Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION .... - SexBaba
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Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION ....

hotaks

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कमीना चूड़ाकड - नई वर्शन ....

मैंने पहले ये स्टोरी इस फोरम मई लिखी थी .. अब इस मई कुछ चेंज करके फिर से लिखना चाहता हु .. होप यू सपोर्ट ..
 
कमीना .... चूड़ाकड..

डिस्क्लेमर :

थिस इस ा वर्क ऑफ़ फिक्शन. नेम्स, चरक्टेर्स, बुसिनेस्सेस, प्लेसेस, इवेंट्स एंड इन्सिडेंट्स अरे ऐथेर थे प्रोडक्ट्स ऑफ़ थे author’s इमेजिनेशन और ुसेड इन ा फिक्टिशुस मन्नेर. अन्य रेसेम्ब्लेंस तो एक्चुअल पर्सन्स, लिविंग और डेड, और एक्चुअल इवेंट्स इस पुरेली कोइन्सिडेंटल.

पिक्टुरेस अरे ताकें फ्रॉम नेट, िफ़ एनीवन हैवे ऑब्जेक्शन प्ल्ज़ तेल्ल उस , वे कैन रिमूव आईटी इम्मेडिएटेली.
 
कमीना ...... चूड़ाकड

नार्थ इंडिया में एक गाओं था हसनपुर. वैसे एक ये छोटा गाओं नहीं था , बहुत बड़ा गाओं था पर सिटी इतना बड़ा भी नहीं था. इस गाओं में दीपक अग्रवाल नाम का एक बड़ा जमींदार था. उसके पास बहोत साड़ी जमीं जायदाद थी. उसका बिज़नेस भी बड़ा था. उसका बिज़नेस उसका बीटा अरविन्द संभालता था .

दीपक को दो बेठिया ti,ek का नाम था कल्पना . उसकी उम्र 33 थी, शादीशुदा थी और वो अपने पति के साथ सहर में रहती टी. उसकी फिगर 36 30 34 थी. ..





दिखने में कमल की सूंदर थी और उतनी hi शालीन थी. पति के आलावा वो पराये मर्द की तरफ डेक्टि भी नहीं थी.

दूसरी बेटी का नाम था कंचन ... वो शहर में मब्ब्स के फाइनल ईयर में थी. वो भी दिखने में कमल की सुन्दर थी ...

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आगे 22 , फिगर 32 26 34 थी . वो एक फटका आइटम लगाती थी..

अरविन्द की शादी कुछ 6 महीने पहले आरती से हुई थी. आरती कमल की सूंदर थी. उम्र 24 थी . दिखने में एक मॉडल लगाती थी. ...

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उसकी फिगर 34 28 36 थी . उसकी सहर में उसकी इतने खूबसूरत दूसरी कोण नहीं थी. ब कर चुकी थी और शादी अग्रवाल फॅमिली में होने की वजस से उससे इस गाओं में आना पड़ा था.

अब आते है आपने मैं लीड नवाज के तरफ.

एक नंबर का कमीना आदमी और उतना चूड़ाकड आदमी. वैसे उसकी उम्र 21 थी लेकिन आपने उम्र इतने लड़की और औरत को छोड़ चूका था. शरीर एकदम कसरती था, हाइट 5 फ़ीट 11 इंच थी. जिस लड़की को पटाने के खाइश रक्त उसको पटटा hi था. किस से डरता नहीं था और उतना hi एकदू था . उसकी इस वायवार से उसका बाप परेशां होकर आपने एक रिलेटिव के मदत से उसने जमींदार दीपक अग्रवाल के यहाँ काम पे लगाया था. नवाज वह एक नौकर था. कभी खेती में तो कभी उसके बुसनेस्स फैक्ट्री में छोटा मोटा काम करता था .
 
अब स्टोरी स्टार्ट...

नवाज को शेतजी के यहाँ 2 महीने के उप्पर हो चूका था और अबतक वो उनके घर में अब तक कभी नहीं गया था और दूसरी तरफ आरती के शादी को 6 महीने हो चुके थे. वो अपनी मैरिड लाइफ से खुश थी. अरविन्द और आरती में अच्छी सेक्सुअल रिलेशनशिप बानी हुई थी. आरती अरविन्द से खुश थी.

शेतजी के यहाँ एक नीता नाम की कामवाली थी.

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वो कभी कबर खेत मई जाया करती थी .उसी दौरान नवाज ने उसे एक दो बार छोड़ा था.

एक बार शेतजी दीपक अग्रवाल ने नवाज को एक काम से घर पर बुलाया था. वो आज पहली बार शेतजी के घर जा रहा था. शेतजी घर मतलब एक बहुत बड़ा बांग्ला था .नवाज उनकी घर पर पहुँच चूका था . शेतजी बहार खुले मई बैठे हुई थे.. नवाज उनके पास जेक खड़ा हो जाता है..

नवाज- शेतजी आपने मुझे बुलाया ???

शेतजी - वो दो रूम का सामान निकलकर बहार गेस्ट रूम में रखना है और वो दो रूम साफ़ भी करना है..

नवाज - जी मई कर दूंगा

शतजि - उसके लिए 2 -4 दिन यहाँ पर रुकना पड़ेगा और कुछ ज्यादा दिन भी लग सकता है ... और छोटे मोठे बहोत सारे काम भी है..

नवाज - जी..

उसी समय नीता शेतजी के लिए चाय और नास्ता लेके आते है..

नीता ने जैसे hi नवाज़ को देखा वैसे hi वो कुश हो जाते है..

शेतजी - नीता इसको अंडर लेके जाओ और चाय नास्ता देकर बहु को बोलो की इसको इसका काम बता दो . ये कुछ दिन यही रखेगा , पिछली वाली खोली में इसको तेरा दो . .

नीता - जी शेतजी ..

शेतजी की ये बात सुनकर नीता खुश हो जाती है और नवाज से कहती है चलो नवाज .

नीता की उम्र 27 थी , एक भरी हुई जिस्म की मालकिन थी वो . वो नवाज पे बहोत ज्यादा फ़िदा थी , ये बोलो की वो नवाज के 9' लौड़े पे ज्यादा फ़िदा थी . उसको नवाज का नेचर पता था फिर भी उससे छोड़ने के लिए हमेश तैयार रहती थी
 
नवाज नीता के साथ चाय नास्ते के लिए किचन में चला जाता है . जब नवाज और नीता किचन मई एंटर करते है तब नवाज के सामने पिट करके आरती कड़ी थी.

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वह वो आरती को और उसकी सेक्सी गांड को देख कर एकदम पागल हो जाता है . आरती ने उस वक्त पिंक कलर की सदी और ग्रीन कलर का स्लीवलेस ब्लाउज पहना था .

इनको आते देख कर आरती घूम जाती है ..

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आरती आपने साडी का पालू एक साइड मई खोंच कर काम कर रही थी .. किचन मई .. . इस वजह से उसकी नंगा पेट नवाज़ के सामने आ जाता है और साडी बूब्स से हटा हुई थी इस वजह नवाज को आरती के बूब्स की साइज ब्लाउज के उप्पेर से पता चल जाती hai.wo आरती के बूब्स को देखता रहता है ...... कुछ मिनट तक , जब आरती उसकी नज़र देखती है तो ब्लाउज पर सदी का पल्लू ूद लेती है..

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आरती- ( गुस्से से ) कोण है ये ... इससे यहाँ क्यों ले हो

आरती के सामने उसकी तरफ ऐसे देखने की हिम्मत अभी तक किसकी नहीं हुई थी..... वो बहुत ज्यादा गुस्से में थी

नीता - दीदीजी ये नवाज है , खेत वाला नौकर है ... वो रूम का सामन रखवाने आया है..

आरती- तो ( छीलते हुई)..

नीता - शेटे ने कहा ता उसे चाय नास्ता देने को ..

आरती - तो किचन मई लाएगी.... उसे बहार ले जाकर नहीं दे सकती क्या

नीता - जी

आरती - तू उसको इतना चिपक कर कड़ी क्यों है

नीता थोड़ी बाजु हाथ जाती है

आरती - और तू मुझे इतना क्या गुर के देख रहा है ..

आरती गुस्से से नवाज़ की तरफ देखते हुई कहती है

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नवाज - देखने की चीज है तो देखूंगा hi न ( कातिल हसी के साथ नवाज़ कहता है )

इस पर आरती बहुत ज्यादा गुस्सा हो जाती है.. आरती का गुस्सा देख के नीता आरती कुछ कहती उससे पहले hi नीता कहती है..

नीता - मेमसाब.. शेतजी ने कहा था आपको बताने के लिए

आरती- क्या

नीता - कोनसे रूम साफ़ करने है ये आप नवाज़ को बताओगे ..

आरती - हम्म्म

नीता - और ये बे बोलै है की कुछ दिन ये यही रहेगा

आरती - कहा

नीता - पिछले वाले रूम में

आरती नवाज़ की तरफ देखते हुई कहती है

अच्छा

नीता - इसको नाश्ता ीदार दू या बहार दू

आरती - अब यहाँ आहे हो तो आज के दिन यहाँ hi दे दो कल से बहार दे देना

ये सब बाते हो रहे तब तक नवाज आरती को उप्पर से निचे तक देख hi रहा था. तब नीता नवाज़ को कहते है..

नीता : ाज़ा बेथ .. उस चेयर मैं.. मई नाश्ता लगाती हु...

ऐसा कह के नीता वह किचन मई एक जो चेयर थी वो खिंच के एक कार्नर मई रख देती है.. और नवाज़ को उस पाई बैठने का इशारा करती है..
 
नीता ने नवाज को ऐसे कहा तो आरती नीता के तरफ गुस्से से देखते हुई कहा ..

अभी तक नाश्ता नहीं बना है.. मई बना रही हु.. रुक थोड़े देर..

जो इस वक़्त किचन सिंक के पास खड़े होकर कुछ कर रही थी..

तब नीता आरती की तरफ देखते हुई कहती है..

जी.. मेमसाब..

आरती ने जब ये कहा तब नवाज़ आरती की तरफ देखते हुई चेयर में बैठ जाता है.. नीता फिर उसके पास आके खड़े हो जाती है..

नवाज़ फिर नीता को कहता है

मैडम का घर बहुत hi प्यारा है. बाहर का बड़ा सा गर्दन.. फिर बहार का बड़ा सा हॉल.. वो दोनों साइड के 3 रूम.... किचन और उसमे का ये सुन्दर सा डाइनिंग टेबल ..

नीता - हाँ नवाज बहुत बड़ा बंगला है ये.. तुम मई पूरा दिखते हु..

अब आरती को गुस्सा आने लगता है नीता पर.. मुझे यहाँ पाई नाश्ता बनाना पद रहा है इस हरामी नौकर के लिए .. हरामी hi तो लग रहा है.. जब से यहाँ आया है तब से मुझे घूरे जा रहा है और ये महारानी उसके बगल मैं खड़े होक उसे गप्पे लड़ाई जा रही है..

ऐसा सोचते हुई आरती नीता से कहते है..

तू वह खड़े होकर क्या कर रही है.. यहाँ आके मुझे हेल्प कर.. मई अकेला इतना सारा काम नहीं कर सकते..

नीता नाराज होते हुई बुरा सा मू बनाते हुई आरती को कहते है..

जी मेमसाब..

ऐसा कह के आरती के पास जेक खड़े हो जाती है.. और कहते है..

बताये.. मैडम जी.. मुझे क्या करना है..

वो बर्तन धु ले.. उसके लिए नास्ता जो बनाना है..

आरती गुस्से से कहते है..

जी

ऐसा कह के नीता बर्तन धोने लगते है..

तब बहार से शेठजी आवाज़ देते है..

नवाज़ थोड़े देर के लिए जरा बहार आना

तब नवाज़ कहता है ..

जी शेठजी

और उठकर बहार जाता है.. आरती उसको बहार जाते हुई देखते है और फिर आरती नीता को कहते है ..

किसी नौकर के लिए मई नास्ता बनाऊ ये सब मुझसे से बर्दाश्त नहीं हो रहा है नीता . . मैं इस बारे में तुम्हारे छोटे मालिक से बात करुँगी.. चाहे जो भी हो.. मई किसी नौकर के लिए नास्ता नहीं बनाउंगी .. और नीता आगे से तू याद रखना किसी मर्द नौकर को डायरेक्टली ऐसे मेरे किचन मई मत लाया करो ..

जी दीदी

आरती गुस्से मई थी .. वो अब नीता को गुस्से से देख रही थी..

पर दीदी शेठजी ने कहा इसलिए उसे यहाँ ले आये

तब गुस्से से आरती नीता को कहते ..

मुझे पता है तुम पापा जी की कितने बात मानते ho..chupchap बर्तन धो लो ..

तभी किचन मई अरविन्द आता है .. अरविन्द किचन मई आते hi आरती के चेहरे पर का गुस्सा देखता है और आरती को कहता है ..

क्या बात है बड़ी परेशां सी दिख रही हो ?

परेशां नहीं हु तो क्या खुश हो जाऊ

क्या हुआ जान इतना नाराज क्यों हो रही हो ?

मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं है की मैं किसी ैरे गैर के लिए गरमी में अपना पसीना बहु.. और उसके लिए खाना बनाऊ..

आरती ने वैसे hi गुस्से भरे हुए अंदाज में कहा और इधर अरविन्द को कुछ समाज नहीं आ रहा था की वो किस बारे मई बात कर रही है .. तुम किस के बारे मई बात कर रहे हो मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा है और तुम खाना बनाने मई तकलीफ है तो नीता को बोल दो वो बना देगी

वो क्या ख़ाक बनायेगे

मई बना लुंगी दीदी

दीदी की बच्चे .. खाना बनाओगे तो मेरा किचन पूरा गन्दा करते हो

गन्दा करेंगे तो साफ़ भी वही करेंगे न

अरविन्द ने कहा तब आरती कहती है

क्या साफ़ करेंगे ..वैसे hi चली जाती है ..

अब नहीं जाउंगी

तब अरविन्द स्माइल करते हुई नीता को देखता है ..और कहता है ..

अब नीता साफ़ करके जाओगे न नीता

हाँ पक्का भैया अब साफ़ करके जाउंगी

तब आरती गुस्से से कहती है

भैया के सामने तो कहती है और भैया चले गए तो बिना बताये चली जाती है और फिर साडी साफ़ सफाये मुझे hi करनी पड़ती है ..

क्या नीता तुम ऐसा कराती हो .. ये ठीक नहीं है नीता तुम्हारा .. आगे से ऐसा कुछ किया और तुम्हारे वजह से मेरे प्यारे से बीवी को थोड़े भी तकलीफ हुई न तो तुम नौकरी से निकल दूंगा ..

ऐसा कहते हुई आरती को आपने बहो मई लेता है





हजौर नीता के तरफ देख के स्माइल करता है और नीता भी स्माइल करती है

नहीं भैय्या आगे से ऐसे गलती नहीं करुँगी ..

पक्का न

पक्का भैया

तब आरती अपनी पति के बहो से हैट जाती है

आप भी न कुछ भी करते हो और कहा भी .. नीता के सामने ये सब करने की क्या जरुरत है ..वो क्या सोचेंगे ..

भला अपनी शादीशुदा बीवी को आपने बहो मई लेने मई किस का डर और वो भला क्या सोचेंगे .. उसे तो पता hi है हम हस्बैंड वाइफ है

उसे पता है ये मुझे पता फिर भी

मई कुछ नहीं सोचूंगी दीदी

तब आरती शर्मा जाती है और शरमाते हुई कहती है





दीदी की बची .. चुपचाप नास्ता बना ले ..

और शरमाते हुई बहार चली जाती है ..
 
आरती बहार आते hi अरविन्द भी बहार आता है ..दोनों मिल के बहार हाल मई से गर्दन मई आ जाते है .. तब अरविन्द आरती को कहता है

वैसे आरती तुम किस की बात कर रही थी .. नास्ता बनाने की ..

तब आरती नवाज़ की तरफ देखती है ..





वो इस वक़्त उसके ससुरजी से बात कर रहा था .. अब तक उसकी नज़र आरती पाई नहीं पड़ी थी ..

उसकी ..

और नवाज़ की तरफ इशारा करती है ..तब नवाज़ को अरविन्द देखता है ..

नवाज़ की ..

क्या नाम है उसका

नवाज़ ..

आप को कैसे पता .. आप जानते हो क्या उसे ..

हाँ अच्छे से ..

मोबाइल मई चाट करते हुई अरविन्द कहता है

कैसे क्या .. आपने फैक्ट्री मई और खेत मई काम करता है ..

तब आरती नवाज़ को देखते है तभी नवाज़ की नज़र भी आरती पर पड़ती है ..





कुछ पल के लिए दोनों एक दूसरे को देखते है.. जैसे hi आरती को लगता है नवाज़ उसको hi देख रहा है वैसे hi आरती उसपे से अपनी नज़र हटाकर आपने पति को देखने लगे ..

अच्छा लड़का है ..

क्या ख़ाक अच्छा है .. मुझे तो ये लड़का बिलकुल भी पसंद नहीं है..

क्यों बाबा

उसकी नजर ठीक नहीं है.. जब भी देखती हु मुझे देख कर अजीब तरह से मुस्कुराते रहता है.. ..

तब अरविन्द हँसाने लगा ..

आप को मेरे बात पर हसी आ रही है..

अरे आरती ऐसी कोई बात नहीं है.. ये लोग ऐसे hi होते है .. गाँव के लोग .. तुम्हे देख कर मुस्कुराते hi तो है.. तो इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है..?

कहते हुए अरविन्द स्माइल करता है

तब जरा नाराज़ होते हुई आरती कहते है

आप के प्यारी सी पत्नी को देख के अगर कोई बहार का लड़का बिनावजह मुस्कुरा रहा होगा तो आप को बुरा नहीं लगता क्या

इस मई बुरा मानाने वाली क्या बात है

ऐसा कह के अरविन्द उन्दोनो के पास चला गया और आरती वह अकेले कड़ी रही .. उनके तरफ पिट करके ..

अरविन्द वह जाते hi कहता है

कैसे हो नवाज़

अच्छा हु छोटे मालिक

कब आये

अभी थोड़े देर पहले .. शेठजी ने बुलाया था .. इसलिए आया ..

तब शेठजी अरविन्द से कहते है ..

हाँ मैंने hi बुलाया है .. 2-3 दिन के लिए.. यहाँ कुछ रूम का सामान बहार निकलना है और कुछ रूम साफ़ भी करने है .. अकेले नीता नहीं कर पाएंगे ..

हाँ अच्छा किया पापा आप ने

ऐसा कहता है तभी उसको किसी का कॉल आता है इस वजह से वो कॉल उतके बात करने लगा .. बाजु मई जेक .. और इधर नवाज़ शेठजी से बाते करने लगा .. वो खेत मई से आया था तो शेठजी खेत के बारे मई कुछ पूछ रहे थे उससे ..और नवाज़ सही से उनोने पूछे हुई बाते बता रहा था ..

शेठजी से बाते करते हुई नवाज़ आरती को देख रहा था .. उसकी गांड को आँखों hi आँखों मई नंगी करते हुई देख रहा तह ..

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आपने आँखों मई आरती की गांड को नंगे करते हुई नवाज़ कहता है..

मालिक आप खेत का टेंशन न लो .. मेरे होते हुई आप को किसी बात का टेंशन लेने के जरुरत नहीं है ..

आरती के कानो मई ये बात पड़ती है ..नवाज़ ने जरा जोर से बोलै था इस वजह से आरती को क्लेअर्ल्य सुनाई दिया था.. इसलिए वो गर्दन घुमा के नवाज़ को देखते है ..





तब वो उसके और hi देख रहा था ..

अब अरविन्द आरती के पास आता है .. तब आरती अरविन्द की तरफ देखते हुई आपने पति को पूछते है ..

क्या कह रहा था..

कोण

वही नवाज़

कुछ तो नहीं

फिर इतने देर पापाजी उससे क्या बात कर रहे है

कुछ खास नहीं .. खेत की बात चल रही है उन्दोनी की ..

अच्छा ..

फिर कुछ सोच के कहते है

ये हमारे खेत की रखवाली करता है क्या

हाँ बिलकुल

भरवसे के लायक है क्या

हाँ ..पापा का बहुत भरोसा है इसपर

अरविन्द ने ऐसे कहते hi आरती उसको देखने lagi..usko देखते हुई कहते है..

अच्छा..

उसने देखते hi निचे देखने लगी ..





फिर आपने पति को देखने लगी ..

आप का है क्या िस्सपर भरोसा..

मोबाइल मई चैटिंग करते हुई कहता है

हाँ

अच्छा

आरती तुम टेंशन मत लो .. वो यहाँ सिर्फ 2-3 दिन के लिए आया है .. उसका यहाँ का काम ख़तम होते hi चला jayega..tume कोई तकलीफ नहीं होगी .. और मैंने नीता को समाज दिया है .. इसका नास्ता और खाने का नीता देख लगे .. तुम उसका टेंशन लेने की कोई जरुरत नहीं है..

हम्म्म्म

फिर कुछ सोच कर कहती है

पक्का दो दिन बाद चला जायेगा न ?

हाँ जायेगा

तभी आरती को शेठजी आवाज़ देते है

आरती बीटा

तब आरती आपने पति को चोर के आपने ससुर के पास जाती है

जी पापा जी

नास्ता नहीं बना है क्या .. नवाज़ कह रहा था

तब आरती गुस्से से नवाज़ को देखते है ..






और मैं मई कहते है ..

कमीने ने आते hi मेरे कम्प्लेन पापा जी को की ..

और फिर आपने ससुर की तरफ देखते हुई कहते है .. चहरे पर स्माइल लेक





जी पापाजी नीता बना रही है ..

और फिर नवाज़ की और देखते हुई कहते है ..





नास्ता बन गया होगा .. किचन मई जेक खा लो ..

नवाज़ आरती की खूबसूरत चहरे को देखते हुई कहता है

जी मेमसाब

और शेठजी को देखते हुई कहता है

शेठजी मई नास्ता कर लेता हु

हाँ कर लो .. शर्माना मत

तब आरती के बॉडी को जाते हुई देखने लगता है ..





और कहता है ..

जी ..वैसे आप तो जानते hi हो शेठजी मई शर्माता नहीं हु ..और आप के घर मई तो बिलकुल नहीं ..

और पलट कर आरती के बॉडी को घर के देखता है .. तब आरती गुस्से से नवाज़ को देखते हुई आपने ब्लाउज ठीक करते है और मैं मई कहते हैं


मुझे ये पापाजी शर्माने वाला नहीं लगा रहा है..

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अब नवाज़ अंदर जा चूका था.. अंदर जाते hi वो नीता को पीछे से चिपक जाता है ..वो इस वक़्त किचन मई उसके लिए hi नास्ता बना रही थी.. जैसे hi उसको वो पकड़ लेता ..

नहीं नहीं नवाज़ दीदी आ जायेगे

नहीं वो बहार है शेठजी और छोटे मालिक से बाते कर रहे है

ऐसा कह के नीता के आम को जोर से दबाता है ..

नवाज़ के ऐसा करने से नीता के पुरे जिस्म में एक झटका सा लगता hai...kamp उठता है उसका पूरा jism…us वजह से नीता के मन से एक सिसकारी निकलती है.... नवाज़ ने नीता को छोड़ के अब बहुत दिन हो गए the..neeta को जब उसने सुबह देखा था तब hi उसका मान किया था की आज कैसे भी करके उसको चोदे ..वो उसी फ़िराक मई था की नीता उसे कब अकेले मिले और वो मौका अब उसको मिल गया था..

अब नवाज़ नीता से चिपक कर खड़ा था .. अब नवाज़ आपने खुरदुरे हाथ नीता के पेट पर रखता है …

नवाज़ मुझे कुछ हो रहा है...... प्ल्ज़ ऐसा मत करो .. उन तीनो मई से कोई अंदर आ गया तो बड़ी आफत हो जायेगे .. मुझे नौकरी से निकल देंगे ..

मगर नवाज़ अब कहाँ रुकने वाला tha............usne उसके मम्मी को दोनों हटो मई पकड़ के जोर से दबाया..

आह्ह्ह्ह नवाज़ पलज़्ज़ज़ रुको न

नवाज़ फिर उसके गर्दन को चूमने लगा ..

नवाज़ प्ल्ज़ रुको …मुझे ऐसे हालत मई पकड़ा तो मेरे खैर नहीं …

एक तरफ तो नीता इंकार कर रही थी मगर अब उसकी बाटिओं में कोई दम नहीं था ........नवाज़ ाचे से समझ रहा था की नीता उससे सफ़ेद झूट बोल रही हैं.....

कुछ नहीं होगा .. मैंने न जाने किस तरह से खुद को कण्ट्रोल किये हुआ है मुझे hi पता है ..

ऐसा कह के वो एक जोर से से झटका मरता है पीछे से ..

ाहः

उसको अपनी गांड पर एक बड़ी तगड़ी चीज़ का अहसास होता है .. उसकी ऑंखें एक बार के लिए बंद होजाती है…

नवाज़ प्लललससस रुख जाओ भगवन के खातिर

मेरे बाँहों मई इतना गरम जिस्म होने के बावजूद अगर मई कुछ न करू तो ठु मेरे जिंदगी पर .. …

नवाज़ मेरे साथ जो करना है वो कर लो पर अब नहीं और इस जगह पाई नहीं ..

क्यों

टाइम सही नहीं है मेरे राजा .. दीदी कभी भी यहाँ आ सकती है....

नीता अपनी ऑंखें अभी भी बंद किये हुए thi....waise hi वो बड़बड़ा रहे thi..tab फीस से नवाज़ उसको जोर से दबोच लेता है .. तब नीता को अहसास होता है की उसकी गांड की दरार मई कुछ बड़ा सा दसा हुआ है .. उसे समजने मई दिएर नहीं लगी की वो नवाज़ का बड़ा कला लौड़ा है ..





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अब नवाज़ उसके होंटो से नीता के कानो को चुबला रहा था .. और साथ मई एक हाथ से उसके मम्मी को दबा रहा था . फिर वो उसके कान के बाद गर्दन को चूमने लगा .. गर्दन को चूमते हुई धीरे धीरे नीचे आने लगा ..मतलब उसके नंगे पीठ को . ..आज वो नीता के बदन के हर हिस्से पर आपने मोहर लगा देना चाहता था .. फिर वो उसको घुमा के उसके गर्दन को चूमने लगा फिर निचे आके उसके मम्मी को चूसने लगा.. ब्लाउज के उप्पर से . उसके मम्मो को अच्छी तरह से चूसने के बाद वो नीचे आया ..और उसके सपाट पेट को चूसने लगा ..

आह्ह्ह्हह

नीता की साँसे काफी तेज़ हो चुकी थी ..अब वो उसके नवल तक आया और उसने उसकी नवल को चूसा .

aaaaaaaaahhhhhhhhhhhaaaaaaaaa…. uffffffffff…. nawaz….zzzzzz

फिर नवल के अंदर जीभ डाली.. तब नीता से बर्दास्त नहीं हुआ ..

Ahhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaaaaa… नवज़ज़्ज़ज़्ज़… ैस्सस्स्स्स्साआआ hi करो ….

नवल को चूसने से उत्तेजना का संचार नीता के बॉडी मई हुआ ..फिर उसने उसके सर को निचे की तरफ दबाया और नवाज़ को निचे की तरफ जाने का इशारा किया ..

बहुत तदपि हु तेरे बगैर नवाज़ .. आज मेरे तड़प मिटा दो राजा ..

कहा हो रही जलन रानी

तब नवाज़ की तरफ देखते हुई कहती है

कहा होगी जलन .. छूट मई hi होगी ..

किस की क्या .. मेरे hi छूट मई होगी .. फिर क्या मालकिन के छूट मई होगी क्या

...................

तब नवाज़ के आँखों के सामने आरती की गांड आती है जो थोड़े देर पहले उसने देखि थी .. यही सोचते हुई वो कहता है

मुझे क्या पता रानी ..तेरे छूट मई जैसे जलन हो रही है वैसे तेरे मालकिन के छूट मई हो रही होगी तो

उनकी जलन मिटने के लिए छोटे मालिक है .. तू उनका मत सोच और मेरे जलन मीठा

नीता की बात मानते हुई नवाज़ ने उसकी साड़ी उप्पर की और उसे किटचे सिंक पाई बिठाकर उसकी पंतय निचे कर के नीता के छूट पर आपने लुंड को सेठ किया और बड़े प्यार से आपने लुंड को उसके छूट में उतरने लगा

Aaaaahhhhhhhaaaaaaaaaa…mmmmmaaaaaaaaaarr…. गाआईईई … नंन्तआज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़… बहुत दर्द हो रहा है आआअह्हह्ह्ह्हह..

नवाज़ मदहोशी में नीता की छूट मई धक्के लगाने लगा.. पूरा कमरा सिसकियों से गूंज रहा था वही नीता का बुरा हाल था ..नवाज़ का लुंड नीता की गांड में घुसता जा रहा था वैसे नीता का दर्द बढ़ाता जा रहा तह ..तब नवाज़ कहता है

धीरे से चीला नहीं तो मालिक या मालकिन को पता चल जायेगा ..

फिर तू धीरे से कर न

तब एक जोर का धक्का नवाज़ नीता को मरता है

आआह्ह्ह्ह नन्नाआव्वाज़्ज़ ाब्ब टूओ धीरी करो नाआ

तेरे गांड में भी घुसा देना चाहता हु यार..

मेरी जान लेगा ओह्ह्ह्हह माआ …

नहीं मारेगी तू .. मेरा वादा है

यहाँ नहीं .. सबको पता चलेगा

फिर कहा

वो बाद मई देखेंगे .. चल जल्दीई कररर कही दीदी न आ जय

फिर नवाज़ जोर जोर से धक्के लगाने लगा 5-6 मिनट .. लास्ट मई दो चार धक्के मरे और नवाज़ झाड़ गया …

ये सब बहुत जल्दी हो गया ..

हाँ राजा पर क्या कर सकते थे ..

हाँ

अब बैठ वह जाए कर किसी ने देख लिया तो जानता है न फिर में कभी नहीं मिलूंगी

तब नवाज़ दिनीनिग टेबल के चेयर मई बैठ गया .. नीता ने फ्रीज मई से दूध निकल कर गरम किया और एक जम्बू गिलास दूध आपने राजा को दिया .. उसने ये दूध आराम से पिया .. फिर 5-10 मिनट उसको अच्छा सा नास्ता दिया .. पराठा विथ देशी घी.. नवाज़ आपने मालिक के अच्छे वाले दिंनिंग टेबल मई बैठ के अब नास्ता करने लगा ..

इधर बहार तीनो बाते कर रहे थे .. और अंदर नाश्ता करते हुई नवाज़ और नीता बाते कर रहे थे .. तभी बहार गेट पाई एक टेम्पो आके खड़ा हो जाता है और टेम्पो ड्राइवर उनके पास जेक खड़ा हो जाता है ..

शेठजी पौदे लाया हु शहर से .. बेतिया ने भेजे है ..

तब शेठजी आरती की तरफ देख के कहते है

आ गए तुम्हारे पौदे ..

हाँ पापा जी .. दीदी ने बहुत जल्दी भेज दिया ..

तुम कंचन के पीछे इतने पड़ी थी तो शयद कॉलेज चोर के पौदे ढूंढे होंगे और तुम भिजवा भी दिए होंगे

तब वो टेम्पो ड्राइवर कहता है

शेठजी कहा उतरने है ये पौदे .. यहाँ या खेत मई ..

तब शेठ जी कहते है

मुझे क्या पूछ रहे हो … मालकिन को पूछ लो .. इन् नानन्द भाभी ने ये सब किया है

अरविन्द को कुछ पता नहीं था इस बारे मई

मतलब पापा

अरविन्द आरती और कंचन ने ये सब डीडे किया है ये पौदे लगाने के ..अब एहि डीडे करेंगे की कहा लगाने के

ये आरती कुछ भी करती है

आप टेंशन न लो .. मई सम्बल लुंगी ..

तब ड्राइवर कहता है ..

फिर बता दीजिये मालकिन यहाँ रखने है या खेत मई ले जाऊ ..

खेत मई क्यों ..इससे में घर मई लगाने के लिए मंगवाए है तो यहाँ घर मई hi लगेंगे.. आप एक काम करो ..आप सरे पौदे यही उस कार्नर मई उतर के रख लो

बहुरानी माफ़ कीजिएगा वो मैं दो दिन से बीमार हु

तब आरती आपने ससुर की तरफ देखते हुई कहती है

अब कोण उतरेगा इसको

बीटा तुम अंदर जेक नवाज़ को बुला लाओ वो उतर लेगा .. और फिर तुम उन दोनों से पौदे तुम जहा लगाने है वो लगा दो ..

जी पापा ये अच्छा है

ऐसा कहते हुई कुश होक आरती अंदर किचन की तरफ जाती है .. तब वह नवाज़ वह नास्ता कर रहा था ..दिंनिंग टेबल के पास जेक नवाज़ की तरफ देखकर आरती कहती है

नाश्ता नहीं हुआ क्या तुम्हारा

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उसके चहरे पर स्माइल थी .. उसके चहरे पर की स्माइल देखते हुई नवाज़ मैं मई सोचता है ..

ये थोड़े देर पहली गुस्से मई थी .. अब तो खुश लग रही है.. आपने को क्या गुस्से मई हो या खुश .. पर खुश होती है तो और खुश लगाती है.. ऐसा सोचते हुई कहता है ..उसको देखकर..

जी हुआ मेमसाब ..

फिर चलो बहार पापा जी बुला रहे है ..वो पौदे लगाने है ..

जी चलिए

ऐसा कहते हुई पानी पीकर उठता है

































































































 
तू भी चल नीता ..

जी दीदी

नीता किचन से बहार आती है…. तभी आरती नोटिस करती है के नीता थोड़ा लड़खड़ा कर चल रही hai….neeta को देख के आरती कहते है

नीता

जी दीदी

नीता तुजे क्या हुआ ऐसा क्यों चल रहीं हैं तू??

नीता आरती के मन से ये बात सुनकर दर सी जाती है.... अब वो क्या bolti...tab वो नवाज़ के तरफ देखने लगाती है. मेरे पूछने के बाद नीता नवाज़ के तरफ क्यों देख रही है ये आरती को समाज नहीं आता ..

नवाज़ ने जरा जोर से नीता की चुदाई की थी और बहुत दिनों के बाद उसकी चुदाई की थी इस वजह से नीता इस तरह चल रही थी .... तब आरती कहते है

उसे क्या देख रहे है .. मई कुछ पूछ रही हु तुम ..

आरती को क्या जवाब दू वो नीता को समाज नहीं आ रहा tha..aur नवाज़ भी उसे कुछ कह नहीं सकता था क्यों की आरती सामने कड़ी थी.. तब कुछ सोच के नीता कहते है

पाओ मई मोच आयी है .. उस वजह से ..

अच्छा.. चल तू मेरे साथ.

फिर नवाज़ को देख के उसे कहते है ..

तू भी चल

जी मेमसाब

फिर आरती और नीता दोनों बहार जाने लगते हैं .... उन्दोनो के पीछे नवाज़ चल रहा tha..piche से नवाज़ दोनों की गांड को घूरते हुई जा रहा था





और बिच बिच में अपना कला लौड़ा भी मसल रहा था.. पंत के ऊपर से …. अब नवाज़ के बदसूरत चेहरे पर एक घिनौनी स्माइल आ जाती है….

अब वो तीनो बहार आ चुके थे .. बहार आने के बाद आरती उन्दोनो को कहते है ..

तुम दोनों उस टेम्पो मई के पौदे निचे उतारकर उस साइड मई रख लो

जी दीदी

ऐसा नीता कहती है तब आरती को उसके नानन्द का मैसेज आया था

कंचन - hi भाभी

मैसेज वजह से आरती का उन्दोनो पाई ध्यान नहीं था .. वो आपने ननद को रिप्लाई करते हुई बिना उन्दोनो की तरफ देखते हुई कहते है

हाँ करलो

आरती - hi दीदी

अब वो दोनों पौदे उतरने लगे ..

टेम्पो आ गया क्या भाभी

हाँ आ गए है

अच्छा है

फिर कुछ देर दोनों के बीच इधर उधर की बात हुई

कुछ पौदे बहुत नाज़ुक है .. उनको धीरे से उतरने को कहो भाभी

जी कहते हु ..

तब आरती सामने देखते है… तब वह नीता नहीं थी .. अकेला नवाज़ पौदे को झट झट निकल के निचे रख रहा था.. तब आरती झट से उसके पास गयी ..

तुम इस तरह से पौदे उतरने लगोगे तो ये ख़राब हो जायेंगे

तब नवाज़ आरती की तरफ देखते हुई कहता है

फिर कैसे उतारू इन

तब आरती उसे देखने लगी ..





उसे देखते हुई कहते है ..

कैसे उतारू का क्या मतलब hai...kya नाम है तुम्हारा

नवाज़

हाँ नवाज़ .. कैसे उतारू का क्या मतलब है

मतलब ऐसे नहीं उतारू तो कैसे उतारू

धीरे से ..उतरो .. ये क्या कोई बोरी है क्या जो तुम इतना फ़ास्ट निकल के निचे रख रहे हो

जी मेमसाब गलती हो गयी

उसकी तरफ देख के कहता है .. वो दोनों अभी क्लोज खड़े थे .. थोड़ा अन्तर था ..ज्यादा दूर नहीं ..

ठीक है .. अब इन धीरे से निकल के आहिस्ता से निचे रख लो

जी मेमसाब

कह के एक पौदे को बहुत धीरे से टेमो से निकल के आहिस्ता से निचे रख देता है ..

ऐसा क्या

हाँ ऐसा hi

ठीक है अब ऐसे hi निकलूंगा .. आप को शिकायत का कोई मौका नहीं दूंगा

अब नवाज़ मीठे मीठी बाते करने की कोशिश करने लगा

और नवाज़ ध्यान रखना

जी क्या ध्यान राखु

इनमे के कुछ पौदे तो बहुत नाज़ुक है

आप के जैसे

ये बहुत धीरे से नवाज़ ने कहा था पर आरती ने ये सुना था .. तब वो घर के नवाज़ को देखने लगी ..





क्या कहा तुमने

कुछ तो नहीं मेमसाब

पक्का

मुझे लगा कुछ तो कहा तुमने

तब नवाज़ मैं मई कहता है..

साली के कान बहुत तेज़ लग रहे है .. आगे से ध्यान देना पड़ेगा ..

नहीं नहीं .. भला मेरे क्या मज़ाल जो मई कुछ कहु आप को .. शेठजी से मार कहानी है क्या ..

ऐसा कह के डरा हुआ सा चेहरा कर देता है ..वो दिखाना चाहता था की वो डर गया है .. ये देख के आरती के चहरे पर स्माइल आ जाती hai..wo आपने आप को कहते है ..

आरती ये कुछ नहीं कहेगा तुजे ऐसा वैसा ..लगता है ये तो पापाजी से बहु डरता है ..

तब नवाज़ और पौदे उतरने लगा ..

ये नीता कहा मर्डर गयी ..

वो शेठजी ने उसे बहार भेजा है

बहार क्यों

मुझे क्या पता .. आप शेठजी से पूछ लीजियेगा

ठीक है ठीक है .. मई पूछ लुंगी .. तुम पौदे धीरे से उतर लो ..

और फिर वो आपने पति और ससुर के पास चली गयी और उनसे बाते करने लगी ..

































































































 
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