Adultery Manhoos se mahan tak - Page 20 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

आज अपडेट दूंगा भाई. टाइम का नहीं कह सकता अभी थोड़ा काम बाकि है
 
अपडेट 152



‘ जल्दी से कैमरा निकल और शुरू कर’

मैनेजर ने अपने कपडे उतर कर अपने जूनियर को कैमरा निकल कर फोटोज लेने को कहा. इस वक़्त निधि मैनेजर क ऑफिस क साथ hi बने रेस्ट रूम में सोफे पर बेहोश पड़ी थी. मैनेजर ने अपने कपडे उतरे और निधि क कपडे उतरने लगा. निधि अछि कर कड़ी और छरहरे बदन की लड़की थी बिलकुल किसी मॉडल की तरह मगर मॉडल्स क विपरीत वो सादगी में रहने वाली लड़की थी. 5’7’’ की अछि कद काठी और दूध सा फक गोरा रंग. नैन नक्श भी इतने तीखे क देखने वाला उसमे खो जाता था. मगर सादगी पसंद होने की वजह से हमेशा एक ठहराव और तेज उसके चेहरे पर रहता था. हमेशा मान मर्यादा में रहने वाली लड़की आज इन हवस क भेड़ियों क जाल में फास गयी थी. आज तक कभी किसी लड़के तक से कोई रिश्ता न रखा था अपनी पड़े से लेकर अपने इस जॉब कर्रिएर तक पर आज उसकी इज़्ज़त ये घटिया लोग कुचलने वाले थे.

मैनेजर ने जैसे hi निधि क बदन से उसकी टाइट फिटिंग वाली ऑफिस ड्रेस क बटन खोलने शुरू किये तो सीने का कसाव उसे पागल बनाने लगा. जैसे तैसे उसने अपनी लपलपाती जीभ को संभल कर निधि की शर्ट उतरी तो उसकी वाइट ब्रा में कैसे हुए उभर देख कर मैनेजर क साथ उसके साथी का भी कलेजा मुँह को आ गया. दोनों निधि को खा जाने वाली नज़रों से देख रहे थे. एक पल को मैनेजर रुक कर निधि के स्तन दबाने लगा तो उसे जूनियर ने hi टोक दिया.

जूनियर : सर क्या कर रहे हो पहले इसके कपडे उतर लो एक बार . सब लोग यहीं हैं कोई आ गया तो काम बिच में रह जायेगा . एक बार फोटो शूट हो जाये बाद में कर लेना बाकि काम.

मैनेजर : क्या करूँ साला कण्ट्रोल नहीं हो रहा. देख नहीं रहा क्या माल है साली . तेरी बात भी सही है जाएगी कहाँ .

इतना कह कर मैनेजर ने निधि क पाऊँ से जुटे उतरे और उसकी पेण्ट को खोलते हुए उतर दिया. केले क तने क सामान मजबूत गोरी चिकनी जांघें जिनपर न कोई दाग था न कोई बल. अछि हैघट होने की वजह से टांगें भी उतनी hi खूबसूरत भी थी . ब्रा क साथ की वाइट पेंटी निधि क यौनांग को ढके हुए थी. मैनेजर ने जल्दी से निधि की ब्रा को भी निकल दिया . और निधि को बाँहों में लेकर ऐसे पोज़ बनाने लगा क देखने वाले को यही लगे क निधि सब होशो हवास में अपनी मर्ज़ी से कर रही है. जूनियर भी घूम घूम कर अलग अलग एंगल से तस्वीरें उतर रहा था.

दूसरी तरफ रजनी ऑटो से निधि क ऑफिस आ रही थी. वो 20 मिनट्स से ऑटो में बैठी भी लगातार फ़ोन पे फ़ोन किये जा रही थी निधि को. जैसे hi वो निधि क ऑफिस क बहार पहुंची तो वो ऑटो वालो को रुकने का कह कर सीधा अंदर को दौड़ गयी . सिक्योरिटी वाले ने रजनी को रोका

सिक्योरिटी : किस्से मिलना है आपको ?

रजनी : मेरी बेटी यहाँ काम करती है. निधि नाम है उसका . उसका फ़ोन आया था उसकी तबियत ठीक नहीं और अब वो फ़ोन नहीं उठा रही मुझे उसके पास ले चलो

सिक्योरिटी: आप ऐसे अंदर नहीं जा सकती , मुझे पहले अंदर से पूछने दीजिये.

सिक्योरिटी वाला रजनी को रुकने का कह कर इण्टरकॉम पर बात करने लगा तो रजनी खुद hi एहि से अंदर को भाग गयी . एक माँ भला कैसे रुक सकती थी जब उसके बच्चों पर कोई खतरा हो. रजनी की ऑंखें भरी हुई थी और किसी तरह वो अपने आंसू रोके हुए अपनी बेटी की चिंता में भागे जा रही थी. उधर से नैना और करुणा भी पहुँच गयी और वो भी अंदर को भाग ली. सिक्योरिटी वाला अभी इण्टरकॉम पर अंदर खबर दे hi रहा था क ये दोनों लड़कियां भी अंदर घुस गयी. रजनी बिल्डिंग में तो पहुँच गयी पर उसे ये नहीं पता था क निधि का ऑफिस कौन से फ्लोर पर है. 5 मंज़िला ये ईमारत बेशक एक hi कंपनी की थी पर इसमें अलग अलग ऑफिसेस भी थे. सोडियां और लिफ्ट पास पास hi थी. रजनी को समझ नहीं आ रहा था क वो क्या करे . पीछे से आ रही नैना जो थोड़ा बहुत निधि क ऑफिस क बारे में जानती थी. उसने रिसेप्शन क पास लगे बोर्ड से hi देख लिया था क निधि का ऑफिस थर्ड फ्लोर पर है. वो जैसे hi लिफ्ट क पास पहुंची तो अपनी माँ को बदहवास वहां कड़ी देख कर वो माँ से लिपट गयी .

नैना : माँ , क्या हुआ है दीदी को ? दीदी फ़ोन क्यों नहीं उठा रही मेरा ?

रजनी : रट हुए ) पता नहीं क्या हुआ है मेरी बची को . जल्दी मुझे उसके पास ले चल पता नहीं कौन सा ऑफिस है उसका .

नैना : मेरे साथ आओ माँ मुझे पता है दीदी का ऑफिस .

नैना रजनी को लिए लिफ्ट में घुस गयी और करुणा भी उसके साथ hi थी. जैसे hi लिफ्ट रुकी तो सामने निधि का ऑफिस था जहाँ इस वक़्त पार्टी चल रही थी . तीनो दौड़ती हुई ऑफिस में घुस गयी . हैरान परेशां निधि को खोजने लगी पर निधि उन्हें नज़र नहीं आ रही थी.

पेओन : किस्से मिलना है आपको ?

रजनी : निधि कहाँ है ?

पेओन : आप कौन हैं?

रजनी : माँ हूँ मैं उसकी , मेरी बेटी कहाँ है बताओ मुझे .

रजनी तेज़ आवाज़ में बोल रही थी तो वहां पार्टी कर रहा सारा स्टाफ इस तरफ देखने लगा. टीना , जिसका आज जनम दिन मनाया जा रहा था उसका रंग hi उड़ गया अपने सामने निधि की माँ और बहन को देख कर . क्यूंकि उसे hi पता था क माजरा क्या है. बात को सँभालने क लिए वो आगे आयी .

टीना : अरे आंटी आप निधि की माँ हैं ? आइये मैं उसकी दोस्त हूँ हम साथ में hi काम करते हैं. आज मेरा बर्थडे है मुझे आशीर्वाद दीजिये .

रजनी : बेटी मुझे मेरी बेटी से मिलवा दो . उसका फ़ोन आया था वो ठीक नहीं है . और कब से मैं फ़ोन कर रही हूँ मगर उसका फ़ोन नहीं लग रहा .

टीना : वो वो शायद घर चली गयी होगी. मैंने देखा नहीं उसे . केक कटवा कर वो पता नहीं कहाँ चली गयी .

नैना : ाचा तो ज़रा मुझे उनके केबिन तक ले चलिए .

टीना : है हाँ हाँ चलो देखलो खुद hi .

सब लोग हैरान परेशां देख रहे थे क ये सब हो क्या रहा है . रजनी नैना और करुणा टीना क साथ निधि क केबिन में गए तो वहां पर उसका हैंड बैग साइड में पड़ा हुआ था और मोबाइल भी . ये देख कर नैना एक डैम गुस्से में आ गयी .

नैना : गुस्से में ) मेरी बहिन कहाँ है ? अगर वो बहार गयी थी तो उसका पर्स और मोबाइल यहाँ क्या कर रहा है ?

रजनी : गुस्से में ) कहाँ है मेरी बेटी ? अगर मेरी बेटी को कुछ हुआ तो मैं आग लगा दूंगी इस दफ्तर को .

टीना दोनों माँ बेटी को गुस्से में देख कर खिसकने लगी तो करुणा ने उसकी कलाई पकड़ कर मरोड़ दी.

करुणा : अब बताओगी या ये कलाई तोड़ दूँ . मुझे पता hi तू जानती है दीदी कहाँ है.

‘ बेहवे योरसेल्फ, ये तरीका है किसी से बात करने का ? निधि यही है . उसकी तबियत ख़राब थी तो वो आराम कर रही है . इंजेक्शन दिया है उसे अभी ठीक हो जाएगी . ‘

ये कड़क दर आवाज़ मैनेजर की hi थी. दरअसल सिक्योरिटी गार्ड द्वारा रजनी क आने की खबर उसे मिल गयी थी. और उसने इतने समय में निधि को फिर से कपडे पहना दिए थे और निधि को होश में लेन क लिए रखा हुआ इंजेक्शन खुद hi लगा दिया था . ऑफिस में हंगामा होता देख वो जल्दी से बहार आ गया था जबकि निधि अभी भी वहीँ थी.

रजनी : मेरी बेटी कहाँ है मुझे मेरी बेटी से मिलवा दो.

मैनेजर : वो बिलकुल ठीक है . ऑफिस क सभी एम्प्लाइज मेरी ज़िम्मेदारी हैं. हम यहाँ एक फॅमिली की तरह है और आप कोई हक़ नहीं ऐसे बदतमीज़ी करने का किसी क साथ . निधि मेरी रिस्पांसिबिलिटी है , उसे मैं कैसे मच होने दे सकता हूँ . डॉ ने उसे चेक कर क इंजेक्शन दे दिया था. शायद उसकी तबियत पहले से hi ख़राब थी इस लिए चक्कर आ गया था. और तुम से सॉरी तो टीना , इसका जन्मदिन है आज और तुम ऐसे बेहवे कर रही हो.

मैनेजर ने करुणा को देखते हुए कहा. तो करुणा ने भी टीना को सॉरी कहा. टीना की तो जान में जान आयी मैनेजर क आने से. फिर मैनेजर तीनो को लेकर उसी जगह आ गया जहाँ निधि अभी भी सोफे पर अधलेटी पड़ी हुई थी . उसे अभी होश नहीं आया था. रजनी निधि को ऐसे देख कर रोटी हुई उससे लिपट गयी और उसे अपनी बाँहों में जकड कर उसका सर सहलाते हुए उसे उठाने की कोशिश करने लगी .

रजनी : निधि , निधि , उठो मेरी बची . क्या हुआ है तुझे ? देख मैं आ गयी . उठो मेरी बची ऑंखें खोलो.

नैना : दीदी , दीदी उठो न , देखो माँ कैसे रो रही है.

इंजेक्शन तो लगा hi चुके थे वो लोग निधि को होश में लेन क लिए और अब इस तरह हिलाये जाने से वो होश में आने लगी.

निधि : माँ ,, मैं कहाँ हूँ ,,, क्या हुआ था मुझे ??? नैना ,,,, करुणा . मेरा सर ....

निधि अधखुली आँखोने से देखने की कोशिश कर रही थी पर उसका सर बहुत भरी था . निधि को अभी कुछ समझ नहीं आ रहा था . निधि को होश में अत देख कर रजनी नैना और करुणा क चेहरे पर मुस्कान आ गयी थी. जबकि मैनेजर की ऑंखें भी चमक रही थी नैना और करुणा को देख कर .

मैनेजर : निधि तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है. तुम घर जाओ और रेस्ट करो. और आंटी जी आप निधि को घर ले जाइये . कल संडे है तो रेस्ट कर क बिलकुल ठीक हो जाएगी . परसों आराम से आना ऑफिस .

नैना : थैंक्स सर , एंड सॉरी फॉर आवर बाद बिहेवियर.

मैनेजर : it’s ok , ी कैन अंडरस्टैंड. निधि की तरह तुम दोनों भी बहुत स्मार्ट हो. तुम दोनों भी हमारा ऑफिस ज्वाइन कर सकती हो . मुझे ख़ुशी होगी . यकीनन तुम दोनों भी निधि की तरह hi हार्डवर्क करने वाली होगी .

बात करते हुए मैनेजर ने नैना का हाथ अपने दोनों हाथों में थम लिया था और बड़ी चतुराई से सेहला भी दिया था.

नैना : जी सर पर अभी तो हमारी स्टडी कम्पलीट नहीं हुई है. फ़िलहाल क लिए सॉरी एंड थैंक्स अगेन. चलो माँ . चलो दीदी.

रजनी करुणा नैना निधि को लेकर केबिन से बाहर निकली और निधि का सामान लेकर बहार निकल गयी. ऑटो वाला बहार hi खड़ा था तो रजनी निधि क साथ उसी में बैठ गयी पीछे पीछे नैना और करुणा स्कूटी पे आने लगी . इन सब क बहार निकलने क बाद मैनेजर अपनी चेयर पर बैठा मुस्कुरा रहा था क तभी उसका जूनियर ऑफिस में एंटर हुए और मैनेजर को हस्ता देख कर हैरान हुआ.

जूनियर : ये क्या सर आप खुश हो रहे हैं? हाथ आयी मुर्गी निकल गयी और आप है रहे हैं.

मैनेजर : अबे गांडू अब वो कहीं नहीं जाने वाली . उसको तो अब जब चाहे अपने नीचे लिया लूंगा मैं. तस्वीरें hi तो चाहिए थी न ? वो तो हो गयी. वैसे भी साली सील पैक्ड है तो ऐसे बेहोश करके सील तोड़ने में मज़ा नहीं अत. अब आराम से उसका मज़ा लेते हुए उसे काली से फूल बनाऊंगा. और खुश मैं इस लिए हो रहा हूँ क एक तीर से तीन तीन शिकार करूँगा अब .

जूनियर : तीन शिकार ? वो कैसे ?

मैनेजर : तू सेल गांडू hi रहेगा. देखा नहीं उसकी बहनो को. साली एक no. माल हैं. पहले निधि को पेलुँगा फिर उसकी मदद से hi उसकी बहनो को .

जूनियर: पर सर क्या वो मानेगी ?

मैनेजर : मानेगी कैसे नहीं ? वो मन कर hi नहीं सकती अब . और फिर ये न भी मणि तो सीधा उसकी बहिन को hi तस्वीरें दिखा कर मन लेंगे. इज़्ज़त तो उसे भी प्यारी होगी .

जूनियर : माल तो उसकी माँ भी टॉप क्लास है. आखिर उसी ने तो ये प्रोडक्ट बनाये हैं .

मैनेजर : है है है तू नहीं सुधरेगा. बेटी क साथ माँ भी चाहिए. चल वो भी देख लेंगे अब ज़रा कैमरा इधर का देखें तो सही कितना ाचा काम किया है तूने .

मैनेजर ने कैमरा लेते हुए उसका मेमोरी कार्ड निकला और अपने लैपटॉप में उसे कॉपी कर क फिर से खली कर दिया. मैनेजर बड़ा हरामी आदमी था जो अपना कोई सबूत किसी क हाथ नहीं छोड़ता था. मेमोरी कार्ड को फॉर्मेट करने क बाद उसने वापिस कैमरा में दाल दिया और लैपटॉप में तस्वीरें ओपन कर क देखने लगा . मैनेजर अंदर से खुश हो रहा था क आखिर वो अपनी प्लानिंग में कामयाब हो hi गया. तो क्या हुआ आज वो निधि का काम नहीं कर पाया पर अब वो उसकी मुठी में आ गयी थी और किसी भी सूरत में वो मन कर hi नहीं सकती थी.

अंकल और मैं जब शहर से निकले तो 8 बजे से ऊपर टाइम हो रहा था. पर न तो हम बस में थे और न hi ये दिन का वक़्त था इस लिए हमे वापिस पहुँचने में ज्यादा टाइम नहीं लगने वाला था . कल्पना ने घर पहुँच कर फ़ोन कर दिया था क वो पहुँच गयी और इधर घर से भी माँ और बाबा क साथ साथ दीपिका ममी और कामिनी ममी से भी बात हो गयी थी . मैंने माँ को बता दिया था क आज नहीं आ पाउँगा. रीमा और राधा से ज्यादा बात कर नहीं सकता था अंकल क साथ होने की वजह से पर मैंने मैसेज कर क बता दिया था अपने बारे में. वहीँ मंजू म से भी मैसेज से hi बात हो गयी थी. रत 10 बजे हम घर पहुँच गए थे आंटी और मोहित हमारा hi इंतज़ार कर रहे थे और अभी तक उन्होंने भी डिनर नहीं किया था. मुझे देखते hi आंटी ने मुझे सीने से लगा लिया . अछि तरह मेरा चेहरा अपने स्तनों में दबाने क बाद मुझसे अलग हुई और झूठा गुस्सा दिखने लगी.

आंटी : बस इतना hi प्यार था हमसे जो शहर में होते हुए भी एक बार नहीं मिलने आये ?

अमित : अरे आंटी कैसी बात कर रही हैं आप, मोहित से पूछिए रोज़ तो आपके बारे में पूछता रहता हूँ. और कम्पटीशन की वजह से सारा ध्यान उसी तरफ लगा हुआ था. वर्ण ऐसा हो सकता है क मैं आपसे मिलने न आऊं? आखिर ये भी तो मेरा घर है.

अंकल : बिलकुल सही कहा बीटा ये भी तुम्हारा hi घर है . रमा आज हमारा बीटा जीत कर आया है और तुम खुश होने की बजाये नाराज़ हो रही हो. कुछ खाने को लाओ मुँह मीठा करवाओ सबका.

आंटी : खुश कैसे नहीं हूँगी मैं? सब से ज्यादा खुश हूँ और मुँह मीठा भी करवाउंगी पर इसे भी पता चलना चाहिए न इसके बिना हमारा दिल नहीं लगता और ये है क अत नहीं मिलने क लिए .

अमित : अरे आंटी जी अब तो मैं फ्री हो गया हूँ न कम्पटीशन से तो जब कहेंगी आ जाऊंगा. आप गुस्सा मत करें.

मोहित : इधर आ यार ज़रा मुझ से भी तो मिल ले .

मोहित गरम जोशी से मुझसे मिला और आंटी किचन में चली गयी .

मोहित : और सुना कैसा रहा टूर? कोई पन्गा तो नहीं हुआ न वहां पर ?

अमित : सब बढ़िया रहा बस तुम लोगों बहुत मिस किया

मोहित : हमने भी किया . तू नहीं था तो कैंटीन में भी मज़ा नहीं अत था. वैसे नैना दीदी और करुणा दीदी आज भी आयी थी कॉलेज . लड़कियों की तो अपनी गैंग बन गयी है अब तो अपनी कोई नहीं चलने वाली. पहले ये क्या काम थी क अब नैना दीदी और करुणा दीदी भी आ गयी साथ.

आंटी : लो पहले मुँह मीठा करो. भगवन हमेशा हर जगह तुम्हे ऐसे hi जितने की ताकत दे.

आंटी अंदर मिठाई का डिब्बा ले आयी थी और मेरे साथ hi मोहित और अंकल का भी मुँह मीठा करवा दिया. उसके बाद हम सब ने मिल कर डिनर किया और कुछ देर बाद सब अपने अपने कमरों में चले गए . आज का दिन बहुत भाग दौड़ वाला रहा था तो मैं भी जल्दी ऑंखें बंद कर क बीएड पर पद गया. मैं आराम से सो रहा था क मेरी नींद गीले गीले एहसास से उचक गयी. मुझे अपने होंठों पर गीला और नरम एहसास हो रहा था , ये समझते मुझे ज्यादा देर नहीं लगी क कोई मेरे होंठ चुम रहा है. और आंटी क सिवा इस वक़्त कोई हो नहीं सकता था. मैंने आराम से उनके होंठ चूमने शुरू किये और उनकी जीभ को अपने मुँह में ले कर चूसने लगा तो उन्होंने किश तोड़ दी.

आंटी : इतने दिनों बाद आये हो और आते hi सो गए . ज़रा भी ख्याल नहीं आया मेरा ?

अमित : थकावट इतनी ज़्यादा हो गयी थी क पता hi नहीं चला कब नींद आ गयी .

आंटी : तुम्हारी थकावट उतरने hi तो आयी हूँ मैं.

आंटी मेरे ऊपर लेती हुई थी और कमरे में जीरो का बल्ब जल रहा था. मैंने अपने हाथ उठाते हुए आंटी की कमर पर रखा और उन्हें किश करते हुए अपने हाथ उनके कूल्हों पर ले गया . नरम नरम कूल्हे दबाने में वादा मज़ा आ रहा था और आंटी क नरम गोले मेरी छाती पर दबे पड़े थे. जल्दी hi मेरा लैंड अकड़ कर आंटी की छूट पर चोट करने लगा.

आंटी : उम्मम्माह्ह तुम बस लेते रहो आज सब मैं करुँगी. तुम्हारी साडी थकावट अभी उतर देती हूँ .

इतना कह कर आंटी मेरे ऊपर से उतरी और एक झटके में अपने बदन से गाउन अलग कर दिया. नीचे आंटी ने कुछ नहीं पहना था . आंटी का दूधिया बदन मेरे सामने बेपर्दा हो गया था. आंटी मेरी कमर की तरफ झुकी और मेरा लोअर अंडरवियर क साथ hi खिंच कर उतर दिया. मैंने भी कमर उठा कर उनकी मदद की . मेरा लैंड जो मस्ती में झूल रहा था आंटी ने उसे हाथ में पकड़ कर मुँह में ले लिया . आधे लैंड को एक hi बार में आंटी ने मुँह में ले लिया और अंदर बहार करने लगी . मस्ती में मेरे मुँह से भी सिसकियाँ निकलने लगी .

अमित : आआह्ह्ह शह्ह्ह्ह क्या कर रही हो आप ?

आंटी : उनममम उम्म्म उम्माह्ह्ह्ह इतने दिनों बाद आये hi तो क्या प्यार भी न करूँ इसे? तुम्हे भी तो पता चले मैं कितना तड़प रही थी .

इतना कह कर फिर से आंटी ने लैंड मुँह में अंदर बनाए करना शुरू कर दिया . मज़े में मेरे हाथ अपने आप आंटी क सर पर चले गए और कमर ऊपर उठने लगी . कोई 5 मिनट्स लैंड चूसने क बाद आंटी मेरी कमर को दोनों तरफ घुटने बीएड पर रख कर एक हाथ से लैंड को खुद hi छूट पर टिका कर एक झटके में बैठ गयी. आधे से ज्यादा लैंड एक hi बार में अंदर घुस गया पर आंटी क मुँह से तेज़ सिसकी निकल गयी

आंटी : आआह्ह्ह्हह कक्कक्क्स आह्ह्ह्ह हर बार ऐसे दर्द देता है जैसे पहली बार अंदर जा रहा है आअह्ह्ह्ह ये कब आराम से जाना शुरू करेगा मेरे अंदर ? उम्मम्मम उफ्फफ्फ्फ़ आज अचे से मेरी खोल कर रख दो ताकि उसे अंदर लेने में परेशानी न हो .

इतना कह कर आंटी उतने hi लैंड को अंदर बहार लेने लगी . आंटी मेरी छाती पर हाथ रख कर खुद hi सब कर रही थी. मैंने भी हाथ बड़ा कर उनके आम लपक लिए और उन्हें मसलने लगा

अमित : क्या ाचा नहीं लगता आपको ये दर्द ? मुझे तो अछि लगती है ये कासी हुई छूट जो अभी भी किसी लड़की की तरह कासी हुई है

आंटी : आअह्ह्ह उम्म्म आअह्ह्ह कासी क्यों न लगे ?? हर रोज़ इतनी म्हणत जो उफ्फ्फ्फ़ आअह्ह्ह करती हूँ . तुम्हारी वजह से मैं फिर से जवाब होने लगी हूँ हनन ऐसे hi ऐसे hi ुगफ्फफ्फ्फ़

मैंने आंटी क बूब्स मसलते हुए अपनी कमर उठा कर धक्के मरने शुरू कर दिए . आंटी मेरे ऊपर झुक गयी और मुझे किश करने लगी . 5 मिनट्स में hi आंटी का पानी निकल गए और वो मेरे ऊपर hi गिर गयी. मैंने आंटी को बीएड पर पलट कर उठ गया और अपनी T-shirt भी उतर दी . आंटी क पाऊँ पकड़ कर मैंने घसीट कर उन्हें किनारे पर किये और टंगे हवा में उठाते हुए छूट पर लैंड सेट कर क एक hi झटके में पूरा जड़ तक लैंड अंदर घुसा दिया . आंटी फिर से करहि पर मैंने बिना रुके लगातार धक्के पेलने शुरू कर दिया और आंटी बस सिसकियाँ लेती रही. कुछ देर बाद मैंने उन्हें फर्श पर खड़ा कर क घोड़ी बना लिया और पीछे से एक hi झटके में लैंड उनकी बचे सभी तक पेल दिया .

आंटी : आअह्हह्ह्ह्ह मायआ फाड़ दो कोई रह मत करना बहुत तड़पती है ये तुम्हारे बिना आज साडी तड़प दूर कर दो इसकी आआह्ह्ह्ह

अमित : आह्हः साडी तड़प मिटा दूंगा जब भी ये ज्यादा तंग करे बुला लिया करो आप . बड़ा मज़ा आता है आपको घोड़ी बनाने में उफ्फ्फ आपकी ये जानलेवा गांड कितनी नरम और गोल है

आंटी : पहले आगे से पूरी तरह ठंडी कर दो फिर पीछे से कर लेना मैं मन नहीं करुँगी सब तुम्हारे लिए hi तो है आअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ऐसे hi करो आह्ह्ह्ह मेरा होने वाला है आअह्ह्ह aaaaaaiiiiiiiiii

इसके साथ hi आंटी एक बार और झाड़ गयी . मैंने उन्हें झड़ने दिया . गरम पानी का शावर मुझे अपनी लैंड पर महसूस हो रहा था . मैंने उन्हें कुछ देर अपने स्खलन का मज़ा लेने दिया और फिर लैंड को छूट से निकल कर गांड पर सेट कर क दबाव देते हुए अंदर घुसाने लगा. 3 इंच लैंड अंदर जाते जाते आंटी सिसकने लगी थी दर्द से फिर मैंने एक तगड़ा झटका पेल दिया . लैंड छूट क पानी से चिकना तो था hi 7 इंच तक गांड में घुस गया .

आंटी : आअह्हह्ह्ह्ह आराम से करो आआह्ह्ह्ह फट गयी आअह्ह्ह्ह कल चलने लायक नहीं छोड़ोगे मुझे कक्ककक्कक्स

अमित : चलोगी भी और दौडोगी भी आप . आप तो मेरी घोड़ी हैं आपकी सवारी करने में बड़ा मज़ा अत है

आंटी : उफ्फ्फ आअह्ह्ह्ह जंगली घोड़े हो पूरे जो हर बार चल बिगड़ देते हो आआह्ह्ह्ह कोई आगे ले ले तो चल न पाए और तुम उफ्फफ्फ्फ़ आअह्ह्ह्ह पीछे भी घुसा देते हो आअह्ह्ह ऐसे hi करो

मैंने आंटी की कमर को थामे ज़ोर दर चुदाई शुरू कर दी और आंटी भी कुछ देर में अपनी कमर पीछे धकेलती हुई मज़ा लेने लगी. हमारा ये खेल कोई 30-35 मिनट्स चला और मैंने अपना पानी आंटी की गांड में hi छोड़ दिया और उनको बीएड पर लिए उनके ऊपर hi देह गया. आंटी भी 3 बार पानी निकल चुकी थी. मुझे पता नहीं कब मेरी आँख लगी पर जब सुबह उठा तो मैंने बीएड पर अकेला hi था.

सुबह आँख थोड़ा लेट hi खुली थी मैं एक्सरसाइज करने की जगह नाहा धो कर तैयार हो गया गाओं जाने क लिए. अंकल तो अभी अख़बार hi पद रहे थे जबकि आंटी भी अभी उठी थी.

अंकल : अरे अमित इतनी जल्दी तैयार हो कर कहा. जा रहे हो?

अमित : कल लेट हो गए थे अंकल तो सोचा जल्दी निकल जाता हूँ सुबह सुबह गाओं क लिए. माँ बाबा इंतज़ार कर रहे होंगे.

अंकल : ये देखो पहले आज का अख़बार. तुम्हारी कॉलेज की टीम की फोटो लगी है फ्रंट पेज पर. तुम भी हो इसमें. और देखो नाम भी लिखा हैं यहाँ पर सबका.

मैं अंकल क हाथ में पकडे न्यूज़ पेपर में छपी खबर और तस्वीर देखने लगा.

आंटी : नाश्ता किये बिना नहीं जाने दूंगी , चुपचाप बैठो यहाँ मैं अभी नाश्ता तैयार करवाई हूँ.

आंटी अभी भी एक गाउन पहने हुए थी और चल ज़रा धीमी थी . मैंने गौर से देखा तो मेरी नज़रों का पीछा करते हुए वो समझ गयी मैं क्या देख रहा हूँ. उनके चेहरे पर शर्मीली मुस्कान आ गयी. किचन की तरफ जाते हुए उनके गाउन में से उनके थिरकते कूल्हे देख कर लैंड ने फिर से अंगड़ाई ली. पर मैं ध्यान हटते हुए अंकल से बात करने लगा. थोड़ी देर में hi आंटी रानी को साथ लिए मेरा नाश्ता और जूस ले आयी . नाश्ता करने क बाद मैं दोनों से इजाज़त ले कर घर को चल दिया. बाइक मोहित क घर hi थी जो वो कॉलेज से ले आया था. मैं अपनी तरोपज्ञ और मैडल भी एक छोटे बैग में दाल कर साथ ले आया. सुबह करीब 9 बजे मैं घर पहुँच गया था . बाबा घर पर hi अंगना में बैठे. एक तरफ चारपाई पर दीपिका ममी बचे को लेकर बैठी थी माँ भी उनके पास hi बचे को खिला रही थी . मुझे दरवाज़े पर देखते hi माँ दौड़ कर मेरे गले लग गयी .

गौरी म : तू आ गया मेरे बेटे. कल कहाँ रह गया था ? पता है कब से इंतज़ार कर रही हूँ साडी रत सो नहीं पायी मैं.

अमित : माँ बताया तो था मैंने कल लेट हो गया था तो अंकल क घर hi रुक गया था. आप इतनी परेशां मत हुआ करो. ये देखिये मैं क्या लाया हूँ.

मैंने बैग से ट्रॉफी और मैडल निकल कर माँ को दिया तो माँ ख़ुशी से फूले नहीं समां रही थी. वो कभी ट्रॉफी तो कभी मुझे चूमती. इतने में बाबा ने भी आ कर मुझे गले लगा लिया .

विजय म : शाबाश मेरे शेर ऐसे hi हमारा नाम रोशन करता रह . जाओ अमित की माँ मुँह मीठा करवाओ बेटे का जीत कर आया है. आज तो पूरे गाओं में लड्डू बांटूंगा. तुम बैठो मैं ज़रा हलवाई की दुकान से होकर आया , कल उसे बोलै था मैंने लड्डू बनाने को .

बाबा की ख़ुशी देखने लायक थी. वो तेज़ कदमो से बहार निकल गए.

गौरी म : तू बैठ मैं अभी आयी .

माँ मुझे इतना कह कर किचन की तरफ चली गयी और मैं दीपिका ममी की तरफ हो गया जो कब से मुझे देख रही थी.

अमित : कैसी हैं आप ?

दीपिका म : तुम्हे देख लेती हूँ अछि हो जाती हूँ . वैसे भी ये है न तुम्हारा लल्ला . एहि दिल लगाए रखता है. देखो लल्ला पापा क्या लाये हैं तेरे लिए . तू भी बड़ा हो कर पापा क जैसे बनना.

मैंने दीपिका ममी की गॉड से अपने बेटे को लेकर चूमते हुए सीने लगा लिया . सच में कितना सुकून मिलता है अपनी औलाद को सीने से लगाने पर ये मुझे महसूस हो रहा था.

दीपिका म : अगले संडे को नामकरण करने का फैसला हुआ है. कोई नाम सोचा है अभी तक या नहीं ?

अमित : जो भी आपको सही लगे वो रख लो आखिर आप का hi तो बीटा है.

दीपिका : तुम नहीं लगते कुछ इसके ? नाम तो तुम hi रखोगे मैं कह देती हूँ हाँ.

‘ सही कहा दीपिका नाम तो इसे hi रखना चाहिए, आखिर इसका भी तो हक़ बनता है’

माँ रसोई से मेरे लिए दूध और मिठाई ले आयी थी. और हम दोनों को देख कर मुस्कुरा रही थी. दीपिका ममी माँ की इस बात पर शर्मा गयी .

दीपिका म : वो hi तो मैं कह रही थी दीदी आप hi समझाइये

गौरी म : इतनी सी बात नहीं मन सकता? नाम तो अब वो hi रखेंगे जो तुम कहोगे वर्ण मुन्ना तो है hi फिर . चल मुँह मीठा कर और दूध पि ले.

मैंने माँ क हाथ से मिठाई के कर पहले उनका और दीपिका ममी का मुँह मीठा करवाया और फिर खुद खा कर दूध पिने लगा. दूध पिने क बाद मैं कामिनी ममी क कमरे में जा कर उनसे भी मिला और उनका भी मुँह मीठा करवाया . कामिनी ममी का पेट भी अब बहुत बड़ा नज़र आने लगा था अब उनका डिलीवरी टाइम भी ज्यादा दूर नहीं था.

अमित : कैसी हैं आप ?

कामिनी म : अछि हूँ बस आजकल दर्द रहने लगी है . बधाई हो तुम्हे जीत की.

अमित : आपको भी और मुझे इनाम जल्द से जल्द चाहिए .

मैंने कामिनी ममी क पेट पर हाथ रखते हुए कहा. वो मेरी बात पर शर्मा गयी.

कामिनी म : इनाम नहीं ये तो वरदान है मेरे लिए. तुम्हारा ,, हमारा प्यारा .

अमित : देख लेना आप जैसी सुन्दर सी बेटी होगी.

कामिनी म : पर मुझे तुम्हारे जैसा बीटा चाहिए.

अमित : चलिए देखते हैं भगवन किसकी सुनता है. आप आराम कीजिये मैं ज़रा माँ क साथ कुछ देर बात कर लूँ .

मैं फिर से बहार आया तो माँ ने नाश्ते का पूछा . मैंने बता दिया क नाश्ता कर क hi आया हूँ. इतने में बाबा आ गए और उनके साथ अजय मां भी . मैं अजय मां से भी गले लग कर मिला और उन्होंने भी मुझे ज़ोर से गले लगा लिया.

अजय मां : शाबाश मेरे शेर , गाओं का नाम खूब रोशन करो अपनी म्हणत से.

विजय म : ले बीटा पहले अपना मुँह मीठा कर और सबका करवा फिर गाओं में लड्डू बाँटने हैं. भगवन क तो मैंने कल hi चढ़ा दिया था.

मैंने बाबा से एक डिब्बा लिया और बरी बरी से सबका मुँह मीठा करवाया. बाबा क साथ hi एक आदमी बहुत सरे डिब्बे ले कर खड़ा था शायद हलवाई की दुकान से hi होगा. बाबा और अजय मां मिठाई ले कर गाओं में बाँटने क लिए निकल गए . बाबा मुझे भी साथ ले जाना चाहते थे पर माँ ने मन कर दिया और मुझे अपने कमरे में आराम करने को कह दिया. मैं भी अपने कमरे में आ आराम करने लगा. कुछ देर बाद राजू चिल्लाता हुआ मेरे कमरे में आ गया

राजू : अरे वह रे मेरे पहलवान तूने तो कमल कर दिया. जियो मेरे शेर

राजू मुझसे गले लग कर मिला . वो बहुत खुश नज़र आ रहा था

अमित : चल आ तेरा मुँह मीठा करवाऊं

राजू : मुँह मीठा कर लिया है मैंने. तेरे बाबा पूरे गाओं का मुँह मीठा करवा रहे हैं . मुझे जैसे hi पता चला मैं यहाँ आ गया. और सुना कैसा है?

अमित : मैं ठीक हूँ तू सुना कैसा है?

राजू : अपना भी ठीक है . नौकरी में अब अछि सेटिंग हो गयी है. सोच रहा हूँ एक छोटा सा घर शहर में hi देख लूँ. फिर माँ को अपने साथ ले जाऊंगा . रीमा का आना जाना ख़तम और फिर रेनू को भी तो शहर में hi लेकर जाना है.

अमित : ठीक सोचा है तुमने , पर इतने पैसे कहाँ से लाएगा?

राजू : देखता हूँ , क़र्ज़ ले लूंगा अपनी थोड़ी सी ज़मीन और घर गहने रख कर. और कहाँ से पैसे आने है और फिर तनख्वाह से उतर दूंगा थोड़ा थोड़ा कर क.

अमित : हम्म वैसे कितने पैसे चाहिए होंगे तुझे ?

राजू : 5-6 लाख तो चाहिए hi होंगे. शहर में जगह गाओं से तो मेहेंगी hi होती है तुझे तो पता hi है

अमित : तू एक काम क्यों नहीं करता . तू जो क़र्ज़ लेना चाहता है वो मैं तुझे बाबा से दिला देता हूँ. इससे तेरी ज़मीन भी कहीं नहीं जाएगी और ब्याज भी चाहे मत देना बस पैसे मोड़ देना वर्ण बाबा मुझे कहें क तू भी निकल दोस्त क साथ है है है

राजू : अरे रहने दे यार ताऊजी क पहले hi इतने एहसान हैं . मैं कोई और जुगाड़ कर लूंगा.

‘ कोई ज़रूरत नहीं और जुगाड़ करने की , जैसे कह रहा है अमित वैसे hi होगा . मैं कह देती हूँ हाँ’

कमरे में आती हुई माँ ने ये बात कही. उनके हाथों में दूध और मिठाई थी जो शायद राजू क लिए hi लायी होंगी.

राजू : पर तेजी ....

गौरी म : बस , चल ये दूध पि और मिठाई खा. तू भी तो हमारा बचा है क्या हम इतना नहीं कर सकते ?

राजू माँ की बात सुन कर उनके पाऊँ पद गया और माँ ने उसे गले से लगा लिया.

राजू : आप सच में बहुत अछि हैं तेजी

गौरी म : तो क्या बाकि सब बुरे हैं हाँ ?? चल अब ये खा और दूध पि और कुछ चाहिए हो तो बता देना.

‘ चची मुँह तो मैं भी मीठा करूँगा छोटा भाई नाम रोशन कर क आया है गाओं का. ‘

ये आवाज़ दरवाज़े से अंदर आते डरा भैया की थी . मैं उठ कर उनसे गले मिला तो उन्होंने भी मुझे कास क गले लगा लिया .

डरा : बधाई हो भाई ऐसे hi म्हणत कर क नाम रोशन कर सबका. ले तू भी मुँह मीठा कर.

अमित : शुक्रिया भैया और आपको भी बधाई नीरज भैया क जितने की.

गौरी म : ये नीरज शीला दीदी का बीटा है न ?

डरा : हाँ चची जी ये दोनों एक hi कॉलेज में हैं और वो भी जीत कर आया है . बता रहा था क अमित तो अभी से सब पर भरी है . आगे आगे और भी नाम चमकाएगा ये .

डरा भैया ने माँ क पाऊँ छुए और उनका भी मुँह मीठा करवाया . उसके बाद माँ डरा भैया क लिए भी दूध मिठाई ले आयी . बाबा ने मुझे फ़ोन कर क पंचायत में आने को कहा तो डरा भैया और राजू क साथ मैं उधर चला गया जहाँ गाओं क मुखिया और खास लोग सब जमा थे. मुखिया जी ने मुझे और पहनाया और शगुन दिया . साथ hi ढोल बजा कर ख़ुशी मानाने लगे. आज हमारे उस्ताद जी भी वहां थे तो मैंने उन सब का आशीर्वाद लिया . दोपहर बाद तक मुझे बाबा क साथ hi गाओं वालों क बीच रहना पड़ा. दोपहर क खाने की जगह बस मिठाई दूध और लस्सी पि कर hi पेट भर गया. जब हम घर वापिस आये तो देखा माँ बिस्टेर पर पड़ी है और दीपिका ममी उनके पास बैठी है. मैं भाग कर उनके पास गया .

अमित : क्या हुआ माँ ? आपकी तबियत तो ठीक है ? आप ऐसे क्यों पड़ी हैं?

दीपिका म : ज्यादा hi ख़ुशी चढ़ गयी थी तेरे आने की तो भगति फिर रही थी पाऊँ फिसल गया. शुक्र है क पेट क बल नहीं गिरी .

दीपिका ममी ने थोड़े गुस्से और नाराज़गी से ये बात कही तो बाबा को भी गुस्सा आ गया जो मेरे पीछे hi थे.

विजय म : ये क्या हरकत है गौरी ? तुम जानती हो न तुम किस हालत में हो ? अगर कुछ हो जाता तो ? तुम्हे अपना ख्याल रखना चाहिए. इतने सैलून बाद भगवन ने दिया की है और तुम ...

गौरी म : गुस्सा मत करो जी आप ये तो ऐसे hi बात बड़ा कर बता रही है. वो तो फर्श पर पानी गिरा हुआ था तो पाऊँ फिसल गया वर्ण मैं ऐसी गलती कर सकती हूँ भला?

विजय म : ठीक है ठीक है , अपना ध्यान रखो मैं डॉ को बुलाता हूँ.

गौरी म : डॉ देख गया है जी कोई ज्यादा बड़ी बात न है. बस पाऊँ मुद गया था और थोड़ा सा सूजन आयी है कमर पे. मालिश कर दी है इसने एक बार और अब ठीक है.

विजय म : चलो ठीक है आराम करो. मैं ज़रा बहार हूँ .

बाबा इतना कह कर कमरे से बहार चले गए.

दीपिका म : मैं भी ज़रा मुन्ने को दूध पीला कर आती हूँ तब तक अमित यहाँ बैठा है.

दीपिका ममी भी मुन्ने को लेकर बहार निकल गयी . अब कमरे में मैं और माँ hi थे.

अमित : आप अपना ध्यान क्यों नहीं रखती ? अगर कुछ हो जाता तो?

गौरी म : ऐसे कैसे कुछ हो जाता? पूरा ध्यान रखती हूँ मैं. वो बस बेध्यानी में पता नहीं चला क पानी गिरा हुआ है. मैं तो तेरे लिए खाना तैयार करने में लगी थी. देख एक तू इतने दिनों बाद आया है और मैं अब बिस्टेर पर पद गयी. क्या क्या नहीं सोचा था और क्या हो गया.

अमित : इतनी चिंता मत किया कीजिये मेरी. मैं तो हमेशा hi आपके पास हूँ. आप वैसे भी जब कहेंगी मैं घर आ सकता हूँ. इसका ज़रा ध्यान रखा कीजिये आप जिसके लिए इतनी म्हणत की है आपने .

मैंने आखरी लाइन धीरे से कही थी और माँ क पेट पर हाथ रख दिया . माँ मेरी बात पर शर्मा गयी.

गौरी म : ज्यादा बातें मत कर, चल जा कर कुछ खा ले भूखा होगा सुबह से कुछ खाया नहीं तूने .

अमित : खा खा क पेट भर गया है अब तो रत को भी न खाया जायेगा. मुझे ज़रा आपकी सेवा करने दो आप .

इतना कह कर मैं क पाऊँ की तरफ बैठ गया और उनके पाऊँ दबाने लगा

गौरी म : अरे ये क्या कर रहा है मत कर मुझे ाचा नहीं लग रहा तुमसे पाऊँ दबवाना.

अमित : वो क्यों भला ? मैं कौन सा पहली बार दबा रहा हूँ

गौरी म : अब पहले वाली बात नहीं है न

अमित : अब ऐसा क्या हो गया जो मैं पाऊँ नहीं दबा सकता ?

गौरी म : धीरे से ) इस लिए क ये पाऊँ भरी भी तो तूने किये हैं

अमित : क्या कहा?

गौरी म : शरमाते हुए ) कुछ नहीं तू बस पाऊँ छोड़ दे.

अमित : आप चुप चाप लेती रहिये बस. मुझे मेरा काम करने दो. भरी किये हैं हलके नहीं कर सकता क्या ?

मैंने भी सरगोशी करते हुए कहा तो माँ ने शर्मा क मुँह फेर लिया .

गौरी म : गन्दा हो गया है तू बड़ा . कर ले मन मणि .

अमित : मन मणि अब अगले हफ्ते करूँगा .

गौरी म : शरमाते हुए ) तू चुप नहीं रह सकता

मैं माँ क पाऊँ दबाता हुआ ऐसे hi हलकी फुलकी बातें करते रहा . आज पूजा भाभी की तरफ भी नहीं जा पाया और इधर माँ क भी चोट लग गयी. खैर रत का खाना खाने क बाद मैं भी अपने कमरे में सोने चला गया. खाने कहते हुए कमलेश मां से भी बात हुई और बाबा ने बताया क संडे को मुहूर्त रखा है मुन्ने क नामकरण का. सब अपने अपने कमरों में सो गयी और मैं भी रत को राधा और रीमा से थोड़ी देर बात करने क बाद सो गया.

सुबह जल्दी उठ कर मैं तैयार हुआ और नाश्ता किये बगैर hi अपना ट्रॉफी वाला बैग लेकर जल्दी से घर से निकल गया. मैं सीधा दिव्या मौसी क घर गया. जैसे hi बेल्ल बजे तो दिव्या मौसी ने hi दरवाज़ा खोला . अभी अभी नाहा कर आयी थी शायद बालों से पानी की बूंदे टपक रही थी उनके. मैंने उनके पाऊँ छुए तो उन्होंने मुझे गले लगा कर मेरे माथा चूम लिया .

दिव्या मौसी : जीत की बधाई हो मेरे बेटे को. ऐसे hi हर कदम पर तुम्हे जीत मिलती रहे. मैं तो परसों भी तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी क शायद तू आ जाये पर राधा ने बताया क तू लेट गया था और राघव भाई साहब क साथ hi चला गया.

अमित : हाँ मौसी वो उनके साथ hi आया था न मैं . मैं तो आना चाहता था पर देर बहुत हो गयी थी तो आंटी ने आने नहीं दिया .

दिव्या मौसी : ठीक किया न दीदी ने , देर रत को क्या ज़रूरत थी आने की? चल इधर बैठ मैं तेरे लिए दूध गरम करती हूँ .

अमित : राधा उठी क नहीं अभी ?

दिव्या मौसी : सो रही है राजकुमारी जा उठा दे उसे , वो भी खुश हो जाएगी.

मैं राधा क कमरे में गया तो हमेशा की तरह वो वैसे hi बेफिक्र सो रही थी और चेहरे पर दिलकश मुस्कान थी. राधा क गोर गुलाबी चेहरे को मैंने कुछ देर निहारा और उसके पास hi बैठ गया . राधा क चेहरे पर आयी रेशमी ज़ुल्फ़ें ऐसे लग रही थी थी जैसे चाँद क आगे बदल छ गए हो. मैंने धीरे से उसकी ज़ुल्फ़ों को पीछे किया तो राधा क गाल लाल होने लगे. मैंने अभी भी उसे ऐसे hi देख रहा था और अपनी hi सोच में गम था.

‘ देखते hi रहोगे या कुछ बोलोगे भी ?’

ये मधुर आवाज़ कानो में पड़ी तो मेरी तन्द्रा टूटी. मैंने राधा की आँखें देखीं जो खुली हुई थी मतलब वो जग रही थी . मुझे अब अपनी इस हरकत पर शर्मिंदगी होने लगी.

अमित : तुम , तुम जग रही थी ?

राधा : आवाज़ सुन ली थी मैंने बाइक की. और सच कहूं तो मेरा दिल कह रहा था तुम ज़रूर आओगे. देखो तुम आ गए. मेरे लिए क्या लाये हो वहां से?

अमित : मैं मम मैं वो हाँ ये लो .

मैंने अपने बैग से ट्रॉफी निकल कर राधा को दे दी . और मैडल भी उसके हाथ में रख दिया. राधा खुश हो गयी और ट्रॉफी को चूम लिया .

राधा : अब ये मेरी है और ये क्या ये मैडल ऐसे hi मिलता है क्या ?

अमित : नहीं नहीं ये तो गले में पहनते हैं

राधा : तो डालो मेरे गले में . ऐसे मैं नहीं लेने वाली , अपने हाथों से पहनाओ

राधा ने कुछ सोच कर ये कहा था. और मैडल को पहनाओ कहना अपने आप में hi बहुत कुछ कह रहा था पर उस वक़्त मैंने ध्यान न दिया क्यूंकि मुझे अभी कुछ देर पहले हुई हरकत पर शर्मिंदगी थी. मैंने जल्दी से राधा क गले में मैडल पहना दिया तो राधा ने ऑंखें बंद कर ली .

राधा ( मन में ) एक दिन ऐसे hi तुम मुझे मंगल सूत्र पहना कर अपनी बना लेना फिर मुझे दुनिया से कोई लेना देना नहीं होगा. मेरी दुनिया सिर्फ तुम हो .

राधा ऑंखें बंद किये थी क दिव्या मौसी हाथ में ट्रे पकडे कमरे में आ गयी.

दिव्या मौसी : अभी तक तुम उठी नहीं? और आते hi डाका मर लिया ट्रॉफी पर ? लो अमित दूध पकड़ो .

राधा : ये मेरी है और ये भी ( मैडल ) इसने खुद कहा है क ये मेरे लिए लाया है.

दिव्या मौसी : चल उठ अब हाथ मुँह ढोले और चाय पि ले. इसे मुझे दिखा ज़रा.

राधा ने बीएड से उठते हुए ट्रॉफी मौसी को पकड़े पर गले से मैडल नहीं उतरा और बाथरूम जाते जाते मेरे आँखों में देख कर मुस्कुराती हुई मैडल को चूमती अंदर घुस गयी .

दिव्या मौसी: आज दामिनी होती तो कितना खुश होती , उसे नाज़ होता तुम पर.

अमित : मेरे लिए तो माँ भी आप hi हैं. वो आपसे अलग थोड़ा hi थी. आप दोनों का दिल एक जैसा था और जैसा आप सोच रही हैं वैसा hi वो सोचती मेरे बारे में. क्या आपको मुझ पर नाज़ है?

मेरी इस बात से दिव्या मौसी ने भरी हुई आँखों से मुझे गले से लगा मेरे चेहरे को चूमते हुए अपनी ममता की बारिश मुझ पर करने लगी.

दिव्या मौसी : तेरे जैसा बीटा तो किस्मत वालों को मिलता है. दामिनी जाते जाते भी अपनी इस नादाँ बहिन को ज़िन्दगी का सबसे खूबसूरत तोहफा दे गयी जो सिर्फ उसका था.

अमित : जब आप दोनों में कभी कोई फरक था hi नहीं तो मैं भी तो आपका hi था न पहले से hi . तो क्या हुआ मुझे जनम माँ ने दिया है . आपने भी तो पला hi होगा न?

दिव्या मौसी : पला ? दूध पिलाया है तुझे मैंने अपना. राधा और तुम में न दामिनी ने फरक किया था न मैंने .

दिव्या इमोशंस में दूध वाली बात कह तो गयी पर अगले पल शर्म से उसके गाल लाल हो गए और वो अमित को दूध पिने का कह के जल्दी से कमरे से निकल गयी . इतने में hi दिव्या की धड़कन बाद गयी थी. आज सुबह भी वो अपने उसी ख्वाब क साथ hi उठी थी जो वो नहीं चाहती थे क उसे आये . जल्दी से बाथरूम में घुस कर अपने चेहरे पानी मारा पर तब तक उसकी धड़कन क साथ साँसे भी बेतहाशा बाद चुकी थी

दिव्या ( मन में ) ये मुझे क्या होता जा रहा है? क्यों मैं बार बार ये सब सोचने लगती हूँ. हे भगवन ये मेरे साथ क्या हो रहा है . वो बीटा है मेरा .

इधर मौसी क बहार निकलते hi राधा कमरे में आ गयी और मुस्कुराती हुई मेरे साथ बैठ कर चाय पिने लगी.

अमित : तो कैसे रहे तीन दिन कॉलेज में ? कोई मुश्किल तो नहीं हुई ?

मेरे इस सवाल पर राधा क मुस्कराहट गायब हो गयी और उसने मेरी आँखों में देखा. फिर ज़बरदस्ती मुस्कुराने की कोशिश करते हुए बोली

राधा : अचे रहे तुम नहीं थे तो दिल नहीं लगता था बस कैंटीन में कुछ देर मिल कर सब बैठ जाते थे .

अमित : तुम मुझसे कुछ छुपा रही हो ?

राधा : नं नहीं तो ऐसी कोई बात नहीं है लो चाय ख़तम हो गयी मैं नाहा कर तैयार होती हूँ तुम नाश्ता करो

राधा इतना कह कर जल्दी से कप साइड में रख कर उठने लगी तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.

अमित : चाय अभी ख़तम नहीं हुई और मुझे सच सुन्ना है . मुझसे कुछ छुपा रही हो तुम .

राधा ने पलट कर मेरी तरफ देखा तो उसकी ऑंखें भीग गयी थी . राधा की आँखों में नमी देख कर मुझे दर्द सा हुआ दिल में और मैंने उठा कर उसे गले से लगा लिया . राधा भी ज़ोर से मेरे गले लग गयी और सिसकने लगी. मैं राधा की विचलित धड़कनो को महसूस कर प् रहा था जिसमे एक दर्द सा था.

अमित : क्या हुआ है मुझसे सच सच बताओ

राधा : सिसकते हुए ) नहीं , अभी नहीं . माँ सुन लेगी.

अमित : ठीक है हम बाद में बात करेंगे. पहले खुद को सम्भालो . तुम्हे पता है न मैं तुम्हारी आँखों में आंसू नहीं देख सकता.

राधा ने चेहरा ऊपर कर क मेरी आँखों में देखा और मुस्कुराने की कोशिश की.

अमित : रट हुए जब ऐसे हस्ती हो तो बंदरिया लगती हो पूरी.

राधा : बन्दर होंगे तुम जाओ जा कर बहार बैठो नहीं तो फिर उस दिन की तरह .....

अमित : वैसे नज़ारा इतना बुरा भी नहीं था उस दिन

राधा : यू !! अभी माँ से कहती हूँ क उनका बीटा कैसी बातें कर रहा है . माआ

राधा ने मेरी छाती पर हलके हाथ से मुक्के मरते हुए ये बात कही और मौसी को आवाज़ दी तो मैं जल्दी से उसे छोड़ कर बहार भाग निकला

राधा : बन्दर hi हो सच में .... मेरे बन्दर

इतना कह कर राधा मुस्कुराती हुई नहाने चली गयी.

इधर मैं बहार हॉल में आया तो मौसी किचन में नाश्ता तैयार कर रही थी. मैं वहीँ हॉल में बैठ गया और कुछ देर में राधा तैयार हो कर आ गयी. मौसी ने हम दोनों को नाश्ता करवाया और हम कॉलेज क लिए चल दिए. अपनी ट्रॉफी और मैडल साथ में ले लिया था जैसा मुझे नीरज ने बताया था क कॉलेज उसे ले कर आना है. रस्ते में मैंने राधा से फिर से सच जानना चाहा तो राधा ने साडी बात बता दी जिसे सुन कर मुझे गुस्सा आ गया . राधा भी समझ रही थी और उसने मुझे पीछे से हुग कर लिया और शांत रहने को कहा.

राधा : उसे सजा मिल चुकी है . कॉलेज से निकल दिया गया है और पुलिस कंप्लेंट भी कर दी है प्रिंसिपल सर ने . तुम ऐसे गुस्सा मत करो .

अमित : मैं कहाँ गुस्सा कर रहा हूँ

राधा : जानती हूँ अछि तरह से तुम्हे. ये धड़कने ऐसे hi नहीं बाद गयी तुम्हारी. वैसे शीना को भी चोट लगी थी उस दिन . उसने hi सब से आगे हो कर मेरी मदद की थी और मोहित ने और सब ने ाचा सबक सिखाया उसे.

अमित : शीना ने तो मुझ पर एहसान कर दिया तुम्हारे लिए इतना कुछ कर क

राधा : तुम पर नहीं हम पर .

इतने में हम कॉलेज पहुँच गए. और पीछे पीछे कल्पना भी नेहा दीदी क साथ आ गयी . गेट पर नीरज भैया खड़े थे तो वो मुझे और कल्पना को अपने साथ ले गए . प्रिंसिपल सर ने जितने वाले सब खिलाडियों को ऑफिस में बुलाया था .

दूसरी तरफ आज निधि अपने ऑफिस में अभी काम कर hi रही थी क पेओन ने आ कर उसे संदेसा दिया क मैनेजर ने उसे बुलाया है. निधि मैनेजर क ऑफिस में गयी तो उसने निधि को बैठने का कह कर एक फाइल निधि क सामने रख दी और उसे देखने को कहा . जैसे hi निधि ने फाइल खोली तो उसकी ऑंखें फट गयी. सामने निधि की hi तस्वीरें थी वो भी पूरी नंगी. तस्वीरों में मैनेजर और निधि दोनों एक दूसरे से चिपके हुए थे . निधि की तो वो हालत हो गयी क काटो तो खून नहीं. उसे समझ नहीं आ रहा था ये कैसे हो गया. निधि का दिमाग झन्ना गया , माथे पर पसीने की बूंदे उभर आयी दिल की धड़कन बहार तक सुनाई देने लगी. हमेशा मन मर्यादा में रहने वाली निधि क लिए ये हृदयघात से काम न था. मैनेजर निधि को देख कर मुस्कुरा रहा था.

मैनेजर : कहो कैसा लगा ? मैंने कहा था न मेरी बात मन लो पर तुमने तो मेरी hi बेइज़्ज़ती कर दी. अब कहो कैसा लग रहा है? सोचो कैसा लगेगा तुम्हारी फॅमिली को जब ये तस्वीरें उनके सामने जाएँगी ? गली मोहल्ले वाले क्या कहेंगे? कैसा लगेगा जब रह चलते लोग तुम्हारा रेट पूछेंगे? तुम्हारी तो बहने भी है न ? उनके बारे में भी लोग यही कहेंगे क वो भी पैसे लेती होंगी . तुम्हारी माँ.....

निधि : चिल्लाते हुए ) शट उपपपपप , बंद करो अपनी गन्दी ज़ुबान. ये सब तुम्हारी चल है . ये सब नकली है.

मैनेजर : गुस्से से ) आवाज़ नीची रख लड़की. ये मेरा ऑफिस है यहाँ सिर्फ मैं बोलता हूँ और वही होता है जो मैं चाहता हूँ. मैंने कहा था प्यार से मेरी बात मन लो . अब देखो अंजाम. और ये सब तस्वीरें असली हैं कहो तो और भी दिखाऊं? चलो छोडो सीधे तुम्हारी फॅमिली को hi दिखता हूँ. मगर पहले ज़रा ऑफिस में तो सब देख लें.

निधि : तुम मुझे अपनी घटिया चल में नहीं फसा सकते , मैंने अभी पुलिस में जाउंगी .

मैनेजर : क्या कहोगी ? क मैंने तस्वीरें खींची हैं? हाँ खींची हैं पर मैंने नहीं. मैं खुद नहीं जनता किसने खींची हैं. मैं तो बस तुम्हारे साथ मज़े ले रहा था क्या पता किसने तस्वीरें खिंच ली. और तुम मेरे साथ सेक्स करती परमोशन लेने क चक्कर में. मुझे अपने जाल में फसा कर तुम हेड बनना चाहती हो अपने डिपार्टमेंट की. बताओ पुलिस किसकी कहानी पर यकीन करेगी? तुम कहती हो तो मैं खुद hi फ़ोन लगा देता हूँ . वैसे भी ैप मेरा खास है. उल्टा तुम फास जाओगी मुझे ब्लैकमेल करने क जुर्म में. तो कहो क्या कहती हो?

मैनेजर की बातें सुन कर निधि क पैरो टेल ज़मीन निकल गयी. मैनेजर तो फुल प्लान बना क बैठा था. निधि को शक तो उसी दिन हो गया था क कुछ गड़बड़ है जब ड्रिंक पिटे hi उसका सर घूमने लगा था पर वो समझ नहीं पायी क उसके साथ हुआ क्या है. निधि को अब समझ नहीं आ रहा था क अब वो करे तो क्या करे ? मैनेजर की बात सही थी पुलिस उसकी hi फेवर करती.

निधि : क्या चाहते हो तुम ?

मैनेजर : कामिनी मुस्कान क साथ ) वही जो तुम देख रही हो . पिछली बार मज़ा नहीं आया था तुम होश में जो नहीं थी . इसी लिए काम अधूरा hi रह गया . अब वो अधूरा काम तुम अपनी मर्ज़ी से पूरा करोगी. वो क्या है न , जब लड़की अपनी मर्ज़ी से सब करती है न तो मज़ा कुछ और hi अत है.

मैनेजर की बात सुन कर निधि की आँखों में आंसू आ गए. वो पूरी तरह से फसा गयी थी और मैनेजर की बात न मैंने का मतलब था वो निधि और उसकी फॅमिली को बदनाम कर देगा. निधि खुद को असहाये महसूस कर रही थी.

मैनेजर : क्या सोच रही हो? तुम्हारे पास और कोई ऑप्शन नहीं है . मर्ज़ी से करोगी तो फायदे में रहोगी . मैं तुम्हारा परमोशन भी करवाऊंगा और सैलरी भी बढ़ेगी. यानि क सोने पे सुहागा. और अगर मर्ज़ी से नहीं करोगी तो तुम्हे मज़ा नहीं आएगा और न परमोशन होगी . बस सजा hi सजा रह जाएगी. अगर मेरी बात न मन कर तुमने कोई चालाकी की तो ये तस्वीरें कल तक पूरे शहर में लोगों तक पहुँच जाएँगी. शुरुआत तुम्हारे घर से hi होगी. और सिर्फ फोटोज hi नहीं मंस भी है मेरे पास ये देखो.

मैनेजर ने अपने लैपटॉप पर वीडियो क्लिप प्ले कर क निधि की तरफ घुमा दिया. निधि की ऑंखें जहर जहर बहने लगी .

निधि : रट हुए ) मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ . मुझे बर्बाद मत करो. मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? मेरी फॅमिली तबाह हो जाएगी प्लीज ऐसा मत करो . मैं अपनी जान दे दूंगी मेरे साथ ऐसा मत करो.

मैनेजर : हस्ते हुए ) न न तुमने थोड़ा hi कुछ बिगाड़ा है मेरा , बिगाड़ा तो तुम्हारे हुस्न ने है . तुम इतनी हसीं हो क मैं खुद को रोक hi नहीं पता . उस दिन भी अगर तुम्हारी माँ न आती तो मैं काम पूरा कर hi लेता. और जान देने की बात मत करो. क्यूंकि जान देने से भी तुम इस बात को रोक नहीं पाओगी . तुम्हारी बहनो क बारे में भी लोग ऐसी hi बातें करेंगे जब वो तुम्हारे मंस देखेंगे. तो क्या तुम चाहती हो क उनका जीना हराम हो जाये ?

निधि : रट हुए ) नहीं ऐसा माता कहो. मेरी बहनो ने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा ? प्लीज ऐसा मत करो मैं तुम्हारे पाऊँ पड़ती हूँ ऐसा मत करो.

मैनेजर : सख्ती से ) मुझे ज्यादा बात करना पसंद नहीं है. या तो वो करो जो मैंने कहा या फिर अंजाम क लिए तैयार रहो. और खुद को कुछ करने क बारे में सोचने से पहले अपनी बहनो क बारे में सोच लेना. अब जाओ अपनी जगह पर. किसी को कुछ भी बताया तो उसी वक़्त तुम्हारा मंस सारे शहर में फैला दूंगा. आज मुझे ज़रूरी काम है . कल सुबह मैं तुम्हे लेने आऊंगा तुम्हारे घर से. और फिर हम एन्जॉय करने चलेंगे. वडा करता हूँ उसके बाद तुम्हे परेशां नहीं करूँगा. तुम खुद hi मेरे पास आओगी एक बार कर लेने क बाद. अब जाओ .

निधि बेचारी रोटी हुई मैनेजर क केबिन से बहार निकल कर अपने केबिन में चली गयी. उसकी तो दुनिया hi लूट गयी थी आज . मैनेजर की बात मन ने क इलावा और कोई रास्ता नहीं रह गया था. वो न पुलिस क पास जा सकती थी न अपनी जान दे सकती थी. निधि को कोई रास्ता नज़र नहीं आया तो में ो बेचारी रोटी रही .

उधर निधि क जाते hi जूनियर केबिन में आ गया.

जूनियर : लगता है कबूतरी जाल में फास गयी सर ?

मैनेजर : मैं डॉन खेलूं और हर जॉन ऐसा भला हो सकता है ? मान गयी है बस अभी मुँह से बोल नहीं रही. पर जो कुछ मैंने कहा है उसके बाद तो वो मन कर hi नहीं सकती

जूनियर: मुबारक हो सर , आगे का क्या प्लान है?

मैनेजर : कल ले के चलते हैं इसे अपने अड्डे पर . फिर सारा दिन मौज करेंगे.

जूनियर : सर मेरा भी कुछ सोचिये .

मैनेजर : तू बड़ा कमीना है . तुझे कैसे छोड़ सकता हूँ. तू भी चलना अगर किसी की ज़रूरत पड़ी तो सेल कोई तो होना चाहिए ध्यान रखने वाला. तू बहार नज़र रखना .

जूनियर : बस मज़ार रखूं ??

मैनेजर : कर लेना तू भी कर लेना पर पहले मैं जी भर क अपनी प्यास बुझाऊंगा उसके बाद तू करना. बड़ा परेशां किया है साली ने. कल तो पूरा हिसाब लूँगा. और हाँ कैमरा अचे से फिट करना कोई गलती भी होनी चाहिए.

जूनियर : उसकी चिंता hi मत कीजिये सर. मैं सब देख लूंगा.

 
अपडेट 153



‘ लो आ गए हमारे शेर मैदान मार क ‘

कैंटीन में आते hi मीनल ने ये कह कर स्वागत किया मेरा और कल्पना का. पहले 2 लेक्चर तो प्रिंसिपल सर क साथ hi गुज़र गए थे. कुछ स्टाफ मेंबर और मैनेजमेंट क सदस्यों क इलावा जर्नलिस्ट्स भी बुलाते गए थे. सबकी तस्वीरें हुई और कुछ सवाल जवाब क साथ प्रेस नोट भी तैयार किये गए थे. प्रिंसिपल सर की रिकमेन्डेशन पर मैनेजमेंट बोर्ड ने जीतने वाले सभी क लिए स्पेशल स्कालरशिप और प्राइज की घोषणा भी की. स्नैक्स और टिया पार्टी क साथ ाचा खासा टॉम जहां किया गया था कॉलेज में hi अलग से. वहां से फारिग हो कर जैसे hi कैंटीन में आये तो हमारी मंडली ने हमें घेर लिया.

कल्पना : ोये काम से काम जेंडर तो चेंज मत कर.

मीनल : हाँ यार गलती हो गयी शेर तो अमित है और तू शेरनी मतलब तू इसकी .....

कल्पना : अभी तेरे कण क नीचे बजती हूँ फिर पता चलेगा.

कल्पना मीनल को मरने क लिए आगे बड़ी तो वो इधर उधर कभी किसी क पीछे कभी किसी क पीछे छिपने लगी. मगर इसके बाद भी कल्पना क मुँह में स्माइल थी और गाल लाल हो रहे थे. आखिर में मीनल नेहा दीदी क पीछे छिप गयी तो कल्पना रुक गयी.

कल्पना : देखो दीदी ये क्या कह रही है . आप बीच में से हैट जाओ इसे मैं देखती हूँ .

नेहा दीदी : गलत क्या कहा इसने ? शेरनी hi तो है तू. हाँ अगर तू अमित को शेर नहीं मानती तो कोई और शेर देखना पड़ेगा .

कल्पना : दीदी आप भी .....

नेहा दीदी की इस बात पर सब हसने लगे और कल्पना क गाल पूरे लाल हो गए. इधर रीमा और राधा नेहा दीदी को hi देख रही थी जैसे उन्हें ये जोके पसंद नहीं आया हो.

शीना : वेल अब जब अमित और कल्पना मैदान मर hi आये हैं तो पार्टी तो बनती है न. तो मैं सोच रही हूँ क कल हम पार्टी करते हैं .

मीनल : नेकी और पूछ पूछ . मैं तो कहती हूँ आज hi होनी चाहिए. शुभ काम में देरी कैसी.

शालू : पर पहले इंतज़ाम भी तो होना चाहिए .

शिवानी : हाँ , एक डैम से कैसे करेंगे फिर मज़ा नहीं आएगा. इस बार पार्टी अचे से होनी चाहिए .

शीना : एक्साक्ट्ली , मैंने सोचा है क पार्टी हमारे फार्म हाउस पर करते हैं. वहां किसी की कोई रोक टोक नहीं होगी. अपने हिसाब से हम सब अर्रंगेमेन्ट्स कर लेंगे. इवनिंग में तो सबका जाना पॉसिबल नहीं हो सकता वर्ण डिस्को चले जाते.

मीनल : यार डिस्को वाला आईडिया ज्यादा ाचा है.

नेहा दीदी : पर हम वहां नहीं जा सकते . हमारी फॅमिली अल्लोव नहीं करती . आप सब चले जाना . मैं और राधा नहीं आ पाएंगे.

रीमा : दीदी आपके और राधा क बिना तो पार्टी हो hi नहीं सकती . इसी लिए फार्म हाउस hi बेस्ट है. वो भी डे टाइम.

मीनल : पर डे टाइम कैसे होगा ?

शीना : वो मैं देख लूंगी. डिस्को जैसा hi माहौल बना देंगे उधर. और दिन में इवनिंग जैसी फीलिंग भी आएगी. अब तो ठीक है न.?

नेहा दीदी : पर यार अगर कल की बजाये परसों हो जाये तो ज्यादा बढ़िया रहेगा. कल एक ज़रूरी लेक्चर है . कल गेस्ट अपीयरेंस में बहार से क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स सर आ रहे हैं. उनका लेक्चर मैं नहीं मिस कर सकती .

शीना : no प्रॉब्लम हम परसों रख लेते हैं . अगर किसी को कोई ऐतराज़ है तो अभी बता सकता है.

किसी ने कोई ऑब्जेक्शन नहीं की तो शीना ने दोने कर दिया.

शीना : तो परसों का फाइनल रहा फिर . परसों कोई कॉलेज नहीं आएगा और सीधा हमारे फार्म हाउस पर hi जायेंगे .

सब ने अब अपना अपना आर्डर दिया और मैं कल्पना क साथ सामान लेने चला गया. आज की ट्रीट हम दोनों की तरफ से थी.

अमित : क्या हुआ तुम कुछ बोल क्यों नहीं रही? इतनी देर से खामोश हो. क्या तुम्हे नेहा दीदी की बात बुरी लग गयी क्या.

कल्पना : स्माइल ) नहीं तो , ऐसी बात नहीं है .

अमित : तो फिर क्या बात है?

कल्पना : स्माइल ) कुछ भी तो नहीं. मैं तो बस परसों की पार्टी क बारे में सोच रही थी .

अमित : ाचा तुम ज़रा ये आर्डर देखो मुझे शीना से एक ज़रूरी बात करनी है.

कल्पना : क्या बात करनी है?

अमित : चलो तुम भी आ hi जाओ खुद hi पता चल जायेगा.

मैं और कल्पना सबके खाने पीने का सामान ले कर वापिस आये तो सब खाने पर टूट पड़े .

अमित : शीना

शीना : हम्म्म

अमित : थैंक यू वैरी मच

शीना : किस लिए

अमित : मुझे राधा ने सब बता दिया है जो भी तुमने किया. तुम ने मुझ पर एहसान किया है राधा को बचा कर.

शीना : एहसान ? ये तो मच भी नहीं उसके सामने जो तुमने मेरे लिए किया है. पहले मेरी जान बचाई और फिर नयी ज़िन्दगी देकर इतने अचे दोस्त भी दिए. तुम्हारे लिए अगर मुझे जान भी देनी पड़ी तो मैं खुद खुशनसीब समझूंगी.

कल्पना : ोये अब क्या सन है मुझे भी तो बताओ.

मीनल : मैं बताती हूँ. हमारे एक सीनियर ने राधा क साथ गलत हरकत करने की कोशिश की थी तो शीना दीदी ने उसकी अचे से खबर ली. और पता है मोहित ने भी अचे से धुलाई की थी उसकी .

कल्पना : ाचा !! दो दिन हम बहार क्या गए इतना कुछ हो गया यहाँ ? तुम सब न अब संडे क संडे मेरे से ट्रेनिंग लेनी शुरू करो. दोबारा कभी ऐसा हो तो खुद hi धुलाई कर देना इतना मैं त्रिनेड कर दूंगी . शीना दीदी ब्रावो , आप ने तो दिल जित लिया. ये जो है न गुड़िया स इसी में जीन की जान है.

मीनल : अब ये जीन कहाँ से आ गया भाई ?

कल्पना : ये जो सामने बैठा है ये क्या जीन से काम है .

कल्पना का इशारा मेरी तरफ था जिस से सब हसने लगे पर राधा क गाल शर्म से लाल हो गए .

अमित : तुम्हे मैं जीन नज़र अत हूँ ?

कल्पना : और नहीं तो क्या , जगह नहीं देखते माहौल नहीं देखते बस भीड़ जाते हो. अपनी तो परवाह है hi नहीं जैसे तुम्हे कुछ हो hi नहीं सकता . कैसे भीड़ गए थे वहां पर भी सब से अकेले. ज़रा भी नहीं सोचा क साथ में लड़की भी है .

कल्पना ने वो बात छेड़ hi दी जिसके लिए मैंने उसे मन किया था अब तीर कमान से निकल चूका था तो वापिस आने से रहा . मैंने अपने सर पर हाथ मारा तो कल्पना को एहसास हुआ क वो क्या कह गयी है. तब तक सब खाना पीना छोड़ कर मेरी तरफ और कल्पना की तरफ देख रहे थे.

नेहा दीदी : कल्पना क्या कह रही है अमित , क्या हुआ था उस शहर में ?

अमित : कक को कुछ भी तो नहीं दीदी पता नहीं ये क्या कह रही है.

राधा : कल्पना तुम बताओ क्या हुआ था . सच सच बताओ तुम्हे मेरी कसम .

कल्पना: ( मेरी तरफ देखते हुए ) सॉरी यार ,,

वो क्या है न हम दोनों रत का खाना खा कर सैर करने निकले थे क वहां ........

कल्पना ने एक एक कर क साडी बात बता दी और मैं सर नीचे कर क बैठा रहा .

नेहा दीदी : चिंता में ) तुझे गोली लगी थी और तूने किसी को बताया तक नहीं ?? दिखा मुझे कहाँ लगी है तुझे गोली .

अमित : अरे दीदी ऐसा कुछ नहीं है वो बस छू कर निकली थी गोली.

नेहा दीदी : मुझे कुछ नहीं सुन्ना मुझे अभी क अभी दिखा.

नेहा दीदी का गाला रूंध गया था बोलते बोलते . अपने लिए उनका ये प्यार और चिंता देख कर मैंने भी उनकी बात मानते हुए T-shirt को गले से एक तरफ खिंच कर कंधे पर लगी पट्टी दिखा दी जो ज़ख़्म क ऊपर लगी हुई थी. दीदी ने पट्टी क ऊपर से hi हल्का हाथ रखा और उठ कर मुझे अपने गले से लगा लिया.

नेहा दीदी : क्यों करता है ऐसा बोल ?? तुझे ज़रा भी परवाह नहीं किसी की? तू जनता है न एक hi तो भाई है तू मेरा. तुझे अगर कुछ हो गया तो किसे भाई कहूँगी मैं? किसे राखी बांधूंगी? सब तुझे कितना प्यार करते हैं और तू ऐसे हर जगह खतरे मोल लेता फिरता है.

अमित : सॉरी दीदी , पर आप hi बताओ उस लड़की की जगह अगर मेरी कोई बहिन होती तो क्या मैं देखता रहता? वो भी तो किसी की बेटी किसी की बहिन होगी न? मैंने वही किया जो मुझे ठीक लगा . आप चिंता मत करो, आप सब क प्यार का कवच मुझे कुछ होने hi नहीं देगा.

नेहा दीदी : तू सच में फरिश्ता है मेरे भाई जो हर किसी क लिए जान की बाज़ी लगा देता है. भगवन हर जनम में मुझे तेरी बहिन बनाये.

अमित : आप भी मेरी प्यारी दीदी हो. अब ये रोना बंद करो. और बैठो यहाँ पर . ये सिर्फ खरोंच hi है कोई गहरा ज़ख़्म नहीं है. देखले कल्पना तूने दीदी को रुला दिया.

कल्पना : सॉरी दीदी , आप ऐसे मत रोइये. वर्ण ये मुझसे नाराज़ हो जायेगा .

मोहित : तूने ये बात मुझे भी नहीं बताई ? ाचा दोस्त है !

अमित : सॉरी यार , मैं नहीं चाहता था क कोई परेशां हो. सोच अगर घर पर किसी को पता चल जाता या अंकल आंटी को पता चल जाता तो वो कितना नाराज़ होते .

मोहित से बात करते हुए मेरी नज़र राधा पर पड़ी जो चुपचाप आंसू बहा रही थी . और मुझसे नज़र मिलते hi उठ कर बहार को चल दी. मैं जल्दी से उठा और पीछे से उसका हाथ पकड़ लिया.

अमित : कहाँ जा रही हो राधा ?

राधा : रट हुए ) तुमसे मतलब ? मैं हूँ hi कौन ? मुझसे हर बात पूछ लेते हो और खुद इतनी बड़ी बात मुझसे छुपाई तुमने ? बस यही जगह है मेरी तुम्हारी नज़रों में ?

मैंने राधा को खींच कर गले से लगा लिया. वो मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी और मेरी छाती पर अपने कोमल हाथों से मुक्के भी मरे पर मैंने उसे उसे अपनी छाती से लगा कर नहीं क घेरे में ले लिया और वो हिचकियाँ लेती शांत होने लगी . मेरा एक हाथ उसके सर को सेहला रहा था और दूसरा हाथ उसकी पीठ पर था.

अमित : शह्ह्ह्हह्ह सब ठीक है , कैच भी तो नहीं हुआ मुझे. मैं जनता था क तुम ऐसे hi रियेक्ट करोगी इसी लिए नहीं बताया था . पर मैं बताने वाला था अपने हिसाब से. कल्पना ने पहले hi बता कर देखो तुम्हे रुला दिया. अब शांत हो जाओ देखो सब देख रहे हैं और हम इस वक़्त घर पर नहीं कैंटीन में हैं .

मेरे इतना कहते मेरी बाँहों में सुकून ले रही राधा मुझसे अलग हुई.

राधा : इतनी आसानी से नहीं छोड़ने वाली तुम्हे. माँ को बताउंगी वो अचे से खबर लेंगी तुम्हारी .

अमित : प्लीज ऐसा मत करना वर्ण मौसी क साथ साथ सबको पता चल जायेगा और मेरी सहमत आ जाएगी और फिर माँ का क्या भरोसा कॉलेज छुड़वा कर गाओं वापिस hi न बुलवा ले.

राधा : तो फिर क्यों करते हो ऐसे काम?

अमित : अब मैं कहाँ करता हूँ बस खुद hi हो जाते हैं चलो आओ बैठो लेक्चर भी ख़तम होने वाला है .

मैंने इतना कहा hi था क बेल्ल बज गयी. पर हैरानी की बात थी हम में से कोई भी अपनी जगह से नहीं उठा. जैसे किसी ने बेल्ल सुनी hi न हो. मैं राधा को लेकर वापिस चेयर पर बैठ गया सबकी नज़रें मेरी तरफ hi थी.

अमित : क्या हुआ ? लेक्चर लगाने नहीं जाना किसी ने?

मीनल : लेक्चर से ज़रूरी ये टॉपिक है इस वक़्त , मतलब तुम हर जगह हीरोगिरी करते रहते हो ? और मैं समझ रही थी क मोहित hi हीरो बन रहा है. अब समझ आयी ये सारा असर hi तुम्हारा हो रहा है. न बाबा न तुम तो इन सब से दूर hi रहना मोहित. क्या पता कल को तुम्हे कोई चोट लग गयी तो?

कल्पना : पल्लू से बांध कर रख लिओ इसे कहीं सर्दी जुकाम hi न हो जाये शादी क बाद .

कल्पना की बात पर एक बार फिर सब हंस दिए और मोहित बगलें झाँकने लगा . राधा अब शांत हो चुकी थी और मेरा हाथ पकड़ कर साथ hi बैठी थी पर जैसे hi मेरी नज़र रीमा पर पड़ी तो उसकी अंकों में भी नमी थी पर ऊपर से मुस्कुरा रही थी .

शीना : सच में यू अरे थे बेस्ट. वाइस कौन थी वो जिसकी तुमने मदद की और ये शेरा कौन था?

कल्पना : शेरा वाला किस्सा तो इन महाराज ने शायद किसी को बताया hi नहीं होगा पहले . मैं hi बता देती हूँ . वो अमित को कुछ महीनो पहले सड़क पर घायल मिला था तो इसने उसकी जान बचाई थी. और उस दिन बी चांस वो वहां पहुँच गया जब वो गुंडा अमित पर गोली चलने वाला था. और पता है शेरा बहुत बड़ा डॉन है उस शहर का मगर अचे लोगों क साथ गलत नहीं होने देता वो .

शीना : रियली ? फिर तो पापा को भी पता होगा.

मोहित : मैं भी पूछूंगा पापा से.

अमित : अबे मरवाएगा क्या ? क्या कहेगा अंकल से तू कैसे जनता है शेरा को? रहने दे तू कोई बात मत करियो. मैं खुद hi तुझे उस से मिलवा दूंगा.

शालू : उस लड़की से तुम्हारी कोई बात नहीं हुई ?

कल्पना : बात ??? वो तो प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन में भी पहुँच गयी थी इससे मिलने . किसी बहुत बड़े वकील की बेटी थी और खुद भी वकील थी इसी लिए तो हमला हुआ था उस पर . वैसे थी वो भी स्मार्ट .

कल्पना ने मेरी टांग खींचने क लिए ऐसी बात की थी.

अमित : मुझे मिलने आयी थी ?? वो इन्वितेद थी वहां पर . ऐसे बातें न बनाओ

कल्पना : ाचा ?? तो क्या करने गयी थी तुम्हारे और अंकल क साथ ? बताओ बताओ

मीनल : ाचा तो बात यहाँ तक पहुँच गयी हम्म्म

अमित : तुम सब भी क्या उसकी बातों में आ गए . असल में उसके पापा को अंकल अचे से जानते थे और उस लड़की को भी. सुमन नाम था उसका. लीगल इश्यूज पर hi बातें कर रहे थे वो न की मेरी बातें. खुद hi सोचो अगर मेरी बात की होती तो क्या अंकल को न पता होती?

नेहा दीदी : अब बस करो ये बात , मैं और नहीं सुन्ना चाहती. और तुम ( अमित ) खुद को ज़रा संभल कर रखा करो. मन क गलत कुछ भी तुझसे बर्दाश्त नहीं होता पर काम से काम सेफ्टी तो देख सकते हो न. भगवन लम्बी उम्र करे उस शेरा की जिसने तुम्हारी जान बचाई सही समय पर आ कर.

सब लोग ऐसे hi बातें करते रहे और एक लेक्चर और ख़तम हो गया. अब हमारा तो एक hi लेक्चर रह गया था आर्ट्स वालों का इस लिए हमने तो क्लास में न जाने का फैसला कर लिया मगर नेहा दीदी रीमा और राधा उठ कर अपने लास्ट 2 लेक्चर लगाने क लिए चल दी. मीनल को मोहित ने hi कहीं जाने न दिया. रीमा जाते जाते मुझे आँखों से इशारा कर रही थी पर मैं समझा नहीं. उनके जाने क बाद यहाँ फिर से हमारी गपशप चालू हो गयी . कुछ देर बाद hi मेरा फ़ोन विबेराते हुआ तो देखा रीमा का मैसेज था वो मुझे लाइब्रेरी में बुला रहा थी. मैं समझ गया वो कहाँ होगी. मैं बाथरूम जाने का बहाना कर के दौड़ता हुआ लाइब्रेरी की तरफ गया. रीमा जहाँ हर बार मुझे मिलती थी मैं वहीँ पहुँच गया पर वो वहां नहीं थी और इस वक़्त इस हॉल में भी कोई नहीं था. मैंने सोचा रीमा शायद अभी नहीं पहुंची होगी इस लिए वहीँ पर खड़ा हो कर वेट करने लगा . मगर तभी पीछे से वो ज़ोर से मुझसे चिपक गयी . मेरी छाती को दोनों हाथों से ज़ोर से पकडे वो मेरी पीठ पर ऐसे लगी थी जैसे मेरे अंदर hi समां जाएगी. उसके नरम रुई क गोले मेरी पीठ पर दबे हुए थे. तभी मुझे ऐसे लगा जैसे मेरी पीठ गीली हो रही है और रीमा सिसकियाँ के रही है. मैंने उसे ज़ोर लगा कर अपनी पीठ से अलग किया और अपने सामने खरा कर लिया. रीमा सच में रो रही थी और उसका चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ था . रीमा क चाँद से चेहरे को यौन आंसुओं में भीगा देख मुझे ाचा नहीं लगा और मैंने तुरंत उसे अपने सीने में भींच लिया.

अमित : ये क्या ? तुम रो रही हो ? नहीं रीमा प्लीज ऐसा मत करो मैं ये बर्दाश्त नहीं कर सकता प्लीज चुप हो जाओ.

रीमा फिर भी रोटी रही और अब वो हिचकियों क साथ रोने लगी थी.

रीमा : रट हुए ) अगर हहह अगर तुम्हे कुछ हहहह हो जाता तो . हहहह हहहह

रीमा रोये जा रही थी और उसकी ये हालत मुझसे देखि नहीं जा रही थी.

अमित : मुझे कुछ नहीं हो सकता , तुम्हारा प्यारा मुझे कुछ होने नहीं देगा रीमा. इतनी से बात से दर गयी तुम? क्या तुम्हे अपने प्यार पर इस भगवन भरोसा नहीं है हम्म्म ?

रीमा : रट हुए ) मुझे किसी पर भरोसा नहीं है किसी पर नहीं हहहह हहहहह. भगवन तब भी था जब बचपन में मेरे पापा मुझे छोड़ गए . हहहह हहहह मैंने माँ को बचपन से अकेले में रट देखा है. हहह हहह माँ तो पता नहीं कैसे बर्दाश्त कर गयी पर मैं नहीं कर पाऊँगी. मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती . अगर तुम्हे कुछ हुआ तो तुमसे पहले मैं .....

मैंने रीमा की बात ख़तम होने से पहले उसके मुँह पर हाथ रख दिया.

अमित : बस इससे ज्यादा नहीं. मैं वडा करता हूँ तुम्हे छोड़ कर कहूं नहीं जाऊंगा . मौत भी आ गयी तो उसे लौटा दूंगा पर तुम्हे अकेला नहीं छोडूंगा. अपने प्यार पर भरोसा रखो रीमा . मैं जनता हूँ तुम्हारे अंदर एक सूनापन और दर है जो तुम्हारे पापा क जाने से और माँ को तकलीफ में देख कर है. पर अब और नहीं, ये दर ये सूनापन बहार निकल कर यहाँ सिर्फ अपना प्यार भर दूंगा.

रीमा : मुझे इतना प्यार दो क मुझे प्यार क सिवा कुछ और महसूस hi न हो. अगर जियूं तो तुम्हारे साथ और अगर मरुँ तो तुम्हारी बाँहों में .

प्यार और दर्द क इस पल में हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देखते हुए कब एक दूसरे में समां गए ये पता भी न चला. रीमा क शहद से मीठे और फूलों से कोमल होंठ पीटा हुआ मैं उसके दर्द को जैसे पी लेना चाहता था. रीमा की ऑंखें बंद हो गयी थी पर चेहरे पर बानी आंसुओं की लकीर मैं देख रहा था. रीमा क अंदर का दर और ये सूनापन मैंने आज पहली बार महसूस किया था और मन hi मन सोच रहा था क मैं रीमा को इतना प्यार दूंगा क वो ये सब भूल जाये.

हम दोनों एक दूसरे की बाँहों में समाये इस चुम्बन में जैसे एक दूसरे क दिल का हल जान रहे थे. रीमा की बहन मेरे गले में थी और मेरा हाथ उसके सर क पीछे तो दूसरा उसकी कमर पर. इतनी तन्मयता से ये चुम्बन चल रहा था क सीधा आत्मा तक एक ठंडक सी महसूस हो रही थी. न कोई उतावला पैन न आसपास की खबर. पता नहीं कब तक हम ऐसे hi एक दूसरे में खोये रहे और ये किश लेक्चर की घंटी बजने टूटा.

अमित : लेक्चर इतनी जल्दी ख़तम हो गया? हमें चलना चाहिए .

रीमा : अभी कहीं मत जाओ न , मैं कुछ देर और ऐसे hi तुम्हारी बाँहों में रहना चाहती हूँ.

अमित : जाना तो पड़ेगा न, बाथरूम जाने का बोल कर आया था वो सब मुझे ढूंढने लग जायेंगे . और तुम्हे भी तो क्लास में जाना है. चलो अब चलते हैं.

रीमा : फिर कब मिलोगे? मैं यहाँ से दूर कहीं तुम से मिलना चाहती हूँ. जहाँ हम दोनों क इलावा कोई न हो. क्या मुझे इतना टाइम दे सकते हो?

अमित : तुम कुछ कहो और मैं न करूँ ऐसा हो सकता है? जब तुम कहोगी हम कहीं घूमने चलेंगे अकेले में. बिना किसी को बताये.

रीमा : और अब यद् रखना अब ये तुम्हारी जान तुम्हारी नहीं मेरी है . इस लिए मेरी जान को दुबारा ऐसे कभी मुश्किल में मत डालना वर्ण तुमसे पहले मैं.... ममममममायआह्हः

रीमा को बात पूरी करने से पहले मैंने चुप

करवा दिया उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर.

अमित : इससे आगे कुछ नहीं बोलना कभी . तुम्हे कुछ नहीं होने दूंगा मैं क्यूंकि तुम मेरी जान हो और अपनी जान क साथ तुम्हारी जान का भी ख्याल रखूँगा ठीक है.

रीमा ने फिर से एक बार मुझे किश किया और अपना चेहरा ठीक करती हुई मुस्कुराती हुई चली गयी. मैं भी उसके पीछे लाइब्रेरी से निकल गया कैंटीन की तरफ.

कल्पना : बाथरूम गए थे या कुआँ खोदने गए थे ? इतनी देर लगती है क्या ?

मीनल : क्या पता कुआँ hi खोद रहा हो हे हे हे

अमित : ो यार फ़ोन आ गया था घर से बात कर रहा था. अब यहीं बैठना है या चलें?

शीना : कुछ देर और बैठते हैं फिर चलते हूँ अभी तो लेक्चर शुरू hi हुआ है तो वहां जा कर भी खड़े hi रहना है.

इतने में नीरज भी कैंटीन में आ गया उसके हाथ में मेरा बैग था.

नीरज : ले भाई तेरा बैग , सुबह से गाड़ी में पड़ा था अब जाते वक़्त यद् आया.

अमित : थैंक्स भैया , वर्ण बैग लेने मुझे आपके घर आना पड़ता .

नीरज : फिर तो गलती हो गयी , इसी बहाने तू घर तो अत. माँ कई बार कह चुकी है और तू है क अत hi नहीं .

अमित : आऊंगा भैया पर अभी तो मुश्किल ा है आज बड़ी मौसी क यहाँ जाना है . बुआ से कहना फिर किसी दिन आऊंगा.

नीरज : चल ाचा मैं चलता हूँ और हाँ आज छुट्टी है प्रैक्टिस से हम लोगों क लिए , कोच साहब ने कहा है आराम करो.

नीरज बैग देकर चला गया और मैंने अपने दूसरे ट्रॉफी वाले बैग और नोटबुक एक जगह कर क रख दिया.

कल्पना : आज तो छुट्टी मिल गयी तो शाम को क्या कर रहे हो ? आज आ सकते हो घर?

अमित : अरे कहाँ यार ? आज तो बड़ी मौसी क घर जाना है. यहाँ से सीधा उनके पास hi जाऊंगा. वर्ण वो नाराज़ हो जाएँगी.

कल्पना : नाराज़ होते हुए ) कोई न कोई बहाना तैयार रहता है तुम्हारे पास.

अमित : बहाना नहीं है यार तुम समझा करो वैसे भी अब पार्टी पर तो जाना hi है न परसों.

कुछ देर बातें करने क बाद हम साइंस ब्लॉक में चले गए और लेक्चर ख़तम होते hi राधा रीमा नेहा दीदी भी आ गए. पार्किंग में राधा मेरे पास आ कर कड़ी हो गयी घर जाने क लिए

अमित : राधा आज मैं बड़ी मौसी क घर जा रहा हूँ. आज तुम कल्पना क साथ चली जाओ.

राधा : तो क्या मुझे घर भी नहीं छोड़ सकते? उधर से hi चले जाना तुम .

अमित : ऐसे करने से मुझे तो रास्ता लम्बा पड़ेगा न .

राधा : ( मायूस होते हुए ) ाचा ठीक है मैं कल्पना क साथ hi चली जाती हूँ.

इतना कह कर राधा जाने लगी तो मुझे उसे निराश करना ठीक नहीं लगा.

अमित : ाचा चलो ठीक है , पर सिर्फ आज hi. रोज़ रोज़ नहीं जाऊंगा मैं वर्ण टाइम तो इधर hi ज्यादा लगा जायेगा और मौसी नाराज़ होंगी.

राधा : खुश होते हुए ) ाचा ठीक है चलो. वैसे मौसी नाराज़ नहीं होंगी अगर तुम मुझे घर छोड़ डोज तो.

राधा चेहेक्ति हुई मेरे पीछे एक हाथ में बैग पकड़ कर दूसरा हाथ मेरी कमर पर रख कर बैठ गयी. सब ने एक दूसरे को bye किया और अपने अपने रस्ते निकल गए . राधा को घर पर ड्राप कर क मैं बहार से hi निकल गया . उसने बहुत कहा मुझे अंदर आने को पर मैंने मन कर दिया क्यूंकि दिव्या मौसी तो खाना खाये बगैर जाने नहीं देती और फिर उधर रजनी मौसी और नैना दीदी नाराज़ हो जाती. मैं बाइक को हवा में उडाता हुआ जल्दी से रजनी मौसी क घर पहुँच गया. मैंने अभी बाइक रोकी hi थी क मौसी क घर का गेट खुला और नैना दीदी मुस्कुराती हुई बहार आ गयी .

नैना दीदी : तो आखिर आ hi गए तुम , मैं कब से वेट कर रही थी इतनी देर कैसे हो गयी ?

अमित : देर कहाँ हुई मैं तो टाइम पर hi आया हूँ. पर आप इतनी जल्दी आ जाती हैं ?

नैना दीदी : मैं तो आज गयी hi नहीं कॉलेज

अमित : वो क्यों ?

नैना दीदी : शरमाते हुए ) तुम जो आ रहे थे आज . सुबह से माँ क साथ तयारी करवा रही थी चलो अंदर आ जाओ माँ कब से तुम्हारा इंतज़ार कर रही है.

मैं बैग कंधे पर उठाये अंदर आया hi था क सामने hi रजनी मौसी मुस्कुराती हुई आ रही थी और आते hi मुझे गले लगा लिया.

रजनी मौसी : आ गया मेरा बीटा , जग जग जियो हमेशा खुश रहो. कितने दोनों बाद देख रही हूँ. तुझे तो अपनी बड़ी मौसी की यद् hi नहीं अति .

अमित : अरे ऐसा क्यों कह रही हैं आप ? मैं भला अपनी सबसे प्यारी मौसी को भूल सकता हूँ. आप जितना प्यार तो मुझे कोई नहीं करता होगा.

रजनी मौसी : बस बस बातें न बना अब चल जल्दी से अंदर तेरी पसंद का खाना बनाया है मैंने. ला ये बैग मुझे पकड़ा दे.

अमित : अरे रहने दो मौसी आप चलो ये मैं खुद hi पकड़ लेता हूँ.

अंदर आ कर मैंने बैग साइड में रखा और सोफे पर बैठ गया . रजनी मौसी किचन में चली गयी और नैना दीदी मेरे पास बैठ गयी .

नैना दीदी : शुक्र है तुम्हारा आना हुआ वर्ण मुझे तो लग रहा था क तुम्हे उठा कर लाना पड़ेगा .

अमित : है है है उठा कर ?? पर मैं तो आपसे उठने वाला नहीं .

नैना दीदी : क्यों नहीं उठोगे पहले भी तो अपने ऊपर उठाया था न तुम्हे

अमित : मुझे उठाया था ? बचपन की बात कर रही हो आप ?? हम अब बड़े हो गए हैं . और मैं बहुत भरी हूँ आपसे.

नैना दीदी : पता है कितने भरी हो , और मैं बचपन की नहीं अभी की hi बात कर रही हूँ. भूल गए जब मेरे ऊपर लेते थे .

नैना दीदी ने धीमी आवाज़ में ये कहा और मेरी आँखों में देख कर शरारती मुस्कान दी . मुझे उनकी बात समझ आयी तो मैं झेंप गया. इतने में मौसी पानी ले आयी .

रजनी मौसी : ले बीटा पानी पि ले. और तू यहाँ क्या कर रही है. सुबह से लगी हुई थी अमित आ रहा है ये करो वो करो. अब खुद यहाँ चिपक कर बैठ गयी है. चल मेरे साथ खाना लगा इसके लिए. कारन भी अत होगा.

नैना दीदी मौसी क साथ किचन में चली गयी पर मैं सोचने लगा क नैना दीदी मेरे यहाँ रहते अब मुझे छोड़ने नहीं वाली . वैसे भी वो कब से कह रही थी मिलने को और मैं मिलने नहीं गया था. अब तो घर में हूँ तो ज़रूर कुछ न कुछ करेंगी. थोड़ी देर में hi मौसी और नैना दीदी ने मेरा और अपना खाना लगा दिया. वाकई मौसी ने बहुत कुछ बनाया था मेरे लिए और सब कुछ मेरी पसंद का hi था . रजनी मौसी शुरू से hi मुझे सबसे ज्यादा प्यार करती आयी थी.

अमित : मौसी आप ने इतना कुछ बना लिया. ये सब मैं कैसे खाऊंगा.

रजनी मौसी : क्यों क्या हुआ? घोड़े जैसा हो गया है तू तुझे क्या मुश्किल है खाने में हाँ? चल खा जल्दी से. मैंने इतने प्यार से तेरे लिए बनाया है.

नैना दीदी : सही कहा माँ घोडा hi है ये और लम्बी रेस का घोडा है .

नैना दीदी ने बात करते हुए फिर से शरारती मुस्कान से ये कहा तो उनकी बात का मतलब मैं समझ गया . पर मौसी को कहाँ पता था क दीदी क्या कह रही है .

रजनी मौसी : तू चुप कर मेरा बीटा है मैं जो कहूं तू नहीं कह सकती इसे कुछ . चल बीटा शुरू कर.

हमने खाना खाना शुरू किया तो कारन भैया भी कॉलेज से वापिस आ गए . मुझे देखते hi वो रुक गए .

रजनी मौसी : आ गया बीटा अजा खाना खा ले देख आज अमित आया है अब ये यहीं रहेगा .

कारन : मुझे भूख नहीं है मैं बाद में खा लूंगा. और इसे आप अपने पास सुला लेना मेरे कमरे में जगह नहीं है . इतना कह कर कारन भैया जाने लगे तो मैं उनसे गले मिलने क लिए आगे बड़ा पर मेरी छाती पर हाथ रख उन्होंने रोक दिया .

कारन : बस बस दूर से hi ठीक है मुझे ये सब पसंद नहीं . मैं जा रहा हूँ आराम करने .

इतना कह कर कारन भैया ऊपर चले गए . मैं वहीँ खड़ा उन्हें देखता रहा . मुझे समझ नहीं आ रही थी वो ऐसा बेहवे क्यों कर रहे हैं. वहीँ रजनी मौसी और नैना दीदी भी सब नोट कर रही थी.

रजनी मौसी : पता नहीं क्या हो गया है इस लड़के को. जब देखो दिमाग ख़राब रहता है इसका. जब से इस शहर में आये हैं ये चिड़चिड़ा हो गया है. आ बीटा तू कहाँ खा उसकी बात पर ध्यान मत दे . पता नहीं किन लोगों में रहता है जो ऐसा होता जा रहा है.

मैं चुप चाप अपने जगह पर बैठ कर खाना खाने लगा . कारन भैया की इस हरकत से सबका मूड ऑफ हो गया था और ख़ामोशी से hi खाना खा रहे थे .

नैना दीदी : ोये ऐसे चुप क्यों है तू? तेरे से तो पार्टी लेनी है मैंने . जीत कर आया है और मुँह तक मीठा नहीं करवाया .

अमित : ले लेना पार्टी दीदी मैंने कब मन किया . सॉरी वो मैं भूल गया पर अभी कहाँ खा कर ले अत हूँ कुछ मीठा.

रजनी मौसी : ये जो इतना कुछ बनाया है ये काम है? ये हलवा और खीर मुँह मीठा करने क लिए hi तो बनायीं थी मैंने. मेरा बीटा जीत कर आया है तो मुँह मीठा सबका करवाना था न मैंने.

नैना दीदी : आप तो रहने दो माँ, आप ने तो उसे दिन मिठाई मंगवा कर खिला दी थी सबको पर इसको भी तो ध्यान रखना चाहिए न.

रजनी मौसी : अभी कॉलेज से तो आ रहा है सीधा . करवा देगा मुँह मीठा बोल तो रहा है. चलो अब खाना हो गया मैं बर्तन उठती हूँ तो अमित क लिए ऊपर अपने साथ वाला रूम तैयार करदे . वहां का सामान उठा कर बालकनी में रख देना मैं बाद में देख लुंगी उसका क्या करना है .

रजनी मौसी बर्तन समेटने लगी तो नैना दीदी ने मुझे अपने साथ ऊपर चलने को कहा. मौसी क घर में नीचे किचन हॉल बाथरूम और 2 कमरे थे. एक मौसी का एक निधि दीदी का. ऊपर तीन कमरे थे एक कारन भैया का एक नैना दीदी का और एक ऐसे hi सिंगल बीएड लगा कर कुछ सामान रखा हुआ था . ये ज़रूरत क वक़्त काम में लाया जाने वाला कमरा था जो बाकि कमरों से थोड़ा छोटा था इसके इलावा बालकनी क लिए जगह छोड़ राखी थी आगे . नैना दीदी मुझे उसी छोटे कमरे में ले आयी . कारन भैया क रूम का दरवाज़ा बंद था . इस रूम में आते hi दीदी ने दरवाज़ा बंद किया और मुझे धक्का दे कर दीवार से लगाया और मुझ पर झपट पड़ी . अपने कोमल होंठों में मेरे होंठ पकड़ कर वो किश करने लगी.

नैना दीदी : उनममममम उम्मम्माह्ह्ह मुँह मीठा तो मैं अभी करुँगी बाद की बाद में देखेंगे. उम्म्म्म ुकम्म्म्म

नैना दीदी बहुत प्यासी थी शायद जो मुझ पर हावी होती जा रही थी. वो मेरे साथ ऐसे चिपक रही थी जैसे चन्दन पर नाग लिपट जाते हैं. अपनी एक तंग घुटने से मोड़ कर वो मेरी कमर पर रगड़ रही थी . मेरा एक हाथ खुद hi उन्होंने अपने एक उभर पर रख लिया . मैंने भी उनका साथ दिया और किश करते हुए जब उनके कच्चे आम से थोड़े सख्त उभर दबाये तो उनके मुँह से सिसकी निकल गयी .

नैना दीदी : आअह्हह्ह्ह्हह कक्कक्कक्स कब से तड़प रही थी मैं तुम्हारे लिए . खुद hi रोग लगाकर कभी मेरा हल तक नहीं पूछने आये तुम. आअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स रगड़ दो उन्हें मसल दो ये सिर्फ तुम्हारे हैं . आअह्ह्ह्हह कक्कक्स उनममममम

मैंने एक हाथ से उनका एक स्तन दबाये हुए दूसरे हाथ से उनके गोल सख्त कूल्हे पकड़ लिए और वो खुद hi अपनी कमर मेरे साथ रगड़ने लगी . मेरा लैंड जो इतने में खाद होने लगा था उसकी अपनी छूट पर महसूस करते hi वो अपनी छूट मेरे लैंड पर दबाने लगी .

नैना दीदी : आअह्ह्ह्हह ककक उम्म्म्म आह्ह्ह्हह ऐसे hi करो हनन ककक बहुत तड़पाया है तुमने मुझे अब मैं सब हिसाब लुंगी तुमसे आअह्ह्ह ककक. उम्म्म

अमित : अपनी आवाज़ बंद कीजिये अगर बहार किसी ने सुन लिया तो मरे जायेंगे. मौसी और कारन भैया घर पर hi हैं . खुद पर कण्ट्रोल कीजिये.

नैना दीदी : इतनी देर से तुम्हे सामने देख कर मैं कण्ट्रोल hi तो कर रही थी कक्कक्स अब नहीं हो रहा मुझे प्यार करो आअह्ह्ह्हह कक्कक्स

अमित : दीदी अब तो मैं आ गया हूँ न सही मौका देख कर करेंगे न जो करना है . ऐसे किसी को पता चल गया तो सोचो क्या होगा ?

नैना दीदी : पर मैं कैसे बर्दाश्त करुँगी मुझे नहीं पता कुछ करो.

अमित : दीदी समझने की कोशिश करो. क्या चाहती हैं मैं यहाँ से चला जॉन?

नैना दीदी : नहीं नहीं ऐसा मत कहो

अमित : तो फिर सही मौके का इंतज़ार करिये. ऐसा कुछ भी जल्दबाज़ी में करने से पूरी फॅमिली में प्रॉब्लम हो जाएगी . हम ये सब बहार जा कर भी तो कर सकते हैं न जैसे पहले किया था.

नैना दीदी : ाचा ठीक है अभी मैं कुछ नहीं करती पर रत को मेरे कमरे में आ जाना .

अमित : अगर मौका हुआ तो ज़रूर. अब चलिए ज़रा कमरा सेट कर लें .

उसके बाद हम दोनों ने कमरे से गलती सामान बहार निकल दिया और दीदी ने बीएड पर नई बेडशीट दाल कर उसे सेट कर दिया. मैंने बस को एक तरफ रख दिया. थोड़ी देर में hi कमरे पूरा तैयार था मेरे लिए . इतने में मौसी भी ऊपर आ गयी . और कमरे का जायज़ा लेने लगी.

रजनी मौसी : हम्म्म ाचा किया शाबाश , किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो तो बता देना और अब थोड़ी देर आराम कर लो.

अमित : ठीक है मौसी आप भी आराम कर लो थक गयी होंगी आप भी इतना काम कर क.

रजनी मौसी : मेरी थकन तो तुझे देख कर hi दूर हो गयी बीटा . इतने सैलून बाद मेरा बीटा मेरे पास आया है . मैं बता नहीं सकती मैं कितनी खुश हूँ. चल अब आराम कर बाद में बात करते हैं.

रजनी मौसी नैना दीदी को साथ लिए कमरे से बहार चली गयी और मैं आराम से लेट गया . पता नहीं कब मेरी आँख लगी पर जगा मैं में ा दीदी क कोमल होंठों की किश से.

नैना दीदी : उम्मम्माआहहह चलो उठो माँ निचे बुला रही है. आकर चाय पिलो फिर तुम्हे जाना भी होगा न

अमित : अगर कोई देख लेता तो? आप को दर नहीं लगता ?

नैना दीदी : ऊपर कोई नहीं है. कारन बहार गया है और घर पर हमारे इलावा सिर्फ माँ है. चाहो तो हम और भी बहुत कुछ कर सकते हैं अभी .

नैना दीदी मेरे ऊपर लेती हुई थी तो मैंने भी उनके दोनों कूल्हे अपने हाथों में लेकर मसल दिए .

नैना दीदी : आअह्ह्ह्ह कक्कक्स इन्हे क्यों बार बार मसलते हो ?

अमित : क्यों की आप क ये मुझसे बहुत अचे लगते हैं. मुलायम और मज़ेदार परफेक्ट शेप में गोल. आप की ये दोनों जगह किसी को भी पागल कर सकती है.

ये कहते हुए मैंने एक हाथ से उनका एक उभर भी मसल दिया .

नैना दीदी : उम्म्म्म न करो न फिर मुझसे कण्ट्रोल नहीं होगा और तुम कुछ करोगे नहीं .

अमित : शुरू किसने किया था ? चलिए उठिये मैं भी फ्रेश हो लूँ.

नैना दीदी ने फिर से एक किश किया और मेरे ऊपर से उठ गयी . मैं भी उठ कर कमरे से बहार निकला और साइड में बने बाथरूम में चला गया फ्रेश होने. कपडे बदलने क बाद मैं नीचे आ गया जहाँ मौसी और नैना दीदी मेरे इंतज़ार कर रही थी.

रजनी मौसी : आ गया बीटा . मैं तेरे लिए चाय लती हूँ.

मुझे बिठा कर मौसी चाय ले आयी तीनो क लिए .

रजनी मौसी : दिव्या बता रही थी तो 5 बजे जाता है स्टेडियम में और वापिस 7 बजे क बाद आता है.

अमित : हाँ मौसी वो प्रैक्टिस क बस ट्यूशन भी जाता हूँ न .

नैना दीदी : तुझे ट्यूशन की क्या ज़रूरत है ? अगर किसी सब्जेक्ट में मदद चाहिए तो बता मैं कर देती हूँ.

अमित : ऐसा है न दीदी वो मेरे मम हैं मुझे अपना छोटा भाई मानते हैं इसी लिए पड़ते हैं बिना किसी फीस क. और सच कहूं तो मुझे बहुत फायदा भी हुआ वर्ण शुरू में तो समझ hi नहीं अत था इंग्लिश की वजह से.

रजनी मौसी : फिर तो बहुत अछि है तुम्हारी मम.

इतने में बहार का दरवाज़ा खुला और निधि दीदी अंदर आती हुई नज़र आयी . अपनी ऑफिस ड्रेस स्काई ब्लू शर्ट और पेण्ट में वो इस वक़्त एक मॉडल hi लग रही थी. वो नज़रें झुकाये अंदर आ रही थी और चेहरे से hi थकी हुई लग रही थी. उन्होंने देखा hi नहीं क मैं सामने बैठा हूँ. मैं अपनी जगह से उठा और दौड़ कर सीधा उनके गले लग गया .

अमित : दीदी !!! मैं जब से आया हूँ तब से आपका इंतज़ार कर रहा था और आप अब आ रही हैं. पता है कितने दिनों बाद देख रहा हूँ आपको .

मैंने निधि दी को अपनी बाँहों में घर लिया था पर निधि दीदी वैसे hi कड़ी रही ऐसा पहले बार हुआ था नहीं तो वो खुद hi मुझे गले लगा लिया करती थी और आज मैंने गले लगाया तो उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भी न लिया . मुझे ये अजीब लगा और उनकी ख़ामोशी भी कुछ कह रही थी . मैं पीछे हटा और उनका चेहरा देखने लगा . ऑंखें लाल थी और चेहरे की रंगत उसी हुई. पर मुझे देख कर ज़बरदस्ती चेहरे पर मुस्कान ले आयी मगर ऑंखें कुछ और hi कहानी सुना रही थी.

निधि दीदी : मेरा प्यारा भाई आ गया तू. कैसा है ?

अमित : मैं तो ठीक हूँ दीदी पर आप ठीक नहीं लग रही . क्या बात है?

निधि दीदी : कुछ नहीं वो ऑफिस से आयी हूँ न तो थक गयी हूँ. तबियत भी थोड़ी ठीक नहीं लग रही .

अमित : पक्का यही बात है ? आप कुछ छुपा तो नहीं रही ?

निधि दीदी : मैं भला क्यों कुछ छुपाउंगी तुझसे .

दीदी की आँखों में मुझे कुछ और hi मज़ार आ रहा था पर वो बात छुपा रही थी. मैंने भी ज्यादा फाॅर्स नहीं किया शायद काम की वजह से कोई परेशानी हो.

रजनी मौसी : क्या हुआ है बेटी ? तबियत कैसे ख़राब हो गयी ? शनिवार को भी तुम्हारी तबियत ख़राब हो गयी थी . डॉ को दिखाओ ज़रा.

निधि दीदी : कुछ नहीं माँ इतनी भी ख़राब नहीं है. ाचा मैं थोड़ी देर आराम करने अपने कमरे में जा रही हूँ . ाचा भाई तुझसे बाद में मुक्ति हूँ आज ज़रा तबियत ठीक नहीं मेरी.

इतना कह कर निधि दीदी अपने कमरे में चली गयी . मैंने भी चाय ख़तम की और मौसी को बता कर निकल गया.

बहार आ कर मैंने बाइक को स्टार्ट करने की कोशिश की तो वो स्टार्ट नहीं हो रही थी. फिर मेरी नज़र तेल की पाइप पर पड़ी तो देखा टंकी से पाइप hi निकली पड़ी थी और सारा तेल निकल चूका था बाइक से.

अमित ( मन में ) अब ये क्या चक्कर चल गया. अछि भली तो थी.

मुझे बाइक क साथ परेशां होता देख कर नैना दीदी पास आ गयी.

नैना दीदी : क्या हुआ बाइक स्टार्ट नहीं हो रही ?

अमित : स्टार्ट कैसे होगी सारा तेल तो निकल गया. पता नहीं ये पाइप कैसे निकल गयी?

नैना दीदी : अब कैसे जाओगे?

अमित : अब तेल का इंतज़ाम करना पड़ेगा.

नैना दीदी : रुक मैं पड़ोस वालों से पूछ कर आती हूँ अगर कोई चीज़ मिल जाये तो.

नैना दीदी पड़ोस वालों से एक स्कूटी मांग कर ले आयी और घर से खली बोतल ले कर मेरे पीछे बैठ गयी. फिर हम दोनों पेट्रोल पंप से पेट्रोल ले ए.

अमित : शुक्र है आपके पड़ोसियों ने मदद कर दी वर्ण बाइक घसीट कर ले जनि पड़ती इतनी दूर. और ये है भी हठी जैसी .

नैना दीदी : दोस्त है मेरी तो मदद कैसे नहीं करती? अब तू जा स्कूटी मैं दे दूंगी उसे.

मैं बाइक ले कर निकल गया सीधा मंजू म क घर . स्टेडियम तो जाना नहीं था तो सोचा आज मंजू म क साथ थोड़ा वक़्त बीतता हूँ. रस्ते से मैंने एक मिठाई का डिब्बा ले लिया उनका मुँह मीठा करवाने क लिए. मैं जब मंजू म क घर पहुंचा तो मेरे बेल्ल बजने. से पहले hi दरवाज़ा खुल गया . मम मुस्कुराती हुई सामने कड़ी थी. मुझे अंदर खींच कर उन्होंने दरवाज़ा बंद कर लिया और मेरे गले लग गयी . मैंने भी मंजू म को कास कर अपने सीने से लगा लिया और उनके मदभरे होंठों को अपने होंठो भर लिया. मम भी मेरा साथ देती हुई मेरे गले में बहन डेल मेरा साथ दे रही थी. हम दोनों किश करते हुए हॉल में आ गए मैं अपने हाथ में पकड़ा डिब्बा एक साइड सोफे पर फेंका और दोनों हाथ मम क कूल्हों क ने हे रख कर उन्हें अपनी गॉड में उठा लिया मम ने भी अपनी टंगे मेरी कमर में लपेट ली.

मंजू म : उम्मम्मम उनमममम सीसीसी उम्मम्मम कब से इंतज़ार कर रही थी उनमममम उम्मम्माआहहह कितने दिनों बाद अब देख रही हूँ तुम्हे उम्म्म्म

अमित : उम्म्म्म क्या करता आज भी उम्मम्मम. प्रिंसिपल सर ने बुला लिया तो क्लास में उम्म्म्म ाः आ नहीं पाया.

मंजू म : आज मुझे जी भर क प्यार करो उम्म्म उम्म्म्म आअह्ह्ह

अमित : मैं खुद भी तो आपसे मिलने क लिए तड़प रहा था. जब से शीना यहाँ आने लगी है आपसे प्यार करने का वक़्त hi नहीं मिल पता.

मैं मंजू म को लिए अभी कमरे में आया hi था क बहार से बेल्ल बज उठी.

मंजू म : लगता है शीना आज जल्दी आ गयी . तुम दरवाज़ा खोलो मैं ज़रा वाशरूम हो कर आयी.

अमित ( मन में ) इसे भी जल्दी आना था आज .

मैंने जा कर दरवाज़ा खोला तो सामने शीना क साथ रीना भी कड़ी थी .

रीना : वह तो आज दर्शन हो hi गए जनाब क. तुम सही थी शीना आज तो ये टाइम से पहले hi आ गए. कोंग्रटुलतिओन्स फिर योर विक्ट्री

इतना कहते हुए रीना और शीना दोनों अंदर आ गयी.

शीना : बाआ कहाँ हो आप ??

अमित : मम अंदर हैं . एंड थैंक यू रीना जी.

रीना : रीना जी नहीं रीना कहा करो. इतनी भी बड़ी मत बनाओ मुझे जी कह क. वो सब छोडो पहले अपनी T-shirt उतरो .

अमित : चौंकते हुए ) मतलब ??

रीना : T-shirt उतरो , शीना ने मुझे बता दिया है जो तुम कर क आये हो वहां कम्पटीशन क इलावा . चलो जल्दी दिखाओ ज़ख़्म कैसा है.

मंजू म : कैसा ज़ख़्म क्या बात हो रही है .

मंजू म भी अपनी हालत ठीक कर क हमारे पास आ गयी.

शीना : इसने तो बताया नहीं होगा आपको मैं बताती हूँ .

शीना मम को साडी बात बताने लगी इधर रीना ने मेरी शर्ट उतरवा दी और मेरे कंधे पर लगी बैंडेज हटा दी .

रीना : हम्म्म्म किस्मत वाले हो ज़ख़्म गहरा नहीं है . पर मैं तुमसे नाराज़ हूँ . तुम्हे क्या ज़रूरत थी गोली क सामने खड़े होने की? तुम्हे अपनी कोई परवाह है क नहीं ? और ये आदमी कहीं वही तो नहीं जिसे तुम मेरी कार में ले क गए थे.

अमित : हाँ ये वही था.

रीना : तुम्हारे अचे काम hi तुम्हारे आगे आ गए वर्ण पता नहीं ......

रीना अपने साथ लायी मेडिकल किट से सामान निकल कर मेरा ज़ख़्म साफ़ कर रही थी और बात करते करते उसका चेहरा भी संजीदा हो गया था. मेरी नज़र मंजू म पर गयी तो उनकी आँखों में भी आंसू थे जिन्हे छुपाते हुए वो फिर से अपने कमरे में चली गयी. मैं समझ सकता था क वो भी दुखी हो रही हैं मेरे साथ हुई इस घटना से.

रीना : लो हो गया , जब तक ये पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता कोई कुश्ती वगैरह मत खेलना और रोज़ मेरे पास आना पट्टी करवाने या मैं यही आ क कर दूंगी. वैसे बॉडी अछि बनाई है तुमने .

डॉ रीना गहरी नज़रों से मेरी छोड़ी छाती और मजबूत कंधे देख रही थी वहीँ शीना का भी यही हल था मैंने जल्दी से T-shirt पेहेन ली.

अमित : मैं आपकी बात ध्यान में रखूँगा. लीजिये पहले मुँह मीठा कीजिये मैं रस्ते से लेकर आया था.

मैंने डिब्बा खोल कर डॉ रीना क आगे कर दिया और उन्होंने के पीेछे मुझे खिलाया और एक खुद खाया शीना ने भी ऐसे hi किया. इतने में मंजू म कॉफ़ी ले आयी.

मंजू म : चलो पहले कॉफ़ी पि लो . अमित ज़रा मेरे साथ आना वो छत से ज़रा सामान उठाना था.

शीना : मैं आती हूँ बुआ

मंजू म : नहीं तुम रीना क साथ बैठो हम अभी आये .

मंजू म क पीछे पीछे मैं भी छत पर आ गया तो मोंटी क पास मंजू म ने पलट कर मुझे कास क पकड़ लिया. मेरे सीने में मुँह डुबाये रोने लगी . मैंने भी उनकी पीठ और सर पर हाथ रख कर उन्हें चुप करवाने लगा. आज पता नहीं क्या बात है पहले राधा फिर रीमा और अब मंजू म सब hi तो रहे हैं.

अमित : आप रो रही हैं ??

मंजू म : तो और क्या करूँ ? अगर तुम्हे कुछ हो जाता तो? तुम जानते हो न कितनी मुश्किल से मैं जीना सीखी हूँ . भैया क जाने क बाद तुम मेरी जीने की वजह बने हो और अगर तुम भी मुझे छोड़ गए तो मैं ...

अमित : शह्ह्ह्हह्ह कुछ नहीं होगा मुझे और न मैं आपको कुछ होने दूंगा . वडा किया है न मैंने आपसे तो भला कैसे जा सकता हूँ आपको ऐसे छोड़ कर? चलिए अपनी हालत ठीक कीजिये वर्ण कहीं शीना पीछे न आ जाये.

मंजू म : बहुत गंदे हो तुम , पहले रुलाते हो और खुल क रोने भी नहीं देते.

अमित : ाचा अगर आप रोना चाहती हैं तो जब यहाँ से करूँगा तो रो लेना .

मैंने मंजू म क मटके जैसे गोल कूल्हे दबाते हुए कहा तो वो मेरी बात से शर्मा गयी.

मंजू म : सही में बिलकुल गंदे हो तुम , कर लेना जो दिल करे मैं नहीं रोकती तुम्हे और मुझे पता है तुम मुझे तब भी रोने नहीं डोज.

मैंने मम क कूल्हे मसलते हुए उन्हें किश करने लगा तो वो भी मेरा साथ देने लगी . हमारी किश वाइल्ड होने लगी थी क नीचे से शीना ने मम को आवाज़ दी तो हम अलग हुए .

अमित : लो आ गयी आपकी सौतें , जब भी प्यार करना होता है बीच में ये आ जाती है.

मंजू म : हस्ते हुए ) सौतें नहीं भतीजी है मेरी और चल अब नीचे कहीं सच में hi ऊपर न आ जाये.

अपनी हालत ठीक करते हुए हम नीचे आ गए . हम चारो काफी देर तक बातें करते रहे . फिर मैं इजाज़त लेकर वापिस आ गया. घर पर अब मौसा जी भी आ चुके थे . मैंने उनके पाऊँ छुए तो उन्होंने भी आशीर्वाद देते हुए पास बिठा लिया . कारन भैया और निधि दीदी दोनों hi नज़र नहीं आ रहे थे मैंने उनका पुछा तो मौसी ने बताया क दीदी की तबियत ठीक नहीं है और कारन भैया अभी घर आये hi नहीं . दीदी क बारे में जान कर मुझे उनकी चिंता होने लगी तो मैं उनके कमरे में चला गया. निधि दीदी घर क आरामदायक कपड़ों में बीएड पर उलटी लेती हुई थी और कमरे में हलकी रौशनी का बल्ब जल रहा था. मैंने जैसे hi बड़ी लाइट ों की तो दीदी उठ कर सीधी बैठ गयी और अपना चेहरा छुपाने लगी . मैंने दीदी की आँखों से बहते आंसू देख लिए थे जिन्हे वो छुपा रही थी. मुझे अंदाज़ा तो पहले hi था क बात कुछ और है और अब तो यकीन हो गया क वो किसी और hi बात को लेकर परेशां हैं. मैं उनके पास बीएड पर बैठ गया और उनका चेहरा अपने हाथों में लिया. उन्होंने ऑंखें बंद कर ली . निधि दीदी का मासूम चेहरा जहाँ मुझे हमेशा एक शांति और प्यार hi नज़र अत था आज वहां दर्द की लकीरें थी. मुझे अपने दिल में दर्द सा महसूस होने लगा. बचपन से hi निधि दीदी ने भाई बहनो में सब से ज्यादा मुझे प्यार किया था और हमेशा मेरी hi साइड लेती थी . मेरा दिल भर आया उनकी इस हालत पर .

अमित : रूंधे गले से) दीदी ऑंखें खोलो , क्या हुआ है आपके साथ ? मैं जनता हूँ आप कुछ छुपा रही हैं. मुझे सच बताइये आखिर क्या वजह आपके इस दर्द की? अगर कोई परेशां कर रहा है तो एक बार बता कर देखिये अपने जा भाई को , वो जो भी होगा उसे ज़िंदा ज़मीन में गाड़ दूंगा जिसने मेरी दीदी को परेशां किया है.

निधि भी दिल से अमित से प्यार करती थी अपने छोटे भाई का अपने लिए प्यार देख कर वो भी खुद को रोक न पायी और अमित को गले से लगा लिया. निधि को पता था अमित उसके लिए कुछ भी कर गुज़रेगा पर उसे इस बात का भी दर था क मैनेजर क पास पैसा भी है और ताकत भी. वो न सिर्फ अमित को नुकसान पहुंचाएगा बल्कि उसकी फॅमिली को बर्बाद भी कर देगा. इस लिए निधि ने फैसला कर लिया क वो अमित को कुछ नहीं बताएगी . निधि ने अमित को गले से लगा लिया क्यूंकि उसने अपने इस छोटे भाई की आँखों में आयी नमी देख ली थी.

निधि दीदी : मेरे भाई मैं जानती हूँ तू मुझे बहुत प्यार करता है. पर तू जो सोच रहा है वैसा कुछ नहीं है. किसी क इतनी हिम्मत है क तेरे होते मुझे कुछ कह दे? तू मेरा प्यारा भाई है न . मैं बस अपनी जॉब की वजह से परेशां थी और कुछ नहीं है.

अमित : आप अभी भी झूठ बोल रही हैं दीदी मैं महसूस कर सकता हूँ. आपकी आँखें आपकी बात का साथ नहीं दे रही हैं . आप मुझे सच बताइये.

निधि दीदी : यही सच है मेरे भाई. तू ऐसे hi चिंता कर रहा है.

अमित : खाइये मेरी कसम क आप सच बोल रही हैं.

निधि दीदी : तू समझता क्यों नहीं , ये hi सच है. और मैं तुम्हारी कसम भूल कर भी नहीं खा सकती. तुझे कभी कुछ हो गया तो मैं खुद को माफ़ नहीं कर पाऊँगी.

अमित : इसका मतलब आप झूठ बोल रही हैं. मुझे सच बताइये वर्ण मैं. ....

निधि दीदी ने मेरे मुँह पर हाथ रख लिया .

निधि दीदी : इससे आगे एक लफ्ज़ भी मत बोलना भाई एक लफ्ज़ भी नहीं. अगर तू मेरी परवाह करता है तो अब मुझसे ये सवाल नहीं पूछेगा. मैं इससे ज्यादा और कुछ नहीं कहना चाहती .

निधि दीदी की आँखों में फिर से आंसू आ गए थे. मैंने दीदी से और कोई सवाल पूछना ठीक नहीं समझा क्यूंकि मैं समझ गया था वो कुछ नहीं बताएंगी पर बात ज़रूर कुछ बड़ी है जो वो छुपा रही हैं इतना तो मैं समझ गया था.

अमित: ठीक है अगर आप की यही मर्ज़ी है तो. पर इतना सुन लीजिये अगर आप क साथ किसी ने भी बुरा किया तो वो अपने पैदा होने पर पछतायेगा.

इतना कह कर मैं गुस्से से दीदी क कमरे से उठ कर बहार आ गया और वो बस मुझे जाता हुआ देखती रही.

निधि ( मन में ) तू समझता क्यों नहीं भाई मैं मजबूर हूँ . मैं अपनी जान दे सकती हूँ पर तुझे कुछ नहीं होने दे सकती और न अपने परिवार को बर्बाद होने दे सकती हूँ. मैं मजबूर हूँ मेरे भाई मैं मजबूर हूँ . मुझे माफ़ कर देना.

मैं गुस्से से निकल कर अपने कमरे में आ गया और बीएड पर लेट गया. दीदी किस बात से इतना दुखी हैं और क्या वजह है क वो बता नहीं रही ये बात मुझे परेशां कर रही थी. मैंने सोच लिया क मैं बात का पता लगा कर रहूँगा. इसके लिए मुझे दीदी क ऑफिस जाना होगा . मैं पता नहीं कब तक इस बारे में सोचता रहा और मुझे पता भी नहीं लगा कब नैना दीदी मेरे पास आ गयी. मुझे पता तब चला जब उन्होंने मुझे हिलाया.

नैना दीदी : कहाँ खोये हो कब से तुम्हे आवाज़ दे रही हूँ . क्या बात है किस बात की परेशानी है?

अमित : अपने निधि दीदी को देखा ? वो बता कुछ रही हैं पर बात मुझे कुछ और लग रही है .

नैना दीदी : मतलब ??

अमित : दीदी अपने कमरे में रो रही थी लाइट बंद कर क और जब मैंने अपने कसम देकर सच जानना चाहा तो उन्होंने साफ मन कर दिया क वो मेरी कसम नहीं खाएंगी. क्या आप कुछ जानती हैं क वो किस वजह से परेशां हैं?

नैना दीदी : लग तो मुझे भी कुछ ऐसा hi रहा है. आज से पहले वो कभी इस तरह खुद को कमरे में बंद नहीं रखती . और तेरे आने पर भी आज वो अपने कमरे से निकल नहीं रही जबकि वो सबसे ज्यादा तुझे hi मानती हैं कारन से भी ज्यादा.

अमित : क्या दीदी को कोई लड़का परेशां कर रहा है ?

नैना दीदी : ऐसा कुछ उन्होंने कभी बताया तो नहीं .

अमित : क्या ऑफिस मैं ऐसा कुछ हुआ है जो आपको पता हो जिससे दीदी परेशां हैं ?

नैना दीदी : मुझे तो नहीं पता कुछ और दीदी ने कभी बताया भी नहीं . हाँ कुछ दिनों से वो कुछ ज्यादा hi बिजी रहने लगी हैं. घर पर भी काम करती रहती हैं . माँ ने पूछा तो कह रही थी वो जॉब चेंज कर लेंगी इसके इलावा तो कुछ नहीं.

अमित : कुछ और बात जो आपको लगे क अलग है ? आप गयी नहीं क्या उनके ऑफिस कभी ?

नैना दीदी : एक hi बार गयी हूँ इसी सैटरडे को वो भी इस लिए क उनकी तबियत ख़राब हो गयी थी. माँ को दीदी का फ़ोन आया था क उनकी तबियत ख़राब है और फिर वो बाद में फ़ोन नहीं उठा रही थी मैंने भी बहुत बार तरय किया फिर मैं करुणा क साथ ऑफिस पहुँच गयी और इधर से माँ भी. ऑफिस में किसी की बर्थडे पार्टी मन रहे थे सब पर दीदी अपनी जगह पर नहीं थी . जिस लड़की का बर्थडे था उसने कहा क दीदी चली गयी है पर दीदी का सामान उनके केबिन में hi पड़ा था . फिर वो लड़की दर गयी थी और करुणा ने उसका हाथ तक मरोड़ दिया था. मगर फिर मैनेजर वहां आ गया और उसने बताया क दीदी बेहोश हो गयी थी . दीदी क होश में एते hi हम उन्हें घर ले ए . ये हो सकता है क जिस तरह हमने उस दिन उस लड़की से बेहवे किया शायद वो परेशां कर रही हो दीदी को.

अमित : आप मुझे दीदी क ऑफिस का एड्रेस बताओ मैं खुद पता करता हूँ बात क्या है .

नैना दीदी : वो सब बाद में अब निचे आ माँ वेट कर रही है खाना लग गया है.

उसके बाद मैं और नैना दीदी निचे आ गए . निधि दीदी ने तबियत ख़राब होने का कह कर खाना खाने से hi मन कर दिया. और इधर हम सब ने मिला कर खाना खाया. कारन भैया ने खाना कहते हुए एक बार भी मुझे नहीं देखा और न बात की. पर मैं इस वक़्त सिर्फ निधि दीदी क बारे में सोच रहा था.

रत का खाना खाने क बाद मैं अपने कमरे में आ कर लेट गया कुछ देर बाद नैना दीदी मेरे पास आयी और रत को अपने कमरे में आने का कहने लगी पर मैंने मन कर दिया. वो भी समझ गयी क मैं दीदी की वजह से परेशां हूँ. रीमा राधा से भी मैंने ठीक से बात नहीं की . रजनी मौसी कुछ देर मेरे पास आ कर घर क बारे में और कॉलेज क बारे में पूछती रही और फिर वो भी मुझे सोने का कह कर चली गयी . मैं पता नहीं कब तक निधि दीदी क बारे में hi सोचता रहा और उनके साथ जो भी मेरी यादें थी वो सब यद् करता रहा . पता नहीं कब मेरी आँख लगी.

सुबह मैं देर से hi उठा. और एक्सरसाइज करने का मन भी नहीं हुआ . फिर से मैं दीदी क बारे में सोचने लगा और सोच लिया क आज कॉलेज नहीं जाऊंगा . आज दीदी क ऑफिस में जाकर सचाई पता करने का इरादा कर लिया आखिर किस वजह से दीदी इतना दुखी हैं. नाश्ता करने क बाद नैना दीदी कारन भैया कॉलेज क लिए निकल गए. निधि दीदी अभी भी कमरे में थी. मैं जाने से पहले उनसे मिलने उनके कमरे में गया . दीदी तैयार हो कर अपने बीएड पर बैठी थी. वो आज ऑफिस ड्रेस में नहीं थी.

अमित : दीदी अब तबियत कैसी है आपकी ?

निधि दीदी : फ़ीली हंसी क साथ ) अछि हूँ तुम कैसे हो

अमित : मैं भी ठीक हूँ. बस कॉलेज जा रहा था सोचा आपसे मिल लूँ. आप इन कपड़ों में कहाँ जा रही हैं ? ये ऑफिस ड्रेस तो नहीं लगती आपकी .

निधि दीदी : वो आज अपनी फ्रेंड क साथ जाना है मुझे उनके घर फंक्शन है.

अमित : अछि बात है , अगर आप कहें तो मैं छोड़ दूँ आपको ?

निधि दीदी : नहीं नहीं तुम जाओ मैं चली जाउंगी . वैसे भी मुझे थोड़ा देर से जाना है.

अमित : ाचा दीदी मैं चलता हूँ. अगर आप मुझे कुछ बताना चाहें तो कभी भी बता सकती हैं . अपने इस भाई पर भरोसा रखिये.

मेरे इतना कहती hi निधि दीदी ने मुझे गले लगा लिया. मुझे उनकी धड़कने महसूस हो रही थी जो बेचैन थी.

निधि दीदी : तू मेरा सबसे प्यारा भाई है. तुम्हे नहीं कहूँगी तो किसे कहूँगी. चल अब जा वर्ण देर हो जाएगी.

दीदी मुझसे अलग हुई तो फिर से उनकी आँखों में नमी थी. पर मैंने कुछ नहीं पूछा और घर से बहार निकल गया . मैं अपनी बाइक को स्टार्ट कर क जाने लगा तो देखा पिछले टायर में हवा hi नहीं है.

अमित : धत्त्त तेरी की. कल पेट्रोल और आज हवा. ये हो क्या रहा है

अब बुलेट को खींचना वो भी बिना हवा क , आप में से किसी ने खिंचा हो तो पता होगा. खैर मैं कोई 15 मिनट्स बाद एक पंक्चर वाले तक पहुंचा. अभी घर से आधा किलोमीटर hi आया हूँगा क इतने में hi कपडे गीले हो गए थे मेरे. सुबह का वक़्त था तो दुकाने भी अभी खुल hi रही थी. मैं वहीँ पंक्चर क पास बैठ गया और उसे पंक्चर लगाने को कहा. सामने hi बड़ी सड़क थी तो टाइम पास क लिए इधर उधर देखने लगा.

पंक्चर वाला : साहब पहले कभी नहीं देखा आपको इधर.

अमित : इधर पास में hi मेरी मौसी का घर है. वहीँ आया हूँ कुछ दिन क लिए.

पंक्चर वाला : तभी नहीं देखा वर्ण यहाँ तो हर कोई बाइक चलने वाला मेरे पास कभी न कभी आ hi जाता है. वैसे मन्ना पड़ेगा , इस बाइक को इस हालत में खींचना आसान कोणी. आप hi खींच लाये. और कोई होता तो वहीँ कड़ी कर मुझे बुलाने अत .

अमित : बस भाई अपना भी हल देख hi लो . अभी नहाये थे और फिर से लग रहा है क नाहा क आया हूँ कपड़ों समेत.

पंक्चर वाला : अरे ये क्या बाबू , इसमें तो पंक्चर है hi नहीं.

अमित : क्या कह रहे हो आप !! फिर हवा कैसे निकल गयी ?

पंक्चर वाला : लगता है किसी ने जान बुझ कर हवा निकली है. ये नाली भी बिलकुल ठीक है तुबे की.

अमित : ाचा पर ऐसा कौन कर सकता है ? यहाँ तो कोई मुझे जनता भी नहीं . चलो आप इसे बंद कर क लगा दो.

पंक्चर वाले ने भी इतने में 15 मिनट्स लगा hi दिए थे. और इधर मेरा फ़ोन भी बजने लगा था . कल्पना और मोहित कॉल कर रहे थे. पंक्चर वाले ने चक्का लगा दिया तो मैं उसे पैसे देने लगा तभी मेरी नज़र सामने से निकल रही एक कार पर पड़ी तो मैं हैरान हो गया. कार में आगे की सीट पर hi निधि दीदी बैठी हुई थी सर झुकाये. वो मुझसे ज्यादा दूर नहीं थी . कार चलने वाले को मैं ठीक से देख तो न पाया पर इतना पता चल गया क वो कोई आदमी hi है.



अमित ( मन में ) दीदी तो कह रही थी वो अपनी सहेली क साथ जाने वाली है फिर ये आदमी कौन है? और दीदी ऐसे सर झुका कर क्यों बैठी हैं ? ज़रूर कोई बात है , मुझे उनके पीछे जाना चाहिए. मैंने जल्दी से बाइक स्टार्ट की और कार का पीछा करने लगा
 
अपडेट 154



कार का पीछा करता हुआ मैं कुछ दूरी बनाये हुए जा रहा था . शहर क एक कोने से चली कार अब दूसरे कोने में पहुँच गयी थी और करीब 20 मिनट्स में कहीं भी नहीं रुकी थी. मुझे यकीन होता जा रहा था क कुछ गड़बड़ ज़रूर है. मैं कार से करीब 25-30 फ़ीट की दूरी बनाये हुए था . शहर क बहती इलाके में मैं पीछा करता हुआ पहुँच चूका था क अचानक नयी तरफ की एक छोटी सड़क से एक कार बहार निकली और सीधा मुझे टक्कर मर दी. मेरा ध्यान से तो सिर्फ आगे वाली कार में था इस लिए संभल न पाया और बाइक समेत नीचे गिर गया. मुझे अपनी बिलकुल भी परवाह न थी. इस लिए जल्दी से उठा और फिर से बाइक को उठा कर निकलने लगा इतने में वो कार वाला गाड़ी रोक कर मुझसे माफ़ी मांगता हुआ मुझे उठाने आया पर मैंने उसकी तरफ ध्यान न दिया. वो कुछ कह रहा था जिस पर मेरा ध्यान नहीं गया. मैंने निधि दीदी वाली कार की तरफ देख तो वो काफी दूर निकल गयी थी और फिर एक तरफ मुद गयी.

कार वाला : ी ऍम सॉरी ी ऍम सॉरी भाई वो गलती सो हो गया माफ़ करना. उठो चलो मेरे साथ मैं तुम्हारी मलहम पट्टी करवा देता हूँ.

अमित : it’s ok मैं ठीक हूँ आप जाओ.

मैंने जल्दी से बाइक को उठाया और स्टार्ट की शुक्र है बाइक स्टार्ट हो गयी और मैं तेज़ी से आगे बाद गया. मुझे अपने दाएं हाथ पर दर्द महसूस हो रहा था और बयां घुटना भी दर्द करने लगा था. बाइक की हालत भी मैंने न देखि बस दीदी की कार क पीछे तेज़ी से गया. जहाँ से कार मुड़ी थी वहां पहुंचा तो ये एक कॉलोनी का गेट था. मैं भी अंदर चल दिया . अंदर बहुत सरे बड़े बड़े घर बने हुए थे और सीधी छोड़ी सड़क क इलावा कुछ सड़के दाएं बाएं भी जा रही थी. सामने वो कार नज़र न आयी तो मेरी धड़कने बाद गयी . मैंने बाइक फुल स्पीड में दौड़ाया और 1 कम लम्बी इस चुदाई सड़क क दूसरे सिरे पर पहुँच गया वहां भी एक गेट लगा था पर वो आधा खुला हुआ था मतलब कार ऐसे में गुज़र नहीं सकती थी . मैं समझ गया कार इसी कॉलोनी में hi है. इस लिए मैंने पूरी कॉलोनी का एक एक घर चेक करने क लिए चक्कर मरना शुरू कर दिया . ये एक पॉश कॉलोनी लग रही थी. घर बड़े बड़े थे और सब क आगे कुछ एरिया छोड़ा हुआ था. दीवार की ऊंचाई लग भाग सबकी एक जितनी थी. मैं एक एक घर की देवर और गेट से चलते हुए झाँकने की कोशिश कर रहा था क कहीं से वो कार नज़र आ जाये.

उधर मैनेजर जब निधि को लेकर एक घर क गेट पर पहुंचा तो हॉर्न बजने पर गेट उसके जूनियर ने hi खोला. निधि उसे यहाँ देख कर सेहम गयी.

निधि : ये यहाँ क्या कर रहे हैं?

मैनेजर : don’t वोर्री डार्लिंग ये मेरा hi आदमी है. इसे ज़रूरी काम से बुलाया था. ये अभी चला जायेगा तुम चिंता मत करो.

निधि : आप ये गलत कर रहे हैं मेरे साथ

मैनेजर : रिलैक्स , मैंने कहा न वो मेरा आदमी है . वो किसी को कुछ नहीं बोलेगा.

निधि बेचारी अपनी किस्मत पर मन hi मन रोने लगी . वो समझ गयी थी क ये दोनों मिले हुए हैं पर वो कर तो कुछ सकती नहीं थी . वहीँ गेट से जब कार अंदर गयी तो जूनियर ने गेट फिर से बंद कर दिया. निधि जब कार से उतरी तो जूनियर उसे हवसी नज़रों से देख कर कामिनी हंसी हंस रहा था. निधि भी उसकी गन्दी नज़रें अपने शरीर पर महसूस कर रही थी.

मैनेजर : मैंने तुम्हे जो फाइल ( कैमरा ) बोली थी वो कहाँ हैं

मैनेजर ने बात करते हुए इशारा किया जिसका मतलब जूनियर अचे से जनता था.

जूनियर : सर वो मैंने अंदर रख दी है. मैंने चेक कर ली थी फाइल अचे से.

मैनेजर : ाचा मुझे निधि से अकेले में बात करनी है तुम यहीं रुको और कोई आये तो बहार से hi भेज देना. चलो निधि

मैनेजर निधि को अपने साथ अंदर ले गया और पीछे उसका साथी ज़हरीली हंसी हंस रहा था . एक हाथ अपने लैंड पर रखता वो उत्तेजित होने लगा निधि क मदमस्त बदन को देखते हुए.

जूनियर ( मन में ) आज तो तेरी अचे से लूँगा साली बड़ा ऐटिटूड दिखती थी. अब देख तुझे रंडी न बना दिया तो कहना. आअह्ह्ह

घर में एंटर होते hi एक हॉल था जिसकी साइड में किचन था और 3 कमरे. हर सुविधा मौजूद थी इस 2 मंज़िला घर में. मैनेजर निधि को लेकर एक कमरे में घुस गया. निधि का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था. वो ज़मीन में गाड़ी जा रही थी और पता भी न चला जब उसकी आँखों ने नदियां बहा दी.

मैनेजर: कॉमन डार्लिंग ये तुम रो क्यों रही हो ? अरे तुम्हे खुश होना चाहिए आज मैं तुम्हे काली से फूल बनाने जा रहा हूँ. ऊपर वाले ने इतना हसीं बनाया है तुम्हे तो जवानी का मज़ा लो न. और फिर इसमें तुम्हारा तो डबल फायदा है. मज़ा भी मिलेगा और परमोशन भी .

निधि : रट हुए ) प्लीज सर मेरे साथ ऐसा मत कीजिये . मैंने आपका क्या बिगाड़ा है ? मैं ये जॉब hi छोड़ दूंगी आप प्लीज मुझे जाने दीजिये.

मैनेजर : बच्चों जैसी बात मत करो निधि. तुम भी जानती हो क ऐसा नहीं हो सकता. और इसमें तो तुम्हारा फायदा hi है न. मुझे खुश करो मैंने तुम्हे खुश करूँगा. जॉब छोड़ने की ज़रूरत hi नहीं पड़ेगी .

निधि : प्लीज सर ऐसा मत करिये ,

मैनेजर : गुस्से में ) देखो निधि ये सब तो तुम्हे करना hi पड़ेगा अब , मर्ज़ी से करोगी तो मज़ा लोगी वर्ण ज़बरदस्ती करना मुझे अत है . चलो अब अपने कपडे उतरो

निधि : प्लीज सर

मैनेजर : तो तुम नहीं मानोगी , मैं अभी वो सरे क्लिप्स भेजता हूँ सबको .

इतना कह कर मैनेजर अपने साथ लाये बैग में से लैपटॉप निकलने लगा तो निधि ने उसका हाथ पकड़ लिया.

निधि : ऐसा मत कीजिये सर प्लीज

मैनेजर : तो कपडे उतरो अपने जल्दी से .

निधि रट हुए अपने कपडे उतरने लगी. निधि इस वक़्त हरे रंग क सफ़ेद फूलों वाले डिज़ाइनर सूट में कमल लग रही थी. एक तो हाइट भी अछि थी ऊपर से ज़बरदस्त फिगर गोरा गुलाबी रंग. जैसे hi निधि ने अपनी कमीज उतरी मैनेजर की जीभ लपलपाने लगी . कमीज क निचे निधि क संतरे काली ब्रा में कैद थे. कमीज उतरने क बाद निधि अपने हाथों से hi खुद को छुपाने की कोशिश करते हुए रोये जा रही थी.

मैनेजर : चलो अब बाकि सब भी उतरो जल्दी करो.

निधि को इतना कह कर मैनेजर ने जल्दी से बीएड क साइड में लगे छोटे से स्टूल का ढक्कन खोला तो ये एक मिनी फ्रिज hi था जिसमे कुछ बेयर की बॉटल्स पड़ी थी. एक बोतल निकल कर मैनेजर ने निधि को हवसी नज़रों से देखते हुए अपने दांतो से hi ढक्कन खोला और दो घूँट चढ़ा लिए .

मैनेजर : रुक क्यों गयी चलो बाकि कपडे भी उतरो , अगर मैंने उतरे तो ये फट जायेंगे फिर घर कैसे जाओगी ?

निधि ने रट हुए अपनी सलवार का नाडा खोला और सलवार को अपने पाऊँ से बहार निकल दिया. निधि की कमीज और सलवार अब बीएड पर पड़े थे और वो खुद को समेत टी हुई काली ब्रा और पेंटी में कड़ी थी . मैनेजर ने जल्दी से एक hi घूँट में आधी बेयर गले क नीचे उतरी और अपने कपडे उतरने लगा . निधि भगवन को यद् कर रही थी या तो वो किसी तरह उसे बचा ले या इसी वक़्त उसे मौत आ जाये ताकि वो इस कलां से बच सके पर दोनों में से कुछ भी नहीं हो रहा था. देखते देखते मैनेजर पूरी तरह नंगा हो गया और निधि को देखते हुए अपना लैंड मसलने लगा.

मैनेजर : ये देख ये है तेरी ज़िन्दगी का पहला लैंड चल इसे मुँह में ले ज़रा अजा .

निधि मैनेजर की गन्दी हरकत और बात से और ज्यादा रोने लगी और न में गर्दन हिलने लगी . बेचारी से कुछ बोलै भी नहीं जा रहा था अब तो . मैनेजर से अब कुछ भी कहने का कोई मतलब hi नहीं था क्यूंकि उसने तो कुछ भी नहीं मन्ना था. निधि ने जब मैनेजर की बात नहीं मणि तो वो गुस्से में अपना लैंड हिलाया निधि की तरफ बड़ा और निधि को बीएड पर गिरा कर उसकी टांगों क बीच आ गया .

इधर मैं मैं हर घर को एक नज़र मरता हुआ तेज़ी से हर एक कोने को चेक कर रहा था. मेरी धड़कने बढ़ती जा रही थी और दिल दर से बैठा जा रहा था क कहीं निधि दीदी क साथ कुछ गलत न हो रहा हो. मैं भगवन से मन hi मन प्रार्थना कर रहा था क वो मेरी मदद करे. तभी मुझे एक घर में गेट क पीछे वो कार नज़र आ गयी जिसमे निधि दीदी यहाँ आयी थी . एक पल को मन में ये भी विचार आया क कहीं वो सच में अपनी सहेली क घर hi न आयी हो. पर मुझे निधि दीदी की फ़िक्र थी इस लिए मैंने बेल्ल बजा दी. दूसरी बेल्ल पर एक आदमी गेट क करीब आया . देखने में अचे कपड़ों में एडुकेटेड पर्सन hi लग रहा था पर चेहरा लाल सुर्ख था उसका और आँखों में भी लाल रेशे नज़र आ रहे थे.

आदमी : कौन हो ? किस्से मिलना है ?

अमित : भाई साहब मैं एक लड़की को ढून्ढ रहा हूँ जो अभी अभी इस कार में यहाँ आयी है.

आदमी : गुस्से में ) यहाँ कोई लड़की नहीं आयी. ये कार मेरी है और यहाँ मेरे इलावा कोई नहीं है तुम जाओ यहाँ से .

उस आदमी क इस जवाब से मेरा शक और भी बाद गया क कुछ तो गड़बड़ है .

अमित : देखिये दरवाज़ा खोलिये मैं जनता हूँ वो यहीं आयी है

आदमी : गुस्से में ) एक बार समझ नहीं आयी चल निकल यहाँ से वर्ण मैं पुलिस को बुलाऊंगा .

अमित : मैं आखरी बार कह रहा हूँ गेट खोलो

आदमी : नहीं खोलता बे क्या कर लेगा चल भाग यहाँ से .

इस घर की दीवार कोई 7 फ़ीट क लगभग थी और गेट भी इतनी hi ऊंचाई का था. मैं थोड़ा पीछे हटा और दौड़ कर दीवार पर उछाल कर चढ़ गया. अगले hi पल मैं दीवार क अंदर बने गार्डन में कूद कर उस आदमी क सामने आ गया . वो तो मुझे देख कर हक्काबक्का रह गया क कितनी आसानी से मैंने दीवार फांद ली. वो आदमी अंदर की तरफ भागने लगा तो मैंने उसकी गर्दन दबोच ली .

अमित : गुस्से में ) अब बता निधि कहाँ है ??

मेरे मुँह से निधि नाम सुनते hi उसकी गांड फैट गयी .

आदमी : मम मैं कुछ नहीं जनता , मैं किसी निधि को नहीं जनता .

अमित : गुस्से में ) लगता है तू ऐसे नहीं मानेगा

मैंने इस आदमी को गर्दन से पकडे हुए ज़ोर से दीवार पर दे मारा और उसका सर इतने में hi खुल गया. सर से खून बेहटा हुआ उसके कपड़ों को भिगोने लगा . मैंने उसे हवा में उठा कर ज़मीन पर पटक दिया . वो आदमी इतने में अधमरा हो गया था. फिर मैं तेज़ी से घर क अंदर की तरफ भगा . हॉल में कोई नहीं था और दरवाज़े बंद थे . तभी मेरे कानो में दीदी की आवाज़ पड़ी जो बायीं तरफ क कमरे से आ रही है थी.

‘ प्लीज मेरे साथ ऐसा मत करो मुझे जाने दो मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती हूँ मुझे बर्बाद मत करो’

दीदी रट हुए ये सब बोल रही थी. मुझे समझते देर न लगी क अंदर क्या हो रहा है. मैं आप से बहार हो गया और ज़ोर से लात दे मरी दरवाज़े पर . दरवाज़ा कुंडली को उखड़ता हुआ दीवार से टकराया तो ‘ खात्ताआँक ‘ की ज़ोरदार आवाज़ कमरे में गूंजी.

सामने बीएड पर निधि दीदी सिर्फ ब्रा पेंटी में थी और उनकी टांगों में बैठा वो नंगा आदमी उनकी पेंटी खींच रहा था. ये नज़ारा तो

मेरे लिए मौत क सामान hi था. मैं निकली की रफ़्तार से आगे बड़ा और ज़ोर से काट दे मरी उस आदमी की पसलियों में. वो ज़ोर से कराहता हुआ लुढ़क कर बीएड की दूसरी तरफ जा गिरा. निधि दीदी मुझे अपने सामने देख कर शॉकेड हो गयी. उनका चेहरा आंसुओं से भरा हुआ था और उनकी ये हालत मुझसे देखि नहीं गयी. मैंने एक साथ से बेडशीट दीदी क ऊपर फेंकी और कूद कर उस आदमी क पास पहुंचा जो नीचे गिरा कराह रहा था.

अमित : गुस्से में ) मेरी दीदी पर हाथ डाला तूने , मैं तुझे ज़िंदा नहीं छोडूंगा.

मैंने उस आदमी को बालों से पकड़ा कर खींच कर खड़ा किया और ज़ोरदार पंच उसके पेट में दे मारा. मुक्का इतना ज़ोरदार था क उसके पेट की अंतड़ियाँ तक हिल गयी और मुँह से उलटी क साथ खून आ गया पर मैं कहा रहना करने वाला था . मैंने उसका सर ज़ोर से दीवार में मारा और उसके सर से भी पानी की तरह खून बहने लगा . मैंने उसकी एक बाजु पकड़ कर मरोड़ते हुए गुस्से में कहा

अमित : इसी हाथ से छुआ था तूने मेरी दीदी को

‘ कड़क ‘ की आवाज़ क साथ hi उसकी बाज़ू लटक गयी. वो लगातार ज़ोर ज़ोर से चीख रहा था पर मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था. निधि दीदी जो बीएड शीट में लिपटी रो रही थी वो मेरा ये रूप देख कर सेहम गयी थी. मैंने अब उस आदमी क एक पाऊँ को पकड़ कर दूसरी तंग को पाऊँ से दबाते हुए पाऊँ को मरोड़ दिया और घुटने से उसका जोड़ कटक की आवाज़ से टूट गया . आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हहजह एक भयंकर चीख फिर से गूंजी. पर मुझे कोई परवाह नहीं थी.

अमित : मेरी दीदी पर गन्दी नज़र डाली तूने हरामज़ादे तू ज़िंदा रहने क काबिल नहीं है

इतना कह कर मैंने उसकी गर्दन पर अपनी बाजु लपेट की और उसकी गर्दन कास क दबा दी. उस आदमी की आवाज़ बंद हो गयी वो अपने एक हाथ से मुझसे छूटने की कोशिश कर रहा था पर उसकी कोई पेश नहीं चल रही थी. जल्द hi उसकी साँस बंद होने लगी और आँखें बहार आने लगी. दीदी ये मंज़र देख कर घबरा गयी और उसी हालत में दौड़ कर मेरे पास आ कर मुझे उस आदमी को छोड़ने को कहने लगी .

निधि दीदी : अमित छोड़ दे इसे ये मर जायेगा . छोड़ इसे मेरे भाई ये मर जायेगा

अमित : इसे जीने का कोई हक़ नहीं दीदी आप पीछे हैट जाओ

निधि दीदी : रट हुए ) इसे छोड़ दे मेरे भाई अगर ये मर गया तो पुलिस तुझे पकड़ लेगी इसे छोड़ दे मैं तेरे हाथ जोड़ती हूँ .

अमित : गुस्से में ) पलोलिस चाहे कुछ भी करले पर मैं इसे छोडूंगा नहीं . इसने आप पर हाथ डाला दीदी आप पर गन्दी नज़र डाली . इसे जीने का कोई हक़ नहीं

निधि दीदी : प्लीज मेरे भाई इसे छोड़ दे तुझे मेरी कसम छोड़ दे इसे .

दीदी क कसम देते hi मेरी पकड़ ढीली पद गयी और मैंने उस आदमी को छोड़ दिया. मैं इस आदमी को छोड़ कर पीछे हटा तो दीदी रोटी हुई मेरे गले लग गयी . मेरे सर पर सवार गुस्सा अब शांत होने लगा. मेरी आँखों से भी अब आंसू बह रहे थे और दीदी क भी. मैं दीदी क दर्द को महसूस कर रहा था . दीदी कुछ देर ऐसे hi मेरे गले लग कर ज़ोर ज़ोर से रोटी रही .

अमित : बस करो दीदी और मत रोइये आप. अगर आप पहले hi मुझे बता देती तो ये सब न होता . खुद को सम्भालिये. मेरे रहते आपको कोई हाथ नहीं लगा सकता.

मैंने दीदी का सर सहलाते हुए उन्हें खुद से अलग किया और उनके आंसू साफ़ किये .

अमित : बस करिये दीदी आपको मेरी कसम अब आप नहीं रोयेंगी. चलिए यहाँ से चलते हैं आप अपने कपडे पेहेन लीजिये.

मैंने इतना कहा तो दीदी को भी एहसास हुआ क वो सिर्फ ब्रा पेंटी में मेरे साथ चिपकी कड़ी हैं. वो शर्म से खुद को समेत टी हुई अपने कपड़ों की तरफ बड़ी तो मैंने भी उनकी तरफ पीठ कर ली. कुछ hi पलों में दीदी ने कपडे पेहेन लिए और मेरे पास आयी.

निधि दीदी : घबराते हुए ) तुझे ये चोट कैसे लगी . कितना खून बह रहा है.

दीदी की बात पर मैंने अपनी बाजु देखि तो वो खून से सनी हुई थी और मेरे कपड़ों पर भी खून लगा हुआ था. अब मुझे यद् आया क जब मैं बाइक से गिरा था ये चोट शायद तब लगी होगी. मेरे बाएं घुटने में भी दर्द हो रहा है रहा था तो मैंने उसे भी चेक किया मगर वहां सूजन और रगड़ लगी थी कोई कट नहीं था.

अमित : वो दीदी रस्ते में बाइक का एक्सीडेंट हो गया था छोटा सा.

निधि दीदी : इधर ला मैं पट्टी बांध दूँ.

दीदी ने अपने दुपट्टे को एक सिरे से गाड़ते हुए पट्टी की शेप में मेरी बाज़ू पर बांध दिया. खून का बहाव थोड़ा रुका गया पर मेरा हाथ और उंगलियां खून से सनी थी. दीदी उसे भी साफ़ करने लगी .

अमित : चलो दीदी अब यहाँ से चलते हैं.

निधि दीदी : वो ....

अमित : क्या बात है दीदी ?

निधि दीदी : इसके पास मेरी कुछ तस्वीरें हैं जिसकी वजह से ये .......

अमित : गुस्से में ) कहाँ है वो तस्वीरें ?

निधि दीदी : इसके लैपटॉप में

मैं कमरे में इधर उधर देखने लगा. लैपटॉप रूम में hi पड़ा था तो दीदी ने उसे जल्दी से उठा लिया. मुझे फिर से गुस्सा आ रहा था . दीदी ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे खिंच कर बहार ले आयी. बहार वो दूसरा आदमी भी पड़ा कराह रहा था. तो मैंने दीदी को एक पल रुकने को कहा.

अमित : दीदी आप ज़रा रुकिए मैं इसे अंदर छोड़ कर आया.

निधि दीदी : रहने दे भाई तू जल्दी चल यहाँ से .

अमित : मैं अभी आया बस, आप 2 मिनट्स रुकिए.

मैंने उस आदमी को बालों पकड़ कर उठाया और उसे घसीट कर अंदर उसी कमरे में ले गया. सामने अपने साथी की हालत देख कर उसकी और फट गयी .

अमित : मैं एक hi बार पूछूंगा और जवाब सही होना चाहिए .

वो आदमी थार थार कम्प रहा था.

अमित : वो तस्वीरें कहाँ हैं ?

आदमी : वो वो सर क पास hi थी लैपटॉप में

अमित : उसकी और कॉपी भी तो होगी तुम लोगों क पास . मैं जनता हूँ तुम जैसे कमीने हमेशा बैकअप रखते हैं. अगर ज़िंदा रहना चाहते हो तो बता दो.

आदमी : डरते हुए ) मैं अपने बीवी बच्चों की कसम खता हूँ मेरे पास कुछ नहीं है . जो कुछ था इसी क पास था. लैपटॉप क इलावा शायद मोबाइल में भी हो कुछ.

इतना सुनते hi मैंने उसे ज़ोरदार लात मर कर उसके साथी क पास hi गिरा दिया और कमरे में ओढे hi दूसरे आदमी क कपड़ों में से मोबाइल निकल लिया. मेरी नज़र बेयर की बोतल पर पड़ी तो मैंने उसे उठा लिया और जो बेहोश पड़ा था नंगा उसकी गांड में बोतल का मुँह दाल कर मैंने ज़ोर से पाऊँ मर कर उसकी गांड में बोतल थोक दी. बोतल आधी hi घुसी थे क टूट गयी और उसका कांच उसकी गांड और अंडकोषों में घुस गया. जहाँ से खून बहने लगा. दूसरा वाला ये मंज़र देख कर सेहम गया और रो रो कर मुझे भीख मांगने लगा.

आदमी : मुझे छोड़ दो मैं कसम खता हूँ आज क बाद ऐसा कुछ नहीं करूँगा . भगवन क लिए मुझे छोड़ दो.

अमित : गुस्से में ) मसारचोद आज क बाद तू कुछ करने क लायक hi नहीं रहेगा . इतना कह कर मैंने ज़ोर दर लत मर कर उसके अंडे फोड़ दिए . फिर से एक ज़ोरदार चीख पोरे घर में गूंजी. दीदी भगति हुई जैसे hi दरवाज़े पर आयी तो सामने का नज़र देख कर वो फिर से घबरा गयी और मेरा हाथ पकड़ कर खींचती हुई मुझे बहार ले गयी .

निधि दीदी : जान से मर देगा क्या उनको ? तू समझता क्यों नहीं तुझे पुलिस पकड़ लेगी.

अमित : मुझे किसी की परवाह नहीं. पर इन जैसे कुत्तों को सजा मिलनी hi चाहिए ताकि ये दोबारा ऐसा कुछ कर hi न पाएं. मेरी दीदी पर हाथ डालने वालों को मैं ज़िंदा hi नहीं छोड़ता पर आपने मुझे रोक दिया .

मैंने गुस्से से ये कहा तो दीदी फिर से मेरे गले लग गयी.

निधि दीदी : इतना प्यार करता है अपनी दीदी से ? मुझे तो पता hi नहीं था मेरा भाई इतना प्यार करता है मुझसे . चल अब जल्दी चल यहाँ से .

मैं दीदी क साथ बहार आया तो अब अपनी बाइक की हालत देखि. एक साइड का इंडिकेटर टूट गया था और कुछ रगड़ वगैरह लग गयी थी.

निधि दीदी : ये तो टूट गयी .

अमित : कोई बात नहीं , ये तो फिर से ठीक हो जाएगी पर अगर आज आपके साथ कुछ हो जाता तो मैं टूट जाता . और उसका इलाज नहीं होता शायद.

दीदी मेरी आँखों में देखने लगी . अपने लिए मेरा प्यार देख कर दीदी की ऑंखें फिर से भीग गयीं. मैंने बाइक को स्टार्ट किया और दीदी को पीछे बिठा कर चल दिया. शरीर पर लगी चोट अब दर्द का एहसास दिला रही थी . दीदी की भी हालत ठीक नहीं थी . ऐसे में घर जाना ठीक नहीं था वर्ण मौसी समझ जाती क क्या हुआ है. और मैं नहीं चाहता था क ये बात घर पता चले. वैसे भी मुझे दीदी से इस बारे में बात करनी थी. मैं दीदी को लेकर सीधा मोहित वाले फ्लैट पर आ गया. फ्लैट की चाबी तो बाइक की चाबी क साथ hi मैंने पक्की राखी हुई थी . दीदी बिना कोई सवाल किये बस चुपचाप मेरे साथ चल रही थी. फ्लैट में आने क बाद मैंने दीदी को पानी पिलाया.

अमित : दीदी आप फ्रेश हो कर अपनी हालत ठीक कर लीजिये. उसके बाद हम घर चलेंगे. ऐसे अगर गए तो मौसी परेशां होंगी आपको देख कर.

निधि दीदी : पर मुझसे ज्यादा तो तुम्हारी हालत ख़राब है . पहले तू अपनी मलहम पट्टी करवले.

अमित : दीदी मैं बिलकुल ठीक हूँ. आपकी बंधी पट्टी ने खून बहना बंद कर दिया खुद hi देखिये.

खून वाकई में बंद हो चूका था. दीदी ने स्नेह से मुझे देखा और फिर मैंने उन्हें बाथरूम का बताया . दीदी सीधा बाथरूम में घुस गयी . मैं भी अपने कपडे उतर कर चेक करने लगा क कहाँ कहाँ चोट लगी है.

निधि बाथरूम में घुसी और अपना चेहरा पानी से धोने लगी. तभी इसकी नज़र अपने माथे पर लगे खून पर गयी. माथे से लेकर बालों क बीच ऐसे खून लगा हुआ था जैसे किसी ने खून से मांग भर दी हो. खून काफी देर से लगा था और सूख चूका था. निधि ने जल्दी से उसे साफ़ करने की कोशिश की पर वो जैम गया था. दीदी को पता था क ये खून अमित का hi है . उसी ने खून बहते हुए हाथ से उसके सर को सहलाया था. निधि को एक झटका सा लगा अपनी मांग अमित क खून से भरी हुई देख कर. दरअसल निधि भी अपनी माँ की तरह संस्कारी और धार्मिक परवर्ती की थी . और मांग भरने का मतलब वो अचे से जानती थी . उसने सुन रखा था क एक बार मांग में जिसके नाम का सिन्दूर भर दिया जाये वही आदमी औरत का पति होता है. अपनी मांग पर हाथ रखते हुए निधि की आँखों में आंसू आ गए .

निधि : ये क्या हो गया , ऐसा कैसे हो सकता है ? हे भगवन ये तूने क्या कर दिया? एक भाई से क हाथों बहिन की मांग भरवा दी तूने. वो मेरा भाई है जिसे बचपन से मैं अपने सेज भाई से ज्यादा प्यार करती आयी हूँ और तूने उसी को मेरा पति बना दिया.

दीदी रट हुए अपने कपडे उतरने लगी. एक दाग जो उसकी आत्मा पर लगने वाला था उसे बचाकर एक दाग उसकी मांग में लगा दिया गया था. चाहे ये सब अनजाने में हुआ था पर निधि क लिए जैसे ये सब कुछ था. अमित ने आज निधि को उस अत्याचार से तो बचा लिया था पर अब निधि क दिल पर ये चोट लग गयी थी. क वो अपने भाई की hi बीवी बन गयी है. सच ये भी था क निधि अमित पर वरि वरि जा रही थी क किस तरह उसने उसे आ कर बचा लिया. जहाँ उसे कोई उम्मीद न थी बचने की वहां अमित पहुंचा था. चाहे उसने खुद अमित को कुछ न बताया पर फिर भी अमित ने उसके दर्द को समझा और उसकी मदद करने उसके पीछे आ गया. निधि कपडे उतर कर नहाने लगी अपने जिस्म पर लगे उस हवसी आदमी की छुहान क निशान मिटने. पर उसने अब अपनी मांग में लगे सिन्दूर रुपी उस खून को मिटने की कोशिश नहीं की. नहाने क बाद जब उसने कपडे पहन कर फिर से शीशे में अपना चेहरा देखा तो मांग में खून देख कर वो खुद hi शर्मा गयी किसी दुल्हन की तरह. खुद को दुरुस्त करती हुई वो जब बहार निकली तो अमित सिर्फ अंडरवियर में खाद अपनी छोट को देख रहा था. निधि अमित क इस बलिष्ठ जिस्म को देख कर बस देखती hi रह गयी . और जैसे hi अमित क पलटने से निधि की नज़रें उससे मिली तो निधि का सर शर्म से झुक गया और गाल लाल हो गए. दिल की धड़कने अचानक बाद गयी . और शरीर में कंपकंपी सी होने लगी .

अमित : सॉरी दीदी वो मैं देख रहा था क चोट कहाँ लगी है . आप आओ मैं कपडे पहन लेता हूँ. निधि को शर्म तो आ रही थी पर उसे अमित की बात पर चिंता भी हुई और वो खुद hi.bol उठी .

निधि दीदी : नहीं कोई बात नहीं तुम बैठो मैं देखती हूँ कहाँ चोट लगी है.

अमित : नहीं दीदी मैं कपडे पहन लेता हूँ

निधि दीदी : मैंने कहा न तुम बैठो , कपडे पेहेन लोगे तो पता कैसे चलेगा चोट का?

मैं दीदी की बात सुन कर वहीँ बैठ गया और दीदी मेरे पास आ कर मुझे अचे से देखने लगी.

निधि दीदी : ये कंधे पर बैंडेज कैसे लगी है तुम्हारे

अमित : दीदी वो चोट लग गयी थोड़ी सी.

निधि दीदी : तुझे कुछ ज्यादा hi ाचा लगता चोट खाना , वैसे तुझे कैसे पता चला मैं कहाँ हूँ? मैंने तो नहीं बताया था .

अमित : दरअसल वो मेरी बाइक पंक्चर हो गयी थी तो मैं वही बनवा रहा था क आप मेरे सामने से गुज़री . मैं वहीँ से आपका पूछा करने लगा . पर मैं आपसे नाराज़ हूँ

निधि दीदी : क्यों ??

अमित : मैंने आपसे कल कितना पुछा था पर आपने नहीं बताया . अगर आप बता देती तो बात यहाँ तक पहुँचती hi नहीं.

निधि दीदी : मैं मजबूर थी अमित , मुझे दर था क कहीं तुम्हारे साथ कुछ गलत न हो जाए. मुझे पता था बात का पता चलते hi तू उस आदमी से लड़ने ज़रूर जायेगा. और उसने धमकी भी थी क अगर मैंने किसी को बताया तो वो मुझे और मेरी फॅमिली को बदनाम कर देगा वो तस्वीरें और वीडियो लोगों को दिखा कर .

अमित : आपने एक बार भी नहीं सोचा क आपके साथ क्या होने वाला था? मेरी चिंता थी आपको पर अगर आपको कुछ हो जाता तो फिर सबका क्या हल होता?? मुझे पता है आप इसके बाद शायद खुद को कुछ कर लेती. पर क्या वो सही होता.

निधि दीदी : रट हुए ) क्या करती मैं. ? मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था.

अमित : आप मुझ पर एक बार विश्वास तो करती . मैं अपनी जान दे कर भी आपको हिफाज़त करता.

निधि दीदी : वो तो अब भी तूने hi की न. मुझे तुम पर गर्व है.

अमित : पर ये सब हुआ कैसे ? आपकी कौन सी तस्वीरें उस आदमी क पास थी और कौन था वो?

निधि दीदी : जहाँ मैं जॉब करती हूँ वो आदमी वहां का मैनेजर था और दूसरा उसका साथी वो भी वहीँ काम करता है . मुझे बह ऐश कर क मेरी कुछ तस्वीरें उसने खिंच ली थी अपने साथ बिना कपड़ों क.

दीदी का सर झुक गया था ये सब कहते हुए तो मैंने उनका चेहरा ऊपर किया. आँखों में आंसू आते देख मैंने उनके वो आंसू साफ़ किये .

अमित : बस दीदी और नहीं. अब सब ठीक है . उसका लैपटॉप तो आपने ले लिया अब उसमे से hi ो सब डिलीट कर दो और ये मोबाइल भी लो उसका . इसमें भी शायद कुछ हो .

निधि दीदी ने मेरी आँखों में देखा तो मुझे उनमे अपने लिए बेपनाह प्यार नज़र आया . उनका वो मासूम चेहरा जो जहाँ भर की मासूमियत और सुंदरता लिए हुए था. जिसे मैं बचपन से देखता आया था और जो हमेशा से मुझे प्यार करता था . मैंने उनके चेहरे को साफ किये और उनका माथा चूम लिया . तभी मेरी नज़र उनके बालों क बीच से माथे तक लगे खून क दाग पर पड़ी.

अमित : दीदी ये खून ??

निधि दीदी : मुस्कुराते हुए ) तुम्हारा hi है. मुझे कुछ नहीं हुआ.

अमित : इसे साफ नहीं किया आपने ? लाइए मैं कर देता हूँ .

मैंने पास में पड़ी अपनी T-shirt उठाकर दीदी क माथे से वो खून साफा करना चाहा तो दीदी ने मेरा हाथ पकड़ लिया .

निधि दीदी : रहने दे इसे, मैं खुद कर लुंगी . चल अब कपडे पेहेन ले. मैं लैपटॉप और मोबाइल को चेक करती हूँ.

दीदी ने एक मुस्कराहट से मुझे देखा और मेरी T-shirt मुझे वापिस दे कर लैपटॉप ले कर बैठ गयी. मैंने भी अपने कपडे पेहेन लिए . दीदी बीच बीच में मुझे देख रही थी पर बोल कुछ नहीं रही थी . कपडे पहन कर मैंने अपना मोबाइल देखा तो उसमे बहुत साडी मिस कॉल्स थी. लगभग सभी क फ़ोन से कॉल्स आयी हुई थी अपनी कॉलेज मंडली क. टाइम 12 से ऊपर हो चूका था . मैंने दीदी को बता कर बहार निकल गया और हम दोनों क लिए खाना ले कर वापिस आ गया . दीदी ने तब तक लैपटॉप और मोबाइल का काम निपटा दिया था. मेरे हाथ से खाना ले कर दीदी ने खुद hi प्लेट में डाला और अपने हाथ से मुझे खिलने लगी . मैंने भी दीदी को अपने हाथों से खाना खिलाया .

निधि दीदी : ये फ्लैट किसका है ?

अमित : अपना hi समझिये दीदी , वैसे ये मोहित की फॅमिली का है. इसकी चाबी मेरे पास hi थी तो यहाँ ले आया आपको.

निधि दीदी : तू पहले भी यहाँ अत है क्या ?

अमित : नहीं तो, मुझे क्या ज़रूरत है? वो तो आंटी ने hi चाबी दी थी इसकी सफाई करवाने क लिए . तब से चाबी मेरे पास hi है.

निधि दीदी: खाना तो हो गया तो अब हम चलें ?

अमित : जैसा आप कहें , और एक बात दीदी .

निधि दीदी : ???

अमित : अब आप उस जॉब पर दोबारा नहीं जाएँगी.

निधि दीदी : मैं भी यही सोच रही थी. अब तो मैं जॉब पर hi नहीं जाना चाहती हर जगह ऐसे hi लोग मिलते हैं.

अमित : अगर आपको अछि जगह जॉब दिलवा दूँ तो ?

निधि दीदी : ऐसी कौन स अछि जगह है तेरे पास ?

अमित : है एक , आप बस तयारी कीजिये जल्दी hi मैं आपको नई जगह जॉब फाइल्स दूंगा जहाँ आप बेफिक्र हो कर काम कर सकती हैं.

निधि दीदी : ाचा तू कहता है तो ठीक है. चल अब चलते हैं और पहले डॉ क पास जाना है . ये दुपट्टा चोट ठीक नहीं करने वाला उसके लिए डॉ क पास जाना hi पड़ेगा.

अमित : चलिए ठीक है जैसा आप कहें.

दीदी को साथ लिए मैं फ्लैट से निकल गया. अब डॉ क पास जाना था तो मैंने सीधा रुख अपने डॉ की तरफ hi किया. डॉ रीना मेरी पक्की डॉ बन गयी थी. मैंने उन्हें फ़ोन कर दिया क मैं आ रहा हूँ तो उन्होंने भी कह दिया क वो हॉस्पिटल में hi हैं. हम दोनों हॉस्पिटल पहुंचे तो मैं दीदी को अपने साथ सीधा hi डॉ रीना क केबिन में ले गया. मुझे देखते hi रीना अपनी जगह पर कड़ी हो गयी और आगे बाद कर हाथ मिलाया . दीदी तो हैरानी से देख रही थी क कैसे मैं सीधा डॉ क केबिन में चला आया और वो भी ऐसे मिल रही हैं.

अमित : रीना जी मीट माय स्वीट एल्डर सिस्टर निधि . और दीदी ये हैं डॉ रीना . कहने को डॉ पर मुझे दोस्त मानती हैं. इनकी सिस्टर राधा क साथ hi पड़ती है.

डॉ रीना : नीस तो मीट यू निधि. वैसे ये न सही से नहीं बता रहा आपको. असल में हम पहले दोस्त हैं फिर मेरी सिस्टर और राधा का पता चला था . वैसे आपका ये भाई बहुत ाचा है. इसने मुझ पर जो एहसान किया है न वो मैं कभी चूका नहीं सकती और उसके इलावा मेरी कजिन को भी बचाया इसने मेरी बुआ को भी बचाया और अभी महाराज पिछले हफ्ते भी एक कारनामा कर क आ रहे हैं.

निधि दीदी मेरी तरफ हैरानी से देख रही थी . जबकि मैं डॉ रीना को चुप रहने को कह रहा था कहीं वो गोली वाली बात भी न बता दे.

डॉ रीना: ये क्या हालत बना राखी है तुमने? अब कहाँ से आ रहे हो ? क्या फिर किसी क साथ झगड़ा हुआ ?

डॉ रीना की नज़र मेरी कलाई पर बंधी पट्टी पर गया तो उन्होंने चिंता से पुछा.

अमित : अरे नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है. वो तो एक कार वाले ने टक्कर मर दी. मेरे साथ मेरी बाइक को भी चोट लगी है.

मैंने हस्ते हुए कहा तो निधि दीदी और रीना दोनों hi गुस्से से मुझे देखने लगी .

डॉ रीना : बाइक का तो मैं कुछ नहीं कर सकती पर चलो पहले तुम्हारी पट्टी कर दूँ . निधि आप बैठो मैं ज़रा इसकी बैंडेज कर दूँ .

दीदी वहीँ चेयर पर बैठ गयी और रीना मुझे साइड में लगे हरे परदे क पीछे ले गयी जहाँ वो क छोटा सा सिंगल बीएड लगा हुआ था. मुझे उस पर बिठा कर रीना ने पहले पट्टी खोली और फिर ज़ख़्म साफ़ कर वहां पट्टी कर दी. जो पट्टी पहले बंधी हुई थी वो मैंने रीना से वापिस ले ली .

डॉ रीना : इसका क्या करोगे तुम? ये गन्दी हो चुकी है फेंक दो इसे.

अमित : ये मेरी दीदी क दुपट्टे का हिस्सा है , मैं इसे नहीं फेंक सकता.

डॉ रीना : दीदी का दुपट्टा ? इसका मतलब वो तुम्हारे साथ थी जब तुम्हे चोट लगी ?

अमित : नहीं मैं अकेला hi था.

डॉ रीना : तो अब वो साथ कैसे? और फिर उनको क्या ज़रूरत पद गयी दुपट्टा फड़के की ? पट्टी भी तो कर सकती थी .

अमित : वो हम बहार थे न इस लिए.

डॉ रीना : अभी तुमने कहा क तुम अकेले थे.

अमित : हाँ वो जान चोट लगी तब अकेला था.

डॉ रीना : तुम कुछ छुपा रहे हो . सच बताओ बात क्या है ?

अमित : नहीं यही सच है .

डॉ रीना : अगर मुझे अपना दोस्त मानते हो तो सच बताओ वर्ण तुम्हारी मर्ज़ी .

अमित : प्लीज रीना तरय तो अंडरस्टैंड, तुम मेरी दोस्त हो मेरी मज़बूरी समझो .

डॉ रीना : समझ गयी , बात ज़रूर तुम्हारी दीदी से जुडी है. It’s ok. मैं नहीं पूछूँगी . अब दिखाओ और कहाँ चोट लगी है ?

मैंने अपने घुटने पर लगी चोट दिखाई तो वहां अब सूजन आ चुकी थी . अछि तरह जांचने क बाद रीना ने मेरे कंधे पर भी नई पट्टी कर दी. फिर हम वापिस दीदी क पास आ गए.

निधि दीदी : सब ठीक तो है न डॉ ?

डॉ रीना : जो सब ठीक है . पट्टी मैंने कर दी है कुछ टेबलेट मैं अभी दे देती हूँ . आप एक बार यद् से इसके घुटने पर मालिश करवा देना . ये खुद परवाह नहीं करता इसी लिए आपको कह रही हूँ . अभी सूजन काम है पर धीरे धीरे ये बाद जाएगी अगर ध्यान न दिया तो. मैं अभी मंगवा देती हूँ सब.

रीना ने बेल्ल बजा कर नर्स को बुलाया और उसे पर्ची दे दी मेडिसिन वाली. और साथ hi 3 कप कॉफ़ी भी आर्डर कर दी.

निधि दीदी : इसकी क्या ज़रूरत थी.

डॉ रीना : ज़रूरत थी. आप पहली बार आयी हैं मेरे पास तो ऐसे कैसे जाने देती. हम तो पिटे रहते हैं आज आप भी हमारी कंपनी कीजिये.

निधि दीदी : लगता है आप अचे दोस्त हैं आपस में.

डॉ रीना : सही कहा आपने , मैं तो भगवन की शुक्र गुज़र हूँ क अमित जैसा दोस्त मिला वर्ण आज कल तो लोग बस मतलब और फरेब से भरे पड़े हैं जो लड़कियों को एक hi नज़र से देखते हैं .

निधि दीदी डॉ रीना की इस बात पर सीरियस हो गयी और सर झुका लिया . वो अपने साथ हुई घटना क बारे में सोचने लगी थी शायद.

अमित : अरे क्या आप कैसी बातें ले कर बैठ गयी . कोई और बात करो आप .

डॉ रीना : गलत क्या कहा मैंने ? यही सचाई है . जब भी मैं सोचती हूँ क उस दिन मेरे साथ क्या होने वाला था तो दर जाती हूँ . तुम जैसे लोग नसीब से मिलते हैं. निधि जी आप बहुत लकी हैं क ये आपका भाई है. शायद आपको भी नहीं पता होगा क ये क्या क्या करता फिरता है .

निधि दीदी : सच कहा आपने क मैं लकी हूँ जो ये मेरे पास है. और आप से बात कर क लग रहा है क बहुत कुछ है जो मैं अभी नहीं जानती. घर जा कर पूछती हूँ अचे से.

इतने में कॉफ़ी आ गयी और हमने साथ में कॉफ़ी पि. डॉ रीना ने कल फिर आने का कहा और हम उनसे विदा लेकर घर आ गए.

सप ऑफिस -

‘ जय हिन्द मैडम , मैडम हमने जगह की अछि तरह से जाँच की है. कुछ फिंगर प्रिंट्स मिले हैं. चोरी जैसी कोई बात नज़र नहीं आती. लेकिन मैनेजर का लैपटॉप और मोबाइल गायब है. ‘

तीन सितारे वाला ये पुलिस इंस्पेक्टर सप ऋतू सिंह को जानकारी देने आया था आज सुबह हुई उस घटना क बारे में जिसमे शहर की एक पॉश कॉलोनी में एक घर से दो लोग बुरी तरह घायल हालत में मिले थे. चूँकि दोनों शहर क सबसे रईस आदमी की कंपनी क एम्प्लोयी थे तो पुलिस पर भी दबाव बनाया जा रहा था मामला जल्द सुलझाने का.

सप ऋतू सिंह : पांडेय जी , केस में प्रोग्रेस क्या है? मामला क्या है और किसने ये किया है? आप क एरिया का केस है तो ज़िम्मेदारी आपकी बनती है. मुझे बार सीनियर ऑफिसर्स का फ़ोन आ रहा है. जल्दी इस मामले को सॉर्ट आउट करो. और अब कैसी कंडीशन है उन दोनों की?

आईएनएस. पांडेय : जी मैडम , दोनों की हालत बहुत क्रिटिकल है. मैनेजर का तो अभी बचना भी मुश्किल नज़र आ रहा है. सर पर चोट क इलावा एक बाजु एक तंग जोड़ से टूटी है. कुछ इंटरनल इंजरीज क इलावा उसके प्राइवेट part और पीछे से बुरी तरह से ज़ख़्मी किया गया है. पूरी रिपोर्ट मेडिकल एग्जामिनेशन क बाद hi पता चलेगी. और दूसरे को सर पर चोट के साथ उसके भी प्राइवेट part को बुरी तरह मारा गया है. डॉ बता रहे थे क उनको जैसे मारा गया है इससे वो नाकारा हो जायेंगे. घर में कोई कक्तव नहीं था इस लिए कोई साबुत नहीं मिला. अभी तक किसी तरह की इनफार्मेशन नहीं मिल पायी. दोनों में से अगर किसी को होश अत है तो कुछ पता चलेगा.

सप ऋतू सिंह : मेरे ख्याल में ये दुश्मनी या फिर रिवेंज फैक्टर है. Let’s सी क्या निकलता है . पर तुम उनके होश आने का इंतज़ार करने की बजाये उनके ऑफिस और उस घर क आसपास क एरिया से इनफार्मेशन निकलने की कोशिश करो. मुझे कल तक रिजल्ट्स चाहिए .

आईएनएस. पांडेय : जी मैडम , जैन हिन्द मैडम.



इतना कह कर इंस्पेक्टर केबिन से बहार निकल गया और सप ऋतू सिंध अपने सामने पड़ी फाइल पर गौर करने लगी जिनमे पिछले कुछ समय से हो रहे लड़कियों क अपहरण क बारे में रिपोर्ट्स थी.
 
अपडेट 155



‘ बड़ी खास पहचान है तेरी इस डॉ से’

डॉ रीना से मिल कर जब मैं और निधि दीदी घर क लिए निकले तो निधि दीदी ने ये बात कही.

अमित : वो बस ऐसे hi दीदी मैंने बताया न आपको. उनकी सिस्टर राधा क साथ hi पड़ती है.

निधि दीदी : मगर उन्होंने तो साफ बता दिया क तुम दोनों पहले से दोस्त हो.

अमित : एक दोस्त को चोट लगी थी तो उसे इसी हॉस्पिटल में लाया था तब पहली बार मिला था. उसके बाद ऐसे hi कई बार एक्सीडेंट मुलाकात हुई और जान पहचान हो गयी.

निधि दीदी : वो जिस तरह बात कर रही थी उससे तो बात जान पहचान से आगे की लगती है.

अमित : अरे क्या दीदी आप भी कौन स बाएं ले कर बैठ गयी . वो सिर्फ दोस्त है मेरी और जो मैडम मुझे पादरी है न इनकी बुआ है वो. बस इस लिए अचे से बात कर लेते हैं हम दोनों.

निधि ऐसे सवाल कर रहे है थी जैसे वो अमित और रीना क बीच में छिपे रिश्ते को ढूंढना चाहती हो. अमित चाहे इसे दोस्त कह रहा था पर रीना की बातों और उसके देखने से निधि को कुछ और hi लग रहा था. एक लड़की होने क नाते उसे समझ आ गयी थी क रीना क दिल में अमित क लिए क्या फीलिंग्स हैं. निधि को वैसे तो खुश होना चाहिए था क उसके भाई को इतनी सुन्दर लड़की चाहती है और ऊपर से डॉ भी. पर निधि उसके उलट अपने अंदर जलन स महसूस करने लगी थी. एक घटना से hi जैसे सब कुछ बदल कर रख दिया था. भाई की तरह अमित को चाहने वाली निधि अब अमित को लेकर कुछ अलग hi महसूस कर रही थी. अमित ने फ़िलहाल उसे चुप तो करवा दिया था पर निधि का मन इस बात से दर भी रहा था क अमित की ज़िन्दगी में पहले से hi कोई और तो नहीं ?

अमित : क्या हुआ दीदी आप खामोश क्यों हो गयी ? कुछ तो बोलिये ?

निधि दीदी : कुछ नहीं वो मैं बस सोच रही थी क घर पर क्या कहूँगी? तुम्हे तो कॉलेज होना चाहिए था और मैं अपनी दोस्त क घर जाने का बोल कर निकली थी. अब हम दोनों साथ में है तो क्या जवाब देंगे ऊपर से तुम्हे चोट भी लगी है.

अमित : तो क्या हुआ ? आप अब भी एहि कहना आप अपनी दोस्त क घर से आ रही हैं. और मैं कॉलेज से . निधि है बात चोट की तो वो तो जो सच है वो hi बताऊंगा मैं.

निधि दीदी : पर तुमने जिस तरह मेरी जान बचाई है वो सबको पता चलना चाहिए न.

अमित : दीदी , मेरे लिए आप ज़रूरी हैं आपका मान सम्मान ज़रूरी है . किसी को बता कर मुझे क्या लेना है ? वैसे भी मैं नहीं चाहता ये बात किसी को पता चले. इसे बुरा सपना समझ कर भूल जाइये आप.

निधि दीदी : तुम बहुत अचे हो अमित , अगर तुम वक़्त पर न आते तो आज मैं ......

इतना कह कर दीदी रोटी हुई मेरी पीठ से चिपक गयी . मैंने बाइक को साइड में रोका और बाइक से उतर कर दीदी को गले लगा लिया . दीदी रो रही थी और मुझसे ये बर्दाश्त नहीं हो रहा था .

अमित : दीदी , आप जानती हैं ? जब आप रोटी हैं तो मेरे दिल में दर्द होता है. और आप बार बार ऐसे रो कर मुझे दुःख दे रही हैं. क्या आप चाहती हैं क आपका ये भाई भी आपके साथ रोये?

निधि दीदी : नहीं , नहीं मैं ये कभी नहीं चाहती .

अमित : तो फिर ये रोना बंद कीजिये . अगर आप क साथ कुछ अलग hi जाता तो मैं उन दोनों कुत्तों को जान से मर देता फिर चाहे आप कितना भी मुझे रोकती. आप मेरी सबसे प्यारी दीदी हैं . बचपन से एक आप hi तो हैं जो मुझे इतना प्यार करती आयी हैं. आपकी तरफ बुरी नज़र से देखने वाले की मैं ऑंखें निकल लूंगा .

निधि दीदी : इतना प्यार करते हो मुझसे ?

अमित : मैं नहीं जनता क कितना पर सबसे ज्यादा .

निधि दीदी : क्या मुझे हमेशा hi प्यार करेगा साडी ज़िन्दगी??

अमित : हमेशा .

निधि दीदी : मैं भी यही चाहती हूँ तू मुझे साडी ज़िन्दगी प्यार करे . भगवन हर जनम में मुझे तेरी hi बनाये .

अमित : मैं भी यही चाहता हूँ तो क जब भी जनम हो तो आप hi मेरी दीदी हो.

निधि दीदी ने एक बार मेरी आँखों में प्यार से देखा और मेरी पीठ पर उनके हाथ कास गए . दीदी शांत होने तक मेरे गले से लगी रही और मैं उनकी पीठ सहलाता रहा. फिर मेरे गाल को प्यार से चूमती वो प्यार भरी नज़रों से देखती हुई बोली.

निधि दीदी : मैं भी चाहताती हूँ तुम हर जनम मुझे मिलो.

दीदी को मैंने पीछे बिठाया और चल दिया घर को. अपना तो इलाज मैंने करवा लिया था पर बाइक का भी इलाज करवाना था तो इस लिए हम पहले बाइक को मैकेनिक क पास छोड़ कर फिर ऑटो में घर गए. घर आते आते 5 बज गए थे. अब तो नैना दीदी और रजनी मौसी का भी फ़ोन आ गया था. मगर मैंने बस इतना hi कहा क मैं घर आ रहा हूँ. जब हम घर पहुंचे तो दीदी क बेल्ल बजने पर दरवाज़ा नैना दीदी ने खोला . मुझे और दीदी को साथ देख कर वो हैरान हुई . हमें अंदर लेते हुए उन्होंने दरवाज़ा बंद किया पर जैसे hi उनकी नज़र मेरी बाजु पर बंधी पट्टी पर पड़ी तो वो ज़ोर से बोली

नैना दीदी : ये चोट कैसे लगी तुझे ?? क्या हुआ है तेरे साथ और तेरी बाइक कहाँ है ? एक्सीडेंट हुआ है क्या तेरा ??

अमित : कुछ नहीं दीदी वो छोटा सा एक्सीडेंट था बस . मामूली सी रगड़ लगी है.

दीदी थोड़ा ऊँचा बोली थी तो मौसी भी उनकी आवाज़ सुनकर हमारे पास आ गयी .

रजनी मौसी : हए हए ये क्या हो गया तुझे ? कहाँ से चोट लगवा कर आ रहा है ? दिखा मुझे . हे भगवन , और कहाँ कहाँ लगी है बता मुझे .

रजनी मौसी मेरी चोट देख कर घबरा hi गयी थी और चिंता से मुझे अछि तरह खुद hi चेक करने लगी :

अमित : मैं ठीक हूँ मौसी जी. बस बाइक स्लिप हो गयी थी तो चोट लग गयी .

‘ बाइक चलनी नहीं आती तो चलता क्यों है ? साइकिल ले ले या ऑटो से जाया कर. पता नहीं मन ने तुझे इतनी मेहेंगी बाइक कैसे लिस दी ‘

ये बात कारन भैया ने कही अंदर आते हुए. शायद वो भी बहार से कहीं से आ रहे थे. मुझे उनका इस तरह से बात करना ाचा तो नहीं लगा पर मेरे बड़े थे तो मैं चुप रहा. मगर उनकी इस बात से रजनी मौसी क साथ नैना दीदी और हमेशा शांत रहने वाली निधि दीदी को भी गुस्सा आ गया .

रजनी मौसी : तेरी ज़ुबान कुछ ज्यादा hi नहीं चलने लगी आज कल. तेरा छोटा भाई है ये. तूने इतनी बार अपनी बाइक का नुकसान किया तुझे तो कभी मन नहीं किया मैंने तो फिर कैसे सवाल उठा रहा है इस पर.

कारन भैया : मुझे इससे मिला रही हो आप ? मैं बड़ा हूँ इससे और अचे से जनता हूँ बाइक चलना.

नैना दीदी : अमित भी अचे से जनता है. एक्सीडेंट किसी क भी साथ हो सकता है फिर तूने इसे कैसे इतनी बड़ी बात कह दी?

कारन भैया : ो ाचा तो तुम भी तरफदारी करने लगी .

निधि दीदी : गुस्से में ) कारन !!! तुझे तमीज भूल गयी है बात करने की??

कारन भैया : ाचा अब मेरी बातें बुरी लगने लगी हैं सबको. 2 दिन क लिए ये मेहमान क्या बन कर आ गया अब मेरी जगह इसे डोज आप लोग? रखो इस मनहूस को अपने पास hi. जो अपने माँ बाप नाना नानी को खा गया आप को भी खा जायेगा .

रजनी मौसी को ये बात बर्दाश्त नहीं हुई तो उन्होंने आगे बाद कर खिंच कर एक झन्नाटे दर थप्पड़ मर दिया कारन भैया क मुँह पर.

रजनी मौसी : इतना ज़हर कहाँ से भर गया तेरे अंदर ? माफ़ी मांग इससे अभी

कारन भैया : इसके लिए मुझ पर हाथ उठाया , जा रहा हूँ मैं घर से . रखो इसी को अपने पास .

इतना कह कर कारन भैया घर से निकल गए पाऊँ पटकते हुए. रजनी मौसी का चेहरा गुस्से से लाल था और निधि दीदी क साथ नैना दीदी भी गुस्से में थी. मगर आज कारन भैया ने वो बात कह दी थी जो मैं अब भूल चूका था. क मैं मनहूस हूँ और अपने माता पिता क साथ अपने नाना नानी को भी खा गया. अपने आप hi मेरी आँखों में पानी आ गया और ऑंखें छलक गयी. मैं चुप चाप सीढ़ियां चढ़ कर अपने कमरे में आया और अपना बैग कपड़ों से भर कर कंधे पर उठा लिया . जैसे hi मैं मुदा सामने नैना दीदी कड़ी थी. उनकी आँखों में भी आंसू थे.

नैना दीदी : कहाँ जा रहे हो ?

अमित : मुझे जाने दो दीदी मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकता. मेरी मनहूसियत कहीं इस हस्ते खेलते घर की खुशियों को आग न लगा दे.

‘ ख़बरदार जो खुद को मनहूस कहा तोह , तू तो हम सब की आँखों का तारा है. वो तो पागल है . गुस्से में पता नहीं क्या क्या कह गया तू उसकी बातों पर ध्यान मत दे. उसको तो मैं सीधा करती हूँ ज़रा उसे घर तो आने दे. ‘ ये बात रजनी मौसी ने कबि थी कमरे में आते हुए. और आते hi मेरे हाथ से बैग लेकर वापिस रख दिया.

रजनी मौसी : क्या अपनी इस मौसी से प्यार नहीं तुझे ? तू उसकी बातों में आकर मुझे छोड़ देगा ? क्या मेरी कोई कीमत नहीं तेरी नज़रों में ? क्या मैं तेरी माँ नहीं ?

रजनी मौसी की ऑंखें भी भर आयी थी ये बात करते करते . मुझे अपनी गलती का एहसास हो गया. मैं मौसी क आंसू पोंछता हुआ उनके गले लग गया .

अमित : मुझे माफ़ कर दो मौसी. पर क्या करूँ जब कोई मुझे मांहुदस कहता है तो मुझसे बर्दाश्त नहीं होता .

रजनी मौसी : तुझे क्या लगता है मुझे ाचा लगता है ? मेरी छोटी बहिन का बीटा है तू. जितना वो मुझे प्यारी थी उससे ज्यादा प्यार मैं तुझे करती हूँ . तेरे में hi तो मैं अपनी बहिन को देख लेती हूँ. क्या तू मुझसे दूर जा कर मुझे अपनी बहिन का दोषी बनाना चाहता है? तेरे लिए मैं अपने बेटे को छोड़ सकती हूँ पर तुझे नहीं. जब तक वो तुझसे माफ़ी नहीं मांगता उसे इस घर में नहीं घुसने दूँगी .

अमित : नहीं मौसी ऐसा मत कहो , इसकी ज़रूरत नहीं है. कारन भैया आपके बेटे हैं

रजनी मौसी : तो क्या तू नहीं है ? दिखा मुझे ये चोट कहाँ से लगवा कर आया है.

अमित : सब ठीक है मौसी बस थोड़ी सी रगड़ लगी थी गिरने से. पट्टी करवा ली है और दवाई भी ली है .

रजनी मौसी : चल मैं तेरे लिए हल्दी वाला गरम दूध ले कर आयी हूँ. तू आराम कर.

इतना कह कर मौसी निचे चली गयी तो मेरी नज़र अब नैना दीदी पर पड़ी .

नैना दीदी : बड़ा गुस्सा अत है न तुझे , एक बार भी मेरे बारे में नहीं सोचा. बस यही था तेरा प्यार ?

नैना दीदी की आँखों में आंसू देख कर और उनकी इन करुणा भरी बातों से मैं खुद को रोक न पाया और उठ कर उन्हें अपने सीने लगा लिया .

अमित : ऐसा मत कहो आप , मैं आप पर तो गुस्सा नहीं था . वो बात hi ऐसी थी क मैं बर्दाश्त नहीं कर पाया.

नैना दीदी : गुस्सा कारन पर था पर सजा तो मुझे दे रहे थे न. और मेरे साथ माँ और दीदी को भी. पता है दीदी की आँखों में भी आंसू आ गए थे और वो अपने कमरे में चली गयी थी तेरे ऊपर आते hi.

अमित : क्या ??? दीदी रो रही हैं ??

नैना दीदी : कौन नहीं तो रहा ?

मैंने दीदी की आँखों से आंसू साफ किये और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए . दीदी क माखन से मुलायम गुलाबी होंठ अपने होंठो में लेते hi मैं उन्हें चूसने लगा. दीदी ने भी मेरे गले में बहन दाल ली और किश करने लगी . कुछ पल किश करने क बाद मैं किश तोड़ी और नैना दीदी की आँखों में देखा तो वो शर्माने लगी .

नैना दीदी : ऐसे क्या देख रहे हो ?

अमित : देख रहा हूँ आप पहले से भी मीठी हो गयी हैं और सुन्दर भी .

नैना दीदी : हट बदमाश, रत को बताउंगी तुझे . बहुत तंग करने लगा है तू मुझे.

इतना कह कर मेरे होंठ चुम कर दीदी निचे भाग गयी . मैं भी उनके पीछे पीछे निचे आ गया. सीढ़ियां उतारते थोड़ा दर्द महसूस हो रहा था मुझे घुटने में पर मैंने ध्यान नहीं दिया. निधि दीदी क कमरे का दरवाज़ा बंद था. मैंने दरवाज़ा खोला तो देखा दीदी तकिये में मुँह छुपाये उलटी लेती हुई थी. मैं उनके सर क पास जा के बैठ गया और उनके चेहरे पर आये बल एक तरफ हटाए तो उनका चेहरा आंसुओं से भरा हुआ था. दीदी ने नज़रें उठा कर मुझे देखा तो उनकी नज़रों में अपने लिए प्यार और दर्द देख कर मैंने उनके आंसू पोंछते हुए उन्हें उठाया. दीदी उठ कर बैठी और मुझे गले लगा लिया .

निधि दीदी : मुझे माफ़ कर दो अमित , कारन की तरफ से मैं माफ़ी मांगती हूँ. तू जो चाहे सजा मुझे दे दे पर इस घर से रूत कर मत जाना. अगर तू ऐसे मुझे छोड़ कर गया तो मैं खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाऊँगी .

अमित : अरे दीदी कैसी बातें कर रही हो . मैं भला आप से नाराज़ हो सकता हूँ? आप तो मेरी सब से प्यारी दीदी हो. मैं कहीं नहीं जा रहा . वो तो बस मुझे कारन भैया की बात बुरी लगी और फिर मेरी वजह से इतना कुछ हो गया तो मैंने सोचा क ....

निधि दीदी : क्या सोच ?? क तू मुझे छोड़ कर चला जायेगा तो सब ठीक हो जायेगा ? खुद hi तो कह रहे थे हमेशा मेरे साथ रहोगे और अब ऐसे जा रहे थे? कुछ hi घंटों में उम्र भर का वडा तोड़ कर जा रहे थे ?

अमित : ऐसा भला हो सकता है ? मैं पास रहूं यान दूर रहूं आप हमेशा मेरे दिल में रहोगी ये आप हमेशा यद् रखना.

निधि दीदी : पर मैं चाहती हूँ तुम हमेशा मेरे पास रहो . तुमने जो एहसान मुझ पर किया है उसका क़र्ज़ मैं जान दे कर भी नहीं चूका सकती.

अमित : ऐसा मत कहो दीदी, भाई कभी बहिन पर एहसान नहीं करता. अगर मेरी जान भी चली जाती तो भी मैं आपको कुछ .....

निधि दीदी ने मेरे मुँह पर हाथ रख कर मेरी बात बीच में hi काट दी.

निधि दीदी : ऐसा फिर मत कहना, भगवन करे तुम्हे मेरी भी उम्र लग जाये. तुम नहीं जानते तुम मेरे लिए क्या हो .

निधि दीदी फिर से मेरे गले लग गयी. एक बात पर दीदी ने ध्यान नहीं दिया क जब वो घर आयी थी तो सर को अचे से दुपट्टे से ढाका हुआ था और अब दुपट्टा सर से उतर चूका था . इधर नैना दीदी पता नहीं कब कमरे में आ गयी थी और हमें देख रही थी.

नैना दीदी : अब क्या सब को रुलाता hi रहेगा? चल हैट पीछे , मेरी प्यारी दीदी को रुलाये जा रहा है .

नैना दीदी ने ये बात कही तो मेरे साथ निधि दीदी क चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी. दीदी क पीछे हैट ते hi नैना दीदी की नज़र निधि दीदी क सर क लाल हिस्से पर पद गयी.

नैना दीदी ( चौंकते हुए ) दीदी ये क्या ? आपके बालों में ये लाल लाल क्या लगा है?

निधि दीदी : को कुछ नहीं कुछ नहीं वो वो

अमित : वो मेरे हाथ से खून बह रहा था न तो वो दीदी क बालों में लग गया .

नैना दीदी : पर तेरे हाथ का खून दीदी को लगा कैसे ? दीदी तो अपनी फ्रेंड क पास गयी थी न?

अमित : हाँ तो मैं दीदी को वहीँ से तो लेने गया था जब मेरा एक्सीडेंट हुआ. मुझे तो पता hi नहीं था क मेरे हाथ से खून बह रहा है और जैसे hi मैंने हाथ दीदी क सर पर है रखा तो दीदी ने hi बताया क खून बह रहा है.

मैंने दीदी को हड़बड़ाते देख खुद बात को सँभालने की कोशिश की.

नैना दीदी : पर तुम दीदी क सर पर हाथ क्यों रख रहे थे? दीदी तुमसे बड़ी हैं छोटी तो नहीं जो तुम उनके सर पर हाथ रखोगे. बात क्या है दीदी ? आप दोनों कुछ छुपा रहे हो मुझसे?

निधि दीदी : नं नहीं तो ऐसा कुछ नहीं है. तुझसे भला क्या छुपाउंगी मैं ?

नैना दीदी : ये तो ऐसे लग रहा है जैसे किसी ने आपकी मांग भरी हो . कहीं आपने चुपचाप शादी तो नहीं कर ली ?

निधि दीदी नैना दीदी की इस बात पर शॉकेड हो गयी. और मेरा भी इस बात पर माथा ठनका .

अमित : ये आप क्या कह रही हो दीदी ?

नैना दीदी : अरे मज़ाक कर रही थी, देख ज़रा दीदी की हालत कैसी हो गयी है. जैसे सच में दीदी ने छुप कर शादी कर ली हो. हे हे हे

नैना दीदी इतना कह कर खिल खिलने लगी . तो निधि दीदी ने भी चैन की सांस ली .

निधि दीदी : रुक ज़रा मैं बताती हूँ तुझे .

निधि दीदी ने नैना दीदी को पकड़ने की कोशिश की तो वो उठ कर भाग गयी. दीदी अब मुस्कुरा रही थी और जैसे मैंने उनकी तरफ देखा तो उन्होंने ने शर्मा कर नज़रें झुका ली.

अमित : सॉरी दीदी मेरी वजह से आप को .....

निधि दीदी : सॉरी क्यों बोल रहे हो ? तुमने कुछ भी तो नहीं किया . ये तो सब अचानक हुआ न . और सब ऊपर वाला hi करता है तू टेंशन मत ले मैं तुझसे नाराज़ नहीं हूँ.

अमित : चलिए अब इसे साफ़ कर लीजिये वर्ण अगर मौसी ने देख लिया तो पक्का क्लास लग जाएगी.

निधि दीदी : मैं कर लुंगी . चल तू फ्रेश हो क कपडे बदल ले फिर तुझे मालिश भी करनी है यद् है न?

अमित : अरे मैं ठीक हूँ कुछ भी नहीं हुआ मुझे.

निधि दीदी : तू जाता है क नहीं ?

अमित : ाचा ाचा जाता हूँ.

तभी मुझे यद् आया मेरी जेब में वो पट्टी पड़ी थी जो दीदी ने अपना दुपट्टा फाड़ कर बंधी थी .

अमित : दीदी ये आपके दुपट्टे का हिस्सा, इसे मैं दे क नहीं सकता था इस लिए डॉ से वापिस ले लिया था. वैसे तो खून लगने से बेकार हो गया है पर फेंकना मुझे ाचा नहीं लगा .

निधि दीदी ने मेरे हाथ से वो पट्टी ले ली और मेरी आँखों में देखते हुए बोली .

निधि दीदी : ये तुमने ाचा किया. इसे मैं हमेशा संभल कर रखूंगी अपने पास. ये मेरे लिए अनमोल है.

इतना कह कर दीदी ने उस खून से लाल हो चुकी पट्टी को चूम लिया. खून तो सुख चूका था पर रंगत तो थी hi . मुझे लगा क शायद वो मेरी यद् समझ कर इसे रखना चाहती हैं तो मैं भी बिना कुछ कहे उनके कमरे से निकल कर अपने कमरे में आ गया. नैना दीदी मुझे दूध का गिलास दे गयी जिसे पीकर मैं नहाने चला गया .

निधि अमित क जाने क बाद उस पट्टी को देख कर वो नज़र यद् करने लगी जब अमित उसको बचने क लिए वहां आया था और आते hi उस मैनेजर को जानवरों की तरह उठा उठा कर पटक रहा था . अगर आज वो अमित को न रोकती तो वो मैनेजर को मर hi देता . कैसे खून सवार था उसके सर पर . सिर्फ निधि क लिए .

निधि ( मन में ) कितना प्यार करता है मुझसे मेरे भाई

भाई शब्द जैसे अब बोझ सा लगने लगा उसे और उसकी आँखों में अपनी खून भरी मांग आ गयी. भाई से बाद कर अब अमित कुछ और हो गया था और ये सब भगवन की मर्ज़ी थी . ये सब अनजाने में हुआ था.

निधि का दिमाग : ये तू क्या सोच रही है निधि ? वो तेरा छोटा भाई है. भूल गयी बचपन से तू उसे गॉड में खिलाती रही है. वो तुम्हे अपनी सब से प्यारी बहिन मंटा है और तू उसे पति समझ रही है . वो सिर्फ एक एक्सीडेंट था. अनजाने में हुई एक घटना . भूल जा उसे. ऐसा सोचना भी पाप है .

निधि का दिल : ‘ पाप ‘ ? पाप तो वो था जो तेरे साथ आज होने जा रहा था. कौन था उस वक़्त तेरे पास ? अपनी जान की परवाह न करते हुए वो तुझे बचने वहां तक आ गया. तूने तो उसे बताया तक नहीं था . घर में और भी तो लोग थे पर तेरा दर्द किसी और ने महसूस किया ? तेरे सेज भाई तक ने तुझसे पूछा तक नहीं था. देखा नहीं था एक्सीडेंट होने क बावजूद वो खून से लथपथ तेरे पीछे आया. उसे तो अपनी परवाह hi नहीं थी कोई. क्या तू उसका एहसान कभी उतर सकती है? ये भगवन की hi मर्ज़ी थी. भगवन ने hi उसे भेजा था . वर्ण सोच क वो कैसे आ गया ? और फिर वो खून कैसे तेरी मांग तक पहुँच गया ? क्या ये सिर्फ एक्सीडेंट था ? नहीं निधि वो तेरे लिए वरदान है भगवन का. आज तक तूने किसी लड़के को आँख उठा कर भी नहीं देखा . किस लिए ? सिर्फ इसी लिए न क यहाँ हर कोई जिस्म का भूखा है , तेरी और तेरी परिवार की इज़्ज़त को कोई रोल न दे तू इसी लिए सब से बचती रही और आज जब तेरी दुनिया लूटने वाली थी तो अमित फरिश्ता बन कर तुझे बचने आ गया . और क्या कमी है उसमे ? तुझे प्यार करता है तेरी इज़्ज़त करता है . दिल का साफ है और कितना हैंडसम भी है. ऐसा लड़का तो किस्मत वालों को मिलता है . तू उसे सिर्फ इस लिए छोड़ देगी क वो रिश्ते में तेरा भाई लगता है . मत भूल वो भगवन का वरदान है तेरे लिए. और कौन सा सागा भाई है तेरा वो.

दिमाग : ‘ भाई ‘ !! भाई hi तो मन है तुमने उसे हमेशा . तो फिर कैसे आज उसे पति मन लेगी ? मत भूल वो तुझे सिर्फ अपनी बहिन मंटा है. वो कभी इस रिश्ते को स्वीकार नहीं करेगा. ये सरासर गलत है . क्या जवाब देगी अगर किसी ने पूछा क तुमने अपने से छोटे लड़के और अपने hi भाई को पति कैसे मन लिया ? इस रिश्ते की समाज में कोई जगह नहीं है .

दिल : किस समाज की बात कर रही है तू ? औरतों को सिर्फ खिलौना समझने वाला ये समाज तब कहाँ होता है जब किसी लड़की क साथ ज्यादती होती है? और रिश्ते की बात hi मत कर. यहाँ सेज रिश्तेदार hi इज़्ज़त तार तार कर देते हैं ये तो फिर भी तेरा कजिन है. और ऐसे रिश्तों में शादी तो हो भी सकती है.

दिमाग : कैसी शादी ? जब वो तुझे बहिन मंटा है तो शादी का सवाल hi कहाँ रह जाता है?

दिल : तो क्या हुआ वो बहन मंटा है ? उसी क खून से तेरी मांग भरी गयी है आज . और इस नाते वो तेरा पति hi है . अगर ऐसा नहीं है तो बता जान से उसने तेरी मांग भरी है तू उसे भाई क्यों नहीं कह प् रही ??

ये बात बिलकुल सही थी. जाने अनजाने निधि अमित को भाई नहीं कह रही थी जान से अमित क खून से उसकी मांग भरी थी या ऐसे कह लो जब से उसने अपनी मांग में अमित का लहू देखा था तब से उसकी ज़ुबान उसका दिल अमित को भाई कह hi नहीं प् रहा था. निधि का दिमाग उसके दिल क आगे हारता हुआ महसूस हुआ उसे. वैसे भी निधि दिल की अछि थी और दिल से फैसले लेती थी पर्सनल लाइफ में .

निधि ( मन में ) वो मने या न मने पर मैं उसे अब अपना पति hi मानूंगी पर कभी उस पर ज़ाहिर नहीं करुँगी. देखते हैं भगवन क्या चाहता है? अगर ये सब उसकी की मर्ज़ी है तो उसका प्यार मुझे ज़रूर मिलेगा अगर नहीं तो भी मैं उसे दिल से पति मानती रहूंगी.

इतना सोचते हुए निधि ने जब शीशे में खुद को देखा तो मांग में अमित क खून से सनी पट्टी गहने की तरह सजी हुई थी. जिसे देख कर वो खुद hi शर्मा गयी . अपने खुद क विचारों में खोई जैसे वो अपने दिल से मजबूर खुद hi अपनी मांग को फिर से सजा रही थी उस सिन्दूर रुपी अमित क खून से.

निधि : अब इसे मैं हमेशा अपने पास संभल रखूंगी. मेरी मांग अब इसी से hi सकती रहेगी. तुम मनो या न मनो मैंने तुम्हे अपना पति मन लिया है. ी लव यू

इतना कहते hi निधि की धड़कन इतनी तेज़ हो गयी क उसे अपने कानो में सुनाई देने लगी . हस्ती मुस्कुराती और शर्माती वो खुद hi तकिये में मुँह छुपाये फिर से बीएड पर धड़ाम से गिर गयी.

मैं अपने कमरे में नाहा कर फ्रेश हुआ और कपडे बदल कर लेट गया पता नहीं कब मेरी आँख लग गयी . शीना शिवानी को साथ ले कर आज अपने फार्म हाउस पर hi रही कल की पार्टी की तयारी क लिए .

रीमा और राधा दोनों hi इस बात पर उदास थी क आज अमित से बात नहीं हुई. हालाँकि मैसेज तो आ गया था अमित का क वो ज़रूरी काम से बहार है पर दिल मन नहीं रहा था . रीमा तो फिर भी खुद को किसी तरह संभल गयी थी क चलो कल तो मिलना hi है. इस लिए वो कल की तयारी में जुट गयी . राधा का दिल बेचैन था , उसका दिल बार बार अमित को यद् कर रहा था. उसे ऐसा लग रहा था जैसे अमित किसी मुश्किल में है. अमित कहीं भी हो वो बात ज़रूर कर लेता था राधा से चाहे देर से hi सही पर आज सुबह से शाम हो गयी न उसने फ़ोन पर बात की न शकल दिखाई . घर पर आ कर भी जैसे उसे करार न था. दिव्या भी अपनी बेटी की बेचैनी देख रही थी पर उसे पता नहीं था क बात क्या है. राधा अपने कमरे में बीएड पर लेती अमित क बारे में hi सोच रही थी क दिव्या उसके पास आ गयी.

दिव्या : क्या बात है बेटी किस सोच में गम हो ? कोई बात हुई है क्या ?

राधा : नहीं माँ ऐसी कोई बात नहीं है.

दिव्या : तो फिर मेरी प्यारी बेटी इतनी उदास क्यों है?

राधा : आज अमित कॉलेज नहीं आया और ऊपर से फ़ोन पर बात भी नहीं की . ऐसा वो कभी नहीं करता . काम से काम बात तो कर hi लेता है वो.

दिव्या : तो इस लिए परेशां है मेरी बची. इसमें कौन सी बड़ी बात है. अभी देख मैं फ़ोन करुँगी तो देखना एक मिनट में उठा लेगा चाहे कहीं भी बिजी हो .

दिव्या ने अपने फ़ोन से अमित को फ़ोन लगाया तो उसने नहीं उठाया. राधा को दिलासा देते हुए उसने फिर से डायल किया पर इस बार भी रिजल्ट वही था. राधा की बेचैनी और बाद गयी . अब तो दिव्या को भी शक होने लगा क कहीं कुछ हुआ तो नहीं ? दिव्या ने अब अपनी बड़ी बहिन को फ़ोन लगा दिया . काम से काम वो तो बता hi देंगी अगर कुछ हुआ तो .

रजनी : आ गयी बड़ी बहिन की यद् ? शिकार है वर्ण मुझे तो लगा था क तू भूल गयी है क मैं भी यहीं पर हूँ.

दिव्या : कैसी बातें करती हो दीदी ? भला आप से कभी मैं दूर हो सकती हूँ ? आप का hi तो सहारा है मुझे.

रजनी : तो मिलने क्यों नहीं आती ?

दिव्या : बस दीदी राधा का भी तो कॉलेज होता है न तो इसी लिए नहीं आ पति. वैसे दीदी एक बात पूछनी थी आपसे

रजनी : पूछ क्या बात है ?

दिव्या : अमित ठीक तो है न? वो फ़ोन नहीं उठा रहा.

रजनी : वो सो रहा है अपने कमरे में. पर तुझे कैसे पता वो ठीक नहीं है ?

दिव्या : घबराते हुए ) क्या हुआ मेरे बचे को ? बताओ दीदी क्या हुआ है उसे ?

रजनी : अरे घबरा मत चिंता वाली कोई बात नहीं है. वो आज उसका छोटा सा एक्सीडेंट हो गया था तो बाजु पर थोड़ी सी चोट लगी है. डॉ को दिखा कर आया था वो .

दिव्या : क्या ???? एक्सीडेंट

दिव्या रजनी क मुँह से एक्सीडेंट सुन कर जहाँ अंदर से घबरा गयी वहीँ राधा का दिल भी माँ क मुँह से एक्सीडेंट शब्द सुनते hi घबराने लगा .

दिव्या : ये सब हुआ कैसे दीदी ?

रजनी : कह रहा था बाइक स्लिप हो गयी. पर सच कहूं तो उस बात से उतना दुःख नहीं हुआ होगा जितना उसके बाद हुआ.

दिव्या : क्या हुआ उसके बाद दीदी ? क्या हो रहा है वहां ?

रजनी : तू जब मिलेगी तो बताउंगी फ़ोन पर ये बात नहीं करना चाहती मैं. तू आ जाना जब तुझे टाइम मिले .

दिव्या ने महसूस किया था क दीदी भी किसी बात से दुखी हैं . बात करते हुए उनकी आवाज़ में छुपा दर्द उसने महसूस किया था. रजनी ने इतना कह कर फ़ोन काट दिया और दिव्या सोच में पद गयी उसे अमित की चिंता होने लगी . उसका दिल कहने लगा क उसे अभी अमित क पास जाना चाहिए पर इस वक़्त शाम क 7 बजने वाले थे और इस समय जाना सही नहीं था. राधा को लेकर वो इस वक़्त कहीं नहीं जाना चाहती थी . कल जाने क बारे में सोच कर जब उसने राधा की तरफ देखा तो अपने बिस्तर पर नहीं थी. तभी बाथरूम का दरवाज़ा खुल और राधा अंदर से निकल कर उसके सामने आ कर कड़ी हो गयी .

राधा : जल्दी करो माँ हाथ मुँह धोलो आप भी . कपडे यही ठीक हैं . 15 मिनट्स में हम मौसी क घर पहुँच जायेंगे .

दिव्या तो राधा को देख कर हैरान हो रही थी. कहाँ वो बिस्टेर पर उदास सी पड़ी थी और अब कैसे बिना पूछे hi खुद फैसला कर लिया जाने का. दिव्या ने भी कोई बात नहीं करि और जल्दी से वो भी हाथ मुँह धो कर तैयार हो गयी जाने क लिए . राधा की तरह दिल तो उसका भी अमित को देखने को मचल रहा था. पता नहीं किस हल में होगा कितनी चोट लगी होगी उसे और दीदी ने जो बात नहीं बताई पता नहीं वो क्या है . 10 मिनट्स में दोनों माँ बेटी घर को अछि तरह लॉक कर क स्कूटी पर निकल गयी रजनी मौसी क घर की तरफ . राधा शो नहीं कर रही थी पर वो दर रही थी क कहीं अमित को ज्यादा चोट तो नहीं आ गयी.

इधर मैं अपने कमरे में सो रहा था क मुझे अपने घुटने पर दबाव महसूस हुआ. कुछ दर्द हुआ तो मेरी नींद उचक गयी . मैंने ऑंखें खोल कर देखा तो निधि दीदी मेरी बगल में बैठी मेरे घुटने की मालिश कर रही थी. मई एक डैम से उठ गया और उनका हाथ पकड़ लिया.

अमित : ये क्या कर रही हो दीदी ?

निधि दीदी : चुप चाप लेता रह आराम से , डॉ ने कहा था मालिश करनी पड़ेगी वर्ण सूजन बढ़ जाएगी. देख अब भी कितना सुजा हुआ लग रहा है.

अमित : आप रहने दो दीदी मैं कर लूंगा

निधि दीदी : तुमने सुना नहीं या दूँ तेरे कान क निचे.

दीदी ने नकली गुस्सा दिखते हुए ये बात कही तो मुझे हंसी आ गयी.

निधि दीदी : हंस क्यों रहा है?

अमित : हसन नहीं तो क्या करूँ, आप ने आज तक कभी किसी को मारा भी है ? यद् है मुझे कभी चोट लग जाती थी बचपन में तो आंसू आपकी आँखों में आ जाते थे. और अब भी तो वैसी hi हैं आप . तो मारेंगी कैसे ?

निधि दीदी : ज्यादा बातें मत बना , अगर बात नहीं मानेगा तो मार भी दूंगी कह देती हूँ मैं. वैसे भी मेरा हक़ है तुम्हारी सेवा करना.

अमित : अपना हक़ ? बड़ों की सेवा करना तो छोटों का हक़ होता है और आप उलटी गंगा बहा रही हैं .

निधि दीदी : उलटी नहीं सीधी hi है. देखा नहीं लक्ष्मी जी को भगवन विष्णु क पैन दबाते हुए?

अमित : पर वो तो उनकी बीवी हैं न . और आप मेरी बहिन हो.

निधि दीदी : चुप करेगा या नहीं अब ? मुझे मेरा काम करने दे बस अब और कोई बात नहीं .

मैं चुप कर गया अब दीदी क आगे मैं क्या कहता. अभी दीदी मेरे घुटने की मालिश कर hi रही थी क राधा दौड़ते हुए कमरे में आयी और दरवाज़े पर hi कड़ी हो कर मुझे देखने लगी. उसकी साँसे फूली हुई थी जो बता रही थी क वो बिना रुके सीढ़ियां दौड़ कर चढ़ कर आयी है. पर अब वो बिना बोले बस मुझे देख रही थी और ऑंखें दबदबा सी गयी थी उसकी. दीदी ने भी उसे देखा. मैं तो बस राधा को देख कर खामोश हो गया क्यूंकि मैं समझ गया था क वो नाराज़ होगी और दुखी भी .

निधि दीदी : अरे राधा तुम ? इतनी सांस क्यों फुला राखी है? और ये क्या ? तू रो रही है ?

‘ सांस तो फूलेगी hi , दौड़ कर जो आयी है निचे से ‘ राधा क पीछे पीछे hi दिव्या मौसी और रजनी मौसी भी आ गयी.

दिव्या मौसी : तो यहाँ आ कर तू मुझे भी भूल गया ? एक फ़ोन कर क बता नहीं सकता था क तुझे चोट लगी है . लेता रह वहीँ.

दिव्या मौसी को देख कर मैं बीएड से उठने लगा तो मौसी खुद hi मेरे पास आ गयी. निधि दीदी उठ कर मौसी से गले लग कर मिली और फिर राधा से भी .

अमित : सॉरी मौसी पर ये मामूली सी चोट थी तो क्यों परेशां करता मैं अपनी प्यारी मौसी को? वैसे आपको किसने बताया ?

दिव्या मौसी : चोट थोड़ी हो ज्यादा बताना तो चाहिए न. और तू नहीं बताएगा तो क्या कोई और भी नहीं बताएगा . दीदी हैं मेरी भी इस घर में. दिखा तो ज़रा .... इसे मामूली चोट कहता है तू ? घुटना सुजा हुआ है और ये पट्टी इतनी बड़ी लगा राखी है . तू गिर कैसे गया बाइक से ? इतना अचे से तो चलता है फिर कैसे गिर सकता है ?

अमित : वो मौसी मोढ़ पर स्लिप हो गया था. आप तो ऐसे hi चिंता कर रहे हो . कुछ भी नहीं हुआ मुझे.

दिव्या मौसी : तू चुप कर , ला निधि वो क्रीम मुझे दे मैं लगा देती हूँ अपने बेटे को.

निधि दीदी : अरे मौसी जी मैं कर रही हूँ न.

दिव्या मौसी : तो अब तू भी मेरी बात नहीं मानेगी?

दिव्या मौसी ने इतना कहा तो दीदी ने क्रीम उनके हवाले कर दी . अब मौसी मेरे घुटने की मालिश करने लगी . मैंने मन करने की कोशिश भी नहीं की कहीं मौसी गुस्से में कुछ और hi न कह दें. इतने में नैना दीदी राधा और दिव्या मौसी क लिए ठंडा ले आयी. दिव्या मौसी ने अचे से पहले मालिश की और फिर मेरे घुटने को कवर करने क बाद hi ठन्डे का गिलास पकड़ा . तब तक नैना दीदी और निधि दीदी राधा से बात करने लगी पर राधा बस बेमन से जवाब दे रही थी मगर उसका सारा ध्यान मेरी तरफ hi था.

रजनी मौसी : चल आ दिव्या मेरे साथ , ज़रा तुझसे बात करनी है.

दिव्या मौसी तुरंत उठ कड़ी हुई और दोनों निचे चली गयी . अब राधा चल कर मेरे पास आयी .

राधा : एक फ़ोन तक नहीं कर सकते थे तुम? क्या इतना भी ज़रूरी नहीं समझा तुमने ?

राधा क इस सवाल पर तो मेरी बोलती hi बंद हो गयी .

निधि दीदी : इसमें इसका कसूर नहीं है राधा. इसका फ़ोन मैंने hi साइलेंट कर क अलग रख दिया था वर्ण ये तो न रेस्ट करता न डॉ क पास जाता. इसे कुछ मत कहो .

राधा : आप इसकी गलती पर पर्दा मत डालो दीदी. इसे बताना चाहिए था मुझे . काम से काम एक फ़ोन तो कर hi सकता था.

राधा खुद को संभल कर बात कर रही थी पर उसके एक एक शब्द से दर्द झलक रहा था.

नैना दीदी : ो मेरी माँ की गुड़िया तू क्यों टेंशन लेती है . मैं हूँ न तेरे साथ . दोनों मिल कर इसकी अचे से खबर लेते हैं . आज तू यहीं रहना .

राधा : नहीं दीदी घर जाना होगा . घर अकेला नहीं छोड़ सकते न हम .

अमित : घर कहीं भाग नहीं जायेगा , चुप चाप यहीं रुक जाओ. इतने अँधेरे में आने की क्या ज़रूरत थी ? अब यहीं रुको रत भर .

राधा : अगर दिन को बता देते तो दिन में न आ जाये हम. अब चिंता हो रही है अँधेरे की ??

राधा ने नाराज़गी से ये बात कबि.

नैना दीदी : बिलकुल सही , अपनी गलती तो मंटा नहीं ये. पर तू भी नहीं जाने वाली अब कहीं सुना.

राधा : ठीक है नहीं जाती कहीं पर मैं नाराज़ हूँ सुन लो अचे से.

मेरी तरफ देखते हुए राधा ने ये कहा और उठ कर बहार चली गयी साथ hi नैना दीदी.

निधि दीदी : राधा तो सच में नाराज़ लग रही है तुमसे .

अमित : हम्म्म , पर ज्यादा देर रहेगी नहीं मुझे पता है उसे कैसे मानना है . आप देखो कहीं मौसी जाने की ज़िद न करें. इतनी रत को जाना ठीक नहीं है दोनों का . अगर ज़िद करेंगी तो कह देना घर छोड़ने फिर मैं जाऊंगा .

निधि दीदी : जो आगे महाराज .

इतना कह कर दीदी मुस्कुराती हुई मेरे बालों में प्यार से हाथ चलती हुई चली गयी .

रजनी दिव्या को साथ लिए अपने कमरे में आ गयी और दरवाज़ा बंद कर दिया.

दिव्या : क्या बात है दीदी ? कुछ गड़बड़ हुई है क्या ?

रजनी : क्या बताऊँ दिव्या , ये कारन को पता नहीं क्या हो गया है? पता नहीं किन घटिया लड़कों की सांगत करने लगा है. आज उसने वो कह दिया जो जिसे सुन कर अब मुझे अपने आप पर शर्म आ रही है.

दिव्या : कहा कहा कारन ने और किसे कहा ?

रजनी : अब कैसे बताऊँ मुझे तो शर्म आ रही है . प्लीज मुझे गलत मत समझना मेरी बहिन तू जानती है मैं अमित से कितना प्यार करती हूँ.

दिव्या : मैं जानती हूँ दीदी, आप ने hi तो उसे सबसे ज्यादा प्यार किया है हम बहनो में . मैं तो अपने गुस्से में अपनी ज़िम्मेदारी निभा hi न पायी.

रजनी : दिल छोटा मत कर मेरी बहिन. कारन ने आज अमित को कह दिया क वो मनहूस है. और अपने माँ बाप को खा गया .

दिव्या : क्याआ ???????? कारन ने ऐसा कहा ???

रजनी : मुझे तो खुद बड़ी शर्म आ रही है बहिन. ऐसे संस्कार तो न दिए थे मैंने . अमित पर क्या गुज़री होगी ये तो अंदाज़ा भी नहीं लगाया जा सकता . वो तो घर से जा रहा था बड़ी मुश्किल से रोका है मैंने. कारन को तो लगा दी थी मैंने और वो भी तब से घर से गायब है .

दिव्या : पर कारन ऐसा क्यों कहा? क्या वजह है इसकी ? आपने पता नहीं किया ?

रजनी : अब किस से पूछूं ? अब आएगा तो टंगे तोड़ दूंगी उसकी .

दिव्या : नहीं दीदी ऐसे तो वो आपके hi खिलाफ हो जायेगा. और वो अमित क और भी खिलाफ हो जायेगा. आप कहें तो मैं अमित को साथ ले जाती हूँ . शायद कारन को अमित का यहाँ रहना ाचा नहीं लग रहा है .

रजनी : ये कैसी बात कर रही है तू दिव्या? क्या अमित मेरा कुछ नहीं. अगर कारन नहीं सुधर तो उसे घर से निकल दूंगी पर अमित को नहीं जाने दूंगी. अगर आज वो चला जाता तो कभी दुबारा नहीं अत. और मैंने दामिनी की निशानी को ऐसे कैसे जाने देती .

दिव्या : पर दीदी अब क्या होगा ? कहीं कारन hi आके हाथ से निकल गया तो?

रजनी : चिंता तो मुझे भी है पर अमित क खिलाफ भी मैं कुछ नहीं सुन सकती .

‘ मैं अंदर आ सकती हूँ ? ‘

निधि ने दरवाज़े से hi पूछा तो दिव्या ने उसे अंदर आने को कहा.

निधि : मौसी आज रत आप यहीं रुकने वाली हैं . आपके बेटे का फरमान है. और अगर आप ने जाने की ज़िद की तो वो खुद आपके छोड़ने जायेगा. ये कहा है उसने .

रजनी : बिलकुल ठीक कहा है मेरे बेटे ने. अब तू कहीं नहीं जा सकती आयी बात समझ में. चल आजा मिल कर खाना बनती हैं दोनों.

निधि : अरे माँ आप बैठिये न . मैं कर लुंगी सब.

दिव्या : अरे बेटी तू अपने घर जा कर करना सब . आज मैं और दीदी हमारे बेटे क लिए कहाँ बनाते हैं उसकी पसंद का. चलो दीदी अब आर्डर हो गए हैं हुज़ूर क तो मन कैसे कर सकती हूँ.

दिव्य रजनी को साथ लिए किचन में चली गयी अपनी बाकि की बातें वहां करने. इधर निधि दिव्या मौसी की बात पर शर्मा रही थी.

निधि ( मन में ) उसी की सेवा तो कर रही हूँ जिसकी करनी चाहिए .



मुस्कुराती हुई निधि फिर से अमित क कमरे में वापिस चली गयी . 2 बहने किचन में लगी थी और दो नैना क कमरे में. नैना और राधा. राधा तो ज्यादा बात नहीं कर रही थी पर नैना आदत से मजबूर लगी हुई थी बक बक करने . इधर निधि फिर से अमित क पास आ गयी और उसके साथ बातें करते हुए उसका सर सहलाने लगी. दुपट्टा अभी भी सर से लपेटा हुआ था निधि ने . जिसके निचे अमित की मोहर लगी हुई थी.
 
अपडेट 156



खाने से कुछ देर पहले hi मौसा जी घर आये तो कारन भैया भी उनके साथ थे. हम सब हॉल में hi बैठे हुए थे . मौसा जी आ कर पहले दिव्या मौसी और राधा से मिले.

मौजा जी : साली साहिबा कैसी हो ? इतने दिनों बाद आज दर्शन दिए हैं. एक शहर में रह कर भी आप क दर्शन नहीं होते.

दिव्या मौसी : जीजा जी मैं तो ठीक हूँ और दर्शन तो आपके नहीं होते. आप तो नौकरी को hi बीवी बनाये बैठे हैं. दीदी से ज्यादा आप नौकरी की परवाह करते हैं. तो फिर भला साली की परवाह कहाँ होगी .

मौसा जी : अब ये तो मज़बूरी है साली सही ा वर्ण कौन कम्बख्त इतनी सुन्दर साली से दूर रहना चाहेगा

रजनी मौसी : बातें जितनी चाहे करवा लो बस . टाइम तो है नहीं किसी क लिए . और ये आपके साथ कहाँ से आ रहा है ? पता है इसने क्या किया है आज?

मौसा जी : अब गुस्सा जाने भी दो रजनी . हो जाती है गलती. मेरे पास hi आया था कह रहा था घर पर नहीं रहूँगा . अब बताओ जवान बेटे पर हाथ उठाना कोई सही बात है क्या ?? गुस्से में अगर कुछ गलत कह गया है तो उसे समझाना चाहिए न. तुम तो हाथ उठाने लग गयी. अब जो हुआ उस पर मिटटी डालो इसे मैंने समझा दिया है . और कारन तू भी माफ़ी मांग अमित से बात ख़तम कर . है तो तेरा छोटा भाई hi न .

रजनी मौसी : आप न इस पर ध्यान नहीं दे रहे . ऐसे हर बार गलती करेगा और बाद में माफ़ी मांग कर बात ख़तम करने को आप कहेंगे पर मैं कहती हूँ क गलती करे hi क्यों ?

मौसा जी : आगे से नहीं करेगा ये मैंने समझा दिया है. चलो अब गुस्सा जाने दो. तू खड़ा क्या देख रहा है? चल माफ़ी मांग सब से .

करना भैया : मुझे माफ़ कर दो माँ , वो मैं गुस्से में था और पता नहीं क्या क्या कह गया.

रजनी मौसी : ऐसे काम करता hi क्यों है जिसके लिए माफ़ी मांगनी पड़े? अमित भी मुझे उतना hi प्यारा है जितना के तू . माफ़ी मांगनी है तो उससे मांग. उसके बारे में तुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए. आगे से ध्यान रखना इस बात का.

करना भैया मौसी की बात सुन कर मेरे पास आये और मुझसे माफ़ी मांगने लगे

कारन भैया : सॉरी अमित वो गुस्से में पता नहीं क्या क्या कह गया .

अमित : कोई बात नहीं भैया आप बड़े हैं . आप कुछ भी कह सकते हो और आपको माफ़ी मांगने की ज़रूरत नहीं है .

दिव्या मौसी : लो हो गयी समस्या ख़तम चलो दीदी हम खाना लगते हैं.

रजनी मौसी और दिव्या मौसी खाना लगाने चली गयी. निधि दीदी ने मौसा जी को पानी पिलाया और कारन को भी समझने लगी. मौसा जी कपडे बदलने चले गए . नैना दीदी क साथ बैठी राधा बात को समझने की कोशिश कर रही थी क माजरा क्या है जो कारन भैया को माफ़ी मांगनी पड़ी. फिर वो नैना दीदी से पूछने लगी तो नैना दीदी ने उसे बाद में बात करने का कह कर चुप करवा दिया . अब राधा मेरी तरफ देख रही थी . जैसे वो मुझसे बात पूछ रही हो. मेरे साथ कारन भैया बैठे थे तो मैंने भी कोई बात नहीं की. उसके बाद सबने मिल कर खाना खाया. और सब अपने अपने कमरों में चले गए . रजनी मौसी और दिव्या मौसी किचन का काम समेटने लगी निधि दीदी भी उनके साथ थी. नैना दीदी राधा को अपने साथ ले गयी कारन भैया अपने कमरे में और मैं अपने कमरे में आ गया. मेरा फ़ोन मुझे नहीं मिल रहा था और मैं रीमा से बात करना चाहता था. मंजू म का भी घर नहीं गया था और न hi उन्हें इन्फॉर्म किया था. निधि दीदी जब काम ख़तम करने क बाद मेरे लिए दूध का गिलास लेकर आयी तो मैंने फ़ोन का पूछा.

निधि दीदी: मेरे पास hi है . तू डिस्टर्ब न हो इस लिए अपने पास रख लिया था . अभी ला कर देती हूँ.

निधि दीदी मेरा फ़ोन ले आयी तो मैंने देखा लगभग सभी की कॉल्स आयी हुई थी. मोहित कल्पना आंटी रीमा रीना मंजू म शीना शिवानी शालू करुणा दीदी और घर से भी.

मैंने कॉलेज टीम को तो मैसेज कर दिया और मंजू म को फ़ोन कर क तबियत ख़राब का बहाना बना दिया. रीना से तो मिला hi था इस लिए उसको ज़रूरत नहीं थी. रीमा को फ़ोन अभी कर नहीं सकता था क्यूंकि निधि दीदी पास में थी तो मैंने मैसेज से hi चाट कर क अपने एक्सीडेंट का बता दिया . वो बेचारी भी घबरा गयी . मैंने उसे बता दिया क रीना ने hi मेरी पट्टी की है तो उसने कहा वो दीदी से पूछेगी. वो नाराज़ भी थी क मैंने बताया नहीं और इस बात पर भी क मैं फ़ोन पर बात नहीं कर रहा पर मैंने मज़बूरी बता दी.

निधि दीदी : चल अब बस कर इसे अब साइड में रख दे. इसी लिए तुझसे दूर रखा था इसे.

अमित : क्या दीदी ,, अब दोस्तों को तो बताना पड़ेगा न वर्ण वो भी सब नाराज़ होंगे .

निधि दीदी : मैंने मन तो नहीं किया न. पर अब इसे साइड में रख दे बाकि कल कर लेना सबसे बात. ाचा एक बात तो बता ? कॉलेज में तेरी कोई गफ भी है ?

ये सवाल करते हुए निधि का दिल घबरा रहा था क अमित क्या जवाब देगा . उसे ये सवाल पूछना चाहिए था या नहीं वो इस बात पर भी सोच रही थी पर दिल क हाथों मजबूर हो कर वो ये सवाल कर गयी थी.

अमित : कहाँ दीदी , मुझे कोई पसंद hi नहीं करती .

‘ एक no. का झूठा है ये दीदी, एक से एक लड़कियां इसके पीछे हैं और ये hi किसी को घास नहीं डालता. मैं और करुणा गए थे इसके कॉलेज . यकीन न हो तो करुणा से पूछ लेना. ‘

नैना दीदी ये कहते हुए हमारे पास आ कर बैठ गयी साथ में राधा भी थी .

निधि दीदी : ाचा तो ये बात है. वैसे लड़कियां तो पीछे आएँगी hi . ऐसा हिरा तो लाखों में एक होता है. पर तुम कब गयी थी इसके कॉलेज और किस लिए गयी थी ?

नैना दीदी : वो क्या है न दीदी अमित जब कम्पटीशन क लिए जा रहा था तो हम इससे मिलने चली गयी थी. बड़ा hi ाचा कॉलेज है. इसी बहाने कॉलेज भी देख लिया और इसके तारीफ भी सुन ली सब से. सच में ये सब से अलग है. मुझे तो लगता है इसके ग्रुप की हर लड़की इसे पसंद करती है. और बच्चू तू कल क लिए ज़रा तैयार रहना कल करुणा भी तेरी क्लास लेने वाली है . अभी बात हुई थी मेरी उससे तूने फ़ोन नहीं उठाया न उसका ?

अमित : वो फ़ोन दीदी क पास था. अभी इस वक़्त मैं क्या बात करता सोचा कल hi करूँगा अब.

नैना दीदी : हाँ कल तो मिलना hi है. पार्टी जो लेनी है.

निधि दीदी : कैसी पार्टी ?

नैना दीदी : वो दीदी क्या है न , इसके और कल्पना की जीत की ख़ुशी में कल सब पार्टी करने वाले हैं.

निधि दीदी : पर ऐसी हालत में no पार्टी

अमित : अरे दीदी मैं ठीक हूँ . आपके साथ hi तो आया न मैं बहार से. मामूली सी चोट है . अब पार्टी फिक्स है तो मन नहीं कर सकता मैं. अगर नहीं गया तो सब नाराज़ होंगे और मैं दोस्तों को नाराज़ नहीं करता . मैं तो कहता हूँ आप भी चलो कल ऑफिस तो जाना नहीं आपने.

निधि दीदी : नहीं मैं नहीं आ सकती , मुझे वहां कौन जनता है वैसे भी तुम सब दोस्तों क बीच मेरा क्या काम.

अमित : नैना दीदी भी तो जा रही है और राधा नेहा दीदी करुणा दीदी भी होंगी . सब अपने hi तो हैं और जिनको आप नहीं जानती कल उनसे भी मिल लेना .

निधि दीदी : नहीं मैं फिर कभी उनसे मिल लुंगी वैसे भी गाओं तो जाना hi है फंक्शन पर तो वो सब वहां आएंगे hi . अब तुम आराम करो मैं ज़रा देख लूँ माँ और मौसी को.

इतना कह दीदी चली गयी . अब नैना दीदी और राधा hi रह गयी थी मेरे पास

नैना दीदी : चल अब तू भी आराम कर . सोचा था अब ढेर साडी बातें करुँगी और चोट लगवा कर बैठ गया है . अब तो कुछ होने से रहा.

नैना दीदी कह कुछ रही थी पर इशारा कुछ और था. वो जाता रही थी क आज रत का उन्होंने प्रोग्राम सेट किया था और वो अधूरा रह गया . मेरी चोट की वजह से .

अमित : कोई बात नहीं अभी तो मैं यहीं हूँ न आज नहीं कर पाए तो कल सही.

मेरे इस जवाब पर नैना दीदी की आँखों में चमक आ गयी.

नैना दीदी : अब कल कोई बहाना नहीं सुनने वाली मैं. चल राधा अब इसे सोने देते हैं .

राधा : दीदी आप चलो मुझे ज़रा बात करनी है .

नैना दीदी : हम्म अछि बात है तू भी लगा hi ले इसकी क्लास. मैं अपने कमरे में hi हूँ आ जाना .

इतना कह कर नैना दीदी चली गयी और राधा ने उठ कर दरवाज़ा बंद कर दिया . मैं राधा की इस हरकत को देख रहा था . राधा दरवाज़ा बंद करने क बाद मेरे पास आयी.

राधा : कॉलेज आने की बजाये कहाँ घूम रहे थे ?? मैं जानती हूँ तुम कुछ छुपा रहे हो . तुम सबके साथ झूठ बोल सकते हो मेरे साथ नहीं . अब बताओ बात क्या है और मुझे पूरी बात सच सच सुन्नी है.

मैं राधा की इस बात पर हैरान परेशां उसे देखने लगा क राधा को कैसे पता चला मैं कुछ छुपा रहा हूँ .

राधा : ऐसे क्या देख रहे हो ? पता चल जाता है मुझे तुम जब ऐसे करते हो . अब बताओ सच सच क्या बात है . झूठ बिलकुल मत बोलना वर्ण कभी बात नहीं करुँगी .

अमित : चोट मुझे एक्सीडेंट से hi लगी थी राधा और मैं कॉलेज इस लिए नहीं आया था क मैं निधि दीदी क पीछे जा रहा था .

राधा : हैरानी से ) क्या ?? तुम दीदी का पीछा कर रहे थे ?? पर क्यों ??

अमित : कल से दीदी अपने कमरे में रो रही थी तो मुझे इस पर शक था क दीदी किसी प्रॉब्लम हैं पर वो कुछ भी बता नहीं रही थी. इस लिए मैंने सोचा क आज मैं उनके ऑफिस जा कर पता करता हूँ . किस्मत से बाइक पंक्चर हो गयी तो मैं वही ठीक करवा रहा था क दीदी को किसी क साथ कार में जाते हुए देखा तो उनका पीछा करने लगा. इसी दौरान मेरा एक्सीडेंट भी हो गया . किस्मत से मैं दीदी तक पहुँच गया वर्ण अगर देर हो जाती तो ......

राधा : आँखों में आंसू ) क्याआ ?? दीदी क साथ भी वो सब ..... कौन था वो ?

अमित : उनके ऑफिस का hi था उनका मैनेजर और एक उसका साथी. उन दोनों को अचे से सजा दी है मैंने . पर एक बार तो मुझे अपने आप पर hi गुस्सा आ रहा था जब मैं उनसे पीछे रह गया था और वो मुझे मिल नहीं रही थी. तब दिल इतना घबरा रहा था क अगर दीदी को कुछ हो जाता तो मैं खुद को hi कुछ कर लेता या उन लोगों की जान ले लेता .

राधा ने एक डैम से मुझे गले लगा लिया और कुछ देर ऐसे hi मेरे गले लगी रही. मैं तो एक डैम से उसके इस रिएक्शन पर हैरान था पर फिर मुझे भी ाचा लगने लगा . राधा की धड़कने तेज़ चल रही थी और थोड़ी देर में वो मुझसे अलग हुई .

राधा : तुम्हे कुछ नहीं हो सकता . तुम सबकी कितनी परवाह करता हो भगवन तुम्हे कुछ नहीं होने देगा. तुमने दीदी को बचाकर बहुत ाचा किया. दीदी कितनी अछि हैं सबको प्यार करती हैं . उनके साथ कुछ गलत होता तो भगवन पर से भरोसा उठ जाता मेरा. शुक्र है दीदी और तुम दोनों सही सलामत हो. इतना कुछ हो गया और दीदी ने किसी को कुछ बताया तक नहीं ?

अमित : ये बात कोई बताने वाली है राधा ? मैंने hi मन किया था दीदी को. वर्ण उन्हें और भी दुःख होता . अब तो नाराज़ नहीं हो न मुझसे ?

राधा : नाराज़ तो अब भी हूँ पर तुमसे नहीं कारन भैया से. नैना दीदी ने बताया मुझे क क्या कैच कहा था उन्होंने. अगर उन्हें पता चलता क तुमने आज क्या किया है तो पाऊँ पकड़ कर माफ़ी मांगते . पता नहीं ऐसा कैसे कह सकते हैं वो तुम्हारे बारे में.

अमित : वो बड़े हैं राधा और हमारा एक रिश्ता भी है. इस लिए गुस्सा करने का कोई मतलब hi नहीं.

राधा : तुम चाहे कुछ भी कहो बुरा तो लगता है न . ऊपर ऊपर से तुम दिखा रहे हो क कोई बात नहीं पर अंदर से तुम इस बात पर कितना दुखी होंगे ये मैं अछि तरह जानती हूँ. माफ़ी मांग लेने से वो दर्द काम नहीं हो जाता तो ऐसी बातों से दिल में होता है. मैं तो उनसे अब बात भी नहीं करुँगी कभी.

अमित : ऐसा मत कहो . उन्होंने तुम्हे थोड़ी कुछ कहा है .

राधा : तुम्हे तो कहा है न , मेरे लिए इतना hi बहुत है.

‘ अरे राधा तुम अभी तक सोई नहीं ? चलो जा कर सो जाओ मैं यही देखने आयी थी क ये अभी तक सोया है या नहीं . ‘

दिव्या मौसी ने कमरे में एते हुए ये कहा . राधा भी जल्दी से कड़ी हो गयी जो अभी तक मेरे साथ जुड़ कर बैठी हुई थी .

राधा : मैं बस जा hi रही थी . माँ आप कहाँ सोने वाली हैं ?

दिव्या मौसी : दीदी तो कह रही हैं निधि क साथ hi सोने को अगर तुझे वहां सोना है तो बता .

राधा : मैं निधि दीदी क साथ सोना चाहती हूँ.

दिव्या मौसी : ाचा ठीक है नैना को बोल दे मैं उसके साथ सो जाती हूँ.

राधा मुझे और मौसी को गुड नाईट कह कर चली गयी तो दिव्या मौसी मेरी बगल में बैठ गयी .

दिव्या मौसी : कारन की बात को दिल पर मत लगाना. सबको बुरा लगा है इस बात का. अगर दीदी और निधि नैना का ख्याल न होता तो मैं तुम्हे एक पल भी यहाँ नहीं रहने देती. दीदी भी परेशां है क कारन ने ऐसा क्यों कहा.

अमित : मैं जनता हूँ बड़ी मौसी कितना प्यार करती हैं मुझे . इसी लिए तो मैं रुक गया . अगर मैं भी गुस्से में चला जाता तो उन्हें बुरा लगता . और निधि दीदी और करुणा दीदी तो कितना प्यार करती हैं मुझे .

दिव्या मौसी : कितना प्यारा है तू जो सबके बारे में सोचता है. तूने आज बहुत बड़ा काम किया है मेरे बचे मुझे तुम पर गर्व है . भगवन करे तुझे दुनिया की हर ख़ुशी मिले.

अमित : पर मैंने ऐसा कौन सा काम कर दिया जिसे आप बड़ा कह रही हैं.?

दिव्या मौसी : किसी की माफ़ कर देना क्या छोटा काम है. तू सच में हम सब का मान है.

दिव्या मौसी ने प्यार से मेरा माथा चूमते हुए सर सेहला दिया. चल अब आराम कर. मैं भी चलती हूँ .

अमित : कुछ देर पास बैठ जाओ न मौसी . आज माँ की बड़ी यद् आ रही है.

मेरी बात सुनते hi दिव्या मौसी की ऑंखें भर आयी और उन्होंने मुझे गले से लगा लिया.

दिव्या मौसी : मैं हमेशा तेरे पास हूँ मेरे बचे हमेशा तेरे पास हूँ. आ मैं तुझे अपनी गॉड में सकती हूँ .

दिव्या मौसी मेरे सर को अपनी गॉड में लेकर बैठ गयी और सर सहलाने लगी. मुझे इतना ाचा लग रहा था क पता hi नहीं लगा कब मैं नींद में चला गया .

उधर राधा निधि दीदी क कमरे में सोने चली गयी थी. अमित क मुँह से निधि दीदी क साथ हुई घटना सुन कर उसे निधि दीदी क साथ सहानुभूति हो रही थी . वो खुद उस मंज़र को देख चुकी थी इस लिए बेहतर समझ सकती थी क निधि दीदी कैसा महसूस किया होगा. दोनों बहने साथ में लेती थी. निधि अपनी इस छोटी बहिन को अपने पास प् कर खुश थी. राधा सबकी प्यारी थी क्यूंकि वो सब से ज्यादा मासूम थी और सब उसे प्यार से गुड़िया hi कहते थे. एक तरफ निधि थी जो सबकी बड़ी थी और दूसरी तरफ राधा सब से छोटी थी. निधि प्यार से राधा को दुलार कर रही थी . पर राधा तो बस निधि की मुस्कान क पीछे दबे उस दर्द को महसूस कर रही थी .

निधि दीदी : ऐसे क्या देख रही हो गुड़िया ? आज कितने समय बाद तुम मेरे पास हो. नहीं तो बस घरी दो घरी क लिए hi मिलना होता था और आज देखो साडी रत हम एक साथ हैं .

राधा : मैं जानती हूँ दीदी आप अंदर से बहुत दुखी हैं, जो कुछ आपके साथ हुआ वो किसी क भी साथ वो इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता. मैं भी इस मंज़र से गुज़री हूँ.

निधि की ऑंखें बड़ी हो गयी क राधा को कैसे पता . राधा निधि क चेहरे पर आयी चिंता की लकीरें देख कर समझ गयी क वो क्या सोच रही है.

राधा : मुझे अमित ने सब बता दिया है दीदी वो मुझसे कुछ नहीं छुपता और मैं ये बात किसी को नहीं बताउंगी .

निधि की आँखों में आंसू आ गए. उसे फिर से मंज़र यद् आ गया था जो आज उसके साथ बिता था. निधि ने कास क राधा को गले से लगा लिया .

निधि दीदी : आज मैं बर्बाद हो जाती राधा अगर ....

राधा : अगर अमित न अत. मुझे भी तो उसी ने बचाया था. किसी फ़रिश्ते की तरह वहां आ पहुंचा था वो जब कोई मदद की किरण तक न थी.

राधा भी उस दिन जो हुआ वो यद् करने लगी.

निधि दीदी : वो फरिश्ता hi है गुड़िया. हम किस्मत वाले हैं वो हमारे साथ है. जानती हो राधा मुझे अपने साथ हुई उस घटना से भी ज्यादा दुःख तब हुआ जब कारन ने अमित क बारे में गलत बोलै. मेरे अपने सेज भाई ने उस फ़रिश्ते को ज़लील करने की कोशिश की जिसने अपनी जान की परवाह किये बिना मुझे बचाया. और मैं कुछ न कह सकीय. मेरा दिल मुझे धिक्कार रहा था क मैं चुप क्यों हूँ. मेरा दिल कर रहा था चीख चीख सबको बता दूँ क आज मेरे साथ क्या हुआ है और कैसे अमित ने मुझे बताया. पर अमित को दिए वेड की वजह से मैं चुप रही. मुझे बोलना चाहिए था मुझे सबको बताना चाहिए था

राधा : नहीं दीदी ाचा हुआ आप चुप रही. ज़रा सोचिये मौसी पर क्या बिट टी जब उन्हें पता चलता आप क साथ क्या हुआ है. और फिर सब hi चिंता में आ जाते . अमित सबकी परवाह करता है इसी लिए उसने ऐसा कहा आपको.

निधि दीदी : वो सच में बहुत ाचा है. जानती हो आज मैंने उसका एक अलग रूप देखा वहां. उस वक़्त वो जैसे कुछ और hi बन गया था. अगर मैं उसे अपनी कसम देकर न रोकती तो वो उन दोनों को जान से hi मर देता. वो खुद ज़ख़्मी था पर उसे जैसे अपनी परवाह नहीं थी.

राधा : मैंने भी देखा है दीदी. भूल गयी जब वो हॉस्पिटल में रहा था मेरी वजह से? आप नहीं थी कोई नहीं था पर मैं थी उसके साथ. बातें करते करते जब वो बेहोश हो गया था तो बता नहीं सकती मेरी क्या हालत हुई थी. मुझे ऐसे लगा जैसे सब कुछ ख़तम हो गया . अगर इस दिन उसे कुछ हो जाता तो ......

निधि ने राधा की आँखों से टपकते आंसू देखे तो उसे ज़ोर से गले लगा लिया. निधि राधा की हालत समझ रही थी और उसकी धड़कन का बेतरतीबी से दौड़ना भी.

निधि दीदी : बस चुप कर मेरी गुड़िया , उसे कुछ नहीं होगा , भगवन उसे कुछ नहीं होने देगा . मैं अब से हर सांस में बस उसी की सलामती की प्रार्थना करुँगी.

राधा : मैं तो शुरू से hi करती हूँ दीदी. उसे कुछ हो गया तो .....

निधि ने राधा की आँखों में देखा तो उसे वहां पर अमित क लिए वो परवाह दिखी जो अब खुद उसके अंदर थी. निधि को राधा पर बड़ा प्यार आया और उसने राधा का मैथ चुम लिया. दोनों बहने देर तक बातें करने क बाद सो गयी .

दिव्या अमित को दुलार करती हुई कब वहीँ बैठी बैठी सो गयी उसे भी पता न चला. दिव्या आज कितने दिनों बाद अमित क साथ थी. उसका वो सपना अब भी उसे अत था और उसे बेचैन करता था. इसी लिए वो नींद की गोली भी खाने लगी थी पर आज न तो उसने गोली खाई थी न वो अपने बिस्टेर पर अकेली थी. आज वो अमित क साथ थी . कब वो नींद में अमित क ऊपर झुक गयी और उसके स्तन अमित क होंठों पर लगने लगे उसे भी पता न चला. नींद में अमित उन स्तनों को मुँह लगा बैठा और दिव्या का जिस्म आज फिर से दिव्या का साथ छोड़ कर अमित का साथ देने लगा. दिव्या की नींद तो तब टूटी जब उसका नींद में hi ख्वाब देखते हुए फिर से पानी निकल गया . नींद खुलते ही खुद को अमित पर लेते देख वो खुद से शर्मिंदा होने लगी. और जब उसकी नज़र अमित क लोअर में टॉप की तरह सर उठाये खड़े उस बलिष्ठ लैंड पर पड़ी तो उसकी नज़र कुछ पल वहीँ रुक गयी . मन में कुछ सोचती हुई वो खुद को ठीक कर क कमरे से जाने लगी तो उसके कदम रुक गए. एक नज़र पलट कर अमित का चेहरा देखा जो शांति से सोया इस वक़्त उसे मासूम लग रहा था. खुद hi चल कर वो वापिस आयी और अमित क माथे और गलों पर किश किया अनायास hi उसके होंठ अमित क होंठों तक जा पहुंचे पर ऐन मोके पर अमित की गरम साँसे अपनी साँसों में महसूस करती वो खुद को बहकने से रोकती झटके से पीछे हैट गयी और तेज़ कदमो से बहार निकल गयी .

दिव्या ( मन में ) ये मुझे क्या होता जा रहा है? मैं उसके नज़दीक होने पर खुद को रोक क्यों नहीं पति? हे भगवन ये सब क्या हो रहा है? दामिनी मुझे बचा ले इस पाप से . उसकी एक एक अच्छी मेरे दिल में दबे सपनो की उस आकृति का रूप धारण करती जा रही है. कैसे ख़ामोशी से सब कुछ सेह कर भी ये लड़का सबकी मदद करता जा रहा है. अगर मैं राधा और इसकी बात न सुनती तो मुझे पता hi न चलता क आज इसने इतना बड़ा काम कर दिया है. निधि सचमुच दीदी जैसी hi है सबका ख्याल रखने वाली. तुमने उसे बचाकर एक और एहसान कर दिया है सब पर. काश तुम जैसा कोई मुझे ....... ये मैं क्या सोचने लगी . नहीं नहीं वो मेरा बीटा है .

दिव्या बाथरूम जा कर अपनी हालत ठीक करने क बाद नैना क साथ जा कर सो गयी . स्खलन क बाद अब उसे अचे से नींद आयी .

अगले दिन मैं थोड़ा देर hi उठा शायद दवा का असर था जो निधि दीदी ने खिला दी थी ज़बरदस्ती. मेरे उठने तक दिव्या मौसी राधा क साथ जा चुकी थी . मुझे नैना दीदी ने hi जगाया .

नैना दीदी : आज कुम्भकर्ण बन क सो रहे हो , कॉलेज नहीं जाना है क्या ? यद् है न आज पार्टी है. देखो टाइम क्या हो रहा है. 8:30 हो गए हैं.

अमित : इतना टाइम हो गया ? मैं तो जल्दी उठ जाता हूँ. आप चलिए मैं नाहा कर तैयार होता हूँ.

नैना दीदी : जल्दी तैयार हो कर नीचे आजा . मैं तो यहाँ से जा रही हूँ करुणा क साथ . माँ को नहीं बताया है मैंने तू भी न बात करना.

इतना कह कर नैना दीदी मुस्कुराती हुई कमरे से निकल गयी . मैं भी जल्दी से बाथरूम जा कर नाहा कर फ्रेश हो कर वापिस आ कर तैयार होने लगा. बाजु पर पट्टी लगी थी तो मैंने फुल बाजु की वाइट कमीज पेहेन ली और साथ में ब्लू जीन्स. सीढ़ियां उतारते हुए घुटने में हलकी चीज़ महसूस हो रही थी पर ज्यादा नहीं. नीचे आया तो रजनी मौसी किचन में hi थी और निधि दीदी उनका साथ दे रही थी. मौसा जी जा चुके थे और कारन भैया भी नाश्ता कर क निकलने वाले थे कॉलेज क लिए .

अमित : गुड मॉर्निंग भैया .

कारन भैया : गुड मॉर्निंग .

कारन भैया ने जस्ट औपचारिकता दिखते हुए बिना किसी भाव क गुड मॉर्निंग का जवाब दिया . तभी किचन से निधि दीदी एक परांठा लिए कारन भैया की तरफ आयी तो मुझ पर नज़र पड़ते hi मुस्कुरा उठी. सिंपल से हलके रंग क इस कॉटन सूट में भी दीदी कमल की लग रही थी. किचन में काम करने की वजह से पसीने से चेहरा भीगा हुआ था और उनका गोरा मुखर कहीं कहीं से गुलाबी लग रहा था. बालों को जुड़ा कर क पीछे बंधा हुआ था पर एक लत आगे लटक रही थी.

निधि दीदी : गुड मॉर्निंग उठ गए तुम. आओ बैठो नाश्ता करवाती हूँ तुम्हे. मन किया था मैंने नैना को मगर फिर भी उठा hi दिया तुम्हे.

अमित : गुड मॉर्निंग दीदी . आप ने क्यों मन किया था. आज पहली बार इतनी देर तक सोया मैं. दिव्या मौसी चली गयी क्या?

निधि दीदी : हाँ वो जल्दी चली गयी थी राधा ने तैयार हो कर कॉलेज भी जाना था न. गयी थी मौसी और राधा तुमसे मिलने पर तुम सो रहे थे. मौसी ने hi कहा था क तुम्हे आराम करने दूँ मैं. वैसे हैंडसम लग रहे हो इन कपड़ों में तुम.

कारन भैया : दीदी जल्दी परांठा दो मैं लेट हो रहा हूँ.

कारन भैया ने थोड़ा खीजते हुए ये कहा तो निधि दीदी उसे परांठा दे कर मेरे लिए नाश्ता लेने चली गयी. निधि दीदी ने मुस्कुराते हुए मुझे नाश्ता दिया और उधर से नैना दीदी भी निचे आ गयी . सिंपल से सूट में भी अछि खासी हॉट लग रही थी और चेहरा बता रहा था क थोड़ा बहुत मेक उप किया हुआ है.

नैना दीदी : ाचा माँ मैं चलती हूँ. आज जल्दी जाना है करुणा मेरा इंतज़ार कर रही है . नाश्ता में उसके साथ hi कर लुंगी .

निधि दीदी : ऐसी भी क्या जल्दी है , नाश्ता तो कर ले.

नैना दीदी : सॉरी दीदी जल्दी है समझा करो. इतना कह कर मुस्कुराती हुई वो घर से बहार निकल तू स्कूटी की चाबी लिए . जाते जाते वो मुस्कुरा कर मुझे देखते हुए गयी जैसे बता रही हो क आज वो मेरे साथ मज़ा करना चाहती हैं पार्टी में.

इधर मैंने नाश्ता शुरू करने लगा था क कल्पना का फ़ोन आने लगा. मैंने फ़ोन पिक कर लिया.

अमित : हाँ कल्पना बोलो .

कल्पना : बोलो क्या ? कहाँ हो तुम ?

अमित : अरे बात क्या है ?

कल्पना : आज पार्टी पर जाना है भूल गए ?

अमित : नहीं नहीं सब यद् है मुझे पर अभी तो 9 hi बजे हैं. वहां तो थोड़ा देर से hi जायेंगे न.

कल्पना : 10 बजे निकलना है सब ने . उससे पहले आ कर कुछ सलाह मशवरा भी करना है क नहीं. और तुम तो कल से hi गायब हो. आज भी आने का इरादा है या आज की भी छुट्टी मरोगे?

अमित : नहीं नहीं मैं ऐसा क्यों करूँगा . मैं बस नाश्ता कर रहा हूँ.

कल्पना: पहुँच जाओगे या लेने आऊं ?

अमित : मैं मोहित को कह दूंगा तुम राधा और दीदी को लेकर जाओ.

कल्पना : ठीक है वैसे भी आज जगह काम है कार में. तुम मोहित को फ़ोन कर लो फिर. Bye

कल्पना से बात करने क बाद मैंने देखा क कारन भैया अभी जहाँ बैठे थे वहां अब निधि दीदी बैठ कर मुझे hi देख रही थी.

अमित : आप ? कारन भैया कहाँ गए ?

निधि दीदी : वो निकल गया शायद लेट हो रहा होगा देखो आधी रोटी बीच में hi छोड़ गया. कहाँ जाने की बात हो रही है?

अमित : आपको बताया तो था कल . आज पार्टी कर रहे हैं न सब दोस्त मिल कर.

निधि दीदी : इसका मतलब नैना और करुणा भी वहीँ जा रही हैं . तभी बैग में कपडे छुपा कर ले कर गयी है साथ. माँ से दर लग रहा होगा न.

अमित : दीदी आप भी चलिए न साथ ाचा लगेगा आपको भी .

निधि दीदी : नहीं तुम सब एन्जॉय करो , मैं तुम सब क बीच क्या करुँगी. तुम सब स्टूडेंट्स हो एक जैसे हो . मेरा वहां जाना थोड़ा अजीब लगेगा.

अमित : क्यों अजीब लगेगा ? आप भी तो अभी कॉलेज स्टूडेंट hi लगती हैं. शर्त लगा लो कोई नहीं कह सकता क आप स्टूडेंट नहीं हैं.

निधि दीदी : नहीं रहने दो मुझे ाचा नहीं लग रहा .

अमित : अब तो आपको जाना hi पड़ेगा . मैं कह रहा हूँ. अगर आप नहीं गयी तो मैं भी नहीं जाऊंगा .

निधि दीदी : समझने की कोशिश करो तुम

अमित : मुझे कुछ नहीं सुन्ना, आप बताओ मेरी बात मानेंगी या नहीं ?

निधि दीदी : ाचा ठीक है ऐसे मुँह मत फुलाओ अब. पहले नाश्ता करो फिर मैं तैयार होती हूँ .

अमित : नाश्ता मैं करता हूँ तब तक आप जा कर अचे से कपडे पहन लो.

निधि दीदी : पर नाश्ता ...

अमित : वो मैं खुद ले लूंगा . आप जा कर तैयार हो जाओ पहले.

निधि दीदी मेरी बात मानते हुए अपने कमरे में चली गयी और मैं नाश्ता करने लगा . निधि दीदी जब किचन में नहीं गयी तो रजनी मौसी खुद hi परांठा ले आयी .

रजनी मौसी : ये निधि खान चली गयी ?

अमित : मैंने उन्हें तैयार होने को कहा है. उन्हें अपने साथ ले कर जा रहा हूँ . आपको ऐतराज़ तो नहीं ?

रजनी मौसी : मुझे क्या ऐतराज़ होगा ? तुम्हारी बहिन है जहाँ चाहे ले जाओ पर निधि कल भी ऑफिस नहीं गयी और आज भी नहीं जा रही. ऊपर से कह रही है क कुछ दिन जाएगी नहीं बात क्या है इसने बताया नहीं .

अमित : कुछ नहीं , वो क्या है न वहां दीदी को कुछ ज्यादा hi काम का बोझ दाल दिया था ऑफिस वालों ने तो मैंने hi दीदी को कहा है आप रिजाइन कर दो. मैंने उनके लिए बात की है मोहित क पापा क साथ . उनके ऑफिस में दीदी को अछि जॉब मिल जाएगी ऊपर से अंकल तो अपने hi हैं ज्यादा बोझ भी नहीं रहेगा दीदी पर.

रजनी मौसी : पर क्या ये ठीक होगा ? राघव क्या सोचेगा ? क हम उसका फायदा उठा रहे हैं ?

अमित : बिलकुल भी नहीं. बल्कि अंकल खुश होंगे उन्हें मैं अचे से जनता हूँ. वैसे भी दीदी काबिल हैं और अपनी काबिलियत वो साबित कर hi देंगी.

रजनी मौसी : अछि बात है जैसे तुम ठीक समझो , आखिर तुम्हारी भी तो बड़ी बहिन है .

थोड़ी देर में मैंने नाश्ता कर लिया और फिर दीदी क कमरे में गया तो. सामने दीदी पिंक सूट वाइट सलवार में शीशे सामने कड़ी आँखों में काजल लगा रही थी. मेरी आहत से वो मेरी तरफ पलटी तो मैं उन्हें देखता hi रह गया . किसी पिंक रोज सी वो मेरे सामने कड़ी मुस्कुरा रही थी. गोरा गुलाबी चेहरा जिस पर हमेशा hi एक अलग hi नूर रहता था. बड़ी बड़ी ऑंखें जो काजल लगाने से और भी बड़ी लग रही थी. कुदरती गुलाबी रंगत क होंठ और मुस्कुराने से चमकते वो मोतियों से दांत. लम्बे कद क अनुपात में सुराहीदार गर्दन . मैं एक नज़र उन्हें सर से पाऊँ तक गौर से देख रहा था वो शर्मा गयी जिससे उनके गाल गुलाबी हो गए.

निधि दीदी : ऐसे क्या देख रहे हो ?

दीदी क इस सवाल से मैं उनके हुस्न क तिलिस्म से बहार निकला और खुद hi अपनी इस हरकत पर शर्मिंदा सा हो गया.

निधि दीदी : क्या देख रहे थे बताया नहीं

निधि अंदर से रोमांचित हो गयी थी अमित को इस तरह खुद को निहारता देख कर. वो छह रही थी क अमित उसे देखे . अमित की नज़रों से hi वो समझ गयी थी क उसे ाचा लग रहा है उसका ये रूप. निधि का दिल छह रहा था क अमित एक प्रेमी की तरह उसकी तारीफ करे. आखिर अब उसका hi तो हक़ था ये जो निधि उसे मन hi मन दे चुकी थी.

अमित : आप बहुत अछि लग रही हो दीदी . एक कल टीका लगा लो कहीं आपको नज़र न लग जाये.

मैंने डरते हुए पता नहीं कैसे ये कह दिया. मुझे खुद समझ में नहीं आ रहा था मैं क्या कह रहा हूँ.

निधि दीदी : तुम्हारी नज़र नहीं लग सकती मुझे . और तुम साथ हो तो और किसी की नज़र लगने भी नहीं डोज.

दीदी क इस जवाब से मैं झेंप सा गया .

अमित : आप तैयार हैं तो मैं मोहित को बुला लूँ ?

निधि दीदी : हाँ बस मैं तैयार हो गयी हूँ . अगर कोई कमी लगती है तुझे तो बता मैं अभी ठीक कर लेती हूँ जैसे तुम्हे ठीक लगे.

अमित : नहीं आप बहुत खूबसूरत लग रही हो . इससे ज्यादा तो मैं सोच भी नहीं सकता .

पता नहीं कैसे फिर ये बात मुँह से निकल गयी और दीदी शर्माने लगी .

अमित : मैं मोहित को फ़ोन करता हूँ आप आ जाओ बहार.



मैंने जल्दी से बहार निकलना hi ठीक समझा. और मोहित को फ़ोन लगा दिया . वो भी इस तरफ आ hi रहा था कल्पना ने उसे फ़ोन कर दिया था पहले hi . कुछ hi देर में मोहित आ गया. वो एक बार रजनी मौसी से मिला और फिर हम निकल गए कॉलेज की तरफ
 
अपडेट 157



मोहित क साथ अगली सीट पर मैं बैठा था और पीछे की सीट पर दीदी बैठी थी. मोहित पहले भी दीदी से मिल चूका था 2-3 बार और दीदी को भी अचे से पता था मोहित क बारे में.

मोहित : दीदी आप भी चल रही हैं पार्टी बहुत अछि बात है बहुत मज़ा आएगा आपको .

निधि दीदी : मैं तो आना नहीं चाहती थी पर अमित मुझे ज़बरदस्ती ले आया. भला तुम सब हम उम्र दोस्तों में मेरा क्या काम? मेरी वजह से तुम लोग अचे से एन्जॉय भी नहीं कर सकोगे.

मोहित : ऐसा क्यों लगता है आपको ? ये सिर्फ एक छोटी स पार्टी है दीदी . वो भी किसी होटल या क्लब में नहीं. सब लड़कियां hi तो हैं वहां आपको भी ाचा लगेगा और फिर नेहा दीदी करुणा दीदी नैना दीदी और राधा भी तो होंगी आपके साथ. सब अपने hi हैं बहार का कोई भी नहीं.

निधि दीदी: फिर भी मैं तुम सब से बड़ी हूँ

अमित : चलो दीदी शर्त लगते हैं , जो आपको नहीं जानते हम उनसे hi पूछेंगे क आप क बारे में अंदाज़ा लगाएं . ी ऍम सूरे सब यही कहेंगे क आप भी स्टूडेंट hi हैं.

मोहित : बिलकुल , ऐसे hi करते हैं. वैसे कौन कौन नहीं जनता दीदी क बारे में?

अमित : मीनल को अगर तूने नहीं बताया तो उसको नहीं पता होगा. उसके इलावा शीना शिवानी और शालू हो हैं जो नहीं जानती होंगी दीदी क बारे में.

मोहित : वैसे मीनल को कहाँ यद् होगा एक आध बार hi बात हुई है दीदी क बारे में और देखा तो उसने है नहीं . वैसे कल्पना को भी नहीं पता होगा.

अमित : यार उसके साथ राधा नैना दीदी नेहा दीदी और करुणा दीदी जो हैं. उनसे तो बात होती hi होगी न.

मोहित : हम्म

निधि दीदी : तुम लोग ऐसे hi लगे हो , सब को पता चल जायेगा देख लेना .

अमित : देखते हैं आप बस चुप रहना.

निधि दीदी : ठीक है मैं चुप रहूंगी और मैं तुम्हारी कौन हूँ ये भी नहीं बताउंगी फिर देखते हैं किसका क्या रिएक्शन होता है.

अमित : दोने , मैं ज़रा नेहा नैना दीदी को भी बता दूँ.

मैंने फ़ोन कर क नेहा दीदी और नैना दीदी को सब समझा दिया और उन्हें करुणा दीदी और राधा को भी बताने को कह दिया. इतने में हम कॉलेज पहुँच गए. पार्किंग से निकल कर हूँ अंदर कैंटीन की तरफ चल दिए. वैसे तो इस वक़्त दूसरा लेक्चर शायद लग चूका था पर हमारी टीम तो वहीँ मौजूद थी . जैसे hi हम कैंटीन में पहुंचे तो सामने खूबसूरत बालाओं को देख कर एक बार तो मैं भी हक्काबक्का रह गया . सब एक से बढ़कर एक सुन्दर लग रही थी . शीना शिवानी जहाँ आज मॉडर्न ड्रेस में किसी को भी दीवाना बनाने को आतुर थी वहीँ शालू भी एक वेस्टर्न मिक्स ड्रेस में कमल लग रही थी. मीनल भी अचे से संवर कर आयी थी. कल्पना भी आज अलग दिख रही थी . नैना दीदी और करुणा दीदी तो जीन्स टॉप में केहर ध रही थी. टॉप में से अपनी कसावट दिखते उनके मस्त उभर मुझे ललचाने लगे. नेहा दीदी भी आज एक बढ़िया डिज़ाइनर सूट पहने थी जिसमे वो खूब जाँच रही थी. और चेहरे पर लगा उनका वो चश्मा भी जैसे आज चार चाँद लगा रहा था उनकी खूबसूरती को. लास्ट में मेरी नज़र रीमा और राधा पर पड़ी . दोनों साथ में hi थी और दोनों hi लॉन्ग स्कर्ट टॉप में थी. मैंने जब दोनों को देखा तो दोनों hi शर्मा गयी . मैं तो सबको देखने में hi खोया था और मुझे खबर hi नहीं थी आसपास क्या हो रहा है.

शीना : कहाँ खो गए ? तुम सुन रहे हो न मैंने क्या कह रही हूँ ?

अमित : हाँ हाँ अब्ब्ब क्या कहा तुमने ?

शीना : लो , जनाब कहीं और hi पहुंचे हुए हैं. मैंने कहा क हमारा इंट्रोडक्शन नहीं करवाओगे अपनी दोस्त से.

अमित : दोस्त ?

शीना : होश में तो हो न तुम ?? ये जो तुम्हारे साथ कड़ी है तुम्हारी दोस्त hi है न?

शीना की इस बात पर नैना दीदी करुणा दीदी और नेहा दीदी क चेहरे पर स्माइल आ गयी. और मोहित भी हंस रहा था.

अमित : अरे हाँ मैं तो भूल hi गया. मीट माय डरेस्ट फ्रेंड मिस निधि.

मेरे ऐसा कहने से निधि दीदी क चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी. पर शीना क भाव कुछ बदल गए.

शीना : hello निधि ी ऍम शीना .

निधि दीदी : हए ी ऍम निधि. नीस तो मीट यू .

शीना : लगता है आप दोनों काफी क्लोज हो ?

अमित : हम्म्म बचपन से . हम दोनों बहुत क्लोज हैं और ये मेरा बहुत ध्यान रखती हैं शुरू से hi.

शीना : ओह्ह्ह पर तुमने पहले तो कभी बताया नहीं इनके बारे में.

शीना क बदलते भाव देख कर निधि दीदी की मुस्कान गहरी होती जा रही थी.

अमित : कभी इस तरफ ज़िकर हुआ hi नहीं.

शीना : वैसे आप कौन से कॉलेज में पड़ती हैं?

शीना की इस बात पर नैना दीदी अपनी हंसी रोक न पायी और ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी . उनके साथ hi करुणा दीदी नेहा दीदी राधा मोहित और मेरी भी हंसी निकल गयी .

शीना : क्या हुआ तुम सब हंस क्यों रहे हो?

नैना दीदी : हांसे नहीं तो क्या करें ? ये मेरी बड़ी दीदी हैं. तुमने पहले कभी देखा नहीं न इन्हे. और ये जॉब करती हैं स्टूडेंट नहीं हैं.

अमित : क्या दीदी आप भी , थोड़ी देर रुक नहीं सकती थी.

नैना दीदी : सॉरी सॉरी पर मुझसे कण्ट्रोल नहीं हुआ.

शीना : तो तुम मुझे उल्लू बना रहे थे .

अमित : अरे नहीं ऐसी बात नहीं है. वो तो दीदी क साथ मेरी शर्त लगी थी. ये कह रही थी क मैं पार्टी में जाउंगी तो तुम लोगों का मज़ा ख़राब होगा. क्यूंकि ये हमसे बड़ी हैं . मैंने कहा क आपको देख कर कोई नहीं कह सकता क आप स्टूडेंट नहीं हैं. अब तुम बताओ क मैंने कुछ गलत कहा क्या?

शीना : बिलकुल सही कहा , कहीं से भी ये अंदाज़ा लागु नहीं जा सकता क ये हमसे बड़ी हैं. मुझे तो ये अपनी आगे की hi लग रही हैं.

निधि दीदी : थैंक्स फॉर थे कॉम्पलिमेंट.

अमित : आओ दीदी आपको बाकि सब से भी मिलवाता हूँ.

कल्पना : हए दीदी ी ऍम कल्पना.

कल्पना खुद hi कूद कर सबसे आगे हो गयी दीदी से मिलने और उसके इस स्टाइल से दीदी क चेहरे पर फिर से मुस्कान आ गयी .

अमित : दीदी ये है लेडी ब्रूस ली , या लेडी डॉन भी कह सकती हैं आप.

कल्पना : तुम फिर शुरू हो गए .

अमित : सॉरी सॉरी , दीदी आज की पार्टी इसी क जितने की ख़ुशी में है. गोल्ड मैडल जीता है इसने जुडो में

कल्पना : ये पूरी बात नहीं बता रहा दीदी, आज की पार्टी हम दोनों क जितने की ख़ुशी में है शीना की तरफ से.

निधि दीदी : तुम तो काफी दिलचस्प और स्ट्रांग हो.

अमित : सही कहा दीदी , सब डरते हैं इससे. और राधा नेहा दीदी की सिक्योरिटी इंचार्ज ये hi है.

कल्पना : देखो दीदी ये क्या क्या कहता रहता है. एक तो मैं नेहा दीदी और राधा को घर छोड़ने और ले कर आने का काम करती हूँ ऊपर से ये मेरा मज़ाक उडाता है.

निधि दीदी : अमित कभी किसी का मज़ाक नहीं उडाता कल्पना . वो तुम्हारी तारीफ hi कर रहा है . बस इसका तरीका अलग है. मुझे बहुत ाचा लगा ये जान कर क मेरी दोनों बहनो की रक्षा तुम कर रही हो. अमित ऊपर से कुछ भी कहे पर अंदर से वो तुम्हारा कर्ज़दार भी है क्यूंकि वो अपनी सभी बहनो से बहुत प्यार करता है और एक तरह से तुम उसी का काम कर रही हो.

दीदी क इस जवाब से कल्पना ने मुस्कुरा कर मुझे देखा . फिर मैंने दीदी को शिवानी और शालू से मिलाया वो दोनों भी बहुत खुश हुई दीदी से मिल कर . मीनल को खुद मोहित ने hi इंट्रोडस करवाया तो दीदी भी समझ गयी क दोनों का रिश्ता खास है . अब रह गयी थी रीमा जो पहली बार दीदी से मिल रही थी. जब मैं दीदी को उससे मिलवाने लगा तो वो खुद hi शर्मा गयी .

निधि दीदी : ये ज़रूर डॉ रीना की बहिन होगी

अमित : हैरानी से ) आपको कैसे पता ?

निधि दीदी : दोनों बहनो की ऑंखें एक जैसी हैं. और तुमने खुद hi तो बताया था क उनकी बहिन राधा क साथ पढ़ती है तो अब ये hi रह गयी न जिसके बारे में अभी तुमने नहीं बताया. बाकि सब का तो पता लग गया . वैसे तुम बहुत खूबसूरत हो , बिलकुल अपनी बहिन की तरह . रीमा नाम है न तुम्हारा .

रीमा : जी दीदी , आप भी बहुत खूबसूरत है दीदी सच में आपको देख लगता hi नहीं क आप हमसे बड़ी हैं . आप हम सब में सब से ज्यादा खूबसूरत हैं.

निधि दीदी : बस बस जानती हूँ मैं क्या हूँ. पर यहाँ मेरे से खूबसूरत hi हैं सब की सब. बिलकुल माँ की गुड़िया जैसी हो तुम और ये देखो पास में कड़ी शर्मा रही है मेरी गुड़िया राधा . तुम दोनों एक जैसी hi लग रही हो. कहीं नज़र न लगे किसी की तुम दोनों को.

नैना दीदी : क्या दीदी , हम अछि नहीं लग रही हैं आपको ?

नैना दीदी ने मुँह बनाते हुए दीदी से कहा तो सबको हंसी आ गयी .

निधि दीदी : मैंने कब कहा तुम अछि नहीं लग रही ? पर तुम दोनों इन कपड़ों में?

करुणा दीदी : आज पार्टी थी तो हमने सोचा आज एहि कपडे पेहेन कर चलते हैं.

निधि दीदी : नेहा तुम कैसी हो ?

नेहा दीदी : अछि हूँ दीदी , आपको आज यहाँ देख कर ाचा लग रहा है.

निधि दीदी : मुझे भी.

शीना : तो अब चलें ? वैसे भी आधा घंटा लग जायेगा पहुँचने में.

शीना की इस बात पर सब चलने का कहने लगे और फिर हम सब पार्किंग में आ गए . मैं मोहित क साथ बैठ गया और पीछे मीनल

क साथ निधि दीदी. शीना क साथ शिवानी शालू और रीमा. कल्पना क साथ नैना दीदी नेहा दीदी करुणा दीदी और राधा. शीना क पीछे चलते हुए कोई आधे घंटे बाद शहर से बहार बने इस बड़े से फार्महाउस पर हम पहुँच गए. ये एक बहुत बड़ा फार्महाउस था. गेट पर सिक्योरिटी गार्ड खड़ा था. गेट से अंदर कोई 200 गज का दोनों तरफ बड़ा सा लॉन और फिर दो मंज़िला बड़ा सा बंगाल था. जैसे hi सब गाड़ियां दरवाज़े क पास पहुंची तो अंदर से दो नौकर जल्दी से गाड़ियों क पास आ गए . हूँ सब गाड़ियों से उतरे तो शीना ने दोनों नौकरों से कुछ कहा वो जल्दी से अंदर को चल दिए. हम सब तो बहार से hi इस शानदार फार्महाउस को देख रहे थे .

नैना दीदी : शीना यार तुम तो काफी अमीर हो , मतलब इतनी बड़ा फार्महाउस.

शीना : पैसे क मामलों में आप ऐसा कह सकती हैं पर प्यार क मामले में आप सब मुझसे ज्यादा अमीर हैं .

निधि दीदी : वैसे तुम्हारे पापा कोई बिजनेसमैन हैं क्या ?

शीना : जी दीदी , बलजीत राइ का नाम शायद सुना होगा आपने . मेरे पापा हैं वो डप इंटरनेशनल क मालिक.

ये बात सुनते hi निधि दीदी शॉकेड हो गयी . मैंने भी उनका फेस इम्प्रैशन नोट कर लिया था.

नैना दीदी : दीदी आप भी तो इसी कंपनी में जॉब करती हैं न ?

शीना : रियली ?? आप किस ऑफिस में और ब्रांच में हैं दीदी मुझे बताइये मैं पापा से कह कर आपका परमोशन करवा दूंगी .

निधि दीदी : नहीं नहीं इसकी ज़रूरत नहीं है. असल में मैंने रिजाइन दे दिया है जॉब से.

शीना : रिजाइन ? मगर क्यों ?

निधि दीदी : बस ऐसे hi .

शीना : वैसे आप किस ब्रांच में थी?

नैना दीदी : दीदी हर में हैं

करुणा दीदी : शीना यार तेरे ऑफिस का वो मैनेजर न बड़ा घटिया आदमी लगा मुझे जैसे वो हमें देख रहा था. ऊपर से वो लड़की क्या नाम था उसका , वो एक तो झूठ बोल रही थी ऊपर से ऐसे घबरा रही थी क जैसे उसकी चोरी पकड़ी गयी हो . वो तो दीदी की जॉब की परवाह थी नहीं तो वहीँ लगा देती उसके कण क नीचे.

शीना : दीदी क्या हुआ था ऑफिस में.

निधि दीदी : कुछ नहीं कुछ नहीं तुम लोग ये बातें ले कर बैठ गयी? यहाँ पार्टी करने आये हो न तो उस तरफ ध्यान दो. वैसे भी मैं वो जॉब छोड़ चुकी हूँ. ी ऍम सॉरी शीना तुम बुरा मत मन्ना.

शीना : नहीं दीदी मैं बुरा क्यों मानूंगी पर अगर आपके साथ किसी ने गलत बेहवे किया है तो उसे इसकी सजा ज़रूर मिलेगी .

मीनल : दीदी अब अंदर चलें या यही खड़े रखना है सबको ?

शीना : हाँ हाँ चलो अंदर .

शीना सबको साथ ले कर आगे बड़ी तो मैंने निधि दीदी का हाथ थम लिया. मुझे लगा वो उनकंफर्टबले महसूस कर रही हैं .

अमित : दीदी जो कुछ हो चूका है उसे यद् कर क मूड मत ख़राब कीजिये. शीना अछि लड़की है उसे कुछ भी नहीं पता होगा. आप प्लीज वो सब दिमाग से निकल दे नहीं तो आप को यहाँ ाचा नहीं लगेगा .

निधि दीदी : कहीं शीना को पता चल गया तो ?

अमित : मैंने कहा न वो अछि लड़की है. अगर उसे कुछ पता चला भी तो वो उन्ही लोगों को सजा देगी . अब आप स्माइल करो और मेरे साथ अंदर चलो देखो सब अंदर चले गए हैं.

निधि दीदी ने मेरी आँखों में देख कर स्माइल किया और प्यार से मेरे गले लग गयी.

निधि दीदी : तुम साथ हो तो मैं उदास हो hi नहीं सकती .

दीदी मेरी तरफ देख मुस्कुराती हुई मेरा हाथ थामे अंदर चल पड़ी. दरवाज़े से अंदर घुसते hi घर की साज सज्जा ने सबको मोहित कर रखा था. हॉल में खड़े सब घूम घूम कर घर को देख रहे थे. अंदर एक बड़ा हाल था सामने बड़ी सी दो तरफ से घूम कर छत पर जाती सीढ़ियां. 4 कमरे अगल बगल थे और कुछ ऊपर भी. फर्नीचर अपने आप में विलासिता का परिचायक था. फर्श पर बड़ा सा कालीन बिछा हुआ था. फर्नीचर को एक तरफ खिसका कर बिच में जगह खली कर राखी थी. कुछ लाइट्स स्टैंड पर लगी थी जैसे डिस्को में लगी होती हैं. एक तरफ कुछ टेबल लगे थे जिन पर वो दो नौकर सामान रख रहे थे और उनके साथ नौकरानियां भी थी. शीना सब को घर दिखा रही थी.

नैना दीदी : वाकई यार ये तो बहुत ाचा है. ऐसा तो फिल्मो में hi देखा था मैंने आज तक.

करुणा दीदी : सच में दीदी कमल hi है ये तो.

शीना : सिर्फ पैसा hi सब कुछ तो नहीं होता न दीदी. घर ाचा होने से क्या होता है. लोगों का ाचा होना ज्यादा ज़रूरी है.

ये कहते हुए शीना मेरी तरफ देख रही थी.

मीनल : तो अब करना क्या है ये भी बताओ.

शीना : करना क्या है, ये लाइट्स हैं और वो रहा सिस्टम अपनी मर्ज़ी से अपने गाने चलाओ लैपटॉप से. नौकरों को अभी बहार भेज देते हैं और ये खिड़कियों क परदे गिरा कर पूरा अँधेरा करवा देते हैं फिर डिस्को वाली फीलिंग भी आ जाएगी. खाने क लिए वहां सब मौजूद है. स्नैक्स क साथ कोल्ड ड्रिंक.

मीनल : वाओ मतलब पूरा इंतज़ाम किया है आपने , मज़ा आएगा.

मीनल मोहित क साथ hi चिपक गयी . ये देख कर सब हंसने लगे.

शिवानी : तो डांस कैसे करें ? कपल तो यहाँ एक hi है और हम सब क्या अकेली अकेली डांस करेंगी ?

कल्पना : सही कहा दीदी , ये तो अपने मजनू क साथ लगी रहेगी लगता है हमें आपस में hi कपल बनना पड़ेगा.

शीना : वैसे अमित भी तो है यहाँ पर अगर उसे ऐतराज़ न हो तो हम बरी बरी से उसके साथ कर सकते हैं.

कल्पना : ये तो आपने सही कहा . मगर हम आपस में भी करेंगे वर्ण ये अकेला सबके साथ करता करता थक जायेगा.

करुणा दीदी : वैसे किस बारे में बात हो रही है जो ये करता करता थक जायेगा ?

करुणा दीदी की इस बात पर नैना दीदी ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी . क्यूंकि वो समझ गयी थी क करुणा दीदी ने अभी क्या कहा और जब तक कल्पना को समझ अत तब तक शिवानी और शालू भी हसने लगी थी. शीना भी शर्मा गयी इस बात का मतलब समझते hi और यही हल कल्पना का भी हुआ .

कल्पना : की दीदी आप ये क्या कह रही हैं , मेरा वो मतलब नहीं था.

निधि दीदी : करुणा नैना ये सब क्या है.

करुणा दीदी : सॉरी दीदी. मैं बस मज़ाक कर रही थी.

मैंने राधा की तरफ देखा तो वो मुझे hi देख रही थी और नज़रें मिलते hi शर्म से झुका ली. रीमा भी मुस्कुरा रही थी पर उसने शर्मा कर नज़रें झुकाने की बजाये प्यार से मेरी आँखों में देखना शुरू कर दिया .

निधि दीदी : यद् रखो अमित हमारा क्या है और तुम क्या कह रही हो.

नैना दीदी : दीदी प्लीज थोड़ा बहुत मज़ाक तो करने दो न वैसे भी सब यहाँ आपस में दोस्त hi तो हैं.

मीनल : दीदी मेरे ख्याल से शुरू करना चाहिए वर्ण बातों बातों में देर हो जाएगी.

शीना : सही कहा मैं अभी परदे गिरवती हूँ .

शीना ने नौकरों को कहा और उन लोगों ने फटाफट सरे खिड़की दरवाज़ों को बंद कर क परदे गिरा दिए. सभी लाइट्स बंद कर क वो सब बहार निकल गए . अब घर क अंदर ाचा खासा अँधेरा हो चूका था. ऊपर क खिड़कियां दरवाज़े पहले से hi बंद और ढके हुए थे तो बहार की रौशनी अंदर नहीं आ रही थी. शीना ने सिस्टम ों किया और वो लाज़र लाइट्स भी चला दी जो चरों तरफ गोल गोल घूमने लगी. लाइट्स क नीचे एक बॉक्स जैसी कोई मशीन पड़ी थी जिसको शीना ने ों किया तो उसने ाचा खासा धुंआ फैला दिया ज़मीन पर. और म्यूजिक शुरू होते hi माहौल बन गया.

मीनल : वाओ फैंटास्टिक दीदी आपने तो कमल कर दिया.

नैना दीदी : वाओ यार शीना ज़बरदस्त है ये तो.

करुणा दीदी : ये तो डिस्को की तरह hi लग रहा है.

शिवानी : तो वेट किसका कर रहे हो यार शुरू करो.

नैना दीदी करुणा दीदी का हाथ पकड़ कर वहां धुंए क बीच में नाचने लगी. मीनल ने भी मोहित का हाथ पकड़ा और शुरू हो गयी . शिवानी शीना को लेकर नाचने लगी . निधि दीदी नेहा दीदी क साथ साइड में कड़ी हो कर सब को देखने लगी. कल्पना शालू रीमा और राधा का हाथ पकड़ कर उन्हें बचने लगी . हिंदी फिल्मो क गाने पर सब थिरक रही थी. मैं कभी उन सबको नाचते हुए देखता कभी साइड में कड़ी निधि दीदी और नेहा दीदी को. सब धीरे धीरे रंग में आने लगी थी. राधा और रीमा तो नाचते हुए भी मुझे hi देख रही थी जैसे कह रही हो क मैं उनके साथ नाचूं.

कल्पना : तुम्हे क्या इनविटेशन देना पड़ेगा ? पार्टी तुम्हारी भी है चलो आओ.

कल्पना मेरा हाथ खिंच कर मुझे बीच में ले गयी . और मेरे साथ नाचने लगी . कल्पना क साथ hi सब ने मुझे घेर लिया और मेरे साथ hi नाचने लगी . अँधेरे और धुंए की वजह से माहौल कुछ ज्यादा hi उत्तेजक बन गया था ऊपर से खूबसूरती की मिसाल ये सब परियां इसे और भी जानलेवा बना रही थी. एक तेज़ धुन वाला गण शुरू होते hi सब की स्पीड भी तेज़ हो गयी. नाचते नाचते नैना दीदी मेरे आगे आ गयी और अपनी कमर मेरे लैंड पर दबा कर घूमने लगी. पीछे से करुणा दीदी अपने नाज़ुक कोमल उभर मेरी पीठ से रगड़ने लगी . नैना दीदी ने एक हाथ निचे ले जा कर मेरे लैंड को दबा कर छोड़ दिया पर इतने में hi मैं हिल गया . मैंने घबरा कर उनकी तरफ देखा तो वो नशीली आँखों से देखती हुई मुस्कुराने लगी और एक आँख दबा कर इशारा किया. फिर उनकी जगह करुणा दीदी आ गयी और उन्होंने भी ऐसा hi किया मुझे तो दर लग रहा था क सबके बीच ये क्या कर रही हैं . मगर अँधेरा और धुआं होने की वजह से शायद किसी को नज़र नहीं आया होगा. तभी रीमा लैपटॉप क पास गयी और गण चेंज कर दिया. ये गण तेज़ म्यूजिक का तो नहीं था पर बहुत रोमांटिक था. गण शुरू होते hi वो मेरी आँखों में देखने लगी . गाने क शब् कुछ इस तरह थे.

‘ अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम ,

अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम , तुम्हे प् कर ज़माने भर से रिश्ता तोड़ देंगे हम ‘

इस गाने की धुन क साथ hi रीमा मेरी आँखों में देखती हुई मेरे करीब आयी धीरे धीरे गाने क बोल क साथ होंठ हिलाते हुए नाचने लगी. मैं तो उसी में खोता जा रहा था. रीमा घूम कर मेरे सामने आयी तो मैंने उसकी कमर को थमने क लिए हाथ बढ़ाया hi था क सबकी मौजूदगी की वजह से खुद को रोक लिया. पर फिर भी मैंने उसका हाथ पकड़ hi लिया . एक पल को वो रुकी और मुस्कुराती हुई घूम कर मेरी छाती से पीठ लगा कर कड़ी हो गयी. मगर ज्यादा देर नहीं हालाँकि मेरा दिल कह रहा था क ये वक़्त यहीं रुक जाये और रीमा मेरी बाँहों में ऐसे hi रहे. रीमा घूम कर जैसे hi दूर हुई तो शीना उसकी जगह आ गयी और वो भी उसी तरह घूम कर मेरे साथ चिपक गयी और मैं सिर्फ उसका साथ देते हुए थिरक रहा था. तभी गण चेंज हो गया और इस बार गण राधा ने प्ले किया था. इस गाने क बोल से सब हैरान हो गए क्यूंकि ये एक पुराण हिंदी गण था. राधा को पता था क मैं पुराने हिंदी गाने सुनता हूँ कभी कभी और उसने उनमे से hi एक ाचा रोमांटिक गण प्ले कर दिया .

‘ गोरी हैं कलाइयां तू लादे मुझे हरी हरी चूड़ियां

गोरी हैं कलाइयां तू लादे मुझे हरी हरी चूड़ियां

अपना बना ले मुझे बालमाआ ‘

इन लाइन्स क साथ hi राधा ताल मिला कर नाचने लगी . मेरे आगे पीछे घूम कर नाचते हुए राधा मेरे आँखों में देखते हुए स्टेप्स कर रही थी. मैं तो बस राधा को इस तरह दिल से गाने की धुन और शब्दों क साथ ताल मिला कर नाचते हुए देख खुश भी था और हैरान भी. गण भी मेरी पसंद का था तो मैं खुद को हीरो की जगह इमेजिन कर क राधा क साथ डांस करने क बारे में सोच रहा था. कल्पना ने तो सिटी hi बजा दी राधा क इस तरह गाने की धुन क साथ एक्टिंग कर क नाचते हुए. कल्पना क देखा देखि नैना दीदी और करुणा दीदी भी शोर मचने लगी और धीरे धीरे सब शुरू हो गयी हो हल्ला करने. राधा ने जब सब को ऐसे करते देखा तो वो शर्मा कर निधि दीदी क पास भाग गयी.

नैना दीदी : वह राधा तुमने तो कमल कर दिया . ये गण कैसे सुझा तुझे ? वैसे इससे एक आईडिया आया मुझे. क्यों न हम सब अपनी अपनी पसंद क एक एक सांग पर यहाँ डांस परफॉरमेंस दें.

शीना : मैं भी यही सोच रही थी.

मीनल : ब्रिलियंट आईडिया दीदी. शुरुआत मैं करती हूँ .

और फिर शुरू हो गयी पर्फॉर्मन्सेस. सब मीनल ने मोहित क साथ एक रोमांटिक गाने पर परफॉरमेंस दी . उसके बाद एक एक कर क सब शुरू हो गए . रीमा और राधा तो पहले hi अपनी पसंद क गाने पर परफॉर्म कर चुकी थी अब बाकियों ने भी परफॉर्म कर दिया. जब शीना की बरी आयी तो उसने दिल तो पागल है फेम गाने पर परफॉरमेंस दी.

‘ साड़ी साड़ी रत जगाता है यही,

अक्षीयों की नींद चुराता है’

शीना नाचते हुए बस मुझे hi देख रही थी. कल्पना ने फिर से वही गण लगा दिया जो रीमा ने लगाया था .

‘ अगर तुम मिल जाओ ज़माना छोड़ देंगे हम’

सब ने बरी बरी परफॉर्म कर दिया बस नेहा दीदी और निधि दीदी को छोड़ कर. सब उनसे कह रहे थे नाचने को पर दोनों मन कर रही थीं. तो मैंने hi निधि दीदी का हाथ पकड़ कर उन्हें सबके बीच खड़ा कर दिया .

अमित : दीदी अब आपको नाचना hi पड़ेगा वर्ण मैं समझूंगा आप मुझसे नाराज़ हैं.

निधि दीदी कुछ नहीं बोली और एक पल मेरी आँखों में देख कर खुद hi एक सांग प्ले कर दिया . ये सांग डांस वाला काम और एक्टिंग वाला ज्यादा था पर सब ने साइलेंट हो कर दीदी की तरफ फोकस कर लिया क्यूंकि वो भी इस गाने क साथ डांस काम एक्टिंग ज्यादा कर रही थी.

‘ टूउउउ मेरी ज़िन्दगी है ,

टूउउउउ मेरी हर ख़ुशी है.....

तू hi मेरी पहली ख्वाहिश

तू hi आखिरी ..... है ....’

दीदी एक एक शब्द क साथ होंठ हिलती और धीरे धीरे थिरकती मेरे सामने नाच रही थी .

‘ वह दीदी सुपर्ब मंद ब्लोइंग परफॉरमेंस ‘ कल्पना ने सिटी बजाते हुए ये कहा तो दीदी शर्मा गयी.

अमित : नेहा दीदी अब आपको भी करना होगा , देखिये निधि दीदी ने भी कर दिया अब तो.

नेहा दीदी ने भी मेरी बात मानते हुए एक गण अपनी पसंद का प्ले कर दिया . ये एक नार्मल सा गण था और धीरे धीरे सब उनके साथ हो लिए. नाचते नाचते मैं निधि दीदी क करीब गया तो वो अचानक लड़खड़ा गयी और मेरे ऊपर गिर गयी . दीदी की नरम छाती मेरी मजबूत और सख्त छाती से लग कर पिचक गयी. मैंने दीदी को सँभालने क लिए उनकी कमर को थम लिया तो एक झटका सा हम दोनों क जिस्म को लगा. दीदी की ऑंखें बंद हो गयी और एक सिसकी उनके मुँह से निकल गयी.

अमित : आप ठीक तो हैं दीदी?

निधि दीदी तो जैसे किसी और hi दुनिया में पहुँच गयी थी. मेरे दूसरी बार आवाज़ देने से उन्होंने ऑंखें खोली और मेरी आँखों में देखा . एक पल मेरी आँखों में देखने क बाद वो शर्माती हुई पीछे हैट गयी . कुछ hi पल वो मेरी बाँहों में रही पर उनके नाज़ुक बदन का एहसास मुझे अपनी बाँहों में अभी भी हो रहा था. एक मीठी सी खुशबु जो उनके बदन से आ रही थी मेरी साँसों में घुल गयी थी.

कुछ देर और सब मिल कर डांस करते रहे. और जब सब थक गए तो फिर खाने की तरफ हो गए. सब खाने की तरफ हुए तो मेरी नज़र मोहित की तरफ गयी जो चुपके से खिसक रहा था एक तरफ. मैंने गौर किया तो मीनल भी वहां नहीं थी मैंने समझ गया ये दोनों कहाँ जा रहे हैं. मैं अभी उधर hi देख रहा था क रीमा मेरे पास से मुझे इशारा करते हुए दूसरी तरफ निकल गयी. सब को एक बार देखने क बाद मैं भी उसके पीछे हो लिया. इस तरफ भी एक कमरा था जिसका दरवाज़ा खुला था . मैंने अंदर घुस कर जैसे hi दरवाज़ा बंद किया तो रीमा पीछे से मेरे साथ चिपक गयी .

रीमा : ी लव यू अमित ी लव यू वैरी मच प्लीज मुझे अपनी बना लो न.

मैंने पलट कर रीमा को गले से लगा लिया .

अमित : ी लव यू 2 और तुम मेरी hi तो हो और कैसे तुम्हे अपना बना लूँ तुम hi बताओ . शादी तो अभी कर नहीं सकता मैं.

रीमा : मैं शादी की बात नहीं कर रही वो तो मुझे पता है और वैसे भी मुझे अभी और पड़ना है .

अमित : तो क्या चाहती हो तुम?

रीमा : मैं चाहती हूँ तुम .. तुम मुझे एक बार वो प्यार करो जो हर लड़की का सपना होता है. जो सिर्फ वो अपने पति क साथ करती है.

अमित : तुम जानती हो तुम क्या कह रही हो? शादी से पहले ये सब ....

रीमा : बस एक hi बार करने को तो कह रही हूँ मैं . ताकि इस दिल को तसल्ली हो जाये क तुम मुझे कभी जुड़ा नहीं होने डोज.

अमित : वो तो मैं वैसे भी होने नहीं दूंगा . पर आज यूँ अचानक ये बात कैसे आ गयी मन में ?

रीमा : मुझे दर लगता है कहीं कोई और तुम्हे मुझसे चीन न ले.

अमित : ऐसा कैसे हो सकता है भला ? मैं तो सिर्फ तुम्हारा हूँ न.

रीमा : पर अगर कोई तुम्हे मुझसे भी ज्यादा चाहती हो तो क्या तुम उसके प्यार को ठुकरा पाओगे ?

अमित : ये तुम क्या कह रही हो ? ऐसा कैसे हो सकता है?

रीमा : यहाँ कुछ भी हो सकता है. हो सकता है कोई तुम्हे मुझसे भी ज्यादा मुझसे भी पहले से चाहती हो.

अमित : किसकी बात कर रही हो तुम ?

रीमा : मैं बस ऐसे hi कह रही हूँ . बस मुझे एक बार तुम वो प्यार दो जो मैं चाहती हूँ.

अमित : पर उसकी ज़रूरत नहीं है रीमा . मैं तो वैसे भी तुम्हारा हूँ . और वैसे भी एक बार कर लिया तो फिर दूर रहना मुश्किल हो जायेगा.

रीमा : मुझे कुछ नहीं पता , अगर मुझसे प्यार करते हो तो तुम्हे मेरी बात माननी होगी.

अमित : रीमा....

रीमा : हाँ या न

अमित : ठीक है अगर तुम्हारी यही मर्ज़ी है तो. बाद में मत कहना क मैंने तुम्हारी चाल बिगाड़ दी.

रीमा : छी गंदे !!!

मेरी छाती पर चपत मरते हुए वो मेरे छाती में hi खुद को छुपाने लगी. मैंने उसे अपनी बाँहों में कस्ते हुए उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और फिर हम दोनों एक दूसरे का रूह से एहसास करते हुए होंठों को चूमने लगे. पता नहीं कितनी देर हम ऐसे hi एक दूसरे क होंठों चूमते रहे , हमारी तन्द्रा तब टूटी जब मेरा मोबाइल बजने लगा . ये कॉल कल्पना की थी.

अमित : hello

कल्पना : कहाँ हो तुम

अमित : मैं ज़रा बाथरूम आया था

कल्पना : अजीब आदमी हो बिना खाये hi बाथरूम भाग गए. जल्दी आओ सब तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं .

अमित : अभी आया.

मैंने रीमा क होंठो को एक बार फिर से चूमा और बहार निकल गया. सब मेरी hi रह देख रहे थे . मोहित मीनल रीमा क इलावा शालू भी नदारद थी .

कल्पना : आइये महाराज अब पेट खली हो गया हो तो थोड़ा खा भी लो अब.

अमित : मैं तो अपनी दीदी क साथ खाऊंगा .

इतना कह कर मैं निधि दीदी क पास बैठ गया तो वो प्यार से मुझे अपने हाथों से खिलने लगी.

करुणा दीदी : तू कोई छोटा बचा है जो दीदी क हाथ से खा रहा है?

निधि दीदी : खाने दो न इसे , ये जैसा भी है मुझे प्यारा है .

राधा : दीदी फिर तो मैं भी सब से छोटी हूँ न क्या मुझे नहीं खिलाएंगी आप ?

निधि दीदी : क्यों नहीं मेरी गुड़िया ? आजा मेरे पास .

अब निधि दीदी की एक साइड मैं और दूसरी साइड राधा थी और दीदी दोनों को बरी बरी से खिला रही थी. नेहा दीदी खुद hi मेरी तरफ आ गयी और वो भी अपने हाथ से मुझे खिलने लगी .

कल्पना : थोड़ा सा प्यार क्या मुझे भी मिल सकता है आपका ??

कल्पना ने बड़ी गंभीरता से ये शब्द कहे थे. निधि दीदी ने कल्पना को अपने पास आने का इशारा किया और उसे भी अपने हाथ से खिला दिया. बस फिर क्या था सब बरी बरी से निधि दीदी क हाथ से खाने लगे . शीना की ऑंखें भर आयी जब निधि दीदी ने उसे भी अपने हाथ से खिलाया . रीमा और शालू भी अब वापिस आ गयी तो वो भी सब क साथ शामिल हो गयी.

अमित : आप सब क लिए एक ज़रूरी इनविटेशन है मेरे पास. संडे को मेरे मां क बेटे का नामकरण है तो आप सब को वहां आना पड़ेगा.

शीना : मैं ज़रूर आउंगी और मेरे साथ रीमा भी .

रीमा : रीना दीदी भी चलेंगी .

कल्पना : मैं तो सब से पहले पहुंचूंगी , कब से कह रही थी क गाओं देखना है आखिर मौका मिल hi गया .

शिवानी : मैं भी चलूंगी और शालू भी हमारे साथ चलेगी.

‘ कौन कहाँ जा रहा है कुछ हमें भी बताओ यार ‘

मीनल ने पास आते हुए पूछ . मोहित उसके साथ hi था .

कल्पना : मिल गया टाइम ? कहीं तो छोड़ दिया करो इसे.

रीमा : अमित क मां क बेटे का नामकरण है संडे को तो सब गाओं जाने की बात कर रहे थे.

मीनल : that’s ग्रेट मैं भी चलूंगी.

मोहित : तूने पापा को बोल दिया है न?

अमित : बाबा ने शायद बोल दिया होगा अब तक. उन्होंने कहा था वो खुद बात करेंगे.

मीनल : क्या ??? अंकल आंटी भी जा रहे हैं? मतलब मैं तुम्हारे साथ नहीं जा सकती ?

कल्पना : कोई बात नहीं डार्लिंग मैं हूँ न. कभी मेरे साथ भी वक़्त बिता कर देखलो.

करुणा दीदी : लगता है कल्पना क इरादे नेक नहीं हैं.

कल्पना : क्या दीदी अआप भी , मैं ऐसी लगती हूँ आपको ??

नैना दीदी : ऐसी लगती तो नहीं हो पर क्या पता बर्फ की जगह तुम गफ hi ढूंढ रही हो .

कल्पना : दीदी .....

निधि दीदी : बस बस कोई परेशां न करो इसे. जैसी भी है बहुत प्यारी है कल्पना .

दीदी क इतना कहने भर से hi कल्पना निधि दीदी से चिपक गयी. खाना पीना ख़तम होते होते 3 बज गए. और उसके बाद सब जैसे आये थे वैसे निकल लिए . 4 बजे तक मैं और निधि दीदी घर वापिस आ चुके थे. मैं मोहित क साथ जा कर अपनी बाइक भी ले आया जो ठीक हो चुकी थी. अब उस पर कोई खरोंच का निशान बाकि न था.

सप ऑफिस

‘ है हिन्द मैडम ‘

सप ऋतू सिंह : कहिये पांडेय जी क्या प्रोग्रेस है ?

आईएनएस. पांडेय : मैडम उनमे से एक को होश आ गया है. और उनसे बयां दिया है क वो एक लड़का था जिसमे उस पर हमला किया. वो लूट क इरादे से hi आया था और दीवार फांद कर अंदर घुस आया. लड़के का हुलिया पहलवान जैसा बताया है उसने . कद कोई 6 फ़ीट . मैनेजर का लैपटॉप और मोबाइल चुराया है उसने घायल करने क बाद . लैपटॉप में ऑफिस की ज़रूरी इनफार्मेशन थी तो हो सकता है ये किसी कॉम्पिटिटर कंपनी वाले ने करवाया हो .

सप ऋतू सिंह : उस लड़के क बारे में कोई और इनफार्मेशन?

आईएनएस. पांडेय : उसने इतना बताया है क लड़का बुलेट बाइक पर था. अब हम उस अरे में लगे कक्तव की फुटेज निकलवा रहे हैं. जैसी hi कोई इमेज मिलती है हम उससे कन्फर्म करवा कर आपको बताएँगे मैडम.

सप ऋतू सिंह : कोशिश करो ये काम आज hi हो जाये और मुझे कल तक वो लड़का मेरे सामने हाज़िर चाहिए.

आईएनएस. पांडेय : जी मैडम मैं पूरी कोशिश करूँगा .

सप ऋतू सिंह : अब आप जा सकते हैं

आईएनएस. पांडेय सलूट मर कर ऑफिस से बहार निकल गए . उनके जाते hi ऋतू सिंह ने टेबल पर पड़े फ़ोन का रिसीवर उठा कर एक no. मिलाया. सामने वाले ने फ़ोन उठाते hi जय हिन्द बोल कर बात शुरू की.

सप ऋतू सिंह : क्या इनफार्मेशन है ?

सामने वाला : मैडम अभी तक कुछ पता नहीं चला है .

सप ऋतू सिंह : पूरे जे से 12 लड़कियां उठा ली गयी और किसी क पास कोई इनफार्मेशन नहीं ? तुम लोग कर क्या रहे हो ?

सामने वाला : मैडम मेरी पूरी टीम काम पर लगी हुई है पर अभी तक हमारे हाथ कोई खास जानकारी नहीं लगी है . बस इतना hi पता चला है क ये एक hi गिरोह का काम है और शायद ये लोग लड़कियों को विदेशों में बेचते हैं या उनसे प्रोस्टीटूशन करवाते हैं देश क दूसरे हिस्सों में भेज कर.

सप ऋतू सिंह: मुझे रिजल्ट्स चाहिए इंस्पेक्टर, जिन घरों की बेटियां उठ ली गयी उन पर क्या बीत रही होगी सोचा है अपने? और उन लड़कियों की क्या ज़िन्दगी होगी आगे चल कर ज़रा ये भी सोच कर देखिये. मुझे परवाह नहीं है ये कोई भी गिरोह हो या कोई भी बड़ा आदमी या नेता उनके पीछे हो. मैं किसी को नहीं छोड़ने वाली . आप बस जल्द से जल्द मुझे पक्की इनफार्मेशन दो. बाकि मैं देख लुंगी क कानून क हिसाब से सजा देनी है या अपने हिसाब से .

सामने वाला : जी मैडम मैं जल्द hi आपके सामने इनफार्मेशन लेकर हाज़िर हो जाऊंगा.

इतना सुन कर ऋतू सिंह रिसीवर वापिस रख दिया. और सामने पड़ी फाइल स्टडी करने लगी जो शहर क बड़े बड़े मुजरिमो क बारे में थी और सबका आपस में एक hi लिंक था.



इधर बाइक लेकर मैं घर आकर आराम करने अपने कमरे में चला गया. शाम को मंजू म क घर जाने क लिए मैं तैयार हो कर बहार निकला तो देखा बाइक का टायर फिर से पंक्चर था. मैंने बाइक को धक्का लगा कर ले जाना चाहा तो निधि दीदी ने मन कर दिया. नैना दीदी अभी तक आयी नहीं थी रीता मौसी क घर से तो मैंने भी जाना कैंसिल कर दिया . और वापिस अंदर आ गया. निधि दीदी मेरे साथ बातें करती रही . आज मेरे साथ पार्टी में जा कर वो भी खुश थी और सबके बारे में अपने विचार बता रही थी. ऐसे hi रत हो गयी और नैना दीदी भी घर वापिस आ गयी थी . मौसा जी क आते hi सबने मिल कर खाना खाया और फिर मैं अपने कमरे में चला गया . कुछ देर मैंने रीमा और राधा से बात की फ़ोन पर. और फिर निधि दीदी मेरे पास आ गयी. निधि दीदी ने मेरे मन करने क बावजूद मेरे घुटने की मालिश की. और मुझे सोने का कह कर मेरा माथा चुम कर वापिस चली गयी. मैं भी लाइट बंद कर क सो गया. रत क किसी पहर मुझे अपने ऊपर किसी का एहसास हुआ तो मेरी आँख खुल गयी .
 
अपडेट 158



ऑंखें खुलते hi मुझे नैना दीदी का चेहरा नज़र आया. वो भी मेरी आँखों में hi देख रही थी. कमरे में हलकी रौशनी का बल्ब जल रहा था.

नैना दीदी : मेरा इंतज़ार किये बिना hi सो गए थे ? अपने आप मेरा ख्याल नहीं अत न तुम्हे?

अमित : दीदी अगर कोई यहाँ आ गया तो ? कारन भैया का कमरा भी तो पास में hi है.

नैना दीदी : कुछ नहीं होता , हम आवाज़ नहीं करेंगे. वैसे भी पहले तो कर hi चुके हैं. आज मैं कोई बहाना नहीं सुनने वाली . 3 दिन हो गए तुम्हे यहाँ आये हुए और अभी तक एक बार भी मेरे पास नहीं आये तुम. क्या इतना hi प्यार था मुझसे ?

नैना दीदी की तड़प मैं समझ रहा था इस लिए उनको जवाब देने की बजाये मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें किश करने लगा. दीदी भी मेरा साथ देने लगी. उनके वो कोमल मदभरे आधार चूसने में मुझे बड़ा आनंद आ रहा था. मेरे हाथ उनकी पीठ से रेंगते हुए उनके कूल्हों पर चले गए जो आकर में ज्यादा बड़े तो नहीं थे पर बड़े hi नरम और गोल थे. मैंने दोनों हाथों से उनके कूल्हे मसलने शुरू कर दिए. दीदी भी अब ज़ोर से किसिंग करने लगी. कुछ hi पलों में मेरा लैंड पूरे आकर में खड़ा हो कर उनकी छूट क ऊपरी भाग और मेरे पेट क नीचे लम्बवत अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहा था.

नैना दीदी : मुआअआआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह ककक बहुत तड़पाया है तुमने मुझे आज मेरी साडी तड़प ख़तम कर दो . मुझे आज जी भर क प्यार करो. उम्मम्मम्म

मैंने दीदी को किश करते हुए पलट कर अपने नीचे कर दिए बीएड पर हाथ रख कर किश तोड़ी.

अमित : आज आपकी तड़प मिटा दूंगा बस आप खुद पर काबू रखना कहीं आवाज़ बहार न जाये.

नैना दीदी : वो मैं देख लुंगी तुम बस प्यार आआअह्ह्ह्ह कक्कक्क्स

मैंने उनकी बात पूरी होने से पहले उनके रुई क गोलों को अपने हाथों में ले लिया. दोनों स्तनों को मसलते हुए मैंने उनकी गर्दन पर किश करना शुरू कर दिया और दीदी ने अपने हाथ मेरी पीठ पर कास दिए . दीदी इस वक़्त एक ढीला टॉप और लोअर पहने थी. अपनी टंगे फेलियर हुए उन्होंने मुझे बीच में ले कर मेरी कमर पर अपने पाऊँ कास लिए. दीदी क मुँह से लगातार सिसकियाँ. निकल रही थी जिन्हे वो अपने होंठ बंद कर क दबाने की कोशिश कर रही थी.

नैना दीदी : उम्म्म्म ककक उम्म्म उफ्फफ्फ्फ़ वक्क्कक्स ऐसे hi प्यार करो इन्हे आअह्ह्ह्ह ये कब से तुम्हारे हाथों का स्पर्श पाने क लिए मचल रहे थे. इन्हे प्यार करो. आअह्ह्ह्ह ककक

दीदी क चूचे अब सख्त होने लगे थे और निप्पल भी कड़े हो गए थे. T-shirt क नीचे उनके चुके आज़ाद थे . मैंने उनकी T-shirt उतरने की कोशिश की तो उन्होंने जल्दी से खुद hi उसे उतर दिया. मैंने उनका एक चुका हाथ में पकड़ा और दूसरे को मुँह में भर लिया. उनके कड़े हो चुके गुलाबी निप्पल को मैं होंठों में दबाकर खींचने लगा और अपनी जीभ से उसे कुरेदने लगा. दीदी और ज्यादा मचलने लगी और मेरा सर अपनी छाती पर दबाने लगी .

नैना दीदी : आआह्ह्ह उम्म्म्म ायःहज ककक ऐसे hi करो आआह्ह्ह्हह कक्कक्स खा जाओ उन्हें आआह्ह्ह्ह

मैंने डेंटन में दबाकर उनकी निप्पल को हलके से कटा तो लम्बी लम्बी सिसकियाँ लेने लगी. एक चुके को अछि तरह चूसने क बाद मैं दूसरे को भी पहले जैसे प्यार करने लगा. दीदी से ये सब बर्दाश्त नहीं हो रहा था और वो खुद अपनी कमर उठाने लगी थी. चुके चूसने क बाद मैं उनके पेट को चूमता हुआ नीचे तक आया और उनका लोअर पकड़ कर खींचने लगा तो दीदी ने खुद hi टंगे उठा कर कमर को उचका कर मुझे लोअर उतरने दिया. लोअर उतारते hi पिंक पेंटी में कैद उनकी छूट सामने थी. मैंने पेंटी क ऊपर से hi उनकी छूट पर किश की जहाँ से बड़ी hi उत्तेजक स्मेल आ रही थी. दीदी ने मेरा सर छूट पर दबा दिया . मैंने देर न करते हुए पेंटी भी उतर दी. अब तक सिर्फ 2 बार चूड़ी छूट कुंवारी छूट की तरह hi लग रही थी बस होंठ थोड़े से खुले हुए थे और अंदर से थोड़ा सा मास चोंच की शकल में झलक दिखा रहा था. बालों का नमो निशान तक न था छूट पर शायद आज hi बल साफ किये थे दीदी ने.

मैंने छोट को उँगलियों से खोल कर देखने की कोशिश की तो अंदर का गुलाबी भाग नज़र आने लगा. छूट थोड़ी गीली थी जो बता रही थी क दीदी कितनी छुडासी हैं.

नैना दीदी : देखते hi रहोगे या प्यार भी करोगे ? ये कब से तड़प रही है तुम्हारे प्यार क लिए आअह्ह्ह्हह

मैंने छूट को फैला ये हुए अपना मुँह छूट पर भिड़ा दिया और छूट की चोंच को अपने होंठों में जकड कर खींचने लगा. दीदी मचलने लगी और मेरा सर छूट पर दबाने लगी. मैंने उनकी दोनों जांघों को फैला ये हुए अपनी जीभ को छूट में अंदर बहार करना शुरू कर दिया . दीदी इतनी छुडासी थी क 2 मिनट्स भी बर्दाश्त न कर पायी और झटके लेते हुए मेरे मुँह में अपना पानी छोड़ने लगी. मैंने भी उनके इस अमृत की एक बूँद भी जाया न होने दी. दीदी स्खलन क दौरान मेरा सर ज़ोर से अपनी जांघों में कास लिया था जो उनके ढीला पड़ते hi आज़ाद हुआ . मैंने उनको आराम करने दिया और अपने कपडे उतर कर उनके ऊपर आ गया. मुझे अपने ऊपर महसूस कर क उन्होंने ऑंखें खोल कर मुझे देखा और हम दोनों की हालत देख कर शर्मा कर ऑंखें बंद कर ली.

अमित : क्या हुआ अब ऑंखें क्यों बंद कर रही हो? अभी तो बड़ा कह रही थी क आज मुझे जी भर क प्यार करो और अब शर्मा रही हो. क्या प्यार नहीं करना अब?

नैना दीदी : तुम करो मुझे शर्म आ रही है. तुमने वहां से मुँह क्यों नहीं हटाया जब मैं. ...

अमित : अब भला अमृत को कोई वास्ते करता है क्या? आपकी तरह आपका पानी भी बड़ा स्वीट है . यकीन न हो तो खुद चेक कर लो.

इतना कह कर मैंने दीदी क होंठ चूसने शुरू कर दिए और अपनी जीभ उनके मुँह में भर दी जिसे वो अपने मुँह में खींचते हुए चूसने लगी. दीदी की टंगे फिर से मेरी कमर पास कास गयी. मेरे लैंड को अपनी छूट पर महसूस करते वो फिर से गरम हो कर कमर हिलने लगी. मैंने एक हाथ नीचे ले जा कर लैंड को छूट पर सेट किया और हलके से पुश किया. लैंड छूट का मुँह खोलता हुआ 3 इंच अंदर घुस गया. छूट इतने दिनों बाद लैंड ले रही थी ऊपर से अभी तक 2 hi बार लैंड लिया था. लैंड छूट में घुसते hi नैना दीदी क मुँह से चीख निकल गयी जिसे मैंने जल्दी से उनके होंठ अपने होंठों में लेकर बंद किया. नैना दीदी ने मेरी पीठ में अपने नाख़ून दबा दिए थे. मुझे एहसास था क उन्हें दर्द तो होगा पर इतना ज्यादा भी नहीं होगा क्यूंकि पहले भी मैं उनकी छूट में लैंड थोक चूका था. मैंने दीदी को किश करते हुए उनके चुके दबाने शुरू कर दिए . जैसे hi दीदी की पकड़ मेरी पीठ पर थोड़ी काम हुई मैंने एक और धक्का मर कर 7 इंच तक लैंड छूट में घुसा दिया .

नैना दीदी : ह्म्म्मम्म्म्म ह्म्म्मम्म्म्म

नैना दीदी छींकने की कोशिश कर रही थी पर उनकी चीख को मैंने अपने मुँह से दबा रखा था. मैं लगातार दीदी क बूब्स मसल रहा था. कुछ hi पलों में दीदी फिर से नार्मल हुई तो मैंने आराम से लैंड अंदर बहार करना शुरू कर दिया . दीदी भी अपनी कमर हिलने लगी. दीदी को नार्मल होता देख मैंने उनके होंठ आज़ाद कर दिए .

नैना दीदी : हम्म्म आअह्ह्ह ककक ऐसे hi करो हम्म्म कितने दिनों बाद आज मज़ा आ रहा है . तुम रोज़ क्यों नहीं करते ? जब तक यहाँ हो रोज़ ऐसे hi प्यार करना मुझे

अमित : दीदी आप बहुत अछि हो मैं आपको बहुत प्यार करता हूँ पर रोज़ रोज़ करने से आप फिर रह नहीं पाएंगी .

नैना दीदी : मुझे कुछ नहीं पता , मैं रोज़ तुम्हे अपनी बाँहों में लेना चाहती हूँ. तुम नहीं जानते मैं कितना मिस करती हूँ तुम्हे. आअह्ह्ह कक्कक्क्स जब से तुमने मुझे ये आनंद दिया है अब और कुछ ाचा hi नहीं लगता . आअह्ह्ह्ह और ज़ोर से करो.

मैं दीदी क बूब्स पकड़ कर दबाता लगातार धक्के पेल रहा था. दीदी की दोनों टाँगें मैंने उठा कर अपने कन्धों पर रख ली और उन्हें चूमते हुए अपनी कमर चलने लगा. फिर मैंने दीदी की छूट से लैंड निकल कर उन्हें पलट दिया और घुटनो क बल कर क एक hi झटके में लैंड पहले जितना घुसा दिया.

नैना दीदी : आआह्ह्ह्हह कक्कक्क्स दर्द क साथ मज़ा भी अत है जब ऐसे करते हो आअह्ह्ह्ह ककक करते रहो उम्म्म्म

मैं दीदी की कमर थम कर धक्के मरता रहा . उनकी पीठ पर झुक कर किश करते हुए मैं उनके लटकते संतरों को भी दबाने लगा. दीदी भी मस्ती में कमर पीछे को धकेलने लगी. उनकी सिसकियाँ बढ़ने लगी थी और कमरे में ‘ ठप्प्प ठप्प्प ठप्प ‘ की आवाज़ गूँज रही थी. अचानक दीदी का बदन ऐंठने लगा और एक बार फिर से उनका पानी निकल गया. दीदी झटके कहती हुई निढाल हो गयी. मुझे लैंड पर गरम पानी का फुहारा महसूस हो रहा था. मैंने उनको ठंडा होने दिया और फिर उनकी गीली छूट में लैंड चलने लगा. अब ‘ठप्प ठप्प ‘ की जगह ‘ फच फच की आवाज़ें आने लगी थी. साथ hi छूट रास की महक फैलने लगी थी . कुछ देर मैंने दीदी की इस पोजीशन में चुदाई करने क बाद मैंने बीएड पर लेट कर उन्हें अपने ऊपर बिठा लिया. दीदी छूट में लैंड सेट कर क एक डैम से बैठ गयी और छूट गीली होने की वजह से लैंड जड़ तक छूट में घुस गया.

नैना दीदी : आआआहहहहह माआआआ

नैना दीदी ने बेध्यानी में पूरा लैंड अंदर ले लिया था जो मैंने अभी तक नहीं किया था. इस वजह से उन्हें छूट में दर्द हुआ और वो चीख पड़ी . मैंने जल्दी से उनका मुँह बंद कर दिया.

अमित : क्या कर रही हो दीदी ? अगर किसी ने सुन लिया तो

नैना दीदी : क्या करूँ ये इतना बड़ा मुसल चाकू की तरह पेट में घुस गया है. आअह्ह्ह्हह उफ्फफ्फ्फ़

अमित : किसने कहा था एक बार में hi अंदर लेने को ? अब थोड़ा कण्ट्रोल करो.

मैंने नैना दीदी को अपने ऊपर झुका कर उन्हें किश करने लगा. कुछ देर दीदी ऐसे hi मेरे ऊपर लेती रही फिर खुद hi अपनी कमर हिलने लगी. नार्मल होते hi नैना दीदी सीधी बैठ कर अपनी कमर आगे पीछे हिलने लगी.

नैना दीदी : आआह्ह्ह्ह ुकम्म्म अब ाचा लग रहा है आअह्ह्ह्ह ककक उम्मम्मम आअह्ह्ह

दीदी फिर से पूरी तरह गरम हो कर अपनी कमर हिलने लगी थी. मैंने भी उनके चुके पकड़ कर मसलते हुए नीचे से कमर उठा कर धक्के मरने की कोशिश करने लगा. हम दोनों क शरीर अब पसीने से भीग चुके थे. लगभग आधे घंटे से मैं दीदी की चुदाई कर रहा था और दीदी भी 2 बार पानी निकलने क बाद तीसरी बार पानी निकलने वाली थी. जैसे hi दीदी ने पानी छोड़ा मैंने भी उनकी छूट से लैंड निकल कर अपना पानी उनके कूल्हों को अपने पानी सी भिगो दिया. दीदी मेरे ऊपर hi गिर गयी . और कुछ देर हम दोनों ऐसे hi सांसे सँभालने में लगे रहे .

नैना दीदी : थैंक यू अमित , तुम नहीं जानते मैं कितना तड़प रही थी इस प्यार क लिए.

अमित : वो तो आपकी सहेली की हालत देख कर मैं समझ गया था . इतना पानी जमा कर रखा था अंदर.

नैना दीदी : इस कुँए की खुदाई सिर्फ तुमको करनी है और तुम करते नहीं तो पानी तो जमा होगा hi न. अगली बार इतना वेट मत करवाना. और जब तक यहाँ हो तब तक तो कर hi सकते हो .

अमित : कोशिश करूँगा दीदी पर हमें हर बात का ध्यान भी रखना होगा.

नैना दीदी : वो मैं देख लुंगी . ाचा अब मैं चलती हूँ.

जैसे hi नैना दीदी उठने लगी तो पेट पकड़ कर बैठ गयी .

नैना दीदी : आआह्ह्ह कक्कक्क्स दर्द हो रही है. पहले ये पूरा अंदर नहीं किया था क्या ??

अमित : नहीं दीदी , मैं आपको दर्द नहीं देना चाहता था ज्यादा.

नैना दीदी : देख फिर से दर्द दे hi दिया न. ाचा होता एक hi बार में सारा दर्द दे देते. पता नहीं कल कॉलेज भी जा पाऊँगी या नहीं.

अमित : ज्यादा दर्द है तो मैं आप को उठा कर ले चलता हूँ.

नैना दीदी : इतना भी नहीं है . चल मुझे कपडे पहनने दे.

दीदी ने फिर कपडे पहने और मुझे किश करने क बाद अपने कमरे में चली गयी . मैंने भी कपडे पहने. फिर बाथरूम से फारिग हो कर वापिस आया तो प्यास लग गयी . कमरे में पानी नहीं था तो मैं नीचे चला गया पानी लेने. सीढ़ियों क पास पहले मौसी का कमरा hi था जिसका दरवाज़ा खुला था. मैंने अंदर देखा तो बीएड पर सिर्फ मौसा जी सोये पड़े थे घोड़े बेच कर और उनके खर्राटों की आवाज़ बता रही थी वो बड़ी देर से सो रहे हैं . पर मौसी कमरे में नज़र नहीं आ रही थी. फिर मैं किचन में चला गया पानी लेने. तभी मुझे बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आने लगी. मैं सोचने लगा क इस वक़्त कौन नाहा रहा है बाथरूम में. मैं किचन में पानी पि कर अभी बहार निकला hi था क मौसी अपने कमरे में जाती हुई दिखी. हलके गीले कपडे बता रहे थे क वो नाहा कर आयी हैं पर इस वक़्त ?? मैं अपनी सोच को विराम देता हुआ वापिस अपने कमरे में आ कर लेट गया .

निधि आज अपने बिस्टेर पर करवटें hi बदल

रही थी. वो जब भी सोने क लिए ऑंखें बंद करती तो उसे आज को मंज़र यद् आने लगता जब अमित ने उसे थम कर खुद से चिपका लिया था. उसने अपनी छाती क उन कोमल हिस्सों का अमित की छाती क साथ सब कर पिचकना एक मीठे दर्द का एहसास करवा रहा था. कैसे अमित ने उसकी कमर को थम लिया था. फिर उसे यद् आया क कैसे उस दिन वो लगभग नंगी hi अमित क सीने से जा लगी थी जब वो उन वेह्शी दरिंदो को जान से मरने वाला था . निधि जो आज तक खुद को दुनिया की नज़र से छुपाती आयी थी अब उसे अमित क साथ लग्न ाचा लगने लगा था .

निधि : सब कुछ उसी का तो है तो फिर मैं क्यों शर्म करूँ? वो जब चाहे जैसे चाहे अपना हक़ जमा सकता है मुझ पर. काश क वो समझ जाता क मैंने वो गण उसी क लिए hi लगवाया था. अब तो नींद भी नहीं आ रही उसके बिना. मैं क्या करूँ?

निधि खुद से hi बातें करती सोने की कोशिश करती रही पर उसे. नींद आ hi नहीं रही थी फिर उसे बहार किसी की आहत हुई तो उसने बहार निकल कर देखा अमित ऊपर जा रहा था. खुद hi वो अपने दिल क हाथों मजबूर हो कर अमित क पीछे उसके कमरे की और चल दी. दरवाज़े क बहार कड़ी वो अंदर जाने न जाने पर hi फैसला नहीं कर प् रही थी. उसे दर था क अमित क्या सोचेगा पर दिल था क दिमाग को कुछ करने hi नहीं से रहा था. निधि ने आहिस्ता से दरवाज़ा खोला तो अमित ऑंखें बंद किये बिस्टेर पर करवट क बल लेता था. निधि आहिस्ता से बिना कोई आवाज़ किये अमित क पास पहुँच गयी और कुछ देर निहारने क बाद जैसे hi पलटने लगी अमित ने उसका हाथ पकड़ लिया. निधि का पूरा बदन लरज गया . दिल तो ख़ुशी में नाचने लगा पर जिस्म था क सूखे पत्ते की तरह कम्प रहा था . रत क इस पहर वो अपने भाई नहीं बल्कि अपने पति क पास आयी थी अपने प्रेमी क पास आयी थी और इस तरह से उसके द्वारा हाथ पकड़ना उसे चेहरे पर शर्म ले आया था.

अमित : दीदी इतनी रत को आप यहाँ क्या कर रही हैं ? नींद नहीं आ रही थी क्या ?

निधि बेचारी तो अभी तक उसी एहसास में थी जो एक प्रेमिका को नए नए प्यार में अपने प्रेमी की छुहान से होता है. उसे तो जैसे कुछ सुनाई hi नहीं दे रहा था.

अमित : क्या हुआ दीदी ? आप कुछ बोल क्यों नहीं रही ? कुछ परेशानी है क्या ?

निधि दीदी : नं नहीं तो मम मैं तो बस देखने आयी थी तुम सो रहे हो या

अमित : इधर बैठिये मेरे पास

मैंने दीदी को अपने पास बीएड पर बैठ लिया.

अमित : मेरी तरफ देखिये , अब बताइये क्या बात है.

निधि दीदी : मुझे नींद नहीं आ रही थी सोचा कुछ देर तुम्हारे साथ

अमित : नींद क्यों नहीं आ रही थी ? कुछ सोच रही थी क्या ?

निधि ( मन में ) तुम्हारे सिवा अब और कुछ न दीखता है न सूझता है कैसे बताऊँ तुम्हे?

अमित : ऐसे क्या देख रही हैं ? आप किसी बात की चिंता मत करिये. जब तक आपका ये भाई ज़िंदा है आपको कोई परेशानी नहीं होने देगा.

निधि दीदी : भगवान् न करे तुझे कुछ हो. तुम्हे कुछ हो गया तो मैं भी ..

अमित : इससे आगे कुछ मत कहियेगा दीदी. आप मेरी सबसे प्यारी दीदी हैं . मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ

निधि दीदी : मैं भी तो तुमसे hi प्यार करती हूँ.

अमित : चलिए आज आप मेरे साथ hi यहाँ सो जाइये.

निधि दीदी : हाँ शायद ऐसे hi मुझे नींद आ जाये . बचपन में मेरी बांह पर सर रख सो जाता था तू और आज मैं तेरी बाजु पर सर रख कर सोऊंगी.

अमित : जैसा आप कहें .

बीएड छोटा था पर हम दोनों साथ साथ लेट गए मेरी एक बाजु पर सर रख कर दीदी ने मेरी तरफ hi करवट ले ली और मेरी छाती पर अपना हाथ रख लिया.

निधि दीदी : कितने अचे थे न वो दिन जब हम साथ होते थे. अब तो जैसे ज़िन्दगी बस एक दौड़ hi बन कर रह गयी है.

अमित : आप अपने लिए वक़्त नहीं निकलती न इसी लिए ऐसा लग रहा है आपको. अब से आप अपने लिए भी वक़्त निकला करो और थोड़ा मेरे लिए भी.

निधि दीदी : सही कहा तुमने , अब से मैं हमारे लिए वक़्त निकला करुँगी.

इतना कहते दीदी मेरे और करीब आ गयी. और अपना एक पेअर मेरी तंग पर रख दिया. उनके कोमल बदन का एहसास मुझे अलग hi आनंद से रहा था. चहरे पर नूर और ठहराव क साथ आँखों में अलग hi चमक क साथ अपने लिए प्यार देख कर मैं बस उन्ही में खो सा गया था.

निधि दीदी : ऐसे क्या देख रहे हो ?

अमित : देख रहा हूँ आप कितनी प्यारी हैं. वो कितना किस्मत वाला होगा जिससे आपकी शादी होगी .

निधि ( मन में ) तुम hi तो वो जिसे भगवन ने मेरे लिए बनाया है.

निधि दीदी : किस्मत वाले तो तुम hi हो

अमित : मतलब

निधि दीदी : मतलब क वो लड़की कितनी लकी होगी जिसे तुम मिलोगे.

अमित : दीदी आप शादी क बाद मुझे भूल तो नहीं जाओगी?

निधि क दिल में पीड़ा सी उठी अमित क इस सवाल से और वो अमित क साथ पूरी चिपक गयी . अब उसका सर अमित की छाती पर और एक तंग अमित क ऊपर आ चुकी थी मनो वो अमित क ऊपर hi चढ़ जाएगी .

निधि दीदी : मैं खुद को भूल सकती हूँ पर तुम्हे नहीं. मैं शादी hi नहीं करुँगी और हमेशा तुम्हारे पास रहूंगी.

अमित : पर एक न एक दिन तो आपकी शादी होगी न.

निधि दीदी : मुझे नहीं करनी शादी अगर इससे मैं तुमसे दूर हो जॉन तो. अब कोई और बात करो ये शादी का टॉपिक बंद करो .

मैंने अपना हाथ मोड़ते हुए दीदी की पीठ पर रख लिया और दूसरा हाथ मेरी छाती पर रखे उनके दूसरे हाथ पर रख लिया .

अमित : पता है दीदी मैं भी यही चाहता हूँ क आप हमेशा मेरे पास रहें. बचपन से मैंने आप hi से तो सबसे ज्यादा प्यार पाया है

निधि दीदी : अब से मैं और भी ज्यादा प्यार करुँगी तुमसे . ये ज़िन्दगी तुम्हारी hi दी हुई है अब तो.

इतना कह कर दीदी ने मेरे गाल पर अपने नाज़ुक कोमल होंठो से एक किश कर दी. और मेरी आँखों में देख कर शर्मा गयी.

अमित : आप बहुत hi प्यारी हैं और जब ऐसे शर्माती हैं तो और भी प्यारी लगती हैं.

निधि दीदी : सो जा अब कल कॉलेज भी जाना है तुझे.

हम दोनों ऐसे hi एक दूसरे की बाँहों में सो गए . बड़ा hi मीठा एहसास था ये निधि दीदी क साथ सोने का. पता नहीं कितने सैलून बाद आज मैं दीदी क साथ ऐसे सो रहा था. नींद भी बड़ी कमल की आयी मुझे दीदी क साथ. सुबह जब आंख खुली तो दीदी कमरे से जा चुकी थी. और मैंने टाइम देखा तो 8 बजने वाले थे. मैंने जल्दी से उठा और नाहा धो कर तैयार हो गया. नीचे आया तो मौसी क साथ निधि दीदी किचन में काम कर रही थी और कारन भैया नाश्ता कर रहे थे. मैंने उन्हें गुड मॉर्निंग विश किया और मौसी को किचन में जा कर मिला जहाँ दीदी भी थी. मुझे देखते hi दीदी क चेहरे पर हमेशा की तरह मुस्कान आ गयी .

रजनी मौसी : उठ गया बीटा ? चल बैठ मैं नाश्ता लगाती हूँ.

मैं बहार आ कर कारन भैया क पास hi बैठ गया और दीदी मेरे लिए नाश्ता ले आयी . मैं नाश्ता करने लगा तो कारन भैया जल्दी से नाश्ता कर क निकल गए .

अमित : दीदी नैना दीदी नज़र नहीं आ रही ?

निधि दीदी : वो अपने कमरे में है. अभी अति hi होगी. तुम नाश्ता करो और बताओ कैसा बना है ? ये परांठे मैंने बनाये हैं

अमित : ये आपने बनाये हैं ? मुझे लगा इतने स्वाद तो सिर्फ मौसी hi बना सकती हैं पर आप तो उनसे भी आगे निकली . जी चाहता है हाथ चूम लूँ.

दीदी मेरी उस बात पर शर्मा गयी .

‘ बड़ी तारीफ हो रही है आज खाने की , लगता है नाश्ता दीदी ने बनाया है ‘ नैना दीदी सीढ़ियां उतर कर पास आते हुए बोली .

निधि दीदी : हाँ मैंने बनाया है और तू भी बैठ जा मैं तेरे लिए भी लगाती हूँ .

निधि दीदी किचन में चली गयी तो नैना दीदी मेरे पास बैठ गयी .

अमित : आप की तबियत तो ठीक है न? ऐसे क्यों चल रही हैं ?

नैना दीदी : जब इतना बड़ा मुसल अंदर जायेगा चल तो बदलेगी hi न. मैं ठीक हूँ बस थोड़ी थोड़ी तीस उठ रही है वहां.

अमित : आप आज छुट्टी कर लेती .

नैना दीदी : कल भी तो छुट्टी हो गयी थी. ज्यादा छुट्टी करुँगी तो मुश्किल हो जाएगी . गर्ल्स कॉलेज है हमारा तुम्हारी तरह मॉडर्न कॉलेज नहीं है .

निधि दीदी नैना दीदी क लिए भी नाश्ता ले आयी और हम दोनों ने नाश्ता कर लिया. नाश्ता करने क बाद मैं कॉलेज जाने क लिए बहार आने लगा तो यद् आया टायर तो पंक्चर था कल. मैं बैग वापिस रखने लगा तो निधि दीदी ने पूछ लिया.

निधि दीदी : क्या हुआ बात वापिस क्यों रख रहे हो ? कॉलेज नहीं जाना क्या?

अमित : वो टायर पंक्चर है तो पहले उसे पंक्चर लगवा लेता हूँ.

निधि दीदी : वो सब हो गया है. पापा ने करवा दिया था. पंक्चर नहीं था बस हवा hi निकली थी.

अमित : बस हवा निकली थी ? परसों भी हवा निकली थी और उससे पहले पेट्रोल की पाइप निकली हुई थी. कहीं कोई जान बुझ कर तो ये सब नहीं कर रहा दीदी?

नैना दीदी : तू चिंता मत कर मैं पता लगाती हूँ. देखें ज़रा कौन शरारत कर रहा है .

निधि दीदी : तुमने पहले क्यों नहीं बताया ये सब? चल अब तू जा वर्ण लेट हो जायेगा.

मैंने अपना बैग उठाया और बाइक ले कर निकल गया कॉलेज क लिए. पार्किंग में hi कल्पना राधा और नेहा दीदी से मुलाकात हो गयी और उनसे मिलने क बाद मैं और कल्पना क्लास में चले गए . लगभग एक हफ्ते से ऊपर हो गया था मुझे चन्दर्कांता मम की क्लास में आये हुए . और जैसे hi चन्दर्कांता मम क्लास में आयी तो मुझे देख कर गुस्से में आ गयी. इस बात का तो पहले hi अंदाज़ा था मुझे

चन्दर्कांता: तो आ गए क्लास में ? बड़ी मेहरबानी अपनी शकल दिखने क लिए . कॉलेज क लिए एक ट्रॉफी क्या जीत ली तुम तो खुद को हीरो समझने लगे हो. अपनी मर्ज़ी से आओगे क्लास में? प्रिंसिपल सर तुम्हे कॉलेज से निकलने से रोक सकते हैं पर क्लास में तो मेरी मर्ज़ी चलेगी न. निकल जाओ मेरी क्लास से बहार और तब तक मेरी क्लास में मत आना जब तक अपने घर से किसी को लेकर नहीं आते.

मैं अब क्या कहता गलती तो अपनी भी थी तो चुपचाप बहार चला गया . कल्पना और मोहित को ये सब ाचा नहीं लग रहा था. कल्पना क चेहरे पर तो गुस्सा साफ़ झलक रहा था. मैं क्लास से निकल कर सामने पार्क में hi बैठ गया सोचा मंजू म की क्लास अटेंड कर लूंगा . चन्दर्कांता का लेक्चर ख़तम हुआ और मैं क्लास में आ गया पर मंजू म क्लास में नहीं ए . पता चला क वो आज छुट्टी पर हैं . मैंने 2 दिन से उन्हें देखा नहीं था और आज उनके एब्सेंट होने से मुझे उनकी चिंता होने लगी तो मैंने उन्हें फ़ोन लगा दिया .

मंजू म : तो आ गयी यद् ? मुझे तो लगा था मुझे भूल hi गए होंगे .

अमित : ये आप कैसी बात कर रही हैं? ऐसा हो सकता है क्या ? सॉरी वो मैं 2 दिन आ नहीं सका पर आप कहाँ हैं आज? कॉलेज क्यों नहीं आयी आप ?

मंजू म : बस तबियत थोड़ी ठीक नहीं थी.

अमित : क्या हुआ है आपको ? आपने मुझे बताया क्यों नहीं ? मैं अभी आ रहा हूँ .

मंजू म : अरे रुको रुको , इतनी भी बुरी हालत नहीं है मेरी. तुम कॉलेज ख़तम होने क बाद आ जाना वैसे भी रुपाली भाभी हैं यहाँ मेरे पास .

अमित : क्या ?? रुपाली आंटी आपके पास हैं ? मतलब ज़रूर ज्यादा hi बात है. मैं आ रहा हूँ.

इतना कह कर मैंने फ़ोन कट किया और कालापन मोहित को बता कर मैं निकल गया मंजू म से मिलने. बाइक को तेज़ी से चलता हुआ 20 मिनट्स में मम क घर पहुँच गया और बेल्ल बजने से पहले hi रुपाली आंटी ने दरवाज़ा खोल दिया . मुझे देख कर वो मुस्कुराने लगी.

रुपाली : आ गए तुम , मंजू ने अंदर से hi बता दिया था क ये तुम्हारी बाइक की आवाज़ है.

मैंने उनके पाऊँ चुने की कोशिश की तो उन्होंने मुझे गले लगा लिया

रुपाली : पाऊँ मत छुआ करो तुम. पाऊँ तो तुम्हारे चुने चाहिए . अंदर आओ.

अमित : ये आप क्या कह रही हैं. आप मेरी बड़ी हैं.

रुपाली : इंसान करम से बड़ा होता है न क उम्र या रुतबे. और तुम सबसे बड़े हो. अब चलो अंदर या यहीं खड़े रहोगे ?

मैं अंदर आ कर सीधा मंजू म क कमरे की तरफ चल दिया . अंदर गया तो देखा मंजू म बिस्टेर पर लेती हुई हैं और उनके पाऊँ पर प्लास्टर लगा हुआ था

अमित : ये क्या हो गया आपको ? आप तो कह रही थी क कोई बात नहीं है और ये

मंजू म : अरे कुछ नहीं है ये सब रीना ने किया है. ज़रा स मोच आयी थी और इतना बड़ा प्लास्टर लगा दिया.

अमित : ये कब हुआ और आपने बताया क्यों नहीं मुझे? क्या इतना पराया हो गया हूँ अब मैं?

मेरी इस बात पर मंजू म की आँखों में नमी आ गयी और चेहरे पर पीड़ा क भाव.

मंजू म : ये तुम कह रहे हो? तुमने ये सोचा भी कैसे? शिकायत तो मुझे है तुमसे क तुम्हारा एक्सीडेंट हुआ और तुमने बताया तक नहीं. मेरा फ़ोन तक नहीं उठाया तुमने.

अमित : एक्सीडेंट क्या था बस ज़रा स चोट थी . और फ़ोन इस लिए नहीं उठाया था क फ़ोन मेरे पास था hi नहीं. दीदी ने फ़ोन अपने पास रख लिया था . मैंने सोचा आप से मिल कर बताऊंगा. पर कल बाइक ख़राब हो गयी और आ न सका. पर आप ?

मंजू म : मुझे कुछ नहीं हुआ है. बस पाऊँ फिसल गया था कल तो मोच आ गयी . पर तुम्हे मुझे बताना चाहिए था. तुम नहीं जानते क मुझे कैसा लगा था जब रीना ने बताया . मैं तो उसी वक़्त तुम्हारे पास आना चाहती थी.

‘ अब बस करो ये शिकवे शिकायत , लो ये जूस पियो अमित ‘

रुपाली मेरे लिए जूस ले आयी .

मंजू म : शिकवा शिकायत भी तो अपनी से होती है न भाभी. और अमित मेरा अपना hi है. ये जब नहीं मिलता तो ाचा नहीं लगता.

रुपाली : ये है hi इतना प्यारा क तुम्हारा भी क्या कसूर. मैं खुद इससे मिलने क बारे में सोचती रहती हूँ. ये तो खुद आता नहीं कभी. सुना है कल सबने मिल कर खूब मस्ती की.

अमित : वो बस ऐसे hi . शीना ने hi पार्टी राखी थी तो सब साथ में मिल कर थोड़ा मस्ती कर रहे थे.

रुपाली : बताया था मेरी दोनों बेटियों ने मुझे. वो ये भी बता रही थी क तुम्हारी बहने भी तुम्हारी तरह बहुत अछि हैं. कभी हमसे से भी मिलवा दो.

अमित : मिलवाना क्या है , संडे को मां क बेटे का नामकरण है आप सब को गाओं आना होगा तब पूरी फॅमिली से मिल लेना आप .

मंजू म : क्यों नहीं , मैं तो कब से कह रही हूँ मुझे सब से मिलना है.

रुपाली : पर तुम इस हालत में कैसे जा सकती हो? रीना ने क्या कहा था यद् है न? काम से काम 5 दिन तो ये प्लास्टर नहीं खोलना है . तो कैसे जाओगी?

मंजू म : कोई बात नहीं मैं चली जाउंगी. मैं सब से मिलना चाहती हूँ.

अमित : नहीं , आप इस हालत में नहीं जा सकती. मैं आपको बाद में ले चलूँगा कभी पर अभी आप अपना ध्यान रखिये.

मंजू म : पर

अमित : पर वॉर कुछ नहीं , आपकी सेहत सबसे ज़रूरी है. मैं नहीं चाहता किसी तरह की गलती हो .

रुपाली : देखा कितना समझदार है ये.

मंजू म : भाभी अब आप भी इसकी साइड लेने लगी .

रुपाली : तो गलत क्या है इसमें ? ठीक तो कह रहा है ये.

मंजू म : भाभी आप न थोड़ी थोड़ी कॉफ़ी बना लीजिये अमित को बहुत पसंद है .

अमित : अरे उसकी ज़रूरत नहीं है . अभी तो जूस पिया है.

रुपाली : ज़रूरत क्यों नहीं है? काम से काम यहाँ तो सेवा का मौका दो मुझे . घर तो लगता है कभी आओगे नहीं .

इतना कह कर रुपाली किचन में चली गयी और उनके जाते मंजू म ने मेरी T-shirt पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया .

मंजू म : मैं तुम्हारे पास आने की बात करती हूँ और तुम हो क मुझसे खुद से दूर भगा रहे हो.

अमित : आप तो मेरे पास hi हो हमेशा पर मेरे लिए आपकी सेहत सबसे ज्यादा ज़रूरी है . मैं भी चाहता था का आप गाओं आएं और सब से मिले पर लगता है भगवन को अभी मंज़ूर नहीं .

मंजू म : जब तुम मुझसे दूर रहते हो न तो मैं खुद को रोक नहीं पति और एक अंजना सा दर लगा रहता है तुम्हे खोने का.

अमित : मुझ पर विश्वास नहीं है क्या ?

मंजू म : तुम पर तो है अपनी किस्मत पर नहीं है .

अमित : किस्मत को भूल जाइये , मैं हमेशा आपके साथ रहूँगा.

इतना कह कर मैंने मंजू म क वो गुलाबी होंठ अपने होंठों में भर लिए और वो भी प्यासी मछली की तरह मेरे होंठ चूमने लगी . मेरे सर को एक हाथ से दबती वो मेरी जीभ चूसने लगती कभी अपनी जीभ मेरे मुँह में दाल देती. रुपाली घर पर hi मौजूद थी तो ज्यादा देर हम किश कर नहीं सकते थे इस लिए किश जल्दी ख़तम कर दी. मंजू का चेहरा लाल हो गया था.

मंजू म : मुझे ठीक होने दो फिर एक पूरा दिन तुम्हे मेरे साथ रहना होगा .

अमित : ठीक है . जैसा आप कहें. पर पहले आप जल्दी से ठीक हो जाइये .

रुपाली थोड़ी देर में कॉफ़ी ले आयी और हमने साथ में कॉफ़ी पि. एक डेढ़ घंटा मंजू म क घर रुकने क बाद मैं वापिस आने लगा तो रुपाली ने मुझे दरवाज़े क पास रोक लिया .

रुपाली : मुझे तुमसे कुछ ज़रूरी बात करनी है अगर तुम्हारे पास थोड़ा टाइम हो तो.

अमित : कहिये क्या बात है ?

रुपाली : यहाँ नहीं , कहीं अकेले में.

अमित : ऐसी कौन सी बात है?

रुपाली : ज़रूरी बात है अकेले में मिलोगे तो बताउंगी .

अमित : ठीक है पर कब मिलना चाहती हैं आप?

रुपाली : तुम गाओं से वापिस आओगे तो मिलेंगे. अभी तो मुझे मंजू क पास रुकना होता है .

अमित : ठीक है, गाओं से आने क बाद मिल लेंगे. अब मैं चलता हूँ.

उसके बाद मैं बाइक उठा कर निकल पड़ा. कॉलेज में अभी छुट्टी होने में टाइम था तो मैंने सोचा कॉलेज hi चलता हूँ . रस्ते में मैं एक सिग्नल पर खड़ा था क ट्रैफिक क वजह से एक वन मेरी दायीं तरफ आ कर कड़ी हुई . वन वाला शायद जल्दी में था तो लगातार हॉर्न मरता जा रहा था. आगे वाले साइड नहीं दे रहे थे. ऐसे hi मेरी नज़र वन क अंदर गयी तो मैंने देख एक लड़की का हाथ पाऊँ बंधे हुए थे और मुँह पर भी कपडा बांध रखा था. उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे. और वो लगातार छूटने की कोशिश कर रही थी. साथ बैठे गुंडे टाइप लोगों ने उसे नीचे दबाया हुआ था. इससे पहले क मैं बाइक से उतर कर उस वन को रोकता . उसे थोड़ी सी जगह मिले और वो तेज़ी से गाडी भगा कर ले गया बिना सिग्नल की परवाह किये . मैंने भी जल्दी से बाइक को कोच मरी और उसके पीछे हो लिया. वन वाला बहुत तेज़ गाडी दौड़ा रहा था और बिना किसी की परवाह किये निकलता जा रहा था. मैं भी बराबर उसका पीछा कर रहा था. वन एक भीड़ भाड़ वाले स्लम एरिया में पहुँच गयी जहाँ सड़कें ज्यादा चौड़ी नहीं थी और गरीब बस्तियात का इलाका था. वन तेज़ी से चलती हुई एक घर में घुस गयी जिसका गेट पहले hi खुला हुआ था. वन क अंदर घुसते हुए तेज़ी से वो गेट बंद हो गया और 2 हथियार बंद गुंडे वहां खड़े हो गए जिनके हाथ में पिस्तौल थी. मैं उस घर से थोड़ा आगे निकल कर एक गली में घुस गया और बाइक वहीँ कड़ी कर दी. मैं दूर से देख कर अंदाज़ा लगाने लगा क वहां कितने लोग हैं. गेट क बहार तो दो लोग थे hi और शायद अंदर भी थे जो वो आपस में बातें कर रहे थे. दो मंज़िला इस मकर की छत पर भी मुझे 2 लोग पहरा देते नज़र आये. मैंने एक बात नोट की क इस घर क आसपास कोई नहीं आ जा रहा था . शायद ये यहाँ क गुंडों का अड्डा होगा. और जानकारी लेने क लिए मैं उस घर क साथ वाले घर क पास गया जो बंद पड़ा था . मैंने सावधानी से दीवार फलांग कर अंदर अंदर घुस गया. घर की छत पर चढ़ कर उस घर का अचे से नज़र हो रहा था. छत पर दो लोग थे और गेट क अंदर की तरफ 4-5 लोग और थे. ऊपर की मंज़िल पर भी कुछ लोग थे. तभी मेरी नज़र ऊपर वाली मंज़िल पर सीढ़ियों से ऊपर आते 2 लोगों पर पड़ी जो एक लड़की को घसीट कर का रहे थे. ये वही लड़की थी जिसे मैंने वन में देखा था. एक कमरे का दरवाज़ा खोल कर उन्होंने उसे लड़की को अंदर धक्का दे दिया . इतने में मेरी नज़र कमरे क अंदर भी थोड़ी सी चली गयी जहाँ और भी लड़कियां थी. मुझे लगा क ये कोई बड़ा गिरोह है तो पुलिस को इन्फॉर्म करना चाहिए. अभी मैं फ़ोन जेब से निकलने hi वाला था क पहले hi मेर फ़ोन बजने लगा. ये कल्पना की कॉल थी .

कल्पना : कहाँ हो यार हम सब तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं ?

अमित : कल्पना मेरी बात ध्यान से सुनो , मैं इस वक़्त क्सक्सक्सक्स इलाके में हूँ. अभी अभी मैंने कुछ गुंडों को एक लड़की को किडनैप कर क इधर लाते हुए देखा है और मैं उसके पीछे यहाँ आ पहुंचा हूँ. यहाँ और भी लड़कियां राखी गयी हैं. और कुछ गुंडे भी हैं हथियारों क साथ. तुम अपने पापा से बोल कर जल्दी से यहाँ पुलिस की रहे करवाओ. मकर क बहार इसका no. क्सक्स लिखा हुआ है. थिस इस सीरियस अभी क अभी पापा को फ़ोन कर क पुलिस को एक्शन लेने का कहो प्लीज. वर्ण पता नहीं इन लड़कियों क साथ कुछ गलत न हो जाये. और हाँ नेहा दीदी और राधा को पता न चले.

कल्पना : चिंता में ) मैं अभी फ़ोन करती हूँ पापा को पर प्लीज तुम उन सब से दूर रहना.

अमित : ok bye .

इतना कह कर मैंने फ़ोन काट दिया और उसे साइलेंट कर दिया .

कल्पना ( मन में ) पता नहीं ये क्यों खुद मुसीबतें मोल लेता रहता है ? सरे ज़माने की बुराई तुम hi दूर करोगे क्या. हे भगवन उसकी रक्षा करना. पहले पापा को फ़ोन लगाती हूँ.

कल्पना : hello पापा

कल्पना ‘स फादर: hello मेरी राजकुमारी कहो कैसे फ़ोन किया ?

कल्पना : पापा एक प्रॉब्लम हो गयी है. आपको अमित का पता है न वो स्टुपिड एक नई मुसीबत में फसने चला गया है.

K’s फादर : क्या हुआ है ठीक से बताओ.

कल्पना : वो किसी लड़की का पीछा करता हुआ उन लोगों क ठिकाने तक पहुँच गया है जो लड़कियों का किडनैप कर रहे हैं. क्सक्सक्सक्स इलाके में क्सक्स no. घर है. गुंडों क पास हथियार भी हैं . मुझे दर लग रहा है पापा आप जल्दी कुछ करो. उसकी आदत है दूसरों क मामले में टांग अदने की. कहीं वो अकेला उन सब से न भीड़ जाये आप जल्दी कुछ करो . मैं उसके पीछे जा रही हूँ.

K’s फादर : पागल मत बनो कल्पना और उसे भी कहो क बीच में न पड़े. मैं अभी पुलिस को वहां भेजता हूँ. मैं फिर से कहता हूँ तुम वहां नहीं जाओगी और उसे भी पीछे रहने को कहो.

इतना कह कर कल्पना क पापा ने फ़ोन कट कर दिया. कल्पना बेचारी का दिल घबरा रहा था. उसने जल्दी से अमित को फ़ोन लगाया पर उसने नहीं उठाया क्यूंकि वो तो फ़ोन साइलेंट कर चूका था. कल्पना के माथे पर चिंता से पसीना आने लगा. उसे अमित को लेकर दर लगने लगा . वो जानती थी अमित ज़रूर बीच में पद जायेगा. कल्पना को चिंता में देख शीना उसके पास आ गयी .

शीना : क्या बात है कल्पना तुम इतनी चिंता में क्यों हो?

कल्पना : वो अमित फिर से मुसीबत में फसने चला गया है.

चिंता में कल्पना भूल गयी क ये बात उसे किसी को नहीं बतानी थी पर मुँह से निकल गयी और शीना भी टेंशन में आ गयी.

शीना: ये क्या कह रही हो तुम ? क्या हुआ है उसे ? कहाँ है वो ?

कल्पना : वो वो देखो किसी को बताना नहीं . राधा और नेहा दीदी को पता नहीं चलना चाहिए.

फिर कल्पना ने शीना को सब बता दिया जो अभी अमित क साथ उसकी बात हुई थी

शीना : ये तो वाकई में बड़ी मुसीबत में फास जायेगा . उसे फ़ोन करो मैं भी करती हूँ अगर उसे कुछ हो गया तो .

कल्पना : ऐसा मत कहो , मैंने पापा से कहा है वो अभी वहां पुलिस भेजने वाले हैं . आप बस राधा और नेहा दीदी को घर पहुंचा दो और उनके सामने कोई बात मत करना. मैं पापा से बात करती हूँ अमित तो फ़ोन नहीं उठा रहा.

शीना : मेरा फ़ोन भी नहीं उठा रहा . भगवन करे सब ठीक हो . पता नहीं ये स्टुपिड क्यों ऐसे पंगों में दस्ता रहता है?

कल्पना : वो है hi ऐसा , हर किसी की मदद करता है. आप जाओ मैं भी निकलती हूँ . फ़ोन पर आपको बताउंगी जैसे hi कुछ पता चला तो.

शीना : ठीक है मैं इन सब को छोड़ कर अति हूँ तुम्हारे पास

सप ऑफिस-

सप ऋतू सिंह क ऑफिस में टेलीफोन की घंटी बजते hi ऋतू सिंह ने फ़ोन उठा लिया .

सप ऋतू सिंह : ऋतू सिंह हेरे

सामने वाला : ऋतू जी शहर में दिन दिहाड़े लड़कियां किडनैप हो रहा है और आपकी पुलिस क्या कर रही है.?

सप ऋतू सिंह : जय हिन्द सर , सर हम पता लगा रहे हैं , जल्दी hi हम उन सब को पकड़ लेंगे

सामने वाला : तब तक तो बहुत देर हो जाएगी. उन लड़कियों की ज़िन्दगी बर्बाद होने क बाद आप

उन्हें ढूंढेंगी.? मेरे खास आदमी ने खबर दी है क वो गैंग इस वक़्त क्सक्सक्स इलाके में क्सक्स no. माकन में है. और साडी लड़कियां भी वही हैं. अभी क अभी आप फाॅर्स लेकर जाओ और उन लोगों को पकड़ो.

सप ऋतू सिंह: जी सर मैं अभी निकल रही हूँ सर . थैंक्स फॉर सुच इनफार्मेशन सर.

सामने वाला : हमारा आदमी भी वहीँ हैं उसको कुछ नहीं होना चाहिए.

सप ऋतू सिंह : ट्रस्ट में सर अपराधियों क इलावा किसी को कुछ नहीं होगा.

सामने वाला : ी ट्रस्ट यू ऋतू जी , इसी लिए आपको यहाँ ट्रांसफर करवा कर बुलाया है मैंने. ी क्नोव यू अरे ान ऑनेस्ट पुलिस अफसर. नाउ टेक एक्शन .

सप ऋतू सिंह: जी सर है हिन्द .

फ़ोन रखते hi सप ऋतू सिंह ने फिर से फ़ोन मिलाया और जल्दी से राडे मरने क लिए टीम को तैयार होने को कहा बिना ये बताये क कहाँ जाना है . वो जानती थी क खबर लीक भी हो सकती है. जल्दी से अपनी कमर पर सर्विस रिवॉल्वर लगाती हुई वो अपनी पोलिसिअ कैप सर पर लगाने क बाद गुस्से से केबिन से बहार निकल आयी. ऋतू सिंह ने मन में थान लिया था क वो आज इस गिरोह को पकड़ hi रहेगी. औरतों पर अत्याचार करने वाले लोगों से सख्त नफरत थी ऋतू सिंह को.

मैं छत से नज़र रखे बैठा हुआ था क 20 मिनट्स बाद एक बड़ा कंटेनर आ कर घर क बहार खड़ा हो गया और उसमे से भी कुछ हथियार बंद लोग निकले. जो घर में पहरा दे रहे लोगों से मिला कर अंदर आ गए और गेट को खोल कर कंटेनर को घुमा कर बैक साइड से घर क अंदर घुसा दिया गया. मैं समझ गया ये लोग उन सब लड़कियों को यहाँ से ले जाने वाले हैं. मुझे लगा क अब मुझे कुछ करना चाहिए कहीं ऐसा न हो क पुलिस क आने से पहले ये लोग निकल जाएँ. मैंने छत पर खड़े बदमाशों को देखा तो उनका ध्यान माकन के आगे की तरफ था और वो बहार नज़रें गड़ाए हुए थे . मैं इस माकन की छत से कूद कर उस तरफ पहुँच गया. सीढ़ियां जहाँ से ऊपर आ रही थी वहां एक कमरा भी बना हुआ था तो मैं जल्दी से उस कमरे में घुस गया . यहाँ पर एक सिंगल बीएड लगा हुआ था और टीवी क इलावा दारुण की बोतलें और गिलास पड़े थे पानी क साथ. मैंने जान बुझ कर एक बोतल निचे गिरा दी. कांच की बोतल

टूट ते hi आवाज़ हुई और उनमे से एक बदमाश देखने क लिए कमरे की तरफ आ गया. मैं दरवाज़े क पीछे hi खड़ा था . जैसे hi वो अंदर आया मैंने पीछे से उसके मुँह को बंद करते हुए ज़ोर से दोनों हाथों से उसकी गर्दन को झटका दिया और वो वहीँ गिर गया. दूसरा आदमी अभी बहार अपनी जगह पर hi खड़ा बहार देख रहा था. मैं बिना आवाज़ किये उसके पीछे गया और उसके सर को भी ज़ोर का झटका देते हुए घुमा दिया. वो भी वहीँ ढेर हो गया. मैंने जल्दी से उसकी जैकेट उतर कर खुद पहनी और मुँह पर कपडा बांध कर उसकी पिस्तौल उठा ली. ज़िन्दगी में पहली बार मैं पिस्तौल पकड़ी थी. चलनी तो नहीं आती थी पर ऐसे मौके पर काम आ सकती थी. मैं सावधानी से सीढ़ियों से नीचे उतर आया. पहली मंज़िल पर यहाँ चार कमरे थे. उनके बहार एक आदमी पिस्तौल पकडे घूम रहा था. मैं बिना उसकी तरफ ध्यान दिए नार्मल रह कर चलता हुआ उसके करीब जाने लगा. उसने पहले तो ध्यान नहीं दिया पर जैसे hi मैं उसके पास से निकलने लगा उसे मुझ पर शक हुआ.

गुंडा : ोये तू कौन है ?

इससे पहले क वो कोई और आवाज़ करता मैंने उसकी गर्दन दबोच कर अपने हाथ में पकड़ी पिस्तौल ज़ोर से उसके सर पे दे मरी. वो इस अचानक हमले से बौखला गया और नीचे गिरने लगा . मैंने उसके हाथ में पकड़ी पिस्तौल छीन ली और एक और वॉर उसके सर पर कर दिया . वो बेहोश हो गया. और साथ hi उसके सर से खून बहने लगा. मैंने जिस दरवाज़े को खुलते हुए देखा था यानि क जहाँ लड़कियां थी. उसी दरवाज़े पर आ गया जो बहार से बंद था. मैं उसे खोला और सामने 10 से ज्यादा लड़कियां थी जो मुझे गुंडा समझ कर चीखने लगी . मैंने जिस गुंडे को घायल किया था उसे घसीट कर अंदर खींच लिया और दरवाज़ा बंद कर क अपने मुँह पर बंधा कपडा हटा दिया .

अमित : प्लीज आप लोग शांत हो जाइये , मैं यहाँ आपकी मदद करने आया हूँ . मुझे अपना भाई समझो.

लड़की : तुम हो कौन और तुम्हारे हाथ में ये गन?

अमित : वो सब बाद में . पहले आप लोग बस शांत हो जाइये. मैं आप सब को यहाँ से सही सलामत लेकर जाऊंगा भगवन पर भरोसा रखिये. इस आदमी को बाँध दो.

मेरे इतना कहते hi उन लड़कियों ने जल्दी से अपने दुपट्टे से hi उस आदमी को अचे से बांध दिया. जो लड़की मैंने वन में देखि थी वो रोटी हुई मेरे पास आयी .

लड़की : आप वही हैं न जिन्होंने मुझे रस्ते में देखा था.

अमित : हाँ बहिन मैं वहीँ हूँ और तुम्हारा पीछा करते हुए hi यहाँ तक पहुंचा हूँ .

लड़की : भैया मुझे यहाँ से ले चलो .

लड़की 2 : भैया हमें जल्दी से ले चलो ये हमें कहीं और भेजने वाले हैं. हमने उन्हें बातें करते हुए सुना है.

अमित : चिंता मत करो बहिन , तुम्हारा ये भाई तुम सब को यहाँ से छुड़ा कर ले जायेगा. तुम दरवाज़ा अंदर से बंद कर लो. मेरा नाम अमित है जब तक मैं नाम न बताऊँ दरवाज़ा मत खोलना .

मैं फिर से बहार निकला और लड़कियों ने दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया . मैंने साथ वाला एक कमरा चेक किया तो वहां कोई नहीं था . उसके आगे वाले कमरे में भी कुछ बॉक्सेस पड़े थे. आखिरी कमरे से कुछ आदमियों की आवाज़ें आ रही थी . मैंने मुँह फिर से बांध लिया और बहार से एक लोहे की रोड पकड़ ली . दरवाज़ा ज़रा सा धक्का हुआ था. अंदर कोई 5-6 आदमी थे और सब दारू पि रहे थे. मैं तेज़ी से अंदर घुसा और सीधा एक क सर पर वॉर किया वो वहीँ ढेर हो गया और खून पानी की तरह उसके सर से बहने लगा. इसी तरह दूसरे और तीसरे को भी मैंने सर पर ज़ोर से मर कर ढेर कर दिया. बचे hi 2 लोग इतने में अलर्ट hi गए. एक ने दारू की बोतल उठा कर मेरे सर पर दे मरी. मैंने परवाह न करते हुए उसके सर पर भी वॉर कर दिया. आखिरी वाले को समय मिल गया तो उसने अपनी पिस्तौल उठा कर गोली चला दी. गोली से तो मैं बच गया पर गोली की आवाज़ पूरे घर में गूँज गयी. मैंने इस आखिरी वाले को भी सर पर वॉर किया और उसे भी सुला दिया . मैं जल्दी से बहार निकला तब तक नीचे से आवाज़ें आने लगी थी और कुछ गुंडे ऊपर को दौड़े . मैं वापिस सीढ़ियों की तरफ लपका और ऊपर आ रहे एक गुंडे को वहीँ सीढ़ियों में hi सर पर वॉर कर क गिरा दिया. उसके पीछे वालों ने फायरिंग शुरू कर दी. और मैं खुद को बचते हुए पीछे हैट गया. अब गोलियों का मेरे पास जवाब नहीं था . मैंने पिस्तौल उठा कर ऐसे hi गोलियां चला दी बिना किसी दिशा या निशाने क पर इस से वो लोग जो ऊपर आ रहे थे वहीँ रुक कर गोलियां चलने लगे. तभी बहार से कुछ गाड़ियों की आवाज़ आयी और बहार से भी गोलियां चलने लगी. सब तरफ अब गोलियों का शोर मच गया था. मेरी पिस्तौल से गोलियां ख़तम हो गयी तो मैं लड़कियों वाले कमरे की तरफ लपका. मुझे चिंता थी क कहीं वो बदमाश ऊपर न पहुँच जाएँ . उससे पहले मैं उन्हें बचाना चाहता था. मैंने एक पिस्तौल और उठायी और दरवाज़ा खुलवा कर अंदर उन सबके पास आ गया. दरवाज़ा बंद करने क बाद मैंने कमरे से बहार निकले का रास्ता ढूंढने की कोशिश की पर वहां तो खिड़की तक न थी.

लड़की : भैया वो लोग हमें मर देंगे

अमित : डरो मत मेरी बहिन जब तक मैं ज़िंदा हूँ तुम लोगों को कुछ नहीं होने दूंगा. बहार से गोलियों की आवाज़ तेज़ होती जा रही थी और किसी ने ऊपर आ के दरवाज़ा पीटना शुरू कर दिया . पर मैंने दरवाज़ा खोलने नहीं दिया. एक एक कर क गोलियों की आवाज़ बंद हो गयी. और फिर दरवाज़े पर दस्तक क साथ hi आवाज़ आयी

‘ पुलिस , दरवाज़ा खोलो . अंदर जो कोई भी अपने आप को हमारे हवाले कर दो’

मैंने एक बार के होल से चेक किया तो मुझे खाखी रंग नज़र आया यानि ये पुलिस hi थी. मैंने दरवाज़ा खोला तो 3-4 पुलिस वाले अंदर आ गए और मेरे हाथ में पिस्तौल देख कर मुझे हाथ ऊपर करने को कहा. मैंने जल्दी से पिस्तौल फेंकी .

अमित : सर मैं यहाँ इन सब को बचने आया था.

तभी एक पुलिस वाले ने बहार से नीचे आवाज़ दी.

‘ मैडम , लड़कियां मिल गयी ‘

2 मिनट्स में कमरे में एक पुलिस अफसर दौड़ते हुए आयी. इसे देख कर मैं शॉकेड हो गया . ये वही थी जिसने मुझे ग्राउंड में थप्पड़ मारा था. उसकी नज़र भी जैसे hi मुझ पर पड़ी तो उसे भी तेज़ गुस्सा आया .

पुलिस वाली : तो तू यहाँ भी है अब बताती हूँ तुझे क औरतों क साथ खिलवाड़ करने वाले क साथ ऋतू सिंह क्या करती है.

उस पुलिस वाली ने ज़ोर से मेरे पेट में लात मरी और एक झन्नाटे दर थप्पड़ उलटे हाथ से मेरे मुँह पर दे मारा. मुझे तो कुछ समझ में hi नहीं आया . इतनी जल्दी उसने मुझ पर हमला कर दिया था

अमित : मैडम मेरी बात तो सुनिए आप गलत समझ रही हैं.

उसने मेरी बात पर ध्यान न देते हुए एक और किक ज़ोर से मेरे घुटने पर मरी और मैं निचे गिरने को हुआ.

ऋतू सिंह : तेरा वो हशर करुँगी क अपने पैदा होने पर रोयेगा.

मैंने लाख समझने की कोशिश की पर उसने एक न सुनी . लड़कियों ने भी कुछ कहना चाहा पर उसने परवाह नहीं की . उसके साथ hi पुलिस वाले भी मुझे मरते हुए अपनी गाड़ी तक ले आयी और बाकि पकडे हुए बदमाशों क साथ मुझे भी पुलिस वन में दाल कर ले गए.

उधर कल्पना और शीना लगातार परेशां थी क्यूंकि न अभी तक अमित ने उनका फ़ोन उठाया था और न hi कल्पना क पापा की तरफ से कोई इनफार्मेशन मिली थी. कल्पना और शीना से और बर्दाश्त न हुआ और वो दोनों hi निकल पड़ी उस जगह खुद अमित को ढूंढने पर जब तक वो पहुंची सारा खेल ख़तम हो चूका था. पुलिस ने एरिया सील कर लिया था और वहां से पकडे गए बदमाशों और लड़कियों को पुलिस हेडक्वार्टर पहुंचा दिया गया था. जो लोग इस ऑपरेशन में मरे गए थे उनकी लाशों को उठाया जा रहा था.

कल्पना का तो दिल hi बैठ गया . अमित का अभी तक पता नहीं चला था और न hi वो फ़ोन उठा रहा था . कहीं अमित भी तो ...

ये ख्याल आते hi कल्पना की आँखों से नदियां बहने लगी. शीना भी घबरा रही थी. शीना ने आगे बढ़कर देखने की कोशिश की तो पुलिस ने सख्ती से उन्हें वहां से चले जाने को कहा.

शीना : अब क्या होगा कल्पना ? अमित को

कैसे ढूंढें हम ?

कल्पना : मेरे साथ चलो दीदी उसे कुछ नहीं हो सकता .

कल्पना बहती आँखों से शीना को साथ लिए सीधा पुलिस हेडक्वार्टर पहुँच गयी. रस्ते में उसकी अपने पापा से बात हुई थी क अमित उसे कहीं नहीं मिला तो वो हेडक्वार्टर जा रही है पर उसके पापा उसे घर पर रुकने को कह रहे थे . पुलिस हेडक्वार्टर में अछि खासी भीड़ थी सारा डिपार्टमेंट वहां जमा हो गया था . ये बहुत बड़ी घटना हो गयी थी जिससे महकमे में हड़कंप मच गया था. 3 पुलिस वाले घायल हुए थे और 5 बदमाश ढेर किये गए थे. इसके साथ पूरा गिरोह काबू में आ गया था . कल्पना ने जब सप ऋतू सिंह से मिलने की कोशिश की तो उसे साफ मन कर दिया गया ये कह कर क मैडम अभी किसी से नहीं मिल सकती. पर कल्पना क दिल को चैन कहाँ था. वो पुलिस वालों से भी बहस करने लगी और अपने पापा का नाम बताया तो उसे अंदर जाने दिया गया . कल्पना और शीना जैसे hi अंदर गए एक तरफ बानी लॉकअप में अमित क दोनों हाथ बांध कर उसे ऊपर से नंगा कर क बांध कर खड़ा किया हुआ था . कल्पना और शीना क पाऊँ क नीचे से ज़मीन hi खिसक गयी ये मंज़र देख कर .

कल्पना : ामित्त्त्त्तत्त !!!!!!’

कल्पना ज़ोर से चिल्लाई और दौड़ते हुए लॉकअप क पास गयी. पुलिस वाले ने उसे वहीँ रोक दिया.

कांस्टेबल : ऐ लड़की कौन हो तुम अंदर कैसे आयी तुम?

कल्पना : जल्दी से अमित को बहार निकालो. तुम लोगों ने इसे क्यों पकड़ा है ?

कांस्टेबल: इसे सप मैडम ने पकड़ा है . लड़कियों का किडनैप करने वाले गिरोह का आदमी है ये . तुम दोनों बहार निकलो यहाँ से.

शीना: देखिये आपने गलत इंसान को पकड़ा है ये तो उन लड़कियों को छुड़ाने गया था .

कांस्टेबल : मुझे कुछ नहीं पता जल्दी से बहार निकलो वर्ण तुम दोनों को भी मदर दाल दूंगा . चलो निकलो यहाँ से .

कल्पना : आप ये ठीक नहीं कर रहे आप जानते नहीं मैं कौन हूँ .

‘ किसी बड़े बाप की बेटी हो या नेता की ? मुझे परवाह नहीं . इस जैसे गन्दी नाली क कीड़ों की हिमायत करने वालों क साथ भी मैं लिहाज़ नहीं करती. और कैसी लड़कियां हो तुम दोनों? लड़कियों पर अत्याचार करने वाले की हिमायत करने आयी हो ?’

कांस्टेबल : है हिन्द मैडम

ये सप ऋतू सिंह hi थी जो अपने केबिन से बहार निकली थी आवाज़ सुन कर.

कल्पना : मैडम आप गलत इंसान को पकड़ कर ले आयी हैं . ये तो उन लड़कियों की मदद क लिए गया था .

सप ऋतू सिंह : इसके साथियों ने बयां दे दिया है क ये उनका hi साथी है . अब तुम दोनों यहाँ से निकलो वर्ण मैं भूल जाउंगी तुम दोनों लड़कियां हो.

शीना : ये आप ठीक नहीं कर रही हैं मैडम. मेरा नाम शीना है डप इंटरनेशनल क मालिक बलजीत राइ की बेटी.

सप ऋतू सिंह : ोू तो तुम हो शीना . ताज्जुब है तुमर साथ भी तो अटेम्प तो रपे किया था न इसने. और जानती हो तुम्हारी hi कंपनी क एम्प्लाइज पर हुआ हमला इसी ने किया था. प्रूफ है मेरे पास.

शीना : अमित ने मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं किया था . और अगर इसने उन दोनों को सजा दी है तो ज़रूर उन दोनों में कुछ किया होगा.

सप ऋतू सिंह : कमल है इतना कुछ होने क बाद भी इसी की साइड ले रही हो. ये एक क्रिमिनल है और इसे कोई नहीं छुड़ा सकता . तुम चाहे कोई भी हो इसके खिलाफ पक्के साबुत हैं मेरे पास. मौका इ वारदात से पकड़ा है इसे और उसके साथियों का कबूलनामा बहुत है इसे सजा दिलाने क लिए . ये भोली शकल दिखा कर तुम लोगों को बेवक़ूफ़ बना सकता है मुझे नहीं .

‘ कल्पना मैंने तुम्हे कहा था न क तुम घर पर रहो . ‘

ये आवाज़ पीछे से आयी जो कल्पना क पापा की थी . चेहरे पर नज़र का चश्मा लगाए फॉर्मल ड्रेस में अछि कद काठी और चेहरे पर मूछों क साथ रूआबदार आवाज़ में ये साहब जैसे hi अंदर आये सप ऋतू सिंह समेत सभी पुलिस वालों ने उन्हें सलूट किया . उनके पीछे hi पुलिस क कुछ अफसर और कुछ सिविल ड्रेस में गोवत अफसर थे .

कल्पना : रट हुए ) पापा देखो न अमित की क्या हालत बना दी है यहाँ पुलिस ने

Kalpana’s फादर : रो मत मेरी बची मैं आ गया हूँ न. ऋतू जी ये क्या हिमाकत है ? आप इनोसेंट और क्रिमिनल चेहरों में फरक कब से भूल गयी ? जिसने उस गिरोह को पकड़वाया आप ने उसे hi पकड़ लिया ? रिलीज़ हिम इम्मेडिएटली. मैंने कहा भी था आपसे क मेरा आदमी वहीँ पर है और मैं इसी की बात कर रहा था. हे इस थे ब्रेव गाए जिसने अपनी परवाह किये बिना उन लोगों का पीछा किया और उनके बारे में खबर दी.

सप ऋतू सिंह का तो दिमाग hi घूम गया. जिसे उसने रेंज हाथों पकड़ा उसे hi छुड़ाने क लिए शहर क डिप्टी कमिश्नर आईएएस विक्रम सिंह राठौर खुद चले आये. इन पर तो शक भी नहीं कर सकती थी वो क्यूंकि विक्रम राठौर अपनी ईमानदारी क लिए जाने जाते थे और खुद उन्होंने hi तो ऋतू की सिफारिश कर क उसे यहाँ ट्रांसफर करवाया था . फिर भी ऋतू ने सोचा शायद उन्हें पूरे मामले क बारे में या इस अमित क बारे में पता नहीं है .

सप ऋतू सिंह : सर ये एक क्रिमिनल है , इसने कॉलेज में एक लड़की क साथ रपे करने की कोशिश की और अभी 2 दिन पहले हो डप

इंटरनेशनल क एम्प्लाइज पर जानलेवा हमला हुआ है वो भी इसी ने किया था लूट पैट की नियत से .

विक्रम राठौर : ऋतू जी ऍम ी चाइल्ड ? ाचा बुरे का पता है मुझे . और इस लड़के को आपसे ज्यादा जनता हूँ मैं. ये जो मेरी बहादुर बेटी है न सब बता चुकी है मुझे इसके बारे में. और मैं खुद भी पता कर चूका हूँ. इतना तो आप भी समझ सकती हैं क सही गलत में फरक मैं करना जनता हूँ . आप इसे रिलीज़ करो और ज़रा उन लड़कियों को यहाँ बुलाओ जो वहां से मिली हैं .

सप ऋतू सिंह ने आर्डर दिया और अमित क हाथ पैन खोल कर उसे लॉकअप से बहार निकला गया . शरीर पर निशान बता रहे थे क उसे पुलिस ने टार्चर किया है. अमित की ये हालत देख कर शीना और कल्पना उसके पास पहुँच गयी . जबकि कल्पना क पापा को गुस्सा आ रहा था अमित की हालत पर वो शांत थे. वो एक आईएएस अफसर थे जो जल्दबाज़ी में फैसला नहीं लेते थे. उधर से एक पुलिस वाला लड़कियों को ले आया. वो लड़की जिसके पीछे अमित वहां तक पहुंचा था वो अमित की ये हालत देख कर दौड़ती हुई उससे लिपट गयी .

लड़की : भैया ये आपके साथ क्या कर दिया इन लोगों ने?

सप ऋतू सिंह भी उस लड़की क इस तरह क रिएक्शन से सतब्ध थी.

विक्रम राठौर : बीटा इधर आओ मेरे पास

उस लड़की को प्यार से कल्पना क पापा ने अपने पास बुलाया.

विक्रम राठौर : बीटा मुझे अपना नाम बताओगी ? मैं तुम्हारी और तुम्हारे इस भैया की मदद करने आया हूँ.

लड़की : अंकल मेरा नाम सोनाली है.

विक्रम : बीटा तुम उस जगह कैसे पहुंची बातों हमें

सोनाली : अंकल मैं अपने गाओं से शहर क लिए बस का वेट कर रही थी क एक गाडी वहां आ कर रुकी और मुझे ज़बरदस्ती बीच में दाल लिया. मैं कंप्यूटर का कोर्स करने गाओं से शहर आती हूँ . मेरे घर में मेरे माता पिता और एक छोटा भाई हैं. पापा ड्राइवर हैं और ट्रक चलते हैं माँ घर में रहती है भाई स्कूल में पड़ता है . वो लोग जब मुझे उठा कर यहाँ रहे थे तो भैया ने सड़क पर मुझे देखा और पीछा करते हुए वहां तक आ गए. फिर इन्होने उन गुंडों को मारा भी.

एक सांस में लड़की ने सब कुछ बता दिया था. सप ऋतू सिंह सर अपनी इस भूल पर शर्मिंदगी से झुक गया. कल्पना क पापा ने ऋतू सिंह का झुका हुआ सर देखा और खुद को शांत करते हुए बोले.

विक्रम: आप एक होनहार अफसर हैं ऋतू जी और मैं आप विश्वास करता हूँ . पर बिना सचाई जाने आपने जो बेहवे इस लड़के क साथ किया है वो न कबीले बर्दाश्त है. सिर्फ अपने मन की आग को शांत करने क किये किसी मासूम की बलि दे देना कभी भी सही न होता , न कानून की किताब में न कर्मो की किताब में. अगर मुझे आप की ईमानदारी पर यकीन न होता तो यूँ एक तरफा करवाई कर क एक इनोसेंट और स्टूडेंट को इस तरह से बेइज़्ज़त करने और बेरहमी से पीटने क कारन मैं आपको ससपेंड कर देता और आप पर इन्क्वायरी बिठा देता . पर फ़िलहाल आपकी लॉयल्टी और आनेस्टी क कारन आपको कुछ नहीं कह रहा. पर इतना एडवाइस ज़रूर करूँगा एक सीनियर होने क नाते. क कभी भी एक तरफा सोच नहीं रखनी चाहिए किसी क बारे में. कई बार जो हम अंदाज़ा लगा लेते हैं सचाई उसके उलट होती है. इस लड़के की सचाई अब आपके सामने है. ये सिर्फ मैंने आपकी तसल्ली क लिए hi पूछा वर्ण मुझे इस लड़के पर पूरा भरोसा था . अब आप जो भी कोई और चार्ज इस पर लगाए बैठी हैं उनकी सचाई पता करने की कोशिश ज़रूर कीजियेगा. और हाँ इन सब लड़कियों को अभी क अभी उनके घरवालों तक पहुंचाओ . मैं नहीं चाहता क कोई भी बची पुलिस स्टेशन में रत कटे. चलो कल्पना बेटी अमित को इलाज और आराम की ज़रूरत है .

सप ऋतू सिंह : ी ऍम रियली सॉरी सर

विक्रम : माफ़ी जिससे मांगनी चाहिए उसी से मांगना मिस ऋतू. वे अरे प्रोफेशनल, काम में गलतियां हो जाती हैं अक्सर.

अब तक शीना और कल्पना मेरे साथ कड़ी मेरे शरीर पर लगे चोट क निशान hi देख रही थी . मेरी T-shirt फैट चुकी थी पर जैसे तैसे कर क मैंने वो वापिस पेहेन ली. पुलिस ने मुझे डंडों से पिता था जिस वजह से शरीर पर सूजन आ गयी थी और निशान भी पद गए थे. कहीं कहीं से तो नीले काळा निशान बन गए थे. मैं लड़खड़ाता खुद को संभालता कालापन और शीना क साथ बहार को आने लगा तो सोनाली मेरे गले लग गयी.

सोनाली : भैया अगर आज आप न होते तो मेरी ज़िन्दगी तबाह हो जाती मेरे माँ बापू का पता नहीं क्या होता. आप ने मुझ पर बहुत बड़ा एहसान किया है.

अमित : कैसी बातें कर रही हो बहिन , भाई भी कभी बहिन पर एहसान करता है .

सोनाली : रट हुए ) भैया

सोनाली रट हुए फिर से मेरे गले लग गयी और उसके देखा देखि बाकि सब लड़कियां भी मेरे पास आ कर मेरे गले लगने लगी. सबकी आँखों में आंसू थे . उन्हें भी दुःख था क मेरी ये हालत उनकी वजह से hi हुई है .

सोनाली : भैया आप मेरे घर चलो मेरे साथ . माँ बापू खुश होंगे आप से मिल कर.

अमित : नहीं बहिन अभी मैं इस हालत में नहीं हूँ क उन से मिल सकूँ. पर ज़िन्दगी ने कभी मौका दिया तो ज़रूर मिलूंगा.

सोनाली : मैं इंतज़ार करुँगी भैया और भगवन से प्रार्थना करुँगी क वो आपकी हर कामना पूरी करे.

कल्पना और शीना मुझे अपने साथ कार तक ले आयी. कल्पना क पापा भी पीछे hi आ गए और मेरा मोबाइल मुझे वापिस दिया.

विक्रम : कल्पना बीटा मुझे अभी काम है इस लिए मैं आ नहीं सकता . तुम अमित को डॉ क पास ले जाओ और इसका इलाज करवाओ. एंड यू , यंग मन सोचा नहीं था क इस तरह मुलाकात होगी. बहुत तारीफ सुनी थी कल्पना से तुम्हारी आज देख भी लिया. तुम सच में तारीफ क काबिल हो. बहादुर भी हो जो अकेले भीड़ गए सबसे. वैसे तुम्हे रुकना चाहिए था.

अमित : जी अंकल मैं रुका हुआ hi था क वहां कंटेनर देख कर मुझे लगा कहीं पुलिस का इंतज़ार करते वो लोग उन सब लड़कियों को कहीं और न ले जाएँ

विक्रम : जो भी हो तुमने साबित कर दिया क इंसानियत आज भी ज़िंदा है. और तुम कितने बहादुर हो ये मैं पहले hi सुन चूका हूँ होनी बेटी से. जल्द hi मुलाकात होगी बीटा. अब तुम लोग जाओ.

अमित : थैंक्स अंकल .

कल्पना : bye पापा एंड थैंक्स यू अरे थे बेस्ट डैड

इतना कह कर कल्पना अपने पापा से गले मिली.

विक्रम : अरे बस करो बेटी ये हमारा घर नहीं है . एंड बी थे वे यू अरे थे बेस्ट डॉटर . नाउ टेक केयर ऑफ़ हिम .

कल्पना मेरे साथ पीछे बैठ गयी और शीना कार को स्टार्ट कर क निकल पड़ी. मैंने अपना फ़ोन देखा जो स्विच ऑफ था . मैं उसे ों करने लगा तो कल्पना ने मन कर दिया .

कल्पना : क्या कहोगे सब से क कहाँ थे? पहले डॉ से इलाज करवा लेते हैं फिर ों कर लेना. शीना दीदी पहले डॉ क पास hi चलो आप.

शीना : वहीँ जा रही हूँ. रीना दीदी क पास.

कल्पना : पता नहीं कैसी अफसर है . पापा तो इतनी तारीफ करते थे इसकी और देखो क्या निकली ? कोई ऐसे मरता है क्या ? काम से काम एक बार सचाई तो पता कर लेती किसी से. और तुम्हे क्या ज़रूरत पड़ी थी , हर बार खुद hi पहुँच जाते ‘ आ बैल मुझे मर ‘ जहाँ देखा बस सर फसा लिया. पता है कैसे कैसे विचार मन में आ रहे थे जब वहां उन लाशों को देखा. मैं तो एक पल क लिए दर hi गयी थी क कहीं तुम्हे कुछ हो तो नहीं गया.

अमित : मुझे कैसे कुछ हो सकता है ? जिसके पास इतने अचे दोस्त हों उसे तो भगवन भी कुछ नहीं कर सकता .

कल्पना : ज्यादा बातें मत बनाओ तुम. बड़े आये डरा सिंह . देखो हल क्या बना दिया है.

शीना : वैसे तुमने मुझे बताया क्यों नहीं क तुमने हमारी कंपनी क मैनेजर को मारा है? . ी क्नोव क ज़रूर उसने ऐसा कुछ किया होगा जो तुमने उसके साथ ऐसा किया . पर काम से काम एक बार बता देते तो ये पुलिस का चक्कर न पड़ने देती मैं.

अमित : वो सब छोडो तुम . मैं उस बारे में बात नहीं करना चाहता.

शीना : पर मुझे कुछ कुछ अंदाज़ा हो गया है. एंड ी प्रॉमिस या मैनेजर और उसके साथी की मैं वाट लगा दूंगी.

थोड़ी देर में hi हम उसी हॉस्पिटल में पहुँच गए जहाँ डॉ रीना काम करती थी. डॉ रीना को शीना ने पहले hi फ़ोन कर दिया था और वो भी तैयार कड़ी थी हमारे आने से पहले .

उधर सप ऑफिस में विक्रम राठौर क जाने क बाद सप ऋतू सिंह होने हाथों हुई इतनी बड़ी गलती की वजह से खुद को कोसती हुई अपने ऑफिस में तनहा बैठ गयी किसी को भी अंदर से मन कर क. अपनी ईमानदारी और बेबाकी की वजह से सबके दिल में खौफ रखने वाली ऋतू सिंह आज खुद पर शर्मिंदा हो रही थी. वो पहले दिन हुई घटना से लेकर हर बात रिवाइंड करने लगी आखिर अमित को समझने में वो इतनी बड़ी गलती कैसे कर गयी . उसे यकीन नहीं हो रहा था क वो कितनी गलत थी. एक पल को उसे ये भी विचार आया क हो सकता है विक्रम सर को गलती लगी हो पर अगले hi पल उसने खुद hi झटक दिया क्यूंकि वो जानती थी की वो कितने सुलझे हुए और न्याय पसंद अफसर हैं . मगर उसका हम उसे खुद को भी गलत मैंने क लिए तैयार नहीं था. तभी उसके दिमाग में एक बात आयी और उसने तुरंत फ़ोन घुमा दिया.

सप ऋतू सूंघ : आईएनएस. पांडेय??

आईएनएस पांडेय : यस मैडम

सप ऋतू सिंह : डप इंटरनेशनल क जिस आदमी को होश आया है आप उसे इसी वक़्त मेरे पास लेकर आइये

आईएनएस. पांडेय : पर मैडम वो तो हॉस्पिटल में भर्ती है . उसकी हालत अभी इतनी अछि नहीं है.

सप ऋतू सिंह : गुस्से में ) मैंने जो कहा शायद आपने ठीक से सुना नहीं . उसे मेरे पास लेकर आइये. अभी मारा तो नहीं है न वो.

आईएनएस. पांडेय : जी मैडम मैं अभी उसे उठा कर ले अत हूँ.

सप ऋतू सिंह ( मन में ) जैसा उस लड़की ने कहा क ये लोग गलत हो सकते हैं बजाये उस लड़के क तो मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी है उसे समझने में. पर मेरा एक्सपीरियंस गलत नहीं हो सकता.
 
अपडेट 159



‘ ये सब कैसे हुआ ? किसने किया ये ? कहीं से झगड़ा कर क आ रहे हो क्या? कितनी बुरी हालत कर दी है ‘

डॉ रीना ने मेरे ज़ख्मों को देखते हुए चिंता से ये सवाल पूछे.

शीना : ये सब पुलिस का किया धरा है दीदी. गलती से इसको अपराधी समझ कर इसे टार्चर कर दिया.

डॉ रीना : तुमने उन्हें बताया नहीं था क्या ? और वो लोग क्या अंधे थे जिन्हे फरक नहीं पता चला इनोसेंट और क्रिमिनल में?

कल्पना : छोडो दीदी , अपनी ताकत क नशे में अंधे होकर लोग ऐसा hi करते हैं. आप इसका इलाज करो पहले. इसे भी चैन कहाँ मिलती है जब देखो किसी न किसी झमेले में पड़ता रहता है.

डॉ रीना : अब कौन सा झमेला हो गया ? मुझे भी बताओ.

अमित : छोड़िये न आप ये सब

डॉ रीना : क्यों छोडूं? हालत देखि है अपनी क्या हुई पड़ी है.?

डॉ रीना का दिल भी अंदर पसीज गया था अमित की ये दशा देख कर. चाहे वो खुद डॉ थी और इससे भी बुरी हालत वो देख चुकी थी मरीज़ों की पर यहाँ जो सामने इस बुरी हालत में बैठा था वो उसका दिल उसका प्यार था. वो खुद को रोक नहीं प् रही थी. अगर शीना और कल्पना यहाँ न होती तो वो रट हुए अमित से चिपक जाती अब तक.

कल्पना : किसी लड़की का पीछा करते हुए ये महाशय उन गुंडों तक पहुँच गए थे जो लड़कियों का किडनैप कर क उन्हें बेच देते थे और गलत कामो में लगा देते थे. मैंने मन भी किया था क पुलिस वहां पहुँच जाएगी तुम कुछ मत करना पर नहीं , इसे तो हीरोगिरी दिखानी होती है. गोली क आगे उछाल उछाल कर टारगेट बनता है ये.

डॉ रीना : तो तुम लड़कियों को बचने गए थे वहां ? कितने एहसान करोगे लोगों पर? कहीं किसी दिन तुम्हे कुछ हो गया तो?

कल्पना : हो गया ? हो जाता आज hi दीदी , पता है वहां 5 लोग मारे गए हैं . एक बार मैं भी दर गयी थी कहीं इसे तो कुछ नहीं हो गया.

कल्पना की बात सुनते hi डॉ रीना क हाथ रुक गए. और फिर वो खुद को मजबूत करते हुए शीना और कल्पना से इतना hi बोली.

डॉ रीना : शीना कल्पना तुम लोग ज़रा बहार जाओगी मैं ज़रा अचे से दवा लगा दूँ.

शीना को लगा शायद उनकी वजह से दीदी डिस्टर्ब हो रही है तो वो कल्पना को ले कर बहार चली गयी. उन दोनों क बहार जाते hi रीना ने दरवाज़ा लोक किया और पलट कर अमित क पास दौड़ कर आते hi उसे गले से लगा लिया . कुछ देर अमित से गले लगी रही अपने दिल में उठ रहे दर्द को शांत करती.

डॉ रीना : रट हुए ) तुम कब सुधरोगे ? अगर तुम्हे कुछ हो गया तो ? कभी नहीं सोचते दुआरों क बारे में जो तुम्हे प्यार करते हैं ?

अमित : आअह्ह्ह दर्द हो रहा है रीना जी , मुझे उस वक़्त उन लड़कियों की ज़िन्दगी बचाना सबसे ज़रूरी लगा. सोचिये ज़रा उनमे से कोई मेरी सिस्टर होती या आपको कोई अपनी तो क्या तब भी आप यही कहती ?

डॉ रीना: बातें मत बनाओ तुम. पुलिस आ रही थी न वहां? ज़रूरी नहीं क हर काम तुम्हे hi करना है. अपनी जान जोखिम में दाल कर दूसरों को बचा रहे हो क्या ये भी भूल गए क तुम्हारी ये जान भी किसी की अमानत है . तुम्हे कोई हक़ नहीं बनता किसी की अमानत को ऐसे जोखिम में डालने का.

अमित : अरे आप टेंशन को लेती हैं? कुछ नहीं होता मुझे . वो तो पुलिस की वर्दी की वजह से मैं चुप था वर्ण बताता उन लोगों को

डॉ रीना : चुप रहो तुम , आगे से फिर किसी झमेले में पड़े तो मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं करने वाली. कितने ज़ख़्म खाओगे इस जिस्म पर.

डॉ रीना मेरे ज़ख्मों पर अचे से क्रीम लगा रही थी और बाद में एक इंजेक्शन भी लगा दिया.

डॉ रीना : मेरे ख्याल से तुम्हे आज यहीं रुक जाना चाहिए. तुम्हे रेस्ट की ज़रूरत है.

अमित : नहीं रीना जी मुझे घर जाना होगा . सुबह से निकला हूँ और उन्हें तो अब तक पता भी नहीं क मैं हूँ कहाँ.

डॉ रीना : मुझे पता था तुम मानोगे नहीं. ये लो पैन किलर टेबलेट्स जब दर्द हो तो ले लेना वैसे मैं पैन किलर इंजेक्शन दे दिया है.

अमित : थैंक्स , और हाँ मंजू म को मत बताइयेगा वर्ण वो फ़िक्र करेंगी. संडे को घर पर फंक्शन है तो आइयेगा ज़रूर . मैं कल hi गाओं चला जाऊंगा.

डॉ रीना : कोशिश करुँगी पर बुआ की वजह से शायद रुकना पड़े. तुम्हारे कब्दे की चोट अब पहले से ठीक है पर फिर भी ख्याल रखना और हो सके तो रत में कपडे उतर क सो जाना वर्ण दिक्कत होगी इन चोटों से आयी सूजन की वजह से.

उसके बाद डॉ रीना ने शीना और कल्पना को भी अंदर बुला लिया और फिर हम डॉ रीना से विदा लेकर चल दिए.

अमित : शीना कार उधर hi ले चलो जहाँ आज वो सब हुआ था. मेरी बाइक वहीँ कड़ी है.

कल्पना : उसकी चिंता मत करो वो तुम्हारे पास पहुँच जाएगी.

अमित : पर मुझे कल गाओं जाना है

कल्पना : इस हालत में गाओं जाओगे ?

अमित : नहीं गया तो दिक्कत होगी. घर पर जा कर फंक्शन की तैयारी भी तो देखनी है .

कल्पना : ाचा ठीक है बाइक सुबह तुम्हे मिल जाएगी , रत को तो कहीं नहीं जाना न तुमने?

शीना : वैसे तुम कहो तो कल मैं तुम्हे कार में ले चलती हूँ गाओं .

अमित : नहीं मैं बाइक से hi जाऊंगा वर्ण घर वालो क सवालों का जवाब क्या दूंगा.

कल्पना : वो सब छोडो पहले तुम्हारे लिए एक T-shirt लेनी पड़ेगी . ऐसे घर नहीं जा सकते .

शीना ने कार एक शोरूम क बहार रोकी और मुझसे साइज पूछ कर खुद hi जा कर एक T-shirt ले आयी और मैंने पेहेन ली. उसके बाद बातें करते हुए हम रजनी मौसी क घर पहुँच गए. देर हो चुकी थी तो शीना और कल्पना बहार से hi चली गयी. मैंने बेल्ल बजायी तो दरवाज़ा निधि दीदी ने खोला उनके चेहरे पर टेंशन साफ़ नज़र आ रही थी . मुझे देखते hi वो मेरे गले लग गयी.

निधि दीदी : कहाँ चले गए थे तुम ? फ़ोन क्यों नहीं लग रहा था तुम्हारा ? किसी को बता कर भी नहीं गए . राधा नेहा तक को नहीं पता तुम्हारा , कहाँ थे अब तक ?

निधि दीदी को मेरी कितनी चिंता थी ये मैं समझ रहा था और वो अपनी जगह जायज़ भी थी. दीदी क इस तरह मेरे साथ लिपटने से मुझे दर्द तो महसूस हुआ पर इतना नहीं शायद इंजेक्शन का hi असर था.

अमित : वो क्या है न दीदी एक दोस्त क साथ चला गया था ज़रूरी काम से और फ़ोन भी बंद हो गया था. अभी सीधा वहीँ से आ रहा हूँ.

निधि दीदी : बाइक कहाँ है तुम्हारी ?

अमित : वो दोस्त क पास hi रह गयी थी. पंक्चर हो गयी थी न वो. अभी मुझे कार में छोड़ कर गया है.

रजनी मौसी : तू आ गया अमित , कहाँ रह गया था? आज खाना खाने भी नहीं आया घर. काम से काम बता कर तो जाते . बेचारी निधि कब से परेशां हो रही थी सबको फ़ोन कर क पूछ रही थी.

अमित : मेरी प्यारी दीदी इतनी फ़िक्र मत किया करो अपने इस भाई की. कुछ नहीं होता मुझे .

नैना दीदी : चल पहले इधर बैठ फिर तुझसे बाद में बात करती हूँ मैं. किसी को भी बता कर नहीं गया तू .

मौसा जी और कारन भी हॉल में hi बैठे थे. मैं सावधानी से चलता हुआ उनके पास जा कर बैठ गया. मौसा जी ने भी एक दो सवाल किये पर ज्यादा नहीं. उसके बाद मौसी ने खाना परोस दिया. मगर इस दौरान निधि दीदी गहरी नज़रों से मुझे देख रही थी जैसे कुछ जांच रही हों. खाना खाने क बाद मैं अपने कमरे में चला गया. नैना दीदी रत क बारे में पूछने लगी तो मैंने मन कर दिया. वो भी कल की ठुकाई से अभी तक दर्द महसूस कर रही थी तो उन्होंने भी ज्यादा ज़िद नहीं की .

उधर सप ऑफिस में ऋतू सिंह क आर्डर पर आईएनएस. पांडेय मैनेजर क साथी को उठा कर ऋतू सिंह क पास ले आया. अभी उसकी हालत कुछ अछि नहीं थी पर पुलिस कहाँ परवाह करती है जब आर्डर हो ऊपर से.

सप ऋतू सिंह : तो अब तबियत कैसी है तुम्हारी?

जूनियर : अभी हालत बुरी है मैडम , बैठना मुश्किल है.

सप ऋतू सिंह : सुना है डॉ कह रहे हैं तुम अब नाकारा हो गए हो . इतनी बुरी तरह मारा है उस लड़के ने तुम्हे.

जूनियर: पूछिए मत मैडम वो हरामी अगर मेरे हाथ आ जाये तो मैं उसे जान से मर दूँ.

जूनियर क मुँह से ये बात सुन कर ऋतू सिंह का पारा चढ़ गया.

ऋतू सिंह : हरामी वो है या तुम दोनों ? सालो क्या कर रहे थे वहां तुम दोनों जो उसने तुम दोनों की ये हालत की है. लूट पात करने वाले कभी ऐसा नहीं करते और न hi तुम्हारी उससे कोई दुश्मनी थी पहले जैसा क तुमने बयां दिया. अब बताओ सचाई क्या है?

ऋतू सिंह क बदलते तेवर और रूआबदार आवाज़ से जूनियर दर गया.

जूनियर : मम मम मैं बता चूका हूँ मैडम मम मैंने कुछ नहीं किया. मैं तो बस मैनेजर सर क साथ वहां काम से गया था.

ऋतू सिंह : एक बार और सोच लो , इतना तो मैं जान गयी हूँ तुम दोनों ने ज़रूर कुछ गलत किया है और सचाई का पता मैं लगा क रहूंगी.

जूनियर : नहीं मैडम मैं सच बोल रहा हूँ . हम वहां काम से गए थे और कुछ नहीं किया हमने.

ऋतू सिंह : ठीक है अगर तुम नहीं बताना चाहते तो तुम्हारी मर्ज़ी. आईएनएस. पांडेय इसे ले जाओ और एक्सीडेंट केस बना कर फाइल क्लोज कर दो बाकि मैं देख लुंगी.

आईएनएस. पांडेय : जी मैडम , चल बे

आईएनएस. पांडेय जूनियर को केबिन से बहार ले आया. जूनियर को समझ नहीं आयी थी क सप ऋतू सिंह ने ये कहा है. उसने अपनी शंका मिटने क लिए पांडेय से पूछ hi लिया.

जूनियर : ये मैडम क्या कह रही थी ? कौन सा एक्सीडेंट ? कैसी फाइल?

आईएनएस. पांडेय : अबे चिरकुट तेरी hi फाइल क्लोज करने को कह रही थी मैडम. तू नहीं जनता उनको बड़ी सख्त और बेरहम हैं हमारी मैडम. तभी तो लोग इतना डरते हैं उनसे. वैसे तेरा तो भला hi किया है उन्होंने. एक तो तू पहले hi नाकारा हो चूका है . ज़िन्दगी पर हिजड़ा बन क जियेगा न अपना सुख न बीवी को सुख. समझ ले तेरा तो उधर हो गया इस नरक की ज़िन्दगी से. वैसे बिमा तो है न तेरा . काम से काम मरने क बाद कुछ तो फायदा मिले बीवी को .

इतना कह कर पांडेय हसने लगा तो जूनियर को अब उसकी बात कुछ कुछ समझ आयी और उसकी गांड बिना लैंड क hi फट गयी .

जूनियर : मुझे बचालो आईएनएस . साहब मैं एकीच नहीं किया है. जो कुछ किया था वो मैनेजर ने किया था. मैं सब सच बता दूंगा मुझे बचा लो .

‘ तो आ गया लाइन पे , पहले hi बता देते तो जान न बच जाती ‘

ये आवाज़ ऋतू सिंह की hi थी जो पीछे कड़ी सब सुन रही थी. जूनियर ने तो अपना काल hi देख लिया था सामने. वो रोटा हुआ दोनों हाथ जोड़ कर अपनी ज़िन्दगी की भीख मांगने लगा.

जूनियर : मैडम मैं सब सच सच बता दूंगा प्लीज आप मुझे छोड़ दीजिये . मुझसे गलती हो गयी . पर मैंने कुछ नहीं किया है.

ऋतू सिंह : चल पहले पूरी बात बता वर्ण मैंने तो फैसला सुना दिया है.

जूनियर : मैडम मैंने कुछ नहीं किया है मुझे अपने बीवी बच्चों की कसम. वो सब मैनेजर ने किया था. फिर मैनेजर ने साडी बात बताई क किस तरह मैनेजर ने निधि को फसाया और ब्लैकमेल कर क वहां बुलाया और कैसे अमित वहां आ pahuncha.ye सब सुन कर ऋतू सिंह की आँखें गुस्से से लाल हो गयी पर उसे अभी और भी जानना था.

ऋतू सिंह : उस लड़के क साथ क्या रिश्ता था उस लड़की का?

जूनियर : वो उसे दीदी कह रहा था बस इतना hi सुना था मैंने.

ऋतू सिंह : रिकॉर्डिंग कैसे करने वाले थे तुम लोग ?

जूनियर: जी वो कैमरा लगाया था कमरे में बीएड क सामने पड़े शोपीस में.

ऋतू सिंह ने गुस्से में आ कर ज़ोर दर कोच मर दी जूनियर की छाती पर और वो वहीँ ज़मीं पर लेट कर चीखने लगा.

ऋतू सिंह: हरामजादो , बिलकुल सही किया उसने तुम दोनों क साथ. अब देखो तुम दोनों का मैं क्या हाल करती हूँ. आईएनएस. पांडेय , अभी क अभी किसी को भेज कर वो शोपीस यहाँ मंगवाओ और बिलकुल मत बताना क उसमे क्या है . इस कुत्ते को हॉस्पिटल पहुंचाओ और दोनों क खिलाफ रपे एटेम्पट , सेक्सुअल असाल्ट, ब्लैकमेलिंग , पुलिस को गुमराह करने और एक बेगुनाह इनोसेंट को झूठे केस में फ़साने का केस बनाओ. और तू कुत्ते मेरी बात ध्यान से सुन , चुपचाप गवाह बन कर अपने साथी क खिलाफ गवाही देना , इससे शायद तू बच जाये. ले जाइये इसे पांडेय जी.

इतना कह कर ऋतू सिंह वापिस केबिन में आ गयी. उसे अब एहसास हो रहा था क वो कितनी बड़ी गलती कर रही थी.

ऋतू सिंह ( मन में ) मैं इतनी गलत कैसे हो सकती हूँ ? वो लड़का सच में hi इतना ाचा निकला और मैं उसे सिर्फ गलत hi समझती रही. अपनी बहिन को बचने क लिए कोई भी भाई ये सब कर सकता है. और उसने तो बेगानी लड़कियों क लिए भी जान की बाज़ी लगा दी. इसका मतलब वो उस दिन सच में मेरी मदद hi कर रहा था और मैंने उसे गलत समझा. ज़िन्दगी में पहली बार कोई ऐसा मर्द मिला है जो दिल से औरतों का सम्मान करता है. वर्ण यहाँ तो सब हवस क पुजारी हैं. मुझे उससे माफ़ी मांगनी चाहिए पर अब मैं उसका सामना कैसे करुँगी ? कैसे बुरी तरह मारा था मैंने उसे .

ऋतू सिंह को अब खुद पर hi गुस्सा आ रहा था क उसने एक भले इंसान क साथ इतना गलत किया . जब उससे और बर्दाश्त न हुआ तो वो गुस्से में केबिन से निकली और जो गुंडे आज ज़िंदा पकड़े थे उन पर hi गुस्सा निकलने लगी और अछि तरह से सबकी ठुकाई करने क बाद उसे कुछ सुकून मिला. उसके बाद वो अपने सरकारी आवास पर चली गयी क्यूंकि मन में गिलटी फील हो रहा था उसे आज. ऋतू सिंह अकेली hi रहती थी और फॅमिली में एक भाई क सिवा कोई नहीं था जो किसी दूसरे शहर में अपनी फॅमिली क साथ रहता था. एक सख्त अफसर होने क साथ hi वो अपनी ज़िन्दगी में बिलकुल अकेली थी . घर पर आने क बाद वो फ्रेश हो कर आराम दायक कपड़ों में वीने की बोतल खोल कर बैठ गयी जैसा की वो अक्सर परेशां होने पर करती थी . मगर आज उसे इस वीने से भी सुकून नहीं मिल रहा था . उसे अंदर hi अंदर अपनी गलती का एहसास खाये जा रहा था. देर तक जब नींद न आयी तो अपने आवास में hi एक तरफ बने कण्ट्रोल रूम में जा कर वो देर तक आपराधिक शिकायतें सुनती रही. इस सख्त और निडर अफसर की ज़िन्दगी में भी एक सूनापन और कुछ काले पैन थे जो ये किसी से साँझा नहीं करती थी क्यूंकि मतलब दुनिया से उसने नाता तोड़ रखा था .

इधर मैं हलके कपडे पेहेन कर अपने बीएड पर लेता हुआ था. सीधा लेटने में ज्यादा दिक्कत थी पीठ पर आयी सूजन से. इस लिए मैं उल्टा hi लेता हुआ था. घर में सब सो चुके थे पर मुझे नींद नहीं आ रही थी. तभी कमरे का दरवाज़ा खुला और कोई कमरे में दाखिल हुआ. मैंने सर घुमा कर देख तो निधि दीदी थी.

अमित : अरे दीदी आप इस वक़्त ? आइये बैठिये , क्या आज भी नींद नहीं आ रही आपको ?

निधि दीदी : तुम क्या छुपा रहे हो अमित ?

अमित : मैं क्या छुपा रहा हूँ ? कुछ भी तो नहीं.

अब तक मैं सीधा बैठ चूका था. और दीदी भी मेरे पास बैठ गयी थी. दीदी ने मेरा हाथ अपने सर पर रखा और कहा

निधि दीदी : मेरे सर की कसम खा कर कहो क तुम कुछ छुपा नहीं रहे.

अमित : दीदी ये आप क्या कह रही हैं ? मैं कसम नहीं खा सकता .

निधि दीदी : अगर मुझसे ज़रा भी प्यार करते हो तो मुझे सब सच सच बताओ . मैं जानती कुछ तो हुआ है जो तुम छुपा रहे हो.

अमित : प्लीज दीदी आप मुझसे कुछ मत पूछिए .

निधि दीदी : तुम ऐसे नहीं मानोगे न . चलो अपनी शर्ट उतरो

अमित : ये आप क्या कह रही हैं मैं ऐसा नहीं कर सकता

निधि दीदी : तुम शर्ट उतारते हो क नहीं. तुम जब घर से गए थे तो दूसरी शर्ट पहनी हुई थी तुमने और तुम कैसे बैठे हुए थे वो भी देखा मैंने . उतरो इसे

दीदी ने ज़बरदस्ती मेरी T-shirt खिंच कर ऊपर कर दी तो उनको मेरे पीठ पर मार क निशान नज़र आ गए. दीदी की आँखों से आंसू बहने लगे.

निधि दीदी : रट हुए ) ये सब क्या है ?? किसने किया ये तुम्हारे साथ ? बोल किन कमीनो ने किया ये ? कहीं ये सब मेरी वजह से तो नहीं ..

अमित : नहीं दीदी आपकी वजह से कुछ नहीं हुआ है.

निधि दीदी : तो फिर ये सब कैसे हुआ ? कहाँ थे तुम आज ?

अमित : सब बताता हूँ पहले आप रोना बंद कीजिये.

मैंने निधि दीदी क आंसू पोंछे . जब वो कुछ शांत हुई तो मैंने बताना शुरू किया. कैसे मैंने उस लड़की को देखा और कैसे फिर वहां पहुंचा उसके बाद पुलिस का मेरे साथ सलूक और कल्पना क पापा का मुझे बचाना . दीदी ख़ामोशी से सब सुनती रही. जैसे hi मैं चुप हुआ वो मेरे सीने से लग गयी .

निधि दीदी : अगर तुझे कुछ हो जाता तो ? क्या तुझे किसी की परवाह नहीं है ?

दीदी मेरे गले में बहन डेल मेरे सीने से लगी थी . मुझे अपनी छाती पर उनकी कोमलता का एहसास हो रहा था . साथ hi उनके शरीर से आती महक मेरी सांसो में घुल रही थी. उनकी बेचैन धड़कने मुझे महसूस हो रही थी मैंने उनको शांत करने क लिए बाँहों में भर लिया तो वो और भी ज़ोर से मेरे सीने से चिपक गयी.

निधि दीदी: अगर तुम्हे कुछ हो गया तो मैं जीते जी मर जाउंगी , तुम मेरे लिए सब कुछ हो.

निधि अमित की हालत पर भावुक हो कर खुद को रोक नहीं प् रही थी . उसे ऐसे लगा क आज वो अमित को सचमुच खो देती. उसका पहला प्यार जिसे वो अपना सब मान चुकी थी वो अमित जी तो था उसके दिल की धड़कने बहुत तेज़ हो गयी थी. और अब अमित ने जैसे उसे बाँहों में भर लिया था तो ये भी निधि को रोमांचित करने लगा था. उसके नंगे चोदे सीने से लिपटी वो कहीं और hi खोने लगी थी.

अमित : ऐसा मत कहिये दीदी , आप जानती हैं न आप मेरी सबसे प्यारी दीदी हैं. आप क लिए hi तो मैं वापिस आया हूँ . वर्ण मैं आज रत घर hi न अत.

अमित का ये कहना निधि को ऐसे लगा जैसे वो अपना प्यार ज़ाहिर कर रहा हो एक प्रेमी की तरह. भाई बहिन जैसे शब्द तो जैसे वो सुनती hi नहीं थी अब.

निधि दीदी : तू सच में मेरे लिए आया है ? एक बार फिर से कहना.

अमित : मैं सिर्फ आपके लिए hi आया हूँ दीदी . और आप की आँखों में आंसू मुझे बिलकुल भी अचे नहीं लगते.

निधि दीदी : मेरी ख़ुशी मेरा गम बस तुम hi तो हो. तुम्हारे सिवा अब निधि की ज़िन्दगी में और कुछ है भी नहीं. कभी मुझे खुद से जुड़ा मत करना अमित वर्ण ये तेरी निधि जी नहीं पायेगी.

दीदी ने इतना कह कर मेरी गर्दन पर अपने होंठ लगा दिए तो मेरे जिस्म में झुरझुरी सी हुई और एक सिसकी क साथ मेरी पकड़ दीदी क बदन पर और मजबूत हो गयी . दीदी का नाज़ुक बदन मेरी बाँहों में और कस गया .

निधि दीदी : आआअह्हह्ह्ह्ह

दीदी की आह सुन कर मैं एक डैम से उस नशे क आलम से बहार निकल और दीदी को अपनी बाँहों की गिरफ्त से निकल दिया.

अमित : सॉरी दीदी

निधि दीदी : सॉरी क्यों कहते हो. मुझे तो ाचा लगता है जब तुम मुझे प्यार से गले लगते हो.

अमित : दीदी अब हमें सो जाना चाहिए कल मुझे गाओं भी जाना है.

निधि दीदी : क्या ??? तुम कल जा रहे हो ?? पर फंक्शन तो संडे को है न.

अमित : माँ ने कहा था क शुक्रवार तक मैं घर आ जॉन. तो सोच रहा हूँ कल कॉलेज जाने की बजाये घर hi चला जॉन .

निधि दीदी: ाचा ..... मैं भी चलूँ तुम्हारे साथ ?

अमित : सच में ?? ये तो बहुत ाचा होगा . हम दोनों साथ में hi चलते हैं . माँ भी खुश हो जाएगी.

निधि दीदी : मगर पहले इधर बैठो मैं मालिश कर देती हूँ . नहीं तो ये जल्दी ठीक नहीं होंगे.

अमित : ाचा तो ये लो क्रीम इसे अचे से लगा दो.

निधि दीदी ने मेरी पीठ पर अचे से क्रीम लगा दी . जगह काम थी और मुझे दिक्कत न हो तो वो आज मेरे साथ नहीं सोई. मैं भी चैन से सो गया. सुबह मुझे निधि दीदी ने hi जगाया और मुझे हल्दी वाला दूध दे कर मेरी अचे से जाँच की. मुझे तैयार होने का कह कर वो चली गयी . मैं जल्दी से तैयार हो गया. नैना दीदी को जब पता चला क मैं आज hi जा रहा हूँ तो वो नाराज़ होने लगी. रजनी मौसी ने निधि दीदी को मेरे साथ जाने की इजाज़त दे दी. अभी नाश्ता बन hi रहा था क बहार की बेल्ल बजी. नैना दीदी ने दरवाज़ा खोला तो सामने पुलिस वाला खड़ा था जिसे देख कर दीदी थोड़ा घबरा गयी.

पुलिस वाला : मर अमित यहीं रहते हैं?

नैना दीदी : हह हाँ मगर क्या बात है आआप क्यों पूछ रहे हैं ?

पुलिस वाला : आप ज़रा उन्हें बुला देंगी .

नैना दीदी तो घबरा hi गयी जब पुलिस वाले ने मेरे बारे में पुछा और वो उसी वक़्त अंदर को भागी आयी . निधि दीदी भी हैरान हो गयी थी इस तरह पुलिस क आने से जबकि कारन भैया खुश हो रहे थे.

कारन भैया : ज़रूर कोई लफड़ा किया होगा और बिठाओ सर पर .

निधि दीदी : तू चुप रहेगा . अमित तुम यहीं रुको मैं बात करती हूँ.

निधि दीदी को पता था कल हुई वारदात क बारे में तो उन्होंने सोचा क शायद पुलिस वाले मुझे उठाने आये हैं. जब की समझ तो मुझे भी नहीं आ रहा था क पुलिस इतनी सुबह कैसे यहाँ आ गयी? और मैं यहाँ हूँ कैसे पता पुलिस को. निधि दीदी खुद पुलिस का सामना करने क लिए आगे बड़ी जैसे वो मेरे लिए सब से भीड़ जाएगी . मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की तो मुझे ऑंखें दिखा कर उन्होंने अंदर कमरे में जाने को कहा और खुद बहार चली गयी .

निधि दीदी : जी सर कहिये क्या बात है किस लिए आप अमित से मिलना चाहते हैं?

पुलिस वाला : आप उनकी क्या हैं ?

निधि दीदी : मैं उसकी बड़ी बहिन हूँ. आप मुझसे बात कीजिये.

पुलिस वाला: जी मुझे दस साहब ने भेजा है , के अमित की बाइक उनके पास रह गयी थी तो वो उन्होंने भिजवाई है.

ये सुनते hi निधि दीदी क चेहरे से परेशानी गायब हो गयी और मुस्कान आ गयी. वहीँ दस का नाम सुन कर कारन भैया की हंसी गायब हो गयी.

निधि दीदी : आएये अंदर आइये

निधि दीदी उस पुलिस वाले को अंदर ले आयी और उसने भी बड़े सलीके से सबको नमस्ते की. उसे भी पता था क ये ज़रूर दस साहब क कोई खास होंगे वर्ण वो उसे खुद यहाँ नहीं भेजते.

मौसा जी : आप को दस साहब ने hi भेजा है क्या ?

पुलिस वाला : जी हाँ , विक्रम सर ने खुद मुझे भेजा है. मर अमित की बाइक उनके पास थी कल से . उन्होंने कहा क पहले मैं बाइक दे कर आऊं फिर वो ऑफिस जायेंगे.

ये बात सुनते hi कारन भैया क तो एक्सप्रेशन hi बदल गए जबकि निधि दीदी मुस्कान और बढ़ गयी. . मौसा जी भी मेरी तरफ गर्व से देख रहे थे. रजनी मौसी पुलिस वाले क लिए पानी ले आयी.

पुलिस वाला : जी आप में से में अमित कौन हैं ?

अमित : मैं हूँ सर.

पुलिस वाला : ये लीजिये सर बाइक की चाबी . बाइक बहार कड़ी है आप एक बार देख लें.

अमित : उसकी कोई ज़रूरत नहीं आप बैठिये

रजनी मौसी : हाँ हाँ बैठिये नाश्ता कर क जाइएगा.

पुलिस वाला : जी शुक्रिया मुझे ड्यूटी पर वापिस पहुंचना है. राठौर सर टाइम क बड़े पाबंद हैं वो मेरा इंतज़ार कर रहे होंगे. ाचा शुक्रिया सर .

इतना कह कर वो बहार निकल गया और मैं उसे दरवाज़े तक छोड़ने आया. बहार एक पुलिस जीप कड़ी थी उसके लिए. बाइक भी चकाचक लग रही थी जैसे धो कर लाये हों. पुलिस वाले क जाने क बाद मैं अंदर आया तो मौसा जी ने मुझे अपने पास बिठा लिया.

मौसा जी : बीटा तुम ये राठौर साहब को कैसे जानते हो तुमने बताया नहीं. उनके बारे में बहुत सुना है और अखबार में भी रोज़ उनकी कोई न कोई कोहबर लगी रहती है. बड़े ईमानदार अफसर हैं.

अमित : असल में मौसा जी मैं भी कल hi मिला हूँ उनसे. मुझे पता hi नहीं था वो मेरे दोस्त क पापा हैं.

नैना दीदी : किस दोस्त क ? मुझे भी बताओ.

अमित : कल्पना क

कल्पना का नाम लेते hi कारन भैया को चाय पिटे पिटे हिचकी लग गयी.

नैना दीदी : क्या !! कल्पना क पापा हैं वो . उसने तो बताया hi नहीं कभी.

अमित : मुझे भी कहाँ बताया था . वो कल hi पता चला.

नैना दीदी : देखा पापा अमित की जान पहचान कितने बड़े बड़े लोगों से है. और देखो इसकी बाइक छोड़ने खुद पुलिस वाले यहाँ तक आये. और कुछ लोग इसके बारे में बातें बनाते हैं.

नैना दीदी का इशारा कारन भैया की तरफ था.

रजनी मौसी : लाखों में एक है मेरा बीटा, देख लेना एक दिन साडी दुनिया में नाम होगा मेरे बेटे का.

निधि दीदी : वो तो अभी भी हो रहा है माँ . न्यूज़ पेपर में तो अभी से नाम आने लगा है इसका.

कारन भैया : माँ मुझे आज जल्दी जाना है मैं जा रहा हूँ कॉलेज. नाश्ता वहीँ कर लूंगा .

मौसी ने कारन भैया को रोकने की कोशिश की पर वो नहीं रुके. कारन भैया क पीछे पीछे नैना दीदी भी बहार तक गयी.

नैना : गलती से भी ऐसा मत करना मुझे पता है तू जो रोज़ रोज़ कर रहा है उसे परेशां करने क लिए. मेरे सहेली ने कल hi बता दिया था मुझे क उसने तुझे देखा है टायर की हवा निकलते हुए.

कारन जो अमित की बाइक का पास अभी बैठा hi था वो नैना को देख कर खड़ा हो गया.

कारन : पता नहीं क्या दिमाग ख़राब हो गया है सबका जो उसी मनहूस क पीछे पागल हो रहे हो. देख लेना इस घर को भी ग्रहण लगा देगा एक दिन.

नैना: मुँह बंद रख अपना , तुझसे कहीं ज्यादा इज़्ज़त और प्यार वो करता हैं हमें. और तेरे साथ क्या गलत किया है उसने जो तू इतनी बकवास करता है उसके बारे में ?

कारन : तुम उसके लिए मेरे साथ लड़ रही हो ? अपने सेज भाई क साथ ?

नैना : हाँ उसके लिए मैं किसी क भी साथ लड़ सकती हूँ. दिल से इज़्ज़त करता है वो मेरी . दिखावा नहीं करता कोई. तूने कभी ठीक से बात भी की है मुझसे या दीदी से? थोड़ा सीख उससे. छोटा है तुझसे पर फिर भी सब उससे कितना प्यार करते हैं और तू है क उसके खिलाफ बकवास करता है.

कारन : देख लूंगा कितनी इज़्ज़त करता है वो .

इतना कह कर कारन गुस्से से निकल गया और नैना भी वापिस अंदर आ गयी .

हम सब ने मिल कर नाश्ता किया. मौसा जी तो सबसे पहले नाश्ता कर क निकल गए. नैना दीदी भी कॉलेज जाने क लिए तैयार हो गयी. मैंने निधि दीदी को तैयार होने को कहा और अपने कमरे में आ कर अपना बैग पैक कर लिया. कुछ hi देर में नैना दीदी एक मुझसे मिलने के बाद कॉलेज क लिए निकल गयी . मैंने राधा रीमा और मोहित को फ़ोन पर बता दिया क मैं घर जा रहा हूँ. निधि दीदी भी जल्दी से तैयार हो गयी और अपना बैग पैक कर लिया . मौसी से विदा लेकर हम 9 बजे तक घर से निकल गए गाओं क लिए.

निधि दीदी : तुझे दिक्कत तो नहीं हो रही न बाइक चलने में?

अमित : नहीं दीदी मैं ठीक हूँ

निधि दीदी : मेरा मतलब था मैं पीछे बैठी हूँ और तेरी पीठ पर सूजन है.

अमित : दीदी आप तो फूलों जैसी हो , भला आपके टच होने से क्या दिक्कत होगी.

मैंने ये कहा तो दीदी कुछ पल क लिए खामोश हो गयी . मुझे लगा कहीं दीदी को मेरी बात बुरी न लग गयी हो. पता नहीं मैं कैसे ये कह गया.

अमित : दीदी आप को मेरी बात बुरी लगी क्या आप खामोश हो गयी

निधि दीदी ने मेरे कंधे पर रखा हाथ मेरी कमर से लपेट का मेरी छाती पर रख दिया और मेरे साथ चिपक गयी. मुझे अपनी पीठ पर उनका एक उभर अचे से महसूस होने लगा

निधि दीदी : मैं तेरी किसी बात का बुरा मन hi नहीं सकती . तू जो चाहे कह किया कर. वैसे एक बात कहूं . मैं तो दर hi गयी थी जब पुलिस वाला घर पर आया था.

अमित : दर तो मैं भी गया था दीदी. अगर वो कल वाली बात सबके सामने कर देता तो मैं क्या जवाब देता मौसा जी और मौसी को.

निधि दीदी : मगर जो भी हुआ ाचा हुआ , माँ और पापा दोनों hi खुश हो गए ये जान कर क तुम्हारी पहचान कितने बड़े लोगों से है.

अमित : सच कहूं दीदी तो मुझे बिलकुल भी नहीं पता था क कल्पना क पापा इतने बड़े अफसर हैं . उन्होंने hi मुझे कल बचा लिया .

निधि दीदी : जब कल्पना गाओं आएगी तो उसकी अचे से खातिरदारी करुँगी मैं. वैसे भी बहुत अछि लड़की है वो. और शीना भी अछि है. इतने बड़ी कंपनी क मालिक की बेटी होकर भी तुम सब क साथ कैसे वो घुल मिल कर रहती है . कोई घमंड नहीं दिखाया उसने उस दिन.

अमित : वो भी अछि है दीदी. और रीमा रीना भी अछि हैं.

निधि दीदी : तुम खुद अचे हो न इस लिए तुम्हे सरे दोस्त अचे hi मिले हैं.

हम दोनों ऐसे hi बातें करते हुए गाओं पहुँच गए. माँ तो मेरे साथ निधि दीदी को देख कर बहुत खुश हुई . दीपिका ममी और कामिनी ममी भी बहुत खुश हुई. बाबा भी घर hi थे उन्होंने भी निधि दीदी को प्यार दिया. और फिर मैं लग गया बाबा क साथ तैयारियों क बारे में समझने.

उधर कॉलेज में 10 बजे सप ऋतू सिंह विथाउट यूनिफार्म सिविल ड्रेस में अमित से मिलने क लिए पहुँच गयी. कल रत भर वो ठीक से सो नहीं पायी थी . मन में गिलटी फील कर रही थी और सुबह ऑफिस जाने की बजाये आज सिविल ड्रेस में hi इधर आ गयी . यूनिफार्म इस लिए नहीं पहनी थी क कॉलेज में कोई गलत न समझे उसका अमित से ऐसे मिलने आना. प्रिंसिपल सर क पास भी नहीं गयी थी वो आज . मगर जब वो अमित की क्लास तक पहुंची तो पता चला आज उनका ये लेक्चर फ्री था मैडम क लीव पर होने की वजह से. अमित को ढूंढते हुए वो कैंटीन में पहुंची तो उसे वहां कल्पना मिल गयी . ऋतू सिंह को देखते hi कल्पना को गुस्सा आ गया पर उसके ओहदे और अपने पापा से सुनी उसकी तारीफ की वजह से वो उसके साथ गलत बेहवे नहीं करना चाहती थी.

कल्पना : गुड मॉर्निंग मैडम , आप यहाँ इस वक़्त वो भी विथाउट यूनिफार्म.

ऋतू सिंह : गुड मॉर्निंग कल्पना . सॉरी मुझे पता नहीं था म तुम राठौर सर की बेटी हो.

कल्पना : सॉरी किस बात की मैडम , आपने कौन सा मुझे टार्चर किया है. जिसको किया है सॉरी उसी से माँगिएगा. वैसे आप यहाँ किसी खास काम से hi आयी होंगी. अमित क बारे में जानने आयी हैं न ? चलिए मैं hi आपकी मदद कर देती हूँ. आफ्टर आल आप इतनी बड़ी अफसर हैं और किसी को भी अंदर कर सकती हैं.

ऋतू सिंह जो पहले hi गिलटी फील कर रही थी उसे कल्पना की बातें शूल सी चुभ रही थी. मगर वो चुप रही.

ऋतू सिंह : मैं अमित से hi मिलने आयी हूँ क्या तुम मुझे उससे मिलवा सकती हो ?

कल्पना : इतनी जल्दी क्या है मैडम आप अचे से इन्क्वायरी कीजिये न . मुजरिम क खिलाफ सबूत पक्के होने चाहिए. वर्ण बनाये गए सबूत कोर्ट में फ़ैल हो जाते हैं . इनसे मिलिए ये हैं शिवानी दीदी. अमित पर रपे एटेम्पट का इलज़ाम इनकी वजह से hi लगा था . शिवानी दीदी ये मम पुलिस की तरफ से आयी हैं . अमित क बारे में इन्हे आप खुद hi बताइये.

कल्पना ऋतू सिंह को शिवानी क पास ले गयी जो इस वक़्त शालू और शीना क साथ वहीँ बैठी थी. मोहित अभी यहाँ नहीं था और राधा रीमा नेहा मीनल भी अपनी क्लास में थी.

शिवानी : देखिये मैडम ऐसा कुछ भी नहीं है . असल में मैंने किसी क बहकावे में आकर अमित पर इलज़ाम लगाया था उसे कॉलेज से निकलवाने क लिए. मैं आज भी इस बात पर शर्मिंदा हूँ पर वो बहुत ाचा है. इन फैक्ट इस सब क बाद जब प्रिंसिपल सर मुझे कॉलेज से निकल रहे थे तब उसी ने सर को रोका था. और बाद में उसने मुझे गलत रस्ते से रही रस्ते पर आने में मदद की. हे इस रियली ा नीस गाए.

शीना : एक्सक्यूज़ में , कल्पना मैं ज़रा उन दोनों को भी यहीं बुलाती हूँ जिन्होंने गलत बातें इन तक पहुंचे थी .

इतना कह कर शीन बहार निकल गयी . शिवानी और शालू को अभी तक कुछ नहीं पता था क ये लेडी कोण है और कल क्या हुआ था . बात अमित की थी तो शिवानी ने बिना कुछ सोचे सब अत दिया. शालू जो अब तक चुप थी उसे भी लग रहा था क ज़रूर अमित किसी पंगे में फसने वाला है हो कल्पना और शीना इस तरह उसकी सफाई दे रही हैं इस लिए उसने भी अपनी बात करना ज़रूरी समझा

शालू : मैं नहीं जानती क आप कौन हैं मैडम , पर अगर बात अमित की है तो मैं अपने बारे में भी बता देती हूँ.

एक बार शालू ने शिवानी और कल्पना को देखा जो उसे हौंसला दे रही थी . और फिर शालू ने बिना किसी का नाम लिए अपने साथ जो कुछ हुआ सब बता दिया. जिसे सुन कर ऋतू सिंह को बहुत बुरा लगा.

शालू : वो कोई आम इंसान है hi नहीं मैडम वो किसी दूसरी दुनिया का hi है. जिस तरह वो बिना किसी मतलब क हर किसी की मदद करता है उस तरह तो इस दुनिया का कोई इंसान कर hi नहीं सकता. मुझे पाऊँ की जुटी रखैल वैश्य तक बना दिया था घटिया लोगों ने पर उसने मुझे गले लगाया और मुझे उन सब से आज़ादी दिला कर उस नरक भरी ज़िन्दगी से निकल कर नई ज़िन्दगी दी. मैं अपने रोम रोम को उस पर लुटा कर भी उसका क़र्ज़ नहीं उतर सकती . अगर आप उसके खिलाफ कुछ करने वाली हैं तो मैं बस इतना hi कहूँगी क आप उसके बदले में चाहे तो मेरी जान ले लीजिये पर उसे कुछ मत कहना उसे कुछ मत कहना .

शालू ये सब कहते हुए रोने लग गयी और उसके साथ शिवानी कल्पना की आँखें भी भर आयी थी. शिवानी ने शालू को गले लगा लिया. आँखों में नमी तो ऋतू सिंह क भी आ गयी थी पर वो एक मजबूत औरत थी जो कैसे भी हालत हो खुद को कमज़ोर नहीं पड़ने देती थी.

ऋतू सिंह : तुम्हारे साथ इतना कुछ हो गया तुमने पुलिस में शिकायत क्यों नहीं की ?

शालू : पुलिस तो उन लोगों की जाने में रहती है मैडम. बड़े बड़े अफसर और नेता उनके तलवे चाट ते हैं . मुझ गरीब की भला कौन सुनता ?

ऋतू सिंह : तुम मुझे बताओ मैं उन लोगों को सजा दिलवाऊंगी

शालू : उसकी ज़रूरत नहीं है मैडम , अमित उन सब को सजा दे चूका है और ऐसी सजा आपकी पुलिस और कानून भी उन्हें नहीं दे सकता . वो लोग ज़िंदा तो हैं मगर अब किसी क साथ कुछ गलत करने क लायक नहीं हैं .

उधर से शीना नितिका को ले आयी अपने साथ और उसे ऋतू सिंह क सामने साडी बात रखने को कहा . नितिका ने भी सब सच सच बता दिया और अपनी गलती की माफ़ी मांगी . ऋतू सिंह अमित क बारे में इतना कुछ सुन कर और भी ज्यादा शर्मिंदा थी . और सब से ज्यादा उसके दिल पर चोट शालू की कहानी से हुई थी. ऋतू सिंह को अब लगने लगा क जिस शख्स की उसे इज़्ज़त करनी चाहिए थी उसने उसे न सिर्फ बेइज़्ज़त किया बल्कि उसको इतना टार्चर भी किया .

ऋतू सिंह : क्या अब मैं अमित से मिल सकती हूँ ?

कल्पना : क्या अभी भी कोई कसार रह गयी है मैडम ?

ऋतू सिंह : ओह प्लीज कल्पना , तुम गलत समझ रही हो . वो जो कुछ भी हुआ एक गलत फेहमी थी . मुझे उसका अफ़सोस है. वो सब बदला नहीं जा सकता पर काम से काम मैं उससे माफ़ी तो मांग सकती हूँ न? प्लीज मुझे उससे मिलवा दो.

कल्पना : सॉरी मैडम आप उससे नहीं मिल सकती . वो आज कॉलेज नहीं आया. और अब वो अगले हफ्ते hi कॉलेज आएगा. वैसे आपको एक बता दूँ उसके ज़ख़्म भी ठीक होने में कुछ दिन तो लगेंगे hi अभी .

ऋतू सिंह : क्या मुझे उसका no. मिल सकता है ?

कल्पना : no. तो आप ले लीजिये पर मुझे लगता है फ़ोन पर बात करने की बजाये आप को खुद उससे मिल कर बात करनी चाहिए .

ऋतू सिंह : ok अब मुझे चलना चाहिए . नीस तो मीट यू आल. एंड शालू बिलीव में उसे कुछ नहीं होगा .

उसके बाद ऋतू सिंह चली गयी. शिवानी और शालू ने उसके बारे में पूछा तो शीना ने सब बता दिया . ये सब सुन कर उन दोनों को भी अमित की चिंता होने लगी . सबसे ज्यादा शालू को दुःख हो रहा था क्यूंकि उसके लिए तो अमित देवता hi था उसका. वो उससे मिलने को उसे देखने को तड़पने लगी. कल्पना ने उन्हें हिदायत दे दी क राधा नेहा क सामने कोई बात न की जाये.

इधर मैं गाओं में किसी काम से बहार गया था क मुझे मोहित का फ़ोन आने लगा .

अमित : हाँ भाई कैसा है बता कैसे यद् किया ?

मोहित : यार यहाँ बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो गयी है

अमित : क्या हुआ ? तू इतना घबरा क्यों रहा है ?

मोहित : पापा को हॉस्पिटल में एडमिट करवाया है उनको हार्ट अटैक हुआ है . मुझे बहुत दर लग रहा है



अमित : क्या ????
 
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