Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION .... - Page 35 - SexBaba
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Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION ....

नवाज़ ने जब आरती की घबराहट देखि, तोह उसने आमलेट का आखरी टुकड़ा मज़े से चबाया और दारू का एक गहरा घूँट भरा. उसके कान के पास बड़े इत्मीनान से फुसफुसाया:

"कोई दिक्कत नहीं होगी रानी... कोई आएगा तोह मैं अपनी रानी को उठा कर सीधा अंदर बैडरूम में ले जाऊंगा... अपनी इन मज़बूत बाहों में. मैं थोड़ा न किसी को अपनी रानी को इस हाल में देखने दूंगा?"

आरती की सांसें जो दर के मारे अटक गयी थीं, नवाज़ के इस 'मरदाना' भरोसे से थोड़ी शांत हुई. उसने नवाज़ की आँखों में देखा, जहाँ शैतानी के saath-saath एक गहरा सुकून था.

नवाज़ ने आपने हाथ उसके ब्लाउज के ऊपर से hi उसके सीने पर अपना दबाव बनाया.

"अरे... उन्हें आने तोह दो. जब तक वह हॉल में होंगे, तब तक तोह मैं तुम्हे अपने सीने से चिपका कर कमरे में पहुंचा चूका हूँगा. वहां... वहां कोई पर्दा नहीं रहेगा,"

नवाज़ ने बेहद सेडक्टिव आवाज़ में कहा.

आरती ने हम्पते हुए नवाज़ के गले में अपने हाथ दाल दिए. उसे अब न तोह 'उन लोगो ' का डर था और न hi अपनी 'खुली' हालत की शर्म. वह बस नवाज़ की बाहों में मेहफ़ूज़ महसूस कर रही थी.

आरती ने शर्मा कर अपना चेहरा नवाज़ के चौड़े सीने में छुपा लिया. उसके गजरे की bachi-kuchi खुशबु नवाज़ को और भी पागल कर रही थी.

बता, क्या इस पेटीकोट की डोरी को भी आज़ाद कर दूँ?"

ऐसा कहते हुई नवाज़ ने आरती की थरथराती हुई गर्दन पर अपना nasha-bhara चेहरा झुका दिया. उसके लबों में स्कॉच की गर्मी थी और आरती की नंगी चमड़ी पर उसकी जीभ का स्पर्श किसी बिजली के झटके जैसा था.

नवाज़ ने गर्दन से शुरू किया, वहां जहाँ आरती के झुमके उसकी हर सिसकी के साथ चीख रहे थे. नवाज़ dheere-dheere अपनी ज़बान से निशाँ बनता हुआ निचे की तरफ सरकने लगा. आरती ने प्लेटफार्म के किनारे को अपने नरम हाथों से कास के पकड़ लिया, उसकी नंगी टांगें हवा में बेचैनी से हिल रही थीं.

नवाज़ ने अपना मुँह अब आरती के ब्लाउज के ऊपर टिका दिया. ब्लाउज की पतली डोरी और कपडे के नीचे से आरती के सांसें साफ़ महसूस हो रही थीं. नवाज़ ने ब्लाउज के कपडे के ऊपर से hi उसके उभारों पर अपने लबों का दबाव बनाया.

आरती का सर पीछे की तरफ झुक गया था. उसने अपनी आँखें ज़ोर से बंद कर ली थीं और उसके मुंह से एक दबी हुई, नशीली आवाज़ निकली,

"नवाज़ जी... उफ़... ये क्या कर रहे हैं... प्लीज रुकिए..."

पर उसके हाथ khud-ba-khud नवाज़ के बालों को और ज़ोर से अपने सीने की तरफ खींच रहे थे.

नवाज़ ने ब्लाउज के कपडे को hi अपने दांतों में हलके से दबा लिया, ठीक वहां जहाँ आरती के निप्पल्स सख्त होकर उसके मरदाना स्पर्श का इंतज़ार कर रहे थे. आरती का पूरा बदन एक झटके में अकड़ गया. उसने महसूस किया की नवाज़ का एक हाथ अब भी उसकी नंगी कमर और खुले पेटीकोट के अंदर सरक रहा है.

नवाज़ ने ब्लाउज के ऊपर से hi एक गहरा किश किया और भरी आवाज़ में फुसफुसाया,

"अभी तोह ये पर्दा हटना बाकी है रानी... बता, क्या आज इस ब्लाउज को भी हमेशा के लिए भूल जाओगी?"

आरती ने हम्पते हुए सिर्फ एक लम्बी सिसकी ली. उसका गजरा अब पूरी तरह ज़मीन पर बिखर चूका था और किचन की गर्मी उन दोनों के जिस्म से निकलने वाले पसीने में घुल गयी थी.

नवाज़ ने उसके लबों पर एक आखरी nasha-bhara किश किया और उसे प्लेटफार्म से उठाते हुए बोलै,

"अब बोलो रानी... क्या अब भी खेत का इंतज़ार करना है, या यही किचन प्लेटफार्म हमारी सुहागरात का गवाह बनेगा?"

आरती ने सिर्फ अपनी आँखें बंद कर ली, उसका जिस्म अब पूरी तरह नवाज़ की मुट्ठी में था.

नवाज़ ने अपनी उँगलियाँ पेटीकोट के डोरी के फंदे में फसा ली और उसे बड़े सुकून से, dhire-dhire खींचने लगा. आरती ने घबरा कर नवाज़ के मज़बूत हाथों को पकड़ लिया, उसकी आँखों में शर्म और एक अनोखी रिक्वेस्ट थी.

"नवाज़ जी... रुकिए... ये... ये ठीक नहीं है,"

आरती ने हम्पते हुए फुसफुसाया, पर उसकी आवाज़ में कोई दम नहीं था.

नवाज़ ने एक शैतानी मुस्कराहट दी और उसके कान के पास झुक कर बोलै,

"रानी, मैंने कहा था न... आज मेरे बर्थडे पर कोई पर्दा नहीं रहेगा. जब अंदर से तुम आज़ाद हो, तोह ये डोरी क्यों बंधी रहे?"

नवाज़ ने जैसे hi पेटीकोट की डोरी खींची, आरती ने एक गहरी सिसकी ली और प्लेटफार्म के किनारे को और ज़ोर से जकड लिया. आरती वहां बैठी थी, इसलिए पेटीकोट निचे तोह नहीं गिरा, पर डोरी खुलने की वजह से वह उसकी कमर पर ढीला हो गया.

नवाज़ ने शैतानी मुस्कराहट के साथ अपना हाथ पेटीकोट के अंदर डाला और उसे dheere-dheere आरती की जाँघों से नीचे सरकने लगा ..पर आरती ने उसे जैम के पकड़ लिया ..

नवाज़ ने जब महसूस किया की आरती ने अपने दोनों हाथों से पेटीकोट को ज़ोर से पकड़ लिया है, तोह उसकी शैतानी मुस्कराहट और गहरी हो गयी. आरती किचन प्लेटफार्म पर बैठी थरथरा रही थी; उसकी उँगलियाँ पेटीकोट के कपडे को इतनी सख्ती से भींचे हुए थीं की उसके नरम नाख़ून सफ़ेद पद गए थे.

उसकी आँखों में शर्म की एक ऐसी लहार थी जो नवाज़ के जोश को और बढ़ा रही थी. वह जानती थी की निचे पंतय नहीं है, और अगर पेटीकोट थोड़ा भी और निचे सरका, तोह उसका आखरी पर्दा भी गिर जायेगा.

नवाज़ ने दारू का मज़ा लेते हुए अपना चेहरा उसके कान के पास लाया और भरी आवाज़ में फुसफुसाया:

"क्यों रोक रही हो रानी? जब डोरी मैंने खोल दी है, तोह ये पकड़ कब तक बरकरार रहेगी? मेरे बर्थडे पर अपनी इस रानी को पूरा आज़ाद देखने का हक़ है मुझे."

नवाज़ ने अपना मज़बूत हाथ आरती के उन नरम हाथों पर रखा जो पेटीकोट को थामे हुए थे. उसने dheere-dheere आरती की उँगलियों को ek-ek करके हटाना शुरू किया. आरती की सांसें उखाड़ने लगी थीं; उसका जिस्म नवाज़ की मरदाना गर्मी और स्कॉच की तीखी महक में डूबा हुआ था.

"नवाज़ जी... प्लीज... थोड़ी तोह शर्म कीजिये,"

आरती ने हम्पते हुए दबी आवाज़ में कहा, पर उसके जिस्म का हर एक इंच नवाज़ के स्पर्श के लिए तड़प रहा है.

नवाज़ ने उसके हाथों को हटाकर उन्हें प्लेटफार्म पर टिकाया और पेटीकोट को उसकी जाँघों से थोड़ा और निचे सरकने में मदद की. अब आरती उस प्लेटफार्म पर पूरी तरह be-parda होने की कगार पर थी.

जैसे hi वो जान गयी की पेटीकोट पूरा निकलने वाला है वैसे hi उसने पेटीकोट जोर से पकड़ लिया ..नवाज़ को देखते हुई .. और एक तक उसे घूरने लगी.....





नवाज़ भी आरती को देखे जा रहा tha...aur उसकी आखो में झांक कर ये समझने की कोसिस में लगा था की उसके मंद में चल क्या रहा है....

नवाज उसे ऊपर से नीचे तक देखता हुआ सुखद आनंद की अनुभूति में डूबता जा रहा tha.....aur नवाज़ के ऐसे देखने से आरती शर्माने लगी और उसने नजरे झुका ली....

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आरती (शरमाते हुए)- ऐसे क्या देख रहे हो.. पहले बार देख रहे हो क्या

उसके आँखों मई देखते हुई वो बोल पड़ा

अब तुम मुझे सुबह से ज्यादा खूबसूरत दिख रही हो …

धत!!! कुछ भी मत बोलो!!!

सच बोल रहा हु लौंडे

लौंडे बोल ने से वो और ज्यादा शर्मा गए.. और शरमाते हुई उसने कहा..

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अभी तो मैंने कुछ किया hi नहीं ..सुबह का hi मेक उप किया हुआ है

अब इतने सुन्दर दिख रही हो तो पुरे सजाने सबरने के बाद कितने सूंदर दिखोगे..

धत्त!!! मेरे तारीफ बहुत हो गए..

शयद बिना साड़ी के वजह से

धत बेशरम

अब रहा नहीं जा रहा है

थोड़ा साबरा करो मेरे राजा

वैसे hi नवाज़ उसके एक आम पर हाथ रख के उसके आम पर कब्ज़ा kiya..taise hi आरती ने उसका हाथ को पकड़ लिया और उसके वही हाथ को वही रोक दिया ..

दोनों की नज़ारे मिली

नहीं नवाज़ जी .. ये मत करो

क्यों

आरती जानती थी की उसके क्यों का वो जवाब नहीं दे पाएंगे

फिर नवाज़ ने उसके आम को दबाने कोशिश की

मन क्यों कर रही हो

नवाज़ के ऐसे कहने से आरती का चेहरा तमतमा गया.. आरती को पता था की जब भी नवाज़ शुरू करेगा तब उसे रोकना मुश्किल हो जायेगा.. और खुद को भी .. फिर भी वो बोली..

नहीं न मेरे राजा ..आप जानते हो न ..मई हम लोगो के बीच का पहला सेक्स यादगार बनाना चाहती हु

पहला सेक्स तुम यादगार बनाना चाहती हो पर उससे पहले बाकि सब तो हम कर सकतें है na..wo करने मई क्या पॉब्लम है

नवाज़ जी वो सब हमने सुबह से दो बार किया है और करने मई भी कोई पॉब्लम नहीं है पर वो सब करते करते हमारा कण्ट्रोल hi नहीं रहता न.. इसलिए अभी थोड़ा दूर hi रहते है..

उसकी फ़िक्र तुम न करो.. जब नौबत वह तक आएंगे तो मई खुद hi मन कर दूंगा .. मई भी तुम्हारे साथ आपने पहला सेक्स यादगार बनाना चाहता हु.. हस्बैंड वाइफ के जैसा..

इसलिए तो कह रही हु.. थोड़ा साबरा karo..Sirf 2 दिन की तो बात है न नवाज़ जी

साबरा तो नहीं है न जान

साबरा तो करना पड़ेगा न राजा नहीं तो बात बिगड़ जायेगे

नहीं बिगड़ेंगे

पर

पर वॉर कुछ नहीं.. मैंने कहा न मई खुद रोक दूंगा.. और तुम भी तो हो.. थोड़ा कण्ट्रोल तो तुम्हे भी होगा न खुद पर.. एंड ी प्रॉमिस अगर मई बहक गया तो तुम्हारे कहने पर मई वही रुक जाऊंगा..

अभी बाथरूम मई मेरे और आप के बीच मई जो हुआ उससे मई एक बात समाज चुकी हु की एक बार आपने खेल सुरु हो गया तो मेरा खुद पाई कण्ट्रोल नहीं रहता.. मेरा क्या शयद किसी का भी नहीं रहता.. शयद आप का भी नहीं रहता.. और वो मई देख चुकी हु.. सेक्स का ये खेल है hi ऐसा मजेदार.. इसलिए मई डर रही हु.. और दूसरे बात अब मई भी चामरे जैसे hi कोई डिस्टर्बेन्स नहीं चाहती..

नवाज़ आरती की इन् बड़े बड़े बातो को बड़े ध्यान से सुन रहा था .. आरती को लगा की नवाज़ उसकी बात को समाज गया hai..(Par नवाज़ आखिर नवाज़ hi था… उसके हाथ की पकड़ अभी भी उसके आम पर जो की त्यों थी.. जब तक वो ढीली नहीं पड़ेगे तब तक नवाज़ ढिल्ला नहीं पड़ेगा..) इसलिए उसने आगे कहा

इसलिए मई कह रही हु वैसा मान जाओ मेरे राजा

हाँ मेरे रानी.. पर हम बाकि का कर सकते है

फिर से करना है आप को ..

हाँ

कितने बार करोगे एक दिन मई

क्यों.. तू अब अपनी पर्सनल प्रॉपर्टी है..

अच्छा जी

कोई शक

शक तो नहीं है पर ( गले मई का मंगलसितरा आपने हाथ मई लेके) इस प्रॉपर्टी आलरेडी किसी ने खरीद ली है..

खरीद लेने दे.. रजिस्ट्री उसके नाम की होंगे पर प्रॉपर्टी पाई कब्ज़ा मेरा होगा.. उस प्रॉपर्टी मई रहुगा तो सिर्फ मई hi

उसके सर पाई हलके से आरती मरती है..

बदमाश!!!

दोनों की नज़रे मिली.. पर कोई कुछ न बोलै..

कुछ देर तक पूरी सिचुएशन को अच्छी तरह से समजने के बाद आरती थोड़े कॉंफिडेंट सी हो गए और ऐसे स्थिति मई किसी दूसरे के किचन मई आपने नौकर के साथ खड़े होने पर उसकी हंसी निकल गए.. और वो बोली..

आप को पता है हम कहा है इस वक़्त .. और इस हालत मई

अछि तरह से पता है.. हम इस वक़्त कहा खड़े है.. तुम क्या मुझे बुद्धू समजते हो क्या..

आरती का चेहरा थोड़ा शरारती हो उठा.. वो अपनी कमर को मटकती हुई बड़े hi सेक्सुअल स्टाइल मई किचन प्लेटफार्म मई hi थोड़ी आगे आये और बोली…

अच्छा जी.. तो मेरा राजा बुद्धू नहीं है.. उसे सब पता है.. अच्छा तो बताओ.. मेरे बुद्धू राजा.. हम इस वक़्त कहा खड़े है और हम क्या कर रहे है..

हम इस वक़्त मेरे डार्लिंग आरती रानी के नानन्द के फ्रेंड के घर के किचन मई है और मेरे डार्लिंग आरती रानी मुझे मज़ा दे रही है..

आप की डार्लिंग आरती रानी सिर्फ आप की डार्लिंग आरती रानी नहीं है.. किसी की बीवी है और किसी की बहु भी है..

उसका मुझे ख्याल

आप को नहीं तो मुझे है

वैसे hi नवाज़ ने उसे आपने बहो मई खिंच लिया .. वैसे hi आरती का चेहरा दमक उठा.. नवाज़ ने फिर उसके एक आम को जोर से दबा दिया..

ारे धीरे न बाबा

धीरज तो नहीं है न मुज मई

और फिर उसके गले को बेतहाशा चूमने लगा..

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फिर उसके गालो par..phir माथे और आँखों पर.. फिर एक गहरी सांस लेकर उसने आपने हूंठ आरती के शरबती हूंतो पर रख दिए और उसे जोर जोर से चूमने लगा

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वो चुम्बन इतना गहरा और नशे से भरा था की आरती आपने होश खो baithi..Nawaz ने आरती के हूंतो को चूस चूका था पर आरती के साथ आज यादगार सेक्स करने की बात आरती के मू से सुनकर उसे बहुत ज्यादा जोश आ चूका था ..वो आरती के नाज़ुक हूंतो का शहद पि रहा था और आरती भी पीछे नहीं thi..wo पुरे ताकत से नवाज़ के हूंतो को चूस रही थी.. उसे आपने रास पीला रही thi..aur उसका निकल रही thi..aisa करते हुई वो बड़े बेहरमी से आपने नोके वाली चठिया नवाज़ के सीने पर रगड़ रही थी.. उनमे हो रही खुजली को वो उसके छोड़े साइन से घिस कर मीठा रही थी ..
 
वो चुम्बन इतना गहरा और नशे से भरा था की आरती आपने होश खो baithi..Nawaz ने आरती के हूंतो को चूस चूका था पर आरती के साथ आज यादगार सेक्स करने की बात आरती के मू से सुनकर उसे बहुत ज्यादा जोश आ चूका था ..वो आरती के नाज़ुक हूंतो का शहद पि रहा था और आरती भी पीछे नहीं thi..wo पुरे ताकत से नवाज़ के हूंतो को चूस रही थी.. उसे आपने रास पीला रही thi..aur उसका निकल रही thi..aisa करते हुई वो बड़े बेहरमी से आपने नोके वाली चठिया नवाज़ के सीने पर रगड़ रही थी..

उनमे हो रही खुजली को वो उसके छोड़े साइन से घिस कर मीठा रही थी ..

यहाँ ठीक नहीं है ये सब …

ये बोलते हुई उसके होंठ लरज गए....

"ka.kkk....kya ?

जवाब में नवाज़ ने उसे इतना कहकर अपनी तरफ और खिंचा और अपने गले से लगा लिया ... एक पल के लिए वो दर गए और अगले hi पल उसने भी अपने हाथो से नवाज़ को जकड लिया . नवाज़ को उसके चुभते हुए मम्मी अपने पेट के थोड़ा ऊपर महसूस हुए.... वो अब आरती के गर्दन को बताशा चूमने लगा ...

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नवाज़ के गीले होंठो को महसूस करके आरती तो पागल सी हो गयी...... उसके मू से तेज हुई सांस के कारन उसके छथि जोर से उप्पर नीचे होने लगे .. .. जोर-2 से सां लेने की वजह से मू के रास्ते आहे बाहर आने लगे... नवाज़ ने उसके चहरे को पकड़ा और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए .. और उसे चूमने लगा ..

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उम्म्म्मममममममममममम.......

Lomde..kya मीठा अहसास आता है … तेरे को चूमते हुई..

बदमाश!!

ऐसा कहते हुई आरती उसके सर को मरती है..

और किस किस को चूमता है..

अभी किसी को नहीं .. पर तेरा जवाब नहीं.. लौंडे..

ऐसा कह रहा है जैसे पहले बार मुझे चुम रहा है..

पहले बार नहीं पर आज कुछ अलग hi मज़ा आ रहा है..

क्या अलग मज़ा आ रहा है.

नखरा करते हुई उसके गले मई हाथ डालते हुई आरती कहते है..

मैंने ने आज से पहले नीता को चूमा था…

सिर्फ नीता

और भी थी.. पर उसके और तेरे होंठों के मिठास मई काफी अंतर है ..

वो भला कैसे ..

नखरा करते हुई आरती कहते है ..

तेरे होंठ एकदम मुलायंदर है .. ... कोमल है .. नाज़ुक है .. और साथ मई बताशा मीठे है . ..

ऐसा कहते हुई नवाज़ उन जोरों से चूसने लगा .. .. नवाज़ की तारीफ से जोश मई आके आरती भी अपने पुरे ताकत से नवाज़ को चूसने लगे…

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आरती अब बहुत जोश मई आ गए थे.. उसने खुद hi नवाज़ के हाथ को पकड़ा और धीरे धीरे ऊपर करते हुई उसे आपने छथि पर रख कर जोर से दबा दिया.. नवाज़ को ऐसा लगा जैसे उसका हाथ मखमली गद्दे के उप्पर रख दिया ho..aur फिर उसने उसके चुचुकों को पकड़ कर जोर से मसल diya..waise hi आरती चिल्ला उठी ..

आआआआअह्हह्ह्ह्हह….. यययययययी..... Uuuuuuuuuuuuuuuuuu……. ffffffffffffffffff …. धीरे करो ...... नवाज़्ज़ज़्ज़ज़…. अहह दर्द होता है....

आवाज इतने तेज थे के इस वक़्त कोई मैं दूर पाई खड़ा होता तो आवाज उसे भी सुनाये दे जाते..

तब नवाज़ ने उन्हें धीरे-2 अपने उँगलियों से दबाना सुरु किया ... और साथ ही उसके होंठों का रास भी पीना जारी रखा. और अचानक उसे आरती के गांड का ख्याल aaya...uske दोनों हाथ एकदम से उसके मस्त पिछवाड़े पर पहुँच गए और वो उन्हें बुरी तरह से मसलने लगा... वह मसलवाने मई तो आरती को भी कोई प्रॉब्लम नहीं थी …

वो अपने मम्मी नवाज़ के छाती मई चुबती हुई आपने गांड नवाज़ से मसलनवाने लगे .. .. आज उसे बहुत मजा आ रहा था... ...और आरती भी पुरे शिद्दत के साथ एन्जॉय कर रही थी

अचानक आरती को अहसास हुआ की नवाज़ ने उसके पेटीकोट के नीचे से उसके गांड पाई हाथ रख दिए है .. उसके नंगे स्किन पर नवाज़ का हाथ के स्पर्श से वो अन्दर तक कपकँपा गए .. और उसने आपने किश की स्पीड बड़ा दी ..

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इस लाजवाब किश और उसके गांड की मालिश से निकल रही तरंगे दोनों के शरीर को ज़नज़ाना रही थी..

ओह नवाज़ ........ कहाँ थे....... पहले क्यों नहीं आये ...... ahah.......love यू ........ ी लव यू ....... मेरे नवाजजजजजज…. Raajjjjjjaaaa…..ummmmamamamamam...... आह्ह्ह्हह…

जोश मई आकर नवाज़ ने आपने शर्ट को उतर के फेक diya..aur वो आरती को फिर से किश करने लगता है .. और वो अब उसके ब्लाउज के उप्पर से उसके निप्पल को दबाने लगा..

नवाज़ ये सब करते हुई अपने आप को इमरान हाश्मी से काम नहीं समझ रहा था.... एक तरफ नीता और दूसरे तरफ आरती और तीसरे तरफ कंचन की तैयार .. .... उसे तो ायंदर से लगाने लगा के अब वो किसी पर भी हाथ रखेगा तो वो लड़की उसे मन नहीं कर पाएंगे...

नवाज़ ने अब उसका ब्लाउज धीरे-2 ऊपर करना शुरू कर दिया ... वो उसके निप्पल को देखना चाहता था.... और उन्हें चूसना भी …

पर ये काम करते हुए अब आरती को दर सा लग रहा था... ऐसे किसी दूसरे के किचन मई पूरा ननगा उसे अजीब लग रहा था… कोई आ जायेगा मतलब वो लोग अचानक आएंगे तो क्या होगा ये सोच कर वो डरने लगे थी .. पर अपने यार को वो मन भी नहीं करना चाहती थी ... इसलिए वो सोचने लगे करे तो क्या करे ..वैसे भी वो इस वक़्त अच्छी तरह से जानती थी की नवाज़ से ज्यादा वो खुद ये सब करने के लिए उतावली thi…par दूसरे के किचन मई खड़े होकर आपने नौकर यार के साथ ये सब करने के लिए वो आरती अब डरने लगे … आरती ये सब करने को तैयार थी पर अंदर अंदर से दर रही थी .. तभी नवाज़ उसका ब्लाउज थोड़ा उप्पर करता है .. नवाज़ का उतावलापन देख के उसकी हांसे निकल gaye..haste हुई उसने उसे कहा…

ो पागल पता है क्या आप क्या कर रहे हो ..

पता है .. रानी ..

पता है .. ऐसे ब्लाउज ऊपर जाता है क्या

तो कैसे जाता है

आप कहते तो हो आप की इतनी साडी गर्लफ्रेंड है .. फिर आप को पता नहीं है क्या कैसे जाता है

वो मेरे आने से पहले नंगी होक बैठ जाती है

धत बेशरम

नवाज़ ने अब और देरी नहीं की. उसने एक हाथ से आरती के नरम बदन को प्लेटफार्म पर थामे रखा और दुसरे हाथ की उँगलियाँ उसके ब्लाउज के हुक्स पर टिका दी.

आपने ब्लाउज के बटन पर नवाज़ का हाट आते hi आरती का सीना upar-neeche हो रहा था..

जोश मई आके वो आरती के ब्लाउज का एक बटन निकालने लगा..

तब आरती का चेहरा शरारती हो उठा.. और वो मुस्कुराते हुई बोली..

ये सब क्यों कर रहे हो ..

तुजे भी पता है

और हर हुक खुलने की आवाज़ किचन की ख़ामोशी में गूंज रही थी.

हाँ पता है पर यहाँ ठीक नहीं है .. वो लोग अचानक आ जायेंगे

नहीं आएंगे ..टाइम है अभी .. और एक घंटा

फिर भी यहाँ ठीक नहीं है

क्यों

क्यों के बच्चे .. सुबह से दो बार कर चुके हो ..

जैसे hi आखरी हुक खुला, नवाज़ ने ब्लाउज को कन्धों से थोड़ा सरकने दिया. आरती ने शर्म के मारे अपनी आँखें और ज़ोर से बंद कर ली, पर उसने नवाज़ को रोका नहीं. नवाज़ ने ब्लाउज के अंदर अपना गरम हाथ डाला और उसके नरम उभारों को अपनी मुट्ठी में भर लिया.

"नवाज़ जी... उफ़... ये नशा... मुझे पागल कर रहा है,"

आरती ने हम्पते हुए फुसफुसाया. उसका गोरा बदन अब किचन की मद्धम रौशनी में पूरी तरह be-parda होने की कगार पर था

बार बार वही करने से बोर नहीं होते .. तब उसे आपने और खींचते हुई कहता है ..

तेरे इतने मस्त मम्मी से कोई पागल hi बोर होगा .. तेरे पति जैसा ..

नवाज़ ने ऐसा कहते hi आरती उसके सर को धीरे से मरती है ..

आपने मालिक को पागल कह रहे हो ..उसके वजह से आप को ये सब मिल रहा है …आप को तो उसको धनवाद बोलना चाहिए .. और आप उन पागल बोल रहा है ..

तब उसके एक मम्मी को ब्लाउज के नीचे से हाट डालके आपने हाथ मई लेके उसे जरा जोर से दबाता है …

Oucccccccccccccccccccccchhhhhhh… जरा dhireeeeeeeeeeeeeeee….

थैंक youuuuuuuuuuuuuu… मेरे पागल malikkkkkkkkkkkkkkkkk…

और जोर से उसे मम्मी को दबाता है

Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhaaaaaa…

करके उसके सर को जरा जोर से मरती है आरती ..

फिर से पागलललललल…

तभी उसके हूंतो को नवाज़ आपने मू मई लेता है ..और उसे चूसने लगता है ..

नवाज़ अब आरती के नंगे मम्मी को बड़े प्यार से दबाने laga..uske हूंतो को चूसते हुई .. जैसे जैसे वो उसके मम्मी को दबा रहा था, आरती की आँखे उप्पर की तरफ होती चली गए.. जैसे कोई मिर्गे का दौरा पद रहा ho..Par वो कोई दौरा नहीं पद रहा था, अत्त्याधुक उत्तेजना की वजह से उसके अन्दर से उसके अन्दर एक जोरदार ऑर्गैनिस्म का निर्माण हो चूका था…

वो अब किश तोड़ता है और उसके ब्लाउज के उप्पर से hi उसके दूसरे निप्पल्स को दबाने लगा.. और जैसे जैसे नवाज़ उसके निप्पल्स को दबा रहा था वो हवा सीधा उसके ऑर्गैज़म मई आकर उसे और ज्यादा पहला रही थी..

अब नवाज़ आरती के मस्त हुई दूसरे निप्पल्स को मू मई लेता है ..और जैसे hi नवाज़ ने उसके निप्पल को मू मई लेकर चूसा.. वैसे hi आरती जोश मई आके बड़बड़ाने लगे ..

Aaahhhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaa…nnaawwwaaaaaazzzzzzzzz..

उउउउउउम्मम्मम्महहहहआ….

नवाज़ उसके गुलाभी निप्पल्स को चूस रहा था.. आपने मू मई लेकर … फिर वो उन चबा रहा था.. और दूसरे हाथ से उसके नंगे मम्मी की मालिश करते हुई उन दबा रहा था ..

मेरे एक बात सुनोगे

Aaaaaaaaaaaaahhhhh…..hhhhhh… aaaaaaaaannnnnnnnnn……

चुदाई की बात चोर के

हाँ.. वो नहीं है बात .. बात दूसरे है

बोलिये जी … क्या अलग बात है ..

तू चाहती है हमारा पहला सेक्स यादगार हो

हाँ यादगार hi होना चाहिए

पर घर मई नहीं चाहते

हां.. वह हमें डिस्टर्ब हो सकता है .. जहा हमें कोई डिस्टर्ब करने वाला नहीं हो..

रातभर सिर्फ मई और मेरा नवाज़ राजा साथ हो

वो यहाँ कैसे पॉसिबल है .. तेरा पति रहेगा यहाँ रात मई तेरे साथ

वो कैसे पॉसिबल.. वह रात मई रुकना पड़ेगा

हां

तो तेरा प्लान खेत मई रात रुकने का इरादा है क्या

हाँ मेरे राजा

और तेरे पति और ससुर को क्या कहेगे तू

और जोश मई आके उसके मम्मी को जोर से दबाता है

Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhaaa.. मेरे राजा .. मई कह दंगे .. आप टेंशन मत लो .. वैसे भी कहने की कोई जरूरत नहीं है पड़ेगे ..

तब नवाज़ आश्रय से आरती को देखने लगता है ..

वो कुछ लोग आने वाले है .. आपने खेत मई सोलर प्लांट लगाना है .. उन प्लांट की जगह दिखानी है ..पापा जी तो जा नहीं सकते .. बुढ़ापे की वजह से .. और अरविन्द बिजी रहता है तो उनलोगो को प्लांट की जगह मुझे hi दिखानी होगी .. और मई आप को साथ मई लेके चलूंगी

और रात मई किस बहाने वह रहेंगे

मौसम नहीं देख रहे हो क्या .. बारिश कब भी आ सकते है .. बारिश आ गए तो हम वह रुख सकते है ..

तब उसके हूंतो को जोर से चूमते हुई नवाज़ कहता है ..

लौंडे .. सच मई तुम लौंडे हो ..

अब मेरे राजा की इच्छा के लिए इतना तो करना पड़ेगा hi न ..

हाँ कर मेरे रानी ..तुजे मई असली मज़ा दूंगा .. असली सुहागरात का मज़ा ..

नवाज़ ने सुहागरात कहते hi उसे अपनी सुहागरात याद आ गयी .. a..arvind वाली सुहागरात … वो सोचने लगे वो क्या सुहागरात thi..uska उंगली सा लुंड.. वो क्या सुहगरात होते है.. फिर वो आपने आप से कहती है .. नवाज़ के 9 इंच लुंड ने उसे पागल बना दिया hai..us दिन मैंने आपने आँखों के सामने देखा tha..tabse मई नवाज़ की दीवानी बानी hu..nawaz के लौड़े की दीवानी..

वो हमारे सुहागरात hi होंगे

किश करते हुई आरती कहते है ..

तो परसो रात करते है सुहागरात हमारी

जर्रोर

आरती ने ऐसे कहते hi नवाज़ जोश मई आ gaya..Konsa मर्द नहीं चाहेगा की उसे किसी लड़की की छूट मई उंगली डालने का अवसर मिले.. उसे चूमने का.. उसकी पुसी को चूसने का आपने लुंड उसे चुसवानव का.. उसके मोममे दबाने का और चबाने का..

नवाज़ ने उसके ब्लाउज को पूरी तरह उतार कर एक तरफ फेंक दिया. अब आरती सिर्फ अपने खुले पेटीकोट में और ब्रा मई नवाज़ के सामने बैठी थी.

जोश मई आके वो आरती के ब्रा का एक बटन निकालने लगा.. तब आरती का चेहरा शरारती हो उठा.. और वो मुस्कुराते हुई बोली..

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बी के बटन क्यों निकल रहे हो आप

मुझे तेरे इस मम्मी का दूध पीना है

वो उसके सर पाई प्यार से चपत लगते हुई नकहरा करते हुई कहती है

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ये पागल.. ऐसे कैसे दूध आ जायेगा वह से.. बच्चा होने के बाद दूध आएगा वह से

उसके लिए तुजे माँ बनाना पड़ेगा मुझे पहले .

नहीं बनाना मुझे माँ

क्यों

इतने जल्दी नहीं बनाना है

मतलब कभी न कभी बनाना है

वो हाँ मई गर्दन हिलाते है

किस के बच्चें के माँ बनाना पसंद है तुजे

वो आचार्य से पूछते है

मतलब

मेरे बच्चे की या तेरे पति के

बेशरम कुछ भी बोलते है आप

बता न

वो शर्मा जाती है

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बता न

मुझे नहीं पता

फिर उसके हूंतो को एक बार चूमता है

बता न

वो आपण चेहरा एक साइड करती है

नवाज़ उसका चेहरा आपने तरफ करता है

बता न क्यों शर्मा रही है

तब आपने हाथो मई आपने चेहरा छुपा लेती है

बता न

मुझे शर्म आती यही.. ऐसा मत मुझे बार बार पूछिए

बता न एक बार फिर

आपने हाथ मई चेहरा चुपके चेहरा एक साइड करते हुई धीरे से बोलै ते है

आप के

तब उसके चहरे पर का वो हाथ हटा देता यही

पक्का

हां

पक्का न

हाँ पक्का

एक बार सोच ले

सोच लिया

फिर पलट तो नहीं जायेगे न

नहीं पलट जाउंगी पर अभी नहीं बाद मई

ठीक है बाद मई तो बाद मई

हम्म्म

तो तू नीता की सौतन बनेगे

वो भला क्यों

नखरा करते हुई कहते है

वो भी मेरे बच्चे की माँ बन रहे है और वो भी तेरे से पहले

उससे क्या

तो वो तेरे सौतन बनेगे

वो क्यों मेरे सौतन बनेगे.. मई मेरे नवाज़ मिया के बच्चे की माँ बनु गए.. मुझे उससे क्या

ऐसा कहते हुई उसके सर के पीछे हाथ डालते हुई उसका चेहरा निचे करके उसको किश करने लगाती है..

किश तोड़ते हुई नवाज़ कहता है..

माँ की अम्मा

जो आप चाहो

अच्छा

ऐसा कहते हुई नवाज़ उसे फिर से किश करने लगा

चूँकि आरती प्लेटफार्म पर बैठी थी, पेटीकोट उसके पिछवाड़े के निचे ढब गया था, पर नवाज़ ने बड़े नज़ाकत से उसे खिंच कर उसके घुटनो तक ले आया.

अब आरती उस किचन प्लेटफार्म पर सिर्फ अपने ब्रा में थी, और निचे उसका पेटीकोट घुटनो तक सिमट गया था. उसके पास अब छुपाने के लिए कुछ नहीं बचा था, क्यूंकि उसने पंतय पहले hi नहीं पहनी थी. उसकी गोरी, नंगी टांगें नवाज़ की नज़रों के सामने पूरी तरह be-parda थीं.

नवाज़ ने दारू का एक और घूँट भरा और गिलास वही रख कर आरती की नंगी कमर को अपनी बाहों में भर लिया. उसने उसके पेटीकोट की डोरी को एक झटके में आज़ाद कर दिया.

"अब कोई पर्दा नहीं बचा रानी... अब तुम सिर्फ मेरी हो,"

नवाज़ ने उसके होंठों पर अपना कब्ज़ा जमाते हुए कहा. आरती ने भी अपना पूरा वजूद उसके हवाले कर दिया, उसे अब सिर्फ नवाज़ की मरदाना गर्मी और उसके स्पर्श का नशा चाहिए था.

नवाज़ ने आमलेट का आखरी निवाला लिया और दारू का गिलास एक तरफ रख कर आरती के दोनों घुटनो को पकड़ा और उन्हें धीरे से फैलाने लगा.

"पेटीकोट निचे गिरेगा रानी... ये डोरी खुलने के बाद अब तुम्हारे और मेरे बीच कोई दीवार नहीं रहिगे .. मंजूर है तुम ,"

नवाज़ ने उसकी नंगी जांघ पर अपना गरम हाथ रखते हुए फुसफुसाया.

"अब बोलो रानी... क्या अब भी तुम्हे उस पुराणी 'मालकिन' वाली इज़्ज़त की परवाह है? या अब तुम सिर्फ मेरी हो?"

नवाज़ ने उसके होंठों को अपने होंठों से टच करते हुए पूछा.

आरती ने सिर्फ हम्पते हुए अपना सर 'हाँ' में हिला दिया. उसका पूरा वजूद अब नवाज़ की मुट्ठी में था और किचन की गर्मी अब हद्द से बाहर हो रही थी.

आरती ने शर्म के मारे अपना चेहरा नवाज़ के कंधे में छुपा लिया, उसका जिस्म ठंडी स्कॉच और नवाज़ की गर्मी के बीच बुरी तरह तप रहा था.

नवाज़ ने उसके ब्रा के हुक पर अपना हाथ रखा और ek-ek करके उन्हें खोलने लगा.

किचन की गर्मी अब हद्द से बाहर हो रही थी. आरती ने महसूस किया की नवाज़ का गरम हाथ अब उसके पेटीकोट के अंदर सरक रहा है, सीधा उसकी नंगी जांघो की तरफ.

"अब ये किचन हमारा खेत बनेगा रानी... बोलो, क्या तुम तैयार हो?"

नवाज़ ने उसके होंठों को अपने होंठों से टच करते हुए पूछा.

आरती ने हम्पते हुए सिर्फ अपना सर 'हाँ' में हिला दिया. उसका पूरा वजूद अब नवाज़ की मुट्ठी में था.

"अब यहाँ आमलेट नहीं, सिर्फ तुम्हारी और मेरी मोहब्बत पकेगी,"

नवाज़ ने उसकी आँखों में शैतानी से देखते हुए कहा

"नवाज़ जी... अब और मत तड़पाइए... उठा लीजिये मुझे,"

आरती ने हम्पते हुए सरेंडर कर दिया.

आरती ने सिर्फ हम्पते हुए अपना सर 'हाँ' में हिला दिया. उसका पूरा वजूद अब नवाज़ की मुट्ठी में था और किचन की गर्मी अब हद्द से बाहर हो रही थी.

नवाज़ ने उसे प्लेटफार्म से उठाया और अपनी मज़बूत बाहों में भर कर उठाया तो उसका पेटीकोट निचे गिर गया पर नवाज़ ने उसे ध्यान नहीं दिया और बैडरूम की तरफ कदम बढ़ा दिए. आरती ने उसके गले में अपने हाथ दाल दिए, उसे पता था की आज की रात उसकी ज़िन्दगी की सबसे यादगार रात होने वाली है.





 
नवाज़ ने जैसे hi आरती को अपनी मज़बूत बाहों में भर कर प्लेटफार्म से उठाया,





वही हुआ जिसका डर और नशा आरती को कब से सत्ता रहा था. डोरी पहले hi खुल चुकी थी, और जैसे hi वह हवा में उठी, पेटीकोट सरक कर सरसराहट के साथ किचन के फर्श पर गिर गया.

आरती अब पूरी तरह नंगी टांगों के साथ नवाज़ की बाहों में थी.





उसे हर पल अपनी उस 'खुली' हालत का एहसास हो रहा tha—niche कोई कपडा नहीं, सिर्फ नवाज़ की गरम हथेलियां उसकी नंगी जाँघों और पिछवाड़े को थामे हुए थीं.

नवाज़ ने निचे गिरे हुए पेटीकोट की तरफ देखा तक नहीं. उसका पूरा ध्यान सिर्फ अपनी 'रानी' पर था, जो शर्म के मारे उसके सीने में मुंह छुपाये हुए थी.





उसने bade-bade कदम भरते हुए बैडरूम की तरफ बढ़ना शुरू किया.

"नवाज़ जी... वो... पेटीकोट..."

आरती ने थरथराती हुई आवाज़ में उसके कान के पास फुसफुसाया.

नवाज़ ने एक गहरी, मरदाना हंसी हंसी और उसके कान पर एक हलकी सी चुटकी काटी.

"गिरे रहने दो रानी... अब उस परदे की ज़रुरत किचन में थी, मेरे बैडरूम में नहीं. आज मेरे बर्थडे पर मेरी रानी को बिलकुल आज़ाद रहना है."

आरती ने नवाज़ के गले में अपने हाथ और कास लिए. उसे पता था की अब पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं है. किचन से बैडरूम तक का वो छोटा सा रास्ता आरती को सदियों लम्बा लग रहा था, क्यूंकि नवाज़ का हर कदम उसकी नंगी चमड़ी पर एक नया करंट दौड़ा रहा था.

जैसे hi नवाज़ बैडरूम में दाखिल हुआ, उसने लात मारकर दरवाज़ा बंद किया और आरती को बड़े नरम अंदाज़ में बिस्तर पर लेता दिया.





आरती का ब्रा अभी भी खुला हुआ था और उसकी नंगी टांगें चांदनी में चमक रही थीं.

"अब शुरू होगा असली 'मैं कोर्स' रानी..."

नवाज़ ने अपना कुरता निकालते हुए उसके ऊपर jhuka.Nawaz की इस बेबाक और मरदाना बातों ने आरती के अंदर एक सिहरन दौड़ा दी.

उसने बड़ी ऐड के साथ कहा





आपका बैडरूम?? ये बैडरूम कबसे आप का hi गया

आरती ने जब "आपका बैडरूम?" पूछ कर थोड़ा सा विरोध जताने की कोशिश की, तोह नवाज़ ने उसे और ज़ोर से अपने सीने से भींच लिया.

नवाज़ ने उसकी आँखों में गहराई से देखा





और एक ऐसी मुस्कराहट दी जो किसी शिकारी की जीत जैसी थी. "

जब भी मैं किसी बैडरूम में किसी को छोड़ता हूँ, तोह वह बैडरूम मेरा हो जाता है... और वह भी हमेशा के लिए मेरी हो जाती है,"

नवाज़ ने उसके कान के पास बिलकुल धीरे से, पर एक हक़ के साथ फुसफुसाया.

आरती की सांसें अटक गयी. उसने महसूस किया की अब वह अरविन्द अग्रवाल की बीवी या अग्रवाल हाउस की मालकिन नहीं रही.

अच्छा जी ये तो मुझे पता hi नहीं था

तुजे बहुत सरे चीज़े अभी तक पैट hi नहीं है रानी

आरती ने उसके गले में अपने हाथ और कास लिए और दबी आवाज़ में बोलै,





"आप बहुत खतरनाक हैं नवाज़... आपने मुझे मुझसे hi छीन लिया है."

नवाज़ ने अपना कुरता निकालते हुए उसके ऊपर झुका और बोलै,

"अभी तोह सिर्फ छीना है रानी... अब तोह तुम्हे मुझमे hi पूरी तरह मिलाना बाकी है."

नवाज़ ने आरती को बिस्तर पर लिटाया और उसके खुले ब्रा को निकल के उसके गोर और नरम उभारों पर अपनी भूखी नज़रें टिका दी.





आरती शर्म के मारे सिमट गयी.. उसने मम्मी पाई हाट रखा पर नवाज़ ने उसके दोनों हाथों को पकड़ कर ऊपर कर दिया ताकि वह पूरी तरह be-parda हो जाये.

नवाज़ ने बड़े जूनून से देखा और एक गहरी सांस लेते हुए बोलै,

"क्या मस्त हैं तेरे मम्मी रानी... gore-gore, मुलायम, बिलकुल रुई जैसे. इन्हे एक बार छूलो तोह लेथ लग जाये और दिल पिघल जाये. और सबसे बेहतरीन... ये तेरे pink-pink निप्पल्स!"

आरती नवाज़ की इस बेबाक तारीफ से पूरी तरह शर्मा गयी,





उसने अपनी गर्दन मोड़ ली पर उसके चेहरे की लाली नवाज़ का जोश और बढ़ा रही थी.

नवाज़ ने उन नरम उभारों को अपनी हथेलियों में भरा और मसलते हुए बोलै,





"ये mote-mote मम्मी देख के ऐसा लग रहा है जैसे इनमे बहुत दूध भरा है... पर क्या करें, तुझे दूध देने के काबिल उस अरविन्द ने बनाया hi नहीं."

आरती की सांसें अब नवाज़ की गर्मी में घुलने लगी thin.aapne मालिक को वो इस अरविन्द कह रहा था और मालिक की बीवी उसे कुछ नहीं कह रही थी ..

उसने नवाज़ की आँखों में देखा





और पहली बार एक ऐसी बात कही उसे सेक्सी लुक देते हुई जिसने नवाज़ का दिमाग सुन्न कर दिया.

"आपके लिए रखा है सब kuch...us अरविन्द ने .. आप hi बना दो मुझे दूध देने के काबिल,"

उसने हम्पते हुए सरेंडर कर दिया.

नवाज़ ने उसके एक पिंक निप्पल को अपने होंठों में हलके से दबाया और फुसफुसाया, "





इसमें दूध होता तोह मज़ा आ जाता रानी... मैं रोज़ खेत जाने से पहले तेरा दूध पीटा."

आरती ने नवाज़ के बालों को कास कर पकड़ा और उसके कान के पास शिशकते हुए बोली, "

तोह बना दीजिये न मुझे दूध देने के काबिल... अपने बच्चे की 'अम्मी' बनाकर. फिर रोज़ बैठ कर अपने बेटे के साथ दूध पीते रहना."

नवाज़ ने जब सुना की अरविन्द अग्रवाल की बीवी उसके बच्चे की अम्मी बनने को तैयार है, तोह उसका मरदाना गर्व आसमान छूने लगा. उसने बिना देरी किये उसके ब्रा को पूरी तरह झटक दिया और उसके गोर बदन पर अपना कब्ज़ा ज़माने के लिए झुक गया. उसकी मरदाना आँखों में एक अजीब सा फितूर चढ़ गया. उसने आरती की नंगी कमर पर अपनी पकड़ और मज़बूत की और उसके चेहरे के बिलकुल पास आकर पूछा:





"मेरे बच्चे की अम्मी बनेगी?"

आरती ने बिना झिझक, उसकी आँखों में देखते हुए कहा,





"हाँ... बनूँगी."

बड़े स्माइल के साथ कहा

नवाज़ ने एक शैतानी हंसी हंसी और उसके नंगी जांघ को सहलाते हुए पूछा,

"कितने बच्चे की?"

आरती ने पहले तोह कुछ नहीं कहा, बस शर्म से अपनी पलके झुका ली. पर नवाज़ कहाँ मैंने वाला था, उसने उसकी चीन पकड़ कर ऊपर उठायी,

"बता न... कितने बच्चे पैदा करेगी?"

तब आरती ने बेहद शर्मा कर, दबी आवाज़ में कहा,





"जितने आप पैदा करना चाहते हो..."

नवाज़ ने उसका मज़ाक उड़ाते हुए कहा,

"तुझे पता है न हमारे में ज़्यादा बच्चे होते हैं? कर पायेगी इतने सारे बच्चे?"

आरती ने हिम्मत जूता कर कहा,

"हाँ... करुँगी."

नवाज़ ने अब हर हद्द पार कर दी. उसने अपना गरम हाथ सीधा उसकी नंगी छूट पर रखा





—वहां जहाँ कोई पर्दा नहीं tha—aur थोड़ा दबाते हुए बोलै,

"तेरे छूट से निकालेंगे इतने सारे... सेह पायेगी ये दर्द?"

आरती के मुंह से एक तीखी सिसकी निकली,





"आह्हः!"

उसने झट से नवाज़ का हाथ पकड़ लिया, पर उसे हटाया नहीं. उसकी सांसें अब किसी तूफ़ान की तरह चल रही थीं. उसने नवाज़ की आँखों में nasha-bhari नज़रों से देखा और फुसफुसाया:





"एक साथ थोड़े न पैदा करने हैं... dhire-dhire करके आप जितने चाहो उतने दे दूंगी. बस... अब मुझे और मत तड़पाइए."
 
आरती बैडरूम के नरम बिस्तर पर पूरी तरह नुदे लेती हुई थी, उसकी सांसें अभी भी नवाज़ के मरदाना नशा और उसके स्पर्श की वजह से उखड़ी हुई थीं. पर जैसे hi उसने सरेंडर किया, नवाज़ अचानक बिस्तर से उठा और बिना कुछ कहे सीधा किचन की तरफ चला गया.

आरती वही लेती रह गयी, हैरत और थोड़ी सी झल्लाहट के साथ. उसने अपने नंगे बदन पर चादर खींचने की कोशिश की पर उसकी नज़रें दरवाज़े पर तिकी थीं.

उसके दिमाग में सवालों का तूफ़ान उठ खड़ा हुआ:

"ये कहाँ चले गए अब मुझे ऐसे हालत में छोड़ के? नवाज़ जी भी बड़े अजीब हैं... जब मैं कपडे निकालने को तैयार नहीं होती, तोह मुझे मानाने के लिए kya-kya जातां नहीं करते, kaise-kaise नखरे उठाते हैं. और अब जब मैं पूरी तरह उनकी होने को तैयार हूँ, मुझे नंगा करके खुद hi गायब हो गए!"

उसने थोड़ा और इंतज़ार किया, पर जब किचन से बर्तनों की हलकी सी आवाज़ आयी, तोह उसने खुद से hi बड़बड़ाना शुरू किया,

"क्या su-su करने गए क्या? या फिर... इतनी दारू पी ली है की रास्ता भूल गए?"

आरती ने शर्म और थोड़ी शरारत से मुस्कुराते हुए सोचा की शायद नवाज़ अभी भी उस आमलेट और दारू के नशे में हैं, या फिर शायद वह उसके लिए कुछ और 'सरप्राइज' लेने गए हैं.

"नवाज़ जी! जल्दी आइये न... यहाँ ठण्ड लग रही है!"

आरती ने थोड़ा ज़ोर से आवाज़ दी, पर उसकी आवाज़ में गुस्सा काम और नवाज़ के लौटने का बेसब्री से इंतज़ार ज़्यादा था.

नवाज़ ने जब आरती की बेसब्री भरी आवाज़ सुनी, तोह उसके होंठों पर एक शैतानी मुस्कराहट आ गयी. वह किचन से वही महंगी स्कॉच की बोतल और वही गिलास लेकर बैडरूम में दाखिल हुआ.

आरती, जो बिस्तर पर नंगी लेती हुई खुद को चादर में छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी, उसे देख कर थोड़ा झल्लायी और थोड़ा शर्मा गयी.

"आप भी न नवाज़ जी... मुझे यहाँ इस हाल में छोड़ कर दारू लेने चले गए? मैंने सोचा पता नहीं कहाँ गायब हो गए,"

आरती ने थोड़ा नखरे से अपनी गर्दन झटकी.

नवाज़ ने दरवाज़ा लात से बंद किया और शैतानी से मुस्कुराते हुए गिलास टेबल पर रखा और आरती के नंगे बदन पर पूरी तरह झुक गया. उसके जिस्म की गर्मी और स्कॉच की तीखी महक आरती की साँसों में घुलने लगी.

आरती ने नखरे से अपनी नज़रें चुराई और थोड़ा चिढ़ते हुए पूछा,

"मेरा नशा काफी नहीं था क्या... जो आपको इस दारू के नशे की ज़रुरत पद गयी?"

नवाज़ ने उसके गजरे से महकते बालों को अपनी उँगलियों में लपेटा और उसके कान के पास बेहद मरदाना और भरी आवाज़ में फुसफुसाया:

"नशा तोह तुम्हारा hi है रानी... पर जब 'शराब' और 'शबाब' दोनों मिल जाएं न, तब असली मज़ा आता है. एक नशा जिस्म को जलाता है, और दूसरा रूह को सुकून देता है."

आरती ने नवाज़ के चौड़े कन्धों पर अपने नरम हाथ रखे और उसकी आँखों में nasha-bhari नज़रों से देखा. उसने बोतल से एक लम्बा जाम गिलास में भरा और आरती की नंगी कमर पर अपना ठंडा हाथ रखा.

आप अब पीओ मत .. आप को ज्यादा हो जायेगे

"अरे रानी... नशा तोह अब शुरू होने वाला है. बिना इस 'शाही शरबत' के, मेरे बर्थडे का असली जश्न कैसे पूरा होता?"

नवाज़ ने गिलास का एक घूँट भरा और फिर गिलास आरती के होंठों के पास ले गया.

आरती ने फिर से मुँह फेरा,

"नहीं... मैंने कहा न मैं नहीं पीती."

नवाज़ ने गिलास वही टेबल पर रखा और आरती के ऊपर झुक गया.

"ठीक है रानी... मत पियो. पर मैं तोह पी रहा हूँ न? और मेरे होंठों का नशा तोह तुम्हे लेना hi पड़ेगा."

नवाज़ ने दारू से भरे अपने होंठों को आरती के नरम होंठों से चिपका दिया. इस बार स्कॉच की गर्मी और नवाज़ का जूनून आरती के जिस्म में बिजली बन कर दौड़ा. उसने महसूस किया की नवाज़ का दूसरा हाथ अब उसकी नांगीज झांग पर वापस पहुँच गया है, वही शैतानी पकड़ के साथ.

"अब बताओ रानी... कितने बच्चे चाहिए? क्यूंकि अब नशा चढ़ चूका है और अब रुकने का कोई सवाल hi नहीं पैदा होता,"

नवाज़ ने उसके होंठों के बीच फुसफुसाया.

आरती ने नवाज़ के बालों में अपनी उँगलियाँ फंसा ली और हम्पते हुए बोली,

"जितने आप पैदा कर सको... बस अब शुरू kijiye.par याद रखना असली खेल परसो खेलना है.. खेत मई ..असली सुहागरात तब होगी ..अब नहीं ..

नवाज़ ने जब आरती के मुंह से "असली खेल परसो खेत में" वाली बात सुनी, तोह वह बीच में hi रुक गया. उसने दारू का गिलास एक तरफ रखा और आरती की नंगी कमर पर अपना मज़बूत हाथ टीकाकार उसकी आँखों में गहराई से देखा.

उसके चेहरे पर एक अजीब सी मरदाना मुस्कराहट आयी, जैसे वह अपनी 'रानी' की इस ज़िद्द का मज़ा ले रहा हो.

"अच्छा... तोह मेरी रानी ने पूरा प्लान बना रखा है?"

नवाज़ ने उसके कान के पास झुक कर, अपनी भरी आवाज़ में फुसफुसाया.

"यहाँ सिर्फ ट्रेलर दिखाना है और असली 'सुहागरात' खेत की खुली हवा में माननी है?"

आरती ने शरमाते हुए अपनी पलके झुका ली और नवाज़ के सीने पर अपने नरम हाथ रख दिए.

"हाँ... आज तोह बस आपका बर्थडे है, इसलिए मैंने आपको ये तोहफा दिया. पर जो वडा आपने खेत का किया है, उसे मैं वही पूरा करना चाहती हूँ. असली सुहागरात वही होगी... मिटटी की खुशबु और आसमान के नीचे."

नवाज़ ने उसके नंगे मामों पर हलकी सी चुटकी काटी, जिससे आरती के मुंह से एक मीठी सिसकी निकली.

"ठीक है रानी... पर याद रखना, अगर परसो खेत में सुहागरात होगी, तोह आज की रात सिर्फ इस 'स्टार्टर' से काम नहीं चलेगा. आज मैं तुम्हे इतना तड़पाऊंगा की परसो तक तुम सिर्फ मेरा नाम जपोगी."

नवाज़ ने दारू की बोतल से एक और घूँट भरा और आरती को बिस्तर पर और ज़ोर से भींच लिया. "चलो, तोह आज सिर्फ इस बदन को निहारने और चखने का खेल खेलते हैं... असली 'जुंग' तोह परसो खेत में hi लड़ी जाएगी."

आरती ने नवाज़ के गले में हाथ दाल दिए, उसकी नंगी टांगें नवाज़ के जिस्म से लिपट गयी थीं. उसे पता था की नवाज़ अब उसे इतनी आसानी से छोड़ेगा नहीं .तब वो बड़ी अड्डा के साथ कहते है

वैसे आप को कितने बच्चे चाहिए

8 -10

नवाज़ ने जब 8-10 बच्चों की बात की, तोह आरती अपनी शर्म भूल कर खिलखिला कर हसने लगी. उसका नंगा बदन बिस्तर पर थरथरा रहा था और उसके गोर मम्मी हंसी के साथ upar-neeche हो रहे थे.

"इतने बच्चों का क्या करोगे नवाज़ जी?"

आरती ने हस्ते हुए पूछा.

नवाज़ ने दारू का एक घूँट भरा और बड़े गर्व से बोलै,

"क्रिकेट टीम बनाएंगे रानी!"

आरती ने उँगलियों पर हिसाब लगाया और शरारत से बोली,

"उसके लिए तोह 11 लगते हैं...

कितने काम पड़ेंगे?"

दो...

कुछ सोच कर कहती है

नहीं, तीन!"

नवाज़ ने शैतानी से उसकी नंगी छूट पर हल्का सा थप्पड़ मारा.

"वह भी पैदा करने पड़ेंगे रानी."

आरती ने हम्पते हुए इक़रार किया,

"हाँ जी... वह भी कर लेंगे."

पर नवाज़ कहाँ रुकने वाला था, उसने गिलास टेबल पर रखा और उसके ऊपर झुक कर बोलै,

"और रिज़र्व में भी तोह 3 होते हैं... मतलब टोटल 14!"

आरती ने आँखें फैलाई और नखरे से नवाज़ का कान पकड़ लिया.

"मैं क्या आपको बच्चे पैदा करने वाली मशीन लगती हूँ क्या? इतने सारे... उफ़!"

उसने थोड़ा तिश्ने में देखा और बोलै,

"मरूंगी... अगर ऐसा मज़ाक फिर से मेरे साथ किया तोह!"

नवाज़ ने उसकी नंगी कमर को कास के पकड़ा और उसके लबों के पास फुसफुसाया,

"मशीन नहीं रानी... तुम तोह मेरी वह 'उपजाऊ ज़मीन' हो जहाँ सिर्फ मोहब्बत की खेती होगी. और रही बात 14 की... तोह अभी तोह सिर्फ स्टार्टर शुरू हुआ है, असली खेल तोह परसो खेत में मिटटी की खुशबु में होगा."

आरती ने नवाज़ के सीने पर सर टिका दिया, उसका गुस्सा अब एक गहरी मुस्कराहट में बदल गया था. उसे पता था की नवाज़ उसे सिर्फ बच्चों की मशीन नहीं, अपनी 'रानी' बना कर रखना चाहता है.

नवाज़ ने दारू का गिलास एक तरफ रखा और आरती की थरथराती हुई नंगी कमर पर अपना मज़बूत हाथ टिका कर उसकी आँखों में शैतानी से देखा. उसके चेहरे पर एक विजयी मुस्कराहट थी.

"रानी... थोड़ी देर पहले जब मैंने तुझसे कहा था की नीता मेरे बच्चे की माँ बनने वाली है और तू उसकी सौतन बनेगी... तब तूने बड़े नखरे दिखाए थे,"

नवाज़ ने उसके कान के पास अपनी गरम सांसें छोड़ी.

उसने आरती की नक़ल उतरी और उसके नरम गाल को हलके से चुनते हुए बोलै,

"तब तूने क्या कहा था? 'वो क्यों मेरी सौतन बनेगी? मैं मेरे नवाज़ मिया के बच्चे की माँ बनूँगी... मुझे उससे क्या!'"

तब आरती कहती है

अम्मी

हां अम्मी

नवाज़ ने उसके गोर मम्मों पर अपना गरम हाथ रखा और थोड़ा दबाते हुए पूछा,

"ऐसा क्यों रानी? इतना बदलाव कैसे? पहले तोह तू नीता का नाम सुनते hi aag-baboola हो जाती थी, और अब... अब तुझे फ़र्क़ नहीं पड़ता की वह मेरे बच्चे की माँ बन रही है?"

आरती ने शर्म के मारे अपनी पलके झुका ली और नवाज़ के चौड़े सीने से और लिपट गयी. उसका जिस्म नवाज़ की 'शराब और शबाब' वाली गर्मी में पिघल रहा था. उसने दबी आवाज़ में कहा:

"नवाज़ जी... तब मैं सिर्फ अरविन्द अग्रवाल की बीवी थी. पर अब... अब मैं सिर्फ आपकी रानी हूँ. मुझे अब किसी सौतन या किसी नीता से फ़र्क़ नहीं पड़ता. मैं बस इतना जानती हूँ की मेरे नवाज़ मिया का पहला और सबसे बड़ा हक़ मुझ पर है... और मैं आपको इतने बच्चे दूँगी की आपको किसी और की तरफ देखने की ज़रुरत hi नहीं पड़ेगी."

नवाज़ ने एक ज़ोर की मरदाना हंसी हंसी और उसके लबों पर एक गहरा nasha-bhara किश किया.

"तोह ये 14 बच्चों की क्रिकेट टीम सिर्फ तेरे भरोसे hi बनेगी रानी? नीता को तोह अब सिर्फ 'एक्स्ट्रा' प्लेयर रखना पड़ेगा!"

आरती ने हम्पते हुए नवाज़ के बालों को कास लिया.

"हाँ... सिर्फ मेरे भरोसे. अब बताइये... खेत जाने से पहले इस 'प्रैक्टिस' सेशन में और kya-kya बाकी है?"
 
तब नवाज़ कहता है

पर रानी जब तू मेरे बच्चे की माँ बनेगी और वो तो आलरेडी बन रही है तो तुम दोनों सौतन हुई न

नहीं

वो भला कैसे

तब बड़ी अड्डा के साथ नखरे से कहते है





वो भला ऐसा मेरे राजा वो सिर्फ आप की रखेल है और मई आप की बेगम

नवाज़ ने जब सुना की आरती ने नीता को सिर्फ एक 'रखेल' का दर्जा दे दिया है और खुद को 'बेगम', तोह उसकी मरदाना हंसी बैडरूम की दीवारों में गूंज गयी.

उसने दारू का गिलास एक तरफ पटका और आरती की नंगी कमर पर अपना मज़बूत हाथ फेरते हुए उसकी आँखों में शैतानी से देखा.

"बड़ी अदा है रानी... तोह वह रखेल और तू begum?Par अगर मैं अपनी आदत से बाज़ न आया और लेडीज के पीछे लगा रहा तोह?" नवाज़ ने उसके ब्लाउज से आज़ाद गोर मम्मों पर हलकी सी चुटकी काटी.

आरती ने नखरे से अपनी गर्दन झटकी और नवाज़ के सीने पर ऊँगली घूमते हुए बोली, "होगा न प्रॉब्लम! पर आप कहाँ मेरी सुनने वाले हो? मेरे पीठ पीछे उसके साथ लगे रहोगे... मुझे पता है आपको औरतों का चस्का है."

नवाज़ ने उसे और करीब खींचा, इतना की उनकी सांसें टकरा रही थीं.

"अगर नीता ने ज़िद्द पकड़ ली की उसे भी मेरी 'बेगम' बनना है... तोह?"

आरती की आँखें अचानक गुस्से और जलन से चमक उठीं.

"नहीं! बनाने नहीं दूँगी!"

उसने सख्ती से कहा.

"अगर फिर भी वह ज़िद्द पर उतर आयी तोह?"

नवाज़ ने उसे और उकसाया.

"जान लूंगी!"

आरती ने बिना सोचे कहा, उसकी आवाज़ में अब वही पुराणी मालकिन वाली जलन और नवाज़ के लिए नया जूनून था.

नवाज़ ने हस्ते हुए पूछा,

"किसकी? उसकी... या मेरी?"

आरती ने शर्मा कर अपनी पलके झुका ली और नवाज़ के गले में अपने नरम हाथ दाल दिए.

"आपकी कैसे ले सकती हूँ... आप तोह मेरे राजा हो, मेरी जान हो. पर उसकी तोह खैर नहीं!"

नवाज़ ने उसके नंगे बदन पर अपना कब्ज़ा और मज़बूत किया और उसके होंठों के पास फुसफुसाया,

"तोह मेरी बेगम इतनी खतरनाक है? चलो, तोह आज इस बेगम का गुस्सा इस नरम बिस्तर पर निकालते हैं... देखें तोह सही मेरी जान लेने वाली रानी में कितना दम है."

आरती ने हम्पते हुए नवाज़ को अपनी तरफ खींचा, उसके जिस्म की गर्मी अब हर पर्दा तोड़ने को तैयार थी.

नवाज़ ने जब देखा की आरती नीता की 'जान' लेने की बात कर रही है, तोह उसकी मरदाना हंसी पूरे कमरे में गूंज गयी. उसने दारू की बोतल साइड में राखी और आरती की नंगी कमर पर अपना मज़बूत हाथ टीकाकार उसके चेहरे के बिलकुल पास गया.

"बड़ी बातें करने लगी है मेरी रानी... पहले तोह नीता का नाम सुनते hi तेरे दिमाग में आग लग जाती थी, और अब उसकी जान लेने पर उतर आयी?"

नवाज़ ने शैतानी से उसके निप्पल पर अपनी जीभ फेरी.





आरती एक डैम से चटपटा गयी..

aaaahh….ssisisissiiii.. नवाज़्ज़ज़ जीई ीी.. ूउम्मम्मम

तब नवाज़ आरती के राइट निप्पल को मुँह में भर लिया.. और चूसने लगा ...





आआह्ह्ह्हह्हह्ज ....मररररर ...गयीईइ...

और दूसरे हाथ से उसके ,लेफ्ट वाले निप्पल को ज़ोर से मसल दिया..

aahhhhhhhhummmm..ssisiiiii…. ssisisisisi..kyaa कर रहे हो जी ???

और आरती ने मस्ती से आँख बंद कर दी…

तब नवाज़ आपने मू हटके कहता है

क्या करेगी नीता को

आरती ने नखरे से अपनी गर्दन झटकी और नवाज़ की आँखों में nasha-bhari नज़रों से देखा.





"हाँ... जान लुंगी उसकी! आपकी कैसे ले सकती हूँ... आप तोह मेरी जान हो न? पर उसने अगर मेरी बेगम वाली जगह लेने की कोशिश की, तोह मैं उसे छोडूंगी नहीं."

नवाज़ ने उसकी इस जलन का मज़ा लेते हुए पूछा,

"पर रानी... तुझे पता है न मेरी आदत? मैं तोह लेडीज के पीछे लगा रहता हूँ. मेरे पीठ पीछे तू kya-kya रोक लेगी? मैं तोह उसके साथ भी वही खेल खेलूंगा जो तेरे साथ खेल रहा हूँ."

आरती ने थोड़ा चिढ़ते हुए और नखरे से नवाज़ के सीने पर कोहनी मारी.





"मुझे पता है आप बाज़ नहीं आएंगे! मेरे मन करने के बाद भी आप उसके साथ लगे रहोगे... पर याद रखिये, वह सिर्फ आपकी रखेल है. बेगम का दर्जा तोह सिर्फ मेरा है."

नवाज़ ने उसके नंगे जिस्म पर अपना कब्ज़ा और मज़बूत किया और उसके कान के पास बेहद सेडक्टिव आवाज़ में फुसफुसाया:

"ठीक है रानी... वह रखेल और तू बेगम. पर आज इस बेगम को इतना नशा देना है की वह अपनी सौतन का नाम तक भूल जाये. बता, अब भी जान लेने का इरादा है या अपनी इस 'जान' को पूरी तरह सौंप देगी?"

आरती ने शर्मा कर अपनी पलके झुका ली और नवाज़ के गले में अपने नरम हाथ दाल दिए.

"आप बहुत बुरे हैं नवाज़ जी... जानते हैं मुझे कैसे मानना है. बस... अब मुझे और मत जलाइए और अपना बनाइये."

नवाज़ ने उसके लबों पर एक गहरा nasha-bhara किश किया और उसके नंगे बदन पर अपना मरदाना हक़ जताने के लिए झुक गया.
 
आरती ने शर्मा कर अपनी पलके झुका ली और नवाज़ के गले में अपने नरम हाथ दाल दिए.

"आप बहुत बुरे हैं नवाज़ जी... जानते हैं मुझे कैसे मानना है. बस... अब मुझे और मत जलाइए और अपना बनाइये."

नवाज़ ने उसके लबों पर एक गहरा nasha-bhara किश किया और उसके नंगे बदन पर अपना मरदाना हक़ जताने के लिए झुक गया.

आरती अब बहुत जोश मई आ गए थे.. उसने खुद hi नवाज़ के हाथ को पकड़ा और धीरे से आपने छथि पर रख कर जोर से दबा दिया.. नवाज़ को ऐसा लगा जैसे उसका हाथ मखमली गद्दे के उप्पर रख दिया ho..wo उसके उसके मम्मी को दबाने लगा..

आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह





नवाज़ ने उसके दोनों मम्मी को पकड़ कर फिर से जोर से दबा दिया......

आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ह्ह्ह्ह.. कमीने.. धीरे न..

ायःहा… आरती.. क्या मम्मी है तुम्हारे… ........ ूउम्महहहह....

उसने नवाज़ का एक हाथ पकड़ कर निचे को किया और अपनी गांड की उप्पर रख दिया और नवाज़ की आँखों मई देखते हुई बड़े नशीले तरीके से बोलै ....

HD-wallpaper-shraddha-kapoor-bollywood-actress.jpg


और इसके बारे मई क्या ख्याल है..

नवाज़ ने उसे पकड़ के बुरी तरह से मसल दिया.. और उसके कान मई बोलै..

इसका तो जवाब hi नहीं है.. ऐसे hi थोड़े न पुरे गाँव के लड़के तुम्हारे गांड के पीछे पागल है..

हैट बदमाश .. कुछ भी बोलते हो आप

कुछ भी नहीं सच बता रहा हु.. गाँव मई कोई ऐसा लड़का नहीं होगा जो तुम्हारे गांड के पीछे पागल न हुआ हो

इतना कह कर उसने उसका चेहरा अपनी तरफ घुमा कर उसे किश करने लगा..





आरती की साँसे तेज होने लगे.. उसने किश तोड़ते हुई बड़े नशीली तरीके से कहा

और आप

मई

हाँ

मई तो चाहता हु तेरे छूट से पहले गांड मरू

न बाबा

क्यों

तब उसने शर्माकर अपनी आँखे नीचे कर ली .. इस वक़्त आरती बहुत सेक्सी लग रही थी .. उसकी सेक्सी स्माइल और आँखों की चमक देखकर नवाज़ ने उसे फिर से पूछा..

बताओ न

तब शर्माकर वो कहते है

इससे से पहले कभी किया नहीं

तेरे पति के साथ भी

नहीं किया

कितना चुटिया है तेरा पते.. मई होता तो तेरे ये मस्त गांड रोज मरता..

ऐसा कहते हुई उसकी गांड जोर से दबाता है

ोुछहहह.. उनको कुछ मत कहो..

तब नवाज़ ने उसको आपने बहो मई भर लिया..

एक बात बताओ

पूछो

खेत मई हमारे सुहागरात मई छूट के साथ गांड भी देंगे क्या ..

तब शर्मा के कहते है

नहीं

दे दे न.. बहुत मज़ा आएगा ..

आप को मज़ा आएगा मुझे नहीं ..मुझे तो तकलीफ होगी ..

कोई तकलीफ नहीं होने दूंगा

तब उसकी आँखों मई देखते हुई कहते है

वडा

वडा रहा ..

पक्का वाला

पाकक वाला वडा..

तब तो मिल जाएगी ..नवाज़ मिय्या

नवाज़ का सब्र अब पूरी तरह से जवाब दे चूका था. जैसे hi आरती ने उसे गांड देने को रेडी हुई जो उसने अपनी पति को कभी नहीं दी है , नवाज़ के अंदर एक जूनून सा सवार हो गया. उसने बिना वक़्त गंवाए आरती के गोर बदन पर अपना कब्ज़ा जमा लिया

नवाज़ ने निचे झुक कर आरती के एक भरे हुए मम्मी को अपने मज़बूत हाथ में भरा और उसे बड़े शौक़ से चाटने लगा.





उसकी गरम और खुरदरी जीभ जब आरती के नरम पिंक निप्पल और उसके गोर उभार पर फिरि, तोह आरती का पूरा जिस्म एक झटके में अकड़ गया

आह्हः... नवाज़ जी!.. मर गए…

आरती के मुंह से एक तीखी और nasha-bhari सिसकी निकली. वह बिस्तर पर तड़प उठी; उसने तकिये को अपने नरम हाथों से कास के पकड़ लिया और उसकी नंगी टांगें बेचैनी से थरथराने लगी..

नवाज़ का सब्र अब पूरी तरह से जवाब दे चूका था. बैडरूम की मद्धम रौशनी में, बिस्तर पर नंगी लेती हुई आरती के गोर बदन ने नवाज़ के अंदर एक जूनून सा भर दिया tha.aab नवाज़ आरती के नरम मम्मी को बड़े शौक़ से चाटने लगा..





वैसे वैसे आरती का पूरा जिस्म अकडने लगा .. उसने नवाज़ के बालों को पकड़ कर और जोर से उसे उप्पर की और खींच लिया …और वो फुसफुसाई…

ओह्ह्होऊ.. नवाज़.. कितना परेशां करते ho..raato मई मुझे.. आजकल तुम.. पता है कल को मई सो नहीं पाए..

इतना कहते हुई उसने नवाज़ के हूंतो पर आपने हूंठ रख दिए.. और उसे चूसने लगे.. नवाज़ भी उसके रसेले हूंतो को आँख बंद करके चूसने लगा..

Shhhhhhhh….shhhhh… सससससस… आह्ह्ह्हआ… ओह्ह्होऊ… नवाज़…

तो क्या किया रात मई..

क्या करते मेरे राजा.. तुम्हारे याद मई तड़पती रहे..

याद मई क्या किया तुमने …

क्या karti..aankhe बंद करके आपने छूट मई उंगली डालकर कसमसा रही थी..

तेरा नामर्द पति नहीं था क्या

था न

उससे चुद के लेना था न

अब तुम्हारे होते हुई उसके पास क्यों जाती..

ऐसा कह के नवाज़ को किश करने लगे..

क्या किश करता है यार tu…ekdum जंगली तरीके से.. क्या चूसता है यार Tu…ek बार फिर से चूस न मुझे.. तू जब थोड़े देर पहले मुझे किश कर रहा था तब मैं ऐसा कर रहा था की मेरे पूरी बॉडी को तू चभा जाये … आपने दांतो से.. हूंतो से.. जीभ से.. मेरे रोम रोम को तुम गीला कर दो..

आरती की साँसे तेज हो गए ये सब कहते हुई..

आरती ने ऐसे कहते hi नवाज़ उसको किश करने लग गया..

किश तोड़ते हुई आरती कहती है..

Ummmhhhh…us बीच नीता की जगह मई होते तो.. ोू God..kitana मज़ा आता… कितना मज़ा आया होगा नीता को.. उस दिन आप के साथ वो सब करते हुई..

तब नवाज़ उसके छूट को जोर से दबा देता है..





ओह्होऊ.. नवाज़.. फुखखक्क… ूउम्महहहह… बब्यीयीय..

नवाज़ को आरती के शब्द्द इस वक़्त किसी ब्लू फिल्म के हीरोइन के डायलाग जैसे लग रहे थे.. जो चुदाई करते वक़्त आव्जे निकलते है..

तब उसका एक मां हाथ मई लेके जोर से दबाता है..

ोुछहहह.. कमीने… धीरे दबा न..

कटने मस्त मम्मी है तेरे ..

इतने तो दबाये न.. मैं नहीं भरा क्या ..

मेरा मैं कैसे bharega..rani

ऐसा बोल के नवाज़ अपनी गरम और स्कॉच के नशे में डूबी हुई जीभ आरती के पिंक निप्पल पर रख देता है ..





तब आरती को ऐसा लगा जैसे उसके पूरे जिस्म में बिजली दौड़ गयी हो

उसने अपना सीना ऊपर की तरफ उठाया ताकि नवाज़ और गहराई से उसके बदन का नशा ले सके.

उसका गजरा पहले hi बिखर चूका था, और अब उसकी शर्म भी इस बैडरूम की तन्हाई में पिघल रही थी.

नवाज़ ने उसके दूसरे मम्मी मसलते हुए और और एक निप्पल को chaat-te हुए बेहद भरी और नशीली आवाज़ में फुसफुसाया,

"आज इस 'बेगम' को बताना पड़ेगा की उसके 'राजा' का नशा किसी भी दारू से ज़्यादा तीखा है. बता रानी, अब भी तड़प रही हो या अब सुकून मिल रहा है?"

आरती ने हम्पते हुए अपनी आँखें बंद कर लीन और नवाज़ का सर और ज़ोर से अपने सीने से चिपका लिया. उसका पूरा वजूद अब सिर्फ नवाज़ की मुट्ठी में था..
 
आरती ने हम्पते हुए अपनी आँखें बंद कर लीन और नवाज़ का सर और ज़ोर से अपने सीने से चिपका लिया. उसका पूरा वजूद अब सिर्फ नवाज़ की मुट्ठी में था

अब नवाज़ थोड़ा पीछे चला गया . उसकी नज़र आरती के गोर गोर पथ और सेक्सी नाभि पर चली गयी.. उसके गोर चित्ते पेट पर अन्दर की तरफ धसी हुई नाभि बड़ी hi सेक्सी लग रही थी.. उसके सेक्सी नाभि देखकर नवाज़ मंत्रमुग्ध सा हो गया..

आरती ने उसे जब आपने पेट घूरते हुई देखा तो वो बोली..

ऐसे क्या घर रहे हो मुझे.. जैसे पहले बार देख रहे हो..

तेरे सेक्सी नाभि पहली बार देख रहा हु..

अच्छा जी.. कोई झूठ बोलना आप से सीखे..

अब मैंने क्या झूट बोलै भला डार्लिंग

आरती को किसी ने पहली बार डार्लिंग कहा था.. शयद अरविन्द ने कभी नहीं कहा .. नवाज़ ने डार्लिंग कहा तो वो खुश हो गए..

मुझे पहले hi नंगे कर चुके हो और कह रहे हो मेरे सेक्सी नाभि पहले बार देख रहा हु..

हाँ न रानी.. पहली बार तेरे नाभि मुझे इतनी सेक्सी लग रही है.. शयद मेरे नज़र इस पर पहले बार गए है..

तब शरमाते हुई आरती कहती है ..

फिर अभी कैसे गयी..

पता नहीं

ऐसे बोल के उसके सेक्सी नाभि पर हाथ रकता है..

आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह… आआह्ह्ह्ह… . बॉब्बीयय.. उम्मम्मम्म..

एक तेज सांस आरती ने अपनी नाक के द्वारा भरी जैसे दुनिया की साडी ऑक्सीजन आपने अंदर समेत लेना चाहती हो .. और आरती के चहरे पर एक मुस्कान आ गयी नवाज़ ने आज से पहले उसका ये नॉटी अवतार कभी नहीं देखा था..

लगता है ये तुम्हारा सेंसिटिव पॉइंट है

आरती ने घरी सांस लेते हुई कहा..

येतो सभी का होता है.. ये पॉइंट हैही ऐसा..

कितना सेंसिटिव है..

तब आरती नखरा करते हुई कहते है..

ये भला कैसे मुझे पता नवाज़.. कितना सेंसिटिव है ..

मई चेक करू

आरती ने शरारती नज़रों से नवाज़ को देखा और बोली

अच्छा जी.. अब आप चेक करना चाहते हो..

हाँ

और उससे क्या होगा भला

पता चल जायेगा कितना सेंसिटिव है मेरे रानी की नाभि

वो भला कैसे चेक करोगे

आरती ने मुस्कुराते हुई कहा

मई कर लूंगा.. तुम कोई ऐतराज तो नहीं है न

मुझे क्या दिक्कत होगी

इतना कहते हुई बड़ी शरारती अंदाज़ मई उसने कहा..

मेरे ऐतराज की इतनी फ़िक्र है आप को

फ़िक्र तो होगी न रानी.. तुजे प्यार जो करता हु

हाउ स्वेट.. नवाज़ आप कितने अच्छे हो.. मेरे अच्छे बुरे की कितनी फ़िक्र है आप को ..

तुम भी तो अच्छी हो न रानी..

मैंने भला अब क्या अच्छा काम किया मेरे राजा

अच्छा नहीं बहुत अच्छा काम किया है.. तुमने हमरे सुहागरात का इतना अच्छा प्लान बनाया है..

वह तेरे घर मई करते तो हमें कोई न कोई डिसट्रब करता.. और तुम पुरे रात मेरे पास नहीं रह पति… खेत के प्लान मई पूरा टाइम भी मिलेगा और कोई डिस्टर्ब करने को है भी नहीं.. और बारिश अगर सच मई बाद गयी तो हम साथ मई 5-10 दिन रह सकते है

आरती आचार्य से कहती है

वो कैसे

अगर बारिश ज्यादा आ गयी तो नदी का पानी बहुत ज्यादा बाद जायेगा और वो 5-10 दिन तक पानी काम नहीं होगा और तब तक रोड चालू नहीं होगा..

अच्छा.. ऐसा क्या.. ये तो मुझे पता नहीं था.. फिर 5-10 दिन का प्लानिंग करना पड़ेगा..

हाँ रानी..

ठीक है करती हु

तब नवाज़ फिर से उसके नवल पर हाथ रखता है..

आह्ह्ह्हहए… शहहह…

पसंद आयी आप को

क्या

आरती थोड़ी करीब आयी और बोली..

ये मेरे नवल .. पसंद आयी क्या आप को ..

हाँ.. किसे पसंद नहीं आएंगे.. ऐसी सेक्सी नाभि

इतना कहते hi उसने आपने मू उसके सेक्सी नाभि पर रख दिया

स्स्स्सस्स्स्शह्ह्ह्ह…. Sshhhhhhh..aahhhhh..

उसने आपने मू रखते hi आरती सीसिया उठी और उसने नवाज़ का सर पकड़ा और उसे आपने पेट पर जोर से दबा दिया.. और मदहोशी मई अपनी आँखे बांध किये.. आरती के ऐसे करते hi नवाज़ जन्नत मई पहुँच gaya..itani मुलायम.. इतनी sexy..itani उत्तेजक नाभि उसने आज से पहले नहीं देखि थी.. उसके बॉडी से आ रही सुंगध नवाज़ के नको मई जाने से उसकी उत्तेजना बाद गयी थी.. उसने अपनी जीभ निकल ली और आप सैप करके उसके पेट को चाटने लगा.. नवाज़ के गीली जीभ का स्पर्श पाकर आरती और भी ज्यादा उत्तेजक हो गयी.. और जब नवाज़ ने अपनी जीभ उसकी नाभि मई डाली तो वो पागल हो उठी..

ूऊमम्महहह… uuuuffffffffffff नआवाज़जज़… मेरे राजा.. मेरी सोनुउउउउ.. मेरे प्यारीयी.. राजज्जजा.. यू अरे किलिंग में.. आह्ह्ह्हहए..

फिर उसके सर को लेकर आरती ऐसे आगे पीछे करने लगी जैसे जीभ से उसका पेट छुड़वा रही हो.. और साथ मई उसके मू से गरम साँसों के साथ आवाज़े निकल रही थी.. आरती आँखे बंद कर के आपने नाभि चूसै का मज़ा ले रही थी..

अब करीब 5 मिनट तक उसके पेट और नाभि चाटने के बाद जब वो सांस लेने अलग हुआ तो उसका चेहरा लाल हो गया tha..Aab नवाज़ ने नाभि चूसना चोर के उठ के बैठ गया.. उसने आरती को देखा.. वो उत्तेजना के मरे थरथर काँप रही थी.. इससे ये साफ़ पता चल रहा था की उसके अन्दर एक तूफान जनम ले चूका है..

आरती का पूरा शरीर सागर की लहरों की लहरों जैसे उप्पर निचे हो रहा था. ..

खासकर उसकी छातीता..

अब दोनों के चहरे पर एक अलग hi ख़ुशी thi..aab जैसे hi नवाज़ की नज़ारे उसकी छातियों पर गयी तो वो तड़प भरी आवाज मई बोली.

अब क्या देख रहे हो आप..

तुम्हारे ये मस्त मस्त आम

फिर वो कांपती हुई आवाज मई बोली

पहले नहीं देखे क्या

पहले भी देखे है पर आज बहुत hi मस्त लग रहे है

मुझे आप के इरादे कुछ ठीक नहीं लग रहे है

इरादे तो नेक hi है पर तुम करने कुछ नहीं डौगी..

अच्छा जी.. वो सब खेत मई..

वो जनता हु

जानते हो तो ऐसे क्यों देख रहे हो

रहा नहीं जा रहा है

इतने पसंद आये क्या आप को

हाँ बहुत

ऐसे कहते हुई उसको अपनी बहो मई भर लिया.. नवाज़ के हाथ उसके नंगी पीठ पर घूम रहे थे..

तब उसकी आँखों मई देखते हुई नवाज़ ने कहा..

रानी मई जनता हु तूने आपने सुहागरात का अच्छा प्लान बनाया है.. उससे पहले छूट मांगना पाप होगा.. पर मुझे तुम छोड़ना है.. मेरे से अब साबरा नहीं होता रानी..

आप की यही बात मई समाज नहीं पति नवाज़ जी .. मेरे बात की इज़्ज़त भी करते हो और उसके अपोजिट बिहेवियर भी करते हो..

मई कोई अपोजिट बिहेवियर नहीं कर रहा हु..

तो ये क्या है.. मुझे छोड़ना है.. ये क्या है..

सुहागरात मई तो तेरे छूट पहली बार मरूंगा.. इसलिए मुझे अब गांड मरने दो..

आप क्या पागल हो गए हो क्या.. वो कभी नहीं मिलेंगे

क्यों .. अभी तो रेडी हो गयी थी देने को

यहाँ नहीं सुहागरात बोलै था ..

दोनों सुहागरात मई .. यहाँ कुछ भी नहीं क्या

कुछ भी नहीं

क्यों

मैंने आपने पति को भी वो नहीं दी है.. तो आप को क्यों दू..

तब नवाज उसके बाल जोर से खींचता है .. और उसका चेहरा आपने पास लता है..

मई तेरा पति नहीं हु.. जो तेरे बात सुनु

प्ल्ज़ नहीं न जणू..

क्यों

.. वो हस्बैंड वाइफ कभी आ सकते है .. वो पहले बार है तो किसी ने मेरे दर्द भरी आवज सुनी तो लेने के देने पद जायेंगे..

ऐसा बोल न फिर.. डायरेक्ट मन क्यों कर रहे थी..

मन नहीं कर रहे थे वो लोग अचानक आ गए तो इसलिए मन कर रहे थे..
 
आरती ने जब ऐसा कहा तब नवाज़ आरती की तरफ देखने लगा.. आरती भी उसकी और hi देख रही थी ……

दिखने में बेहद खूबसूरत और मॉडर्न लड़की .. या लेडी ..बीएड मई नंगी बैठी काळा लड़के को देखे जा रही थी … …दोनों एक दूसरे को काफी देर तक यूँ hi देखे जा रहे थे ..

अब आरती बीएड पर लेत गयी और नवाज़ को आपने उप्पर खिंच लिया..





आज पहली बहार आरती ने नवाज़ को आपने उप्पर खिंच लिया था.. नवाज़ के जिस्म को अपनी बॉडी के उप्पर लेकर एक नया अहसास उसमे जाग गया था .. उसके लुंड को अपनी छूट के उप्पर साफ़ महसूस कर पा रही thi..uske लुंड और छूट आपस मई मिल रहे है ये सोचकर hi दोनों के दिल की धड़कने काफी तेज हो गयी थी..

तब नवाज़ आपने लुंड उसके छूट के उप्पेर रख देता है..





पर जैसा की दोनों ने डीडे किया था की ऐसा मौका आने पर दोनों आगे नहीं बढ़ेंगे.. पहली सुहागरात खेत मई hi होगी उससे पहले कुछ नहीं होगा .. जैसे डीडे हुआ वैसे hi आरती ने नवाज़ को रोका..

नहीं नवाज़ जी

और उसका लुंड को हाथ से पकड़ के बाजु मई किया .. वैसे hi नवाज़ ने उसके दोनों गोर बूब्स को पक्कड़ लिया..

क्यों..

हमारा डीडे हुआ है न

क्या डीडे हुआ है

उसे जोर से दबाते हुई कहा

आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हहआ.. स्स्स्सस्स्स्शह्ह्ह्ह.. हम कुछ नहीं करेंगे यहाँ..

जैसे इसमे से दूध निकल लेगा वैसा नवाज़ ने उसके बूब्स को बहुत जोर से दबाया..

इतने जोर से क्यों दबा रहे हो जी .. अब क्या इसमे का दूध निकल लगे क्या

वैसा hi कुछ सोच रहा हु..

तब उसके सर पाई आरती मरती है..

बदमाश!!!

तब उसका एक मां नवाज़ आपने मू मई लेता है..





आह्ह्ह्हहए.. मेरे राजा…. . चूस्स्स्स ले मेरे राजायआ… पी लिए.. पूरा पी जा.. सुबह से खुजली हो रही है… आहहहा.. फूऊखकककककक..

एक मम्मी आपने मू मई लेके चूसने लगा और दूसरे मम्मी को मसलने लगा..

आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.. मेरे राजा… मेरी जान.. ऐसे करोगे तो मुझसे भी साबरा नहीं होगा..

शयद कुछ अजीब तरह की खुजली आरती के छथि मई हो रही थी और वो खुजली नवाज़ से मिटाना च रही थी.. तब उसके होंठो पर आपने होंठ रखकर गरम साँसे लेते हुई उसे चूमने लगा..





करने दे न फिर मुझे.. मान जा न..

नहीं न थोड़ा साबरा करो

नवाज़ ने अपनी उँगलियों के बीच उसके निप्पल को लेकर कुचल दिया .... और कहने लगा..

साबरा.. गया भाड़ मई.. मुझे तेरे अभी के अभी लेने है.. बस .. और कुछ मुझे पता नहीं ..

नवाज़ के ऐसे करने से आरती तो पागल hi हो गयी.. आरती ने दहक़ाहते हुई आवाज मई कहा





पर… मेरे राजा.. आप ने भी मुझे कहा था.. खेत मई hi करना है.. और अब ऐसे कह रहे हो.. ये सब ठीक नहीं है..

2 दिन की तो बात है.. थोड़ा वेट करते है न.. खेत मई जाने का.. प्ल्ज़्ज़्ज़्ज़..

अब साबरा मुझसे नहीं होगा

इतना कहते हुई नवाज़ ने आपने चेहरा आगे किया और अआपने जीभ से आरती के दूसरे मम्मी के निप्पल्स कुतरने लगा..





आह्ह्ह्ह .. वेट तो मुज से भी नहीं हो रहा है नवाज़ पर साबरा करना hi पड़ेगा न..

तब नवाज़ का हाथ उसके मम्मी को सहलाते हुई निचे जाने लगा ..

.. उसके मम्मी बिलकुल नंगे उसके सामने थे.. उसका नंगा यूएन नवाज़ के सामने आया तो एक्पाल के लिए नवाज़ सब कुछ भूल gaya..uske गोर गोर मम्मी को लगातार देखने लगा.. तब शर्माकर आरती ने आपने मू दूसरी तरफ कर दिया..

तब नवाज़ के हाथ आपने आप आरती के रेशमी बालो मई घूमने लगे.. और फिर उसके एक मम्मी को पकड़ कर जोर से चूसने लगा..





पहले एक मां फिर दूसरा मां.. कुछ देर चूसने के बाद उसने आपने हाट निचे ले जाने लगा

तब आरती ने नवाज़ की तरफ देखा..

आरती कुछ कहती इस से पहले hi उसके छूट पर उसने आपने लुंड रखा वैसे hi आरती सिसक पड़ी..

सशह्ह्ह्हह्ह आह्ह्ह्हहए .. ..

जैसे hi आरती सिसक पड़ी वैसे hi नवाज़ ने उसके छूट पर जोर दिया.. तब थोड़ा hi उसका लुंड उसके छूट मई घुस पाया..

नवाज़ - आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.. ..

आरती - ओह्ह्ह.. एसससस.. बेबी.. उम्मंहहहहह

नवाज़ - ये वो फीलिंग है जिस के लिए मई सुबह से परेशां हु..

नहीं नहीं नवाज़ ये गलत है..

आहहहा.. मज़ा आ रहा है… बहुत टाइट है तुम्हारी छूट..

बैडरूम मैं इन् दोनों का रोमांस चल रहा था की अचानक hi दूर किसी ने बजाय .........
 
जैसे hi आरती सिसक पड़ी वैसे hi नवाज़ ने उसके छूट पर जोर दिया.. तब थोड़ा hi उसका लुंड उसके छूट मई घुस पाया..

नवाज़ - आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.. ..

आरती - ओह्ह्ह.. एसससस.. बेबी.. उम्मंहहहहह

नवाज़ - ये वो फीलिंग है जिस के लिए मई सुबह से परेशां हु..

नहीं नहीं नवाज़ ये गलत है..

आहहहा.. मज़ा आ रहा है… बहुत टाइट है तुम्हारी छूट..

बैडरूम मैं इन् दोनों का रोमांस चल रहा था की अचानक hi दूर किसी ने बजाय .........

दूर की बेल्ल जैसे hi बज ुति वैसे hi आरती घबरा गई.. और दूर की तरफ देखने लगी.. मतलब हॉल की तरफ ..

वो खुद से कहने लगी.. अब कौन आ गया इस वक़्त ...... कहीं वो हस्बैंड वाइफ तो नहीं आ गए .......

आरती की धड़कने बढ़ चुकी थी. बहार बेल्ल की हर गूँज उसके डर को और गहरा कर रही थी. उसका दिमाग घोड़े की तरह दौड़ रहा tha—ek तरफ नवाज़ कमरे में था, और दूसरी तरफ घर के असली मालिक दरवाज़े पर हो सकते थे.

उसने सोचा

uuuuuuffffffffffffffffffff अब क्या करू मई …

अगर उन लोगो के पास घर के के होगी और मैंने दूर नहीं खोला और और उन्होंने खुद दरवाज़ा खोल दिया, तोह नवाज़ को छुपाने का मौका भी नहीं मिलेगा!उनोने दूर ओपन करके अंदर आये और नवाज़ को रूम मई देख लिया तो वो लोग क्या कहेंगे.. क्या कहेंगे आरती.. तेरे ये करतूत तेरे ससुर और हस्बैंड को बता देंगे और वो लोग तुजे घर से निकल देंगे........

आरती को अपना पूरा भविष्य खतरे में दिखने लगा. ससुर की नाराज़गी और हस्बैंड का घर से निकल देना... ये ख्याल उसे अंदर तक झंझोर रहे थे.

एहि बाते आरती सोच रही थी की दूर पाई किसी ने दूसरे बार थपथपाया .. इस बार बेल्ल नहीं बजती .. वैसे hi आरती और ज्यादा डर गयी .. पक्का ये घर के मालिक हस्बैंड वाइफ hi honge.nahi तो दूर ऐसे कोई दूसरा थपथपाते नहीं है .. दूसरा कोई होगा तो वो आवाज देता .

ऐसे सोचते हुई आरती ने आपने चेहरा उप्पर उठाया और गुस्से से नवाज़ को बोली..

दूर हटो जी मेरे उप्पर से.. दूर पाई कोई है .. वो हस्बैंड वाइफ होंगे. अगर वो होंगे तो मई कही की नहीं रहूंगी..

वो कैसे हो सकते है ..उन आने मई तो अब टाइम है ..

फिर कोण है

तभी नवाज़ को बच्चे की आवाज़ आयी

शयद सोसाइटी के बच्चे है

पाका

सुन नहीं रही हो बच्ची की आवाज़

तब आरती ध्यान से सुनती है तब उसे बच्चे बात करने की आवाज़ आ रही थी

आरती की जान में जान आयी! जैसे hi उसने उन बच्चों की मासूम आवाज़ें सुनी, उसके चेहरे का रंग थोड़ा वापस लौटने लगा. नवाज़ की बातों ने उसे थोड़ा रिलैक्स कर दिया

हां बच्चे hi है बात कर रहे है

"तुम भी न आरती, खामखा इतना डर गयी,"

नवाज़ ने उसे छेड़ते हुए कहा. आरती ने एक हलकी स्माइल दी, पर उसके दिल की धड़कन अभी भी पूरी तरह नार्मल नहीं हुई थी. उसने अपना सर नवाज़ के कंधे पर टिका दिया, मानो उसकी बाहों में खुद को मेहफ़ूज़ महसूस कर रही हो.

लेकिन डर के उस एक पल ने उसे एहसास दिला दिया था की ये रिस्क कितना बड़ा है. आरती ने धीरे से कहा,

नवाज़ जी अगर सच में वो लोग आ जाते तोह

नवाज़ ने उसकी चीन पकड़ कर ऊपर उठायी और आँखों में देखते हुए बोलै,

"जब तक मैं हूँ, सब संभल लूंगा. चलो अब ये टेंशन छोडो और बाकि का बचा हुआ काम करते है

तब आरती शर्मा के निचे देखने लगती है.. तब नवाज़ ने उसका हाथ पकड़कर उसे अपनी और खींचकर उसे अपनी सीने से चिपका लिया .. अब उन दोनों का चेहरा एक दूसरे के आमने सामने था..

नवाज़ की आँखे आरती के चहरे को देख रही थी.. आरती के आँखों मई नवाज़ के लिए बेपनाह प्यार था और नवाज़ की आँखों मई हवस .. बस सिर्फ हवस.. नवाज़ के ऐसे देखने से आरती शर्माकर उसके सीने से चिपक गए..

उसका चेहरा पकड़ के थोड़ा उप्पर करके उसकी आँखों मई देखते हुई नवाज़ किश करने लगा. ..





तब जवाब मई आरती ने भी उसके गाल को किश किया.. धीरे धीरे वो दोनों एक दूसरे को किश करने लग गए.. अब किश करने का सिलसिला तेजी से चलने लगा था.. नवाज़ आपने हूंतो को आरती के होंटो पर रखकर चूमने लगा गया और आपने एक हाथ उसकी कमर से होता हुआ उसके गांड पर आ गया.. और उसे दबा दिया..





ोूऊछहहह

फिर अपनी आँखे आरती पर गोल गोल फिरते हुई उसके गांड की मालिश करने लग गया..

थोड़े देर यही मालिश करने के बाद नवाज़ ने अपनी उंगली उसकी छूट के मू तक ले गया और छूट के दोनों फैंको को अलग करके उसके अन्दर एक झटके मई उंगली कर दी..

तब आरती उछाल पड़ी..

आह्ह्ह्हह.. नवाज़ जी..

बोल रानी

उसको किश करते हुई कहता है

आग आगे नहीं

क्यों नहीं

आप को पता है

क्या पता है रानी

वो हस्बैंड वाइफ कब भी आ सकते है

ऐसा कह के नवाज़ को पीछे किया और स्माइल करते हुई कहने लगी..

चलते है अब यहाँ से..
 
नवाज़ ने फिर जोश मई आ गया था

कहा चलते है रानी

उसके मम्मी को मसलने लगा, उसके कड़क हो चुके निप्पलों को अंगूठे और उंगली के बीच दबाकर मसल दिया…

Aahhhhh..mere राजा

नवाज़ का जोश और बढ़ गया था. उसने आरती को अपनी बाहों में कास लिया और उसके बदन की गर्मी ने उसे और भी बेकाबू कर दिया. आरती, जो अभी डर से उभरी hi थी, नवाज़ के इस नए हमले से थोड़ा हड़बड़ा गयी पर फिर उसके एहसास में खोने लगी.

नवाज़ के हाथ उसके जिस्म पर तेज़ी से घूम रहे थे. जैसे hi उसने आरती के कड़क हो चुके निप्पलों को मसला, आरती के मुँह से एक दबी हुई आह निकल गयी. उसका डर अब पूरी तरह से एक्ससिटेमेंट में बदल चूका था. नवाज़ उसके कान के पास फुसफुसाया,

"अब डरो मत, बस मुझ पर ध्यान दो..."

आरती ने अपनी आँखें बंद कर ली और नवाज़ के जोश का साथ देने लगी. कमरे में अब सिर्फ उनकी साँसों की आवाज़ थी.

अब नवाज़ उसे किश करने लगा तभी उसका मोबाइल बजा ..तब वो आपने मोबाइल की और देखते है .. कॉल उसके हस्बैंड का था ..

देखो अरविन्द जी का कॉल है ..हमें चलना होगा

ऐसा बोल के किचन मई गयी और आपने कपडे लेक पहनने लगी

फिर नवाज़ की और देखते हुई कहते है

नवाज़ जी आप बहार जाओ मुझे कपडे पहनने है..

ठीक है तुम कपडे पहन लो .. मई कुछ नहीं karunga..bas ऐसा hi यहाँ बैठा rahunga..bas मेरे सामने कपडे पहन लो

वो कैसे पॉसिबल hai..aap कके सामने.. नंगे कैसे कपडे पहन लू

हो तो चुकी हो आलरेडी

आरती इस बात पर पहले शर्मा जाती है और फिर उसके चहरे पर स्माइल आ जाती है.. वो कुछ सोचती है ..और कहती है

वो अलग बात है ..

कैसे अलग बात है . . . तब उसकी आँखों मई देखते हुई बड़े शर्मीली अंदाज़ मई उसने कहा..

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मई नंगे नहीं हुई थी .. आप ने नंगा किया था ..

अच्छा .. फिर भी नंगे तो हुई न ..

हुई थी पर ऐसे नंगे कोई लेडी आपने हस्बैंड के सामने भी साड़ी नहीं पहनेगी और आप तो ..

और आप तो क्या

कुछ नहीं

यही न की मई तो तुम्हारा शोहर भी नहीं हु ..

हाँ

तो मेरे सामने तुम ननगे साड़ी पहनने के लिए तुम मुझे आपने बेगम बनाना पड़ेगा

तब आरती उसकी तरफ घूम गए .. और उसके बहो मई आपने बहे डालते हुई वो कहता है

अच्छा जी … आज कल बड़े बाते करना सिख गए हो ..

ऐसा hi कुश संजो ..

तो बन जाओगे क्या मेरे बेगम

आरती का चेहरा दमक उठा .. वो नवाज़ की आँखों मई बड़े सेक्सी तरीके से देखते हुई बोल पड़े .

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ऐसा hi कोई किसी की बेगम बनती है के ..

आरती के ऐसे कहने के बाद उसके गले मई बहे डालकर नवाज़ उसे बताशा चूमने लगा ..

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पहले उसके गलो पर .. फिर माथे पर और फिर आँखों पर .. और फिर उसके हूंतो पर..

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और फिर उसे कहता है ..

तो कैसे बनाते है मोहतरमा

उसका एक प्रोसीजर है .. वो फॉलो करना पड़ता है ..

ये बोलते हुई आरती के चहरे पर एक अलग hi चमक आ गए थी ..

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और वो क्या प्रोसीजर है ..

ऐसे कहते हुई आपने हूंठ आरती के शरबती हूंतो पर रख दिए .. और उसे किश करने लगा..

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ummmmhhhhh..pucchhhhh..sssssss….

किस तोड़ते हुई आरती कहते है ..

सब से पहले न एक मौलवी ढूढना पड़ेगा आप को नवाज़ मिया

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ऐसा कहते हुई उसने नवाज के चहरे को आपने हाथो मई पकड़ के आपने हूंतो को उसके हूंतो पर रख दिया... और फिर पुरे ताकत से उसके हूंतो को चूसने लगे ..

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वो उसे आपने रास पीला रही थी .. और उसका रास निकल रही थी .. ऐसा करते हुई वो आपने छतिया उसके साइन पर रगड़ रही थी ..उनमे हो रही खुजली को वो उसके छोड़े साइन को घिस कर मीठा रही थी ..

फिर

बारात के रसम की तैयार करने पड़ेगे

फिर

निकाह की तैयार ..

और फिर

लास्ट मई निकाह ..और हम आपके बेगम और आप हमारे शोहर ..

ज्यादा मुश्किल तो नहीं लग रहा है ..

इतना आसान भी नहीं है नवाज मिय्या ..

आसान तो नहीं है पर आपने चाहा तो आसान हो जायेगा ..

करवा देंगे

पक्का

हाँ पक्का .. अगर आप चाहते हो की हम आप की बेगम बन जाये तो आप की ये खवाइश पूरी कर देंगे ..

अच्छा तो पुरे कर दो

वडा रहा ..

पक्का वाला

पाकक वाला वडा.. नवाज़ मिया ..

आरती अब बहुत जोश मई आ गए थे.. उसने खुद hi नवाज़ के हाथ को पकड़ा और धीरे धीरे ऊपर करते हुई उसे आपने छथि पर रख कर जोर से दबा दिया.. नवाज़ को ऐसा लगा जैसे उसका हाथ मखमली गद्दे के उप्पर रख दिया ho..wo उसके निप्पल को दबाने लगा..
 
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