Adultery Manhoos se mahan tak - Page 33 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 240



मंजू बुआ दिव्या मौसी को देख कर अवाक रह गयी थी . हाथों से छूट कर पतीला ज़मीन पर गिर चूका था . ज़ोर से भाभी कह कर चीखना बता रहा था क वो दिव्या मौसी को अपनी भाभी यानि क मेरी माँ समझ कर ऐसे चीखी हैं . साथ hi उनकी आँखों में आये आंसू उनके दर्द को भी बयां कर रहे थे . ऐसा hi कुछ हल दिव्या मौसी का भी था. उनकी आँखों में भी नमी उतर आयी थी . मैं एक साइड में खड़ा दोनों को hi देख रहा था . हम तीनो अपनी अपनी जगह खड़े थे . समय मनो वहीँ थम सा गया था. इससे आगे बढ़ना है या यहीं पत्थर बन कर खड़े रहना है इसका फैसला नहीं हो प् रहा था . तब दिव्या मौसी ने इस पल को फिर से गति दी

दिव्या : मंजूउउ

बस इतना hi निकला दिव्या मौसी क मुँह से और दोनों hi एक दूसरे की तरफ बढ़ कर गले लग गयी. वो दोनों ऐसे गले मिल रही थी जैसे ज़िन्दगी फिर से मिल गयी हो. दोनों की आँखों से आंसू बह रहे थे और एक दूसरे को सहलाते हुए चूमते हुए बस गले hi लगी रही. ज़ुबान मनो इस पल में दोनों का hi साथ नहीं दे रही थी . दिव्या मौसी क मुँह से बस बुआ का नाम और बुआ क मुँह से बस भाभी hi निकल रहा था . वो शायद ये भूल गयी थी क उनकी भाभी तो इस दुनिया में है भी नहीं . मंजू बुआ जो अभी तक सिर्फ आंसू बहा रही थी धीरे धीरे उनका रोना बढ़ता गया और वो ज़ोर ज़ोर से रोने लगी . दिव्या मौसी उन्हें शांत करने की कोशिश कर रही थी पर मंजू बुआ तो जैसे सुन hi नहीं रही थी . वो इतनी ज़ोर ज़ोर से रोने लगी थी क जैसे कोई अपना मर गया हो.

दिव्या : मंजूउउ !!! मंजूउउ !! खुद को सम्भालो मंजू , बस कर ,,,, चुप हो जा प्लीज मंजू . देख मैं आ गयी हूँ न प्लीज चुप हो जा .

मंजू बुआ का रुदन बिलकुल भी काम नहीं हो रहा था . वो वैसे hi रोये जा रही थी और उनको ऐसे रोटा देख मेरी आँखों में भी आंसू आ गए थे . शायद ये वो दर्द था जो वो कई सैलून से अपने अंदर छुपाये हुए थी और मौसी को देखते hi बहार निकल आया . अभी तक वो मौसी को अपनी भाभी hi समझ कर बस रोये जा रही थी . मौसी ने मुझे इशारा किया क मैं मंजू बुआ को सम्भालूं तो मैं भी अब सामने आ गया और मंजू बुआ को चुप करवाने की कोशिश करने लगा . तभी मेरी नज़र पीछे कड़ी ऋतू पर पड़ी जो पता नहीं कब वहां आ गयी थी और अपने सामने मंजू बुआ को दिव्या मौसी से गले लग रोये जा रही थी. शायद वो भी असमंजस में थी मौसी को देख कर. मैंने मंजू बुआ को मौसी क साथ सहारा देते हुए अंदर दाखिल हुआ और मंजू बुआ को हम हॉल में ले आये . इतने में ऋतू पानी का गिलास ले आयी और मंजू बुआ को पिलाने लगी. मौसी ऋतू को नहीं जानती थी इस लिए उसे हैरानी से देख रही थी . ऋतू इस वक़्त एक लॉन्ग गाउन पहने हुए थी . शायद अभी बीएड से hi उठी थी .

ऋतू : मंजू प्लीज खुद को संभल , ले पानी पि ले .

मंजू बुआ मनो अभी भी कुछ समझने की हालत में नहीं थी. तब दिव्या मौसी ने अपने हाथ में पानी का गिलास लिया और मंजू बुआ क मुँह से लगा दिया.

दिव्या : क्या मेरी बात नहीं मानेगी तू ? ले पानी पि पहले फिर बात करते हैं .

दिव्या मौसी ने प्यार और ज़ोर से मंजू बुआ को पानी पिलाया और वो भी मौसी को देखती हुई पानी पिने लगी .

मंजू : रट हुए ) भाभी आप कहाँ चली गयी थी मुझे छोड़ कर ?

दिव्या : वो तो कब की हम सब को छोड़ कर जा चुकी है मंजू. मैं दामिनी नहीं दिव्या हूँ.

मौसी की बात सुन कर मंजू बुआ का रोना एक डैम से बंद हो गया और वो मौसी को एक तक देखने लगी .

दिव्या : हाँ मंजू , मैं दिव्या हूँ . दामिनी को गुज़ारे तो कितने बरस हो गए . अब तो वो बस यादों में hi ज़िंदा है . पर मैं अभी ज़िंदा हूँ और आज तुझे घर ले जाने आयी हूँ. मगर पहले मुझे माफ़ करदे , मैंने एक बार भी तेरे बारे में नहीं सोचा . तू भी तो दामिनी से इतना प्यार करती थी . मगर मुझे अपने गम में किसी और का दर्द नज़र hi नहीं आया . दामिनी अक्सर कहा करती थी क तू उसकी ननद भी है बहिन भी और बेटी भी. मगर मैं , मैं उसकी ज़िम्मेदारियों को निभा नहीं पायी . मुझे माफ़ कर दे दिव्या मुझे माफ़ कर दे .

दिव्या मौसी अपनी बात कहते कहते रोने लगी तो इस बार मंजू बुआ ने उन्हें गले लगा लिया .

मंजू : ये आप क्या कह रही हैं दीदी , आप क्यों माफ़ी मांग रही हैं. माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए . मैंने अपने मक्कार भाई की बात पर यकीन कर लिया . और उसकी की सजा इतने बरस तक झेलती रही हूँ. अगर मुझे पता होता क बिट्टू ज़िंदा है तो मैं सब कुछ छोड़ कर आप लोगों क पास चली आती .

दिव्या : तूने बहुत कुछ सहा है मंजू तूने बहुत कुछ सहा है. अमित ने मुझे बताया क तेरे साथ क्या क्या हुआ है. काश मैंने एक बार तुझसे मिलने की कोशिश की होती. जब तेरी शादी की खबर मिली थी तब भी मैं गुस्से से वहां नहीं आयी . काश मुझसे इतनी साडी गलतियां न होती .

मंजू : दीपक भैया कहाँ हैं ? क्या उन्हें नहीं पता था अमित क बारे में ? उन्होंने मुझे कभी क्यों कुछ नहीं बताया ? वो तो मेरी शादी पर भी ए थे .

मंजू बुआ की इस बात पर मेरे कान खड़े हो गए . ये बात तो मेरे दिमाग में आयी hi नहीं थी अब तक . आखिर वो थे तो रिश्ते में भाई hi . फिर उन्होंने आज तक क्यों मेरे बारे में नहीं बताया था मंजू बुआ को?

दिव्या : तुम तो जानती हो जब दामिनी का एक्सीडेंट हुआ तब वो विदेश चले गए थे . उन्हें अमित क बारे में पता hi नहीं था . 4 साल जब वो वापिस आये तो बड़े भैया ने hi उन्हें कसम दी थी क वो अमित क बारे में किसी से बात नहीं करेंगे .

मंजू : काम से काम मुझे तो बता सकते थे . आखिर मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ ?

दिव्या : रो मत मंजू , इसमें किसी का कोई दोष नहीं . सब दोष तक़दीर का है. क्या दामिनी की मौत जायज़ थी? वो तो अपने बेटे को ठीक से खिला भी नहीं पायी . सब को हँसाने वाली ऐसे रोटा हुआ छोड़ कर चली गयी .

मंजू : नहीं दीदी , भाभी तो आज भी ज़िंदा है. आप उनके जैसी hi तो हो. और ये , मेरा बिट्टू . चेहरे से भैया जैसा और ऑंखें भाभी जैसी. इसे देख कर मुझे भैया भाभी की hi यद् आयी थी सबसे पहले. इसे बार बार देखने को दिल करता था पर कभी समझ hi नहीं पायी क ये कोई गैर नहीं मेरा अपना hi तो है . कितनी बड़ी भूल हो गयी मुझसे जो इसे पहचान न पायी.

मंजू बुआ ने बात करते करते मुझे बहन फैला कर अपने पास बुलाया तो मैं भी उनके गले लग गया . दिव्या मौसी भी पीछे से मेरी पीठ और सर सहलाने लगी .

दिव्या : जानती हो मंजू मैंने सोचा था मैं तुमसे कभी नहीं मिलूंगी . पर अमित ने जब मुझे सच बताया तो मैं रह न पायी . अगर ये तुमसे पहले न मिला होता तो शायद मैं तुम्हारे पास ऐसे न बैठी होती . कल रत hi इसने मुझे सब बताया और देख दिन चढ़ने से पहले मैं तुझे लेने आ गयी .

मंजू : लेने ??

दिव्या : हाँ , तू हमारे साथ गाओं चल रही है. भैया खुद लेने आने वाले थे पर मेरी वजह से वो नहीं आ पाए . तब मुझे पता नहीं था न . अब मैं तुम्हे साथ ले जा कर सबको सरप्राइज दूंगी . देखना सब कितने खुश होंगे तुम्हे वहां देख कर .

मंजू : पर मैं कैसे ......

अमित : बस बुआ , अब और कोई बहाना नहीं चलेगा . आज आपको हमारे साथ चलना hi होगा . वर्ण मैं आपसे बात नहीं करूँगा . वहां सब आप का वेट कर रहे हैं .

मंजू : मुझसे बात नहीं करेगा ? तुझे पता भी है मैं इतने साल कैसे मर मर की जी हूँ? अगर तूने ऐसा किया तो इस बार मैं चली जाउंगी जैसे भैया भाभी चले गए थे .

अमित : बाआआ ......

मंजू बुआ की बात सुन कर मैं एक डैम से पीछे हुए और उनके मुँह पर हाथ रख दिया . मंजू बुआ की आँखों में नमी थी. उन्हें मेरी बात का कितना दुःख लगा था मुझे एहसास हो गया था .

अमित : दोबारा ऐसा मत कहना बुआ , मैंने माँ पिता जी को कभी देखा भी नहीं और आप भी दूर होने की बात कर रही हो . क्या मेरा दुःख किसी को नज़र नहीं अत ?

मेरी इस बात का असर बुआ और मौसी दोनों पर hi हुआ . और दोनों ने आगे पीछे से मुझे अपनी बाँहों में भर लिया .

मंजू : मुझे माफ़ कर दे बिट्टू . मैं ऐसा कभी नहीं करुँगी. कभी नहीं .

दिव्या : सब मेरी गलती है मेरे बेटे , मैंने अपनी ज़िम्मेदारी नहीं निभाई . दामिनी क बाद मुझे तुझे संभालना था पर मैं दामिनी की जुदाई में अपनी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी को hi समझ नहीं पायी .

ऋतू : मंजू , दीदी पहली बार घर आयी हैं तो क्या उन्हें ऐसे रुलाती रहोगी ?

ऋतू ने इस इमोशनल माहौल को विराम लगते हुए तीनो का ध्यान अपनी तरफ किया .

मंजू ( आंसू पोंछते हुए ) हम्म हहह सरररय , मैं भी कितनी पागल हूँ. आप बैठो दीदी मैं अभी आयी .

दिव्या : तू बैठ यहीं. मुझे किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं है. और अआप ...????

ऋतू : जी मैं ऋतू हूँ , मंजू की बेस्ट फ्रेंड. हम स्कूल कॉलेज साथ में hi थे.

दिव्या : मैंने आपको कहीं देखा है .

मंजू : देखा होगा दीदी , ये इस शहर की सप है .

दिव्या : हैरान होते हुए ) सप ???? तो वो आप hi हैं?

ऋतू : जी सप सिर्फ दुनिया क लिए . आपके लिए ऋतू , मंजू की फ्रेंड . मंजू मेरी दोस्त hi नहीं मेरी बहिन मेरी फॅमिली भी है. इसके इलावा मेरा और कोई नहीं है .

दिव्या : कैसे नहीं है ? अब से आप भी मंजू की तरह हमारी अपनी हैं .

ऋतू ने जब दिव्या मौसी क मुँह से ये बात सुनी तो वो भी एक पल क लिए शुन्य हो गयी. वो दिव्या मौसी को तो कभी मंजू बुआ को देखने लगी .

दिव्या : मैंने कुछ गलत कहा क्या ? अगर आपको ऐतराज़ है तो ....

दिव्या मौसी की बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी क ऋतू ने झुक कर दिव्या मौसी क गले में बहन दाल ली. मैंने ऋतू का चेहरा देखा तो उसकी आँखों से भी अश्रु धरा बह रही थी .

ऋतू : थैंक यू , थैंक यू वैरी मच . आप नहीं जानती आपने ये कह कर मुझे बिना मोल खरीद लिया है. मेरा अपना कोई नहीं है सिवाए मंजू क. और आप जैसी फॅमिली में अगर मुझे थोड़ी सी भी जगह मिल जाये तो मैं सब कुछ छोड़ने को तैयार हूँ.

दिव्या : आज से आप भी हमारी फॅमिली का हिस्सा हैं. और आप भी हमारे साथ hi चलिए गाओं.

ऋतू : ये क्या ? एक तरफ आप मुझे अपनी फॅमिली का हिस्सा बना रही हैं. और दूसरी तरफ आप आप कह कर पराया भी कर रही हैं. मैं भी मंजू जैसी hi तो हूँ फिर नाम से hi बिलाइये न

दिव्या : वो आप सप ....

ऋतू : मैंने कहा न सप दुनिया क लिए . इंसान चाहे कोई भी ओहदा रखता हो पर अपने परिवार में तो उसकी पहचान वो नहीं होगी न जो दुनिया में समाज में हो. परिवार में तो सिर्फ परिवार का सदस्य hi होता है .

दिव्या : ठीक है , तो मैं अब से तुम्हे ऋतू hi बुलाऊंगी .

ऋतू : ये हुई न बात , अब आप बातें कीजिये मैं चाय बना कर लती हूँ.

मंजू : तू बैठ मैं बनती हूँ न चाय .

ऋतू : मैंने कहा न मैं बनती हूँ. तू थोड़ी देर और अपना रोना धोना कर ले. दीदी पहली बार आयी है तो मैं अपने हाथ की चाय पिलाऊंगी इन्हे.

इतना कह कर ऋतू मुस्कुराती हुई किचन में चली गयी और जाते जाते मुझे नज़र मिली तो उसकी आँखों में अलग hi ख़ुशी नज़र आ रही थी .

दिव्या : बहुत hi प्यारी सहेली है तुम्हारी .

मंजू : हाँ दीदी , एक ये hi तो थी मेरी ज़िन्दगी में. वक़्त ने इसे भी मुझसे दूर कर दिया था . और अब वापिस मिली भी है तो अमित की hi वजह से. जब से अमित मुझसे मिला है ऐसा लग रहा है जैसे सब कुछ एक एक कर क वापिस मिल रहा है . मेरा बिट्टू मऊआआह्ह .

मंजू बुआ ने मेरे चेहरा हाथों में पकड़ा और मेरे गाल को चूम लिया .

अमित : अब आप जल्दी तैयार हो जाइये . हमें वापिस भी जाना है

मंजू : ऐसे कैसे जाना है ? नाश्ता आप यहीं करेंगे . फिर बाद में चलेंगे गाओं .

ऋतू : मंजूउउ , ज़रा अमित को भेजना ये डिब्बा उतर नहीं रहा .

किचन से ऋतू की आवाज़ आयी तो मंजू बुआ उठ कर जाने लगी . मगर दिव्या मौसी ने उन्हें रोक दिया .

दिव्या : अमित जा कर देख ज़रा , मंजू को मेरे पास hi रहने दे .

अमित : जी मौसी .

मैं उठ कर किचन में गया तो ऋतू सामने कड़ी जैसे मेरा hi इंतज़ार कर रही थी. और मेरे आते hi उसने मेरे गले में बहन दाल ली और धकेल कर दीवार से लगा लिया. इससे पहले क मैं कुछ बोल पता ऋतू ने मेरी बोलती hi बंद कर दी मेरे होंठों को अपनी गिरफ्त में लेते हुए . मैं ऋतू क इस अप्रत्याशित हमले से अचम्भे में था . ऋतू मुझ पर हावी होती हुई लगातार मुझे किश किये जा रही थी . किश क दौरान मुझे कुछ नमकीन सा गीला पैन होंठों पर महसूस हुआ तो मैंने ऋतू का चेहरा हाथों में थम कर खुद से अलग किया . ऋतू की आँखों से आंसू बह रहे थे पर चेहरे पर ख़ुशी थी .

अमित : ये क्या ?? आप रो रही हैं ??

ऋतू : मैं रो नहीं रही ये तो ख़ुशी क आंसू हैं. तुमने सुना नहीं दीदी ने क्या कहा ? मैं भी मंजू की तरह अब तुम्हारी फॅमिली का हिस्सा हूँ. तुम्हे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं क मैं कितनी खुश हूँ. मैं तो कब से खुद को अनाथ समझ रही थी बस अकेली जी रही थी. जी क्या रही थी बस उम्रकैद की सजा hi तो काट रही थी. पर आज ऐसे लग रहा है जैसे मुझे ज़िन्दगी वापिस मिल गयी हो. तुम ,,, तुम कोई फ़रिश्ते हो जो मेरी ज़िन्दगी सँवारने ए हो. थैंक यू ,,,, थैंक यू वैरी मच . उम्मम्मम्हाआआह्ह्ह्हह

ऋतू ने अपनी बात कह कर फिर से मेरे होंठ अपने होंठों में जकड लिए . मैंने ऋतू क अंदर की इस ख़ुशी को महसूस करते हुए उसका साथ दिया . मुझे इस बात का भी दर था क कहीं कोई किचन में न आ जाये . बुआ का तो कोई नहीं पर मौसी का दर था इसी लिए मैंने ऋतू को खुद से अलग किया .

अमित : बस बस , खुद को सम्भालिये अगर मौसी को पता चल गया तो सब कैंसिल हो जायेगा समझी आप ?

ऋतू : शहहह , मैं ऐसा बिलकुल नहीं होने दूंगी. सुना नहीं अब से मैं भी फॅमिली का हिस्सा हूँ. वैसे रिश्ता तो पहले hi बन चूका है तुम्हारी वजह से .

अमित : मेरी वजह से रिश्ता ?

ऋतू : और नहीं तो क्या , तुम्हारी मौसी यानि क मेरी मौसी सास . समझे ? हे हे हे

अमित : आप भी न ,,,, अपनी सास क लिए चाय नहीं बनाएंगी?

ऋतू : मर गयी ,,, सब तुम्हारी गलती है . जाओ यहाँ से जल्दी , मुझे चाय बनानी है .

अमित : है है है ,, अभी तो जंगली बिल्ली बानी हुई थी और अभी देखो कैसे भीगी बिल्ली बन रही हैं आप

ऋतू : क्या कहा ??? तुम्हे तो बाद में देखूंगी . पहले चाय बना लूँ .

ऋतू की बात सुन कर मैं किचन से निकलने लगा पर जाने से पहले मैंने ऋतू की मस्त गांड पर थप्पड़ मर दिया . उसने पलट कर झूठा गुस्सा दिखाया पर मैं हँसते हुए भाग कर निकल गया . वापिस हाल में आया तो बुआ और मौसी दोनों अब आराम से बातें कर रही थी. मैं भी दोनों क करीब बैठ गया और उनके बातें सुनने लगा . कुछ hi देर में ऋतू चाय ले आयी और सबको चाय देने क बाद वो बुआ क साथ hi बैठ गयी. बातों बातों में चाय भी ख़तम हो गयी .

ऋतू : ाचा मंजू अब मैं तैयार होती हूँ मुझे ऑफिस जाना है

दिव्या : ये क्या ,, तुम हमारे साथ नहीं चल रही ?

ऋतू : सॉरी दीदी , मन तो बहुत है पर आप तो जानती हैं . ओहदे क साथ ज़िम्मेदारी भी बड़ी होती है. आज कुछ ज़रूरी मीटिंग्स हैं. पर मैं वडा करती हूँ जल्द hi सब से मिलने मैं ज़रूर आउंगी. सप नहीं आपकी ऋतू बन कर.

दिव्या : ठीक है , मैं इंतज़ार करुँगी.

मंजू : चल तू तैयार हो तब तक मैं नाश्ता बनती हूँ.

ऋतू : नहीं , तुम दीदी क साथ बात करो . इतने दोनों बाद मिले हो तो आराम से बातें करो . नाश्ता मैं ऑफिस कर लुंगी और आप सब क लिए भी आर्डर कर देती हूँ .

दिव्या : ऐसे कैसे ? नाश्ता तो हमारे साथ hi करना पड़ेगा . इतना तो कर hi सकती हो न सप साहिबा ? चल मंजू मुझे अपना किचन दिखा .

मंजू : आप रहने दो दीदी मैं कर लुंगी

दिव्या मौसी ने मंजू बुआ की एक न सुनी और उनका हाथ पकड़ कर खींचती हुई किचन में चली गयी. ऋतू भी तैयार होने बैडरूम में चली गयी . कुछ देर मैं सोफे पर hi बैठा रहा . मुझे आज इतनी ख़ुशी मिल रही थी क ऐसे बैठना भी ाचा नहीं लग रहा था . मैं उठ कर किचन में देखने गया तो वहां मौसी और बुआ दोनों मिल कर नाश्ता बना रही थी और आपस में ऐसे बात कर रही थी जैसे बहुत पुराणी पक्की सहेलियां हो.

मंजू : दीदी वो ज़रा डिब्बी पकड़ना आमचूर की .

दिव्या : ये ले , माखन तो पड़ा होगा न फ्रिज में ? नहीं तो अमित को भेज कर मंगवा ले. उसे आलू क परांठे क साथ माखन बहुत पसंद है .

मंजू : जानती हूँ दीदी इसी लिए हमेशा hi रखती हूँ . पता नहीं कब उसका दिल कर आये नाश्ता मेरे साथ करने का . और दही भी रखा है . दीदी नमक कैसा डालूं ?

दिव्या : तुझे पता है न वो कैसा खता है बस एक ऐसा hi दाल .

मैं दरवाज़े पर खड़ा दोनों की बातें सुन रहा था . दोनों मेरी पसंद क अल्लू क परांठे बना रही थी. दोनों hi मुझे कितना प्यार करती थी उनका प्यार देख कर मैं बस ु की बातें सुनने में hi मगन था .

दिव्या : तुम यहाँ क्या कर रहे हो ? जाओ जा कर बैठो वहां . अभी थोड़ा टाइम लगेगा .

दिव्या मौसी की आवाज़ से मैं होश में आया तो देखा दोनों मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी .

अमित : मैं भी आपकी मदद करता हूँ न मौसी.

दिव्या : हम दोनों कर रही हैं न , तू जा कर बैठ .

अमित : पर मौसी ,,,,,

मंजू : सुना नहीं दीदी ने क्या कहा ,, तुम जा कर बैठो. मदद करनी है तो पेट भर क खाना खा लेना .

दिव्या : चल अब जा भी ...

मैं अब भला क्या करता चुपचाप वहां से खिसक गया . किचन से हॉल में एते मेरी नज़र बैडरूम में पड़ी तो ऋतू बाथरूम से तौलिये में लिपटी निकल रही थी . क्या क़यामत जिस्म था ऋतू का भी. ऊँचा लम्बा कद गोरा रंग और बेहद hi एथलेटिक मजबूत जिस्म. फिगर क मामले में ऋतू वाकई बेजोड़ थी. गीले बालों से टपकता पानी और उसका मदमस्त बदन आधा नंगा तौलिये में लिप्त देख मेरी नज़रें वहीँ जैम गयी. पर मौसी और बुआ की वजह से यहाँ कुछ भी किया नहीं जा सकता था मगर मेरा लैंड तो उसे देख कर hi अकड़ चूका था. मुझे एक शरारत सूझी तो मैं चुपके से कमरे में घुसा , ऋतू को मेरे आने का पता नहीं चला उसकी पीठ मेरी तरफ थी. मैंने पीछे से ऋतू को बाँहों में ले लिया और उसकी गर्दन पर अपने होंठ रख दिए . ऋतू का जिस्म नहाने की वजह से एक डैम ठंडा लग रहा था और उस पर मेरे गरम होंठ एक अलग सा एहसास था .

ऋतू : कक्कक्क्स उम्म्म्म क्या कर रहे हो , दीदी या मंजू देख लेंगी

अमित : उम्मम्मम पहले तो खुद किचन में शुरू हो गयी थी और अब मुझे रोक रही हो. तुम्हारा ये संगेमरमर की मूरत सा बदन देख कर कौन रोक सकता है खुद को . उम्मम्मम

ऋतू : प्लीज रुक जाओ अमित आआअह्ह्ह्ह ककक मत करो न उम्म्म

मैंने ऋतू की गर्दन को चूमते हुए कण की लौ को भी अपने होंठों में पकड़ लिया और साथ hi अपने हाथ ऋतू क कैसे हुए संतरों पर रख दिए . न चाहते हुए भी ऋतू मस्त होने लगी और उसकी गर्दन पीछे की तरफ मेरी गर्दन पर लुढ़क गयी और एक हाथ मेरे सर पर आ गया . ऋतू क मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी और अब उसके बदन का एक मात्रा कपडा यानि क टॉवल भी उसका साथ छोड़ कर ज़मीन पर गिर चूका था .

ऋतू : प्लीज ,,,,,, रुक जाओ ,,,,,, वर्ण मैं कक्कक्कक्स

ऋतू अटक अटक कर बोल रही थी मेरा एक हाथ उसके बूब्स पर और दूसरा अब उसकी छूट पर पहुँच चूका था . ऋतू मेरे साथ चिपकी बस तड़प रही थी . मैं अभी ऋतू का मज़ा ले hi रहा था क ऋतू भी गरम हो गयी और एक डैम पलट गयी. ऋतू की आँखों में लाल डोरे नज़र आ रहे थे. उसने मेरी आँखों में देखा और एक डैम से मेरे सर क पीछे हाथ रख कर मेरे होंठ अपने होंठों में जकड लिए . ऋतू मुझे वीलडली किश करने लगी और मेरे बल नोचते हुए मुझे धकेल कर बीएड पर गिरा दिया और खुद मेरे ऊपर आ गयी

ऋतू : हहहह तुम ऐसे नहीं मानोगे न ,,, अभी बताती हूँ .

अमित : रुको रुको आह्ह्ह्ह ककक

ऋतू ने मेरे ऊपर से उठते hi मेरे लोअर को नीचे कर्क अंडरवियर में हाथ दाल कर मेरा लैंड जकड लिया . मेरे मुँह से मस्ती भरी आग निकल गयी . इससे पहले क ऋतू कुछ और करती बुआ की आवाज़ किचन से आयी

मंजू : ऋतूउउउ ,, तू रेडी हो गयी क्या ????

बुआ की आवाज़ सुनते hi ऋतू होश में आयी .

ऋतू : हाँ बस 5 मिनट्स

ऋतू : बहुत मस्ती चढ़ रही है न तुम्हे ,, अभी तो छोड़ रही हूँ पर इसका बदला मैं ज़रूर लुंगी . अब जाओ मुझे तैयार होने दो

ऋतू मेरे ऊपर से उतर कर वैसे hi नंगी बिना किसी झिझक क बीएड से अपनी पेंटी उठा कर पहनने लगी तो उसके झुकने से बहार को निकली उसकी मस्त गांड देख कर मेरा हाथ अपने आप ऋतू की गांड पर जा लगा .

ऋतू : सीसीसी तुम हटोगे नहीं न ?? इससे पहले क मैं कुछ करूँ चुपचाप चले जाओ . ठरकी कहीं क .

ऋतू ने आखिरी बात थोड़ा मुस्कुरा कर कही तो मुझे भी हंसी आ गयी . मैं रूम से बहार निकल कर हाल में आ गया. ऋतू क साथ मस्ती कर क लैंड का बुरा हॉल हो गया था . मैं खुद को शांत करता हुआ सोफे पर बैठ गया . कुछ देर में hi ऋतू हॉल में आ गयी. अब वो अपनी यूनिफार्म में थी . खाखी यूनिफार्म सर पर कैप पाऊँ में ब्राउन जुटे हाथ में स्टिक. ऋतू सच में यूनिफार्म में इतनी ज्यादा सेक्सी लगती थी क शायद hi कोई और लगता होगा . उसके उठे हुए बूब्स सामने से शर्ट को ऊपर उठाये खड़े थे जहाँ पर एक तरफ रंग दर प्लेट लगी थी और एक तरफ उसकी नाम प्लेट जिस पर ऋतू सिंह लिखा हुआ था . कंधे पर लगे स्टार और चार शेरोन क निशान क साथ आईपीएस लिखा हुआ था . मैं सर से पाऊँ तक ऋतू को देख रहा था .

ऋतू : बाज़ आ जाओ , यूनिफार्म की इज़्ज़त करो वर्ण जानते हो न क्या कर सकती हूँ मैं.

अमित : कसम से इस यूनिफार्म में एक बार आपके साथ मज़ा ले लूँ फिर चाहे आप जान भी ले लेना .

ऋतू ने आगे आ कर हाथ में पकड़ी स्टिक मेरी गर्दन पर रख दी और झुक कर बोली .

ऋतू : लगता है ऐसे नहीं मानोगे तुम. अब तो तुम्हारी जान मैं लेकर रहूंगी .

इतना कह कर ऋतू ने अपना पाऊँ उठा कर मेरे लैंड क ऊपर रखा और दबा दिया . मेरे मुँह से हल्दी सी आह्हः निकली तो ऋतू में थोड़ा और झुक कर मेरे होंठों को जल्दी से चूमा और पीछे हैट गयी .

मंजू : तो हो गयी तुम रेडी , चलो अब नाश्ता कर लो .

ऋतू अभी पीछे hi हुई थी क मंजू बुआ हाथ में ट्रे लिए आ गयी जिसमे परांठे और माखन क साथ दही भी था . उनके पीछे दिव्या मौसी भी आ गयी. ऋतू को यूनिफार्म में देख कर वो भी एक बार उन्हें सर से पाऊँ तक देखने लगी .

दिव्या : सच में बहुत खूबसूरत लग रही हो ऋतू , ये यूनिफार्म तुम पर बहुत जंचती है.

ऋतू : थैंक्स दीदी ,

ऋतू ने मौसी को जवाब दे कर एक बार मेरी तरफ देखा और मेरी नज़रों का इशारा देख कर वो खुद hi शर्मा गयी . उसके बाद हमने मिल कर नाश्ता किया . ऋतू नाश्ता करते hi फिर मिलने का कह कर मौसी और बुआ से गले मिल कर निकल गयी.

दिव्या : चल मंजू अब तू भी अपना सामान पैक कर और चल हमारे साथ . अब तू वहीँ रहेगी .

मंजू : नहीं दीदी , मैं कैसे ,,, मेरी जॉब भी तो है यहाँ .

दिव्या : तो क्या हुआ ? अभी तो छुट्टियां हैं न . जब कॉलेज शुरू हो जायेंगे तो वापिस आ जाना . इसे भी तो कॉलेज जाना hi है.

मंजू : पर दीदी , मुझे दर लग रहा है . मैं कैसे सब क सामने .......

दिव्या : धत्त पगली कहीं की. मैं हूँ न साथ तेरे . वैसे भी वहां सब तेरा इंतज़ार hi कर रहे हैं. बस एक मैं hi थी जिसे तेरे आने पर ऐतराज़ था और देख मैं hi तुझे लेने आ गयी . अब कोई बहाना नहीं चलेगा . जल्दी से अपने कपडे बैग में दाल और चल .

मंजू : पर दीदी ......

दिव्या : अब कुछ और कहा न तो मर खायेगी मुझसे . चल उठ तेरा बैग मैं खुद hi पैक करती हूँ. दिखा मुझे कहाँ हैं तेरे कपडे .

दिव्या मौसी ने मंजू बुआ का हाथ पकड़ कर उठाया और उन्हें बैडरूम में ले गयी . दिव्या मौसी कितने प्यार और अपने पैन से बुआ को तैयार कर रही थी ये देख कर मुझे मौसी पर गर्व हो रहा था . मौसी बुआ को लेकर उनके बैडरूम में ले गयी . मौसी ने खुद hi बुआ का सामान पैक किया और तब तक बुआ भी नाहा कर रेडी हो गयी.

दिव्या : चलो अब गाओं चलते हैं . पर हम बाइक पर कैसे जायेंगे . अमित तू बहार टैक्सी ले आ जा कर .

मंजू : उसकी क्या ज़रूरत है दीदी , मेरे पास गाडी है न . अमित भी हमारे साथ hi चलेगा .

अमित : पर बुआ फिर मेरी बाइक का क्या ? आप एक काम करो आप गाड़ी से चलो मैं आपके पीछे पीछे अत हूँ .

मंजू : पर बाइक पर क्यों ?

अमित : अरे बुआ , मुझे प्रैक्टिस क लिए बार बार यहाँ आना पड़ेगा न . मुझे कार भी तो चलनी नहीं आती .

दिव्या : ठीक है , पर तू साथ में hi रहना और ध्यान से चलना .

उसके बाद बुआ ने घर को अचे से लॉक किया और मौसी को अपने साथ कार में बिठा के चल पड़ी गाओं की तरफ . मैं उनके साथ hi चल रहा था . मुझे अंदर से एक अलग hi ख़ुशी मिल रही थी क आज मैं बुआ को अपने घर ले के जा रहा हूँ. कितनी जल्दी कितना कुछ ज़िन्दगी में अचानक से हो रहा था और इतनी ख़ुशी जीवन में पहली बार मिल रही थी मुझे . जैसे hi हम गाओं क करीब पहुंचे मैंने बाइक की स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से घर पहुँच गया . मैं जब घर पहुंचा तो बाइक की आवाज़ सुन कर माँ क साथ साथ दीपिका ममी भी आंगन में आ गयी .

गौरी : कहाँ गया था सुबह सुबह ? और दिव्या कहाँ है ?

अमित : वो सब छोडो माँ , जल्दी से आरती की थाली ले कर आओ .

गौरी : आरती की थाली क्यों?

माँ मुझसे अभी सवाल hi पूछ रही थी क दीपिका ममी भाग कर कूचें में चली गयी जैसे उन्हें पता चल गया हो .

अमित : बाबा कहाँ हैं माँ ? सबको बुलाओ जल्दी से . मौसीईईई ,,, बबाआआआ ,,, मां जीईई

मैंने ज़ोर ज़ोर से आवाज़ दी तो सब कमरों से बहार निकल ए .

गौरी : बात क्या है पहले ये तो बता कौन आ रहा है. तेरे बाबा खेत गए हैं अजय क साथ और कमलेश भी घर नहीं है.

रजनी मौसी रीता मौसी कामिनी ममी और सब लड़कियां आंगन में इकट्ठी हो गयी. सब मुझे पूछने लगे क बात क्या है . इतने में बहार से गाड़ी की आवाज़ आयी .

अमित : खुद hi देख लो माँ .

मैं भाग कर गेट पर गया और गेट को खोल दिया . सामने hi बुआ की कार कड़ी थी. एक तरफ का दरवाज़ा खोल कर मौसी निकली तो सब उन्हें देखने लगे. दूसरी तरफ का दरवाज़ा खुला तो माँ ज़ोर से चिल्लाई.



गौरी : मंजूउउउउ
 
अपडेट 241



मंजू बुआ क गाड़ी से बहार निकलते hi माँ उन्हें देखते hi पहचान गयी और ज़ोर से उनका नाम लेकर चिल्लाई . रजनी मौसी रीता मौसी कामिनी ममी ने भी उन्हें पहचान लिया . दीपिका ममी को तो मैं बता hi चूका था और वो उनसे पहले मिल भी चुकी थी. लेकिन राधा को छोड़ बाकि सब लड़कियां हैरानी से देख रही थी. सबसे ज्यादा शॉक तो कल्पना नज़र आ रही थी. मेरी नज़र राधा से मिली तो उसकी आँखों में ख़ुशी क साथ साथ नमी भी थी . मेरी हालत जैसे राधा को hi समझ आ रही थी या यूँ कहें क उसकी हालत मेरे जैसी hi थी . माँ तेज़ कदमो से बुआ की तरफ बढ़ने लगी तो दीपिका ममी ने उनकी कलाई पाकर क रोक दिया .

दीपिका : रुको दीदी पहले आरती तो उतरने दो और आप ज़रा अपना भी ध्यान रखिये .

दीपिका ममी ने माँ को उनकी गाढावस्था की यद् दिलाई और खुद आगे बढ़ गयी. मंजू बुआ की आँखों में भी नमी आ गयी थी माँ और मौसियों को देख कर. जबकि दीपिका ममी को वो पहली बार इस घर में देख रही थी चाहे वो हॉस्पिटल में उनसे मिली थी एक बार . दीपिका ममी ने आरती उतरी और बुआ क माथे पर तिलक लगा कर ु का स्वागत किया . मंजू बुआ अंदर आने की बजाये वहीँ दरवाज़े पर कड़ी रोने लगी थी तो माँ ने आगे बढ़ कर उनको गले से लगा लिया जिससे बुआ का रोना और भी तेज़ हो गया . सबको चेहरों पर आयी ख़ुशी एक बार फिर इमोशंस में बहने लगी थी.

गौरी : मंजू ,,, तू आ गयी मंजू ,,, कहाँ थी तू इतने सालों से ?? तुझे एक बार भी हमारी यद् नहीं आयी ?

मंजू : रट हुए ) मुझे माफ़ कर दो भाभी माँ , मुझे माफ़ कर दो .

गौरी : माफ़ी किस बात की हाँ ? चल , अंदर चल पहले .

माँ ने मंजू बुआ को गले लगा कर उनके आंसू पोंछते हुए उन्हें घर क अंदर प्रवेश करवाया और पहले रजनी मौसी ने उन्हें गले लगाया फिर रीता मौसी और फिर कामिनी ममी. रो रो कर मंजू बुआ सब से माफ़ी मांग रही थी हाथ जोड़ कर. सब ने उनको ऐसे गले लगाया जैसे उनसे किसी को कोई शिकवा था hi नहीं . इधर मैंने गाड़ी से बुआ का बैग बहार निकल लिया . दिव्या मौसी दीपिका ममी क साथ किचन में चली गयी और माँ मौसियों क साथ बुआ को अपने कमरे में ले गयी . मुझे बाबा का ख्याल आया और जल्दी से बैग रख कर बाइक ले कर निकल गया बाबा को लेने . बाबा खेत पर hi थे मैंने उन्हें बताया क बुआ आयी है तो वो भी ख़ुशी में दौड़ पड़े . मैंने उन्हें बाइक पर बिठाया और अजय मां पीछे पीछे स्कूटर पर आ गए . घर पहुंचे तो माँ मौसी सब बुआ को लड़कियों से मिलवा रही थी. बाबा लगभग भागते हुए कमरे में पहुंचे तो सामने बुआ को देख कर उनकी आँखों में आये आंसू भी बहने लगे .

विजय : मंजूउ

बाबा क मुँह से इतना hi निकल था क बुआ बाबा को देखते hi दौड़ कर उनके गले लग गयी . दोनों hi रो रहे थे और बाकि सब क चेहरों पर ख़ुशी क साथ साथ आँखों में नमी थी . बाबा बुआ को गले से लगाए किसी छोटी बची की तरह उन्हें दुलार कर रहे थे .

मंजू : भैयाआ ,, मुझे माफ़ कर दो भैया

विजय : मत रो मेरी गुड़िया मत रो ,, माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए . मैं तेरा अपराधी हूँ. मैंने तुम्हे तुम्हारे बिट्टू से दूर कर दिया . मुझे माफ़ कर दे गुड़िया मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था . मैं स्वार्थी हो गया था और मुझे तेरा वजूद नज़र hi नहीं आया . काश मैंने ऐसी गलती न की होती . मुझे माफ़ कर दे गुड़िया मुझे माफ़ कर दे .

मंजू : नहीं भैया आप ऐसा मत कहिये ,, इसमें आपकी कोई गलती नहीं है. ये तो मेरी तकदीर में hi लिखा था . मैं तो खुश हूँ क आपने मेरे बिट्टू की इतनी अछि परवरिश की है. मैं कहा उसे तन संभल पति. हाँ इस बात का अफ़सोस ज़रूर है क मैं इसका बचपन ठीक से देख नहीं पायी . काश मैंने एक बार आपसे मिलने की कोशिश की होती

अजय : मंजू , तू आ गयी गुड़िया . मेरा दिल कहता था तू एक दिन ज़रूर आएगी हमारे पास . बहुत देर लगाडी आने में पर शुक्र है तू आ तो गयी.

अजय मां ने कमरे क दरवाज़े पर खड़े खड़े बुआ को देख कर ये बात कही तो बुआ बाबा से अलग हो कर अजय मां की तरफ लपकी .

मंजू : अजय भैयाआआ

अजय : मंजूउ

दोनों सेज भाई बहनो की तरह एक दूसरे क गले लग कर आंसू बहा रहे थे .

मंजू : मुझे माफ़ कर दो भाई.......

अजय : शह्ह्ह्हह्ह , तू तो हमारी गुड़िया है सबसे छोटी बहिन . तू हमसे माफ़ी मांग कर हमे शर्मिंदा मत कर मेरी बहिन . तू हमेशा hi हमारे दिल में थी . हमारी hi गलती है क हमने कभी तेरा हल जानने की कोशिश hi नहीं की.

विजय : दिव्या कहाँ है ?

अचानक बाबा को दिव्या मौसी का ख्याल आया जैसे उन्हें दर हो क वो अब क्या कहेंगी .

दिव्या : मैं यहाँ हूँ भैया

विजय : तुम यहाँ ???

बाबा क चेहरे पर चिंता देख कर माँ ने आगे बढ़ कर जवाब दिया .

गौरी : मंजू को हमारी दिव्या hi लेकर आयी है . मैंने खा था न हमारी दिव्या बहुत समझदार है . देखो खुद hi ले आयी जा कर .

विजय : दिव्या मेरी बहिन , तूने अपने इस भाई का एयर गर्व से ऊँचा कर दिया . मुझे तुम पर नाज़ है मेरी प्यारी बहिन .

बाबा ने दिव्या मौसी को भी प्यार से गले लगा लिया . दिव्या मौसी बाबा द्वारा ऐसे गले लगाने से बहुत खुश हुई जो उनके चेहरे से नज़र आ रहा था . उन्हें इसी बात का तो मलाल था क उनके बड़े भाई की दिली ीचा उन्होंने तोड़ दी थी .

दिव्या : मुझे माफ़ कर दो भैया , उस दिन मैंने सच जाने बिना hi मन कर दिया था . मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था.

विजय : मैं समझ सकता हूँ मेरी प्यारी बहिन . दामिनी क लिए तेरे दिल में जो प्यार आज भी है ये सब उसी की वजह से तो है. उसके जाने का सबसे ज्यादा असर तुमने hi तो झेला है. पर मुझे ख़ुशी है क तूने मंजू को स्वीकार कर लिया . आज ऐसा लग रहा है जैसे हमारा घर फिर से पूरा हो गया . इतने सैलून से जो सूना पैन इन दीवारों में समाया था आज वो ख़तम हो गया है . कैशा ये दिन देखने क लिए माँ बाबू जी दामिनी और पवन भी हमारे बीच होते .

बाबा की बात पर एक बार तो सब हो खामोश हो गए और सबकी ऑंखें नाम हो गयी.

करुणा : मां जी आज मंजू आंटी आयी हैं तो सेलिब्रेशन बनता है न ??

करुणा दीदी ने कमरे में छाये सन्नाटे को भांग करते हुए अपने हिसाब की बात कर दी और सब उनकी तरफ देखने लगे . रीता मौसी ने करुणा दीदी को रोकना चाहा पर रजनी मौसी ने रीता मौसी को hi रोक दिया .

नैना : हाँ मां जी , आंटी क आने की ख़ुशी तो मिल कर हमे माननी hi पड़ेगी .

करुणा : चलो यार आज धमाल हो जाये .

अजय : बिलकुल , हमारी सबसे छोटी बहिन इतने सैलून बाद घर आयी है , पार्टी तो बनती है. तुम सब जल्दी से तयारी करो , जो जो सामान चाहिए मुझे बताओ मैं खुद ले कर आऊंगा .

नैना : ठीक है मां जी हम अभी सब देखते हैं और आपको लिस्ट बना कर देते हैं . ोये चल तू भी हमारे साथ अब क्या बुआ क पास hi बैठेगा ??

नैना दीदी कमरे से निकलते निकलते मुझे भी साथ में लपेट लिया . मैं जो अब तक बस खामोश खड़ा सब देख रहा था , दीदी क इस तरह मुझे लपेटने से मैं थोड़ा हड़बड़ा गया . तभी सब मेरी हालत पर हसने लगे .

दीपिका : अरे उसे क्यों तंग कर रही हो , चलो मैं चलती हूँ तुम्हारे साथ .

अजय मां दीपिका ममी करुणा नैना दीदी को साथ लिए चल दी और साथ hi कल्पना राधा नेहा दीदी भी चली गयी . बाबा ने मुझे इशारे से करीब बुलाया और गले से लगा लिया .

विजय : शाबाश मेरे शेर , आज तूने मेरे दिल से बहुत बड़ा बोझ उतर दिया है. तू नहीं जनता तूने कितनी ख़ुशी दी है मुझे . तू सच में हम सब पर उपकार करने क लिए hi पैदा हुआ है . ( मंजू बुआ से ) गुड़िया , ले तेरा बिट्टू आज से तेरा है. हमने इसे तुमसे छीन लिया था . आज तुझे तेरा बिट्टू वापिस कर रहा हूँ मैं . जो वक़्त गुज़र गया उसे वापिस तो नहीं लाया जा सकता पर आगे आने वाला वक़्त इतना हसीं हो की बुरी यादें तुम्हारे दिल से मिट जाएँ . मैं बस यही दुआ करूँगा . इतने साल तेरे इस बिट्टू ने इस घर को रोशन रखा है और इसकी वजह से hi आज ये घर इतना खुशहाल है . अब से ये सिर्फ तुम्हारा है , सिर्फ तुम्हारा .

बाबा ने सजल आँखों से मुझे और बुआ को देखते हुए ये सब कहा तो माँ कामिनी ममी और दिव्या मौसी क चेहरे क भाव बदल गए. उनकी आँखों में बाबा की बातों से जैसे दुःख क भाव नज़र आने लगे . जैसे वो बाबा की इस बात से सहमत न हो.

मंजू : नहीं भैया , मैं इतनी स्वार्थी नहीं हूँ क इस घर की खुशियां छीन कर आप सब को दुखी कर दूँ. मुझे पता है आप सब इसे कितना प्यार करते हैं. इतना प्यार तो इसे मैं भी नहीं दे सकती थी. यहाँ रह कर इसे माता पिता क साथ मां ममी मौसी और बहनो का प्यार भी मिला है . इतना सब तो न कभी मेरे पास था न आज है. मैं नहीं चाहती क अमित से इतने सरे रिश्ते मैं दूर कर दूँ . इस लिए ये यहीं रहेगा . मैं बस इतना hi चाहती हूँ क थोड़ी सी जगह मुझे भी इस घर में मिल जाये ताकि कभी कभी इसे यहाँ आकर मिल सकूँ .

बुआ की बात सुन कर माँ ने उन्हें गले लगा लिया .

गौरी : ये कैसी बातें कर रही है तू ? तू अब से यहीं रहेगी हमारे साथ . ये घर तेरा भी है समझी . और मैं कोई बहाना नहीं सुनने वाली. तू इस परिवार का हिस्सा है, देखती हूँ तू कैसे हमें छोड़ कर कहीं जाती है.

दिव्या : बिलकुल सही कहा भाभी , अब तो तुम हमारे साथ hi रहोगी और शहर में भी मेरे साथ रहना होगा

रीता : क्यों ? तू क्या अकेली hi रखेगी इसे अपने पास ? हम दोनों भी हैं वहां , यद् है न ?

अमित : मैं एक बात पहले hi कह देता हूँ आप सब को यहाँ , अब से मैं बुआ क साथ भी रहा करूँगा शहर में .

मैंने ये बात कही तो तीनो मौसियों ने एक बार मुझे देखा और फिर हसने लगी . तीनो ने अपनी सहमति दिखा दी थी . अब वो सब बुआ को घेर कर उनसे बातें करने लगी और बाबा मुझे अपने साथ कमरे से बहार ले आये. लड़कियां सब मिलकर पता नहीं कहाँ गायब हो गयी थी . बाबा ने मुझे अपने साथ चलने को कहा और हम दोनों घर से निकल गए . बाबा आज बहुत खुश नज़र आ रहे थे . उनकी ख़ुशी उनके चेहरे से hi नज़र आ रही थी. मगर वो मुझे कहाँ ले जा रहे थे मुझे समझ नहीं आ रहा था . बाबा मुझे ले कर खेतों में आ गए जहाँ इस वक़्त बस काम करने वाले मजदूर hi थे.

विजय : आज मैं बहुत खुश हूँ बीटा और ये ख़ुशी तुमने मुझे दी है. आज ऐसा लग रहा है जैसे मेरे साइन का बोझ उतर गया हो. ज़िन्दगी में बस ये hi एक दर्द था जो मुझे चैन से सोने नहीं देता था. जाने अनजाने मैंने मंजू क साथ बहुत बुरा किया था पर तुमने आज मेरी वो गलती को भी ठीक कर दिया . मुझे तुम पर गर्व है मेरे बेटे . तुमने न सिर्फ मेरा बोझ उतरा है बल्कि अपने पिता का फ़र्ज़ भी निभा दिया है. बस अब मंजू को वो हर ख़ुशी देना जिसकी वो हक़दार है. परिवार रिश्तेदार चाहे कोई कुछ भी कहे पर तुम अब कभी उसे अकेला मत छोड़ना .

अमित : मैं ऐसा hi करूँगा बाबा , पर आज आप ऐसी बातें क्यों कर रहे हैं?

विजय : पता नहीं पर जो दिल में आया मैंने कह दिया . दुनिया से जाने से पहले हर कोई अपने क़र्ज़ उतरना चाहता है और मेरे दिल पर भी ये एक क़र्ज़ था जो आज तुमने उतर दिया .

अमित : ये आप कैसी बातें कर रहे हैं बाबा ? अभी तो आपने बहुत कुछ देखना है . अभी तो माँ , माँ बनने वाली है . मेरी तरह आपको अपने बेटे को भी बड़ा करना है . और फिर आरव , छोटू. और मैं ,, हम सब को आपकी ज़रूरत है. आप ऐसे जाने की बातें दुबारा मत करना वर्ण मैं आपसे बात नहीं करूँगा .

विजय : अरे अरे मेरा बीटा मेरा शेर मुझसे नाराज़ हो गया ?? ाचा भाई दुबारा ऐसी बात नहीं करूँगा पर मैंने तो वो सचाई बताई है . चल अब चलते हैं. इतने दिनों बाद गुड़िया आयी है तो उसके लिए भी तो कुछ करना है .

अमित : वैसे बाबा आप बुआ को गुड़िया क्यों बुला रहे हैं ? इसकी कोई खास वजह ?

विजय : है है है ,,, अब गुड़िया को गुड़िया नहीं कहूंगा तो क्या कहूंगा . तेरे पापा भी यही बुलाते थे उसे. जानते हो जब तेरे माता पिता की शादी हुई थी ये स्कूल में पड़ती थी . छोटी थी नासमझ और बहुत भोली . तेरे पापा hi इसके सब कुछ थे और अब से तुम.

अमित : एक बात पूछूं बाबा ? मौसी पापा की बात पर ऐसे गुस्से में क्यों आ जाती हैं ? क्या आप जानते हैं इसके पीछे क्या वजह है .

विजय : ये बस तुम्हारा वहां है. वो शायद उस एक्सीडेंट की वजह से ऐसा सोचती होगी.

अमित : आखिर एक्सीडेंट हुआ कैसे था जो मौसी उसके लिए पापा को दोषी मानती हैं.

विजय : इतना तो मुझे भी नहीं पता . हाँ उस वक़्त कार शायद तुम्हारे पापा चला रहे थे और दामिनी क साथ साथ हमारे माता पिता यानि तुम्हारे नाना नानी भी साथ थे .

अमित : पर बाबा अगर वो सब एक साथ एक्सीडेंट में मरे गए तो मैं कैसे बच गया ?

विजय : भगवन की मर्ज़ी है बीटा , तुम्हारे माता पिता ने अपनी जान देकर तुम्हारी जान बचाई

अमित : पर मैं उस वक़्त बहुत छोटा था न तो मुझे किसने निकला कार में से ?

विजय : वो ,,, वो किस्मत से मैं उस तरफ hi आ रहा था . एक्सीडेंट क कुछ hi देर में मैं वहां पहुँच गया था

अमित : पर आपने तो कहा था आप मंदिर में थे .

विजय : मंदिर में ,, हह हाँ ,, हाँ वो मैं मंदिर में hi था पर वो लोग लेट हो गए थे तो मैं उन्हें देखने क लिए घर की तरफ आ रहा था .

अमित : बाबा आप मुझसे कुछ छुपा रहे हैं ?

विजय : मैं ऐसा क्यों करूँगा ? चल अब घर चलते हैं बहुत देर .....

अमित : आपने मेरे ज़िंदा होने की बात क्यों छुपाई बाबा ? अगर वो सिर्फ एक एक्सीडेंट था तो क्यों नहीं आपने बुआ को बता दिया मेरे बारे में ? आखिर क्यों छुपाया गया मेरे बारे में और आपने सबको कसम भी दी किसी को न बताने की . आखिर ऐसा क्यों ? आप मुझसे सचाई छुपा रहे हैं.

विजय : मैंने कहा न , मैं ,, मैं नहीं चाहता था क तुम उन लोगों क साथ रहो. और फिर तुम्हारी माँ की गॉड भी तो सुनी थी . इसी लिए हमने ये बात छुपाई थी .

अमित : बाबा ....

विजय : बस अब बहुत हुआ , चल अब घर चलते हैं. वहां सब हमारा इंतज़ार कर रहे होंगे.

बाबा जल्दी से मेरी बात काट कर आगे चल दिए . मैं इतना तो समझ रहा था क बाबा कुछ छुपा रहे हैं पर आखिर इसके पीछे की वजह क्या है. उनके इलावा शायद और कोई जनता भी नहीं होगा . क्यूंकि एक वही तो उस वक़्त वहां मौजूद थे . शायद बुआ इस बारे में कुछ जानती हों पर वो तो खुद बेचारी सचाई से अनजान थी. जो भी था अब मेरे दिमाग में ये सवाल गूंजने लगा था क आखिर मेरे पिता की मौत क पीछे की सचाई क्या है. क्या सच में वो एक एक्सीडेंट था या ???

खैर मैं बाबा क पीछे पीछे चल दिया भरी मन क साथ . बाबा ने रस्ते में और कोई बात नहीं की और न hi मैंने . जब हम घर पहुंचे तो कमलेश मां भी आ चुके थे . सब लड़कियों ने मिल कर माँ बाबा क रूम में hi हलकी फुलकी सजावट कर ली थी और बहार से कुछ सामान मंगवाएं क साथ दीपिका ममी ने भी किचन में अपना कमल दिखा दिया था . मंजू बुआ तो नन्हे मुन्ने बच्चों को अपनी गॉड में खिला कर खुश हो रही थी . मैं बुआ क पास hi जा कर बैठ गया . पास hi माँ कामिनी ममी रजनी और रीता मौसी बैठी थी .

मंजू : कितना प्यारा है ये भाभी , देखो देखो इसकी नाक इसका चेहरा अमित से कितना मिलता है न ?

बुआ की बात पर कामिनी ममी ने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर उनके होंठों पर मुस्कान आ गयी .

कामिनी : वो हर वक़्त अमित रहता था न आँखों क सामने तो इस लिए इसके जैसा है .

रीता : बिलकुल सही , यही सच है .गर्भावस्था में औरत जिसके बारे में सोचे या देखे उसके जैसा hi होता है बचा . देख लेना ये बिलकुल अपने पापा जैसा होगा .

रोटा मौसी ने ये बात कह कर मेरी तरफ देख कर आँखों से इशारा किया तो इस बात पर मैंने नज़रें फेर ली.

मंजू : पर ये क्या भाभी , आपने इतने साल क्यों लगा दिए ? ये कोई बात है ? इतनी कंजूसी किस बात की? अगर पहले hi ये कर लिया होता तो अब तक ये भी जवान हो चूका होता अमित जैसे .

कामिनी : अब इसमें मैं क्या कह सकती हूँ ? भगवन को जो मंज़ूर है वैसा hi होता है .

कामिनी ममी फिर से मेरी तरफ मुस्कुरा कर देख रही थी.

मंजू : कोई बात नहीं , एक बात तो अछि hi हुई . मैं अमित का बचपन तो न देख पायी अब इन दोनों को hi बड़े होते देख लुंगी .

रीता : चाहो तो तुम भी एक अध् कर लो . अभी तुम्हारी उम्र hi क्या है .

रीता मौसी की बात पर मंजू बुआ की हंसी एक डैम से गायब हो गयी और वो मुँह खोले मौसी को देखने लगी .

मंजू : दीदी मैंने बताया न क मेरे साथ क्या क्या हुआ है. उस सब क बाद अब मैं फिर से शादी वादी नहीं करना चाहती .

गौरी : मंजू देखना ये छोटू और आरव बिलकुल अमित जैसे बनेंगे बड़े होकर . वैसे इसका नाम हमने अभी तक नहीं सोचा क्या तुम कोई नाम सुझाओगी ?

माँ ने मंजू बुआ क चेहरे पर आये भाव देख कर बात को बदल दिया था और साथ hi रीता मौसी को भी इशारा कर क ऐसी बात न करने को कहा.

मंजू : हाँ क्यों नहीं , मैं ाचा सा नाम सोच कर बताउंगी इसके लिए .

गौरी : ठीक है तो अब हम वही नाम रखेंगे जो तुम कहोगी . क्यों कामिनी , ठीक कहा न ?

कामिनी : जी दीदी

तभी कमरे में नैना दीदी और करुणा दीदी आ गयी .

करुणा : चलो चलो सब लोग , जल्दी चलो . चलिए बुआ हमारे साथ .

मंजू : पर कहाँ ?

नैना : आप चलिए तो पहले . और आप सब भी चलिए . तुझे क्या अलग से कहना पड़ेगा ? चल तू भी .

नैना दीदी और करुणा दीदी मंजू बुआ का हाथ पकड़ कर उन्हें खींचती हुई अपने साथ कमरे से बहार ले जाने लगी तो उनके पीछे पीछे हम भी चल पड़े . माँ बाबा क कमरे में सजावट क साथ एक छोटा सा केक भी टेबल पर सजा कर रखा हुआ था जिसके ऊपर वेलकम बुआ लिखा था . मंजू बुआ को बीच में बैठा कर बाकि सब लोग उनके आसपास जमा हो गए और नैना दीदी करुणा दीदी ने बुआ क हाथ में चाकू पकड़ा कर उन्हें केक काटने को कहा . बुआ क चेहरे पर ख़ुशी साफ झलक रही थी जो अब उनकी आँखों में नमी बन क उभर आयी थी .

मंजू : ये सब ....

रजनी : कुछ भी नहीं है , चलो अब केक काटो. बच्चों ने इतने प्यार से तुम्हारे लिए किया है .

मंजू : ावववव , थैंक यू सो मच नैना करुणा .

करुणा : वो सब बाद में बुआ पहले आप केक काटो . बहुत भूख लगी है .

मंजू बुआ केक करने लगी तो रुक गयी और मुझे देख कर अपने पास बुलाया .

मंजू : ये सब तुम्हारी वजह से है. तुमने मुझे मेरी ज़िन्दगी लौटा दी . मुहाः

बुआ ने मेरे गाल पर प्यार से चुम्बन किया और फिर मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर चाकू को केक पर रखा और काट दिया . सब ख़ुशी से तालियां बजने लगे . बुआ ने पहले मुझे केक खिलाया और फिर मैंने उन्हें . उसके बाद बरी बरी से सबने केक बुआ को खिलाया .

‘ कोई मुझे बताएगा यहाँ क्या हो रहा है और मुझे किसी ने बताना तक ज़रूरी भी नहीं समझा ‘ ये आवाज़ सुन कर सबका ध्यान दरवाज़े पर कड़ी निधि दीदी पर गया जो अपनी कमर पर हाथ रखे कभी मुझे कभी बुआ को देख रही थी. निधि दीदी इस वक़्त कासुअल कपड़ों में hi थी शायद ऑफिस से सीधा इधर आयी थी . पिछले 2-3 दिन में मेरी भी उनसे बात नहीं हुई थी और उनको बुआ क बारे में बताने का दिमाग से hi निकल गया था .

रजनी : अरे निधि तू आ गयी बीटा , तेरी मीटिंग हो गयी ?

निधि : वो सब बाद में पर ये सब क्या हो रहा है पहले उसका जवाब दो मुझे कोई . ( मेरी तरफ देखते हुए ) क्या तुम बताओगे मुझे इस बारे में कुछ ?

निधि दीदी मेरी सबसे प्यारी सबसे फेवरेट दीदी थी और मैं उन्ही को कैसे मिस कर गया . खुद को मन में गली देता मैं उछाल कर दीदी क पास पहुँच गया और उन्हें गले से लगा लिया .

अमित : ो दीदी ी रियली मिस यू . आप बिलीव नहीं करेंगी क मैंने कितना मिस किया आपको. आप जानती हैं आज कितना बड़ा दिन है ? देखो कौन आया है , मेरी बुआ , मंजू बुआ .

निधि दीदी मेरे गले से लगी एक डैम शांत हो गयी थी और सब भूल गयी थी. मैंने उनसे अलग हो कर मंजू बुआ क बारे में बताया तो वो हैरानी से बुआ को देखने लगी .

निधि : मंजू बुआ ??? पर ये तो तुम्हारी ....

अमित : प्रोफ़ेसर थी ,,, यही तो बात है दीदी . इतने दिनों से बुआ मेरे सामने थी और मुझे पता hi नहीं चला . उस दिन बुआ क घर जब माँ पापा को तस्वीर देखि एल्बम में तो ये भेद खुला. वर्ण मुझे कभी पता hi नहीं चलता . और आज देखा मेरी बुआ घर में है हम सब क सामने .

निधि दीदी कभी मुझे तो कभी मंजू बुआ को देखने लगी. फिर वो मंजू बुआ की तरफ बरही और उनके गले लग गयी .

निधि : बाआआ ,,, ी ऍम सॉरी बुआ मैं भी आपको पहचान नहीं पायी . पर पहचानती भी कैसे तब मैं भी छोटी थी और आप भी कुछ और थी . एनीवे भगवन का लाख लाख शुक्र है क आप मिल गयी. माँ कभी कभी आपके बारे में बातें करती थी और आपको बहुत मिस करती थी . और सबसे ज्यादा तो आपकी ज़रूरत हमारे हीरो को थी.

मंजू : थैंक्स निधि , वैसे मुझे एक पल को उस दिन लगा भी था क जैसे मेरी वो छोटी सी प्यारी सी निधि hi मेरे सामने है . वही मासूम चेहरा और ऑंखें पर मैं समझ hi नहीं पायी. मेरे अपने मेरे सामने थे और मैं पहचान hi नहीं पायी .

निधि : कोई बात नहीं बुआ अब आप आ गयी है न अब आप को हम कहीं जाने नहीं देंगे . और तुम ,,, तुम ज़रा मेरे साथ आओ . तुमसे अकेले में कुछ बात करनी है .

निधि दीदी ने थोड़ा गुस्से वाला चेहरा बनाते हुए कहा तो रजनी मौसी बोली

रजनी ; अरे बीटा पहले कुछ खा पि तो ले , ऐसे गुस्सा क्यों हो रही हो .

निधि : माँ प्लीज ये मेरा और इसका मटर है . इतना कुछ हो गया और मुझे एक बार फ़ोन के क बताया तक नहीं .

नैना : बिलकुल दीदी इसे छोड़ना मत बहुत लापरवाह है ये .

करुणा : मैं तो कहती हूँ दीदी इसे आप मुर्गा बना hi दो.

निधि : तुम दोनों अपनी सलाह अपने पास रखो मुझे पता है मुझे क्या करना है . चलो मेरे साथ

निधि दीदी मेरा हाथ पकड़ कर मुझे खींचती हुई बहार ले जाने लगी तो मैंने एक नज़र माँ बुआ और मौसी को देखा मगर सब मुस्कुरा रही थी. और नैना दीदी करुणा दीदी तो मेरी हालत पर दांत निकल रही थी. निधि दीदी मुझे खींचती हुई कमरे से बहार लायी और फिर सीढ़ियां चढ़ कर मेरे कमरे में ले गयी और दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया . मैं तो बस दीदी को hi देख रहा था क आज दीदी को हुआ क्या है . हमेशा शांत रहने वाली निधि दीदी आज कुछ अलग hi लग रहीं थी .

निधि : तो अब मैं तुम्हारे इतनी परायी हो गयी हूँ क तुम मुझसे बात भी नहीं कर सकते . एक फ़ोन तक नहीं किया तुमने मुझे. और इतनी बड़ी बात तुमने मुझे बतानी ज़रूरी नहीं समझी ?

निधि दीदी क चेहरे पर एक एक निराशा क भाव आ गए थे जिसे देख कर मुझे खुद बुरा लग रहा था. वो मुझे अपने सेज भाई से भी ज्यादा प्यार करती थी और मैंने .....??

अमित : मुझे माफ़ कर दो दीदी ,, मुझसे गलती हो गयी . मैंने ऐसा जानबूझ कर नहीं किया वो असल में हालत hi कुछ ऐसे हो गए थे क मैं खुद परेशां था .

फिर मैंने दीदी को साडी बात बताई क कैसे मुझे बुआ क बारे में पता चला और वो घर आने से दर रही थी फिर मौसी का नाराज़ होना. मैंने जब साडी बात बताई तो निधि दीदी क चेहरे से नाराज़गी दूर हुई .

निधि : इतना कुछ हो गया और तुमने मुझे बताया भी नहीं , तुम अकेले hi सब झेलते रहे. एक बार तो मुझसे कहा होता मैं सब कुछ छोड़ कर चली आती तुम्हारा साथ देने क लिए. भगवन का लाख लाख शुक्र है क सब सही हुआ . मौसी भी मन गयी और बुआ आज हमारे बीच है. पर आइंदा से ऐसा बिलकुल मत करना. जब भी जो भी परेशानी हो मुझे ज़रूर बताया करो. चाहे कोई तुम्हारा साथ दे न दे मैं हर कदम तुम्हारे साथ हूँ.

दीदी ने मुझे अपने गले से लगा लिया और ऐसे मेरे साथ गले लगी जैसे हम दोनों क वजूद को एक करना चाहती हो. मुझे उनका ये प्यार ये अपना पैन उनके साथ अदृश्य प्रेम क धागे से बंधे हुए था . कुछ देर हम दोनों ऐसे hi एक दूसरे से गले लगे रहे .

अमित : वैसे दीदी आप थी कहाँ ?

निधि : अंकल क साथ गयी थी ज़रूरी मीटिंग थी क्लाइंट्स क साथ. वर्ण मैं क्या तुमसे दूर रह सकती हूँ.

अमित : अंकल ,,, अरे हाँ दीदी , अंकल तो हमने बताया hi नहीं. मंजू बुआ क बारे में तो वो भी पता करने का कह रहे थे . पहले हम उन्हें फ़ोन कर क बताते हैं.

मैंने तुरंत अपना मोबाइल निकला और अंकल को फ़ोन लगा दिया .

अंकल : तो आ गयी अंकल की यद् ,, आज कैसे यद् किया मेरे बेटे ने ??

अमित : अंकल आपको एक गुड न्यूज़ देनी है .

अंकल : गुड न्यूज़ ??? कौन सी गुड न्यूज़ जल्दी बताओ . बहुत दिनों से कोई गुड न्यूज़ नहीं मिली कहीं से .

अमित : अंकल मंजू बुआ का पता चल गया है .

अंकल : क्याआआआ ??? तुम सच कह रहे हो ?? कहाँ है मंजू ??? वो तुम्हे कहाँ मिली ??? कैसी है वो ??? जल्दी बताओ मुझे ....

अमित : अंकल बुआ इस वक़्त हमारे साथ hi है हमारे घर . आप जल्दी से गाओं आ जाओ. आज hi बुआ को हम घर लेकर आये हैं.

अंकल : हाँ मैं अभी आया ,, अभी आया मैं. मैं सब को लेकर आ रहा हूँ. उसे कहीं जाने मत देना . उसे कहना क उसका भाई आ रहा है ,, राघव आ रहा है .

अंकल ख़ुशी से फूले नहीं समां रहे थे . उन्होंने इतना कह कर फ़ोन काट दिया . मैं समझ गया क वो अब जल्द hi गाओं पहुँच जायेंगे . निधि दीदी भी पास कड़ी सुन रही थी तो उन्हें भी सब पता चल गया .

निधि : चलो चल कर सब को बताते हैं. सब खुश होंगे .

अमित : नहीं दीदी , बुआ क लिए सरप्राइज hi रहने दो. जब वो सामने आएंगे तो बुआ बहुत खुश होगी.

निधि : तुम सबकी ख़ुशी का कितना ध्यान रखते हो . मममऊआआआह्ह्ह्ह , हमेशा ऐसे hi रहना .

दीदी ने मेरे गाल पर प्यार से चुम्बन किया और मुस्कुराने लगी. मैंने अपने गलों पर उनके गीले चुम्बन पर हाथ माला और उनकी खूबसूरत मुस्कान को देखने लगा .

‘ थककक थककक थककक ‘ डीडीईई ,, अमित्तत्त आप दोनों अंदर हो न ? दरवाज़ा खोलो .



दरवाज़े पर दस्तक देने वाली करुणा दीदी थी . निधि दीदी एक बार फिर से मेरे गले लगी और मुस्कुराते हुए दरवाज़ा खोल दिया .
 
अपडेट 242



निधि : क्या है ? थोड़ी देर बात भी नहीं करने देगी?

करुणा : बातें जितनी मर्ज़ी कर लेना दीदी मैं तो आपको ये बताने आयी हूँ क बड़े मां आपको बुला रहे हैं.

निधि : मां जी , कोई काम है क्या ?

करुणा : पता नहीं , आपको बुला रहे हैं बस, वैसे आप इसे सजा देने लायी थी या मज़ा देने ? आआआह्ह्ह्ह मायआ

करुणा दीदी ने मेरी तरफ देख कर कहा तो एक निधि दीदी ने करुणा दीदी को हलके हाथ से थप्पड़ मारा

निधि : बहुत ज़ुबान चलने लगी है तेरी , शर्म नहीं आती ऐसे बात करते हुए ? चल नीचे .

निधि दीदी ने बनावटी गुस्सा दिखते हुए कहा पर उनके चेहरे की मुस्कराहट कुछ और hi बता रही थी . निधि दीदी अपना चेहरा छुपाती जल्दी से पलट कर सीढ़ियां उतरने लगी और 4-5 सीढ़ियां उतर कर एक बार पलटी और मुझे मुस्कुरा कर देखती तेज़ कदमो से नीचे चली गयी .

करुणा : तो क्या इरादा है डार्लिंग , बुआ क आने की ख़ुशी में पार्टी तो बनती है .

अमित : पार्टी कर तो ली

करुणा : मैं दूसरी पार्टी की बात कर रही हूँ. मौका ाचा है सब नीचे अपने में मस्त हैं.

करुणा दीदी आगे बढ़ कर मुझे किश करने लगी तो मैंने उन्हें पीछे धकेल दिया क्यूंकि दीपिका ममी सीढ़ियों क पास hi थी.

अमित : आपका दिमाग तो ख़राब नहीं हो गया ? मरवा डौगी आप , जाओ नीचे देखो ममी ऊपर hi आ रही है .

करुणा ( मुँह बनाते हुए ) ममी भी न ,,, रत को तैयार रहना . पार्टी तो मैं लेके रहूंगी . उम्म्माह

करुणा दीदी ने जल्दी से मेरे होंठों को चूमा और नीचे चली गयी. मैं उन्हें जाते हुए देखता रहा . दीपिका ममी ऊपर hi आ रही थी तो मैं दरवाज़े से पीछे हैट अंदर की तरफ आ गया . दीपिका ममी भी मेरे पीछे कमरे में आ गयी .

दीपिका : अभी तक नाराज़ हो मुझसे ?

दीपिका ममी परे पीछे कड़ी थी जब उनके मुँह से मैंने ये बात सुनी तो मुद कर उन्हें देखा . दीपिका ममी क चेहरे पर उदासी नज़र आ रही थी.

दीपिका : इतनी सी गलती की इतनी बड़ी सजा डोज मुझे ? कल से तुम बात नहीं कर रहे मुझसे आखिर मैंने ऐसी क्या भूल कर दी ? मुझसे ऐसे मुँह न मोड़ो वर्ण मैं .... तुम जानते हो न तुम मेरे लिए क्या हो . तुम्ही मुझसे ऐसे मुँह फेर लोगे तो मैं कहाँ जाउंगी . तुम चाहो तो मुझे दांतो मुझे मारो पर ऐसे चुप रह कर सजा मत दो. सब से है खेल रहे हो और मेरी तरफ देख भी नहीं रहे . क्या अब मैं इतनी बुरी हो गयी हूँ?

अमित : मामीई ,,,,, मुझे माफ़ कर दो मैं बस ऐसे hi आप पर गुस्सा हो गया . असल में गुस्सा किसी और बात का था पर आप पर निकल गया . मैं आपसे नाराज़ नहीं हूँ. और नाराज़ हो भी नहीं सकता . आप hi तो मेरी सबसे अछि दोस्त और गुरु हो. आप क बिना मैं खुद अपने आप को अधूरा पता हूँ. फिर कैसे भला आपसे नाराज़ रह सकता हूँ.

दीपिका : तुम्हे पता भी है कल से मेरा क्या हल है. दिखावे क लिए सब क साथ है खेल रही थी पर अंदर से मेरा क्या हल है मैं hi जानती हूँ. मुझे तुम्हे ऐसे रोकना नहीं चाहिए था आखिर सब कुछ तुम्हारा hi तो है .

अमित : आपने कुछ गलत नहीं किया. सब मेरी hi गलती है. पर अब ऐसा नहीं होगा . मैं अपने किये की माफ़ी मांगता हूँ

दीपिका ( मेरे मुँह पर हाथ रखते हुए ) शहहह , तुम्हे माफ़ी मांगने की ज़रूरत नहीं. बस मुझे प्यार से एक बार गले लगा लो .

दीपिका ममी क इतना कहते hi मैंने उन्हें अपने सीने से लगा कर अपनी बाँहों के भींच किया और वो भी मेरे वजूद में जैसे समां जाना चाहती थी. हम दोनों क बीच से हवा निकलने की भी जगह नहीं थी . मामी की धड़कने मुझे महसूस हो रही थी . उनकी तड़प मैं महसूस कर प् रहा था और खुद को भी कौस रहा था क मैंने बेवजह उन्हें परेशां किया . मैंने ममी क चेहरे अपने हाथों में थाम कर ऊपर उठाया तो उनकी ऑंखें बंद थी . ममी बहुत hi खूबसूरत लग रही थी हमेशा की तरह .

अमित : ऑंखें खोलो न ममी

दीपिका : ( न में सर हिलाते हुए ) ुँहुँणन

अमित : प्लीज खोलिये न .

दीपिका : ुँहुँणन , सही तरह से कहो

मैं समझ गया ममी क्या चाहती हैं.

अमित : ऑंखें खोलो दीपिका

मेरे मुँह से अपना नाम सुनते hi ममी ने धीरे से अपनी ऑंखें खोली और मुझे देखने लगी . उनके चेहरे पर हलके से मुस्कान आ गयी थी मेरे मुँह से अपना नाम सुन कर . मैं उनकी आँखों में देखता रहा और उनके लरज़ते होंठों पर अपने होंठ रख दिए . ममी भी जैसे इसके लिए तड़प रही थी और खुद hi वो मेरे होंठ चूमने लगी. हम दोनों एक दूसरे को किश करने लगे . इस किश में ज़रा भी वासना या उत्तेजना नहीं बल्कि समर्पण और प्रेम था . कुछ देर यूँही हम किश करते रहे और फिर ममी ने hi किश तोड़ी और मुझसे अलग हो कर दरवाज़ा बंद करने चली गयी. ममी ने दरवाज़ा बंद किया पर लॉक नहीं किया . और फिर चल कर मेरे करीब आ गयी . मुझे बीएड पर बिठा कर वो मेरे साथ hi बैठ गयी .

दीपिका : खुश तो होंगे न तुम ? मंजू आज सबके बीच है

अमित : खुश ? मैं तो बहुत खुश हूँ . इससे ज्यादा ख़ुशी की और क्या बात होगी . मेरी बुआ आज मेरे साथ है हम सब क साथ. देखा नहीं बाबा भी कितने खुश हैं . मौसी , माँ अजय मां सब खुश हैं. और सब से ज्यादा खुश तो बुआ हैं . वो कितनी अकेली , कितनी दुखी थी. आज उन्हें उनका परिवार वापिस मिल गया

दीपिका : वो सब तो ठीक है पर ...

अमित : पर क्या ??

दीपिका : तुम दोनों क बीच जो रिश्ता पहले बन चूका है , उसका क्या ?

अमित : वो , वो सब अनजाने में हुआ था . तब मैं नहीं जनता था क वो hi मेरी बुआ हैं वर्ण वो सब नहीं होता .

दीपिका : और मंजू ? वो क्या सोचती है इस बारे में ? जहाँ तक मैं समझती हूँ , वो तुम्हे दिल से चाहने लगी थी जैसा तुमने बताया . तुमने उसकी सुनी ज़िन्दगी में प्यार क रंग भरे . तो अब वो कैसे तुम्हे दूसरे रिश्ते में स्वीकार कर पायेगी?

अमित : वो सब अनजाने में हुआ था और इसी बात पर वो बहुत ज्यादा हर्ट भी हुई थी जब उन्हें पता चला क मैं उनका hi सागा भतीजा हूँ . वो तो मरने की बातें करने लगी थी. एक बार तो मैं भी दर गया था . उन्होंने खुद को बड़ी मुश्किल से संभाला है. हम दोनों वो सब भूल कर नए सिरे से शुरुआत कर रहे हैं इस रिश्ते की जो हमें भगवन ने दिया है .

दीपिका : क्या ये सब इतना आसान है ? तुम्हे लगता है ये सब मुमकिन होगा ? एक औरत जब दिल में किसी को बसा ले तो उसे कभी भुला नहीं सकती और मंजू तो तुम्हे अपना सब कुछ मन चुकी थी . फिर कैसे वो अब तुम्हे किसी दूसरे रिश्ते में देख पायेगी ?

अमित : आप कहना क्या चाहती हैं .?

दीपिका : यही क तुम्हे उसको सहारा देना होगा . अभी वो सब क बीच है , आरसे बाद मिली है तो कुछ दिन वो बिजी रहेगी मगर उसके बाद ? जब वो अकेली और तनहा होगी तब तुम्हारे साथ बिताये वो प्यार भरे पल उसे जीने नहीं देंगे . तब वो टूट जाएगी और फिर तुमसे दूर जाने क बारे में सोचेगी .

अमित : नहीं मैं उन्हें अब कहीं नहीं जाने दूंगा . मैं ऐसा नहीं होने दूंगा .

दीपिका : ऐसा नहीं होगा पर उसके लिए तुम्हे इस बात को गहराई से समझना होगा . एक साथ दो दो रिश्ते तुम पहले से hi रख रहे हो . मेरे साथ , कामिनी दीदी क साथ , बड़ी दीदी क साथ , रीता मौसी क साथ और ये नौटंकी करुणा , नैना . सब क साथ तुम दोहरा रिश्ता निभा रहे हो न तो फिर मंजू क साथ क्यों नहीं ? अभी वो शायद खुद को कसूरवार समझ रही होगी जो सब हुआ उसके लिए . पर बाद में यही भावना उसे दूर जाने क लिए मजबूर न कर दे . तुम्हे उसे एहसास दिलाना होगा क वो तुम्हारी बुआ होने क बाद भी तुम्हारे उसी प्यार को प् सकती है .

अमित : पर बुआ ....

दीपिका : अभी वो कुछ दिन बिजी hi रहने वाली है . चिंता मत करो और मैं हूँ न . ज़रूरत पड़ी तो मैं खुद बात करुँगी. तुम्हारी ख़ुशी पर आंच नहीं आने दे सकती मैं .

अमित : पर आप बात कैसे करेंगी ? अगर आपने उनसे बात की तो वो भी समझ जाएँगी क आपके और मेरे बीच.....

दीपिका : तो क्या हुआ ? तुम्हारे लिए मुझे सब मंजूर है . फिर चाहे वो मुझे दो चार गलियां hi क्यों न दे दे क उसके भतीजे क साथ मैंने वो सब किया . मैं भी कह दूंगी क उसका भतीजा मेरे बचे का बाप भी है और उस नाते वो मेरी सास हुई. अब देखती हूँ क उसे कौन सा रिश्ता रखना है . भाबी वाला , सास वाला या सौतें वाला .

अमित : आप भी न ..... ये सब आसान नहीं है .

दीपिका : आसान काम हम करते भी नहीं . चलो अब चलते हैं .

दीपिका ममी उठ कर जाने लगी तो मैंने उन्हें पीछे से आवाज़ दी .

अमित : वैसे एक नाम और भी है

दीपिका : ???????

अमित : रजनी मौसी

दीपिका : क्याआ?????

दीपिका का हैरानी से मुँह खुला का खुला रह गया . मैंने उन्हें हाँ में सर हिला कर उन्हें यकीन दिलाया .

दीपिका : तुम किसी को छोड़ोगे भी या सब पर अपनी मोहर लगा कर hi रुकोगे ? कहीं दिव्या दीदी क साथ भी तो.......

अमित : आपको पता भी है आप क्या कह रही हैं ? दिव्या मौसी को आप जानती हैं न .

दीपिका : जानती हूँ , और देख भी रही हूँ क वो कैसे तुम्हारे आपस रहती हैं. मंजू की बात पर बड़े भैया को कैसे इंकार के दिया था और तुम्हारे साथ खुद लेने चली गयी उन्हें. मनो या न मनो पर एक नाम और जुड़ने वाला है पहले hi कह देती हूँ .

इतना कह कर दीपिका ममी नीचे चली गयी और मैं सोच में पद गया . दीपिका ममी ने ऐसे hi ये बात नहीं की होगी . ज़रूर वो नज़र रख रही होंगी मौसी पर . और फिर मैंने भी तो कई बार मौसी को अजीब तरह से रियेक्ट करते महसूस किया था. एक एक कर क दिव्या मौसी क साथ हुई साडी घटनाएं मेरी आँखों क सामने आने लगी . न चाहते हुए भी मेरे दिलो दिमाग में ये बात आने लगी क दीपिका ममी ने जो कहा वो सच है . ये सब सोचते सोचते मेरा लैंड अकड़ने लग गया तो मैंने सर झटकते हुए खुद से hi कहा .

अमित : नहीं ऐसा नहीं हो सकता . दिव्या मौसी ऐसी नहीं है . वो मुझसे अपना बीटा मानती हैं. वो मेरी माँ की जुड़वाँ हैं मेरी माँ जैसी हैं. मैं कैसे उनके साथ ? नहीं नहीं ये नहीं हो सकता .

‘ ोये तू यहाँ बैठा है चल नीचे आ देख कौन आया है ‘

नैना दीदी दरवाज़े खोल कर एक डैम से अंदर आयी और मुझे मेरी ख्यालों की दुनिया से बहार निकला .

अमित : कौन आया है दीदी ?

नैना : अंकल आये हैं फॅमिली क साथ . चल नीचे .

मैं तुरंत नीचे की तरफ भागा. दीपिका ममी क साथ बात करते हुए मुझे वक़्त का पता hi नहीं चला और अंकल गाओं भी आ पहुंचे . जैसे hi मैं नीचे आया तो माँ क कमरे में सब एक साथ थे जहाँ राघव अंकल मंजू बुआ को गले से लगाए भावुक हो कर आंसू बहा रहे थे . पास में hi कड़ी आंटी और करिश्मा दीदी की ऑंखें भी भरी हुई थी जबकि मोहित थोड़ा हैरानी से देख रहा था .

राघव : तू इतने दिन कहाँ थी मेरी बहिन ? तुझे अपने इस भाई की ज़रा भी यद् नहीं आयी ? तू तो पवन क साथ मुझे राखी बांधती थी न ? फिर कैसे तू भूल गयी क तेरा एक भाई और भी है . आज तक तेरे इस भाई की कलाई सुनी है जहाँ तू कभी राखी बांधती थी. तूने मुझे किस बात की सजा दी मुझे ऐसे खुद से दूर कर क .

मंजू ( रट हुए ) भैया ,, मुझे माफ़ कर दो भैया मुझे माफ़ कर दो. मैं क्या करती भैया , पवन भैया क जाने क बाद गुमसुम सी हो गयी थी . और जब कुछ संभाली तो बड़े भैया ने फरमान सुना दिया क मैं आपसे नहीं मिलूं. एक बार मैंने कोशिश भी की थी तो बदले में भाभी और बच्चों को बुरी तरह से मारा था उन्होंने . उनके लिए मैंने दिल पर पत्थर रख लिया था भैया . वर्ण मैं ऐसा कभी नहीं करती .

राघव : और तेरा ये भाई इतने साल बस यही सोचता रहा क आखिर मैंने ऐसी कौन सी खता कर दी जो तूने कभी मुझसे बात तक नहीं की. एक बार तो मेरे से बात की होती तुमने . उन जल्लादों क पास मैं तुम्हे कभी रहने नहीं देता कभी नहीं .

‘ तो इसी लिए तू मैडम क घर जाता था . सेल इतने दिनों तक तूने सब से छुपा के रखा ‘ मोहित की नज़र जब मुझ पर पड़ी तो वो मुझसे लड़ने लगा . ये सब वो धीमी आवाज़ में बोल रहा था ताकि कोई और न सुन ले .

अमित : अबे मुझे भी नहीं पता था क यही बुआ हैं. ये तो उस दिन hi पता चला जब मैं तुम्हारे घर से बुआ क घर गया और वो मुझे फॅमिली एल्बम दिखने लगी .

मंजू : मैं मजबूर थी भैया, नहीं तो क्या मैं आपके पास नहीं आती ?

रमा : तूने बहुत रुलाया है हमें मंजू , बहुत रुलाया है. ये तुम्हे यद् कर क अक्सर रट रहते थे , राखी वाले दिन तो ये खुद को बंद hi कर लेते थे . बस तुम्हारी और पवन भैया की तस्वीरों क साथ बातें करते रहते थे .

मंजू : मैं भी तो थाई करती थी भाभी , आप सब को, भैया भाभी को यद् करती थी और रोटी थी.

रमा : तू थी कहाँ इतने दिनों तक ? तुझे एक बार भी हम लोगों की यद् नहीं आयी?

मंजू : हिम्मत नहीं थी भाभी , हिम्मत नहीं थी . इतने साल दूर रह कर किस मुँह से सामने आती .

राघव : मार खायेगी मेरे हाथों से ,, तुझे अपने इस भाई पर इतना hi भरोसा था ? तूने सोचा भी कैसे मैं ऐसा सोच सकता हूँ तेरे बारे में . मैं हमेशा से जनता था क उन लोगों ने तुझे मजबूर किया होगा.

करिश्मा : माँ , पापा , क्या मुझे नहीं मिलवाओगे बुआ से ?

मंजू : ये ,, ये करिश्मा है न भैया ??

करिश्मा दीदी को देख कर बुआ ने अंकल से पूछा तो उन्होंने सर हिला कर हामी भरी. इसी क साथ बुआ ने करिश्मा दीदी को गले से लगा लिया .

मंजू : कितनी बड़ी हो गयी है काशी , बिलकुल भाभी पर गयी है .

मंजू बुआ ने करिश्मा दीदी को गले से लगा कर चूमा और उन्हें अपना प्यार दिया . करिश्मा दीदी भी खुश थी बुआ से मिल कर .

करिश्मा : पापा आपको बहुत यद् करते थे बुआ , अब आप हमें छोड़ कर कहीं मत जाना .

मंजू : कहीं नहीं जाउंगी मेरी बची कहीं नहीं जाउंगी . और ये मोहित कहाँ है ? मोहित ,,, तू वहां खड़ा क्या देख रहा है ? इधर आ .

मोहित : कुछ नहीं मैडम वो ....

मंजू : मैडम नहीं , बुआ हूँ समझे ?? इधर आ .

मोहित पास आया तो बुआ ने उसे भी गले से लगा कर प्यार दिया .

राघव : मैडम ?? ये तुम मैडम क्यों कह रहे हो मंजू को ?

मोहित : पापा आप नहीं जानते , बुआ हमारे कॉलेज में इंग्लिश की लेक्चरर हैं.

राघव : क्या ??? और तुम मुझे अब बता रहे हो . ( मेरी तरफ देखते हुए ) और तुमने भी नहीं बताया हमें ??

मंजू : इसमें इन दोनों की क्या गलती है भैया , जब मैं hi नहीं जानती थी अपने भतीजों को .

रमा : पर तुम इसी शहर में थी तो एक बार हमें बता तो देती .

राघव : साडी गलती मेरी है , मुझे इनमे कॉलेज जाना चाहिए था . खैर छोडो अब से तुम हमारे साथ रहोगी .

विजय : रुको भाई ,, अभी तो वो आयी है और तुम अभी से उसे हमसे दूर ले जाना चाहते हो. थोड़ा हमारा भी तो ख्याल कर लो .

राघव : सॉरी भैया पर मंजू को अगर कॉलेज जाना है तो फिर वो शहर में hi रहेगी न . इस लिए मैंने ऐसा कहा . अब भाई क होते ये अलग किसी घर में रहे तो ाचा थोड़ा hi लगेगा .

गौरी : वो बाद की बात है अभी तो ये यहीं रहने वाली है. दीपिका जाओ ज़रा इनके लिए कुछ ले कर आओ .

दीपिका ममी क साथ निधि दीदी और दिव्या मौसी भी किचन में चली गयी . इधर मैं मोहित को लेकर घर से बहार आ गया . हम अभी घर से निकले hi थे क सामने से राजू भी अत हुआ नज़र आया .

अमित : अबे सेल तू ,, कहाँ था इतने दिन से ? अब मैं गाओं में हूँ और तू है क नज़र नहीं आ रहा .

राजू : तेरा तो मस्त है भाई पर मुझे तो सब काम खुद hi करने हैं न . 4 महीने रह गए हैं शादी में और अभी तक रहने का इंतज़ाम नहीं हुआ. उसी चक्कर में लगा हुआ हूँ. शहर में एक दो माकन देखें हैं किराये पर रहने क लिए . तुझे तो पता hi है शादी क बाद रेनू को लेकर यहाँ से जाना पड़ेगा .

मोहित : ये क्या चक्कर है ? जाना क्यों पड़ेगा ?

राजू : मालिक वो ....

मोहित : मालिक नहीं मोहित . तू बता यार क्या चक्कर है.

फिर मैंने रही और रेनू की प्रेम कहानी और शादी की शर्त क बारे में मोहित को बता दिया .

मोहित : बस इतनी सी बात , पहले बता देते तो अब तक तुम्हारी शादी भी करवा देते हम . तुम चिंता मत करो समझो तुम्हारा काम हो गया . तुम बस शादी की तयारी करो घर की चिंता मुझ पर छोड़ दो .

राजू : पर मालिक ....

मोहित : एक बार और मालिक कहा न तो दांत तोड़ दूंगा . जैसा अमित है तुम्हारे लिया वैसा मुझे भी समझ . वैसे भाभी है कैसी ? मुझे भी तो मिलवाओ .

राजू : क्या भाई ,, आप भी मेरी फिरकी ले रहे हो .

अमित : अबे इतना शर्मा क्यों रहा है ? जा जा कर रेनू को बुलावा भेज दे. वैसे भी घर पर शहर सब आये हुए हैं . सब दीदियां हैं घर पर तो उसको भी कोई प्रॉब्लम नहीं होगी . और तुझे किसी से मिलवाना भी है

राजू : किस्से ?

अमित : तू पहले रेनू को बुलावा भेज क आ ,, चल हम साथ hi चलते हैं तेरे

मैं और मोहित राजू क साथ चल दिए . राजू ने अपने पड़ोस में रहती एक लड़की क हाथ संदेसा रेनू तक भिजवा दिया . मोहित को घर ले जा कर राजू और उसकी अम्मा ने मोहित की बहुत आओभगत की और मुझे भी प्यार दिया . मोहित ने भी कोई औपचारिकता न दिखते हुए अपने पैन से राजू क घर चाय पानी पिया . फिर हम राजू को साथ लेकर घर की तरफ चल दिए . मैंने आंटी को भी घर आने को कहा तो वो कुछ देर में आने का कहने लगी . जब हम घर पहुंचे तो राजू बरी बरी सब से मिला . अंकल आंटी और करिश्मा दीदी से मिलने क बाद राजू ने मंजू बुआ को देखा तो उनके बारे में पूछने लगा .

राजू : ये कौन हैं ? मैंने पहले इन्हे नहीं देखा

गौरी : ये अमित की बुआ है , सगी बुआ . और मंजू ये है राजू . अमित क बचपन का एक लौटा दोस्त . बहुत hi प्यारा है .

मंजू : इधर आ राजू, तू भी मेरे अमित जैसा hi है .

मंजू बुआ ने राजू का माथा चूमा राजू ने भी बुआ क पाऊँ छुए . राजू तो हैरान हो रहा था क्यूंकि उसने तो कभी सुना hi नहीं था क मेरी कोई बुआ भी है .

‘ सर हमने ऋतू सिंह क बारे में पता किया है. कुछ ज्यादा तो पता नहीं लगा पाए क्यूंकि वो किसी से मिलती नहीं है. बस दो लोगों को छोड़ कर ‘

बलजीत राइ अपने ऑफिस में बैठा था और उसका आदमी सामने खड़ा उसे ऋतू सिंह क बारे में खबर दे रहा था. बलजीत राइ ने ऋतू सिंह से सीधा टकराने का ख्याल दिमाग से निकल कर उसे दूसरे तरीकों से हैंडल करने क बारे में विचार बना लिया था . अपने दोस्त ंद क खौफनाक हशर क बाद तो बलजीत राइ की हिम्मत जवाब hi दे गयी थी इस लिए अब वो सैम डैम भेद की नीति पर चलने की कोशिश कर रहा था . ऋतू क बारे में इतना तो उसे पता hi था क न उसे पैसे से खरीदा जा सकता है और न उसे डराया जा सकता है . सीधा टकराव कर क ंद जैसा पावरफुल नेता और गुंडा इतनी बुरी मौत मारा गया तो बलजीत राइ फिर एक सफेदपोश चेहरा था .

बलजीत राइ : जल्दी बता कौन हैं वो दो लोग?

आदमी : सर एक तो वो आपको सौतेली बहिन है मंजू . दोनों की बहुत अछि दोस्ती है , पिछले दो तीन दिन से वो उसी क घर रह रही है. इतना hi नहीं वो बीच बीच में भी उसके पास आती जाती रहती है.

बलजीत राइ : मंजू ,,, लगता है उसके पास जाना hi पड़ेगा . दूसरी कौन है ?

आदमी : दूसरी नहीं दूसरा , वो एक लड़का है . कॉलेज में पड़ता है . और मंजू क घर भी वो अक्सर अत जाता है .

बलजीत राइ : लड़का ???? और मंजू क घर भी वो अत जाता है ? कौन है वो लड़का ?

आदमी : अमित नाम है सर और कॉलेज में शीना रीमा बेबी क साथ hi पड़ता है . शायद वो दोस्त भी है उनका . बेबी की बर्थडे पार्टी में भी आया था वो . और राघव क घर भी उसका काफी आना जाना है .

बलजीत राइ : क्या ? राघव क घर आना जाना ?? उस लड़के की पूरी कुंडली निकल कर मुझे दो . अब जाओ यहाँ से .

बलजीत राइ का हुकुम सुन कर वो आदमी निकल गया और बलजीत राइ अपना स्कॉच से आधा भरा गिलास उठा कर फिर से मुँह को लगते हुए सोचने लगा . कहाँ वो थोड़ी देर पहले सिर्फ ऋतू क बारे में hi सोच रहा था और यहाँ एक और नाम निकल कर सामने आ गया था जिसने उसे सोच में दाल दिया था .

बलजीत ( मन में ) आखरी ये लड़का है कौन ? ऋतू और मंजू दोनों से hi मिलता है और राघव क साथ भी . राघव क साथ है तो इसका मतलब मंजू से राघव मिल चूका होगा . नहीं , ऐसा होता तो मंजू अब तक अकेली नहीं होती. खैर पहले इस लड़के की कुंडली पता लग जाये फिर देखता हूँ. तब तक मंजू से hi काम चलना पड़ेगा . पर मुझसे तो बात भी नहीं करेगी वो. मेघा ??? नहीं . शीना से थोड़ा बहुत प्यार है उसको. रुपाली ????? हाँ हाँ , ये काम रुपाली hi कर सकती है. वैसे भी बड़े दिन हो गए उसके साथ कुछ किया नहीं . आज उसी क साथ रत रंगीन करता हूँ. कम्बख्त इतने सैलून क बाद भी अभी तक उसका बदन वैसे hi कैसा हुआ है .

‘ भाभी है तो मस्त यार , गाओं में भी इतनी सुन्दर लड़कियां होती हैं मुझे पता hi नहीं था’

मोहित रेनू को देख कर ये बात कह रहा था जिसे सुन कर राजू बगलें झाँकने लगा . रेनू इस वक़्त लड़कियों की टोली में घिरी हुई थी अपनी हमउम्र सहेली क साथ. उसके चेहरे पर छायी शर्म की लाली देख मैं अंदाज़ा लगा रहा था क करुणा और नैना दीदी उसके मज़े ले रही हैं. बड़े सब एक कमरे में थे . दीपिका ममी दिव्या मौसी और निधि दीदी किचन संभल रही थी और यहाँ ये सब लडकियां अलग महफ़िल लगाए हुए थी . हम बस दूर से देख hi सकते थे कमरे में आने की इजाज़त जो नहीं थी .

अमित : तूने क्या समझा था क सिर्फ शहर में hi अछि लड़कियां होती हैं? बताऊँ मीनल को फ़ोन कर क तुम यहाँ लाइन मर रहे हो गाओं में लड़कियों पर ?

मोहित : अबे मरवाएगा क्या ? मैं तो बस ऐसे hi कह रहा था .

मोहित मीनल का नाम सुनते hi फत्तू बन गया . मैं अचे से जनता था मीनल उसे कैसे दबा क रखती है . मीनल का नाम सुन कर राजू क कण भी खड़े हो गए . जनता तो वो भी था इस बारे में .

राजू : वैसे मीनल मेमसाब भी बहुत अछि हैं. दोनों की जोड़ी बहुत अछि है .

अमित : मेम साब नहीं भाभी बोल समझा . अभी तुझे क्या समझाया था

मोहित : यार तुम लोग यहाँ रुक कर देखते रहो मैं ज़रा मीनल से बात कर क अत हूँ. उसको फ़ोन भी नहीं किया था आने से पहले , अब गुस्सा करेगी .

अमित : जा सेल तू भी पूरा फत्तू है . अभी से ये हल है पता नहीं शादी क बाद क्या करेगा . मुझे तो लगता है लड़की तू है और वो लड़का.

मोहित खिसिया कर हस्ता हुआ ऊपर चला गया और मैं राजू क साथ वहीँ खड़ा रह गया. देखते देखते अँधेरा होने लगा तो रेनू अपनी सहेली क साथ घर जाने क लिए निकल पड़ी . राजू भी उसके पीछे पीछे हो लिया. और मैं अंदर सबके पास चला गया . आज इतनी देर तक अंकल आंटी और यहीं थे और उन्हें देख कर लग रहा था क वो आज रत यहीं रुकने वाले हैं.



कुछ देर में रत का खाना बन गया और सब साथ में बैठ गए खाने क लिए . आज घर पर इतनी रौनक लगी हुई थी जैसे क कोई फंक्शन रखा हुआ हो . मंजू बुआ क आने की वजह से घर का माहौल hi बदल गया था आज तो .
 
अपडेट 243



‘ तो अब कौन कहाँ सोयेगा ? ‘ खाना खाने क बाद रीता मौसी ने ये बात कही . वैसे तो हम सब पहले hi एडजस्ट हो hi जाते थे पर आज बुआ क साथ साथ अंकल आंटी भी थे और साथ में करिश्मा दीदी और मोहित .

दीपिका : राघव भाई साहब और रमा भाभी को अमित का कमरा दे देते हैं दीदी. करिश्मा निधि क साथ हो जाएगी और इनके साथ नेहा राधा . करुणा नैना कल्पना क एक साथ सो जाएँगी . आप दिव्या दीदी और बड़ी दीदी एक साथ सो जाना . अमित और मोहित एक साथ सो जायेंगे .

रीता : पर इतने कमरे कहाँ हैं. ऊपर से सर्दी का मौसम .

अमित : मैं और मोहित राजू क घर सो सकते हैं.

गौरी : नहीं , कोई बहार नहीं जायेगा.

रमा : मोहित और अमित हमारे साथ hi सो जायेंगे .

दिव्या : मेरे ख्याल से करिश्मा और मोहित राघव भैया क साथ hi सो जायेंगे . निधि नेहा क साथ राधा और रजनी दीदी. करुणा कल्पना नैना क साथ रीता दीदी . और एक में मैं मंजू और अमित सो जायेंगे.

दिव्या मौसी क इस सुझाव पर सब सहमत हो गए . और उसी हिसाब से एक्स्ट्रा चारपाई लगा कर कमरों के जगह बना दी गयी . नैना दीदी और करुणा दीदी थोड़ा मुँह बना रही थी क मौसी उनके साथ सोयेंगी. दोनों का शायद कुछ और hi प्रोग्राम था . मंजू बुआ भी इस सुझाव से खुश थी. पर फ़िलहाल बातों का सिलसिला जारी hi था . इतने सैलून की कसार आज hi निकलने का सोचे बैठे थे सब . मगर माँ ने सबको सख्ती से सोने का आदेश दे दिया . सबका इंतज़ाम करने क बाद दीपिका ममी और मैं जब फ्री हुए तो ममी ने मुझे अपने कमरे में जाने को कहा . मौसी और बुआ पहले hi कमरे में चली गयी थी . मैं जब वहां पहुंचा तो अपने लिए अलग से लगाई चारपाई पर पसर गया .

दिव्या : तुम वहां क्यों लेट रहे हो ? इधर आओ बीएड पर .

अमित : पर मौसी ये चारपाई है न मेरे लिए .

दिव्या : तो क्या हुआ , चुपचाप इधर आओ . आज मंजू इतने सैलून बाद आयी है तो अब तू दूर रहेगा . वैसे भी जब से आयी है तब से हर कोई इसे घेर कर बैठा है और तू दूर दूर रह रहा है .

मंजू : कोई बात नहीं दीदी , ये तो मेरे पास hi रहेगा अब से . बाकि सब तो अपने अपने घर रहेंगे पर इसे मैं अपने पास रखूंगी .

दिव्या : आते hi इसे हम सब से छीनने का इरादा बना लिया तुमने ?

मंजू : मैंने ऐसा कब कहा दीदी ?

दिव्या : तो फिर ? अगर तू इसे अपने पास रखेगी तो बाकि सब का क्या ?

मंजू : मेरे कहने का वो मतलब नहीं था दीदी . मैं तो बस ये कह रही थी ....

मंजू बुआ दिव्या मौसी की बातों से थोड़ा घबरा सी गयी है . दिव्या मौसी क चेहरे पर गुस्सा और सख्त आवाज़ से उन्हें लग रहा था क मौसी गुस्से में आ गयी है . मुझे भी एक पल ऐसा लगा पर अगले hi पल दिव्या मौसी मुस्कुराने लगी और बुआ का चेहरा अपने हाथों में लेकर बोली .

दिव्या : मज़ाक कर रही थी मेरी भोली मंजू . तेरा भी बराबर का हक़ है इस पर सबकी तरह बल्कि ज्यादा hi है. इतने सैलून की कसार जो निकालनी है तुमने . चल अब मुस्कुरा दे थोड़ा सा. और तू क्या देख रहा है ? चल इधर आ हम दोनों क बीच लेट जा आ कर .

दिव्या मौसी को मुस्कुराता देख कर मंजू बुआ भी मुस्कुराने लगी और मेरी तरफ दोनों ने उन्हें प्यार से देखा . मैं भी मौसी की बात मानते हुए दोनों क बीच आ गया.

अमित : लो मौसी मैं आ गया पर मेरी वजह से आप दोनों को दिक्कत होगी. इतनी जगह थोड़ा है बीएड पर . एक काम करता हूँ एक और कम्बल पकड़ लेता हूँ.

दिव्या : बहुत जगह है और कोई ज़रूरत नहीं कम्बल की . ये है तो डबल बीएड वाला . और तुझे क्या हम दोनों मोती नज़र आती हैं हो जगह काम पड़ेगी. देखले मंजू अपने भतीजे को . इसे हमारे साथ दिक्कत है .

अमित : मैंने कब ऐसा कहा मौसी , मुझे भला क्या दिक्कत होगी . मैं तो खुशनसीब हूँ जो मेरे अगल बगल इतनी खूबसूरत औरतें मौजूद हैं.

दिव्या : मुझे मरते हुए ) बेशरम,,, अभी बताती हूँ तुझे .

मंजू : मैं इसे पकड़ती हूँ दीदी आप मारो इसे मेरी तरफ से भी .

अब सन ये था क मैं बीएड पर लेता था दोनों क बीच और मैं दिव्या मौसी से बचने क लिए जैसे hi पलटा मंजू बुआ ने मेरे बाजु पकड़ लिए और दिव्या मौसी मेरी पीठ पर मरने लगी. वो हलके हाथों से मर रही थी पर मैं दिखावा ऐसे कर रहा था जैसे बहुत ज़ोर से मर पद रही हो . दोनों hi मेरी इस एक्टिंग का मज़ा ले रही थी .

अमित : आआ मौसी आए मर गया मौसी छोड़ दो मौसी फिर से ऐसा नहीं करूँगा . बुआ बचाओ प्लीज बुआ बचा लो अअअअअ मा

दिव्या : अब बोल क्या बोल रहा था ? अब बोलेगा ऐसा ?

अमित : नहीं मौसी अब नहीं बोलूंगा . आए

मौसी ने जैसे hi मरना बंद किया तो बुआ ने भी मुझे छोड़ दिया . मैं अपनी पीठ मलते हुए सीधा हुआ तो बुआ और मौसी दोनों मुझे देख कर है रही थी .

दिव्या : अब बोल क्या बोल रहा था .

अमित : क्या बोलूं ? आपने तो मेरी बोलती hi बंद कर दी . सच कहूं तो आपके कोमल हाथों से मर खा कर मज़ा बहुत आया . ऐसे लग रहा था जैसे प्यार से मालिश कर रही हैं. सच में खूबसूरत औरत क हाथों से मर खाना भी मज़ेदार है .

दिव्या : क्या कहा , अब देख तेरा क्या हल करती हूँ मैं .

दिव्या मौसी फिर से गुस्से में आ गयी और इस बार अपने दोनों हाथों से मेरा गाला hi दबा दिया. ये सब वो मज़ाक में कर रही थी पर उनकी इस हरकत से मेरी हवा टाइट हो गयी क्यूंकि इस बार मैं सीधा लेता हुआ था और मौसी मेरा गाला दबाने क चक्कर में मेरी छाती पर hi आ गयी . मौसी तो मेरा गाला दबा रही थी पर मौसी क ठोस स्तन मेरी छाती दबा रहे थे . मौसी क कोमल स्तनों का एहसास मेरे खून में गर्मी पैदा करने लगा . इससे पहले क मेरा लैंड सर उठता मैंने मौसी को अपने ऊपर से हटाने की कोशिश की तो मौसी भी मेरे साथ ज़ोर आज़माइश करने लगी .

अमित : आआअह्ह्ह्हह

दिव्या : आअह्ह्ह्ह. कक्कक्कक्कक्स

मेरे और मौसी क मुँह से एक साथ आवाज़ निकली जिसे सुन कर बुआ चौंक गयी .

मंजू : क्या हुआ ?? तुझे कहीं चोट तो नहीं लगी ? दीदी आपको क्या हुआ ?

असल में हुआ ये था क दिव्या मौसी मेरे साथ कुश्ती लड़ती मेरे ऊपर hi आ गयी थी . इस दौरान उनका डायन घुटना मेरे लैंड पर ज़ोर से लग गया जिस से मेरे मुँह से आज निकल गयी. दर्द से मैं झटपटाया और बे ध्यानी में मेरा डायन हाथ मौसी क बाएं चूतड़ पर ज़ोर से कास गया . दर्द की वजह से मैंने ज़ोर से मुठी भींच ली थी. हालाँकि मुझे तब पता भी नहीं चला था क मेरा हाथ कहाँ है मगर मौसी की सिसकी और मंजू बुआ क सवाल से मेरा ध्यान जब अपने हाथ पर गया तो मुझे एहसास हुआ . मैंने जल्दी से हाथ मौसी क चूतड़ से हटाया और पलट गया. क्यूंकि न तो मौसी का सामना करने की मुझ में हिम्मत थी और न मैं मंजू बुआ को मौसी क सामने ये बता सकता था क मैं क्यों चीखा हूँ.

मंजू : तू बोलता क्यों नहीं ?? क्या हुआ तुझे ?

अमित : कुछ नहीं बुआ वो मैं बस मज़ाक कर रहा था .

मंजू : तू सच बोल रहा है न ? ,,,, दीदी आपको क्या हुआ ?

दिव्या मौसी जो अभी तक खामोश थी वो बुआ क सवाल से हड़बड़ा गयी .

दिव्या : कक को कुछ नहीं कुछ भी तो नहीं . वो मेरा हाथ मुद गया था .

मंजू : देख ले , तेरी वजह से दीदी को चोट लग गयी और तेरा मज़ाक hi नहीं ख़तम होता . चल अब चुपचाप अपने बिस्तर पर जा .

दिव्या : नहीं , रहने दे न मंजू , इसमें इसकी क्या गलती है . मेरी hi गलती थी. मैं लाइट बंद कर देती हूँ अब सौतé हैं.

दिव्या ( मन में ) क्या अमित ने जानबूझ कर मेरे वहां हाथ लगाया होगा ? शायद गलती से लग गया होगा . कितना ज़ोर से मसला है सीसीसी अभी तक ऐसे लग रहा है जैसे अमित अभी भी वहां दबा रहा है. कहीं इसने जानबूझ कर तो नहीं किया ?

दिव्या मौसी ने जब तक लाइट बंद नहीं कर दी मैं उल्टा hi लेता रहा. फिर जब वो बीएड पर वापिस आ गयी तो मैंने बीएड से उठने की कोशिश की तो मौसी ने मुझे रोक दिया

दिव्या : चुपचाप यहीं लेता रह आयी बात समझ में .

मरता क्या न करता , मैं चुपचाप सीधा लेट गया . मगर मन में उथल पुथल मची हुई थी . मेरे दिमाग में दीपिका ममी की बातें घूमने लगी . मन में छिपा शैतान मेरी सोच पर हावी होता जा रहा था . मेरे एक तरफ मंजू बुआ लेती थी जिनके साथ मैं पहले भी कई बार प्यार भरे पल बिता चूका था और दूसरी तरफ मेरी प्यारी दिव्या मौसी जिनके साथ लगातार कोई न कोई ऐसी घटना होती जा रही थी क मेरे अंदर उनके प्रति गलत विचार घर करने लगे थे . मैंने अँधेरे में बस ऑंखें बंद किये मौसी और बुआ क बारे में सोचता रहा . पता नहीं कब तक मैं अपनी सोच में डूबा रहा , नींद थी क आज आ hi नहीं रही थी. बुआ और मौसी शायद कब की सो चुकी थी और मैं उल्लू की तरह जग रहा था . तभी दिव्या मौसी नींद में करवट बदलती मेरे करीब आ गयी .

दिव्या : ज्यादा ज़ोर से तो नहीं लगी न ?

दिव्या मौसी ने सरगोही की तो मैं चौंक गया . इसका मतलब दिव्या मौसी भी जाग रही थी मगर क्यों ? और अगर जग रही थी तो इतनी देर से सोने की एक्टिंग क्यों कर रही थी . और ऊपर से ऐसा सवाल, जो बात मैं छुपा रहा था वो अब सामने से hi पूछ रही थी . मतलब उन्हें पता था क क्या हुआ है . पर मैं मौसी क सवाल पर कुछ नहीं बोलै और वैसे hi पड़ा रहा .

दिव्या : ी ऍम सॉरी , मैंने जान बुझ कर नहीं किया था . तुम्हे ज्यादा दर्द तो नहीं हुआ न ?

अमित : कोई बात नहीं मौसी , मैं जनता हूँ सब अनजाने में हुआ . और प्लीज आप मुझे भी माफ़ कर दो . मेरे हाथ अनजाने में .....

दिव्या : जानती हूँ , इसी लिए मैंने बुरा नहीं मन . चल अब कुछ मत सोच और आराम से सो जा .

मौसी की बात सुन कर मुझे ाचा लगा . मैं करवट बदल कर मौसी की तरफ घूमने लगा तो उसी दौरान मौसी भी शायद मेरा गाल ता माथा चूमने क लिए मेरी तरफ झुकी थी और हमारे चेहरे एक दूसरे क सामने आ गए और होंठों से होंठ जुड़ गए . ये सब अँधेरे क कारन हुआ था . न मौसी ने ऐसा सोचा था न मैंने . मगर होंठों से होंठ जुड़ते hi मनो हम दोनों hi बट बन गए . न मौसी कोई हरकत कर रही थी न hi मैं. हम दोनों क होंठ बस आपस में जुड़े hi थे , सिर्फ टच करते हुए. पर इस टच से hi शरीर सुन्न पद गया था . अचानक से मौसी पीछे हुई और करवट बदल कर मेरी तरफ पीठ कर ली.

दिव्या : मन में ) है भगवन ये मैंने क्या कर दिया ,, ये मुझसे कैसे हो गया ,,, अमित क्या सोच रहा होगा मेरे बारे में ,,, पहले उसे वहां पर टच कर बैठी और अब सीधा होंठों पर hi ... ये मुझे क्या होता जा रहा है ,,, क्यों मैं अपने आप से hi बहार होती जाती हूँ इसके पास होने पर hi. ..

मैं जो अभी तक शुन्य में था मौसी क पलट जाने से मुझे भी होश आया और मैं भी अपनी बरही हुई धड़कनो को काबू करता हुआ सीधा लेट गया और अपने चेहरे पर हलके हाथ से थप्पड़ लगा कर खुद को होश में लेन की कोशिश करने लगा . दिव्या मौसी और मैं चाहे खुद से अलग हो गए थे और वो टच भी भी कुछ पलों का hi था मगर उसका एहसास मुझे अंदर से रोमांचित किये जा रहा था . एक बार फिर दिमाग पर शैतान हावी होने लगा था मगर मैं खुद को रोकने की कोशिश करते हुए ऑंखें बंद कर क सोने की कोशिश करने लगा . मेरा ध्यान अपने लैंड पर गया तो वो साला पहले hi टॉप बना खड़ा था . अब इस माहौल में उसे शांत करने का और कोई तरीका तो था नहीं. और अब ऐसे उठ कर जाता तो मौसी पता नहीं क्या सोचती . सोच अब भी रही होगी पर अभी जो भी हुआ वो अनजाने में हुआ था. मैं खुद को कण्ट्रोल करता ऑंखें बंद किये सोने की कोशिश कर रहा था . मौसी भी ऐसा hi कुछ कर रही थी हालाँकि नींद दोनों को hi नहीं आने वाली थी . एक बार फिर से पूरे कमरे में सन्नाटा पसर गया था .

अमित : ी ऍम सॉरी मौसी वो मैंने जान बुझ कर नहीं किया .

मैंने जिझझकते हुए मौसी से बात करने की कोशिश की पर मौसी ने कोई जवाब नहीं दिया . मुझे लगा मौसी सो गयी शायद या वो बात नहीं करना चाहती . मैंने दोबारा से मौसी से बात करने की कोशिश की पर हिम्मत hi नहीं हो रही थी . इस लिए करवट दूसरी तरफ कर क सोने की कोशिश करने लगा .

पता नहीं कब मेरी आँख लगी पर सपने में भी मेरे साथ दिव्या मौसी hi मुझे नज़र आयी और मैंने उन्हें अपनी बाँहों में कैसे हुए लेते लेते hi उनके पीछे से अपना लैंड उनकी छूट में घुसा रहा था . हम दोनों एक तरफ मुँह लिए करवट क बल लेते हुए थे और मेरा डायन हाथ मौसी क दाएं स्तन पर था . मौसी क साथ मैं इतना ज्यादा एक्ससिटेड हो रहा था क लैंड को पूरे ज़ोर से घुसाए जा रहा था. एक्ससिटेमेंट में मैंने कुछ ज्यादा hi ज़ोर से मौसी क बूब्स को दबा दिया और मौसी क मुँह से आज निकल गयी . इस क साथ मेरी आँख खुल गयी क्यूंकि मुझे किसी ने धक्का दिया था . मैं हड़बड़ा गया कमरे में अँधेरा था इस लिए कुछ समझ में नहीं आ रहा था . पर जब थोड़ा सा होश आया तो मुझे बुआ की आवाज़ सुनाई दी .

मंजू : ये क्या कर रहे थे तुम ? मैंने तुम्हे समझाया था न , फिर भी तुम ......

बुआ की बात सुन कर मुझे समझ आया क मैं सपने में जो कुछ कर मौसी क साथ कर रहा था असल में वो सपना नहीं था और मौसी की जगह बुआ थी.

अमित : ी ऍम सॉरी बुआ ,, वो नीँन्द में गलती से .......

मंजू : जाओ उधर चारपाई पर सो जाओ , कहीं दीदी क साथ ऐसी हरकत कर दी तो क्या मुँह दिखाओगे .

मैं शर्मिंदा सा होकर बीएड से उतर गया और अपने चारपाई पर चला गया . बुआ ने सही कहा था कहीं ये हरकत मौसी क साथ हो जाती तो पता नहीं क्या होता . मंजू बुआ क साथ चाहे मैं पहले जैसे भी रहा पर अब वो भी मुझसे दूर hi रहना चाहती थी तो मैं भी उन्हें मजबूर नहीं करना चाहता था . इस लिए चुपचाप सोने की कोशिश करने लगा और पता नहीं कही कब नींद आ गयी.

‘ छोड़ दीजिये मुझे , वर्ण मैं चिल्लाऊंगी . ‘ बलजीत राइ बहार से hi आज शराब पी कर घर लौटा था और आज सोच के आया था क वो रुपाली क साथ चुदाई करेगा . बहुत दिनों से रुपाली उसके हाथ नहीं आयी थी और दूसरा मंजू को घर लेन का काम भी वो रुपाली से हो करवाना चाहता था . इस लिए घर आते hi वो सीधा रुपाली क कमरे में गया . किस्मत से रुपाली इस वक़्त कमरे में अकेली थी. बलजीत राइ क घर आने क बारे में कोई नहीं जनता था इस लिए शीना भी इस वक़्त अपनी चची क साथ नहीं थी . मौका ाचा जान कर बलजीत राइ ने रुपाली को दबोच लिया था . मगर रुपाली उससे बचने क लिए जद्दोजेहद कर रही थी .

बलजीत राइ : चिल्ला साली , चिल्ला. बुला जिसको बुलाना है. नखरा तो ऐसे कर रही है जैसे मैं पहली बार कर रहा हूँ. आज कल तेरी गर्मी कोई और ठंडी कर रहा है जो मेरे पास नहीं आती . मत भूल क मेरी बात न मैंने का अंजाम क्या होगा .

रुपाली बेचारी अपनी बेटी क सामने अपनी इज़्ज़त ख़राब होने क दर से चिल्ला भी नहीं सकती थी और ये बात बलजीत राइ अछि तरह जनता था . वैसे भी इतनी सैलून में वो रुपाली को अनगिनत बार अपने नीचे ला चूका था तो वो निश्चिन्त था क वो कुछ करेगी . रुपाली की आँखों में फिर से बेबसी क आंसू आ गए . इस वक़्त उसे अमित की यद् आ रही थी . उसके वडा किया था क वो उसे बचाएगा पर आज वो अकेली फिर से उसी शैतान क आगे बेबस थी. जो उसे हमेशा अपने निचे रोंदता था और उसकी बेटियों पर भी नज़र रखता था . रुपाली मन hi मन भगवन से प्रार्थना कर रही थी क वो किसी तरह उसे बचा ले .

बलजीत राइ : चल अब नखरे छोड़ इसे मुँह में ले .

बलजीत राइ ने रुपाली को शांत देखा और झट से अपनी ज़िप खोल कर अपना लैंड बहार निकल कर रुपाली को उसे मुँह में लेने को कहा . रुपाली रोटी आँखों से अभी भी किसी मदद की आस में दरवाज़े की तरफ hi देख रही थी .

‘ थक थक थक ‘ दरवाज़े पर दस्तक हुई तो रुपाली की ऑंखें उम्मीद में बड़ी हो गयी. जबकि बलजीत राइ ने झुंझला कर एक बार दरवाज़े की तरफ देखा और फिर रुपाली को पकड़ कर उसके कान में बोलै .

बलजीत राइ : जो भी हो उसे दरवाज़े से hi ताल देना वर्ण तू जानती है मुझे .

रुपाली बेचारी लाचारी में दरवाज़े की तरफ चल पड़ी . एक एक कदम चलती वो भगवन से मदद hi मांग रही थी और जैसे hi उसने दरवाज़ा खोला तो शीना दरवाज़े को धकेलती हुई अंदर आ गयी.

शीना : क्या चची , इतनी देर दरवाज़ा खोलने में ....... पापा !!! आप कब आये? आपने अपने आने की खबर तक नहीं दी किसी को ?

शीना रुपाली से बात करती अंदर आयी पर जब उसकी नज़र सामने खड़े अपने बाप पर गयी तो हैरान हो गयी . शॉक तो बलजीत राइ भी हो गया था . उसका कलपद जो हो गया था . वहीँ रुपाली का दिल शीना को दुआएं दे रहा था क उसने आ के उसे बचा लिया .

बलजीत राइ : हहह हाँ बीटा वो बस अभी आया hi हूँ . मुझे लगा तू यहाँ होगी तो सीधा यहीं चला आया . आज कल चची क पास ज्यादा रहती है न तू .

शीना : हाँ ये तो बिलकुल सही है और आज भी मैं चची क पास hi सोने वाली हूँ . पर आप यहाँ हैं और घर में किसी को पता तक नहीं , ये कोई बात हुई ?

बलजीत राइ : मैंने कहा न बस अभी आया hi हूँ . सोचा पहले अपनी राजकुमारी से मिल लूँ तो यहाँ चला आया . तू कैसे है मेरी प्यारी बेटी?

शीना : मैं तो एक डैम फिर हूँ पापा . आप शायद थक गए होंगे . चलिए मैं पहले आपका खाना लगवाती हूँ फिर आप आराम कर लेना. चची आप भी थोड़ा आराम कर लो . आपकी तबियत ठीक नहीं है न सुबह से .

शीना ने जानबूझ कर रुपाली की तबियत की बात कही तो रुपाली ने भी बस सर हिला कर सहमति जताई .

बलजीत राइ : क्या ? तुम्हारी तबियत ख़राब है और तुमने मुझे बताया नहीं .

शीना : चची ऐसी hi है पापा , आप चलिए और चची को आराम करने दीजिये .

बलजीत राइ : ठीक है , वैसे मुझे एक बात करनी थी अब तुम भी यहीं हो तो दोनों से कह देता हूँ. इतना बड़ा घर होने क बाद भी मंजू वहां छोटे से घर में अकेली रह रही है , ये कोई अछि बात है ? सोसाइटी में लोग बातें बना रहे हैं. मैंने पहले भी तुम्हे कहा था क उसे घर ले आओ.

शीना : पापा मैंने पहले भी बताया था क बुआ यहां नहीं आना चाहती और वो नहीं आएँगी.

बलजीत राइ : आखिर क्यों नहीं आएगी वो ? देखो मैं जनता हूँ वो मुझसे नाराज़ है पर तुम तो उसे मन सकती हो न . मैं भी उससे माफ़ी मांग लूंगा , बस उसे घर वापिस ले आओ. मुझसे बहुत गलतियां हुई हैं पर अब मैं सब ठीक करना चाहता हूँ.

शीना को तो एक बार अपने बाप की बात सुन कर बहुत ाचा लगा और उसके चेहरे पर ख़ुशी की लहर आ गयी मगर रुपाली क चेहरे पर व्यंग भरी हलकी सी मुस्कान थी क्यूंकि वो जानती थी क कुत्ते की पंच सीधी नहीं हो सकती .

शीना : सच पापा !!! फिर तो हम बुआ को कैसे भी कर क मन लेंगे और घर ले आएंगे . हम सुबह hi बुआ क पास चलेंगे . आप भी साथ चलना .

बलजीत राइ : पहले तुम सब जाओ , मैं गया तो शायद वो गुस्सा करे . एक बार वो यहाँ आ गयी तो मैं उसे मन hi लूंगा .

शीना : ये भी ठीक है , चची आप सुबह तैयार रहना . मैं आप और रीमा कल बुआ को घर ले कर आएंगे .

रुपाली : ठीक है बेटी कल हम चलेंगे .

शीना : चलो पापा , आज मैं आपको अपने हाथों से खाना लगा कर देती हूँ. चलिए .



शीना अपने बाप का हाथ पकड़ उसे खींचती हुई अपने साथ कमरे से बहार ले गयी. शीना तो बेचारी अपनी बुआ को घर लेन की बात से hi खुश थी . और उसे लग रहा था क उसका बाप सुधर गया है शायद. मगर उसे क्या पता था क मंजू को घर लेन क पीछे भी उसका कोई और hi इरादा है .
 
अपडेट 244



‘ अमित !! अमित !! उठो भी , कब तक सोते रहोगे ? तुम्हे आज एक्सरसाइज नहीं करनी क्या ? ‘ दीपिका ममी ने मुझे नींद से जगाया तो मैं ऑंखें माल्टा हुआ उठा. सामने दीपिका ममी को देख कर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी और वैसी hi मुस्कान उनके चेहरे पर भी .

अमित : गुड मॉर्निंग ममी जी .

दीपिका : गुड मॉर्निंग मुऊआआह्ह्ह्ह

दीपिका ममी ने जल्दी से मेरे होंठों पर एक छोटी सी किश कर दी . वैसे तो मुझे दीपिका ममी का किश करना हमेशा hi ाचा लगता था पर मौसी और बुआ का ख्याल आते hi मैं घबरा गया . मेरी नज़र जब बीएड पर गयी तो वहां बुआ और मौसी दोनों hi नहीं थी .

दीपिका : क्या देख रहे हो ? बुद्धू हो तुम भी , अगर कोई यहाँ होता तो मैं ऐसा करती ? वो दोनों अभी नीचे गयी हैं और बड़ी दीदी क साथ चाय पि रही हैं.

अमित : बच गए ,

दीपिका : क्यों बच्चू , निकल गयी हवा ? वैसे तो बड़ा शेर बनते हो .

दीपिका ममी ने मुझे चिढ़ाते हुए कहा तो मुझे भी जोश आ गया . वैसे भी उनके साथ मुझे हमेशा ाचा hi लगता था . एक अलग तरह का प्यार उनके साथ मुझे हमेशा hi महसूस होता था . मैंने दीपिका ममी की कलाई पकड़ी और उन्हें अपने ऊपर बिस्टेर पर गिरा लिया .

दीपिका : एआईई आआ छोडो ,, छोडो मिझे ..

अमित : क्या कह रही थी , बुद्धू ?? उम्म्म्म

दीपिका ममी हंस भी रही थी और मुझसे छूटने की कोशिश भी कर रही थी मैंने भी उन्हें मौजा न देते हुए उनके नरम गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए और किश करने लगा . दीपिका ममी वैसे तो छटपटा रही थी पर अब उनका हाथ मेरे बालों में चलने लगा था . ममी को किश करते करते मैं एक हाथ से उनके दूध मसलने लगा और दूसरे हाथ से उनकी गांड मसलने लगा .

दीपिका : उम्मम्मम उनमममम डीडीइइइइइ

दीपिका ममी ने कुछ पल किश करने क बाद अपने होंठ अलग किये और दरवाज़े की तरफ देख कर चीखी तो मैंने उन्हें एक पल में hi खुद से अलग कर दिया . मैंने दरवाज़े की तरफ देखा तो वहां कोई नहीं था जबकि दीपिका ममी मुझे देख कर ज़ोर ज़ोर से हंस रही थी .

दीपिका : हे हे हे , क्यों बच्चू ठंडा पद गया न जोश ? अब चुपचाप जा कर अपनी एक्सरसाइज करो. और आज तुम्हे प्रैक्टिस क लिए भी जाना पड़ेगा . कल्पना बता रही थी क तुम्हे वहां आने को कहा गया है पर तुम जा नहीं रहे हो. आज न गए तो तुम्हारी खबर मैं अचे से लुंगी .

दीपिका ममी इतना कह कर कमरे से निकल गयी . मैं भी सर खुजाता हुआ उठा और दूध का गिलास ख़तम किया जो ममी लेकर आयी थी. उसके बाद एक्सरसाइज करने चला गया जहाँ कल्पना पहले से लगी हुई थी.

कल्पना : क्या बात है , आज देर से आये हो ?

अमित : वो बस आँख hi देर से खुली .

कल्पना : वो तो होगा hi , बुआ जो साथ थी ,,,,, वैसे ये अछि बात नहीं . तुमने पहले क्यों नहीं बताया क मंजू मम तुम्हारी बुआ हैं? तुम तो जाते रहते थे न अक्सर उनके यहाँ .

अमित : अब मुझे कहाँ पता था क वो मेरी बुआ हैं. ये तो उस दिन जब मैं उनसे मिलने गया तो बातों बातों में उन्होंने अपनी फॅमिली एल्बम दिखाई तब मुझे पता चला उनके बारे में . मैंने तो उनकी फोटो तक नहीं देखि थी. और जो देखि भी तो वो बहुत पुराणी थी .

कल्पना : तुम्हारी लाइफ में इतने पंगे हैं यार , सच में तुम पर न एक फिल्म तो बननी hi चाहिए . वैसे इस तरह तो शीना रीमा और मोंटी भी तुम्हारे कजिन हुए न?

कल्पना की इस बात पर मैं खामोश हो गया . अब क्या जवाब दूँ इस बात पर , मोंटी ,, जिसको मैंने नाकारा बना दिया था वो मेरा भाई निकला. शीना और रीमा , जिन पर मैंने अपने प्यार की मोहर लगायी थी और उनकी ज़िन्दगी का पहला मर्द बन गया था. वो मेरी hi बहने निकली. इनके इलावा रुपाली और मेघा भी तो मेरी ताई लगती थी रिश्ते में . मैंने उनके साथ भी ......

कल्पना : ोये कहाँ खो गए ? तूने अभी उन दोनों को बताया क नहीं ? वैसे मुझे बहुत कुछ सुनने को मिला है तुम्हारे बारे में . कॉलेज चल क बात करेंगे . अभी पहले एक्सरसाइज कर लो . अब तो 20 दिन भी नहीं रह गए और तुम सब भूल कर लगे हुए हो मौज मस्ती करने .

अमित : हाँ यार ये तो है. कुछ दिनों से ठीक से प्रैक्टिस की hi नहीं. मैं आज से hi अखाड़े में एक्सरसाइज शुरू कर दूंगा . वैसे रीमा शीना को तुम अभी कुछ मत बताना .

कल्पना : ठीक है पर जल्दी बता दियो खुद hi. तुम तो लगता है बात hi नहीं कर रहे उससे .

मैं फिर एक्सरसाइज में लग गया मगर दिमाग में बस रीमा का hi ख्याल घूम रहा था . हम दोनों ने एक दूसरे का साथ देने की कस्मे खायी थी और अब मैं hi उसे अकेला छोड़ कर पीछे हैट रहा था . पर इसमें कसूर मेरा भी तो नहीं था . अब हम दोनों में जो रिश्ता निकल आया था उसके बाद तो हम दोनों का एक होने पॉसिबल hi नहीं था . खैर एक घंटा एक्सरसाइज क बाद हम तैयार होने चले गए . मेरे कमरे में तो अंकल और उनकी फॅमिली थी इस लिए मैं बहार hi हाथ मुँह धो कर नीचे चला गया .

‘ तो आ गए पहलवान , चल आजा ज़रा गाओं की सैर कर क आते हैं. तब तक नाश्ता भी रेडी हो जायेगा ‘ मैं नीचे आया hi था क अंकल चाय का गिलास रख कर मेरे पास आये और मुझे चलने को कहा. आंटी बुआ ममी और मौसी क साथ बातें करती हुई नाश्ते की तयारी में मदद कर रही थी . लड़कियां अभी उठ रही थी मगर बड़े सब उठ चुके थे . माँ और कामिनी ममी बच्चों को देख रही थी जबकि रीता मौसी ऊपर गयी थी सब आलसी लोगों को उठाने .

अमित : चलिए अंकल , पैदल चलेंगे या बाइक पर ?

राघव : बाइक hi ले ले यार , खेत तो दूर हैं न यहाँ से ? अब पैदल गए तो वापिस आने में देर हो जाएगी. लेट उठा वर्ण भैया क साथ hi निकल जाता .

मैंने बाइक निकली और अंकल को बिठा कर निकल लिया अपने खेतों की तरफ गाओं क बीच से होते हुए . अंकल तो गाओं की खूबसूरती देख कर hi खुश हो रहे थे और पुराणी बातों को यद् कर रहे थे जब वो पापा क साथ यहाँ आये थे . खेतों में पहुंचे तो बाबा घर जाने को तैयार थे मगर फिर अंकल को देख कर रुक गए . अजय मां और बाबा अंकल को बातें करते हुए खेत खलिहान दिखने लगे . फिर घर से नाश्ते क लिए फ़ोन आ गया और हम वापिस घर की और चल दिए . घर आने तक सब उठ चुके थे और नाश्ते की टेबल पर नाश्ता लग चूका था . बस फिर क्या था . दीपिका ममी दिव्या मौसी निधि दीदी परांठे बना रही थी और सब मिल कर खा रहे थे . राधा और नेहा दीदी किचन से खाने क टेबल तक की सप्लाई देख रही थी . इधर की बातें और हंसी मज़ाक में खाना भी हो गया . अंकल का फ़ोन बार बार बज रहा था पर आज तो वो भी सरे काम भूल कर बस यहीं रहने का मन बनाये बैठे थे . जब सब खाने से फ्री हो गए तो नैना दीदी और करुणा दीदी सब लड़कियों को इकठ्ठा करने लगी .

करुणा : चलो न दीदी आज सब साथ में बैठ कर कुछ खेलते हैं. रोज़ रोज़ कहाँ ऐसा मौका मिलता है और आज तो करिश्मा दीदी भी हैं यहाँ अपनी ब्रूस ली भी है. चलो न खेलते हैं.

निधि : तुम लोग खेलो मेरा मन नहीं है .

करुणा : क्या दीदी , आप भी न बोरिंग हो नेहा दीदी की तरह . करिश्मा दीदी आप मन नहीं कर सकती पहले hi कह देती हूँ मैं .

करिश्मा : पर मैंने खाना पेट भर क खाया है अब मुझसे खेला नहीं जायेगा .

नैना : तो हमने कौन सा कोई उछाल कूद करनी है दीदी . आप चलो तो सही .

करुणा और नैना दीदी करिश्मा दीदी को महका नहीं दे रही थी मन करने का . उनके साथ कल्पना तो पहले hi तैयार थी. क्यूंकि उसे पता था क वो मन करेगी तो क्या होगा उसके साथ .

करुणा : तू क्या देख रही है मेरी माँ की गुड़िया . चल तू भी ऊपर .

राधा बेचारी मन कहाँ कर सकती थी . पर जाते जाते उसकी नज़र मुझ पर hi थी . पर उसने नेहा दीदी का हाथ थम लिया

राधा : आप भी चलो न दीदी .

अब नेहा दीदी दूसरों को चाहे मन कर दे पर राधा को नहीं करती थी इस लिए वो भी चल दी .

करुणा : ोये तू वहां क्या बैठा देख रहा है? चल तू भी साथ , यहाँ बड़ों में बैठ कर क्या करेगा . मोहित तू भी चल .

करुणा दीदी ने मुझे और मोहित को भी चलने को कह दिया. हम दोनों भी उठ कर चल दिए उनके पीछे . हम सब मेरे hi कमरे में गए और नीचे ज़मीन पर hi बिस्तर गिरा कर जल्दी जल्दी से जगह बन दी . फिर सब को एक गोल घेरा बना कर बिठा दिया गया .

कल्पना : हम करने क्या वाले हैं दीदी ?

नैना : ट्रुथ एंड डरे खेलना है और क्या ? वैसे भी अब खाना खा कर और कुछ तो करने से रहे .

तभी करुणा दीदी ने एक बोतल उठा कर बीच में रख दी . सारा इंतज़ाम पहले hi कर चुकी थी दोनों .

‘ क्या खेलने वाले हो तुम सब यहाँ ? ‘ आवाज़ सुन कर सब ने दरवाज़े की तरफ देखा तो वहां निधि दीदी कड़ी थी .

करुणा : अभी तो आप मन कर रही थी ? अब कैसे मूड बन गया ? वैसे हम ट्रुथ एंड डरे खेलने वाले हैं. यहाँ बैठना है तो खेलना पड़ेगा पहले hi कह देती हूँ .

निधि : ठीक है दादी माँ , अब तुम्हे मन कैसे कर सकती हूँ . थोड़ा सा आगे हो के मेरे लिए भी जगह बनाओ.

निधि दीदी मेरे करीब आ गयी और मेरी साइड में बैठी करिश्मा दीदी ने थोड़ा खिसक कर जगह बनाई उनके लिए . मेरे दूसरी तरफ मोहित बैठा था . और मेरे सामने राधा क साथ नेहा दीदी . निधि दीदी घुटने मोड़ कर एक तरफ पाऊँ करते हुए मेरी साइड को झुक कर बैठ गयी जिससे वो मेरे और भी करीब हो गयी .

करुणा : सब पहले hi साफ़ साफ़ सुन लो. बोतल का ढक्कन जिस तरफ होगा उसे ट्रुथ या डरे चुनना होगा . और एक बार जो चुन लिया दूसरी टर्न आने पर दूसरा चुनना होगा . अगर कोई मन करेगा तो उसको सजा दी जाएगी चाहे वो कोई भी हो.

मोहित : सजा क्या होगी ?

नैना : वो हम बाद में देखेंगे , फ़िलहाल इतना सुन लो क मुर्गा बना दिया जायेगा अगर तुम दोनों ने मन किया तो . बाकियों का बाद में . चल घुमा करुणा .

नैना दीदी क कहते hi करुणा दीदी ने बोतल घुमा दी और बोतल का ढक्कन आ कर रुका कल्पना पर .

कल्पना: मर गयी !!!

करुणा : तो डार्लिंग क्या चूसे करना है तुम्हे ?

कल्पना करुणा दीदी क इरादे अचे से जानती थी और उनकी मुस्कान से भी साफ़ पता चल रहा था क वो कुछ न कुछ तो करने वाली हैं .

कल्पना: ट्रुथ .

करुणा : बड़ी चालक बनती हो , कोई न . तो बताओ लेडी डॉन क तुम्हारा कोई बर्फ है या नहीं ?

कल्पना : no , मेरा कोई बर्फ नहीं .

नैना : कोई तो पसंद होगा ?

कल्पना : सॉरी दीदी एक hi सवाल .

करुणा : कोई न , अगली बार देखती हूँ तुझे .

करुणा दीदी ने फिर से बोतल घुमाई और इस बार आ कर रुकी निधि दीदी पर .

करुणा : तो दीदी आप क्या करना चाहेंगी ?

निधि : ट्रुथ

करुणा : दीदी से मैं पूछूँगी ,

निधि : क्या सब तुम दोनों hi करोगी ? बाकि सब नहीं हैं यहाँ ? नेहा और राधा को भी तो मौका दो.

नैना : ठीक है , नेहा तू hi पूछ ले

नेहा : दीदी आप कारन और अमित में से किसे ज्यादा प्यार करती हैं ?

नेहा दीदी क सवाल से एक बार को सब हैरान हुए क ये कैसा सवाल है . पर निधि दीदी क चेहरे पर मनो कोई भाव नहीं था . उल्टा वो एक पल शांत होती हलकी सी स्माइल चेहरे पर ले आयी

नैना : ये कैसा सवाल हुआ नेहा ?

निधि : कोई बात नहीं , मैं जवाब दूंगी. कारन मेरा सागा भाई ज़रूर है पर सचाई ये है क अमित ने जो कुछ मेरे लिए किया है वो शायद कोई और कर hi न पता . आज मैं जो भी हूँ इसी की वजह से हूँ . मैं अमित की तुलना किसी से भी नहीं कर सकती . ये मेरे लिए जो है ( पति ) वो कोई और नहीं हो सकता .

दीदी ने मेरी तरफ प्यार से देख रही थी और प्यार से अपना हाथ मेरे बालों में फिराया. मैं तो दीदी क विचार सुन कर hi गदगद हो गया था अंदर से क वो मुझे कितना प्यार करती हैं .

नेहा : थैंक्स दीदी . मुझे बस यही जानना था .

करुणा : वैसे इसने ऐसा क्या कर दिया जो आप इस बन्दर की इतनी तारीफ कर रही हैं .

निधि : तू न मर खायेगी अब एक शब्द भी और कहा तो . चल बोतल घुमा .

करुणा : तो अब आप भी धमकी देने लगी माँ की तरह ? कोई बात नहीं .....

इस बार बोतल घूमी और आकर रुकी मोहित पर .

मोहित : फास गया यार

नैना : तो , ट्रुथ या डरे ?

मोहित : डरे

कल्पना : इस बार मैं बताती हूँ दीदी , तो मियां मजनू ज़रा मजनू की एक्टिंग hi कर क दिखा दो .

मोहित : कुछ और बोलो मैं ये नहीं करने वाला .

कल्पना : करते हो या बताऊँ दीदी को ?

करिश्मा : क्या बताना है .

मोहित : कुछ नहीं दीदी ये बस ऐसे hi बोलती रहती है. ( कल्पना को )तुझे तो मैं देखता हूँ .

उसके बाद मोहित उठा और अपने सर पर एक चुनरी बांध कर लोअर को एक तंग में फोल्ड कर अपनी T-shirt खींचता हुआ मजनू एक्टिंग करने लगा .

मोहित : लाइलाहा ,,, लाइलाहा ,, देख डेरा मजनू आया है लैलाआआ .....

मोहित ने सच में अछि एक्टिंग की और हम सब तालियां बजने लगे .

करुणा : जियो मेरे शेर शाबाश ,,, देखा दीदी ( करिश्मा ) आपका भाई कितना टैलेंटेड है. आप भी तैयार रहिये अपना टैलेंट दिखने क लिए .

कल्पना : वाकई यार कमल कर दिया , बस नाम गलत ले लिया वर्ण तुझे इनाम ज़रूर मिल जाता लैला से .

करिश्मा : किसकी बात कर रही हो कल्पना ?

मोहित : छोडो दीदी तुम भी किसकी बातों में लग गयी . चलो दीदी बोतल घुमाओ .

करुणा ने फिर से बोतल घुमाई और इस बार करिश्मा दीदी की hi टर्न आ गयी.

करुणा : या मारा , चलिए दीदी अब आपकी बरी . आप बोलो क्या चूसे करती हो .

करिश्मा : प्लीज ये एक्टिंग वेक्टिंग मुझसे नहीं होगी . तुम सवाल पूछ लो जो पूछना है .

नैना : तो बताइये अपना कोई सीक्रेट जो कोई नहीं जनता .

करिश्मा : मम मेरा कोई ऐसा सीक्रेट है hi नहीं .

करुणा : कॉमन दीदी , यहाँ हम सब hi तो हैं. क्या हम पर भरोसा नहीं है आपको ?

करिश्मा : ऐसी बात नहीं है.

निधि : अगर तुम्हे ठीक नहीं लगता तो रहने दो करिश्मा .

करिश्मा : पता नहीं आप लोग क्या सोचोगे पर मैंने ज़िन्दगी में पहली बार किसी पर हाथ उठाया और उसके लिए मैं अभी तक खुद को माफ़ नहीं कर प् रही और न hi कभी कर पाऊँगी .

करिश्मा दीदी भावुक हो कर ये सब कह रही थी और लगातार मुझे hi देख रही थी . मैंने उन्हें इशारे से रोकने की कोशिश की पर वो जैसे किसी और hi लौ में थी.

करुणा : किसको बजा दिया दीदी ? किसी लोफर ने छेड़ा था क्या ?

करिश्मा : लोफर नहीं है वो , वो तो मेरी मदद कर रहा था मैं hi उसे गलत समझ बैठी .

मोहित : आप किसकी बात कर रही हो दीदी ?

करिश्मा : उसी की जो तुम्हारे साथ बैठा है. अनजाने में मैंने इसी पर हाथ उठा दिया इसे बहुत गलत समझ लिया था मैंने . जबकि ये मुझे उस नरक से निकलने hi गया था वहां. ी सरररय ,,,,, ी ऍम सॉरी अमित ,,, ी ऍम सॉरी . हहहह हहहहह हहहह

करिश्मा दीदी खुद को कण्ट्रोल नहीं कर पायी और फुट फुट कर रोने लगी. निधि दीदी ने उन्हें अपने साथ लगा लिया और मैं उन्हें दिलासा देने लगी . जबकि बाकि सब मेरी तरफ देख रहे थे . नेहा दीदी की आँखों में तो जैसे गुस्सा और दर्द दोनों hi था और वैसा hi कुछ राधा की आँखों में पर उसके चेहरे पर मुस्कान थी. जैसे उसे मुझ पर गर्व हो रहा हो .

अमित : दीदी आप कब उस बात को छोड़ोगी ? मैंने कहा था न उस बात को भूल जाओ. मैं भी तो भाई हूँ न आपका जैसे मोहित है

करिश्मा : तो फिर इतना दूर दूर क्यों रहने लग गया है हम सब से ? मैं अछि तरह जानती हूँ तुम उसी बात पर नाराज़ हो अंदर से .

अमित : कसम से दीदी ऐसा कुछ भी नहीं है . आपके सामने hi तो है सब . ऐसा क्यों नहीं करती क आप यहीं रह लो हमारे साथ . तब आपको यकीन आएगा मेरी बात पर .

करुणा : ok ok , माहौल कुछ ज्यादा hi सीरियस हो गया है . इसे चेंज करना पड़ेगा . चलो देखते हैं अब किसकी बरी आती है .

करुणा दीदी ने एक बार फिर से सबका ध्यान गेम की तरफ किया और बोतल घुमा दी. और लग गयी मेरी भी .

करुणा : अब बता बच्चू तेरे साथ क्या सलूक किया जाये .

अमित : ट्रुथ

नैना : डरे ,, तुम्हे कर क दिखाना पड़ेगा .

अमित : पर मैंने ट्रुथ कहा था

करुणा : दीदी ने बोलै न डरे तो डरे , तू अपना सच अगली बार बता देना . बोलो दीदी क्या करवाना है इससे ?

नैना : पर्पस

अमित : क्या ?????

नैना : सुना नहीं ? पर्पस कर क दिखाओ हमें .

करुणा : चल बच्चू शाबाश हो जा शुरू . और अचे से करियो , मोहित से ज्यादा no. आने चाहिए तुम्हारे .

अमित : पर मैं ऐसे कैसे , मैंने कभी ये नहीं किया .

नैना : तब तो और भी मज़ा आएगा . चल करुणा इसकी मदद कर दे , अकेले से कहाँ होगा. ये है तेरी हेरोइन और तू इसे पर्पस करेगा .

कल्पना : ये क्या दीदी , करुणा दीदी क साथ कैसे कर पायेगा वो . वो तो बहिन हैं न. बहिन को कैसे पर्पस कर सकता है?

करुणा : तो क्या हुआ ? एक्टिंग hi तो करनी है. वैसे भी यहाँ सब बहने hi तो हैं .

कल्पना : अगर बुरा न मनो तो मैं अमित की हेल्प कर देती हूँ वैसे भी मैं बहिन थोड़ी हूँ . मेरे साथ ज्यादा कम्फर्टेबले रहेगा.

करुणा ( मन में ) तुझे क्या मालूम ये तो मेरी नाथ भी उतर चूका है और तू पर्पस की बात करती है.

नैना : ोये होये , लगता है हमारी ब्रूस ली को पर्पस करवाने की जल्दी है. करले भाई कर ले इसके साथ hi कर ले .

नैना दीदी ने ये कहते हुए करुणा दीदी कक इशारा किया और दोनों हसने लगी. जबकि कल्पना शर्मा गयी थी .

मोहित : चल यार अब कर भी दे .

मैं खड़ा हुआ तो कल्पना भी मेरे साथ कड़ी हो गयी . अब कल्पना को पर्पस करने का चाहे एक्ट hi करना था पर मुझे अजीब सी फीलिंग आने लगी थी. ऊपर से मैंने कभी पर्पस किया भी कहाँ था . फिर भी मैंने पूरी कोशिश की अचे से करने की और कल्पना का हाथ अपने दोनों हाथों में पकड़ कर उठाया और उसकी आँखों में देख कर कहा .

अमित : कल्पना ,, ी लिखे यू ,, क्या तुम मेरे साथ फ्रेंडशिप .....

करुणा : ोये क्या बोरिंग सा डायलाग मर रहा है . ज़रा अचे से कर , पता चलना चाहिए तू अपनी लेडी डॉन को पर्पस कर रहा है . थोड़ी लव शव वाली फीलिंग लाओ .

मैंने फिर से कल्पना का हाथ पकड़ा और दुबारा से वही बोलै तो करुणा दीदी उठ कर करीब आ गयी .

करुणा : ले इसे पकड़ , मन ले ये रोज है और ज़रा घुटने पर बैठ कर पर्पस कर . ऐसे पर्पस कर क कल्पना मन कर hi न पाए .

करुणा दीदी ने मेरे हाथ में एक कंगी पकड़ा दी और मुझे डायरेक्शन दी . मैंने इस बार एक घुटना ज़मीन पर टिका कर उस कंगी को दोनों हाथों में पकड़ कर आगे करते हुए कल्पना की आँखों में देख कर कहा .

अमित : कल्पना ,, ी लिखे यू . क्या तुम मुझे अपने दिल में थोड़ी सी जगह डौगी ? ताकि मैं उसे प्यार से भर सकूँ .

कल्पना : एसससस

कल्पना ने इतना hi कहा था क करुणा दीदी और नैना दीदी तालियां मरने लगी .

नैना : जियो मेरे शेर , कमल कर दिया . देख तो ज़रा इस जंगली बिल्ली को कैसे भीगी बिल्ली बन गयी है अब .

कल्पना वाकई में शर्मा रही थी . सब तालियां बजा रहे थे . कल्पना शर्मा कर दुबक गयी नेहा दीदी की बगल में पर करुणा दीदी कहाँ उसे छोड़ने वाली थी. वो उसके साथ hi बैठ गयी और उसे तंग करने लगी .

करुणा : क्यों अब क्या हुआ डार्लिंग. बड़ी उछाल रही थी . पसंद है न हमारा भाई ?

कल्पना : बस भी करो दीदी , ये तो सिर्फ नाटक था .

करुणा : हाँ नाटक था , इसी लिए तेरे गाल

इतने लाल हो रहे हैं. वैसे जोड़ी अछि है , एक पहलवान दूसरी जुडो मास्टर

मैं वापिस निधि दीदी क बगल में बैठा तो वो प्यार भरी नज़रों से मुझे देख रही थी .

निधि ( मन में ) हाउ रोमांटिक आईटी वास् , काश मुझे भी इसी तरह कभी तुम ......

नैना : चल यार अब नेक्स्ट देखते हैं किसकी बरी अति है .

नैना दीदी ने hi इस बार बोतल घुमाई और वो आकर रुकी राधा पर . राधा अपनी टर्न देख कर hi थोड़ा घबराई पर फिर शांत हो कर मुझे देखा और फिर नैना दीदी को.

नैना : तो अब आ गयी बरी हमारी माँ की गुड़िया की .

करुणा : इसे तो मैं देखती हूँ दीदी

निधि : नहीं , राधा को कोई तंग नहीं करेगा , वो जो करना चाहे उसे करने दो . बोलो राधा तुम्हे क्या करना है .

राधा : ट्रुथ

निधि : तो खुद hi बता दो ऐसी बात जो तुम बताना चाहती हो.

राधा ने एक बार निधि दीदी की तरफ देख कर हाँ में सर हिलाया और मुझे देखने लगी. कुछ देर खामोश रहने क बाद राधा बोलने लगी .

राधा : मैंने कभी भगवन नहीं देखा पर माँ कहती है भगवन किसी न किसी रूप में आते हैं जब हम मुसीबत में होते हैं. कॉलेज में पहले hi दिन मेरे साथ रैगिंग क नाम पर बदतमीज़ी की जा रही थी . सब थे वहां मगर कोई कुछ नहीं बोल रहा था. तब भगवन की तरह वहां आ कर अमित ने मेरी इज़्ज़त बचाई और अकेले hi उन सब से भीड़ गया. और उस दिन जब मेरा किडनैप किया गया था तब मुझे लगा था क मैं अब ज़िंदा नहीं बचूंगी और बच भी जाती तो उस सब क बाद मैं खुद hi अपने आप को ख़तम कर लेती . उस वक़्त मैंने भगवन को यद् किया . और फिर एक बार वहां अमित भगवन की तरह आया और मुझे बचा लिया . एक उम्मीद सी थी क अमित मुझे बचने आएगा और हुआ भी वैसा hi मगर उसमे वो खुद बुरी तरह घायल हो गया . उस रत हॉस्पिटल में मैं पहली बार इतना बेबस और मजबूर थी क जितना कभी नहीं हुई. मेरे सामने मेरा भगवन मौत की आगोश में जा रहा था . मैं ऊपर वाले से बस यही दुआ कर रही थी क चाहे तो मेरी जान लेले पर अमित को कुछ न हो . अगर इसे कुछ हो जाता तो मैं भी ज़िंदा नहीं बचती . मेरे लिए भगवन अगर है तो वो अमित hi है. मैं और कुछ नहीं कहना चाहती .

राधा की आँखों में आंसू आ गए थे बात करते करते और उसकी बातें सुन कर मेरा भी दिल भर आया था . अगर इस वक़्त आसपास कोई न होता तो मैं यकीनन उसे अपने सीने से लगा लेता . राधा की वेदना मेरा दिल अचे से महसूस कर रहा था . और बाकि भी सब खामोश थे . तभी निधि दीदी अपनी जगह से उठी और राधा क पास बैठ के उसे गले लगा लिया . नेहा दीदी भी एक साइड से राधा क गले लगी हुई थी .

निधि : मत रो राधा मत रो , मैं समझ सकती हूँ तेरी हालत . मैं भी तो गुज़री हूँ उस मंज़र से . ये सच में फरिश्ता है .

नैना : आप भी गुज़री हैं से क्या मतलब दीदी ?

निधि : कुछ नहीं , जाओ पानी का गिलास लेकर आओ राधा क लिए .

राधा को देख कर मुझसे भी कण्ट्रोल नहीं हुआ तो मैं भी उठ कर कमरे से बहार निकल गया . थोड़ी देर बाद बाकि सब भी नीचे आ गए . कल्पना ने मुझे यद् दिलाया क हमें कॉलेज जाना है तो मैं भी तैयार हो कर आ गया और हम दोनों बाइक पर निकल लिए शहर की तरफ .

दूसरी तरफ शीना सुबह से hi एक्सीटेंड थी आज मंजू को घर लेन क लिए . हालाँकि उसे उम्मीद काम hi थी क वो वहां आएगी पर अपने बाप को पश्चाताप करता देख उसके दिल में थोड़ी उम्मीद तो थी hi . शीना ने रुपाली और रीमा को भी तैयार कर लिया था . शीना ने मंजू को सरप्राइज देने की सोची और इसे फ़ोन तक नहीं किया और पहुँच गयी अपनी बहिन और चची को साथ लेकर . शीना जैसे hi मंजू के

घर पहुंची तो वहां लॉक देख कर उसकी साडी प्लानिंग फ़ैल हो गयी . मंजू को फ़ोन कर क उसने पता करने की कोशिश की तो मंजू ने उसे बस इतना hi बताया क वो ज़रूरी काम से आउट ऑफ़ स्टेशन है . वो अमित क साथ है ये बात उसने नहीं बताई क्यूंकि वो अमित क बारे में उसको बताना नहीं चाहती थी . शीना मायूस हो कर वापिस लौट गयी. बलजीत राइ घर पर वेट कर रहा था क शायद उसकी बेटी मंजू को लेकर hi आएगी पर जब उसने आ कर बताया क मंजू आउट ऑफ़ स्टेशन है तो उसे ये बात अजीब लगी. क्यूंकि मंजू की ज़िन्दगी में और तो कोई था नहीं कोई रिश्ते नाते दर फिर वो कहाँ गयी . बलजीत राइ घर से निकल गया और अपने आदमी को मंजू का पता लगाने को कहा . बलजीत राइ अपने फार्महाउस पर hi बैठा था क दोपहर तक वो आदमी इनफार्मेशन ले कर बलजीत राइ क पास आ गया .

बलजीत: कहो क्या खबर लाये हो ?

आदमी : सर ये तो अभी पता नहीं चला है क वो कहाँ हैं. पर वो भी पता लगा hi लूंगा शाम तक . अभी बस इतना hi पता चला है क वो किसी क सत्य गयी हैं .

बलजीत: किसके साथ गयी है वो ?

आदमी : जी उनके पड़ोस से पता चला है क एक औरत और एक लड़का कल सुबह hi उनके घर आये थे और बाद में वो उनके साथ hi चली गयी . और लड़का बाइक पर था . हो न हो ये लड़का वही हो सकता है सर .

बलजीत: क्या ????? इसका मतलब कोई खास hi रिश्ता बना लिया है उसके साथ इसने . तुमने अभी तक मुझे उस लड़के क बारे में पूरी इनफार्मेशन नहीं दी . क्या कर रहे हो तुम .

आदमी : कॉलेज में छुट्टियां हैं न सर इसी लिए दिक्कत हो रही है . पर मैंने बात की है , कल तक उसका रिकॉर्ड निकलवा कर उसकी फॅमिली की भी पूरी डिटेल आपको दे दूंगा .

बलजीत: कल मुझे पूरी इनफार्मेशन चाहिए समझे , वर्ण मुझे शकल न दिखाना . अब जाओ यहाँ से .



बलजीत ( मन में ) ये लड़का आखिर है कौन? मंजू तो ऐसी नहीं थी फिर वो किसी क साथ ऐसे hi कैसे जा सकती है. कुछ तो ज़रूर है . शीना से भी सीधा पूछ नहीं सकता वर्ण वो शक करेगी . जो भी हो जल्द से जल्द इस लड़के का पता चलना चाहिए .
 
अपडेट 245



‘ तुम क्या आज कल गाओं में hi तयारी कर रहे हो जो यहाँ आना नहीं होता तुम्हारा ? वैसे वो भी ठीक hi है पर फिर भी थोड़ा स्टाइल और रूल्स का फरक है तो तुम्हे यहाँ भी पूरा समय देना चाहिए वर्ण मैच में गलती हो सकती है . तुम जानते हो न सबको कितनी उम्मीदें हैं तुमसे ‘ कॉलेज इंडोर स्टेडियम में प्रैक्टिस करते वक़्त कोच साहब भी आये थे तो आज मुझे वहां देख कर उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया और समझने लगे .

अमित : जी सर , मैं पूरी कोशिश करूँगा ाचा खेलने की .

प्रोफ व् : तो कैसी चल रही है प्रैक्टिस? कोच साहब आपका शागिर्द ठीक से तो कर रहा है न .

वरिंदर सर दरवाज़े से अंदर आते हुए हमारे करीब आ गए . मैंने आगे बढ़ कर उनके पाऊँ छुए तो उन्होंने मुझसे आशीर्वाद दिया .

कोच : ये तो पहले hi सब कुछ सीखा हुआ है सर , इसे तो बस पॉलिशिंग की हो ज़रूरत थी जो हम कर रहे हैं. ट्रेलर तो आप भी देख hi चुके हैं.

वरिंदर : वो तो ठीक है मगर इस बार मुकाबले में बहुत सरे कॉम्पिटिटर मिलने वाले हैं

कोच : वो तो है सर पर फिर भी ये कर लेगा . इस केटेगरी में एक तो खिलाडी काम hi होते हैं और जो होते हैं उनमे न इतनी फिरती होती है न लचक. और कई तो गलत आदतों में फंस भी जाते हैं. हमारा अमित इस मामले में हीरा है. दो पेच तो इसे बेहतर आते हैं , मैं तो कायल हूँ उन लोगों का जिन्होंने इसे सिखाया है. इसे बस प्रैक्टिस की hi ज़रूरत है .

वरिंदर: तो बरखुरदार सुन लिया न अपने गुरु का उपदेश ? अब थोड़ा और भी म्हणत करो इस पर .

अमित : जी सर , मैं ज़रूर करूँगा .

कुछ देर वरिंदर सर वहां रहे और मुझे प्रैक्टिस करते हुए देखते रहे . 2 घंटे एक्सरसाइज और कुश्ती करते हुए जिस्म पसीना पसीना हो गया था . मेरे फ्री होने से पहले कल्पना फ्री हो के हमारे वाली साइड hi आ गयी थी .

कल्पना : आज कुछ ज्यादा hi टाइम नहीं लगा दिया तुमने ?

अमित : इतने दिनों बाद तो आज सही से प्रैक्टिस की है . टाइम का किसे ख्याल रहता है जब मन लगा हो .

कल्पना : अब जल्दी से फ्रेश हो लो फिर हमें चलना भी है .

अमित : हाँ हाँ , घर hi तो जाना है . बस थोड़ी देर और बैठने दो .

कल्पना : नहीं , घर तो बाद में जायेंगे पहले मेरे साथ चलो .

अमित : कहाँ ?

कल्पना : बड़े दिन हो गए यार बहार कुछ खाया नहीं है. आज दिल कर रहा है कहीं पिज़्ज़ा खाने का .

अमित : तुम्हे अपनी तैयारी करने है या बहार का खाना खा क बीमार होना है .

कल्पना : पिज़्ज़ा नहीं खाना तो जूस तो पि hi सकते हैं न ? बस वही पीला देना . मेरा मूड है आज थोड़ा बहार जाने का .

अमित : क्यों ? घर पर बोर हो गयी हो क्या ?

कल्पना : no चांस , वहां तो इतना मज़ा अत है क ऐसे लगता है हमेशा हमेशा क लिए वहीँ रह जॉन .

अमित : ो मैडम ज्यादा सपने मत देखो. मैं ज़रा फ्रेश हो क आया फिर चलते हैं .

मैं जा कर फ्रेश हुआ और फिर हम कॉलेज से निकल पड़े .

अमित : अब बोलो कहाँ चलना है ?

कल्पना : कहीं भी , जहाँ हम कुछ देर आराम से बैठ कर बातें कर सकें .

अमित : अरे यार बातें तो घर भी कर सकते हैं न .

कल्पना : वहां टाइम कहाँ मिलता है फिर . तुम बस चलो और किसी अचे से रेस्टोरेंट पे रोकना .

मैं कॉलेज से थोड़ी दूरी पर बने रेस्टोरेंट पर ले गया जहाँ अक्सर कॉलेज क लड़के लड़कियां बैठते थे . पर छुट्टियों की वजह से इस वक़्त इक्का दुक्का hi लोग थे .

अमित : अब बोलो क्या बात करनी है तुम्हे .

कल्पना : पप पहले कुछ आर्डर तो कर लो , आराम से बात करते हैं न .

अमित : तुम भी अजीब हो , ाचा बताओ क्या आर्डर करना है .... . भाई साहब ज़रा सुनिए तो ..

मैंने वेटर को बुलाया और कल्पना ने हम दोनों क लिए जूस आर्डर कर दिया. कल्पना अपने हाथों की उँगलियों को मसल रही थी . उसको देख कर मुझे लगा क शायद वो कोई बात करना तो छह रही है पर कर नहीं प् रही .

अमित : क्या बात है कल्पना , तुम किसी बात से परेशां हो?

कल्पना : नहीं तो , तुम्हे ऐसा क्यों लगा ?

अमित : बेवजह अपने हाथों की उंगलियां दबा दबा क क्या करने की कोशिश कर रही हो फिर ?

कल्पना : ये तो ,,, ये वो आज ज़रा प्रैक्टिस करते वक़्त थोड़ा यहाँ चोट आ गयी थी तो ,, इससे ाचा लगता है .

अमित : पक्का कोई बात नहीं है ?

कल्पना : हम्म्म

अमित : अब बोलो भी ,, क्या बात करनी थी तुम्हे?

कल्पना : करती हूँ , तुम्हे कोई जल्दी है क्या ?

अमित : हमें घर भी जाना है .

कल्पना : हाँ पहले जूस तो आने दो फिर बात भी करती हूँ .

अमित : अजीब हो तुम भी , हहहह .

कल्पना : एक बात पूछूं ?

अमित : पूछो

कल्पना : क्या तुमने सच कभी किसी को पर्पस नहीं किया ?

अमित : अब क्या लिख कर देना पड़ेगा ?

कल्पना: गुस्सा क्यों करते हो ? वैसे लगा तो नहीं कर तुम पहली बार कर रहे हो ,,, मतलब जैसे तुमने पूछा .. सच कहूं तो मैं फ्लैट हो गयी थी .

अमित : तुम भी न ,,, वो तो बस ऐसे hi हो गया . और तुम तो मेरी दोस्त हो अब दोस्त से थोड़ा hi दर लगेगा . सच में किसी को पर्पस करना होता तो मैं कभी कर hi न पता .

कल्पना : सच में hi तो था

अमित : सच में कहाँ ,,, वो तो बस नाटक था .

कल्पना : पर बहुत ाचा था काश ...

‘ मैडम जूस , सर आपका ‘ कल्पना की बात बीच में hi रह गयी जब वेटर ने हम दोनों क आगे जूस क गिलास रख दिए .

अमित : हम्म्म , काश क्या ?

कल्पना : वो ,, काश तुम सच में ऐसे hi पर्पस करते तो कितने अचे लगते .

अमित : छोडो यार ये सब ,, प्यार व्यार मेरी किस्मत में नहीं है . मैं ऐसे hi ठीक हूँ.

( मन में ) प्यार क नाम पर तक़दीर बार बार मेरा hi मज़ाक बना रही है . शायद मेरी तकदीर में ये सब है hi नहीं . मेरी वजह से दूसरों को भी दर्द और रुसवाई मिल रही है. पहले कजरी और अब रीमा . काश रीमा मेरी बहिन न होती.

कल्पना : किस्मत किसने देखि है , तुम्हे कोशिश तो करनी चाहिए क्या पता तुम्हारी किस्मत तुम्हारे एक कदम उठाने से hi बदल जाये .

अमित : कोई बात करो यार ये सब मुझे नहीं सुन्ना . और सुनाओ प्रैक्टिस कैसी रही आज ?

कल्पना : सब ठीक था , टीम बात मत बदलो . वैसे तुम्हे कैसी लड़की पसंद है . ी मैं सीधी सधी या मॉडल टाइप या कोई स्पोर्ट्स पर्सन .

अमित : ये तुम क्या लेके बैठ गयी हो यार . चलो चलते हैं . देखो मेरा जूस ख़तम भी हो गया और तुम अभी तक हाथ में लिए बैठी हो .

कल्पना ( मन में ) जूस hi नज़र आ रहा है और जो दिल हाथ पे लिए बैठी हूँ वो नहीं दिख रहा तुम्हे ? बुद्धू कहीं का .

कल्पना : पी रही हूँ न , तुम्हे जल्दी किस बात की है ?

कल्पना मुँह बनती हुई थोड़ा थोड़ा कर क जूस पिने लगी , इतने में मेरा मोबाइल पर कॉल आने लगी. ये कॉल रुपाली की थी पहले मैंने सोचा क रहने दूँ , कहीं रीमा hi न फ़ोन कर रही हो . फिर सोचा हो सकता है उन्हें मेरी ज़रूरत हो कोई हेल्प चाहिए हो तो मैंने फ़ोन उठा लिया .

अमित : hello

रुपाली : hello अमित , तुम इस वक़्त कहाँ हो ? क्या तुम मुझे मिल सकते हो ? बहुत ज़रूरी है

रुपाली की आवाज़ से लग रहा था क जैसे वो परेशां है .

अमित : हाँ हाँ , आप बताइये क्या काम है ?

रुपाली : तुम मुझसे आ कर मिलो मैं फ़ोन पर नहीं बता सकती .

अमित : ठीक है , बोलिये कहाँ आएँगी आप ?

रुपाली : तुम बताओ उस वक़्त कहाँ मिल सकते हो ? क्या तुम्हारे फ्लैट पर आ जॉन?

अमित : नहीं , हम कहीं बहार मिल लेते हैं.

रुपाली : ठीक है क्सक्सक्सक्स रेस्टोरेंट में आ जाओ . वहां बैठ कर बात कर लेंगे .

अमित : ठीक है मैं 15 मिनट में वहां पहुँच जाऊंगा .

उसके बाद मैंने कॉल कट कर दी. मेरी नज़र कल्पना पर पड़ी तो वो मुझे hi देख रही थी .

कल्पना : किसका फ़ोन था?

अमित : वो मेरी एक आंटी का फ़ोन था उन्हें कुछ काम है मेरे साथ . मुझे जाना होगा . तुम यहीं बैठ कर मेरा वेट करो तब तक .

कल्पना: अब ये कौन सी आंटी आ गयी तुम्हारी यहाँ ? कहीं कोई गफ तो नहीं है ?

अमित : क्या यार तुम भी ,, मैंने कहा न मेरा ऐसा कोई चक्कर नहीं है . तुम यहाँ रुको मैं आधे घंटे में वापिस आ जाऊंगा .

कल्पना : मैं भी साथ चलूंगी , आंटी hi है न तो मैं भी मिल लुंगी .

अमित : नहीं , उन्हें मुझसे कोई ज़रूरी काम है . वो अकेले मिलना चाहती हैं . तुम रुको मैं अभी आ जाऊंगा .

मैं कल्पना को रुपाली क बारे में नहीं बताना चाहता था . क्यूंकि वो जानती रुपाली को , ऐसे में ये बात रीमा तक पहुँच सकती थी . वैसे भी रुपाली को कोई ज़रूरी बात करनी थी अकेले में वर्ण वो मुझे अपने घर आने को भी कह सकती थी .

कल्पना ( मन में ) अगर आंटी होती तो मुझे साथ ले जाने में क्या दिक्कत थी , ज़रूर कोई लड़की hi होगी इसी लिए ऐसे छुपा रहा है . कोई बात नहीं मैं भी देखती हूँ किस्से मिलने जा रहे हो .

कल्पना : पर मैं यहाँ अकेली बोर हो जाउंगी .

अमित : तो ऐसे करो तुम अपनी फ्रेंड सीमा को यहाँ बुला लो तब तक .

कल्पना : ठीक है , तुम्हे इतना ज़रूरी जाना है तो जाओ मैं एडजस्ट कर लुंगी .

मैं कल्पना को वहीँ छोड़ के बाइक ले कर निकल गया . रुपाली ने जो जगह बताई थी वो 10 मिनट्स का hi रास्ता था यहाँ से . मैं सीधा वहीँ पहुँच गया और रुपाली का वेट करने लगा . ये एक बढ़िया रेस्टोरेंट था जहाँ प्राइवेसी क लिए अलग से केबिन अवेलेबल थे . थोड़ी देर वेट करने क बाद वहां रुपाली भी आ गयी और हम दोनों एक केबिन में चले गए . रुपाली हमेशा की तरह सदी पहने खूबसूरत लग रही थी पर उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें थी. आज रुपाली से बात करने में भी मुझे झिझक सी हो रही थी. हमारे बीच जो कुछ हो चूका था उसके बाद अब मुझे उनसे नज़रें मिलाने में झिझक महसूस हो रही थी. क्यूंकि अब मैं जनता था क वो रिश्ते में मेरी ताई लगती हैं .

रुपाली : तुम कैसे हो ? इतने दिनों से थे कहाँ ? फ़ोन तक नहीं उठा रहे तुम न रीना का रीमा का . कोई प्रॉब्लम है क्या ?

अमित : नहीं वो बस मैं गाओं में hi हूँ न आज कल छुट्टियों की वजह से . आप बताइये क्या काम था ? आप किसी टेंशन में लग रही हैं .

रुपाली : बलजीत वापिस आ गया है . और कल उसने मेरे साथ फिर से वही सब करने की कोशिश .....

रुपाली की आँखों में आंसू आ गए और वो बात करते करते रोने लगी . मैंने उसके आंसू पोछने की कोशिश की . उनकी हालत पर मुझे बुरा भी लग रहा था और बलजीत राइ जो मेरे बड़े तय थे रिश्ते से उन पर गुस्सा भी आ रहा था .

अमित : खुद को सम्भालिये , ऐसे रोने से क्या होगा . आपको मजबूत बनना होगा .

रुपाली : मुझसे ये सब नहीं सहा जाता , अपनी बेटियों की वजह से मैं इतने साल ये सब सेहती रही हूँ. पर अब मुझे उनका बारे में भी दर लगने लगा है . कहीं वो मेरी बेटियों क साथ भी ..... और अगर उसने रीमा और रीना को इस बारे में बता दिया तो मेरी इज़्ज़त क्या रह जाएगी ? मैं ज़िंदा नहीं रह पाऊँगी अगर उसने ऐसा किया तो . वो मुझे बार बार इसी बात कर दर दिखता है . अब मैं क्या करूँ ?

अमित : आओ घबराइए मत , सब ठीक हो जायेगा . आपको मजबूत बनना होगा तभी आप अपनी और अपनी बेटियों की हिफाज़त कर पाओगी .

रुपाली : मुझमे और हिम्मत नहीं है , प्लीज मेरी मदद करो . तुमने वडा किया था न तुम मेरी मदद करोगे. प्लीज मुझे बचा लो उस दरिंदे से .

अमित : मैं कैसे,,,,,

रुपाली : तुम hi मेरी उम्मीद हो , मंजू भी पता नहीं कहाँ चली गयी है . वो बेचारी भी क्या करेगी , अब तो वो मंजू को भी घर लेन की बात कर रहा है . कहीं वो मंजू क साथ भी कुछ बुरा ...

अमित : जान ले लूंगा अगर उसने ऐसी जुर्रत की तो .

मंजू बुआ क बारे में सुन कर मुझे एक डैम से गुस्सा आ गया और मैंने गुस्से से टेबल पर मुक्का मर दिया . रुपाली मेरी तरफ हैरानी से देखें लगी.

रुपाली : मेरी मदद करो प्लीज . मेरे लिए नहीं तो रीमा क लिए hi सही. तुम तो उससे प्यार करते हो न ??

अमित : ये आप क्या.....

रुपाली : मुझे रीमा ने सब बता दिया है . और सच कहूं मैं बहुत खुश हूँ क तुम रीमा की ज़िन्दगी में आये. मैं चाहती हूँ तुम रीमा को भी उस नरक से निकल कर अपने साथ ले जाओ . मेरी दोनों बेटियों को तुम hi बचा सकते हो . अब तो मंजू भी मेरी मदद नहीं कर पायेगी

अमित : नहीं ये नहीं हो सकता .

रुपाली : क्या नहीं हो सकता ?

अमित : वो ,, वो रीमा ,, आप गलत सोच रही हैं .

रुपाली : इसका मतलब तुम रीमा से प्यार नहीं करते ? पर वो तो कह रही थी क तुम दोनों एक दूसरे को प्यार करते हो .

अमित : वो मेरी एक अछि दोस्त है बस . इससे ज्यादा और कुछ नहीं .

रुपाली : नहीं तुम झूठ बोल रहे हो . मेरी बेटी को मैं अछि तरह से जानती हूँ. वो तुम्हे दिल से चाहती है और उसकी चाहत मैंने उसकी आँखों में देखि है. प्लीज मेरी बेटी क साथ ऐसा मत करना. वो बहुत नाज़ुक है , अगर तुमने उसे छोड़ दिया तो वो टूट जाएगी .

रीमा की मुहब्बत मैं अचे से जनता था और उसके दिल पर क्या गुज़रेगी इस बात का भी मुझे अचे से एहसास था . क्यूंकि मैं भी तो उसी दर्द से गुज़र रहा था . सचाई एक न एक दिन तो सामने आणि hi थी अकसर .

अमित : रीमा से मैं बात कर लूंगा . फ़िलहाल आप की सुरक्षा इस वक़्त ज़रूरी है . आप एक काम कीजिये कुछ दिन क लिए आप मेरे उसी फ्लैट पर चले जाइये बाकि बाद में देख लेंगे .

रुपाली : पर तुम रीमा क साथ ऐसा क्यों कर रहे हो पहले मुझे इस बात का जवाब दो . वो बेचारी रो रो कर पागल हुयी जा रही है . तुम उससे बात भी नहीं कर रहे हो. आखिर बात क्या हुई है ?

अमित : आप चिंता मत कीजिये मैं जल्दी hi उससे मिलूंगा . फ़िलहाल आप वहां चले जाइये और रीमा को भी साथ ले जाना आप . ये लीजिये चाबी. आपको जो भी ज़रूरत हो आप फ़ोन कर दीजियेगा मुझे .

मैंने बाइक क के रिंग से फ्लैट वाली चाबी निकल कर रुपाली को दे दी .

रुपाली : एक बात पूछूं?

अमित : कहिये

रुपाली : कहीं तुम इस वजह से रीमा क साथ ऐसा तो नहीं कर रहे हो हम दोनों क बीच हुआ

अमित : प्लीज , मैं इस बात क लिए शर्मिंदा हूँ. वो सब मेरी गलती थी. अगर मेरे बस में होता तो वक़्त की धरा बदल कर मैं वो सब सही कर देता . रीमा बहुत अछि लड़की है मैं उससे बात करूँगा .

रुपाली : पर ....

अमित : आप ये चाबी रखिये , वहां हर चीज़ है . फिर भी अगर किसी चीज़ की ज़रूरत हो तो बता दीजियेगा . मैं जल्दी आपसे मिलूंगा और रीमा से भी .

रुपाली को चाबी पकड़ा कर मैं वहां से उठ कर आ गया . रीमा ने रुपाली को हमारे बारे में बता दिया था शायद . और एक माँ क नाते रुपाली को उसकी फ़िक्र हो रही थी. पर मैं अपने मन में चल रहे द्वन्द में फसा हुआ था . दिल में रीमा क लिए प्यार और दिमाग में रिश्तों की परवाह मुझसे ये सेहन नहीं हो रहा था . रीमा मुझसे कितना प्यार करती थी और मैं भी उसे उतना hi चाहता था पर इस दोराहे पर मैं किस और जॉन ये फैसला मुझसे नहीं हो प् रहा था . आँखों में हलकी नमी लिए मैं वहां से बहार निकल आया और बाइक उठा कर वापिस चल दिया . जब मैं रेस्टोरेंट वापिस आया तो कल्पना वहां नहीं थी . मुझे लगा शायद सीमा क साथ चली गयी होगी. इस लिए मैंने उसे फ़ोन लगाया.

अमित : hello कल्पना , कहाँ हो तुम ?

कल्पना : तुम पहुँच गए ? मैं भी बस आ रही हूँ थोड़ी देर रुको .

अमित : तुम कहाँ हो ? मैं वहीँ से तुम्हे पिक कर लेता हूँ.

कल्पना : यार थोड़ा रुको मैं बस आ hi रही हूँ . Bye

कल्पना ( मन में ) ये वापिस भी पहुँच गया और मैं इसे यहाँ ढूंढ रही हूँ. खैर अब जल्दी वापिस भी पहुंचना पड़ेगा . कम्बख्त ये ऑटो वाले ने देर कर दी वर्ण देख लेती किसके साथ था .

थोड़ी देर इंतज़ार करने क बाद कल्पना वापिस आ गयी पर वो अकेली थी .

अमित : तुम अकेली गयी थी? मुझे लगा शायद सीमा आ गयी होगी . पर गयी कहाँ थी तुम ?

कल्पना : कुछ नहीं बस यहीं थी . अब चलो देर हो रही है .

कल्पना ने आते hi मुझे चलने को कहा तो मैं भी उसे पीछे बिठा कर चल दिया . रस्ते में कल्पना ने फिर पूछा क मैं किस्से मिलने गया था पर मैंने उसे ताल दिया . मेरे दिमाग में अब रुपाली और रीमा को अपने बड़े ताऊ से बचने क hi ख्याल चल रहे थे . इस बारे में मुझे बुआ से बात करने की ज़रूरत थी. बलजीत राइ यानि अपने ताऊ जी पर मुझे पहले hi गुस्सा था और अब तो ये और भी ज्यादा हो गया था . बुआ ने मन किया था उन सब से मिलने और अपनी असलियत बताने को वर्ण आज मन तो हो रहा था क जा कर उनसे हिसाब चुकता करूँ. कैसा घटिया आदमी है अपनी hi फॅमिली क साथ ऐसे ऐसे घटिया काम कर दिए . मेरे माता क मरने क बाद बुआ की न परवाह की न भाई होने का फ़र्ज़ निभाया ऊपर से अपने छोटे भाई की बीवी क साथ hi इतना गलत कर रहा था . और अब अपनी भतीजियों पर गन्दी नज़र थी . मन में गुस्सा दबाये मैं घर पहुँच गया . सब लोग बातों में लगे हुए थे . हमारे आते hi गर्ल्स गैंग हमें घेरने आ गयी .

करुणा : तो आ गए लैला मजनू घूम क ? कैसी रही डेट ?

कल्पना: क्या दीदी आप भी ,,, आपको पता है न हम कहाँ गए थे .

नैना : पता है सब पता है . और ये भी पता है क कॉलेज से यहाँ आने में कितनी देर लगती है. तुम्ही ने बताया था क तुम फ्री हो गए हो . इस बात को 1:30 घंटा हो गया है. अब बोल ,,,,, तू कहाँ चला , तुझसे भी हमें बहुत कुछ पूछना है .

अमित : मेरा मूड ठीक नहीं है आप लगे रहो

करुणा : क्यों ऋ इसे क्या हुआ ? ये क्यों उखाड़ा हुआ है? कहीं तूने कुछ ......

कल्पना : छियई आप भी न कुछ ज्यादा hi मज़ाक करती हो . आप क्या ऐसा समझती हैं मुझे ? और वो तो आपका भाई है उसका तो पता hi होगा आपको .

नैना : बिलकुल , अचे से पता है हम दोनों को. लगता है तुझे hi अभी कुछ पता नहीं क वो क्या चीज़ है . चल ज़रा हमें बता क्या क्या हुआ आज .

मैं दीदी को मन कर क बुआ की तरफ जाने लगा तो वो सब क साथ बैठी बातों में लगी थी . इस लिए मैं अपने कमरे की तरफ चल दिया . दीपिका ममी पानी का गिलास लिए मेरे पीछे पीछे आ गयी .

दीपिका : क्या बात है , तुम किसी बात से परेशां लग रहे हो .

अमित : कुछ नहीं बस ऐसे hi .

दीपिका : मुझे भी नहीं बताओगे ?

अमित : अब क्या बताऊँ आपको , ज़िन्दगी में कुछ ाचा होने लगता है तो बुरा भी साथ hi हो जाता है .

दीपिका : साफ साफ बताओ क्या बात है . किसकी बात कर रहे हो .

फिर मैंने दीपिका ममी को अपनी उलझन क बारे में बताया जो रीमा क साथ रिश्ते को लेकर हो रही थी. दीपिका ममी ने आराम से साडी बात सुनी और बोली .

दीपिका : मेरे ख्याल से तुम्हे रीमा से एक बार बात करनी चाहिए. इस सब में उसकी तो गलती कोई नहीं है. उसने तुम्हे दिल से चाहा है तो तुम्हारा भी फ़र्ज़ बनता है क उसका साथ दो. एक बार उसे अपनी उलझन बताओ तो सही . उसके बाद वो जो भी फैसला ले तुम उसका साथ देना . अगर वो अलग होना चाहे तो ठीक वर्ण तुमने उसके लिए समाज क कानून तोड़ने होंगे. सच्चा प्यार तक़दीर से hi मिलता है . उसे ऐसे मत ठुकरा.

अमित : पर बुआ ......

दीपिका : फ़िलहाल उसे इस बारे में मत बताओ कुछ दिन बाद वो खुद hi समझ जाएगी . अभी उसे थोड़ा वक़्त दो . अब दूसरी क्या बात है वो भी बता दो , मैं जानती हूँ बात कुछ और भी है

अमित : आप को कैसे पता चल जाता है ?

दीपिका : बस , चल जाता है. अब बताओ भी सारा दिन नहीं है मेरे पास .

अमित : समझ नहीं अत कैसे बताऊँ ,,

दीपिका : इतना क्यों सोच रहे हो ? मैं कोई तुमसे अलग हूँ क्या ? समझ लो शीशे सामने खड़े हो , जो दिल में ए बोल दो. मैं तुम्हारा अक्स hi हूँ .

मैंने दीपिका ममी की आँखों में अपने लिए उमड़ता प्यार देखा और मेरी ज़ुबान अपने आप सब सच सच बोलने लगी. मैंने रुपाली चची क बारे में उन्हें बता दिया क किस तरह बलजीत राइ उनको मजबूर कर क अपनी हवस मिटाता आया है और अब उसकी नज़र रीमा रीना पर भी है . मैंने ये भी बता दिया क कैसे मैं भी रुपाली चची क साथ सब कुछ कर चूका हूँ .

दीपिका : कितना घटिया इंसान है ये बलजीत राइ. शायद इसी लिए बड़े भैया तुम्हे वहां से ले ए थे . क्या पता तुम्हारे साथ कितना बुरा करता वो . पहले तुम्हारे माता पिता क साथ गलत सलूक फिर अपनी छोटी बहिन क साथ इतना बुरा बर्ताव और अपने hi सेज भाई की बीवी बच्चियों क साथ ..... छियई ,,, ऐसे घटिया इंसान को तो इंसान कहना भी इंसानियत को गली देना है . रुपाली चची और रीमा रीना का उस शैतान क साथ रहना खतरे से खली नहीं . कैसे भी कर क तुम्हे उन्हें वहां से निकलना होगा . और तुम ये क्या क्या करते फिर रहे हो ??? बेटी क साथ माँ को भी लपेट लिया ??? पता नहीं और क्या क्या दिखाओगे , ममी मौसी चची ताई ,, छोड़ना मत किसी को तुम. बैठो यहाँ , मैं भेजती हूँ मंजू को यहाँ .

दीपिका ममी कमरे से चली गयी और मैं उनकी कही बातों क बारे में सोचने लगा . उनकी बात सही थी और यही मेरे दिल की आवाज़ भी थी. ममी मेरे दिल की आवाज़ अछि तरह जानती थी या ये कहूं क उनको ज्यादा समझ थी तो ये गलत न होगा . मैं अब सुकून महसूस कर रहा था . दीपिका ममी ने मुझे सही रास्ता दिखा दिया था . हालाँकि बुआ ने मुझे सख्ती से मन किया था किसी से भी अपने रिश्ते क बारे में बताने से पर अब रीमा को सच बताना बहुत ज़रूरी था.

‘ तुमने मुझे यहाँ क्यों बुलाया ? वहीँ आ जाते ‘ बुआ ने कमरे में आते hi मुझसे सवाल किया. मैं अपनी सोच से बहार आया और उठ कर पहले दरवाज़ा लॉक किया . मैं नहीं चाहता था कोई हमारी बात सुने . मुझे दरवाज़ा बंद करते देख बुआ थोड़ा हैरान थी .

अमित : आप पहले यहाँ बैठो बुआ , और मेरी बात ज़रा ध्यान से सुनो .

मंजू : बात क्या है ? इसके लिए दरवाज़ा क्यों बंद कर रहे हो ? देखो कल रत भी तुमने .....

अमित : वो सब अनजाने में हुआ , मैं नींद में था और वो सब हो गया . प्लीज माफ़ कर दीजिये उसके लिए . मगर मैं किसी और बारे में बात करना चाहता हूँ .

मंजू : क्या बात है ?

अमित : मैं आज रुपाली चची से मिला था.

मंजू : रुपाली भाभी से ? तुमने उन्हें बताया तो नहीं ?

अमित : नहीं , पर मुझे लगता है रीमा को सब बताना पड़ेगा . वो बता रही थीं क रीमा अपसेट है मेरी वजह से . मैं उसे दुखी नहीं देख सकता .

मंजू : उसे नहीं पता क तुम उसके भाई लगते हो पर तुम्हे तो पता है न .

अमित : इसी लिए तो बुआ उसे बताना ज़रूरी है . फिर आगे वो जैसा कहे वैसा hi होगा .

मंजू : अगर रीमा ने किसी को बता दिया तो ?

अमित : वो ऐसा नहीं करेगी .

मंजू : पर फिर भी , अगर उसने तुम्हारी बात को न समझा और वो ज़िद करने लगी तो क्या तुम सच में ....

अमित : मैंने उसे वडा किया था क मैं उसे कभी नहीं छोडूंगा . मैं उसे धोखा नहीं देना चाहता . इसमें उसकी तो गलती नहीं है न बुआ

मंजू : पर ये सब सही नहीं है .

अमित : और वो जो रुपाली चची क साथ हो रहा है उसका क्या ?

मंजू : क्या मतलब ?

फिर मैंने बलजीत राइ द्वारा रुपाली चची क साथ किये गए अत्याचार क बारे में उन्हें बताया . ये सब सुन कर बुआ की आँखों में आंसू आ गए.

मंजू : क्या ???? इतना कुछ हो रहा था भाभी क साथ ??? वो जल्लाद है शैतान है . वो किसी का भाई नहीं है. मैं सौतेली थी भैया सौतेले थे पर अपने सेज भाई की बीवी क साथ . छी , जानते हो उस घर में सिर्फ रुपाली भाभी hi थी जो मुझसे प्यार से बात करती थी . जिसने मुझे प्यार दिया था . वर्ण बाकियों क लिए तो मैं जैसे घर की नौकरानी या बोझ hi थी. शीना रीना और रीमा मेरे पास hi रहती थी. पर रुपाली भाभी इतना कुछ सेह रही थी इसका तो मुझे अंदाज़ा नहीं था . होगा भी कैसे , मैं तो वहां कभी लौट कर गयी hi नहीं .

अमित : अब क्या करना है बुआ , रुपाली चची की मदद हमें करनी hi होगी .

मंजू : तुम चिंता मत करो , उन्हें मैं अपने साथ रखूंगी .

अमित : पर आप तो हमारे साथ रहने वाली हो न ?

मंजू : हाँ पर उनको भी तो सहारा देना होगा न . अगर मैं ऐसा नहीं करुँगी तो कैसे उनकी मदद होगी ? अगर उनको यहाँ लाये तो तुम्हारी असलियत कहाँ छिपी रहेगी फिर .

अमित : पर आप इतना डर्टी क्यों है आखिर क्या वजह है ? आखिर माँ पापा क साथ हुआ क्या था? मुझे कोई क्यों नहीं बताता क आखिर क्या वजह है हो मुझे आप सब ऐसे छुपा रहे हो ?

मंजू : वजह है वो दौलत वो पैसा जो पन्नू भैया ने अपनी म्हणत से कमाया था . भैया क मरते hi सब कुछ उनके नाम हो गया . यही सब तो वो चाहते थे . दौलत क नशे ने उन्हें अँधा कर दिया है . ऐसे में अगर उन्हें तुम्हारे बारे में पता चला तो क्या वो चुप बैठेंगे ? मैं नहीं चाहती क तुम्हे कुछ हो . और इसी लिए तुम्हे मैंने अपनी कसम दी है.

अमित : पर बुआ ...

मंजू : मेरी कसम तोडना चाहता है तो तोड़ ले , फिर कभी अपनी बुआ को नहीं देख पायेगा .

अमित : ऐसा मत कहो बुआ , ऐसा मत कहो .

मंजू : तो फिर सब भूल जा , तू किसी से कुछ नहीं कहेगा .

अमित : पर रीमा को तो सच बताना hi पड़ेगा बुआ , मैं उसे धोखा नहीं दे सकता . प्लीज आप सिर्फ उसे बताने की परमिशन दे दो. मैं वडा करता हूँ रीमा किसी को कुछ नहीं बताएगी .

मंजू : इसका फैसला तुम्हे करना है , अगर किसी को पता चला तो तुम्हे कुछ होने से पहले मैं मर जाउंगी .

मंजू बुआ अपनी आँखों में आये आंसू पोंछते हुई दरवाज़ा खोल कर कमरे से बहार निकल गयी और मैं उन्हें जाता हुआ देख कर सोचता रहा . बुआ मेरी चिंता में मुझे सच बताने से रोक रही थी . मैं उन्हें दुःख नहीं देना चाहता था पर रीमा क दुःख की वजह भी मैं नहीं बनना चाहता था.

‘ क्या सोच रहे हो ? ‘ मैं अपनी सोच में सूबा था क निधि दीदी कब मेरे पास आयी मुझे पता भी नहीं चला .

अमित : कुछ भी तो नहीं ? आप कब आयी ?

निधि : झूठ , तुम ज़रूर कुछ सोच रहे थे . बताओ क्या बात है ?

अमित : नहीं ऐसी कोई बात नहीं है वो मैं बस सोच रहा था क प्रैक्टिस क लिए मुझे अब थोड़ा ज्यादा टाइम देना होगा . आज कोच सर भी कह रहे थे मुझे इस बारे में .

निधि : तो क्या हुआ ? कल से डबल टाइम कर लेना . अखाडा तो यहाँ लगता hi है न सुबह शाम . अब चलो खाना खा लो , मैंने भी नहीं खाया है . तुम्हारा hi इंतज़ार कर रही थी .

अमित : पर आपने क्यों नहीं खाया ? बाकि सब का तो हो गया होगा न .

निधि : मन नहीं था , सोचा तुम्हारे साथ hi खा लुंगी . वैसे भी तुम्हे खाना भी तो खिलाना था न , अब हर काम क्या ममी hi करती रहेंगी .

निधि दीदी मेरा कुछ ज्यादा hi ख्याल रखती थी. हम दोनों नीचे आये और दीदी ने अपने हाथों से हम दोनों क लिए खाना लगाया . कल्पना को तो करुणा दीदी hi शायद खिला रही थी कुछ और . मैंने और निधि दीदी ने साथ में खाना खाया और कुछ देर आराम करने क लिए मैं अपने कमरे में चला गया . शाम को मैं अखाड़े में जाने का सोच रहा था इस लिए सोचा थोड़ा रेस्ट कर लूँ.

‘ माँ आप ये क्या कह रही हो? हम कहाँ जायेंगे ? ‘ रीमा रुपाली द्वारा सामान पैक करने का कहने पर हैरान थी. उसे समझ में नहीं आ रहा था क आखिर ऐसा क्या हो गया जो उसकी माँ एक डैम से उसे अपना ज़रूरी सामान पैक करने को कह रही थी .

रुपाली: तुझसे जितना कहा है तू उतना कर . बातें बाद में कर लेंगे

रीमा : पर माँ बताओ तो सही बात क्या है ? हम जायेंगे कहाँ ? और दीदी को बड़ी माँ को बड़े पापा को क्या जवाब देंगे ?

रुपाली: तुझे अपनी माँ पर भरोसा नहीं है क्या ?

रीमा अपनी माँ की इस बात पर निरुत्तर हो गयी पर उसके मन में उथल पुथल हो रही थी आखिर उसकी माँ ये सब क्यों कर रही है ? रीमा चुपचाप अपने कमरे में चली गयी सामान पैक करने. किस्मत से बलजीत और मेघा दोनों hi घर नहीं थे . दोनों माँ बेटी अपना अपना सामान पैक कर रही थी . इतने में शीना अपनी दोस्त से मिल कर घर वापिस आ गयी और आदत मुताबिक पहले रीमा क पास गयी और उसने सामान पैक करता देख वो भी शॉक हो गयी.

शीना : ये सब क्या है रीमा ? तुम सारा सामान क्यों पैक कर रही हो ?

रीमा : पता नहीं दीदी माँ ने कहा है . वो कह रही है हमें अभी जाना होगा .

शीना : पर क्यों ? और जाना कहाँ है?

रीमा : पता नहीं दीदी माँ कुछ नहीं बता रही

शीना : ऐसे कैसे चले जाओगे आप दोनों. मैं देखती हूँ चची को .

शीना रुपाली क कमरे में गयी जहाँ वो भी अपना सामान पैक कर रही थी . शीना ने जाकर रुपाली क हाथ से बैग छीन लिया .

शीना : ये सब क्या है चची ? आप कहाँ जा रही हैं?

रुपाली : शीना मेरी बची आज मुझे मत रोक मुझे जाने दे . अब मैं यहाँ और नहीं रह सकती .

शीना : मगर क्यों ? मैं आपको कहीं नहीं जाने दूंगी .

रुपाली : प्लीज शीना मेरी बची , मुझे रोकने की कोशिश मत कर. मुझे जाने दे इसी में हूँ सब का भला है .

शीना : पापा ने कुछ कहा है क्या आपको ?

रुपाली शीना क इस सवाल से एक पल क लिए रुक गयी. शीना क इस सवाल का मतलब था क शायद उसे कुछ पता है .

रुपाली : मैं इस बारे में कोई बात नहीं करना चाहती , प्लीज तू मुझे रोकने की कोशिश मत करना प्लीज् मेरी बची मुझे आज जाने दे.

शीना : नहीं ,, अगर आप यहाँ से गयी तो मैं भी आपके साथ जाउंगी . आप जानती हैं न मेरे लिए आप hi मेरी माँ हो. अगर आप यहाँ नहीं रहेंगी तो मेरा भी यहाँ कोई काम नहीं .

रुपाली : तू समझने की कोशिश कर .....



शीना : आप समझने की कोशिश करो . मैं आपके बिना नहीं रह सकती इस घर में . ये चारदीवारी मेरे लिए घर सिर्फ आपकी वजह से है. मैं आपको कहीं जाने नहीं दूंगी . अगर आपको किसी का दर है तो सुन लीजिये , मेरे होते कोई आपका बाल भी बांका नहीं कर सकता . आपके लिए मैं किसी से भी लड़ सकती हूँ चाहे वो मेरे माँ पापा hi क्यों न हो .
 
अपडेट 246



‘ ोये तुझे गाओं नहीं देखना क्या ? और आज तो अखाडा भी लगा हुआ है शाम क वक़्त . वैसे तू चाहे तो यहीं रह कर आराम कर सकती है.’ करुणा ने कल्पना क मज़े लेते हुए कहा . असल में अमित सब को बोल कर मोहित को साथ लेकर अखाड़े क लिए निकल गया था . करुणा और नैना ने अपनी आँखों से आज अखाडा देखने की सलाह कर ली थी . वो अमित को अपनी आँखों से अपने बलिष्ठ शरीर से पसीना बहते हुए ज़ोर आज़माइश करते देखना चाहती थी . वैसे तो उन्हें अखाड़े में जाने से हमेशा hi मन किया जाता था पर आज उन्होंने कल्पना को गाओं और अखाडा दिखने का बहाना किया था और इसी लिए किसी ने मन नहीं किया . ये बात कल्पना को नहीं पता थी क उसी की वजह से परमिशन मिली है . उल्टा नैना और करुणा दोनों उसका मज़ा ले रही थी .

कल्पना : मैंने कब कहा मुझे आराम करना है ? मैं भी तो गाओं घूमने hi तो आयी हूँ.

नैना : देख देख कितनी जल्दी है इसे , गाओं hi देखना है न तुझे , तो वो कल देख लेना . हम तो अखाड़े जा रहे हैं आज.

कल्पना : तो मैं भी अखाडा देख लुंगी . वैसे भी कभी ऐसे देसी रेसलिंग नहीं देखि मैंने .

करुणा : ाचा रेसलिंग देखनी है तुझे तो कल दिखा देंगे , आज रहने दो. हम तो करिश्मा दीदी को ले क जा रहे हैं . उन्होंने अमित का मैच देखना है .

कल्पना : मैं क्यों नहीं देख सकती उसका मैच? वैसे भी उसे कॉलेज में कई बार देखा है और रोज़ hi देख रही हूँ आज कल.

नैना : तो रहने दे न फिर , क्या करेगी जा कर . तू तो रोज़ देख hi लेती है उसे .

कल्पना : आप मुझे नहीं ले जाना चाहती तो ठीक है . जाओ आप .

कल्पना ने मुँह फुला लिया था अब , उसे गुस्सा भी आने लगा था क दोनों उसे साथ नहीं ले जाना चाहती .

दीपिका : क्या हुआ कल्पना तुम अभी तक तैयार नहीं हुई. जाना नहीं है क्या ? करुणा तो कह रही थी तुझे अखाडा देखना है इसी लिए तो दोनों को तेरे साथ भेजने क लिए मणि है दीदी . चलो जल्दी करो राजू आ गया है .

दीपिका ने कमरे में आते हुए कल्पना को बैठे देख कर ये बात कही तो कल्पना हैरान होती करुणा और नैना को देखने लगी . दोनों hi अब बगले झांक रही थी. उनका ड्रामा जो अभी और चलने वाला था उस पर दीपिका ममी ने पानी फेर दिया था . दीपिका तो सामान रखने आयी थी और वो रख कर बहार भी निकल गयी . अब पीछे रह गयी तीनो .

कल्पना : तो आप दोनों जान बुझ कर मुझे तंग कर रही थी . ठीक है अब मुझे भी नहीं जाना .

नैना : हम तो थोड़ा सा मज़ाक कर रहे थे बस .

करुणा : और क्या , तू तो बुरा hi मन गयी .

कल्पना : ाचा , मज़ाक कर रहे थे आप . कोई बात नहीं मैंने बुरा नहीं मन . पर अब मेरा मूड नहीं है . मैं फिर कभी चली जाउंगी .

करुणा : चल न यार , देख तेरे लिए मैंने माँ और मौसी को मनाया और तू अब ऐसे कर रही है . तुझे पता भी है उधर लड़कियों औरतों को जाने नहीं देते . सब कहते हैं लड़कों को उस हालत में नहीं देखना चाहिए . सिर्फ तेरे लिए मैंने मौसी को मनाया है .

कल्पना : मेरे लिए या अपने लिए ? मैंने तो नहीं कहा था आपसे ऐसा . लगता है आपको कोई पसंद है जो उधर अखाड़े में मिलेगा. गाओं में hi ससुराल ढूंढ रही हो क्या आप ?

करुणा : तू ज्यादा बातें मत बना , नहीं जाना न तुझे तो ठीक है मैं करिश्मा दीदी को ले जाउंगी . तू बैठ यहीं .

नैना : चलो यार छोडो अब , चल कल्पना जल्दी कर राजू वेट कर रहा है .

कालापन ने भी बात को यहीं रोकते हुए जल्दी से वाशरूम का रुख किया और लग गयी खुद को सही करने . कुछ hi देर में तीनो लड़कियां राजू क साथ चल पड़ी अखाड़े की और. कल्पना ने राधा को जाने क पूछा था पर उसने मन कर दिया . उसे पता था क उस जगह जाना ठीक नहीं समझा जाता और अमित को ये बात पसंद भी नहीं थी. क्यूंकि वहां सब पहलवान लंगोट में hi तो होते हैं. राधा नेहा और निधि क साथ hi खुश थी घर पर बच्चों क साथ और करिश्मा भी सब क साथ खुश नज़र आ रही थी. घर की रौनक चाहे मंजू क आने से बढ़ गयी थी पर असल रौनक तो घर क नए नन्हे सदस्य hi थे .

‘ दीदी आप तीनो मेरे साथ hi रहना और किसी को कुछ मत बोलना वर्ण उस्ताद जी नाराज़ होंगे’ राजू ने अखाड़े क प्रवेश द्वार पर hi तीनो को ये चेतावनी दी. अखाड़े क प्रवेश द्वार से hi पता चल रहा था क ये सिर्फ अखाडा hi नहीं है इसके साथ hi मंदिर भी है और साथ लगती शमशान भूमि भी. नैना और करुणा जहाँ घरेलु कपड़ों यानि सलवार कमीज में थी वहीँ कल्पना ट्रैक सूट पहने थी. अखाड़े का सुन कर उसे लगा था क ये एक प्ले ग्राउंड टाइप होगा इस लिए वो खिलाडी होने क नाते ऐसे कपड़ों में आयी थी. पर अब यहाँ अपने सामने ऐसा नज़ारा देख कर वो सोच में पद गयी थी. राजू क साथ जब तीनो प्रवेश द्वार से अंदर गयी तो आसपास हरे भरे पेड़ और फूलों की कायरियाँ थी . एक तरफ को जाता रास्ता सामने लगे 6-7 नालों पर ख़तम हो रहा था . सर्दी और शाम का वक़्त था इस लिए ये अभी बंद पड़े थे पर देख कर hi लग रहा था ये जगह नहाने क लिए इस्तेमाल की जाती होगी . कुछ कदम आगे जाने पर भोलेनाथ की प्रतिमा लगी थी जिस तरफ से एक रास्ता शमशान भूमि को जा रहा था . बायीं तरफ एक मंदिर हनुमान जी का भी था जहाँ दीपक अभी से जल रहा था . पहलवानी अखाड़े में इनका होना तो लाज़मी hi होता है हर जगह . कल्पना ये सब गौर से देखती धीमे कदमो से आगे बढ़ रही थी. करुणा और नैना क सर झुका कर माथा टेकने पर कल्पना ने भी उनका अनुसरण किया . कुछ कदमो पर एक बड़ी सी दीवार थी जिसके पार से आती आवाज़ें बता रही थी क अंदर ज़ोर आज़माइश चल रही है . इन आवाज़ों ने तीनो लड़कियों क दिल की धड़कन क साथ कदमो की चाल भी बढ़ा दी थी.

‘ शाबाश ऐसे hi ,, थोड़ा और ज़ोर लगा ,, गर्दन पर हाथ की पकड़ और मजबूत कर ‘ अखाड़े की मिटटी में अमित एक हट्टे करते लड़के क साथ ज़ोर लगा रहा था . एक हाथ गर्दन और दूसरा कंधे क ऊपर गर्दन की तरफ रखे अमित मिटटी में पाऊँ जमाये घुटने आधे मोड हुए सामने वाले को झुकाने की कोशिश कर रहा था. पर सामने वाला भी कोई नौसिखिया नहीं लग रहा था जो पूरी कोशिश कर रहा था अमित क इस दो से बचने की. दोनों क जिस्म एक सामान तगड़े थे और इस वक़्त पसीने और मिटटी से साणे हुए . दोनों क बलिष्ठ बदन पर कपड़ों क नाम पर सिर्फ लाल लंगोटी थे जो एक अंडरवियर से ज्यादा न लग रहे थे इस वक़्त. अखाड़े क अंदर एक और आदमी खड़ा था जो देखने में हत्ता करता पर उम्र से थोड़ा ज्यादा था . ऊपर बनियान और एक धोती पहने हुए वो लगातार दोनों पहलवानो को करीब से देख कर दिशा निर्देश दे रहा था जो केवल अमित क लिए hi था फ़िलहाल . यानि क ये अखाड़े क उस्ताद जी थे और खुद अमित की ट्रेनिंग देख रहे थे . अखाड़े क बहार 6-7 और पहलवान अपने जिस्म को गरम कर रहे थे लंगोट पहने हुए . नैना और करुणा तो बड़ी बड़ी आँखों से अमित को निहार रही थी मगर कल्पना क दिल की धड़कन काबू से बहार हो रही थी. उसने कभी इस तरह कपड़ों क बिना कुश्ती नहीं देखि थी . टीवी पर आने वाली रेसलिंग और अपने सामने का प्रत्यक्ष नज़ारा दोनों में बहुत फरक था . राजू तो थोड़ा आगे हो के खड़ा हो गया था जबकि तीनो लड़कियां दीवार की ाओत में कड़ी देख रही थी. नैना और करुणा दोनों तो अमित को मादरजात हालत में देख hi चुकी थी पर कल्पना अपने सामने अमित का नंगा बदन देख बस उसे आँखों से hi स्कैन कर रही थी . आज अखाड़े में अमित का वास्तविक स्वरुप कल्पना अछि तरह से देख प् रही थी. शरीर का एक एक अंग और उसका कटाव. ज़ोर लगते हुए इस मंज़र में पाऊँ जहाँ मिटटी में कहीं गायब थे पर उसके ऊपर मजबूत पिंडलियाँ जो अपना सही आकर दिखा रही थी. घुटनो क ऊपर मांसल जांघों क मसल्स जो ऐसे फूल रहे थे मनो हवा भरी जा रही हो. गेहुअन रंग लाल पड़ता दिखाई दे रेशा था . घुटने से लेकर जांघ क जोड़ तक का हिस्सा इतना मांसल था क साइड से देखने से संधि स्थल तक नज़र जा hi नहीं सकती थी. कमर से ऊपर कन्धों तक का हिस्सा भी जैसे मांस का मजबूत लोथड़ा जहाँ कहीं भी हड्डी का नामोनिशान नज़र नहीं अत था . मॉडल्स और फिल्मी हीरो क मुकाबले पेट सपाट नहीं बल्कि हल्का सा उभरा हुआ था . जो इस बात का गवाह था क ये बॉडीबिल्डर नहीं बल्कि देसी पहलवानी पता है . मजबूत कंधे और बाजु की साइड में बड़ी बड़ी मछलियां जो ज्यादा कटाव में तो नहीं पर आकर में बड़ी थी . कल्पना मनो इस मंज़र को अपने दिलो दिमाग में छाप रही थी .

करुणा : कल्पना ,,, कल्पना ,,, कहाँ खो गयी ? वो देख कैसे घुटने ज़मीन पर टिकाव दिए तेरे हीरो ने .

कल्पना मनो किसी और hi दुनिया में खोयी थी जब उसे करुणा बुला रही थी पर उसे जैसे कुछ सुनाई hi नहीं दे रहा था . करुणा ने हिला कर कल्पना को जब दोबारा आवाज़ दी तो उसे कुछ होश आया . सामने क मंज़र दिखते हुए करुणा ने उसे बताया क कैसे अमित ने सामने वाले क घुटने लगा दिए थे . पर इस दौरान उसने अमित को कल्पना का हीरो कह कर सम्बोधित किया था जिस पर उसका ध्यान hi नहीं गया पर चेहरे पर स्माइल थी. उस्ताद जी ने दोनों पहलवानो को अलग किया और कुछ समझते हुए हुए एक बार फिर दोनों को भिड़ा दिया . पर इस बार सामने वाले ने अमित की गर्दन पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए गर्दन और कंधे क बीच वाले मुस्कले को दबोच लिया और पूरी ताकत क साथ मसल दिया . एक बार तो अमित क चेहरे पर दर्द क भाव उभरे और ये देख कर कल्पना ने भी ज़ोर अपनी मीठी भींच दी .

करुणा : आआआअह्ह्ह्हह मायआ मेरा हाथ तोड़ेगी क्या ??? एआईईईई

कल्पना : सॉरी दीदी वो मुझे पता नहीं चला .

गलती से कल्पना ने करुणा का हाथ hi मसल दिया था जो उसके हाथ में hi था पर उसे ध्यान नहीं था . ध्यान तो सारा अमित पर था.

‘ ोये शाबाश मेरे शेर ,,, वह वह वह ,, शाबाश ‘

अभी ये तीनो लड़कियों का ध्यान करुणा क हाथ पर hi था क उस्ताद जी की ज़ोरदार आवाज़ अखाड़े में गूंजी . असल में अमित की गर्दन को दबोचते हुए सामने वाले का सारा ध्यान उसी एक जगह था मगर अमित ने कुशलता से ज़ोरदार प्रहार उसकी कलाइयों पर कर क उसकी पकड़ हटा कर बिना मौका दिए काच में एक बाज़ू दाल कर सामने वाले की दायीं बाज़ू पकड़ में ली और घूम कर उसे अपनी पीठ क सहारे ऊपर से घुमा कर मिटटी में पटक दिया था और बाज़ू अब अमित ने अपनी बाज़ुओं को कैंची बना कर दबा दी थी जिससे वो पहलवान ज़मीन पर हाथ मर कर अपनी हर स्वीकार कर रहा था. अमित ने उसकी बाजु छोड़ी और उसे सहारा देकर खड़ा किया . उस्ताद जी अमित की पीठ थपथपा रहे थे.

‘ देखा तुम लोगों ने ? इसे कहते हैं फुर्ती. सिर्फ ताकत hi नहीं दिमाग और चतुराई भी ज़रूरी है कुश्ती में . कालू का ये दो अचे अचे पहलवानो को दबा देता है अपने आगे पर अमित ने कितनी आसानी से इसे न सिर्फ विफल किया बल्कि उसी पर उल्टा हमलावर हो गया . सीखो कुछ इससे . ‘

अखाड़े क पास खड़े बाकि लड़कों को उस्ताद जी शिक्षा दे रहे थे अमित का उदहारण देते हुए . और इधर कल्पना मनो अंदर hi अंदर उछाल रही थी अमित की तारीफ पर .

कालू : मान गए छोटे भाई , तू वाकई में चीते सा फुर्तीला है .

डरा : ऐसे hi थोड़ा ये गाओं और इस अखाड़े की शान बना है . अब तो मुझ पर भी भरी पड़ता है ये .

डरा जो अभी तक अखाड़े क बहार hi खड़ा था वो अखाड़े क अंदर आ कर अमित को अपने साथ लगाए खड़ा था . देखने में डरा अमित से 21 hi था मगर उसकी बातों से ज़ाहिर था क अमित उसे भी अब पछाड़ चूका है .

अमित : अभी तो आपसे बहुत कुछ सीखना है भैया , ये तो आपकी और उस्ताद जी की hi मेहरबानी है . वर्ण मैं तो कोई खास नहीं .

उस्ताद : म्हणत मैं सबको एक जैसी hi करवाता हूँ बीटा , पर तेरी लगन सबसे ज्यादा है इस खेल में शुरू से hi. इसी लिए तू इतनी जल्दी इतनी आगे निकल गया है. तू बस अखाड़े में समय से अत रहा कर. अभ्यास hi सफलता की कुंजी है . रही बात दो पेंच की तो अब तू सब सीख hi चूका है .

डरा : उस्ताद जी ठीक कह रहे हैं. तू जितने दिन यहाँ है बस बता दिया कर क कब टाइम है तेरे पास . हम तेरे लिए हमेशा हाज़िर हैं.

राजू : दीदी , चलें ? अँधेरा हो रहा है . अभी ये लोग कुछ देर और यहीं रुकने वाले हैं मगर हमें चलना चाहिए . क्यूंकि अब तेल

मालिश और नहाना hi रह गया है . वो तो आप देख नहीं सकती .

मन तो तीनो लड़कियों का अंदर से यही कह रहा था क वो आगे का प्रोग्राम भी देख ले मगर राजू की बात भी सही थी. वैसे भी अगर किसी की नज़र पद जाती तो जवाब देना मुश्किल हो जाता . मन क भाव दबाये हुए तीनो राजू क साथ वापिस लौट गयी बिना किसी की नज़र में आये हुए .

करुणा : तो ,,, तूने उसे कुछ बताया या नहीं ?

वापिस घर आने क बाद करुणा और नैना कल्पना क साथ ऊपर क कमरे में थी सब से अलग . जबकि बाकि सब नीचे साथ में बातें कर रहे थे और कुछ घर का काम . करुणा एक बार फिर से शुरू हो गयी थी कल्पना की क्लास लेने .

कल्पना : ऐसा कुछ नहीं है जैसा आप सोच रही हैं . हम दोनों सिर्फ अचे दोस्त हैं .

नैना : अचे दोस्त ???? ये बात किसी और से कहना . तुम्हारी आँखों में सब नज़र अत है . और तुम ये बात छुपा नहीं सकती . हमसे तो बिलकुल भी नहीं , हाँ वो नहीं समझता है.

करुणा : वैसे जोड़ी तो टक्कर की है, एक पहलवान और दूसरी ब्रूस ली . है है है

कल्पना : आप दोनों मेरा मज़ाक बनाने में hi लगी रहती हो न ? जाओ मैं आपसे बात नहीं करती . मैं जा रही हूँ राधा क पास .

करुणा : अरे अरे रुक जा मेरी ब्रूस ली , उसके पास जाने से कुछ नहीं होगा . वो तो है hi माँ की गुड़िया . अभी तक उसने अपने लिए कोई नहीं ढूँढा . वो तेरी क्या मदद करेगी . अगर उस बैल को काबू करना है तो हमारी मदद लेनी hi पड़ेगी .

कल्पना : बात तो ऐसे कर रही हो आप जैसे आप दोनों ने इसमें पीएचडी कर राखी हो . कितने बर्फ बनाये हैं अभी तक आप दोनों ने .

नैना : एक hi काफी है दोनों क लिए , तू कहे तो तेरी भी एडजस्टमेंट करवा देते हैं साथ में . हमारा एक्सपीरियंस काम आएगा तेरे hi .

कल्पना : धत्त्त ,, बहुत गन्दी हो आप दोनों . मैं यहाँ और रुकी तो मेरा दिमाग ख़राब कर डौगी आप .

कल्पना कमरे से निकल कर भाग गयी क्यूंकि उसकी धड़कने तेज़ हो रही थी . एक तो अमित का वो रूप दूसरा दोनों लड़कियों की छेड़ कहानी . कल्पना इस तरह की बातों की आदि नहीं थी. और अपने दिल क मामले में तो वो बेचारी बिलकुल नादाँ थी. पहली बार जो किसी को दिल से चाहने लगी थी . कल्पना क जाते hi दोनों लड़कियां लग गयी आपस में चर्चा करने . विषय एक hi था , अमित . दोनों फिर से कोई जुगत भिड़ने क चक्कर में थी .

‘ मंजू , मेरी एक रिक्वेस्ट मानोगी ? ‘ राघव रमा क साथ मंजू से बात कर रहा था और इस वक़्त कमरे में गौरी क साथ साथ कामिनी भी मौजूद थी. रीता रजनी दिव्या दीपिका दूसरे कमरे में थी और साथ hi किचन का काम कर रही थी.

मंजू : रिक्वेस्ट ? अब आप ऐसे बात करोगे अपनी छोटी बहिन से ?

राघव : इतने सैलून बाद मिली हो न तो दर लग रहा है कहीं तुम मन न कर दो .

मंजू : आप को डरने की ज़रूरत नहीं. वैसे भी अब मैं कहीं नहीं जाने वाली आप सब को छोड़ के .

राघव : तो ठीक है , अब से तुम अकेली नहीं रहोगी , बल्कि हमारे साथ हमारे घर में रहोगी .

मंजू : पर भैया ....

राघव : देख तू मुझे भाई मानती है तो तुझे मेरी बात माननी होगी . वर्ण मैं समझूंगा तू मुझे भाई नहीं मानती ज़

मंजू : भैयाआ ,, ऐसा सोचियेगा भी मत . एक बार गलती कर चुकी हूँ . दोबारा से वही गलती नहीं करुँगी .

गौरी : पर तुम तो यहाँ रहने वाली थी न हमेशा क लिए ? अगर तुम यहाँ नहीं रहोगी तो अमित ......

मंजू : किसने कहा मैं जा रही हूँ ? वैसे भी तो अमित अभी कॉलेज क लिए शहर में रह रहा है न . तो उसका कॉलेज ख़तम होने तक मैं भी कॉलेज में अपनी जॉब करती रहूंगी. रही बात यहाँ रहने की तो अमित क साथ hi आ जय करुँगी यहाँ . मैं आपसे दूर थोड़ा hi जा रही हूँ . और भैया आप भी समझिये , अगर मैं अपना घर छोड़ कर आपके यहाँ रहने लगी तो लोग क्या कहेंगे ?

रमा : क्या कहेंगे ? वो तुम्हारा अपना घर है . भाई क घर रहने क लिए बहिन को किसी से पूछने की ज़रूरत है क्या ? वैसे भी तुम वहां रहोगी तो अमित भी हमारे पास रह लेगा . वर्ण तो वो अब नज़र hi कहाँ अत है .

कामिनी : पर रजनी दीदी रीता दीदी और दिव्या का क्या ? उनके यहाँ भी तो अमित को जाना होता है न बरी बरी से .

राघव : हाँ वो तो है . हम कौन सा उसे मन कर रहे हैं

मंजू : पर बड़े भैया का क्या ? आप जानते हैं न उन्हें . उन्हें पता चला क मैं आपके पास हूँ तो वो .....

राघव : तुम्हे डरने की ज़रूरत नहीं मेरी बहना . तेरा ये भाई उसके जितना न सही पर उससे काम भी नहीं है . मैं देख लूंगा सब .

राघव और रमा की बात पर फिलहाल मंजू सहमत तो हो गयी थी पर दिल में कहीं न कहीं वो जानती थी इससे बलजीत राइ राघव पर गुस्सा होगा और उसे नुक्सान पहुँचाने की कोशिश करेगा .

मैं और मोहित दोपहर ढलते hi घर से अखाड़े क लिए निकल गए थे . मोहित ने खुद hi कहा था क वो मेरे साथ चल क गाओं का अखाडा और कुश्ती देखना चाहता है . चाहते तो अंकल भी थे पर शायद उन्हें कोई काम था तो वो रुक गए . इधर हम अखाड़े में पहुंचे और मैं जुट गया मिटटी में अपने शरीर का पसीना बहाने . आज उस्ताद जी और देवा भैया से बात हुई थी तो उन्होंने मेरे लिए hi शाम को अखाडा लगाने का इंतज़ाम किया था वर्ण सर्दी क दिनों में अखाड़े में काम hi लोग आते हैं और शाम को न क बराबर . मैं इधर कुश्ती करने में जुट गया और उधर मोहित पता नहीं कहाँ गायब हो गया . मेरा भी इस तरफ ध्यान नहीं गया था . पर जब कुश्ती कर क हम फारिग हुए तो मोहित को वहां न पाकर मुझे थोड़ी चिंता होने लगी थी . इतने में मोहित एक तरफ से अखाड़े में अत नज़र आया तो मैंने उससे इस बारे में बात की .

अमित : अबे तू कहाँ था इतनी देर से ? मैं यहाँ अखाड़े में पसीना बहा रहा हूँ और तू गायब है . घर से तो अखाडा देखने आया था न ?

मोहित : अरे यार वो मीनल का फ़ोन था बस उसी में टाइम लग गया .

अमित : इतना टाइम ? कोई ज़रूरी बात थी क्या?

मोहित : है भी और नहीं भी

अमित : मतलब ?

मोहित : परसों क्रिसमस है न तो मीनल कह रही है क रीयूनियन पार्टी राखी है हमारे कुछ दोस्तों ने जो स्कूल में हमारे साथ थे . अब हमें वहां जाना है .

अमित : हम्म , अछि बात है . करो तुम एन्जॉय .

मोहित : तुझे भी साथ जाना है इसी लिए बता रहा हूँ .

अमित : मुझे ? पर मेरा वहां क्या काम ? मैं किसी को जनता थोड़ा hi हूँ वहां .

मोहित : वो सब मुझे नहीं पता . तू चल रहा है तो चल रहा है .

अमित : ये सब ाचा नहीं लगता यार , वो तुम लोगों क दोस्त हैं . मैं वहां जाऊंगा तो बोर हो जाऊंगा. और वो लोग भी क्या सोचेंगे मेरे बारे में . छोड़ यार मैं नहीं जाऊंगा तू चला जा मीनल क साथ .

मोहित : सेल मैं कह रहा हूँ न चल तो चल. कोई कुछ नहीं कहेगा . अगर किसी ने कुछ कहा तो मैं भी वापिस आ जाऊंगा . वैसे भी तुझे वहां साथ ले जाने की एक और वजह है .

अमित : कौन सी वजह ?

मोहित : वो बाद में बताऊंगा , बस इतना सुन ले क तुझे चलना hi होगा . कोई बहाना नहीं सुनूंगा मैं .

अमित : ाचा चल ठीक है पर अब पहले घर चलें ? अँधेरा हो रहा है . उस्ताद जी और देवा भैया तो चले भी गए और मैं तेरा इंतज़ार कर रहा हूँ. घर से भी दांत सुन्नी पड़ेगी .

मैं और मोहित अखाड़े से घर की तरफ चल पड़े . अँधेरा हो रहा था लोग तकरीबन अपनी दुकान वगैरह समेत कर घरों को जा रहे थे . हम दोनों बातें करते घर hi जा रहे थे क पीछे से किसी ने मुझे आवाज़ दी . मैंने मुद कर देखा तो सामने अंकल खड़े मुझे बुला रहे थे . ये अंकल वही ताऊ जी थे पूजा भाबी क ससुर .

अमित : पौन लगे अंकल जी . कैसे हैं आप ?

अंकल : मैं तो ठीक हूँ बीटा पर लगता है तुम्हे अब हमारे घर का रास्ता भूल गया है .

अमित : अरे नहीं ऐसी बात नहीं है ताऊ जी. मैं वो बस घर पर hi बिजी था . मेहमान ए हुए हैं न .

अंकल ने पास खड़े मोहित की तरफ देखा और मोहित ने भी अंकल को नमस्ते की जिस का उन्होंने अभिवादन किया .

अंकल : अछि बात है , विजय मिला था मुझे उसने बताया था क बहने आयी हुई हैं. थोड़ा टाइम निकल कर हमारे घर भी चक्कर लगा लेना बीटा , तू तो जनता है अब हम बूढ़ा बूढी hi अकेले हैं घर . और तो कोई अत जाता नहीं . तू अत था कभी कभी मगर अब तुमने भी आना छोड़ दिया है .

अमित : अरे आप कैसी बातें कर रहे हो ताऊ जी . अभी तो आप पूरे जवान हैं और ताऊ जी भी तो सारा काम खुद hi कर लेती हैं. वैसे आप अकेले कहाँ हो , भाभी है न घर पर ?

अंकल : लगता है तुझे पता नहीं , पता भी कैसे होगा जब आते hi नहीं हो. और तेरी ताई का भी तो चक्कर न लगा . पूजा को मेरा बीटा अपने साथ ले गया है. विदेश से आ गया था वापिस और अब यहीं शहर में उसकी नौकरी लगी है . थोड़ा दूर है पर अछि नौकरी है . आ जाता है मिलने महीने में एक आध बार . ज्यादा दिल करे तो हम दोनों hi मिल आते हैं.

अमित : भैया वापिस आ गए ? मुझे सच में किसी ने नहीं बताया था .

अंकल : कोई बात नहीं , घर चल बैठ कर बातें करते हैं.

अमित : नहीं ताऊ जी , अभी तो अखाड़े से आ रहा हूँ. पहले घर जा कर थोड़ा आराम करूँगा और फिर खाना . कल अत हूँ आपके घर और तै जी से भी दांत खा लूंगा थोड़ी .

अंकल : है है है , सही कहा , वो भी नाराज़ है थोड़ी . देख लेना फिर कल . ाचा अब मैं चलता हूँ .

पूजा भाभी क ससुर अपने रस्ते हो लिए और मैं वहां खड़ा पूजा भाबी क बारे में सोचने लगा . कितना समय हो गया था मैं कभी पूजा भाभी से मिलने hi नहीं आया . उन्होंने कई बार फ़ोन भी किये थे पर वक़्त hi नहीं लगा या यूँ कहो क हालत hi ऐसे रहे क कभी जा hi न पाया. शायद वो मुझसे बात करना चाहती होगी जाने से पहले . मोहित क साथ मैं घर वापिस आ गया. घर पहुँचते hi दीपिका ममी सबसे पहले मुखातिब हुई .

दीपिका : आ गए तुम लोग ? बैठो मैं दूध गरम कर क लती हूँ .

अमित : पहले मुझे नहाना है फिर दूध पिता हूँ.

दीपिका : ठीक है तुम नाहा लो तब तक मैं दूध गरम कर क लती हूँ .

मोहित तो अंकल आंटी क पास चला गया और मैं ऊपर अपने कमरे में चला गया . अंकल आंटी सब नीचे थे तो इस वक़्त मेरे कमरे में कोई नहीं था . इस लिए मैं अपने कमरे में चला गया . वैसे भी गरम पानी की सुविधा मेरे बाथरूम में hi थी. मैं नाहा कर अभी टॉवल से खुद को साफ़ कर hi रहा था क रूम का दरवाज़ा खुलने और बंद होने की आवाज़ आयी . मैं समझ गया ममी दूध ले आयी है . टॉवल को कमर से बंधे मैं बाथरूम से निकला hi था क लाइट चली गयी और एक डैम से अँधेरा हो गया . इस वक़्त कमरे मैं और ममी hi थे अकेले तो मुझे शरारत सूझी और मैं चुपचाप उनकी तरफ बढ़ा. अंदाज़े से चलते हुए मैं उनसे टकराया तो मैंने उन्हें अपने सीने से लगा लिया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए . ममी एक डैम से घबरा गयी एक तो लाइट बंद थी दूसरा मेरा ऐसे अचानक से उनके करीब आना . उनके नरम मुलायम होंठों को मैंने अपने होंठों में कैद कर रखा था . पहले तो वो कुछ देर मूरत hi बानी रही मगर फिर धीरे धीरे उनके होंठ खुल गए और मैं प्यार से उनके होंठ अपने होंठों में लेकर चूसने लगा. आअह्ह्ह क्या मज़ा आ रहा था , इतने नरम और मुलायम होंठ . दीपिका ममी मेरी बाँहों में मूरत बानी कड़ी बस मेरे चुम्बन का रिस्पांस hi दे रही थी और कुछ नहीं कर रही थी. पर एक बात थी आज उनके होंठ कुछ ज्यादा hi पतले लग रहे थे . मैंने ममी की कमर में हाथ दाल कर उन्हें पूरी तरह अपने साथ चिपका लिया . मेरे नंगे सीने से उनका सीना जुड़ गया था. मुझे ममी का बदन कंपता हुआ सा महसूस हुआ . मैंने अपने होंठ ममी क होंठों से अलग किये और पूछा .

अमित : क्या हुआ ? आप कम्प क्यों रही हैं? क्या ाचा नहीं लगा ?

ममी ने मेरी बात का कोई जवाब न दिया और मेरी बाँहों से निकल कर भाग गयी . अँधेरे की वजह से बस दरवाज़े का खुलना hi पता चला और उनका बहार निकलना . मैं समझ नहीं पाया क उन्होंने ऐसा क्यों किया . खैर मैं वहीँ बीएड पर बैठ गया . कुछ hi पलों में लाइट आ गयी और बीएड की साइड में पड़ा दूध का गिलास उठा कर मैंने पहले गरम गरम दूध पिया . दूध ख़तम कर क मैं अपने लिए कपडे निकलने लगा .

‘ ओह , ी ऍम सॉरी मुझे पता नहीं था तुम ‘ ये आवाज़ करिश्मा दीदी की थी जो अपनी आँखों पर हाथ रखे बोल रही थी . मैं इस वक़्त सिर्फ टॉवल लपेटे उनके सामने खड़ा था और मुझ से ऑंखें चुरा रही थी .

अमित : कोई बात नहीं दीदी , वो मैं बस कपडे पेहेन hi रहा था .

करिश्मा दीदी ने हाथ हटा कर एक बार फिर मुझे देखा और उनकी नज़रें इस बार मेरे ऊपर जैम गयी. मैं जल्दी से अपनी T-shirt पहनी और लोअर पहनने लगा तो मुझे इस बात का ध्यान hi नहीं रहा क मैंने अभी अंडरवियर नहीं पहना था . लोअर पहनते वक़्त जल्द बाज़ी में टॉवल निकल कर गिर गया . मैंने तो जल्दी से लोअर चढ़ा लिया पर करिश्मा दीदी की नज़रें मनो जैम सी गयी थी.

अमित : ी ऍम सॉरी दीदी , वो गलती से .

करिश्मा : हह हँ हाँ कक कोई बात नहीं it’s ok .

इतना कह कर दीदी कमरे से बहार निकल गयी . मैंने भी जल्दी से कपडे ठीक किये और बहार निचे चला गया . सब क साथ बैठ कर मैं भी बातचीत का हिस्सा बन गया . रत को साथ में खाना खाया और फिर कल की तरह अपनी अपनी जगह सब सोने चले गए . दिव्या मौसी से मेरी आज सारा दिन बात नहीं हुई थी क्यूंकि आज मैं ज्यादा टाइम घर नहीं था और जितना था उठा मौसी काम लगी रही . अब जब हम एक hi कमरे में थे तो मुझे कल वाली हरकत पर शर्मिंदगी महसूस हो रही थी . पता नहीं मौसी क्या सोच रही होंगी मेरे बारे में . मैं चुपचाप आज अपने बिस्तर पर लेट गया . मौसी ने भी कोई बात नहीं की और न hi बुआ ने .

सुबह जल्दी उठ कर मैं घर पर एक्सरसाइज करने की बजाये अखाड़े में चला गया . घर पर अभी सब सो रहे थे . आज डरा भैया क साथ अचे से अभ्यास किया और खूब पसीना बहाया. मैं अखाड़े में hi था जब बाबा क साथ अंकल वहां ए और मुझे कुश्ती करते हुए देखने लगे . उनके चेहरे पर ख़ुशी साफ़ नज़र आ रही थी. उस्ताद जी क साथ अंकल और बाबा काफी देर बातें करते रहे . फिर अंकल मुझसे मिल कर बाबा क साथ hi निकल गए . उन्हें आज ज़रूरी काम से जाना था तो वो चले गए . कल रत hi खाने पर इस बारे में चर्चा हो रही थी . अंकल को ज़रूरी काम था इस लिए उन्होंने जल्दी निकलना था पर आंटी करिश्मा दीदी और मोहित बाद में जाने वाले थे . अखाड़े से फ्री हो कर मैं घर क लिए निकला तो मुझे यद् आया पूजा भाभी क घर जाना था मुझे . मैं घर जाने से पहले उनके घर चल दिया .

‘ अमित तुम यहाँ ? मुझे तो लगा था तुम्हे रास्ता भूल गया है इस घर का ‘ पूजा भाभी की सास ने गेट खोला तो मुझे सामने प् कर उन्होंने थोड़ा रूखे भाव से मुझे कहा .

अमित : पाऊँ लागे ताई , मैं रास्ता क्यों भूलने लगा भला ? आप hi रास्ता भूल गयी हैं शायद इसी लिए अब आती नहीं हमारी तरफ .

आंटी : पहले अंदर आओ , साड़ी बातें यही करनी हैं क्या .

मैं आंटी क साथ अंदर चला आया . आंटी इस वक़्त साडी पहने हुए थी. घर क अंदर से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी. न hi कहीं अंकल नज़र आ रहे थे .

अमित : ताऊ जी कहीं नज़र नहीं आ रहे ?

आंटी : वो गए हैं हैं किसी क साथ , आ जायेंगे घंटे भर में . क्या लोगे तुम ?

अमित : नहीं कुछ नहीं चाहिए . आप बैठिये यहाँ .

आंटी : ऐसे कैसे कुछ नहीं , तुम भूल गए हो हमको पर हम नहीं भूले. बैठो मैं अभी आयी .

आंटी किचन में चली गयी. उनके चेहरे पर अभी भी वैसे hi रूखे भाव hi थे . मुझे पता था क वो मेरे इतने दिन न आने से नाराज़ हैं . इसी लिए ऐसे बात कर रही हैं. कुछ hi देर में आंटी हाथ में दूध का गिलास लिए आ गयी .

आंटी : लो इसे पि लो , गाय का घी दाल कर लगी हूँ . म्हणत कर क आ रहा है न अखाड़े से . इसे पि लो ताकत आएगी

मैंने दूध का गिलास पकड़ा और एक hi बार में पूरा खली कर दिया .

आंटी : तो , कहाँ थे इतने दिन ? तुझे कितनी बार फ़ोन किया था पूजा ने पर तू आया hi नहीं. बेचारी तुमसे मिलना चाहती थी जाने से पहले .

अमित : वो मैं कुछ उलझा हुआ था इधर उधर क कामो में . पर भाभी ऐसे अचानक चली क्यों गयी ?

आंटी : पेट से हो गयी थी वो इस लिए बेटे को बुलाना पड़ा . फिर तेरे ताऊ जी भी कहने लगे क अब विदेश जाने का रहने दे तो यहीं नौकरी मिल गयी उसे कंपनी की तरफ से hi . अब दोनों वहीँ रहते हैं साथ में कंपनी क क्वार्टर में .

अमित : भाभी पेट से हो गयी थी ?

आंटी : और नहीं तो क्या , और तेरा hi बचा है ऐसे सोच क्या रहा है . मैं तो बहुत खुश हूँ . इतने दिनों बाद भगवन ने हमारी सुन ली . मेरे बेटे में hi शायद कोई कमी थी जो इतनी देर से बहु को बचा नहीं ठहर रहा था. हमें तो चिंता होती रहती थी क पता नहीं क्या होगा. पर तुम्हारी वजह से आज वो इतनी खुश है .

अमित : पर भाभी ने तो कुछ बताया नहीं .

आंटी : इसी लिए तो तुझसे मिलना चाहती थी जाने से पहले . मगर तुम्हे तो दुनिया भर क काम हैं .

अमित : पर आप क्यों नहीं आ रही थी इतने दिनों से ? आप तो आ सकती थी न ? क्या आपको पता नहीं था क मैं यहीं हूँ?

आंटी : पता तो था और मैं मिलना भी चाहती थी पर अब मैं तुम्हारे घर नहीं आना चाहती .

अमित : क्यों ऐसी क्या बात है ?

आंटी : वो है न कमीना तेरा छोटा मां , कमलेश . तुझे नहीं पता , बहु को परेशां करने लगा था . एक बार तो इधर घर hi आ धमका था . ये तो ाचा हुआ मैं आ गयी वर्ण पता नहीं क्या करता .

अमित : मां ??? तो क्या .......

आंटी : मुझे बता दिया है बहु ने सब कुछ , पहले मुझे बुरा लगा पर फिर उसकी हालत समझ गयी थी मैं इस लिए कुछ नहीं कहा उसे . पर वो मुआ कमलेश , अछि भली अपनी बीवी को छोड़ कर बहार मुँह मरता फिरता है . तुझे तो पता hi है सब . पूजा ने सब बता दिया है मुझे . इसी लिए मैं अब तुम्हारे घर नहीं जाती . कोई और होता तो पंचायत में नंगा करवा देती . पर तुम भले लोग हो . विजय अजय दोनों कितने भले मानस हैं और तुम्हारी माँ गौरी कामिनी दीपिका . सब अचे हैं. पता नहीं ये मुआ कमलेश इतना हरामी कैसे है . तुम्हारी परवाह न होती तो उसे छाती का दूध यद् दिला देती . बस तेरी वजह से चुप रह गयी मैं .

मुझे आंटी की बात सुन कर कमलेश मां पर गुस्सा आ रहा था क वो अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे .

आंटी : तू क्यों सोच में पद गया है ? अब सब ठीक है . इसी लिए पूजा को मैंने बेटे क साथ भेज दिया वर्ण क्या पता कब कोई गुल खिला देता तेरा मां .

अमित : मैं बहुत शर्मिंदा हूँ ताई, मां सच में बहुत गलत कर रहे हैं

आंटी : तू क्यों शर्मिंदा हो रहा है ? अब सब ठीक है तू चिंता मत कर . हो सके तो कभी कभी आ कर मिल जाया करो ाचा लगेगा . अब तो पूजा भी नहीं है यहाँ तो अकेले मन नहीं लगता .

अमित : मैं इस बात का ध्यान रखूँगा . ाचा ताई अब मैं चलता हूँ .

मैं इतना कह कर उठने लगा तो आंटी ने मेरा हाथ पकड़ लिया .

आंटी : कहाँ चले ? क्या बस पूजा क लिए hi आ सकते हो यहाँ ? मेरे लिए नहीं ?

आंटी की आँखों में तड़प साफ़ नज़र आ रही थी . शायद वो बहुत प्यासी थी जो मुझे आँखों hi आँखों में गुहार लगा रही थी क मैं उनकी प्यास को शांत करूँ . अपने मां की वजह से मुझे पहले hi शर्मिंदगी महसूस हो रही थी . आंटी की तड़प को मैं नज़र अंदाज़ न कर सका और सोचा क उनके लिए कुछ तो करना hi चाहिए . मैंने आंटी का चेहरा हाथों में लिया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए . आंटी भी प्यासी थी जो मेरे ऐसा करते hi मेरे होंठ निचोड़ने लगी . मेरे सर को हाथों में थामे वो मेरे होंठों को नोचने लगी . वो बहुत वाइल्ड तरीके से किश कर रही थी . मेरा हाथ खुद hi उन्होंने अपने बड़े बड़े चुचों पर रख दिया और मैं भी उन्हें मसलने लगा . आंटी पता नहीं कितनी प्यासी थी क कुछ hi पल किश करने क बाद वो झटके से घुटनो क बल बैठी और मेरा लोअर निचे खिसका कर मेरा लैंड अंडरवियर से बहार निकला और एक बार हाथ से पूरा मसलने क बाद उसे मुँह में भर लिया . आंटी मज़े से मेरा आधा लैंड मुँह में अंदर बहार करने लगी. मस्ती में मेरी ऑंखें भी बंद होने लगी . सुबह का वक़्त था और कोई भी घर आ सकता था मगर आंटी को किसी बात की परवाह नहीं थी .

आंटी : उम्म्म्म उम्म्म उम्म्म उम्म्म हहहहह आआह्ह्ह्ह कितना तड़पाया है तुमने मुझे इसके लिए हहहह . अब देर मत कर , इससे पहले क तेरे अंकल आ जाएँ जल्दी से एक बार मेरी प्यास बुझा दे.

आंटी जल्दी से कड़ी हुई और वही पलट कर अपनी सदी पेटीकोट कमर तक उठा के अपनी पेंटी नीचे गिरा कर सोफे पर हाथ रख कर झुक गयी . आंटी की गोरी चिकनी बड़ी गांड मेरे सामने आ गयी और नीचे रास बहती उनकी बालों से भरी छूट . मुझे भी लगा क देर करना ठीक नहीं मैंने तुरंत आगे बढ़ कर लैंड को छूट पर सेट किया और कमर को दोनों हाथों में थम कर धक्का पेल दिया .

आंटी : आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मायआ रिइइइइइइ धीरे बेताआआ एक hi बार में पेल दिया सारा आआह्ह्ह्ह अब इन बूढी हड्डियों में इतनी जहां नहीं है बेताआए थोड़ा तरस खा मुझ पर कक्कक्क्स एआइइइइइइइइइ आआआआ मायआ अअअअअअअ

अमित : अभी आप बूढी कहाँ हुई हो टाई अभी तो आप पूरी जवाब हो . आपकी ये गांड तो अभी भी लड़कों को पागल कर सकती है . आह्हः मज़ा आ गया , छूट क बाद गांड भी मरूंगा आपकी आज तो .

मैं बात करता हुआ आंटी पर बिना कोई रहम किये ज़बरदस्त धक्के मर रहा था . आंटी पूरी हिल रही थी और खुद को गिरने से बचने क लिए सोफे को मजबूती से पकडे हुए थी . उनके मुँह से तेज़ तेज़ सिसकियाँ निकल रही थी और मेरी जांघें उनके चूतड़ों से टकरा कर ठप्प ठप्प ठप्प की आवाज़ें कर रही थी . आंटी की कास थोड़ा काम था इस लिए मुझे घुटने बेंड करने पद रहे थे . मैं छूट में धक्के पेलता पेलता इतना जोश में आ गया क मैंने उन्हें कमर से पकड़ कर सीधा हो गया जिससे उनके पाऊँ जमीन से ऊपर हवा में हो गए और वो आगे गिरने को हुई पर मैंने उन्हें थामे रखा .

आंटी : आआआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह मैं गिर जाउंगी लल्ला एआईईईई धीरे कर ले क्यों मेरी छूट का भोसड़ा बनाने में लगा है माआ रईईईई

मैं आंटी की किसी बात का जवाब देने की बजाये बस धक्के पेलता जा रहा था. आंटी ज्यादा देर खुद को रोक न पायी और उनकी छूट भरभरा कर बहने लगी . उनका पूरा शरीर कम्पनी लगा . मैंने धक्के पेलने रोका और उन्हें अपना पानी निकलने दिया .

आंटी : कक्कक्स आईई आआह्ह्ह आअह्ह्ह ककक माआ तूने तो कक्कक्क्स आआह्ह्ह मेरी हालत ख़राब कर दी ककक ऐसे करता है भला कोई .

अमित : अभी कहाँ ताई , अभी तो आपकी ये मस्त गांड का भी मज़ा लेना है .

मैंने आंटी को सहारा दे कर घुटनो पर सोफे पर किया और अपना लैंड गांड क छेड़ पर टिका कर धक्का पेल दिया . एक बार फिर से आंटी कररह उठी पर मैं कहा सुनने वाला था . अंकल क आने से पहले मुझे काम ख़तम करना था . गांड इतने दिनों से चूड़ी नहीं थी इस लिए टाइट हो राखी थी पर लैंड भी छूट क पानी से चिकना था तो ज्यादा दिक्कत न हुई और गांड को चीरता हुआ लैंड पूरा गांड में घुस गया . आंटी की गांड बड़ी मस्त थी जिसे मरने में मज़ा आ रहा था . उनके गोर चिकने बड़े बड़े चूतड़ देख कर मुझे और भी मज़ा आ रहा था . मैं धक्के पेलता हुआ साथ में उनके चूतड़ थप्पड़ मर मर कर लाल करने लगा . अभी मैंने 5 मिनट hi आंटी की गांड मरी थी क बहार से गेट बजने लगा .

आंटी : मर गयी ,, लगता है तेरे अंकल आ गए . जा बीटा जा कर ज़रा दरवाज़ा खोल दे मैं तब तक अपनी हालत ठीक करती हूँ ककक आआह्ह्ह्ह हड्डियां चटका दी तूने तो माआ ककक

मैंने जल्दी से अपना लोअर अंडरवियर सब ठीक किया और अपनी हालत दुरुस्त कर क दरवाज़ा खोलने चला गया . सामने अंकल hi थे . मुझे देख कर वो बहुत खुश हुए और अपने गले लगा लिया . फिर हम दोनों अंदर ए .

अंकल : और कैसे हो बीटा ? ये तूने बहुत ाचा किया जो इस वक़्त मिलने आ गया . वर्ण बाद में तो टाइम hi नहीं मिलता . तेरी तै कहाँ है नज़र नहीं आ रही . आरी सुनती हो .... कहाँ हो .

अमित : ताई यहीं है ताऊ जी , अभी मुझे दूध दे कर गयी थी . शायद बाथरूम में होंगी . आप बैठिये .



कुछ देर बाद आंटी अपनी हालत ठीक कर का बाथरूम से निकल कर आ गयी और हमारे साथ hi बैठ गयी बातें करने . उनके चेहरे पर कहीं भी दर्द क भाव नहीं थे बल्कि चेहरे पर संतुष्टि नज़र आ रही थी . कुछ देर मैं वहां दोनों क साथ बैठ कर बातें करता रहा और फिर उनसे इजाज़त लेकर घर की तरफ चल दिया . आंटी ने मुझे फिर आने का कहा . मैंने आंटी को तो संतुष्ट कर दिया था पर मेरे लैंड का कलपद हो गया था. खैर अब किया भी क्या जा सकता था . पर अब मेरे दिमाग में कमलेश मां की हरकत घूम रही थी. मुझे उन पर गुस्सा आ रहा था . मुझे लगा क इस मामले में मुझे दीपिका ममी से बात करनी चाहिए . इस लिए मैं जल्दी से घर पहुँच गया . घर पहुंचा तो वहां सब नाश्ता कर रहे थे. आंटी मोहित और करिश्मा दीदी तैयार थे जाने क लिए . निधि दीदी नज़र नहीं आ रही थी शायद वो भी अंकल क साथ चली गयी थी पर उनकी कार कड़ी थी और अंकल की नहीं .
 
अपडेट 247



गौरी : आ गए तुम ? कहाँ चले गए थे ? जाओ जल्दी जा कर नाहा कर आओ पहले . नाश्ता तैयार है .

माँ ने मुझे तैयार होने को बोल दिया और खुद सबको खाना सर्वे कर रही थी . बाबा भी नाश्ता कर रहे थे वहां. मैं पहले अपने कमरे में गया और जा कर नाहा कर तैयार हो कर नीचे आ गया . तब तक जो खाना खा रहे थे वो फ्री हो चुके थे और अब बरी थी उनकी जो नाश्ता बनाने या सर्वे करने में लगी हुई थी यानि दीपिका ममी दिव्या मौसी माँ और राधा . मैं जा कर बैठा तो मेरी बगल में राधा और दूसरी तरफ माँ बैठी थी .

गौरी : इतनी देर कहाँ लगा कर ए हो ?

अमित : वो पूजा भाभी की तरफ चला गया था . कल रत ताऊ मिले थे वो बोल रहे थे घर आने को .

दीपिका : पूजा भी अचानक से चली गयी , चलो ाचा है अब अपने पति क साथ है .

अब दीपिका ममी को मैं क्या बताता सबके सामने क वो अचानक क्यों चली गयी .

अमित : माँ निधि दीदी नहीं नज़र आ रही , क्या वो भी चली गयी अंकल क साथ ?

गौरी : हाँ वो राघव को ज़रूरी मीटिंग में जाना था तो इस लिए निधि को भी जाना पड़ा.

दीपिका : मन तो नहीं था बेचारी का जाने का , देखा नहीं कैसे उदास हो गयी थी जाने की बात पर . उसका यहाँ मन लगता है अब .

रजनी : क्या बात है मेरी बेटी क चर्चे हो रहे हैं. ये ले गरम गरम परांठा .

गौरी : हम बस यही बात कर रहे थे क निधि का अब यहाँ मन लगने लगा है . कहाँ पहले तो आती hi नहीं थी .

रजनी : हाँ मैंने भी देखा है यहाँ आ कर वो खुश रहती है . पर अब ज्यादा दिन तो नहीं रह गए उसके . इनका फ़ोन आया था लड़का देख लिया है निधि क लिए कोई.

दिव्या : सच दीदी ?? ये तो बहुत अछि बात है. पर जीजा जी से कह देना लड़का निधि क हिसाब से होना चाहिए कोई ऐरा गैर हुआ तो मैं न होने दूंगी रिश्ता .

रजनी : तू खुद hi देख लियो , मुझे भी कहाँ पता है अभी कुछ. कल शाम को hi बोल रहे थे क लड़का देखा है . उनके साथ hi बैंक में सरकारी नौकरी करता है . अभी ज्यादा बात नहीं हुई मेरी . आज जा रही हूँ शहर कल तक देख लुंगी क लड़का कैसा है फिर तुम सब को भी बता देंगे . अभी निधि से कोई बात न करना कोई भी .

दीपिका : आप चिंता मत करो , पहले लड़का देख कर तसल्ली कर लो फिर निधि को बताएँगे .

मैं मौसी की बात सुन कर बहुत खुश हो रहा था क . निधि दीदी की भी शादी की उम्र थी और उनकी सब सहेलियां तकरीबन शादीशुदा थी. निधि दीदी एक परफेक्ट लड़की थी पर शादी नहीं करवाई थी उन्होंने अब तक. अब वो भी अपनी जॉब में अछि तरह सेट थी और शादी क लिए अब देरी का कोई मतलब नहीं था . नाश्ता करने क बाद मोहित ने निधि दीदी वाली कार निकली और अपना सामान रख कर रेडी हो गया . आंटी और करिश्मा दीदी बरी बरी सब से मिले . रजनी मौसी भी साथ जाने क लिए तैयार हो गयी थी. सब से मिलने का बाद आंटी और करिश्मा दीदी ने बरी बरी से मुझे घर आने का कहा और फिर मौसी को साथ लेकर वो चल दिए शहर . मुझे आज शहर जाना था क्यूंकि मैंने सोच लिया था क कुछ भी हो पहले रीमा से बात करना ज़रूरी है . मैं उसे और दुखी नहीं करना चाहता था . इस लिए मैं अपने कमरे में जा कर तैयार होने लगा .

दीपिका : कहाँ जा रहे हो ?

मैं कपडे बदल कर तैयार हो गया था इतने में दीपिका ममी कमरे में आ गयी . मुझे भी उनसे बात करनी थी पर समय नहीं मिल रहा था सबके रहते .

अमित : ाचा हुआ आप आ गयी , मुझे आपसे एक ज़रूरी बात करनी है .

दीपिका ममी समझ गयी क कुछ तो ज़रूरी बात होगी जो मैं अकेले में करना चाहता हूँ. इस लिए वो दरवाज़ा बंद कर क मेरे पास आ गयी.

दीपिका : क्या बात है ?

अमित : पूजा भाभी अचानक यहाँ से क्यों गयी , पता है आपको ?

दीपिका : हाँ उसका पति आ गया था और सुना है अब वो यहीं दूसरे शहर में नौकरी कर रहा है इस लिए वो उसके साथ रहने गयी है .

अमित : और उनकी सास अब इधर क्यों नहीं आती ?

दीपिका : सोचते हुए ) तुम कहना क्या चाहते हो ?

अमित : कमलेश मां उसे तंग कर रहे थे फिर से सम्बंद बनाने क लिए . इस लिए वो ऐसे अचानक यहाँ से चली गयी . और अब ये बात उनकी सास को भी पता है इस लिए वो यहाँ नहीं अति .

दीपिका : क्याआ ??? ये इंसान कभी नहीं सुधर सकता , मैं कोशिश कर रही थी खुद को बदलने की ताकि उसे उसका हक़ दे सकूँ . ये इसी काबिल है क उसे कोई न पूछे .

दीपिका ममी की आँखों में आंसू आ गए थे . उन्हें बहुत दुःख हो रहा था ये बात जान कर . मैंने उन्हें आगे बढ़ कर गले से लगा लिया . कुछ देर में वो शांत हो गयी .

अमित : एक ख़ुशी की बात बताऊँ ?

दीपिका : ऑंखें साफ़ करते हुए ) बोल

अमित : पूजा भाभी माँ बनने वाली हैं .

दीपिका : क्या ???

अमित : हाँ

दीपिका : और कहाँ कहाँ गुल खिला रहे हो , पहले hi बता दो मुझे . तुम तो लाइन लगा डोज बच्चों की. चलो ये भी ाचा hi हुआ , उसे भी ज़रूरत थी . पर थोड़ा खुद पर कण्ट्रोल भी करो . किसी और क साथ तो ऐसा नहीं किया न ?

अमित : नहीं और कोई नहीं .

दीपिका : और ये पूजा की सास को ये सब कैसे पता ? और उसने कुछ कहा क्यों नहीं अभी तक किसी से ? इसका मतलब उसके साथ भी ....

दीपिका ममी ने मेरी आँखों में देख कर ये सवाल पुछा तो मैंने हाँ में सर हिला कर चेहरा झुका लिया .

दीपिका : तौबा ,, तुम आदमी हो क .... नहीं आदमी नहीं घोड़े hi हो . घोड़े का hi तो लगा हुआ है जो रुक hi नहीं रहा . पर थोड़ा संभल कर रहो. ऐसा न हो क किसी कुंवारी लड़की को भी पेट से कर दो . फिर गले पद जाएगी कह देती हूँ. करुणा नैना क साथ तो ध्यान रखते हो न ?

अमित : इतनी तो समझ है मुझ में आप चिंता न करो .

दीपिका : देख रही हूँ समझ ,,, और अब कहाँ जा रहे हो इस वक़्त ?

अमित : रीमा क पास , सोचा आज उसे सब सच बता देता हूँ. फिर जो होगा देखा जायेगा .

दीपिका : सीरियस होते हुए ) मेरी एक बात मानोगे ? रीमा तुम्हारा प्यार है और तुम उसके लिए सब कुछ हो. जितना मैंने उसे देखा है वो एक सीधी सधी और दिल की अछि लड़की है. तुम उसे मत छोड़ना . अपनी तरफ से बिलकुल भी ऐसा कुछ मत कहना क उसका दिल टूट जाये . उसे बस इस रिश्ते की सचाई बताना बाकि फैसला उसे करने देना .

अमित : पर ....

दीपिका : कहा न ,, फैसला उसे करने दो. वो तुम्हे दिल से चाहती है और उससे अछि लड़की तो ढूंढने से भी नहीं मिलेगी . अब जाओ

अमित : जाने से पहले मुँह तो मीठा करवा दो आरव की अम्मा .

मैंने दीपिका ममी का हाथ पकड़ कर खिंचा तो वो मेरे सीने से आ लगी .

दीपिका : हटो छोडो मुझे. हर वक़्त एक hi काम रहता है तुम्हे . रीमा क पास जा रहे हो न उसी क साथ कर लेना जो करना है .

अमित : बस इतना hi प्यार था मेरे साथ वैसे तो कहती हो उम्मम्मम्म

मेरी बात पूरी होने से पहले दीपिका ममी ने मेरा सर पकड़ कर झुकाते हुए मेरे होंठ अपने होंठों में जकड लिए और किश करने लगी . मेरे बाल खींचते हुए वो वाइल्ड तरीके से मेरे होंठ निचोड़ रही थी. यहाँ तक की सांस लेने का भी मौका नहीं दे रही थी .

दीपिका : मुऊआआअह्ह्ह हहहह अब बोलो क्या बोल हहह रहे थे .

अमित : हहहह हहहह बिलकुल जंगली बिल्ली हो आप भी , कभी कभी समझ hi नहीं अत आपका भी . कल क्या हुआ था ?

दीपिका : कल ??? क्या हुआ था किस बारे में बात कर रहे हो ?

अमित : कल जब मैं किश कर रहा था तो आप कम्प क्यों रही थी ?

दीपिका : मुझे कब किश किया था तुमने ?

अमित : यहीं मेरे कमरे में जब आप दूध देने आयी थी .

दीपिका : पर मैं तो कल तुम्हे दूध देने आयी नहीं .

अमित : शॉकेड ) क्या ? तो वो .....

दीपिका : इसका मतलब किसी और को hi पकड़ लिया और तुम्हे पता तक नहीं चला . इसी लिए कहती हूँ संभल कर रहा करो और अपना ये खूंटा काबू में रखा करो. अब पता नहीं किसे दबोच लिया तुमने कल . पता लगाना पड़ेगा , पर कौन होगी वो ? किसी ने कुछ कहा क्यों नहीं ? वो लड़की थी यार औरत ? इतना पता है क नहीं ?

अमित : नहीं , अँधेरा था तो पता नहीं चला . शायद लड़की होगी , मतलब वो भरी नहीं थी .

दीपिका : भरी नहीं थी हहहह , किश किया और टच भी किया पर पता नहीं किसे किया ?? लड़कियों में ,,,,, नैना करुणा तो हो नहीं सकती वर्ण वो तो ऐसे कम्पटी नहीं वैसे भी वो कल्पना क साथ hi थी बच्चों क साथ . नेहा और राधा भी वहीँ थी . अब बची करिश्मा और निधि . पर दोनों में से किसी ने कोई भी रिएक्शन तो नहीं दिखाया . इसका मतलब है वो जो भी है तुम्हे पसंद करती है . मेरे ख्याल से वो करिश्मा हो सकती है . क्यूंकि उसकी नज़रें तुम पर hi रहती हैं . लिख लो एक और नाम अपनी लिस्ट में . अब वो भी तुम्हारे निचे आने वाली है मेरे घोड़े . उम्म्माह्ह्ह

दीपिका ममी मुझे किश कर क चली गयी . और मैं करिश्मा दीदी क बारे में सोचने लगा . कल वो hi तो आयी थी जब मैं कपडे पहन रहा था . इसका मतलब दीपिका ममी का अंदाज़ा सही था . अपनी सोच को विराम देकर मैं भी नीचे आ गया और अपनी बाइक को बहार निकलने लगा

गौरी : कहाँ जा रहे हो इस वक़्त ?

अमित : शहर जा रहा हूँ माँ कुछ काम है .

गौरी : क्या काम है ?

अमित : एक दोस्त से मिलना है ज़रूरी

गौरी : तो साथ क्यों नहीं चले गए सबके ?

अमित : साथ जाता तो वापिस कैसे अत ? शाम को वापिस आऊंगा कॉलेज से होकर

कल्पना : मैं भी चलूँ ? बाद में मैं कैसे आउंगी ?

अमित : इतनी जल्दी जा के क्या करोगी वहां ? वैसे भी मुझे काम है . तुम ऐसा करना बुआ की कार ले जाना . कॉलेज में मिलेंगे .

कल्पना : साथ hi चलते हैं न मैं वहां सीमा की तरफ चली जाउंगी .

नैना : ले जा न साथ तेरा क्या जाता है इसमें

अमित : वहां बोर हो जाएगी ये , यहाँ तो आप सब हैं hi .

करुणा : ओहु , बड़ी फ़िक्र हो रही है इसकी ? चल चुपचाप ले क जा.

अब मैं भला क्या करता माँ भी कहने लग गयी तो मुझे मजबूरन कल्पना को भी साथ ले जाना पड़ा .

कल्पना : वैसे किस्से मिलने जा रहे हो ? कोई खास है क्या ?

अमित : नहीं ऐसी कोई बात नहीं है , एक दोस्त से मिलना है .

कल्पना : उसी दोस्त से जिससे होटल में मिलने गए थे ?

अमित : होटल में ? तुम्हे कैसे पता मैं कहाँ गया था ? तुम क्या पूछा कर रही थी मेरा ?

कल्पना : मैं पीछा कैसे कर सकती हूँ मैं तो तुम्हारे साथ hi थी न कौन सा अपनी गाड़ी पे थी . वो तो तुम्हारी बातें सुनी थी फ़ोन पर इस लिए पता है . वैसे उसी से मिलने जा रहे हो न ???

अमित: नहीं , किसी और से मिलना है मुझे .

कल्पना: लड़का है या लड़की ?

अमित : तुम ये इन्वेस्टीगेशन क्यों कर रही हो ?

कल्पना : क्यों न करूँ ? तुम कहाँ हो मुझे पता होना चाहिए न . कल को कोई बात हो गयी तो जवाब तो मुझे hi देना पड़ेगा न घरवालों को .

अमित : ओह अच्छा , नैना दीदी और करुणा दीदी की सांगत का असर होने लगा है तुम पर . ऐसी कोई बात नहीं है .

कल्पना : तो मैं भी चलूँ साथ ?

अमित : मैंने कहा न मुझे ज़रूरी काम है . तरय तो अंडरस्टैंड इसी लिए मैं तुम्हे नहीं ला रहा था साथ .

कल्पना : ठीक है ठीक है , जाओ जहाँ जाना है जिससे मिलना है . मुझे क्या .

( मन में ) पक्का कोई लड़की है जिससे चोरी छिपे मिलने जाते हो तुम . मैं भी पता कर क रहूंगी .

बातें करते हुए हम शहर पहुँच गए और कल्पना को सीमा क घर ड्राप कर क मैं निकल गया . रीमा से मैं अकेले में मिलना चाहता था जहां कोई डिस्टर्ब करने वाला न हो . इस लिए मैं एक पार्क में चला गया . सर्दियों का टाइम था इस लिए पार्क में लोग न क बराबर hi होते हैं ठण्ड क दिनों में . पार्क में उम्मीद मुताबिक कोई न था . रीमा से बात करने का मैंने मन तो बना लिया था पर दिल था जो अभी भी दर रहा था क पता नहीं ये सब मैं कैसे हैंडल कर पाउँगा और रीमा का क्या रिएक्शन होगा . मैंने रीमा को फ़ोन लगाया तो दूसरी बेल्ल बजने से पहले hi रीमा ने फ़ोन उठा लिया .

रीमा : कहाँ थे तुम इतने दिनों से ? फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे थे मेरा ? कोई गलती हो गयी मुझसे ? किस बात की सजा दे रहे हो ? तुम्हे पता भी है मेरी क्या हालत हो गयी है ?

एक hi सांस में रीमा ने कितने hi सवाल पूछ लिए पर उसकी आवाज़ से साफ़ पता चल रहा था क वो जैसे आंसू बहा रही है .

अमित : क्या तुम मुझसे मिलने आ सकती हो ?

रीमा : कहाँ हो तुम ? मैं अभी अति हूँ . बताओ कहाँ हो ?

अमित : क्सक्सक्सक्स पार्क में , अकेली आना और किसी को बताना मत क मुझसे मिलने आ रही हो .

रीमा : तुम वहीँ रुको मैं अभी आयी .

रीमा ने जल्दी से फ़ोन काट दिया . उसकी हालत का अंदाज़ा उसकी आवाज़ से hi हो रहा था . उसके दुःख की वजह मेरी बेरुखी थी और उससे ज्यादा दुःख उसे मुझ से मिल क होने वाला था . पर फ़िलहाल रीमा से बात कर क मेरी आँखों में भी नमी आ गयी थी. आखिर उसको मैं कैसे बताऊँ क हम दोनों का क्या रिश्ता है और तकदीर ने हमें किस मोड़ पर ला कर खड़ा कर दिया है . मैं सोच में गम वहां रीमा का इंतज़ार करने लगा . मेरी बेचैनी पल पल बढ़ती जा रही थी . रीमा का इंतज़ार मनो इस वक़्त क़यामत सा लग रहा था . तभी मुझे रीमा आती हुई दिखी . मुझे देखते hi रीमा क कदम रुक गए और फिर वो तेज़ कदमो से दौड़ती हुई आकर सीधा मेरे साइन से लग कर रोने लगी .

रीमा : क्यों , क्यों , क्यों , हहहह हहहहह , क्यों कर रहे हो मेरे साथ ऐसा ? क्या खता हुई है मुझसे ? अगर मेरी किसी बात पर तुम गुस्सा हो तो मुझे मारो मुझे सजा दो पर इस तरह खुद से जुड़ा तो न करो. तुम नहीं जानते इतने दिन तुम्हे बिना देखे बिना बात किये मैंने कैसे गुज़ारे हैं. आखिर क्यों कर रहे हो मेरे साथ ऐसा ? तुम्हे पता है न मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती फिर इतने दिन से क्यों मुझे तड़पा रहे हो ?

रीमा मेरे साइन से लगी बस रोये जा रही थी . उसकी एक एक बात सही थी और मेरे दिल पर उसके ये सवाल खंजर से चल रहे थे . मेरे हाथ अपने आप रीमा को अपनी आगोश में लेने लगे . मेरा दिल रीमा की तड़प क साथ hi अब तड़प रहा था .

अमित : तुम्हे मैं कैसे दुःख दे सकता हूँ? दुःख तो मेरी तकदीर में लिखा है . हर कदम किसी न किसी रूप में मेरे सामने आ जाता है . जब भी ज़िन्दगी में कोई ख़ुशी मिलती है उसे निगलने क लिए आ जाता है .

रीमा जो अभी तक अपना चेहरा मेरे साइन में छुपाये थी मेरी बात सुन कर उसने चेहरा उठा कर मेरी आँखों में देखा . रीमा की आंसू बहती झिलमिल आँखों में कई सवाल थे .

रीमा : तुम कहना क्या चाहते हो ?

अमित : हम कभी एक नहीं हो पाएंगे रीमा . किस्मत को हमारा प्यार मंज़ूर नहीं .

रीमा : ऐसा मत कहो प्लीज ऐसा मत कहो . आखिर हुआ क्या है जो तुम ऐसी बातें कर रहे हो ?

अमित : अब तुम्हे कैसे बताऊँ रीमा मुझे खुद समझ नहीं आ रही . तकदीर ने हमारे साथ बहुत घटिया खेल खेला है .

रीमा : साफ़ साफ़ कहो क्या बात है , मुझे दर लग रहा है . मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती प्लीज ऐसी बातें मत करो .

अमित : मैं भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकता रीमा . मगर किस्मत ने जिस दौराहे पर ला कर हमें खड़ा कर दिया है वहां से आगे हमारे रस्ते जुड़ा हो जायेंगे .

रीमा : भगवन क लिए ऐसी बातें मत करो . मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकती . ऐसा होने से पहले अपने हाथों से मेरी जान ले लेना . मैं तुम्हारे बिना किसी और की नहीं हो सकती .

अमित : ऐसा मत करो रीमा ऐसा मत कहो. मेरी बदकिस्मती की सजा तुम खुद को क्यों देना चाहती हो .

रीमा : प्लीज साफ़ साफ़ कहो बात क्या है तुम्हे मेरी कसम .

अमित : पहले तुम्हे में वडा करना होगा ये बात तुम किसी को नहीं बताओगी .

रीमा : मैं वडा करती हूँ मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी . तुम प्लीज जल्दी बताओ बात क्या है .

अमित : मैं , मैं और तुम . हम

रीमा : हम क्या ?

अमित : हम दोनों भाई बहिन हैं रीमा .

रीमा : ये क्या मज़ाक कर रहे हो तुम . प्लीज ऐसा मज़ाक मत करो .

अमित : ये मज़ाक नहीं हकीकत है रीमा . मैं रिश्ते में तुम्हारा भाई हूँ . मंजू बुआ मेरी भी बुआ हैं. मैं तुम्हारे पवन चाचा का बीटा अमित हूँ. तुम्हारा भाई हूँ मैं .

रीमा मेरी बात सुन कर शॉकेड हो गयी और दो कदम सदमे में पीछे हैट गयी. उसकी आवाज़ जैसे बंद हो गयी . मुँह पर हाथ रखे वो बस मुझे देखे जा रही थी .

रीमा : ऐसा नहीं हो सकता , ऐसा कभी नहीं हो सकता . वो तो कब क मर चुके हैं चाचा चची और उनका बीटा भी उनके साथ hi एक्सीडेंट में मर गए थे .

अमित : मैं बच गया था उस एक्सीडेंट में. और तब से मेरे मां ममी ने hi मुझे पला है अपने बेटे की तरह . मैं कौन हूँ ये मुझे भी नहीं पता था . और मंजू बुआ मेरी सगी बुआ हैं ये बात भी मुझे कुछ दिन पहले hi पता चली है . इसी लिए मैं तुम्हारा फ़ोन नहीं उठा रहा था . तकदीर ने बहुत गन्दा खेल खेला है हमारे साथ रीमा .

रीमा : नहीं ऐसा नहीं हो सकता , ऐसा नहीं हो सकता . प्लीज कह दो क ये सब झूठ है . तुम झूठ बोल रहे हो . तुम ज़रूर मेरे साथ मज़ाक कर रहे हो. प्लीज ऐसा मज़ाक मत करो मेरे साथ. तुम जो सजा देना चाहते हो मुझे दे सकते हो . ऐसा मज़ाक मत करो मेरे साथ . मैं जानती हूँ तुम इस बात से नाराज़ हो न क मैंने मन किया था तुम्हे वो सब करने से . तुम जो चाहो मेरे साथ कर सकते हो मैं मन नहीं करुँगी . मैं तुम्हारी हूँ सर से पाऊँ तक दिल से आत्मा तक मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ, सिर्फ तुम्हारी .

अमित : मैं कोई मज़ाक नहीं कर रहा हूँ रीमा ये सच है . तुम्हे क्या लगता है क मैं ऐसा घटिया मज़ाक करूँगा तुम्हारे साथ ? मज़ाक तो मेरे साथ किया है तकदीर ने .

रीमा : ऐसा नहीं हो सकता , मैं तुम्हे अपना सब कुछ मन चुकी हूँ. तुम्हे अपना सब कुछ सौंप चुकी हूँ . तुम्हे अपने मन मंदिर का देवता बना चुकी हूँ. अब तुम्हारे सिवा मैं किसी और क बारे में सपने में भी नहीं सोच सकती . मैं तुम्हे किसी और रिश्ते में नहीं देख सकती . मैं नहीं मानती किसी रिश्ते को. मेरे लिए तुम मेरे सब कुछ हो . या तो मैं तुम्हारे साथ जियूँगी या फिर मर जाउंगी पर तुमसे जुड़ा हो कर मैं नहीं रह पाऊँगी .

अमित : मैं भी तुम्हे दिलो जान से चाहता हूँ रीमा पर समाज कभी हमारे रिश्ते को स्वीकार नहीं करेगा . क्या जवाब देंगे हम बुआ को ? तुम्हारी माँ को ? मेरी फॅमिली को ? कोई भी इस रिश्ते क लिए नहीं मानेगा .

रीमा : क्यों नहीं मानेंगे ? उन्हें मन्ना होगा . अगर हमारे बीच कोई रिश्ता है तो उसमे हमारी क्या गलती है ? क्या हमें पता था क हमारा आपस में कोई रिश्ता भी है ? नहीं , इसमें हमारी तो कोई गलती नहीं है न . फिर तुम कैसे इस बात को एक्सेप्ट कर सकते हो ? भूल जाओ क हमारे बीच कोई और रिश्ता है . मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ सिर्फ तुम्हारी . इसके इलावा और कोई रिश्ता मुझे मंज़ूर नहीं . या तो मैं तुम्हारी हो कर जियूँगी या तुम्हारे प्यार में तड़प तड़प कर मरूंगी , तड़प तड़प कर मरूंगी .

अमित : रीमा समझने की कोशिश क......

रीमा : नहीं , तुम समझने की कोशिश करो . या तो मुझे एक्सेप्ट कर लो या अपने हाथों से मुझे मर दो . मैं उफ़ तक नहीं करुँगी . मगर तुमसे दूर रह कर मैं जी नहीं सकती .

रीमा का रो रो कर बुरा हल हो रहा था . उसे ऐसे तड़पता देख मेरा दिल पसीज रहा था . मैं खुद को और रोक न सका और आगे बढ़ कर रीमा को गले से लगा लिया .

अमित : ी लव यू , ी लव यू रीमा . मैं भी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ. तुमसे दूर रह कर तो मैं भी जी नहीं पाउँगा . जिस दिन से मुझे पता चला था क रिश्ते में तुम मेरी बहिन हो . मैं अंदर से टूट गया था . समझ नहीं आ रही थी क कैसे तुमसे दूर रह पाउँगा कैसे तुम्हे ये सचाई बता पाउँगा .

रीमा : इतने दिन क्यों तुम ये दर्द सहते रहे और मुझे भी दुखी किया . पहले नहीं बता सकते थे ये बात ? तुमने सोचा भी कैसे क मैं किसी और रिश्ते को क़ुबूल करुँगी . मुझे किसी की परवाह नहीं है . मेरी दुनिया सिर्फ तुम हो सिर्फ तुम. ी लव यू मोरे थान एनीथिंग. कभी सोचना भी मत क मैं तुमसे दूर जाउंगी कभी. और तुम कभी दूर हुए तो मैं ज़िंदा नहीं रहूंगी .

अमित : ऐसा दिन कभी नहीं आएगा . उम्मम्मम

प्यार और भवनों क सागर में बहते हुए हम दोनों एक दूसरे में खो गए और रीमा न कोमल होंठ मेरे होंठों से मिल गए . इस चुम्बन में गहरे प्यार का एहसास था . आँखों से बेहटा पानी होंठों से मुँह में घुल रहा था और शहद की मिठास क साथ नमक घोल रहा था पर जो भी था हम दोनों दुनिया से दूर अपने में hi खोये बस एक दूसरे क साथ जुड़े जाने कितनी देर तक ऐसे hi खड़े रहे . समय जैसे वहीँ रुक गया था . दोनों में से कोई भी अलग होना नहीं छह रहा था . कहीं दूर से किसी की आवाज़ आयी तो मैं इस सम्मोहन से बहार आया और इस चुम्बन को ख़तम किया .

अमित : थैंक यू रीमा , आज मुझे ऐसे लग रहा है जैसे सीने से बहुत बड़ा बोझ उतर गया हो .

रीमा ने मेरे होंठों पर अपना हाथ रख दिया .

रीमा: शहहहहह , थैंक्स प्यार में गली जैसा लगता है . No सॉरी no थैंक्स . हमारे प्यार को इन शब्दों की ज़रूरत नहीं है .

अमित : ठीक है , पर सबको मानना आसान नहीं होगा .

रीमा : मुझे अपने प्यार और भगवन पर भरोसा है . वो ज़रूर कोई न कोई रास्ता बना देगा . अगर फिर भी कभी ऐसा वक़्त आया क ये समाज रुकावट बना तो मैं ख़ुशी से सब रिश्ते नाते तोड़ दूंगी पर तुम्हारा साथ कभी नहीं छोडूंगी .

अमित : पर बुआ इस बात से बहुत नाराज़ होंगी .

रीमा : बुआ ने तुम्हे मन किया है न किसी को बताने से ?

अमित : हाँ

रीमा : तो फिर समझ लो क तुमने मुझे कुछ बताया hi नहीं . मैं भी किसी से कुछ नहीं कहूँगी . सही वक़्त आने तक हम इस बात को सब से छिपा कर रखेंगे .

अमित : पर आंटी तो कह रहे थे ....

रीमा : माँ को मैं कुछ न कुछ कह कर मन लुंगी . उन्हें थोड़ा hi पता है क तुम कौन हो. वो तुम्हे एक्सेप्ट कर चुकी हैं मेरे लिए .

अमित : अगर उन्होंने ने बुआ से बात की तो ?

रीमा : डोंट वोर्री , मैं समझा दूंगी उन्हें. वो किसी से कुछ नहीं कहेंगी .

अमित : पर बुआ को तो पता है न सब

रीमा : बुआ क सामने हम नार्मल रहेंगे . बाकि सब वक़्त आने पर . अभी मुझे अपने सीने से लगाए रखो. पता भी है मैं कितना रोई हूँ तुमसे दूर रह कर ? और माँ भी टेंशन में आ गयी थी तुम्हारी वजह से . अब सब भूल जाओ जो होगा देखा जायेगा .

रीमा छोटे बच्चों की तरह फिर से मेरे सीने से लग गयी और मैं उसे अपने साथ लगाए वहीँ एक पेड़ क नीचे बैठ गया . रीमा मुझसे अलग होने को बिलकुल भी तैयार नहीं थी . और मेरा भी दिल अब उससे दूर होना नहीं छह रहा था .

‘ सर , ये लीजिये उस लड़के की साडी डिटेल. कॉलेज रिकॉर्ड से मैं ये सब लेकर आया हूँ. ‘ बलजीत राइ इस वक़्त अपने ऑफिस में था . उसका खास आदमी उसके लिए उस लड़के की डिटेल ले आया था जिसके साथ मंजू आज कल घुल मिल रही थी. बलजीत राइ ने जैसे hi फाइल खोली पहले पेज पर उसकी तस्वीर थी . मगर इस छोटी तस्वीर पर ध्यान देने की बजाये वो नीचे लिखी डिटेल देखने लगा .

‘ ये क्सक्सक्सक्सक्स गांव क किसी विजय शंकर का बीटा है सर . राघव क बेटे का खास दोस्त है और उसके घर भी इसका आना जाना है . सुना है राघव इसे अपने ऑफिस और फैक्ट्री में भी कई बार लेकर गया है . हल hi में उस अनाथाश्रम में भी ये मौजूद था जिसे आप हासिल करना चाहते हैं’

बलजीत राइ : क्या ????? विजय का बीटा ??? इसका मतलब वो सब फिर से मिलने लगे हैं इतने सैलून बाद ? और ये मंजू क्या कर रही है उन लोगों क साथ ? वो तो भूल चुकी थी सबको और अब फिर से ..... मंजू कहाँ है इस वक़्त ?

आदमी : सर वो अभी तक वापिस नहीं आयी है . इसी लड़के क साथ गयी थी . शायद उसके गाओं गयी होंगी. आप कहें तो मैं जा कर पता करता हूँ .

बलजीत राइ : नहीं , वहां जाने की ज़रूरत नहीं. तुम बस नज़र रखो . जैसे hi मंजू वापिस आये मुझे बताना . अब तुम जा सकते हो .

बलजीत ( मन में ) ये लोग फिर से एक हो गए हैं और मंजू भी इनका साथ दे रही है. कहीं राघव तो कोई चल नहीं चल रहा . मंजू क हिस्से की प्रॉपर्टी क लिए तो कहीं ये सब नहीं कर रहा वो ? इसका कुछ करना पड़ेगा . पर ये मंजू विजय क घर कैसे चली गयी ? वो तो भूल चुकी थी सबको और उनसे नफरत भी करने लगी थी फिर अचानक कैसे ? विजय का बीटा भी है ये मुझे बताया क्यों नहीं उसने ? इससे पहले क पानी सर से ऊपर निकले मुझे मंजू को वापिस लाना hi होगा .

मैं और रीमा पार्क में वही पेड़ क निचे बैठे हुए थे . रीमा अधलेटी अवस्था में मेरे साइन पर अपना सर टिकाये हुए थी.

रीमा : अब तो कभी ऐसा नहीं करोगे न ?

अमित : कभी नहीं

रीमा : तो पहले क्यों किया था ?

अमित : मुझे समझ hi नहीं आ रहा था क मैं क्या करूँ . एक hi पल में सब ख़तम हो गया था .

रीमा : ऐसे कैसे ख़तम हो जाता सब कुछ ? जब तक मैं ज़िंदा हूँ तब तक किसी और की नहीं हो सकती . उसके बाद .....

अमित : अगर फिर से ऐसी बात की तो मैं बात नहीं करूँगा .

रीमा : और इतने दिन जो मेरी हालत हुई तब तरस नहीं आया था मुझ पर ? चलो छोडो इस बात को. पता है दीदी भी कितना नाराज़ हैं तुम से . आज उनसे बात कर लेना उन्हें ाचा लगेगा. वो वहां पर अकेली हैं और गुस्सा भी हो रही हैं तुम पर .

अमित : कर लूंगा , अब सब ठीक है . आज hi फ़ोन कर लूंगा . वैसे राधा से तुमने क्या कहा था ? उससे बात हुई थी न तुम्हारी .

रीमा : यही कहा था क तुम मुझसे बात नहीं कर रहे . और किस्से कहती ? रीमा क तो ो hi तो बाई जिसकी बात तुम ताल नहीं सकते . और मेरी बेस्ट फ्रेंड भी है वो . मैं उससे रोज़ बात करती हूँ. उसी ने तो हौंसला दिया था वर्ण मैं तुम्हारे पीछे पीछे घर तक आ जाती .

अमित : ओह्ह्ह तो इसका मतलब राधा तुम्हे सब बता रही थी . फिर मंजू बुआ वाली बात उसने नहीं बताई ?

रीमा : आज पूछूँगी उससे क उसने क्यों नहीं बताया . पर वो ऐसा नहीं कर सकती ज़रूर तुमने hi मन किया होगा .

इतने में मेरे मोबाइल की रिंग बजने लगी. देखा तो कल्पना की कॉल थी .

कल्पना : hello , कहाँ हो तुम ? अभी तक फ्री नहीं हुए ? कॉलेज नहीं जाना था क्या ? मैं कब से वेट कर रही हूँ .

रीमा क साथ समय का तो ध्यान hi नहीं रहा था . टाइम देखा तो मैं लेट हो चूका था

अमित : ओह सॉरी मुझे टाइम का ध्यान hi नहीं रहा . तुम पहुँच गयी क्या कॉलेज ?

कल्पना : नहीं , तुम्हारा वेट कर रही हूँ . जल्दी से आ जाओ अब .

अमित : ाचा मैं अभी अत हूँ . Bye

रीमा : किसका फ़ोन था और कहाँ जाना है ?

अमित : कल्पना थी , उसे सीमा क घर छोड़ कर आया था . हमें प्रैक्टिस क लिए कॉलेज जाना था पर टाइम का ध्यान hi नहीं रहा .

रीमा : जाना ज़रूरी है क्या ? इतने दिनों बाद मिले हो . मन नहीं हो रहा तुमसे अलग होने का .

अमित : चिंता मत करो जब कहोगी मिलने आ जाऊंगा . पर अभी और देर की तो वो मेरा सर खा जाएगी . और घर पर अलग से शिकायत कर देगी .

रीमा : ठीक है , अभी जाने देती हूँ. पर दोबारा ऐसा मत करना.

अमित : कभी भी नहीं गलती से भी नहीं करूँगा .

रीमा ने सरक कर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और एक बार फिर प्यार की मस्त फ़िज़ाओं में हूँ दोनों एक हो कर उड़ने लगे.

अमित : उम्म्म्माःह्ह्ह हहहह , बस , अब मुझे जाना होगा . तुम भी अब घर जाओ.

रीमा: ठीक है , तुम भी अपना ध्यान रखना . ी लव यू उमंमाहहह

अमित : ी लव यू ताऊ .



उसके बाद रीमा मेरे गले लग कर मिली और मैं उसे बहार तक छोड़ने आया. रीमा क चेहरे पर जहाँ एते वक़्त दर्द और आंसू थे अब वहां मुस्कान थी . उसे फिर से जीवंत देख कर मेरा दिल भी अंदर से खुश था . अब सब ठीक हो चूका था . समस्या ख़तम तो नहीं हुई थी पर फ़िलहाल दिल ने दिमाग को शिकस्त दे कर अपना फैसला सुना दिया था . रीमा ने मुझे सोच विचारों से बहार निकल कर मंज़िल दिखा दी थी . हालाँकि रास्ता आसान नहीं था पर रीमा क प्यार क साथ मुझे सब मंज़ूर था . अब मुश्किल सामने आने वाली थी तो बुआ की तरफ से . पर मुझे यकीन था दीपिका ममी पर . वो ज़रूर कुछ न कुछ कर लेंगी मेरे लिए . वो सही थी , रीमा क्या फैसला लेगी ये उन्होंने पहले hi इशारे में बता दिया था . फिर मैंने भी अपनी रानी को हंसी ख़ुशी स्टार्ट किया और चल पड़ा कल्पना को लेने . आज इतने दिनों बाद मुझे रानी की आवाज़ संगीत की तरह बजती महसूस हो रही थी .
 
अपडेट 248



‘ कहाँ रह गए थे ? कितनी देर से इंतज़ार कर रही हूँ तुम्हारा ‘ कल्पना को लेने जब मैं सीमा क घर पहुंचा तो वो मुझ पर गुस्सा होने लगी .

अमित : सॉरी यार वो टाइम का पता hi नहीं चला

कल्पना : हाँ हाँ अब टाइम का पता चलेगा भी कैसे अपनी खास दोस्त से जो मिलने गए थे , मज़े करने .

अमित : तुम गलत समझ रही हो

कल्पना : सब जानती हूँ मैं , इसी लिए तो मुझे यहाँ छोड़ कर गए थे .

अमित : ऐसा नहीं है यार , तुम्हे मुझ पर यकीन नहीं ?

कल्पना : मुझे बनाने की कोशिश मत करो . धीरे धीरे पता चल रहा है मुझे .

अमित : यार तुम ऐसे बातें क्यों कर रही हो ? ाचा जो सोचना है सोचो . कॉलेज चलना है तो बैठो वर्ण मैं अकेला चला जाऊंगा .

कल्पना ( मन में ) कहीं सच में गुस्सा hi न हो जाये मुझसे. वो सब तो बाद में भी पता कर लुंगी पर इसे नाराज़ करने का रिस्क नहीं उठा सकती . करुणा दीदी की बातें सुनूंगी तो कही उल्टा hi पद जाये .

कल्पना : ठीक है ठीक है . चलो चलते हैं.

कल्पना बाइक पर बैठ गयी और हम चल पड़े कॉलेज . कल्पना आज कुछ ज्यादा hi बातें कर रही थी जबकि वो ऐसी नहीं थी. मैंने और बात करना ठीक नहीं समझा और चुपचाप बाइक चलता रहा . रीमा से मिलने क बाद दिल में एक सुकून सा था इस लिए मैंने कल्पना की बातों को ज्यादा सीरियस नहीं लिया . उसके बाद कॉलेज में प्रैक्टिस करने क बाद हम वापिस गाओं क लिए निकल लिए . कल क्रिसमस की वजह से छुट्टी रहने वाली थी तो आज क बाद परसों hi आना था . वापिस आते वक़्त कल्पना ने मुझसे बात करने की कोशिश की पर मैंने किसी बात का जवाब नहीं दिया . घर आ कर पहले मैंने पेट पूजा की क्यूंकि आज दोपहर में कुछ खाया नहीं था . कल्पना को तो नैना दीदी और करुणा दीदी अपने साथ ले गयी . इधर राधा दीपिका ममी क साथ मुझे खाना खिला रही थी. जब तक मैंने खाना खाया राधा मेरे पास hi बैठी रही . जैसे hi मैं खाना खा कर अपने कमरे में गया पीछे पीछे hi दीपिका ममी भी आ गयी .

दीपिका : तो क्या कहा मेरी सौतें ने ?

अमित : सौतेल ? वो आपकी सौतें कैसे हुई भला ?

दीपिका : सौतें नहीं तो और क्या है , इतना प्यार जो करते हो उससे . उसी क साथ तो साडी ज़िन्दगी रहने वाले हो जो मैं नहीं रह सकती . तो हुई न मेरी सौतें .

अमित : आप कैसे कह सकती हैं क हम साडी ज़िन्दगी साथ रहने वाले हैं? अभी तो मैंने बताया भी नहीं क उसने क्या कहा .

दीपिका : ज़रूरत नहीं है , तुम न भी बताओ तो भी मुझे पता है क उसने क्या कहा है . तुम्हारे चेहरे पर ये जो ख़ुशी नज़र आ रही है न ये इस बात का सुबूत है क वो तुम्हारी बहिन नहीं बीवी बनना चाहती है .

अमित : आप न सच में कमल की हो. सब पता चल जाता है आपको . यू अरे जीनियस. ी लव यू उम्मम्मम्म

मैंने दीपिका ममी को बाँहों में भर कर उनके होंठों को अपने होंठों में कैद कर लिया और प्यार से उन्हें किश करने लगा . कुछ पल दीपिका ममी ने भी मेरा साथ दिया और फिर धक्का मर कर खुद से अलग कर दिया .

दीपिका : कुछ तो शर्म किया करो . कहीं भी शुरू हो जाते हो. दरवाज़ा खुला है , अगर कोई आ जाता तो ? अब बैठो यहाँ और बताओ क्या क्या बात हुई .

अमित : बात क्या होनी थी , पहले तो वो मेरे सीने से लगी रोटी रही . उसे रोटा देख कर मुझे भी रोना आ रहा था . सच में मैंने उसे बहुत दुःख दिया है अनजाने में .

दीपिका : वो तो है hi , एक no . क बुद्धू हो तुम. हर बात को समाज क नियम कायदों को चश्मा लगा कर देखते हो. दिल क फैसले दिल से hi लिए जाते हैं. उसमे कोई कानून कोई नियम लागु नहीं होता . अगर ऐसा होता तो इतनी साडी औरतें जो तुम भीग चुके हो न , उस सब क लिए तुम्हे उम्र कैद हो जाती . किसी को प्यार दे कर उसके दिल क ज़ख्मों पर नमक लगाना कभी भी गलत नहीं है . समाज क्या कहेगा अगर यही सोचोगे तो तुम किसी का भला कर hi नहीं सकते . इंसान सही मायने में तभी इंसान कहलाता है जब वो दूसरों का दुःख दर्द समझे और उसे वो ख़ुशी दे जिसकी सब से ज्यादा ज़रुरत हो. आपसी सहमति से बने सम्बन्ध समाज की नज़र में चाहे गलत हो पर उस इंसान क लिए वो संजीवनी से काम नहीं होते जो वीरान ज़िन्दगी में फिर से जीवन फूंक दे . मुझे hi ले लो, देखा जाये तो समाज की नज़र में मैं भी दोषी हूँ पर दूसरी तरफ तुमने मुझे नहीं ज़िन्दगी दी है . जीने का मकसद दिया है तो मेरे लिए समाज क नियम से ज्यादा तुम मायने रखते हो. नियम भी तो तब hi लागु होंगे न जब इंसान ज़िंदा रहे, मुर्दों पर तो कोई कानून कोई नियम नहीं होता . मैं तो मर hi चुकी थी , ज़िन्दगी दी है तो तुमने . जिस जिस कारन साथ भी तुमने प्यार क रिश्ते कायम लिए हैं यकीन मनो वो सब भी यही सोचती होंगी . रिश्ते तब hi बोझ बनते हैं जब वो एक तरफा हो या ज़बरदस्ती थोपे जाएँ . और जो रिश्ते प्यार से बने हो उसके लिए हर नियम कायदा तोडा जा सकता है .

दीपिका ममी किसी दार्शनिक की तरह मुझे जीवन का अमूल्य ज्ञान दे रही थी और मैं बस चुप बैठा उन्हें देख रहा था , उनकी बातों को समझ रहा था .

दीपिका : ऐसे क्या देख रहे हो ?

अमित : देख रहा हूँ अपनी उस गुरु को जिसके पास ऐसा ज्ञान है जो किताबों में नहीं मिलता .

दीपिका : हस्ते हुए ) है है है , मैं और गुरु ? ाचा तो चेले , अपने गुरु को क्या डोज गुरु दक्षिणा में ?

अमित : जो आप कहें .

दीपिका : हम्म्म , समय आने पर मांग लेंगे . अभी बताओ और क्या क्या कहा रीमा ने .

फिर मैंने साडी बात बताई जो जो हमारे बीच हुई . दीपिका ममी ने साडी बात सुनी और कुछ देर सोचती रही .

अमित : जब सबको पता चलेगा क रीमा मेरी बहिन लगती है तो इस रिश्ते क लिए कोई नहीं मानेगा . और मंजू बुआ तो ....

दीपिका : अभी बहुत समय है , तुम बस पड़े पर ध्यान दो . रही बात मंजू की तो मैंने कहा था न मंजू से मैं बात करुँगी. उसकी चिंता तुम न करो .

अमित : कब बात करेंगी आप ?

दीपिका : करुँगी करुँगी करुँगी , तुम चिंता क्यों करते हो ? अभी तो सब यहीं हैं. वक़्त मिले अकेले में बात करने का तो बात करूँ. चलो अब आराम करो मुझे भी काम है .

दीपिका ममी क जाते hi मैंने आराम करने की सोची और दरवाज़ा बंद कर क बिस्टेर पर लेट गया . रीमा क साथ बिताये हसीं पलों को यद् कर क मैं अंदर से खुश हो रहा था . तभी मुझे रीमा की बात यद् आयी . रीना से भी कितने दिनों से बात नहीं की थी मैंने . मैंने तुरंत रीना को फ़ोन लगा दिया पर उसने कॉल कट कर दी. मुझे लगा गुस्से से रीना ने कॉल कट कर दी है पर अगले hi पल उसकी तरफ से कॉल आ गयी मैंने तुरंत पिक की.

अमित : hello

रीना : आ गयी यद् ? मुझे तो लगा था भूल गए क मैं अभी ज़िंदा हूँ.

अमित : ये आप क्या .....

रीना : बात मत करो तुम , कितने दिन हो गए ? कितनी कॉल की थी मैंने . कुछ यद् भी है ? एक बार भी तुमने बात नहीं की . बात करना तो दूर मेरी कॉल अटेंड तक नहीं की . बस इतनी hi जगह है मेरी तुम्हारी ज़िन्दगी में ?

अमित : वो मैं यहाँ बिजी ......

रीना : हाँ हाँ , दुनिया भर क काम तो तुम्हे hi पड़े रहते हैं. इतना भी इंसान क्या बिजी होता है क एक फ़ोन तक उठा सके ? काम से काम एक बार बात कर क बता तो सकते थे अगर कोई प्रॉब्लम थी तो . पर नहीं , तुम्हे तो किसी से कोई फरक पड़ता hi नहीं. मैं हूँ hi कौन तुम्हारी जो तुम्हे परवाह होगी .

रीना बहुत गुस्से में थी पर गुस्से की जगह उसकी बातों में गिला hi था .

अमित : ी ऍम सॉरी , प्लीज मुझे माफ़ कर दो . घर में थोड़ा बिजी हो गया था और कुछ ऐसी उलझने थी क समझ hi नहीं आ रही थी .

रीना : काम से काम एक बार बता तो सकते थे न . क्या इतना भी तुमने ज़रूरी नहीं समझा ? तुम्हारे कहने पर hi मैं यहाँ आयी थी न और तुमने hi मुँह मोड़ लिया . ये भी नहीं सोचा क मैं यहाँ अकेली हूँ . तुमने तो वडा किया था रोज़ बात करोगे और इतने दिनों बाद आज बात कर रहे हो

अमित : मैं सच में बहुत शर्मिंदा हूँ. प्लीज माफ़ कर दीजिये आगे से ऐसी गलती नहीं होगी . आप जो चाहे सजा दे सकती हो मुझे .

रीना : वहां होती तो ज़रूर सबक सिखाती तुम्हे . अगर 2-3 दिन और तुम्हारा फ़ोन न अत तो मैं खुद वापिस आ जाती .

अमित : ऐसे कैसे वापिस आ जाती आप . कोर्स पूरा किये बिना वापिस नहीं आ सकती आप . आपने वडा किया था .

रीना : खुद तो वडा निभाते नहीं और मुझे कह रहे हो .

अमित : अब गलती हो गयी तो क्या आप भी गलती करोगी अब ? वैसे कोर्स कब ख़तम हो रहा है आपका ?

रीना : मैं तो कहती हूँ आज hi ख़तम हो जाये . पर अभी थोड़ा टाइम और लगेगा . तुम्हे बता नहीं सकती क मैं कैसे यहाँ वक़्त काट रही हूँ .

अमित : कोई बात नहीं आप बस अपना कोर्स ख़तम करो और फिर जल्दी से वापिस आ जाओ .

रीना : एक बात पूछूं ?

अमित : पूछिए

रीना : क्या तुम्हे मेरी यद् नहीं आती?

अमित : बिलकुल नहीं

रीना मेरी बात सुन कर खामोश हो गयी जैसे उसे ये सुन कर दुःख हुआ हो . कुछ देर मैं चुप रहा और फिर बोलै .

अमित : यद् उनकी आती है जिन्हे इंसान भुला दे और आप को तो कोई भूल hi नहीं सकता . क्या आपको लगता है मैं आपको भूला दूंगा .

रीना : खुश होते हुए ) सछह !! गंदे ,, ये कोई तरीका है बात करने का . मुझे लगा ...

अमित : क्या लगा ?

रीना : यही क तुम्हारी ज़िन्दगी में शायद कोई और है जो तुम मुझे ऐसे इग्नोर कर रहे हो .

अमित : ज़िन्दगी में तो कई लोग होते हैं पर हर किसी की अपनी जगह होती है . और आपकी जगह सब से खास है .

रीना : सच !! कितना ाचा होता अगर तुम यहाँ होते मेरे साथ . पता है यहाँ कितनी ठण्ड है , अक्सर बर्फ पड़ती है आज कल और क्रिसमस की वजह से यहाँ बहुत hi ाचा माहौल बना हुआ है . ऐसा लगता है जैसे ये कोई अलग hi जन्नत है जहाँ हर तरफ लोग एक दूसरे से प्यार करते हैं बिना किसी की बंधन और रुकावट क.

अमित : तो अपने लिए आप भी कोई राजकुमार देख लीजिये न उधर hi .

रीना : ज्यादा बातें मत बनाओ वर्ण कान खिंच दूंगी तुम्हारे . वापिस आने दो फिर बताती हूँ तुम्हे.

अमित : ाचा अब मैं थोड़ा रेस्ट करना चाहता हूँ , बहुत थक गया हूँ. आप से फिर बात करूँगा .

रीना : ठीक है तुम आराम करो , जब फ्री हो जाओ मिसकॉल कर देना . फ़ोन करने की ज़रूरत नहीं है . तुम्हारी तरफ से कॉल बहुत मेहेंगा पड़ता है . Ok नाउ टेक रेस्ट. Bye

अमित : bye .

रीना से बात कर क मैंने उसका गुस्सा भी ठंडा कर दिया . रीना सच में बहुत अछि थी , जितनी अछि डॉक्टर उतनी hi अछि इंसान भी . मुझे बहुत मानती थी जो मेरे कहने पर वो विदेश जाने क लिए तैयार हुई थी . रुपाली उसे बचाना छह रही थी बलजीत राइ से . बलजीत राइ , मुझे अब कुछ ज्यादा hi नफरत होने लगी थी इस शख्स से . कहने को तो अब वो रिश्ते में मेरे ताऊ थे पर उनकी काली करतूतें सुन कर उनकी शकल देखने को भी जी नहीं छह रहा था . शीना पता नहीं कैसे ऐसे घटिया इंसान क घर पैदा हो गयी. मोंटी ऐसा क्यों है ये अब समझ में आ रहा था . बाप पर hi गया था . बलजीत राइ क बारे में सोचते सोचते मुझे रुपाली चची की भी चिंता होने लगी की वो मुझसे मिली थी तो कितनी टेंशन में थी . मैंने उन्हें चाबी दी थी फ्लैट की फिर वो वहां गयी क्यों नहीं . आखिर क्या वजह रही होगी ? खैर अब बुआ भी सब जानती थी तो वो कोई न कोई रास्ता निकल hi लेंगी मुझे भरोसा था . यही सब सोचते मैं नींद की आगोश में चला गया .

‘ ोये तेरा मुँह क्यों उतर हुआ है ? क्या हुआ आज ? तू तो साथ hi गयी थी न ? ‘ नैना और करुणा यहाँ कल्पना को घेरे बैठी थी. कल्पना का चेहरा बता रहा था क वो निराश है .

कल्पना : उदास होते हुए ) कुछ नहीं दीदी , वो मुझसे नाराज़ हो गया है शायद . ठीक से बात भी नहीं कर रहा .

नैना : पर हुआ क्या है ये तो बता

कल्पना : होना क्या है , मुझे मेरी सहेली क घर छोड़ कर पता नहीं किधर निकल गया . मैंने कोशिश भी की पीछा करने की पर मैं hi लेट हो गयी और वो तब तक निकल चूका था . मुझे लगा उस दिन वाले होटल में गया होगा पर वहां भी नहीं था . पता नहीं कहाँ कहाँ ढूँढा पर नहीं मिला . और जब वापिस आया तो खुश नज़र आ रहा था . मुझे ये देख कर गुस्सा आ गया और मैंने थोड़ा उससे झगड़ा कर लिया लेट आने की वजह से. तब से वो ठीक से बात नहीं कर रहा है .

करुणा : बस इतनी सी बात , लगता है तू अभी तक जानती नहीं. वो इतनी जल्दी किसी से नाराज़ नहीं होता है . तू ऐसे hi दिल छोटा कर रही है. अगर ऐसे सोचेगी तो उससे दिल की बात कैसे करेगी .

नैना : और तुझे ये क्यों लगता है क वो किसी लड़की से hi मिलने गया होगा वहां ?

कल्पना : दीदी hi तो कह रही थी क ज़रूर कोई लड़की का चक्कर है . वो तो कह hi रहा था क किसी दोस्त से मिलने गया है . मैं इनकी बातों में आ कर उससे झगड़ा कर बैठी और देखो वो अब मुझसे बात भी नहीं कर रहा है .

नैना : तू भी न , दिल छोटा मत कर. बस अब उससे इस बारे में बात मत करना और भूल जा क कोई लड़की वड़की है . अब बस उससे प्यार से बात करना देखना वो ऐसे बात करेगा जैसे कुछ हुआ hi नहीं .

कल्पना : पक्का न

नैना : लिख कर दूँ क्या ? चल अब थोड़ा स्माइल तो कर क दिखा .

शाम को मैं उठा और हाथ मुँह धो कर अखाड़े चला गया . कुछ देर वहां भी प्रैक्टिस की. घर आते आते शाम हो गयी थी . घर आकर पहले दूध पिया और फिर खाना खाया . आज तो मंजू बुआ भी किचन में साथ काम करवा रही थी हालाँकि सब मन कर रहे थे पर बुआ नहीं मणि . खाना खाने क बाद मैं अपने कमरे में चला गया क्यूंकि अब वो खली था . मैं अभी कमरे में लेता hi था क करुणा और नैना दीदी वहीँ आ गयी .

नैना : किस्से मिलने गए थे आज शहर में ?

अमित : बात क्या है ? पहले कल्पना पूछ रही थी और अब आप दोनों आ गयी . अरे था मुझे किसी से ज़रूरी काम .

करुणा : तो बता न किस्से काम था कौन सा ज़रूरी काम था . क्या हमें भी बता नहीं सख्त ?

अमित : एक दोस्त से मिलना था , थोड़ा मिसुन्दरस्टण्डींग हो गयी थी इस लिए बात करने गया था .

नैना : फ्रेंड ? लड़का या लड़की ?

अमित : इससे क्या फरक पड़ता है

करुणा : फरक क्यों नहीं पड़ता , चल सीधा सीधा बता किस्से मिलने गया था .

अमित : आप को जलन हो रही है क्या ?

नैना : जलन क्यों होगी ? वैसे भी हम अपने हिस्से का ले लेती हैं . अब तुझे कोई और पसंद आ गयी है तो तेरी मर्ज़ी . पर काम से काम बता तो सकता है न . या हमें इतना भी नहीं मंटा तू .

अमित : ऐसी बात नहीं है , आप दोनों मेरे दिल क कितना करीब हो ये आप भी जानती हो .

करुणा : पता है पता है , ये सब बातें सिर्फ मन बहलाने को बोल रहा है तू .

मैंने करुणा दीदी का हाथ अपने दोनों हाथों में पकड़ लिया और उनकी आँखों में देख कर बोलै .

अमित : क्या आप को ऐसा लगता है ?

करुणा : तो बता क्यों नहीं देता जो हम जानना चाहते हैं .

अमित : बताऊंगा सब बताऊंगा पर अभी नहीं . सही समय आने पर .

करुणा : इसका मतलब पक्का कोई और देख राखी है तूने .

‘ अरे तुम दोनों यहाँ क्या कर रही हो ? सोना नहीं है क्या तुम दोनों को ? जाओ जा कर अपने कमरे में सो जाओ . कल्पना भी तुम्हारा इंतज़ार कर रही है अपने कमरे क बहार कड़ी ‘ दिव्या मौसी हाथ में गरम दूध का गिलास लिए आ गयी. उनकी देख कर दोनों हस्ती हुई कड़ी हो गयी

करुणा : क्या मौसी , अभी तो छुट्टियां हैं. सोने क लिए तो साडी रत पड़ी है . क्या हम थोड़ी देर अपने इस बन्दर क साथ नहीं खेल सकती .

दिव्या : ज्यादा बातें मत बनाओ . और इसे बन्दर क्यों बोल रही हो ? तुम दोनों शैतान की नानी की शिकायत करनी पड़ेगी . चलो जाओ जा कर आराम करो .

नैना : क्या मौसी , हमने आपका क्या बिगाड़ा है जो हमारी शिकायत लगा रही हो

दिव्या : ज्यादा बातें नहीं . और इसे बन्दर बोल रही हो , तुम दोनों भी तो इसकी बहने हो न . फिर तुम क्या हुई ?

करुणा : मुँह बनाते हुए ) मौसी !!!! अब आप इसकी साइड लेने लगी . जाओ हम आपसे बात नहीं करते

दिव्या : ो नौटंकी , चल चुप चाप अपने कमरे में .

करुणा दीदी और नैना दीदी न चाहते हुए भी अपने कमरे में चली गयी . मैं तो चुप बैठा था . दिव्या मौसी से नज़रें चुरा रहा था . क्यूंकि उनसे बात करने की मेरी भी हिम्मत नहीं हो रही थी. परसों रत क बाद से मेरी बात नहीं हुई थी . पता नहीं वो कैसे रियेक्ट करेंगी . कहीं वो उस बात से नाराज़ न हो .

दिव्या : लो दूध पि लो , आज यहाँ सोने वाले हो ?

अमित : वो आज कमरा खली है तो यहीं सो जाता हूँ . वैसे भी वहां अलग से चारपाई डालनी पड़ती है . फिर आप को भी तो दिक्कत होती है .

दिव्या : मुझे क्यों दिक्कत होगी ?

अमित : वो उस दिन गलती से .... आप मुझसे नाराज़ हो नहीं हैं न मौसी ? कल से आप मुझसे बात hi नहीं कर रही .

दिव्या : वो सब गलती से हुआ था मैं जानती हूँ . इसी लिए तो मैंने कोई गुस्सा नहीं किया और न hi मैं नाराज़ हु. दिन भर तो तू खुद hi बहार रहता है. जितने तुम यहाँ थे मैं भी किसी न किसी काम में लगी रही . अब भला मैं तुमसे नाराज़ हो कर कहाँ जाउंगी . एक hi तो बीटा है मेरा .

दिव्या मौसी की बातें सुन कर मेरा दर ख़तम हो गया . दिल को बहुत सुकून मिला था मौसी की बातों से . मैं ख़ुशी से मौसी क गले लग गया और मौसी भी मेरा सर सहलाने लगी .

अमित : आप बहुत अछि हो मौसी , सब से अछि .

दिव्या : बस बस , पहले दूध पि ले वर्ण ठंडा हो जायेगा . तू यहाँ अकेला सोयेगा या मंजू को भेजूं ?

‘ आज रत तो मैं सोने वाली हूँ अपने बेटे क साथ . इतने दिन हो गए ठीक से बात तक नहीं कर पायी ‘ रीता मौसी रूम में आती हुई बोली और मेरे साथ hi बीएड पर बैठ गयी

दिव्या : ये भी ठीक है , वैसे भी रजनी दीदी तो हैं नहीं यहाँ .

रीता : और नहीं तो क्या , लड़कियां तो सब अपने में मस्त रहती हैं और तुम मंजू क साथ हो. तो मैं अकेली क्या करुँगी .

दिव्या : वैसे आप कहें तो मैं यहाँ सो जाती हूँ आप मंजू क साथ सो जाओ .

रीता : नहीं , उसकी तेरे साथ hi ज्यादा बनती है . मैं तो वैसे भी दिन में बतिया ली थी उसके साथ. मैं ज़रा सदी बदल कर अति हूँ.

रीता मौसी बाथरूम में घुस गयी . अपने साथ वो शायद एक मैक्सी लेकर आयी थी. मैंने दूध का गिलास ख़तम किया तो दिव्या मौसी एक बार फिर प्यार से मेरा सर सहलाती हुई चली गयी. मैंने उठ कर कमरे का दरवाज़ा लॉक किया और बड़ी लाइट बंद कर क छोटा बल्ब जला कर बीएड पर लेट गया . मौसी अभी भी बाथरूम में थी . शायद नहाने लग गयी होंगी क्यूंकि पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी. रीता मौसी का इस वक़्त मेरे कमरे में आना और उनकी नज़रों में चमक देख कर मैं समझ गया था क वो आज क्या इरादे लिए यहाँ आयी हैं .

मैं एक बाज़ू अपने चेहरे पर रखे लेता हुआ था क बाथरूम का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आयी . मैंने धीरे से उस तरफ नज़र दौड़ाई तो रीता मौसी रूम में दाखिल हो रही थी. धीरे धीरे वो बीएड की तरफ आ रही थी . बीएड क करीब आ कर वो रुक गयी और मुझे देखने लगी.

रीता : अब उठो भी या और ड्रामा करना है कोई .

मैंने सोने चेहरे से बाज़ू हटाई और मौसी की तरफ देखा . काम रौशनी में भी उनका गोरा चेहरा साफ़ नज़र आ रहा था और उनके बाल जो हलके गीले थे वो अलग hi रंग जमा रहे थे .

अमित : इतनी ठण्ड में आप इस वक़्त नाहा रही थी ? क्या बात है ?

रीता : गर्मी कुछ ज्यादा hi बढ़ गयी थी , इसी लिए तो यहाँ आयी हूँ .

रीता मौसी ने मादक ऐडा क साथ इतना कहा और मेरे ऊपर झुक गयी. मेरे होंठों पर उन्होंने अपने मुलायम होंठ रखे और किश करने लगी . रीता मौसी क होंठ एक डैम ठन्डे थे , किश करते hi मुझे इस बात का एहसास हो गया पर मौसी मुझ पर हावी होती ज़बरदस्त तरीके से किश करती मेरे ऊपर hi आ गयी थी. उनके जिस्म की ठंडक उनके अंदर की गर्मी से ख़तम होने लगी और उनके साथ मैं भी गरम होने लगा . मेरे हाथ मौसी की पीठ से खिसकते हुए उनके बड़े बड़े नितम्बो पर चले गए और उन मांसल कूल्हों को मैं हाथ में दबोच कर ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा .

रीता : उम्म्म उम्म्म ुम्माआह्ह्ह्ह कक्कक्क्स कितने दिन हो गए आज मेरी अचे से प्यास बुझा दे. रोज़ तुझे आँखों क सामने देख कर कैसे खुद को रोकती हूँ मुझे hi पता है .

अमित : मौसी अगर कोई आ गया तो ?

रीता : मुझे कुछ नहीं पता , आज दीदी चली गयी हैं और कल मैं भी जा रही हूँ . जाने से पहले अचे से मेरी गर्मी निकल दे . फिर पता नहीं कब मौका मिलेगा .

अमित : क्या ?? आप जा रही हैं ? पर अभी तो छुट्टियां पड़ी हैं न

रीता : तेरा मौसा आ रहे हैं कल वापिस इसी लिए जाना पड़ेगा . अब ज्यादा बात मत कर उम्मम्मम

अब मुझे समझ आया मौसी आज इस तरह मेरे कमरे में क्यों चली आयी . खैर आज मूड तो मेरा भी ाचा था तो सोचा मौसी की मुराद भी पूरी कर दी जाये . मौसी को किश करते करते मैंने पलट कर अपने नीचे कर दिया और उनके बड़े बड़े ख़रबूज़े ज़ोर ज़ोर से भींचने लगा . मौसी भी पहलों की तरह किश करती अपनी टांगों में मुझे कसने लगी . इसी में मौसी की मैक्सी अब घुटनो तक ऊपर चढ़ चुकी थी . मैं रुक कर मौसी क ऊपर से उठा और अपनी टीशर्ट बनियान निकल दी . साथ hi मौसी की मैक्सी भी उतरने लगा तो मौसी उठ कर बैठ गयी और खुद hi अपनी मैक्सी उतर दी . नीचे उन्होंने ब्रा या पेंटी नहीं पहनी थी इस लिए उनका गोरा गदराया बदन निर्वस्त्र हो कर मेरी आँखों क सामने आ गया . मौसी की स्किन अभी भी ठंडी महसूस हो रही थी . मैंने मौसी को पुश कर क वापिस बीएड पर लिटा दिया और उनके ऊपर लेट गया . उनके ठन्डे बदन क साथ अपने बदन को रगड़ता हुआ मैं उनके एक स्तन को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा और दूसरे को दबाने लगा . मौसी मेरा सर अपनी छाती पर दबती मेरे निचे कसमसा रही थी. मेरी कमर पर अपनी टांगों को कास कर जैसे वो मुझसे अपने अंदर सामने की कोशिश कर रही थी. उनके मुँह से लगातार सिसकियाँ निकल रही थी. कुछ देर दोनों स्तनों को बरी बरी से चूसने क बाद मैंने उनके पेट को चूमता हुआ नीचे उनकी छूट तक जा पहुंचा . छूट क आसपास एक भी बल नहीं था . शायद आज hi साडी सफाई की थी मौसी ने . उनकी छूट पनिया गयी थी . एक बार उँगलियों से उसे जांचने क बाद मैंने अपना मुँह छूट पर लगा दिया और उसे चूसने लगा .

रीता : आआह्ह्ह्हह कक्ककक्कक्स मायआ कक्कक्स ऐसे hi चूस हम्म्म्म बड़े दिनों से प्यासी है ये . आज इसकी गर्मी निकल दे साडी उम्मम्मम कक्कक्स

मैं मौसी की छूट चाट ता हुआ साथ हूँ उंगली से उसकी चुदाई भी कर रहा था . कुछ hi मिनट में मौसी का बदन अकड़ने लगा और उनकी छूट झटके कहती हुई झड़ने लगी. मैंने मौसी को झड़ने दिया और वो कुछ hi पलों में शांत हो गयी . पर मैं अब मूड में आ चूका था. मैंने मौसी क शांत होते hi मौसी की गदरायी जांघों को मसलना और चेतना शुरू कर दिया. मौसी फिर से हीट में आने लगी . मैं मौसी टांगों को उठाये बरी बरी से दोनों टांगों को चूम रहा था .

रीता : ककक उम्म्म्म अब बस कर , मुझे भी कुछ करने दे

मौसी ने मुझे अपने ऊपर से अलग हटाया और मुझे बीएड पर लिटा कर उठ गयी . मेरा लोअर और अंडरवियर एक साथ खिंच कर मौसी ने उतर दिया . कपडे निकलते hi लैंड महाराज छत की तरफ सर उठाये खड़े थे . मौसी ने एक पल में दोनों हाथों में उसे दबोच लिया और सुपडे को चूम लिया . मौसी क ऐसा करने से मेरे मुँह से सिसकारी फुट पड़ी . मौसी मेरा लैंड पकडे मेरी तरफ देखती धीरे धीरे सर नीचे दबती उसे मुँह में लेने लगी . रीता मौसी सेक्स क मामले में सब से ज्यादा एक्टिव थी . और अचे से मज़ा लेने क साथ साथ मज़ा देती भी थी . मौसी मज़े से आधे से ज्यादा लैंड अपने मुँह से गले तक लेती मुख मैथुन करने लगी . मैं तो मज़े की वादियों में उड़ रहा था . कुछ देर लैंड चूसै क बाद मौसी मेरे ऊपर आ गयी और घुटने बीएड पर टिका कर एक हाथ से लैंड को छूट पर सेट कर क वो धीरे धीरे बैठती चली गयी .

रीता : आआह्ह्ह्ह कक्कक्क्स माआ हर बार ये जान hi ले लेता है . पता नहीं कब आराम से जाने लगेगा ये कक्कक्कक्स

अमित : मौसी मेरी जान आप hi हो जो इसे इतने मज़े से लेती हो. आप सच में कमल की हो .

रीता : क्यों , दीदी मज़ा नहीं देती क्या ? और दीपिका कामिनी ?

अमित : आपकी बात hi अलग है , उनके साथ तो दोबारा किया hi नहीं . उनकी गॉड भरने क बाद

रीता : ऐसा लैंड जो एक बार ले ले वो ज्यादा देर इससे दूर रह hi नहीं सकती . जल्द hi वो भी फिर से इसे लेने आ जाएँगी . पर पहले मेरी प्यास बुझा . तुझे एक्सपर्ट बना दूंगी इसमें उम्मम्मम आराम से लेता रह तू मुझे करने दे

मैंने नीचे से धक्का लगाने की कोशिश की तो मौसी ने मुझे रोक दिया और खुद hi धीरे धीरे ऊपर निचे होने लगी. कुछ पलों में hi लैंड आराम से अंदर बहार होने लगा और मौसी की स्पीड बढ़ती चली गयी . फिर तो मौसी उछाल उछाल कर पूरा लैंड छूट में लेने लगी और खुद hi अपने बूब्स मसलती लैंड की सवारी करने लगी . मौसी जब थक गयी तो मुझे ऊपर आने को कहा और मैंने उन्हें नीचे लिटा कर उनके पाऊँ अपने कंधे पर रखे और दे दाना दान उनकी छूट की धज्जियाँ उड़ने लगा . जितने तेज़ मैं धक्के मरता उतना hi जोश से मौसी मुझे और तेज़ करने को कहती. आधा घंटा चली चुदाई में मौसी ने तीन बार अपनी छूट से पानी निकला और लास्ट में मैं भी उनके अंदर अपना लैंड खली करता उनके ऊपर hi ढेर हो गया . सर्दी क मौसम में ऐसी गरमा गरम चुदाई क बाद मज़े की नींद क्यों न आये . हम दोनों नंगे hi एक दूसरे को बाँहों में समय नींद की वादियों में चले गए .



इधर दरवाज़े क पीछे किसी और ने भी हमारी रासलीला का आनंद उठा लिया था . रीता मौसी की मज़े से निकलती आवाज़ें दरवाज़े पर कण लगाए सुनने क बाद वो मुस्कुराती हुई अपने कमरे में चली गयी .
 
अपडेट 249



सुबह मेरी आंख आदतन जल्दी खुल गयी . मैं जैसे hi थोड़ा हिला तो मुझे महसूस हुआ रीता मेरे साथ पूरी चिपकी हुई थी. कम्बल क अंदर हम दोनों hi नंगे थे . रीता मौसी करवट लिए लगभग मेरे ऊपर hi थी. डायन बाज़ू और दायी तंग पूरी तरह मेरे ऊपर थी. मेरा लैंड भी शायद गर्मी महसूस करता मुझसे पहले hi जग चूका था . मौसी की मांसल जांघ क नीचे लैंड पूरी तरह अकड़ा हुआ था . मैंने हम दोनों क ऊपर से कम्बल हटाया तो मौसी का गोरा बदन देख कर एक बार तो मन हुआ क एक और राउंड हो जाये . पर ये समय सही नहीं था . मैंने मौसी की बहार को निकली भरी गांड एक बार अचे से मसली तो मौसी नींद में hi कुनमुनाई.

रीता : क्या कर रहे हो , सोने दो न .

अमित : मौसी डार्लिंग सुबह हो गयी है. इससे पहले कोई यहाँ आये आप अपने कपडे पेहेन लो. मैं भी जा रहा हूँ बहार .

मौसी ने नींद से जागते हुए आंखे हलके से खोली और मुझे देखा . मैंने उनके होंठों को चूम कर उन्हें प्यार से सहलाया तो उन्होंने भी मुझे किश किया .

अमित : अब तो गर्मी नहीं लग रही है न ?

हम दोनों कपड़ों क बिना थे और कम्बल भी मैंने हटा दिया था तो मौसी को सर्दी का एहसास हुआ .

रीता : मेरे कपडे ?? और ये कम्बल तुमने हटाया न ? शर्म नहीं आती . चलो उठो जल्दी मुझे भी उतने दो .

मौसी की हरकत देख कर मुझे हंसी आ गयी और मैंने एक बार फिर से मौसी क चूतड़ सेहला कर एक थप्पड़ उनके चूतड़ों पर जड़ दिया .

रीता : कक्कक्स पागल हो गए हो क्या ?? इतनी ज़ोर से मर रहे हो .

अमित : रत को ये बच गए थे , अगली बार यहीं से शुरू करूँगा .

इतना कह कर मैं उठा और बाथरूम में चला गया . कुछ देर में hi मैं तैयार हो कर अखाड़े क लिए निकल गया . इधर मौसी फिर से कपडे पहन कर थोड़ी देर आराम करने का सोच कर फिर से लेट गयी . अखाड़े में पसीना बहाने क बाद मैं वापिस घर लौटा तो तब तक सब उठ चुके थे . दीपिका ममी मेरे पीछे hi गर्म दूध लेकर आ गयी.

दीपिका : आ गए अखाड़े से ? आज कल कुश्ती ज्यादा hi खेलने लगे हो . दिन क्या रत क्या .

दीपिका ममी क हाथ से मैंने दूध का गिलास पकड़ा और पिने लगा . दूध में आज बादाम क साथ ममी ने घी भी डाला था .

अमित : आज घी भी डाला है ?

दीपिका : अब इतनी मेहनत दिन रत जो कर रहे हो . ताकत की ज़रूरत तो पड़ेगी न . वैसे रत में बड़ी आवाज़ें आ रही थी तुम्हारे कमरे से .

दीपिका ममी की बात सुन कर मुझसे ठसका लगा और मैं उन्हें देखने लगा .

दीपिका : ऐसे क्या देख रहे हो ? रत को आयी थी मैं बात करने मगर तुम तो यहाँ खत कबड्डी में लगे थे . वैसे दीदी कुछ ज्यादा hi जोशीली लगती हैं जो इतनी आवाज़ कर रही थी. रत काफी रंगीन रही फिर ?

अमित : हाँ वो कल कुछ ज्यादा hi जोश में थी. आज वापिस जा रही हैं न तो मैंने भी मन नहीं किया . आपको जलन हो रही है क्या ?

दीपिका : वापिस जा रही हैं ? मुझे तो बताया नहीं . और मुझे जलन क्यों होने लगी ? पहला हल तो मेरा hi है हिसाब से . जब चहुँ ले सकती हु.

अमित : तो ले लीजिये न , वैसे भी बहुत समय हो गया है .

मैंने दीपिका ममी को अपने साथ लगा कर उन्हें किश करने की कोशिश की तो उन्होंने मुझे पीछे धकेल दिया .

दीपिका : बस बस , पहले मेहमानो को सम्भालो . मैं तो यहीं हूँ . रत दीदी को खुश किया है तो अब वो शैतान की नानी भी आएगी. उसके लिए थोड़ा बचा क रखो .

तभी मुझे बाबा की आवाज़ सुनाई दी जो मुझे आँगन से hi आवाज़ दे रहे थे . मैं उनकी आवाज़ सुन कर जल्दी से नीचे आ गया.

अमित : जी बाबा

विजय : तुम्हे आज कोई ज़रूरी काम तो नहीं है न ?

अमित : नहीं बाबा आप कहिये .

विजय : कुछ खास तो नहीं है बस आज पंचायत में कुछ मेहमान आने वाले हैं . सरपंच साहब कह रहे थे क मैं तुम्हे लेता आऊं उधर . आखिर हमारे गाओं का नाम रोशन करने वाले को तो मेहमानो से मिलवाना बनता है क नहीं . तुम जाओ और नाहा धो कर पहले नाश्ता कर लो . फिर चलते हैं चौपाल में .

अमित : जी बाबा.

बाबा क चेहरे पर फख्र और ख़ुशी साफ़ नज़र आ रही थी . उनको देख कर मुझे भी ाचा लग रहा था . मैं जल्दी से कमरे में गया और नाहा धो कर तैयार हो गया . नीचे आया तो बाबा नाश्ते क लिए मेरा इंतज़ार कर रहे थे . ये बात वो शायद सब को बता चुके थे इस लिए सब के चेहरे पर ख़ुशी थी. मैं अभी बैठा hi था क माँ मेरे पास आयी और मुझे घुमा कर अपनी तरफ करते हुए एक हाथ में लाल मिर्ची पकडे मेरे सर से पाऊँ तक क्लॉक वाइज घूमने लगी . अब हमें तो पता hi था क माँ क्या कर रही है . पर कल्पना बड़े गौर से देख रही थी . माँ कुछ नहीं बोली और न hi मैं. मेरी नज़र उतरने क बाद माँ वो मिर्ची हाथ में पकडे चूल्हे की तरफ गयी और उसे वही जला दिया . फिर वो सीधा वापिस मेरे पास आयी और अपनी आंख से काजल उंगली पर लगा कर मेरे कण क पीछे लगाने लगी .

गौरी : भगवन करे किसी की नज़र न लगे तुम्हे. सुनिए जी कह देती हूँ आपको , इसे किसी क साथ मत भेजना और न hi ज्यादा इसकी बढ़ाई करना. पता नहीं कौन लोग आ रहे हैं. कहीं नज़र hi न लगा दें.

विजय : है है है , तुम भी न , पता नहीं क्या क्या सोचती रहती हो . अरे पास क hi गाओं क लोग हैं और उनके कुछ साथी. सरपंच साहब बस अपने गाओं का रोअब दिखाना चाहते हैं और क्या . थोड़ी देर का hi काम है और कहीं नहीं जाना हमने .

गौरी : पता है जी मुझे आपका भी और आपकी पंचायत का भी . चल दीपिका जल्दी खाना से इसे वर्ण कहीं खाना बीच में hi छोड़ कर न चले जाएँ ये दोनों .

माँ क आगे बाबा की बोलती भी बंद थी. पर माँ क इस तरह बात करने से दबे छिपे सब हंस रहे थे . सिवाए कल्पना क .

गौरी : क्या हुआ बेटी , तुम ऐसे क्या देख रही हो ?

कल्पना : वो आंटी वो सब क्या था जो अपने अभी किया .

गौरी : तुम्हे नज़र उतरने का नहीं पता ? लाल मिर्ची से नज़र उतर कर फिर उस नज़र को आग में जला दिया जाता है ताकि उससे कोई बुरी घटना न हो. लगता है तुमने कभी देखा नहीं पहले .

कल्पना : कैसे देखती ? माँ तो बचपन में hi चली गयी थी हमें छोड़ कर . और पापा ये सब मानते नहीं .

कल्पना की बात सुन कर माँ उसके पास गयी और उसे अपने गले लगा लिया .

गौरी : मैं क्या तेरी माँ नहीं हूँ ? आज क बाद कभी ऐसे मत सोचना क तुम्हारी माँ नहीं है. जब दिल करे आ क मिल लिया कर अपनी इस माँ से . इधर आ पहली तेरी नज़र उतरूं कहीं मेरी hi नज़र न लग जाये .

कल्पना की आँखों में नमी आ गयी थी और उसने माँ को कास क गले से लगा लिया . फिर माँ ने उसे भी बिठाया और उसकी वैसे hi नज़र उतरी जैसे मेरी उतरी थी . इधर मैंने और बाबा ने नाश्ता कर लिया था और फिर हम दोनों घर से पैदल hi निकल लिए . घर से निकलने से पहले बाबा ने सर पर पगड़ी बांध ली . ऐसा वो कभी कभार hi करते थे किसी खास मौके . पर आज शायद मेरी वजह से ऐसा किया था . मुझे बाबा को खुश देख ख़ुशी हो रही थी. घर से लेकर चौपाल तक जो भी रस्ते में मिला सबने बाबा को इज़्ज़त से बुलाया . यही तो कमाई थी बाबा की क हर कोई उन्हें पूरी इज़्ज़त देता था . चौपाल में उम्मीद क मुताबिक पहले से hi गाओं क कुछ बड़े बैठे हुए थे . फिर उनसे मिलने क बाद हम सब साथ में पंचायत वाले दफ्तर में गए . यही एक जगह थी जहाँ पंचायत क सब काम होते थे . वर्ण छोटे मोठे मसले तो वहीँ पीपल क नीचे बानी चौपाल में hi सुलझा लिए जाते .

सरपंच : वह भाई वह , आज तो हमारा शेर भी आया है पंचायत में . शाबाश बीटा , ऐसे hi गाओं का नाम रोशन करते रहना . सुना है अगले महीने बहार कहीं जा रहे हो खेलने क लिए. किसी भी तरह की कोई भी ज़रूरत हो तो निस्संकोच मुझे बताना . तुम्हारे लिए हम कुछ भी करेंगे . क्यों भाई पांचो.

सरपंच साहब की बात में सब लोगों ने हाँ हाँ में हाँ मिलायी .

अमित : शुक्रिया सरपंच साहब , आपके आशीर्वाद से सब अचे से चल रहा है. रही बात ज़रूरतों की तो बाबा मेरे बिना कहे hi खुद से सब कर लेते हैं फिर भी कोई ज़रूरत कभी पड़ी तो मैं ज़रूर कहूंगा .

मेरे जवाब से बाबा की ख़ुशी और बढ़ गयी और सरपंच साहब भी खुश हो गए . तभी बहार 2-3 गाड़ियां आ कर रुकी जिनमे से कुछ लोग उतर कर आये और सरपंच साहब क साथ बाबा और बाकि सब मिल कर उनका स्वागत करने लगे .

सरपंच : आओ भाई आओ , तुम्हारा hi इंतज़ार कर रहे थे . आओ बैठो , इन्हे तो आप जानते hi होंगे हमारे विजय भाई साहब और ये है इनका सुपुत्र हमारे गाओं की शान , अमित . और आप हैं हमारे शाम सुन्दर जी. क्सक्सक्सक्स गाओं क मुखिया .

शाम सुन्दर : तो तुम हो वो नौजवान जिसने मेला hi लूट लिया था कुश्ती जीत कर . देखने में तो उम्र से कच्चे लगते हो पर काम बड़ा कर दिया . किस्मत क धनि मालूम होते हो . वर्ण हमारे बेटे का सामना नहीं कर पते अगर वो उधर अत तो .

ये कुछ घमंडी आदमी लग रहा था बातों से. मैं भला अब क्या बोलता बड़ों में. अगर बाबा वहां न होते या मामला गाओं का न होता तो कोई जवाब दे भी देता

विजय : म्हणत से पके फल किस्मत की बारिश क मोहताज नहीं होते भाई साहब. आपका बीटा भी खूब म्हणत कर क बना होगा . वो भी नाम कमा लेगा. रही बात मेरे बेटे की तो आपने सही कहा उम्र से कच्चा है पर इरादों से नहीं .

बाबा की बात पर जहाँ सब प्रशंसा भरी नज़रों से उन्हें देख रहे थे वहीँ इस शाम सुन्दर क घमंड को जैसे ठेस पहुँच गयी

शमसुन्दर : तो जाये किसी दिन एक मुकाबला दोनों क बीच . पता चल जायेगा कौन कितने पानी में है . वैसे ये कोई ज़रूरी नहीं , चाहे तो ये नाम वापिस भी ले सकता है. जितने वाले को 5 हज़ार इनाम मेरी तरफ से .

सरपंच: छोडो भाई क्या बात लेकर बैठ गए तुम भी. हम यहाँ किस लिए इकठ्ठा हुए हैं और आप क्या बात लेकर बैठ गए .

शमसुन्दर : अरे इसमें हर्ज hi क्या है , हम कौन सा कोई गलत बात कर रहे हैं. बल्कि इससे तो इसका फायदा hi होगा . स्कूल कालेज का खर्चा hi निकल जायेगा अगर जित गया तो.

विजय : शुक्रिया भाई , भगवन की दया से इतने समर्थ तो हम हैं क इसका खर्चा उठा सकते हैं. रही बात जीत हर की तो उसमे यहाँ किसी को कोई शक नहीं होगा क जीत इसी की होगी

इस बात से तो शमसुन्दर जैसे आग बबूला हो उठा .

शमसुन्दर : लगता है तुम्हे अपने इस चूज़े पर ज्यादा hi घमंड है . अब तो मुकाबला हो कर रहेगा . सुनो सरपंच जी जल्द से जल्द आप मुकाबला रखिये . बाकि सब काम बाद में देखे जायेंगे .

सरपंच : अरे भाई आप दोनों क्या लेकर बैठ गए . हम यहाँ इस लिए इकठ्ठा हुए थे क अपने इलाके क विकास क रुके हुए काम करवाने क लिए प्रशासन से बात करें और आप आपस में hi यहाँ भिड़ने बैठ गए .

शमसुन्दर : वो सब काम हम करवा लेंगे सरपंच साहब उसकी चिंता मत करो . मला का सचिव हमारी जान पहचान का है . और वहां कलेक्टर क दफ्तर में भी मेरी मौसी का बीटा लगा हुआ है . हम तो यहाँ आपके कहने पर मिलने चले आये . पर आपके लोग कुछ ज्यादा hi हवा कर रहे हैं. गाओं से लेकर मला क दफ्तर तक सुन्दर पहलवान को सब सलाम ठोकते हैं. और मेरा बीटा मेरे से भी 2 हाथ आगे है. अब या तो आप मुकाबला करवाइये या फिर सब काम भूल जाइये . क्यों की जब तक मुकाबला नहीं होगा तब तक मैं कोई काम होने भी नहीं दूंगा .

शमसुन्दर की बात सुन कर सब एक दूसरे मुँह देखने लगे . बात कहाँ से कहाँ चली गयी थी. ये आदमी तो कुछ ज्यादा hi पहुंची होई चीज़ मालूम पद रहा था . शायद रणनीति से जुड़ आदमी होगा .

विजय : देखो भाई मेरा बीटा कोई नुमाइश की चीज़ नहीं जिसे हर जगह दिखाया जाये . मैं तो उसे यहाँ इस लिए लेकर आया था क सरपंच साहब ऐसा चाहते थे . रही बात मुकाबले की तो इसे अभी बहुत सरे बड़े बड़े मुकाबले खेलने हैं. ऐसे गाओं नुक्कड़ में इसे मैं नहीं खिलाने वाला . विकास क काम हम खुद देख लेंगे क कैसे करवाने हैं

शमसुन्दर : सीधे सीधे कहो न क दर गए . वैसे भी इसे देख कर लग hi रहा है क ज्यादा देर ठहर न पायेगा .

सरपंच : शमसुन्दर जी आप एक पहलवान रह चुके हैं. इसी लिए मैंने इन्हे यहाँ बुलाया था क आप मिल कर खुश होंगे पर आप तो बात को किसी और hi रंग में ले रहे हैं .

शमसुन्दर: पहलवान हूँ इसी लिए ये बात कही है. जब तक चुनौतियाँ समाप्त न हो जाएँ कोई खुद को बड़ा पहलवान नहीं कहलवा सकता . और आप सब ने इसकी इतनी बढ़ाई कर राखी है क हर तरफ इसकी चर्चा हो रही है . मुझे ये मंज़ूर नहीं . मेरा बीटा इससे कहीं ज्यादा मजबूत पहलवान है . या तो ये साबित करे क ये वाली काबिल है या फिर भूल जाओ क कोई काम यहाँ कभी हो पायेगा . मला इस इलाके में मेरे पूछे बगैर कहीं पाऊँ न रखता और काम तो कोई करेगा भी नहीं जब तक मैं न चहुँ .

दिल तो मेरा कर रहा था क मैं अभी इसकी चुनौती उठा कर इसका मुँह बंद कर दूँ पर बाबा ने मारा हाथ दबा रखा था . इस लिए मैं खामोश खड़ा रहा .

विजय : सरपंच साहब मेरे ख्याल से हमें अब चलना चाहिए . ए थे किस बात क लिए और हो कुछ और hi रहा है . अगर मेरे जीमने कोई सेवा हो तो सन्देश भेज देना .

अभी बाबा ने अपनी बात कही hi थी पुलिस की गाड़ियां साईरन बजती हुई गाओं में प्रवेश कर गयी. ऐसे कभी नहीं होता था हमारे गाओं में. सब की नज़रें उसी तरफ घूम गयी . एक नहीं दो नहीं बल्कि एक क बाद एक गाड़ियां थी . 2 गाड़ियां आगे पुलिस की साईरन और लाल नीली बत्ती क साथ थी उसके पीछे 2 बड़ी गाड़ियां लाल बत्ती लगी हुई थी और लास्ट में भी 2 गाड़ियां पुलिस की . साईरन बजती गाड़ियां चौपाल क पास आ कर रुकी और पुलिस वाले ने एक आदमी को बुलाकर पता पूछा और गाड़ियां आगे बढ़ गयी. यहाँ सब हैरान थे क माजरा क्या है . जिस आदमी से पुलिस वालों ने पता पुछा था वो भागता हुआ इधर hi आ गया .

आदमी : हाँ गया हुआ ) विजय भैया कोई मसला हुआ है क्या आपका ?

विजय : नहीं तो , तुम क्यों पूछ रहे हो .

सरपंच : वो लोग तुमसे क्या पूछ रहे थे ? कौन आया है ?

आदमी : सरपंच साहब वो विजय भैया का पता hi पूछ रहे थे . मैंने पुछा कौन है तो कुछ नहीं बोले . गाड़ियों में सब बड़े अफसर लोग hi बैठे हैं पुलिस क . कउनो पन्गा तो नहीं हुआ भैया आपका या किसी और का घर परिवार से. अगर है तो बता दीजिये हम सब आपके साथ हैं.

अब ये बात सुन कर तो बाबा क चेहरे पर परेशानी नज़र आने लगी. मैं भी समझने की कोशिश कर रहा था . और जैसे hi मुझे अंदाज़ा हुआ मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी

सरपंच : बात क्या है भैया ? हमें बताओ हम आपके साथ हैं

विजय : मुझे तो खुद नहीं पता क क्या बात है और ये लोग हैं कौन .

उधर शमसुन्दर अपने मोबाइल पर किसे से बात कर रहा था . बात करने क बाद वो भी बोलै

शमसुन्दर : जाओ जाओ देख लो जाकर कौन आया है. मला क सचिव से बात हुई है मेरी वो इधर नहीं आये हैं. अब अगर कोई मसला हुआ तो बता देना मैं उनसे बात कर क हल करवा दूंगा . पर शर्त ये है क तुम्हारे बेटे को फिर मेरे बेटे का लोहा मन्ना होगा .

शमसुन्दर की इस बात पर बाबा को गुस्सा तो आया पर वो शांत रहे . जबकि मुझे हंसी आ रही थी . बाबा सबको साथ लिए वहां से घर की तरफ चलने लगे तो मैंने शमसुन्दर से कहा.

अमित : अंकल प्लीज आप हमारे साथ चलिए न . आप की पहचान तो मला तक है और आपका भाई कलेक्टर ऑफिस में भी है. आप साथ चलेंगे तो हमारी बड़ी मदद हो जाएगी . फिर आप जो कहेंगे मैं मन लूंगा .

विजय : ये तुम क्या कह रहे हो अमित .

अमित : मैं ठीक कह रहा हूँ बाबा , आप चलिए न अंकल .

शमसुन्दर: लगता है अपने बाप से ज्यादा समझदार हो तुम. चलो देखते हैं कौन है. अभी एक फ़ोन कर क वापिस भगा दूंगा उसे .

शमसुन्दर तो घमंड में फूला नहीं समां रहा था . उसे लगा क मैंने घुटने तक दिए . पर उसे क्या पता था क वहां क्या होने वाला है . मेरी बात सुन कर शमसुन्दर भी घमंड से गर्दन ऊँची किये अपने आदमियों क साथ लिए हमारे साथ चल पड़ा . हम जब हमारे घर क पास पहुंचे तो देखा सब गाड़ियां लाइन में घर क बहार कड़ी थी और पुलिस वाले सब बहार पहरा दे रहे थे . इतने सरे लोगों को देख कर वो सब मुस्तैद हो गए और जो गाड़ियों में बैठे थे वो भी बहार निकल आये . सरपंच बाबा क साथ आगे थे और शमसुन्दर भी अपनी हेकड़ी दिखता आगे आ गया . मैं ख़ामोशी से बाबा क पीछे hi था . तभी एक पोलिसवाले हाथ में हूँ पकडे हमारी तरफ बढ़ा और हाथ का इशारा कर क रोक दिया .

पोलिसवाले : रुक जाइये , कौन हैं आप लोग और इधर क्या करने आये हैं ?

शमसुन्दर: नमस्कार भाई मेरा नाम शमसुन्दर है , लोग मुझे सुन्दर पहलवान क नाम से जानते हैं. मला का खास आदमी हूँ. और ये सब इसी गाओं क लोग हैं. यहाँ कौन आया है और क्या बात हुई है ? कोई लफड़ा तो नहीं है ?

बाबा क बोलने से पहले hi सुन्दर पहलवान अपनी प्रधानगी दिखने लगा . पर मैं बस मंद मंद मुस्कुरा रहा था .

पुलिस वाला : नहीं कोई मसला नहीं है आप लोग जा सकते हो यहाँ से .

शमसुन्दर: देखो भाई ये इनका घर है, अगर कोई मसला है तो हमें बताओ . वर्ण हम मला साहब को यहीं बुला लेंगे और फिर तुम सब को दिक्कत होगी .

पुलिस वाला : बाबा से ) ये आपका घर है सर ? ठीक है आप आ जाइये बाकि सब यहीं रुकिए .

अब बाबा को इतनी इज्जत देते देख शमसुन्दर को और गुस्सा आ गया . क्यूंकि उसकी बात तो अनसुनी कर दी थी पुलिस वाले ने .

शमसुन्दर: देखो ये ठीक बात नहीं है , तुम ऐसे हमें नहीं है रोक सकते . तुम्हे अभी पता नहीं मैं कौन हूँ . एक फ़ोन कर क तुम्हारी वर्दी उतरवा दूंगा . मेरा भाई कलेक्टर दफ्तर में काम करता है .

शमसुन्दर कुछ ज्यादा hi तैश में आ गया था . उधर पीछे से एक इंस्पेक्टर मामला बिगड़ता देख हमारी तरफ hi आ गया .

इंस्पेक्टर : क्या बात है कांस्टेबल क्या कह रहे हैं ये लोग ?

पुलिस वाला : सर ये सब अंदर जाना चाहते हैं. बोल रहे हैं क ये मला क खास हैं और इनका भाई कलेक्टर ऑफिस में काम करता है . मेरी वर्दी उतरवाने की बात कर रहे हैं .

इंस्पेक्टर: ओह ाचा , तो लगाओ फ़ोन अपने उस भाई को या मला को . पर उन्हें पहले ये बता देना क यहाँ ऋतू सिंह और राठौर साहब दोनों अपने निजी काम से आये हैं और तुम ज़बरदस्ती उनसे मिलने की कोशिश कर रहे हो . फिर देखते हैं वो क्या कहता है.

ऋतू सिंह और राठौर सर का नाम सुन कर सब क कान खड़े हो गए . बाबा क चेहरे पर अब मुस्कान आ गयी थी. उन्होंने मेरी तरफ देखा तो मुझे मुस्कुराता देख कर वो सब समझ गए क मैं पहले hi जनता था .

शमसुन्दर: क्या ? सप मैडम और राठौर साहब दोनों यहाँ आये हैं ? पर वो तो किसी क यहाँ जाते नहीं फिर वो यहाँ क्यों आये हैं .

इंस्पेक्टर: ये बात तो उन्हें hi पता होगी , तुम अपनी चोंच बिच में मत अदाओ वर्ण राठौर साहब तो फिर भी बक्श देंगे मगर ये जो वर्दी उतरवाने की बात तुमने कही है न. अगर ये बात मैडम को पता चली तो यहाँ से घर तक नंगे hi जाओगे वो भी पुलिस की खातिरदारी क बाद . जाओ यहाँ से , जब तक बुलाया न जाये यहाँ मत आना .

शमसुन्दर की तो अब बोलती hi बंद हो गयी थी और वो नज़रें चुराता मुँह छुपाने लगा . ऋतू सिंह का खौफ उसके चेहरे पे साफ नज़र आ रहा था . मैंने बाबा को खामोश रहने का इशारा किया और उसके मज़े लेने क लिए मैं उससे बोलै .

अमित : अंकल प्लीज कुछ कीजिये न , कहीं ये लोग हमें अंदर न करवा दे .

शमसुन्दर: अरे को कुछ नहीं होगा . मैं कह रहा हूँ न .

सरपंच : सुन्दर भाई मला तो आपको बहुत मानते हैं न . आप उनसे hi एक बार बात कर क देखो . उनकी तो ये लोग मन hi लेंगे . विजय भाई बहुत hi सज्जन व्यक्ति हैं . इनके साथ कुछ गलत नहीं होना चाहिए .

शमसुन्दर: मैं करता हूँ कुछ .

शमसुन्दर अपनी जेब से मोबाइल निकल कर कोई no. मिलाने लगा . सामने वाले ने फ़ोन उठाया तो शमसुन्दर बात करने लगा . फ़ोन की वॉल्यूम इतनी ऊँची थी क पास खड़ा मैं आसानी से सुन सकता था .

शमसुन्दर: भाई साहब क्या हल हैं आपके और मला साहब कैसे हैं . मैं सुन्दर पहलवान बोल रहा हूँ क्सक्सक्सक्स गाओं से .

सामने वाला : हाँ हाँ , कहिये क्या काम था . मला साहब ज़रा अभी खाना खा रहे हैं .

शमसुन्दर: ओह ाचा ाचा , जी काम तो कुछ खास नहीं था . मैं इस वक़्त क्सक्सक्सक्स गाओं में हूँ . यहाँ मीटिंग क लिए आया था मला साहब क hi काम से . यहाँ थोड़ी दिक्कत हो गयी है. पुलिस वाले हमें अपना रोअब दिखा रहे हैं. मैंने उन्हें कहा भी क मैं मला साहब का खास आदमी हूँ . पर वो तो उल्टा रोअब झाड़ रहे हैं. आप ज़रा इन लोगों से बात कीजिये .

शमसुन्दर ने जान बुझ कर मला क काम का हवाल देकर उस आदमी को अपनी तरफ से सिफारिश करने को कहा जो शायद मला का hi सचिव था जिसकी ये पहले hi डींगे हेंक रहा था . शमसुन्दर ने मोबाइल इंस्पेक्टर की तरफ बढ़ाया तो उसने पकड़ लिया और बात करने लगा .

इंस्पेक्टर: मैं इंस्पेक्टर कारन राणे बोल रहा हूँ .

सामने वाले ने कुछ कहा जो मैं सुन नहीं पाया .

इंस्पेक्टर: देखिये मैं सप ऋतू सिंह जी की सुरक्षा में तैनात हूँ और यहाँ वो अपने निजी काम से आयी हैं. और वो अकेली नहीं आयी राठौर साहब भी उनके साथ आये हैं. ये लोग ज़बरदस्ती उनसे मिलने की कोशिश कर रहे हैं.

सामने वाले ने फिर कुछ कहा और इंस्पेक्टर ने ok कह कर मोबाइल वापिस शमसुन्दर को दे दिया और बात करने को कहा .

शमसुन्दर: hello

सामने वाला : तुम्हारा दिमाग ख़राब हो गया है क्या ? जिस ऋतू सिंह क सामने मला साहब कुछ नहीं बोलते तुम उसी से पन्गा लेने की बात कर रहे हो . पहले मुझे बता देते तो मैं इंस्पेक्टर से भी बात न करता . अपनी खैरियत चाहते हो तो चुपचाप निकल लो . अगर ऋतू सिंह क हाथे चढ़ गए तो मैं क्या मला साहब भी कुछ नहीं कर पाएंगे . अब फ़ोन रखो और आइंदा ऐसे फ़ोन मत करना .

शमसुन्दर की तो हवा hi टाइट हो गयी थी . कॉल पर सचिव कुछ ज्यादा hi गुस्से में और ज़ोर से बोलै था जिससे उसकी आवाज़ आपस खड़े लोगों क कानो में भी पहुँच गयी थी . अब सरपंच साहब भी उससे दूर होने लगे . तब मेरे दिमाग में एक आईडिया आया क बाबा की इज़्ज़त इन सब क सामने और बढ़ाई जाये . मैंने जेब से मोबाइल निकाला और कॉल लगा दी .

विजय : किसे फ़ोन कर रहे हो बीटा ?

अमित : एक दोस्त को , इनसे तो कुछ हुआ नहीं पर वो हमारी मदद ज़रूर करेगा .

शमसुन्दर: खिसियाते हुए ) हुन्न्न लगा लो तुम भी फ़ोन . अभी पता चल जायेगा कितने पानी में हो . जब मला इस मामले में नहीं घुस रहा तो और कौन आएगा.

शमसुन्दर अपनी इज़्ज़त बचने क लिए ऐसे बात कर रहा था . पर उसे क्या पता था क अब एक और धमाका होने वाला है क्यूंकि मैंने फ़ोन किसी और को नहीं बल्कि ऋतू सिंह को hi लगाया था .

अमित : hello , क्या आप बहार आ सकती हैं ?

ऋतू : लो करलो बात , मैं तुम्हारे घर तुम्हे सरप्राइज देने आयी हूँ और तुम खुद hi बहार हो . अब बहार क्यों बुला रहे हो मुझे ?

अमित : ज़रूरी है , यहाँ कोई है जो मेरा मज़ाक उदा रहा है .

मेरी बात का जवाब दिए बिना hi ऋतू सिंह ने फ़ोन काट दिया मैं समझ गया क अब क्या होने वाला है .

शमसुन्दर: क्यों हो गयी बोलती बंद ? उसने तो नाम भी नहीं पूछा . बात करता है ,, हहहह

शमसुन्दर फिर से अपनी अकड़ दिखने लगा . बाबा ने एक बार उसे देखा और फिर मुझे अंदर चलने को इशारा किया पर मैंने उन्हें रुकने को कहा . तभी हमारे घर का गेट खुला और अंदर से ऋतू सिंह बहार निकली . उसे देखते hi पुलिस वाले जल्दी से गाड़ियों क पास पहुँच गए और एक ने दरवाज़ा खोला . पर उन्हें मन करती ऋतू सिंह हमारी तरफ hi आ गयी . सर पर पुलिस की टोपी और चुस्त फिटिंग की पुलिस वाली वर्दी में ऋतू सिंह इस वक़्त क़यामत hi लग रही थी. जैसे किसी हेरोइन को यूनिफार्म में खड़ा कर दिया हो . क़यामत तो वो थी hi पर इस वक़्त उसे अपनी तरफ अत देख कइयों क दिल घबरा गए थे . खास कर क शमसुन्दर का .

ऋतू : अरे आप लोग यहाँ बहार hi खड़े हैं ? मैं और राठौर सर कब से आपका इंतज़ार कर रहे हैं . इंस्पेक्टर आपने उन्हें बहार क्यों खड़ा कर क रखा है ? जानते हो ये मेरे कितने खास हैं. और राठौर सर स्पेशलय इन्हे मिलने यहाँ आये हैं.

ये बात सुन कर तो सबकी बोलती बंद हो गयी . सब हाथ जोड़े खड़े थे . शमसुन्दर तो फटी आँखों से कभी ऋतू सिंह को तो कभी मुझे देख रहा था .

इंस्पेक्टर: सॉरी मैडम हमें नहीं पता था ये लोग सब एक साथ आ रहे थे तो हमने रोक दिया .

सरपंच: विजय भैया आपने बताया नहीं क ये आपसे मिलने ए हैं .

विजय : मुझे भी कहाँ पता था ये सब . बीटा तुम जानते थे .

अमित : पता तो नहीं था पर अंदाज़ा हो गया था . कहिये शमसुन्दर जी , अब कुछ कहना चाहेंगे आप .

शमसुन्दर की तो बोलती बंद थी . बाकि सब भी अब उसे घृणा से देख रहे थे .

ऋतू : देखिये एक बात कान खोल कर सुन लीजिये . ये मेरा परिवार है , अगर किसी ने इनके साथ कोई भी गुस्ताखी की तो फिर उसे मैं देखूंगी और मैं कैसी हूँ ये आप सब लोगों को पता hi होगा .

ऋतू की इस धमकी क बाद तो सब क चेहरों पर दर क बदल छ गए . पर बाबा ने उनका दर दूर किया .

विजय : अरे नहीं ऋतू जी ऐसा कुछ भी नहीं है . सब अपने hi हैं .

ऋतू ने मेरी तरफ देख कर इशारे से पुछा hi मैंने शमसुन्दर की तरफ इशारा कर दिया

ऋतू : तुम ( शमसुन्दर) इधर आओ . तुम कहाँ रहते हो ?

शमसुन्दर: हाथ जोड़ कर ) जी मैं यहीं पास hi क्सक्सक्स गाओं का रहने वाला हूँ. मला साहब का खास आदमी हूँ .

इंस्पेक्टर: मैडम ये साहब कांस्टेबल को वर्दी उतरवाने की धमकी भी दे रहे थे .

ऋतू : गुस्से में ) क्या कहा ?? तू वर्दी उतरवायेगा . वर्दी को बाप की जागीर समझा है क्या ? या किसी मला की खैरात जो तू उतरवायेगा ? इंस्पेक्टर उतरवाओ इसके कपडे और भेजो यहाँ से नंगा . जाकर पूछ लेना अपना मला से क ऋतू सिंह कौन है .

शमसुन्दर तो गिड़गिड़ाने लगा ऋतू सिंह की बात सुन कर .

शमसुन्दर: माफ़ कर दो मैडम गलती हो गयी . वो मैं तो इन लोगों की मदद hi कर रहे था .

विजय : ऋतू जी रहने दीजिये , हमारी खातिर जाने दीजिये. आप हमारे घर पहली बार आयी हैं. हमें सेवा का मौका दीजिये .

ऋतू : पहली बात क मुझे जी मत कहिये . आपसे छोटी हूँ मैं . आप कहते है तो छोड़ देती हूँ वर्ण वर्दी पर उंगली उठाने वाले को मैं छोड़ती नहीं फिर चाहे वो कोई भी हो . चलिए अब अंदर , सब इंतज़ार कर रहे हैं .

शमसुन्दर तो अब हाथ जोड़ कर बाबा को धन्यवाद् कर रहा था और मेरे आगे तो नज़रें hi झुका ली . मैं बाबा और ऋतू तीनो घर क अंदर चल दिए . अंदर तो अलग hi महफ़िल लगी हुई थी . कल्पना क पापा चेयर पर बैठे हुए थे और बाकि सब उन्हें घेर कर खड़े थे . खास कर नैना दीदी और कल्पना दीदी . कल्पना है है क अपने पापा को दोनों क किस्से सुना रही थी और वो भी बराबर लपेट रही थी कल्पना को . हमें आया देख कर राठौर सर अपनी चेयर से उठ खड़े हुए हाथ जोड़ कर .

विजय : अरे अरे राठौर साहब आप क्यों खड़े हो रहे हैं. आप इतने बड़े आदमी हमारे गरीब खाने पर आये हैं . मुझे तो यकीन नहीं हो रहा .

बाबा ने हाथ जोड़ कर कल्पना क पापा का अभिवादन किया और वो भी उतनी hi शालीनता से मिले .

राठौर : अरे भाई साहब ऐसे तकल्लुफ मत कीजिये . मैं यहाँ कलेक्टर बन कर नहीं कल्पना क बाप की हैसियत से आया हूँ . शुक्रगुज़ार तो मैं आपका हूँ क आपने इतने दिन मेरी बची को अपने घर में पनाह दी. बहुत hi प्यारा परिवार है आपका . देख रहा हूँ मेरी बची यहाँ आ कर कितनी खुश है . इतना खुश तो मैंने कभी इसे अपने घर भी नहीं देखा . मैं कैसे शुक्रिया ऐडा करूँ आपका .

गौरी : ये अब हमारे परिवार का hi हिस्सा है भाई साहब . ऐसे शुक्रिया कह कर पराया मत कीजिये हमें .

राठौर : माफ़ कीजिये मेरे वो मतलब नहीं था . वो क्या है न , बिना माँ क पाली है न तो मुझे हमेशा से लगता रहा है क मैं इसे वो प्यार नहीं दे पाया जिसकी इसे सबसे ज्यादा ज़रूरत थी . माँ का और परिवार का प्यार . आप लोगों ने वो कमी भी पूरी कर दी है .

गौरी : इतने दिनों में hi कल्पना इतना घुल मिल गयी है क अब तो लगता hi नहीं ये हम में से नहीं . अब से ये इसी परिवार का हिस्सा है . जब चाहे आये जाये इसके लिए हमारे दरवाज़े हमेशा खुले रहेंगे .

माँ की बात सुन कर कल्पना माँ क पास गयी और उन्हें गले लगा लिया . कल्पना कुछ ज्यादा hi इमोशनल हो गयी थी और ये देख कर उसके पापा की आँखों में भी नमी आ गयी जिसे उन्होंने जल्दी से साफ़ किया और मुस्कुराने लगे .

राठौर : और भाई बरखुरदार कैसे हो तुम ? लो मैंने अपना वडा पूरा कर दिया . अब तो कोई और शर्त नहीं है न ?

अमित : कैसी बात कर रहे हैं अंकल . मैं तो बस यही चाहता था क एक बार आप सब से मिल ले . इसी लिए यहाँ आने की रिक्वेस्ट की थी .

राठौर : ये तुमने सही काम किया था वर्ण मैं इतने अचे परिवार से मिल hi न पता शायद . वडा निभाने आ गया वर्ण वक़्त hi कहाँ मिलता है .

उधर किचन से मंजू बुआ हाथ में ट्रे लिए आ गयी. और आते hi पहले राठौर सर और ऋतू सिंह को कप दिए .

विजय : गुड़िया तुम ये सब क्यों कर रही हो ? सब हैं तो यहाँ वो कर लेंगे काम .

मंजू : आप नहीं जानते भैया इसे ( ऋतू ) मेरे हाथ की कॉफ़ी बहुत पसंद है . आज पहली बार यहाँ आयी है तो कैसे न पिलाती इसे . आप पहले तो इससे नहीं मिले होंगे ? ये मेरी बेस्ट फ्रेंड है बहिन की तरह . ऋतू सिंह .

विजय : ओह्ह्ह्ह तो इसी लिए आप यहाँ इतनी दूर तक चली आयी . चलो ये भी ाचा है हमें एक और बहिन मिल गयी .

बाबा ने भी यार से ऋतू सिंह क सर पर हाथ रखा . ऋतू सिंह इस मौके पर कुछ ज्यादा hi इमोशनल हो गयी थी . अपनी आँखों में आयी नमी उन्होंने जल्दी से साफ़ की पर ये सब ने नोट कर लिया था .

विजय : क्या हुआ बहिन ? मैंने कुछ गलत कह दिया क्या ?

ऋतू : नहीं भैया आप ने कुछ गलत नहीं कहा . बस आपको देख कर मुझे अपने भाई की यद् आ गयी . कितना फरक है आप में और मेरे भाई में . सेज न होते हुए भी आपने इतना प्यार दिया मंजू को और मुझे भी उसी बराबर मन रहे हैं और एक मेरा अपना भाई था जिसे सिर्फ मेरा फायदा hi उठाना था.

विजय : बहुत hi बदकिस्मत है वो भाई जिसने इतनी प्यारी बहिन को खो दिया . मुझे ख़ुशी होगी अगर तुम मुझे अपने भाई की जगह दे सको तो .

ऋतू : खुश किस्मती तो मेरी है भैया .

गौरी : अब बस भी करो , क्या रुकते हो रहोगे छोटी बहिन को . थानेदारनी जी तुम मेरे साथ चलो . ये तो हैं hi ऐसे, चल मंजू तू भी साथ चल . इतनी बड़ी अफसर हो कर बच्चों जैसे ऑंखें भर रही है .

माँ मंजू बुआ और ऋतू को साथ लेकर अपने कमरे में चली गयी . इधर बाबा और राठौर अंकल बातें करने लगे . कल्पना क पापा ने उसे अपना सामान पैक करने को कह दिया था . कल्पना बेमन से अपना सामान पैक करने चली गयी . नैना दीदी करुणा दीदी उसके साथ hi थी . राठौर अंकल को कुछ ज़रूरी काम था इस लिए उन्होंने लंच तक रुकने में असमर्थता जताई. बाबा ने भी ज्यादा ज़ोर न दिया . उधर से कल्पना भी अपना बैग पैक कर क आ गयी . उसके चेहरे पर उदासी नज़र आ रही थी .

राठौर : क्या हुआ कल्पना ?

कल्पना : कुछ नहीं पापा .

राठौर : तो ऐसे उदास क्यों हो?

कल्पना : वो इतने दिनों से यहाँ सब क साथ थी न तो .....

राठौर : समझ सकता हूँ बेटी पर हूँ क न एक दिन तो जाना hi था न . वैसे अगर तुम चाहो तो अपनी बहनो को अपने घर साथ लेकर चल सकती हो. वैसे भी इतना बड़ा घर खली खली सा लगता है .

कल्पना : खुश होते हुए ) सच !!! चलो न दीदी आप दोनों भी हमारे साथ चलो . अभी तो छुट्टियां पड़ी हैं न . कुछ दिन आप हमारे साथ उधर रह लेना .

राठौर : हाँ हाँ , उसे अपना hi घर समझो , वैसे है तो सरकारी पर जब तक यहाँ हूँ तो अधिकार है मेरा . अब अगर अपनी इस दोस्त क पापा की थोड़ी सी इज़्ज़त हो तो कुछ दिन हमारे घर चलो .

नैना : दोस्त नहीं अंकल ये तो हमारी बहिन hi है अब. मुझे ख़ुशी होगी पर माँ से पूछना पड़ेगा .

रीता : जाना चाहती हो तो तुम दोनों को मैं इजाज़त देती हूँ . एक दो दिन की तो बात है. पर वडा करो तुम वहां जा कर कोई शरारत नहीं करोगी .

रीता मौसी ने करुणा और नैना दीदी क मन की बात समझ ली थी और इजाज़त दे दी शर्त क साथ . ये बात सुन कर दोनों खुश हो गयी और साथ hi कल्पना भी

करुणा : बिलकुल भी नहीं मदर इंडिया , हम दोनों अछि बची बन कर रहेंगी . और अंकल को बिलकुल भी तंग नहीं करेंगी .

राठौर : बहिन जी आप इन्हे कुछ मत कहिये . बेटी बना कर ले जा रहा हूँ तो बेटी की तरह hi रखूँगा . ये जो चाहे करें बस मेरे ऑफिस और फाइल्स को छोड़ कर सब इनका है.

इस बात से तो दोनों और खुश हो गयी . और फिर कल्पना दोनों क साथ उनका सामान पैक करवाने चल दी . कुछ देर में तीनो का सामान गाड़ी में था . राठौर सर ने जाने क लिए ऋतू सिंह से पूछा तो उन्होंने कुछ देर और उनके की बात कही . कल्पना सब से बरी बरी से मिली . माँ बाबा ने उसे शगुन क तौर पर कुछ पैसे और कपडे दिए .

कल्पना : आंटी मैं ये नहीं ले सकती .

गौरी : कैसे नहीं ले सकती ? बेटी की तरह रखा है तुम्हे यहाँ तो क्या हम अपनी बेटी को शगुन भी नहीं से सकते . अगर नहीं लेना तो हमें हमारा प्यार वापिस कर दो फिर .

कल्पना ने माँ को गले से लगा लिया और माँ ने भी उसे प्यार दिया . लास्ट में कल्पना मेरे पास आयी . उसे देख कर लग रहा था क वो मुझे गले hi लगा लेगी . पर सब क सामने तो ऐसा करना गलत होता .

कल्पना : अब तुम्हे भी उधर आना होगा . काम से काम एक वक़्त खाना खाने तो आ सकते हो न

अमित : ज़रूर आऊंगा , और तुम भी जब चाहे यहाँ आ सकती हो .

कल्पना: वो तो मैं अब आउंगी hi. तुमसे पूछने की ज़रूरत नहीं है मुझे समझे . ाचा अब चलती हूँ .

राठौर सर क साथ में तीनो लड़कियां सवार हो गयी थी bari-bari सब से मिलने क बाद . ऋतू सिंह की गाड़ी और 2 पुलिस की गाड़ियां यहीं रुक गयी जब की राठौर सर की गाड़ी क साथ 2 पुलिस की गाड़ियां चल पड़ी . अभी गाडी चली hi थी क सामने पंचायत क लोग हाथ जोड़ कर खड़े थे जिन्हे देख कर राठौर सर ने गाड़ी रुकवा ली.

राठौर : आप लोग यहाँ किस लिए खड़े हैं ? कुछ काम था क्या ?

सरपंच : कलेक्टर साहब आप हमारे छोटे से गाओं में पधारे ये हमारे लिए फख्र की बात है . विजय भैया हमारे गाओं क सबसे अचे आदमी हैं. हूँ सब आपके पास hi शहर आने वाले थे और आप खुद यहाँ आ गए. दरअसल हमारे इलाके की कुछ समस्याएं हैं .......

राठौर : बीच में बोलते हुए ) समझ गया , आपके जो भी काम हैं या जो भी आपकी मांग है आप वो एक कागज़ पर लिख कर विजय भाई साहब तक पहुंचा दीजिये . आपको शहर आने की ज़रूरत नहीं है . आपका काम हो जायेगा . और आइंदा किसी भी तरह की परेशानी हो तो आप उनसे कह सकते हैं. ाचा जी अब मैं चलता हूँ मुझे ज़रूरी काम है कुछ .

इतना कह कर राठौर सर ने गाड़ी आगे बढ़ाने का कहा और उनका काफिला गाओं से निकल गया . राठौर सर की बातें सुन कर सब लोग बहुत खुश हुए और उनका धन्यवाद् करते हुए हमारे घर की तरफ चले ए . बाबा और मैं बहार hi थे . आते hi सब लोगों ने बाबा को कन्धों पर उठा लिया .

विजय : अरे अरे ये आप लोग क्या कर रहे हो .

सरपंच: विजय भाई तुम इतने बड़े अफसरों क साथ उठते बैठते हो और फिर भी कभी बताया नहीं. ऐसे hi हम लोग उस सुन्दर क हाथ जोड़ रहे थे . अब तो साहब खुद कह गए हैं क सब काम हो जायेंगे . और जानते हो क्या कहे हैं? बोल रहे थे क कोई भी काम हो आपसे कहें . सब काम हो जायेंगे . बोलो विजय भैया



‘ ज़िंदाबाद ‘ विजय भैया , ज़िंदाबाद ‘ अब सब मिल कर बाबा क नारे लगाने लगे . बाबा उन्हें रोक रहे थे पर वो सब कहाँ मैंने वाले थे . बाबा को कन्धों पर उठाये वो अब उन्हें चौपाल की तरफ चल दिए . अब वहां क्या क्या होने वाला था मुझे पता था . मैं साथ तो जाना चाहता था पर फिर ख्याल आया अभी एक मेहमान तो घर में hi है . उनसे भी मिल लिया जाये . मैं जल्दी से वापिस घर में आ गया .
 
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