट पर गए और पार्टी की. इस दौरान मेरे एक तरफ शीना और एक तरफ शिवानी बैठी थी. और जब हम खाने पीने में लगे थे तो मुझे अपनी दायीं जांघ पर किसी का हाथ चलता महसूस हुआ मैंने देखा तो ये हाथ शिवानी का था . मैंने उसे देखा तो वो तिरछी नज़रों से मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. मैंने एक बार उसका हाथ हटाने की कोशिश की पर वो कहाँ पीछे हटने वाली थी. ये टेबल क नीचे से हो रहा था इस लिए किसी को कुछ पता नहीं चल रहा था . इस लिए मैंने भी ज्यादा कुछ नहीं कहा. अभी शिवानी का हाथ hi मेरी जांघ पर चल रहा था क मुझे दूसरी जांघ पर भी हाथ महसूस हुआ . मैंने दूसरी तरफ देखा तो ये शीना का हाथ था . मैंने उसे देखा तो वो बाकि सब से बात कर रही थी और बिना कुछ ज़ाहिर किये अपने हाथ से मेरी जांघ सेहला रही थी . मेरा तो खाना hi हलक में रुक गया . दोनों तरफ मुझ पर हमला हो रहा था . और वो भी दोनों एक से बाद कर एक खूबसूरत बालाएं . मुझे कुछ कुछ हो रहा था पर मैंने खुद को कण्ट्रोल किया और खाने में लगा रहा . दोनों ने कोई कसार नहीं छोड़ी थी मुझे गरम करने में . शिवानी ने तो मेरे लैंड पर हाथ रख कर एक बार कास क मेरा लैंड मसल भी दिया . दोनों सहेलियां मेरे साथ मस्ती कर रही थी मगर दोनों को एक दूसरे क बारे में पता नहीं था . मेरे माथे पर पसीना आने लगा था जो शालू और कल्पना ने अछि तरफ नोट कर लिया था . मगर टेबल क नीचे क्या चल रहा था ये उन्हें पता नहीं था . तभी शिवानी मेरे पास खिसकी और मेरे धीरे से बोली
शिवानी : सिर्फ इसी से काम नहीं चलेगा , मुझे कुछ और भी चाहिए . कितने दिन हो गए एक बार भी मेरे बारे में नहीं सोचा न तुमने ? एक्साम्स क बाद एक दिन पूरा का पूरा मुझे चाहिए . अगर नहीं दिया तो देख लेना सीधा गाओं आ जाउंगी तुम्हारे घर .
मैं शिवानी की बात सुन कर चौंक गया और उसकी तरफ देखने लगा . जबकि वो स्माइल करती हुई पीछे हैट गयी और मेरे लैंड को भी मसल दिया .
शालू : कान में क्या बातें कर रही हो हमें भी तो बताओ ?
शिवानी : कुछ भी तो नहीं , मैं तो थैंक्स कह रही थी अमित को , है न अमित ?
अमित : हह हाँ हाँ
मैंने जवाब तो दे दिया पर मेरा हड़बड़ाना कल्पना बड़े गौर से देख रही थी जबकि शालू नीचे मुँह कर क है रही थी . खाना ख़तम कर क हम उठे और मैंने पेमेंट की . जब हम बहार निकले तो शीना और मोहित कार लेने चले गए शिवानी कल्पना क साथ कोई बात कर रही थी तो शालू मेरे करीब आ गयी
शालू : तो क्या कह रही थी शिवानी?
अमित : क्या ? कुछ भी तो नहीं .
शालू : ाचा ? वैसे उसका हाथ कहाँ था मुझे सब पता है . वैसे भी वो कह रही थी मुझे पता है . उसने पहले hi बता दिया था मुझे . मुझे बस इतना कहना है क अगर हो सके तो थोड़ा सा टाइम तुम मुझे भी दे देना. अगर हो सके तो , मैं सिर्फ रिक्वेस्ट hi कर सकती हूँ . मेरी ज़िन्दगी में अब तुम्हारे सिवा और कुछ भी नहीं है. और मैं हमेशा hi तुम्हारा इंतज़ार करती रहूंगी जब भी तुम्हारा दिल करे बस मुझे आवाज़ दे देना . मैं चली आउंगी .
शालू ने मेरी आँखों में देख कर पूरी संजीदगी से ये बात कही . मैं पहले तो उसकी बात से चौंका क उसे शिवानी की हरकत क बारे में सब पता था पर उसकी आखिरी बात सुन कर मेरा दिल एक डैम से पिघल सा गया . शालू क साथ जब मैं उसके घर गया था और हमने जो किया था उस वक़्त भी शालू ने अपने जज़्बात ज़ाहिर किये थे . शालू दिल की बहुत अछि थी मगर ज़िन्दगी ने उसके साथ बहुत बुरा किया था. वो सब मैं बदल तो नहीं सकता था पर दिल कहता था क उसके लिए मैं जो भी कर सकूँ मुझे करना चाहिए. अब भी जब शालू ने ये कह कर अपने ज़ज़्बात ज़ाहिर किये तो मेरे दिल में अपने आप एक उबाल सा उठता महसूस हुआ . मेरा दिल किया क अभी उसे बाँहों में भर लूँ . शालू की सादगी उसका कोमल दिल एक अलग hi जगह बना चुके थे में मेरे दिल में. मैं उसकी आँखों में देखता रहा . हम दोनों खामोश थे पर नज़रें बातें कर रही थी . शालू क अंदर मुझे अपने लिए बेपनाह मुहब्बत महसूस हो रही थी .
शिवानी: चलना नहीं है क्या ? चलो वो दोनों आ गए हैं .
हम दोनों की तन्द्रा टूटी तो देखा सामने मोहित और शीना अपनी अपनी कार ले ए थे . हम सब कार्स में बैठ गए और चल पड़े मोहित क घर की तरफ . जब हम मोहित क घर पहुंचे तो सब हॉल में hi मौजूद थे . अंकल और करिश्मा दीदी को छोड़ कर बाकि सब यहीं थे . माँ बाबा अजय मां कामिनी ममी आंटी . मैंने शीना शिवानी और शालू को सब से मिलवाया .
विजय : ाचा हुआ तुम आ गए , हम तुम्हारा hi इंतज़ार कर रहे थे .
अमित : कोई काम था क्या बाबा ?
विजय : नहीं काम तो कोई नहीं था. तू बता तेरा आज का पेपर कैसा हुआ ?
अमित : बहुत ाचा हुआ बाबा
विजय : शाबाश , अब और कितने रह गए पेपर ?
अमित : बस एक और है बाबा .
विजय : उसके बाद गाओं आ रहा है न ? पेपर क बाद छुट्टियां हो जाएँगी न ?
अमित : जी
विजय : ाचा आज हम वापिस जा रहे हैं. सुबह जाने वाले थे पर तुझसे मिले बिना जाने को तुम्हारी माँ और ममी मन नहीं रही थी . तू आ गया है और मिल भी लिया. अब हम चलते हैं .
अमित : पर इतनी जल्दी क्यों ? अभी कुछ दिन और तो रुक जाते .
विजय : नहीं बीटा , गाओं में तेरा छोटा मां अकेला है और बेचारी दीपिका भी अकेली परेशां होगी . वैसे भी डॉ साहब ने तो छुट्टी दे hi दी है . कामिनी भी अब ठीक है . तो हमने सोचा अब चलते हैं. कब तक यहाँ बैठे रहेंगे.
आंटी : ये आप बहुत गलत कर रहे हैं भैया . ये क्या आपका घर नहीं है ? पता है राघव कितने नाराज़ होंगे जब वापिस आएंगे . वो तो ज़रूरी मीटिंग ाँ पड़ी वर्ण वो जाते नहीं. वो जब वापिस आएंगे तो मैं क्या जवाब दूंगी ?
गौरी : कुछ नहीं कहेगा . मेरी बात करवा देना उससे. घर में छोटी अकेली है और आरव तो अभी छोटा सा है . उसे भी तो हमारा साथ चाहिए न ? कामिनी भी अब जल्दी अपने घर वापिस जाना चाहती है . चाहे ये घर भी अपना है पर जहाँ साडी ज़िन्दगी गुज़री है अब दिल तो वहीँ रहता है न . गाओं जा कर तयारी भी तो करनी है. फिर तुम सब को गाओं आना पड़ेगा कह देती हूँ. और तुम सब भी आना बचो .
माँ ने हक़ सब को देख कर कहा . तो सब ने हाँ में सर हिला दिया . कुछ देर और बात चित क बाद गाड़ी में सामान रखवाने क बाद माँ बाबा अजय मां कामिनी ममी बचे क साथ गाओं क लिए रवाना हो गए . शालू शिवानी शीना और कल्पना भी अपने घर क लिए निकल गए . उसके बाद मैंने भी मोहित को मुझे रीता मौसी क घर मुझे ड्राप करने को कहा तो आंटी ने मुझे लंच कर क जाने को कहा . वैसे तो भूख नहीं थी . पर फिर भी थोड़ा बहुत तो खाना hi था . इस दौरान करुणा दीदी और रीता मौसी का 3-4 बार फ़ोन आ गया था. खाने क बार मोहित मुझे रीता मौसी क घर छोड़ गया . कुछ देर वो रुका और रीता मौसी नेहा दीदी करुणा दीदी से मिल कर गया .
रीता : तू कल क्यों नहीं आया ? मैं तो सोच रही थी क सब यहीं हैं तो कल hi आ जायेगा पर तू ...
अमित : मौसी वो कल निधि दीदी ने hi रोक लिया था . कहने लगी क पेपर की तयारी कर लो वर्ण रह जायेगा .
नेहा : ठीक कहा दीदी ने , वर्ण सच में रह जाता.
रीता : तयारी यहाँ भी तो हो सकती थी न . पता है कल कितना इंतज़ार किया हमने . और ये करुणा तो ....
रीता मौसी अभी बात कर hi रही थी क करुणा दीदी गुस्से से मुझे देखती हुई उठ कर अपने कमरे में चली गयी . जब से मैं आया था तब से hi वो मुझे गुस्से से देख रही थी और बात नहीं कर रही थी .
रीता : देखा , बहुत नाराज़ है तुमसे. उसे उम्मीद थी क कल तू आएगा . रत तो तेरा इंतज़ार करती रही मगर तू नहीं आया . जा अब जा कर बात कर ले उससे वर्ण खाना नहीं खायेगी गुस्से में.
मौसी की बात सुन कर मैं वहां से उठा और करुणा दीदी क रूम में चला गया . मैं कमरे में गया तो करुणा दीदी बीएड पर बैठी थी और मुझे देख कर दूसरी तरफ करवट कर क बैठ गयी . मैं दरवाज़ा लॉक कर क दीदी क पास गया . मुझे पता था क वो कैसे मानेंगी इस लिए मैं बीएड पर उनके साथ बैठ गया.
अमित : तो मेरी गफ नाराज़ है मुझसे , इतनी क अब बात भी नहीं करेगी. कोई बात नहीं , देखता हूँ क कितनी देर नाराज़ रहती है मुझसे.
करुणा : गफ ? आ गयी यद् ? मुझसे बात मत कर मुझे तेरी कोई बात नहीं सुन्नी.
दीदी ने गुस्से से मुझे कहा और फिर चेहरा दूसरी तरफ कर लिया.
अमित : ाचा , तो बात नहीं करनी? ठीक है बात मत करो मगर मैं तो प्यार करूँगा.
इतना कह कर मैंने करुणा दीदी को को पीछे से बाँहों में भर लिया मगर वो मेरी बाँहों से निकलने की कोशिश कर रही थी . मैंने उनकी गर्दन पर होंठ रख लिए और उन्हें चूमने लगा . दीदी एक डैम से खामोश हो गयी और मज़ा लेने लगी . मैंने उनकी गर्दन चूमते हुए उनके कण की लो को चुम कर दांतो में हल्का सा दबा दिया तो उनके मुँह से सिसकी निकल गयी .
करुणा : सीईईई
मैंने अपने हाथ उनके ठोस स्तनों पर रख दिए और मसलने लगा . करुणा दीदी एक डैम से निढाल हो गयी और अपना सर पीछे को गिरते हुए मेरी गर्दन पर दाल दिया . मगर मैं नहीं रुका और लगातार उनके स्तनों को मसलता रहा. दीदी खुद को और कण्ट्रोल नहीं कर पायी और एक डैम से मेरी बाँहों में घूम गयी और मेरे होंठों को अपने होंठों में जकड कर स्मूच करने लगे . मेरे सर और पीठ पर हाथ चलते हुए वो मेरी गॉड में बैठ गयी . मेरा लैंड गरम होकर खड़ा हो गया था जो अब दीदी की गांड क नीचे था . दीदी अपनी कमर हिला हिला कर मेरे लैंड पर अपने चूतड़ मसल रही थी . हम दोनों अपने में hi खोये थे क नीचे से मौसी की आवाज़ आयी और मैंने किश तोड़ी .
अमित : नीचे मौसी बुला रही हैं .
करुणा : तो क्या हुआ , मुझे कुछ नहीं पता . अभी मुझे प्यार करो. इतने दिनों बाद आये तो ऐसे नहीं जाने दूंगी .
अमित : अब तो मैं यहीं हूँ न. मौका देख कर आपको खूब प्यार करूँगा . अगर अभी निचे नहीं गए तो वो ऊपर आ जाएँगी .
करुणा : बड़े ख़राब हो , एक तो उतने दिनों बाद आये हो ऊपर से मुझे ऐसे तड़पा कर अब छोड़ रहे हो.
अमित : थोड़ा सबर रखिये , मैं आपकी साडी तड़प मिटा दूंगा. अब आ गया हूँ न . चलिए .
मैंने उठने लगा तो दीदी ने फिर से एक बार मेरे होंठों को अपने होंठों में जकड लिया और अचे से किश करने क बाद छोड़ दिया. अपनी हालत ठीक करने क बाद दीदी ने मेरी तरफ देखा और शर्मा गयी . मैं उन्हें hi देख रहा था .
करुणा : ऐसे क्या देख रहे हो ? चलो अब
हम दोनों नीचे आ गए और मौसी नेहा दीदी क साथ hi बैठ गए . करुणा दीदी मेरी बाजु पकड़ कर बैठी थी .
रीता : बस हो गयी नाराज़गी दूर ? अभी तो बड़ा गुस्सा दिखा रही थी .
करुणा : नाराज़ तो मैं अभी भी हूँ. और इससे पूरा हिसाब भी लुंगी . हाँ गुस्सा नहीं हूँ क्यूंकि इससे गुस्सा तो मैं हो hi नहीं सकती . आप बैठी क्यों हैं ? लेकर आइये न इसके लिए कुछ.
मौसी उठ कर जाने लगी तो मैंने मन कर दिया. फिर कुछ देर हूँ बातें करते रहे. नेहा दीदी और करुणा दीदी का कल एग्जाम था इस लिए नेहा दीदी करुणा दीदी को पड़ने का कह कर अपने साथ के गयी. करुणा दीदी जाना तो नहीं चाहती थी पर मौसी और मेरे कहने पर वो चली गयी. उसके बाद मैं और रीता मौसी hi वहां रह गए .
रीता : अमित ज़रा मेरे साथ आना मेरे कमरे में , कुछ काम है .
अमित : जी मौसी
मैं रीता मौसी क साथ उनके कमरे में चल दिया . कमरे में आते hi मौसी ने दरवाज़ा बंद किया और मुझ पर झपट पड़ी. मेरे चेहरे को दोनों हाथों में पकड़ कर मौसी ने मेरे होंठ अपने होंठों में जकड लिए . मैं पहले तो चौंका पर फिर मौसी का साथ देने लगा . रीता मौसी कितनी गरम हैं मैं अचे से जनता था और इतने दिनों बाद मिल रही थी तो ऐसा होना स्वाभाविक था . मैंने मौसी का साथ देते हुए अपने हाथ उनके बड़े बड़े चूतड़ों पर रख दिए और साडी की ऊपर से उनके बड़े चूतड़ मसलने लगा . मौसी पागलों की तरह मेरे होंठ चुम रही थी . मैंने उन्हें वहीँ दीवार क साथ लगा लिया और अब अपने हाथ उनके बड़े बड़े स्तनों पर रख कर ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा .
रीता : उम्म्म्म उनमममम उम्माह्ह्ह्हह्ह कक्कक्कक्स ुण्णं कक्कक्क्स उफ्फफ्फ्फ़ आराम से कक्कक्क्स इतना क्यों तड़पते हो ?? तुझे अपनी मौसी का ज़रा भी ख्याल नहीं अत . कक्कक्क्स
अमित : ख्याल तो अत है मौसी पर आप को भी तो पता है मैं टाइम निकल नहीं पता .
रीता : उफ्फ्फफ्फ्फ़ कक्कक्कक्स आइइइइइ ककक जानती हूँ इसी लिए तो इंतज़ार कर रही थी कल से . उफ्फ्फ्फ़ उम्म्म्म अब और इंतज़ार नहीं होता . जल्दी से एक बार मुझे ठंडी कर दे . बहुत आग लगी है .
अमित : मौसी क्या कह रही हो आप . दीदी घर पर हैं .
रीता : वो पढ़ रही हैं. जल्दी से एक बार कर दे ने
मैं मौसी को रुकने को कह रहा था पर मौसी कुछ ज्यादा hi गरम थी . वो जल्दी से घुटनो पर बैठ गयी और मेरी पेण्ट खोल कर अंडरवियर क साथ झटके से खिंच कर घुटनो तक कर दी और मेरा लैंड हाथ में पकड़ कर मसलने लगी .
रीता : कक्कक्स कितना तड़पती हूँ इसके लिए ,, अब तो तेरे मौसा जी क साथ करने का बिलकुल भी मन नहीं करता . उम्मम्मम उम्म्म्म
मौसी ने जल्दी से मेरा लैंड अपने होंठों में कैद कर लिया और उसे चूसने लगी . किसी लोली पॉप की तरह वो मज़े से मेरा लैंड चूसने लगी. मैं जो अभी मौसी को रोक रहा था अब खुद hi मौसी क इशारों पर नाचने लगा. मैं अपने मुँह से निकललन वाली मज़े की सिसकारियों को रोकने की कोशिश कर रहा था . मज़े में मेरी ऑंखें बंद हो गयी और मेरे हाथ मौसी क सर पर चले गए . मेरी ाड़ियाँ अपने आप उठ गयी और मैं मज़े की वादियों में उड़ने लगा .
रीता : उम्म्म उम्म्म्म उम्मम्मम ुम्माआठ कक्कक्क्स सारूउप सारूउप सारूउप उम्मम्मम उम्म्म्म
मौसी एक हाथ से मुठ मरती हुई मज़े से मेरा लैंड अपने मुँह में अंदर बहार कर रही थी . मैं उनका सर अपने लैंड पर दबाये जा रहा था . मौसी ने मेरा लैंड मुँह से बहार निकला और जल्दी से अपने साडी पेटीकोट कमर तक उठा कर अपनी पेंटी घुटनो तक कर क बीएड पर हाथ रख कर झुक गयी.
रीता : जल्दी से इसे दाल दे अंदर अब और बर्दाश्त नहीं होता .
मेरा लैंड अकड़ कर दर्द करने वाली हालत में आ गया था . मुझसे भी अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था मैंने आगे बढ़ कर मौसी क नंगे कूल्हों को एक बार मसला और घुटने बेंड कर कर एक हाथ से अपना लैंड पकड़ कर मौसी की रास बहती छूट पर रगड़ा. मौसी की छूट एक डैम साफचक थी . वो पहले से hi साडी तयारी कर क बैठी थी .
रीता : कक्कक्स अब दाल भी दे aaaaaaaaaahhhhhh mmmmmmmmmmmm
मैंने मौसी की बात पूरी होते हुए एक ज़बरदस्त धक्का मारा और मेरा लैंड एक hi बार में पूरा छूट में घुस गया . मौसी क मुँह से ज़ोरदार चीख निकलते मिलते रह गयी जिसे उन्होंने अपने हाथ से मुँह बंद करते हुए रोका. इतने दिनों बाद मौसी मेरा लैंड ले रही थी शायद उनकी छूट थोड़ी सिकुड़ गयी थी . मुझे भी अपने लैंड पर उनकी छूट का दबाव महसूस हुआ. पर छूट इतना पानी छोड़ रही थी और लैंड भी मौसी क थूक से गीला था क स्लिप करता हुआ पूरा अंदर घुस गया. मौसी आगे को गिरने काफी पर मैंने उनकी कमर को मजबूती से पकड़ा हुआ था . मौसी की चीख सुन कर मुझे एक अलग hi मज़ा भी आया क्यूंकि मौसी को ऐसी hi चुदाई पसंद थी और मुझे भी उनके साथ ऐसे मज़ा अत था . मैंने एक बार फिर से लैंड सुपडे तक बहार निकला और फिर से एक hi झटके में पूरा घुसा दिया . मौसी फिर से तदपि
रीता : उम्मम्मम्म मममममम ाआईईई धीरे आआह्ह्ह मरेगा क्या कक्कक्स मायआ
अमित : बहुत तड़प रही थी न आप , आज साडी तड़प मिटा दूंगा . ये लो
मैंने मौसी की कमर पकड़ कर ज़ोरदार धक्के मरने शुरू कर दिए . मौसी लगातार झटकों से हिल रही थी और कराह रही थी मगर उन्होंने मुझे न रुकने को कहा न लैंड बहार निकलने को . मतलब साफ़ था क उन्हें भी मज़ा आ रहा था . मैं लगातार मौसी की छूट को उधेड़ने में लगा हुआ था . मौसी लगातार सिसकियाँ छोड़ रही थी . मौसी कुछ ज्यादा hi प्यासी थी इस लिए जल्दी hi उनका पानी निकल . मौसी को टंगे कम्पनी लगी उनकी छूट से पानी का फव्वारा फुट पड़ा था जो बहकर उनकी जांघों से होता हुआ नीचे पाऊँ तक आने लगा और उनकी पेंटी भी भीग गयी .
रीता : मैं गयीईइ मैं गयीईइ आअह्ह्ह ककक रुऊ रूयकककककक जा बीटा कक्कक्कक्स ममममम
मौसी से खड़ा नहीं हुआ जा रहा था मगर मैं लगातार धक्के मर रहा था . क्यूंकि मेरा अभी नहीं हुआ था . मगर मौसी की हालत देख कर मैंने उनकी कमर को ढीला छोड़ दिया तो वो आगे को बिस्तर पर गिर कर औंधे मुँह लेट गयी. मौसी की नंगी टंगे मांसल जांघें और बड़े बड़े चूतड़ देख कर मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था . मैंने मौसी की टंगे पकड़ कर उन्हें बीएड क किनारे तक खिंचा और उन्हें पलट कर उनकी टंगे ऊपर उठा दी. उनकी घुटनो में अटकी पड़ी पेंटी मैंने उनके पाऊँ से बहार निकली और पाऊँ कंधे पर रख कर झुक कर फिर से लैंड छूट पर सेट कर क एक hi धक्के में पूरा जड़ तक घुसा दिया. अभी अभी झड़ी छूट पानी से लबा लैब थी और लैंड पूरी रवानी से मौसी क गर्भाशय से टकराया. मौसी क मुँह से दबी दबी मस्ती से भरी आह्हः निकली.
रीता : आअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स थोड़ी देर रुक तो जाता कक्कक्क्स आज क्या हो गया है तुझे कक्कक्स फाड़ देगा क्या
अमित : आप hi तो कह रही थी बड़ा तदपि हो आप. तो अब आपकी साडी तड़प hi तो मिटा रहा हूँ.
मौसी की नंगी चिकनी टांगों को चूमता मसलता मैं तेज़ तेज़ धक्के मर रहा था . कुछ देर में hi मौसी फिर से गरम हो कर खुद hi अपने स्तन मसलती हुई गांड उठाने लगी.
रीता : और ज़ोर से कर ककक उफ्फ्फ्फ़ और तेज़ फाड़ दे इसी निगोड़ी को बहुत तड़पती है ककक अपने मुसल से फास दे आअज इसे . साडी गर्मी निकल दे इसकी सीसीसी आआह्ह्ह मायआ ककक मर दाल मुझे फाड़ दे और ज़ोर से कर
अमित : ये लो मौसी आज तेरी साडी गर्मी निकल दूंगा . ले और ले ...
मौसी क साथ चुदाई करते हुए मुझे सब कुछ भूल गया और मैं पूरी तरह मौसी पर सवार हो गया . मौसी क पाऊँ उसके सर की तरफ दबाता हुआ मैं पूरी तरह उनके ऊपर hi आ गया था . और कोई वक़्त होता तो मौसी की जान निकल जाती पर इस वक़्त तो वो जंगली बिल्ली बानी मुझे और उकसा रही थी . मैंने पूरी तरह उनके ऊपर आते हुए उनके दोनों कन्धों को जकड कर अपनी कमर ज़ोर ज़ोर से हिलाते हुए जड़ तक लैंड को छूट में पेल रहा था . मेरे तेज़ धक्कों से मौसी बुरी तरह हिल रही थी . वो खिसक कर 2 फ़ीट आगे चली गयी थी पर मैं इस वक़्त सिर्फ उनकी तसल्ली करवाने में लगा हुआ था . एक बार फिर से मौसी की छूट में उबाल आ गया और वो झड़ने लगी.
रीता : मार और ज़ोर से मार मैं गयी आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह ऐसे hi ज़ोर से कर मेरे घोड़े फाड़ दे मेरी आयआईईईई .
अमित : लो मौसी लो मेरा भी पानी अपनी छूट में ले लो बुझा लो अपनी प्यास . आअह्ह्ह
मौसी की छूट से पानी निकलते hi मैंने भी अपना पानी निकल दिया और आखिर क ज़ोरदार धक्के मरता हुआ मैं उनके ऊपर hi गिर गया . हम दोनों की साँसों का शोर कमरे में सुनाई दे रहा था . गर्मी ठंडी होते hi मौसी ने मुझे अपने से उतारते हुए बीएड पर एक तरफ पलटा दिया और खुद टंगे फैला कर लेती रही . कुछ देर बाद जब साँसे दुरुस्त हुई तो मैंने मौसी की तरफ देखा जो मुझे hi देख रही थी .
अमित : क्या देख रही हो मौसी ?
रीता : हो क्या गया था तुझे ? मेरी कमर दुखने लग गयी है तेरी वजह से . ी
अमित : खुद hi तो कह रही थी आप क और ज़ोर से करो . मैंने तो मन भी किया था आपको.
रीता : वो तो पता नहीं क्या क्या उस वक़्त मुँह से निकल जाता है . मुझ में अब इतनी हिम्मत कहाँ है क तुझ जैसे सांड को संभल सकूँ. कहीं कमर चटक जाती तो?
अमित : आपको क्या हुआ है? अभी भी पूरी जवान हो आप. अगर आपको ाचा नहीं लगा तो दोबारा नहीं कर.......
रीता : ख़बरदार ऐसा सोचा भी तो. तेरा hi तो सहारा है वर्ण मेरा क्या होगा. तेरे मौसा तो मुझे ठंडा करते नहीं . तू भी मेरे बारे में नहीं सोचेगा तो किसको कहूँगी?
अमित : मैं तो मज़ाक कर रहा था मौसी , आपको भला मैं छोड़ कर जा सकता हूँ. अगली बार मैं यहाँ से भी करूँगा तैयार रहना .
मैंने मौसी की गांड को मसलते हुए कहा तो वो मुस्कुराने लगी
रीता : तू इसी क पीछे क्यों पड़ा रहता है ? एक तो तेरा ये गधे जैसा मुसल आगे लेने में hi जान निकल जाती है और तू इसे पीछे घुसाने में लगा रहता है.
अमित : क्या करूँ मौसी , आप की बैक इतनी मस्त है क देख कर कण्ट्रोल करना मुश्किल हो जाता है. अब भी अगर दीदी लोग घर पर नहीं होते तो मैं पीछे से ज़रूर करता .
रीता : चल अब तू आराम कर मैं घर क काम भी देख लूँ. आआह्ह्ह्हह्ह ककक क्या करता है
मौसी उठने लगी तो मैंने उनके नंगे चूतड़ मसल दिए. जिससे उनके मुँह से सिसकी निकली. फिर मौसी धीरे धीरे बाथरूम की तरफ चली गयी. मौसी पाऊँ फैला कर चल रही थी . एक hi चुदाई में उनकी चल बदल गयी थी. मैंने उठ कर अपने कपडे सेट किये और मौसी क कमरे से निकल कर अपने कमरे में चला गया . चुदाई कर क मुझे अब नींद आ गयी थी . इस लिए बीएड पर पड़ते hi सो गया .
उधर निधि का दिल आज काम में नहीं लग रहा था. वो यही सोच रही थी क अब वो क्या करे. क्यूंक घर पर आज अमित नहीं होगा और अब उसे अमित क साथ hi अचे से नींद आती थी. वो बहाने सोच रही थी क किसी तरह वो अमित क पास चली जाये मगर घर पर क्या कहे ? ये hi उसे समझ नहीं आ रहा था . दूसरा रीता मौसी क घर वो अमित क साथ एक hi बीएड पर कैसे सो पायेगी. ये भी एक बड़ी समस्या थी.
रजनी भी आज घर वापिस आ गयी थी दिव्या क घर से . घर आ कर वो अमित क न होने से उदास नहीं थी बल्कि खुश थी. क्यूंकि अब अमित वहीँ था जहाँ रजनी खुल कर उसके साथ वो सब करने का सोच रही थी जो उसके मन में उसी दिन आ गया था जब पुलिस स्टेशन में इंस्पेक्टर की गन्दी नज़र से उसे अमित ने बचाया था.