कैसे टूटेंगे रानी .. मई हु न ..और वो भी आने वाले है न .. कंचन के फ्रेंड के भैय्या और भाभी..
ओह्ह्ह गॉड मई ये तो भूल hi गयी ..
तब तक तो हम रोमांस कर सकते है न
तब आरती शर्मा गयी ..
और वो दोनों रात मई नहीं आये तो
फिर इस घर मई हम सुहागरात मनाएंगे
धत बेशरम
वैसे hi नवाज़ आरती के पास आ जाता है
नवाज़- आजाओ आरती
आ जाओ आरती ऐसे नवाज़ ने कहते hi आरती का दिल zor-zor से धड़कने लगा. उस हॉल मई वो अब जहा बैठे थे वह की उस मद्धम रौशनी में नवाज़ के बुलाने से उसका चेहरा शर्म से तमतमा उठा था

पर नवाज़ की आँखों में जो शोखी और मर्दाना तेवर था, वह उसे अपनी तरफ खिंच रहा था पर फिर भी आपने पाई काबू पाकर वो कहती है
नहीं
क्यों रानी
दर लग रहा है
किस बात का दर
ऐसा बोल के उसका हाट आपने हाट मई लेता है
तब शरमाते हुई कहते है .. निचे गर्दन करके

अगर मई आप के पास आयी और आपने वो सब मेरे साथ किया तो मेरे शादी टूट जाएगी
"कैसे टूटेंगे रानी? मैं हूँ न... और वैसे भी, कंचन के bhaiyya-bhabhi आने hi वाले हैं," नवाज़ ने शरारत से उसके कान के पास फुसफुसाया.
तभी आरती वह से पीछे हटाने लगी तभी नवाज़ ने आरती को कास कर अपने सीने से चिपका लिया.
उसकी पकड़ इतनी मजबूत थी की आरती छह कर भी पिचि हैट नहीं प् रही थी. उसने अपनी तरफ से पूरी कोसिस की उसकी कैद से आजाद होने के लिए पर आरती उसकी बांहो की गिरफ्त से जरा भी hil-dul नै सकीय.
आरती - मुझे चोरो जी
नवाज़- क्यों जी
ऐसा कहते हुई आरती को अपनी गिरफ्त में लिए हुए hi उसने अपना मुंह उसके चेहरे की तरफ ले आया.

आरती कुछ कर पति इससे पहले hi नवाज़ ने आरती के होंठो पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें बुरी तरह से चूसने लग गया.

उसके होंठ चूसने का तरीका इतना गन्दा था की आरती के होंठो से खून तक निकल आया. बिलकुल जानवरो की तरह से वो आरती के हूंतो को चूस रहा था..
आरती ने बड़ी मुश्किल से अपने चेहरे पर से उसका चेहरा हटा पायी थी. और नीचे उसका लुंड आरती के पेट में रगड़ मार रहा था.
आरती ने उसकी कैद से आजाद होने के लिए छटपटाते हुए कहा.
प्ल्ज़ चोरो न जी
ऐसा कहते हुई आरती ने झटके से अपना सर उप्पर उठाया और नवाज़ के छथि पाई दोनों हाट रख के उसे पीछे धकेल दिया .. धक्का जरा जोर से दिया था इस वजह से नवाज़ जरा जोर से पीछे गया तह इस वजह से आरती की नज़र सामने वाल पाई के वाच पाई गयी .. वह घडी मई टाइम देख के आरती के आँखें फटी की फटी रह गयी.
"ओह गॉड! टाइम देखो नवाज़ जी .. आप के चक्कर मई मई तोह ये बिलकुल भूल hi गयी थी... वह लोग कभी भी आ सकते हैं नवाज़ जी ! हमे निकलना चाहिए अभी
तब नवाज़ कहता है
अभी कहा .. इतने जल्दी .. अभी तो तेरे साडी उतरने है
तब आरती शर्मा गयी

उतरने देगी न
तब नखरे से कहती है
नहीं
और khil-khila कर हंसाने लगी..
एक बार उतरने देना
आरती - कभी नहीं..
नवाज़- क्यों..
मेरे मर्ज़ी
तेरे पति से अच्छे से उतरूंगा मई
तब आरती शर्मा के कहती है

मेरे पति ने अब तक मेरे साड़ी उतरी hi नहीं है
फिर तो बड़ा मज़ा आएगा
क्या बड़ा मज़ा आएगा .. अब तक तो आपने बहुत साड़ी योन के साड़ी उतरी है तो मेरे साड़ी उतरने मई और उनकी साड़ी उतरने मई ऐसा क्या फरक है .. शामे तो शामे hi है न
शामे तो शामे नहीं होता रानी ..
ऐसा बोल के उसको फिर से आपने बहो मई ले लेता है और उसके होंटो मई आपने होंठ रख के उसे किश करने लगता है
हर औरत की पहली बार मई साड़ी उतरता हु न तो मुझे अलग hi मज़ा आता है
तब नखरे से कहते है ..नवाज़ के बहो से निकल कर ...
आप के मज़े के लिए मुझे क्यों सजा दे रहे हो जी
तुजे भी तो मज़ा दूंगा न रानी ...
मुझे नहीं चाहिए कोई मज़ा वज़ा
तो क्या चाहिए तुझे
कुछ नहीं चाहिए मुझे ..और चुपचाप आप की फटफटी पाई बिठाकर मुझे घर ले चलिए
घर तो जाना hi है न रानी पर एक बार साड़ी उतरने दे न ..सच मई तुझे बहुत मज़ा दूंगा
क्यों मेरे साड़ी उतरने के पीछे पड़े हो आप जी .. और चुपचाप घर ले चलिए न
चलते है
तो चलो जी
ऐसा कहते हुई नवाज़ की और देखती हुई कहती है

क्यों खेमका मुझे दूसरे के घर रुलाये हुई हो .. आपने घर मई चलो .. वह जो मर्ज़ी केर लेना….
जो मर्ज़ी केर लू क्या???
आरती शरमाते हुई कहती है -
मेरा मतलब वो करना नहीं thaa….mera मतलब जो कल किया था वो केर लेना….
इतना कहते ही नवाज़ आरती को अपनी बाहो में उठा लेता hai…aur आरती भी स्माइल करने लगती है और अपनी बाहे नवाज़ के गर्दन के इर्दगिर्द दाल लेती है…. आरती को बोहत रोमांटिक फीलिंग हो रही थी
साड़ी भी उतर लू क्या
तब शरमाते हुई कहते है
उतर लेना ..इतनी hi आप की इच्छा हो रही है मेरे साड़ी उतरने की तो .. अब मैंने आप को आपने तन मन से चाहा है तो भला मई कैसे मन कर सकती हु भला
ये हुई न बात ..मेरे प्यारी बेगम सहीभा
नहीं .. मेरी प्यारी मालकिन बेगम सहीभा
और शर्मा गयी तब नवाज़ फिर से उसको चूमने लगा ..

उसको बहो मई लेके .. आरती भी उसको चूमने लगी ..अब उनका किश ख़तम हुआ
यहाँ उतारू क्या
नहीं
क्यों
दूसरे का घर है .. अब चले लेत हो जायेगा .. ज्यादा लेत होगा तो पापा जी का कॉल भी आ सकता है
ये बुद्धा हमारा पीछा नहीं छोड़ेगा न
तब आरती कहते है स्माइल करते हुई
उनकी बहु हु तो उनको चिंता होगी न मेरी
हां रानी
अब चोरो जी मुझे
नवाज़ कुछ नहीं कहता तब
आरती उसके बहो से निकलने की कोशिश करने लगी पर निकल नहीं प् रही थी ... नवाज़ ने आरती को इस तरह से पकड़ रहा था की आरती के दोनों बांहो में बेहटा हुआ खून रुक सा गया था.
अब नवाज़ ने आरती को वैसे hi पकडे घूमा दिया जिस कारन अब आरती की पीठ उसकी तरफ थी और उसकी निकलती हुई साँसे आरती को आपने कंधे पर महसूस हो रही थी.
पीठ की तरफ घूम जाने से आरती को आपने गांड पर उसका लुंड साफ़ महसूस हो रहा था जिसे महसूस करते hi उसके पुरे शरीर में एक बिजली सी कोंध गयी.
अचानक नवाज़ ने अपना एक हाथ पकड़ से हटा कर आरती के गांड पर रख दिया. उसका हाथ अपने गांड पर महसूस करते hi एक अजीब से दर के कारन आरती के रोंगटे खड़े हो गए.
आरती ने उसकी कैद से निकलने की दोबारा कोसिस करते हुए उससे कहा..
छोड़िये मुझे ये क्या कर रहे हो आप ?
पर नवाज़ तो अपनी मस्ती में मस्त था.. अपना चेहरा उसके कान के नजदीक ला कर धीरे से आरती के कान में नवाज़ बोलै
नवाज़- बोहोत मुलायम है… तीर गांड .. आरती.. एक डैम रुई के गद्दे के जैसे.
छी गंदे कही के
नवाज़ ने फिर भी उसके गांड की मालिश जारी राखी
प्ल्ज़ ऐसा मत कीजिये .. ये गन्दा है
पर नवाज़ कुछ नहीं कहता
मैं कहती हु नवाज़ जी अपना हाथ वह से हटा लीजिये गए . वर्ण इसका नतीजा अच्छा नहीं होगा.
जरा बड़े टोन मई आरती कहती है और आरती ने लगभग पूरी ताकत से से उसकी पकड़ से निकलने का प्रयास किया और अपने दांत भींचते हुए उस से kaha.Par नवाज़ ने आरती की एक नहीं सुनी..
नवाज़- कहा से हाथ हतौ.. आरती..
मुझे नहीं पता
आरती बराबर उस से चोर्ने की कह रही थी लेकिन वो उतनी hi सख्ती के साथ अपने हाथ को आरती के गांड पर चलाये जा रहा था. बारी बारी से उसने आरती के दोनों गांड को मसल कर रख दिया.
आरती ने बर्थडे सेलिब्रेशन के वजह से एक पतली सी साड़ी पहने थे जिस कारन उसका हाथ आरती के गांड पर आसानी से चल रहा था और उसके दोनों गांड को मसले जा रहा tha.patali साड़ी की वजह से नवाज़ को आरती के गांड का अहसास हो रहा था..
नवाज़- मज़ा आ गया आरती .. .. इस साड़ी की वजह से तेरे गांड को चुना बहोत अच्छा लग रहा है..
उसके हाथो से अपने गांड को इस तरह से मसाले जाना आरती को अंदर hi अंदर कही न कही बड़ा अच्छा सा फील करा रहा था. अब आरती ने पकड़ से बहार निकलने की कोसिस करना भी बंद सा कर दिया था. ये बात नवाज़ समाज गया.. इस लिए उसने आरती की गांड को मसलते मसलते hi साड़ी के ऊपर से गांड की दरार में ऊँगली दाल दी. अपने गांड के बीच में ऊँगली महसूस करते hi आरती का पूरा बदन फिर से thar-thar कांपने लग गया.
और वो चिल्ला उठी……..
आरती- nnnnnnnnnn…aaa... www आए… ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़…….. plzzzzzzzzzzzzzzzzzzz…. नननननननननु……
आरती की सिसकने से नवाज़ भी जोश मई आ गया..
नवाज़- क्या हुआ मेरी रानी.. अछ्हा .. लग रहा है न..
ऐसे कहते हुई फिर से उंगली बहार निकलकर एक बार जोर से आरती के गांड के दरार मई साड़ी के उप्पर से hi दाल दी.. ये हमला पहले से hi बड़ा था.. इस वजह से आरती फिर से सिसक पड़ी..
आरती- आआआआह्ह्ह्हह्हआआआ… नवाज़.. जीई जरा .. धीरे न.. दर्द होता है..
नवाज़- कैसा लग रहा है..
आरती- अच्छा..
नवाज़- एक बार छोड़ने दे न..
उसकी ये बात सुन कर आरती अपने दांत बीचंच कर रह गयी..
उसका पूरा खून खुल गया.. और वो होश मई आ गयी.. वो जो बहक रही थी उसको उसने कभो मई किया..
आरती - नहीं..
इस बार उसने नहीं कहा था .. कल जब नवाज़ ने पूछा था तब आरती ने कभी नहीं कहा तह और अब नहीं कहा तह .. ये आरती मई का बदलाव ये बता रहा तह की आरती नवाज़ से छुड़ाने के लिए धीरे धीरे रेडी हो रही थी .. पर इतने बड़े घर की बहु होने की वजह से वो तुरंत रेडी नहीं हो रही थी
नवाज़- क्यों.. तेरे पति से ज्यादा मज़ा दूंगा तुजे..
इस पर आरती झूठमूठ का गुस्सा दिखते हुई गुस्से मई कहती है..
आरती- आप हैट रहे हो की नहीं.
नवाज़ ने उतने hi बड़ी आवाज़ मई कहा ..
नवाज़- नहीं
आरती अगर मई हैट गया तो इसमें नुक्सान तुम्हारा hi होगा.
नवाज़ ने आरती के कंधे को चूमते हुए कहा.

नवाज़- तेरा पति भी मेरी तरह गांड की मालिश नहीं कर सकता. सोच लो.
Khil-khilate हुए हसते हुई नवाज़ ने अपनी बात पूरी की.
आरती- मेरा पति ये सब करता नहीं ये तो मई जानती हु .. पर मई इसके लिए थोड़ी न आप के पास आयी हु ..
तो किस के लिए आयी है
प्यार के लिए
ये भी तो प्यार hi है न रानी
ये गन्दा प्यार नहीं चाहिए मुझे मेरे नवाज़ से
तो कैसा प्यार चाहिए
अच्छा वाला
साडी उतरने वाला प्यार
तब आरती शर्मा जाती है

और शरमाते हुई कहते है
अपनी मालकिन के साथ ऐसा गन्दा प्यार कर रहे हो ..श्रम नहीं आती क्या आप को
न - आ तो बोहोत रही है .. पर मैं दिल के हाथो बोहोत मजबूर हो गया हु. जब से तेरे घर आया हु तब से तेरे कातिल मतवाली गांड का नशा मेरी आँखों से हटाता hi नहीं है.
आरती- Shut-up .. चुप रहो जी आप .. कुछ भी गंदे बोले जा रहे हो
आरती ने उसकी तरफ तरफ गुस्से से देखते हुई कहा . तब अचानक नवाज़ ने कुछ अजीब तरह से आरती के गांड के छेड़ को जोर से रगड़ दिया जिस से आरती के मुंह से खुद भी खुद सिसकारी सी निकल गयी. और वो थोड़ा उछाल कर आगे की तरफ हो गयी ..
आरती- अअअअअअहाआआ.. mumiiiiiiiiiiii..
नवाज़- छोड़ने दे न
आरती- उस नीता के पास जाओ na..mere पीछे क्यों पड़े है आप
नवाज़- उसके छूट अब मेरे लिए पुराने हो गयी है..
आरती - चोर दो मुझे... आप मेरे साथ ऐसा कुछ भी नहीं कर सकते हो.
आरती ने गुस्से भरी आवाज में नवाज़ से कहा.
अब नवाज़ ने आरती के साडी को उसके गांड के ऊपर से गांड की दरार में अंदर की तरफ धकेलते हुए उसने अपनी एक ऊँगली आरती के गांड के छेड़ पर ले जा कर टिका दी. आज तक किसी ने भी आरती के वह नहीं छुआ था यहाँ तक की अरविन्द ने भी नहीं. उसकी ऊँगली अपने गुदा द्वार पर महसूस करते hi आरती का शरीर कांपने लग गया.
नवाज़- आरती कमाल की गांड है तेरी एक डैम गजब. छोटे मालिक तो खेले बिना नहीं रह पते होंगे ऐसी मस्तानी मतवाली गांड से. एक डैम कातिलाना गांड है तुम्हारी .
आरती- हमारे बीच मई मेरे पति को बिना लाये जी नहीं भरता क्या आप का
मुझे जलन होती है तेरे पति पाई
वो क्यों जी
क्यों की मई सोचता हु किसी का इतना अच्छा नसीब कैसे हो सकता है .. इतने बड़े घर मई पैदा हु और बीवी इतने सुन्दर मिली है की पूछो मत ..
इस वजह से जलन होती है आप को मेरे पति पाई
हां
जिन वजह से जलन होती है आप को उनमे से एक चीज़ तो आप के अब हातो मई है
फिर शर्मा के कहती है
सॉरी सॉरी हटो मई नहीं बहो मई है अब
आरती की बात सुनकर नवाज़ की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गयी. रात का सन्नाटा और कमरे की मद्धम रौशनी उनके बीच के तनाव को और गहरा कर रही थी.
नवाज़ ने आरती को और करीब खिंचा और धीरे से उसके कान में बोलै,
"तुम सही कह रही हो आरती... जो खुशनसीबी उसके नसीब में थी, वह इस वक़्त मेरी बाँहों में है. शायद इसी पल का मुझे इंतज़ार था."
आरती ने शर्मा कर अपनी नज़रें झुका लीन, लेकिन उसके चेहरे पर एक हलकी मुस्कराहट थी जो नवाज़ की जलन को ठंडक पहुंचा रही थी. उसने दबे पाऊँ पीछे हटने की कोशिश की पर नवाज़ ने पकड़ ढीली नहीं होने दी.
"अब जब तुम यहाँ हो, तोह पुराणी बातें भूल जाओ," नवाज़ ने कहा, "आज रात सिर्फ हम हैं और यह पल."
आरती ने धीरे से उसके सीने पर हाथ रखा और बोली, "आप बहुत बातें बनाने लगे हैं... चलिए अब बाकी बातें रस्ते मई करेंगे, वर्ण मेरे ससुर जी का कॉल आएगा या अब आप जिस पर हल रहे थे न उसका कॉल आएगा ."
आने दे पर तूने एक hi बात बताये
दूसरे तो पहले के वजह से आ hi jayege..jaise अब कपडे और मोबाइल आया
हां वो तो है
ऐसा बोल के नवाज़ ने उसके गुदा छेड़ को रगड़ना शुरू कर दिया.
अह्ह्ह्हह्हह मत करिये प्ल्ज़
पहले तो आरती को ये पसंद नहीं आया पर धीरे धीरे उसके आरती के गुदा छिद्र को रगड़ने से आरती को उसके शरीर में एक अजीब सी हलचल महसूस होने लग गयी. सबसे बड़ा झटका तो आरती को तब लगा जब उसे अपनी दोनों टांगो के बीच में गिला गिला सा महसूस होने लग गया. उसके पीछे वाले छेड़ पर हो रही रगड़ के कारन उसकी छूट ने गिला होना शुरू कर दिया था. जिस कारन वो अब एक डैम ख़ामोशी के साथ जो कर रहा था उसे करने दे रही थी.
नवाज़- तुजे मजा तो आ रहा है न आरती..
उसने बेशर्मी से अपनी बत्तीसी फाड़ते हुए कहा.
मेरे मजेसे आप को क्या करना है .. आप तो वही करोगे न हो आप चाहते हो
नखरा करते हुई आरती कहती है तब नवाज़ कहता है..
हां वही करता हु जो मुझे करना है
तब आरती स्माइल करते है तब उसके गल्ल को हाथ लगते हुई पूछता है..
है न मुझे जो करना है वही करता हु न आरती
तभी उसका भाई नमन का उसके मोबाइल पर फ़ोन आता hain......wo फ़ोन कहा है वो देखने लगती है... वो पर्स मई था और पर्स सोफे पि थी .. तब वो नवाज़ को कहते है..
मेरे मोबाइल बाज़ रहा है मुझे जाने दो
वो फ़ोन करनेवाला दुबारा भी कर सकता है या किसी कंपनी वाले का होगा
मेरे पति का भी हो सकता है
मेरे होते हुई पति से बात करने की क्या जरुरत है..
एक बार तो उसे नवाज़ पर बहुत गुस्सा आता हैं मगर वो बिना बात का तमाशा नहीं बनाना चाहती thi.......is लिए वो नवाज़ से नार्मल होकर बात करती हैं.....
जाने दो नहीं तो फिर से कॉल करेगा अरविन्द.. अरविन्द का कॉल नहीं उठाया तो पापाजी भी फ़ोन कर सकते है
तब वो आरती को देखते हुई कहता है
क्या ऐसा हो सकता है क्या
हाँ.. मैंने अरविन्द का कॉल नहीं उठाया तो वो पापा जी को कॉल करता है और पापा जी मुझे .. पापा जी का तो अनीहौ मुझे कॉल उतना पड़ता है
ऐसा कहके नवाज़ को कहते है
चोरो मुझे
ऐसा कहते आरती ने नवाज़ के चुंगुल से खुद को छुड़ाया और आरती ने तेज़ी से अपना फ़ोन चेक किया .. उसके चेहरे पर थोड़ी घबरात थी क्यूंकि उसके भाई का कॉल था.
तब नवाज़ उसे चोर देता है.. तब वो झट से नवाज़ के चुंगुल से छूट जाती है और आपने मोबाइल देख लेते है.. वो उसके भाई का कॉल था वो उसे उतके बात करने लगती है..
नवाज़ थोड़ा पीछे हैट गया और ख़ामोशी से आरती को बात करते देखने लगा. आरती ने खुद को संभाला और कॉल उठाया.
"हाँ भैया..." उसकी आवाज़ थोड़ी काँप रही थी पर उसने कण्ट्रोल किया.
"आरती कहाँ हो तुम?" भाई की आवाज़ में सख्ती और फ़िक्र दोनों थी.
"यही..." आरती ने छोटा सा जवाब दिया.
"यही मतलब?"
हां भैया
आरती कहा हो तुम
यही
यही मतलब
आरती ने तुरंत एक बहाना बनाया,
"वह कंचन की फ्रेंड का बर्थडे था, तोह वो यहाँ लेके आयी मुझे."
"फिर क्या तुम रुकनेवाली हो क्या?" भाई ने पूछा.
"नहीं नहीं, मैं अब निकलने वाली हूँ," आरती ने नवाज़ की तरफ एक गहरी नज़र डालते हुए कहा.
"पक्का?"
"हाँ भैया."
फिर वैसा मैं पापा जी... मतलब तेरे ससुर जी को बोल दू? उनका फ़ोन आया था मुझे."
आरती ने रहत की सांस ली, "हाँ, बोल दीजिये."
"तू जल्दी निकल... रात बहुत हो रही है," भाई ने हिदायत दी और कॉल रख दिया.
आरती ने फ़ोन निचे रखा .. मौसम अब बदल चूका था. ससुर जी और भाई के बीच बात हो चुकी थी, इसका मतलब अब आरती को वहां से फ़ौरन निकलना होगा वर्ण शक हो सकता है.. और फिर उसने नवाज़ की तरफ dekha...aur सोचने लगी ..

पर नवाज़ जी को कैसे संजो .. पर संजना पड़ेगा
ऐसा सोच के आगे बड़ी और नवाज़ से कहा
चलिए हमें अब निकलना होगा
नवाज़ ने आरती का रास्ता रोका और उसकी आँखों में देखते हुए धीरे से बोलै,
आरती, इतनी जल्दी क्या है? भाई को तोह तुमने बोल hi दिया है की निकल रही हो.. हम निकलते है न .. ये मेरे बर्थडे का केक ख़तम करके
ये तो रस्ते मई भी तो खा सकते है न जी
हां खा सकते है .. पर अभी बहार मौसम और रास्ता दोनों ठीक नहीं हैं. बस ek-do घंटे की तोह बात है, थोड़ा सुकून से निकलते है..
आरती ने हिचकिचाते हुए कहा,
"पर नवाज़ जी , अगर किसी को पता चल गया तोह?"
नवाज़ ने उसके करीब आकर उसके बिखरे हुए बालों को कान के पीछे किया और नरम आवाज़ में बोलै, "कोई नहीं जानेगा... किस को पता है हम कहा है.. सिर्फ कंचन को पता है .. और वो किसी को नहीं बतायेगे
वो नहीं बतायेगे पर लेट हुआ तो पापा जी और मेरे पति को शक हो जायेगा
कोई बहाना बना देंगे
कोनसा बहाना
तब नवाज़ कुछ सोच के कहता है
गाडी ख़राब होने का
तब आरती स्माइल करते हुई कहते है
बहुत शातिर हो
अब इतने खूबसूरत औरत मेरे बर्थडे के लिए और बर्थडे गिफ्ट के लिए इतना कुछ कर सकती है ..और आपने ननद को बेवकूफ बना सकती है तो मुझे भी कुछ बहाना बनाना पड़ेगा न
वो अचानक मेरे दीमक मई आया तो मैंने किया
मेरे लोमड़ी उतनी स्मार्ट है मुझे पता है
तब स्माइल करते हुई कहती है
हां पर जल्दी निकलना है .. केक कहते hi
मेरा बर्थडे है थो थोड़ा ज्यादा टाइम का इनाम मुझे नहीं मिलेगा क्या
मिलेगा न
तब नवाज़ ने उसका हाथ पकड़ कर उसे धीरे से अपनी तरफ खिंचा.. तब आरती की धड़कन तेज़ हो गयी.
कमरे में सिर्फ घडी की 'tik-tik' सुनाई दे रही थी.
"सिर्फ एक घंटा..." आरती ने दबी हुई आवाज़ में कहा, पर उसकी आँखों में नवाज़ के लिए एक अलग hi कशिश थी.
नवाज़ ने मुस्कुराते हुए उसके माथे को चूमा और बोलै, "यह एक घंटा हमारी ज़िन्दगी का सबसे यादगार वक़्त होगा. तुम्हारी खूबसूरती की तारीफ करने के लिए मुझे इतना वक़्त तोह चाहिए hi."
आरती ने शर्मा कर अपना सर उसके सीने पर रख दिया. बहार रात का सन्नाटा था, पर अंदर उन दोनों के बीच की नज़दीकियां बढ़ती जा रही थी.