Adultery Manhoos se mahan tak - Page 35 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 257



‘ तू कहाँ गायब है 2 दिन से ? रत को भी लेट अत है , बात क्या है ? कुछ बताएगा ‘ रमा और करिश्मा क साथ मोहित जब आ कर बैठा तो रमा थोड़ा गुस्से से बोल रही थी मोहित को. मोहित बस नज़रें hi चुरा रहा था. उसके चेहरे पर उदासी और गंभीरता करिश्मा को परेशां कर रही थी मगर रमा का इस बात पर ध्यान नहीं गया था अभी.

मोहित : छुट्टियां ख़तम होने वाली हैं तो दोस्तों क साथ थोड़ा बहार गया था

रमा : तू और तेरे दोस्त , अब कौन से दोस्त आ गए तेरे ? अमित से तो मिलने गया नहीं तू फिर किन लोगों से मिल रहा है ? कहीं फिर से उन लफंटर दोस्तों से तो नहीं मिलने लग गया ? मैंने पहले भी कहा था उन लोगों से तेरा मिलना मुझे पसंद नहीं . लगता है तेरे पापा को बोलना पड़ेगा

मोहित : आप को जो ाचा लगे आप करो मैं जा रहा हूँ.

मोहित गुस्से से खड़ा हुआ और माँ को जवाब देकर जाने लगा तो करिश्मा ने उठ कर उसका हाथ पकड़ लिया . जबकि रमा तो मोहित क इस रवैये से और ज्यादा भड़क गयी .

करिश्मा : खान जा रहा है ? मुझे तेरे से बात करनी है

रमा : जाने दे इसे जहाँ जाना है इसे . अपने उन्हें घटिया दोस्तों क पास hi जायेगा जिन्हे छोटे बड़ों का लिहाज़ नहीं और न hi शर्म . उनके साथ रह कर उनके जैसा hi हो जायेगा .

मोहित : हाँ हो जाऊंगा उनके जैसा , आपको ाचा नहीं लगता तो चला जाता हूँ हमेशा क लिए .

मोहित करिश्मा का हाथ झटक कर गुस्से से अपनी माँ को बोलता हुआ निकल गया घर से. करिश्मा उसे पुकारती रही पर वो बिना सुने बहार निकल गया. रमा को मोहित क ऐसे बिहेवियर की उम्मीद नहीं थी वो तो बस स्तब्ध थी मोहित का ये रूप देख कर. करिश्मा भी दुखी हो रही थी मोहित क ऐसे जाने से .

करिश्मा : ये आप ने क्या किया माँ , आपको नज़र नहीं आ रहा वो किसी बात से उखाड़ा हुआ है और आप उस पर ऐसे चिल्ला रही थी. आपको उससे बात तो करनी चाहिए थी अचे से

रमा : तुमने देखा कैसे बात की उसने मेरे साथ. अगर कोई प्रॉब्लम है तो बता नहीं सकता . ऐसे बात करेगा अब अपनी माँ से. ये सब गलत सांगत का नतीजा है . ाचा भला अमित क साथ अब खुश रहने लगा था पता नहीं फिर से कैसे उन लोगों क पास पहुँच गया है ये. देख लेना ये फिर से बिगड़ जायेगा .

करिश्मा : नहीं ऐसा नहीं होगा , मैं उससे बात करुँगी और फिर अमित भी तो है न . मोहित अमित को बहुत मंटा है. बस उसको समझने की देर है फिर सब ठीक हो जायेगा

दोनों माँ बेटी मोहित की वजह से टेंशन में आ गयी थी. करिश्मा को तो अंदाज़ा था क बात क्या है . इस लिए वो एक बार मोहित से इस मटर पर बात करना चाहती थी तभी इसका हल निकल सकता था .

उधर गाओं में बिल्ला और उसके साथी तैयार थे हमले क लिए . शाम का वक़्त हो चूका था और सर्दियों की वजह से अँधेरा भी हो रहा था . विजय जो गाओं से बहार था उसका आने का वक़्त हो चला था . इधर अमित घर पर hi था . बिल्ला गाओं से बहार जो टीम बैठी थी उनके पास hi चला गया था और खेत में छिप कर सड़क पर नज़र गड़ाए बैठे थे . वहीँ तीन लोग इशारा मिलने क इंतज़ार में थे क वो अमित को घर से बुला कर हमला कर सके . दोनों जगह एक hi टाइम पर काम करना था ताकि भाग कर निकल सके . अगर वक़्त आगे पीछे होता तो बाद वाली टीम पकड़ी जा सकती थी लोगों को पता लगने पर .

‘ क्यों भाई किसके घर आये हो ? बड़ी देर से बहार hi घूम रहे हो . ‘ बिल्ला क जो तीन साथी अमित क घर क पास hi गली में देहाती बन कर बैठे बीड़ी सुलगा रहे थे उन्हें रह चलते एक बुज़ुर्ग व्यक्ति ने पूछ hi लिया. अब शहर तो था नहीं क किसी से कोई मतलब न रखता हो. गाओं में तो लोग एक दूसरे को अचे से जानते थे परिवार की तरह और उनके रिश्तेदारों तक की खबर रखते थे . ऐसे hi इस बुज़ुर्ग ने इन लोगों को नोटिस कर लिया था जब वो दूसरी बार इस गली से गुज़रते हुए इन लोगों को वहीँ देख कर रुक गया .

‘ अरे ताऊ बस विजय भैया से मिलने ए थे . उह घर माँ नहीं है तो इन्हे बैठ उनकी रह देखर रहे ‘ देहाती लहजे में बात करने की कोशिश करते हुए एक ने जवाब दिया .

‘ अपने विजय क घर आये हो ?? तो बहार कहे बैठे हो . चलो हमर साथ , बैठ कर चाय नाश्ता करवाते हैं . वैसे ू लोग तो किसी परदेसी और मेहमान को ऐसे घर से बहार नहीं बिठाते फिर तुम लोग कइसन बहार बैठे रहे . कोनो बात नहीं आवा हमर साथ ‘ बुज़ुर्ग तो गाओं की उदार मानसिकता वाला इंसान था और वो अचे से जनता था क विजय का परिवार कैसा है . इस लिए उसे उन लोगों का ऐसा बहार बैठना कुछ जांचा नहीं

‘ अरे ताऊ कहे दिक्कत दें उन लोगों का , बस विजय बाबू से काम है तो बहार hi से मिल कर निकल लेंगे . आप जाइये अँधेरा बहुत हो रहा है ‘ एक बार फिर से बुज़ुर्ग से पीछा छुड़ाने क लिए उस गुंडे ने कोशिश की पर बुज़ुर्ग तो जैसे इसे तौहीन समझ रहा था गाओं की.

‘ अरे ऐसे कैसे तुम लोगों का यहां रहने दायी, जाड़े का मौसम है और अँधेरा भी हो गया है. चलो हमारे साथ ‘

‘ अरे जाओ न ताऊ कहे सर्दी में आप बहार ठिठुर रहे हो. हम चले जाई अभी विजय बाबू से मिल कर ‘

इस बार लहजा थोड़ा सख्त सा था उस गुंडे का जिससे बुज़ुर्ग को और ज्यादा शक हो गया . बाकि दोनों की नज़रें भी बुज़ुर्ग ने देख ली थी इस लिए वो चुपचाप वहां से निकल लिया . मगर घर जाने की बजाये वो दूसरी तरफ से चौराहे की तरफ हो लिया जहाँ इस वक़्त गाओं क कुछ लोग अभी मौजूद हो सकते थे .

‘ ये साला बुदौऊ मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा . मैं तो कहता हूँ अभी जा कर काम शुरू कर दे . खून ये साला किसी को बता न दे ‘

‘ उस्ताद ने कहा था क एक वक़्त पर hi काम करना है . अभी उनकी तरफ से खबर नहीं आयी है ‘

इतने में उसके हाथ में पकड़ा मोबाइल बज उठा और उसने तुरंत फ़ोन उठा लिया .

‘ हाँ उस्ताद ,,,,,,, ठीक है ,,,,,,, हम भी जा रहे हैं ,,,,,,.. ठीक है . उस्ताद ने कहा है क काम शुरू कर दो ‘

इतना सुनते hi बाकि दोनों ने जो बड़ी सी शाल आयद राखी थी उसे निकल कर अपने हथियार दुरुस्त किये . एक क हाथ में हॉकी और दूसरे क हाथ में लोगे की रोड थी. तीसरा तेज़ कदमो से विजय क घर की तरफ भगा और ज़ोर ज़ोर से दरवाज़ा पीटने लगा . दरवाज़ा अजय ने खोला जो अभी अभी घर लौटा था .

अजय : क्या बात है कौन हो आप ? किस्से मिलना है ?

‘ जी वो ,,, वो वहां विजय बाबू का एक्सीडेंट हो गया है . वो अमित को बुला रहे हैं .’

अजय : क्याआआ ??? भैया का एक्सीडेंट ??? कहाँ हुआ है ? कैसे हुआ है ? कहाँ हैं वो ?

‘ hi वो गाओं से दूर हैं. आप अमित को बुला दीजिये . वो अमित को बुला रहे हैं ‘

अजय : हाँ हाँ , मैं चलता हूँ , तुम मुझे बताओ वो कहाँ हैं

अजय मां की आवाज़ थोड़ी ऊँची आयी थी जब वो उस आदमी से बात कर रहे थे जिससे हम सब को ये अजीब लगा और मैं जल्दी से उठ कर उनकी तरफ तेज़ कदमो से बढ़ा .

अमित : क्या बात है मां जी ??

अजय : ये कह रहा है भैया का एक्सीडेंट हो गया है . चल जल्दी चल .

अमित : क्या ????? बाबा का एक्सीडेंट ??? कहाँ हैं वो ? चलो जल्दी बताओ मुझे

‘ आइये मेरे साथ , मैं बताता हूँ ‘ मैं उस आदमी क साथ बहार निकला और अजय मां भी मेरे साथ hi चल पड़े. हम दोनों को बाबा की चिंता हो रही थी. अजय मां और मैं दोनों hi टेंशन में आ गए थे ये बात सुन कर . हम उस आदमी क साथ तेज़ी से लगभग भागते हुए चले जा रहे थे . गली क मोड़ से मुड़ते hi आगे खड़े दो लोग जैसे हमारे hi इंतज़ार में थे और उन्होंने हम पर हमला किया . अजय मां संभल नहीं पाए और उनके सर पर हॉकी का वॉर हो गया . मुझ पर दूसरे ने हमला किया पर मैंने हवा में इस लोहे की रोड को रोक लिया . जो आदमी हमें घर से बुला कर लाया था उसने भी पलट झपकते अपनी शाल गिरायी और तेज धार हथियार से मुझ पर झपटा . इससे पहले की वो मुझ पर वॉर करता उसका हाथ हवा में hi रुक गया . मैंने देख तो उसके हाथ को रोकने वाला कोई और नहीं डरा भैया थे और उनके साथ कुछ और लोग भी थे जिन्होंने आते hi तीनो को पकड़ कर मरना पीटना शुरू कर दिया . मैंने जल्दी से अजय मां को संभाला .

अमित : आप ठीक तो हैं मां ?

अजय : हाँ मैं ठीक हूँ .

डरा : मारो इन कुत्तों को . तुम चिंता मत करो छोटे भाई . हम देख लेंगे इन लोगों को.

अमित : कौन हैं ये लोग और आप यहाँ कैसे पहुंचे ?

डरा : ताऊ ने अभी बताया था क तीन अज्ञानी लोग यहाँ बैठे हैं और इनके इरादे ठीक नहीं. तुम्हारे बाबा का नाम लिया था इन्होने बस जानने क लिए आ गए . वैसे तुम्हारे बाबा हैं कहाँ ?

अमित : बाबा तो अभी तक आये नहीं और ये लोग यही कह कर हमें यहाँ लाये थे क उनका एक्सीडेंट हो गया है गाओं क बहार . कहीं उनके साथ …….

बाबा क बारे में दिमाग में बात आते hi मैं गुस्से से भर गया और एक क पेट में ज़ोर से घुटना मारा जिससे वो दोहरा हो गया दर्द से. दाहिने हाथ से ज़ोर दर पंच उसके मुँह पर मरते हुए मैंने उसे ज़मीन पर गिरा दिया और उसके पेट में ज़ोर ज़ोर से ठोकर मरने लगा . फिर मैंने उसकी बाजु घुमा कर पीठ पर लगते हुए और ज्यादा मरोड़ दी तो वो दर्द से तड़प कर चीखने लगा . उसकी बाजु टूट सकती थी जिससे बचने क लिए वो छत पता रहा था

‘ आआअह्ह्ह्ह छोड़ ,,, छोड दो मुझे आआअह्ह्ह्ह ‘

अमित : बता किसने भेजा है तुम लोगों को यहाँ ? मेरे बाबा कहाँ हैं ? बता नहीं तो अभी क अभी चीयर दूंगा तुम लोगों को

‘ आआअह्ह्ह्हह छोड़ दो मुझे आआअह्ह्ह्हहीीी बताता हूँ बताता हूँ पहले छोडो ‘

मैंने उसके हाथ को थोड़ा ढीला किया तो वो बोलै .

‘ तुम्हारे बाप पर हमला होने वाला है . शायद हो चूका होगा गाओं क बहार ‘

इतना सुनते hi मैं गुस्से से भर गया और उसकी बाजु ज़ोर से झटक कर मरोड़ दी जिससे उसकी कलाई और कन्धा अपने जोड़ से खिसक गए और वो ज़ोर से चिल्लाने लगा . मैं तेज़ कदमो से वहां से गाओं क बहार वाले रस्ते की तरफ भगा और मेरे पीछे डरा भैया भी दौड लगा दिए . उनके पीछे बाकि सब भी भाग पड़े . मुझे चिंता हो रही थी क कहीं बाबा क साथ कुछ गलत न हो जाये . मैं तेज़ कदमो से बस भागता hi जा रहा था. बाकि सब तो पीछे रह गए थे बस डरा भैया hi मेरे करीब थे . गाओं क बहार वाले रस्ते क करीब जैसे hi हम पहुंचे तो कुछ लोगों क अक्स नज़र आये . अँधेरे में साफ़ नज़र नहीं आ रहा था. पर किसी क कराहने की आवाज़ आ रही थी . मुझे समझते देर न लगी क ये बाबा hi हैं.

अमित : बबाआआआआ

मैं बड़े कदमो से उछाल कर उन लोगों पर गिर पड़ा जो लोग बाबा को मर रहे थे . दो लोगों को अपने नीचे लिए मैं गिर पड़ा . दो और लोग वहां थे . जिन्होंने मुझ पर हमला करने की कोशिश की तो पीछे से डरा भैया ने दोनों को अपनी दायीं और बायीं बाजु में गर्दन से कास लिया. मैं जल्दी से उठा और एक क हाथ में पकड़ा बसेबत छीन कर उसी से दोनों की ज़ोर ज़ोर से धुनाई करने लगा . डरा भैया ने भी दोनों को अपनी बगलों के इतना ज़ोर से जकड रखा था क उनकी साँसे बंद होने लगी थी . वो दोनों ज़ोर ज़ोर से छटपटा रहे थे डरा भैया की पकड़ से छूटने क लिए पर डरा भैया की पकड़ से भला वो कैसे छूट सकते थे . इधर दोनों को मैं पागलों की तरह बस मरता hi जा रहा था . और इतना मारा क दोनों भीख मांगने लगे क मैं उन्हें छोड़ दूँ . तभी बाकि लोग भी पहुँच गए और डरा भैया ने भी दोनों को ज़ोर से पटक दिया. बाबा ने कराहते हुए मेरा नाम पुकारा तो मेरा ध्यान उन की तरफ गया . सड़क की एक तरफ उसका स्कूटर गिरा पड़ा था . मैंने जल्दी से उनको उठाने की कोशिश की तो देखा उनके सर से बहुत ज्यादा खून निकल रहा था .

अमित : बाबा ,,, बाबा ,,,, आपको कुछ नहीं होगा ,,, कुछ नहीं होगा आपको .

विजय : मैं,,,,, ठीक हूँ ,,,,

अमित : डरा भैया आप स्कूटर उठाओ

बाबा की हालत ठीक नहीं थी इस लिए मैंने उन्हें जल्दी से उठाया और डरा भैया ने बाबा का स्कूटर उठा कर उसे स्टार्ट किया और मैं बाबा को बीच में बिठा कर पीछे बैठ गया . डरा भैया तेज़ी से स्कूटर चलने लगे और हम निकल गए शहर की तरह क्यूंकि गाओं में बस एक छोटी सी डिस्पेंसरी थी जो शाम को बंद हो जाती थी और इस वक़्त बाबा की हालत अछि नहीं थी . मुझे बाबा की हालत देख कर चिंता होने लगी थी. उनके सर से लगातार खून बह रहा था जिसे मैं हाथों से दबा कर रोकने की कोशिश कर रहा था .

अमित : बाबा आपको कुछ नहीं होगा ,, कुछ नहीं होगा आपको. हिम्मत रखिये .

विजय : ममम मैं थीएककक हूंणंन्न मैं थी ,,,,,,,

बाबा की आवाज़ बहुत कमज़ोर सी निकल रही थी और अब जैसे उन पर बेहोशी छ गयी थी. मैं बाबा को होश में लेन की कोशिश कर रहा था पर बाबा बोल नहीं रहे थे . डरा भैया भी स्कूटर को पूरी गति से दौड़ा रहे थे. पर शहर गाओं से दूर था . मगर फिर भी समय से पहल hi डरा भैया ने हमें शहर पहुंचा दिया और हॉस्पिटल पहुँचते hi मैं बाबा को बाँहों में उठाये सीधा अंदर को भगा . तुरंत कम्पाउण्डर और नर्स ने बाबा को स्ट्रेचर पर डाला और िक में ले गए. एक डॉ जो वहीँ मौजूद था उसने जल्दी से बाबा का इलाज शुरू किया और हमें बहार रुकने को कहा .

डरा : सब ठीक हो जायेगा छोटे तुम चिंता मत करो. पर ये मामला क्या है ? वो लोग थे कौन ?

अमित : पता नहीं भैया मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा .

डरा : कहीं ये उस सुन्दर पहलवान का काम तो नहीं ??? सुना है उस दिन वो दांत पिस्ता हुआ गया था गाओं से .

अमित : ये तो वो लोग hi बता सकते हैं जो हमला करने आये थे . आप फ़ोन लगा के पता करो उन्होंने कुछ बताया या नहीं . अगर ये सुन्दर का काम है तो उसको और उसके बेटे को मैं ज़िंदा नहीं छोडूंगा .

डरा : शांति रख भाई , जब तक सचाई पता नहीं चलती तब तक कुछ नहीं करना . मेरा फ़ोन तो घर पर hi रह गया , क्या तेरे पास है फ़ोन ?

मैंने अपनी जेब चेक की तो मेरा फ़ोन भी घर पर hi रह गया था . असल में बच्चों की तस्वीरें खींच रहे थे हम इस लिए फ़ोन मेरे हाथ में नहीं था .

अमित : नहीं भाई मेरा भी पास नहीं है .

डरा : तू यहीं रुक मैं देखता हूँ.

डरा भैया बहार चले गए और मैं वहीँ खड़ा बस भगवन क आगे हाथ जोड़ रहा था क बाबा ठीक हो जाएँ.

उधर गाओं में अजय मां क सर पर चोट लगने क बाद 2 लोग उन्हें घर ले गए थे . घर जाते hi जब अजय मां की हालत देखि तो सब चिंता में पद गए .

गौरी : ये क्या हुआ देवर जी ये चोट कैसे लग गयी ?

अजय : कुछ नहीं हुआ भाभी मैं ठीक हूँ

गौरी : कहाँ ठीक हो , ये सर से खून निकल रहा है. ये चोट कैसे लगी है तुम्हे ?

अजय : वो पाऊँ फिसल गया था भाभी मैं ठीक हूँ आप सब चिंता मत करो

दिव्या : चिंता कैसे न करे ? ये चोट गिरने से तो लगी नहीं लगती . अमित कहाँ है ? वो तो आपके साथ गया था न .

अजय : वो ,,, वो भैया को लेने गया है

गौरी : झूठ बोल रहे हो तुम अजय , सच सच बताओ क्या हुआ है . और तेरे भैया किधर हैं . तुम बताओ क्या बात है ?

अजय को जो घर छोड़ने आया था लड़का गौरी ने उसे hi घेर लिया . अब तक कामिनी भी अजय क पास आ गयी थी और चिंता से उसकी आँखों से आंसू निकल आये थे . दीपिका हालत को देखते हुए गरम पानी और मलहम पट्टी का सामान ले आयी थी . जिसमे राधा और नेहा उसकी मदद कर रहे थे .

‘ वो पता नहीं कौन लोग थे ताई उन लोग ने हमला किया है चाचा और अमित पर . अमित ठीक है पर वो बड़े ताऊ जी की तरफ गया है . वो लोग उन पर भी हमला करने वाले थे . ‘ ये सुनते hi गौरी क पाऊँ क नीचे से ज़मीन hi निकल गयी. और ऐसा hi कुछ हल दिव्या का भी था. दीपिका को भी अब चिंता हो रही थी मगर वो हिम्मत से काम ले रही थी .

गौरी : क्या ? कौन हैं वो लोग ? आखिर हमारी क्या दुश्मनी है उन लोगों से ? हैट भगवन रक्षा करना , पता नहीं किसे हैं वो .

दीपिका : दीदी चिंता मत करो सब ठीक होगा , अमित गया है जा . वो सब संभल लेगा

दिव्या : क्या संभल लेगा वो , अभी वो इतना भी बड़ा नहीं हुआ , कहीं उसे कुछ हो गया तो? वो अपनी बिलकुल भी परवाह नहीं करता. अकेला भीड़ जाता है हर जगह अगर उसे कुछ…….

गौरी : नहीं नहीं ,,, उसे कुछ नहीं होगा . कमलेश कहाँ है ? वो अभी तक आय क्यों नहीं. जल्दी से उसे फ़ोन लगाओ और बोलो क जाकर देखे . मैं भी इन्हे फ़ोन लगाती हूँ.

दीपिका ने जल्दी से कमलेश को फ़ोन कर क हालत क बारे में बताया . गौरी ने विजय को फ़ोन किया तो उसका फ़ोन नहीं लग रहा था जब अमित का no. लगाया तो वो पास में hi पड़ा था .

राधा : ममी अमित का फ़ोन तो गलती से यहीं रह गया .

दिव्या : ये लड़का बहुत लापरवाह है , कह देती हूँ अगर उसे कुछ हुआ तो मैं ,,,,,, मैं यहाँ कभी दुबारा नहीं आउंगी .

दिव्या तो रोने hi लगी थी उसके मन में उलटे सीधे विचार आने लगे थे . अजय क सर पर लगी चोट से चाहे खून थोड़ा hi बहा था पर उसका असर दिव्या पर ज्यादा hi हो गया था . वो डरने लगी थी क कहीं अमित को कुछ न हो जाये .

गौरी : ये तुम कैसी बातें कर रही हो दिव्या . कुछ नहीं होगा उसे .

एक दूसरे को चाहे सब हौंसला दे रहे थे पर अंदर से दिल सबका घबरा रहा था . और थोड़ी देर में hi कमलेश घर आ गया भागता हुआ साथ hi ये खबर भी घर पहुँच गयी क विजय बुरी तरह से ज़ख़्मी हुआ है और अमित डरा उसे लेकर शहर चले गए हैं. अमित क ठीक होने की खबर सुन कर जहाँ कुछ रहत मिली थी सबको वहीँ विजय की हालत ने चिंता बढ़ा दी थी. कमलेश ने जल्दी से अपनी मोटरसाइकिल निकली और अजय को साथ बिठा कर निकल लिया शहर की तरफ . उधर दीपिका ने जल्दी से फ़ोन घुमा दिया मंजू और राघव की तरफ

मंजू ने जब ये बात सुनी क विजय पर हमला हुआ है उसका तो दिल hi दर से बैठ गया . कल hi तो धमकी दी थी बलजीत राइ ने और आज हमला भी हो गया . मंजू भी बहुत घबरा गयी और तुरंत ऋतू को फ़ोन लगा कर साडी जानकारी दी. अमित कहाँ है किस हॉस्पिटल गया है ये अभी तक किसी को नहीं पता था . पर ऋतू ने फ़ौरन वायरलेस पर आर्डर कर दिया था क सब हॉस्पिटल में पता करो लड़ाई झगडे में कोई घायल हो कर आया है तो जल्दी बताये .

उधर राघव तो शहर से बहार था पर रमा को जब इस बात का पता चला तो वो भी चिंता में पद गयी और तैयार हो गयी घर से निकलने क लिए पर जाना कहाँ है उसे भी कहाँ पता था .

इधर हॉस्पिटल में आधे घंटे बाद डॉ बहार आया तो मैं दौड़ कर उसके पास गया .

अमित : अब बाबा की तबियत कैसी है डॉ साहब

डॉ : घबराने की बात नहीं है , खून ज्यादा बहने से बेहोश हो गए थे . अभी उन्हें ग्लूकोस लगा दिया है और कुछ इंजेक्शन लगा दिए हैं. ज़रूरत पड़ी तो ब्लड भी चढ़ा देंगे . इन्हे अभी यहीं रखना पड़ेगा . देखिये ये लड़ाई झगडे का केस है इस लिए पुलिस केस बनता है. वो थोड़ी देर में आ जायेंगे . तब तक आप पैसों का इंतज़ाम कर लीजिये .

डॉ मुझे ये सब कह कर अपने केबिन की तरफ चला गया और एक नर्स मेरे पास आयी और मुझे 10000 जमा करवाने को कहा . किस्मत से इस वक़्त जेब में न पैसा था न पर्स . मैंने नर्स से कहा क थोड़ी देर में पैसे जमा करवा दूंगा आप इलाज करो . उधर से डरा भैया भी आ गए .

डरा : गाओं में खबर कर दी है तुम्हारे घर भी बता देंगे . पर एक गड़बड़ हो गयी .

अमित : क्या हुआ ?

डरा : वो लोग भाग निकले , अब ये पता नहीं चलेगा क किसने ये सब किया है .

अमित : वो लोग भाग कैसे गए ? इतने लोगों क बीच से .

डरा : वहां हम दोनों क पि हे सब भाग लिए दो लोग रह गए थे जिन्हे धक्का देकर वो अँधेरे में कहीं गायब हो गए . उधर सड़क पर जो चार लोग थे उनमे से शायद एक काबू में आ जाये , क्यूंकि वो खेतों क बीच कहीं भगा है बाकि तीन तो गाड़ी से भाग लिए . अब वो चौथा काबू में आ जाये तो शायद कुछ पता चले .

अमित : अजय मां तो ठीक है न ?

डरा : हाँ उन्हें ज्यादा चोट नहीं आयी है और मैंने कहलवा दिया है क इधर भी सब ठीक है . अभी डॉ ने क्या बोलै ?

अमित : डॉ ने कहा है क सब ठीक है . पुलिस को शायद बुलावा लिया है उन्होंने ने .

डरा : ये भी ज़रूरी है , आखिर पता तो चले क इस सब क पीछे कौन है .

थोड़ी देर में नर्स ने आकर फिर से पैसों का पूछा तो मैं और डरा एक दूसरे को देखने लगे .

डरा : मैं जाकर गाओं से ले कर अत हूँ .

अमित : नहीं भाई आप यहीं रुको , मैडम थोड़ी देर में पैसे जमा करवा देंगे घर से कोई न कोई अभी आ जायेगा .

‘ किधर है वो पेशेंट जो लड़ाई झगडे में घायल हुआ है ? ‘ एक सख्त आवाज़ को सुन कर मैंने उस तरफ देखा तो एक पुलिस इंस्पेक्टर नर्स से ये सवाल पूछ रहा था. उसके साथ हवलदार भी थे.

नर्स : सर वो अभी होश में नहीं है. ये उनके साथ हैं .

इंस्पेक्टर: तुम लोग क्सक्सक्सक्सक्स गाओं से आये हो ?

इंस्पेक्टर ने हमारे गाओं का नाम लिया तो मैं और डरा भैया दोनों hi चौंक गए .

अमित : जी सर पर आपको कैसे पता ?

इंस्पेक्टर: तुम दोनों में से अमित कौन है ?

हम दोनों hi एक बार फिर से हैरान थे क इंस्पेक्टर को मेरा नाम तक पता है .

अमित : जी सर मैं hi हूँ पर आपको कैसे पता ?

इंस्पेक्टर : बताता हूँ ,

हमारी बात का जवाब देने की बजाये इंस्पेक्टर ने अपने हाथ में पकडे वायरलेस पर बात करनी शुरू की और बात दिया क उसे दोनों मिल गए हैं और हॉस्पिटल का नाम भी बता दिया . मुझे समझते देर नहीं लगी क ये सब ऋतू की वजह से हो रहा है. जबकि डरा भाई और वो नर्स अभी भी हैरान थे

इंस्पेक्टर: नर्स डॉ को जल्दी से बुलाओ , और आपको परेशां होने की ज़रूरत नहीं है. हमें सप साहब ने भेजा है . आप उन्हें जानते हैं न ? अभी थोड़ी देर में वो भी आ रही हैं यहीं . आप किसी बात की चिंता मत करिये .

अमित : थैंक यू इंस्पेक्टर साहब

इतने में नर्स क साथ डॉ भी वहां आ गया .

इंस्पेक्टर : डॉ कैसी तबियत है मरीज़ की ?

डॉ : बेहोश है पर खतरे वाली बात नहीं .

इंस्पेक्टर: देखिये डॉ साहब ये लोग सप साहिब क खास हैं . इस लिए अचे से इलाज कीजियेगा , थोड़ी देर में वो भी यहीं आ रही हैं. आप दोनों को कुछ चाहिए तो बता दीजिये अभी हाज़िर हो जायेगा .

अमित : नहीं इंस्पेक्टर साहब हम ठीक हैं शुक्रिया .

डरा भैया और मैं वहीँ बैठे थे और पुलिस वाले हमारे साथ . अब तो डॉ भी बार बार बाबा को चेक करने आ रहा था और दोबारा नर्स ने भी पैसों का नहीं पुछा. कोई आधे घंटे बाद hi साईरन बजता सुनाई दिया और पुलिस वाले फटाफट बहार को दौड़े . मैं और डरा भैया वहीँ थे और डॉ भी भाग कर हमारे साथ खड़ा हो गया. तभी गेट मंजू बुआ और ऋतू अंदर आती हुई दिखाई दी. उनके साथ कई पुलिस वाले थे . मंजू बुआ तो लगभग दौड़ते हुए hi आयी. उनकी आँखों से आंसू लगातार बह रहे थे . मुझे देखते hi उन्होंने मेरा चेहरा दोनों हाथों में थाम कर चूमना शुरू कर दिया. वो साथ में रोये जा रही थी.

मंजू : तू ठीक तो है न तुझे कुछ हुआ तो नहीं ??? तेरे कहीं चोट तो नहीं आयी .

बुआ मुझे अचे से चेक कर रही थी क कहीं मुझे चोट तो नहीं लगी.

अमित : मैं ठीक हूँ बुआ पर बाबा को बहुत चोट आयी है वो अभी भी बेहोश हैं .

मंजू : भैया बेहोश हैं ??? ये सब मेरी वजह से हुआ है . सब मेरी वजह से हुआ है

अमित : ये आप क्या कह रही हो बुआ ? आपकी वजह से कैसे कुछ हो सकता है . आप कैसी बातें कर रही हो .

ऋतू : मंजू खुद को सम्भालो , सब ठीक है . तुम्हे कुछ हुआ तो नहीं न ?

अमित : नहीं मैं बिलकुल ठीक हूँ

ऋतू : कौन थे वो लोग ? ये सब किसे हुआ मुझे ठीक से बताओ .

डरा : मैं बताता हूँ , वो लोग कहीं बहार से आये थे . अमित तो घर पर था और ताऊ जी तो गाओं में थे hi नहीं . वो 7-8 लोग रहे होंगे जो भेष बदल कर गाओं देहात क बन कर hi गाओं में आये थे . इन के घर क पास हमारे गाओं क hi एक बुज़ुर्ग ने जब 3-4 अनजान लोगों को देखा और उनसे सही जवाब न मिला तो उन्होंने आकर चौपाल पर बताया . किस्मत मैं और 3-4 लड़के वहां मौजूद थे तो हम तुरंत वहां पहुंचे . समय रहते हम पहुँच गए वर्ण वो लोग अमित और अजय चाचा को ठीक hi देते . ताऊ जी को उन लोगों ने गाओं से बहार hi घेर लिया और ज़रा देर हो गयी हमें वहां पहुँचते . बस फिर यहाँ आ गए उन लोगों की पिटाई क बाद

ऋतू : अब वो लोग कहाँ हैं ?

डरा : मैंने फ़ोन पर पता किया था तो वो लोग बता रहे थे क वो सब मौका देख कर निकल लिए जब हम ताऊ जी को बचने में लगे थे . हाँ एक अभी भी शायद वहां कहीं छुपा है खेतों में .

ऋतू : पांडेय जी फ़ौरन वहां जो थाना लगता है उसके इंचार्ज को खबर कर दो क वो आदमी बचना नहीं चाहिए . चाहे साडी रत लग जाये पर उसे पकड़ कर मेरे सामने पेश करो .

ऋतू की बात सुनते hi पांडेय नाम का इंस्पेक्टर उसे सलूट कर क बहार निकल गया . इतने में बहार से अजय मां और कमलेश मां भागते हुए आये . अजय मां की शर्ट पर खून की कुछ बुँदे गिर कर दाग बना चुकी थी. मैं जल्दी से उनकी तरफ बढ़ा

अमित : मां आप ठीक तो हैं न , आपको ज्यादा तो नहीं लगी

अजय : मुझे कुछ नहीं हुआ बस ज़रा सी चोट है. तू तो ठीक है न , तुझे तो कहीं चोट नहीं लगी. और भैया कैसे हैं अब ?

अमित : मैं ठीक हूँ , बाबा को अभी होश नहीं आया है . पर वो खतरे से बहार हैं

कमलेश : आखिर ये सब हो क्या रहा है ? किस्से झगड़ा किया है तूने जो बात घर तक पहुँच गयी है .

अमित : मैंने कुछ नहीं किया मां जी

अजय : इसमें इसकी क्या गलती है जो तू उससे पूछ रहा है . शायद भैया को कुछ पता हो . जब तक सच पता न हो ऐसे उंगली मत उठाया करो .

कमलेश : भैया का किसी से क्या बैर , क्या आप नहीं जानते वो कैसे हैं. ज़रूर इसी ने कुछ किया होगा .

ऋतू : एक्सक्यूज़ में मर कमलेश , आप क्या जानते हैं ? ये सब कैसे हुआ है ? आप जैसे बात कर रहे हैं ऐसे लग रहा है आपको कुछ पता है . क्या बताएँगे क क्या बात है

कमलेश : मम मुझे क्या पता , इसी ने किया होगा कुछ

ऋतू : अगर पता नहीं है तो चुप रहिये , हम पता लगा लेंगे . ऐसे किसी पर उंगली मत उठाइये .

कमलेश : मैं कुछ भी कहूं ये मेरे घर का मामला है . आप बीच में मत बोलिये

ऋतू : फॉर योर काइंड इनफार्मेशन ये मेरे भी घर का मामला है इसी लिए समझा रही हूँ . वर्ण मैं ज्यादा बात नहीं करती .

कमलेश मां तो ऋतू की इस बात पर जलभुन गए पर अजय मां ने बात को संभाला और कमलेश मां को पैसे जमा करवाने को भेज दिया .

अजय : ये भी हमारी बहिन है समझे , मंजू की तरह इसे भी हमने बहिन बनाया है तो इसका भी हक़ है . अब तू जा जाकर पैसे देख डॉ को कितने देने है.

अजय : ऋतू बहिन गुस्सा मत करो तुम वो ऐसा hi है .

ऋतू : अरे नहीं भैया मैं गुस्सा नहीं कर रही . आप तो ठीक हैं न .

अजय : मैं बिलकुल ठीक हूँ बस ज़रा सी चोट है , सर पर लगी थी न तो थोड़ा खून निकल आया था . मंजू तुम ज़रा घर पर बात कर लो . भाभी परेशां होगी और दिव्या भी बहुत चिंता कर रही थी अमित की .

मंजू बुआ ने जल्दी से गाओं फ़ोन लगा दिया और फिर मेरी बात करवाई पहले माँ और फिर दिव्या मौसी से बात करने क बाद कामिनी ममी और दीपिका ममी से बात हुई . माँ और दिव्या मौसी को मुझसे बात कर क अब चैन मिला था . डरा भैया कमलेश मां और अजय मां को ऋतू ने पुलिस की गाड़ी ने गाओं भिजवा दिया क्यूंकि बाबा को रत यहीं रहना था तो उनके पास मैंने रुकने की ज़िद की जिसके चलते बाकि सब को जाना पड़ा. मंजू बुआ भी ज़िद कर क वहीँ रुक गयी मेरे साथ. ऋतू भी रुकना चाहती थी पर मैंने उन्हें मन कर दिया . वर्ण उनके साथ पुलिस वालों को भी रुकना पड़ता . फिर भी 2 पुलिस वाले हमारी सुरक्षा में खड़े कर hi गयी वो. डॉ तो ऋतू क आने से hi बदल गया था . उसने खुद hi एक प्राइवेट रूम में बाबा को शिफ्ट कर दिया और उनके पास hi मैं और बुआ रुक गए . इस बीच रमा आंटी का फ़ोन भी आया मंजू बुआ क फ़ोन पे पर मैंने उन्हें आने से मन कर दिया . वो भी ज़िद कर रही थी और बड़ी मुश्किल से उन्हें मनाया . अभी तो रीता मौसी और रजनी मौसी को पता नहीं चला था पता नहीं वो क्या कहेंगी जब पता चलेगा .

‘ ये साला बिंदु कहाँ मर गया ? गाडी में चढ़ा नहीं था क्या ? ‘ गाओं क बहार जो चार लोग थे अमित और डरा क निकलने क बाद अँधेरे का फायदा उठाते हुए भागे थे उनमे बिल्ला भी था . जो अब अपने एक साथी क काम होने पर पूछ रहा था . बड़ी मुश्किल से आज जान बची थी. गाओं वाले पीट पीट कर मर hi डालते . ये तो गनीमत रही क गाओं क बहार थे और रौशनी भी कोई नहीं थी आसपास . करीब hi छुपाई हुई गैर का किसी को अंदाज़ा नहीं था जिस में सवार हो कर ये लोग भाए निकले पर एक साथी उतना किस्मत वाला नहीं निकला. गाडी में सवार होने से पहले hi वो गिर गया था और अँधेरे में जल्दबाज़ी की वजह से ये लोग उसे वहीँ छोड़ कर भाग निकले .

‘ मेरी तो फटी पड़ी थी उस्ताद मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था . बहनचोद आज तो मरते मरते बचे हैं. सेल वो दोनों थे कौन. मर मर कर सेल ने बुरा हल कर दिया है . मौत सामने देख कर किसी तरह गाड़ी तक पहुँचने की हिम्मत जुताई है. बिंदु भी मेरे साथ hi था और वो साला हम दोनों को ऐसे मर रहा था क मार hi डालेगा . ‘ जिन दो लोगों को अमित ने बुरी तरह मारा था ये उनमे से एक था और जो पीछे रह गया था वो भी उसके साथ hi अमित क बैठे चढ़ा था .

बिल्ला : काम पूरा हो hi गया था क वो सेल पता नहीं कहाँ से आ गए . बहनचोद साला इतना तगड़ा था क हिल hi नहीं रहा था . हम दो थे और वो अकेला hi ऐसे दबाये था काच में क हम कोई बचे हैं . बाकि सब कहाँ हैं उनकी कोई खबर मिली ?

‘ नहीं उस्ताद अभी तक तो कोई खबर नहीं . मुझे तो लगता है सेल वो भी काबू आ गए हैं वर्ण ये लोग कैसे हम तक पहुंचे . गलत जगह पन्गा ले लिया उस्ताद . हमारे लोग उनके हाथ आ गए तो पहले ये सेल पिट पिट कर अधमरा करेंगे और फिर पुलिस अलग से खाल उधेड़ेगी. साली वो ऋतू सिंह जल्लाद है , जान से hi मर देगी एनकाउंटर कर क. मैं तो कहता हूँ उस्ताद अब शहर वापिस जाने का सोचना भी मत कहीं दूर निकल जाते हैं. वो हमें ज़रूर ढूंढ लेगी कहीं न कहीं से .

बिल्ला : चुप साले फत्तू , इतना दर लगता है तो जा जेक मजबूरी कर इस धंधे में क्या गांड मरने आया है . उन लोगों का फ़ोन तरय करो देखो साला कोई उठता है क नहीं. उनको वहां से निकलना पड़ेगा वर्ण हम सब पकडे जायेंगे .



बिल्ला भी अंदर से दर तो रहा था ऋतू क नाम से पर अपना दर दिखा नहीं रहा था . उसे चिंता थी क कोई पुलिस क हाथ ज़िंदा काबू आ गया तो ऋतू उन तक पहुँच hi जाएगी . दूसरे साथी ने जल्दी से फ़ोन लगाना शुरू किया तो किसी का तो पहले तो दो लोगों का फ़ोन लगा hi नहीं पर तीसरे का लग गया . उससे पता चला क तीनो वहां से भाग निकले हैं. अँधेरे की वजह से वो भी गाओं से निकल तो गए थे पर पता नहीं था क वो हैं कहाँ. बिल्ला ने उन्हें शहर वापिस न आने का कह कर दूसरे ठिकाने पर आने का बोल दिया . अब उनमे से सिर्फ एक hi साथी काम था जिसके बारे में किसी पता नहीं था बस इतना hi पता था क वो भी बुरी तरफ ज़ख़्मी है . अंदर hi अंदर बिल्ला दर रहा था क्यूंकि अब उसे ऋतू का चेहरा दिखाई दे रहा था काल क रूप में .
 
अपडेट 258



‘ तुझे अपने माता पिता क साथ hi मर जाना चाहिए था . अब तू मुझसे मेरी दौलत छीनना चाहता है ? इस दौलत क लिए मैंने क्या कुछ नहीं किया और तू मुझसे मेरी दौलत छीनने आ गया . मैं तुमसे तुम्हारी ज़िन्दगी hi चीन लूंगा ‘ बलजीत राइ हाथ में रिवॉल्वर पकडे हुए था और उसके आदमियों ने अमित को रस्सी से बांध कर घुटनो पर बिठाया हुआ था . अमित का सारा चेहरा लहूलुहान था . उसकी हालत ऐसे थी क पता नहीं साँसे कब साथ छोड़ दे.

अमित : मैं तुमसे नहीं डरता , तुमने मेरे माता पिता क साथ जो किया है उसकी सजा तो तुझे मिलेगी hi. तुझे हिसाब देना होगा मेरी बुआ क आसुओं का .

बलजीत राइ : मुझसे हिसाब लेगा तू ? ये ले हिसाब ,,,,, ढिश्क्याउऊंणन ,,,, ढिश्क्याउऊंणन ,,,, ढिश्क्याउऊंणन….

है है है है है है है ,,, मिल गया हिसाब ???? कुछ काम है तो बता दे और दे देता हूँ . है है है है है

अमित बलजीत राइ क सामने hi तड़प तड़प कर डैम तोड़ने लगा . तभी एक ज़ोरदार गगन भेदी चीख गूंजी

‘ nahiiiiiiiiiiiiiiiiii ‘ अचानक से मंजू चीख उठी थी अपनी आँखों क सामने अमित को मरता हुआ देख कर . उसका दिल जैसे धड़कना hi भूल गया था . इस ज़ोरदार चीख क साथ मंजू उठ बैठी जो नींद में बुरा सपना देख रही थी .

मंजू बुआ की चीख सुन कर मैं नींद से जगा तो देख बुआ पसीने से भीगी हुई थी. उनकी ऑंखें ऐसे दिखाई दे रही थी जैसे उन्हें कोई सदमा लग गया हो . मैं तुरंत उनकी तरफ लपका

अमित : क्या हुआ बुआ ?? आप चीखी क्यों ???? बुआए ,,,,,, बाआआ ,,,, बाआआ

मंजू बुआ सदमे में hi चली गयी थी . मैं उनकी हिला रहा था और पूछ रहा था पर वो न बोल रही थी न ऑंखें हिला रही थी . बस एक जगह ऑंखें रुक गयी जैसे पत्थर हो गयी थी और न hi वो कुछ देख प् रही थी .

अमित : बाआआ ,,,,. होश में आइये ,,,,, बाआ ,,, मेरी तरफ देखिये ,,, मैं अमित हूँ. अआप चीखी क्यों ? कोई बुरा सपना देखा क्या ???? बाआआ

मैंने पास पड़े पानी की गिलास से पानी ले कर बुआ क चेहरे पर मारा तब कहीं जा कर उनकी ऑंखें झपकी और उनका ध्यान मेरी तरफ गया. मुझे सामने देख पहले तो वो ऐसे देखती रही जैसे मैं कोई छलावा हूँ फिर आसपास देखा और जब होश आया तो मेरा चेहरा हाथों में पकड़ के मुझसे चूमने लगी और रोने लगी

मंजू : तू ठीक है ???? तू ठीक है ,,,, तुझे कुछ नहीं हुआ ,,,,, तू ठीक है न ,,,,,,

अमित : हाँ बुआ मैं ठीक हूँ पर आप को क्या हुआ है? कोई सपना देखा क्या ?

मंजू : वो सपना था ??? हाँ ,, हह हाँ वो सपना hi था , सपना hi था . भगवन करे ऐसा कभी न हो चाहे तो मेरी जान ले ले मगर तुझे कुछ न हो .

अमित : लगता है आपने सपने में मेरे साथ कुछ बुरा होते देखा है. पर वो सिर्फ सपना था बुआ मैं ठीक हूँ. आप ऐसे hi दर गयी. लीजिये पानी पीजिये , मैं तो दर hi गया था क आपको क्या हो गया . शायद सुबह होने वाली है , आप आराम करना चाहे तो कर ले मैं बाबा को देखता हूँ जाकर.

मंजू : मैं भी साथ hi चलती हूँ .

मंजू ( मन में ) मैं तुझे कुछ नहीं होने दूंगी. भगवन मेरे अमित को कुछ न होने देना . चाहे तो मेरी जान ले लेना

हम दोनों को आराम करने क लिए अलग कमरा दिया था रत को डॉ ने इस लिए अब हम अपने कमरे से निकल कर बाबा क पास गए तो वो भी जाग चुके थे . सर पर पट्टी बंधी थी और चेहरे पर सूजन थी साथ hi बाजु पर और हाथ पर भी पत्तियां बंधी थी. बीएड से तक लगाए बैठे वो कुछ सोच रहे थे और मुझे देखते hi उनके चेहरे पर रौनक आ गयी .

अमित : बबाआ

विजय : अरे अमित तू आ गया , तू ठीक तो है न ???

अमित : हाँ बाबा मैं तो ठीक हूँ आप बताइये आओ कैसे हैं ?

विजय : तू आ गया है अब मैं बिलकुल ठीक हूँ. बस हल्का सा दर्द है . अरे मंजू तू भी यहीं है ? और कौन कौन है यहाँ ?

अमित : बस हम hi हैं , अजय मां और कमलेश मां आये थे रत को तब आप होश में नहीं थे तो मैंने उन्हें वापिस भेज दिया डरा भैया क साथ. आप क लिए चाय पता हूँ.

विजय : नहीं रहने दे अभी , ये तूने ाचा किया उनको भेज दिया . डॉ से बात कर ले हम भी वापिस चलते हैं. इतनी चोट नहीं लगी है बस सर पर hi तो है थोड़ी सी .

मंजू : भैया आप चुपचाप आराम कीजिये , डॉ को ज्यादा मालूम है या आपको? पता भी है कितना खून बहा है आपका ? रत भर आपको होश नहीं थी ,, बात करते हैं ..

विजय : अरे गुड़िया तू तो ऐसे hi परेशां हो रही है . मैं ठीक हूँ .

अमित : बुआ ठीक कह रही है बाबा , आप बस आराम करो . मैं डॉ को बुला कर लता हूँ.

फिर मैं डॉ को बुलाने चला गया और मंजू बुआ बाबा क पास बैठ गयी . डॉ ने बाबा को चेक किया तो बाबा उसे छुट्टी क बारे में पूछने लगे . डॉ ने भी बताया क चोट ज्यादा गहरी नहीं थी इस लिए आज छुट्टी मिल जाएगी . बस खून बहने से कमज़ोरी आ गयी है जिसकी वजह से आराम करना पड़ेगा अभी कुछ दिन . वो चाहे तो घर पर hi कर ले . डॉ की बात सुन कर बाबा बहुत खुश हुए और मुझे गाओं के चलने को बोलने लगे . इतने में गाओं से अजय मां और कमलेश मां भी आ गए. वो चाय नाश्ता साथ लेकर आये थे . कुछ देर में रमा आंटी भी आ गयी करिश्मा दीदी क साथ . रमा आंटी तो हमें घर लेकर जाना चाहती थी पर बाबा नहीं मने . मंजू बुआ को भी बाबा ने उनके साथ hi भिजवा दिया . करिश्मा दीदी कुछ देर बाद लौट आयी और कहने लगी क वो खुद छोड़ने जाएगी गाओं . बाबा मन कर रहे थे पर वो नहीं मणि . और फिर दोपहर होने तक हम वापिस गाओं क लिए निकल लिए. पुलिस वाले जो रत को हमारी रखवाली पर खड़े थे उनको भी साथ ले जाना पड़ा . मैंने मन भी किया पर कहने लगे क हमें आर्डर हैं . वर्ण मैडम ससपेंड कर देंगी . खैर हम दोपहर तक वापिस घर पहुँच गए . घर पहुँचते hi माँ जो बेसब्री से हमारा इंतज़ार कर रही थी बाबा को देखते hi बिफर पड़ी

गौरी : ये क्या हो गया ,,,,,,,, हहहह ,,, हहह ,,,, आपके साथ ये किसने बैर निकला है ,,,,, भगवन को ज़रा भी रेहम नहीं आया ,,,, आग लगे ,,, कीड़े पड़ें उन लोगों को जिन्होंने आपके साथ ये सब किया है

माँ रोटी हुई बाबा की हालत देखती और सिसकियाँ लेती हुई उनकी हालत पर पता नहीं क्या क्या बोल रही थी. बाबा ने उन्हें सँभालने की कोशिश की .

विजय : मैं ठीक हूँ गौरी बस ज़रा स चोट है. खुद को सम्भालो , देखो ऐसी हालत में तुम्हारा ऐसे रोना ठीक नहीं . बचे पर क्या असर पड़ेगा .

गौरी : आपको कुछ हो जाता तो क्या मैं ज़िंदा रहती ??? किस्से बैर लिया है आपने जो आप पर ऐसा हमला हो गया . आपने तो साडी ज़िन्दगी किसी क साथ बुरा न किया फिर कौन आ गया आपकी जान का दुश्मन

विजय : ऐसा कुछ नहीं है , पता नहीं कौन लोग थे . पुलिस देख लेगी , वैसे भी मैं तो ठीक हूँ न . अमित समय पर पहुँच गया था मेरे पास. इसके होते भला मुझे कुछ हो सकता है.

बाबा की बात सुन कर माँ का ध्यान मेरी तरफ गया और बाबा को छोड़ कर उन्होंने मुझे गले लगा लिया और रट हुए मुझे चूमने लगी .

गौरी : मेरे लाल तू ठीक तो है न ??? तुझे कहीं चोट तो नहीं लगी ??

अमित : नहीं माँ मैं ठीक हूँ , देखो आपके सामने hi तो खड़ा हूँ . पर ये आप ाचा नहीं कर रही . बाबा घर आये हैं और आप रोये जा रही हो. अपना कुछ तो ख्याल करो , ये न हो क मेरा छोटा भाई रोंदू हो .

मेरी बात सुन कर माँ ने मुझे चपत मरी .

गौरी : शर्म नहीं आती ऐसी बात करते हुए. चलिए जी आप पहले अंदर चलिए , अपने कमरे में आराम करिये आराम से .

माँ बाबा को लेकर कमरे में चली गयी. इधर दिव्या मौसी जैसे इंतज़ार hi कर रही थी . माँ क हैट ते hi वो मुझे गले लगा ली.

दिव्या : तू ठीक तो है न ,,, मैं कितना दर गयी थी. तू सच में बहुत बहादुर है , बड़े भैया को बचा लिया वर्ण पता नहीं क्या हो जाता .

अमित : सब ठीक है मौसी आप चिंता मत करें , मुझे कुछ नहीं हुआ और मेरे होते बाबा को कुछ नहीं हो सकता .

दिव्या : तू चल पहले तेरे लिए मैं हल्दी वाला दूध लती हूँ .

‘ हल्दी वाला दूध हाज़िर है दीदी , पहले hi मैंने गरम कर दिया था . लीजिये खुद पीला दीजिये ‘ दीपिका ममी हाथ में दूध का गिलास लिए पहले hi आ गयी और मौसी क हाथ में दूध का गिलास थमा दिया . दीपिका ममी ने कुछ नहीं पूछा बस मुझे गुजर से देखने लगी जैसे स्कैन कर रही हो. इधर कामिनी ममी भी करीब आ गयी

कामिनी : कितने एहसान करेगा मुझ पर , तेरे एहसान तो मैं कभी चूका hi नहीं सकती. तूने अपने मां को बचा कर मुझ पर एक और एहसान कर दिया है

अमित : मैंने क्या किया ममी , वो तो सब आ गए थे गाओं वाले . उल्टा मां को hi चोट लग गयी .

कामिनी : बस बस , सब जानती हूँ मैं, सब बता दिया है उन्होंने मुझे . अब जा कर आराम कर ले बाद में बात करती हूँ तुझसे .

दीपिका : मेरे ख्याल से अमित को आराम करने देना चाहिए , रत भी हॉस्पिटल में आराम तो नहीं मिला होगा . अब थोड़ा आराम कर लेगा तो शाम को अखाड़े भी जाना होगा इसने.

दिव्या : आराम का तो ठीक है पर अखाड़े से आज छुट्टी करने दे . एक दिन न जायेगा तो क्या हो जायेगा.

दिव्या मौसी दीपिका ममी को जवाब देकर मुझे ऊपर ले गयी कमरे में और खुद hi बीएड पर मुझे लिटा कर मेरा सर अपनी गॉड में रख कर सहलाने लगी. मुझे पता hi न लगा कब मेरी आँख लग गयी . रत को अचे से नींद नहीं आयी थी शायद इसी वजह से तुरंत नींद आ गयी.

उधर मंजू जब घर पहुंची तो रुपाली और रीमा चिंता में थी . रत को भी मंजू ने खुल कर कुछ नहीं बताया था बस इतना hi कहा था क विजय का एक्सीडेंट हुआ है .

रुपाली : अब कैसे है विजय भाई साहब ? ये सब हुआ कैसे ?

मंजू : अब वो ठीक हैं और वापिस गाओं चले गए हैं. पर ये एक्सीडेंट नहीं था भाभी .

रुपाली : शॉकेड ) क्या ?? तुम कहना क्या चाहती हो ? फिर उन्हें हुआ क्या है ?

मंजू : उन पर जानलेवा हमला हुआ है वो भी उनके गाओं में .

रुपाली : पर ऐसा कौन कर सकता है , उनकी किसी क साथ कोई दुश्मनी है क्या ?

मंजू : पहले तो नहीं थी पर मेरी वजह से उनका दुश्मन बन गया है कोई.

रुपाली : तुम किसकी बात कर रही हो ?

मंजू : बड़े भैया की , यद् नहीं वो धमकी देकर गए थे ? मुझे पूरा यकीन है ये उन्ही का काम है . वर्ण भैया की किसी क साथ कोई दुश्मनी है hi नहीं. लोग तो उनकी इतनी इज़्ज़त करते हैं. और जानती हो हमला अमित पर भी किया गया है

रुपाली : क्या ??? वो ठीक तो है न ???

रुपाली अमित पर हमले क सुन कर कुछ ज्यादा hi अधीर हो गयी थी आखिर वो उसे अपना दामाद जो बनाने का सोच रही थी और वैसे भी उसके साथ जो कुछ हो चूका था उसकी दिल में खास जगह थी. इन दोनों की बातें बहार कड़ी रीमा भी सुन रही थी. जो अमित क बारे में सुन कर रोने hi लगी थी और पूरी बात सुने बिना hi अपने कमरे में दौड गयी और जाकर अपने फ़ोन से उसे फ़ोन करने लगी. पर उसका फ़ोन लगातार रिंग हो रहा था मगर कोई रिस्पांस नहीं .

मंजू : हाँ भाभी , उस पर भी हमला हुआ था और अजय भैया पर भी मगर वो दोनों बच गए बस अजय भैया को मामूली चोट आयी है. ये सब मेरी वजह से हो रहा है . मुझे वहां नहीं जाना चाहिए था . मेरी वजह से बड़े भैया उनको नुकसान पहुँचाना चाहते हैं. मैं ये शहर छोड़ कर कहीं और चली जाउंगी .

रुपाली : कहाँ जाएगी ? कितना भागेगी ? इतने साल पहले भी तो भगति रही है छिपती रही है . और कितना भागेगी ? तुझे सामना करना hi होगा मंजू , तेरे सहारे तो मुझ में हिम्मत आयी है अगर तू hi ऐसे कमज़ोर पद गयी तो मेरा क्या होगा मरी बच्चियों का क्या होगा ? वो इंसान नहीं भेड़िया है . हमें उसका सामना करना hi होगा. और फिर ऋतू भी तो यहीं है .

मंजू : नहीं भाभी , मुझे इतनी हिम्मत नहीं है क मैं अमित को कुछ होता हुआ देख सकूँ. आज सुबह hi मैंने एक भयानक सपना देखा है , मैं नहीं चाहती मेरा सपना सच हो. मैं खुद मर सकती हूँ पर अमित को मरता हुआ नहीं देख सकती

रुपाली : एक सपना देख कर तू दर गयी ? ज़रा हमारे बारे में भी तो सोच , हम कहाँ जायेंगे ?

मंजू : आप भी मेरे साथ चलो भाभी , हम कहीं और चले जायेंगे जहाँ वो हमें ढूंढ न पाए

रुपाली : इतने सैलून बाद जिस खोये हुए परिवार को तुम वापिस मिली हो क्या उन्हें ऐसे hi छोड़ डौगी

मंजू : मेरी वजह से उन्हें कुछ हो मुझे ये भी तो मंज़ूर नहीं. दूर जा कर काम से काम ये तो तसल्ली रहेगी की वो सुरक्षित हैं

रुपाली : अगर दूर जाने क बाद भी उनके साथ कुछ बुरा हो गया तो ???

मंजू : ऐसा कुछ नहीं होगा , ये सब मेरी वजह से हो रहा है. मैं चली जाउंगी तो कुछ नहीं होगा .

रुपाली : मेरी मन तो उनका साथ दे और सामना कर , वर्ण ज़िन्दगी में बाकि क्या रह जायेगा . वैसे भी ज़िन्दगी का क्या भरोसा , कब कहाँ क्या हो जाये. इतने साल तू अकेली रही है अब क्या साडी उम्र अकेली hi रहना चाहती है .

मंजू रुपाली की बातों पर डबल मंद हो गयी थी . कहाँ वो आते वक़्त बस यही सोच रही थी क वो अब यहाँ से कहीं दूर चली जाएगी ताकि उसका बिट्टू और परिवार सुरक्षित रहे पर अब रुपाली ने उसे सोचने पर मजबूर कर दिया था आखिर इतने साल अकेले रह कर वो भी तो अकेलापन से तंग आ गयी थी

‘ कुछ बोलै इसने अभी क नहीं ? ‘ गाओं में जो बिल्ला का एक साथी खेतों में छिप गया था उसे सुबह होने से पहले hi पुलिस ने गाओं वालों क साथ मिल कर घेरा दाल काबू कर लिया था . ऋतू क आर्डर क मुताबिक पुलिस उसे सीधा हेडक्वार्टर hi ले आयी और अपने तरीके से पूछताछ कर रही थी. सुबह से उसे बांध कर लटका दिया गया था और लगातार उसकी धुनाई हो रही थी. इतनी दुर्दशा तो उसकी कभी न हुई थी चाहे वो पहले भी पकड़ा गया था कई बार. पर अब तो छोटे से अपराध पर उसे ऐसे टार्चर किया जा रहा था जैसे उसने किसी बड़े आदमी का कतल hi कर दिया हो . उसने अभी तक मुँह नहीं खोला था पर अब ऋतू को सामने देख उसकी जो थोड़ी बहुत हिम्मत बची थी वो भी जवाब देने लग गयी थी . ऋतू भी रत भर चैन से सो नहीं पायी थी. अब एक क पकडे जाने से उसे तसल्ली हो गयी थी क अब वो जड़ तक पहुँच hi जाएगी .

‘ नहीं मैडम अभी तक इसने मुँह नहीं खोला ‘

ऋतू : कोई बात नहीं अब ये सब कुछ तोते की तरह बोलेगा . ( गुंडे क पास आकर ) तो ,, बहुत चर्बी है तुम में ??? कहाँ हाथ दाल रहे हो पहले ये जान लेना चाहिए था तुम लोगों को . जिस पर तुम लोगों ने हाथ डाला है न वो मेरे अपने हैं. और मैं कौन हूँ ये तो तुम्हे अचे से पता hi होगा . कोट कचेहरी तुम जैसे लोगों को ले जाना मुझे ाचा नहीं लगता इस लिए खुद hi फैसला कर देती हूँ मैं. तो अब तुम मुझे सब कुछ सच सच बताओगे जो मैं जानना चाहती हूँ या फिर तुम्हे तुम्हारी इस गन्दी ज़िन्दगी की कैद से रिहा कर दिया जाये .

‘ मम ,, मैं को ,, कुछ नहीं जनता . मैं बस साथ गया था ‘ ऋतू की सार्ड आवाज़ में कही बात ने उस गुंडे को अंदर तक हिला कर रख दिया था . दर क मरे मुँह से शब्द सही से नहीं निकल रहे थे .

ऋतू : किसके साथ गए थे ? कितने लोग थे तुम और किसके कहने से गए थे ? सब कुछ बताओ

‘ मम ,, मैं कुछ नहीं जनता मैं तो बस स ,, साथ गया था पप ,, पैसों की खातिर’

ऋतू : हम्म्म तो तुम कुछ नहीं जानते . कोई बात नहीं मैं यद् दिला देती हूँ .

‘ आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ‘ एक ज़ोरदार चीख उस गुंडे क मुँह से निकली जो बहार तक सब ने सुनी होगी जब ऋतू ने हाथ में पकड़ा हुआ पेन जैसा छोटा सा मेटल का टुकड़ा पूरा का पूरा उस गुंडे की जांघ में घुसा दिया . खून की धरा साथ hi बहने लगी थी . पास में मौजूद पुलिस वाले भी ऋतू क इस रूप से दांग थे . दरअसल ऋतू खुद कभी ऐसे पूछताछ करने आती hi नहीं थी अगर कोई बहुत बड़ी घटना न हो.

ऋतू : कुछ यद् आया ? या अभी इसमें मिर्ची भर दूँ ?

‘ आआह्ह्ह्हह माआआ छोड़ दो मुझे मैं मर जाऊंगा आआआह्ह्ह्ह ‘ वो गुंडा भीख मांगने लगा था दर्द से छटपटाता. पर ऋतू को जैसे ये भी पसंद न आया और एक hi बार में वो चीज़ उसकी जांघ से खिंच कर दूसरी जांघ में घुसेड़ दी. वो फिर से चीखा और वहीँ कुर्सी पर बांध उछलने लगा .

ऋतू : ऐसे छेड़ पता नहीं कहाँ कहाँ बन जायेंगे तुम्हारी बॉडी पर . और अगर फिर भी न बोले तो आखिरी छेड़ माथे क बीचो बिच गोली से बनाउंगी . चल बता जल्दी जो कुछ भी पता है .

‘ aaaaaaiiiiiiiiii maaaaaaaaaa आआआआ बिलल्लोआ ,,,,,, बिल्ल्ल्लाहा क साथ गया था मैं वहां . वव ,,, विजय को हाथ पाऊँ तोड़ने और,,,, और उसके बेटे क . हम 7 लोग थे इससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं पता मैडम . प्लीज मुझे छोड़ दीजिये एआईई ‘

ऋतू : बिल्ला कहाँ है इस वक़्त ?

‘ क्सक्सक्सक्सक्स अड्डे पर मिलने का बोलै था मैडम प्लीज मैडम बहुत दर्द हो रहा है मुझे छोड़ दीजिये . इससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं पता ‘

ऋतू को पता चल गया था क इससे ज्यादा वो नहीं जनता होगा . बिल्ला क बारे में ऋतू को पता था और आगे सब कुछ बिल्ला से hi पता चल सकता था . ऋतू ने उसे वहीँ छोड़ा और रुमाल से अपना खून से रंगा हाथ साफ़ करती हुई बहार निकल आयी. उसके साथ hi 2 इंस्पेक्टर भी थे . जिन्हे टीम बना कर बिल्ला क ठिकाने पर राइड करने को उसने कह दिया . ऋतू को शक तो था hi क इसके पीछे बलजीत राइ का हाथ है बस एक क सुबूत चाहिए था फिर उसकी क्या दुर्गति वो करेगी उसे खुद भी नहीं पता था . आखिर बात थी अमित की , ये हमला सिर्फ विजय पर नहीं बल्कि अमित पर भी था और अमित उसके लिए क्या मायने रखता था ये कोई और कहाँ जनता था .

मैं आराम से बीएड पर सोया पड़ा था जब मुझे अपने हाथ पर किसी क और क हाथों का एहसास हुआ . मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कोई मेरे हाथ क साथ कुछ कर रहा है जिससे थोड़ा सा दर्द भी महसूस हो रहा था . मेरी अचानक से आँख खुली तो सामने राधा को पाया . जो साइड में बैठी मेरे हाथ पर मालिश कर रही थी.

अमित : राधा तुम यहाँ ? ये क्या कर रही हो ?

राधा : आराम से लेते रहो थोड़ी देर . तुम्हारे हाथों में सूजन है शायद तुमने ध्यान नहीं दिया . ज़ोर से मारा होगा न उन बदमाशों को, सूजन पद गयी है. इस पर पट्टी नहीं करवा सकते थे ? रत भर तो हॉस्पिटल में थे .

अमित : ये सब तो होता रहता है. थोड़ी सी तो सूजन है . ठीक हो जाएगी

राधा : मैंने कहा न आराम से लेते रहो, बहुत लापरवाह हो तुम. अपना ध्यान hi नहीं रखते . ये तो ाचा हुआ मैंने और छोटी ममी ने देख लिया . वर्ण तुम तो बताते hi नहीं

अमित : दीपिका ममी को भी पता है ?

राधा : और नहीं तो क्या ? ये हल्दी जला कर चूना तेल में गरम कर क वही तो बना कर दे कर गयी हैं. वर्ण मैं तो पैन रिलीफ hi लगा देती. कह रही थी इससे जल्दी ठीक हो जायेगा.

अमित : अरे यार कुछ भी नहीं है . ये अपने आप ठीक हो जायेगा .

राधा : शहहहहह , मैंने कहा न चुपचाप लेते रहो. बड़े आये अपने आप ठीक हो जायेगा . और कहाँ कहाँ चोट लगी है दिखाओ मुझे .

अमित : अरे कहीं नहीं लगी है चोट वोट मुझे .

राधा : मुझे कुछ नहीं सुन्ना , चलो अपनी T-shirt उतरो . मुझे देखना है

अमित : तुम्हे शर्म नहीं आती मेरे कपडे उतरवाना चाहती हो ?

राधा : हाँ नहीं आती शर्म मुझे , तुमसे तो बिलकुल नहीं. अब खुद उतरोगे या मैं उतरूं ?

राधा को ऐसे बातें करता देख मैं थोड़ा हैरान भी था पर ाचा भी लग रहा था.

अमित : ाचा रुको बाबा मैं निकलता हूँ , अगर कोई आ गया तो खुद hi जवाब देना फिर क तुम क्या कर रही थी

राधा : उसकी तुम परवाह मत करो .

मैं उठ कर बैठ गया और अपनी T-shirt उतर कर राधा की तरफ पीठ कर क बैठ गया . राधा ने अचे से देखा और फिर मुझे घूमने को कहा . मैं अब राधा की तरफ मुँह कर क बैठ गया , मुझे अजीब सा लग रहा था राधा क सामने ऐसे ऊपर से नंगा हो कर बैठना पर राधा को जैसे इससे कोई फरक नहीं था . वो अचे से मुझे चेक कर रही थी और जब मेरी बॉडी पर कोई निशान नज़र न आया तो मेरे करीब आ कर मेरे बालों में चेक करने लगी जैसे वहां कोई चोट न छिपी हो. राधा मेरे बिलकुल करीब आ गयी थी . मैं बीएड पर बैठा था और राधा मेरा सर चेक कर रही थी . बे ध्यानी में राधा ने मेरा सर झुकाया जो उसके सीने से लग गया . हूँ दोनों को hi एक झटका सा लगा क्यूंकि मेरा सर राधा क नरम मांस क गोलों से जा लगा था . ये एक पल क लिए hi था मगर मेरी धड़कन एक पल में hi तेज़ हो गयी थी. राधा का हिलना भी मुझे महसूस हुआ पर उसने कुछ ज़ाहिर किये बिना ऐसे hi मेरा सर झुकाये रखा और देखती रही. मेरी साँसों में राधा की खुशबु महक रही थी. मेरी ऑंखें अपने आप बंद होने लगी. ये पता नहीं कैसी कशिश थी जो राधा क पास मुझे हमेशा hi महसूस होती थी . एक बार फिर मैं उस कशिश में खुद को बांधता हुआ महसूस कर रहा था . कुछ देर राधा ऐसे hi मेरे बल सहलाती चोट ढूंढने की कोशिश करती रही और मैं मदहोश सा खोया रहा किसी और दुनिया में.

राधा : शुक्र है सर में चोट नहीं है , अब टंगे चेक करनी पड़ेगी .

अमित : क्या ???? मैं नहीं उतरने वाला कपडे पहले hi कह देता हूँ.

राधा : कपडे उतरने को किसने बोलै ? मैं ऐसे hi चेक कर लुंगी .

राधा ने झांगों से लेकर पाऊँ तक अचे से दबा दबा कर चेक किया और साथ hi मेरा फेस इम्प्रेशंस देखती रही क कहीं मैं कुछ छिपा तो नहीं रहा .

अमित : अब तो हो गया यकीन ?

राधा : हाँ हो गया , सॉरी पर मैं क्या करती तुम हर छिपाते हो . अपने आप बताते नहीं इस लिए चेक किया था . अब कपडे पहन लो. मैं हाथों पर गरम पट्टी लपेट देती हूँ

अमित : अब इसकी क्या ज़रूरत है वैसे भी मुझे अखाड़े में जाना है

राधा : आज कहीं नहीं जाने वाले तुम. वर्ण मैं माँ से कह दूंगी फिर खुद hi जवाब देते रहना . अब अचे बच्चों की तरह बात मनो और नीचे चलो. सब से मिल लो चल क , तुम सो रहे थे इस लिए कोई ऊपर नहीं आया

अमित : कौन आया है ?

राधा : सब आये हैं , बड़ी मौसी रीता मौसी बड़े मौसा जी नैना दीदी करुणा दीदी कल्पना और थोड़ी देर में शीना दीदी भी आ रही हैं रीमा क साथ

अमित : क्या ? पर उन लोगों को किसने बताया ?

राधा : बताया ??? नीचे चलो तुम्हारी भी क्लास लगने वाली है. मौसी को नहीं बताया था न जब हॉस्पिटल में थे . सबकी क्लास वो लगा चुकी है अब तुम भी पार्षद ले लो चल क .

अमित : लग गए अब तो

राधा मुस्कुरा उठी मेरी हालत देख कर और मैं उसे मुस्कुराता देख अंदर hi अंदर खुश हो रहा था . उसकी यही मुस्कान तो हमेशा से मेरे दिल में बसी थी . मगर इस वक़्त उसे मुस्कुराता देख मुझे शरारत सूझी.

अमित : हंसी आ रही है ??? मुझ पर हंस रही हो तुम ??? अभी बताता हूँ .

राधा : हे हे हे नहीं नहीं मैं आआ हे हे हे मा नहीं हे हे हे छोडो

मैं राधा की तरफ लपका और वो हस्ती हुई भागने लगी तो मैंने उसे अपनी बाँहों क घेरे में दबोच लिया . राधा हांसे जा रही थी और मैं उसे उठा के घूमने लगा . मैं चाहे गुस्से का दिखावा कर रहा था पर राधा भी जानती थी मैं नाटक कर रहा हूँ और वो पूरा मज़ा ले रही थी. राधा को गोल गोल घूमने से उसने अपनी टंगे इकठी कर ली थी और उसकी पीठ पूरी तरह से मेरे सीने से लग गयी थी. फूलों की तरह हलकी और कोमल राधा को ऐसे झूलने में मुझे भी ाचा लग रहा था . वो खिलखिला क हंस रही थी और मुझे इसमें और ज्यादा ख़ुशी मिल रही थी.

राधा : छोडो हे हे माआ नीचे उतरो मुझे .

अमित : अब हंसोगी मुझ पर

राधा : नहीं हंसती मुझे नीचे तो उतरो .

मैं जैसे hi राधा को नीचे उतरा उसने पलट कर मुझे फिर से जीभ निकल कर चिढ़ाया . राधा फिर से भागने लगी और मैंने फिर से उसे पकड़ने की कोशिश की पर इस बार मैंने उसे ज़ोर से उठा कर अपने ऊपर गिरते हुए खुद बीएड पर गिर गया और राधा मेरे ऊपर थी पर राधा की हंसी एक डैम से रुक गयी थी. जैसे hi मेरा ध्यान अपने हाथों पर गया तो मेरा गाला hi सुख गया . मेरे दोनों हाथ राधा की छाती पर यानि क उसके नरम मांस पर थे यानि क उसके स्तनों पर . मैं बीएड पर गिरा हुआ था और राधा मेरे ऊपर थी. हम दोनों hi एक डैम से शांत हो गए थे बिलकुल पत्थर बन गए थे . राधा पूरी कम्प रही थी और उसकी कम्पन मुझे महसूस हो रही थी . मेरे अपने हाथ भी कम्पनी लग गए थे . मगर ताज्जुब था क हम दोनों अभी तक हिले नहीं थे और न hi मेरे हाथ राधा क स्तनों से हेट थे. तभी बहार से किसी क सीढ़ियों पर चढ़ने की आहत हुई तो मैंने जल्दी से राधा को अपनी गिरफ्त से निकल बीएड से नीचे उतर दिया . राधा बिना पीछे देखे भाग कर कमरे से निकल गयी . और इधर मेरी फैट गयी , पता नहीं राधा मेरे बारे में क्या सोचेगी. सीढ़ियों पर hi दिव्या मौसी की आवाज़ सुनाई दो राधा से आराम से सीढ़ियां उतरने को कह रही थी. मौसी की आवाज़ सुन मैं भी होश में आया और जल्दी से अपनी टीशर्ट पेहेन ली. अगर मौसी ऐसे मुझे देख लेती तो पता नहीं क्या सोचती .

दिव्या : हो गयी नींद पूरी ? चलो अब नीचे चलो , पहले कुछ खा लो और सब से मिल भी लो . दीदी नाराज़ हैं तुमसे पर डरने की बात नहीं है . मैं हूँ न . चल अब नीचे चल, तू सुन भी रहा है मैं क्या कह रही हूँ

मैं तो अभी जो कुछ हुआ उसी में खोया था , दिव्या मौसी की बात पर मैंने ध्यान hi नहीं दिया .

अमित : हह हाँ मौसी वो हाँ हम नीचे चलते हैं .

दिव्या मौसी क साथ मैं नीचे आ गया .

उधर राधा की धड़कन मनो ट्रैन क इंजन से भी तेज़ चल रही थी. उसके पाऊँ ज़मीन पर नहीं लग रहे थे . जैसे वो हवा में hi उड़ रही थी . सीढ़ियों से उछालती हुई वो नीचे तो आ गयी मगर किसी का सामना करने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी इस लिए भाग कर बाथरूम में hi जा घुसी . उसकी धड़कन शांत होने का नाम hi नहीं ले रही थी. अपने सीने पर हाथ रखे वो लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी. उसकी आँखों में अभी भी वो पल वैसे hi घूम रहा था. अभी भी वो खुद को अमित क ऊपर महसूस कर रही थी और उसके हाथ अपने सीने पर. राधा क चेहरे पर मुस्कान आ गयी , ये सब अप्रत्याशित था और राधा एक पल को घबरा भी गयी थी पर अब उसे वो सब यद् कर क ाचा लग रहा था जैसे कोई मनचाही ख़ुशी मिल गयी हो. आज पहली बार अमित का हाथ उसके सीने पर आया था . राधा की नज़र दीवार पर लगे शीशे पर गयी तो खुद को देख शर्मा गयी. जैसे शीशे में भी उसे वही मंज़र नज़र आ रहा हो . अमित उसके पीछे खड़ा है और उसके हाथ उसके सीने पर.

राधा : गंदे !!! ये क्या बात हुई ,, कोई ऐसे करता है क्या ?? बुद्धू हो तुम , सीधा hi वहां तक पहुँच गए ?? पहले बात करो

मुलाकात करो फिर थोड़ा प्यार करो , वो से तुम्हे तो सीधा यही काम करना है . गंदे !!! की ,, मर पड़ेगी तुम्हे माँ से . सब तुम्हारा hi तो है पर ऐसे थोड़ा न करना चाहिए ,,, गंदे ,,, उउउउउउउउ , अब करो



शीशे में hi अमित का चेहरा देख उसे जीभ निकल कर दिखती . अपने स्तनों की तरफ देख करने का ऐसे कह रही थी जैसे वो सच में पीछे खड़ा है और फिर से वो दोबारा उसके स्तनों को पकड़ लेगा . फिर खुद hi शर्माती अपने सर पर हाथ मरती अपना चेहरा पानी से धो वो बहार निकल गयी .
 
अपडेट 259



‘ मुझे तुझसे कोई बात नहीं करनी , मैं तो कुछ लगती hi नहीं न इस घर की, मुझे तू क्यों बताएगा कुछ ‘ मैं माँ क कमरे में आया तो रजनी मौसी बड़े मौसा जी रीता मौसी अजय मां कामिनी ममी और माँ बाबा बैठे थे . बड़े मौसा जी से मिलने क बाद मैं रजनी मौसी से आशीर्वाद लेने क लिए झुका तो उन्होंने नाराज़गी से मुँह फेर लिया और मुझे ये सब कहा .

अमित : अरे मेरी प्यारी मौसी कौन कहता है आप इस घर की कुछ नहीं लगती. ये घर तो आपका hi है , आप कहती हैं तो मैं निकल जाता हूँ अभी क अभी. वैसे भी घर की मालकिन hi नाराज़ हो जाये तो घर में कोई कैसे रह सकता है .

रजनी : ज्यादा बातें मत बना , इतनी hi मेरी परवाह होती तो मुझे फ़ोन कर क बताता क तुम हॉस्पिटल में हो. कौन सा मैं दूर थी , आ hi जाती वहां . मगर तुझे तो कोई परवाह hi नहीं क्या बीतेगी किसी पर .

अमित : अब फ़ोन कैसे करता मौसी फ़ोन तो मेरा घर पर hi छूट गया था . वैसे भी मुझे खुद कुछ समझ में नहीं आ रहा था . ाचा , गलती हो गयी मौसी , माफ़ कर दो न एक बार. मैं जब हॉस्पिटल दाखिल हो है तो पक्का पहले आपको फ़ोन कर……

मेरी बात ख़तम होने से पहले रजनी मौसी ने पलट कर मेरे मुँह पर हाथ रख दिया . उनके चेहरे पे दर्द झलक रहा था .

रजनी : ख़बरदार मुँह ऐसी बात भी निकली तो , तुझे मिलने क लिए क्या मुझे हॉस्पिटल आना पड़ेगा ? दोबारा ऐसी बात कही तो गाल सेक दूंगी तेरे .

रीता : देख क्या रही हो दीदी , के दो लाल अभी . जो मुँह में अत है बोल देता है . किसी की परवाह है hi नहीं इसको .

अमित : तो अब आप भी मुझ पर नाराज़ हैं ? देखा मौसी आप नाराज़ हैं तो सब नाराज़ हैं मुझ पर . प्लीज माफ़ कर दो न एक बार . मैंने कौन सा जान बुझ कर किया है.

रजनी : इस बार माफ़ कर देती हूँ , अगली बार कभी ऐसा किया तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा . पता है कैसे लगता है जब पास में आकर बिना मिले लौट जाओ. ऊपर से ऐसे समय में. अरे मुसीबत क वक़्त hi तो सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है अपनों की.

अमित : सॉरी मौसी दोबारा ऐसी गलती कभी नहीं करूँगा .

रजनी : जा माफ़ किया अब अपनी रीता मौसी से भी माफ़ी मांग ले .

अमित : रीता मौसी को तो मानना मुझे अचे से अत है .

रीता : मैं नहीं मैंने वाली , अपनी चिकनी चुपड़ी बातें दीदी को hi सुना.

मैं उठ कर रीता मौसी क पास गया . रीता एक साइड में बैठी थोड़ा आलास से. मैं मौसी क पास गया और सीधा उनके गले लग गया . मौसी मुझे धकेलने की कोशिश करने लगी पर मैंने उनके कण की लो को होंठों में दबा लिए और अपनी जीभ से छूने लगा . मौसी की बॉडी में सिहरन सी हुई. लगे हाथ मैंने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर मौसी की कमर और चूतड़ तक मसल दिया . जिससे मौसी जो मुझे धकेल रही थी खुद hi उन्होंने मुझे अपने सीने से लगा लिया . रीता मौसी क मुँह से हलकी सी सिसकी निकली जो शायद किसी ने नहीं सुनी होगी.

अमित : क्यों मौसी , अभी भी नाराज़ हो या और अचे से मानों ?

रीता : बड़ा बदमाश हो गया है तू , तुझसे नाराज़ भला मैं रह सकती हूँ .

रजनी : लो , अभी तो कह रही थी मैं नहीं मैंने वाली और अभी एक पल में मान भी गयी.

रीता : अब इससे नाराज़ हो कर जाउंगी भी तो कहाँ . एक यही तो है जिससे मिल कर ख़ुशी मिलती है. आप भी तो मान गयी न .

रीता मौसी ने रजनी मौसी की आँखों में देख कर एक खास ऐडा से ये बात बड़े अलग अनाज में कही जिसे सुन कर रजनी मौसी भी शर्मा गयी .

विजय : चलो ये ाचा हुआ दोनों मन गयी वर्ण बेवजह मेरा शेर पुत्र लटक जाता . अब जा जाकर अपनी बहनो से भी मिल ले. वो भी नाराज़ हैं तुझ से .

अमित : अब वो भला क्यों नाराज़ हैं . ाचा मैं देखता हूँ उनको भी .

मैं कमरे से निकल कर मैं दीपिका ममी क कमरे में गया जहाँ सब लड़कियां बैठी थी सिवाए राधा क. मुझे देखते hi कल्पना दीदी राशन पानी ले कर मेरे ऊपर चढ़ गयी.

कल्पना : बहुत बड़ा हो गया है तू ? बहुत बिजी रहने लगा है न ? एक बार भी हलचल नहीं पूछा फ़ोन कर क. वैसे तो बड़ा प्यार दिखता है पर सामने हो तो यद् भी नहीं करता . बस इतनी hi जगह है हमारी ? काम से काम बाँदा एक फ़ोन hi कर लेता है पर नहीं तुझे तो परवाह है hi नहीं. कितनी बार गया तो शहर , एक बार भी तुझे नहीं लगा क एक बार हमसे मिल ले ?

नैना : हम नहीं हैं यहाँ तो तुम मौज मस्ती कर रहे हो . हम थे यहाँ तो तुझे कुछ परवाह hi नहीं थी. ाचा फायदा उठा रहा है तू. तुझे इतना प्यार कर क बस यही सिला मिलना था . शॉपिंग करवाई जा रही है सबको बस एक हम hi लिस्ट में नहीं हैं.

अमित : तो आप इस बात क लिए नाराज़ हो. मैंने तो सोचा था आप दोनों को अकेले में लेकर जाऊंगा शॉपिंग क लिए पर अब आप नाराज़ हैं तो ठीक है रहने देते हैं .

करुणा : क्या बोलै ?? रहने देते हैं ? मैं भी देखती हूँ कैसे नहीं लेके जाता तू .

करुणा दीदी ने मेरा गाला दोनों हाथों में पकड़ दबाना शुरू कर दिया .

अमित : लेके तो तब जाऊंगा न जब आप मुझसे अचे से बात करोगी ,,, हहहहह ,,,, मेरा गाला ,,,,, हहहहह ,,, खुद hi तो नाराज़ हो रही हो दोनों तो लेकर कैसे जाऊंगा .

नैना : ठीक है ठीक है , छोड़ दे करुणा इसे. अब हमें शॉपिंग पर लेकर जायेगा इस बात का तूने प्रॉमिस किया यद् रखना.

अमित : ठीक है , पर अब तो नाराज़ नहीं हो न आप?

करुणा : अब भी नाराज़ हैं , तूने हमें कुछ बताया क्यों नहीं . इतना कुछ हो गया .

अमित : टाइम hi कहाँ मिला दीदी , वैसे भी आप को पता तो चल गया न .

कल्पना : पता चल गया क्या मतलब , हमें पहले hi बता देना चाहिए था . पता है पापा भी नाराज़ हो रहे हैं क तुम शहर हॉस्पिटल में थे और अंकल को इतनी चोट लगी फिर भी नहीं बताया . वो खुद आने वाले थे अगर ज़रूरी काम न होता .

अमित : अरे यार सब अचानक से हुआ और फिर मेरे पास तो फ़ोन भी नहीं था .

इतने में राधा कमरे में उछलती कूदती आयी और और मुझे सामने देख कर एक डैम से रुक गयी और उसके चेहरे पर जो ख़ुशी थी वो गायब हो गयी . मुझे ऐसे सामने देख वो पहले तो शॉक हुई पर अगले hi पल शर्मा कर चेहरा झुका लिया और नेहा दीदी क पीछे छुप गयी . मुझे कमरे में हुई वो घटना यद् आ गयी. मुझे लगा शायद मेरी वजह से राधा उनकंफर्टबले महसूस कर रही है

नैना : तुझे क्या हुआ ? अभी तो नाचती कूदती आ रही थी और अभी इसे देख कर शर्मा रही है. बात क्या है ?

राधा : कुछ भी तो नहीं दीदी बस ऐसे hi .

नैना : तेरी भी समझ नहीं अति घर में भी शर्माती रहती है पता नहीं बहार क्या करती होगी.

मैं समझ रहा था क राधा मेरी वजह से शर्मा रही है तो मैं चुपचाप कमरे से निकल गया . मुझे राधा से अकेले में माफ़ी मांगनी होगी जो हुआ उसके लिए . इस लिए जल्दी से निकल गया . करुणा दीदी मुझे आवाज़ देती रह गयी .

कमरे से निकला तो दिव्या मौसी ने पकड़ कर बिठा लिया और मुझे खाना परोस दिया . दीपिका ममी किचन में मेरे लिए खाना बना रही थी. मैंने आराम से खाना खाया . कुछ देर सब क साथ बैठ कर बातें की. बातों बातों में पता चला क जो एक बदमाश गाओं क बहार खेतों में छुपा था उसे पकड़ लिया गया है और शहर ले गए हैं तो मैं समझ गया क ऋतू क पास hi गए होंगे. मैंने अपने कमरे में जा कर ऋतू को फ़ोन लगा दिया .

ऋतू : अब कैसी तबियत है भैया की ?

अमित : पहले से बेहतर हैं, उस आदमी ने बताया कुछ ?

ऋतू : उसी क लिए फ़ोन किया था ? मुझे लगा शायद मुझसे बात करने को मन किया होगा . खैर , उसे पकड़ लिया है अब उसके साथियों की तलाश जारी है. जल्दी hi पता चल जायेगा इस सब क पीछे कौन है. तुम इस बात को मुझ पर छोड़ दो. मैं सब देख लुंगी तुम बस घर पर ध्यान दो. कोई भी बात हो सीधा मुझे फ़ोन करना .

अमित : ठीक है , वैसे बुआ से बात हुई आपकी ? वो घर नहीं आयी आज ?

ऋतू : हाँ मेरी बात हुई थी , वो आ जाएगी .

अमित : आप कब आ रही हैं?

ऋतू : तुम कहो तो अभी आ जाती हूँ सब छोड़ कर .

अमित : मेरा मतलब था जब आप फ्री होंगी तब

ऋतू : पहले उन गुंडों को तो देख लूँ जिन्होंने मेरी जान पर हमला किया है. एक बार हाथ लग जाएँ , साडी बदमाशी पीछे घुसेड़ दूंगी .

अमित : अरे अरे , इतना गुस्सा , शांत रहो मेरी जंगली बिल्ली . कहीं लोग तुमसे दर क शहर hi न खली कर दे.

ऋतू : ऐसा नहीं होगा , तुम हो न मुझे शांत करने क लिए . ाचा अब मैं रखती हूँ ज़रा काम है .

अमित : ok bye

मैं ऋतू से बात कर क सोचने लगा क आखिर ये सब किस क इशारे से हुआ होगा . मेरा पहला शक उसे शाम सुन्दर पर hi जा रहा था . पर यकीन नहीं था , क्यूंकि वो उस दिन ऋतू को देख कर ाचा खासा दर गया था. फिर इतनी हिम्मत वो कैसे कर सकता है. इतने में बहार से किसी गाड़ी की आवाज़ आयी तो मैं नीचे आने लगा. तभी दरवाज़े से शीना और रीमा दोनों अंदर आती हुई नज़र आयी . दोनों की नज़र जैसे hi मुझ पर पड़ी तो रीमा जैसे मुझे देख कर मेरी तरफ भाग कर hi आने वाली थी पर नैना दीदी सामने आ गयी और दोनों को आवाज़ दी. रीमा वहीँ रुक गयी और दोनों नैना दीदी से मिलने लगी .

नैना : आ गयी तुम दोनों , कब से वेट कर रहे थे तुम दोनों का. चलो आओ .

शीना : नहीं दीदी , पहले अंकल को देख लें ज़रा.

नैना : अछि बात है , तू वहां क्या खड़ा देख रहा है . चल नीचे आ .

मैं नैना दीदी की आवाज़ सुन जल्दी से नीचे उतरा. शीना और रीमा दोनों मुझे देख रही थी. रीमा क चेहरे पर जहाँ ख़ुशी थी मुझे देख वहीँ शीना मुझसे नज़रें चुरा रही थी. मैंने करीब आ कर रीमा से हाथ मिलाया पर शीना ने बिना मेरी आँखों में देखे hi हाथ मिला कर औपचारिकता दिखाई. मुझे ये थोड़ा अजीब लगा उसे देख कर . फिर नैना दीदी उन्हें लेकर माँ बाबा क पास गयी . मैं भी पीछे पीछे दरवाज़े तक गया और मेरे पीछे करुणा दीदी कल्पना राधा भी आ गयी. राधा फिर से मेरे करीब से सर झुकाये निकल गयी .

शीना : अंकल कैसे हैं आप ?

विजय : अरे शीना बेटी तुम ?? लगता है तुम्हे भी बता दिया इन सब ने . मैं ठीक हूँ बीटा बस ज़रा सी चोट है .

शीना : क्या आप मुझे अपना नहीं मानते जो मेरा यहाँ आना आपको ाचा नहीं लगा .

विजय : अरे ये तुम कैसी बातें कर रही हो. तुम भी तो बाकि सब की तरह हमारी बची hi हो. पर तुम दोनों अकेले क्यों आयी हो घर से किसी को साथ लेकर अति. तुम्हारे माता पिता कहाँ हैं तुमने पिछली बार भी कहा था उन्हें लेकर आओगी पर लायी नहीं .

शीना : वो ,,, वो यहाँ नहीं हैं . फिर कभी मिला दूंगी. आप बहुत अचे हैं अंकल , पता नहीं वो कौन सा गलत इंसान होगा जिसने ये सब किया है .

दिव्या : इंसान नहीं कोई शैतान hi होगा जो हमारे देवता सामान भैया पर हमला करवा दिया .

रजनी: वैसे बीटा गलती तो मेरी भी है जो अभी तक पूछा hi नहीं. एक hi शहर में रहते हैं तो काम से काम नाम hi बता दो अपने माता पिता का शायद कहीं मिले हो . निधि ने इतना तो बताया था क वो बहुत बड़े आदमी हैं. पर नाम तो उसने भी नहीं बताया .

शीना : छोडो न मौसी , फिर कभी मिलवा दूंगी. मैं तो अंकल का हाल जानने आयी हूँ. जैसे hi अंकल क बारे में पता चला तो रह न पायी .

गौरी : कितने अचे संस्कार दिए हैं तुम्हारे माता पिता ने . सच में दोनों बहुत अचे इंसान होऊं तुम्हारे माता पिता

शीना : आप तो उन्हें जानती भी नहीं फिर भी ऐसी बात बोल रही हैं. क्या पता सचाई कुछ और hi हो , मेरा मतलब है आप खुद एक अछि इंसान हैं इसलिए सबके बारे में ऐसा hi सोचती हैं.

दीपिका : अरे रीमा तुम पीछे क्यों कड़ी हो आओ तुम भी आगे आओ . मैं तुम दोनों क लिए चाय बनती हूँ.

शीना क चेहरे पर गंभीरता और उसकी बातों से मुझे लग रहा था क शायद कुछ गड़बड़ है . वो जब से आयी थी मुझसे नज़रें hi चुरा रही थी. दीपिका ममी ने बीच में बोल कर शीना को जैसे चुप hi करवा दिया और फिर रीमा आगे बढ़ कर माँ बाबा से मिली. दीपिका ममी कमरे से बहार निकलते समय मुझे इशारा कर क गयी पीछे आने का और मं उनके पीछे चला गया . इधर शीना और रीमा से सब मिलने लगे .

अमित : क्या हुआ आपने मुझे यहाँ क्यों बुलाया ?

दीपिका : क्या तुमने देखा शीना कुछ बदली बदली लग रही है और उसकी बातें ?

अमित : हाँ मैं भी गौर कर रहा हूँ , जब से आयी वो मेरी तरफ देख hi नहीं रही .

दीपिका : लगता है कोई बात ज़रूर है जिस वजह से वो ऐसा कर रही है .

अमित : क्या बात हो सकती है ?

दीपिका : देखते हैं , तू ऊपर अपने कमरे में जा मैं रीमा को किसी बहाने से भेजती हूँ

अमित : क्या ??? रीमा को ? सब घर में हैं , आप मरवाएँगी क्या ?

दीपिका : मरवा तो लूँ पर जल्दी बाज़ी में मज़ा नहीं आएगा फील हल रीमा से hi काम चला ले .

अमित : आपको मज़ाक सूझ रहा है .

दीपिका : खुद hi तो कह रहा है तू अब मैंने तो बस जवाब दिया है . अब सुन , वो इतनी दूर तुमसे hi मिलने आयी है तो क्या 5 मिनट्स उसे अकेले में नहीं मिल सकता तू ? तेरे लिए वो इतनी दूर चली आयी और तू दर रहा है. चल जा जल्दी अपने कमरे में अभी किसी को कुछ पता नहीं चलने वाला . चाय क साथ सब बिजी हो जायेंगे तब मिल लियो उससे अचे से .

अमित : आप न सच में कमल हो ,,, उम्मम्मम्माआठ

दीपिक : ये रिश्वत थी ?? इससे काम नहीं चलेगा , मुझे तो पूरा चाहिए मगर आराम से बिना जल्दबाज़ी क. अब भाग इससे पहले कोई तुम्हे आवाज़ लगा दे .

मैं ममी की बात सुन कर जाता हुआ अपने कमरे में चला गया . दीपिका ममी सच में मेरा कितना ख्याल रखती थी. रीमा से जलन करने की बजाये वो खुद hi मेरे लिए सब सेटिंग कर रही थी .

दीपिका : रीमा ज़रा मेरी मदद करोगी ?

दीपिका ने सबके बीच से सिर्फ रीमा को मदद क लिए पुकारा तो एक पल क लिए उसके पास बैठो राधा शीना और नेहा का ध्यान भी दीपिका पर गया और बाकि सब ने भी आवाज़ सुनी . रीमा अभी उठने hi लगी थी क राधा ने उसे रोक कर खुद उठते हुए जवाब दिया.

राधा : मैं करती हूँ ममी जी , रीमा को आप रहने दो

दीपिका : तू चिंता मत कर कोई ज्यादा काम नहीं करवाना मुझे इससे. और साथ में थोड़ी बातें मैं भी कर लुंगी .

दिव्या : मैं कर देती हूँ काम तुम यहाँ बैठ जाओ आराम से .

दीपिका : अरे नहीं नहीं दीदी , बस काम तो हो hi गया है. बस थोड़ा बात करने का मन था मेरा भी रीमा से .

दिव्या : ठीक है ले जाओ और कर लो बातें , अमित कहाँ है?

दीपिका : वो बहार गया है सामान लेन अभी आ जायेगा .

दीपिका रीमा को साथ लिए किचन में गयी. रीमा तो यही सोच कर किचन में आयी थी क कोई काम hi होगा शायद.

रीमा : क्या करना है ममी जी ?

दीपिका : बताती हूँ , जा ज़रा अमित क रूम में नए कप रखे हैं चाय वाले . उन्हें लेके आ , तब तक चाय भी तैयार हो जाएगी .

अमित क रूम में जाने की बात सुन कर hi रीमा की धड़कन तेज़ हो गयी . मनो अमित कमरे में hi हो और दीपिका रीमा को उसके पास भेज रही हो . जैसे सास दुल्हन को बेटे क पास भेजती है .

रीमा : जी ाचा ममी जी , मैं अभी लती हूँ

अपने आप को सँभालते हुए नज़रें नीची किये hi रीमा ने जवाब दिया और तेज़ कदमो से निकल गयी . असल में वो दीपिका से नज़रें चुरा रही थी शर्म से. जैसे उसको अमित क नाम से दीपिका ने छेड़ा हो . अब भला रीमा को कहाँ पता था क असल बात क्या है . जैसे hi रीमा अपने मन में hi कितना कुछ सोचती अमित क कमरे में घुसी तो पीछे से दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया और किसी ने उसे अपनी बाँहों में ले लिया .

रीमा : छो………. तुम ?? तुम यहाँ हो . ममी तो कह रही थी तुम बहार गए हो.

रीमा जैसे hi कमरे में आयी मैं दरवाज़े क पीछे hi छुपा था तो पहले दरवाज़ा बंद किया और रीमा को बाँहों में भर लिया. रीमा पहले तो दरी पर अगले hi पल समझ गयी क ये मैं हूँ. उसके मुँह से ममी की बात सुन कर मुझे समझ आ गयी क उन्होंने रीमा को झूठ क्यों बोलै है.

अमित : तुम इतनी दूर से मुझे मिलने आयी तो मैं भला तुम्हे छोड़ कर कैसे जा सकता हूँ. पहले तुम्हे अचे से प्यार तो कर लूँ फिर कुछ और करूँगा.

मैं रीमा की गर्दन और कण पर किश करते हुए उसे सोने सीने से लगाए था. रीमा की पीठ मेरे सीने से लगी हुई थी और एक हाथ मेरे सर पर रख मुझे खुद से अलग करने की कोशिश कर रही थी.

रीमा : जातो ,,, छोडो न ,,,, कोई आ गया तो पकडे जायेंगे . उन्न्नन ,,, छोडो न प्लीज .

मैंने रीमा को एक डैम से छोड़ दिया और उससे दूर हो गया . साथ hi नाराज़ होने वाला मुँह बना कर कहा.

अमित : मुझे तो लगा था तुम मुझ से मिलने आयी हो

रीमा मेरे ऐसा कहते hi कास क मेरे साइन से लग गयी और मेरे होंठों को अपने होंठों में कास लिया . मेरे तो मन की मुराद hi जैसे पूरी हो गयी. मैंने भी रीमा को अपनी बाँहों में कास लिया और रीमा क होंठों को शिद्दत से चूसने लगा . रीमा भी ऐसे किश कर रही थी जैसे बरसों बाद मिले हों . कुछ देर हम ऐसे hi एक दूसरे को चूमते रहे. फिर रीमा ने खुद hi किश तोड़ी और मेरी आँखों में प्यार से देखती हुई बोली .

रीमा: अब तो मेरी जान नाराज़ नहीं है न ??

अमित : इतने प्यार से मनाओगी तो नाराज़ कैसे रह सकता हूँ. पहले मन क्यों कर रही थी ? क्या तुम्हारा दिल नहीं करता प्यार करने को?

रीमा : किसने कहा क मेरा दिल नहीं करता ? बल्कि तुमसे भी ज्यादा करता है. पर ज़रा ये भी तो सोचो कोई आ जाये इस वक़्त यहाँ तो ? क्या जवाब देंगे हम?

अमित : सब बातों में लगे हैं कोई यहाँ नहीं आने वाला .

रीमा : ममी ने मुझे यहाँ कप लेने भेजा है ज्यादा देर की तो वो यहीं आ जाएँगी.

अमित : नहीं आएँगी

रीमा : तुम्हे कैसे पता ?

अमित : बस ऐसे hi , ाचा ये बताओ ये अचानक यहाँ कैसे आना हुआ ?

रीमा : बुआ क मुँह से जब सुना क बाबा और तुम पर हमला हुआ है तो मैं खुद को रोक नहीं पायी और दीदी क साथ आ गयी . मेरा दिल बहुत घबरा रहा था . क्या करती ?

अमित : ज़रा स बात पर इतना घबरा गयी ? मेरी जान इतनी कमज़ोर है ? मैं तो समझा था तुम बहुत बहादुर हो.

रीमा : बहादुर का मतलब ये तो नहीं क तुम्हे कुछ हो और मैं बर्दाश्त कर लूँ? मैं तो मर hi जाउंगी न .

अमित : शह्ह्ह्ह , मारें तुम्हारे दुश्मन , हमें तो साडी उम्र साथ रहना है और ढेर सारे बचे पैदा करने हैं

रीमा : मुझे मरते हुए ) गंदे ,,,, यही सोचते रहते हो तुम ??? हटो पीछे अब मुझे जाना है .

अमित : रुको तो

रीमा : बिलकुल नहीं ,,, उम्मम्मम्हाआअह bye

रीमा जाते जाते पलटी और फिर से मुझे किश किया . साथ hi हस्ती खिलखिलाती हुई नीचे चली गयी .

इधर रीमा अमित क साथ प्यार भरे पल बिता कर हिरणी सी उछलती हुई जब कमरे में पहुंची तो सामने दीपिका को देख कर उसे यद् आया वो तो कप लेने गयी थी . मगर यहाँ तो सब पहले hi चाय पि रहे थे . दीपिका ने खास अंदाज़ में मुस्कुराते हुए रीमा को देखा जिससे रीमा घबरा स गयी.

दीपिका : कहाँ चली गयी थी रीमा ???

रीमा : वो ,,, वो मैं ,, वो

दीपिका : बाथरूम जाना था तो बता देती , दिल्ली तुम्हारी चाय ठंडी हो रही है . चलो जल्दी से पि लो.

रीमा को तो समझ hi नहीं आया क दीपिका ममी ऐसा क्यों कह रही है. बेचारी अपने आप में hi घबराती हुई जल्दी से शीना क साथ बैठ कर चाय का कप हाथ में थम ली. उसकी धड़कने फिर एक बार तेज़ हो गयी थी .

कुछ देर रुकने क बाद मैं भी नीचे चला आया और आते hi दीपिका ममी ने सबके सामने मुझे सामान का पुछा जिसका मैंने भी सही से जवाब दे दिया जो पहले hi सोच रखा था. मैंने रीमा की तरफ देखा तो वो नज़रें नीची किये बस चाय पि रही थी . कुछ देर बाद शीना उठ कड़ी हुई और जाने का कहने लगी.

शीना : ाचा आंटी जी अब मैं चलती हूँ. वर्ण अँधेरा हो जायेगा .

गौरी : बीटा रुक जाओ न आज यहीं.

शीना : नहीं ौंटी , फिर कभी आउंगी अभी चलती हूँ. आप अंकल का ध्यान रखिये .

शीना और रीमा बरी बरी से सब से मिली और लास्ट मेरे पास आयी . तब तक हम बहार तक आ चुके थे . मैं थोड़ा अलग खड़ा था और शीना अकेली मेरे करीब आयी .

शीना : ी ऍम सॉरी अमित ये सब कुछ …..

अमित : इसमें तुम क्यों सॉरी बोल रही हो ? हाँ अगर इस बात क लिए माफ़ी मांग रही हो क तुम मुझे इग्नोर कर रही थी तो it’s ok. बस मुझे वजह बता दो क ऐसा क्यों कर रही थी. मैंने कुछ गलत किया है तो मैं कोशिश करूँगा ठीक करने की

शीना : तुमने कुछ गलत नहीं किया , कुछ भी नहीं. इन फैक्ट मैं hi शर्मिंदा हूँ . प्लीज कुछ भी गलत मत सोचना मेरे बारे में . मैं कभी भी तुम्हारे खिलाफ नहीं जा सकती न ऐसा करने का सोच सकती हूँ. मैं चलती हूँ जल्दी मिलेंगे .

अमित : पर तुमने बताया नहीं क …..

मेरी बात सुने बिना शीना अपनी आँख में आये आंसू साफ़ करती हुई गाडी में बैठ गयी और फिर रीमा भी मेरी तरफ प्यार से देखती हुई मुझसे हाथ मिला कर कार में बैठ गयी . और देखते hi देखते दोनों कार में सवार आँखों से ओझल हो गयी .

उधर करिश्मा फिर से गाओं से शहर वापिस आपने घर पहुँच गयी थी अमित और विजय को घर छोड़ने क बाद . अपनी माँ से मिल कर वो मोहित से मिलना चाहती थी पर वो घर पर था hi नहीं. उसने फ़ोन भी तरय किया पर उसने फ़ोन उठाया hi नहीं . रमा भी गाओं जाना चाहती थी पर राघव का फ़ोन आ गया था क वो आ रहा है तो कल दोनों साथ में hi चलेंगे. करिश्मा को अपने भाई की चिंता होने लगी थी . इस मौके जब अमित की फॅमिली पर ऐसा समय आया है तो उसे एक दोस्त की तरह उसके पास होना चाहिए था पर उसे तो जैसे किसी से कोई लेना देना hi नहीं था . करिश्मा को समय hi नहीं मिल पाया था मोहित से बात करने का और न hi वो बात कर रहा था . मगर बात करना भी तो इस वक़्त बेहद ज़रूरी हो गया था .

दूसरी तरफ ऋतू क आर्डर पर पुलिस छापे मरी कर रही थी पर अभी तक बिल्ला और उसके साथी हाथ नहीं लगे थे . पुलिस ने अपने सरे तौर तरीके लगा दिए थे उन्हें ढूंढने क लिए . मोबाइल लोकेशन को ट्रेस किया जा रहा था पर अभी तक उसका फ़ोन बंद hi था . बिल्ला भी खतरे को पहले hi भांप गया था और शहर वापिस न आकर दूसरे शहर निकल गया था छिपने क लिए पर ऋतू क सख्त आर्डर पर पुलिस भी कुत्तों की तरह सूंघ कर उनका पता लगाने में जुटी थी. इस बीच बलजीत राइ थोड़ा खुश ज़रूर हुआ था इस बात पर क विजय को उसने चोट पहुंचा दी है. और उसी ख़ुशी में अपने ठिकाने पर मौज मस्ती कर रहा था. कल रत भी वो घर नहीं गया था चाहे उसकी बेटी शीना ने उसे फ़ोन कर क घर बुलाया भी था मगर मीटिंग का बहाना बना वो खबर क इंतज़ार में था जो उसे बहुत देर से मिली थी . पर आज वो खुश था और आज वो घर भी लौटने वाला था. मगर उसे ये नहीं पता था क उसकी बेटी खुद उसके दुश्मन क घर गयी है आज . और अपने दिल में तूफ़ान लिए वो वहां से लौट रही थी .

मंजू क शहर छोड़ कर जाने वाली बात पर रुपाली कुछ ज्यादा hi दुखी थी . अपने से ज्यादा उसे इस बात की भी चिंता थी क मंजू एक बार फिर से अज्ञात जीवन जीने चली जाएगी और पता नहीं दोबारा लौटे क न. इस लिए उसने थक हर कर ऋतू को फ़ोन कर दिया . ऋतू वैसे तो बिल्ला क पीछे पड़ी थी उसका पता लगाने में पर अपनी सहेली क बारे में ऐसी बात सुन वो खुद को रोक न सकीय और सब काम छोड़ मंजू से मिलने चली गयी जो गाओं जाने न जाने पर असमंजस में थी . रीमा घर पर नहीं थी तो रुपाली hi उसके पास थी.

ऋतू : ये मैं क्या सुन रही हूँ ? तू फिर से जाना चाहती है सब को छोड़ क ? तू खुद को समझती क्या है ? जब जो तेरे मन में आएगा वो तू करेगी ? और हमेशा तुझे खुद को hi चोट पहुंचनी होती है कभी ये भी सोचा है क उन पर क्या बीतेगी जो तेरे अपने हैं ? इतने साल गुमनाम रह कर तेरा जी नहीं भरा ? मैं समझी थी तुझे तेरी ज़िन्दगी वापिस मिल गयी है और तेरे सहारे मैं भी फिर से जीना सिख रही थी पर नहीं तुझे ये भी मंज़ूर नहीं. ठीक है तुझे जाना है तो जा . पर उनका क्या जो तेरे साथ जुड़े हुए हैं ? अमित को क्या जवाब डौगी? क्या बीतेगी उस पर जब उसे पता चलेगा तेरे बारे में? कभी सोचा है ? अगर तू सोचती है क वो तेरे पीछे नहीं आएगा तो ये तेरी गलती है. मैं तो शायद किसी गिनती में हूँ hi नहीं और न hi तुझे मेरी परवाह है. काम से काम जो तेरे खून क रिश्ते हैं उनका तो सोच ?

मंजू बेचारी तो रोने hi लग पड़ी थी ऋतू की बातें सुन कर. जबकि आँख ऋतू की भी सजल हो गयी थी ये सब कहते हुए . रुपाली भी दोनों की बातें सुन रही थी भावुक वो भी थी पर उसे एक बात समझ नहीं आयी क ऋतू अमित का ज़िकर ऐसे क्यों कर रही है ? मंजू रट हुए ऋतू क गले hi लग गयी .

मंजू : मैं क्या करूँ तू hi बता , मैं क्या करूँ? फिर से वो सब मैं नहीं झेल पाऊँगी , मेरी वजह से बड़े भैया उसके साथ बुरा कर देंगे . मैं जी नहीं पाऊँगी अगर उसे कुछ हुआ तो , इससे ाचा है मैं कहीं चली जॉन या खुद को ख़तम कर लूँ फिर ऐसा कुछ नहीं होगा .

ऋतू : तुझे क्या लगता ऐसा करने से सब ठीक हो जायेगा ? उसके बाद भी कुछ नहीं रुकने वाला . जब तक क उसे रोका नहीं गया और मैं रोकूंगी उसे . अगर तू चाहती है वो सब सही सलामत रहें तो तुझे सामना करना होगा अपने दर का . मुझ पर भरोसा करना होगा और अमित भी कोई कमज़ोर नहीं है जो तू दर रही है. बल्कि वो इतना सक्षम है क हर खतरे का सामना कर सकता है. बस ज़रूरत है तो उसे सब सच सच बताने की

मंजू : नहीं नहीं , ऐसा बिलकुल नहीं करना प्लीज ऐसा नहीं करना . वर्ण वो कुछ के बैठेगा और फिर से मैं उसे खो दूंगी .

ऋतू : पर कब …..

मंजू : प्लीज ऋतू , समझने की कोशिश करो

ऋतू : ठीक है पर प्रॉमिस कर तू कोई बेवकूफी नहीं करेगी वर्ण मैं खुद उसे सब सच सच बता दूंगी .

मंजू ने बस सर हिला कर मूक स्वीकृति दी और ऋतू ने उसके चेहरे पर बानी आंसुओं की कतारों को साफ़ किया . मंजू ने भी अपनी बहिन जैसी सहेली क साथ वैसा hi किया . रुपाली जो ख़ामोशी से सब सुन रही थी दोनों क सँभालते hi वो भी बोल पड़ी.



रुपाली : कौन से सच की बात कर रही हो ऋतू ? और ये अमित का ज़िकर बार बार क्यों कर रही हो . वो तो विजय भैया का बीटा है न फिर उनका ज़िकर क्यों नहीं ? ??
 
अपडेट 260



रीमा और शीना क बाद सब लड़कियां साथ बैठ गयी . मैं उनसे बचने क लिए माँ बाबा क पास चला गया जहाँ से मुझे दीपिका ममी ने बुला लिया . मैं सीधा ममी क पास गया जो इस वक़्त काम का बहाना कर क सब से अलग अपने कमरे में गयी थी और कपड़ों को संभल रही थी .

अमित : मैं कुछ मदद करूँ?

दीपिक : तू क्या मदद करेगा ? ये तेरे करने का काम नहीं बस इधर बैठ जा . तो फिर क्या क्या बात हुई रीमा क साथ ?

दीपिका ममी ने मेरी आँखों में देख क्र मुस्कुराते हुए ये सवाल पूछा तो मैं एक बार शर्मा गया .

दीपिका : अब क्यों शर्मा रहा है ? हालत देखि थी उस बेचारी की , अगर मैं न संभालती तो आसानी से पकड़ी जाती .

अमित : आप थी न सँभालने क लिए , वैसे बहाना ाचा बनाया था उसे मेरे पास भेजने का .

दीपिका : तो और क्या कहती , क जाओ जा कर अमित क साथ मस्ती करो ? वैसे उसे शक तो नहीं हुआ न ?

अमित : नहीं मुझे नहीं लगता ऐसा कुछ है .

दीपिका : हम्म , तो फिर क्या कर रहे थे उसके साथ ? बार बार अपने होंठ चेक कर रही थी

अमित : आप भी न , आपने खुद hi तो कहा था उसे थोड़ा प्यार कर लो बस वही किया .

दीपिका : थोड़ा सा ??? लगता तो नहीं .

अमित : आपको भी कर क दिखाऊं क कितना किया था .

दीपिका : मुझे कर क क्यों दिखाओगे ? ऐसे hi बता दो .

अमित : ऐसे कैसे पता चलेगा , थोड़ा सा कर क बता hi देता हूँ.

इतना कह कर मैंने बिना वक़्त गंवाए दीपिका ममी को कमर में हाथ दाल अपने साथ लगा लिया. वो मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी

दीपिका : छोडो ,, ये क्या कर रहे हो ,, कोई आ जायेगा . छोडो उम्मम्मम्मम

दीपिका ममी मचल रही थी , मैंने उनकी बात का जवाब देने क बजाये उनके होंठों को अपने होंठों से बंद कर दिया. मेरा एक हाथ उनकी कमर पर और दूसरा उनके सर क पीछे था . ममी मेरे सीने पर हाथ रख मुझे पीछे धकेल रही थी पर बाद में मेरा साथ देने लगी और उनके हाथ भी मेरे सर क पीछे और सीने पर चलने लगे . दीपिका ममी ऑंखें बंद किये बस मेरे होंठ चूस रही थी और फिर हम दोनों एक दूसरे क मुँह में जीभ दाल अचे से एक दूसरे को किश करने लगे. आज कितने दिनों बाद दीपिका ममी क साथ इतना ाचा किश कर रहा था मैं. मेरे हाथ अब दीपिका ममी की पीठ से फिसलते हुए उनके चूतड़ों पर पहुँच गए . और मैंने उनके चूतड़ों को मसलते हुए उन्हें ऊपर उठा लिया . दीपिका ममी की टंगे अपने आप खुल गए और मेरी कमर पर उन्होंने अपनी टंगे लपेट ली. अब ममी भी जैसे सब भूल कर मेरे साथ प्यार करने लगी थी , वैसे भी कितने महीने हो गए थे हम दोनों ने किश से ज्यादा कुछ किया नहीं था . अब तो दीपिका ममी ऐसे किश कर रही थी जैसे मेरे होंठ hi चबा जाएगी. मैं दीपिका ममी को ऐसे hi उठाये उन्हें दीवार से चिपका कर किश करता हुआ अब उनके स्तनों को मसलने लगा . दीपिका ममी और ज्यादा जोश में आ गयी और मेरे बल नोचती हुई मेरे होंठ काटने लगी. अब तो मुझसे भी कण्ट्रोल करना मुश्किल होने लगा था . मैंने अपनी कमर को दीपिका ममी की कमर साथ कास कर रगड़ना शुरू कर दिया जिससे मेरा खड़ा लैंड दीपिका ममी की छूट पर दबाव बनाने लगा .

‘ ममी जी आप अंदर हैं क्या , माँ बुला रही है .’ ये आवाज़ सुनते hi हम मज़े क समंदर में गोते लगते एक डैम से होश में लौटे. दरवाज़े क बहार राधा कड़ी थी और ममी को आवाज़ दे रही थी . मैं एक डैम से पीछे हैट गया और ममी भी जल्दी से अपनी हालत ठीक करने लगी. हम दोनों की साँसे उखड़ी हुई थी.

दीपिका : आ ,,, आयी बस तुम चालू

राधा : ठीक है ममी जी

राधा शायद बहार से hi वापिस लौट गयी . मैं और दीपिका ममी एक दूसरे को देखने लगे. दीपिका ममी का चेहरा इतने में hi लाल हो गया था . उनकी आँखों में खुमार नज़र आ रहा था

दीपिका : तो ये सब कर रहे थे रीमा क साथ ? मैंने कहा था न मुझे जल्दबाज़ी में नहीं कुछ करना . अब देखो , ,,,, पकडे जाते न अभी ? इतने दिनों बाद पास आये तो वो भी बस आग लगाने को. तुझे तो मैं बाद में बताउंगी .

दीपिका ममी अपनी बात कह कर बस जल्दी से कपडे ठीक करती बहार निकल गयी . मैं बस मन मसोस कर रह गया . अब लैंड एक डैम तन्न कर खड़ा था अब इसका क्या इलाज किया जाये मैं यही सोचने लगा. फिर खुद को शांत कर क ऊपर अपने कमरे में चला गया.

उधर शीना रीमा को मंजू क यहाँ छोड़ कर अपने बाप से मिलने सीधा उसके ऑफिस चली गयी पर वो वहां नहीं था . उसने पता किया क वो कहाँ है और फिर उसके पास पहुँच गयी. वो अपने फार्महाउस पर था . अपनी सेक्रेटरी की चुदाई करने क बाद अभी वो आराम hi कर रहा था क शीना वहां पहुँच गयी . सेक्रेटरी अभी बहार निकल hi रही थी क शीना उसे मिल गयी .

सेक्रेटरी: माँ,,, ायम्म ाआपपपप ???

सेक्रेटरी एक डैम से शीना को देख घबरा hi गयी जैसे उसकी चोरी पकड़ी गयी हो. हालाँकि वो अपनी हालत ठीक कर चुकी थी पर उसकी घबराहट से शीना समझ गयी .

शीना : डैड कहाँ हैं ?

सेक्रेटरी: वो ,, वो सर वो ,, अंदर hi हैं. मुझे बुलाया था उन्होंने कुछ डिसकस करना था .

शीना : मैंने तो नहीं पूछा क किस लिए बुलाया था , तुम जा सकती हो .

सेक्रेटरी तो बेचारी शीना क सामने पानी पानी हो गयी और जल्दी से वहां से खिसक गयी . अब शीना गुस्से में अपने बाप क पास सीधा उसके कमरे में hi चली गयी.

शीना : ये सब क्या है डैड ?? आप में ऐसा क्यों किया ?? आखिर उन लोगों ने आपका क्या बिगाड़ा है? बुआ अगर घर नहीं चाहती तो इसमें उनका क्या कसूर है? आप जानते भी हैं जिस पर आपने हमला किया है अगर वो न होता तो आपकी बेटी किसी को मुँह दिखने क काबिल नहीं रहती और आप ने उसी पर हमला करवा दिया .

बलजीत राइ तो शीना क तेवर देख कर hi हैरान था. आज तक शीना ने कभी उसी ऐसे गुस्से में बात नहीं की थी. बेशक 2 दिन पहले hi रुपाली क लिए वो उससे बहस करने लग गयी थी पर यहाँ तो शीना फुल गुस्से में थी. बलजीत राइ जान बुझ कर अनजान बनता हुआ बोलै .

बलजीत राइ : तुम क्या कह रही हो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा , किसकी बात कर रही हो और ये मुँह दिखने वाली बात का क्या मतलब .

शीना : ज्यादा बनिए मत डैड , मैं अमित और विजय अंकल की बात कर रही हूँ . अभी मैं सीधा वहीँ से आ रही हूँ. उन पर हमला आपके hi लोगों ने किया है आपके कहने पर मैं अचे से जानती हूँ. क्यूंकि उनकी किसी क साथ कोई दुश्मनी नहीं है. और अब आप इस बात से मुखिये मत . आप खुद hi कह कर निकले थे बुआ क घर से और आप ने कर दिया .

बलजीत राइ : वो तो मैंने ऐसे hi गुस्से में कह दिया था , मैं ऐसा आदमी थोड़ा hi हूँ . तुम क्या अपने बाप को ऐसा वैसा समझती हो

शीना : मुझे अचे से पता है डैड क आप किस हद तक जा सकते हैं . और एक बात आप भी सुन लीजिये अगर आपने विजय अंकल और अमित को किसी भी तरह का नुकसान पहुँचाने की कोशिश की तो मैं अपनी जान दे दूंगी .

शीना की ये बात सुन कर तो बलजीत राइ क जोश hi उड़द गए . चाहे जो भी हो बलजीत राइ अपनी बेटी से बहुत प्यार करता था . वो झट से खड़ा हुआ और शीना को अपने सीने से लगा लिया .

बलजीत राइ : ये तुम कैसी बातें कर रही हो शीना मेरी बची . तुम जानती हो न मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ. आज तक मैंने तेरी कौन सी बात नहीं मणि ? कौन सी ज़िद पूरी नहीं की तेरी जो तू ऐसी बातें कर रही है मेरे साथ . तेरे डैड क्या इतने बुरे हो गए हैं जो तू अपने डैड को ऐसे सजा देना चाहती हो

शीना बेचारी भी थी तो उसकी बेटी hi , उसकी आँखों से आंसू बहने लगे थे और वो रोने लगी थी.

शीना : तो फिर आप ऐसा क्यों करते हैं डैड ? क्या आप दूसरों की तरह एक अचे डैड नहीं बन सकते ? जानते हैं अमित वही लड़का है जिसके बारे में मैंने आपसे कहा था. उसने मेरे लिए अपनी जान खतरे में दाल कर मुझे बचाया था जब भाई क दोस्त मेरी इज़्ज़त ……

बलजीत राइ : क्याआआ ???? तुमने ये बात पहले क्यों नहीं बताई मुझे ? कौन हैं वो हरामज़ादे जिन्होंने मेरी बची पर हाथ डाला . उनके पूरे खंडन का नमो निशान मिटा दूंगा मैं .

शीना : रिलैक्स डैड , अमित ने उन लोगों को अचे से सबक सीखा दिया था , और आप अपनी बेटी को बचने वाले पर hi हमला करवा रहे हैं. उसकी फॅमिली को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं. क्या जवाब दूंगी मैं खुद को क जिसने मेरी तरफ इज़्ज़त बचाई मेरे डैड ने उसकी फॅमिली को hi नुकसान पहुँचाया . उसे इनाम देने की बजाये आप उसे ये सिला दे रहे हैं ?

बलजीत राइ : मम मम ,,, मैंने ऐसे कुछ नहीं किया बेटी , मैं भला ऐसा क्यों करूँगा ? टीम उसे यहाँ बुलाओ , मैं उसे खुद मिलूंगा , उसका शुक्रिया करूँगा . तुम उसे बुलाओ

शीना : झूठ मत बोलिये डैड , मैं जानती हूँ ये आपने hi करवाया है और अब आप मन नहीं रहे. बस इतना सुन लीजिये क अमित क लिए मैं अपनी जान भी दे सकती हूँ. अगर दोबारा आप ने ऐसा किया तो आप अपनी बेटी को ज़िंदा नहीं देखेंगे .

इतना कह कर शीना रोटी हुई भाग कर वापिस चली गयी. बलजीत राइ बेचारा अब खुद दुविधा में फंस गया था . कहाँ वो जश्न मन रहा था विजय पर हमला कर क और अब अपनी बेटी की धमकी सुन कर सर पकड़ कर बैठ गया. अमित क बारे में तो वो भूल hi गया था . शीना पहले भी उसका ज़िकर कर चुकी थी उससे मगर कभी मिलना नहीं हुआ था. और अब जब शीना को पता चल गया था क उसने hi उस पर हमला करवाया है तो ऐसी खतरनाक धमकी दे गयी थी क उसकी बोलती बंद थी . अपनी ज़िन्दगी में पता नहीं कितनो को अपने रस्ते से हटवाया था बलजीत राइ ने पर अब अपनी hi बेटी की मौत की धमकी पर उसका खून सफ़ेद पड़ता जा रहा था . अब तो उसे अपने कदम वापिस खींचने hi पड़ेंगे वर्ण उसे अपनी बेटी खोनी पड़ेगी. मंजू को वो छोड़ सकता था रुपाली रीमा को छोड़ सकता था पर शीना को ,,, शीना को कैसे छोड़ देता आखिर उसकी बेटी थी वो . अपनी बीवी से उसे उतना प्यार न था जितना अपनी बेटी से था . बल्कि उसकी ज़िन्दगी में थोड़ा बहुत जो प्यार या लगाव था वो अपनी इस बेटी से hi था . बाकि तो सब हवस पूरी करने वाली चीज़ें थी .

रीमा क लौट आने पर मंजू अपनी कार ले कर गाओं क लिए निकल गयी . रीमा से मंजू ने पुछा भी नहीं क वो गयी कहाँ थी. उसे बस इतना hi पता था क वो शीना क साथ गयी है. ऋतू क समझने पर अब मंजू को हौंसला हो गया था और वो वापिस आ गाओं चल दी अपने भतीजे क पास. रुपाली ने उससे कहा भी क वो जाना चाहती है विजय से मिलने पर उसने मन कर दिया ये कह कर क अभी सही समय नहीं है. पहले वो उनसे उसके बारे में बात करेगी तब हो मिलवाएगी . रुपाली को भी ये बात ठीक लगी , आखिर अतीत में हो कुछ भी हुआ था उसके बाद वो उनके सामने कैसे जाये ये बात तो उसके मन को भी परेशां कर रही थी. उसके पति ने हमेशा बलजीत राइ का hi साथ दिया था .

दूसरी तरफ राघव भी निधि क साथ वापिस लौट आया था पर देर से . निधि तो बेचारी रत को hi अमित क पास पहुँच जाना चाहती थी पर देर हो जाने की वजह से घर रुकना पड़ा . राघव थका हुआ था इस लिए आते hi सो गया . मोहित आज भी घर से बहार hi था देर तक . करिश्मा दर रही थी क कहीं उसके पापा को मोहित क बारे में पता न चल जाये . पर शुक्र था क थकावट की वजह से वो सोने चला गया . पर करिश्मा अब मोहित को लेकर ज्यादा टेंशन में थी. इस लिए अपने माँ डैड क सोने क बाद भी वो मोहित से बात करने क लिए जगती रही. मोहित देर से घर लौटा और नशे में . मोहित होश में नहीं था तो करिश्मा उसे सहारा दे कर उसके कमरे तक ले गयी. अब तो पानी सर से ऊपर बहने लगा था और करिश्मा को समझ नहीं आ रहा था क वो करे तो क्या करे. एक अमित hi था जो मोहित से बात कर सकता था उसे समझा सकता था पर यहाँ अब वो उसे कहने से भी हिचकिचा रही थी.

मंजू बुआ शाम को घर आ गयी थी उन्हें देख मुझे बहुत ख़ुशी हुई. वो बाबा क पास hi बैठी रही . इधर उधर की बातों क इलावा कुछ खास नहीं हुआ और ऐसे hi रत का खाना भी हो गया. इस दौरान राधा मुझे जब भी देखती तो नज़रें झुका लेती . मैं उससे बात करना चाहता था पर टाइम hi नहीं मिल रहा था. मैं खाना खाने क बाद अपने कमरे में आ गया. नैना करुणा दीदी और कल्पना राधा को अपने साथ hi रखे हुए थी . सोने क लिए जब सब लड़कियां ऊपर अपने कमरों में जाने लगी तो राधा सबसे पीछे थी. जाते जाते जब राधा ने मेरे कमरे में झांक कर देखा तो मैंने उसे आवाज़ लगा दी. राधा सर झुकाये मेरे कमरे में आ गयी. वो अभी भी मुझसे नज़रें नहीं मिला रही थी. मुझे उकसा ऐसा करना ाचा नहीं लग रहा था. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैंने बहुत बड़ा अपराध कर दिया है. हम दोनों एक दूसरे क पास पास थे पर एक अजीब सी ख़ामोशी थी हम दोनों क बीच.

अमित : ी ऍम सॉरी राधा , मैं जनता हूँ तुम मुझसे नाराज़ हो. वो सब मैंने जान बुझ कर नहीं किया था. पता नहीं कैसे पर वो सब गलती से हो गया मुझसे . प्लीज मुझे माफ़ कर दो. मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था . हम दोनों अचे दोस्त हैं . मुझे बहुत बुरा लग रहा है . तुम मुझसे नाराज़ हो तो ऐसा लग रहा है जैसे अंदर कुछ टूट रहा है. मुझसे तुम्हारी ये नाराज़गी बर्दाश्त नहीं हो रही . तुम चाहो जो मर्ज़ी सजा मुझे दे दो पर प्लीज ऐसे मत करो. अगर तुम कहोगी तो मैं दोबारा तुम्हारे कभी हाथ भी नहीं लगाऊंगा . प्लीज एक बार माफ़ कर दो . मैं नहीं चाहता तुम मेरी वजह से ऐसे गुमसुम रहो.

मैंने एक सांस में जो कुछ मेरे मन में चल रहा था वो सब कह दिया . ताकि राधा मुझे माफ़ कर दे . मेरी बातें सुन कर राधा ने नज़रें उठाई और एक तक मुझे देखने लगी. पर उसकी आँखों में क्या था मुझे समझ नहीं आ रहा था . शायद वो सोच रही थी क वो क्या जवाब दे. किसी भी लड़की क साथ ऐसी कोई हरकत हो तो वो गुस्सा तो होगी hi और चांटा भी मर देगी पर राधा इतनी भोली थी क उसने तो मुझे कुछ कहा तक नहीं था. राधा और मैं एक दूसरे को देख रहे थे . राधा जब कुछ न बोली तो मैंने उसके आगे हाथ जोड़ दिए और फिर से माफ़ी मांगी . पर राधा ने मेरे हाथ पकड़ लिए .

राधा : ये सब क्या कर रहे हो ? और किसने कहा क मैं तुमसे नाराज़ हूँ ? तुम तो मेरे बॉडीगार्ड हो न तो भला तुमसे मुझे क्या दर हो सकता है . ऐसा कभी सोचना भी मत क मैं तुमसे कभी नाराज़ हो सकती हूँ. हाँ तुम्हारा ऐसा करना मुझे बिलकुल ाचा नहीं लग रहा . मेरे लिए तुमसे बाद कर और कोई नहीं है , कोई भी नहीं.

राधा ने मेरी आँखों में देखते हुए संजीदगी से इतना कहा तो मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे दिल से बहुत बड़ा बोझ उतर गया हो. मेरे हाथ अभी भी राधा क हाथों में थे . हम दोनों एक दूसरे को देखे जा रहे थे . राधा की आँखों में अपने लिए प्यार देख कर मेरी आवाज़ तो मेरे कंठ में hi कहीं गम हो गयी थी.

‘ राधा ,,,, राधा ,,, कहाँ रह गयी तू……. तू यहाँ क्या कर रही है ? चल हम तेरा वहां इंतज़ार कर रहे हैं ‘ करुणा दीदी राधा को आवाज़ देती हुई कमरे में दाखिल हो गयी. मगर उससे पहले hi राधा ने मेरे हाथ छोड़ दिए थे और पीछे हैट गयी थी . मैं भी पीछे हैट गया था. करुणा दीदी ने हम दोनों को देखा .

राधा : वो बस आ hi रही थी दीदी , चलिए .

करुणा : और तू ऐसे बूत क्यों बना खड़ा है ? चल सो जा अब आराम से .

करुणा दीदी राधा का हाथ पकड़ क उसे साथ लिए चल दी . जाते जाते राधा ने एक बार पलट कर फिर मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा कर चल दी. मुझे मन में बहुत ज्यादा ख़ुशी महसूस हो रही थी. मन हल्का हो गया था. मैं बीएड पर फिर गया और राधा की कही बातों क बारे में सोचने लगा . राधा का चेहरा उसकी ऑंखें मुझे अभी भी सामने hi नज़र आ रही थी.

‘ तुमसे किसने कहा मैं तुमसे नाराज़ हूँ ‘ राधा क ये शब्द अब मेरे दिलो दिमाग पर चोट करने लगे . इसका मतलब वो मुझसे नाराज़ थी hi नहीं. पर हमारे बीच जो हुआ उसके बाद तो उसे गुस्सा करना चाहिए था . फिर भी वो नाराज़ नहीं हुई ? आखिर क्यों ? राधा को मेरी वो हरकत बुरी नहीं लगी ? कोई भी लड़की ऐसी हरकत को आसानी से माफ़ नहीं करती पर राधा ने तो न गुस्सा किया न नाराज़ हुई ? आखिर राधा क मन में क्या है ? वो ऐसे क्यों बेहवे कर रही थी. कहीं मेरा मन रखने क लिए तो ऐसा नहीं कह दिया उसने . राधा क बारे में मैं काफी देर तक सोचता रहा और फिर दिव्या मौसी मेरे लिए दूध का गिलास ले आयी. कुछ देर उनसे बात हुई और फिर मंजू बुआ भी आ गयी. बातों बातों में मौसी और बुआ एक साथ सोने का कह कर चली गयी. शायद दोनों को बातचीत करनी थी कोई . मैं भी कुछ देर बाद सो गया .

सुबह मेरी आँख जल्दी खुल गयी और मैं अखाड़े चला गया . वहां पर अचे से एक्सरसाइज की. डरा भैया और तकरीबन हर कोई बस उन गुंडों क बारे में hi बात कर रहा था . वहां से आने में मुझे थोड़ी देर हो गयी आज.

‘ तुम आ गए , कहाँ रह गए थे ‘ मैं घर पहुंचा hi था क निधि दीदी दौड़ कर मेरे गले लग गयी . निधि दीदी आँगन में hi मेरे साथ चिपक कर कड़ी थी और मुझे अपने सीने पर उनके नरम मांस क गोले महसूस हो रहे थे . साथ hi उनकी बेचैन धड़कने भी. मुझे कास क गले लगाए वो जैसे इस पल में मुझ से अलग होना hi नहीं चाहती थी. मैंने भी दीदी को बाँहों में भर लिया . निधि दीदी का प्यार देख कर मुझे भी ाचा लग रहा था . फिर मैंने उन्हें खुद से अलग किया .

अमित : अरे दीदी आप , इतनी सुबह सुबह ?

निधि : तू ठीक तो है न ( मुझे अछि तरह देखते हुए वो जैसे स्कैन कर रही थी हाथ लगा लगा कर .) तुझे कहीं चोट तो नहीं लगी ? मैंने जब सुना तुम पर और मां जी पर हमला हुआ है तो मेरी क्या हालत हो गयी थी पता भी है ?

अमित : पर आप तो अंकल क साथ गयी थी न फिर अचानक कैसे आ गयी ?

निधि : कल hi हम वापिस लौट आये थे सब काम छोड़ कर. अँधेरा ज्यादा न होता तो रत को hi आ जाती. पर अंकल ने और माँ ने मन कर दिया था. तुझे देखने को मन कर रहा था इस लिए सुबह होते hi चली आयी .

अमित : आप भी न कभी कभी बच्चों जैसी हो जाती हो. मुझे कुछ नहीं हुआ , वैसे भी सब यहाँ है तो मेरे पास .

निधि : तो क्या हुआ , मुझे ाचा नहीं लग रहा था इस समय तुमसे दूर रहना .

‘ इसका बस चले तो सब काम छोड़ बस तेरे hi पास रह जाये . पता नहीं क्या जादू कर दिया है तुमने इस पर . शादी की उम्र हो चली है और अभी भी बची बानी हुई है’ रजनी मौसी ने पीछे से आते हुए कहा और मुझे दूध का गिलास थमा दिया .

रजनी: चल अब कुछ खा ले , कब से कह रही हूँ कुछ खा ले पर कह रही है पहले अमित को देखना है. मुश्किल से रोका है और वर्ण तेरे पीछे अखाड़े में hi आ जाती .

मौसी की बात सुन कर मैंने निधि दीदी को देखा तो वो शर्मा hi गयी .

अमित : ये क्या दीदी , मैं घर आ hi जाट न . आप ने अभी तक खाया क्यों नहीं ? चलिए अब साथ में कहते हैं . मौसी आप नाश्ता दो .

मौसी जल्दी से किचन में चली गयी. जहाँ दीपिका ममी और दिव्या मौसी खाना बना रही थी . निधि दीदी और मैं खाने क लिए टेबल पर चले गए .

अमित : आप अकेली आयी हैं ?

निधि : हम्म

अमित : किसी को साथ ले अति , अंकल आंटी ने भी तो आना था hi .

निधि : मैंने कहा न , मुझे बस तुम्हे देखना था. वो पता नहीं कब आते .

अमित : आप भी न , कारन भैया मुझसे और नाराज़ होंगे क आप मुझे उनसे ज्यादा प्यार करती हैं.

निधि : हाँ करती हूँ , सब से ज्यादा करती हूँ. तुम्हे मैं किसी क साथ कपड़े नहीं कर सकती.

अमित : कल को आपकी शादी हो जाएगी फिर तो जीजा जी से hi करेंगी.

निधि : तुम्हारी जगह कोई नहीं ले सकता , कभी भी नहीं. और शादी की बात मत hi करो , मुझे नहीं करनी शादी .

‘ हाँ हाँ , तू तो साडी उम्र घर पर hi बैठना चाहती है. लोग क्या कहेंगे कभी सोचा है ? तेरे पापा को कितनी चिंता रहती है तुम्हारी पता भी है ?’ रजनी मौसी हम दोनों क लिए नाश्ता ले आयी . और निधि को दांत ते हुए बोली.

निधि : माँ मैंने कहा न मुझे शादी नहीं करनी . आपको मैं बोझ लगती हूँ तो बता दो मैं कहीं और चली जाती हूँ.

रजनी: क्या होगा है तुझे ? तू तो ऐसी नहीं थी , तू हम पर बोझ कब बन गयी? हूँ तो तेरे लिए hi कह रहे हैं.

निधि : सॉरी माँ पर मैं शादी नहीं करना चाहती .

रजनी : मगर क्यों ? साडी उम्र अकेले रहना चाहती हो क्या ?

निधि : मैं अकेली कहाँ हूँ? सब हैं तो यहाँ मेरे पास. आपको शादी hi करवानी है तो नैना की करवा दो. मुझे कहीं नहीं जाना यहाँ से दूर.

रजनी : पता नहीं किस की नज़र लग गयी है इस लड़की को. तू hi समझा जा कुछ इसे .

अमित : मौसी ठीक कह रही है दीदी , शादी तो एक न एक दिन होनी hi होती है तो अभी क्यों नहीं ?

निधि दीदी खामोश रही बस मेरी आँखों में ऑंखें दाल देखने लगी जैसे उन्हें मेरी बात अछि न लगी हो .

अमित : ाचा चलो छोड़िये पहले नाश्ता कर लीजिये .

मैंने एक निवाला बना कर दीदी की तरफ किया तो वो नाराज़गी दिखते हुए मन करने लगी पर मैंने भी ज़बरदस्ती उनके मुँह में ठूंस hi दिया . और वो खाने लगी . मगर अभी भी बात नहीं कर रही थी. मैंने खुद भी नाश्ता कर रहा था और दीदी को भी अपने हाथ से करवा रहा था . नैना दीदी करुणा दीदी कल्पना नेहा दीदी और राधा भी हमारे पास आ गयी .

नैना : वह वह , बड़ी सेवा हो रही है दीदी की कभी हमारी भी सेवा कर दिया कर थोड़ी सी .

अमित : आप क्यों जल रही हैं अगर मैं मेरी प्यारी दीदी की सेवा कर रहा हूँ तो ?

करुणा : हम क्यों जलने लगे ? करो करो खूब सेवा करो . दीदी क साथ hi दहेज़ में भी चले जाना हमको क्या .

रजनी : आ गयी तुम सब भी , चलो चलो आ कर अपना नाश्ता ले लो .

रजनी मौसी ने परांठे रखते हुए उन्हें अपना नाश्ता लेने को कहा तो राधा जल्दी से उठ कर किचन में चली गयी उनकी मदद क लिए . नाश्ता कर क मैं उठा और अपने कमरे में चला गया क्यूंकि अब मुझे नहाना भी था . मैं बाथरूम से नाहा कर कमरे में दाखिल हुआ तो निधि दीदी बीएड पर बैठी थी . मैं सिर्फ टॉवल लपेट कर hi आ गया था . दीदी को सामने देख मैं रुक गया और दीदी भी मुझे देखने लगी.

अमित : दीदी आप ? सॉरी मैं ऐसे hi …..

निधि : मुझे तुमसे बातें करनी है , वहां निचे वो सब बात hi नहीं करने देंगी इस लिए मैं यहाँ चली आयी. और तुमने मुझसे ऐसे शर्माने की ज़रूरत नहीं . मैं कोई परायी तो नहीं.

अमित : परायी की बात कहाँ से आ गयी ? ाचा आप बैठो मैं कपडे पहल लेता हूँ.

मैं वहीँ अलमारी से कपडे निकल कर पहनने लगा और दीदी कनखियों से मुझे hi देख रही थी .

निधि : मुझे न तुम्हे अपने साथ कहीं ले कर जाना है . क्या तू चलेगा मेरे साथ ?

अमित : अगर मेरा जाना ज़रूरी है तो ज़रूर चलूँगा . पूछने की क्या बात है आप बस हुकम कीजिये . वैसे जाना कहाँ है और कब ?

निधि : एक पार्टी पर जाना है हमने , नई ईयर की पार्टी है और मैं वहां अकेले जाना नहीं चाहती . इस लिए तुम्हे मेरे साथ चलना होगा . और किसी को मैं वहां लेकर नहीं जा सकती.

अमित : ऐसी कौन सी पार्टी है जहाँ आप किसी और को नहीं ले जा सकती . वैसे आप कब से पार्टी में जाने लगी ?

निधि : मेरी एक दोस्त है उसने इन्विते किया है इस लिए जाना पड़ेगा वर्ण वो नाराज़ हो जाएगी.

अमित : तो आप वहां कारन भैया या नैना दीदी क साथ भी तो जा सकती हैं.

निधि : मैंने कहा न मैं किसी और क साथ नहीं जाना चाहती. तुम्हे मेरे साथ चलना है. अगर नहीं जाना तो बता दे.

अमित : मैंने कब मन किया , मैं तो बस …. चलना कब है?

निधि : कल शाम को , एक्चुअली नई ईयर की पार्टी है न तो रत को hi होती है ऐसी पार्टीज .

अमित : हम्म फिर तो जाना hi पड़ेगा . लो हो गया तैयार , वैसे ये पार्टी का क्या चक्कर है ? ज़रा खुल कर बताएंगी ?

निधि : जब जायेंगे तब बता दूंगी . अभी फ़िलहाल किसी से इस बारे में बात मत करना. मैंने किसी को नहीं बताया और न तुम बताना .

अमित : लगता है मामला कुछ सीरियस है

निधि : हाँ , ऐसा hi समझ ले .

अमित : वैसे आपकी वो फ्रेंड लड़की है या लड़का?

निधि : मेरी आँखों में देख कर ) तुझे क्या ऐसा लगता है मैं किसी और क बारे में ऐसा सोच सकती हूँ ?

अमित : सॉरी सॉरी , मैं तो बस जानना चाहता था .

निधि : तुझे यही जानना है न मैं किसी को पसंद करती हूँ क नहीं? तुझे पार्टी में पता चल जायेगा .

अमित : सछह !!!! फिर तो मज़ा आ जायेगा , फाइनली आपको कोई पसंद तो आया . मौसी को पता चलेगा तो कितनी खुश होंगी

निधि : मैंने कहा न अभी किसी को कुछ नहीं बताना . बस इतना यद् रखना क मेरे साथ चलना है और रत हम बहार hi रुकेंगे . घर पर देर से आये तो दांत पड़ेगी.

अमित : आपके लिए तो कुछ भी मंज़ूर है . मुझे तो अभी से इतनी ख़ुशी हो रही है क मैं बता नहीं सकता .

निधि ( मन में ) अब और ज्यादा इंतज़ार मैं नहीं कर सकती. मुझे अब अपने दिल की बात कैसे भी तुम्हे बतानी hi पड़ेगी. भगवन मुझे हिम्मत देना क मैं अपने दिल की बात अमित को बता सकूँ

‘ मोहित ,, मोहित ,, उठ न मोहित, देख टाइम कितना हो रहा है. हमें अमित क घर भी जाना है. पापा तैयार हो रहे हैं. उठ जा भाई ‘ करिश्मा मोहित को सुबह सुबह जगा रही थी . हालाँकि मोहित रत देर से hi आया था पर राघव और रमा का प्लान था सुबह जल्दी निकलने का तो इसी लिए करिश्मा मोहित को जगाने आ गयी. वो नहीं चाहती थी क उन दोनों में से कोई मोहित क पास सुबह जाये . शराब की महक उन दोनों का दिल तोड़ देती . मोहित करिश्मा क बार बार हिलने से थोड़ा सा कसमसाया और उसे जाने को कहने लगा.

मोहित : सोने दो दीदी क्यों तंग कर रही हो.

करिश्मा : तूने सुना नहीं , में डैड तैयार हो रहे हैं और तू भी जल्दी से तैयार हो जा . हमें गाओं जाना है विजय अंकल का पता लेने . तुझे कुछ खबर भी है उन पर हमला हुआ है.

मोहित : मैं बाद में आ जाऊंगा मुझे सोने दो

करिश्मा : तेरा दिमाग तो सही है ? वो तेरा दोस्त है और तुझे उसकी ज़रा भी परवाह नहीं ?

मोहित : जाने दो न दीदी तुम क्यों इतना टेंशन ले रही हो. उसे परवाह है क्या मेरी जो मैं उसकी करूँ ?

करिश्मा : ये तू कैसी बातें कर रहा है ? तुझे होश भी है क अब तक नशे में है ? वो तेरी इतनी परवाह करता है और तू ऐसी बातें कर रहा है . किसके साथ बैठ कर पीने लगा है तू ? तेरा दिमाग ख़राब हो गया है . देख रही हूँ उस दिन क बाद से तू घर से बहार hi रहता है और शराब पीने लगा है. आखिर बात क्या है ? मीनल क साथ झगड़ा हुआ है क्या तेरा ? उस दिन हुआ क्या यह ? तुम दोनों को नशे की हालत में लेकर आया था अमित .

मोहित : हाँ झगड़ा हो गया है मेरा अब खुश ??? और उसे भी जा कर बोल देना ता की वो भी खुश हो ले. वो तो यही चाहता था न क मीनल मुझसे दूर हो जाये . मुझे कोई ज़रूरत नहीं है उसकी. और आपको वो इतना hi पसंद है न तो उसे यहीं ला कर रख लो . मैं चला जाता हूँ कहीं .

करिश्मा : चटाक ,,,, तेरा दिमाग ख़राब हो गया है . अभी माँ को बताती हूँ .

करिश्मा ने गुस्से में मोहित क गाल पर तमाचा हाथ दिया था और मोहित भी आग बबूला हो कर उठ गया .

मोहित : जिसे जो कहना है कह दो . मुझे परवाह नहीं. मैं जा रहा हूँ .

मोहित गुस्से में घर से निकल गया . करिश्मा वहीँ सर पकड़ कर बैठ गयी.



कुछ देर में राघव और रमा दोनों तैयार हो कर आ गए . मोहित को न पाकर दोनों को बुरा तो लगा पर करिश्मा ने इस बात पर यह कह कर पर्दा दाल दिया क उसके किसी दोस्त को का एक्सीडेंट हो गया है इस लिए वो उधर गया है. हालाँकि दोनों इस बात से संतुष्ट नहीं थे . उनकी नज़र में तो अमित से बेहतर और कोई होना hi नहीं चाहिए था मोहित क लिए पर करिश्मा की वजह से दोनों चुप चाप करिश्मा को साथ लिए गाओं की तरफ चल दिए
 
सॉरी दोस्तों कुछ दोस्त नाराज़ होंगे क अपडेट लेट दे रहा हूँ आज कल पर साफ़ बात बोल देता हूँ क भाई काम काज में फंसा हूँ. ऊपर से अलग अलग ज़रूरी काम ाँ पड़ते हैं . ज़िम्मेदारियाँ सबसे पहले हैं भाई लोगो. ी होप यू आल विल अंडरस्टैंड. अगला अपडेट कल कोशिश करूँगा अगर कम्पलीट हो पाया तो.
 
दोस्तों करवा की वजह से पटरी से उतरी गाडी को दोबारा पटरी पर लेन में वक़्त लग रहा है. अब अपने साथ साथ अपने ऊपर आश्रित परिवारों क लिए ज्यादा म्हणत करनी पड़ती है. मैं थोड़ा थोड़ा कर क लिखने की कोशिश क्र रहा हूँ पर टाइम उतना नहीं मिल प् रहा. अब कुछ भाई इस बात को समझने की बजाये वसूली वाली भाषा में बात करते हैं तो ाचा नहीं लगता इस लिए इधर कोई रिप्लाई देने का मन नहीं होता. इतना बता देता हूँ क जल्दी hi अपडेट मिलेगा आपको इसी वीक में . आज तो नहीं कल या कल क बाद
 
अपडेट 261



अभी नाश्ता कर क सब हेट थे क राघव अंकल और रमा आंटी घर में पधारे. साथ में hi करिश्मा दीदी भी थी. मैं अपने कमरे में hi था पर नीचे से आती आवाज़ सुन कर मैं भी नीचे आ गया और सामने सबको देख कर मुझे ख़ुशी हुई. अंकल आंटी तो सीधा बाबा क कमरे में hi गए पहले और उनका हाल जाना. करिश्मा दीदी को बहार hi सब बहनो ने घेर लिया था . मैं भी पहले अंकल आंटी क पास गया और उनका आशीर्वाद लिया . अंकल ने मुझे सीने से लगा कर खूब सारा आशीर्वाद दिया. उनकी बातों से पता चल रहा था क वो कितनी परवाह करते हैं हम सब की . खास कर क मेरी. वो बार बार मुझसे चोट वगैरह क बारे में पूछते रहे जैसे यकीन कर लेना चाहते हो क मैं वाकई ठीक हूँ.

राघव : भाई साहब आखिर ये सब हुआ कैसे ? मेरा मतलब है आप पर कौन हमला कर सकता है वो भी गाओं में ?

विजय : पता नहीं कौन थे वो सब मामला पुलिस खुद hi देख लेगी . वैसे भी ऋतू छोटी बहिन hi तो है हमारी वो खुद hi संभल लेगी.

राघव : फिर भी भाई साहब ये कोई मामूली बात तो नहीं. और तो और अमित और अजय पर भी तो निशाना साधा गया है. उन लोगों क इरादे इनको भी नुकसान पहुँचाने क थे. इस लिए पता लगाना ज़रूरी है

विजय : मैं समझ सकता हूँ क अमित को लेकर तुम चिंता कर रहे हो. पर भरोसा रखो ऋतू सब देख लेगी. वो भी बहुत परवाह करती है इसकी. तुम बस चिंता छोडो और ये मोहित कहाँ है वो नहीं नज़र आ रहा .

रमा : वो उसके किसी दोस्त का शायद कोई एक्सीडेंट हुआ है तो वो उधर चला गया सुबह सुबह . वर्ण वो यहाँ ज़रूर अत .

विजय : चलो कोई बात नहीं , दोस्तों क काम आना चाहिए . विजय पर hi तो जायेगा न , जैसा बाप से ऐसा बीटा .

अंकल आंटी माँ बाबा क साथ बातों में व्यस्त थे तो मैं उठ कर बहार आ गया . दीपिका ममी क कमरे से सब लड़कियों की आवाज़ आ रही थी. मैं भी उधर हो लिया. कमरे में पहुंचा तो सब की सब यहीं मौजूद थी. करिश्मा दीदी क साथ निधि दीदी बैठी थी और एक तरफ नैना दीदी करुणा दीदी कल्पना उनसे हंसी मज़ाक कर रही थी. नेहा दीदी और राधा बस मूक दर्शक बानी हुई थी

करुणा : लो , आ गए महाराज , यहाँ क्या लेने आया है ? यहाँ तेरा कोई काम नहीं .

निधि : करुणा ,,, कुछ काम था क्या ?

निधि दीदी ने करुणा दीदी को रोक कर मुझसे आने क मंतव्य पूछा तो मैंने बस न में गर्दन हिला दी

अमित : वो मैं तो बस करिश्मा दीदी से मिलने आया था .

मेरी बात सुन कर करिश्मा दीदी क चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी.

करिश्मा : आओ बैठो न

अमित : दीदी वो मोहित कहाँ गया है ? वो नहीं आया साथ में .

करिश्मा : वो ,,, वो किसी ज़रूरी काम से गया है . कह रहा था वो आ जायेगा .

करिश्मा दीदी ने जवाब देते हुए मुझसे नज़रें चुराई तो मुझे लगा क वो कुछ छुपा रही हैं. सबके सामने मैं पूछना नहीं चाहता था उस लिए दोबारा नहीं पूछा . नैना दीदी और करुणा दीदी तो मेरे पीछे hi पद गयी थी इस लिए मैं जल्दी वहां से उठ कर चला गया . दीपिका ममी ने घर क लिए कुछ सामान मंगाया था जो मैंने लेकर दिया और अपने कमरे में जा कर लेट गया . कुछ hi देर में करिश्मा दीदी मेरे कमरे में आ गयी. मैं उन्हें देखते hi उठ कर बैठ गया. दीदी ने एक बार मुझे देखा और एक बार बहार देख कर दरवाज़ा हल्का सा बंद कर क मेरे पास आ गयी . दीदी को देख कर मैं समझ गया क वो मुझसे कोई बात करना चाहती हैं.

करिश्मा : हम बात कर सकते हैं?

अमित : हाँ हाँ दीदी , आइये बैठिये .

करिश्मा दीदी मेरे पास बीएड पर hi बैठ गयी. कुछ देर खामोश रहने क बाद उन्होंने बात करनी शुरू की .

करिश्मा : मोहित बदल गया है , तुम जानते हो ऐसा वो क्यों कर रहा है ? वो आज यहाँ नहीं आया बिना किसी वजह क . शायद अब वो तुमसे भी नाराज़ है किसी बात को लेकर

करिश्मा दीदी क मुँह से ये सुन कर मुझे झटका लगा .

अमित : क्याआ ?? मुझसे नाराज़ है ? पर मैंने क्या किया है ?

करिश्मा : मुझे भी कहाँ पता है ? पर ये सब उसी दिन क बाद से हो रहा है . अब तो रोज़ शराब पीकर घर अत है. मुझे तो दर लग रहा है माँ डैड को पता चला तो पता नहीं क्या होगा.

अमित : मोहित शराब पिने लगा है ???? आपने मुझे पहले क्यों नहीं बताया ?

करिश्मा : जब मुझे पता चला तब अंकल को चोट लग गयी . अब ऐसे में कैसे बताती. अब तुम्हे hi कुछ करना होगा . अगर जल्दी कुछ न किया तो कहीं वो ……

करिश्मा दीदी की आँखों में आंसू आ गए थे बात करते हुए. मैंने उनके हाथ अपने हाथों में थम लिए तो दीदी मेरे गले से लग गयी .

अमित : ऐसा कुछ नहीं होगा . मैं उससे बात करूँगा मैं जनता हूँ वो ऐसा क्यों कर रहा है. शायद दोनों में अभी तक सुलह नहीं हुई है जो अब मुझे hi करवानी पड़ेगी . आप चिंता मत करो .

करिश्मा : तो ये मीनल क कारन हो रहा है?

अमित : मीनल क कारन नहीं , बस वक़्त का पहिया कहिये इसे. दोनों एक दूसरे से दिल से प्यार करते हैं मगर गलतफहमी ने ऐसा कर दिया है. आप बिलकुल भी चिंता मत करो दोनों की.

करिश्मा : मुझे तुम पर पूरा भरोसा है तुम सब ठीक कर डोज .

अमित : ाचा अभी वो है कहाँ पर ?

करिश्मा : पता नहीं कहाँ जाता है पर जब अत है तब शराब क नशे में रहता है.

अमित : मैं देखता हूँ शायद मेरा फ़ोन उठा ले

मैंने मोहित का no . तरय किया पर रिंग्स जा रही थी वो उठा नहीं रहा था . करिश्मा दीदी को मैंने जाने का इशारा कर दिया क्यों की मैं मोहित से अकेले में बात करना चाहता था. 1 बार 2 बार 3 बार मैं बार बार फ़ोन तरय कर रहा था . आखिर कर मोहित ने मेरा फ़ोन उठा लिया.

अमित : hello मोहित कहाँ है यार तू?

‘ मोहित तो मज़े में है और अभी किसी से बात नहीं कर सकता . तुम चाहो तो मुझसे बात कर सकते हो ‘

ये आवाज़ मोहित की नहीं बल्कि किसी लड़की की थी. मैं पहले तो आवाज़ सुन कर चौंका पर अगले hi पल दिमाग पर ज़ोर दिया तो मुझे कुछ अंदाज़ा हो गया .

अमित : तुम कौन हो ?

‘ मोहित की बेस्ट फ्रेंड ‘

अमित : ओह्ह्ह , तो तुम हो

‘ तुम कौन ?? नाम बताओ ‘

अमित : नाम तो रोज जैसा है पर काँटों क बीच रहना पसंद है शायद तुम्हे .

रॉय : तो तुमने मुझे पहचान लिया . अब गुलाब क साथ कांटे तो रहते hi हैं हिफाज़त क लिए . मगर गुलाब की खुशबु सबको अपनी तरफ खिंच hi लेती है.

अमित : सही कहा शायद इसी लिए मोहित भी खिंचा चला आया तुम्हारे पास .

रॉय : वो तो पहले से hi मेरा था बस टाटा भूल गया था .

अमित : रास्ता पहले भूल गया था या अब भूल गया है ? खैर उसे मैं देख लूंगा

रॉय : तुम इतनी चिंता क्यों कर रहे हो? मोहित मेरा है और मैं अब उसे कहीं नहीं जाने दूंगी. तुम भी इस मामले में अपनी तंग मत अदना .

अमित : ाचा ? तो तुम मुझे रोकेगी ? मैं भी देखता हूँ तुम कब तक उसे गुमराह करती हो .

रॉय : तुम आखिर ये मीनल की इतनी तरफदारी क्यों कर रहे हो . तुम्हे क्या मिलेगा ? या फिर पहले hi वो तुम्हे कुछ दे रही है ?

अमित : ऐसी घटिया सोचा घटिया दिमाग में hi आ सकती है . मोहित से मैं खुद बात कर लूंगा और देखना जब उसे सचाई पता चलेगी क तुम लोगों ने उसके साथ ये सब ड्रामा किया है तो वो थूकेगा भी नहीं तुम पर .

रॉय : तुम आखिर मेरे इतने खिलाफ क्यों हो ? मैं क्या इतनी बुरी हूँ ? मैं भी मोहित से दिलो जान से प्यार करती हूँ. मैं उसे किसी कीमत पर खुद से अलग नहीं होने दूंगी .

अमित : जिसे तुम प्यार कह रही हो उसकी नुमाइश तो मैं देख चूका हूँ.

रॉय : देखो तुम मुझे गलत समझ रहे हो मैं सच में मोहित से बहुत प्यार करती हूँ. तुम मुझे समझने की कोशिश करो. क्या तुम मुझसे एक बार मिल सकते हो ?

अमित : मैं तुमसे क्यों मिलूं ?

रॉय : प्लीज एक बार मिलो तो सही , एक बार मेरी बात तो सुन लो.

अमित : ठीक है पर पहले मोहित को ऐसे शराब में डुबोना बंद करो. अगर सच में उससे प्यार करती हो तो उसे ऐसे बर्बाद करना बंद करो.

रॉय : मैं तो ऐसा कुछ कर hi नहीं रही वो तो ….. मैं ख्याल रखूंगी . तुम कब मिलने आओगे मुझसे ?

अमित : जल्द hi मिलूंगा .

रॉय : मैं ित्नत्ज़र करुँगी . प्लीज तब तक मीनल को बीच में मत लाना .

रॉय से बात करने क बाद मैंने फ़ोन कट कर दिया . रॉय की बातों से इतना तो साफ़ था क वो मोहित को अपने जाल में फसा रही है और कहीं न कहीं वो भी शामिल है उस रत वाले खेल में . अब मुझे बस इस बात को पुख्ता करना था . रॉय से मिलना ज़रूरी था पर उससे पहले मोहित से एक बार मिलना भी ज़रूरी था ताकि पता चल सके उसके दिमाग में क्या क्या डाला गया है . कुछ देर बाद मैं भी नीचे आ गया . दोपहर का खाना सबने साथ मिल कर खाया . करिश्मा दीदी एक आस भरी नज़र से मुझे बार बार देख रही थी और मैंने भी उन्हें आँखों से hi तसल्ली दी क सब ठीक हो जायेगा . आंटी और अंकल तो अजय मां बाबा और ममी बुआ मौसी क साथ बातों में लगे हुए थे. निधि दीदी आज खाना परोसने में लगी थी और खास कर क वो मुझे कुछ ज्यादा hi प्यार से परोस रही थी. मुझे उनका मेरा ऐसे केयर करना हमेशा hi ाचा लगता था. करुणा और नैना दीदी तो बात बात में मज़ाक कर hi रही थी. खैर ऐसे hi दिन भी निकल गया . अंकल आंटी करिश्मा दीदी मौसा मौसी सब वापिस चले गए थे मगर निधि दीदी यहीं रुक गयी . जाते जाते करिश्मा दीदी को मैंने वडा कर दिया था क मैं कल उनके घर आऊंगा क्यूंकि मेरा मोहित से मिलना अब ज़रूरी था . करुणा नैना दीदी ने मुझे अपने साथ बिठा कर मुझे घेरने की कोशिश की कल्पना को साथ मिला कर मैं निधि दीदी क सहारे उनसे बच गया. रत का खाना खाने क बाद जब मैं अपने कमरे में गया तो करुणा दीदी कमरे में आ धमकी और दरवाज़ा बंद कर क मेरे से चिपक गयी .

अमित : क्या कर रही हो दीदी कोई आ जायेगा .

करुणा : क्या करुणा कण्ट्रोल नहीं हो रहा , इतने दिन हो गए हैं तुमने मेरे साथ कुछ भी नहीं किया. तुम्हे ज़रा भी यद् नहीं अति क्या मेरी.

अमित : ऐसी बात नहीं है दीदी पर आप भी तो देखो यहाँ टाइम कहाँ होता है .

करुणा : मुझे कुछ नहीं पता , आज रत मैं तुम्हारे कमरे में आउंगी तुम बस दरवाज़ा खुला रखना .

अमित : दीदी आप समझा करो सब घर में हैं ऐसी बेवकूफी कैसे कर सकती हो आप

करुणा : मुहब्बत और जंग में सब जायज़ है डार्लिंग. इतना खतरा तो उठाना hi पड़ेगा . वैसे भी खतरा हो तो मज़ा भी ज्यादा अत है.

तभी बहार से किसी क कदमो की आहत हुई तो दीदी एक डैम से पीछे हैट गयी और मुझे आँख मरते हुए कमरे से निकल गयी. मैं तो करुणा दीदी की इस हरकत पर सोच में पद गया . घर में सबके होते ऐसा कुछ करना बहुत बड़ी गलती है कोई भी आ सकता है . वैसे भी मेरे कमरे में कोई न कोई तो आ hi जाता है . और ऊपर से कल्पना भी तो उनके साथ hi कमरे में सोने वाली थी कहीं उसे कोई शक हो गया तो. मैं बस करुणा दीदी को मन करने क बारे में सोच रहा था क एक बार फिर निधि दीदी मुझे बचने आ गयी .

निधि : क्या सोच रहे हो ?

अमित : कुछ भी तो नहीं , आप यहाँ इस वक़्त ?

निधि : तुमसे बात करने को मन कर रहा था तो आ गयी. तुम बिजी तो नहीं हो न ? या को और आने वाला है ?

अमित : और कौन आएगा ? और वैसे भी जब आप मेरे साथ हो तो किसी और की क्या ज़रूरत है ?

मेरी इस बात पर निधि दीदी क चेहरे पर स्माइल आ गयी और वो मेरी आँखों में देख कर शर्माने लगी .

निधि : मैं आज यहीं सो जॉन तो कोई दिक्कत तो नहीं ?

मुझे तो ये आसान रास्ता मिल गया था करुणा दीदी को मन करने क लिए . निधि दीदी क होते मुझे कुछ कहने की ज़रूरत hi नहीं थी.

अमित : इसमें पूछने की क्या ज़रूरत है दीदी , आप को मन कर सकता हूँ मैं भला ?

निधि : तो चलो फिर आराम से लेट कर बातें करते हैं.

मैं और दीदी दोनों बीएड पर लेट गए . दरवाज़ा दीदी ने खुद hi लॉक कर दिया था . मैं करवट क बल लेट कर दीदी की तरफ देख रहा था . वो भी मेरी तरह करवट क बल लेती बस मुझे देखे जा रही थी

अमित : क्या देख रही हो दीदी ?

निधि : कुछ नहीं , बस तुम्हे देख रही हूँ. इतने दिन तुमसे दूर थी तो ऐसे लग रहा था जैसे बरसों हो गए हो तुम्हे देखे हुए .

अमित : ऐसा क्यों ? फ़ोन पर तो बात कर hi लेती हो आप मेरे साथ .

निधि : बात करने से तसल्ली तो हो जाती है पर तुम्हे सामने देख कर hi ाचा लगता है .

अमित : आप मेरी इतनी परवाह करोगी तो शादी क बाद आपका दिल hi नहीं लगेगा फिर जीजू से क्या कहोगी ? हूँ ो तो मुझसे hi नाराज़ होंगे न

निधि : तुम बार बार मेरी किसी और से शादी की बात क्यों करते हो ? मैं तुम्हे छोड़ कर किसी और क साथ शादी नहीं करने वाली.

अमित : पर शादी तो आपको करनी hi पड़ेगी न दीदी. एक न एक दिन सबकी होती है. और आप ने तो कहा था आप मुझे बताएंगी आप किसे पसंद करती हैं .

निधि : वो कल पता चल जायेगा तुम्हे . कल मेरे साथ चल रहे हो तुम .

अमित : क्या जीजू भी वहां आने वाले हैं ? वैसे वो करते क्या हैं?

निधि : मैंने कहा न कल सब पता चल जायेगा. और कुछ नहीं कहना मुझे .

अमित : ाचा ठीक है , तो कोई और बात करलो .

निधि दीदी कुछ देर खामोश रही और मुझे देखती रही फिर बोली .

निधि : मैं तुम्हे कैसी लगती हूँ?

अमित : आप तो मेरी सबसे बेस्ट दीदी हो ये मैं सबके सामने भी कह सकता हूँ चाहे फिर कोई नाराज़ hi क्यों न हो जाये .

निधि : मैं वो नहीं पूछ रही , मतलब ….. एक लड़के की नज़र से बताओ

अमित : ये आप क्या कह रही हैं दीदी , मैं आपको भला उस नज़र से कैसे देख सकता हूँ

हम दोनों क बीच कुछ पल ख़ामोशी रही फिर मेरे मन में आया क शायद दीदी इस लिए पूछ रही हैं क कल वो जीजू से मिलने वाली हैं तो कोई सलाह लेना चाहती होंगी.

अमित : ाचा ,,, अब समझा ,, जीजू को इम्प्रेस करने का सोच रही हैं न आप ? आपको कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं दीदी . ऊपर वाले ने आपको ऐसा बनाया है क कोई भी आपको देख कर अपने होश खो देगा. आप जैसी लड़की को तो कोई किस्मत से hi प् सकता है . आप सूरत से जितनी अछि हैं उससे भी ज्यादा आप सीरत से अछि हैं. एक हमसफ़र क रूप में आप जैसी लड़की पाना ऊपर वाले क वरदान से काम नहीं. जीजू ने तो ज़रूर कोई मोती दान किये होंगे जो आप उनको मिल गयी .

मेरे मुँह से तारीफ सुन कर निधि दीदी की आँखों में ख़ुशी साफ़ नज़र आ रही थी और साथ hi उनके गलों पर आती गुलाबी रंगत बता रही थी क वो शर्मा रही हैं ऐसी तारीफ सुन कर .

निधि : क्या सच में मैं ऐसी लगती हूँ तुम्हे ?

अमित : आप क्या हो ये तो मैं बयां hi नहीं कर सकता वो क्या है न क मैं कवि नहीं हूँ वर्ण आप पर ढेर साडी कविताएं ज़रूर लिख देता .

निधि : तुमने इतना कह दिया ये hi मेरे लिए बहुत है . मोती दान तो मैंने किये होंगे जो तुम मुझे मिले .

अमित : लो इसमें मोती दान वाली कैसी बात ? मैं तो आपके साथ साथ नैना दीदी करुणा दीदी नेहा दीदी का भी भाई हुआ न तो क्या सबने मोती दान किये हैं ? नहीं ये तो मैंने hi अचे कर्म किये हैं क मुझे इतना प्यार करने वाले मिले हैं.

निधि : मैंने कह दिया सो कह दिया , वैसे तुम्हे कैसी लड़की चाहिए ? क्या तुम मेरे जैसी किसी लड़की से शादी कर सकते हो ? मतलब जो बिलकुल मेरी तरह हो दिखने में भी और हर बात में . समझ लो मेरी कॉपी या मुझे hi इमेजिन कर लो.

अमित : ऐसा कभी नहीं हो सकता

निधि : क्यों ?

अमित : आप मेरी दीदी हो भला मैं आपको कैसे इमेजिन कर सकता हूँ .

निधि : क्यों नहीं कर सकते , इमेजिन करने को hi तो कह रही हूँ. प्लीज बताओ न , अगर मेरे जैसी कोई लड़की तुम्हे मिले तो क्या तुम शादी कर लोगे ?

अमित : ऐसा हो hi नहीं सकता , क्यूंकि भगवन क पास इतना भी फ्री टाइम नहीं क वो दोबारा आप जैसी कोई लड़की बनाने में अपना इतना समय लगाए. पहले hi आप पर उसने बहुत टाइम लगाया है .

निधि दीदी ने क बार फिर से शर्मा गयी और मेरे करीब हो कर अपना चेहरा मेरी छाती में छुपाने लगी .

अमित : एक तो आप शर्माती बहुत हो पता नहीं जीजू से बात कैसे करोगी कल .

निधि : उसकी चिंता मत करो मैंने सब सोच लिया है. तुम बस मेरे साथ रहना और मेरा साथ देना .

अमित : वो तो मैं आपके साथ hi हूँ पर आप करने क्या वाली हो कल ?

निधि : कल पता चल जायेगा .

अमित : ठीक है तो अब सोते हैं वर्ण साडी रत बातों में hi निकल जाएगी.

निधि : ठीक है पर अपनी ये बाज़ू यहाँ करो ऐसे

दीदी ने खुद hi मेरी बाज़ू अपनी तरफ बीएड पर पूरी खोल ली और तकिया हटा कर अपना और मेरी बाज़ू पर रख लिया .

अमित : पर आपके पास तकिया है तो

निधि : मुझे ये hi तकिया पसंद है बस , अब सो जाओ आराम से .

मैंने और कुछ नहीं कहा क्यूंकि दीदी ऑंखें बंद कर क मेरी बांह पर सर टिकाये लेट चुकी थी और उनके चेहरे पर एक मनमोहक मुस्कराहट थी जिसे देख मेरी कुछ कहने की hi हिम्मत hi नहीं हुई . दीदी को देखते देखते मेरी भी आँख लग गयी.

वहीँ निधि आँखें बंद किये बस अमित क पास होने क एहसास का hi आनंद ले रही थी. कल वो अपने दिल की बात कैसे अमित से कहेगी ये सोच सोच कर वो अंदर से घबरा रही थी पर अपने माता पिता द्वारा शादी क लिए बार बार दबाव देने से अब उसके पास ऐसे समय ख़तम हो गया था. पहले तो वो अमित की स्टडी पूरी होने तक रुकना चाहती थी पर अब जब उसके पापा ने बता दिया था क उन्होंने उसके लिए लड़का पसंद कर लिया है तो निधि ने अब फैसला कर लिया था क हर हल में वो अपने दिल का हल अमित को बता कर रहेगी और भगवन की मर्ज़ी भी. कुछ देर जब अमित की तरफ से किसी तरह की हलचल न हुई तो निधि ने धीरे से ऑंखें खोल कर देखा तो अमित को सोया हुआ पाया. अमित को चैन से सोता हुआ देख कर निधि को उस पर बहुत प्यार आया और उसने आगे बढ़ कर अमित क गाल पर चुम्बन जरह दिया . पर इतने से दिल की प्यास कहाँ बुझती है. निधि क होंठ खुद बा खुद अमित क होंठों पर आ गए और धीरे से उसने अमित क होंठों को चूम लिया. कुछ पल वो इस प्यार भरे एहसास का आनंद उठाना चाहती थी पर तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई और निधि एक डैम से घबरा गयी. निधि की धड़कन एक डैम से ऐसे तेज़ हो गयी थी जैसे उसकी चोरी पकड़ी गयी हो. निधि कुछ सोचती या समझती उससे पहले hi एक बार फिर दरवाज़े पर दस्तक हुई. ये दस्तक बहुत धीमे थी और वो भी रत क 12 बजे . निधि तो बेचारी अपनी छोटी पकडे जाने से दर रही थी . उसने इतना भी न सोचा क आखिर इतनी देर रत इस तरह धीमे से कौन दरवाज़ा खटखटा रहा है और वो भी इतने धीमे. इससे पहले की एक बार फिर दरवाज़े पर दस्तक होती निधि अपनी धड़कनों को संभालती हुई बीएड से उठी. वो नहीं चाहती थी क अमित की नींद ख़राब हो. इस लिए जल्दी से वो नंगे पाऊँ hi दरवाज़े पर जा पहुंची और दरवाज़े को खोल दिया . निधि तो बेचारी अंदर से खुद hi दरी हुई थी जैसे उसे बहार खड़े शख्स ने देख लिया हो. मगर जैसे hi दरवाज़ा खुला तो सामने करुणा थी. दोनों hi नहीं क दूसरे को देख कर शॉकेड हो गयी. निधि जहाँ अपनी चोरी पकडे जाने से दर रही थी वहीँ करुणा इस वक़्त निधि को अमित क कमरे में देख कर दर गयी. क्यूंकि वो तो अमित क साथ प्यार का झूला झूलने आयी थी . निधि को यहाँ उसने सोचा भी नहीं था. अब उसे दर था क इतनी रत को यहाँ आने का वो क्या बहाना बनाएगी. पर इस मामले में नैना और करुणा दोनों hi उस्ताद थी. निधि तो बेचारी भोली थी मगर ये दोनों चांट थी.

निधि : करुणा तुम यहाँ , इस वक़्त ?

करुणा : वो दीदी,, वो मैं पानी पिने उठी थी तो आपको आपके कमरे में न पाकर मुझे टेंशन हो रही थी तो आपको देखने चली आयी. मैं तो दर hi गयी थी . जब से मां पर गुंडों ने हमला किया है मुझे हर बात पर दर लगने लगा है.

निधि : तुम ऐसे hi घबरा रही हो , यहाँ भला कोई ऐसा करने का भी सोच सकता है ? जाओ तुम जा कर आराम करो . इतनी रत तक तुम जग क्यों रही थी? और ये कैसे कोड़े पहने हुए हैं तुमने?

करुणा अमित को रइज़हाने क लिए एक भड़कीली निघ्त्य पहन कर आयी थी. इस निघ्त्य में उसके चुचों क बीच की घाटी साफ़ नज़र आ रही थी. और फिटिंग भी ऐसी की सब साफ़ दिख रहा था . निधि ने करुणा को इस रूप में देखा तो उससे पूछ hi लिया .

करुणा : हाँ वो ये वो कल्पना की है , मैंने सोचा आज मैं इसे तरय के क देखती हूँ. कैसी लग रही है दीदी ?

निधि : ऐसे कपडे शादी क बाद hi पेहेनना वो भी अगर तुम्हारे हस्बैंड चाहे तो. अगर किसी ने देख लिया तो ाचा नहीं होगा . जाओ जाकर अपने कमरे में सो जाओ .

करुणा : जी ाचा दीदी , वैसे आप यहाँ क्या कर रही थी दीदी ? आप जग रही हैं अमित कहाँ है?

करुणा ने निधि क माथे पर आये पसीने और होंठों को देखा तो उसे ये अजीब लगा . साथ hi निधि नंगे पाऊँ इस ठण्ड क मौसम में कड़ी थी जबकि उसके गाल लाल हो रहे थे . आँखों में गुलाबी डोरे इस बात का सुबूत थे क निधि अंदर से गरम है जबकि बहार ठण्ड थी.

निधि अब करुणा क इस सवाल से एक बार तो अंदर तक हिल गयी. जिस तरह से करुणा उसे गौर से देख रही थी उसे भी लगा क कहीं उसे कुछ नज़र तो नहीं आ गया . इसी चक्कर में निधि से गलती हो गयी. करुणा को जाने का कह वो जल्दी से पीछे मुद गयी और दरवाज़ा एक डैम से बंद कर दिया जबकि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था. वहीँ करुणा निधि की इस हरकत पर मंद मंद मुस्काती अपने कमरे में वापिस लौट गयी. उसे अमित क साथ हसीं रत न मिल पाने का मलाल नहीं था बल्कि निधि की हालत देख उसे शक की एक वजह मिल गयी थी .

निधि दरवाज़ा बंद कर क अपने सीने पर हाथ रखे कड़ी थी . करुणा की नज़रें और उसके सवाल से निधि अभी तक अंदर दर क मरे कुछ समझ नहीं प् रही थी. जैसे नयी नयी प्यार में पड़ी कोई अल्हड छोटी सी बात पर hi घबरा जाती है पकडे जाने क दर से , ऐसा hi हल निधि का भी हो रहा था. एक नज़र अमित को देख वो जल्दी से भाग कर बाथरूम में घुसी और शीशे में खुद को देखने लगी. अछि तरह खुद को देखने क बाद उसे एहसास हुआ क ऐसा तो कुछ था hi नहीं फिर वो ऐसे hi क्यों दर गयी.

निधि ( मन में ) मैं भी कितनी पागल हूँ , उसे भला कैसे कुछ पता चलेगा ? अभी से उतना दर लग रहा है तो कल को सबके सामने कैसे कह पाऊँगी क मैं उससे प्यार करती हूँ . खुद को स्ट्रांग बनाओ निधि वर्ण कहीं तुम अमित को ……. नहीं नहीं , ऐसा नहीं होगा . मैं अमित क बिना नहीं रह सकती .

कुछ देर कल क बारे में सोच कर निधि वापिस आ कर बीएड पर अमित क साथ hi लेट गयी और पहले की तरह चिपक कर सो गयी .

‘ मैडम बिल्ला क बारे में इनफार्मेशन मिली है . वो और उसके साथी क्सक्सक्सक्स गाओं में छिपे हुए हैं. ‘

एक इंस्पेक्टर ने ऋतू क सामने आ कर सलूट मरी और उसे ज़रूरी बात की खबर दी. ऋतू तुरंत अपनी जगह पर कड़ी हो गयी जैसे वो इसी खबर का इंतज़ार कर रही थी .

ऋतू : अभी क अभी 2 टीम्स बना कर निकलो. मुझे वो लोग हर हल में मेरे सामने चाहिए. और वो बिल्ला मुझे ज़िंदा चाहिए .

इंस्पेक्टर: पर मैडम वो एरिया क्सक्सक्सक्स डिस्त्त. में अत है.

ऋतू : मुझे कोई परवाह नहीं , उन लोगों को उठा कर मेरे सामने लाओ बाकि सब मैं देख लुंगी.

इंस्पेक्टर: जी मैडम , मैं अभी सबको इकठ्ठा करता हूँ.

ऋतू : यद् रहे खली हाथ मत आना .

इंस्पेक्टर: जी मैडम

इंस्पेक्टर क जाते hi ऋतू क चेहरे पर जीत क भाव थे . कुछ सोच कर वो वापिस चेयर पर बैठी और टेबल क नीचे से एक फाइल निकली . फाइल खोलते hi सामने बलजीत राइ की तस्वीर लगी थी.

ऋतू : अब देखती हूँ तुम्हे कौन बचता है. एक एक गुनाह की सजा भुगतने क लिए तैयार हो जाओ बलजीत राइ .

सुबह मेरी आँख जब खुली तो निधि दीदी मेरे सीने पर सर टिकाये एक बाजु और एक तंग मेरे ऊपर डेल लगभग आधी मेरे ऊपर hi थी. बिखरे बालों क नीचे उनका मासूम सा चेहरा इस वक़्त इतना हसीं लग रहा था क कुछ वक़्त मैं उन्हें निहारता रहा . ऐसा लग रहा था जैसे मैं अभी भी नींद में हूँ और कोई सपना देख रहा हूँ. दीदी क चेहरे पर आयी ज़ुल्फ़ों को मैंने हाथ से पीछे हटाया तो उनका चेहरा पूरी तरह से मेरे सामने आ गया . कुछ देर बस मैं उन्हें एक तक देखता रहा . मुझे उनकी रत की बात यद् आने लगी क अगर मुझे उनके जैसी लड़की मिले तो क्या मैं उसे पसंद करूँगा. ये बात मन में एते hi मैं उन्हें उसी नज़र से देखने लगा . पर फिर मुझे अपनी hi इस हरकत पर बुरा लगने लगा. वो मेरी दीदी थी जो मुझे सबसे ज्यादा प्यार करती थी और मैं उन्हें ऐसे देख रहा था. खुद को काबू करते हुए मैंने धीरे से दीदी को अपने ऊपर से हटाया और उनके नरम बदन को बीएड पर दाल कर उठ गया. एक नज़र मैंने फिर से दीदी को देखा तो वो थोड़ा कसमसा रही थी और नींद में hi करवट बदल ली . उनकी कमर से कमीज अस्त व्यस्त हो कर उनकी नंगी कमर दिखा रही थी और करवट क बल होने से उनके चूतड़ कुछ ज्यादा hi उभर आये थे. मेरी नज़र एक बार फिर उन पर जैम गयी. इससे पहले क मेरा मन और बहकता मैं जल्दी से बाथरूम में घुस गया और अपने चेहरे पर ठंडा पानी डाला. खुद को कोसते हुए मैं जल्दी से तैयार हो कर घर से निकल गया अखाड़े की तरफ. अखाड़े में मेहनत करने क बाद मैं घर वापिस आ गया . दीपिका ममी ने मुझे दूध का गिलास दिया और मैं अपने कमरे में तैयार होने चला गया . अभी मैं नाहा कर टॉवल लपेटे कपडे ढूंढ रहा था क निधि दीदी कमरे में आ गयी.

निधि : जल्दी से तैयार हो जाओ और नाश्ता करते हैं. यद् है न आज तुम मेरे साथ चल रहे हो . कोई पूछे तो कह देना किसी से मिलने जाना है पार्टी का किसी को मत बताना .

निधि दीदी ने आते hi मुझे हिदायत दे दी. वो शायद अभी अभी नाहा कर hi आयी थी जिस वजह से उनके बाल कुछ गीले थे और खुले छोड़ रखे थे . एक सफ़ेद सूट में जिस पर क गुलाबी फूल बने हुए थे उसे पहने हुए दीदी खुद फूलों सी लग रही थी. मैं तो एक तक उन्हें देखता hi रह गया

निधि : ठीक है न ??? अछि लग रही हूँ ??

मैं दीदी क इस सवाल पर हड़बड़ा गया .

अमित : हह हाँ हाँ ,, आप हमेशा की तरह बहुत अछि लग रही हैं. मैं कपडे बदल कर आ रहा हूँ. पर क्या हमें अभी चलना है ?

निधि : हाँ, नाश्ता कर क हम निकल जायेंगे . मुझे थोड़ा काम भी है .

अमित : ठीक है.

उसके बाद दीदी मुस्कुराती हुई नीचे चली गयी और मैं एक बार फिर खुद को अपनी इस हरकत पर कोस्टा हुआ कपडे पहनने लगा . नीचे आ कर मैंने दीदी क साथ hi नाश्ता किया . बाकि सब भी उठ चुके थे मगर नैना दीदी और उनकी मंडली अभी तक नीचे नहीं आयी थी. इतनी जल्दी तैयार हुए देख कर दिव्या मौसी ने मुझसे और दीदी से पूछा तो दीदी ने और मैंने वही कह दिया जो दीदी ने मुझे कहा था . नाश्ता करने क बाद हम दोनों दीदी की कार में hi शहर की तरफ निकल लिए और एक घंटे से पहले hi शहर पहुँच गए .

निधि : ाचा मुझे शाम क लिए कुछ तयारी करनी है. तुम चाहो तो साथ आ सकते हो पर बोर हो जाओगे. अगर कहो तो तुम्हे तब तक क लिए कहीं छोड़ दूँ?

अमित : ठीक है तो आप मुझे मोहित क घर hi छोड़ दीजिये .

निधि : ये सही रहेगा. चलो फिर मैं तुम्हे वहीँ छोड़ देती हूँ.



निधि दीदी और मैं मोहित क घर पहुँच गए . अंकल तो घर नहीं थे पर आंटी करिश्मा दीदी ज़रूर घर थे जो हॉल में hi बैठे मिल गए . मुझे और दीदी को देख के दोनों बहुत खुश हुए और फिर बातों का सिलसिला चला . निधि दीदी एक घंटा वहां रही और फिर चली गयी. मैं मोहित से बात करना चाहता था तो उसी क कमरे में चला गया जहाँ वो अभी भी सो रहा था. मैंने दरवाज़ा अंदर से लॉक किया और जाकर उसे जगाया .
 
अपडेट 262



‘ तू यहाँ क्या कर रहा है ? जा जा कर अपनी फॅमिली क साथ मज़े ले मुझे मेरे हल पे छोड़ दे. कोई ज़रूरत नहीं तेरी यहाँ पर ‘

मैंने मोहित को उठाया तो वो मुझे सामने देख कर ऐसे भड़का जैसे हम दोस्त हो hi न . मैं तो उसके ऐसे रिएक्शन से सोच में पद गया.

अमित : ये कैसी बातें कर रहा है तू ? तेरा दिमाग तो ठीक है? और मैं कौन से मज़े ले रहा हूँ ? सेल अभी अभी मेरे बाबा पर हमला हुआ है और तू पता लेने तक नहीं आया

मोहित : तूने मेरा हल पूछा था जो मैं पूछने अत ? तुझे कहा था क चल मेरे साथ मीनल से बात करने पर तू आया ? जब तुझे मेरी परवाह नहीं है तो मैं क्यों करूँ. वैसे भी सब मतलब क हो यार होते हैं. वो भी मतलब क लिए hi मेरी गफ बानी थी और तू भी .

मोहित की बात सुन मुझे गुस्सा आ रहा था . उसने एक पल में मुझे मतलबी कह दिया .

अमित : तू मुझे मतलबी कह रहा है ? बता कौन सा मतलब निकला मैंने तेरे साथ ? और तू मीनल को क्यों मतलबी बोल रहा है? सेल यद् है उस रत पार्टी में तू क्या कर रहा था रॉय क साथ. एक तो खुद गलती की और अब उल्टा दूसरों पर उंगली उठा रहा है .

मोहित : ये रत जो भी हुआ नशे में हुआ था . मैंने जान बुझ कर कुछ नहीं किया मगर मीनल तो होश में थी. फिर उसने कैसे किसी और क साथ …… ाचा हुआ जो सब सामने आ गया वर्ण मैं पागल बना हुआ था. सच्चा प्यार समझ कर उसके आगे पीछे घूम रहा था . और वो ,,, उससे तो अछि रॉय है काम से काम उसका दिल तो साफ़ है .

मोहित की बातें सुन कर मुझे शक हो गया क ज़रूर इसके दिमाग में मीनल को लेकर गलत बातें डाली गयी है और ये काम शायद रॉय hi कर रही होगी

अमित : तुझे किसने कहा क मीनल किसी और क साथ कुछ कर रही थी? और तूने मन भी किसे लिया ये सब. कोई साबुत है तेरे पास जिससे पता चले क वो कुछ गलत कर रही थी? अगर है सुबूत तो दिखा फिर मैं तुझे नहीं रोकूंगा कुछ भी करने से.

मेरी बात सुन कर मोहित चुप हो गया . यानि क उसने सुनी सुनाई बातों पर यकीन कर लिया था .

अमित : क्यों ,, अब चुप क्यों हो गया ? दिखा कोई सुबूत है तो . तू इतना बेवक़ूफ़ किसे बन गया क किसी में तुझे मीनल क बारे में कुछ भी कहा और तू मन गया . एक तो तूने गलती की और ऊपर से उसे मानाने की जगह तू अकड़ रहा है . क्या यही है तेरा प्यार ?

मोहित : मुझे भाषण मत दे , गया था मैं उसे मानाने पर उसने साफ़ कह दिया क वो मेरी शकल देखना नहीं चाहती. हो गयी मुझसे गलती मैंने माफ़ी भी मांगी अब और क्या करता ? उसे खुद पर इतना hi घमंड है तो मुझे भी उसकी परवाह नहीं है.

अमित : ये सब बातें तेरे दिमाग में रॉय ने hi डाली है न? सेल तुझे नज़र नहीं आ रहा क वो तुम दोनों क बीच दरार दाल रही है. और ये शराब पि कर तू साबित क्या करना छह रहा है? एक तरफ कह रहा है क तुझे मीनल की परवाह नहीं तो फिर शराब क्यों पि रहा है और अगर उसकी परवाह है तो फिर रॉय से क्यों मिल रहा है ? इस तरह तू सब कुछ बर्बाद कर लेगा. तुझे पता भी है दीदी कितना परेशां है तेरी वजह से ? और अगर इस बारे में अंकल आंटी को पता चल गया तो क्या होगा?

मोहित : मुझे कुछ नहीं पता , मेरा जो दिल करेगा वो मैं करूँगा . शराब पि कर काम से काम होश तो नहीं रहता जो मतलबी लोगों क बारे में सोच सकूँ . और अगर मेरी वजह से मेरे माँ डैड को तकलीफ है तो मैं घर से दूर कहीं चला जाऊंगा . पर अब मैं वही करूँगा जो मेरा दिल करेगा . और रही रॉय की बात , तो सुनी ने मुझे सहारा दिया है जब मेरे अपने मुझे छोड़ कर अपनी अपनी लाइफ एन्जॉय कर रहे थे.

अमित : तू गलत समझ रहा है. रॉय तेरे साथ …..

मोहित : मुझे कुछ नहीं सुन्ना है रॉय क बारे में . तुझे कोई और बात करनी है तो कर नहीं तो चला जा

अमित : तुझे मेरी बात पर यकीन नहीं है न. तो ठीक है सचाई तेरे सामने मैं लेकर रहूँगा . तू तब तक उससे दूर रह .

मोहित : मैं क्यों उससे दूर रहूं? वो मेरी दोस्त है मेरा प्यार है .

अमित : घंटा प्यार है , तुझे उस पर यकीन है न तो बस 2 दिन का टाइम दे मुझे तब तक तू जो चाहे कर जहाँ जाना है जा पर तू रॉय से नहीं मिलेगा . अगर तेरे दिल में मेरी थोड़ी सी भी जगेह है तो मेरी बात मन .

मोहित मेरी इस बात पर कुछ देर खामोश रहा फिर बोलै

मोहित : ठीक है पर सिर्फ 2 दिन , अगर तू सबूत न दे पाया तो फिर कभी उसके बारे में कुछ मत बोलना

अमित : वडा , बस 2 दिन.

मोहित मेरी बात सुन कर बीएड से उठा और बाथरूम में घुस गया .

अमित : मन में ) तू चाहे कुछ भी सोच पर तू मेरा दोस्त है और मैं अपने दोस्त को बर्बाद नहीं होने दूंगा. वडा करता हूँ तुझे तेरा प्यार वापिस लौटाऊंगा और उन सबको सबक भी सिखाऊंगा जो तुम दोनों को बर्बाद करना चाहते हैं . फिर मैं नीचे आ गया जहाँ आंटी और करिश्मा दीदी बैठी हुई थी .

रमा : उठा गया मोहित या अभी भी सो रहा है

अमित : तैयार हो रहा है आंटी अभी आ जायेगा. अंकल कब आएंगे ?

रमा : उनका तो वो hi जाने कह कर तो गए हैं क कल तक आ जायेंगे फिर भी कुछ पता नहीं. वैसे तुम्हे तो कहीं जाना नहीं है न ? कल नए साल का पहला दिन है तो आज यहीं रुक जाओ.

अमित : नहीं क hi बात है आंटी , यहाँ रहूं या गाओं. आप क्यों नहीं चलती मेरे साथ.

करिश्मा : तुम्हे रहने को बोलै तो तुम माँ को भी साथ ले जाने की बात करने लगे . ये क्या बात हुई ? क्या तुम रुक नहीं सकते या फिर उसके लिए भी निधि दीदी से कहना पड़ेगा . उन्ही क लिए आये हो न आज ?

अमित : उनके साथ मुझे जाना है पर शाम को मगर यहाँ मैं आपके कहने पर hi आया हूँ .

मैंने ये करिश्मा दीदी की आँखों में देख कर कहा तो वो खामोश हो गयी मेरी आँखों में देखते हुए .

रमा : तो फिर आज रत तुम दोनों यहीं क्यों नहीं रुक जाते. शाम को कहाँ जाना है वैसे ?

अमित : दीदी की किसी फ्रेंड ने कोई पार्टी राखी है शायद और वो अकेले जाती नहीं हैं कहीं .

रमा : अछि बात है , फिर तय रहा , शाम की पार्टी क बाद तो रत हो hi जाएगी तुम लोगों को तो फिर रत तुम कहीं और नहीं जाओगे सीधा हमारे पास hi आओगे .

इतने में मोहित सीढ़ियों से नीचे अत हुआ दिखाई दिया तो आंटी ने उसे बुला लिया .

रमा : तुम कहाँ चल दिए ? इधर आओ मुझे तुमसे कुछ बात करनी है.

मोहित : मैं बाद में आपकी बात सुन लूंगा अभी मुझे ज़रूरी काम से जाना है . आप अमित का hi ध्यान रखिये

मोहित ने मेरा नाम ऐसे लिया जैसे रंज कर रहा हो.

रमा : ये क्या तरीका है बात करने का . इधर आओ मेरे पास .

मोहित : बाद में माँ , जो भी कहना हो बाद में कह लेना .

मोहित बिना पीछे मुड़े कहता हुआ बहार निकल गया और गाड़ी चलने की आवाज़ आयी जिसका मतलब था वो चला गया . करिश्मा दीदी की नज़र बहार hi लगी थी. वो मोहित को जाते देख रही थी. इधर रमा आंटी क चेहरे पर भी थोड़ा गुस्सा नज़र आ रहा था .

रमा : पता नहीं इस लड़के को हो क्या गया है . आज कल घर पर रुकता hi नहीं और न कोई काम करता है

अमित : रिलैक्स आंटी , कोई ज़रूरी काम होगा उसे .

रमा : दिख रहा है उसे क्या ज़रूरी काम है . तुम यहाँ बैठे हो और वो ऐसे चल दिया जैसे कोई अनजान बैठा हो. कल भी गाओं नहीं गया. तुम दोनों क बीच किसी बात पर झगड़ा तो नहीं हुआ ?

अमित : नहीं ऐसी कोई बात नहीं है आंटी आप ऐसे hi सोच रही हैं

रमा : ऐसे hi सोच रही हूँ , छोटी बची हूँ न कोई.

अमित : हाँ थोड़ी सी बड़ी हैं शायद पर हैं बची hi .

मैंने ये बात आंटी की चुकी को देख कर कही और आँख मर दी जिससे आंटी शर्मा गयी. वो मेरा इशारा समझ गयी थी. मैंने ये जान बुझ कर किया ताकि उनका ध्यान हटा सकूँ.

रमा : बदमाश , तुम्हारे कान भी खींचने पड़ेंगे .

अमित : मैंने कब मन किया है आंटी जो मर्जी पकड़ कर खिंच लो.

मैंने इस बार अपने लैंड की तरफ इशारा कर क कहा तो आंटी शर्म से पानी पानी हो गयी .

रमा : मैं तुम लोगों क लिए कुछ लेकर अति हूँ. तुम्हे तो मैं बार में बताती हूँ. बहुत बोलने लगे हो.

आंटी शर्माती हुई उठ कर चली गयी . मैं आंटी को जाते हुए देखता रहा . उनकी कमर कुछ ज्यादा hi हिचकोले खा रही थी या वो जान बुझ कर ऐसा कर रही थी . आंटी की गांड कुछ ज्यादा hi मटक रही थी जिसे देख कर एक बार तो मन किया क अभी उठा कर उन्हें बैडरूम में ले जॉन और पेल दूँ . मैं आंटी को जाते देख hi रहा था क करिश्मा दीदी का यद् आते hi मैंने उनकी तरफ देखा तो वो मुझे hi देख रही थी. यानि उन्होंने मुझे देख लिया था आंटी को घूरते हुए. मैं करिश्मा दीदी को देख कर हड़बड़ा गया और नज़रें झुका ली.

करिश्मा : आज रत यहीं रुक रहे हो न ? मैं दीदी से बात कर लुंगी .

अमित : ठीक है .

करिश्मा : मोहित से क्या बात हुई तुम्हारी ? उसने कुछ बताया ?

अमित : मुझे लगता है उसे कोई भड़का रहा है . मुझे थोड़ा टाइम दीजिये . मैं खुद जा कर देखता हूँ क क्या चक्कर है. आप चिंता मत कीजिये सब ठीक हो जायेगा .

करिश्मा : तुम पर hi तो भरोसा है मुझे .

फिर आंटी खाने को कुछ स्नैक्स वगैरह ले आयी . निधि दीदी को पता नहीं कितना टाइम लग्न था तो मैं आंटी और करिश्मा दीदी क साथ बैठ कर बातें करता रहा . दोपहर का खाना खाने क बाद हम आराम करने चले गए .

दूसरी तरफ पुलिस की 2 टीम बिल्ला और उसके साथियों को उठाने रत को निकल गयी थी और सुबह 3 बजे उस जगह पर धावा बोल दिया गया जहाँ बिल्ला और उसके साथियों क छिपे होने का अनुमान था . किस्मत अछि निकली क वो लोग रत को ज्यादा शराब पि कर सोये थे इस लिए होश में नहीं थे . उनके सँभालने से पहले पुलिस ने उन सब को दबोच लिया. ये खबर तुरंत इंस्पेक्टर ने ऋतू को दी जो सुबह क इस पहर में भी जग रही थी और इंतज़ार में थी खबर क. जैसे hi उसके कानो में इंस्पेक्टर की आवाज़ पड़ी क बिल्ला साथियों समेत ज़िंदा काबू कर लिया गया है तो ऋतू एक बार उछाल hi पड़ी. एक मामूली सा केस जिसकी पुलिस वालों की नज़र में कोई खास एहमियत भी न थी उस केस क लिए सप ऋतू सिंह जैसी सख्त अफसर इतनी ज्यादा एक्ससिटेड थी ये बात तो कई पुलिस वालों क गले न उतर रही थी पर मुँह सबके बंद थे . ऋतू इधर अपने सरकारी आवास में खबर सुनने क बाद उछाल पड़ी . उसकी नींद तो मनो हवा hi हो गयी. उसका दिल कर रहा था क वो अभी जाये और बलजीत राइ को घसीट कर हवालात में दाल दे और अमित को जाकर खुद बताये क उसने उस पर और उसके परिवार पर हमला करने और करवाने वाले को सलाखों क पीछे दाल दिया है. ये एक तरह से अपनी वफादारी और मुहब्बत दिखने का जरिया मात्रा था. कहीं न कहीं ऋतू दिल से अमित की नज़रों में अपना प्यार साबित करना चाहती थी चाहे इसकी ज़रूरत नहीं थी. खैर पुलिस टीम उन बदमाशों को काबू में कर क वापिस चल दी थी .

‘ hello , कहाँ रह गए तुम? मैं कब से तुम्हारी वेट कर रही हूँ . कब आओगे ?’ रॉय मोहित को फ़ोन कर क उसके आने क बारे में पूछ रही थी. पिछले 3 दिनों में मोहित की रूटीन सी बन गयी थी. वो रॉय क पास चला जाता जहाँ पहले मोहित को वो नशे में डुबो देती और फिर उसके साथ अपने जिस्म की आग ठंडी करती. मोहित को भी शराब और शबाब दोनों की लत लग रही थी जैसा की रॉय चाहती थी .

मोहित : मुझे कुछ काम है मैं आज नहीं आऊंगा .

रॉय : ये क्या बात हुई ? मुझसे नाराज़ हो क्या ? कोई गलती तो नहीं हो गयी मुझसे ? तुम कहो तो तुम्हारे पाऊँ में पद कर माफ़ी मांग लेती हूँ. प्लीज मुझसे ऐसे दूर मत जाओ. तुम्हारे लिए मैंने सब को छोड़ दिया और तुम ऐसे के रहे हो मेरे साथ .

रॉय जान बुझ कर ऐसी बातें कर रही थी ताकि मोहित क दिल में अपनी जगह पक्की कर सके .

मोहित : नहीं ऐसी बात नहीं है . वो मुझे सच में एक ज़रूरी काम है .

रॉय : सच कह रहे हो ? कहीं उस मीनल ने फिर से तुम्हे अपनी चिकनी चुपड़ी बातों में तो नहीं फंसा लिया ?

मोहित : कितनी बार कहा है उसका नाम मत लिया करो. मैं किसी काम से जा रहा हूँ.

रॉय : पर ऐसे अचानक कैसे ? कल तो तुम कह रहे थे क नई ईयर ईव हम साथ रहेंगे कल तक . अब कैसे अचानक तुम्हारा प्लान चेंज हो गया

मोहित : मैं आना तो चाहता था पर एक ज़रूरी काम आ गया . मैं शायद कल भी न पौन बहार जा रहा हूँ.

रॉय : पक्का और कोई वजह तो नहीं है न? देखो अगर कोई बात है तो प्लीज एक बार मुझसे बात ज़रूर करना .

मोहित : कोई भी ऐसी वैसी बात नहीं है तुम बस एक दिन और इंतज़ार कर लो फिर हम कहीं घूमने चलते हैं , किसी हिल स्टेशन पर.

रॉय : वावू , हम शिमला चलेंगे . शिमला की ठंडी वादियों में खूब मस्ती करेंगे . पर आज और कल मैं तुम्हारे बिना कैसे बिताउंगी मुझे समझ नहीं आ रही. तुम्हारे बिना अब तो एक पल भी मुझे चैन नहीं अत . तुम्हारे साथ बिताया एक एक पल मुझे बेचैन कर देता है .

रॉय पूरी कोशिश कर रही थी मोहित को एक्साइट करने की. उसे शक हो रहा था क कहीं किसी ने मोहित को रोका तो नहीं है . इस लिए वो तरह तरह से कोशिश कर रही थी क अगर कोई इसके पीछे है तो मोहित की ज़ुबान पर नाम आ जाये.

मोहित : मुझे भी तुम्हारे साथ बहुत मज़ा अत है डार्लिंग . सच कहूं तो अब तुम्हारे बिना मुझे भी ाचा नहीं लगेगा. बस एक दिन की बात और है फिर हम पूरा वीक साथ में होंगे . तुम्हारे एक एक अंग को जी भर क प्यार करूँगा और तुम्हारी गांड तो मैं खोल कर रहूँगा .

रॉय : तुम्हारी hi है जान , जब चाहो खोल लेना . मुझे इंतज़ार रहेगा .

मोहित : ठीक है अब मैं रखता हूँ , bye .

रॉय : मुउउउउआआह्ह bye जाएं , लव यू .

रॉय ने फ़ोन पर hi किश करने क बाद कॉल डिसकनेक्ट की और अपना दिमाग दौड़ने लगी. उसका दिल इस बात को मन hi नहीं रहा था क मोहित किसी काम से जा रहा है. फिर उसे यद् आया क उसने कल अमित से मिलने की बात की थी और वो भी मिलने क लिए मन गया था. आज मोहित यहाँ नहीं तो ये एक ाचा मौका था अमित को शीशे में उतरने का वैसे भी फ़ोन पे बात कर क वो इतना तो समझ गयी थी क अमित क साथ बात बन सकती है. इस लिए उसने फ़ोन पर उसका no . मिला दिया .

इधर मैं आराम से सोया पड़ा था क मोबाइल की रिंगटोन बजने से मेरी आंख खुल गयी. मुझे लगा निधि दीदी का फ़ोन होगा पर देखा तो अननोन no . था . फिर भी मैंने पिक कर hi लिया .

अमित : कौन है ?

रॉय : इतनी जल्दी भूल गए जनाब , मैं रॉय बोल रही हूँ. तुमने खुद तो फ़ोन करना नहीं सोचा खुद hi फ़ोन कर क तुम्हे यहाँ बुला लूँ. आज नई ईयर ईव है तो क्यों न नए रिश्ते की शुरुआत करें? क्या आज आ सकते तुम मुझसे मिलने ?

अमित : ओह !! तो आप बोल रही हैं मिस रॉय . वैसे ख्याल तो ाचा है आपका पर आप कौन से रिश्ते की बात कर रही हैं ? ज़रा खुल कर बताइये

रॉय : भोले मत बनो , सब जानते हो तुम. और खुद hi तो कह रहे थे क तुम्हारा क्या फायदा तो अब अपने फायदे की बात भी नहीं समझ रहे ? आज मैं अकेली हूँ , जल्दी से चले आओ , फिर आराम से बैठ कर बातें करेंगे

अमित : बस बातें ?? वो तो फ़ोन पर भी कर सकते हैं न फिर इसके लिए वहां आने की क्या ज़रूरत है ?

रॉय : और भी बहुत कुछ कर लेंगे पर पहले आओ तो. मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ.

अमित : सॉरी मिस रॉय आज तो नहीं आ सकता इस लिए आप आज अपने दोस्तों क साथ एन्जॉय कीजिये वैसे भी आज तो मोहित भी आपसे मिलने नहीं आएगा

मैं समझ गया था क रॉय क पास मोहित नहीं गया है . इसी लिए ये आज मुझे मिलने को बुला रही है . मोहित ने आखिर मेरी बात मन ली थी. अब रॉय को मैं इशारे से बताना चाहता था क मैं क्या कर सकता हूँ.

रॉय : तुम्हे कैसे पता क मोहित आज नहीं आएगा? क्या वो तुम्हारे साथ है?

रॉय की बेचैनी उसकी बातों से ज़ाहिर हो रही थी. मेरे होंठों पर एक स्माइल आ गयी रॉय क ऐसे घबराने से .

अमित : नहीं मेरे साथ तो नहीं है पर मैंने hi उसे कहीं भेजा है . और वो कल भी नहीं आएगा. रही मेरी बात तो मैं अभी उसके घर पर hi हूँ. और यहाँ सब मेरी बात मानते हैं चाहे वो मोहित हो या अंकल आंटी . वो छह कर भी मेरी बात नहीं ताल सकता . सॉरी मेरी वजह से तुम्हारा मज़ा ख़राब हो गया हो तो .

(रॉय को झटका तो लगा क मोहित क जाने क पीछे अमित का हाथ है पर खुद को संभल कर अब वो अमित को रिझाने क लिए आगे बात करने लगी .)

रॉय : वो तो मुझे पहले से hi पता है क वो तुम्हारी हर बात मंटा है . इसी लिए तो मैं चाहती हूँ क हम दोनों एक दूसरे को अचे से समझ लें . मैं तुम्हे किसी भी बात की कमी नहीं होने दूंगी और जो भी तुम कहोगे हर बात मानूंगी . आखिर मेरे देवर जो बनोगे तुम.

अमित ( मन में ) देवर ??? साली तुझे देख मैं क्या क्या बनता हूँ. मेरे दोस्त को बेवक़ूफ़ बना रही है पर मैं तेरी चल में फसने वाला नहीं .

अमित : ाचा !!! हर बात मानोगी ??? फिर तो आना hi पड़ेगा . देखता हूँ क्या क्या मानती हो . अगर मेरी कोई बात न मणि तो फिर देख लेना क अंजाम क्या हो सकता है.

रॉय : एक बार आओ तो , वडा करती हूँ खुश हो कर hi जाओगे .

अमित : फिर तो आना hi पड़ेगा , पर आज नहीं कल . कल क लिए तैयार रहना . नए साल की शुरुआत धमाकेदार करते हैं .

रॉय : ज़रूर , इंतज़ार रहेगा . बीईईईई

मैं रॉय से बात करने क बाद आगे क बारे में सोचने लगा . रॉय क मुँह से मुझे सचाई उगलवानी थी और उसका ये घिनोना चेहरा मोहित क सामने लाना था . कुछ देर मैं इस बारे सोचता रहा . इतने में निधि दीदी की कॉल आ गयी .

निधि : कहाँ पर हो ?

अमित : मैं तो मोहित क घर पर hi हूँ पर आप कहाँ हैं और कब आएँगी ?

निधि : वो मुझे यहाँ थोड़ा टाइम और लगेगा . मैंने इस लिए तुम्हे फ़ोन किया है क तुम एक घंटे तक क्सक्सक्सक्सक्स जगह आ जाओ. मैं यहीं मिलूंगी. यहीं से हम सीधे पार्टी में चल पड़ेंगे .

अमित : ठीक है मैं पहुँच जाऊंगा .

निधि : जल्दी आ जाना यहाँ एक काम और भी है.

अमित : कौन सा काम ?

निधि : पहले आओ तो . ाचा मैं रखती हूँ अब . बीईई .

निधि दीदी से बात करने क बाद मैं फ्रेश हुआ और नीचे आ गया . आंटी भी अपने रूम से बहार निकल कर हॉल में आ गयी. करिश्मा दीदी अभी उठी नहीं थी. आंटी क कैसे हुए स्तन टाइट सूट में कुछ ज्यादा hi बड़े नज़र आ रहे थे . मेरी नज़र वहीँ ठहर गयी जिसे आंटी ने देख लिया.

रमा : शर्म नहीं आती ऐसे घूरते हुए ?

अमित : शर्म तो अति है पर क्या करूँ , आप हो hi इतनी हॉट क कण्ट्रोल नहीं होता.

रमा : ये बातें किसी और को सुनाओ , अब तो तुम अपने आप मेरे करीब आते भी नहीं. अब लगता है तुम्हे पसंद नहीं मैं .

अमित : आपसे किसने कहा क पसंद नहीं आप ? अरे आप तो इतनी ज़बरदस्त हो क मन कर रहा है अभी पटक क शुरू हो जॉन .

रमा ( शरमाते हुए ) जातो बदमाश कहीं क , अगर इतना hi मन है तो चलो मेरे कमरे में . करिश्मा अभी सो रही है .

अमित : अभी फ़िलहाल तो मुझे जाना है. निधि दीदी बुला रही हैं. रत को पक्का मिलते हैं.

रमा : पक्का न ?

अमित : पक्का मेरी जान , तुम बस आगे पीछे तेल लगा कर रखना . आज रत गाड़ी दोनों सड़कों पर दौड़ेगी .

इतना कह कर मैं एक हाथ से आंटी की गांड मसल दी तो वो एक डैम से हड़बड़ा गयी.

रमा : क्या कर रहे हो , कोई देख लेगा तो क्या होगा पता है.

अमित : अभी तो आपने कहा क दीदी सो रही हैं और तो कोई है नहीं यहाँ .

रमा : इसी लिए इतनी शरारत कर रहे हो .

अमित : ाचा तो आंटी फिर मैं चलता हूँ .

रमा आंटी ने आगे बढ़ कर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख लिए और किश करने लगी.

रमा : ुम्माआह्ह्ह्ह. रत का इंतज़ार रहेगा .

मोहित क घर से निकल कर मैं बहार आया और ऑटो पकड़ क उस जगह पहुँच गया जहाँ का दीदी ने कहा था . ये एक बेऔति सलून था जो देखने से hi आधुनिक लग रहा तह. बहार कुछ लक्ज़री कार्स कड़ी थी. कुछ बड़े घर की औरतों को मैंने वहां एते जाते देखा: मैं ये देख सोच में पद गया क दीदी में आखिर मुझे ऐसी जगह क्यों बुलाया . वो तो ऐसे सजना संवारना पसंद नहीं करती और न hi कभी ब्यूटी पार्लर जाती हैं . मैं कुछ देर खड़ा रहा और जब दीदी नहीं दिखी तो उनको फ़ोन किया जिसे उन्होंने तुरंत उठा लिया .

निधि : आ गए तुम ?

अमित : हाँ दीदी , पर आपने मुझे यहाँ किस लिए बुलाया ? क्या आप भी यहीं हैं ?

निधि : हाँ , ाचा तुम रुको मैं अभी आयी .

कुछ hi पलों में दीदी अंदर से बहार निकलती हुई नज़र आयी तो मैं उन्हें देखता hi रह गया. मैंने कभी सोचा भी नहीं था क दीदी का ऐसा रूप भी देखने को मिल सकता है . निधि दीदी लाल रंग की शार्ट ड्रेस में थी जो की उनकी जांघों तक hi थी. पाऊँ में काळा सैंडिल जो क खास किसम क लग रहे थे और थोड़े हाई हील टाइप भी. एक तो दीदी पहले से hi अछि हाइट की थी ऊपर से हील. एक डैम मॉडल लग रही थी. बालों को खास स्टाइल में कट करके खुला छोड़ रखा था . और उनकी स्किन कुछ ज्यादा चमकदार लग रही थी. मैं दीदी को सर से ूँ तक देख रहा था और दीदी कब पास आ गयी इसका ख्याल भी नहीं रहा .

निधि : अछि लग रही हूँ न ? अमित !!! अमित!!!! ऐसे क्या देख रहे हो ? अछि तो लग रही हूँ न ?

अमित : हह हाँ ,,, हाँ ,,, दीदी . आप तो कमल की लग रही हो . मैंने तो पहचाना hi नहीं एक बार क ये आप हो . आप ने पहले तो कभी ऐसे कपडे पहने नहीं .

निधि : अचे नहीं लगे क्या ?

अमित : बहुत अचे हैं दीदी , आप एक डैम मॉडर्न लग रही हो . किसी फिल्म की हेरोइन की तरह . जीजू तो पक्का पागल हो जायेंगे आपको देख कर.

निधि : तुम्हे तो पसंद आया न ?

अमित : पसंद क्यों नहीं आएगा जब आप इतनी हसीं लग रही हैं .

निधि : वो तो तुम भी बहुत हैंडसम लग रहे हो .

अमित : पर आपके सामने कुछ भी नहीं दीदी.

निधि : अब क्या ऐसे hi तारीफ करते रहोगे या चलें भी ?

अमित : हाँ हाँ , चलिए दीदी , वर्ण यहीं भीड़ लग जाएगी. देखिये कैसे सब आपको hi देख रहे हैं.

मेरी बात सुन कर दीदी ने आसपास देखा तो कुछ लड़के और आदमी आते जाते उन्हें hi घूर कर देख रहे थे . दीदी उन्हें देख कर उनकंफर्टबले हो गयी.

निधि : जल्दी चलो यहाँ से मुझे दर लग रहा है

अमित : अब दर रही हैं , पहले नहीं सोचा क ऐसे कपडे पहनोगी तो लोगों का क्या होगा. एक तो आप पहले से hi इतनी खूबसूरत हो और ऊपर से ऐसे कपडे , देखने वाला तो पागल हो hi जायेगा . इसमें उनका भी क्या कसूर.

मेरी बात सुन कर दीदी थोड़ा शर्मा गयी .

निधि : तो तुम पागल क्यों नहीं हुए ? चलो अब जल्दी करो गाड़ी उधर कड़ी है.

दीदी खुद hi मेरा हाथ थम मुझे अपने साथ कार की तरफ ले गयी और हम गाड़ी में बैठ कर चल दिए . सर्दियों में सुन छोटे होते हैं और वैसे भी 6 से ऊपर समय हो चला था. इतनी सर्दी में भी दीदी में इतनी शार्ट ड्रेस पहनी थी . मैं तो बार बार चोर नज़रों से उन्हें देख रहा था . एक तरफ मन में ये विचार था क वो मेरी दीदी हैं इस लिए खुद पर गुस्सा भी आ रहा था पर दूसरी तरफ मन बार बार उन्हें देखने को कर रहा था .

निधि : चुप क्यों हो कोई तो बात करो . तुम ऐसे चुप हो तो मुझे अजीब सा लग रहा है . एक तो ये कपडे ……

अमित : तो किसने कहा था ऐसे कपडे पहनने को ? पहले तो कभी पहने नहीं आपने ऐसे कपडे .

निधि : वो मेरी दोस्त ने कहा था ऐसे कपडे पेहेन कर आने को. वो पार्टी में सब ऐसे hi कपडे पेहेन कर आने वाले हैं इस लिए .

अमित : हम्म , तो इस लिए आज आप ऐसे कपड़ों में हैं. पता नहीं वहां पर सब का क्या हाल होने वाला है .

निधि : तुम हो न मेरे साथ , मुझे किसी की परवाह नहीं . ाचा एक बात केहनी थी .

अमित : कहिये

निधि : वो मैं ,,, वो बात ये है क

अमित : अब कहिये भी दीदी आप इतना सोच क्यों रही हैं.

निधि : वो बात ये है क मेरी फ्रेंड ने कहा था क मैं अपने बर्फ क साथ आऊं . मैंने उसे मज़ाक में कह दिया था क मेरा बर्फ है. इस लिए तुम्हे वहां पार्टी में मेरा बर्फ बन क जाना है.

अमित : क्याआ ??? पर ऐसा कैसे हो सकता है ??? और आज तो आप जीजू से मिलने वाली थी न ???

निधि : मैंने ऐसा कब कहा था ? वो तो तुम खुद hi ऐसा कह रहे थे .

अमित : पर आप hi तो कह रही थी क आज आप अपने दिल की बात करेंगी

निधि : हाँ पर मैंने कब कहा क मैं किसी से मिलने वाली हूँ. दिल की बात तो ऐसे भी हो सकती है न . अब वो सब छोडो , तुम वहां मुझे मेरे नाम से बुलाओगे . अगर तुमने मुझे दीदी कहा तो मेरी फ्रेंड क आगे मेरी पोल खुल जाएगी और फिर वो मुझ पर हँसेगी. तुम ऐसा तो नहीं चाहते न क वो मुझ पर हांसे ?

अमित : पर दीदी …..

निधि : पर वॉर कुछ नहीं , तुम आज मेरे बर्फ हो उस पार्टी में और कुछ मत सोचो. मैं सिर्फ तुम पर hi भरोसा कर सकती हूँ इस लिए तुम्हे साथ लेकर आयी हूँ. अब अगर तुम्हे कोई ऐतराज़ है तो हम वापिस चलते हैं.

निधि दीदी ने भी नैना दीदी की तरह मुझे उसी चक्कर में फंसा दिया था. अब मैं क्या करता , अगर इंकार करता तो दीदी पर उनकी फ्रेंड हस्ती . ऐसा मैं नहीं चाहता था . दूसरी तरफ जो कुछ नैना दीदी और मेरे बीच इस सब क कारन हो चूका था वो सब मैं निधि दीदी क साथ नहीं चाहता था इस लिए दिल दर भी रहा था .

अमित : ठीक है मुझे मंज़ूर है.

निधि : मुस्कुराते हुए ) अब थोड़ा स्माइल भी करो , ऐसे मुँह क्यों लटका रहे हो. और वहां बिलकुल एक बर्फ की तरह पेश आना. वैसे तो मुझे खुद कोई एक्सपीरियंस नहीं पर जो भी हो , जैसा वहां सब के रहे हो हम भी वैसा hi करेंगे .

अमित : पर दीदी हम भाई बहिन हैं , वो सब हम कैसे कर सकते हैं.

निधि : क्या सब ?? सिर्फ डांस hi तो करना होता है . तुम किस बारे में बात कर रहे हो ?

मैं तो पता नहीं क्या क्या सोच गया था दिमाग में . जबकि निधि दीदी तो ऐसी थी hi नहीं. नैना दीदी और करुणा दीदी की बात और थी. निधि दीदी ने जब सवाल पूछा तो मैं बात को सँभालने लगा .

अमित : हाँ ,,, हाँ , वो मैं उसी की बात कर रहा था .

निधि : अब डांस करने में क्या प्रॉब्लम है? वो तो हम कर hi सकते हैं न .

अमित : हम्म्म , ठीक है .

कुछ hi देर में हूँ एक डिस्को क्लब में पहुँच गए . जहाँ बहार बहुत साडी गाड़ियां कड़ी गयी थी और बहुत सरे लड़के लकड़ियां वहां नई ईयर का जश्न मानाने आये हुए थे. सब बड़े घरों क hi लग रहे थे . दीदी ने अपनी फ्रेंड को कॉल किया तो उसने अंदर आने को कहा . हम दोनों भी अंदर को चल दिए . अंदर जाने से पहले दीदी ने मेरी लेफ्ट बाज़ू को अपनी दोनों बाँहों में थम लिया और मेरा साथ सात कर चलने लगी जिससे दीदी की छाती से एक बार मेरी बाज़ू टच हुई तो मेरी रिड की हड्डी तक सिहरन हुई . एक तो दीदी आज इतनी खूबसूरत लग रही थी पता नहीं क्या क्या करवा कर हक्क कर आयी थी वहां से ऊपर से ऐसे कपडे पहने थे क बार बार मेरी नज़र उन पर जा रही थी. दूसरा वहां का माहौल , हर तरफ लड़के लड़कियां बस एक दूसरे क साथ डांस करने क नाम पर बस छेड़छाड़ hi कर रहे थे . अंदर रौशनी बहुत hi काम थी और सब डांस में लगे हुए थे. एक तरफ बार बना हुआ था और आगे बैठने क लिए लाउन्ज सा बना हुआ था . वहां पर दीदी की तरह hi सफ़ेद शार्ट ड्रेस में एक लड़की एक लड़के क साथ बाँहों में बहन दाल कड़ी थी जिसने निधि दीदी को इशारा किया और दीदी ने भी उसे इशारा किया. हम उस तरफ चल दिए .

निधि : ये मेरी फ्रेंड है , और साथ में उसका बर्फ. अब सब तुम्हारे हाथ में है. यद् रखना मुझे मेरे नाम से hi बुलाना बिलकुल एक बर्फ की तरह .

निधि : hi , साक्षी कैसी हो ? मीट माय फ्रेंड अमित . अमित शी इस साक्षी , माय कॉलेज फ्रेंड .

दीदी ने अपनी फ्रेंड से मुझे मिलवाया तो मैंने उससे हाथ मिलाया. देखने में वो भी खूबसूरत थी पर दीदी से हर मामले में 19 hi थी.

साक्षी : hi अमित , तो फाइनली तुमने अपनी कसम तोड़ कर अपने लिए पार्टनर ढूंढ hi लिया. वैसे मन्ना पड़ेगा तुमने क्या चुन कर अपने लिए बर्फ ढूँढा है. परफेक्ट जोड़ी है . देखने में तो बिलकुल हीरो की तरह hi लग रहा है और सेहत से तो बॉडीगार्ड . बी थे वे मीट माय बर्फ नीलेश . नीलेश शी इस माय फ्रेंड निधि एंड हेर बर्फ अमित .

नीलेश देखने में स्मार्ट था पर नार्मल hi था फिजिक्स से . उसने हाथ आगे बढ़ाया तो मैंने उससे भी हाथ मिलाया .

नीलेश : बहुत सुना था तुम्हारे बारे में क एक लड़की ऐसी भी है जिसने कभी किसी लड़के से दोस्ती नहीं की . चलो ये भी ाचा है क तुमने इरादा बदल लिया. वैसे मन्ना पड़ेगा , साक्षी ने जितना बताया था तुम उससे भी ज्यादा खूबसूरत हो .

निधि : थैंक यू , पता नहीं उसने क्या बताया है पर ये भी किसी से काम नहीं. आप दोनों ज़रा बातें करो , हम दोनों अभी आती हैं.

निधि मुझे नीलेश क पास छोड़ कर साक्षी क साथ एक तरफ चल दी शायद वाशरूम जाना था उन्हें .

नीलेश: तो भाई , क्या करते हो तुम? वैसे बुरा मत मन्ना चेहरे से तो अभी छोटे लगते हो मगर बॉडी देख कर नहीं लगता .

अमित : है है है , थैंक्स , बस अभी कॉलेज ,,,,,, कॉलेज से निकला हूँ. हम दोनों एक hi कंपनी में काम करते हैं.

मेरे मुँह से निकलने वाला था क कॉलेज में हूँ पर ऐन मोके पर यद् आ गया क मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए .

नीलेश: ाचा ??? फिर तो तुम निधि से छोटे हो मतलब ?

अमित : अब प्यार में उम्र कौन देखता है वैसे कोई खास फरक है भी नहीं.

नीलेश : हाँ बात तो सही है. वैसे मन्ना पड़ेगा यार , क्या ज़बरदस्त हाथ मारा है. निधि सच में बहुत हॉट है यार . प्लीज बुरा मत मन्ना .

मुझे गुस्सा तो आया निधि दीदी क बारे में ऐसा सुन कर मैंने खुद पर कण्ट्रोल किया आखिर मैं यहाँ उनका बर्फ बन कर आया था . वैसे भी नीलेश ने गलत बात नहीं की थी अब वो हैं hi इतनी खूबसूरत क ऐसे hi विचार तो निकलेंगे दिल से .

अमित : मैं खुशकिस्मत हूँ क उन्होंने मुझे चुना .

नीलेश : बात कहाँ तक पहुंची ? कुछ किया वीर्य क नहीं अभी तक. मैं होता तो पहली बार में hi बैडरूम तक ले जाता .

अमित : वो ऐसी नहीं हैं , आप कुछ लेंगे ?

नीलेश बातों में कुछ ज्यादा hi आगे बढ़ रहा था जो मैं नहीं करना चाहता था . इस लिए मैंने उसे ड्रिंक क बारे में पूछ लिया. पर भूल गया क ये एक बार है.

उधर निधि साक्षी को लेकर साइड में निकल गयी थी उससे बात करने क लिए

साक्षी : यहाँ क्यों लायी है मुझे ? देख तेरे कहने पर मैं नीलेश क साथ यहाँ आयी हूँ . अब बाकि का तो तुझे खुद hi करना पड़ेगा. वैसे तू सही कह रही थी , देखने में हीरो hi लगता है पर थोड़ा शर्मीला है जो तेरे साथ इतना डेन्ट बन कर खड़ा था. वर्ण जितना हॉट तू आज लग रही है . कोई और होता तो यहाँ आने की बजाये बीएड पर hi ले क जाता .

निधि : शर्मा कर ) अब चुप भी करेगी ? एक तो पहले hi मेरी धड़कने इतनी तेज़ चल रही हैं क समझ नहीं आ रही. उससे किसे बात करूँ? मुझसे हिम्मत नहीं हो रही .

साक्षी : तू भी न शुरू से hi बुद्धू है. अरे लड़के तो खुद पीछे पड़े रहते हैं लड़कियों क. और तुझसे बेहतर उसे और कोई लड़की कहाँ मिलेगी? मेरी मन सीधा सीधा बात कर ले , वो मन कर hi नहीं सकता तुझे .

निधि : तू नहीं जानती साक्षी ये सब इतना आसान नहीं है . मतलब मेरे में हिम्मत नहीं है. पर आज जो भी हो मुझे हर हल में अपने दिल की बात उससे करनी hi होगी . वर्ण देर हो जाएगी .

साक्षी : तो फिर हिम्मत कर क बोल दाल. अगर और हिम्मत चाहिए तो मेरे साथ चल दो शॉट वोडका क लगा ले. हिम्मत अपने आप आ जाएगी.

निधि : पर उससे कोई गड़बड़ तो नहीं होगी न ?

साक्षी : अरे इतने से कुछ नहीं होता . बोतल जातक जाती हैं लड़कियां तो. वैसे भी वो है न तेरे साथ . क्या पता मौके क फायदा वो hi उठा ले और आज तुम्हारी ओपनिंग कर दे . हे हे हे

निधि : छी ,, गन्दी ,, वो ऐसा नहीं है

साक्षी : क्यों? उसके पास घोडा नहीं है क्या ? देखने में तो हत्ता कट्टा है . सामान भी तगड़ा hi होगा .

निधि : चुप्प , प्लीज ऐसा मत बोल . वो ऐसा नहीं है. चल अब चलते हैं . प्लीज मुझे हिम्मत देना आज मुझे हर हल में उससे दिल की बात करनी है . मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकती



साक्षी : तू चल तो सही मेरी जान . मैं तेरे साथ हूँ
 
अपडेट 262



‘ तू यहाँ क्या कर रहा है ? जा जा कर अपनी फॅमिली क साथ मज़े ले मुझे मेरे हल पे छोड़ दे. कोई ज़रूरत नहीं तेरी यहाँ पर ‘

मैंने मोहित को उठाया तो वो मुझे सामने देख कर ऐसे भड़का जैसे हम दोस्त हो hi न . मैं तो उसके ऐसे रिएक्शन से सोच में पद गया.

अमित : ये कैसी बातें कर रहा है तू ? तेरा दिमाग तो ठीक है? और मैं कौन से मज़े ले रहा हूँ ? सेल अभी अभी मेरे बाबा पर हमला हुआ है और तू पता लेने तक नहीं आया

मोहित : तूने मेरा हल पूछा था जो मैं पूछने अत ? तुझे कहा था क चल मेरे साथ मीनल से बात करने पर तू आया ? जब तुझे मेरी परवाह नहीं है तो मैं क्यों करूँ. वैसे भी सब मतलब क हो यार होते हैं. वो भी मतलब क लिए hi मेरी गफ बानी थी और तू भी .

मोहित की बात सुन मुझे गुस्सा आ रहा था . उसने एक पल में मुझे मतलबी कह दिया .

अमित : तू मुझे मतलबी कह रहा है ? बता कौन सा मतलब निकला मैंने तेरे साथ ? और तू मीनल को क्यों मतलबी बोल रहा है? सेल यद् है उस रत पार्टी में तू क्या कर रहा था रॉय क साथ. एक तो खुद गलती की और अब उल्टा दूसरों पर उंगली उठा रहा है .

मोहित : ये रत जो भी हुआ नशे में हुआ था . मैंने जान बुझ कर कुछ नहीं किया मगर मीनल तो होश में थी. फिर उसने कैसे किसी और क साथ …… ाचा हुआ जो सब सामने आ गया वर्ण मैं पागल बना हुआ था. सच्चा प्यार समझ कर उसके आगे पीछे घूम रहा था . और वो ,,, उससे तो अछि रॉय है काम से काम उसका दिल तो साफ़ है .

मोहित की बातें सुन कर मुझे शक हो गया क ज़रूर इसके दिमाग में मीनल को लेकर गलत बातें डाली गयी है और ये काम शायद रॉय hi कर रही होगी

अमित : तुझे किसने कहा क मीनल किसी और क साथ कुछ कर रही थी? और तूने मन भी किसे लिया ये सब. कोई साबुत है तेरे पास जिससे पता चले क वो कुछ गलत कर रही थी? अगर है सुबूत तो दिखा फिर मैं तुझे नहीं रोकूंगा कुछ भी करने से.

मेरी बात सुन कर मोहित चुप हो गया . यानि क उसने सुनी सुनाई बातों पर यकीन कर लिया था .

अमित : क्यों ,, अब चुप क्यों हो गया ? दिखा कोई सुबूत है तो . तू इतना बेवक़ूफ़ किसे बन गया क किसी में तुझे मीनल क बारे में कुछ भी कहा और तू मन गया . एक तो तूने गलती की और ऊपर से उसे मानाने की जगह तू अकड़ रहा है . क्या यही है तेरा प्यार ?

मोहित : मुझे भाषण मत दे , गया था मैं उसे मानाने पर उसने साफ़ कह दिया क वो मेरी शकल देखना नहीं चाहती. हो गयी मुझसे गलती मैंने माफ़ी भी मांगी अब और क्या करता ? उसे खुद पर इतना hi घमंड है तो मुझे भी उसकी परवाह नहीं है.

अमित : ये सब बातें तेरे दिमाग में रॉय ने hi डाली है न? सेल तुझे नज़र नहीं आ रहा क वो तुम दोनों क बीच दरार दाल रही है. और ये शराब पि कर तू साबित क्या करना छह रहा है? एक तरफ कह रहा है क तुझे मीनल की परवाह नहीं तो फिर शराब क्यों पि रहा है और अगर उसकी परवाह है तो फिर रॉय से क्यों मिल रहा है ? इस तरह तू सब कुछ बर्बाद कर लेगा. तुझे पता भी है दीदी कितना परेशां है तेरी वजह से ? और अगर इस बारे में अंकल आंटी को पता चल गया तो क्या होगा?

मोहित : मुझे कुछ नहीं पता , मेरा जो दिल करेगा वो मैं करूँगा . शराब पि कर काम से काम होश तो नहीं रहता जो मतलबी लोगों क बारे में सोच सकूँ . और अगर मेरी वजह से मेरे माँ डैड को तकलीफ है तो मैं घर से दूर कहीं चला जाऊंगा . पर अब मैं वही करूँगा जो मेरा दिल करेगा . और रही रॉय की बात , तो सुनी ने मुझे सहारा दिया है जब मेरे अपने मुझे छोड़ कर अपनी अपनी लाइफ एन्जॉय कर रहे थे.

अमित : तू गलत समझ रहा है. रॉय तेरे साथ …..

मोहित : मुझे कुछ नहीं सुन्ना है रॉय क बारे में . तुझे कोई और बात करनी है तो कर नहीं तो चला जा

अमित : तुझे मेरी बात पर यकीन नहीं है न. तो ठीक है सचाई तेरे सामने मैं लेकर रहूँगा . तू तब तक उससे दूर रह .

मोहित : मैं क्यों उससे दूर रहूं? वो मेरी दोस्त है मेरा प्यार है .

अमित : घंटा प्यार है , तुझे उस पर यकीन है न तो बस 2 दिन का टाइम दे मुझे तब तक तू जो चाहे कर जहाँ जाना है जा पर तू रॉय से नहीं मिलेगा . अगर तेरे दिल में मेरी थोड़ी सी भी जगेह है तो मेरी बात मन .

मोहित मेरी इस बात पर कुछ देर खामोश रहा फिर बोलै

मोहित : ठीक है पर सिर्फ 2 दिन , अगर तू सबूत न दे पाया तो फिर कभी उसके बारे में कुछ मत बोलना

अमित : वडा , बस 2 दिन.

मोहित मेरी बात सुन कर बीएड से उठा और बाथरूम में घुस गया .

अमित : मन में ) तू चाहे कुछ भी सोच पर तू मेरा दोस्त है और मैं अपने दोस्त को बर्बाद नहीं होने दूंगा. वडा करता हूँ तुझे तेरा प्यार वापिस लौटाऊंगा और उन सबको सबक भी सिखाऊंगा जो तुम दोनों को बर्बाद करना चाहते हैं . फिर मैं नीचे आ गया जहाँ आंटी और करिश्मा दीदी बैठी हुई थी .

रमा : उठा गया मोहित या अभी भी सो रहा है

अमित : तैयार हो रहा है आंटी अभी आ जायेगा. अंकल कब आएंगे ?

रमा : उनका तो वो hi जाने कह कर तो गए हैं क कल तक आ जायेंगे फिर भी कुछ पता नहीं. वैसे तुम्हे तो कहीं जाना नहीं है न ? कल नए साल का पहला दिन है तो आज यहीं रुक जाओ.

अमित : नहीं क hi बात है आंटी , यहाँ रहूं या गाओं. आप क्यों नहीं चलती मेरे साथ.

करिश्मा : तुम्हे रहने को बोलै तो तुम माँ को भी साथ ले जाने की बात करने लगे . ये क्या बात हुई ? क्या तुम रुक नहीं सकते या फिर उसके लिए भी निधि दीदी से कहना पड़ेगा . उन्ही क लिए आये हो न आज ?

अमित : उनके साथ मुझे जाना है पर शाम को मगर यहाँ मैं आपके कहने पर hi आया हूँ .

मैंने ये करिश्मा दीदी की आँखों में देख कर कहा तो वो खामोश हो गयी मेरी आँखों में देखते हुए .

रमा : तो फिर आज रत तुम दोनों यहीं क्यों नहीं रुक जाते. शाम को कहाँ जाना है वैसे ?

अमित : दीदी की किसी फ्रेंड ने कोई पार्टी राखी है शायद और वो अकेले जाती नहीं हैं कहीं .

रमा : अछि बात है , फिर तय रहा , शाम की पार्टी क बाद तो रत हो hi जाएगी तुम लोगों को तो फिर रत तुम कहीं और नहीं जाओगे सीधा हमारे पास hi आओगे .

इतने में मोहित सीढ़ियों से नीचे अत हुआ दिखाई दिया तो आंटी ने उसे बुला लिया .

रमा : तुम कहाँ चल दिए ? इधर आओ मुझे तुमसे कुछ बात करनी है.

मोहित : मैं बाद में आपकी बात सुन लूंगा अभी मुझे ज़रूरी काम से जाना है . आप अमित का hi ध्यान रखिये

मोहित ने मेरा नाम ऐसे लिया जैसे रंज कर रहा हो.

रमा : ये क्या तरीका है बात करने का . इधर आओ मेरे पास .

मोहित : बाद में माँ , जो भी कहना हो बाद में कह लेना .

मोहित बिना पीछे मुड़े कहता हुआ बहार निकल गया और गाड़ी चलने की आवाज़ आयी जिसका मतलब था वो चला गया . करिश्मा दीदी की नज़र बहार hi लगी थी. वो मोहित को जाते देख रही थी. इधर रमा आंटी क चेहरे पर भी थोड़ा गुस्सा नज़र आ रहा था .

रमा : पता नहीं इस लड़के को हो क्या गया है . आज कल घर पर रुकता hi नहीं और न कोई काम करता है

अमित : रिलैक्स आंटी , कोई ज़रूरी काम होगा उसे .

रमा : दिख रहा है उसे क्या ज़रूरी काम है . तुम यहाँ बैठे हो और वो ऐसे चल दिया जैसे कोई अनजान बैठा हो. कल भी गाओं नहीं गया. तुम दोनों क बीच किसी बात पर झगड़ा तो नहीं हुआ ?

अमित : नहीं ऐसी कोई बात नहीं है आंटी आप ऐसे hi सोच रही हैं

रमा : ऐसे hi सोच रही हूँ , छोटी बची हूँ न कोई.

अमित : हाँ थोड़ी सी बड़ी हैं शायद पर हैं बची hi .

मैंने ये बात आंटी की चुकी को देख कर कही और आँख मर दी जिससे आंटी शर्मा गयी. वो मेरा इशारा समझ गयी थी. मैंने ये जान बुझ कर किया ताकि उनका ध्यान हटा सकूँ.

रमा : बदमाश , तुम्हारे कान भी खींचने पड़ेंगे .

अमित : मैंने कब मन किया है आंटी जो मर्जी पकड़ कर खिंच लो.

मैंने इस बार अपने लैंड की तरफ इशारा कर क कहा तो आंटी शर्म से पानी पानी हो गयी .

रमा : मैं तुम लोगों क लिए कुछ लेकर अति हूँ. तुम्हे तो मैं बार में बताती हूँ. बहुत बोलने लगे हो.

आंटी शर्माती हुई उठ कर चली गयी . मैं आंटी को जाते हुए देखता रहा . उनकी कमर कुछ ज्यादा hi हिचकोले खा रही थी या वो जान बुझ कर ऐसा कर रही थी . आंटी की गांड कुछ ज्यादा hi मटक रही थी जिसे देख कर एक बार तो मन किया क अभी उठा कर उन्हें बैडरूम में ले जॉन और पेल दूँ . मैं आंटी को जाते देख hi रहा था क करिश्मा दीदी का यद् आते hi मैंने उनकी तरफ देखा तो वो मुझे hi देख रही थी. यानि उन्होंने मुझे देख लिया था आंटी को घूरते हुए. मैं करिश्मा दीदी को देख कर हड़बड़ा गया और नज़रें झुका ली.

करिश्मा : आज रत यहीं रुक रहे हो न ? मैं दीदी से बात कर लुंगी .

अमित : ठीक है .

करिश्मा : मोहित से क्या बात हुई तुम्हारी ? उसने कुछ बताया ?

अमित : मुझे लगता है उसे कोई भड़का रहा है . मुझे थोड़ा टाइम दीजिये . मैं खुद जा कर देखता हूँ क क्या चक्कर है. आप चिंता मत कीजिये सब ठीक हो जायेगा .

करिश्मा : तुम पर hi तो भरोसा है मुझे .

फिर आंटी खाने को कुछ स्नैक्स वगैरह ले आयी . निधि दीदी को पता नहीं कितना टाइम लग्न था तो मैं आंटी और करिश्मा दीदी क साथ बैठ कर बातें करता रहा . दोपहर का खाना खाने क बाद हम आराम करने चले गए .

दूसरी तरफ पुलिस की 2 टीम बिल्ला और उसके साथियों को उठाने रत को निकल गयी थी और सुबह 3 बजे उस जगह पर धावा बोल दिया गया जहाँ बिल्ला और उसके साथियों क छिपे होने का अनुमान था . किस्मत अछि निकली क वो लोग रत को ज्यादा शराब पि कर सोये थे इस लिए होश में नहीं थे . उनके सँभालने से पहले पुलिस ने उन सब को दबोच लिया. ये खबर तुरंत इंस्पेक्टर ने ऋतू को दी जो सुबह क इस पहर में भी जग रही थी और इंतज़ार में थी खबर क. जैसे hi उसके कानो में इंस्पेक्टर की आवाज़ पड़ी क बिल्ला साथियों समेत ज़िंदा काबू कर लिया गया है तो ऋतू एक बार उछाल hi पड़ी. एक मामूली सा केस जिसकी पुलिस वालों की नज़र में कोई खास एहमियत भी न थी उस केस क लिए सप ऋतू सिंह जैसी सख्त अफसर इतनी ज्यादा एक्ससिटेड थी ये बात तो कई पुलिस वालों क गले न उतर रही थी पर मुँह सबके बंद थे . ऋतू इधर अपने सरकारी आवास में खबर सुनने क बाद उछाल पड़ी . उसकी नींद तो मनो हवा hi हो गयी. उसका दिल कर रहा था क वो अभी जाये और बलजीत राइ को घसीट कर हवालात में दाल दे और अमित को जाकर खुद बताये क उसने उस पर और उसके परिवार पर हमला करने और करवाने वाले को सलाखों क पीछे दाल दिया है. ये एक तरह से अपनी वफादारी और मुहब्बत दिखने का जरिया मात्रा था. कहीं न कहीं ऋतू दिल से अमित की नज़रों में अपना प्यार साबित करना चाहती थी चाहे इसकी ज़रूरत नहीं थी. खैर पुलिस टीम उन बदमाशों को काबू में कर क वापिस चल दी थी .

‘ hello , कहाँ रह गए तुम? मैं कब से तुम्हारी वेट कर रही हूँ . कब आओगे ?’ रॉय मोहित को फ़ोन कर क उसके आने क बारे में पूछ रही थी. पिछले 3 दिनों में मोहित की रूटीन सी बन गयी थी. वो रॉय क पास चला जाता जहाँ पहले मोहित को वो नशे में डुबो देती और फिर उसके साथ अपने जिस्म की आग ठंडी करती. मोहित को भी शराब और शबाब दोनों की लत लग रही थी जैसा की रॉय चाहती थी .

मोहित : मुझे कुछ काम है मैं आज नहीं आऊंगा .

रॉय : ये क्या बात हुई ? मुझसे नाराज़ हो क्या ? कोई गलती तो नहीं हो गयी मुझसे ? तुम कहो तो तुम्हारे पाऊँ में पद कर माफ़ी मांग लेती हूँ. प्लीज मुझसे ऐसे दूर मत जाओ. तुम्हारे लिए मैंने सब को छोड़ दिया और तुम ऐसे के रहे हो मेरे साथ .

रॉय जान बुझ कर ऐसी बातें कर रही थी ताकि मोहित क दिल में अपनी जगह पक्की कर सके .

मोहित : नहीं ऐसी बात नहीं है . वो मुझे सच में एक ज़रूरी काम है .

रॉय : सच कह रहे हो ? कहीं उस मीनल ने फिर से तुम्हे अपनी चिकनी चुपड़ी बातों में तो नहीं फंसा लिया ?

मोहित : कितनी बार कहा है उसका नाम मत लिया करो. मैं किसी काम से जा रहा हूँ.

रॉय : पर ऐसे अचानक कैसे ? कल तो तुम कह रहे थे क नई ईयर ईव हम साथ रहेंगे कल तक . अब कैसे अचानक तुम्हारा प्लान चेंज हो गया

मोहित : मैं आना तो चाहता था पर एक ज़रूरी काम आ गया . मैं शायद कल भी न पौन बहार जा रहा हूँ.

रॉय : पक्का और कोई वजह तो नहीं है न? देखो अगर कोई बात है तो प्लीज एक बार मुझसे बात ज़रूर करना .

मोहित : कोई भी ऐसी वैसी बात नहीं है तुम बस एक दिन और इंतज़ार कर लो फिर हम कहीं घूमने चलते हैं , किसी हिल स्टेशन पर.

रॉय : वावू , हम शिमला चलेंगे . शिमला की ठंडी वादियों में खूब मस्ती करेंगे . पर आज और कल मैं तुम्हारे बिना कैसे बिताउंगी मुझे समझ नहीं आ रही. तुम्हारे बिना अब तो एक पल भी मुझे चैन नहीं अत . तुम्हारे साथ बिताया एक एक पल मुझे बेचैन कर देता है .

रॉय पूरी कोशिश कर रही थी मोहित को एक्साइट करने की. उसे शक हो रहा था क कहीं किसी ने मोहित को रोका तो नहीं है . इस लिए वो तरह तरह से कोशिश कर रही थी क अगर कोई इसके पीछे है तो मोहित की ज़ुबान पर नाम आ जाये.

मोहित : मुझे भी तुम्हारे साथ बहुत मज़ा अत है डार्लिंग . सच कहूं तो अब तुम्हारे बिना मुझे भी ाचा नहीं लगेगा. बस एक दिन की बात और है फिर हम पूरा वीक साथ में होंगे . तुम्हारे एक एक अंग को जी भर क प्यार करूँगा और तुम्हारी गांड तो मैं खोल कर रहूँगा .

रॉय : तुम्हारी hi है जान , जब चाहो खोल लेना . मुझे इंतज़ार रहेगा .

मोहित : ठीक है अब मैं रखता हूँ , bye .

रॉय : मुउउउउआआह्ह bye जाएं , लव यू .

रॉय ने फ़ोन पर hi किश करने क बाद कॉल डिसकनेक्ट की और अपना दिमाग दौड़ने लगी. उसका दिल इस बात को मन hi नहीं रहा था क मोहित किसी काम से जा रहा है. फिर उसे यद् आया क उसने कल अमित से मिलने की बात की थी और वो भी मिलने क लिए मन गया था. आज मोहित यहाँ नहीं तो ये एक ाचा मौका था अमित को शीशे में उतरने का वैसे भी फ़ोन पे बात कर क वो इतना तो समझ गयी थी क अमित क साथ बात बन सकती है. इस लिए उसने फ़ोन पर उसका no . मिला दिया .

इधर मैं आराम से सोया पड़ा था क मोबाइल की रिंगटोन बजने से मेरी आंख खुल गयी. मुझे लगा निधि दीदी का फ़ोन होगा पर देखा तो अननोन no . था . फिर भी मैंने पिक कर hi लिया .

अमित : कौन है ?

रॉय : इतनी जल्दी भूल गए जनाब , मैं रॉय बोल रही हूँ. तुमने खुद तो फ़ोन करना नहीं सोचा खुद hi फ़ोन कर क तुम्हे यहाँ बुला लूँ. आज नई ईयर ईव है तो क्यों न नए रिश्ते की शुरुआत करें? क्या आज आ सकते तुम मुझसे मिलने ?

अमित : ओह !! तो आप बोल रही हैं मिस रॉय . वैसे ख्याल तो ाचा है आपका पर आप कौन से रिश्ते की बात कर रही हैं ? ज़रा खुल कर बताइये

रॉय : भोले मत बनो , सब जानते हो तुम. और खुद hi तो कह रहे थे क तुम्हारा क्या फायदा तो अब अपने फायदे की बात भी नहीं समझ रहे ? आज मैं अकेली हूँ , जल्दी से चले आओ , फिर आराम से बैठ कर बातें करेंगे

अमित : बस बातें ?? वो तो फ़ोन पर भी कर सकते हैं न फिर इसके लिए वहां आने की क्या ज़रूरत है ?

रॉय : और भी बहुत कुछ कर लेंगे पर पहले आओ तो. मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ.

अमित : सॉरी मिस रॉय आज तो नहीं आ सकता इस लिए आप आज अपने दोस्तों क साथ एन्जॉय कीजिये वैसे भी आज तो मोहित भी आपसे मिलने नहीं आएगा

मैं समझ गया था क रॉय क पास मोहित नहीं गया है . इसी लिए ये आज मुझे मिलने को बुला रही है . मोहित ने आखिर मेरी बात मन ली थी. अब रॉय को मैं इशारे से बताना चाहता था क मैं क्या कर सकता हूँ.

रॉय : तुम्हे कैसे पता क मोहित आज नहीं आएगा? क्या वो तुम्हारे साथ है?

रॉय की बेचैनी उसकी बातों से ज़ाहिर हो रही थी. मेरे होंठों पर एक स्माइल आ गयी रॉय क ऐसे घबराने से .

अमित : नहीं मेरे साथ तो नहीं है पर मैंने hi उसे कहीं भेजा है . और वो कल भी नहीं आएगा. रही मेरी बात तो मैं अभी उसके घर पर hi हूँ. और यहाँ सब मेरी बात मानते हैं चाहे वो मोहित हो या अंकल आंटी . वो छह कर भी मेरी बात नहीं ताल सकता . सॉरी मेरी वजह से तुम्हारा मज़ा ख़राब हो गया हो तो .

(रॉय को झटका तो लगा क मोहित क जाने क पीछे अमित का हाथ है पर खुद को संभल कर अब वो अमित को रिझाने क लिए आगे बात करने लगी .)

रॉय : वो तो मुझे पहले से hi पता है क वो तुम्हारी हर बात मंटा है . इसी लिए तो मैं चाहती हूँ क हम दोनों एक दूसरे को अचे से समझ लें . मैं तुम्हे किसी भी बात की कमी नहीं होने दूंगी और जो भी तुम कहोगे हर बात मानूंगी . आखिर मेरे देवर जो बनोगे तुम.

अमित ( मन में ) देवर ??? साली तुझे देख मैं क्या क्या बनता हूँ. मेरे दोस्त को बेवक़ूफ़ बना रही है पर मैं तेरी चल में फसने वाला नहीं .

अमित : ाचा !!! हर बात मानोगी ??? फिर तो आना hi पड़ेगा . देखता हूँ क्या क्या मानती हो . अगर मेरी कोई बात न मणि तो फिर देख लेना क अंजाम क्या हो सकता है.

रॉय : एक बार आओ तो , वडा करती हूँ खुश हो कर hi जाओगे .

अमित : फिर तो आना hi पड़ेगा , पर आज नहीं कल . कल क लिए तैयार रहना . नए साल की शुरुआत धमाकेदार करते हैं .

रॉय : ज़रूर , इंतज़ार रहेगा . बीईईईई

मैं रॉय से बात करने क बाद आगे क बारे में सोचने लगा . रॉय क मुँह से मुझे सचाई उगलवानी थी और उसका ये घिनोना चेहरा मोहित क सामने लाना था . कुछ देर मैं इस बारे सोचता रहा . इतने में निधि दीदी की कॉल आ गयी .

निधि : कहाँ पर हो ?

अमित : मैं तो मोहित क घर पर hi हूँ पर आप कहाँ हैं और कब आएँगी ?

निधि : वो मुझे यहाँ थोड़ा टाइम और लगेगा . मैंने इस लिए तुम्हे फ़ोन किया है क तुम एक घंटे तक क्सक्सक्सक्सक्स जगह आ जाओ. मैं यहीं मिलूंगी. यहीं से हम सीधे पार्टी में चल पड़ेंगे .

अमित : ठीक है मैं पहुँच जाऊंगा .

निधि : जल्दी आ जाना यहाँ एक काम और भी है.

अमित : कौन सा काम ?

निधि : पहले आओ तो . ाचा मैं रखती हूँ अब . बीईई .

निधि दीदी से बात करने क बाद मैं फ्रेश हुआ और नीचे आ गया . आंटी भी अपने रूम से बहार निकल कर हॉल में आ गयी. करिश्मा दीदी अभी उठी नहीं थी. आंटी क कैसे हुए स्तन टाइट सूट में कुछ ज्यादा hi बड़े नज़र आ रहे थे . मेरी नज़र वहीँ ठहर गयी जिसे आंटी ने देख लिया.

रमा : शर्म नहीं आती ऐसे घूरते हुए ?

अमित : शर्म तो अति है पर क्या करूँ , आप हो hi इतनी हॉट क कण्ट्रोल नहीं होता.

रमा : ये बातें किसी और को सुनाओ , अब तो तुम अपने आप मेरे करीब आते भी नहीं. अब लगता है तुम्हे पसंद नहीं मैं .

अमित : आपसे किसने कहा क पसंद नहीं आप ? अरे आप तो इतनी ज़बरदस्त हो क मन कर रहा है अभी पटक क शुरू हो जॉन .

रमा ( शरमाते हुए ) जातो बदमाश कहीं क , अगर इतना hi मन है तो चलो मेरे कमरे में . करिश्मा अभी सो रही है .

अमित : अभी फ़िलहाल तो मुझे जाना है. निधि दीदी बुला रही हैं. रत को पक्का मिलते हैं.

रमा : पक्का न ?

अमित : पक्का मेरी जान , तुम बस आगे पीछे तेल लगा कर रखना . आज रत गाड़ी दोनों सड़कों पर दौड़ेगी .

इतना कह कर मैं एक हाथ से आंटी की गांड मसल दी तो वो एक डैम से हड़बड़ा गयी.

रमा : क्या कर रहे हो , कोई देख लेगा तो क्या होगा पता है.

अमित : अभी तो आपने कहा क दीदी सो रही हैं और तो कोई है नहीं यहाँ .

रमा : इसी लिए इतनी शरारत कर रहे हो .

अमित : ाचा तो आंटी फिर मैं चलता हूँ .

रमा आंटी ने आगे बढ़ कर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख लिए और किश करने लगी.

रमा : ुम्माआह्ह्ह्ह. रत का इंतज़ार रहेगा .

मोहित क घर से निकल कर मैं बहार आया और ऑटो पकड़ क उस जगह पहुँच गया जहाँ का दीदी ने कहा था . ये एक बेऔति सलून था जो देखने से hi आधुनिक लग रहा तह. बहार कुछ लक्ज़री कार्स कड़ी थी. कुछ बड़े घर की औरतों को मैंने वहां एते जाते देखा: मैं ये देख सोच में पद गया क दीदी में आखिर मुझे ऐसी जगह क्यों बुलाया . वो तो ऐसे सजना संवारना पसंद नहीं करती और न hi कभी ब्यूटी पार्लर जाती हैं . मैं कुछ देर खड़ा रहा और जब दीदी नहीं दिखी तो उनको फ़ोन किया जिसे उन्होंने तुरंत उठा लिया .

निधि : आ गए तुम ?

अमित : हाँ दीदी , पर आपने मुझे यहाँ किस लिए बुलाया ? क्या आप भी यहीं हैं ?

निधि : हाँ , ाचा तुम रुको मैं अभी आयी .

कुछ hi पलों में दीदी अंदर से बहार निकलती हुई नज़र आयी तो मैं उन्हें देखता hi रह गया. मैंने कभी सोचा भी नहीं था क दीदी का ऐसा रूप भी देखने को मिल सकता है . निधि दीदी लाल रंग की शार्ट ड्रेस में थी जो की उनकी जांघों तक hi थी. पाऊँ में काळा सैंडिल जो क खास किसम क लग रहे थे और थोड़े हाई हील टाइप भी. एक तो दीदी पहले से hi अछि हाइट की थी ऊपर से हील. एक डैम मॉडल लग रही थी. बालों को खास स्टाइल में कट करके खुला छोड़ रखा था . और उनकी स्किन कुछ ज्यादा चमकदार लग रही थी. मैं दीदी को सर से ूँ तक देख रहा था और दीदी कब पास आ गयी इसका ख्याल भी नहीं रहा .

निधि : अछि लग रही हूँ न ? अमित !!! अमित!!!! ऐसे क्या देख रहे हो ? अछि तो लग रही हूँ न ?

अमित : हह हाँ ,,, हाँ ,,, दीदी . आप तो कमल की लग रही हो . मैंने तो पहचाना hi नहीं एक बार क ये आप हो . आप ने पहले तो कभी ऐसे कपडे पहने नहीं .

निधि : अचे नहीं लगे क्या ?

अमित : बहुत अचे हैं दीदी , आप एक डैम मॉडर्न लग रही हो . किसी फिल्म की हेरोइन की तरह . जीजू तो पक्का पागल हो जायेंगे आपको देख कर.

निधि : तुम्हे तो पसंद आया न ?

अमित : पसंद क्यों नहीं आएगा जब आप इतनी हसीं लग रही हैं .

निधि : वो तो तुम भी बहुत हैंडसम लग रहे हो .

अमित : पर आपके सामने कुछ भी नहीं दीदी.

निधि : अब क्या ऐसे hi तारीफ करते रहोगे या चलें भी ?

अमित : हाँ हाँ , चलिए दीदी , वर्ण यहीं भीड़ लग जाएगी. देखिये कैसे सब आपको hi देख रहे हैं.

मेरी बात सुन कर दीदी ने आसपास देखा तो कुछ लड़के और आदमी आते जाते उन्हें hi घूर कर देख रहे थे . दीदी उन्हें देख कर उनकंफर्टबले हो गयी.

निधि : जल्दी चलो यहाँ से मुझे दर लग रहा है

अमित : अब दर रही हैं , पहले नहीं सोचा क ऐसे कपडे पहनोगी तो लोगों का क्या होगा. एक तो आप पहले से hi इतनी खूबसूरत हो और ऊपर से ऐसे कपडे , देखने वाला तो पागल हो hi जायेगा . इसमें उनका भी क्या कसूर.

मेरी बात सुन कर दीदी थोड़ा शर्मा गयी .

निधि : तो तुम पागल क्यों नहीं हुए ? चलो अब जल्दी करो गाड़ी उधर कड़ी है.

दीदी खुद hi मेरा हाथ थम मुझे अपने साथ कार की तरफ ले गयी और हम गाड़ी में बैठ कर चल दिए . सर्दियों में सुन छोटे होते हैं और वैसे भी 6 से ऊपर समय हो चला था. इतनी सर्दी में भी दीदी में इतनी शार्ट ड्रेस पहनी थी . मैं तो बार बार चोर नज़रों से उन्हें देख रहा था . एक तरफ मन में ये विचार था क वो मेरी दीदी हैं इस लिए खुद पर गुस्सा भी आ रहा था पर दूसरी तरफ मन बार बार उन्हें देखने को कर रहा था .

निधि : चुप क्यों हो कोई तो बात करो . तुम ऐसे चुप हो तो मुझे अजीब सा लग रहा है . एक तो ये कपडे ……

अमित : तो किसने कहा था ऐसे कपडे पहनने को ? पहले तो कभी पहने नहीं आपने ऐसे कपडे .

निधि : वो मेरी दोस्त ने कहा था ऐसे कपडे पेहेन कर आने को. वो पार्टी में सब ऐसे hi कपडे पेहेन कर आने वाले हैं इस लिए .

अमित : हम्म , तो इस लिए आज आप ऐसे कपड़ों में हैं. पता नहीं वहां पर सब का क्या हाल होने वाला है .

निधि : तुम हो न मेरे साथ , मुझे किसी की परवाह नहीं . ाचा एक बात केहनी थी .

अमित : कहिये

निधि : वो मैं ,,, वो बात ये है क

अमित : अब कहिये भी दीदी आप इतना सोच क्यों रही हैं.

निधि : वो बात ये है क मेरी फ्रेंड ने कहा था क मैं अपने बर्फ क साथ आऊं . मैंने उसे मज़ाक में कह दिया था क मेरा बर्फ है. इस लिए तुम्हे वहां पार्टी में मेरा बर्फ बन क जाना है.

अमित : क्याआ ??? पर ऐसा कैसे हो सकता है ??? और आज तो आप जीजू से मिलने वाली थी न ???

निधि : मैंने ऐसा कब कहा था ? वो तो तुम खुद hi ऐसा कह रहे थे .

अमित : पर आप hi तो कह रही थी क आज आप अपने दिल की बात करेंगी

निधि : हाँ पर मैंने कब कहा क मैं किसी से मिलने वाली हूँ. दिल की बात तो ऐसे भी हो सकती है न . अब वो सब छोडो , तुम वहां मुझे मेरे नाम से बुलाओगे . अगर तुमने मुझे दीदी कहा तो मेरी फ्रेंड क आगे मेरी पोल खुल जाएगी और फिर वो मुझ पर हँसेगी. तुम ऐसा तो नहीं चाहते न क वो मुझ पर हांसे ?

अमित : पर दीदी …..

निधि : पर वॉर कुछ नहीं , तुम आज मेरे बर्फ हो उस पार्टी में और कुछ मत सोचो. मैं सिर्फ तुम पर hi भरोसा कर सकती हूँ इस लिए तुम्हे साथ लेकर आयी हूँ. अब अगर तुम्हे कोई ऐतराज़ है तो हम वापिस चलते हैं.

निधि दीदी ने भी नैना दीदी की तरह मुझे उसी चक्कर में फंसा दिया था. अब मैं क्या करता , अगर इंकार करता तो दीदी पर उनकी फ्रेंड हस्ती . ऐसा मैं नहीं चाहता था . दूसरी तरफ जो कुछ नैना दीदी और मेरे बीच इस सब क कारन हो चूका था वो सब मैं निधि दीदी क साथ नहीं चाहता था इस लिए दिल दर भी रहा था .

अमित : ठीक है मुझे मंज़ूर है.

निधि : मुस्कुराते हुए ) अब थोड़ा स्माइल भी करो , ऐसे मुँह क्यों लटका रहे हो. और वहां बिलकुल एक बर्फ की तरह पेश आना. वैसे तो मुझे खुद कोई एक्सपीरियंस नहीं पर जो भी हो , जैसा वहां सब के रहे हो हम भी वैसा hi करेंगे .

अमित : पर दीदी हम भाई बहिन हैं , वो सब हम कैसे कर सकते हैं.

निधि : क्या सब ?? सिर्फ डांस hi तो करना होता है . तुम किस बारे में बात कर रहे हो ?

मैं तो पता नहीं क्या क्या सोच गया था दिमाग में . जबकि निधि दीदी तो ऐसी थी hi नहीं. नैना दीदी और करुणा दीदी की बात और थी. निधि दीदी ने जब सवाल पूछा तो मैं बात को सँभालने लगा .

अमित : हाँ ,,, हाँ , वो मैं उसी की बात कर रहा था .

निधि : अब डांस करने में क्या प्रॉब्लम है? वो तो हम कर hi सकते हैं न .

अमित : हम्म्म , ठीक है .

कुछ hi देर में हूँ एक डिस्को क्लब में पहुँच गए . जहाँ बहार बहुत साडी गाड़ियां कड़ी गयी थी और बहुत सरे लड़के लकड़ियां वहां नई ईयर का जश्न मानाने आये हुए थे. सब बड़े घरों क hi लग रहे थे . दीदी ने अपनी फ्रेंड को कॉल किया तो उसने अंदर आने को कहा . हम दोनों भी अंदर को चल दिए . अंदर जाने से पहले दीदी ने मेरी लेफ्ट बाज़ू को अपनी दोनों बाँहों में थम लिया और मेरा साथ सात कर चलने लगी जिससे दीदी की छाती से एक बार मेरी बाज़ू टच हुई तो मेरी रिड की हड्डी तक सिहरन हुई . एक तो दीदी आज इतनी खूबसूरत लग रही थी पता नहीं क्या क्या करवा कर हक्क कर आयी थी वहां से ऊपर से ऐसे कपडे पहने थे क बार बार मेरी नज़र उन पर जा रही थी. दूसरा वहां का माहौल , हर तरफ लड़के लड़कियां बस एक दूसरे क साथ डांस करने क नाम पर बस छेड़छाड़ hi कर रहे थे . अंदर रौशनी बहुत hi काम थी और सब डांस में लगे हुए थे. एक तरफ बार बना हुआ था और आगे बैठने क लिए लाउन्ज सा बना हुआ था . वहां पर दीदी की तरह hi सफ़ेद शार्ट ड्रेस में एक लड़की एक लड़के क साथ बाँहों में बहन दाल कड़ी थी जिसने निधि दीदी को इशारा किया और दीदी ने भी उसे इशारा किया. हम उस तरफ चल दिए .

निधि : ये मेरी फ्रेंड है , और साथ में उसका बर्फ. अब सब तुम्हारे हाथ में है. यद् रखना मुझे मेरे नाम से hi बुलाना बिलकुल एक बर्फ की तरह .

निधि : hi , साक्षी कैसी हो ? मीट माय फ्रेंड अमित . अमित शी इस साक्षी , माय कॉलेज फ्रेंड .

दीदी ने अपनी फ्रेंड से मुझे मिलवाया तो मैंने उससे हाथ मिलाया. देखने में वो भी खूबसूरत थी पर दीदी से हर मामले में 19 hi थी.

साक्षी : hi अमित , तो फाइनली तुमने अपनी कसम तोड़ कर अपने लिए पार्टनर ढूंढ hi लिया. वैसे मन्ना पड़ेगा तुमने क्या चुन कर अपने लिए बर्फ ढूँढा है. परफेक्ट जोड़ी है . देखने में तो बिलकुल हीरो की तरह hi लग रहा है और सेहत से तो बॉडीगार्ड . बी थे वे मीट माय बर्फ नीलेश . नीलेश शी इस माय फ्रेंड निधि एंड हेर बर्फ अमित .

नीलेश देखने में स्मार्ट था पर नार्मल hi था फिजिक्स से . उसने हाथ आगे बढ़ाया तो मैंने उससे भी हाथ मिलाया .

नीलेश : बहुत सुना था तुम्हारे बारे में क एक लड़की ऐसी भी है जिसने कभी किसी लड़के से दोस्ती नहीं की . चलो ये भी ाचा है क तुमने इरादा बदल लिया. वैसे मन्ना पड़ेगा , साक्षी ने जितना बताया था तुम उससे भी ज्यादा खूबसूरत हो .

निधि : थैंक यू , पता नहीं उसने क्या बताया है पर ये भी किसी से काम नहीं. आप दोनों ज़रा बातें करो , हम दोनों अभी आती हैं.

निधि मुझे नीलेश क पास छोड़ कर साक्षी क साथ एक तरफ चल दी शायद वाशरूम जाना था उन्हें .

नीलेश: तो भाई , क्या करते हो तुम? वैसे बुरा मत मन्ना चेहरे से तो अभी छोटे लगते हो मगर बॉडी देख कर नहीं लगता .

अमित : है है है , थैंक्स , बस अभी कॉलेज ,,,,,, कॉलेज से निकला हूँ. हम दोनों एक hi कंपनी में काम करते हैं.

मेरे मुँह से निकलने वाला था क कॉलेज में हूँ पर ऐन मोके पर यद् आ गया क मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए .

नीलेश: ाचा ??? फिर तो तुम निधि से छोटे हो मतलब ?

अमित : अब प्यार में उम्र कौन देखता है वैसे कोई खास फरक है भी नहीं.

नीलेश : हाँ बात तो सही है. वैसे मन्ना पड़ेगा यार , क्या ज़बरदस्त हाथ मारा है. निधि सच में बहुत हॉट है यार . प्लीज बुरा मत मन्ना .

मुझे गुस्सा तो आया निधि दीदी क बारे में ऐसा सुन कर मैंने खुद पर कण्ट्रोल किया आखिर मैं यहाँ उनका बर्फ बन कर आया था . वैसे भी नीलेश ने गलत बात नहीं की थी अब वो हैं hi इतनी खूबसूरत क ऐसे hi विचार तो निकलेंगे दिल से .

अमित : मैं खुशकिस्मत हूँ क उन्होंने मुझे चुना .

नीलेश : बात कहाँ तक पहुंची ? कुछ किया वीर्य क नहीं अभी तक. मैं होता तो पहली बार में hi बैडरूम तक ले जाता .

अमित : वो ऐसी नहीं हैं , आप कुछ लेंगे ?

नीलेश बातों में कुछ ज्यादा hi आगे बढ़ रहा था जो मैं नहीं करना चाहता था . इस लिए मैंने उसे ड्रिंक क बारे में पूछ लिया. पर भूल गया क ये एक बार है.

उधर निधि साक्षी को लेकर साइड में निकल गयी थी उससे बात करने क लिए

साक्षी : यहाँ क्यों लायी है मुझे ? देख तेरे कहने पर मैं नीलेश क साथ यहाँ आयी हूँ . अब बाकि का तो तुझे खुद hi करना पड़ेगा. वैसे तू सही कह रही थी , देखने में हीरो hi लगता है पर थोड़ा शर्मीला है जो तेरे साथ इतना डेन्ट बन कर खड़ा था. वर्ण जितना हॉट तू आज लग रही है . कोई और होता तो यहाँ आने की बजाये बीएड पर hi ले क जाता .

निधि : शर्मा कर ) अब चुप भी करेगी ? एक तो पहले hi मेरी धड़कने इतनी तेज़ चल रही हैं क समझ नहीं आ रही. उससे किसे बात करूँ? मुझसे हिम्मत नहीं हो रही .

साक्षी : तू भी न शुरू से hi बुद्धू है. अरे लड़के तो खुद पीछे पड़े रहते हैं लड़कियों क. और तुझसे बेहतर उसे और कोई लड़की कहाँ मिलेगी? मेरी मन सीधा सीधा बात कर ले , वो मन कर hi नहीं सकता तुझे .

निधि : तू नहीं जानती साक्षी ये सब इतना आसान नहीं है . मतलब मेरे में हिम्मत नहीं है. पर आज जो भी हो मुझे हर हल में अपने दिल की बात उससे करनी hi होगी . वर्ण देर हो जाएगी .

साक्षी : तो फिर हिम्मत कर क बोल दाल. अगर और हिम्मत चाहिए तो मेरे साथ चल दो शॉट वोडका क लगा ले. हिम्मत अपने आप आ जाएगी.

निधि : पर उससे कोई गड़बड़ तो नहीं होगी न ?

साक्षी : अरे इतने से कुछ नहीं होता . बोतल जातक जाती हैं लड़कियां तो. वैसे भी वो है न तेरे साथ . क्या पता मौके क फायदा वो hi उठा ले और आज तुम्हारी ओपनिंग कर दे . हे हे हे

निधि : छी ,, गन्दी ,, वो ऐसा नहीं है

साक्षी : क्यों? उसके पास घोडा नहीं है क्या ? देखने में तो हत्ता कट्टा है . सामान भी तगड़ा hi होगा .

निधि : चुप्प , प्लीज ऐसा मत बोल . वो ऐसा नहीं है. चल अब चलते हैं . प्लीज मुझे हिम्मत देना आज मुझे हर हल में उससे दिल की बात करनी है . मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकती



साक्षी : तू चल तो सही मेरी जान . मैं तेरे साथ हूँ
 
सॉरी भाई लोगो पर निधि वाला अपडेट थोड़ा मुझे लिखने में मुश्किल सा लग रहा है इस लिए टाइम ज्यादा लग रहा बार बार लिख कर डिलीट करना पद रहा . कल कोशिश रहेगी कम्पलीट करने की
 
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