Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION .... - Page 32 - SexBaba
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Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION ....

ये तुम्हारी नानन्द हमेशा बीच मई आती है.. ऐसा बोल के पीछे हैट जाता hai..aur आरती हँसाने लगाती है..





तब कंचन अंदर आके कहती है..

क्यों है रही हो भाभी

तब आरती कहती है

हम लोगो के लिए आइस क्रीम लाओगे क्या

हम लोग

तब नवाज़ कहता है ..

हम तीनो ..और कोण है

लगता है भाभी आप दोनों मिल के मुझे नौकर बना के रहोगे

लाओगे या नहीं ये बताओ

लाऊंगी न क्यों नहीं लाऊंगी ...बताओ कोनसी लानी है

नवाज़ - मेरे लिए choclate....aur खाने वाली lana...choosna पसंद नहीं मुझे ...

फिर कंचन की और देखती हुई कहता है

आप को कोनसे चाहिए ...चूसना पसंद है न आप को ..???

कंचन गुस्से से उसे देखने लगी





और फिर जरा जोर से कहती है -

क्या..??

नवाज़ - sorry...waisa कुछ नहीं था ... मेरे मैं मई .. वो आती है na...choosne वाली और खाने wali...wo कहना चाहता था मई

तब कंचन आरती के तरफ देखते है तो आरती हँसाने लगती है





तब कंचन नवाज़ को देखते हुई कहते है

कंचन- सब समझती हु main...mai लेन वाली हु .. तो मई डीडे करुँगी कोनसी लेन है...

तब नवाज़ कहता है

आप तो गुस्सा हो गई....

तब बिना कुछ बोली कंचन बहार चली गयी और ice-cream लेकर आयी ... तीनो आइस क्रीम खाने लगे ..तब नवाज़ कहता है.. कंचन की और देखती हुई ..

sorry....mera मतलब गलत नहीं tha....bas baat-baat में निकल gaya...sorry ...पलज़्ज़ज़...

अभी भी कंचन गुस्से से उसे देख रही थी





तब आरती कहती है .. आरती हस्ते हुई कहती है

कभी कभी ऐसा हो जाता hai...kanchan माफ़ कर दे इन

कंचन की तरफ देखते हुई आरती कहती है





तब कंचन कहते है

इतस ok....

तब नवाज़ थैंक्स कहता है

फिर सबने ice-cream खाई और तब आरती कहती है..

हम निकलते है अब

हां भाभी

ऐसा कह के वो शॉपिंग के लिए निकल गए.. गाड़ी मई बैठते hi नवाज़ कहता है

ice-cream अच्छी थी...

कंचन मुस्कुरा कर कहती है

थैंक्स

तब आरती कहती है

वैसे मुझे चूसने वाली ice-cream ज्यादा पसंद है....

तब तीनो हँसाने लगे ..
 
अब आरती और कंचन पार्किंग से निकल कर 1सत फ्लोर पर जो मॉल था वह जाने लगती hai…parking भहुत बड़ा था और अंडर ग्राउंड में था..... नवाज़ ने गाड़ी लास्ट में पार्क की थी जिसकी वजह से उसे बहार निकलने में 5 मिनट तो laga…tab तक आरती और कंचन थोड़ा दूर चलते हुई आये ..वह 2 लड़के उन देख रहे थे.. पार्किंग मई पूरा सन्नाटा tha....sirf वही दो लड़के थे जो वह सग्गेराते पि रहे थे.....

उन्दोनो को आपने और आते देख कर वो लड़के कहने लगे

पहला लड़का - ोोू भाई भाई देख जल्दी क्या माल आ रहा है ... uffffffffffffffffffff क्या कातिल जवानी है दोनों की....

दूसरा लड़का - उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ यार सच कहा तूने ....क्या माल है साली दोनों की दोनों एटम बम है…

आरती और कंचन जैसे हे उन दोनों लड़को का पास से गुजरी दोनों लड़को ने उन्हें देख कर ज़ोर से कहा….

पहला लड़का - हायययययय साली क्या गांड है इस साड़ी वाली ki....saree मई उसकी गांड इतनी ढकी हुई है फिर भी बहार निकल रही है .... नंगी गांड कितनी उभरी हुई होगी इस रंडी की.... उफ्फ्फफ्फ्फ़ साली की गांड देख कर मेरा लुंड खड़ा हो गया....

इन् की बाटे सुन के आरती डर से सहम जाती है...

दूसरा लड़का - हाँ यार उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ भाभी जी क्या गांड है आपके ...इतने सुडोल गांड क लिए तो एक फुट का गधे का लुंड चाहिए ....छोटे मोठे लुंड से इस गांड की प्यास नहीं बुझेगी....

पहला लड़का - काश एक बार छोड़ने देती साली को रगड़ कर छोड़ता .....

दूसरा लड़का - अपनी रांड बना कर छोड़ता इस भाभी जी को.....

कंचन को कमेंट सुनने की आदत थी कॉलेज मई पर इतने गंदे नहीं .. आरती को आज कल ये आदत नहीं थी कमेंट सुनाने की .. कंचन वो इतना बुरा नहीं लगा पर आरती को बहुत बुरा लगा .. ज्यादा तर कमेंट आरती पर थे तो कंचन को थोड़ा अजीब लगा क्यों की जब भी वो फ्रेंड्स के साथ बहार घूमती या सोल्लगे मई घूमती तब ज्यादा कमेंट उसपर हु होते थे . इसलिए उसे अजीब लग रहा था या योन कहे हलकी सी

उसे जलन हो रही थी..

इतने में एक लड़का बोलै ....

अबे यार उस बड़े से सेक्सी और हॉट तो उसकी छोटी बहन hai...dekh तो साली क्या मस्त साड़ी पहनी hi.....poori कमर दिख रही है इस रंडी ki....isko रात भर पटक पटक कर छोडूंगा तो भी दिल नहीं भरेगा बहन छोड़....

इनके ऐसे कमेंट से आरती की तो डर से हालत ख़राब हो रही थी..... आरती डर की वजह से जल्दी जल्दी चलने लगी थी.... कंचन थोड़ा पीछे रह गयी thi....use डर नहीं लग रहा था इसलिए वो थोड़ा आराम से धीरे धीरे अपनी गांड को मटकाते हुई चल रही thi....tab आरती एक बार पीछे मुद के कंचन को देख कर कहते है





कंचन जल्दी चलो

क्या हुआ भाभी .. आप डर रही हो क्या ..

दारू नहीं तो क्या करू कंचन

डरने की क्या जरुरत है ये तो लड़को का काम है ... लड़कियों को देख कर कमैंट्स करते है ....और वैसे भी आप इतनी हॉट जो हो ...किसी भी मर्द का मन मचल जायेगा आपको देख कर हहहहए ....

धत्त बदमाश कही ki...kuchh भी बोलती hai....ab चलो ..

रखो भाभी

ऐसा कह कर कंचन दिवार के सहारे खड़े होकर अपना सांडले ठीक करने लगाती है और गर्दन घुमा के उन दोनों लड़को को देखती है...





कंचन की चूचिया इस आधे से ज्यादा बहार को निकल गयी थी इस तरह झुक कर सांडले ठीक करने me....dono लड़के आंखे फाड़ फाड़ कर कंचन की चुकी को हे घूरे जा रहे the....tab एक लड़का बोलै

उफ्फ्फफ्फ्फ़ साली ये तो कमाल का माल है

तभी एक लड़का आरती के सामने आके उसका रास्ता रोकते हुई सिगरेट का काश लेते हुई आरती को देखने लगा .. और दूसरा लड़का कंचन की तरफ बढ़ा और उसके साड़ी के पल्लू को चुने की कोशिश करने लगा.

आरती के सामने वाला लड़का बोलै

"ोये, सुन तोह सही... कहाँ जा रही है?"

उन दो लड़को के ऐसे बर्ताव से आरती और कंचन के चेहरे पर डर साफ़ दिख रहा था. अंडरग्राउंड पार्किंग का सन्नाटा उन लड़कों की गन्दी बातों से और भी भयानक लगने लगा.

तभी, एक भयानक रफ़्तार से नवाज़ उनके करीब आकर रुका बिना एक शब्द बोले, नवाज़ ने एक लड़के के कान के नीचे जोर से

चपत लगाए .. दूसरा लड़का आगे और कुछ बोले इस से पहले उसके कान के नीचे भी जोर से

चपत लगाए .नवाज़ का चेहरा गुस्से से लाल था और आँखों में खून उतर आया tha.pehle लड़के के कालर से पकड़ा और उससे पास के सीमेंट के खम्बे (पिलर) पर दे मारा.

"धाम!"

लड़के के मुंह से खून निकलने लगा. दूसरा लड़का नवाज़ पर हमला करने आया, पर नवाज़ ने उसका हाथ हवा में hi पकड़ कर मरोड़ दिया. पार्किंग में उसकी हड्डी टूटने की "चटक" आवाज़ आयी.

नवाज़ रुका नहीं. वह उस लड़के को नीचे गिरा कर उसकी छाती पर बैठ गया और tabad-tod मुक्के बरसाने लगा. हर मुक्के के साथ लड़का बेहोश होने की हालत में पहुँच रहा था.

तुम दोनों के घर माँ बहाने नहीं है मादरचोदो

ऐसा बोल के नवाज़ उन दोनों लड़को को लात गुस्सा से मरने लगा तब आरती और कंचन उनको देखने लगी .. कंचन बड़ी ध्यान से नवाज़ को देख रही थी





भाभी आप का नवाज़ तो काफी बढ़िया है

मतलब

नवाज़ की और अड्डा के साथ देखते हुई कंचन कहते है





देखो कैसे अकेला उन दोनों मावली लड़के को मार रहा है

हां वो तो है .. मेरा नवाज़ किसी से नहीं डरता

ऐसा नवाज़ की और देखती हुई आरती कहती है





ऐसा क्या

फिर कंचन की नज़र आरती पर गयी ..वो मू मई उंगली रख कर बड़ी सेक्सी तरीके से नवाज़ को देख रही थी .. वो कैसे मरता है ये भी देख रही थी .. तब कंचन की नज़र आरती के हाट है गयी वो नवल के वह से साड़ी का पल्लू उप्पर कर चुकी थी .. ये देख के कंचन के चहरे पर स्माइल आ जाती है

भाभी आप आप का नवाज़ उन लड़को को कैसे मार रहा है ये देख रही हो या पल्लू उतके आपने सेक्सी नवल उसे दिखा रही हो

तब आरती झट से साडी का पल्लू निचे करती है और शर्मा जाती है

तब कंचन को याद आता है भाभी ने मेरा नवाज़ कहा था अभी अभी .. मेरा नवाज़ ऐसे कहने के बाद कंचन बड़े आशर्य से आरती को देखने लगती है





किसी से नहीं डरता

तब आरती कहती है

ऐसा वो कहता है

आप का नवाज़

तब आरती कहती है

ी मैं हमारा नौकर नवाज़

इधर नवाज़ उन दोनों लड़की को मार रहा था..

माँ की छूट तुम्हारी

ऐसा कह के लात गुस्सा से उन दोनों लड़को को मरने लगा

काफी ताकत लगती है आप के नवाज़ मई

हां

फिर आरती कहती है नवाज़ की और देखती हुई





ऐसा एक ताकतवर नौकर चाहिए न हम जैसे लेडीज के सेफ़गार्ड के लिए

आप के लिए चाहिए न .. यू अरे राइट भाभी

मई मेरे अकेले की बात नहीं कर रही हु .. हम सब की बात कर रही हु

मुझे हम सब का पता नहीं पर आप के लिए जरूर चाहिए ..

तब आरती कुछ नहीं कहती तब कंचन कहते है

फिर से आप आपने चहिते नौकर को नवल दिखने लगी भाभी

तब आरती कहती है

मेरे पाई ध्यान देना चोर के वो कैसे उस लोफर लड़के को मार रहा है वो देखो न कंचन

हां वो बात भी है भाभी.. आप का नवाज़ बहुत अच्छे से उन लोफर लड़को की धुलाये कर रहा है

है न . ..

हां भाभी

फिर फ्री मई के धुलाये का लुफ्त उठाओ

वैसे भाभी यहाँ अगर भैय्या होते तो क्या वो भी ऐसे मरते क्या इन् लड़की को

तब आरती मू टेड़ा करके आरती कहती है

तुम्हारे भैय्या कहा मार पते .. वो हमें hi कहते इन् गंदे लोंगो के मू नहीं लगते

तब दोनों हसने लगी .. अब ये दोनों नवाज़ कैसे उन लड़को को मार रहा है ये देख रही थी ..

तब कंचन कहते है

कितना हॉट है ये आपका नवाज़ ..

हॉट

हां भाभी . अगर आप उसके पीछे पागल नहीं होती न मई इस्पे लट्टू हो जाती भाभी

तब आपने नानन्द के तरफ शक की नज़र से देखते हुई कहते है





तेरे को किसने कहा मई इसके पीछे पागल हु

नहीं हो क्या.. फिर मेरे लाइन क्लियर.. आप जाओ गाँव फिर मई इसे लेके जाउंगी लॉन्ग ड्राइव पाई और इसके साथ मई बर्थडे सेलिब्रेट करुँगी

तब आरती हस्ते हुई कहते है

फिर रोहित का क्या

कोण रोहित

नवाज़ ने चक्कर मई क्या तू रोहित को भूल गयी.. जिसके साथ तेरे मांगनी फाइनल हो चुकी है.. तेरे भैय्या ने और पापा जी ने फाइनल किया है..

छी.. वो लल्लू.. भाभी आप भी न किस का नाम ले रही हो.. एक हॉट माल के सामने आप उस लल्लू का नाम न लो

तब हस्ते हुई आरती कहते है

मेरे प्यारी ननद रानी ..वो कार्डियोलॉजिस्ट है और कितना बड़ा हॉस्पिटल है उसके पापा का पता है न तेरे को

भद्द मई जय वो और उसके पापा का हॉस्पिटल

तब हस्ते हुई

कंचन पता है क्या तुम नवाज़ क्या कह के बुलाता है

क्या

तुनकमिजाजी

वो क्या होता है

गरुपिनेस्स .. टेम्पेरमेंटल .. जो जल्दी ृतति है या बिगड़ते है ऐसे लड़की

तब कंचन शांत होती है ..और कहते है..

ये कोनसे लैंग्वेज का वर्ड है

उर्दू

आप क्या उर्दू भी सिख गयी क्या आप के नवाज़ से

नहीं रे .. वो कभी कभी बीच बीच मई एक दो उर्दू वर्ड बोल देता है .. उस वजह से थोड़ा बहुत समाज मई आ जाती है

अच्छा ठीक है . भाभी आप जाओ अब और आपने नवाज़ को रुको ..नहीं तो इन् दोनों लड़को को मार hi देगा

मरने दो न फिर .. वो मार रहा है तो तेरे को क्या प्रॉब्लम

मुझे क्या प्रॉब्लम होगा पर लगा रहा आपने प्यारे मालकिन पर गंदे कमेंट उसके दिल को बहुत चुबे है

तब आरती शर्मा जाती है





भाभी आज कल बहुत ज्यादा hi शर्माने लगी हो

तो तू ऐसे बात करेगी तो शर्म तो आएगी hi न

वो जाने दो और रोको उसे

तुजे क्या प्रॉब्लम है .. जो हो रहा है होने दे

मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है पर गुस्से मई उसे मार देगा .. जाओ न आप

कंचन जरा जोर से गुस्से मई बोलती है

तब आरती कहती है

क्या कंचन तू भी न.. अभी रोहित पाई गुस्सा हो रही थी और अब नवाज़ पाई

नहीं नहीं नवाज़ पाई नहीं वो तो कितना क्यूट है..

क्यूट और नवाज़ .. वो तो कला है

क्यूट थोड़ा hi न भाभी कलर पाई होता है..

अच्छा ये तो मुझे पता hi नहीं था ..

वो जाने दो ..जेक रुको उसे

ठीक है जाते हु

बोल के नवाज़ के पास जाती है.. नवाज़ के पास पहुंचते hi आरती ने तुरंत आगे बढ़ कर नवाज़ का कन्धा पकड़ा.

"नवाज़, बस करो! छोडो इसे! हम ठीक हैं, नवाज़!"

नवाज़ का हाथ हवा में hi रुक गया. उसका सीना हांप रहा था. उसने एक बार गुस्से से उन लड़कों को देखा और फिर आरती की तरफ मुद्दा, उसकी आँखों में अब भी थोड़ा जूनून बाकी था.











हज
 
नवाज़ का गुस्सा अभी ठंडा नहीं हुआ था. जैसे hi आरती ने उसका हाथ पकड़ा, नवाज़ ने अपनी लाल आँखों से उन लड़कों की तरफ देखा जो ज़मीन पर तड़प रहे थे.

"इनकी हिम्मत कैसे हुई?!"

नवाज़ की आवाज़ पार्किंग की दीवारों से टकरा कर गूंजी.

"तुम्हे गन्दी बातें बोली... तुम्हारा रास्ता रोका! इन्हे लगता है ये किसी भी शरीफ लड़की को छेड़ कर निकल जायेंगे?"

आरती ने कोशिश की उसे रोकने की, पर नवाज़ ने एक और भयानक मुक्का उस लड़के के जबड़े पर दे मारा.

"धाड़!" लड़का बेहोश होकर गिर पड़ा.

"नवाज़! बस करो... मेरी कसम तुम्हे, रुक जाओ!" आरती लगभग रट हुए नवाज़ के सामने आ गयी और उसका चेहरा आपने हाट मई लेके वो रोने गयी .





वो दोनों अब एक बड़े से पिलर के पीछे थे इस वजह से कंचन को दिख नहीं रहे थे ..

नवाज़ का दिलवादक रहा था, जैसे कोई तूफ़ान उसके अंदर बंद हो. आरती की नम्म आँखें देख कर नवाज़ की मुट्ठी ढीली पड़ी. उसका जूनून dheere-dheere फीका पड़ने laga.tabhi आरती की नज़र नवाज़ के हाथ पर padi.un लड़को के साथ लड़ते वक़्त उन लड़के के दांत या शायद खम्बे की किसी नुकीली चीज़ से नवाज़ के उँगलियों के जोड़ के वह काट गया था और वहां से तेज़ी से खून बह रहा था.

"नवाज़! तुम्हे चोट लगी है...

देखो कितना खून निकल रहा है,"

आरती ने उसका हाथ अपने नरम हाथों में thama.Nawaz ने उस दर्द को महसूस तक नहीं किया था. उसने गहरी सांस ली और आरती की आँखों में देखते हुए धीरे से बोलै





"मेरा खून बहने से दर्द नहीं होता आरती... पर कोई तुम्हे आँख उठा कर देखे, तोह दिल में ज़ख्म हो जाता है."

आरती का दिल एक पल के लिए धड़कना भूल गया. उसने नवाज़ की आँखों में वही पुराणी फ़िक्र और दीवानापन देखा. उसने उसके माथे को चूमते हुई कहा





"पागल हो तुम,"

उसने धीरे से कहा, उसकी आवाज़ में अब गुस्सा नहीं, सिर्फ मोहब्बत थी.

पार्किंग के सन्नाटे में नवाज़ का गुस्सा ठंडा हो चूका था, पर आरती के अंदर का डर अभी बाकी था. जैसे hi उन गुंडों का खतरा टाला, आरती की हिम्मत जवाब दे गयी. उसने नवाज़ को dekha—uske बिखरे बाल, उसके हाथ पर बेहटा खून और उसकी वो सुर्ख आँखें जो सिर्फ उसकी फ़िक्र कर रही थी.

आरती से रहा नहीं गया. बिना कुछ सोचे, वह आगे बढ़ी और नवाज़ के गले लग गयी.





उसने अपने दोनों हाथ नवाज़ के कन्धों पर कास दिए, मानो वह उस सुरक्षा को कभी छोड़ना नहीं चाहती थी. नवाज़ ने भी अपना एक हाथ आरती के सर पर रखा, उसकी उँगलियाँ उसके बालों में सहारा दे रही थी, जैसे कह रही हों, "मैं हूँ न, अब डरने की कोई बात नहीं

."





आरती ने अपना चेहरा नवाज़ के सीने में छुपा लिया. उसका दिल नवाज़ की तेज़ धड़कनो को महसूस कर सकता था. पार्किंग की धुंधली रौशनी में, उनका ये प्यार भरा गले लग्न सारे डर और गुस्से पर भारी पद गया.

"तुम पागल हो नवाज़," आरती ने सिसकते हुए कहा, उसकी आवाज़ नवाज़ के शर्ट में डाब सी गयी थी.

"अगर तुम्हे कुछ हो जाता तोह? क्यों इतना रिस्क लेते हो?"

नवाज़ ने उसके पिट पर के हाट को थोड़ा और आपने और दबोचा और धीरे से बोलै,





"तुम्हारे लिए तोह मैं पूरी दुनिया से लड़ जॉन आरती, ये तोह सिर्फ दो कौड़ी के गुंडे थे. जब तक मैं ज़िंदा हूँ, कोई तुम्हे छू भी नाह सकता."

वहां दूर कड़ी कंचन ये सब देख नहीं पा रही थी .. क्यों की बीच मई बड़ा सा पिलर था .. पर उसे पता था इन् दोनों के बीच कुछ न कुछ हो रहा है क्यों की वो दो लोफर लड़के कभी के भाग गए थे . वो सोचते है मई जाऊ क्या फिर मुस्कुराने हुई कहते है नहीं .. नहीं भाभी को नवाज़ के साथ अच्छा क्वालिटी वाला टाइम स्पेंड करने देते हु .. भैय्या तो भाभी को टाइम नहीं देते .. नवाज़ तो दे रहा है . मई क्यों इन् दोनों के बीच कबाब मई हड्डी बनु .. उसके आँखों मई ख़ुशी थी .. क्यों न हो उसने देखा की कैसे नवाज़ ने आज उसकी और उसके .. सॉरी अपनी 'जान' की हिफाज़त की थी..

कुछ देर वही खड़े रहने के बाद, आरती ने धीरे से अपना सर उठाया और नवाज़ के घायल हाथ को देखा.

"चलो अब... मेडिकल शॉप जाना है. आप का ये खून मुझे दर्द दे रहा है

वह तीनो मॉल के पास वाली एक छोटी सी मेडिकल शॉप पर gaye.wo मेडिकल शॉप मॉल के बाजु वाली एक छोटी से गली मई था .. कंचन थोड़ा दूर कड़ी हो गयी ताकि उन दोनों को थोड़ा वक़्त मिल सके.

वह दोनों मेडिकल शॉप के अंदर गए. आरती ने खुद कॉटन और एंटीसेप्टिक लिया. जब वह नवाज़ के ज़ख्म को साफ़ कर रही थी, नवाज़ बिना पालक झपकाए सिर्फ आरती के चेहरे को निहार रहा था.

"ाः..." नवाज़ ने हलके से कराहने का नाटक किया.

दर्द हो रहा है क्या जी

नवाज़ ने हां मई गर्दन हिलाते

आरती ने बड़े hi ध्यान से नवाज़ की बैंडेज की. हर बार जब आरती का हाथ नवाज़ के ज़ख्म को छोटा, नवाज़ की नज़रें सिर्फ आरती के चेहरे पर होती. वह दर्द भूल चूका था, उसे तोह बस आरती का वो फ़िक्र भरा चेहरा देखना सुकून दे रहा था..

"दर्द हो रहा है?" आरती ने फूक मारते हुए पूछा.

नवाज़ मुस्कुरा दिया,

"दर्द तोह एंटीसेप्टिक से हो रहा है... तुम्हारी उँगलियों का एहसास तोह मरहम जैसा है. काश ये ज़ख्म थोड़ा और गहरा होता तोह तुम थोड़ी देर और मेरा हाथ पकडे रहती."

आरती ने शर्मा कर नज़रें झुका ली





और थोड़ा ज़ोर से बैंडेज बाँध दी.

"ज़्यादा फिल्मी मत बनो, चलो अब!"

पर नवाज़ की नज़रें अब भी वही thi—usne जान लिया था की आज की इस लड़ाई ने उनके दरमियान की दुरी थोड़ी और काम कर दी है. वो थोड़ा आगे आये .. कंचन कब की आगे निकल चुखी थी.. आरती ने जैसे hi देखा रास्ता छोटा है ..सुनसान है ..यहाँ कोई नहीं है उसने एक पल की भी देरी नहीं की. उसने आगे बढ़कर नवाज़ को अपने घेरे में ले लिया.





इस बार ये हुग पहले से भी ज़्यादा गहरा और सख्त था. आरती ने अपने दोनों हाथ नवाज़ की गर्दन के चारों तरफ कास दिए, जैसे वह दुनिया से उससे छुपा लेना चाहती हो.

नवाज़ ने भी आरती को अपनी बाहों में भर लिया. उसने अपने मज़बूत हाथ आरती की पीठ पर रखे, उसे अपने सीने से बिलकुल सत्ता लिया. वह दोनों वहां खड़े रहे, मानो वक़्त रुक गया हो.

"तुम अंदाज़ा भी है तुम मेरे लिए क्या हो?"

नवाज़ ने आरती के कान के पास धीमी, भरी आवाज़ में कहा.

"अगर आज उन कुत्तों ने तुम्हे छू भी लिया होता, तोह मैं खुद को कभी माफ़ नहीं कर पता."

आरती ने अपना चेहरा नवाज़ के कंधे पर टिका दिया. उसने नवाज़ की शर्ट को अपनी मुट्ठियों में जकड लिया था.

"नवाज़, मुझे उन लड़कों से डर नहीं लग रहा था... मुझे आप के इस पागलपन से डर लग रहा था. तुम्हे कुछ हो जाता तोह मैं कैसे जीती?"

नवाज़ ने हलकी सी मुस्कराहट के साथ आरती को थोड़ा पीछे हटाया और उसके चेहरे को निहारने लगा. उसने अपने ज़ख़्मी हाथ से, जिस पर अभी भी हल्का खून था, आरती की एक बाल की लेथ को कान के पीछे किया.

"तुम्हारे लिए मरना तोह बहुत आसान है आरती... पर तुम्हे बिना देखे जीना बहुत मुश्किल है,"

नवाज़ ने बड़े hi रोमांटिक अंदाज़ में कहा.

आरती ने उसका वही ज़ख़्मी हाथ पकड़ा और बड़े प्यार से उस पर फूक मारी. उसने देखा की ज़ख्म थोड़ा गहरा है.

"चलो अब, ज़्यादा बातें मत बनाओ,"

आरती ने नरम लहजे में कहा, उसकी आँखों में अब शरारत और मोहब्बत दोनों थी.

"पहले शॉपिंग करते है .. आप के इस ज़ख्म की marham-patti हो गयी है और आप के ये हीरो गिरी भी देख ली "

पसंद आये

तब आरती शर्मा के कहती है

आप की हर चीज़ मुझे पसंद आती है

इतना पसंद हु मई

हां ..

कहते हुई आरती ने उसकी आँखों में देखा.

अब चलो अंदर, आज का दिन रोने या लड़ने के लिए नहीं है. कंचन वेट कर रही होगी ..

हां चलो

फिर वो दोनों मॉल की और जाने लगे ..
 
नवाज़ को लगा शायद सिर्फ छोटा मोटा बर्थडे सेलिब्रेशन होगा .. थोड़ा बहुत घुमाएंगे पर उससे क्या पता था की उसकी 'आरती' ने उसके लिए पूरा आस्मां ज़मीन पर उतारने की तयारी कर राखी है.

अंडरग्राउंड पार्किंग से निकल कर जैसे hi वह तीनो मॉल के चमचमाते फ्लोर पर पहुंचे, नवाज़ की आँखें फटी की फटी रह गयी. वह एक seedha-saadha, गरीब घर का लड़का tha—phati हुई जीन्स और वही पुराणी शर्ट उसकी पहचान थी.

"चलो नवाज़ जी , अब आप की बर्थडे की शॉपिंग करते है ,"

आरती ने छाती पहला कर कहा.

नवाज़ थोड़ा hichkichaya..mall की चमचमाती लाइट्स और bade-bade शीशों के बीच, नवाज़ खुद को थोड़ा अजनबी महसूस कर रहा था. उसने कभी इतने बड़े ब्रांडेड शोरूम में कदम नहीं रखा था. उसका पुराण शर्ट अब थोड़ा फीका लग रहा था, पर उसकी मर्दाना शख्सियत वहां के हर मॉडल से बेहतर थी.

"नहीं रे आरती, मेरे पास कपडे हैं... और इतने मेहेंगे मॉल में हमारी क्या हैसियत?"

तभी आरती ने नवाज़ का हाथ थमा और उसकी आँखों में देखते हुए बड़े प्यारा से बोलै,

"हैसियत इंसान की होती है नवाज़ जी , कपड़ों की नहीं. और आज आप मन नहीं करोगे... ये सब आप के hi पैसे हैं जो आप ने म्हणत से कमाए ये , याद है?"

आरती ने झूठ बोलै था ताकि कंचन को यही लगे की नवाज़ की अपनी कमाई है, पर असल में आरती ने अपनी साड़ी सेविंग्स आज नवाज़ पर उड़ने का फैसला किया था.

वह लोग एक बड़े ब्रांडेड शोरूम में गए. आरती ने शोरूम में घुसते hi एक डीप रॉयल ब्लू रंग की शर्ट उठायी. वह जानती थी की नवाज़ की गहरी रंगत (कम्प्लेक्सीओं) पर ये रंग खिलेगा..

नवाज़ जी ये पेहेन कर देखो,"

आरती ने बड़े हक़ से कहा.

नवाज़ ने थोड़ा हिचकिचाते हुए शर्ट पकड़ी,

"आरती, ये बहुत मेहेंगी दिख रही है... और मेरा रंग थोड़ा सांवला है, ये ब्लू मुझ पर कैसा लगेगा?"

आरती ने उसके करीब आकर उसकी शर्ट का कालर थोड़ा ठीक किया, उसकी उँगलियाँ नवाज़ की गर्दन को हल्का सा छू गयी.

"आप को नहीं पता नवाज़ जी , जब आप गुस्से में होते हो तोह ये सांवला रंग आग जैसा लगता है... और जब मुस्कुराते हो तोह सुकून. ये शर्ट आप के लिए hi बानी है."

कंचन थोड़ी दूर दूसरे कपडे देख रही थी, तोह आरती ने मौका देख कर नवाज़ को ट्रायल रूम की तरफ धक्का दिया. नवाज़ अंदर गया और शर्ट पेहेन्ने लगा, पर उसके ज़ख़्मी हाथ (जिसमे पट्टी बंधी थी) की वजह से बटन बंद करने में उसे तकलीफ हो रही थी.

"आरती... ये बटन नहीं लग रहे, हाथ में दर्द हो रहा है,"

नवाज़ ने अंदर से धीरे से कहा.

आरती ने चारो तरफ देखा, कंचन अभी भी दूर थी. उसने तेज़ी से ट्रायल रूम का दरवाज़ा थोड़ा खोला और अंदर दाखिल हो गयी. छोटी सी जगह में दोनों ek-dusre के बिलकुल करीब खड़े थे. नवाज़ का सीना नंगा था और उसने शर्ट सिर्फ कन्धों पर डाली हुई थी.

नवाज़ की सांसें तेज़ हो गयी. आरती ने बिना कुछ बोले निचे से बटन बंद करना शुरू किया. उसके नरम हाथ नवाज़ के सख्त सीने से टकरा रहे थे. नवाज़ ने अपने दोनों हाथ आरती की कमर पर रख दिए और उसे अपनी तरफ kheencha.aur कहा

कोई देख लेगा

नवाज़ की नज़रें आरती के गुलाबी होंठों पर thi.Aarti ने ऊपर देखा, उसकी आँखों में शरारत और बेइंतेहा मोहब्बत थी. उसने आखरी बटन बंद किया और नवाज़ के कालर को पकड़ कर उसे अपनी तरफ झुकाया.

"देखने दो... आज आपका बर्थडे है, और ये मेरा हक़ hai.mai इतना तो कर सकती हु न आपने शोहर के लिए

और फिर आरती ने हलकी सी चुम्बन नवाज़ के गाल पर की, जहाँ थोड़ी देर पहले लड़ाई का पसीना था, वहां अब आरती की खुशबु थी. नवाज़ ने उसे कास के पकड़ लिया, जैसे वह इस पल को वहीँ रोक देना चाहता हो.

आरती कुछ नहीं बोलती है.. तब नवाज़ उसका चुके पर हाथ रखता है.. और उसको दबाता है..

आह्ह्हह्ह्ह्ह

आरती उसे पीछे हटती है.. और घूम के कड़ी हो जाती hai..aarti की बैक साइड उसके तरफ थी.. वो उसे देख नहीं रही थी .. नवाज़ उसके पीछे से उसको पकड़ लेता है..





और उसके मम्मी दबाने laga…aur पीछे से आरती की गांड पैर अपना लुंड लगाड़ने laga…..aur पीछे से आरती के जिस्म की खुशबु लेते हुए आरती के कंधे को चूमने लगा….





वहीँ आरती जानती थी अब नवाज़ क्या करनेवाला है या योन कहे की वो इस इंतज़ार में थी की कब नवाज़ उसे पकड़े और उसके साथ प्यार करे .. उसे भी अब इन् सब मई बोहत मज़ा आ रहा था .. नवाज़ अब उसे पीछे से पकड़ के उसके मम्मी दबाने से… और उसके इस तरह चुनने से आरती भी मदहोश होने lagi….par उसे पता था यहाँ ये सब ठीक नहीं है

नवाज़ जी प्ल्ज़्ज़ चोर दो कोई देख लेगा….

अब कोण देखेगा मेरी जान.. तेरा बुद्धा ससुर भी नहीं है यहाँ हमें डिस्टर्ब करने

तब नखरे से नवाज़ के सर को मरती है

पापा जी को कुछ मत कहो जी आप .. बल्कि मई पापा जी की शुक्र गुजर हु जिनकी वजह से आप मेरे जिंदगी मई आये

जैसे मेरे प्यारे बेगम का आदेश

आदेश नहीं बिनती है जी .. फिर भी यहाँ बहार लोग है कोई भी आ सकता है ..

कोई नहीं आएगा जी

ऐसा बोल के उसके ब्लाउज पीछे से खोल देता है

ब्लाउज मत खोलो

खुद को मेरे बेगम बोलते हो और आपने शोहर को प्यार नहीं करने देती .. पता नहीं सुहागरात कब मानाने देगी

तब नखरे से कहते है

मेरे सुहागरात तो अरविन्द जी के साथ हुई है

मेरे साथ कर फिर देख लेना

अच्छा जी

अब मुझे प्यार करने दे ..नखरा मत कर

तब हस्ते हुई कहते है

प्यार कहा भी नहीं होता है जी

फिर कहा होता है

बैडरूम मई

मेरे पास तो कोई बैडरूम नहीं है ..एक छोटा सा घर है ..जो भी एक गन्दी बस्ती मई

गन्दी बस्ती

हां मेरा घर एक गन्दी बस्ती मई .. वह आएंगे क्या

आउंगी ..आप के लिए कहा भी आउंगी

पक्का मुकर न जाना

नहीं जाउंगी

अच्छा बेगम

इतना कहते ही नवाज़ आरती को पलट के अपनी बाहो में उठा लेता hai…aur आरती hi भी स्माइल करने लगती है और अपनी बाहे नवाज़ के नैक क अराउंड दाल लेती है…. आरती को बोहत रोमांटिक फीलिंग आ रही थी इस टाइम…. फिर उसके गर्दन को चूमता है





फिर उसके मुलायम गुलाबी गुलाभी होंठो पैर अपने काळा भद्दे होंठ रख देता hai….aur अच्छे से उसके होंठ चूसने लगता है

फिर उसके गले को चूमता है





फिर उसके होंटो को फिर से चूमने लगा ..अपनी गन्दी जीभ आरती के मुँह में घुसा देता hai…..wahi आरती भी बिना किसी डर के नवाज़ की किश का रिस्पांस दे रही थी नवाज़ को किश बैक karke….dono में पूरा पशनातेली किश होने laga…kiss करते करते नवाज़ आरती के मम्मी भी दबाने laga….aur वो उसकी साड़ी उप्पर करने वाला hi था की तभी बहार से आवाज़ आता है

सर जल्दी से बहार आ जायेगे .. बहार कस्टमर वेट कर रहे थे

तब किश तोड़ते हुई आरती कहते है

बोलै था न

आज नसीब hi ख़राब है ..वह तेरा वो पति आया और यहाँ ये रांड

उसको रांड क्यों कह रहे हो जी ..वो तो बिचारि अपनी ड्यूटी कर रही है

फिर आपने ब्लाउज पीछे से अचे से बंदने लगी पर नहीं बंद प् रही थी ..

जी.. मेरे ब्लाउज के बटन लगा दीजिये न

नहीं

आप ने तो निकले है

मुझे न औरत के कपडे उतरने आते है ..बंदने नहीं आते है

तब नखरे से कहती है

पता है है बहुत सरे औरत के आपने कपडे उतरे है ..पर आज के बाद सिर्फ मेरे कपडे उतरने है ..किसी और के नहीं

समजे

जी बेगम

फिर उसके मैथ्स को चुम लेते है





अब जल्दी बहार चलो, वर्ण कंचन को शक हो जायेगा,"

आरती ने शर्मा कर कहा और बाहर निकल gayi.uske पीछे नवाज़ आया

आप लोग मज़े भी नहीं करने देते

ऐसे उस लेडी को कहता है तब आरती शर्मा के आगे भाग जाती है

आप भी न नवाज़ जी

जब नवाज़ ट्रायल रूम से बहार आया, तोह उसका चलने का अंदाज़ hi बदल गया था. वह नए कपड़ों में नहीं, बल्कि आरती के प्यार में नया नया लग रहा था.

फिर ब्लू डेनिम chuni.aur फिर आरती ने बिल पाय किया और वो लोग शो रूम से बहार आये
 
शॉपिंग ख़तम करके आरती और कंचन, नवाज़ को लेकर मॉल के सबसे बड़े और चमचमाते मोबाइल शोरूम के सामने रुकी.

नवाज़ ने बहार से hi bade-bade बोर्ड देखे जहाँ लेटेस्ट ीफोने और सैमसंग के एड्स लगे थे. उसने अपना पुराण, टूटा हुआ मोबाइल जेब से निकाला जिसका गिलास चटका हुआ था और स्क्रीन धुंधली थी.

"चलो अंदर," आरती ने नवाज़ का हाथ पकड़ कर उसे अंदर kheencha.Andar घुसते hi एक की ठंडी हवा और कांच के काउंटर के पीछे चमकते फ़ोन्स ने नवाज़ की आँखें चौंधिया दी. मोबाइल शोरूम के अंदर घुसते hi आरती सीधा प्रीमियम सेक्शन में गयी जहाँ ीफोने 15 प्रो रखा tha.phir आरती ने एक गहरी सांस ली और अपना "मालकिन" वाला मुखौटा पहन लिया. कंचन उत्सुकता से bade-bade फ़ोन्स देख रही थी.

आरती ने काउंटर पर रखे एक चमचमाते ीफोने 15 प्रो की तरफ इशारा किया .. उसने काउंटर बॉय को इशारा किया और उसने एक ब्रांड नई, seal-pack बॉक्स बहार निकाल diya.aur थोड़ा कड़क लहजे में बोली,

"ये देखो नवाज़ जी , कैसा है?"

"नवाज़, इधर आओ. देखो ये फ़ोन, सुना है इसका कैमरा बहुत अच्छा है. ज़रा चेक करके बताओ तोह हमें."

नवाज़ थोड़ा ठिठक गया.

"मालकिन, ये तोह बहुत मेहेंगा है..."

और फिर धीरे से आरती को बोलै ताकि कंचन न सुने

"आरती, कपडे तोह ठीक थे... पर ये महंगा फ़ोन ? ये जगह हमारे लिए नहीं है. एक फ़ोन की क़ीमत मेरी दो महीने की मज़दूरी के बराबर होगी."

तब आरती नवाज़ की तरफ देख के जरा रॉब दिखते हुई कहते है





"मैंने जो कहा वह करो,"

और फिर आरती ने आँखों से इशारा किया...

वो देखे उससे पहले ले लो न जी .... पलज़्ज़ज़

और फिर धीरे से बोली .. उसके क्लोज जेक ..उसके आँखों मई देखते हुई बोली





मेरा ये आप के लिए बर्थडे गिफ्ट है .. लोगे न आपने बेगम से ये पहला गिफ्ट

हां लूंगा पर तेरे ननद को क्या बोलेगे

वो मई देख लुंगी

ऐसा कह के कंचन को देखने लगी .. फिर नवाज़ को कहती है

ये देखो नवाज़ जी , कैसा है?

फिर नवाज़ ने darte-darte फ़ोन हाथ में लिया. नवाज़ ने darte-darte बॉक्स पकड़ा.

"बहुत सुन्दर है... पर ये तोह लाखों का होगा. आरती, पागल मत बनो, चलो यहाँ से."

तब कंचन भी पास आ गयी

"वो भाभी! ये तोह कमाल का है. पर नवाज़ इतना मेहेंगा फ़ोन कैसे लेगा?"

फिर कंचन ने नवाज़ के तरफ मुस्कुराते हुए कहा,

" सिर्फ देखने में क्या हरज है? है न! भाभी "

आरती हां कहते हैं और फिर कुछ सोच के कंचन की तरफ देखकर बोली"

कंचन, तुम ज़रा वो साइड वाले कवर चेक करो तोह, हमें घर के लिए एक दो लेने हैं."

जैसे hi कंचन थोड़ा दूर गयी, आरती ने तेज़ी से काउंटर बॉय की तरफ अपना कार्ड बढ़ाया और धीरे से फुसफुसाई,

"इसकी बिलिंग जल्दी करिये और नवाज़ को पकड़ा दीजिये... ये बोलकर की ये उनकी लाटरी या स्कीम में निकला है."

काउंटर बॉय समझ गया. जब कंचन वापस आयी, तोह बॉय ने मुस्कुराते हुए नवाज़ को बॉक्स पकड़ाया,

"सर, मुबारक हो! हमारी शॉप की 10तह एनिवर्सरी स्कीम में आप लकी विनर हैं. ये फ़ोन आपको सिर्फ 2000 रुपये की टोकन मनी पर मिल रहा है!"

कंचन की आँखें फटी की फटी रह गयी.

"सच में?! नवाज़ की तोह किस्मत खुल गयी!"

नवाज़ ने आरती की तरफ देखा, उसकी आँखों में शुक्रिया और दीवानगी साफ़ थी. आरती ख़ुशी से उछाल padi,uske होंठों पर हलकी मुस्कराहट लाते हुए कहा,

"देखा नवाज़, किस्मत हमेशा बहादुरों का साथ देती है. अब ये 2000 रुपये तुम्हारी पिछली तनख्वा से काट लुंगी, समझे?"

तब बड़ी आश्चर्य से नवाज़ की और देखने लगी ..





उसे शक भी हो रहा था और दूसरे साइड लग रहा रहा था शयद नवाज़ लकी भी हो सकता है जो लाटरी लगी हो .. पहले लाटरी भाभी और दूसरी लाटरी फ़ोन .. पर उसे क्या पता था की 2000 रुपये तोह सिर्फ एक बहाना था, असली कीमत तोह आरती ने अपने दिल और पैसे दोनों से चुकाई थी.

आरती ने बॉक्स उसके हाथ में थमा diya.Nawaz ने बॉक्स को छाती से लगा लिया. उसने धीरे से आरती के कान के पास होकर कहा, "इस 'लाटरी' की असली मलिका तोह आप हैं... अब से हर कॉल सिर्फ आपके हुकुम का इंतज़ार करेगा."

फिर वह नवाज़ के बिलकुल करीब आयी. नवाज़ उस बॉक्स को ऐसे देख रहा था जैसे कोई सपना हो.

"नवाज़ जी ,"

आरती ने उसके कान के पास झुक कर बिलकुल धीमी और रसीली आवाज़ में कहा,

"ये फ़ोन सिर्फ बात करने के लिए नहीं है... इसमें एक ख़ास फोल्डर है जिसमे मेरी कुछ ऐसी फोटोज हैं जो सिर्फ तुम देखोगे. और याद रखना, अब से हर रात सोने से पहले पहला वीडियो कॉल मुझे hi होना चाहिए."

नवाज़ का सीना गर्व और मोहब्बत से भर गया. उसने आरती का हाथ काउंटर के निचे दबा लिया और उसे हल्का सा दबाया.

"इतना मेहेंगा तोहफा... मैं कैसे चुकाऊंगा इसका क़र्ज़?"

आरती ने उसकी आँखों में देखा, जहाँ सचाई चमक रही थी.

"क़र्ज़ नहीं है नवाज़ जी ... ये तोह बस एक रिश्वत है, ताकि आप हमेशा मेरे पास रहो."

नवाज़ ने वही शोरूम में सबके सामने आरती का हाथ अपने माथे से लगा लिया. उस गरीब लड़के के लिए वो मेहेंगा फ़ोन सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि आरती की उस बेइंतेहा मोहब्बत की निशानी थी जो हैसियत नहीं, सिर्फ दिल देखती थी.
 
जैसे hi मोबाइल मिला वैसे hi नवाज़ और आरती जाने लगे तब कंचन कहते है

भाभी मोबाइल कवर

कोनसा मोबाइल कवर .. ये तो ी फ़ोन वाला देते है न

तब कंचन कहते है

आपने घर वाले मोबाइल के लिए बोलै था न

वो क्या बाद मई लेते है .. मूवी सुरु हो गया होगा

हां भाभी चलो जल्दी

ये एक रोमांटिक मूवी थी .. मूवी थिएटर के अंदर का सन्नाटा और हलकी ठंडक एक अलग hi नशा घोल रही थी. थिएटर के अँधेरे में, एक की ठंडक और स्क्रीन की मद्धम रौशनी ने एक अलग hi जादू जगा दिया था.

स्क्रीन पर क्लासिक रोमांटिक मूवी चल रही thi—heroine बारिश में भीग रही थी और हीरो उससे अपनी बाहों में भर रहा tha.par नवाज़ की नज़रें तोह कहीं और hi थी. उसने नयी शर्ट पहनी हुई थी और उसकी खुशबु आरती को अपनी तरफ खींच रही थी.

आरती और नवाज़ कार्नर की सीट्स पर बैठे थे और कंचन थोड़ा साइड में पॉपकॉर्न का लुत्फ़ उठा रही थी. थिएटर के उस मद्धम अँधेरे में, बहार की दुनिया का डर ख़तम हो चूका था... और उन देखनेवाला कोई नहीं था ..

नवाज़ ने धीरे से अपना वही ज़ख़्मी हाथ जिस पर आरती ने बैंडेज बाँधी थी वो आरती के कंधे पर रखा .. तब आरती ने धीरे से अपना हाथ नवाज़ की नयी शर्ट के ऊपर रखा. आरती ने बिना देरी किये अपनी नरम उँगलियाँ नवाज़ की मुट्ठी में फसा दी. नवाज़ ने उसे हलके से दबाया, जैसे पूछ रहा हो,

"तुम ठीक हो न?"

नवाज़ ने महसूस किया की आरती का सीना dhak-dhak कर रहा था और वो बात बात कंचन की तरफ देखे जा रही थी ..

नवाज़ ने अँधेरे का फायदा उठाया और आरती का हाथ पकड़ कर उसे चुम लिया तब आरती ने उसके कंडे पर जो नवाज़ ने आपने जख्मी हाट रखा था उसको आपने हाट मई ले लिया और

अपने होंठों से लगा लिया. उसके ज़ख़्मी हाथ की पट्टी आरती की नरम होंटो पर चुभी तोह आरती ने दर्द भरी नज़र से उसे देखा.. तब नवाज़ ने पूछा

क्या हुआ

कुछ नहीं

कह के आरती ने अपना सर धीरे से नवाज़ के मज़बूत कंधे पर टिका दिया. नवाज़ ने मौका देख कर अपना सर आरती के सर से भिड़ा लिया.

"पता है नवाज़ जी ,"

आरती ने बिलकुल फुसफुसाते हुई कहा,

"जब आप पार्किंग में उन लड़को को मार रहे थे, मुझे डर तोह लग रहा था... पर एक सुकून भी था की मेरे पास कोई ऐसा है जो मेरी खातिर मौत से भी लड़ जाये."

नवाज़ ने अँधेरे का फायदा उठाया और अपना चेहरा आरती के गाल के बिलकुल पास ले गया. उसका गरम सांस आरती की गर्दन पर महसूस हो रही थी, जिससे आरती के बदन में एक सिसकी सी दौड़ गयी.

"मैंने कहा था न आरती,"

नवाज़ की आवाज़ भरी हो गयी थी,

"तुम्हारे लिए मरना आसान है... पर तुम्हारे बिन जीना सजा है. ये नए कपडे, ये मेहेंगा फ़ोन... ये सब फीका है अगर तुम मेरे साथ न हो."

नवाज़ ने आरती की हथेली को चुम लिया. आरती ने शर्मा कर अपनी आँखें मूँद ली. थिएटर की स्क्रीन से आने वाली रौशनी kabhi-kabhi उनके चेहरों पर चमक रही थी, जिसमे आरती का चेहरा गुलाब जैसा लाल दिख रहा था.

नवाज़ ने धीरे से अपना हाथ आरती की कमर के पास रखा और उसे थोड़ा और अपनी तरफ खींचा. आरती ने भी कोई ऐतराज़ नहीं किया; उसने अपना दूसरा हाथ नवाज़ के सीने पर रख दिया, जहाँ उसकी धड़कन किसी भागे हुए घोड़े की तरह तेज़ थी.

"नवाज़, सब देख रहे हैं..."

आरती ने झूठी शिकायत की.

नवाज़ ने उसके कान के पास झुक कर कहा,

"अँधेरा बहुत गहरा है आरती... और मेरी मोहब्बत उससे भी गहरी. आज मेरा बर्थडे है, क्या मुझे अपना तोहफा नहीं मिलेगा?"

आरती ने मुद कर नवाज़ की आँखों में देखा. उनका चेहरा ek-dusre के इतने करीब था की उनकी सांसें टकरा रही थी. आरती ने हिम्मत जुताई और नवाज़ के माथे पर एक लम्बी, सुकून भरी किश की. नवाज़ ने अपनी आँखें बंद कर li—us गरीब घर के लड़के के लिए आज वह मॉल, वह मूवी और वह लड़की, पूरी कायनात बन गयी थी

नवाज़ जी ... दर्द हो रहा है?"

आरती ने बिलकुल उसके कान के पास झुक कर पूछा. उसका गरम सांस नवाज़ की गर्दन से टकराया, तोह नवाज़ के बदन में एक करंट सा दौड़ गया.

नवाज़ ने आरती की कमर में हाथ डाला और उसे अपनी तरफ इतना खींचा की दोनों के काँधे भीड़ गए.

"तू पास हैं आरती... तोह मौत का दर्द भी सुकून देता है. ये तोह सिर्फ एक खरोंच है,"

नवाज़ ने भरी आवाज़ में कहा..

स्क्रीन पर hero-heroine करीब आ रहे थे, और यहाँ थिएटर के अँधेरे में नवाज़ ने आरती की चीन पकड़ कर उसका चेहरा अपनी तरफ मोड़ा. आरती की आँखें चमक रही थी. नवाज़ ने धीरे से अपना अंगूठा आरती के होंठों पर फेरा.

आरती ने डर के मारे एक बार कंचन की तरफ देखा, पर कंचन मूवी में खोयी हुई थी. आरती ने हिम्मत जुताई और अपना सर नवाज़ के चौड़े कंधे पर टिका दिया.

"पता है नवाज़, जी "

आरती ने फुसफुसाते हुए कहा,

"आज पहली बार मुझे लग रहा है की मैं मालकिन नहीं सिर्फ एक लड़की हूँ... किसी बीवी नहीं हु .. किसी के बहु नहीं हु .. और आप मेरे प्रोटेक्टर हो.

मेरे भी बीवी नहीं

तब हस्ते हुई कहती है

आप की कहा मई बीवी हु .. आप की तो बेगम हु

नवाज़ ने आरती के बालों में अपनी उँगलियाँ फसा दी और उसके माथे पर एक गहरी और ठंडी किश की.

"मैं हमेशा तेरा साया बनकर रहूँगा... चाहे गाओं की दीवार हो या ये शहर का मॉल."

मई भी तो यही चाहती हु

तब नवाज़ आरती के होंठो पैर हल्का सा किश करता है तब आरती शर्मा जाती है

नवाज़ जी प्ल्ज़्ज़ यहाँ नहीं .. कोई देख लेगा .. सब लोग आजु बाजु बैठे है

कोई नहीं देखेगा रानी .. और वैसे भी तू मेरे बेगम है

बेगम है तो क्या कही भी सुरु हो जाओगे क्या ..

तब नवाज़ आरती की कमर में हाथ डालकर फिरसे अपनी तरफ खींचते हुई कहता है

हां

तब आरती शर्मीली मुस्कान के साथ कहती है -

आप तोह न हमेशा तैयार ही रहते ho….na जगह देखते हो न किसी को आसपास देखते ho…bass कहीं भी शुरू हो जाते ho….baju मई मेरे असली वाली ननद बैठे है

बैठने दे न .. और तू कह रही है कही भी सुरु हो जाते हो पर क्या करू तू है ही इतनी हसीं मेरी जान के तुझसे कभी मैं ही नहीं भरता जब भी देखता हु तुझे मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता hai….mera बास चलता तोह तुझे कभी तेरे कमरे से बहार ही नहीं आने deta…subah शाम तेरी चुदाई ही करता रहता….

आप भी न नवाज़ जी

जाने दे एक किश दे दे न

नहीं नहीं बिलकुल नहीं

प्ल्ज़्ज़ एक बार

तब चहरे पर स्माइल लेट हुई कहते है

और कंचन ने देख लिया तो

उसको भी पता लूंगा

तब गुस्से से नवाज़ की और देखती है

लगा hi तह ..

अरे मज़ाक कर रहा था रानी ..

आप ने मुझे प्रॉमिस किया है

हां किया है पता है ..

मुझे धोका नहीं देना है

नहीं दूंगा रानी ..पर एक किश दे दे न

नहीं बोलै न

तब नवाज़ उसके जांघो पर हाट रखता है वो हाट आरती निकल देती है .. तब फिर से वो हाट रख के सहलाने लगा तब आरती कहती है

प्ल्ज़ चुप हो जायेंगे न

ऐसा बोल के उसका हाट निकलती है

फिर उसके कंडे पर जो हाट था वो हाट थोड़ा आगे आके उसके एक मम्मी पाई रखने लगता है तब आरती झटके से वो हाट हटती है तब नवाज़ आह्ह्ह्ह का नाटक करता है

तब चेहरे पर नाराज़गी दिखते हुई कहते है

सॉरी.. मुझे याद नहीं रहा .. पर क्यों रखा वो हाट .. उसको लगा है न

तब नवाज़ आरती का हाट पकड़ के आपने लौड़े पाई रखता है तब झट से आरती वो हाट पीछे कर लेती है .. और गुस्से से उसे देखते हुई कहती है

आप ये सैतानी बंद कीजिये

पर नवाज़ कहा रुकने वाला तह .. उसने फिर से आरती के झांग पर हाट रख दिया .. तब आरती इधर उधर देख रही थी तांकि किसी की पता न chale…halaki आरती को ऐसी एडवेंचर्स में बोहत मज़ा आ रहा tha….par उसे दर लग रहा था .. पर उसे पता था जब तक नवाज़ किश नहीं करेगा वो रखेगा नहीं .. इसलिए वो एक बार कंचन को देखती है और फिर नवाज़ के होंठ पाई आपने होंठ रखती है और किश करनी लगती है

तब नवाज़ उसके मम्मी मई हाथ रख के दबाने वाला था की उसके हाट को मार्के किश तोड़ते हुई कहती है

नहीं बोलै न

करने दे न

आपने एक बार बोलै वो किया न मैंने

बहुत छोटा था

यहाँ इतना hi पॉसिबल है .. बाकि का रस्ते मई

पक्का

पक्का मेरे राजा .. मई क्यों आप से झूठ बोलूंगी

ठीक है फिर

फिर वो नवाज़ को कहते है

पलज़्ज़ज़ नवाज़ जी अभी कुछ मत kijiye…..wo होंटो के लिपस्टिक पाई से पाचन लेगी

ाचा मेरी जान….

तब नवाज़ एक बार आरती के होंठो पैर किश केर देता hai….aur चुपचाप मूवी देखने लगता

है ..

फिर मूवी ख़तम हुआ .. मूवी ख़तम होते hi लाइट लग गयी ..
 
फिर मूवी ख़तम हुआ .. मूवी ख़तम होते hi लाइट लग गयी ..

मूवी ख़तम हुई और लाइट्स ों होते hi दोनों फिरसे "मालकिन और नौकर" के किरदार में लौट आये.

अब तीनो उठ गए और मूवी हॉल से बहार निकले .. अब तीनो मॉल की पार्किंग की तरफ जाने लगता hain….jaate जाते नवाज़ की नज़र आरती की गोल , मुलायम और टाइट हिलती हुई गांड पैर पड़ती है….. तब नवाज़ ठोस फ़ास्ट आरती के पास आता है ..उसके पास आते hi नाकज आरती प की गांड पैर हाथ फेरने लगता hai….aur आरती कंचन से बाते करते हुई बार बार उसका हैट हत्ता रही थी….

नवाज़ के नए ीफोने की गैलरी अभी खली थी, और उससे भरना ज़रूरी था. इसलिए उसने सोचा इसके साथ hi पहला फोटो लेते है ..

मॉल से निकलते वक़्त पार्किंग की तरफ जाते हुए एक सुनसान कॉरिडोर आया जहाँ badi-badi कांच की खिड़कियों से शहर की लाइट्स दिख रही thi.Kanchan थोड़ा आगे निकल गयी थी वाशरूम के बहाने.

नवाज़ ने मौका देखा और आरती का हाथ पकड़ कर उसे एक पिलर के पीछे खिंच लिया.

"नवाज़ जी ! क्या कर रहे हो? कंचन आती hi होगी,"

आरती ने घबराते हुए कहा, पर उसकी आँखों में शरारत थी.

नवाज़ ने अपना नया ीफोने निकला और उसका कैमरा ों किया.

"मेरे प्यारे बेगम मालकिन, इतना मेहेंगा तोहफा दिया है तूने ... इसमें पहली तस्वीर तोह उसकी होनी चाहिए जिसने मेरी किस्मत बदली है."

आरती ने अपने बाल सही किये और थोड़ा शर्मा कर एक रॉयल पोज़ दिया. नवाज़ ने स्क्रीन पर देखा.. आरती उस साड़ी में और पीछे शहर की रोशनियां... वो बिलकुल एक पारी लग रही थी.

"क्लिक!"

नवाज़ ने फोटो खींची, पर रुका नहीं. उसने आरती के बिलकुल करीब आकर एक सेल्फी मोड ों किया. आरती ने अपना सर नवाज़ के कंधे पर रखा और दोनों ने एक ऐसी फोटो खींची जो सिर्फ उनके दरमियान रहने वाली थी.

"इससे हमेशा के लिए लॉक कर देना नवाज़ जी ,"

आरती ने धीरे से कहा, उसका चेहरा नवाज़ के बिलकुल पास था.

नवाज़ का मोबाइल हाट मई लेके उसने फोटो को 'प्राइवेट फोल्डर' में डाला तब नवाज़ बोलता है

"इसे तोह मैं अपनी साँसों में लॉक कर चूका हूँ. जब भी गाओं में तू मुझसे दूर होंगी, मैं इसी तस्वीर को देख कर अपना दिन गुज़ारूंगा."

तभी कंचन की आवाज़ आयी,

"भाभी! कहाँ रह गए आप दोनों?"

आरती ने तुरंत अपना पल्लू सही किया और बाहर निकल गयी. नवाज़ ने फ़ोन जेब में डाला और एक जीतने वाली मुस्कराहट के साथ उसके पीछे चल दिया.

मॉल की चकाचौंध से निकल कर कंचन उन्हें अपने एक पुराने दोस्त के खाली फ्लैट पर ले गयी. दोस्त शहर से बाहर था.. वह दोस्त नहीं दोस्त के भैय्या और भाभी रहते थे .. वो रात को लेट आने वाले थे ..

इसलिए कंचन इधर आयी थी .. पूरा घर इन तीनो के लिए एक सेफ ठिकाना था. वहां न कोई मालकिन थी, न कोई naukar—bas तीन दिल थे जो एक ख़ुशी बाँट रहे थे.

कंचन ने घडी देखि,

"भाभी , जल्दी करो . 9 बजने वाले हैं.. वार्डन ने गेट बंद कर दिया तोह मैं बाहर hi रह jaungi.aur यहाँ से वह पहुँचाने मई 2 घंटे लग जायेंगे "

तब आरती ने फ्रीज़ से केक निकला और टेबल पर वही शानदार चॉकलेट केक रखा. रौशनी थोड़ी मद्धम थी, और बाहर बालकनी से शहर की लाइट्स चमक रही थी. नवाज़ ने जब केक पर लिखा पढ़ा—

"हैप्पी बर्थडे माय हीरो"

तोह उसने पलट कर आरती को देखा. आरती की आँखों में वही पुराणी दीवानगी और फक्र था.

आरती ने चाकू नवाज़ के हाथो मई thama.tab आरती की हथेली नवाज़ के गरम हाथ पर थी. जैसे hi केक कटा, कंचन ने ज़ोर से ताली बजायी,

"हैप्पी बर्थडे नवाज़ !"

नवाज़ ने केक का पहला टुकड़ा आरती को खिलाया. आरती ने मौका देख कर थोड़ी सी क्रीम अपनी ऊँगली पर ली और नवाज़ के गाल पर लगा दी.

"ये क्या भाभी!"

कंचन ने चिढ़ाते हुए कहा,

"आप दोनों का तोह अलग hi रोमांस चल रहा है! वैसे भाभी, एक बात sach-sach बताइये..."

कंचन ने नवाज़ के नए ीफोने और ब्रांडेड शर्ट की तरफ इशारा किया,

"नवाज़ के पास इतने पैसे कहाँ से आये? मुझे तोह पूरा शक है की ये आपकी hi 'मेहेरबानी' है."

आरती का दिल ज़ोर से धड़का पर नवाज़ ने तुरंत बात सम्बली

डॉक्टर मैडम , म्हणत की कमाई है... और दुआओं का असर.

तब आरती कहती है

तू बस केक खा और अपने हॉस्टल निकल, वर्ण तेरी वार्डन तुझे 'जीरो' बना देगी."

कंचन मुस्कुरायी, उसे समझ तोह आ गया था की भाभी ने नवाज़ पर दिल खोल कर खर्च किया है, पर उसने बात वहीँ ख़तम कर दी. उसने jaldi-jaldi केक खाया, अपना बैग उठाया और बोली,

"ठीक है, मैं चलती हूँ. आप दोनों ध्यान से गाओं निकलना... और हाँ, थोड़ा काम रोमांस करना रस्ते में!"

और निकलने लगी .. तब फिर पलट के कहती है

घर के मालिक और मालकिन .. मतलब मेरे फ्रेंड के भाई और भाभी 11 बजे आने वाले है उससे पहले निकल जाओ ..उनके आने तक रुकोगे भी तो कोई प्रॉब्लम नहीं है वैसे मैंने मेरे भैया और भाभी है उन बोल दिया है

और वो निकल गयी .

कंचन के निकलते hi घर में एक अजीब सा सन्नाटा और नशा छ गया. अब वहां सिर्फ नवाज़ और आरती थे. नवाज़ ने दरवाज़ा लॉक किया और मुड़कर आरती को देखा, जो अब भी वही क्रीम वाला हाथ लिए कड़ी thi.Poora घर अब उनका था, और बाहर की दुनिया का डर ख़तम हो गया था.

"मेरे प्यारे बेगम मालकिन... अब तोह कंचन भी चली गयी,"

नवाज़ अब dhire-dhire आरती की तरफ बढ़ने लगा . उसका हर कदम के साथ आरती की धड़कनो को तेज़ कर रहा था

"अब मेरे बर्थडे का असली तोहफा कब मिलेगा?"

"पहले ये बताओ... क्या आप गाओं में सबके सामने मुझे अपना 'हीरो' बनकर दिखाओगे?"

नवाज़ ने आरती की कमर में हाथ डाला और उसे इतने ज़ोर से खींचा की दोनों के जिस्म ek-dusre में समां गए. उसने आरती के कान के पास झुक कर भरी आवाज़ में कहा,

"गाओं में दुनिया मालकिन और नौकर देखती है... पर यहाँ, इस कमरे में, सिर्फ मैं हूँ और मेरी आरती."

नवाज़ ने अपनी ज़बान से आरती की ऊँगली पर लगी चॉकलेट क्रीम को साफ़ किया. आरती के बदन में एक करंट सा दौड़ गया और उसने अपनी आँखें मूँद ली. नवाज़ रुका नहीं; उसने आरती की गर्दन पर अपने होंठ रख दिए. उसका नया ब्रांडेड शर्ट आरती के रेशमी साड़ी से रगड़ खा रहा था..

"नवाज़ जी ... हमें निकलना चाहिए, देर हो रही है,"

आरती ने कमज़ोर आवाज़ में कहा, पर उसके हाथ नवाज़ के बालों में कास गए थे.

नवाज़ ने उसे उठा कर पास के सोफे पर बैठा दिया और उसके घुटनो पर बैठ गया. उसने आरती का वही नरम हाथ पकड़ा जिसने आज उस पर इतना खर्च किया था.

"तूने आज मुझे एक नया इंसान बना दिया आरती. ये फ़ोन, ये कपडे... ये सिर्फ चीज़ें नहीं हैं, ये तेरा भरोसा है."

आरती ने नवाज़ का चेहरा अपने होठों के करीब खींचा.

"ये तोह सिर्फ शुरुआत है नवाज़ जी . जब तक मैं हूँ, आप की किस्मत हमेशा चमकेगी."

भरोसा रखो मुझपर आरती.. तुजे कभी नाउम्मीद नहीं करूँगा

पता है मुझे ..अब चलते है .. कंचन के फ्रेंड के भैय्या और भाभी कभी भी आ सकते है

आने दे न ..वैसे भी उसने बताया है भैया और भाभी है .. फिर रुकते है ..

और रुकर क्या करेंगे

शरमाते हुई कहते है

वही जो एक शोहर और बेगम करते है

और उधर क्या बोलू मई .. अरविन्द और पापा जी को ..

दादी के पास रुके है बोल देना

और उनोने दादी मतलब मेरे मायके वालो को पूछा तो हमारी चोरी पकड़े जायेंगे

पकड़ी जाने दे ..फिर बोलना मई मेरे शोहर के साथ हु

नहीं

क्यों रानी

लगता है आप मेरे शादी तिड़वा के रहोगे

मई ऐसा कैसा कर सकता हु रानी

नहीं करोगे पर हम यहाँ रुके तो ये पक्का होगा

अच्छा चलते है रानी . मई तुझपर कभी जबरदस्ती नहीं करूँगा

मई जानती थी आप मेरे मज़बूरी समाज जाओगे

हम्म

चलिए फिर

चलिए मेरे प्यारे मालकिन बेगम सहीभा अब बाइक पर चलते हैं. रात का सन्नाटा और ठंडी हवा हमारा इंतज़ार कर रही है.

तब आरती उठ जाती है

एक किश दे न .. सिनेमा हाल मई भी नहीं दिया तूने

तब शर्माके कहते है

मई वही सोच रही थी अभी तक आपने किश माँगा कैसे नहीं

तो दे दे

मुझे पता है किश दिया तो आप सुरु हो जाओगे और फिर रुकोगे नहीं ..और यहाँ रोकने वाला कोई नहीं है .. न पापा जी और न कंचन

ये तो अच्छा hi है

अच्छा नहीं बुरा है . .. सुरु होते hi रुकोगे नहीं और मेरे शादी टूट के रहेंगे

कैसे टूटेंगे रानी .. मई हु न ..और वो भी आने वाले है न .. कंचन के फ्रेंड के भैय्या और भाभी..

ओह्ह्ह गॉड मई ये तो भूल hi गयी ..

तब तक तो हम रोमांस कर सकते है न

तब आरती शर्मा गयी ..

और वो दोनों रात मई नहीं आये तो

फिर इस घर मई हम सुहागरात मनाएंगे

धत बेशरम

वैसे hi नवाज़ आरती के पास आ जाता है
 
कैसे टूटेंगे रानी .. मई हु न ..और वो भी आने वाले है न .. कंचन के फ्रेंड के भैय्या और भाभी..

ओह्ह्ह गॉड मई ये तो भूल hi गयी ..

तब तक तो हम रोमांस कर सकते है न

तब आरती शर्मा गयी ..

और वो दोनों रात मई नहीं आये तो

फिर इस घर मई हम सुहागरात मनाएंगे

धत बेशरम

वैसे hi नवाज़ आरती के पास आ जाता है

नवाज़- आजाओ आरती

आ जाओ आरती ऐसे नवाज़ ने कहते hi आरती का दिल zor-zor से धड़कने लगा. उस हॉल मई वो अब जहा बैठे थे वह की उस मद्धम रौशनी में नवाज़ के बुलाने से उसका चेहरा शर्म से तमतमा उठा था





पर नवाज़ की आँखों में जो शोखी और मर्दाना तेवर था, वह उसे अपनी तरफ खिंच रहा था पर फिर भी आपने पाई काबू पाकर वो कहती है

नहीं

क्यों रानी

दर लग रहा है

किस बात का दर

ऐसा बोल के उसका हाट आपने हाट मई लेता है

तब शरमाते हुई कहते है .. निचे गर्दन करके





अगर मई आप के पास आयी और आपने वो सब मेरे साथ किया तो मेरे शादी टूट जाएगी

"कैसे टूटेंगे रानी? मैं हूँ न... और वैसे भी, कंचन के bhaiyya-bhabhi आने hi वाले हैं," नवाज़ ने शरारत से उसके कान के पास फुसफुसाया.

तभी आरती वह से पीछे हटाने लगी तभी नवाज़ ने आरती को कास कर अपने सीने से चिपका लिया.

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उसकी पकड़ इतनी मजबूत थी की आरती छह कर भी पिचि हैट नहीं प् रही थी. उसने अपनी तरफ से पूरी कोसिस की उसकी कैद से आजाद होने के लिए पर आरती उसकी बांहो की गिरफ्त से जरा भी hil-dul नै सकीय.

आरती - मुझे चोरो जी

नवाज़- क्यों जी

ऐसा कहते हुई आरती को अपनी गिरफ्त में लिए हुए hi उसने अपना मुंह उसके चेहरे की तरफ ले आया.





आरती कुछ कर पति इससे पहले hi नवाज़ ने आरती के होंठो पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें बुरी तरह से चूसने लग गया.





उसके होंठ चूसने का तरीका इतना गन्दा था की आरती के होंठो से खून तक निकल आया. बिलकुल जानवरो की तरह से वो आरती के हूंतो को चूस रहा था..

आरती ने बड़ी मुश्किल से अपने चेहरे पर से उसका चेहरा हटा पायी थी. और नीचे उसका लुंड आरती के पेट में रगड़ मार रहा था.

आरती ने उसकी कैद से आजाद होने के लिए छटपटाते हुए कहा.

प्ल्ज़ चोरो न जी

ऐसा कहते हुई आरती ने झटके से अपना सर उप्पर उठाया और नवाज़ के छथि पाई दोनों हाट रख के उसे पीछे धकेल दिया .. धक्का जरा जोर से दिया था इस वजह से नवाज़ जरा जोर से पीछे गया तह इस वजह से आरती की नज़र सामने वाल पाई के वाच पाई गयी .. वह घडी मई टाइम देख के आरती के आँखें फटी की फटी रह गयी.

"ओह गॉड! टाइम देखो नवाज़ जी .. आप के चक्कर मई मई तोह ये बिलकुल भूल hi गयी थी... वह लोग कभी भी आ सकते हैं नवाज़ जी ! हमे निकलना चाहिए अभी

तब नवाज़ कहता है

अभी कहा .. इतने जल्दी .. अभी तो तेरे साडी उतरने है

तब आरती शर्मा गयी





उतरने देगी न

तब नखरे से कहती है

नहीं

और khil-khila कर हंसाने लगी..

एक बार उतरने देना

आरती - कभी नहीं..

नवाज़- क्यों..

मेरे मर्ज़ी

तेरे पति से अच्छे से उतरूंगा मई

तब आरती शर्मा के कहती है





मेरे पति ने अब तक मेरे साड़ी उतरी hi नहीं है

फिर तो बड़ा मज़ा आएगा

क्या बड़ा मज़ा आएगा .. अब तक तो आपने बहुत साड़ी योन के साड़ी उतरी है तो मेरे साड़ी उतरने मई और उनकी साड़ी उतरने मई ऐसा क्या फरक है .. शामे तो शामे hi है न

शामे तो शामे नहीं होता रानी ..

ऐसा बोल के उसको फिर से आपने बहो मई ले लेता है और उसके होंटो मई आपने होंठ रख के उसे किश करने लगता है

हर औरत की पहली बार मई साड़ी उतरता हु न तो मुझे अलग hi मज़ा आता है

तब नखरे से कहते है ..नवाज़ के बहो से निकल कर ...

आप के मज़े के लिए मुझे क्यों सजा दे रहे हो जी

तुजे भी तो मज़ा दूंगा न रानी ...

मुझे नहीं चाहिए कोई मज़ा वज़ा

तो क्या चाहिए तुझे

कुछ नहीं चाहिए मुझे ..और चुपचाप आप की फटफटी पाई बिठाकर मुझे घर ले चलिए

घर तो जाना hi है न रानी पर एक बार साड़ी उतरने दे न ..सच मई तुझे बहुत मज़ा दूंगा

क्यों मेरे साड़ी उतरने के पीछे पड़े हो आप जी .. और चुपचाप घर ले चलिए न

चलते है

तो चलो जी

ऐसा कहते हुई नवाज़ की और देखती हुई कहती है





क्यों खेमका मुझे दूसरे के घर रुलाये हुई हो .. आपने घर मई चलो .. वह जो मर्ज़ी केर लेना….

जो मर्ज़ी केर लू क्या???

आरती शरमाते हुई कहती है -

मेरा मतलब वो करना नहीं thaa….mera मतलब जो कल किया था वो केर लेना….

इतना कहते ही नवाज़ आरती को अपनी बाहो में उठा लेता hai…aur आरती भी स्माइल करने लगती है और अपनी बाहे नवाज़ के गर्दन के इर्दगिर्द दाल लेती है…. आरती को बोहत रोमांटिक फीलिंग हो रही थी

साड़ी भी उतर लू क्या

तब शरमाते हुई कहते है

उतर लेना ..इतनी hi आप की इच्छा हो रही है मेरे साड़ी उतरने की तो .. अब मैंने आप को आपने तन मन से चाहा है तो भला मई कैसे मन कर सकती हु भला

ये हुई न बात ..मेरे प्यारी बेगम सहीभा

नहीं .. मेरी प्यारी मालकिन बेगम सहीभा

और शर्मा गयी तब नवाज़ फिर से उसको चूमने लगा ..





उसको बहो मई लेके .. आरती भी उसको चूमने लगी ..अब उनका किश ख़तम हुआ

यहाँ उतारू क्या

नहीं

क्यों

दूसरे का घर है .. अब चले लेत हो जायेगा .. ज्यादा लेत होगा तो पापा जी का कॉल भी आ सकता है

ये बुद्धा हमारा पीछा नहीं छोड़ेगा न

तब आरती कहते है स्माइल करते हुई

उनकी बहु हु तो उनको चिंता होगी न मेरी

हां रानी

अब चोरो जी मुझे

नवाज़ कुछ नहीं कहता तब

आरती उसके बहो से निकलने की कोशिश करने लगी पर निकल नहीं प् रही थी ... नवाज़ ने आरती को इस तरह से पकड़ रहा था की आरती के दोनों बांहो में बेहटा हुआ खून रुक सा गया था.

अब नवाज़ ने आरती को वैसे hi पकडे घूमा दिया जिस कारन अब आरती की पीठ उसकी तरफ थी और उसकी निकलती हुई साँसे आरती को आपने कंधे पर महसूस हो रही थी.

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पीठ की तरफ घूम जाने से आरती को आपने गांड पर उसका लुंड साफ़ महसूस हो रहा था जिसे महसूस करते hi उसके पुरे शरीर में एक बिजली सी कोंध गयी.

अचानक नवाज़ ने अपना एक हाथ पकड़ से हटा कर आरती के गांड पर रख दिया. उसका हाथ अपने गांड पर महसूस करते hi एक अजीब से दर के कारन आरती के रोंगटे खड़े हो गए.

आरती ने उसकी कैद से निकलने की दोबारा कोसिस करते हुए उससे कहा..

छोड़िये मुझे ये क्या कर रहे हो आप ?

पर नवाज़ तो अपनी मस्ती में मस्त था.. अपना चेहरा उसके कान के नजदीक ला कर धीरे से आरती के कान में नवाज़ बोलै

नवाज़- बोहोत मुलायम है… तीर गांड .. आरती.. एक डैम रुई के गद्दे के जैसे.

छी गंदे कही के

नवाज़ ने फिर भी उसके गांड की मालिश जारी राखी

प्ल्ज़ ऐसा मत कीजिये .. ये गन्दा है

पर नवाज़ कुछ नहीं कहता

मैं कहती हु नवाज़ जी अपना हाथ वह से हटा लीजिये गए . वर्ण इसका नतीजा अच्छा नहीं होगा.

जरा बड़े टोन मई आरती कहती है और आरती ने लगभग पूरी ताकत से से उसकी पकड़ से निकलने का प्रयास किया और अपने दांत भींचते हुए उस से kaha.Par नवाज़ ने आरती की एक नहीं सुनी..

नवाज़- कहा से हाथ हतौ.. आरती..

मुझे नहीं पता

आरती बराबर उस से चोर्ने की कह रही थी लेकिन वो उतनी hi सख्ती के साथ अपने हाथ को आरती के गांड पर चलाये जा रहा था. बारी बारी से उसने आरती के दोनों गांड को मसल कर रख दिया.

आरती ने बर्थडे सेलिब्रेशन के वजह से एक पतली सी साड़ी पहने थे जिस कारन उसका हाथ आरती के गांड पर आसानी से चल रहा था और उसके दोनों गांड को मसले जा रहा tha.patali साड़ी की वजह से नवाज़ को आरती के गांड का अहसास हो रहा था..

नवाज़- मज़ा आ गया आरती .. .. इस साड़ी की वजह से तेरे गांड को चुना बहोत अच्छा लग रहा है..

उसके हाथो से अपने गांड को इस तरह से मसाले जाना आरती को अंदर hi अंदर कही न कही बड़ा अच्छा सा फील करा रहा था. अब आरती ने पकड़ से बहार निकलने की कोसिस करना भी बंद सा कर दिया था. ये बात नवाज़ समाज गया.. इस लिए उसने आरती की गांड को मसलते मसलते hi साड़ी के ऊपर से गांड की दरार में ऊँगली दाल दी. अपने गांड के बीच में ऊँगली महसूस करते hi आरती का पूरा बदन फिर से thar-thar कांपने लग गया.

और वो चिल्ला उठी……..

आरती- nnnnnnnnnn…aaa... www आए… ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़…….. plzzzzzzzzzzzzzzzzzzz…. नननननननननु……

आरती की सिसकने से नवाज़ भी जोश मई आ गया..

नवाज़- क्या हुआ मेरी रानी.. अछ्हा .. लग रहा है न..

ऐसे कहते हुई फिर से उंगली बहार निकलकर एक बार जोर से आरती के गांड के दरार मई साड़ी के उप्पर से hi दाल दी.. ये हमला पहले से hi बड़ा था.. इस वजह से आरती फिर से सिसक पड़ी..

आरती- आआआआह्ह्ह्हह्हआआआ… नवाज़.. जीई जरा .. धीरे न.. दर्द होता है..

नवाज़- कैसा लग रहा है..

आरती- अच्छा..

नवाज़- एक बार छोड़ने दे न..

उसकी ये बात सुन कर आरती अपने दांत बीचंच कर रह गयी..

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उसका पूरा खून खुल गया.. और वो होश मई आ गयी.. वो जो बहक रही थी उसको उसने कभो मई किया..

आरती - नहीं..

इस बार उसने नहीं कहा था .. कल जब नवाज़ ने पूछा था तब आरती ने कभी नहीं कहा तह और अब नहीं कहा तह .. ये आरती मई का बदलाव ये बता रहा तह की आरती नवाज़ से छुड़ाने के लिए धीरे धीरे रेडी हो रही थी .. पर इतने बड़े घर की बहु होने की वजह से वो तुरंत रेडी नहीं हो रही थी

नवाज़- क्यों.. तेरे पति से ज्यादा मज़ा दूंगा तुजे..

इस पर आरती झूठमूठ का गुस्सा दिखते हुई गुस्से मई कहती है..

आरती- आप हैट रहे हो की नहीं.

नवाज़ ने उतने hi बड़ी आवाज़ मई कहा ..

नवाज़- नहीं

आरती अगर मई हैट गया तो इसमें नुक्सान तुम्हारा hi होगा.

नवाज़ ने आरती के कंधे को चूमते हुए कहा.





नवाज़- तेरा पति भी मेरी तरह गांड की मालिश नहीं कर सकता. सोच लो.

Khil-khilate हुए हसते हुई नवाज़ ने अपनी बात पूरी की.

आरती- मेरा पति ये सब करता नहीं ये तो मई जानती हु .. पर मई इसके लिए थोड़ी न आप के पास आयी हु ..

तो किस के लिए आयी है

प्यार के लिए

ये भी तो प्यार hi है न रानी

ये गन्दा प्यार नहीं चाहिए मुझे मेरे नवाज़ से

तो कैसा प्यार चाहिए

अच्छा वाला

साडी उतरने वाला प्यार

तब आरती शर्मा जाती है





और शरमाते हुई कहते है

अपनी मालकिन के साथ ऐसा गन्दा प्यार कर रहे हो ..श्रम नहीं आती क्या आप को

न - आ तो बोहोत रही है .. पर मैं दिल के हाथो बोहोत मजबूर हो गया हु. जब से तेरे घर आया हु तब से तेरे कातिल मतवाली गांड का नशा मेरी आँखों से हटाता hi नहीं है.

आरती- Shut-up .. चुप रहो जी आप .. कुछ भी गंदे बोले जा रहे हो

आरती ने उसकी तरफ तरफ गुस्से से देखते हुई कहा . तब अचानक नवाज़ ने कुछ अजीब तरह से आरती के गांड के छेड़ को जोर से रगड़ दिया जिस से आरती के मुंह से खुद भी खुद सिसकारी सी निकल गयी. और वो थोड़ा उछाल कर आगे की तरफ हो गयी ..

आरती- अअअअअअहाआआ.. mumiiiiiiiiiiii..

नवाज़- छोड़ने दे न

आरती- उस नीता के पास जाओ na..mere पीछे क्यों पड़े है आप

नवाज़- उसके छूट अब मेरे लिए पुराने हो गयी है..

आरती - चोर दो मुझे... आप मेरे साथ ऐसा कुछ भी नहीं कर सकते हो.

आरती ने गुस्से भरी आवाज में नवाज़ से कहा.

अब नवाज़ ने आरती के साडी को उसके गांड के ऊपर से गांड की दरार में अंदर की तरफ धकेलते हुए उसने अपनी एक ऊँगली आरती के गांड के छेड़ पर ले जा कर टिका दी. आज तक किसी ने भी आरती के वह नहीं छुआ था यहाँ तक की अरविन्द ने भी नहीं. उसकी ऊँगली अपने गुदा द्वार पर महसूस करते hi आरती का शरीर कांपने लग गया.

नवाज़- आरती कमाल की गांड है तेरी एक डैम गजब. छोटे मालिक तो खेले बिना नहीं रह पते होंगे ऐसी मस्तानी मतवाली गांड से. एक डैम कातिलाना गांड है तुम्हारी .

आरती- हमारे बीच मई मेरे पति को बिना लाये जी नहीं भरता क्या आप का

मुझे जलन होती है तेरे पति पाई

वो क्यों जी

क्यों की मई सोचता हु किसी का इतना अच्छा नसीब कैसे हो सकता है .. इतने बड़े घर मई पैदा हु और बीवी इतने सुन्दर मिली है की पूछो मत ..

इस वजह से जलन होती है आप को मेरे पति पाई

हां

जिन वजह से जलन होती है आप को उनमे से एक चीज़ तो आप के अब हातो मई है

फिर शर्मा के कहती है

सॉरी सॉरी हटो मई नहीं बहो मई है अब

आरती की बात सुनकर नवाज़ की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गयी. रात का सन्नाटा और कमरे की मद्धम रौशनी उनके बीच के तनाव को और गहरा कर रही थी.

नवाज़ ने आरती को और करीब खिंचा और धीरे से उसके कान में बोलै,

"तुम सही कह रही हो आरती... जो खुशनसीबी उसके नसीब में थी, वह इस वक़्त मेरी बाँहों में है. शायद इसी पल का मुझे इंतज़ार था."

आरती ने शर्मा कर अपनी नज़रें झुका लीन, लेकिन उसके चेहरे पर एक हलकी मुस्कराहट थी जो नवाज़ की जलन को ठंडक पहुंचा रही थी. उसने दबे पाऊँ पीछे हटने की कोशिश की पर नवाज़ ने पकड़ ढीली नहीं होने दी.

"अब जब तुम यहाँ हो, तोह पुराणी बातें भूल जाओ," नवाज़ ने कहा, "आज रात सिर्फ हम हैं और यह पल."

आरती ने धीरे से उसके सीने पर हाथ रखा और बोली, "आप बहुत बातें बनाने लगे हैं... चलिए अब बाकी बातें रस्ते मई करेंगे, वर्ण मेरे ससुर जी का कॉल आएगा या अब आप जिस पर हल रहे थे न उसका कॉल आएगा ."

आने दे पर तूने एक hi बात बताये

दूसरे तो पहले के वजह से आ hi jayege..jaise अब कपडे और मोबाइल आया

हां वो तो है

ऐसा बोल के नवाज़ ने उसके गुदा छेड़ को रगड़ना शुरू कर दिया.

अह्ह्ह्हह्हह मत करिये प्ल्ज़

पहले तो आरती को ये पसंद नहीं आया पर धीरे धीरे उसके आरती के गुदा छिद्र को रगड़ने से आरती को उसके शरीर में एक अजीब सी हलचल महसूस होने लग गयी. सबसे बड़ा झटका तो आरती को तब लगा जब उसे अपनी दोनों टांगो के बीच में गिला गिला सा महसूस होने लग गया. उसके पीछे वाले छेड़ पर हो रही रगड़ के कारन उसकी छूट ने गिला होना शुरू कर दिया था. जिस कारन वो अब एक डैम ख़ामोशी के साथ जो कर रहा था उसे करने दे रही थी.

नवाज़- तुजे मजा तो आ रहा है न आरती..

उसने बेशर्मी से अपनी बत्तीसी फाड़ते हुए कहा.

मेरे मजेसे आप को क्या करना है .. आप तो वही करोगे न हो आप चाहते हो

नखरा करते हुई आरती कहती है तब नवाज़ कहता है..

हां वही करता हु जो मुझे करना है

तब आरती स्माइल करते है तब उसके गल्ल को हाथ लगते हुई पूछता है..

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है न मुझे जो करना है वही करता हु न आरती

तभी उसका भाई नमन का उसके मोबाइल पर फ़ोन आता hain......wo फ़ोन कहा है वो देखने लगती है... वो पर्स मई था और पर्स सोफे पि थी .. तब वो नवाज़ को कहते है..

मेरे मोबाइल बाज़ रहा है मुझे जाने दो

वो फ़ोन करनेवाला दुबारा भी कर सकता है या किसी कंपनी वाले का होगा

मेरे पति का भी हो सकता है

मेरे होते हुई पति से बात करने की क्या जरुरत है..

एक बार तो उसे नवाज़ पर बहुत गुस्सा आता हैं मगर वो बिना बात का तमाशा नहीं बनाना चाहती thi.......is लिए वो नवाज़ से नार्मल होकर बात करती हैं.....

जाने दो नहीं तो फिर से कॉल करेगा अरविन्द.. अरविन्द का कॉल नहीं उठाया तो पापाजी भी फ़ोन कर सकते है

तब वो आरती को देखते हुई कहता है

क्या ऐसा हो सकता है क्या

हाँ.. मैंने अरविन्द का कॉल नहीं उठाया तो वो पापा जी को कॉल करता है और पापा जी मुझे .. पापा जी का तो अनीहौ मुझे कॉल उतना पड़ता है

ऐसा कहके नवाज़ को कहते है

चोरो मुझे

ऐसा कहते आरती ने नवाज़ के चुंगुल से खुद को छुड़ाया और आरती ने तेज़ी से अपना फ़ोन चेक किया .. उसके चेहरे पर थोड़ी घबरात थी क्यूंकि उसके भाई का कॉल था.

तब नवाज़ उसे चोर देता है.. तब वो झट से नवाज़ के चुंगुल से छूट जाती है और आपने मोबाइल देख लेते है.. वो उसके भाई का कॉल था वो उसे उतके बात करने लगती है..

नवाज़ थोड़ा पीछे हैट गया और ख़ामोशी से आरती को बात करते देखने लगा. आरती ने खुद को संभाला और कॉल उठाया.

"हाँ भैया..." उसकी आवाज़ थोड़ी काँप रही थी पर उसने कण्ट्रोल किया.

"आरती कहाँ हो तुम?" भाई की आवाज़ में सख्ती और फ़िक्र दोनों थी.

"यही..." आरती ने छोटा सा जवाब दिया.

"यही मतलब?"

हां भैया

आरती कहा हो तुम

यही

यही मतलब

आरती ने तुरंत एक बहाना बनाया,

"वह कंचन की फ्रेंड का बर्थडे था, तोह वो यहाँ लेके आयी मुझे."

"फिर क्या तुम रुकनेवाली हो क्या?" भाई ने पूछा.

"नहीं नहीं, मैं अब निकलने वाली हूँ," आरती ने नवाज़ की तरफ एक गहरी नज़र डालते हुए कहा.

"पक्का?"

"हाँ भैया."

फिर वैसा मैं पापा जी... मतलब तेरे ससुर जी को बोल दू? उनका फ़ोन आया था मुझे."

आरती ने रहत की सांस ली, "हाँ, बोल दीजिये."

"तू जल्दी निकल... रात बहुत हो रही है," भाई ने हिदायत दी और कॉल रख दिया.

आरती ने फ़ोन निचे रखा .. मौसम अब बदल चूका था. ससुर जी और भाई के बीच बात हो चुकी थी, इसका मतलब अब आरती को वहां से फ़ौरन निकलना होगा वर्ण शक हो सकता है.. और फिर उसने नवाज़ की तरफ dekha...aur सोचने लगी ..





पर नवाज़ जी को कैसे संजो .. पर संजना पड़ेगा

ऐसा सोच के आगे बड़ी और नवाज़ से कहा

चलिए हमें अब निकलना होगा

नवाज़ ने आरती का रास्ता रोका और उसकी आँखों में देखते हुए धीरे से बोलै,

आरती, इतनी जल्दी क्या है? भाई को तोह तुमने बोल hi दिया है की निकल रही हो.. हम निकलते है न .. ये मेरे बर्थडे का केक ख़तम करके

ये तो रस्ते मई भी तो खा सकते है न जी

हां खा सकते है .. पर अभी बहार मौसम और रास्ता दोनों ठीक नहीं हैं. बस ek-do घंटे की तोह बात है, थोड़ा सुकून से निकलते है..

आरती ने हिचकिचाते हुए कहा,

"पर नवाज़ जी , अगर किसी को पता चल गया तोह?"

नवाज़ ने उसके करीब आकर उसके बिखरे हुए बालों को कान के पीछे किया और नरम आवाज़ में बोलै, "कोई नहीं जानेगा... किस को पता है हम कहा है.. सिर्फ कंचन को पता है .. और वो किसी को नहीं बतायेगे

वो नहीं बतायेगे पर लेट हुआ तो पापा जी और मेरे पति को शक हो जायेगा

कोई बहाना बना देंगे

कोनसा बहाना

तब नवाज़ कुछ सोच के कहता है

गाडी ख़राब होने का

तब आरती स्माइल करते हुई कहते है

बहुत शातिर हो

अब इतने खूबसूरत औरत मेरे बर्थडे के लिए और बर्थडे गिफ्ट के लिए इतना कुछ कर सकती है ..और आपने ननद को बेवकूफ बना सकती है तो मुझे भी कुछ बहाना बनाना पड़ेगा न

वो अचानक मेरे दीमक मई आया तो मैंने किया

मेरे लोमड़ी उतनी स्मार्ट है मुझे पता है

तब स्माइल करते हुई कहती है

हां पर जल्दी निकलना है .. केक कहते hi

मेरा बर्थडे है थो थोड़ा ज्यादा टाइम का इनाम मुझे नहीं मिलेगा क्या

मिलेगा न

तब नवाज़ ने उसका हाथ पकड़ कर उसे धीरे से अपनी तरफ खिंचा.. तब आरती की धड़कन तेज़ हो गयी.

कमरे में सिर्फ घडी की 'tik-tik' सुनाई दे रही थी.

"सिर्फ एक घंटा..." आरती ने दबी हुई आवाज़ में कहा, पर उसकी आँखों में नवाज़ के लिए एक अलग hi कशिश थी.

नवाज़ ने मुस्कुराते हुए उसके माथे को चूमा और बोलै, "यह एक घंटा हमारी ज़िन्दगी का सबसे यादगार वक़्त होगा. तुम्हारी खूबसूरती की तारीफ करने के लिए मुझे इतना वक़्त तोह चाहिए hi."

आरती ने शर्मा कर अपना सर उसके सीने पर रख दिया. बहार रात का सन्नाटा था, पर अंदर उन दोनों के बीच की नज़दीकियां बढ़ती जा रही थी.
 
आरती ने जब कहा सिर्फ एक घंटा तब नवाज़ ने एक शरारत भरी मुस्कराहट के साथ केक की तरफ इशारा किया और बोलै,

इतनी जल्दी भी क्या है? ये चॉकलेट केक तुम्हारा फवौरीते केक है न

आप को कैसे पता

रानी तेरे हर चीज़ मुझे पता है .. तेरे दिल मई जो बैठा हु

तब आरती शर्मा गयी





वो तो है

मैं तुम्हारे लिए तुम्हारा फेवरेट केक लाया हूँ.

आप ने नहीं कंचन ने लगा है ..

उसने लाया है क्या .. मुझे लगा मैंने लाया

झूट बोलना कोई आप से सीखे

ऐसा बोल के आरती नवाज़ को देखने लगी





उसके चहरे पर हसी थी और साथ मई उसकी प्यारी अड्डा

जूथ हो या सच मई नहीं जनता पर प्यार है ये मई जनता हु

अच्छा

हां रानी

तब नवाज़ आरती की और देखते हुई कहता है

रानी तेरे लिए गजरा लाना भूल गया ..गाँव से निकलते हुई ध्यान मई था पर कैसे की दिमाख से निकल गया

कोई नहीं .. कल लेक देना

पहनेगे क्या मेरा दिया हुआ गजरा

क्यों नहीं पहूँगी .. आप hi आपने हटो से पहना दो

तू तो सुबह किचन मई होती है ..वह तेरा पति होगा ..ससुर होगा या नीता होगी तो कैसे पहनाऊ

हम दोनों उसके लिए टाइम निकल लेंगे ..मुझे पता है

हां वो तो है

फिर बड़ी ऐडा के साथ नवाज़ को देखते हुई कहती है





सिर्फ कल hi लाओगे या रोज लाओगे

तू कहे तो रोज़ लाऊंगा

आपने गाँव मई मिलते है क्या

तेरे लिए कहा से भी पैदा करूँगा .. चाहे रोज़ शहर आऊंगा तेरे लिए

तब शरमाते हुई कहती है

हाउ रोमांटिक .. इतना प्यार करते हो क्या आप मुझसे

हां रानी कोई शक

शक वक कोई नहीं है

तब नवाज़ कहता है

माँ की छूट ... इस गजरे के चक्कर मई केक रह गया

तब आरती हसने लगी





नवाज़ ने आरती के सामने गली दी पर आरती ने न गुस्सा किया और न hi उसके तरफ गुस्से से देखा .. उलटा हॉंसे लगी थी ..

एक टाइम ऐसा था नवाज़ के ऐसे hi गली के वजह से उसने आपने ससुर और हस्बैंड को नवाज़ की कम्प्लेन की थी

इतना बदलाव नवाज़ ने आरती मई लाया था

बिना केक खाये जाओगी तोह मेरी म्हणत बेकार जाएगी.

ऐसा बोल के नवाज़ उठ गया और केक के पास गया और एक छोटा सा, नरम चॉकलेट केक टुकड़ा तोड़ कर आरती के होठों के पास लाया.

आरती ने मन करने की कोशिश की, पर नवाज़ की ज़िद्द के आगे उसकी एक न चली.

"नवाज़ जी ... ," आरती ने सिर्फ इतना कहा नवाज़ की और देखते हुई ..





वो आगे बोल नहीं पायी . ..

उसकी आँखों में प्यार साफ़ दिख रहा था.

अब क्या हुआ

तब शरमाते हुई कहती है





उसकी और देखते हुई

ऐसे मस्ती मैंने किसी के साथ नहीं की

तो मेरे साथ कर .. मई तुजे जिंदगी का असली मज़ा दूंगा रानी

ऐसा नवाज़ ने धीरे से कहा उसके गाल का चूमा लेते हुई और उसे केक का पहला टुकड़ा खिलाया. आरती ने शर्मा कर केक खाया और फिर अपने हाथ से एक छोटा सा टुकड़ा तोड़ कर नवाज़ की तरफ badhaya.Nawaz ने उसका हाथ पकड़ लिया और केक कहते वक़्त उसकी उँगलियों को हलके से छूना नहीं भूला. कमरे में चॉकलेट की महक और उनकी दबी हुई हंसी गूँज रही थी.

आरती के होठों पर थोड़ी सी क्रीम लग गयी थी. नवाज़ ने टिश्यू उठाने के बजाये अपनी ऊँगली से उसे साफ़ किया और फिर आरती की तरफ गहराई से देखा.

"अब बताओ, क्या अभी भी निकलने का मैं है?"

नवाज़ ने उसके कान के पास गुनगुनाया.

आरती का दिल ज़ोर से धड़कने लगा. वह केक की मिठास और नवाज़ की नज़दीकियां सब भूल कर बस उस पल में खो गयी.

बता न रानी

इतना सुनते hi आरती नवाज़ की और सेक्सी अड्डोंसे देखने लगी





पर कहा कुछ नहीं तब नवाज़ ने अपने काळा होंठ आरती के गुलाबी नरम होंठो पैर रख दिए और उसे चूसने laga…..aarti भी अपने एक हाथ से नवाज़ का सर सहलाती रही और एक हाथ से उसके चेस्ट पैर फेरती रही…

फिर नवाज़ आरती को अपनी मज़बूत बाजुओं में उठा केर वह के सोफे पाई बिठा देता hai..pahle वो बैठ जाता है और फिर अपनी गॉड में आरती को बिठा देता है.. जैसे hi नवाज़ की नज़र आरती पैर पड़ी आरती बुरी तरह शर्मा gayi…sharmate हुई वो नवाज़ के गॉड मई बैठ के नीचे देखने लगी ..





हलकानकी नवाज़ ने आरती को पहले आपने बहो मई लिया था किश भी किया था पर जिस तरीके से उसे आपने बहो मई उसे उतके आपने गॉड मई बिठाया था उस वजह से आरती को काफी ज़्यादा शर्म आ रही thee…tab नवाज़ कहता है

अरे आरती रानी अब छोड़ भी दे ये sharmana…ab भला हमसे कैसी शर्म ..

तब आरती नॉटी फेस बनाते हुई कहती है





क्यों न शर्मो .. ये मेरा अधिकार है .. हक़ है

मालूम है ये तेरा अधिकार है .. हक़ है पर ..आपने शोहर के सामने इतनी शर्म ठीक नहीं है

आप मेरे शोहर है तो क्या मई आप से न शर्मो ..

बेशक शर्मा मेरी रानी

फिर मन क्यों किया

जरा नखरे से कहती है

मेरे गलती हुई मेरी माँ

मेरी माँ कहते hi आरती कहती है

मई आप की माँ नहीं हु .. बेगम हु

हां पता है ..तू कैसे मेरे अम्मी कैसे बन सकती है ..मेरे अम्मी तो बीमार रहती है.. हां तुजे मई आपने बच्चे की अम्मी जरूर बना सकता हु

तब आरती शर्मा के कहते है





है ढैय्या .. मुझे नहीं बनाना आप के बच्चे की ामी

क्यों

तब उसे याद आता है नवाज़ ने कहा था अम्मी बीमार रहती है

वो जाने दो ..आप की अम्मी कैसे बीमार है ..क्या हो गया है उन

बीमार है दो साल से

कल हम उन देखने जायेंगे

ठीक है जाते है ..पर अम्मी के चक्कर मई मई मेरे रात वास्ते नहीं करना चाहता

तब आरती कहती है

आप को न आपने अम्मी की फ़िक्र hi नहीं hai..aapne बेगम के चक्कर मई

आरती ने जब नवाज़ को उसकी अम्मी की याद दिलाई तोह नवाज़ ने शैतानी से मुस्कुराते हुए उसे कमर से पकड़ कर अपनी तरफ खिंच लिया.

"अब बेगम अगर इतनी हॉट, ब्यूटीफुल और सेक्सी होगी, तोह किस चुटिया को अपनी अम्मी की फ़िक्र रहेगी... बेगम को छोड़ के?"

नवाज़ ने उसकी आँखों में आँखें दाल कर बेशर्मी से कहा.

आरती का चेहरा तमतमा गया और उसने शर्मा कर नवाज़ के सीने पर हल्का सा मुक्का मारा,

"धत बेशरम! कुछ तोह लिहाज़ कीजिये, बड़े बद्तमीज़ हो गए हैं आप
 
आरती ने जब नवाज़ को उसकी अम्मी की याद दिलाई तोह नवाज़ ने शैतानी से मुस्कुराते हुए उसे कमर से पकड़ कर अपनी तरफ खिंच लिया.

"अब बेगम अगर इतनी हॉट, ब्यूटीफुल और सेक्सी होगी, तोह किस चुटिया को अपनी अम्मी की फ़िक्र रहेगी... बेगम को छोड़ के?"

नवाज़ ने उसकी आँखों में आँखें दाल कर बेशर्मी से कहा.

आरती का चेहरा तमतमा गया और उसने शर्मा कर नवाज़ के सीने पर हल्का सा मुक्का मारा,

धत बेशरम! कुछ तोह लिहाज़ कीजिये, बड़े बद्तमीज़ हो गए हैं आप... आप को न आपने अम्मी की फ़िक्र hi नहीं hai..aapne बेगम के चक्कर मई

नवाज़ ने हस्ते हुए उसका हाथ पकड़ लिया और उसे अपने और करीब लेट हुए बोलै,

"बदतमीज़ी तोह अभी शुरू भी नहीं हुई रानी. जब सामने इतना नशा हो, तोह कोई भी होश खो बैठे. वैसे भी, आज मेरा बर्थडे है, थोड़ी बदतमीज़ी तोह बनती है न?"

ऐसा कहते हुई नवाज़ ने उसकी कमर पर हाथ रखते उसने केक का एक छोटा सा टुकड़ा तोडा और आधा आपने मू मई रखा और आधा बहार और फिर आरती के होठों के पास ले gaya.tab आरती ने नज़रें जुका ली पर उसकी मुस्कराहट बता रही थी की उसे नवाज़ का ये अंदाज़ पसंद आ रहा है.

नवाज़ ने वही रूककर आरती की आँखों में देखा और अपने होठों के बीच दबे उस केक के टुकड़े को और करीब लाया. आरती ने शर्मा कर अपनी आँखें बंद कर ली, पर उसकी धड़कन साफ़ सुनाई दे रही थी.

नवाज़ ने धीरे से अपना चेहरा आगे बढ़ाया और बिना हाथ लगाए, अपने होठों से वही केक का टुकड़ा आरती के होठों तक पहुंचा diya.dono के होठ एक दूसरे से इतने करीब थे की उनकी सांसें टकरा रही थी. आरती ने हिचकिचाते हुए अपना मुंह खोला और उसने वही आधा टुकड़ा अपने होठों मई ले लिया.

नवाज़ ने मौका देख कर आरती की कमर पर अपनी पकड़ और मज़बूत कर दी और उसे पूरी तरह अपने जिस्म से चिपका लिया और जैसे hi केक ख़तम हुआ दोनों के होंठ एक दूसरे से चिपक गए .. दोनों एक दूसरे को अब किश करने लगे थे ..

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दोनों अब वीलडली एक दूसरे के होंठो को चूसने लगे थे …. जैसे hi किश टुटा तब नवाज़ कहता है

"कैसा लगा बर्थडे केक?"

नवाज़ ने उसके होठों के इतने पास होकर पूछा की उसकी हर बात आरती को एक सिहरन दे रही थी.

आरती ने केक निगलते हुए धीरे से कहा.. नवाज़ की और देखते हुई





"बहुत... बहुत मीठा है."

नवाज़ ने शैतानी से मुस्कुराते हुए उसके कान के पास फुसफुसाया,

"अभी तोह मिठास शुरू हुई है रानी. मैंने कहा था न, आज बर्थडे मेरा है पर तोहफा मुझे तुमसे चाहिए."

आरती ने नवाज़ के बालों में अपनी उँगलियाँ फंसा दी और अपना सर उसके कंधे पर टिका दिया. रूम की उस मद्धम रौशनी में केक की मिठास और उनके बीच का ये शिद्दत भरा रोमांस अब हर हद्द पर कर रहा tha.uske कंधे पर सर रखते हुई आरती ने धीरे से पूछा

आप को कैसे लगा

तब नवाज़ ने बेशर्मी से मुस्कुराते हुई कहा.

केक से ज़्यादा तोह तुम मीठी हो

और फिर नवाज़ ने उसका बाल पकड़े और उसका सर पीछे खिंच लिया .. तब वो सिसक उठी

ोुछहहह

आरती उसके गॉड मई बैठी हुई थी.. आरती के ोूछ कहने और उसको हुई तकलीफ से नवाज़ को कोई फरक नहीं पड़ा .. उसने तुरंत आरती को चमन शुरू किया ..

उसके उप्पर वाले हूंठ को वो आपने दोनों हूंतो मई लेके जोर से खींचता है

अह्ह्ह्हह मत तड़पाओ मुझे

नवाज़ फिर एक बार वैसे hi करता है और इस बार जरा जोर से उसके हूंतो को खींचता है..

नवाज़ ने जब आरती के होठों को ज़ोर से खींचा, तोह आरती के मुंह से एक हलकी कराह निकल गयी. उसने नवाज़ के सीने पर हल्का सा धक्का दिया और लड़खड़ाती आवाज़ में बोली

"ाएहा... धीरे से! काटो मत, निशाँ पद गया तोह मुसीबत हो जाएगी."

नवाज़ का नशा और बढ़ गया था. उसने उसकी कमर पर अपनी पकड़ और मज़बूत की और उसकी आँखों में शैतानी से देखते हुए बोलै,

"करने दे न रानी... आज की रात सिर्फ निशानियों की है."

आरती ने घबरा कर कहा,

"काटोगे तोह मेरे पति को शक होगा, और कल आप की उस नीता रानी को पता चल गया तोह? वो बहुत तेज़ है."

नवाज़ ने लापरवाही से हस्ते हुए कहा,

"उसे तोह लगेगा तेरे पति ने hi काटा होगा. उस चूतिये को क्या पता की यहाँ क्या हो रहा है."

"हाँ, पर वो पूछेगी की भैया तोह यहाँ हैं नहीं, और मई कुछ सफाई देने जाउंगी तो कहेगे ..आजतक तो कटा नहीं फिर आज hi कैसे कटा?

इतने सवाल पूछते है क्या वो रांड

हां न नवाज़ जी ..हमेशा मुझे ऐसे सवाल पूछ कर तंग करती रहती hai….aap कुछ बंदोबस्त करो न ..आप की उस चैनल रांड का

आरती ने थोड़ा चीरते हुए और नवाज़ को उकसाते हुए कहा..

नवाज़ तो हमेशा चैनल और रांड शब्द उसे करता था पर आरती ने पहली बार उसे किया था नवाज़ के रांड कहने के बाद ..

रांड और चैनल ये वर्ड आरती ने पहली बार उसे किया था ..शयद जेलस होक या नवाज़ के लाइफ मई से वो नीता को अब पूरी तरह से हटाना चाहा रही हो..

आरती के मुंह से 'रांड' और 'चैनल' जैसे शब्द सुनकर नवाज़ एक पल के लिए ठिठक गया. उसने कभी नहीं सोचा था की इतने बड़े घर की इतनी शरीफ दिखने वाली बहु, जो पहले मेरे मू से थोड़ी से गली या गन्दा वर्ड निकलते तो चीड़ जाती थी .. गली से इतनी नफरत करती थी, आज जलन और ओबसेशन में इस हद्द तक उतर आएगी.

आरती की आँखों में नीता के लिए नफरत साफ़ दिख रही थी. वह अब नवाज़ को किसी के साथ शेयर नहीं करना चाहती थी. उसने नवाज़ का कुरता कास के पकड़ लिया और उसकी आँखों में देखते हुए बोली,

"क्या देख रहे हैं जी ? हाँ, मैंने hi कहा. मैं उस औरत का नाम भी नहीं सुन्ना चाहती आपके मुंह से."

नवाज़ ने आरती की इस जलन का मज़ा लेते हुए उसे और करीब खिंचा. उसे समझ आ गया था की आरती अब पूरी तरह उसके रंग में रंग चुकी है.

"रानी... इतनी जलन?"

नवाज़ ने उसके चेहरे पर बिखरी लातों को हटते हुए कहा.

"लगता है अब तुम सिर्फ मेरी बेगम hi नहीं, मेरी मालकिन भी बनना चाहती हो. नीता तोह सिर्फ एक जरिया थी, पर तुम... तुम तोह मेरा नशा बन गयी हो."

आरती ने गुस्से और प्यार के mile-jule एहसास में कहा, "तोह फिर हटाइये न उसे. क्यों रखा है उसने आपको अपने जीवन में? आज के बाद अगर उसने आपको कॉल भी किया, तोह मैं बर्दाश्त नहीं करुँगी."

नवाज़ ने उसकी गर्दन पर एक गहरा निशाँ छोड़ा और उसके चहरे को पकड़ कर ऊपर उठाया और उसकी आँखों में देखते हुए एक खतरनाक मुस्कराहट के साथ बोलै,

"तुम फ़िक्र मत करो रानी. जो तुम चाहो वही होगा. आज से वो तुम्हे तंग नहीं करेगी.. और अगर करेगी तोह मई उसे देख लूंगा .. तुम टेंशन न लो "

फिर उसके होंटो पाई किश करते हुई कहता है

आज की रात के बाद, नीता तुम्हारे और मेरे बीच कभी नहीं आएगी..

आरती ने सुकून की सांस ली और नवाज़ के गले लग गयी. उसने पहली बार महसूस किया की वह नवाज़ पर पूरा हक़ जाता रही hai.phir नवाज़ ने ने आरती के कान के पास धीरे से फुसफुसाया,

"अब उसकी बातें छोड़... बस ये बता, मेरे इस 'बर्थडे गिफ्ट' का अगला हिस्सा क्या होगा?"
 
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