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अगली सुबह मैं कॉलेज जाने क लिए जल्दी उठा मगर माँ मुझसे पहले hi उठ कर चली गयी थी. मैं जल्दी से तैयार हुआ और नीचे आ गया. किचन से माँ ने आवाज़ देकर खाना खा कर जाने को कहा और मेरा खाना लगा दिया. माँ नाहा चुकी थी मगर उसके बाल अभी भी गीले थे . जब वो मेरे पास मुझे नाश्ता देने आयी तो उनके जिस्म से आती महक मेरी साँसों में घुटने लगी. माँ मुझे खाना देकर शर्माती हुई फिर से किचन में चली गयी . शायद उन्होंने भी नोट कर लिया था क मैं ऑंखें बंद कर क उनकी खुशबु ले रहा हूँ. मैं नाश्ता कर रहा था क बाबा भी तैयार हो कर आ गए. मुझे नाश्ता करता देख कर वो मेरे पास hi बैठ गए और बातें करने लगे. मैंने जल्दी से नाश्ता किया और जैसे hi मैं निकलने लगा माँ मेरे पास आयी और मुझे गले से लगा लिया. एक बार फिर से उनकी महक मुझे उत्तेजित करने लगी और अपने आप मेरे हाथ उनके जिस्म पर कास गए. माँ ने भी अपने स्तन ज़ोर से मेरी छाती से लगा दिए . मेरे हाथ उनकी पीठ से फिसल कर उनके कूल्हों की तरफ hi जा रहे थे क मुझे बाबा का ख्याल आया और मैं जल्दी से पीछे हैट गया . माँ का हल भी कुछ मेरे जैसा hi था और उनकी आँखों में भी मुझे अपने लिए चाहत दिख गयी.
गौरी ममी : इस बार टाइम से घर आना मैंने कोई बहाना नहीं सुन्ना .
अमित : इस बार टाइम से hi आऊंगा मैं और इस बार की तरह hi दोनों रत यहीं रहूँगा
मेरे इस तरह कहने से माँ क चेहरे पर स्माइल आ गयी और उन्होंने नज़रें झुका ली . मैंने जल्दी से बाबा से आशीर्वाद लिया और जाने hi लगा था क कामिनी ममी और दीपिका ममी भी कमरों से बहार आ गयी . मैं उनसे भी मिला और जल्दी आने का कह कर बाइक पर सवार हो कर निकल गया कॉलेज क लिए.
कैंटीन में आज हम सब साथ बैठे थे और हमारा ग्रुप अब एक बड़ा ग्रुप बन चूका था इस लिए सब से ज्यादा रौनक हमारे hi टेबल्स पर थी . हर कोई मौजूद था सिवाए शीना क. शिवानी ने बताया क वो कॉलेज में hi है और अभी आ जाएगी .
कल्पना : तो गाइस क्या कहते हो आप सब , कोई प्लान किया जाये मूवी का?
मीनल : फैंटास्टिक आईडिया , ी ऍम इन और मोहित भी .
कल्पना : वो तो मुझे पता hi है तोता मैना साथ में hi जायेंगे अकेले में चोंच किस से लड़ाओगे ?
मीनल : तू भी लड़ा ले न किसी क साथ चोंच ऐसे जलती क्यों है?
कल्पना : मुझे शीना नहीं ऐसे और वैसे भी मैं इंसान hi ठीक हूँ hi hi hi
शिवानी : सही है यार बड़े दिनों से कॉलेज से बंक नहीं किया , चलते हैं कहीं बहार. शीना भी न नहीं करेगी. शालू तुम क्या कहती हो?
शालू : मैं भी तैयार हूँ अगर सब चल रहे हो तो.
नेहा दीदी : पर यार ऐसे लेक्चर मिस कर क जाना ठीक नहीं , मेरा मतलब आज वीक का पहला hi दिन है और तुम लोग प्लान बना रहे हो मूवी का . अभी कल hi तो संडे निकल कर गया है.
कल्पना : क्या संडे , सो बोरिंग . मैं तो सारा दिन बोर होती रही फिर राधा क पास जा कर कुछ टाइम पास हुआ. एन्जॉय तो सबके साथ hi होता है और फिर संडे को सब मिल कहाँ लेट हैं. ये जनाब तो गाओं भाग जाते हैं सैटरडे को hi.
राधा : अमित को घर भी तो जाना होता है न जहाँ सब उसका इंतज़ार कर रहे होते हैं और पिछली बार तो ये मेरी वजह से जा भी नहीं पाया था .
अमित : ऐसा क्यों कहती हो ? तुम्हारी वजह से hi तो मुझे वो मिला जो अभी तक नहीं मिला था . इतनी सेवा मेरी कभी नहीं हुई थी
मेरा इशारा दिव्या मौसी की तरफ था जो राधा भी समझ गयी थी.
कल्पना : लगता है तुम्हे हॉस्पिटल जाने में कुछ ज्यादा hi मज़ा आया है. वैसे कहीं कोई चक्कर तो नहीं चला किया हॉस्पिटल में hi ?
राधा : अमित ऐसा नहीं है , वो तो किसी को देखता भी नहीं.
राधा की इस बात से रीमा मेरी आँखों में देखते हुए स्माइल करने लगी. जैसे कह रही हो क ये सब झूठ है. वहीँ शिवानी की स्माइल भी कुछ ऐसी hi थी.
कल्पना : बात कहाँ से कहाँ चली गयी फिर से, अब मूवी का बताओ . मैं तो जाना चाहती हूँ भाई और तुम्हे तो चलना hi पड़ेगा वर्ण तुम्हारे बिना ये लोग भी जाने नहीं वाले
अमित: अब मैं इसमें क्या कह सकता हूँ. मैं तो साथ hi हूँ तुम सब क.
कल्पना : तो रीमा राधा और नेहा दीदी आप लोग अपना फैसला सुनाई जल्दी .
रीमा : मैं तैयार हूँ
राधा : दीदी चलो न आप , आपको अकेले छोड़ कर जाना मुझे ाचा नहीं लगेगा.
राधा की मासूमियत भरी इल्तिजा को नेहा दीदी मन नहीं कर पायी और हाँ कह दी. राधा मन की कितनी साफ़ थी और सबको साथ रख कर चलती थी.
नेहा दीदी : ाचा ठीक है मगर ज्यादा देर नहीं होनी चाहिए.
कल्पना : क्या दीदी आप भी ? सब साथ हैं तो किस बात का दर?
मोहित : दीदी आप क्यों चिंता करती हैं ? आपको घर तो यही छोड़ क आएगी न लेडी ब्रूस ली .
कल्पना : ोये तू चुप कर वर्ण चोंच तोड़ दूंगी.
राधा : पर शीना दीदी तो आयी नहीं अभी तक उन्हें ऐसे अकेला छोड़ कर जाना ाचा नहीं लगता. उन्हें भी बुला लो.
शिवानी : मैं फ़ोन करती हूँ उसे.
शिवानी ने शीना को फ़ोन लगाया और उससे बात की .
शिवानी : वो आ रही है 5 मिनट्स में .
कल्पना : तो चलो 12 बजे वाला शो मिल hi जायेगा अभी टाइम है .
हम सब पार्किंग की तरफ चल दिए और शीना भी उधर hi आ गयी . उसकी ऑंखें ऐसे लग रही थी जैसे अभी रो कर आयी है मगर मैंने सबके सामने पुछा नहीं.
कल्पना : मेरी और मोहित की कार में hi आ जायेंगे सारे. सबको अपनी अपनी गाड़ी ले जाने की ज़रूरत नहीं है. वैसे भी सेव एनर्जी एंड लेस्स पोल्लुशण .
अमित : बिलकुल सही .
कल्पना : चलो बैठो जल्दी .
मैं मोहित क साथ उसकी कार में बैठ गया जैसा क हमारा रोज़ का hi काम था . हमारे साथ मीनल तो पक्की थी. राधा भी नेहा दीदी को बोलकर हमारे साथ hi बैठ गयी और रीमा भी . कल्पना क साथ शीना शिवानी शालू और नेहा दीदी बैठ गयी. और सब चल पड़े मूवी देखने.
एक से बढ़कर एक 8 खूबसूरत लड़कियां हमारे साथ थी और इनमे मैं और मोहित hi 2 लड़के थे. सिनेमा पहुँचते hi सब की नज़र इन तितलियों पर अटकने लगी. जहाँ नेहा दीदी और राधा हमेशा की तरह सिंपल सूट में भी कमल की लग रही थी वहीँ शीना शालू मीनल बौर कल्पना जीन्स टॉप में धमाल लग रही थी . रीमा और शिवानी को भी पता था क मैं सिम्पलिसिटी पसंद हूँ तो वो मेरी वजह से अब ज्यादातर सूट hi फेंटिन थी. सब की सब अपने आप में खूबसूरती में कमल थी . सिनेमा में इस समय ज्यादातर कॉलेज क hi लड़के लड़कियां आये हुए थे. जो लड़के अकेले थे वो तो इन खूबसूरत बालाओं को देख hi रहे थे साथी जो लड़के अपनी गफ क साथ थे वो भी इन हसीनाओं को देख कर अपनी लार टपका रहे थे. मैं और मोहित सबके लिए टिकट्स लेने चले गए तो इधर कुछ लड़के जो एक साथ hi आये हुए थे हमारी तितलियों को देख कर कमैंट्स करने लगे. सब साले लाइन मरने में लगे थे. मगर बात जब तक हद से बहार न हो तब तक सब चुप hi रहते हैं. बस ऐसा hi कुछ हमारी हसीनाएं कर रही थी और उन आवारा मजनुओं को भाव न देते हुए अपने में मस्त थी . मैं और मोहित जब टिकट्स लेकर वापिस आये तो मैंने इन मुस्टंडों को गन्दी नज़र इन सब को ताड़ते हुए पाया. राधा ने मुझे उन लोगों की तरफ गुस्से से देखते हुए पाया तो मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अंदर चलने को कहा. अब राधा क आगे मैं भला कहाँ गुस्से में रह सकता हूँ इस लिए चुपचाप चल दिया सबके साथ. हमारी टिकट्स एक hi रौ में थी तो बैठने में आसानी थी. अभी मूवी शुरू होने में टाइम था और हॉल भी इतना भरा हुआ नहीं था . सब से कार्नर में मीनल और मोहित बैठ गए जैसे की पहले hi हमें पता था . उसके बाद शीना शिवानी और शालू बैठ गयी और फिर कल्पना राधा रीमा और मैं. मैं खुद hi सबसे बहार बैठा था क इस तरफ से कोई भी लड़का छेड़छाड़ न कर सके रीमा क साथ.
कल्पना : यार हमने तो कुछ खाने को लिया hi नहीं. सब अपना अपना बताओ क क्या खाओगे ?
राधा : रहने दो न बाद में खा लेंगे.
कल्पना : थोड़ा हल्का फुल्का तो खा hi सकते हैं यार. ाचा छोडो मैं खुद hi ले आती हूँ. कोई चलेगा मेरे साथ ?
अमित : मैं चलता हूँ चलो .
हम दोनों हॉल से बहार आये और सबके लिए कोल्ड ड्रिंक्स और पॉपकॉर्न ले लिए. जब हम वापिस आये तो रीमा मेरी चेयर पर बैठी थी और राधा स्माइल क साथ मुझे देख रही थी. रीमा और राधा की स्माइल देख कर मुझे समझ नहीं आ रहा था क ये राधा का आईडिया है या रीमा का पर जो भी था ाचा था. रीमा क साथ वाली सीट पर भी एक लड़की अपने बर्फ क साथ बैठी थी. मैं दोनों क बीच में बैठ गया. जैसे hi मूवी शुरू होने को हुई तो साडी लाइट्स ऑफ hi गयी और हॉल में पूरा अँधेरा हो गया. हम सब कोल्ड ड्रिंक क साथ पॉप कॉर्न का मज़ा लेते हुए मूवी देखने लगे. ये रोमांटिक + एक्शन मूवी थी. मैंने अपना डायन हाथ में रीमा का हाथ पकड़ा तो वो भी स्माइल करते हुए मेरी बाज़ू अपने साइन से लगते हुए मेरे साथ सात कर बैठ गयी . उसका सर मेरे कंधे से सारा हुआ था. इधर दूसरी तरफ राधा जो अभी मूवी देख रही थी उसकी नज़र इस तरफ नहीं थी . रीमा मेरे हाथ जो अपने दोनों हाथों में थामे मुझे अपने प्यार का एहसास करवा रही थी. मैं भी उसके साथ उसका प्यार फील कर रहा था. कुछ hi देर में जब एक एक्शन सन आया तो राधा घबराकर मेरी बाजु के साथ चिपक गयी.
अमित : क्या हुआ राधा ?
राधा : कुछ नहीं मैं वो मूवी
अमित : तो फाइट देख कर दर गयी थी तुम . ये तो सब नकली है और तुम घबरा रही हो ?
राधा : मुझे दर लगता है ये सब देख कर.
अमित : जस्ट रिलैक्स ये सब असली नहीं होता.
राधा : हम्म्म
राधा मासूमियत से ऐसे hi मेरी बाजु को अपने साथ लगाए बैठी रही और मैंने भी उसे ऐसे बैठने दिया. अब मेरे एक तरफ रीमा मुझसे सटी बैठी थी और दूसरी तरफ राधा . धीरे धीरे राधा ने भी मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया. फिल्म में जब एक रोमांटिक सन आया और हीरो ने हेरोइन को किश किया तो रीमा को देखते हुए मेरा दिल उसे किश करने का होने लगा मगर इधर राधा की भी पकड़ मेरी बाज़ू पर मजबूत हो गयी और मुझे उसकी कोमलता का एहसास अपनी बाज़ू पर होने लगा . मैंने राधा की तरफ देखा तो हमारी नज़रें मिली. राधा की आँखों में मुझे अलग hi कशिश नज़र आ रही थी जो मुझे अपनी तरफ खिंच रही थी. इससे पहले क मैं उन नज़रों क जादू में खो जाता मेरा फ़ोन बजने लगा. मैंने हड़बड़ा कर अपना मोबाइल निकला और देखा तो ये डॉ रीना का फ़ोन था. मैंने जल्दी से कॉल काट दी क्यूंकि यहाँ बात तो कर नहीं सकता था ऊपर से सब डिस्टर्ब होते. मैंने डॉ रीना को बाद में कॉल करने का मैसेज कर दिया . नाम की जगह मैंने सिर्फ डॉ लिखा था इस लिए राधा और रीमा ने भी कुछ नहीं पूछा. इंटरवल तक ऐसे hi हम तीनो एक दूसरे से जुड़ कर बैठे रहे.
इंटरवल होते hi सब उठ कर फ्रेश होने चले गए . मोहित और मीनल की हालत देख कर hi पता चल रहा था क उन्होंने मूवी देखने की बजाये अपनी hi मूवी प्ले की है. सभी गर्ल्स एक साथ बाथरूम की तरफ चली गयी और मैं मोहित एक तरफ . मुझे तो जाना नहीं था तो मैं बहार hi खड़ा हो गया. तभी मेरी नज़र शीना पर पड़ी जो शायद अंदर गयी hi नहीं थी और एक तरफ कड़ी थी . शीना को अकेला देख कर मैं उसके पास चला गया .
अमित : तुम गयी नहीं उनके साथ ?
शीना : नहीं मुझे ज़रूरत नहीं थी . तुम भी तो बहार hi हो.
अमित : हाँ मुझे भी ज़रूरत नहीं थी . एक बात पूछ सकता हूँ तुमसे?
शीना : तुम्हे कुछ भी पूछने क लिए इजाज़त की ज़रूरत नहीं है .
अमित: जब तुम पार्किंग में आयी थी तो तुम्हारी ऑंखें ऐसे लग रही थी जैसे तुम रो कर आयी हो, क्या मैं इसकी वजह जान सकता हूँ ?
शीना : तुमने ये भी नोट कर लिया? और तो किसी का ध्यान नहीं गया था इस बात पर. तुम सच में बहुत अचे हो अमित थैंक यू वैरी मच . अगर तुम न बताते तो मैं कभी जान hi न पति क मोंटी कितना गलत है. तुम नहीं जानते क उसने परायों क साथ साथ अपनों को भी नहीं छोड़ा. मुझे खुद से नफरत हो गयी है जब से अपनी आँखों से उसकी काली करतूतें देखि हैं. तुम्हारा जितना भी शुक्रिया ऐडा करूँ वो काम है. तुमने बहुत सी मासूम ज़िंदगियाँ बचाई हैं. अब मैं भी एक अछि इंसान बन कगाया दिखाउंगी.
शीना की बातों से मुझे लगा क कहीं उसे रुपाली क बारे में पता तो नहीं चल गया. पर इस बारे में मैं सवाल भी तो नहीं पूछ सकता था. हो सकता है लैपटॉप में से कुछ ऐसा निकल आया हो जिससे उसे पता चल गया हो.
अमित : मैंने बस वही किया जो एक दोस्त क नाते मुझे करना चाहिए था. मैंने शालू से वडा किया था क मैं उसे इस नरक से निकलूंगा. तुम अछि हो इसी लिए तुम मोंटी की बुराई जानने पर खुद उसे गलत कह रही हो. मुझे यकीन है क तुम और भी अछि बन कर दिखाओगी. वैसे मेरे सवाल का जवाब तुमने अभी भी नहीं दिया.
शीना : मैं आज किसी से मिलने गयी थी जो मेरे दिल क बहुत करीब थी कभी मगर वक़्त ने मुझे उनसे जुड़ा कर दिया था. आज इतने सैलून बाद फिर से उनसे मिली तो अपने आप को रोक न सकीय.
तभी मुझे कुछ लड़कों क कमैंट्स सुनाई दिए . असल में मैं शीना से बात करता हुआ एक साइड में चला गया था और जब बाथरूम से शालू बहार आयी तो वही लड़के जो पहले भी कमैंट्स कर रहे थे वो शालू को कमैंट्स करने लगे.
लड़का 1 : आये हेट क्या ज़बरदस्त माल है आगे पीछे दोनों बम्पर बड़े बड़े और मजबूत लग रहे हैं . मज़ा आ जायेगा टक्कर मरने में.
लड़का 2 : लगता है कोई सर्विस करने वाला नहीं है साथ में , क्यों न हम hi ये नेक काम कर दें.
मुझे उनकी बातें सुन कर गुस्सा आ गया . इससे पहले क मैं उन 5 लड़कों की तरफ बढ़ता शीना मुझसे पहले hi वहां पहुँच गयी और गुस्से से उन लड़कों को उनकी औकात बताते हुए बोली.
शीना : घर में माँ बहिन है तो उसे भी बुलवा लो सर्विस मैं करवा देती हूँ हिजड़ो. बड़ा शोक है लड़कियां ताड़ने का ? नंगा कर क सड़क पर दौड़ाउंगी एक मिनट में साडी हेकड़ी निकल जाएगी.
शीना की बात सुन कर जहाँ शालू शर्मिंदगी से बहार आ कर अब कॉन्फिडेंस से शीना क साथ कड़ी हो गयी थी वहीँ उन सब छछूंदरों की झांटे hi सुलग गयी थी. शीना का इस तरह शालू को डिफेंड करना मुझे बहुत ाचा लगा पर उन लड़कों ने अपनी बेइज़्ज़ती बर्दाश्त न करते हुए शीना पर हमला बोल दिया.
लड़का 1 : हरामज़ादी रांड कहीं की मुझे नंगा करेगी तू ? अभी तुझे बताता हूँ .
इतना कह कर वो लड़का जैसे hi शीना की तरफ बड़ा तो शीना ने करारा थप्पड़ उसके गाल पर जड़ दिया. ये थप्पड़ इतना करारा था क सबकी नज़रें उसी तरफ घूम गयीं. या लड़के क मुँह पर शीना क हाथ का नक्शा बन गया था .
शीना : कुत्ते अपनी औकात में रह बोलै न. वर्ण वो हल करुँगी क साडी उम्र पछतायेगा.
लड़का 2 : देख क्या रहे हो उठालो साली को.
‘ तडडडडक ‘ जैसे hi दूसरा लड़का आगे बड़ा तो एक ज़बरदस्त किक उसके मुँह पर लगी और वो ज़मीन पर औंधे मुँह गिरा ख़ाक छान रहा था. ये कल्पना थी हमारी लेडी ब्रूस ली जिसके एक hi वॉर से वो लड़का धराशायी हो गया था.
कल्पना : माँ क दूध पिया है तो हाथ लगा कर दिखाओ, अपने पाऊँ पर चल कर नहीं जा पाओगे.
इससे पहले की ये झगड़ा और बढ़ता सिक्योरिटी वालों ने आकर उन 5 लड़कों को बहार का रास्ता दिखा दिया.
शालू : थैंक्स शीना तुम मेरे लिए उन सब से भीड़ गयी.
शीना : मैंने कहा था न तुम अब से मेरी दोस्त hi नहीं बहिन भी हो . तुम्हारे लिए हर वक़्त रेडी रहेगी ये शीना . थैंक्स कल्पना तुम वाकई बहुत स्ट्रांग हो.
कल्पना : थैंक्स कैसा ? अपनी दोस्त छुम बहनो क लिए क्या इतना भी नहीं कर सकती ? शालू शीना और कल्पना तीनो एक दूसरे क गले लग गयी. बाकि सब भी उन्हें देख रहे थे और फिर इस भावुक पलों क साथ फिर से सब अंदर अपनी अपनी सीट पर आ गए. एक तरफ राधा बैठी थी इस लिए मैं रीमा क साथ कुछ कर नहीं पर रहा था पर रीमा मेरे हाथ को अपने हाथों में लिए मुझसे से सात कर बैठी रही और राधा भी दर क मरे मेरे साथ hi लगी रही.
मूवी ख़तम होने क बाद हम सब बहार आये तो वही लड़के सामने खड़े हमारा hi इंतज़ार कर रहे थे. अब उनके साथ कुछ और लड़के भी थे. इतने लोगों को सामने देख कर जहाँ सब लड़कियां दर गयी वहीँ कल्पना हमारी लेडी ब्रूस ली फिर से आगे आ गयी और उसके साथ शीना भी.
लड़का 1 : पकड़ो साली को आज इसे दिखता हूँ हमसे टकराने का अंजाम.
कल्पना : लगता है एक बार में तुम्हे शांति नहीं मिली . किसी बहुत बड़े हरामी की औलाद है तू. चल अजा तुझे बताती हूँ.
जैसे hi एक लड़का आगे बड़ा कल्पना ने उसे ज़ोरदार पंच मर कर गिरा दिया. ये देख कर सब लड़के एक साथ टूट पड़े . और कल्पना भी अपने हाथ पाऊँ चलने लगी. मगर एक साथ हमला कर देने से वो 3-4 लड़कों को hi मर पति थी क उसके हाथ पाऊँ उन लोगों ने पकड़ लिए. मोहित और शीना ने भी कल्पना का साथ देते हुए उन लड़कों पर हमला किया पर वो एक एक क साथ hi उलझ सके . मैं जो कल्पना की पावर देख रहा था अब मुझे लगा क मुझे उसकी मदद करनी चाहिए .
लड़का 2 : अब बोल साली , बहुत उछाल रही थी चल तेरी गर्मी निकलता हूँ.
वो लड़का कल्पना की छाती पर हाथ डालने hi लगा था क मैंने आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ कर मरोड़ दिया और उसे उठा कर नीचे पटक दिया . वो ज़ोर से कराहने लगा . जैसे hi दूसरे ने आगे बढ़ने की कोशिश की तो उसे भी मैंने उठा कर पटक दिया.
कल्पना : ले आ गया तेरा जीजा अब बोल क्या बोल रहा था साले .
कल्पना क हाथ पाऊँ छूट ते hi अब वो फिर से उनकी ठुकाई करने लगी और मैंने भी एक एक कर क धोबी पताका दिया . 5-7 मिनट्स में hi सब धराशायी हो कर निचे पड़े कराह रहे थे. कल्पना में फिर से उस लड़के को पकड़ कर घसीटा और उसके मुँह पर पाऊँ रखते हुए कहा.
कल्पना : असली मर्द क्या होता है पता चल गया न ? अगर अभी भी शक है तो भेज देना घर से किसी को . लड़कियों को चीज़ समझता है न कुत्ते ? कसूर तेरा नहीं तेरी माँ का है जिसने तेरा जैसा हरामी पैदा क्या है. अभी तो ट्रेलर था अभी फिल्म बाकि है.
इतना कह कर कल्पना ने अपनी जेब से फ़ोन बहार निकला और दूर जा कर किसी को फ़ोन करने लगी. जैसे hi वो हमारे पास वापिस आयी तो नेहा दीदी चलने को कहने लगी जबकि राधा मेरे हाथ देख रही थी क कहीं मुझे चोट तो नहीं लगी . सब कार्स में बैठने लगे. इस बार कल्पना ने मुझे अपने साथ कार में बैठने को कहा तो मुझे उसके साथ बैठना पारा और शालू नेहा दीदी मेरी जगह आ गयी . हमारे पार्किंग से बहार निकलते निकलते पुलिस की 2 गाड़ियां उधर पहुँच गयी और उन लड़कों को उठा कर वो लोग गाड़ियों में डालने लगे. हम सब वापिस चल कॉलेज को निकल गए.
शीना : वह कल्पना , मुझे तो पता hi नहीं था यार क तुम इतनी पावरफुल फाइटर हो. और क्या मस्त डायलाग मारा था ‘ ले आ गया तेरा जीजा ‘
शिवानी : एक बात तो बता ये तूने अमित को उनका जीजा क्यों कहा ? बहिन तो तू खुद बन रही थी?
कल्पना : शरमाते हुए ) वो वो क्या दीदी आप भी मेरी तंग खींचने लगी .
कल्पना ने एक नज़र मुझे देखा और फिर से सामने देखने लगी .
शालू : जो भी हो , मूवी से ज्यादा तुम्हारा एक्शन देखने में मज़ा आया. एंड यू बोथ शीना ने और तुमने मेरे लिए इतना कुछ किया.
कल्पना : दीदी हम सब फ्रेंड्स हैं और फ्रेंडशिप में no थैंक्स.
अमित : एक बात तो बताओ तुमने फ़ोन किसे किया था ? इतनी जल्दी पुलिस भी आ गयी उनको पकड़ने क लिए.
कल्पना : पापा को किया था और किसे करुँगी .
अमित : तुम्हारे पापा पुलिस में हैं क्या ?
कल्पना : नहीं तो , हाँ उनकी पुलिस में चलती है. अब उनकी एक लौटी बेटी क साथ कोई बदतमीज़ी करेगा तो वो इतना तो करेंगे hi न .
शीना : लगता है तुम्हारे पापा कोई बहुत बड़ी हस्ती हैं जो इतनी चलती है उनकी .
कल्पना : मेरे लिए वो hi सब कुछ हैं.
शिवानी : वैसे करते क्या हैं तुम्हारे पापा ?
कल्पना : लोक सेवा .
शीना : इसका क्या मतलब?
कल्पना : क्या दीदी आप तो सवाल पे सवाल पूछे जा रही हैं . ऐसा लग है जैसे मेरी रिमांड ली जा रही है.
इतने में हम कॉलेज पहुँच गए . पीछे पीछे hi दूसरी कार भी पहुँच गयी . छुट्टी का टाइम हो गया था तो कल्पना राधा और नेहा दीदी को लेकर जाने लगी तभी राधा मेरे पास आ गयी.
राधा : तुम नहीं चल रहे साथ? आज तुमने हमारे यहाँ आना है न रहने क लिए .
अमित : वो मैंने बताया न क आज मुझे कुछ काम है . रत को एक फंक्शन पर जाना है तो लेट हो जाऊंगा . वैसे भी मेरे कपडे मोहित क घर पड़े हैं . इस लिए कल hi आऊंगा वर्ण मौसी ऐसे रत को कहीं जाने नहीं देंगी.
राधा : मगर जाना कहा है तुम्हे ? माँ कल से तुम्हारे लिए पता नहीं क्या क्या तैयारियां कर रही है.
अमित : प्लीज मौसी को मन लेना , मैं कल पक्का आ जाऊंगा. आज किसी तरह उन्हें मन लो
राधा : बात पूरे हफ्ते की हुई थी ऐसे तो एक दिन काम हो गया न
राधा ने मासूम सा चेहरा बनाते हुए कहा . बिलकुल बच्चों की तरह शिकायती लहजे में कह रही थी.
अमित : कोई बात नहीं तुम नोट कर लो . इसे फिर किसी हफ्ते में एडजस्ट कर लेंगे .
राधा : कल पक्का आओगे न ?
अमित : पक्का , प्रॉमिस .
राधा : ाचा तो फिर मैं चलूँ ?
अमित : ठीक है अब तुम जाओ.
इसके बाद राधा कल्पना और नेहा दीदी क साथ चली गयी . जबकि रीमा और शालू शीना क साथ उसकी कार में गयी . शालू को शीना क साथ देख कर मुझे ाचा लगा . और फिर मोहित भी मीनल क साथ चला गया . मैं चूँकि बाइक पर आया था तो मैंने भी अपनी बाइक उठायी तभी यद् आया क डॉ रीना से बात तो की नहीं. मैंने डॉ रीना को फ़ोन लगा दिया.
डॉ रीना : कहाँ हो मर ? फ़ोन hi अटेंड नहीं कर रहे थे.
अमित : मैं ज़रा अपने दोस्तों क साथ था.
डॉ रीना : दोस्त या गफ?
अमित: लगता है आप भूल गयी क मेरी गफ नहीं है.
डॉ रीना : ज्यादा दिन अकेले नहीं रहोगे तुम
अमित : मतलब ?
डॉ रीना : आ अब इतने हैंडसम हो तो कोई न कोई पकड़ hi लेगी तुम्हे. वैसे शाम को जाना है मेरे साथ यद् तो है न ?
अमित : जी बिलकुल , आप बोलो कितने बजे चलना है?
डॉ रीना : एक घंटे की ड्राइव है यहाँ से तो 8 बजे तक चलते हैं. मेरी कार में hi चलेंगे . मुझे बता दो तुम्हे कहाँ से पिक करूँ?
अमित : ठीक है , मैं आपको एड्रेस सेंड कर देता हूँ.
डॉ रीना : ाचा ठीक है , और हाँ , आने में शायद देर भी हो सकती है . कोई प्रॉब्लम तो नहीं न?
अमित : कोई बात नहीं .
डॉ रीना : ाचा ठीक है शाम को मिलती हूँ ज़रा पेशेंट चेक कर लूँ.
अमित : ok bye.
उसके बाद मैं मोहित क घर चला गया . आंटी मुझे देख कर बहुत खुश हुई उन्हें लगा था क मैं आज नहीं आऊंगा. हमने साथ में लंच किया और अपने कमरे में चला गया रेस्ट करने. आंटी को मैंने बता दिया था क मैं रत में मैरिज पर जाने वाला हूँ. थोड़ा बहुत उन्होंने भी सवाल किये और जाने की परमिशन दे दी. कुछ देर सोने क बाद शाम को मैं स्टेडियम चला गया. अब कम्पटीशन में ज्यादा वक़्त नहीं था तो मैंने प्रैक्टिस शुरू करना hi ठीक समझा . नीरज ने कोच सर को मेरे बारे में बता दिया था तो वो भी नाराज़ नहीं थे. इतने दिनों बाद मैं स्टेडियम आया था तो ज्यादा ज़ोर नहीं लगाया और उसके बाद मैं मंजू म से मिलने उनके घर चला गया.
बाइक की आवाज़ सुनते hi मम ने दरवाज़ा खोल दिया. मैं जब दरवाज़े पर पहुंचा तो सामने मंजू म एक T-shirt और लोअर पहने कड़ी थी. उनके चेहरे पर एक दिलकश स्माइल थी. चेहरा देख कर मैं समझ गया क वो बहुत खुश हैं. जैसे hi मैं घर क अंदर दाखिल हुआ तो मम कूद कर मेरी गॉड में चढ़ गयी और अपने पाऊँ मेरी कमर पर बांध लिए. मंजू मेरी गर्दन को दोनों हाथों से पकड़ कर मेरे होंठ चूसने लगी. ये सब अचानक हुआ था . कुछ सेकण्ड्स में मैं भी संभाला और मम क होंठों को चूमते हुए उन्हें दीवार से लगा दिया. मम वीलडली किश कर रही थी और अभी तक न खुद कुछ बोली थी न मुझे कुछ बोलने दिया था . जैसे hi हम दोनों की सांसे उखाड़ने लगी तो हमने किश तोडा.
अमित : हहहहह , आज क्या बात है ? आप इतनी एग्रेसिव क्यों हैं ?
मंजू म : एग्रेसिव नहीं ी ऍम हैप्पी और मैं अपनी ख़ुशी अपनी जान से बाँट रही हूँ ‘ उम्मम्मम उम्म्म्माःह्ह्ह’
अमित : पर बात क्या है कुछ बताएंगी ?
मंजू म : पहले मैं अपनी जान को जी भर क प्यार तो कर लूँ फिर बताती हूँ. आखिर इसकी वजह भी तो तुम हो. ‘ उम्मम्मम्मम’
मंजू मम फिर से मुझे किश करने लगी . किश करते हुए मम ने मेरी T-shirt खिंच कर निकल दी और मेरे नंगे सीने से लिपट कर किश करने लगी. मैं मम को लिए ऐसे hi सोफे पर आ कर बैठ गया और मंजू म मेरी दोनों साइड घुटनो क बल मेरी गॉड में बैठी थी. मेरा लैंड अकड़ कर सलामी देने लगा था जो मंजू म को अपनी छूट कर महसूस हो रहा था . जल्दी से मम ने उठ कर अपना लोअर पेंटी समेत घुटनो तक किया और मेरा लैंड भी खुद मेरे लोअर से बहार निकलने क बाद अपने थूक से लैंड का सूपड़ा चिकना करते हुए फिर से मेरी गॉड में बैठ गयी और सुपडे को छूट पे से कर क एक डैम से बैठ गयी
मंजू म : aaaaaaaaaaaahhhhhhhhh कक्कक्कक्कक्स उम्मम्मम्मम्म ी लव आईटी. ी लव यू जान . यू अरे माय लकी चार्म. उम्म्म्म ओह्ह्ह्हह आआअह्ह्ह्हह आआह्ह्ह
मंजू म खुद hi अपने बूब्स मसलती हुई मेरे लैंड पर उछलने लगी. मैंने भी मम की T-shirt उतर दी और उनके बूब्स को खिंच कर ब्रा से बहार निकल कर किश करने लगा.
करीब 20 मिनट्स तक मैंने मंजू म को अलग अलग पोजीशन में प्यार किया . मंजू म की छूट 3 बार अपना पानी बहा चुकी थी और लास्ट में मैंने भी अपना पानी निकल दिया. मंजू म मेरी नंगी छाती से लिपट कर आराम कर रही थी.
अमित : अब बताएंगी आप इतनी एक्ससिटेड क्यों थी ?
मंजू म : तुम्हारी वजह से
अमित : मेरी वजह से? वो कैसे ?
मंजू म : यू अरे माय लकी चार्म . जब से तुम मेरी ज़िन्दगी में आये हो ज़िन्दगी hi बदल गयी है. अब तो लग रहा है जैसे वो हर ख़ुशी जो मुझसे रूठ गयी थी वो वापिस मेरे तक आ रही है.
अमित : मैं कुछ समझा नहीं .
मंजू म : पता है आज क्या हुआ ?
अमित : बताइये
मंजू म : आज कॉलेज में शीना मुझसे मिलने आयी थी. वो मेरे गले लगी और देर तक रोटी रही. वो बार बार मुझसे माफ़ी मांग रही थी. सच में वो बदल गयी है और ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है . भैया और बिट्टू क बाद मैंने उन्ही बच्चों में तो खुद को बिजी किया था या यूँ कहो इन बच्चों क सहारे hi मैं खुद को संभल पायी थी मगर वक़्त ने मुझसे इनसे दूर कर दिया था और देखो अब फिर से वो मेरे पास आ गए.
अमित : ये बिट्टू कौन है ? पहले तो कभी नहीं बताया आपने ?
मंजू म: मेरा भतीजा बिट्टू पन्नू भैया का बीटा. बहुत क्यूट था और मैं उसे बहुत प्यार करती थी. मैंने hi उसका ये नाम रखा था. मेरे लिए तो वो मेरा खिलाना था जिससे मैं घंटों खेला करती थी . मगर एक एक्सीडेंट में सब ख़तम हो गया.
इतना कहते हुए मंजू म की आँखों में पानी आ गया तो मैंने उनकी आँखों. को साफ़ करते हुए अपने सीने से कास दिया
अमित : जो कुछ हो चूका उसे यद् मत कीजिये सिवाए दुःख क कुछ नहीं मिलेगा. आज जो सामने है उसे प्यार कीजिये. शीना से क्या बात हुई आपकी?
मंजू म : वो फिर से मुझे घर चलने को कह रही थी और ये भी कह रही थी क वो मुझे बहुत मिस करती है. वो यहाँ मुझसे मिलने आने की परमिशन मांग रही थी
अमित : तो क्या कहा आपने?
मंजू म: मैंने कह दिया क जब चाहे आ सकती हो पर उसके माँ बाप और मोंटी नहीं आने चाहिए .
अमित : और
मंजू म : और रुपाली भाभी से भी मैं मिलना चाहती हूँ और उनकी दोनों बेटियों से भी. ी ऍम सो हैप्पी . तुम ने फिर से मेरी ज़िन्दगी में खुशियां भर दी हैं . कभी मुझे खुद से अलग मत करना .
अमित : कभी भी नहीं , हाँ कहूं आप मुझसे दूर न हो जाना अपने रिश्तेदारों क आते hi.
मंजू म : गंभीर लहजे में ) दुबारा कभी ऐसा सोचना भी मत. ये सब तुम्हारी वजह से hi तो हुआ है वर्ण वो तो पहले भी यहीं थे. मैं सब को छोड़ सकती हूँ पर तुम्हे नहीं .
मंजू म को सीरियस होता देख मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और किश करने लगा .
अमित : ी लव यू . ाचा अब मुझे जाना है . आज एक फंक्शन पर जाना है तो जल्दी जाना होगा अभी तैयार भी होना है जाकर.
मंजू म : यहीं तैयार हो जाओ न? कपडे तो हैं तुम्हारे यहीं पर .
अमित : मैरिज फंक्शन है तो सोच रहा हूँ उस हिसाब क कपडे पहन कर जॉन . कपडे मोहित क घर पर पड़े हैं तो वहां जाना hi होगा.
मंजू म : तो काम से काम यहाँ मेरे साथ नाहा तो सकते हो न?
अमित : लगता है अभी मन नहीं भरा आपका ?
मंजू म : तुमसे तो कभी भी मन नहीं भर सकता .
अमित : तो चलो फिर साथ में नहाते हैं पर यद् रखना मुझे जल्दी जाना है .
मंजू म : ठीक है .
फिर मैंने मंजू म और अपने जिस्म पर मौजूद आखिरी कपडे भी उतरे और हम दोनों बाथरूम में नंगे हो कर एक दूसरे को नहलाने लगे. मम क चिकने गदराये हुए बदन को मसलने में फिर से लैंड अकड़ गया . अगर मुझे जाना न होता तो एक और राउंड वहीँ पर उन्हें पेल देता पर चूँकि डॉ रीना को वडा किया था तो मैं भी लेट नहीं होना चाहता था . इस लिए जल्दी से नाहा कर दूसरे कपडे पहने और मंजू म को किश करने क बाद मोहित क घर वापिस चला गया. आंटी ने मेरे लिए कुछ ब्लेजर वगैरह लिए थे जो मैंने कभी पहने नहीं थे . उन्हें में से एक पेहेन कर मैं रेडी हो गया . जब मैं तैयार हो कर निचे आया तो आंटी मेरी तारीफ करने लगी . और मुझसे लिपट कर मेरे छरहरे और होंठों पर ढेर सरे किश कर दिए . उधर 8 बजने से पहले hi डॉ रीना की कॉल आ गयी.
डॉ रीना : रेडी हो ?
अमित : मैं तो रेडी हूँ पर लगता है आप रेडी नहीं हुई अभी .
डॉ रीना : मैं भी रेडी hi हूँ. वैसे तो मुझे मेकअप वगैरह करना ाचा नहीं लगता पर आज तुम साथ जा रहे हो तो थोड़ा टाइम लगाना पड़ा . बस 10 मिनट्स में मैं पहुँच रही हूँ तुम बहार आ जाना .
अमित : ठीक है आप आ जाओ.
आंटी: कब तक आओगे और जा किसके साथ रहे हो?
अमित : वो डॉ रीना हैं न उनके साथ. उनके घर वाले जा नहीं सकते थे तो उन्होंने मुझे चलने को कहा . उनकी फ्रेंड की मैरिज है . अब उनहोंने मेरा इतना ख्याल रखा था इतना तो मैं कर hi सकता हूँ.
आंटी : कहीं वो तुम पर फ़िदा तो नहीं हो गयी ?
अमित : ऐसी बात नहीं है . वो मुझे अपना दोस्त समझती हैं बस.
आंटी : दोस्ती से hi प्यार शुरू होता है . वैसे वो तो है भी खूबसूरत . अगर बात बने तो बना लो.
अमित : नहीं ऐसा कुछ नहीं है.
आंटी : ाचा वापिस कब तक आओगे?
अमित : अब ये तो पता नहीं क्यूंकि जाना दूर है . हाँ देर तो हो hi जाएगी .
आंटी : ठीक है मुझे बता ज़रूर देना कब तक आना है .
अमित : जी ठीक है .
हमारी बातें चल hi रही थी क फिर से मेरा फ़ोन बजा. डॉ रीना की hi कॉल थी मतलब क वो बहार आ चुकी थी. मैंने आंटी से गले मिल कर इजाज़त ली और बहार निकल गया जहाँ डॉ रीना कार में बैठी मेरा इंतज़ार कर रही थी.
अगली सुबह मैं कॉलेज जाने क लिए जल्दी उठा मगर माँ मुझसे पहले hi उठ कर चली गयी थी. मैं जल्दी से तैयार हुआ और नीचे आ गया. किचन से माँ ने आवाज़ देकर खाना खा कर जाने को कहा और मेरा खाना लगा दिया. माँ नाहा चुकी थी मगर उसके बाल अभी भी गीले थे . जब वो मेरे पास मुझे नाश्ता देने आयी तो उनके जिस्म से आती महक मेरी साँसों में घुटने लगी. माँ मुझे खाना देकर शर्माती हुई फिर से किचन में चली गयी . शायद उन्होंने भी नोट कर लिया था क मैं ऑंखें बंद कर क उनकी खुशबु ले रहा हूँ. मैं नाश्ता कर रहा था क बाबा भी तैयार हो कर आ गए. मुझे नाश्ता करता देख कर वो मेरे पास hi बैठ गए और बातें करने लगे. मैंने जल्दी से नाश्ता किया और जैसे hi मैं निकलने लगा माँ मेरे पास आयी और मुझे गले से लगा लिया. एक बार फिर से उनकी महक मुझे उत्तेजित करने लगी और अपने आप मेरे हाथ उनके जिस्म पर कास गए. माँ ने भी अपने स्तन ज़ोर से मेरी छाती से लगा दिए . मेरे हाथ उनकी पीठ से फिसल कर उनके कूल्हों की तरफ hi जा रहे थे क मुझे बाबा का ख्याल आया और मैं जल्दी से पीछे हैट गया . माँ का हल भी कुछ मेरे जैसा hi था और उनकी आँखों में भी मुझे अपने लिए चाहत दिख गयी.
गौरी ममी : इस बार टाइम से घर आना मैंने कोई बहाना नहीं सुन्ना .
अमित : इस बार टाइम से hi आऊंगा मैं और इस बार की तरह hi दोनों रत यहीं रहूँगा
मेरे इस तरह कहने से माँ क चेहरे पर स्माइल आ गयी और उन्होंने नज़रें झुका ली . मैंने जल्दी से बाबा से आशीर्वाद लिया और जाने hi लगा था क कामिनी ममी और दीपिका ममी भी कमरों से बहार आ गयी . मैं उनसे भी मिला और जल्दी आने का कह कर बाइक पर सवार हो कर निकल गया कॉलेज क लिए.
कैंटीन में आज हम सब साथ बैठे थे और हमारा ग्रुप अब एक बड़ा ग्रुप बन चूका था इस लिए सब से ज्यादा रौनक हमारे hi टेबल्स पर थी . हर कोई मौजूद था सिवाए शीना क. शिवानी ने बताया क वो कॉलेज में hi है और अभी आ जाएगी .
कल्पना : तो गाइस क्या कहते हो आप सब , कोई प्लान किया जाये मूवी का?
मीनल : फैंटास्टिक आईडिया , ी ऍम इन और मोहित भी .
कल्पना : वो तो मुझे पता hi है तोता मैना साथ में hi जायेंगे अकेले में चोंच किस से लड़ाओगे ?
मीनल : तू भी लड़ा ले न किसी क साथ चोंच ऐसे जलती क्यों है?
कल्पना : मुझे शीना नहीं ऐसे और वैसे भी मैं इंसान hi ठीक हूँ hi hi hi
शिवानी : सही है यार बड़े दिनों से कॉलेज से बंक नहीं किया , चलते हैं कहीं बहार. शीना भी न नहीं करेगी. शालू तुम क्या कहती हो?
शालू : मैं भी तैयार हूँ अगर सब चल रहे हो तो.
नेहा दीदी : पर यार ऐसे लेक्चर मिस कर क जाना ठीक नहीं , मेरा मतलब आज वीक का पहला hi दिन है और तुम लोग प्लान बना रहे हो मूवी का . अभी कल hi तो संडे निकल कर गया है.
कल्पना : क्या संडे , सो बोरिंग . मैं तो सारा दिन बोर होती रही फिर राधा क पास जा कर कुछ टाइम पास हुआ. एन्जॉय तो सबके साथ hi होता है और फिर संडे को सब मिल कहाँ लेट हैं. ये जनाब तो गाओं भाग जाते हैं सैटरडे को hi.
राधा : अमित को घर भी तो जाना होता है न जहाँ सब उसका इंतज़ार कर रहे होते हैं और पिछली बार तो ये मेरी वजह से जा भी नहीं पाया था .
अमित : ऐसा क्यों कहती हो ? तुम्हारी वजह से hi तो मुझे वो मिला जो अभी तक नहीं मिला था . इतनी सेवा मेरी कभी नहीं हुई थी
मेरा इशारा दिव्या मौसी की तरफ था जो राधा भी समझ गयी थी.
कल्पना : लगता है तुम्हे हॉस्पिटल जाने में कुछ ज्यादा hi मज़ा आया है. वैसे कहीं कोई चक्कर तो नहीं चला किया हॉस्पिटल में hi ?
राधा : अमित ऐसा नहीं है , वो तो किसी को देखता भी नहीं.
राधा की इस बात से रीमा मेरी आँखों में देखते हुए स्माइल करने लगी. जैसे कह रही हो क ये सब झूठ है. वहीँ शिवानी की स्माइल भी कुछ ऐसी hi थी.
कल्पना : बात कहाँ से कहाँ चली गयी फिर से, अब मूवी का बताओ . मैं तो जाना चाहती हूँ भाई और तुम्हे तो चलना hi पड़ेगा वर्ण तुम्हारे बिना ये लोग भी जाने नहीं वाले
अमित: अब मैं इसमें क्या कह सकता हूँ. मैं तो साथ hi हूँ तुम सब क.
कल्पना : तो रीमा राधा और नेहा दीदी आप लोग अपना फैसला सुनाई जल्दी .
रीमा : मैं तैयार हूँ
राधा : दीदी चलो न आप , आपको अकेले छोड़ कर जाना मुझे ाचा नहीं लगेगा.
राधा की मासूमियत भरी इल्तिजा को नेहा दीदी मन नहीं कर पायी और हाँ कह दी. राधा मन की कितनी साफ़ थी और सबको साथ रख कर चलती थी.
नेहा दीदी : ाचा ठीक है मगर ज्यादा देर नहीं होनी चाहिए.
कल्पना : क्या दीदी आप भी ? सब साथ हैं तो किस बात का दर?
मोहित : दीदी आप क्यों चिंता करती हैं ? आपको घर तो यही छोड़ क आएगी न लेडी ब्रूस ली .
कल्पना : ोये तू चुप कर वर्ण चोंच तोड़ दूंगी.
राधा : पर शीना दीदी तो आयी नहीं अभी तक उन्हें ऐसे अकेला छोड़ कर जाना ाचा नहीं लगता. उन्हें भी बुला लो.
शिवानी : मैं फ़ोन करती हूँ उसे.
शिवानी ने शीना को फ़ोन लगाया और उससे बात की .
शिवानी : वो आ रही है 5 मिनट्स में .
कल्पना : तो चलो 12 बजे वाला शो मिल hi जायेगा अभी टाइम है .
हम सब पार्किंग की तरफ चल दिए और शीना भी उधर hi आ गयी . उसकी ऑंखें ऐसे लग रही थी जैसे अभी रो कर आयी है मगर मैंने सबके सामने पुछा नहीं.
कल्पना : मेरी और मोहित की कार में hi आ जायेंगे सारे. सबको अपनी अपनी गाड़ी ले जाने की ज़रूरत नहीं है. वैसे भी सेव एनर्जी एंड लेस्स पोल्लुशण .
अमित : बिलकुल सही .
कल्पना : चलो बैठो जल्दी .
मैं मोहित क साथ उसकी कार में बैठ गया जैसा क हमारा रोज़ का hi काम था . हमारे साथ मीनल तो पक्की थी. राधा भी नेहा दीदी को बोलकर हमारे साथ hi बैठ गयी और रीमा भी . कल्पना क साथ शीना शिवानी शालू और नेहा दीदी बैठ गयी. और सब चल पड़े मूवी देखने.
एक से बढ़कर एक 8 खूबसूरत लड़कियां हमारे साथ थी और इनमे मैं और मोहित hi 2 लड़के थे. सिनेमा पहुँचते hi सब की नज़र इन तितलियों पर अटकने लगी. जहाँ नेहा दीदी और राधा हमेशा की तरह सिंपल सूट में भी कमल की लग रही थी वहीँ शीना शालू मीनल बौर कल्पना जीन्स टॉप में धमाल लग रही थी . रीमा और शिवानी को भी पता था क मैं सिम्पलिसिटी पसंद हूँ तो वो मेरी वजह से अब ज्यादातर सूट hi फेंटिन थी. सब की सब अपने आप में खूबसूरती में कमल थी . सिनेमा में इस समय ज्यादातर कॉलेज क hi लड़के लड़कियां आये हुए थे. जो लड़के अकेले थे वो तो इन खूबसूरत बालाओं को देख hi रहे थे साथी जो लड़के अपनी गफ क साथ थे वो भी इन हसीनाओं को देख कर अपनी लार टपका रहे थे. मैं और मोहित सबके लिए टिकट्स लेने चले गए तो इधर कुछ लड़के जो एक साथ hi आये हुए थे हमारी तितलियों को देख कर कमैंट्स करने लगे. सब साले लाइन मरने में लगे थे. मगर बात जब तक हद से बहार न हो तब तक सब चुप hi रहते हैं. बस ऐसा hi कुछ हमारी हसीनाएं कर रही थी और उन आवारा मजनुओं को भाव न देते हुए अपने में मस्त थी . मैं और मोहित जब टिकट्स लेकर वापिस आये तो मैंने इन मुस्टंडों को गन्दी नज़र इन सब को ताड़ते हुए पाया. राधा ने मुझे उन लोगों की तरफ गुस्से से देखते हुए पाया तो मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अंदर चलने को कहा. अब राधा क आगे मैं भला कहाँ गुस्से में रह सकता हूँ इस लिए चुपचाप चल दिया सबके साथ. हमारी टिकट्स एक hi रौ में थी तो बैठने में आसानी थी. अभी मूवी शुरू होने में टाइम था और हॉल भी इतना भरा हुआ नहीं था . सब से कार्नर में मीनल और मोहित बैठ गए जैसे की पहले hi हमें पता था . उसके बाद शीना शिवानी और शालू बैठ गयी और फिर कल्पना राधा रीमा और मैं. मैं खुद hi सबसे बहार बैठा था क इस तरफ से कोई भी लड़का छेड़छाड़ न कर सके रीमा क साथ.
कल्पना : यार हमने तो कुछ खाने को लिया hi नहीं. सब अपना अपना बताओ क क्या खाओगे ?
राधा : रहने दो न बाद में खा लेंगे.
कल्पना : थोड़ा हल्का फुल्का तो खा hi सकते हैं यार. ाचा छोडो मैं खुद hi ले आती हूँ. कोई चलेगा मेरे साथ ?
अमित : मैं चलता हूँ चलो .
हम दोनों हॉल से बहार आये और सबके लिए कोल्ड ड्रिंक्स और पॉपकॉर्न ले लिए. जब हम वापिस आये तो रीमा मेरी चेयर पर बैठी थी और राधा स्माइल क साथ मुझे देख रही थी. रीमा और राधा की स्माइल देख कर मुझे समझ नहीं आ रहा था क ये राधा का आईडिया है या रीमा का पर जो भी था ाचा था. रीमा क साथ वाली सीट पर भी एक लड़की अपने बर्फ क साथ बैठी थी. मैं दोनों क बीच में बैठ गया. जैसे hi मूवी शुरू होने को हुई तो साडी लाइट्स ऑफ hi गयी और हॉल में पूरा अँधेरा हो गया. हम सब कोल्ड ड्रिंक क साथ पॉप कॉर्न का मज़ा लेते हुए मूवी देखने लगे. ये रोमांटिक + एक्शन मूवी थी. मैंने अपना डायन हाथ में रीमा का हाथ पकड़ा तो वो भी स्माइल करते हुए मेरी बाज़ू अपने साइन से लगते हुए मेरे साथ सात कर बैठ गयी . उसका सर मेरे कंधे से सारा हुआ था. इधर दूसरी तरफ राधा जो अभी मूवी देख रही थी उसकी नज़र इस तरफ नहीं थी . रीमा मेरे हाथ जो अपने दोनों हाथों में थामे मुझे अपने प्यार का एहसास करवा रही थी. मैं भी उसके साथ उसका प्यार फील कर रहा था. कुछ hi देर में जब एक एक्शन सन आया तो राधा घबराकर मेरी बाजु के साथ चिपक गयी.
अमित : क्या हुआ राधा ?
राधा : कुछ नहीं मैं वो मूवी
अमित : तो फाइट देख कर दर गयी थी तुम . ये तो सब नकली है और तुम घबरा रही हो ?
राधा : मुझे दर लगता है ये सब देख कर.
अमित : जस्ट रिलैक्स ये सब असली नहीं होता.
राधा : हम्म्म
राधा मासूमियत से ऐसे hi मेरी बाजु को अपने साथ लगाए बैठी रही और मैंने भी उसे ऐसे बैठने दिया. अब मेरे एक तरफ रीमा मुझसे सटी बैठी थी और दूसरी तरफ राधा . धीरे धीरे राधा ने भी मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया. फिल्म में जब एक रोमांटिक सन आया और हीरो ने हेरोइन को किश किया तो रीमा को देखते हुए मेरा दिल उसे किश करने का होने लगा मगर इधर राधा की भी पकड़ मेरी बाज़ू पर मजबूत हो गयी और मुझे उसकी कोमलता का एहसास अपनी बाज़ू पर होने लगा . मैंने राधा की तरफ देखा तो हमारी नज़रें मिली. राधा की आँखों में मुझे अलग hi कशिश नज़र आ रही थी जो मुझे अपनी तरफ खिंच रही थी. इससे पहले क मैं उन नज़रों क जादू में खो जाता मेरा फ़ोन बजने लगा. मैंने हड़बड़ा कर अपना मोबाइल निकला और देखा तो ये डॉ रीना का फ़ोन था. मैंने जल्दी से कॉल काट दी क्यूंकि यहाँ बात तो कर नहीं सकता था ऊपर से सब डिस्टर्ब होते. मैंने डॉ रीना को बाद में कॉल करने का मैसेज कर दिया . नाम की जगह मैंने सिर्फ डॉ लिखा था इस लिए राधा और रीमा ने भी कुछ नहीं पूछा. इंटरवल तक ऐसे hi हम तीनो एक दूसरे से जुड़ कर बैठे रहे.
इंटरवल होते hi सब उठ कर फ्रेश होने चले गए . मोहित और मीनल की हालत देख कर hi पता चल रहा था क उन्होंने मूवी देखने की बजाये अपनी hi मूवी प्ले की है. सभी गर्ल्स एक साथ बाथरूम की तरफ चली गयी और मैं मोहित एक तरफ . मुझे तो जाना नहीं था तो मैं बहार hi खड़ा हो गया. तभी मेरी नज़र शीना पर पड़ी जो शायद अंदर गयी hi नहीं थी और एक तरफ कड़ी थी . शीना को अकेला देख कर मैं उसके पास चला गया .
अमित : तुम गयी नहीं उनके साथ ?
शीना : नहीं मुझे ज़रूरत नहीं थी . तुम भी तो बहार hi हो.
अमित : हाँ मुझे भी ज़रूरत नहीं थी . एक बात पूछ सकता हूँ तुमसे?
शीना : तुम्हे कुछ भी पूछने क लिए इजाज़त की ज़रूरत नहीं है .
अमित: जब तुम पार्किंग में आयी थी तो तुम्हारी ऑंखें ऐसे लग रही थी जैसे तुम रो कर आयी हो, क्या मैं इसकी वजह जान सकता हूँ ?
शीना : तुमने ये भी नोट कर लिया? और तो किसी का ध्यान नहीं गया था इस बात पर. तुम सच में बहुत अचे हो अमित थैंक यू वैरी मच . अगर तुम न बताते तो मैं कभी जान hi न पति क मोंटी कितना गलत है. तुम नहीं जानते क उसने परायों क साथ साथ अपनों को भी नहीं छोड़ा. मुझे खुद से नफरत हो गयी है जब से अपनी आँखों से उसकी काली करतूतें देखि हैं. तुम्हारा जितना भी शुक्रिया ऐडा करूँ वो काम है. तुमने बहुत सी मासूम ज़िंदगियाँ बचाई हैं. अब मैं भी एक अछि इंसान बन कगाया दिखाउंगी.
शीना की बातों से मुझे लगा क कहीं उसे रुपाली क बारे में पता तो नहीं चल गया. पर इस बारे में मैं सवाल भी तो नहीं पूछ सकता था. हो सकता है लैपटॉप में से कुछ ऐसा निकल आया हो जिससे उसे पता चल गया हो.
अमित : मैंने बस वही किया जो एक दोस्त क नाते मुझे करना चाहिए था. मैंने शालू से वडा किया था क मैं उसे इस नरक से निकलूंगा. तुम अछि हो इसी लिए तुम मोंटी की बुराई जानने पर खुद उसे गलत कह रही हो. मुझे यकीन है क तुम और भी अछि बन कर दिखाओगी. वैसे मेरे सवाल का जवाब तुमने अभी भी नहीं दिया.
शीना : मैं आज किसी से मिलने गयी थी जो मेरे दिल क बहुत करीब थी कभी मगर वक़्त ने मुझे उनसे जुड़ा कर दिया था. आज इतने सैलून बाद फिर से उनसे मिली तो अपने आप को रोक न सकीय.
तभी मुझे कुछ लड़कों क कमैंट्स सुनाई दिए . असल में मैं शीना से बात करता हुआ एक साइड में चला गया था और जब बाथरूम से शालू बहार आयी तो वही लड़के जो पहले भी कमैंट्स कर रहे थे वो शालू को कमैंट्स करने लगे.
लड़का 1 : आये हेट क्या ज़बरदस्त माल है आगे पीछे दोनों बम्पर बड़े बड़े और मजबूत लग रहे हैं . मज़ा आ जायेगा टक्कर मरने में.
लड़का 2 : लगता है कोई सर्विस करने वाला नहीं है साथ में , क्यों न हम hi ये नेक काम कर दें.
मुझे उनकी बातें सुन कर गुस्सा आ गया . इससे पहले क मैं उन 5 लड़कों की तरफ बढ़ता शीना मुझसे पहले hi वहां पहुँच गयी और गुस्से से उन लड़कों को उनकी औकात बताते हुए बोली.
शीना : घर में माँ बहिन है तो उसे भी बुलवा लो सर्विस मैं करवा देती हूँ हिजड़ो. बड़ा शोक है लड़कियां ताड़ने का ? नंगा कर क सड़क पर दौड़ाउंगी एक मिनट में साडी हेकड़ी निकल जाएगी.
शीना की बात सुन कर जहाँ शालू शर्मिंदगी से बहार आ कर अब कॉन्फिडेंस से शीना क साथ कड़ी हो गयी थी वहीँ उन सब छछूंदरों की झांटे hi सुलग गयी थी. शीना का इस तरह शालू को डिफेंड करना मुझे बहुत ाचा लगा पर उन लड़कों ने अपनी बेइज़्ज़ती बर्दाश्त न करते हुए शीना पर हमला बोल दिया.
लड़का 1 : हरामज़ादी रांड कहीं की मुझे नंगा करेगी तू ? अभी तुझे बताता हूँ .
इतना कह कर वो लड़का जैसे hi शीना की तरफ बड़ा तो शीना ने करारा थप्पड़ उसके गाल पर जड़ दिया. ये थप्पड़ इतना करारा था क सबकी नज़रें उसी तरफ घूम गयीं. या लड़के क मुँह पर शीना क हाथ का नक्शा बन गया था .
शीना : कुत्ते अपनी औकात में रह बोलै न. वर्ण वो हल करुँगी क साडी उम्र पछतायेगा.
लड़का 2 : देख क्या रहे हो उठालो साली को.
‘ तडडडडक ‘ जैसे hi दूसरा लड़का आगे बड़ा तो एक ज़बरदस्त किक उसके मुँह पर लगी और वो ज़मीन पर औंधे मुँह गिरा ख़ाक छान रहा था. ये कल्पना थी हमारी लेडी ब्रूस ली जिसके एक hi वॉर से वो लड़का धराशायी हो गया था.
कल्पना : माँ क दूध पिया है तो हाथ लगा कर दिखाओ, अपने पाऊँ पर चल कर नहीं जा पाओगे.
इससे पहले की ये झगड़ा और बढ़ता सिक्योरिटी वालों ने आकर उन 5 लड़कों को बहार का रास्ता दिखा दिया.
शालू : थैंक्स शीना तुम मेरे लिए उन सब से भीड़ गयी.
शीना : मैंने कहा था न तुम अब से मेरी दोस्त hi नहीं बहिन भी हो . तुम्हारे लिए हर वक़्त रेडी रहेगी ये शीना . थैंक्स कल्पना तुम वाकई बहुत स्ट्रांग हो.
कल्पना : थैंक्स कैसा ? अपनी दोस्त छुम बहनो क लिए क्या इतना भी नहीं कर सकती ? शालू शीना और कल्पना तीनो एक दूसरे क गले लग गयी. बाकि सब भी उन्हें देख रहे थे और फिर इस भावुक पलों क साथ फिर से सब अंदर अपनी अपनी सीट पर आ गए. एक तरफ राधा बैठी थी इस लिए मैं रीमा क साथ कुछ कर नहीं पर रहा था पर रीमा मेरे हाथ को अपने हाथों में लिए मुझसे से सात कर बैठी रही और राधा भी दर क मरे मेरे साथ hi लगी रही.
मूवी ख़तम होने क बाद हम सब बहार आये तो वही लड़के सामने खड़े हमारा hi इंतज़ार कर रहे थे. अब उनके साथ कुछ और लड़के भी थे. इतने लोगों को सामने देख कर जहाँ सब लड़कियां दर गयी वहीँ कल्पना हमारी लेडी ब्रूस ली फिर से आगे आ गयी और उसके साथ शीना भी.
लड़का 1 : पकड़ो साली को आज इसे दिखता हूँ हमसे टकराने का अंजाम.
कल्पना : लगता है एक बार में तुम्हे शांति नहीं मिली . किसी बहुत बड़े हरामी की औलाद है तू. चल अजा तुझे बताती हूँ.
जैसे hi एक लड़का आगे बड़ा कल्पना ने उसे ज़ोरदार पंच मर कर गिरा दिया. ये देख कर सब लड़के एक साथ टूट पड़े . और कल्पना भी अपने हाथ पाऊँ चलने लगी. मगर एक साथ हमला कर देने से वो 3-4 लड़कों को hi मर पति थी क उसके हाथ पाऊँ उन लोगों ने पकड़ लिए. मोहित और शीना ने भी कल्पना का साथ देते हुए उन लड़कों पर हमला किया पर वो एक एक क साथ hi उलझ सके . मैं जो कल्पना की पावर देख रहा था अब मुझे लगा क मुझे उसकी मदद करनी चाहिए .
लड़का 2 : अब बोल साली , बहुत उछाल रही थी चल तेरी गर्मी निकलता हूँ.
वो लड़का कल्पना की छाती पर हाथ डालने hi लगा था क मैंने आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ कर मरोड़ दिया और उसे उठा कर नीचे पटक दिया . वो ज़ोर से कराहने लगा . जैसे hi दूसरे ने आगे बढ़ने की कोशिश की तो उसे भी मैंने उठा कर पटक दिया.
कल्पना : ले आ गया तेरा जीजा अब बोल क्या बोल रहा था साले .
कल्पना क हाथ पाऊँ छूट ते hi अब वो फिर से उनकी ठुकाई करने लगी और मैंने भी एक एक कर क धोबी पताका दिया . 5-7 मिनट्स में hi सब धराशायी हो कर निचे पड़े कराह रहे थे. कल्पना में फिर से उस लड़के को पकड़ कर घसीटा और उसके मुँह पर पाऊँ रखते हुए कहा.
कल्पना : असली मर्द क्या होता है पता चल गया न ? अगर अभी भी शक है तो भेज देना घर से किसी को . लड़कियों को चीज़ समझता है न कुत्ते ? कसूर तेरा नहीं तेरी माँ का है जिसने तेरा जैसा हरामी पैदा क्या है. अभी तो ट्रेलर था अभी फिल्म बाकि है.
इतना कह कर कल्पना ने अपनी जेब से फ़ोन बहार निकला और दूर जा कर किसी को फ़ोन करने लगी. जैसे hi वो हमारे पास वापिस आयी तो नेहा दीदी चलने को कहने लगी जबकि राधा मेरे हाथ देख रही थी क कहीं मुझे चोट तो नहीं लगी . सब कार्स में बैठने लगे. इस बार कल्पना ने मुझे अपने साथ कार में बैठने को कहा तो मुझे उसके साथ बैठना पारा और शालू नेहा दीदी मेरी जगह आ गयी . हमारे पार्किंग से बहार निकलते निकलते पुलिस की 2 गाड़ियां उधर पहुँच गयी और उन लड़कों को उठा कर वो लोग गाड़ियों में डालने लगे. हम सब वापिस चल कॉलेज को निकल गए.
शीना : वह कल्पना , मुझे तो पता hi नहीं था यार क तुम इतनी पावरफुल फाइटर हो. और क्या मस्त डायलाग मारा था ‘ ले आ गया तेरा जीजा ‘
शिवानी : एक बात तो बता ये तूने अमित को उनका जीजा क्यों कहा ? बहिन तो तू खुद बन रही थी?
कल्पना : शरमाते हुए ) वो वो क्या दीदी आप भी मेरी तंग खींचने लगी .
कल्पना ने एक नज़र मुझे देखा और फिर से सामने देखने लगी .
शालू : जो भी हो , मूवी से ज्यादा तुम्हारा एक्शन देखने में मज़ा आया. एंड यू बोथ शीना ने और तुमने मेरे लिए इतना कुछ किया.
कल्पना : दीदी हम सब फ्रेंड्स हैं और फ्रेंडशिप में no थैंक्स.
अमित : एक बात तो बताओ तुमने फ़ोन किसे किया था ? इतनी जल्दी पुलिस भी आ गयी उनको पकड़ने क लिए.
कल्पना : पापा को किया था और किसे करुँगी .
अमित : तुम्हारे पापा पुलिस में हैं क्या ?
कल्पना : नहीं तो , हाँ उनकी पुलिस में चलती है. अब उनकी एक लौटी बेटी क साथ कोई बदतमीज़ी करेगा तो वो इतना तो करेंगे hi न .
शीना : लगता है तुम्हारे पापा कोई बहुत बड़ी हस्ती हैं जो इतनी चलती है उनकी .
कल्पना : मेरे लिए वो hi सब कुछ हैं.
शिवानी : वैसे करते क्या हैं तुम्हारे पापा ?
कल्पना : लोक सेवा .
शीना : इसका क्या मतलब?
कल्पना : क्या दीदी आप तो सवाल पे सवाल पूछे जा रही हैं . ऐसा लग है जैसे मेरी रिमांड ली जा रही है.
इतने में हम कॉलेज पहुँच गए . पीछे पीछे hi दूसरी कार भी पहुँच गयी . छुट्टी का टाइम हो गया था तो कल्पना राधा और नेहा दीदी को लेकर जाने लगी तभी राधा मेरे पास आ गयी.
राधा : तुम नहीं चल रहे साथ? आज तुमने हमारे यहाँ आना है न रहने क लिए .
अमित : वो मैंने बताया न क आज मुझे कुछ काम है . रत को एक फंक्शन पर जाना है तो लेट हो जाऊंगा . वैसे भी मेरे कपडे मोहित क घर पड़े हैं . इस लिए कल hi आऊंगा वर्ण मौसी ऐसे रत को कहीं जाने नहीं देंगी.
राधा : मगर जाना कहा है तुम्हे ? माँ कल से तुम्हारे लिए पता नहीं क्या क्या तैयारियां कर रही है.
अमित : प्लीज मौसी को मन लेना , मैं कल पक्का आ जाऊंगा. आज किसी तरह उन्हें मन लो
राधा : बात पूरे हफ्ते की हुई थी ऐसे तो एक दिन काम हो गया न
राधा ने मासूम सा चेहरा बनाते हुए कहा . बिलकुल बच्चों की तरह शिकायती लहजे में कह रही थी.
अमित : कोई बात नहीं तुम नोट कर लो . इसे फिर किसी हफ्ते में एडजस्ट कर लेंगे .
राधा : कल पक्का आओगे न ?
अमित : पक्का , प्रॉमिस .
राधा : ाचा तो फिर मैं चलूँ ?
अमित : ठीक है अब तुम जाओ.
इसके बाद राधा कल्पना और नेहा दीदी क साथ चली गयी . जबकि रीमा और शालू शीना क साथ उसकी कार में गयी . शालू को शीना क साथ देख कर मुझे ाचा लगा . और फिर मोहित भी मीनल क साथ चला गया . मैं चूँकि बाइक पर आया था तो मैंने भी अपनी बाइक उठायी तभी यद् आया क डॉ रीना से बात तो की नहीं. मैंने डॉ रीना को फ़ोन लगा दिया.
डॉ रीना : कहाँ हो मर ? फ़ोन hi अटेंड नहीं कर रहे थे.
अमित : मैं ज़रा अपने दोस्तों क साथ था.
डॉ रीना : दोस्त या गफ?
अमित: लगता है आप भूल गयी क मेरी गफ नहीं है.
डॉ रीना : ज्यादा दिन अकेले नहीं रहोगे तुम
अमित : मतलब ?
डॉ रीना : आ अब इतने हैंडसम हो तो कोई न कोई पकड़ hi लेगी तुम्हे. वैसे शाम को जाना है मेरे साथ यद् तो है न ?
अमित : जी बिलकुल , आप बोलो कितने बजे चलना है?
डॉ रीना : एक घंटे की ड्राइव है यहाँ से तो 8 बजे तक चलते हैं. मेरी कार में hi चलेंगे . मुझे बता दो तुम्हे कहाँ से पिक करूँ?
अमित : ठीक है , मैं आपको एड्रेस सेंड कर देता हूँ.
डॉ रीना : ाचा ठीक है , और हाँ , आने में शायद देर भी हो सकती है . कोई प्रॉब्लम तो नहीं न?
अमित : कोई बात नहीं .
डॉ रीना : ाचा ठीक है शाम को मिलती हूँ ज़रा पेशेंट चेक कर लूँ.
अमित : ok bye.
उसके बाद मैं मोहित क घर चला गया . आंटी मुझे देख कर बहुत खुश हुई उन्हें लगा था क मैं आज नहीं आऊंगा. हमने साथ में लंच किया और अपने कमरे में चला गया रेस्ट करने. आंटी को मैंने बता दिया था क मैं रत में मैरिज पर जाने वाला हूँ. थोड़ा बहुत उन्होंने भी सवाल किये और जाने की परमिशन दे दी. कुछ देर सोने क बाद शाम को मैं स्टेडियम चला गया. अब कम्पटीशन में ज्यादा वक़्त नहीं था तो मैंने प्रैक्टिस शुरू करना hi ठीक समझा . नीरज ने कोच सर को मेरे बारे में बता दिया था तो वो भी नाराज़ नहीं थे. इतने दिनों बाद मैं स्टेडियम आया था तो ज्यादा ज़ोर नहीं लगाया और उसके बाद मैं मंजू म से मिलने उनके घर चला गया.
बाइक की आवाज़ सुनते hi मम ने दरवाज़ा खोल दिया. मैं जब दरवाज़े पर पहुंचा तो सामने मंजू म एक T-shirt और लोअर पहने कड़ी थी. उनके चेहरे पर एक दिलकश स्माइल थी. चेहरा देख कर मैं समझ गया क वो बहुत खुश हैं. जैसे hi मैं घर क अंदर दाखिल हुआ तो मम कूद कर मेरी गॉड में चढ़ गयी और अपने पाऊँ मेरी कमर पर बांध लिए. मंजू मेरी गर्दन को दोनों हाथों से पकड़ कर मेरे होंठ चूसने लगी. ये सब अचानक हुआ था . कुछ सेकण्ड्स में मैं भी संभाला और मम क होंठों को चूमते हुए उन्हें दीवार से लगा दिया. मम वीलडली किश कर रही थी और अभी तक न खुद कुछ बोली थी न मुझे कुछ बोलने दिया था . जैसे hi हम दोनों की सांसे उखाड़ने लगी तो हमने किश तोडा.
अमित : हहहहह , आज क्या बात है ? आप इतनी एग्रेसिव क्यों हैं ?
मंजू म : एग्रेसिव नहीं ी ऍम हैप्पी और मैं अपनी ख़ुशी अपनी जान से बाँट रही हूँ ‘ उम्मम्मम उम्म्म्माःह्ह्ह’
अमित : पर बात क्या है कुछ बताएंगी ?
मंजू म : पहले मैं अपनी जान को जी भर क प्यार तो कर लूँ फिर बताती हूँ. आखिर इसकी वजह भी तो तुम हो. ‘ उम्मम्मम्मम’
मंजू मम फिर से मुझे किश करने लगी . किश करते हुए मम ने मेरी T-shirt खिंच कर निकल दी और मेरे नंगे सीने से लिपट कर किश करने लगी. मैं मम को लिए ऐसे hi सोफे पर आ कर बैठ गया और मंजू म मेरी दोनों साइड घुटनो क बल मेरी गॉड में बैठी थी. मेरा लैंड अकड़ कर सलामी देने लगा था जो मंजू म को अपनी छूट कर महसूस हो रहा था . जल्दी से मम ने उठ कर अपना लोअर पेंटी समेत घुटनो तक किया और मेरा लैंड भी खुद मेरे लोअर से बहार निकलने क बाद अपने थूक से लैंड का सूपड़ा चिकना करते हुए फिर से मेरी गॉड में बैठ गयी और सुपडे को छूट पे से कर क एक डैम से बैठ गयी
मंजू म : aaaaaaaaaaaahhhhhhhhh कक्कक्कक्कक्स उम्मम्मम्मम्म ी लव आईटी. ी लव यू जान . यू अरे माय लकी चार्म. उम्म्म्म ओह्ह्ह्हह आआअह्ह्ह्हह आआह्ह्ह
मंजू म खुद hi अपने बूब्स मसलती हुई मेरे लैंड पर उछलने लगी. मैंने भी मम की T-shirt उतर दी और उनके बूब्स को खिंच कर ब्रा से बहार निकल कर किश करने लगा.
करीब 20 मिनट्स तक मैंने मंजू म को अलग अलग पोजीशन में प्यार किया . मंजू म की छूट 3 बार अपना पानी बहा चुकी थी और लास्ट में मैंने भी अपना पानी निकल दिया. मंजू म मेरी नंगी छाती से लिपट कर आराम कर रही थी.
अमित : अब बताएंगी आप इतनी एक्ससिटेड क्यों थी ?
मंजू म : तुम्हारी वजह से
अमित : मेरी वजह से? वो कैसे ?
मंजू म : यू अरे माय लकी चार्म . जब से तुम मेरी ज़िन्दगी में आये हो ज़िन्दगी hi बदल गयी है. अब तो लग रहा है जैसे वो हर ख़ुशी जो मुझसे रूठ गयी थी वो वापिस मेरे तक आ रही है.
अमित : मैं कुछ समझा नहीं .
मंजू म : पता है आज क्या हुआ ?
अमित : बताइये
मंजू म : आज कॉलेज में शीना मुझसे मिलने आयी थी. वो मेरे गले लगी और देर तक रोटी रही. वो बार बार मुझसे माफ़ी मांग रही थी. सच में वो बदल गयी है और ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है . भैया और बिट्टू क बाद मैंने उन्ही बच्चों में तो खुद को बिजी किया था या यूँ कहो इन बच्चों क सहारे hi मैं खुद को संभल पायी थी मगर वक़्त ने मुझसे इनसे दूर कर दिया था और देखो अब फिर से वो मेरे पास आ गए.
अमित : ये बिट्टू कौन है ? पहले तो कभी नहीं बताया आपने ?
मंजू म: मेरा भतीजा बिट्टू पन्नू भैया का बीटा. बहुत क्यूट था और मैं उसे बहुत प्यार करती थी. मैंने hi उसका ये नाम रखा था. मेरे लिए तो वो मेरा खिलाना था जिससे मैं घंटों खेला करती थी . मगर एक एक्सीडेंट में सब ख़तम हो गया.
इतना कहते हुए मंजू म की आँखों में पानी आ गया तो मैंने उनकी आँखों. को साफ़ करते हुए अपने सीने से कास दिया
अमित : जो कुछ हो चूका उसे यद् मत कीजिये सिवाए दुःख क कुछ नहीं मिलेगा. आज जो सामने है उसे प्यार कीजिये. शीना से क्या बात हुई आपकी?
मंजू म : वो फिर से मुझे घर चलने को कह रही थी और ये भी कह रही थी क वो मुझे बहुत मिस करती है. वो यहाँ मुझसे मिलने आने की परमिशन मांग रही थी
अमित : तो क्या कहा आपने?
मंजू म: मैंने कह दिया क जब चाहे आ सकती हो पर उसके माँ बाप और मोंटी नहीं आने चाहिए .
अमित : और
मंजू म : और रुपाली भाभी से भी मैं मिलना चाहती हूँ और उनकी दोनों बेटियों से भी. ी ऍम सो हैप्पी . तुम ने फिर से मेरी ज़िन्दगी में खुशियां भर दी हैं . कभी मुझे खुद से अलग मत करना .
अमित : कभी भी नहीं , हाँ कहूं आप मुझसे दूर न हो जाना अपने रिश्तेदारों क आते hi.
मंजू म : गंभीर लहजे में ) दुबारा कभी ऐसा सोचना भी मत. ये सब तुम्हारी वजह से hi तो हुआ है वर्ण वो तो पहले भी यहीं थे. मैं सब को छोड़ सकती हूँ पर तुम्हे नहीं .
मंजू म को सीरियस होता देख मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और किश करने लगा .
अमित : ी लव यू . ाचा अब मुझे जाना है . आज एक फंक्शन पर जाना है तो जल्दी जाना होगा अभी तैयार भी होना है जाकर.
मंजू म : यहीं तैयार हो जाओ न? कपडे तो हैं तुम्हारे यहीं पर .
अमित : मैरिज फंक्शन है तो सोच रहा हूँ उस हिसाब क कपडे पहन कर जॉन . कपडे मोहित क घर पर पड़े हैं तो वहां जाना hi होगा.
मंजू म : तो काम से काम यहाँ मेरे साथ नाहा तो सकते हो न?
अमित : लगता है अभी मन नहीं भरा आपका ?
मंजू म : तुमसे तो कभी भी मन नहीं भर सकता .
अमित : तो चलो फिर साथ में नहाते हैं पर यद् रखना मुझे जल्दी जाना है .
मंजू म : ठीक है .
फिर मैंने मंजू म और अपने जिस्म पर मौजूद आखिरी कपडे भी उतरे और हम दोनों बाथरूम में नंगे हो कर एक दूसरे को नहलाने लगे. मम क चिकने गदराये हुए बदन को मसलने में फिर से लैंड अकड़ गया . अगर मुझे जाना न होता तो एक और राउंड वहीँ पर उन्हें पेल देता पर चूँकि डॉ रीना को वडा किया था तो मैं भी लेट नहीं होना चाहता था . इस लिए जल्दी से नाहा कर दूसरे कपडे पहने और मंजू म को किश करने क बाद मोहित क घर वापिस चला गया. आंटी ने मेरे लिए कुछ ब्लेजर वगैरह लिए थे जो मैंने कभी पहने नहीं थे . उन्हें में से एक पेहेन कर मैं रेडी हो गया . जब मैं तैयार हो कर निचे आया तो आंटी मेरी तारीफ करने लगी . और मुझसे लिपट कर मेरे छरहरे और होंठों पर ढेर सरे किश कर दिए . उधर 8 बजने से पहले hi डॉ रीना की कॉल आ गयी.
डॉ रीना : रेडी हो ?
अमित : मैं तो रेडी हूँ पर लगता है आप रेडी नहीं हुई अभी .
डॉ रीना : मैं भी रेडी hi हूँ. वैसे तो मुझे मेकअप वगैरह करना ाचा नहीं लगता पर आज तुम साथ जा रहे हो तो थोड़ा टाइम लगाना पड़ा . बस 10 मिनट्स में मैं पहुँच रही हूँ तुम बहार आ जाना .
अमित : ठीक है आप आ जाओ.
आंटी: कब तक आओगे और जा किसके साथ रहे हो?
अमित : वो डॉ रीना हैं न उनके साथ. उनके घर वाले जा नहीं सकते थे तो उन्होंने मुझे चलने को कहा . उनकी फ्रेंड की मैरिज है . अब उनहोंने मेरा इतना ख्याल रखा था इतना तो मैं कर hi सकता हूँ.
आंटी : कहीं वो तुम पर फ़िदा तो नहीं हो गयी ?
अमित : ऐसी बात नहीं है . वो मुझे अपना दोस्त समझती हैं बस.
आंटी : दोस्ती से hi प्यार शुरू होता है . वैसे वो तो है भी खूबसूरत . अगर बात बने तो बना लो.
अमित : नहीं ऐसा कुछ नहीं है.
आंटी : ाचा वापिस कब तक आओगे?
अमित : अब ये तो पता नहीं क्यूंकि जाना दूर है . हाँ देर तो हो hi जाएगी .
आंटी : ठीक है मुझे बता ज़रूर देना कब तक आना है .
अमित : जी ठीक है .
हमारी बातें चल hi रही थी क फिर से मेरा फ़ोन बजा. डॉ रीना की hi कॉल थी मतलब क वो बहार आ चुकी थी. मैंने आंटी से गले मिल कर इजाज़त ली और बहार निकल गया जहाँ डॉ रीना कार में बैठी मेरा इंतज़ार कर रही थी.