Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION .... - Page 33 - SexBaba
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Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION ....

"अब उसकी बातें छोड़... बस ये बता, मेरे इस 'बर्थडे गिफ्ट' का अगला हिस्सा क्या होगा?"

आरती ने थोड़ा शर्मा कर नवाज़ की और देखते हुई धीरे से कहा





दे तो दिया मोबाइल दिया

. .. नए कपडे दिए और क्या चाहिए आप को

नवाज़ ने आरती की कमर पर अपनी पकड़ और मज़बूत की और उसकी आँखों में शैतानी से देखते हुए मुस्कुराया.

"रानी, मोबाइल और कपडे तोह सिर्फ चीज़ें हैं... वो तोह कोई भी दे सकता है,"

नवाज़ ने उसके कान के पास धीरे से फुसफुसाया, जिस से आरती की सांसें तेज़ हो गयी.

"मुझे वो तोहफा चाहिए जो सिर्फ तुम दे सकती हो. ये रात, ये ख़ामोशी, और तुम्हारा ये नया बेशरम अंदाज़... मुझे ये चाहिए."

आरती ने शर्मा कर अपनी नज़रें झुका ली और नवाज़ के सीने पर हल्का सा धक्का देते हुए बोली,

"आपका पेट कभी नहीं भरता न? इतना सब तोह दे दिया, अब और क्या बचा है?"

नवाज़ ने उसके बालों में नाक गुसा के उसके बालो की महक ली और उसके कानो के बलि को ऊँगली से छेड़ते हुए बोलै,

"बचा तोह अभी बहुत कुछ है. आज मेरा बर्थडे है, और मैं चाहता हूँ की मेरी बेगम मुझे पूरी तरह से अपना 'तोहफा' क़ुबूल करने दे. बिना किसी डर के, बिना किसी तीसरे के ख्याल के."

आरती ने नवाज़ की आँखों में देखा, जहाँ सिर्फ उसके लिए दीवानगी थी. उसने धीरे से नवाज़ के गले में अपनी बाहें दाल दी और उसके बेहद करीब आकर बोली,

"अच्छा बाबा... ठीक है. बताइये, क्या करना है आपकी इस बेगम को?"

नवाज़ ने उसकी बात सुनकर एक शैतानी मुस्कराहट दी. बिना एक पल गवाए, उसने आरती को अपनी गॉड से एक झटके में थोड़ा और ऊपर उठाया और उसे वही सोफे पर लिटा दिया.

आरती की धड़कन एक दम से तेज़ हो गयी. हॉल के उस सन्नाटे और हलकी रौशनी में नवाज़ उसके ऊपर झुका हुआ था. आरती ने घबरा कर उसके कंधे पकड़ लिए और धीरे से बोली,

"नवाज़ जी ... ये क्या कर रहे हैं आप ? अभी तोह केक भी पूरा ख़तम नहीं हुआ... पहले उसे ख़तम करते है ."

नवाज़ ने उसकी एक बात नहीं सुनी. उसने आरती के दोनों हाथों को उसके सर के ऊपर सोफे पर टिकाया और उसकी आँखों में गहराई से देखते हुए बोलै, "केक तोह सिर्फ शुरुआत थी रानी... असली मिठास तोह अब शुरू होगी. आज मेरा बर्थडे है, और तुमने अभी पूछा न की 'बेगम को क्या करना है'?"

आरती ने अपनी आँखें मूँद ली और उसके चेहरे पर शर्माहट की एक सुर्खी दौड़ गयी. नवाज़ ने उसके चेहरे के बेहद करीब आकर फुसफुसाया, "बस वहीँ रहो... हिलना मत. आज की रात मैं चाहता हूँ की तुम सिर्फ मेरी बनो, बिना किसी डर के."

आरती ने दबी हुई आवाज़ में कहा,

"आप बहुत बेशरम हो गए हैं..."

नवाज़ ने उसके होठों के पास आकर कहा, "तुम्हारे नशीले रूप ने hi तोह मुझे ऐसा बनाया है."

हॉल की हलकी रौशनी उन दोनों के चेहरों पर पद रही थी, जिससे माहौल और भी नशीला हो गया था.

नवाज़ ने उसके कान के पास आपने होंठ लेके धीरे से कहा,

"बेशर्मी तोह अभी शुरू हुई है रानी... जब सामने तुम जैसा नशा हो, तोह होश किसको रहता है?"

उसने आरती के दोनों हाथों को अपने एक हाथ से ऊपर की तरफ पकड़ लिया और दूसरा हाथ उसकी कमर पर रखा.

आरती की सांसें तेज़ी से चल रही थी. उसने दबी हुई आवाज़ में कहा,

"नवाज़ जी ... अगर वो लोग आ गए तोह हम कहीं के नहीं रहेंगे."

नवाज़ ने आरती की घबराहट महसूस की और उसके चेहरे के और करीब आकर धीरे से बोलै,

"डरो मत रानी, यहाँ कोई नहीं है. अभी तोह दो घंटे बाकी हैं उनके आने में. 11 बजे तक हमें निकलना है, पर तब तक... तब तक ये वक़्त सिर्फ हमारा है."

आरती ने एक गहरी सांस ली, उसकी धड़कन अब थोड़ी शांत हुई पर रोमांस का नशा बढ़ता जा रहा था.

"दो घंटे... सिर्फ दो घंटे हैं हमारे पास?"

उसने नवाज़ की आँखों में देखते हुए पूछा.

नवाज़ ने उसके दोनों हाथों को सोफे पर ऊपर की तरफ और मज़बूती से पकड़ा और उसकी आँखों में देखते हुए एक शैतानी मुस्कराहट दी,

, "दो घंटे बहुत होते हैं अगर साथ तुम जैसी बेगम हो. आज की रात का हर एक पल मैं तुम्हारे नाम कर देना चाहता हूँ

."

फिर उसने आगे कहा

आज की रात तोह वैसे भी मेरे बर्थडे की है. क्या तुम अपने इस दीवाने को इतना सा तोहफा भी नहीं डौगी?"

उसने आरती के होठों के बेहद करीब आकर उन्हें हल्का सा छुआ, जैसे वो केक की मिठास को अब उन होठों पर ढूंढ रहा हो. आरती ने अपनी आँखें कास कर बंद कर ली और उसका पूरा जिस्म thar-thar कांपने लगा. वो छह कर भी नवाज़ को खुद से दूर नहीं कर प् रही थी.

"नवाज़ जी ... बस कीजिये,"

आरती ने कहा, पर उसकी आवाज़ में कोई सख्ती नहीं थी, बल्कि एक तरह का समर्पण tha..Nawaz ने उसके चेहरे से होती हुई अपनी उँगलियाँ उसकी गर्दन तक ले गया और बोलै,

"बस तोह अभी नहीं होगा... आज रात तुम सिर्फ मेरी हो, बिना किसी डर के."
 
उसने आरती के होठों के बेहद करीब आकर उन्हें हल्का सा छुआ, जैसे वो केक की मिठास को अब उन होठों पर ढूंढ रहा हो. आरती ने अपनी आँखें कास कर बंद कर ली और उसका पूरा जिस्म thar-thar कांपने लगा. वो छह कर भी नवाज़ को खुद से दूर नहीं कर प् रही थी.

"नवाज़ जी ... बस कीजिये,"

आरती ने कहा, पर उसकी आवाज़ में कोई सख्ती नहीं थी, बल्कि एक तरह का समर्पण tha..Nawaz ने उसके चेहरे से होती हुई अपनी उँगलियाँ उसकी गर्दन तक ले गया और बोलै,





"बस तोह अभी नहीं होगा... आज रात तुम सिर्फ मेरी हो, बिना किसी डर के."

उसने आरती के होठों के बेहद करीब आकर उन्हें हल्का सा छुआ, जैसे वो केक की मिठास को अब उन होठों पर ढूंढ रहा हो. आरती ने अपनी आँखें कास कर बंद कर ली और उसका पूरा जिस्म thar-thar कांपने लगा. वो छह कर भी नवाज़ को खुद से दूर नहीं कर प् रही थी.

ऐसे क्या करते हो जी आप .. कबसे हम साथ है जी .. कल श्याम से .. इतना तो नवाज़ जी मई कभी आपने पति के साथ नहीं रही

आरती की बातों में एक ऐसी सचाई थी जो उनके रिश्ते की नयी गहराई को बयान कर रही थी. नवाज़ ने उसकी thar-tharahat को महसूस किया और उसके करीब होकर धीरे से बोलै:

"वक़्त की बात नहीं होती आरती, बात होती है उस एहसास की जो हमने इन कुछ घंटों में जिया है. तुम्हारे पति के साथ बिताये दिनों पर ये एक रात भारी है, क्यूंकि आज तुमने खुद को खोने नहीं, बल्कि पाने की हिम्मत दिखाई है."

आरती ने नवाज़ की आँखों में देखा, जहाँ अब अजीब सा सुकून घर कर रहा था. नवाज़ ने उसके भीगे होठों को फिर से एक बार महसूस किया, जैसे वो उसके हर लफ्ज़ की मिठास को अपने अंदर उतार लेना चाहता हो.

नवाज़ ने आरती की चीन को धीरे से ऊपर उठाया और उसकी आँखों में झांकते हुए बोलै,

"वक़्त को मत गिनो, आरती. कुछ रिश्ते सदियों की पहचान मांगते हैं, और कुछ सिर्फ एक पल की शिद्दत. तुम्हारे पति ने शायद तुम्हें देखा होगा, पर मैंने आज तुम्हें महसूस किया है."

आरती की सांसें तेज़ हो गयी थीं. नवाज़ का स्पर्श उसकी गर्दन से होते हुए उसके कन्धों तक गया, जिससे उसके जिस्म में एक बिजली सी दौड़ गयी. उसने धीरे से नवाज़ के कुर्ते को अपनी उँगलियों में कास लिया, जैसे वो गिरने से बच रही हो.

"नवाज़ जी... मैंने कभी सोचा नहीं था की कोई मुझे इस तरह भी देख सकता है,"

आरती ने हलके से फुसफुसाया.

नवाज़ उसके कान के बेहद करीब झुका और उसकी गरम सांसें आरती की त्वचा को चुने लगीं.

"अभी तोह शुरुआत है. आज रात हम हर वो पर्दा गिरा देंगे जो तुम्हें तुम्हारी ख्वाहिशों से दूर रखता है."

उसने आरती की कमर पर अपना हाथ थोड़ा और सख्त किया और उसे अपनी तरफ खेंचा, दोनों के दरमियान अब हवा की भी जगह नहीं बची थी. आरती ने अपनी गर्दन एक तरफ झुका दी, नवाज़ को पूरा हक़ देते hue.tab नवाज़ उसके गर्दन पर किश करने लगा ..





नवाज़ ने जैसे hi आरती के एक नरम आम पर हाथ रखकर उसे दबाने की कोशिश की, आरती ने तुरंत उसका हाथ थामे लिया. दोनों की नज़रें मिली





नवाज़ की आँखों में ठरक भरी भूक थी, और आरती की आँखों में एक शरारत भरा ऐतराज़.

"नहीं नवाज़ जी... ये मत करो," आरती ने धीरे से कहा.

"क्यों?" नवाज़ ने थोड़ा बेचैन होकर पूछा. उसका हाथ अब भी वही था, बस आरती की पकड़ ने उसे रोक रखा था.

आरती जानती थी की अगर उसने 'क्यों' का असली जवाब दिया, तोह नवाज़ शायद कण्ट्रोल खो दे. नवाज़ ने फिर से ज़ोर लगाया और उसके अंग को भींचने की कोशिश की आरती कुछ पल के लिए दर गयी ..





नवाज़ ने इतने जोर से उसके कमर के पीछे हाट दाल के पकड़ा जो था पर आरती ने तुरंत खुद को सम्बल के उसकी कलाई और कास के पकड़ ली.

"मन क्यों कर रही हो?" नवाज़ ने थोड़ा झुंझलाकर पूछा.

आरती का चेहरा गर्मी से तमतमा गया. उसे पता था की एक बार नवाज़ शुरू हो गया, तोह फिर उसे रोकना na-mumkin होगा, और शायद वो खुद भी बहक जाये. उसने हिम्मत जुताई और बोली,





"दोपहर में होटल में दबाया था न आपने... और कल रात घर में भी वही किया था मेरे साथ."

थोड़े शर्म थी उसके चहरे पर

नवाज़ ने थोड़ा भांपते हुए कहा, "

दोनों hi बार तूने पूरा काम कहाँ करने diya.chodane कहा दिया "

"मैं चाहती हूँ हमारा पहला मिलान स्पेशल हो," आरती ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा.

"हाँ रानी, ये तोह मैं भी चाहता हूँ. और मेरे बर्थडे से स्पेशल दिन और कौनसा होगा? आज hi करते हैं न सब,"

नवाज़ ने उसके करीब आते हुए फुसफुसाया.

आरती हंसी और बोली,





"नहीं हो सकता."

"क्यों रानी?"

"क्यूंकि हमारे पास सिर्फ 2 घंटे हैं. वो दोनों आ जायेंगे. मैं चाहती हूँ हमारे स्पेशल मिलान में हमें कोई डिस्टर्ब करने वाला न हो."

नवाज़ ने हैरानी से पूछा,

"ऐसा कैसे होगा? क्या तेरा ससुर और पति कहीं बहार जा रहे हैं?"

"नहीं, हम जाने वाले हैं,"

आरती ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया.

"कहाँ?"

"खेत में... हमारे खेत में."

नवाज़ के होश उड़ गए.

"ये खेत कहाँ से बीच में आ गया?"

आरती ने उसके होंटो को छमाटे हुए कहा,





"मेरे राजा, वहां हमारे बीच कोई नहीं आएगा. मैंने वहां के लिए एक सॉलिड प्लान बनाया है."

"कौनसा प्लान?

वो सरप्राइज है

क्यों मुझे तड़पा रही है रानी?"

नवाज़ अब पूरी तरह उत्तेजित हो चूका था. नीता के बाद आरती जैसी हॉट औरत को पाने की बात सोच कर hi उसके शरीर में हलचल होने लगी थी.

आरती ने ऐडा से कहा, "इतनी हॉट मालकिन बेगम को पाना है तोह थोड़ा तड़पना तोह पड़ेगा न."

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ उसके चेहरे के पास आकर कहा,

"ऐसा न कर... एक बार छोड़ने दे न."

"बोलै न मैंने, मैं मेरे राजा को सब कुछ दूँगी. जो तुम चाहते हो वो सब करने दूँगी... पर अभी यहाँ नहीं."

"फिर कब?" नवाज़ ने बेताबी से पूछा.

"थोड़ा सबर करो. खेत में सब करने दूँगी. वहां हमारी सुहागरात होगी, और मुझे यकीन है मेरा राजा इसे यादगार बनाएगा."

नवाज़ ने उसकी कमर पकड़ कर कसके अपने करीब खिंचा और बोलै,

"बहुत यादगार बनाऊंगा... तू अगले दिन चलने के लायक नहीं रहेगी!"

आरती शर्मा गयी और उसके सीने पर हलके से मारते हुए बोली,





"धत बेशरम!"

छोड़ने भी दूंगी

हां दूंगी
 
नवाज़ की बेचैनी अब हद्द से बहार हो रही थी. आरती की बातों ने उसके अंदर की आग को और भड़काए दिया था. उसने आरती की कमर को और कास के पकड़ा और उसकी आँखों में झांकते हुए एक बार फिर वही सवाल किया जो उसके दिमाग में घूम रहा था.

"पक्का... करने भी देगी न?"

नवाज़ ने थोड़ी भरी आवाज़ में पूछा, जैसे उसे अभी भी यकीन न हो रहा हो की इतनी बड़ी मालकिन बेगम उसे ये मौका देगी.

आरती ने शरारत भरी मुस्कान के साथ नवाज़ की गर्दन में हाथ डाला और धीरे से उसके होंठ पर आपने होंठ रख के उसे किश करते हुई कहा ,





"हाँ मेरे राजा... सब करने दूँगी. जो जो तुमने सोचा है, वो सब... एक बार नहीं, baar-baar करने दूँगी."

नवाज़ का दिल तेज़ी से धड़कने लगा. उसने आरती के चेहरे को देखा जो शर्म और उत्तेजना से लाल हो रहा था.





"खेत में हमारी सुहागरात ऐसी होगी की तुम साड़ी ज़िन्दगी याद रखोगे,"

आरती ने वादा करते हुए कहा.

नवाज़ ने कुटिल मुस्कराहट के साथ जवाब दिया,

"ठीक है रानी, थोड़ा सबर और सही. पर याद रखना, जब वहां पहुंचेंगे तोह मैं कोई कसार नहीं छोडूंगा."

आरती ने उससे थोड़ा दूर hat-te हुए कहा,

"वही तोह मैं चाहती हूँ. अब बस थोड़ा इंतज़ार और..."

नवाज़ की बेताबी देखकर आरती के चेहरे पर एक मिठास भरी मुस्कान आ गयी. नवाज़ baar-baar वही पूछ रहा था की आखिर उन्हें खेत के लिए निकलना कब है.

"जाना कब है?"

नवाज़ ने उसके और करीब आते हुए पूछा.

आरती ने उसे थोड़ा पीछे धकेला और शरारत से बोली,

"वो सरप्राइज है बोलै न... इतने उतावले मत बनो मेरे राजा."

"फिर भी बता न... कब जाना है?"

नवाज़ ने हार नहीं मानी.

आरती थोड़ा शरमाते हुए, अपनी नज़रें झुका कर बोली,





"परसो."

नवाज़ की आँखें चमक उठी.

"पक्का न?"

"हाँ,"

आरती ने पक्का भरोसा दिलाया. फिर कुछ देर सोचने के बाद उसने नवाज़ की तरफ देखा, जैसे कोई ज़रूरी बात बतानी हो.





"वह कोई है हमारी प्लानिंग में हेल्प करने के लिए... हमारे वहां पहुँचने से पहले."

नवाज़ थोड़ा ठिठका.

"हाँ?

कौन?"

"हरिया."

आरती का चेहरा उतर गया.

"वो बुद्धा? पर वो किसी को बताएगा तोह नहीं?"

आरती को डर था की कही उनका ये सीक्रेट मिलान सबके सामने न आ जाये.

नाकज ने उसे तसल्ली देते हुए कहा,

"नहीं... वैसे भी उसे हम ज़्यादा कुछ बताएँगे नहीं. बस इतना की हमें वहां कुछ वक़्त सुकून से बिताना है."

आरती ने चैन की सांस ली और इधर नवाज़ ने कुटिलता से मुस्कुरा दिया, परसो का दिन उसकी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा दिन होने वाला था.

फिर आरती कहती है

चले अब

नवाज़ ने आरती की बातों को हंसी में उदा दिया और उसके चेहरे के और करीब आ गया. हॉल की हलकी रौशनी उन दोनों के चेहरों पर पद रही थी, जिससे माहौल और भी नशीला हो गया था.

आरती की सांसें तेज़ी से चल रही थी. उसने दबी हुई आवाज़ में कहा,

लेट हो रहा है

नवाज़ ने आरती की गर्दन पर अपनी साँसों की गर्मी छोड़ी, जिस से आरती के पुरे जिस्म में एक सिहरन दौड़ गयी. उसने अपनी आँखें कास कर बंद कर ली. हॉल का वह सन्नाटा उनकी तेज़ साँसों से भर गया था.

"नवाज़... आप सच में बहुत बेशरम हैं,.. मई चलने की बात कर रही हु और आप मुझे आपने से दूर नहीं होने दे रहे हो "

आरती ने दबी हुई आवाज़ में कहा, पर इस बार उसने अपना चेहरा नवाज़ की तरफ थोड़ा और झुका दिया.

नवाज़ ने उसके होठों के बेहद करीब आकर फुसफुसाया,

"बेशर्मी तोह अभी शुरू हुई है... अभी तोह पूरा केक बाकी है, और हमारी ये अधूरी दास्तान भी."

उसने आरती की कमर पर अपना हाथ फिराते हुए उसे और करीब खिंच liya.Nawaz की बातों में अब एक अलग hi अपनापन और शरारत थी.

केक रहने दीजिये आप

रहने कैसे दू ..आफ्टर आल मेरे बर्थडे का केक है

ठीक है साथ मई लेके चलते है ..रस्ते मई और घर मई जेक खाएंगे

ये हुई न बात ..मेरे बेगम वाली

बेगम हु तो बेगम वाली बात करुँगी न

. अआप भी न

ऐसा कहके अंदर किचन मई जेक केक का बॉक्स लेके आती है और उसमे केक पैक करती है

अब चले

आरती ने जब जाने की बात की, तोह नवाज़ ने उसे थोड़ा रोकते हुए कहा,

"हां चलेंगे ? पर तुम्हारी बातों से तोह मुझे भूक लग गयी है."

आरती खिलखिला कर हंस पड़ी,

"आप भी न! बातों से भला कहीं भूक लगती है क्या?"

नवाज़ ने उसकी आँखों में देखते हुए थोड़ा गंभीर होने का नाटक किया,

"मैं क्या झूट बोल रहा हूँ? सच में भूक लगी है."

आरती ने उसके भरोसेमंद चेहरे को देखा और नरम लहज़े में बोली,

"नहीं, आप मुझसे झूट नहीं बोलोगे, मुझे पता है."

तभी नवाज़ ने मौका देख कर अपनी फरमाइश रख दी,

"देखो, आज मेरा बर्थडे है... तोह मेरे लिए कुछ मेरी पसंद का बनाओ न."

आरती थोड़ा हैरान हुई और aas-paas देखते हुए बोली,

"यहाँ? इस वक़्त?"

नवाज़ ने मुस्कुराते हुए सर हिलाया, जैसे वो आरती के हाथ का स्वाद चखने के लिए बेताब हो. आरती को भी लगा की बर्थडे के दिन इतना तोह बनता है
 
नवाज़ की बात सुनकर आरती ने थोड़ा नखरे दिखते हुए पूछा,

"क्या खाना है आपको?"

नवाज़ ने उसकी आँखों में आँखें दाल कर शरारत से कहा,

"तू जानती है मुझे क्या पसंद है."

आरती ने उसके चेहरे की तरफ देखा और बड़े hi नाटकी अंदाज़ में, एक गहरी सांस लेते हुए बोली,

"Non-veg?"

नवाज़ का चेहरा खिल उठा,

"हाँ रानी! वही तोह असली मज़ा है."

लेकिन जैसे hi non-veg का नाम आया, आरती ने तुरंत अपने कान पकड़ लिए और साफ़ मन करते हुए बोली,

"अरे नहीं बाबा! मैं वेजीटेरियन हूँ, मई अग्रवाल हु.. मैं ये सब नहीं बनती! मेरे हाथ से तोह उम्मीद hi मत रखिये."

नवाज़ ने हर नहीं मानी. उसने एक कुटिल मुस्कान के साथ आरती को करीब खिंचा और धीरे से कहा, "पर ये अग्रवाल का घर नहीं है... यहाँ तोह सब चलता है न रानी? यहाँ बन सकता है, किसी को पता भी नहीं चलेगा."

आरती थोड़ा हिचकिचाई, उसे पता था की नवाज़ अपने बर्थडे पर अपनी man-pasand चीज़ खाने की ज़िद्द कर रहा है. उसने नवाज़ की बेचैनी देखि और फिर थोड़ा नरम पड़ते हुए सोचना शुरू किया.

आरती की हिचकिचाहट देख कर नवाज़ ने मौका संभाला और बड़े hi मासूम अंदाज़ में अपने पेट पर हाथ फेरते हुए कहा,

"रानी, बड़ी भूक लगी है."

आरती ने हैरत से उसकी तरफ देखा और मश्वरा दिया,

"रस्ते में कहीं होटल देख लेंगे न, नवाज़ जी."

नवाज़ ने तुरंत इंकार कर दिया,

"इस वक़्त हमारे रोड पर कोई होटल खुला नहीं मिलेगा. और वैसे भी, मैं चाहता हूँ की मेरी रानी आज अपने हाथों से कुछ अच्छा बनके खिलाये."

उसने आरती की आँखों में बड़े प्यार से देखा, जैसे कोई बचा ज़िद कर रहा हो.

आरती अब भी थोड़ा हिचकिचा रही थी,

"पर यह मेरा घर थोड़ी है? मुझे तोह यहाँ के किचन का नक़्शे तक का पता नहीं."

"मैं हूँ न रानी! हर चीज़ ढूंढने में तुम्हारी पूरी हेल्प करूँगा,"

नवाज़ ने उसका नरम हाथ थमा और उसे किचन की तरफ ले जाने लगा.

आरती उसकी इस दीवानगी पर मुस्कुरा दी और चलते हुए बोली,

"आप हेल्प काम और डिस्टर्ब ज़्यादा करोगे, मुझे अच्छे से पता है!"

किचन में पहुँचते hi नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ लाइट ों की. आरती ने चरों तरफ dekha—kitchen काफी बड़ा और मॉडर्न था.

नवाज़ ने उसके पीछे खड़े होकर उसकी कमर पर हाथ रखा और उसके कान के पास फुसफुसाया...

जाओ रानी और सुरु हो जाओ

तब पलट के नवाज़ को पलट के देखते है

अब बताओ, शुरुआत कहाँ से करनी है?.. आप बताने वाले थे न
 
किचन में पहुँचते hi नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ लाइट ों की. आरती ने चरों तरफ dekha—kitchen काफी बड़ा और मॉडर्न था.





नवाज़ ने उसके पीछे खड़े होकर उसकी कमर पर हाथ रखा और उसके कान के पास फुसफुसाया...





जाओ रानी और सुरु हो जाओ

तब पलट के नवाज़ को पलट के देखते है

अब बताओ, शुरुआत कहाँ से करनी है?.. आप बताने वाले थे न

ऐसे कह के किचन से बहार जाने लगी

आरती ने जब किचन से बहार जाने के लिए कदम बढ़ाये, तोह नवाज़ ने उसे हैरानी से देखा और पूछा,

"कहा जा रही हो अब?"

आरती ने chalte-chalte अपनी गर्दन घुमाई और बड़े नखरे से कहा,





"वाशरूम!"

ये सुनते hi नवाज़ के चेहरे पर वही शैतानी मुस्कराहट आ गयी. उसने लपक कर आरती का हाथ पकड़ लिया और बोलै,

"चलो, मैं भी चलता हूँ."

आरती वही रुक गयी और हैरानी से उसकी तरफ देखा,





"आप क्या मेरे साथ वह भी आएंगे क्या? हद्द है नवाज़ जी !"

नवाज़ ने आरती को अपनी तरफ थोड़ा और खिंचा और उसकी आँखों में बड़े हक़ से देखते हुए बोलै,

"फिर क्या हुआ रानी? बेगम तू है मेरी और मैं तेरा शौहर ... मेरे और तेरे बीच अब पर्दा कैसा? जहाँ तू जाएगी, वही तेरा ये दीवाना शोहर भी जायेगा."

आरती का चेहरा शर्मा कर बिलकुल लाल हो गया.





उसने धीरे से अपना हाथ नवाज़ के सीने पर रखा और उसे पीछे धकेलते हुए बोली,

"आप सच में पागल हो गए हैं. दो मिनट रुकिए यही, मैं अभी आयी."

तब नवाज़ ने एक बार फिर आरती का हाथ थोड़ा ज़ोर से पकड़ा और उसे अपनी तरफ खींच कर उसके कान के पास झुका. उसका लहज़ा अब थोड़ा शरारती और थोड़ा ज़िद्दी हो गया था.

नवाज़ ने फुसफुसाते हुए कहा,

"दो मिनट? बेगम, तुमसे दो सेकंड भी दूर रहना मुश्किल हो रहा है. और रही बात पागलपन की, तोह ये पागलपन सिर्फ तुम्हारे लिए hi है

आरती ने उसे हल्का सा धक्का दिया तब नवाज़ ने हस्ते हुए उसका हाथ छोड़ा पर jaate-jaate उसके कान में फुसफुसाया,

"जल्दी आना... वर्ण मैं सच में अंदर आ जाऊंगा."

तब आरती तेज़ी से वाशरूम की तरफ भागी और हस्ते हुई नवाज़ वही खड़ा हो गया, पर उसकी नज़रें आरती के peechhe-peechhe वाशरूम के दरवाज़े तक गयी. आरती के दिल में नवाज़ की उन बातों ने एक अजब सी बेचैनी और रोमांस भर दिया था.

फिर नवाज़ किचन के दरवाज़े पर खड़ा उसके आने का इंतज़ार करने लगा, उसकी नज़रें सिर्फ आरती के उस रास्ते पर तिकी thi.aur इधर आरती ने अंदर जाते hi दरवाज़ा बंद किया..

इधर नवाज़ के दिमाग में अब भी वही बात घूम रही थी जो उसने पहले की thi—ki उनके बीच अब कोई पर्दा नहीं होना चाहिए.

आरती जैसे hi वाशरूम के अंदर गयी, उसने तुरंत दरवाज़ा अंदर से लॉक किया, क्यूंकि उसे पता था की नवाज़ का कोई भरोसा नहीं, वो दरवाज़ा पुश करके अंदर आ सकता hai.Tabhi बहार से नवाज़ की हसने की आवाज़ आयी,

"आरती, कुण्डी लगाने से क्या होगा? दिल के दरवाज़े तोह कब के खुल चुके हैं!"

अंदर आरती मुस्कुरा रही थी,





उसका दिल नवाज़ की इस "शौहर वाली ज़िद" पर तेज़ी से धड़क रहा था. उसने जल्दी से अपना काम ख़तम करना सही समजा .. इसलिए वो आपने साड़ी उप्पर करके आपने चड्डी निचे करके कमोड पर बैठ गयी...
 
इधर बाथरूम के अंदर आरती कमोड पर बैठी थी साडी संभल के .. छड़ी उसने घुटनो के नीचे की हुई थी.. और उधर बहार नवाज़ की बेचैनी बाद रही थी . उससे रहा नहीं गया इसलिए वो बाथरूम के दरवाज़े पर खड़ा होक उसने बाथरूम का दरवाज़ा थपथपाया ..

तब आरती दरवाज़े की और देखने lagi.Nawaz के इस थपथपाहट ने आरती की धड़कनो को तेज़ कर दिया.

"हो गया क्या तेरा?"

आरती कुछ नहीं बोली पर उसे नवाज़ की बेचैनी दरवाज़े के उस पार से साफ़ महसूस हो रही थी.

नवाज़ ने दुबारा दस्तक देते हुए पूछा.

"हो गया क्या तेरा?"

आरती ने हलकी हंसी के साथ जवाब दिया,

"नहीं! साबरा नहीं है क्या आपको? दो मिनट तोह चैन लीजिये."

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कराहट के साथ दरवाज़े पर थोड़ा और ज़ोर दिया और बड़ी बेशर्मी से बोलै,

"आ जॉन क्या अंदर ?"

आरती के होश उड़द gaye.Aarti का दिल सीने से बहार आने को हो गया. उसने अपनी साड़ी को कास कर पकड़ा और घबराई हुई आवाज़ में बोली,

"नवाज़ जी! आप अंदर मत आइये!"

नवाज़ ने बहार से एक कुटिल मुस्कराहट के साथ जवाब दिया,

"मैं तोह नहीं आना चाहता था रानी... पर अब तू इतनी शिद्दत से कह रही है, तोह आ hi जाता हूँ."

आरती ने हड़बड़ाकर सफाई दी,

"मैंने आने को नहीं कहा... मैं तोह न आने को कह रही हूँ!"

नवाज़ ज़ोर से हसने लगा, उसकी हसी में वही पुराना ढीठपन था.

"मुझे अपने शब्दों के जाल में मत फंसा रानी. मैं जानता हूँ तू बहुत padhi-likhi है और मैं तेरे जितना पड़ा लिखा नहीं हूँ... पर इतना तोह जानता हूँ की तेरी 'न' में भी 'हाँ' छुपी है. तू मुझे अंदर hi बुला रही है."

आरती ने ठंडी सांस भरी, उसे पता था की नवाज़ को बातों में हराना नामुमकिन है. उसने थोड़ा नरम पड़ते हुए कहा,

"मैं नहीं बुला रही... मैं मानती हूँ मैं ज़्यादा padhi-likhi हूँ, पर आप मुझसे ज़्यादा होशियार हैं. आपको अच्छे से पता है की कौनसी चीज़ कब और कहाँ करनी है."

नवाज़ ने दरवाज़े पर थोड़ा और ज़ोर दिया और धीरे से फुसफुसाया,

वही तोह रानी... मुझे पता है की इस वक़्त मुझे कहाँ होना चाहिए. तेरी इस हालत में तेरा शौहर तेरे पास न हो, तोह ये तोह नाइंसाफी होगी न?"

आरती कमोड पर बैठी थरथरा रही थी. उसने देखा की नवाज़ के पुश करने से दरवाज़ा की कुण्डी धीरे धीरे से खुल रहा है.. उसने दरवाज़े की और देखा और हड़बड़ाते हुए बोली,

"नहीं नवाज़ जी! बिलकुल नहीं! मैं अभी आयी... आप बहार hi रुकिए."

लेकिन नवाज़ कहाँ मैंने वाला था. उसने धीरे से कुण्डी पर थोड़ा और प्रेशर डाला और फुसफुसाया,

"इतना डर क्यों रही हो रानी? शौहर हूँ तेरा... और वैसे भी, तूने hi तोह कहा था की मुझे सब पता है की कब और कहाँ क्या करना चाहिए. तोह मुझे लग रहा है की अभी मुझे तेरे पास होना चाहिए."

आरती ने अपनी साड़ी को और कास के पकड़ा और शर्म से अपनी आँखें मूँद ली. उसे पता था की नवाज़ आज उसकी हर एक 'न' को 'हाँ' में बदलने की ज़िद्द ठान कर आया है.

आरती कमोड पर बैठी थरथरा रही थी. उसने देखा की नवाज़ के पुश करने से दरवाज़ा की कुण्डी धीरे धीरे से खुल रही है.. अब उसे कुण्डी हिलने की आवाज़ आ रही थी . उसका दिल हल्केक कर हलक में आ गया.

"नवाज़ जी! क्या कर रहे हो?"

उसने घबराते हुए पूछा.

कुछ नहीं रानी ..आपने बेगम को देखने की इच्छा हो रही है

नहीं नवाज़ जी! रुकिए... मई आती हु बहार

नवाज़ कहाँ मैंने वाला था. उसने धीरे से कुण्डी पर थोड़ा ज़ोर दिया तो कुण्डी थोड़ा सरक गयी .. शायद पुराणी होने की वजह से या नवाज़ के 'शौहर वाले हक़' की ज़िद्द से वो सरक gayi.phir नवाज़ ने और थोड़ा जोर लगाया तो दरवाज़ा हल्का सा खुल गया.

नवाज़ ढीठपन से अंदर दाखिल हुआ.. आरती उसके सामने बैठी थी.. कमोड पर साडी ऊपर करके ..





साडी उसके घुटने तक थी.. और छड़ी घुटने के निचे ... जैसे hi दरवाज़ा खुला आरती ने हड़बड़ाकर अपनी साड़ी संभाली, पर उसका एक पेअर कमोड से थोड़ा बहार था और साड़ी की सिलवटें उसकी सुंदरता को और बढ़ा रही थी..

अब नवाज़ उसे देखने लगा .. उसने देखा की आरती वही कमोड पर बैठी है, उसकी नंगी जांघें साड़ी के बीच से चमक रही थी और उसका चेहरा शर्म और डर के मरे झुका हुआ था.

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ अंदर कदम रखा और दरवाज़ा पीछे से भांड कर दिया. आरती ने तुरंत अपनी साड़ी से खुद को ढकने की कोशिश की, पर नवाज़ की नज़रें उसके हर एक अंग को निहारता रही thi.Aarti की हालत देख कर उसके चेहरे पर एक बेहद कुटिल और ठरक भरी मुस्कान आ गयी.

आरती ने हड़बड़ाकर अपनी साड़ी से खुद को ढकने की कोशिश की, पर वो कमोड पर बैठी थी और उसकी चड्डी घुटनो तक निचे थी. उसका गोरा बदन और उसकी बेबस हालत देख कर नवाज़ की आँखों में आग लग गयी.

"मैंने कहा था न रानी... मेरे और तेरे बीच अब पर्दा कैसा?"

.. नवाज़ ने जैसे hi दरवाज़ा बंद किया वाशरूम का छोटा सा कमरा उनकी बढ़ती धड़कनों और भरी होती साँसों से भर गया. आरती कमोड पर बैठी थी, उसकी साड़ी घुटनो से ऊपर चढ़ी हुई थी, जिस से उसकी गोरी और बेदाग़ जांघें नवाज़ की भूकी नज़रों के सामने पूरी तरह नंगी थी.

नवाज़ की हरकतों ने आरती को हैरान कर दिया था. जैसे hi वो वाशरूम में घुसा, आरती ने हड़बड़ाकर खुद को संभाला और थोड़ा गुस्से और शर्म के mile-jule लहज़े में बोली:

"अरे! ऐसे वाशरूम में अंदर आते हैं क्या?"

नवाज़ ने दरवाज़ा पीछे से हल्का सा भिड़ाया और एक शरारत भरी मुस्कान के साथ आरती की तरफ कदम बढ़ाये. उसके चेहरे पर वही पुराणी 'ठरक' और दीवानापन साफ़ दिख रहा था.

"क्यों रानी? अपने राजा से शर्मा रही हो?"

नवाज़ ने धीरे से कहा, उसकी नज़र आरती के धरे हुए चेहरे और उसकी खूबसूरती पर तिकी थी.

आरती ने उसे बहार भेजने की कोशिश की

"नवाज़ जी, बहार jaiye...wo पति पत्नी अचानक आ गए तोह अनर्थ हो जायेगा! और अभी तोह किचन में खाना बनाने की बात हो रही थी न?"

नवाज़ ने कहा

"खाना तोह बनता रहेगा, पर पहले इस भूक का क्या करूँ जो तुम्हे देख कर लग रही है?"

आरती का दिल तेज़ी से धड़कने लगा. उसे पता था की नवाज़ को रोकना मुश्किल है, पर वो यहाँ इस तरह पकडे जाने से डर रही thi.use देखते हुई नवाज़ आरती के बिलकुल सामने निचे ज़मीन पर बैठ गया

आरती अब वाशरूम के कमोड पर बैठी थी और नवाज़ बिलकुल उसके पैरों के पास नीचे बैठा उसकी आँखों में आँखें दाल कर देख रहा था. माहौल में एक अजीब सी उत्तेजना और बेशर्मी घुल गयी थी.

नवाज़ ने उसका हाट आपने हातो मई लेते हुई उसके हाट को किश किया

तब आरती शरारत से कहती है

ये क्या किश करने की जगह है क्या

मई क्या किश कर रहा हु क्या

ये क्या है फिर

ये तो पप्पी है

पप्पी को hi तो इंग्लिश मई किश कहते है

अच्छा मुझे नहीं पता था

आप को सब पता है ..आप सिर्फ नखरे करते हो

नखरे से याद आया ..तेरा पति नहीं आया क्या कभी ऐसे peeche-peeche बाथरूम मई ?

आरती ने हलकी मुस्कान के साथ जवाब दिया,

"नहीं, अरविन्द ऐसा बिलकुल नहीं करता. वो बहुत सोफिस्टिकेटेड है, हर काम ढंग और तमीज से करता है."

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ पूछा,

"और मैं?"

आरती ने उसकी आँखों में आँखें दाल कर कहा,

"आप एक नंबर के गुंडे हो!"

नवाज़ ने करीब आते हुए उसका हाथ कास के पकड़ के अपनी और खिंचा

"और तुझे ये गुंडा hi पसंद आया?"

आह्ह्ह्ह

आरती थोड़ा शर्मायी और नज़रें झुका कर धीरे से बोली,

"अब पसंद आ hi गया है तोह क्या करूँ..."

नवाज़ ने उसे छेड़ते हुए फिर पूछा,

"अरविन्द नहीं आया क्या पसंद?"

आरती ने थोड़ा चिढ कर और नवाज़ के सीने पर हाथ रख कर उसे दूर धकेलते हुए कहा,

"हमारे दोनों के बीच उसको क्यों ले आ रहे हो? अभी हम हैं, और आप का बर्थडे है... बस."

नवाज़ ने देखा की आरती अब मूड में आ रही है. उसने उसके चेहरे को निहारा तब आरती ने उसे किचन की तरफ जाने का इशारा kiya.tab नवाज़ कहता है

दोनों साथ मई जाते है

आरती तो पहली थोड़ी झिझकी और फिर अपने घुटनो को पास लेट हुई थोड़ा गुस्सा दिखते हुई कहती है





"जाओ जी यहाँ से... मुझे सुसु करनी है."

नवाज़ ने वही baithe-baithe एक कुटिल मुस्कान दी और हिला तक नहीं. उसने आरती के नरम पैरों पर अपना हाथ रखा और बड़े ढीठपन से बोलै,

"तोह कर लो रानी... मैंने कब रोका है? मैं तोह बस अपने बर्थडे का तोहफा देखना चाहता हूँ."

आरती का चेहरा शर्म से बिलकुल लाल हो गया. उसने नवाज़ का कन्धा थपथपाया,

"आप सच में एक नंबर के गुंडे हो! आप को इतनी भी शर्म नहीं आती? जाइये बहार, मैं आ रही हूँ किचन में."

नवाज़ ने उसकी बातों को अनसुना कर दिया और उसके पास और सरक गया.

"आज कोई शर्म नहीं, कोई पर्दा नहीं. जो खेत में होने वाला है, उसका ट्रेलर तोह दिखाओ."

आरती ने गहरी सांस ली, उसे पता था की नवाज़ आज पूरी तरह से मूड में है और वो उसे इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है.

उसने वही baite-baite आरती की आँखों में आँखें दाल कर





बेशर्मी से कहा,

"मुझे देखना है तू सुसु कैसे करती है."

आरती ने हैरत और शर्म से अपनी आँखें पहाड़ी और उसे दूर धकेलते हुए बोली,





"वैसे hi... जैसे सब लेडीज करती हैं! इसमें देखने जैसा क्या है?"

"दिखा न,"

नवाज़ ने ज़िद्द करते हुए उसके घुटनो पर अपना हाथ रखा . हाट रखते hi आरती सीसल उठी

आह्ह्ह्हह... नवाज़ जी

और उसका हाट निकल दिया

नवाज़ का लहज़ा बिलकुल किसी भूके शिकारी जैसा था जो अपने शिकार को छोड़ने के मूड में नहीं था.

आरती ने अपने दोनों हाथों से अपनी इज़्ज़त ढकने की कोशिश की और चेहरा घूमते हुए बोली,





"नहीं दिखा सकती! नवाज़ जी, इतने बेशरम मत बनिए... यहाँ कोई नहीं है ये अच्छी बात है पर यहाँ कोई होता और कोई सुन लेगा तोह क्या सोचेगा?"

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ कहा,

"कोई नहीं है तो सुनेगा क्या ..... आज मेरा बर्थडे है, और मुझे अपनी रानी को हर रूप में देखना है. तू शर्मा मत, कर ले..."

आरती की सांसें तेज़ हो गयी थी. एक तरफ नवाज़ की ये नंगी ज़िद्द थी और दूसरी तरफ उसकी अपनी शर्म. उसे समझ नहीं आ रहा था की इस 'गुंडे' से पीछा कैसे छुड़ाए.

नवाज़ वहीँ ढीट बनकर बैठा रहा, उसकी नज़रों में एक अलग hi ज़िद थी. आरती ने फाई उसे धकेलते हुए कहा,

"जाओ न... ऐसे कैसे करूँ?"

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ जवाब दिया,

"मैं यहाँ बैठा रहूँगा तोह तुझे क्या प्रॉब्लम है? मैं तुझे देख थोड़ी रहा हूँ."

आरती ने हैरत से उसे देखा, "आप सामने बैठे हो, मैं कैसे सुसु करू?"

नवाज़ ने उसकी हालत का मज़ा लेते हुए कहा,

"तूने तोह सब धक् लिया है... अपनी साड़ी और पेटीकोट से. मैं कुछ देख नहीं पाउँगा, तू टेंशन मत ले और कर ले."

आरती का चेहरा शर्म से तमतमा गया. उसे समझ नहीं आ रहा था की नवाज़ इतना बेशरम कैसे हो सकता है. उसने अपनी साड़ी को थोड़ा और कसके पकड़ा.

"नवाज़ जी, आप समझ क्यों नहीं रहे? कोई सामने खड़ा हो तोह कैसे हो सकता है?"

आरती ने थोड़ा गिड़गिड़ाए हुए कहा.

नवाज़ ने अपनी बाहें थोड़े आगे की और कमोड से टिक गया,

"जब तक तू करेगी नहीं, मैं हिलूंगा नहीं. आज बर्थडे बॉय की हर ज़िद्द पूरी करनी पड़ेगी तुझे."

नवाज़ वही ज़मीन पर घुटनो के बल बैठ गया, ठीक आरती के पैरों के बीच. उसकी नज़रें आरती की उन रेशमी जाँघों पर जैम गयी, जो लाइट की रौशनी में मखमली चमक रही थी. आरती ने शर्म के मारे अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया और अपनी साड़ी को नीचे खींचने की नाकाम कोशिश की.

"नवाज़ जी... क्या देख रहे हैं आप? जाइये यहाँ से,"

आरती ने कांपती आवाज़ में कहा.

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ अपना हाथ धीरे से उसकी पेअर पर rakha.matlab घुटने पर .. आरती के शरीर में बिजली सी दौड़ गयी और उसके मुंह से एक हलकी सी सिसकी निकली. नवाज़ ने महसूस किया की आरती का बदन थरथरा रहा है.

उसने आरती की आँखों में देखते हुए धीरे से फुसफुसाया,

"रानी... आज तक किसी ने तुझे इतना करीब से नहीं देखा होगा, है न?"

आरती कुछ बोल न सकीय, बस उसकी पकड़ को अपनी घुटनो पर महसूस करती रही. नवाज़ का स्पर्श खुरदुरा था पर उसमे एक अलग hi जूनून था जो आरती को अंदर तक झकझोर रहा था. नवाज़ अब dheere-dheere अपने हाथों को ऊपर की तरफ सरकने लगा, जिस से आरती की सांसें और भी तेज़ हो गयी..
 
नवाज़ आरती के बिलकुल सामने घुटनो के बल बैठ कर उसके नरम घुटनो पर अपना हाथ रखे हुआ था ..इस वजह से आरती की सांसें अटक गयी थी . उसने नवाज़ की आँखों में देखा जहाँ सिर्फ और सिर्फ उसके लिए ठरक और दीवानगी थी.

"आप... आप बहुत बेशरम हैं नवाज़ जी. मुझे मेरा काम तोह ख़तम करने दीजिये."

नवाज़ ने उसका हाथ पकड़ कर अपने लबों से लगा लिया और बोलै,

"तोह कर लो रानी... मैं तोह बस देखने आया हूँ की मेरी मालकिन बेगम कितनी 'सोफिस्टिकेटेड' तरीके से मुट्ठी है."

आरती ने शर्मा कर अपनी आँखें बंद कर ली.





उसे पता था की नवाज़ आज उसकी हर एक मर्यादा को तोड़ने पर आमादा है.

आरती शर्म से बिलकुल लाल हो गयी, उसने अपने चेहरे को हाथों से छुपा लिया.

"आप... आप बहुत बेशरम हैं! जाइये यहाँ से, मुझे... मुझे सुसु करनी है."

ऐसा कह के आपने घुटनो पर का उसका हाट निकल देती है .. पर नवाज़ के ढीठपन की अब कोई हद्द नहीं थी. उसने फिर से हाट रखा ..पर इस बार घुटनो पर नहीं बल्कि उसके झांग पर

जैसे hi उसने आरती की नंगी गोरी जांघ पर अपना खुरदुरा हाथ रखा, आरती के पुरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ गयी.

"आह्ह्ह्हह... नवाज़ जी!"

आरती ज़ोर से सिसक उठी. उसने अपनी दोनों आँखें मूँद ली और उसका बदन थरथराने लगा. ये पहली बार था की किसी ने उसकी जाँघों को इस तरह से छुवा था. अरविन्द सोफिस्टिकेटेड था, उसने कभी ऐसी बेबाकी नहीं दिखाई थी, पर नवाज़... वो तोह एक भूके शिकारी की तरह उसके नरम बदन को महसूस कर रहा था.

उन्हें थोड़ा सहलाते हुए बोलै,

"तोह कर लो न रानी. मैं तोह बस अपने बर्थडे का नज़ारा देखने आया हूँ. मुझे देखना है मेरी मालकिन बेगम ये सब कैसे करती है."

नवाज़ ने अपनी उँगलियाँ उसकी जांघ पर dheere-dheere ऊपर की तरफ सरकायी. आरती ने हड़बड़ाकर उसकी कलाई पकड़ ली, पर उसमे नवाज़ को रोकने की ताक़त नहीं थी.

"कितनी नरम है रे तू रानी... बिलकुल मक्खन जैसी,"

नवाज़ ने गहरी सांस लेते हुए फुसफुसाया. उसका चेहरा आरती के घुटनो के पास था और उसकी गरम सांसें आरती की चमड़ी पर महसूस हो रही थी.

आरती ने भांपते हुए कहा,

"नवाज़ जी... छोड़िये... न ... ."

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ उसकी आँखों में देखा और बोलै,

"आज तेरा शौहर तुझे पहली बार पूरा महसूस कर रहा है. डरने की क्या बात है?"

आरती की सांसें तेज़ हो गयी. एक तरफ नवाज़ का ये नंगा पागलपन था और दूसरी तरफ उसकी अपनी शिद्दत. उसने नवाज़ की आँखों में देखा, जहाँ सिर्फ और सिर्फ उसके लिए दीवानगी थी.

"आप... आप सच में गुंडे हो,"

आरती ने भांपते हुए कहा.

नवाज़ ने उसकी चीन पकड़ कर ऊपर उठायी और बोलै,

"सिर्फ तुम्हारा गुंडा! अब दिखाओ न रानी... शर्माओ मत."

और नवाज़ की कातिल नज़रें सीधा उस पर तिकी हैं आरती कमोड पर बैठी थरथरा रही थी, उसकी सफ़ेद चड्डी उसके घुटनो के पास फांसी हुई थी, जिसने उसकी पूरी गोरी जाँघों को नवाज़ के सामने बेपर्दा कर दिया था.

नवाज़ ने जब अपना खुरदुरा हाथ उसकी नरम जांघ पर रखा और dheere-dheere ऊपर की तरफ सरकने लगा, तोह आरती की आँखें पहात गयी.





उसका हाथ अब उसकी चड्डी के किनारों को छूटे हुए और ऊपर की तरफ बढ़ रहा एक दम उसकी नाज़ुक जगह के करीब पहुँचने वाला था.

"आआह्ह्ह... नवाज़ जी... ये क्या... रुकिए..."

आरती ने सिसकते हुए नवाज़ की कलाई पकड़नी चाही, पर उसके जिस्म में जैसे जान hi नहीं बची थी.

नवाज़ ने एक शैतानी मुस्कान के साथ उसकी आँखों में देखा.

"क्यों रुकिए रानी? आज तोह बर्थडे बॉय को पूरा हक़ मिलना चाहिए न? देखने तोह दे तेरी ये 'सोफिस्टिकेटेड' शर्म कहाँ तक जाती है."

नवाज़ का हाथ अब बिलकुल उसकी जांघों के जोड़ तक पहुँच गया था. आरती ने दर और उत्तेजना के मरे अपना सर पीछे कुमोद से टिका लिया ..आँखे बंद करते हुई





और gehri-gehri सांसें लेने लगी. उसका पूरा बदन पसीने से तर हो रहा था.

नवाज़ ने वही बैठकर आरती की आँखों में देखा, उसकी उँगलियाँ अब आरती की नंगी जांघ के बिलकुल ऊपर वाले हिस्से पर ठहर गयी थी. आरती की चड्डी घुटनो के पास फांसी हुई थी, जिसकी वजह से उसकी दोनों जांघें थोड़ी खुली हुई और बेपर्दा थी.

नवाज़ ने तुरंत आगे बढ़ने की जगह वही रुक कर अपनी उँगलियों से आरती की मक्खन जैसी चमड़ी पर gol-gol घूमना शुरू किया.

आरती का दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था की उसे लगा वो अभी बेहोश हो जाएगी. उसने नवाज़ के बालों में अपनी उँगलियाँ फसा दी और बिना चाहते हुए भी उसके इस स्पर्श का मज़ा लेने लगी.

"नवाज़ जी... रुकिए मत... या तोह... या तोह छोर दीजिये,"

आरती ने बेहाली में कहा, उसका पूरा बदन नवाज़ के इस थोड़े से स्पर्श से काँप रहा था.

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी,

"इतनी जल्दी क्या है रानी? अभी तोह सिर्फ छुआ है... अभी तोह तुझे तड़पना बाकी है."

नवाज़ ने अपनी उँगलियाँ थोड़ा और अंदर की तरफ सरकायी, वह जहाँ आरती की जांघें मिलती हैं. वो अपनी उँगलियों को आरती की नाज़ुक चमड़ी पर बहुत dheere-dheere फिरा रहा था, कभी ऊपर तोह कभी नीचे. आरती की सांसें इतनी तेज़ हो गयी थी की उसकी छाती तेज़ी से upar-neeche हो रही थी.

"आआह्ह्ह... नवाज़... प्लीज..."

आरती ने अपनी दोनों आँखें कसके मूँद ली और कमोड के किनारों को अपने हाथों से कसके पकड़ लिया.

नवाज़ ने अपना चेहरा आरती के घुटनो के पास लाया और उसकी गोरी जांघ पर चुम लिया

"बता न रानी... कैसा लग रहा है? अरविन्द ने कभी ऐसे तड़पाया है तुझे?"

आरती ने सिर्फ अपना सर न में हिलाया, उससे बोलै नहीं जा रहा था. नवाज़ की उँगलियाँ अब उसकी चड्डी के बिलकुल किनारे तक पहुँच गयी थी, पर वो उसे हटा नहीं रहा था, बस वही किनारे पर अपनी उँगलियाँ फिरा कर आरती को पागल कर रहा था.

नवाज़ ने जब देखा की आरती उसके थोड़े से स्पर्श से hi पागल हो रही है, तोह उसने अपनी शैतानी मुस्कान और गहरी कर दी. उसने आरती की दोनों जाँघों पर अपने हाथ रखे और dheere-dheere उन्हें थोड़ा और फैलाया.

आरती की सांसें अटक गयी थी. उसने देखा की नवाज़ ने अपने दोनों हाथों से उसकी सफ़ेद चड्डी के किनारों को पकड़ा जो पहले से hi घुटनो के पास फांसी हुई थी. नवाज़ ने आरती की आँखों में देखते हुए, बड़े hi आराम से और ढीठपन से, उस चड्डी को नीचे की तरफ और खींचा.

"आआह्ह्ह... नवाज़ जी... ये क्या..."

आरती ने एक लम्बी और गर्म सिसकी ली. उसके पेअर थरथरा रहे थे और उसने शर्म के मारे अपना चेहरा हाथों से छुपा लिया.

नवाज़ ने उसकी चड्डी को पूरी तरह से उसके पैरों से निकाल दिया और उसे आपने जेब मई दाल दिया

अब आरती कमोड पर बिलकुल बेपर्दा बैठी थी, .. बिलकुल नहीं कह सकते थोड़ी सरे थी वह .. हां उसकी नंगी गोरी जांघें नवाज़ की नंगी नज़रों के सामने थी... पर छूट अभी तक बेपर्दा नहीं थी ..उसे आरती के सरे ने अभी तक ढाका हुआ तह ..

नवाज़ वही ज़मीन पर घुटनो के बल बैठा आरती की खूबसूरती को निहार रहा था. उसने अपना हाथ फिर से आरती की जांघ के बिलकुल ऊपर वाले हिस्से पर रखा, जहाँ की चमड़ी मक्खन से भी नरम थी.

"देख रानी... अब हमारे बीच कोई पर्दा नहीं रहा,"

नवाज़ ने फुसफुसाते हुए कहा और अपना चेहरा उसकी नंगी जाँघों के करीब लाया.

आरती ने भांपते हुए अपना सर पीछे कमोड से टिका दिया.

"आप... आप बहुत ज़ालिम हो... कितना तड़पाओगे मुझे?"

नवाज़ ने उसकी आँखों में देखा और बोलै,

"अभी तोह तड़पना शुरू किया है रानी... अभी तोह असली बर्थडे गिफ्ट बाकी है."
 
नवाज़ ने जब देखा की आरती पूरी तरह बेपर्दा और उसके सामने बेबस बैठी है, तोह उसकी आँखों में हवस और जूनून और बढ़ गया. उसने आरती की दोनों नंगी और गोरी जाँघों को अपने मज़बूत हाथों से पकड़ा और उन्हें थोड़ा और फैलाया.

आरती की सांसें अटक गयी थी. उसने देखा की नवाज़ का चेहरा अब उसकी नंगी जांघ के बिलकुल करीब आ रहा है. नवाज़ ने अपने गरम और खुरदुरे लबों को आरती की मखमली जांघ पर रख दिए.





"आआह्ह्ह... नवाज़ जी!"

आरती ज़ोर से सिसक उठी और उसने नवाज़ के बालों को अपने हाथों से कसके पकड़ लिया.

नवाज़ ने वहां एक गहरा और गर्म किश किया.





उसने सिर्फ किश hi नहीं किया, बल्कि आरती की नरम चमड़ी को अपने दांतों से हल्का सा भींचा भी. आरती का पूरा बदन एक दम से अकड़ गया और उसकी सांसें इतनी तेज़ हो गयी की उसकी छाती तेज़ी से upar-neeche होने लगी.

नवाज़ ने रुकने का नाम नहीं लिया. उसने अपने होंठो को आरती की जांघ पर थोड़ा और ऊपर सरकाया, बिलकुल उसकी सबसे नाज़ुक जगह के किनारे tak.uske छूट तक





वो वहां baar-baar किश कर रहा था, कभी जीभ फेर रहा था तोह कभी अपने होंठो से वहां की गर्मी को महसूस कर रहा था.

"कितनी मीठी है रे तू रानी... बिलकुल शहद जैसी,"

नवाज़ ने भांपते हुए फुसफुसाया, उसका मुँह अभी भी आरती की जाँघों के बीच था.

आरती ने अपनी दोनों आँखें कसके मूँद ली और उसका चेहरा शर्म और उत्तेजना से तमतमा गया.

"नवाज़ जी ... प्लीज... बस कीजिये... मैं... मैं पागल हो जाउंगी,"

उसने रट हुए लहज़े में कहा, पर उसकी आवाज़ में एक अजीब सी चाहत थी.

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ ऊपर देखा और बोलै,

"अभी तोह पूरी रात बाकी है रानी... खेत में तोह मैं तुझे चलने के लायक नहीं छोडूंगा."

नवाज़ की ये बात सुनते hi आरती के पूरे जिस्म में एक थरथराहट सी दौड़ गयी. उसका चेहरा शर्म और उत्तेजना से तमतमा रहा था..

"नवाज़ जी... ऐसा मत बोलिये... डर लग रहा है अब तोह,"

आरती ने भांपते हुए कहा, पर उसकी आँखों में डर से ज़्यादा नवाज़ के लिए एक जुनूनी चाहत थी.

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी और अपनी उँगलियों से आरती की मक्खन जैसी जाँघों पर हलकी खरोच मारी.

"डर कैसा रानी? आज तोह तेरा राजा तुझे वो सुख देगा जो तूने ख्वाबों में भी नहीं सोचा होगा."

आरती ने अपनी दोनों आँखें कसके मूँद ली. नवाज़ ने अब और इंतज़ार नहीं किया. उसने आरती की दोनों जाँघों को कसके पकड़ा और अपना चेहरा उनके बीच की गर्मी में दाल दिया. और उसके झांग पर हाट चलने लगा ..





आरती ने ज़ोर से सिसकी ली और नवाज़ के बालों को अपने हाथों से भींच लिया.

"आआआहहहहह... नवाज़... प्लीज... जो करना है जल्दी करो... मैं मर जाउंगी!"

आरती ने तड़पते हुए अपना सर पीछे कमोड से टिका दिया.

नवाज़ ने वहां एक गहरा और गर्म चुम्बन किया, और फिर अपनी जीभ से वहां की हर एक इंच को महसूस करने लगा. आरती का पूरा बदन एक कमान की तरह अकड़ गया और उसकी सांसें इतनी तेज़ हो गयी की वाशरूम का सन्नाटा उनकी भरी साँसों से गूंजने लगा.

"अभी तोह सिर्फ ट्रेलर है रानी... असली सुहागरात तोह खेत में होगी,"

नवाज़ ने उसके कान में फुसफुसाया और उसके लबों को अपने लबों में भर लिया

फिर वो नीचे आया और आरती को देखने लगा .. .नवाज़ ने जब देखा की आरती पूरी तरह उसके काबू में है, तोह उसने अपने ढीठपन की साड़ी हदें पार कर दी. उसने आरती की नंगी और गोरी जाँघों को अपने मज़बूत हाथों से पकड़ा और उसके दोनों पैरों को dheere-dheere ऊपर उठाने लगा.

आरती की सांसें अटक गयी. उसने कमोड के किनारों को एक हाट से कसके पकड़ लिया क्यूंकि उसके पेअर अब हवा में थोड़ा ऊपर थे और दूसरे हाट से आपने छूट पर साडी दबाने लगी ..क्यों की उसे पता पेअर ऊपर उतने से उसकी छूट नवाज़ के आँखों के आने बेपर्दा हो सकती है

अब नवाज़ बिलकुल उसके बीच में बैठा था.

"नवाज़ जी... ये क्या... रुकिए... मैं गिर जाउंगी!"

आरती ने हड़बड़ाकर कहा, पर उसकी आवाज़ में डर से ज़्यादा उत्तेजना थी.

नवाज़ ने उसके दोनों पैरों को अपने कन्धों पर टिका लिया. अब आरती पूरी तरह से बेपर्दा और खुली हुई नवाज़ की नज़रों के सामने थी. नवाज़ ने एक शैतानी मुस्कान के साथ उसकी नंगी और मखमली जाँघों को ऊपर से नीचे तक निहारा.

"गिरने नहीं दूंगा रानी... आज तोह तुझे जन्नत की सैर करवाऊंगा,"

नवाज़ ने भांपते हुए फुसफुसाया.

नवाज़ ने जब देखा की आरती शर्म के मारे अपनी साड़ी से अपनी छूट को ढकने की कोशिश कर रही है, तोह उसने एक गहरी और ठरक भरी हंसी दी. आरती कमोड पर बैठी थरथरा रही थी, उसके दोनों गोर पेअर नवाज़ के कन्धों पर ठीके थे, और वो अपने एक हाथ से साड़ी को नीचे दबा रही थी ताकि नवाज़ की नज़रों से बच सके.

"साड़ी क्यों दबा रही है रानी? जब पूरा जिस्म मेरा होने वाला है, तोह ये पर्दा कैसा?"

नवाज़ ने उसकी जाँघों पर अपनी पकड़ और मज़बूत कर दी.

आरती ने शर्म से अपनी आँखें मूँद ली और सिसकते हुए बोली,

"नहीं नवाज़ जी... प्लीज... ऐसे मत देखिये... मुझे शर्म आ रही है."

नवाज़ ने उसकी बात अनसुनी कर दी. उसने आरती के उस हाथ को, जिस से वो साड़ी दबा रही थी, बड़े hi आराम से पकड़ा और उसे ऊपर उठा दिया. कुछ पल के लिए पर आरती ने तुरंत वह साड़ी दबा दी

कुछ पल के लिए hi सही आरती पूरी तरह से बेपर्दा और नंगी नवाज़ की नज़रों के सामने थी. उसके जिस्म की और छूट की सफेदी देख कर नवाज़ की सांसें भरी हो गयी.

क्यों छुपा रही है

ऐसा बोल के उसका साड़ी पर का हाट हटाने लगी

नवाज़ ने जब आरती की छूट कुछ पल के लिए देखि थी तब उसे उसके छूट पर घने बाल दिखे थे ..

उसने एक कुटिल मुस्कान के साथ आरती की तरफ देखा और थोड़ा छेड़ते हुए बोलै,

"बहुत बाल हैं रानी..."

आरती का चेहरा शर्म से बिलकुल लाल टमाटर हो गया. उसने हड़बड़ाकर अपनी साड़ी से खुद को ढकने की नाकाम कोशिश की और नवाज़ की आँखों में आँखें दाल कर थोड़ा हकलाते हुए बोली,

"निकल दूँगी... सुहागरात से पहले सब साफ़ कर दूँगी."

नवाज़ ने एक गहरी सांस ली और उसकी नंगी जांघ पर अपना हाथ फेरते हुए फुसफुसाया,

"ज़रुरत नहीं है रानी... ये बाल तोह तेरी खूबसूरती को और बढ़ा रहे हैं. मुझे तोह तू हर रूप में पसंद है."

आरती ने शर्मा कर अपनी आँखें मूँद ली. नवाज़ ने अब और देर नहीं की, उसने आरती के दोनों पैरों को अपने कन्धों पर और कसके टिकाया और अपना चेहरा उन बालों के बीच की गर्मी में दाल diya...saree के उप्पर से

"आआआहहहहह... नवाज़ जी!"

आरती ज़ोर से सिसक उठी और उसने नवाज़ के बालों को अपने हाथों से भींच liya.tab थोड़ा उप्पर होक उसके नवल पाई आ गया ..

नवाज़ ने वहां अपनी गरम सांसें छोड़ी और अपनी जीभ से आरती की नरम चमड़ी को महसूस करने लगा. आरती का पूरा जिस्म एक कमान की तरह अकड़ गया और वो बेहाल होकर अपना सर पीछे दीवार से टिकने लगी.

"कितनी गर्म है रे तू रानी... बिलकुल आग जैसी,"

नवाज़ ने भांपते हुए कहा और वहां एक गहरा चुम्बन लिया

"आआआहहहहह... नवाज़... प्लीज..."

आरती ज़ोर से चिल्लाई और उसने नवाज़ के बालों को कसके पकड़ लिया.

उसने अपने दोनों हाथों से आरती की जाँघों को थोड़ा और फैलाया और अपना चेहरा उसकी सबसे नाज़ुक जगह के बिलकुल करीब ले गया. तो आरती वह साडी दबाने लगी

आरती का शरीर थरथरा रहा था, उसने अपनी दोनों आँखें कसके मूँद ली और दीवार से अपना सर टिका कर gehri-gehri सिसकियाँ लेने लगी.

"आआह्ह्ह... नवाज़... प्लीज... इतना मत तड़पाओ..." आरती ने रट हुए लहज़े में कहा, उसका पूरा बदन पसीने से तर हो गया था.

नवाज़ ने वही रुके बिना आरती की जांघ के बिलकुल ऊपर वाले हिस्से पर एक गहरा और गर्म किश किया. उसने अपनी जीभ से वहां की गर्मी को महसूस किया, जिस से आरती का पूरा जिस्म एक दम से अकड़ गया.

नवाज़ ने जब देखा की आरती के गोर पेअर उसके कन्धों पर ठीके हैं और वो पूरी तरह उसके सामने खुली हुई है, तोह उसकी शैतानी फितरत और जाग गयी. उसने फ़ौरन कुछ करने की जगह आरती को और ज़्यादा तड़पने का फैसला किया.

नवाज़ ने अपने दोनों हाथों से आरती की नरम और गोरी जाँघों को कसके पकड़ा और उन्हें थोड़ा और बहार की तरफ khincha.aur आपने लुंड उसके छूट से सत्ता दिया ..





उनके लुंड और छूट के बीच सिर्फ साडी थी .. छड़ी तो कब की निकल गयी थी .. आरती की सांसें इतनी तेज़ हो गयी थी की उसकी छाती तेज़ी से upar-neeche हो रही थी.

"नवाज़... प्लीज... अब... अब और नहीं..."

आरती ने रट हुए लहज़े में कहा, उसकी आँखें बंद थी और सर पीछे दीवार से टिका था.

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ अपना चेहरा उसकी दोनों जाँघों के बिलकुल बीच में लाया. उसने वहां पर अपनी गरम सांसें छोड़ी, जिस से आरती के पूरे जिस्म में एक झनझनाहट सी दौड़ गयी. नवाज़ ने अब अपनी जीभ से आरती की जांघ के बिलकुल ऊपर वाले हिस्से पर, जहाँ की चमड़ी मक्खन जैसी थी, वहां एक लम्बी लकीर खींची.

"आआआहहहहह... नवाज़ जी!"

आरती ज़ोर से चिल्ला उठी और उसने कमोड के किनारों को इतनी ज़ोर से पकड़ा की उसकी उँगलियाँ सफ़ेद पद गयी.

नवाज़ वही नहीं रुका. उसने अपनी उँगलियों से आरती की सरे के नीचे से उसके छूट के किनारों को बहुत धीरे से छुवा, बस इतना की आरती को एहसास हो जाये.

नवाज़ ने जब आरती की साड़ी के नीचे से उसकी सबसे नाज़ुक जगह उसकी छूट को अपनी उँगलियों से हल्का सा छुआ, तोह आरती के पूरे जिस्म में एक बिजली सी दौड़ गयी. वो तड़प कर रह गयी, उसका शरीर कमोड पर hi ऐंठने लगा.

"आआअह्ह्ह... नवाज़ जी!"

आरती के मुंह से एक लम्बी और गरम सिसकी निकली. उसने अपने दोनों हाथ नवाज़ के कन्धों पर कसके जमा लिए.

नवाज़ ने अपनी उँगलियों को वहां से हटाया नहीं, बल्कि उन्हें बहुत dheere-dheere गोल घूमने लगा. वो उसे अंदर नहीं दाल रहा था, बस बहार की नरम चमड़ी और उन घने बालों के बीच अपनी उँगलियों से खेल रहा था. आरती की सांसें इतनी तेज़ हो गयी थी की उसका सीना तेज़ी से upar-neeche हो रहा था.

"कैसा लग रहा है रानी?"

नवाज़ ने अपनी भरी आवाज़ में फुसफुसाया. उसका चेहरा आरती की जाँघों के इतने करीब था की उसकी गरम सांसें सीधा आरती की नाज़ुक जगह पर लग रही थी.

आरती ने अपनी आँखें कसके मूँद ली और रट हुए लहज़े में बोली,

"नवाज़... प्लीज... ऐसे मत तड़पाओ... मैं... मैं पागल हो जाउंगी. जो करना है... जल्दी करो."

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान दी और अपनी एक ऊँगली को थोड़ा और आगे सरकाया, पर अंदर नहीं डाला .. आरती पूरी तरह से गीली हो चुकी थी. आरती ने ज़ोर से झटका खाया और अपना सर पीछे दीवार से टिका दिया. उसका पूरा बदन पसीने से tar-ba-tar था और वो बेहाल होकर नवाज़ के बालों को खींचने लगी.

"अभी तोह सिर्फ शुरुआत है रानी... खेत में तोह मैं तुझे दिखाऊंगा की तड़पना किसे कहते हैं,"

नवाज़ ने उसके घुटने पर एक गहरा किश करते हुए कहा.

उसके उंगली अभी भी उसके छूट के पास थी ..बस अंदर दाल नहीं रहा था ..वो बस उसे उस मोड़ तक ले जाना चाहता था जहाँ आरती खुद भीक मांगने लगे.

"बता न रानी... कैसा लग रहा है? क्या अरविन्द ने कभी तुझे इस तरह पागल किया है?"

नवाज़ ने भांपते हुए फुसफुसाया, उसका मुँह अभी भी वही निचे था.

आरती का पूरा बदन पसीने से tar-ba-tar था. उसने तड़पते हुए अपना सर dayein-baayein हिलाया और सिसकते हुए बोली,

"नहीं... कभी नहीं... नवाज़... मैं मर जाउंगी... प्लीज... जो करना है करो... पर ऐसे मत तड़पाओ..."

नवाज़ ने एक विजयी मुस्कान दी और आरती की दोनों जाँघों पर एक गहरा निशान छोड़ते हुए वहां अपने दांत गड़ाए
 
नवाज़ ने जब आरती की दोनों गोरी और मखमली जाँघों पर अपने दांत गड़ाए, तोह आरती के मुंह से एक दर्द और मज़े भरी चीख निकल गयी. उसका पूरा बदन कमान की तरह अकड़ गया और उसने नवाज़ के बालों को और भी ज़ोर से भींच लिया.

नवाज़ ने वही रुक कर अपनी शैतानी नज़रें ऊपर उठायी और आरती की बेहाल हालत देख कर एक विजयी मुस्कान दी. उसकी ऊँगली अब भी आरती की गीली हो चुकी नाज़ुक जगह के बिलकुल किनारे पर ठहरी हुई थी, बस अंदर नहीं जा रही थी.

"पर तू तोह सब खेत में करना चाहती है न रानी?"

नवाज़ ने भांपते हुए फुसफुसाया, उसका लहज़ा अब और भी ज़्यादा ढीट और शरारती हो गया था.

आरती की सांसें इतनी तेज़ थी की वो ठीक से बोल भी नहीं पा रही थी. उसका पूरा जिस्म पसीने से तर था और उसकी जांघें थरथरा रही थी. उसने तड़पते हुए अपनी आँखें खोली, जो उत्तेजना से लाल हो चुकी थी.

"नवाज़... प्लीज... अब... अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा..."

आरती ने रट हुए लहज़े में भीक मांगते हुए कहा.

"खेत... खेत तक का इंतज़ार... मैं... मैं मर जाउंगी... प्लीज..."

नवाज़ ने जब आरती की दोनों गोरी जाँघों के बीच से अपना चेहरा ऊपर उठाया, तोह उसकी आँखों में एक अजीब सी शैतानी चमक थी. आरती बेहाल थी, उसका पूरा बदन पसीने से tar-ba-tar हो चूका था और उसकी नज़रें नवाज़ से रेहम की भीक मांग रही थी.

फिर उसकी नरम चमड़ी को सहलाते हुए बोलै,





पर रानी... मैं तोह मेरी बेगम के प्लान के हिसाब से hi जाऊंगा. सुहागरात तोह 'स्पेशल' hi होगी, और वो भी तेरे खेत में hi होगी!""

नवाज़ ने उसके नरम गाल को अपने खुरदुरे हाथ से थपथपाया .. ार्र्टी ने तड़पते हुए नवाज़ की कलाई पकड़ ली, उसकी सांसें अभी भी उखड़ी हुई थी.

"नवाज़ जी... इतना मत तड़पाओ... मैं... मैं कैसे रुकूंगी परसो तक?"

नवाज़ ने हस्ते हुए उसके पैरों को अपने कन्धों से नीचे उतरा और उसे कमोड से उठा कर अपनी बाहों में भर लिया.

उसने आरती के कान के पास फुसफुसाते हुए कहा,

"ये तड़प hi तोह मज़ा देगी रानी. जितना आज तड़पेगी, परसो खेत में उतना hi खुल कर बरसेगी. मैं तुझे इतना प्यासा रखूँगा की परसो तू खुद मेरे सामने सब कुछ निछावर कर देगी."

आरती ने अपना सर नवाज़ के सीने पर टिका दिया, उसके दिल की धड़कन नवाज़ के कानो में साफ़ गूँज रही थी.

ये सही नहीं है नवाज़ जी .. इतना तड़पना

अरे रानी, अभी तोह तूने देखा hi क्या है? मैंने कहा था न, बर्थडे बॉय तुझे तड़पाएगा. अगर अभी सब दे दिया, तोह खेत में क्या मज़ा आएगा?"

नवाज़ ने अपनी ऊँगली से वहां एक हल्का सा दबाव बनाया, पर फिर से पीछे हैट गया. आरती का जिस्म एक दम से झटका खाने लगा, वो बिलकुल उस मोड़ पर थी जहाँ वो अपना होश खो देने वाली थी.

"नवाज़! आप ... आप बहुत ज़ालिम हो!"

आरती ने सिसकते हुए अपना सर दीवार पर पटका.

नवाज़ ने एक गहरी सांस ली और अपना चेहरा उसकी जाँघों के बीच की गर्मी में दाल दिया.

"ज़ालिम हूँ, तभी तोह तुझे इतना पसंद हूँ रानी. पर याद रखना, ये तड़प तुझे परसो खेत में जन्नत दिखाएगी ..

ऐसा बोलते हुई उसने आरती को कमोड से उठाया.. उसकी चड्डी वो पहले से hi निकल चूका था .. नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ आरती की गोरी और भरी हुई गांडपर अपना मज़बूत हाथ रखा और उसे ज़ोर से भींच लिया.





"आआह्ह्ह... नवाज़ जी!"

आरती ने सिसकते हुए अपना सर नवाज़ के कंधे पर टिका दिया. नवाज़ का खुरदुरा हाथ उसकी मखमली चमड़ी पर बड़े hi बेबाक अंदाज़ में घूम रहा था.

नवाज़ ने उसके कान के पास झुक कर अपनी गरम सांसें छोड़ी और फुसफुसाया,

"मैंने कहा था न रानी... मेरे बेगम के प्लान के हिसाब से hi सब होगा. पर अभी जो ये तड़प तेरे चेहरे पर है, वो मुझे पागल कर रही है."

आरती ने भांपते हुए नवाज़ की शर्ट के बटन कसके पकड़ लिए. उसका पूरा बदन नवाज़ की गर्मी और उसके इस बेबाक स्पर्श से पिघल रहा था. नवाज़ ने अब आरती की गांड को मसलते हुए उसके लबों को अपने लबों में भर लिया और एक जुनूनी किश करना शुरू किया.

"नवाज़... प्लीज... अब और नहीं..."

आरती ने किश के बीच में hi तड़पते हुए कहा.

नवाज़ ने एक शैतानी मुस्कान दी और वो पीछे हैट गया.

"बस रानी, अभी के लिए इतना hi ट्रेलर काफी है. असली सुहागरात तोह तेरे खेत में hi होगी, और वो भी तेरे प्लान के मुताबिक."

आरती ने शर्मा कर अपनी नज़रें झुका ली. उसका जिस्म अभी भी थरथरा रहा था और उसके दिमाग में सिर्फ नवाज़ का वो खुरदुरा स्पर्श और परसो का खेत वाला प्लान घूम रहा था.

आरती अपनी साड़ी ठीक करने लगी .. तब नाकज ने और उसके माथे पर एक लम्बा और गर्म किश किया.

"अब चलो किचन में... बर्थडे बॉय को भूक लगी है,"

आप जाओ मई सुसु करके आती हु

मेरे सामने कर न
 
"अब चलो किचन में... बर्थडे बॉय को भूक लगी है,"

आप जाओ मई सुसु करके आती हु

मेरे सामने कर न

आरती ने शर्मा कर अपनी नज़रें झुका ली और कहा

नहीं

प्ल्ज़

आरती ने ठंडी सांस भरी. उसे पता था की नवाज़ इतनी आसानी से हार maan-ne वाला नहीं है, और आज उसका बर्थडे भी था. उसने एक शरारत भरी नज़र नवाज़ पर डाली और अपनी साड़ी को थोड़ा सँभालते हुए बोली,

"ठीक है बाबा, आपकी ज़िद्द के आगे मैं हार गयी. पर एक शर्त है... अपनी आँखें बंद करो!"

नवाज़ की आँखों में चमक आ गयी.

"रानी, आँखें बंद करके क्या मज़ा? मुझे तोह देखना है."

"नहीं, पहले बंद करो!" आरती ने ज़िद्द की.

नवाज़ ने मुस्कुराते हुए अपनी दोनों आँखें हाथों से धक् ली, पर उँगलियों के बीच से थोड़ा सा झाँकने की कोशिश कर रहा है. आरती ने उसकी चोरी पकड़ ली और उसका हाथ थोड़ा और कसके बंद करवाया.

"अब हिलना मत," आरती ने धीरे से कहा.

दोनों के बीच एक अजीब सी ख़ामोशी च गयी. नवाज़ की सांसें तेज़ थी, वो बस सुन्ना चाहता था... और आरती की शर्म का कोई ठिकाना नहीं था. उसने दबे पाऊँ अपनी तैयारी की और जैसे hi थोड़ी सी आवाज़ हुई, नवाज़ के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गयी.

"होगया?"

नवाज़ ने दो उंगली से देखते हुई pucha.aarti ने वो देखा तब

आरती ने तुरंत अपने साड़ी निचे की ..

ऐसा चोरी नहीं चलेंगे

मैंने कुछ नहीं देखा

आरती जैसे hi कमोड से उठने लगी, नवाज़ ने मौका देख कर अपनी आँखें खोल दी. उसका ढीठपन अपनी हद्द पर था.

आरती ने हड़बड़ाकर अपनी साड़ी संभाली और गुस्से में उसे देखा.

"आपने तोह कहा था आँखें बंद रखोगे!"

आरती ने शर्म से लाल होकर कहा.

नवाज़ ने एक कुटिल मुस्कान के साथ उसकी तरफ देखा और बोलै,

"बर्थडे बॉय से झूट बोलना पाप है रानी, और बर्थडे बॉय को धोखा देना उससे भी बड़ा पाप. मैंने तोह कुछ नहीं देखा था ."

आरती ने उसे ज़ोर से धक्का दिया..

आप बहार जाओ

सु सु कर न मेरे सामने

नहीं करूंगी

प्ल्ज़ आरती ने थोड़ा सख्त रुख अपनाया और नवाज़ की आँखों में आँखें दाल कर बोली,

"देखिये नवाज़ जी, अगर आप अभी यहाँ से बहार नहीं गए, तोह समझ लीजिये परसो का प्लान कैंसिल!"

नवाज़ का चेहरा एक दम से उतर गया.

"अरे रानी, ऐसा मत कहो... बर्थडे है मेरा."

"बर्थडे है तोह क्या कुछ भी करोगे?"

आरती ने उसे दरवाज़े की तरफ धकेलते हुए कहा,

"अगर खेत में मुझसे मिलना है और वो सुहागरात यादगार बनानी है, तोह अभी तमीज से बहार जाइये और किचन में मेरा इंतज़ार कीजिये."

खेत वाली बात सुनते hi नवाज़ की साड़ी अकड़ ढीली पद गयी. उससे पता था की अगर आरती रुख गयी तोह उसका बड़ा नुकसान हो जायेगा.

"ठीक है, ठीक है... जा रहा हूँ,"

नवाज़ हस्ते हुए बोलै और अपना हाथ उठा कर हार मान ली.

"पर याद रखना, खेत में मैं तेरी एक नहीं सुनूंगा!"

आरती ने उसे दरवाज़े की तरफ धकेलते हुए

हाँ, अब चलिए यहाँ से!

बहुत हो गयी आपकी नौटंकी. अब किचन में जाईये, वर्ण भूके hi रह जाओगे."

और उसे वाशरूम से बहार धकेल दिया ..वाशरूम से बहार निकालते हुए बोली,

"आप बहुत बड़े गुंडे हो नवाज़ जी! चलिए अब बहार, और अब जब तक खाना नहीं बनता, मुझसे बात मत कीजियेगा."

नवाज़ हस्ते हुए बहार आया और बोलै,

"बात तोह खेत में होगी रानी, अभी तोह बस पेट की भूक मिटानी है."

आरती ने मुस्कुरा कर दरवाज़ा बंद कर लिया.

कुछ देर बाद जब वो बहार aayi..Uske पेअर अभी भी थरथरा रहे थे और उसके दिमाग में सिर्फ वही एक बात घूम रही thi—parso का खेत और वो यादगार सुहागरात.

आरती वाशरूम से बहार आयी तोह उसकी आँखों में एक अजीब सी कशिश और थोड़ी हैरानी thi..Nawaz की इस शैतानी ने आरती को पूरी तरह से परेशां और थोड़ा ब्लश करने पर मजबूर कर दिया था. जैसे hi वो वाशरूम से बहार आयी, उसने नवाज़ को वही खड़ा पाया, जैसे वो किसी पुरस्कार का इंतज़ार कर रहा हो.

नवाज़ ने उसकी तरफ देखते हुए एक तीखी मुस्कराहट दी और बोलै,

"बड़ी जल्दी आ गयी? मैंने तोह सोचा था शायद अंदर hi देर तक रुकी रहोगी दर के मारे."

आरती ने उसे घूरते हुए अपने भीगे हुई हाथ उसकी तरफ झटके, जिसकी कुछ बूँदें नवाज़ के चेहरे पर गिरी.

"आप... आप सच में बिलकुल बेशरम हो गए हैं! अच्छा हुआ हम आपने घर नहीं है .आपने घर होते और किसी ने देख लिया होता तोह क्या सोचते?"

नवाज़ ने अपने चेहरे से पानी पोंछा और उसके थोड़ा करीब आते हुए धीरे से बोलै,

"अगर आपने घर होता मतलब घर हमारा है, बेगम मेरी हो, तोह पर्दा कैसा? और रही बात आमलेट की, तोह जाओ जल्दी हाथ धो कर aao,achha साबुन लगा के ..सिर्फ पानी से नहीं ..

आप के जैसे गन्दी नहीं हु .. अच्छे से वाश करके आये हु

ठीक है फिर ..मुझे बहुत भूक लगी है... और सिर्फ आमलेट की नहीं."

आरती ने अपना चेहरा घुमाया पर उसके होंठों पर एक छोटी सी मुस्कान आ गयी.

किया ना अंदर बहुत कुछ

नवाज़ ने तब उसे कमर से पकड़ लिया और उसके कान में फुसफुसाया,

"अभी तोह सिर्फ सुना है रानी... खेत में तोह सब देखना भी है और करना भी."

आरती ने उसे शर्मा कर देखा और किचन की तरफ बढ़ गयी

उसने किचन की तरफ कदम बढ़ाते हुए कहा,

"आपका कुछ नहीं हो सकता. शांति से बैठिये वह, मैं अभी बनती हूँ कुछ अच्छा सा."

नवाज़ उसके peeche-peeche किचन तक गया और दरवाज़े पर तक लगाकर उसे काम करते हुए देखने लगा. उसका दिल आज नवाज़ की इस 'over-possessive' और थोड़ी पागल सी मोहब्बत पर फ़िदा हो रहा था.

किचन में पहुँचते hi आरती ने थोड़ा नखरे से पूछा,

"बताइये अब, kya-kya चाहिए आपके उस non-veg के लिए? मैं बस बताउंगी, हाथ आपको hi चलना पड़ेगा."
 
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