- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 31,768
अपडेट 240
मंजू बुआ दिव्या मौसी को देख कर अवाक रह गयी थी . हाथों से छूट कर पतीला ज़मीन पर गिर चूका था . ज़ोर से भाभी कह कर चीखना बता रहा था क वो दिव्या मौसी को अपनी भाभी यानि क मेरी माँ समझ कर ऐसे चीखी हैं . साथ hi उनकी आँखों में आये आंसू उनके दर्द को भी बयां कर रहे थे . ऐसा hi कुछ हल दिव्या मौसी का भी था. उनकी आँखों में भी नमी उतर आयी थी . मैं एक साइड में खड़ा दोनों को hi देख रहा था . हम तीनो अपनी अपनी जगह खड़े थे . समय मनो वहीँ थम सा गया था. इससे आगे बढ़ना है या यहीं पत्थर बन कर खड़े रहना है इसका फैसला नहीं हो प् रहा था . तब दिव्या मौसी ने इस पल को फिर से गति दी
दिव्या : मंजूउउ
बस इतना hi निकला दिव्या मौसी क मुँह से और दोनों hi एक दूसरे की तरफ बढ़ कर गले लग गयी. वो दोनों ऐसे गले मिल रही थी जैसे ज़िन्दगी फिर से मिल गयी हो. दोनों की आँखों से आंसू बह रहे थे और एक दूसरे को सहलाते हुए चूमते हुए बस गले hi लगी रही. ज़ुबान मनो इस पल में दोनों का hi साथ नहीं दे रही थी . दिव्या मौसी क मुँह से बस बुआ का नाम और बुआ क मुँह से बस भाभी hi निकल रहा था . वो शायद ये भूल गयी थी क उनकी भाभी तो इस दुनिया में है भी नहीं . मंजू बुआ जो अभी तक सिर्फ आंसू बहा रही थी धीरे धीरे उनका रोना बढ़ता गया और वो ज़ोर ज़ोर से रोने लगी . दिव्या मौसी उन्हें शांत करने की कोशिश कर रही थी पर मंजू बुआ तो जैसे सुन hi नहीं रही थी . वो इतनी ज़ोर ज़ोर से रोने लगी थी क जैसे कोई अपना मर गया हो.
दिव्या : मंजूउउ !!! मंजूउउ !! खुद को सम्भालो मंजू , बस कर ,,,, चुप हो जा प्लीज मंजू . देख मैं आ गयी हूँ न प्लीज चुप हो जा .
मंजू बुआ का रुदन बिलकुल भी काम नहीं हो रहा था . वो वैसे hi रोये जा रही थी और उनको ऐसे रोटा देख मेरी आँखों में भी आंसू आ गए थे . शायद ये वो दर्द था जो वो कई सैलून से अपने अंदर छुपाये हुए थी और मौसी को देखते hi बहार निकल आया . अभी तक वो मौसी को अपनी भाभी hi समझ कर बस रोये जा रही थी . मौसी ने मुझे इशारा किया क मैं मंजू बुआ को सम्भालूं तो मैं भी अब सामने आ गया और मंजू बुआ को चुप करवाने की कोशिश करने लगा . तभी मेरी नज़र पीछे कड़ी ऋतू पर पड़ी जो पता नहीं कब वहां आ गयी थी और अपने सामने मंजू बुआ को दिव्या मौसी से गले लग रोये जा रही थी. शायद वो भी असमंजस में थी मौसी को देख कर. मैंने मंजू बुआ को मौसी क साथ सहारा देते हुए अंदर दाखिल हुआ और मंजू बुआ को हम हॉल में ले आये . इतने में ऋतू पानी का गिलास ले आयी और मंजू बुआ को पिलाने लगी. मौसी ऋतू को नहीं जानती थी इस लिए उसे हैरानी से देख रही थी . ऋतू इस वक़्त एक लॉन्ग गाउन पहने हुए थी . शायद अभी बीएड से hi उठी थी .
ऋतू : मंजू प्लीज खुद को संभल , ले पानी पि ले .
मंजू बुआ मनो अभी भी कुछ समझने की हालत में नहीं थी. तब दिव्या मौसी ने अपने हाथ में पानी का गिलास लिया और मंजू बुआ क मुँह से लगा दिया.
दिव्या : क्या मेरी बात नहीं मानेगी तू ? ले पानी पि पहले फिर बात करते हैं .
दिव्या मौसी ने प्यार और ज़ोर से मंजू बुआ को पानी पिलाया और वो भी मौसी को देखती हुई पानी पिने लगी .
मंजू : रट हुए ) भाभी आप कहाँ चली गयी थी मुझे छोड़ कर ?
दिव्या : वो तो कब की हम सब को छोड़ कर जा चुकी है मंजू. मैं दामिनी नहीं दिव्या हूँ.
मौसी की बात सुन कर मंजू बुआ का रोना एक डैम से बंद हो गया और वो मौसी को एक तक देखने लगी .
दिव्या : हाँ मंजू , मैं दिव्या हूँ . दामिनी को गुज़ारे तो कितने बरस हो गए . अब तो वो बस यादों में hi ज़िंदा है . पर मैं अभी ज़िंदा हूँ और आज तुझे घर ले जाने आयी हूँ. मगर पहले मुझे माफ़ करदे , मैंने एक बार भी तेरे बारे में नहीं सोचा . तू भी तो दामिनी से इतना प्यार करती थी . मगर मुझे अपने गम में किसी और का दर्द नज़र hi नहीं आया . दामिनी अक्सर कहा करती थी क तू उसकी ननद भी है बहिन भी और बेटी भी. मगर मैं , मैं उसकी ज़िम्मेदारियों को निभा नहीं पायी . मुझे माफ़ कर दे दिव्या मुझे माफ़ कर दे .
दिव्या मौसी अपनी बात कहते कहते रोने लगी तो इस बार मंजू बुआ ने उन्हें गले लगा लिया .
मंजू : ये आप क्या कह रही हैं दीदी , आप क्यों माफ़ी मांग रही हैं. माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए . मैंने अपने मक्कार भाई की बात पर यकीन कर लिया . और उसकी की सजा इतने बरस तक झेलती रही हूँ. अगर मुझे पता होता क बिट्टू ज़िंदा है तो मैं सब कुछ छोड़ कर आप लोगों क पास चली आती .
दिव्या : तूने बहुत कुछ सहा है मंजू तूने बहुत कुछ सहा है. अमित ने मुझे बताया क तेरे साथ क्या क्या हुआ है. काश मैंने एक बार तुझसे मिलने की कोशिश की होती. जब तेरी शादी की खबर मिली थी तब भी मैं गुस्से से वहां नहीं आयी . काश मुझसे इतनी साडी गलतियां न होती .
मंजू : दीपक भैया कहाँ हैं ? क्या उन्हें नहीं पता था अमित क बारे में ? उन्होंने मुझे कभी क्यों कुछ नहीं बताया ? वो तो मेरी शादी पर भी ए थे .
मंजू बुआ की इस बात पर मेरे कान खड़े हो गए . ये बात तो मेरे दिमाग में आयी hi नहीं थी अब तक . आखिर वो थे तो रिश्ते में भाई hi . फिर उन्होंने आज तक क्यों मेरे बारे में नहीं बताया था मंजू बुआ को?
दिव्या : तुम तो जानती हो जब दामिनी का एक्सीडेंट हुआ तब वो विदेश चले गए थे . उन्हें अमित क बारे में पता hi नहीं था . 4 साल जब वो वापिस आये तो बड़े भैया ने hi उन्हें कसम दी थी क वो अमित क बारे में किसी से बात नहीं करेंगे .
मंजू : काम से काम मुझे तो बता सकते थे . आखिर मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ ?
दिव्या : रो मत मंजू , इसमें किसी का कोई दोष नहीं . सब दोष तक़दीर का है. क्या दामिनी की मौत जायज़ थी? वो तो अपने बेटे को ठीक से खिला भी नहीं पायी . सब को हँसाने वाली ऐसे रोटा हुआ छोड़ कर चली गयी .
मंजू : नहीं दीदी , भाभी तो आज भी ज़िंदा है. आप उनके जैसी hi तो हो. और ये , मेरा बिट्टू . चेहरे से भैया जैसा और ऑंखें भाभी जैसी. इसे देख कर मुझे भैया भाभी की hi यद् आयी थी सबसे पहले. इसे बार बार देखने को दिल करता था पर कभी समझ hi नहीं पायी क ये कोई गैर नहीं मेरा अपना hi तो है . कितनी बड़ी भूल हो गयी मुझसे जो इसे पहचान न पायी.
मंजू बुआ ने बात करते करते मुझे बहन फैला कर अपने पास बुलाया तो मैं भी उनके गले लग गया . दिव्या मौसी भी पीछे से मेरी पीठ और सर सहलाने लगी .
दिव्या : जानती हो मंजू मैंने सोचा था मैं तुमसे कभी नहीं मिलूंगी . पर अमित ने जब मुझे सच बताया तो मैं रह न पायी . अगर ये तुमसे पहले न मिला होता तो शायद मैं तुम्हारे पास ऐसे न बैठी होती . कल रत hi इसने मुझे सब बताया और देख दिन चढ़ने से पहले मैं तुझे लेने आ गयी .
मंजू : लेने ??
दिव्या : हाँ , तू हमारे साथ गाओं चल रही है. भैया खुद लेने आने वाले थे पर मेरी वजह से वो नहीं आ पाए . तब मुझे पता नहीं था न . अब मैं तुम्हे साथ ले जा कर सबको सरप्राइज दूंगी . देखना सब कितने खुश होंगे तुम्हे वहां देख कर .
मंजू : पर मैं कैसे ......
अमित : बस बुआ , अब और कोई बहाना नहीं चलेगा . आज आपको हमारे साथ चलना hi होगा . वर्ण मैं आपसे बात नहीं करूँगा . वहां सब आप का वेट कर रहे हैं .
मंजू : मुझसे बात नहीं करेगा ? तुझे पता भी है मैं इतने साल कैसे मर मर की जी हूँ? अगर तूने ऐसा किया तो इस बार मैं चली जाउंगी जैसे भैया भाभी चले गए थे .
अमित : बाआआ ......
मंजू बुआ की बात सुन कर मैं एक डैम से पीछे हुए और उनके मुँह पर हाथ रख दिया . मंजू बुआ की आँखों में नमी थी. उन्हें मेरी बात का कितना दुःख लगा था मुझे एहसास हो गया था .
अमित : दोबारा ऐसा मत कहना बुआ , मैंने माँ पिता जी को कभी देखा भी नहीं और आप भी दूर होने की बात कर रही हो . क्या मेरा दुःख किसी को नज़र नहीं अत ?
मेरी इस बात का असर बुआ और मौसी दोनों पर hi हुआ . और दोनों ने आगे पीछे से मुझे अपनी बाँहों में भर लिया .
मंजू : मुझे माफ़ कर दे बिट्टू . मैं ऐसा कभी नहीं करुँगी. कभी नहीं .
दिव्या : सब मेरी गलती है मेरे बेटे , मैंने अपनी ज़िम्मेदारी नहीं निभाई . दामिनी क बाद मुझे तुझे संभालना था पर मैं दामिनी की जुदाई में अपनी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी को hi समझ नहीं पायी .
ऋतू : मंजू , दीदी पहली बार घर आयी हैं तो क्या उन्हें ऐसे रुलाती रहोगी ?
ऋतू ने इस इमोशनल माहौल को विराम लगते हुए तीनो का ध्यान अपनी तरफ किया .
मंजू ( आंसू पोंछते हुए ) हम्म हहह सरररय , मैं भी कितनी पागल हूँ. आप बैठो दीदी मैं अभी आयी .
दिव्या : तू बैठ यहीं. मुझे किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं है. और अआप ...????
ऋतू : जी मैं ऋतू हूँ , मंजू की बेस्ट फ्रेंड. हम स्कूल कॉलेज साथ में hi थे.
दिव्या : मैंने आपको कहीं देखा है .
मंजू : देखा होगा दीदी , ये इस शहर की सप है .
दिव्या : हैरान होते हुए ) सप ???? तो वो आप hi हैं?
ऋतू : जी सप सिर्फ दुनिया क लिए . आपके लिए ऋतू , मंजू की फ्रेंड . मंजू मेरी दोस्त hi नहीं मेरी बहिन मेरी फॅमिली भी है. इसके इलावा मेरा और कोई नहीं है .
दिव्या : कैसे नहीं है ? अब से आप भी मंजू की तरह हमारी अपनी हैं .
ऋतू ने जब दिव्या मौसी क मुँह से ये बात सुनी तो वो भी एक पल क लिए शुन्य हो गयी. वो दिव्या मौसी को तो कभी मंजू बुआ को देखने लगी .
दिव्या : मैंने कुछ गलत कहा क्या ? अगर आपको ऐतराज़ है तो ....
दिव्या मौसी की बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी क ऋतू ने झुक कर दिव्या मौसी क गले में बहन दाल ली. मैंने ऋतू का चेहरा देखा तो उसकी आँखों से भी अश्रु धरा बह रही थी .
ऋतू : थैंक यू , थैंक यू वैरी मच . आप नहीं जानती आपने ये कह कर मुझे बिना मोल खरीद लिया है. मेरा अपना कोई नहीं है सिवाए मंजू क. और आप जैसी फॅमिली में अगर मुझे थोड़ी सी भी जगह मिल जाये तो मैं सब कुछ छोड़ने को तैयार हूँ.
दिव्या : आज से आप भी हमारी फॅमिली का हिस्सा हैं. और आप भी हमारे साथ hi चलिए गाओं.
ऋतू : ये क्या ? एक तरफ आप मुझे अपनी फॅमिली का हिस्सा बना रही हैं. और दूसरी तरफ आप आप कह कर पराया भी कर रही हैं. मैं भी मंजू जैसी hi तो हूँ फिर नाम से hi बिलाइये न
दिव्या : वो आप सप ....
ऋतू : मैंने कहा न सप दुनिया क लिए . इंसान चाहे कोई भी ओहदा रखता हो पर अपने परिवार में तो उसकी पहचान वो नहीं होगी न जो दुनिया में समाज में हो. परिवार में तो सिर्फ परिवार का सदस्य hi होता है .
दिव्या : ठीक है , तो मैं अब से तुम्हे ऋतू hi बुलाऊंगी .
ऋतू : ये हुई न बात , अब आप बातें कीजिये मैं चाय बना कर लती हूँ.
मंजू : तू बैठ मैं बनती हूँ न चाय .
ऋतू : मैंने कहा न मैं बनती हूँ. तू थोड़ी देर और अपना रोना धोना कर ले. दीदी पहली बार आयी है तो मैं अपने हाथ की चाय पिलाऊंगी इन्हे.
इतना कह कर ऋतू मुस्कुराती हुई किचन में चली गयी और जाते जाते मुझे नज़र मिली तो उसकी आँखों में अलग hi ख़ुशी नज़र आ रही थी .
दिव्या : बहुत hi प्यारी सहेली है तुम्हारी .
मंजू : हाँ दीदी , एक ये hi तो थी मेरी ज़िन्दगी में. वक़्त ने इसे भी मुझसे दूर कर दिया था . और अब वापिस मिली भी है तो अमित की hi वजह से. जब से अमित मुझसे मिला है ऐसा लग रहा है जैसे सब कुछ एक एक कर क वापिस मिल रहा है . मेरा बिट्टू मऊआआह्ह .
मंजू बुआ ने मेरे चेहरा हाथों में पकड़ा और मेरे गाल को चूम लिया .
अमित : अब आप जल्दी तैयार हो जाइये . हमें वापिस भी जाना है
मंजू : ऐसे कैसे जाना है ? नाश्ता आप यहीं करेंगे . फिर बाद में चलेंगे गाओं .
ऋतू : मंजूउउ , ज़रा अमित को भेजना ये डिब्बा उतर नहीं रहा .
किचन से ऋतू की आवाज़ आयी तो मंजू बुआ उठ कर जाने लगी . मगर दिव्या मौसी ने उन्हें रोक दिया .
दिव्या : अमित जा कर देख ज़रा , मंजू को मेरे पास hi रहने दे .
अमित : जी मौसी .
मैं उठ कर किचन में गया तो ऋतू सामने कड़ी जैसे मेरा hi इंतज़ार कर रही थी. और मेरे आते hi उसने मेरे गले में बहन दाल ली और धकेल कर दीवार से लगा लिया. इससे पहले क मैं कुछ बोल पता ऋतू ने मेरी बोलती hi बंद कर दी मेरे होंठों को अपनी गिरफ्त में लेते हुए . मैं ऋतू क इस अप्रत्याशित हमले से अचम्भे में था . ऋतू मुझ पर हावी होती हुई लगातार मुझे किश किये जा रही थी . किश क दौरान मुझे कुछ नमकीन सा गीला पैन होंठों पर महसूस हुआ तो मैंने ऋतू का चेहरा हाथों में थम कर खुद से अलग किया . ऋतू की आँखों से आंसू बह रहे थे पर चेहरे पर ख़ुशी थी .
अमित : ये क्या ?? आप रो रही हैं ??
ऋतू : मैं रो नहीं रही ये तो ख़ुशी क आंसू हैं. तुमने सुना नहीं दीदी ने क्या कहा ? मैं भी मंजू की तरह अब तुम्हारी फॅमिली का हिस्सा हूँ. तुम्हे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं क मैं कितनी खुश हूँ. मैं तो कब से खुद को अनाथ समझ रही थी बस अकेली जी रही थी. जी क्या रही थी बस उम्रकैद की सजा hi तो काट रही थी. पर आज ऐसे लग रहा है जैसे मुझे ज़िन्दगी वापिस मिल गयी हो. तुम ,,, तुम कोई फ़रिश्ते हो जो मेरी ज़िन्दगी सँवारने ए हो. थैंक यू ,,,, थैंक यू वैरी मच . उम्मम्मम्हाआआह्ह्ह्हह
ऋतू ने अपनी बात कह कर फिर से मेरे होंठ अपने होंठों में जकड लिए . मैंने ऋतू क अंदर की इस ख़ुशी को महसूस करते हुए उसका साथ दिया . मुझे इस बात का भी दर था क कहीं कोई किचन में न आ जाये . बुआ का तो कोई नहीं पर मौसी का दर था इसी लिए मैंने ऋतू को खुद से अलग किया .
अमित : बस बस , खुद को सम्भालिये अगर मौसी को पता चल गया तो सब कैंसिल हो जायेगा समझी आप ?
ऋतू : शहहह , मैं ऐसा बिलकुल नहीं होने दूंगी. सुना नहीं अब से मैं भी फॅमिली का हिस्सा हूँ. वैसे रिश्ता तो पहले hi बन चूका है तुम्हारी वजह से .
अमित : मेरी वजह से रिश्ता ?
ऋतू : और नहीं तो क्या , तुम्हारी मौसी यानि क मेरी मौसी सास . समझे ? हे हे हे
अमित : आप भी न ,,,, अपनी सास क लिए चाय नहीं बनाएंगी?
ऋतू : मर गयी ,,, सब तुम्हारी गलती है . जाओ यहाँ से जल्दी , मुझे चाय बनानी है .
अमित : है है है ,, अभी तो जंगली बिल्ली बानी हुई थी और अभी देखो कैसे भीगी बिल्ली बन रही हैं आप
ऋतू : क्या कहा ??? तुम्हे तो बाद में देखूंगी . पहले चाय बना लूँ .
ऋतू की बात सुन कर मैं किचन से निकलने लगा पर जाने से पहले मैंने ऋतू की मस्त गांड पर थप्पड़ मर दिया . उसने पलट कर झूठा गुस्सा दिखाया पर मैं हँसते हुए भाग कर निकल गया . वापिस हाल में आया तो बुआ और मौसी दोनों अब आराम से बातें कर रही थी. मैं भी दोनों क करीब बैठ गया और उनके बातें सुनने लगा . कुछ hi देर में ऋतू चाय ले आयी और सबको चाय देने क बाद वो बुआ क साथ hi बैठ गयी. बातों बातों में चाय भी ख़तम हो गयी .
ऋतू : ाचा मंजू अब मैं तैयार होती हूँ मुझे ऑफिस जाना है
दिव्या : ये क्या ,, तुम हमारे साथ नहीं चल रही ?
ऋतू : सॉरी दीदी , मन तो बहुत है पर आप तो जानती हैं . ओहदे क साथ ज़िम्मेदारी भी बड़ी होती है. आज कुछ ज़रूरी मीटिंग्स हैं. पर मैं वडा करती हूँ जल्द hi सब से मिलने मैं ज़रूर आउंगी. सप नहीं आपकी ऋतू बन कर.
दिव्या : ठीक है , मैं इंतज़ार करुँगी.
मंजू : चल तू तैयार हो तब तक मैं नाश्ता बनती हूँ.
ऋतू : नहीं , तुम दीदी क साथ बात करो . इतने दोनों बाद मिले हो तो आराम से बातें करो . नाश्ता मैं ऑफिस कर लुंगी और आप सब क लिए भी आर्डर कर देती हूँ .
दिव्या : ऐसे कैसे ? नाश्ता तो हमारे साथ hi करना पड़ेगा . इतना तो कर hi सकती हो न सप साहिबा ? चल मंजू मुझे अपना किचन दिखा .
मंजू : आप रहने दो दीदी मैं कर लुंगी
दिव्या मौसी ने मंजू बुआ की एक न सुनी और उनका हाथ पकड़ कर खींचती हुई किचन में चली गयी. ऋतू भी तैयार होने बैडरूम में चली गयी . कुछ देर मैं सोफे पर hi बैठा रहा . मुझे आज इतनी ख़ुशी मिल रही थी क ऐसे बैठना भी ाचा नहीं लग रहा था . मैं उठ कर किचन में देखने गया तो वहां मौसी और बुआ दोनों मिल कर नाश्ता बना रही थी और आपस में ऐसे बात कर रही थी जैसे बहुत पुराणी पक्की सहेलियां हो.
मंजू : दीदी वो ज़रा डिब्बी पकड़ना आमचूर की .
दिव्या : ये ले , माखन तो पड़ा होगा न फ्रिज में ? नहीं तो अमित को भेज कर मंगवा ले. उसे आलू क परांठे क साथ माखन बहुत पसंद है .
मंजू : जानती हूँ दीदी इसी लिए हमेशा hi रखती हूँ . पता नहीं कब उसका दिल कर आये नाश्ता मेरे साथ करने का . और दही भी रखा है . दीदी नमक कैसा डालूं ?
दिव्या : तुझे पता है न वो कैसा खता है बस एक ऐसा hi दाल .
मैं दरवाज़े पर खड़ा दोनों की बातें सुन रहा था . दोनों मेरी पसंद क अल्लू क परांठे बना रही थी. दोनों hi मुझे कितना प्यार करती थी उनका प्यार देख कर मैं बस ु की बातें सुनने में hi मगन था .
दिव्या : तुम यहाँ क्या कर रहे हो ? जाओ जा कर बैठो वहां . अभी थोड़ा टाइम लगेगा .
दिव्या मौसी की आवाज़ से मैं होश में आया तो देखा दोनों मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी .
अमित : मैं भी आपकी मदद करता हूँ न मौसी.
दिव्या : हम दोनों कर रही हैं न , तू जा कर बैठ .
अमित : पर मौसी ,,,,,
मंजू : सुना नहीं दीदी ने क्या कहा ,, तुम जा कर बैठो. मदद करनी है तो पेट भर क खाना खा लेना .
दिव्या : चल अब जा भी ...
मैं अब भला क्या करता चुपचाप वहां से खिसक गया . किचन से हॉल में एते मेरी नज़र बैडरूम में पड़ी तो ऋतू बाथरूम से तौलिये में लिपटी निकल रही थी . क्या क़यामत जिस्म था ऋतू का भी. ऊँचा लम्बा कद गोरा रंग और बेहद hi एथलेटिक मजबूत जिस्म. फिगर क मामले में ऋतू वाकई बेजोड़ थी. गीले बालों से टपकता पानी और उसका मदमस्त बदन आधा नंगा तौलिये में लिप्त देख मेरी नज़रें वहीँ जैम गयी. पर मौसी और बुआ की वजह से यहाँ कुछ भी किया नहीं जा सकता था मगर मेरा लैंड तो उसे देख कर hi अकड़ चूका था. मुझे एक शरारत सूझी तो मैं चुपके से कमरे में घुसा , ऋतू को मेरे आने का पता नहीं चला उसकी पीठ मेरी तरफ थी. मैंने पीछे से ऋतू को बाँहों में ले लिया और उसकी गर्दन पर अपने होंठ रख दिए . ऋतू का जिस्म नहाने की वजह से एक डैम ठंडा लग रहा था और उस पर मेरे गरम होंठ एक अलग सा एहसास था .
ऋतू : कक्कक्क्स उम्म्म्म क्या कर रहे हो , दीदी या मंजू देख लेंगी
अमित : उम्मम्मम पहले तो खुद किचन में शुरू हो गयी थी और अब मुझे रोक रही हो. तुम्हारा ये संगेमरमर की मूरत सा बदन देख कर कौन रोक सकता है खुद को . उम्मम्मम
ऋतू : प्लीज रुक जाओ अमित आआअह्ह्ह्ह ककक मत करो न उम्म्म
मैंने ऋतू की गर्दन को चूमते हुए कण की लौ को भी अपने होंठों में पकड़ लिया और साथ hi अपने हाथ ऋतू क कैसे हुए संतरों पर रख दिए . न चाहते हुए भी ऋतू मस्त होने लगी और उसकी गर्दन पीछे की तरफ मेरी गर्दन पर लुढ़क गयी और एक हाथ मेरे सर पर आ गया . ऋतू क मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी और अब उसके बदन का एक मात्रा कपडा यानि क टॉवल भी उसका साथ छोड़ कर ज़मीन पर गिर चूका था .
ऋतू : प्लीज ,,,,,, रुक जाओ ,,,,,, वर्ण मैं कक्कक्कक्स
ऋतू अटक अटक कर बोल रही थी मेरा एक हाथ उसके बूब्स पर और दूसरा अब उसकी छूट पर पहुँच चूका था . ऋतू मेरे साथ चिपकी बस तड़प रही थी . मैं अभी ऋतू का मज़ा ले hi रहा था क ऋतू भी गरम हो गयी और एक डैम पलट गयी. ऋतू की आँखों में लाल डोरे नज़र आ रहे थे. उसने मेरी आँखों में देखा और एक डैम से मेरे सर क पीछे हाथ रख कर मेरे होंठ अपने होंठों में जकड लिए . ऋतू मुझे वीलडली किश करने लगी और मेरे बल नोचते हुए मुझे धकेल कर बीएड पर गिरा दिया और खुद मेरे ऊपर आ गयी
ऋतू : हहहह तुम ऐसे नहीं मानोगे न ,,, अभी बताती हूँ .
अमित : रुको रुको आह्ह्ह्ह ककक
ऋतू ने मेरे ऊपर से उठते hi मेरे लोअर को नीचे कर्क अंडरवियर में हाथ दाल कर मेरा लैंड जकड लिया . मेरे मुँह से मस्ती भरी आग निकल गयी . इससे पहले क ऋतू कुछ और करती बुआ की आवाज़ किचन से आयी
मंजू : ऋतूउउउ ,, तू रेडी हो गयी क्या ????
बुआ की आवाज़ सुनते hi ऋतू होश में आयी .
ऋतू : हाँ बस 5 मिनट्स
ऋतू : बहुत मस्ती चढ़ रही है न तुम्हे ,, अभी तो छोड़ रही हूँ पर इसका बदला मैं ज़रूर लुंगी . अब जाओ मुझे तैयार होने दो
ऋतू मेरे ऊपर से उतर कर वैसे hi नंगी बिना किसी झिझक क बीएड से अपनी पेंटी उठा कर पहनने लगी तो उसके झुकने से बहार को निकली उसकी मस्त गांड देख कर मेरा हाथ अपने आप ऋतू की गांड पर जा लगा .
ऋतू : सीसीसी तुम हटोगे नहीं न ?? इससे पहले क मैं कुछ करूँ चुपचाप चले जाओ . ठरकी कहीं क .
ऋतू ने आखिरी बात थोड़ा मुस्कुरा कर कही तो मुझे भी हंसी आ गयी . मैं रूम से बहार निकल कर हाल में आ गया. ऋतू क साथ मस्ती कर क लैंड का बुरा हॉल हो गया था . मैं खुद को शांत करता हुआ सोफे पर बैठ गया . कुछ देर में hi ऋतू हॉल में आ गयी. अब वो अपनी यूनिफार्म में थी . खाखी यूनिफार्म सर पर कैप पाऊँ में ब्राउन जुटे हाथ में स्टिक. ऋतू सच में यूनिफार्म में इतनी ज्यादा सेक्सी लगती थी क शायद hi कोई और लगता होगा . उसके उठे हुए बूब्स सामने से शर्ट को ऊपर उठाये खड़े थे जहाँ पर एक तरफ रंग दर प्लेट लगी थी और एक तरफ उसकी नाम प्लेट जिस पर ऋतू सिंह लिखा हुआ था . कंधे पर लगे स्टार और चार शेरोन क निशान क साथ आईपीएस लिखा हुआ था . मैं सर से पाऊँ तक ऋतू को देख रहा था .
ऋतू : बाज़ आ जाओ , यूनिफार्म की इज़्ज़त करो वर्ण जानते हो न क्या कर सकती हूँ मैं.
अमित : कसम से इस यूनिफार्म में एक बार आपके साथ मज़ा ले लूँ फिर चाहे आप जान भी ले लेना .
ऋतू ने आगे आ कर हाथ में पकड़ी स्टिक मेरी गर्दन पर रख दी और झुक कर बोली .
ऋतू : लगता है ऐसे नहीं मानोगे तुम. अब तो तुम्हारी जान मैं लेकर रहूंगी .
इतना कह कर ऋतू ने अपना पाऊँ उठा कर मेरे लैंड क ऊपर रखा और दबा दिया . मेरे मुँह से हल्दी सी आह्हः निकली तो ऋतू में थोड़ा और झुक कर मेरे होंठों को जल्दी से चूमा और पीछे हैट गयी .
मंजू : तो हो गयी तुम रेडी , चलो अब नाश्ता कर लो .
ऋतू अभी पीछे hi हुई थी क मंजू बुआ हाथ में ट्रे लिए आ गयी जिसमे परांठे और माखन क साथ दही भी था . उनके पीछे दिव्या मौसी भी आ गयी. ऋतू को यूनिफार्म में देख कर वो भी एक बार उन्हें सर से पाऊँ तक देखने लगी .
दिव्या : सच में बहुत खूबसूरत लग रही हो ऋतू , ये यूनिफार्म तुम पर बहुत जंचती है.
ऋतू : थैंक्स दीदी ,
ऋतू ने मौसी को जवाब दे कर एक बार मेरी तरफ देखा और मेरी नज़रों का इशारा देख कर वो खुद hi शर्मा गयी . उसके बाद हमने मिल कर नाश्ता किया . ऋतू नाश्ता करते hi फिर मिलने का कह कर मौसी और बुआ से गले मिल कर निकल गयी.
दिव्या : चल मंजू अब तू भी अपना सामान पैक कर और चल हमारे साथ . अब तू वहीँ रहेगी .
मंजू : नहीं दीदी , मैं कैसे ,,, मेरी जॉब भी तो है यहाँ .
दिव्या : तो क्या हुआ ? अभी तो छुट्टियां हैं न . जब कॉलेज शुरू हो जायेंगे तो वापिस आ जाना . इसे भी तो कॉलेज जाना hi है.
मंजू : पर दीदी , मुझे दर लग रहा है . मैं कैसे सब क सामने .......
दिव्या : धत्त पगली कहीं की. मैं हूँ न साथ तेरे . वैसे भी वहां सब तेरा इंतज़ार hi कर रहे हैं. बस एक मैं hi थी जिसे तेरे आने पर ऐतराज़ था और देख मैं hi तुझे लेने आ गयी . अब कोई बहाना नहीं चलेगा . जल्दी से अपने कपडे बैग में दाल और चल .
मंजू : पर दीदी ......
दिव्या : अब कुछ और कहा न तो मर खायेगी मुझसे . चल उठ तेरा बैग मैं खुद hi पैक करती हूँ. दिखा मुझे कहाँ हैं तेरे कपडे .
दिव्या मौसी ने मंजू बुआ का हाथ पकड़ कर उठाया और उन्हें बैडरूम में ले गयी . दिव्या मौसी कितने प्यार और अपने पैन से बुआ को तैयार कर रही थी ये देख कर मुझे मौसी पर गर्व हो रहा था . मौसी बुआ को लेकर उनके बैडरूम में ले गयी . मौसी ने खुद hi बुआ का सामान पैक किया और तब तक बुआ भी नाहा कर रेडी हो गयी.
दिव्या : चलो अब गाओं चलते हैं . पर हम बाइक पर कैसे जायेंगे . अमित तू बहार टैक्सी ले आ जा कर .
मंजू : उसकी क्या ज़रूरत है दीदी , मेरे पास गाडी है न . अमित भी हमारे साथ hi चलेगा .
अमित : पर बुआ फिर मेरी बाइक का क्या ? आप एक काम करो आप गाड़ी से चलो मैं आपके पीछे पीछे अत हूँ .
मंजू : पर बाइक पर क्यों ?
अमित : अरे बुआ , मुझे प्रैक्टिस क लिए बार बार यहाँ आना पड़ेगा न . मुझे कार भी तो चलनी नहीं आती .
दिव्या : ठीक है , पर तू साथ में hi रहना और ध्यान से चलना .
उसके बाद बुआ ने घर को अचे से लॉक किया और मौसी को अपने साथ कार में बिठा के चल पड़ी गाओं की तरफ . मैं उनके साथ hi चल रहा था . मुझे अंदर से एक अलग hi ख़ुशी मिल रही थी क आज मैं बुआ को अपने घर ले के जा रहा हूँ. कितनी जल्दी कितना कुछ ज़िन्दगी में अचानक से हो रहा था और इतनी ख़ुशी जीवन में पहली बार मिल रही थी मुझे . जैसे hi हम गाओं क करीब पहुंचे मैंने बाइक की स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से घर पहुँच गया . मैं जब घर पहुंचा तो बाइक की आवाज़ सुन कर माँ क साथ साथ दीपिका ममी भी आंगन में आ गयी .
गौरी : कहाँ गया था सुबह सुबह ? और दिव्या कहाँ है ?
अमित : वो सब छोडो माँ , जल्दी से आरती की थाली ले कर आओ .
गौरी : आरती की थाली क्यों?
माँ मुझसे अभी सवाल hi पूछ रही थी क दीपिका ममी भाग कर कूचें में चली गयी जैसे उन्हें पता चल गया हो .
अमित : बाबा कहाँ हैं माँ ? सबको बुलाओ जल्दी से . मौसीईईई ,,, बबाआआआ ,,, मां जीईई
मैंने ज़ोर ज़ोर से आवाज़ दी तो सब कमरों से बहार निकल ए .
गौरी : बात क्या है पहले ये तो बता कौन आ रहा है. तेरे बाबा खेत गए हैं अजय क साथ और कमलेश भी घर नहीं है.
रजनी मौसी रीता मौसी कामिनी ममी और सब लड़कियां आंगन में इकट्ठी हो गयी. सब मुझे पूछने लगे क बात क्या है . इतने में बहार से गाड़ी की आवाज़ आयी .
अमित : खुद hi देख लो माँ .
मैं भाग कर गेट पर गया और गेट को खोल दिया . सामने hi बुआ की कार कड़ी थी. एक तरफ का दरवाज़ा खोल कर मौसी निकली तो सब उन्हें देखने लगे. दूसरी तरफ का दरवाज़ा खुला तो माँ ज़ोर से चिल्लाई.
गौरी : मंजूउउउउ
मंजू बुआ दिव्या मौसी को देख कर अवाक रह गयी थी . हाथों से छूट कर पतीला ज़मीन पर गिर चूका था . ज़ोर से भाभी कह कर चीखना बता रहा था क वो दिव्या मौसी को अपनी भाभी यानि क मेरी माँ समझ कर ऐसे चीखी हैं . साथ hi उनकी आँखों में आये आंसू उनके दर्द को भी बयां कर रहे थे . ऐसा hi कुछ हल दिव्या मौसी का भी था. उनकी आँखों में भी नमी उतर आयी थी . मैं एक साइड में खड़ा दोनों को hi देख रहा था . हम तीनो अपनी अपनी जगह खड़े थे . समय मनो वहीँ थम सा गया था. इससे आगे बढ़ना है या यहीं पत्थर बन कर खड़े रहना है इसका फैसला नहीं हो प् रहा था . तब दिव्या मौसी ने इस पल को फिर से गति दी
दिव्या : मंजूउउ
बस इतना hi निकला दिव्या मौसी क मुँह से और दोनों hi एक दूसरे की तरफ बढ़ कर गले लग गयी. वो दोनों ऐसे गले मिल रही थी जैसे ज़िन्दगी फिर से मिल गयी हो. दोनों की आँखों से आंसू बह रहे थे और एक दूसरे को सहलाते हुए चूमते हुए बस गले hi लगी रही. ज़ुबान मनो इस पल में दोनों का hi साथ नहीं दे रही थी . दिव्या मौसी क मुँह से बस बुआ का नाम और बुआ क मुँह से बस भाभी hi निकल रहा था . वो शायद ये भूल गयी थी क उनकी भाभी तो इस दुनिया में है भी नहीं . मंजू बुआ जो अभी तक सिर्फ आंसू बहा रही थी धीरे धीरे उनका रोना बढ़ता गया और वो ज़ोर ज़ोर से रोने लगी . दिव्या मौसी उन्हें शांत करने की कोशिश कर रही थी पर मंजू बुआ तो जैसे सुन hi नहीं रही थी . वो इतनी ज़ोर ज़ोर से रोने लगी थी क जैसे कोई अपना मर गया हो.
दिव्या : मंजूउउ !!! मंजूउउ !! खुद को सम्भालो मंजू , बस कर ,,,, चुप हो जा प्लीज मंजू . देख मैं आ गयी हूँ न प्लीज चुप हो जा .
मंजू बुआ का रुदन बिलकुल भी काम नहीं हो रहा था . वो वैसे hi रोये जा रही थी और उनको ऐसे रोटा देख मेरी आँखों में भी आंसू आ गए थे . शायद ये वो दर्द था जो वो कई सैलून से अपने अंदर छुपाये हुए थी और मौसी को देखते hi बहार निकल आया . अभी तक वो मौसी को अपनी भाभी hi समझ कर बस रोये जा रही थी . मौसी ने मुझे इशारा किया क मैं मंजू बुआ को सम्भालूं तो मैं भी अब सामने आ गया और मंजू बुआ को चुप करवाने की कोशिश करने लगा . तभी मेरी नज़र पीछे कड़ी ऋतू पर पड़ी जो पता नहीं कब वहां आ गयी थी और अपने सामने मंजू बुआ को दिव्या मौसी से गले लग रोये जा रही थी. शायद वो भी असमंजस में थी मौसी को देख कर. मैंने मंजू बुआ को मौसी क साथ सहारा देते हुए अंदर दाखिल हुआ और मंजू बुआ को हम हॉल में ले आये . इतने में ऋतू पानी का गिलास ले आयी और मंजू बुआ को पिलाने लगी. मौसी ऋतू को नहीं जानती थी इस लिए उसे हैरानी से देख रही थी . ऋतू इस वक़्त एक लॉन्ग गाउन पहने हुए थी . शायद अभी बीएड से hi उठी थी .
ऋतू : मंजू प्लीज खुद को संभल , ले पानी पि ले .
मंजू बुआ मनो अभी भी कुछ समझने की हालत में नहीं थी. तब दिव्या मौसी ने अपने हाथ में पानी का गिलास लिया और मंजू बुआ क मुँह से लगा दिया.
दिव्या : क्या मेरी बात नहीं मानेगी तू ? ले पानी पि पहले फिर बात करते हैं .
दिव्या मौसी ने प्यार और ज़ोर से मंजू बुआ को पानी पिलाया और वो भी मौसी को देखती हुई पानी पिने लगी .
मंजू : रट हुए ) भाभी आप कहाँ चली गयी थी मुझे छोड़ कर ?
दिव्या : वो तो कब की हम सब को छोड़ कर जा चुकी है मंजू. मैं दामिनी नहीं दिव्या हूँ.
मौसी की बात सुन कर मंजू बुआ का रोना एक डैम से बंद हो गया और वो मौसी को एक तक देखने लगी .
दिव्या : हाँ मंजू , मैं दिव्या हूँ . दामिनी को गुज़ारे तो कितने बरस हो गए . अब तो वो बस यादों में hi ज़िंदा है . पर मैं अभी ज़िंदा हूँ और आज तुझे घर ले जाने आयी हूँ. मगर पहले मुझे माफ़ करदे , मैंने एक बार भी तेरे बारे में नहीं सोचा . तू भी तो दामिनी से इतना प्यार करती थी . मगर मुझे अपने गम में किसी और का दर्द नज़र hi नहीं आया . दामिनी अक्सर कहा करती थी क तू उसकी ननद भी है बहिन भी और बेटी भी. मगर मैं , मैं उसकी ज़िम्मेदारियों को निभा नहीं पायी . मुझे माफ़ कर दे दिव्या मुझे माफ़ कर दे .
दिव्या मौसी अपनी बात कहते कहते रोने लगी तो इस बार मंजू बुआ ने उन्हें गले लगा लिया .
मंजू : ये आप क्या कह रही हैं दीदी , आप क्यों माफ़ी मांग रही हैं. माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए . मैंने अपने मक्कार भाई की बात पर यकीन कर लिया . और उसकी की सजा इतने बरस तक झेलती रही हूँ. अगर मुझे पता होता क बिट्टू ज़िंदा है तो मैं सब कुछ छोड़ कर आप लोगों क पास चली आती .
दिव्या : तूने बहुत कुछ सहा है मंजू तूने बहुत कुछ सहा है. अमित ने मुझे बताया क तेरे साथ क्या क्या हुआ है. काश मैंने एक बार तुझसे मिलने की कोशिश की होती. जब तेरी शादी की खबर मिली थी तब भी मैं गुस्से से वहां नहीं आयी . काश मुझसे इतनी साडी गलतियां न होती .
मंजू : दीपक भैया कहाँ हैं ? क्या उन्हें नहीं पता था अमित क बारे में ? उन्होंने मुझे कभी क्यों कुछ नहीं बताया ? वो तो मेरी शादी पर भी ए थे .
मंजू बुआ की इस बात पर मेरे कान खड़े हो गए . ये बात तो मेरे दिमाग में आयी hi नहीं थी अब तक . आखिर वो थे तो रिश्ते में भाई hi . फिर उन्होंने आज तक क्यों मेरे बारे में नहीं बताया था मंजू बुआ को?
दिव्या : तुम तो जानती हो जब दामिनी का एक्सीडेंट हुआ तब वो विदेश चले गए थे . उन्हें अमित क बारे में पता hi नहीं था . 4 साल जब वो वापिस आये तो बड़े भैया ने hi उन्हें कसम दी थी क वो अमित क बारे में किसी से बात नहीं करेंगे .
मंजू : काम से काम मुझे तो बता सकते थे . आखिर मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ ?
दिव्या : रो मत मंजू , इसमें किसी का कोई दोष नहीं . सब दोष तक़दीर का है. क्या दामिनी की मौत जायज़ थी? वो तो अपने बेटे को ठीक से खिला भी नहीं पायी . सब को हँसाने वाली ऐसे रोटा हुआ छोड़ कर चली गयी .
मंजू : नहीं दीदी , भाभी तो आज भी ज़िंदा है. आप उनके जैसी hi तो हो. और ये , मेरा बिट्टू . चेहरे से भैया जैसा और ऑंखें भाभी जैसी. इसे देख कर मुझे भैया भाभी की hi यद् आयी थी सबसे पहले. इसे बार बार देखने को दिल करता था पर कभी समझ hi नहीं पायी क ये कोई गैर नहीं मेरा अपना hi तो है . कितनी बड़ी भूल हो गयी मुझसे जो इसे पहचान न पायी.
मंजू बुआ ने बात करते करते मुझे बहन फैला कर अपने पास बुलाया तो मैं भी उनके गले लग गया . दिव्या मौसी भी पीछे से मेरी पीठ और सर सहलाने लगी .
दिव्या : जानती हो मंजू मैंने सोचा था मैं तुमसे कभी नहीं मिलूंगी . पर अमित ने जब मुझे सच बताया तो मैं रह न पायी . अगर ये तुमसे पहले न मिला होता तो शायद मैं तुम्हारे पास ऐसे न बैठी होती . कल रत hi इसने मुझे सब बताया और देख दिन चढ़ने से पहले मैं तुझे लेने आ गयी .
मंजू : लेने ??
दिव्या : हाँ , तू हमारे साथ गाओं चल रही है. भैया खुद लेने आने वाले थे पर मेरी वजह से वो नहीं आ पाए . तब मुझे पता नहीं था न . अब मैं तुम्हे साथ ले जा कर सबको सरप्राइज दूंगी . देखना सब कितने खुश होंगे तुम्हे वहां देख कर .
मंजू : पर मैं कैसे ......
अमित : बस बुआ , अब और कोई बहाना नहीं चलेगा . आज आपको हमारे साथ चलना hi होगा . वर्ण मैं आपसे बात नहीं करूँगा . वहां सब आप का वेट कर रहे हैं .
मंजू : मुझसे बात नहीं करेगा ? तुझे पता भी है मैं इतने साल कैसे मर मर की जी हूँ? अगर तूने ऐसा किया तो इस बार मैं चली जाउंगी जैसे भैया भाभी चले गए थे .
अमित : बाआआ ......
मंजू बुआ की बात सुन कर मैं एक डैम से पीछे हुए और उनके मुँह पर हाथ रख दिया . मंजू बुआ की आँखों में नमी थी. उन्हें मेरी बात का कितना दुःख लगा था मुझे एहसास हो गया था .
अमित : दोबारा ऐसा मत कहना बुआ , मैंने माँ पिता जी को कभी देखा भी नहीं और आप भी दूर होने की बात कर रही हो . क्या मेरा दुःख किसी को नज़र नहीं अत ?
मेरी इस बात का असर बुआ और मौसी दोनों पर hi हुआ . और दोनों ने आगे पीछे से मुझे अपनी बाँहों में भर लिया .
मंजू : मुझे माफ़ कर दे बिट्टू . मैं ऐसा कभी नहीं करुँगी. कभी नहीं .
दिव्या : सब मेरी गलती है मेरे बेटे , मैंने अपनी ज़िम्मेदारी नहीं निभाई . दामिनी क बाद मुझे तुझे संभालना था पर मैं दामिनी की जुदाई में अपनी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी को hi समझ नहीं पायी .
ऋतू : मंजू , दीदी पहली बार घर आयी हैं तो क्या उन्हें ऐसे रुलाती रहोगी ?
ऋतू ने इस इमोशनल माहौल को विराम लगते हुए तीनो का ध्यान अपनी तरफ किया .
मंजू ( आंसू पोंछते हुए ) हम्म हहह सरररय , मैं भी कितनी पागल हूँ. आप बैठो दीदी मैं अभी आयी .
दिव्या : तू बैठ यहीं. मुझे किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं है. और अआप ...????
ऋतू : जी मैं ऋतू हूँ , मंजू की बेस्ट फ्रेंड. हम स्कूल कॉलेज साथ में hi थे.
दिव्या : मैंने आपको कहीं देखा है .
मंजू : देखा होगा दीदी , ये इस शहर की सप है .
दिव्या : हैरान होते हुए ) सप ???? तो वो आप hi हैं?
ऋतू : जी सप सिर्फ दुनिया क लिए . आपके लिए ऋतू , मंजू की फ्रेंड . मंजू मेरी दोस्त hi नहीं मेरी बहिन मेरी फॅमिली भी है. इसके इलावा मेरा और कोई नहीं है .
दिव्या : कैसे नहीं है ? अब से आप भी मंजू की तरह हमारी अपनी हैं .
ऋतू ने जब दिव्या मौसी क मुँह से ये बात सुनी तो वो भी एक पल क लिए शुन्य हो गयी. वो दिव्या मौसी को तो कभी मंजू बुआ को देखने लगी .
दिव्या : मैंने कुछ गलत कहा क्या ? अगर आपको ऐतराज़ है तो ....
दिव्या मौसी की बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी क ऋतू ने झुक कर दिव्या मौसी क गले में बहन दाल ली. मैंने ऋतू का चेहरा देखा तो उसकी आँखों से भी अश्रु धरा बह रही थी .
ऋतू : थैंक यू , थैंक यू वैरी मच . आप नहीं जानती आपने ये कह कर मुझे बिना मोल खरीद लिया है. मेरा अपना कोई नहीं है सिवाए मंजू क. और आप जैसी फॅमिली में अगर मुझे थोड़ी सी भी जगह मिल जाये तो मैं सब कुछ छोड़ने को तैयार हूँ.
दिव्या : आज से आप भी हमारी फॅमिली का हिस्सा हैं. और आप भी हमारे साथ hi चलिए गाओं.
ऋतू : ये क्या ? एक तरफ आप मुझे अपनी फॅमिली का हिस्सा बना रही हैं. और दूसरी तरफ आप आप कह कर पराया भी कर रही हैं. मैं भी मंजू जैसी hi तो हूँ फिर नाम से hi बिलाइये न
दिव्या : वो आप सप ....
ऋतू : मैंने कहा न सप दुनिया क लिए . इंसान चाहे कोई भी ओहदा रखता हो पर अपने परिवार में तो उसकी पहचान वो नहीं होगी न जो दुनिया में समाज में हो. परिवार में तो सिर्फ परिवार का सदस्य hi होता है .
दिव्या : ठीक है , तो मैं अब से तुम्हे ऋतू hi बुलाऊंगी .
ऋतू : ये हुई न बात , अब आप बातें कीजिये मैं चाय बना कर लती हूँ.
मंजू : तू बैठ मैं बनती हूँ न चाय .
ऋतू : मैंने कहा न मैं बनती हूँ. तू थोड़ी देर और अपना रोना धोना कर ले. दीदी पहली बार आयी है तो मैं अपने हाथ की चाय पिलाऊंगी इन्हे.
इतना कह कर ऋतू मुस्कुराती हुई किचन में चली गयी और जाते जाते मुझे नज़र मिली तो उसकी आँखों में अलग hi ख़ुशी नज़र आ रही थी .
दिव्या : बहुत hi प्यारी सहेली है तुम्हारी .
मंजू : हाँ दीदी , एक ये hi तो थी मेरी ज़िन्दगी में. वक़्त ने इसे भी मुझसे दूर कर दिया था . और अब वापिस मिली भी है तो अमित की hi वजह से. जब से अमित मुझसे मिला है ऐसा लग रहा है जैसे सब कुछ एक एक कर क वापिस मिल रहा है . मेरा बिट्टू मऊआआह्ह .
मंजू बुआ ने मेरे चेहरा हाथों में पकड़ा और मेरे गाल को चूम लिया .
अमित : अब आप जल्दी तैयार हो जाइये . हमें वापिस भी जाना है
मंजू : ऐसे कैसे जाना है ? नाश्ता आप यहीं करेंगे . फिर बाद में चलेंगे गाओं .
ऋतू : मंजूउउ , ज़रा अमित को भेजना ये डिब्बा उतर नहीं रहा .
किचन से ऋतू की आवाज़ आयी तो मंजू बुआ उठ कर जाने लगी . मगर दिव्या मौसी ने उन्हें रोक दिया .
दिव्या : अमित जा कर देख ज़रा , मंजू को मेरे पास hi रहने दे .
अमित : जी मौसी .
मैं उठ कर किचन में गया तो ऋतू सामने कड़ी जैसे मेरा hi इंतज़ार कर रही थी. और मेरे आते hi उसने मेरे गले में बहन दाल ली और धकेल कर दीवार से लगा लिया. इससे पहले क मैं कुछ बोल पता ऋतू ने मेरी बोलती hi बंद कर दी मेरे होंठों को अपनी गिरफ्त में लेते हुए . मैं ऋतू क इस अप्रत्याशित हमले से अचम्भे में था . ऋतू मुझ पर हावी होती हुई लगातार मुझे किश किये जा रही थी . किश क दौरान मुझे कुछ नमकीन सा गीला पैन होंठों पर महसूस हुआ तो मैंने ऋतू का चेहरा हाथों में थम कर खुद से अलग किया . ऋतू की आँखों से आंसू बह रहे थे पर चेहरे पर ख़ुशी थी .
अमित : ये क्या ?? आप रो रही हैं ??
ऋतू : मैं रो नहीं रही ये तो ख़ुशी क आंसू हैं. तुमने सुना नहीं दीदी ने क्या कहा ? मैं भी मंजू की तरह अब तुम्हारी फॅमिली का हिस्सा हूँ. तुम्हे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं क मैं कितनी खुश हूँ. मैं तो कब से खुद को अनाथ समझ रही थी बस अकेली जी रही थी. जी क्या रही थी बस उम्रकैद की सजा hi तो काट रही थी. पर आज ऐसे लग रहा है जैसे मुझे ज़िन्दगी वापिस मिल गयी हो. तुम ,,, तुम कोई फ़रिश्ते हो जो मेरी ज़िन्दगी सँवारने ए हो. थैंक यू ,,,, थैंक यू वैरी मच . उम्मम्मम्हाआआह्ह्ह्हह
ऋतू ने अपनी बात कह कर फिर से मेरे होंठ अपने होंठों में जकड लिए . मैंने ऋतू क अंदर की इस ख़ुशी को महसूस करते हुए उसका साथ दिया . मुझे इस बात का भी दर था क कहीं कोई किचन में न आ जाये . बुआ का तो कोई नहीं पर मौसी का दर था इसी लिए मैंने ऋतू को खुद से अलग किया .
अमित : बस बस , खुद को सम्भालिये अगर मौसी को पता चल गया तो सब कैंसिल हो जायेगा समझी आप ?
ऋतू : शहहह , मैं ऐसा बिलकुल नहीं होने दूंगी. सुना नहीं अब से मैं भी फॅमिली का हिस्सा हूँ. वैसे रिश्ता तो पहले hi बन चूका है तुम्हारी वजह से .
अमित : मेरी वजह से रिश्ता ?
ऋतू : और नहीं तो क्या , तुम्हारी मौसी यानि क मेरी मौसी सास . समझे ? हे हे हे
अमित : आप भी न ,,,, अपनी सास क लिए चाय नहीं बनाएंगी?
ऋतू : मर गयी ,,, सब तुम्हारी गलती है . जाओ यहाँ से जल्दी , मुझे चाय बनानी है .
अमित : है है है ,, अभी तो जंगली बिल्ली बानी हुई थी और अभी देखो कैसे भीगी बिल्ली बन रही हैं आप
ऋतू : क्या कहा ??? तुम्हे तो बाद में देखूंगी . पहले चाय बना लूँ .
ऋतू की बात सुन कर मैं किचन से निकलने लगा पर जाने से पहले मैंने ऋतू की मस्त गांड पर थप्पड़ मर दिया . उसने पलट कर झूठा गुस्सा दिखाया पर मैं हँसते हुए भाग कर निकल गया . वापिस हाल में आया तो बुआ और मौसी दोनों अब आराम से बातें कर रही थी. मैं भी दोनों क करीब बैठ गया और उनके बातें सुनने लगा . कुछ hi देर में ऋतू चाय ले आयी और सबको चाय देने क बाद वो बुआ क साथ hi बैठ गयी. बातों बातों में चाय भी ख़तम हो गयी .
ऋतू : ाचा मंजू अब मैं तैयार होती हूँ मुझे ऑफिस जाना है
दिव्या : ये क्या ,, तुम हमारे साथ नहीं चल रही ?
ऋतू : सॉरी दीदी , मन तो बहुत है पर आप तो जानती हैं . ओहदे क साथ ज़िम्मेदारी भी बड़ी होती है. आज कुछ ज़रूरी मीटिंग्स हैं. पर मैं वडा करती हूँ जल्द hi सब से मिलने मैं ज़रूर आउंगी. सप नहीं आपकी ऋतू बन कर.
दिव्या : ठीक है , मैं इंतज़ार करुँगी.
मंजू : चल तू तैयार हो तब तक मैं नाश्ता बनती हूँ.
ऋतू : नहीं , तुम दीदी क साथ बात करो . इतने दोनों बाद मिले हो तो आराम से बातें करो . नाश्ता मैं ऑफिस कर लुंगी और आप सब क लिए भी आर्डर कर देती हूँ .
दिव्या : ऐसे कैसे ? नाश्ता तो हमारे साथ hi करना पड़ेगा . इतना तो कर hi सकती हो न सप साहिबा ? चल मंजू मुझे अपना किचन दिखा .
मंजू : आप रहने दो दीदी मैं कर लुंगी
दिव्या मौसी ने मंजू बुआ की एक न सुनी और उनका हाथ पकड़ कर खींचती हुई किचन में चली गयी. ऋतू भी तैयार होने बैडरूम में चली गयी . कुछ देर मैं सोफे पर hi बैठा रहा . मुझे आज इतनी ख़ुशी मिल रही थी क ऐसे बैठना भी ाचा नहीं लग रहा था . मैं उठ कर किचन में देखने गया तो वहां मौसी और बुआ दोनों मिल कर नाश्ता बना रही थी और आपस में ऐसे बात कर रही थी जैसे बहुत पुराणी पक्की सहेलियां हो.
मंजू : दीदी वो ज़रा डिब्बी पकड़ना आमचूर की .
दिव्या : ये ले , माखन तो पड़ा होगा न फ्रिज में ? नहीं तो अमित को भेज कर मंगवा ले. उसे आलू क परांठे क साथ माखन बहुत पसंद है .
मंजू : जानती हूँ दीदी इसी लिए हमेशा hi रखती हूँ . पता नहीं कब उसका दिल कर आये नाश्ता मेरे साथ करने का . और दही भी रखा है . दीदी नमक कैसा डालूं ?
दिव्या : तुझे पता है न वो कैसा खता है बस एक ऐसा hi दाल .
मैं दरवाज़े पर खड़ा दोनों की बातें सुन रहा था . दोनों मेरी पसंद क अल्लू क परांठे बना रही थी. दोनों hi मुझे कितना प्यार करती थी उनका प्यार देख कर मैं बस ु की बातें सुनने में hi मगन था .
दिव्या : तुम यहाँ क्या कर रहे हो ? जाओ जा कर बैठो वहां . अभी थोड़ा टाइम लगेगा .
दिव्या मौसी की आवाज़ से मैं होश में आया तो देखा दोनों मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी .
अमित : मैं भी आपकी मदद करता हूँ न मौसी.
दिव्या : हम दोनों कर रही हैं न , तू जा कर बैठ .
अमित : पर मौसी ,,,,,
मंजू : सुना नहीं दीदी ने क्या कहा ,, तुम जा कर बैठो. मदद करनी है तो पेट भर क खाना खा लेना .
दिव्या : चल अब जा भी ...
मैं अब भला क्या करता चुपचाप वहां से खिसक गया . किचन से हॉल में एते मेरी नज़र बैडरूम में पड़ी तो ऋतू बाथरूम से तौलिये में लिपटी निकल रही थी . क्या क़यामत जिस्म था ऋतू का भी. ऊँचा लम्बा कद गोरा रंग और बेहद hi एथलेटिक मजबूत जिस्म. फिगर क मामले में ऋतू वाकई बेजोड़ थी. गीले बालों से टपकता पानी और उसका मदमस्त बदन आधा नंगा तौलिये में लिप्त देख मेरी नज़रें वहीँ जैम गयी. पर मौसी और बुआ की वजह से यहाँ कुछ भी किया नहीं जा सकता था मगर मेरा लैंड तो उसे देख कर hi अकड़ चूका था. मुझे एक शरारत सूझी तो मैं चुपके से कमरे में घुसा , ऋतू को मेरे आने का पता नहीं चला उसकी पीठ मेरी तरफ थी. मैंने पीछे से ऋतू को बाँहों में ले लिया और उसकी गर्दन पर अपने होंठ रख दिए . ऋतू का जिस्म नहाने की वजह से एक डैम ठंडा लग रहा था और उस पर मेरे गरम होंठ एक अलग सा एहसास था .
ऋतू : कक्कक्क्स उम्म्म्म क्या कर रहे हो , दीदी या मंजू देख लेंगी
अमित : उम्मम्मम पहले तो खुद किचन में शुरू हो गयी थी और अब मुझे रोक रही हो. तुम्हारा ये संगेमरमर की मूरत सा बदन देख कर कौन रोक सकता है खुद को . उम्मम्मम
ऋतू : प्लीज रुक जाओ अमित आआअह्ह्ह्ह ककक मत करो न उम्म्म
मैंने ऋतू की गर्दन को चूमते हुए कण की लौ को भी अपने होंठों में पकड़ लिया और साथ hi अपने हाथ ऋतू क कैसे हुए संतरों पर रख दिए . न चाहते हुए भी ऋतू मस्त होने लगी और उसकी गर्दन पीछे की तरफ मेरी गर्दन पर लुढ़क गयी और एक हाथ मेरे सर पर आ गया . ऋतू क मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी और अब उसके बदन का एक मात्रा कपडा यानि क टॉवल भी उसका साथ छोड़ कर ज़मीन पर गिर चूका था .
ऋतू : प्लीज ,,,,,, रुक जाओ ,,,,,, वर्ण मैं कक्कक्कक्स
ऋतू अटक अटक कर बोल रही थी मेरा एक हाथ उसके बूब्स पर और दूसरा अब उसकी छूट पर पहुँच चूका था . ऋतू मेरे साथ चिपकी बस तड़प रही थी . मैं अभी ऋतू का मज़ा ले hi रहा था क ऋतू भी गरम हो गयी और एक डैम पलट गयी. ऋतू की आँखों में लाल डोरे नज़र आ रहे थे. उसने मेरी आँखों में देखा और एक डैम से मेरे सर क पीछे हाथ रख कर मेरे होंठ अपने होंठों में जकड लिए . ऋतू मुझे वीलडली किश करने लगी और मेरे बल नोचते हुए मुझे धकेल कर बीएड पर गिरा दिया और खुद मेरे ऊपर आ गयी
ऋतू : हहहह तुम ऐसे नहीं मानोगे न ,,, अभी बताती हूँ .
अमित : रुको रुको आह्ह्ह्ह ककक
ऋतू ने मेरे ऊपर से उठते hi मेरे लोअर को नीचे कर्क अंडरवियर में हाथ दाल कर मेरा लैंड जकड लिया . मेरे मुँह से मस्ती भरी आग निकल गयी . इससे पहले क ऋतू कुछ और करती बुआ की आवाज़ किचन से आयी
मंजू : ऋतूउउउ ,, तू रेडी हो गयी क्या ????
बुआ की आवाज़ सुनते hi ऋतू होश में आयी .
ऋतू : हाँ बस 5 मिनट्स
ऋतू : बहुत मस्ती चढ़ रही है न तुम्हे ,, अभी तो छोड़ रही हूँ पर इसका बदला मैं ज़रूर लुंगी . अब जाओ मुझे तैयार होने दो
ऋतू मेरे ऊपर से उतर कर वैसे hi नंगी बिना किसी झिझक क बीएड से अपनी पेंटी उठा कर पहनने लगी तो उसके झुकने से बहार को निकली उसकी मस्त गांड देख कर मेरा हाथ अपने आप ऋतू की गांड पर जा लगा .
ऋतू : सीसीसी तुम हटोगे नहीं न ?? इससे पहले क मैं कुछ करूँ चुपचाप चले जाओ . ठरकी कहीं क .
ऋतू ने आखिरी बात थोड़ा मुस्कुरा कर कही तो मुझे भी हंसी आ गयी . मैं रूम से बहार निकल कर हाल में आ गया. ऋतू क साथ मस्ती कर क लैंड का बुरा हॉल हो गया था . मैं खुद को शांत करता हुआ सोफे पर बैठ गया . कुछ देर में hi ऋतू हॉल में आ गयी. अब वो अपनी यूनिफार्म में थी . खाखी यूनिफार्म सर पर कैप पाऊँ में ब्राउन जुटे हाथ में स्टिक. ऋतू सच में यूनिफार्म में इतनी ज्यादा सेक्सी लगती थी क शायद hi कोई और लगता होगा . उसके उठे हुए बूब्स सामने से शर्ट को ऊपर उठाये खड़े थे जहाँ पर एक तरफ रंग दर प्लेट लगी थी और एक तरफ उसकी नाम प्लेट जिस पर ऋतू सिंह लिखा हुआ था . कंधे पर लगे स्टार और चार शेरोन क निशान क साथ आईपीएस लिखा हुआ था . मैं सर से पाऊँ तक ऋतू को देख रहा था .
ऋतू : बाज़ आ जाओ , यूनिफार्म की इज़्ज़त करो वर्ण जानते हो न क्या कर सकती हूँ मैं.
अमित : कसम से इस यूनिफार्म में एक बार आपके साथ मज़ा ले लूँ फिर चाहे आप जान भी ले लेना .
ऋतू ने आगे आ कर हाथ में पकड़ी स्टिक मेरी गर्दन पर रख दी और झुक कर बोली .
ऋतू : लगता है ऐसे नहीं मानोगे तुम. अब तो तुम्हारी जान मैं लेकर रहूंगी .
इतना कह कर ऋतू ने अपना पाऊँ उठा कर मेरे लैंड क ऊपर रखा और दबा दिया . मेरे मुँह से हल्दी सी आह्हः निकली तो ऋतू में थोड़ा और झुक कर मेरे होंठों को जल्दी से चूमा और पीछे हैट गयी .
मंजू : तो हो गयी तुम रेडी , चलो अब नाश्ता कर लो .
ऋतू अभी पीछे hi हुई थी क मंजू बुआ हाथ में ट्रे लिए आ गयी जिसमे परांठे और माखन क साथ दही भी था . उनके पीछे दिव्या मौसी भी आ गयी. ऋतू को यूनिफार्म में देख कर वो भी एक बार उन्हें सर से पाऊँ तक देखने लगी .
दिव्या : सच में बहुत खूबसूरत लग रही हो ऋतू , ये यूनिफार्म तुम पर बहुत जंचती है.
ऋतू : थैंक्स दीदी ,
ऋतू ने मौसी को जवाब दे कर एक बार मेरी तरफ देखा और मेरी नज़रों का इशारा देख कर वो खुद hi शर्मा गयी . उसके बाद हमने मिल कर नाश्ता किया . ऋतू नाश्ता करते hi फिर मिलने का कह कर मौसी और बुआ से गले मिल कर निकल गयी.
दिव्या : चल मंजू अब तू भी अपना सामान पैक कर और चल हमारे साथ . अब तू वहीँ रहेगी .
मंजू : नहीं दीदी , मैं कैसे ,,, मेरी जॉब भी तो है यहाँ .
दिव्या : तो क्या हुआ ? अभी तो छुट्टियां हैं न . जब कॉलेज शुरू हो जायेंगे तो वापिस आ जाना . इसे भी तो कॉलेज जाना hi है.
मंजू : पर दीदी , मुझे दर लग रहा है . मैं कैसे सब क सामने .......
दिव्या : धत्त पगली कहीं की. मैं हूँ न साथ तेरे . वैसे भी वहां सब तेरा इंतज़ार hi कर रहे हैं. बस एक मैं hi थी जिसे तेरे आने पर ऐतराज़ था और देख मैं hi तुझे लेने आ गयी . अब कोई बहाना नहीं चलेगा . जल्दी से अपने कपडे बैग में दाल और चल .
मंजू : पर दीदी ......
दिव्या : अब कुछ और कहा न तो मर खायेगी मुझसे . चल उठ तेरा बैग मैं खुद hi पैक करती हूँ. दिखा मुझे कहाँ हैं तेरे कपडे .
दिव्या मौसी ने मंजू बुआ का हाथ पकड़ कर उठाया और उन्हें बैडरूम में ले गयी . दिव्या मौसी कितने प्यार और अपने पैन से बुआ को तैयार कर रही थी ये देख कर मुझे मौसी पर गर्व हो रहा था . मौसी बुआ को लेकर उनके बैडरूम में ले गयी . मौसी ने खुद hi बुआ का सामान पैक किया और तब तक बुआ भी नाहा कर रेडी हो गयी.
दिव्या : चलो अब गाओं चलते हैं . पर हम बाइक पर कैसे जायेंगे . अमित तू बहार टैक्सी ले आ जा कर .
मंजू : उसकी क्या ज़रूरत है दीदी , मेरे पास गाडी है न . अमित भी हमारे साथ hi चलेगा .
अमित : पर बुआ फिर मेरी बाइक का क्या ? आप एक काम करो आप गाड़ी से चलो मैं आपके पीछे पीछे अत हूँ .
मंजू : पर बाइक पर क्यों ?
अमित : अरे बुआ , मुझे प्रैक्टिस क लिए बार बार यहाँ आना पड़ेगा न . मुझे कार भी तो चलनी नहीं आती .
दिव्या : ठीक है , पर तू साथ में hi रहना और ध्यान से चलना .
उसके बाद बुआ ने घर को अचे से लॉक किया और मौसी को अपने साथ कार में बिठा के चल पड़ी गाओं की तरफ . मैं उनके साथ hi चल रहा था . मुझे अंदर से एक अलग hi ख़ुशी मिल रही थी क आज मैं बुआ को अपने घर ले के जा रहा हूँ. कितनी जल्दी कितना कुछ ज़िन्दगी में अचानक से हो रहा था और इतनी ख़ुशी जीवन में पहली बार मिल रही थी मुझे . जैसे hi हम गाओं क करीब पहुंचे मैंने बाइक की स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से घर पहुँच गया . मैं जब घर पहुंचा तो बाइक की आवाज़ सुन कर माँ क साथ साथ दीपिका ममी भी आंगन में आ गयी .
गौरी : कहाँ गया था सुबह सुबह ? और दिव्या कहाँ है ?
अमित : वो सब छोडो माँ , जल्दी से आरती की थाली ले कर आओ .
गौरी : आरती की थाली क्यों?
माँ मुझसे अभी सवाल hi पूछ रही थी क दीपिका ममी भाग कर कूचें में चली गयी जैसे उन्हें पता चल गया हो .
अमित : बाबा कहाँ हैं माँ ? सबको बुलाओ जल्दी से . मौसीईईई ,,, बबाआआआ ,,, मां जीईई
मैंने ज़ोर ज़ोर से आवाज़ दी तो सब कमरों से बहार निकल ए .
गौरी : बात क्या है पहले ये तो बता कौन आ रहा है. तेरे बाबा खेत गए हैं अजय क साथ और कमलेश भी घर नहीं है.
रजनी मौसी रीता मौसी कामिनी ममी और सब लड़कियां आंगन में इकट्ठी हो गयी. सब मुझे पूछने लगे क बात क्या है . इतने में बहार से गाड़ी की आवाज़ आयी .
अमित : खुद hi देख लो माँ .
मैं भाग कर गेट पर गया और गेट को खोल दिया . सामने hi बुआ की कार कड़ी थी. एक तरफ का दरवाज़ा खोल कर मौसी निकली तो सब उन्हें देखने लगे. दूसरी तरफ का दरवाज़ा खुला तो माँ ज़ोर से चिल्लाई.
गौरी : मंजूउउउउ