Adultery Manhoos se mahan tak - Page 31 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 225



अमित : कहिये दीदी क्या काम था आपको मेरे साथ ?

निधि : इतनी जल्दी क्या है. थोड़ी देर बैठ तो जाओ. फिर हम चलेंगे .

अमित : और अंकल को क्या काम था मुझसे ?

निधि : हाँ वो मैं क फंक्शन है क्सक्सक्सक्स शहर में . कोई ऑर्फ़न होम है . अंकल ने कहा है क उस दिन तुम्हे खास तौर पर उस फंक्शन में होना है.

अमित : कौन सा फंक्शन? और मेरा होना क्यों ज़रूरी है ?

‘ इस लिए क वो चाचा जी से जुड़ा हुआ है. और पापा चाहते हैं इस बार तुम वो सब अपने हाथों से करो .’ ये आवाज़ करिश्मा दीदी की थी जो पता नहीं कब ऑफिस में एंटर कर चुकी थी. करिश्मा दीदी क चेहरे पर मुझे देख कर हलकी सी स्माइल थी. पर आँखों में एक उदासी की झलक. ऑफिस क हिसाब से वो भी कोट पेण्ट पहने हुए थी . करिश्मा दीदी को देख कर मैं और निधि दीदी अपनी अपनी जगह से खड़े हो गए .

करिश्मा : ये क्या दीदी ? मैंने कितनी बार कहा है क आप ऐसे खड़े मत हुआ करो. आप मेरी बड़ी बहिन हैं और तुम क्यों खड़े हो रहे हो? तुम तो एम्प्लोयी भी नहीं हो तो फिर ऐसे क्यों कर रहे हो जैसे क्लास में टीचर क आने पर स्टूडेंट्स खड़े हो जाते हैं .

करिश्मा दीदी की बात पर निधि दीदी भी है पड़ी और मुझे खुद भी हंसी आ गयी .

अमित : नहीं दीदी ऐसी बात नहीं है . आप कैसी हैं ?

करिश्मा : ठीक हूँ , तुम कैसे हो ?

अमित : मैं भी ठीक हूँ .

करिश्मा : कभी तुम्हारा दिल नहीं करता हमसे मिलने को ? अपने आप तो तुम आते hi नहीं . लगता है अभी भी नाराज़ हो .

अमित : अरे ये आप क्या कह रही हैं . मैं भला क्यों नाराज़ होने लगा .

निधि : करिश्मा तुम अगर बिजी नहीं हो तो तुम भी हमारे साथ चलो . मैं अमित क साथ शॉपिंग करने जा रही हूँ .

निधि दीदी ने मुस्कुराते हुए करिश्मा दीदी को इन्विते कर लिया और मैं हैरान परेशां दीदी को देखने लगा . क्यूंकि हम शॉपिंग पे जा रहे हैं ये अभी अभी मुझे पता चला था .

करिश्मा : मेरी तरफ देखते हुए ) नहीं आप दोनों hi चले जाओ .

मैं समझ गया की दीदी मेरी वजह से ऐसा कह रही हैं .

अमित : क्या अभी भी गुस्सा हो मुझसे दीदी ?

मैंने जब इतना कहा तो करिश्मा दीदी की मुस्कान एक डैम से गायब हो गयी और वो एक तक मुझे देखने लगी . फिर अचानक उन्होंने आगे बढ़ कर मुझे गले से लगा लिया . करिश्मा दीदी की आँखों से आंसू बह रहे थे मगर वो कुछ बोल नहीं प् रही थी . करिश्मा दीदी की ऐसी हालत देख कर निधि दीदी ने भी उन्हें पीछे से गले लगा लिया .

निधि : क्या हुआ तुझे ? ऐसे क्यों रो रही है? तुझे ाचा नहीं लगा क्या ?

करिश्मा : कैसी बात कर रही हो दीदी आप . मैं बता नहीं सकती मुझे कितनी ख़ुशी हो रही है . मैं समझती थी क ये मुझसे नाराज़ है इसी लिए मैं ..... पर आज पता चला इसका दिल वाकई में बहुत बड़ा है .

निधि : चल अब अपनी ये ऑंखें साफ़ कर ऐसे बिलकुल भी अछि नहीं लग रही तू .

अमित : सही कहा दीदी आपने . करिश्मा दीदी तो बस हस्ती हुई hi अछि लगती है . पर मेरी वजह से ......

करिश्मा : क्या तेरी वजह से हाँ ? आज तेरी वजह से hi मैं उस नरक से आज़ाद हुई हूँ समझे . और मैं जितना भी शुक्रिया ऐडा करूँ उतना काम है . चलो अब चलते हैं . मैंने भी बहुत देर से शॉपिंग नहीं की. आज दिल खोल कर शॉपिंग करुँगी .

उसके बाद करिश्मा दीदी निधि दीदी और मैं तीनो एक बड़े से मॉल में पहुँच गए . निधि दीदी और करिश्मा दीदी इतनी अछि लग रही थी क हर किसी की नज़र उन दोनों पर hi थी. मॉल में पहुँचने पर मुझे लगा क दोनों को शॉपिंग करने में वक़्त लगेगा तो मैं थोड़ा रीगल लेता हूँ और रीमा से बात कर लेता हूँ.

अमित : दीदी आप दोनों शॉपिंग करो मैं भी थोड़ा घूम लेता हूँ .

निधि : तुमने अब कहाँ जाना है . चुपचाप मेरे साथ शॉपिंग करवाओ .

अमित : पर मैं क्या करूँगा इसमें ?

निधि : क्या करूँगा मतलब ? मेरी हेल्प करोगे और क्या

अमित : उसके लिए तो करिश्मा दीदी है न

करिश्मा : तो क्या हुआ , तुम हमारे साथ नहीं रह सकते ? वैसे भी मुझे भी तुम्हारी हेल्प चाहिए .

अमित : मेरी हेल्प ?

करिश्मा : हाँ वो मुझे मोहित क लिए कुछ ड्रेसेस लेनी है तो तुम साथ होंगे तो आसानी होगी .

अब मैं मन कैसे कर सकता था . खैर उसके बाद शॉपिंग शुरू हुई. मगर शॉपिंग पहले गेट्स कलेक्शन से hi शुरू हुई. करिश्मा दीदी ने मोहित क लिए ड्रेसेस लेनी थी इस लिए मुझे ड्रेस तरय करने को कहती और फिर दोनों मिल कर ड्रेस को फाइनल करती . कुछ ड्रेसेस लेने क बाद निधि दीदी ने भी कहा क वो कारन भैया क लिए कुछ ड्रेसेस लेना चाहती हैं इस लिए मुझे उनके लिए भी ड्रेसेस तरय करने पड़े. पर मुझे इस बात से थोड़ी हैरानी और ख़ुशी भी हो रही थी क इतने दिनों बाद निधि दीदी आज खुद hi कारन भैया का नाम ले रही थी जो पहले उनका नाम सुनते hi गुस्सा होने लगी थी . गेट्स कलेक्शन से फारिग हो कर हम फिर लेडीज कलेक्शन में पहुंचे . करिश्मा दीदी तो आते hi अपने लिए ड्रेसेस देखने लगी पर निधि दीदी मेरे साथ hi कड़ी हो गयी .

अमित : क्या बात है दीदी आप शॉपिंग क्यों नहीं कर रही? आप क कहने पर hi तो हूँ यहाँ आये हैं.

निधि : मैंने जो लेना था ले लिया अब बस .

अमित : ये क्या बात हुई ? मुझे कुछ नहीं सुन्ना. चलिए पहले अपने लिए शॉपिंग कीजिये . दूसरों की फ़िक्र रहती है हमेशा आपको पर अपनी नहीं .

निधि : ाचा ठीक है पर मेरी एक बात माननी होगी तुझे . मेरे लिए ड्रेस तू hi सेलेक्ट करेगा .

अमित : चलिए ठीक है . अब तो चलो .

निधि दीदी मेरे हाँ करते hi मुस्कुराती हुई मेरे हाथ पकड़ कर खींचती हुई मुझे अपने साथ ले गयी . फिर मैंने 2-3 ड्रेस दीदी क लिए सेलेक्ट किये और उनको वो सब तरय करने क लिए कहा. करिश्मा दीदी थोड़ी दूर hi अपने लिए ड्रेस देख रही थी पर उनकी नज़र हम पर hi थी और शायद मन में कुछ सोच रही थी क्यूंकि उनका ध्यान ड्रेस देखने में काम और हमारी तरफ ज्यादा था . तभी एक लड़का उनके पास आया और उनसे बात करने लगा .

लड़का : हए मिस ब्यूटीफुल, आप अकेली हैं ? क्या मैं कोई हेल्प करूँ? वैसे तो आप पर कोई भी ड्रेस जाँच जाएगी. पर मेरे ख्याल से ये आप पर ज्यादा अछि लगेगी .

करिश्मा : गुस्से से घूरते हुए ) हे स्टॉप आईटी , हु अरे यू ? मंद योर ओन बिज़नेस.

लड़का : ओह्ह , इतनी गर्मी . लगता है किसी ने अचे से उतरी नहीं है. कोई बात नहीं मैं निकल दूंगा साडी गर्मी .

करिश्मा : यू बास्टर्ड , तेरी हिम्मत कैसे हुई बकवास करने की .

करिश्मा दीदी ने गुस्से में आकर अपना हाथ उस लड़के पर उठा दिया . पर उस लड़के ने करिश्मा दीदी का हाथ पकड़ लिया . मैं उनकी तरफ hi देख रहा था पर इतनी दूर से पता नहीं चल रहा था क क्या बात हो रही है. मगर जब दीदी को हाथ उठाते देखा तो मैं भाग के उनके पास पहुँच गया . उस लड़के ने जिस हाथ से करिश्मा का हाथ पकड़ा हुआ था मैंने उसकी वो कलाई ज़ोर से पकड़ कर भींच दी और वो दर्द से कराह उठा . जिससे उसके हाथ से करिश्मा दीदी का हाथ छूट गया .

लड़का : आआह्ह्ह्हह्ह छोड़ साले छोड़ मुझे .

अमित : ये क्या कह रहा था दीदी ?

मेरे मुँह से दीदी सुन कर उस लड़के की तो हवा टाइट हो गयी पहले hi उसकी कलाई मेरे हाथ में पीस रही थी और वो मेरी तगड़ी बॉडी को देख कर जैसे पहले hi सरेंडर कर चूका था .

लड़का : सॉरी भाई गलती हो गयी , मुझे नहीं पता था उनका कोई आप जैसा भाई भी है. मैं माफ़ी मांगता हूँ भाई सॉरी , सॉरी दीदी माफ़ कार्डो मुझे दोबारा गलती नहीं होगी . करिश्मा दीदी : क्यों निकल गयी साडी गरमी? अभी तो मेरी गरमी निकलने की बात कर रहा था . अब बोल , अब सांप सूंघ गया इसे देख कर ? . चटाक चटाक चटाक . गेट लॉस्ट यू सोन ऑफ़ ा बीच .

करिश्मा दीदी ने गुस्से में आकर उस लड़के को गली देते हुए 3 थप्पड़ कास कास क जड़ दिए. मैं तो हैरान हो रहा था. जिस तरह उस लड़के ने माफ़ी मांग ली थी मेरा इरादा तो था उसे छोड़ देने का पर दीदी तो पूरी गुस्से में आ गयी. वैसे तो मैं भी दीदी क हाथ से थप्पड़ खा चूका था इस लिए जल्दी खुद को संभल लिया . वो लड़का तुरंत वहां से उठ कर अपने गाल सहलाता हुआ भाग गया. करिश्मा दीदी तो और उसे मरना चाहती थी पर मैंने उन्हें रोक लिए . मैं तो दीदी का ये रूप देख कर हैरान था . करिश्मा दीदी शायद मेरी हालत समझ गयी थी .

करिश्मा : ऐसे क्या देख रहे हो ?

अमित : कक को कुछ नहीं .

जवाब देते हुए मेरा हाथ अपने आप अपने गाल पर चला गया था जिसे देख दीदी को शायद अंदाज़ा हो गया क मैं क्या सोच रहा हूँ

करिश्मा : हस्ते हुए ) तू क्यों अपने गाल सेहला रहा है ? तुझे तो मैंने कुछ नहीं कहा .

अमित : मैं सोच रहा हूँ उस बेचारे का क्या हल हो रहा होगा . मुझे आपके हाथ की मर का पता है .

करिश्मा : और कितना शर्मिंदा करेगा मुझे ? मुझे सच में बहुत बुरा लगता है जब भी वो सब यद् अत है मुझे. क्या तू उसे भूल नहीं सकता ? चाहे तो तू अपने हाथों से मुझे मर ले .

दीदी ने मेरे हाथ पकड़ कर अपने गलों पर मार्के की कोशिश की तो मैंने उनके गलों को प्यार से अपने हाथों में ले लिया .

अमित : ये क्या कर रही हो आप दीदी ? इतने प्यारे गलों पर भला कोई कैसे मर सकता है. ये मरने क लिए नहीं प्यार करने क लिए हैं. और मैं आपसे नाराज़ नहीं हूँ वो तो बस कभी कभी ये आ जाता है. अब इसमें मैं क्या कर सकता हूँ . ाचा वो सब छोड़िये . आप शॉपिंग क्यों नहीं कर रही ? मैं देख रहा हूँ आपका ध्यान शॉपिंग में है hi नहीं .

करिश्मा दीदी मेरी बात सुन कर मन hi मन पता नहीं क्या सोचने लगी थी. मैंने उन्हें हिलाया .

करिश्मा : हह हाँ वो ,, वो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था क क्या लूँ अपने लिए . तुम निधि दीदी की हेल्प कर रहे थे तो क्या थोड़ी सी मेरी भी हेल्प कर डोज ?

अमित : लो इसमें कौन सी बात है . चलिए मैं देखता हूँ आपके लिए . पर क्या आपको मेरी पसंद अछि लगेगी ?

करिश्मा: बिलकुल लगेगी , मैं जानती हूँ तुम्हारी पसंद बहुत अछि है.

अमित : आपको कैसे पता ?

करिश्मा : माँ ,,, दीदी बताती रहती है .

करिश्मा दीदी आंटी का नाम लेने वाली थी पर बीच में hi रुक गयी और दीदी का नाम ले लिया . मैंने उनके लिए कुछ ड्रेसेस निकली और उन्हें तरय करने को कहा तब तक निधि दीदी भी वापिस आ गयी थी कपडे तरय करने क बाद . यहाँ अभी जो कुछ हुआ उन्हें पता नहीं चला था. थोड़ी देर बाद करिश्मा दीदी भी अपने ड्रेसेस तरय करने क बाद वापिस आ गयी . शॉपिंग करते करते हमें काफी देर हो गयी थी और हमें भूख भी लग रही थी तो हम कुछ खाने क लिए रेस्टोरेंट में चले गए . तभी मुझे कल्पना की कॉल आने लगी .

कल्पना : कहाँ हो सुबह से ? मैं तुम्हारा वेट कर कर क पागल हो रही हूँ .

(मुझे तो भूल hi गया था क मुझे कल्पना को लेके गाओं जाना था आज .)

अमित : ओह सॉरी सॉरी , वो क्या है न मैं दीदी क साथ शॉपिंग करने आया था. उन्हें कुछ ड्रेसेस लेने थे .

कल्पना : ओह्ह्ह , चल कोई बात नहीं. काम से काम बता तो देते . ाचा फ्री हो क जल्दी आ जाना मैं वेट कर रही हूँ .

कल्पना से बात करने क बाद मैं वापिस आया तो निधि दीदी मेरी तरफ घूर कर देख रही थी .

अमित : क्या हुआ दीदी ? ऐसे क्यों देख रही हो आप ?

निधि : मॉल में क्या किया था तूने ?

अमित : मैंने क्या ,, कुछ भी तो नहीं .

निधि : गुस्से से ) मुझे सब पता है .

मैं दीदी के तेवर देख कर सोच में पद गया क दीदी क्यों गुस्से में हैं. कहीं करिश्मा दीदी ने सब कुछ मेरे ऊपर तो नहीं दाल दिया ? जबकि मारा तो उन्होंने खुद था . मैंने करिश्मा दीदी की तरफ देखा. तभी करिश्मा दीदी जो चुप कर क बैठी थी एक डैम से ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी .

निधि : क्या करिश्मा तुम भी ,,,, थोड़ी देर कण्ट्रोल नहीं कर सकती थी ? मुझे इसकी क्लास भी नहीं लेने दी तुमने

करिश्मा : हे हे हे , सॉरी सॉरी , सॉरी दीदी . पर आपने देखा नहीं कैसी शकल बना ली थी इसने हे हे हे .

निधि : चल अब बस कर, क्यों हंस रही है? तेरी hi तो मदद की न इसने और अब तू हंस रही है इसी पर .

अब मुझे समझ आया क दोनों मेरे साथ मज़ाक कर रही थी. निधि को ऐसे मज़ाक करता देख कर मुझे ाचा भी लग रहा था क्यों की वो ऐसा करती नहीं थीं. इस लिए मैं बस खामोश उन्हें hi देख रहा था . और जैसे hi उनकी नज़र मुझ से मिली वो शर्मा गयी और मुस्कुरा कर बोली .

निधि : तुम नाराज़ तो नहीं हो न ? ये सब इसी का आईडिया था . अब खुद हंस रही है मुझसे फंसा कर .

अमित : नहीं दीदी , मुझे तो बहुत ाचा लगा . आप ऐसे hi हंसी मज़ाक किया कीजिये अछि लगती हो आप .

निधि शर्मा के नज़रें झुका कर बैठ गयी और फिर से नज़रें उठा कर मुझे देखने लगी .

करिश्मा : एक बात तो है दीदी , अमित न हर चीज़ में परफेक्ट है. उस लड़के की तो हालत hi जागरण हो गयी थी जब इसमें उसका हाथ पकड़ कर मरोड़ दिया था . इसे देख कर hi वो मुझे दीदी दीदी कहने लगा . मैं भी रख hi दिए 2-4 अब दीदी कहेगा तो दीदी का आशीर्वाद भी तो मिलेगा न . वैसे वो लड़की किस्मत वाली होगी जिसके साथ इसकी शादी होगी .

निधि : चलो अब खाना खा लो कहीं नज़र न लगा देना इसे.

करिश्मा : मैं क्या नज़र लगाउंगी दीदी ये तो वैसे hi हर किसी की नज़र में hi रहता है . घर पर भी माँ डैड इसी की बातें करते हैं. और करें भी क्यों न मैं खुद भी इसकी बात करती हूँ. मुझे उस नरक से आज़ाद करवाने वाला ये हो तो है. अगर ये न अत तो शायद मैं कभी उस नरक से निकल hi न पति .

करिश्मा दीदी को सीरियस होता देख निधि दीदी ने उनका हाथ थम लिया और उन्हें रिलैक्स करने लगी .

अमित : क्या दीदी आप भी , अचे भले मूड की वाट लगा दी . अब बार बार वही सब यद् करती रहोगी क्या ? अब आपको अपनी ज़िन्दगी नए सिरे से शुरू करनी चाहिए जैसा अंकल आंटी चाहते हैं . और मेरा क्या है , मैं तो हमेशा आपके पास hi हूँ .

उसके बाद हमने साथ में लंच किया और निकल पड़े . करिश्मा दीदी तो अपने घर चली गयी. निधि दीदी मुझे साथ लिए रीता मौसी क घर आ गयी . मैंने कल्पना को यहीं आने को कह दिया फ़ोन पे. थोड़ी देर में मैंने अपनी पैकिंग की और घर जाने क लिए तैयार हो गया . फिर मैं बरी बरी से सब से मिला और तब तक कल्पना भी आ गयी थी. फिर कल्पना भी सब से मिली. जब करुणा दीदी को पता चला क कल्पना भी मेरे साथ गाओं जा रही है तो वो भी साथ चलने को तैयार हो गयी . मौसी ने भी परमिशन दे दी. फिर मैं कल्पना और करुणा दीदी गाओं क लिए निकल गए . बातों बातों में मैं भूल hi गया था क आज मुझे मंजू म से भी मिलना था. मुझे उनकी यद् आ रही थी तो मैंने उनको कॉल लगा दी .

मंजू : तो आ गयी यद् ? और ये क्या ? फ़ोन कर कर रहे हो खुद कहाँ हो?

अमित : सॉरी मम वो दीदी क साथ गया था तो टाइम नहीं मिला आज . ाचा आप एक काम करना . कल आप रेडी रहना मैं आपको लेने आ रहा हूँ. कल आपको मेरे साथ मेरे गाओं चलना है.

मंजू : क्या ? कल ? पर कल मैं .....

अमित : मैं कोई बहन नहीं सुनूंगा मम. कल आपको मेरे साथ चलना hi पड़ेगा . ाचा अब रखता हूँ फिर फ़ोन करूँगा .

मंजू म की बात सुने बिना मैंने कॉल कट कर दी. मैं नहीं चाहता था क वो कल का कोई बहाना बनाये जैसा क मुझे लग रहा था . इसी लिए मैंने उनकी बात सुने बिना कॉल काट दी.

कल्पना : किसको फ़ोन कर रहे थे ?

अमित : सरप्राइज , कल देख लेना खुद hi

कल्पना : जानती हूँ तुम्हारे सरप्राइज . एक hi मम है जिनसे तुम बात करते हो . चन्दर्कांता से तो बात करने से रहे .

करुणा : चन्दर्कांता? इसकी क्या कहानी है डार्लिंग ज़रा मुझे भी तो बताओ .

कल्पना : अरे आपको बताया नहीं था जब आप कॉलेज में आयी थी? उसका और इसका 36 का आंकड़ा है . पता नहीं किस बात पे गुस्सा रहती है . पर बात बात पर इसकी लेने को तैयार रहती है मतलब इसको परेशां करती है

करुणा : अरे चिल यार . हम दोस्त हैं जैसे चाहे बोल. वैसे वो सच में ज़बरदस्त आइटम hi होगी जो इसकी लेने में लगी रहती है वर्ण इसने कुछ कर दिया तो सब भूल जाएगी .

ये सुन कर मुझे और कल्पना दोनों को hi झटका लगा .

कल्पना: डीडीईई , कुछ तो कण्ट्रोल करो आप

करुणा : मेरी तरफ शरारती नज़रों से देखते हुए ) इससे क्या शर्माना , ये कोई बेगाना है क्या?

कल्पना: मेरी छोड़िये पर आपका तो भाई है न.

करुणा : ाचा ! मेरा भाई है मगर तू क्यों शर्मा रही है ? तेरा तो भाई नहीं न तू तो झील कर मज़ा ले .

कल्पना: तौबा दीदी आप तो किसी को नहीं छोड़ टी. शुक्र है अभी नैना दीदी साथ में नहीं हैं.

करुणा : don’t वोर्री डार्लिंग वो भी आ जाएँगी . तुमने क्या सोचा था तुम अकेली अकेली मज़े ले लोगी इसके साथ? हम भी हैं मैदान में डार्लिंग .

करुणा दीदी बात बात में मेरी तरफ कामुक नज़रों से देखती और मैं उनसे नज़रें चुराता. कल्पना बेचारी को तो पता भी नहीं था क करुणा दीदी कहाँ से बात कर रही हैं. इंदिरेक्ट्ली वो हमारे सीक्रेट रिलेशन की hi बात कर रही थी. जबकि कल्पना ये समझ रही थी क वो उसे छेद रही है . खैर ऐसे hi सरे रस्ते बातें करते हुए हम अपने गाओं अपने घर पहुँच hi गए. अँधेरा हो रहा था और जब गाड़ी आ कर दरवाज़े पर रुकी तो गाड़ी की आवाज़ सुन कर दरवाज़ा अपने आप खुल गया . गेट खोलने वाले अजय मां थे और मुस्कुरा कर हमारा स्वागत कर रहे थे . कल्पना ने गाड़ी घर क अंदर की और तब तक अजय मां गेट बंद कर क हमारे करीब आ गए . गाड़ी से उतारते hi उन्होंने मुझे गले से लगा लिया .

अजय : तू आ गया बीटा , हम सब तेरी hi रह देख रहे थे चल जल्दी चल .

करुणा : गाड़ी से निकलते हुए ) क्या मां जी , सारा प्यार इसी क लिए hi है या हमें भी कुछ मिलेगा ?

अजय : क्यों नहीं मिलेगा मेरी शरारती बची. आ इधर .

मैं गाड़ी से अपना और कल्पना करुणा दीदी का भी बैग निकलने लगा . तब तक करुणा भी कार से बहार निकली और मां जी ने उसे भी गले से लगा कर प्यार दिया . फिर हम तीनो आगे बढ़े तो मेरी नज़र दीपिका ममी और माँ पर पड़ी जो किचन क पास hi थी. मुझे देख कर दोनों क चेहरे पर मुस्कान आयी पर फिर से चेहरे पर नाराज़गी दिखते हुए दीपिका ममी किचन

में चली गयी . जबकि माँ हमारे पास आने लगी . मैंने उनके पाऊँ छूने की कोशिश की तो उन्होंने मुझे गले से लगा लिया .

गौरी : आ गया मेरा बीटा , कैसा है ? पेपर तो अचे से हो गए न ? अचे hi हुए होंगे. चल आ बैठ कब से तेरी रह देख रही थी . तू तो सुबह आने वाला था न.

अमित : वो माँ निधि दीदी क साथ चला गया था बस वहीँ टाइम लग गया .

करुणा : ो मदर इंडिया ज़रा एक नज़र हम पर भी तो मर लो.

गौरी : तुझ पर नज़र मरने की क्या ज़रूरत है. तू तो हमेशा सब की नज़रों में रहती है मेरी बची इधर आ .

माँ ने करुणा दीदी को गले से लगाया और फिर कल्पना को देख कर उसे भी गले से लगा लिया.

गौरी : तो तुम्हे भी वक़्त मिल hi गया आखिर. ाचा है अब घर में रौनक लगेगी तुम सब क आने से . जा बीटा पहले कामिनी से मिल आ , बड़ा यद् के रही तो तुझे और बच्चों को भी देख लेना दोनों उसी क पास हैं.

करुणा : इसे क्या कह रही हैं ममी हम दोनों हैं न हम देखते हैं. चल कल्पना .

करुणा दीदी कल्पना को साथ लेकर कामिनी ममी क रूम में चली गयी और उनके पीछे पीछे मैं भी. कामिनी ममी बीएड पर hi थी और अपने बेटे को गॉड में लिए बैठी थी. शायद उन्होंने अभी उसे दूध पिलाया था क्यूंकि वो सो रहा था और उनके होंठो पर थोड़ा सा दूध लगा हुआ था . करुणा दीदी ने तो उनकी गॉड से बचे को ले लिया और कल्पना भी ममी से मिल कर करुणा दीदी क साथ बचे को खिलने लगी .

अमित : कैसी हैं आप ममी ?

कामिनी : मैं ठीक हूँ और अब तो और भी अछि हो गयी हूँ. बड़ी देर कार्डो आने में , पता है हूँ सब सुबह से तेरा इंतज़ार कर रहे थे . दीपिका से मिला तू? वो नाराज़ हो रही है तुझसे.

अमित : उनको तो मैं अभी मन लूंगा . आप चिंता मत करो . ाचा मैं ज़रा पहले उन से मिल hi लेता हूँ.

कामिनी ममी ने है क मेरी और देखा और फिर करुणा कल्पना क साथ बच्चों में बिजी हो गयी. मैं रूम से निकला और सीधा किचन में गया . दीपिका मामी चाय बना रही थी . मुझे एक नज़र देखने क बाद वो फिर से चाय बनाने में लग गयी. मैं उनके करीब चला गया पर वो मुझे देख नहीं रही थी .

अमित : नाराज़ हैं क्या मुझसे.

दीपिका : ......

अमित : तो बात नहीं करेंगी ?

दीपिका : ......

अमित : ाचा ये बात है तो ठीक है . मैं वापिस मौसी क घर hi चला जाता हूँ .

मैं इतना कह कर मुड़ने लगा तो दीपिका ममी ने मेरी जैकेट का कलर पकड़ लिया .

दीपिका : टंगे तोड़ दूंगी अब एक कदम भी बहार रखा तो. एक तो इतने दिनों बाद घर रहने क लिए थोड़ी सी छुट्टियां मिली हैं उनके भी तुम्हे शहर जाना है. हमारी कोई परवाह नहीं तुम्हे?

दीपिका ममी की बात सुन कर और उनके तेवर देख कर मुझे बहुत ाचा लगा . क्यूंकि वो ऊपर से चाहे नाराज़गी दिखा रही थी पर उनके दिल में मेरे लिए कितना प्यार है ये देख कर सुकून भी बहुत मिल रहा था .

अमित : अब आप बात hi नहीं करेंगी तो कहाँ जाऊंगा मैं .

दीपिका : ाचा , मैं बात नहीं कर रही ? और तू जो इतने दिन अपने आप फ़ोन भी नहीं करता वो ?? उसका क्या ? एक तो सारा दिन बिता कर अब घर आ रहे हो ऊपर से आते hi वापिस जाने की बात कर रहा है. किसी को गुस्सा करने का भी हक़ नहीं है क्या ?

दीपिका ममी को मुँह बनाते देख मुझे बहुत ाचा लग रहा था. मैंने उन्हें एक साइड से hi नहीं में भर कर कास क सीने से लगा लिया .

अमित : ाचा तो आप गुस्सा हैं मुझ पर. ठीक है तो पहले आपका गुस्सा hi उतरता हूँ.

इतना कह कर मैंने ममी क गाल चूमने की कोशिश की तो वो मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी .

‘ अह्ह्ह्हम्म्म्म अह्ह्हम्म्म्म , छोटी चाय बन गयी क्या ?’ ये आवाज़ माँ की थी जो किचन क दरवाज़े पर hi कड़ी थी और जान बुझ कर खांस कर हमें चेतावनी दे रही थी. मैं उनकी आवाज़ सुनते hi एक डैम से ममी से दूर हो गया और जल्दी से किचन से निकल गया बिना किसी की तरफ देखे.

गौरी : ये अभी क्या हो रहा था ? अगर कोई देख लेता तो ?

दीपिका : शरमाते हुए ) आप ने देखा नहीं वो खुद hi लगा हुआ था मैं तो उससे बात भी नहीं कर रही थी .

गौरी : बस बस , सब पता है मुझे. सुबह से किसे मरी जा रही थी क कब आएगा कब आएगा . और अब ऐसे नखरा कर रही है. क्यों सत्ता रही थी उसे? चल अब चाय दाल मैं दे कर अति हूँ .

दीपिका : मैं कर लुंगी खुद आप बस आराम करो. कितनी बार कहा है मैं कर लुंगी फिर भी आप मानती नहीं .

गौरी : अरे कुछ नहीं होता . तो मेरी चिंता न कर. और देख उसे बताना नहीं कुछ भी . मुझे नहीं लगता क उसे यद् भी है. तेरे भैया भी आने वाले हैं चुपचाप सब अचे से छुपा देना .

दीपिका : आप चिंता मत करो मुझे सब यद् है. चलिए अब अपने लादले को देखिये किधर निकल गया है.

उधर ऋतू अपने सरकारी आवास पर थी जब शाम को इंस्पेक्टर पांडेय रिपोर्ट ले कर आया.

पांडेय: मैडम आपने जिस आदमी क नाम बताया था वो एक जौर्नालिस्ट था. तीन महीने पहले एक एक्सीडेंट में वो और उसकी पत्नी दोनों मरे गए. किसी ट्रक ने गाड़ी को कुचल दिया था. सुना है क वो मला नारायण दास क खिलाफ ख़बरें चाप रहे थे जिस वजह से उसी ने ये सब करवट है पर सरकारी रिकॉर्ड में ये एक एक्सीडेंट है.

ऋतू : हम्म्म्म तो ये बात सही निकली . और उसकी बाकि फॅमिली ? मतलब उसके बचे या कोई और ?

पांडेय : और तो कोई नहीं है. हाँ एक बेटी थी जिसका कुछ पता नहीं उनके एक्सीडेंट क बाद से .

ऋतू : इसका मतलब वो लड़की सच बोल रही है

पांडेय : कौन सी लड़की मैडम ?

ऋतू : मुझे एक लड़की फ़ोन आया था वो खुद को उसी रिपोर्टर की बेटी बता रही थी और उसी ने बताया क उसके माता पिता क कतल हुआ है. और ये भी बताया क वो इस वक़्त नारायण दस की कैद में है. उसके पास कुछ सुबूत हैं जो सिर्फ मुझे देना चाहती है.

पांडेय: पर आप hi को क्यों ? वो किसी और को भी तो दे सकती है .

ऋतू : उसने बताया क वहां क पोलिसवाले नारायण दस् क साथ मिले हुए हैं इसी लिए वो ये सब सिर्फ मेरे हवाले करना चाहती है.

पांडेय : पर मैडम ये कोई ट्रैप भी तो हो सकता है. और वैसे भी जिस लड़की का पता hi नहीं क्या पता वो भी अब तक मर चुकी हो ?

ऋतू : हो तो कुछ भी सकता है. और ये भी तो हो सकता hi क वो सच बोल रही हो. वैसे भी उसने हो बताया वो तो सच hi निकला. जो भी हो रिस्क तो लेना पड़ेगा . वर्ण उस कमीने क खिलाफ हमारे पास तो कोई सुबूत तक है hi नहीं.

पांडेय: तो अपने क्या सोचा है मैडम ?

ऋतू : उसी क बारे में सोच रही हूँ. मुझे बस इस रिपोर्ट का इंतज़ार था. जो भी हो मैं ये मौका गँवा नहीं सकती. इस लिए मैं जाउंगी वहां. चूँकि वो हमारा एरिया नहीं है और न hi हम वहां क लोगों पर भरोसा कर सकते हैं तो ये सब हमें अपने लेवल पर hi कारन पाएगा वो भी बिना किसी की नज़र में आये . एक काम कर तुम अपने साथ एक टीम ले जाओ . उस जगह क बारे में सर्वे कर क आओ . हमें किस जगह जाना है काम से काम ये तो पता कर लें. और हाँ किसी को कुछ पता न चले इस लिए सिविल में hi जाना और गाड़ी भी पर्सनल ले कर जाना. कल तक सब कुछ चेक कर क मुझे बताओ और फिर आगे की तयारी करते हैं.

पांडेय : जी मैडम , मैं कल शाम तक आपको सब पता कर रिपोर्ट करूँगा .

ऋतू : ठीक है अब तुम जाओ



पांडेय क जाने क बाद ऋतू सभी विकल्प पर विचार करने लगी . वो जानती थी क वो बहुत बड़ा रिस्क लेने जा रही है पर जीत क लिए रिस्क तो लेना hi पड़ता है. यही सोच कर ऋतू ने अपनी कमर कास ली थी नारायण दास की तबाही क लिए .
 
भाई लोगो वक़्त नहीं मिलता इस लिए जवाब भी नहीं दे पता. आज रत अपडेट देने की पूरी कोशिश रहेगी . अगर किसी कारन पूरा न कर पाया तो कल हर हल में अपडेट ज़रूर मिलेगा
 
अपडेट 226



बाबा जब घर आये तो मैं कल्पना और करुणा दीदी क साथ hi कामिनी कमाई क रूम में बैठा था. अजय मां और माँ भी हमारे साथ थे. जबकि दीपिका ममी किचन में खाना बना रही थी . बाबा जब आये तो मुझे गले लगा कर मिले और फिर करुणा दीदी और कल्पना को देख कर वो भी बहुत खुश हुए . कमलेश मां थोड़ा देर से आये पर हम सब ने मिल कर खाना खाया और फिर ऊपर मेरे रूम क पास hi कल्पना और करुणा दीदी को रूम दे दिया गया. खाना खाने क बाद अब हम लोग अपने अपने बिस्तर पर आराम कर रहे थे. मुझे लगा था क करुणा दीदी और कल्पना मेरे पास आएँगी पर ाचा हुआ वो दोनों नहीं आयी . इस लिए मैं भी फ्री हो कर रीमा से फ़ोन पर बात करने लगा. पर उसने ज्यादा देर बात नहीं की और ये कह कर फ़ोन काट दिया क वो बाद में करेगी अभी उसे मम्मी बुला रही है . मैं भी आराम से लेट गया और पता hi नहीं चला कब मेरी आँख लग गयी . मैं आराम से सो रहा था क किसी ने मुझे हिला कर उठाया . मैंने उठ कर जैसे hi आंख खोली तो मेरे कमरे में सब क सब मौजूद थे . माँ बाबा अजय मां कामिनी ममी कमलेश मां और दीपिका ममी . और साथ hi कल्पना क साथ करुणा दीदी भी .

गौरी : जग जग जियो मेरे लाल भगवन करे तुझे मेरी भी उम्र लग जाये . तुम हमेशा हँसते मुस्कुराते रहो और ज़िन्दगी की हर ख़ुशी तुम्हे मिले . जन्मदिन मुबारक हो.

माँ ने मेरे सर से बालाएं लेते हुए मुझे आशीर्वाद दिया . मैं उनका प्यार देख खुद को रोक न पाया और उन्हें गले से लगा लिया .

अमित : माआ

मेरे मुँह से बस इतना hi निकला . माँ ने भी मुझे कास क गले से लगा लिया और अपने हाथों से मेरे सर को सहलाते हुए अपनी ममता की बरसात मुझ पर करने लगी .

विजय : भाई मुझे भी तो अपने बेटे को थोड़ा प्यार देने दो. सरे आशीर्वाद तो तुमने दे दिए अब मैं कहूं. बीटा ज़िन्दगी में खूब तरक्की करो और हम सब का नाम रोशन करो. भगवन तुम्हे हमेशा कामयाबी दे .

बाबा ने भी मेरा सर सहलाते हुए आशीर्वाद दिया.

करुणा : ये क्या मां जी ममी जी , आप लोग तो सारा किया कराया ख़तम कर रहे हो. चलिए पहले उसे केक तो काटने दीजिये .

करुणा दीदी की बात सुन कर मेरा और माँ बाबा का ध्यान उस और गया . तभी दीपिका ममी ने एक छोटे टेबल पर केक रखा जिस पर कैंडल्स जल रही थी . मैं देख कर हैरान हुआ और जब बाकि सब को देखा तो सब मुस्कुरा रहे थे

अमित : ये सब क्या है माँ ?

गौरी : क्या है मतलब ? आज तेरा जन्मदिन है . देख 12 बज चुके हैं. हर बार हम दिन को hi तेरा जन्मदिन मानते हैं वो भी सधी से. पर इस बार दीपिका और कामिनी ने कहा क हम सुबह की बजाये रत को hi तेरा जन्मदिन मन ले ता की मंदिर में पूजा वाला काम भी हो जाये और ये छोटा सा जश्न भी. चल अब देख क्या रहा है ? आ इधर .

मैंने एक नज़र दीपिका ममी और कामिनी ममी को देखा तो दोनों ख़ुशी से मुझे hi देख रही थी . मैं उठ कर केक क पास आया और सब आपस खड़े हो गए . मैंने जैसे hi कैंडल्स को फूक मरी तो सब हैप्पी बर्थडे की धुन गाने लगे . फिर माँ ने मेरा मुँह मीठा करवाया और फिर बाबा ने . मैंने भी दोनों का मुँह मीठा करवाया . और फिर एक एक कर क सब बरी बरी ऐसा करने लगे. जब दीपिका ममी मेरा मुँह मीठा करवा रही थी जो नज़र बचा कर उन्होंने मेरे होंठों पर उंगली फेरी और आँखों से इशारा करने लगी. उनका इशारा तो मैं समझ गया था पर सबके सामने ऐसा नहीं ऐसा कुछ कर नहीं सकता था . फिर बरी आयी करुणा दीदी की .

करुणा : तो आज हमारे सांड का ईशःठ मेरा मतलब साहब का बर्थडे है . तो सेलिब्रेशन भी ज़रा ज़ोरदार होना चाहिए ये क्या सब फॉर्मेलिटी hi कर रहे हैं. ये कोई बात हुई. जन्मदिन पर तो ऐसे मुँह मीठा करवाया जाता है.

इतना कह कर करुणा दीदी ने ढेर सारा केक मेरे मुँह पर मॉल दिया और सब ज़ोर ज़ोर से हंसने लगे . मुझे पहले गुस्सा तो आया पर सब को खुश देख कर मैं भी हसने लगा . मगर मैंने भी करुणा दीदी को छोड़ा नहीं और उनके मुँह पर भी थोड़ा केक लगा hi दिया . आखिर में कल्पना ने भी मेरा मुँह मीठा करवाया .

गौरी : चलो दीपिका सबको केक दो . और तुझे तेरे सरे गिफ्ट सुबह hi मिलेंगे .

दीपिका ममी सबके लिए केक डालने लगी . इतने में मेरा फ़ोन बजने लगा . मैंने देखा तो राधा की कॉल थी मैंने जैसे hi फ़ोन उठाया तो वो मुझे बर्थडे विश करने लगी .

राधा : हैप्पी बर्थडे, भगवन करे तुम हमेशा हस्ते मुस्कुराते रहो. सरे जहाँ की खुशियां तुम्हे मिलें.

अमित : थैंक यू राधा , थैंक यू वैरी मच और बताओ तुम कैसी हो मौसी कैसी है?

राधा : मैं भी ठीक हूँ और माँ भी. लो माँ से बात करो

दिव्या : जग जग जिओ बीटा , भगवन करे तुझे हर ख़ुशी मिले .

अमित : शुक्रिया मौसी , काश आप यहाँ होती तो कितना ाचा होता

दिव्या : मैं तो हमेशा hi तेरे साथ हूँ. तू बस मुझे अपने पास hi समझ .

कुछ देर और मैंने मौसी से बात की इसी बीच मेरे फ़ोन पर लगातार कॉल आयी जा रही थी तो मैंने मौसी को bye बोल कर उनकी कॉल जातो और देखा तो रीमा का फ़ोन था . सबके सामने मैंने उससे ज्यादा बात नहीं की वो भी समझ गयी थी . रीमा क बाद निधि दीदी की कॉल भी आ गयी . नैना दीदी रजनी मौसी से बात हुई और इसी तरह बरी बरी से सबका फ़ोन आने लगा . नेहा दीदी रीता मौसी , शीना , शालू , शिवानी, मंजू म, मोहित , आंटी , अंकल और करिश्मा दीदी का भी. इसके साथ hi डॉ रीना का भी फ़ोन आया . मैंने थोड़ी थोड़ी सब से बात की. आज पहली बार मेरा बर्थडे ऐसे मनाया जा रहा था जिसकी वजह से मैं अंदर से बहुत खुश था. पिछले साल क जन्मदिन और इस साल क जन्मदिन में कितना अंतर आ गया था. जहाँ गाओं में मेरे साथ कोई नहीं था वहीँ शहर जाने से मेरे साथ कितने लोग जुड़ गए थे . घर वाले भी सब देख रहे थे क मुझे कितने फ़ोन आ रहे हैं. माँ तो खुश hi थी पर दीपिका ममी कहीं न कहीं इस बात से थोड़ा नाराज़ भी दिख रही थी . जबकि करुणा दीदी इस बात पर भी मेरी तंग खिंच रही थी

करुणा : ोये होये , इतने फ़ोन , लगता है चाहने वालों की क़तर बहुत लम्बी है . तेरा पत्ता तो काट गया लगता है कल्पना .

करुणा दीदी की बात पर कल्पना एक डैम से शर्मा गयी मगर खुद को कण्ट्रोल करती हुई करुणा दीदी को जवाब देने लगी .

कल्पना : क्या दीदी आप भी पता नहीं क्या क्या बोलते रहते हो. मेरी छोड़िये अमित तो आपका भाई है क्या आपको वो ऐसा लगता है ?

करुणा : भाईईई , ये तो और भी बहुत कुछ है और ये क्या है ये मैं अचे से जानती हूँ .

करुणा दीदी मेरी आँखों में देखते हुए जिस तरह बात कर रही थी मैं समझ गया क वो क्या कह रही हैं . पर और किसी को कहाँ पता था क वो क्या कह रही हैं.

गौरी : चलो अब सब अपने अपने कमरों में चलो. सुबह जल्दी उठना है पूजा क लिए . अमित तुम भी जल्दी से सो जाओ , पूजा में तो तुम्हे hi बैठना है .

माँ ने मेरे सर पर हाथ फिराया और सबको अपने कमरों में जाने का कह कर वो बाबा क साथ नीचे चली गयी. अजय मां कामिनी ममी को साथ लेकर चले गए . दीपिका ममी ने आरव को कमलेश मां क हवाले किया और उन्हें नीचे भेज कर करुणा दीदी और कल्पना को भी कमरे से बहार किया . सबके जाने क बाद दीपिका ममी दरवाज़ा बंद कर क मेरे पास आयी .

दीपिका : तो ,,, मिल गया टाइम तुम्हे घर आने का . अब तो शहर जा कर hi दिल लगा लिया है. और किसी की तो यद् hi नहीं अति न अब तुम्हे .

दीपिका ममी ने झूठी नाराज़गी दिखते हुए ये कहा तो मैंने उठ कर उनको खींच कर अपनी बाँहों में भर लिया . दीपिका ममी मेरी बाँहों से निकलने क लिए कोशिश करने लगी पर ये सब सिर्फ दिखावा था जो मैं अचे से जनता था इसी लिए उन्हें अपनी बाँहों से निकलने नहीं दिया बल्कि और कास क अपने सीने से लगा लिया .

अमित : आपको ऐसा लगता है ? अगर यही बात मैं कहूं तो ? क आरव क आने क बाद आपको अब मेरी ज़रूरत नहीं पड़ती तो क्या कहेंगी आप ? उस दिन आप भी तो बिना मिले आ गयी थी न .

मेरी बात सुनते hi दीपिका ममी एक डैम से स्थिर हो गयी और मेरी आँखों में देखने लगी. उनकी आँखों में दर्द क भाव दिखने लगे . ऐसा लग रहा था क जैसे अभी उन आँखों में नमी आ जाएगी .

दीपिका : अगर मेरा बस चले तो मैं तुम्हारे बिना एक भी सांस न लूँ. पर इस घर की मर्यादा और रिश्तों में बंधी हूँ. अगर इन सब का ख्याल न होता तो मैं हर वक़्त तुम्हारे कदमो में hi रहती. उस दिन भी दीदी की वजह से hi मुझे ऐसे जाना पड़ा था . वर्ण थान रखा hi क्या है तेरे बगैर. रही बात आरव की तो वो भी तो तुम्हारी hi निशानी है.

अमित : आप इतना सीरियस क्यों हो रही हैं. क्या मैं नहीं जनता क आप मुझसे कितना प्यार करती हैं. पर लगता है क आपको मुझ पर शक है

दीपिका : ाचा तो मुझे शक है ? और ये जो घर पर अपने साथ इतनी सुन्दर लड़की के आये हो इसका क्या ? लोग तो यही समझेंगे न क ये तुम्हारी गफ है . और क्या पता ये सच भी हो .

अमित : अगर ऐसा होता तो सब से पहले मैं आपको hi बताता . वो मेरी दोस्त है. और रही बात यहाँ लेन की तो उसके पापा ने hi कहा था और मैंने इसके लिए माँ बाबा से पहले पुछा भी था . यकीन न हो तो खुद पूछ लेना आप.

दीपिका : जानती हूँ जानती हूँ , पर इस दिल को कैसे समझों?

अमित : मेरी प्यारी प्यारी ममी छुम वाइफ छुम मेरे बचे की माँ. इतना मत सोचो. मेरी ज़िन्दगी में सबसे पहले आप hi हो माँ क बाद . हाँ आपके बाद अब बहुत लोग आ चुके हैं. मैं कब से आपके साथ ढेर साडी बातें करना चाहता था पर वक़्त hi नहीं मिल प् रहा था .

दीपिका : तो बता न कौन कौन सी सुअटान बना दी मेरी तूने .

अमित : है है है , सौतन ? आप भी न. आप फ़िलहाल रिलैक्स रहिये , अब तो यहीं हूँ . जब टाइम होगा दोनों क पास तो ढेर साडी बातें करेंगे .

दीपिका : टाइम कहाँ देगी वो जो साथ में आयी हैं दोनों . कल्पना तो फिर भी हैंडल कर लेंगे पर करुणा ? वो तो अपने आप में तूफ़ान मेल है.

अमित : आप चिंता मत कर किसी बात की . ाचा अब आप जाओ कहीं मां पीछे पीछे यहाँ न आ जाएँ .

दीपिका : ठीक है , अभी तो चलती हूँ पर यद् रखना मुझे सब कुछ जानना है . क्या क्या गुल खिला रहे हो शहर में .

अमित : सब बताऊंगा पर अभी आप जा कर आराम करो .

दीपिका : ‘ ुम्माआआअह ‘ अब ठीक है. चलो तुम भी सो जाओ अब सुबह जल्दी उठना है . वन्स अगेन हैप्पी बर्थडे आरव क पापा

दीपिका ममी मेरे होंठों पर किश करने क बाद स्माइल करती हुई नीचे चली गयी. मगर उनकी आखिरी बात सुन कर दिल को जो ख़ुशी मिली है ो बहुत खास थी जैसे मेरे कण ऐसा hi सुन्ना चाहते हों . ममी क जाने क बाद मैंने भी दरवाज़ा बंद किया और बीएड पर आराम से लेट गया. पता नहीं कब मेरी आँख लगी. सुबह सुबह बाबा ने आ कर मुझे जल्दी से जगा दिया और फिर पूजा क लिए तैयार होने का कह कर वो नीचे चले गए . मैं भी जल्दी से तैयार हुआ और नीचे आ गया . आज पूजा में मैं और बाबा hi बैठे थे जबकि अजय मां और कमलेश मां अपने अपने बीवी बच्चों की देख रेख कर रहे थे . माँ को भी बाबा ने आराम करने को कहा था . दीपिका ममी किचन देख रही थी और करुणा दीदी शायद अभी सो रही थी. कल्पना जल्दी उठने की आदि थी शायद जो जल्दी तैयार हो कर नीचे आ गयी और मुझे बाबा क साथ पूजा में बैठा देख दीपिका ममी से बतियाने लगी . खैर पंडित जी ने 2 घंटे पूजा हवन में लगाए और दान दक्षिणा ले कर चले गए . उनके जाते hi दीपिका ममी नाश्ता ले आयी . सुबह से हम खली पेट hi लगे हुए थे .

दीपिका : चलो पहले नाश्ता कर लो , आज तेरे लिए स्पेशल आलू पूरी हलवा और खीर बानी है .

हर साल मेरे जन्मदिन पर माँ यही बनती थी क्यूंकि और तो कुछ होता नहीं था कभी .

अमित : जल्दी लाओ ममी भूख क मरे चूहे दौड़ रहे हैं पेट में .

गौरी : मैं अपने हाथों से खिलाऊंगी अपने बेटे को . ला इधर कर थाली .

माँ किचन से निकल कर मेरे करीब आ कर बैठ गयी. और खुद hi निवाला बना कर मेरे मुँह में डालने लगी . मैं बस उन्हें एक तक देख रहा था .

गौरी : ऐसे क्या देख रहा है ? ाचा नहीं बना क्या ?

अमित : बहुत ाचा बना है माँ , आप हमेशा मेरे लिए ऐसे hi सब बनती हैं न .

गौरी : अपने बेटे क लिए नहीं बनाउंगी तो और किस क लिए बनाउंगी .

‘ वह वह भाभी जी लगता है बिलकुल सही समय पर आये हैं . राम राम भैया राम राम भाभी जी ‘ माँ मुझे खाना खिला रही थी क बहार से अंकल आंटी अंदर आते हुए दूर से hi ये बोलने लगे . उन्हें देख कर मैं बाबा और माँ तीनो अपनी अपनी जगह पर खड़े हो गए . अंकल पहले बाबा और माँ से मिले फिर मुझे आशीर्वाद देकर गले से लगा लिया . आंटी माँ से गले लग कर मिली .

अंकल : जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक मेरे बेटे , भगवन करे तुम अपने पिता से भी आगे अपना नाम बनाओ .

अमित : थैंक यू अंकल , मोहित नहीं आया ?

अंकल : वो भी आ रहा है पहले तुम बाकि सब से तो मिल लो .

अंकल का इशारा समझ कर जैसे hi मैं पीछे घूमा तो झट से नैना दीदी ने मुझे गले से लगा लिया .

नैना : हैप्पी बर्थडे चपड़ गंजु. आज तो तेरे से बड़ी वाली पार्टी लेनी है मुझे .

अमित : थैंक्स दीदी

अभी नैना दीदी से hi मैं गले मिल रहा था क उनके पीछे पीछे नेहा दीदी निधि दीदी और राधा भी आ गयी और साथ hi तीन देवियां यानि क रजनी मौसी रीता मौसी और दिव्या मौसी भी .

नेहा : हैप्पी बर्थडे भाई , भगवन करे तुम्हे हर ख़ुशी मिले और हर जनम में तुम मेरे भाई बनो .

नेहा दीदी की बात सुन कर मेरा मन अंदर से इतना भर गया क मैंने आगे बढ़ कर उन्हें कास क गले से लगा लिया .

अमित : भगवन करे ऐसा hi हो दीदी . मैं हर जनम आपका भाई बनना चाहता हूँ .

निधि : थोड़ा सा प्यार क्या मुझे भी मिल सकता है ?

निधि दीदी की बात सुन के मैं नेहा दीदी से अलग हुआ और निधि दीदी क गले जा लगा .

अमित : आप का तो सबसे पहले हल है दीदी . आप तो सबसे पहले हो हमेशा की तरह .

निधि ( मन में ) मैं जो प्यार चाहती हूँ वो तू कब समझेगा ? अब और बर्दाश्त नहीं होता है मुझसे , कैसे बताऊँ क मैं कैसा प्यार चाहती हूँ तुमसे .

रजनी : अरे भाई मुझे भी तो मिलने दो मेरे बेटे से .

रजनी मौसी की आवाज़ सुन कर निधि दीदी मुझसे अलग हुई और फिर मैं रजनी मौसी से गले लग कर मिला और ऐसे hi रीता मौसी से . फिर मैं दिव्या मौसी की तरफ बढ़ा जो चुपचाप बस देख रही थी मुझे .

दिव्या : जग जग जियो मेरे लाल , भगवन करे तुम पर कभी कोई बुरी बाला न आये . मेरी उम्र भी तुझे लग जाये .

अमित : अगर आपकी उम्र मुझे लग गयी तो मुझे माँ का प्यार कौन देगा माँ ?

मैंने जब इतना कहा तो दिव्या मौसी की आँखों में पानी आ गया और उन्होंने कास क मुझे गले से लगा लिया . कुछ देर वो ऐसे hi मुझे अपने से चिपकाए कड़ी रही. उनकी आँखों से बहती अश्रु धरा मेरे कंधे भिगो रही थी . और मेरी भी आँखों में नमी आ गयी थी. वास्तव में मुझे ऐसे लग रहा था जैसे मैं अपनी माँ क hi गले लगा हुआ हूँ. क्यूंकि दोनों जुड़वाँ जो थी . आज मुझे अपनी माँ का एहसास दिव्या मौसी की आगोश में हो रहा था .

रजनी : दिव्या !!!

दिव्या : ऑंखें पोंछते हुए ) मैं ठीक हूँ , ठीक हूँ मैं .

रजनी : बस करो खुद को सम्भालो ज़रा. आज कितने सैलून बाद तुम इसके जन्मदिन पर आयी तो क्या आज ऐसे मिलोगी ?

दिव्या : क्या करूँ दीदी , आज दामिनी की बहुत यद् आ रही है .

दिव्या मौसी की बात सुन कर हो हंसी की आवाज़ गूंज रही थी सबकी बातों में वो एक डैम से खामोश हो गयी. मैंने देखा तो लगभग सबकी आँखों में नमी आ गयी थी . और एक पल क लिए सन्नाटा सा छ गया .

गौरी : आज इतने सैलून बाद इसके जन्मदिन पर आप सभी कथा हुए हो . सोचो आज दामिनी की आत्मा कितनी खुश होगी. हर साल इसके जन्मदिन की बजाये हम सब का बाबू जी और पवन दामिनी की बरसी hi तो मानते थे. पर आज पहली बार लग रहा है क इसका जन्मदिन है . आज उस दर्द को भुला कर इसका दिन नहीं मन सकते क्या हूँ सब ?

माँ ने ख़ामोशी को तोड़ते हुए ये बात कही तो सबकी नज़रें माँ की तरफ hi घूम गयी . जो नाम आँखों से मेरी तरफ देख कर ये बात कह रही थी .

रीता : सही कहा भाभी , आज दामिनी यहाँ होती तो कितनी खुश होती . वो अमित का बर्थडे कितनी धूम धाम से मानती . आज तक हम हमेशा इस बात को भूल कर बस अपने माँ बाप और दामिनी को खोने का hi दर्द यद् करते आये हैं. पर आज हमें इसके जन्मदिन की ख़ुशी माननी चाहिए . दिव्या , तू तो दामिनी का hi रूप है न , तो क्या तू उसकी तरह अमित का ये खास दिन नहीं मनाएगी ?

दिव्या : क्यों नहीं मनाऊंगी ? आज तक मैं बस अपनी बहिन को यद् कर क रोटी रही और जो उसके फ़र्ज़ थे वो भूल गयी. मैं भूल गयी क एक फ़र्ज़ मेरा ये भी था क इसे वो प्यार दूँ जो दामिनी इसे देती . पर आज से ऐसा नहीं होगा. आज हम सब इसका जन्मदिन मिल कर मनाएंगे .

दिव्या मौसी की बात सुन कर सबके चेहरों पर रौनक आ गयी . माँ ने आगे बढ़ कर दिव्या मौसी को गले से लगा लिया. वहीँ राधा जो अब तक पीछे hi कड़ी थी उसके चेहरे पर आयी उदासी भी एक पल में फुर्र्र हो गयी . मैं भी माँ और दिव्या मौसी को ऐसे देख कर अपनी आँखों को साफ़ करने लगा तब मेरी नज़र राधा पर पड़ी .

अमित : राधा ,,, वहां क्यों कड़ी हो ? मुझसे नहीं मिलोगी ?

राधा की नज़र मुझसे मिली तो वो नाम आँखों से मुस्कुराती हुई एक झटके में मेरे गले आ लगी . मैंने भी उसे अपनी बाँहों में भर लिया. इन भावुक पलों में मैं राधा की हालत अचे से महसूस कर प् रहा था. बिलकुल मेरी तरह hi तो उसकी भी हालत हो रही थी . न राधा कुछ बोल रही थी न मैं कुछ बोल प् रहा था . मेरे सीने से लगी राधा किसी छोटे बचे की तरह ऐसे चिपकी थी जैसे मुझे छोड़ा तो कहीं मैं गायब न हो जॉन. मुझे भी एक असीम शांति महसूस हो रही थी और मेरी ऑंखें खुद hi बंद हो गयी. ऐसा लग रहा था जैसे राधा क दिल की धड़कन मुझे अपने अंदर महसूस हो रही हो . कुछ पल की ख़ामोशी क बाद मैंने ऑंखें खोल कर देखा तो माँ और दिव्या मौसी हमें hi देख रहे थे .

गौरी : चल पहले खाना खा ले या यूँ hi खड़ा रहेगा ? और छोड़ मेरी बची को मैं भी तो मिलूं इससे .

इतना सुन कर मैंने अपनी पकड़ से राधा को आज़ाद किया और राधा भी शर्माती हुई मुझसे अलग हो कर माँ क गले लग गयी .

नैना : लगता है सारा प्यार एक hi बहिन क लिए रखा हुआ है . क्या हम तेरी कुछ नहीं लगती ?

करुणा : और नहीं तो क्या , देखो तो कैसे बाँहों में ले कर ऑंखें बंद कर क खड़ा था . और हमें तो बस फॉर्मेलिटी क लिए गले लग क मिला . आज तेरा जन्मदिन न होता तो तुझे बताती चपड़ गंजु . चलो दीदी , आज इसे छोड़ना नहीं है . आज पहली बार मौका मिला है तो वसूल भी करेंगे

नेहा : ये क्या बोल रही हो करुणा .

दीपिका : वो सब बाद में करती रहना चलो पहले सब नाश्ता कर लो . बातों बातों में सब भूखे रह जाओगे . नाश्ता तो किया नहीं होगा न इतनी जल्दी किसी ने .

इतना कह कर दीपिका ममी सबको बैठने का कह कर किचन की तरफ चली गयी और माँ सबको बैठ कर नाश्ता करने को कहने लगी. निधि दीदी भी किचन में दीपिका ममी की मदद क लिए चली गयी और रीता मौसी भी . कल्पना राधा करुणा दीदी नैना दीदी आपस में बातें करने लगी और साथ hi दोनों बच्चों को प्यार करने लगी .

अमित : अंकल मोहित कहाँ रह गया है ? आप तो कह रहे थे वो आ रहा है .

अंकल : हाँ वो आ रहा है और करिश्मा भी उसके साथ hi आ रही है. आते hi होंगे तब तक तुम नाश्ता करो . भाई साहब अगर आप इजाज़त दे तो मैं अमित को अपने साथ लेकर जाना चाहता हूँ . आप तो जानते हैं पवन ने एक अनाथ आश्रम खोला था . मैं हर साल पवन और दीपिका की बरसी वहीँ मनाता था . अब सोच रहा हूँ क ये काम उनका बीटा अपने हाथों से hi करे तो ाचा होगा .

विजय : बात तो तुम्हारी ठीक है राघव पर .....

अंकल : पर क्या भैया ?

विजय : मैं नहीं चाहता ोनुस शहर की मनहूस परछाइयां मेरे बेटे क ऊपर पड़ें. अगर ये वहां गया तो लोगों को पता चल जायेगा .

अंकल : ऐसा कुछ नहीं होगा भैया. ये पहले भी तो जा चूका है मेरे साथ वहां . आप निश्चिन्त रहिये मैं किसी को इसके बारे में पता नहीं चलने दूंगा . बस दिल में ीचा स है क ये काम इसके हाथों से हो. और इसे भी तो पता चले क इसके पापा कैसे इंसान थे. वहां जायेगा तो खुद देख लेगा .

विजय : ठीक है अगर तुम यही चाहते हो तो ले जाओ . वैसे भी ये तुम्हारा भी तो है. तुम पवन क लिए भाई सामान hi तो थे. फॉर भी थोड़ा संभल कर रहना.

मैं चुपचाप दोनों की बातें सुन रहा था . मगर कुछ भी पूछने की हिम्मत नहीं हो रही थी . क्यूंकि पूछने पर भी मुझे वो कुछ बताने वाले तो थे नहीं.

अंकल : तो बरखुरदार कल तुम्हे क्सक्सक्सक्स शहर जाना है . बाकि सब तुम्हे वहीँ पता चलेगा. आज अपना जन्मदिन मनाओ और सुबह हमारे साथ चलो .

अमित : ठीक है अंकल , जैसा आप कहें .

तभी दरवाज़े की आवाज़ आयी और बहार से कुछ गाड़ियों की भी. मैं अभी दरवाज़े की और देख hi रहा था क मोहित क साथ करिश्मा दीदी और उनके साथ साथ शीना रीमा शिवानी शालू मीनल आती हुई नज़र आयी . सबके हाथों में गिफ्ट पकडे हुए थे .

मोहित : हैप्पी बर्थडे मेरे यार , कैसा है ?

अमित : गले मिलते हुए ) मैं तो ठीक हूँ तू सुना कैसा है ? और ये सब यहाँ ?

मोहित : सरप्राइज , तेरा बर्थडे ऐसे कैसे जाने देते . सब ने मिल कर प्रोग्राम बनाया है.

करिश्मा : हैप्पी बर्थडे अमित और ये तुम्हारे लिए .

अमित : थैंक्स दीदी पर ये सब किस लिए ?

करिश्मा : अब क्या इतना भी नहीं कर सकती मैं ? चलो रख लो इसे और अभी पहन कर दिखाओ.

करिश्मा दीदी क गिफ्ट पांच से पता चल रहा था क ज़रूर उसमे कपडे होंगे . करिश्मा दीदी मुझसे मिल कर बाकि सब से मिलने लगी और फिर शीना ने मुझे बर्थडे विश करते हुए गिफ्ट दिया और शिवानी शालू मीनल ने भी ऐसा hi किया . लास्ट में रीमा रह गयी थी जो नज़रें मिला कर मुस्कुरा भी रही थी और शर्मा भी रही थी .

रीमा : हैप्पी बर्थडे

अमित : बस , सिंपल सा हैप्पी बर्थडे ?

रीमा : ये गिरफ्त भी तो है न .

अमित : नहीं , ये मेरा गिफ्ट नहीं है .

रीमा : तो क्या चाहिए जनाब को गिफ्ट में ?

अमित : चाहिए तो बहुत कुछ , फ़िलहाल मुँह मीठा hi करवा देती तो मज़ा आ जाता .

रीमा : तो करलो मुँह मीठा, मेरा क्या है . मैं तो कह दूंगी मैं आपको होने वाली बहु हूँ. तुम अपनी सोचो .

अमित : ाचा !! बड़ी बातें आ रही हैं. अकेले में मिलो फिर बताता हूँ .

रीमा : मुस्कुराते हुए ) वो तो जब की तब देखेंगे . पहले अपनी सोचो. लगता है सब यहाँ तुम्हे hi लूटने आये हैं. देखा नहीं दीदी को , बच क रहना . कहीं इज्जत न लूट जाये हे हे हे

इतना कह कर रीमा राधा की तरफ हो ली. सब लड़कियां अछि दोस्त बन चुकी थी और आपस में लग गयी बातें करने. माँ बाबा मौसी मां और ममी सब खुश थे . पूरे घर में रौनक लग गयी थी. सब क आ जाने से किचन का काम बढ़ गया था . बाबा ने कमलेश मां को बाजार से सामान लेन को तो मैं मोहित को साथ लेकर खुद hi चला गया . वैसे भी रीमा की बात सुन कर दिल मेरा भी थोड़ा दर ज़रूर रहा था. क्यूंकि शीना और शिवानी की नज़रों में शरारत साफ़ नज़र आ रही थी . और ऊपर से करुणा नैना दीदी पहले से hi आफत थी. खैर मैं मोहित क साथ निकल कर दुकान से सामान लेने चला गया . वैसे तो गाओं में ज्यादा कुछ मिलता नहीं था पर काम चलौ सामान मिल hi जाता था . रस्ते में hi मुझे राजू मिल गया जो मुझसे मिलने घर hi आ रहा था . उसने मुझे विश किया और साथ hi हो लिया . सामान लेने क बाद हम घर वापिस आ गए . बस उसके बाद तो शाम तक सब लड़कियां मिल कर धमाल करती रही और मेरी फॅमिली भी बहुत खुश थी. घर में ाचा खड़ा माहौल बन गया था. शीना शिवानी और रीमा से मेरी नज़रें मिलती तो तीनो की नज़रों में अलग hi भाव नज़र आते जैसे अकेले में एक बार मिलूं तो मुझ पर सवार हो जाये . जबकि नैना दीदी और करुणा दीदी सबके सामने hi बातों बातों में मेरी लेने में लगी हुई थी . बड़ों की महफ़िल अलग से लगी हुई थी. मोहित अपने साथ केक लेकर आया था जो मेरे हाथों से कटवाया गया . शाम तक सब हमारे घर रुके और फिर दुबारा मिलने का कह कर सब विधा हो गए. शीना और शिवानी ने मुझे यद् दिलाया क मैंने उन्हें वक़्त देने का बोलै था पर फ़िलहाल मैंने अपने हालत का हवाला दिया और जल्दी मिलने का कहा. रत होते होते मोहित और उनकी फॅमिली समेत सब लड़कियां वापिस चली गयी. रीमा से मैं अकेले मिलना चाहता था पर मौका नहीं बना. खैर अब घर पर रह गए थे हमारी फॅमिली और मौसियों क साथ मेरी सभी बहने और कल्पना . सब क जाने क बाद रत का खाना खा कर सब अपने अपने कमरों में चले गए. मौसियों और बहनो क लिए ऊपर क कमरों में hi व्यवस्था की गयी थी. मैं सब क लिए इंतज़ाम करने क बाद जब अपने काने में आ कर लेता तो दिन भर की थकावट की वजह से आते hi बीएड पर पद गया. बाकि सब का भी ऐसा hi हल था. मैं अभी ऑंखें बंद कर क लेता हुआ hi था क मुझे अपने माथे पर किसी क नरम हाथों का स्पर्श महसूस हुआ. मैंने ऑंखें खोल कर देखा तो दिव्या मौसी मेरी बगल में बैठी मुझे hi निहार रही थी .

अमित : मौसी आप

मैं उठने लगा तो मौसी ने मुझे उठने नहीं दिया.

दिव्या : लेते रहो , थक गए हो न आज बहुत? लाओ मैं तुम्हारा सर दबा देती हूँ.

अमित : अरे नहीं ऐसी कोई बात नहीं है मौसी . थक तो आप भी गयी होंगी . आप आराम कीजिये

दिव्या : मैं खान थक गयी . मैंने क्या किया है भला . सारा काम तो तुम hi कर रहे थे भाग भाग कर . आज इतने सैलून बाद मैं अपने बेटे क पास आयी हूँ उसके सबसे खास दिन पर . थोड़ा सा प्यार तो कर लेने दे मुझे .

अमित : मौसी !!!! मैंने कितने साल इंतज़ार किया है आपके प्यार क लिए मैं बता नहीं सकता .

दिव्या : मुझे माफ़ कर दे मेरे बेटे , अपनी नासमझी और गुस्से ने मुझे मेरा फ़र्ज़ hi भुला दिया था. पर अब ऐसा नहीं होगा कभी . अब मैं तुझसे दूर नहीं रहूंगी. तू मेरा बीटा है. मैं तुझे बहुत प्यार दूंगी. इतने सैलून तक जो तुम्हे कमी महसूस हुई वो सब दूर कर दूंगी.

मौसी फिर से भावुक हो गयी थी और मैं भी. आज मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं अपनी माँ की गॉड में hi सर रख कर लेता हुआ हूँ. मौसी प्यार भरी बातें करती हुई मेरा सर से होती रही और पता hi नहीं चला कब मेरी आँख लग गयी.



उधर ऋतू सिंह आज दिन भर अपने भरोसे मंद ऑफिसर्स क साथ गुप्त मीटिंग में लगी रही आने वाले कल की तयारी करने में. कल क लिए सब सेट कर लिया गया था. 10 - 10 की 2 टीम बनायीं गयी थी जो भेष बदल कर उस जगह क आसपास रहने वाली थी जहाँ उस लड़की ने ऋतू को आने का कहा था . पर मुश्किल ये थी क वो जगह शहर क बहार थी जहाँ कोई आबादी नहीं थी . जिस वजह से वहां पर उन लोगों का रुकना आसानी से किसी की भी नज़र में आ सकता था . ये सब बिना किसी की नज़र में आये करना था . क्यूंकि वहां का प्रशासन नारायण दास क साथ मिला हुआ था. इस लिए ऋतू कोई भी रिस्क लेना नहीं चाहती थी. कैसे भी कर क ऋतू अब नारायण दास को कानून क शिकंजे में लेना चाहती थी . आज अमित का बर्थडे था और ऋतू उससे मिलना भी चाहती थी मगर इस काम की वजह से वो जा नहीं पायी . फ़ोन पर hi कुछ देर क लिए बात ज़रूर की थी. और जल्दी hi उसने अमित से मिलने का भी कहा था एक खुश खबरि क साथ. ऋतू नारायण दास को पकड़ कर इसे अमित को जन्मदिन क तोहफे क रूप में देना चाहती थी . मगर वहां कल क्या होने वाला था ये किसी को अंदाज़ा hi नहीं था . इस बार चल नारायण दस् ने खेली थी और ज़ाहिर था क सभी पत्ते उसके हाथ में थे . क्यूंकि खेल भी उसका था और इलाज भी उसका .
 
अपडेट 227



दिव्या कसमसाती हुई आनंद सागर में डूबती जा रही थी . इस अलौकिक सुख की अनुभूति में उसकी ऑंखें बंद हो चुकी थी और वो खुद hi अमित का सर अपनी छाती पर दबा रही थी जो इस वक़्त दिव्या की एक चुकी को मुँह के दबाये चूस रहा था और दूसरी को ज़ोर से मसल रहा था . दिव्या क मुँह से आनंद भरी कामुक सिसकियों क इलावा और कुछ नहीं निकल रहा था . दिव्या क जिस्म पर एक भी कपडा नहीं था और न hi अमित क जिस्म पर कोई कपडा बचा था . दिव्या अमित को फुल सपोर्ट कर रही थी. उसका मन छह रहा था क जल्दी से अमित उसकी बहती हुई होनी में अपना लैंड दाल कर उसकी बरसों की तड़प मिटा दे . मगर अमित कब से उसके बूब्स hi चूसने में खा हुआ था . दिव्या ने अमित को पलट कर अपने नीचे किया और खुद उसके ऊपर आ कर अपने बूब्स अमित क मुँह में डाले हुए अमित क लैंड पर बैठ कर उसे अंदर लेने की कोशिश करने लगी. मगर उसका लैंड था क अंदर जाने का नाम hi नहीं ले रहा था . दिव्या का खुद पर काबू ख़तम हो गया था और लैंड को अंदर लेने से पहले hi उसकी योनि का बांध टूट गया और वो पानी बहाने लगी . दिव्या बहुत ज़ोर ज़ोर से साँस ले रही थी. जब योनि में से पानी निकल गया और साँसे कुछ नार्मल हुई तो दिव्या ने आँखें खोल कर देखा तो वो शर्म से पानी पानी हो गयी . उसको एक चुकी अमित क होंठों पर hi थी . जैसा की वो सपने में देख रही थी . मगर यहाँ अमित सो रहा था बिलकुल वैसे hi जैसा वो दिव्या द्वारा मालिश करने से सो गया था . और दिव्या भी उसे देखते देखते जाने कब नींद की आगोश में चली गयी थी. नींद में hi वो अमित क ऊपर झुक गयी थी जिस वजह से उसके स्तन अमित क चेहरे पर आ गए थे और उसकी एक चुकी अमित क होंठों पर आ लगी थी जिसे दिव्या नींद में hi ख्वाब देखती उसके मुँह में देने की कोशिश कर रही थी. ये तो ाचा हुआ क अमित की आंख नहीं खुली थी वर्ण दिव्या क लिए मुश्किल होता उसका सामना करना पर फ़िलहाल उसकी छूट जिस तरह गीली हो चुकी थी वो भी उसके लिए मुश्किल hi था . दिव्या ने थोड़ा पीछे हैट ते हुए अपनी साडी का पल्लू ठीक किया और धीरे से बिस्तर से नीचे उतर गयी ताकि अमित की नींद डिस्टर्ब न हो . मगर कमरे से जाने से पहले वो अमित को एक बार फिर प्यार से देखने लगी.

दिव्या : मने में ) कितना प्यारा लग रहा है सोते हुए , मेरी नींद उदा कर खुद सो रहा है. पता नहीं ये सब क्या होने लगता है मुझे जब भी ये पास होता है . मैं खुद पर काबू क्यों नहीं रख प् रही हूँ . दामिनी ये सब तेरी वजह से hi हो रहा है. तू hi मुझे इसके करीब ला रही है. समझ नहीं अत ये ठीक हो रहा है या गलत . अगर किसी को पता चला तो वो क्या कहेगा ? मगर अब मेरा दिल भी तो इससे दूर नहीं रह प् रहा है .

खुद क विचारों में खोयी दिव्या एक बार फिर अमित को प्यार से निहारती उसकी तरफ झुकी और उसका माथा चूमने क बाद गाल चूमने लगी पर उसके होंठ अमित क होंठों से जा लगे . जैसे दिल ने उसकी सोच पर पूरी तरह काबू कर लिया था और वो बस प्यार से उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर ऑंखें बंद किये बस इस एहसास को जी रही थी . तभी बहार किसी आवाज़ से वो हड़बड़ा कर पीछे हटी और जल्दी से कमरे से बहार निकल कर अपने कमरे की तरफ बढ़ गयी. सुबह होने में अभी कुछ वक़्त बाकि था इस लिए अँधेरा hi था . दिव्या जल्दी से पहले बाथरूम में गयी और अपनी गीली पेंटी उतर कर अपनी छूट को साफ करने लगी . उसके बाद दिव्या अपने कमरे में जा कर बीएड पर लेट गयी . जहाँ राधा पहले hi सो रही थी .

सुबह होते hi आदत अनुसार मैं जल्दी उठ गया. रत बहुत अछि नींद आयी थी और ऐसा लग रहा था जैसे मेरी माँ मेरे साथ थी रत भर . होता भी क्यों न , दिव्या मौसी ने अपनी गॉड में सर रख कर जो प्यार से मुझे सुलाया था अपनी ममता की छाओं में . मेरा दिल छह रहा था मैं फिर से सो जॉन इस लिए मैं दोबारा से आंख मूँद लेट गया और उस एहसास को फिर से महसूस करने की कोशिश करने लगा . अभी कुछ hi सेकण्ड्स हुए थे क मेरे कमरे का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आयी .

निधि : अभी तक सो रहे हो ? यद् है न हमें जाना है ?

निधि दीदी की आवाज़ सुन कर मैं न चाहते हुए भी उठ गया . निधि दीदी भी अब तक मेरे करीब आ चुकी थी. मैंने देखा तो निधि दीदी की हालत से लग रहा था उठ कर सीधा मेरे पास hi आ गयी हैं. क्यूंकि वो फ्रेश नहीं लग रही थी .

अमित : गुड मॉर्निंग दीदी , मैं उठ तो गया था बस ऑंखें बंद कर क लेता हुआ था . क्या हमें अभी निकलना है ?

निधि : गुड मॉर्निंग, हाँ हमें अभी निकलना है. जल्दी से नाहा कर तैयार हो जाओ. तब तक मैं भी तैयार हो जाउंगी. पहले हमें शहर जाना है वहां से सब साथ में चलेंगे . सफर 3-4 घंटे का है इस लिए जल्दी निकलना पड़ेगा . चलो अब जल्दी से तैयार हो जाओ और हाँ नए कोड़े पहन लेना . तुम कहो तो मैं निकल दूँ? वैसे सब तुम्हारी अलमारी में hi रखे हैं. तुम्हारे सरे गिफ्ट खोल कर चेक कर लिए थे कल इन लड़कियों ने.

अमित : ठीक है दीदी मैं तैयार होता हूँ आप भी तैयार हो जाओ. वैसे आप तो बिना नहाये भी खूबसूरत hi दिखती हैं .

मेरी बात पर निधि दीदी शर्मा गयी. और मुझे देखती हुई शर्मा कर जल्दी से बहार निकल गयी. मैं भी सोचने लगा ये मैं क्या बोल गया. पर मैं भी क्या करता दीदी लग hi इतनी अछि हैं है थी क मुँह से निकल गया . मैं सर को झटक कर जल्दी से उठा और बाथरूम में घुस गया . नाहा कर जब मैंने कपडे चेक करने लगा तो हैरान हो गया . क्यूंकि ये वो hi कपडे थे जो कल मॉल में निधि दीदी और करिश्मा दीदी ने लिए थे . इसका मतलब करिश्मा दीदी मेरे लिए hi शॉपिंग कर रही थी कल . खैर मैंने उनमे से एक कपडे पहन लिए जो करिश्मा दीदी ने सेलेक्ट किये थे मोहित का कह कर . मैं तैयार हो कर बहार निकल तो निधि दीदी भी सामने से आ रही थी. दीदी बहुत खूबसूरत लग रही थी. बिना मेकअप क सिंपल से सूट में भी क़यामत . मैं उन्हें हो देख रहा था जब हमारी नज़रें मिली तो शर्मा कर उन्होंने नज़रें झुका ली.

निधि : ऐसे क्या देख रहे हो ?

अमित : आप कितनी अछि लग रही हैं दीदी बस यही देख रहा था .

निधि : अब चलें बाकि बातें गाड़ी में कर लेना . अगर इनमे से कोई उठ गया तो देर हो जाएगी .

दीदी की बात मानते हुए मैं उनके साथ नीचे आ गया . नीचे सब उठ चुके थे मगर अपने कमरों में थे . मां शायद बहार खेतों में चले गए थे . मैंने सोचा क जाने से पहले माँ से मिल लूँ . जैसे hi मैं माँ क कमरे की तरफ बढ़ा तो माँ किचन से बहार आती हुई नज़र आयी हाथ में दूध और चाय का कप पकडे हुए. मैंने माँ क पैन छुए तो उन्होंने भी आशीर्वाद दिया .

गौरी : मुझे पता था तुम लोग बिना कुछ कहते भागने की कोशिश करोगे . चलो ये चाय दूध पि को तुम दोनों और ये थोड़ा सा खा भी लो .

निधि : अरे ममी जी आप ने इतनी टेंशन क्यों ली हम तो शहर जा कर खा hi लेते . वहां अंकल आंटी हमारा वेट कर रहे होंगे .

गौरी : वो सब तो वहां जा कर होगा न. घर से क्या भूखे जायेंगे मेरे बचे . चलो जल्दी करो . और तू बैठ यहाँ ज़रा तेरी नज़र उतर दूँ, कितना प्यारा लग रहा है . कहीं कोई नज़र hi न लगा दे तुझे .

अमित : मुझे कौन नज़र लगाएगा माँ. आप ऐसे hi चिंता करती हो.

माँ किचन से मिर्ची ले आयी और मेरी नज़र उतरने लगी . ऐसे hi मैंने दूध और दीदी ने चाय ख़तम की . और साथ में हल्का फुल्का खा कर माँ से आशीर्वाद लेकर हम निकल पड़े दीदी की कार में . दीदी कार चलती हुई मुझे देखती और मुस्कुराती .

निधि : ममी जी सच कह रही थी . आज तुम बहुत अचे लग रहे हो इन कपड़ों में . कहीं कोई नज़र hi न लगा दे

अमित : आप भी न दीदी , इतना भी नहीं कुछ . मुझे किसी की नज़र नहीं लगने वाली और किसकी लगेगी नज़र भला .

निधि : किसी की भी लग सकती है. क्या पता मेरी hi लग जाये .

अमित : आपकी ? आपको नज़र मुझे कैसे लगेगी ? आप तो मेरी प्यारी दीदी हो. वैसे अगर ऐसा है तो माँ को आपकी भी नज़र उतरनी चाहिए थी. क्यूंकि आप भी आज बहुत खूबसूरत लग रही हैं. और क्या पता आपको मेरी नज़र लग जाये .

निधि : शरमाते हुए) तुम्हारी नज़र मुझे लगे इससे ाचा और क्या होगा .

अमित : क्या मतलब ?

निधि : कुछ नहीं .

ऐसे hi हम दोनों बातें करते हुए आधे घंटे में शहर पहुँच गए . अंकल आंटी क जब घर पहुंचे तो वो दोनों तैयार hi थे और नाश्ते की तयारी कर रहे थे . मैंने अंकल से आशीर्वाद लिया. आंटी शायद किचन में थी .

अंकल : जीते रहो , सही समय पर आये हो तुम दोनों , आओ आओ बैठो . करिश्मा भी आती hi होगी . तुम्हारी आंटी किचन में नाश्ता तैयार करवा रही है .

निधि ; मैं आंटी की हेल्प करती हूँ अंकल .

अंकल दीदी को रोकते रहे पर दीदी बिना सुने सीधा किचन में चली गयी.

अमित : अंकल मोहित नहीं चल रहा क्या ?

अंकल : नहीं उसे एक काम जाना पड़ेगा ऑफिस क , मैं तो यहाँ नहीं हूँगा इसी लिए अपनी जगह उसे भेज रहा हूँ. करिश्मा जा रही है हमारे साथ . लो वो भी आ गयी .

मैंने अंकल की बात सुन कर सीढ़ियों की तरफ देखा जहाँ से करिश्मा दीदी निचे उतर रही थी. ओने पीेछे ब्लैक गाउन में वो क़यामत hi लग रही थी. खुले बाल जो हवा क साथ हिल रहे थे और गोरा रंग जो काळा लिबास में और भी ज्यादा गोरा लग रहा था . फिगर इतना ज़बरदस्त क क्या कहने. ऊपर से गाउन में उनकी बॉडी की पूरी शेप दिखाई दे रही थी . उनको गौर से देखते हुए जब मेरी नज़र उनके चेहरे पर पड़ी तो वो मुझे hi देख रही थी. और नज़रें मिलते hi मैं हड़बड़ा गया जैसे मेरी चोरी पकड़ी गयी हो.

अंकल : गुड मॉर्निंग बीटा , आज तो सच में बहुत प्यारी लग रही है मेरी बेटी. ऐसे hi रहा करो हमेशा .

करिश्मा दीदी चलते हुए पास आयी और अंकल से गले लग कर मिली फिर मेरे करीब आयी .

करिश्मा : गुड मॉर्निंग अमित कैसे हो ?

अमित : मम मैं ठीक हूँ , आप कैसी हैं?

करिश्मा : तुम्हारे सामने hi हूँ. कैसी लग रही हूँ ?

‘ बहुत hi प्यारी लग रही है मेरी बेटी , और तुम खड़े क्यों हो ? चलो बैठो और जल्दी से नाश्ता कर लो ‘ किचन से आंटी और निधि दीदी हमारी तरफ hi आ रहे थे साथ में रानी भी थी . खाने की ट्रे टेबल पर रखने क बाद आंटी मुझसे और करिश्मा दीदी से मिली फिर निधि दीदी और करिश्मा दीदी आपस में बातें करते हुए साथ में बैठ गयी. हम सब ने नाश्ता किया और एक hi गाड़ी में निकल पड़े . इधर उधर की बातें करते हुए हम अनाथाश्रम पहुँच गए. जहाँ बहार से पता चल रहा था क अंदर ाचा खड़ा प्रोग्राम होने वाला है. ये आश्रम काफी बड़ा लग रहा था . जिसकी ईमारत 2 मंज़िल थी. बहार काफी गाड़ियां लगी हुई थी यानि क लोगों को आमंत्रित किया गया होगा . हमारे वहां पहुँचते hi जल्दी से गाडी का दरवाज़ा खोलने क लिए एक आदमी आगे आया जो शायद अंकल का कोई एम्प्लोयी hi था . वहीँ कुछ और भी जाने पहचाने चेहरे थे जिन्हे मैं पिछली बार मिला था अंकल क साथ hi. हम सब गाड़ियों से उतरे . अंकल में आंटी को करिश्मा दीदी और निधि क साथ गेट रूम में जाने को कहा और थोड़ा रेस्ट करने को कहा . लम्बे सफर क बाद उन्हें फ्रेश होने की ज़रूरत थी शायद . अंकल मेरे कंधे पर हाथ रखे मुझे एक तरफ बने ऑफिस में ले गए .

अंकल : ये है वो आश्रम जो तुम्हारे पिता जी ने अपनी म्हणत से खड़ा किया था. ये उनकी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा काम था शायद जो उन्हें बहुत ख़ुशी देता था . न जाने कितने hi अनाथ बच्चों को यहाँ सहारा मिला और वो अछि ज़िन्दगी जीने क काबिल बने. यहाँ अनाथ बच्चों क लिए सिर्फ घर hi नहीं बल्कि उनकी शिक्षा और ज़िन्दगी में कुछ बनने क लिए उन्हें काम धंधे की भी सिखाई दी जाती है. इसको चलने वाले ट्रस्ट का ट्रस्टी उन्होंने मुझे बनाया था इस लिए तब से अब तक मैं hi इसे देख रहा हूँ और अब आगे तुम्हे ये सब देखना है. मगर एक बात का ख्याल रखना , जब तक सही समय नहीं आ जाता तब तक तुम ये बात किसी को नहीं बताओगे क तुम पवन क बेटे हो .

अमित : पर ऐसा क्यों अंकल ?

अंकल : इसकी वजह मत पूछो बस वो करो जो मैंने कहा है. सॉरी बीटा पर ये ज़रूरी है. अभी तुम फ्रेश हो जाओ फिर हम चलते हैं फक्शन में. आज उन बच्चों को सम्मानित किया जायेगा हो पड़े में ाचा कर रहे हैं . साथ hi यहाँ शहर क कुछ बड़े लोग और वो लोग भी होंगे जो यहाँ से निकल कर आगे बढ़े हैं.

तभी ऑफिस में एक आदमी आया जो यहाँ का काम काज संभालता था . अंकल उससे मिले और मुझे भी मिलाया.

अंकल : आइये रमेश जी कैसे हैं आप ?

रमेश : भगवन की कृपा है भाई साहब. आप कैसे हैं ?

अंकल : मैं भी ाचा हूँ. और बताइये कैसे चल रहा है सब .

रमेश : सब बढ़िया चल रहा है . पवन बाबू क लगाए हुए इस बाग़ से कितने फूल निकल कर आज अपनी खुशबु से समाज को महका रहे हैं ये तो सब जानते हैं. बस कमी है तो इस बात की क वो हमारे बीच नहीं हैं.

अंकल : ये तो अपने बिलकुल सही कहा रमेश जी . काश वो हमारे बीच होता पर चिंता मत करो वो जहाँ भी होगा खुश होगा . और इस वक़्त भी वो हमारे साथ मौजूद है .

ये बात अंकल ने मेरी तरफ देखते हुए कही थी . वो आदमी भी मेरी तरफ देख रहा था .

रमेश : आप ठीक कह रहे हैं. वो हमेशा हमारे साथ hi रहेंगे. वैसे ये कौन है? इनको देख कर ऐसे लग रहा है जैसे ...

अंकल : ये मेरा भतीजा है , मेरे बेटे जैसा hi है. आज पहली बार यहाँ आया है . सोचा इसे भी दिखा दूँ ये सब .

रमेश : भतीजा !! पर आपका तो कोई ...

अंकल : मेरा कोई नहीं तो क्या हुआ , ये मेरे दोस्त का बीटा है . हुआ न भतीजा hi .

रमेश : जो वो तो है , पर इनमे झलक पवन जी की hi दिखाई देती है. अगर उनका बीटा आज ज़िंदा होता तो शायद ऐसा हो दीखता .

अंकल : ाचा अब ज़रा बताइये क फंक्शन तो शुरू हो गया है न ?

रमेश : जी हाँ , आप थोड़ी देर में आ जाइये तब तक मैं आपके आने के बारे में बताता हूँ सबको .

इतना कह कर वो आदमी चला गया . मैं अंकल को hi देख रहा था और वो भी मेरे मन की बात समझ गए .

अंकल : ये रमेश है , तुम्हारे पापा ने hi इसे यहाँ नौकरी दी थी इस लिए ये काफी कुछ जनता है. मगर तुम ज़िंदा हो ये मेरी तरह ये भी नहीं जनता और न hi किसी और को पता है. भैया ने ये बात इस तरह छुपाई क किसी को भी कुछ नहीं पता .

अमित : क्या पापा की फॅमिली से यहाँ कोई नहीं अत और मेरी बुआ ?? वो कहाँ हैं अंकल ? मैं एक बार उनसे मिलना चाहता हूँ

अंकल : मिलना तो मैं भी चाहता हूँ बीटा पर पता नहीं कहाँ है. तेरे पापा क बाद मैंने कई बार उससे मिलने की कोशिश की थी पर तेरे पापा क भाइयों ने मिलने hi नहीं दिया . तुम चिंता मत करो मैं जल्द hi पता लगवाता हूँ. रही बात बाकि सब की तो वो शुरू शुरू में आये थे इस अनाथाश्रम को चलने नहीं बल्कि इसे बंद करवा कर इस ज़मीन को हथियाने. मगर ाचा हुआ क इसका ट्रस्टी मैं था वो लोग नहीं. खैर वो सब छोडो बस इतना यद् रखना क किसी को पता न चले क तुम कौन हो. अब जल्दी से फ्रेश हो जाओ मैं तुम्हारी आंटी और करिश्मा को ले कर अत हूँ .

इतना कह कर अंकल चले गए और मैं इन सब बातों क बारे में सोचने लगा . पता नहीं मेरे पापा क भाई कैसे लोग होंगे जो अंकल और बाबा मुझे उनसे मिलने नहीं देना चाहते . खैर वो लोग अचे तो हरगिज़ नहीं थे जैसा मैंने अब तक सुना था मगर एक बात थी जो जानना ज़रूरी थी मेरे लिए. और वो ये थी क भाई तो सौतेले थे मगर बहिन तो सगी थी. फिर आखिर मेरी बुआ मुझसे मिलने कभी क्यों नहीं आयी . और पापा इतना प्यार करते थे अपनी बहिन से तो आखिर क्या वजह रही होगी जो उन्होंने कभी मेरे बारे में जानने की कोशिश तक नहीं की . और बाबा ने तो बताया था क वो अंतिम बार पापा को देखने तक नहीं आयी. इन सब बातों का जवाब मैं जानना चाहता था और जवाब सिर्फ मेरी बुआ hi दे सकती थी . खैर मैं जल्दी से फ्रेश हुआ और तब तक अंकल आंटी निधि दीदी और करिश्मा दीदी को लेकर आ गए. ऑफिस और गेस्ट रूम स्टार्ट में हूँ थे और बचो क कमरे पीछे बानी बिल्डिंग में थे जो किसी स्कूल की तरह चौतरफा ईमारत थी बीच में बड़ा सा ग्राउंड . जैसे hi हम उस बीच क रस्ते से आगे बढ़े तो कुर्सियों पर लोग बैठे हुए थे. सामने एक बड़ी सी स्टेज लगी हुई थी जिस पर मेरे माता पिता की बड़ी तस्वीर लगी हुई थी और साथ में एक बुज़ुर्ग दम्पति की. माँ पापा की तस्वीर देख कर मेरी आँख भर आयी .

अंकल : खुद को सम्भालो बीटा , वो देख रहे हो तेरे दादा दादी की तस्वीर है . इन्हे तो जानते होंगे . अब चलो और चेहरे पर स्माइल रखो तुम्हे गर्व होना चाहिए अपने पापा क इस काम पर .

मैंने अपनी ऑंखें साफ की और हम लोगों क बीच में से आगे बढ़ने लगे . स्टेज से रमेश जी अनोउंसमेंट कर रहे थे अंकल क आने की इस लिए सब खड़े हो कर तालियां बजने लगे . बीच में से निकलते हुए लोग अंकल का अभिवादन कर रहे थे . हम चलते हुए स्टेज पर पहुंचे और कुर्सियों पर बैठ गए. फिर रमेश जी ने कुछ अनाथाश्रम क बारे में बताया और मेरे पिता जी क बारे में. उसके बाद एक एक कर क उन सब लोगों क बारे में बताने लगे जो यहाँ से निकल कर समाज में अपना नाम बनाने में कामयाब हुए थे . उन में से कुछ लोग यहाँ आये हुए भी थे जिनको स्टेज पर भी बुलाया गया. और फिर बच्चों को इनाम दिए गए . अंकल ने इनाम मेरे हाथों से दिलवाये . मुझे पापा पर गर्व हो रहा था . शहर क बहुत से बड़े लोग आये हुए थे इसमें गेस्ट क रूप में . अंकल ने भी पापा क बारे में बहुत कुछ बताया जिसे सुन कर मैं भावुक भी हो रहा था मगर खुद को संभाले हुए था. तभी मेरी नज़र एक शख्स पर पड़ी जो अभी अभी लोगों क पीछे से अंदर आया था और लास्ट में hi चेयर्स पर चुप चाप बैठ गया . जिसे देख कर मैंने पहचान लिया. उसके साथ कुछ और लोग भी थे जो उसके पीछे खड़े हो गए . मैं अपनी चेयर से उठा तो अंकल आंटी मेरी तरफ देखने लगे .

अंकल : कहाँ जा रहे हो बीटा ?

अमित : कहीं नहीं अंकल , मैं अभी अत हूँ.

इतना कह कर मैं नीचे उतर और एक तरफ से घूमता हुआ पीछे उस आदमी क पास पहुँच गया .

अमित : कैसे हो शेरा भाई ?

जी हाँ ये शेरा hi था जिसकी मैंने जान बचायी थी और फिर उसने भी मेरी जान बचायी थी . मेरी आवाज़ सुनते hi शेरा भाई ने पीछे मुद कर देखा और मुझे देखते hi वो अपनी जगह पर खड़े हो गए. उनके चेहरे पर भी ख़ुशी साफ नज़र आ रही थी. अगले hi पल उन्होंने मुझे गले से लगा लिया .

शेरा : अमित !!!! कैसे हो छोटे भाई ? बड़े दिनों बाद दर्शन हुए तुम्हारे. कब से तुमसे मिलना छह रहा था मगर मज़बूरी में आ नहीं प् रहा था . और आज देखो भगवन फिर से मिलवा दिया .

अमित : ये क्या शेरा भाई , आप की भला क्या मज़बूरी ? आप तो मिलने आ hi सकते थे . मैं तो पड़े की वजह से नहीं आ पाय पर आप ?

शेरा : है है है , अब क्या बताऊँ . तुम तो जानते hi हो मेरा पेशा कैसा है . वो सब छोडो . तुम यहाँ कैसे ?

अमित : मैं तो अपने अंकल क साथ आया हूँ. वो सामने बैठे हैं. राघव अंकल

शेरा : क्या सच में ? तुम उनके साथ आये हो वो तुम्हारे अंकल हैं . फिर तो तुम वाकई बहुत अचे परिवार से हो. मैं उनकी दिल से इज़्ज़त करता हूँ. वो जो तस्वीर देख रहे हो न तुम उनके दोस्त पवन बाबू. वो एक देवता इंसान थे. मुझ पर बहुत एहसान है उनका . मेरी ज़िन्दगी उन्हें की दी हुई है. मगर अफ़सोस क उनका एहसान चुकाने का मुझे तकदीर ने कोई मौका नहीं दिया .

अमित : एहसान ? कैसा एहसान ? ज़रा खुल कर बताएँगे ?

मैं शेरा भाई क मुँह से अपने पापा क बारे में सुन कर हैरान भी हुआ और खुश भी. इस लिए मन में जिज्ञासा जाग उठी क मैं उनसे अपने पापा क बारे में कुछ जान सकूँ .

शेरा : तुम मेरे छोटे भाई जैसे हो इस लिए तुम्हे ज़रूर बताऊंगा . बात तब की है जब मैं छोटा था . मेरे पिता मज़बूरी करते थे और एक हादसे में उनकी जान चली गयी . उसके बाद माँ लोगों क घरों में काम कर क जैसे तैसे गुज़ारा करने लगी . मगर इंसान क भेष में यहाँ भेड़िये बहुत हैं. एक शैतान ने मेरी माँ पर बुरी नज़र डाली और उसकी इज़्ज़त लूटने की कोशिश की. मैं तब बहुत छोटा था इस लिए कुछ कर नहीं प् रहा था. जब मैंने उस भेड़िये को रोकने की कोशिश की तो उसने मुझे ज़ोर से मारा. मैं एक hi वॉर में धराशायी हो गया. मेरी माँ उसके आगे गिगिडाती रही और मुझे बचने की कोशिश करने लगी पर वो माँ से बहुत ताकतवर था. जैसे तैसे कर क मेरी माँ ने मुझे उस दरिंदे से बचा कर भगा दिया . मैं मदद मांगने क लिए इधर उधर दौड़ रहा था मगर वहां कोई भी नहीं था. क्यूंकि हम शहर से बहार की तरफ एक पुराणी सी झोंपड़ी मेर रहते थे . आसपास कोई भी नहीं था . रत का वक़्त था इस लिए सड़क पर भी कोई भी नहीं था. मैं रीता हुआ इधर उधर भाग रहा था क अचानक एक गाड़ी से टकरा गया. मुझे चोट लग गयी थी पर मुझे अपनी माँ की चिंता थी . इस लिए अपनी चोट की परवाह किये बिना मैं फिर से उठा और उस गाड़ी वाले से मदद मांगने की कोशिश की. तब तक वो भला इंसान खुद hi मेरे लिए गाड़ी से निकल आया था . उसने मुझे हॉस्पिटल ले जाने की बात की तो मैंने उसे मेरी माँ को बचने को कहा . मुझसे बोलै नहीं जा रहा था . मेरी हालत को समझते हुए उस शख्स ने मुझे उठाया और मेरे साथ हमारी झोंपड़ी की तरफ दौड़ा. जब हम वहां पहुंचे तब तक देर हो चुकी थी. झोंपड़ी में मेरी माँ ज़मीन पर गिरी तड़प रही थी. उसके पेट से खून निकल रहा था . अपनी इज़्ज़त बचने क लिए माँ ने खुद hi अपना पेट चीयर लिया था चाकू से. डैम तोड़ती हुई मेरी माँ ने मुझे देखा और अपने गले से लगा लिया . मेरी माँ को मरते वक़्त भी मेरी चिंता थी . तब उस भले आदमी ने मेरी माँ को वचन दिया क वो मेरी देखभाल करेंगे . इतने में मेरी माँ ने डैम तोड़ दिया . फिर उस आदमी ने मेरी माँ का अंतिम संस्कार करवाया और मुझे अपने साथ ले गया . उनकी बीवी भी एक देवी थी . दोनों ने मुझे अपने बचे की तरह रखा और धीरे धीरे जब वो भला इंसान एक बड़ा इंसान बन गया तो उसने मेरे जैसे अनाथ बच्चों को सहारा देने क लिए इस घर का निर्माण करवाया . वो शख्स और कोई नहीं हमारे पवन बाबू थे . और उनकी देवी जैसी पत्नी दामिनी. जिसने मेरे जैसे अनाथ बच्चों को माँ का प्यार दिया . लोगों क लिए भले hi ये अनाथाश्रम है पर मेरे लिए घर . फिर एक दिन अचानक वो दोनों ये दुनिया छोड़ कर चले गए . बिना कुछ बताये बिना आखिरी बार मिले. एक बार फिर से हम अनाथ बच्चों को अनाथ कर क .

ये सब बताते हुए शेरा भाई की ऑंखें भी भर आयी थी और मेरी भी. अपने पापा क बारे में ये सुन कर मुझे और भी ज्यादा फख्र महसूस हो रहा था .

शेरा : उसके बाद राघव जी ने इस जगह की देखभाल करनी शुरू कर दी. वो भी एक अचे इंसान हैं. फिर एक दिन मुझे वो शैतान नज़र आया जिसने मेरी माँ की इज़्ज़त लूटने की कोशिश की थी. तब तक मैं इतना काबिल तो हो चूका था क मैं बदला ले सकूँ . और मैंने बदला ले लिया . उस भेड़िये को अपने हाथों से मर कर . उसके बाद फिर मैं कभी यहाँ वापिस नहीं लौटा और जुर्म की दुनिया में चला गया . मगर आज भी इस जगह पर अत हूँ तो वो सब यद् आ जाता है. काश क ऊपर वाला एक मौका दे देता उस भले इंसान क लिए कुछ करने का. उनके लिए तो कुछ कर नहीं पाया पर अपने इन अनाथ भाइयों क लिए जो कर सकता हूँ वो करता हूँ. तुम्हे क्या हुआ ? तुम्हारी ऑंखें क्यों भर आयीं?

अमित : कुछ नहीं शेरा भैया , आपकी कहानी सुन कर ....

शेरा : वो सब छोडो , आज इतने दिनों बाद मिले हो तो मेरे साथ चलो . आज कुछ खातिर दरी का मौका दो .

अमित : खातिरदारी की कोई ज़रूरत नहीं है भाई , आप कुछ और बताइये न उनके बारे में .

शेरा : उनके बारे में तो क्या hi बताऊँ , बताते बताते रत हो जाएगी.

‘ तो आखिर तुम आ hi गए , देर से hi सही आये तो सही ‘ ये आवाज़ सुन कर मैं और शेरा भाई दोनों ने पीछे मुद कर देखा तो सामने ादव. सुमन कड़ी थी.

सुमन : कैसे हो ? और आप कैसे हैं शेरा भाई ?

अमित : अरे मैडम आप यहाँ ? मैं तो ठीक हूँ . पर आप तो कह रही थी मैं आती रहती हूँ तुम्हारे शहर फिर आप तो आयी नहीं एक बार भी.

सुमन : वो क्या है न एक केस क सिलसिले में यहीं इतना उलझ गयी थी क मौका hi नहीं मिला . पर शुक्र है तुम से मुलाक़ात हो hi गयी. एक उम्मीद क शायद तुम यहाँ आओगे . इसी लिए यहाँ चली आयी और देखा मेरा आना सफल हो गया .

शेरा : वैसे किस्मत तो आज मेरी अछि है, आज आप दोनों मेरे घर आये हैं. अब मैं ऐसे नहीं जाने दूंगा आपको . चलिए कहीं बैठ कर बातें करते हैं.

सुमन : ज़रूर , मैं भी कब से मिलना चाहती थी जनाब से . इन फैक्ट मैंने तो पापा को भी बताया था तुम्हारे बारे में और वो भी मिलना चाहते हैं तुमसे .

अमित : शेरा भाई मैं अंकल से पूछ कर अत हूँ . वो कहेंगे तभी जा सकूंगा आपके साथ .

शेरा : हाँ हाँ ज़रूर , तुम जाओ मैं यहीं वेट कर रहा हूँ.

मैं अंकल से पूछने क लिए जाने लगा तो सुमन भी मेरे साथ चली आयी . और स्टेज पर जैसे hi हम पहुंचे तो सुमन करिश्मा दीदी को देख कर ख़ुशी से उछाल पड़ी क्यूंकि वो दोनों अछि तरह एक दूसरे को जानती थी. वो दोनों बातें कर रही थी तो मैंने अंकल से इजाज़त मांगी.

अमित : अंकल मैं ज़रा थोड़ी देर क लिए अपने दोस्त क साथ जा रहा हूँ.

अंकल : तुम्हारा दोस्त वो भी यहाँ ?

अमित : हाँ वो पिछली बार एक दोस्त बन गया था . किस्मत से वो भी यहाँ आया हुआ है तो थोड़ी देर उसके साथ बैठ कर बातें करने को मन हो रहा है. अगर आप इजाज़त दें तो

अंकल : ठीक है पर अपना ख्याल रखना और ज्यादा देर मत करना .

अंकल से इजाज़त लेकर मैं जल्दी से नीचे उतर आया . सुमन तो करिश्मा दीदी क साथ बातों में hi खो गयी थी. इधर मैं फिर से शेरा क पास आ गया और वो मुझे अपने साथ गाड़ी में बिठा कर चल पड़ा. उसके साथ 3 गाड़ियां और थी जो उसका गैंग था . शेरा मुझे अपने ठिकाने पर ले आया . और अपने बारे में बताने लगा क किस तरह वो इस दुनिया में आया और एक डॉन बन गया. उसने ये भी बताया क उसने कभी किसी मजलूम क साथ अन्याय नहीं होने दिया और न hi किया है. स्पेशलय वो औरतों की बहुत इज़्ज़त करता है क्यूंकि उसकी आँखों क सामने उसकी माँ की इज़्ज़त लूटने की कोशिश की गयी थी इस लिए वो हर उस शख्स में उसी शैतान को देखता है जिसने उसकी माँ क साथ गलत करने की कोशिश की थी. शेरा मुझे अपनी वो छोटी छोटी यादें बताता रहा जो वक़्त उसने माँ पिता जी क साथ बिताया था. मेरा दिल तो छह रहा था क मैं अपने बारे में बता दूँ पर अंकल की कही बात की वजह से मैं चुप रहा .

अमित : ाचा शेरा भाई अब तो आप मिलते रहेंगे न मुझसे ? या अब भी आप बहाना बनाएंगे ?

शेरा : सच कहूं भाई तो मैं खुद शर्मिंदा हूँ क तुमसे मिलने वहां नहीं आ सका . और इसकी वजह है तुम्हारे शहर की सप साहिबा .

अमित : मतलब ?

शेरा : शेरा ाचों क साथ ाचा और बुरे लोगों क साथ बुरा है . मैं पुलिस से नहीं डरता और न hi मौत से. पर जो ईमानदारी से अपना कम लेते हैं मैं उनके रस्ते में नहीं अत . तुम्हारे शहर की सप ऋतू सिंह एक ईमानदार और इंसाफ पसंद अफसर है . उनके साथ मेरा एना सामना न हो बस इसी लिए वहां नहीं आया अब तक . वर्ण शेरा को कोई ताकत रोक नहीं सकती.

अमित : तो आप उनकी वजह से वहां नहीं आते . आपकी ये टेंशन तो मैं हल कर सकता हूँ.

शेरा : हैरान होते हुए ) वो कैसे ?

अमित : वो ऐसे

इतना कह कर मैंने अपना मोबाइल निकला और ऋतू को कॉल लगा दी . दूसरी बेल्ल पर hi ऋतू ने कॉल अटेंड की.

ऋतू : hello ( ऋतू इस वक़्त गाड़ी में थी और साथ में 2 पुलिस वाले . सिविल ड्रेस में ये लोग आज उस लड़की से मिलने जा रहे थे. बाकि की टीम पहले hi वहां पहुँच चुकी थी . ऋतू ने फ़ोन तो अटेंड कर लिया था मगर साथ में 2 लोग होने की वजह से वो ज़रा संभल कर बात कर रही थी वर्ण अब तक वो प्यार से कुछ न कुछ कह देती)

अमित : hello कैसी हैं मैडम आप

ऋतू : ी ऍम फाइन , तुम कैसे हो .

अमित : मैं भी ाचा हूँ. क्या आप अभी बात कर सकती हैं ?

ऋतू : हाँ हाँ , बोलो ( वैसे तो इस वक़्त ऋतू किसी और क ोहोने अटेंड नहीं कर रही थी पर अमित को कैसे छोड़ सकती थी जिसे वो अपना दिल से बैठी थी. और कहीं न कहीं वो खुद भी अमित को इस ऑपरेशन क बारे कुछ न बताने की वजह से परेशां भी थी )

अमित : आपसे मुझे एक ज़रूरी बात करनी है. आप इस वक़्त कहाँ हैं ?

ऋतू : मैं एक ज़रूरी काम से क्सक्सक्सक्स शहर जा रही हूँ . क्या बात है ? कौन सा ज़रूरी काम था ?

अमित : क्या आप सच में क्सक्सक्सक्स शहर आ रही हैं ? That’s ग्रेट मैं भी यहीं हूँ . आप ने कहाँ आना है और कब तक पहुंचेंगी यहां?

ऋतू : शॉकेड ) क्या ? तुम भी उसी शहर में हो ? मगर तुम वहां क्या कर रहे हो?

अमित : मैं अपने अंकल साथ यहाँ आया था एक फंक्शन में. पर आपने नहीं बताया आप कहाँ आ रही हैं ?

ऋतू : वो मुझे किसी से ज़रूरी मिलना है एक केस क सिलसिले में . शहर से बहार पुराने मंदिर की तरफ. ( वैसे तो ये एक कॉन्फिडेंटिअल बात थी पर पता नहीं कैसे ऋतू क मुँह से निकल गयी )

अमित : कब तक फ्री होंगी आप? वैसे तो सोचा था फ़ोन पर hi बात कर लूँ पर आप यहाँ आ hi रही हैं तो डायरेक्ट मिल कर hi बात करूँगा अब .

ऋतू : मैं एक घंटे में पहुँचने वाली हूँ . बस उसके बाद जैसे hi फ्री होती हूँ तुम्हे फ़ोन ज़रूर करुँगी .

अमित : ाचा तो ठीक है . मैं आपके फ़ोन का इंतज़ार करूँगा . गुड लक आप जिस काम क लिए जा रही हैं वो काम पूरा हो.

ऋतू : थैंक यू वैरी मच .

इसके बाद मैंने फ़ोन काट दिया .शेरा मेरी तरफ हैरानी से देख रहा था .

शेरा : अभी तुम किस्से बात कर रहे थे और तुमने पुराने मंदिर का ज़िकर क्यों किया ?

अमित : भाई आपका hi काम कर रहा था . आप ने कहा न आप ऋतू मैडम की वजह से वहां नहीं आते . तो मैंने ऋतू मैडम से hi बात कर रहा था. वो मेरी मैडम की खास दोस्त हैं और मुझे भी अछि तरह जानती हैं. मैं उनसे बात करूँगा और आपके इतने कोई न कोई रास्ता निकल आएगा . वो बहुत अछि हैं.

शेरा : सच में ? पर वो यहाँ क्यों आ रही हैं और वो भी पुराने मंदिर क पास ?

अमित : वो किसी काम से आ रही हैं . कोई केस क सिलसिले में . पर आप पुराने मंदिर क नाम से इतना हैरान क्यों हो रहे हैं .

शेरा : इस लिए क वो इलाका खतरनाक है. उस तरफ पुलिस भी नहीं जाती . शहर से बहार एक सुनसान इलाका है. उस तरफ न कोई रहता है न कोई अत जाता है. फिर ऐसे में वो वहां क्या करने जा रही हैं ? कहीं कोई गड़बड़ ......

अमित : क्या सच में ??? पर वो तो एक पुलिस अफसर हैं . वो अकेली तो कहीं जातो नहीं. अगर वो यहाँ आ रही हैं तो ज़रूर कोई खास वजह hi होगी.



शेरा भाई ने जो बताया था उसके बाद एक बार मुझे भी चिंता होने लगी पर फॉर सोचा क वो बहुत स्ट्रांग हैं और उनकी बातों से इतना तो मैं समझ hi गया था क वो अकेली नहीं हैं इस लिए मैं थोड़ा निश्चिन्त भी था .
 
अपडेट 228



ऋतू अपनी टीम क साथ पुराने मंदिर क पास पहुँच चुकी थी . उसकी टीम पहले hi यहाँ मौजूद थी. कोई मैसूर क रूप में कोई भिखारी क रूम में कोई ट्रक ड्राइवर कोई टैक्सी ड्राइवर बन कर . ऋतू क साथ आये 2 लोग भी कुछ पहले उतर गए और ऋतू खुद गाडी चलते हुए मंदिर क करीब पहुंची. दिसंबर क ठन्डे महीने में दिन वैसे hi छोटे होते हैं और अँधेरा जल्दी हो जाता है. यहाँ भी आलम कुछ ऐसा hi था . शाम हो रही थी और अँधेरा अपना साम्राज्य बिखेर रहा था . ऋतू दूर से hi धीरे धीरे आगे बढ़ती मंदिर क आसपास गौर से देख रही थी. मगर वहां ज्यादा कुछ नहीं था . फूल और पार्षद वाली 4-5 दुकाने कुछ मुठी भर लोग जो मंदिर में hi आये थे शायद. मगर अभी तक ऋतू को वो लड़की नज़र नहीं आयी थी. उसने शाम को 5 बजे का hi टाइम दिया था आज सुबह hi फ़ोन पर . ऋतू मंदिर क सामने गाड़ी कड़ी कर क कड़ी हो गयी. उसने तभी वहां एक टैक्सी और एक ट्रक आकर रुके जिनके से ड्राइवर और उनके साथ सवारी और क्लीनर क रूप में 3 लोग और उतरे जो ऋतू क hi साथी थे . ऋतू भी मुस्तैद थी और अपनी हूँ को एक बार फिर से चेक कर अपनी कमर में फसा लिया T-shirt क नीचे जीन्स में . आज वो जीन्स इसी लिए पहन कर आयी थी क अगर कोई गड़बड़ हो तो वो एक्शन मोड क लिए तैयार रहे .

ऋतू अभी गाड़ी में इंतज़ार कर hi रही थी क एक लड़की छुपती छुपाती हुई अपना चेहरा ढके मंदिर की सीढ़ियों क पास रुकी और ऋतू की कार की तरफ देखने लगी. ऋतू की नज़र जब उस लड़की से मिली तो दोनों एक दूसरे को पहचान गयी. और वो लड़की ऋतू को अपने पीछे आने का इशारा कर क मंदिर क पिछली तरफ चली गयी. ऋतू क गाड़ी से निकलते hi उसकी टीम भी मुस्तैद हो गयी. मगर ऋतू क इशारे क बिना वो लोग हिल नहीं सकते थे जैसा क ऋतू का आर्डर था . 5 लोग अभी 2 गाड़ियों से आ चुके थे . और 4-5 लोग और पैदल चलते हुए मंदिर की तरफ भक्त बन कर आ रहे थे . जबकि कुछ लोग ट्रक क पीछे छिपे हुए थे . सब धीरे धीरे मंदिर क पास पहुँच गए और अपनी अपनी पोजीशन ले ली .

ऋतू : क्या तुम्ही वो लड़की हो ?

लड़की : क्या आप hi ऋतू सिंह हैं ?

ऋतू : हाँ मैं hi ऋतू हूँ. अब जल्दी से मुझे वो सुबूत दो .

‘ इतनी जल्दी भी क्या है मैडम , उतनी दूर चल कर आयी है तनिक इंतज़ार तो कर लीजिये . क्या हमें सेवा का मौका नहीं दीजियेगा ? ‘ ये आवाज़ किसी आदमी की थी. ऋतू एक डैम से पलटी तो उसके पीछे से 4-5 लोगों ने घेरा बना लिया था. ऋतू ने जल्दी से अपनी कमर में लगी पिस्तौल निकली .

ऋतू : यू बास्टर्ड , हैंड्स उप चुपचाप अपने आप को मेरे हवाले कर दो वर्ण तुम में से एक भी ज़िंदा नहीं बचेगा .

ऋतू की बात सुन कर वो सब हसने लगे जिससे ऋतू भी शॉकेड हो गयी. उन सब क हाथों में भी गन्स थी .

‘ है है है , देख बे कलुआ ी सोच रही है क ी हम का पकड़ रही है . ी का नहीं मालूम क ससुरी खुद हमर कब्जे में आयी बे करि ‘ वो बदमाश ढीठता से हस्ता हुआ जिस तरह से बात कर रहा था ऋतू भी घबरा गयी मगर ज़ाहिर न करते हुए रोअब से बोली .

ऋतू : हरामज़ादे बहुत हंसी आ रही है. अभी तुझे बताती हूँ क कौन किसके कब्जे में है . पाण्डेयययययय

‘ बुलाव बुलाव , बुलाव अपने खसम का ससुर की नातिन. हम भी देखत हैं क कौन साला हियँ आवे बे करि है है है ‘

ऋतू ने ज़ोर से पांडेय को आवाज़ दी थी जो इशारा था उसकी टीम क लिए मगर कोई नहीं आया शायद उन तक आवाज़ नहीं पहुँच पायी थी . इस लिए ऋतू ने फिर से ज़ोर से आवाज़ दी

ऋतू : पाण्डेयययय ,, श्रीवस्तववव ,,,, कहाँ हो सब लोग .

‘ है है है , का हुआ , कोनो बात नहीं सुनत रहा तुम्हरी . तुम्हार मुश्किल हम हल करात रही तनिक ठहरो . अबे ोये ,, ला ता ज़रा उन कबूतरों को , मैडम का दिल नहीं लगत रहा उनके बगैर है है है ‘

ऋतू का दिल अब किसी अनहोनी क दर से घबराने लगा था और वो खुद को बचने का वह रही थी. उसे समझ में आ गया था क वो जाल में फास गयी है. जिसका दर था आखिर वो हो गया था . तभी उस गुंडे क साथ ऋतू की पूरी टीम को हाथ ऊपर करवाए बन्दूक की नोक पर ऋतू क सामने ले आये . ये सब गुंडे वही लोग थे जो मंदिर क अंदर बहार भक्त बन कर और दुकानदार बन कर खड़े थे . ऋतू की चल आज फ़ैल हो गयी थी और वो बुरी तरह से जाल में फंस गयी थी स ऋतू ने अपनी टीम को इस तरह देखा तो आखरी कोशिश करते हुए अपने हाथ में पकड़ी गन का निशाना उस गुंडे पर लगते हुए उसे अपनी काबू में करने की कोशिश की .

‘ न न न , ऐसी गलती मत करियेगा मैडम. वर्ण आपके ये जो लल्लन ताप खड़े हैं . ी सब मरे जायेंगे और ीका जिम्मेदार और कोई नाही सिर्फ और सिर्फ आप गयी बे करि . अब चुप चाप ी तमाचा फेंक दिया और हमारे साथ चलो वर्ण ी सब ससुरे आज ऊपर की गारी पकड़ लेई बे करि ‘

ऋतू समझ गयी क अब वो कुछ नहीं कर सकती. इस लिए अपनी गन को नीचे कर लिया .

ऋतू : तुम जानते नहीं तुम लोग किस्से पन्गा ले रहे हो. बहुत पछताओगे, एक एक को चुन चुन क मरूंगी .

‘ है है है , सुना बे कलुआ ी ससुरी का कह रही है . ी का लग रहा है क ी हम का मारेगी है है है . अभी तुहार ले जाई क ऐसी खातिर करिबे हूँ क जिंदगी भर दोबारा ी गलत फेहमी न होइयेबे करि. चला बे डालो सब ससुरा को गाड़ी में . चलिए मैडम वर्ण आपका ी गोरा बदन मैला हो जायेगा हमरे गंदे हाथों से ‘ ऋतू अपने साथियों की जान बचने क लिए मजबूर हो गयी थी इस लिए चुपचाप उन गुंडों क साथ चल पड़ी. उसे पता था क अगर उसने बात नहीं मणि तो उसके साथी मरे जायेंगे जो सिर्फ और सिर्फ उसके आर्डर से hi यहाँ ए थे. और उन सब की ज़िम्मेदारी ऋतू क ऊपर थी. ऋतू क 20 साथियों क मुकाबले इन गुंडों की टीम दोगुनी थी . और सब हथियार बंद . ऋतू छह कर भी कुछ नहीं कर सकती थी. वो लोग ऋतू और उसके साथियों को पैदल hi बन्दूक की नोक पर आगे जंगल में ले जाने लगे . इसी बीच ऋतू का मोबाइल रिंग हुआ. ऋतू ने जल्दी से जाने से मोबाइल निकल कर बिना देखे उठा लिया मगर

ऋतू : हह hello ....

‘ ी साली फेंक ी का , हरामज़ादी फ़ोन पे बात करिबे करि. इहाँ तुहार फ़रिश्ते भी न ावत रही ‘ ऋतू क बात करने से पहले hi उसका मोबाइल उस गुंडे ने चीन कर तोड़ दिया और फेंक दिया .

लगभग 2 कम अंदर जा कर पेड़ों क पीछे छुपा एक गुप्त अड्डा था जो नारायण दस का गुप्त ठिकाना था . उसके काले कारनामो का ठिकाना . ऋतू आगे चल रही थी और वो लड़की भी उसके साथ थी . ऋतू समझ चुकी थी क वो लड़की उन गुंडों की hi साथी है इस लिए वो उसे गुस्से से देख रही थी और अपनी टीम को बचने क बारे में सोच रही थी. उस लड़की ने ऋतू से बात करने की कोशिश भी की पर ऋतू नहीं बोली . वो लड़की अपनी मज़बूरी का हवाला दे रही थी पर ऋतू इस वक़्त गुस्से में कुछ सुन्ना नहीं चाहती थी.

नारायण दास का ये ठिकाना अय्याशी का भी अड्डा था जहाँ वो अपने काळा कारनामों क साथियों क साथ मजलूम लड़कियों की इज़्ज़त लूट ता था . यहाँ पर भी 20 क करीब हथियार बंद लोग थे . ऋतू और उसकी टीम को जब इस फार्महाउस क अंदर लाया गया तो हॉल क बीचों बीच सब को खड़ा कर दिया गया. तब वो हत्ता कट्टा बदमाश जो ऋतू को धमका रहा था वो सीढ़ियां चढ़ कर ऊपर गया और कुछ hi पलों में उसके साथ नारायण दस एक कमरे से बहार निकला. ऋतू और उसकी टीम को कब्जे में देख कर वो कामिनी हंसी हसने लगा . जबकि ऋतू उसे देख कर गुस्से में आग बबूला हो गयी .

नारायण दास : है है है , तो आखिर आ hi गयी जंगली बिल्ली मेरे कब्जे में . बहुत अकड़ है न तुझ में . आज तेरी साडी अकड़ निकल क रख दूंगा .

ऋतू : ये तुझे बहुत मेहेंगा पड़ेगा कुत्ते. जानती तो मैं पहले से hi थी क इन सब गैर क़ानूनी कामों क पीछे तेरा hi हाथ है. पर सबूत नहीं थे. मैं तो तुझे कानून क हाथों सजा दिलाना चाहती थी पर लगता है तुझे मेरे हाथों hi मरना है .

नारायण दस : सीढ़ियों से नीचे एते हुए ) रस्सी जल गयी मगर बल नहीं गया. तुम्हारी ये hi ऐडा का तो मैं दीवाना हूँ साली. आज तेरी साड़ी अकड़ निकल दूंगा. बहुत गरमी है न तुझ में , आज तेरी गर्मी तेरी छूट से बाहर निकलूंगा और फिर तू मेरे कोठे की शान बनेगी .

ऋतू : हरामज़ादे , तेरा वो हाल करुँगी क मरने से पहले 100 बार मरने की भीख मांगेगा. तेरे पाप का घड़ा भर चूका है . आज तुझे कोई नहीं बचा सकता .

नारायण दस : लगता है तुझे अभी तक समझ नहीं आया क तू मेरे कब्जे में है न की मैं.

इतना कहते hi नारायण दास ने अपने गुंडे क हाथ से गन लेकर ऋतू क साथी पोलिसवाले को गोली मार्डी जो उसके कंधे पर लगी और वो कराहता हुआ नीचे गिर गया

नारायण दास : अब समझ आया क कौन किसके कब्जे में है.

ऋतू : हरामज़ादे मरना है तो मुझे मर इनको क्यों मर रहा है?

नारायण दस : तुम्हे ये बताने क लिए क यहाँ मेरी हुकूमत है इस लिए आवाज़ नीची रखो. ऐ पकड़ो साली को लगाओ इंजेक्शन .

नारायण दस का आर्डर मिलते hi दो लोगों ने ऋतू की को कास क पकड़ लिया और एक आदमी ने इंजेक्शन ऋतू की कलाई की नस में लगा दिया. ऋतू खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी पर उसकी एक न चली.

नारायण दस: है है है , अब दिखाना अपनी गर्मी. थोड़ी देर में तू खुद मुझसे कहेगी क मैं तेरी गर्मी को ठंडा करूँ. अब तू भीख मांगेगी मुझसे मेरे लैंड की और फिर तुझे अपने लैंड पर नचाउंगा मैं. ऐ ले जाओ इन सब को और बंद कर दो. अगर कोई होशियारी दिखने की कोशिश करे तो थोक देना . और इसे ले कर आओ मेरे कमरे में .

ऋतू खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी और गलियां दे रही थी मगर उसकी एक नहीं चल रही थी. 4 लोग उसे उठा कर नारायण दस क पीछे पीछे ऊपर उसके कमरे की तरफ चल दिए. बाकि सब पुलिस वालों को बन्दूक की नोक पर बहार लेजाकर एक बड़े कमरे में बंद कर दिया गया . ऋतू को नारायण दास क कमरे में ले जा कर बीएड पर दाल दिया गया और उसके हाथ बीएड क साथ बांध दिए गए . अब कमरे में ऋतू ऐ नारायण दस hi थे . नारायण दस ने अपने कपडे उतरे और शराब की बोतल खोल कर पेग बना कर पिने लगा. ऋतू लगातार चिल्ला रही थी और गलियां दे रही थी. मगर नारायण दस उसकी कोई बात नहीं सुन रहा था. उसे इंतज़ार था तो इंजेक्शन क असर होने का . धीरे धीरे ऋतू क खून में मिल कर दवा रंग दिखने लगी थी और उसकी गर्मी बढ़ती जा रही थी . उसके अंदर वासना की आग भड़कने लगी थी और उसके चुके खुद hi सख्त होते जा रहे थे . छूट में चीटियां रेंगने लगी थी . वो खुद को छुड़ाने क लिए अपनी टंगे पटक रही थी जबकि हाथ दोनों तरफ बंधे हुए थे . ऋतू आज पूरी तरह खुद को असहाये महसूस कर रही थी और उसे अपनी ज़िन्दगी बर्बाद होती नज़र आ रही थी. वो भगवन से दुआ मांग रही थी क किसी तरह वो इस दरिंदे से बच जाये .

नारायण दस आराम से शराब पि रहा था क्यूंकि उसे पता था जो इंजेक्शन ऋतू को उसने दिया है उसका असर होने में आधा घंटा लगेगा और फिर उसका असर बहुत देर तक रहने वाला था. ऋतू क साथ अपनी हवस पूरी करने क लिए वो खुद को तैयार कर रहा था .

नारायण दस : है है है , क्यों साली तुझे क्या लगा था क तू मुझ पर हाथ डालेगी और मैं देखता रहूँगा . आज तक किसी की हिम्मत नहीं हुई मेरे गिरेबान पे हाथ डालने की और तू मेरी हस्ती मिटने चली थी. तेरी वजह से मुझे मंत्री की कुर्सी नहीं मिल रही पर आज क बाद तू मेरी पालतू कुटिया बन कर रहेगी. मेरा बिस्तर गरम करेगी. मेरे लैंड पर नाचेगी तू. नहीं तो तुझे कोठे पर बिठा दूंगा और तेरे ऊपर शहर क सरे कुत्ते चढ़ा दूंगा . तुझे लगा था क तू मेरे साथ खेल खेल रही है हाँ ? ये खेल तू नहीं मैं खेल रहा था. तुझे यहाँ तक मैं hi लेकर आया था. बहुत होशियार बन रही थी अपने लोगों को पहले hi भेज दिया भेस बदल कर . है है है , इतना भी नहीं जानती क ये इलाका मेरा है और मेरे दर से इधर कोई परिंदा भी नहीं मरता तो तेरे आदमी यहां कैसे होशियारी दिखा जाते. आज तक 50 से ज्यादा मर्डर किये हैं मैंने. आज तक कोई पुलिस वाला मुझ तक पहुँच नहीं सका और तू ... हॉट साली. मेरे कोठे बंद करवाने चली थी तू ?? अब तू hi मेरे कोठे की रौनक बनेगी. थोड़ी देर में तू खुद मुझसे भीख मांगेगी क मैं तेरी छूट को फाड़ कर तुझे रंडी बना दूँ. है है है .

ऋतू : ये तेरी ज़िन्दगी की आखरी गलती है हरामज़ादे . तेरा नमी निशान तक मिटा दूंगी.

नारायण दस् : चुप साली चैनल , बहुत गर्मी है न तुझ में . आज तेरी गर्मी को अछि तरह से ठंडा करूँगा .

इतना बोल कर नारायण दस बची हुई शराब हलक से नीचे उतर कर उठा और अपने कपडे उतरने लगा . ये देख कर ऋतू खुद को छुड़ाने की फिर से असफल कोशिश करने लगी . अब तक दवा क असर से ऋतू का बदन भी जलने लगा था . मगर वो खुद को अभी भी काबू करने की कोशिश कर रही थी. नारायण दस अपने कपडे उतर कर सिर्फ अंडरवियर में hi ऋतू क करीब आ गया और उसे सर से पाऊँ तक देखने लगा. टाइट जीन्स और T-shirt में उसका कैसा हुआ बदन और भी ज़बरदस्त दिख रहा था . जिसे देख कर नारायण दास क अंदर हवसी भेड़िया लार टपकने लगा . ऋतू को जब पहली बार उसने यूनिफार्म में देखा था तब से hi वो उसे पाना चाहता था . और आज आखिर वो वक़्त आ hi गया था जब वो अपने गंदे इरादे पूरे करने वाला था . ऋतू क बगल में बैठते hi नारायण दस ने ऋतू क गोर हसीं चेहरे पर उँगलियों से स्पर्श करते हुए उसकी कोमल त्वचा को फील किया .

नारायण दस : आअह्ह्ह्ह साली क्या गरम मॉल है तू.

नारायण दास एक डैम से ऋतू पर झुका और उसके चेहरे को चूमने लगा . ऋतू अपना चेहरा उससे छुड़ाने की कोशिश करने लगी . ऋतू उसे गलियां बोल रही थी मगर नारायण दास तो कुछ सुन hi नहीं रहा था. वो तो बस इस अप्सरा क हुस्न को पीने की कोशिश कर रहा था और उसे गरम करने की . अगले hi पल उसने ऋतू क ठोस स्तनों पर अपने हाथ रख कर उन्हें कास क मसलना शुरू कर दिया. ऋतू ने खुद को बचने क लिए अपने पाऊँ इकठ्ठा करके ज़ोर दर प्रहार किया जिससे नरम दस् बीएड से नीचे जा गिरा .

नारायण दस : हरामज़ादी लगता है तू ऐसे नहीं मानेगी .

गुस्से से तिलमिलाए मरण दस ने इधर उधर देखा तो उसे एक लाठर की बेल्ट नज़र आयी . उसने जल्दी से वो बेल्ट उठायी और ऋतू की टांगों पर मरने लगा . ऋतू खुद को बचने क लिए पाऊँ सिकोड़ रही थी मगर नारायण दास गुस्से में मरता गया . ऋतू दर्द से कराह रही थी मगर नारायण दास तो जल्लाद बन गया था . कुछ देर तक ऋतू को पीटने क बाद उसने बेल्ट एक तरफ दे को और फिर से ऋतू क पास बैठ गया जो रो रही थी.

नारायण दास : देख रंडी मुझे जानवर बनने पर मजबूर मत कर. अगर तू मर्ज़ी से मुझे खुश करेगी तो मैं तुझे माफ़ कर दूंगा और अपनी पर्सनल रंडी बना कर रखूँगा . अगर तूने नखरा किया तो आज hi यहाँ मौजूद हर कुत्ता तुझे रंडी की तरह छोड़ेगा. अब बोल मेरी रंडी बनेगी या सरे शहर की ?

ऋतू : मैं तेरा खून पि जाउंगी हरामज़ादे , एक बार मेरे हाथ खोल दे .

नारायण दस : है है है , हाथ नहीं आज तो तेरी छूट को hi खोलूंगा .

इतना कह कर नारायण दस ने ऋतू की पेण्ट का बटन खोला और उसे खिंच कर उतरने लगा . ऋतू खुद को बचने की कोशिश कर रही थी पर अभी जो उसकी पिटाई हुई थी उससे उसकी टंगे बुरी तरह दर्द करने लगी थी और चाहते हुए भी वो रेसिस्ट नहीं कर प् रही थी . नारायण दास ने उसकी जीन्स खिंच कर उसके पाऊँ से निकली तो ऋतू की गोरी चिकनी लम्बी टंगे देख कर उसकी कार टपकने लगी और वो उसकी टैंगो पर hi टूट पड़ा जो पिटाई की वजह से कुछ लाल हो गयी थी .

‘ सुरर्रूप सरीउउउप साररूउप , ‘ पाऊँ से ले कर जंगों तक नारायण दस ऋतू की गोरी टांगों को चाट रहा था जैसे कुत्ता हड्डी चाट ता है . ऋतू की टांगों को अपने नीचे दबाये वो पूरी तरह लिप्त हुआ चाट रहा था और धीरे धीरे ऋतू की पेंटी तक आ पहुंचा था. दवा क असर से और अब नारायण दस क इस हमले से ऋतू की छूट न चाहते हुए भी गीली हो चुकी थी. नारायण दास ने जब ऋतू की पेंटी का गीला पैन देखा तो उसके चेहरे पर कमीनी मुस्कान आ गयी .

नारायण दस : देख साली तेरी छूट कैसे तड़प रही है मेरा लैंड लेने क लिए. सुना है तू किसी मर्द को अपने पास भी नहीं आने देती इसी लिए शादी तक नहीं की. आज तेरी जवानी का रास मैं अछि तरह निचोड़ूंगा .



ऋतू सिसकती हुई बस खुद को बचने क लिए करवट hi बदलने की कोशिश कर रही थी. मगर उसका बदन अब आग में जल रहा था. अगले hi पल नारायण दस् ने ऋतू की पेंटी को दोनों तरफ से पकड़ कर एक झटके में खींच कर उतर दिया और ऋतू ने अपनी टंगे सिकोड़ कर अपनी छूट को छिपा लिया . नारायण दास ने अपने जिस्म पर से आखिरी कपडा यानि अपना अंडरवियर भी उतर दिया . अंडरवियर उतारते hi नारायण दास का कला लैंड झूमता हुआ सामने आ गया जो ऋतू को देख देख कर पहले hi गरम हो चूका था. नारायण दस ऋतू क पाऊँ पकड़ कर खोलते हुए बीच में आ गया .
 
अपडेट 229



शेरा भाई क साथ बातें करते हुए काफी वक़्त बीत गया था. इस दौरान निधि दीदी की कॉल आयी वो मुझसे आने का पूछ रही थी तो मैंने उन्हें कुछ देर में आने का कहा. तभी मुझे ख्याल आया क अब तक ऋतू की कॉल नहीं आयी थी तो मैंने उससे पूछने क लिए उसे कॉल लगा दी. बेल्ल बजते hi ऋतू ने कॉल उठायी मगर जो मैंने सुना उसे सुनते hi मेरे होश उड़ गए .

ऋतू : हह हेलो ... ीे साली फेंक ी का .

ऋतू की आवाज़ क साथ hi किसी आदमी की ये आवाज़ सुनाई दी और कॉल कट गयी. ऋतू घबराई हुई लग रही थी और पीछे से आयी वो आवाज़ बता रही थिंक ऋतू किसी मुसीबत में फंस गयी है . ये सुनते hi मैं झटके से खड़ा हो गया . शेरा भाई ने भी मेरी परेशानी भांप ली थी .

शेरा : क्या हुआ भाई क्या बात है ?

अमित : शेरा भाई ऋतू मैडम मुसीबत में है .

शेरा : क्याआ ??? जल्दी से फ़ोन लगा फिर से फ़ोन लगा .

मैंने दुबारा फ़ोन लगाया तो नोट रचाबळे आने लगा .

अमित : शेरा भाई अब फ़ोन नहीं लग रहा है . ज़रूर वो किसी मुसीबत में फंस गयी है. मुझे अभी जाना होगा . आप जानते हैं वो जगह कहाँ है ?

शेरा : हाँ जनता हूँ चल मैं भी साथ चलता हूँ . मुझे पहले hi शक था क वो जगह सही नहीं ज़रूर कोई गड़बड़ होगी . ऐ भीमा जल्दी से गाड़ियां निकालो सबको चलें को बोलो . सब अपनी अपनी गन्स साथ ले लो .

शेरा भाई क कहते hi वहां मौजूद सब लोग गिरती से अपनी अपनी गन्स लेकर बहार की तरफ दौड़े और गाड़ियों में सवार हो गए . शेरा भाई मुझे अपने साथ लेकर गाड़ी में बैठे और हमारे साथ 5 गाड़ियां और तैयार हो गयी. जितने भी लोग थे सब हथियार बंद थे . गाडी को फुल स्पीड में चलने को कह कर शेरा भाई फ़ोन निकल कर अपने आदमियों से बात करने लगे . मेरा दिल दिमाग ऋतू को लेकर परेशां हो गया था. ऋतू एक बहुत ईमानदार अफसर थी और मंजू म की सबसे खास सहेली . मैं भी दिल से उसे पसंद करता था . ऊपर से हमारे बीच रिश्ता भी तो कायम हो चूका था . मैं परेशानी में ड्राइवर को गाडी तेज़ चलने को कह रहा था .

अमित : गाडी और तेज़ चलाओ हमें जल्दी वहां पहुंचना है इससे पहले क बहुत देर हो जाये .

शेरा : तुम फ़िक्र मत करो मेरे भाई , शेरा क होते उनके साथ कुछ गलत नहीं हो सकता . वो अब मेरी ज़िम्मेदारी है .

शेरा भाई मुझे हौंसला दे रहे थे . मगर फिर भी मेरा दिल घबरा रहा था और मुझे गुस्सा भी बहुत आ रहा था . 20 मिनट्स में hi हम इस जगह आ पहुंचे जो ऋतू ने बताई थी मगर हमें वहां कोई दिखाई नहीं दिया . सिर्फ 2 कार्स और एक ट्रक खड़ा था. अँधेरा हो रहा था और दूर तक कोई आदमी की ज़ात तक दिखाई नहीं दे रही थी .

गाड़ी रुकते hi हम जल्दी से नीचे उतर और भाग कर इधर यादगार ढूंढने लगे . मगर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था .

अमित : शेरा भाई वो लोग कहाँ चले गए ? ये गाड़ियां यहाँ ऐसे hi नहीं कड़ी वो ज़रूर यहीं आयी होगी .

शेरा : तुम ठीक कह रहे हो , ऐ ढूंढो कहीं कुछ नज़र आये तो बताओ .

सब लोग गाड़ियों से निकल कर इधर उधर ढूंढने में लग गए थे . सब ने हाथों में गन्स पकड़ी हुई थी . मैं इधर उधर भाग कर देख रहा था मगर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था . मैं भाग कर मंदिर क पीछे की तरफ गया तो एक कच्चा रास्ता पीछे को जाता दिखाई दिया. मैं उस तरफ आगे बढ़ा तो शेरा भाई भी मेरे साथ हो लिया . कुछ दूरी पर hi मेरे पाऊँ क नीचे एक मोबाइल आ गया जो टूटा हुआ था . मैंने उसे उठा कर देखा तो मुझे समझते देर नहीं लगी क ये ऋतू का हो सकता है .

अमित : ये देखो शेरा भाई , ये मोबाइल इस जगह पर पड़ा है. हो न हो ज़रूर ये ऋतू मैडम का hi है. वो ज़रूर इसी तरफ गए हैं.

शेरा भाई ने अपने साथियों को पीछे आने को कहा . मैं दौड़ता हुआ आगे बढ़ रहा था और शेरा भाई मेरे साथ थे. बाकि सब भी हमारे पीछे आ रहे थे . इस कच्चे रस्ते पर मैं तेज़ी से आगे बढ़ रहा था . कुछ देर बाद hi मुझे एक दीवार दिखाई दी . जिसके आसपास क़तर में पेड़ लगे हुए थे . जिससे अंदर क्या है ये पता नहीं चल रहा था . ये देखते hi शेरा भाई ने मेरी बाजु पकड़ कर मुझे रोक लिया .

शेरा : ठहरो भाई , लगता है यही उन लोगों का ठिकाना है .

अमित : आप मुझे रोक क्यों रहे हैं भाई. हमारे पास वक़्त नहीं है . अगर मैडम को कुछ हो गया तो .

शेरा : छोटे भाई हमला करने से पहले दुश्मन को जाँच लेना ज़रूरी है . और ये खेल बन्दूक और गोली का है. अब तुम पीछे रहोगे . यहाँ से आगे मैं देखूंगा .

अमित : नहीं भाई मैं पीछे नहीं हटूंगा .

शेरा : पीछे हटने को नहीं कह रहा भाई. पर जिन लोगों ने एक पुलिस अफसर पर हाथ डाला है वो लोग मामूली तो नहीं होंगे . और पता नहीं वो कितने होंगे. इस लिए पहले हमें देख लेना चाहिए . वैसे भी ये तुम्हारा काम नहीं है. ये हमारा काम है . भीमा ज़रा देख तो अंदर क्या है और कितने लोग हैं.

शेरा भाई ने अपने आदमी को कहा और बाकि सब फ़ैल गए . दीवार की ाओत में हूँ सब खड़े हो गए और भीमा नाम का वो आदमी बड़ी फिरती से पेड़ क साथ ऊपर चढ़ कर अंदर देखने लगा . अंदर का जायज़ा लेने क बाद वो नीचे उतर कर हमारे पास आया .

भीमा : भाई अंदर तो बहुत बड़ा अड्डा है , उस तरफ गेट है . गेट क पास 4 लोग हैं हथियार क साथ . उस तरफ पीछे एक बड़ा सा कमरा है जिसके बहार कुछ लोग बैठ कर दारू पि रहे हैं. जिस तरह वो वहां खड़े हैं लग रहा है क अंदर किसी को बंद किया हुआ है. और बीच में जो बिल्डिंग है वहां पर भी कुछ लोग नीचे और कुछ ऊपर चढ़े हुए हैं. काम से काम 25 से 30 लोग होंगे .

शेरा : इसका मतलब सीधा हमला करना बेवकूफी होगी. हमें होशियारी से काम लेना होगा . ऐसा करो पेड़ क साथ दीवार पर चढ़ कर बिना आवाज़ किये अंदर घुसो . जब तक ज़रूरी न हो कोई गोली नहीं चलाएगा . जिनके पास खंजर है वो लोग आगे रहो और रास्ता क्लियर करो .

शेरा भाई क आर्डर मिलते hi जल्दी से सब अलग अलग जगह पेड़ से जल्दी से दीवार पे चढ़ने लगे . अँधेरे का फायदा उठाते हुए दीवार फांद कर हम सब अंदर की तरफ उतर गए . यहाँ रौशनी नहीं की गयी थी शायद इस जगह को गुप्त रखने क लिए . मगर फिर भी गेट क पास बने केबिन और जो कमरे बने थे उनके अंदर रौशनी थी. जल्दी से सब अपनी अपनी पोजीशन संभल कर उन लोगों पर टूट पड़े . मैं और शेरा भाई उस कमरे की तरफ बढ़े जिसको बंद कर दरवाज़े क पास कुछ लोग पहरा देते हुए दारू पि रहे थे . ये 6 लोग थे .

‘ चलो अपना पेग उठाओ , अंदर बॉस तो उस छमिया का मज़ा ले रहा है और हम यहाँ मचार मर रहे हैं ‘ एक आदमी पेग बनता हुआ बाकि सब को पीने को बोल रहा था

‘ क्या माल है साली ऊपर से पुलिस वाली , साला कितना खौफ सुना था इस का और आज बॉस उसे अपनी रंडी बनाने वाले हैं ‘ दूसरा आदमी पेग उठता हुआ बोलै .

‘ जो भी कहो साली है मस्त आइटम , एक बार मुझे उसकी लेने का मौका मिल जाये तो उसके बदले में उसकी गोली भी खा लूंगा ‘ तीसरा गुंडा ये बात बोल कर पेग को एक सांस में हलक से नीचे उतारता हुआ बोलै .

‘ अरे हरिया कह रहा था बॉस कह रहे थे क उसकी लेने क बाद बॉस उसे हमारे लिए छोड़ देगा . फिर सब मिल कर मज़े करेंगे ‘ चौथे गुंडे ने बात कही तो बाकि सब भी हसने लगे

उनकी बातें सुन कर मेरा खून खौल गया और मैं बिना किसी बात की परवाह किये उन लोगों पर टूट पड़ा . शराब की आधी भरी बोतल उठा कर मैंने एक क सर पर दे मरी और टूटी हुई बीतल को दूसरे क पेट में घुसा दिया . इससे पहले क बाकि सब कोई हरकत कर पते मैंने एक और गुंडे की गर्दन पकड़ कर दूसरा हाथ उसकी टांगों क बीच दाल कर उसे हवा में ऊपर उठा कर उसका सर ज़मीन की तरफ लाते हुए ज़ोर से ज़मीन पर पटका और वो इतने में hi ढेर हो गया . बाकि 3 लोग कोई हरकत करते उससे पहले hi शेरा और उसके 2 साथियों ने उन तीनो की आँतड़ियों में खंजर क कई वॉर कर दिए . मैं जल्दी से दरवाज़ा खोला तो अंदर कुछ लोग थे . हमें देखते hi वो लोग हमें देखने लगे . मैं ऋतू मैडम को खोज रहा था मगर वो यहाँ नहीं थी

अमित : गुस्से से ) ऋतू सिंह कहाँ है? जवाब दो वर्ण एक एक को जान से मर डालूंगा .

तभी एक आदमी आगे आया जिसे मैं पहचान गया. ये पुलिस वाला था जिसे मैंने ऋतू सिंह क साथ देखा था .

पांडेय : अमित सर आप यहाँ ? मैं इंस्पेक्टर पांडेय हूँ आपने पहचाना ?

अमित : आप ? और ये लोग ?

पांडेय : ये सब मेरी तरह hi पुलिस वाले हैं. हम ऋतू मैडम क साथ hi यहाँ आये थे .

अमित : ऋतू मैडम कहाँ है?

पांडेय : वो नारायण दस क पास हैं. उस बिल्डिंग में .

मई तेज़ी से बहार निकलने लगा तो गोलियों की आवाज़ आने लगी . शायद उन लोगों को पता चल गया था हमारे यहाँ आने का . मई जैसे hi बहार निकलने लगा शेरा भाई ने मुझे रोकने की कोशिश की और खुद गन हाथ में पकडे आगे हो कर गोलियां चलने लगे . सब तरफ से गोलियां चलने लगी थी. इंस्पेक्टर पांडेय और उनके साथी भी जल्दी से उन मरे हुए गुंडों की गन्स उठा कर गोलियां चलने लगे . उन गुंडों की बातें सुनने क बाद मुझे ऐसा लग रहा था क कहीं ऋतू क साथ नारायण दस रपे न कर रहा हो इस लिए मुझसे रुकना मुश्किल हो रहा था . मैं शेरा भाई को दरकिनार करता हुआ तेज़ी से बिल्डिंग की तरफ भगा .

शेरा : रुक्खक्क जा भाआईईई

शेरा भाई ने ज़ोर से चिल्ला कर मुझे रोकने की कोशिश की मगर मैं तेज़ी से आगे बढ़ गया . और शेरा भाई मेरे पीछे hi दौड़ पड़े गोलियां चलते हुए . गोलियों की बोछारक बीच मैं तेज़ी से बिल्डिंग की तरफ बढ़ गया और दरवाज़े तक पहुँचते पहुँचते जो लोग दरवाज़े क पास खड़े थे उन्हें पीछे से आ रही गोलियों ने भून दिया और वो धराशायी हो गए . मैं जल्दी से अंदर घुस गया . तभी सामने एक गुंडा आ गया . इससे पहले क वो मुझ पर निशान लगता मैंने दरवाज़े क पास hi पड़ी धातु की मूर्ति उठा कर उस पर दे मरी और वो नीचे गिर गया . उसे उठने का मौका दिए बगैर मैंने फिर से वो मूर्ति उठायी और उसके मुँह पर ज़ोर से वॉर किया जिससे वो बेहोश हो गया . मैंने चारो तरफ नज़र दौड़ाई तो वहां 3 कमरे थे . मैंने भाग कर उनको चेक करना शुरू किया मगर वहां कोई नहीं था बस कुछ हथियार और सामान पड़ा था . तब मैं सीढ़ियों से ऊपर की तरफ भगा . सीढ़ियां चढ़ते चढ़ते एक और गुंडा पिस्तौल ताने सामने आ गया और उसने मुँह पर वॉर किया मगर मैं एक तरफ को कूदते हुए खुद को बचा लिया और उसके साथ hi ‘ धायें धायें ‘ कर क दो गोलियां चली जो उस गुंडे को लगी और वो निचे गिर गया . मैंने पीछे देखा तो शेरा भाई मेरी तरफ hi बढ़ रहे थे . मैं फिर से उठ खड़ा हुआ और सामने का दरवाज़ा ज़ोर से काट मर कर खोलते हुए अंदर घुसा . यहाँ भी कोई नहीं था . फिर मैं दूसरे कमरे की तरफ बढ़ा . ये दरवाज़ा किक था . मुझे लगा क शायद ऋतू मैडम यहीं होगी . मैंने अपनी साडी ताकत इकट्ठी करते हुए ज़ोर से धक्का मारा जिससे वो दरवाज़ा लॉक वाले हिस्से से उखड कर टूट ता हुआ खुल गया. अंदर का नज़ारा देख कर मेरी आँखों में लगी उतर आया . सामने बीएड पर ऋतू मैडम बंधी हुई थी जो नीचे से पूरी तरह निर्वस्त्र थी और नारायण दास पूरी तरह से नंगा उनकी टांगों क बीच उनके ऊपर झुक रहा था . मैं गोली की रफ़्तार से उस पर टूट पड़ा और एक ज़ोरदार लात उसकी बगल में मरते हुए उसे बीएड से नीचे गिरा दिया . मैंने जल्दी से बेडशीट ऋतू मैडम क ऊपर डाली और बिना कोई बात कहे सुने पलट कर नारायण दस की तरफ बढ़ा जो ज़मीन से उठाने की कोशिश कर रहा था .

अमित : कुत्ते तेरी हिम्मत कैसे हुई ऋतू को हाथ लगाने की. अपने गंदे हाथों से तूने इसको छुआ कैसे ? मैं तेरी जान ले लूंगा .

नारायण दास जल्दी से उठने लगा तो मैंने उस पर हमला करते हुए एक और ज़ोरदार लात उसे दे मरी और इस बार मेरा निशाना उसका सेंटर पॉइंट था . अपने लैंड पर ज़ोरदार प्रहार से hi नारायण दास धराशायी हो गया . मैंने उसे हवा में उठाते हुए ज़ोर से उसकी कमर अपने घुटने पर दे मरी जिससे उसकी रीढ़ की हड्डी में छोटी लगी और एक ज़ोर दर चीख उसके मुँह से निकली ‘ aaaaaaaaiiiiiiiiiii आआआआअह्हह्ह्ह्हह ‘ मैं इस वक़्त आप से बहार हो चूका था मुझे कुछ और सुनाई नहीं दे रहा था . मैंने उसे दोनों पाऊँ से पकड़ कर ज़ोर से हवा में घुमा कर ज़मीन पर धोबी पटका दिया तो ‘ कटाक ‘ की एक ज़ोरदार आवाज़ आयी जिसके साथ hi नारायण दस की ज़ोरदार चीख गुंजी और वो खामोश हो गया. मगर मैं वहीँ नहीं रुका और फिर से उसे दोबारा धोबी पटका दिया मगर इस बार उसकी कोई आवाज़ नहीं आयी

अमित : चीख हरामज़ादे और चीख आज तेरी चीखें इन दीवारों में गूंजनी चाहिए .

मैंने गुस्से में आप खोते हुए फिर से उसे दोबारा धोबी पटका दिया . उसका जिस्म शिथिल हो चूका था मगर मुझे जैसे खुद अपना hi होश नहीं था क मैं क्या कर रहा हूँ और क्या हो रहा है. मैं नारायण दस् को उठा उठा कर ऐसे पटक रहा था जैसे धोबी कपडे धोते हैं. तभी शेरा भाई कमरे में आये और मुझे गुस्से में ऐसे नारायण दास को उठा उठा कर लटकते देख वो भी सकते में आ गए. उन्होंने मुझे आवाज़ देकर रोकने की कोशिश की मगर मैं कहाँ सुन रहा था . फिर शेरा भाई ने पीछे से मेरी गर्दन में अपनी बहन लपेट कर मुझे खींचा

सहारा : ज़ोर से ) मैंने कहा छोड़ इसे छोड़ , पागल हो गए हो क्या वो मर चूका है

अमित : छोड़ दो भाई , इसकी हिम्मत कैसे हुई ऋतू मैडम क साथ ऐसा करने की . छोड़ दो मुझे .

शेरा : रुक जा मेरे भाई वो मर चूका है छोड़ दे उसे . पागल हो गया है क्या छोड़ उसे. देख मैडम भी तुझे रुकने को कह रही हैं छोड़ इसे .

तभी मेरे कानो में ऋतू मैडम की आवाज़ सुनाई दी जो शायद कब से मुझे कुछ कह रही थी

ऋतू : अमित रुक जाओ खुद को सम्भालो प्लीज रुक जाओ .

मैंने ऋतू मैडम की तरफ देखा तो वो बीएड से बंधी हुई मेरी तरफ hi देख रही थी और मुझे रोक रही थी. मैं नारायण दास को छोड़ कर उनकी तरफ लपका और जल्दी से उनके हाथ खोले . हाथ खुलते hi वो जल्दी से उठ बैठी और मेरे गले लग गयी . वो रोटी हुई मेरे गले लगी तो मेरा गुस्सा धीरे धीरे ठंडा होने लगा .

अमित : आप , आप ठीक तो हैं न मैडम ? आप को कुछ हुआ तो नहीं?

ऋतू सिंह बस रोये जा रही थी. उनके मुँह से कोई आवाज़ नहीं निकल रही थी . शेरा भाई फिर से हमर करीब ए और मेरे कंधे पर हाथ रख कर बोले .

शेरा : तुम यहीं रुक कर मैडम को सम्भालो मैं बहार देखता हूँ .

शेरा भाई मुस्तैदी क साथ दरवाज़े से बहार निकले तो मैंने ऋतू मैडम का सर सहलाते हुए उनका चेहरा दोनों हाथों में पकड़ कर उनके आंसू साफ़ किये

अमित : बस , बस अब चुप हो जाइये . मैं आ गया हूँ न . सब ठीक है .

ऋतू : रट हुए ) तुम नहीं आते तो आज वो मुझे ....

इतना कह के ऋतू मैडम फिर से मेरे गले लग कर रोने लगी . बहार से गोलियां चलने की आवाज़ अभी भी आ रही थी. मगर अब काम हो गयी थी. आवाज़ टूटे हुए दरवाज़े की तरफ से आ रही थी. शायद ये कमरा साउंड प्रूफ था अगर दरवाज़ा बंद होता तो ये भी सुनाई न देती. इसी वजह से नारायण दास को शायद पता नहीं चला क बहार क्या हो रहा है वर्ण वो यहाँ से भागने की कोशिश करता . मैंने ऋतू मैडम को हौंसला देते हुए उन्हें बीएड से उठाया तो बेडशीट हैट ते hi उनका निचला भाग फिर से निर्वस्त्र हो गया . मैंने ये देखते hi नज़रें घुमा ली. और ज़मीन पर पड़ी ऋतू मैडम की जीन्स और पेंटी उठा कर बिना उनकी तरफ देखे उन्हें पकड़ती और उनकी तरफ पीठ कर क खड़ा हो गया .

अमित : जल्दी से इसे पेहेन लीजिये . हमें यहाँ से निकलना है .

2 मिनट्स में hi ऋतू ने अपने कपडे ठीक किये और बहार चलने से पहले नारायण दास क पास जा कर ज़ोर ज़ोर से उसे करने लगी .

ऋतू : उठ कुत्ते अब उठ क्यों नहीं रहा , मुझे रंडी बनाएगा तू ? उठ साले देख आ गया मुझे बचने वाला . उठ साले देख अपनी मौत को .

ऋतू गुस्से से नारायण दस को ठोकरें मार रही थी . मगर उसकी ज़रा सी भी आवाज़ नहीं निकली . मैंने ऋतू मैडम को अपनी आगोश में ले लिया उनका गुस्सा काम करने क लिए और वो भी फिर से मेरे गले लग गयी .

ऋतू : रट हुए ) तुमने मुझे बचा लिया अगर तुम वक़्त पर न आते तो ये कमीना मेरी ....

अमित : कुछ नहीं हुआ सब ठीक है . मैं आ गया न , सब ठीक है. ऐसे कैसे कोई आपके साथ गलत कर लेता. अब आप खुद को सम्भालिये.

ऋतू सुबक रही थी पर जल्द hi उसने माहौल को समझते हुए खुद को संभाला. इतने में गोलियां चलने की आवाज़ बंद हो गयी . अभी ऋतू मेरे गले लगी हुई थी क शेरा भाई क साथ उनके कुछ साथी और इंस्पेक्टर पांडेय अपने कुछ साथियों क साथ आ पहुंचे .

पांडेय: मैडम आप ठीक हैं ?

ऋतू पांडेय की आवाज़ सुन कर मुझसे अलग हुई .

ऋतू : हाँ मैं ठीक हूँ.

पांडेय : नारायण दस को देखते हुए ) ये तो मारा गया मैडम , अब क्या होगा ? ये एक मला कहीं हम सब इसमें फस्स न जाएँ .

पांडेय की बात सही थी. उसकी हत्या पर कानूनी करवाई तो होनी hi थी और ऐसे में उन सब की नौकरी खतरे में पद सकती थी.

ऋतू : तुम लोग यहाँ से निकल जाओ . ये सब मेरी वजह से हुआ है . मैं सब अपने ऊपर ले लुंगी . तुम में से किसी को कुछ नहीं होगा.

पांडेय: पर मैडम आप को जेल हो सकती है.

ऋतू : जानती हूँ, इस कैसे राक्षस को सजा देने क बदले सब मंज़ूर है मुझे .

शेरा : नहीं , आप जैसी ईमानदार पुलिस अफसर की वजह से hi लोगों को इंसाफ मिल सकता है अगर आप hi न रहेंगी पुलिस में तो आम लोगों का क्या होगा. मैडम आप यहाँ से चले जाइये मैं सब देख लूंगा . वैसे भी मैं तो पहले से hi मुजरिम हूँ तो एक और जुर्म सही .

ऋतू : नहीं , ऐसा करने से इसे शहीद कहा जायेगा. मैं इसकी ज़िम्मेदारी लेकर लोगों को इसका सच तो बता सकती हूँ

शेरा : समझने की कोशिश करिये मैडम, ज़रूरी है तो आपका पुलिस में रहना . इसी क्या होगा क्या नहीं वो सब छोड़िये. इसे तो इसकी करनी की सजा मिल hi गयी . आप जाइये यहाँ से , अमित तुम उन्हें लेकर चले जाओ यहाँ से .

ऋतू : नहीं

शेरा : मैं आपके आगे हाथ जोड़ता हूँ मैडम आप जाइये यहाँ से .

पांडेय: ये ठीक कह रहा है मैडम , आप जैसी अफसर की ज़रूरत है डिपार्टमेंट को . चलिए यहाँ से .

अमित : ये सब मैंने किया है आप दोनों क्यों अपने ऊपर ले रहे हैं. आप दोनों चले जाइये यहाँ से. शेरा भाई आप यहाँ मेरी वजह से आये थे न , मैं नहीं चाहता आप पर एक और इलज़ाम आये .

शेरा : कैसी बातें कर रहे हो छोटे भाई , तुम्हारी वजह से आज मुझे एक नेक काम करने का मौका मिला है. मैं तुम्हारा शुक्रगुज़ार हूँ इसके लिए. तुम मेरी चिंता मत करो .

ऋतू : कोई कुछ नहीं करेगा समझे तुम लोग. पांडेय हमारे यहाँ आने क सब सबूत ख़तम कर क सब कुछ जला दो. और इसकी लाश क साथ यहाँ हो हथियार और गैर कानूनी सामान पड़ा है सब रख दो. जो भी यहाँ आएगा सब समझ जायेगा . किसी को कुछ करने की ज़रूरत नहीं है .

पांडेय : जी मैडम , यही सही रहेगा . पर आप यहाँ से निकल जाइये इससे पहले क कोई यहाँ तक पहुंचे . मैं शेरा क साथ मिल कर सब साफ करवा देता हूँ.

‘ मुझे माफ़ कर दीजिये मैडम , मैंने सब मज़बूरी में किया . इन लोगों ने मेरी फॅमिली को ....’

एक लड़की रट हुए ऋतू क कदमो में गिर गयी.

ऋतू : छोडो मुझे , तुमने सिर्फ अपनी फॅमिली क बारे में सोचा और आज यहाँ तुम्हारी वजह से मेरे साथ क्या होने वाला था इसका अंदाज़ा भी है तुम्हे? काम से काम एक इशारा तो कर दिया होता , मैं समझ जाती .

लड़की : मैं बहुत दर गयी थी मैडम , इन लोगों ने मुझे और मेरी फॅमिली को कैद कर रखा था . आप hi बताइये मैं क्या करती ?

ऋतू : उठो अब चली जाओ यहाँ से अब तुम आज़ाद हो. यहाँ क्या हुआ है ये किसी को पता नहीं चलना चाहिए .

लड़की : मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी मैडम .

शेरा : अब आप निकलिए यहाँ से मैडम . इससे पहले क कोई यहाँ आ जाये .

ऋतू : थैंक्स शेरा जी , मैं आपका एहसान .....

शेरा : शर्मिंदा मत कीजिये मैडम , ये सब अमित की वजह से हुआ है . इसका हक़दार सिर्फ ये है. मैं तो खुद एहसान मंद हूँ इसका . आप जाइये फिर कभी आपसे मुलाकात होगी .

शेरा भाई ने मुझे गले से लगाया और वहां से निकल जाने को कहा . पांडेय ने अपने कुछ साथियों को अपने साथ वहीँ रोक लिया और बाकि सब को ऋतू मैडम क साथ चले जाने को कहा . मैं ऋतू सिंह और उनके कुछ साथी वापिस मंदिर की तरफ आये और वहां कड़ी उनकी गाड़ियों में सवार हो गए . ऋतू ने बाकि सब को जाने को कहा.

ऋतू : आप सब लोग जल्दी से वापिस अपने शहर पहुँच जाओ मैं भी आ रही हूँ .

‘ मैडम आप भी साथ hi चलिए , हम आप को अकेला छोड़ कर कैसे जा सकते हैं ‘ उनमे से एक पुलिस वाला बोलै .

ऋतू : श्रीवास्तव मेरी चिंता न करो. वाइज भी मैं अकेली कहाँ हूँ . अमित है न मेरे साथ. तुम लोग जाओ मैं भी आ रही हूँ थोड़ी देर में .

ऋतू की बात मानते हुए वो पुलिस वाले वहां से निकल लिए . उनके जाते हुए ऋतू मेरी तरफ देखने लगी और देखते देखते अचानक से मेरे पाऊँ में गिर गयी.

ऋतू : थैंक यू थैंक यू वैरी मच . तुम वक़्त पर नहीं आते तो आज मेरी इज़्ज़त लूट चुकी होती. तुम ने मुझ पर बहुत बड़ा एहसान किया है .

मैंने ऋतू को तुरंत उठाया और उनकी नाम आँखों को साफ़ किया .

अमित : ये आप क्या कह रही हैं , मैंने कोई एहसान नहीं किया आप पर . ये तो मेरा फ़र्ज़ था . अगर मैं वक़्त पर नहीं पहुँचता तो खुद को कभी माफ़ नहीं कर पता. मंजू म को क्या जवाब देता मैं .

ऋतू : मंजू !! सच में कितनी लकी है मंजू क तुम उसे मिले. और उसकी वजह से तुम मेरी ज़िन्दगी में आये . अब से मेरी ज़िन्दगी तुम्हारे लिए है , सिर्फ तुम्हारे लिए .

अमित : अब ज्यादा इमोशनल होने का वक़्त नहीं है . पहले यहाँ से निकालिये . और ये आपको ऑंखें इतनी लाल क्यों हैं ? आपकी तबियत तो ठीक है ?

ऋतू : मैं ठीक हूँ उन लोगों ने मुझे इंजेक्शन दिया था उसकी वजह से .....

अमित : इंजेक्शन ? कैसा इंजेक्शन ? हमें डॉ क पास चलना चाहिए पहले . चलिए जल्दी से .

ऋतू : रुको तो

अमित : नहीं पहले हम हॉस्पिटल चलते हैं.

मैंने ऋतू का हाथ पकड़ कर उन्हें कार में बिठाने की कोशिश की तो वो खुद ड्राइविंग सीट पर बैठ गयी और मुझे दूसरी तरफ बैठने को कहा . ऋतू मुझे बार बार प्यार भरी नज़रों से देखती हुई कार चला रही थी.

ऋतू : वैसे तुम यहाँ इस शहर में क्या करने आये थे ?

अमित : बताया तो था मैं यहाँ अंकल क साथ .... ओह मर गए , मैंने तो उन्हें बताया hi नहीं मैं कहाँ हूँ. वो सब परेशां होंगे .

मैंने जल्दी से अपनी जेब से मोबाइल निकला जो मैंने साइलेंट कर रखा था . मैंने देखा तो वहां ढेरों मिस कॉल्स थी. सब से ज्यादा निधि दीदी की. मैंने तुरंत उन्हें फ़ोन लगा दिया

निधि : अमित !! अमित , तुम कहाँ हो ? तुम ठीक तो हो? तुम फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे थे ? मैं कितना दर गयी थी. तुम कुछ बोलते क्यों नहीं कहाँ हो ?

कॉल उठाते hi निधि दीदी घबराई हुई एक hi सांस में ढेरों सवाल पूछने लगी.

अमित : शांत दीदी प्लीज चुप हो जाइये . आप कुछ बोलने का मौका देंगी तभी तो कुछ बोलूंगा

निधि : कैसे शांत हो जॉन? यहाँ मेरी क्या हालत हो रही है तुम्हे पता भी है . कहाँ हो तुम जल्दी से आ जाओ

अमित : सॉरी दीदी पर मैंने अंकल को बताया तो था क मैं अपने एक दोस्त क साथ हूँ. सॉरी वो कुछ ज्यादा hi टाइम लग गया.

निधि : सॉरी नहीं , तुम जल्दी से आ जाओ सब तुम्हारा वेट कर रहे हैं. अंकल अलग से परेशां हैं अब तक तो वो पुलिस को भी फ़ोन कर चुके हैं .

अमित : क्या ?? पुलिस को ? मगर क्यों ? मैंने तो उन्हें बताया था

निधि : तुमने तो कहा था क जल्दी आ जाओगे और फिर तुम फ़ोन भी नहीं उठा रहे थे तो हूँ सब को तुम्हारी चिंता हो रही थी.

तभी दीदी से अंकल ने फ़ोन पकड़ लिया .

अंकल : अमित बीटा कहाँ हो तुम ? तुम ठीक तो हो ? मुझे तुम्हारी फ़िक्र हो रही है . तुम फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे थे .

अमित : मैं ठीक हूँ अंकल , वो गलती से फ़ोन साइलेंट हो गया था इस लिए ऐसा हुआ . आप मेरी चिंता न करें . मैं आ जाऊंगा .

अंकल : आ जाऊंगा ? तुम हो कहाँ ? अभी क अभी वापिस आओ .

अमित : मैं आ जाऊंगा अंकल वो क्या है मैं जिस दोस्त से मिलने आया था उसकी तबियत ज़रा ठीक नहीं है टेनिस लिए उसे डॉ क पास लेकर जा रहा हूँ.

अंकल : कौन से हॉस्पिटल में हो तुम मुझे बताओ . मैं खुद वहां अत हूँ.

अमित : अरे अंकल आप टेंशन क्यों ले रहे हैं . मैं आ जाऊंगा . बस एक बार डॉ को दिखा लूँ .

अंकल : पर बेटे ...

अमित : प्लीज अंकल , मैं प्रॉमिस करता हूँ जल्दी आ जाऊंगा .

अंकल : ाचा ठीक है , हम तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं. अगर किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो फ़ोन करना . हम यहीं हैं अपने पुराने घर में . तुम्हे यद् है न ?

अमित : हाँ अंकल यद् है . मैं यहाँ से फ्री होकर घर पहुँच जाऊंगा .

इतना बोल कर मैंने फ़ोन काट दिया . ाचा हुआ जो मुझे यद् आ गया वर्ण सब चिंता में दुबे रहते . फ़ोन काटने क बाद मैं अभी जो कुछ भी हुआ था उसके बारे में सोचने लगा. मेरी आँखों क सामने साडी फिल्म चलने लगी. आज मेरे हाथों से एक खून हुआ था जो बहुत बड़ी बात थी. चाहे गुस्से में मैं वो सब कर गया था पर अब वो सब यद् आते hi मुझे अंदर से घबराहट सी महसूस होने लगी थी. यूँ तो पहले भी मैं लड़ाई झगडे में पद चूका था पर पहले किसी की जान नहीं ली थी मगर आज एक हत्या करने का जुर्म मैं कर चूका था.

ऋतू : क्या सोच रहे हो ?

मुझे सोच में डूबा देख ऋतू मैडम खुद hi बोली

अमित : मुझसे बहुत बड़ा अपराध हो गया मैडम , मेरे हाथों आज एक इंसान की जान चली गयी. किसी की जान लेने का हक़ किसी को भी नहीं है. कानून की नज़र में आज मैं भी एक अपराधी बन गया न. अगर ये बात मेरे परिवार को पता चल गयी तो वो मुझे माफ़ नहीं करेंगे. क्या बीतेगी उन पर जब उन्हें पता चलेगा उनका बीटा एक कातिल है.

ऋतू : कौन कहता है तुम कातिल हो ? और किस कानून की बात कर रहे हो , वो जिसे नारायण दस जैसे बाहुबली अपने पाऊँ की जुटी समझते हैं. कानून सभ्य समाज क लिए होते हैं . इन जैसे दरिंदों क लिए नहीं. ऐसे भेड़ियों का वध करना चाहे कानून की नज़र में गलत हो पर इंसानियत की नज़र में कभी गलत नहीं. अगर तुम उसे न मरते तो मैं hi मर देती चाहे बाद में जो मर्ज़ी होता . और अब तो ऐसा कुछ भी नहीं है. तुमने देखा न मेरे साथी भी कैसे खुद hi सबूत मिटने में लग गए . मतलब उनकी नज़र में भी ये सब गलत नहीं है. वर्दी क पीछे हम पुलिस वाले भी इंसान hi हैं. कानून हमारे हाथ बांध देता है मगर सही गलत तो हम भी जानते हैं. वहां जो कुछ भी हुआ उसे भूल जाओ. इस बात को बिलकुल भी मन में मत लाना क तुमने कोई अपराध किया है. रही बात तुम्हारे घरवालों की तो उन्हें कौन बताएगा ? वैसे भी इस काम पर तो हर किसी को गर्व हो होगा .

अमित : ये सब कहना आसान है मैडम पर फिर भी मेरा दिल खुद को कसूरवार मन रहा है. किसी की जान लेना ....

ऋतू : बस इससे आगे और कुछ मत सोचो. तुमने उस दरिंदे को मर कर जाने कितनी मासूम ज़िंदगियाँ बचाई हैं. हज़ारों लोगों की दुआएं मिल रही होंगी तुम्हे जो उस दरिंदे क हाथों बर्बाद हुए होंगे . अब और कुछ मत सोचो तुम्हे मेरी कसम.

इसके बाद फिर से कुछ देर ख़ामोशी रही और फिर ऋतू मैडम ने खुद hi माहौल बदलते हुए बात शुरू की .

ऋतू : एक बात पूछूं ? तुम इतना गुस्से में क्यों आ गए थे ? जब तुम उसे उठा उठा कर ज़ोर से ज़मीन पर पटक रहे थे तो तुम्हारा ये रूप देख के मैं भी घबरा गयी थी . तुम्हे हो क्या गया था ?

अमित : मुझे खुद नहीं पता , मगर जब मैंने उसे आप क साथ ज़बरदस्ती लेते देखा तो मुझे कुछ होश नहीं रही. बस उसके बाद मुझे कुछ यद् नहीं क मैंने उसके साथ क्या किया .

ऋतू : प्यार भरी नज़रों से एकटक मुझे देखते हुए ) इतना प्यार करते हो मुझसे क अपनी जान की परवाह किये बिना इतना कुछ कर गुज़ारे ? काश तुम मेरी ज़िन्दगी में पहले आये होते तो ...

मैंने ऋतू की आँखों में देखा जहाँ मुझे बेइंतहा प्यार नज़र आया .

अमित : तो ?

ऋतू : तो ऋतू साडी दुनिया छोड़ देती तुम्हारे लिए .

मैं ख़ामोशी से बस ऋतू को देख रहा था और उसके इस प्रेम समर्पण को महसूस कर रहा था.

अमित : मैं अकेला तो नहीं आया था, ये सब शेरा भाई की वजह से हुआ वरना मैं अकेला क्या कर सकता था.

ऋतू : जो भी है पर मेरे लिए तुमने जान की बाज़ी लगा दी . अब मेरी ज़िन्दगी तुम्हारी अमानत है .

ऋतू की ऑंखें अभी भी लाल थी और वो बार बार अपनी टाँगें सिकोड़ रही थी साथ hi उसका चेहरा लाल सुराख़ लग रहा था. चलती कार में खुले शीशों से आ रही हवा क बाद भी वो पसीने से भीग रही थी .

अमित : आप जल्दी से पहले हॉस्पिटल चलो . आपकी तबियत ठीक नहीं है .

ऋतू : मैं ठीक हूँ तुम मेरी चिंता मत करो .

अमित : वो सब बाद में पहले हॉस्पिटल चल क एक बार डॉ को दिखा लो आप .

कुछ hi देर में हमें एक हॉस्पिटल नज़र आया तो मेरे कहने पर ऋतू ने कार को वहां रोक दिया .

ऋतू : एक बात का ध्यान रखना वहां किसी को मेरा असली नाम और मैं क्या हूँ ये क्या न चले .

कार से उतारते हुए ऋतू ने ये कहा तो मैं भी उसकी बात का मतलब समझ गया . हम जल्दी से हॉस्पिटल में गए और मैंने डॉ को उन्हें चेक करने को कहा . ऋतू ने डॉ को बताया क उसे ड्रिंक में किसी ने ड्रग मिला कर दी है तो डॉ ने पहले उनका ब्लड सैंपल लिया. रिपोर्ट आने तक ऋतू लगातार अपना बदन ऐंठ रही थी . रिपोर्ट आते hi डॉ ने ऋतू को अपने केबिन में बुलाया .

डॉ : देखिये आपको बहुत hi स्ट्रांग वियाग्रा ड्रग दी गयी है जो हार्मोन्स को एग्रेसिव कर देती है और बॉडी में सेक्स करने की भूख सी लग जाती है. इस ड्रग को निकलने क लिए ब्लड में मेडिसिन ड्रिप थ्रू डालनी होगी और इसके लिए आपको एडमिट होना होगा .

ऋतू : मैं एडमिट नहीं हो सकती डॉ आप मेडिसिन दे दीजिये .

डॉ : देखिये सिर्फ मेडिसिन से काम नहीं चलेगा . ये बहुत hi स्ट्रांग ड्रग है . इसको निकलने का यही तरीका है या फिर ....

ऋतू : या फिर क्या ?

डॉ : देखिये ये सेक्स क लिए हार्मोन्स को एक्टिव करने की ड्रग है . और दूसरा तरीका ये है क आपको लगातार सेक्स करना होगा ताकि इसका असर ख़तम हो सके . आप समझ रही हैं न मैं क्या कह रहा हूँ ?

ऋतू : मैं समझ गयी डॉ , आप दवा दे दीजिये बस .

मैं बहार बैठा ऋतू का वेट कर रहा था . ऋतू बहार आयी और मुझे चलने को कहा .

अमित : डॉ ने क्या कहा ?

ऋतू : बताती हूँ पहले यहां से चलो .

हम दोनों कार में बैठ गए और वहां से निकल गए . ऋतू की हालत लगातार ख़राब होती जा रही थी . वो पसीने से लगातार भीगी जा रही थी .

अमित : आपकी हालत ठीक नहीं है , डॉ ने कहा क्या है कुछ तो बताइये ?

ऋतू : बताती हूँ थोड़ा सा वेट करो .

कुछ hi पलों में ऋतू ने एक होटल क बहार कार को रोका .

अमित : हम यहाँ क्यों रुक गए ?

ऋतू : मेरे इलाज क लिए .

अमित : आपका इलाज वो भी यहाँ ? यहाँ कौन सा इलाज होगा और कौन करेगा ?

ऋतू : पहले अंदर चलो और हाँ रिसेप्शन पर जा कर रत क लिए अपने नाम से रूम लो .

मुझे समाज नहीं आ रहा था क ऋतू करना क्या छह रही है . मैंने रिसेप्शन पर जा कर अपने नाम से रूम बुक किया और वेटर ने मुझे कमरा दिखा दिया . ऋतू भी पीछे पीछे आ गयी . वेटर क जाते hi ऋतू रूम में आयी और दरवाज़ा अंदर से लॉक कर दिया .

अमित : अब तो बतिये क आप किस इलाज की बात कर रही हैं और कौन करेगा इलाज यहाँ ?

ऋतू : नशीली आँखों से मुझे देखते हुए ) तुम्हे पता है मुझे क्या हुआ है ? उस कमीने ने मुझे वियाग्रा ड्रग दी थी ताकि मैं उसके साथ सेक्स करूँ . उसी का असर है मुझ पर और डॉ ने कहा है क इसे निकलने क लिए मुझे सेक्स करना होगा वर्ण मेरी तबियत और ज्यादा ख़राब हो जाएगी . अब समझे क मेरा इलाज क्या है ? और मेरा इलाज अब सिर्फ तुम hi कर सकते हो . उम्मम्मम्मम

इतना कहते hi ऋतू मुझ पर झपट पड़ी और मेरे होंठों को अपने होंठों में जकड कर किश करने लगी . ऋतू बहुत ज्यादा गरम हो चुकी थी और अब मैं भी उसकी इस गर्मी को महसूस कर प् रहा था . वैसे तो मेरा बिलकुल भी मन नहीं था पर जैसा की ऋतू ने बताया उसकी इस हालत का इलाज अब सिर्फ यही था तो मैंने भी उसका साथ देने का फैसला किया और उसे किश करने लगा . ऋतू बहुत ज्यादा वाइल्ड होती जा रही थी और मेरे होंठों को डेंटन में के दबाकर खींच खींच कर किश कर रही थी . वो मेरे कपडे नोचने लगी तो मैंने भी उसका साथ देते हुए अपनी T-shirt उतर दी . ऋतू ने अपनी T-shirt भी खुद hi उतर दी और काली ब्रा में कैद उसके ठोस वक्ष और भी ज्यादा तन कर खड़े हुए नज़र आने लगे . अगले hi पल उसकी ब्रा भी जिस्म से जुड़ा हो चुकी थी . मैंने बिना देर किये उसके गोर ठोस स्तनों को अपने हाथों में जकड लिया और ज़ोर से दबाने लगा . ऋतू मेरे हाथों पर अपने हाथ रख कर खुद hi ज़ोर से प्रेस करवाने लगी . ऋतू ने मेरे बालों को अपने हाथों में पकड़ कर खींचते हुए फिर से मेरे होंठ जकड लिए और किश करने लगी . ऋतू अपनी एक तंग को मेरी तंग से रगड़ रही थी तो मैंने उसके कूल्हों क नीचे हाथ दाल कर उसे हवा में उठा लिया और ऋतू ने मेरी कमर पर अपनी टाँगें लपेट ली . मैं ऋतू को गॉड में उठा कर बीएड पर ले आया और उसे वहां लिटा कर उसके मदमस्त स्तनों को चूमने लगा और उसके गुलाबी निप्पल्स अपने डेंटन में दबा कर खींचने लगा .

ऋतू : उनममम कक्कक्क्स उम्मम्मम मम्माआआ कक्कक्स और ज़ोर से करो उनममम खा जाओ कॉमन सूचक बात उम्म्म्म कक्ककक्कक्स

ऋतू लगातार मेरे बल खींच रही थी . मैंने कुछ देर ऋतू क स्तनों को चूमा जिससे वो और भी ज्यादा वाइल्ड होती जा रही थी. ऋतू ऊपर से निर्वस्त्र हो चुकी थी और नीचे जीन्स में थी. मैं अभी स्तनों को चूम कर पेट की तरफ बढ़ा hi था क ऋतू ने मुझे पलट दिया और खुद मेरे ऊपर आ गयी . अगले hi पल वो मेरी जीन्स को खोल कर उतरने लगी . ऋतू इस वक़्त उतावले पैन में थी जैसे बहुत जल्दी हो . ये हालत शायद ड्रग्स की वजह से hi थी इस लिए मैं भी बस उसका साथ देता जा रहा था . ऋतू ने जीन्स क साथ hi मेरा अंडरवियर hi खिंच कर उतर दिया . कपड़ो से आज़ाद होते hi मेरा लैंड स्प्रिंग की तरह उछाल कर लहराने लगा . ऋतू ने जल्दी से उसे हाथ में पकड़ा और भूखे भेड़िये की तरह लैंड पर टूट पड़ी . मगर उसने ज्यादा टाइम वास्ते नहीं किया और अपनी जीन्स पेंटी क साथ hi उतर कर एक डैम नंगी हो गयी . मैंने अभी अचे से देखा भी नहीं था उसे क वो बीएड पर घुटनो क बल होती मेरे ऊपर आ गयी और लैंड को हाथ से पकड़ कर अपनी छूट पर से किया और बिना देर किये नीचे बैठ गयी. एक hi झटके में आधा लैंड छूट में घुस गया जिसे ऋतू क मुँह से कराह निकल गयी .

ऋतू : आआआहहहहह कक्ककक्कक्स उईईई माआआ बड़ा जालीम है कक्कक्क्स पर आअज मैं इसे छोडूंगी नहीं मममम aaaaaahhhhhhhhhhh

ऋतू ने अपनी बात पूरी करते हुए अपना जिस्म थोड़ा सा ऊपर किया और अगले hi पल धक् से नीचे बैठ गयी और एक बार फिर से वो ज़ोर से चिल्लाई. और इसी क साथ hi उसके चूतड़ मेरी जांघों पर टिक गए . ऋतू का गोरा बदन कामाग्नि में जल कर लाल गुलाबी हो चूका था . और अभी लैंड को झटके से जड़ तक लेने से कराह रहा था . ऋतू ने अपने होंठ डेंटन में दबा लिए थे और ऑंखें बंद कर क इस दर्द को जज्ब कर रही थी . मैंने हाथ बढ़ा कर उसके स्तनों को मसलना शुरू किया तो के चेहरे पर दर्द क भाव कुछ कम हुए और उसने ऑंखें खोल कर मेरी आराम देखा .

अमित : इतनी जल्दी क्या थी आपको ? आराम से भी तो कर सकती थी . देखा कितनी दर्द हो रही है अब आपको .

ऋतू : ये दर्द hi तो ाचा लगता है तुम्हारे साथ , मैं चाहती हूँ ये दर्द तुम मुझे बार बार दो . आज तुमने मेरा दिल मेरी आत्मा सब कुछ जीत लिया है . इस जिस्म को जितना चाहे दर्द मिले पर ये सिर्फ तुमसे प्यार hi चाहेगा और आज मैं हर दर्द सहना चाहती हूँ . कक्कक्स अह्ह्ह आह्हः अह्ह्ह आअह्ह्ह

ऋतू मेरी आँखों में देखते हुए खुद hi मेरे लैंड पर अपनी छूट पटकने लगी. मैंने उसके स्तनों को दबा रहा था और वो अपने हाथों से अपने बाल नोच रही थी. ऋतू का गोरा मजबूत बदन मेरे लैंड पर उछाल रहा था जिससे उसके स्तन हवा में उछाल रहे थे . वो पहलों की तरह अपने बाल नोच रही थी . जैसे जैसे वक़्त बीत रहा था ऋतू और भी ज्यादा वाइल्ड होती जा रही थी.

ऋतू : फुककक फुककक फुककक सीसीसी और ज़ोर से करो और तेज़ फुकक में लिखे सलूट फुककक में कक्कक्स उम्म्म्म

ऋतू का खुद पर काबू नहीं था . ऋतू को काबू करने क लिए मैंने अब उसे पलट कर नीचे दाल लिया और खुद उसके ऊपर आ गया . ऋतू की लम्बी गोरी चिकनी टांगों को कंधे पर रख कर मैंने उसकी जंगों को पकड़ा और तेज़ तेज़ झटके मरने लगा .

ऋतू : आअह्ह्ह आअह्ह्ह सीसीसी और तेज़ और ज़ोर से करो और ज़ोर से ,,, ककक वो हरामज़ादा मेरी इज़्ज़त लूटना चाहता था मुझे रंडी बनाना चाहता था उम्म्म्मक्क्कक्स हरामज़ादा कुत्ता उसे क्या पता मैं उसके बाआप की रंडी हूँ तुम्हारी रंडी हूँ और ज़ोर से करो और ज़ोर सीए ीीे आअह्ह्ह्हह सुन भड़वे देख तेरा बाप मुझे कैसे छोड़ रहा है . मैंने कहा था न मुझे हाथ लगाया तो तू ज़िंदा नहीं बचेगा , अब तो मर कर आज़ाद हो गया है न , देख तेरा बाप कैसे मुझे छोड़ रहा है . इसे कहते हैं असली मर्द , मेरे इस जिस्म पर सिर्फ इसी मर्द का हक़ है . तेरे जैसे भावों का नहीं कुत्ते आआह्ह्ह आआह्ह्ह और ज़ोर से करो मेरी जाएं आअज क बाद इस छूट में कभी गर्मी न पैदा हो ऐसे ठंडी कर दो उम्म्म्म उम्म्म्म

अमित : तुम राबड़ी नहीं हो तुम मेरी ऋतू हो मेरी साली आधी घरवाली मैं तुम्हे कभी कुछ होने नहीं दूंगा मेरी जाएं

ऋतू : आधी नहीं पूरी घरवाली हूँ मेरे मालिक जब चाहो जहाँ चाहो मुझे अपने नीचे लिया लेना , ऋतू आपको कभी मन नहीं करेगी बस ऐसे hi मुझे प्यार करना हमेशा . आअह्ह्ह आअह्ह्ह

ऋतू लगातार कुछ न कुछ बोले जा रही थी और मुझे उसका रही थी वास्तव में उसके जिस्म की आग उससे ये सब बुलाव रही थी जिसे मैं ठंडा करने में लगा हुआ था . ऋतू मेरे नीचे लेती खुद hi अपनी कमर उछाल कर लैंड को और ज्यादा अंदर लेने की कोशिश कर रही थी . चुदाई का तूफ़ान लगभग आधा घंटा चला जब तक क मेरी बस नहीं हो गयी . और आखिर में मैं ऋतू को घोड़ी बना कर उसकी सवारी करता हुआ उसके ऊपर hi देह गया उसकी छूट को अपने पानी से भरता हुआ . ऋतू की छूट पता नहीं कितनी बार ो ी छोड़ चुकी थी मगर वो अभी भी ठंडी नहीं हुई थी. मेरा पानी निकलते hi मैं उसकी पीठ पर hi गिर गया और वो मेरे नीचे सब गयी. कुछ देर हम दोनों अपनी साँसे दुरुस्त करते रहे . कब मेरी साँसे कुछ सम्भालो तो मुझे अपने मोबाइल की रिंग टोन सुनाई दी . मैंने ज़मीन पर गिरी अपनी जीन्स में से मोबाइल निकला तो देखा निधि दीदी की कॉल थी .

निधि : आखिर तुम हो कहाँ ? फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे कब से कर रही हूँ . टाइम देखो कितना हो गया है . कब आ रहे हो घर ?

अमित : ओह्ह्ह स सॉरी सॉरी दीदी मुझे पता hi नहीं चला . वो क्या है न अपने दोस्त को लेकर डॉ क पास आया था तो बस इसी में पता नहीं चला.

निधि : अब कैसा है तुम्हारा दोस्त ? और अब तुम घर कब आ रहे हो . अगर कोई ज़रूरी मसला है तो मुझे बताओ मैं भी वहां आ जाती हूँ.

अमित : अरे दीदी आप यहाँ आ कर क्या करेंगी . मैं aaaaaaaaaaaa रह्हह्हह्हआआआ हूँ न .

मेरे शब्द सिसकी बन गए थे क्यूंकि ऋतू फिर से मुझे गरम करने लगी थी और मेरे लैंड को मुँह में भर चूसने लगी थी . मैंने उसे रोकने की कोशिश की पर वो मन नहीं रही थी .

निधि : ये कैसे बात कर रहे हो ? तुम ठीक तो हो न ? कहीं तुम्हे तो कुछ .....

अमित : नहीं दीदी मम मैं बिलकुल ठीक हूँ . अआप चिंता मत करो . मैं अभी रखता हूँ डॉ से बात करनी है . आप मेरी चिंता मत करो . जैसे hi यहाँ से फ्री हो गया तो वापिस आ जाऊंगा . आप मेरा वेट मत कर मुझे देर हो जाएगी . Ok दीदी bye .



दीदी की बात सुने बिना hi मैंने फ़ोन काट दिया क्यूंकि मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था जिस तरह से ऋतू मेरा लैंड मुँह में लिए मुझे गरम कर रही थी . फ़ोन को साइड में फेंक कर मैंने ऋतू की तरफ देखा जो मस्ती में खोयी मेरा लैंड तैयार कर रही थी. शायद उसके जिस्म की आग अभी ठंडी नहीं हुई थी. मैंने ऋतू का सर सहलाया और फिर से शामिल हो गया उसके साथ . मैंने दीदी को कह तो दिया था क मैं वापिस आऊंगा पर ऋतू को देख कर लग रहा था क ये रत लम्बी होने वाली थी .
 
हैप्पी होली तो आल मेंबर्स ऑफ़ थिस फोरम
 
अपडेट 230



ऋतू पर ड्रग्स का जो असर था वो धीरे धीरे काम तो हो रहा था मगर इस कोशिश में हम दोनों की hi हालत ख़राब हो गयी थी. सुबह 4 बजे तक मैं ऋतू मैडम की आग को ठंडा करने क लिए जी तोड़ म्हणत करता रहा और इस सब में मेरी अपनी हालत ख़राब हो गयी थी. मैंने चार बार अपना पानी ऋतू की छूट में भरा जो एक पल क लिए भी बहने से रुकी नहीं थी. इतना ज्यादा पानी बहाने से ऋतू की अपनी हालत भी ख़राब हो गयी थी. उसकी छूट की फांके सूज गयी थी और टमाटर की तरह लाल हो गयी थी. शरीर में मनो जान बाकि hi नहीं बची थी. आखरी बार जब मैं पानी छोड़ा तो ऋतू मैडम क साथ मेरी हालत भी ऐसी हो गयी थी क पाऊँ पर खड़े होना भी मुश्किल था . ऋतू मैडम की ऐसे hi अधमरी हालत में पड़ी थी और मैं भी उनके ऊपर गिर पड़ा था . मैंने जैसे तैसे हिम्मत इकठ्ठा की और ऋतू मैडम को मेडिसिन दी जो डॉ ने दी थी. अब मुझे भी आराम की सख्त ज़रूरत थी . इस लिए कुछ देर आराम करने का सोच कर मैं भी ऋतू मैडम क साथ hi लेट गया . बीएड पर गिरते hi ऐसे नींद आयी जैसे मैं कई दोनों से सोया नहीं था . पलंग तोड़ चुदाई का hi असर था क हम दोनों को hi कुछ होश न रहा . वैसे भी इतनी ज्यादा चुदाई से नसें तक खुश्क हो गयी थी दोनों की hi. पता नहीं कब तक हम सोये रहे और नींद खुली तो फ़ोन की घंटी से hi जो पता नहीं कब से बज रही थी .मैंने नींद में वैसे hi फ़ोन उठा कर कण से लगा लिया .

अमित : हेलललललूओ

निधि : कहाँ हो तुम ? रत भर घर नहीं आये और सुबह से सब तुम्हे फ़ोन लगा रहे हैं . तुम फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे .

निधि दीदी की आवाज़ सुनते hi मेरे दिमाग ने एक डैम से काम करना शुरू किया और मेरी नींद पल में Hi उचट गयी . मैं झटके से उठ कर बैठ गया .

अमित : वो दीदी वो मैं साडी रत जगता रहा न तो पता hi नहीं चला कब आँख लग गयी . सब तो ठीक तो है न ?

निधि : कुछ ठीक नहीं है , सब को कितनी चिंता हो रही थी पता भी है? घर से मां ममी का भी फ़ोन आ चूका है माँ मौसी भी सब पूछ रहे हैं क तुम फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे . अंकल आंटी यहाँ अलग से परेशां हैं. कितने हॉस्पिटल्स में पता कर चुके हैं. तुम आखिर हो कहाँ ?

अमित : मैं वो मैं ,, मैंने बताया था न दीदी क मेरे दोस्त की हालत ठीक नहीं थी तो मैं उसे हॉस्पिटल लेकर आया था .

निधि : झूठ मत बोलो , अंकल सब हॉस्पिटल में पता कर चुके हैं. आखिर ऐसा कौन सा हॉस्पिटल है जो तुम अब तक मिले नहीं .

अमित : हह हॉस्पिटल में होता तो मिलता न दीदी. मैं तो अपने दोस्त क घर पर हूँ. वो क्या है न क रत बहुत लेट गया था और मेरे दोस्त क घर कोई था भी नहीं तो मैं यहीं रुक गया. आप चिंता मत करो मैं अभी आ रहा हूँ. साथ में ब्रेकफास्ट करते हैं .

निधि : ब्रेकफास्ट ??? घडी देखो 12 बज चुके हैं. अब तो लंच hi होगा . तुम जल्दी से आ जाओ बस .

मैंने दीदी को जल्दी आने का बोल कर कॉल कट की और जल्दी से बीएड से उठा . मैं बाथरूम में जाने hi लगा था क ऋतू मैडम पर मेरी नज़र पड़ी जो अभी भी बीएड पर बेसुध पड़ी थी. बीएड शीट पर पड़े हमारे वीर्य क धब्बे रत को घमासान चुदाई क सुबूत थे . ऋतू मैडम बीएड पर उलटी लेती हुई थी और उनके बाल बिखरे हुए थे. दोनों टाँगें फैलाये वो सो रही थी . टांगों क बीच छूट अभी भी सूजी हुई लग रही थी. मैंने जल्दी से जा कर बेतहरूम में गीज़र ों किया और पानी गरम कर क ऋतू मैडम को उठाने की कोशिश की. मगर वो अभी भी जैसे बेहोशी में hi थी. मैं उन्हें वैसे hi गॉड में उठा कर बाथरूम में ले गया और उन्हें कमोड पर बैठ कर उनकी छूट पर गरम पानी गिरा कर मालिश करने लगा . छूट पर गरम पानी पड़ते hi ऋतू मैडम दर्द से सिसक पड़ी .

ऋतू : cccccccccc माआआ उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ ाआईईई प्लीज मत करो ाआईईईई

अमित : बस बस मैडम बस थोड़ा सा बर्दाश्त कर लीजिये . इससे आपको आराम मिलेगा .

ऋतू मैडम दर्द से कराह तो रही थी मगर होश में आते hi वो दर्द को बर्दाश्त करती मुझे अपनी छूट की सिकाई करते हुए गौर से देखने लगी . मैं आराम से उनकी छूट की सिकाई करता रहा और फिर उन्हें धरा देकर शावर क नीचे खड़ा किया और उन्हें नहलाया . ऋतू मैडम नज़रें झुकाये शर्मा भी रही थी और बीच बीच में मुझे प्यार भरी नज़रों से देख भी लेती . उनका शर्माना बिलकुल अल्हड लड़कियों जैसा लग रहा था . ऋतू मैडम को नहलाने क बाद मैंने उन्हें टॉवल से साफ़ किया और फिर से बाँहों में उठा कर वापिस बीएड पर ले गया. मैंने मैडम को कपडे पहनने को कहा और खुद नहाने चला गया . मेरे वापिस आने तक मैडम ने अपने कपडे पेहेन लिए थे और मैं भी जल्दी से कपडे पेहेन कर तैयार हो गया .

अमित : मैडम टाइम बहुत हो गया है . हमें अभी निकलना होगा. आप ड्राइव तो कर लेंगी न ? क्या आप कुछ खाना पसंद करेंगी ?

ऋतू : रुकोऊ ,, किस बात की जल्दी है तुम्हे ? और ये बार बार मैडम क्यों कह रहे हो मुझे ? क्या मैं तुम्हारी मैडम हूँ ? पहले मुझे मेरे नाम से बुलाओ फिर मैं कोई बात सुनूंगी .

ऋतू मैडम की बात सुन कर मैं एक डैम से ठिठक गया. मुझे तो यहाँ से जाने की जल्दी थी पर पता नहीं ऋतू मैडम क मन में क्या चल रहा था .

अमित : ाचा ाचा सॉरी ऋतू जी ....

ऋतू : ऋतू जी नहीं , सिर्फ ऋतू. यही मेरा नाम है. हाँ अगर तुम कुछ और कहना चाहो तो वो भी चलेगा . स्वीट हर्ट्स जणू डार्लिंग बीवी मधुकर कुछ भी . जो तुम्हे ाचा लगे पर मैडम या ऋतू जी नहीं.

ये सब कहते हुए ऋतू मैडम क होंठों पर अलग hi मुस्कान थी और आँखों में शरारत .

अमित : रत भर मेरी हालत ख़राब करने क बाद भी लगता है मन नहीं भरा तुम्हारा . अब क्या जान लोगी ?

ऋतू : मेरा कलर पकड़ते हुए ) जान अभी ली कहाँ है . वैसे भी मुझे जो चाहिए होगा मैं हक़ से ले लुंगी.

इतना कह कर ऋतू ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और किश करने लगी . मेरे बालों को मुठी में भींचे ऋतू वाकई में पूरे हक़ से किश कर रही थी और मैं उसकी पकड़ में फसा चुपचाप उसका साथ दे रहा था .

अमित : ऊम्ममाहहह ,,, हमें अब जाना भी होगा टाइम देखो. घर पर सब टेंशन में हैं. और तुम्हे भी तो जाना है न वापिस .

ऋतू : मन तो नहीं कर रहा तुम्हे छोड़ ने का पर,,,, ाचा चलो चलते हैं.

अमित : अभी तक दवा का असर उतरा नहीं क्या ? रत भर हालत ख़राब कर दी मेरी .

ऋतू : हालत क्या सिर्फ तुम्हारी ख़राब हुई मेरी नहीं ? पाऊँ पर खड़े होने में भी दिक्कत हो रही है

अमित : तो फिर अब ये सब क्यों कर रही हो ?

ऋतू : प्यार ,,, प्यार मेरी जान . तुम पर दिलो जान कुर्बान करने को मन कर रहा है. वैसे भी हम दोनों यहाँ अकेले hi तो हैं .

इतना कह के ऋतू ने मेरे गले में बहन डाली और फिर से किश करने लगी

अमित : उम्म्माःह्ह्ह्ह बस अब और नहीं वर्ण फिर से मूड बन जायेगा और हम दोनों की hi हालत ठीक नहीं है . चलिए अब चलते हैं .

ऋतू : ठीक है पर तुम्हे यद् है न तुमने वडा किया था मेरा बर्थडे गिफ्ट ?

अमित : क्या अभी भी कुछ कमी रह गयी है ?

ऋतू : कल जो कुछ भी हुआ वो मज़बूरी थी समझे . मैं तुम्हारे साथ पूरा एक दिन प्यार करते हुए बिताना चाहती हूँ.

अमित : ठीक है मगर फ़िलहाल कोई वडा नहीं कर सकता . अभी घर चलिए वर्ण मेरी बुरी हालत हो जनि है आज . पता नहीं अब क्या कहूंगा घर जा कर .

उसके बाद ऋतू मैडम ने मुझे घर क करीब ड्राप किया और खुद वापिस चली गयी अपने शहर की तरफ . इस बीच मैंने शेरा भाई से भी बात की . वो परेशां थे और कई बार मुझे फ़ोन भी लगा चुके थे जब हम सो रहे थे . मैंने उन्हें अपनी खैरियत बताई और ये भी बता दिया क मैं वापिस जा रहा हूँ . वो मुझसे मिलना तो चाहते थे पर मेरी मज़बूरी को समझते हुए उन्होंने ज़ोर नहीं दिया . जैसे hi मैं घर पहुंचा तो सिक्योरिटी गार्ड ने जल्दी से गेट खोला. घर क अंदर आते hi निधि दीदी जो हॉल में hi बैठी थी दौड़ कर आयी और मेरे गले लग गयी

निधि : कहाँ चले गए थे तुम ? तुम्हे ज़रा भी परवाह है किसी की ? सब कितना परेशां हो रहे थे , ऊपर फ़ोन भी नहीं उठाते तुम .

निधि क चेहरे पर चिंता साफ़ नज़र आ रही थी. होती भी क्यों न वो सब से ज्यादा मुझे hi तो प्यार करती थी .

अमित : सॉरी दीदी , मैंने आपको बताया न वो मेरे दोस्त की तबियत अचानक ख़राब हो गयी थी और उसके घर में कोई था भी नहीं इस लिए मुझे रुकना पड़ा. अब अपने दोस्त को ऐसे छोड़ भी तो नहीं सकता था न .

‘ अरे भाई तुम्हारा कौन सा दोस्त बन गया इस शहर में जिसके लिए तुम सब कुछ बीच में hi छोड़ कर चले गए ? हमसे नहीं मिलवाओगे उसे ? साथ तो लाये हो न उसे ? ‘ ये आवाज़ अंकल की थी जो हमारी तरफ hi आ रहे थे . मैंने आगे बढ़ कर उनके पाऊँ छुए

अमित : वो अंकल आप उसे नहीं जानते , पिछली बार जब मैं आया था तब मुलाकात हुई थी और एक बार हमारे शहर में भी. बहुत ाचा है वो , मैं उसे साथ ज़रूर लेकर अत पर तबियत कुछ ज्यादा ठीक नहीं थी तो उसे आराम hi करने दिया

राघव : कोई बात नहीं पर दोबारा ऐसा मत करना . पता भी है यहाँ क्या क्या सोच रहे थे सब . अब जल्दी से बैठो खाना खा के हमें वापिस निकलना है . रमा अब तो खाना मिलेगा न ?

रमा : हाँ हाँ अब तो आप को मज़ाक hi सूझेगा . सुबह से तो खुद hi खाना पीना भूले हुए थे . और तुम तुमसे तो मैं बाद में बात करती हूँ पहले खाना खा लो

अंकल ने थोड़ा मज़ाकिया लहजे में पुछा तो पास में hi कड़ी आंटी उनकी बात पर झूठा गुस्सा दिखते हुए मुझे देखते हुए किचन में चली गयी.

करिश्मा : तुम सुमन को कैसे जानते हो ? बड़ी तारीफ कर रही थी तुम्हारी.

अमित : वो मैं वो हाँ वो मैं जब कम्पटीशन क लिए यहाँ आया था कॉलेज की तरफ से तब उनसे मिला था . उनकी गाड़ी ख़राब हो गयी थी . तब मैंने मदद की थी .

मैंने करिश्मा दीदी क इस सवाल पर एना फानन में जवाब तो दे पर उनके चेहरे क भाव से लग रहा था क वो जैसे संतुष्ट नहीं हैं मेरे जवाब से .

करिश्मा : ाचा !!! पर वो तो कुछ और hi बता रही थी .

अमित :क क क्या बता रही थी वो ?

रमा : पहले चुपचाप खाना खा लो बातें बाद में भी हो जाएँगी.

आंटी ने टेबल पर खाना लगते हुए कहा . नौकर क हाथ से खाना लेकर सब को परोसते हुए आंटी भी साथ hi बैठ गयी . मुझे तो समझ नहीं आ रहा था क मैं अब जवाब क्या दूँ ाचा हुआ आंटी बीच में आ गयी . पर करिश्मा दीदी का रिएक्शन देख कर मुझे शक हो रहा था क कहीं सुमन ने वो बात तो नहीं बता दी. मैंने तो उसे कहा भी था क इस बारे में कभी किसी से ज़िकर न करे पर हो सकता है पुराणी दोस्त होने की वजह से उसने कहीं बता hi न दिया हो .

जल्दी से हम सब ने खाना खाया और अंकल ने सबको गाड़ियों में बैठने को कहा . गाड़ियों में सवार होते hi हम वापिस निकल पड़े. मैं करिश्मा दीदी से बचना छह रहा था पर यहाँ भी वो जैसे सवालों की पोटली साथ लिए बैठी थी. अंकल आंटी दूसरी कार में थे और यहाँ मैं निधि दीदी और करिश्मा दीदी थे. निधि कार चला रही थी और मैं उनके बगल में बैठा था .

करिश्मा : तो अब बताओगे एक्साक्ट्ली तुम कैसे मिले थे सुमन से ?

अमित : बताया तो था दीदी क उनकी कार ख़राब हो गयी थी और मैंने उनकी मदद की थी.

करिश्मा : पर वो तो कह रही थी तुमने उसकी जान बचाई थी .

करिश्मा दीदी की इस बात से मेरी तो बोलती hi बंद हो गयी . इसका मतलब सुमन ने सब कुछ बता दिया है इनको .

निधि : सच क्या है बताओगे अब ? वैसे मैं भी सुमन को जानती हूँ बचपन में मिली हूँ कई बार. पहले तो पहचाना नहीं था पर करिश्मा ने यद् दिलाया. ये दोनों तो काफी सैलून तक अछि दोस्त रही हैं . अब मुझे भी जानना है क बात क्या है जो वो इतनी तारीफ कर रही थी. वहां ज्यादा बात हो नहीं पायी. वैसे वो तुमसे मिलने आने वाली थी मगर उसकी आज कोर्ट में डरे थी ज़रूरी . उसने कहा है वो जल्दी hi आएगी सब से मिलने .

अमित : सब से मिलने ? क्या वो सब को जानती है ?

निधि : और नहीं तो क्या , बजाज अंकल तुम्हारे पापा क खास थे इस लिए सभी रिश्तेदारों को वो अछि तरह जानते हैं. हर फंक्शन में तो साथ hi होते थे और सुमन भी साथ hi हुआ करती थी . वो तो अंकल ने मन किया था इस लिए हमने नहीं बताया क तुम कौन हो . मगर जब वो सब से मिलेगी तो पता चल hi जायेगा . अब तुम पहले जवाब दो

अमित : वो क्या है न दीदी क उनकी कार ख़राब हो गयी थी और कोई उनका पीछा कर रहा था . मैंने तन उनकी मदद की तो इस लिए उन्होंने ऐसा कहा होगा. इसके इलावा और तो कुछ नहीं हुआ था.

करिश्मा : पक्का यही बात है न ? मैं सुमन से पूछ लुंगी .

अमित : हाँ दीदी आप यकीन क्यों नहीं कर रही .

करिश्मा : ाचा तुम रत भर किस हॉस्पिटल में थे ?

अमित : हॉस्पिटल में था पर रत को वापिस आ गया था मैं दोस्त क घर .

करिश्मा : हाँ वो hi , कुन से हॉस्पिटल लेकर गए थे तुम अपने दोस्त को.

अमित : ये तो मैंने देखा hi नहीं. मैं जल्दी जल्दी में ले गया था मुझे यहाँ का भला क्या पता होगा .

करिश्मा: तुम्हे पता भी है कितनी टेंशन हो गयी थी पापा को ? ऊपर से सरे शहर में टेंशन का माहौल बन गया है मला क मर्डर से .

अमित : क्या ? मला का मर्डर ?

करिश्मा : तो क्या तुमने ये भी नहीं सुना ? तुम थे कहाँ आखिर ? कल रत को hi पुलिस को उसकी डेड बॉडी शहर क बहार मिली है. पुलिस का कहना है क ये काम नक्सलियों या अंडरवर्ल्ड का है . सरे शहर में नाकाबंदी हो चुकी है . इसी लिए पापा को टेंशन हो रही थी कहीं तुम किसी मुसीबत में न दस जाओ .

करिश्मा दीदी की बात सुन कर मैं सोच में पद गया और मुझे शेरा भाई की टेंशन होने लगी. मुझे तो उन्होंने बचा लिया था पर हूँ ो खुद फास सकते थे इस केस में. हम शहर से बहार निकल hi रहे थे क पुलिस नका पर हमारी गाड़ी की अचे से जाँच की गयी. सभी गाड़ियों को अचे से जांचा जा रहा था . अंकल क साथ होने की वजह से कोई ज्यादा बात नहीं हुई क्यूंकि वो शहर क बड़े बिजनेसमैन थे . करिश्मा दीदी और निधि दीदी मुझसे बात कर रही थी मगर मेरा ध्यान शेरा भाई की तरफ था . रस्ते में एक होटल पर हम चाय नाश्ते क लिए रुके तो मैंने शेरा भाई को फ़ोन किया और उनसे उनकी खैरियत पूछी. उन्होंने बताया क वो सेफ हैं और मैं उनकी चिंता न करूँ. पुलिस को उनके खिलाफ कुछ नहीं मिला था जैसा क ऋतू मैडम क साथी पुलिस वालों ने अचे से सबूत मिटा दिए थे . मुझे उनसे बात कर क कुछ रहत मिली और हम ऐसे सफर करते करते वापिस शहर पहुँच गए .

उधर गाओं में अलग hi बेचैनी चाय हुई थी दिव्या क मन में . एक तो अमित को उसी शहर में जाना ऊपर से रत तक वापिस आने का कह कर गए थे मगर वहीँ रुक गए. नैना और करुणा ने रत को अमित से फ़ोन पर बात करने की कोशिश की थी मगर उसने फ़ोन hi नहीं उठाया . ये बात उन दोनों ने सबके सामने ऐसे hi कह दी थी मगर दिव्या का मन इससे और ज्यादा बेचैन हो उठा था. एक अजीब सी बेचैनी उसे होने लगी थी जैसे अमित क साथ कुछ बुरा न हो जाये या फिर वो अपने पिता क सौतेले भाइयों की नज़र में न आ जाये . वो जानती थी क वो कैसे लोग हैं क्यूंकि दामिनी से उनसे सब कुछ सुन रखा था उन लोगों क बारे में . उसने राधा से भी फ़ोन करवाया था सुबह मगर अमित ने फ़ोन नहीं उठाया. तब उसने निधि से बात की थी . निधि ने वैसे तो बात को संभल लिया था ताकि घर पर कोई परेशां न हो मगर दिव्या का मन जैसे किसी अनहोनी होने से दर रहा था . उसकी ऑंखें बस अमित को देखना छह रही थी और इसी लिए उसका किसी भी काम में मन नहीं लग रहा था . उसकी नज़र बस दरवाज़े पर hi थी क कब अमित वापिस घर आएगा . इंतज़ार करते करते उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी . अब वो उखड़ी उखड़ी सी गुस्से में आने लगी थी और अपने भैया भाभी से भी इस बात पर नाराज़ हो रही थी क उन्होंने अमित को जाने hi क्यों दिया . उसकी बेचैनी सब समझ रहे थे . मगर दिव्या को इस वक़्त समझना किसी क बस में नहीं था . दिव्या की बेचैनी से गौरी भी अंदर से बचें हो गयी थी. कहीं न कहीं उसका भी मन अंदर से दर रहा था . मगर शाम को जब राघव का फ़ोन आया क वो वापिस घर आ गए हैं तो उसे थोड़ी शांति मिली. पर साथ में उसने ये भी बता दिया था क अमित आज रत वहीँ रहेगा . इस बात से वो थोड़ी नाराज़ तो हुई अपने पति से पर बेचारी क्या करती . मगर दिव्या तो मनो अभी भी किसी अनहोनी से दर रही थी. उसका दिल शांत hi नहीं हो रहा था ये जान कर भी क अमित सही सलामत वापिस आ चूका है . पता नहीं क्यों दिव्या का दिल घबराये जा रहा था क जैसे कुछ होने वाला है .

उधर ऋतू भी वापिस आ चुकी थी. चाहे उसने होटल में अछि नींद ले ली थी पर उसकी बॉडी इतनी ज्यादा थक गयी थी रत भर की ज़बरदस्त चुदाई से क वो वापिस आ कर दवा खा कर फिर से सो गयी. उसका मन तो था क वो मंजू से जा कर मिले और अपने साथ जो कुछ भी हुआ वो सब मंजू को बताये. पर थकावट की वजह से उनसे ताल दिया . ऋतू अंदर से इतनी खुश थी की जितनी पहले शायद hi कभी हुई हो. रत की यद् आते hi वो खुद hi शर्मा जाती और मुस्कुरा देती. उसका रोम रोम अमित क नाम से पुलकित हो रहा था . वो मंजू को बताना चाहती थी कैसे अमित ने उसे बचाया है . और ये भी बताना चाहती थी क अब वो सिर्फ अमित की hi होकर रहेगी चाहे अंजाम कुछ भी हो. अपनी hi बेस्ट फ्रेंड की सौतें बनने पर भी उसे किसी तरह की इर्षा या दुःख नहीं हो रहा था बल्कि वो खुश थी . उसके लिए अमित अब उसका सब कुछ उसका पति उसका प्रेमी उसका स्वामी बन चूका था . अमित क बारे में hi सोचते सोचते वो दवा खा कर चैन की नींद सो गयी .

अंकल आंटी क यहाँ हम शाम को पहुँच गए थे . मैंने गाओं वापिस जाने की इजाज़त मांगी तो अंकल ने मन कर दिया . और खुद hi घर पर फ़ोन कर क बोल दिया क अमित सुबह वापिस आएगा . मैं खली बैठा था और मोहित भी घर पर नहीं था . तब मुझे मंजू म की यद् आयी . मैंने संडे को उन्हें गाओं ले जाने का कहा था पर बर्थडे होने की वजह से माँ ने घर से बहार निकलने hi नहीं दिया था . इस लिए सोचा क चल कर उनसे मिल लेता हूँ. मैं अंकल आंटी से जल्दी आने ला बोल कर निकल गया मंजू म से मिलने . जैसे hi मैंने बेल्ल बजायी तो मंजू म ने दरवाज़ा खोला और मुझसे सामने देख कर उनके चेहरे पर रौनक आ गयी जहाँ कुछ पहले उदासी थी.

मंजू : अमित !!! तुम आ गए .

मेरे अंदर आते hi मम मेरे गले लग गयी . मैंने भी उन्हें कास क बाँहों में भर लिया .

अमित : कैसी हैं आप ? सॉरी मैं इस दिन आपको लेने नहीं आ सका .

मंजू : सॉरी क्यों ? तो क्या हुआ तुम नहीं आ सके . अब तो आ गए हो न. पता है मैं तुम्हे कितना मिस कर रही थी.

अमित : ाचा , कितना मिस कर रही थी ? ज़रा मैं भी तो सुनु

मैंने मंजू म की चीन पर हाथ रख कर उनका चेहरा ऊपर उठाया तो वो शर्मा गयी .

मंजू : चलो पहले आराम से बैठो मैं तुम्हारे लिए कुछ लती हूँ.

मंजू म मेरी बाँहों से निकल कर जाने लगी तो मैंने उनका हाथ थम कर फिर से उन्हें खिंच कर अपने साथ लगा लिया .

अमित : किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं है , आप हैं न बस और कुछ नहीं चाहिए .

हम दोनों चल कर हॉल में आ गए . मैंने मंजू को अपने साथ hi सोफे पर बिठा लिया . वो ढीले ढले कपड़ों में थी और उनकी हालत से लग रहा था जैसे वो बहुत उदास रही हैं .

अमित : आप कुछ उदास लग रही हैं. बात क्या है ?

मंजू : कुछ नहीं , बस पुराणी यादों में खोयी थी. अकेली थी न तो अपनी ज़िन्दगी क उन ज़ख्मों को यद् करते करते बस ......

बात करते करते मंजू म क चेहरे पर दुःख क भाव उभर आये थे. मैंने उनका चेहरा अपनी तरफ घुमाया और उनकी आँखों में देखते हुए बोलै.

अमित : मैंने कहा था न क आप कभी उदास नहीं रहेंगी . फिर भी आप ऐसे खुद को तकलीफ दे रही हैं .

मंजू : जब से तुम मेरी ज़िन्दगी में आये हो मैं सब भूल hi गयी थी अमित. और जब से तुमने कसम दी है तब से मैंने कभी अपने दुःख दर्द को यद् भी नहीं किया . पर क्या करती जिस दिन तुम्हारा जन्मदिन था उस दिन मेरे भैया की बरसी भी थी. बस खुद को रोक नहीं पायी. एक वो hi तो थे जो मेरे सब कुछ थे मेरी दुनिया थे .

अमित : ओह्ह्ह ी ऍम सॉरी , मुझे नहीं पता था . आप अपने भैया से बहुत प्यार करती थी न .

मंजू : आज भी करती हूँ और हमेशा करती रहूंगी . वो मेरे लिए भाई hi नहीं मेरे माँ मेरे बाप भी थे . और फिर भाभी भी तो मेरी दोस्त मेरी बहिन जैसे थी. दोनों hi मुझसे बहुत ज्यादा इयार करते थे . सोचा नहीं था क इतना प्यार देने क बाद वो मुझे इस तरफ अचानक छोड़ जायेंगे . और बिट्टू , मेरा भतीजा मेरा खिलौना था जिसके साथ मैं खेलती थी उसे अपनी गॉड में खिलाती थी . अभी तो वो बस इतना सा था मगर भगवान सब कुछ छीन लिया . सब कुछ छीन लिया मुझसे और मुझे रोने क लिए छोड़ दिया .

इतना कह कर मंजू म रोने लगी और उनकी आँखों से आंसू जहर जहर बहने लगे . मैंने उन्हें गले से लगाया और उनको शांत करने की कोशिश की .

अमित: शह्ह्ह्ह बस बस प्लीज चुप हो जाइये मैडम , आप ऐसे रट hi तो क्या आपके भैया को ाचा लगेगा ? उनकी आत्मा को भी तो तकलीफ होती होगी न. प्लीज चुप हो जाइये .

मंजू म धीरे धीरे शांत हुई तो मैंने उनका चेहरा साफ़ किया .

अमित : ाचा आपने इतनी बार अपने भैया क बारे में बताया है मगर आज तक कभी मुझे उनसे मिलवाया नहीं . क्या मुझे नहीं मिलवाएंगी उनसे ?

मंजू : ऑंखें साफ़ करते हुए ) हाँ हाँ क्यों नहीं . चलो मेरे साथ. एक तुम hi तो हो उनके बाद जिसने मुझसे ज़िन्दगी में फिर से जाना सिखाया है. मैं भी पागल हूँ जो आज तक इस तरफ ध्यान hi नहीं दिया . वैसे तुम उनके जैसे hi दीखते हो. चलो पहले आज तुम्हे उनकी तस्वीर दिखती हूँ. आज तुम्हे उनके बारे में सब कुछ बताउंगी .

मंजू म खुश होते हुए मेरे हाथ पकड़ कर मुझे खींचती हुई अपने कमरे में ले गयी और मुझे बीएड पर बिठा कर अपनी अलमारी से एल्बम ले कर आ गयी . मेरे साथ बैठ कर जैसे hi उन्होंने एल्बम खोल कर अपने भाई की तस्वीर दिखाई तो मैं शॉकेड हो गया .



मंजू : ये हैं मेरे पवन भैया जिन्हे मैं प्यार से पन्नू भैया बुलाती थी . और ये हैं मेरी भाभी दामिनी और ये मेरा प्यारा बिट्टू .
 
दोस्तों मुश्किल हो रहा है , इस मोड़ से आगे का सन इमोशंस से भरा होगा . मगर उस सन को किसे एक्सप्लेन करूँ ये पहली बार मुझे लिखने में हूँ क बड़ी दुविधा की तरह hi नज़र आ रहा है. कोशिश करूँगा ठीक से लिखने की अगर सही से न लिखा तो आप सब क साथ मुझे भी बुरा लगेगा .
 
कोशिश रहेगी आज अपडेट कम्पलीट कर सकूँ पर वडा नहीं . अगर आज न हो सका तो कल को अपडेट मिल जायेगा
 
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