Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION .... - Page 3 - SexBaba
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Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION ....

तब नवाज़ धीरे धीरे अपना मोठे काळा होंठ नीता के होंठ के तरफ बढ़ने लगता है ....... नीता इतना बहक चुकी थी की अब उसने विरोध करना बंद कर दिया thi......jaise हे नवाज़ के होंठ नीतक के होठो के नज़दीक पहुँचते है नीता अपनी आंखे बंद करके उसे ग्रीन सिग्नल दे देती है अपने रसीले होंठो को चूसने ka........tab नवाज़ के चेहरे पर एक कातिल मुस्कान तैर जाती hai.......nawaz अपने होंठ नीता के होंठो के ठीक करीब लेकर 1 मिनट के लिए रुक जाता है ........जब एक मिनट तक नवाज़ किश नहीं करता तो आरती इधर कहती है

ये किश क्यों नहीं कर रहा है

तब नवाज़ झट से गर्दन घुमा के दूर की तरफ देखता है तब झट से आरती पीछे चुप जाती है

ओह्ह्ह गॉड.. इस कमीने ने मुझे देखा तो नहीं न .. अब मई क्या करू

तब इधर नीता अपनी आंखें खोल कर नवाज़ को

कहते है ….

अब क्या hua.....chuso न मेरे honth.....chus चूस कर सारा रस निचोड़ लो मेरे होंठो का…

तब आरती कहती है

कामिनी तो अब तक ओपपोसे कर रही thi..aab क्या हुआ .. अब तो किश करो बोल रही है.. अब नहीं आएंगे क्या दीदी.. साली नाटक कर रही थी शयद .. ये दोनों भी कमीने है ..

ऐसा वो पीछे चुप के सोचते हुई सोचने लगी .. आरती इतना एक्साइट अपनी पूरी ज़िन्दगी में पहली बार हुयी thi....wo अपने पति के साथ सेक्स करने पर भी जितना एक्ससिटेड नहीं हुई थी उतना एक्ससिटेड इस वक़्त वो नीता और नवाज़ का रोमांस देख के हुई थी …सोचो चुदाई देखेंगे तो क्या होगा ..

आरती की सांस बहुत तेज़ चलने लगी thi..phir भी वो उन्दोनो का रोमांस देखना चाहा रही थी ..वो कुछ सोचती है और फिर पलट के दूर के सामने आ जाती है .. और अंदर उन्दोनो को देखने लगी ..





वो देखती है नवाज़ ने अपना मुँह खोला हुआ था ..और नीता के गर्दन को देखते हुई उसके पसीने से भीगे हुई गले को चाट liya..pura मुँह खोल के

वही नवाज़ के इतने प्यार और इतने कामुक तरीके से गर्दन चाटने से नीता की आँख बंद हो जाती है और वो थोड़ा पीछे को हुई और दीवार से जा लगी..

नवाज़ पूरा मुँह खोल के उसके नमकीन पसीने को चाटने लगा और नीता के हाथ की पकड़ नवाज़ के कमर पे टाइट हो गयी तब नवाज़ ने आपने एक हाट उसके एक मम्मी पाई रखा और उसको जोर से दबाया ..

तब नीता दर्द से कामुक आवाज़ मई बोली..

उऊंणमन्त्र... नाव्वाज़्ज़्ज़्ज़ ......क्याआ काररर रही होऊ.. ड़ड़ड़ड़ड़ हो रहहहह हाइइइइ … धीरीई से दबावूओ ना .. ाआवाज़ज से कही दीदी न आ जय ..

आ जाने दो

आरती नवाज़ के हिम्मत से हैरान thi..wo मैं मई कहती है

इसको तो मेरा डर भी नहीं है .. कैसा आदमी है.. इसकी नौकरी भी तो जा सकती है.. इसको क्या सेक्स के आगे आपने नौकरी की भी चिंता नहीं है क्या. पक्का नहीं है..

वो नीता के गर्दन को चूमते हुए पागल हुआ जा रहा था.. नीता का डैम घुटने लगा था ..तब वो नवाज़ को दूर करते हुए बोली..

नाहीइ jaavedddd..plssss ऑर्डर नाहीई pllssssssssssssssssss…

ऐसा कहते हुई निचे देखने लगी ..तब वो हफ्ते हुई पसीना पसीना हो के नीता को देखने लगा .. उसका लिंग पूरा तन गया था .. नीता तेज़ साँस लेते हुई निचे को देख के खड़े thi..abhi भी उसको ऐसा लग रहा था जैसे की नवाज़ अभी भी उसके गले को चाट रहा हो .

नवाज़ बस उसके कामुक फेस को देखते रहता है ..उसने देखा की नीता के हलके मोठे होंठ जिन पे हलकी सी लिपस्टिक लगी है .. कम्प रहे है… नवाज़ ने धीरे से जैसे hi अपना मुँह उसके फेस की और किया नीता ने मुँह दूसरे साइड कर लिया ...तब आरती के चेहरे पर स्माइल आ जाती है





लेकिन नवाज़ अब कहा सुनने वाला था .उसने फिर से नीता के फेस को पकड़ा और जल्दी से अपना मुँह खोल के उसके उप्पेर के होंटो को अपने होंठ मैं भर liya..aur बस चूसते रहा.. चूसते रहा.. नीता ने आँखों को ज़ोर से बंद कर दिया.. और नवाज़ की बाजु टाइट से पकड़ li..aur बस खड़े rahi..tabhi नवाज़ ने अपना लेफ्ट हाथ उसके साडी के पल्लू पाई रखा और उसका पल्लू निचे गिरा दिया और खुद उसके और को badha..aur उसने तुरंत नीता के कमर पे दोनों हाथ डेल और उसको पूरा अपने और खिंच लिया..

नीता आआआआह्ह्ह्ह करते हुई नवाज़ को चिपक गयी ... तब उसके होंटो पर आपने होंठ रख के नवाज़ ने उसको चूसा और उसके दोनों खुल्हे पर आपने दोनों हाथ रख के बुरी तरह से मसल दिया तब नीता सिसक उठी तभी नवाज़ ने उसके होंठ हलके से काट दिए .

तब नीता बिलबिला गयी और ऊम्मम … aaaaaaaaaaa...kehte हुई उसके होंटो मई से आपने होंठ चुरा लिया और नीता ने नवाज़ को चेस्ट पे हाथ रख के उसको पीछे पुश किया और निचे को देखने लगी..

नाहीईई

क्यों

तुम काट रहे हो

नहीं काटूंगा अब

तब नवाज़ ने फिर से दोनों हाथों से उसके फेस को पकड़ के उप्पेर किया तब नीता ने फिर से नज़र निचे कर ली और तेज़ी से गहरी सांस लेने लगी .. तब विंडो से आती रोशनी मई नवाज़ बस उसके कामुक फेस को देखते रहता है ..तब वो शर्म से जैसे hi बहार को जाने लगी तब नवाज़ ने पीछे से उसका हाथ पकड़ के उसको पीछे खिंचा .. और पीछे से उसको पकड़ लिया .. अब उन्दोनो का फेस दूर की तरफ था मतलब आरती के तरफ था इसलिए आरती थोड़ा पीछे चुप गए और चुप के उन्दोनो को देखने लगी ..

तब एक हाट से उसके दोनों हाट को पकड़ा और दूसरे हाट से उसके साडी का पल्लू गिरा के उसके ब्लाउज के निचे से हाट डालके उसके एक मम्मी को जोर से पकड़ लिया ..

आअह्हह्ह्हह्हआआ

वैसे उसने ब्रा नहीं पहनी थी इसलिए उसने उसके नंगे मम्मी को आपने हातो मई पकड़ा था .. और उसे मसल रहा था तब वो उसने जो हाट से उसके दोनों हाट को पकड़ा था वो हाट को चोर के वो हाट आगे ले जाकर उसके साडी के अंदर दाल के जैसे hi उसके छूट पाई उंगली रखता है वैसे hi नीता उछाल पड़ती है तभी किचन मई के 1-2 बर्तन निचे गिरते है ...जिससे ज़ोर से आवाज़ हुई. शयद चुवे की वजह से बर्तन गिरे थे .. पर उससे नीता दर जाती है ...होंठ पे हाथ रख के भर को भाग जाती है .. .. दर या कहिये मज़े मई कहिये उसने वह कड़ी अपनी मेमसाब को देखा hi नहीं ..
 
नीता के भागने के बाद झट से आरती पीछे हैट जाती hai….uski दिल की धड़कन तेज़ थी इस waqt....jo भी उसने इस वक़्त देखा था उसके बाद उसकी जिस्म में एक अजीब नशा सा चढ़ गया tha....ye सब देख के आरती तेज़ सांस ले रही थी .वो नवाज़ के इस पागल पैन से हैरान थी .. ऐसा तो कभी उसके पति ने भी नहीं किया था उसके साथ .

तभी नवाज़ का मोबाइल बाज़ उठता है

हां रांडा आ रहा हु

ऐसा कहता है तब आरती को लगा ये बहार आएगा अब तब आरती भागते हुई सीधा बैडरूम में जाकर दूर बंद करके उसको सात के कड़ी होक अपनी फूली हुई सांसों पर काबू पाने लगती है ..और अपने ऊँगली के नाख़ून को कुतरने लगती है........ आरती के बड़े चुके उसके ब्लाउज में ज़ोर जोरसे साँस लेने की वजह से ऊपर निचे हो रहे the....thodi देर बाद वो नार्मल हो जाती है ....... तब वो आपने बीएड पाई जेक बैठ जाती hai..lekin उसकी आँखों के सामने नीता और जावेद के रोमांस का सन आ रहा tha....wo खुद पर चाहे जितना कण्ट्रोल कर ले लेकिन उसके दिमाग से वो सन नहीं जा रहा था ..पता नहीं क्यों लेकिन उसके अंदर एक नशा सा था इस waqt....aisa उसके साथ इससे पहले कबि नहीं हुआ था......

फिर वो कैसे तो आपने आप पर कण्ट्रोल करते हुई फ्रेश होने चली जाती है .. फ्रेश होकर वापस हॉल में आ जाती है और टीवी देखने लगाती है.. कुछ देर बाद मतलब 2-3 घंटे बाद बहार से आ रही आवाज़ से उसका ध्यान बहार की और चला जाता है .. बहार नवाज़ और उसके ससुर बाते कर रहे थे. तब वो उठ के हॉल के विंडो के पास जाती है और बहार के तरफ देखने लगती है..





बहार नवाज़ और आरती के ससुर बाते कर रहे थे .. उसके ससुर की पिट आरती के तरफ थी और नवाज़ का चेहरा आरती के तरफ था पर नवाज़ ने अभी तक आरती को देखा नहीं था.. जहाँ नवाज़ खड़ा था उसको आरती क्लियर देख सकती थी .... आरती नवाज़ के तरफ देखती है.... नवाज़ एक पुराणी से शर्ट में और पुराणी से पंत मई खड़ा था और आपने मालिक को है है के कुछ बता रहा था ..वो क्या बाते कर रहे वो आरती सुन नहीं प् रही थी

उसे देख के आरती कहती है

ऐसा क्या है इस काळा मई जो पापा जी इतना ज्यादा इम्प्रेस है .. अरविन्द कह रहे थे खेत की साडी जिम्मेदारी पापा जी ने इसे दे राखी है .. और नीता को भी इसमे क्या लगा जो आपने सब कुछ इस काळा गेंदे को दे दिया ..

अब आरती एक जगह पर खड़ा होकर नवाज़ को हे देखे जा रही thi......fir अचानक आरती के चेहरे पर स्माइल आ जाती है........





पापा जी इसे कितना अच्छा मानते है और ये गन्दा आदमी सरे आम हमारे किचन मई हमारे माइड के साथ रोमांस कर रहा था.. रोमांस क्या सेक्स भी करता अगर नीता नहीं बैग जाती .. अगर पापा को ये पता चल जाये की अगर उसके चहिते नौकर ने उनके किचन मई hi उनके माइड के साथ रोमांस किया और सेक्स करने की कोशिश की तो उनकी रिएक्शन क्या होगी .. क्या वो उनके चहिते नौकर को काम से निकल देंगे या सिर्फ डाँटेगे या खेत मई वापिस भेज देंगे .. देखना पड़ेगा .. पापा जी क्या करते है .. मई क्या पापा जी को बोल दू क्या ..























हह











 
मई क्या पापा जी को बोल दू क्या इतना कहके आरती को पता नहीं क्या हो गया और बहार चली गयी .. मैं दूर से और विंडो के सामने जेक बैठ गयी ...और तिरछी गर्दन करके उन्दोनो को देखने लगी ..





अब वो नवाज़ को देखनी लगी तब उसे नवाज़ को देखते हुई बार बार नीता के साथ किया हुआ नवाज़ का रोमांस याद आने लगा .. तभी नवाज़ की नज़र अचानक आरती पर जाती हैं वो देख के आरती की धड़कन तेज़ होजाती है…

आरती ने इस वक़्त बहुत hi टाइट ब्लाउज पहना हुआ था और साडी का पल्लू ऐसा लिया था की उसकी कमर और पेट पूरा दिख रहा था .. जिस वजह से वो सेक्स बम दिख रही थी...... नवाज़ जब आरती को इस साड़ी में देखता है नवाज़ का लुंड तो जैसे फनफनाने लगता है...... आरती की गोल मटोल सुडोल चुकी देख कर उसका लुंड फनफने लगा था … आरती भी बड़े प्यार से नवाज़ की आँखों में देखती है....





तभी आरती के ससुर ने उसे देखा तब आरती अपनी साडी ठीक करती है

ारे आरती बीटा

तब आरती कहती है

जी पापा जी

इधर तो आओ जरा

जी पापा जी

कहते हुई आरती आपने ससुर के पास चली जाती है

ारे आरती बीटा तुमने नवाज़ और नीता को बताया नहीं है क्या

क्या पापा जी

यही की कोण कोनसे रूम की साफ़ सफाई करनी है

नहीं पापा जी

फिर बता दो न

जी अभी बता देती हु

फिर वो नवाज़ को देख के इशारा करते है यहाँ से चलने का





पर वो इशारा नवाज़ नहीं समाज पाया तब आरती कहते है

चलो

किधर

किधर क्या ..तुम रूम दिखते हु

हां हां दिखा तो

तो चलो

ऐसा कह के रूम दिखने के लिए जाने लगी तब शेठजी कहते है

पर बीटा कामचोर किधर है

तब नवाज़ की और पलट के देखते हुई स्माइल करते हुई आरती कहती है





वो कहा जाएगी ..वो भी इसके पीछे पीछे आ जायेगे

तब शेठजी कहते है

मतलब बीटा

कुछ नहीं पापा ..मई इसे रूम दिखती हु

हाँ दिखादो

चलो

हाँ .. वैसे कोनसे कमरे से साफ़ सफाई शुरू करनी है...

आ जाओ मैं दिखती हूँ...

उतना बोलकर आरती आगे चलने लगती है और नवाज़ उसके piche....aarti की मटकती हुई गांड पर नवाज़ की नज़र जाना लाज़मी thi...aarti की बड़ी गांड के दोनों फैंको की मूवमेंट उस साड़ी में काफी हद तक पता चल रही थी… नवाज़ चलते हुई अपने लौड़ा खुजला रहा था आरती की गांड की हरकत देख kar....fir आरती नवाज़ को अपने ससुर के कमरे तक लेजाती है…

नवाज़ इस कमरे से शुरू करना है.. फिर बाकि कुछ पुराणी भी कमरे हैं वो बाद में कर लेंगे....

जी मेमसाब

तब पलट के नवाज़ को देखते हुई कहती है ..





फ़िक्र मत करो ..तुम्हारी नीता को भी मई बुला लौंगे .. वो तुम्हारी मदद कर लेगी...

आप हो तो उसके क्या जरुरत

तब आशर्य से आरती नवाज़ को देखते हुई कहती है

मतलब क्या है तुम्हारा

मतलब आप का ितं बड़ा सा अच्छा सा बंगला है ..

उसके मम्मी की और देखते हुई कहती है ..

तो इतने बड़े बंगले की कहा कह और कैसे कैसे सफाई करनी है वो नीता से अच्छा आप बता सकती है .. आफ्टर आल ये आपका बांग्ला है ..आप इसकी मालकिन है

अच्छा ऐसा क्या

हाँ मेमसाब और दूसरा क्या हो सकता है

हाँ वो बात तो है पर नीता रहेंगे तो वो तेरे हेल्प करेगी

वो क्या हेल्प करेगी मेमसाब ..वो तो सिर्फ काम बढ़ती है

तब आरती हँसाने लगी

वैसे हेल्प तो आप भी कर सकती हो न.. आप थोड़ी न मुझे मन कर सकते हो

हाँ .. मई भी हेल्प करुँगी

नवाज़ ने डबल मीनिंग से बोलै था जो आरती समाज नहीं पायी

आप थोड़ी न मुझे मन करोगी

नहीं करुँगी

तब आरती के गुलाभी होंठो को नवाज़ देखने लगा .. उसके होंठ जैसे नवाज़ के जानवर को और ज्यादा जगा रहे थे .... नवाज़ ने जब से उसके बाल भिगोये थे तब से उसने बाल नहीं बन्दे थे .. आरती के खुले बाल उसको खूबसूरती में चार चाँद लगा रही थे..... आरती का ब्लाउज इतना टाइट और छोटा था की उसकी चुकी जैसे अभी फाड़ कर बहार निकल jaegi.......aarti का सपाट चमकता हुआ चिकना पेट इसमें छोटी सी गहरी नाभि कयामत धा रही थी...... नवाज़ आरती से बात करते हुई उसे hi देख रहा था ..
 
तब आरती कहती है

क्या तुम पहले भी यहाँ आया है क्या

तब झट से नवाज़ बोलता है

नहीं मेमसाब पहली बार आया हु

तब नवाज़ की तरफ घूरते हुई देखते है और कहते है..





फिर इस बंगले के बारे मई इतना सारा कैसे पता है तुम.. क्या आते hi पूरा बंगला घूम के देख लिया क्या तुमने ...

ऐसा कहते हुई आगे चलने लगी ..आपने ससुर के कमरे मई

मुझे क्या पता है .. मुझे तो कुछ भी पता नहीं है आप के बंगले के बारे मई

पता नहीं है तो अभी कैसे तुमने कहा की आप का ितं बड़ा सा अच्छा सा बंगला है .. और उस दिन नीता को कैसे कहा की मैडम का घर बहुत hi प्यारा है. बाहर का बड़ा सा गर्दन.. फिर बहार का बड़ा सा हॉल.. वो दोनों साइड के 3 रूम.... किचन और उसमे का ये सुन्दर सा डाइनिंग टेबल ..

ऐसा कहते हुई आरती अपनी गर्दन पीछे घूमते हुई है... उसके चेहरे पर हलकी से स्माइल थी.. ये कहते हुई..

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मैं जब नीता को ये बता रहा था तब इसने सुन लिया शयद.. लगता है इसका मेरे तरफ hi ध्यान था उस वक़्त .. ये तो अच्छी बात है ..

ऐसा नवाज़ आरती ने जब पूछा तो सोचने लगता है ..और आरती की और देखते हुई कहता है ..

मैंने तो ऐसे hi कहा था

लगा hi था मुझे ..

ऐसा कह के स्माइल करते हुई आगे होती है .. तब नवाज़ उसकी गांड को आँखों hi आँखों मई नंगी करते हुई देखता है ..

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एक्चुअली मेमसाब .. मैं तो आज पहली hi बार यहाँ आया हु.. आप के बारे मई बहुत कुछ सुना है पहले hi..

क्या??

आरती पलट के आर्चाय से कहते है

मेरे बारे मई . . और तुमने..

मेरा मतलब आप के बंगले के बारे मई मैडम जी..

आरती अब घूम जाती है और वाल से पिट सत्ता के खड़े होकर आपने नशीले आँखों से नवाज़ की तरफ देखते हुई कहती है..

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ओह्ह्हू.. अच्छा... ऐसा क्या सुना है हमारे बंगलो के बारे मैं

बहुत कुछ

अच्छा या बुरा

आरती के चहरे पर हलकी सर स्माइल थी..

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जब से वो आया था तब से उसे नवाज़ का गुस्सा आ रहा था पैर अब वो काफी हद तक काम हो गया था

अच्छा hi.. मेमसाब जी.. इतने खूबसूरत बंगले के बारे मई कोण बुरा बता सकता है..

वो तारीफ तो बंगले की कर रहा था पर देखे जा रहा था आरती के खुबसुरती को..

तुमने बांग्ला अभी तक अच्छे से देखा नहीं है.. तो कैसे कह सकते हो.. वो कितना खूबसूरत है या नहीं..

आरती नखरा दिखते हुई कमर पर हाथ रखते हुई सेक्सी तरीके से खड़े होक कहते है

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देखने की क्या जरूरत है मेमसाब जी.. अच्छी चीज़ पहले hi नज़र मई बहा जाती है..

नवाज़ के इस बात पर आरती का चेहरा खिल उठता है..

अच्छा जी.. बाते तो बहुत अच्छे कर लेते हो.. कहा से सीखे इतने अच्छे बाते करना

हम कहा से गरीब लोग अच्छे बाते करना सीखेंगे.. मेमसाब जी.. जो दिल मई होता है वही बोल देते है.. वो खुद बा खुद आप जैसे बड़े लोंगो को अच्छे लगने लगती है..

आरती खुल रहे है ये जानकार नवाज़ उसको बाटली मई उतरने की कोशिश कर रहा था..

आरती नवाज़ के इस बात पर खुल कर हस्ती है..

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जब से नवाज़ आय था तब से पहली बार आरती खुल कर हसे थी..

आरती हस्ते हुई कहते है

सिर्फ बाते hi करना जानते हो या काम बाम भी करना आता है.. कुछ..

तब नीता वह आ जाती है और आते hi कहते है..

काम तो बहुत अच्छे से करता है ये.. कोई कम्प्लेन की गुंजाइश नहीं रहेंगे.. दीदी ..

जिस तरह से नीता ने कहा था उस वजह से आरती उसके तरफ एक अलग hi तरीके से देखने लगती है..

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तुजे बहुत कुछ पता है रे इस के बारे मई..

वो मैडम मैंने उसके साथ खेत मई कुछ दिन काम किया था न तो इस वजह से मुझे नवाज़ के बारे मई थोड़ा बहुत पता है.. बाकि कुछ नहीं..

पक्का

पक्का क्या मेमसाब

बाकि कुछ नहीं

आरती पहले नीता को शक की नज़र से देखते है.. वैसे तो उसे सब कुछ पता था पर वो वैसे दिखाना नहीं च रही थी ..





और फिर कहते है...

पक्का बाकि कुछ नहीं है न

और फिर नवाज़ को सेक्सी तरीके से देखने लगती गई ..

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नीता को लगता है मेमसाब को क्या मुज पर शक हो गया है क्या??

ऐसा नीता सोचने लगती है.. ऐसा सोचते हुई वो सब्जेक्ट बदलने लगती गई..

नीता : और नवाज़.. अम्मी आबू कैसे है ...

तब आरती ने अपनी नशीली आँखों से उन दोनों के तरफ देखा और फिर नीता की तरफ आपने चेहरा करते हुए कहा...

लगता है तू इससे पहले से जानती है..

हाँ मेमसाब मैंने कहा न की खेत मई हम साथ मई कम् करते थे

हाँ मई भूल hi गयी
 
नवाज़.. तूने नहीं बताया.. अम्मी अब्बू कैसे है..

नीता ने बात बदल दी ये आरती पहचान जाती है.. और वो चहरे पर थोड़े हलकी से स्माइल लेट हुई कहते है..

नवाज़ बता बता.. इससे तेरे अम्मी आबू के बारे मई. . इससे उनके बारे मई जानने की बहुत इच्छा है..

तब नवाज़ भी हँसाने लगता है ..

नीता सोचने लगती है..

आज मेमसाब को क्या हो गया है.. मेरे पीछे क्यों पड़े है..

नवाज़ : अच्छे है वो दोनों.. तुम्हे बहुत याद करते है...

नवाज़ ने हस्ते हुए कहा...

तब नीता कहते है

मुझे भी उनकी बहुत याद आती है...

नीता के ऐसे कहने पर नीता आगे कुछ बोले उस से पहले hi आरती कहते है.. कुछ मजाकिया अंदाज़ मई ..

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तो उनको मिलाने जाया कर तू ... नीता ..

नीता आरती के ऐसे कहने से उसकी तरफ देखने लगती है.. और फिर नवाज़ की तरफ देखने लगती है ..

आरती अब थोड़े मज़ाक के मूड थी.. और वो खुल भी गए टी .. वो नीता की थोड़े लेने के फ़िराक मई थी .. वो नवाज़ की तरफ देखते हुई कहती है..

नवाज़ ये आती है क्या तुम्हारे अम्मी आबू को मिलाने ...

आरती के ऐसे कहने के बाद नवाज़ पहले आरती की तरफ देखता है और फिर नीता की तरफ .. वो सोचने लगता है .. मई क्या कहु ..

आरती चालक थी .. नवाज़ के चहरे के हावभाव से उसे पता चल गया की नवाज़ क्या सोच रहा है .. वो सोच कर आरती नवाज़ को चहरे से और आँखों से इशारा करती है .. बता दो ऐसा इशारा करती है ..

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आरती इतना खुल गए है ये सोच कर और आरती के बातो से और इशारो की वजह से नवाज़ अब खुली आँखों से hi सपने देखने लगा....

नवाज़ (मन में)- क्या किस्मत है yaar...jagah पाई hi बिना कुछ करे चुदाई के लिए माल मिल रहा है ........ये छूट खुली हुई होंगे या सील पैक... यार नवाज़ मैडम शाधिषूदः मतलब छूट खुली hi होंगे न.. तू भी कुछ भी सोचने लगा.. पर साहब ने अच्छे से छूट खुली की नहीं होंगे.. तो क्या हुआ.. नवाज़ तू इस कमल की छूट को खुली कर देना..

( और फिर वो आपने आप से कहने लगा) और सबसे बड़ी baat....ye इतने आसानी से कैसे मेरे जाल मई आ gaye.....kuch भी ho...iski छूट मेरे लुंड का स्वाद कहेगी जरूर....

ये सब सोच कर नवाज़ जोश मई आ गया .. आरती आपने को डायरेक्ट बात कर रही है ये जान कर नवाज़ झट से बोल पड़ता है..

नहीं

नवाज़ के ऐसे जवाब से नीता बड़े बड़े आँखे कर के नवाज़ को देखने लगती है.. शयद इशारे से कह रही थी मैडम को ये सब सही सही क्यों बता रहा है..

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तब नवाज़ कहता है..

मैडम मई थो ज्यादातर आप के खेत मई रहता हु.. मुझे ज्यादा कुछ पता नहीं है.. पर शयद बीच बीच मई जाती होंगे अम्मी अब्बू को मिलाने..

नवाज़ ने पलटी क्यों मरी ये आरती को तब पता चला जब उसने नीता को देखा.. नीता अभी भी नवाज़ की तरफ गुस्से से बड़े बड़े आँखे करते हुई देख रही थी.. आरती इससे सब समाज गयी..

तब आरती नीता को देखने लगे.. और कहते है.. उसको देखते हुई..

क्यों रे.. तू जाती है क्या.. नवाज़ के अम्मी अब्बू को मिलाने..

आरती की तरफ देखते हुई नीता कहती है..

टाइम कहा मिलता है.. मेमसाब.. यहाँ काम इतना सारा रहता है..

नीता आगे और कुछ बोले इससे पहले hi आरती है..

खाली याद करना है.. मिलाने नहीं जाना है.. ये याद करने का अच्छा तरीका है..

फिर वो नवाज़ की तरफ देखते है.. गर्दन घुमा के... चहरे पर हलकी सी स्माइल और सेक्सी अड्डा लेट हुई..





नवाज़... ये तुम्हारे आबू अम्मी को याद नहीं करती .. सिर्फ कहने के लिए कह रही है..

नहीं मेमसाब कहने के लिए नहीं कह रही हु.. सच मई ज्यादा टाइम नहीं मिलता..

मिल के आने मई ऐसा कितना टाइम लगता है .. नीता..

अब नीता कुछ कह नहीं पा रही थी.. वो न जाने का सही से एक्सप्लनेशन नहीं दे प् रही थी..

नीता नवाज़ के घर जाया कर.. मई तुम छुट्टी दंगे..

आरती के ऐसे कहने से नीता आचार्य से आरती की और देखने लगे और सोचने लगे.. आखिर आज मेमसाब को क्या हुआ है.. क्यों वो मुझे नवाज़ के अम्मी अब्बू को मिलाने के लिए कह रही है..

उस बहाने तुम दोनों की मुलाक़ात होते रहेंगे.. वो खेत मई और तुम यहाँ.. ऐसे कैसे.. तुम दोनों को बार बार मिलाना पड़ेगा न.. आखिर कर मई तुम दोनों की मालकिन हु.. तुम्हारे दुश्मन थोड़े hi हूँ.. तुम दोनों को मिलाना मेरा फ़र्ज़ है..

मैडम.. हम दोनों के बीच मई ऐसा वैसा कुछ नहीं है.. आप को कुछ गलतफैमी हुई है..

गलतफैमी और मुझे..

हाँ मेमसाब

कोई गलतफैमी नहीं हुई है.. तुम दोनों जैसे चिपक के खड़े थे तभी मई समाज गए थे..

नहीं नहीं.. मेमसाब.. वो तो ऐसे hi खड़े थे..

कैसे तो नीता बात को छुपाने की कोशिश कर रही थी..

मुझे पापा जी जैसे घूमने की कोशिश मत करो तुम

सच मेमसाब ऐसा कुछ नहीं है

तब आरती जोर जोर से हँसाने लगे..

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अब नीता को सब समाज आया.. मेमसाब मेरे साथ मज़ाक कर रही है.. ये उसके समाज मई आ गया.. इधर नवाज़ भी हँसाने लगा...

अब नवाज़ और आरती हँसाने लगे थे और नीता चुप चाप कड़ी थी . थोड़े देर ऐसा hi सन उस रूम मई चलता raha..wo दोनों आपने आपने काम करने लगे और आरती वही खड़ा रहके उन दोनों को देखा ने लगी..

थोड़े देर बाद नवाज़ कहता है..

मेमसाब अगर कुछ नाश्ता मिल जाता तो आपका बहुत एहसान hoga........wo क्या हैं की आप खाना बहुत ाचा बनती हैं ....... ऐसा सुना है..

आरती नखरा करते हुई कहती है..





किस से सुना है..

उसपर नवाज़ कहता है

किस से सुना होगा

तुम्हारे नीता से

नीता के तरफ देखते हुई स्माइल करते हुई आरती कहते है..





आप ने सही कहा ..

नीता ने कहा था की मेमसाब जैसा खाना तो मेरी माँ भी कभी नहीं बनती hai.........aapke हाथों में तो जैसे जादू हैं ......

नवाज़ इतना कहकर अपने काळा पीले दांत दिखता हुआ धीरे से हंस पड़ता हैं....... वहीँ आरती भी इस बार उसकी बाटिओं को सुन्करर मुस्कुराये बिना नहीं रह pati.........wo ाचे से जानती थी की नवाज़ जाहिर हैं ...... गंवार हैं ..... मगर न जाने क्यों अब उसे उसकी बातें ाची लगने लगी thi.......uske मुँह से अपनी तारीफ उसे गुदगुदाने लगी थी......

अच्छा जी.. ऐसा कहा क्या तुम्हारे नीता ने

हाँ मेमसाब

तब नीता कहते है..

आप इतना अच्छा खाना बनती हो इसलिए बोलै.. उसमे जूथ क्या है.. सब सच तो है..

मैं नहीं जानती की मई इसके माँ से अच्छी बनती हु या नहीं पर मेरा खाना बहुत लोंगो को पसंद आता है..

तो हमें भी खिला दो

" ठीक हैं.. अब नास्ता बनती हु.. रात मई खाना banaungi..tum दोनों चलो किचन मई .....मैं तुम्हारे लिए कुछ नास्ता बनती हूँ......."

और आरती घूम जाती है और किचन के तरफ जाने लगाती है .. किचन मई जाने के बाद गैस की तरफ चल पड़ती हैं वहीँ नवाज़ की नज़रें एक बार फिर से आरती पर थी........ आरती के घूमते hi वो अपने पंत के ऊपर से अपने लौड़े को धीरे से मसल देता hain.....wahin अब उसे यकीन हो चला था की ये बुलबुल बहुत जल्द उसके बिछाये जाल में फंसेगी .......और जब वो फंसेगी तो वो उस बुलबुल का शिकार बहुत आराम से करेगा ......... जैसा मर्ज़ी वैसा उसके साथ करेगा ............

पानी कहा है.. पीने का..

तब आरती घूम जाती hai..aur नवाज़ की तरफ देखने लगती है.. आरती का ऐसे देखने की वजह से नवाज़ कहता है..

वो मेमसाब ...मुझे पानी पीना था ...प्यास बहुत लगी है...
 
नवाज़ ने आरती को पानी का इस लिए बोलै था ताकि बात को कुछ और आगे बढ़ाया जय.. कुछ और बात चित हो.. आरती को और थोड़ा ओपन किया जय.. पर आरती कुछ बोले इस से पहले hi नीता बोल पड़े.. एक बार फिर नवाज़ का ये दांव अधूरा छूट गया..

नीता कहती है..

वो साइड मई फ़िल्टर है.. वह से ले लो..

अब नवाज़ फ़िल्टर की तरफ जाने लगता है.. वो जैसे hi फ़िल्टर के पास पहुँच जाता है.. वैसे hi आरती कहती है..

रुक जाओ..

उसके ऐसे कहने से नीता और नवाज़ आरती की तरफ देखने लगते है..

वो पानी गरम होगा.. मई ठंडा पानी देते हु..

ऐसा कहा के वो फ्रीज की तरफ जाने लगते है.. वैसे नीता आपने काम करने लगते है.. आरती फ्रीज की तरफ जाने लगती है.. कमर को झटके मरते हुई.. उसकी इस सेक्सी अड्डा को नवाज़ बड़े प्यार से देखने लगता है.. उसकी सेक्सी नवल ने उसे पागल बना दिया तह..

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आरती फ्रीज़ से ठन्डे पानी की एक बोतल निकल लेती है... और दिंनिंग टेबल के पास आके वो बोतल उस पर रख देते है.. नवाज़ बाजु मई hi खड़ा था.. नवाज़ आरती की ादोंको hi देखे जा रहा था...

आरती अब थोड़ा निचे जुख जाती है.. गिलास लेने के लिए... जो दिंनिंग टेबल के निचे रखे थे.. तब उसका पल्लू आगे की तरफ जुख जाता है.. उस वजह से उसके आम का सही से दर्शन नवाज़ को हो जाता है..

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ये नज़ारा देख के नवाज़ जो पहले hi आरती के जवने के जलवे से पागल हुआ था वो अब और पागल हो जाता है..

आरती कैसे तो आपने साड़ी ठीक कर लेते है और उठ के खड़े होकर गिलास मई पानी डालती है.. और आरती पानी ले कर नवाज़ के सामने जेक खड़े हो जाती है..





उसे आपने इतने नज़दीक पाकर नवाज़ की नज़र उसी पर ठहर गए... उसके इतने करीब होने के वजह से नवाज़ को वो और hi ज्यादा खूबसूरत लग रही थी.. उसकी नज़र उसके चहरे से हट नहीं रही थी.. आपने सम्मे इतने करीब आरती को देखा तो फिर से नवाज़ सपने में खोने लगा....

अब सन ऐसा था की आरती नवाज़ के सामने खड़े थी .. हाथ मई गिलास लेके.. और नवाज़ उसके सपनो मई खोया हुआ था.. नवाज़ के ऐसे लगातार आपने चहरे की और देखने से आरती को अजीब से फील हो रहा था.. उसे हाथ मई गिलास लेके खड़ा होना ऑकवर्ड फील हो रहा था.. ये सब देख कर वो आशर्य से नवाज़ की तरफ देखने लगती है..





पर उसका नवाज़ पर कोई असर नहीं होता है.. वो लगातार आरती को देखे जा रहा था..

तब परेशां होक आरती कहती है..

नवाज़.. पानी ले लो

आरती ने वैसे भी ये बहुत धीरे से कहा था और नवाज़ वैसे भी आरती के सपनो मई था.. इसलिए नवाज़ ने नहीं सुना.. तब आरती 2-3 बार नवाज़ नवाज़ कहती है.. पर नवाज़ ने कोई रिस्पांस नहीं दिया..

अब आरती थोड़ा जोर से कहती है..

पानी ले लो.. मई कितने देर ऐसे hi यहाँ खड़े राहु..

आरती के बड़े आवाज से जैसे नवाज़ सपने से बहार आता है.. और उसके चहरे की और देखते हुई उम्म्म्म कहता है..

तब आरती कहती है.. थोड़े गुस्से से..





ये उम्म्म क्या कर रहे हो .. और ये पानी ले लो.. प्यास लगे है न तुम..

फिर उसके आँखों मई देखते हुई कहते है

ऐसा देख क्या रहे हो मुझे .....

तब नवाज़ हड़बड़ा जाता है..

नहीं.. तो... कुछ नहीं देख रहा हु..

तो ले लो न पानी .... ऐसा कितने देर मुझे आपने सामने खड़े करने का इरादा है तुम्हारा..

पर तभी नवाज़ की नजर उसके चेहरे से हैट कर उसके सीने पर padi...to उसकी चूचियां देख कर नवाज़ के अरमान जागने लगे .... इतनी मस्त चूचिया … पल्लू से ढकी थी फिर भी बिजली गिरा रही thi....jab खुल कर सामने आएगी तब क्या हाल करेगी… यही नवाज़ सोचने लगा..

आरती की साँसों के साथ hi उसका सीना uper-neeche हो रहा tha...aur उसके हिलते हुए बूब्स नवाज़ के लुंड की गर्मी बड़ा रहे थे.. सामने से बूब्स के बीच की गहराई भी थोड़ी बहुत नजर आने लगी थी .. क्योकि आरती का पल्लू थोड़ा सरक चूका था....

....

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नवाज़ का आपने बूब्स का इतने करीब से देखना शयद आरती को अच्छा लग रहा था.. या वो कुछ अलग hi सोच मई थी.. उसके चेहरे पर अजीब सा सुकून था ....उसे नवाज़ के साँसों की गर्मी अच्छी लग रही थी शयद .. इस वजह से वो वह से नहीं जा रही थी.. और इसी वजह से उसकी साँसे तेज हो चली थी....

नवाज़ अपने आप में खोये इस खूबसूरत पल का आनंद ले रहा था ...पर तभी आरती के आवाज ने नवाज़ का सारा मज़ा खराब हो गया....

ारे पानी नहीं पीना है क्या तुमको.. जाऊ क्या मई.. मुझे बहुत काम है.. मई क्या तुम्हारे जैसे कामचोर नहीं हु..

.





नखरा करते हुई आरती कहती है..

नवाज़ तो जैसे सुनहरे सपने से जाग गया और उसने गुस्से से आरती की तरफ देखा … नवाज़ का चेहरा देख के आरती की हसी छूट गए.. वो जाएं गए की अचानक नवाज़ के चहरे पर गुस्सा क्यों चाय हुआ है..

मई क्या आप को काम चोर लगता हु क्या मेमसाब

नहीं तो क्या कब से आये हु.. सिर्फ खड़े रहे हो..

तो क्या मई आप को नाश्ता बनाने मई हेल्प करू क्या..

नवाज़ के ऐसे कहने से आरती की हसी चऊथ जाती है





अरे बाबा... मैंने ऐसे तो नहीं कहा

आप के कहने का यही मतलब है.. कामचोर कह कर..

कामचोर का वो मतलब नहीं है

तो क्या मतलब है मैडम जी

मई भला क्यों बताऊ तुम

मतलब मैंने जो कामचोर शदह का मतलब निकला वही मतलब है

वो मतलब नहीं है.. समजे..

तो क्या मतलब है.. मैडम जी.. हमें भी पता चले इसके अलावा कामचोर शब्द का कोई और भी ार्थ होता है.. हमारे घ्यान मई उतना hi इज़ाफ़ा हो जाये

तो हमारे द्वारा तुम आपने घ्यान मई वर्दी करना चाहते हो..

हाँ मैडम जी

अच्छा तरीका है आपने घ्यान की वर्दी करने का.. बिना कुछ किये दुसरो का घ्यान ले लो और आपने घ्यान मई वर्दी करो..

बिना कुछ किये

हाँ

आपको लगता है हमने कुछ नहीं किया

हाँ

आप को पता नहीं है मेने अब तक क्या क्या किया है..

मुझे क्या पता तुमने क्या क्या किया है और कहा कहा झंडे गड़े है..

वैसे मैडम जी हम झंडे गाड़ने मई बहुत माहिर है..

पता है

ऐसा कहा के आरती नीता के तरफ देखने लगती है

तो आपको सब पता चल गया है

मई क्या तुम बुद्धू लगती हु

लगती तो नहीं हो

शुक्रिया

वैसे आप को पता नहीं है हमने क्या किया है

मुझे कैसे पता चलेगा तुमने क्या किया है

आप तो चालक हो

ज्यादा चने के पेड़ मई मत चढ़ाओ हमें.. हम सब समजते है

क्या समजते हो आप

कुछ नहीं

मुझे लगा आप को पता चल गया होगा मैंने यहाँ आने के बाद क्या क्या किया है..

ऐसा कह के वो उसके मम्मी को फिर से घूरने लगा..





उसका एक मां सदी का पल्लू बाजु मई होने से नवाज़ के आँखों से बरारबर सामने आ गया था.. नवाज़ की नज़र पहचान कर आपने पल्लू आरती ठीक कर लेती है..

मुझे लगता है तुम समाज गए
 
तुम???

सॉरी .... आप..

वो मई समाज गए.. तुम्हारे आँखे कहा मंडरा रही है..

कहा मंडरा रही है.. मेमसाब जी.. हमें भी बता दो आप.. .

वो तुम भी पता है और मुझे भी.. ज्यादा स्मार्ट मत बनो..

तब नवाज़ सब्जेक्ट चेंज करता है

वैसे मैडम जी आपने कामचोर का मतलब नहीं समझाया हमें..

तुम क्या एक चौथे बच्चे हो क्या मई तुम एक एक शबद का एअर्थ समजाओ

बताओ न मैडम प्लीज

Ok.. बताती हु.. पहले ये तुम्हारा पानी ले लो..

जरूर लगा......

तो ले लो

आरती मुस्कुरा कर कहती है......





oh...haa...dhynyawad ......

ऐसा कहते हुई नवाज़ पानी का गिलास लेने लगता है...

वेलकम

वेलकम तो रूम मई आते वक़्त बोलते है अब कैसे??

बुद्धू..

अब मैंने क्या किया

तुम तो एक नंबर के बुद्धू हो.. जब कोई थैंक्स या धन्यवाद बोलता है तो जवाब मई वेलकम कहते है..

ऐसा क्या.. हम जरा अंग्रेजी मई कमज़ोर है

हाँ पता है

पर लगता है अब आपके साथ रहेंगे तो हमारी अंग्रेजी भी सुधर जायेगे

तब उसके और देखते हुई आरती कहते है..





मेरे साथ क्यों रहोगे.. रह लो तुम्हारे नीता के साथ

तब आरती के ऐसे कहने से नीता शर्मा जाती है

हाँ मैडम हम तो नीता के साथ रह लेंगे पर यहाँ काम पाई जितने दिन है तब आप के पास काम के सिलसिले मई आप के यहाँ आना पड़ेगा न तब अंग्रेजी सीखा दीजियेगा

अब क्या हमें तुम अंग्रेजी भी सीखनी होंगे

सीखा दीजियेगा थोड़े से

हम से क्या क्या करवाओगे

थोड़े से तकलीफ

पानी का गिलास लेते वक़्त अचानक नवाज़ का हाथ उसके हाथ को लगा… तब आरती सकपका गई.... और वो नवाज़ के तरफ देखते हुई कह पड़े..

आरती - नवाज़ ...

तब नवाज़ ने उसे सॉरी कहा… आरती ने सिर्फ ok कहा और वही उसके सामने खड़े रही..





वो नवाज़ के सामने खड़े रह कर शयद आपने बॉडी का दर्शन उसे दे रही थी..

नवाज़ पानी पिटे हुई आरती को निहारता raha...aur आरती भी स्माइल करते हुए नवाज़ के अरमानो को बढ़ती रही...

नवाज़ पानी पिटे हुई कभी उसके चहरे को देखता तो कभी उसके मम्मी.. तो कभी उसके क्लीवेज को तो कभी उसके नंगे नवल को.. शयद ये आरती जान गए थी पर उसने नवाज़ को कुछ नहीं कहा.. रीज़न पता नहीं पर उसने नवाज़ को कुछ नहीं कहा..

नवाज़ का पानी पीना ख़तम होने के बाद नवाज़ ने आरती को थैंक्स कहा.. आरती ने स्माइल करते हुई जवाब दिया.. और बड़े अदा के साथ कहा

आरती - अब तुम्हारे प्यास भुझ गई hogi...hai न.... नवाज़

नवाज़ - (मुस्कुरा कर)- हम्म...

और आरती की तरफ देखते हुई कहता है

प्यास कभी भुझ्ती कहा hai....memsaab... मतलब फिर लगेगी....

तब आरती मुस्कुरा कर कहने लगी





तो मैं हु na...fir बुझा doogi...ghar में बहुत पानी है.... बहुत सारा पानी पिलाऊंगी.. और ज्यादा hi प्यास लगे होंगे तो नीता है hi न..

नीता - दीदी जी आप कुछ भी बोलते हो

ऐसा कह के वो फिर से एक बार शर्मा जाती है

नवाज़ - पर आप ने नहीं बताया??

क्या?

कामचोर का मतलब..

जाना न है तुम

हाँ

तो जान लो

आप बताओ न

मई बताऊ

हाँ

कामचोर का मतलब है लोफर.. आवारा.. लुच्चा.. बदमाश .. जालसाज.. दुसथा..

कामचोर के इतने सारे मतलब है... मेमसाब..

हाँ

एएब्रो को उड़ाते हुई आरती कहते है..





समजे बुद्धू..

ऐसा कहा के उसके सर को हलके हांथो से मरती है और घूम जाती है..

इतने सरे ार्थ है क्या कामचोर के

आरती गर्दन घुमा के हाँ मई गर्दन हिलती है.. और फिर आरती नीता के पास चली जाती है ..

फिर आरती वह से जाने के बाद नवाज़ मैं मई सोकहने लगता है ..

नवाज़ (मन में)- इसे मेरी किसी बात का बुरा नहीं laga...na hi गुस्सा किया इसने ...मतलब कुछ तो चांस hai....bas इसी चांस पर डांस karuga...bas थोड़ा आराम से चलना होगा....

अब कुछ देर तक आरती और नीता आपने काम मई बिजी हो गए ... पर नवाज़ की नज़र आरती पर hi तह.. वो आरती को देखकर आपने आप से कहने लगा.. इससे एक बार छोड़ना पड़ेगा hi .. हालाँकि मेरे लिए लड़कियों और औरत की कमी नहीं hai..aur जो मेरा लुंड एक बार भी चख ले वो तो दोबारा खुद बी खुद मुझसे छुड़वाने के लिए आएगी.. और कुछ नहीं मिला तो रंडिया तो है hi ... उन रंडियो को छोडूंगा मेमसाब समाज कर ... मुझे उसमे बहुत मज़ा आएगा और मई उन रंडियो की भी हालत ख़राब कर दूंगा ..क्योंकि मेमसाब के बारे मई सोचकर मई जब भी किसी रंडी की चुदाई करूँगा तो मेरा लुंड झड़ने का नाम hi नहीं लेगा....
 
इतने सरे ार्थ है क्या कामचोर के

आरती गर्दन घुमा के हाँ मई गर्दन हिलती है.. और फिर आरती नीता के पास चली जाती है ..

फिर आरती वह से जाने के बाद नवाज़ मैं मई सोकहने लगता है ..

नवाज़ (मन में)- इसे मेरी किसी बात का बुरा नहीं laga...na hi गुस्सा किया इसने ...मतलब कुछ तो चांस hai....bas इसी चांस पर डांस karuga...bas थोड़ा आराम से चलना होगा....

अब कुछ देर तक आरती और नीता आपने काम मई बिजी हो गए ... पर नवाज़ की नज़र आरती पर आरती पर hi तह.. वो आरती को देखकर आपने आप से कहने लगा.. इससे एक बार छोड़ना पड़ेगा hi .. हालाँकि मेरे लिए लड़कियों और औरत की कमी नहीं hai..aur जो मेरा लुंड एक बार भी चख ले वो तो दोबारा खुद बी खुद मुझसे छुड़वाने के लिए आएगी.. और कुछ नहीं मिला तो रंडिया तो है hi ... उन रंडियो को छोडूंगा मेमसाब समाज कर ... मुझे उसमे बहुत मज़ा आएगा और मई उन रंडियो की भी हालत ख़राब कर दूंगा ..क्योंकि मेमसाब के बारे मई सोचकर मई जब भी किसी रंडी की चुदाई करूँगा तो मेरा लुंड झड़ने का नाम hi नहीं लेगा....

आरती ने नाश्ता बनाने के बाद नाश्ता लेकर उसके पास आती है.... वो नीचे बैठा हुआ था नास्ते के लिए.

आरती नास्ते की प्लेट सर्वे करने के लिए नीचे ज़्हुकति है तो उसके ब्लाउज मई से उसके गूरे क्लीवेज नवाज़ को दिख रहे the.....nawaz की आखे वही अटक गयी थी... उसके मुँह मई पानी आ रहा था वो नजारा देख कर.... आरती भी नवाज़ को देखती है और उसको पता चलता है की उसकी नजरे इस वक्त कहा hai.ye देख के उसको गुस्सा आ जाता है तो वो प्लेट देखे बाजु हैट जेक किचन बेस को सात के गुस्से से दूसरी और देखने लगी





और आरती सोचने लगी ..

सेल को मई इतना अच्छा नास्ता बनके दे रही हु और ये कमीना मेरे क्लीवेज देख रहा है ये सोच के आरती के हसीं चेहरे पे हसी आ जाती है..

कमीना साला

ऐसा कह के वो नवाज़ को देखने लगी ... किचन बेस पाई बैठ के





और नवाज़ वही जुंगलियो की तरह खाने लगता है ..... आरती उसको देखती रहती है... उसको दया भी आती है बेचारे पर.... और थोड़े घिन्न भी....

अब कहते हुई नवाज़ आरती को देखता है ..तब आरती उसके आखो मई देखती हुई मुस्कुरा देती hai....pahle से नवाज़ को आरती के ादयो ने दीवाना बनाया था और अब उसकी ये स्माइल .... वो आरती का सुन्दर चेहरा देख कर एक आह्ह्ह्ह भरता है.... और खुदको काबू करता है .....तब आरती मुस्कुराती हुई कहती है ...

नाश्ता करो ..

जी.... मैडम जीई......

ऐसे वो आपने काले डाट निकलते हुई कहता hai.....aur नवाज़ जल्दी से नाश्ता ख़तम करता है..

और उठके खड़ा हो जाता है....

धन्यवाद् मैडम जी.... बहुत स्वादिष्ट नाश्ता बनाया था आपने.. दिल खुश हो गया.. आप बहुत अच्छी है मैडम......

आरती मुस्कुराती हुई कहती है

थैंक यू नवाज़....

चलिए मैडम जी हम चलते है.. काम भी बहुत बाकि है ..

मन तो उसका आरती से दूर जाने का था नहीं पर उसको बोलना पड़ता है.....

जी

फिर वो आरती को कहता है

एक बात पूछे मैडम जी

हाँ

साहब नहीं दिख रहे है

काम के सिलसिले मई शहर गए है .... रात को आएंगे ....

ये बात सुन कर नवाज़ का शैतानी दिमाग ढूढ़ने लगता है....

आरती घर पे अकेली रहेंगी अगर मैंने नीता को कही भेज दिया तो ये मुझे घर मई अकेले मिल जायेगे .. मतलब मई उसके घर मई अकेला रहूँगा उसके साथ.... ये बात सोचके उसका खून गरम होने लगता है.... वो कहता है

अच्छा मैडम.... आपको अकेले दर नहीं लगता ?

नहीं नवाज़.... नहीं लगता दर.....

फिर मुस्कुराते हुए एक अदा के साथ कहते हैं





वैसे भी मई अकेली कहा हु ..... तुम्हारे नीता रहती है न घर मई मेरे साथ ..और अब तुम भी हो न मेरे साथ..... हो न

ये बात सुन के तो नवाज़ को कोई साप सुंग गया था.... उसका तो दिमाग हे काम करना बंद कर देता है ..तब आरती कहते है

कहा खो गए .......

जी मैडम jiii......neeta भी है और अब हम है न आपके साथ.... आपको डरने की कोई जरुरत नहीं है आपको कोई दिक्कत नहीं होने देंगे......

वो अपने काले डाट निकलते हुई कहता है.....

आरती भी उसके आखो मई देखती हुए मुस्कुरा देती है....

जानती हु मई .. तुम्हारे रहते .. ी मैं नीता और तुम्हारे रहते मुझे क्या दिक्कत हो सकती है ..चलो नवाज़ अब तुम आपने काम ख़तम करो .... बाकि की बाते बाद मई करते है .....

ये बड़ी अदा के साथ आरती कहते है





और तुम्हारी महारानी कहा है वो भी देख लो

जी मैडम जी देख लेता हु वैसे भी वो कहा जायेंगे मुझे चोर कर

हां वो भी है तुम चोर कर कहा जायेगा भला वो .. इतने अच्छे मूंदे को चोर के कोण कहा जायेगा

क्या ??

कुछ नहीं कुछ नहीं .. तुम आपने काम करो..

बहुत बहुत शुक्रिया आपका मैडम जी ..... आप का दिल बहुत बड़ा है...

नवाज़ ये बात अपने गंदे डाट निकलता हुई आरती को देखते हुई कहता है....

आरती भी उसको देखते हुई मुस्कुरा देती है

बड़ी बात नहीं है nawaz..Itna तो करना पड़ता है...

तब नवाज़ उसकी आखो मई देखता hai…aur आरती के हाट पर आपने हाट रख देता है ..

बड़ी बात hi है मैडम जी ..नहीं तो आजकल कोण मालकिन आपने नौकर के लिए इतना करती है

और इतना कह कर वह से चला जाता hai..nawaz का यु उसके हाथ पर आपने हाथ रखने से और करीब आने से आरती की सासे बड़ी तीजी से चलने लगी थी.. वो अपने हाथो को देखती है तो उसके गूरे गूरे कोमल हाथ मैले हो गए थे... वो किचन सिंक के पास चली जाती है और अपने हाथो को वाश कर लेती है... आरती के अंदर एक मिक्स्ड टाइप की फीलिंग थी .. उसे एक तरफ से तो घिन भी आ रही थी नवाज़ से वही दूसरी तरफ उसे यु तैसे और सडके करना अच्छा भी लग रहा tha...use कुछ समझ नहीं आ प् रहा tha...idhar नवाज़ की तो जैसे लाटरी लग गयी थी...

फिर आरती भी बहार आ जाती है... और हाल मई सोपे पाई बैठ जाती है .. और सोचने लगाती है.. फिर कुछ सोचकर वो अंदर किचन मई चली जाती है और नवाज़ के बर्तन उठाकर किचन सिंक में

रख देते है और किचन सिंक मई धोने लगाती hai..aur धोते हुई कहती है..

मेरे बर्तन कितने गंदे कर दिए इस नवाज़ ने

ऐसा कहते हुई वो उसके नास्ते का प्लेट और गिलास धोने लगता है
 
मेरे बर्तन कितने गंदे कर दिए इस नवाज़ ने

ऐसा कहते हुई वो उसके नास्ते का प्लेट और गिलास धोने लगाती है ..

फिर दिन भर कुछ नहीं हुआ ..और रात मई घर का छोटा मोटा काम करके वो सो जाती है ..

दूसरे दिन सुबह सुबह उसके हस्बैंड अरविन्द का आरती को कॉल आता है तब वो कॉल उठा लेती है

hello...

हां आरती उठ गयी??

जी अभी थोड़ी देर pehle....aap कल रात आने वाले थे न .. नहीं आये

हां.. नहीं आया .. सुनो मैं आज भी नहीं आ पाउँगा … शायद 2 दिन और लग जायेंगे....

लेकिन क्यों आप ने तो नहीं बोलै था 2 दिन रुकने का

हां आरती लेकिन वो क्लाइंट की फ्लाइट डिले हो गयी इसलिए रुकना पड़ेगा आज भी..

आरती थोड़ा मायूस सी होती है .... उसे यहाँ अजीब लग रहा था फिर भी बे मन से कहती है ....

जी...

अरविन्द को आरती की आवाज़ से पता चल जाता है के आरती नाराज़ हो गयी है....

आरती फ़िक्र मत करो बस 2 दिन की बात है फिर मैं आ jaunga...fir हम कहीं घूमने चलेंगे....

जीई...

चलो मैं अब रखता हु bye....

bye….

कॉल एन्ड करके आरती मोबाइल लेकर hi बैडरूम के बहार निकलती है और

हॉल के तरफ जाते है …कुछ देर हॉल मई बैठ जाती है . फिर बर्ष करके चाय पाइक घर के पीछे की तरफ थोड़े घूमते है .. थोड़े देर घूमने के बाद वो वापिस घर मई जानेवाली होती है की एक आवाज से वो वही रुख जाती है . .

तुम प्लीज ऐसा मत करो देखो कोई आ जायेगा प्लीज. ...

इस आवाज से आरती रुख जाती है..

वो सोचने लगती ये तो किसी लड़की की आवाज है.. यहाँ तो कोई नहीं आता मेरे और अरविन्द के अलावा.. अरविन्द तो यहाँ है नहीं ..वो तो शहर मई है .. तो कोण है .. कोण होगा . कोई नौकर. .. कोण नौकर होगा .. इतने सुबह सुबह . .. कोण नौकर होगा . सब नौकर तो शायद आपने आपने घर मई सो रहे होंगे .. .. ओह्ह्ह माय गॉड नवाज़ ... पापा कह रहे थे नवाज़ यही सोने वाला है .. नहीं नहीं.. नीता इतने सुबह सुबह नहीं आती .. फिर क्या कोई दूसरे लड़की .. ऐसा तो नहीं लगता वो मुझे .. क्या पता नवाज़ hi होगा.. मर्द लोंगो की क्या गुरंटी.. लड़की देखि तो फिसल जाते है.. पर मुझे लगता है नवाज़ ऐसा नहीं है..

फिर वो कुछ देर सोचती है .. क्या वो कमीना होगा क्या.. पर इतने सुबह सुबह.. और नीता तो इतनी सुबह आयी भी नहीं है .. फिर कोण होगा.. मई जेक देखते हु..

ऐसा खुद को कहते हुई उधर जाने लगती है.. थोड़ा आगे जाते है तो उसे बड़ा शॉक लगता है.. नवाज़ ने एक लड़की को दबोच रखा था.. वाल से सत्ता के खड़ा किया था.. उसके दोनों हाथ उप्पर खड़े किये .. मतलब वाल से सत् के खड़े किये थे और आपने चेहरा उसके चहरे के एकदम करीब लाया था..





आरती दूर से पाचन नहीं पायी ये औरत कोण है.. इसलिए वो नज़दीक जाती है तब उसे और बड़ा शॉक लगता है.. क्यों की इस वक़्त नवाज़ के साथ नीता नहीं थी तो कोई और लड़की थी..

वो देख के आरती आपने आप से कहते है.. ये पक्का नीता नहीं है.. ये कोई और hi है.. वो उसे बहुत धीरज से देखते है.. नवाज़ के होंठ उस लड़की के होंटो के बहुत पास थे.. लघबघ उसको वो किश करने वाला था अब..

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अब नज़दीक जाने के कारन आरती ने उस लड़की को पहचान लिया..

अरे ये तो वंदना है.. मुखिया जी की बेटी.. ये तो शहर मई है इंजीनियरिंग करती है.. फिर इस कमीने के साथ कैसे..

ऐसे कह के उसकी और आशर्य से देखने लगी ..





नवाज़: " बोहोत दिन हो गए तुमसे मिले हुए"

तब वंदना ने आपने हाट से उसका हाथ चुरा लिया और वो घूम गयी.. और बोलने लगी..

वंदना : "मिलने की क्या ज़रुरत है... बात कर तो लेते हैं न डेली "

"भेनचोद.. मेरे बारे में कभी नहीं सोचती न तू ..!!"

नवाज़ ने गुस्से मई कहा तब वंदना हसने लग्गी..

' अब्ब हस्स क्यों रही है?"

"तुम गुस्सा क्यों हो रहे हो नवाज़ ?"

गुस्सा नहीं हो क्या

ाचा मिल लेंगे रेगुलरली..

इतने दिनों से प्लान बना रहे है शहर मई जेक फिल्म देखने का.. तो बता कब चल न है?

मैं बाबा से बात करती hoon...phir बताती हु

तेरे बाप को साथ नहीं लेके जाना.. उससे क्यों बात करनी है?

अब वंदना गुस्सा हो जाती है..

ाचा तो मैं उन्हें बिना बताये तुम्हारे साथ चली जाओ?

नवाज़ हस्ते हुयी..

हाँ.. बोल दे के मैं अपने आशिके के साथ फिल्म देखने जा रही हूँ. ..और उससे से बोल के वो अपने काम पे धायण दे.. आपने मुखियागिरी पाई .. उसकी बेटी का ध्यान मैं रख लूंगा..

ाचा जी.. तुम जानते हो न उन्ह... एक बार बहुत मार खाये हो न.. मेरे वजह से.. याद है या भूल गए..

तब उसकी और देखते हुई आरती कहती है





मतलब इसने मार भी खाया है

उस मार की वजह से तो तू पैट गयी न

वंदना इस बात पाई शर्मा जाती है..

पर अब मई तेरे बाप से नहीं डरता..

तो मई बता दू..

क्या बतायेगे..

यही तूने जो बोलै

तू आपने काम कर के तेरे बेटी का ख्याल उसका आशिक़ रख लेगा..

हाँ

नाम भी बता दू आशिक़ का

हाँ

डरते नहीं हो क्या

नहीं.. क्या कर लेगा तेरा बाप ?? याद है तेरे बाप के सामने छेड़ा था तुझे मार्किट मैं..

हस्ते हुई वंदना कहते है..

और उसके बाद बहुत मार भी खाया था मेरे बाप का..

तब उसके कमर पर हाथ रखता है.. तब वंदना घूम जाती है और नखरा करते हुई कहते है...

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.. दफर.. क्या कर रहे हो मेरे साथ..

दफर.. कोण दफर..

कोण क्या तुम.. और कोई है क्या यहाँ

मई दफर नहीं हु

बाबा तुम इसी नाम से बुलाते है न

तेरे बाप पागल है

ऐसे बोल के उसको वाल से सत्ता देता है और कमर के पीछे हाट दाल के एक हाट से उसके आम को दबाता है और सात मई उसके गाल को और गर्दन को किश करने लगता है..





आह्ह्ह्हह..

तुम बहुत ख़राब हो नवाज़

ये सब बड़े इंतेमाम से आरती बहार खड़े होक देख रही थी..





ख़राब hi सही... आशिके हूँ तेरा.. किसी की गांड में डैम नहीं जो मुझे रोक सक्के... और गलत क्या है इसमें.. अपनी गिरफरैंड को फिल्म देखा hi सकता हूँ न.. इसमें तेरे बाप को क्या तकलीफ है? .. उसका क्या जायेगा..

तब नखरा करते हुई कहते है..

मेरे बाप को कोई तकलीफ नहीं है पर तेरा जायेगा तो मेरे को तकलीफ है न..

ये सुन के आरती कहती है..

गन्दी लड़की कही की.. कुछ भी बाते कर रही है..

नवाज़ ने जब वंदना को अपनी गफ बुलाया तब वंदना को जैसे करंट सा लगा.. ये एक अलग hi एहसास था. जो गलत भी था पर जिसका अपना hi एक मज़ा tha.phir भी नखरा करते हुई कहता है..

गर्लफ्रेंड!! कब बानी मई तेरे गर्लफ्रेंड.. कुछ भी मत बोलो.. .. ऐसे बात मत करो किसी की बेटे के साथ.. मई अच्छे घर के लड़के हु.. तेरे जैसे दफर की मई कैसे गर्लफ्रेंड बन सकते हु..

वंदना थोड़ी अकड़ दिखते हुए कहते है..

तुम किसी की भी बेटी हो... भेनचोद मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता.. कोनसे खंडन से ho..usse मुझे क्या करना है .. मुझे बस अपनी गिरफरैंड को फिल्म दिखानी है बास..

आरती को इस नोक झोक से थोड़ी बोहोत एक्सकिटमेंट हो रही थी...

ऐसा कहके उसके पुरे चहरे पर किश करने लगा.. और एक हाट से उसकी गांड भी दबाने लगा..





तब वंदना कहते है..

ok बाबा... चलेंगे बास...

हाँ ये हुयी न बात.. तो अपने बाप को पूछने की जरूरत नहीं .. बस बता दो के मैं नवाज़ के साथ जा रही हूँ. . .

तब आरती कहते है..

आपने नाम तो ऐसे बता रहा जैसे ये कही का सप या कलेक्टर हो..

तब वंदना कहते है..

हाँ कह दूंगी.. पर पहले ये किश करना बंद कर दो..

ये इतने जल्दी कैसे बंद होगी.. कितने दिनों बाद आज मिले हो ..

ऐसा कहके आपने होंठ उसके होंटो के पास ले जाता है..





ये सब देख के बाद आरती के मैं मई बोहोत सी बातें चल रही थी..
 
ऐसा कहके आपने होंठ उसके होंटो के पास ले जाता है..





ये सब देख के बाद आरती के मैं मई बोहोत सी बातें चल रही थी.. ये कैसा लड़का है.. इस वंदना को अपनी गर्लफ्रेंड बोल रहा है तो नीता कोण है.. मैंने इसका नीता के साथ वाला सेक्स देखा है और अब वंदना के साथ.. क्या मई देखु या नहीं.. क्या मई सही कर रही हु या नहीं ? एक गैर मर्द .. जो हमारे घर का नौकर है.. उसके दो दो लड़की के साथ अफेयर.. मुझे मालूम होते हुई भी मई कुछ नहीं कर रही हु.. मेरे हस्बैंड और ससुर को नहीं बता रही हु.. एक लड़की को अपनी गिरफरैंड बोल रहा है.

एक तरफ आरती को सब गलत भी लगता है लेकिन नवाज़ की बातों का उस पर इतना असर हो चूका था के वो गलत है ये जानकर वही कड़ी रही ..

वो थोड़ी नर्वस और थोड़ी एक्ससिटेड थी. खुद की नर्वस्नेस और एक्ससिटेमेंट देख कर वो खुद भी हैरान थी.

इधर वंदना भी रेडी हो गयी thi.wo बेहद खूबसूरत लग रही थी. गोरा रंग, लाल होंठ... जो भी देखे बस देखता hi रह जाये... वो आज सुबह सुबह नवाज़ के लिए हल्का सा मेकअप करके आयी थी.. जैसे hi नवाज़ ने उसे बुलाया वो फैट से आ गयी..

जैसे hi आरती जान गयी की वंदना भी रेडी है तब वो उसको देख के हसने लग्गी..

वंदना रेडी है ये जानकर नवाज़ ने उसकी कमर पकड़ के दबा दिया और बोलै -

तुम कितनी हॉट और ब्यूटीफुल हो.

तब वो हस्ते हुई कहते है..

ज्यादा मस्का लगाने की जरुरत नहीं है.. मई आलरेडी तुम से पैट चुखी हु और तुम दिल से आपने मान लिया है.. क्यों की मई दिल से तुम प्यार करती हु..

तब आरती कहती है..

ओह्ह माय गॉड.. ये लड़की क्या पागल है क्या.. इस लड़कीबाज से प्यार करती है.. अब मई क्या करू.. इससे बताऊ क्या.. पर कैसे.. चिलौ क्या.. पर मई ऐसा क्यों करुँगी.. जाने दो इस पागल लड़की को अपनी जिंदगी बर्बाद करनी है तो करने दो.. उसमे मेरे बाप का क्या जायेगा..

मई तुम प्यार करती हु ये सुनकर तो नवाज़ लगभग पागल सा हो गया.. वो जोश मई आ गया..

फिर तो कोई प्यार की निशानी तुम देने पड़ेगे..

हैट बदमषः कही के..

ऐसे शर्मा के वंदना ने कहा वैसे hi उसके होंटो को आपने होंटो मई नवाज़ ने ले लिया..





और उसे चूमने लगा.. उसकी गांड दबाने लगा और उसके मम्मी भी.. तब उसके मुँह से ोुछः और आआह्ह्ह्ह की आवाज निकली ..

अब वंदना के गूरे गाल पे किश करके, जब अपना लेफ्ट हैंड से उसके चुकी दबाये तो वंदना ने भी जोश मई आके आपने राइट घुटना नवाज़ की जीन्स मई के लुंड के उभर पे रख कर दबा दी और फुसफुसाई ..

जरा ज्यादा hi एक्ससिटेड और हार्ड हो रहा है..... और उसके लेफ्ट कान पे धीरे से काट ली.

वंदना का ये बेहेवियर देख के आरती कहती है..

बहुत बेशर्म लड़की है ये तो..

आरती ने ये कहा था क्यों की उसने देखा तह की उसके कड़क लुंड पर वंदना ने आपने घुटना दबा दिया था.. अब वंदना जोश मई आ गयी थी और वो भी बड़े जोश से नवाज़ no किश कर रही थी..





अब वो बार बार उसके बड़े लुंड के जीन और अंडरवियर में बने उभर को जान बुझ के अपने उलटे घुटने दबा कर हार्डनेस चेक करती हुयी उसे जोश मई किश कर रही थी ..... तब किश तोड़ते हुई नवाज़ ने कहा

आआअह्हह्ह्ह्हह..... बहुत मस्त चूस रही हो ..... इतना अच्छा किश करना कहाँ से सीखा ? प्लीज झूट मत बोलना....

तब उसके सर्र पाई मरर्ते हुई बड़े अड्डा के साथ.. आपने नखरा दिखते हुई कहती है..

बदमाश!!!! मुझे कोण किश करेगा तुम्हारे अलावा.. जिंदगी का पहले किश तुम hi किया था और आखरी भी तुम hi करूंगी.. ये सब तुम्हारे hi दें है.. तुमने hi सिखाया है.

तब उसे अपनी बहो मई उतके किश करता है और किश तोड़ते हुई कहता है..

ये सब मैंने सिखाया.. अल्ला कसम तुम तो मुझसे अच्छा किश कर रही हो..

तब उसके छथि मई गुड्डा मरते हुई कहते है..

चल जूते...

ये देख कर आरती के होंटो पर मुस्कान फेल गए…… नवाज़ के तरफ मुस्करा कर देखते हुए बोली...

कुछ भी कहो ये मास्टर आदमी है ये.. पहले नीता.. बाद मई ये वंदना.. और अब मेरे पीछे पड़ा है.. और नसीब भी सेल का देखो न.. एक से मस्त दूसरी है.. दोनों को तो पता चूका है.. और तीसरी??? नहीं नहीं तीसरी नहीं पटेगे.. मई कैसे.. आरती तू कैसे पटेगे.. तू कुछ भी सोच रही है.. तू भी न आरती..

फिर वो सोचती है.. इस के पास 2 लड़किया है.. और मेरे पीछे पड़ा है.. उन्दोनो जैसे गंदे हरकत क्या मेरे साथ करेगा क्या?? नहीं नहीं.. ऐसा नहीं कर सकता ..

फिर वो खुद को hi कहते है..

ये कमीना कुछ भी हरकत करने की हिम्मत रखता है..

ये सब सोचकर और देखकर उसे अन्दर hi अंदर मजा भी आ रहा था और उसकी उत्तेजना भी बढ़ती जा रही थी.. वैसे उसकी उत्तेजना जब से उसने नीता और नवाज़ का गेम देखा था तबसे बाद चुखी थी..

ऐसा आरती सोचती है.. की उसे तभी एक चिट्टी ने कटा तब उसके मू से आह्ह्ह्हह निकल गयी.. जैसे hi आवाज़ निकली वैसे hi उसने मू पर हाथ रखा पर उसकी धीरे आवाज़ भी नवाज़ ने सुनी और विंडो के तरफ देखने लगा.. आवाज़ की वजह से विंडो से थोड़े बाजु मई आरती हो गयी थी.. जब उसे विंडो मई कोई नहीं दिखा तब उसने फिर से वंदना को किश करने लगा.. ये चुप के से आरती देखती है.. और ाःह करती है. और आपने आप से कहते है..

अच्छा हुआ कमीने ने मुझे नहीं देखा..

आपने hi घर मई ये खेल देखने से उसे अब दर लग रहा था.. फिर वो खुद से कहते है..

आरती उस कमीने से देखने से पहले यहाँ से निकल नहीं तो ये कमीना कुछ न कुछ गन्दी हरकत करेगा.. हाँ निकलना पड़ेगा.. मई निकलती हु..

ऐसा सोचकर वो जाने को निकलती है.. और अंदर चली जाती है..
 
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