अपडेट 152
‘ जल्दी से कैमरा निकल और शुरू कर’
मैनेजर ने अपने कपडे उतर कर अपने जूनियर को कैमरा निकल कर फोटोज लेने को कहा. इस वक़्त निधि मैनेजर क ऑफिस क साथ hi बने रेस्ट रूम में सोफे पर बेहोश पड़ी थी. मैनेजर ने अपने कपडे उतरे और निधि क कपडे उतरने लगा. निधि अछि कर कड़ी और छरहरे बदन की लड़की थी बिलकुल किसी मॉडल की तरह मगर मॉडल्स क विपरीत वो सादगी में रहने वाली लड़की थी. 5’7’’ की अछि कद काठी और दूध सा फक गोरा रंग. नैन नक्श भी इतने तीखे क देखने वाला उसमे खो जाता था. मगर सादगी पसंद होने की वजह से हमेशा एक ठहराव और तेज उसके चेहरे पर रहता था. हमेशा मान मर्यादा में रहने वाली लड़की आज इन हवस क भेड़ियों क जाल में फास गयी थी. आज तक कभी किसी लड़के तक से कोई रिश्ता न रखा था अपनी पड़े से लेकर अपने इस जॉब कर्रिएर तक पर आज उसकी इज़्ज़त ये घटिया लोग कुचलने वाले थे.
मैनेजर ने जैसे hi निधि क बदन से उसकी टाइट फिटिंग वाली ऑफिस ड्रेस क बटन खोलने शुरू किये तो सीने का कसाव उसे पागल बनाने लगा. जैसे तैसे उसने अपनी लपलपाती जीभ को संभल कर निधि की शर्ट उतरी तो उसकी वाइट ब्रा में कैसे हुए उभर देख कर मैनेजर क साथ उसके साथी का भी कलेजा मुँह को आ गया. दोनों निधि को खा जाने वाली नज़रों से देख रहे थे. एक पल को मैनेजर रुक कर निधि के स्तन दबाने लगा तो उसे जूनियर ने hi टोक दिया.
जूनियर : सर क्या कर रहे हो पहले इसके कपडे उतर लो एक बार . सब लोग यहीं हैं कोई आ गया तो काम बिच में रह जायेगा . एक बार फोटो शूट हो जाये बाद में कर लेना बाकि काम.
मैनेजर : क्या करूँ साला कण्ट्रोल नहीं हो रहा. देख नहीं रहा क्या माल है साली . तेरी बात भी सही है जाएगी कहाँ .
इतना कह कर मैनेजर ने निधि क पाऊँ से जुटे उतरे और उसकी पेण्ट को खोलते हुए उतर दिया. केले क तने क सामान मजबूत गोरी चिकनी जांघें जिनपर न कोई दाग था न कोई बल. अछि हैघट होने की वजह से टांगें भी उतनी hi खूबसूरत भी थी . ब्रा क साथ की वाइट पेंटी निधि क यौनांग को ढके हुए थी. मैनेजर ने जल्दी से निधि की ब्रा को भी निकल दिया . और निधि को बाँहों में लेकर ऐसे पोज़ बनाने लगा क देखने वाले को यही लगे क निधि सब होशो हवास में अपनी मर्ज़ी से कर रही है. जूनियर भी घूम घूम कर अलग अलग एंगल से तस्वीरें उतर रहा था.
दूसरी तरफ रजनी ऑटो से निधि क ऑफिस आ रही थी. वो 20 मिनट्स से ऑटो में बैठी भी लगातार फ़ोन पे फ़ोन किये जा रही थी निधि को. जैसे hi वो निधि क ऑफिस क बहार पहुंची तो वो ऑटो वालो को रुकने का कह कर सीधा अंदर को दौड़ गयी . सिक्योरिटी वाले ने रजनी को रोका
सिक्योरिटी : किस्से मिलना है आपको ?
रजनी : मेरी बेटी यहाँ काम करती है. निधि नाम है उसका . उसका फ़ोन आया था उसकी तबियत ठीक नहीं और अब वो फ़ोन नहीं उठा रही मुझे उसके पास ले चलो
सिक्योरिटी: आप ऐसे अंदर नहीं जा सकती , मुझे पहले अंदर से पूछने दीजिये.
सिक्योरिटी वाला रजनी को रुकने का कह कर इण्टरकॉम पर बात करने लगा तो रजनी खुद hi एहि से अंदर को भाग गयी . एक माँ भला कैसे रुक सकती थी जब उसके बच्चों पर कोई खतरा हो. रजनी की ऑंखें भरी हुई थी और किसी तरह वो अपने आंसू रोके हुए अपनी बेटी की चिंता में भागे जा रही थी. उधर से नैना और करुणा भी पहुँच गयी और वो भी अंदर को भाग ली. सिक्योरिटी वाला अभी इण्टरकॉम पर अंदर खबर दे hi रहा था क ये दोनों लड़कियां भी अंदर घुस गयी. रजनी बिल्डिंग में तो पहुँच गयी पर उसे ये नहीं पता था क निधि का ऑफिस कौन से फ्लोर पर है. 5 मंज़िला ये ईमारत बेशक एक hi कंपनी की थी पर इसमें अलग अलग ऑफिसेस भी थे. सोडियां और लिफ्ट पास पास hi थी. रजनी को समझ नहीं आ रहा था क वो क्या करे . पीछे से आ रही नैना जो थोड़ा बहुत निधि क ऑफिस क बारे में जानती थी. उसने रिसेप्शन क पास लगे बोर्ड से hi देख लिया था क निधि का ऑफिस थर्ड फ्लोर पर है. वो जैसे hi लिफ्ट क पास पहुंची तो अपनी माँ को बदहवास वहां कड़ी देख कर वो माँ से लिपट गयी .
नैना : माँ , क्या हुआ है दीदी को ? दीदी फ़ोन क्यों नहीं उठा रही मेरा ?
रजनी : रट हुए ) पता नहीं क्या हुआ है मेरी बची को . जल्दी मुझे उसके पास ले चल पता नहीं कौन सा ऑफिस है उसका .
नैना : मेरे साथ आओ माँ मुझे पता है दीदी का ऑफिस .
नैना रजनी को लिए लिफ्ट में घुस गयी और करुणा भी उसके साथ hi थी. जैसे hi लिफ्ट रुकी तो सामने निधि का ऑफिस था जहाँ इस वक़्त पार्टी चल रही थी . तीनो दौड़ती हुई ऑफिस में घुस गयी . हैरान परेशां निधि को खोजने लगी पर निधि उन्हें नज़र नहीं आ रही थी.
पेओन : किस्से मिलना है आपको ?
रजनी : निधि कहाँ है ?
पेओन : आप कौन हैं?
रजनी : माँ हूँ मैं उसकी , मेरी बेटी कहाँ है बताओ मुझे .
रजनी तेज़ आवाज़ में बोल रही थी तो वहां पार्टी कर रहा सारा स्टाफ इस तरफ देखने लगा. टीना , जिसका आज जनम दिन मनाया जा रहा था उसका रंग hi उड़ गया अपने सामने निधि की माँ और बहन को देख कर . क्यूंकि उसे hi पता था क माजरा क्या है. बात को सँभालने क लिए वो आगे आयी .
टीना : अरे आंटी आप निधि की माँ हैं ? आइये मैं उसकी दोस्त हूँ हम साथ में hi काम करते हैं. आज मेरा बर्थडे है मुझे आशीर्वाद दीजिये .
रजनी : बेटी मुझे मेरी बेटी से मिलवा दो . उसका फ़ोन आया था वो ठीक नहीं है . और कब से मैं फ़ोन कर रही हूँ मगर उसका फ़ोन नहीं लग रहा .
टीना : वो वो शायद घर चली गयी होगी. मैंने देखा नहीं उसे . केक कटवा कर वो पता नहीं कहाँ चली गयी .
नैना : ाचा तो ज़रा मुझे उनके केबिन तक ले चलिए .
टीना : है हाँ हाँ चलो देखलो खुद hi .
सब लोग हैरान परेशां देख रहे थे क ये सब हो क्या रहा है . रजनी नैना और करुणा टीना क साथ निधि क केबिन में गए तो वहां पर उसका हैंड बैग साइड में पड़ा हुआ था और मोबाइल भी . ये देख कर नैना एक डैम गुस्से में आ गयी .
नैना : गुस्से में ) मेरी बहिन कहाँ है ? अगर वो बहार गयी थी तो उसका पर्स और मोबाइल यहाँ क्या कर रहा है ?
रजनी : गुस्से में ) कहाँ है मेरी बेटी ? अगर मेरी बेटी को कुछ हुआ तो मैं आग लगा दूंगी इस दफ्तर को .
टीना दोनों माँ बेटी को गुस्से में देख कर खिसकने लगी तो करुणा ने उसकी कलाई पकड़ कर मरोड़ दी.
करुणा : अब बताओगी या ये कलाई तोड़ दूँ . मुझे पता hi तू जानती है दीदी कहाँ है.
‘ बेहवे योरसेल्फ, ये तरीका है किसी से बात करने का ? निधि यही है . उसकी तबियत ख़राब थी तो वो आराम कर रही है . इंजेक्शन दिया है उसे अभी ठीक हो जाएगी . ‘
ये कड़क दर आवाज़ मैनेजर की hi थी. दरअसल सिक्योरिटी गार्ड द्वारा रजनी क आने की खबर उसे मिल गयी थी. और उसने इतने समय में निधि को फिर से कपडे पहना दिए थे और निधि को होश में लेन क लिए रखा हुआ इंजेक्शन खुद hi लगा दिया था . ऑफिस में हंगामा होता देख वो जल्दी से बहार आ गया था जबकि निधि अभी भी वहीँ थी.
रजनी : मेरी बेटी कहाँ है मुझे मेरी बेटी से मिलवा दो.
मैनेजर : वो बिलकुल ठीक है . ऑफिस क सभी एम्प्लाइज मेरी ज़िम्मेदारी हैं. हम यहाँ एक फॅमिली की तरह है और आप कोई हक़ नहीं ऐसे बदतमीज़ी करने का किसी क साथ . निधि मेरी रिस्पांसिबिलिटी है , उसे मैं कैसे मच होने दे सकता हूँ . डॉ ने उसे चेक कर क इंजेक्शन दे दिया था. शायद उसकी तबियत पहले से hi ख़राब थी इस लिए चक्कर आ गया था. और तुम से सॉरी तो टीना , इसका जन्मदिन है आज और तुम ऐसे बेहवे कर रही हो.
मैनेजर ने करुणा को देखते हुए कहा. तो करुणा ने भी टीना को सॉरी कहा. टीना की तो जान में जान आयी मैनेजर क आने से. फिर मैनेजर तीनो को लेकर उसी जगह आ गया जहाँ निधि अभी भी सोफे पर अधलेटी पड़ी हुई थी . उसे अभी होश नहीं आया था. रजनी निधि को ऐसे देख कर रोटी हुई उससे लिपट गयी और उसे अपनी बाँहों में जकड कर उसका सर सहलाते हुए उसे उठाने की कोशिश करने लगी .
रजनी : निधि , निधि , उठो मेरी बची . क्या हुआ है तुझे ? देख मैं आ गयी . उठो मेरी बची ऑंखें खोलो.
नैना : दीदी , दीदी उठो न , देखो माँ कैसे रो रही है.
इंजेक्शन तो लगा hi चुके थे वो लोग निधि को होश में लेन क लिए और अब इस तरह हिलाये जाने से वो होश में आने लगी.
निधि : माँ ,, मैं कहाँ हूँ ,,, क्या हुआ था मुझे ??? नैना ,,,, करुणा . मेरा सर ....
निधि अधखुली आँखोने से देखने की कोशिश कर रही थी पर उसका सर बहुत भरी था . निधि को अभी कुछ समझ नहीं आ रहा था . निधि को होश में अत देख कर रजनी नैना और करुणा क चेहरे पर मुस्कान आ गयी थी. जबकि मैनेजर की ऑंखें भी चमक रही थी नैना और करुणा को देख कर .
मैनेजर : निधि तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है. तुम घर जाओ और रेस्ट करो. और आंटी जी आप निधि को घर ले जाइये . कल संडे है तो रेस्ट कर क बिलकुल ठीक हो जाएगी . परसों आराम से आना ऑफिस .
नैना : थैंक्स सर , एंड सॉरी फॉर आवर बाद बिहेवियर.
मैनेजर : it’s ok , ी कैन अंडरस्टैंड. निधि की तरह तुम दोनों भी बहुत स्मार्ट हो. तुम दोनों भी हमारा ऑफिस ज्वाइन कर सकती हो . मुझे ख़ुशी होगी . यकीनन तुम दोनों भी निधि की तरह hi हार्डवर्क करने वाली होगी .
बात करते हुए मैनेजर ने नैना का हाथ अपने दोनों हाथों में थम लिया था और बड़ी चतुराई से सेहला भी दिया था.
नैना : जी सर पर अभी तो हमारी स्टडी कम्पलीट नहीं हुई है. फ़िलहाल क लिए सॉरी एंड थैंक्स अगेन. चलो माँ . चलो दीदी.
रजनी करुणा नैना निधि को लेकर केबिन से बाहर निकली और निधि का सामान लेकर बहार निकल गयी. ऑटो वाला बहार hi खड़ा था तो रजनी निधि क साथ उसी में बैठ गयी पीछे पीछे नैना और करुणा स्कूटी पे आने लगी . इन सब क बहार निकलने क बाद मैनेजर अपनी चेयर पर बैठा मुस्कुरा रहा था क तभी उसका जूनियर ऑफिस में एंटर हुए और मैनेजर को हस्ता देख कर हैरान हुआ.
जूनियर : ये क्या सर आप खुश हो रहे हैं? हाथ आयी मुर्गी निकल गयी और आप है रहे हैं.
मैनेजर : अबे गांडू अब वो कहीं नहीं जाने वाली . उसको तो अब जब चाहे अपने नीचे लिया लूंगा मैं. तस्वीरें hi तो चाहिए थी न ? वो तो हो गयी. वैसे भी साली सील पैक्ड है तो ऐसे बेहोश करके सील तोड़ने में मज़ा नहीं अत. अब आराम से उसका मज़ा लेते हुए उसे काली से फूल बनाऊंगा. और खुश मैं इस लिए हो रहा हूँ क एक तीर से तीन तीन शिकार करूँगा अब .
जूनियर : तीन शिकार ? वो कैसे ?
मैनेजर : तू सेल गांडू hi रहेगा. देखा नहीं उसकी बहनो को. साली एक no. माल हैं. पहले निधि को पेलुँगा फिर उसकी मदद से hi उसकी बहनो को .
जूनियर: पर सर क्या वो मानेगी ?
मैनेजर : मानेगी कैसे नहीं ? वो मन कर hi नहीं सकती अब . और फिर ये न भी मणि तो सीधा उसकी बहिन को hi तस्वीरें दिखा कर मन लेंगे. इज़्ज़त तो उसे भी प्यारी होगी .
जूनियर : माल तो उसकी माँ भी टॉप क्लास है. आखिर उसी ने तो ये प्रोडक्ट बनाये हैं .
मैनेजर : है है है तू नहीं सुधरेगा. बेटी क साथ माँ भी चाहिए. चल वो भी देख लेंगे अब ज़रा कैमरा इधर का देखें तो सही कितना ाचा काम किया है तूने .
मैनेजर ने कैमरा लेते हुए उसका मेमोरी कार्ड निकला और अपने लैपटॉप में उसे कॉपी कर क फिर से खली कर दिया. मैनेजर बड़ा हरामी आदमी था जो अपना कोई सबूत किसी क हाथ नहीं छोड़ता था. मेमोरी कार्ड को फॉर्मेट करने क बाद उसने वापिस कैमरा में दाल दिया और लैपटॉप में तस्वीरें ओपन कर क देखने लगा . मैनेजर अंदर से खुश हो रहा था क आखिर वो अपनी प्लानिंग में कामयाब हो hi गया. तो क्या हुआ आज वो निधि का काम नहीं कर पाया पर अब वो उसकी मुठी में आ गयी थी और किसी भी सूरत में वो मन कर hi नहीं सकती थी.
अंकल और मैं जब शहर से निकले तो 8 बजे से ऊपर टाइम हो रहा था. पर न तो हम बस में थे और न hi ये दिन का वक़्त था इस लिए हमे वापिस पहुँचने में ज्यादा टाइम नहीं लगने वाला था . कल्पना ने घर पहुँच कर फ़ोन कर दिया था क वो पहुँच गयी और इधर घर से भी माँ और बाबा क साथ साथ दीपिका ममी और कामिनी ममी से भी बात हो गयी थी . मैंने माँ को बता दिया था क आज नहीं आ पाउँगा. रीमा और राधा से ज्यादा बात कर नहीं सकता था अंकल क साथ होने की वजह से पर मैंने मैसेज कर क बता दिया था अपने बारे में. वहीँ मंजू म से भी मैसेज से hi बात हो गयी थी. रत 10 बजे हम घर पहुँच गए थे आंटी और मोहित हमारा hi इंतज़ार कर रहे थे और अभी तक उन्होंने भी डिनर नहीं किया था. मुझे देखते hi आंटी ने मुझे सीने से लगा लिया . अछि तरह मेरा चेहरा अपने स्तनों में दबाने क बाद मुझसे अलग हुई और झूठा गुस्सा दिखने लगी.
आंटी : बस इतना hi प्यार था हमसे जो शहर में होते हुए भी एक बार नहीं मिलने आये ?
अमित : अरे आंटी कैसी बात कर रही हैं आप, मोहित से पूछिए रोज़ तो आपके बारे में पूछता रहता हूँ. और कम्पटीशन की वजह से सारा ध्यान उसी तरफ लगा हुआ था. वर्ण ऐसा हो सकता है क मैं आपसे मिलने न आऊं? आखिर ये भी तो मेरा घर है.
अंकल : बिलकुल सही कहा बीटा ये भी तुम्हारा hi घर है . रमा आज हमारा बीटा जीत कर आया है और तुम खुश होने की बजाये नाराज़ हो रही हो. कुछ खाने को लाओ मुँह मीठा करवाओ सबका.
आंटी : खुश कैसे नहीं हूँगी मैं? सब से ज्यादा खुश हूँ और मुँह मीठा भी करवाउंगी पर इसे भी पता चलना चाहिए न इसके बिना हमारा दिल नहीं लगता और ये है क अत नहीं मिलने क लिए .
अमित : अरे आंटी जी अब तो मैं फ्री हो गया हूँ न कम्पटीशन से तो जब कहेंगी आ जाऊंगा. आप गुस्सा मत करें.
मोहित : इधर आ यार ज़रा मुझ से भी तो मिल ले .
मोहित गरम जोशी से मुझसे मिला और आंटी किचन में चली गयी .
मोहित : और सुना कैसा रहा टूर? कोई पन्गा तो नहीं हुआ न वहां पर ?
अमित : सब बढ़िया रहा बस तुम लोगों बहुत मिस किया
मोहित : हमने भी किया . तू नहीं था तो कैंटीन में भी मज़ा नहीं अत था. वैसे नैना दीदी और करुणा दीदी आज भी आयी थी कॉलेज . लड़कियों की तो अपनी गैंग बन गयी है अब तो अपनी कोई नहीं चलने वाली. पहले ये क्या काम थी क अब नैना दीदी और करुणा दीदी भी आ गयी साथ.
आंटी : लो पहले मुँह मीठा करो. भगवन हमेशा हर जगह तुम्हे ऐसे hi जितने की ताकत दे.
आंटी अंदर मिठाई का डिब्बा ले आयी थी और मेरे साथ hi मोहित और अंकल का भी मुँह मीठा करवा दिया. उसके बाद हम सब ने मिल कर डिनर किया और कुछ देर बाद सब अपने अपने कमरों में चले गए . आज का दिन बहुत भाग दौड़ वाला रहा था तो मैं भी जल्दी ऑंखें बंद कर क बीएड पर पद गया. मैं आराम से सो रहा था क मेरी नींद गीले गीले एहसास से उचक गयी. मुझे अपने होंठों पर गीला और नरम एहसास हो रहा था , ये समझते मुझे ज्यादा देर नहीं लगी क कोई मेरे होंठ चुम रहा है. और आंटी क सिवा इस वक़्त कोई हो नहीं सकता था. मैंने आराम से उनके होंठ चूमने शुरू किये और उनकी जीभ को अपने मुँह में ले कर चूसने लगा तो उन्होंने किश तोड़ दी.
आंटी : इतने दिनों बाद आये हो और आते hi सो गए . ज़रा भी ख्याल नहीं आया मेरा ?
अमित : थकावट इतनी ज़्यादा हो गयी थी क पता hi नहीं चला कब नींद आ गयी .
आंटी : तुम्हारी थकावट उतरने hi तो आयी हूँ मैं.
आंटी मेरे ऊपर लेती हुई थी और कमरे में जीरो का बल्ब जल रहा था. मैंने अपने हाथ उठाते हुए आंटी की कमर पर रखा और उन्हें किश करते हुए अपने हाथ उनके कूल्हों पर ले गया . नरम नरम कूल्हे दबाने में वादा मज़ा आ रहा था और आंटी क नरम गोले मेरी छाती पर दबे पड़े थे. जल्दी hi मेरा लैंड अकड़ कर आंटी की छूट पर चोट करने लगा.
आंटी : उम्मम्माह्ह तुम बस लेते रहो आज सब मैं करुँगी. तुम्हारी साडी थकावट अभी उतर देती हूँ .
इतना कह कर आंटी मेरे ऊपर से उतरी और एक झटके में अपने बदन से गाउन अलग कर दिया. नीचे आंटी ने कुछ नहीं पहना था . आंटी का दूधिया बदन मेरे सामने बेपर्दा हो गया था. आंटी मेरी कमर की तरफ झुकी और मेरा लोअर अंडरवियर क साथ hi खिंच कर उतर दिया. मैंने भी कमर उठा कर उनकी मदद की . मेरा लैंड जो मस्ती में झूल रहा था आंटी ने उसे हाथ में पकड़ कर मुँह में ले लिया . आधे लैंड को एक hi बार में आंटी ने मुँह में ले लिया और अंदर बहार करने लगी . मस्ती में मेरे मुँह से भी सिसकियाँ निकलने लगी .
अमित : आआह्ह्ह शह्ह्ह्ह क्या कर रही हो आप ?
आंटी : उनममम उम्म्म उम्माह्ह्ह्ह इतने दिनों बाद आये hi तो क्या प्यार भी न करूँ इसे? तुम्हे भी तो पता चले मैं कितना तड़प रही थी .
इतना कह कर फिर से आंटी ने लैंड मुँह में अंदर बनाए करना शुरू कर दिया . मज़े में मेरे हाथ अपने आप आंटी क सर पर चले गए और कमर ऊपर उठने लगी . कोई 5 मिनट्स लैंड चूसने क बाद आंटी मेरी कमर को दोनों तरफ घुटने बीएड पर रख कर एक हाथ से लैंड को खुद hi छूट पर टिका कर एक झटके में बैठ गयी. आधे से ज्यादा लैंड एक hi बार में अंदर घुस गया पर आंटी क मुँह से तेज़ सिसकी निकल गयी
आंटी : आआह्ह्ह्हह कक्कक्क्स आह्ह्ह्ह हर बार ऐसे दर्द देता है जैसे पहली बार अंदर जा रहा है आअह्ह्ह्ह ये कब आराम से जाना शुरू करेगा मेरे अंदर ? उम्मम्मम उफ्फफ्फ्फ़ आज अचे से मेरी खोल कर रख दो ताकि उसे अंदर लेने में परेशानी न हो .
इतना कह कर आंटी उतने hi लैंड को अंदर बहार लेने लगी . आंटी मेरी छाती पर हाथ रख कर खुद hi सब कर रही थी. मैंने भी हाथ बड़ा कर उनके आम लपक लिए और उन्हें मसलने लगा
अमित : क्या ाचा नहीं लगता आपको ये दर्द ? मुझे तो अछि लगती है ये कासी हुई छूट जो अभी भी किसी लड़की की तरह कासी हुई है
आंटी : आअह्ह्ह उम्म्म आअह्ह्ह कासी क्यों न लगे ?? हर रोज़ इतनी म्हणत जो उफ्फ्फ्फ़ आअह्ह्ह करती हूँ . तुम्हारी वजह से मैं फिर से जवाब होने लगी हूँ हनन ऐसे hi ऐसे hi ुगफ्फफ्फ्फ़
मैंने आंटी क बूब्स मसलते हुए अपनी कमर उठा कर धक्के मरने शुरू कर दिए . आंटी मेरे ऊपर झुक गयी और मुझे किश करने लगी . 5 मिनट्स में hi आंटी का पानी निकल गए और वो मेरे ऊपर hi गिर गयी. मैंने आंटी को बीएड पर पलट कर उठ गया और अपनी T-shirt भी उतर दी . आंटी क पाऊँ पकड़ कर मैंने घसीट कर उन्हें किनारे पर किये और टंगे हवा में उठाते हुए छूट पर लैंड सेट कर क एक hi झटके में पूरा जड़ तक लैंड अंदर घुसा दिया . आंटी फिर से करहि पर मैंने बिना रुके लगातार धक्के पेलने शुरू कर दिया और आंटी बस सिसकियाँ लेती रही. कुछ देर बाद मैंने उन्हें फर्श पर खड़ा कर क घोड़ी बना लिया और पीछे से एक hi झटके में लैंड उनकी बचे सभी तक पेल दिया .
आंटी : आअह्हह्ह्ह्ह मायआ फाड़ दो कोई रह मत करना बहुत तड़पती है ये तुम्हारे बिना आज साडी तड़प दूर कर दो इसकी आआह्ह्ह्ह
अमित : आह्हः साडी तड़प मिटा दूंगा जब भी ये ज्यादा तंग करे बुला लिया करो आप . बड़ा मज़ा आता है आपको घोड़ी बनाने में उफ्फ्फ आपकी ये जानलेवा गांड कितनी नरम और गोल है
आंटी : पहले आगे से पूरी तरह ठंडी कर दो फिर पीछे से कर लेना मैं मन नहीं करुँगी सब तुम्हारे लिए hi तो है आअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ऐसे hi करो आह्ह्ह्ह मेरा होने वाला है आअह्ह्ह aaaaaaiiiiiiiiii
इसके साथ hi आंटी एक बार और झाड़ गयी . मैंने उन्हें झड़ने दिया . गरम पानी का शावर मुझे अपनी लैंड पर महसूस हो रहा था . मैंने उन्हें कुछ देर अपने स्खलन का मज़ा लेने दिया और फिर लैंड को छूट से निकल कर गांड पर सेट कर क दबाव देते हुए अंदर घुसाने लगा. 3 इंच लैंड अंदर जाते जाते आंटी सिसकने लगी थी दर्द से फिर मैंने एक तगड़ा झटका पेल दिया . लैंड छूट क पानी से चिकना तो था hi 7 इंच तक गांड में घुस गया .
आंटी : आअह्हह्ह्ह्ह आराम से करो आआह्ह्ह्ह फट गयी आअह्ह्ह्ह कल चलने लायक नहीं छोड़ोगे मुझे कक्ककक्कक्स
अमित : चलोगी भी और दौडोगी भी आप . आप तो मेरी घोड़ी हैं आपकी सवारी करने में बड़ा मज़ा अत है
आंटी : उफ्फ्फ आअह्ह्ह्ह जंगली घोड़े हो पूरे जो हर बार चल बिगड़ देते हो आआह्ह्ह्ह कोई आगे ले ले तो चल न पाए और तुम उफ्फफ्फ्फ़ आअह्ह्ह्ह पीछे भी घुसा देते हो आअह्ह्ह ऐसे hi करो
मैंने आंटी की कमर को थामे ज़ोर दर चुदाई शुरू कर दी और आंटी भी कुछ देर में अपनी कमर पीछे धकेलती हुई मज़ा लेने लगी. हमारा ये खेल कोई 30-35 मिनट्स चला और मैंने अपना पानी आंटी की गांड में hi छोड़ दिया और उनको बीएड पर लिए उनके ऊपर hi देह गया. आंटी भी 3 बार पानी निकल चुकी थी. मुझे पता नहीं कब मेरी आँख लगी पर जब सुबह उठा तो मैंने बीएड पर अकेला hi था.
सुबह आँख थोड़ा लेट hi खुली थी मैं एक्सरसाइज करने की जगह नाहा धो कर तैयार हो गया गाओं जाने क लिए. अंकल तो अभी अख़बार hi पद रहे थे जबकि आंटी भी अभी उठी थी.
अंकल : अरे अमित इतनी जल्दी तैयार हो कर कहा. जा रहे हो?
अमित : कल लेट हो गए थे अंकल तो सोचा जल्दी निकल जाता हूँ सुबह सुबह गाओं क लिए. माँ बाबा इंतज़ार कर रहे होंगे.
अंकल : ये देखो पहले आज का अख़बार. तुम्हारी कॉलेज की टीम की फोटो लगी है फ्रंट पेज पर. तुम भी हो इसमें. और देखो नाम भी लिखा हैं यहाँ पर सबका.
मैं अंकल क हाथ में पकडे न्यूज़ पेपर में छपी खबर और तस्वीर देखने लगा.
आंटी : नाश्ता किये बिना नहीं जाने दूंगी , चुपचाप बैठो यहाँ मैं अभी नाश्ता तैयार करवाई हूँ.
आंटी अभी भी एक गाउन पहने हुए थी और चल ज़रा धीमी थी . मैंने गौर से देखा तो मेरी नज़रों का पीछा करते हुए वो समझ गयी मैं क्या देख रहा हूँ. उनके चेहरे पर शर्मीली मुस्कान आ गयी. किचन की तरफ जाते हुए उनके गाउन में से उनके थिरकते कूल्हे देख कर लैंड ने फिर से अंगड़ाई ली. पर मैं ध्यान हटते हुए अंकल से बात करने लगा. थोड़ी देर में hi आंटी रानी को साथ लिए मेरा नाश्ता और जूस ले आयी . नाश्ता करने क बाद मैं दोनों से इजाज़त ले कर घर को चल दिया. बाइक मोहित क घर hi थी जो वो कॉलेज से ले आया था. मैं अपनी तरोपज्ञ और मैडल भी एक छोटे बैग में दाल कर साथ ले आया. सुबह करीब 9 बजे मैं घर पहुँच गया था . बाबा घर पर hi अंगना में बैठे. एक तरफ चारपाई पर दीपिका ममी बचे को लेकर बैठी थी माँ भी उनके पास hi बचे को खिला रही थी . मुझे दरवाज़े पर देखते hi माँ दौड़ कर मेरे गले लग गयी .
गौरी म : तू आ गया मेरे बेटे. कल कहाँ रह गया था ? पता है कब से इंतज़ार कर रही हूँ साडी रत सो नहीं पायी मैं.
अमित : माँ बताया तो था मैंने कल लेट हो गया था तो अंकल क घर hi रुक गया था. आप इतनी परेशां मत हुआ करो. ये देखिये मैं क्या लाया हूँ.
मैंने बैग से ट्रॉफी और मैडल निकल कर माँ को दिया तो माँ ख़ुशी से फूले नहीं समां रही थी. वो कभी ट्रॉफी तो कभी मुझे चूमती. इतने में बाबा ने भी आ कर मुझे गले लगा लिया .
विजय म : शाबाश मेरे शेर ऐसे hi हमारा नाम रोशन करता रह . जाओ अमित की माँ मुँह मीठा करवाओ बेटे का जीत कर आया है. आज तो पूरे गाओं में लड्डू बांटूंगा. तुम बैठो मैं ज़रा हलवाई की दुकान से होकर आया , कल उसे बोलै था मैंने लड्डू बनाने को .
बाबा की ख़ुशी देखने लायक थी. वो तेज़ कदमो से बहार निकल गए.
गौरी म : तू बैठ मैं अभी आयी .
माँ मुझे इतना कह कर किचन की तरफ चली गयी और मैं दीपिका ममी की तरफ हो गया जो कब से मुझे देख रही थी.
अमित : कैसी हैं आप ?
दीपिका म : तुम्हे देख लेती हूँ अछि हो जाती हूँ . वैसे भी ये है न तुम्हारा लल्ला . एहि दिल लगाए रखता है. देखो लल्ला पापा क्या लाये हैं तेरे लिए . तू भी बड़ा हो कर पापा क जैसे बनना.
मैंने दीपिका ममी की गॉड से अपने बेटे को लेकर चूमते हुए सीने लगा लिया . सच में कितना सुकून मिलता है अपनी औलाद को सीने से लगाने पर ये मुझे महसूस हो रहा था.
दीपिका म : अगले संडे को नामकरण करने का फैसला हुआ है. कोई नाम सोचा है अभी तक या नहीं ?
अमित : जो भी आपको सही लगे वो रख लो आखिर आप का hi तो बीटा है.
दीपिका : तुम नहीं लगते कुछ इसके ? नाम तो तुम hi रखोगे मैं कह देती हूँ हाँ.
‘ सही कहा दीपिका नाम तो इसे hi रखना चाहिए, आखिर इसका भी तो हक़ बनता है’
माँ रसोई से मेरे लिए दूध और मिठाई ले आयी थी. और हम दोनों को देख कर मुस्कुरा रही थी. दीपिका ममी माँ की इस बात पर शर्मा गयी .
दीपिका म : वो hi तो मैं कह रही थी दीदी आप hi समझाइये
गौरी म : इतनी सी बात नहीं मन सकता? नाम तो अब वो hi रखेंगे जो तुम कहोगे वर्ण मुन्ना तो है hi फिर . चल मुँह मीठा कर और दूध पि ले.
मैंने माँ क हाथ से मिठाई के कर पहले उनका और दीपिका ममी का मुँह मीठा करवाया और फिर खुद खा कर दूध पिने लगा. दूध पिने क बाद मैं कामिनी ममी क कमरे में जा कर उनसे भी मिला और उनका भी मुँह मीठा करवाया . कामिनी ममी का पेट भी अब बहुत बड़ा नज़र आने लगा था अब उनका डिलीवरी टाइम भी ज्यादा दूर नहीं था.
अमित : कैसी हैं आप ?
कामिनी म : अछि हूँ बस आजकल दर्द रहने लगी है . बधाई हो तुम्हे जीत की.
अमित : आपको भी और मुझे इनाम जल्द से जल्द चाहिए .
मैंने कामिनी ममी क पेट पर हाथ रखते हुए कहा. वो मेरी बात पर शर्मा गयी.
कामिनी म : इनाम नहीं ये तो वरदान है मेरे लिए. तुम्हारा ,, हमारा प्यारा .
अमित : देख लेना आप जैसी सुन्दर सी बेटी होगी.
कामिनी म : पर मुझे तुम्हारे जैसा बीटा चाहिए.
अमित : चलिए देखते हैं भगवन किसकी सुनता है. आप आराम कीजिये मैं ज़रा माँ क साथ कुछ देर बात कर लूँ .
मैं फिर से बहार आया तो माँ ने नाश्ते का पूछा . मैंने बता दिया क नाश्ता कर क hi आया हूँ. इतने में बाबा आ गए और उनके साथ अजय मां भी . मैं अजय मां से भी गले लग कर मिला और उन्होंने भी मुझे ज़ोर से गले लगा लिया.
अजय मां : शाबाश मेरे शेर , गाओं का नाम खूब रोशन करो अपनी म्हणत से.
विजय म : ले बीटा पहले अपना मुँह मीठा कर और सबका करवा फिर गाओं में लड्डू बाँटने हैं. भगवन क तो मैंने कल hi चढ़ा दिया था.
मैंने बाबा से एक डिब्बा लिया और बरी बरी से सबका मुँह मीठा करवाया. बाबा क साथ hi एक आदमी बहुत सरे डिब्बे ले कर खड़ा था शायद हलवाई की दुकान से hi होगा. बाबा और अजय मां मिठाई ले कर गाओं में बाँटने क लिए निकल गए . बाबा मुझे भी साथ ले जाना चाहते थे पर माँ ने मन कर दिया और मुझे अपने कमरे में आराम करने को कह दिया. मैं भी अपने कमरे में आ आराम करने लगा. कुछ देर बाद राजू चिल्लाता हुआ मेरे कमरे में आ गया
राजू : अरे वह रे मेरे पहलवान तूने तो कमल कर दिया. जियो मेरे शेर
राजू मुझसे गले लग कर मिला . वो बहुत खुश नज़र आ रहा था
अमित : चल आ तेरा मुँह मीठा करवाऊं
राजू : मुँह मीठा कर लिया है मैंने. तेरे बाबा पूरे गाओं का मुँह मीठा करवा रहे हैं . मुझे जैसे hi पता चला मैं यहाँ आ गया. और सुना कैसा है?
अमित : मैं ठीक हूँ तू सुना कैसा है?
राजू : अपना भी ठीक है . नौकरी में अब अछि सेटिंग हो गयी है. सोच रहा हूँ एक छोटा सा घर शहर में hi देख लूँ. फिर माँ को अपने साथ ले जाऊंगा . रीमा का आना जाना ख़तम और फिर रेनू को भी तो शहर में hi लेकर जाना है.
अमित : ठीक सोचा है तुमने , पर इतने पैसे कहाँ से लाएगा?
राजू : देखता हूँ , क़र्ज़ ले लूंगा अपनी थोड़ी सी ज़मीन और घर गहने रख कर. और कहाँ से पैसे आने है और फिर तनख्वाह से उतर दूंगा थोड़ा थोड़ा कर क.
अमित : हम्म वैसे कितने पैसे चाहिए होंगे तुझे ?
राजू : 5-6 लाख तो चाहिए hi होंगे. शहर में जगह गाओं से तो मेहेंगी hi होती है तुझे तो पता hi है
अमित : तू एक काम क्यों नहीं करता . तू जो क़र्ज़ लेना चाहता है वो मैं तुझे बाबा से दिला देता हूँ. इससे तेरी ज़मीन भी कहीं नहीं जाएगी और ब्याज भी चाहे मत देना बस पैसे मोड़ देना वर्ण बाबा मुझे कहें क तू भी निकल दोस्त क साथ है है है
राजू : अरे रहने दे यार ताऊजी क पहले hi इतने एहसान हैं . मैं कोई और जुगाड़ कर लूंगा.
‘ कोई ज़रूरत नहीं और जुगाड़ करने की , जैसे कह रहा है अमित वैसे hi होगा . मैं कह देती हूँ हाँ’
कमरे में आती हुई माँ ने ये बात कही. उनके हाथों में दूध और मिठाई थी जो शायद राजू क लिए hi लायी होंगी.
राजू : पर तेजी ....
गौरी म : बस , चल ये दूध पि और मिठाई खा. तू भी तो हमारा बचा है क्या हम इतना नहीं कर सकते ?
राजू माँ की बात सुन कर उनके पाऊँ पद गया और माँ ने उसे गले से लगा लिया.
राजू : आप सच में बहुत अछि हैं तेजी
गौरी म : तो क्या बाकि सब बुरे हैं हाँ ?? चल अब ये खा और दूध पि और कुछ चाहिए हो तो बता देना.
‘ चची मुँह तो मैं भी मीठा करूँगा छोटा भाई नाम रोशन कर क आया है गाओं का. ‘
ये आवाज़ दरवाज़े से अंदर आते डरा भैया की थी . मैं उठ कर उनसे गले मिला तो उन्होंने भी मुझे कास क गले लगा लिया .
डरा : बधाई हो भाई ऐसे hi म्हणत कर क नाम रोशन कर सबका. ले तू भी मुँह मीठा कर.
अमित : शुक्रिया भैया और आपको भी बधाई नीरज भैया क जितने की.
गौरी म : ये नीरज शीला दीदी का बीटा है न ?
डरा : हाँ चची जी ये दोनों एक hi कॉलेज में हैं और वो भी जीत कर आया है . बता रहा था क अमित तो अभी से सब पर भरी है . आगे आगे और भी नाम चमकाएगा ये .
डरा भैया ने माँ क पाऊँ छुए और उनका भी मुँह मीठा करवाया . उसके बाद माँ डरा भैया क लिए भी दूध मिठाई ले आयी . बाबा ने मुझे फ़ोन कर क पंचायत में आने को कहा तो डरा भैया और राजू क साथ मैं उधर चला गया जहाँ गाओं क मुखिया और खास लोग सब जमा थे. मुखिया जी ने मुझे और पहनाया और शगुन दिया . साथ hi ढोल बजा कर ख़ुशी मानाने लगे. आज हमारे उस्ताद जी भी वहां थे तो मैंने उन सब का आशीर्वाद लिया . दोपहर बाद तक मुझे बाबा क साथ hi गाओं वालों क बीच रहना पड़ा. दोपहर क खाने की जगह बस मिठाई दूध और लस्सी पि कर hi पेट भर गया. जब हम घर वापिस आये तो देखा माँ बिस्टेर पर पड़ी है और दीपिका ममी उनके पास बैठी है. मैं भाग कर उनके पास गया .
अमित : क्या हुआ माँ ? आपकी तबियत तो ठीक है ? आप ऐसे क्यों पड़ी हैं?
दीपिका म : ज्यादा hi ख़ुशी चढ़ गयी थी तेरे आने की तो भगति फिर रही थी पाऊँ फिसल गया. शुक्र है क पेट क बल नहीं गिरी .
दीपिका ममी ने थोड़े गुस्से और नाराज़गी से ये बात कही तो बाबा को भी गुस्सा आ गया जो मेरे पीछे hi थे.
विजय म : ये क्या हरकत है गौरी ? तुम जानती हो न तुम किस हालत में हो ? अगर कुछ हो जाता तो ? तुम्हे अपना ख्याल रखना चाहिए. इतने सैलून बाद भगवन ने दिया की है और तुम ...
गौरी म : गुस्सा मत करो जी आप ये तो ऐसे hi बात बड़ा कर बता रही है. वो तो फर्श पर पानी गिरा हुआ था तो पाऊँ फिसल गया वर्ण मैं ऐसी गलती कर सकती हूँ भला?
विजय म : ठीक है ठीक है , अपना ध्यान रखो मैं डॉ को बुलाता हूँ.
गौरी म : डॉ देख गया है जी कोई ज्यादा बड़ी बात न है. बस पाऊँ मुद गया था और थोड़ा सा सूजन आयी है कमर पे. मालिश कर दी है इसने एक बार और अब ठीक है.
विजय म : चलो ठीक है आराम करो. मैं ज़रा बहार हूँ .
बाबा इतना कह कर कमरे से बहार चले गए.
दीपिका म : मैं भी ज़रा मुन्ने को दूध पीला कर आती हूँ तब तक अमित यहाँ बैठा है.
दीपिका ममी भी मुन्ने को लेकर बहार निकल गयी . अब कमरे में मैं और माँ hi थे.
अमित : आप अपना ध्यान क्यों नहीं रखती ? अगर कुछ हो जाता तो?
गौरी म : ऐसे कैसे कुछ हो जाता? पूरा ध्यान रखती हूँ मैं. वो बस बेध्यानी में पता नहीं चला क पानी गिरा हुआ है. मैं तो तेरे लिए खाना तैयार करने में लगी थी. देख एक तू इतने दिनों बाद आया है और मैं अब बिस्टेर पर पद गयी. क्या क्या नहीं सोचा था और क्या हो गया.
अमित : इतनी चिंता मत किया कीजिये मेरी. मैं तो हमेशा hi आपके पास हूँ. आप वैसे भी जब कहेंगी मैं घर आ सकता हूँ. इसका ज़रा ध्यान रखा कीजिये आप जिसके लिए इतनी म्हणत की है आपने .
मैंने आखरी लाइन धीरे से कही थी और माँ क पेट पर हाथ रख दिया . माँ मेरी बात पर शर्मा गयी.
गौरी म : ज्यादा बातें मत कर, चल जा कर कुछ खा ले भूखा होगा सुबह से कुछ खाया नहीं तूने .
अमित : खा खा क पेट भर गया है अब तो रत को भी न खाया जायेगा. मुझे ज़रा आपकी सेवा करने दो आप .
इतना कह कर मैं क पाऊँ की तरफ बैठ गया और उनके पाऊँ दबाने लगा
गौरी म : अरे ये क्या कर रहा है मत कर मुझे ाचा नहीं लग रहा तुमसे पाऊँ दबवाना.
अमित : वो क्यों भला ? मैं कौन सा पहली बार दबा रहा हूँ
गौरी म : अब पहले वाली बात नहीं है न
अमित : अब ऐसा क्या हो गया जो मैं पाऊँ नहीं दबा सकता ?
गौरी म : धीरे से ) इस लिए क ये पाऊँ भरी भी तो तूने किये हैं
अमित : क्या कहा?
गौरी म : शरमाते हुए ) कुछ नहीं तू बस पाऊँ छोड़ दे.
अमित : आप चुप चाप लेती रहिये बस. मुझे मेरा काम करने दो. भरी किये हैं हलके नहीं कर सकता क्या ?
मैंने भी सरगोशी करते हुए कहा तो माँ ने शर्मा क मुँह फेर लिया .
गौरी म : गन्दा हो गया है तू बड़ा . कर ले मन मणि .
अमित : मन मणि अब अगले हफ्ते करूँगा .
गौरी म : शरमाते हुए ) तू चुप नहीं रह सकता
मैं माँ क पाऊँ दबाता हुआ ऐसे hi हलकी फुलकी बातें करते रहा . आज पूजा भाभी की तरफ भी नहीं जा पाया और इधर माँ क भी चोट लग गयी. खैर रत का खाना खाने क बाद मैं भी अपने कमरे में सोने चला गया. खाने कहते हुए कमलेश मां से भी बात हुई और बाबा ने बताया क संडे को मुहूर्त रखा है मुन्ने क नामकरण का. सब अपने अपने कमरों में सो गयी और मैं भी रत को राधा और रीमा से थोड़ी देर बात करने क बाद सो गया.
सुबह जल्दी उठ कर मैं तैयार हुआ और नाश्ता किये बगैर hi अपना ट्रॉफी वाला बैग लेकर जल्दी से घर से निकल गया. मैं सीधा दिव्या मौसी क घर गया. जैसे hi बेल्ल बजे तो दिव्या मौसी ने hi दरवाज़ा खोला . अभी अभी नाहा कर आयी थी शायद बालों से पानी की बूंदे टपक रही थी उनके. मैंने उनके पाऊँ छुए तो उन्होंने मुझे गले लगा कर मेरे माथा चूम लिया .
दिव्या मौसी : जीत की बधाई हो मेरे बेटे को. ऐसे hi हर कदम पर तुम्हे जीत मिलती रहे. मैं तो परसों भी तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी क शायद तू आ जाये पर राधा ने बताया क तू लेट गया था और राघव भाई साहब क साथ hi चला गया.
अमित : हाँ मौसी वो उनके साथ hi आया था न मैं . मैं तो आना चाहता था पर देर बहुत हो गयी थी तो आंटी ने आने नहीं दिया .
दिव्या मौसी : ठीक किया न दीदी ने , देर रत को क्या ज़रूरत थी आने की? चल इधर बैठ मैं तेरे लिए दूध गरम करती हूँ .
अमित : राधा उठी क नहीं अभी ?
दिव्या मौसी : सो रही है राजकुमारी जा उठा दे उसे , वो भी खुश हो जाएगी.
मैं राधा क कमरे में गया तो हमेशा की तरह वो वैसे hi बेफिक्र सो रही थी और चेहरे पर दिलकश मुस्कान थी. राधा क गोर गुलाबी चेहरे को मैंने कुछ देर निहारा और उसके पास hi बैठ गया . राधा क चेहरे पर आयी रेशमी ज़ुल्फ़ें ऐसे लग रही थी थी जैसे चाँद क आगे बदल छ गए हो. मैंने धीरे से उसकी ज़ुल्फ़ों को पीछे किया तो राधा क गाल लाल होने लगे. मैंने अभी भी उसे ऐसे hi देख रहा था और अपनी hi सोच में गम था.
‘ देखते hi रहोगे या कुछ बोलोगे भी ?’
ये मधुर आवाज़ कानो में पड़ी तो मेरी तन्द्रा टूटी. मैंने राधा की आँखें देखीं जो खुली हुई थी मतलब वो जग रही थी . मुझे अब अपनी इस हरकत पर शर्मिंदगी होने लगी.
अमित : तुम , तुम जग रही थी ?
राधा : आवाज़ सुन ली थी मैंने बाइक की. और सच कहूं तो मेरा दिल कह रहा था तुम ज़रूर आओगे. देखो तुम आ गए. मेरे लिए क्या लाये हो वहां से?
अमित : मैं मम मैं वो हाँ ये लो .
मैंने अपने बैग से ट्रॉफी निकल कर राधा को दे दी . और मैडल भी उसके हाथ में रख दिया. राधा खुश हो गयी और ट्रॉफी को चूम लिया .
राधा : अब ये मेरी है और ये क्या ये मैडल ऐसे hi मिलता है क्या ?
अमित : नहीं नहीं ये तो गले में पहनते हैं
राधा : तो डालो मेरे गले में . ऐसे मैं नहीं लेने वाली , अपने हाथों से पहनाओ
राधा ने कुछ सोच कर ये कहा था. और मैडल को पहनाओ कहना अपने आप में hi बहुत कुछ कह रहा था पर उस वक़्त मैंने ध्यान न दिया क्यूंकि मुझे अभी कुछ देर पहले हुई हरकत पर शर्मिंदगी थी. मैंने जल्दी से राधा क गले में मैडल पहना दिया तो राधा ने ऑंखें बंद कर ली .
राधा ( मन में ) एक दिन ऐसे hi तुम मुझे मंगल सूत्र पहना कर अपनी बना लेना फिर मुझे दुनिया से कोई लेना देना नहीं होगा. मेरी दुनिया सिर्फ तुम हो .
राधा ऑंखें बंद किये थी क दिव्या मौसी हाथ में ट्रे पकडे कमरे में आ गयी.
दिव्या मौसी : अभी तक तुम उठी नहीं? और आते hi डाका मर लिया ट्रॉफी पर ? लो अमित दूध पकड़ो .
राधा : ये मेरी है और ये भी ( मैडल ) इसने खुद कहा है क ये मेरे लिए लाया है.
दिव्या मौसी : चल उठ अब हाथ मुँह ढोले और चाय पि ले. इसे मुझे दिखा ज़रा.
राधा ने बीएड से उठते हुए ट्रॉफी मौसी को पकड़े पर गले से मैडल नहीं उतरा और बाथरूम जाते जाते मेरे आँखों में देख कर मुस्कुराती हुई मैडल को चूमती अंदर घुस गयी .
दिव्या मौसी: आज दामिनी होती तो कितना खुश होती , उसे नाज़ होता तुम पर.
अमित : मेरे लिए तो माँ भी आप hi हैं. वो आपसे अलग थोड़ा hi थी. आप दोनों का दिल एक जैसा था और जैसा आप सोच रही हैं वैसा hi वो सोचती मेरे बारे में. क्या आपको मुझ पर नाज़ है?
मेरी इस बात से दिव्या मौसी ने भरी हुई आँखों से मुझे गले से लगा मेरे चेहरे को चूमते हुए अपनी ममता की बारिश मुझ पर करने लगी.
दिव्या मौसी : तेरे जैसा बीटा तो किस्मत वालों को मिलता है. दामिनी जाते जाते भी अपनी इस नादाँ बहिन को ज़िन्दगी का सबसे खूबसूरत तोहफा दे गयी जो सिर्फ उसका था.
अमित : जब आप दोनों में कभी कोई फरक था hi नहीं तो मैं भी तो आपका hi था न पहले से hi . तो क्या हुआ मुझे जनम माँ ने दिया है . आपने भी तो पला hi होगा न?
दिव्या मौसी : पला ? दूध पिलाया है तुझे मैंने अपना. राधा और तुम में न दामिनी ने फरक किया था न मैंने .
दिव्या इमोशंस में दूध वाली बात कह तो गयी पर अगले पल शर्म से उसके गाल लाल हो गए और वो अमित को दूध पिने का कह के जल्दी से कमरे से निकल गयी . इतने में hi दिव्या की धड़कन बाद गयी थी. आज सुबह भी वो अपने उसी ख्वाब क साथ hi उठी थी जो वो नहीं चाहती थे क उसे आये . जल्दी से बाथरूम में घुस कर अपने चेहरे पानी मारा पर तब तक उसकी धड़कन क साथ साँसे भी बेतहाशा बाद चुकी थी
दिव्या ( मन में ) ये मुझे क्या होता जा रहा है? क्यों मैं बार बार ये सब सोचने लगती हूँ. हे भगवन ये मेरे साथ क्या हो रहा है . वो बीटा है मेरा .
इधर मौसी क बहार निकलते hi राधा कमरे में आ गयी और मुस्कुराती हुई मेरे साथ बैठ कर चाय पिने लगी.
अमित : तो कैसे रहे तीन दिन कॉलेज में ? कोई मुश्किल तो नहीं हुई ?
मेरे इस सवाल पर राधा क मुस्कराहट गायब हो गयी और उसने मेरी आँखों में देखा. फिर ज़बरदस्ती मुस्कुराने की कोशिश करते हुए बोली
राधा : अचे रहे तुम नहीं थे तो दिल नहीं लगता था बस कैंटीन में कुछ देर मिल कर सब बैठ जाते थे .
अमित : तुम मुझसे कुछ छुपा रही हो ?
राधा : नं नहीं तो ऐसी कोई बात नहीं है लो चाय ख़तम हो गयी मैं नाहा कर तैयार होती हूँ तुम नाश्ता करो
राधा इतना कह कर जल्दी से कप साइड में रख कर उठने लगी तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.
अमित : चाय अभी ख़तम नहीं हुई और मुझे सच सुन्ना है . मुझसे कुछ छुपा रही हो तुम .
राधा ने पलट कर मेरी तरफ देखा तो उसकी ऑंखें भीग गयी थी . राधा की आँखों में नमी देख कर मुझे दर्द सा हुआ दिल में और मैंने उठा कर उसे गले से लगा लिया . राधा भी ज़ोर से मेरे गले लग गयी और सिसकने लगी. मैं राधा की विचलित धड़कनो को महसूस कर प् रहा था जिसमे एक दर्द सा था.
अमित : क्या हुआ है मुझसे सच सच बताओ
राधा : सिसकते हुए ) नहीं , अभी नहीं . माँ सुन लेगी.
अमित : ठीक है हम बाद में बात करेंगे. पहले खुद को सम्भालो . तुम्हे पता है न मैं तुम्हारी आँखों में आंसू नहीं देख सकता.
राधा ने चेहरा ऊपर कर क मेरी आँखों में देखा और मुस्कुराने की कोशिश की.
अमित : रट हुए जब ऐसे हस्ती हो तो बंदरिया लगती हो पूरी.
राधा : बन्दर होंगे तुम जाओ जा कर बहार बैठो नहीं तो फिर उस दिन की तरह .....
अमित : वैसे नज़ारा इतना बुरा भी नहीं था उस दिन
राधा : यू !! अभी माँ से कहती हूँ क उनका बीटा कैसी बातें कर रहा है . माआ
राधा ने मेरी छाती पर हलके हाथ से मुक्के मरते हुए ये बात कही और मौसी को आवाज़ दी तो मैं जल्दी से उसे छोड़ कर बहार भाग निकला
राधा : बन्दर hi हो सच में .... मेरे बन्दर
इतना कह कर राधा मुस्कुराती हुई नहाने चली गयी.
इधर मैं बहार हॉल में आया तो मौसी किचन में नाश्ता तैयार कर रही थी. मैं वहीँ हॉल में बैठ गया और कुछ देर में राधा तैयार हो कर आ गयी. मौसी ने हम दोनों को नाश्ता करवाया और हम कॉलेज क लिए चल दिए. अपनी ट्रॉफी और मैडल साथ में ले लिया था जैसा मुझे नीरज ने बताया था क कॉलेज उसे ले कर आना है. रस्ते में मैंने राधा से फिर से सच जानना चाहा तो राधा ने साडी बात बता दी जिसे सुन कर मुझे गुस्सा आ गया . राधा भी समझ रही थी और उसने मुझे पीछे से हुग कर लिया और शांत रहने को कहा.
राधा : उसे सजा मिल चुकी है . कॉलेज से निकल दिया गया है और पुलिस कंप्लेंट भी कर दी है प्रिंसिपल सर ने . तुम ऐसे गुस्सा मत करो .
अमित : मैं कहाँ गुस्सा कर रहा हूँ
राधा : जानती हूँ अछि तरह से तुम्हे. ये धड़कने ऐसे hi नहीं बाद गयी तुम्हारी. वैसे शीना को भी चोट लगी थी उस दिन . उसने hi सब से आगे हो कर मेरी मदद की थी और मोहित ने और सब ने ाचा सबक सिखाया उसे.
अमित : शीना ने तो मुझ पर एहसान कर दिया तुम्हारे लिए इतना कुछ कर क
राधा : तुम पर नहीं हम पर .
इतने में हम कॉलेज पहुँच गए. और पीछे पीछे कल्पना भी नेहा दीदी क साथ आ गयी . गेट पर नीरज भैया खड़े थे तो वो मुझे और कल्पना को अपने साथ ले गए . प्रिंसिपल सर ने जितने वाले सब खिलाडियों को ऑफिस में बुलाया था .
दूसरी तरफ आज निधि अपने ऑफिस में अभी काम कर hi रही थी क पेओन ने आ कर उसे संदेसा दिया क मैनेजर ने उसे बुलाया है. निधि मैनेजर क ऑफिस में गयी तो उसने निधि को बैठने का कह कर एक फाइल निधि क सामने रख दी और उसे देखने को कहा . जैसे hi निधि ने फाइल खोली तो उसकी ऑंखें फट गयी. सामने निधि की hi तस्वीरें थी वो भी पूरी नंगी. तस्वीरों में मैनेजर और निधि दोनों एक दूसरे से चिपके हुए थे . निधि की तो वो हालत हो गयी क काटो तो खून नहीं. उसे समझ नहीं आ रहा था ये कैसे हो गया. निधि का दिमाग झन्ना गया , माथे पर पसीने की बूंदे उभर आयी दिल की धड़कन बहार तक सुनाई देने लगी. हमेशा मन मर्यादा में रहने वाली निधि क लिए ये हृदयघात से काम न था. मैनेजर निधि को देख कर मुस्कुरा रहा था.
मैनेजर : कहो कैसा लगा ? मैंने कहा था न मेरी बात मन लो पर तुमने तो मेरी hi बेइज़्ज़ती कर दी. अब कहो कैसा लग रहा है? सोचो कैसा लगेगा तुम्हारी फॅमिली को जब ये तस्वीरें उनके सामने जाएँगी ? गली मोहल्ले वाले क्या कहेंगे? कैसा लगेगा जब रह चलते लोग तुम्हारा रेट पूछेंगे? तुम्हारी तो बहने भी है न ? उनके बारे में भी लोग यही कहेंगे क वो भी पैसे लेती होंगी . तुम्हारी माँ.....
निधि : चिल्लाते हुए ) शट उपपपपप , बंद करो अपनी गन्दी ज़ुबान. ये सब तुम्हारी चल है . ये सब नकली है.
मैनेजर : गुस्से से ) आवाज़ नीची रख लड़की. ये मेरा ऑफिस है यहाँ सिर्फ मैं बोलता हूँ और वही होता है जो मैं चाहता हूँ. मैंने कहा था प्यार से मेरी बात मन लो . अब देखो अंजाम. और ये सब तस्वीरें असली हैं कहो तो और भी दिखाऊं? चलो छोडो सीधे तुम्हारी फॅमिली को hi दिखता हूँ. मगर पहले ज़रा ऑफिस में तो सब देख लें.
निधि : तुम मुझे अपनी घटिया चल में नहीं फसा सकते , मैंने अभी पुलिस में जाउंगी .
मैनेजर : क्या कहोगी ? क मैंने तस्वीरें खींची हैं? हाँ खींची हैं पर मैंने नहीं. मैं खुद नहीं जनता किसने खींची हैं. मैं तो बस तुम्हारे साथ मज़े ले रहा था क्या पता किसने तस्वीरें खिंच ली. और तुम मेरे साथ सेक्स करती परमोशन लेने क चक्कर में. मुझे अपने जाल में फसा कर तुम हेड बनना चाहती हो अपने डिपार्टमेंट की. बताओ पुलिस किसकी कहानी पर यकीन करेगी? तुम कहती हो तो मैं खुद hi फ़ोन लगा देता हूँ . वैसे भी ैप मेरा खास है. उल्टा तुम फास जाओगी मुझे ब्लैकमेल करने क जुर्म में. तो कहो क्या कहती हो?
मैनेजर की बातें सुन कर निधि क पैरो टेल ज़मीन निकल गयी. मैनेजर तो फुल प्लान बना क बैठा था. निधि को शक तो उसी दिन हो गया था क कुछ गड़बड़ है जब ड्रिंक पिटे hi उसका सर घूमने लगा था पर वो समझ नहीं पायी क उसके साथ हुआ क्या है. निधि को अब समझ नहीं आ रहा था क अब वो करे तो क्या करे ? मैनेजर की बात सही थी पुलिस उसकी hi फेवर करती.
निधि : क्या चाहते हो तुम ?
मैनेजर : कामिनी मुस्कान क साथ ) वही जो तुम देख रही हो . पिछली बार मज़ा नहीं आया था तुम होश में जो नहीं थी . इसी लिए काम अधूरा hi रह गया . अब वो अधूरा काम तुम अपनी मर्ज़ी से पूरा करोगी. वो क्या है न , जब लड़की अपनी मर्ज़ी से सब करती है न तो मज़ा कुछ और hi अत है.
मैनेजर की बात सुन कर निधि की आँखों में आंसू आ गए. वो पूरी तरह से फसा गयी थी और मैनेजर की बात न मैंने का मतलब था वो निधि और उसकी फॅमिली को बदनाम कर देगा. निधि खुद को असहाये महसूस कर रही थी.
मैनेजर : क्या सोच रही हो? तुम्हारे पास और कोई ऑप्शन नहीं है . मर्ज़ी से करोगी तो फायदे में रहोगी . मैं तुम्हारा परमोशन भी करवाऊंगा और सैलरी भी बढ़ेगी. यानि क सोने पे सुहागा. और अगर मर्ज़ी से नहीं करोगी तो तुम्हे मज़ा नहीं आएगा और न परमोशन होगी . बस सजा hi सजा रह जाएगी. अगर मेरी बात न मन कर तुमने कोई चालाकी की तो ये तस्वीरें कल तक पूरे शहर में लोगों तक पहुँच जाएँगी. शुरुआत तुम्हारे घर से hi होगी. और सिर्फ फोटोज hi नहीं मंस भी है मेरे पास ये देखो.
मैनेजर ने अपने लैपटॉप पर वीडियो क्लिप प्ले कर क निधि की तरफ घुमा दिया. निधि की ऑंखें जहर जहर बहने लगी .
निधि : रट हुए ) मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ . मुझे बर्बाद मत करो. मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? मेरी फॅमिली तबाह हो जाएगी प्लीज ऐसा मत करो . मैं अपनी जान दे दूंगी मेरे साथ ऐसा मत करो.
मैनेजर : हस्ते हुए ) न न तुमने थोड़ा hi कुछ बिगाड़ा है मेरा , बिगाड़ा तो तुम्हारे हुस्न ने है . तुम इतनी हसीं हो क मैं खुद को रोक hi नहीं पता . उस दिन भी अगर तुम्हारी माँ न आती तो मैं काम पूरा कर hi लेता. और जान देने की बात मत करो. क्यूंकि जान देने से भी तुम इस बात को रोक नहीं पाओगी . तुम्हारी बहनो क बारे में भी लोग ऐसी hi बातें करेंगे जब वो तुम्हारे मंस देखेंगे. तो क्या तुम चाहती हो क उनका जीना हराम हो जाये ?
निधि : रट हुए ) नहीं ऐसा माता कहो. मेरी बहनो ने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा ? प्लीज ऐसा मत करो मैं तुम्हारे पाऊँ पड़ती हूँ ऐसा मत करो.
मैनेजर : सख्ती से ) मुझे ज्यादा बात करना पसंद नहीं है. या तो वो करो जो मैंने कहा या फिर अंजाम क लिए तैयार रहो. और खुद को कुछ करने क बारे में सोचने से पहले अपनी बहनो क बारे में सोच लेना. अब जाओ अपनी जगह पर. किसी को कुछ भी बताया तो उसी वक़्त तुम्हारा मंस सारे शहर में फैला दूंगा. आज मुझे ज़रूरी काम है . कल सुबह मैं तुम्हे लेने आऊंगा तुम्हारे घर से. और फिर हम एन्जॉय करने चलेंगे. वडा करता हूँ उसके बाद तुम्हे परेशां नहीं करूँगा. तुम खुद hi मेरे पास आओगी एक बार कर लेने क बाद. अब जाओ .
निधि बेचारी रोटी हुई मैनेजर क केबिन से बहार निकल कर अपने केबिन में चली गयी. उसकी तो दुनिया hi लूट गयी थी आज . मैनेजर की बात मन ने क इलावा और कोई रास्ता नहीं रह गया था. वो न पुलिस क पास जा सकती थी न अपनी जान दे सकती थी. निधि को कोई रास्ता नज़र नहीं आया तो में ो बेचारी रोटी रही .
उधर निधि क जाते hi जूनियर केबिन में आ गया.
जूनियर : लगता है कबूतरी जाल में फास गयी सर ?
मैनेजर : मैं डॉन खेलूं और हर जॉन ऐसा भला हो सकता है ? मान गयी है बस अभी मुँह से बोल नहीं रही. पर जो कुछ मैंने कहा है उसके बाद तो वो मन कर hi नहीं सकती
जूनियर: मुबारक हो सर , आगे का क्या प्लान है?
मैनेजर : कल ले के चलते हैं इसे अपने अड्डे पर . फिर सारा दिन मौज करेंगे.
जूनियर : सर मेरा भी कुछ सोचिये .
मैनेजर : तू बड़ा कमीना है . तुझे कैसे छोड़ सकता हूँ. तू भी चलना अगर किसी की ज़रूरत पड़ी तो सेल कोई तो होना चाहिए ध्यान रखने वाला. तू बहार नज़र रखना .
जूनियर : बस मज़ार रखूं ??
मैनेजर : कर लेना तू भी कर लेना पर पहले मैं जी भर क अपनी प्यास बुझाऊंगा उसके बाद तू करना. बड़ा परेशां किया है साली ने. कल तो पूरा हिसाब लूँगा. और हाँ कैमरा अचे से फिट करना कोई गलती भी होनी चाहिए.
जूनियर : उसकी चिंता hi मत कीजिये सर. मैं सब देख लूंगा.