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"अब उसकी बातें छोड़... बस ये बता, मेरे इस 'बर्थडे गिफ्ट' का अगला हिस्सा क्या होगा?"
आरती ने थोड़ा शर्मा कर नवाज़ की और देखते हुई धीरे से कहा

दे तो दिया मोबाइल दिया
. .. नए कपडे दिए और क्या चाहिए आप को
नवाज़ ने आरती की कमर पर अपनी पकड़ और मज़बूत की और उसकी आँखों में शैतानी से देखते हुए मुस्कुराया.
"रानी, मोबाइल और कपडे तोह सिर्फ चीज़ें हैं... वो तोह कोई भी दे सकता है,"
नवाज़ ने उसके कान के पास धीरे से फुसफुसाया, जिस से आरती की सांसें तेज़ हो गयी.
"मुझे वो तोहफा चाहिए जो सिर्फ तुम दे सकती हो. ये रात, ये ख़ामोशी, और तुम्हारा ये नया बेशरम अंदाज़... मुझे ये चाहिए."
आरती ने शर्मा कर अपनी नज़रें झुका ली और नवाज़ के सीने पर हल्का सा धक्का देते हुए बोली,
"आपका पेट कभी नहीं भरता न? इतना सब तोह दे दिया, अब और क्या बचा है?"
नवाज़ ने उसके बालों में नाक गुसा के उसके बालो की महक ली और उसके कानो के बलि को ऊँगली से छेड़ते हुए बोलै,
"बचा तोह अभी बहुत कुछ है. आज मेरा बर्थडे है, और मैं चाहता हूँ की मेरी बेगम मुझे पूरी तरह से अपना 'तोहफा' क़ुबूल करने दे. बिना किसी डर के, बिना किसी तीसरे के ख्याल के."
आरती ने नवाज़ की आँखों में देखा, जहाँ सिर्फ उसके लिए दीवानगी थी. उसने धीरे से नवाज़ के गले में अपनी बाहें दाल दी और उसके बेहद करीब आकर बोली,
"अच्छा बाबा... ठीक है. बताइये, क्या करना है आपकी इस बेगम को?"
नवाज़ ने उसकी बात सुनकर एक शैतानी मुस्कराहट दी. बिना एक पल गवाए, उसने आरती को अपनी गॉड से एक झटके में थोड़ा और ऊपर उठाया और उसे वही सोफे पर लिटा दिया.
आरती की धड़कन एक दम से तेज़ हो गयी. हॉल के उस सन्नाटे और हलकी रौशनी में नवाज़ उसके ऊपर झुका हुआ था. आरती ने घबरा कर उसके कंधे पकड़ लिए और धीरे से बोली,
"नवाज़ जी ... ये क्या कर रहे हैं आप ? अभी तोह केक भी पूरा ख़तम नहीं हुआ... पहले उसे ख़तम करते है ."
नवाज़ ने उसकी एक बात नहीं सुनी. उसने आरती के दोनों हाथों को उसके सर के ऊपर सोफे पर टिकाया और उसकी आँखों में गहराई से देखते हुए बोलै, "केक तोह सिर्फ शुरुआत थी रानी... असली मिठास तोह अब शुरू होगी. आज मेरा बर्थडे है, और तुमने अभी पूछा न की 'बेगम को क्या करना है'?"
आरती ने अपनी आँखें मूँद ली और उसके चेहरे पर शर्माहट की एक सुर्खी दौड़ गयी. नवाज़ ने उसके चेहरे के बेहद करीब आकर फुसफुसाया, "बस वहीँ रहो... हिलना मत. आज की रात मैं चाहता हूँ की तुम सिर्फ मेरी बनो, बिना किसी डर के."
आरती ने दबी हुई आवाज़ में कहा,
"आप बहुत बेशरम हो गए हैं..."
नवाज़ ने उसके होठों के पास आकर कहा, "तुम्हारे नशीले रूप ने hi तोह मुझे ऐसा बनाया है."
हॉल की हलकी रौशनी उन दोनों के चेहरों पर पद रही थी, जिससे माहौल और भी नशीला हो गया था.
नवाज़ ने उसके कान के पास आपने होंठ लेके धीरे से कहा,
"बेशर्मी तोह अभी शुरू हुई है रानी... जब सामने तुम जैसा नशा हो, तोह होश किसको रहता है?"
उसने आरती के दोनों हाथों को अपने एक हाथ से ऊपर की तरफ पकड़ लिया और दूसरा हाथ उसकी कमर पर रखा.
आरती की सांसें तेज़ी से चल रही थी. उसने दबी हुई आवाज़ में कहा,
"नवाज़ जी ... अगर वो लोग आ गए तोह हम कहीं के नहीं रहेंगे."
नवाज़ ने आरती की घबराहट महसूस की और उसके चेहरे के और करीब आकर धीरे से बोलै,
"डरो मत रानी, यहाँ कोई नहीं है. अभी तोह दो घंटे बाकी हैं उनके आने में. 11 बजे तक हमें निकलना है, पर तब तक... तब तक ये वक़्त सिर्फ हमारा है."
आरती ने एक गहरी सांस ली, उसकी धड़कन अब थोड़ी शांत हुई पर रोमांस का नशा बढ़ता जा रहा था.
"दो घंटे... सिर्फ दो घंटे हैं हमारे पास?"
उसने नवाज़ की आँखों में देखते हुए पूछा.
नवाज़ ने उसके दोनों हाथों को सोफे पर ऊपर की तरफ और मज़बूती से पकड़ा और उसकी आँखों में देखते हुए एक शैतानी मुस्कराहट दी,
, "दो घंटे बहुत होते हैं अगर साथ तुम जैसी बेगम हो. आज की रात का हर एक पल मैं तुम्हारे नाम कर देना चाहता हूँ
."
फिर उसने आगे कहा
आज की रात तोह वैसे भी मेरे बर्थडे की है. क्या तुम अपने इस दीवाने को इतना सा तोहफा भी नहीं डौगी?"
उसने आरती के होठों के बेहद करीब आकर उन्हें हल्का सा छुआ, जैसे वो केक की मिठास को अब उन होठों पर ढूंढ रहा हो. आरती ने अपनी आँखें कास कर बंद कर ली और उसका पूरा जिस्म thar-thar कांपने लगा. वो छह कर भी नवाज़ को खुद से दूर नहीं कर प् रही थी.
"नवाज़ जी ... बस कीजिये,"
आरती ने कहा, पर उसकी आवाज़ में कोई सख्ती नहीं थी, बल्कि एक तरह का समर्पण tha..Nawaz ने उसके चेहरे से होती हुई अपनी उँगलियाँ उसकी गर्दन तक ले गया और बोलै,
"बस तोह अभी नहीं होगा... आज रात तुम सिर्फ मेरी हो, बिना किसी डर के."
आरती ने थोड़ा शर्मा कर नवाज़ की और देखते हुई धीरे से कहा

दे तो दिया मोबाइल दिया
. .. नए कपडे दिए और क्या चाहिए आप को
नवाज़ ने आरती की कमर पर अपनी पकड़ और मज़बूत की और उसकी आँखों में शैतानी से देखते हुए मुस्कुराया.
"रानी, मोबाइल और कपडे तोह सिर्फ चीज़ें हैं... वो तोह कोई भी दे सकता है,"
नवाज़ ने उसके कान के पास धीरे से फुसफुसाया, जिस से आरती की सांसें तेज़ हो गयी.
"मुझे वो तोहफा चाहिए जो सिर्फ तुम दे सकती हो. ये रात, ये ख़ामोशी, और तुम्हारा ये नया बेशरम अंदाज़... मुझे ये चाहिए."
आरती ने शर्मा कर अपनी नज़रें झुका ली और नवाज़ के सीने पर हल्का सा धक्का देते हुए बोली,
"आपका पेट कभी नहीं भरता न? इतना सब तोह दे दिया, अब और क्या बचा है?"
नवाज़ ने उसके बालों में नाक गुसा के उसके बालो की महक ली और उसके कानो के बलि को ऊँगली से छेड़ते हुए बोलै,
"बचा तोह अभी बहुत कुछ है. आज मेरा बर्थडे है, और मैं चाहता हूँ की मेरी बेगम मुझे पूरी तरह से अपना 'तोहफा' क़ुबूल करने दे. बिना किसी डर के, बिना किसी तीसरे के ख्याल के."
आरती ने नवाज़ की आँखों में देखा, जहाँ सिर्फ उसके लिए दीवानगी थी. उसने धीरे से नवाज़ के गले में अपनी बाहें दाल दी और उसके बेहद करीब आकर बोली,
"अच्छा बाबा... ठीक है. बताइये, क्या करना है आपकी इस बेगम को?"
नवाज़ ने उसकी बात सुनकर एक शैतानी मुस्कराहट दी. बिना एक पल गवाए, उसने आरती को अपनी गॉड से एक झटके में थोड़ा और ऊपर उठाया और उसे वही सोफे पर लिटा दिया.
आरती की धड़कन एक दम से तेज़ हो गयी. हॉल के उस सन्नाटे और हलकी रौशनी में नवाज़ उसके ऊपर झुका हुआ था. आरती ने घबरा कर उसके कंधे पकड़ लिए और धीरे से बोली,
"नवाज़ जी ... ये क्या कर रहे हैं आप ? अभी तोह केक भी पूरा ख़तम नहीं हुआ... पहले उसे ख़तम करते है ."
नवाज़ ने उसकी एक बात नहीं सुनी. उसने आरती के दोनों हाथों को उसके सर के ऊपर सोफे पर टिकाया और उसकी आँखों में गहराई से देखते हुए बोलै, "केक तोह सिर्फ शुरुआत थी रानी... असली मिठास तोह अब शुरू होगी. आज मेरा बर्थडे है, और तुमने अभी पूछा न की 'बेगम को क्या करना है'?"
आरती ने अपनी आँखें मूँद ली और उसके चेहरे पर शर्माहट की एक सुर्खी दौड़ गयी. नवाज़ ने उसके चेहरे के बेहद करीब आकर फुसफुसाया, "बस वहीँ रहो... हिलना मत. आज की रात मैं चाहता हूँ की तुम सिर्फ मेरी बनो, बिना किसी डर के."
आरती ने दबी हुई आवाज़ में कहा,
"आप बहुत बेशरम हो गए हैं..."
नवाज़ ने उसके होठों के पास आकर कहा, "तुम्हारे नशीले रूप ने hi तोह मुझे ऐसा बनाया है."
हॉल की हलकी रौशनी उन दोनों के चेहरों पर पद रही थी, जिससे माहौल और भी नशीला हो गया था.
नवाज़ ने उसके कान के पास आपने होंठ लेके धीरे से कहा,
"बेशर्मी तोह अभी शुरू हुई है रानी... जब सामने तुम जैसा नशा हो, तोह होश किसको रहता है?"
उसने आरती के दोनों हाथों को अपने एक हाथ से ऊपर की तरफ पकड़ लिया और दूसरा हाथ उसकी कमर पर रखा.
आरती की सांसें तेज़ी से चल रही थी. उसने दबी हुई आवाज़ में कहा,
"नवाज़ जी ... अगर वो लोग आ गए तोह हम कहीं के नहीं रहेंगे."
नवाज़ ने आरती की घबराहट महसूस की और उसके चेहरे के और करीब आकर धीरे से बोलै,
"डरो मत रानी, यहाँ कोई नहीं है. अभी तोह दो घंटे बाकी हैं उनके आने में. 11 बजे तक हमें निकलना है, पर तब तक... तब तक ये वक़्त सिर्फ हमारा है."
आरती ने एक गहरी सांस ली, उसकी धड़कन अब थोड़ी शांत हुई पर रोमांस का नशा बढ़ता जा रहा था.
"दो घंटे... सिर्फ दो घंटे हैं हमारे पास?"
उसने नवाज़ की आँखों में देखते हुए पूछा.
नवाज़ ने उसके दोनों हाथों को सोफे पर ऊपर की तरफ और मज़बूती से पकड़ा और उसकी आँखों में देखते हुए एक शैतानी मुस्कराहट दी,
, "दो घंटे बहुत होते हैं अगर साथ तुम जैसी बेगम हो. आज की रात का हर एक पल मैं तुम्हारे नाम कर देना चाहता हूँ
."
फिर उसने आगे कहा
आज की रात तोह वैसे भी मेरे बर्थडे की है. क्या तुम अपने इस दीवाने को इतना सा तोहफा भी नहीं डौगी?"
उसने आरती के होठों के बेहद करीब आकर उन्हें हल्का सा छुआ, जैसे वो केक की मिठास को अब उन होठों पर ढूंढ रहा हो. आरती ने अपनी आँखें कास कर बंद कर ली और उसका पूरा जिस्म thar-thar कांपने लगा. वो छह कर भी नवाज़ को खुद से दूर नहीं कर प् रही थी.
"नवाज़ जी ... बस कीजिये,"
आरती ने कहा, पर उसकी आवाज़ में कोई सख्ती नहीं थी, बल्कि एक तरह का समर्पण tha..Nawaz ने उसके चेहरे से होती हुई अपनी उँगलियाँ उसकी गर्दन तक ले गया और बोलै,
"बस तोह अभी नहीं होगा... आज रात तुम सिर्फ मेरी हो, बिना किसी डर के."
































