अपडेट 129
आज ट्यूसडे था और आज मुझे हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने वाली थी. मुझे घर ले जाने क लिए मोहित आंटी और दिव्या मौसी आये हुए थे. डॉ रीना साडी रत मेरे साथ hi रही और इस वक़्त वो घर जा चुकी थी. बिल क्लियर करने क बाद डॉ से कुछ मेडिसिन और हिदायतें लेने क बाद हम घर चले गए . आज दिव्या मौसी पहली बार मोहित क घर आयी थी और वो बहुत खुश भी थी इतना बड़े घर को देख कर . आंटी ने मुझे ऊपर वाले कमरे की बजाये नीचे रहने को कहा और अपने साथ वाला कमरा दे दिया. आंटी दिव्या मौसी को घर रोक कर रखना चाहती थी पर वो नहीं मणि. उन्हें राधा क आने से पहले घर जाना था और खाना वगैरह भी करना था. मुझे घर आने का कह कर वो मोहित क साथ घर चली गयी . मैं भी अब काफी बेहतर था बस हिलने जुलने से बीच बीच में ज़ख्मों में दर्द होने लगता था लेकिन वो भी ज्यादा नहीं था. आंटी मेरे पास hi बैठी रही और रानी को भी सख्त हिदायत दी क वो मेरा खास ख्याल रखे.
मैंने मंजू म को दो दिन से खुद से मिलने आने नहीं दिया था मगर दिन में 2-3 बार उनसे फ़ोन पर बात हो जाती थी. वो इस बात से नाराज़ भी थी क मैं उन्हें मिलने आने क्यों नहीं देता. मैंने सोच लिया था क मैं खुद hi उनसे मिलने उनके पास जाऊंगा .
दोपहर को आज कल्पना और राधा मुझसे मिलने मोहित क घर आ गयी.
कल्पना : तो घर आ hi गए तुम , अब तबियत कैसी है? पता है कम्पटीशन भी आने वाले वाले हैं बस नेक्स्ट वीक hi है बीच में.
अमित : बस ज़ख़्म ठीक हो जाएँ तो तयारी शुरू करता हूँ. और बताओ क्लास कैसे चल रही है.?
कल्पना : सब ठीक है चन्दर्कांता को छोड़ कर हे हे हे
राधा : तुम हमारे घर भी तो चल सकते थे न फिर यहाँ क्यों आ गए?
अमित : तुम्हारे घर भी आऊंगा न नेक्स्ट वीक से. अभी क्या है न एक तो मेरा सारा सामान यहाँ है दूसरा मुझे अगर मदद चाहिए हो तो यहाँ मोहित है , वहां किसे कहता ? तुम और मौसी hi तो हो घर पर
राधा : क्यों , मैं भी तो कर सकती थी न मदद .
अमित : पर तुम कैसे , मेरा मतलब है तुम एक लड़की हो
राधा : तो क्या हुआ , तुम्हारे लिए इतना तो कर सकती हूँ न .
कल्पना : मेरी भोली बेगम वो क्या कह रहा है समझ नहीं रही तुम ? मतलब उसे बाथरूम वगैरह जाना हो तो क्या तुम ले कर जाओगी उसे ?
कल्पना की इस बात पर राधा शर्मा गयी और सर झुका लिया.
राधा : मैं तो वो ....
अमित : तुम चिंता मत करो मंडे से मैं तुम्हारे घर आने वाला हूँ .
राधा : पक्का न ??
राधा क चेहरे पर एक ख़ुशी नज़र आ रही थी और वो जैसे यकीन करना चाहती थी क मैं जो कह रहा हूँ वो सच hi है या नहीं
अमित : प्रॉमिस , अगला पूरा हफ्ता मैं तुम्हारे घर रुकने वाला हूँ. तुमने भी तो सुना था न रीता मौसी ने क्या कहा था .
कल्पना : कभी गलती से मेरे घर भी आ जाओ या फिर तुम्हे किडनैप कर क ले जाना पड़ेगा?
अमित : आऊंगा आऊंगा लेकिन पहले ठीक तो हो जॉन. क्या ऐसे मिलाना चाहती हो अपनी फॅमिली से.
कल्पना : मेरी फॅमिली मेरे पापा hi हैं. और उन्हें मैंने सब बता रखा है आलरेडी तुम्हारे बारे में. आने से पहले तुम्हे बताना होगा, पापा का कुछ पता नहीं होता वो कब मिलेंगे कब नहीं . वो कब खान निकल जाये कुछ पता नहीं होता.
अमित : लगता है तुम्हारे पापा भी अंकल की तरह कोई बड़े बिजनेसमैन हैं.
कल्पना : ऐसा hi समझ लो.
राधा : माँ आयी थी यहाँ?
अमित : हाँ मौसी आयी थी और तुम्हारे आने से आधा घंटा पहले hi मोहित उन्हें घर छोड़ने गया है.
राधा : ाचा अब मैं भी चलती हूँ माँ इंतज़ार कर रही होगी .
कल्पना: ाचा तो मैं भी चलती हूँ , राधा को घर छोड़ कर मैं भी जाती हूँ.
राधा : तुम पक्का आओगे न ?
अमित : हाँ हाँ पक्का आऊंगा
राधा हाथ हिलती हुई चली गयी . आंटी ने दोनों को लंच क लिए पूछा मगर दोनों रुकी नहीं . खाना खा कर मैं कुछ देर क लिए सो गया और आंटी भी मेरे पास hi थी.
उधर मोंटी रत क शराब क हैंगओवर से जब सुबह उठा तो उसका सर अभी भी चक्र रहा था . उसके बीएड पर एक लड़की अभी भी औंधे मुँह नंगी सो रही थी . दूसरे रूम में रघु भी नंगा क लड़की क साथ बीएड पर पड़ा हुआ था. मोंटी रूम क साथ आत्ताच बाथरूम में फ्रेश होने क बाद नहाने लगा तो बीएड पर सो रही लड़की आवाज़ सुन कर उठ गयी और बाथरूम का दरवाज़ा खुला देख कर वो भी नंगी hi अंदर आ गयी . कल रत मोंटी ने इस लड़की क साथ काफी मज़ा किया था और वो लड़की जो शायद सेक्स लवर थी मोंटी को ऐसे नंगा देख कर उससे चिपकने लगी . मोंटी ने उसे पीछे हटाने की कोशिश की मगर वो तो उसकी सुन hi नहीं रही थी . मोंटी भी ज्यादा देर उसे रोक नहीं पता और फिर वो लड़की उसे किश करती हुई घुटनो पर बैठ कर अब मोंटी क सोये हुए लैंड को मुँह में ले कर चूसने लगी . ये रत की शराब का हैंगओवर था या फिर कल रत सेक्स कुछ ज्यादा कर लिया था मोंटी ने क अब उसका लैंड खड़ा नहीं हो रहा था. वो लड़की जो देखने में बहुत सेक्सी थी और किसी का भी लैंड बिना हाथ लगाए अपनी अदाओं से hi खड़ा करने की काबिलियत रखती थी वो जी जान से कोशिश कर रही थी मगर मोंटी का लैंड खड़ा नहीं हो रहा था . पहले तो कुछ मिनट्स मोंटी यही सोचता रहा क रत को ज्यादा हो गया था इस लिए अभी खड़ा नहीं हो रहा मगर इतनी ज्यादा म्हणत क बाद भी लैंड में जब ज़रा सा भी तनाव नहीं आया तो उसे भी हैरानी हुई. वहीँ वो लड़की भी झुंझला गयी थी. अपनी पूरी काम कला का इस्तेमाल उसने कर लिया मगर रिजल्ट वही . आखिर में वो झुंझला कर कड़ी हो गयी और बुरा सा मुँह बना कर वापिस रूम में चली गयी. अब मोंटी को मुँह पर कुछ कहने उसकी हिम्मत तो थी नहीं. बस मन में उसे गालियां देती हुई अपना गुस्सा निकल रही थी. मोंटी भी सब भूल कर नहाने लगा उसे यही लगा क ये हैंगओवर का असर है . असल में उसके साथ कल रत क्या हो गया था इसका उसे खुद भी पता नहीं था .
दूसरी तरफ शीना आज भी कॉलेज नहीं गयी थी और घर पर hi थी शिवानी ने भी दोस्ती निभाते हुए कॉलेज से छुट्टी कर ली और शीना क साथ hi उसका मन बहलाने की कोशिश की.
मैं आराम से सो रहा था क मेरा फ़ोन बहने लगा . मैंने देखा तो ये कॉल मेघा की थी. एक पल तो मुझे गुस्सा hi आ गया मोंटी की वजह से मगर मैंने कुछ सोच कर फ़ोन उठा लिया .
मेघा : कहाँ गायब हो ? फ़ोन भी बंद रखते hi क्या ? मैंने सैटरडे को कितने फ़ोन किये , प्रोग्राम बनाना था और तुम पता नहीं कहाँ गायब थे ?
अमित : अब क्या करता मेरा एक्सीडेंट हो गया था . फ़ोन टूट गया था अभी न्य लिया है.
मेघा : क्या ???? एक्सीडेंट?? तुम ठीक तो हो न?
अमित : हाँ बस तंग पर चोट लगी है तो कुछ दिन आराम करूँगा
मेघा : मैं आती हूँ तुमसे मिलने
अमित : कहाँ आएँगी मैं तो गाओं में हूँ बहुत दूर . आप बस आराम करिये मैं जैसे hi ठीक हो जाऊंगा आपको फ़ोन करूँगा .
मेघा : अपना ध्यान रखना , मैं तुम्हारा इंतज़ार करुँगी .
अमित : मन में) तेरा तो वो हल करूँगा क यद् करेगी .
उसके बाद मैंने और कोई बात न की और फ़ोन काट दिया .
उधर सप ऋतू सिंह चाहे सीनियर क कहने पर रुक गयी थी मगर उसके मन में अमित क प्रति दुर्भावना आ चुकी थी . अमित क बारे में और जानकारी लेने क लिए उसने एक लेडी कांस्टेबल को भेष बदल कर कॉलेज की लड़कियों से सच जानने को कहा था. और जिस लेडी कांस्टेबल को उसने भेजा था वो भी अपनी रिपोर्ट लेकर आ गयी थी.
कांस्टेबल : मई ी के इन मम?
ऋतू सिंह : यस के इन
कांस्टेबल : है हिन्द मम , आपका शक सही था मम . वो लड़का वैसे तो रेसलिंग का प्लेयर है और पड़े में भी ाचा है . लेकिन एक लड़की न अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बताया है क उस लड़के पर पहले भी एक लड़की क साथ एटेम्पट तो रपे शिकायत दर्ज की गयी थी मगर किसी वजह से बात प्रिंसिपल और स्टाफ ने दबा दी थी.
ऋतू सिंह : मैं जानती थी वो बास्टर्ड ऐसा hi होगा . क्या तुमने उस लड़की का पता लगाया जिसके साथ उसने ऐसी हरकत की थी ?
कांस्टेबल : जी मम , पर वो लड़की 2-3 दिन से कॉलेज नहीं आ रही .
ऋतू सिंह : उसका कोई कांटेक्ट no या एड्रेस?
कांस्टेबल: no मम , वो तो कॉलेज क रिकॉर्ड से hi पता चल सकता है.
ऋतू सिंह : वो प्रिंसिपल शायद कुछ ज्यादा hi मेहरबान है उस लड़के पर . फ़ोन आया था प्रिंसिपल का कमिश्नर सर क पास , मेरी शिकायत की है . अब हम कॉलेज तो नहीं जा सकते इसी लिए तुम्हे भेजा था. जिसने तुम्हे ये इनफार्मेशन दी उसने कुछ और नहीं बताया ?
कांस्टेबल : जी वो कह रही थी क ये लड़का सब लड़कियों को गन्दी नज़र से hi देखता है.
ऋतू सिंह : इन जैसों को तो सीधा करना अछि तरह अत है मुझे. जिस लड़की की किडनेपिंग की शिकायत आयी थी ज़रा उसको कांटेक्ट करो और यहाँ बुलाओ . रुको ... यहाँ नहीं , एक लड़की को ऐसे बुलाना ाचा नहीं लगता . उससे मेरी बात करवाओ उसका कांटेक्ट no. लेके और अगर वो मिलना चाहती है तो हम खुद उनके घर चलेंगे .
ऋतू सिंह : मन में ) तेरी पहुँच जहाँ तो भी हो एक बार मेरे हाथ पक्का साबुत आ जाये फिर तुझे बताती हूँ क औरतों पर बुरी नज़र डालने वालों का क्या हल करती है ऋतू सिंह .
इधर शीना और शिवानी शीना क घर पर hi थी . जब उनकी दोनों सहेलियों नितिका और वैशाली उनसे मिलने आयी . नितिका तो ऐसे चहक रही थी क बहुत बड़ा मैदान मर लिया हो . दोनों को अभी तक पता नहीं था क शीना क साथ क्या क्या हो चूका था इन 3-4 दिनों में.
नितिका : कोंग्रटुलतिओन्स शीना , आज मैंने वो काम किया है क तू मुझे सर पे उठा लेगी . तेरे और मोंटी क दुश्मन का पक्का इंतज़ाम कर क आयी हूँ मैं .
शीना ने तो नितिका की किसी बात पर ध्यान hi न दिया पर शिवानी क तो कान खड़े हो गए सुनते hi.
शिवानी : किसकी बात कर रही है तू?
नितिका : एक hi तो है बास्टर्ड , देखना अब उसका क्या हल होता है. अब तो उसे कोई बचा नहीं पायेगा . ऐसा मामला फिट कर क आयी हूँ क वो तो गया .
शिवानी : गुस्से में ) तू क्या कर क आयी है साफ़ साफ़ बात
नितिका : तेरी क्यों इतनी जल रही है ? मैं शीना से बात कर रही हूँ .
शिवानी : तू बताती है या नहीं ?
वैशाली : बता दे यार या मैं बताऊँ
नितिका : तो सुन , उस देहाती को अब पुलिस नहीं छोड़ने वाली . अब तो वो अंदर भी जायेगा और कॉलेज से भी बहार निकल देंगे उसे .
शिवानी : चीखते हुए ) क्या किया है तूने ?
नितिका : तुझे क्या हो रहा है ? ऐसे रियेक्ट कर रही है जैसे वो तेरा बर्फ है. सुन , आज एक लड़की कॉलेज में उसके बारे में पूछ रही थी . मैं देख कर hi समझ गयी क वो कॉलेज की नहीं है. उसके पर्स से झांकता उसका िकार्ड देखते hi मैं समझ गयी क वो कोई पुलिस वाली है. 2 दिन पहले भी कॉलेज में पुलिस आयी थी और उसके बारे में hi पूछने आयी थी. वो भी 3-4 दिन से कॉलेज में नहीं दिखा मतलब कोई लफड़ा है . मेरा दिमाग खटका . मैंने भी पूरी एक्टिंग करते हुए उसे ऐसी ऐसी बातें बताई क अब वो साला बच नहीं सकता . उसे तो रेपिस्ट hi बना दिया मैंने . अब जायेगा जेल में देख लेना. ‘चतताआयककककक ‘
शिवानी को नितिका की बात सुनते hi इतना गुस्सा आया क वो नितिका का मुँह तोड़ने वाली थी मगर उससे पहले hi ये ज़ोरदार चांटा शीना ने दे मारा नितिका क मुँह पर .
शीना : यू बीच !! हाउ डरे यू तो दो सो ? तूने पता है तूने क्या किया है ? तूने उस लड़के पर झूठ इलज़ाम लगा दिया जिसने मेरी इज़्ज़त मेरी जान बचाई . तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ? जानती है वो कॉलेज क्यों नहीं आ रहा ? वो हॉस्पिटल में पड़ा है वो भी मेरी वजह से. मेरी इज़्ज़त बचते हुए वो ज़ख़्मी हो गया और तूने उसी पर ऐसा इलज़ाम लगा दिया? मैं तो पहले hi अपनी नज़रों में गिरा हुआ महसूस कर रही हूँ ऊपर से तूने मुझे और गिरा दिया . उसे जब पता चलेगा तो क्या सोचेगा वो ? क ये सिला दिया मैंने उसके एहसान का? मेरी नज़रों से दूर हो जाओ तुम दोनों इससे पहले क मैं भूल जॉन तुम दोनों मेरी दोस्त हो .
नितिका : शॉकेड ) ी ऍम सॉरी शीना पर मुझे पता नहीं था कुछ भी . मुझे तो लगा क तुम उससे बदला लेना चाहती हो तो इस लिए मैंने ऐसा किया .
शीना : बदला !! हहहह , वो सही था मैं hi गलत हूँ घटिया हूँ जो ऐसे दोस्त बना रखे हैं . वो तो हमेशा से hi सही था और मुझे भी तुम में से किसी ने नहीं रोका एक बार भी सिवाए शिवानी क. ऊपर से तुमने जो आज किया है अब तो मैं उससे माफ़ी मांगने क भी काबिल नहीं रही. जानती है क्या हुआ था मेरे साथ ? उससे बदला लेने hi चली थी मैं . राधा को उठवा लिया था हमने और अपने hi जाल में फंस गए. अगर अमित टाइम पर न अत वो सब मिल कर मेरा रपे कर देते . जब कोई नहीं था तब उसने अपने जान पर खेल कर मेरी इज़्ज़त बचाई और तूने उसी पर एक और इलज़ाम दाल दिया . अगर उसे कुछ भी हुआ तो अपना हाल सोच लेना और तुम जानती हो मुझे मैं कैसी हूँ
शीना की ऐसी बातें सुन कर नितिका की हवा टाइट हो गयी . वहीँ वैशाली भी ये बदलाव देख कर हैरान थी .
नितिका : ी ऍम सॉरी शीना , मैं तुम से माफ़ी मांगती हूँ प्लीज यार गलती हो गयी अगर मुझे पता होता तो मैं ऐसा कभी नहीं करती . मैं उससे भी माफ़ी मांग लुंगी यार प्लीज माफ़ कर दे.
शीना : जा पहले जा क जिससे शिकायत कर क आयी है उसे ढून्ढ क सच बता वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा
शीना को गुस्से में देख वैशाली नितिका को ले कर निकल गयी . मगर अब वो कहाँ ढूंढती उस पुलिस वाली को जिसको कभी देखा hi नहीं था .
शीना : ये क्या हो गया शिवानी
शिवानी : वही मैं सोच रही हूँ, पहले hi मैं कितनी शर्मिंदा हुई थी उस हरकत क लिए और इसने फिर से उसी बात को उछाल दिया है. अगर कहीं पुलिस ने उसे पकड़ लिया तो ?
शीना : मेरे होते ऐसा कुछ नहीं हो सकता . ज़रूरत पड़ी तो मैं पापा से बात करुँगी , वो सब ठीक कर देंगे.
2-3 घंटे आराम से सोने क बाद मैं जब शाम को उठा तो रूम में पहले से hi मोहित और नीरज बैठे हुए थे. मुझे देखते hi दोनों मेरे पास आ कर बैठ गए .
मोहित : अब साले हमसे बातें छुपाने लगा तू फिर से ?
अमित : क्या कह रहा है तू ?
नीरज : डरा भैया किधर आये थे ? बिना किसी खास काम क तो वो आने से रहे , ज़रूर तूने hi बुलाया होगा. तो अब बता क्या चक्कर है ये ?
मोहित : और झूठ तो बिलकुल मत बोलियों अगर ज़रा सी भी हमारी इज़्ज़त है तो .
अमित : क्या यार , मैं तुम लोगों इससे दूर रखना चाहता था इस लिए नहीं बताया था. अब पूछ hi रहे हो तो सुनो. उस मोंटी का हमेशा क लिए पत्ता साफ कर दिया है .
नीरज / मोहित : वो कैसे ? कहीं तूने उसे ....
अमित : अबे मैं कोई क्रिमिनल हूँ क्या जो उसे मरूंगा ? बस वो काम कर दिया है क वो अब अपनी खुद की बीवी से भी कुछ कर नहीं पायेगा .
मोहित : शॉकेड ) वो कैसे ?
अमित : डॉ रीना ने बताया था क मर्द को नामर्द बनाने क लिए एक इंजेक्शन आता है. उनके मुताबिक ऐसे लोगों का यही इलाज है और मैंने उनकी बात मन ली. कल रत मोंटी को उसकी उस बीमारी से आज़ाद कर दिया जो उसे लड़कियों क साथ गलत काम करने क लिए मजबूर करती थी . अब वो किसी क साथ कुछ नहीं कर पायेगा.
मोहित : ो तेरी की ,, तूने तो मैदान hi मर लिया . मगर सेल तूने ये सब किया कब? मैं तो तेरे साथ hi था न हॉस्पिटल में , फिर तू कब गया ?
अमित : बताता हूँ बताता हूँ , तुझे ये है जब तू सो गया था मैं डॉ रीना से बातें कर रहा था
मोहित : हाँ, बस उसके बाद रत 12 बजे डरा भैया अपने दोस्त को लेकर आ गए . और फिर
फ़्लैश बैक :-
अमित : डॉ रीना प्लीज मेरी ये पत्तियां हटा दीजिये वर्ण ये मेरी पहचान करवा देंगी अगर मैं किसी फुटेज में दिखा तो .
डॉ रीना : क्या तुम्हारा जाना ज़रूरी है ? ये काम कोई और नहीं कर सकता क्या ? तुम्हारे ज़ख़्म कहीं फिर से खुल गए तो ?
अमित : देखिये ये जंग मेरी है तो मुझे hi लड़नी होगी . इसी लिए तो मैंने आज यहाँ रुकना मन था. अभी जल्दी कीजिये .
डॉ रीना ने मेरे सर से पत्तियां हटा दी. और मुझे एक पैन किलर इंजेक्शन भी लगा दिया क कहीं दर्द न होने लगे ज्यादा . उसके बाद मुझे मोंटी को लगाने वाला इंजेक्शन देते हुए उन्होंने मुझे लगाने का तरीका भी समझाया. हॉस्पिटल में भी कक्तव लगे थे तो डॉ रीना ने खुद मुझे कामर्स से बचते हुए पीछे क रस्ते से बहार निकल दिया जहाँ डरा भैया मेरा इंतज़ार कर रहे थे. वहीँ से मैं उन दोनों क साथ चल पड़ा. मोंटी कहाँ है ये मैंने पहले hi पता कर लिया था. 1 बजे क लगभग हम इस जगह पहुंचे जो शहर से बहार एक बड़ा सा फार्महाउस था . गेट पर सिक्योरिटी गार्ड और कामर्स लगे थे . मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था इस लिए हम तीनो ने अपने मुँह सर अछि से कपडा बांध कर छुपा लिए और एक और से दीवार फंड कर अंदर चले गए . एक साइड में बिजली क कनेक्शन वगैरह का बॉक्स लगा था जहाँ से डरा भैया ने फ्यूज निकल दिया और हम पीछे की खुली हुई खिड़की से अंदर घुस गए . अंदर से पूरी शांति थी और अँधेरा भी था बस 2 रूम्स से रौशनी बहार आ रही थी. इन्वर्टर से चलने वाली होगी शायद. मैंने पहला रूम चेक किया तो वहां मोंटी का दोस्त रघु नंगा लेता था और एक लड़की भी उसके साथ थी . मैंने दूसरा रूम देखा तो वहां भी एक लड़की नंगी पड़ी थी . शीना रूम्स में पड़ी शराब की बॉटल्स देख कर मैंने अंदाज़ा लगा लिया क सब शराब पि क नशे में सोये हैं. मगर मोंटी मुझे वहां नज़र नहीं आ रहा था . ऊपर जाती सीढ़ियों से मुझे लगा क वो ऊपर होगा शायद. जैसे hi हम ऊपर जाने लगे तो मेरी नज़र हाल में पड़े सोफे पर पड़ी जहां कोई लेता हुआ था . पास जा कर चेक किया तो ये मोंटी hi था. जो सिर्फ अंडरवियर में था और उसके हाथ से छूट कर एक बोतल निचे लड़की पड़ी थी .
मोंटी को देख कर मेरा गुस्सा सर पर चढ़ गया मैं उसे मरने क लिए आगे बड़ा तो उसे नशे में धुत्त देख कर एक बार क लिए मैं रुक गया . जो इंसान होश में hi न हो उस पर हाथ उठाना कहे की मर्दानगी. बस इसी लिए मैं उन्हें रुक गया . फिर मेरे दिमाग में आया क क्यों न मोके का फायदा उठाया जाये. इस लिए मैंने चुप चाप वो इंजेक्शन उसके पिछवाड़े में घुसा दिया. वो इतना टुन्न था क उसे पता भी नहीं चला क उसके साथ क्या हुआ.
इंजेक्शन लगाने क बाद मैंने डरा भैया को चले को कहा तो वो मुझसे गुस्सा होने लगे
डरा : ये क्या कर रहा है तू भाई ? यही है न वो कुत्ता ? चल इसी हड्डी पसली तोड़ते हैं , इसका भी वही हल करते हैं जो इसके साथियों का किया था .
अमित : नहीं भैया उसकी ज़रूरत नहीं है. वैसे भी मरे हुए को क्या मरना. रही बात सजा की तो वो अभी मैंने उसे दे hi दी है.
डरा : मैं समझा नहीं
अमित : भैया अभी जो इंजेक्शन मैंने लगाया है न वो आदमी को नामर्द बना देता है. अब ये साला किसी क साथ कुछ करने क काबिल hi नहीं रहेगा .
डरा : सच में ऐसा होता है ?
अमित : हाँ भैया , रही बात इसकी ठुकाई की तो जब ये होश में मुझसे टकराएगा तो हिसाब बराबर कर लेंगे .
उसके बाद हम जैसे आये थे वैसे hi वापिस चले गए . डरा भैया मुझे हॉस्पिटल क पीछे उतर कर चले गए जहाँ से डॉ रीना मुझे उसी तरह से अंदर ले गयी और फिर से मेरी पट्टी कर दी.
अमित : ये था सारा किस्सा .
मोहित : ो तेरी की , मान गए यार तूने तो सारा काम hi ख़तम कर दिया , न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी. अब साला किसी लड़की क साथ कैच करने क लायक hi नहीं रहा
नीरज : सुबह जब वो होश में आएगा तो कुछ पता भी नहीं चलेगा क उसके साथ क्या हो गया है.
अमित : बस यार एक गलती हो गयी, अब जिससे उसकी शादी होगी वो बेचारी क्या करेगी?
मोहित : अब तूने किया है तो उसकी ज़िम्मेदारी भी तुम्हारी है. है है है
हम तीनो ऐसे hi है है क बातें करने लगे . और बाद में करुणा दीदी क साथ रीता मौसी भी मेरा हल चल लेने आयी. रजनी मौसी से फ़ोन और hi बात हुई. नीबाज मेरी बाइक घर छोड़ गया था. मैं अभी बाइक चलने क काबिल नहीं था तो इस लिए मैं घर पर hi रहा मगर अब हालत पहले से कहीं बेहतर हो चुकी थी . ये दिन भी ऐसे hi गुज़र गया .
अगले दिन सुबह मैं बेहतर फील कर रहा था तो कॉलेज जाने क लिए मैं रेडी हो गया. मोहित भी इतने दिनों से नहीं गया था. हम दोनों कार में बैठ कर कॉलेज क लिए निकल गए . मीनल की माँ भी घर पर आ चुकी थी और उसकी भाभी उनका ख्याल रख रही थी तो वो भी आज कॉलेज जा रही थी हमारे साथ. मीनल से पहले भी मेरी बात हो चुकी थी मोहित क ज़रिये तो वही नार्मल बातचीत करते हम कॉलेज पहुँच गए . कॉलेज में hi नेहा दीदी कल्पना और राधा मुझे मिल गयी. वो मुझे देख कर खुश भी थी और हैरान भी क मुझे तो अभी और रेस्ट करना चाहिए था. खैर हम जब क्लास में गए तो चन्दर्कांता ने मुझे क्लास से बिना बताये एब्सेंट रहने क लिए फटकारा मगर सर पर लगी पट्टी अपने आप में गवाह थी .
चन्दर्कांता: इतने दिन से कहाँ गायब थे तुम ? ये चोट कहाँ से लगवा कर आये हो ? मारपीट करने का शोक है तो पड़े छोड़ दो.
मोहित चन्दर्कांता की बात का जवाब देने क लिए खड़ा होने hi लगा था क मैंने उसे रोक दिया. मगर चन्दर्कांता इतने से कहाँ रुकने वाली थी , उसे भी पता था क पुलिस मेरे बारे में पूछती हुई आयी थी मगर उसके बाद क्या क्या हुआ है या प्रिंसिपल सर की क्या बात हुई है वो उसे नहीं पता थी . चन्दर्कांता मुझे प्रिंसिपल सर क पास ले गयी . प्रिंसिपल सर क ऑफिस में हमेशा की तरह इस वक़्त प्रोफ व् भी बैठे थे मैंने जाते hi दोनों से आशीर्वाद लिया.
प्रिंसिपल: कहिये मैडम क्या बात है?
चन्दर्कांता: सर थिस स्टूडेंट इस इर्रेगुलर एंड इर्रेस्पोंसिबले इन क्लास. ये लड़ाई झगड़ों में लगा हुआ है जिससे कॉलेज का नाम बदनाम हो रहा है. अब तो इसकी वजह से पुलिस भी कॉलेज आने लगी है.
प्रिंसिपल: आपसे किसने कहा क पुलिस इसकी वजह से कॉलेज में आयी है?
चन्दर्कांता: वो सर सब लोग इस बारे में बातें कर रहे थे .
प्रिंसिपल: सुनी सुनाई बातों पर यकीन नहीं करना चाहिए मैडम. क्या ये स्टडी में ध्यान नहीं दे रहा ? अगर ऐसा है तो मैं एक्शन लूंगा . क्या रिजल्ट था इसका ज़रा बताइये मुझे .
चन्दर्कांता की तो जैसे बोलती बंद हो गयी थी .
चन्दर्कांता: वो सर रिपोर्ट तो इस वक़्त मेरे पास नहीं है . मैं ऐसे बता नहीं पाऊँगी .
प्रिंसिपल: अमित तुम्हे तो पता होगा रिजल्ट अपना ?
अमित : जी सर .
प्रिंसिपल: कितने परसेंट मार्क्स मिले.
अमित : सर ओवरआल 82 और हिस्ट्री में 85
मेरे जवाब पर चन्दर्कांता को जैसे और मिर्ची लग गयी पर प्रिंसिपल सर बे बात ख़तम करते हुए कहा.
प्रिंसिपल: मैडम अमित हमारे कॉलेज का नाम रोशन करने वाला स्टूडेंट है. मुझे यकीन है ये स्पोर्ट्स और स्टडी दोनों में hi ाचा परफॉर्म करेगा . अगर थोड़ा बहुत कहीं कोई कमी रह भी जाती है तो क्या हम इतना टोलेराते नहीं कर सकते ?
चन्दर्कांता: जी सर
प्रिंसिपल: आप जा सकती हैं , आपकी क्लास चल रही है शायद और अमित तुम यहीं रुको.
चन्दर्कांता क पास कहने को कुछ था नहीं तो जल्दी से वापिस चली गयी . मगर प्रिंसिपल सर ने मुझे क्यों रोका ये मुझे समझ नहीं आ रहा था.
प्रिंसिपल: तुम्हे पता है मैंने तुम्हे क्यों रोका है?
अमित : जी नहीं सर
प्रिंसिपल: मैं जानना चाहता हूँ क ऐसा क्या हो रहा है जो मुझे पता नहीं है. कॉलेज टूर से लड़की का किडनैप जो तुम्हारी कजिन है. शीना क किडनैप में तुम्हारा नाम आना , और पुलिस का तुम्हे ढूंढते हुए यहाँ आना. ये सब क्या है. और यकीन ये चोट भी तुम्हे वहीँ से लगी है .
अमित : जी सर वो ....
प्रिंसिपल: डरो नहीं , हम तुम्हारी कजिन से आलरेडी बात कर चुके हैं मगर मुझे लगता है क उसे भी पूरी बात पता नहीं है जो तुम्हे पता होगी .
प्रोफ व् : कॉमन अमित , हमारे सिवा कोई नहीं है यहाँ. तुम्हे कोई कुछ नहीं कहेगा . हमें शक तो है पर तुम्हारे मुँह से सुन्ना चाहते हैं हम.
अमित : सर मुझे किसी ने खबर दी थी क राधा का किडनैप होने वाला है . मैं उसे बचने क लिए hi पीछे गया था. नेटवर्क न होने की वजह से किसी से बात नहीं हो प् रही थी वर्ण शायद ऐसा न होता . मैं जब वहां पहुंचा तो वो राधा को उठा कर ले जा चुके थे . अगर वहां पर हमारी नज़र उन गाड़ियों पर न पड़ी होती और वो चेक पोस्ट वालों ने हमें न बताया होता तो शायद मैं राधा को बचा नहीं पता. हैरानी तो मुझे इस बात पर थी क तो वहां शीना भी मौजूद थी और उसके साथ भी वही सब वो लोग करने वाले थे.
प्रोफ व् : कौन थे वो लोग और उन्होंने ये सब क्यों किया? क्या दुश्मनी है उनकी तुम्हारे साथ ? और तुम्हे बताय किसने?
अमित : सर वो लोग हमारे कॉलेज से नहीं थे. , मेरी मदद जिसने की है मैं उसके बारे में आपको बता नहीं सकता . रही बात दुश्मनी की तो ये मुझे भी समझ नहीं आ रही.
प्रोफ व् : तो तुम नहीं बताओगे , वैसे इतना तो हम समझते हैं क इसके पीछे कौन है. पर सीधा सीधा वो शामिल नहीं था इस लिए उसे कुछ कह नहीं पाएंगे . शीना वहां कैसे पहुंची ? और इतनी सफाई से कोई इतने लोगों में से कैसे किसी को ले जा सकता है ? और किसी को पता तक नहीं लगा ? मुझे लगता है किसी ने मदद की है उन लोगों की शायद स्टाफ में से hi . वर्ण आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ था . एनीवे मैं चाहता हूँ तुम सतर्क रहो .
प्रिंसिपल: शीना अभी तक कॉलेज नहीं आयी है मगर हमें पता है क वो सुरक्षित है और घर पर है. उसने खुद हमें फ़ोन पर बताया है. पुलिस का यहाँ आना गलत था और बेवजह तुम्हे फसाया जा रहा था. मैंने कमिश्नर से बात कर ली है कोई तुम्हे कुछ नहीं कहेगा . मगर मुझे भी लगता है क तुम्हे स्टार्क रहना चाहिए और किसी भी तरह क लड़ाई झगडे से बचो. अब तुम भी जा सकते हो और हाँ ज़रा अपनी टीचर का भी मान रख लिया करो . मैं जनता हूँ तुम गलत नहीं पर वो टीचर हैं तो कोशिश करो ऐसी सिचुएशन न hi बने क यहाँ तक आना पड़े.
अमित : जी मैं ख्याल रखूँगा सर , थैंक यू सर
मैं प्रिंसिपल सर क ऑफिस से निकल कर अपनी क्लास की और चल पड़ा . प्रोफ व् ने लास्ट में जो बात कही थी उस पर मेरा ध्यान नहीं गया था क स्टाफ से किसी ने मदद की हो सकती है मतलब कोई शामिल था मोंटी क साथ. टूर पर साइंस क hi टीचर थे तो मतलब वो जो भी है वो आगे भी कोई ऐसी हरकत कर सकता है . उसे ढूंढना भी अब ज़रूरी था. फ़िलहाल इस बात no झटकता मैं क्लास में पहुंचा . अभी मैं क्लास में आया hi था क बेल्ल बज गयी और पहला लेक्चर ख़तम हो गया. चन्दर्कांता अपने वही एक्सप्रेशन देते हुए चली गयी .
अगला लेक्चर मंजू म का था . वो जैसे hi क्लास में आयी तो मुझे देखते hi उनके चेहरे पर रौनक आ गयी . मगर खुद को काबू में रखते हुए वो अपनी चेयर पर बैठ गयी और अटेंडेंस लेने लगी. पूरा लेक्चर मम की नज़र मुझ पर hi लगी रही. और लेक्चर ख़तम होते hi हम अपने अड्डे पर चले गए , यानि क कैंटीन में. उधर से राधा मीनल और नेहा दीदी भी आ गए .
कल्पना : फाइनली इतने दिनों बाद आज कैंटीन में आना हुआ , मैं तो बहुत मिस कर रही थी यार ये अट्मॉस्फेरे.
अमित : क्यों ? तुम आती नहीं थी क्या?
कल्पना: मैं अकेली कैसे आती ? तुम तो थे नहीं ऊपर से मोहित और मीनल भी नहीं थे. राधा तो 2 दिन से आ रही है मगर ये भी कैंटीन में नहीं आयी तो बताओ अकेली क्या करती यहाँ पर?
मीनल : सही कहा यार , कॉलेज में न यही जगह सब से ज्यादा यद् आती है . स्पेशलय जब सब साथ होते हैं.
सब अपनी अपनी बात कर रहे थे तो मुझे कुछ यद् आया.
अमित : तुम लोग बातें करो मैं अभी आया ?
राधा : चिंता में ) तुम कहाँ जा रहे हो ? तुम्हारी चोट अभी ठीक भी नहीं हुई.
अमित : don’t वोर्री मैं यहीं हूँ अभी आया बस.
मोहित : मैं चलूँ क्या साथ?
अमित : नहीं मैं अभी आया बस.
मैं कैंटीन से निकल कर सीधा लाइब्रेरी में गया तो वहां एक दम पिन ड्राप साइलेंस था. बहार का चिखचिहड़ा अंदर नहीं आ रहा था. मैं जिसे ढून्ढ रहा था वो मुझे कही दिखाई नहीं दी. मैं थोड़ा आगे गया तो एक कार्नर में अकेले किताबें खोल कर पद रही रीमा मुझे दिखाई दी. एक पल तो उसे देख कर मैं हैरान hi हो गया. रीमा कितनी बदल गयी थी. पहले से कहीं ज़्यादा पतली लग रही थी और चेहरा भी जैसे मुरझा सा गया था . आँखों पर चश्मा लगाए वो बस जैसे किताब में hi डूबी हुई थी. सिंपल से कपड़ों में अब वो पहले जैसी रंगत से बिलकुल उलट थी. जैसे उसने सजना संवारना का भी सीखा hi न हो. या यूँ कहो क उसे अब इस बात से कोई मतलब hi न हो. उसे इस हालत में देखते हुए मुझे यद् आने लगा क उसकी मुस्कान कितनी प्यारी थी और उसका वो मेरे प्रति प्यार और झुकाव जिसे मैंने सिर्फ इस लिए ठुकरा दिया था क वो मोंटी की बहिन थी. बहिन तो वो आज भी मोंटी की थी मगर उसने राधा क बारे में बता कर जो मुझ पर एहसान किया था उसका मैं मोल नहीं दे सकता था. अगर रीमा ने मुझे न बताया होता तो शायद मैं कभी राधा को बचा hi नहीं पता.
कुछ पर रीमा को देखता हु मैं अपनी सोच में डूबा रहा और फिर किसी की आवाज़ से मेरी तन्द्रा टूटी . मगर रीमा अभी भी वैसे hi बैठी थी. मैं चल कर उसके पास जा कर खड़ा हो गया मगर उसने मेरी तरफ देखा भी नहीं जैसे उसे आसपास की परवाह hi नहीं थी. मैंने रीमा की किताब बंद कर दी तब कही जा कर उसने निगाहें ऊपर की .
अमित : ी ऍम सॉरी ,
रीमा की ऑंखें भी मुझे कुछ कमज़ोर सी लग रही थी और उसकी इस हालत का ज़िम्मेदार कहीं न कहीं मैं hi था. उसके दिल में मेरे लिए जो जज़्बात थे मैं उससे अनजान नहीं था और शायद मेरा उसे ठुकरा देना hi उसकी इस हालत की वजह थी. मेरे मुँह से और कुछ नहीं निकला सिवाए सॉरी की हालाँकि मुझे तो उसे थैंक यू कहना था. मगर मेरे सॉरी कहते hi रीमा की आँखों में पानी आ गया . उसकी ऑंखें बाद छलकने को hi थी पर उसने इसे रोकने की कोशिश करते हुए कहा
रीमा : सॉरी किस बात की ?
अमित : जो भी मैंने किया , मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. तुम्हारी इस हालत का ज़िम्मेदार मैं हूँ . मुझे माफ़ कार्डो.
रीमा : उनके ज़ेहन में मेरा नाम आ गया ,, आज दर्द मेरा मेरे काम आ गया .
रीमा क दिल से निकले ये अल्फ़ाज़ सीधा मेरे दिल पर लगे और उसकी आँखों क साथ साथ मेरी आँखों में भी नमी आ गयी . मैंने रीमा को गले लगते हुए अपनी बाँहों में कास लिया . इस वक़्त हम कहाँ थे आसपास कोण था मुझे जैसे इस बात की परवाह hi नहीं थी . मेरी धड़कने अचानक से तेज़ हो गयी थी और रीमा को गले से लगा कर एक अलग hi सुकून महसूस हो रहा था मुझे . रीमा ने भी मुझे अपनी बाँहों में कास लिया था. मैं कुछ देर ऐसे hi रीमा को गले से लगाए खड़ा रहा . मुझे जब अपनी साइन पर कुछ गिला गिला महसूस हुआ तो मैंने रीमा को अपने दूर कर के देखा तो वो रो रही थी और सिसकियाँ लेती हुई वो लगातार आंसू बहा रही थी . जैसे बहुत देर से उसने इन आंसुओं को रोक कर रखा हुआ था .
अमित : ी ऍम सॉरी रीमा ी ऍम रियली सॉरी . मैं गलत था जो तुम्हे खुद से दूर कर रहा था . और तुमने मेरे लिए क्या नहीं किया . अगर तुम मेरी मदद न करती तो मैं राधा को कभी बचा नहीं पता . प्लीज मुझे माफ़ कार्डो . प्लीज रोना बंद कार्डो .
रीमा : कुछ मत कहो प्लीज . मुझे कुछ देर अपने सीने से लगा रहने दो. मैं आज खुल कर रोना चाहती हूँ . कब से ये आंसू मैंने रोक कर रखे थे . मगर किसी को क्या बताती इसी लिए रो नहीं पति थी. आज मुझे रो लेने दो.
अमित : मगर तुम रो क्यों रही हो? रोना तो मुझे चाहिए जो मेरी वजह से तुम्हारी हे हालत हुई है. तुमने तो मुझ पर इतना बड़ा एहसान किया है जिसका मैं मोल दे hi नहीं सकता.
रीमा : कोई एहसान नहीं किया मैंने तुम पर . मैं जानती हूँ तुम अपनी कौसिन्स से बहुत प्यार करते हो. अगर उसके साथ कुछ गलत हो जाता तो तुम पर क्या बिट टी मैं जानती हूँ. और तुम्हे कुछ हो जाता तो क्या मुझे ाचा लगता? मैंने किसी पर एहसान नहीं किया मैंने अपने आप पर एहसान किया है.
अमित : इतना प्यार करती हो मुझसे ?
रीमा : मुझे नहीं पता क कितना पर मैं तुम्हारे लिए उम्र भर इंतज़ार करने को तैयार थी . मुझे उम्मीद थी एक न एक दिन तुम ज़रूर मेरे पास आओगे . भगवन इतना भी निर्दयी नहीं हो सकता क हर बार मुझे रुलाये .
अमित : नहीं रीमा , आज क बाद मैं तुम्हे रोने नहीं दूंगा. तुम्हारे प्यार को मैं पहले hi पहचान गया था बस मुझे दर था क कहीं मैं किसी क दुःख का कारन न बनु और देखो तुम्हे इंकार कर क भी मैं तुम्हारे दुःख का कारन बन hi गया.
रीमा : ये तो मेरा टेस्ट था , अगर मेरा प्यार सच्चा न होता तुम कभी वापिस न आते . अब मुझे फिर से छोड़ कर तो नहीं जाओगे न ?
अमित : नहीं बिलकुल नहीं
रीमा : मैं तुम्हे सब कुछ बता दूंगी , जो भी तुम पूछोगे . मैं कुछ नहीं छुपाउंगी. प्लीज मुझे ऐसा कभी छोड़ना मत. मैंने तुम्हे खो देने क दर से तुम्हे अपनी सचाई नहीं बताई थी मगर अब मैं सब कुछ बताउंगी तुम्हे .
अमित : उसकी ज़रूरत नहीं है रीमा , अब मुझे उससे कोई फरक नहीं पड़ता . मुझे किसी से कोई मतलब नहीं है . अब चलो मेरे साथ सब कैंटीन वेट कर रहे हैं .
रीमा : पर मैं ऐसे .....
अमित : कुछ नहीं होता तुम चलो .
मैं रीमा को लेकर कैंटीन की तरफ चल दिया. कैंटीन में सब मेरा hi वेट कर रहे थे और मेरे साथ रीमा को देख कर सब सरप्राइज हो गए. कल्पना तो पहले रीमा से मिली hi नहीं थी . इस लिए वो बस देख रही थी क ये लड़की कौन है.
अमित : राधा , अगर रीमा ने मुझे उस दिन बताया न होता तो मैं कभी तुम्हारी मदद क लिए आ hi न पता . तुम आज सेफ हो तो इसी की वजह से . इसका शीना मोंटी क साथ क्या रिश्ता है मुझे उसकी परवाह नहीं पर आज से ये हमारी दोस्त है और हमेशा रहेगी
राधा : थैंक्स रीमा , मैं तुम्हारा एहसान कभी नहीं भूलूंगी .
इतना कह कर राधा में रीमा को गले लगा लिया .
उसके बाद नेहा दीदी ने भी रीमा को गले लगाया और मीनल ने भी .
कल्पना : कोई मुझे भी मिलवाएगा ?
मीनल : ये है रीमा हमारी क्लासमेट . रीमा ये है कल्पना अमित और मोहित की क्लासमेट और हमारी बॉडीगार्ड.
कल्पना : मैं सिर्फ नेहा दीदी और राधा की बॉडीगार्ड हूँ तुम्हारा तो मोहित है. Hi रीमा नीस तो मीट यू एंड थैंक्स तुमने जो राधा क लिए किया. आज से मुझे भी अपना दोस्त समझो.
रीमा : थैंक्स .
मोहित : ये क्या रीमा तुम तो अछि भली हुआ करती थी और अब ये क्या हालत बना ली है. मोहित क सवाल से रीमा और मेरी नज़र एक बार आपस में मिली फिर उसने जवाब देते हुए कहा.
रीमा : वो मैं बीमार पद गयी थी न इस लिए ऐसी हो गयी हूँ. मगर अब जल्दी ठीक हो जाउंगी मुझे डॉ जो मिल गया है
कल्पना : ोये होये , तुम तो बड़ी चालक निकली यार . आते hi डॉ ढूंढ लिया और यहाँ देखो राधा नेहा दीदी और मैं अभी तक खली हैं. ये महाशय भी किसी को पसंद नहीं करते पता नहीं कैसी लड़की चाहिए इसे.
मैंने रीमा को आँखों से इशारा करते हुए मन किया क वो कोई ऐसी बात न करे. रीमा भी समझ गयी और उसने बात बदल दी
रीमा : मेरा मतलब था क अब मेरा इलाज ठीक से हो रहा है. अब मैं जल्दी hi पहले जैसी हो जाउंगी . वैसे तुम बातें बहुत अछि करती हो .
अमित : ज़रा बच कर रहना , लेडी ब्रूस ली है ये .
कल्पना : लगता है हॉस्पिटल से तुम्हार जी नहीं भरा अभी .
हमारी महफ़िल अभी लगी थी क बेल्ल बजते hi हमें सभा समाप्त करनी पड़ी . और सभी अपनी अपनी क्लास की और चल पड़े . जाते हुए रीमा बार बार पलट कर मुझे देख रही थी और उसके चेहरे पर अलग hi ख़ुशी झलक रही थी .