Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION .... - Page 5 - SexBaba
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Adultery KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION ....

ऐसे कोई बात नहीं है .. मेरे उसके बारे मई की कोई सोच बदली नहीं है लेकिन मैंने पहले बार जब उसको देखा था तब जितना बुरा मुझे लगा था अब सोच रही हु वो उतना बुरा नहीं है

मतलब आप की सोच बदली है

तब आरती जरा शरमाते हुई कहते है





ऐसे कोई बात नहीं है

पक्का

हाँ .. अब जेक आपने काम कर

कर लुंगी पर दीदी नवाज़ आने के बाद पक्का उसने खाना खिलाओगे न

हां खिलाऊंगी बाबा .. तू जा अब ..

तब नीता वह से चली जाती है.. उधर जैसे hi नवाज़ फैक्ट्री जाता है और मैनेजर साहब को फाइल देता है तो वो उसे वह रुकने को कहता है नवाज़ वैसे करता है.. फिर उसको फैक्ट्री का कुछ काम भी नवाज़ को करना पड़ता hai..ye सब काम करके थकभग के श्याम को नवाज़ घर आता है. घर मतलब शेठजी का घर

अब बहार हाल मई नवाज़ आ जाता है.. नवाज़ को देखते हुई शेठ जी कहते है

दे दिया फाइल मैनेजर साहब को

हाँ शेठ जी

तब नवाज़ के हातो मई एक बॉक्स शेठजी देखते है

ये क्या है .. कैसा बॉक्स है ..

आप मैडम जी को बुलाओ न

आरती को

हाँ

क्या काम है...

वो मेमसाब के पास कुछ काम था..

हाँ बुलाता हु रुको यहाँ

ऐसा कह के शेठ जी अन्दर रूम मई जाते है..

आरती बीटा

हाँ पापाजी

वो नवाज़ आया है

पापाजी ने ऐसे कहने के बाद आरती पापा जी के तरफ देखने लगती है.. पर आपने ससुर को कहते कुछ नहीं hai..par उसके चेहरे पर ऑटोमेटिकली एक स्माइल आ जाती है .. और मैं मई कहते है ..

आ गया

वो कह रहा है तुम्हारे पास उसका कुछ काम है..

तब वो शर्मा जाती है ..





और शरमाते हुई कहती है

उसका काम और मेरे पास

हाँ बीटा .. ऐसा कह रहा है वो .. बहार खड़ा है वो.. तुम्हारा वेट कह रहा है.. जेक देख लो..

हाँ पापाजी.. जेक देखती हु..

ऐसा कह के किचन से बहार हाल मई जाने वाले दूर पाई खड़े होक वो हाल मई देखती है .. तो नवाज़ वह खड़ा था .. तब वो कुछ सोच के आपने बैडरूम मई जाती है और मिरर के सामने खड़े होक आपने बाल ठीकठाक करने लगती है..





फिर आपने साड़ी का पल्लू ठीक कर लेती है .. फिर हल्का सा मेकअप कर लेते है.. हल्का सी 💄 लगा लेती है..

फिर थोड़ा शरमाते हुई कहते है

उसका मेरे पास कोनसा काम होगा .. बहार से आते hi पापाजी के हटो मेरे को बुलाने लगा .. उसको जरा भी साबरा नहीं है क्या .. थोड़े देर बाद मई उसके सामने आ hi जाती न .. नवाज़ भी न .. ये भी नहीं सोचा पापाजी क्या सोचते .. वो सोच सकते थे न या उसको कह भी सकते थे न

क्या काम है मुझे बता .. मई आरती को बता दूंगा .. क्या पता उनोने पूछा भी होगा .. फिर क्या उस कमीने ने पापाजी को ये तो नहीं कहा न की मई आरती मेमसाब को .. नहीं नहीं ..

फिर कमर के वह साड़ी ठीक से बन्दते हुई कहती है ..





थोड़ा शर्माके

वो कहा मेरे को मेमसाब कहता है .. मेरे को तो मैडम जी कहता है .. उसने पापा जी को ये तो नहीं कहा होगा न की मई सिर्फ मैडम जी को hi बताऊंगा .. कह भी सकता है .. कमीने का कुछ भरोसा नहीं ..

ऐसा कह के शरमाते है ..

जाने दो मुझे क्या करना वो जाने और पापा जी जाने .. मई जेक उसे मिलते हु.. कही मैंने लेट कर दिया तो मुझे आवाज़ देगा .. मई जेक उसे पूछ hi लुंगी .. ऐसा क्या अर्जेंट काम है मेरे पास जो उसको साबरा नहीं हो रहा है

ऐसा कह के वो एक बार साड़ी ठीक करती है .. बाल ठीक करती है और बहार हॉल मई चली जाती है ..और उसके सामने कड़ी हो जाती है और बड़ी अड्डा के साथ उसके सामने कड़ी हो जाती है ..सर पाई हाट रख के ..





और उसको देखते हुई जरा नौटंकी गुस्सा दिखते हुई कहती है

क्या है .. क्यों बुला रहे थे मुझे

कुछ नहीं आप को देखने का मैं कर रहा था

तब जरा नखरे से कहते है

देख लिया

अब कहा .. अब तो सुरवात की है .. अब तो अच्छे से देखना बाकि है

तब शरमाते हुई कहती है

अच्छा जी

हाँ जी मैडम जी

देखु क्या

मन करुँगी तो नहीं देखोगे क्या

अपनी मैडम जी का आदेश सर आँखों पर .. आपने मन किया तो नहीं देखूंगा

तो ठीक है फिर मत देखो

आपको नहीं देखु तो किसको देखु मैडम जी

मैडम जी के बचे देखना है तो तेरे नीता को देखो .. मुझे क्यों देख रहे हो ..

उसे तो कब से देख रहा हु .. अब आप की बरी ..

तब आरती नवाज़ की तरफ देखने लगे..





वो पसीने से भीगे हुई उसके बॉडी को वो देखने लगे .. . और कहते है

ये क्या हुलिए बनाया है

मतलब

कितने पसीने से भीगे हुई हो

आप की वजह से

मेरे वजह से वो भला कैसे

आपने मुझे फैक्ट्री भेजा था .. और वह जाने के बाद मैनेजर साहब ने बहुत सारा काम लगाया .. इस वजह से इतना पसीना आया है ..

तब स्माइल करते हुई कहती है

बी थे वे मैंने तुम फैक्ट्री नहीं भेजा .. तुम्हारे छोटे मालिक और शेठजी ने भेजा था ....

आपने hi बताया होगा

भला मई क्यों बोलूंगी

ताकि मई आप से दूर राहु इसलिए

मई क्यों तुम आपने से दूर करू

तो क्या पास रखना चाहती हो क्या आप

मेरा वो मतलब नहीं था..

तो क्या मतलब था आपका

मेरे कहने का सिर्फ इतना मतलब है के मैंने तुम नहीं भेजा फैक्ट्री

आपने hi भेजा है

मई भला क्यों भेजूंगी

ताकि मई नीता से दूर राहु

नवाज़ ने एक दांव खेला

मई क्यों करुँगी नीता से दूर तुम .. वैसे तुम दोनों को एक दूसरे से चैन नहीं है ... जब से तुम गए हो तब से मेरा उसने दिमाख ख़राब किया है .. नवाज़ कहा गया है बिल के और अब तुम भी उसके पास जाना चाहा रहे हो तो जाओ आपने माशूका के पास

जाऊंगा न मैडम जी

तो जाओ न

तब नवाज़ कहता है

मैडम जी आप इस मैक्सी मई बहुत खूबसूरत लग रही हो

तब उसकी और घूम कर देखते है





और अड्डा के साथ कहते है

मई नीता नहीं हु .. और ये मैक्सी नहीं है.. निघ्त्य है..

ऐसा कह के नवाज़ को देखने लगी . उसका भीगा बदन .. और आपने आप से कहने लगे... इसकी हाइट अरविन्द से एक दो इंच काम hi है मगर बॉडी ज़्यादा मस्कुलर है. शायद ये कुछ एक्सरसाइज या गयम वगैरा की वजह से होगी . और फिर खुद से hi कहने लगे.. इन् गरीब लोगो के पास गयम के लिए पैसे कहा होंगे.. और ये खेत मई रहता है और गयम तो इधर गाओं मई है.. खेत से गयम के लिए आना इससे पॉसिबल नहीं होगा.. खेत मई hi ये एक्सरसाइज करता होगा..
 
और अड्डा के साथ कहते है

मई नीता नहीं हु .. और ये मैक्सी नहीं है.. निघ्त्य है..

ऐसा कह के नवाज़ को देखने लगी . उसका भीगा बदन .. और आपने आप से कहने लगे... इसकी हाइट अरविन्द से एक दो इंच काम hi है मगर बॉडी ज़्यादा मस्कुलर है. शायद ये कुछ एक्सरसाइज या गयम वगैरा की वजह से होगी . और फिर खुद से hi कहने लगे.. इन् गरीब लोगो के पास गयम के लिए पैसे कहा होंगे.. और ये खेत मई रहता है और गयम तो इधर गाओं मई है.. खेत से गयम के लिए आना इससे पॉसिबल नहीं होगा.. खेत मई hi ये एक्सरसाइज करता होगा..

तब नवाज़ किचन के तरफ मतलब नीता की तरफ जाने लगा ..

तब आरती कहती है

किधर जा रहा है

आपने तो कहा न नीता के पास जाओ बोल के

अच्छा ..





ऐसा बोल के आपने बॉल ठीक कर्त हुई बड़ी अड्डा के साथ कहते है

ऐसे hi जाओगे क्या

फिर कैसे जाऊ ..

मेरा मतलब है तुम ऐसे मेरे किचन में नहीं जा सकते

फिर कैसे जाना पड़ेगा

मेरे यहाँ ऐसा नहीं चलेगा

तो

नाहा धो के जाना मेरे किचन मई वर्ण मत जाना

सुबह तो नाहा धोके आया हु घर से

पर अब तो पुरे गंदे हो गए हो न

फिर क्या फिर से नहाना पड़ेगा क्या

तब उसकी और स्माइल करते हुई आरती कहती है





हाँ

मेमसाब घर जेक आऊंगा तो टाइम लगेगा

घर क्यों जा रहा है.. यही पाई नाहा ले किसी बाथरूम मई

वो तो ठीक है मेमसाब.. पर आप देख hi रही हो न पसीने से मेरे कपडे कितने ख़राब हो गए है.. कितने बदबू आ रही है उसमे से.. और आप को तो बदबू पसंद नहीं है.. नहाने के बाद यही कपडे पहन लूंगा तो बदबू मरेंगे न.. मैंने कोई कपडे लाये नहीं है न

अच्छा अच्छा साहब के कुछ कपडे देते हु.. ज्यादा नौटंकी मत मार

तब नवाज़ हस्ते हुई कहता है

आप बहुत स्मार्ट हो.. मैं की बात तुरंत जान लेती हो

तब शर्माके आपने आँखे बंद करके बालो मई हाट घुमाके स्माइल करते हैं..





अब ज्यादा तारीफ मत करो और आपने काम करो

अब काम कहा करना है .. नहाना है सिर्फ .. वो भी आपके बाथरूम मई ..

तब बड़े अड्डा के साथ उसकी और देखते हुई कहते है..





मेरे बाथरूम में नहीं .. बहार के बाथरूम में नहाना है ..

वही वही .. वो भी आपका hi तो बाथरूम है

हाँ है पर मई वह नहाती नहीं

अच्छा..

ऐसा कह के आरती को देखते हुई कहता है

तो दे रहे हो न मेमसाब

क्या ..

वो आपने कहा था की साहब के कपडे डोज

हाँ हां

कहते हुई बड़ी अड्डा के साथ कहते है

तुममे है न नवाज़.. धीरज नाम को कोई चीज़ है hi नहीं.. बताने की देर उसके पीछे पड़े रहते हो..

वो क्या है न मेमसाब आदमी आदत से मजबूर होता है.. और भूख बहुत जोर की लगी है.. आपने कहा भी है न बिना नहाये मेरे किचन मई नहीं आना है.. तो आपने प्यारे से मेमसाब की बात मानाने पड़ेगे hi न..

तब आरती स्माइल करती है..





और अपनी नटखट अड्डा के साथ कहते है..

एक नंबर के नौटंकीबाज़ हो तुम.

तो दे रही हो न

और कुछ देर रुख के कहता है

साहब के कपडे

तब नखरा करते हुई आरती कहते है.. स्माइल के साथ





हाँ देते हु.. चलो... पर बिना नहाये मेरे किचन मई नहीं आना है

नहीं ाऔँगा मेमसाब
 
अब आरती आगे चल रही थी और नवाज़ उसके piche..piche पीछे चलते हुई वो कहता है..

मैडम जी

तब आरती गर्दन घुमा कर के उसकी और देकते हुए बोली





क्या है

इस मैक्सी में तो आप कोई साउथ के पिक्चर की हीरोइन दिख रही हो . …

अपनी tàarif सुनकर आरती खुश हो गए .. स्माइल करते हुई कहते है

बोलै ने तुम मई नीता नहीं हु .. और ये मैक्सी भी नहीं है.. इससे निघ्त्य कहते है..

आरती के इस बात पर नवाज़ बिना कुछ बोले hi आरती को देखने लगा.. आरती ने मई नीता नहीं हु ऐसा कहा था पर उसके चेहरे पे कही न कही एक हसी थी .. जो वो नवाज़ से छुपाना छह रही थी… पर नवाज़ ने वो हसी अछि तरह नोटिस कर ली थी.. उसके पीछे का वो मतलब निकलने लगा.. उसकी हसी देखकर नवाज़ को लगा की वो मंज़िल के बहुत करीब है .. वो आपने आप से कहने लगा.. बस उसे अब सिर्फ ऐसा बेहवे करना चाहिए जैसे वो सच में hi आरती से प्यार करता hai…aur इसी प्यार के चलते hi वो उससे जिस्मानी रिश्ता जोड़ना चाहता है … उसके अन्दर कोई हवस नहीं है..

हलाकि उसे हर दिन चुदाई का शौक था. ..और पिछले कुछ दिनों से तो वो बिलकुल भी इस काम से दूर hi था … सिर्फ यहाँ इस घर मई आया तब से उसने नीता को छोड़ा था.. पर नीता और आरती मई बहुत फरक था.. वो जनता था की अगर उसने आरती को पता लिया तो उसकी जिंदगी सवार जायेगे.. उसके छोड़ छोड़ के अपनी रांड बनाएगा .. और आरती के जरिये बहुत सारा पैसा भी कमा लेगा.. वो जनता था की इन् लोगो के पास पैसे के कोई कमी नहीं है… पर इस के लिए बहुत धीरे से जाना होगा.. और इसके लिए वो बिलकुल hi तैयार था …

वो जनता था आरती को पाने के लिए कुछ टाइम लगेगा पर पैट जरूर जायेंगे .. तबतक के लिए नीता है hi na..wo सोचता है … पैट जाने के बाद पुरे 3 महीने से दबी हुयी हवस आरती की छूट में hi उतर दूंगा…

आरती के रिस्पांस से वो ये सोचने laga...tabhi आरती कहते hai...usko देखते हुई स्माइल करके ..





मेरे पीछे पीछे ऐसे चलने की कोई जरुरत नहीं है..

अब नहीं चलेंगे तो करेंगे क्या

मतलब

आप आगे आगे चलोगे तो मुझे पीछे पीछे चलना तो पड़ेगा hi न

तब उसकी और देखते हुई बड़ी अड्डा के साथ कहते है..





बहार के बाथरूम मई जेक नाहा लो और किचन मई खाना खाने आ जाओ.. मई खाना बना के रखती हु ..

ऐसा कह के वो उसे देखने लगाती है..





तब नवाज़ भी उसे देखने लगता है.. आरती को लगा होगा नवाज़ खाने बनाने के कहने पाई कुछ कहेगा पर नवाज़ कुछ नहीं कहता ..तब आरती खुद hi कहती है..

क्या बनाना है

आप मेरे इच्छा पूछ रही हो

हां नहीं तो क्या

मुझे जो पसंद है वो आप बना नहीं सकती

बदमाश !! वो नहीं बना सकती .. पता है तुजे

तो मुझे क्यों पूछ रही हो

क्यों की तेरे इच्छा जानने है .. फिर वैसे बना लुंगी मई

मेरे इच्छा तो आप को पता hi है

तब उसको देख के कहती है

तुजे क्या नॉनवेज के अलावा दूसरे कोई खाने की चीज़ पसंद है

नहीं

फिर रहने दे

ऐसा कहके वह से आपने बैडरूम मई चली जाती है.. उसके बाद उसके पीछे पीछे नवाज़ बैडरूम मई आ जाता है.. वो नवाज़ को आपने पति के कपडे देते है... तब वो बैडरूम से बहार आता है और बहार वाले बाथरूम मई गुस्स जाता और आरती किचन मई चली जाती है...

किचन मई जाने के बाद आरती सोचती है..





मई आज नाहा लेते हु.. गर्मी से पूरा बदन चिप छिपा सा हो गया है. पसीने से मेरा ब्रा भीग गया है.. अच्छा हुआ ज्यादा पसीना नहीं आया नहीं तो ब्लाउज भीग जाता और वो कमीना फिर मुझे hi देख लेता.. पसीने से ब्लाउज भीग जाता तो मेरा ब्रा और बूब्स उस कमीने को दिख जाते.. ओह्ह गॉड.. फिर तो वो कमीना मेरे से नज़र hi नहीं हटाता.. कमीना बहुत चालू है..
 
फिर आरती किचन से बहार आती है और नहाने के लिए आपने बाथरूम मई घुस गयी.. ये बाथरूम उसके बैडरूम के बगल मई था.. वह से बैडरूम मई डायरेक्ट घुसा जा सकता था..

इधर बहार वाले बाथरूम मई पानी नहीं आ रहा था तब नवाज़ उस बाथरूम से बहार आता है.. उसने शर्ट और पंत निकला हुआ था और वो सिर्फ अपनी ुंदरपनत मई था.. बहार शेठ जी कही जा रहे थे.. वो थोड़े हड़बड़ी मई थे तब नवाज़ नुने कहता है..

शेठ जी यहाँ पानी नहीं आ रहा है

तब शेठ जी उसे देखे बगैर hi कहते है…

उस बाजु वाले बाथरूम मई जाओ… यहाँ पानी नहीं आता ..

और बहार चले जाते है और ड्राइवर को आवाज देने लगते है.. नवाज़ उस बाथरूम की तरफ जाने लगता hai..wo सिर्फ अपनी ुंदरपनत मई था.. उसे नहीं पता था अन्दर आरती नाहा रही है..

नवाज़ वैसे हे पसीने से भीगा बिना कपडे पहने सिर्फ ुंदरपनत पाई उस बाथरूम मई घुसने लगा … और जैसे hi दरवाज़े से अंदर जाने के लिए दरवाजे के सामने आ गयी .. उधर से मतलब

अन्दर से आरती ने जोरसे दरवाजा खोला और वो बहार आने लगे .. और इस वजह उन दोनों की हलकी सी टक्कर हो गयी .. जैसे hi टक्कर हुई वैसे hi आरती के मू से अह्हह्ह्ह्ह निकल गयी ..और आरती ने गुस्से मई नवाज़ के शोल्डर को पकड़ लिया और पीछे धकेल दिया… और गुस्से मई बोली..

अरे ...देख के chalo…ye क्या तरीका है..

नवाज़ के छाती और बॉडी का पसीना आरती के हाथ और निघ्त्य को लगा गया … मनो आज नवाज़ की छाती और आरती के बॉल के बिच एक हल्का सा टकराव हुवा… आरती के निघ्त्य सामने से भीग गयी ..लेकिन आरती का उसपे ड़याँ hi नहीं गया.. आरती के बॉल नवाज़ के बदन को लगते hi एक अलग hi फीलिंग आयी उसके अन्दर ..और उसके लैंड ने सलामी दे दी.

ारे मैडम जी मुझे पता hi नहीं था आप अन्दर हो ..

तब गुस्से से उसको देखते हुई कहते है..





अच्छा!!!

हां मैडम जी

नखरा करते हुई कहते है..

मई तुम अच्छे से जानती हु

विश्वास करो मुज पर मैडम जी ..
 
अच्छा विश्वास करू ..

हाँ ..

झटके से कहते है..





और तुमपर..

हाँ

और तुम यहाँ इस बाथरूम मई क्या कर रहे हो.. मैंने तुम उस बाथरूम मई जाने को कहा..

मई गया था.. पर वह पानी नहीं था.. इसलिए शेठ जी ने कहा इस बाथरूम मई जाओ.. इसलिए यहाँ आ गया.. और यहाँ तो..

ऐसा कह के वो आरती को देखने लगा..





उसने अब रेड कलर की निघ्त्य पहनी थी .... बदन भीगा हुआ था उसपर जल्दी के कारन उसने निघ्त्य पहन ली थी इस वजह निघ्त्य उसके बदन से चिपक गयी थी.. भीगे हुई निघ्त्य से आरती के बदन की लकीरे साफ़ दिखाए दे रही thi..saree मई उसकी झांग ठीक से नहीं नज़र आती थी ..लेकिन निघ्त्य मई उसके पेअर और झंगो का शेप ऐसा दिख रहा था जैसे पारदर्शक कपडे से दिखता हो .. ..

नवाज़ के ऐसे कहने से और देखने से आरती उसकी और शरमाते हुई देखते है.. और कहते है..





और यहाँ तो का क्या मतलब है..

कुछ मतलब नहीं है मेमसाब..

फिर क्यों कहा???

और अड्डा के साथ नवाज़ की तरफ देखते हुई कहते है..





और ऐसा क्या देख रहे हो मुझे

तब नवाज़ कहता है..

आप सरे से ज्यादा उस निघ्त्य मई खूबसूरत दिख रहे थी .. उस निघ्त्य से ज्यादा इस निघ्त्य मई सुन्दर दिख रही हो ..

तब आरती शरमाते हुई कहती है





धत्त बेशर्म!!

ऐसा कह के उसके छथि को मार्के बाजु मई हो जाती है..

और अब वो अच्छे से नवाज़ को देखते है ..और वो जान लेती है की नवाज़ ऑलमोस्ट नंगा खड़ा है उसके सामने.. सिर्फ ुंदरपनत उसके बदन पर है .. तब उसे आपने आप पर लज़्ज़ा आती है.. वो उसे देखे बगैर कहती है..

ये क्या तरीका है

नवाज़ को कुछ समाज नहीं आता है..

अब क्या किया मेने मैडम जी

ऐसे नंगे क्यों घूम रहे हो मेरे घर मई … ये कोई अच्छा तरीका थोड़ा hi है..

मैडम जी वो क्या हुआ आपने कहा उस बाथरूम मई जाओ और मई वैसे गया कपडे निकले और पानी के लिए नल चालू किया तो पानी नहीं आ रहा था .. फिर शेठ जी को पूछा तो उनोने कहा इस बाथरूम मई जाओ वैसे मई यहाँ आ गया …

अच्छा समाज आ गया.. तुम जाओ अन्दर बाथरूम मई और नाहा लो..

ठीक है जाता हु..

कहके वो जाने लगा..

पर मैडम जी एक प्रॉब्लम है

अब क्या प्रॉब्लम है

वो टॉवल नहीं है

अच्छा!!

नखरा दिखते हुई उसको देखते हुई कहती hai..chehare पर स्माइल लेक ..





अब क्या तुम्हारे लिए टॉवल भी मुझे देना पड़ेगा

हाँ

क्या???

उसके हाँ पाई आरती आशर्य से क्या कहते है…

इतने सेवा कर दीजिये न मैडम जी ..

तब नाराजगी दिखते हुई आरती कहती है..

बीवी वाले सब काम मुझसे करवा रहे हो..

तब नवाज़ ने धीरे से कहा उसको देखते हुई..

तो बन जाओ न

आरती ने सुना पर ठीक से नहीं सुना . .

क्या कहा तुम ने

कुछ नहीं

पक्का

हाँ. .

तब गुस्से से उसे देखते है..





और उसे कहती है..

मुझे लग रहा है कुछ तो कहा तुमने

नहीं मैडम जी .. मेरे क्या मज़ाल आप को कुछ कहने ki...aur..

कहके रुक गया..

तब अड्डा के साथ उसे देखते हुई कहते है.





अच्छा बहुत बाते कर रहे हो..

अब सामने आप जैसा हॉट माल खड़ा हो तो..

और शांनत हो जाता hai..Nawaz के ऐसे कहने के बाद बड़ी नज़ाकत से आरती उसे देख रही thi..na गुस्सा और न नफरत..





उतना hi कह कर नवाज़ चुप हो जाता है.. और देखने लगता है की आरती की क्या प्रतिक्रिया है.. वो आगे इसलिए नहीं बोलता की कही ज्यादा बोलने से बात बिगड़ न jaye..Aab दोनों शांत hi थे.. कोई कुछ नहीं बोल रहा था.. बस दोनों एक दूसरे को देखे जा रहे थे.. कुछ देर एक दूसरे को देखने के बाद आरती आपने चहरे पर थोड़ा गुस्सा लेट हुई कहती है..





हो गया तुम्हारा

हाँ

तो कुछ नहीं कहा तुमने

नहीं मैडम जी

अच्छा ..
 
हो गया तुम्हारा

हाँ

तो कुछ नहीं कहा तुमने

नहीं मैडम जी

अच्छा

ऐसा कह के वो एक वार्डरॉब ओपन करती है और जुख के वह टॉवल देखने lagi…jukane की वजह से और भीगे हुई निघ्त्य की वजह से निघ्त्य उसके गांड मई घुस गयी थी.. वही नवाज़ देखे जा रहा था..

तब आरती को लगा शयद नवाज़ उसे hi देख रहा है और हो भी वैसे रहा था.. इसलिए वो पीछे गर्दन कर के नवाज़ को देखने लगे..





तब नवाज़ आपने चेहरा बाथरूम की तरफ घुमा के बाथरूम मई जाने लगता है.. आरती गुस्से मई कहते है..

कमीना साला.. मई इसकी इतने हेल्प कर रही हो और ये मेरे बदन को घर रहा है कमीना… मुझे लगा इसको अच्छा वाला टॉवल सर्च करके देते हु पर ये आपने आदत से बाज़ नहीं आता है.. इसको ये गन्दा वाला hi टॉवल देते हु..

ऐसा कह के वो बाथरूम के पास चली जाती है और गुस्से मई कहती है..





लेलो टॉवल

तब नवाज़ पानी के लिए नल चालू कर रहा था ..

उधर हेंगर पर रख दो मैडम जी

तब नखरे से आरती वह टॉवल रखती है..

एक काम और था

अब क्या है

मेरे पिट बहुत गंदे हो गए है

तब नखरा करते हुई उसको देखते हुई कहते है..





तो

वह तक मेरा हाथ नहीं पहुंच रहा है मैडम जी

तब उसकी और देखते हुई कहते है





इरादे क्या है तुम्हारे

इरादे कुछ नहीं है बस थोड़ा साबुन लगा देती तो

पागल हो क्या??

पागल नहीं तोड़े से सेवा

मुझे क्या अपनी बीवी समाज रखा है क्या

नहीं मैडम जी ..

तो

नवाज़ कुछ नहीं कहता.. तब वो कहती है..

ये काम एक तो गर्लफ्रेंड करते है या बीवी करती है

पता है

पता है तो

कभी कबर मालकिन भी कर लेते है

कोई मालकिन कभी नहीं करती

करती है कही कही

मई नहीं करती.. और मई उस मालिकन जैसे मालकिन हु भी नहीं

पता है

पता है तो बोलै क्यों

क्या करे पिट मई बहुत खुजली हो रही है

खुजली हो रही है तो नीता को बुलाओ

वो वाली खुजली नहीं. .

तब स्माइल करते हुई कहते है..





बत्तमीज़ मैंने भी वो वाली खुजली नहीं बोली..

मुझे क्या पता

तुम सब पता है

आपने hi कहा था न बीवी वाले काम करवा रहे हो मुझसे

सही तो कहा था

फिर इतना सा काम कर दो न फिर बीवी वाला

नीता को बुलाओ क्या

शेठ जी नहीं आने देंगे उसे

तो मई क्या करू

सिर्फ साबुन लगाओ

नहीं

कह के जाने लगे.. तब नवाज़ आरती का हाथ पकड़ लेता है.. तब आरती को बड़ा झटका लगा .... वो आरती के तरफ देखने लगता है जो इस वक़्त उसके सामने कड़ी thi....aur उसे hi देख रही थी ..गुस्से se..tab नवाज़ झट से हाट चोर देता hai..aab दोनों एक दूसरे को देखने लगते है पर कुछ नहीं kahte..tab आरती गर्दन घुमा के रूम के तरफ देखने लगी .. अब उसकी पीठ नवाज़ की तरफ थी ..

आज नवाज़ ने पहली बार इतने बड़ी डेरिंग की थी उसका हाट पकड़ने का .. पर जैसे hi आरती ने उसको गुस्से से देखा तब नवाज़ की फैट गयी और उसने हाट तुरंत चोर दिया.. आरती को कुछ कहने की जरुरत hi नहीं पड़ी . .. वो आपने आप को नार्मल करते हुई कहता है..

आप की वजह से गन्दगी साफ़ करनी पड़ी और उसी वजह से पिट मई खुजली हो रही है..

आरती भी नार्मल हुई thi..haat पकड़ने से जो गुस्सा था वो चला गया था .. ऐसे पहले बार उसके साथ हुआ था ..गुस्सा इतने जल्दी चला गया था .. वो नार्मल होक गर्दन घुमाके स्माइल करते हुई कहती है..





तब तो मुझे हर नौकर के पिट मई साबुन लगाना पड़ेगा ..

नवाज़ हस्ते हुई कहता है

नहीं ऐसा नहीं होगा.. मैंने आप का घर अच्छे से साफ़ किया है..

तब घूम कर नवाज़ की और देखने लगी..





तुम्हारा वो काम है और बी थे वे घर साफ़ करने के लिए मैंने नहीं पापा ने कहा था तुम.. उनोने hi तुम खेत से घर बुलाया था..

सही बात है

सही बात है तो क्यों कह रहे हो ये

क्या

तुम्हारे साबुन लगाने का

वो मेरा हाट नहीं पहुँच रहा था इस वजह से

फिर मेरा हाट क्यों पकड़ा

सॉरी मैडम जी वो गलती से

तब उसकी और देखते हुई कहते है

गलती से

हां मैडम जी

अगर गलती से मैंने अगर पापा जी को या तुम्हारे छोटे मालिक को बोलै तो

नवाज़ डरते हुई कहता है

नहीं मैडम जी मत कहो

नवाज़ पूरा दर गया था

तब स्माइल करते हुई आरती कहती है

उन्दोनो मई से किसी एक को बताने से तुम्हारे साथ बहुत बड़ी गलती हो सकती है

पता है मैडम जी

पता होने के बाद भी तुमने ये गलती हो गयी

गलती से मिस्टेक हो गयी मैडम जी

मैंने गलती से मिस्टेक की तो तेरे पाई बहुत भरी पद सकती है

वो जाने दो न मैडम ji..Ek बार सोप लगाओ न मेरे पीछे

नहीं..

प्ल्ज़

बीवी नहीं हु तुम्हारे

मालकिन तो हो

फिर कुछ सोच के कहते है...

ठीक है

लगा डोज

हाँ पर हाथ चोरो पहले

हाथ छोड़ने के बाद वो बहार जाने लगी..

ऐसा धोखा देना ठीक नहीं है मैडम जी

धोके की बात तुम कर रहे हो जो हर लेडी को धोके देता आ रहा है..

नवाज़ उसकी और देखता है पर कहता कुछ नहीं है.. आरती उसकी और देखते है और कहती है..

बी थे वे मई धोखा नहीं दे रही हु.. सोप लेने जा रही थी..

अच्छा मुझे लगा

नवाज़ की बात ख़तम होने से पहले बोले

सबको आपने जैसा मत संजो

नहीं समझूंगा..

सबको आपने जैसा मत संजो

ऐसा कह के एक सोप उसके हाट मई देते है और स्माइल करते हुई कहते है

ये लो सोप और नाहा लो

ऐसा कह के वह से झट से पीछे जाती है और रूम से बहार जाती है तब नवाज़ कहता है

कामिनी साली
 
आरती बहार आयी.. और दूसरे एक रूम मई गए क्यों की उसके बैडरूम के बगल वाले बाथरूम मई नवाज़ था .. भीगे बाल पोहचने लगी..





फिर उसने अपनी भीगे हुई निघ्त्य उतर दी.. और दूसरी अच्छी वाली निघ्त्य पहन ली. फिर कुछ सोचते हुई उसने टॉवल से आपने भीगे बाल पोछने लगी…





बाल पोछने के बाद उसने सोचा किचन मई जेक खाना बनती हु.. मुझे भी भूक लगी है.. और नवाज़ के लिए भी बनाना पड़ेगा .. ये सोचकर किचन मई जाने के लिए वो उस रूम से बहार आती है.. और किचन की और जाने लगते है .. तभी बहार वाले बाथरूम के बहार उसे नवाज़ के शर्ट पंत दिखते है.. यहाँ शर्ट पंत रखना ठीक नहीं होगा .. कोई भी हॉल मई आ जाता है.. ये सोचकर आरती वह चली जाती है.. वह जाने के बाद आरती कहते है..

ये नवाज़ भी न.. कुछ भी करता रहता है .. भला यहाँ कोण अपनी शर्ट पंत डालता है

ये कहते हुई शर्ट पंत उतने के लिए जुकाते है.. तब गंदे पंत देखके उसका मैं कहता है..

आरती तू इतने गंदे कपडे को उठाएंगे क्या??

फिर वो उसके पंत नहीं उठाते और नीता को उतने के लिए देखते है पर नीता कही नहीं दीखते तब वो खुद से कहते है.. कुछ नहीं होगा आरती झट से उतके इस सामने वाले बाथरूम मई दाल दूंगी..

ऐसा सोच के थोड़ा मू थेड़ा करके पंत को अपनी दो उंगली मई पकड़ने के लिए अपनी दो उंगली आगे करती है.. उस गंदे पंत को देख के कहते है..

छी कितने गंदे पंत है .. ये नवाज़ भी न.. कैसे इतने गंदे कपडे पहन के घूमता रहता है… और ये नीता भी .. आपने यार के शर्ट पंत धो भी नहीं सकते..

इतना सोच कर वो आपने दो उंगली मई पंत उठाती है.. तब उसकी नज़र उसके जेब मई के एक रेड कलर की डायरी पर पड़ी …… तब आरती ने पंत निचे रखे.. और इधर उधर देखने लगी.. वह उस वक़्त कोई नहीं था.. जब वह कोई नहीं दिखा तब उसने आपने कांपते हाथ डायरी के तरफ बढ़ाये और कहा…

सॉरी.. नवाज़.. किसी के चीज़े बिना उसके जानकारी के उतना गलत है.. पर..

ऐसा कह के उसने आपने कांपते हाथो से वो डायरी उसके जेब से बहार निकल ली ….. उसने डेरी पर एक नज़र डाली … डेरी भी गंदे सी थी.. उसपे धूल जमी हुई थी .. उसे देख के स्माइल करते हुई आरती कहते है..

गंदे नवाज़ के जैसे ये डेरी भी गन्दी लग रही है..

ऐसा कह के वो डेरी आपने पैरों पर 2-3 बार जोर से मरते है.. ताकि उसकी धूल निकल जय. .. थोड़े धूल हटते hi वो उसके पैन पलटने लगते है.. तब अचानक एक पैन पाई लिखा हुआ उसके आँखों के सामने आ जाता है..

“तुम्हारी परवाह करते करते कितना रोया तनहा मैं

जिस रात तुम्हारी ज़रूरत थी उस रात को सोया तनहा मैं

बोझल बोझल पलकें लेकर मंदिर मस्जिद जाता हूँ

वही तख़्त पर बैठे बैठे ,याद में रोया तनहा मैं

बड़े मसीहा हो तुम मेरे, मुझे बचने आ जाओ पत्थर लेकर मोती समझा हार पिरोया तनहा मैं…."

एक पढ़कर आरती के मू से वाओ… निकला..

कमीना इतने अच्छी श्यारी लिख सकता है क्या.. खुद की है या किसी की चुरा ली है.. सेल को पड़ना लिखना भी आता है क्या पता नहीं.. कुछ भी हो लिखा बहुत अच्छा है.. आगे पड़ती हु.. नहीं नहीं पहले पेज से पड़ती हु..

ऐसा कह के पहला पेज की तरफ जाती है.. मतलब पीछे.. और पड़ने लगती है..

मैंने कभी नहीं सोचा था की एक दिन मई इतना अकेला हो जाऊंगा की मुझे अपने दिल की बात इन बेजुबान कागज़ पर लिखनी पड़ेगी …. लेकिन आज अगर नहीं लिखूंगा तो शायद ज़िंदा नहीं रह पाउँगा और घुट घुट कर मर जाऊंगा…..

जानती हो आज फिर से एक और नाकामी मेरे हिस्से में आ गयी ….…तुम रूठ क्या गयी जैसे ज़िन्दगी की हर खुसी hi रूठ gayi……...mai इतना अकेला कभी नहीं हुआ ज़िन्दगी me……..aaj मई बहुत टूट गया हु तन्वी …..

तब आरती कहते है..

ये तन्वी कोण है..

टूट तो उसी दिन गया था जिस दिन तुम रूठी लेकिन अब शायद धीरे धीरे बिखर रहा हु ….... आज मुझे तुम्हारी बहुत जरूरत hai…plz कही से आ जाओ na…mujhe आकर समेत लो न तन्वी ……….. plzzzzzzzzzzzzzz..

जनता हु की तुम नहीं aaogi….fir भी दिल को तसल्ली दे लेता हु ……. जानती हो मुझे इस नाकामी का इतना दुःख नहीं hai…jab तुम hi साथ नहीं तो फिर क्या फरक पड़ता hai………..ab तो यहाँ काम करने का मन भी नहीं karta…..jab हमसफ़र hi साथ नहीं तो मंज़िल पर पहुंचकर भी क्या करना ….

सच कहु तो अब जीने का मन भी नहीं karta…..kya करूँगा जी कर …..लेकिन मरने की हिम्मत भी नहीं जूता पा रहा हु …. बस यही सोचता हु की अम्मी को इतना बड़ा धोखा कैसे दू…….. अब्बू की क्या हालत होंगे मेरे मरने पर.. अपने bête की लाश कैसे देखि जाएगी उनसे …….

तब आरती कहते है..

कमीना कही का.. अम्मी अब्बू का नाम ले रहा पर मरने का नाटक कर रहा है..

फिर पेज पलट देते है और पड़ने लगते है..

सबकुछ जनता हु ……लेकिन क्या करू तुम्हारे बिना सब सुना सुना लगता है …….. जियूँगा जब तक जी सकूंगा ……. जब तुमने सजा सुना hi दी है तो अब उसे काटना hi padega……..janti हो बस दिल में एक hi कसक है ……. तुमने सजा तो दे दी लेकिन जुर्म नहीं bataya….…aur ये कसम भी दे दी की मई कभी जान भी न सकू ….…. लेकिन मई हर वडा निभाउंगा तन्वी ….कभी नहीं पूछूंगा तुमसे की तुमने मुझे तनहा क्यों छोड़ दिया ……… मेरे hi प्यार में कोई कमी रही होगी…..

आरती कहते है..

प्यार??? ये कमीना प्यार कर सकता है क्या कभी.. हवस है इसके सब.. तन्वी से प्यार है तो नीता से क्या है.. जाने दो मुझे क्या करना है.. मई पद लेते हु पहले.. ये कमीना बहार आने से पहले.. नहीं तो मुझे देख लेगा पड़ते हुई तो मई उसे क्या कहूंगी..

फिर वो आगे पड़ने लगते है..

सोचता हु घर चला जाऊ यहाँ से …. लेकिन नहीं जा पा रहा हु …. क्यों की वह जाने के बाद तुम्हारे हर चीज़ मुझे तुम्हारी यद् dilayegi…khas करके वो नदी का kinara…….aur मई हर यद् पर एक मौत मरता रहूँगा …..

आरती कहते है.. बाथरूम के और देखते हुई..

कुछ भी हो.. कमीने ने लिखा बहुत अच्छे से.. किसी टूटे हुई आशिक़ जैसे..

तन्वी तुम्हारा नवाज़ इतना कमजोर नहीं hai….mai हज़ारो नाकामियां अपने सीने पर सजा कर भी लड़ता रहता ……..लेकिन तुम्हारी मुहब्बत मेरी कमजोरी बन गयी है …….. एक बार गले से लगाकर बोल दो और आज भी तुम्हारी कसम मई दुनिया की कोई भी इम्तेहान पास कर जाऊ ……….. लेकिन तुम्हारे बिना नहीं ….कुछ भी नहीं…… दिल में एक सूना पैन आ गया है yar……..log कहते है की ज़िन्दगी चलती रहती hai,lekin मेरी ज़िन्दगी रूक गयी है तन्वी …. और अब तो बस इतनी तमन्ना है की ये साँसे भी रूक जाये….. और क्या कहु ….कुछ समझ में नहीं aata……...janta हु तुम नहीं आओगे.. तुम्हारा पति नहीं आने देगा..

आरती - मतलब ये तन्वी शाधिशुद्धा है..

फिर भी जाने क्यों ये पागल दिल आस का दमन नहीं छोड़ता …………और जिस दिन ये दमन छूट गया शायद उस दिन ये साँसे भी रूक जायेंगे……. खुस रहो ….. बस इतनी दुआ hi दे सकता हु और कुछ तो है नहीं मेरे पास तुम्हे देने के लिए …..........मिस यू जणू..

एक इश्क़ नगर की वाड़ी थी

जहाँ प्यार की नदिया बहती थी

कुछ दिल वाले भी रहते थे

जो प्यार की बातें करते थे…

जब बहार का मौसम आता था और फूल प्यार के खिलते थे मस्त नशीली शामों में प्यार से दो दिल मिलते थे

एक रोज़ वह बस्ती उजेर गई

और प्यार की हस्ती बिखेर गई

फिर हेर इक दिल को सोग लगा

और जीवन भर का रोग लगा

दीवाने फिरते रहते हैं

और हेर एक से वह कहते हैं

इक़रार किसी से न करना

तुम प्यार किसी से न करना … तुम प्यार किसी से न करना ……………..

अब ज़िन्दगी में किसे से प्यार नहीं karunga....kisi को अपना दोस्त नहीं बनाऊंगा.............

डायरी मई इतना लिखा हुआ पढ़कर आरती ने आँखे बंद कर ली …..… कुछ देर अपनी आँखे बंद hi राखी.. कुछ देर बाद आँखे खोल कर कहने लगे..

इतना dard………..itani मुहब्बत…… इतनी तड़प…… इस कमीने के मैं मई.. कौन है ये तन्वी.. पता लगाना पड़ेगा.. लग रहा है सचमुच ये कमीना उससे प्यार करता है..

आरती ने शायद पहले बार नवाज़ के बारे पोसिटीवेली कहा..

आगे पड़ती हु..

ऐसा कह के उसने पन्ना पलटा की बाथरूम के दूर खुलने की आवय आयी तब आरती ने डरते हुई झट से डेरी उसके पंत मई राखी और भागते हुई किचन मई चली गयी..

अब आरती किचन मई थी.. उसके साँसे जोर से चल रही थी..
 
तभी पीछे से नवाज़ भी आरती के पीछे रसोई मई चला जाता है.. अन्दर आरती कुछ काम कर रही थी...

अंदर जाते hi नवाज़ की नज़र आरती पैर पड़ी जो की उसके तरफ पिट करके खड़े रही thi..ek बार को तो उसे यु अकेला देख कर नवाज़ का मैं किया की पीछे से दबोच ले मगर अगले hi पल उसे उसके बहन ने कुछ दिन पहले कही हुई बात याद आ गयी की धीरे धीरे जाओगे तो कामयाब होंगे इसलिए चुप चाप जाकर एक छोटे से आते के डिब्बे पैर बैठ जाता है और पीछे से अपनी मैडम जी की जवानी को देख कर आहे भरते हुए मैं में सोचने लगा..

नवाज़ - ( मैं में) आआह्ह क्या मस्त गांड है माँ कसम.. ये एक बार हां केहड़े तो कसम के बहुत छोडूंगा ऊऊफफफफफ.. इसको..

पर जल्द hi ये ख्याल दिमाग से निकाल के अपने जुगाड़ में लग जाता है .. . कुछ सोच कर वो किसी शरीफ आदमी की तरह बोलै.....

"मैडम जी आप कितना काम करती हो जब भी यहाँ घर मई आता हु तो आप को बस काम करते hi देखता हु "

आरती पलट जाती है और नवाज़ की तरफ देखते हुई कहते है ..





अरे नहीं ऐसी कोई बात नहीं है . काम hi क्या होता है ..बस खाना बनाना … बाकि का काम तो तुम्हारी नीता करती है.. फिर अपने घर का काम है .. वो तो मुझे hi करना पड़ेगा hi न… कोई बहार वाला आके थोड़ा hi करने वाला है..

आपकी बात भी सही है .. आपका आपने घर है तो आप को hi करना पड़ेगा hi न ..

ह्ह्हम्म्म्म

वैसे एक बात पूछनी थी आप से ..

शादी से पहले आप आपने मम्मी के घर मई भी इतना hi काम करते थे क्या

तब तुरंत hi आरती रिप्लाई देती है..

नहीं तो क्या.. काम करनी की मुझे बचपन से आदत है..

अगर उस टाइम मई वह होता तो मई क्या कहता.. पता है आप को..

तब आरती बड़ी अदा के साथ कहती है . . उसके और देखते हुई..





क्या कहते. .

मेमसाब जी आप कितना काम करते हो

मई क्या कहती पता है तुम

हाँ

क्या

यही की आपने घर का काम है. .. आपने घर का काम तो करना पड़ता है. .

उस पर तुम क्या कहते

वैसे ये आपका अपना घर तो नहीं है

आरती थोड़ी तुनक कर कहती है..

मई कहती

क्यों??... क्यों नहीं है मेरा घर ?

मई कहता

अरे आपका घर तो वो होगा जब आपकी शादी होगी और हमारे साहब जी आपको ले जायेंगे डोली मई..

तब आप शर्मा जाती और कहती..

धत्त्त ..तू कैसी बाटे करने लगा है ...

नवाज़ के ऐसे कहने के बाद बड़ी नज़ाकत से आरती उसे देख रही थी..





उसपर मई कहता. .

" अरे ..lo...isme क्या गलत बोल दिया ...आप तो शादी के लायक लगने लगी हो "

इस पर आरती शर्मा जाती है ..

इस पर आप क्या कहती पता है..

आरती शरमाते हुई कहती है





मई कुछ नहीं कहती

आप कहती

"होई दिया … तुम गाँव के लड़के कितने गंदे होते हो ...और कोई बात नहीं आती तुम लोगो को "

इतना कह कर नवाज़ चुप हो जाता है.. और देखने लगता है की आरती की क्या प्रतिक्रिया है.. वो आगे इसलिए नहीं बोलता की कही ज्यादा बोलने से बात बिगड़ न जाये..

अब दोनों शांत hi थे.. कोई कुछ नहीं बोल रहा था.. बस दोनों एक दूसरे को देखे जा रहे थे.. कुछ देर एक दूसरे को देखने के बाद आरती आपने चहरे पर थोड़ा गुस्सा लेट हुई कहती है..





हो गया तुम्हारा

हाँ

उठ जाओ वह से

नवाज़ को आरती की बात समाज नहीं आयी

तब नवाज़ के तरफ थोड़े आगे आते हुई आरती कहती है

उठ जाओ वह से

नवाज़ आश्रय से आरती की तरफ देखता है

उस आते के डिब्बी पाई से उठ जाओ.. मुझे आता लेना है उस डिब्बे से ...

अब आरती की बात नवाज़ को समाज आ गयी.. नवाज़ डिब्बी से उठ के साइड मई जेक खड़ा हो गया.. तब आरती डिब्बा उठाकर किचन सिंक पाई रख लेते है और उसमे से आता निकल कर आता गूथ रही थी.. तभी नवाज़ ने पीछे से आवाज देते हुए कहा...

मैडम जी बोहोत प्यास लगी है एक गिलास पानी मिलेगा क्या ? और चाय मिलेंगे क्या??

तब पीछे घूम के आरती नवाज़ की तरफ गुस्से से देखते है और कहती है..





देख नहीं रहे हो मई क्या कर रही हु.. ऐसे हातो से मई तुम पानी कैसे दू.. जेक वह से पानी ले लो..

ठीक है.. ले लेता हु..

वो पानी लेता है और आरती की तरफ देख के कहता है..

चाय मिलेंगे क्या??

अब चाय कोनसे वक़्त की..

पिने का मैं हो रहा था..

कोई चाय बाई नहीं मिलेंगे... अब खाने के लिए बना रही हु.. खाना खाओ चुप चाप..

ठीक है मैडम जी ..
 
चाय मिलेंगे क्या??

अब चाय कोनसे वक़्त की..

पिने का मैं हो रहा था..

कोई चाय बाई नहीं मिलेंगे... अब खाने के लिए बना रही हु.. खाना खाओ चुप चाप..

ठीक है मैडम जी ..

अब नवाज़ बिना उसकी तरफ देखे पानी पि रहा था उसका ये नया अवतार देख कर आरती को आश्चर्य हो रहा था..

फिर वो नवाज़ को देखते हुई मैं मई कहने लगे..

क्या बात है आज एक बार बोल दिया और ये मान गया.. और अब बड़ा चुप चाप है .. तबियत तो ठीक है न इस कमीने की ..

ऐसे मैं मई कहते हुई आरती फिर चुप चाप खाना बनाने लगी और बार बार चोरी नज़रो से नवाज़ को भी देख रही थी मगर नवाज़ ने एक बार भी उसकी तरफ नहीं देखा .. नवाज़ एक जगह पर खड़े होकर चुपचाप पानी पि रहा था . ..

ये सब देख के आरती को बेचैनी सी हुई तो वो वही से खड़े खड़े hi बोली.. धीरे से..

कमीना.... साला... मेरे तरफ देख भी नहीं रहा है..

ये सुन के नवाज़ कहता है

आप ने कुछ कहा मैडम जी..

तब आरती ने पलट कर देखा. .





नहीं तो..

नवाज़ की तरफ गुस्से से देखते हुई कहते है.. तब नवाज़ कहता है..

एक बार चाय बना दो न मैडम जी ..

तब आरती कहती है..

कैसे बनाऊ..

आते का हाथ दिखते हुई कहते है..

आप नहीं बना सकती तो मई बना लू क्या.. अगर आप को आपत्ति नहीं होंगे तो..

नवाज़ की बात सुनकर आरती को दर लगने लग गया... वो मैं मई कहने लगे..

आ गया कमीना अपनी औकात पर.. साला.. मेरे पास आने के लिए ये इसका नया बहाना है..

वो फिर सोचने लगे..

बहाना बना रहा है साला .. मई ऐसा नहीं होने दंगे ..

बना दू क्या मई मैडम जी ..

कोई जरुरत नहीं है.. मई बना दूंगी..

आरती को लग रहा था की कही ये नज़दीक आके कुछ कह न दे... या कर न दे.. इस वजह से उससे नज़ारे न मिलते हुई आरती न झट से कहा . . .
 
अब आरती नवाज़ के लिए गैस पाई चाय चढ़ा देती है और वही खड़े होक खाना बनाने लगते है.. अब उसकी पिट नवाज़ के सामने थी.. वहीँ नवाज़ आरती के निघ्त्य के ऊपर से उसकी थिरकी हुई गांड को अजीब सी नज़रियों से देखने लगता हैं ......

नवाज़ गन्दी नज़रियों से आरती के बदन को घूरता हुआ बोल पड़ता हैं

चाय हो गए क्या..

हो रही है..

फिर से गुस्से से कहते है.. और उसे गुस्से से देखने लगती है..





तभी गैस बंद हो जाती है..

ोोू no

अब क्या हो गया

गैस ख़तम हो गयी..

फिर अब

बहार सिलिंडर है उसे अन्दर लाओ..

अच्छा ठीक है लता हु ..

कहके वो बहार जाता है.. और सिलिंडर लता है और आरती के पास रख देता है और उसे देखने लगता है..

मेरे को क्या देख रहे हो.. उस सिलिंडर का रेगुलेटर निकल के इस सिलिंडर को लगाओ ..

अच्छा.. आप को नहीं आता क्या

नहीं.. हमेशा तुम्हारी माशूका करती है..

तब आरती के पास जेक सिलिंडर का रेगुलेटर खोलने लगा.. पर वो कुछ ज्यादा hi टाइट बैठ गया था.. अब आरती थोड़े नज़दीक आ गयी थी नवाज़ के क्यों की नवाज़ सिलिंडर के चिपक के खड़ा था इस वजह से.. और वो सिलिंडर को एक साइड से पकड़ लेती है.. अब वो दोनों एकदम नज़दीक आ गए थे.. मनो एकदूसरे को चिपक जाये..

खिंच.. खिंच.. देखना नहीं तो निचे गिर जायेगा..

अब आरती ने सिलिंडर पकड़ लिया और नवाज़ रेगुलेटर खिंच रहा था..

नवाज़ ने एकदम से ताकत लगा के रेगुलेटर खिंचा .. वो निकल gaya..nawaz ने जोर से खिंचा इस वजह से गैस सिलिंडर भी उसके साथ निचे गिर गया.. आरती ने सिलिंडर को पकड़ा था इस वजह से नवाज़ और सिलिंडर के साथ वो भी निचे गिर गयी.. नवाज़ के बगल मई..

आह्ह्ह्हहए..

जैसे hi गिरी वैसे hi आरती जोर से चिलए.. तब नवाज़ जल्दी से उठकर आरती का हाथ पकड़ के उसने उसको वताया.. उतने के बाद आरती ने अपनी निघ्त्य ठीक की.. और गुस्से से नवाज़ की तरफ देखते हुई कहने लगी.

तुम्हारे वजह से मई गिर गयी…

सॉरी सॉरी मैडम जी

तब नखरा करते हुई आरती कहती है

सॉरी के बच्चे.. ठीक से खिंच नहीं सकते क्या..

अब मुझे कोई आईडिया नहीं था की रेगुलेटर जोर से खींचने से सिलिंडर भी गिर जायेगा और आप भी

तुम पता नहीं था क्या मैंने सिलिंडर को पकड़ा था.. सिलिंडर गिरेगा तो मई भी गिर जाउंगी ..

सॉरी मदसं जी ऐसा कुछ सोचा hi नहीं..

तब आरती गुस्से से कहती है..

ऐसा कुछ सोचा hi नहीं था.. अब खड़े खड़े क्या मुझे देख रहे हो.. वो रेगुलेटर उस दूसरे सिलिंडर को लगा दो..

वैसे नवाज़ रेगुलेटर दूसरे सिलिंडर को लगा देता है..

बाजु हो जाओ

वैसे नवाज़ बाजु हो जाता है.. और आरती स्टोव ों करके चाय उबलने को लगती है…

नवाज़ थोड़ा बाजु हो जाता है पर ज्यादा नहीं.. अब बाजु मई खड़े होकर नवाज़ आरती को देखने लगता है …अब उसकी नज़रें कभी आरती के चूचियों पर तो कभी उसके नंगी पिट पर चली जाती hain.......wo एक तुक उसके हसीं बदन को देखे जा रहा था......

तब आरती घूम जाती है और उसको चाय देते हुई उसकी आँखों मई देखते हुई कहते है





हो गया मुझे dekhana..Tu नीता से कुछ भी कर मुझे प्रॉब्लम नहीं है. . पर मुझे ऐसा देखोगे तो मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा..

आरती के ऐसे कहने से नवाज़ दर जाता है.. और पीछे जेक चुप चाप से चाय पिने लगता है.. और आरती खाना बनाने लगती है.. बीच बीच मई वो नवाज़ को चोर नज़रो से देख रही थी.. पर नवाज़ उसे नहीं देख रहा था .. वो पहले तो नीचे गर्दन कर चाय पि रहा था.. और अब चाय पिने के बाद निचे गर्दन करके बैठा था..

आरती को उम्मीद नहीं थी की नवाज़ को थोड़ा बोलने से वो उसकी तरफ देखेगा भी नहीं.. उसे उम्मीद नहीं थी की नवाज़ उसके सामने बैठा हो और उसके तरफ न देखे. कही न कही नवाज़ का ये बर्ताव उसे अच्छा नहीं लग रहा था पर उस पर वो कुछ कर नहीं पा रही थी.. वो उसे कह तोह नहीं सकती की मेरे तरफ देखो.. उसके इस बर्ताव से उसकी तरफ गुस्से से आरती देख रही थी..





हरामी... मेरे तरफ देख भी नहीं रहा है...

इस बार वो थोड़े जोर से बोले तब नवाज़ ने उसकी बात सुनकर जब उसकी तरफ देखा तो आरती उसे hi देख रही थी... गुस्से से .. उसके खूबसूरत चूचियों को hi अब नवाज़ देखने लगा.





और मान मई कहने लगा...

ऊऊफफफफफ क्या मस्त जवानी है इसकी.. ये मेरी जान लेकर रहेगी एक दिन.. क्या करू जब भी देखता हु हर बार पहले से ज्यादा खूबसूरत पहले से ज्यादा सेक्सी नज़र आती है .. अअअअअ हहहहह हहहह आ...

आरती क्या करू तेरा मई..

आरती ने नवाज़ को अपनी और देखते हुए देखा तो गुस्से में बोली.. धीरे से ..

हे भगवान् ये लड़का तो पूरा बेशरम हो गया है कैसे मेरी चुकी को घर रहा है आठ ...जब भी मई इस के बारे में सोचती हु पता नहीं मेरी छूट क्यों गीली हो जाती ाहहए

और आँखे बंद कर के दूसरी और मू कर लेती है अड्डा के साथ..





तब उसके निघ्त्य के लेस्स एक साइड से थोड़े निचे हो जाती है.. .. वो देखकर नवाज़ कहता है..

साला ये आज मुझे मार hi डालेंगे..

फिर भी खुद को कण्ट्रोल करते हुई नवाज़ बोलै..

हो गया क्या खाना तैयार

तब आरती कहती है..

हाँ हो गया..
 
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