अब नवाज़ उसके होंटो से नीता के कानो को चुबला रहा था .. और साथ मई एक हाथ से उसके मम्मी को दबा रहा था . फिर वो उसके कान के बाद गर्दन को चूमने लगा .. गर्दन को चूमते हुई धीरे धीरे नीचे आने लगा ..मतलब उसके नंगे पीठ को . ..आज वो नीता के बदन के हर हिस्से पर आपने मोहर लगा देना चाहता था .. फिर वो उसको घुमा के उसके गर्दन को चूमने लगा फिर निचे आके उसके मम्मी को चूसने लगा.. ब्लाउज के उप्पर से . उसके मम्मो को अच्छी तरह से चूसने के बाद वो नीचे आया ..और उसके सपाट पेट को चूसने लगा ..
आह्ह्ह्हह
नीता की साँसे काफी तेज़ हो चुकी थी ..अब वो उसके नवल तक आया और उसने उसकी नवल को चूसा .
aaaaaaaaahhhhhhhhhhhaaaaaaaaa…. uffffffffff…. nawaz….zzzzzz
फिर नवल के अंदर जीभ डाली.. तब नीता से बर्दास्त नहीं हुआ ..
Ahhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaaaaa… नवज़ज़्ज़ज़्ज़… ैस्सस्स्स्स्साआआ hi करो ….
नवल को चूसने से उत्तेजना का संचार नीता के बॉडी मई हुआ ..फिर उसने उसके सर को निचे की तरफ दबाया और नवाज़ को निचे की तरफ जाने का इशारा किया ..
बहुत तदपि हु तेरे बगैर नवाज़ .. आज मेरे तड़प मिटा दो राजा ..
कहा हो रही जलन रानी
तब नवाज़ की तरफ देखते हुई कहती है
कहा होगी जलन .. छूट मई hi होगी ..
किस की क्या .. मेरे hi छूट मई होगी .. फिर क्या मालकिन के छूट मई होगी क्या
...................
तब नवाज़ के आँखों के सामने आरती की गांड आती है जो थोड़े देर पहले उसने देखि थी .. यही सोचते हुई वो कहता है
मुझे क्या पता रानी ..तेरे छूट मई जैसे जलन हो रही है वैसे तेरे मालकिन के छूट मई हो रही होगी तो
उनकी जलन मिटने के लिए छोटे मालिक है .. तू उनका मत सोच और मेरे जलन मीठा
नीता की बात मानते हुई नवाज़ ने उसकी साड़ी उप्पर की और उसे किटचे सिंक पाई बिठाकर उसकी पंतय निचे कर के नीता के छूट पर आपने लुंड को सेठ किया और बड़े प्यार से आपने लुंड को उसके छूट में उतरने लगा
Aaaaahhhhhhhaaaaaaaaaa…mmmmmaaaaaaaaaarr…. गाआईईई … नंन्तआज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़… बहुत दर्द हो रहा है आआअह्हह्ह्ह्हह..
नवाज़ मदहोशी में नीता की छूट मई धक्के लगाने लगा.. पूरा कमरा सिसकियों से गूंज रहा था वही नीता का बुरा हाल था ..नवाज़ का लुंड नीता की गांड में घुसता जा रहा था वैसे नीता का दर्द बढ़ाता जा रहा तह ..तब नवाज़ कहता है
धीरे से चीला नहीं तो मालिक या मालकिन को पता चल जायेगा ..
फिर तू धीरे से कर न
तब एक जोर का धक्का नवाज़ नीता को मरता है
आआह्ह्ह्ह नन्नाआव्वाज़्ज़ ाब्ब टूओ धीरी करो नाआ
तेरे गांड में भी घुसा देना चाहता हु यार..
मेरी जान लेगा ओह्ह्ह्हह माआ …
नहीं मारेगी तू .. मेरा वादा है
यहाँ नहीं .. सबको पता चलेगा
फिर कहा
वो बाद मई देखेंगे .. चल जल्दीई कररर कही दीदी न आ जय
फिर नवाज़ जोर जोर से धक्के लगाने लगा 5-6 मिनट .. लास्ट मई दो चार धक्के मरे और नवाज़ झाड़ गया …
ये सब बहुत जल्दी हो गया ..
हाँ राजा पर क्या कर सकते थे ..
हाँ
अब बैठ वह जाए कर किसी ने देख लिया तो जानता है न फिर में कभी नहीं मिलूंगी
तब नवाज़ दिनीनिग टेबल के चेयर मई बैठ गया .. नीता ने फ्रीज मई से दूध निकल कर गरम किया और एक जम्बू गिलास दूध आपने राजा को दिया .. उसने ये दूध आराम से पिया .. फिर 5-10 मिनट उसको अच्छा सा नास्ता दिया .. पराठा विथ देशी घी.. नवाज़ आपने मालिक के अच्छे वाले दिंनिंग टेबल मई बैठ के अब नास्ता करने लगा ..
इधर बहार तीनो बाते कर रहे थे .. और अंदर नाश्ता करते हुई नवाज़ और नीता बाते कर रहे थे .. तभी बहार गेट पाई एक टेम्पो आके खड़ा हो जाता है और टेम्पो ड्राइवर उनके पास जेक खड़ा हो जाता है ..
शेठजी पौदे लाया हु शहर से .. बेतिया ने भेजे है ..
तब शेठजी आरती की तरफ देख के कहते है
आ गए तुम्हारे पौदे ..
हाँ पापा जी .. दीदी ने बहुत जल्दी भेज दिया ..
तुम कंचन के पीछे इतने पड़ी थी तो शयद कॉलेज चोर के पौदे ढूंढे होंगे और तुम भिजवा भी दिए होंगे
तब वो टेम्पो ड्राइवर कहता है
शेठजी कहा उतरने है ये पौदे .. यहाँ या खेत मई ..
तब शेठ जी कहते है
मुझे क्या पूछ रहे हो … मालकिन को पूछ लो .. इन् नानन्द भाभी ने ये सब किया है
अरविन्द को कुछ पता नहीं था इस बारे मई
मतलब पापा
अरविन्द आरती और कंचन ने ये सब डीडे किया है ये पौदे लगाने के ..अब एहि डीडे करेंगे की कहा लगाने के
ये आरती कुछ भी करती है
आप टेंशन न लो .. मई सम्बल लुंगी ..
तब ड्राइवर कहता है ..
फिर बता दीजिये मालकिन यहाँ रखने है या खेत मई ले जाऊ ..
खेत मई क्यों ..इससे में घर मई लगाने के लिए मंगवाए है तो यहाँ घर मई hi लगेंगे.. आप एक काम करो ..आप सरे पौदे यही उस कार्नर मई उतर के रख लो
बहुरानी माफ़ कीजिएगा वो मैं दो दिन से बीमार हु
तब आरती आपने ससुर की तरफ देखते हुई कहती है
अब कोण उतरेगा इसको
बीटा तुम अंदर जेक नवाज़ को बुला लाओ वो उतर लेगा .. और फिर तुम उन दोनों से पौदे तुम जहा लगाने है वो लगा दो ..
जी पापा ये अच्छा है
ऐसा कहते हुई कुश होक आरती अंदर किचन की तरफ जाती है .. तब वह नवाज़ वह नास्ता कर रहा था ..दिंनिंग टेबल के पास जेक नवाज़ की तरफ देखकर आरती कहती है
नाश्ता नहीं हुआ क्या तुम्हारा
उसके चहरे पर स्माइल थी .. उसके चहरे पर की स्माइल देखते हुई नवाज़ मैं मई सोचता है ..
ये थोड़े देर पहली गुस्से मई थी .. अब तो खुश लग रही है.. आपने को क्या गुस्से मई हो या खुश .. पर खुश होती है तो और खुश लगाती है.. ऐसा सोचते हुई कहता है ..उसको देखकर..
जी हुआ मेमसाब ..
फिर चलो बहार पापा जी बुला रहे है ..वो पौदे लगाने है ..
जी चलिए
ऐसा कहते हुई पानी पीकर उठता है














































