Adultery Manhoos se mahan tak - Page 16 - SexBaba
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Adultery Manhoos se mahan tak

भाई अपडेट पर hi काम कर रहा हूँ थोड़ा बड़ा हो रहा है सन बनते बनते
 
अपडेट 123



मैं मंजू म को लेने क लिए गया तो मम रिसेप्शन पर hi कड़ी थी और येलो सूट में फूल की तरह खिली हुई लग रही थी. मेरा दिल चाहा क उन्हें अभी बाँहों में भर कर अपनी ख़ुशी उनके साथ बचन पर मैं ऐसा नहीं कर सकता था मगर मेरे चेहरे से वो भी समझ गयी क मैं कितना खुश हूँ.

मंजू म : बहुत बहुत मुबारकबाद तुम्हे , लगता है अपनी ममी क बचा होने की तुम्हे कुछ ज्यादा hi ख़ुशी है.

अमित : होगी hi न और मुझे क्या सबको hi है , इतने सैलून बाद जो मां क घर बचा हुआ है .

मंजू म : फिर तो पार्टी बनती है , मुझे नहीं मिलवाओगे अपनी ममी से ?

अमित : हाँ हाँ क्यों नहीं चलिए

‘ अरे मम आप और यहाँ ? ‘ ये आवाज़ कल्पना की थी जो मंजू म को मेरे साथ देख कर हैरान हो रही थी. कल्पना क साथ राधा भी आयी थी .

मंजू म : कल्पना तुम भी यहाँ हो ? कैसी हो तुम ? और राधा तुम कैसी हो?

राधा : मैं भी ठीक हूँ , आप कैसी हैं ?

कालापन : मम आप ने बताया नहीं आप यहाँ कैसे ?

मंजू म : क्यों मैं नहीं आ सकती क्या? लगता है अमित ने तुम्हे बताया नहीं मेरे बारे में

कल्पना और राधा दोनों hi मेरी तरफ देखने लगी.

मंजू म : मैं खुद hi बता देती हूँ. असल में मैं अमित को कॉलेज से पहले hi मिली थी तब हम दोनों एक दूसरे को नहीं जानते थे. इसने मुझे गुंडों से बचाया था. बस उसके बाद मैं इसे कॉलेज में मिली और फिर इसे स्टडी में मदद करने लगी. मेरे लिए ये मेरे फॅमिली मेम्बर की तरह hi है. अब इस ख़ुशी क मोके पर मेरा शरीक होना तो बनता है न.

कल्पना : तो आज एक और अछि बात पता चल गयी इसके बारे में. सच में यार यू अरे तू गुड. मुझे ख़ुशी है क तुम मेरे दोस्त हो.

मंजू म : यस हे इस ा नीस गाए.

कल्पना और मंजू म दोनों मेरी तारीफ कर रही थी और राधा चुपचाप बस मुस्कुरा रही थी . मैं भी क्या जवाब देता इन बातों का . उसके बाद हम दीपिका ममी क रूम की तरफ चल दिए . रूम में पहुंचे तो वहां पर करुणा दीदी और रजनी दीदी hi बैठे थे जबकि दीपिका ममी बीएड पर रेस्ट कर रही थी. हमारे अंदर आते hi मेरे साथ मंजू म को देख कर तीनो hi हैरान थी क्यूंकि कोई भी मम क बारे में नहीं जनता था. मैंने मम को ममी से मिलवाया.

अमित : ममी जी इनसे मिलिए ये हैं मंजू म कॉलेज में हमें इंग्लिश पड़ती हैं .

दीपिका ममी : ाचा तो यही हैं जिनको बचते हुए तुम्हे चोट लगी थी. वैसे आप तो काफी यंग लग रही हैं.

मंजू म : थैंक्स फॉर थे कॉम्पलिमेंट . वैसे आप भी काफी यंग हैं . जैसा सोचा था उससे बिलकुल hi उलट पाया आपको. आपको बहुत बहुत बधाई . अमित ने बताया क आपको इतने सालों बाद बीटा हुआ है.

दीपिका ममी : जी शुक्रिया , सच कहूं तो ये सब इसकी दुआओं का hi नतीजा है. हमारे घर की जान यही तो है.

मंजू म : ये है hi ऐसा , दिल का बहुत ाचा है और दूसरों क दुःख दर्द को न सिर्फ समझता है बल्कि सहारा भी देता है.

दीपिका ममी : लगता है आप अचे से जानती हैं इसे.

मंजू म : जी मेरे पास ट्यूशन जो पड़ने अत है और मुझे अपनी बहिन बना रखा है इसने. सच कहूं तो इसके आने से पहले मैं बिलकुल अकेली हो गयी थी मगर अब लगता है क मेरा भी कोई है.

मंजू म ने सीरियस लहजे में ये कहा तो एक पल क लिए सब खामोश हो गए और सबकी नज़रें मेरी तरफ hi थी.

अमित : अरे आप सब चुप क्यों हो गए ? दीदी मम को कुछ दीजिये न खाने पिने को .

मंजू म: रहने दो , मैं कोई मेहमान थोड़ा हूँ.

नैना दीदी : ऐसे कैसे रहने दें , आप टीचर हैं काम से काम इतना तो रेस्पेक्ट बनता hi है.

नैना दीदी ने जल्दी से जूस गिलास में दाल कर मम को दिया .

अमित : दीदी , मौसी और मां कहाँ गए ?

करुणा दीदी : वो डॉ ए थे तो उनके साथ बात करने गए हैं दोनों शायद .

मंजू म : राधा और कल्पना का तो मुझे पता है , इनसे नहीं मिलवाओगे मुझे ?

अमित : सॉरी मम , ये है नैना दीदी मेरे सबसे बड़ी मौसी की बेटी और गर्ल्स कॉलेज में पड़ती हैं . ये हैं करुणा दीदी मेरी दूसरी मौसी की बेटी और नेहा दीदी की छोटी बहिन . नेहा दीदी को तो आप जानती hi हैं न

मंजू म : हाँ हाँ उसे तो कॉलेज में मिल चुकी हूँ. वैसे तुम्हारी साडी बहने खूबसूरत हैं. तुम भी शायद गर्ल्स कॉलेज में hi होगी ?

करुणा दीदी : जी मम , वैसे आप भी काफी यंग हैं . अब पता चला आपके कॉलेज को इतनी तारीफ क्यों होती है सब तरफ . स्टूडेंट्स क साथ साथ फैकल्टी भी इतनी अछि जो है

करुणा दीदी की ऐसी बात पर मंजू म क चेहरे पर जहाँ मुस्कान क साथ शर्म आ गयी वहीँ बाकि सब हसने लगे.

दीपिका ममी : बस भी करो करुणा किसी को तो छोड़ दिया करो. वो टीचर हैं अमित की

मंजू म : it’s ok , वैसे भी मैं यहाँ टीचर की हैसियत से नहीं आयी.

हम अभी बात hi कर रहे थे क मेरे फ़ोन पर कमलेश मां का फ़ोन आने लगा . मैंने जल्दी से उनका फ़ोन उठाया

कमलेश मां : कहाँ पर हो तुम ?

अमित : मां जी मैं ममी क पास हूँ.

कमलेश मां : डॉ ने पैसे जमा करवाने को बोलै है और भैया अभी तक आये नहीं . तुम जाओ दिव्या क पास कुछ पैसे पड़े हैं उससे ले आओ .

अमित : कितने पैसे चाहिए मां जी?

कमलेश मां : 1 लाख जमा करवाने हैं और मेरे पास अभी 20 हज़ार हैं. भैया लेने गए हैं मगर अभी तक नहीं आये.

अमित : ठीक है मां जी मैं पैसे ले कर अत हूँ.

मैं फ़ोन पर बात करने क बाद रूम से निकलने लगा तो मंजू म ने रोक लिया.

मंजू म : कहाँ जा रहे हो तुम ?

अमित : जी मैं ज़रा काम से जा रहा हूँ 1 घंटे तक आ जाऊंगा

मंजू म : ठीक है तो मैं भी चलती हूँ . मुझे आज मार्किट जाना है

दीपिका ममी : अरे ऐसे कैसे ? आप बैठिये थोड़ी देर मेरे पास तब तक ये आ जायेगा

मंजू म : मैं फिर कभी बैठूंगी और घर पर भी आउंगी सब से मिलने . पर अभी मुझे जाना है. एक hi दिन तो टाइम मिलता है अपने लिए कुछ लेने का.

दीपिका ममी : ठीक है मगर आइयेगा ज़रूर

उसके बाद मंजू म मेरे साथ hi बहार निकल गयी. मैं मम को कार तक छोड़ ने गया तो मम ने मुझे भी कार में बैठने को कहा . मैं मन करने लगा तो मुझे अपनी कसम देकर ज़बरदस्ती बिठा लिया और कार लेकर चल दी.

अमित: आप मुझे कहाँ ले कर जा रही हैं . मुझे ज़रूरी काम से जाना है. मां मेरा वेट कर रहे हैं.

मंजू म : पता है मुझे तुम्हे क्या ज़रूरी काम है . सुन लिया था मैंने भी. पैसे लेने जा रहे हो न? आज तो बैंक भी बंद हैं तो किस्से लोगे पैसे ? किसी रिश्तेदार से hi लोगे न ? मेरे पास पड़े हैं घर पर वो ले लो .

अमित : ये आप क्या कर रही हैं? मैं कैसे आप से पैसे ले सकता हूँ?

मंजू म : इसका मतलब तुम मुझे अपना नहीं मानते ?

अमित : ऐसी बात नहीं है

मंजू म : ऐसी hi बात है , वर्ण तुम मन नहीं करते . और किसी से ले सकते हो बस मुझसे नहीं ये क्या बात हुई?

अमित : पर आप ?

मंजू म : बस बस मुझे कुछ नहीं सुन्ना . अगर अपना समझते हो तो पैसे ले लो नहीं तो कुछ कहने की ज़रूरत नहीं.

बातें करते करते हम घर पहुँच गए और मम मुझे सीधा अपने बीएड रूम में ले गयी और अलमारी से निकल कर पैसे मेरे सामने रख दिए.

मंजू म : ये 2 लाख हैं , और चाहिए तो बता दो मैं उसका भी इंतज़ाम कर दूंगी.

अमित : उसकी ज़रूरत नहीं है. बाबा गाओं से पैसे लेने गए हैं बस अभी तक आये नहीं और मुझे बस 80 हज़ार hi चाहिए . वैसे तो मैं अपने एटीएम से लेने जा रहा था पर वहां से इतने निकलेंगे नहीं. मौसी से बात की थी मां ने फिर भी आप ज़बरदस्ती कर रही हैं.

मंजू म : कोई बात नहीं , मैं क्या तुम्हारी नहीं ? तुम मेरे हो और तुम्हारी फॅमिली भी मेरी है . इस लिए चुप चाप पैसे रख लो और कुछ मत सोचो . ये सरे पैसे तुम ले जाओ.

मंजू म की ऐसी बातों से मुझे उन पर और भी प्यार आया . सचमुच वो दिल की कितने अछि थी , कितना बड़ा दिल था उनका. मैंने आगे बदले मंजू म को गले लगा लिया.

अमित : आप सचमुच बहुत अछि हैं . ी लव यू

मंजू म : ी लव यू 2 मेरा सब तुम्हारा hi तो है. मुझे ाचा लगता अगर तुम खुद हक़ से मुझे ये सब करने को कहते पर पता नहीं क्यों तुम मुझे कुछ कहते नहीं हो. आगे से कभी मुझसे ऐसे कुछ छुपाना नहीं. जो भी चाहिए ले लो मुझसे मांगने की या पूछने की ज़रूरत नहीं है.

मैंने मंजू म को और भी अपने सीने से कास लिया और उनके होंठो पर अपने होंठ रख कर किश करने लगा . सचमुच मंजू म मुझे दिल से चाहती थी और एक समर्पण सा था उनके अंदर मेरे लिए. मैंने कुछ देर उन्हें ऐसे hi अपने सीने से लगाए रखा.

अमित : मैं आपको जल्दी hi ये वापिस लौटा दूंगा और आप इस मामले में और कुछ नहीं कहेंगी वर्ण मैं ये पैसे नहीं लूंगा .

मंजू म : ाचा ठीक है जैसी तुम्हारी मर्ज़ी पर मुझे ज़रूरत नहीं है इनकी. अब तुम जाओ वर्ण फिर मैं जाने नहीं दूंगी.

अमित : अभी जाता हूँ पर टाइम मिलते hi वापिस ज़रूर आऊंगा और फिर आपको जी भर क प्यार करूँगा.

मंजू म: मैं इंतज़ार करुँगी पर पहले अपनी ममी को घर पर जाने दो तब तक तो तुम्हे उनका ध्यान रखना पड़ेगा.

अमित : जी बिलकुल ok bye

उसके बाद मैं ऑटो पकड़ कर सीधा हॉस्पिटल गया और जा कर 1 लाख रूपए मां को दे दिए जो उन्होंने हॉस्पिटल में जमा करवा दिए . रजनी मौसी वापिस जा चुकी थी नैना दीदी क साथ . इस वक़्त हॉस्पिटल में करुणा दीदी कमलेश मां कल्पना और राधा hi थे. दोपहर क खाने क समय दिव्या मौसी रीता मौसी नेहा दीदी और गौरी ममी भी आ गए. संडे था तो सब को छुट्टी होती है इस लिए आज निधि दीदी क साथ मौसा जी और कारन भैया भी आये थे. कल्पना उनके आने से पहले hi चली गयी थी और उसके बाद सब बरी बरी से चले गए. गाओं से अजय मां आये थे बाबा की जगह और वो भी बचे को देख कर बहुत खुश हुए. कामिनी ममी को ट्रेवल करवाने का रिस्क उन्होंने नहीं लिया पर फ़ोन से बात हो रही थी उनसे भी. मोहित भी शाम को अपनी हाज़िरी लगवा गया.

बात जब पैसों की आयी तो कमलेश मां ने मुझसे इस बारे में पूछा

कमलेश मां : अमित मैंने तुझे दिव्या से पैसे लेन को कहा था पर तू उसके पास नहीं गया फिर ये पैसे कहाँ से ले कर आया है ?

अमित : जी वो मेरे पास पड़े थे तो मैं वही ले आया सोचा क जब और ज़रूरत पड़ेगी तो मौसी से ले लेंगे

दिव्या मौसी : तेरे पास इतने पैसे कहाँ से ए?

अमित : जी वो बाबा में मेरे बैंक अकाउंट में डलवाये थे और कुछ अजय मां जी ने भी दिए थे कॉलेज की पड़े और खर्चे क लिए

दिव्या मौसी : वो पैसे तुझे अपने खर्चे क लिए मिले हैं न फिर क्यों तू ऐसे उदा रहा है ? हम हैं न देखने क लिए . चल ये पैसे रख अपने आप और आइंदा ऐसा नहीं होना चाहिए.

अमित : मौसी जी बात तो एक hi है न? ये पैसे भी तो मुझे घर से hi मिले और घरवालों पर खर्च करने से ाचा और क्या हो सकता है?

दिव्या मौसी : एक बार समझ में नहीं आया तुझे. भैया ने पैसे तुझे तेरी पड़े और खर्चे क लिए दिए हैं और उन्हें उसी पर खर्च करना. इधर उधर दोस्तों में या फालतू कहीं उड़ाए तो देख लेना.

गौरी ममी : अरे तुम दोनों ऐसे hi मेरे बचे क पीछे पड़े हो. तुम्हे तो तारीफ करनी चाहिए इसकी. कितनी अछि सोच है इसकी .

कमलेश मां : ये तो आपने सही कहा भाभी ये हमेशा सबके बारे में सोचता है .

दिव्या मौसी : पर भाभी मेरे पास पड़े थे न पैसे फिर इसे क्या ज़रूरत थी अपने पास से देने की?

गौरी ममी : अब जाने भी दे दिव्या , देख हमारा बीटा कितना समझदार है जो सबका ख्याल रखता है. उसने सोचा होगा क पहले अपने इस्तेमाल कर ले फिर ज़रूरत पड़ेगी तो तुझसे भी ले लेंगे. वैसे अब तो ज़रूरत पड़नी नहीं चाहिए

कमलेश मां : नहीं अब नहीं पड़ेगी . भैया पैसे दे गए हैं. और ये लो अमित तुम भी अपने पैसे वापिस रख लो

अमित : नहीं मां जी पहले हॉस्पिटल से घर चले जाएँ फिर बाद में देख लेंगे

दिव्या मौसी : बिलकुल नहीं , चलो पैसे रखो अपने पास.

दिव्या मौसी ने ज़बरदस्ती मुझे पैसे लेने पर मजबूर कर दिया . उसके बाद दिव्या मौसी राधा और कमलेश मां भी चले गए . रत का खाना हम लोगों ने खा लिया था. आज सारा दिन सबका आना जाना लगा रहा और हम भी बहुत थक गए थे.

करते करते रत हो गयी और कल की तरह आज भी मैं और माँ रत को दीपिका ममी क पास रुके.

रत को किसी पहर मेरी जग खुली तो मुझे अपने लैंड पर दबाव महसूस हो रहा था. कल तो जीन में होने की वजह से कुछ खास पता न चला था मगर आज मैं लूसे कपड़ों में था यानि क T-shirt और लोअर में इस लिए मुझे हलचल अछि तरह महसूस हो रही थी . मेरी नींद खुल तो गयी थी मगर मैंने आँखें धीरे से थोड़ी सी खोली तो देखा माँ क स्तन मेरे चेहरे क पास थे और वो अपने हाथों से मुझे अपनी छाती पर दबा रही थी. जबकि उनकी एक तंग मेरी कमर पर छड़ी हुई थी और वो अपनी कमर को मेरे लैंड पर दबा कर अपनी छूट पर मेरे लैंड को रगड़ रही थी. माँ की सदी कमर तक ऊपर उठी हुई थी. मेरा लैंड भी तन कर पूरा खड़ा था और सूपड़ा बिलकुल उनकी छूट पर लगा हुआ था . मुझे समझ नहीं आ रहा था मैं क्या करूँ. एक तरफ मेरे लैंड में पूरा तनाव था और जिस्म की गर्मी बाद चुकी थी जबकि दूसरी तरफ मुझे उनके साथ ये सब करना भी सही नहीं लग रहा था क्यूंकि वो मेरी माँ थी चाहे उन्होंने मुझे जनम नहीं दिया पर हमेशा माँ की तरह hi पला था. मैं अपनी सोच में डूबा था क मुझे माँ का एक हाथ अपने लोअर में घुसता हुआ महसूस हुआ. मैं उन्हें रोकना चाहता था पर मैं उन्हें रोक कर शर्मिंदा भी नहीं करना चाहता था. अगर मैं उनका हाथ रोकता तो उन्हें पता चल जाता क मैं जग रहा हूँ जबकि वो मुझे सोया हुआ समझ कर ये सब कर रही थी. लोअर और अंडरवियर में हाथ दाल कर उन्होंने मेरा लैंड हाथ में आते hi उन्होंने मुठी में कास लिया . मेरे जिस्म में झुरझुरी सी दौड़ गयी. मैंने बड़ी मुश्किल से खुद को रोका वर्ण मेरे हाथ माँ क जिस्म पर चलने वाले थे.

अब सिचुएशन ये थी माँ क स्तन ब्लाउज में से आधे से ज्यादा बहार झांकते मेरी आँखों क सामने थे और माँ मेरा सर अपनी छाती में दबा दिया है थी वहीँ माँ की सदी कमर तक ऊपर उठी हुयी थी और अपनी तंग मेरी कमर और चढ़ा कर वो अपनी छूट मेरे लैंड से रगड़ रही थी . एक हाथ से उन्होंने मेरा लैंड लोअर क अंदर हाथ दाल कर पकड़ लिया था . मैं नींद में होने की एक्टिंग करता माँ क 3-3 हमले एक साथ बर्दाश्त कर रहा था . मेरी धड़कन मुझे अपने कानो में महसूस हो रही थी. कमरे में जीरो का बल्ब लगा हुआ था ज्यादा रौशनी तो नहीं थी पर फिर भी पास से एक दूसरे को देखना मुश्किल नहीं था. माँ लगातार मुझे गरम कर रही थी और मैं सोने की एक्टिंग hi कर रहा था मगर कब तक? मेरा सबर जवाब देने लगा था. माँ ने एक कदम और आगे बड़ा कर मेरा लैंड बहार निकल लिया और जैसे hi अपनी छूट पर लगया तो मुझे छूट की नंगी फैंको का एहसास हुआ जो गीली थी. इसका मतलब था क माँ ने पेंटी पहले hi उतर दी थी. नंगी छूट पर लैंड लगते hi मेरा रहा सहा कण्ट्रोल भी ख़तम होने लगा और माँ क दबाव देते hi मैंने भी अपनी तरफ से थोड़ा दबाव दिया और लैंड फास्ट हुआ आधे सुपडे तक अंदर घुस गया.

गौरी ममी : आआआअह्हह्ह्ह्हह ccccccccccc उम्मम्मम्मम और कितना तड़पाएगा मुझे ? कामिनी और दीपिका की तरह मैं भी तो तेरी ममी हूँ , मुझे भी तेरा प्यार चाहिए फिर मुझे इस तरह क्यों तरसा रहा है.

माँ धीमी आवाज़ में ये सब फुसफुसा रही थी जैसे खुद से hi बात कर रही हो . उन्हें कहाँ पता था क मैं जग रहा हूँ. मगर गौरी मामी की ऐसी बातें सुन कर मुझे हैरानी हो रही थी क उनको कब पता चला कामिनी ममी और दीपिका ममी क बारे में? अब मेरे दिमाग में दीपिका ममी की बात आने लगी शायद वो इसी लिए मुझे गौरी ममी से प्यार करने को कह रही थी. कुछ बातें मुझसे छुपाई गयी हैं ममी द्वारा खैर उनसे तो बाद में पुछा जा सकता है फ़िलहाल मैं जिस सिचुएशन में था उससे निपटना ज़रूरी था. माँ की सीधी बातें सुन कर अब मैं सोचने पर मजबूर हो गया था क मुझे क्या करना चाहिए . वो अब खुद सामने से मुझे इन्विते कर रही थी मगर अभी भी मेरे अंदर कहीं न कहीं आवाज़ आ रही थी क ये सब सही नहीं है. पर लैंड महाराज तो बिना दिमाग क hi पैदा होते हैं उन्हें क्या क सामने कौन है बस घुसने की जगह चाहिए. जाने अनजाने मैंने एक और हल्का धक्का दे दिया और लैंड सुपडे क साथ एक इंच और अंदर घुस गया.

गौरी ममी : आआह्ह्ह्ह कक्कक्कक्स पूरा अंदर कर दे अब मुझसे रहा नहीं जाता . कब तक ऊपर ऊपर से रगड़ती रहूंगी ?

मैं चुप रहा और अपनी कमर को थोड़ा सा पीछे कर क एक और हल्का धक्का मारा तो 1 इंच और लैंड अंदर घुस गया.

गौरी ममी : आआह्ह्ह्ह कक्कक्कक्स उम्म्म्म कितना बड़ा है ये अंदर लेने में पसीने निकल रहा है . पता नहीं कैसे अंदर गया था ये मेरे. मैं इसे पूरा अंदर लेना चाहती हूँ .

इतना कह कर माँ ने मुझे ज़ोर लगा कर सीधा कर दिया और खुद मेरे ऊपर आ गयी. मैं अभी भी वैसे hi सोया हुआ रहा. मगर माँ ने मेरी कमर की दोनों तरफ अपने पाऊँ टिकते हुए अपना भर अपने पाऊँ पर डाला और धीरे धीरे मेरे लैंड पर बैठती गयी. अभी आधे से थोड़ा ज्यादा लैंड अंदर गया था क माँ रुक गयी. शायद उन्हें मुश्किल हो रही थी लैंड अंदर लेने में.

गौरी ममी : आअह्ह्ह ककक माआ पता नहीं दीपिका और कामिनी कैसे लेती हैं इतना बड़ा. आआह्ह्ह्ह कक्कक्स उम्म्म

धीरे धीरे माँ उतने hi लैंड को अंदर लिए ऊपर नीचे होने लगी. लैंड छूट में कैसा हुआ था और मुझे भी अब ाचा लगने लगा था मगर एक झिझक अभी भी मेरे अनादर थी जबकि माँ की स्पीड अब बढ़ती जा थी थी . मैंने अपने हाथों की मुठियाँ कास ली कहीं मेरे हाथ माँ क झूल रहे स्तनों तक न चले जाएँ. माँ खुद hi अपने स्तन दबाते हुए ऊपर नीचे हो रही थी. लैंड अभी भी 3 इंच तक बहार था. मगर माँ उतना hi ले प् रही थी. माँ शायद कई दिनों की प्यासी थी इस लिए ज्यादा देर खुद को रोक नहीं पायी और उनका पानी निकल गया. पानी निकलते hi वो मदहोश हो गयी और अपना भर न संभालती हुई वो एक डैम से लैंड पर बैठ गयी जिससे लैंड चिकनाई से भरी छूट में बिना रोक टोक क पूरा अंदर घुस गया मगर माँ क लिए ये आसान नहीं था और उन्हें एक डैम से दर्द का एहसास हुआ जिससे उनके मुँह से कराह निकल गयी

गौरी ममी : आआह्ह्हह्ह्ह्ह माआआआ मर गईइइइइइइ एआईईईई

दीपिका ममी : क्या हुआ दीदी ? आप चीख क्यों रही हैं

माँ की चीख से दीपिका ममी की नींद टूट गयी और बे ध्यानी में उन्होंने सवाल पूछ लिया मगर माँ को मेरे ऊपर देख कर शायद वो समझ गयी

गौरी ममी : को को कुछ नहीं वो आह्ह्ह्ह लगता है किसी कीड़े ने काट लिया नींद में.

दीपिका ममी : दीदी ध्यान से कहीं कीड़ा अंदर तो नहीं घुस गया? . . . . साडी में

दीपिका ममी ने रुक कर अपनी बात पूरी की जो इशारा था इस बात का क वो सब समझ चुकी हैं मगर मैं भी सोया hi रहा जान बुझ कर

दीपिका ममी : अमित सो रहा है क्या दीदी? इसे जगा लीजिये ये देख लेगा

गौरी ममी : नहीं नहीं रहने दे इसे सोने दे , मैं ठीक हूँ.

दीपिका ममी : वैसे दीदी सोये हुए कीड़ा कैसे कर सकता है ? आप अमित को आवाज़ तो दीजिये एक बार.

दीपिका ममी समझ गयी थी क मैं सोने की एक्टिंग कर रहा हूँ उनकी बात सही भी थी मगर माँ ने लाज शर्म क मरे शायद मुझे आवाज़ देना सही नहीं समझा और धीरे से मेरे ऊपर से सरक कर साइड में आ गयी. माँ ने चरम सुख प् लिया था इस लिए अब वो आराम से ले गयी खुद की हालत सही करती हुई मगर मैं वैसे hi पड़ा रहा . कुछ देर बाद मैंने भी अपने लैंड को कपड़ों में किया और माँ क बारे में सोचता हुआ सो गया.

अगले दिन सुबह माँ नार्मल रियेक्ट कर रही थी जबकि दीपिका ममी बार बार नज़रों क इशारे करते हुए मुस्कुरा रही थी जैसे कल रत की बात पर वो मुझे चिड़ा रही हो और न चाहते हुए भी मैं उनसे नज़रें चुरा रहा था. आज मंडे था और कॉलेज जाना था मगर मैंने दीपिका ममी क हॉस्पिटल से घर जाने तक कॉलेज न जाना hi ठीक समझा. कॉलेज जाने से पहले कल्पना राधा और नेहा दीदी को लेकर एक बार हमसे मिलने आयी और फिर कॉलेज चली गयी. मोहित और मंजू म को मैंने बता दिया था क मैं आज नहीं आऊंगा . डॉ ने भी दीपिका ममी को 2 दिन और रुकने को कहा हॉस्पिटल में. गाओं से आज बाबा ए थे और माँ को रेस्ट देने क लिए रजनी मौसी आ गयी उनकी जगह . माँ दिव्या मौसी क यहाँ चली गयी . मैं भी मोहित क घर चला गया तैयार होने . दोपहर का खाना रीता मौसी क यहाँ से आना था . 12 बजे रीता मौसी का मुझे फ़ोन आ गया .

रीता मौसी : कहाँ पे हो तुम ?

अमित : जी मसि जी मैं मोहित क घर पर हूँ. कहिये .

रीता मौसी : वहां क्या कर रहा है ? जल्दी अजा दोपहर का खाना तुझे ले क जाना पड़ेगा यहाँ से , नेहा और करुणा तो कॉलेज गयी हैं.

अमित : जी मैं आ जाऊंगा 2 बजे से पहले

रीता मौसी : 2 बजे तो बहुत लेट हो जायेगा. तू ऐसा कर अभी आ जा मुझे कुछ बाजार से मंगवाना भी है और घर पर कोई है नहीं.

अमित : ठीक है मैं अत हूँ .

मैं तैयार हो कर बाइक ले कर चला गया रीता मौसी क घर . घर पर मौसी अकेली hi थी और शायद किचन में काम कर रही थी. जब उन्होंने दरवाज़ा खोला तो पसीने भीगी हुई थी.

रीता मौसी : तू आ गया ? अजा अंदर बैठ

अमित : बाद में बैठता हूँ मौसी पहले बताइये क्या लाना है ?

रीता मौसी : वो मैं बताती हूँ पहले अंदर तो आ . यहाँ बैठ मैं ज़रा नाहा कर अति हूँ. पानी पियेगा?

अमित : जी नहीं घर से hi तो आया हूँ. आप जल्दी कीजिये .

मैं सोफे पर बैठ गया और रीता मौसी अपने रूम में चली गयी . कुछ देर बाद मौसी ने मुझे अपने रूम से आवाज़ देकर अपने पास बुलाया और जब मैं अंदर गया तो अंदर का नज़ारा देख कर मेरी हलक खुश्क हो गयी. रीता मौसी अपनी बॉडी पर टॉवल लपेटे कड़ी थी. उनका बदन बूब्स से लेकर जांघों तक टॉवल में लिप्त था और बाकि नुमाया था. नहाने की वजह से उनके पास से खास महक आ रहा है थी और गोरा चिकना बदन कुछ बूंदे अपने ऊपर लिए ऐसे लग रहा था जैसे संगमरमर की मूरत पर शबनम की कुछ बूंदे लगी हो. कन्धों तक खुले बल जो गीले थे उनके रूप को और भी कातिलाना बना रहे थे. वो नशीली निगाहों से मुझे देख रही थी और मेरे अंदर आते hi वो ऐडा से चलती हुई मेरे पास आयी और मेरी T-shirt पकड़ कर मुझे खींचती हुई अपने करीब ले आयी.

रीता मौसी : तुझे अपनी इस मौसी का ख्याल नहीं अत ? या फिर सारा प्यार अपनी ममियों को hi देगा?

अमित : मैंने कब आपको मन किया ? आप hi अभी तक मेरी बात नहीं मन रही.

रीता मौसी : तो तू नहीं मानेगा वहां किये बिना ?

अमित : आप इतनी खूबसूरत हो क मैं खुद को रोक नहीं पता अगर कभी जोश में ज़बरदस्ती कर बैठा तो आपको भी ाचा नहीं लगेगा और मुझे भी.

रीता मौसी : मुझे पता था तू नहीं मानेगा इसी लिए मैंने भी तयारी कर क राखी है और आज मौका देख कर तुझे बुला लिया. खाना तो मैं पहले hi बना चुकी हूँ और नेहा करुणा भी 2 बजे से पहले नहीं आने वाली. हमारे पास 2 घंटे हैं अब टाइम ख़राब मत करो.

रीता मौसी मुझे अपनी गांड देने क लिए मान गयी ये सुनते hi मेरा लैंड जो पहले hi मौसी को इस हालत में देख कर तनाव में आ चूका था अब वो लोहे की रेड की तरह सख्त हो गया था और टॉप की तरह गोला दागने क लिए तैयार था. मौसी की बात सुनते hi मैंने मौसी को अपनी बाँहों में कास लिया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख लिए . मौसी भी बराबर जवाब देती हुई मेरे साथ चिपक कर मेरे होंठ चूसने करने लगी. मैंने अपना हाथ नीचे ले जा कर मौसी की बड़ी गांड को मसलना शुरू किया तो मौसी ने अपनी अपनी तंग घुटने से मोड़ते हुए मेरी कमर पर लपेट ली. हम दोनों hi पूरे जोश में आ गए थे . मैं मौसी को लिए बीएड पर जा गिरा अब मौसी मेरे निचे थी और उनकी टंगे मेरी कमर पर लिपटी हुई थी. हम दोनों लगातार एक दूसरे क होंठ चूस रहे थे. मौसी का टॉवल कब उनका साथ छोड़ गया हम दोनों को hi पता नहीं चला . मौसी ने मेरी T-shirt उतरने की कोशिश की तो मैंने उनका साथ देते हुए अपनी T-shirt उतरने क बाद अपनी जीन्स भी उतर दी. अब मेरे शरीर पर सिर्फ अंडरवियर था जिसे मैंने नहीं उतरा . रीता मौसी जल्दी से उठ कर बैठ गयी और मेरा अंडरवियर खिंच कर निचे करते हुए मेरे खड़े लैंड को दोनों हाथों में पकड़ कर अपने होंठों में ले लिया. मेरा लैंड तो कल रत से hi गर्मी में था क्यूंकि माँ क साथ मैं अपना पानी नहीं निकल पाया था . रीता मौसी क इस कामुक ऐडा से मेरे लैंड को चूसने से मेरा खून दुगनी रफ़्तार से दौड़ने लगा. रीता मौसी बड़ी ऐडा से मेरा लैंड चूस रही थी मुझे उन पर हैरानी हो रही थी क वो ये सब कैसे कर रही हैं? वो भी तो एक घरेलु औरत hi थी . मुझे शक होने लगा कहीं मौसी का किसी और क साथ भी कभी चक्कर तो नहीं रहा? ये बात मेरे दिल में तो आ गयी थी मगर मैं उनसे पूछूं कैसे ये समझ नहीं आ रहा था.

अमित : आअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स मौसी ये सब कहाँ से सीखा आपने ? क्या लैंड चुस्ती हो आप .

रीता मौसी : सरररूउप साररूणुप्प शादी से पहले अपनी सहेलियों क साथ बहुत साडी गन्दी गन्दी बातें होती रहती थी पर कभी मैंने किसी क साथ किया नहीं , सोचा था शादी क बाद सब करुँगी और किया भी . तेरे मौसा क साथ बहुत एन्जॉय किया है मैंने पर अब न उनको इंटरेस्ट है न उनमे डैम है और मैं तड़पती रहती हूँ. एक तेरा hi सहारा है बीटा बहार कभी न मैं पहले गयी था न अब जाउंगी.

रीता मौसी का जवाब सुन कर मुझे अंदर से बहुत ख़ुशी हुई. मैं जो जानना चाहता था मुझे पता चल गया. वर्ण पता नहीं क्या क्या सोचता रहता मैं. खैर मैं रीता मौसी द्वारा लैंड चूसै एन्जॉय कर रहा था. मैं बीएड क पास खड़ा था और मौसी बीएड पर बैठी मेरा लैंड चूस रही थी मेरी ऑंखें मज़े में बंद हो रही थी और हाथ मौसी क सर पर थे. मौसी अपने गले तक मेरा लैंड ले जा रही थी . 2-3 मिनट्स लैंड चूसने क बाद मौसी ने लैंड चूसै छोड़ दी तो मैंने उन्हें बीएड पर लिटा दिया .

मौसी मेरे सामने पूरी नंगी लेती थी और उनका गदराया हुआ जिस्म मुझे अपनी तरफ खिंच रहा था . सच में रीता मौसी खूबसूरती में कमल थी. मेरी तीनो हो मौसी एक से बाद कर एक थी मगर रीता मौसी क इलावा मैंने किसी को इस नज़र से देखा नहीं था. देखा तो रीता मौसी को भी कभी गलत नज़र से नहीं था ये तो वो खुद hi आ गयी थी मेरी तरफ. जो भी था रीता मौसी की अपनी जगह थी और सच में आज पता चला था क करुणा दीदी इतनी नॉटी क्यों हैं क्यूंकि ये सब उन्हें रीता मौसी से जो मिला है. मैं रीता मौसी क ऊपर लेट गया और उन्हें किश करने लगा. थोड़ी देर होंठों का मधु रास पिने क बाद मैं उनकी गर्दन पर किश करता हुआ निचे बढ़ने लगा. उनके रुई क गोलों क जैसे नरम गोर गुलाबी स्तनों का रसपान करने क बाद मैं उनकी छूट तक आ गया और फिर उनकी छूट चूसै शुरू कर दी. छूट को चूसते hi रीता मौसी की आग पूरी तरह भड़क गयी और वो अपनी कमर उछलने लगी

रीता मौसी : आआह्ह कक्कक्क्स ऐसे hi उम्म्म्म आअह्ह्ह्हह ऐसे hi करो उम्म्म किसने सिखाया है तुझे ये सब आआअह्ह्ह्हह मम्माआ बहुत मज़ा देता है तू ऐसे hi कर

मैंने अभी कुछ hi देर छूट को रसपान किया था क मौसी मेरा सर अपनी छूट पर दबाने लगी और कुछ hi पलों में उनका बदन अकड़ कर झटके लेता शांत हो गया.

रीता मौसी : आआआह्ह्ह्हह्ह आईईईई माआ मैं gyiiiiiiiiiiiiiii आअह्ह्ह्हह आआआह्ह्ह्हह्ह .

कुछ देर मैंने रीता मौसी को शांत होने दिया और फिर उनको पलट दिया . मौसी अब पेट क बल लेती थी और उनके नितम्ब पहाड़ की तरह सर उठाये खड़े थे. रीता मौसी क चूतड़ मुझे बहुत पसंद थे . बिलकुल गोल और कुछ बहार को उभरे हुए. जब वो चलती थी तो उनके कूल्हे थिरकते थे जो किसी को भी घायल करने क लिए काफी थे. मैंने अपने हाथ दोनों पहाड़ों पर रख दिए और उन्हें मसलने लगा.

रीता मौसी : आआआअह्ह्ह्हह माआआ आराम से कर न . तुझे इनमे क्या नज़र अत है जो पीछे पड़ा है इनके?

अमित : मत पूछो मौसी , आपकी गांड तो किसी को भी पागल बना दे . मैंने जब पहली बार इसे देखा तो तभी सोच लिया था क यहाँ ज़रूर करूँगा . समझ लीजिये ये मेरी दिली ख्वाहिश है.

रीता मौसी : तेरा इतना बड़ा मुसल यहाँ घुस नहीं पायेगा . आज तो पका पीछे से भी मेरी फटने वाली है. ध्यान से करना कहीं मैं मर hi न जॉन.

अमित : आप ऐसे क्यों सोचती हैं ? मैं ऐसा नहीं होने दूंगा .

मैं मौसी क नितम्ब भी मसल रहा था और उनसे बातें भी कर रहा था. उसके बाद मैं उनके हिप्स पर झुक गया और बरी बरी से दोनों को किश करता प्यार करने लगा . मैंने दोनों चूतड़ों को फैला कर गांड का सुराख़ देखा जो छोटा सा था मगर थोड़ा खुला हुआ था . मैंने मौसी से पूछ hi लिया

अमित : मौसी क्या आपने गांड मरवाई है पहले?

रीता मौसी : नहीं बीटा आज पहली बार तुम्हारे साथ hi करने वाली हूँ वहां

अमित : तो ये खुला हुआ क्यों लग रहा है ?

रीता मौसी : बीटा तेरा इतना बड़ा मुसल मैं सीधा लेती तो मर hi जाती . इसलिए कुछ दिनों से पीछे मोमबत्ती ले कर खुला करने की कोशिश कर रही थी .

अमित : ो मेरी प्यारी मौसी आप मेरी ीचा पूरी करने क लिए इतना कुछ कर रही थी

रीता मौसी : और नहीं तो क्या ? तूने कुछ माँगा तो मैं मन कैसे कर सकती थी. बस खुद को तैयार करने क लिए थोड़ा टाइम लिया वर्ण मैं तो उसी दिन ले लेती .

अमित : ी लव यू मौसी आप बहुत अछि हो. मैं आपको बिलकुल भी तकलीफ नहीं होने दूंगा.

मैंने मौसी को सहारा देते हुए घुटनो पर किया और उनके पीछे पोजीशन ले ली. जैसे hi मैंने लैंड को गांड क सुराख़ पर लगाया तो मौसी बोली

रीता मौसी : अमित एक बार आगे से कर ले न पहले उसके बाद पीछे से कर लेना .

मौसी की बात को मानते हुए मैंने लैंड को उनकी छूट पर टिकाया और हल्का धक्का देते हुए लैंड छूट में थोड़ा सा घुसा दिया . सुपडे से 2 इंच और आगे तक लैंड छूट में घुस गया.

रीता मौसी : आआआअह्ह्ह्हह कक्ककक्कक्स उम्मम्मम कितना बड़ा है तेरा ये मुसल हर बार ऐसे लगता है जैसे पहली बार ले रही हूँ. उम्म्म्म करदे पूरा अंदर इसे

मैंने मौसी की बात मानते हुए उनकी कमर को दोनों हाथों से थमा और एक ज़ोरदार धक्का पेल दिया . एक बार में hi लैंड छूट को फैलता हुआ जड़ तक घुस गया.

रीता मौसी : aaaaaaaaaahhhhh माआआ मर गयी फैट गयी मेरी आआअह्ह्ह रुक जा थोड़ा

अमित : अब रुकने का टाइम नहीं है मौसी आपने hi तो कहा था घुसा दे

रीता मौसी : तूने तो एक hi झटके में घुसा दिया , फाड़ने का इरादा है क्या ? आआअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स

मैं मौसी की कमर को थम कर धक्के मरने लगा . मौसी कुछ देर कराहती रही और फिर खुद hi अपनी कमर पीछे को धकेलने लगी .

रीता मौसी : आआह्ह्ह्ह आआअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह उम्म्म्म आआह्ह्ह्हह ऐसे hi और ज़ोर से मर आआह्ह्ह्हह तू मुझे इतना क्यों तड़पता है तेरे इंतज़ार में मैं कैसे तड़पती हूँ तुम्हे कैसे बताऊँ . तेरे मौसा तो अब हाथ नहीं लगते मैं किसे कहूं तेरे सिवा है hi कौन आआह्ह्ह्हह मायआ फाड़ दे आज साडी गर्मी निकल दे आअज उम्मम्मम

अमित : रोज़ रोज़ कहाँ आ सकता हूँ मौसी आप भी जानती हैं. पर जब भी टाइम मिलेगा अत रहूँगा या आप आ जाना आअह्ह्ह्ह उम्म्म क्या कमल हो मौसी आप , आज भी पूरी जवाब लगती हो आप

रीता मौसी : तो लूट ले न मेरी जवानी , मैं तेरी hi तो हूँ जो चाहे कर बस मुझे ऐसे प्यार करते रहना आअह्ह्ह्ह उम्मम्मम आअह्ह्ह आह्हः ककक

थापपप थप्प्प्प थप्प्प्प्प ‘ कमरे में मौसी की सिसकियों क इलावा हमारे धक्कों से निकलने वाली आवाज़ गूँज रही थी. मौसी की थिरकती गांड मुझे पागल कर रही थी. मौसी का पानी निकलने क लिए मैंने धक्के मरने क साथ एक हाथ से उनकी छूट की फांकों को मसलना शुरू कर दिया और दूसरे हाथ से उनके लटकते आम पकड़ लिए. एक हाथ तीन जगह पर रगड़ से जल्दी hi मौसी एक बार फिर चरम पर पहुँच गयी और उनका बदन अकड़ कर झटके लेता हुआ झड़ने लगा . मौसी बीएड पर गिरने लगी तो मैंने उनकी कमर को दोनों हाथों से थम कर पकडे रखा. मौसी की छूट में मेरे लैंड पर गरम पानी का शावर मुझे साफ महसूस हो रहा था और अब उनकी छूट का पानी उनकी जांघों क साथ बेहटा हुआ बेडशीट को भिगोने लगा था. मैंने छूट से लैंड बहार निकला जो पूरी तरह चिंका था. और लुब्रिकेशन की ज़रूरत नहीं थी गांड में घुसाने क लिए तो मैंने ऐसे hi गांड क सुराख़ पर लैंड टिकाया और ज़ोर देते हुए सूपड़ा गांड में घुसा दिया . मौसी जो अभी अभी झड़ी थी और चरम सुख का मज़ा ले रही थी उन्हें एक बार फिर से मैंने दर्द दे दिया था

रीता मौसी : आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माआआ एआईईईई धीरे बीटा बहुत बड़ा है तेरा aaaaaaaaaaa

उनकी बात पूरी होने से पहले मैंने एक और धक्का पेल दिया था और लगभग अआधा लैंड उनकी गांड में घुस चूका था. मौसी क मुँह से ज़ोरदार चीख निकल गयी शुक्र है इस वक़्त घर पर कोई नहीं था. रीता मौसी दर्द से कराहने लगी और मुझे भी अपने लैंड बार गांड का दबाव महसूस हो रहा था. मैंने लैंड को थोड़ी देर वहीँ रहने दिया और मौसी का दर्द काम करने क लिए मैं उनके बूब्स मसलने लगा . रीता मौसी का कराहना जैसे hi कुछ काम हुआ तो मैंने थोड़ा सा लैंड बहार खींच कर एक और तगड़ा झटका पेल दिया.

रीता मौसी : आअह्ह्ह्ह मा मर गयी निकल ले बहार मैं मर जाउंगी आआह्ह्ह

अमित : बस मौसी अब और दर्द नहीं होगा . जितना दर्द होना था हो गया अब और नहीं.

मैं कुछ देर रुका और फिर अपना लैंड बहार निकलने की कोशिश की तो ऐसे लगा जैसे लैंड अंदर hi फिक्स हो गया हो. लैंड क साथ गांड चिपक सी गयी थी . मगर मैंने थोड़ा थोड़ा कर क लैंड को बहार सरकाया और फिर से अंदर पेल दिया. 10-15 धक्कों क बाद लैंड अब अंदर बहार आसानी से जाने लगा . रीता मौसी को अभी भी दर्द हो रहा था मगर अब वो दर्द बर्दाश्त करती हुई मुझे धक्के मरने दे रही थी. 10 मिनट्स धीरे धीरे करने क बाद मैंने अपनी स्पीड बदनी शुरू कर दी और ज़ोरदार धक्के मरने लगा

रीता मौसी : आअह्ह्ह्ह आआअह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्ह ऐसे hi अब कुछ ठीक लग रहा है आअह्ह्ह्ह ऐसे hi करो उम्म्म्म कक्कक्स आआह्ह आआह्ह्ह आह्ह्ह्ह

अमित : आप कमल की हो मौसी थैंक यू वैरी मच अपने मुझे पीछे से करने दिया वर्ण मेरे दिल की बात दिल में रह जाती .

रीता मौसी : ऐसे कैसे रह जाती ? तेरे लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ बीटा . तू hi तो मेरा सहारा है. वैसे एक बात कहूं मैंने भी सोचा था एक बार पीछे से ज़रूर करुँगी मगर तेरा मुसल देख कर दर गयी थी . अभी मुझे ाचा लग रहा है आअह्ह्ह उम्म्म्म ऐसे hi करो और तेज़

रीता मौसी खुल कर मेरा साथ देने लगी और मैं ज़ोरदार धक्के मरने लगा. एक हाथ से मौसी अपनी छूट रगड़ रही थी और जल्द hi मौसी की छूट ने फिर से पानी छोड़ दिया . मैं भी अब झड़ने वाला था तो मैंने भी आखरी 10-15 धक्के ज़ोरदार लगाए और मौसी की गांड में जड़ तक लैंड घुसा कर उनके ऊपर hi ढेर हो गया. कुछ देर तक हम दोनों की hi साँसे उखड़ी रही . और जब होश आया तो मैं मौसी क ऊपर से साइड में हटा. हम दोनों का शरीर पसीने से भीग गया था . मेरे नज़र मौसी की गांड पर गयी तो उसका मुँह 2 इंच तक खुल गया था और अंदर से मेरा वीर्य निकल कर बहार आ रहा था . साथ में गांड क किनारे कुछ चील से गए थे जहाँ पर खरोंच और खून सा लगा हुआ था . मैंने मौसी को हिलाया तो मौसी कराहने लगी

रीता मौसी : आअह्ह्ह मत हिला मुझे दर्द हो रहा है , जान निकल दी तूने आज . बाप रे तूने तेरी इस मुसल ने मेरी फाड़ क रख दी आज.

अमित : मौसी घर में कोई पैन किलर पड़ी है क्या?

रीता मौसी : बीएड क साइड वाले दराज़ में देख पड़ी होगी

मैंने बीएड की दराज़ से पैन किलर टेबलेट निकली और मौसी को पानी क साथ दे दी. फिर मैं उन्हें सहारा दे कर बाथरूम में ले गया. उनको पानी से साफ करने क बाद मैं उठा कर वापिस बीएड पर ले आया.

रीता मौसी : आअह्ह्ह्ह अभी भी दर्द हो रहा है . मुझसे बैठा नहीं जा रहा , आज मैं हॉस्पिटल नहीं आ पाऊँगी दीपिका से मिलने . वैसे बधाई हो तुम्हे भी , बाप तो तुम hi बने हो . बिलकुल तुम्हारे जैसा है . देख लेना बड़ा हो कर तुम्हारे जैसे hi निकलेगा. और आज ये मेरी तरह से गिफ्ट था जो तूने किया हमारे मायके क लिए .

( रीता मौसी को मैं दीपिका ममी क साथ अपने रिश्ते क बारे में पहले hi बता चूका था )

अमित : मैंने तो कुछ भी नहीं किया मौसी जी वो तो छोटी ममी hi थी जिन्होंने ये रास्ता चुना और आज सब खुश हैं.

रीता मौसी : जो भी हो सब खुश हैं तो सब सही है. और तू हमेशा सबका भला hi तो करता है. चल अब ज़रा मेरी मदद कर मैं कपडे पहन कर तुम्हे खाना पैक कर दूँ इस से पहले क नेहा या करुणा घर आ जाएँ.

बात भी सही थी 1:30 बज रहा था और कोई भी आ सकता था. मैंने अपने कपडे पहने और मौसी की मदद की . मौसी ने कपडे पहनने क बाद खाना पैक कर दिया और मैं हॉस्पिटल वापिस चला गया. हॉस्पिटल में अभी रजनी मौसी बाबा और कमलेश मां hi थे. मेरे आते hi रजनी मौसी तो बाबा क साथ घर चली गयी और कमलेश मां दीपिका ममी क साथ मैंने लंच कर लिया. खाना खाने क बाद कमलेश मां कुछ काम से बहार गए तो दीपिका ममी ने मुझे अपने पास बिठा लिया

दीपिका ममी : तो रत में कर दिया काण्ड तूने दीदी का?

अमित : म मम मैंने कब किया

दीपिका ममी : मुझसे छुपायेगा ? उनकी चीख से जब मैं इतनी दूर पड़ी उठ सकती हूँ तो तू भला कैसे सोया रहा ? मैं जानती हूँ तू जग रहा था और शायद दीदी को इस बात का अंदाज़ा न हो या हो भी सकता है. फ़िलहाल अभी भी तुम दोनों क बीच एक पर्दा अभी भी है मगर इससे न तुम्हे मज़ा आएगा न दीदी को. इस लिए उनके साथ जो भी करना है खुल क करो.

अमित : मगर उनके साथ मैं कैसे ?

दीपिका ममी : देख उन्हें तुम्हारी ज़रूरत है और ये तू भी अछि तरह जनता है . वो भी तो मेरी तरह तुम्हारी ममी hi तो हैं. तू क्यों ये भूल जाता है? मेरी बात मन उन्हें और मत तड़पा . उन्होंने तुम्हे इतना प्यार दिया है क्या तू उनका मोल नहीं चुकाएगा ?

अमित : मैं छह कर भी नहीं कर सकता आप समझ नहीं रही

दीपिका ममी : तू नहीं समझ रहा और उन्हें तड़पा रहा है. देखा नहीं वो कैसे खुद hi सब कर रही हैं . सोच ज़रा वो कितना तड़प रही होंगी अंदर से.

हम दोनों बात कर hi रहे थे क कल्पना राधा को लिए मिलने चली आयी और फिर कॉलेज की बातें बताने लगी. उसने बताया क टेस्ट चेक हो रहे हैं और आज एक सब्जेक्ट क टेस्ट मार्क्स बताये भी गए थे. जिसमे मेरे 100 में से 75 मार्क्स आये थे. कल्पना क 80 और मोहित क 60 थे . कल्पना ने ये भी बताया क चन्दर्कांता ने कल सब को क्लास में आने को कहा है शायद वो कल मार्क्स बताने वाली हैं. राधा कुछ चुप चुप सी थी मैंने पूछा पर उसने कुछ बताया नहीं तो मैंने कल्पना को इस बारे में नज़र रखने को कहा. खैर कुछ देर बाद वो दोनों चली गयी . दीपिका ममी को आज भी हॉस्पिटल में रहना था और कल शायद उन्हें छुट्टी मिल जाये ऐसा नर्स से पता चला था मुझे .

उधर कॉलेज में आज कुछ हुआ था जिससे राधा चुप थी. राधा कॉलेज टूर पे नहीं जाना चाहती थी इस लिए वो आज फिर एक बार मधु मैडम क पास बात करने गयी थी और उसके साथ रीमा भी थी.

मधु म का ऑफिस -

मधु : राधा , रीमा तुम दोनों ? क्या काम था ?

राधा : मम मैं आपसे कहने आयी थी क मैं टूर पे नहीं जा सकती .

मधु : मगर क्यों ? तुम्हे पता है न अगर नहीं गयी तो एक्सेस्समेंट में से मार्क्स कट हो जायेंगे और तुम पीछे रह जाओगी. तुम तो टोपर हो क्लास में , क्या तुम चाहती हो तुम टॉप 3 में भी न रहो ?

राधा : प्लीज मम मैं नहीं जा सकती . मेरी माँ की तबियत ठीक नहीं रहती . मैं उन्हें अकेला छोड़ कर नहीं जा सकती

मधु : ठीक है एक एप्लीकेशन लिखो और अपनी माँ क सिग्न करवा कर ऑफिस में जमा करवा दो पर्ण इतना समझ लो उसके बाद तुम टॉप 3 में से किसी पोजीशन में आने का सोचना भी मत.

राधा ने तो झूट बोलै था माँ की तबियत का और अब माँ से सिग्न करवाने की बात पर वो फास गयी थी ऊपर से एक्सेस्समेंट का भी चक्कर था . मगर वो दिल से 1 परसेंट भी जाना नहीं चाहती थी. राधा निराश हो कर ऑफिस से बहार आ गयी और यही बात रीमा में भी मधु क सामने राखी.

रीमा : मम मैं भी टूर पे नहीं जाना चाहती .

मधु : अब तुम्हे क्या प्रॉब्लम है?

रीमा : मम मेरा बिलकुल भी मन नहीं है और अगर एक्सेस्समेंट क मार्क्स काटेंगे तो भी कोई बात नहीं पर मैं जाना नहीं चाहती.

मधु : ठीक है अगर यही तुम्हारी मर्ज़ी है तो . एप्लीकेशन जमा करवा दो तुम भी .



रीमा भी ऑफिस से बहार निकल गयी थी. मधु क चेहरे पर अब थोड़ी शिकन आ गयी थी . उसे शीना की बात यद् आ रही थी क फर्स्ट ईयर का हर स्टूडेंट जाना चाहिए और ऐसे में 2-2 स्टूडेंट्स मन कर रहे थे. कहीं इनमे से hi वो लड़की हुई जिसे शीना सबक सीखने चाहती है तो मधु क लिए ये बुरा हो सकता है. मधु ने सोच लिया क कैसे भी कर क वो सबको ले कर hi चलेगी. हालाँकि उसे पता था क रीमा शीना की कजिन है पर क्या पता शीना अपनी कजिन की hi वाट लगाना चाहती हो.
 
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2 रत से से लगातार मैं और माँ hi दीपिका ममी क पास रुक रहे थे तो आज रजनी मौसी ने हम दोनों को रेस्ट करने को कहा और खुद कमलेश मां क साथ रुकने का फैसला किया . मुझे जहाँ उनके इस फैसले से इस बात का संतोष हो रहा था क आज माँ क साथ कल जैसी सिचुएशन नहीं बनेगी , वहीँ माँ मौसी को अपना फैसला बदलने क लिए कन्विंस करने क कोशिश कर रही थी . मगर रजनी मौसी तो रजनी मौसी थी . परिवार में सबसे बड़ी और सबका ख्याल रखने वाली उनकी बात कोई कैसे ताल सकता है. खैर रत को माँ दिव्या मौसी क घर रुक गयी और मैं मोहित क घर चला गया हालाँकि माँ ने मुझे दिव्या मौसी क घर रुकने को कहा पर मैं नहीं मन. अगली सुबह मैं फिर कॉलेज जाने की बजाये हॉस्पिटल गया . आज अंकल आंटी भी अपनी बेटी से मिल कर वापिस आ गए और सीधा हॉस्पिटल चले आये हम सब से मिलने . हमारी ख़ुशी में वो भी शरीक हुए और दोनों सच में hi खुश थे जैसे क वो हमारी फॅमिली का hi हिस्सा हों मगर मुझे आंटी क चेहरे पर शिकन नज़र आ रही थी . मैंने उनसे पुछा भी पर उन्होंने नहीं बताया . खैर दोपहर क बाद डॉ ममी को डिस्चार्ज कर दिया और 2 हफ्ते बाद आ कर चेक करवाने को कहा. मैं कमलेश मां दीपिका ममी गौरी ममी बाबा सब एक साथ गाओं गए और मां ने गाओं में लड्डू बनते. घर पर बधाई देने वालों का ताँता लगा रहा. सारा दिन इसी भाग दौड़ में निकल गया.

उधर कॉलेज में मधु म ने राधा को अपने ऑफिस में बुलाया

राधा : मई ी के इन माँ?

मधु म : आओ आओ राधा मैं तुम्हारा hi इंतज़ार कर रही थी.

राधा : मम आप ने मुझे बुलाया था ?

मधु म : हाँ वो तुम टूर पे न जाने की बात कह रही थी न कल

राधा : जी मम

मधु म : मैंने कल सीनियर सर से बात की थी अपने डिपार्टमेंट क तो उन्होंने कहा है क तुम्हे जाना hi पड़ेगा वर्ण मार्क्स काटेंगे. और मार्क्स काटने पर तुम टॉप में नहीं होगी और अगर ऐसा हुआ तो अगले साल क लिए तुम्हे स्कालरशिप नहीं मिलेगी. तुम तो जानती hi हो न क ये कॉलेज कितना मेहेंगा है. अगर तुम स्कालरशिप न ले पायी तो तुम्हे इस कॉलेज में एडमिशन नहीं मिलेगा. फैसला तुम्हारे हाथ में है. फिर भी तुम नहीं जाना चाहती तो तुम अपनी माँ को एक बार होड़ से मिलवा देना . देखो मैं तुम्हारे भले क लिए कह रही हूँ . ऐसा मत करो वर्ण तुम इस कॉलेज में एडमिशन नहीं ले पाओगी . अगर तुम्हे पैसों की या कोई और दिक्कत है तो मैं तुम्हारी हेल्प कर सकती हूँ.

राधा को कॉलेज में एडमिशन न मिलने की बात से दर लगने लगा. उसके दर की वजह अमित था क्यूंकि वो किसी भी सूरत में अब अमित से दूर नहीं होना चाहती थी . अमित क होते hi वो खुद को सिक्योर फील करती थी . हो भी क्यों न क्यूंकि पहले दिन से hi तो उसने राधा की हिफाज़त की थी और अब कल्पना को राधा क साथ hi लगा दिया था. राधा को ऐसा फील होने लगा क जैसे वो अमित से दूर हो जाएगी . सिर्फ टूर पर जाने की hi तो बात थी और फिर स्टाफ भी तो साथ होता है . राधा ने खुद को समझते होने टूर पर जाना स्वीकार कर लिया क्यूंकि उसे अमित से दूर जाना स्वीकार नहीं था.

राधा : ठीक है मम अगर टूर पे जाना इतना hi ज़रूरी है तो मैं तैयार हूँ.

राधा की बात सुनते hi मधु अंदर से खुश हो गयी मगर उसने ज़ाहिर नहीं किया और राधा को अपनी क्लास में वापिस जाने को कहा. राधा क बाद रीमा भी मधु क पास एप्लीकेशन ले आयी मगर मधु मान नहीं रही थी फिर रीमा ने मधु की शीना से बात कराई तब जाकर मधु ने रीमा की एप्लीकेशन एक्सेप्ट की पर उसे सख्त हिदायत भी दी क वो अपने न जाने क बारे में किसी से भी बात न करे.

उधर क्लास में आज चन्दर्कांता ने सबको उनके टेस्ट दिखाए पर अमित को क्लास में न पाकर उसे गुस्सा आ गया . उसने मोहित को खड़ा कर क कह दिया क कल अगर अमित क्लास में नहीं आया तो उसे ससपेंड कर दिया जायेगा. मोहित और कल्पना ने फ़ोन पर मुझे इस बारे में बता दिया . फ़िलहाल मैं गाओं में बिजी था क्यूंकि हर कोई मां को बधाई देने आ रहा था. करते करते रत आ गयी और रत तक हम सब इतना थक चुके थे क बीएड पर पड़ते hi सो गए. अगली सुबह मैं जल्दी उठ कर तैयार हो गया क्यूंकि आज कॉलेज जाना ज़रूरी थी . कल जो कुछ मुझे मोहित ने बताया था वो मैंने माँ बाबा को बता दिया था . दीपिका ममी भी इस बार पर खुश थी क डिलीवरी क टाइम और उसके बाद भी मैं उनके पास रहा इस लिए उन्होंने भी मुझे जाने की इजाज़त दे दी. आने से पहले मैंने अपने बेटे को भी दुलार किया. उसे भी शायद मेरी पहचान थी और मां की जगह वो मेरी गॉड में ज्यादा खुश रहता था. खैर नाश्ता करने क बाद मैं घर से निकल कर सीधा मोहित क घर गया और अंकल आंटी से मिलने क बाद मोहित क साथ hi कॉलेज गया. पहले लेक्चर में hi चन्दर्कांता म ने मुझे क्लास में खड़ा कर दिया .

चन्दर्कांता: कल कहाँ थे तुम ? और परसों भी नहीं ए ? यही तरीका है तुम्हारा पड़े करने का? रोल no . क्या है तुम्हारा ? मैं भी तो देखूं पास भी हुए हो यान कॉलेज से छुट्टी का टिकट कटवा लिया है तुमने

अमित : मम वो मेरे घर पर कुछ प्रॉब्लम थी तो मैं इस लिए आ नहीं पाया था. ी ऍम सॉरी . मेरा रोल no. क्सक्स है

चन्दर्कांता: इन्फॉर्म नहीं कर सकते थे या फिर कॉलेज क रूल्स को कुछ समझते नहीं ? अभी पता चल जायेगा क कॉलेज में रहोगे भी या नहीं.

चन्दर्कांता ने एक स्टूडेंट को भेज कर टेस्ट मंगवा लिए और उसमे से मुझे अपना टेस्ट निकलने को बोलै . मैंने जल्दी से अपना टेस्ट निकला मार्क्स देख कर मैं खुश हो गया . मेरे चेहरे पर ख़ुशी देख कर चन्दर्कांता ने मेरे हाथ से टेस्ट पकड़ लिया और उसको तो जैसे झटका लग गया. लगे भी क्यों न . उसके सब्जेक्ट में मुझे 87 मार्क्स जो मिले थे . जो थोड़ी देर पहले मुझे कॉलेज से बहार जाने की बातें कर रही थी उसके लिए ये शॉक से काम नहीं था.

चन्दर्कांता: ये कैसे हो सकता है? ज़रूर तुमने चीटिंग की है . मैं अभी तुम्हारी शिकायत करती हूँ . तुम्हारे साथ कौन बैठा था?

अमित : मम मैंने कोई चीटिंग नहीं की. मेरे साथ मोहित बैठा था .

चन्दर्कांता: मोहित स्टैंड उप , तुम्हारे कितने मार्क्स हैं?

मोहित : मम मेरे 58 हैं

मोहित का जवाब सुन कर तो चन्दर्कांता जैसे झुंझला गयी.

चन्दर्कांता: इम्पॉसिबल, ज़रूर कोई चीटिंग की है तुमने. सच सच बताओ क्या और कैसे किया है तुमने .

अमित : मम मैं सच कह रहा हूँ मैंने कोई चीटिंग नहीं की है .

चन्दर्कांता: ऐसा हो hi नहीं सकता , न तुम क्लास में एते हो न पड़ते हो फिर कैसे हो सकता है.

अमित : मम मैं भले hi क्लास मिस कर जाता हूँ पर मैं अपनी स्टडी मिस नहीं करता

चन्दर्कांता: तू सब को बेवक़ूफ़ बना सकता है मुझे नहीं. चल मेरे साथ ऑफिस में अभी प्रिंसिपल क सामने तेरी पोल खोलती हूँ.

‘क्या हुआ मम किसकी पोल खोलने जा रही हैं आप ‘

ये आवाज़ मंजू म की थी जो क्लास में एंटर हो रही थी. हमें पता hi नहीं चला था कब लेक्चर ख़तम हो गया और अगला शुरू हो गया.

चन्दर्कांता: आप ?

मंजू म : जी ये मेरा लेक्चर है न मम इस लिए मैं आ गयी . वैसे बात क्या है ? कहाँ ले जा रही हैं इसे आप?

चन्दर्कांता: ये लड़का न तो क्लास में अत है न पड़ता है ऊपर से टेस्ट में इतने अचे मार्क्स ले कर पास हुआ है. इसने चीटिंग की है और अब मन नहीं रहा. इस लिए प्रिंसिपल क पास ले कर जा रही हूँ इसे.

मंजू म : ये आप क्या कह रही हैं मम ? ये तो पड़े में ाचा है . ये भला चीटिंग क्यों करेगा? रुकिए मैं दिखती हूँ आपको.

मंजू मम ने अपने साथ लाये हुए टेस्ट निकले और मेरा टेस्ट उसमे से निकल कर दिखने लगी. इंग्लिश का टेस्ट देख कर तो चन्दर्कांता की ऑंखें बहार आ गयी. इसमें मुझे 92 मार्क्स मिले थे.

चन्दर्कांता की हालत देख कर मुझे अंदर से हंसी आ रही थी मगर मैं खुद को काबू में किये था ऐसा hi कुछ हल मंजू म का भी था.

चन्दर्कांता: मुझे यकीन है इसने इसमें भी चीटिंग की है

मंजू म : मम अगर बुरा न मने तो एक सुग्गेस्टिव दूँ ? आप इसके बाकि टेस्ट भी एक बार चेक कर hi लो. कहीं प्रिंसिपल सर क सामने आप गलत न साबित हो बाद में.

मंजू म की बात सुन कर चन्दर्कांता का गुस्सा और बाद गया मगर उसने कुछ कहा नहीं और मेरा टेस्ट अपने साथ ले कर क्लास से चली गयी .

मंजू म : यू मई सीट ों योर सीट नाउ. स्टूडेंट्स हेरे ी हैवे योर टेस्ट्स .

मम ने मुझे मेरी सीट पर बैठने को कहा और फिर सबको उनके टेस्ट देने लगी. इंग्लिश में लगभग सबके अचे मार्क्स थे मगर 90 से ऊपर कुछ hi स्टूडेंट्स थे और मेरे मार्क्स मंजू म खुश थी. हिंदी मध्यम बैकग्राउंड से होकर भी मैंने जो प्रोग्रेस की थी वो काफी थी. मंजू म का लेक्चर ख़त्म होते hi कल्पना हमारे पास आ कर मुझे बधाई देने लगी.

कल्पना : वह वह वह तुमने तो कमल कर दिया यार . चन्दर्कांता का चेहरा देखा था तुमने ? ऐसे लग रहा था जैसे गुस्से से अभी फट पड़ेगी. तुम तो छिपे रुस्तम निकले . मुझे लगा नहीं था इतने अचे मार्क्स लोगे तुम. खैर अब तो तुम्हारी इस कामयाबी की असली वजह पता चल गयी है मुझे. वैसे अगर चांस हो तो क्या मैं भी आ सकती हूँ पड़ने क लिए ?

अमित : ये तो मम hi बता सकती हैं

मोहित : सच में हर तू तो बड़ा छिपा रुस्तम है . देख मैं मर मर क 50-60 क बीच में हूँ और तेरे 70 से ऊपर hi हैं . ओवरआल 80 क पास तो पहुँच hi जायेगा अभी 2 क बाकि हैं रिजल्ट्स

अमित : अबे तू भी म्हणत किया कर न . मीनल क इलावा तो तुझे कुछ सूझता नहीं.

कल्पना : ाचा अभी चलो कैंटीन में वर्ण यहीं टाइम हो जायेगा.

उसके बाद हम कैंटीन में चले गए जहाँ नेहा दीदी मीनल और राधा भी आ गए. नेहा दीदी और राधा क मार्क्स 90 से ऊपर hi थे वो दोनों तो स्कॉलर hi थी. मीनल क भी 70 प्लस थे. नेहा दीदी और मीनल जहाँ खुश नज़र आ रही थी वहीँ राधा मुझे टेंशन में लग रही थी

अमित : बात क्या है राधा तुम कल भी टेंशन. में थी और आज भी ? किसी ने कुछ कहा है क्या ?

राधा : नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है. वो टूर पर जाने को लेकर थोड़ी टेंशन में हूँ. मैं जाना नहीं चाहती और मम मन नहीं रही .

मीनल : क्या यार तू ऐसे hi टेंशन ले रही है. साडी क्लास जा रही है तो तुझे क्या टेंशन है? मैं भी तो चल रही हूँ न साथ में. तू चिंता मत कर हम दोनों साथ में रहेंगे . वैसे भी स्टाफ भी तो होगा.

नेहा दीदी : ठीक तो कह रही है मीनल , तू ऐसे hi टेंशन ले रही है.

राधा : पता नहीं दीदी क्यों मेरा दिल बिलकुल भी नहीं कर रहा जाने का.

मीनल : तू टेंशन लेना छोड़ कुछ भी नहीं होता ऐसा वैसा कुछ वहां. स्टाफ साथ में होगा और अपनी hi तो क्लास क स्टूडेंट्स होंगे वहां कोई गैर थोड़ा hi होगा . अब चलो आज पार्टी करते हैं . अमित क घर में नन्हा मेहमान आया है और इसने अभी तक मुँह भी मीठा नहीं करवाया

कल्पना : ये बात तो बिलकुल सही कही तुमने . आज तो पार्टी बनती है.

नेहा दीदी : अरे मगर पहले बाकि क टेस्ट का रिजल्ट तो लेलो

मीनल : ठीक है तो कॉलेज क बाद चलते हैं.

कल्पना / नेहा दीदी / मोहित : दोने

उसके बाद हम सब अपने अपनी क्लास में चले गए और बाकि क टेस्ट क रिजल्ट भी ले लिए . बाकि दोनों सब्जेक्ट में भी मेरे 80 प्लस hi थे और कल्पना क मेरे जैसे hi मार्क्स थे बस 2-3% का hi फरक था. जैसे तय हुआ था हम सब कॉलेज का आखिरी लेक्चर ख़तम होते hi रेस्टोरेंट में चले गए और मिल कर एक छोटी पार्टी की. उसके बाद कल्पना नेहा दीदी और राधा को लेकर चली गयी और मैं मोहित मीनल क साथ घर को चल दिया.

लंच क बाद मैं आंटी क पास चला गया . उन्होंने हॉस्पिटल में मुझे कुछ बताया नहीं था पर मुझे लगा था क कुछ बात ज़रूर है जो वो छिपा रही हैं . वो अपनी बेटी को लेने गयी थी मगर वापिस खली हाथ hi लौटी थी. वहां क्या हुआ होगा मुझे जानना था . मोहित को भी अंकल आंटी ने कुछ नहीं बताया था. मैं औरत क रूम में गया तो आंटी बीएड पर लेती कुछ सोच रही थी. वो इतना खोयी थी क मेरे आने का भी उन्हें पता न चला और मैं चुप चाप उनकी बगल में बैठ गया.

अमित : कहाँ खोयी हुई हैं आप?

आंटी : तुम ? तुम कब ए ? मुझे लगा तुम सो रहे होंगे रूम में.

अमित : बात क्या है ? आप कुछ छुपा रही हैं . कोई तो बात है जो आपको परेशां कर रही है . आप तो दीदी को लेने गयी थी न ? फिर उन्हें लेकर क्यों नहीं आयी ? क्या हुआ है वहां पर जो आप इतनी टेंशन में हैं?

आंटी : मुझे खुद समझ में नहीं आ रही. करिश्मा को देख कर लगा जैसे वो मेरी बेटी है hi नहीं वो कोई और hi है. हमेशा हसने खेलने वाली मेरी फूल सी बची बिलकुल मुरझा सी गयी है. उसके चेहरे पर तो हंसी नज़र hi नहीं आती और न hi उसकी वो हालत मुझसे देखि जा रही थी. कुछ भी पूछूं बस जवाब एक hi ‘ मैं खुश हूँ यहाँ ‘ ये भला कोई बात हुई. कुछ तो है जो वो बता नहीं रही . वहां सब ठीक नहीं है. न उसने अपने पापा से कुछ कहा न मुझसे . मगर मैं भी माँ हूँ उसकी . उसकी आँखों में जो दर्द था वो मैंने महसूस कर लिया था पर बात क्या है अब ये किस्से पूछूं? जब उससे ज्यादा पूछने की कोशिश की तो अपनी कसम देकर चुप करवा दिया मुझे. जब से उससे मिल क आयी हूँ मुझे एक पल भी चैन नहीं आ रहा . मैंने बड़ी कोशिश की उसे यहाँ लेन की पर वो नहीं मणि . बस यही कह रही थी क अब यही मेरा घर है. पता नहीं क्या हुआ है उसके साथ जो एक साल में hi ऐसी हो गयी है वो?

अमित : अंकल ने कुछ नहीं कहा ? आप ने उनके ससुराल वालों से बात नहीं की ?

आंटी : वो कहाँ कुछ बताते हैं ? तेरे अंकल ने भी कोशिश की मगर इनकी नज़र में तो वो लोग बड़े अचे हैं . मेरा दिल नहीं मन रहा . बेटी ने hi मजबूर कर दिया वर्ण मैं उसे साथ लाये बिना वापिस नहीं आती.

अमित : आप चिंता मत करो सब ठीक हो जायेगा. आप एक काम कीजिये उन्हें किसी बहाने से यहाँ बुला लीजिये और फिर कुछ दिन यहीं रख लीजियेगा. हो सकता है वहां रह कर वो कोई बात न करना चाहती हों

आंटी : ये तुमने ठीक कहा. ये बात तो मेरे दिमाग में आयी hi नहीं. मैं उसे अभी फ़ोन करती हूँ.

अमित : मगर कहेंगी क्या उनसे? वो फिर से मन कर देंगी .

आंटी : क्या कहूं तुम hi बताओ ?

अमित : एक काम करिये , आप उनसे किसी की बीमारी या एक्सीडेंट का बहाना बना दीजिये.

आंटी : पर इससे तो वो बुरा मन जाएगी

अमित : वो सब से ज्यादा प्यार किस्से करती हैं ?

आंटी : वो तो सब से hi प्यार करती है वैसे ज्यादा अपने पापा से करती है

अमित : बस फिर ठीक है , अंकल को 2 दिन काम से छुट्टी करवा कर घर बैठाइये और उनके बीमार होने की खबर दीदी को दे दीजिये . देख लेना दौड़ी चली आएँगी . फिर करते रहना अपने मन की

आंटी : खुश होते हुए) ये तुमने बिलकुल सही कहा , ऐसा hi करती हूँ . वो अपने पापा क लिए दौड़ी आएगी फिर रोक लुंगी उसे कुछ दिन .

अमित : पहले अंकल क साथ टाइम सेट कर लीजिये वर्ण गड़बड़ हो जाएगी.

आंटी : मैं अभी इनसे बात करती हूँ.

आंटी ने जल्दी से अंकल को फ़ोन लगाया और उन्हें साडी बात समझा दी. अंकल पहले तो मन नहीं रहे थे फिर आंटी क ज़ोर देने पर उन्हें हाँ करनी hi पड़ी मगर उन्होंने कुछ दिन रुकने को ज़रूर कह दिया काम की वजह से. आंटी तो मन नहीं रही थी मगर मैंने उन्हें इशारे से बात मन जाने को कहा .

आंटी : तुमने इतने दिन रुकने की बात पर मन जाने को क्यों कहा?

अमित : अंकल की बात भी सही थी एक तो वो अपना काम देख लेंगे दूसरा अभी तो आप वहां से ए हैं तो ऐसे अचानक तबियत का बहाना करने से वो शायद न एते . अब आप छोड़िये टेंशन लेना. जब दीदी यहाँ आएंगी तो बात भी पता चल जाएगी. आप ऐसे टेंशन में अछि नहीं लगती.

आंटी : क्या करूँ माँ हूँ न , पर अब तुमने मेरी टेंशन काम कर दी है. तुम सच में मेरी परवाह करते हो . ी लव यू

इतना कह कर आंटी मुझे किश करते हुए मेरे ऊपर hi चढ़ गयी . मैंने भी उनका साथ दिया मगर इस तरह दिन दिहाड़े ऐसे करना मुझे ठीक नहीं लग रहा था इस लिए मैंने जल्दी किश ख़तम की हालाँकि वो तैयार नहीं थी. उसके बाद मैं अपने रूम में आकर कुछ देर आराम करने लगा. पिछले कुछ दिनों से मैं स्टेडियम नहीं जा पता था इस लिए शाम को जब स्टेडियम गया तो कोच सर थोड़े नाराज़ भी हुए क्यूंकि इसी महीने तो कम्पटीशन भी था. मगर मैं अपने साथ मिठाई ले गया था और जब खुश खबरि सुनाई तो माहौल बदल गया. नीरज को पहले hi पता चल गया था और वो भी बहुत खुश था. खैर मैंने कोच सर को प्रॉमिस किया क अब से मैं कोई दिन मिस नहीं करूँगा. उसके बाद मैं मंजू म क पास भी गया. पड़े तो कोई खास करनी नहीं थी आज बस कुछ देर बातें कर क वापिस आ गया क्यूंकि वो भी बिजी थी कुछ टेस्ट रिलेटेड काम में.

आज मैं कुछ फ्री था तो पहले घर पर बात की और दीपिका ममी और बचे का हल जाना , उसके बाद मैंने नैना दीदी करुणा दीदी से बात की. कुछ दिनों से नैना दीदी की सहेली ज्योति क फ़ोन भी आ रहे थे जिसे मैं उठा नहीं रहा था तो उसे भी फ़ोन कर क सारा सूरते हल बता दिया. वो मिलने को कह रही थी मगर मैंने उसे अभी ताल दिया. फिर मुझे यद् आया क मैंने रुपाली को मोंटी का लैपटॉप लेन को कहा था. यद् एते hi मैंने उसे फ़ोन लगा दिया . एक बार तो उसने फ़ोन उठाया hi नहीं मुझे टेंशन होने लगी मगर दूसरी बार करने पर उसने फ़ोन उठा लिया

रुपाली : क्या बात है क्यों फ़ोन कर रहे हो ? अभी नहीं हुआ तुम्हारा काम. मोंटी लैपटॉप को छोड़ता hi नहीं है . जैसे hi काम बनेगा मैं फ़ोन करुँगी तुम्हे

अमित : मुझे लगा कहीं तुम भूल तो नहीं गयी. वैसे इतने दिनों में तुम्हे मेरी यद् नहीं आयी? तुम्हारी जेठानी तो मुझे फ़ोन करती रहती है.

रुपाली : तो उसी से बात करो मुझे क्यों फ़ोन कर रहे हो मुझे ये सब पसंद नहीं है. मेरी मज़बूरी का तुम फायदा उठा रहे हो कभी किसी दिन तुम्हारे साथ ऐसा हुआ तो तुम्हे पता चलेगा. अब बंद करो फ़ोन मैं खुद hi करुँगी.

रुपाली ने इतना कह कर फ़ोन काट दिया . मुझे रुपाली की हालत पता था इस लिए मैंने भी उसकी बात का गुस्सा नहीं किया . सच कहूं तो मुझे भी ये सब करना ाचा नहीं लग रहा था पर मेरे पास यही एक रास्ता था जो बिना लड़ाई झगडे क काम को कर सकता था जिससे क शालू पर भी कोई आंच न आये.

फिर मैंने शालू और शिवानी को भी फ़ोन किया और उनसे भी बात की. शिवानी मुझसे नाराज़ भी थिंक इतने दिनों से मैं न उससे मिला न फ़ोन किया . पर वो जल्दी hi मान गयी वो खुद भी तो शीना क साथ लगी हुई थी . मगर उसने कहा क उसे ऐसा कुछ भी नहीं लग रहा क अभी वो लोग कुछ करना चाहते हैं इस लिए वो अब शीना से मिलना काम करने वाली थी. मैंने जल्द hi उससे मिलने का कहा.

रत का खाना खाने क बाद मैं अपने रूम में था क मेघा की कॉल आने लगी . मैं पिछले कई दिनों से उसकी कॉल नहीं उठा रहा था सोचा आज बात कर hi लूँ.

अमित : hello

मेघा : कहाँ गायब हो इतने दिनों से ? कितनी बार मैं फ़ोन कर चुकी हूँ तुम फ़ोन क्यों नहीं उठाते ?

अमित : अरे अरे शांत , शांत हो जाओ . मैं किसी काम से बहार गया था इस लिए फ़ोन नहीं उठा रहा था . अब बताओ , लगता है मुझे मिस कर रही थी.

मेघा : और नहीं तो क्या ? इतने दिनों से तड़प रही थी तुमसे मिलने क लिए . तुम्हारे सिवा अब और कोई जंचता hi नहीं मुझे. अब बताओ कब मिल रहे हो ? तुम्हारे लिए एक गिफ्ट है मेरे पास

अमित : गिफ्ट ? कैसा गिफ्ट

मेघा : सरप्राइज है , अब बताओ कब मिल रहे हो?

अमित : अभी तो मुश्किल है नेक्स्ट वीक में देखता हूँ

मेघा : मैं इतने दिन वेट नहीं कर सकती पहले hi इतने दिन हो गए तुमसे मिले हुए .

अमित : मेरी मज़बूरी है मैं किसी ज़रूरी काम में फसा हुआ हूँ . अगले हफ्ते पक्का मिलूंगा

मेघा : ठीक है मगर इससे लेट नहीं करना वर्ण मैं खुद तुम्हारे पास आ जाउंगी फिर चाहे मुझे रमा क घर hi क्यों न आना पड़े.

अमित : नहीं उसकी ज़रूरत नहीं पड़ेगी और गलती से भी उनके घर मत जाना वर्ण मेरा राज़ खुल जायेगा .

मेघा : तो खुद hi मुझसे मिलने आ जाना मैं इंतज़ार करुँगी. Bye bye मुहाः

उसके बाद मेघा ने फ़ोन काट दिया मगर मैं सोच में पद गया अगर कहीं सच में ये यहाँ आ गयी तो मैं क्या जवाब दूंगा? मैं इन सब बातों को सोचता हुआ लेट गया और सोने की कोशिश करने लगा. मैं अभी कच्ची नींद में था क आंटी रूम में आयी और दूर लॉक कर क आहिस्ता कदमो से चलती हुई मेरे पास आ गयी . कमरे में जीरो बल्ब लगा हुआ था मगर इतनी रौशनी ज़रूर थी क मैं उन्हें अछि तरह देख प् रहा था. वो इस वक़्त उसी गाउन में थी जो वो अपने रूम में पहनती थी . बीएड पर मेरे पास बैठ कर वो धीरे से झुकी और मेरे होंठों पर एक हल्का सा किश कर दिया .

आंटी : इतनी जल्दी सो भी गए ? इतने दिन बाद आज मौका मिला है तो क्या मुझे प्यार नहीं करोगे ?

मैंने आंटी को जवाब नहीं दिया और वैसे hi सोता बना रहा . मैं आंटी को सतना चाहता था इस लिए चुप चाप लेता मज़े ले रहा था.

आंटी : लगता है खुद hi सब कुछ करना पड़ेगा , मैं भी देखती हूँ कब तक सोते हो.

इतना कह कर आंटी ने अपना गाउन उतर कर एक तरफ रख दिया. गाउन क निचे कुछ न पहनने क कारन आंटी पूरी नंगी हो गयी . इसके साथ hi वो मेरे ऊपर झुक गयी और मेरे लोअर में हाथ दाल क मेरे लैंड को मसलने लगी . उनके हाथ लगते hi लैंड में तनाव आने लगा. मैं तो जग hi रहा था और लैंड भी जल्दी सलामी देने लगा. आंटी ने जैसे hi लैंड को अपने मुँह में लिया तो मेरा सबर जवाब दे गया और मैंने आंटी का सर अपना लैंड पर दबा दिया .

आंटी : तो जग रहे थे तुम , फिर ये एक्टिंग क्यों?

अमित : बाद देखना चाहता था क आप क्या करती हो?

आंटी : तो ये बात है , अभी दिखती हूँ मैं क्या करती हूँ .

आंटी फिर से लैंड को मुँह में ले कर चूसने लगी और थोड़ी देर चूसै क बाद जल्दी से मेरी दोनों तरफ घुटने क बल आ कर उन्होंने लैंड को छूट पर सेट किया और एक झटके में बैठ गयी .

आंटी : अअअअअ मा कितना बड़ा है ये हर बार जान hi निकल देता है . पता नहीं कब ये आराम से जाने लगेगा.

अमित : आप खुद hi जल्दबाजी करती हो , आराम से लो न

आंटी : क्या करूँ आअह्ह्ह 5 दिन बाद तो मौका मिला है उफ्फफ्फ्फ़ कक्कक्क्स वेट नहीं हो रहा था.

मैंने आंटी को पलट कर निचे कर दिया और खुद उनके ऊपर आये हुए अपनी T-shirt उतर कर उनके ऊपर लेट कर उनके बूब्स को प्यार करता हुआ अपनी कमर हिलाने लगा . जल्दी hi आंटी भी रंग में आ गयी और मेरी कमर पर अपनी टंगे लपेट कर खुद hi कमर उठा उठा कर साथ देने लगी. आंटी इतने दिनों की प्यासी थी तो जल्द hi मंज़िल प् गयी और उसके बाद मैंने उन्हें अपना पानी निकलने तक अछि तरह रगड़ा और लास्ट में उनकी गांड में अपना पानी निकला. हम दोनों hi चुदाई से इतना पास्ट हो गए थे क ऐसे लेट गए और मेरी आँख लग गयी.

अगली सुबह मैं जब उठा तो आंटी मेरे पास नहीं थी . मैं जल्दी से उठ कर एक्सरसाइज क लिए निकल गया . आज ग्राउंड में मुझे फिर वही लेडी अफसर नज़र आयी मगर मैंने उसकी तरफ देखा भी नहीं और अपनी एक्सरसाइज ख़तम कर क वापिस आ गया. मेरे पास से रनिंग कर क जाते हुए उसने मुझे घूर कर ज़रूर देखा मगर मैंने उसकी तरफ न देखना hi बेहतर समझा. घर आ कर नाश्ता कर क मैं और मोहित कॉलेज क लिए निकल गए. चन्दर्कांता आज भी मुझे गुस्से से देख रही थी मगर उसने कुछ कहा नहीं . शायद उसने मेरे बाकि सब्जेक्ट्स क मार्क्स भी देख लिए थे. आज कैंटीन में जब हम सब इकठ्ठा हुए तो डिस्कशन का टॉपिक राधा और मीनल की क्लास का कॉलेज टूर था. आज थर्सडे था और कल से दो दिन क लिए उनकी क्लास टूर पे जा रही थी.

कल्पना : तो तुम दोनों की तयारी है न पूरी कल क लिए ?

मीनल : यस , ी ऍम वैरी एक्ससिटेड. सीनियर गर्ल ने बताया था क बहुत मज़ा अत है टूर पे और इस बार तो जहाँ टूर जा रहा है वो फारेस्ट एरिया है. सुना है वहां टेण्टिंग भी होगी.

मोहित : क्या यार तुम चली जाओगी तो मेरा दिल कहाँ लगेगा यहाँ , क्या मैं नहीं चल सकता साथ में?

मीनल : जी नहीं , वहां सिर्फ हमारी क्लास क hi स्टूडेंट्स जा सकते हैं . ये स्पेशलय हमारी क्लास क लिए है पूरे कॉलेज क लिए नहीं. वैसे भी 2 दिन मैं भी तुमसे दूर रहना चाहती हूँ ताकि तुम्हे मेरी कदर पता चले

मोहित : तुम्हारे कहने का मतलब क्या है क मैं तुम्हारी कदर नहीं करता ?

कल्पना : क्या यार मीनल और कितना बात मानवाओगी इससे ? पहले hi जोरू का गुलाम तो है

नेहा दीदी : जोरू का गुलाम कैसे ? अभी इसकी शादी कहाँ हुई है?

कल्पना : हुई नहीं तो हो जाएगी दीदी , वैसे भी मुझे नहीं लगता क इन्हे शादी की ज़रूरत पड़ेगी. बस दोनों अलग घरों में hi तो रहते हैं बाकि सब तो .......

मीनल : तू मुझसे मार खायेगी कल्पना देख लेना .

कल्पना की बात पर मीनल और मोहित की हालत ऐसी हो गयी थी जैसे उनकी चोरी पकड़ी गयी हो जबकि हम सब है रहे थे. राधा आज भी खामोश थी और जैसे कहीं खोयी स थी.

अमित : राधा तुम चुप क्यों हो ? क्या बात है?

राधा : कुछ नहीं , वो बस मैं इस टूर पे जाना नहीं चाहती पता नहीं क्यों मेरा दिल नहीं मन रहा . क्या ऐसा नहीं हो सकता क तुम भी साथ चलो ?

अमित : मैं भला कैसे साथ जा सकता हूँ ? अभी तो मीनल ने बताया क वहां सिर्फ तुम्हारी hi क्लास जाएगी. और फिर मीनल है न तुम्हारे साथ , तुम्हे डरने की क्या ज़रूरत है.

मीनल : और नहीं तो क्या , हम हैं तो क्या गम है. हे हे हे

राधा : वो बात नहीं बस मुझे एक दर सा लग रहा है.

नेहा दीदी : तुम कभी घर से बहार गयी नहीं न अकेले इस लिए तुम्हे ऐसा लग रहा है. वैसे भी कॉलेज स्टाफ भी तो होगा साथ में . तुम्हे डरने की ज़रूरत नहीं है.

राधा : पर दीदी .....

अमित : एक काम करना तुम मुझसे फ़ोन पर बात करती रहना. और मैं खुद भी तुम्हे फ़ोन करता रहूँगा. ऐसे तुम्हे दर नहीं लगेगा. वैसे मौसी मन कैसे गयी ?

कल्पना : मानती कैसी नहीं ? आंटी बहुत समझदार हैं . उन्हें जब पता चला क एक्सेस्समेंट क लिए जाना ज़रूरी है तो वो खुद hi कहने लगी क तुम हो आओ .

मैंने राधा का हाथ पकड़ा और उसे तसल्ली देते हुए कहा.

अमित : घबराओ मत कुछ नहीं होगा . अगर फिर भी तुम्हे दर लगे या कोई प्रॉब्लम हो तो मुझे बता देना मैं आ जाऊंगा.

राधा : पक्का तुम आ जाओगे ?

अमित : प्रॉमिस , जब भी पुकारोगी मैं कहीं भी हूँ तुम्हारे पास आ जाऊंगा .

राधा ने मुँह से तो और कुछ नहीं कहा मगर उसके चेहरे क भाव बता रहे थे क उसे बहुत ख़ुशी मिली थी मेरी इस बात से और उसने आँखों से जैसे मुझे कुछ कहा मगर मैं समझा नहीं. खैर बेल्ल बजते hi हम अपनी अपनी क्लास में वापिस चले गए . उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ और घर आ कर लंच क बाद आराम किया और फिर शाम को स्टेडियम. मंजू म आज भी बिजी थी तो मैं उनके साथ थोड़ी देर बातें करने क बाद घर वापिस आ गया . आज अंकल भी घर आ गए थे तो आंटी क आने की भी कोई संभावना नहीं थी. इस लिए रत को सोने से पहले बस एक बार सब से फ़ोन पर बात की . अगली सुबह सुबह एक्सरसाइज क बाद ब्रेकफास्ट और फिर मोहित क साथ कॉलेज क लिए निकल गया . रस्ते में जब हम मीनल क घर पहुंचे तो बहार hi एम्बुलेंस कड़ी थी. एम्बुलेंस देख कर मैं और मोहित दोनों hi घबरा गए क पता नहीं क्या हो गया. मोहित को तो दर लगने लगा कहीं मीनल को तो कुछ नहीं हुआ मगर जल्द hi मीनल सही सलामत गाड़ी क पास कड़ी नज़र आयी तो मोहित जल्दी से उसके पास चला गया और पीछे पीछे मैं भी .

मोहित : कल्पना तुम ठीक तो हो ? ये एम्बुलेंस यहाँ क्या कर रही है?

मीनल : रट हुए ) वो माँ

मोहित : क्या हुआ आंटी को?

मीनल : माँ सीढ़ियों से गिर गयी , बहुत खून निकला है उनका और शायद तंग भी टूट गयी है . वो बेहोश हो गयी थी . डॉ ने हॉस्पिटल ले जाने को कहा है.

मोहित : तुम चिंता मत करो कुछ नहीं होगा आंटी को . मैं चलता हूँ तुम्हारे साथ.

मीनल : नहीं अभी तुम रहने दो . पापा आ रहे हैं . और राधा से कह देना मैं नहीं जा पाऊँगी वो मम को बता दे.

मोहित : पर तुम अकेली कैसे संभालोगी

मीनल : भैया हैं साथ एम्बुलेंस में बैठे हैं मैं भी जा रही हूँ साथ . तुम जाओ बाद में मिलते हैं .

मीनल एम्बुलेंस में बैठ कर चली गयी और मोहित को मैं वापिस गाड़ी की तरफ ले आया .

अमित : ये तो प्रॉब्लम हो गयी यार. एक तो मीनल की माँ को चोट लग गयी ऊपर से वो जा नहीं पायेगी अब राधा को अकेले hi जाना पड़ेगा . चल जल्दी उसे जाकर बता देते हैं.

मैं और मोहित कार में बैठे और जल्दी से कॉलेज पहुँच गए . कॉलेज क अंदर hi 2 शानदार डीलक्स बसेस कड़ी थी . उसके पास hi राधा की क्लास क स्टूडेंट्स और साथ जाने वाले स्टाफ मेंबर खड़े थे. राधा भी पहुँच चुकी थी और नेहा दीदी क साथ कल्पना भी राधा क साथ कड़ी थी. राधा कंधे पर एक बैग लटकाये जैसे हमें hi ढून्ढ रही थी. और मुझ पर नज़र पड़ते hi जैसे उसे तसल्ली हो गयी.

राधा : कहाँ रह गए थे तुम ? मैं कब से तुम्हारी रह देख रही हूँ. मुझे लगा कहीं तुम भूल तो नहीं गए क मुझे आज जाना है? अगर तुम नहीं आते मुझे ाचा नहीं लगता.

अमित : सॉरी वो ज़रा लेट हो गए आते आते. वैसे तुमने सोचा भी कैसे क मैं नहीं आऊंगा ? अगर बस यहाँ से निकल भी जाती तो मैं पीछा कर क बस रुकवा कर तुम्हे bye करने अत .

कल्पना : ाचा हुआ यहीं मिल लिए वर्ण खामखा बस ड्राइवर को टेंशन हो जाती.

अमित : तो क्या हुआ , राधा को ऐसे थोड़ा जाने देता बिना मिले. तुम अपना ख्याल रखना और बिलकुल भी डरना मत . कभी भी तुम मुझे फ़ोन कर सकती हो. अगर फिर भी दर लगे तो बोल देना मैं लेने आ जाऊंगा.

राधा ने मेरा हाथ अपने दोनों हाथों में पकड़ लिया और उसके चेहरे पर रौनक आ गयी .

नेहा दीदी : वैसे मीनल कहाँ है ? वो नज़र नहीं आ रही .

मोहित : दीदी उसकी माँ सीढ़ियों से नीचे गिर गयी हैं और अभी अभी वो उन्हें हॉस्पिटल ले कर गए हैं . हम वहीँ से आ रहे हैं.

कल्पना : तो इसका मतलब अब वो नहीं जाएगी राधा क साथ?

मोहित : नहीं और उसने कहा है क राधा को बता दूँ ताकि वो मम को बता दे.

राधा : भगवन उसकी माँ को सलामत रखें . मैं मम को बोल दूंगी . मगर अब मैं अकेली कैसे रहूंगी वहां ?

कल्पना : डोंट वोर्री राधा , बे स्ट्रांग . कुछ नहीं होगा तुम्हे तुम ऐसे hi दर रही हो.

अमित : मैंने कहा न मैं तुम्हारे साथ हूँ अगर तुम्हे ज्यादा दर लगे तो मुझे फ़ोन कर देना . अब जाओ और बैठो बस में देखो सब बैठ गए हैं .

स्टूडेंट्स ऑलमोस्ट बुस्सेस में बैठ गए थे इस लिए मैंने राधा को बस में बैठने को कहा. हम सब ने राधा को बेस्ट ऑफ़ लक कहा और उसे बस में चढ़ा कर बस क चलते hi अपनी अपनी क्लास में चले गए . राधा अपने सफर के चली गयी थी मगर पता नहीं क्यों मुझे भी राधा की फ़िक्र हो रही थी . लास्ट मोमेंट पर मीनल क न जाने से मुझे भी राधा की चिंता होने लगी अगर मीनल साथ रहती तो मुझे चिंता नहीं थी. फ्री लेक्चर में हम कैंटीन में बैठे हुए थे क मोंटी उसके दोस्त और शीना का ग्रुप हमारे सामने आ कर बैठ गया. उनकी टोली क सब लोग मौजूद थे सिवाए शीना क . मोंटी जान बूझ कर मुझे देख कर कामिनी हंसी हंस रहा था मगर मैंने उसको तवज्जो नहीं दी और अपनी टीम क साथ बैठ कर टाइम पास करता रहा. कैंटीन में बैठे hi राधा का फ़ोन आ गया और हम सब ने बरी बरी उससे बात की. उसने बताया क वो छाए नाश्ते क लिए किसी होटल पर रुके हैं और रस्ते में एक साइट पर विजिट करने क बाद वो शाम तक अपने डेस्टिनेशन पर पहुँच जायेंगे. खैर हम सब भी कॉलेज क बाद घर चले गए. मैंने शिवानी को फ़ोन पर शीना क बारे में पूछा तो उसने कहा क उसे भी नहीं पता . शीना ने अचानक से कहीं जाने का प्रोग्राम बनाया था और वो कहाँ गयी किसके साथ गयी ये उसने किसी को भी नहीं बताया . मुझे ये कुछ अजीब लगा पर मोंटी तो कॉलेज में hi था तो मुझे इसने कोई खतरे वाली बात नज़र नहीं आयी.

शाम को जब मैं स्टेडियम में प्रैक्टिस कर रहा था तो मेरा फ़ोन बजने लगा. मुझे लगा क राधा का फ़ोन होगा क्यूंकि वो 2-3 बार फ़ोन कर चुकी थी . मैंने बिना देखे फ़ोन उठा लिया और सामने से जो मैंने सुना उसकी सुनते hi मेरा खून खोलने लगा.

ों कॉल -

रीमा : hello मैं रीमा बोल रही हूँ , प्लीज मेरी बात सुने बिना फ़ोन मत काटना . राधा खतरे में है. मैंने मोंटी को किसी से बात करते हुए सुना है . वो राधा को कहीं लेन की बात कर रहा था रत को . प्लीज जल्दी से कुछ करो . मैं राधा को भी फ़ोन कर रही हूँ मगर उसका फ़ोन नहीं मिल रहा. प्लीज उसे बचा लो .

अमित : क्या उसकी इतनी हिम्मत . राधा को अगर कुछ भी हुआ तो मैं उसका खून पि जाऊंगा . मैं उसे ज़िंदा नहीं छोडूंगा .

मैं एक डैम से गुस्से में आ गया था . मैंने रीमा की और कोई बात सुने बिना फ़ोन कर दिया और जल्दी से राधा का फ़ोन तरय करने लगा मगर वो नॉट रचाबळे आ रहा था. मुझे टेंशन होने लगी . नीरज जो मेरे पास में hi था शायद उसने मेरी बात सुन ली थी और उसे भी टेंशन होने लगी .

नीरज : क्या बात है छोटे भाई ? कोई प्रॉब्लम है क्या ?

अमित : गुस्से में ) भैया अभी अभी फ़ोन आया है किसी का उसने बताया है क मोंटी राधा क साथ कुछ करने वाला है.

नीरज : पर राधा तो टूर पे गयी है न आज ? और मोंटी तो कॉलेज में hi था.

ओह सहित इसका मतलब ये उसका प्लान था और हम सोच रहे थे क वो यहाँ कुछ करेगा मगर उसने तो . चल जल्दी छोटे हमें अभी निकलना पड़ेगा.

अमित: पर उनका टूर किस जगह गया है ये भी तो पता चले . आप जल्दी से किसी से पता करो मैं भी पता करता हूँ क वो किस लोकेशन पर रुकने वाले हैं.

मुझे समझ नहीं आ रहा था क किस्से पता करूँ और राधा का भी तो फ़ोन नहीं लग रहा था. फिर मेरे दिमाग में मंजू म का ख्याल आया. मैंने जल्दी से उनको फ़ोन किया और उन्होंने दूसरी बेल्ल पर hi फ़ोन उठा लिया.

मंजू म : कहाँ रह गए ? आज आना नहीं है क्या जो फ़ोन कर रहे हो ?

अमित : क्या आप जानती हैं साइंस क्लास का जो टूर आज गया है वो किस लोकेशन पर होगा आज ?

मंजू म : नहीं मगर बात क्या है ?

अमित : मोंटी राधा क साथ कुछ गलत करने वाला है मुझे अभी अभी पता चला है. प्लीज कैसे भी कर क मुझे पता लगा कर दीजिये वर्ण मैं खुद को माफ़ नहीं कर पाउँगा .

मंजू म: क्या ???? उसकी इतनी हिम्मत , तुम रुको मैं अभी पता करती हूँ.

मंजू म ने जल्दी से फ़ोन कटा और उधर से नीरज ने भी किसी से जानकारी ले ली.

नीरज : चल जल्दी छोटे . पूरा तो पता नहीं चला पर इतना पता चल गया है क वो किस तरफ गए हैं. यहाँ से काफी दूर है . जाने में 2-3 घंटे लग जायेंगे . चल जल्दी से निकलते हैं मेरी कार बहार hi कड़ी है.

अमित : मोहित को भी साथ ले चलते हैं क्या पता उसकी ज़रूरत न पद जाये .

नीरज : ठीक कहा बुला लो उसे भी

मैंने मोहित को फ़ोन लगाया .

अमित : hello कहाँ पर हो तुम ?

मोहित : मैं हॉस्पिटल आया हूँ मीनल की माँ का पता लेने बात क्या है

अमित : अभी अभी रीमा का फ़ोन आया था उसने बताया क मोंटी राधा क साथ कुछ गलत करने वाला है

मोहित : उसकी माँ की ! तू कहाँ है बता . मैं अभी अत हूँ.

अमित : मैं और नीरज भैया स्टेडियम में हैं.

मोहित : मैं अभी आया रुको वहीँ पर .

हम दोनों मोहित का वेट करने लगे . मुझसे एक पल भी इंतज़ार नहीं हो रहा था मगर मोहित क लिए रुकना भी ज़रूरी था. इतनी देर में नीरज कहीं से 1-2 हॉकी और बेस बात ले आया . मोहित क आते hi हम कार में तीनो एक साथ निकल लिए. कार मोहित चाल रहा था और फुल स्पीड में चला रहा था .

मोहित : यार हम जा तो रहे हैं पर क्या तेरी बात हुई है राधा से या किसी और से ? मतलब क तू रीमा की एक फ़ोन कॉल पर चल दिया और तो कोई बात नहीं है न ? तू खुद hi कह रहा था क रीमा उसकी बहिन है तो फिर वो अपने भाई क खिलाफ क्यों तेरा साथ से रही है?

अमित : ये तो मैंने सोचा नहीं पर मुझे उसकी बातों में सचाई लग रही थी. और राधा का फ़ोन भी तो नहीं लग रहा.

नीरज : ऐसा भी तो हो सकता है क वहां नेटवर्क की प्रॉब्लम हो. मेरे दोस्त ने बताया है क वो फारेस्ट एरिया है.

इतने में मंजू म का फ़ोन आ गया और उन्होंने मुझे बताया क कहाँ पर टूर का स्टे होने वाला था आज रत. उन्हें कॉलेज स्टाफ से जानकारी मिली थी मगर उन्होंने ये भी बताया क जो स्टाफ साथ में गया है उनसे भी कांटेक्ट नहीं हो प् रहा है.



अब हमारे पास लोकेशन का पता था तो हमने उस तरफ फुल स्पीड में आगे बढ़ना शुरू कर दिया . साथ hi मैं लगातार राधा का फ़ोन तरय कर रहा था मगर हर बार एक hi जवाब आ रहा था ‘ नॉट रचाबळे ‘ . जैसे जैसे समय बीत रहा था मेरी धड़कन बढ़ती जा रही थी. मोंटी कैसा है ये तो मैं अछि तरह जनता था और राधा क साथ वो क्या कर सकता ये सब दिमाग में एते hi मेरा दिमाग ख़राब होने लगा . मैंने पक्का इरादा कर लिया क अगर राधा को एक खरोंच तक आयी तो मैं मोंटी को ज़िंदा नहीं छोडूंगा. अँधेरा हो रहा था और अभी तक राधा क साथ कांटेक्ट नहीं हो पाया था और बीच बीच में मंजू म भी मुझे फ़ोन कर क पूछ रही थी. अपनी तरफ से वो भी स्टाफ को कांटेक्ट करने की कोशिश कर रही थी.
 
अपडेट 125



आज साइंस क्लास टूर पर जा रही थी और वैसा hi हो रहा था जैसा क मोंटी ने प्लान किया था . प्लान क मुताबिक बॉयज कॉलेज क लड़कों को मोंटी ने पहले hi उस जगह पहुंचा दिया था मोंटी ने सेट की थी राधा को किडनैप कर क लेन क लिए. शीना भी घर से पहले hi निकल गयी थी उस लोकेशन की तरफ जहाँ सब स्टूडेंट्स क स्टे क लिए अरेंजमेंट किये गए थे. शीना को मोंटी दूर रखना चाहता था इस सब से मगर शीना ज़िद्द कर क इसमें शामिल हुई थी और उसका काम था राधा को उठाने में बॉयज कॉलेज वाले लड़कों की मदद करना . बॉयज कॉलेज वाले लड़को का लीडर रंजीत था जो की नीरज से पहले भी झगड़ चूका था और नीरज अमित की तरह रेसलिंग का प्लेयर था . इस काम क लिए उसने नए लड़को को साथ लिया था जो क फर्स्ट ईयर क hi थे और रेसलिंग क प्लेयर थे. इन नए लड़कों में वो भी लड़का था जिस से अमित का मुकाबला हो चूका था जिसका असली नाम तो पता नहीं पर उसे ‘ हठी ‘ कह क बुलाते थे सब. हठी नाम उसकी भरी भरकम देह की वजह से था. रंजीत ने नए लड़कों को इस लिए शामिल किया था क अगर कुछ भी गड़बड़ हुई तो वो खुद निकल लेगा और इलज़ाम इन नए लड़कों पर आएगा. रंजीत अपने साथ इन 5 लड़कों को लाया था जो आवारा और हरामी किसम क hi थे. शीना इस सब में इस लिए भी शामिल हुई थी क वो एक तो खुद अमित और राधा को सबक सीखना चाहती थी और दूसरी वजह कहीं न कहीं उसके दिल में वो बात थी क एक लड़की की इज़्ज़त ख़राब नहीं होनी चाहिए . क्यूंकि यहाँ पर प्लान किडनैप कर क रखने का था तो इसका गलत इस्तेमाल भी हो सकता था. भले hi उसे मोंटी पर भरोसा था मगर इस काम में दूसरे कॉलेज क लड़के शामिल थे तो उसने ये फैसला लिया था.

शीना तो चली गयी थी घर से सीधा hi उस लोकेशन की तरफ और उसने इस बारे में अपनी किसी भी सहेली को नहीं बताया था जैसा क मोंटी ने कहा था . मोंटी कॉलेज में hi रुका ताकि कुछ भी होने पर उस पर कोई उंगली न उठा सके. वो काम होने क बाद यहाँ से रत में hi उधर जाने वाला था. इधर कॉलेज से सब टूर क लिए निकल चुके थे और शीना भी रस्ते में hi थी उधर रंजीत अपने साथियों को खिलने पिलाने में लगा था. मोंटी जनता था क ऐसे लोग खाने पीने क शौकीन होते हैं इस लिए सबके लिए मॉस मदिरा का ाचा इंतज़ाम था.

रंजीत : चलो बे उठो अब रात को काम पीनी थी अब साले उठ नहीं रहे हो

पंजू : क्या भाई आप भी साले प्रोफ़ेसर लोगों की तरह गांड मरने में लगे हो . अभी तो बहुत टाइम पड़ा है

रंजीत : सालो ऐसे hi पड़े रहोगे तो काम कैसे होगा फिर ? पता है न हमें क्या करना है ? साला ज़रा सी चूक हुई तो सबके लोडे लग जायेंगे.

हठी : क्या भाई आप भी कैसी बातें कर रहे हैं. कोई गड़बड़ नहीं होगी . वैसे मोंटी तो साला पूरा उस्ताद है. जिसको चाहे छोड़ लेता होगा या तो पैसा दिखा कर यार फिर हम जैसों से उठवा कर. उस लड़की क साथ भी तो यही करने वाला होगा वो ?

रंजीत : हमें क्या वो जो भी करे , हमें तो अपने काम से मतलब है. वैसे कुछ भी है साला मोंटी है यारों का यार. खूब मज़े करवाता है. देखो तो कितना ाचा इंतज़ाम करवाया है हमारे लिए और बोल रहा था क बाद में हम भी उस लड़की क साथ मज़े कर सकते हैं.

हठी : वैसे उस्ताद वो लड़की है कोण ? साला कुछ ज्यादा hi पन्गा लगता है उसका

रंजीत : अरे ये उसकी बहिन है जिसका काम तुझे करने को बोलै था मैच में.

हठी : क्या ?? उसकी बहिन है , उस मादरचोद के साथ तो मुझे भी हिसाब करना है . बहनचोद ने मुझे पटक दिया था . आज तो उसकी बहिन को छोड़ कर हिसाब बराबर करूँगा . अगर वो भी साला मिल जाता तो उसकी भी गांड मर लेता आज hi.

रंजीत : ज्यादा तो मुझे पता नहीं पर लगता है उसकी बहिन को उठा क उसको भी यहाँ बुलाएगा मोंटी . फिर कर लेना हिसाब.

हठी : ये तो डबल फायदा है अपना. इसी बात पर एक एक हो जाये?

रंजीत : सेल रत को भी पूरी बोतल तू अकेला hi पि गया था कितनी पिता है? चलो लगा लो और सब को लगा क दे . दारू क सुरूर में रहेंगे तो बिना डरे काम हो जायेगा

पंजू : उस्ताद आपके होते दर कैसा ? आपका हाथ सर पर हो तो हम किसी की भी माँ छोड़ देंगे.

रंजीत : शाबाश मेरे शेरो, तुम लोग ऐसे hi मेरा साथ देते रहो मैं तुम सबको ऐश करवाता रहूँगा.

उसके बाद सब मिलके दारू पिने लगे. उधर से शीना दोपहर तक कैम्पिंग लोकेशन क पास पहुँच चुकी थी और अब उससे वेट नहीं हो रही थी इस लिए वो मधु को फ़ोन करने लगी. जवाब में मधु ने बताया क वो अभी रस्ते में एक साइट पर रुके हैं और शाम को 6 बजे पहुँच जायेंगे. अभी तो 3 घंटे पड़े थे इस ऐसे में शीना बोर हो रही थी तो उसने सोचा क्यों न तब तक उन लड़कों को hi देख ले . शीना जानती थी क वो कहाँ हैं तो वो सीधा वहीँ चली गयी.

शीना जैसे hi उस गेस्ट हाउस पर पहुंची जो क पूरा का पूरा मोंटी ने रेंट पर ले लिया था कुछ दिन क लिए वहां सब लोग दारू पि रहे थे और थोड़ा थोड़ा सुरूर में थे . उनको नशे में देख कर और उनकी बातों से शीना गुस्से में आ गयी. शीना हाई सोसाइटी की लड़की थी जहाँ ऐसी भाषा का कहीं भी इस्तेमाल नहीं होता था और उन लड़कों का सलीका उसे ज़रा भी ाचा नहीं लगा.

शीना : व्हाट थे हेलल अरे यू दोंग हेरे? तुम लोगों को आज किस काम क लिए बुलाया है क्या इतना भी यद् नहीं तुम्हे? मुफ्त की शराब देख कर घटिया पैन दिखा रहे हो यहाँ.

शीना को शिव ये रंजीत क कोई नहीं जनता था इस लिए शीना की बातें सुन कर सब को गुस्सा आ गया . ऊपर से शीना थी भी कितनी खूबसूरत और उसकी ड्रेसिंग सेंस भी इतनी हॉट रहती थी हमेशा क देखने वाले क मुँह और लैंड में पानी आ hi जाता था.

हठी : लगता है तुम्हे कुछ ज्यादा hi गर्मी है चल पहले तेरी hi गर्मी ठंडी करता हूँ .

रंजीत : अबे बकवास बंद कर ये मोंटी की बहिन है.

शीना : कैसे घटिया लोगों को बुलाया है मोंटी ने , अगर दुबारा कोई हरकत की तो खाल उधेड़ दूंगी तुम्हारी

हठी रंजीत क कहने से चुप तो हो गया मगर शीना की बात उसे अछि नहीं लगी थी. उसका तो खून अंदर से खौल रहा था और यही हल बाकि सब का था. एक तो वो सब नशे में थे ऊपर से शीना इतनी हॉट थी क सब क मुँह में पानी आ गया था. जैसे hi रंजीत ने बताया क वो मोंटी की बहिन है तो मनो सबके अरमानो पर पानी फिर गया. शीना का भी दिमाग ख़राब हो गया था उसने उसी पल मोबाइल निकला और मोंटी को फ़ोन लगाया

मोंटी : हाँ शीना , पहुँच गयी तुम ?

शीना : मैं तो पहुँच गयी पर ये किन घटिया लोगों को बुलाया है तुमने ?

मोंटी : तुम उनसे कब मिली ? मैंने कहा था न वो सब तुम्हारे पास आ आएंगे . देखो तुम शांत रहो , ऐसे काम शरीफ लोग नहीं करते . ऐसे hi लोगों से काम करवाना पड़ता है. अब तुम खुद को शांत करो और प्लान पर फोकस करो . कोई गड़बड़ नहीं होनी चाहिए .

शीना : मगर इन लोगों ने कोई गड़बड़ कर दी तो ? ये सब नशा किये हुए हैं और बहुत hi घटिया किस्म क लोग हैं .

मोंटी : तुम उनकी चिंता छोडो और उनसे दूर hi रहना बाकि मैं उनसे बात कर लेता हूँ . तुम बस वही करो जो तुम्हे कहा है उनके मुँह मत लगो. इसी लिए मैं तुम्हे कह रहा था क तुम इसमें मत घुसो. अब जाओ अपनी जगह

शीना : ठीक है मगर उन्हें समझा देना क कुछ गलत नहीं होना चाहिए.

शीना तो वापिस चली गयी मगर उसके जाने क बाद रंजीत क साथी उसके साथ शीना की बातों का गिला करने लगे . रंजीत ने कैसे भी कर क उन्हें मन लिया और फ़िलहाल मामला शांत हो गया.

उधर सब स्टूडेंट्स शाम होते होते निर्धारित जगह पर पहुँच गए. पहाड़ी और जंगली एरिया होने की वजह से अँधेरा वक़्त से पहले hi होने लगा था. कॉलेज स्टाफ में से मिस मधु क इलावा एक और फीमेल और 2 मेल फैकल्टी थी इसके इलावा 2 पेओन और 2 गार्ड भी भेजे गए थे स्टूडेंट्स की सिक्योरिटी क लिए . जहाँ रुकने का प्रबंध था वहां पर एक गेस्ट हाउस था और कुछ अलग से कमरे बने थे नौकरों क लिए इसके इलावा कुछ टेंट लगाए गए थे. बॉयज और गर्ल्स को अलग अलग जगह दी गयी थी रुकने क लिए. शीना तो पहले hi इंतज़ार में थी , मौका देख कर वो मधु क पास चली गयी सबसे नज़रें बचती हुई.

शीना : इतनी देर कैसे हो गयी आने में?

मधु : तुम्हे कहा था न रस्ते में एक साइट पर रुके थे बस वहीँ देर हो गयी.

शीना : अब तुम राधा को बहार टेंट में रुकने को कहो और सबसे कार्नर वाला टेंट देना उसे. अगर हो सके तो उसे अकेली hi रखना मेरा काम आसान हो जायेगा.

मधु : तुम करने क्या वाली हो ? देखो किसी की लाइफ बर्बाद नहीं करने दूंगी मैं तुम्हे

शीना : बर्बाद करना चहुँ तो वो मैं तुम्हे भी कर सकती हूँ पर मैं ऐसी नहीं हूँ. उसको बस सबक सीखना है मैंने और उसके भाई की अकड़ निकालनी है और कुछ नहीं. Don’t वोर्री कुछ नहीं होगा. अगर फिर भी कुछ हो तो कह देना वो बिना बताये चली गयी अपने बर्फ क साथ .

मधु : शीना ...

शीना : मैंने कहा न कुछ नहीं होगा , तुम पर कोई बात नहीं आएगी और अगर फिर भी मुझे रोकना चाहती हो तो अंजाम सोच लो.

मधु शीना की बात सुन कर चुप हो गयी. शीना ने जैसा कहा था मधु ने वैसा hi किया और राधा को सबसे लास्ट वाला टेंट दे दिया गया वो भी अकेली क लिए .

राधा : मम मैं टेंट में नहीं रहना चाहती प्लीज मुझे किसी रूम में शिफ्ट कर दीजिये

मधु : सॉरी राधा रूम्स सब फुल हैं. मैं इसमें कुछ नहीं कर सकती .

राधा : मम मुझे दर लगता है अगर आप को ऐतराज़ न हो तो मैं आपके साथ रह लूँ ?

मधु : नहीं ऐसा नहीं हो सकता . तुम अपने टेंट में आराम से रही हम सब यहीं हैं कोई तुम्हे तंग नहीं करेगा .

राधा : प्लीज मम .......

मधु : ी ऍम सॉरी राधा , अब जाओ अपने टेंट में और अपना सामान सेट कर क उधर आ जाओ डिनर जल्दी लगा दिया जायेगा .

राधा मीनल क न आने से पहले hi अकेला फील कर रही थी और एक अंजना सा दर उसके अंदर था ऊपर से टेंट में रहना उसे और डरा रहा था. खैर अँधेरा जल्दी हो गया था और फिर दिन की थकावट भी थी इस लिए डिनर जल्दी लगा दिया गया था . राधा बेचारी बार बार अपना मोबाइल देख रही थी क काम से काम वो अमित से और अपनी माँ से बात hi करले मगर यहाँ तो जैसे नेटवर्क था hi नहीं. किसी का भी फ़ोन नेटवर्क नहीं पकड़ रहा था. जल्दी hi डिनर कर क सब अपनी अपनी जगह सोने क लिए चले गए. एक बार स्टाफ ने सब स्टूडेंट्स को चेक किया और वो भी सोने चले गए. गार्ड और पेओन की ड्यूटी थी रत को आसपास नज़र रखना और वो ऐसा कर भी रहे थे. रंजीत अपने साथियों को लेकर जगह पर पहुँच गया था और शीना का इंतज़ार कर रहा था क्यूंकि फ़ोन तो काम नहीं कर रहे थे. शीना भी छुपी हुई थी ताकि वो किसी की नज़र में न आये . जब सब तरफ माहौल शांत हो गया तो शीना रंजीत और उसके साथियों क पास आयी.

शीना : तुम लोग आ गए ?

रंजीत : हम तो कब से आ गए थे मगर आप hi नहीं दिखाई दे रही थी.

शीना : तो क्या मैं ऐसे hi यहाँ बैठी रहती तुम लोगों क लिए ? मुझे बाकि इंतज़ाम भी करने थे. अब चलो , बेहोशी की दवा तो लाये हो न तुम?

रंजीत : हम सब लेकर ए हैं आप बस लड़की बताओ कहाँ है .

शीना : चलो मेरे साथ

शीना ने देखा क गार्ड एक तरफ बैठ कर बातें कर रहे हैं तो वो छुपती छुपाती राधा क टेंट क पास पहुँच गयी . रंजीत को राधा का बता कर वो खुद एक तरफ होने लगी तो वो हठी से टकरा गयी और बे ध्यानी में उसके चूतड़ हठी की कमर क निचले भाग से लगे जहाँ पर सख्ती और उभर का उसे एहसास हुआ . शीना जैसे ज्वालामुखी की तरह फट hi पड़ी और ज़ोर से एक थप्पड़ रसीद कर दिया हठी क मुँह पर

शीना : हरामज़ादे अपनी औकात में रह वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.

असल में हठी ने जानबूझ कर hi अपना लैंड शीना की गांड पर रगड़ा था और शो ऐसे किया क जैसे उसे कुछ पता hi नहीं. शीना क थप्पड़ से हठी का तो दिमाग hi घूम गया मगर रंजीत ने बीच बचाव किया .

रंजीत : ये क्या कर रही हो तुम ? मोंटी की वजह से चुप हूँ इसका मतलब ये नहीं क कुछ भी कहोगी तुम .

शीना : बकवास बंद करो अपनी तुम्हारे इस घटिया साथी ने मुझे अभी गलत जगह टच किया . इसकी हिम्मत कैसे हुई मुझे छूने की?

हठी : मैंने कहाँ छुआ तुम्हे बताओ ज़रा ?

शीना : तुम्हे तो बाद में देख लुंगी .

रंजीत : देखो शीना तुम लिमिट में रहो वर्ण हम अपने सेज बाप की नहीं सुनते तो तुम क्या हो? अब अगर कुछ कहा तो ाचा नहीं होगा.

हठी तो थप्पड़ खा कर अंदर hi अंदर सुलग रहा था अब बाकि क साथी भी गुस्से में थे बस रंजीत की वजह से चुप थे वर्ण शीना को यहीं पटक कर छोड़ देते .

शीना साइड हो गयी और रंजीत ने अपनी जेब से रुमाल निकल कर उस पर 2-3 बूंदे वो तेज़ सी दुर्गन्ध वाली दवा डाली. सबने अपने चेहरे पहले hi धक् लिए थे रुमाल से . बड़ी सावधानी से रंजीत और हठी दोनों राधा क टेंट में घुसे मगर राधा अभी जग रही थी और अपने सामने दो लोगों को चेहरा ढके इस तरह अपने टेंट में घुसते देख जैसे hi राधा ने शोर मचाना चाहा तो हठी ने जल्दी से उसका मुँह बंद कर दिया . राधा उससे छूटने क लिए हाथ पाऊँ मरने लगी पर वो नाज़ुक सी लड़की इस दैत्याकार बदमाश क आगे क्या थी. रंजीत ने जल्दी से वो दवा वाला रुमाल राधा क मुँह पर लगा दिया. रुमाल सही से राधा क मुँह पर तो नहीं लगा मगर दवा का असर इतना तेज़ था क ज़रा सी साँसों में घुलते hi वो बेहोश होती गयी. राधा क बेहोश होते hi हठी ने अपना हाथ उसके मुँह से हटा लिया. राधा को किसी गठड़ी की तरह अपने कंधे पर लड़ कर हठी रंजीत क पीछे हो लिया और शीना भी उन लोगों क आगे आगे चलती वहां से दूर हो गयी. किसी को कानो कानो खबर तक न हुई क उनके बीच में से एक लड़की का अपहरण हो गया . रंजीत ने सोचा भी नहीं था क ये काम इतनी आसानी से हो जायेगा , वो तो इसे जोखिम भरा काम समझ कर hi अपने साथ इन 5 लड़कों को लेके आया था मगर इतनी आसानी से काम होने क पीछे मोंटी और शीना की परफेक्ट प्लानिंग थी. कुछ दुरी पर कड़ी की गाडी में राधा को दाल कर रंजीत अपने साथियों क साथ उसी गेस्ट हाउस की तरफ चल दिया और शीना भी अपनी कार में उनके पीछे पीछे चल दी.

दूसरी तरफ मैं नीरज और मोहित क साथ उस जगह पहुँचने hi वाला था जो जगह मंजू म से पता लगी थी कैंपिंग एरिया क लिए . मैं रोड से एक छोटी रोड अलग हो कर कोई 3 कम अंदर जाकर ये जगह थी. हम जब मैं रोड को छोड़ कर टर्न ले hi रहे थे तो हमसे पहले 2 गाड़ियां उधर से निकल कर हमारी उलटी दिशा में गयी थी. थोड़ा दूर होने और अँधेरे की वजह से हम देख नहीं पाए क उन गाड़ियों में कौन है .

मेरी आँखों में तो पानी आने लगा था और दिल घबरा रहा था . क्यूंकि पिछले 2 घंटे से भी ऊपर से हम ड्राइव करते हुए आ रहे थे और राधा से न तो कांटेक्ट हो पाया था और न hi किसी और से कुछ पता लग पाया था. मुझे अंदर hi अंदर दर भी लग रहा था क कहीं इतनी देर में राधा क साथ कुछ हो न गया हो? वो इस वक़्त कहाँ होगी और किस हल में होगी यही सोच कर मेरा दिल घबरा रहा था. मोहित भी फुल स्पीड में कार को चलता हुआ 5 मिनट्स से भी काम टाइम में वहां पहुँच गया . बुस्सेस पर नज़र पड़ते hi हमें यकीन हो गया क हम सही जगह पर पहुँच गए हैं. जैसे hi मोहित ने गाड़ी रोकी हम तीनो भागते हुए टेंट्स क पास पहुंचे तो गार्ड जो शायद गाड़ी की लाइट देख कर पहले hi चौकन्ने हो चुके थे उन्होंने हमारा रास्ता रोका.

गार्ड : कौन हो तुम लोग यहाँ. क्या .......

मैंने गॉर्ड को एक तरफ धक्का दे कर गिरा दिया . जैसे hi दूसरा आगे बड़ा उसे नीरज ने और तीसरे को मोहित ने रोक लिया . नीरज और मोहित तो उनसे बात करने लगे लेकिन मैं राधा का नाम ज़ोर ज़ोर से चिल्लाता हुआ टेंट्स क पास पहुँच गया . कुछ स्टूडेंट्स अभी भी जग रहे थे मेरी आवाज़ सुनते hi वो बहार आ गए .

अमित : राधा राधा .... राधा कहाँ हो राधा

गर्ल 1 : क्या हुआ तुम ऐसे क्यों चिल्ला रहे हो?

अमित : तुम्हे पता है राधा कहाँ है ? बरी मुझे राधा कहाँ है ?

गर्ल 2 : तुम तो हमारे कॉलेज में hi पड़ते हो न ?

अमित : मुझे जल्दी से बताओ राधा कहाँ है ?

गर्ल 2 : डरे हुए ) वो उस लास्ट वाले टेंट में है राधा.

उस लड़की ने लास्ट टेंट की तरफ इशारा किया तो मैं तेज़ी से उस टेंट क पास पहुँच गया . जैसे hi मैंने टेंट का पर्दा हटाया तो अंदर राधा को न पाकर मेरे दिल की धड़कन रुकने लगी . एक अनजाने दर ने मुझे घेर लिया . राधा का मासूम सा चेहरा मेरी आँखों क सामने घूमने लगा . मेरे पीछे पीछे नीरज और मोहित भी आ गए और उनके पीछे गॉर्ड भी अब तक शोर सुन कर कई और स्टूडेंट्स और स्टाफ मेंबर भी उठ कर आ रहे थे.

अमित : वो लोग राधा को ले गए मेरी राधा को ले गए .

नीरज : खुद को सम्भालो भाई हम उसे कुछ नहीं होने देंगे. यहाँ किसी ने राधा को कब देखा था आखिरी बार ?

गर्ल : अभी कुछ देर पहले तक वो जग रही थी मैंने उसे देखा था कोई 15 मिनट्स पहले .

नीरज : इसका मतलब क ये सब अभी अभी हुआ है.

हमारी बातों से सबको माजरा समझ में आ गया था. और मिस मधु जो पहले hi दर और घबराहट से सो नहीं रही थी उसे ये सब देख कर पसीने छूटने लगे. सब खूसट फुसर करने लगे . तभी मेरे दिमाग में बात आयी .

अमित : मोहित नीबाज जल्दी चलो . वो गाड़ियां जो अभी मोड़ पर मिली थी ज़रूर वो लोग उन गाड़ियों में hi गए होंगे.

मोहित : सही कहा और तो कोई रस्ते में और यहाँ दिखा hi नहीं . चल भाई उन लोगों को ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे.

प्रोफ़ेसर: तुम लोग कुछ उल्टा सीधा मत करना मैं अभी पुलिस को फ़ोन करता हूँ

प्रोफ़ेसर साहब बोलते रह गए और हम बिजली की रफ़्तार से कार में बैठ कर निकल गए. अब हमें पर था क हमें कार्स को ढूँढना है पर सिवाए उनकी कार की दिशा क इलावा हमारे पास और कोई क्लू नहीं था. मोहित ने कार रोड पर चढ़ाई और जिस तरफ वो कार्स गयी थी उसी तरफ फुल स्पीड में कार दौड़ानी शुरू कर दी. मेरी आँखों से आंसू गिर रहे थे और दिल में शोले भड़क रहे थे. मोहित ने कार को उसकी फुल पावर तक खींचना जारी रखा मगर हमें रोड पर कुछ भी नज़र नहीं आ रहा था .

दूसरी तरफ कुछ hi देर में दोनों कार्स रोड से हटकर बने इस कॉटेज में पहुँच गयी थी. सारा काम बड़ी hi सफाई से हो गया था. रंजीत और उसके साथियों ने बड़ी आसानी से ये मुश्किल काम को अंजाम दे दिया था . हठी राधा को फूलों की तरह अपने हाथों में उठाये अंदर ले आया और एक रूम में बीएड पर दाल दिया. पीछे पीछे शीना भी पहुँच गयी थी. राधा बेचारी बेहोश पड़ी थी और हठी उस नाज़ुक काली को हवसी नज़रों से देख रहा था . हठी ने जैसे hi अपने हाथ राधा क कोमल अंगों पर रखे तो शीना रूम में आ गयी और हठी को राधा क साथ ऐसी हरकत करते देख उसे गुस्सा आ गया. उसने हठी को धक्का देकर गिरा दिया .

शीना : हाउ डरे यू ? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इसे हाथ लगाने की ?

हठी जो नीचे गिरा था और क झटके में उठ कर खड़ा हो गया. शराब का नशा और गुस्सा दोनों हावी हो चुके थे उस पर और शीना की आवाज़ सुन कर बाकि साथी भी आ गए थे वहीँ.

हठी : बहुत गर्मी है न तुझ में हरामज़ादी ? पहल तेरी hi गर्मी निकलता हूँ.

इतना कह कर हठी शीना पर झपट पड़ा. शीना तो अभी भी खुद को पता नहीं क्या समझ रही थी और उसने हठी को थप्पड़ मरने की कोशिश की मगर हठी तो उस से 4 गुना बड़ा दैत्याकार पहलवान था. उसने शीना क दोनों हाथ अपने एक hi हाथ में पकड़ लिए और दूसरे हाथ से उसके गर्दन पकड़ ली.

हठी : बहुत चर्बी है न तेरे अंदर पैसे की? तेरा भाई ने बहुत लड़कियों को छोड़ा होगा और तू भी साली काम नहीं लगती . पता नहीं किस किस से चूड़ी होगी. इस लड़की को भी तेरा भाई छोड़ने क लिए hi तो उठा कर लाया है. पहले तो उसके छोड़ने क बाद हम इसे छोड़ने वाले थे मगर अब प्लान में कुछ चेंज है. अब इसे पहले मैं छोडूंगा और उसके साथ तुझे भी छोडूंगा. आज तू हम सब की रंडी बनेगी रत भर.

हठी को ऐसा करता देख रंजीत ने एक बार इसे रोकने की कोशिश की. क्यूंकि वो जनता था क मोंटी बड़े बाप की औलाद है . और शीना क साथ अगर कुछ गलत हुआ तो वो लोग छोड़ेंगे नहीं उनको.

रंजीत : ये क्या कर रहा है हठी ? ये मोंटी की बहिन है छोड़ इसे .

हठी : बस उस्ताद बहुत हुआ अब मैं और नहीं बर्दाश्त कर सकता. कब से साली बेइज्जती कर रही है हमारी. साली बातें ऐसे करती है जैसे खुद कोई साफ सुथरी हो. जैसा इसका भाई हरामी है ये भी वैसी hi होगी. वो मोंटी तो इस लड़की क मज़े लेगा उसकी बहिन को भी मज़े मिलने चाहिए. इसका तो कांड अब मैं कर क रहूँगा अगर तुमने मुझे रोका तो फिर मैं तुम्हारी भी नहीं सुनूंगा और मुझे पता है बाकि सब भी मेरे साथ हैं . क्यों भाई लोग ?

बाकि सब ने हठी की बात पर सहमति जताई तो रंजीत ने और कुछ नहीं कहा. वहीँ शीना अंदर तक कम्प गयी थी हठी की बात सुन कर. अपने भाई क बारे में सुन कर तो उसे यकीन hi नहीं था. उसे लगा क ये झूठ बोल रहा है क्यूंकि मोंटी उसके साथ झूठ नहीं बोल सकता . और वो ये सब अपनी और उसकी बेइज़्ज़ती का बदला लेने क लिए hi तो कर रहा था. इससे पहले क शीना कुछ समझ पति हठी ने उसके टॉप को गले पकड़ कर खिंच दिया और चरररररररर की आवाज़ कार्य हुआ उसका टॉप चिथड़े हो गया. आगे से शीना का टॉप फैट कर अलग हो गया और नीचे से काली ब्रा में कैद उसके सुन्दर कलश सामने नज़र आने लगे. शीना अमीर घर की सुख सुविधा में पाली बड़ी लड़की थी और हद से ज्यादा खूबसूरत भी थी बस घमंडी और नकचढ़ी थी. शीना का दूधिया जिस्म देख कर वहां मौजूद सबकी लार टपकने लगी.

शीना की टंगे कम्पनी लगी थी मगर उसके खुद को छुड़ाने की नाकाम कोशिश अभी भी जारी राखी .

शीना : कुत्ते अपने गंदे हाथ मुझसे दूर रख . मेरा भाई तुझे ज़िंदा नहीं छोड़ेगा

हठी : कौन भाई ? वो साला खुद दूसरों की बहनो की इज़्ज़त लूट ता फिरता है वो क्या बचाएगा तुझे. और तू साली नखरा तो ऐसे कर रही है जैसे तू दूध की धूलि है . अभी तुझे भी चेक कर लेते हैं.

शीना ने जब देखा क वो हाथ नहीं छुड़ा प् रही तो उसने ज़ोर से अपना घुटना हठी क लैंड पर दे मारा. एक पल क लिए हठी की सांस hi अटक गयी और उसके हाथों से शीना छूट गयी. शीना ने जैसे hi भागना चाहा उसे दूसरे लड़के ने दबोच लिया और बाकि सब ने भी हर तरफ से उसे पकड़ कर उसके कपडे नोचने शुरू कर दिए.

शीना : छोडो हरामजादो छोडो मुझे , एक एक को ज़िंदा गाड़ देगा मेरा भाई

हठी जो अभी हुए हमले एक पल को भौंचक्का हो गया था अब वो फिर से होश में आया और अपना लैंड पेण्ट क ऊपर से मसल कर ठीक करने लगा

हठी : साली तू ऐसे नहीं मानेगी अभी बताता हूँ तुझे.

हठी ने गुस्से से शीना क मुँह पर एक ज़ोरदार थप्पड़ दे मारा और एक पल क लिए शीना की आँखों क आगे अँधेरा छ गया . शीना होश खो बैठी थी एक hi थप्पड़ से. हठी ने शीना को पकड़ कर बीएड पर फेंक दिया

हठी : बहुत तीखी मिर्ची है साली. सारा नशे की माँ बहन कर दी . जा दारू की बोतल ला. इसके भाई की दारू इस पर hi निकलूंगा आज.

जल्दी से एक लड़का दारू की बोतल साथ वाले कमरे से उठा कर ले आया और हठी ने ढक्कन खोल कर नेट hi 3-4 घूँट वो कड़वी शराब गले क निचे उतर ली. यही बाकि सब ने भी किया . और फिर हठी पेण्ट क ऊपर से hi लैंड को मसलता हुआ बीएड पर गिरी पड़ी दोनों बेहद खूबसूरत लड़कियों को हवसी नज़रों से देखे लगा . दारू की बोतल ख़तम हो कर एक तरफ लुढ़क गयी थी और बाकि सब भी अब हठी की तरह बीएड पर गिरी पड़ी दोनों लड़कियों को देख रहे थे. शीना कुछ होश में आयी तो सबको अपनी तरफ घूरता प् कर वो अंदर तक सिहर उठी. अपनी आप को अध् नंगी हालत में देख तो उसकी हालत और भी बुरी हो गयी. शीना क जिस्म पर अब काली ब्रा थी और कमर क नीचे से उसकी स्कर्ट भी फैट चुकी थी . शीना को सबकी हवसी नज़रें देख कर अंदाज़ा हो गया था क वो लोग अब क्या करने वाले हैं.

शीना : मेरे पास मत आना , एक एक को जान से मर दूंगी मेरे पास मत आना.

हठी : जान से तो पहले hi मर चुकी हो बुलबुल . तेरा ये हुस्न देख कर देखो मेरे सब साथी घायल हो चुके हैं. तेरे साथ ये लड़की तो डबल गिफ्ट है.

इतना कह कर हठी अपने कपडे उतरने लगा. उसका अनुसरण करते हुए बाकि सब भी कपडे खोलने लगे . एक लड़के ने राधा क ऊपर पानी फेंका उसे होश में लेन क लिए . राधा पानी पड़ते hi होश में आने लगी . अभी वो पूरी होश में भी नहीं आयी थी क रंजीत और उसके साथी राधा पर टूट पड़े. राधा बेचारी तो पहले hi दवा क असर में थी उससे विरोध भी नहीं हो प् रहा था . जल्दी hi उसके जिस्म से कपडे नोच कर निकल दिए गए और हठी ने भी शीना क जिस्म से वो गया हुआ स्कर्ट निकल दिया. दोनों लड़कियां अब अंतर वस्त्रों में बीएड पर पड़ी थी. राधा होश में आने की कोशिश कर रही थी वहीँ शीना लगातार हठी से छूटने की कोशिश कर रही थी. शीना ने एक और थप्पड़ हठी को मर दिया जिससे वो गुस्से में पागल हो गया

हठी : हरामज़ादी लगता है तुझे ज़बरदस्ती वाला hi काम पसंद है अपने भाई की तरह

इतना कह कर हठी ने एक और थप्पड़ शीना को दे मारा और उसका सारा विरोध ख़तम हो गया. राधा की नज़र अब पड़ी थी शीना पर उसको अपने पास देख कर उसे भी समझ नहीं आ रहा था क वो कहाँ है और शीना क्या कर रही है उसके पास

राधा : मुझे छोड़ दो , भगवन क लिए मुझे छोड़ दो . मैंने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा.

रंजीत : छोड़ देंगे बस तुम्हारे साथ थोड़ा प्यार तो कर लें

राधा : नहीं मुझे छोड़ दो मैं किसी को मुँह दिखने क लायक नहीं रहूंगी . प्लीज मुझे छोड़ दो. हेल्प हेल्प हेल्प ! कोई है बचाओ . अमित तुम कहाँ हो मुझे बचाओ

हठी : बुला साली जिसको चाहे बुला कोई नहीं आने वाला यहाँ . और तेरे उस भाई से तो मुझे भी हिसाब चुकाना है.

दूसरी तरफ हम कार में तेज़ी से आगे बढ़ते जा रहे थे मगर दूर दूर तक अँधेरे क सिवा कुछ नज़र नहीं आ रहा था. हम 8-10 कम वहां से निकल चुके थे मगर कोई भी नज़र नहीं आ रहा था. इस अँधेरे जंगल में राधा को खोजना राइ क पहाड़ में से सुई ढूंढने जैसा था . पर वो कहते हैं न जब भगवन की मर्ज़ी हो तो मदद मिल hi जाती है. हम तेज़ी से आगे बढे जा रहे थे क रोड पर एक जगह दूर से 2-3 टोर्च हमारी तरफ बजने लगी. थोड़ा नज़दीक जाने पर हमें पुलिस वाले नज़र ए तो मोहित ने कार रोक ली.

पुलिस : कौन हो तुम लोग और जा वक़्त यहाँ क्या कर रहे हो?

मोहित : सर हमारी बहिन किडनैप हो गयी है अभी अभी और हम उसे ढूंढ रहे हैं . क्या अपने यहाँ से कोई गाड़ी जाती हुई देखि है अभी कुछ देर में?

पुलिस : क्या ? किडनेपिंग? हवलदार ठाणे वायरलेस करो जल्दी से . तुम लोगों को कैसे पता वो लोग इधर ए हैं?

अमित : हमने कार्स को इस तरफ मुड़ते हुए देखा था

पुलिस : पर यहाँ से तो कोई गाड़ी नहीं गुज़री. कहाँ से देखा था तुमने कार्स को इधर एते हुए?

मोहित : कोई 8-10 कम पहले.

पुलिस : 8-10 कम पहले ? पर इस रस्ते से तो और कोई रोड भी नहीं निकलती. आसपास जंगल hi तो है सारा यहाँ और हम इसी लिए यहाँ हैं. हम फारेस्ट गार्ड हैं. पर 8-10 कम वो गाड़ियां कहाँ जा सकती हैं ?.............. अरे हाँ यद् आया . यहाँ से 4 कम पीछे दायीं तरफ एक कच्चा रास्ता जाता है . कोई 2 कम अंदर जा कर एक कॉटेज बना हुआ है . कहीं वो लोग वहां न गए हों.

अमित : शुक्रिया सर चल मेरे भाई जल्दी कर

पुलिस : अरे रुको हम लोग .........

वो पुलिस वाला कुछ कहता रह गया पर मेरे कहने पर मोहित ने तुरंत गाड़ी घुमा ली और तेज़ी से उस पुलिस वाले दवारा बताये स्थान की तरफ बढ़ने लगे. हमारी नज़रें बहार hi लगी थी वो कच्चा रास्ता ढूंढने क लिए जो कॉटेज की तरफ जाता था. एक उम्मीद की किरण हमें मिल चुकी थी और फिर से हम तीनो पूरे जोश में आ गए थे . हमें जल्द से जल्द अब वहां पहुंचना था. अब हमारे पास मंज़िल का रास्ता था और मंज़िल भी दूर नहीं थी.

नीरज : ये रहा रास्ता घुमा इधर जल्दी से.

नीरज की नज़र रस्ते पर पद गयी थी जो उसकी साइड में था. जल्दी से मोहित ने गाड़ी को घुमा लिया और तेज़ी से आगे बढ़ने लगा . मेरे दिल की धड़कन दुगनी तेज़ी से चल रही थी और गुस्सा मुझ पर हावी होता जा रहा था. जल्दी hi हमें कॉटेज नज़र आ गया और बहार कड़ी वो 2 कार्स भी . मोहित ने जैसे hi कार रोकी मैंने कार से उतारते hi अंदर की तरफ भागा जबकि नीरज और मोहित डिक्की से हॉकी और बसेबत निकलने लगे . दरवाज़ा अंदर से बंद था मगर अंदर आती राधा क चीखने की आवाज़ें सुन कर मैं गुस्से से पागल हो गया . अपना पूरा ज़ोर लगा कर मैंने ज़ोर से कंधे का इस्तेमाल करते हुए दरवाज़े को धक्का दिया तो उसका लॉक उखड गया और वो खुल गया. अंदर जिस रूम से आवाज़ें आ रही थी मैं तेज़ी से उस और बड़ा और अंदर का नज़ारा देखते hi मेरा रहा सहा कण्ट्रोल भी ख़तम हो गया. राधा बीएड पर नंगी पड़ी थी और उसको 3-4 लोगों ने दबोचा हुआ था. सब क सब लगभग नंगे थे और एक राधा क ऊपर चढ़ने की कोशिश कर रहा था . मैंने छलांग लगते हुए एक ज़ोर दर किक उस लड़के को दे मरी जो राधा पर चढ़ रहा था. वो लड़का कराहता हुआ बीएड से निचे जा गिरा . इससे पहले क बाकि लोग मुझ पर हमला करते मैंने तेज़ी से राधा को पकडे लड़कों क मुँह पर एक एक ज़ोरदार पांच मरे और उन्हें दूर गिरा दिया. राधा की तो जैसे जान में जान आ गयी मुझे देख कर वो रोटी हुई मुझसे लिपट गयी.

राधा : अमित , अमित तुम आ गए अमित , ये लोग मेरे साथ !!!! मैं ज़िंदा नहीं रहती अगर तुम न आते. मुझे बचा लो इनसे

अमित : मेरे होते तुम कुछ नहीं हो सकता राधा . जब तक मैं ज़िंदा हूँ तुम्हे कुछ नहीं होने दूंगा.

मैंने जल्दी से अपनी T-shirt उतर कर राधा को दी . इतने में मुझे अपनी पीठ पर तेज़ दर्द का एहसास हुआ और मैं निचे गिर गया.

हठी : तो तू आ hi गया हरामज़ादे. ाचा हुआ , अब तेरे सामने hi तेरी बहिन का मज़ा लूंगा.

मैं निचे गिरते hi फिर से उठने लगा तो 2-3 लड़कों ने मुझे दबोच लिया और मुझ पर लात घुसे चलने लगे. इतने में मोहित और नीरज भी बहार से आ गए और आते hi हॉकी का जादू चलने लगे. वो सब संभल नहीं पर रहे थे और इधर मैंने भी मुझे पकड़ने वालों को उछाल कर फेंक दिया. रंजीत को देख कर नीरज को अपनी पुराणी दुश्मनी यद् आ गयी और वो उस पर टूट पड़ा . जल्द hi 2-3 बदमाशों क हाथों में भी हथियार आ गए जो शायद वो पहले hi साथ लेकर आये होंगे . जहाँ नीरज और मोहित उनकी धुलाई कर रहे थे वहीँ हठी मेरे ऊपर झपट पड़ा और हम दोनों का मुकाबला शुरू हो गया. हठी क दिमाग में तो पहले hi मैच वाली बात की चिढ़ थी. जैसे hi हठी ने मुझ पर हमला किया मैंने भी उसका वॉर रोका. तब तक राधा संभल चुकी थी और उसने अपनी सलवार उठा कर पहन ली थी उसके साथ दूसरी कोई लड़की भी है ये अब तक मैंने देखा नहीं था क्यूंकि मुझे तो बस राधा hi नज़र आ रही थी .

हठी ने मुझ पर तेज़ हमला किया था और एक बार उसके इस शक्तिशाली प्रहार से मैं दूर जा गिरा . था तो वो भी ताकतवर और शायद यहाँ मौजूद सब में वो hi ज्यादा पावरफुल था मगर मुझसे ज्यादा नहीं . मैं. फिर से संभल कर खड़ा हुआ और उसके पेट में घुसा मर कर उसकी गर्दन को पकड़ कर काबू करते हुए ज़ोर से दिवार में दे मारा. हठी वहीँ गिर गया और फिर मैं बाकियों को देखने लगा. मोहित को 2-3 लड़कों ने काबू कर लिया था. वो सब तगड़े थे और मोहित चाहे बसेबत लिए था पर उनके सामने कमज़ोर था. नीरज रंजीत क साथ लड़ रहा था मगर उसको भी एक और लड़के ने पीछे से पकड़ लिया और उसके हाथ से हॉकी रंजीत ने छीन कर नीरज को मरना शुरू कर दिया. मैं तेज़ी से हवा में उड़ता हुआ रंजीत पर टूट पड़ा . रंजीत एक hi वॉर से फर्श पर गिर गया और नीरज ने दूसरे को पकड़ कर पटक दिया. मैंने एक ज़ोरदार मुक्का मरते हुए उस लड़के को भी गिरा दिया जो मोहित को मर रहा था वही हल दूसरे दोनों का भी किया . मोहित ने फिर से बसेबत उठा लिया और लगा उनको मरने. इतने में हठी फिर से उठा और पास में पड़ी शराब की बॉटल पीछे से मेरे सर पर दे मरी. मुझे दर्द तो हुआ मगर इस वक़्त मैं गुस्से में पागल था और दर्द की परवाह किसे थी. मैंने पलट कर हठी को ज़ोरदार किक मरी और उसे उठा कर पटक दिया. मैं फिर से मोहित की तरफ बढ़ने लगा

राधा : अमित !!!!

राधा की चीख सुन कर मैं जैसे पलटने लगा तो मुझे अपनी लोअर बैक में तेज़ दर्द का एहसास हुआ . ऐसा लगा किसी ने कोई तीखी चीज़ घुसा दी हो. मैं हाथ पीछे ले जा कर उसे पकड़ने की कोशिश की तो किसी का हाथ मेरे हाथ में आ गया. मैं तेज़ी से पलटा तो देखा ये हाथ hi था जिसके हाथ में टूटी हुई कांच की बोतल थी जो अब खून से रंगी हुई थी. मुझे अपने कानो में एक और लड़की की चीख सुनाई दी मगर पहले मैंने हठी को दबोच लिया.

अमित : कुत्ते पीछे से hi वॉर करता है हमेशा .

मैंने हठी का वो हाथ पकड़ कर मरोड़ दिया और उसे ज़ोर से दिवार में दे मारा. वो तड़पने लगा मगर इस बार मैं नहीं रुका और उसकी बाज़ू पूरी मरोड़ दी . कटक ‘ की आवाज़ आते hi हठी ज़ोर से ज़ोर से चीखने लगा और बाकियों की नज़र भी उस पर पड़ी. हठी का हाथ टूट चूका था . मैंने उसे पूरा ऊपर उठा कर इतनी ज़ोर से ज़मीन पर पटका क वो बेहोश हो गया. वहीँ जो लोग बाकि रह गए थे उन पर भी मैं झपट पड़ा और इतने ज़ोर से वॉर किये क वो सब धराशायी हो गए. नीरज ने भी रंजीत को अचे से पेल कर अधमरा कर दिया था.

राधा दौड़ कर मुझसे से लिपट गयी . तब जा कर मैं रुका और मुझे दर्द का एहसास होने लगा. मैं राधा की तरफ पलटा तो मेरी नज़र अब उस दूसरी लड़की पर पड़ी जो फाटे हुए कपड़ों में थी . उसे देख कर मुझे फिर से गुस्सा आ गया.

अमित: तो तुम थी इस सब क पीछे ? कहाँ है तेरा वो कमीना भाई ? लड़कियों क पीछे चिपटा है. कहाँ है वो ? आज उसे मैं छोडूंगा नहीं.

शीना बस रोये जा रही थी और मेरे सामने हाथ जोड़ रही थी. मैं उसकी तरफ गुस्से से बढ़ने लगा तो राधा ने मुझे रोक लिया.

राधा : उसे कुछ मत कही उसके साथ भी ये लोग वही करने वाले थे मेरी तरह. तुम पहले इधर आओ देखो तुम्हारा खून निकल रहा है तुम्हे चोट लगी है.

राधा के यद् दिलाने से मुझे अपने सर और पीठ पर दर्द का एहसास हुआ. मैंने हाथ लगता तो गिला गिला सा लगा. हाथ सामने लेकर देखा तो खून देख कर मुझे एहसास हुआ क मामूली चोट नहीं है ये. राधा ने जल्दी से अपनी चुनरी जो वहीँ गिरी पड़ी थी उठा कर मेरे सर पर लपेट दी और अपनी कमीज जो फटी पड़ी थी उसको मेरी पीठ पर लपेट दिया खून का बहाव रोकने क लिए.

राधा : देखो तुम्हे कितनी चोट लगी है जल्दी चलो हमें डॉ क पास जाना होगा.

उधर मोहित और नीरज ने भी अछि तरह से सबको धो दिया था . सब क सब अब ज़मीन की धुल चाट रहे थे. मोहित और नीरज को भी चोट लगी थी मगर वो इतनी ज्यादा भी नहीं थी. वो दोनों जैसे hi मेरे पास आये तो मेरे सलहज देख कर उन्होंने भी जल्दी चलने को कहा.

मोहित : चल यार जल्दी . तेरा तो इतना खून बह रहा है तुझे हॉस्पिटल ले जाना पड़ेगा.

नीरज : हाँ जल्दी करो यहाँ तो हॉस्पिटल भी नहीं मिलेगा पास में कोई .

राधा : तुम नहीं चलोगी ?

राधा ने शीना को देख कर पूछा तू मोहित नीरज भी अब शीना को देखने लगे. शीना तो शर्मिंदगी से सर hi नहीं उठा पर रही थी और लगातार उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे.

अमित : उसे रहने दो राधा वो बड़े बाप की बेटी है . हम जैसे लोगों क साथ वो नहीं चलेगी वैसे भी बहार उसकी कार कड़ी है.

शीना ज़ोर ज़ोर से रोने लगी मेरी बात सुन कर . राधा शीना क पास जाने लगी तो नीरज ने एहसास दिलाया क हमें हॉस्पिटल जाना है

राधा : हम इसे ऐसे छोड़ कर नहीं जा सकते . क्या तुम इसे ऐसे hi छोड़ डोज? वो जैसी भी है एक लड़की है .

मैं राधा की बात कैसे ताल सकता था. मैंने आगे बाद कर शीना को बाज़ू से पकड़ कर उठाया और उसका पर्स राधा ने उठा लिया. हम लोग बहार आ गए . मैंने नीरज को शीना क साथ उसकी कार में आने को कहा और खुद मोहित की कार में बैठ गया . राधा भी मेरे साथ बैठ गयी . खून का बहाव कल ज़रूर हो गया था पर अभी भी वो बह रहा था. मेरे जिस्म ऊपर से नंगा था और खून से सना हुआ जबकि मेरी T-shirt राधा ने पेहेन राखी थी जो उसे बहुत ढीली थी. राधा ने मुझे पिछले सीट पर लेटने को कहा और खुद मेरा सर अपनी गॉड में रख कर बैठ गयी. अब मुझे अपने ज़ख्मो क दर्द का एहसास हो रहा था. मोहित ने फिर से गाड़ी को तेज़ी से चलना शुरू कर दिया. रत हो चुकी थी और अँधेरे को चीरते हुए हमारी दोनों गाड़ियां वापिस लौट रही थी .

राधा : अगर तुम न आते तो मैं ज़िंदा नहीं रहती . मैं आखरी पल तक तुम्हे hi यद् कर रही थी और देखो तुम आ गए . मगर मेरी वजह से तुम्हारी क्या हालत हो गयी है

अमित: तुम्हारी वजह से कुछ नहीं हुआ . ये सब तो उस मोंटी की वजह से हुआ है अगर वो मिल जाता तो उसे आज मैं ज़िंदा नहीं छोड़ता . गलती तो मुझसे हुई क मैं समझ नहीं सका उसके इरादे. अगर तुम्हे कुछ हो जाता तो मैं खुद को माफ़ नहीं कर पता. मुझे माफ़ कार्डो मैं इतना देरी से पहुंचा .

राधा : माफ़ी क्यों मांग रहे हो तुम? तुमने तो मुझे अपनी जान पर खेल कर बचाया है. और सच कहूं तो मुझे उम्मीद थी क तुम आओगे

अमित : कैसे नहीं अत? तुमसे वडा जो किया था . अब रोना बंद करो . रट हुए तुम बिलकुल अछि नहीं लगती . ऐसे hi रोटी रहोगी तो मौसी मेरे गाल लाल कर देंगी

राधा : वो तो तुम्हे सर आँखों पर बिठाएंगी जब उन्हें पता चलेगा.

अमित : नहीं उन्हें मत बताना वर्ण वो दर जाएँगी और फिर पता नहीं तुम्हे कॉलेज से hi न हटा लें.

राधा : ऐसा कुछ नहीं करेंगी वो. उन्हें पता है तुम्हारे होते मुझे कुछ नहीं हो सकता . तुम मेरे हीरो हो .



मैं राधा से बातें करता रहा और बीच बीच में मोहित भी कोई बात कर लेता पर उसका ध्यान जल्दी से हॉस्पिटल पहुँचने में था . रत में रोड खली थी तो मोहित भी तेज़ी से गाड़ी चला रहा था और वक़्त से पहले hi पहुँचने वाले थे. रस्ते में मोहित ने होपितल ढूंढने की बात की तो मैंने उसे अपने hi शहर चलने को कहा. करते करते 2 घंटे क लगभग हो गए थे और अब शहर भी दूर नहीं था मगर लगातार मुझे अपने अंदर कमज़ोरी महसूस हो रही थी और मुझे पता hi नहीं चला मैं कब बेहोश हो गया.
 
अपडेट 126



बातें करते करते जब अचानक से अमित खामोश हो गया तो राधा की मनो जान hi निकल गयी. उसने देखा तो अमित की ऑंखें बंद थी . राधा ने अमित को हिलाया मगर अमित ने कोई रिस्पांस नहीं दिया .

राधा : रट हुए ) अमित ! अमित आँखों खोलो . तुम कुछ बोल क्यों नहीं रहे . ऑंखें खोली अमित. मोहित देखो अमित को क्या हो गया है ये कुछ बोल क्यों नहीं रहा . अमित उठो ऑंखें खोलो . अगर तुम्हे कुछ हो गया तो मैं भी नहीं रहूंगी .

मोहित : ओह no लगता है अमित बेहोश हो गया है .

राधा : जल्दी हॉस्पिटल चलो जल्दी करो

मोहित : बस हम पहुँचने hi वाले हैं

अमित की हालत देख कर राधा का दिल बैठा जा रहा था. उसको तो अपनी दुन्या hi लूट तो हुई नज़र आ रही थी. बचपन से जवानी तक माँ की नफरत क बाद भी वो अमित को दिल से पसंद करती थी और जब से कॉलेज शुरू हुआ था पहले दिन की घटना से hi उसके दिल में अमित क लिए जो प्यार था वो अब उसके ऊपर लगातार हावी होता जा रहा था. और आज जो कुछ भी हुआ था उससे तो वो अमित क लिए अब जीने मरने वाली भावनाओं से भर चुकी थी. राधा ने उन घड़ियों में भी आज अमित को यद् किया था जब लोग भगवन को यद् करते हैं. राधा मन hi मन भगवन से प्रार्थना कर रही थी क वो अमित को बचा ले.

थोड़ी hi देर में मोहित कार को सीधा हॉस्पिटल में ले गया . हॉस्पिटल वालों ने अमित की हालत को देखते हुए सीधा उसे िक में दाल दिया. डॉ ने आनन् फानन में अमित को वेंटिलेटर में दाल कर उसके ज़ख्मों का निरिक्षण शुरू किया और ज़रूरी टेस्ट लेने लगे. मामला मारपीट का देखा तो डॉ ने पुलिस को भी इन्फॉर्म कर दिया. िक क बहार राधा लगातार रट जा रही थी और मोहित भी फ़ोन करने लगा. उसके फ़ोन पर घर से और मीनल क फ़ोन से कई सरे मॉस्कल्स आये हुए थे.

मोहित : hello पापा

राघव : हाँ बीटा क्या हुआ तुम घबराये हुए क्यों हो? और कहाँ हो ? तुम्हारी माँ का फ़ोन आया था क तुम बिना बताये कहीं चले गए और अमित भी अभी तक घर नहीं लौटा.

मोहित : पापा मैं क्सक्सक्सक्सक्स हॉस्पिटल में हूँ . अमित की हालत सीरियस है उसे िक में ले क गए हैं.

राघव : शॉकेड ) क्या ????? क्या हुआ है ? अमित को क्या हुआ है ? और तुम ठीक तो हो न ?

मोहित : पापा वो राधा को कुछ लोगों ने किडनैप करने की कोशिश की थी हम उसी क पीछे गए थे और वहीँ लड़ाई में अमित को चोटें लग गयी हैं . वो बेहोश है और अभी डॉ उसका इलाज कर रहे हैं.

राघव : शॉकेड ) क्या ??? राधा का किडनैप ? ये सब कैसे हुआ ? हे भगवन !! अमित की हालत कैसी है ?

मोहित : पापा अभी तक डॉ बहार नहीं ए , उसका इलाज चल रहा है. आप जल्दी आ जाइये .

राघव : तुम चिंता मत करो मेरे बचे उसे कुछ नहीं होगा. भगवन ऐसा नहीं कर सकता . पहले मेरे दोस्त को मुझसे छीन लिया अब उसके बेटे को भी .... नहीं मैं ऐसा नहीं होने दूंगा . मैं आ रहा हूँ .

मोहित : पापा जल्दी आइयेगा राधा बेचारी का भी रो रो कर बुरा हल है. माँ को भी साथ ले आइयेगा.

कॉल काटने क बाद मोहित राधा को हौंसला देने लगा तभी उसे नीरज की कॉल आयी तो मोहित ने उसे भी अमित क बारे में बता दिया .

उधर मंजू बेचैन थी जब से अमित का फ़ोन नेटवर्क से बहार बता रहा था. रह रह कर उसके दिल में बुरे ख्याल आ रहे थे. आशु रत हो चुकी थी मगर अमित का फ़ोन अभी भी पहुँच से बहार था. असल में लड़ाई झगडे में अमित का फ़ोन भी टूट चूका था इस लिए अब स्विच ऑफ बता रहा था. मंजू की हालत और भी पतली हो गयी थी. उसे ये दर सताने लगा था क कहीं वो फिर से अकेली न हो जाये. अमित जो अब उसके जीने का एक मात्रा सहारा था वो भी अब उसे खोता हुआ दिखाई दे रहा था. मंजू क पास अमित क किसी साथी का फ़ोन no. भी नहीं था जिससे वो पता लगा सके . वो खुद को बेबस महसूस कर रही थी और जब उससे ये सब बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने खुद उस जगह जाने का फैसला किया जहाँ टूर गया था. क्यूंकि अमित ने उसकी लोकेशन hi तो पूछी थी लास्ट टाइम. उसके बाद से न तो अमित का फ़ोन लगा न hi उस स्टाफ में से किसी का जो टूर पर गया था. मंजू आधी रत को hi दर्द और चिंता में डूबी अपनी कार लेकर निकल गयी अमित का पता लगाने मगर उसकी चिंता तब और भी बाद गयी जब रस्ते में उसके फ़ोन पर उसकी एक साथी प्रोफ़ेसर का फ़ोन आया जिसने ये सुचना दी क टूर में से एक लड़की गायब है और 3 लड़के जिनमे अमित भी था उसे ढूंढते हुए रत वहां पहुंचे थे. ऐसी अप्रिय घटना हो जाने की वजह से टूर कैंसिल कर दिया गया था और सुबह सब वापिस आने वाले थे. ये सब सुचना किसी तरह टूर पर गए स्टाफ ने अपने होड़ तक पहुंचा दी थी जिससे सबको खबर हो गयी थी . मंजू चिंता में डूबी बीच रस्ते से वापिस आ गयी क्यूंकि अब वहां जाने का कोई फायदा नहीं था मगर अब उसकी हालत पहले से भी ज्यादा ख़राब हो गयी थी .

उधर जैसे hi राघव ने रमा को फ़ोन पर सुचना दी तो उसके पाऊँ टेल से भी ज़मीन खिसक गयी . वो भी अमित को दिल से चाहती थी इस लिए फ़ौरन कपडे चेंज कर क वो अकेली hi कार ले कर हॉस्पिटल क लिए निकल गयी क्यूंकि राघव को अभी टाइम लगने वाला था. और इतनी देर वो खुद को रोक नहीं सकती थी.

थोड़ी देर में hi िक क बहार रमा राधा को चुप करवा रही थी और उसके साथ खुद भी आंसू बहा रही थी. जैसे hi डॉ िक से बहार निकला तो मोहित और नीरज दौड़ कर उसके पास गए .

मोहित : डॉ अब कैसा है मेरा दोस्त ?

डॉ : हे इस आउट ऑफ़ डेंजर . ज़ख़्म हमने साफ कर दिए हैं और मलहम पट्टी कर दी गयी है. ऑपरेशन की ज़रूरत नहीं पड़ी . हे इस लकी क सर पर लगी चोट ज्यादा गहरी नहीं थी वर्ण कुछ भी हो सकता था. खून ज्यादा hi बह गया था जिसकी वजह से वो बेहोश हो गया. पर ये सब हुआ कैसे ? उसके ज़ख्मों से कांच निकला है जैसे किसी बोतल से मारा गया है. It’s पुलिस केस. आपको बयां देने होंगे.

मोहित कोई जवाब देता उससे पहले hi नीरज बोल पड़ा

नीरज : जी डॉ हम खुद नहीं जानते ये सब कैसे हुआ ? किसी ने उस पर हमला कर दिया था अँधेरे में.

डॉ : ok आप लोग रिलैक्स हो जाइये उसे ब्लड चढ़ा दिया गया है और 1-2 घंटे तक वो होश में आ जायेगा.

इतना कह कर डॉ चला गया और मोहित नीरज को देखने लगा

मोहित : आपने सच क्यों नहीं बताया डॉ से?

नीरज : इस लिए क पुलिस में शिकायत करने से कुछ नहीं होगा. उल्टा हम लोग hi परेशां होंगे. मोंटी क बाप की पहुँच ऊपर तक है. उसे तो हम खुद hi सबक सिखाएंगे. बस एक बार अमित ठीक हो जाये .

दोनों दोस्त साइड में खड़े बातें कर रहे थे वहीँ रमा और राधा क आंसू अब थम चुके थे अमित क बारे में डॉ से सुन कर. कुछ देर में राघव भी पहुँच गया था हॉस्पिटल में और अमित की हालत देख कर उसे दुःख हुआ मगर उसे इस बात की तसल्ली भी थी क अमित खतरे से बहार है. राघव ने मोहित से घटना क बारे में जानना चाहा तो नीरज क इशारे पर मोहित ने भी साफ़ साफ़ कुछ नहीं बताया .

दूसरी तरफ मोंटी को जब रंजीत का फ़ोन नहीं आया तो वो खुद hi निकल पड़ा था इस कॉटेज की तरफ जहाँ राधा की उठा कर लेन वाले थे. जब मोंटी वहां पहुंचा तो सबकी बुरी हालत देख कर वो शॉकेड हो गया. उसने तो सोचा था राधा उनके कब्जे में होगी मगर यहाँ तो पैसा hi पलट गया था. असल में मोंटी से पहले अमित पहुँच गया था और सबकी ठुकाई कर क राधा और शीना को लेकर निकल गया था. रस्ते में शायद किसी जगह दोनों आमने सामने से गुज़ारे भी थे पर दोनों को hi अंदाज़ा नहीं था इस बात .

मोंटी : ोये रंजीत उठ सेल होश में आ , क्या है ये सब ? वो लड़की कहाँ है?

रंजीत : दर्द में ) आआह्ह्ह्ह साला वो ले गया उसे . बहनचोद वो नीरज भी था उसके साथ और एक लड़का और . सैलून ने पीछे से हमला कर दिया और हमारी हालत ख़राब कर दी

मोंटी : गुस्से में ) मादरचोद खुद को पहलवान कहते हो तुम 6 लोग 3 का मुकाबला नहीं कर पाए ? लाहनत है.

रघु : अब क्या होगा मोंटी? वो सेल तो निकल गए . मगर उन्हें पता कैसे चला यहाँ का? अब तो सैलून को सब कुछ पता चल गया होगा कहीं पुलिस तक बात चली गयी तो?

मोंटी : कुछ नहीं होगा तू दर मत . हम तो कॉलेज में थे. पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगड़ सकती .

तभी मोंटी को शीना का ख्याल आया

मोंटी : शीना कहाँ है?

रंजीत अब इस बात का क्या जवाब देता ? मोंटी तो उल्टा उनको hi थोक देता.

रंजीत : शीना को वो लोग अपने साथ ले गए हैं.

मोंटी : क्या कहा मादरचोद ? मेरी बहिन को वो ले गया और तुम लोग कुछ नहीं कर सके. उसकी तो माँ की . अब सेल को कोई नहीं बचा सकता मुझसे.

मोंटी ने जल्दी से फ़ोन निकला और किसी को फ़ोन किया.

मोंटी : hello अंकल मैं मोंटी बोल रहा हूँ.

आदमी : हाँ बीटा कैसे हो ? पापा कैसे हैं ? कही क्या बात है इतनी रत को फ़ोन किया?

मोंटी : अंकल शीना को एक लड़का ज़बरदस्ती अपने साथ ले गया है . मैं चाहता हूँ उसकी खंडन की सभी लड़कियां अब कोठे पर बैठें .

आदमी: क्या ??? किसकी इतनी हिम्मत हुई? कौन है वो लड़का ? नाम पता बता मुझे . उसके खंडन की हर औरत कोठे पर बैठेगी अपने.

मोंटी : वो हमारे कॉलेज में hi पड़ता है . अमित नाम है उसका . एड्रेस कॉलेज से मिल जायेगा.

आदमी : तुम चिंता मत करो वो सब पुलिस देख लेगी . मैं अभी फ़ोन किये देता हूँ . अब तुम आराम करो बस . जल्दी hi शीना बेटी घर पर होगी .

इतना कह उस आदमी ने फ़ोन काट दिया .

रघु : किसे फ़ोन किया था ?

मोंटी : पापा क फ्रेंड हैं मला . अब पुलिस उसे घसीट कर हमारे क़दमों में लेकर फेंकेगी. अब देखता हूँ सका कैसे बचता है. शीना को तो कुछ नहीं होगा मगर उसकी बहनो को अब कोठे पर मैं बिठा कर रहूँगा.

रघु : इन लोगों का क्या करना है?

मोंटी : तू एक काम कर सबको गाड़ी में दाल कर हॉस्पिटल ले जा . मैं भी घर पहुँचता हूँ शीना का भी तो पता लगाना पड़ेगा.

मोंटी तो रघु को काम देकर निकल गया . चाहे वो ज़ाहिर न करे मगर मोंटी को अंदर से शीना की चिंता हो रही थी. जैसे भी हो वो बहिन थी उसकी . चाहे दूसरों की बहनो की वो इज़्ज़त नहीं करता था मगर अपनी बहिन की चिंता उसे भी थी. मोंटी क घर पहुँचने से पहले hi शीना का फ़ोन उसे आ गया था इस लिए वो सीधा घर hi गया.

मोंटी : तुम ठीक तो हो शीना . मुझे फ़िक्र हो रही थी तुम्हारी . कहाँ ले गया था वो हरामज़ादा तुम्हे? उसने तुम्हारे साथ कोई गलत हटकट तो नहीं की ? मैंने उसे जान से मर दूंगा .

शीना : किसे जान से मरोगे ? उसे जिसने आज मेरी इज़्ज़त बचाई तुम्हारे गुंडों से ?

मोंटी : ये तुम क्या कह रही हो ?

शीना : सच कह रही हूँ मैं. अगर आज वो टाइम से न अत तो तुम्हारे वो गुंडे मेरी इज़्ज़त लूट चुके होते . यही करने को बोलै था न तुमने उन्हें राधा क साथ ? इसी लिए किडनैप करवा रहे थे उसका ?

मोंटी : ये .. ये तुम कैसी बातें कर रही हो? तुम मुझ पर ऐसा घटिया इलज़ाम कैसे लगा सकती हो?

शीना : सब जान गयी हूँ मैं. सब सुन लिया था मैंने तुम्हारे उन गुंडों क मुँह से क आज रत क्या करने वाले थे तुम उसके साथ. शुक्र करो क अमित वहां आ गया वर्ण इस वक़्त वो सब मुझे नोच रहे होते.

मोंटी : उनकी इतनी हिम्मत , मैं उन लोगों को ज़िंदा नहीं छोडूंगा. मेरी बहिन पर हाथ डाला उन्होंने .

शीना : तुमने भी तो अमित की बहिन पर हाथ डाला है न तो क्या वो ऐसा नहीं करेगा ?

मोंटी : शीना !!! तुम मुझ पर झूठा इलज़ाम लगा रही हो. तुम्हे पता है न हम बस अमित को वहां बुला कर अपना बदला लेने वाले थे. तुम उन लोगों की बातों पर यकीन कर क अपने भाई पर इलज़ाम लगा रही हो ? क्या तुम नहीं जानती क तुम्हारा भाई कैसा है? क्या तुम मुझे इतना गिरा हुआ समझती हो?

मोंटी मगरमच्छ क आंसू बहाने लगा और शीना बेचारी को लगा क शायद मोंटी सच बोल रहा है.

शीना : ी ऍम सॉरी मोंटी मुझे लगा वो सच बोल रहे हैं. पर अब तुम अमित क खिलाफ कुछ नहीं करोगे बल्कि हम दोनों उससे माफ़ी मांगेंगे .

मोंटी को तो ये कटाई कबूल न था मगर अभी शीना को मानाने क लिए वो मन गया

मोंटी : मैं ज़रूर उससे माफ़ी मांगूंगा बल्कि उसके पाऊँ भी पडूंगा आज उसने मेरी बहिन की जान बचाकर मुझे खरीद लिया है.

शीना : सच !! तो चलो हम अभी उसके पास चलते हैं . उसे बहुत चोट लगी है ज़रूर हॉस्पिटल गए होंगे वो लोग.

मोंटी: नहीं अभी नहीं , अभी वो लोग गुस्से में होंगे अगर हम गए तो मुझे देख कर वो गुस्से में आ जायेंगे . हम उनसे बाद में मिलेंगे .

शीना : प्रॉमिस

मोंटी : प्रॉमिस

शीना : मगर उन लोगों को छोड़ना नहीं .

मोंटी : वो तुम मुझ पर छोड़ दो मैं देख लूंगा और हाँ पापा को कुछ मत बताना वर्ण वो नाराज़ होंगे .

शीना : नहीं बताती

मोंटी ने शीना को अपनी बातों में फसा लिया था. वो जनता था क शीना उसकी बात मन hi जाती है क्यूंकि उसकी नज़र में मोंटी का कोई कुकर्म जो सामने नहीं आया था अभी तक.

उधर रात ख़तम होने को थी और मोहित नीरज रमा राघव राधा सब हॉस्पिटल में बैठे अमित क होश में आने का वेट कर रहे थे. नींद से अब आँखें बंद होने लगी थी सबकी मगर राधा बेचारी की आँखों में तो जैसे नींद थी hi नहीं . जब राधा ने देखा क कोई भी स्टाफ नर्स आसपास नहीं है तो वो खुद hi बिना पूछे अमित क पास चली गयी. अमित का सर पूरा पट्टी से धक्का हुआ था और उसे उल्टा लिटाया गया था पीठ पर चोट क कारन . अमित की लोअर बैक पर भी रुई का बड़ा सा गोला लगा कर टेप से पत्तियां की हुई थी . एक तरफ ब्लड और ग्लूकोस की बोतल से लगी पाइप्स अमित की कलाई क पास इंजेक्ट की हुई थी. साइड में लगी मशीन पर भी कुछ रीडिंग आ रही थी जो राधा अछि तरह जानती थी . अमित की ऐसी हालत देख कर एक बार फिर राधा की आँखों से आंसू बहने लगे . वो धीमे कदमो से चलती बिना कोई आवाज़ किये अमित क पास आ कर कड़ी हो गयी . अमित अभी भी बेहोश था और उसके चेहरे को देखती हुई राधा उसके ऊपर झुकती गयी और पहली बार आज उसके होंठ अमित को स्पर्श कर रहे थे. इस चुम्बन में प्यार और तड़प थी जो सिर्फ राधा का दिल hi जनता था. कंपते होंठों से राधा ने अमित क गाल को चूम लिया था और उसके अंदर जाने कितने जज़्बात उमड़ रहे थे.

राधा : धीमी आवाज़ में) बहुत परवाह करते हो न मेरी ? मैं भी तुम्हारे बिना और कुछ नहीं सोचती. आज तक तुम्हारे सिवा किसी और को सोचा भी नहीं मैंने. पता नहीं ये कैसा रिश्ता है ? मगर मैं तुमसे दूर नहीं रहना चाहती. प्लीज लौट आओ न.

राधा ने आज पहली बार अपने दिल क जज़्बात अपने ज़ुबान पर लाये थे. अभी तक वो नहीं जान पायी थी क उसके अंदर अमित क लिए कैसी फीलिंग है. क्यूंकि रिश्तों की दुनिया में अमित उसका भाई था एक किसम से पर राधा क अंदर अमित को लेकर भाई बहिन वाली फीलिंग्स नहीं थी. और न hi उसे ऐसा कोई पल यद् था क कभी उसने अमित को भाई समझा हो या कभी राखी बंधी हो. राधा बहुत hi ज़्यादा इनोसेंट थी और उसकी भावनाएं निर्मल थी . वो अमित को बहुत चाहती थी मगर वो इस प्यार और चाहत को समझ नहीं रही थी . या यूँ कहें क उसे प्यार और इश्क़ क बारे में सही से जानकारी नहीं थी .

अमित जो पिछले 3 घंटे से बेहोश पड़ा था एक एक राधा क कोमल एहसास से वो होश में आने लगा और जैसे hi उसने धीरे धीरे अपनी ऑंखें खोली तो राधा को सामने प् कर उसे तसल्ली हुई. राधा की आँखों में नमी थी पर उसके चेहरे पर अब ख़ुशी आ गयी थी अमित को होश में अत देख कर. अमित ने जैसे hi कुछ बोलने क लिए मुँह खोला तो राधा ने उसके होंठों पर हाथ रख कर न में गर्दन हिलायी .

राधा : अभी कुछ मत कहो बस आराम करो. मैं यहीं हूँ तुम्हारे पास.

राधा वहीँ अमित क पास बैठ गयी . रमा जो सबकी तरह बैठे बैठे थोड़ा नींद में चली गयी थी अचानक उसकी नींद टूटी तो राधा को पास न पाकर वो एक पल क लिए चिंतित हुई पर जैसे hi उसने िक में राधा को अमित क पास बैठे देखा तो उसे चैन आया. रमा भी अंदर घुस गयी अमित को देखने क लिए .

रमा : राधा तुम यहाँ ? बीटा तुम थक जाओगी कुछ आराम कर लो.

राधा : नहीं आंटी में ठीक हूँ . आप आराम कीजिये .

आंटी की आवाज़ सुन कर मैंने फिर से आँखें खोल ली तो आंटी मुझे होश में देख कर खुश हो गयी

आंटी : तुम्हे होश आ गया ? शुक्र है भगवन का. तुमने तो द्र hi दिया था मुझे. अब कैसी तबियत है?

अमित : अब ठीक हूँ आंटी. पर आप यहाँ कैसे आयी ?

आंटी: मैं hi नहीं तेरे अंकल भी ए हैं वो बहार बैठे हैं.

अमित : सॉरी मेरी वजह से आपको तकलीफ हुई

‘ तकलीफ कैसी बरखुरदार?’ ये आवाज़ अंकल की थी जो शायद आंटी क पीछे hi आ गए थे

अंकल : तुमने तो मुझे डरा hi दिया था . जब मोहित का फ़ोन आया तो मुझे एक पल तो लगा क कहीं मैं अपने यार को फिर से खो न दूँ. पर शुक्र है भगवन ने मेरी सुन ली.

तभी वहां नर्स आ गयी .

नर्स : देखिये यहाँ आप लोग नहीं आ सकते प्लीज आप सब बहार जाइये .

आंटी: आप इसे रूम में शिफ्ट कर दीजिये न अब . हम इसके पास रहना चाहते हैं.

नर्स : देखिये वो डॉ क कहने पर hi कर सकते हैं.

अंकल : ठीक है हम डॉ से बात कर लेते हैं. आओ रमा , आओ बेटी तुम भी.

अंकल आंटी और राधा को लेकर बहार चले गए . नर्स ने बोतल में कोई इंजेक्शन लगाया और कुछ hi देर में मुझे नींद सी आने लगे.

जब मेरी आँख दुबारा खुली तो मैंने खुद को िक की जगह रूम में हॉस्पिटल क किसी और कमरे में पाया. राधा अभी भी मेरे सर क पास बैठी हुई थी और शायद उसकी आँख लग गयी थी बैठे बैठे. इस वक़्त राधा बहुत hi मासूम लग रही थी . किसी मासूम बची की तरह उसका इनोसेंट फेस किसी को भी आकर्षित करने क लिए काफी था. वो अभी भी मेरी T-shirt में थी .

अमित : मन में ) तुम कितनी मासूम हो राधा ? मैं तुम्हे कभी कुछ नहीं होने दूंगा. उस मोंटी को तो इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी जो उसने तुम्हारे साथ किया .

मैं अभी राधा को देख रहा था क दरवाज़ा खुला और नर्स क साथ एक डॉ अंदर आ गयी . डॉ क चेहरे पर मास्क लगा हुआ था मगर मैंने उसे पहचान लिया. ये डॉ रीना hi थी. मुझे देखते hi वो भी शॉकेड हो गयी .

डॉ रीना : अमित तुम !!! ये सब कैसे हुआ तुम्हारे साथ ? किसने किया ये ? ो माय गॉड ,

डॉ रीना को मेरी चिंता होने लगी . जहाँ उनके साथ आयी नर्स उनके इस बिहेवियर को देख कर हैरान हो रही थी वहीँ राधा भी आवाज़ सुन कर नींद से जाग गयी थी.

अमित : कुछ नहीं डॉ ज़रा सी चोट है बस . और अब आप आ गयी हैं तो सब ठीक कर hi देंगी.

डॉ रीना : ज्यादा बातें न बनाओ और बताओ ये सब कैसे हुआ? और ये तुम्हारी कजिन है न उस दिन जिनके घर गए थे ?

राधा : जी मैं वही हूँ . पर आप यहाँ ?

डॉ रीना : मैं यहीं जॉब करती हूँ. और अब कोई बताएगा क क्या माजरा है ये? इतनी चोट कोई खेलते हुए तो लग नहीं सकती. 5 बोतल खून चढ़ाया गया है तुम्हे कल रत . अब बताओ जल्दी

अमित : क्या आप बात पकड़ क बैठ गयी हैं. आप बताओ आप कैसी हो इतने दिनों बाद मिल रही हो?

डॉ रीना : पहले मेरी बात का जवाब दो ये सब कैसे हुआ?

राधा : ये सब मेरी वजह से हुआ है डॉ .

अमित : राधा ये तुम क्या कह रही हो?

राधा : वही जो सच है. ये सब मेरी वजह से hi तो हुआ है. मेरी वजह से hi तुम्हारी ये हालत हुई है.

अमित : इसमें तुम्हारी क्या गलती है?

डॉ रीना : हुआ क्या है?

राधा : काम कुछ गुंडों ने मुझे किडनैप कर लिया था और मेरे साथ .....

डॉ रीना : ी अंडरस्टैंड, तो उन लोगों ने तुम्हारे साथ ज़बरदस्ती करने की कोशिश की?

राधा : जी , अगर अमित न अत तो मैं आज ज़िंदा भी नहीं होती .

डॉ रीना : डिसगस्टिंग, ऐसे घटिया लोगों को तो फांसी दे देनी चाहिए. तुम लोगों ने पुलिस को बताया ?

राधा : नहीं

डॉ रीना : क्यों नहीं बताया ? ऐसे लोगों को तो छोड़ना नहीं चाहिए .

अमित : पुलिस ऐसे लोगों की जब में होती है मैडम. उसे तो मैं खुद सजा दूंगा . बड़े बाप की औलाद है तो सबको अपने बाप की जागीर समझता है.

डॉ रीना : वो सब बाद में पहले खुद की हालत तो देखो.

अमित: मेरी हालत तो आप ठीक कर देंगी मगर उसकी मैं वो हालत करूँगा क कोई भी ठीक नहीं कर पायेगा .

डॉ रीना : ाचा च महाराज अब ज़रा चेकउप कर लें ?

हम तीनो क चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी. डॉ रीना ने मेरा चेकउप किया और फिर आने का कह कर चली गयी क्यूंकि उन्हें सब मरीज़ों को एक बार देखना था.

डॉ रीना क जाने क बाद मैंने राधा से बात की

अमित : तुम अभी तक रत वाले hi कपड़ों में हो ? घर नहीं गयी क्या ?

राधा : जब तक तुम्हे ठीक नहीं देख लेती मैं कैसे चली जाती ? वैसे भी तुम्हे भी तो ज़रूरत पद सकती थी न किसी की यहाँ पर?

अमित : बाकि सब कहाँ हैं?

राधा : मोहित और आंटी अभी अभी गए हैं घर . अंकल और नीरज भैया पहले चले गए थे .

अमित : तुमने घर पर फ़ोन किया ? मौसी चिंता कर रही होगी.

राधा : मेरा फ़ोन तो उधर hi रह गया टेंट में. माँ को कहाँ कुछ पता होगा . अभी तो 9 hi बजे हैं .

अमित : इतनी देर हो गयी ? तुम भी अब घर जाओ मौसी फ़िक्र कर रही होंगी. मेरा मोबाइल ....

मैंने जेब में हाथ डाला तो मोबाइल नहीं था . मैंने राधा की तरफ देखा तो उसने मुझे मेरा मोबाइल दिया जो टूट चूका था.

अमित : ये तो टूट गया. अब किसी को फ़ोन भी नहीं कर सकता.

राधा : चिंता मत करो तुम मोबाइल hi तो है दूसरा ले लेना. तुम बस आराम करो. तुम्हे भूख तो नहीं लगी ? कल रत से ऐसे hi पड़े हो.

अमित : नहीं बस थोड़ा बदन टूट रहा है और सर दर्द भी हो रहा है

राधा : मैं अभी डॉ को बुलाती हूँ

अमित : रहने दो अभी तो गयी हैं डॉ और सुना नहीं तुमने वो कह कर गयी हैं क अभी आ जाएँगी दोबारा.

राधा : क्या तुम्हे बैठना है ?

अमित : हाँ

राधा : चलो फिर उठो मैं सहारा देती हूँ.

अमित : तुम रहने दो , बहार से किसी को बुला दो

राधा : क्यों ? मैं नहीं कर सकती क्या ?

अमित : ऐसी बात नहीं है , ाचा ठीक है आओ इधर .

राधा मेरे पास आ आयी और मेरी एक बाजु उसने अपने कंधे पर राखी और मुझे उठने में मेरी मदद करने लगी. उस बेचारी से कहाँ मेरा वजन उठा होना था . इस लिए मैंने खुद उठने की कोशिश की तो मुझे अपने ज़ख्मो पर तेज़ दर्द होने लगा हो अब तक नदारद था.

अमित : आआआह्ह्ह्हह्ह

राधा : घबराते हुए ) क्या हुआ ? कहीं दर्द हो रहा है क्या ? दिखाओ मुझे

अमित : कुछ नहीं मैं ठीक हूँ . वो हिलने से दर्द हुआ थोड़ा .

राधा : तुम लेट जाओ फिर नहीं तो और दर्द होगा.

अमित : नहीं मैं ठीक हूँ तुम चिंता मत करो.

मैं एक साइड से तक लगा कर बैठ गया . लेते लेते मुझे खुद hi अपना शरीर बीमार सा लगने लगा था. मैं जनता था क राधा ने कुछ खाया नहीं होगा इस लिए मैंने पास पड़ी जूस की बोतल से राधा को जूस पिलाने को कहा और अपने साथ उसे भी जूस पीला दिया.

दूसरी तरफ रत को hi मोंटी से बात होने क बाद मला ने पुलिस कमिश्नर को फ़ोन कर क उस लड़के को ढूंढने को कह दिया था . मला कोई छोटी हस्ती नहीं थी इस लिए पुलिस भी एक्शन में आ गयी थी . मामला कॉलेज से जुड़ा था तो दिन चढ़ने तक उनको रुकना पड़ा और सुबह कॉलेज शुरू होते hi सप साहब खुद कॉलेज क प्रिंसिपल क ऑफिस में पहुँच गए अपनी टीम क साथ . वैसे तो ये काम कोई भी इंस्पेक्टर कर सकता था पर सप साहब जो नए ए थे उन्होंने प्रिंसिपल जैसे रेस्पेक्टेड ओहदे का मन रखते हुए खुद hi जाना बेहतर समझा. वैसे भी कॉलेज में किसी तरह की गलती न हो इस लिए उन्होंने खुद जाने का फैसला किया.

प्रिंसिपल का ऑफिस -

पेओन : सर सप साहब आपसे मिलना चाहते हैं . अंदर भेज दूँ ?

प्रिंसिपल: सप मुझसे मिलने ए हैं ? कुछ बताया उन्होंने किस बारे में बात करने ए हैं ?

पेओन : नहीं सर

प्रिंसिपल: ठीक है भेज दो

प्रिंसिपल क साथ इस वक़्त उनके परम मित्र और कॉलेज क प्रोफेसर वरिंदर बैठे थे. पेओन क जाते hi एक पुलिस की यूनिफार्म में शहर क नए सप प्रिंसिपल सर क सामने आ कर खड़े हो गए और उन्हें सलूट दे कर गुड मॉर्निंग कहा. प्रिंसिपल सर तो सप को देख कर हैरान हो गए . क्यूंकि ये तो एक युवती थी जो इस ड्रेस में भी किसी हेरोइन से काम नहीं लग रही थी . ( अगर आप लोगों ने दृश्यम मूवी देखि हो तो उसमे जैसे तब्बू यूनिफार्म में लगती थी )

सप : गुड मॉर्निंग सर . ी ऍम ऋतू सिंह , सप ऑफ़ योर सिटी

प्रिंसिपल: यस प्लीज , हाउ मई ी हेल्प यू

सप : सॉरी तो इन्फॉर्म यू सर बूत वे हैवे ा सीरियस मटर. कल रत को एक लड़की को किडनैप हुआ है और उसके रिगार्डिंग मैं इन्वेस्टीगेशन करने आयी हूँ.

प्रिंसिपल सर ने सोचा क शायद ये टूर से गायब हुई लड़की क बारे में छानबीन करने आये हैं. पर उस बारे में तो किसी तरह की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं करवाई गयी थी . बोर्ड ने साफ मन किया था क जब तक कन्फर्म न हो F.i.R न लिखवाई जाये.

प्रिंसिपल: आप किस लड़की क बारे म बात कर रही हैं और उससे इस कॉलेज का क्या लेना देना है?

सप : सर उस लड़की का नाम शीना है और लड़के का नाम अमित है जो इसी कॉलेज का है.

ये नाम सुनते hi प्रिंसिपल क साथ साथ प्रोफेसर व् भी हैरान हो गए.

प्रिंसिपल: अरे यू सूरे ? हमें तो ऐसी कोई बात अभी तक सुनने को नहीं मिली क्या अपने खुद चेक किया है?

सप : देखिये हमें ऊपर से आर्डर मिले हैं और बिना शिकायत क तो ऐसा हो नहीं सकता न?

प्रिंसिपल: देखिये मैडम मैं आपको गलत नहीं कह रहा पर आप जिस लड़के का नाम ले रही हैं वो बिलकुल भी ऐसा नहीं है. मैं ऐसा इस लिए कह रहा हूँ क किसी इनोसेंट क साथ कुछ गलत नहीं होना चाहिए .

सप : सर वो देखना तो कानून का काम है क कौन कैसा है. वैसे भी मुजरिम क माथे पर नहीं लिखा होता क वो मुजरिम है. अक्सर शरीफ दिखने वाले लोग hi शातिर होते हैं.

प्रिंसिपल: देखिये मैं आपको आपका काम करने से नहीं रोक रहा पर एक रिक्वेस्ट कर रहा हूँ क किसी क साथ नाइंसाफी नहीं होनी चाहिए .

सप : डोंट वोर्री सर , मेरे होते किसी क साथ गलत नहीं हो सकता . सही को सही और गलत को गलत कहना मेरी फितरत है.

प्रिंसिपल: अछि बात है. मैं उस लड़के को यहीं बुला लेता हूँ आप वेट कीजिये .

सप : जी ज़रूर मैं भी स्टूडेंट्स क बीच जा कर किसी को डरना नहीं चाहती.

प्रिंसिपल ने बेल्ल बजा कर पेओन को बुलाया और मैडम क लिए कॉफ़ी लेन क साथ hi अमित को क्लास से बुलाने को कहा.

सप : सर आपको कैसे पता क मैं किस अमित को ढून्ढ रही हूँ ? ी मैं एक नाम क तो कई स्टूडेंट्स होंगे न ?

प्रिंसिपल: मैडम मैंने आपसे पहले hi कहा न क वो लड़का ऐसा नहीं है. और ऐसा मैंने इस लिए कहा क शीना नाम की एक hi लड़की है इस कॉलेज में जिसे सब जानते हैं. और उसकी तथा उसके भाई की उस लड़के से थोड़ी ुंबन है. इस लिए आप ने जब शीना का नाम लिया तो मैं समझ गया . एक बार पहले भी उन लोगों ने अमित को बदनाम करने की कोशिश की थी उस पर रपे एटेम्पट का केस दाल कर. तब सचाई समय रहते हमारे सामने आ गयी थी और उस लड़के को बचा लिया गया. इस बार भी मुझे ऐसा hi शक है तभी मैंने कहा क किसी इनोसेंट क साथ कुछ गलत नहीं होना चाहिए.

सप : हम्म let’s सी क्या सच है क्या नहीं.

पेओन जब अमित की क्लास में गया तो अमित क्लास में नहीं था. उसके साथ साथ आज मोहित भी नहीं आया था . पेओन ने चन्दर्कांता को बताया क प्रिंसिपल ऑफिस में सप साहब आये हैं और अमित को ऑफिस में बुलाया गया है . ये सुन कर चन्दर्कांता क चेहरे पर स्माइल आ गयी ये सोच कर क ज़रूर वो किसी चक्कर में फसने वाला होगा . मगर कल्पना जो अमित और मोहित क न होने से अकेली बोर हो रही थी अमित का नाम सुनते hi चौकन्नी हो गयी थी और चन्दर्कांता से जो पेओन ने कहा वो भी उसने सुन लिया था. कल्पना को अब चिंता होने लगी. क्यूंकि एक तो अमित और मोहित दोनों आज एब्सेंट थे दूसरा पेओन की बातों से उसे कुछ गलत होने का शक होने लगा. पेओन क जाते hi वो भी बाथरूम जाने का बहाना कर क बहार निकल गयी और प्रिंसिपल सर क ऑफिस की तरफ चली गयी .

पेओन ने जब वापिस आ कर बताया क अमित क्लास में नहीं है तो सप को अमित पर शक होने लगा इस लिए उसने अमित की फोटो और उसकी डिटेल का रिकॉर्ड मंगाने को कहा. प्रिंसिपल ने पेओन को एडमिशन फाइल लेन को कहा जहाँ से अमित का रिकॉर्ड मिल सकता था. ऑफिस क बहार कल्पना पेओन पर hi नज़र रख रही थी. बहार खड़े पुलिस वाले से उसने बात कर क सच जानने की कोशिश की तो उसने कुछ भी बताने से मन कर दिया . पर जब पेओन को फाइल लेट देखा तो वो समझ गयी क मटर कुछ और hi है. अमित की डिटेल निकलने का मतलब है क अमित पर कोई चार्ज लगाया जा रहा है और उसे अब ढूंढने की कोशिश हो रही है. कल्पना ने जल्दी से अमित को फ़ोन लगाने की कोशिश की तो उसका फ़ोन स्विच ऑफ आ रहा था. कल्पना की टेंशन बढ़ने लगी . उसने फिर मोहित को फ़ोन लगाया . मोहित भी तो सुबह hi सोया था इस लिए उसके फ़ोन पर बेल्ल तो जा रही थी मगर वो उठा नहीं रहा था. कल्पना आनन् फानन में दौड़ती हुई कॉलेज से निकली और मोहित क घर क लिए निकल गयी. वहीँ सप ऋतू सिंह ने जब फाइल में से अमित की फोटो देखि तो उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया. उसने उसका फॉर्म फाइल में से निकला और अपने पास ले कर प्रिंसिपल से शुक्रिया कह कर निकल गयी. प्रिंसिपल और प्रोफ व् सप क इस बिहेवियर से सकते में आ गए उन्हें अब शक होने लगा था क कहीं कोई साजिश तो नहीं हो रही?

कल्पना को मोहित क घर पर पहुंची तो उसे आंटी किचन में नाश्ता तैयार करवाती हुई मिल गयी .

कल्पना : टेंशन में ) आंटी अमित और मोहित कहाँ हैं ? अमित का फ़ोन बंद आ रहा है और मोहित फ़ोन नहीं उठा रहा ?

आंटी : बेटी तुम कौन हो मैंने तुम्हे पहचाना नहीं?

कल्पना : ओह सॉरी आंटी , मैं अमित और मोहित की क्लास मात हूँ. बताइये वो दोनों कहाँ हैं?

आंटी : मोहित तो ऊपर अपने कमरे में सो रहा है बात क्या है?

कल्पना : प्लीज उसे जल्दी बुला दीजिये , मुझे अमित क बारे में पूछना है उससे .

आंटी : क्या पूछना है मुझसे पूछ लो?

कल्पना : आप जानती हैं? अमित कहाँ है इस वक़्त और उसका फ़ोन क्यों बंद है?

आंटी : तुम्हे नहीं पता ? तुम्हे कैसे पता होगा सब कुछ रत में तो हुआ है. अमित का फ़ोन टूट गया है और उसे भी चोट लगी है वो इस वक़्त हॉस्पिटल में है और मैं उसी क लिए नाश्ता ले कर जा रही हूँ वहां . तुम्हे चलना है तो आ जाओ

कल्पना : शॉकेड ) हॉस्पिटल में ? क्या हुआ है उसे ? जल्दी बताइये .

आंटी : बताया न उसे चोट लगी है. बाकि तुम खुद hi पूछ लेना उससे मिल कर.

थोड़ी देर में hi नाश्ता पैक करवा कर आंटी कल्पना को साथ लेकर हॉस्पिटल जा पहुंची . कल्पना ने जैसे hi अमित को देखा तो अमित की हालत देख कर उसे झटका लगा. अमित का पूरा सर पट्टी से बंधा हुआ था और ऊपर से हॉस्पिटल में जो मरीज़ों को हरे कपडे डेल जाते हैं वो डाला हुआ था. फिर उसकी नज़र अमित की बगल में बैठी राधा पर पड़ी. जिसकी हालत भी अछि नहीं थी . ऊपर T-shirt और निचे सलवार बाल कुछ बिखरे हुए. ऑंखें लाल जो शायद नींद से भरी थी या आंसुओं की वजह से. कहीं कहीं खरोंच क निशान राधा की कलाइयों और गर्दन पर भी थे जिस पर कल्पना की तेज़ निगाहें जल्दी hi पहुँच गयी और उसे किसी हादसे का अंदेशा होने लगा.

अमित : अरे कल्पना तुम यहाँ ? तुम कॉलेज नहीं गयी क्या ?

कल्पना: मेरी छोडो तुम्हे क्या हुआ है?

अमित : बस ज़रा सी चोट लगी है और क्या

कल्पना : और राधा यहाँ क्या कर रही है? इसे तो टूर पर होना चाहिए था न?

राधा : मैं बताती हूँ तुम्हे क्या हुआ है.

अमित : रहने दो राधा अब जो हुआ सो हुआ

कल्पना : मुझे सच जानना है.

फिर राधा ने कल्पना को साडी बात बताई और आंटी भी सब सुन रही थी. साडी बात सुनते hi कल्पना की गुस्से से ऑंखें लाल हो गयी .

कल्पना : इतने हौंसले बाद गए उन लोगों क उन्हें किसी का दर नहीं कानून का भी नहीं. तुम्हे पता भी है क मुझे कैसे पता चला तुम्हारे बारे में? तुम्हे ढूंढते हुए पुलिस कॉलेज में आयी थी अभी . इसी लिए मैं मोहित क घाट पर पहुंची क्यूंकि तुम दोनों का फ़ोन नहीं लग रहा था. ज़रूर तुम पर कोई चार्ज लगाया जा रहा है. मैं भी देखती हूँ क क्या करते हैं वो लोग . मैं अभी आयी .



कल्पना बिना किसी की बात सुने गुस्से में तमतमाती हुई बहार निकली और फ़ोन पर किसी से बात करने लगी . इधर राधा अमित और रमा तीनो क चेहरों का रंग बदल गया था कल्पना की बात सुनने क बाद .
 
अपडेट 127



कल्पना क रूम से बहार जाने क बाद हम तीनो क चेहरों पर टेंशन आ गयी थी मगर मैंने माहौल को हल्का करने की कशिश की .

अमित : आप दोनों इतना क्यों घबरा रही हैं? अब लड़ाई झगडे में इतना तो होता hi है. आप टेंशन मत लो . वैसे भी मैं अभी कहीं जाने की हालत में नहीं हूँ तो पुलिस क्या कर लेगी ?

आंटी : ये छोटी बात नहीं है . पता नहीं क्या शिकायत दी गयी हो पुलिस को . वैसे कल तुम लोगों ने किसी को इतना तो नहीं मारा न क वो जान से hi मर जाये ?

अमित : नहीं आंटी ऐसा कुछ नहीं हुआ है आप चिंता मत करो .

राधा : आखिर शिकायत की किसने है ? किडनैप तो मेरा हुआ था फिर कौन शिकायत करवा रहा है और कैसी शिकायत .

अमित : अब ये कैसे पता चलेगा ? तुम टेंशन मत लो मच नहीं होगा. हमने कुछ गलत नहीं किया तो हम क्यों दरें? चलो पहले खाना खा लो फिर तुम घर चली जाना मौसी चिंता कर रही होंगी.

आंटी : तुम दोनों नाश्ता करो मैं ज़रा तुम्हारे अंकल को फ़ोन कर क बता देती हूँ . वो सब देख लेंगे. अगर वाकई में कोई बात है तो पहले से तयारी रखनी चाहिए .

अमित : आप ऐसे hi दर रही हैं.

आंटी : तुम नाश्ता करो बस , राधा लो तुम भी करो और इसे भी करवाओ.

आंटी फ़ोन पर अंकल से बात करने लगी और राधा मेरे साथ नाश्ता करने लगी . थोड़ी देर बाद कल्पना भी वापिस आ गयी अब वो नार्मल लग रही थी जैसे उसने सब कुछ हल कर दिया हो.

अमित : कहाँ चली गयी थी तुम ?

कल्पना : कुछ नहीं बस एक फ़ोन करना था.

अमित : किसे ?

कल्पना : वो छोडो , राधा ये क्या तुम अभी तक ऐसे hi कपड़ों में हो?

अमित : अब हॉस्पिटल में कपडे कहाँ से लाएगी ये? तुम एक काम करो इसे घर ले जाओ मौसी भी परेशां होंगी . और हाँ कल जो हुआ उसके बारे में बात मत करना वर्ण वो टेंशन में आ जाएँगी और बात घर वालों तक पहुँच जाएगी.

राधा : मगर मैं माँ से कुछ नहीं छुपाती और कल अगर उन्हें किसी और से पता चला तो उनको बुरा लगेगा.

अमित : मगर ...

राधा : मैं समझा दूंगी माँ को तुम चिंता मत करो.

कल्पना : तुम आराम करो मैं राधा को घर छोड़ कर वापिस अति हूँ . फिर देखते हैं आगे क्या करना है.

कल्पना राधा को लेकर चली गयी और मैं आराम करने लगा इतने में डॉ रीना वापिस आ गयी .

डॉ रीना : तो अब बताओ कहाँ से चोट लगी है तुम्हे माज़रा क्या है सारा?

अमित : आप जान कर क्या करेंगी ?

डॉ रीना : इसका मतलब मुझे जनन्ने का भी हक़. नहीं है? अचे दोस्त हो ?

अमित : तो सुनिए , राधा को कल रत कुछ लड़कों ने किडनैप कर दिया था बस उसे बचते हुए ये चोट लगी है.

डॉ रीना : गुस्से में ) क्या???? ऐसे लोगों को तो जान से मर देना चाहिए . मेरा बस चले तो एक एक को जान से मर दूँ . लड़कियों को बस इस्तेमाल की चीज़ समझते हैं. हर तरफ समाज में ऐसे भेड़िये घूम रहे हैं . हमारा कानून hi कमज़ोर है इसी लिए उन्हें दर नहीं. अगर 2-4 को लटकाया जाये तो बाक़िओं को भी दर हो.

अमित : शांत शांत डॉ साहिबा , आपका काम जान बचाना है जान लेना नहीं. रही बात ऐसे लोगों की तो इस बात पर मैं भी यही सोचता हूँ.

डॉ रीना : जान बचाना मेरा फ़र्ज़ है जानती हूँ मगर साइंस ने और भी रस्ते ईजाद किये हैं ऐसे लोगों को सजा देने क लिए

अमित : वो कैसे ?

डॉ रीना : जिस मर्दानगी की अकड़ ऐसे भेड़िओं को उकसाती है न बस एक इंजेक्शन में सब ख़तम किया जा सकता है. इससे तो जान नहीं जाएगी न.

अमित : क्या सच में ऐसा हो सकता है ? फिर तो यही सही सजा है ऐसे लोगों क लिए .

डॉ रीना : वैसे थे कौन वो लोग ?

अमित : किडनैप करने वाले लड़के तो और थे मगर जिसने उन्हें भेजा था वो हाथ नहीं आया. बड़े बाप की औलाद है तो कानून का भी दर नहीं उसे.

डॉ रीना : फिर तो उसकी यही सजा है क उसे उसकी मर्दानगी से hi फारिग कर दिया जाये .

अमित : हम्म्म

डॉ रीना : क्या हम्म , इतने दिनों बाद मिले हो वो भी इस हालत में . हर बार ऐसे hi मिलोगे क्या ?

अमित : वैसे डॉ और पेशेंट वाला रिश्ता है हमारा तो आपसे मिलने ऐसे hi आना पड़ेगा न?

डॉ रीना : कोई ज़रूरत नहीं ऐसे आने की, डॉ पेशेंट क इलावा हम दोस्त भी तो हैं अफ़सोस क तुम अपनी इस दोस्त को मिलने भी नहीं आते.

अमित : आपके सामने hi तो हूँ. पहले टेस्ट चल रहे थे और फिर ममी क बीटा हुआ और अब ये . आपको तो मैंने बताया hi था.

डॉ रीना : इसी लिए मैंने परेशां नहीं किया पर खुद hi तो सोचो कितने दिन हो गए कॉफ़ी लिए साथ में? बी थे वे बधाई हो तुम्हे तुम्हारे छोटे कजिन भाई की.

अमित : थैंक यू , वैसे कॉफ़ी तो हम यहाँ भी पि सकते हैं अब तो आपके पास hi हूँ.

डॉ रीना : ज्यादा होशिआर मत बनो , मैं डेट पर जाने की बात कर रहीं हूँ

अमित : डेट पर ?

डॉ रीना : शरमाते हुए ) मेरा मतलब है बहार साफ में जैसे उस दिन तुम लेकर गए थे.

अमित : ाचा वो , हाँ वहां भी चलेंगे पर उसके लिए आपको पहले मुझे ठीक करना होगा.

डॉ रीना : don’t वोर्री , सीरियस इंजरीज नहीं है कोई . 2-3 दिन में छुट्टी ले सकते हो बस कुछ दिन ज़ख़्म ठीक होने में लगेंगे अभी.

अमित : 2-3 दिन ?? ये तो ज्यादा है मैं इतने दिन क्या करूँगा यहाँ.

डॉ रीना : अब आ hi गए हो तो खातिरदारी का मौका दीजिये हुज़ूर .

अमित : कहीं खातिरदारी भरी न पद जाये आपको

डॉ रीना : तुम्हारे लिए सब मंज़ूर है.

इतने में बहार से नर्स आ गयी डॉ रीना को बुलाने

नर्स : डॉ रीना ऑपरेशन थिएटर रेडी है डॉ साहब ने कहा है आप आ जाएँ.

डॉ रीना : तुम चलो मैं अभी आयी. एक ऑपरेशन क लिए अभी जा रही हूँ 3-4 घंटे में वापिस आती हूँ तब तक तुम आराम करो.

इतना कह कर डॉ रीना स्माइल करती हुई चली गयी . और आंटी रूम में आ गयी .

उधर मंजू म भी आज कॉलेज नहीं गयी थी , उन्हें तो बस अमित की hi टेंशन थी और अभी तक कुछ भी पता नहीं चला था उसे कहीं से . ऊपर से कॉलेज में पुलिस अमित को ढूंढते हुए आयी है ये बात पता चलते hi उसकी धड़कने और बाद गयी. वो बार बार अमित का फ़ोन तरय कर रही थी मगर जवाब एक hi था. तब उसने फैसला किया क वो मोंटी और शीना से इस बारे में बात करेगी . मंजू को यद् आया क उसके पास शीना का फ़ोन no. था उसने उसे कॉल लगाई . 2-3 बार कॉल पिक नहीं हुई मगर फिर भी वो तरय करती रही . आखिर कर शीना ने फ़ोन उठा hi लिया.

शीना : hello , आज अपने मुझे कॉल कैसे की?

मंजू म : अमित कहाँ है ?

शीना : क्या मतलब ? वो मेरे पास थोड़ा hi है ?

मंजू म : और कहाँ है ? वो कल राधा को बचने गया था और अभी तक न राधा का पता चला है न अमित का ऊपर से पुलिस उसे ढून्ढ रही है. क्या किया है तुम दोनों ने उसके साथ ?

शीना : क्या अभी तक दोनों घर नहीं पहुंचे ? पर वो तो रत को hi आ गए थे वापिस .

मंजू म : क्या ??? मतलब तुम उनके साथ थी ? क्या हो क्या रहा है मुझे सब सच बताओ ?

शीना : मैं अभी आपको वापिस कॉल करती हूँ

इतना कह कर शीना ने फ़ोन काट दिया . मंजू ने कई बार फ़ोन तरय किया मगर शीना का फ़ोन बिजी आता रहा. शीना क मुँह से अमित और राधा क रत को वापिस आने की बात सुन कर मंजू को जहाँ एक तरफ तसल्ली मिली वहीँ टेंशन भी होने लगी की वो जा कहाँ सकते हैं दोनों.

शीना ने मंजू की कॉल काटने क बाद मोंटी को कॉल की और उससे पुलिस वाला मटर पूछा तो मोंटी ने साडी बात बताई . शीना ने मोंटी को मला को वापिस फ़ोन कर क पुलिस को रोकने को कहा और मोंटी ने ऐसा hi किया. अब शीना को चिंता इस बात की थी क अमित और राधा हैं कहाँ . उसे यद् आया क अमित को काफी चोट लगी थी . ये बात दिमाग में आते hi उसे भी चिंता होने लगी. शीना जो नफरत करती थी अमित से अचानक एक हादसे ने उसका नजरिया बदल दिया था. अब अमित का उस पर एहसान था चाहे अमित खुद उस से नफरत hi करे पर शीना अब उसकी कर्ज़दार थी . मोंटी और शीना में शायद यही फरक था. जहाँ मोंटी इसे अपनी एक शिकस्त समझ कर आगे की सोच रहा था वहीँ अब शीना इस दुश्मनी को hi ख़तम करने की तरफ सोच रही थी.

शीना ने अपनी क्लास्स्मेटिस को फ़ोन लगता और नीरज का no. लिया . नीरज भी घर पर आराम कर रहा था . उसने अननोन no. समझ कर पहले तो उठाया नहीं पर जब बार बार फ़ोन आने लगा तो उसने कॉल पिक कर hi ली

नीरज : hello हु इस थिस?

शीना : hi नीरज थिस इस शीना

नीबाज : शीना ! तुमने मुझे क्यों फ़ोन किया ? फिर से कुछ करना है क्या ? देखो अमित से दूर रहो वर्ण ाचा नहीं होगा.

शीना : ी ऍम सॉरी नीरज मुझसे अनजाने गलती हो गयी . कल मुझे एहसास हुआ क मैं कितनी गलत थी . मुझे अमित की चिंता हो रही है . कल उसे बहुत चोट लग गयी थी और अभी पता चला है क वो घर भी नहीं गया और राधा भी . प्लीज इतना बारे दो क वो ठीक तो है न?

नीरज : ठीक नहीं है वो . बहुत ज्यादा खून निकल जाने से वो बेहोश हो गया था और रत से हॉस्पिटल में hi एडमिट है.

शीना : घबराते हुए ) व्हाट ??? कौन से हॉस्पिटल में है वो ? मुझे अभी बताओ , प्लीज भगवन क लिए मुझे बताओ मैं उसे देखना चाहती हूँ. मेरी जान बचा कर उसने मुझ पर एहसान किया है मैं तो उसका शुक्रिया तक न कर पायी.

नीरज : देखो शीना अभी उससे मिलना ठीक नहीं होगा . सब गुस्से में होंगे तो तुम वहां मत जाना. मुझे लग रहा है क तुम में चंगेस आ गए हैं शायद पर फिर भी अभी अमित क पास जाना ठीक नहीं रहेगा . वो जैसे hi ठीक हो कर कॉलेज आएगा तब उस से मिल लेना.

शीना : प्लीज इतना तो बता दो क वो कौन से हॉस्पिटल में है?

नीरज : वो क्सक्सक्सक्स हॉस्पिटल में है मगर मैं फिर कहता हूँ तुम वहां मत जाना . जो भी है उसकी इस हालत क ज़िम्मेदार तुम और मोंटी hi हो.

शीना : ी विल टेक केयर ऑफ़ थिस . एंड थैंक्स तो यू . तुमने कल भी मेरी मदद की थी और आज भी .

इतना कह कर शीना ने फ़ोन काट दिया . मगर उसे अब अमित को लेकर मन में अलग अलग विचार आ रहे थे. कहाँ कल तक वो अमित को अपना दुश्मन मानती थी और आज वो उसकी फ़िक्र कर रही थी. शीना का फिर से फ़ोन बजने लगा उसने देखा क मंजू का hi फ़ोन है तो उसने जल्दी से फ़ोन उठाया .

मंजू : कुछ पता चला? कहाँ है दोनों?

शीना : बुआ कल अमित को कुछ चोटें लग गयी थी . इस लिए वो हॉस्पिटल में एडमिट है.

मंजू : क्या ????? हॉस्पिटल में है ? हे भगवन क्या किया तुम दोनों ने उसके साथ ? कौन से हॉस्पिटल में है वो जल्दी बताओ.

शीना : क्सक्सक्सक्स हॉस्पिटल में . बुआ प्लीज मुझे माफ़ कर देना अगर कल वो न होता तो पता नहीं मेरा क्या होता . मैं उससे नफरत करती थी और कल उसी ने मेरी जान मेरी इज्जत बचाई. मैं बहुत बुरी हूँ बुआ. मैं आप जैसी नहीं बन पायी . मैं बहुत बुरी हूँ . प्लीज मुझे माफ़ कर दीजिये .

शीना लगभग रोने hi लगी थी मंजू से बात करते करते मगर मंजू ने तो हॉस्पिटल क नाम क आगे कुछ सुना hi नहीं और फ़ोन काट दिया. शीना को पता नहीं चला क फ़ोन काट गया है और वो रट रट अपने जज़्बात ज़ाहिर करने लगी. मंजू शीना और बाकि बच्चों से बहुत प्यार करती थी शादी से पहले तक वो सब बचीं क साथ लाड लड़ती थी खुद को नार्मल रखने क लिए अपने दूसरे भाई भाबी और भतीजे की मौत क बाद. मंजू शीना को अपने जैसा बनाना चाहती थी मगर समय का चक्कर ऐसा चला क मंजू शादी कर क घर से क्या गयी कभी वापिस hi न लौटी . अब वो न ससुराल में रहती थी न मायके में. शीना पर भी धीरे धीरे माहौल का असर हो गया और वो पैसे की झूठी शान में घमंडी बन गयी. मगर कहीं न कहीं अच्छी आज भी उसके अंदर ज़िंदा थी . इसी लिए तो उसने प्लान में खुद इन्वॉल्व होना स्वीकार किया था ताकि राधा की इज़्ज़त पर डेग न लगे .

उधर पुलिस की टीम अमित क गाओं क एड्रेस पर छापेमारी क लिए निकल चुकी थी क रस्ते में hi उन्हें वापिस लौटना पड़ा ऊपर से फ़ोन आने की वजह से . सप ऋतू सिंह जो खु एक साख और ईमानदार अफसर थी वो ऐसे अपराधियों से सख्त नफरत करती थी जो औरतों क साथ दरिंदगी करते हैं. उनकी ईमानदारी की वजह से जिले के ईमानदार आईएएस कमिश्नर ने उसे खास रिकमेन्डेशन पर यहाँ ट्रांसफर करवाया था. जैसे hi सप ऋतू सिंह को पता चला क मला ने फ़ोन कर क ये मिशन रुकवा दिया है और फाइल बंद करने को कहा है तो वो अंदर hi अंदर गुस्से से उबाल रही थी. उसकी नज़र में अमित नाम का ये लड़का अपराधी था और पर्सनली भी उसे ऐसा hi लग रहा था क ये लड़का हवसी और घटिया है. फ़िलहाल कानून में बंधी होने की वजह से उसने खुद को रोक लिया मगर अमित को लेकर उसके दिल में नफरत भर गयी थी.

कल्पना जब राधा को लेकर घर पहुंची तो दिव्या जो राधा का फ़ोन न लगने क कारन परेशां थी वो राधा की हालत और उसके कपडे देख कर शॉकेड हो गयी . उसे किसी अनहोनी का दर लगने लगा और उसने भाग कर राधा को गले लगा लिया दोनों माँ बेटी की आँखों से आंसू बहने लगे

दिव्या : रट हुए ) ये क्या हालत बना राखी है तूने मेरी बची ? तुम कहाँ थी ? क्या हुआ है तुम्हारे साथ ? बोल मेरी बची ये सब क्या है?

राधा : रट हुए ) मैं ठीक हूँ माँ अगर अमित न होता तो मैं आज आपके सामने नहीं होती .

दिव्या : अमित !! क्या हुआ है ? मुझसे सब सच सच बता ? किसने किया ये ? तुम तो टूर पर गयी थी न ? तो ये सब कैसे हुआ?

राधा : रट हुए ) कल रत उधर कम्प में से कुछ गुंडों ने मेरा किडनैप कर लिया था माँ. वो सब मेरे साथ ....( राधा क्रिस )

दिव्या : मत रो मेरी बची मत रो

राधा : वो मेरे साथ दरिंदगी करने वाले थे. अमित पता नहीं कैसे पर वहां आ गया और अपनी जान पर खेल कर मुझे बचाया.

दिव्या : लाख लाख शुक्र है भगवन का , पर अमित कहाँ है ? उसे कुछ हुआ तो नहीं ?

राधा : वो हॉस्पिटल में है माँ, उसे बहुत चोट लगी है. मैं रत भर हॉस्पिटल में उसी क पास थी अभी कल्पना मुझे यहाँ लेकर आयी है.

दिव्या : रट हुए ) क्या ??? वो हॉस्पिटल में है ?? वो ठीक तो है न ? हे भगवन मेरा बचा ठीक तो है न? उसे कुछ नहीं होना चाहिए मैं क्या जवाब दूंगी दामिनी को ? मुझे उसके पास ले चलो मैं उसे देखना चाहती हूँ . कहाँ है मेरा बीटा ?

दिव्या जज़्बात में बह कर अब अमित को एक माँ की तरह बीटा कह कर बुला रही थी जिसे सुन कर राधा को बहुत ाचा लग रहा था. मगर दिव्या बेचारी तो पगला गयी थी अमित की हालत का सुन कर . उसके अंदर क जज़्बात उस पर हावी हो गए थे और बदहवास हो कर अमित को देखने को तरसने लगी .

कल्पना : आंटी प्लीज खुद को सम्भालिये , वो बिलकुल ठीक है. हम अभी उसी क पास से तो आ रहे हैं. वो बिलकुल ठीक है बस कुछ चोटें लगी हैं इसके इलावा कोई घबराने वाली बात नहीं है. आप खुद को सम्भालिये . वो तो कह रहा था क आपको इस बारे में न बताया जाये . और शायद वो सही कह रहा था .

दिव्या : मैं जब तक उसे देख नहीं लेती मुझे चैन नहीं आएगा . मुझे उसके पास ले चलो.

राधा : माँ हम अभी चलते हैं मगर आप खुद को सम्भालो पहले. और अमित ने खास तौर पर कहा है ये बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए. मैं आप से कुछ नहीं छिपाती पर प्लीज आप किसी को मत बताना .

कल्पना : राधा ठीक कह रही है आंटी . अभी आप पहले राधा को और खुद को सम्भालिये . इसने भी आराम नहीं किया होगा. अमित तो वहां आराम से है , आप चिंता मत करो मैं आपको लेकर जाउंगी हॉस्पिटल पर पहले ज़रा राधा को सम्भालिये .

हॉस्पिटल में आंटी क फ़ोन क कुछ देर बाद मोहित और अंकल दोनों आ गए .

अंकल : अब तबियत कैसी है अमित ?

अमित : अब ठीक हूँ अंकल .

अंकल : तुम किसी बात की चिंता मत करो मैंने अपने वकील से बात कर ली है कुछ नहीं होने दूंगा मैं तुम्हे. और अभी मैं कॉलेज जा रहा हूँ प्रिंसिपल से मिलने . ये क्या बात हुई करे कोई भरे कोई ?

अमित : नहीं अंकल इसमें उनकी क्या गलती है . वो तो बहुत अचे हैं .

अंकल : पर पता तो चले ये सब हो क्या रहा है?

मोहित : बिलकुल , पापा आप जाओ और उनसे बात करो . वैसे भी कम्प से राधा का किडनैप हुआ है ये कोई छोटी बात तो नहीं

अंकल : बिलकुल ठीक कहा तुमने . अंदर तो अब उन लोगों को मैं करवाऊंगा जिन्होंने राधा को उठाने की कोशिश की

अमित : नहीं अंकल रहने दीजिये , पुलिस इसमें कुछ नहीं कर पायेगी . अब ये मामला मैं खुद hi देखूंगा

आंटी : बिलकुल नहीं , मैं तुम्हे कुछ नहीं करने दूंगी .

अमित : ाचा ाचा मैं कुछ नहीं करता पर आप भी कोई पुलिस कंप्लेंट नहीं करवाएंगे .

अंकल : पर बीटा

अमित : नहीं अंकल , आप इस बात को यहीं रहने दो फ़िलहाल बाद में देखेंगे.

अंकल : ठीक है पर मैं एक बार प्रिंसिपल से बात ज़रूर करूँगा और रमा तुम भी मेरे साथ चलो वापसी पर दिव्या बहिन से भी मिल लेंगे . वो भी परेशां होंगी .

आंटी : ठीक है , मोहित तुम अमित क पास hi रहना .

अंकल आंटी को लेकर चले गए . पीछे रह गए मैं और मोहित .

अमित : क्यों बे तू कॉलेज नहीं गया आज ? कल्पना आयी थी अभी उसी से पता चला क पुलिस मुझे ढून्ढ रही है

मोहित : अब ऐसी शकल ले कर कॉलेज जाता क्या ? अभी भी मुँह पर सूजन है बाकि सब तो कपड़ों में छुप जाता है, चेहरे का क्या करें? वैसे भी तुम यहाँ हो मीनल हॉस्पिटल में अपनी माँ क पास है तो मैं अकेला क्या करता कॉलेज में?

अमित : अब कैसी है उसकी माँ की तबियत ?

मोहित : अब ठीक हैं बस प्लास्टर लगा है शायद आज छुट्टी भी मिल जाये उन्हें. मेरी बात हुई थी उससे , वो भी बहुत गुस्से में हैं राधा क बारे में जान कर. इस मोंटी का तो इलाज करना पड़ेगा . और वो शीना , साला अगर उसके साथ रपे हो जाता तब पता चलता उसे .

अमित : ऐसा मत कहो , लड़की चाहे दुश्मन की भी क्यों न हो इज़्ज़त सबकी एक जैसी होती है.

हम बातें कर रहे थे तभी रूम का दरवाज़ा खुला और सामने मंजू म खड़े थे आँखों में आंसू लिए .

अमित : मम आप यहाँ ?

मेरी बात सुन कर मोहित ने भी यादगार देखा तो सामने मंजू म को देख कर उठ कर खड़ा हो गया

मोहित : मम आप ?

मंजू म तेज़ कदमो से चल कर मेरे पास आयी और रट हुए मेरे ऊपर गिर गयी

मंजू म : रट हुए ) ये क्या हो गया ? पता है कितना दर गयी थी मैं ? एक फ़ोन तो कर देते काम से काम. मैं तो तुम्हारे पीछे उधर भी जा रही थी मगर फिर पता चला तुम रत में hi वहां से निकल गए थे और जब राधा की किडनेपिंग का पता चला तो मेरा दिल घबराने लगा क कहीं मैं तुम्हे भी खो न दूँ. मेरा क्या होता ? मैं फिर से अकेली हो जाती

अमित : अरे अरे खुद को सम्भालिये, सब ठीक है . मुझे कुछ नहीं हुआ है. मैं फ़ोन कैसे करता मेरा तो फ़ोन hi ख़राब हो गया था और रत में तो मुझे अपनी hi होश नहीं थी.

मोहित हैरान होता सब तमाशा देख रहा था. उसे तो समझ hi नहीं आ रहा था क ये चक्कर क्या है. मेरी नज़र मोहित पर पड़ी तो मैंने जल्दी से बात बदलने की कोशिश की कहीं मम कोई ऐसी बात न कह दें क मोहित को कुछ पता चल जाये.

अमित : अरे मम अब उठिये देखिये मोहित भी तो यहीं है. ये भी था मेरे साथ . इसकी और नीरज भैया की मदद क बिना मैं राधा को नहीं बचा सकता था.

मेरी मुँह से मोहित का नाम सुनते hi मंजू म ने खुद को संभाला और सीधी हो कर अपने चेहरा पोंछते हुए मोहित की तरफ देखा .

मंजू म : थैंक यू मोहित , तुम सच में एक अचे दोस्त हो ये तुमने साबित कर दिया .

मोहित : ये तो मेरा फ़र्ज़ था राधा मेरी भी तो बहिन हुई न ? अपनी बहिन की hi तो जान बचाई मैंने. वैसे भी अमित भी तो यही करता . पर आप यहाँ ? आपको कैसे पता चला और आप तो हमारी टीचर हैं फिर ....

मंजू म : वो . वो अमित मेरा सिर्फ स्टूडेंट hi नहीं है ये मेरे लिए एक फॅमिली मेम्बर है. मेरा और तो कोई है नहीं तो अमित hi मेरे लिए सब कुछ है.

अमित : मम ने मुझे अपना भाई बनाया है .

मोहित : ओह ाचा , आप बैठिये मम मैं आपके लिए कुछ खाने को लता हूँ. मोहित जैसे hi रूम से निकला तो मंजू म ने उठ कर रूम लोच कर दिया. मैं मंजू म को सवालिया नज़रों से देखने लगा . इससे पहले क मैं कुछ कहता मम मेरे ऊपर झुक गयी और मुझे अपनी बहिन में कास लिया . वो दीवानावार मेरे चेहरे मेरे गले पर हर जगह किश करने लगी

मंजू म : मैं रत भर सो नहीं पायी कहीं तुम्हे कुछ हो जाता तो मैं भी ज़िंदा नहीं रहती. पहले hi इतनी मुश्किल से खुद को संभाला था मगर अब और सदमा मैं सेह नहीं सकती प्लीज कभी मुझे छोड़ कर मत जाना .

अमित : खुद को सम्भालिये मम अभी कोई भी यहाँ आ सकता है प्लीज. मैं आपको छोड़ कर कहीं नहीं जाने वाला मैंने आपसे वडा किया था न. खुद को सम्भालिये अगर मोहित ने देख लिया तो क्या होगा.

मंजू म : क्या करूँ खुद पर काबू नहीं हो रहा . मैं hi जानती हूँ मुझ पर क्या बीत रही थी. कहाँ कहाँ चोट लगी है तुम्हे दिखाई मुझे ?

अमित : चोट ज्यादा गहरी नहीं है बस खून ज्यादा निकल गया था तो यहाँ पड़ा हूँ. आज या कल मैं यहाँ से छुट्टी ले लूंगा.

मंजू म : कोई ज़रूरत नहीं है. जब तक पूरी तरह ठीक नहीं हो जाते तुम यहीं रहोगे या फिर मेरे साथ घर चलो . मैं कॉलेज से छुट्टी ले कर तुम्हारी सेवा करुँगी.

अमित : सेवा तो अभी भी आप कर सकती हैं

मंजू म : मैं समझी नहीं ?

अमित : मैं समझाता हूँ.

इतना कह कर मैंने मम क सुर्ख गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख लिए और उन्हें किश करने लगा. मम भी मेरा साथ देने लगी पर जल्द hi मैंने किश ख़तम कर दी क्यूंकि मोहित कभी भी वापिस आ सकता था.

अमित : अब आप साइड में बैठ जाइये मोहित अत hi होगा.

उसके बाद मोहित कैंटीन से खाने पिने को ले आया . काफी देर तक मंजू म हमारे साथ रही . उनकी हालत देख कर hi मैं समझ रहा था क उन्हें भी रेस्ट की ज़रूरत है तो मैंने उन्हें वापिस भेज दिया आराम करने का कह कर हालाँकि वो जाना नहीं चाहती थी पर मेरे फाॅर्स करने पर वो चली गयी.

मोंटी शीना क मुँह से सचाई सुन कर अब रंजीत और उसके साथियों पर आग बबूला था तो वो अपने कुछ आदमियों को लेकर अपने उस फार्महाउस पर गया जहाँ उसने रंजीत और उसके साथियों को छिपा कर रखा था और उनका इलाज करवा रहा था. मोंटी ने सबकी अचे से खबर ली और मर मर कर सबके हाथ पाऊँ तोड़ दिए . मोंटी ने कभी किसी की जान नहीं ली थी और न hi वो इस हद तक गलत था. इस लिए उसने सिर्फ उन लोगों क हाथ पाऊँ तुड़वाये और उन्हें बहार फेंकवा दिया. पुलिस क पास वो मामला लेकर नहीं जाना चाहता था क्यूंकि इसमें वो खुद भी फस्स सकता था. शीना क कहने पर उसे अमित क खिलाफ पुलिस एक्शन रुकवाना पड़ा no वो नहीं चाहता था. लेकिन अब उसके दिमाग पहले से भी ज्यादा गुस्सा भर गया था . वो इसे अपनी शिकस्त मन रहा था. शीना क साथ क्या हुआ उसे इससे ज्यादा इस बात की परवाह थी क अमित एक बार फिर उसके वॉर से बच गया . और शीना को बचने से अब वो उस पर एहसान जतायेगा . मोंटी अब ये hi सोच रहा था क अब आगे क्या किया जाये. क्यूंकि अब मामला उलझ गया था . चाहे मोंटी किसी भी तरह पिक्चर में नहीं था पर फिर भी उसे दर था क कहीं किसी तरह वो इस चक्कर में न फसे.

इधर हॉस्पिटल में मोहित और मैं मंजू म क जाने क बाद अकेले थे. मैं बैठा बैठा थक गया था तो फिर से पेट क बल लेट गया. मैं ऑंखें बंद किये लेता था क दरवाज़ा खुला और मुझे लगा कोई कमरे में आया है मगर कोई आवाज़ नहीं सुनाई दी किसी की. मुझे एहसास हुआ क कोई मेरी लोअर बैक पर जो पट्टी बदनदही है उसे कोई चेक कर रहा है. फिर वो हाथ मेरे सर पर आ गया . और मेरे दिल को एक अलग सुकून सा मिलने लगा . मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी माँ प्यार से मुझे सेहला रही है . मैं ऑंखें बंद किये इस एहसास को फील कर रहा था. तभी मेरे गाल पर पानी की बूँदें गिरी तो मैं समझ गया क ये पानी नहीं आंसू हैं. मैंने आँखें खोल कर पलटने की कोशिश की तो मुझे दिव्या मौसी की आवाज़ सुनाई दी

दिव्या मौसी : लेता रह चुपचाप, कितनी चोट लगी है तुझे. तूने एक बार भी सोचा क तुझे कुछ हो जाता तो क्या होता? भैया भाबी और बाकि सब का क्या होता ? क्या जवाब देती मैं तेरी माँ को?

दिव्या मौसी का गाला बात करते हुए रुंधने लगा. मैं हैरान हो रहा था जो हमेशा मुझ पर गुस्सा करती हैं वो अंदर से मेरी कितनी परवाह करती हैं मुझे एहसास हो रहा था. उनके एहसास से मुझे अपनी माँ का एहसास हो रहा था . सच कहते हैं सब दोनों एक जैसी hi हैं. मुझे अपनी माँ तो यद् नहीं थी पर उनका एहसास जो मेरे ज़ेहन में कहीं छिपा हुआ था आज मैंने उसे फील किया था. वो एहसास सो मुझे उनकी गॉड में मेरे बचपन में मुझे मिला था आज मैंने उसे फील किया था.

अमित : अगर राधा को कुछ हो जाता तो क्या होता मौसी ? क्या तब मैं खुद को माफ़ कर पता ? क्या तब आप मुझे माफ़ कर पति ? क्या तब मेरी माँ मुझे माफ़ कर पति?

दिव्या मौसी : तू सचमुच कितना ाचा है और मैं तुझ पर हमेश गुस्सा करती रही. मैं कितनी बुरी हूँ

अमित : कौन कहता है आप बुरी हैं? आप तो सब से अछि हैं . जानती हो मौसी अभी अभी अपने मुझे छुआ तो एक पल को मुझे लगा जैसे माँ मुझे प्यार कर रही है. क्या आप फिर से मुझे माँ का एहसास दिलाएंगी? मुझे तो वो यद् भी नहीं हैं पर आज उनका एहसास हुआ मुझे .

दिव्या मौसी : रट हुए ) मैं भी तेरी माँ hi तो हूँ मेरे बेटे . तू दामिनी का नहीं मेरा भी बीटा है . मैं गलत थी जो तुझे इतने साल खुद से दूर रखा . तुम्हे माँ की ज़रूरत थी और मैं तुझे वो प्यार नहीं दे पायी जो तुम्हे मिलना चाहिए था.

दिव्या मौसी ने रट हुए मुझे चूम लिया और मेरी पीठ पर सर रख कर आंसू बहाने लगी. तभी आंटी ने उनके आंसू पोंछे और उन्हें चुप करवाया

आंटी : रो मत दिव्या खुद को सम्भालो . देखो वो बिलकुल ठीक है . तुम अब भी तो उसे वो प्यार दे सकती हो न हो उसे मिलना चाहिए .

दिव्या मौसी : मैं तुम्हे बहुत प्यार दूंगी मेरे बेटे . मैं तुझे बहुत प्यार करती हूँ. दामिनी hi नहीं मैं भी तेरी माँ हूँ . तू मेरा बीटा है मेरा .

दिव्या मौसी क आंसू रुक नहीं रहे थे और मेरी आँखों में भी आंसू आ गए थे. मैंने उठने की कोशिश की तो मौसी ने सहारा देकर मुझे बिठाया और मुझे गले लगा कर रोने लगी. मैंने उनको चुप करवाने की कोशिश की . मेरी नज़र कमरे में मौजूद मोहित , आंटी , अंकल और राधा पर पड़ी तो सब हमारी तरफ hi देख रहे थे. राधा की आंखे भी भीगी हुई थी और चेहरे पर कबुशी भी झलक रही थी .

अमित : बस कीजिये मौसी जी खुद को सम्भालिये मैं बिलकुल ठीक हूँ कुछ नहीं हुआ मुझे.

दिव्या मौसी : मत रोक मुझे कब से ये आंसू मैंने बहने नहीं दिए थे आज इन्हे बहने दे.

अमित : आप ऐसे रोयेंगी तो क्या मुझे ाचा लगेगा ?

आंटी : अमित ठीक कह रहा है दिव्या खुद को सम्भालो . राधा दिव्या को सम्भालो ज़रा बेटी .

राधा आंटी की बात सुन कर दिव्या मौसी क गले लग कर उन्हें चुप करवाने लगी. और कुछ hi पल में दिव्या मौसी क आंसू थम गए . खुद को ठीक करने क बाद दिव्या मौसी से मेरे पास hi बैठ गयी . वो घर से खाना बना कर लायी थी और अपने हाथों से मुझे खाना खिलने लगी . खाना कहते कहते कल्पना नेहा दीदी को लेकर आ गयी. शायद वो उन्हें कॉलेज से घर ले जाते वक़्त इधर hi ले आयी थी

नेहा दीदी मुझे इस हालत में देख कर एक पल को वहीँ जैम गयी और मेरे सर पल लगी पत्तियों को देखने लगी . उनके चेहरे पर चिंता क भाव आ गए और ऑंखें भी जैसे नाम होने वाली थी .

नेहा दीदी : नाम ऑंखें ) इतना कुछ हो गया और मुझे किसी ने बताया तक नहीं ? ये तेरी क्या हालत हो गयी है मेरी भाई ?

नेहा दीदी ने आकर मुझे गले लगा लिया .

अमित : ाचा भला तो हूँ दीदी , बस सर पर डॉ ने बड़ी बड़ी पत्तियां लगा दी हैं . मैं कैसे बताता मेरा तो फ़ोन भी टूट गया है. आप घबराओ मत मैं बिलकुल ठीक हूँ.

नेहा दीदी : बात मत बदल , कल्पना ने सब बता दिया है मुझे.

मैंने कल्पना की तरफ देखा तो वो समझ गयी मैं क्या कहना चाहता हूँ

कल्पना : ऐसे क्या देख रहे हो ? अब दीदी को न बताती तो बाद में ये मुझसे hi नाराज़ होती तुम्हे तो कुछ नहीं कहना था इन्होने. और दीदी प्लीज आप घर पर किसी को मत बताना अमित ने मन किया था इसी लिए किसी को बताने को.

नेहा दीदी : ज्यादा स्मार्ट मत बनो मौसी को भी तो पता चल hi गया न? और मुझे नहीं लगता क मौसी ने कुछ कहा होगा. बल्कि कोई भी कुछ नहीं कहेगा. सब प्राउड hi करेंगे तुमने जो कुछ किया राधा क लिए . कितना ाचा है मेरा भाई , ऐसा भाई सबको मिले .

कल्पना : ये लो अपना फ़ोन , मैं ले गयी थी ठीक करवाने .

कल्पना ने मुझे फ़ोन दिया तो मैंने देखा ये मेरे मोबाइल जैसा hi था पर बिलकुल नया लग रहा था .

अमित : ये तो नया लग रहा है , तुम नया फ़ोन ले कर आयी हो ?

कल्पना : वो रिपेयर नहीं हो सकता था तो उसके जैसा hi ले आयी और इसमें सारा डाटा ट्रांसफर करवा दिया है मैंने .

अमित : पर तुम्हे क्या ज़रूरत थी ?

कल्पना : मुझे नहीं तुम्हे ज़रूरत थी. ज्यादा देर फ़ोन बंद रहने से घर वाले परेशां नहीं होंगे क्या ?



कल्पना की बात बिलकुल सही थी . अब तक तो शायद कोई न कोई फ़ोन कर भी चूका होगा . मैंने चुप चाप फ़ोन रख लिया कल्पना को शुक्रिया कहा . कुछ देर तक नेहा दीदी भी वहीँ रही और फिर कल्पना उन्हें घर ले जाने लगी. मैंने राधा को भी घर जा कर आराम करने को कहा हालाँकि वो मेरे पास रहना चाहती थी. अब राधा को अकेला घर तो नहीं छोड़ा जा सकता था तो मैंने दिव्या मौसी को भी जाने को कहा राधा क लिए. दिव्या मौसी जाना तो नहीं चाहती थी पर राधा की खातिर उन्हें जाना पड़ा . उसके बाद मैंने घर पर खुद hi फ़ोन कर क सब से बात की . शाम को नीरज भी मिलने आया मंजू म को मैंने फ़ोन कर क आने से मन कर दिया क्यूंकि किसी को शक हो सकता था . इस बीच डॉ रीना फिर से आयी और कुछ देर मेरे पास बैठ कर बातें करती रही. मैंने उनसे छुट्टी का पूछा तू उन्होंने मुझे एक दिन और रुकने का कहा. आंटी मेरे साथ हॉस्पिटल में रुकना चाहती थी पर मैंने मन कर दिया . रत का खाना भी दिव्या मौसी ले कर आयी और राधा भी उनके साथ थी. अपने हाथों से मुझे उन्होंने खाना खिलाया . दिव्या मौसी और राधा क जाने क बाद आंटी को भी मोहित घर छोड़ने चला गया. रत को अब हॉस्पिटल में अकेला था . अभी रत क 10 बज रहे थे तो मेरे कमरे का दरवाज़ा खुला और सामने जो खड़ा था उसे देख कर एक पल को मैं हैरान हुआ और अगले hi पल मुझे गुस्सा भी आ गया
 
अपडेट 128



मंजू बुआ से बात करने क बाद शीना खुद को कौस रही थी क वो जिसके साथ इतना गलत करने जा रही थी उसी ने उसकी इज़्ज़त बचाई . शीना कभी भी दिल से बुरी नहीं थी और न hi करैक्टर से ख़राब थी . वो चाहे ऊपर से कैसी भी दिखे पर अंदर से वो बहुत अछि भी थी . उसके बचपन में उसे अपने बुआ से बहुत सारा प्यार और संस्कार मिले थे पर वक़्त और हालत ऐसे बनते गए क वो एक तो अपनी बुआ से दूर हो गयी दूसरा उसके ऊपर अपने भाई और माँ बाप को देख कर पैसे का घमंड आ गया. बुआ से तो उसके माँ बाप ने रिश्ता न रखा था तो वो बेचारी क्या करती और फिर मंजू बुआ उसकी ज़िन्दगी से hi दूर चली गयी थी. इतने सैलून बाद कॉलेज में उन्हें टीचर क रूप में देख कर एक पल तो उसके अंदर उनके लिए प्यार जगा पर पहले अपने माँ बाप और फिर मोंटी की वजह से वो मंजू बुआ से दूर hi रही. मगर आज मंजू बुआ से बात करते हुए वो खुद को रोक नहीं पायी. खुद को मजबूत दिखने वाली शीना अंदर से कितनी कोमल है आज कोई देखता तो उसे पता चलता . शीना क अंदर जो गिलटी की भावना आ रही थी वो उसकी आँखों से आंसू बन कर बहार निकल रही थी. आज उसे एक सहारे की ज़रूरत थी मगर ऐसा कोई नहीं था. अब तो रीमा भी उससे कभी कभार बात करती थी जबकि उसकी अपनी माँ तो जैसे किसी और hi दुनिआ में रहती थी . शीना की अपनी सहेलियां भी सब हाई सोसाइटी की लड़कियां थी जिनमे उसे कभी भी ऐसी बात नज़र नहीं आयी थी क वो किसी से दिल की बात करे. आज शीना खुद को अकेला महसूस कर रही थी. वो अमित से मिल कर माफ़ी मांगना चाहती थी पर नीरज ने जैसा कहा वहां जाना सही नहीं था क्यूंकि हर कोई गुस्से में होगा जो भी जनता होगा . ऐसे में जब शिवानी का फ़ोन आया तो उसने उसे घर पर hi बुला लिया.

शिवानी जो की शीना क बिना बताये गायब हो जाने से हैरान थी अमित का गायब होना भी उसके लिए शॉकिंग था. ऐसे में शीना से बात होते hi वो उससे मिलने उसके घर आ गयी . शिवानी जब शीना क कमरे में गयी तो देखा की शीना की आँखों में आंसू हैं. ऐसा वो पहली बार देख रही थी. हर वक़्त दूसरों पर रोअब झड़ने वाली शीना , दूसरों को पाऊँ क नीचे रखने वाली शीना आज रो रही थी. शिवानी तो शॉकेड hi हो गयी पर जैसी भी थी वो शिवानी की बचपन की दोस्त थी इस लिए उसको भी ाचा नहीं लग रहा था.

शिवानी : शीना !! तुझे हुआ क्या है ? तू रो क्यों रही है ? तू कहाँ थी कल से ? क्या हुआ तेरे साथ जो तेरी आँखों में आंसू हैं आज ?

शीना जो अंदर से भरी हुई थी अपने बचपन की दोस्त को गले लगते hi फुट फुट कर रोने लगी.

शीना : मैं बहुत बुरी हूँ , बहुत बुरी हूँ मैं. मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी शिवानी .

शीना : हुआ क्या है यार कुछ बताएगी भी ? पहले ये रोना बंद कर और बात क्या है ये बता ?

शीना : तू नहीं जानती शिवानी मैं कितनी बड़ी गलती करने जा रही थी और जिसके साथ मैं गलत करने वाली थी उसी ने मुझे बचाया

शिवानी : बात क्या है ? कौन सी गलती और किसने बचाया तुझे ? सही सही बता.

शीना : तू तो जानती है न मैं और मोंटी अमित से बदला लेना चाहते थे . कल मैं उधर hi गयी थी.

अमित का नाम सुनते hi शिवानी अचानक घबरा गयी

शिवानी : क्या किया तुम दोनों ने ? कहाँ है वो ?

शीना : सब मेरी गलती है मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. मोंटी ने कहा था क राधा को कैंप से किडनैप कर क अमित को वहां बुलाएँगे और उसे सबक सिखाएंगे. फिर उसे हूँ कॉलेज से निकलवा देते. पर जानती है क्या हुआ? मोंटी ने जिन लोगों को भेजा था वो मेरी और राधा की इज़्ज़त लूटने वाले थे. पर पता नहीं कैसे अमित वहां पहुँच गया और हम दोनों को बचा लिया . लड़ाई में उसे बहुत चोट लग गयी और इस वक़्त वो हॉस्पिटल में पड़ा है.

शिवानी : क्या ????? इतना कुछ कर दिया तुमने? तू कैसी लड़की है ? ऐसा कैसे कर सकती है तू? मैं जानती हूँ तू गुस्से वाली है पर तुझे एक बार भी नहीं लगा क मोंटी राधा को क्यों किडनैप कर रहा है? अमित सही था , मोंटी राधा की इज़्ज़त लूटने की फ़िराक में है.

शीना : गुस्से से ) शिवानी !!! ये तू क्या कह रही है ? मोंटी ऐसा कभी नहीं कर सकता

शिवानी : मैं जानती हूँ तू नहीं मानेगी पर यही सच है . अमित ने मुझे बताया था क मोंटी ऐसा hi कुछ करने वाला है इसी लिए मैं इतने दिनों से तुम्हारे साथ hi थी क मुझे कोई बात पता चल सके पर अफ़सोस मैं फ़ैल हो गयी.

शीना : तो तुम मेरी जासूसी कर रही थी . तुम तो मेरी बेस्ट फ्रेंड हो न ? फिर मेरे hi खिलाफ तुम उसका साथ दे रही थी ?

शिवानी : मैं सिर्फ सही का साथ दे रही थी. क्या नहीं किया तुमने और मोंटी ने उसके साथ और मैं भी तो शामिल थी तुम्हारे साथ मगर फिर भी उसने मुझे अपना दोस्त बनाया और मुझे माफ़ किया. खुद अपनी तरफ देख उसने तुझे भी तो बचाया न ? ऐसा hi है वो, और तुम दोनों उससे बदला लेना चाहते हो . किस बात का बदला ? उसने अपनी कजिन को मोंटी से बचाया इस बात का बदला ? या फिर वो तुम्हारी तरह आमिर नहीं है इस बात का बदला ? वो पैसे से अमीर न हो चाहे पर दिल का इतना अमीर है क हम सब उसके सामने बोन हैं. अब भी अगर थोड़ी सी भी शर्म बाकि है तो उससे माफ़ी मंगलो जाकर वो बड़े दिल वाला है, माफ़ कर देगा. मुझे तो शर्म आ रही है क तुम भी मोंटी जैसी बन गयी .

शीना : मुझसे गलती हुई है पर मुझे ऐसे तो ज़लील न करो. मैं बस उससे बदला लेना चाहती थी . मैं राधा क साथ कुछ गलत नहीं होने देती कभी और मोंटी भी ऐसा नहीं है

शिवानी : ऐसा hi है मोंटी पर तुम क्या जानो . तुम्हारी नज़र में तो वो बहुत ाचा है न. जानती हो क्या है मोंटी ? लड़कियों की ज़िन्दगी से खेलना शोक है तुम्हारे भाई का . न जाने कितनी लड़कियों की ज़िन्दगी बर्बाद कर चूका है वो अब तक. भोली भली लड़कियों को अपने चक्कर में दाल कर उनका इस्तेमाल करता है वो. खुद मेरे साथ भी वो ऐसा कर चूका है

शिवानी क इस खुलासे से शीना अंदर तक हिल गयी. उसे यकीन नहीं हो रहा था क उसका भाई इतना कमीना है.

शिवानी : और तुम्हे क्या लगा क राधा को किस लिए किडनैप कर रहा है वो? उसका असली मकसद राधा की इज़्ज़त लूटना hi था . तुम तो बस उसका काम आसान कर रही थी. शुक्र है क राधा को कुछ नहीं हुआ वर्ण अमित अब तक मोंटी को जान से मार चूका होता . मुझे शर्म आ रही है क मेरी दोस्त भी अपने भाई जैसी निकली . चलती हूँ मैं तुम्हे अपनी रईसी मुबारक.

शीना जब अपनी बातों से शीना क मुँह पर तमाचे मर कर जाने लगी तो शीना शिवानी क पाऊँ में गिर गयी.

शीना : मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी शिवानी . प्लीज मुझे माफ़ कार्डो. मैं अमित से भी माफ़ी मांगूंगी . वो तो तुम्हारा दोस्त है न उसे कह दो क मुझे माफ़ कर दे. तुम तो जानती हो न मुझे ? मैं ऐसे नहीं हूँ. मैं राधा क साथ कुछ गलत करने का सोच भी नहीं सकती . मुझे नहीं पता था मोंटी ऐसा है. और तुमने भी तो कभी नहीं बताया मुझे . प्लीज मुझे माफ़ कर दो . तू hi तो मेरी सचाई दोस्त है. क्या तू मेरी मदद नहीं करेगी? मैं सच में शर्मिंदा हूँ और उससे माफ़ी मांगना चाहती हूँ. तुम नहीं जानती शिवानी अमित न अत तो वो सब मिल कर मेरे साथ पता नहीं क्या क्या करते . प्लीज मुझे माफ़ कर दो.

शीना क आंसू देख कर शिवानी का मन भी पिघल गया और उसने शीना को उठा कर अपने गले से लगा लिया.

शिवानी : मत रो शीना मत रो. मैं जानती हूँ तू गलत नहीं थी कभी भी बस तू थोड़ा घमंडी हो गयी थी और लगता है आज तेरा घमंड टूट गया है . अमित बहुत ाचा है वो ज़रूर तुम्हे माफ़ कर देगा . मुझसे वडा कर आज क बाद तू कभी उसके खिलाफ मोंटी का साथ नहीं देगी

शीना : मैं तो उसके खिलाफ कुछ सोच भी नहीं सकती शिवानी . और मोंटी को भी मैं ऐसा नहीं करने दूंगी.

शिवानी : अब तू खुद को संभल. मुझे अमित को देखने जाना है. पता नहीं किस हालत में होगा वो ? एक बार मैं उस से मिल कर अति हूँ .

शीना : मैं भी उससे मिल कर माफ़ी मांगना चाहती हूँ . प्लीज मुझे साथ ले कर चलो.

शिवानी : देखो शीना अभी पता नहीं वहां पर कैसे माहौल होगा ? जैसे hi वो ठीक होगा तो तुम मिल लेना .

शीना : मुझे चैन नहीं आएगा शिवानी . मुझे खुद पर गुस्सा आ रहा है क मैं गुस्से में कितना गलत करने वाली थी उसके साथ फिर भी उसने मुझे बताया . उसकी वो नफरत भरी नज़रें मुझे अभी भी यद् हैं जब उसने मुझे देखा था वहां. मुझे ये अंदर hi अंदर खाये जा रहा है.

शिवानी शीना की हालत समझ रही थी इस लिए वो शीना क पास hi रुक गयी . दोनों सहेलियां जब अमित से मिलने गयी तो हॉस्पिटल में सब मौजूद थे अमित क पास इस लिए वो बहार से hi वापिस आ गयी. शिवानी तो मिल भी सकती थी मगर शीना क लिए वो भी रुक गयी . और रत को जब दोनों दुबारा मिलने आयी तो तब भी सब अमित क पास मौजूद थे मगर अब शीना अमित से मिले बिना वापिस नहीं जाना चाहती थी इस लिए दोनों बहार अपनी कार में बैठ कर इंतज़ार करती रही. जैसे hi मोहित अपनी माँ को लेकर निकला तो दोनों जल्दी से अमित से मिलने उसके कमरे में गयी.

जैसे hi दरवाज़ा खुला शामे शिवानी को देख कर मैं चौंका और उसके पीछे शीना को देख कर मुझे गुस्सा आ गया .

अमित : गुस्से में ) अब क्या लेने आयी hi यहाँ ? चली जाओ यहाँ से

शीना : रट हुए ) ी ऍम सॉरी , ी ऍम सॉरी , मुझे माफ़ करो मुझसे गलती हो गयी . प्लीज मुझे माफ़ कर दो.

अमित : बंद करो ये मगरमच्छ क आंसू . तुम जैसे पैसे वालों क लिए इज़्ज़त छोटी चीज़ होगी लेकिन हमारी नज़रों में ये अनमोल है. सोचा भी है अगर मैं वक़्त पर न पहुँच पता तो क्या होता ? राधा अपनी जान दे देती तुम्हे तो कोई फरक नहीं पड़ने वाला था . जैसा तुम्हारा भाई घटिया है वैसे hi तुम भी होज़ जाने कितने लड़कियों को बर्बाद किया है उसने. अब और नहीं , उसे कह देना क उसने राधा पर हाथ दाल कर आखिरी गलती कर दी है अब उसे मैं नहीं छोड़ने वाला . और तुम भी दफा हो जाओ यहाँ से .

शीना : प्लीज मेरी एक बार बात तो सुन लो

अमित : मैंने कहा न दफा हो जाओ यहाँ से, तुम जैसे घटिया लोगों की मैं शकल भी नहीं देखना चाहता . शुक्र करो क तुम एक लड़की हो वर्ण राधा क साथ जो तुमने किया उसके बाद मैं तुम्हारे साथ भी वही करता जो बाकि सक क साथ किया था.

शिवानी : प्लीज अमित एक बार उसकी बात तो सुन लो वो तुमसे माफ़ी मांगने आयी है

अमित : मुझे कुछ नहीं सुन्ना , अगर तुम इसकी तरफदारी करने आयी हो तो तुम भी जा सकती हो. इन दोनों ने उसके साथ गलत करना चाहा जिसकी आँख में मैं एक आंसू भी नहीं देख सकता .

शीना मेरा ये रूप देख कर रोटी हुई कमरे से बहार चली गयी . शिवानी भी उसके पीछे जाती जाती रुक गयी और मेरे पास आयी

शिवानी : मैं जानती हूँ तुम नाराज़ हो मुझसे भी पर वो सच में शर्मिंदा है , इसी लिए मैं उसे यहाँ लेकर आयी थी . इन फैक्ट हम दोनों पहले भी आयी थी मगर सब यहां बैठे थे तो वापिस चले गए. शीना दिल की बुरी नहीं है . मैं उसे बचपन से जानती हूँ. वो मोंटी क इरादे नहीं जानती थी . हो सके तो उसे माफ़ कर देना और मुझे भी .

इतना कह कर शिवानी जाने लगी तो मुझे एहसास हुआ क मैं गुस्से में शिवानी से भी गलत बोल गया था . मैंने शिवानी को रोकने की कोशिश की

अमित : ी ऍम सॉरी शिवानी मैं गुस्से में तुम्हे...

शिवानी : ी क्नोव अमित तुम गुस्से में थे पर प्लीज ठन्डे दिमाग से एक बार सोचना उसे माफ़ कर डोज तो वो भी ाचा बनने की कोशिश करेगी वरन वो ऐसी hi रह जाएगी. और अपना ख्याल रखना मैं चलती हूँ.

अमित : क्या इतना नाराज़ हो गयी हो क ऐसे hi चली जाओगी ?

शिवानी की आँखों में भी हलकी नमी आ गयी थी मेरी वजह से . मेरे इतना कहते hi शिवानी दौड़ कर मेरे गले लग गयी . और मुझे किश करने लगी .

शिवानी : तुम्हे इस हालत में देख कर मुझे कैसा लग रहा है ये सिर्फ मैं hi जानती हूँ. इतने दिनों बाद मिल रहे हैं वो भी ऐसे. मुझे माफ़ कर देना क मैं अपना काम पूरा नहीं कर पायी .

अमित : इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है शिवानी . कल शायद मुझे छुट्टी मिल जाये और फिर मुझे गाओं जाना है तो अब वापिस आ कर मिलूंगा. और प्लीज मेरी बात का बुरा मत मन्ना.

शिवानी : तुम्हारी किसी बात का मैं बुरा मन hi नहीं सकती. हाँ मुझे शीना क लिए बुरा लग रहा है . वो सच में तुमसे माफ़ी मांगने hi आयी थी.

अमित : जब तक मैं मोंटी को उसके किये की सजा नहीं दे देता तब तक मैं किसी को माफ़ नहीं करने वाला. पर मैं शीना को कुछ नहीं करूँगा. उसे उसकी गलती का एहसास है इतना hi बहुत है.

शिवानी : ाचा अब मैं चलती हूँ तुम अपना ख्याल रखना .

शिवानी ने एक बार फिर से मुझे किश किया और बहार निकल गयी. शिवानी क जाने क बाद मैं शीना क बारे में सोचने लगा . दिल कह रह था क शीना वाकई में माफ़ी मांगने आयी थी मगर दिमाग में अभी भी ये बात थी क कहीं ये कोई चल न हो. कहीं हमसे बचने क लिए मोंटी ने शीना को आगे न किया हो ? पर जो कुछ कल हुआ था उसके बाद मुझे शीना में बदलाव स्वाभाविक लगा.

दूसरी तरफ शीना रट हुए भाग कर बहार आ गयी थी और लगातार रट हुए पैदल hi चली जा रही थी. कार की चाबी शिवानी क पास थी और वो वहां रुकने की हालत में नहीं थी . शीना क कानो में अमित क कड़वे बोल अभी भी गूँज रहे थे. मगर रह रह कर उसे शिवानी की बातें भी यद् आ रही थी. आखिर अमित कहाँ गलत था ? शुरू से लेकर अब तक मोंटी और वो खुद अमित को सबक सीखने में लगे थे. आज तक उसने किसी को कुछ समझा hi कहाँ था . हर जगह उसके बाप का नाम और पैसा इतना हावी था क कोई कभी इनके सामने टिकता hi नहीं था. पहली बार कोई सामने खड़ा हुआ था जिसने दोनों को हिला कर रख दिया था. शीना खुद तो जैसे उसके एहसान क नीचे इतना डाब गयी थी क अमित क इतना बुरा कहना पर भी वो मुँह से एक शब्द नहीं कह पायी उसके खिलाफ . यहाँ तक क उसके दिल में भी अमित क खिलाफ कोई बात नहीं आ रही थी. उसके लिए तो अमित जैसे मसीहा बन गया था जिसने उस वक़्त उसकी मदद की जब कहीं से भी मदद की कोई गुंजाईश नहीं थी . शीना की आँखों क आगे वो हर बात घूम रही थी जो वो पैसे क घमंड में आज तक दूसरों क साथ करती आयी थी. काश क अपनी ज़िन्दगी से वो अपनी साडी गलतियों को डिलीट कर सकती . एक hi घटना ने सब कुछ बदल क रख दिया था उसकी ज़िन्दगी में. उसका पैसा ताकत कुछ काम नहीं आया था जब उसे बीएड पर घसीट कर नंगी कर दिया गया था . वो मंज़र यद् कर क उसकी रूह अंदर से कांप जाती और अगले hi पल उसे अमित नज़र अत. शीना जो बहुत hi ज्यादा खूबसूरत थी और हर कोई उसे पाने की सोचता था पर अंदर से वो ऐसी नहीं थी . बहार से फैशनेबुल रहने वाली लड़को को जुटे की नोक पर समझने वाली शीना को दिल से आज तक कोई लड़का नहीं भय था. असल में उसे जिस लड़के की छह थी वो कभी उसे मिला hi नहीं. हर कोई उसके पैसे और खूबसूरती का दीवाना बन कर उसके पीछे अत था पर वो ऐसा लड़का चाहती थी जिसे न हवस हो न लालच. और उसे ऐसा लड़का पहली बार मिला था जिसने न उसके पैसे की परवाह की न उसकी खूबसूरती की और वो था अमित . उल्टा अमित ने तो उसे कुछ समझा hi नहीं ये भी एक वजह थी क शीना क दिल में अमित की एक अलग जगह बन गयी थी . वैसे तो वो उसे अपने आगे झुकना चाहती थी पर उसे उसका मर्द की तरह उसके और मोंटी क सामने खड़े होना भी ाचा लग रहा था .

शिवानी जब हॉस्पिटल से बहार आयी तो शीना को कार क पास न पाकर उसे टेंशन होने लगी. शीना कहीं गुस्से में कुछ कर न दे ये दर उसे सत्ता रहा था. उसने शीना को फ़ोन भी किया पर बेल्ल बज रही थी वो उठा नहीं रही थी. शीना ने जल्दी से कार को घुमाया और तेज़ी से चल पड़ी शीना को खोजने . मगर जल्दी hi उसे शीना बदहवास सो सड़क क किनारे पैदल चलती हुई नज़र आ गयी. शिवानी ने जल्दी से कार को वास् रोक कर एक साइड ने रोका और शीना को कार में ज़बरदस्ती बिठा दिया. शीना का चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ था और ऐसा लग रहा था जैसे वो होश में hi नहीं है.

शिवानी : शीना खुद को सम्भालो , तुम ऐसी तो नहीं थी. देखो मैंने पहले भी तुम्हे मन किया था. वो इस वक़्त गुस्से में है. ज़रा सोचो उसकी बहिन क साथ क्या होने वाला था. अब उसे गुस्सा तो आएगा hi न?

शीना : रट हुए ) मैं तो उससे माफ़ी मांगने hi गयी थी न अपनी गलती की. अब मैं वो सब बदल तो नहीं सकती न. मेरे साथ भी तो वही सब होने वाला था. क्या मैंने जान बुझ कर ऐसा किया था?

शिवानी : शीना कण्ट्रोल करो यार , वो माफ़ कर देगा तुम थोड़ा वेट करो. मैंने कहा न वो बहुत ाचा है .

शीना : वो क्यों नहीं समझ रहा मैं अब पहले जैसी नहीं रही , काम से काम एक मौका तो मिलना चाहिए न अपनी गलती सुधरने का?

शिवानी : कलम डाउन शीना बस थोड़ा वक़्त दो उसे . जब मुझे उसने माफ़ कर दिया तो क्या तुम्हे नहीं करेगा ? तुम बस खुद को सम्भालो.

शिवानी शीना को तसल्ली देते हुए उसे उसके घर ले गयी. इधर मोहित भी वापिस आ गया मगर मैंने उससे शीना का ज़िकर नहीं किया. मोहित को आज जल्दी hi नींद आने लगी थी शायद ज्यादा hi थक गया होगा. मैं सारा दिन तो बीएड पर hi रहा इस लिए मुझे नींद नहीं आ रही थी . मैं शीना और मोंटी क बारे में hi सोच रहा था क एक बार फिर से दरवाज़ा खुला और डॉ रीना रूम में आ गयी . डॉ रीना को इस वक़्त देख कर मैं हैरान हो गया क्यूंकि वो तो डे टाइम hi शिफ्ट में रहती थी फिर इस वक़्त कैसे ?

अमित : आप इस वक़्त यहाँ ?

डॉ रीना : क्यों ? नहीं आ सकती क्या ? आज ऑपरेशन ज्यादा hi लम्बा चला इस लिए मैं रेस्ट करने घर चली गयी थी और नाईट शिफ्ट वाले डॉ क साथ अपना टाइम चेंज कर लिया था . उसने मेरी जगह ड्यूटी दे दी और अब मैं उसकी जगह आयी हूँ. ( जबकि सचाई ये थी क अमित क पास रहने का मौका रीना हाथ से नहीं जाने देना चाहती थी इस लिए रिक्वेस्ट कर क उसने आज पहली बार नाईट ड्यूटी ली थी. )

अमित : ओह ाचा तो इसी लिए आप मिलने नहीं आयी थी ? मुझे लगा आप बिना मिले ऐसे hi चली गयी .

डॉ रीना : ऐसे कैसे जा सकती हूँ? दोस्त हो तुम मेरे क्या इतना भी नहीं कर सकती मैं ? वेल अब तो मैं रत भर तुम्हारे साथ हूँ. अगर नींद न आये तो हम बातें कर सकते हैं.

अमित : सच में ? वैसे मुझे भी नींद नहीं आ रही . सारा दिन तो बीएड पर लेता hi रहा हूँ .

डॉ रीना : फिर तो हम बहुत साडी बातें कर सकते हैं.

अमित : हाँ अगर आप को काम न हो तो, क्या पता कब किसी पेशेंट को देखने जाना पड़े.

डॉ रीना : ऐसा तो कोई पेशेंट नहीं है पर कह नहीं सकते. वैसे एक बात कहूं ?

अमित : कहिये आपको पूछने की ज़रूरत नहीं.

डॉ रीना : तुम बहुत अचे हो , एक लड़की की इज़्ज़त बचने क लिए तुम अपनी जान पर खेल गए. मेरी नज़रों में तुम्हारी इज़्ज़त और भी बाद गयी है.

अमित : मैंने वही किया जो ऐसी सिचुएशन में कोई भी कर जाता .

डॉ रीना : सब ऐसे नहीं होते अमित , मैंने देखा है लोगों को औरत की मज़बूरी का फायदा उठाते हुए. यहाँ पर तो अपने भी दुश्मनो से काम नहीं है आज कल. एक औरत क लिए उसकी इज़्ज़त hi सब कुछ होती है. तुम नहीं जानते क जब किसी क साथ ऐसी दरिंदगी होती है तो उसकी आत्मा तक घायल हो जाती है. और समाज भी उसके लिए औरत को hi ज़िम्मेदार ठहरता है. इसी लिए तो ज्यादातर लड़कियां खुद ख़ुशी कर लेती हैं.

अमित : सही कहा आपने , आप ये किन बातों में पद गयी. ऐसी बातें सोचने से तो आपका मूड ऑफ हो जायेगा और आपका मूड ख़राब हुआ तो किसी का इलाज कैसे करेंगी ?

डॉ रीना : ाचा फिर तुम hi बताओ क्या बात करें?

अमित : आप किसी इंजेक्शन क बारे में बता रही थी आज , क्या वो आप ला सकती हैं?

डॉ रीना : तुम करने क्या वाले हो ? कहीं तुम ....

अमित : जिस लड़के ने राधा का किडनैप करवाया था , वो और भी कई लड़कियों की ज़िन्दगी बर्बाद कर चूका है और मैं चाहता हूँ क अब ये बीमारी दूर करदी जाये.

डॉ रीना : अगर ऐसी बात है तो तुम्हारा काम हो जायेगा पर ये गैरकानूनी है.

अमित : वो मैं देख लूंगा , आप पर कोई बात नहीं आएगी.

डॉ रीना : मैं अपनी नहीं तुम्हारी बात कर रही हूँ. मैं नहीं चाहते तुम किसी चक्कर में फंसो.

अमित : ऐसा कुछ नहीं होगा फ़िलहाल मेरे लिए उस दरिंदे को रोकना ज़रूरी है जो पता नहीं कब तक मासूम ज़िन्दगियों से खेलता रहेगा.

डॉ रीना : कितनी लकी होगी वो लड़की जो तुम्हारी ज़िन्दगी में आएगी. कितनी अछि सोच है तुम्हारी. काश क मैं .......

अमित : क्या ?

डॉ रीना : कुछ नहीं , तुम कॉफ़ी पियोगे मैं घर से बना कर लायी थी .

अमित : तो आप पूरी तयारी क साथ आयी हैं.

डॉ रीना : सोचा जब तक तुम यहाँ तो तुम्हारे साथ थोड़ा वक़्त स्पेंड कर लूँ.

अमित : इसका मतलब फिर आपने खुद hi नाईट शिफ्ट ली है.

डॉ रीना : न . नहीं तो .. . . . हाँ ऐसा hi समझ लो. वैसे तो तुम मिलने आते नहीं तो सोचा अब आये हो तो क्यों न थोड़ा टाइम तुम्हारे साथ बिता लूँ . क्या पता तुम .....

अमित : क्या ? आप बात पूरी क्यों नहीं कहती ?

डॉ रीना : मन में ) क्या पता तुम भी मुझे पसंद करने लगो जैसे मैं करती हूँ. क्या पता तुम भी मुझे प्यार करने लगो जैसे मैं करती हूँ)

डॉ रीना : वो बस ऐसे hi ाचा मैं कॉफ़ी ले कर आयी .

डॉ रीना कॉफ़ी लेने चली गयी और मैं उनके बारे में सोचने लगा . रीना का ऐसे मेरे लिए अपनी शिफ्ट बदलना और उसकी बातों का मतलब मैं समझने की कोशिश कर रहा था . डॉ रीना थोड़ी देर में वापिस आ गयी और हम दोनों ने साथ में कॉफ़ी पि. उनके साथ देर तक मैं बातें करता रहा और फिर वो खुद hi मुझे आराम करने का कह कर चली गयी . अगली सुबह जब आँख खुली तो राधा मेरे सामने थी. उसने मुझे सहारा देकर बिठाया तो सामने देखा . कल्पना नेहा दीदी और दिव्या मौसी भी थी . मोहित शायद चला गया था.

कल्पना : गुड मॉर्निंग, अब तबियत कैसी है ?

अमित : ाचा हूँ पर आप सब इतनी सुबह ? मोहित कहाँ है ?

कल्पना : मैंने उसे भेज दिया . अब हम सब यहाँ है तो उसे घर जा कर रेस्ट करने को कह दिया है.

अमित : मौसी आप ?

दिव्या मौसी : 10 बज रहे हैं, सोचा तुम्हे भूख लगी होगी तो नाश्ता लेकर मैं भी इनके साथ आ गयी .

नेहा दीदी : सॉरी अमित एक प्रॉब्लम हो गयी है

अमित : क्या हुआ?

नेहा दीदी : वो आते वक़्त गलती से माँ ने सुन लिया क तुम हॉस्पिटल में हो और वो भी आ रही हैं करुणा क साथ .

अमित : हे भगवन , अब तो सबको पता चल जायेगा. ये आपने क्या किया ?

कल्पना : तुम तो ऐसे दर रहे हो जैसे तुमने कोई चोरी की है? सब प्राउड करेंगे तुम पर और तुम ऐसे दर रहे हो.

दिव्या मौसी : कल्पना सच कह रही है बीटा , कोई कुछ नहीं कहेगा तुम्हे. मुझे भी फ़ोन आया था रीता दीदी का. मैंने उन्हें साडी बात बता दी है.

इतने में मेरा फ़ोन बजने लगा. मैंने देखा तो रजनी मौसी का फ़ोन था . अब मैं क्या बात करता मैंने फ़ोन दिव्या मौसी को दे दिया . दिव्या मौसी ने रजनी मौसी का फ़ोन अटेंड किया और वो बात करते हुए बहार चली गयी .

अमित : हो गया कल्याण , अब सब मिल कर मेरी वाट लगाने वाले हैं . रजनी मौसी का फ़ोन था और वो अभी घर भी बता देंगी .

कल्पना : तुम ये डरना बंद करो सब तुमसे प्यार करते हैं कोई कुछ नहीं कहेगा.

नेहा दीदी : कल्पना ठीक कह रही है

अमित : वैसे आज तो संडे है , आज तुम यहाँ कैसे ?

कल्पना : क्यों ? संडे को घर से बहार निकलने पर पाबन्दी है क्या?

अमित : मेरा मतलब था क संडे को तो छुट्टी एन्जॉय करनी चाहिए थी तुम्हे और तुम हॉस्पिटल में आ गयी

कल्पना : मेरा बेस्ट फ्रेंड हॉस्पिटल में हो और मैं छुट्टी एन्जॉय करूँ ? तुम जल्दी से ठीक हो जाओ फिर साथ में मिल कर हम सब घूमने चलेंगे .

अमित : राधा तुम कैसी हो ?

राधा : मैं तो ठीक हूँ पर मेरी वजह से तुम इस हालत में हो मुझे ाचा नहीं लग रहा.

अमित : क्या हुआ है मुझे ? ज़रा स चोट hi तो लगी है . अगर तुम्हे बचने में जान भी चली जाती तो मैं परवाह नहीं करता .

राधा ने मेरे इतना कहते hi मेरे मुँह पर हाथ रख दिया.

राधा : ख़बरदार जो ऐसी बात की तो.

‘ मारें तुम्हारे दुश्मन , तुम्हे तो हमारी भी उम्र लग जाये ‘

ये आवाज़ रीता मौसी की थी और उनके साथ hi करुणा दीदी और दिव्या मौसी भी थी. रीता मौसी तेज़ कदमो से चलके मेरे पास आयी और मुझे गले लगा लिया.

रीता मौसी : क्या हालत हो गयी है , मुझे किसी ने बताया क्यों नहीं ? तू कल से यहाँ है और मुझे आज पता चल रहा है वो भी किसी ने खुद से नहीं बताया . क्या अब मैं परायी हो गयी हूँ हाँ ?

अमित : ऐसी बात नहीं है मौसी जी , ज़रा स चोट है तो मैंने सोचा क्यों सबको परेशां करना.

रीता मौसी : इसमें परेशां होने वाली क्या बात है?

करुणा दीदी : कुछ ज्यादा hi स्मार्ट नहीं बन रहा तू ? तेरी सब चिंता करते हैं क्यूंकि तुझे सब प्यार करते हैं और तू इतनी बड़ी बात सबसे छिपा रहा था . हमें तो तुम पर गर्व है क तुम हमारे लिए इतना कुछ कर सकते हो. रुक तू अभी नैना दीदी भी आ रही हैं फिर तुझे बताती हूँ.

दिव्या मौसी : कोई कुछ नहीं कहेगा मेरे बचे को. मैंने hi मन किया था सबको बताने से.

रीता मौसी ऐसे दिव्या मौसी को देखने लगी जैसे कोई अनहोनी हो गयी हो.

रीता मौसी : दिव्या !!! तू ये कह रही है ???

दिव्या मौसी : क्या गलत कहा मैंने ? क्या ये मेरा बीटा नहीं है? भूल गयी आप , दामिनी ने खुद कहा था क अमित तुम्हारा बीटा है और राधा मेरी बेटी.

दिव्या मौसी की बात सुन कर रीता मौसी तो हैरान थी hi. राधा भी शर्मा गयी उनकी बात पर . दिव्या मौसी चल मेरे पास आयी . अब दोनों तरफ दिव्या मौसी और रीता मौसी बैठी थी . फिर दोनों ने अपने हाथों से मुझे नाश्ता करवाया . कमरे में अछि खासी रौनक लग गयी थी. कल्पना नेहा दीदी राधा और करुणा दीदी साथ बैठ कर बातें करने लगी. करुणा दीदी तो राधा से साडी कहानी शुरू से सुन रही थी . कुछ देर बाद आंटी अंकल भी आ गए , संडे था और आज अंकल भी मेरी वजह से बहार नहीं गए थे . अंकल आंटी क साथ रीता मौसी और राधा मौसी बातें करने लगे . अब बरी थी रजनी मौसी की . और वो भी दौड़ते हुए कमरे में आयी , आते hi मुझे गले से लगा लिया . उनकी ऑंखें भीगी हुई थी. सच में सब से अलग थी वो.

रजनी मौसी : ये क्या हो गया मेरे बचे को ? मुझे किसी ने बताया क्यों नहीं ? आग लगे उन लोगों को कीड़े पड़ें जिन्होंने तेरा ये हल किया है. तू ठीक तो है न ?

अमित : मैं ठीक हूँ मौसी जी , कुछ नहीं हुआ मुझे .

रजनी मौसी : तू चुप कर , सब नज़र आ रहा है मुझे. पहले मुझे ये बताओ क मुझे किसी ने बताया क्यों नहीं ?

दिव्या मौसी : दीदी मैंने मन किया था , घर के अभी अभी खुशियां आयी हैं , ऐसे सब का मूड ख़राब हो जाता.

रजनी मौसी : कुछ भी हो चाहे , इससे ज़रूरी नहीं है कुछ भी . मैं बहुत नाराज़ हूँ तुझसे .

अमित : मौसी जी असल में मैंने hi मन किया था सबको बताने को इसमें मौसी की गलती नहीं है. आप उनसे नाराज़ मत होइए.

रजनी मौसी : बची नहीं है वो , उसे नहीं पता क एक माँ क दिल पर क्या बिट टी है. गौरी को क्या ाचा लगेगा जब उसे पता चलेगा ? उसे भी नहीं बताया होगा किसी ने ?

अमित : आप भी मत बताना , घर पर उन्हें hi तो सब देखना है . कामिनी ममी और दीपिका ममी तो अभी कुछ कर नहीं सकती.

रजनी मौसी : कितना समझदार है मेरा बीटा . तू चिंता मत कर मैं उसे कुछ नहीं बताउंगी. तूने कुछ खाया क नहीं?

रीता मौसी : अभी अभी खाया हुआ उसने और वो भी दिव्या क हाथों से .

रजनी मौसी : खुश होते हुए ) सच !! दिव्या आज तूने मुझे वो ख़ुशी दी है मैं बता नहीं सकती.

दिव्या मौसी : दीदी ये मेरा भी तो बीटा है न , कब तक मैं इससे दूर रहती ?

रजनी मौसी : शाबाश मेरी बहिन आज दामिनी बहुत खुश होगी बहुत खुश होगी मेरी बहिन.

रजनी मौसी क साथ साथ दिव्या मौसी की ऑंखें भी भर आयी थी इस बात पर और फिर रीता मौसी और आंटी ने दोनों को हौंसला दिया . अब मौसी क हैट ते hi मेरे प्यारी निधि दीदी मेरे पास आ कर बैठ गयी और प्यार से मेरे चेहरे पर हाथ फिरते हुए बोली.

निधि दीदी : कैसा है मेरा प्यारा भाई ?

अमित : ाचा हूँ दीदी और आप को देख कर तो और भी ाचा हो गया हूँ.

निधि दीदी : तूने जो किया है न उससे मुझे तुझ पर आज और भी गर्व हो रहा है. लाखों में एक है मेरा भाई. भगवन हर जनम में तुम्हे मेरा भाई बनाये. तुझ जैसे भाई क होते किसी लड़की क साथ गलत नहीं हो सकता . तुझे मेरी भी उम्र लग जाये भाई.

अमित : दीदी आप सब से प्यारी हो , मुझे भी हर जनम आपका भाई बनना है. मैं आपको बहुत मिस करता हूँ पर आपसे मिल नहीं पता

निधि दीदी : मैं भी तुझे बहुत मिस करती हूँ भाई . कारन से ज्यादा मुझे तुम प्यारे हो. तू हमारे साथ hi क्यों नहीं रह लेता ?

आंटी : ये तो हमारे साथ hi रहेगा ये मैं पहले hi कह देती हूँ बीटा . हाँ तुम सब चाहो तो हमारे साथ रह सकते हो.

रीता मौसी : अमित अब से मेरे साथ hi रहेगा . वैसे भी इसके मौसा तो महीने में 20 दिन बहार hi रहते हैं तो घर पर कोई तो मर्द होना चाहिए न

दिव्या मौसी : क्या मेरा कोई हक़ नहीं मेरे बेटे पर . हम भी तो माँ बेटी अकेली hi रहती हैं.

रजनी मौसी : तुम्हारा हक़ तो हम सब से ज्यादा है दिव्या . अब से ये तुम्हारे साथ hi रहेगा .

रीता मौसी : पर दीदी क्या हमारे साथ नहीं रह सकता ये ? क्यों न हम सब क घर बरी बरी से रहा करे ये ?

रजनी मौसी : बात तो ठीक है , तुम क्या कहती तो दिव्या ?

दिव्या मौसी : ठीक है अगर रमा दीदी को मंज़ूर है तो. वैसे भी इतने दिनों से ये hi तो ध्यान रख रही हैं इसका . इनसे पूछना ज्यादा ज़रूरी है.

आंटी : मैं इसे कहीं और भेजना तो नहीं चाहती पर इस पर आप सब का भी तो हक़ है तो मुझे मंज़ूर है.

रीता मौसी : लो हो गया क्लियर अब से एक एक हफ्ता कर क तू सब क साथ रहेगा .

अब बड़ों क फैसलों में मैं भला क्या बोलता , मैंने चुप चाप हामी भर दी. इस फैसले से सबसे ज्यादा ख़ुशी राधा क चेहरे पर थी जबकि करुणा दीदी भी शोख निगाहों से मुझे देख रही थी और नज़रों hi नज़रों में ज़ाहिर भी कर रही थी क वो क्या करने वाली हैं . कुछ देर में hi नैना दीदी और कारन भैया भी आ गए. और सब की तरह नैना दीदी भी मुझसे पहले गिला करने लगी बाद में सबके साथ मिल कर बातें करने बैठ गयी. उन्हें जब मेरा सबके साथ बरी बरी से रुकने का पता चला तो वो भी खुश हो गयी . मैंने एक बात और नोट की क कारन भैया सिर्फ कल्पना को hi ताड़ रहे थे. और शायद कल्पना ने भी ये नोट कर लिया था इस लिए उसने उनकी तरफ अपनी पीठ कर ली. इस दौरान मंजू म का मुझे फ़ोन भी आया वो आना चाहती थी मगर मैंने मन कर दिया . क्यूंकि सबके वहां होने से मुझे दर था क कहीं कोई बात न हो जिससे किसी को शक हो. घर से माँ का और दीपिका ममी का फ़ोन भी आया था मेरे गाओं न जाने की वजह से तो मैंने बहाना बना दिया क अंकल क साथ कोई ज़रूरी काम है .

करते करते सारा दिन कैसे गुज़र गया पता hi नहीं चला. रत को फिर से मोहित hi मेरे पास रुकने वाला था और बाकि सब वापिस चले गए. शाम क बाद नाईट शिफ्ट शुरू होते hi डॉ रीना भी आ गयी. वेड क मुताबिक वो मेरे लिए वो इंजेक्शन ले आयी थी जो मैंने उनसे मंगवाया था. वैसे तो मैं आज छुट्टी लेना चाहता था मगर फिर मैंने दो दिन और हॉस्पिटल में रहने का सोचा . सबके जाने क बाद मैंने आगे का प्लान बना कर डरा भैया को फ़ोन कर दिया और उन्हें कल आने को कहा .

कल की तरह आज भी डॉ रीना देर तक मेरे साथ बातें करती रही . वो मेरे बारे में hi ज्यादा पूछती रही मेरी आदतों और ज़िन्दगी क बारे में. आज कल क मुकाबले मैं बेहतर था और चलने फिरने में आसानी थी. डॉ रीना ने भी कहा क मैं चहुँ तो छुट्टी ले सकता हूँ पर मुझे आराम करने की सलाह देते हुए उन्होंने ऐसा करने से मन किया. मैं खुद भी अभी एक दो दिन रहना चाहता था इसी लिए मैंने डरा भैया को फ़ोन किया था. मेरे दिमाग में एक प्लान आ चूका था जो अब मुझे पूरा करना था.

अगला दिन मंडे था और आज राधा भी कॉलेज चली गयी. मोहित को भी मैंने कॉलेज जाने को कहा. मेरे पास आंटी और दिव्या मौसी रुक गयी थी. दोपहर को मुझसे मिलने डरा भैया आ गए और उनके साथ उनका वही दोस्त . मैंने अकेले में डरा भैया को साडी बात बता दी तो उनको भी बहुत गुस्सा आया और मेरे साथ वो भी सहमत थे .



कॉलेज में प्रिंसिपल सर ने राधा को बुला कर सरे मामले की खुद से जांच की . किसी भी तरह मोंटी या शीना पर कोई बात नहीं आयी क्यूंकि न तो मोंटी वहां खुद मौजूद था और शीना खुद भी शिकार हुई थी . फिर भी प्रिंसिपल सर ने पुलिस क कॉलेज में आने और मुझे दोषी मैंने क खिलाफ शिकायत ज़रूर कर दी. शिवानी ने मुझे फ़ोन पर बताया क मोंटी 2-3 दिन से अपने फार्म हाउस पर hi है न वो घर पर आ रहा है न कॉलेज में. बस यही सही मौका था जब मैं अपना प्लान पूरा कर सकता था और मैंने इसे फाइनल करने का सोच लिया. मैं इसमें किसी और को इन्वॉल्व नहीं करना चाहता था. इस लिए मोहित और नीरज से मैंने इस बारे में बात नहीं की . ज़रा स चूक होने पर वो भी मोंटी क राडार पर आ जाते और मैं उन्हें किसी खतरे में नहीं डालना चाहता था . इस काम में मुझे डॉ रीना की मदद की ज़रूरत थी और उन्होंने भी मेरी मदद करने का वडा किया .
 
भाई आज बहार था सारा दिन आज लिख नहीं पाया , कल पक्का अपडेट करूँगा . अभी लिखने लगा हूँ
 
भाई रत तक अपडेट दे दूंगा 70 % हो गया है .
 
अपडेट 129



आज ट्यूसडे था और आज मुझे हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने वाली थी. मुझे घर ले जाने क लिए मोहित आंटी और दिव्या मौसी आये हुए थे. डॉ रीना साडी रत मेरे साथ hi रही और इस वक़्त वो घर जा चुकी थी. बिल क्लियर करने क बाद डॉ से कुछ मेडिसिन और हिदायतें लेने क बाद हम घर चले गए . आज दिव्या मौसी पहली बार मोहित क घर आयी थी और वो बहुत खुश भी थी इतना बड़े घर को देख कर . आंटी ने मुझे ऊपर वाले कमरे की बजाये नीचे रहने को कहा और अपने साथ वाला कमरा दे दिया. आंटी दिव्या मौसी को घर रोक कर रखना चाहती थी पर वो नहीं मणि. उन्हें राधा क आने से पहले घर जाना था और खाना वगैरह भी करना था. मुझे घर आने का कह कर वो मोहित क साथ घर चली गयी . मैं भी अब काफी बेहतर था बस हिलने जुलने से बीच बीच में ज़ख्मों में दर्द होने लगता था लेकिन वो भी ज्यादा नहीं था. आंटी मेरे पास hi बैठी रही और रानी को भी सख्त हिदायत दी क वो मेरा खास ख्याल रखे.

मैंने मंजू म को दो दिन से खुद से मिलने आने नहीं दिया था मगर दिन में 2-3 बार उनसे फ़ोन पर बात हो जाती थी. वो इस बात से नाराज़ भी थी क मैं उन्हें मिलने आने क्यों नहीं देता. मैंने सोच लिया था क मैं खुद hi उनसे मिलने उनके पास जाऊंगा .

दोपहर को आज कल्पना और राधा मुझसे मिलने मोहित क घर आ गयी.

कल्पना : तो घर आ hi गए तुम , अब तबियत कैसी है? पता है कम्पटीशन भी आने वाले वाले हैं बस नेक्स्ट वीक hi है बीच में.

अमित : बस ज़ख़्म ठीक हो जाएँ तो तयारी शुरू करता हूँ. और बताओ क्लास कैसे चल रही है.?

कल्पना : सब ठीक है चन्दर्कांता को छोड़ कर हे हे हे

राधा : तुम हमारे घर भी तो चल सकते थे न फिर यहाँ क्यों आ गए?

अमित : तुम्हारे घर भी आऊंगा न नेक्स्ट वीक से. अभी क्या है न एक तो मेरा सारा सामान यहाँ है दूसरा मुझे अगर मदद चाहिए हो तो यहाँ मोहित है , वहां किसे कहता ? तुम और मौसी hi तो हो घर पर

राधा : क्यों , मैं भी तो कर सकती थी न मदद .

अमित : पर तुम कैसे , मेरा मतलब है तुम एक लड़की हो

राधा : तो क्या हुआ , तुम्हारे लिए इतना तो कर सकती हूँ न .

कल्पना : मेरी भोली बेगम वो क्या कह रहा है समझ नहीं रही तुम ? मतलब उसे बाथरूम वगैरह जाना हो तो क्या तुम ले कर जाओगी उसे ?

कल्पना की इस बात पर राधा शर्मा गयी और सर झुका लिया.

राधा : मैं तो वो ....

अमित : तुम चिंता मत करो मंडे से मैं तुम्हारे घर आने वाला हूँ .

राधा : पक्का न ??

राधा क चेहरे पर एक ख़ुशी नज़र आ रही थी और वो जैसे यकीन करना चाहती थी क मैं जो कह रहा हूँ वो सच hi है या नहीं

अमित : प्रॉमिस , अगला पूरा हफ्ता मैं तुम्हारे घर रुकने वाला हूँ. तुमने भी तो सुना था न रीता मौसी ने क्या कहा था .

कल्पना : कभी गलती से मेरे घर भी आ जाओ या फिर तुम्हे किडनैप कर क ले जाना पड़ेगा?

अमित : आऊंगा आऊंगा लेकिन पहले ठीक तो हो जॉन. क्या ऐसे मिलाना चाहती हो अपनी फॅमिली से.

कल्पना : मेरी फॅमिली मेरे पापा hi हैं. और उन्हें मैंने सब बता रखा है आलरेडी तुम्हारे बारे में. आने से पहले तुम्हे बताना होगा, पापा का कुछ पता नहीं होता वो कब मिलेंगे कब नहीं . वो कब खान निकल जाये कुछ पता नहीं होता.

अमित : लगता है तुम्हारे पापा भी अंकल की तरह कोई बड़े बिजनेसमैन हैं.

कल्पना : ऐसा hi समझ लो.

राधा : माँ आयी थी यहाँ?

अमित : हाँ मौसी आयी थी और तुम्हारे आने से आधा घंटा पहले hi मोहित उन्हें घर छोड़ने गया है.

राधा : ाचा अब मैं भी चलती हूँ माँ इंतज़ार कर रही होगी .

कल्पना: ाचा तो मैं भी चलती हूँ , राधा को घर छोड़ कर मैं भी जाती हूँ.

राधा : तुम पक्का आओगे न ?

अमित : हाँ हाँ पक्का आऊंगा

राधा हाथ हिलती हुई चली गयी . आंटी ने दोनों को लंच क लिए पूछा मगर दोनों रुकी नहीं . खाना खा कर मैं कुछ देर क लिए सो गया और आंटी भी मेरे पास hi थी.

उधर मोंटी रत क शराब क हैंगओवर से जब सुबह उठा तो उसका सर अभी भी चक्र रहा था . उसके बीएड पर एक लड़की अभी भी औंधे मुँह नंगी सो रही थी . दूसरे रूम में रघु भी नंगा क लड़की क साथ बीएड पर पड़ा हुआ था. मोंटी रूम क साथ आत्ताच बाथरूम में फ्रेश होने क बाद नहाने लगा तो बीएड पर सो रही लड़की आवाज़ सुन कर उठ गयी और बाथरूम का दरवाज़ा खुला देख कर वो भी नंगी hi अंदर आ गयी . कल रत मोंटी ने इस लड़की क साथ काफी मज़ा किया था और वो लड़की जो शायद सेक्स लवर थी मोंटी को ऐसे नंगा देख कर उससे चिपकने लगी . मोंटी ने उसे पीछे हटाने की कोशिश की मगर वो तो उसकी सुन hi नहीं रही थी . मोंटी भी ज्यादा देर उसे रोक नहीं पता और फिर वो लड़की उसे किश करती हुई घुटनो पर बैठ कर अब मोंटी क सोये हुए लैंड को मुँह में ले कर चूसने लगी . ये रत की शराब का हैंगओवर था या फिर कल रत सेक्स कुछ ज्यादा कर लिया था मोंटी ने क अब उसका लैंड खड़ा नहीं हो रहा था. वो लड़की जो देखने में बहुत सेक्सी थी और किसी का भी लैंड बिना हाथ लगाए अपनी अदाओं से hi खड़ा करने की काबिलियत रखती थी वो जी जान से कोशिश कर रही थी मगर मोंटी का लैंड खड़ा नहीं हो रहा था . पहले तो कुछ मिनट्स मोंटी यही सोचता रहा क रत को ज्यादा हो गया था इस लिए अभी खड़ा नहीं हो रहा मगर इतनी ज्यादा म्हणत क बाद भी लैंड में जब ज़रा सा भी तनाव नहीं आया तो उसे भी हैरानी हुई. वहीँ वो लड़की भी झुंझला गयी थी. अपनी पूरी काम कला का इस्तेमाल उसने कर लिया मगर रिजल्ट वही . आखिर में वो झुंझला कर कड़ी हो गयी और बुरा सा मुँह बना कर वापिस रूम में चली गयी. अब मोंटी को मुँह पर कुछ कहने उसकी हिम्मत तो थी नहीं. बस मन में उसे गालियां देती हुई अपना गुस्सा निकल रही थी. मोंटी भी सब भूल कर नहाने लगा उसे यही लगा क ये हैंगओवर का असर है . असल में उसके साथ कल रत क्या हो गया था इसका उसे खुद भी पता नहीं था .

दूसरी तरफ शीना आज भी कॉलेज नहीं गयी थी और घर पर hi थी शिवानी ने भी दोस्ती निभाते हुए कॉलेज से छुट्टी कर ली और शीना क साथ hi उसका मन बहलाने की कोशिश की.

मैं आराम से सो रहा था क मेरा फ़ोन बहने लगा . मैंने देखा तो ये कॉल मेघा की थी. एक पल तो मुझे गुस्सा hi आ गया मोंटी की वजह से मगर मैंने कुछ सोच कर फ़ोन उठा लिया .

मेघा : कहाँ गायब हो ? फ़ोन भी बंद रखते hi क्या ? मैंने सैटरडे को कितने फ़ोन किये , प्रोग्राम बनाना था और तुम पता नहीं कहाँ गायब थे ?

अमित : अब क्या करता मेरा एक्सीडेंट हो गया था . फ़ोन टूट गया था अभी न्य लिया है.

मेघा : क्या ???? एक्सीडेंट?? तुम ठीक तो हो न?

अमित : हाँ बस तंग पर चोट लगी है तो कुछ दिन आराम करूँगा

मेघा : मैं आती हूँ तुमसे मिलने

अमित : कहाँ आएँगी मैं तो गाओं में हूँ बहुत दूर . आप बस आराम करिये मैं जैसे hi ठीक हो जाऊंगा आपको फ़ोन करूँगा .

मेघा : अपना ध्यान रखना , मैं तुम्हारा इंतज़ार करुँगी .

अमित : मन में) तेरा तो वो हल करूँगा क यद् करेगी .

उसके बाद मैंने और कोई बात न की और फ़ोन काट दिया .

उधर सप ऋतू सिंह चाहे सीनियर क कहने पर रुक गयी थी मगर उसके मन में अमित क प्रति दुर्भावना आ चुकी थी . अमित क बारे में और जानकारी लेने क लिए उसने एक लेडी कांस्टेबल को भेष बदल कर कॉलेज की लड़कियों से सच जानने को कहा था. और जिस लेडी कांस्टेबल को उसने भेजा था वो भी अपनी रिपोर्ट लेकर आ गयी थी.

कांस्टेबल : मई ी के इन मम?

ऋतू सिंह : यस के इन

कांस्टेबल : है हिन्द मम , आपका शक सही था मम . वो लड़का वैसे तो रेसलिंग का प्लेयर है और पड़े में भी ाचा है . लेकिन एक लड़की न अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बताया है क उस लड़के पर पहले भी एक लड़की क साथ एटेम्पट तो रपे शिकायत दर्ज की गयी थी मगर किसी वजह से बात प्रिंसिपल और स्टाफ ने दबा दी थी.

ऋतू सिंह : मैं जानती थी वो बास्टर्ड ऐसा hi होगा . क्या तुमने उस लड़की का पता लगाया जिसके साथ उसने ऐसी हरकत की थी ?

कांस्टेबल : जी मम , पर वो लड़की 2-3 दिन से कॉलेज नहीं आ रही .

ऋतू सिंह : उसका कोई कांटेक्ट no या एड्रेस?

कांस्टेबल: no मम , वो तो कॉलेज क रिकॉर्ड से hi पता चल सकता है.

ऋतू सिंह : वो प्रिंसिपल शायद कुछ ज्यादा hi मेहरबान है उस लड़के पर . फ़ोन आया था प्रिंसिपल का कमिश्नर सर क पास , मेरी शिकायत की है . अब हम कॉलेज तो नहीं जा सकते इसी लिए तुम्हे भेजा था. जिसने तुम्हे ये इनफार्मेशन दी उसने कुछ और नहीं बताया ?

कांस्टेबल : जी वो कह रही थी क ये लड़का सब लड़कियों को गन्दी नज़र से hi देखता है.

ऋतू सिंह : इन जैसों को तो सीधा करना अछि तरह अत है मुझे. जिस लड़की की किडनेपिंग की शिकायत आयी थी ज़रा उसको कांटेक्ट करो और यहाँ बुलाओ . रुको ... यहाँ नहीं , एक लड़की को ऐसे बुलाना ाचा नहीं लगता . उससे मेरी बात करवाओ उसका कांटेक्ट no. लेके और अगर वो मिलना चाहती है तो हम खुद उनके घर चलेंगे .

ऋतू सिंह : मन में ) तेरी पहुँच जहाँ तो भी हो एक बार मेरे हाथ पक्का साबुत आ जाये फिर तुझे बताती हूँ क औरतों पर बुरी नज़र डालने वालों का क्या हल करती है ऋतू सिंह .

इधर शीना और शिवानी शीना क घर पर hi थी . जब उनकी दोनों सहेलियों नितिका और वैशाली उनसे मिलने आयी . नितिका तो ऐसे चहक रही थी क बहुत बड़ा मैदान मर लिया हो . दोनों को अभी तक पता नहीं था क शीना क साथ क्या क्या हो चूका था इन 3-4 दिनों में.

नितिका : कोंग्रटुलतिओन्स शीना , आज मैंने वो काम किया है क तू मुझे सर पे उठा लेगी . तेरे और मोंटी क दुश्मन का पक्का इंतज़ाम कर क आयी हूँ मैं .

शीना ने तो नितिका की किसी बात पर ध्यान hi न दिया पर शिवानी क तो कान खड़े हो गए सुनते hi.

शिवानी : किसकी बात कर रही है तू?

नितिका : एक hi तो है बास्टर्ड , देखना अब उसका क्या हल होता है. अब तो उसे कोई बचा नहीं पायेगा . ऐसा मामला फिट कर क आयी हूँ क वो तो गया .

शिवानी : गुस्से में ) तू क्या कर क आयी है साफ़ साफ़ बात

नितिका : तेरी क्यों इतनी जल रही है ? मैं शीना से बात कर रही हूँ .

शिवानी : तू बताती है या नहीं ?

वैशाली : बता दे यार या मैं बताऊँ

नितिका : तो सुन , उस देहाती को अब पुलिस नहीं छोड़ने वाली . अब तो वो अंदर भी जायेगा और कॉलेज से भी बहार निकल देंगे उसे .

शिवानी : चीखते हुए ) क्या किया है तूने ?

नितिका : तुझे क्या हो रहा है ? ऐसे रियेक्ट कर रही है जैसे वो तेरा बर्फ है. सुन , आज एक लड़की कॉलेज में उसके बारे में पूछ रही थी . मैं देख कर hi समझ गयी क वो कॉलेज की नहीं है. उसके पर्स से झांकता उसका िकार्ड देखते hi मैं समझ गयी क वो कोई पुलिस वाली है. 2 दिन पहले भी कॉलेज में पुलिस आयी थी और उसके बारे में hi पूछने आयी थी. वो भी 3-4 दिन से कॉलेज में नहीं दिखा मतलब कोई लफड़ा है . मेरा दिमाग खटका . मैंने भी पूरी एक्टिंग करते हुए उसे ऐसी ऐसी बातें बताई क अब वो साला बच नहीं सकता . उसे तो रेपिस्ट hi बना दिया मैंने . अब जायेगा जेल में देख लेना. ‘चतताआयककककक ‘

शिवानी को नितिका की बात सुनते hi इतना गुस्सा आया क वो नितिका का मुँह तोड़ने वाली थी मगर उससे पहले hi ये ज़ोरदार चांटा शीना ने दे मारा नितिका क मुँह पर .

शीना : यू बीच !! हाउ डरे यू तो दो सो ? तूने पता है तूने क्या किया है ? तूने उस लड़के पर झूठ इलज़ाम लगा दिया जिसने मेरी इज़्ज़त मेरी जान बचाई . तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ? जानती है वो कॉलेज क्यों नहीं आ रहा ? वो हॉस्पिटल में पड़ा है वो भी मेरी वजह से. मेरी इज़्ज़त बचते हुए वो ज़ख़्मी हो गया और तूने उसी पर ऐसा इलज़ाम लगा दिया? मैं तो पहले hi अपनी नज़रों में गिरा हुआ महसूस कर रही हूँ ऊपर से तूने मुझे और गिरा दिया . उसे जब पता चलेगा तो क्या सोचेगा वो ? क ये सिला दिया मैंने उसके एहसान का? मेरी नज़रों से दूर हो जाओ तुम दोनों इससे पहले क मैं भूल जॉन तुम दोनों मेरी दोस्त हो .

नितिका : शॉकेड ) ी ऍम सॉरी शीना पर मुझे पता नहीं था कुछ भी . मुझे तो लगा क तुम उससे बदला लेना चाहती हो तो इस लिए मैंने ऐसा किया .

शीना : बदला !! हहहह , वो सही था मैं hi गलत हूँ घटिया हूँ जो ऐसे दोस्त बना रखे हैं . वो तो हमेशा से hi सही था और मुझे भी तुम में से किसी ने नहीं रोका एक बार भी सिवाए शिवानी क. ऊपर से तुमने जो आज किया है अब तो मैं उससे माफ़ी मांगने क भी काबिल नहीं रही. जानती है क्या हुआ था मेरे साथ ? उससे बदला लेने hi चली थी मैं . राधा को उठवा लिया था हमने और अपने hi जाल में फंस गए. अगर अमित टाइम पर न अत वो सब मिल कर मेरा रपे कर देते . जब कोई नहीं था तब उसने अपने जान पर खेल कर मेरी इज़्ज़त बचाई और तूने उसी पर एक और इलज़ाम दाल दिया . अगर उसे कुछ भी हुआ तो अपना हाल सोच लेना और तुम जानती हो मुझे मैं कैसी हूँ

शीना की ऐसी बातें सुन कर नितिका की हवा टाइट हो गयी . वहीँ वैशाली भी ये बदलाव देख कर हैरान थी .

नितिका : ी ऍम सॉरी शीना , मैं तुम से माफ़ी मांगती हूँ प्लीज यार गलती हो गयी अगर मुझे पता होता तो मैं ऐसा कभी नहीं करती . मैं उससे भी माफ़ी मांग लुंगी यार प्लीज माफ़ कर दे.

शीना : जा पहले जा क जिससे शिकायत कर क आयी है उसे ढून्ढ क सच बता वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा

शीना को गुस्से में देख वैशाली नितिका को ले कर निकल गयी . मगर अब वो कहाँ ढूंढती उस पुलिस वाली को जिसको कभी देखा hi नहीं था .

शीना : ये क्या हो गया शिवानी

शिवानी : वही मैं सोच रही हूँ, पहले hi मैं कितनी शर्मिंदा हुई थी उस हरकत क लिए और इसने फिर से उसी बात को उछाल दिया है. अगर कहीं पुलिस ने उसे पकड़ लिया तो ?

शीना : मेरे होते ऐसा कुछ नहीं हो सकता . ज़रूरत पड़ी तो मैं पापा से बात करुँगी , वो सब ठीक कर देंगे.

2-3 घंटे आराम से सोने क बाद मैं जब शाम को उठा तो रूम में पहले से hi मोहित और नीरज बैठे हुए थे. मुझे देखते hi दोनों मेरे पास आ कर बैठ गए .

मोहित : अब साले हमसे बातें छुपाने लगा तू फिर से ?

अमित : क्या कह रहा है तू ?

नीरज : डरा भैया किधर आये थे ? बिना किसी खास काम क तो वो आने से रहे , ज़रूर तूने hi बुलाया होगा. तो अब बता क्या चक्कर है ये ?

मोहित : और झूठ तो बिलकुल मत बोलियों अगर ज़रा सी भी हमारी इज़्ज़त है तो .

अमित : क्या यार , मैं तुम लोगों इससे दूर रखना चाहता था इस लिए नहीं बताया था. अब पूछ hi रहे हो तो सुनो. उस मोंटी का हमेशा क लिए पत्ता साफ कर दिया है .

नीरज / मोहित : वो कैसे ? कहीं तूने उसे ....

अमित : अबे मैं कोई क्रिमिनल हूँ क्या जो उसे मरूंगा ? बस वो काम कर दिया है क वो अब अपनी खुद की बीवी से भी कुछ कर नहीं पायेगा .

मोहित : शॉकेड ) वो कैसे ?

अमित : डॉ रीना ने बताया था क मर्द को नामर्द बनाने क लिए एक इंजेक्शन आता है. उनके मुताबिक ऐसे लोगों का यही इलाज है और मैंने उनकी बात मन ली. कल रत मोंटी को उसकी उस बीमारी से आज़ाद कर दिया जो उसे लड़कियों क साथ गलत काम करने क लिए मजबूर करती थी . अब वो किसी क साथ कुछ नहीं कर पायेगा.

मोहित : ो तेरी की ,, तूने तो मैदान hi मर लिया . मगर सेल तूने ये सब किया कब? मैं तो तेरे साथ hi था न हॉस्पिटल में , फिर तू कब गया ?

अमित : बताता हूँ बताता हूँ , तुझे ये है जब तू सो गया था मैं डॉ रीना से बातें कर रहा था

मोहित : हाँ, बस उसके बाद रत 12 बजे डरा भैया अपने दोस्त को लेकर आ गए . और फिर

फ़्लैश बैक :-

अमित : डॉ रीना प्लीज मेरी ये पत्तियां हटा दीजिये वर्ण ये मेरी पहचान करवा देंगी अगर मैं किसी फुटेज में दिखा तो .

डॉ रीना : क्या तुम्हारा जाना ज़रूरी है ? ये काम कोई और नहीं कर सकता क्या ? तुम्हारे ज़ख़्म कहीं फिर से खुल गए तो ?

अमित : देखिये ये जंग मेरी है तो मुझे hi लड़नी होगी . इसी लिए तो मैंने आज यहाँ रुकना मन था. अभी जल्दी कीजिये .

डॉ रीना ने मेरे सर से पत्तियां हटा दी. और मुझे एक पैन किलर इंजेक्शन भी लगा दिया क कहीं दर्द न होने लगे ज्यादा . उसके बाद मुझे मोंटी को लगाने वाला इंजेक्शन देते हुए उन्होंने मुझे लगाने का तरीका भी समझाया. हॉस्पिटल में भी कक्तव लगे थे तो डॉ रीना ने खुद मुझे कामर्स से बचते हुए पीछे क रस्ते से बहार निकल दिया जहाँ डरा भैया मेरा इंतज़ार कर रहे थे. वहीँ से मैं उन दोनों क साथ चल पड़ा. मोंटी कहाँ है ये मैंने पहले hi पता कर लिया था. 1 बजे क लगभग हम इस जगह पहुंचे जो शहर से बहार एक बड़ा सा फार्महाउस था . गेट पर सिक्योरिटी गार्ड और कामर्स लगे थे . मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था इस लिए हम तीनो ने अपने मुँह सर अछि से कपडा बांध कर छुपा लिए और एक और से दीवार फंड कर अंदर चले गए . एक साइड में बिजली क कनेक्शन वगैरह का बॉक्स लगा था जहाँ से डरा भैया ने फ्यूज निकल दिया और हम पीछे की खुली हुई खिड़की से अंदर घुस गए . अंदर से पूरी शांति थी और अँधेरा भी था बस 2 रूम्स से रौशनी बहार आ रही थी. इन्वर्टर से चलने वाली होगी शायद. मैंने पहला रूम चेक किया तो वहां मोंटी का दोस्त रघु नंगा लेता था और एक लड़की भी उसके साथ थी . मैंने दूसरा रूम देखा तो वहां भी एक लड़की नंगी पड़ी थी . शीना रूम्स में पड़ी शराब की बॉटल्स देख कर मैंने अंदाज़ा लगा लिया क सब शराब पि क नशे में सोये हैं. मगर मोंटी मुझे वहां नज़र नहीं आ रहा था . ऊपर जाती सीढ़ियों से मुझे लगा क वो ऊपर होगा शायद. जैसे hi हम ऊपर जाने लगे तो मेरी नज़र हाल में पड़े सोफे पर पड़ी जहां कोई लेता हुआ था . पास जा कर चेक किया तो ये मोंटी hi था. जो सिर्फ अंडरवियर में था और उसके हाथ से छूट कर एक बोतल निचे लड़की पड़ी थी .

मोंटी को देख कर मेरा गुस्सा सर पर चढ़ गया मैं उसे मरने क लिए आगे बड़ा तो उसे नशे में धुत्त देख कर एक बार क लिए मैं रुक गया . जो इंसान होश में hi न हो उस पर हाथ उठाना कहे की मर्दानगी. बस इसी लिए मैं उन्हें रुक गया . फिर मेरे दिमाग में आया क क्यों न मोके का फायदा उठाया जाये. इस लिए मैंने चुप चाप वो इंजेक्शन उसके पिछवाड़े में घुसा दिया. वो इतना टुन्न था क उसे पता भी नहीं चला क उसके साथ क्या हुआ.

इंजेक्शन लगाने क बाद मैंने डरा भैया को चले को कहा तो वो मुझसे गुस्सा होने लगे

डरा : ये क्या कर रहा है तू भाई ? यही है न वो कुत्ता ? चल इसी हड्डी पसली तोड़ते हैं , इसका भी वही हल करते हैं जो इसके साथियों का किया था .

अमित : नहीं भैया उसकी ज़रूरत नहीं है. वैसे भी मरे हुए को क्या मरना. रही बात सजा की तो वो अभी मैंने उसे दे hi दी है.

डरा : मैं समझा नहीं

अमित : भैया अभी जो इंजेक्शन मैंने लगाया है न वो आदमी को नामर्द बना देता है. अब ये साला किसी क साथ कुछ करने क काबिल hi नहीं रहेगा .

डरा : सच में ऐसा होता है ?

अमित : हाँ भैया , रही बात इसकी ठुकाई की तो जब ये होश में मुझसे टकराएगा तो हिसाब बराबर कर लेंगे .

उसके बाद हम जैसे आये थे वैसे hi वापिस चले गए . डरा भैया मुझे हॉस्पिटल क पीछे उतर कर चले गए जहाँ से डॉ रीना मुझे उसी तरह से अंदर ले गयी और फिर से मेरी पट्टी कर दी.

अमित : ये था सारा किस्सा .

मोहित : ो तेरी की , मान गए यार तूने तो सारा काम hi ख़तम कर दिया , न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी. अब साला किसी लड़की क साथ कैच करने क लायक hi नहीं रहा

नीरज : सुबह जब वो होश में आएगा तो कुछ पता भी नहीं चलेगा क उसके साथ क्या हो गया है.

अमित : बस यार एक गलती हो गयी, अब जिससे उसकी शादी होगी वो बेचारी क्या करेगी?

मोहित : अब तूने किया है तो उसकी ज़िम्मेदारी भी तुम्हारी है. है है है

हम तीनो ऐसे hi है है क बातें करने लगे . और बाद में करुणा दीदी क साथ रीता मौसी भी मेरा हल चल लेने आयी. रजनी मौसी से फ़ोन और hi बात हुई. नीबाज मेरी बाइक घर छोड़ गया था. मैं अभी बाइक चलने क काबिल नहीं था तो इस लिए मैं घर पर hi रहा मगर अब हालत पहले से कहीं बेहतर हो चुकी थी . ये दिन भी ऐसे hi गुज़र गया .

अगले दिन सुबह मैं बेहतर फील कर रहा था तो कॉलेज जाने क लिए मैं रेडी हो गया. मोहित भी इतने दिनों से नहीं गया था. हम दोनों कार में बैठ कर कॉलेज क लिए निकल गए . मीनल की माँ भी घर पर आ चुकी थी और उसकी भाभी उनका ख्याल रख रही थी तो वो भी आज कॉलेज जा रही थी हमारे साथ. मीनल से पहले भी मेरी बात हो चुकी थी मोहित क ज़रिये तो वही नार्मल बातचीत करते हम कॉलेज पहुँच गए . कॉलेज में hi नेहा दीदी कल्पना और राधा मुझे मिल गयी. वो मुझे देख कर खुश भी थी और हैरान भी क मुझे तो अभी और रेस्ट करना चाहिए था. खैर हम जब क्लास में गए तो चन्दर्कांता ने मुझे क्लास से बिना बताये एब्सेंट रहने क लिए फटकारा मगर सर पर लगी पट्टी अपने आप में गवाह थी .

चन्दर्कांता: इतने दिन से कहाँ गायब थे तुम ? ये चोट कहाँ से लगवा कर आये हो ? मारपीट करने का शोक है तो पड़े छोड़ दो.

मोहित चन्दर्कांता की बात का जवाब देने क लिए खड़ा होने hi लगा था क मैंने उसे रोक दिया. मगर चन्दर्कांता इतने से कहाँ रुकने वाली थी , उसे भी पता था क पुलिस मेरे बारे में पूछती हुई आयी थी मगर उसके बाद क्या क्या हुआ है या प्रिंसिपल सर की क्या बात हुई है वो उसे नहीं पता थी . चन्दर्कांता मुझे प्रिंसिपल सर क पास ले गयी . प्रिंसिपल सर क ऑफिस में हमेशा की तरह इस वक़्त प्रोफ व् भी बैठे थे मैंने जाते hi दोनों से आशीर्वाद लिया.

प्रिंसिपल: कहिये मैडम क्या बात है?

चन्दर्कांता: सर थिस स्टूडेंट इस इर्रेगुलर एंड इर्रेस्पोंसिबले इन क्लास. ये लड़ाई झगड़ों में लगा हुआ है जिससे कॉलेज का नाम बदनाम हो रहा है. अब तो इसकी वजह से पुलिस भी कॉलेज आने लगी है.

प्रिंसिपल: आपसे किसने कहा क पुलिस इसकी वजह से कॉलेज में आयी है?

चन्दर्कांता: वो सर सब लोग इस बारे में बातें कर रहे थे .

प्रिंसिपल: सुनी सुनाई बातों पर यकीन नहीं करना चाहिए मैडम. क्या ये स्टडी में ध्यान नहीं दे रहा ? अगर ऐसा है तो मैं एक्शन लूंगा . क्या रिजल्ट था इसका ज़रा बताइये मुझे .

चन्दर्कांता की तो जैसे बोलती बंद हो गयी थी .

चन्दर्कांता: वो सर रिपोर्ट तो इस वक़्त मेरे पास नहीं है . मैं ऐसे बता नहीं पाऊँगी .

प्रिंसिपल: अमित तुम्हे तो पता होगा रिजल्ट अपना ?

अमित : जी सर .

प्रिंसिपल: कितने परसेंट मार्क्स मिले.

अमित : सर ओवरआल 82 और हिस्ट्री में 85

मेरे जवाब पर चन्दर्कांता को जैसे और मिर्ची लग गयी पर प्रिंसिपल सर बे बात ख़तम करते हुए कहा.

प्रिंसिपल: मैडम अमित हमारे कॉलेज का नाम रोशन करने वाला स्टूडेंट है. मुझे यकीन है ये स्पोर्ट्स और स्टडी दोनों में hi ाचा परफॉर्म करेगा . अगर थोड़ा बहुत कहीं कोई कमी रह भी जाती है तो क्या हम इतना टोलेराते नहीं कर सकते ?

चन्दर्कांता: जी सर

प्रिंसिपल: आप जा सकती हैं , आपकी क्लास चल रही है शायद और अमित तुम यहीं रुको.

चन्दर्कांता क पास कहने को कुछ था नहीं तो जल्दी से वापिस चली गयी . मगर प्रिंसिपल सर ने मुझे क्यों रोका ये मुझे समझ नहीं आ रहा था.

प्रिंसिपल: तुम्हे पता है मैंने तुम्हे क्यों रोका है?

अमित : जी नहीं सर

प्रिंसिपल: मैं जानना चाहता हूँ क ऐसा क्या हो रहा है जो मुझे पता नहीं है. कॉलेज टूर से लड़की का किडनैप जो तुम्हारी कजिन है. शीना क किडनैप में तुम्हारा नाम आना , और पुलिस का तुम्हे ढूंढते हुए यहाँ आना. ये सब क्या है. और यकीन ये चोट भी तुम्हे वहीँ से लगी है .

अमित : जी सर वो ....

प्रिंसिपल: डरो नहीं , हम तुम्हारी कजिन से आलरेडी बात कर चुके हैं मगर मुझे लगता है क उसे भी पूरी बात पता नहीं है जो तुम्हे पता होगी .

प्रोफ व् : कॉमन अमित , हमारे सिवा कोई नहीं है यहाँ. तुम्हे कोई कुछ नहीं कहेगा . हमें शक तो है पर तुम्हारे मुँह से सुन्ना चाहते हैं हम.

अमित : सर मुझे किसी ने खबर दी थी क राधा का किडनैप होने वाला है . मैं उसे बचने क लिए hi पीछे गया था. नेटवर्क न होने की वजह से किसी से बात नहीं हो प् रही थी वर्ण शायद ऐसा न होता . मैं जब वहां पहुंचा तो वो राधा को उठा कर ले जा चुके थे . अगर वहां पर हमारी नज़र उन गाड़ियों पर न पड़ी होती और वो चेक पोस्ट वालों ने हमें न बताया होता तो शायद मैं राधा को बचा नहीं पता. हैरानी तो मुझे इस बात पर थी क तो वहां शीना भी मौजूद थी और उसके साथ भी वही सब वो लोग करने वाले थे.

प्रोफ व् : कौन थे वो लोग और उन्होंने ये सब क्यों किया? क्या दुश्मनी है उनकी तुम्हारे साथ ? और तुम्हे बताय किसने?

अमित : सर वो लोग हमारे कॉलेज से नहीं थे. , मेरी मदद जिसने की है मैं उसके बारे में आपको बता नहीं सकता . रही बात दुश्मनी की तो ये मुझे भी समझ नहीं आ रही.

प्रोफ व् : तो तुम नहीं बताओगे , वैसे इतना तो हम समझते हैं क इसके पीछे कौन है. पर सीधा सीधा वो शामिल नहीं था इस लिए उसे कुछ कह नहीं पाएंगे . शीना वहां कैसे पहुंची ? और इतनी सफाई से कोई इतने लोगों में से कैसे किसी को ले जा सकता है ? और किसी को पता तक नहीं लगा ? मुझे लगता है किसी ने मदद की है उन लोगों की शायद स्टाफ में से hi . वर्ण आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ था . एनीवे मैं चाहता हूँ तुम सतर्क रहो .

प्रिंसिपल: शीना अभी तक कॉलेज नहीं आयी है मगर हमें पता है क वो सुरक्षित है और घर पर है. उसने खुद हमें फ़ोन पर बताया है. पुलिस का यहाँ आना गलत था और बेवजह तुम्हे फसाया जा रहा था. मैंने कमिश्नर से बात कर ली है कोई तुम्हे कुछ नहीं कहेगा . मगर मुझे भी लगता है क तुम्हे स्टार्क रहना चाहिए और किसी भी तरह क लड़ाई झगडे से बचो. अब तुम भी जा सकते हो और हाँ ज़रा अपनी टीचर का भी मान रख लिया करो . मैं जनता हूँ तुम गलत नहीं पर वो टीचर हैं तो कोशिश करो ऐसी सिचुएशन न hi बने क यहाँ तक आना पड़े.

अमित : जी मैं ख्याल रखूँगा सर , थैंक यू सर

मैं प्रिंसिपल सर क ऑफिस से निकल कर अपनी क्लास की और चल पड़ा . प्रोफ व् ने लास्ट में जो बात कही थी उस पर मेरा ध्यान नहीं गया था क स्टाफ से किसी ने मदद की हो सकती है मतलब कोई शामिल था मोंटी क साथ. टूर पर साइंस क hi टीचर थे तो मतलब वो जो भी है वो आगे भी कोई ऐसी हरकत कर सकता है . उसे ढूंढना भी अब ज़रूरी था. फ़िलहाल इस बात no झटकता मैं क्लास में पहुंचा . अभी मैं क्लास में आया hi था क बेल्ल बज गयी और पहला लेक्चर ख़तम हो गया. चन्दर्कांता अपने वही एक्सप्रेशन देते हुए चली गयी .

अगला लेक्चर मंजू म का था . वो जैसे hi क्लास में आयी तो मुझे देखते hi उनके चेहरे पर रौनक आ गयी . मगर खुद को काबू में रखते हुए वो अपनी चेयर पर बैठ गयी और अटेंडेंस लेने लगी. पूरा लेक्चर मम की नज़र मुझ पर hi लगी रही. और लेक्चर ख़तम होते hi हम अपने अड्डे पर चले गए , यानि क कैंटीन में. उधर से राधा मीनल और नेहा दीदी भी आ गए .

कल्पना : फाइनली इतने दिनों बाद आज कैंटीन में आना हुआ , मैं तो बहुत मिस कर रही थी यार ये अट्मॉस्फेरे.

अमित : क्यों ? तुम आती नहीं थी क्या?

कल्पना: मैं अकेली कैसे आती ? तुम तो थे नहीं ऊपर से मोहित और मीनल भी नहीं थे. राधा तो 2 दिन से आ रही है मगर ये भी कैंटीन में नहीं आयी तो बताओ अकेली क्या करती यहाँ पर?

मीनल : सही कहा यार , कॉलेज में न यही जगह सब से ज्यादा यद् आती है . स्पेशलय जब सब साथ होते हैं.

सब अपनी अपनी बात कर रहे थे तो मुझे कुछ यद् आया.

अमित : तुम लोग बातें करो मैं अभी आया ?

राधा : चिंता में ) तुम कहाँ जा रहे हो ? तुम्हारी चोट अभी ठीक भी नहीं हुई.

अमित : don’t वोर्री मैं यहीं हूँ अभी आया बस.

मोहित : मैं चलूँ क्या साथ?

अमित : नहीं मैं अभी आया बस.

मैं कैंटीन से निकल कर सीधा लाइब्रेरी में गया तो वहां एक दम पिन ड्राप साइलेंस था. बहार का चिखचिहड़ा अंदर नहीं आ रहा था. मैं जिसे ढून्ढ रहा था वो मुझे कही दिखाई नहीं दी. मैं थोड़ा आगे गया तो एक कार्नर में अकेले किताबें खोल कर पद रही रीमा मुझे दिखाई दी. एक पल तो उसे देख कर मैं हैरान hi हो गया. रीमा कितनी बदल गयी थी. पहले से कहीं ज़्यादा पतली लग रही थी और चेहरा भी जैसे मुरझा सा गया था . आँखों पर चश्मा लगाए वो बस जैसे किताब में hi डूबी हुई थी. सिंपल से कपड़ों में अब वो पहले जैसी रंगत से बिलकुल उलट थी. जैसे उसने सजना संवारना का भी सीखा hi न हो. या यूँ कहो क उसे अब इस बात से कोई मतलब hi न हो. उसे इस हालत में देखते हुए मुझे यद् आने लगा क उसकी मुस्कान कितनी प्यारी थी और उसका वो मेरे प्रति प्यार और झुकाव जिसे मैंने सिर्फ इस लिए ठुकरा दिया था क वो मोंटी की बहिन थी. बहिन तो वो आज भी मोंटी की थी मगर उसने राधा क बारे में बता कर जो मुझ पर एहसान किया था उसका मैं मोल नहीं दे सकता था. अगर रीमा ने मुझे न बताया होता तो शायद मैं कभी राधा को बचा hi नहीं पता.

कुछ पर रीमा को देखता हु मैं अपनी सोच में डूबा रहा और फिर किसी की आवाज़ से मेरी तन्द्रा टूटी . मगर रीमा अभी भी वैसे hi बैठी थी. मैं चल कर उसके पास जा कर खड़ा हो गया मगर उसने मेरी तरफ देखा भी नहीं जैसे उसे आसपास की परवाह hi नहीं थी. मैंने रीमा की किताब बंद कर दी तब कही जा कर उसने निगाहें ऊपर की .

अमित : ी ऍम सॉरी ,

रीमा की ऑंखें भी मुझे कुछ कमज़ोर सी लग रही थी और उसकी इस हालत का ज़िम्मेदार कहीं न कहीं मैं hi था. उसके दिल में मेरे लिए जो जज़्बात थे मैं उससे अनजान नहीं था और शायद मेरा उसे ठुकरा देना hi उसकी इस हालत की वजह थी. मेरे मुँह से और कुछ नहीं निकला सिवाए सॉरी की हालाँकि मुझे तो उसे थैंक यू कहना था. मगर मेरे सॉरी कहते hi रीमा की आँखों में पानी आ गया . उसकी ऑंखें बाद छलकने को hi थी पर उसने इसे रोकने की कोशिश करते हुए कहा

रीमा : सॉरी किस बात की ?

अमित : जो भी मैंने किया , मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. तुम्हारी इस हालत का ज़िम्मेदार मैं हूँ . मुझे माफ़ कार्डो.

रीमा : उनके ज़ेहन में मेरा नाम आ गया ,, आज दर्द मेरा मेरे काम आ गया .

रीमा क दिल से निकले ये अल्फ़ाज़ सीधा मेरे दिल पर लगे और उसकी आँखों क साथ साथ मेरी आँखों में भी नमी आ गयी . मैंने रीमा को गले लगते हुए अपनी बाँहों में कास लिया . इस वक़्त हम कहाँ थे आसपास कोण था मुझे जैसे इस बात की परवाह hi नहीं थी . मेरी धड़कने अचानक से तेज़ हो गयी थी और रीमा को गले से लगा कर एक अलग hi सुकून महसूस हो रहा था मुझे . रीमा ने भी मुझे अपनी बाँहों में कास लिया था. मैं कुछ देर ऐसे hi रीमा को गले से लगाए खड़ा रहा . मुझे जब अपनी साइन पर कुछ गिला गिला महसूस हुआ तो मैंने रीमा को अपने दूर कर के देखा तो वो रो रही थी और सिसकियाँ लेती हुई वो लगातार आंसू बहा रही थी . जैसे बहुत देर से उसने इन आंसुओं को रोक कर रखा हुआ था .

अमित : ी ऍम सॉरी रीमा ी ऍम रियली सॉरी . मैं गलत था जो तुम्हे खुद से दूर कर रहा था . और तुमने मेरे लिए क्या नहीं किया . अगर तुम मेरी मदद न करती तो मैं राधा को कभी बचा नहीं पता . प्लीज मुझे माफ़ कार्डो . प्लीज रोना बंद कार्डो .

रीमा : कुछ मत कहो प्लीज . मुझे कुछ देर अपने सीने से लगा रहने दो. मैं आज खुल कर रोना चाहती हूँ . कब से ये आंसू मैंने रोक कर रखे थे . मगर किसी को क्या बताती इसी लिए रो नहीं पति थी. आज मुझे रो लेने दो.

अमित : मगर तुम रो क्यों रही हो? रोना तो मुझे चाहिए जो मेरी वजह से तुम्हारी हे हालत हुई है. तुमने तो मुझ पर इतना बड़ा एहसान किया है जिसका मैं मोल दे hi नहीं सकता.

रीमा : कोई एहसान नहीं किया मैंने तुम पर . मैं जानती हूँ तुम अपनी कौसिन्स से बहुत प्यार करते हो. अगर उसके साथ कुछ गलत हो जाता तो तुम पर क्या बिट टी मैं जानती हूँ. और तुम्हे कुछ हो जाता तो क्या मुझे ाचा लगता? मैंने किसी पर एहसान नहीं किया मैंने अपने आप पर एहसान किया है.

अमित : इतना प्यार करती हो मुझसे ?

रीमा : मुझे नहीं पता क कितना पर मैं तुम्हारे लिए उम्र भर इंतज़ार करने को तैयार थी . मुझे उम्मीद थी एक न एक दिन तुम ज़रूर मेरे पास आओगे . भगवन इतना भी निर्दयी नहीं हो सकता क हर बार मुझे रुलाये .

अमित : नहीं रीमा , आज क बाद मैं तुम्हे रोने नहीं दूंगा. तुम्हारे प्यार को मैं पहले hi पहचान गया था बस मुझे दर था क कहीं मैं किसी क दुःख का कारन न बनु और देखो तुम्हे इंकार कर क भी मैं तुम्हारे दुःख का कारन बन hi गया.

रीमा : ये तो मेरा टेस्ट था , अगर मेरा प्यार सच्चा न होता तुम कभी वापिस न आते . अब मुझे फिर से छोड़ कर तो नहीं जाओगे न ?

अमित : नहीं बिलकुल नहीं

रीमा : मैं तुम्हे सब कुछ बता दूंगी , जो भी तुम पूछोगे . मैं कुछ नहीं छुपाउंगी. प्लीज मुझे ऐसा कभी छोड़ना मत. मैंने तुम्हे खो देने क दर से तुम्हे अपनी सचाई नहीं बताई थी मगर अब मैं सब कुछ बताउंगी तुम्हे .

अमित : उसकी ज़रूरत नहीं है रीमा , अब मुझे उससे कोई फरक नहीं पड़ता . मुझे किसी से कोई मतलब नहीं है . अब चलो मेरे साथ सब कैंटीन वेट कर रहे हैं .

रीमा : पर मैं ऐसे .....

अमित : कुछ नहीं होता तुम चलो .

मैं रीमा को लेकर कैंटीन की तरफ चल दिया. कैंटीन में सब मेरा hi वेट कर रहे थे और मेरे साथ रीमा को देख कर सब सरप्राइज हो गए. कल्पना तो पहले रीमा से मिली hi नहीं थी . इस लिए वो बस देख रही थी क ये लड़की कौन है.

अमित : राधा , अगर रीमा ने मुझे उस दिन बताया न होता तो मैं कभी तुम्हारी मदद क लिए आ hi न पता . तुम आज सेफ हो तो इसी की वजह से . इसका शीना मोंटी क साथ क्या रिश्ता है मुझे उसकी परवाह नहीं पर आज से ये हमारी दोस्त है और हमेशा रहेगी

राधा : थैंक्स रीमा , मैं तुम्हारा एहसान कभी नहीं भूलूंगी .

इतना कह कर राधा में रीमा को गले लगा लिया .

उसके बाद नेहा दीदी ने भी रीमा को गले लगाया और मीनल ने भी .

कल्पना : कोई मुझे भी मिलवाएगा ?

मीनल : ये है रीमा हमारी क्लासमेट . रीमा ये है कल्पना अमित और मोहित की क्लासमेट और हमारी बॉडीगार्ड.

कल्पना : मैं सिर्फ नेहा दीदी और राधा की बॉडीगार्ड हूँ तुम्हारा तो मोहित है. Hi रीमा नीस तो मीट यू एंड थैंक्स तुमने जो राधा क लिए किया. आज से मुझे भी अपना दोस्त समझो.

रीमा : थैंक्स .

मोहित : ये क्या रीमा तुम तो अछि भली हुआ करती थी और अब ये क्या हालत बना ली है. मोहित क सवाल से रीमा और मेरी नज़र एक बार आपस में मिली फिर उसने जवाब देते हुए कहा.

रीमा : वो मैं बीमार पद गयी थी न इस लिए ऐसी हो गयी हूँ. मगर अब जल्दी ठीक हो जाउंगी मुझे डॉ जो मिल गया है

कल्पना : ोये होये , तुम तो बड़ी चालक निकली यार . आते hi डॉ ढूंढ लिया और यहाँ देखो राधा नेहा दीदी और मैं अभी तक खली हैं. ये महाशय भी किसी को पसंद नहीं करते पता नहीं कैसी लड़की चाहिए इसे.

मैंने रीमा को आँखों से इशारा करते हुए मन किया क वो कोई ऐसी बात न करे. रीमा भी समझ गयी और उसने बात बदल दी

रीमा : मेरा मतलब था क अब मेरा इलाज ठीक से हो रहा है. अब मैं जल्दी hi पहले जैसी हो जाउंगी . वैसे तुम बातें बहुत अछि करती हो .

अमित : ज़रा बच कर रहना , लेडी ब्रूस ली है ये .

कल्पना : लगता है हॉस्पिटल से तुम्हार जी नहीं भरा अभी .



हमारी महफ़िल अभी लगी थी क बेल्ल बजते hi हमें सभा समाप्त करनी पड़ी . और सभी अपनी अपनी क्लास की और चल पड़े . जाते हुए रीमा बार बार पलट कर मुझे देख रही थी और उसके चेहरे पर अलग hi ख़ुशी झलक रही थी .
 
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