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मेरे सामने मंजू म मेरे hi माता पिता और मेरी बचपन की तस्वीर खोले बैठी थी और मुझे उनके बारे में बता रही थी. और मेरी ज़ुबान जैसे लकवा hi मर गयी थी. जिस मंजू बुआ की तलाश मुझे थी वो इतने समय से मेरी आँखों क सामने थी और मैं उन्हें कभी पहचान hi न पाया . जब भी मैं उनसे मिलता था तो मुझे हमेशा ये एहसास होता था क मेरा उनके साथ सम्बन्ध काफी पुराण है . मैं सोचता था शायद ये पिछले जनम का सम्बन्ध होगा पर ये नहीं समझ पाया क सम्बन्ध इसी जनम का था . मैं पत्थर सा बना बस उन्हें hi देखे जा रहा था और वो तस्वीरें दिखते हुए पता नहीं क्या क्या बता दिया रही थी. उनकी आँखों से बात करते करते आंसू बह रहे थे और उन्हें जैसे एहसास hi नहीं था क उनके पास मैं भी बैठा हूँ. जबकि मैं उनको देख कर खुद को सँभालने की कोशिश कर रहा था . आखिर मुझे आज वो पहला शख्स मिला था जो मेरे पापा क परिवार से था . और वो भी उनकी वो सही बहिन जिस पर वो अपनी जान छिड़कते थे . जिसे वो अपने बच्चों की तरह प्यार करते थे . जिनके लिए वो माँ बाप भाई सब थे . जिसकी तलाश सब को थी पर कोई नहीं जनता था वो इसी शहर में थी मगर सब उससे अनजान थे . मुझे समझ hi नहीं आ रहा था क मैं क्या कहूं उन्हें. मेरी आँखों में रुके आंसुओं ने अपनी सीमा लाँघ ली थी और अब मेरे चेहरे पर लकीरें बनाते हुए नीचे गिर रहे थे .
मंजू : रट हुए ) मेरी दुनिया मेरे भैया भाभी और मेरा बिट्टू hi थे मगर भगवन ने एक पल में hi मुझसे सब चीन लिया . काश मैं भी अपने भैया भाभी और अपने बिट्टू क साथ hi मर जाती .
अमित : रट हुए ) आप ने कभी अपने बिट्टू को तलाशने की कोशिश क्यों नहीं की बाआआ
मेरे मुँह से ‘ बुआ ‘ सुनते hi मंजू म को झटका लगा और एक डैम से वो रोटी रोटी चुप हो गयी और मुझे हैरानी से देखने लगी .
मंजू : क्या कहा तुमने ?
अमित : रट हुए ) आपने अपने बिट्टू को तलाशने की कोशिश क्यों नहीं की ‘ बाआआ ‘
मंजू : शॉकेड ) यय ये ये ये तुम क्या कह रहे हो ? मेरा बिट्टू तो मर चूका है . मुझसे ऐसा मज़ाक .....
अमित : रट हुए ) आपका बिट्टू ज़िंदा है बुआ और आपके सामने बैठा है .
मंजू म मेरी बात सुनते hi झटके से कड़ी हुई और 2 कदम पीछे हैट गयी . अपने हाथों को अपने मुँह पर रखे वो बड़ी बड़ी आँखों से मुझे देख रही थी जैसे ये कोई अनहोनी हो रही हो जिस पर उन्हें यकीन नहीं हो रहा था .
मंजू : ये तुम क्या बोले जा रहे हो ? तुम्हे क्या हो गया है ? मेरे साथ ऐसा मज़ाक मत करो. मत करो ऐसा मेरे साथ
अमित :रट हुए ) ये मज़ाक नहीं है बुआ , मैं hi आपका बिट्टू हूँ. माँ पापा तो मुझे छोड़ गए पर आपने भी एक बार भी मुझ से मिलने की कोशिश क्यों नहीं की ? क्या उनके साथ मेरा वजूद भी ख़तम हो गया था आपके लिए ?
मंजू : ज़ोर से ) nahiiiiiiiiiiii ,,,,, ऐसा नहीं हो सकता . केहदो क तुम झूठ बोल रहे हो. ऐसा नहीं हो सकता ये सब झूठ है .
अमित : रट हुए ) जानती हैं न मेरे बर्थडे पर hi माँ पापा और नाना नानी की एक्सीडेंट में मौत हुई थी . उस दिन शायद सब मंदिर जा रहे थे मेरे लिए पूजा करवाने . मगर मैं उस एक्सीडेंट में बच गया था . पर आपको कैसे पता होगा , आपने तो कभी जानने की कोशिश hi नहीं की क आपका बिट्टू ज़िंदा भी है या मर गया.
मंजू : तो क्या ,,, तो क्या तुम सच में ??????
अमित : हाँ बुआ मैं hi आपका बिट्टू हूँ . आपके पन्नू भैया और दामिनी भाभी का बीटा . जिसे आपने मारा हुआ मन लिया था पर बदकिस्मती से मैं ज़िंदा बच गया था .
मेरे मुँह से ये सुनते hi मंजू बुआ ने भाग कर मुझे गले से लगा लिया और मेरे सर को दोनों हाथों में थामे मेरे चेहरे पर लगातार चूमने लगी . साथ hi वो रोये जा रही थी और बोलती जा रही थी .
मंजू :रट रट चूमते हुए ) तू इतने दिन कहाँ था ? किसी ने मुझे बताया क्यों नहीं की तुम ज़िंदा हो ? मैं इतने सैलून तक यही सोचती रही क तुम भी भैया भाभी क साथ .. ये मेरे साथ इतना बड़ा धोखा किसने किया ? किसने मुझे मेरे बिट्टू से दूर किया ? मुझे तो यही कहा गया था क तुम भी भैया भाभी क साथ उस एक्सीडेंट में करे गए . तुम अब तक कहाँ थे ? कहाँ थे अब तक? तुझे कभी अपनी इस बदनसीब बुआ की यद् नहीं आयी ? एक बार भी तुझे तरस नहीं आया अपनी बुआ पर ? बोल कहाँ था तू ? कहाँ था अब तक ?
अमित : रट हुए ) यही तो मैं आपसे जानना चाहता हूँ क आपने कभी कोशिश क्यों नहीं की मेरे बारे में जानने की ? मुझे मेरे मां ममी अपने साथ ले गए थे पर आपने एक बार भी उन लोगों से मिल कर कुछ जानना ठीक नहीं समझा? आखिर ऐसी क्या बात हो गयी थी जो आपको अपने बिट्टू की ज़रा भी यद् नहीं आयी ?
मंजू : कैसे आती मैं ? बड़े भैया ने कहा था क उन लोगों ने भैया भाभी की तुम्हारी लाश भी देखने नहीं दी. ऊपर से झगड़ा भी किया . वो तुम्हारे नाना नानी और तुम्हारी माँ की मौत का ज़िम्मेदार पन्नू भैया को ठहरा रहे थे . ऊपर से उनहोंने धमकी भी दी थी क अगर कोई कभी उनके घर आया तो वो जान से मर डालेंगे .
अमित : आप तो जानती थी न सब को ? क्या आपको लगता है वो लोग ऐसा कर सकते थे ? आपसे झूठ बोलै गया था बुआ . हाँ मैं ज़िंदा हूँ ये बात ज़रूर छिपाई गयी जिसकी शायद कोई वजह ज़रूर रही होगी . पर ये भी सच है क उन सब को आपका इंतज़ार था . बाबा ने बताया था मुझे आपके बारे में क आप पापा की लाडली थी और मुझसे भी कितना प्यार करती थी. और इसी लिए मैं आपसे मिलना चाहता था एक बार क आपसे पूछ सकूँ , आपने ऐसा क्यों किया ? काम से काम एक बार तो आप वहां आती मगर आप नहीं आयी और न hi कभी किसी से मिलने की कोशिश की .
मंजू : कैसे आती , कैसे आती मैं. मेरा दिल कई बार किया था आने को . पर हर बार मुझे रोक लिया गया और ऐसी ऐसी बातें बताई गयी क मेरे दिल में भी गुस्सा भर गया था उन सब क प्रति. पर वो भी तो बता सकते थे न क तुम ज़िंदा हो. आखिर उन लोगों ने ऐसा क्यों किया? क्यों तुम्हे मुझसे दूर रखा . अगर वो नहीं चाहते थे क तुम हमारे साथ रहो तो मुझे hi बता देते . मैं सब कुछ छोड़ कर अपने बिट्टू क पास चली आती.
अमित : मैंने कहा न बुआ , बाबा ने ये बात सब से छुपाई थी . यहाँ तक क मुझे भी नहीं पता था क मैं असल में उनका बीटा नहीं हूँ. उन्होंने हमेशा मुझे अपने सेज बेटे की तरह hi पला. और जब से मुझे अपने माता पिता क बारे में पता चला है मैं तब से hi तड़प रहा था आप से मिलने क लिए . और देखो इतने दिनों से आप मेरे सामने थी मगर मैं आपको पहचान नहीं पाया .
मंजू : पहचान तो मैं नहीं पायी तुझे , तुझे देखते hi मुझे पन्नू भैया का चेहरा नज़र अत था और तुम्हारी ऑंखें ,, तुम्हारी ऑंखें बिलकुल दामिनी भाभी जैसी हैं. मगर मैं कभी ये समझ hi नहीं पायी क तुम्ही मेरे बिट्टू हो. अब मैं तुझे अपने से दूर नहीं जाने दूंगी . अब से तू मेरे साथ hi रहेगा . अब मैं अकेली नहीं हूँ दुनिया में . मेरे पन्नू भैया का बीटा मेरे साथ है मेरी दामिनी भाभी का बीटा मेरे साथ है . मेरा बिट्टू मेरे साथ है .
इतना कह कर मंजू बुआ फिर से मुझे चूमने लगी . हम दोनों लगातार रोये जा रहे थे . हमारे अंदर क जज़्बात आंसू बन कर लगातार बह रहे थे और हम खुद को रोक hi नहीं प् रहे थे . मंजू बुआ कभी मुझे गले लगा लेती कभी चूमने लगती कभी ज़ोर ज़ोर से रोने लगती.
अमित : बस करो बुआ बस करो अब और नहीं . बहुत रो लिया आपने अब मैं आपको और रोने नहीं दूंगा . अब आप अकेली नहीं रहेंगी , अब से आप हमारे साथ रहेंगी . चलिए हूँ अभी घर चलते हैं. माँ बाबा आपको देख कर बहुत खुश होंगे .
मंजू : नहीं नहीं , मैं उनके सामने किस मुँह से जाउंगी ? एक बार भी मैं उनसे मिलने नहीं गयी . बल्कि उन्हें गलत समझती रही. वो तो मेरी शक्ल भी देखना पसंद नहीं करेंगे. मैं किस मुँह से उनके सामने जॉन.
अमित : आप गलत समझ रही हैं बुआ . वो ऐसे बिलकुल भी नहीं हैं. बल्कि वो तो खुद इस बात से हैरान थे क आप कभी मिलने क्यों नहीं आयी. वो आपको अपनी छोटी बहिन जैसे hi मानते हैं. जब उनको सचाई का पता चलेगा तो वो बिलकुल भी नाराज़ नहीं होंगे .
मंजू : नहीं , मैं नहीं जाउंगी उनके पास . फ़िलहाल अभी तो नहीं. मुझ में इतनी हिम्मत नहीं क उनका सामना कर सकूँ.
अमित : क्या मेरे लिए भी नहीं ?
मंजू : तेरे लिए तो मैं अपनी जान भी दे सकती हूँ . पर तुझे मेरी कसम मुझे मजबूर मत कर. तक़दीर ने पहले hi मेरे साथ इतना बड़ा खिलवाड़ कर दिया है. जिसे अपनी गॉड में खिलाया था उसी क साथ मैं ......
इतना कह कर मंजू बुआ मुझसे दूर हैट गयी और चेहरे दूसरी तरफ कर क रोने लगी. मैं समझ रहा था क वो हम दोनों क बीच बने संबंधों से अब आहत हो रही हैं . मैंने आगे बढ़ कर उनके कंधे पर हाथ रखा तो वो बिना मेरी तरफ देखे फिर से बोली .
मंजू : मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी , बहुत बड़ी गलती . भैया भाभी मुझे कभी माफ़ नहीं करेंगे . शायद उनके कहने से hi भगवन ने तुम्हे मेरे पास भेजा था और मैं वासना की आग में लिपटी तुम्हारे साथ ...... छींन ,,, मुझे तो भगवन भी माफ़ नहीं करेगा . अपने आप से hi नफरत हो रही है मुझे ये सोच कर क मैं अपने hi भतीजे क साथ वो सब करती रही.
अमित : वासनाआ ??? क्या वो सिर्फ वासना थी? नहीं बुआ वो वासना नहीं प्रेम था . ऐसा प्रेम जिसमे न कोई स्वार्थ था न कोई भूख . अपने दिल पर हाथ रख कर कहिये क आपने मेरे साथ दिल की गहराईयों से प्यार नहीं किया ?
मंजू : भगवन क लिए चुप हो जाओ अमित . मैं पहले hi पाप कर चुकी हूँ. मुझे और पापी मत बनाओ .
अमित : पाप ?? अब आप निश्छल प्रेम को पाप कहने लगी ? अभी कुछ देर पहले तक हम दोनों क बीच जो प्यार था वो एक सच जान लेने से से पाप हो गया ? अगर हमारे बीच का ये रिश्ता ज़ाहिर नहीं होता तो क्या तब भी आप उसे पाप hi कहती ?
मंजू : चुप हो जाओ प्लीज . तुम अछि तरह जानते हो क एक बुआ भतीजे क बीच ऐसा रिश्ता सिर्फ पाप hi कहलाता है. समाज में ऐसे रिश्तों को सिर्फ तिरस्कार की नज़रों से देखा जाता है. किसी को तो बाद में जवाब देता है इंसान , पर खुद को क्या जवाब दूँ मैं? क्या जवाब दूँ खुद को बोलो ? अपने hi सेज भतीजे क साथ मैं वो सब करती आयी हूँ . छींन ,, मुझे खुद से hi घिन आ रही है . इससे ाचा होता मैं मर hi जाती .
अमित : अनजाने में हुए पाप क लिए तो भगवन भी माफ़ कर देता है बुआ . और हमने तो कोई पाप भी नहीं किया . आप जिस समाज की दुहाई दे रही हैं , तब कहाँ था ये समाज जब अकेली ज़िन्दगी में दुखों का बोझ धो रही थी. तब तो ये समाज आपके दुःख दूर करने नहीं आया था . हम दोनों तो जानते भी नहीं थे क हम दोनों क बीच कोई रिश्ता और भी है . मैंने तो आपके दिल क दर्द को महसूस किया और जो मैं कर सकता था वो मैंने किया . हमारा मिलना भगवन की मर्ज़ी थी . वैसे भी तो दुनिया में सब कुछ उसी की मर्ज़ी से hi तो होता है न ? तो फिर इसमें आप दोषी कैसे हुई ? अगर आप खुद को दोष दे रही हैं तो फिर आपके साथ मैं भी बराबर का दोषी हुआ न . ऐसे तो फिर मुझे hi मर जाना चाहिए .....
मेरी बात ख़तम होने से पहल hi बुआ मेरे मुँह से मरने की बात सुन कर एक डैम से पालतू और मेरे मुँह पर हाथ रख लिया .
मंजू : रट हुए ) ख़बरदार जो मरने की बात भी की तो . भैया की तरह क्या तू भी मुझे छोड़ कर चला जायेगा , हाँ ? इससे तो ाचा है मुझे अपने हाथों से hi मर दे. ऐसी ज़िन्दगी से तो मौत हज़ार दर्जे अछि है , हज़ार दर्जे अछि है . मार दे मुझे अपने हाथों से , मार दे मुझे मार दे .
इतना सब कहते कहते बुआ रोटी हुई ज़मीन पर बैठ गयी थे कपडे नोचती नोचती. बुआ का रुदन और भी ज्यादा हो गया था . मैं उनके मन की व्यथा को महसूस कर रहा था क उनके दिल पर क्या बीत रही थी . अपने hi सेज भतीजे क साथ अपने जिस्मानी ताल्लुकात को यद् कर क वो खुद को दोषी मन रही थी. उनके लिए मुश्किल हो रहा था इस बात को एक्सेप्ट करना . हालाँकि वो सब अनजाने में हुआ था जिसके लिए न वो दोषी थी न मैं , दोषी था तो सिर्फ वक़्त . और अब हम उस दोराहे पर खड़े थे जहाँ से किस तरफ जाएँ हमें समझ नहीं आ रहा था . जहाँ हम दोनों क दिल खुश भी थे अपना असली रिश्ता जान कर वहीँ इससे पहले हमारे बीच बन चूका वो रिश्ता अब हमारे असल रिश्ते की पवित्रता पर दाग सा लग रहा था . इस सचाई क सामने आने से पहले तक मैं मंजू बुआ की दुनिया था और अब वो खुद से hi शर्मिंदा हो रही थी सिर्फ मेरी वजह से. हालाँकि मेरे लिए ये बड़ी बात नहीं थी पर क्यूंकि मैं पहले hi ऐसे रिश्तों में पद चूका था मगर बुआ क लिए ये बहुत बड़ी गलती बन गया था.
अमित : मुझे तो होश भी नहीं था जब मेरे माँ बाप अकेला मुझे छोड़ गए . और इतने सालों तक मैं इस सच से hi अनजान रहा . जब से मुझे मेरे माता पिता क बारे में पता चला मैं तब से hi खुद को अकेला समझने लग गया था . और फिर मुझे आपके बारे में पता चला . सब ने यही कहा क आप पापा की जान थी इस लिए आप को एक बार देखना चाहता तह , पूछना चाहता था क आखिर किस लिए आपने अपने इकलौते भतीजे क बारे में जानने की कोशिश तक नहीं की . और अब जब आप मेरे सामने हैं तो आप ऐसी बातें कर रही हैं. मैं जनता हूँ आपने ज़िन्दगी में बहुत दुःख देखे हैं. मैंने आपके हर दर्द को महसूस किया और हमारे बीच जो कुछ भी हुआ उसमे किसी की कोई गलती नहीं थी. फिर आप इसके लिए खुद को क्यों दोष दे रही हैं? ये भगवन की hi मर्ज़ी थी जो हम करीब आये. मैंने आपसे वडा किया था क आपको कभी दुखी नहीं होने दूंगा और आज आप फिर से दुखी हैं सिर्फ मेरी वजह से . मुझे समझ नहीं आ रहा क मैं अपनी बुआ क मिलने की ख़ुशी मानों या फिर जो हुआ उसके लिए दुःख मानों. पर इसमें न आपका दोष है न मेरा . हम दोनों ने hi एक दूसरे को दिल से मुहब्बत की है बुआ जिसमे ज़रा सी भी हवस नहीं थी. ये आप अछि तरह जानती हैं. चाहे ये सब अनजाने में हुआ पर ये पाप कभी नहीं था . फिर भी अगर आप इसे पाप समझ रही हैं तो ,,,, मैं कभी आपके सामने नहीं आऊंगा. क्यूंकि मुझे देख कर आपको बार बार दुःख होगा . और मैं नहीं चाहता क मेरी वजह से आप कभी दुखी हो. मैं जा रहा हूँ बुआ, सोचा था क हमेशा आपके साथ रहूँगा मगर ज़िन्दगी इस मोड़ पर ले आएगी ये नहीं जनता था . हो सके तो मुझे माफ़ कर देना . पर इतना ज़रूर यद् रखना क अगर आपने अपने साथ कुछ भी गलत करने की कोशिश की तो मैं भी खुद को ख़तम कर लूंगा मैं कसम खता हूँ.
बुआ लगातार रोये जा रही थी पर मेरी आखिरी बात सुन कर वो एक डैम शॉकेड सी मुझे देखने लगी . मगर अब मुझ में और हिम्मत नहीं थी क मैं वहां रुकूँ. मंजू बुआ को इस वक़्त समझाना शायद नामुमकिन था इस लिए मैं वहां से निकल आया . मुझे लगा क कहीं वो अपने साथ कुछ गलत न कर लें इस लिए मैंने ये सब कह दिया था . उनकी बातों से साफ़ ज़ाहिर था क वो कितनी ज्यादा दुखी हो रही हैं. और जितना ज्यादा वो इमोशनल थी उस वजह से मेरे दिल में एक दर सा था. जाते जाते ये सब कह कर मैंने उन्हें कुछ भी गलत करने से रोक तो दिया था . पर समस्या वहीँ क वहीँ थी. इतने सैलून बाद हम दोनों मिले भी तो किस मोड़ पर . अब बुआ क्या फैसला लेगी ये उन पर था मगर अब मैं उन्हें खोना नहीं चाहता था . बुआ क घर से निकल कर मैं खुद को संभालता हुआ पैदल hi चल पड़ा .
वहीँ मंजू अभी भी सदमे में थी. जाते जाते अमित ने जो कहा था वो सब सुन कर उसका दिल एक अनजाने दर से भर गया था. मगर उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था . तकदीर ने आज फिर से उसके साथ बहुत बड़ा धोखा किया था . मंजू की ज़िन्दगी बस दुःख दर्द की किताब बन कर hi रह गयी थी . बचपन में hi माँ बाप का साया चीन गया . उसके बाद जो उसकी दुनिया था उसका बड़ा भाई जो उसे माता पिता भाई बहिन दोस्त सबका प्यार देता था उसे भी तकदीर ने चीन कर बेसहारा कर दिया . सौतेले भाइयो ने उसे सर पर बोझ समझ कर हालत लोगों क हवाले कर दिया जहाँ उसे सिवाए दुखों क कुछ नहीं मिला . इतने सैलून बाद उसे अमित क रूप में थोड़ी सी खुशियां मिली थी . एक उम्मीद की किरण उसकी ज़िन्दगी में आयी थी. उसकी सुनी ज़िन्दगी में फिर से रंग भरने लगे थे मगर एक hi पल में सब फिर से ख़तम हो गया . जिसे वो अपनी ज़िन्दगी समझ रही थी जिसके साथ वो अपनी उम्र बिताना चाहती थी वो उसका अपना सागा भतीजा निकला . जिसे गॉड में खिलाया था उसी की गॉड में वो खेल रही थी इतने दिनों से. मंजू को जितनी ख़ुशी अपने भतीजे को ज़िंदा देख कर हुई उससे कहीं ज्यादा दुःख उसे अपने और अमित प्रेम सम्बन्धो पर हो रहा था . उसका दिल छह रहा था क अभी क अभी धरती फट जाये और वो उसमे समां जाये . या फिर वक़्त का पहिया पीछे घूम जाये और जो कुछ भी अभी कुछ देर में हुआ वो सब न हो. मगर दोनों hi नहीं हो सकते थे . मंजू मन hi मन इतना दुखी हो गयी थी क उसे ज़िन्दगी क इस भद्दे रूप से ज्यादा मौत अछि लग रही थी. मगर जाते जाते अमित ने खुद को मरने की जो धमकी दे दी थी उससे अब वो मर भी नहीं सकती थी. मंजू अमित को जाते हुए देखती रही वो उसे रोकना चाहती थी उसे गले लगाना चाहती थी मगर ऐसा करने की भी जैसे हिम्मत नहीं हो रही थी. सिवाए रोने क अब उसके पास और कुछ नहीं बचा था . ज़मीन पर बैठी वो रोये जा रही थी और बार बार भगवन से यही सवाल पूछ रही थी क आखिर उसकी कौन सी ऐसी खता थी जिसकी उसे इतनी बड़ी सजा मिली.
मैं मंजू बुआ क बारे में सोचता सोचता चला जा रहा था , मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था क मैं क्या करूँ . मंजू बुआ क मिलने की जो ख़ुशी होनी चाहिए थी अब उसकी जगह दर्द और पछतावे ने ले ली थी . जो भी हुआ अनजाने में हुआ था पर ज़िन्दगी क आईने में वो अक्स ऐसे दिखेगा ये सोचा भी नहीं था . मैं अपने hi ख्यालों में गम था क मेरा फ़ोन बजने लगा . ये फ़ोन मोहित का था जो मुझसे पूछ रहा था क मैं कहाँ हूँ . मैंने उसे बता दिया क मैं बस आ रहा हूँ और जल्दी से उसके घर की तरफ चल दिया . मंजू बुआ की जो हालत थी उसे देख कर मुझे उनका ज़िकर करना ठीक नहीं लग रहा था इस लिए मैंने सोच लिया क जब तक वो खुद नार्मल नहीं हो जाती तब तक मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगा . पर उनको नार्मल कैसे किया जाये ये भी एक पेचीदा मसला था . आखिर वो इस सचाई को कैसे एक्सेप्ट कर पाएंगी . मुझे बार बार उनकी चिंता हो रही थी. मेरा दिल बार बार एहि कह रहा था क मुझे उन्हें छोड़ कर नहीं आना चाहिए था कहीं वो अपने साथ कुछ कर न लें. मगर सचाई ये भी थी क मेरे सामने होने पर वो खुद को और भी ज्यादा दोष देती रहती इसी लिए मैं चला आया था . तभी मुझे ऋतू का ख्याल आया एक वो hi तो थी मंजू बुआ की सब कुछ उनकी दोस्त उनकी बहिन उनकी हमराज़ हमदर्द . मैंने जल्दी से फ़ोन निकला और ऋतू को फ़ोन किया . उन्होंने भी दूसरी hi रिंग पर फ़ोन उठा लिया
रीता : तो आ गयी हुज़ूर क अपनी कनीज़ की यद्. शुक्र है अपने बीमार का ख्याल तो आया जनाब को.
अमित : आप अभी कहाँ हैं ?
ऋतू : चौंकते हुए ) क्या बात है ? तुम कुछ परेशां लग रहे हो . क्या हुआ है ? सब ठीक तो है न ?
अमित : कुछ ठीक नहीं है. आपको अभी मंजू बुआ क पास जाना होगा वर्ण वो कहीं खुद को कुछ ....
ऋतू : क्या हुआ है मंजू को ? और वो खुद को कुछ क्यों करेगी ? ,,,,,, एक मिनट ,,, तुमने अभी अभी क्या कहा ? मंजू ‘ बुआ ‘ ???
( ऋतू एक डैम से शॉकेड हो गयी थी बुआ शब्द सुन कर . उसे अपने कानो पर जैसे यकीन नहीं हो रहा था )
अमित : हाँ बुआ ,,, क्यूंकि वो मेरी बुआ हैं. मैं उनके सेज भाई का बीटा हूँ और वो मेरी सही बुआ हैं. ये बात मुझे आज hi पता चली है. किस्मत ने बहुत बड़ा मज़ाक किया है हमारे साथ. मंजू बुआ रोये जा रही हैं. कहीं वो खुद को कुछ कर न ले. प्लीज आप अभी उनके पास चले जाइये. उन्हें बस आप hi संभल सकती हैं.
ऋतू : ओह माय गॉड , ओह माय गॉड . ओह सहित , ऐसा कैसे हो सकता है. क्या तुम सच कह रहे हो? कहीं तुम्हे कोई गलत फेहमी तो नहीं हुई?
अमित : मुझे कोई गलत फेहमी नहीं हुई है . प्लीज आप अभी क अभी बुआ क पास चले जाइये वर्ण कहीं वो खुद को कुछ कर न लें. अगर ऐसा हुआ तो मैं भी .....
ऋतू : स्टॉप , इससे आगे कुछ मत कहना , मंजू ऐसा कुछ नहीं कर सकती , मैं अभी उसके पास जाती हूँ. और प्लीज तुम भी खुद को संभालना . मुझे तो अब भी यकीन नहीं हो रहा जो तुमने अभी कहा. तुम अपना ख्याल रखना मैं उसके पास जा रही हूँ.
ऋतू से बात कर क मुझे कुछ तसल्ली हुई और मैं अपने मन को समझाता हुआ मोहित क घर पहुँच गया जहाँ सब मेरा hi इंतज़ार कर रहे थे .
रमा : कहाँ चले गए थे तुम ? हम कब से इंतज़ार कर रहे हैं .
अमित : वो एक दोस्त से मिलने गया था.
मोहित : चल आज यार साथ में खाना कहते हैं .
अमित : नहीं यार मेरा मन नहीं है .
रमा : ऐसे कैसे मन नहीं है . चुपचाप बैठो यहाँ .
आंटी की बात मानते हुए मैं बैठ तो गया पर मेरा मन बिलकुल भी नहीं था कुछ खाने का. मैंने अपने चेहरे से कुछ ज़ाहिर नहीं होने दिया क मैं किन हालातों से निकल कर आ रहा हूँ . मगर करिश्मा दीदी मुझे घूर कर देख रही थी . मेरी नज़र जब उनसे मिली तो खुद को ऐसे घूरता देख कर मैंने नज़रें चुरा ली.
अमित : निधि दीदी नज़र नहीं आ रही कहीं.
रमा : हाँ बीटा वो घर से फ़ोन आया था तो वो घर चली गयी . बोल कर गयी है क सुबह जल्दी आ जाएगी . लो खाना खाओ .
मन न होते हुए भी मैं चुप चाप खाना खाने लगा. बार बार मेरे दिमाग में बस मंजू बुआ का hi ख्याल था इस लिए मेरा हाथ खाना कहते कहते रुक जा रहा था. मोहित और आंटी मुझसे बात कर रहे थे पर मेरा बिलकुल भी ध्यान नहीं था.
रमा : अमित ,,,, अमित !! क्या हुआ तुम खाना क्यों नहीं खा रहे ? क्या बात है ? तुम्हारा ध्यान कहाँ है ?
अमित : हह हम्म्म , कुछ नहीं वो बस माँ की यद् आ रही थी.
रमा : क्यों ? क्या अब हमारा साथ तुम्हे ाचा नहीं लग रहा ?
अमित : नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है. वो बस ऐसे hi . माँ यद् कर रही होगी न .
रमा : कोई बात नहीं , कल तो तुम जा hi रहे हो गाओं. अब आराम से खाना खाओ.
मैंने जैसे तैसे बेमन से थोड़ा बहुत खाना खाया और थकावट का बहाना कर क अपने कमरे में चला गया . मोहित मुझसे बात करना चाहता था पर मैंने मन कर दिया और वो भी अपने कमरे में चला गया . कमरे में आते hi मैं बीएड पर पद गया और मंजू बुआ क बारे में सोचने लगा. तभी मेरे फ़ोन पर रीमा की कॉल आने लगी . रीमा का नाम देखते hi मेरे हाथ कॉल पिक करते करते रुक गए . रीमा मंजू बुआ की भतीजी यानि क मेरे चाचा की hi लड़की थी जिसे मैं dilo-jan से चाहता था और अब एक hi झटके में सब ख़तम हो गया . तकदीर ने क्या भद्दा मज़ाक किया था . जिस जिस क साथ प्यार की दुनिया बसने की सोच रहा था वो एक पल में hi पराये हो गए. कहाँ मैं अपने खोये हुए परिवार से मिलना चाहता था और अब ऐसी हालत हो गयी थी क सचाई बताने में भी शर्म आ रही थी . मैंने रीमा का फ़ोन बजने दिया , वो लगातार फ़ोन किये जा रही थी और मैं बस फ़ोन साइलेंट पर दाल कर सोच रहा था . रीमा मेरी बहिन थी रिश्ते में जिसे मैं अपनी पत्नी अपनी ज़िन्दगी बनाना छह रहा था . और रुपाली मेरी सही चची जिसके साथ भी मैं शारीरिक सम्बन्ध बना चूका था और शीना ,, मोंटी ,,, और तो और अपनी ताई क साथ मैंने कितना ब्रुचालल्य सेक्स किया था . ये सब सोच सोच कर मेरा सर दर्द से फैट जा रहा था. उन सब क सामने अब मैं कैसे जाऊंगा कैसे उन्हें कहूंगा क मैं उनका अपना हूँ. मैं तो इस काबिल भी नहीं रह गया था क उन्हें अपना सच बताऊँ. मोंटी की तो मैंने ज़िन्दगी hi बर्बाद कर दी थी . एक से एक सवाल मेरे दिमाग में घूमते जा रहे थे और मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी. सब से बड़ा सवाल तो मेरे प्यार का था . रीमा ,,, अब रीमा को मैं किस नज़र से देखूं? चाहे मैं अपनी मौसी की बेटियों क साथ भी सेक्स कर चूका था पर रीमा क साथ मैं ज़िन्दगी गुजरने क ख्वाब देख चूका था . और अब सब ख़त्म हो गया था . मैं कभी खुद को तो कभी अपनी तकदीर को कौस रहा था क ये मेरे साथ क्या हो गया. सच hi कहते थे सब क मैं हूँ hi मनहूस और फिर से एक बार मेरी मनहूसियत मेरे सामने hi आ गयी थी. एक बार फिर से मैं सब कुछ खो बैठा था . मेरी आँखों में नींद बिलकुल भी नहीं थी और दिल खून क आंसू रो रहा था . सब सपने ख़ाक हो गए थे , सब अरमान मिटटी हो गए थे . मेरा दिल रोने को हो रहा था पर रो कर भी क्या होना था . मुझे माँ की यद् आ रही थी . मेरा फ़ोन फ़्लैश कर रहा था मगर अब फ़ोन घर से आ रहा था . शायद माँ hi कर रही होगी . मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी क मैं फ़ोन उठाऊं मगर जब बार बार फ़ोन बजता रहा तो मुझे लगा क फ़ोन उठा लेना चाहिए वर्ण सब टेंशन में आ जायेंगे .
अमित : hello
‘ hello , कहाँ हो तुम ? फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे थे ? क्या हुआ है ? तुम बोलते क्यों नहीं ? ‘ फ़ोन पर माँ hi थी . माँ की आवाज़ सुनते hi मेरी आँखों से आंसू बहने लगे पर ज़ुबान थी की जैसे लकवा मर गयी हो.
गौरी : तुम बोलते क्यों नहीं बीटा , मेरा hi घबरा रहा है. बात क्या है कुछ तो बोल.
‘ मुझे दो भाभी , hello hello ,, hello अमित तुम सुन रहे हो न? प्लीज कुछ तो बोलो . मेरा दिल घबरा रहा है . प्लीज कुछ तो बात कर ‘
ये आवाज़ दिव्या मौसी की थी जिन्होंने माँ से फ़ोन ले लिया था और अब वो मुझसे बात कर रही थी . मगर मेरे कब नहीं खुल रहे थे . मगर मैं नहीं चाहता था क वो सब टेंशन में आएं इस लिए मैंने हिम्मत कर क बात की .
अमित : hello , हाँ हाँ मौसी मैं ठीक हूँ . वो आवाज़ नहीं आ रही थी शायद . आप कैसी हैं और माँ कैसी है ?
दिव्या : तू ठीक तो है न ? हम यहाँ सब ठीक हैं. हमें बड़ी बेचैनी हो रही है बीटा . सब ठीक तो है न? तू घर कब आ रहा है ?
अमित : मैं बिलकुल ठीक हूँ मौसी और यहीं हूँ मोहित क घर . आप मेरी चिंता मत करो.
दिव्या : कैसे चिंता न करूँ? मेरा दिल घबरा रहा है जैसे कुछ हुआ है तेरे साथ. तू जल्दी से अजा मैं तुझे देखना चाहती हूँ.
गौरी : बीटा जल्दी से अजा देख जब तक तुझे देख नहीं लुंगी मुझे चैन नहीं आएगा .
अमित : माँ मैंने कहा न सब ठीक है. आप और मौसी ऐसे hi चिंता कर रहे हो. मैं यहीं घर पर hi तो हूँ और कल वापिस आ रहा हूँ घर . ाचा अब मैं रखता हूँ . रत बहुत हो गयी है आप भी सो जाओ.
मैंने माँ को समझा बुझा कर फ़ोन काट दिया और साइड में रख दिया . दिव्या मौसी और माँ दोनों क hi दिल शायद मेरे साथ हुए इस हादसे को महसूस कर रहे थे मगर किसी को क्या पता था जो मेरे साथ हुआ . रत क 12 बज चुके थे मगर नींद तो जैसे आज आने hi नहीं वाली थी. मैं अँधेरे में hi बीएड पर बैठा हुआ था क मेरे कमरे का दरवाज़ा खुला और कोई चुपके से कमरे में दाखिल हुआ. दरवाज़ा धीरे से बंद कर क वो साया मेरी तरफ बढ़ा मुझे समझते देर नहीं लगी क हो न हो ये रमा आंटी hi होंगी. और मेरा अंदाज़ा सही साबित हुआ जब बीएड क करीब आ कर उन्होंने धीमी आवाज़ में मेरा नाम लिया .
रमा : अमित ,, अमित ,, सो गए क्या ?
उधर ऋतू घर पर आराम कर रही थी जब अमित का फ़ोन आया था और अपनी सबसे खास सहेली मंजू क बारे में सुन कर वो भी टेंशन में आ गयी और जल्दी से कपडे चेंज कर क अकेली hi निकल जाती है मंजू से मिलने . जब वो मंजू क घर पहुंची तो दरवाज़ा खुला हुआ था . ऋतू भागते हुए घर क अंदर घुसी तो मंजू ज़मीन पर hi लेती हुई थी जैसे उसे कुछ हो गया हो.
ऋतू : चिल्ला कर ) मंजूउउउउउ
मेरे सामने मंजू म मेरे hi माता पिता और मेरी बचपन की तस्वीर खोले बैठी थी और मुझे उनके बारे में बता रही थी. और मेरी ज़ुबान जैसे लकवा hi मर गयी थी. जिस मंजू बुआ की तलाश मुझे थी वो इतने समय से मेरी आँखों क सामने थी और मैं उन्हें कभी पहचान hi न पाया . जब भी मैं उनसे मिलता था तो मुझे हमेशा ये एहसास होता था क मेरा उनके साथ सम्बन्ध काफी पुराण है . मैं सोचता था शायद ये पिछले जनम का सम्बन्ध होगा पर ये नहीं समझ पाया क सम्बन्ध इसी जनम का था . मैं पत्थर सा बना बस उन्हें hi देखे जा रहा था और वो तस्वीरें दिखते हुए पता नहीं क्या क्या बता दिया रही थी. उनकी आँखों से बात करते करते आंसू बह रहे थे और उन्हें जैसे एहसास hi नहीं था क उनके पास मैं भी बैठा हूँ. जबकि मैं उनको देख कर खुद को सँभालने की कोशिश कर रहा था . आखिर मुझे आज वो पहला शख्स मिला था जो मेरे पापा क परिवार से था . और वो भी उनकी वो सही बहिन जिस पर वो अपनी जान छिड़कते थे . जिसे वो अपने बच्चों की तरह प्यार करते थे . जिनके लिए वो माँ बाप भाई सब थे . जिसकी तलाश सब को थी पर कोई नहीं जनता था वो इसी शहर में थी मगर सब उससे अनजान थे . मुझे समझ hi नहीं आ रहा था क मैं क्या कहूं उन्हें. मेरी आँखों में रुके आंसुओं ने अपनी सीमा लाँघ ली थी और अब मेरे चेहरे पर लकीरें बनाते हुए नीचे गिर रहे थे .
मंजू : रट हुए ) मेरी दुनिया मेरे भैया भाभी और मेरा बिट्टू hi थे मगर भगवन ने एक पल में hi मुझसे सब चीन लिया . काश मैं भी अपने भैया भाभी और अपने बिट्टू क साथ hi मर जाती .
अमित : रट हुए ) आप ने कभी अपने बिट्टू को तलाशने की कोशिश क्यों नहीं की बाआआ
मेरे मुँह से ‘ बुआ ‘ सुनते hi मंजू म को झटका लगा और एक डैम से वो रोटी रोटी चुप हो गयी और मुझे हैरानी से देखने लगी .
मंजू : क्या कहा तुमने ?
अमित : रट हुए ) आपने अपने बिट्टू को तलाशने की कोशिश क्यों नहीं की ‘ बाआआ ‘
मंजू : शॉकेड ) यय ये ये ये तुम क्या कह रहे हो ? मेरा बिट्टू तो मर चूका है . मुझसे ऐसा मज़ाक .....
अमित : रट हुए ) आपका बिट्टू ज़िंदा है बुआ और आपके सामने बैठा है .
मंजू म मेरी बात सुनते hi झटके से कड़ी हुई और 2 कदम पीछे हैट गयी . अपने हाथों को अपने मुँह पर रखे वो बड़ी बड़ी आँखों से मुझे देख रही थी जैसे ये कोई अनहोनी हो रही हो जिस पर उन्हें यकीन नहीं हो रहा था .
मंजू : ये तुम क्या बोले जा रहे हो ? तुम्हे क्या हो गया है ? मेरे साथ ऐसा मज़ाक मत करो. मत करो ऐसा मेरे साथ
अमित :रट हुए ) ये मज़ाक नहीं है बुआ , मैं hi आपका बिट्टू हूँ. माँ पापा तो मुझे छोड़ गए पर आपने भी एक बार भी मुझ से मिलने की कोशिश क्यों नहीं की ? क्या उनके साथ मेरा वजूद भी ख़तम हो गया था आपके लिए ?
मंजू : ज़ोर से ) nahiiiiiiiiiiii ,,,,, ऐसा नहीं हो सकता . केहदो क तुम झूठ बोल रहे हो. ऐसा नहीं हो सकता ये सब झूठ है .
अमित : रट हुए ) जानती हैं न मेरे बर्थडे पर hi माँ पापा और नाना नानी की एक्सीडेंट में मौत हुई थी . उस दिन शायद सब मंदिर जा रहे थे मेरे लिए पूजा करवाने . मगर मैं उस एक्सीडेंट में बच गया था . पर आपको कैसे पता होगा , आपने तो कभी जानने की कोशिश hi नहीं की क आपका बिट्टू ज़िंदा भी है या मर गया.
मंजू : तो क्या ,,, तो क्या तुम सच में ??????
अमित : हाँ बुआ मैं hi आपका बिट्टू हूँ . आपके पन्नू भैया और दामिनी भाभी का बीटा . जिसे आपने मारा हुआ मन लिया था पर बदकिस्मती से मैं ज़िंदा बच गया था .
मेरे मुँह से ये सुनते hi मंजू बुआ ने भाग कर मुझे गले से लगा लिया और मेरे सर को दोनों हाथों में थामे मेरे चेहरे पर लगातार चूमने लगी . साथ hi वो रोये जा रही थी और बोलती जा रही थी .
मंजू :रट रट चूमते हुए ) तू इतने दिन कहाँ था ? किसी ने मुझे बताया क्यों नहीं की तुम ज़िंदा हो ? मैं इतने सैलून तक यही सोचती रही क तुम भी भैया भाभी क साथ .. ये मेरे साथ इतना बड़ा धोखा किसने किया ? किसने मुझे मेरे बिट्टू से दूर किया ? मुझे तो यही कहा गया था क तुम भी भैया भाभी क साथ उस एक्सीडेंट में करे गए . तुम अब तक कहाँ थे ? कहाँ थे अब तक? तुझे कभी अपनी इस बदनसीब बुआ की यद् नहीं आयी ? एक बार भी तुझे तरस नहीं आया अपनी बुआ पर ? बोल कहाँ था तू ? कहाँ था अब तक ?
अमित : रट हुए ) यही तो मैं आपसे जानना चाहता हूँ क आपने कभी कोशिश क्यों नहीं की मेरे बारे में जानने की ? मुझे मेरे मां ममी अपने साथ ले गए थे पर आपने एक बार भी उन लोगों से मिल कर कुछ जानना ठीक नहीं समझा? आखिर ऐसी क्या बात हो गयी थी जो आपको अपने बिट्टू की ज़रा भी यद् नहीं आयी ?
मंजू : कैसे आती मैं ? बड़े भैया ने कहा था क उन लोगों ने भैया भाभी की तुम्हारी लाश भी देखने नहीं दी. ऊपर से झगड़ा भी किया . वो तुम्हारे नाना नानी और तुम्हारी माँ की मौत का ज़िम्मेदार पन्नू भैया को ठहरा रहे थे . ऊपर से उनहोंने धमकी भी दी थी क अगर कोई कभी उनके घर आया तो वो जान से मर डालेंगे .
अमित : आप तो जानती थी न सब को ? क्या आपको लगता है वो लोग ऐसा कर सकते थे ? आपसे झूठ बोलै गया था बुआ . हाँ मैं ज़िंदा हूँ ये बात ज़रूर छिपाई गयी जिसकी शायद कोई वजह ज़रूर रही होगी . पर ये भी सच है क उन सब को आपका इंतज़ार था . बाबा ने बताया था मुझे आपके बारे में क आप पापा की लाडली थी और मुझसे भी कितना प्यार करती थी. और इसी लिए मैं आपसे मिलना चाहता था एक बार क आपसे पूछ सकूँ , आपने ऐसा क्यों किया ? काम से काम एक बार तो आप वहां आती मगर आप नहीं आयी और न hi कभी किसी से मिलने की कोशिश की .
मंजू : कैसे आती , कैसे आती मैं. मेरा दिल कई बार किया था आने को . पर हर बार मुझे रोक लिया गया और ऐसी ऐसी बातें बताई गयी क मेरे दिल में भी गुस्सा भर गया था उन सब क प्रति. पर वो भी तो बता सकते थे न क तुम ज़िंदा हो. आखिर उन लोगों ने ऐसा क्यों किया? क्यों तुम्हे मुझसे दूर रखा . अगर वो नहीं चाहते थे क तुम हमारे साथ रहो तो मुझे hi बता देते . मैं सब कुछ छोड़ कर अपने बिट्टू क पास चली आती.
अमित : मैंने कहा न बुआ , बाबा ने ये बात सब से छुपाई थी . यहाँ तक क मुझे भी नहीं पता था क मैं असल में उनका बीटा नहीं हूँ. उन्होंने हमेशा मुझे अपने सेज बेटे की तरह hi पला. और जब से मुझे अपने माता पिता क बारे में पता चला है मैं तब से hi तड़प रहा था आप से मिलने क लिए . और देखो इतने दिनों से आप मेरे सामने थी मगर मैं आपको पहचान नहीं पाया .
मंजू : पहचान तो मैं नहीं पायी तुझे , तुझे देखते hi मुझे पन्नू भैया का चेहरा नज़र अत था और तुम्हारी ऑंखें ,, तुम्हारी ऑंखें बिलकुल दामिनी भाभी जैसी हैं. मगर मैं कभी ये समझ hi नहीं पायी क तुम्ही मेरे बिट्टू हो. अब मैं तुझे अपने से दूर नहीं जाने दूंगी . अब से तू मेरे साथ hi रहेगा . अब मैं अकेली नहीं हूँ दुनिया में . मेरे पन्नू भैया का बीटा मेरे साथ है मेरी दामिनी भाभी का बीटा मेरे साथ है . मेरा बिट्टू मेरे साथ है .
इतना कह कर मंजू बुआ फिर से मुझे चूमने लगी . हम दोनों लगातार रोये जा रहे थे . हमारे अंदर क जज़्बात आंसू बन कर लगातार बह रहे थे और हम खुद को रोक hi नहीं प् रहे थे . मंजू बुआ कभी मुझे गले लगा लेती कभी चूमने लगती कभी ज़ोर ज़ोर से रोने लगती.
अमित : बस करो बुआ बस करो अब और नहीं . बहुत रो लिया आपने अब मैं आपको और रोने नहीं दूंगा . अब आप अकेली नहीं रहेंगी , अब से आप हमारे साथ रहेंगी . चलिए हूँ अभी घर चलते हैं. माँ बाबा आपको देख कर बहुत खुश होंगे .
मंजू : नहीं नहीं , मैं उनके सामने किस मुँह से जाउंगी ? एक बार भी मैं उनसे मिलने नहीं गयी . बल्कि उन्हें गलत समझती रही. वो तो मेरी शक्ल भी देखना पसंद नहीं करेंगे. मैं किस मुँह से उनके सामने जॉन.
अमित : आप गलत समझ रही हैं बुआ . वो ऐसे बिलकुल भी नहीं हैं. बल्कि वो तो खुद इस बात से हैरान थे क आप कभी मिलने क्यों नहीं आयी. वो आपको अपनी छोटी बहिन जैसे hi मानते हैं. जब उनको सचाई का पता चलेगा तो वो बिलकुल भी नाराज़ नहीं होंगे .
मंजू : नहीं , मैं नहीं जाउंगी उनके पास . फ़िलहाल अभी तो नहीं. मुझ में इतनी हिम्मत नहीं क उनका सामना कर सकूँ.
अमित : क्या मेरे लिए भी नहीं ?
मंजू : तेरे लिए तो मैं अपनी जान भी दे सकती हूँ . पर तुझे मेरी कसम मुझे मजबूर मत कर. तक़दीर ने पहले hi मेरे साथ इतना बड़ा खिलवाड़ कर दिया है. जिसे अपनी गॉड में खिलाया था उसी क साथ मैं ......
इतना कह कर मंजू बुआ मुझसे दूर हैट गयी और चेहरे दूसरी तरफ कर क रोने लगी. मैं समझ रहा था क वो हम दोनों क बीच बने संबंधों से अब आहत हो रही हैं . मैंने आगे बढ़ कर उनके कंधे पर हाथ रखा तो वो बिना मेरी तरफ देखे फिर से बोली .
मंजू : मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी , बहुत बड़ी गलती . भैया भाभी मुझे कभी माफ़ नहीं करेंगे . शायद उनके कहने से hi भगवन ने तुम्हे मेरे पास भेजा था और मैं वासना की आग में लिपटी तुम्हारे साथ ...... छींन ,,, मुझे तो भगवन भी माफ़ नहीं करेगा . अपने आप से hi नफरत हो रही है मुझे ये सोच कर क मैं अपने hi भतीजे क साथ वो सब करती रही.
अमित : वासनाआ ??? क्या वो सिर्फ वासना थी? नहीं बुआ वो वासना नहीं प्रेम था . ऐसा प्रेम जिसमे न कोई स्वार्थ था न कोई भूख . अपने दिल पर हाथ रख कर कहिये क आपने मेरे साथ दिल की गहराईयों से प्यार नहीं किया ?
मंजू : भगवन क लिए चुप हो जाओ अमित . मैं पहले hi पाप कर चुकी हूँ. मुझे और पापी मत बनाओ .
अमित : पाप ?? अब आप निश्छल प्रेम को पाप कहने लगी ? अभी कुछ देर पहले तक हम दोनों क बीच जो प्यार था वो एक सच जान लेने से से पाप हो गया ? अगर हमारे बीच का ये रिश्ता ज़ाहिर नहीं होता तो क्या तब भी आप उसे पाप hi कहती ?
मंजू : चुप हो जाओ प्लीज . तुम अछि तरह जानते हो क एक बुआ भतीजे क बीच ऐसा रिश्ता सिर्फ पाप hi कहलाता है. समाज में ऐसे रिश्तों को सिर्फ तिरस्कार की नज़रों से देखा जाता है. किसी को तो बाद में जवाब देता है इंसान , पर खुद को क्या जवाब दूँ मैं? क्या जवाब दूँ खुद को बोलो ? अपने hi सेज भतीजे क साथ मैं वो सब करती आयी हूँ . छींन ,, मुझे खुद से hi घिन आ रही है . इससे ाचा होता मैं मर hi जाती .
अमित : अनजाने में हुए पाप क लिए तो भगवन भी माफ़ कर देता है बुआ . और हमने तो कोई पाप भी नहीं किया . आप जिस समाज की दुहाई दे रही हैं , तब कहाँ था ये समाज जब अकेली ज़िन्दगी में दुखों का बोझ धो रही थी. तब तो ये समाज आपके दुःख दूर करने नहीं आया था . हम दोनों तो जानते भी नहीं थे क हम दोनों क बीच कोई रिश्ता और भी है . मैंने तो आपके दिल क दर्द को महसूस किया और जो मैं कर सकता था वो मैंने किया . हमारा मिलना भगवन की मर्ज़ी थी . वैसे भी तो दुनिया में सब कुछ उसी की मर्ज़ी से hi तो होता है न ? तो फिर इसमें आप दोषी कैसे हुई ? अगर आप खुद को दोष दे रही हैं तो फिर आपके साथ मैं भी बराबर का दोषी हुआ न . ऐसे तो फिर मुझे hi मर जाना चाहिए .....
मेरी बात ख़तम होने से पहल hi बुआ मेरे मुँह से मरने की बात सुन कर एक डैम से पालतू और मेरे मुँह पर हाथ रख लिया .
मंजू : रट हुए ) ख़बरदार जो मरने की बात भी की तो . भैया की तरह क्या तू भी मुझे छोड़ कर चला जायेगा , हाँ ? इससे तो ाचा है मुझे अपने हाथों से hi मर दे. ऐसी ज़िन्दगी से तो मौत हज़ार दर्जे अछि है , हज़ार दर्जे अछि है . मार दे मुझे अपने हाथों से , मार दे मुझे मार दे .
इतना सब कहते कहते बुआ रोटी हुई ज़मीन पर बैठ गयी थे कपडे नोचती नोचती. बुआ का रुदन और भी ज्यादा हो गया था . मैं उनके मन की व्यथा को महसूस कर रहा था क उनके दिल पर क्या बीत रही थी . अपने hi सेज भतीजे क साथ अपने जिस्मानी ताल्लुकात को यद् कर क वो खुद को दोषी मन रही थी. उनके लिए मुश्किल हो रहा था इस बात को एक्सेप्ट करना . हालाँकि वो सब अनजाने में हुआ था जिसके लिए न वो दोषी थी न मैं , दोषी था तो सिर्फ वक़्त . और अब हम उस दोराहे पर खड़े थे जहाँ से किस तरफ जाएँ हमें समझ नहीं आ रहा था . जहाँ हम दोनों क दिल खुश भी थे अपना असली रिश्ता जान कर वहीँ इससे पहले हमारे बीच बन चूका वो रिश्ता अब हमारे असल रिश्ते की पवित्रता पर दाग सा लग रहा था . इस सचाई क सामने आने से पहले तक मैं मंजू बुआ की दुनिया था और अब वो खुद से hi शर्मिंदा हो रही थी सिर्फ मेरी वजह से. हालाँकि मेरे लिए ये बड़ी बात नहीं थी पर क्यूंकि मैं पहले hi ऐसे रिश्तों में पद चूका था मगर बुआ क लिए ये बहुत बड़ी गलती बन गया था.
अमित : मुझे तो होश भी नहीं था जब मेरे माँ बाप अकेला मुझे छोड़ गए . और इतने सालों तक मैं इस सच से hi अनजान रहा . जब से मुझे मेरे माता पिता क बारे में पता चला मैं तब से hi खुद को अकेला समझने लग गया था . और फिर मुझे आपके बारे में पता चला . सब ने यही कहा क आप पापा की जान थी इस लिए आप को एक बार देखना चाहता तह , पूछना चाहता था क आखिर किस लिए आपने अपने इकलौते भतीजे क बारे में जानने की कोशिश तक नहीं की . और अब जब आप मेरे सामने हैं तो आप ऐसी बातें कर रही हैं. मैं जनता हूँ आपने ज़िन्दगी में बहुत दुःख देखे हैं. मैंने आपके हर दर्द को महसूस किया और हमारे बीच जो कुछ भी हुआ उसमे किसी की कोई गलती नहीं थी. फिर आप इसके लिए खुद को क्यों दोष दे रही हैं? ये भगवन की hi मर्ज़ी थी जो हम करीब आये. मैंने आपसे वडा किया था क आपको कभी दुखी नहीं होने दूंगा और आज आप फिर से दुखी हैं सिर्फ मेरी वजह से . मुझे समझ नहीं आ रहा क मैं अपनी बुआ क मिलने की ख़ुशी मानों या फिर जो हुआ उसके लिए दुःख मानों. पर इसमें न आपका दोष है न मेरा . हम दोनों ने hi एक दूसरे को दिल से मुहब्बत की है बुआ जिसमे ज़रा सी भी हवस नहीं थी. ये आप अछि तरह जानती हैं. चाहे ये सब अनजाने में हुआ पर ये पाप कभी नहीं था . फिर भी अगर आप इसे पाप समझ रही हैं तो ,,,, मैं कभी आपके सामने नहीं आऊंगा. क्यूंकि मुझे देख कर आपको बार बार दुःख होगा . और मैं नहीं चाहता क मेरी वजह से आप कभी दुखी हो. मैं जा रहा हूँ बुआ, सोचा था क हमेशा आपके साथ रहूँगा मगर ज़िन्दगी इस मोड़ पर ले आएगी ये नहीं जनता था . हो सके तो मुझे माफ़ कर देना . पर इतना ज़रूर यद् रखना क अगर आपने अपने साथ कुछ भी गलत करने की कोशिश की तो मैं भी खुद को ख़तम कर लूंगा मैं कसम खता हूँ.
बुआ लगातार रोये जा रही थी पर मेरी आखिरी बात सुन कर वो एक डैम शॉकेड सी मुझे देखने लगी . मगर अब मुझ में और हिम्मत नहीं थी क मैं वहां रुकूँ. मंजू बुआ को इस वक़्त समझाना शायद नामुमकिन था इस लिए मैं वहां से निकल आया . मुझे लगा क कहीं वो अपने साथ कुछ गलत न कर लें इस लिए मैंने ये सब कह दिया था . उनकी बातों से साफ़ ज़ाहिर था क वो कितनी ज्यादा दुखी हो रही हैं. और जितना ज्यादा वो इमोशनल थी उस वजह से मेरे दिल में एक दर सा था. जाते जाते ये सब कह कर मैंने उन्हें कुछ भी गलत करने से रोक तो दिया था . पर समस्या वहीँ क वहीँ थी. इतने सैलून बाद हम दोनों मिले भी तो किस मोड़ पर . अब बुआ क्या फैसला लेगी ये उन पर था मगर अब मैं उन्हें खोना नहीं चाहता था . बुआ क घर से निकल कर मैं खुद को संभालता हुआ पैदल hi चल पड़ा .
वहीँ मंजू अभी भी सदमे में थी. जाते जाते अमित ने जो कहा था वो सब सुन कर उसका दिल एक अनजाने दर से भर गया था. मगर उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था . तकदीर ने आज फिर से उसके साथ बहुत बड़ा धोखा किया था . मंजू की ज़िन्दगी बस दुःख दर्द की किताब बन कर hi रह गयी थी . बचपन में hi माँ बाप का साया चीन गया . उसके बाद जो उसकी दुनिया था उसका बड़ा भाई जो उसे माता पिता भाई बहिन दोस्त सबका प्यार देता था उसे भी तकदीर ने चीन कर बेसहारा कर दिया . सौतेले भाइयो ने उसे सर पर बोझ समझ कर हालत लोगों क हवाले कर दिया जहाँ उसे सिवाए दुखों क कुछ नहीं मिला . इतने सैलून बाद उसे अमित क रूप में थोड़ी सी खुशियां मिली थी . एक उम्मीद की किरण उसकी ज़िन्दगी में आयी थी. उसकी सुनी ज़िन्दगी में फिर से रंग भरने लगे थे मगर एक hi पल में सब फिर से ख़तम हो गया . जिसे वो अपनी ज़िन्दगी समझ रही थी जिसके साथ वो अपनी उम्र बिताना चाहती थी वो उसका अपना सागा भतीजा निकला . जिसे गॉड में खिलाया था उसी की गॉड में वो खेल रही थी इतने दिनों से. मंजू को जितनी ख़ुशी अपने भतीजे को ज़िंदा देख कर हुई उससे कहीं ज्यादा दुःख उसे अपने और अमित प्रेम सम्बन्धो पर हो रहा था . उसका दिल छह रहा था क अभी क अभी धरती फट जाये और वो उसमे समां जाये . या फिर वक़्त का पहिया पीछे घूम जाये और जो कुछ भी अभी कुछ देर में हुआ वो सब न हो. मगर दोनों hi नहीं हो सकते थे . मंजू मन hi मन इतना दुखी हो गयी थी क उसे ज़िन्दगी क इस भद्दे रूप से ज्यादा मौत अछि लग रही थी. मगर जाते जाते अमित ने खुद को मरने की जो धमकी दे दी थी उससे अब वो मर भी नहीं सकती थी. मंजू अमित को जाते हुए देखती रही वो उसे रोकना चाहती थी उसे गले लगाना चाहती थी मगर ऐसा करने की भी जैसे हिम्मत नहीं हो रही थी. सिवाए रोने क अब उसके पास और कुछ नहीं बचा था . ज़मीन पर बैठी वो रोये जा रही थी और बार बार भगवन से यही सवाल पूछ रही थी क आखिर उसकी कौन सी ऐसी खता थी जिसकी उसे इतनी बड़ी सजा मिली.
मैं मंजू बुआ क बारे में सोचता सोचता चला जा रहा था , मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था क मैं क्या करूँ . मंजू बुआ क मिलने की जो ख़ुशी होनी चाहिए थी अब उसकी जगह दर्द और पछतावे ने ले ली थी . जो भी हुआ अनजाने में हुआ था पर ज़िन्दगी क आईने में वो अक्स ऐसे दिखेगा ये सोचा भी नहीं था . मैं अपने hi ख्यालों में गम था क मेरा फ़ोन बजने लगा . ये फ़ोन मोहित का था जो मुझसे पूछ रहा था क मैं कहाँ हूँ . मैंने उसे बता दिया क मैं बस आ रहा हूँ और जल्दी से उसके घर की तरफ चल दिया . मंजू बुआ की जो हालत थी उसे देख कर मुझे उनका ज़िकर करना ठीक नहीं लग रहा था इस लिए मैंने सोच लिया क जब तक वो खुद नार्मल नहीं हो जाती तब तक मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगा . पर उनको नार्मल कैसे किया जाये ये भी एक पेचीदा मसला था . आखिर वो इस सचाई को कैसे एक्सेप्ट कर पाएंगी . मुझे बार बार उनकी चिंता हो रही थी. मेरा दिल बार बार एहि कह रहा था क मुझे उन्हें छोड़ कर नहीं आना चाहिए था कहीं वो अपने साथ कुछ कर न लें. मगर सचाई ये भी थी क मेरे सामने होने पर वो खुद को और भी ज्यादा दोष देती रहती इसी लिए मैं चला आया था . तभी मुझे ऋतू का ख्याल आया एक वो hi तो थी मंजू बुआ की सब कुछ उनकी दोस्त उनकी बहिन उनकी हमराज़ हमदर्द . मैंने जल्दी से फ़ोन निकला और ऋतू को फ़ोन किया . उन्होंने भी दूसरी hi रिंग पर फ़ोन उठा लिया
रीता : तो आ गयी हुज़ूर क अपनी कनीज़ की यद्. शुक्र है अपने बीमार का ख्याल तो आया जनाब को.
अमित : आप अभी कहाँ हैं ?
ऋतू : चौंकते हुए ) क्या बात है ? तुम कुछ परेशां लग रहे हो . क्या हुआ है ? सब ठीक तो है न ?
अमित : कुछ ठीक नहीं है. आपको अभी मंजू बुआ क पास जाना होगा वर्ण वो कहीं खुद को कुछ ....
ऋतू : क्या हुआ है मंजू को ? और वो खुद को कुछ क्यों करेगी ? ,,,,,, एक मिनट ,,, तुमने अभी अभी क्या कहा ? मंजू ‘ बुआ ‘ ???
( ऋतू एक डैम से शॉकेड हो गयी थी बुआ शब्द सुन कर . उसे अपने कानो पर जैसे यकीन नहीं हो रहा था )
अमित : हाँ बुआ ,,, क्यूंकि वो मेरी बुआ हैं. मैं उनके सेज भाई का बीटा हूँ और वो मेरी सही बुआ हैं. ये बात मुझे आज hi पता चली है. किस्मत ने बहुत बड़ा मज़ाक किया है हमारे साथ. मंजू बुआ रोये जा रही हैं. कहीं वो खुद को कुछ कर न ले. प्लीज आप अभी उनके पास चले जाइये. उन्हें बस आप hi संभल सकती हैं.
ऋतू : ओह माय गॉड , ओह माय गॉड . ओह सहित , ऐसा कैसे हो सकता है. क्या तुम सच कह रहे हो? कहीं तुम्हे कोई गलत फेहमी तो नहीं हुई?
अमित : मुझे कोई गलत फेहमी नहीं हुई है . प्लीज आप अभी क अभी बुआ क पास चले जाइये वर्ण कहीं वो खुद को कुछ कर न लें. अगर ऐसा हुआ तो मैं भी .....
ऋतू : स्टॉप , इससे आगे कुछ मत कहना , मंजू ऐसा कुछ नहीं कर सकती , मैं अभी उसके पास जाती हूँ. और प्लीज तुम भी खुद को संभालना . मुझे तो अब भी यकीन नहीं हो रहा जो तुमने अभी कहा. तुम अपना ख्याल रखना मैं उसके पास जा रही हूँ.
ऋतू से बात कर क मुझे कुछ तसल्ली हुई और मैं अपने मन को समझाता हुआ मोहित क घर पहुँच गया जहाँ सब मेरा hi इंतज़ार कर रहे थे .
रमा : कहाँ चले गए थे तुम ? हम कब से इंतज़ार कर रहे हैं .
अमित : वो एक दोस्त से मिलने गया था.
मोहित : चल आज यार साथ में खाना कहते हैं .
अमित : नहीं यार मेरा मन नहीं है .
रमा : ऐसे कैसे मन नहीं है . चुपचाप बैठो यहाँ .
आंटी की बात मानते हुए मैं बैठ तो गया पर मेरा मन बिलकुल भी नहीं था कुछ खाने का. मैंने अपने चेहरे से कुछ ज़ाहिर नहीं होने दिया क मैं किन हालातों से निकल कर आ रहा हूँ . मगर करिश्मा दीदी मुझे घूर कर देख रही थी . मेरी नज़र जब उनसे मिली तो खुद को ऐसे घूरता देख कर मैंने नज़रें चुरा ली.
अमित : निधि दीदी नज़र नहीं आ रही कहीं.
रमा : हाँ बीटा वो घर से फ़ोन आया था तो वो घर चली गयी . बोल कर गयी है क सुबह जल्दी आ जाएगी . लो खाना खाओ .
मन न होते हुए भी मैं चुप चाप खाना खाने लगा. बार बार मेरे दिमाग में बस मंजू बुआ का hi ख्याल था इस लिए मेरा हाथ खाना कहते कहते रुक जा रहा था. मोहित और आंटी मुझसे बात कर रहे थे पर मेरा बिलकुल भी ध्यान नहीं था.
रमा : अमित ,,,, अमित !! क्या हुआ तुम खाना क्यों नहीं खा रहे ? क्या बात है ? तुम्हारा ध्यान कहाँ है ?
अमित : हह हम्म्म , कुछ नहीं वो बस माँ की यद् आ रही थी.
रमा : क्यों ? क्या अब हमारा साथ तुम्हे ाचा नहीं लग रहा ?
अमित : नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है. वो बस ऐसे hi . माँ यद् कर रही होगी न .
रमा : कोई बात नहीं , कल तो तुम जा hi रहे हो गाओं. अब आराम से खाना खाओ.
मैंने जैसे तैसे बेमन से थोड़ा बहुत खाना खाया और थकावट का बहाना कर क अपने कमरे में चला गया . मोहित मुझसे बात करना चाहता था पर मैंने मन कर दिया और वो भी अपने कमरे में चला गया . कमरे में आते hi मैं बीएड पर पद गया और मंजू बुआ क बारे में सोचने लगा. तभी मेरे फ़ोन पर रीमा की कॉल आने लगी . रीमा का नाम देखते hi मेरे हाथ कॉल पिक करते करते रुक गए . रीमा मंजू बुआ की भतीजी यानि क मेरे चाचा की hi लड़की थी जिसे मैं dilo-jan से चाहता था और अब एक hi झटके में सब ख़तम हो गया . तकदीर ने क्या भद्दा मज़ाक किया था . जिस जिस क साथ प्यार की दुनिया बसने की सोच रहा था वो एक पल में hi पराये हो गए. कहाँ मैं अपने खोये हुए परिवार से मिलना चाहता था और अब ऐसी हालत हो गयी थी क सचाई बताने में भी शर्म आ रही थी . मैंने रीमा का फ़ोन बजने दिया , वो लगातार फ़ोन किये जा रही थी और मैं बस फ़ोन साइलेंट पर दाल कर सोच रहा था . रीमा मेरी बहिन थी रिश्ते में जिसे मैं अपनी पत्नी अपनी ज़िन्दगी बनाना छह रहा था . और रुपाली मेरी सही चची जिसके साथ भी मैं शारीरिक सम्बन्ध बना चूका था और शीना ,, मोंटी ,,, और तो और अपनी ताई क साथ मैंने कितना ब्रुचालल्य सेक्स किया था . ये सब सोच सोच कर मेरा सर दर्द से फैट जा रहा था. उन सब क सामने अब मैं कैसे जाऊंगा कैसे उन्हें कहूंगा क मैं उनका अपना हूँ. मैं तो इस काबिल भी नहीं रह गया था क उन्हें अपना सच बताऊँ. मोंटी की तो मैंने ज़िन्दगी hi बर्बाद कर दी थी . एक से एक सवाल मेरे दिमाग में घूमते जा रहे थे और मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी. सब से बड़ा सवाल तो मेरे प्यार का था . रीमा ,,, अब रीमा को मैं किस नज़र से देखूं? चाहे मैं अपनी मौसी की बेटियों क साथ भी सेक्स कर चूका था पर रीमा क साथ मैं ज़िन्दगी गुजरने क ख्वाब देख चूका था . और अब सब ख़त्म हो गया था . मैं कभी खुद को तो कभी अपनी तकदीर को कौस रहा था क ये मेरे साथ क्या हो गया. सच hi कहते थे सब क मैं हूँ hi मनहूस और फिर से एक बार मेरी मनहूसियत मेरे सामने hi आ गयी थी. एक बार फिर से मैं सब कुछ खो बैठा था . मेरी आँखों में नींद बिलकुल भी नहीं थी और दिल खून क आंसू रो रहा था . सब सपने ख़ाक हो गए थे , सब अरमान मिटटी हो गए थे . मेरा दिल रोने को हो रहा था पर रो कर भी क्या होना था . मुझे माँ की यद् आ रही थी . मेरा फ़ोन फ़्लैश कर रहा था मगर अब फ़ोन घर से आ रहा था . शायद माँ hi कर रही होगी . मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी क मैं फ़ोन उठाऊं मगर जब बार बार फ़ोन बजता रहा तो मुझे लगा क फ़ोन उठा लेना चाहिए वर्ण सब टेंशन में आ जायेंगे .
अमित : hello
‘ hello , कहाँ हो तुम ? फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे थे ? क्या हुआ है ? तुम बोलते क्यों नहीं ? ‘ फ़ोन पर माँ hi थी . माँ की आवाज़ सुनते hi मेरी आँखों से आंसू बहने लगे पर ज़ुबान थी की जैसे लकवा मर गयी हो.
गौरी : तुम बोलते क्यों नहीं बीटा , मेरा hi घबरा रहा है. बात क्या है कुछ तो बोल.
‘ मुझे दो भाभी , hello hello ,, hello अमित तुम सुन रहे हो न? प्लीज कुछ तो बोलो . मेरा दिल घबरा रहा है . प्लीज कुछ तो बात कर ‘
ये आवाज़ दिव्या मौसी की थी जिन्होंने माँ से फ़ोन ले लिया था और अब वो मुझसे बात कर रही थी . मगर मेरे कब नहीं खुल रहे थे . मगर मैं नहीं चाहता था क वो सब टेंशन में आएं इस लिए मैंने हिम्मत कर क बात की .
अमित : hello , हाँ हाँ मौसी मैं ठीक हूँ . वो आवाज़ नहीं आ रही थी शायद . आप कैसी हैं और माँ कैसी है ?
दिव्या : तू ठीक तो है न ? हम यहाँ सब ठीक हैं. हमें बड़ी बेचैनी हो रही है बीटा . सब ठीक तो है न? तू घर कब आ रहा है ?
अमित : मैं बिलकुल ठीक हूँ मौसी और यहीं हूँ मोहित क घर . आप मेरी चिंता मत करो.
दिव्या : कैसे चिंता न करूँ? मेरा दिल घबरा रहा है जैसे कुछ हुआ है तेरे साथ. तू जल्दी से अजा मैं तुझे देखना चाहती हूँ.
गौरी : बीटा जल्दी से अजा देख जब तक तुझे देख नहीं लुंगी मुझे चैन नहीं आएगा .
अमित : माँ मैंने कहा न सब ठीक है. आप और मौसी ऐसे hi चिंता कर रहे हो. मैं यहीं घर पर hi तो हूँ और कल वापिस आ रहा हूँ घर . ाचा अब मैं रखता हूँ . रत बहुत हो गयी है आप भी सो जाओ.
मैंने माँ को समझा बुझा कर फ़ोन काट दिया और साइड में रख दिया . दिव्या मौसी और माँ दोनों क hi दिल शायद मेरे साथ हुए इस हादसे को महसूस कर रहे थे मगर किसी को क्या पता था जो मेरे साथ हुआ . रत क 12 बज चुके थे मगर नींद तो जैसे आज आने hi नहीं वाली थी. मैं अँधेरे में hi बीएड पर बैठा हुआ था क मेरे कमरे का दरवाज़ा खुला और कोई चुपके से कमरे में दाखिल हुआ. दरवाज़ा धीरे से बंद कर क वो साया मेरी तरफ बढ़ा मुझे समझते देर नहीं लगी क हो न हो ये रमा आंटी hi होंगी. और मेरा अंदाज़ा सही साबित हुआ जब बीएड क करीब आ कर उन्होंने धीमी आवाज़ में मेरा नाम लिया .
रमा : अमित ,, अमित ,, सो गए क्या ?
उधर ऋतू घर पर आराम कर रही थी जब अमित का फ़ोन आया था और अपनी सबसे खास सहेली मंजू क बारे में सुन कर वो भी टेंशन में आ गयी और जल्दी से कपडे चेंज कर क अकेली hi निकल जाती है मंजू से मिलने . जब वो मंजू क घर पहुंची तो दरवाज़ा खुला हुआ था . ऋतू भागते हुए घर क अंदर घुसी तो मंजू ज़मीन पर hi लेती हुई थी जैसे उसे कुछ हो गया हो.
ऋतू : चिल्ला कर ) मंजूउउउउउ