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अमित : कहिये दीदी क्या काम था आपको मेरे साथ ?
निधि : इतनी जल्दी क्या है. थोड़ी देर बैठ तो जाओ. फिर हम चलेंगे .
अमित : और अंकल को क्या काम था मुझसे ?
निधि : हाँ वो मैं क फंक्शन है क्सक्सक्सक्स शहर में . कोई ऑर्फ़न होम है . अंकल ने कहा है क उस दिन तुम्हे खास तौर पर उस फंक्शन में होना है.
अमित : कौन सा फंक्शन? और मेरा होना क्यों ज़रूरी है ?
‘ इस लिए क वो चाचा जी से जुड़ा हुआ है. और पापा चाहते हैं इस बार तुम वो सब अपने हाथों से करो .’ ये आवाज़ करिश्मा दीदी की थी जो पता नहीं कब ऑफिस में एंटर कर चुकी थी. करिश्मा दीदी क चेहरे पर मुझे देख कर हलकी सी स्माइल थी. पर आँखों में एक उदासी की झलक. ऑफिस क हिसाब से वो भी कोट पेण्ट पहने हुए थी . करिश्मा दीदी को देख कर मैं और निधि दीदी अपनी अपनी जगह से खड़े हो गए .
करिश्मा : ये क्या दीदी ? मैंने कितनी बार कहा है क आप ऐसे खड़े मत हुआ करो. आप मेरी बड़ी बहिन हैं और तुम क्यों खड़े हो रहे हो? तुम तो एम्प्लोयी भी नहीं हो तो फिर ऐसे क्यों कर रहे हो जैसे क्लास में टीचर क आने पर स्टूडेंट्स खड़े हो जाते हैं .
करिश्मा दीदी की बात पर निधि दीदी भी है पड़ी और मुझे खुद भी हंसी आ गयी .
अमित : नहीं दीदी ऐसी बात नहीं है . आप कैसी हैं ?
करिश्मा : ठीक हूँ , तुम कैसे हो ?
अमित : मैं भी ठीक हूँ .
करिश्मा : कभी तुम्हारा दिल नहीं करता हमसे मिलने को ? अपने आप तो तुम आते hi नहीं . लगता है अभी भी नाराज़ हो .
अमित : अरे ये आप क्या कह रही हैं . मैं भला क्यों नाराज़ होने लगा .
निधि : करिश्मा तुम अगर बिजी नहीं हो तो तुम भी हमारे साथ चलो . मैं अमित क साथ शॉपिंग करने जा रही हूँ .
निधि दीदी ने मुस्कुराते हुए करिश्मा दीदी को इन्विते कर लिया और मैं हैरान परेशां दीदी को देखने लगा . क्यूंकि हम शॉपिंग पे जा रहे हैं ये अभी अभी मुझे पता चला था .
करिश्मा : मेरी तरफ देखते हुए ) नहीं आप दोनों hi चले जाओ .
मैं समझ गया की दीदी मेरी वजह से ऐसा कह रही हैं .
अमित : क्या अभी भी गुस्सा हो मुझसे दीदी ?
मैंने जब इतना कहा तो करिश्मा दीदी की मुस्कान एक डैम से गायब हो गयी और वो एक तक मुझे देखने लगी . फिर अचानक उन्होंने आगे बढ़ कर मुझे गले से लगा लिया . करिश्मा दीदी की आँखों से आंसू बह रहे थे मगर वो कुछ बोल नहीं प् रही थी . करिश्मा दीदी की ऐसी हालत देख कर निधि दीदी ने भी उन्हें पीछे से गले लगा लिया .
निधि : क्या हुआ तुझे ? ऐसे क्यों रो रही है? तुझे ाचा नहीं लगा क्या ?
करिश्मा : कैसी बात कर रही हो दीदी आप . मैं बता नहीं सकती मुझे कितनी ख़ुशी हो रही है . मैं समझती थी क ये मुझसे नाराज़ है इसी लिए मैं ..... पर आज पता चला इसका दिल वाकई में बहुत बड़ा है .
निधि : चल अब अपनी ये ऑंखें साफ़ कर ऐसे बिलकुल भी अछि नहीं लग रही तू .
अमित : सही कहा दीदी आपने . करिश्मा दीदी तो बस हस्ती हुई hi अछि लगती है . पर मेरी वजह से ......
करिश्मा : क्या तेरी वजह से हाँ ? आज तेरी वजह से hi मैं उस नरक से आज़ाद हुई हूँ समझे . और मैं जितना भी शुक्रिया ऐडा करूँ उतना काम है . चलो अब चलते हैं . मैंने भी बहुत देर से शॉपिंग नहीं की. आज दिल खोल कर शॉपिंग करुँगी .
उसके बाद करिश्मा दीदी निधि दीदी और मैं तीनो एक बड़े से मॉल में पहुँच गए . निधि दीदी और करिश्मा दीदी इतनी अछि लग रही थी क हर किसी की नज़र उन दोनों पर hi थी. मॉल में पहुँचने पर मुझे लगा क दोनों को शॉपिंग करने में वक़्त लगेगा तो मैं थोड़ा रीगल लेता हूँ और रीमा से बात कर लेता हूँ.
अमित : दीदी आप दोनों शॉपिंग करो मैं भी थोड़ा घूम लेता हूँ .
निधि : तुमने अब कहाँ जाना है . चुपचाप मेरे साथ शॉपिंग करवाओ .
अमित : पर मैं क्या करूँगा इसमें ?
निधि : क्या करूँगा मतलब ? मेरी हेल्प करोगे और क्या
अमित : उसके लिए तो करिश्मा दीदी है न
करिश्मा : तो क्या हुआ , तुम हमारे साथ नहीं रह सकते ? वैसे भी मुझे भी तुम्हारी हेल्प चाहिए .
अमित : मेरी हेल्प ?
करिश्मा : हाँ वो मुझे मोहित क लिए कुछ ड्रेसेस लेनी है तो तुम साथ होंगे तो आसानी होगी .
अब मैं मन कैसे कर सकता था . खैर उसके बाद शॉपिंग शुरू हुई. मगर शॉपिंग पहले गेट्स कलेक्शन से hi शुरू हुई. करिश्मा दीदी ने मोहित क लिए ड्रेसेस लेनी थी इस लिए मुझे ड्रेस तरय करने को कहती और फिर दोनों मिल कर ड्रेस को फाइनल करती . कुछ ड्रेसेस लेने क बाद निधि दीदी ने भी कहा क वो कारन भैया क लिए कुछ ड्रेसेस लेना चाहती हैं इस लिए मुझे उनके लिए भी ड्रेसेस तरय करने पड़े. पर मुझे इस बात से थोड़ी हैरानी और ख़ुशी भी हो रही थी क इतने दिनों बाद निधि दीदी आज खुद hi कारन भैया का नाम ले रही थी जो पहले उनका नाम सुनते hi गुस्सा होने लगी थी . गेट्स कलेक्शन से फारिग हो कर हम फिर लेडीज कलेक्शन में पहुंचे . करिश्मा दीदी तो आते hi अपने लिए ड्रेसेस देखने लगी पर निधि दीदी मेरे साथ hi कड़ी हो गयी .
अमित : क्या बात है दीदी आप शॉपिंग क्यों नहीं कर रही? आप क कहने पर hi तो हूँ यहाँ आये हैं.
निधि : मैंने जो लेना था ले लिया अब बस .
अमित : ये क्या बात हुई ? मुझे कुछ नहीं सुन्ना. चलिए पहले अपने लिए शॉपिंग कीजिये . दूसरों की फ़िक्र रहती है हमेशा आपको पर अपनी नहीं .
निधि : ाचा ठीक है पर मेरी एक बात माननी होगी तुझे . मेरे लिए ड्रेस तू hi सेलेक्ट करेगा .
अमित : चलिए ठीक है . अब तो चलो .
निधि दीदी मेरे हाँ करते hi मुस्कुराती हुई मेरे हाथ पकड़ कर खींचती हुई मुझे अपने साथ ले गयी . फिर मैंने 2-3 ड्रेस दीदी क लिए सेलेक्ट किये और उनको वो सब तरय करने क लिए कहा. करिश्मा दीदी थोड़ी दूर hi अपने लिए ड्रेस देख रही थी पर उनकी नज़र हम पर hi थी और शायद मन में कुछ सोच रही थी क्यूंकि उनका ध्यान ड्रेस देखने में काम और हमारी तरफ ज्यादा था . तभी एक लड़का उनके पास आया और उनसे बात करने लगा .
लड़का : हए मिस ब्यूटीफुल, आप अकेली हैं ? क्या मैं कोई हेल्प करूँ? वैसे तो आप पर कोई भी ड्रेस जाँच जाएगी. पर मेरे ख्याल से ये आप पर ज्यादा अछि लगेगी .
करिश्मा : गुस्से से घूरते हुए ) हे स्टॉप आईटी , हु अरे यू ? मंद योर ओन बिज़नेस.
लड़का : ओह्ह , इतनी गर्मी . लगता है किसी ने अचे से उतरी नहीं है. कोई बात नहीं मैं निकल दूंगा साडी गर्मी .
करिश्मा : यू बास्टर्ड , तेरी हिम्मत कैसे हुई बकवास करने की .
करिश्मा दीदी ने गुस्से में आकर अपना हाथ उस लड़के पर उठा दिया . पर उस लड़के ने करिश्मा दीदी का हाथ पकड़ लिया . मैं उनकी तरफ hi देख रहा था पर इतनी दूर से पता नहीं चल रहा था क क्या बात हो रही है. मगर जब दीदी को हाथ उठाते देखा तो मैं भाग के उनके पास पहुँच गया . उस लड़के ने जिस हाथ से करिश्मा का हाथ पकड़ा हुआ था मैंने उसकी वो कलाई ज़ोर से पकड़ कर भींच दी और वो दर्द से कराह उठा . जिससे उसके हाथ से करिश्मा दीदी का हाथ छूट गया .
लड़का : आआह्ह्ह्हह्ह छोड़ साले छोड़ मुझे .
अमित : ये क्या कह रहा था दीदी ?
मेरे मुँह से दीदी सुन कर उस लड़के की तो हवा टाइट हो गयी पहले hi उसकी कलाई मेरे हाथ में पीस रही थी और वो मेरी तगड़ी बॉडी को देख कर जैसे पहले hi सरेंडर कर चूका था .
लड़का : सॉरी भाई गलती हो गयी , मुझे नहीं पता था उनका कोई आप जैसा भाई भी है. मैं माफ़ी मांगता हूँ भाई सॉरी , सॉरी दीदी माफ़ कार्डो मुझे दोबारा गलती नहीं होगी . करिश्मा दीदी : क्यों निकल गयी साडी गरमी? अभी तो मेरी गरमी निकलने की बात कर रहा था . अब बोल , अब सांप सूंघ गया इसे देख कर ? . चटाक चटाक चटाक . गेट लॉस्ट यू सोन ऑफ़ ा बीच .
करिश्मा दीदी ने गुस्से में आकर उस लड़के को गली देते हुए 3 थप्पड़ कास कास क जड़ दिए. मैं तो हैरान हो रहा था. जिस तरह उस लड़के ने माफ़ी मांग ली थी मेरा इरादा तो था उसे छोड़ देने का पर दीदी तो पूरी गुस्से में आ गयी. वैसे तो मैं भी दीदी क हाथ से थप्पड़ खा चूका था इस लिए जल्दी खुद को संभल लिया . वो लड़का तुरंत वहां से उठ कर अपने गाल सहलाता हुआ भाग गया. करिश्मा दीदी तो और उसे मरना चाहती थी पर मैंने उन्हें रोक लिए . मैं तो दीदी का ये रूप देख कर हैरान था . करिश्मा दीदी शायद मेरी हालत समझ गयी थी .
करिश्मा : ऐसे क्या देख रहे हो ?
अमित : कक को कुछ नहीं .
जवाब देते हुए मेरा हाथ अपने आप अपने गाल पर चला गया था जिसे देख दीदी को शायद अंदाज़ा हो गया क मैं क्या सोच रहा हूँ
करिश्मा : हस्ते हुए ) तू क्यों अपने गाल सेहला रहा है ? तुझे तो मैंने कुछ नहीं कहा .
अमित : मैं सोच रहा हूँ उस बेचारे का क्या हल हो रहा होगा . मुझे आपके हाथ की मर का पता है .
करिश्मा : और कितना शर्मिंदा करेगा मुझे ? मुझे सच में बहुत बुरा लगता है जब भी वो सब यद् अत है मुझे. क्या तू उसे भूल नहीं सकता ? चाहे तो तू अपने हाथों से मुझे मर ले .
दीदी ने मेरे हाथ पकड़ कर अपने गलों पर मार्के की कोशिश की तो मैंने उनके गलों को प्यार से अपने हाथों में ले लिया .
अमित : ये क्या कर रही हो आप दीदी ? इतने प्यारे गलों पर भला कोई कैसे मर सकता है. ये मरने क लिए नहीं प्यार करने क लिए हैं. और मैं आपसे नाराज़ नहीं हूँ वो तो बस कभी कभी ये आ जाता है. अब इसमें मैं क्या कर सकता हूँ . ाचा वो सब छोड़िये . आप शॉपिंग क्यों नहीं कर रही ? मैं देख रहा हूँ आपका ध्यान शॉपिंग में है hi नहीं .
करिश्मा दीदी मेरी बात सुन कर मन hi मन पता नहीं क्या सोचने लगी थी. मैंने उन्हें हिलाया .
करिश्मा : हह हाँ वो ,, वो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था क क्या लूँ अपने लिए . तुम निधि दीदी की हेल्प कर रहे थे तो क्या थोड़ी सी मेरी भी हेल्प कर डोज ?
अमित : लो इसमें कौन सी बात है . चलिए मैं देखता हूँ आपके लिए . पर क्या आपको मेरी पसंद अछि लगेगी ?
करिश्मा: बिलकुल लगेगी , मैं जानती हूँ तुम्हारी पसंद बहुत अछि है.
अमित : आपको कैसे पता ?
करिश्मा : माँ ,,, दीदी बताती रहती है .
करिश्मा दीदी आंटी का नाम लेने वाली थी पर बीच में hi रुक गयी और दीदी का नाम ले लिया . मैंने उनके लिए कुछ ड्रेसेस निकली और उन्हें तरय करने को कहा तब तक निधि दीदी भी वापिस आ गयी थी कपडे तरय करने क बाद . यहाँ अभी जो कुछ हुआ उन्हें पता नहीं चला था. थोड़ी देर बाद करिश्मा दीदी भी अपने ड्रेसेस तरय करने क बाद वापिस आ गयी . शॉपिंग करते करते हमें काफी देर हो गयी थी और हमें भूख भी लग रही थी तो हम कुछ खाने क लिए रेस्टोरेंट में चले गए . तभी मुझे कल्पना की कॉल आने लगी .
कल्पना : कहाँ हो सुबह से ? मैं तुम्हारा वेट कर कर क पागल हो रही हूँ .
(मुझे तो भूल hi गया था क मुझे कल्पना को लेके गाओं जाना था आज .)
अमित : ओह सॉरी सॉरी , वो क्या है न मैं दीदी क साथ शॉपिंग करने आया था. उन्हें कुछ ड्रेसेस लेने थे .
कल्पना : ओह्ह्ह , चल कोई बात नहीं. काम से काम बता तो देते . ाचा फ्री हो क जल्दी आ जाना मैं वेट कर रही हूँ .
कल्पना से बात करने क बाद मैं वापिस आया तो निधि दीदी मेरी तरफ घूर कर देख रही थी .
अमित : क्या हुआ दीदी ? ऐसे क्यों देख रही हो आप ?
निधि : मॉल में क्या किया था तूने ?
अमित : मैंने क्या ,, कुछ भी तो नहीं .
निधि : गुस्से से ) मुझे सब पता है .
मैं दीदी के तेवर देख कर सोच में पद गया क दीदी क्यों गुस्से में हैं. कहीं करिश्मा दीदी ने सब कुछ मेरे ऊपर तो नहीं दाल दिया ? जबकि मारा तो उन्होंने खुद था . मैंने करिश्मा दीदी की तरफ देखा. तभी करिश्मा दीदी जो चुप कर क बैठी थी एक डैम से ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी .
निधि : क्या करिश्मा तुम भी ,,,, थोड़ी देर कण्ट्रोल नहीं कर सकती थी ? मुझे इसकी क्लास भी नहीं लेने दी तुमने
करिश्मा : हे हे हे , सॉरी सॉरी , सॉरी दीदी . पर आपने देखा नहीं कैसी शकल बना ली थी इसने हे हे हे .
निधि : चल अब बस कर, क्यों हंस रही है? तेरी hi तो मदद की न इसने और अब तू हंस रही है इसी पर .
अब मुझे समझ आया क दोनों मेरे साथ मज़ाक कर रही थी. निधि को ऐसे मज़ाक करता देख कर मुझे ाचा भी लग रहा था क्यों की वो ऐसा करती नहीं थीं. इस लिए मैं बस खामोश उन्हें hi देख रहा था . और जैसे hi उनकी नज़र मुझ से मिली वो शर्मा गयी और मुस्कुरा कर बोली .
निधि : तुम नाराज़ तो नहीं हो न ? ये सब इसी का आईडिया था . अब खुद हंस रही है मुझसे फंसा कर .
अमित : नहीं दीदी , मुझे तो बहुत ाचा लगा . आप ऐसे hi हंसी मज़ाक किया कीजिये अछि लगती हो आप .
निधि शर्मा के नज़रें झुका कर बैठ गयी और फिर से नज़रें उठा कर मुझे देखने लगी .
करिश्मा : एक बात तो है दीदी , अमित न हर चीज़ में परफेक्ट है. उस लड़के की तो हालत hi जागरण हो गयी थी जब इसमें उसका हाथ पकड़ कर मरोड़ दिया था . इसे देख कर hi वो मुझे दीदी दीदी कहने लगा . मैं भी रख hi दिए 2-4 अब दीदी कहेगा तो दीदी का आशीर्वाद भी तो मिलेगा न . वैसे वो लड़की किस्मत वाली होगी जिसके साथ इसकी शादी होगी .
निधि : चलो अब खाना खा लो कहीं नज़र न लगा देना इसे.
करिश्मा : मैं क्या नज़र लगाउंगी दीदी ये तो वैसे hi हर किसी की नज़र में hi रहता है . घर पर भी माँ डैड इसी की बातें करते हैं. और करें भी क्यों न मैं खुद भी इसकी बात करती हूँ. मुझे उस नरक से आज़ाद करवाने वाला ये हो तो है. अगर ये न अत तो शायद मैं कभी उस नरक से निकल hi न पति .
करिश्मा दीदी को सीरियस होता देख निधि दीदी ने उनका हाथ थम लिया और उन्हें रिलैक्स करने लगी .
अमित : क्या दीदी आप भी , अचे भले मूड की वाट लगा दी . अब बार बार वही सब यद् करती रहोगी क्या ? अब आपको अपनी ज़िन्दगी नए सिरे से शुरू करनी चाहिए जैसा अंकल आंटी चाहते हैं . और मेरा क्या है , मैं तो हमेशा आपके पास hi हूँ .
उसके बाद हमने साथ में लंच किया और निकल पड़े . करिश्मा दीदी तो अपने घर चली गयी. निधि दीदी मुझे साथ लिए रीता मौसी क घर आ गयी . मैंने कल्पना को यहीं आने को कह दिया फ़ोन पे. थोड़ी देर में मैंने अपनी पैकिंग की और घर जाने क लिए तैयार हो गया . फिर मैं बरी बरी से सब से मिला और तब तक कल्पना भी आ गयी थी. फिर कल्पना भी सब से मिली. जब करुणा दीदी को पता चला क कल्पना भी मेरे साथ गाओं जा रही है तो वो भी साथ चलने को तैयार हो गयी . मौसी ने भी परमिशन दे दी. फिर मैं कल्पना और करुणा दीदी गाओं क लिए निकल गए . बातों बातों में मैं भूल hi गया था क आज मुझे मंजू म से भी मिलना था. मुझे उनकी यद् आ रही थी तो मैंने उनको कॉल लगा दी .
मंजू : तो आ गयी यद् ? और ये क्या ? फ़ोन कर कर रहे हो खुद कहाँ हो?
अमित : सॉरी मम वो दीदी क साथ गया था तो टाइम नहीं मिला आज . ाचा आप एक काम करना . कल आप रेडी रहना मैं आपको लेने आ रहा हूँ. कल आपको मेरे साथ मेरे गाओं चलना है.
मंजू : क्या ? कल ? पर कल मैं .....
अमित : मैं कोई बहन नहीं सुनूंगा मम. कल आपको मेरे साथ चलना hi पड़ेगा . ाचा अब रखता हूँ फिर फ़ोन करूँगा .
मंजू म की बात सुने बिना मैंने कॉल कट कर दी. मैं नहीं चाहता था क वो कल का कोई बहाना बनाये जैसा क मुझे लग रहा था . इसी लिए मैंने उनकी बात सुने बिना कॉल काट दी.
कल्पना : किसको फ़ोन कर रहे थे ?
अमित : सरप्राइज , कल देख लेना खुद hi
कल्पना : जानती हूँ तुम्हारे सरप्राइज . एक hi मम है जिनसे तुम बात करते हो . चन्दर्कांता से तो बात करने से रहे .
करुणा : चन्दर्कांता? इसकी क्या कहानी है डार्लिंग ज़रा मुझे भी तो बताओ .
कल्पना : अरे आपको बताया नहीं था जब आप कॉलेज में आयी थी? उसका और इसका 36 का आंकड़ा है . पता नहीं किस बात पे गुस्सा रहती है . पर बात बात पर इसकी लेने को तैयार रहती है मतलब इसको परेशां करती है
करुणा : अरे चिल यार . हम दोस्त हैं जैसे चाहे बोल. वैसे वो सच में ज़बरदस्त आइटम hi होगी जो इसकी लेने में लगी रहती है वर्ण इसने कुछ कर दिया तो सब भूल जाएगी .
ये सुन कर मुझे और कल्पना दोनों को hi झटका लगा .
कल्पना: डीडीईई , कुछ तो कण्ट्रोल करो आप
करुणा : मेरी तरफ शरारती नज़रों से देखते हुए ) इससे क्या शर्माना , ये कोई बेगाना है क्या?
कल्पना: मेरी छोड़िये पर आपका तो भाई है न.
करुणा : ाचा ! मेरा भाई है मगर तू क्यों शर्मा रही है ? तेरा तो भाई नहीं न तू तो झील कर मज़ा ले .
कल्पना: तौबा दीदी आप तो किसी को नहीं छोड़ टी. शुक्र है अभी नैना दीदी साथ में नहीं हैं.
करुणा : don’t वोर्री डार्लिंग वो भी आ जाएँगी . तुमने क्या सोचा था तुम अकेली अकेली मज़े ले लोगी इसके साथ? हम भी हैं मैदान में डार्लिंग .
करुणा दीदी बात बात में मेरी तरफ कामुक नज़रों से देखती और मैं उनसे नज़रें चुराता. कल्पना बेचारी को तो पता भी नहीं था क करुणा दीदी कहाँ से बात कर रही हैं. इंदिरेक्ट्ली वो हमारे सीक्रेट रिलेशन की hi बात कर रही थी. जबकि कल्पना ये समझ रही थी क वो उसे छेद रही है . खैर ऐसे hi सरे रस्ते बातें करते हुए हम अपने गाओं अपने घर पहुँच hi गए. अँधेरा हो रहा था और जब गाड़ी आ कर दरवाज़े पर रुकी तो गाड़ी की आवाज़ सुन कर दरवाज़ा अपने आप खुल गया . गेट खोलने वाले अजय मां थे और मुस्कुरा कर हमारा स्वागत कर रहे थे . कल्पना ने गाड़ी घर क अंदर की और तब तक अजय मां गेट बंद कर क हमारे करीब आ गए . गाड़ी से उतारते hi उन्होंने मुझे गले से लगा लिया .
अजय : तू आ गया बीटा , हम सब तेरी hi रह देख रहे थे चल जल्दी चल .
करुणा : गाड़ी से निकलते हुए ) क्या मां जी , सारा प्यार इसी क लिए hi है या हमें भी कुछ मिलेगा ?
अजय : क्यों नहीं मिलेगा मेरी शरारती बची. आ इधर .
मैं गाड़ी से अपना और कल्पना करुणा दीदी का भी बैग निकलने लगा . तब तक करुणा भी कार से बहार निकली और मां जी ने उसे भी गले से लगा कर प्यार दिया . फिर हम तीनो आगे बढ़े तो मेरी नज़र दीपिका ममी और माँ पर पड़ी जो किचन क पास hi थी. मुझे देख कर दोनों क चेहरे पर मुस्कान आयी पर फिर से चेहरे पर नाराज़गी दिखते हुए दीपिका ममी किचन
में चली गयी . जबकि माँ हमारे पास आने लगी . मैंने उनके पाऊँ छूने की कोशिश की तो उन्होंने मुझे गले से लगा लिया .
गौरी : आ गया मेरा बीटा , कैसा है ? पेपर तो अचे से हो गए न ? अचे hi हुए होंगे. चल आ बैठ कब से तेरी रह देख रही थी . तू तो सुबह आने वाला था न.
अमित : वो माँ निधि दीदी क साथ चला गया था बस वहीँ टाइम लग गया .
करुणा : ो मदर इंडिया ज़रा एक नज़र हम पर भी तो मर लो.
गौरी : तुझ पर नज़र मरने की क्या ज़रूरत है. तू तो हमेशा सब की नज़रों में रहती है मेरी बची इधर आ .
माँ ने करुणा दीदी को गले से लगाया और फिर कल्पना को देख कर उसे भी गले से लगा लिया.
गौरी : तो तुम्हे भी वक़्त मिल hi गया आखिर. ाचा है अब घर में रौनक लगेगी तुम सब क आने से . जा बीटा पहले कामिनी से मिल आ , बड़ा यद् के रही तो तुझे और बच्चों को भी देख लेना दोनों उसी क पास हैं.
करुणा : इसे क्या कह रही हैं ममी हम दोनों हैं न हम देखते हैं. चल कल्पना .
करुणा दीदी कल्पना को साथ लेकर कामिनी ममी क रूम में चली गयी और उनके पीछे पीछे मैं भी. कामिनी ममी बीएड पर hi थी और अपने बेटे को गॉड में लिए बैठी थी. शायद उन्होंने अभी उसे दूध पिलाया था क्यूंकि वो सो रहा था और उनके होंठो पर थोड़ा सा दूध लगा हुआ था . करुणा दीदी ने तो उनकी गॉड से बचे को ले लिया और कल्पना भी ममी से मिल कर करुणा दीदी क साथ बचे को खिलने लगी .
अमित : कैसी हैं आप ममी ?
कामिनी : मैं ठीक हूँ और अब तो और भी अछि हो गयी हूँ. बड़ी देर कार्डो आने में , पता है हूँ सब सुबह से तेरा इंतज़ार कर रहे थे . दीपिका से मिला तू? वो नाराज़ हो रही है तुझसे.
अमित : उनको तो मैं अभी मन लूंगा . आप चिंता मत करो . ाचा मैं ज़रा पहले उन से मिल hi लेता हूँ.
कामिनी ममी ने है क मेरी और देखा और फिर करुणा कल्पना क साथ बच्चों में बिजी हो गयी. मैं रूम से निकला और सीधा किचन में गया . दीपिका मामी चाय बना रही थी . मुझे एक नज़र देखने क बाद वो फिर से चाय बनाने में लग गयी. मैं उनके करीब चला गया पर वो मुझे देख नहीं रही थी .
अमित : नाराज़ हैं क्या मुझसे.
दीपिका : ......
अमित : तो बात नहीं करेंगी ?
दीपिका : ......
अमित : ाचा ये बात है तो ठीक है . मैं वापिस मौसी क घर hi चला जाता हूँ .
मैं इतना कह कर मुड़ने लगा तो दीपिका ममी ने मेरी जैकेट का कलर पकड़ लिया .
दीपिका : टंगे तोड़ दूंगी अब एक कदम भी बहार रखा तो. एक तो इतने दिनों बाद घर रहने क लिए थोड़ी सी छुट्टियां मिली हैं उनके भी तुम्हे शहर जाना है. हमारी कोई परवाह नहीं तुम्हे?
दीपिका ममी की बात सुन कर और उनके तेवर देख कर मुझे बहुत ाचा लगा . क्यूंकि वो ऊपर से चाहे नाराज़गी दिखा रही थी पर उनके दिल में मेरे लिए कितना प्यार है ये देख कर सुकून भी बहुत मिल रहा था .
अमित : अब आप बात hi नहीं करेंगी तो कहाँ जाऊंगा मैं .
दीपिका : ाचा , मैं बात नहीं कर रही ? और तू जो इतने दिन अपने आप फ़ोन भी नहीं करता वो ?? उसका क्या ? एक तो सारा दिन बिता कर अब घर आ रहे हो ऊपर से आते hi वापिस जाने की बात कर रहा है. किसी को गुस्सा करने का भी हक़ नहीं है क्या ?
दीपिका ममी को मुँह बनाते देख मुझे बहुत ाचा लग रहा था. मैंने उन्हें एक साइड से hi नहीं में भर कर कास क सीने से लगा लिया .
अमित : ाचा तो आप गुस्सा हैं मुझ पर. ठीक है तो पहले आपका गुस्सा hi उतरता हूँ.
इतना कह कर मैंने ममी क गाल चूमने की कोशिश की तो वो मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी .
‘ अह्ह्ह्हम्म्म्म अह्ह्हम्म्म्म , छोटी चाय बन गयी क्या ?’ ये आवाज़ माँ की थी जो किचन क दरवाज़े पर hi कड़ी थी और जान बुझ कर खांस कर हमें चेतावनी दे रही थी. मैं उनकी आवाज़ सुनते hi एक डैम से ममी से दूर हो गया और जल्दी से किचन से निकल गया बिना किसी की तरफ देखे.
गौरी : ये अभी क्या हो रहा था ? अगर कोई देख लेता तो ?
दीपिका : शरमाते हुए ) आप ने देखा नहीं वो खुद hi लगा हुआ था मैं तो उससे बात भी नहीं कर रही थी .
गौरी : बस बस , सब पता है मुझे. सुबह से किसे मरी जा रही थी क कब आएगा कब आएगा . और अब ऐसे नखरा कर रही है. क्यों सत्ता रही थी उसे? चल अब चाय दाल मैं दे कर अति हूँ .
दीपिका : मैं कर लुंगी खुद आप बस आराम करो. कितनी बार कहा है मैं कर लुंगी फिर भी आप मानती नहीं .
गौरी : अरे कुछ नहीं होता . तो मेरी चिंता न कर. और देख उसे बताना नहीं कुछ भी . मुझे नहीं लगता क उसे यद् भी है. तेरे भैया भी आने वाले हैं चुपचाप सब अचे से छुपा देना .
दीपिका : आप चिंता मत करो मुझे सब यद् है. चलिए अब अपने लादले को देखिये किधर निकल गया है.
उधर ऋतू अपने सरकारी आवास पर थी जब शाम को इंस्पेक्टर पांडेय रिपोर्ट ले कर आया.
पांडेय: मैडम आपने जिस आदमी क नाम बताया था वो एक जौर्नालिस्ट था. तीन महीने पहले एक एक्सीडेंट में वो और उसकी पत्नी दोनों मरे गए. किसी ट्रक ने गाड़ी को कुचल दिया था. सुना है क वो मला नारायण दास क खिलाफ ख़बरें चाप रहे थे जिस वजह से उसी ने ये सब करवट है पर सरकारी रिकॉर्ड में ये एक एक्सीडेंट है.
ऋतू : हम्म्म्म तो ये बात सही निकली . और उसकी बाकि फॅमिली ? मतलब उसके बचे या कोई और ?
पांडेय : और तो कोई नहीं है. हाँ एक बेटी थी जिसका कुछ पता नहीं उनके एक्सीडेंट क बाद से .
ऋतू : इसका मतलब वो लड़की सच बोल रही है
पांडेय : कौन सी लड़की मैडम ?
ऋतू : मुझे एक लड़की फ़ोन आया था वो खुद को उसी रिपोर्टर की बेटी बता रही थी और उसी ने बताया क उसके माता पिता क कतल हुआ है. और ये भी बताया क वो इस वक़्त नारायण दस की कैद में है. उसके पास कुछ सुबूत हैं जो सिर्फ मुझे देना चाहती है.
पांडेय: पर आप hi को क्यों ? वो किसी और को भी तो दे सकती है .
ऋतू : उसने बताया क वहां क पोलिसवाले नारायण दस् क साथ मिले हुए हैं इसी लिए वो ये सब सिर्फ मेरे हवाले करना चाहती है.
पांडेय : पर मैडम ये कोई ट्रैप भी तो हो सकता है. और वैसे भी जिस लड़की का पता hi नहीं क्या पता वो भी अब तक मर चुकी हो ?
ऋतू : हो तो कुछ भी सकता है. और ये भी तो हो सकता hi क वो सच बोल रही हो. वैसे भी उसने हो बताया वो तो सच hi निकला. जो भी हो रिस्क तो लेना पड़ेगा . वर्ण उस कमीने क खिलाफ हमारे पास तो कोई सुबूत तक है hi नहीं.
पांडेय: तो अपने क्या सोचा है मैडम ?
ऋतू : उसी क बारे में सोच रही हूँ. मुझे बस इस रिपोर्ट का इंतज़ार था. जो भी हो मैं ये मौका गँवा नहीं सकती. इस लिए मैं जाउंगी वहां. चूँकि वो हमारा एरिया नहीं है और न hi हम वहां क लोगों पर भरोसा कर सकते हैं तो ये सब हमें अपने लेवल पर hi कारन पाएगा वो भी बिना किसी की नज़र में आये . एक काम कर तुम अपने साथ एक टीम ले जाओ . उस जगह क बारे में सर्वे कर क आओ . हमें किस जगह जाना है काम से काम ये तो पता कर लें. और हाँ किसी को कुछ पता न चले इस लिए सिविल में hi जाना और गाड़ी भी पर्सनल ले कर जाना. कल तक सब कुछ चेक कर क मुझे बताओ और फिर आगे की तयारी करते हैं.
पांडेय : जी मैडम , मैं कल शाम तक आपको सब पता कर रिपोर्ट करूँगा .
ऋतू : ठीक है अब तुम जाओ
पांडेय क जाने क बाद ऋतू सभी विकल्प पर विचार करने लगी . वो जानती थी क वो बहुत बड़ा रिस्क लेने जा रही है पर जीत क लिए रिस्क तो लेना hi पड़ता है. यही सोच कर ऋतू ने अपनी कमर कास ली थी नारायण दास की तबाही क लिए .
अमित : कहिये दीदी क्या काम था आपको मेरे साथ ?
निधि : इतनी जल्दी क्या है. थोड़ी देर बैठ तो जाओ. फिर हम चलेंगे .
अमित : और अंकल को क्या काम था मुझसे ?
निधि : हाँ वो मैं क फंक्शन है क्सक्सक्सक्स शहर में . कोई ऑर्फ़न होम है . अंकल ने कहा है क उस दिन तुम्हे खास तौर पर उस फंक्शन में होना है.
अमित : कौन सा फंक्शन? और मेरा होना क्यों ज़रूरी है ?
‘ इस लिए क वो चाचा जी से जुड़ा हुआ है. और पापा चाहते हैं इस बार तुम वो सब अपने हाथों से करो .’ ये आवाज़ करिश्मा दीदी की थी जो पता नहीं कब ऑफिस में एंटर कर चुकी थी. करिश्मा दीदी क चेहरे पर मुझे देख कर हलकी सी स्माइल थी. पर आँखों में एक उदासी की झलक. ऑफिस क हिसाब से वो भी कोट पेण्ट पहने हुए थी . करिश्मा दीदी को देख कर मैं और निधि दीदी अपनी अपनी जगह से खड़े हो गए .
करिश्मा : ये क्या दीदी ? मैंने कितनी बार कहा है क आप ऐसे खड़े मत हुआ करो. आप मेरी बड़ी बहिन हैं और तुम क्यों खड़े हो रहे हो? तुम तो एम्प्लोयी भी नहीं हो तो फिर ऐसे क्यों कर रहे हो जैसे क्लास में टीचर क आने पर स्टूडेंट्स खड़े हो जाते हैं .
करिश्मा दीदी की बात पर निधि दीदी भी है पड़ी और मुझे खुद भी हंसी आ गयी .
अमित : नहीं दीदी ऐसी बात नहीं है . आप कैसी हैं ?
करिश्मा : ठीक हूँ , तुम कैसे हो ?
अमित : मैं भी ठीक हूँ .
करिश्मा : कभी तुम्हारा दिल नहीं करता हमसे मिलने को ? अपने आप तो तुम आते hi नहीं . लगता है अभी भी नाराज़ हो .
अमित : अरे ये आप क्या कह रही हैं . मैं भला क्यों नाराज़ होने लगा .
निधि : करिश्मा तुम अगर बिजी नहीं हो तो तुम भी हमारे साथ चलो . मैं अमित क साथ शॉपिंग करने जा रही हूँ .
निधि दीदी ने मुस्कुराते हुए करिश्मा दीदी को इन्विते कर लिया और मैं हैरान परेशां दीदी को देखने लगा . क्यूंकि हम शॉपिंग पे जा रहे हैं ये अभी अभी मुझे पता चला था .
करिश्मा : मेरी तरफ देखते हुए ) नहीं आप दोनों hi चले जाओ .
मैं समझ गया की दीदी मेरी वजह से ऐसा कह रही हैं .
अमित : क्या अभी भी गुस्सा हो मुझसे दीदी ?
मैंने जब इतना कहा तो करिश्मा दीदी की मुस्कान एक डैम से गायब हो गयी और वो एक तक मुझे देखने लगी . फिर अचानक उन्होंने आगे बढ़ कर मुझे गले से लगा लिया . करिश्मा दीदी की आँखों से आंसू बह रहे थे मगर वो कुछ बोल नहीं प् रही थी . करिश्मा दीदी की ऐसी हालत देख कर निधि दीदी ने भी उन्हें पीछे से गले लगा लिया .
निधि : क्या हुआ तुझे ? ऐसे क्यों रो रही है? तुझे ाचा नहीं लगा क्या ?
करिश्मा : कैसी बात कर रही हो दीदी आप . मैं बता नहीं सकती मुझे कितनी ख़ुशी हो रही है . मैं समझती थी क ये मुझसे नाराज़ है इसी लिए मैं ..... पर आज पता चला इसका दिल वाकई में बहुत बड़ा है .
निधि : चल अब अपनी ये ऑंखें साफ़ कर ऐसे बिलकुल भी अछि नहीं लग रही तू .
अमित : सही कहा दीदी आपने . करिश्मा दीदी तो बस हस्ती हुई hi अछि लगती है . पर मेरी वजह से ......
करिश्मा : क्या तेरी वजह से हाँ ? आज तेरी वजह से hi मैं उस नरक से आज़ाद हुई हूँ समझे . और मैं जितना भी शुक्रिया ऐडा करूँ उतना काम है . चलो अब चलते हैं . मैंने भी बहुत देर से शॉपिंग नहीं की. आज दिल खोल कर शॉपिंग करुँगी .
उसके बाद करिश्मा दीदी निधि दीदी और मैं तीनो एक बड़े से मॉल में पहुँच गए . निधि दीदी और करिश्मा दीदी इतनी अछि लग रही थी क हर किसी की नज़र उन दोनों पर hi थी. मॉल में पहुँचने पर मुझे लगा क दोनों को शॉपिंग करने में वक़्त लगेगा तो मैं थोड़ा रीगल लेता हूँ और रीमा से बात कर लेता हूँ.
अमित : दीदी आप दोनों शॉपिंग करो मैं भी थोड़ा घूम लेता हूँ .
निधि : तुमने अब कहाँ जाना है . चुपचाप मेरे साथ शॉपिंग करवाओ .
अमित : पर मैं क्या करूँगा इसमें ?
निधि : क्या करूँगा मतलब ? मेरी हेल्प करोगे और क्या
अमित : उसके लिए तो करिश्मा दीदी है न
करिश्मा : तो क्या हुआ , तुम हमारे साथ नहीं रह सकते ? वैसे भी मुझे भी तुम्हारी हेल्प चाहिए .
अमित : मेरी हेल्प ?
करिश्मा : हाँ वो मुझे मोहित क लिए कुछ ड्रेसेस लेनी है तो तुम साथ होंगे तो आसानी होगी .
अब मैं मन कैसे कर सकता था . खैर उसके बाद शॉपिंग शुरू हुई. मगर शॉपिंग पहले गेट्स कलेक्शन से hi शुरू हुई. करिश्मा दीदी ने मोहित क लिए ड्रेसेस लेनी थी इस लिए मुझे ड्रेस तरय करने को कहती और फिर दोनों मिल कर ड्रेस को फाइनल करती . कुछ ड्रेसेस लेने क बाद निधि दीदी ने भी कहा क वो कारन भैया क लिए कुछ ड्रेसेस लेना चाहती हैं इस लिए मुझे उनके लिए भी ड्रेसेस तरय करने पड़े. पर मुझे इस बात से थोड़ी हैरानी और ख़ुशी भी हो रही थी क इतने दिनों बाद निधि दीदी आज खुद hi कारन भैया का नाम ले रही थी जो पहले उनका नाम सुनते hi गुस्सा होने लगी थी . गेट्स कलेक्शन से फारिग हो कर हम फिर लेडीज कलेक्शन में पहुंचे . करिश्मा दीदी तो आते hi अपने लिए ड्रेसेस देखने लगी पर निधि दीदी मेरे साथ hi कड़ी हो गयी .
अमित : क्या बात है दीदी आप शॉपिंग क्यों नहीं कर रही? आप क कहने पर hi तो हूँ यहाँ आये हैं.
निधि : मैंने जो लेना था ले लिया अब बस .
अमित : ये क्या बात हुई ? मुझे कुछ नहीं सुन्ना. चलिए पहले अपने लिए शॉपिंग कीजिये . दूसरों की फ़िक्र रहती है हमेशा आपको पर अपनी नहीं .
निधि : ाचा ठीक है पर मेरी एक बात माननी होगी तुझे . मेरे लिए ड्रेस तू hi सेलेक्ट करेगा .
अमित : चलिए ठीक है . अब तो चलो .
निधि दीदी मेरे हाँ करते hi मुस्कुराती हुई मेरे हाथ पकड़ कर खींचती हुई मुझे अपने साथ ले गयी . फिर मैंने 2-3 ड्रेस दीदी क लिए सेलेक्ट किये और उनको वो सब तरय करने क लिए कहा. करिश्मा दीदी थोड़ी दूर hi अपने लिए ड्रेस देख रही थी पर उनकी नज़र हम पर hi थी और शायद मन में कुछ सोच रही थी क्यूंकि उनका ध्यान ड्रेस देखने में काम और हमारी तरफ ज्यादा था . तभी एक लड़का उनके पास आया और उनसे बात करने लगा .
लड़का : हए मिस ब्यूटीफुल, आप अकेली हैं ? क्या मैं कोई हेल्प करूँ? वैसे तो आप पर कोई भी ड्रेस जाँच जाएगी. पर मेरे ख्याल से ये आप पर ज्यादा अछि लगेगी .
करिश्मा : गुस्से से घूरते हुए ) हे स्टॉप आईटी , हु अरे यू ? मंद योर ओन बिज़नेस.
लड़का : ओह्ह , इतनी गर्मी . लगता है किसी ने अचे से उतरी नहीं है. कोई बात नहीं मैं निकल दूंगा साडी गर्मी .
करिश्मा : यू बास्टर्ड , तेरी हिम्मत कैसे हुई बकवास करने की .
करिश्मा दीदी ने गुस्से में आकर अपना हाथ उस लड़के पर उठा दिया . पर उस लड़के ने करिश्मा दीदी का हाथ पकड़ लिया . मैं उनकी तरफ hi देख रहा था पर इतनी दूर से पता नहीं चल रहा था क क्या बात हो रही है. मगर जब दीदी को हाथ उठाते देखा तो मैं भाग के उनके पास पहुँच गया . उस लड़के ने जिस हाथ से करिश्मा का हाथ पकड़ा हुआ था मैंने उसकी वो कलाई ज़ोर से पकड़ कर भींच दी और वो दर्द से कराह उठा . जिससे उसके हाथ से करिश्मा दीदी का हाथ छूट गया .
लड़का : आआह्ह्ह्हह्ह छोड़ साले छोड़ मुझे .
अमित : ये क्या कह रहा था दीदी ?
मेरे मुँह से दीदी सुन कर उस लड़के की तो हवा टाइट हो गयी पहले hi उसकी कलाई मेरे हाथ में पीस रही थी और वो मेरी तगड़ी बॉडी को देख कर जैसे पहले hi सरेंडर कर चूका था .
लड़का : सॉरी भाई गलती हो गयी , मुझे नहीं पता था उनका कोई आप जैसा भाई भी है. मैं माफ़ी मांगता हूँ भाई सॉरी , सॉरी दीदी माफ़ कार्डो मुझे दोबारा गलती नहीं होगी . करिश्मा दीदी : क्यों निकल गयी साडी गरमी? अभी तो मेरी गरमी निकलने की बात कर रहा था . अब बोल , अब सांप सूंघ गया इसे देख कर ? . चटाक चटाक चटाक . गेट लॉस्ट यू सोन ऑफ़ ा बीच .
करिश्मा दीदी ने गुस्से में आकर उस लड़के को गली देते हुए 3 थप्पड़ कास कास क जड़ दिए. मैं तो हैरान हो रहा था. जिस तरह उस लड़के ने माफ़ी मांग ली थी मेरा इरादा तो था उसे छोड़ देने का पर दीदी तो पूरी गुस्से में आ गयी. वैसे तो मैं भी दीदी क हाथ से थप्पड़ खा चूका था इस लिए जल्दी खुद को संभल लिया . वो लड़का तुरंत वहां से उठ कर अपने गाल सहलाता हुआ भाग गया. करिश्मा दीदी तो और उसे मरना चाहती थी पर मैंने उन्हें रोक लिए . मैं तो दीदी का ये रूप देख कर हैरान था . करिश्मा दीदी शायद मेरी हालत समझ गयी थी .
करिश्मा : ऐसे क्या देख रहे हो ?
अमित : कक को कुछ नहीं .
जवाब देते हुए मेरा हाथ अपने आप अपने गाल पर चला गया था जिसे देख दीदी को शायद अंदाज़ा हो गया क मैं क्या सोच रहा हूँ
करिश्मा : हस्ते हुए ) तू क्यों अपने गाल सेहला रहा है ? तुझे तो मैंने कुछ नहीं कहा .
अमित : मैं सोच रहा हूँ उस बेचारे का क्या हल हो रहा होगा . मुझे आपके हाथ की मर का पता है .
करिश्मा : और कितना शर्मिंदा करेगा मुझे ? मुझे सच में बहुत बुरा लगता है जब भी वो सब यद् अत है मुझे. क्या तू उसे भूल नहीं सकता ? चाहे तो तू अपने हाथों से मुझे मर ले .
दीदी ने मेरे हाथ पकड़ कर अपने गलों पर मार्के की कोशिश की तो मैंने उनके गलों को प्यार से अपने हाथों में ले लिया .
अमित : ये क्या कर रही हो आप दीदी ? इतने प्यारे गलों पर भला कोई कैसे मर सकता है. ये मरने क लिए नहीं प्यार करने क लिए हैं. और मैं आपसे नाराज़ नहीं हूँ वो तो बस कभी कभी ये आ जाता है. अब इसमें मैं क्या कर सकता हूँ . ाचा वो सब छोड़िये . आप शॉपिंग क्यों नहीं कर रही ? मैं देख रहा हूँ आपका ध्यान शॉपिंग में है hi नहीं .
करिश्मा दीदी मेरी बात सुन कर मन hi मन पता नहीं क्या सोचने लगी थी. मैंने उन्हें हिलाया .
करिश्मा : हह हाँ वो ,, वो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था क क्या लूँ अपने लिए . तुम निधि दीदी की हेल्प कर रहे थे तो क्या थोड़ी सी मेरी भी हेल्प कर डोज ?
अमित : लो इसमें कौन सी बात है . चलिए मैं देखता हूँ आपके लिए . पर क्या आपको मेरी पसंद अछि लगेगी ?
करिश्मा: बिलकुल लगेगी , मैं जानती हूँ तुम्हारी पसंद बहुत अछि है.
अमित : आपको कैसे पता ?
करिश्मा : माँ ,,, दीदी बताती रहती है .
करिश्मा दीदी आंटी का नाम लेने वाली थी पर बीच में hi रुक गयी और दीदी का नाम ले लिया . मैंने उनके लिए कुछ ड्रेसेस निकली और उन्हें तरय करने को कहा तब तक निधि दीदी भी वापिस आ गयी थी कपडे तरय करने क बाद . यहाँ अभी जो कुछ हुआ उन्हें पता नहीं चला था. थोड़ी देर बाद करिश्मा दीदी भी अपने ड्रेसेस तरय करने क बाद वापिस आ गयी . शॉपिंग करते करते हमें काफी देर हो गयी थी और हमें भूख भी लग रही थी तो हम कुछ खाने क लिए रेस्टोरेंट में चले गए . तभी मुझे कल्पना की कॉल आने लगी .
कल्पना : कहाँ हो सुबह से ? मैं तुम्हारा वेट कर कर क पागल हो रही हूँ .
(मुझे तो भूल hi गया था क मुझे कल्पना को लेके गाओं जाना था आज .)
अमित : ओह सॉरी सॉरी , वो क्या है न मैं दीदी क साथ शॉपिंग करने आया था. उन्हें कुछ ड्रेसेस लेने थे .
कल्पना : ओह्ह्ह , चल कोई बात नहीं. काम से काम बता तो देते . ाचा फ्री हो क जल्दी आ जाना मैं वेट कर रही हूँ .
कल्पना से बात करने क बाद मैं वापिस आया तो निधि दीदी मेरी तरफ घूर कर देख रही थी .
अमित : क्या हुआ दीदी ? ऐसे क्यों देख रही हो आप ?
निधि : मॉल में क्या किया था तूने ?
अमित : मैंने क्या ,, कुछ भी तो नहीं .
निधि : गुस्से से ) मुझे सब पता है .
मैं दीदी के तेवर देख कर सोच में पद गया क दीदी क्यों गुस्से में हैं. कहीं करिश्मा दीदी ने सब कुछ मेरे ऊपर तो नहीं दाल दिया ? जबकि मारा तो उन्होंने खुद था . मैंने करिश्मा दीदी की तरफ देखा. तभी करिश्मा दीदी जो चुप कर क बैठी थी एक डैम से ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी .
निधि : क्या करिश्मा तुम भी ,,,, थोड़ी देर कण्ट्रोल नहीं कर सकती थी ? मुझे इसकी क्लास भी नहीं लेने दी तुमने
करिश्मा : हे हे हे , सॉरी सॉरी , सॉरी दीदी . पर आपने देखा नहीं कैसी शकल बना ली थी इसने हे हे हे .
निधि : चल अब बस कर, क्यों हंस रही है? तेरी hi तो मदद की न इसने और अब तू हंस रही है इसी पर .
अब मुझे समझ आया क दोनों मेरे साथ मज़ाक कर रही थी. निधि को ऐसे मज़ाक करता देख कर मुझे ाचा भी लग रहा था क्यों की वो ऐसा करती नहीं थीं. इस लिए मैं बस खामोश उन्हें hi देख रहा था . और जैसे hi उनकी नज़र मुझ से मिली वो शर्मा गयी और मुस्कुरा कर बोली .
निधि : तुम नाराज़ तो नहीं हो न ? ये सब इसी का आईडिया था . अब खुद हंस रही है मुझसे फंसा कर .
अमित : नहीं दीदी , मुझे तो बहुत ाचा लगा . आप ऐसे hi हंसी मज़ाक किया कीजिये अछि लगती हो आप .
निधि शर्मा के नज़रें झुका कर बैठ गयी और फिर से नज़रें उठा कर मुझे देखने लगी .
करिश्मा : एक बात तो है दीदी , अमित न हर चीज़ में परफेक्ट है. उस लड़के की तो हालत hi जागरण हो गयी थी जब इसमें उसका हाथ पकड़ कर मरोड़ दिया था . इसे देख कर hi वो मुझे दीदी दीदी कहने लगा . मैं भी रख hi दिए 2-4 अब दीदी कहेगा तो दीदी का आशीर्वाद भी तो मिलेगा न . वैसे वो लड़की किस्मत वाली होगी जिसके साथ इसकी शादी होगी .
निधि : चलो अब खाना खा लो कहीं नज़र न लगा देना इसे.
करिश्मा : मैं क्या नज़र लगाउंगी दीदी ये तो वैसे hi हर किसी की नज़र में hi रहता है . घर पर भी माँ डैड इसी की बातें करते हैं. और करें भी क्यों न मैं खुद भी इसकी बात करती हूँ. मुझे उस नरक से आज़ाद करवाने वाला ये हो तो है. अगर ये न अत तो शायद मैं कभी उस नरक से निकल hi न पति .
करिश्मा दीदी को सीरियस होता देख निधि दीदी ने उनका हाथ थम लिया और उन्हें रिलैक्स करने लगी .
अमित : क्या दीदी आप भी , अचे भले मूड की वाट लगा दी . अब बार बार वही सब यद् करती रहोगी क्या ? अब आपको अपनी ज़िन्दगी नए सिरे से शुरू करनी चाहिए जैसा अंकल आंटी चाहते हैं . और मेरा क्या है , मैं तो हमेशा आपके पास hi हूँ .
उसके बाद हमने साथ में लंच किया और निकल पड़े . करिश्मा दीदी तो अपने घर चली गयी. निधि दीदी मुझे साथ लिए रीता मौसी क घर आ गयी . मैंने कल्पना को यहीं आने को कह दिया फ़ोन पे. थोड़ी देर में मैंने अपनी पैकिंग की और घर जाने क लिए तैयार हो गया . फिर मैं बरी बरी से सब से मिला और तब तक कल्पना भी आ गयी थी. फिर कल्पना भी सब से मिली. जब करुणा दीदी को पता चला क कल्पना भी मेरे साथ गाओं जा रही है तो वो भी साथ चलने को तैयार हो गयी . मौसी ने भी परमिशन दे दी. फिर मैं कल्पना और करुणा दीदी गाओं क लिए निकल गए . बातों बातों में मैं भूल hi गया था क आज मुझे मंजू म से भी मिलना था. मुझे उनकी यद् आ रही थी तो मैंने उनको कॉल लगा दी .
मंजू : तो आ गयी यद् ? और ये क्या ? फ़ोन कर कर रहे हो खुद कहाँ हो?
अमित : सॉरी मम वो दीदी क साथ गया था तो टाइम नहीं मिला आज . ाचा आप एक काम करना . कल आप रेडी रहना मैं आपको लेने आ रहा हूँ. कल आपको मेरे साथ मेरे गाओं चलना है.
मंजू : क्या ? कल ? पर कल मैं .....
अमित : मैं कोई बहन नहीं सुनूंगा मम. कल आपको मेरे साथ चलना hi पड़ेगा . ाचा अब रखता हूँ फिर फ़ोन करूँगा .
मंजू म की बात सुने बिना मैंने कॉल कट कर दी. मैं नहीं चाहता था क वो कल का कोई बहाना बनाये जैसा क मुझे लग रहा था . इसी लिए मैंने उनकी बात सुने बिना कॉल काट दी.
कल्पना : किसको फ़ोन कर रहे थे ?
अमित : सरप्राइज , कल देख लेना खुद hi
कल्पना : जानती हूँ तुम्हारे सरप्राइज . एक hi मम है जिनसे तुम बात करते हो . चन्दर्कांता से तो बात करने से रहे .
करुणा : चन्दर्कांता? इसकी क्या कहानी है डार्लिंग ज़रा मुझे भी तो बताओ .
कल्पना : अरे आपको बताया नहीं था जब आप कॉलेज में आयी थी? उसका और इसका 36 का आंकड़ा है . पता नहीं किस बात पे गुस्सा रहती है . पर बात बात पर इसकी लेने को तैयार रहती है मतलब इसको परेशां करती है
करुणा : अरे चिल यार . हम दोस्त हैं जैसे चाहे बोल. वैसे वो सच में ज़बरदस्त आइटम hi होगी जो इसकी लेने में लगी रहती है वर्ण इसने कुछ कर दिया तो सब भूल जाएगी .
ये सुन कर मुझे और कल्पना दोनों को hi झटका लगा .
कल्पना: डीडीईई , कुछ तो कण्ट्रोल करो आप
करुणा : मेरी तरफ शरारती नज़रों से देखते हुए ) इससे क्या शर्माना , ये कोई बेगाना है क्या?
कल्पना: मेरी छोड़िये पर आपका तो भाई है न.
करुणा : ाचा ! मेरा भाई है मगर तू क्यों शर्मा रही है ? तेरा तो भाई नहीं न तू तो झील कर मज़ा ले .
कल्पना: तौबा दीदी आप तो किसी को नहीं छोड़ टी. शुक्र है अभी नैना दीदी साथ में नहीं हैं.
करुणा : don’t वोर्री डार्लिंग वो भी आ जाएँगी . तुमने क्या सोचा था तुम अकेली अकेली मज़े ले लोगी इसके साथ? हम भी हैं मैदान में डार्लिंग .
करुणा दीदी बात बात में मेरी तरफ कामुक नज़रों से देखती और मैं उनसे नज़रें चुराता. कल्पना बेचारी को तो पता भी नहीं था क करुणा दीदी कहाँ से बात कर रही हैं. इंदिरेक्ट्ली वो हमारे सीक्रेट रिलेशन की hi बात कर रही थी. जबकि कल्पना ये समझ रही थी क वो उसे छेद रही है . खैर ऐसे hi सरे रस्ते बातें करते हुए हम अपने गाओं अपने घर पहुँच hi गए. अँधेरा हो रहा था और जब गाड़ी आ कर दरवाज़े पर रुकी तो गाड़ी की आवाज़ सुन कर दरवाज़ा अपने आप खुल गया . गेट खोलने वाले अजय मां थे और मुस्कुरा कर हमारा स्वागत कर रहे थे . कल्पना ने गाड़ी घर क अंदर की और तब तक अजय मां गेट बंद कर क हमारे करीब आ गए . गाड़ी से उतारते hi उन्होंने मुझे गले से लगा लिया .
अजय : तू आ गया बीटा , हम सब तेरी hi रह देख रहे थे चल जल्दी चल .
करुणा : गाड़ी से निकलते हुए ) क्या मां जी , सारा प्यार इसी क लिए hi है या हमें भी कुछ मिलेगा ?
अजय : क्यों नहीं मिलेगा मेरी शरारती बची. आ इधर .
मैं गाड़ी से अपना और कल्पना करुणा दीदी का भी बैग निकलने लगा . तब तक करुणा भी कार से बहार निकली और मां जी ने उसे भी गले से लगा कर प्यार दिया . फिर हम तीनो आगे बढ़े तो मेरी नज़र दीपिका ममी और माँ पर पड़ी जो किचन क पास hi थी. मुझे देख कर दोनों क चेहरे पर मुस्कान आयी पर फिर से चेहरे पर नाराज़गी दिखते हुए दीपिका ममी किचन
में चली गयी . जबकि माँ हमारे पास आने लगी . मैंने उनके पाऊँ छूने की कोशिश की तो उन्होंने मुझे गले से लगा लिया .
गौरी : आ गया मेरा बीटा , कैसा है ? पेपर तो अचे से हो गए न ? अचे hi हुए होंगे. चल आ बैठ कब से तेरी रह देख रही थी . तू तो सुबह आने वाला था न.
अमित : वो माँ निधि दीदी क साथ चला गया था बस वहीँ टाइम लग गया .
करुणा : ो मदर इंडिया ज़रा एक नज़र हम पर भी तो मर लो.
गौरी : तुझ पर नज़र मरने की क्या ज़रूरत है. तू तो हमेशा सब की नज़रों में रहती है मेरी बची इधर आ .
माँ ने करुणा दीदी को गले से लगाया और फिर कल्पना को देख कर उसे भी गले से लगा लिया.
गौरी : तो तुम्हे भी वक़्त मिल hi गया आखिर. ाचा है अब घर में रौनक लगेगी तुम सब क आने से . जा बीटा पहले कामिनी से मिल आ , बड़ा यद् के रही तो तुझे और बच्चों को भी देख लेना दोनों उसी क पास हैं.
करुणा : इसे क्या कह रही हैं ममी हम दोनों हैं न हम देखते हैं. चल कल्पना .
करुणा दीदी कल्पना को साथ लेकर कामिनी ममी क रूम में चली गयी और उनके पीछे पीछे मैं भी. कामिनी ममी बीएड पर hi थी और अपने बेटे को गॉड में लिए बैठी थी. शायद उन्होंने अभी उसे दूध पिलाया था क्यूंकि वो सो रहा था और उनके होंठो पर थोड़ा सा दूध लगा हुआ था . करुणा दीदी ने तो उनकी गॉड से बचे को ले लिया और कल्पना भी ममी से मिल कर करुणा दीदी क साथ बचे को खिलने लगी .
अमित : कैसी हैं आप ममी ?
कामिनी : मैं ठीक हूँ और अब तो और भी अछि हो गयी हूँ. बड़ी देर कार्डो आने में , पता है हूँ सब सुबह से तेरा इंतज़ार कर रहे थे . दीपिका से मिला तू? वो नाराज़ हो रही है तुझसे.
अमित : उनको तो मैं अभी मन लूंगा . आप चिंता मत करो . ाचा मैं ज़रा पहले उन से मिल hi लेता हूँ.
कामिनी ममी ने है क मेरी और देखा और फिर करुणा कल्पना क साथ बच्चों में बिजी हो गयी. मैं रूम से निकला और सीधा किचन में गया . दीपिका मामी चाय बना रही थी . मुझे एक नज़र देखने क बाद वो फिर से चाय बनाने में लग गयी. मैं उनके करीब चला गया पर वो मुझे देख नहीं रही थी .
अमित : नाराज़ हैं क्या मुझसे.
दीपिका : ......
अमित : तो बात नहीं करेंगी ?
दीपिका : ......
अमित : ाचा ये बात है तो ठीक है . मैं वापिस मौसी क घर hi चला जाता हूँ .
मैं इतना कह कर मुड़ने लगा तो दीपिका ममी ने मेरी जैकेट का कलर पकड़ लिया .
दीपिका : टंगे तोड़ दूंगी अब एक कदम भी बहार रखा तो. एक तो इतने दिनों बाद घर रहने क लिए थोड़ी सी छुट्टियां मिली हैं उनके भी तुम्हे शहर जाना है. हमारी कोई परवाह नहीं तुम्हे?
दीपिका ममी की बात सुन कर और उनके तेवर देख कर मुझे बहुत ाचा लगा . क्यूंकि वो ऊपर से चाहे नाराज़गी दिखा रही थी पर उनके दिल में मेरे लिए कितना प्यार है ये देख कर सुकून भी बहुत मिल रहा था .
अमित : अब आप बात hi नहीं करेंगी तो कहाँ जाऊंगा मैं .
दीपिका : ाचा , मैं बात नहीं कर रही ? और तू जो इतने दिन अपने आप फ़ोन भी नहीं करता वो ?? उसका क्या ? एक तो सारा दिन बिता कर अब घर आ रहे हो ऊपर से आते hi वापिस जाने की बात कर रहा है. किसी को गुस्सा करने का भी हक़ नहीं है क्या ?
दीपिका ममी को मुँह बनाते देख मुझे बहुत ाचा लग रहा था. मैंने उन्हें एक साइड से hi नहीं में भर कर कास क सीने से लगा लिया .
अमित : ाचा तो आप गुस्सा हैं मुझ पर. ठीक है तो पहले आपका गुस्सा hi उतरता हूँ.
इतना कह कर मैंने ममी क गाल चूमने की कोशिश की तो वो मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी .
‘ अह्ह्ह्हम्म्म्म अह्ह्हम्म्म्म , छोटी चाय बन गयी क्या ?’ ये आवाज़ माँ की थी जो किचन क दरवाज़े पर hi कड़ी थी और जान बुझ कर खांस कर हमें चेतावनी दे रही थी. मैं उनकी आवाज़ सुनते hi एक डैम से ममी से दूर हो गया और जल्दी से किचन से निकल गया बिना किसी की तरफ देखे.
गौरी : ये अभी क्या हो रहा था ? अगर कोई देख लेता तो ?
दीपिका : शरमाते हुए ) आप ने देखा नहीं वो खुद hi लगा हुआ था मैं तो उससे बात भी नहीं कर रही थी .
गौरी : बस बस , सब पता है मुझे. सुबह से किसे मरी जा रही थी क कब आएगा कब आएगा . और अब ऐसे नखरा कर रही है. क्यों सत्ता रही थी उसे? चल अब चाय दाल मैं दे कर अति हूँ .
दीपिका : मैं कर लुंगी खुद आप बस आराम करो. कितनी बार कहा है मैं कर लुंगी फिर भी आप मानती नहीं .
गौरी : अरे कुछ नहीं होता . तो मेरी चिंता न कर. और देख उसे बताना नहीं कुछ भी . मुझे नहीं लगता क उसे यद् भी है. तेरे भैया भी आने वाले हैं चुपचाप सब अचे से छुपा देना .
दीपिका : आप चिंता मत करो मुझे सब यद् है. चलिए अब अपने लादले को देखिये किधर निकल गया है.
उधर ऋतू अपने सरकारी आवास पर थी जब शाम को इंस्पेक्टर पांडेय रिपोर्ट ले कर आया.
पांडेय: मैडम आपने जिस आदमी क नाम बताया था वो एक जौर्नालिस्ट था. तीन महीने पहले एक एक्सीडेंट में वो और उसकी पत्नी दोनों मरे गए. किसी ट्रक ने गाड़ी को कुचल दिया था. सुना है क वो मला नारायण दास क खिलाफ ख़बरें चाप रहे थे जिस वजह से उसी ने ये सब करवट है पर सरकारी रिकॉर्ड में ये एक एक्सीडेंट है.
ऋतू : हम्म्म्म तो ये बात सही निकली . और उसकी बाकि फॅमिली ? मतलब उसके बचे या कोई और ?
पांडेय : और तो कोई नहीं है. हाँ एक बेटी थी जिसका कुछ पता नहीं उनके एक्सीडेंट क बाद से .
ऋतू : इसका मतलब वो लड़की सच बोल रही है
पांडेय : कौन सी लड़की मैडम ?
ऋतू : मुझे एक लड़की फ़ोन आया था वो खुद को उसी रिपोर्टर की बेटी बता रही थी और उसी ने बताया क उसके माता पिता क कतल हुआ है. और ये भी बताया क वो इस वक़्त नारायण दस की कैद में है. उसके पास कुछ सुबूत हैं जो सिर्फ मुझे देना चाहती है.
पांडेय: पर आप hi को क्यों ? वो किसी और को भी तो दे सकती है .
ऋतू : उसने बताया क वहां क पोलिसवाले नारायण दस् क साथ मिले हुए हैं इसी लिए वो ये सब सिर्फ मेरे हवाले करना चाहती है.
पांडेय : पर मैडम ये कोई ट्रैप भी तो हो सकता है. और वैसे भी जिस लड़की का पता hi नहीं क्या पता वो भी अब तक मर चुकी हो ?
ऋतू : हो तो कुछ भी सकता है. और ये भी तो हो सकता hi क वो सच बोल रही हो. वैसे भी उसने हो बताया वो तो सच hi निकला. जो भी हो रिस्क तो लेना पड़ेगा . वर्ण उस कमीने क खिलाफ हमारे पास तो कोई सुबूत तक है hi नहीं.
पांडेय: तो अपने क्या सोचा है मैडम ?
ऋतू : उसी क बारे में सोच रही हूँ. मुझे बस इस रिपोर्ट का इंतज़ार था. जो भी हो मैं ये मौका गँवा नहीं सकती. इस लिए मैं जाउंगी वहां. चूँकि वो हमारा एरिया नहीं है और न hi हम वहां क लोगों पर भरोसा कर सकते हैं तो ये सब हमें अपने लेवल पर hi कारन पाएगा वो भी बिना किसी की नज़र में आये . एक काम कर तुम अपने साथ एक टीम ले जाओ . उस जगह क बारे में सर्वे कर क आओ . हमें किस जगह जाना है काम से काम ये तो पता कर लें. और हाँ किसी को कुछ पता न चले इस लिए सिविल में hi जाना और गाड़ी भी पर्सनल ले कर जाना. कल तक सब कुछ चेक कर क मुझे बताओ और फिर आगे की तयारी करते हैं.
पांडेय : जी मैडम , मैं कल शाम तक आपको सब पता कर रिपोर्ट करूँगा .
ऋतू : ठीक है अब तुम जाओ
पांडेय क जाने क बाद ऋतू सभी विकल्प पर विचार करने लगी . वो जानती थी क वो बहुत बड़ा रिस्क लेने जा रही है पर जीत क लिए रिस्क तो लेना hi पड़ता है. यही सोच कर ऋतू ने अपनी कमर कास ली थी नारायण दास की तबाही क लिए .