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‘ तू कहाँ गायब है 2 दिन से ? रत को भी लेट अत है , बात क्या है ? कुछ बताएगा ‘ रमा और करिश्मा क साथ मोहित जब आ कर बैठा तो रमा थोड़ा गुस्से से बोल रही थी मोहित को. मोहित बस नज़रें hi चुरा रहा था. उसके चेहरे पर उदासी और गंभीरता करिश्मा को परेशां कर रही थी मगर रमा का इस बात पर ध्यान नहीं गया था अभी.
मोहित : छुट्टियां ख़तम होने वाली हैं तो दोस्तों क साथ थोड़ा बहार गया था
रमा : तू और तेरे दोस्त , अब कौन से दोस्त आ गए तेरे ? अमित से तो मिलने गया नहीं तू फिर किन लोगों से मिल रहा है ? कहीं फिर से उन लफंटर दोस्तों से तो नहीं मिलने लग गया ? मैंने पहले भी कहा था उन लोगों से तेरा मिलना मुझे पसंद नहीं . लगता है तेरे पापा को बोलना पड़ेगा
मोहित : आप को जो ाचा लगे आप करो मैं जा रहा हूँ.
मोहित गुस्से से खड़ा हुआ और माँ को जवाब देकर जाने लगा तो करिश्मा ने उठ कर उसका हाथ पकड़ लिया . जबकि रमा तो मोहित क इस रवैये से और ज्यादा भड़क गयी .
करिश्मा : खान जा रहा है ? मुझे तेरे से बात करनी है
रमा : जाने दे इसे जहाँ जाना है इसे . अपने उन्हें घटिया दोस्तों क पास hi जायेगा जिन्हे छोटे बड़ों का लिहाज़ नहीं और न hi शर्म . उनके साथ रह कर उनके जैसा hi हो जायेगा .
मोहित : हाँ हो जाऊंगा उनके जैसा , आपको ाचा नहीं लगता तो चला जाता हूँ हमेशा क लिए .
मोहित करिश्मा का हाथ झटक कर गुस्से से अपनी माँ को बोलता हुआ निकल गया घर से. करिश्मा उसे पुकारती रही पर वो बिना सुने बहार निकल गया. रमा को मोहित क ऐसे बिहेवियर की उम्मीद नहीं थी वो तो बस स्तब्ध थी मोहित का ये रूप देख कर. करिश्मा भी दुखी हो रही थी मोहित क ऐसे जाने से .
करिश्मा : ये आप ने क्या किया माँ , आपको नज़र नहीं आ रहा वो किसी बात से उखाड़ा हुआ है और आप उस पर ऐसे चिल्ला रही थी. आपको उससे बात तो करनी चाहिए थी अचे से
रमा : तुमने देखा कैसे बात की उसने मेरे साथ. अगर कोई प्रॉब्लम है तो बता नहीं सकता . ऐसे बात करेगा अब अपनी माँ से. ये सब गलत सांगत का नतीजा है . ाचा भला अमित क साथ अब खुश रहने लगा था पता नहीं फिर से कैसे उन लोगों क पास पहुँच गया है ये. देख लेना ये फिर से बिगड़ जायेगा .
करिश्मा : नहीं ऐसा नहीं होगा , मैं उससे बात करुँगी और फिर अमित भी तो है न . मोहित अमित को बहुत मंटा है. बस उसको समझने की देर है फिर सब ठीक हो जायेगा
दोनों माँ बेटी मोहित की वजह से टेंशन में आ गयी थी. करिश्मा को तो अंदाज़ा था क बात क्या है . इस लिए वो एक बार मोहित से इस मटर पर बात करना चाहती थी तभी इसका हल निकल सकता था .
उधर गाओं में बिल्ला और उसके साथी तैयार थे हमले क लिए . शाम का वक़्त हो चूका था और सर्दियों की वजह से अँधेरा भी हो रहा था . विजय जो गाओं से बहार था उसका आने का वक़्त हो चला था . इधर अमित घर पर hi था . बिल्ला गाओं से बहार जो टीम बैठी थी उनके पास hi चला गया था और खेत में छिप कर सड़क पर नज़र गड़ाए बैठे थे . वहीँ तीन लोग इशारा मिलने क इंतज़ार में थे क वो अमित को घर से बुला कर हमला कर सके . दोनों जगह एक hi टाइम पर काम करना था ताकि भाग कर निकल सके . अगर वक़्त आगे पीछे होता तो बाद वाली टीम पकड़ी जा सकती थी लोगों को पता लगने पर .
‘ क्यों भाई किसके घर आये हो ? बड़ी देर से बहार hi घूम रहे हो . ‘ बिल्ला क जो तीन साथी अमित क घर क पास hi गली में देहाती बन कर बैठे बीड़ी सुलगा रहे थे उन्हें रह चलते एक बुज़ुर्ग व्यक्ति ने पूछ hi लिया. अब शहर तो था नहीं क किसी से कोई मतलब न रखता हो. गाओं में तो लोग एक दूसरे को अचे से जानते थे परिवार की तरह और उनके रिश्तेदारों तक की खबर रखते थे . ऐसे hi इस बुज़ुर्ग ने इन लोगों को नोटिस कर लिया था जब वो दूसरी बार इस गली से गुज़रते हुए इन लोगों को वहीँ देख कर रुक गया .
‘ अरे ताऊ बस विजय भैया से मिलने ए थे . उह घर माँ नहीं है तो इन्हे बैठ उनकी रह देखर रहे ‘ देहाती लहजे में बात करने की कोशिश करते हुए एक ने जवाब दिया .
‘ अपने विजय क घर आये हो ?? तो बहार कहे बैठे हो . चलो हमर साथ , बैठ कर चाय नाश्ता करवाते हैं . वैसे ू लोग तो किसी परदेसी और मेहमान को ऐसे घर से बहार नहीं बिठाते फिर तुम लोग कइसन बहार बैठे रहे . कोनो बात नहीं आवा हमर साथ ‘ बुज़ुर्ग तो गाओं की उदार मानसिकता वाला इंसान था और वो अचे से जनता था क विजय का परिवार कैसा है . इस लिए उसे उन लोगों का ऐसा बहार बैठना कुछ जांचा नहीं
‘ अरे ताऊ कहे दिक्कत दें उन लोगों का , बस विजय बाबू से काम है तो बहार hi से मिल कर निकल लेंगे . आप जाइये अँधेरा बहुत हो रहा है ‘ एक बार फिर से बुज़ुर्ग से पीछा छुड़ाने क लिए उस गुंडे ने कोशिश की पर बुज़ुर्ग तो जैसे इसे तौहीन समझ रहा था गाओं की.
‘ अरे ऐसे कैसे तुम लोगों का यहां रहने दायी, जाड़े का मौसम है और अँधेरा भी हो गया है. चलो हमारे साथ ‘
‘ अरे जाओ न ताऊ कहे सर्दी में आप बहार ठिठुर रहे हो. हम चले जाई अभी विजय बाबू से मिल कर ‘
इस बार लहजा थोड़ा सख्त सा था उस गुंडे का जिससे बुज़ुर्ग को और ज्यादा शक हो गया . बाकि दोनों की नज़रें भी बुज़ुर्ग ने देख ली थी इस लिए वो चुपचाप वहां से निकल लिया . मगर घर जाने की बजाये वो दूसरी तरफ से चौराहे की तरफ हो लिया जहाँ इस वक़्त गाओं क कुछ लोग अभी मौजूद हो सकते थे .
‘ ये साला बुदौऊ मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा . मैं तो कहता हूँ अभी जा कर काम शुरू कर दे . खून ये साला किसी को बता न दे ‘
‘ उस्ताद ने कहा था क एक वक़्त पर hi काम करना है . अभी उनकी तरफ से खबर नहीं आयी है ‘
इतने में उसके हाथ में पकड़ा मोबाइल बज उठा और उसने तुरंत फ़ोन उठा लिया .
‘ हाँ उस्ताद ,,,,,,, ठीक है ,,,,,,, हम भी जा रहे हैं ,,,,,,.. ठीक है . उस्ताद ने कहा है क काम शुरू कर दो ‘
इतना सुनते hi बाकि दोनों ने जो बड़ी सी शाल आयद राखी थी उसे निकल कर अपने हथियार दुरुस्त किये . एक क हाथ में हॉकी और दूसरे क हाथ में लोगे की रोड थी. तीसरा तेज़ कदमो से विजय क घर की तरफ भगा और ज़ोर ज़ोर से दरवाज़ा पीटने लगा . दरवाज़ा अजय ने खोला जो अभी अभी घर लौटा था .
अजय : क्या बात है कौन हो आप ? किस्से मिलना है ?
‘ जी वो ,,, वो वहां विजय बाबू का एक्सीडेंट हो गया है . वो अमित को बुला रहे हैं .’
अजय : क्याआआ ??? भैया का एक्सीडेंट ??? कहाँ हुआ है ? कैसे हुआ है ? कहाँ हैं वो ?
‘ hi वो गाओं से दूर हैं. आप अमित को बुला दीजिये . वो अमित को बुला रहे हैं ‘
अजय : हाँ हाँ , मैं चलता हूँ , तुम मुझे बताओ वो कहाँ हैं
अजय मां की आवाज़ थोड़ी ऊँची आयी थी जब वो उस आदमी से बात कर रहे थे जिससे हम सब को ये अजीब लगा और मैं जल्दी से उठ कर उनकी तरफ तेज़ कदमो से बढ़ा .
अमित : क्या बात है मां जी ??
अजय : ये कह रहा है भैया का एक्सीडेंट हो गया है . चल जल्दी चल .
अमित : क्या ????? बाबा का एक्सीडेंट ??? कहाँ हैं वो ? चलो जल्दी बताओ मुझे
‘ आइये मेरे साथ , मैं बताता हूँ ‘ मैं उस आदमी क साथ बहार निकला और अजय मां भी मेरे साथ hi चल पड़े. हम दोनों को बाबा की चिंता हो रही थी. अजय मां और मैं दोनों hi टेंशन में आ गए थे ये बात सुन कर . हम उस आदमी क साथ तेज़ी से लगभग भागते हुए चले जा रहे थे . गली क मोड़ से मुड़ते hi आगे खड़े दो लोग जैसे हमारे hi इंतज़ार में थे और उन्होंने हम पर हमला किया . अजय मां संभल नहीं पाए और उनके सर पर हॉकी का वॉर हो गया . मुझ पर दूसरे ने हमला किया पर मैंने हवा में इस लोहे की रोड को रोक लिया . जो आदमी हमें घर से बुला कर लाया था उसने भी पलट झपकते अपनी शाल गिरायी और तेज धार हथियार से मुझ पर झपटा . इससे पहले की वो मुझ पर वॉर करता उसका हाथ हवा में hi रुक गया . मैंने देख तो उसके हाथ को रोकने वाला कोई और नहीं डरा भैया थे और उनके साथ कुछ और लोग भी थे जिन्होंने आते hi तीनो को पकड़ कर मरना पीटना शुरू कर दिया . मैंने जल्दी से अजय मां को संभाला .
अमित : आप ठीक तो हैं मां ?
अजय : हाँ मैं ठीक हूँ .
डरा : मारो इन कुत्तों को . तुम चिंता मत करो छोटे भाई . हम देख लेंगे इन लोगों को.
अमित : कौन हैं ये लोग और आप यहाँ कैसे पहुंचे ?
डरा : ताऊ ने अभी बताया था क तीन अज्ञानी लोग यहाँ बैठे हैं और इनके इरादे ठीक नहीं. तुम्हारे बाबा का नाम लिया था इन्होने बस जानने क लिए आ गए . वैसे तुम्हारे बाबा हैं कहाँ ?
अमित : बाबा तो अभी तक आये नहीं और ये लोग यही कह कर हमें यहाँ लाये थे क उनका एक्सीडेंट हो गया है गाओं क बहार . कहीं उनके साथ …….
बाबा क बारे में दिमाग में बात आते hi मैं गुस्से से भर गया और एक क पेट में ज़ोर से घुटना मारा जिससे वो दोहरा हो गया दर्द से. दाहिने हाथ से ज़ोर दर पंच उसके मुँह पर मरते हुए मैंने उसे ज़मीन पर गिरा दिया और उसके पेट में ज़ोर ज़ोर से ठोकर मरने लगा . फिर मैंने उसकी बाजु घुमा कर पीठ पर लगते हुए और ज्यादा मरोड़ दी तो वो दर्द से तड़प कर चीखने लगा . उसकी बाजु टूट सकती थी जिससे बचने क लिए वो छत पता रहा था
‘ आआअह्ह्ह्ह छोड़ ,,, छोड दो मुझे आआअह्ह्ह्ह ‘
अमित : बता किसने भेजा है तुम लोगों को यहाँ ? मेरे बाबा कहाँ हैं ? बता नहीं तो अभी क अभी चीयर दूंगा तुम लोगों को
‘ आआअह्ह्ह्हह छोड़ दो मुझे आआअह्ह्ह्हहीीी बताता हूँ बताता हूँ पहले छोडो ‘
मैंने उसके हाथ को थोड़ा ढीला किया तो वो बोलै .
‘ तुम्हारे बाप पर हमला होने वाला है . शायद हो चूका होगा गाओं क बहार ‘
इतना सुनते hi मैं गुस्से से भर गया और उसकी बाजु ज़ोर से झटक कर मरोड़ दी जिससे उसकी कलाई और कन्धा अपने जोड़ से खिसक गए और वो ज़ोर से चिल्लाने लगा . मैं तेज़ कदमो से वहां से गाओं क बहार वाले रस्ते की तरफ भगा और मेरे पीछे डरा भैया भी दौड लगा दिए . उनके पीछे बाकि सब भी भाग पड़े . मुझे चिंता हो रही थी क कहीं बाबा क साथ कुछ गलत न हो जाये . मैं तेज़ कदमो से बस भागता hi जा रहा था. बाकि सब तो पीछे रह गए थे बस डरा भैया hi मेरे करीब थे . गाओं क बहार वाले रस्ते क करीब जैसे hi हम पहुंचे तो कुछ लोगों क अक्स नज़र आये . अँधेरे में साफ़ नज़र नहीं आ रहा था. पर किसी क कराहने की आवाज़ आ रही थी . मुझे समझते देर न लगी क ये बाबा hi हैं.
अमित : बबाआआआआ
मैं बड़े कदमो से उछाल कर उन लोगों पर गिर पड़ा जो लोग बाबा को मर रहे थे . दो लोगों को अपने नीचे लिए मैं गिर पड़ा . दो और लोग वहां थे . जिन्होंने मुझ पर हमला करने की कोशिश की तो पीछे से डरा भैया ने दोनों को अपनी दायीं और बायीं बाजु में गर्दन से कास लिया. मैं जल्दी से उठा और एक क हाथ में पकड़ा बसेबत छीन कर उसी से दोनों की ज़ोर ज़ोर से धुनाई करने लगा . डरा भैया ने भी दोनों को अपनी बगलों के इतना ज़ोर से जकड रखा था क उनकी साँसे बंद होने लगी थी . वो दोनों ज़ोर ज़ोर से छटपटा रहे थे डरा भैया की पकड़ से छूटने क लिए पर डरा भैया की पकड़ से भला वो कैसे छूट सकते थे . इधर दोनों को मैं पागलों की तरह बस मरता hi जा रहा था . और इतना मारा क दोनों भीख मांगने लगे क मैं उन्हें छोड़ दूँ . तभी बाकि लोग भी पहुँच गए और डरा भैया ने भी दोनों को ज़ोर से पटक दिया. बाबा ने कराहते हुए मेरा नाम पुकारा तो मेरा ध्यान उन की तरफ गया . सड़क की एक तरफ उसका स्कूटर गिरा पड़ा था . मैंने जल्दी से उनको उठाने की कोशिश की तो देखा उनके सर से बहुत ज्यादा खून निकल रहा था .
अमित : बाबा ,,, बाबा ,,,, आपको कुछ नहीं होगा ,,, कुछ नहीं होगा आपको .
विजय : मैं,,,,, ठीक हूँ ,,,,
अमित : डरा भैया आप स्कूटर उठाओ
बाबा की हालत ठीक नहीं थी इस लिए मैंने उन्हें जल्दी से उठाया और डरा भैया ने बाबा का स्कूटर उठा कर उसे स्टार्ट किया और मैं बाबा को बीच में बिठा कर पीछे बैठ गया . डरा भैया तेज़ी से स्कूटर चलने लगे और हम निकल गए शहर की तरह क्यूंकि गाओं में बस एक छोटी सी डिस्पेंसरी थी जो शाम को बंद हो जाती थी और इस वक़्त बाबा की हालत अछि नहीं थी . मुझे बाबा की हालत देख कर चिंता होने लगी थी. उनके सर से लगातार खून बह रहा था जिसे मैं हाथों से दबा कर रोकने की कोशिश कर रहा था .
अमित : बाबा आपको कुछ नहीं होगा ,, कुछ नहीं होगा आपको. हिम्मत रखिये .
विजय : ममम मैं थीएककक हूंणंन्न मैं थी ,,,,,,,
बाबा की आवाज़ बहुत कमज़ोर सी निकल रही थी और अब जैसे उन पर बेहोशी छ गयी थी. मैं बाबा को होश में लेन की कोशिश कर रहा था पर बाबा बोल नहीं रहे थे . डरा भैया भी स्कूटर को पूरी गति से दौड़ा रहे थे. पर शहर गाओं से दूर था . मगर फिर भी समय से पहल hi डरा भैया ने हमें शहर पहुंचा दिया और हॉस्पिटल पहुँचते hi मैं बाबा को बाँहों में उठाये सीधा अंदर को भगा . तुरंत कम्पाउण्डर और नर्स ने बाबा को स्ट्रेचर पर डाला और िक में ले गए. एक डॉ जो वहीँ मौजूद था उसने जल्दी से बाबा का इलाज शुरू किया और हमें बहार रुकने को कहा .
डरा : सब ठीक हो जायेगा छोटे तुम चिंता मत करो. पर ये मामला क्या है ? वो लोग थे कौन ?
अमित : पता नहीं भैया मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा .
डरा : कहीं ये उस सुन्दर पहलवान का काम तो नहीं ??? सुना है उस दिन वो दांत पिस्ता हुआ गया था गाओं से .
अमित : ये तो वो लोग hi बता सकते हैं जो हमला करने आये थे . आप फ़ोन लगा के पता करो उन्होंने कुछ बताया या नहीं . अगर ये सुन्दर का काम है तो उसको और उसके बेटे को मैं ज़िंदा नहीं छोडूंगा .
डरा : शांति रख भाई , जब तक सचाई पता नहीं चलती तब तक कुछ नहीं करना . मेरा फ़ोन तो घर पर hi रह गया , क्या तेरे पास है फ़ोन ?
मैंने अपनी जेब चेक की तो मेरा फ़ोन भी घर पर hi रह गया था . असल में बच्चों की तस्वीरें खींच रहे थे हम इस लिए फ़ोन मेरे हाथ में नहीं था .
अमित : नहीं भाई मेरा भी पास नहीं है .
डरा : तू यहीं रुक मैं देखता हूँ.
डरा भैया बहार चले गए और मैं वहीँ खड़ा बस भगवन क आगे हाथ जोड़ रहा था क बाबा ठीक हो जाएँ.
उधर गाओं में अजय मां क सर पर चोट लगने क बाद 2 लोग उन्हें घर ले गए थे . घर जाते hi जब अजय मां की हालत देखि तो सब चिंता में पद गए .
गौरी : ये क्या हुआ देवर जी ये चोट कैसे लग गयी ?
अजय : कुछ नहीं हुआ भाभी मैं ठीक हूँ
गौरी : कहाँ ठीक हो , ये सर से खून निकल रहा है. ये चोट कैसे लगी है तुम्हे ?
अजय : वो पाऊँ फिसल गया था भाभी मैं ठीक हूँ आप सब चिंता मत करो
दिव्या : चिंता कैसे न करे ? ये चोट गिरने से तो लगी नहीं लगती . अमित कहाँ है ? वो तो आपके साथ गया था न .
अजय : वो ,,, वो भैया को लेने गया है
गौरी : झूठ बोल रहे हो तुम अजय , सच सच बताओ क्या हुआ है . और तेरे भैया किधर हैं . तुम बताओ क्या बात है ?
अजय को जो घर छोड़ने आया था लड़का गौरी ने उसे hi घेर लिया . अब तक कामिनी भी अजय क पास आ गयी थी और चिंता से उसकी आँखों से आंसू निकल आये थे . दीपिका हालत को देखते हुए गरम पानी और मलहम पट्टी का सामान ले आयी थी . जिसमे राधा और नेहा उसकी मदद कर रहे थे .
‘ वो पता नहीं कौन लोग थे ताई उन लोग ने हमला किया है चाचा और अमित पर . अमित ठीक है पर वो बड़े ताऊ जी की तरफ गया है . वो लोग उन पर भी हमला करने वाले थे . ‘ ये सुनते hi गौरी क पाऊँ क नीचे से ज़मीन hi निकल गयी. और ऐसा hi कुछ हल दिव्या का भी था. दीपिका को भी अब चिंता हो रही थी मगर वो हिम्मत से काम ले रही थी .
गौरी : क्या ? कौन हैं वो लोग ? आखिर हमारी क्या दुश्मनी है उन लोगों से ? हैट भगवन रक्षा करना , पता नहीं किसे हैं वो .
दीपिका : दीदी चिंता मत करो सब ठीक होगा , अमित गया है जा . वो सब संभल लेगा
दिव्या : क्या संभल लेगा वो , अभी वो इतना भी बड़ा नहीं हुआ , कहीं उसे कुछ हो गया तो? वो अपनी बिलकुल भी परवाह नहीं करता. अकेला भीड़ जाता है हर जगह अगर उसे कुछ…….
गौरी : नहीं नहीं ,,, उसे कुछ नहीं होगा . कमलेश कहाँ है ? वो अभी तक आय क्यों नहीं. जल्दी से उसे फ़ोन लगाओ और बोलो क जाकर देखे . मैं भी इन्हे फ़ोन लगाती हूँ.
दीपिका ने जल्दी से कमलेश को फ़ोन कर क हालत क बारे में बताया . गौरी ने विजय को फ़ोन किया तो उसका फ़ोन नहीं लग रहा था जब अमित का no. लगाया तो वो पास में hi पड़ा था .
राधा : ममी अमित का फ़ोन तो गलती से यहीं रह गया .
दिव्या : ये लड़का बहुत लापरवाह है , कह देती हूँ अगर उसे कुछ हुआ तो मैं ,,,,,, मैं यहाँ कभी दुबारा नहीं आउंगी .
दिव्या तो रोने hi लगी थी उसके मन में उलटे सीधे विचार आने लगे थे . अजय क सर पर लगी चोट से चाहे खून थोड़ा hi बहा था पर उसका असर दिव्या पर ज्यादा hi हो गया था . वो डरने लगी थी क कहीं अमित को कुछ न हो जाये .
गौरी : ये तुम कैसी बातें कर रही हो दिव्या . कुछ नहीं होगा उसे .
एक दूसरे को चाहे सब हौंसला दे रहे थे पर अंदर से दिल सबका घबरा रहा था . और थोड़ी देर में hi कमलेश घर आ गया भागता हुआ साथ hi ये खबर भी घर पहुँच गयी क विजय बुरी तरह से ज़ख़्मी हुआ है और अमित डरा उसे लेकर शहर चले गए हैं. अमित क ठीक होने की खबर सुन कर जहाँ कुछ रहत मिली थी सबको वहीँ विजय की हालत ने चिंता बढ़ा दी थी. कमलेश ने जल्दी से अपनी मोटरसाइकिल निकली और अजय को साथ बिठा कर निकल लिया शहर की तरफ . उधर दीपिका ने जल्दी से फ़ोन घुमा दिया मंजू और राघव की तरफ
मंजू ने जब ये बात सुनी क विजय पर हमला हुआ है उसका तो दिल hi दर से बैठ गया . कल hi तो धमकी दी थी बलजीत राइ ने और आज हमला भी हो गया . मंजू भी बहुत घबरा गयी और तुरंत ऋतू को फ़ोन लगा कर साडी जानकारी दी. अमित कहाँ है किस हॉस्पिटल गया है ये अभी तक किसी को नहीं पता था . पर ऋतू ने फ़ौरन वायरलेस पर आर्डर कर दिया था क सब हॉस्पिटल में पता करो लड़ाई झगडे में कोई घायल हो कर आया है तो जल्दी बताये .
उधर राघव तो शहर से बहार था पर रमा को जब इस बात का पता चला तो वो भी चिंता में पद गयी और तैयार हो गयी घर से निकलने क लिए पर जाना कहाँ है उसे भी कहाँ पता था .
इधर हॉस्पिटल में आधे घंटे बाद डॉ बहार आया तो मैं दौड़ कर उसके पास गया .
अमित : अब बाबा की तबियत कैसी है डॉ साहब
डॉ : घबराने की बात नहीं है , खून ज्यादा बहने से बेहोश हो गए थे . अभी उन्हें ग्लूकोस लगा दिया है और कुछ इंजेक्शन लगा दिए हैं. ज़रूरत पड़ी तो ब्लड भी चढ़ा देंगे . इन्हे अभी यहीं रखना पड़ेगा . देखिये ये लड़ाई झगडे का केस है इस लिए पुलिस केस बनता है. वो थोड़ी देर में आ जायेंगे . तब तक आप पैसों का इंतज़ाम कर लीजिये .
डॉ मुझे ये सब कह कर अपने केबिन की तरफ चला गया और एक नर्स मेरे पास आयी और मुझे 10000 जमा करवाने को कहा . किस्मत से इस वक़्त जेब में न पैसा था न पर्स . मैंने नर्स से कहा क थोड़ी देर में पैसे जमा करवा दूंगा आप इलाज करो . उधर से डरा भैया भी आ गए .
डरा : गाओं में खबर कर दी है तुम्हारे घर भी बता देंगे . पर एक गड़बड़ हो गयी .
अमित : क्या हुआ ?
डरा : वो लोग भाग निकले , अब ये पता नहीं चलेगा क किसने ये सब किया है .
अमित : वो लोग भाग कैसे गए ? इतने लोगों क बीच से .
डरा : वहां हम दोनों क पि हे सब भाग लिए दो लोग रह गए थे जिन्हे धक्का देकर वो अँधेरे में कहीं गायब हो गए . उधर सड़क पर जो चार लोग थे उनमे से शायद एक काबू में आ जाये , क्यूंकि वो खेतों क बीच कहीं भगा है बाकि तीन तो गाड़ी से भाग लिए . अब वो चौथा काबू में आ जाये तो शायद कुछ पता चले .
अमित : अजय मां तो ठीक है न ?
डरा : हाँ उन्हें ज्यादा चोट नहीं आयी है और मैंने कहलवा दिया है क इधर भी सब ठीक है . अभी डॉ ने क्या बोलै ?
अमित : डॉ ने कहा है क सब ठीक है . पुलिस को शायद बुलावा लिया है उन्होंने ने .
डरा : ये भी ज़रूरी है , आखिर पता तो चले क इस सब क पीछे कौन है .
थोड़ी देर में नर्स ने आकर फिर से पैसों का पूछा तो मैं और डरा एक दूसरे को देखने लगे .
डरा : मैं जाकर गाओं से ले कर अत हूँ .
अमित : नहीं भाई आप यहीं रुको , मैडम थोड़ी देर में पैसे जमा करवा देंगे घर से कोई न कोई अभी आ जायेगा .
‘ किधर है वो पेशेंट जो लड़ाई झगडे में घायल हुआ है ? ‘ एक सख्त आवाज़ को सुन कर मैंने उस तरफ देखा तो एक पुलिस इंस्पेक्टर नर्स से ये सवाल पूछ रहा था. उसके साथ हवलदार भी थे.
नर्स : सर वो अभी होश में नहीं है. ये उनके साथ हैं .
इंस्पेक्टर: तुम लोग क्सक्सक्सक्सक्स गाओं से आये हो ?
इंस्पेक्टर ने हमारे गाओं का नाम लिया तो मैं और डरा भैया दोनों hi चौंक गए .
अमित : जी सर पर आपको कैसे पता ?
इंस्पेक्टर: तुम दोनों में से अमित कौन है ?
हम दोनों hi एक बार फिर से हैरान थे क इंस्पेक्टर को मेरा नाम तक पता है .
अमित : जी सर मैं hi हूँ पर आपको कैसे पता ?
इंस्पेक्टर : बताता हूँ ,
हमारी बात का जवाब देने की बजाये इंस्पेक्टर ने अपने हाथ में पकडे वायरलेस पर बात करनी शुरू की और बात दिया क उसे दोनों मिल गए हैं और हॉस्पिटल का नाम भी बता दिया . मुझे समझते देर नहीं लगी क ये सब ऋतू की वजह से हो रहा है. जबकि डरा भाई और वो नर्स अभी भी हैरान थे
इंस्पेक्टर: नर्स डॉ को जल्दी से बुलाओ , और आपको परेशां होने की ज़रूरत नहीं है. हमें सप साहब ने भेजा है . आप उन्हें जानते हैं न ? अभी थोड़ी देर में वो भी आ रही हैं यहीं . आप किसी बात की चिंता मत करिये .
अमित : थैंक यू इंस्पेक्टर साहब
इतने में नर्स क साथ डॉ भी वहां आ गया .
इंस्पेक्टर : डॉ कैसी तबियत है मरीज़ की ?
डॉ : बेहोश है पर खतरे वाली बात नहीं .
इंस्पेक्टर: देखिये डॉ साहब ये लोग सप साहिब क खास हैं . इस लिए अचे से इलाज कीजियेगा , थोड़ी देर में वो भी यहीं आ रही हैं. आप दोनों को कुछ चाहिए तो बता दीजिये अभी हाज़िर हो जायेगा .
अमित : नहीं इंस्पेक्टर साहब हम ठीक हैं शुक्रिया .
डरा भैया और मैं वहीँ बैठे थे और पुलिस वाले हमारे साथ . अब तो डॉ भी बार बार बाबा को चेक करने आ रहा था और दोबारा नर्स ने भी पैसों का नहीं पुछा. कोई आधे घंटे बाद hi साईरन बजता सुनाई दिया और पुलिस वाले फटाफट बहार को दौड़े . मैं और डरा भैया वहीँ थे और डॉ भी भाग कर हमारे साथ खड़ा हो गया. तभी गेट मंजू बुआ और ऋतू अंदर आती हुई दिखाई दी. उनके साथ कई पुलिस वाले थे . मंजू बुआ तो लगभग दौड़ते हुए hi आयी. उनकी आँखों से आंसू लगातार बह रहे थे . मुझे देखते hi उन्होंने मेरा चेहरा दोनों हाथों में थाम कर चूमना शुरू कर दिया. वो साथ में रोये जा रही थी.
मंजू : तू ठीक तो है न तुझे कुछ हुआ तो नहीं ??? तेरे कहीं चोट तो नहीं आयी .
बुआ मुझे अचे से चेक कर रही थी क कहीं मुझे चोट तो नहीं लगी.
अमित : मैं ठीक हूँ बुआ पर बाबा को बहुत चोट आयी है वो अभी भी बेहोश हैं .
मंजू : भैया बेहोश हैं ??? ये सब मेरी वजह से हुआ है . सब मेरी वजह से हुआ है
अमित : ये आप क्या कह रही हो बुआ ? आपकी वजह से कैसे कुछ हो सकता है . आप कैसी बातें कर रही हो .
ऋतू : मंजू खुद को सम्भालो , सब ठीक है . तुम्हे कुछ हुआ तो नहीं न ?
अमित : नहीं मैं बिलकुल ठीक हूँ
ऋतू : कौन थे वो लोग ? ये सब किसे हुआ मुझे ठीक से बताओ .
डरा : मैं बताता हूँ , वो लोग कहीं बहार से आये थे . अमित तो घर पर था और ताऊ जी तो गाओं में थे hi नहीं . वो 7-8 लोग रहे होंगे जो भेष बदल कर गाओं देहात क बन कर hi गाओं में आये थे . इन के घर क पास हमारे गाओं क hi एक बुज़ुर्ग ने जब 3-4 अनजान लोगों को देखा और उनसे सही जवाब न मिला तो उन्होंने आकर चौपाल पर बताया . किस्मत मैं और 3-4 लड़के वहां मौजूद थे तो हम तुरंत वहां पहुंचे . समय रहते हम पहुँच गए वर्ण वो लोग अमित और अजय चाचा को ठीक hi देते . ताऊ जी को उन लोगों ने गाओं से बहार hi घेर लिया और ज़रा देर हो गयी हमें वहां पहुँचते . बस फिर यहाँ आ गए उन लोगों की पिटाई क बाद
ऋतू : अब वो लोग कहाँ हैं ?
डरा : मैंने फ़ोन पर पता किया था तो वो लोग बता रहे थे क वो सब मौका देख कर निकल लिए जब हम ताऊ जी को बचने में लगे थे . हाँ एक अभी भी शायद वहां कहीं छुपा है खेतों में .
ऋतू : पांडेय जी फ़ौरन वहां जो थाना लगता है उसके इंचार्ज को खबर कर दो क वो आदमी बचना नहीं चाहिए . चाहे साडी रत लग जाये पर उसे पकड़ कर मेरे सामने पेश करो .
ऋतू की बात सुनते hi पांडेय नाम का इंस्पेक्टर उसे सलूट कर क बहार निकल गया . इतने में बहार से अजय मां और कमलेश मां भागते हुए आये . अजय मां की शर्ट पर खून की कुछ बुँदे गिर कर दाग बना चुकी थी. मैं जल्दी से उनकी तरफ बढ़ा
अमित : मां आप ठीक तो हैं न , आपको ज्यादा तो नहीं लगी
अजय : मुझे कुछ नहीं हुआ बस ज़रा सी चोट है. तू तो ठीक है न , तुझे तो कहीं चोट नहीं लगी. और भैया कैसे हैं अब ?
अमित : मैं ठीक हूँ , बाबा को अभी होश नहीं आया है . पर वो खतरे से बहार हैं
कमलेश : आखिर ये सब हो क्या रहा है ? किस्से झगड़ा किया है तूने जो बात घर तक पहुँच गयी है .
अमित : मैंने कुछ नहीं किया मां जी
अजय : इसमें इसकी क्या गलती है जो तू उससे पूछ रहा है . शायद भैया को कुछ पता हो . जब तक सच पता न हो ऐसे उंगली मत उठाया करो .
कमलेश : भैया का किसी से क्या बैर , क्या आप नहीं जानते वो कैसे हैं. ज़रूर इसी ने कुछ किया होगा .
ऋतू : एक्सक्यूज़ में मर कमलेश , आप क्या जानते हैं ? ये सब कैसे हुआ है ? आप जैसे बात कर रहे हैं ऐसे लग रहा है आपको कुछ पता है . क्या बताएँगे क क्या बात है
कमलेश : मम मुझे क्या पता , इसी ने किया होगा कुछ
ऋतू : अगर पता नहीं है तो चुप रहिये , हम पता लगा लेंगे . ऐसे किसी पर उंगली मत उठाइये .
कमलेश : मैं कुछ भी कहूं ये मेरे घर का मामला है . आप बीच में मत बोलिये
ऋतू : फॉर योर काइंड इनफार्मेशन ये मेरे भी घर का मामला है इसी लिए समझा रही हूँ . वर्ण मैं ज्यादा बात नहीं करती .
कमलेश मां तो ऋतू की इस बात पर जलभुन गए पर अजय मां ने बात को संभाला और कमलेश मां को पैसे जमा करवाने को भेज दिया .
अजय : ये भी हमारी बहिन है समझे , मंजू की तरह इसे भी हमने बहिन बनाया है तो इसका भी हक़ है . अब तू जा जाकर पैसे देख डॉ को कितने देने है.
अजय : ऋतू बहिन गुस्सा मत करो तुम वो ऐसा hi है .
ऋतू : अरे नहीं भैया मैं गुस्सा नहीं कर रही . आप तो ठीक हैं न .
अजय : मैं बिलकुल ठीक हूँ बस ज़रा सी चोट है , सर पर लगी थी न तो थोड़ा खून निकल आया था . मंजू तुम ज़रा घर पर बात कर लो . भाभी परेशां होगी और दिव्या भी बहुत चिंता कर रही थी अमित की .
मंजू बुआ ने जल्दी से गाओं फ़ोन लगा दिया और फिर मेरी बात करवाई पहले माँ और फिर दिव्या मौसी से बात करने क बाद कामिनी ममी और दीपिका ममी से बात हुई . माँ और दिव्या मौसी को मुझसे बात कर क अब चैन मिला था . डरा भैया कमलेश मां और अजय मां को ऋतू ने पुलिस की गाड़ी ने गाओं भिजवा दिया क्यूंकि बाबा को रत यहीं रहना था तो उनके पास मैंने रुकने की ज़िद की जिसके चलते बाकि सब को जाना पड़ा. मंजू बुआ भी ज़िद कर क वहीँ रुक गयी मेरे साथ. ऋतू भी रुकना चाहती थी पर मैंने उन्हें मन कर दिया . वर्ण उनके साथ पुलिस वालों को भी रुकना पड़ता . फिर भी 2 पुलिस वाले हमारी सुरक्षा में खड़े कर hi गयी वो. डॉ तो ऋतू क आने से hi बदल गया था . उसने खुद hi एक प्राइवेट रूम में बाबा को शिफ्ट कर दिया और उनके पास hi मैं और बुआ रुक गए . इस बीच रमा आंटी का फ़ोन भी आया मंजू बुआ क फ़ोन पे पर मैंने उन्हें आने से मन कर दिया . वो भी ज़िद कर रही थी और बड़ी मुश्किल से उन्हें मनाया . अभी तो रीता मौसी और रजनी मौसी को पता नहीं चला था पता नहीं वो क्या कहेंगी जब पता चलेगा .
‘ ये साला बिंदु कहाँ मर गया ? गाडी में चढ़ा नहीं था क्या ? ‘ गाओं क बहार जो चार लोग थे अमित और डरा क निकलने क बाद अँधेरे का फायदा उठाते हुए भागे थे उनमे बिल्ला भी था . जो अब अपने एक साथी क काम होने पर पूछ रहा था . बड़ी मुश्किल से आज जान बची थी. गाओं वाले पीट पीट कर मर hi डालते . ये तो गनीमत रही क गाओं क बहार थे और रौशनी भी कोई नहीं थी आसपास . करीब hi छुपाई हुई गैर का किसी को अंदाज़ा नहीं था जिस में सवार हो कर ये लोग भाए निकले पर एक साथी उतना किस्मत वाला नहीं निकला. गाडी में सवार होने से पहले hi वो गिर गया था और अँधेरे में जल्दबाज़ी की वजह से ये लोग उसे वहीँ छोड़ कर भाग निकले .
‘ मेरी तो फटी पड़ी थी उस्ताद मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था . बहनचोद आज तो मरते मरते बचे हैं. सेल वो दोनों थे कौन. मर मर कर सेल ने बुरा हल कर दिया है . मौत सामने देख कर किसी तरह गाड़ी तक पहुँचने की हिम्मत जुताई है. बिंदु भी मेरे साथ hi था और वो साला हम दोनों को ऐसे मर रहा था क मार hi डालेगा . ‘ जिन दो लोगों को अमित ने बुरी तरह मारा था ये उनमे से एक था और जो पीछे रह गया था वो भी उसके साथ hi अमित क बैठे चढ़ा था .
बिल्ला : काम पूरा हो hi गया था क वो सेल पता नहीं कहाँ से आ गए . बहनचोद साला इतना तगड़ा था क हिल hi नहीं रहा था . हम दो थे और वो अकेला hi ऐसे दबाये था काच में क हम कोई बचे हैं . बाकि सब कहाँ हैं उनकी कोई खबर मिली ?
‘ नहीं उस्ताद अभी तक तो कोई खबर नहीं . मुझे तो लगता है सेल वो भी काबू आ गए हैं वर्ण ये लोग कैसे हम तक पहुंचे . गलत जगह पन्गा ले लिया उस्ताद . हमारे लोग उनके हाथ आ गए तो पहले ये सेल पिट पिट कर अधमरा करेंगे और फिर पुलिस अलग से खाल उधेड़ेगी. साली वो ऋतू सिंह जल्लाद है , जान से hi मर देगी एनकाउंटर कर क. मैं तो कहता हूँ उस्ताद अब शहर वापिस जाने का सोचना भी मत कहीं दूर निकल जाते हैं. वो हमें ज़रूर ढूंढ लेगी कहीं न कहीं से .
बिल्ला : चुप साले फत्तू , इतना दर लगता है तो जा जेक मजबूरी कर इस धंधे में क्या गांड मरने आया है . उन लोगों का फ़ोन तरय करो देखो साला कोई उठता है क नहीं. उनको वहां से निकलना पड़ेगा वर्ण हम सब पकडे जायेंगे .
बिल्ला भी अंदर से दर तो रहा था ऋतू क नाम से पर अपना दर दिखा नहीं रहा था . उसे चिंता थी क कोई पुलिस क हाथ ज़िंदा काबू आ गया तो ऋतू उन तक पहुँच hi जाएगी . दूसरे साथी ने जल्दी से फ़ोन लगाना शुरू किया तो किसी का तो पहले तो दो लोगों का फ़ोन लगा hi नहीं पर तीसरे का लग गया . उससे पता चला क तीनो वहां से भाग निकले हैं. अँधेरे की वजह से वो भी गाओं से निकल तो गए थे पर पता नहीं था क वो हैं कहाँ. बिल्ला ने उन्हें शहर वापिस न आने का कह कर दूसरे ठिकाने पर आने का बोल दिया . अब उनमे से सिर्फ एक hi साथी काम था जिसके बारे में किसी पता नहीं था बस इतना hi पता था क वो भी बुरी तरफ ज़ख़्मी है . अंदर hi अंदर बिल्ला दर रहा था क्यूंकि अब उसे ऋतू का चेहरा दिखाई दे रहा था काल क रूप में .
‘ तू कहाँ गायब है 2 दिन से ? रत को भी लेट अत है , बात क्या है ? कुछ बताएगा ‘ रमा और करिश्मा क साथ मोहित जब आ कर बैठा तो रमा थोड़ा गुस्से से बोल रही थी मोहित को. मोहित बस नज़रें hi चुरा रहा था. उसके चेहरे पर उदासी और गंभीरता करिश्मा को परेशां कर रही थी मगर रमा का इस बात पर ध्यान नहीं गया था अभी.
मोहित : छुट्टियां ख़तम होने वाली हैं तो दोस्तों क साथ थोड़ा बहार गया था
रमा : तू और तेरे दोस्त , अब कौन से दोस्त आ गए तेरे ? अमित से तो मिलने गया नहीं तू फिर किन लोगों से मिल रहा है ? कहीं फिर से उन लफंटर दोस्तों से तो नहीं मिलने लग गया ? मैंने पहले भी कहा था उन लोगों से तेरा मिलना मुझे पसंद नहीं . लगता है तेरे पापा को बोलना पड़ेगा
मोहित : आप को जो ाचा लगे आप करो मैं जा रहा हूँ.
मोहित गुस्से से खड़ा हुआ और माँ को जवाब देकर जाने लगा तो करिश्मा ने उठ कर उसका हाथ पकड़ लिया . जबकि रमा तो मोहित क इस रवैये से और ज्यादा भड़क गयी .
करिश्मा : खान जा रहा है ? मुझे तेरे से बात करनी है
रमा : जाने दे इसे जहाँ जाना है इसे . अपने उन्हें घटिया दोस्तों क पास hi जायेगा जिन्हे छोटे बड़ों का लिहाज़ नहीं और न hi शर्म . उनके साथ रह कर उनके जैसा hi हो जायेगा .
मोहित : हाँ हो जाऊंगा उनके जैसा , आपको ाचा नहीं लगता तो चला जाता हूँ हमेशा क लिए .
मोहित करिश्मा का हाथ झटक कर गुस्से से अपनी माँ को बोलता हुआ निकल गया घर से. करिश्मा उसे पुकारती रही पर वो बिना सुने बहार निकल गया. रमा को मोहित क ऐसे बिहेवियर की उम्मीद नहीं थी वो तो बस स्तब्ध थी मोहित का ये रूप देख कर. करिश्मा भी दुखी हो रही थी मोहित क ऐसे जाने से .
करिश्मा : ये आप ने क्या किया माँ , आपको नज़र नहीं आ रहा वो किसी बात से उखाड़ा हुआ है और आप उस पर ऐसे चिल्ला रही थी. आपको उससे बात तो करनी चाहिए थी अचे से
रमा : तुमने देखा कैसे बात की उसने मेरे साथ. अगर कोई प्रॉब्लम है तो बता नहीं सकता . ऐसे बात करेगा अब अपनी माँ से. ये सब गलत सांगत का नतीजा है . ाचा भला अमित क साथ अब खुश रहने लगा था पता नहीं फिर से कैसे उन लोगों क पास पहुँच गया है ये. देख लेना ये फिर से बिगड़ जायेगा .
करिश्मा : नहीं ऐसा नहीं होगा , मैं उससे बात करुँगी और फिर अमित भी तो है न . मोहित अमित को बहुत मंटा है. बस उसको समझने की देर है फिर सब ठीक हो जायेगा
दोनों माँ बेटी मोहित की वजह से टेंशन में आ गयी थी. करिश्मा को तो अंदाज़ा था क बात क्या है . इस लिए वो एक बार मोहित से इस मटर पर बात करना चाहती थी तभी इसका हल निकल सकता था .
उधर गाओं में बिल्ला और उसके साथी तैयार थे हमले क लिए . शाम का वक़्त हो चूका था और सर्दियों की वजह से अँधेरा भी हो रहा था . विजय जो गाओं से बहार था उसका आने का वक़्त हो चला था . इधर अमित घर पर hi था . बिल्ला गाओं से बहार जो टीम बैठी थी उनके पास hi चला गया था और खेत में छिप कर सड़क पर नज़र गड़ाए बैठे थे . वहीँ तीन लोग इशारा मिलने क इंतज़ार में थे क वो अमित को घर से बुला कर हमला कर सके . दोनों जगह एक hi टाइम पर काम करना था ताकि भाग कर निकल सके . अगर वक़्त आगे पीछे होता तो बाद वाली टीम पकड़ी जा सकती थी लोगों को पता लगने पर .
‘ क्यों भाई किसके घर आये हो ? बड़ी देर से बहार hi घूम रहे हो . ‘ बिल्ला क जो तीन साथी अमित क घर क पास hi गली में देहाती बन कर बैठे बीड़ी सुलगा रहे थे उन्हें रह चलते एक बुज़ुर्ग व्यक्ति ने पूछ hi लिया. अब शहर तो था नहीं क किसी से कोई मतलब न रखता हो. गाओं में तो लोग एक दूसरे को अचे से जानते थे परिवार की तरह और उनके रिश्तेदारों तक की खबर रखते थे . ऐसे hi इस बुज़ुर्ग ने इन लोगों को नोटिस कर लिया था जब वो दूसरी बार इस गली से गुज़रते हुए इन लोगों को वहीँ देख कर रुक गया .
‘ अरे ताऊ बस विजय भैया से मिलने ए थे . उह घर माँ नहीं है तो इन्हे बैठ उनकी रह देखर रहे ‘ देहाती लहजे में बात करने की कोशिश करते हुए एक ने जवाब दिया .
‘ अपने विजय क घर आये हो ?? तो बहार कहे बैठे हो . चलो हमर साथ , बैठ कर चाय नाश्ता करवाते हैं . वैसे ू लोग तो किसी परदेसी और मेहमान को ऐसे घर से बहार नहीं बिठाते फिर तुम लोग कइसन बहार बैठे रहे . कोनो बात नहीं आवा हमर साथ ‘ बुज़ुर्ग तो गाओं की उदार मानसिकता वाला इंसान था और वो अचे से जनता था क विजय का परिवार कैसा है . इस लिए उसे उन लोगों का ऐसा बहार बैठना कुछ जांचा नहीं
‘ अरे ताऊ कहे दिक्कत दें उन लोगों का , बस विजय बाबू से काम है तो बहार hi से मिल कर निकल लेंगे . आप जाइये अँधेरा बहुत हो रहा है ‘ एक बार फिर से बुज़ुर्ग से पीछा छुड़ाने क लिए उस गुंडे ने कोशिश की पर बुज़ुर्ग तो जैसे इसे तौहीन समझ रहा था गाओं की.
‘ अरे ऐसे कैसे तुम लोगों का यहां रहने दायी, जाड़े का मौसम है और अँधेरा भी हो गया है. चलो हमारे साथ ‘
‘ अरे जाओ न ताऊ कहे सर्दी में आप बहार ठिठुर रहे हो. हम चले जाई अभी विजय बाबू से मिल कर ‘
इस बार लहजा थोड़ा सख्त सा था उस गुंडे का जिससे बुज़ुर्ग को और ज्यादा शक हो गया . बाकि दोनों की नज़रें भी बुज़ुर्ग ने देख ली थी इस लिए वो चुपचाप वहां से निकल लिया . मगर घर जाने की बजाये वो दूसरी तरफ से चौराहे की तरफ हो लिया जहाँ इस वक़्त गाओं क कुछ लोग अभी मौजूद हो सकते थे .
‘ ये साला बुदौऊ मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा . मैं तो कहता हूँ अभी जा कर काम शुरू कर दे . खून ये साला किसी को बता न दे ‘
‘ उस्ताद ने कहा था क एक वक़्त पर hi काम करना है . अभी उनकी तरफ से खबर नहीं आयी है ‘
इतने में उसके हाथ में पकड़ा मोबाइल बज उठा और उसने तुरंत फ़ोन उठा लिया .
‘ हाँ उस्ताद ,,,,,,, ठीक है ,,,,,,, हम भी जा रहे हैं ,,,,,,.. ठीक है . उस्ताद ने कहा है क काम शुरू कर दो ‘
इतना सुनते hi बाकि दोनों ने जो बड़ी सी शाल आयद राखी थी उसे निकल कर अपने हथियार दुरुस्त किये . एक क हाथ में हॉकी और दूसरे क हाथ में लोगे की रोड थी. तीसरा तेज़ कदमो से विजय क घर की तरफ भगा और ज़ोर ज़ोर से दरवाज़ा पीटने लगा . दरवाज़ा अजय ने खोला जो अभी अभी घर लौटा था .
अजय : क्या बात है कौन हो आप ? किस्से मिलना है ?
‘ जी वो ,,, वो वहां विजय बाबू का एक्सीडेंट हो गया है . वो अमित को बुला रहे हैं .’
अजय : क्याआआ ??? भैया का एक्सीडेंट ??? कहाँ हुआ है ? कैसे हुआ है ? कहाँ हैं वो ?
‘ hi वो गाओं से दूर हैं. आप अमित को बुला दीजिये . वो अमित को बुला रहे हैं ‘
अजय : हाँ हाँ , मैं चलता हूँ , तुम मुझे बताओ वो कहाँ हैं
अजय मां की आवाज़ थोड़ी ऊँची आयी थी जब वो उस आदमी से बात कर रहे थे जिससे हम सब को ये अजीब लगा और मैं जल्दी से उठ कर उनकी तरफ तेज़ कदमो से बढ़ा .
अमित : क्या बात है मां जी ??
अजय : ये कह रहा है भैया का एक्सीडेंट हो गया है . चल जल्दी चल .
अमित : क्या ????? बाबा का एक्सीडेंट ??? कहाँ हैं वो ? चलो जल्दी बताओ मुझे
‘ आइये मेरे साथ , मैं बताता हूँ ‘ मैं उस आदमी क साथ बहार निकला और अजय मां भी मेरे साथ hi चल पड़े. हम दोनों को बाबा की चिंता हो रही थी. अजय मां और मैं दोनों hi टेंशन में आ गए थे ये बात सुन कर . हम उस आदमी क साथ तेज़ी से लगभग भागते हुए चले जा रहे थे . गली क मोड़ से मुड़ते hi आगे खड़े दो लोग जैसे हमारे hi इंतज़ार में थे और उन्होंने हम पर हमला किया . अजय मां संभल नहीं पाए और उनके सर पर हॉकी का वॉर हो गया . मुझ पर दूसरे ने हमला किया पर मैंने हवा में इस लोहे की रोड को रोक लिया . जो आदमी हमें घर से बुला कर लाया था उसने भी पलट झपकते अपनी शाल गिरायी और तेज धार हथियार से मुझ पर झपटा . इससे पहले की वो मुझ पर वॉर करता उसका हाथ हवा में hi रुक गया . मैंने देख तो उसके हाथ को रोकने वाला कोई और नहीं डरा भैया थे और उनके साथ कुछ और लोग भी थे जिन्होंने आते hi तीनो को पकड़ कर मरना पीटना शुरू कर दिया . मैंने जल्दी से अजय मां को संभाला .
अमित : आप ठीक तो हैं मां ?
अजय : हाँ मैं ठीक हूँ .
डरा : मारो इन कुत्तों को . तुम चिंता मत करो छोटे भाई . हम देख लेंगे इन लोगों को.
अमित : कौन हैं ये लोग और आप यहाँ कैसे पहुंचे ?
डरा : ताऊ ने अभी बताया था क तीन अज्ञानी लोग यहाँ बैठे हैं और इनके इरादे ठीक नहीं. तुम्हारे बाबा का नाम लिया था इन्होने बस जानने क लिए आ गए . वैसे तुम्हारे बाबा हैं कहाँ ?
अमित : बाबा तो अभी तक आये नहीं और ये लोग यही कह कर हमें यहाँ लाये थे क उनका एक्सीडेंट हो गया है गाओं क बहार . कहीं उनके साथ …….
बाबा क बारे में दिमाग में बात आते hi मैं गुस्से से भर गया और एक क पेट में ज़ोर से घुटना मारा जिससे वो दोहरा हो गया दर्द से. दाहिने हाथ से ज़ोर दर पंच उसके मुँह पर मरते हुए मैंने उसे ज़मीन पर गिरा दिया और उसके पेट में ज़ोर ज़ोर से ठोकर मरने लगा . फिर मैंने उसकी बाजु घुमा कर पीठ पर लगते हुए और ज्यादा मरोड़ दी तो वो दर्द से तड़प कर चीखने लगा . उसकी बाजु टूट सकती थी जिससे बचने क लिए वो छत पता रहा था
‘ आआअह्ह्ह्ह छोड़ ,,, छोड दो मुझे आआअह्ह्ह्ह ‘
अमित : बता किसने भेजा है तुम लोगों को यहाँ ? मेरे बाबा कहाँ हैं ? बता नहीं तो अभी क अभी चीयर दूंगा तुम लोगों को
‘ आआअह्ह्ह्हह छोड़ दो मुझे आआअह्ह्ह्हहीीी बताता हूँ बताता हूँ पहले छोडो ‘
मैंने उसके हाथ को थोड़ा ढीला किया तो वो बोलै .
‘ तुम्हारे बाप पर हमला होने वाला है . शायद हो चूका होगा गाओं क बहार ‘
इतना सुनते hi मैं गुस्से से भर गया और उसकी बाजु ज़ोर से झटक कर मरोड़ दी जिससे उसकी कलाई और कन्धा अपने जोड़ से खिसक गए और वो ज़ोर से चिल्लाने लगा . मैं तेज़ कदमो से वहां से गाओं क बहार वाले रस्ते की तरफ भगा और मेरे पीछे डरा भैया भी दौड लगा दिए . उनके पीछे बाकि सब भी भाग पड़े . मुझे चिंता हो रही थी क कहीं बाबा क साथ कुछ गलत न हो जाये . मैं तेज़ कदमो से बस भागता hi जा रहा था. बाकि सब तो पीछे रह गए थे बस डरा भैया hi मेरे करीब थे . गाओं क बहार वाले रस्ते क करीब जैसे hi हम पहुंचे तो कुछ लोगों क अक्स नज़र आये . अँधेरे में साफ़ नज़र नहीं आ रहा था. पर किसी क कराहने की आवाज़ आ रही थी . मुझे समझते देर न लगी क ये बाबा hi हैं.
अमित : बबाआआआआ
मैं बड़े कदमो से उछाल कर उन लोगों पर गिर पड़ा जो लोग बाबा को मर रहे थे . दो लोगों को अपने नीचे लिए मैं गिर पड़ा . दो और लोग वहां थे . जिन्होंने मुझ पर हमला करने की कोशिश की तो पीछे से डरा भैया ने दोनों को अपनी दायीं और बायीं बाजु में गर्दन से कास लिया. मैं जल्दी से उठा और एक क हाथ में पकड़ा बसेबत छीन कर उसी से दोनों की ज़ोर ज़ोर से धुनाई करने लगा . डरा भैया ने भी दोनों को अपनी बगलों के इतना ज़ोर से जकड रखा था क उनकी साँसे बंद होने लगी थी . वो दोनों ज़ोर ज़ोर से छटपटा रहे थे डरा भैया की पकड़ से छूटने क लिए पर डरा भैया की पकड़ से भला वो कैसे छूट सकते थे . इधर दोनों को मैं पागलों की तरह बस मरता hi जा रहा था . और इतना मारा क दोनों भीख मांगने लगे क मैं उन्हें छोड़ दूँ . तभी बाकि लोग भी पहुँच गए और डरा भैया ने भी दोनों को ज़ोर से पटक दिया. बाबा ने कराहते हुए मेरा नाम पुकारा तो मेरा ध्यान उन की तरफ गया . सड़क की एक तरफ उसका स्कूटर गिरा पड़ा था . मैंने जल्दी से उनको उठाने की कोशिश की तो देखा उनके सर से बहुत ज्यादा खून निकल रहा था .
अमित : बाबा ,,, बाबा ,,,, आपको कुछ नहीं होगा ,,, कुछ नहीं होगा आपको .
विजय : मैं,,,,, ठीक हूँ ,,,,
अमित : डरा भैया आप स्कूटर उठाओ
बाबा की हालत ठीक नहीं थी इस लिए मैंने उन्हें जल्दी से उठाया और डरा भैया ने बाबा का स्कूटर उठा कर उसे स्टार्ट किया और मैं बाबा को बीच में बिठा कर पीछे बैठ गया . डरा भैया तेज़ी से स्कूटर चलने लगे और हम निकल गए शहर की तरह क्यूंकि गाओं में बस एक छोटी सी डिस्पेंसरी थी जो शाम को बंद हो जाती थी और इस वक़्त बाबा की हालत अछि नहीं थी . मुझे बाबा की हालत देख कर चिंता होने लगी थी. उनके सर से लगातार खून बह रहा था जिसे मैं हाथों से दबा कर रोकने की कोशिश कर रहा था .
अमित : बाबा आपको कुछ नहीं होगा ,, कुछ नहीं होगा आपको. हिम्मत रखिये .
विजय : ममम मैं थीएककक हूंणंन्न मैं थी ,,,,,,,
बाबा की आवाज़ बहुत कमज़ोर सी निकल रही थी और अब जैसे उन पर बेहोशी छ गयी थी. मैं बाबा को होश में लेन की कोशिश कर रहा था पर बाबा बोल नहीं रहे थे . डरा भैया भी स्कूटर को पूरी गति से दौड़ा रहे थे. पर शहर गाओं से दूर था . मगर फिर भी समय से पहल hi डरा भैया ने हमें शहर पहुंचा दिया और हॉस्पिटल पहुँचते hi मैं बाबा को बाँहों में उठाये सीधा अंदर को भगा . तुरंत कम्पाउण्डर और नर्स ने बाबा को स्ट्रेचर पर डाला और िक में ले गए. एक डॉ जो वहीँ मौजूद था उसने जल्दी से बाबा का इलाज शुरू किया और हमें बहार रुकने को कहा .
डरा : सब ठीक हो जायेगा छोटे तुम चिंता मत करो. पर ये मामला क्या है ? वो लोग थे कौन ?
अमित : पता नहीं भैया मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा .
डरा : कहीं ये उस सुन्दर पहलवान का काम तो नहीं ??? सुना है उस दिन वो दांत पिस्ता हुआ गया था गाओं से .
अमित : ये तो वो लोग hi बता सकते हैं जो हमला करने आये थे . आप फ़ोन लगा के पता करो उन्होंने कुछ बताया या नहीं . अगर ये सुन्दर का काम है तो उसको और उसके बेटे को मैं ज़िंदा नहीं छोडूंगा .
डरा : शांति रख भाई , जब तक सचाई पता नहीं चलती तब तक कुछ नहीं करना . मेरा फ़ोन तो घर पर hi रह गया , क्या तेरे पास है फ़ोन ?
मैंने अपनी जेब चेक की तो मेरा फ़ोन भी घर पर hi रह गया था . असल में बच्चों की तस्वीरें खींच रहे थे हम इस लिए फ़ोन मेरे हाथ में नहीं था .
अमित : नहीं भाई मेरा भी पास नहीं है .
डरा : तू यहीं रुक मैं देखता हूँ.
डरा भैया बहार चले गए और मैं वहीँ खड़ा बस भगवन क आगे हाथ जोड़ रहा था क बाबा ठीक हो जाएँ.
उधर गाओं में अजय मां क सर पर चोट लगने क बाद 2 लोग उन्हें घर ले गए थे . घर जाते hi जब अजय मां की हालत देखि तो सब चिंता में पद गए .
गौरी : ये क्या हुआ देवर जी ये चोट कैसे लग गयी ?
अजय : कुछ नहीं हुआ भाभी मैं ठीक हूँ
गौरी : कहाँ ठीक हो , ये सर से खून निकल रहा है. ये चोट कैसे लगी है तुम्हे ?
अजय : वो पाऊँ फिसल गया था भाभी मैं ठीक हूँ आप सब चिंता मत करो
दिव्या : चिंता कैसे न करे ? ये चोट गिरने से तो लगी नहीं लगती . अमित कहाँ है ? वो तो आपके साथ गया था न .
अजय : वो ,,, वो भैया को लेने गया है
गौरी : झूठ बोल रहे हो तुम अजय , सच सच बताओ क्या हुआ है . और तेरे भैया किधर हैं . तुम बताओ क्या बात है ?
अजय को जो घर छोड़ने आया था लड़का गौरी ने उसे hi घेर लिया . अब तक कामिनी भी अजय क पास आ गयी थी और चिंता से उसकी आँखों से आंसू निकल आये थे . दीपिका हालत को देखते हुए गरम पानी और मलहम पट्टी का सामान ले आयी थी . जिसमे राधा और नेहा उसकी मदद कर रहे थे .
‘ वो पता नहीं कौन लोग थे ताई उन लोग ने हमला किया है चाचा और अमित पर . अमित ठीक है पर वो बड़े ताऊ जी की तरफ गया है . वो लोग उन पर भी हमला करने वाले थे . ‘ ये सुनते hi गौरी क पाऊँ क नीचे से ज़मीन hi निकल गयी. और ऐसा hi कुछ हल दिव्या का भी था. दीपिका को भी अब चिंता हो रही थी मगर वो हिम्मत से काम ले रही थी .
गौरी : क्या ? कौन हैं वो लोग ? आखिर हमारी क्या दुश्मनी है उन लोगों से ? हैट भगवन रक्षा करना , पता नहीं किसे हैं वो .
दीपिका : दीदी चिंता मत करो सब ठीक होगा , अमित गया है जा . वो सब संभल लेगा
दिव्या : क्या संभल लेगा वो , अभी वो इतना भी बड़ा नहीं हुआ , कहीं उसे कुछ हो गया तो? वो अपनी बिलकुल भी परवाह नहीं करता. अकेला भीड़ जाता है हर जगह अगर उसे कुछ…….
गौरी : नहीं नहीं ,,, उसे कुछ नहीं होगा . कमलेश कहाँ है ? वो अभी तक आय क्यों नहीं. जल्दी से उसे फ़ोन लगाओ और बोलो क जाकर देखे . मैं भी इन्हे फ़ोन लगाती हूँ.
दीपिका ने जल्दी से कमलेश को फ़ोन कर क हालत क बारे में बताया . गौरी ने विजय को फ़ोन किया तो उसका फ़ोन नहीं लग रहा था जब अमित का no. लगाया तो वो पास में hi पड़ा था .
राधा : ममी अमित का फ़ोन तो गलती से यहीं रह गया .
दिव्या : ये लड़का बहुत लापरवाह है , कह देती हूँ अगर उसे कुछ हुआ तो मैं ,,,,,, मैं यहाँ कभी दुबारा नहीं आउंगी .
दिव्या तो रोने hi लगी थी उसके मन में उलटे सीधे विचार आने लगे थे . अजय क सर पर लगी चोट से चाहे खून थोड़ा hi बहा था पर उसका असर दिव्या पर ज्यादा hi हो गया था . वो डरने लगी थी क कहीं अमित को कुछ न हो जाये .
गौरी : ये तुम कैसी बातें कर रही हो दिव्या . कुछ नहीं होगा उसे .
एक दूसरे को चाहे सब हौंसला दे रहे थे पर अंदर से दिल सबका घबरा रहा था . और थोड़ी देर में hi कमलेश घर आ गया भागता हुआ साथ hi ये खबर भी घर पहुँच गयी क विजय बुरी तरह से ज़ख़्मी हुआ है और अमित डरा उसे लेकर शहर चले गए हैं. अमित क ठीक होने की खबर सुन कर जहाँ कुछ रहत मिली थी सबको वहीँ विजय की हालत ने चिंता बढ़ा दी थी. कमलेश ने जल्दी से अपनी मोटरसाइकिल निकली और अजय को साथ बिठा कर निकल लिया शहर की तरफ . उधर दीपिका ने जल्दी से फ़ोन घुमा दिया मंजू और राघव की तरफ
मंजू ने जब ये बात सुनी क विजय पर हमला हुआ है उसका तो दिल hi दर से बैठ गया . कल hi तो धमकी दी थी बलजीत राइ ने और आज हमला भी हो गया . मंजू भी बहुत घबरा गयी और तुरंत ऋतू को फ़ोन लगा कर साडी जानकारी दी. अमित कहाँ है किस हॉस्पिटल गया है ये अभी तक किसी को नहीं पता था . पर ऋतू ने फ़ौरन वायरलेस पर आर्डर कर दिया था क सब हॉस्पिटल में पता करो लड़ाई झगडे में कोई घायल हो कर आया है तो जल्दी बताये .
उधर राघव तो शहर से बहार था पर रमा को जब इस बात का पता चला तो वो भी चिंता में पद गयी और तैयार हो गयी घर से निकलने क लिए पर जाना कहाँ है उसे भी कहाँ पता था .
इधर हॉस्पिटल में आधे घंटे बाद डॉ बहार आया तो मैं दौड़ कर उसके पास गया .
अमित : अब बाबा की तबियत कैसी है डॉ साहब
डॉ : घबराने की बात नहीं है , खून ज्यादा बहने से बेहोश हो गए थे . अभी उन्हें ग्लूकोस लगा दिया है और कुछ इंजेक्शन लगा दिए हैं. ज़रूरत पड़ी तो ब्लड भी चढ़ा देंगे . इन्हे अभी यहीं रखना पड़ेगा . देखिये ये लड़ाई झगडे का केस है इस लिए पुलिस केस बनता है. वो थोड़ी देर में आ जायेंगे . तब तक आप पैसों का इंतज़ाम कर लीजिये .
डॉ मुझे ये सब कह कर अपने केबिन की तरफ चला गया और एक नर्स मेरे पास आयी और मुझे 10000 जमा करवाने को कहा . किस्मत से इस वक़्त जेब में न पैसा था न पर्स . मैंने नर्स से कहा क थोड़ी देर में पैसे जमा करवा दूंगा आप इलाज करो . उधर से डरा भैया भी आ गए .
डरा : गाओं में खबर कर दी है तुम्हारे घर भी बता देंगे . पर एक गड़बड़ हो गयी .
अमित : क्या हुआ ?
डरा : वो लोग भाग निकले , अब ये पता नहीं चलेगा क किसने ये सब किया है .
अमित : वो लोग भाग कैसे गए ? इतने लोगों क बीच से .
डरा : वहां हम दोनों क पि हे सब भाग लिए दो लोग रह गए थे जिन्हे धक्का देकर वो अँधेरे में कहीं गायब हो गए . उधर सड़क पर जो चार लोग थे उनमे से शायद एक काबू में आ जाये , क्यूंकि वो खेतों क बीच कहीं भगा है बाकि तीन तो गाड़ी से भाग लिए . अब वो चौथा काबू में आ जाये तो शायद कुछ पता चले .
अमित : अजय मां तो ठीक है न ?
डरा : हाँ उन्हें ज्यादा चोट नहीं आयी है और मैंने कहलवा दिया है क इधर भी सब ठीक है . अभी डॉ ने क्या बोलै ?
अमित : डॉ ने कहा है क सब ठीक है . पुलिस को शायद बुलावा लिया है उन्होंने ने .
डरा : ये भी ज़रूरी है , आखिर पता तो चले क इस सब क पीछे कौन है .
थोड़ी देर में नर्स ने आकर फिर से पैसों का पूछा तो मैं और डरा एक दूसरे को देखने लगे .
डरा : मैं जाकर गाओं से ले कर अत हूँ .
अमित : नहीं भाई आप यहीं रुको , मैडम थोड़ी देर में पैसे जमा करवा देंगे घर से कोई न कोई अभी आ जायेगा .
‘ किधर है वो पेशेंट जो लड़ाई झगडे में घायल हुआ है ? ‘ एक सख्त आवाज़ को सुन कर मैंने उस तरफ देखा तो एक पुलिस इंस्पेक्टर नर्स से ये सवाल पूछ रहा था. उसके साथ हवलदार भी थे.
नर्स : सर वो अभी होश में नहीं है. ये उनके साथ हैं .
इंस्पेक्टर: तुम लोग क्सक्सक्सक्सक्स गाओं से आये हो ?
इंस्पेक्टर ने हमारे गाओं का नाम लिया तो मैं और डरा भैया दोनों hi चौंक गए .
अमित : जी सर पर आपको कैसे पता ?
इंस्पेक्टर: तुम दोनों में से अमित कौन है ?
हम दोनों hi एक बार फिर से हैरान थे क इंस्पेक्टर को मेरा नाम तक पता है .
अमित : जी सर मैं hi हूँ पर आपको कैसे पता ?
इंस्पेक्टर : बताता हूँ ,
हमारी बात का जवाब देने की बजाये इंस्पेक्टर ने अपने हाथ में पकडे वायरलेस पर बात करनी शुरू की और बात दिया क उसे दोनों मिल गए हैं और हॉस्पिटल का नाम भी बता दिया . मुझे समझते देर नहीं लगी क ये सब ऋतू की वजह से हो रहा है. जबकि डरा भाई और वो नर्स अभी भी हैरान थे
इंस्पेक्टर: नर्स डॉ को जल्दी से बुलाओ , और आपको परेशां होने की ज़रूरत नहीं है. हमें सप साहब ने भेजा है . आप उन्हें जानते हैं न ? अभी थोड़ी देर में वो भी आ रही हैं यहीं . आप किसी बात की चिंता मत करिये .
अमित : थैंक यू इंस्पेक्टर साहब
इतने में नर्स क साथ डॉ भी वहां आ गया .
इंस्पेक्टर : डॉ कैसी तबियत है मरीज़ की ?
डॉ : बेहोश है पर खतरे वाली बात नहीं .
इंस्पेक्टर: देखिये डॉ साहब ये लोग सप साहिब क खास हैं . इस लिए अचे से इलाज कीजियेगा , थोड़ी देर में वो भी यहीं आ रही हैं. आप दोनों को कुछ चाहिए तो बता दीजिये अभी हाज़िर हो जायेगा .
अमित : नहीं इंस्पेक्टर साहब हम ठीक हैं शुक्रिया .
डरा भैया और मैं वहीँ बैठे थे और पुलिस वाले हमारे साथ . अब तो डॉ भी बार बार बाबा को चेक करने आ रहा था और दोबारा नर्स ने भी पैसों का नहीं पुछा. कोई आधे घंटे बाद hi साईरन बजता सुनाई दिया और पुलिस वाले फटाफट बहार को दौड़े . मैं और डरा भैया वहीँ थे और डॉ भी भाग कर हमारे साथ खड़ा हो गया. तभी गेट मंजू बुआ और ऋतू अंदर आती हुई दिखाई दी. उनके साथ कई पुलिस वाले थे . मंजू बुआ तो लगभग दौड़ते हुए hi आयी. उनकी आँखों से आंसू लगातार बह रहे थे . मुझे देखते hi उन्होंने मेरा चेहरा दोनों हाथों में थाम कर चूमना शुरू कर दिया. वो साथ में रोये जा रही थी.
मंजू : तू ठीक तो है न तुझे कुछ हुआ तो नहीं ??? तेरे कहीं चोट तो नहीं आयी .
बुआ मुझे अचे से चेक कर रही थी क कहीं मुझे चोट तो नहीं लगी.
अमित : मैं ठीक हूँ बुआ पर बाबा को बहुत चोट आयी है वो अभी भी बेहोश हैं .
मंजू : भैया बेहोश हैं ??? ये सब मेरी वजह से हुआ है . सब मेरी वजह से हुआ है
अमित : ये आप क्या कह रही हो बुआ ? आपकी वजह से कैसे कुछ हो सकता है . आप कैसी बातें कर रही हो .
ऋतू : मंजू खुद को सम्भालो , सब ठीक है . तुम्हे कुछ हुआ तो नहीं न ?
अमित : नहीं मैं बिलकुल ठीक हूँ
ऋतू : कौन थे वो लोग ? ये सब किसे हुआ मुझे ठीक से बताओ .
डरा : मैं बताता हूँ , वो लोग कहीं बहार से आये थे . अमित तो घर पर था और ताऊ जी तो गाओं में थे hi नहीं . वो 7-8 लोग रहे होंगे जो भेष बदल कर गाओं देहात क बन कर hi गाओं में आये थे . इन के घर क पास हमारे गाओं क hi एक बुज़ुर्ग ने जब 3-4 अनजान लोगों को देखा और उनसे सही जवाब न मिला तो उन्होंने आकर चौपाल पर बताया . किस्मत मैं और 3-4 लड़के वहां मौजूद थे तो हम तुरंत वहां पहुंचे . समय रहते हम पहुँच गए वर्ण वो लोग अमित और अजय चाचा को ठीक hi देते . ताऊ जी को उन लोगों ने गाओं से बहार hi घेर लिया और ज़रा देर हो गयी हमें वहां पहुँचते . बस फिर यहाँ आ गए उन लोगों की पिटाई क बाद
ऋतू : अब वो लोग कहाँ हैं ?
डरा : मैंने फ़ोन पर पता किया था तो वो लोग बता रहे थे क वो सब मौका देख कर निकल लिए जब हम ताऊ जी को बचने में लगे थे . हाँ एक अभी भी शायद वहां कहीं छुपा है खेतों में .
ऋतू : पांडेय जी फ़ौरन वहां जो थाना लगता है उसके इंचार्ज को खबर कर दो क वो आदमी बचना नहीं चाहिए . चाहे साडी रत लग जाये पर उसे पकड़ कर मेरे सामने पेश करो .
ऋतू की बात सुनते hi पांडेय नाम का इंस्पेक्टर उसे सलूट कर क बहार निकल गया . इतने में बहार से अजय मां और कमलेश मां भागते हुए आये . अजय मां की शर्ट पर खून की कुछ बुँदे गिर कर दाग बना चुकी थी. मैं जल्दी से उनकी तरफ बढ़ा
अमित : मां आप ठीक तो हैं न , आपको ज्यादा तो नहीं लगी
अजय : मुझे कुछ नहीं हुआ बस ज़रा सी चोट है. तू तो ठीक है न , तुझे तो कहीं चोट नहीं लगी. और भैया कैसे हैं अब ?
अमित : मैं ठीक हूँ , बाबा को अभी होश नहीं आया है . पर वो खतरे से बहार हैं
कमलेश : आखिर ये सब हो क्या रहा है ? किस्से झगड़ा किया है तूने जो बात घर तक पहुँच गयी है .
अमित : मैंने कुछ नहीं किया मां जी
अजय : इसमें इसकी क्या गलती है जो तू उससे पूछ रहा है . शायद भैया को कुछ पता हो . जब तक सच पता न हो ऐसे उंगली मत उठाया करो .
कमलेश : भैया का किसी से क्या बैर , क्या आप नहीं जानते वो कैसे हैं. ज़रूर इसी ने कुछ किया होगा .
ऋतू : एक्सक्यूज़ में मर कमलेश , आप क्या जानते हैं ? ये सब कैसे हुआ है ? आप जैसे बात कर रहे हैं ऐसे लग रहा है आपको कुछ पता है . क्या बताएँगे क क्या बात है
कमलेश : मम मुझे क्या पता , इसी ने किया होगा कुछ
ऋतू : अगर पता नहीं है तो चुप रहिये , हम पता लगा लेंगे . ऐसे किसी पर उंगली मत उठाइये .
कमलेश : मैं कुछ भी कहूं ये मेरे घर का मामला है . आप बीच में मत बोलिये
ऋतू : फॉर योर काइंड इनफार्मेशन ये मेरे भी घर का मामला है इसी लिए समझा रही हूँ . वर्ण मैं ज्यादा बात नहीं करती .
कमलेश मां तो ऋतू की इस बात पर जलभुन गए पर अजय मां ने बात को संभाला और कमलेश मां को पैसे जमा करवाने को भेज दिया .
अजय : ये भी हमारी बहिन है समझे , मंजू की तरह इसे भी हमने बहिन बनाया है तो इसका भी हक़ है . अब तू जा जाकर पैसे देख डॉ को कितने देने है.
अजय : ऋतू बहिन गुस्सा मत करो तुम वो ऐसा hi है .
ऋतू : अरे नहीं भैया मैं गुस्सा नहीं कर रही . आप तो ठीक हैं न .
अजय : मैं बिलकुल ठीक हूँ बस ज़रा सी चोट है , सर पर लगी थी न तो थोड़ा खून निकल आया था . मंजू तुम ज़रा घर पर बात कर लो . भाभी परेशां होगी और दिव्या भी बहुत चिंता कर रही थी अमित की .
मंजू बुआ ने जल्दी से गाओं फ़ोन लगा दिया और फिर मेरी बात करवाई पहले माँ और फिर दिव्या मौसी से बात करने क बाद कामिनी ममी और दीपिका ममी से बात हुई . माँ और दिव्या मौसी को मुझसे बात कर क अब चैन मिला था . डरा भैया कमलेश मां और अजय मां को ऋतू ने पुलिस की गाड़ी ने गाओं भिजवा दिया क्यूंकि बाबा को रत यहीं रहना था तो उनके पास मैंने रुकने की ज़िद की जिसके चलते बाकि सब को जाना पड़ा. मंजू बुआ भी ज़िद कर क वहीँ रुक गयी मेरे साथ. ऋतू भी रुकना चाहती थी पर मैंने उन्हें मन कर दिया . वर्ण उनके साथ पुलिस वालों को भी रुकना पड़ता . फिर भी 2 पुलिस वाले हमारी सुरक्षा में खड़े कर hi गयी वो. डॉ तो ऋतू क आने से hi बदल गया था . उसने खुद hi एक प्राइवेट रूम में बाबा को शिफ्ट कर दिया और उनके पास hi मैं और बुआ रुक गए . इस बीच रमा आंटी का फ़ोन भी आया मंजू बुआ क फ़ोन पे पर मैंने उन्हें आने से मन कर दिया . वो भी ज़िद कर रही थी और बड़ी मुश्किल से उन्हें मनाया . अभी तो रीता मौसी और रजनी मौसी को पता नहीं चला था पता नहीं वो क्या कहेंगी जब पता चलेगा .
‘ ये साला बिंदु कहाँ मर गया ? गाडी में चढ़ा नहीं था क्या ? ‘ गाओं क बहार जो चार लोग थे अमित और डरा क निकलने क बाद अँधेरे का फायदा उठाते हुए भागे थे उनमे बिल्ला भी था . जो अब अपने एक साथी क काम होने पर पूछ रहा था . बड़ी मुश्किल से आज जान बची थी. गाओं वाले पीट पीट कर मर hi डालते . ये तो गनीमत रही क गाओं क बहार थे और रौशनी भी कोई नहीं थी आसपास . करीब hi छुपाई हुई गैर का किसी को अंदाज़ा नहीं था जिस में सवार हो कर ये लोग भाए निकले पर एक साथी उतना किस्मत वाला नहीं निकला. गाडी में सवार होने से पहले hi वो गिर गया था और अँधेरे में जल्दबाज़ी की वजह से ये लोग उसे वहीँ छोड़ कर भाग निकले .
‘ मेरी तो फटी पड़ी थी उस्ताद मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था . बहनचोद आज तो मरते मरते बचे हैं. सेल वो दोनों थे कौन. मर मर कर सेल ने बुरा हल कर दिया है . मौत सामने देख कर किसी तरह गाड़ी तक पहुँचने की हिम्मत जुताई है. बिंदु भी मेरे साथ hi था और वो साला हम दोनों को ऐसे मर रहा था क मार hi डालेगा . ‘ जिन दो लोगों को अमित ने बुरी तरह मारा था ये उनमे से एक था और जो पीछे रह गया था वो भी उसके साथ hi अमित क बैठे चढ़ा था .
बिल्ला : काम पूरा हो hi गया था क वो सेल पता नहीं कहाँ से आ गए . बहनचोद साला इतना तगड़ा था क हिल hi नहीं रहा था . हम दो थे और वो अकेला hi ऐसे दबाये था काच में क हम कोई बचे हैं . बाकि सब कहाँ हैं उनकी कोई खबर मिली ?
‘ नहीं उस्ताद अभी तक तो कोई खबर नहीं . मुझे तो लगता है सेल वो भी काबू आ गए हैं वर्ण ये लोग कैसे हम तक पहुंचे . गलत जगह पन्गा ले लिया उस्ताद . हमारे लोग उनके हाथ आ गए तो पहले ये सेल पिट पिट कर अधमरा करेंगे और फिर पुलिस अलग से खाल उधेड़ेगी. साली वो ऋतू सिंह जल्लाद है , जान से hi मर देगी एनकाउंटर कर क. मैं तो कहता हूँ उस्ताद अब शहर वापिस जाने का सोचना भी मत कहीं दूर निकल जाते हैं. वो हमें ज़रूर ढूंढ लेगी कहीं न कहीं से .
बिल्ला : चुप साले फत्तू , इतना दर लगता है तो जा जेक मजबूरी कर इस धंधे में क्या गांड मरने आया है . उन लोगों का फ़ोन तरय करो देखो साला कोई उठता है क नहीं. उनको वहां से निकलना पड़ेगा वर्ण हम सब पकडे जायेंगे .
बिल्ला भी अंदर से दर तो रहा था ऋतू क नाम से पर अपना दर दिखा नहीं रहा था . उसे चिंता थी क कोई पुलिस क हाथ ज़िंदा काबू आ गया तो ऋतू उन तक पहुँच hi जाएगी . दूसरे साथी ने जल्दी से फ़ोन लगाना शुरू किया तो किसी का तो पहले तो दो लोगों का फ़ोन लगा hi नहीं पर तीसरे का लग गया . उससे पता चला क तीनो वहां से भाग निकले हैं. अँधेरे की वजह से वो भी गाओं से निकल तो गए थे पर पता नहीं था क वो हैं कहाँ. बिल्ला ने उन्हें शहर वापिस न आने का कह कर दूसरे ठिकाने पर आने का बोल दिया . अब उनमे से सिर्फ एक hi साथी काम था जिसके बारे में किसी पता नहीं था बस इतना hi पता था क वो भी बुरी तरफ ज़ख़्मी है . अंदर hi अंदर बिल्ला दर रहा था क्यूंकि अब उसे ऋतू का चेहरा दिखाई दे रहा था काल क रूप में .