Adultery Manhoos se mahan tak - Page 17 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery Manhoos se mahan tak

अपडेट 130



लेक्टर्स ख़तम होने क बाद मैं कल्पना और मोहित साइंस ब्लॉक की तरफ चल दिए .

कल्पना : वैसे ये रीमा की क्या स्टोरी है ? मुझे कभी बताया नहीं

मोहित : अमित की चाहने वाली है और क्या

कल्पना: शॉकेड ) क्या मतलब ?

अमित : कुछ नहीं ऐसे hi बोलता रहता है ये . तुम्हे भी तो यही कहता है क तुम मेरी चाहने वाली हो.

कल्पना : स्माइल ) मेरी बात और है , , पर मुझे भी कुछ ऐसा hi लग रहा था उसे देख कर . जैसे वो तुम्हे देख रही थी

अमित : तो तुम यही सब नोट करती हो क कौन कैसे देखता है मुझे

कल्पना : और नहीं तो क्या अब तुम्हारे ध्यान तो रखना पड़ेगा न.

अमित : शी इस ा गुड गर्ल , बहुत अछि है वो और इनोसेंट भी. सच कहूं तो उसकी हालत देख कर मुझे खुद पर गुस्सा आ रहा था . उसकी इस हालत का ज़िम्मेदार कहीं न कहीं मैं hi हूँ. जब मुझे पता लगा क वो शीना और मोंटी की बहिन है तो मैंने उसे एक डैम से बुलाना बंद कर दिया और मेरी वजह से बाकि सब ने भी. वो हमारे साथ खुश रहती थी पर उसके बाद देखो क्या हल बना लिया. फिर भी उसने मेरी मदद hi की. अगर वो न बताती तो राधा क साथ कुछ भी हो सकता था.

कल्पना : व्हॉट ?? वो उन दोनों की बहिन है? फिर भी तुमने उसको दोस्त बना लिया.

अमित : पहले उसने नहीं बताया था इसी लिए तो मैंने उसे छोड़ दिया था . मगर उसने मोंटी क खिलाफ मेरी मदद की है तो तुम खुद hi बताओ क मैं कैसे उसे इग्नोर करूँ?

मोहित : बिलकुल ठीक, मुझे भी पहले यही लगा था क वो कोई गेम न खेल रही हो पर उसने सच में मदद की.

कल्पना : अगर ऐसा है तो फिर उसके बारे में जानना चाहिए , ी मैं एक बहिन अपने भाई क खिलाफ जा कर किसी की मदद क्यों करेगी ?

अमित : इस लिए क वो उन जैसी नहीं है . अब तुम अपना शक्की दिमाग चलना बंद करो. शी इस ा गुड गर्ल और वो हमारी दोस्त है.

कल्पना : जो हुकुम मालिक

अमित : अब ये क्या था ?

कल्पना : कुछ नहीं , तुम सबके बारे में सोचते हो बस मेरे लिए टाइम नहीं है

अमित : ऐसा क्यों कह रही हो ? तुम तो मेरी सबसे अछि दोस्त हो. तुम हो तो मुझे चिंता नहीं राधा और नेहा दीदी की. तुम्हारा एहसान तो मैं चूका hi नहीं सकता.

कल्पना : एक दूंगी रख कर , एहसान कह कर गली मत दो. तुम्हारे लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ. तुम मेरी लाइफ क पहले लड़के हो जिस पर मुझे भरोसा है और पता है पापा को मैं तुम्हारे बारे में सब बताती रहती हूँ. उनका भी यही कहना है क तुम बहुत अचे हो .

मोहित : मतलब बात घर तक पहुँच चुकी है. देख लेना किसी दिन शगुन hi न लगा दे

कल्पना ने मोहित की बाजु पकड़ कर मरोड़ दी

कल्पना : कुछ ज्यादा hi नहीं बोलने लगे तुम

मोहित : आआह्ह्ह सॉरी सॉरी यार मैं तो मज़ाक कर रहा था

‘ अरे अरे ये क्या कर रही हो ? मेरे बर्फ का हाथ तोड़ेगी क्या ‘

लेक्चर ख़तम हो गया था और मीनल कल्पना को ऐसा करता देख कर भगति हुई पास आ गयी. उसके पीछे पीछे नेहा दीदी राधा और रीमा भी आ रही थी और सबके चेहरे पर हंसी थी .

कल्पना : संभल कर रखो अपने मजनू को. पता नहीं क्या क्या बोलता रहता है.

मीनल : अब क्या कह दिया इसने?

मोहित : कुछ नहीं मैंने अमित से बस इतना hi कहा क बच कर रहना कहीं ये अपने पापा से बोल कर शगुन hi न लगवा दे .

मोहित की बात सुन कर सब है रहे थे

कल्पना : सुना क्या कह रहा है

मीनल : वैसे इसमें गलत भी क्या है ? तुम नहीं चाहती अमित से रिश्ता जोड़ना

कल्पना : तुम भी शुरू हो गयी , अभी बताती हूँ तुझे.

नेहा दीदी ने बीच बचाव किया .

नेहा दीदी : अरे अरे बस करो. वो तुम्हारे साथ मज़ाक कर रहे हैं और तुम गुस्सा कर रही हो.

राधा : कोई कुछ भी कहे तुम क्यों गुस्सा करती हो हम सब जानते हैं क तुम अमित की अछि दोस्त हो और हमारी भी. अब चलें ?

कल्पना: चलो वर्ण ये दोनों मेरा दिमाग ख़राब कर देंगे

कल्पना चाहे बातों में गुस्सा दिखा रही थी मगर उसके चेहरे की स्माइल कुछ अलग hi कहानी कह रही थी.

ऐसे hi हंसी मज़ाक करते हम सब बहार आये और सब अपने अपने रस्ते हो लिए . जाते जाते रीमा क चेहरे पर वही मनमोहक स्माइल थी. मीनल को घर छोड़ने क बाद मैंने मोहित को मुझे मंजू म क घर ड्राप करने को कहा .

मोहित : खाने का टाइम है और तू मम क घर जाना चाहता है बात क्या है?

अमित : यार उनसे कुछ ज़रूरी बात करनी है. कॉलेज में नहीं कर सकता इस लिए घर जा रहा हूँ.

मोहित : पर घर पे क्या कहूं?

अमित : कुछ भी बोल देना. और मैं जब फ़ोन करूँ तो लेने आ जाना.

मोहित ने मुझे मंजू म क घर पर ड्राप कर दिया . वो घर आ चुकी थी शायद कुछ देर पहले hi. मैंने बेल्ल बजायी तो उन्होंने अंदर से hi पहले पूछ

मंजू म : हु इस थिस ?

अमित : आपका स्टूडेंट

मंजू म ने मेरी आवाज़ पहचान ली और एक झटके में hi दरवाज़ा खोल दिया. मुझे सामने देख कर वो वहीँ मेरे गले लग गयी.

मंजू म : तुम आ गए ? मैं तुम्हे कितना मिस कर रही थी. तुम्हे क्लास में देख कर मैंने खुद को कैसे कण्ट्रोल किया ये मैं hi जानती हूँ. इतने दिन मुझे खुद से दूर क्यों रखा ?

अमित : बस इसी लिए

मंजू म : मतलब ?

अमित : मतलब ये क हम दरवाज़े पर खड़े हैं अंदर तो आने दीजिये. ऐसे hi आप सबके सामने करती तो क्या जवाब देता मैं ? वो तो ाचा था उस दिन मोहित था अगर कोई और होता तो ?

मंजू म ने मुझे अंदर खिंच कर दरवाज़ा लोच कर दिया . और फिर से मेरे गले लग कर मुझे किश करने लगी.

मंजू म : मैं कितना तड़प रही थी ये मैं hi जानती हूँ. तुम्हे उस हालत में देख कर मैं कैसे रह सकती थी?

अमित : चिंता मत कीजिये कोई बड़ी चोट नहीं लगी मुझे . और अब पहले से काफी हद तक ठीक हूँ .

मंजू म : बैठो मैं तुम्हारे लिए कुछ लती हूँ.

अमित : आपने लंच कर लिया क्या ?

मंजू म : नहीं , तुमने किया ?

अमित : इसी लिए तो आया हूँ. आज आपके साथ hi लंच करूँगा और शाम तक मैं यहीं हूँ आपके पास. इतने दिन जो आपको दूर रखा आज साडी कसार निकल दूंगा.

मंजू म : स्माइल ) रहने दी अभी तुम पूरी तरह ठीक नहीं हुए.

अमित : मैं उसके लिए नहीं कह रहा . आज बस आपके साथ वक़्त बिताने आया हूँ . और बहुत सी बातें करनी हैं मुझे आपसे .

मंजू म : सच !! मैं खाना बनती हूँ तुम रेस्ट करो फिर बाद में बातें करेंगे.

मैं सोफे पर बैठ गया और मंजू म खाना बनाने लगी . उसके बाद हम दोनों ने साथ में खाना खाया . मंजू म मुझे अपने हाथों से खाना खिला रही थी.

मंजू म : अब बताओ क्या बात करनी है

अमित : आप बताइये , नाराज़ तो नहीं हैं न मुझसे ?

मंजू म : सच कहूं तो पहले मुझे बुरा लगा था क तुम हॉस्पिटल में और मुझे अपने पास आने नहीं दे रहे पर फिर मैं समझ गयी क तुम किस लिए मन कर रहे थे. अब कोई नाराज़गी नहीं. तुम आज न आते तो पक्का गुस्सा करती .

अमित : आपके पास तो आना hi था . आज hi घर से निकला हूँ और देखिये आपके पास हूँ. वैसे अभी मैं बाइक चला नहीं सकता तो मोहित hi मुझे ड्राप कर क गया है.

मंजू म : उसे भी ले आते , वैसे वो भी तो तुम्हारे फॅमिली मेम्बर जैसे hi है.

अमित : हाँ ऐसा hi है मगर उसे ले अत तो जैसे अपने दरवाज़ा खोल कर स्वागत किया है न वो सब समझ जाता.

मंजू म : शरमाते हुए ) ऐसा भी नहीं है कुछ

अमित : ाचा एक बात बताइये , मोंटी या शीना का साइंस क टीचर्स से क्या कनेक्शन है ?

मंजू म : मैं समझी नहीं तुम क्या कहना चाहते हो ?

अमित : मुझे लगता है राधा का किडनैप करने में स्टाफ में से किसी ने उनकी मदद की है . वर्ण इतनी सफाई से बिना किसी को पता चले ये कैसे पॉसिबल है.

मंजू म : तो इसी लिए प्रिंसिपल सर ने उन लोगों को बुलाया था? इसका मतलब कोई बात ज़रूर है . पर मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता . स्टाफ में तो ऐसा कोई नहीं जो उनके लिंक में हो.

अमित : चलिए कोई बात नहीं . शायद कहीं और से पता चल जाये . पर इस बात का पता लगाना ज़रूरी है .

मंजू म : मैं भी कोशिश करुँगी पता करने की. वैसे अब राधा कैसी है?

अमित : वो ठीक है . आप अपनी सुनाओ . मैं सच में ये महसूस कर रहा था क मैं आपको दूर रख कर सही नहीं कर रहा.

मंजू म : जो हुआ सो हुआ अब छोडो उसे . तुम मेरे पास हो इतना hi बहुत है. आओ अंदर चलते हैं यहाँ बैठे बैठे थक जाओगे तुम .

मम मुझे अपने बीएड रूम में ले गयी और मुझे बीएड पर लिटा दिया और खुद मेरे साइन पर सर रख कर लेट गयी.

अमित : आपको ऐसे ाचा लगता है मेरे साथ लेटना?

मंजू म : सच कहूं तो मुझे तुम्हारे ऊपर लेटना ाचा लगता है पर अभी तुम्हारे ज़ख़्म ठीक नहीं हैं तो ऐसे hi ठीक है.

अमित : मुझे भी ाचा लगता है ऐसे आपको बाँहों में लेना.

मैंने मंजू म को अपनी बाँहों में कास लिया तो वो भी किसी छोटी बची की तरह मेरी बाँहों में संकुचित हो गयी. हम दोनों ऐसे hi एक दूसरे की बाँहों में पड़े प्यार भरी बातें करते पता नहीं कब सो गए.

दूसरी तरफ एक बड़े हॉस्पिटल में डॉ क केबिन में बैठ मोंटी वेट कर रहा था अपनी रिपोर्ट की. कल रत जब लाख कोशिश करने क बाद भी मोंटी क लैंड में हल्का सा भी तनाव न आया तो उसे भी टेंशन होने लगी थी क ऐसा कैसे हो सकता है. अपने बाप की तरह वो भी हवस का पुजारी था और पता नहीं किस किस को वो अपने लैंड पर बिठा चूका था और कइयों को निशने पर रखा हुआ था ऐसा करने क लिए .

डॉ : ी ऍम सॉरी मर मोंटी , आपकी प्रॉब्लम कुछ ज्यादा hi बड़ी है.

मोंटी : शॉकेड ) मैं समझा नहीं डॉ आप क्या कह रहे हैं?

डॉ : मेरा कहने का मतलब है क आपके पेनिस में अब कभी तनाव नहीं आएगा .

मोंटी : क्या ???? मगर ऐसे ाचा ये कैसे हो गया मेरा मतलब मैं तो बिलकुल ठीक था और सब कुछ अचे से चल रहा था फिर ये सब अचानक कैसे ?

डॉ : ये तो मुझे भी समझ नहीं आ रही क इसकी वजह क्या है. पर जो रिपोर्ट है उसके मुताबिक आपके पेनिस में ेररक्शन नहीं आएगी . आपकी बॉडी में स्पर्म प्रोडक्शन बंद हो गयी है.

मोंटी क तो पाऊँ टेल से ज़मीन hi निकल गयी थी. उसे समझ नहीं आये था वो क्या करे . उसके कानो ने जो सुना उस पर उसे यकीन नहीं हो रहा था.

मोंटी : डॉ कहीं टेस्ट में तो कोई गड़बड़ नहीं हुई ? आप एक बार फिर से टेस्ट ले लीजिये .

डॉ : कोई गड़बड़ नहीं हुई है मर मोंटी .

मोंटी : तो इसका इलाज कीजिये न डॉ , पैसे परवाह मत कीजिये बस मेरी ये प्रॉब्लम ठीक कर दीजिये.

डॉ : ी ऍम सॉरी मोंटी पर हमारे यहाँ इसका इलाज नहीं है. बल्कि इंडिया में इसका कहीं भी इलाज इतना अचे से नहीं हो सकेगा. हाँ अगर तुम जा सकते हो तो ुक या उसे में इसका ाचा इलाज हो सकता है या फिर जर्मनी में. पर 100 % तो वो भी नहीं कर पाएंगे हाँ तुम शादी करने जितना हो सकते हो.

मोंटी : क्या मतलब.?

डॉ : मतलब क 40-50 % तक hi ठीक हो सकता है वो भी लम्बे इलाज क बाद . जिसके लिए तुम्हे वही रहना पड़ेगा और शायद सर्जरी भी करनी पड़े . पर यहाँ तो इतना भी पॉसिबल नहीं है . फिर भी तुम किसी और से डिसकस करना चाहो तो कर सकते हो. दिल्ली और मुंबई में काफी बड़े बड़े हॉस्पिटल हैं जहाँ लेटेस्ट मचिनेस हैं इलाज है.

डॉ की बातें सुन कर मोंटी काफी निराश हो गया और सर झुकाये वहां से उठ कर वापिस चला आया. कहाँ कल तक वो राधा और नेहा को अपने नीचे लेन का प्लान बना दिया रहा था और आज उसके साथ इतना बुरा हो गया जो उसने कभी सोचा भी नहीं था. मोंटी क बाप क पास पैसों की कोई कमी नहीं थी . पर वो अपने बाप से क्या कहता क उसके साथ क्या हुआ है? मोंटी को कुछ भी सूझ नहीं रहा था क आखिर वो क्या करे. किसे बताये और कैसे बताये . पर इस बात का कोई हल तो ढूंढना hi था. वो कहते हैं न क पडोसी क घर में आग बाद में लगा लेना पहले अपने घर को तो आग से बचा लो. मोंटी क दिमाग से सब बातें निकल चुकी थी . अब बस कोई बात दिमाग में थी तो उसकी डूबती हुई मर्दानगी. मोंटी की हालत ऐसी थी क जैसे उसका सब कुछ जैसे किसी ने लूट लिया हो. मोंटी अपने फार्म हाउस चला गया और अपना फ़ोन बंद कर क खुद को अलग थलग कर लिया पर ये कोई हल नहीं था. फिर उसने इंटरनेट पर अपनी बीमारी क बेस्ट डॉ देखने शुरू कर दिए . और वहां भी रिजल्ट्स वही बता रहे थे जो डॉ ने उसे बताया था . आखिर कर मोंटी ने मन hi मन फैसला कर लिया क वो पहले वो अपना इलाज करवाएगा बाकि सब बाद में. प्रॉब्लम अब ये थी क अपने बाप से वो क्या कहे. इस तरह पड़े बीच में छोड़ कर विदेश जाना वो भी किस ज़रूरी काम क लिए . मगर अब मोंटी क लिए सब से ज़रूरी था अपनी मर्दानगी को बचाना.

इधर मैं और मंजू म सोये पड़े थे क मेरा फ़ोन बजने से हमारी नींद टूटी. फ़ोन मोहित का था .

अमित : हाँ मोहित

मोहित : सो रहा था क्या ? कितनी देर से फ़ोन कर रहा हूँ ? जल्दी से उठ जा मैं तुझे लेने आ रहा हूँ तेरे बाबा आये हैं घर .

अमित : बाबा आये हैं ? ऐसे अचानक ? चल अजा तू मैं तैयार hi हूँ.

मंजू म : क्या हुआ ?

अमित : बाबा आये हैं मुझे जाना होगा. पता hi नहीं चला कब आँख लग गयी

मंजू म : मुझे तो बहुत अछि नींद आयी . तुम्हारी बाँहों में जो सुकून मिलता है वो कहीं भी नहीं मिल सकता . काश क रोज़ ऐसी hi नींद मिले मुझे.

मैंने मंजू म क होंठो पर किश किया तो वो भी प्रतिउत्तर देने लगी. मैंने टाइम देखा तो 5 बजने वाले थे जल्दी से मैं हाथ मुँह धो कर तैयार हो गया.

थोड़ी देर में मोहित बहार आ गया और कार का हॉर्न बजते hi मैं मंजू म से एक बार फिर गले मिला और मोहित क साथ वापिस चल पड़ा. घर ए तो बाबा आंटी क साथ हॉल में hi बैठे हुए थे. मैंने जैसे hi उनके पाऊँ छुए तो उन्होंने उठ कर मुझे गले से लगा लिया.

विजय मां : कैसा है मेरा बीटा ? तूने मेरा सीना गर्व से चौड़ा कर दिया . शाबाश मेरे बचे .

अमित : बाबा आपको किसने बताया ?

विजय मां : तेरी बड़ी मौसी ने बताया है .

अमित : पर मैंने मन किया था सबको . माँ टेंशन ले लेती है

विजय मां : चिंता मत कर उसे नहीं पता बस मुझे पता है घर में. और तू खुद hi बता देना जब घर आएगा. तेरी चोट कैसी है ? कहीं ज्यादा तो नहीं लगी?

अमित : नहीं बाबा मैं ठीक हूँ . बस कमज़ोरी आ गयी थी खून बहने से .

आंटी : आप इसकी चिंता मत करने भाई साहब ये हमारा भी तो बीटा है. हम इसका अचे से ख्याल रख रहे हैं .

विजय मां : तुम लोगों क पास है इसी लिए तो मैं चिंता नहीं करता. राघव इसे अपना बीटा hi तो मंटा है .

अमित : बाबा घर पर क्या बता कर आये हैं?

विजय मां : क्या बताना है ? तेरी माँ को पता है मैं दिव्या क पास हो कर hi अत हूँ जब भी शहर आऊं . अभी भी मैं उसके पास से hi आ रहा हूँ. दोपहर का खाना खाये बगैर आने नहीं देती वो.

बाबा ज्यादा देर नहीं रुके क्यूंकि उन्हें वापिस भी जाना था तो वो चले गए .

शीना जो कॉलेज नहीं जा रही थी और बस अपने कमरे में hi बैठी रहती थी , शिवानी एक अछि दोस्त की तरह उसका साथ निभा रही थी इस घडी में उसके साथ रह कर. शिवानी की बातों से शीना क मन में अमित क लिए और भी जगह बन गयी थी . आज अमित कॉलेज गया था ये बात शिवानी को पता चली तो उसने शीना को भी बताया

शिवानी : शीना कल से हम भी कॉलेज चलते हैं , कितने दिन तक घर बैठी रहेगी ? देख अमित ने भी कॉलेज आना शुरू कर दिया है . तू उससे कॉलेज में तो मिल hi सकती है न. उससे माफ़ी भी मांग लेना , मैं तुम्हारी मदद करुँगी.

शीना : क्या वो सच में कॉलेज गया था? वो इतनी जल्दी ठीक हो गया ? अभी तो उसके ज़ख़्म ठीक भी नहीं हुए होंगे . मैं उससे माफ़ी कैसे मांगूंगी वो तो मेरी शकल भी देखना नहीं चाहता .

शिवानी : उस दिन वो गुस्से में था इस लिए ऐसा कह गया वो. देखा नहीं मुझे भी क्या नहीं कहा उसने. पर वो दिल का ाचा है ज्यादा देर गुस्सा नहीं रहता वो. और फिर मैं हूँ न? मैं बात करुँगी उससे .

शीना : वो माफ़ कर तो देगा न?

शिवानी : हाँ कर देगा , वैसे भी तुमने कहाँ कुछ किया है ? ये सब तो मोंटी hi कर रहा था न और मोंटी का गुस्सा वो तुम पर निकले ये कैसे हो सकता है ?

शीना : क्या सच में मोंटी ऐसा है जैसा तुमने और अमित ने कहा ? मेरा भाई ऐसा कैसे हो सकता है ?

शिवानी : मोंटी ऐसा hi है शीना , साडी सचाई तुम्हारे आगे आ hi जाएगी.

शीना : मैं मोंटी से भी कहूँगी वो अमित से माफ़ी मांगे. उसका एहसान तो मैं कभी चूका hi नहीं सकती . मुझे लगता था क पैसा hi सब कुछ है . पापा का नाम सुनते hi हर कोई हाथ जोड़ देता था तो लगता था क हम कोई राजा महाराजा हैं. पर उस दिन जब मेरी इज़्ज़त उतरने वाली थी तो एहसास हुआ क हम असल में कुछ नहीं हैं . इंसान क हालत कब बदल जाएँ कोई कुछ नहीं जनता . मैं उस दिन बिना कपड़ों क नंगी बिस्टेर पर पड़ी थी जहाँ वो सब गुंडे मुझे नोचने वाले थे मगर अमित ने एक बार भी मुझे नहीं देखा. मैंने आज तक एक भी लड़का ऐसा नहीं देखा जो लड़कियों बुरी नज़र से न देखता हो और इसने तो मुझे नंगी होते हुए भी नहीं देखा. कहा लोग कपड़ों क ऊपर से hi मेरी खूबसूरती को खा जाने वाली नज़रों से ताड़ते रहते हैं और उसने जैसे मुझे इस काबिल भी नहीं समझा क एक बार देख ले.

शिवानी : वो सब से अलग है शीना . क्या मैंने कोशिश नहीं की थी उसे सडके करने की ? मगर वो तब भी नहीं पिघला था.

शीना : वो ऐसा क्यों है ? देखने में इतना हैंडसम और ताकत भी कितनी है. हिम्मत वाला भी है जो अकेला सब से भीड़ गया . फिर वो लड़कियों से दूर क्यों रहता है ? उसे देख कर तो कोई भी लड़की उसे दिल दे बैठेगी .

शीना मन में यद् करने लगती है अमित का वो बलशाली बदन जो शीना ने उस दिन देखा था जब अमित ने अपनी T-shirt निकल कर राधा को पहना दी थी. कितना छोड़ा सीना था और शरीर जैसे मांस से गुंडा हुआ . मजबूत कंधे और बाज़ुओं में बड़ी बड़ी मचियाँ साबुत थे क जिस्म में कितनी ताकत होगी और हठी जैसे भरी भरकम इंसान को उठा कर पटकना भी जैसे अनहोनी सी बात थी.

शिवानी : कहूं तू भी तो उस पर फ्लैट नहीं हो गयी ?

शीना जो अपने ख्यालों में hi अमित को देख रही थी शिवानी की उस बात पर हड़बड़ा गयी.

शीना : न न नहीं तो , मैं तो ा ऐसे hi कह रही थी.

शिवानी : वो सच में एक आइडियल है और जैसे उसके विचार हैं , क्या कहूं यार . काश क वो मुझे पहले मिला होता . बहुत लकी होगी वो लड़की वो जिसे चाहेगा.

शीना शिवानी की इस बात पर फिर से अमित क बारे में hi सोचने लगी . शिवानी की हर बात जो अमित से जुडी होती थी वो शीना को अमित क प्रति आसक्त करती जा रही थी .

इधर मैं घर पर hi रहा क्यूंकि अभी मैं स्टेडियम जाने और प्रैक्टिस करने क काबिल नहीं था तो घर पर hi रेस्ट करता रहा. फ़ोन पर सब से बात कर क मैंने सबका हलचल जाना . दीपिका ममी और माँ मुझे बहुत मिस कर रही थी वहीँ करुणा दीदी और नैना दीदी मुझसे जल्द मिलना चाहती थी . जब से मैं हॉस्पिटल से घर आया था उनसे मुलाकात नहीं हुई थी . रीता मौसी तो मुझे ु के घर आने का कह रही थी . रत का खाना खाने क बाद मैं रूम में आराम कर रहा था तो राधा का फ़ोन आ गया और कुछ देर उससे बात करने क बाद मैं अभी सोने की तयारी कर रहा था क रीमा का भी फ़ोन आ गया .

रीमा : मैंने डिस्टर्ब तो नहीं किया ?

अमित : बिलकुल नहीं , वैसे भी मैं जल्दी नहीं सोता. तुम क्या कर रही थी ?

रीमा : तुम्हे यद् कर रही थी

अमित : मुझे ? वो क्यों भला ?

रीमा : यद् तो तुम्हे हर पल हर रोज़ hi करती हूँ पर आज तुमने जैसे मुझे गले लगाया वो पल अभी भी मैं महसूस कर रही हूँ. ये किसी सपने की तरह लग रहा है मुझे. क्या सच में ऐसा हुआ था न ?

अमित : मैंने कब गले लगाया तुम्हे ?

रीमा : क्या ?? इसका मतलब मैं सपना देख रही थी ? सपना hi होगा मैं तो लाइब्रेरी में थी .

अमित : मुझे क्या पता

रीमा : लगता है मुझे अब खुली आँखों से भूल तुम्हारे सपने आने लगे हैं

अमित : इसका मतलब तुम पहले भी मेरे सपने देखती हो?

रीमा : हम्म , तुमसे हकीकत में बात तो कर नहीं पति थी तो अक्सर सपने में hi बात होती थी

रीमा की ये बात सुन कर मुझे एहसास हुआ क वो मुझे किस कदर चाहती है और मैंने उसे बिना वजह hi इतनी बड़ी सजा दे दी

अमित : ी ऍम सॉरी रीमा मैंने तुम्हे बहुत दुःख दिया न

रीमा : बार बार सॉरी क्यों कहते हो? अब तुम मुझे मिल गए हो न तो मैं सब भूल गयी हूँ अगर न मिलते तो शायद मैं खुद को hi भूल जाती

अमित : ऐसा मत कहो रीमा , ऐसा मत कहो . मैं अब कभी तुम्हे दुःख नहीं दूंगा. मैं वो पल वापिस तो नहीं ला सकता हो तूने दुःख में गुज़ारे हैं मगर अब तुम्हे और दुखी नहीं होने दूंगा.

रीमा : मुझे बस तुम और तुम्हारा प्यार चाहिए. एक छोटा सा कोना अपने दिल में मुझे दे देना और कुछ मैं नहीं मांगती. तुम्हारे लिए मैं उम्र भर इंतज़ार करने को तैयार हूँ .

अमित : ऐसा नहीं होगा , पर मुझे लगता है मैं तुम्हारे प्यार क लायक नहीं हूँ.

रीमा : ऐसा क्यों कह रहे हो?

अमित : मैंने तुम्हे बताया था न क मैं पहले भी किसी से प्यार कर चूका हूँ और इसके इलावा भी मेरी ज़िन्दगी में कोई है.

रीमा : मैं जानती हूँ तुम कभी किसी को धोखा नहीं दे सकते इस लिए मुझे ये सब बता रहे हो. मुझे कोई परवाह नहीं क तुम्हारी ज़िन्दगी में कौन है , मुझे बस अपने लिए प्यार चाहिए. और मैं जानती हूँ तुम कभी गलत नहीं करोगे , जो भी तुम्हारी लाइफ में है वो ज़रूर कोई खास hi होगा जिसे तुम्हारी ज़रूरत होगी . तुम कभी किसी क साथ गलत रिश्ता नहीं बना सकते मैं जानती हूँ.

अमित : क्या इतना भरोसा है मुझ पर ?

रीमा : अपने से भी ज्यादा.

अमित : अगर कभी कोई ऐसी बात तुम्हे पता चले जो तुम्हे बुरी लगे तो ?

रीमा : तो क्या ? चाहे कुछ भी हो मैं तुम्हे नहीं छोडूंगी. अब बताओ क्या सच में मैंने सपना देखा था या तुमने सच में मुझे गले से लगाया था .

अमित : वो सब सच था और अगर फिर भी यकीन न आये तो कल फिर से गले लगा लूँ क्या सबके सामने?

रीमा : ऐसा मत करना , क्या कहेंगे सब . मीनल और राधा तो मेरी क्लास में hi हैं. और कल्पना भी तो काम नहीं. वैसे क्या वो लड़की कल्पना है ?

अमित : नहीं कल्पना सिर्फ मेरी दोस्त है. वो बहुत अछि है और सच कहूं तो उसके होते मुझे परवाह नहीं राधा और नेहा दीदी की. उन दोनों को उसी क भरोसे तो छोड़ा हुआ है अकेले.

रीमा : फिर तो वो बहुत खास है. वैसे मैं कुछ कहूं?

अमित : कहो

रीमा : मोंटी और शीना .......

अमित : मैं उनके बारे में कुछ नहीं सुन्ना चाहता कोई और बात करो

रीमा : पर मैं ....

अमित : प्लीज रीमा मैं उनके बारे में कुछ सुन्ना नहीं चाहता

रीमा : ाचा ठीक है. एक बात कहूं?

अमित : उन दोनों क इलावा कोई और बात है तो कहो

रीमा : धीमी आवाज़ में ) ी लव यू

अमित : ??????

रीमा : चुप क्यों हो ? बोलो

अमित : क्या बोलूं ?

रीमा : कुछ भी

अमित : क्या कुछ भी ?

रीमा : जो मैंने कहा उस का जवाब hi देदो

अमित : तुम्हे अभी भी जवाब चाहिए ?

रीमा : हम्म्म

अमित : अल्फ़ाज़ों से बयान क्या करें हम चाहत अपनी ,, कभी दिल में उतर कर धड़कनों से पूछ क वो बेकरार कितनी हैं.

रीमा : भरी गले से ) ी लव यू , ी लव यू , ी लव यू सूऊऊ मच. प्लीज मुझे कभी खुद से अलग मत करना कभी भी नहीं.

अमित : कभी भी नहीं . और मुझे तुम मुस्कुराती हुई अछि लगती हो ऐसे रोना धोना ाचा नहीं लगता मुझे.

रीमा : मैं कहाँ रो रही हूँ . ये तो ख़ुशी से ऐसा हो रहा है

अमित : तुम्हे जवाब मिल गया न ? अब खुश हो ?

रीमा : बहुत ज्यादा, काश इस वक़्त तुम मेरे सामने होते तो

अमित : तो क्या ?

रीमा : कुछ नहीं

अमित : बताओ न

रीमा : तुम्हारे गले लग जाती

अमित : और फिर ?

रीमा : कुछ नहीं बस इतना hi .

अमित : लगता है तुम्हे बहुत कुछ सीखना पड़ेगा.

रीमा : मुझे कुछ नहीं सीखना

अमित : ऐसे कैसे नहीं सीखना , मेरी गफ हो तो तुम्हे सब आना चाहिए न.

रीमा : ाचा ? ये ज़रूरी है क्या ?

अमित : और नहीं तो क्या , वर्ण सब कहेंगे क मैंने तुम्हे कुछ सिखाया नहीं

रीमा : तो तुम सबको बताने वाले हो? नेहा दीदी और राधा को भी

अमित : पागल हो क्या उनको पता चला तो सबको पता चल जायेगा. मैं तो मोहित को भी नहीं बताऊंगा क्यूंकि वो मीनल को बता देगा और फिर बात सब को पता चल जाएगी.

रीमा : मैं भी नहीं चाहती क किसी को पता चले वर्ण सब बातें करेंगे.

अमित : ठीक है अब हमें सो जाना चाहिए कल कॉलेज मिलते हैं .

रीमा : मुझे तो अब नींद hi नहीं आएगी

अमित : वो क्यों भला?

रीमा : तुमने अभी अभी जो कहा है वो मुझे सपना सा hi तो लग रहा है कहीं मैं सो कर उठूं और ये सपना टूट जाये तो?

अमित : ऐसा नहीं होगा. तुम जितनी बार कहोगी उतनी बार तुम्हे ी लव यू कहूंगा . कल अगर मुझे मिलना है तो अब सोना पड़ेगा और क्या पता सपना में फिर से मुलाकात हो जाये.

रीमा : ठीक है जैसा तुम कहो . ी लव यू गुड नाईट

अमित : ी लव यू 2 गुड नाईट एंड स्वीट ड्रीम्स

उसके बाद रीमा से मेरी बात ख़त्म हुई . रीमा से बात कर क मुझे ाचा लग रहा था. मुझे उससे बात करते हुए उसका निर्मल प्रेम महसूस हो रहा था. उसे मुझ पर बहुत विश्वास है और पता नहीं मैं उसके काबिल हूँ क नहीं मगर उसने खुद hi कहा क उसे फरक नहीं पड़ता क मेरा किसी और क साथ भी कोई रिश्ता है .

खैर उसके बाद मैं सो गया अगले दिन भी सुबह का नाश्ता करने क बाद हम दोनों एक साथ कॉलेज क लिए चल दिए.

फ्री लेक्चर में हम सब कैंटीन में बैठे थे. आज रीमा कल से कहीं अछि लग रही थी . हम सब बातों में लगे थे क वहां शिवानी और शीना दोनों आ गए . शीना को देख कर मुझे फिर से गुस्सा आ गया . मैं उठ कर पहले hi उनके पास पहुँच गया. बाकि साब मुझे इस तरह उठ कर जाता देखने लगे मगर अगले hi पल जब उनकी नज़र शीना पर पड़ी तो वो समझ गए.

शिवानी : अमित कैसे हो ? मुझे पता है तुम्हे ाचा नहीं लग रहा होगा पर क्या शीना को एक मौका नहीं दे सकते तुम ? वो सच में शर्मिंदा है. एक बार उसकी बात सुन लो उसे माफ़ कार्डो .

अमित : मैंने तुमसे पहले भी कहा था क मैं इसकी शकल भी देखना नहीं चाहता . इसे कहो चली जाये यहाँ से.

शीना : प्लीज ऐसा मत कहो . मैं बहुत शर्मिंदा हूँ एक बार मुझे माफ़ कर दो प्लीज. गलतियां सब से होती हैं , मैंने भी गलतियां की हैं पर क्या अब मुझे अपनी भूल सुधरने का मौका भी नहीं डोज तुम? प्लीज एक बार माफ़ कार्डो , तुम कहो तो तुम्हारे पाऊँ पद जाती हूँ .

अमित : बंद करो ये नाटक , तुम पैसे वाले लोग बस पैसे को hi सब कुछ मानते हो. बहुत घमंड है न तुम्हे पैसों का इसी लिए किसी को कुछ समझती नहीं हो. क्या कहती हो तुम मुझे , हाँ ‘देहाती ‘ अब इस देहाती से माफ़ी मांगने में इज़्ज़त काम नहीं हो रही तुम्हारी ? जाओ जा कर किसी और को बेवक़ूफ़ बनाओ. एक बार पहले भी मुझे तुम लोग बेवक़ूफ़ बना चुके हो अब मैं तुम्हारे झांसे में नहीं आने वाला

शीना हाथ जोड़ती हुई घुटनो पर बैठ गयी . सब लोग शीना को hi देखने लगे और वो रो रो कर मुझे माफ़ी मांगने लगी.

शीना : मैं कसम कहती हूँ मैं अब बदल गयी हूँ , मैं पहले जैसी नहीं रही. प्लीज माफ़ कार्डो मुझे . तुम जो कहोगे मैं करुँगी एक बार मुझे माफ़ कार्डो.

शीना को देख कर सब हैरान थे मुझे भी लग रहा था क ये कुछ ज्यादा hi हो रहा है . वो शीना जो किसी से सीधे मुँह बात नहीं करती थी आज सबके सामने घुटनो पर बैठी मुझसे माफ़ी मांग रही थी . मैं कुछ कहता उससे पहले राधा जाने कब हमारे पास आ गयी .

राधा : दीदी आप उठिये नीचे से , अमित ने आपको माफ़ किया. प्लीज आप चुप हो जाइये.

राधा ने जब शीना को ऐसा कहा तो उसके आंसू थम गए ुर वो कभी राधा को कभी मुझे देखने लगी . मैं भी राधा की इस बात पर हैरत से उसे देख रहा था . राधा ने वही कहा था जो मैं चाहता था पर मैं कह नहीं पता शायद . मेरे दिल की बात राधा ने समझ ली थी.

अमित : ये तुम क्या कह रही हो राधा ? तुम्हे पता भी है तुम्हारे साथ जो कुछ भी हुआ उसमे इसका hi हाथ था .

राधा : मुझे बस इतना पता है क ये अपने किये पर शर्मिंदा हैं और ये तुम भी जानते हो. गलतियां सब से होती हैं पर सुधरने का मौका तो सबको मिलना चाहिए न. वैसे भी उस दिन उनके साथ भी तो वही सब होने वाला था न. शायद इन्हे समझ आ गयी है क ये क्या कर रही थी. अब तुम भी इन्हे एक बार अपने मुँह से कह कर माफ़ी दे दो.

अमित : मगर राधा

नेहा दीदी : राधा ठीक कह रही है , माफ़ कार्डो इसे. मेरे अछि भाई हो न तुम . माफ़ कार्डो इसे.

अमित : ठीक है पर इसे केहदो क वो उन सब से माफ़ी मांगे जिनके साथ इसने और इसके भाई ने बुरा किया है तब जाकर मैं इसे माफ़ करूँगा .

शीना : मैं सब से माफ़ी मांगूंगी. जिससे कहोगे मैं माफ़ी मांगूंगी . प्लीज एक बार अपने मुँह से कह दी तुमने मुझे माफ़ किया .

अमित : राधा ने अभी कहा न क मैंने माफ़ किया तो किया . पर तुम्हे सब से माफ़ी मांगनी होगी . जिस किसी क साथ भी तुमने गलत किया है.

शीना : थैंक यू वैरी मच , मैं अब कभी कोई गलत काम नहीं करुँगी. तुम सच में बहुत अचे हो . थैंक यू वैरी मच . तुमने उस दिन मेरे लिए जो किया मैं उसका एहसान कभी नहीं चूका सकती .

अमित : तुम्हारी जगह कोई भी होता तो मैं ऐसा hi करता. लड़कियों की इज़्ज़त की हिफाज़त करना मर्द की ज़िम्मेदारी है. अफ़सोस क कुछ लोग औरतों लड़कियों की इज़्ज़त से खेलना hi मर्दानगी समझते हैं जैसे क तुम्हारा भाई

शीना : मैं उसे भी समझाउंगी और तुम से माफ़ी मँगवाउंगी .

अमित : खुद को सुधर लो इतना hi बहुत है. रही बात मोंटी की तो वो कभी नहीं सुधरने वाला. जो अपनी बहिन का इस्तेमाल कर सकता है किसी क बहिन को उठाने क लिए वो कितना घटिया होगा तुम अंदाज़ा भी नहीं लगा सकती. ज़रा एक बार शालू से मिल लेना वो बेहतर बता देगी तुम्हे तुम्हारे घटिया भाई क बारे में.

इतना कह कर मैं नेहा दीदी और राधा को लेकर वापिस अपनी जगह पर आ गया. मैंने देखा क रीमा की आँखों में आंसू थे . शायद वो अपनी बहिन क साथ मेरे ऐसे बिहेवियर से दुखी थी.

अमित : ी ऍम सॉरी रीमा , पर शीना ने जो किया है उसकी वजह से मैं उस पर गुस्सा था .

रीमा : ये तो होना hi था बूत ी ऍम हैप्पी क वो अब बदल रही हैं.

अमित : वैसे मुझे लगता है तुम्हे होनी बहिन क पास जाना चाहिए इस वक़्त. वो काफी दुखी लग रही है. उसे सम्भालो जा कर.

रीमा : तुम बहुत अचे हो सबका सोचते हो. मैं जाती हूँ bye .

रीमा उठ कर बहार चली गयी जिधर शीना और शिवानी गयी थी. रीमा क जाते hi सब फिर से मुझे देखने लगे .

अमित : अब क्या हुआ?

कल्पना : रियली यू अरे तू गुड. शीना को तुमने सच में माफ़ भी कर दिया और अब उसकी परवाह भी कर रहे हो .

मीनल : सही कहा यार , मुझे तो लगा था क इतनी आसानी से नहीं मानोगे तुम.

राधा : स्माइल ) ऐसा hi है अमित , किसी से ज्यादा देर नाराज़ नहीं रह सकता ये . जब वो नीचे बैठी रो रही थी तभी इसने उसे माफ़ कर दिया था बाद ऊपर ऊपर से गुस्सा दिखा रहा था.

अमित : तुम्हे कैसे पता ?

राधा : बस महसूस किया मैंने , किसी लड़की की आँखों में आंसू नहीं दे सकते न तुम , स्पेशलय जब वो तुम्हारी वजह से हो

नेहा दीदी : मेरा भाई लाखों में एक है. काश हर कोई तुम्हारे जैसा होता तो दुनिया कितनी अछि होती .



कल्पना : ये एक hi ओने एंड ओनली पीेछे है वर्ण मैंने तो आज तक नहीं देखा ऐसा अजूबा हे हे हे
 
भाई लोगो आज बहुत भाग दौड़ रही इस लिए लिख नहीं पाया कल कोशिश करूँगा और वैसे तो कल का भी दिन भागदौड़ रहने वाली है
 
भाई ज़रूरी काम से बहार आया हूँ आउट ऑफ़ स्टेट कल कोशिश रहेगी अपडेट देने की
 
अपडेट 131



कैंटीन से निकलने क बाद शीना क दिल में अब एक सुकून सा था क अमित ने उसे माफ़ कर दिया मगर मोंटी क बारे में कही गयी बात उसे परेशां कर रही थी और अमित ने जिस तरह शालू का ज़िकर किया वो भी एक सवाल की तरह hi था . शालू तो मोंटी की. दीवानी थी शीना की नज़र में और अब वो एक चालू लड़की बन चुकी थी ैसकफजा. शीना सोचती थी मगर अब उसे लगने लगा क कुछ और भी है जो उसे नहीं पता. शीना को अमित ने उन सबसे माफ़ी मांगने को कहा था जिसके साथ भी उसने बुरा किया तो उसने शुरुआत शालू से hi करने का सोचा क्यूंकि शालू क साथ भी तो वो हमेशा गलत hi सलूक करती आयी थी आज तक. उसे 2 टेक की चालू लड़की समझ कर पता नहीं क्या क्या सुना देती थी वो. दूसरा मोंटी की क्या कहानी है ये भी उसे जानना था. शीना शिवानी क साथ जा रही थी क पीछे से रीमा ने आ कर उसके कंधे पर हाथ रखा .

रीमा : दीदी आप ठीक तो हैं ?

शीना : नाम आँखों से ) मैं ठीक हूँ रीमा , तू कैसी है ? आज इतने दिनों बाद मुझसे बात करने का टाइम मिला तुझे मेरी बहिन?

रीमा : ी ऍम सॉरी दीदी मैं भी कैच अपसेट थी इस लिए आप से बात नहीं करती थी. पर आपका ये नया रूप देख कर मुझे ाचा लगा. मगर आप ऐसे रोटी अछि नहीं लगती . प्लीज आप चुप हो जाइये.

शीना : ये आंसू बह लेने दे मेरी बहिन . अमित ने मुझे एहसास दिलाया क मैं झूठे घमंड में खुद को दूसरों से ऊँचा समझती थी और सबकी इंसल्ट करती थी. मुझे मेरी गलतियां सुधारनी होंगी और अब मैं वही करने वाली हूँ. तुम मेरी चिंता मत करो मेरे साथ मेरी बेस्ट फ्रेंड शिवानी है न. यू अरे लकी क तुम उसकी दोस्त हो . मैं पूरी कोशिश करुँगी क मैं सब ठीक कर सकूँ और तुम्हारी तरह उसकी दोस्ती क काबिल बन सकूँ . तुम जाओ मुझे अभी बहुत से काम करने हैं.

रीमा : बेस्ट ऑफ़ लक दीदी एंड ी लव यू, काश क मोंटी भैया भी आप जैसे समझ सकें .

उसके बाद शीना शिवानी को लेकर शालू को ढूंढने लगी. शालू जो पहले मोंटी क हाथों की कठपुतली थी और उसके ग्रुप क साथ रहती थी. अब वो अमित क कहने क बाद से उन सब से अलग हो कर फिर से पड़े पर ध्यान देने लगी थी और खुद को संभल रही थी. शीना ने शालू को हर ठिकाने पर चेक किया तो वो कहीं नहीं मिली और लास्ट में जब किसी से पता चला तो वो उससे मिलने लाइब्रेरी में hi चली गयी . लाइब्रेरी में हमेशा की तरह काम hi स्टूडेंट्स थे और शालू सब से अलग बैठी पद रही थी . शीना ने जब उसे पड़ते हुए देखा तो बिना किसी आवाज़ क चुपचाप वो उसके पास चली गयी.

शीना : कैसी हो शालू ?

शालू ने नज़र उठा कर एक बार शीना को देखा और फिर आसपास ऐसे देखा जैसे चेक कर रही हो क शीना किसके साथ आयी है. मगर मोंटी को वहां न पाकर वो कुछ रिलैक्स हो गयी

शालू : मैं ठीक हूँ पर तुम आज मेरे पास कैसे ?

शीना : मुझे माफ़ कर दो शालू ी वास् सो रौदे . मैंने आज तक पता नहीं तुम्हे क्या क्या कहा है और कितनी बार तुम्हारी इंसल्ट की है. मैं जानती हूँ ये इतना आसान नहीं है पर क्या तुम मुझे माफ़ करोगी .

शालू तो जैसे शॉकेड hi हो गयी सुन कर जो कुछ भी अभी शीना ने कहा था .

शालू : शॉकेड ) तुम होश में तो हो या फिर कोई ड्रामा कर रही हो मेरे साथ. देखो मुझे पड़ने दो , तुम तो बड़े घर की लड़की हो तुम्हे फरक नहीं पड़ता मगर मेरे लिए ये बहुत ज़रूरी है .

शीना. :मैं कोई ड्रामा नहीं कर रही शालू प्लीज मैं बहुत शर्मिंदा हूँ. मैंने जाने अनजाने तुम्हारा बहुत दिल दुखाया है . प्लीज एक बार मुझे माफ़ कार्डो . जब तक तुम मुझे माफ़ नहीं करती मुझे चैन नहीं आएगा.

शालू : है है है , लगता है कोई नशा कर क आयी हो तुम वर्ण तुम मुझसे माफ़ी मानगो? शीना किसी से माफ़ी मांगे हाउ it’s पॉसिबल? शिवानी शीना को ले जाओ यार वर्ण कल ये मुझे कॉलेज क सामने इंसल्ट करेगी. क्या कहती हो तुम मुझे ,, हाँ 2 टेक की चालू लड़की और मुझसे माफ़ी मांग रही हो.

शिवानी : शालू प्लीज शीना सच में माफ़ी मांगने आयी है.

शालू : तुम भी शुरू हो गयी. भाई मैं हाथ जोड़ती हूँ मुझे बक्श दो या फिर मैं खुद hi उठ कर चली जॉन . कहीं मोंटी को पता चल गया तो मेरी सहमत आ जाएगी.

शीना : आंसू बहते हुए ) प्लीज शालू मेरी बहिन मुझे माफ़ करदे. मैं मानती हूँ मैं बहुत गलत थी हमेशा से पर आज मैं अपनी हर गलती की माफ़ी मांगने आयी हूँ. और मुझे तुमसे कुछ और भी जानना है.

शालू : तो अब आई न असली बात बहार. बताइये मैडम मैं क्या सेवा कर सकती हूँ.

शीना : ऐसा मत कहो शालू , मुझे और शर्मिंदा मत करो. मैं हमेशा से तुम्हे गलत समझती आयी हूँ क्यूंकि मोंटी की बातों से मुझे ऐसा लगा था क तुम ऐसी लड़की हो मगर किसी ने मुझे कहा है क तुम्हारे साथ मोंटी ने गलत किया है . मुझे बताओ तुम्हारे साथ क्या हुआ है ? मैं मोंटी की तरफ से भी माफ़ी मांगती हूँ और जो तुम कहोगी मैं करुँगी.

शालू : शॉकेड ) किस ने कहा ये तुमसे ?

शीना : तुम पहले मुझे माफ़ करो फिर मैं बताउंगी.

शालू : जिसने तुमसे ये कहा है उसी से पूछ लो फिर जा कर क क्या किया है मोंटी ने.

शीना : उसने भी नहीं बताया , प्लीज मेरी बहिन मुझे माफ़ कार्डो और मोंटी ने क्या किया है मुझे बताओ.

शालू : मन में) कहीं शीना को किसी ने बता तो नहीं दिया मेरे बारे में? पर ऐसा कौन कर सकता है? मोंटी का कोई साथी तो ऐसा करेगा नहीं फिर कौन? और तो किसी को पता भी नहीं . ये बात तो सिर्फ मैंने अमित ..... तो इसका मतलब अमित ने शीना को बताया है !! . तभी मैं सोचूं ये माफ़ी क्यों मांग रही है. ज़रूर अमित ने hi कुछ ऐसा किया है जिससे शीना आज भीगी बिल्ली बानी हुई है. हमेश मुझे ज़लील करने वाली आज मुझसे माफ़ी मांग रही है. यू अरे सो स्पेशल अमित काश....

शीना : प्लीज कुछ तो बोलो शालू

शिवानी : शालू प्लीज हमें बताओ क मोंटी ने तुम्हारे साथ क्या किया है? शीना सच में दिल से माफ़ी मांगने आयी है तुमसे . क्या तुम माफ़ नहीं करोगी?

शालू : नाम आँखें ) अगर तुम सच में दिल से माफ़ी मांगने आयी हो तो मैं भी तुम्हे माफ़ करती हूँ. रही बात मोंटी की तो मैं उसे कभी माफ़ नहीं कर सकती , कभी नहीं. तुम दोनों चली जाओ यहाँ से. मैं तुम्हे कुछ नहीं बता सकती. जिसने तुम्हे यहाँ भेजा है जाओ उसी से पूछो क क्या किया है मोंटी ने मेरे साथ . एक वो hi है जो सब सचाई जनता है.

इतना कह कर शालू आंसू बहते हुए उठ कर चली गयी.

शीना : आखिर मोंटी ने ऐसा क्या किया है जो शालू बताना भी नहीं चाहती और उसे माफ़ भी नहीं कर सकती . ज़रूर कुछ बुरा हुआ है शालू क साथ मगर अब किस्से पूछूं. शालू ने तो कहा है क जिसने मुझे यहाँ भेजा है उसी से पूछूं वो hi सब सच जनता है. इसका मतलब अमित को सब पता है.

शिवानी : इसी लिए तो उसने तुम्हे यहाँ भेजा है . मगर मुझे नहीं लगता बिना शालू क वो कुछ बताएगा. वो शालू की कोई बात उसकी मर्ज़ी क बगैर नहीं बताएगा. वो ऐसा hi है , किसी क साथ गलत नहीं करता.

शीना : अब क्या करूँ मैं ?

शिवानी : मेरे ख्याल से तुम्हे राधा से बात करनी चाहिए. एक वो hi है जिसकी बात अमित नहीं ताल सकता. देखा नहीं तुमने क कैसे राधा ने तुम्हे माफ़ कर दिया और अमित ने भी मन लिया .

शीना : तुम ठीक कह रही हो. वो भी बहुत अछि है. इतना कुछ होने क बाद भी उसने मुझे कुछ नहीं कहा. मुझे उससे बात करनी चाहिए. और उससे माफ़ी भी मांगूंगी मैं.

लेक्टर्स ख़तम होने क बाद हम तीनो साइंस ब्लॉक में जा रहे थे क मेरा फ़ोन बजने लगा. मैंने देखा तो रुपाली का फ़ोन था. रुपाली ने कहा था क वो खुद मुझे फ़ोन करेगी जब उसके हाथ मोंटी का लैपटॉप आ जायेगा. इसका मतलब क काम हो गया. मैं अंदर से ख़ुशी से नाच उठा. मैंने तुरंत फ़ोन उठाया.

अमित : hello

रुपाली : कहाँ हो तुम?

अमित : आपके दिल में.

रुपाली : बकवास मत करो. मैंने इस लिए फ़ोन किया है क तुमने जो कहा था मैंने कर दिया है. अब बताओ कब मिलोगे मुझसे?

अमित : तो आपको लैपटॉप मिल गया? ग्रेट. आप बताइये कब मिलना चाहेंगी ?

रुपाली : कल 11 बजे

अमित : ठीक है , वहीँ मिलना है ?

रुपाली : नहीं , वो फ्लैट मेघा का है. किसी और जगह .

अमित : किसी होटल में ?

रुपाली : नहीं मैं होटल में नहीं जाती. कोई और जगह बताओ

अमित : खुले में मिलना सही नहीं रहेगा . आप एक काम कीजिये मैं आपको एक एड्रेस भेजता हूँ आप वहां आ जाइएगा.

रुपाली : ठीक है मगर वो वीडियो कल मुझे चाहिए और उसके बाद तुम कभी मुझे परेशां नहीं करोगे.

अमित : ठीक है कल आखिरी बार मैं आपसे मिलूंगा उसके बाद नहीं .

रुपाली : ok कल मिलते हैं .

मोहित : कौन था बे?

अमित : कुछ नहीं यार एक काम कहा था मैंने किसी को बस कल वो हो जायेगा तो उसी क बारे में बात कर रहा था.

कल्पना : पर तुम तो टाइम सेट कर रहे थे किसी क साथ मिलने का? और होटल का भी सुना था मैंने.

अमित : ो लेडी जेम्स बांड काम हो जाये उसके बाद सब बता दूंगा अभी चुप रहो .

इतने में शिवानी और शीना दोनों हमारे पास आ गयी .

अमित : अब क्यों आयी हो यहाँ ?

शीना : मैंने शालू से माफ़ी मांग ली है और उसने मुझे माफ़ भी कर दिया है मगर उसने कुछ नहीं बताया मोंटी क बारे में. उसने कहा क जिसने भेजा है उसी से पूछो .

अमित : मुझे पता था क वो तुम्हे माफ़ कर देगी . क्यूंकि वो तुम्हारी तरह नहीं है. वो एक बहुत hi अछि लड़की है जिसके साथ तुम्हारे भाई ने वो किया है जो वो बता hi नहीं सकती . और मैं भी ऐसी बातें करना नहीं चाहता मगर तुम्हे साबुत क साथ सब दिखाऊंगा वर्ण तुम्हे यकीन नहीं होगा क तुम्हारा भाई कितना घटिया इंसान है . इंसान नहीं जानवर है . अब चली जाओ यहाँ से.

शीना : प्लीज अब तो मुझे माफ़ कर दो.

अमित : मैं तुम्हे माफ़ कर चूका हूँ अब जाओ यहाँ से.

शीना : अगर माफ़ कर दिया है तो क्या हम दोस्त नहीं बन सकते ?

अमित : दोस्त , वो भी मैं हँ . जाइये मेम साब कोई अमीर लड़का जो आपके लेवल का हो उसे ढूंढिए. हम जैसे मामूली लोग आपकी शान पर सिर्फ एक धब्बा हैं. मेरे जैसे कितने 2 कोड़ी क लोग आपकी फैक्ट्री में काम करते होंगे ,जाइये यहाँ से.

शीना : प्लीज अब ऐसी बातें तो न करो , मैं माफ़ी मांग चुकी हूँ न. तुम जो कहोगे मैं करुँगी पर प्लीज मुझे ....

अमित : देखो तुम टाइम ख़राब कर रही हो. मैंने कहा न क मैंने तुम्हे माफ़ किया तो बात ख़तम. मुझे तुमसे और कुछ नहीं कहना. दोस्ती हम ख्याल लोगों से होती है. यही एक रिश्ता है जो इंसान खुद बनता है बाकि सब तो हमें जनम से और हालातों से मिलते हैं. तुम भी कोई अपने जैसा ढूंढो.

इतने में बेल्ल बज गयी और नेहा दीदी राधा मीनल रीमा सब आ गए. शीना ने उनके आते hi राधा क आगे हाथ जोड़ दिए और उससे माफ़ी मांगने लगी .

शीना : प्लीज राधा फॉरगिव में. मैंने तुम्हारे साथ बहुत गलत किया है. मुझे माफ़ कर दो. जब तक तुम माफ़ नहीं करोगी अमित कभी मुझे अपना दोस्त नहीं मानेगा. प्लीज राधा .

राधा : अरे अरे दीदी ये आप क्या कह रही हैं ? मुझे तो आपसे कोई शिकायत नहीं है . आप क साथ भी तो वही सब हुआ न जो मेरे साथ हुआ तो आपसे कैसा गिला . आप ऐसे hi चिंता कर रही हैं . अमित ने भी आपको माफ़ कर दिया न फिर क्यों ऐसा कर रही हैं आप ?

शीना : मगर वो मुझे अपना दोस्त नहीं बना रहा . उससे कहो न क मुझे भी अपना दोस्त बना ले.

शीना की इस बात पर राधा मेरी तरफ देखने लगी मगर उसने मुझसे कुछ कहा नहीं. राधा जानती थी क मैं क्यों ऐसा कर रहा हूँ और कहीं न कहीं वो भी अंदर से यही चाहती थी क मैं शीना मोंटी से दूर रहूं .

नेहा दीदी : अमित , जब कोई अपनी गलती मन ले तो उसे सुधरने का मौका ज़रूर देना चाहिए. हो सकता है क वो हमेशा क लिए सही रस्ते पर आ जाये .

अमित : और अगर पिछली बार की तरह दोस्ती की आड़ में कोई और इलज़ाम मेरे ऊपर लगा तो क्या वो आपको मंज़ूर होगा ?

मेरे इस सवाल से नेहा दीदी चुप हो गयी . मैं एक नज़र शिवानी को देख कर पलट गया मगर एक एक मेरी नज़र एक टीचर पर पड़ी जो बड़े गौर से शीना को hi देख रही थी और उसके चेहरे पर चिंता क भाव थे . साइंस ब्लॉक में वो अकेली कड़ी थी और उसकी चिंता क भाव लिए रंगत मेरे दिमाग में घंटी बजने लगी. मैंने मीनल को उसकी तरफ इशारा किया तो मीनल ने भी उसे देखा . शायद उसे भी पता चल गया था क हम उसे देख रहे हैं इस लिए वो वहां से हैट गयी .

राधा : दीदी , आप कुछ दिन वेट कीजिये और ऐसे hi खुद को सही साबित कीजिये. यकीन रखिये वो एक दिन ज़रूर आपको सब में शामिल कर लेगा . रीमा भी तो हैं न हम सब क साथ . आप को भी हम अपने साथ शामिल कर hi लेंगे बस जब तक वो नहीं मंटा आप शांत रहिये . वो ऊपर से चाहे पत्थर लगता हो मगर अंदर से माँ का है. ाचा अब हम चलते हैं .

इसके साथ hi हम सब बहार आ गए और अपने अपने रस्ते हो लिए . मैं मोहित और मीनल कार में जा रहे थे तो मैंने मीनल से पूछा

अमित : मीनल वो मैडम कोण थी जो शीना को ऐसे देख रही थी?

मीनल : वो हमारी मधु मैडम हैं . इसी कॉलेज से पद क गयी हैं वो पहले

अमित : तो ये बात है , ज़रूर शीना क लिंक में होगी वो.

मोहित : तू कहना क्या चाहता है?

अमित : कुछ नहीं घर चल क बात करते हैं.

मीनल : पर मैंने तो कभी उसे शीना से बात करते नहीं देखा . शायद रीमा को पता हो. पर बात क्या है ?

अमित : कुछ नहीं बस ऐसे hi कुछ दिमाग में आया था. चलो छोडो इस बात को बाद में देखेंगे .

मुझे मधु मैडम क शीना को चिंता से देखने से शक हो रहा था क हो न हो शायद वही होंगी जिसने शीना की मदद की होगी राधा को किडनैप करने में. मगर एक टीचर ऐसा क्यों करेंगी? पर जिस तरह से वो घबराकर शीना को देख रही थी और वहां पर मैं राधा दोनों मौजूद थे तो ज़रूर वो दर रही होगी क कहीं शीना उसके बारे में कुछ बता न दे . अब इस बात पर रीमा से मैं पूछ सकता था. इस लिए फ़िलहाल मैं अपनी सोच को विराम देता मोहित और मीनल क साथ बातें करता हुआ घर आ गया.

लंच क बाद मैं अपने रूम में आराम कर रहा था क मेरा फ़ोन बजने लगा. मैंने देखा तो शिवानी की कॉल थी. मैंने कॉल पिच की.

अमित : hello

शिवानी : नाराज़ हो क्या मुझसे ?

अमित : नहीं , मगर तुम ये क्यों पूछ रही हो?

शिवानी : मुझे लगा मैं शीना का साथ दे रही हूँ तो शायद इस वजह से तुम नाराज़ हो .

अमित : नहीं ऐसा नहीं है. मुझे पता है तुम कुछ गलत नहीं करोगी. शीना तुम्हारी बेस्ट फ्रेंड है तो उसका साथ देना गलत कैसे हो सकता है. वैसे भी उसे तुम्हारी ज़रूरत है.

शिवानी : वो अब बदल गयी है. आज उसने शालू से भी माफ़ी मांगी और खुद भी वो कह रही थी क वो अब कभी किसी क साथ गलत नहीं करेगी. वो तुम्हारे साथ दोस्ती करना चाहती है मगर तुम उसे ऐसे ठुकरा रहे हो

अमित : देखो मुझे अभी उस पर भरोसा नहीं है. क्या पता वो दिखावा कर रही हो बदलने का और मौका मिलते hi फिर से कुछ कर दे मेरे साथ ?

शिवानी : मुझे ऐसा नहीं लगता. उस दिन क बाद से एक बार भी मुझे ऐसा नहीं लगा क वो दिखावा कर रही है किसी चीज़ का. तुमने उसको बचाकर उस पर जो एहसान किया है वो उसकी वजह से कभी ऐसा सोच भी नहीं सकती . वैसे मुझे तुम से एक बात करनी है.

अमित : कहो

शिवानी : ऐसे नहीं. तुम्हे मुझसे मिलना होगा .

अमित : तुम्हे पता है न क मैं अभी बाइक नहीं चला सकता .

शिवानी : मैं आ जाती हूँ तुम्हे लेने. तुम बस गेट तक आ जाना.

अमित : अगर तुम शीना से मिलवाना चाहती हो या उसकी बात करना चाहती हो तो मत आना.

शिवानी : शीना अपने घर है . मैं तुमसे अकेले में बात करना चाहती हूँ और मैं आ रही हूँ.

अगले 20 मिनट्स में hi शिवानी गेट पर थी और मैं आंटी को बता कर उसके साथ चला गया .

अमित : तो बताओ क्या बात है?

शिवानी : यहाँ नहीं घर चल कर बात करते हैं

अमित : ऐसी क्या बात है जो घर जा कर करोगी ? यहाँ भी तो कर सकते हैं .

शिवानी: क्या तुम मेरे साथ नहीं चल सकते या तुम्हे मुझ पर विश्वास नहीं?

अमित : मैंने ऐसा कब कहा? ाचा चलो मैं कुछ नहीं पूछता अब.

शिवानी : आखिरी बार कब मुझसे मिले थे तुम ,यद् भी है ?

अमित : तो मुझसे मिलने क लिए ये सब कर रही हो , ाचा है आज आंटी से भी मिल लूंगा.

शिवानी : स्माइल ) पहले घर तो चलो.

कुछ hi देर में हम शिवानी क घर पर थे मगर आंटी कहीं नज़र नहीं आ रही थी. शिवानी मुझे अपने कमरे में ले गयी और दरवाज़ा बंद कर दिया.

अमित : दरवाज़ा क्यों बंद कर रही हो? आंटी देखेंगी तो क्या सोचेंगी ?

शिवानी: देखेंगी तब न

अमित : क्या मतलब?

शिवानी: माँ और पापा 2 दिन से बहार गए हैं. और कल वापिस आएंगे

अमित : तो इसका मतलब ....

मेरी बात पूरी होने से पहले शिवानी ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए.

शिवानी : माहहहह , कितने दिनों से तरस रही थी आज मत रोकना मुझे . मैं कब से तुम्हे प्यार करने का मौका देख रही थी. 2 दिन तो शीना क घर पर hi थी पर आज मैं तुम्हारे साथ प्यार करने वाली हूँ.

अमित : पर अभी मैं अचे से नहीं कर पाउँगा.

शिवानी : डोंट वोर्री मैं खुद कर लुंगी तुम बस आराम से लेते रहो.

शिवानी ने मुझे धक्का दे कर बीएड पर लिटा दिया और खुद मेरी पेण्ट उतरने लगी. अंडरवियर उतारते hi मेरा लैंड बहार आ गया जो अभी सोया हुआ था . शिवानी ने उसे प्यार से अपने हाथों में लिया और उस पर किश कर दिया.

शिवानी : कितना प्यारा लग रहा है , मैंने बहुत मिस किया तुम्हे मुआअह

धीरे धीरे शिवानी मेरे लैंड को किश करते हुए मुँह में लेने लगी . अब लैंड भी कब तक ऐसे रहता ? जल्दी वो भी जग गया और खड़ा हो कर सलामी देने लगा. एक हाथ से लैंड को जड़ से पकड़ कर शिवानी जितना हो सका अपने गले में उतरने लगी.

अमित : आअह्हह्ह्ह्ह उम्म्म शिवानी ये क्या कर रही हो?

शिवानी : उम्म्म उम्म्म्म साररूअल उम्म्म उम्म्म्म आआअह्ह्ह प्यार कर रही हूँ और तुम बस चुप रहो उम्मम्मम उम्म्म्म

लैंड अकड़ कर फटने वाला हो रहा था मगर शिवानी तो जैसे आज उसे छोड़ना hi नहीं चाहती थी. आखिर कर 10 मिनट्स तक नई भर कर चुदाई करने क बाद शिवानी ने लैंड को छोड़ा तो वो सीधा सर उठाये थूक से लिसड़ा हुआ झूम रहा था. शिवानी ने जल्दी से अपने कपडे उतरे और मेरी कमर की दोनों पर तरफ बीएड पर घुटने टिकते हुए एक हाथ से लैंड को पकड़ कर अपनी छूट पर सेट किया और दूसरे हाथ से अपनी छूट पर थूक लगा कर लैंड का सूपड़ा छूट में फसती हुई वो धीरे धीरे लैंड को अंदर लेने लगी .

शिवानी : आआआअह्हह्ह्ह्ह माआआआ ये इतना बड़ा कैसे किया है तुमने ? अंदर जाता है तो जान. निकल देता है . आअह्ह्ह्हह कक्कक्कक्स

आधा लैंड ले कर शिवानी रुक गयी और उतने से hi ऊपर निचे होने लगी. मैंने भी अपने दोनों हाथ बड़ा कर शिवानी क उछाल रहे बूब्स पर रख दिए और उन्हें मसलने लगा. शिवानी और जोश में आ गयी और उसकी स्पीड बाद गयी. शिवानी मस्ती में आकर और तेज़ अपनी कमर चलाई लगी. शिवानी तेज़ तेज़ कमर हिलती एक डैम से पूरा वजन गिराकर में कमर पर बैठ गयी और पूरा लैंड उसकी छूट में घुस गया

शिवानी : आआआह्ह्ह्हह्ह माआआआ आइइइइइइइइ हर बार ये ऐसे दर्द देगा क्या माआआआ कक्कक्कक्स

अमित : इतने दिनों बाद ले रही हो न इस लिए . अभी मज़ा भी देगा तुम्हे.

शिवानी : तो रोज़ रोज़ कर लिया करो न, मैं तो कभी मन नहीं करने वाली तुम्हे . इतना क्यों तड़पते हो मुझे?

अमित : रोज़ रोज़ मिलने से फिर मज़ा कहाँ मिलेगा जो ऐसे मिलता है.

शिवानी : मुझे कुछ नहीं पता , मैं तो रोज़ ऐसा मज़ा लेना चाहती हूँ . क्या तुम मुझे ऐसा प्यार रोज़ नहीं कर सकते ? मैं तो अब तुम्हारे सिवा किसी क बारे में सोच भी नहीं सकती . मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ सिर्फ तुम्हारी आआह्ह्ह उनमममम कक्कक्क्स

शिवानी ने फिर से उछलना शुरू कर दिया . वो तेज़ी से कमर चला रही थी. कभी वो उछलती और कभी कमर को सीधी बैठ कर तेज़ी से आगे पीछे घिसने लगती. मैं तो बस आराम से लेता उसके प्यारे कोमल बूब्स मसल कर मज़ा ले रहा था चुदाई का. एक बार पानी निकलने क बाद शिवानी कुछ देर क लिए रुकी मगर उसने चुदाई तब तक बंद नहीं की जब तक क मेरा पानी नहीं निकला. जब मेरा टाइम नज़दीक आया तो मैंने उसे बता दिया . शिवानी ने छूट से लैंड बहार निकल कर मुँह में ले लिया और कुछ पलों में hi मेरा पानी उसके मुँह में निकल गया जिसे वो मज़े से पि गयी . शिवानी का भी 2 बार पानी निकल चूका था और वो इतनी म्हणत से थक भी गयी थी. शिवानी वैसे hi नंगी मेरे साथ लेट गयी .

शिवानी : उम्म्म्म मुआअह मज़ा आ गया . कैसा लगा तुम्हे ?

अमित : मुझे भी ाचा लगा , तुम वाकई कमल हो. आज एक न्य एक्सपीरियंस मिला है.

शिवानी : हर बार न्य एक्सपीरियंस देने को तैयार हूँ मैं बस तुम टाइम दिया करो मुझे.

अमित : अब मैं तो तुम्हारे सामने hi हूँ. वैसे अब तो तुम्हे शीना क साथ रहने की ज़रूरत नहीं है.

शिवानी : उसे मेरी ज़रूरत है अमित . शी इस माय बेस्ट फ्रेंड और दोस्तों का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए , तुम भी तो ऐसा hi करते हो न. पहले मुझे लगा था क शीना भी मोंटी जैसी हो गयी है मगर देखा न वो कैसे बदल गयी है? शीना पहले भी ऐसी hi थी पर धीरे धीरे वो बदल गयी मगर अब देखो तुमने फिर से उसे पहले जैसी बना दिया है.

अमित : क्या पता वो कोई खेल hi न खेल रही हो?

शिवानी : नहीं ऐसा नहीं है, इतने दिनों से मैं hi तो हूँ उसके साथ. मैंने देखा है वो बदल गयी है. पता है तुम्हारे लिए उसने नितिका को थप्पड़ तक मर दिया और मुझे लगता है अब तो वो तुम्हारे लिए मोंटी से भी भीड़ जाएगी.

अमित : नितिका को थप्पड़ मेरे लिए ? ऐसा क्या हुआ ?

शिवानी : वो उसने किसी पुलिस वाली से तुम्हारे बारे में गलत बात कह दी थी और शीना क पास आ कर शेखी मर रही थी क तुम्हे फिर से फसा दिया . बस फिर क्या था शीना ने जड़ दिया थप्पड़ . वैसे मैं ये बात बताना भूल गयी थी. अगर कोई पुलिस वाला तंग करे तो बता देना , शीना तुम्हारे साथ कुछ गलत नहीं होने देगी .

अमित : चलो ाचा है अगर वो सुधर रही है तो.

शिवानी : क्या तुम उसे एक मौका नहीं दे सकते? मेरे लिए उसे एक मौका दे दो प्लीज. अगर तुमने उसे मौका न दिया तो कहीं फिर से वो पहले जैसी न बन जाये और मैं अपनी प्यारी दोस्त खोना नहीं चाहती.

अमित : उसने जो राधा क साथ किया उसके बाद भी मैंने उसे कुछ नहीं कहा , क्या ये काम है?

शिवानी : वो सब उसका प्लान नहीं था अमित , उसने मुझे सब बताया है . मोंटी ने उसे धोखे में रखा था. और जिस तरह तुमने उसे बचाया वो तो तुम्हे अब बहुत मानती है . ी थिंक वो तुम्हे पसंद करने लगी है अब.

अमित : संभल रखो अपनी उस दोस्त को . मुझे कोई ज़रूरत नहीं उस की . अगर उसने फिर से कुछ गड़बड़ की तो मैं भूल जाऊंगा वो एक लड़की है . रही बात मौका देने की तो अभी इतनी जल्दी मैं उस पर विश्वास नहीं कर सकता . अभी देखो क्या वो सच में बदली है या कोई खेल खेल रही है.

शिवानी और मैं एक दूसरे क साथ लेते काफी देर तक बातें करते रहे उसके बाद वो तैयार हो कर मुझे घर छोड़ गयी जहाँ से मैं मोहित क साथ डॉ रीना क पास आ गया चेकउप क लिए.

डॉ रीना : अब तुम काफी हद तक ठीक हो. ज़ख़्म भी ड्राई हो रहा है. मेरे ख्याल से इसे खुला hi रहने देते हैं . बस सर क बल कुछ कटे हुए नज़र आ रहे हैं तो कैप लगा सकते हो.

अछि तरह मेरा मुआयना करने क बार डॉ रीना ने ये कहा.

अमित : शुक्रिया डॉ आप ने अचे से ख्याल रखा है मेरा.

डॉ रीना : दोस्ती में शुक्रिया नहीं कहते . वैसे तुमसे एक बात करनी थी मुझे .

अमित : दोस्तों से बात करने क लिए पूछा भी नहीं करते . बात कहिये क्या है.

डॉ रीना : मेरी एक फ्रेंड की शादी है मंडे को शहर से कुछ दूर . मैं अकेली वहां जाना नहीं चाहती और कोई है नहीं जिसके साथ मैं जा सकूँ . िफ़ यू .....

अमित : बस इतनी सी बात , don’t वोर्री आप मेरे लिए इतना कर सकती हैं तो क्या मैं नहीं कर सकता ?

डॉ रीना : थैंक यू वैरी मच. अगर तुम मन करते तो मैं जाती hi नहीं. घर में सिर्फ माँ और एक छोटी बेहेन hi तो है मेरी और उन्हें मैं कह नहीं सकती . वो भी अकेली जाने नहीं देती एक तो रत की मैरिज है ऊपर से शहर से दूर. अकेली किसे जाती मैं.

अमित : चिंता मत करिये मेम साहब , आपका बॉडीगार्ड हाज़िर है. किसी ने आँख उठा कर भी देखा तो ऑंखें निकल लूंगा

डॉ रीना : मन में ) ऐसा hi तो प्यार करने वाला चाहिए होता है हर किसी को. इस बार तो मैं तुम्हे अपने दिल का हल बता कर रहूंगी .

अमित : क्या हुआ चुप क्यों हो गयी आप ?

डॉ रीना : कुछ नहीं वो मैं , मैं कार ले आउंगी तुम एड्रेस बता देना क कहाँ मिलोगे .

अमित : जी , अब इजाज़त है ?

डॉ रीना : ऐसे कैसे ? पहले एक एक कप कॉफ़ी फिर जाना तुम . मैं घर से खुद बना कर लायी हूँ.

अमित : आप मेरी आदत बिगड़ देंगी. आपके हाथों की कॉफ़ी इतनी टेस्टी है क साडी ज़िन्दगी पिता रहूं

डॉ रीना : तो क्या हुआ , मैं तो साडी उम्र तुम्हे अपने हाथों से कॉफ़ी पिलाने को तैयार हूँ.

अमित : हम्म्म्म ???

डॉ रीना : मेरा मतलब है क ये कौन सा कोई बड़ा काम है. मुझे भी ाचा लगता है जब तुम ऐसे तारीफ करते हो.

अमित: ाचा रीना जी अब मैं चलता हूँ.

डॉ रीना : कल आओगे न ?

अमित : आप hi ने तो कहा अब ज़ख़्म को खुला छोड़ना है. फिर कल ?

डॉ रीना : मिलने नहीं आ सकते क्या ?

अमित : ठीक है , कोशिश करूँगा .

डॉ रीना : मैं इंतज़ार करुँगी .

उसके बाद मैं केबिन से बहार निकला जहाँ मोहित मेरा इंतज़ार कर रहा था और फिर उसके साथ मैं मंजू म क घर चला गया. आज मोहित क पास भी टाइम था तो मैंने सोचा उसे मम से मिलवा देता हूँ इस लिए मैंने पहले hi ु हे फ़ोन कर क बता दिया था क हम आ रहे हैं . मंजू म तो हर बार की तरह मुझे देख कर खुश थी और मोहित क साथ भी वो अचे से मिली .

मंजू म : अब कैसी तबीयते तुम्हारी? मोहित कैसे हो तुम ? तुम तो आज पहली बार आ ये हो

अमित : मैं पहले काफी बेहतर हूँ और आज तो पट्टी भी खोल दी है डॉ ने. कुछ दिन ज़ख़्म खुला रखने को कहा है.

मोहित : मैं भी ठीक हूँ मम , ाचा लग रहा है आपके घर आ कर. आप तो वैसे भी बहुत अछि हैं. सब स्टूडेंट्स आपकी बहुत तारीफ करते हैं.

मंजू म: ाचा ? वैसे तो स्टूडेंट्स मज़ाक भी बहुत उड़ाते हैं टीचर्स का पर तुम कहते हो तो मन लेती हूँ और हाँ आराम से बैठो इसे अपना hi घर समझो . तुम अमित क बेस्ट फ्रेंड हो तो मेरे लिए भी खास मेहमान हो. अमित मेरा अपना है और उस नाते तुम भी.

मोहित : थैंक्स मम , वैसे आप भी कभी आइये न हमारे घर.

मंजू म : ज़रूर आउंगी, तुम लोग बैठो मैं कॉफ़ी लायी

उसके बाद मंजू म कॉफ़ी ले आयी और मुझे एक बार फिर से कॉफ़ी पिने लगा.

मोहित : आपने अमित की काफी म्हणत करवाई है क्या आप मुझे भी पड़ा सकती हैं

मोहित क इस सवाल पर मंजू म ने एक पल मुझे देखा और फिर कुछ सोचते हुए कहा

मंजू म : मुझे ट्यूशन की इजाज़त तो नहीं है ऐसे पर तुम्हे मेरी मदद की ज़रूरत हो तो वो मैं कर सकती हूँ स्टडी रिलेटेड बूत किसी को कॉलेज में बताना मत. अमित क साथ मेरा खास रिश्ता है इस लिए मैं इसे पड़े में मदद कर रही थी . वो भी जस्ट इस लिए इसे ज़रूरत थी क ये हिंदी मीडियम से था.

मोहित : ी अंडरस्टैंड मम , मैं ध्यान रखूँगा .



कुछ देर हम मम क पास रुके और फिर इजाज़त ले कर घर वापिस आ गए. मंजू म ने बड़ी समझदारी से मोहित को जवाब दिया था . क्यूंकि वो जानती थी क अगर मोहित को सीधा हाँ कर दिया तो फिर वो मेरे साथ अकेले में वक़्त नहीं बिता पाएंगी. हम घर पर पहुंचे तो अंकल भी घर पर hi थे. अंकल काफी देर तक मेरे साथ बैठ कर बातें करते रहे . मैं अब पहले जैसा नार्मल हो रहा था तो मैंने फिर अपने ऊपर वाले रूम में शिफ्ट होना hi बेहतर समझा हालाँकि आंटी अभी भी मन कर रही थी. रत को मैंने रीमा से और राधा से फ़ोन पर कुछ देर बात की . नैना दीदी करुणा दीदी से भी मैंने कुछ देर बात की ऑन उनके गीले शिकवे सुने . अब कल मुझे रुपाली से मिलना था और मुझे उम्मीद थी क उसने काम कर दिया है . कल क बाद शालू को भी मैं अपने दोस्तों क साथ शामिल करने की सोच रहा था. ऐसे hi कल क बारे में सोचता हुआ मैं सो गया.
 
अपडेट 132



आज मैंने रुपाली से मिलने जाना था तो मैंने मोहित को कॉलेज जाने को कह दिया . मोहित को पता था क मैंने आज किसी से मिलान है तो उसने भी ज्यादा बात नहीं की. मैंने रुपाली को संस कर क एड्रेस भेज दिया था फ्लैट का और नाश्ते पर अंकल से कुछ देर बातें करने क बाद मैं घर से निकलने लगा तो आंटी ने रोक लिया .

आंटी : कहाँ जा रहे हो ?

अमित : मुझे किसी से मिलने जाना है ज़रूरी काम है .

आंटी : तो मोहित को बोल देते या राघव क साथ hi चले जाते . ऐसे अब बाइक चलने से तुम्हे तकलीफ हो सकती है

अमित : अरे ऐसा कुछ भी नहीं होगा . अब तो मैंने पूरा ठीक हूँ. आपके सामने अभी बाइक चला कर दिखता हूँ

आंटी : मुझे नहीं सुन्ना कुछ भी. अभी तुम ठीक नहीं हो तो नहीं हो. इतनी क्या जल्दी है तुम्हे बाइक चलने की. जाओ तुम कार ले जाओ ड्राइवर को बुला लेती हूँ ऑफिस से या मोहित को बुला लो

अमित : अरे आंटी से समझने की कोशिश कीजिये मैं अब ठीक हूँ

आंटी : नहीं हो ठीक मैं जानती हूँ.

आंटी तो ज़िद पर अड़ गयी थी अब मैं किसी को साथ लेकर जाना नहीं चाहता था ऐसे में अब मुझे सूझ नहीं रहा था क आंटी को कैसे मानों . आंटी मोबाइल उठाकर किसी को कॉल करने hi लगी थी क मैं तेज़ी से आंटी की और बड़ा और उन्हें अपनी बाँहों में कस्ते हुए उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए . एक पल तो आंटी भी समझ नहीं पायी क ये क्या है मगर फिर वो भी मेरा साथ देने लगी और मेरे बालों में हाथ चलने लगी. मैंने आंटी को किश करते हुए उनकी गांड को मसलना शुरू कर दिया तो आंटी भी मेरे साथ ज्यादा से ज्यादा चिपकने लगी. उन्होंने अपनी एक तंग उठा कर मेरी कमर पर लपेट ली और अपने बूब्स मेरे सीने में घिसने लगी. कुछ hi पलों में आंटी गरम हो गयी और उनकी साँसे तेज़ चलने लगी . जब मैंने किश ख़तम की तो उनका सीना तेज़ी से ऊपर नीचे हो रहा था और चेहरा लाल हो गया था .

अमित : अब पता चला

आंटी : तेज़ साँसे लेते हुए) ऐसे कैसे पता चलेगा ? काम पूरा करोगे तभी तो पता चलेगा न.

अमित : बाकि काम रत को , अभी मुझे ज़रूरी जाना है .

आंटी : अभी मैं क्या करूँ ? कुछ तो करो . मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा तुमने अब आग लगा दी है

अमित : आग जितना भड़केगी उतना hi तो मज़ा आएगा न भुजने में. आप अभी रत की तयारी करो . मैंने किसी को टाइम दिया है वर्ण अभी काम कर देता आपका .

आंटी : लड़की से मिलने जा रहे हो ?

अमित : नहीं किसी और काम से जा रहा हूँ . आप ऐसे शक मत किया कीजिये.

आंटी : शक नहीं कर रही , वैसे भी अगर लड़की से मिलने जा रहे हो तब भी मुझे ऐतराज़ नहीं है. ाचा अब जाओ पर यद् रखना मैं रत को बहाना नहीं सुनने वाली . और ध्यान से जाना .

अमित : ाचा मैं ध्यान रखूँगा अब चलता हूँ .

आंटी को एक और किश देने क बाद मैंने अपनी बाइक निकली . आज इतने दिनों बाद मैं अपनी बाइक चलने वाला था. इतने दिनों से बेचारी का किसी ने हल तक न पूछा था. कपडा मरने क बाद मैंने उसे स्टार्ट किया तो अचे बचे को तरह पहली किक में स्टार्ट हो गयी. मैं अपनी बाइक पर सवार हो कर डुग डुग करता निकल गया अपनी मंज़िल की तरफ . मैं 11 बजे से पहले hi फ्लैट पर पहुँच गया और ठीक 11 बजे फ्लैट की बेल्ल बजी तो मैंने देखा सामने रुपाली बिजलियाँ गिरती हुई कड़ी थी . एक वाइट कलर क परफेक्ट फिटिंग वाले सूट में वो क्या कमल लग रही थी .ऊपर से खुले बल कानो में पतले चूड़ी जितनी आकर की बालियान दोनों हाथों में चंडी का एक एक स्टाइलिश कंगन . पाऊँ में भी सफ़ेद hi जुटी थी जो थोड़ी हाई हील लग रही थी . सूट की फिटिंग भी ऐसी थी क उसकी फिगर कोई ऐसे hi देख कर बता दे. 38-32-40 उसका गदराया हुआ बदन किसी पर भी बिजलियाँ गिराने क काबिल था. मैं उसे सर से पाऊँ तक गौर से देख रहा था क वो मुझे साइड करती खुद hi फ्लैट क अंदर आ गयी. रुपाली क अंदर एते hi मैं चेतना में वापिस लौटा और दरवाज़ा बंद कर क वापिस उसके पास आया. रुपाली का हुसैन देख कर मेरा दिल पिघलने लगा था . मेरी नज़र रुपाली क चेहरे और पड़ी तो देखा वो गुस्से से मुझे देख रही थी. गुस्से से तो देखेगी hi अब उसकी दुखती राग जो मेरे हाथ में थी.

रुपाली : वो वीडियो कहाँ है?

अमित : दे देता हूँ आप बैठ तो जाइये. वैसे आप आज बहुत खूबसूरत लग रही हैं. सफ़ेद रंग म बिलकुल सफ़ेद गुलाब सी.

रुपाली : मैं यहाँ तुम्हारी घटिया बातें सुनने नहीं आयी. मुझे वो वीडियो दो

अमित : आप इतनी गुस्से में क्यों रहती हैं? गुस्सा आप पर ाचा नहीं लगता , आप तो सिर्फ प्यार क लिए बानी हैं.

रुपाली : बंद करो अपनी गन्दी ज़ुबान. मुझे वीडियो दो.

अमित : वो भी दे दूंगा पर पहले आप आराम से बैठ तो जाइये. क्या आप मुझसे प्यार से बात नहीं कर सकती ? वैसे आज आपको देख कर एक बार फिर से आपसे प्यार करने को दिल कर रहा है.

रुपाली : देखो तुमने कहा था क अगर मैं तुम्हारा काम कर दूँ तो तुम दुबारा मुझे परेशां नहीं करोगे.

अमित : परेशां कहाँ कर रहन हूँ मैं? मैं तो आपको प्यार करने की बात कर रहा हूँ.

रुपाली : मुझे ये सब पसंद नहीं है .

अमित : क्यों ? मोंटी और उसके बाप क साथ तो आप करती हैं सब कुछ फिर मुझ में क्या बुराई है?

रुपाली : गुस्से में ) अपनी ज़ुबान को लगाम दो. मुझे मेरी वीडियो दो मैं एक मिनट यहाँ रुकना नहीं चाहती.

अमित : आप चाहें तो जा सकती हैं पर फिर ये वीडियो कहीं और पहुँच जाएगी.

रुपाली : तो तुम फिर से मुझे ब्लैकमेल करना चाहते हो?

अमित : ब्लैकमेल नहीं , मैं तो आपको बस प्यार करना चाहता हूँ एक आखिरी बार.

रुपाली : मैं ये नहीं कर सकती. एक बार कर लिया न , मुझसे नहीं होगा अब

अमित : सोच लीजिये आप मुझे मन करने का रिस्क ले सकती हैं क्या ?

रुपाली : कुछ सोचते हुए ) मुझे लगा था तुम एक अचे इंसान हो मगर तुम भी घटिया hi निकले. कर लो जो करना है.

मैं जो रुपाली की सुंदरता में मोहित हुआ ऐसी बातें करने लगा था एक डैम से जैसे नींद से जगा जब रुपाली ने ऐसी बात कही. उसकी आँखों में नमी आ गयी थी जो मेरे दिल को झकझोर रही थी. मैंने आगे बाद कर उसे गले लगा लिया और उससे माफ़ी मांगने लगा.

अमित : ी ऍम सॉरी रुपाली जी , ी ऍम रियली सॉरी . मैं आपको दुःख नहीं देना चाहता था पर क्या करूँ आपकी खूबसरती में खो कर वो सब कह गया. मुझे माफ़ कर दीजिये .

रुपाली : आंसू बहते हुए ) दूर हटो मुझसे , यही असलियत है तुम्हारी . तुम यही हो बस. औरत क जिस्म क भूखे भेड़िये. हर आदमी बस एक hi नज़र से औरत को देखता है . तुम भी न वही जानवर हो .

अमित : मुझे माफ़ कर दीजिये प्लीज चुप हो जाइये. मैं सच में शर्मिंदा हूँ. ये लीजिये मेरा मोबाइल अपने हाथों से वीडियो डिलीट कर दीजिये.

मैंने रुपाली को अपना फ़ोन दे दिया और वो मोबाइल को पकड़ कर मुझे देखने लगी जैसे कुछ समझने की कोशिश कर रही हो. फिर जल्दी से रुपाली ने अपना वीडियो डिलीट किया .

रुपाली : इसकी दूसरी कॉपी भी होगी तुम्हारे पास ?

अमित : नहीं है

रुपाली : मैं कैसे यकीन कर लूँ ? इतनी आसानी से तुम कैसे दे सकते हो मुझे ये वीडियो जबकि अभी तक तो तुम्हारा काम भी नहीं किया मैंने

अमित : देखिये मैं सचमुच शर्मिंदा हूँ क आप का दिल मैंने दुखाया . उस दिन भी आपके साथ वो सब करने क बाद मुझे पछतावा हो रहा था और आज फिर से मैं वही गलती करने जा रहा था. हो सके तो आप माफ़ कर देना मुझे. रही बात लैपटॉप की तो मैं कोई और रास्ता ढून्ढ लूंगा.

रुपाली : एक बात पूछ सकती हूँ ?

अमित : पूछिए

रुपाली : उस लैपटॉप में क्या है जो तुम उसके पीछे पड़े हो?

अमित : उससे पहले आपको मेरे सवाल का जवाब देना होगा तभी मैं जवाब दे पाउँगा.

रुपाली : ठीक है पूछो

अमित : जहाँ तक मैं समझ पाया हूँ आप बहुत अछि और संस्कारी हैं. फिर मोंटी जैसे लड़के क साथ आप कैसे ? और उसका बाप ....

रुपाली : मैं ये सब नहीं बता सकती.

अमित : ठीक है आपकी मर्ज़ी. आप चाहें तो अब जा सकती हैं.

रुपाली अपनी जगह पर वहीँ कड़ी रही और कुछ देर सोचती रही. अपने हाथों की उँगलियों को वो बार बार मसल रही थी जिसका मतलब था क वो दुविधा में थी .

अमित : आप मुझ पर भरोसा कर सकती हैं . अगर आप क साथ कुछ गलत हुआ है तो यकीन करिये मैं आपकी मदद भी करूँगा.

रुपाली : रट हुए ) मेरी मदद कोई नहीं कर सकता . कोई कैच नहीं कर सकता . कोई नहीं है जो मुझे इस नरक से आज़ाद करवा सके.

मुझसे रुपाली का रोना देखा न गया. उसके आंसू उसके दर्द को बयां कर रहे थे . मैंने आगे बाद कर फिर एक बार उसे गले लगाया और उसके सर पर हाथ फिरते हुए उसे सांत्वना देने लगा.

अमित : प्लीज चुप हो जाइये. मैं आपकी मदद करूँगा. आप मुझे बताइये आपके साथ क्या हुआ है. आप मुझे अपना समझिये , मैं वडा करता हूँ मैं आपकी मदद करूँगा. मुझे सब बताइये .

रुपाली : तुम कुछ नहीं कर सकते कोई कुछ नहीं कर सकता . वो दोनों बाप बेटे भेड़िये हैं भेड़िये. जो बस औरत क जिस्म को नोचते हैं . पहले बाप ने मुझे लूटा फिर बेटे ने. मैं तो जैसे ज़िंदा लाश हूँ . न कोई मेरा अपना है न किसी क पास मदद मांगने जा सकती हूँ. मर भी नहीं सकती अपनी बच्चियों की खातिर.

अमित : ये सब हुआ कैसे ? क्या आपके पति ...

रुपाली : मेरे पति क मरने क बाद मोंटी क बाप की नियत मुझ पर बदल गयी थी. वो हमेशा से hi परायी औरतों लड़कियों को हवस की बाज़ारों से देखता था और उनकी मज़बूरी का फायदा उठता था. मेरे पति क मरने के कुछ महीनो बाद उसने शराब क नशे में मेरे साथ बलात्कार कर दिया. मैं रोटी रही चिल्लाती रही मगर मेरी मदद करने वाला कोई नहीं था. अगले दिन मैं अपने बच्चों को लेकर अपने माता पिता क पास चली गयी तो ये वहां भी पहुँच गया और मुझे धमकी दी क अगर मैंने घर छोड़ा तो मेरे बच्चों और मेरे माँ बाप को मरवा देगा. मैं बिचारि क्या करती. उसकी धमकी क आगे मुझे झुकना पड़ा . कई बार सोचा क खुद को ख़तम कर लूँ मगर फिर बच्चों की खातिर सब सेहती रही . धीरे धीरे बचे तो बड़े हो गए मगर मोंटी क बाप का जुल्म बंद नहीं हुआ. वो जब कभी घर अत शराब क नशे में मुझे बाज़ारू औरतों की तरह इस्तेमाल करता. एक दिन पता नहीं कैसे मोंटी ने सब देख लिया और वीडियो बना ली. उसके बाद उसने मेरे बच्चों को वो वीडियो दिखने की धमकी दी और मुझे उसके निचे भी लेटना पड़ा. वो दोनों बाप बेटे मेरे साथ वेह्शीपन करते हैं और मैं बस लाश की तरह पड़ी रहती हूँ. अगर मुझे अपने बच्चों की परवाह न होती तो मैं कब की ख़तम हो गयी होती. फिर कुछ दिन पहली मोंटी की माँ ने मुझे तुम्हारे लिए ब्लैकमेल किया. मुझे लगा था क उसे कुछ नहीं पता. पर जब उसने बताया क वो सब जानती है अपने पति और मेरे बारे में तो मुझे एहसास हुआ क वो भी कितनी घटिया औरत है जो अपने पति को रोकने की बजाये चुप रह कर उसका hi साथ दे रही थी. पता नहीं मैं तुम्हे ये सब क्यों बता रही हूँ? तुमने भी तो वही सब किया है मेरे साथ .

अमित : मुझे माफ़ कर दीजिये. मैं नहीं जनता था क आपके साथ इतना कुछ गलत हो रहा है . ऐसे लोगों को तो सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए. मैं तो ये समझा था क मेघा की तरह आप भी वैसी hi हैं हो अपने भतीजे क साथ वो सब कर रही हैं. अगर मुझे पता होता क आप मज़बूरी में वो सब कर रही हैं तो मैं कभी आपके साथ ऐसा नहीं करता. पर अब आपको डरने की ज़रूरत नहीं है. आज क बाद मोंटी आपको हाथ भी नहीं लगा सकेगा. और रही बात उसके बाप की तो उसका भी कोई न कोई हल कर hi दूंगा मैं.

रुपाली : ये तुम क्या कह रहे हो ?

अमित : आप जानती हैं मैं मोंटी को कैसे जनता हूँ और मुझे उसका लैपटॉप क्यों चाहिए ?

रुपाली : ????

अमित : मैं मोंटी क कॉलेज में hi पड़ता हूँ. मेरी एक दोस्त जो मोंटी की hi क्लास में है , उसकी ज़िन्दगी मोंटी ने बर्बाद कर दी है. वो बेचारी गरीब घर की लड़की थी जो स्कालरशिप पर कॉलेज में पड़ने आयी थी . उसका बाप मोंटी क बाप की फैक्ट्री में hi काम करता था. मोंटी ने उस लड़की का फायदा उठाते हुए अपने जल में फसाया और उसकी वीडियो बना कर उसे अपने दोस्तों क आगे परोस दिया. वो बेचारी अपने पिता की वजह से जैसे तैसे ज़िंदा है वर्ण इन दरिंदो ने तो कसार नहीं छोड़ी थी. उसकी वो वीडियोस hi मुझे चाहिए थी जो उसके लैपटॉप में है. मैंने उस लड़की से वडा किया था क मैं उसे इस नरक से निकलूंगा. अगर आप वो लैपटॉप ले आती तो मेरा काम आसान हो जाता . खैर , मैं और कोई रास्ता निकल लूंगा . ओने अगेन ी ऍम सॉरी मैंने आपके साथ अनजाने में वो सब .....

रुपाली : अगर तुम सच में इस लड़की मदद करने क लिए ये सब कर रहे थे तो मेरे साथ वो सब क्यों किया ?

अमित : सच कहूं तो आपकी खूबसूरती देख कर मैं पागल हो गया था. भगवन ने आपको बहुत खूबसूरत बनाया है और जब मैंने आपको मोंटी क साथ देखा तो मुझे लगा क मेघा की तरह आप भी गरम औरत हैं तो क्यों न मैं भी आपके साथ....

रुपाली : तुम्हारी बातों से तो लग रहा है क तुम अचे हो फिर मेघा दीदी क साथ कैसे? वो तो उम्र में तुमसे इतनी बड़ी हैं.

अमित : वो सब एक हादसा था. मैं अपने दोस्त की बर्थडे पार्टी में गया था वहीँ मेघा ने शराब क नशे में मुझे कुछ और समझ कर अपने साथ खींचती हुई कमरे में ले गयी. मैंने सोचा वो नशे में हैं और उसे कमरे में छोड़ कर मैं वापिस आ जाऊंगा पर उसने तो जाते hi मेरे कपडे उतरने शुरू कर दिए . मैं उसके साथ कुछ भी करने वाला नहीं था और जब उसने मुझे माँ बाप की गली दी तो मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने गुस्से में उसके साथ वो सब कर दिया .

रुपाली : तो तुमने ज़बरदस्ती की थी उनके साथ. यद् है मुझे कैसे लंगड़ा कर चलती रही थी कई दिन तक. पर उस दिन तो ऐसा नहीं लग रहा था मुझे क तुम मज़बूरी में कर रहे हो.

अमित : उस दिन मज़बूरी नहीं थी. उस दिन मैं आपके लिए कर रहा था . और अब मैं उसके साथ भी नहीं करने वाला. मुझे लगा था क शायद उसके ज़रिये मैं अपना काम निकलवा लूँ मगर वो बहुत तेज़ औरत है वो समझ जाएगी क मैं कुछ और करने वाला हूँ.

रुपाली : ठीक कहा तुमने पर तुम्हे अब इसकी ज़रूरत नहीं है.

अमित : मतलब ?

रुपाली : मतलब क मैं लैपटॉप लेकर आयी हूँ.

रुपाली ने अपने कंधे पर टंगे बड़े से पर्स को खोलकर मोंटी का लैपटॉप बहार निकला और मुझे दे दिया.

रुपाली : तुमने कैसे सोचा क मैं लैपटॉप नहीं लायी हूँ? तुम एक ाचा काम कर रहे हो . उस लड़की को बचा लो मोंटी से . मेरे साथ तो जो होना था हो गया काम से काम कोई तो बचे.

अमित : थैंक यू वैरी मच . आप ने बहुत बड़ा एहसान किया है मुझ पर. अब आपको भी डरने की ज़रूरत नहीं है मोंटी से . वो छह कर भी कुछ नहीं कर पायेगा आपके साथ

रुपाली : वो कैसे ?

अमित : मोंटी की गन्दी नज़र मेरी कजिन पर थी जो उसी कॉलेज में hi पड़ती है . पिछले हफ्ते उसने मेरी कजिन का किडनैप करवा लिया था अपने गुंडों से . मैंने उसे तो छुड़ा लिया मगर मोंटी दोबारा किसी की ज़िन्दगी बर्बाद न कर इस लिए मैंने उसे वो सजा दी है क वो अब किसी क साथ कुछ कर hi नहीं सकता.

रुपाली : क्या किया है तुमने ?

अमित : मैंने उसे न मर्द बना दिया है. अब वो ज़िन्दगी भर किसी क साथ कुछ कर hi नहीं सकता .

रुपाली : खुश होते हुए ) सच !!! तुम नहीं जानते तुमने कितनी अछि खबर सुनाई है मुझे . मैं बहुत परेशां थी मोंटी से कुछ दिनों से उसकी नज़र मेरी बेटियों पर भी गन्दी हो रही थी. मैं तो मुश्किल में थी क क्या करूँ पर तुमने तो मेरे साथ मेरी बेटियों को भी बचा लिया.

अमित : मुझे बस इस बात का दुःख है क जिसके साथ उसकी शादी होगी उसे सजा भुगतनी पड़ेगी.

रुपाली : ाचा हुआ न क तुमने उसे नपुंसक बना दिया . वर्ण उसके बीज से भी तो उसके जैसा hi पैदा होता न. रही बात उसकी बीवी की तो वो किसने देखा है क्या होगा.

अमित : पर एक बात बताइये आपको ये लैपटॉप मिला कैसे ?

रुपाली : वैसे तो मोंटी लैपटॉप को छोड़ता नहीं पर पता नहीं कल वो कुछ जल्दी में था और लैपटॉप को जाते जाते भूल गया. इतने दिनों बाद वो घर आया था और किसी से मिला भी नहीं. शायद कहीं बहार गया है कुछ दिनों क लिए.

अमित : हम्म्म पता चल hi जायेगा. अब तो आप बैठिये , मैं आपके लिए कुछ लता हूँ.

रुपाली : नहीं उसकी ज़रूरत नहीं है. तुमने जो खुश खबरि मुझे सुनाई है उसके बाद तो अब दिल कर रहा है क तुम्हे इसका इनाम दूँ.

अमित : इनाम ?

रुपाली : तुम मेरे साथ प्यार करना चाहते हो न एक आखिरी बार?

अमित : नहीं , मैं ऐसा नहीं कर सकता

रुपाली : पहले भी तो किया है न, समझ लो एक और बार हमने गलती कर दी

अमित : पर मैंने आपके साथ तब गलत किया था.

रुपाली : हाँ तुमने गलत किया था और मुझे भी ाचा नहीं लगा था मगर सच कहूं तो मेरे पति क बाद उस दिन पहली बार मुझे वो सुख मिला था जो मैं शायद भूल hi गयी थी . मोंटी और उसके बाप क साथ तो मैंने कभी खुद को महसूस किया hi नहीं . पर उस दिन पता नहीं कैसे मैं तुम्हारे साथ बहती चली गयी थी . तुमने जो मेरे लिया किया है समझ लो क उसके बदले में मैं तुम्हारी ख्वाहिश पूरी कर रही हूँ .

अमित : पर ये .....

रुपाली : ज्यादा मत सोचो कहीं फिर से मेरा इरादा न बदल जाये . मैं पहली बार अपनी मर्ज़ी से किसी क साथ सम्बन्ध बनाने जा रही हूँ . तुम खुद hi सोचो क मैं कितनी खुश हूँ और इसकी वजह सिर्फ तुम हो.

ये बात सच थी क मैं रुपाली क हुस्न क आगे खुद को बेबस महसूस कर रहा था पर उसकी सचाई जानने क बाद मुझे खुद से शर्मिंदगी थी मगर अब जब वो खुद सामने से ऑफर दे रही थी तो मैंने भी सोचा क्यों न अपने मन की कर hi लूँ वैसे भी वो खुद कह रही है क उसे मेरे साथ मज़ा आया था . मैंने एक कदम आगे बाद कर रुपाली क साथ सात कर खड़ा हो गया और अपना एक हाथ उसके चेहरे पर लगते हुए कहा.

अमित : मैं वो वक़्त तो नहीं बदल सकता जो गुज़र चूका है , न hi आपके उन दुःख तकलीफों को मिटा सकता हूँ जो आज तक अपने सही हैं पर मैं इतना ज़रूर कर सकता हूँ क आपको आने वाली ज़िन्दगी में वो सब न सहना पड़े. और अगर मेरी वजह से आपको ख़ुशी मिलती है तो मुझे ाचा लगेगा.

इतना कह कर मैंने रुपाली क चेहरे पर झुकता गया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए . रुपाली ने भी आज मेरा साथ देते हुए मुझे किश करना शुरू कर दिया . मैंने रुपाली क सर क पीछे अपना हाथ रख कर पश्नल्ली किश करना शुरू किया तो रुपाली का किश करना भी एक डैम वाइल्ड होता गया. अब रुपाली क हाथ भी मेरे सर क पीछे थे और मेरा दूसरा हाथ उसके नरम मुलायम गोलों पर . रुपाली क बूब्स को दबाता हुआ मैं उसे किश करने में hi बिजी था और रुपाली मेरे साथ ज्यादा से ज्यादा चिपक कर अपने बूब्स मेरे सीने घुसा रही थी. हमारी ऑंखें बंद थी और साँसे उखड रही थी. जैसे hi सांस लेने क लिए मैंने किश तोड़ी तो मेरी नज़र रुपाली पर गयी . वो ज़ोर ज़ोर से साँस ले रही थी और उसका सीना ऊपर नीचे हो रहा था. चेहरा गुलाबी से लाल हो रहा था. हमारी नज़रें आपस में मिली तो मैंने फिर से उसे किश करना शुरू कर दिया. रुपाली भी मेरा साथ दे रही थी और इस बार मैं उसकी ऑंखें में देखता हुआ किश कर रहा था. एक बार फिर से हम दोनों वीलडली किश करने लगे और मैंने अपने दोनों हाथ उसके कूल्हों पर ले जाकर उसे थम लिया और ऊपर उठाते हुए अपनी गॉड में ले लिया. रुपाली ने भी अपने पाऊँ मेरी कमर पर कास लिए और मैं उसे ले कर रूम में चल दिया. आहिस्ता से बिस्टेर पर रुपाली को लेटने क बाद मैं ऊपर हुआ और अपनी T-shirt उतर दी. रुपाली मदहोश आँखों से मुझे और मेरी छोड़ी छाती को देख रही थी. उसने अपने हाथ बढाकर मेरी छाती पर लगा दिए और मैंने. उसके हाथ को पकड़ कर चूम लिया. मैं रुपाली की टांगों क बीच था और मैंने उसके दोनों पाऊँ को पकड़ कर ऊपर उठाते हुए उसके पाऊँ को चुम लिया.

अमित : आपके पाऊँ कितने कोमल हैं , आप सर से पाऊँ तक प्यार करने क लायक हैं.

रुपाली : ऐसी बातें मत करो मुझे शर्म अति है

अमित : आपका ये शर्माना भी किसी ऐडा से काम नहीं है

रुपाली ने अपना चेहरा हाथों में छुपा लिया और मैंने उसके पाऊँ को चूमते हुए कन्धों पर रखा और उसकी कमर में हाथ दाल कर सलवार को पकड़ा. सलवार में लास्टिक लगी थी तो उतरने में आसानी हो गयी और रुपाली ने भी अपनी कमर को थोड़ा सा उचका कर मेरी मदद की . सलवार को पाऊँ से अलग कर क मैंने बीएड पर फेंक दिया और उनकी गोरी दूधिया टंगे नंगी हो गयी. रुपाली ने अपनी टंगे अपने पेट से लगा ली . केले क तने सी सफ़ेद मुलायम जांघें हाथों में लेते hi मुझे उसकी कोमलता का एहसास हो रहा था . सफ़ेद सलवार क नीचे सफ़ेद पेंटी उसके खजाने को छुपाये हुए थी जिसे मैं एक बार पहले भी भोग चूका था पर आज बात और थी . मैंने पेंटी को दोनों तरफ से पकड़ कर उतरने की कोशिश की तो एक बार रुपाली ने रोका मगर मैंने पेंटी को उसके जिस्म से अलग कर दिया . रुपाली ने फिर से टंगे सिकोड़ ली थी. मैंने उसकी टांगों को पकड़ कर खोला तो उसकी छूट सामने आ गयी मगर अगले hi पल उसने हाथ से उसे फिर से छिपा लिया

अमित : अब मुझसे क्यों छुपा रही हैं आप ? क्या आप नहीं चाहती क मैं इसे प्यार करूँ ?

रुपाली : मुझे शर्म आ रही है . ऐसा मैं अपने पति क इलावा कभी भी किसी क लिए दिल से नहीं थी और आज .....

अमित : आज मैं आपको वो ख़ुशी दूंगा जिसकी आप हक़दार हैं.

इतना कह कर मैंने रुपाली क हाथ उसकी छूट क ऊपर से हटाए और उसकी गोरी गुलाबी रंगत वाली छूट क ऊपर झुक कर अपने होंठ उस पर लगा दिए

रुपाली : आआह्ह्ह्हह कक्ककक्कक्स ये क्या कर रहे हो उम्म्म्म

रुपाली की छूट मेरे होंठ लगते hi पानी या गयी. जो इस बात का सबूत था क वो भी अंदर से इस पल को कितना एन्जॉय कर रही थी. मैंने अपनी एक उंगली से छूट को कुरेदते हुए अपनी जीभ छूट में अंदर बहार करनी शुरू कर दी. रुपाली क जिस्म में वाइब्रेशन शुरू हो गयी. धीरे धीरे उसकी सिसकारियां बढ़ने लगी और उसके हाथ मेरे सर पर चलने लगे. मैं लगातार उसकी छूट को चाट ता जा रहा था और उसकी सिसकारियां पूरे कमरे में गूंजने लगी. वो अपनी कमर को उठाने लगी और मेरा सर अपनी छूट पर दबाने लगी .

रुपाली : आआअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स आअह्ह्ह्ह उनममम ये क्याआ आअह्ह्ह्हह जादू कर रहे हो कक्कक्क्स उन्न्नन्नं मैं गयी आआह्ह्ह्हह आह्ह्हह्ह्ह्ह आअह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ एआइइइइ मायआ आआअह्ह्ह्हह.....

इसके साथ hi रुपाली का पानी निकल गया और मैं उसकी छूट का रास निचोड़ता गया. पानी निकलने क कुछ पल बाद उसका बदन ढीला हुआ और मेरा सर उसकी जांघों की पकड़ से आज़ाद हुआ. रुपाली ऑंखें बंद किये इस पल का मज़ा ले रही थी और उसके स्तन ऊपर नीचे हो रहे थे. मैंने अपनी पेण्ट भी उतर कर एक साइड रख दी और अंडरवियर उतर कर लैंड को आज़ाद कर दिया जो कब से अकड़ रहा था . मैं फिर से रुपाली की जांघों में बीच आ गया और उसकी गोरी चिकनी जांघों को चूमने लगा. रुपाली वैसे hi पड़ी रही. फिर मैंने पोजीशन बनाते हुए रुपाली की कमर क नीचे तकिया रखा और अपने लैंड को उसकी छूट पर सेट किया . रुपाली ने ऑंखें खोल कर मुझे देखा , उसकी आँखों में लाल डोरे नज़र आ रहे थे. रुपाली ने एक नज़र मुझे देखा और फिर अपनी छूट पर सलामी दे रहे मेरे लैंड को. बिना कुछ कहे रुपाली थोड़ा सा ऊपर हुई और अपनी कमीज निकल कर साइड में रख दी और फिर से लेट गयी. मैं समझ गया वो कपडे ख़राब नहीं करना चाहती वर्ण कोई भी अंदाज़ा लगा लेता है कपड़ों से . मैंने फिर से रुपाली और अपनी पोजीशन सेट की और उसकी टंगे अपने कन्धों पर रख कर लैंड का सूपड़ा छूट पर सेट कर क हल्का सा पुश किया. सूपड़ा छूट में फिट हो गया तो मैंने एक माध्यम वेग से धक्का मर कर आधा लैंड छूट में घुसा दिया.

रुपाली : आआह्ह्ह्हह्ह कक्कक्कक्स उम्मम्मम तुम्हारा इतना बड़ा क्यों है आआह्ह्ह्हह कक्कक्स पिछली बार मेरी हालत पतली हो गयी थी आआह्ह्ह्हह कक्कक्क्स

अमित : ये ऐसा hi है . वैसे आप भी किसी जवान लड़की से काम नहीं हो

रुपाली : अब कहाँ जवान , अब तो मेरी 2-2 जवान बेटियां हैं. तुम ऐसी बातें करते हो तो कुछ कुछ होता है मत करो न

अमित : मैं तो वही कह रहा हूँ जो सच है. मैं दिल से आपकी खूबसूरती का कायल हो गया था आपको देखते hi . आपसे प्यार करने का आज मौका मिल रहा है पिछली बार तो ऐसी फीलिंग नहीं आ रही थी जैसी क आज आ रही है.

रुपाली : तुम बड़े तेज़ हो आखिर मन hi लिया न मुझे अब बातें hi करोगे या ....... आआअह्ह्ह्हह मायआ आआआईईईई

रुपाली की बात पूरी होने से पहले hi मैंने लैंड को थोड़ा सा पीछे किया और एक और एक और प्रहार कर दिया. इस बार पूरा लैंड छूट की गहराईयों में उतर चूका था . छूट में लैंड पूरा तिघ्टलय फिट हो चूका था. रुपाली क चेहरे पर पीड़ा क भाव आ गए थे और मुँह खुला हुआ था जैसे वो दर्द बर्दाश्त करने की कोशिश कर रही हो.

रुपाली : आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माआआआ जान hi निकल दी तुमने . ाआईईईई कक्कक्कक्स कोई ऐसे करता है क्या? थोड़ा आराम से नहीं कर सकते . माआआ इतना दर्द तो आअह्ह्ह्हह ककक पहली रत में भी न हुआ था .

अमित : आपको देख कर मैं खुद पर काबू नहीं रख प् रहा हूँ. आप सच मच बहुत खूबसूरत हैं.

मैंने रुपाली पर झुकते हुए उसके स्तनों को ब्रा से खींचकर बहार निकला और बरी बरी से दोनों स्तनों को मुँह में लेकर चूसने लगा. रुपाली मेरे सर को अपने स्तनों पर दबाने लगी . कुछ hi पलों में रुपाली अपनी कमर हिलने लगी तो मैंने कमर हिलनी शुरू कर दी. रुपाली क मुँह से मज़े की सिसकियाँ निकलने लगी

रुपाली : आअह्ह्ह्ह ुकम्म्म कक्कक्स आआह्ह्ह्ह ऐसे hi करो उम्म्म्म उफ्फ्फफ्फ्फ़ आआआह्ह्ह्हह्ह ऐसे करते रहो

मैं लगातार धक्के मरते हुए उसके बूब्स मसल रहा था और साथ hi उसके पाऊँ को चूम रहा था जो मेरे कन्धों पर थे. रुपाली इतनी मस्ती में आ गयी क खुद hi पाने बूब्स मसलने लगी और कमर उठाने लगी .

रुपाली : आअह्ह्ह्हह कक्कक्स उम्म्म्म और तेज़ करो कक्कक्स उम्म्म आआअह्ह्ह्ह और तेज़ मैं होने वाली हूँ आआह्ह्ह्ह ककक आअह्ह्ह आह्ह्ह्ह ाहः आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

एक बार फिर से रुपाली का पानी निकल गया और मेरा लैंड उसकी छूट में था उसके छूट रास में नाहा गया. रुपाली का जिस्म कुछ देर झटके खता रहा और फिर शांत हो गया. मैंने छूट से लैंड बहार निकला और रुपाली को पलट कर उल्टा कर दिया. अब मेरी आँखों क सामने पहाड़ो की तरह सर उठाये उसके बड़े बड़े चूतड़ थे जिन्हे देख कर मेरा मन मचलने लगा. पिछली बार भी रुपाली की गांड नहीं ले पाया था . मैंने झुक कर उसके चूतड़ों पर किश किया और बाईट भी कर दी. मैंने चूतड़ों को फैला कर गांड का सुराख़ देखा जो हल्का भूरा था मगर छोटा सा. मैंने उस पर थूक लगाकर अपनी एक उंगली वहां डाली तो रुपाली पूरी की पूरी हिल गयी .

रुपाली : प्लीज वहां मत करो मैं वहां नहीं ले सकती.

अमित : प्लीज सिर्फ एक बार , मुझे आपकी बैक साइड बहुत पसंद है. मैं एक बार यहाँ से करना चाहता हूँ.

रुपाली : प्लीज अभी नहीं , मैंने कभी वहां नहीं किया है. तुम्हारा तो ये भी कितना बड़ा है. इसके लिए तो बहुत म्हणत करनी पड़ेगी.

रुपाली क जवाब से मुझे लगा क ये शायद आगे भी मुझसे मिलने क लिए अंदर से तैयार है चाहे वो पहले इसे आखिरी मुलाकात कह रही थी . मैंने भी ज्यादा ज़ोर नहीं दिया और उसे घुटनो पर कर क छूट पर लैंड सेट किया और ज़ोरदार धक्का मर कर पूरा लैंड एक hi बार में अंदर कर दिया .

रुपाली : आआअह्ह्ह्हह कक्कक्क्स जानवर मत बनो प्लीज आराम से करो आआह्ह्ह्हह मैं कहीं भागी नहीं जा रही .

मैंने दोनों हाथों से रुपाली की कमर को थमा और धक्के मरने शुरू कर दिए . कुछ hi पलों में रुपाली भी रंग में आ गयी और अपनी कमर पीछे को ठेलने लगी. मेरे धक्कों से रुपाली क चूतड़ थिरक रहे थे और कमरे में ‘ थापपपप थापपपपप थापपपपप ‘ की आवाज़ें आ रही थी. रुपाली का कामर्स उसकी छूट से बह कर उसकी जाँघों से होता हुआ घुटनो तक आ रहा था. मैं अपनी मस्ती में लगा धक्कों की स्पीड बसता जा रहा था. एक बार फिर से रुपाली का पानी निकल गया और वो थक कर बीएड पर गिरने लगी तो मैंने उसकी कमर थम कर ताबड़तोड़ धक्के मरने शुरू कर दिए . अब मैं भी अपना पानी निकलना चाहता था.

रुपाली : आयआईईई आआअह्हह्ह्ह्हह छोड़ दो मुझे जलन होने लगी है प्लीज रुक जाओ

अमित : आअह्ह्ह उम्म्म्म मेरा भी होने वाला है बस थोड़ी देर और

मैंने पूरी जान लगते हुए आखिर क तेज़ धक्के मरे और छूट से लैंड निकल कर उसके बड़े बड़े चूतड़ों पर अपना पानी निकलना शुरू कर दिया . रुपाली औंधे मुँह बीएड पर गिरी पड़ी थी. मैं अपना पानी निकलने क बाद रुपाली क साथ hi बीएड पर ले गया. हम दोनों पसीने में भीग चुके थे. कुछ देर ऑंखें बंद कर क हूँ अपनी साँसे दुरुस्त करने में लगे रहे .

रुपाली : क्या कहते हो तुम ? 3-3 बार मेरा होने क बाद भी तुम लगे रहे .

अमित : क्या करूँ आपका हुस्न hi ऐसा है क मन नहीं भरता . अगर आप इजाज़त देती तो मैं पीछे से करने की अपनी ख्वाहिश भी पूरी कर लेता.

रुपाली : मेघा दीदी क साथ करते हो न तुम फिर मेरे पीछे क्यों पड़े हो?

अमित : उसके साथ तो बस मज़बूरी में हो गया था जबकि आपके साथ तो मेरी दिली ख्वाहिश है. क्या आप मेरी ीचा पूरी नहीं करेंगी ?

रुपाली : तुम जो मांग रहे हो वो मुझे बिस्तर पर दाल देगा. चलो वो देखा जायेगा अगर किस्मत ने फिर से मिलाया तो मैं अगली बार तुम्हारी ये ख्वाहिश पूरी कर दूंगी .

अमित : तो क्या आप मुझसे दुबारा नहीं मिलेंगी?

रुपाली : देखो अमित हम दोनों की उम्र में बहुत फरक है. हमारे बीच ये सब होना गलत है. तुम्हारे जितनी तो मेरी बेटियां हैं. अगर कहीं उन्हें पता चला तो मेरा क्या होगा? मेरे पास उनके सिवा कुछ नहीं है. किस्मत ने हमें मिलाया है और अगर फिर से कभी हम मिले तो मैं तुम्हारी ीचा पूरी करुँगी. इसके इलावा मैं कुछ नहीं कह सकती.

अमित : क्या आपको मेरे साथ ाचा नहीं लगा ?

रुपाली : कितना ाचा लगा ये तो शायद मैं बता भी नहीं सकती , बस इतना जान लो क इतना मज़ा मुझे कभी नहीं आया . मगर मैं अपनी बेटियों की नज़रों में गिरना नहीं चाहती इस लिए मुझे फाॅर्स मत करना.

अमित : ठीक है जैसी आपकी मर्ज़ी. लगता है मेरा सपना सपना hi रह जायेगा.

रुपाली : स्माइल ) तुम बहुत अचे हो , क्या पता तुम्हारा सपना किसी दिन सच हो जाये .

इतना कह कर रुपाली ने मेरे होंठो पर किश कर दी और मैं भी उसके होंठ चूमने लगा. उसके बाद वो बिस्टेर से उठी और बाथरूम में चली गयी . रुपाली की चल कुछ बदल गयी थी . मैं एक बार फिर से उसके चूतड़ हिलते देख कर दिल पर पत्थर रख कर खुद को सँभालने लगा. रुपाली ने बाथरूम का दरवाज़ा बंद करने से पहले मुझे हस्ते हुए देखा और कहा

रुपाली : सपने देखते रहो शायद कभी पूरे हो जाएँ.

इतना कह कर उसने दरवाज़ा बंद कर दिया. कुछ देर बाद वो नाहा कर वापिस आयी और कपडे पहन कर तैयार हो गयी. मैंने भी हाथ मुँह धोकर अपने कपडे पहन लिए . हम दोनों वापिस पहले जैसे तैयार हो गए.

रुपाली : ाचा अब मैं चलती हूँ. अपनी दोस्त को आज़ाद करवाना और ऐसे hi दूसरों की मदद करते रहना. यू हैवे रियली ा काइंड हार्ट . तुम दूसरों क दुःख को समझते हो और उन्हें प्यार से संभालना भी जानते हो. मुझे तुम्हारे साथ बहुत ाचा लगा . मगर मेरा तुम्हारा सफर यहीं तक है. किस्मत ने फिर से मिलाया तो देखेंगे.

इतना कह कर उसने मुझे गले से लगा कर एक भरपूर किश की और चली गयी. मैं उसके साथ बिताये हसीं पलों को कुछ देर यद् करता रहा. एक ग्लानि जो मेरे मन में थी क मैंने उसके साथ पिछली बार गलत किया था अब वो निकल चुकी थी. रुपाली को मेरे साथ ाचा लगा और उसे ख़ुशी मिली ये मेरे लिए बहुत था. कॉलेज की छुट्टी का टाइम हो रहा था . मैंने फ़ोन चेक किया तो राधा कल्पना और रीमा की मिस कॉल्स आयी हुई थी. असल में मैंने फ़ोन साइलेंट कर दिया था . मैंने घर जाने की बजाये कॉलेज जाने का सोचा और लैपटॉप ले कर फ्लैट को लॉक करने क बाद मैं चला गया कॉलेज.

कॉलेज पहुंचा तो देखा मोहित और कल्पना साइंस ब्लॉक क पास hi थे. मैं सीधा दोनों क पास चला गया .

कल्पना : ोये किधर थे तुम आज ? कुछ बताते भी नहीं हो ?

अमित : मोहित ने बताया नहीं था क्या ? मुझे किसी से ज़रूरी काम था.

कल्पना : ये लैपटॉप किसका है ?

अमित : ये हमारे खास दोस्त का है , मोहित जनता है उसे . पिछली बार हम गए थे लेन पर मिला नहीं था हैना मोहित .

मोहित को तो पहले समझ hi नहीं आया क मैं क्या कह रहा हूँ पर मैंने उसे आँखों से इशारा किया तो उसकी घंटी बजी .

मोहित : खुश होते हुए ) तो तुझे लैपटॉप मिल गया , ये तो बहुत अछि बात है . अब क्या करना है?

कल्पना : एक मिनट , ये लैपटॉप कहीं मोंटी का तो नहीं ?

कल्पना की इस बात पर हम दोनों एक दूसरे को देखने लगे.

कल्पना : तो ये उसी का है , बचा समझा है क्या मुझे ? तुम दोनों से ज्यादा समझदार हूँ बच्चू. अब बताओ चक्कर क्या है?

अमित : वो तुम्हे तो पता hi है मैंने बताया था न क मोंटी मेरी एक दोस्त को तंग करता है . बस इसी में वो है जिसके डैम पर वो उसे परेशां करता था.

कल्पना : ये तो तुमने ाचा किया अब जल्दी से इसे खोलो.

कल्पना ने मेरे हाथ से लैपटॉप लिया और उसे ों किया. मगर उसमे पासवर्ड लगा हुआ था.

कल्पना : ये तो मुसीबत हो गयी. ये तो हाइली प्रोटेक्टेड है . ये सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर ब्रेक नहीं हो सकता . किसी प्रोफेशनल हैकर hi ये काम कर सकता है .

मोहित : उसी क पास चलते हैं न हम शाम को , क्यों अमित

अमित : हाँ मैं भी यही सोच रहा था. मुझे पहले hi पता था क मोंटी जैसे बदमाश इतना ओपनली तो नहीं छोड़ने वाला इतने ज़रूरी सामान को.

मीनल : किस समन की बात हो रही है ? वह लैपटॉप ये किसका है भाई ? एप्पल का है , मोहित कहीं तुम इसे मेरे लिए तो नहीं लाये?

राधा नेहा दीदी रीमा और मीनल हमारे पास आ गए थे.

कल्पना : लैपटॉप नहीं ये तो टेडी बेयर लाएगा तुम्हारे लिए तुम्हारा मजनू .

नेहा दीदी : फिर ये किसका है? अमित क पास तो है नहीं ये ज़रूर कल्पना का hi होगा.

कल्पना : नहीं दीदी असल में ये किसी का है . बस थोड़ी प्रॉब्लम हो गयी थी तो चेक करवाना है .

रीमा बड़े गौर से लैपटॉप को देख रही थी शायद उसने पहचान लिया था क ये मोंटी का है मगर उसने कोई बात नहीं की.

राधा : तुम आज कहाँ थे सारा दिन? अभी तुम्हारी चोट ठीक भी नहीं हुई और तुम फिर से बहार घूमने लगे . मैं आज hi माँ से बोल कर तुम्हारी शिकायत करती हूँ सब से.

अमित : अरे अरे ऐसा मत करना , मैं तो एक ज़रूरी काम से गया था कहीं. बहुत ज़रूरी था वर्ण मैं नहीं जाता

राधा : मुझे कुछ नहीं सुन्ना , अभी तुम्हारी चोट ठीक भी नहीं हुई होगी और तुम हीरो बने फिर रहे हो. सर पर कैप लगाकर तुम दूसरों से अपनी चोट छिपा सकते हो पर हम तो जानते हैं न. उस दिन क्या हालत हो गयी थी पता है न ? बेहोश हो गए थे तुम और तुम्हे अपनी कोई परवाह नहीं . काम से काम उनका तो सोचो हो तुम्हारी परवाह करते हैं.

राधा जज़्बात में इतना कुछ मुझसे कह रही थी उसकी बातों में गुस्सा और नाराज़गी दोनों थे. आज तक कभी वो मुझसे ऐसे बात नहीं करती थी. मैं समझ सकता था क वो मेरी कितनी परवाह करती है. मैं आ चुप चाप उसकी बातें सुन रहा था जबकि मोहित मीनल और कल्पना को हंसी आ रही थी .

राधा : जवाब क्यों नहीं देते अब ? और तुम गए कैसे थे ? बाइक से न ? कार तो तुम्हे अति नहीं . डॉ मन किया था न क कुछ दिन बाइक नहीं चलनी फिर भी तुम बाइक पर गए .

अमित : ी ऍम सॉरी राधा , पर मेरा जाना ज़रूरी था.

राधा : किसी और को ले जाते या मुझसे कह देते मैं तुम्हे ले जाती अपनी स्कूटी पर .

अमित : अरे मैं बिलकुल ठीक हूँ तुम ऐसे hi चिंता कर रही हो . देखो ाचा भला खड़ा हूँ तुम्हारे सामने.

राधा : पता है मुझे सब . अब तुम मेरे साथ चलोगे हमारे घर . माँ hi खबर लेंगी अब तुम्हारी .

कल्पना : सच में राधा यू अरे तू गुड . देखो कैसे भीगी बिल्ली बना हुआ है तुम्हारे सामने. है है है

कल्पना की इस बात पर सबकी हंसी छूट गयी पर राधा वैसे की वैसे hi बानी रही शायद उसे मेरे ऊपर सबका हसना भी ाचा नहीं लगा .

राधा : ये भीगी बिल्ली नहीं है , ये बस मेरी परवाह करता है इस लिए चुप है और इसे पता है क बात नहीं मैंने पर मैं क्या करुँगी . आज तो तुम्हे माँ क पास ले कर चलना hi पड़ेगा चलो.

अमित : राधा प्लीज ऐसा मत करो मौसी गुस्सा होंगी . देखो मैं ाचा भला हूँ . बाइक चलने में मुझे कोई परेशानी नहीं है .

राधा : ाचा ये बात है तो चलो मुझे बाइक चलकर दिखाओ. आज मैं तुम्हारे साथ hi बाइक पर घर चलूंगी .

अमित : तुम आराम से कार में जाओ कहाँ बाइक पर धुल मिटटी में परेशां होगी .

राधा : मुझे कुछ नहीं सुन्ना. अगर मेरी बात नहीं मणि तो अभी सबको फ़ोन कर क बता दूंगी .

अमित : ाचा ठीक है मगर फिर मेरी शिकायत तो नहीं करोगी न?

राधा : ाचा नहीं करती पर अगर तुम्हे बाइक चलने में परेशानी हुई तो फिर देख लेना .

रीमा अभी तक चुप थी और बस गौर से मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी .

रीमा : अब तो कोई बहाना नहीं चलेगा . राधा अचे से खबर लेना तुम अमित की. अभी एक हफ्ता भी नहीं हुआ और जनाब चले बाइक उड़ने.

राधा : वो hi तो , मैं भी तो देखूं कितना ठीक हो गए है जो बाइक पर स्वर हो गए इतने जल्दी

बातें करते करते हुए हम पार्किंग में आ गए . मैंने लैपटॉप मोहित को ले जाने को कहा . नेहा दीदी कल्पना क साथ बैठ गयी और रीमा भी अपनी कार में बैठ गयी. मैंने अपनी बाइक स्टार्ट की तो राधा भी मेरे पीछे बैठ गयी और अपना हाथ मेरे कंधे पर रख लिया . सब एक एक कर क एक दूसरे को bye करते हुए निकल गए . मैंने भी बाइक को घुमा दिया दिव्या मौसी क घर की तरफ. कॉलेज से कुछ दूर जाते hi राधा ने अपना हाथ मेरे कंडे से हटाकर मेरे पेट पर रख दिया .

राधा : तुम सच में ठीक हो न ? ी ऍम सॉरी मैं गुस्से में कुछ ज्यादा hi बोल गयी. तुम्हे बुरा तो नहीं लगा ?

अमित : कैसी बातें करती हो तुम भी , भला तुम्हारी किसी बात का मैं बुरा मन सकता हूँ?

राधा : मेरी वजह से सब तुम पर है रहे थे मुझे ाचा नहीं लग रहा था .

अमित : वो तो सब अपने hi हैं कोई गैर थोड़ा हैं . तुम उनकी किसी बात का बुरा मत मनो. सच कहूं तो मुझे भी हंसी आने वाली थी जैसे तुम मुझे बड़ों की तरह दांत रही थी .

राधा : दांत कहाँ रही थी मैं वो तो बस ..... तुम अपना ध्यान रखा करो बस . तुमने इतनी जल्दी पट्टी क्यों उतर दी ?

अमित : डॉ ने hi कहा था क अब ज़ख़्म को खुला छोड़ देना चाहिए जल्दी ठीक हो जायेगा.

राधा : भगवन का शुक्र है क तुम जल्दी अचे हो गए वर्ण मैं तो उस दिन बहुत दर गयी थी. मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था . अगर तुम्हे कुछ हो जाता तो ?? ये सोचते hi मेरा दिल घबराने लगा था.

अमित : मुझे कुछ नहीं होगा , तुम्हारे होते भगवन भी मुझे कुछ होने नहीं देगी . इतनी प्यारी लड़की की आँखों में आंसू भला उसे अचे लगेंगे?

राधा ने शर्मा गयी और मेरे पेट पर उसका हाथ कास गया. मेरे पीठ में उसने अपने आप को छुपा लिया. हम ऐसे hi थोड़ी देर में घर पहुँच गए . दिव्या मौसी राधा का hi वेट कर रही थी और मुझे सामने देख कर वो हैरान भी हुई और खुश भी.

दिव्या मौसी : अमित तुम !!! ाचा हुआ तुम आ गए . इतने दिनों से तुम्हे देखा नहीं था , मैं सोच hi रही थी क तुमसे मिल आऊं और तुम खुद hi आ गए .

राधा : आया नहीं मैं लेकर आयी हूँ माँ. जनाब को तो फुर्सत hi नहीं हमारे घर आने की दुनिया भर क काम करवा लो.

दिव्या मौसी : ऐसा क्यों कह रही हो तुम

राधा : खुद hi पूछ लो बाइक पर कहाँ घूमते फिर रहे हैं .

दिव्या मौसी : क्या ?? तुमने बाइक चलनी शुरू कर दी ? पर बीटा अभी तो तुम्हारे ज़ख़्म ठीक नहीं हुए होंगे.

अमित : मौसी अब मैं ठीक हूँ इसी लिए तो बाइक चला रहा हूँ. पूछ लो राधा से ये पीछे बैठ कर hi तो आयी है.

दिव्या मौसी : पर तुझे अभी ज़रूरत क्या थी बाइक चलने की ? मोहित क पास कार है न .

राधा : माँ अब क्या यहीं खड़ा रखोगी या कुछ खाने पिने को भी डौगी बड़ी भूख लगी है . आज तो कैंटीन में भी कुछ नहीं खाया.

दिव्या मौसी : तुम दोनों हाथ मुँह धोलो मैं खाना लगाती हूँ.

दिव्या मौसी किचन में चली गयी और राधा अपने रूम की तरफ जाने लगी तो मैंने पूछा .

अमित : आज कैंटीन में नहीं गए क्या ?

राधा : गए थे मगर जायदा देर रुके नहीं.

अमित : वो क्यों ?

राधा : तुम जो नहीं थे वहां.

इतना कह कर राधा चली गयी और मैं भी अपने हाथ धोने चला गया. उसके बाद दिव्या मौसी क हाथों का लज़ीज़ खाना खाने क बाद मैं उनसे विदा लेकर आ गया . अभी 4 hi बजे थे तो सोचा रस्ते में डॉ रीना से भी मिल लेता हूँ . इस लिए मैं सीधा उनके हॉस्पिटल की तरफ चल दिया.

दूसरी तरफ शीना परेशां थी और शिवानी भी उसके पास बैठी थी.

शिवानी : शीना बात क्या है तुम इतनी परेशां क्यों हो ?

शीना : यार वो मोंटी इतने दिन से घर नहीं आ रहा . जब भी फ़ोन करती हूँ तो ज्यादा बात नहीं करता और फ़ोन काट देता है. मैं उससे सब कुछ पूछना चाहती हूँ मुझे सच जानना है.

शिवानी : क्या तुम्हे मेरी और अमित शालू की बातों पर विश्वास नहीं है?

शीना : ऐसी बात नहीं है , पर मैं खुद उससे पूछना चाहती हूँ क उसने ऐसा क्यों किया ? उसने शालू क साथ क्या किया है ? वो उस दिन राधा क साथ क्या करने वाला था? मुझे सब सच जानना है. माइड से पता लगा है क वो कल घर आया था और जल्दी में अपने साथ बैग लेकर घर निकल गया किसी को बता कर भी नहीं गया.

शिवानी : तुम उसकी चिंता मत करो. उसे भला क्या होगा. वो तो खुद दूसरों की ज़िन्दगी उजड़ता है .

शीना : उसने तुम्हारे साथ भी गलत किया है न, तुम चिंता मत करो मैं तुम्हे इंसाफ ज़रूर दिलवाऊंगी तुम मेरी बेस्ट फ्रेंड हो . मैं सब ठीक कर दूंगी.

शिवानी : छोड़ न यार शीना कोई बात कर. मुझे कुछ नहीं चाहिए . मेरी hi गलती थी जो मैंने मोंटी जैसे लड़के पर विश्वास किया . काश क अमित मुझे पहले मिला होता तो ....

शीना : तो ?

शिवानी : कुछ नहीं

शीना : वो सच में बहुत ाचा है . तुम सही कहती हो अगर वो पहले मिला होता तो आज बात कुछ और होती . मुझे आज तक एक भी लड़का उसके जैसा नहीं मिला था . सच कहूं तो ऐसा लग रहा है जैसे क अमित hi वो लड़का है जिसकी मुझे तलाश थी.

शिवानी : शॉकेड ) शीना !!!!! ये तुम क्या कह रही हो ??

शीना : वही जो तुमने सुना , पर ये बात किसी को मत बताना . पता नहीं क्या कशिश है उसमे, मैं पहले दिन hi उसकी पर्सनालिटी से इम्प्रेस हो गयी थी . मोंटी क साथ पंगे की वजह से बस मुझे उस पर गुस्सा आ गया और हर बार किसी न किसी बात पर ये गुस्सा बढ़ता गया . मगर उसने उस दिन मेरी जान और इज़्ज़त बचाकर मनो मुझे खरीद hi लिया. अब तो उसे किसी भी कीमत पर मैं अपना बना कर रहूंगी .

शिवानी : ये गलत है शीना , तुम उसके साथ ज़बरदस्ती तो नहीं कर सकती न. ये उसकी मर्ज़ी है वो किसे चाहता है या नहीं.

शीना : एवरीथिंग इस फेयर इन लव एंड वॉर. वैसे तुम चिंता मत करो मैं अब कुछ गलत नहीं करुँगी. मैं उसे प्यार से जीतूंगी. उसे मेरे प्यार को एक्सेप्ट करना hi पड़ेगा. अगर वो एक बार कहेगा तो मैं उसके लिए कुछ भी कर गुज़रूंगी. शिवानी तुम मेरी बेस्ट फ्रेंड हो न, मेरी बहिन तुम मेरा साथ डौगी न.

शिवानी : मन में ) मैं तुझे मन कैसे करुणा शीना पर ये भी सच है क वो तुम्हे प्यार नहीं करने वाला. वो सब से अलग है और तुम पर तो विश्वास hi नहीं करता प्यार क्या करेगा.

शिवानी : एक शर्त पर , तुम किसी क साथ कुछ गलत नहीं करोगी.

शीना : ी प्रॉमिस , मैं किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाउंगी .



शिवानी : तो ठीक है मैं तुम्हारे साथ हूँ .
 
अपडेट 133



मैं हॉस्पिटल पहुंचा तो डॉ रीना अभी अपने केबिन में आ कर बैठी hi थी एक राउंड पेशेंट्स को देख कर आने क बाद.

अमित : मई ी के इन मम?

डॉ रीना : कितनी बार कहा है क मेरे केबिन में आने क लिए तुम्हे पूछने की ज़रूरत नहीं है.

मैं दरवाज़े को पूरा खोलता हुआ अंदर आ गया . डॉ रीना अभी परदे क पिछली तरफ लगे वाश बेसिन में हाथ साफ़ कर रही थी .

अमित : आप को कैसे पता क दरवाज़े पर मैं hi हूँ ? कोई और भी तो हो सकता था .

डॉ रीना : पहली बात क इस समय मुझे कोई डिस्टर्ब नहीं करता क्यों क ये टिया ब्रेक है. दूसरी बात क मुझे तुम्हारी आवाज़ अचे से पता है. बिना देखे भी पहचान सकती हूँ मैं.

अमित : तो इतनी पहचान हो गयी है आपको मेरी. वैसे मैं गलत टाइम पर आ गया. आपको तो इस टाइम रेस्ट करनी चाहिए . अभी शायद आप पेशेंट को देख कर hi आयी हैं.

डॉ रीना : तुम बिलकुल सही समय पर आये हो और मैं बहुत खुश हूँ क तुम ए . वैसे आज कॉफ़ी मैं घर से नहीं लायी और तुम भी यहाँ पट्टी करवाने तो आये नहीं . क्यों न हम बहार चले कॉफ़ी पिने.

अमित : जैसी आपकी मर्ज़ी .

डॉ रीना : अकेले hi आये हो न ?

अमित : जी अकेला hi हूँ

डॉ रीना : फिर तो ज़रूर बाइक पर होंगे तो आज बाइक पर hi चलते हैं बड़े दिन हो गए बाइक पर बैठे तुम्हारे साथ.

अमित : मैं तो तैयार हूँ आपको बिठाने को पर लोग कहीं गलत न समझ ले क पेशेंट बन कर आया था और डॉ hi फसा ली.

डॉ रीना : लोग जो कहते हैं कहने दो, मुझे परवाह नहीं . कोई तुम्हे मेरा बर्फ समझ कर जलता है तो जलने दो न. मुझे तो कोई ऐतराज़ नहीं.

अब डॉ रीना की ऐसी बेबाकी क आगे मैं और क्या बोलता बस चुपचाप उनके साथ बहार आ गया जहाँ बाइक कड़ी थी. मैंने बाइक को स्टार्ट की तो वो मेरे पीछे बैठ गयी. आज वो बिन झिझक और दर क मेरे पीछे बैठी थी और उन्होंने अपना हाथ मेरे पेट पर रखा हुआ था

अमित : आपको दर तो नहीं लग रहा आज?

डॉ रीना : तुम्हारे साथ दर कैसे लग सकता है. तुम मुझे कुछ होने थोड़ा hi डोज

अमित : इतना विश्वास है मुझ पर ?

डॉ रीना : इसी लिए तो तुम्हारे साथ जाने का सोचा है शादी पर.

डॉ रीना : मन में ) तुम्हारे साथ अकेले में इतना वक़्त तो वहीँ मिल सकता है जिसमे मैं अपने दिल की बात बता सकूँ

अमित : वैसे आप ने कोई डॉ पसंद किया क नहीं ? या साडी ज़िन्दगी ऐसे hi रहना चाहती हैं

डॉ रीना : पसंद तो है एक , पेशे से तो डॉ नहीं मगर मैं उसकी पेशेंट ज़रूर बन गयी हूँ.

अमित : रियली ? ये तो बहुत अछि बात है . बहुत लकी है वो जिसे आप पसंद कर रही हैं. वैसे है कौन वो?

डॉ रीना : है एक , मेरे दिल का शेह्ज़ादा. मगर बड़ा hi बुद्धू है. समझता hi नहीं मेरी फीलिंग को. आज तक उसके सिवा मैंने किसी क साथ अकेले में टाइम नहीं बिताया और फिर भी वो है क न मेरी बात समझता है न इशारा. मैंने भी सोच लिया है क उसे अपने दिल का हल कह क hi रहूंगी.

अमित : बेस्ट ऑफ़ लक. वो जो कोई भी हो आपको मन कर hi नहीं सकता. आप जैसी खूबसूरत और दिल की अछि लड़कियां है hi कितनी ज़माने में. ब्यूटी विथ ब्रेन इस ा रियली रेयर कॉम्बिनेशन.

डॉ रीना : वैसे अगर तुम उस लड़के की जगह होते तो तुम क्या कहते ?

अमित : मैंने कहा न आपको कोई मन कर hi नहीं सकता . मैं भी तो सब में अत हूँ.

इतने में हम कैफ़े पहुँच गए . अंदर जाकर हम ने एक कार्नर में 2 चेयर वाला टेबल

लिया और मैं कॉफ़ी लेने चला गया. हमेशा की तरह लड़के लड़कियां जो शायद कपल hi थे वहां बैठे हुए थे. मैं जब कॉफ़ी ले कर वापिस आया तो डॉ रीना किसी सोच में डूबी हुई थी.

अमित : क्या हुआ कहाँ क्या सोच रही हैं आप ? लीजिये कॉफ़ी पीजिये .

डॉ रीना : कुछ नहीं बस ऐसे hi कुछ सोच रही थी. एक बात का जवाब डोज ?

अमित : आप ये हर बार कुछ भी पूछने से पहले हर बार इजाज़त क्यों मांगती हैं? मुझे ाचा नहीं लगता.

डॉ रीना: ाचा अब नहीं पूछती पहले . मैं ये पूछना चाहती हूँ क अगर किसी से प्यार हो जाये और वो उम्र में हमसे बड़ा हो या फिर छोटा हो तो क्या ये सही है ?

अमित : प्यार उम्र कहाँ देखता है रीना जी. प्यार तो वो मुक़द्दस मुकाम है जहाँ कुछ भी मायने नहीं रखता सिवाए प्यार क. प्यार न धरम देखता है न जाट न रंग न उम्र.

डॉ रीना : लगता है तुम्हे प्यार क बारे में बहुत कुछ पता है.

अमित : जी बिलकुल , फिल्मे मैंने भी देखि हैं है है है

डॉ रीना : वैरी फनी , ाचा अगर लड़की बड़ी हो और लड़का छोटा तो क्या ये सही है?

अमित : मैंने अभी कहा न उम्र नहीं देखि जाती बस मायने रखता है तो प्यार .

डॉ रीना : ाचा , अगर तुम्हे किसी से प्यार हो जाये वो उम्र में तुमसे बड़ी हो तो क्या तुम फिर भी उसे प्यार करोगे या नहीं ?

डॉ रीना क इस सवाल पर मेरे खयालो में मंजू मम और दीपिका ममी का चेहरा आ गया जिनसे मुझे दिल से प्यार था और वो उम्र में भी मुझसे बड़ी थी उनके साथ hi कामिनी ममी रमा आंटी रीता मौसी का भी अक्स मेरे ज़ेहन में आ गया.

अमित : प्यार तो सिर्फ प्यार है रीना जी इसमें उम्र का या कोई और बंधन हो hi नहीं सकता . हाँ समाज क कुछ कायदे कानून हैं जो अक्सर प्यार क आड़े आ जाते हैं. मगर दिल सिर्फ प्यार की भाषा समझता है.

डॉ रीना : वैसे 4-5 साल तो कोई ज्यादा फर्क न होगा जो समाज इसमें आड़े आये .

डॉ रीना की बात पर मैं चौंक गया. 4-5 साल उन्होंने किस लिहाज़ से कहा था . मैंने उनकी बात का मतलब जानने क लिए उनसे पूछ hi लिया

अमित : ये 4-5 का फरक आप क्यों कह रही हैं ?

डॉ रीना : अरे ऐसे hi पूछ रही हूँ. वो होता है न लड़की लड़के से छोटी होनी चाहिए तो hi लोग रिश्ते क लिए मानते हैं. अगर तुम्हे किसी ऐसी लड़की से प्यार हो जाये जो 4-5 साल तुमसे बड़ी हो तो क्या तुम उसके साथ रिश्ता बनोगे या नहीं

अमित : मेरा जवाब अभी भी वही है. जब लड़का 4-5 साल बड़ा हो सकता है तो लड़की क्यों नहीं ?

मेरा जवाब सुनते hi डॉ रीना क चेहरे पर ख़ुशी छ गयी और शर्मा कर उन्होंने एक बार नज़रें झुका ली.

अमित : अब चलें ? कॉफ़ी भी ख़तम हो गयी अब तो.

डॉ रीना : ख़तम हो गयी ? ओह्ह , तुम और कुछ नहीं लोगे ? मेरा मतलब है कुछ खाने को या ....

अमित : नहीं रीना जी , अब हमें चलना चाहिए. आपको भी तो ड्यूटी पर जाना है. देखिये 5 बज गए हैं

डॉ रीना : 5 बज गए ? तुम्हारे साथ वक़्त का पता hi नहीं चलता. ऐसा लगता है घडी तेजी से भाग रही है. चलो चलते हैं ड्यूटी तो देनी hi पड़ेगी.

उसके बाद हम दोनों फिर से हॉस्पिटल आ गए. रस्ते में फिर से डॉ रीना मेरे साथ चिपक कर बैठी थी और पता नहीं क्या क्या बातें करते हम वापिस आ गए.

डॉ रीना : कल आओगे ?

अमित : जी नहीं , कल मुश्किल है. मैं कल हैं जा रहा हूँ और संडे भी उधर hi रहूँगा.

डॉ रीना : ओह्ह ाचा , यद् रखना मंडे को मेरे साथ चलना है तुम्हे वर्ण मैं भी नहीं जा पाऊँगी.

अमित : मैं पहुँच जाऊंगा आप चिंता मत करें. ाचा मैं अब चलता हूँ.

डॉ रीना : ok , बीईई

उसके बाद मैं सीधा घर गया क्यूंकि लैपटॉप का भी काम करना था. जब मैं घर पहुंचा तो मोहित हॉल में hi आंटी क साथ बैठा चाय पि रहा था.

मोहित : आ गया तू ? मैं तेरा hi इंतज़ार कर रहा था.

आंटी : कहाँ थे तुम अब तक ?

अमित : मोहित ने बताया नहीं आपको क मैं दिव्या मौसी क घर गया था.

आंटी : उसके बाद कहाँ थे? दिव्या से मेरी बात हुई थी तुम 4 बजे निकल गए थे वहां से

अमित : वो रस्ते में डॉ को दिखने चला गया था .

आंटी : अपना ध्यान रखा करो बता कर जाता करो. अब तुम दोनों कहाँ जाने वाले हो?

मोहित : माँ एक लैपटॉप ठीक करवाना है. बस वहीँ जा रहे हैं जल्दी वापिस आ जायेंगे. चल चलें यार.

आंटी : कोई चाय कॉफ़ी नहीं पियोगे तुम?

अमित : नहीं आंटी मैं कॉफ़ी पि कर hi आया हूँ.

मोहित और मैं लैपटॉप लेकर उसकी कार में निकल गए और उसी लड़के क पास जो अंकल क ऑफिस में काम करता था .

मोहित : कैसे हो भाई ? ये रहा लैपटॉप जिसकी मैं बात कर रहा था. इसका लॉक खोलना है और मुझे सारा डाटा चाहिए .

उस लड़के ने कुछ देर लैपटॉप को चेक किया और अलग अलग तरीके से उसे चलने की कोशिश की.

लड़का : इसमें तो एडवांस सिक्योरिटी वर्शन लगा है यार. किसका लैपटॉप है ये? कोई आम आदमी तो ऐसा सॉफ्टवेयर डालता hi नहीं. काफी महंगा है ये.

मोहित : वो सब छोड़ तू इसे खोल सकता है क्या.

लड़का : सॉरी यार मैं इसे तोड़ नहीं पाउँगा . ये मेरे बस क बहार है. अगर मैंने दूसरा तरीका लगाया तो ये सब फॉर्मेट कर देगा और कुछ नहीं बचेगा.

अमित : ये तो पन्गा हो गया यार अब इसे कैसे खोलेंगे?

मोहित : ाचा ठीक है हम चलते हैं. तुम एक काम करना किसी और से भी पूछ कर देखना अगर कोई इसे खोल सके तो.

लड़का : वैसे तो अभी तक इसको किसी ने ब्रेक नहीं किया है क्यूंकि ये लेटेस्ट है. फिर भी मैं और करूँगा पर चान्सेस काम hi हैं.

हम दोनों उस लड़के से मिल कर निराश वापिस लौट पड़े.

अमित : अब क्या होगा यार? ये तो साला नया पन्गा खड़ा हो गया.

मोहित : अरे यार तू टेंशन क्यों लेता है? हूँ एक काम करते हैं इस लैपटॉप को hi तोड़ देते हैं. न कोई रिकॉर्ड रहेगा न मोंटी कुछ कर पायेगा .

अमित : वो तो ठीक है यार पर काम से काम पता तो चले को वो सब इसमें है भी या नहीं जो हमें चाहिए . क्या पता वो इसमें हो hi न या मोंटी ने कहीं और रखे हों तो?

मोहित : ये भी सही है. मगर अब इसका करें क्या? पासवर्ड तो मोंटी क hi पास होगा. और वो तो किसी को देने से रहा.

अमित : वही मैं भी सोच रहा हूँ.

मोहित : एक आईडिया है

अमित : बता

मोहित : शीना

अमित : शीना ?

मोहित : यार वो मोंटी की बहिन है , क्या पता उसे पता हो पासवर्ड क बारे में.

अमित : वो तो रीमा भी है न. हम उससे hi पूछ लेते हैं. वैसे भी वो समझ गयी होगी क ये मोंटी का लैपटॉप है इसी लिए तो ध्यान से देख रही थी.

मोहित : हम्म ये तो और भी अछि बात है. वो तो मोंटी क खिलाफ भी है. मगर यार तेरे को नहीं लगता क रीमा जैसे मोंटी क खिलाफ हमारे साथ है क्या वो सच में उसकी बहिन हो सकती है? मुझे तो नहीं लगता.

अमित : इसमें क्या है , रीमा एक अछि लड़की है और कहीं से भी वो शीना या मोंटी जैसी नहीं है . इसी लिए उसने हमारा साथ दिया .

मोहित : चलो एक बार उससे पूछ कर देख.

अमित : हम्म घर चल क बात करते हैं.

घर पहुंचे तो मेरा फ़ोन बजने लगा. मैंने चेक किया तो मंजू म का फ़ोन था. आज मैं कॉलेज भी नहीं गया था और ऊपर से 7 बजने वाले हो गए थे और उनके पास भी नहीं गया. इस लिए लैपटॉप को रूम में रख कर मैं पहले मंजू म क पास चला गया . मैं आज बाइक पर आया था तो बाइक की आवाज़ सुन कर hi मम ने दरवाज़ा खोल दिया. मैं बाइक साइड में लगा कर उनके पास पहुंचा तो वो होंठों पर प्यारी मुस्कान लिए मेरे इंतज़ार में कड़ी थी.

अमित : सॉरी आज थोड़ा लेट हो गया .

मंजू म : सॉरी की ज़रूरत नहीं है. मैं आज बहुत खुश हूँ . तुम्हे फिर से बाइक चलता देख कर मुझे कितना ाचा लग रहा है मैं बता नहीं सकती .

मैं जैसे hi घर क अंदर घुसा तो मम ने मेरे गले में बहन दाल ली और मुझे किश करते हुए मेरे साथ चिपक गयी . मैं भी उनका साथ देने लगा. मंजू म में पता नहीं क्या कशिश थी जो मैं उनके पास आते hi बस उनमे खो जाता था. मंजू म क कोमल बदन को अपने बाज़ुओं की गिरफ्त में लेकर मैंने उन्हें रास भरे होंठो का रास पीने लगा. हम दोनों एक दूसरे में ऐसे खोये थे क सांस उखाड़ने से हमने किश तोड़ी.

अमित : आप इतनी प्यारी और मीठी क्यों हैं? जब भी आपको चूमता हूँ तो खुद पर काबू नहीं रहता.

मंजू म : यही सवाल मैं तुमसे पूछूं तो ? पता नहीं क्या कशिश है जो मुझे तुम्हारे पास खिंच लती है और मैं भी दिल क हाथों मजबूर बस खींची चली आती हूँ. शायद हमारा रिश्ता जन्मो जन्मो का है

अमित : इसी बात का मुझे दर है क कहीं मैं ऐसा कुछ न कर बैठूं क आपकी और खुद की नज़रों से hi गिर जॉन.

मंजू म: ऐसा कभी नहीं होगा. मैं जानती हूँ क तुम्हे किसी न किसी को तो अपनी ज़िन्दगी में जगह देनी hi होगी और मुझे इससे कोई फरक नहीं पड़ता. वैसे भी तो दुनिया क सामने हम एक नहीं हो सकते न. मैं बस इतना चाहती हूँ क तुम मुझे ज़िन्दगी भर अपने पास रखो . मेरी आखिरी सांस निकले तो तुम्हारी बाँहों में.

अमित : ख़बरदार जो ऐसी बात दोबारा की तो. मैं आपको कभी खुद से अलग नहीं होने दूंगा. मैं आपको को वो हर ख़ुशी दूंगा जो कभी अपने ख्वाब में hi क्यों न देखि हो. एक बात आप से करना चाहता हूँ अगर आप बुरा न मने तो

मंजू म : तुम्हारी किसी बात का मैं बुरा मन सकती हूँ क्या. बोलो क्या बात है?

अमित : अगर मेरी ज़िन्दगी में कोई लड़की आ जाये तो आप को कैसा लगेगा?

मंजू म : स्माइल ) बस इतनी सी बात , कौन है वो लड़की ?

अमित : ये मेरे सवाल का जवाब नहीं है .

मंजू म : मैंने तो जवाब पहले hi दे दिया है तुम्हे. मुझे कोई फरक नहीं पड़ता किसी से , ये तो एक दिन होना hi है . मैं बस इतना चाहती हूँ क तुम मुझे हमेशा अपने पास रखो और मुझे अपना प्यार देते रहना

अमित : आपको सच में कोई फरक नहीं पड़ेगा अगर मैं किसी को आपके सामने अपनी बाँहों में लूंगा उसे प्यार करूँगा

मंजू म : मैं ये सब तो शायद देख नहीं पाऊँगी पर मैं इस बात से ऐतराज़ भी नहीं करुँगी . बीवी को तो प्यार करना तुम्हारा फ़र्ज़ है न. अगर तुम्हे कोई पसंद है तो बेझिझक कहो मुझसे. वर्ण अभी इन बातों को बहुत समय है.

अमित : एक लड़की है जो मुझसे प्यार करती है और मैं भी उसे पसंद करता हूँ.

मंजू म : स्माइल ) तो ये बात है. यानि क मेरे शेर को किसी से मुहब्बत हो गयी है. कौन है वो ? कहीं कल्पना तो नहीं ?

अमित : अरे नहीं नहीं वो तो मेरी बेस्ट फ्रेंड है. वैसे आप उसे जानती हैं.

मंजू म : मैं जानती हूँ ? कौन है वो ?

अमित : आपकी भतीजी और मोंटी की बहिन .

मंजू म : शॉकेड ) शीना ????? ये तुम क्या कह रहे हो ?

अमित : मैंने शीना कब कहा ? मैं तो रीमा की बात कर रहा हूँ.

मंजू म : रीमा ?? क्या सच में ?? वो भी तुमसे प्यार करती है?

अमित : हाँ , वो मुझसे प्यार करती है. और जानती हैं उसी ने मेरी मदद की थी . अगर वो न बताती मोंटी क प्लान क बारे में तो मुझे कैसे पता चलता क राधा क साथ क्या होने वाला है . मैंने तो बेचारी को बुलाना hi बंद कर दिया था जब मुझे पता चला था क वो मोंटी की बहिन है और देखिये उसी ने मदद की मेरी.

मंजू म : तुमसे किसने कहा क वो मोंटी की बहिन है? वो तो अपनी माँ पर गयी है .उसकी न भी तो ऐसी hi है . दिल की साफ और सबको प्यार करने वाली. एक वो hi तो थी जो भैया क जाने क बाद मुझे प्यार देती थी.

अमित : शॉकेड ) क्याआ ?? रीमा मोंटी की बहिन नहीं है ?? मगर वो ,,,,, तो वो शीना को दीदी क्यों कहती है?

मैं मंजू म की बात का मतलब समझ रहा था पर मैं छह रहा था क ऐसा न हो.

मंजू म : वो मेरे दूसरे भैया की बेटी है यानि क मोंटी क चाचा की बेटी . अब रिश्ते में वो मोंटी शीना की बहिन hi लगी न? उसकी माँ रुपाली भाभी दिल की बहुत अछि हैं और रीमा अपनी माँ पर hi गयी है बल्कि दोनों बेटियां भाभी पर hi हैं. रीमा को तो कॉलेज में देखा है मैंने पर बड़ी को तो देखे hi सैलून हो गए.

मंजू म की बात सुन कर तो मैं शॉकेड hi हो गया. आखिर वही हुआ जो मैं छह रहा था क न हो. रुपाली रीमा की माँ है , और मैं उसी क साथ वो सब ..... मुझे खुद पर गुस्सा आने लगा क मैंने कभी इस बात पर ध्यान क्यों नहीं दिया . मैं तो समझा था क मोंटी की बहिन है और मोंटी की माँ मेघा तो ऐसी थी जिसके साथ बहुत सरे लोग मज़े ले चुके होंगे ऐसे में मैंने भी कर लिया तो क्या फरक पड़ता है. पर आज रुपाली ने जो अपनी दुःख भरी दास्ताँ सुनाई थी और उसके बाद रीमा उसकी बेटी है सुनने क बाद मुझे अब शर्मिंदगी होने लगी क मैंने बस रुपाली की खूबसूरती देख कर उसे भोगने क बारे में सोचा और एक बार इन बातों पर कभी मेरा ध्यान नहीं गया. मुझे समझ नहीं आ रही थी क मैं रीमा का सामना कैसे करूँगा . और जब रुपाली को पता चलेगा की उसकी बेटी ऐसे लड़के से प्यार करती है जो न सिर्फ उसकी माँ को भोग चूका है बल्कि उसकी तै को भी तो वो क्या सोचेगी ?

मंजू म : क्या हुआ कहाँ खो गए तुम? रीमा बहुत अछि लड़की है और मुझे ख़ुशी है क उसने तुम्हे चुन कर सही फैसला किया है. मैं तुम दोनों क बीच कभी नहीं आउंगी . वो मेरी भी बेटी जैसी है तो उसके साथ मैं नाइंसाफी नहीं कर सकती .

अमित : नहीं ऐसा नहीं होगा , मैं उसे मन कर दूंगा पर आपको कभी नहीं छोडूंगा.

मंजू म : नहीं ऐसा मत कहो , तुम नहीं जानते बिन बाप क उसने कैसे ज़िन्दगी बितायी होगी अब तक तुम ज़रा सोच कर देखो . वो भी उस माहौल में जहाँ सिर्फ लालच और घुटन भरी हो घर में रिश्तों में. रुपाली भाभी ने ज़रूर उसे अपने संस्कार दिए होंगे. मेरी मनो तो उसे अपना लो और उसे वो हर ख़ुशी देना जो उसे चाहिए.

अमित : मगर मैं आपको नहीं छोड़ने वाला ये आप अछि तरह समझ लो .

मंजू म : नाम ऑंखें ) इतना प्यार करते हो मुझसे ?

अमित : मैं नहीं जनता क कितना पर मैं आपको खुद से अलग नहीं करने वाला . और अगर आप ने कभी मुझसे दूर होने की कोशिश की तो मैं किसी का भी नहीं रहूँगा ये भी सुन लो आप.

मंजू म फिर से मेरे गले लग गयी और मेरी छाती से लगी आंसू बहाने लगी .

मंजू म : इतना प्यार मत करो मुझे अमित मत करो. मैं बहुत अभागी हूँ . जिसने भी मुझे ज़िन्दगी में प्यार दिया वो मुझसे तकदीर ने छीन लिया . अगर तुम भी मुझसे जुड़ा हुए तो मैं भी ज़िंदा नहीं रह पाऊँगी.

अमित : अब ऐसा नहीं होगा और ये बात आप अछि तरह समझ लो. अब रोना बंद करें. मुझे आपके हाथों की गरमा गरम कॉफ़ी पिणि है.

मंजू म : ांसो पोछते हुए ) तुम बैठो मैं अभी लायी .

अमित : ऐसे नहीं

मैंने मंजू म का चेहरा साफ़ किया और उनके होंठो को फिर से भरपूर किश किया . अब उनके चेहरे पर कुछ रंगत आ गयी थी .

अमित : अब ठीक है , अब जाओ आप और नदिअ सी कॉफ़ी बना कर लाओ.

मंजू म मुस्कुराती हुई किचन में चली गयी और मैं सोफे पर बैठ कर रीमा क बारे में सोचने लगा. एक पल तो मुझे लगा क मुझे रीमा से अलग हो जाना चाहिए पर वो भी दिल की सॉफ्ट थी , पिछली बार क बाद उसने जो अपना हल बना लिया था उसे देख कर मुझे लगा क शायद वो ये सब बर्दाश्त न कर पाए. दूसरा जैसे क मंजू म ने कहा क उसकी ज़िन्दगी आसान नहीं रही होगी उस माहौल में और रुपाली क साथ जो हुआ वो तो मैं देख और सुन hi चूका था. रुपाली ने भी बताया था क मोंटी की नज़र उसकी बेटियों पर ठीक नहीं थी . मुझे अब दर था तो सिर्फ इस बात क क्या रुपाली इस रिश्ते को एक्सेप्ट कर पायेगी? अगर उसने रीमा को सच बता दिया तो ? रीमा क्या सोचेगी मेरे बारे में? मैं इसी दुविधा में डूबा था क मम कॉफ़ी ले आयी . मम क साथ प्यार भरी बातें करते हुए मैंने कॉफ़ी ख़तम की और उनसे इजाज़त ले कर निकल गया.

मुझे अब रीमा को लेकर टेंशन होने लगी थी क अब मैं क्या करूँ ? वो भी दिल से मुझे चाहती थी और उसका दिल मैं एक बार दुख चूका था. मैंने फैसला किया क मैं उसे प्यार दूंगा और रही बात रुपाली की तो वो वक़्त पर छोड़ना hi बेहतर था . मैंने घर जाने से पहले रीमा से एक बार मिलने का सोचा और उसे फ़ोन कर दिया.

रीमा : तो आज आ hi गयी यद् मेरी , रोज़ मैं hi फ़ोन करती हूँ शुक्र है तुमने भी खुद मुझे फ़ोन किया

अमित : यद् तो उसे करते जिसे भूल जाओ और तुम तो हर वक़्त मेरे दिल में रहती हो .

रीमा : आज तो बड़ी रोमांटिक बातें कर रहे हो , क्या बात है ? कहीं ये राधा की दांत का कमल तो नहीं? मैं तो उसे कहूँगी क रोज़ तुम्हे थोड़ा सा दांत दिया करे ताकि तुम ऐसी प्यारी प्यारी बातें कर सको मेरे साथ .

अमित : तो तुम मुझे दांत खिलाकर मज़े लेना चाहती हो. जाओ मैं भी बात नहीं करूँगा तुमसे

रीमा : ऐसा मत कहो , तुमसे दूर रह कर मेरी क्या हालत हो गयी थी मैं hi जानती हूँ . पहली बार मैंने किसी को चाहा है और वो तुम हो . तुमसे दूर मैं कैसे रह पाऊँगी प्लीज ऐसा मत कहो .

रीमा का गाला रुंधने लगा था बात करते हुए. मुझे लगा क मैंने गलत बात कर दी

अमित : अरे अरे मैं तो मज़ाक कर रही था , तुम इतनी जल्दी बुरा मन जाती हो ? मैं गलती से भी तुम्हे अब खुद से दूर नहीं करूँगा. मुझे तो अब पता चला क मेरी गफ इतनी जल्दी रोने लगती है . लगता है मुझे बहुत सरे नैपकिन साथ रखने पड़ेंगे हर वक़्त . तुम्हारा क्या भरोसा कब रोने लगो.

रीमा : तो तुम मुझे रुलाना चाहते हो जो नैपकिन साथ रखोगे हाँ ?

अमित : मैंने ऐसा कब कहा? मैं तुम्हारी आँखों में आंसू नहीं आने दूंगा. ाचा मुझे तुमसे मिलना है , क्या तुम मिल सकती हो मुझसे?

रीमा : तुम सच में मिलना चाहते हो? कहीं तुम मज़ाक तो नहीं कर रहे ?

अमित : इसमें मज़ाक वाली क्या बात है ? क्या मैं अपनी गफ से नहीं मिल सकता? अगर कोई मुश्किल है तो रहने देते हैं.

रीमा : नहीं नहीं कोई मुश्किल नहीं है . मुझे लगा तुम मज़ाक कर रहे हो. तुम बताओ कहाँ मिलना है और कितनी देर में?

अमित : मैं अभी घर से बहार hi हूँ और सोच रहा था क तुमसे मिलने क बाद hi घर जॉन . अब तुम बताओ कितनी देर में और कहा मिल सकती हो?

रीमा : मैं बस अभी निकल रही हूँ घर से तुम बताओ तुम कहाँ हो ?

अमित : ो hello रिलैक्स रिलैक्स . ये क्या बात हुई ? मैंने कहा और तुम उठ कर भागने लगी. अचे से तैयार हो कर आना , हाँ मेकअप करने मत बैठ जाना . मैं इस वक़्त क्सक्सक्सक्स जगह पर हूँ.

रीमा : ाचा ठीक है मैं ड्रेस चेंज कर क 20 मिनट्स में वहां आ रही हूँ . फिर कहीं चलेंगे.

अमित : ok .

दूसरी तरफ आज निधि क ऑफिस में भी कुछ ऐसा हुआ जिससे उसकी चिंता बढ़ने लगी थी और मन में इन्सेक्युरित्य की भावना आने लगी थी. असल में मैनेजर साहब कई बार निधि को अपने साथ डिनर पर चलने और कभी किसी कभी किसी पार्टी पर चलने को कहते रहते थे मगर निधि हमेशा मन कर देती थी ये कह कर क उसकी फॅमिली ये सब अल्लोव नहीं करती . और जब कभी ऑफिस टाइम में भी लंच साथ में करने को कहते तो वो तब भी ताल जाती.

निधि : मई ी के इन सर ?

मैनेजर : यस के इन , आओ निधि

निधि : आपने मुझे बुलाया सर

मैनेजर : हाँ , तुम्हे पता चल गया होगा क हेड ऑफिस में मीटिंग है .

निधि : जी सर , सर ने बताया था मुझे पर सर ी ऍम सॉरी मैं नहीं जा सकती.

मैनेजर : क्यों तुम क्यों नहीं जा सकती ? अपॉइंटमेंट लेटर पर पड़ा नहीं था क कंपनी क ज़रूरी काम से अगर बहार जाना पड़े तो तुम मन नहीं कर सकती. तुम्हे प्रॉब्लम hi क्या है? और तो कोई लड़की मन नहीं करती . वहां ऑफिस क काम से hi जाना है कोई मौज मस्ती करने नहीं जाना हमने. और फिर तुम्हारे साथ मैं हूँ तुम्हे डरने की ज़रूरत नहीं. बस 2 दिन की तो बात है.

निधि : ी ऍम सॉरी सर मेरी फॅमिली ये सब अल्लोव नहीं करती. मैं घर से बहार एक रत भी नहीं रह सकती. अगर आप मुझे फाॅर्स करेंगे तो मैं रिजाइन लिख कर दे दूंगी .

मैनेजर : गुस्से में ) तुम जानती हो तुम क्या कह रही हो? इसके लिए तुम्हे नौकरी से निकला जा सकता है और अगर तुमने रिजाइन दिया बिना प्रायर नोटिस तो तुम्हारे खिलाफ लीगल एक्शन भी हो सकता है.

मैनेजर ने निधि को डरने की कोशिश जो उसका आखिरी हथियार था लीगली एक्शन की. अक्सर लोग इस बात से hi दर जाते हैं क कानूनी पचड़े में फसना पड़ेगा.

निधि : ी ऍम सॉरी सर आप जो चाहें वो कर सकते हैं. पर मैं शहर से बहार कहीं नहीं जाने वाली और न hi किसी काम से रत भर बहार रुक सकती हूँ . मैं रेसिग्नेशन आपको दे दूंगी .

मैनेजर निधि क इस सीधे सपाट जवाब से सकते में आग गया . उसे निधि से इस तरह क जवाब की उम्मीद न थी. कहाँ वो निधि को अपने साथ काम का बहाना कर क उसका फायदा उठाने क चक्कर में था अब उसे अपना प्लान फ़ैल होता नज़र आया तो उसने तुरंत रंग बदल लिया .

मैनेजर : स्माइल ) ी अप्प्रेसियते योर ऐटिटूड मिस निधि. तुमने बिलकुल सही जवाब दिया. मैं तुम्हारी भावनाओं की कदर करता हूँ. असल में मैं हेड ऑफिस से आये आर्डर की वजह से थोड़ा स्ट्रेस में था. तुम्हे तो पता है वो फाइल तुम्हारे अंडर है उस लिए उस पर ब्रीफिंग क लिए तुम्हारा जाना ज़रूरी था. मुझे भी अभी थोड़ी देर पहले फ़ोन आया था मैंने उन्हें मन भी किया था क निधि नहीं आ सकती पर वो मन hi नहीं रहे . तुम चिंता करो मैं तुम्हारे लिए फिर उनसे बात करूँगा. तुम्हारे जैसी होनहार एम्प्लोयी को मैं जाने नहीं दे सकता . तुम चिंता मत करो. अब तुम जा सकती हो.

निधि : थैंक यू सर

निधि इतना कह कर ऑफिस से बहार तो आ गयी मगर वो मैनेजर क इस तरह रंग बदलने से सोच में पद गयी थी. मैनेजर क इरादों पर अब इसे शक होने लगा था. अभी तक उसने सीधी तरह से तो मच कहा नहीं था और न कहा था पर उसकी हरकतें निधि भी अनदेखा नहीं कर रही थी मगर एक तो वो अभी यहाँ न्यू थी और ऊपर से मैनेजर की पोस्ट भी तो सबसे ऊपर थी इस ऑफिस में. वो शिकायत करे भी तो किस्से. निधि अपनी सोच में डूबी अपनी चेयर पर जा कर बैठ गयी . वहीँ मैनेजर एक बार और अपने प्लान पर पानी फिरने से गुस्से में तमतमा रहा था. उसने इण्टरकॉम से अपने जूनियर को बुलाया जो उसका हर बुरे काम का साथी था.

जूनियर : जी सर , कुछ बात बानी ?

मैनेजर : गुस्से में ) साली खुद को पता नहीं क्या समझती है. बोल रही थी रिजाइन कर दूंगी. भेनचोद पहली लड़की मिली है जो मुझको कुछ समझती hi नहीं.

जूनियर : तीखी मिर्ची है सर , जितना गुस्सा दिखाएगी उतना hi मज़ा आएगा इसे मसलने में.

मैनेजर : मसलूंगा तो ऐसा क साली को रंडी न बना दिया तो कहना. इसकी साडी अकड़ इसकी छूट में घुसेड़ दूंगा. पेओन तक न इसके ऊपर चढ़ा दिया तो मेरा नाम बदल देना.

जूनियर : सर आप भी कहाँ पहुँच गए , पहले तो अपने लैंड का जुगाड़ लगाओ बाकि सब का बाद में सोचना . आगे क्या करना है सोचा है?

मैनेजर : एक आखिरी तरय मर क देखता हूँ प्यार से अगर मन जाये तो .

जूनियर : वो कैसे सर ?

मैनेजर : इसे इंसेंटिव क नाम पर गोल्ड चैन देता हूँ कल. ले लेगी तो समझो शीशे में उतर जाएगी अगर नहीं तो फिर बर्थडे पार्टी तो है hi है है है

जूनियर : बिलकुल सर , रंजना क साथ भी तो ऐसे hi किया था . कैसे पालतू बन गयी थी बाद में.

दोनों मिलकर हस्ते हुए अपने खुराफाती प्लान पर हसने लगे.

इधर मैं एक जगह रुक कर रीमा की वेट कर रहा था और कोई आधे घंटे क बाद उसकी कार मेरे सामने आ कर कड़ी हो गयी . कार से उतर कर रीमा मेरे पास आ रही थी और मैं उसकी खूबसूरती को निहार रहा था. किसी हिरणी सी चल क साथ सादे 5 फ़ीट की अछि हाइट घुंघराले बल ग्रे ऑंखें गोरा रंग चेहरे पर मासूमियत और सिंपल से मेकअप और सिंपल से फ्रॉक सूट में वो कमल लग रही थी. उसकी वो प्यारी सी मुस्कान जो देखने वाले को उसकी खूबसूरती और मासूमियत का कायल कर देती थी मैं बस उसे hi देख रहा था . वो कब मेरे पास आ गयी मुझे पता भी नहीं चला.

रीमा : ऐसे क्या देख रहे हो?

अमित : देख रहा हूँ क जैसे इंद्रा लोक से कोई अप्सरा उतर कर मेरे सामने आ कर कड़ी हो गयी हो. तुमने सच मच बहुत खूबसूरत हो रीमा .

रीमा : शरमाते हुए ) इतनी भी तारीफ मत करो , कुछ खास नहीं हूँ मैं. यहाँ मेरे से भी सुन्दर लड़कियां और भी हैं.

अमित : मेरी नज़र में तो तुमसे ज्यादा सुन्दर और कोई नहीं.

रीमा : अब तारीफ hi करते रहोगे या यहाँ से चलोगे भी . देखो लोग हमें देख रहे हैं .

अमित : हमें नहीं वो सिर्फ तुम्हे देख रहे हैं. मगर मैं नहीं चाहता क वो सब इस पारी को ऐसे देखें चलो हम चलते हैं.

मैंने बाइक को वहीँ खड़ा रहने दिया साइड में और खुद रीमा क साथ उसकी कार में बैठ गया . रीमा कार चलने लगी और मैं उसे hi देखता रहा.

रीमा : अब बस भी करो मुझे शर्म आ रही है. बताओ कहाँ चलना है?

अमित : जहाँ तुम ले चलो.

रीमा : वैसे मुझे लगता है तुम मुझसे कोई बात करना चाहते हो जो इस वक़्त मुझे बुलाया वर्ण मिल तो तुम कॉलेज में भी सकते थे.

अमित : तो क्या तुम्हे ाचा नहीं लगा मेरा ऐसे मिलने बुलाना?

रीमा : मुझे तो बहुत ख़ुशी हुई क तुमने मुझे मिलने बुलाया. और मैं चाहती भी हूँ क हम कुछ वक़्त अकेले में बिताया करें पर कॉलेज में पॉसिबल नहीं होता और बाद में तुम्हारे पास टाइम नहीं होता.

अमित : हम्म , तुम्हारी ये शिकायत भी दूर कर दूंगा मैं. फ़िलहाल तो मैंने तुम्हे इसी लिए बुलाया है क मैं कुछ देर तुमसे बातें करना चाहता हूँ. कुछ तुम्हे समझना चाहता हूँ. फ़ोन पर वो मज़ा नहीं अत जो मिल कर बात करने में अत है.

रीमा : सही कह रहे हो तुम. सामने बैठ कर बात करने में फीलिंग और एक्सप्रेशन दोनों क्लियर होते हैं.

अमित : वैसे उस दिन जब तुम्हे मैंने लाइब्रेरी में देखा था तो मैं हैरान था क तुम क्या बन गयी थी. मैंने तो ऐसा सोचा भी नहीं था . मुझे लगा था क तुम भी अपने भाई बहिन जैसी होगी और कोई प्लान क लिए हमारे साथ मिली होगी पर मैं गलत था.

रीमा : पहली बार मुझे कोई ाचा लगा जो दूसरों क बारे में सोचता और उनकी मदद करता . इसी लिए न चाहते हुए भी मैं तुम्हारी तरफ खींचती चली गयी. तुम्हारा साफ़ दिल , खुलेपन , सबकी मदद करना सबकी केयर करना और सबसे बाद कर तुम्हारी वफादारी सचाई. ये सब कहाँ किसी में मिलता है. बस मैं मन से तुम्हारी हो गयी थी. और जब तुमने मेरी बात सुने बिना मुझे छोड़ दिया तो मैं टूट गयी थी. कुछ भी ाचा नहीं लगता था बस एक hi आस थी कभी तुम मुझे बुलाओगे और मुझे मेरी सफाई का मौका डोज. तुमने मुझे उस गुनाह की सजा दी जो मैंने किया hi नहीं . बचपन से मैं बिना पापा क रही हूँ. मेरा कोई भाई नहीं है , और जिसे तुम मेरा भाई समझते हो मेरे ताऊ जी का बीटा है . वो कैसा है मुझे कुछ कुछ पता था मगर तुम्हारे साथ जो कुछ उसने किया और उस दिन राधा क साथ उसने करने की कोशिश की उसके बाद तो सब साफ़ हो गया. शीना दीदी भी मेरी कजिन hi तो हैं पर वो फिर भी मेरे साथ अछि रही मगर मोंटी का hi साथ देती हैं वो भी . पर अब लग रहा है क वो भी बदल गयी हैं. मेरा क्या हल था तुम्हारे दूर जाने से ये तो मैं भी नहीं जानती बस इतना पता है क मैं खुद को hi खो बैठी थी . इतने दिन मैं या तो क्लास और लाइब्रेरी में hi रही या अपने रूम में. माँ और दीदी भी नाराज़ थी क मैं हर वक़्त किताबों में क्यों घुसी रहती हूँ पर उन्हें क्या बताती क मैं तो किताब क हर पैन पर भी तुम्हे hi देखती थी.

ये सब कहते हुए रीमा की आँखों में पानी आ गया और मुझे भी उसके दर्द का एहसास हुआ जिसकी वजह मैं था. मैं रीमा को गले लगाने वाला था क रीमा ने कार की ब्रेक लगा दी. मैंने सामने देखा तो हम पार्क पहुँच गए थे. शाम का वक्त था और लाइट्स जल चुकी थी. लोग अपने बच्चों क साथ कुछ बहार आ रहे थे कुछ आसपास लगी दुकानों पर खा पि रहे थे. रीमा ने कार रोकने क बाद मेरी तरफ देखा तो मैंने उसका चेहरा हाथों में लेकर उसके आंसू पोंछे.

अमित : मैं अब इन आँखों में कभी आंसू नहीं आने दूंगा. जो कुछ हुआ वो मेरी गलती थी. मैंने सचाई जानने की कोशिश भी नहीं की पर अब ऐसा कुछ नहीं होगा .

रीमा ने अपने चेहरे पर मौजूद मेरे हाथों को थामे हुए अश्कों भरी आँखों क साथ जब मुस्कुरा कर मुझे देखा तो मैं खुद को रोक नहीं पाया और उसके लरजते हो थी पर अपने होंठ रख दिए. मैं रीमा क होंठों को अपने होंठों में लेकर चूमने लगा. रीमा को किश करना नहीं अत था पर मैं उसके होंठों पहले एक साथ फिर बरी बरी से ऊपर निचे वाले होंठों को चूमने चूसने लगा. रीमा बस खुद को मेरे हवाले किये हुए थी. बहार किसी गाड़ी की आवाज़ से मुझे ख्याल आया क हम पब्लिक प्लेस में हैं और आसपास क लोग हमें देख सकते हैं . इस लिए मैंने किश ख़तम किया. रीमा की ऑंखें अभी भी बंद थी और होंठ अभी भी उसी तरह थोड़े से खुले हुए जैसे मैंने उन्हें चूमा था.

अमित : रीमा , हमें बहार चलना चाहिए.

रीमा ने ऑंखें खोल कर मुझे देखा और अगले hi पल शर्म से उसकी नज़रें झुक गयी मगर एक प्यारी मनमोहक मुस्कान उसके होंठों पर आ चुकी थी. हम दोनों कार से बहार निकले और पैदल चलते हुए पार्क में अपने बैठने की जगह ढूंढने लगे. पार्क बहुत बड़ा था और अंदर कुछ झूले और लाइट्स लगी हुई थी. बहुत सरे लोग जिनमे ज्यादातर युवा hi थे अंदर सैर कर रहे थे . शाम हो जाने से बचे अब झूलों पर तो नहीं थे पर कुछ अभी भी अपने माता पिता क साथ इधर उधर खेल रहे थे. रीमा और मैं चलते हुए सबसे अलग लगे एक बेंच पर जा कर बैठ गए जहाँ रौशनी भी काम थी और लोग तो बहुत काम.

अमित : चुप क्यों हो रीमा ? कुछ तो बात करो.

रीमा : धीमी आवाज़ में ) क्या बात करूँ ? मुझे शर्म आ रही है.

अमित : शर्म ? किस बात की शर्म ? मैंने किश किया उसकी शर्म या फिर मुझसे शर्म ?

रीमा : शर्माकर ) मुझे नहीं पता .

अमित : तो ठीक है अगर तुम्हे ये सब ाचा नहीं लगता तो मैं तुम्हे हाथ भी नहीं लगाऊंगा.

रीमा : हड़बड़ा कर ) मैंने ऐसा कब कहा.

मुझे रीमा क रिएक्शन पर हंसी आ गयी और मुझे हँसता देख कर रीमा शर्मा गयी .

रीमा : गंदे , ड्रामेबाज़, जाओ मैं नहीं बोलती तुमसे.

अमित : ाचा तो ठीक है मत बोलो मैं चलता हूँ.

रीमा : क्या तुम भी , ज़रा स बात पर hi गुस्सा हो जाते हो. क्या मैं तुमसे नाराज़ भी नहीं हो सकती? और तुम तो मानते भी नहीं हो . तुमसे नाराज़ होने वाले को तुम छोड़ hi डोज.

अमित : है है है , कैसे मानों जब तुम्हारा रूठना hi इतना मज़ेदार लग रहा है तो . तुम बहुत प्यारी हो रीमा , मैं जनता हूँ क तुम मुझसे रूठ भी नहीं सकती बस नाटक कर रही हो.

रीमा : इतनी जल्दी समझ गए मुझे ?

अमित : तुम बहुत साफ़ दिल हो रीमा. तुम्हारी आँखों में hi तुम्हारे दिल का हल पता चल जाता है और उस दिन भी तुम्हारी आँखों में देख कर मैं सब समझ गया था क तुम कितने दुःख में इसी लिए तो सबके सामने hi तुम्हे गले से लगा लिया था.

रीमा : तो पहले मेरी आँखों में तुम्हे मेरा प्यार मेरी सचाई नज़र नहीं आयी थी?

अमित : पहले भी आयी थी पर मैं तुम्हे अपने नज़दीक नहीं आने देना चाहता था. मुझे दर था क कहीं तुम्हे भी मेरी दुःख hi न मिले इस प्यार में.

रीमा : ये किसने देखा है क क्या मिलेगा क्या नहीं. मुझे बस तुम्हारा साथ चाहिए सुख दुःख की परवाह किसे है .

अमित : तुम्हारे इसी प्यार ने तो मुझे मजबूर कर दिया वर्ण मैं तो खुद को इस सब से दूर hi रखना चाहता था. मगर सच कहूं तो मुझे लगता है क मैं तुम्हारे प्यार क काबिल नहीं हूँ. मेरी ज़िन्दगी में और भी कई ऐसे शख्स हैं जिन्हे मुझसे प्यार चाहिए और मैं उन्हें छोड़ नहीं सकता. कहीं किसी रोज़ मेरी ऐसी किसी सचाई से तुम्हारा दिल न टूर जाये जो मैं खुद तुम्हे बता भी नहीं सकता.

रीमा : तुम्हारी यही साफ़दिली तो मुझे पसंद है . तुम जैसे भी हो जो भी हो मुझे सब मंज़ूर है . मैं जानती हूँ तुम कभी किसी क साथ गलत नहीं कर सकते. जो भी तुमसे जुड़े हुए हैं उन्हें तुम्हारी ज़रूरत होगी. और मैं तुम्हारे हर फैंसले में तुम्हारा साथ दूंगी .

अमित : तुम इसका मतलब जानती हो ? अगर तुम्हे मुझे किसी क साथ शेयर करना पड़े तो कर पाओगी?

रीमा : मैं इस सवाल का जवाब नहीं दे सकती . मगर इतना ज़रूर कहूँगी क मुझे सिर्फ मेरा प्यार चाहिए . यानि जब भी मेरे पास आओ तो सिर्फ मेरे. दूसरों क साथ तुम कैसे मिलते hi ये तुम्हे देखना है. और मैं अछि तरह जानती हूँ क तुम सिर्फ मेरा टेस्ट के रहे हो जबकि तुम्हारा किसी क साथ कोई रिश्ता नहीं है वर्ण कल्पना तो कब से तुम्हारे साथ है और अब तक मुझे नहीं लगता तुमने उसके साथ ऐसा की रिश्ता बनाया है.

अमित : अगर ये सब सच हुआ तो ?

रीमा : तो भी जो मैंने कहा मुझे सब मंज़ूर है. अब तुम्हारे सवाल ख़तम हो गए हो तो कोई और बात करें ?

अमित : तुम कितनी अछि हो ज़रूर तुम्हारी माँ भी ऐसी hi होंगी.

रीमा : वो तो मुझसे भी अछि हैं. मैं उनके जैसा hi बनना चाहती हूँ बचपन से उन्हें hi तो आदर्श मन है . वो बहुत हिम्मत वाली हैं हमेशा चेहरे पर मुस्कराहट रखती हैं मगर उस मुस्कराहट क पीछे कितना दर्द है ये कोई नहीं जनता . बचपन में hi पापा हमें छोड़ कर चले गए थे मगर माँ ने कभी हमें कमी महसूस नहीं होने दी. काश क मैंने उनको वो ख़ुशी से पौन जो उन्हें कभी मिली नहीं. और मुझे विश्वास है क तुमसे मिल कर वो बहुत खुश होंगी. तुम्हारी नेचर उन्हें बहुत पसंद आएगी .

रीमा की इस बात पर मैं दर गया क जब सच में मैं रीमा की माँ से मिलूंगा तो वो कैसे रियेक्ट करेंगी.

अमित : वो सब तो बाद की बातें हैं. क्या पता वो देखते hi मुझे घर से बहार निकल दें.

रीमा : माँ ऐसा कर hi नहीं सकती .

अमित : अगर ऐसा हुआ तो ?

रीमा : न मैं तुम्हे छोड़ सकती हूँ न माँ को. अगर ऐसा कभी हुआ क मुझे तुम दोनों में से किसी एक को चुनना पड़ा तो मैं खुद को hi छोड़ दूंगी.

अमित : एक दूंगा कान क नीचे दिमाग ठिकाने आ जायेगा तुम्हारा. तुम्हारी माँ को क्या ाचा लगेगा जिन्होंने तुम्हे इतनी मुश्किलों से पला है. और क्या मैं खुद को माफ़ कर पाउँगा ? जो भी हो तुम हमेशा अपनी माँ का साथ देना. वक़्त क साथ सब समझ जाते हैं बस थोड़ा सबर रखना चाहिए.

रीमा : पर मैं तुम्हारे इलावा किसी और की नहीं हो सकती .

अमित : तुम तो ऐसे कह रही हो जैसे हम अलग हो रहे हैं . अभी तो ऐसी कोई बात hi नहीं है फिर भी तुम ऐसे रियेक्ट कर रही हो ?

रीमा : तुमने खुद hi तो बात शुरू की थी .

अमित : ाचा तो ये सब छोडो, मोंटी क लैपटॉप क पासवर्ड क बारे में कुछ जानती हो तुम?

रीमा : तो अब आया तुम्हे यद्, मैं कॉलेज में देखते hi समझ गयी थी क वो लैपटॉप मोंटी का है. मगर तुम्हारे पास वो कहाँ से आया?

अमित : वो सब बाद में कभी, अभी बताओ क तुम कुछ जानती हो ?

रीमा : नहीं मैं कुछ नहीं जानती उसके बारे में. मगर शायद शीना दीदी को पता हो.

अमित : वो तो बताएगी नहीं . मुझे उसका पासवर्ड चाहिए क्या तुम किसी तरह उससे पता कर सकती हो?

रीमा : कोशिश करुँगी पर मुझे लगता है अगर तुम सीधा भी उनसे पूछोगे तो वो बता देंगी . वो काफी बदल गयी हैं और कहीं न कहीं तुम hi इसकी वजह हो.

अमित : मुझे उस पर विश्वास नहीं है.

रीमा : तो उनसे पूछ कर देख लो. अगर वो वाकई में बदल गयी हैं तो बता hi देंगी वर्ण डाउट क्लियर.

अमित : चलो देखते हैं मगर तुम कोशिश कर क देखो अगर बात बने तो.

रीमा : मैं ज़रूर कोशिश करुँगी . मगर उस लैपटॉप में है क्या?

अमित : वो तुम्हे बाद में सब बता दूंगा अभी तुम इसे रहने दो .

रीमा : ठीक है. वैसे एक बात पूछूं?

अमित : पूछो

रीमा : तुम सच में मुझ प्यार करते हो न?

अमित : लगता है तुमने अभी तक मेरे प्यार को महसूस नहीं किया , अभी बताता हूँ.

इतना कह कर मैंने रीमा क सर क पीछे हाथ रखा और उसे एक तरफ झुकाते हुए उसके गुलाब की पंखुरियों से होंठों पर अपने होंठ रख दिए. मैं उसके मधु रास से भरे होंठों का रास निचोड़ने लगा. रीमा ऑंखें बंद किये बस खुद को मेरे हवाले किये हुए थी. वो इस पल को दिल से महसूस कर रही थी और मुझे भी उसका प्यार महसूस हो रहा था . अपने आप रीमा क साथ मेरे सर क पीछे आ गए और वो भी मेरे होंठों को अपने होंठों की गिरफ्त में लेने लगी. हम तब तक एक दूसरे क होंठो क साथ खेलते रहे जब तक क हमारी सांस नहीं उखड गयी.

अमित : हहहहह ...... मिल गया जवाब ?

रीमा : शरमाते हुए ) बड़े वो हो तुम

अमित : क्या हूँ ??

रीमा : कुछ नहीं .

अमित : लगता है फिर से करना पड़ेगा.

रीमा : नहीं नहीं कोई देख लेगा.

रीमा इतना कहते हुए जल्दी से कड़ी हो गयी और मैं भी उसके साथ खड़ा हो गया.

अमित : लगता है तुम्हे लोगों की कुछ ज्यादा hi परवाह है . चलो ठीक है चलते हैं , मैं hi पागल हूँ.

इतना कह कर मैं आगे बढ़ने लगा तो रीमा ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे रोका . मैं उसकी तरफ पलटा तो अगले hi पल रीमा ने मेरे सर क पीछे हाथ रखते हुए मुझे अपने ऊपर झुकाया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए. रीमा ऐसा भी कर सकती है मुझे उम्मीद नहीं थी पर जो भी वो कर रही थी मुझे बहुत ाचा लग रहा था . उसने ऐसा कर क बता दिया था क उसे सिर्फ मेरी परवाह है और किसी की नहीं .

रीमा : हहहह .... अब बोलो

अमित : तुमने बोलो को छोड़ा hi क्या है .

रीमा : मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकती हूँ और मुझे किसी की परवाह भी नहीं. पर लड़की होने क नाते मुझे शर्म लिहाज़ तो रखना hi पड़ेगा न वर्ण लोग हमें जीने नहीं देंगे. बाकि तुम जैसा कहोगे मैं वैसी hi बन जाउंगी.

अमित : तुम जैसी हो मुझे वैसी hi पसंद हो. तुम्हे बदलने की ज़रूरत नहीं . मैं सिर्फ मज़ाक कर रहा था तुम्हारे साथ. इधर आओ.

मैंने रीमा को अपने गले से लगते हुए अपनी बाँहों में कास लिया और रीमा ने भी मेरी पीठ पर अपने हाथ कास दिए. हम दोनों ऑंखें बाद कर क कुछ देर एक दूसरे को महसूस करते रहे . पता नहीं कितनी देर हम यूँ hi ख़ामोशी से एक दूसरे क गले लगे खड़े रहे. हमें मदहोशी क आलम से बहार लाया कुछ बच्चों का शोर जो शायद एक दूसरे क साथ खेलते भागते हुए हमारे नज़दीक आ पहुंचे थे. मैंने ऑंखें खोली और रीमा को खुद से अलग किया. रीमा की ऑंखें मदहोशी में ऐसे लग रही थी जैसे उसने कोई नशा किया हो . मेरा. भी हल कुछ ऐसा hi था.

रीमा : अपनी आगोश में मुझे भर कर ज़माने से दूर कहीं ले चल ,,

क तेरी पहलु में उम्र बिताने को जी चाहता है ,,

बहुत थक गया है मेरा वजूद ज़माने की नाशुमारी से,

तेरे बाँहों में टूट कर बिखर जाने को जी चाहता है.

रीमा क ये शब्द सीधा उसके दिल से निकले थे और मेरी धड़कन जैसे एक पल में hi काबू से बहार हो गयी और मैंने रीमा को बाँहों में लेते हुए कास कर अपने सीने से लगा लिया .

अमित : तुम इतना प्यार कैसे कर सकती हो मुझे ? तुम बहुत अछि हो बहुत प्यारी हो. ी लव यू रीमा , प्लीज कभी मुझे अकेला छोड़ कर मत जाना. ी लव यू रीमा ी लव यू

रीमा : तुमसे दूर तो अब मेरी लाश hi जाएगी . जब तक ज़िंदा हूँ मैं तुमसे दूर जा hi नहीं सकती . ी लव यू तू तुम hi मेरी ज़िन्दगी हो मेरा प्यार हो मेरे सब कुछ हो.

मैंने रीमा को फिर से किश किया और फिर हम अलग hi कर खुद को ठीक करने लगे. समय काफी हो रहा था इस लिए हम वापिस बहार की तरफ चल दिए . रीमा ने मेरा हाथ अपने हाथ में थम रखा था और बार बार मुझे hi देखती हुई शर्माती हुई चल रही थी. हम बहार आ कर फिर से कार में बैठे और इस बार रीमा ने मेरे होंठों पर एक छोटी सी किश की मगर ये भी अछि थी.

रीमा : थैंक यू सो मच , ये पल मेरी ज़िन्दगी क सबसे हसीं पल थे. मैं बता नहीं सकती मैं कैसा महसूस कर रही हूँ. मुझे आज वो महसूस हुआ जो कभी नहीं हुआ था. ये प्यार भी अजीब है न एक पल में ऐसा लगा क बस वक़्त यहीं थम जाये और हम ऐसे hi एक दूसरे की बाँहों में रहें क़यामत तक.

अमित : तुम तो शायरी करने लगी . वैसे सही कहा , मुझे भी ऐसा hi लग रहा था . मुझे मेरी धड़कन तक महसूस हो रही थी तुम्हारी साँसों क साथ चलती हुई.

रीमा : सही कहा , मैं भी बस तुम्हारी धड़कने hi फील कर रही थी. और ये शायरी प्यार का hi असर है जो अपने आप आ जाती है.

अमित : मैं hi बस इसमें निकम्मा हूँ जो मुझे नहीं अति.

रीमा : कोई बात नहीं जो तुम्हे अत है वो तुम सिखाओ जो मुझे अत है वो मैं सीखा दूंगी .

अमित : मुझे तो बस एक hi चीज़ अति है.

मैं फिर से रीमा को किश करने लगा तो उसने मुझे रोक दिया.

रीमा : बस बस टाइम देखो, अगर ज्यादा देर की तो माँ नाराज़ हो जाएँगी . मुझे वापिस जाना होगा .

अमित : क्या यार एक किश तो करने देती. ाचा ठीक है चलो वापिस . मुझे वहीँ उतर देना .

हम फिर से बातें करते हुए वापिस चल दिए और कुछ hi मिनट्स में हम उसी जगह पर पहुँच गए जहाँ से रीमा ने मुझे पिक किया था. मैं कार से उतरने लगा तो रीमा ने मेरी बाज़ू पकड़ ली.

अमित : हम्म्म उम्मम्मम

मैं जैसे hi रीमा की तरफ मुँह कर क कुछ बोलने लगा उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और किश करने लगी .

रीमा : मुआअआआह्ह्ह्हह्ह ......... हहहहहह हहहह , कैसा था ?

अमित : बहुत ाचा , तुम तो एक hi दिन में सिख गयी.

रीमा : जब सीखने वाला इतना ाचा हो स्टूडेंट तो सीखेंगे hi न. अब चलूँ मैं ?

अमित : हाँ ठीक है कल मिलते हैं . Bye

रीमा : bye bye , ी लव यू

अमित : ी लव यू 2



रीमा कार लेकर वापिस चली गयी और मैं उन हसीं पलों को यद् करता हुआ बाइक पर बैठ गया और बुलेट की डुग डुग का मज़ा लेता अपनी मस्ती में वापिस घर की तरफ चल पड़ा .
 
भाई लोग आज कुछ लिख नहीं पाया और अभी कुछ मूड भी नहीं है तो आज की लीव लगा दो मेरी
 
अपडेट 134



रीमा से मिलकर मैं घर आ गया. अंकल आज भी घर पर नहीं थे. डिनर करते वक़्त आंटी कुछ चुप चुप सी नज़र आयी पर मैंने मोहित क सामने कोई सवाल नहीं किया. रत अपने बीएड पर सोने की तयारी कर रहा था क राधा का मैसेज आ गया.

राधा : जग रहे हो या सो गए ?

अमित : अभी तो जग रहा हूँ . तुम बताओ क्या कर रही हो ?

राधा : बस अभी किताबें बंद की हैं , सोचा थोड़ी देर तुमसे बात कर लूँ. आज मैंने तुम से सबके सामने जैसे बात की तुम उसके लिए मुझसे नाराज़ तो नहीं हो न ? प्लीज मुझसे नाराज़ मत होना . मैं बस तुम्हारे न आने से थोड़ा अपसेट सी थी.

अमित : फिर वही बात, मैंने तुम्हे कहा था न क मैं तुमसे नाराज़ हो hi नहीं सकता कभी. तुम ऐसे hi पता नहीं क्या क्या सोचती रहती हो. वैसे मेरे न आने से तुम अपसेट क्यों थी ? कोई प्रॉब्लम हुई है क्या ? बताओ मुझे अगर ऐसी कोई बात है तो ?

राधा : नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है. बस तुम्हे जब सामने नहीं देखती तो तुम्हारी चिंता होने लगती है. जब से तुम्हे उस दिन वाली हालत में देखा है मुझे दर लगने लगता है तुम्हे सामने न पाकर.

अमित : तुम सचमुच बहुत भोली हो. मुझे क्या होगा ? उस दिन भी तो ज़रा स चोट hi तो थी. वो तो कमज़ोरी आने मैं थोड़ी देर क लिए सो गया था. वर्ण इतना तो मैं हूँ hi क कोई आसानी से नहीं गिरा सकता.

राधा : पता है मुझे सब हाँ , तुम न ज्यादा पहलवान मत बना करो. तुम्हे अगर कुछ हो गया तो मैं .....

अमित : फिर से वही बात , मैंने कहा न क कुछ नहीं होगा मुझे. तुम बेकार hi टेंशन लेती हो और फिर तुम क्या मुझे कुछ होने डौगी? सब की दुआएं और आशीर्वाद भी तो मेरे साथ.

राधा : मैं अपने जीते जी तुम्हे कुछ नहीं होने दूंगी अगर यमराज भी आ जाएँ तो मैं उन्हें कहूँगी क वो तुम्हे छोड़ दे और मुझे ले जाये .

अमित : ो मेरी भोली राधा , तुम पता नहीं क्या क्या सोचती रहती हो. इतनी फ़िक्र मत किया करो वर्ण पड़े में मार्क्स काम आएंगे तुम्हारे. मुझसे ज्यादा तुम्हे मौसी की फ़िक्र करनी चाहिए .

राधा : वो तो माँ है , वो तो खुद मेरी और तुम्हारी फ़िक्र करती हैं. उनकी मैं क्या करूँ?

अमित : ाचा ाचा राधा जी हाथ जोड़े आपसे बातों में कोई नहीं जित सकता. आप को कल कॉलेज नहीं जाना क्या जो अभी तक जग रही हैं ?

राधा : क्यों नहीं जाना कॉलेज? कॉलेज जाउंगी तभी तो तुम्हारे साथ रह पाऊँगी ........ मेरा मतलब है तुम पर नज़र रख पाऊँगी.

अमित : ाचा तो कॉलेज मुझ पर नज़र रखने जाती हो तुम ?

राधा : रखनी पड़ती है क्या पता कब कोई मुसीबत मोल ले लो तुम.

अमित : मुसीबत मैं मोल नहीं लेता बल्कि वो खुद मुझे ढून्ढ लेती है.

राधा : मेरी वजह से hi तो मुसीबत में फास जाते हो तुम बार बार. मैं तुम्हारे लिए अछि नहीं हूँ .

अमित : ऐसा दोबारा कहा तो देख लेना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा. बात नहीं करूँगा तुमसे मैं. तुम मेरे लिए क्या हो मैं खुद भी नहीं जनता पर मैं तुम्हारी आँखों में आंसू नहीं देख सकता. तुम्हारी खातिर अगर मौत भी आ गयी तो मुझे गम नहीं होगा.

राधा : शूटटटटटटटटट उपपपपपप !! शट उप समझे बार बार ये मरने की बात क्यों करते हो ? क्या मैं ज़िंदा रह पाऊँगी अगर मेरी वजह से तुम्हे कुछ हो गया तो? क्या माँ ज़िंदा रह पायेगी ? तुमसे पहले मैं मर जाउंगी अगर ऐसा हुआ तो.

अमित : ी ऍम सॉरी राधा प्लीज मैं तो बस तुम्हे अपनी फीलिंग बता रहा था ....

राधा : गलती से भी कैसे निकल गया ? बात मत करो मुझसे तुम . गंदे हो तुम ..

अमित : प्लीज राधा ी ऍम सॉरी

राधा ने मेरे मैसेज का कोई रिप्लाई नहीं किया मैंने कई बार उसे मैसेज किया पर उसका कोई जवाब नहीं आया . मैंने फ़ोन किया तो वो फ़ोन भी नहीं उठा रही थी . मुझे खुद पर hi गुस्सा आने लगा क मैंने उसका दिल दुख दिया . जब जब मैं बार बार फ़ोन करने लगा तो राधा का मैसेज आया

राधा : चुपचाप सो जाओ कल कॉलेज में खबर लूंगी तुम्हारी मैं.

अमित : यार प्लीज माफ़ कार्डो वर्ण मुझे नींद नहीं आएगी मुझे.

राधा : माफ़ी कल माँगना अभी चुप चाप सो जाओ , मैं भी सो रही हूँ . और हाँ मेरी चिंता मत करो मैं कल तुमसे मिल कर इस बात का हिसाब लूंगी बस उसके बारे में सोचो. गुड नाईट स्वीट ड्रीम्स

राधा का ये मैसेज पद कर मुझे कुछ शांति मिली क चलो राधा आराम से सो जाएगी उसके मैसेज से साफ था क वो अब नार्मल है पर वो कल मुझे छोड़ने नहीं वाली. खैर कल जो होगा देखेंगे राधा को तो ऐसा वैसा कुछ करना भी नहीं अत. मैंने राधा को रिप्लाई किया और उसके बाद कुछ देर रीमा से भी बात की.

मैं अभी ऑंखें बंद कर क लेता hi था क कमरे का दरवाज़ा खुला और कोई अंदर आया . मैं समझ गया क आंटी hi होंगी . और थी भी वही. दरवाज़े को लोच कर क वो बीएड पर आते hi मेरे ऊपर चढ़ गयी.

आंटी : मुझे पता है तुम जग रहे हो इस लिए ड्रामा बंद करो और जल्दी से मेरी प्यास बुझा दो.

मैंने भी अपनी ऑंखें खोली और आंटी को बाँहों में भर कर उन्हें किश करने लगा और साथ hi उनकी गांड मसलने लगा

आंटी: आआह्ह्ह्ह उनममम ककक उनममम आअह्ह्ह आज मुझे इतना प्यार करो क कुछ दिनों तक मुझे फिर से ज़रूरत न पड़े

अमित : ऐसा क्यों ?

आंटी : कल तुम गाओं चले जाओगे और फिर मंडे से तुम अपनी मौसी क घर जाने वाले हो पता नहीं कब यहाँ आओगे वापिस , मैं इतने कैसे रहूंगी तुम्हारे बिना?

अमित : ाचा तो इस लिए आप चुप चुप सी थी , आपने ये कैसे सोच लिया क मैं आपको मिलूंगा hi नहीं ? चाहे मौसी क घर रहूं , हूँ तो इसी शहर में न . जब आपको मेरी ज्यादा यद् ए तो बुला लेना , मैं आपको प्यार करने आ जाऊंगा .

आंटी : सच ? मुझे दर लग रहा था क इतने कैसे रहूंगी तुम्हारे बिना. अब तो मुझे तुम्हारी आदत लग गयी है .

अमित : मैं तो आपके पास hi हूँ पर फिर भी आप खुद पर काबू रखा करो.

आंटी : तुम जब पास होते हो तो काबू नहीं रहता . अब बातें छोडो और मुझे प्यार करो . पता नहीं फिर कब मौका मिले.

इतना कह कर आंटी फिर से मुझे किश करने लगी. आज उनका अंदाज़ कुछ ज्यादा hi वाइल्ड था. कुछ hi देर में हम दोनों क कपडे हमारा साथ छोड़ चुके थे. आंटी की मदमस्त गोरा चिकना बदन मेरे सामने नंगा था . आज आंटी खुद hi कमान सँभालते हुए मेरी कमर क दोनों तरफ घुटने टेकते हुए मेरे लैंड को अपनी छूट पर लगते हुए नीचे बैठ गयी और मेरा लैंड उनकी छूट की भेदता हुआ अंदर तक चला गया .

आंटी : उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ कक्ककक्कक्स. हर बार तुम्हारा ये मुसल आआअह्हह्ह्ह्ह दर्द दिए बिना अंदर नहीं जाता कक्कक्क्स पता नहीं कब ये आराम से जाने लगेगा आइइइइइइ कक्कक्कक्स आआह्ह्ह्हह्ह उफ्फ्फफ्फ्फ़

अमित : मज़ा भी तो आपको hi देता है न ,

आंटी : इसी लिए तो हर बार इसे बर्दाश्त करती हूँ. आह्ह्ह्ह आह्हः उम्म्म्म इससे मिला दर्द भी बाद में ाचा लगता है. मैं तो चाहती हूँ उफ्फफ्फ्फ़ आराम से मैं कर रही हूँ न आआह्ह्ह्हह आह्ह्ह्ह . मैं तो चाहती hi तुम हर रोज़ मुझे अपने निचे मसलो मुझे दर्द दो कक्कक्कक्स आआअह्ह्ह्हह .

आंटी धीरे धीरे ऊपर निचे हो रही थी और मैं अपनी कमर उठा कर बीच में hi पेल ने लगा. आंटी भी थोड़ी देर में तेज़ी से कूदने लगी . आंटी आज पता नहीं किस रंग में थी जो खुद hi अपने बूब्स मसलती हूँ अपने बाल बिखेर रही थी. कुछ देर उथल बैठक करने क बाद आंटी एक साइड में करवट क बल लेट गयी तो मैंने ु के पीछे लेट कर उनकी तंग को घुटने से पकड़ कर बेंड करते हुए उठाया और लैंड को छूट पर सेट कर क एक धक्का पेल दिया. आंटी की पीठ मेरी छाती से लगी हुई थी और वो अपना चेहरा पीछे कर क मुझे किश करने की कोशिश कर रही थी. हम दोनों ऐसे hi पोज़ बदल बदल कर चुदाई करते रहे जब तक क मेरा पानी आंटी क बदन पर शावर नहीं कर गया. उसके बाद आंटी अपने कमरे में वापिस आ गयी और मैं भी चैन से सो गया.

अगली सुबह मैं आज थोड़ा जल्दी उठा , इतने दिनों से न मैं एक्सरसाइज करने गया था न hi स्टेडियम प्रैक्टिस करने पर अब ज्यादा दिन नहीं थे मेरे पास तो मैंने सोचा क शुरुआत की जाये. मैंने बहार जाने की बजाये छत पर hi कुछ देर हलकी फुलकी एक्सरसाइज कर ली . आंटी भी योग करने ऊपर आयी तो मुझे एक्सरसाइज करता देख कर खुश हुई. मेरे सामने hi वो योग करने लगी और मुझे अपना जिस्म दिखने लगी . अभी रत hi में उनकी प्यास अचे से बुझाई थी तो मैं उनसे दूर hi रहा. नाश्ता करने क बाद मैं और मोहित कॉलेज चले गए. लैपटॉप घर पर छोड़ना सही नहीं था तो हम साथ hi ले गए और वैसे भी मुझे उम्मीद थी क रीमा शायद पासवर्ड का पता लगा ले या फिर उसके कहने क मुताबिक शीना को एक मौका दे कर देखा जाये. मुझे शालू की मदद क लिए सब मंज़ूर था . मीनल ने भी लैपटॉप देख कर उसके बारे में सवाल किया पर मोहित ने बहन कर दिया. कॉलेज पहुँचते hi पार्किंग में hi करुणा नेहा दीदी और राधा हमें मिल गए और रीमा भी वहीँ कड़ी थी शायद मेरा hi वेट कर रही होगी . सब है कर मिले मगर राधा ने मुँह फुलाया हुआ था .

अमित : अभी भी नाराज़ हो मुझसे ? मैंने सॉरी बोलै न ? लो फिर से बोलता हूँ ी ऍम सॉरी

राधा : मुझे तुमसे बात नहीं करनी

नेहा दीदी : मुझे कोई बताएगा क बात क्या है ?

राधा : इसी से पूछिए , इसे तो दूसरों को तंग करने में मज़ा अत है न.

कल्पना : तो मामला सीरियस है , राधा मैं तुम्हारे साथ हूँ इसे हम छोड़ेंगे नहीं .

नेहा दीदी : पहले बात तो बताओ क्या है फिर मैं उससे पूछती हूँ .

राधा : आप चलो अभी , फ्री लेक्चर में बात करेंगे .

इतना कह कर राधा नेहा दीदी का हाथ पकड़ कर उन्हें साथ ले गयी और मीनल भी उनके साथ चल दी.

मोहित : ोये अब ये क्या सन है? भाई कोई पन्गा हुआ तो मैं गर्ल्स क खिलाफ नहीं जाने वाला पहले hi बता देता हूँ.

कल्पना : गुड , अब बताओगे क क्या हुआ है ?

अमित : कुछ नहीं यार बस ऐसे hi छोटी सी बात पर बुरा मन गयी है . चलो छोडो क्लास में चलते हैं वर्ण चन्दर्कांता क्लास में नहीं घुसने देगी .

रीमा जो अभी भी गेट क पास hi कड़ी थी हमारे आते hi उसने हम तीनो को गुड मॉर्निंग कहा और मुस्कुरा कर मिली. कल पार्क में जो हमने साथ में समय बिताया था मुझे उसकी यद् आ गयी और रीमा क मधु भरे कोमल होंठो को देख कर मेरा फिर से दिल मचलने कहा उन्हें चूमने को. रीमा भी मुझे अपनी तरफ ऐसे देखता हुआ देख कर शर्मा गयी . मैं तो वहीँ खड़ा रहता रीमा की मुस्कराहट में खोया मगर मेरे दोनों दोस्त मुझे खींचते हुए क्लास की तरफ ले गए और रीमा भी हस्ती हुई अपनी क्लास में चली गयी. आज चन्दर्कांता फिर से गुस्से में थी कल फिर जो मैं एब्सेंट था बिना बताये मगर उसने ज्यादा कुछ नहीं कहा . उसके बाद मंजू म क लेक्चर में भी कुछ खास नहीं हुआ और फिर हम सब कैंटीन में इकठ्ठा हुए.

कल्पना : तो अब बताओ राधा क इसने क्या किया है ? आज इसे हम मिलकर सजा देंगे.

मीनल : हाँ राधा तुम बताओ क्या बात है ?

नेहा दीदी : बताओ राधा क्या हुआ है , अगर इसने कुछ गलत किया या कहा है तो मैं खबर लेती हूँ इसकी.

राधा : दीदी ये न बार बार ऐसे hi कहता रहता है क ये मर भी जाये तो कोई बात नहीं , आप hi बताओ क्या ये सही है? इसे बिलकुल भी परवाह नहीं क इसके चले जाने से क्या होगा . सब इसे कितना प्यार करते हैं और ये ऐसी बातें करता है , मुझे गुस्सा नहीं आएगा क्या?

राधा ने बड़ी मासूमियत से बच्चों की तरह शिकायती लहजे में ये सब कहा था जिससे मैं चिंता करने की जगह मुस्कुराने लगा उसके इसे भोले पैन से. मगर बाकि सब तो अब गुस्से से मुझे देखने लगे.

नेहा दीदी : तुमने ऐसा कहा ? कुछ ज्यादा hi बोलने लगा है तू . तुझे ज़रा भी परवाह नहीं अपनी या किसी और की. क्या हम तुम्हारे कुछ नहीं लगते? एक hi तो भाई है मेरा क्या वो भी मुझसे छीन लोगे तुम हाँ

नेहा दीदी का गाला बात करते हुए रुंधने लगा तो मुझे एहसास हुआ क उन्हें ज्यादा hi दुःख पहुंचा है इस बात से. वहीँ राधा की आँखों में भी नमी आने लगी थी जिसे देख कर मुझे अब सच में बुरा लग रहा था .

कालापन : दीदी इसे ऐसे नहीं छोड़ना , इसे पता चलना चाहिए क इसने क्या कहा है . इसे ऐसी सजा दो क दुबारा ऐसा गलती से भी न कहे.

मीनल : ी एग्रीड

अमित : दीदी प्लीज ये सब ऐसे hi बातों बातों में मुँह से निकल गया था . असल में बात उस दिन की हो रही थी जब मुझे चोट लगी थी. मैं तो बस इतना hi कह रहा था राधा से क तुम इम्पोर्टेन्ट हो . प्लीज ी ऍम सॉरी दीदी और राधा मैं फिर से माफ़ी मांगता हूँ प्लीज चुप हो जाओ. तुम्हे पता है न मुझे तुम्हारी आँखों में आंसू अचे नहीं लगते .

राधा : तो ऐसा करते hi क्यों हो जिससे आंसू आये?

रीमा : राधा प्लीज अमित को एक बार माफ़ कार्डो . वो माफ़ी मांग रहा है न. तुम रट हुए बिलकुल भी अछि नहीं लगती और देखो नेहा दीदी की ऑंखें भी भर आयी हैं.

रीमा मेरा साथ देते हुए राधा और नेहा दीदी को चुप करने की कोशिश की.

कल्पना : दीदी आप दोनों क्यों ऐसे कर रही हो ? गलती इसने की है तो इसे सजा दो फिर देखते हैं माफ़ी देनी है या नहीं. बोलो मंज़ूर है ?

अमित : मुझे सब मंज़ूर है . आप दोनों जो कहोगी मैं करूँगा.

कल्पना : तो ठीक है , जाओ कैंटीन क सामने कान पकड़ कर खड़े हो जाओ और 5 मिनट तक खड़े रहना फिर आ कर माफ़ी मांगना.

राधा : नहीं रहने दो ऐसा मत करो

राधा कल्पना की बात सुनते hi जल्दी से बोल पड़ी. वो हाला कैसे मेरे साथ ऐसा होने देती.

मीनल : कल्पना ने बिलकुल सही कहा है , अब तो मज़ा आएगा.

राधा : नहीं कल्पना प्लीज रहने दो न . सब इस पर हसेंगे.

कल्पना : सजा मिलेगी तभी ये दुबारा गलती नहीं करेगा.

नेहा दीदी : छोडो रहने दो कोई और सजा दे दो इसे.

मीनल : क्या दीदी आप भी ये तो छोटी सी सजा दी है कल्पना ने . ाचा ऐसा करते हैं 5 की बजाये 2 मिनट कर देते हैं.

कल्पना : बोलो मंज़ूर है ?

अमित : अगर यही सबकी मर्ज़ी है तो ठीक है.

कल्पना : तो जाओ जल्दी से देर क्यों कर रहे हो ?

राधा : कल्पना रहने दो न प्लीज , मुझे ाचा नहीं लगेगा.

मीनल : कुछ नहीं होता राधा , इसे सबक मिलेगा तभी ये आगे से ऐसी बात नहीं करेगा.

मैं उठ कर कैंटीन से बहार चला गया और दरवाज़े क सामने खड़ा हो गया . मुझे शर्म आ रही थी ऐसे सबके सामने अपने कान पकड़ने में. कल्पना मीनल और मोहित तो अंदर से hi मुझे कान पकड़ने का इशारा कर रही थी जबकि रीमा नेहा दीदी और राधा चुप चाप मुझे देख रही थी. मैंने ऑंखें बंद करके अपने कान पकड़ लिए और सर झुका लिया. मैं किसी से नज़र नहीं मिलाना चाहता था. अंदर हंसी क ठहाके बजने लगे तो मुझे पता चल गया सबकी नज़र मुझ पर hi है. अब तो 2 मिनट भी 2 साल लग रहे थे. मैं ऑंखें बंद किये कण पकडे खड़ा था क एक आवाज़ क साथ किसी ने मेरे हाथ निचे कर दिए .

‘ ये क्या कर रहे हो तुम ? किसने किया ये ? किसने ऐसा करने को कहा तुम्हे ? मैं देखती हूँ उसे कौन है वो नाम बताओ मुझे ? ‘

मैंने ऑंखें खोल कर जब सामने वाले को देखा तो मैं शॉकेड हो गया . ये शीना थी और उसके चेहरे पर गुस्सा नज़र आ रहा था. शीना क साथ hi शिवानी भी थी.

शीना : चुप क्यों हो बताओ मुझे किसने किया ये तुम्हारे साथ .

अमित : तुम यहाँ क्या कर रही हो ? मैं कुछ भी करूँ तुम्हे क्या है इससे ? मेरी फ़िक्र करने का ये झूठा नाटक मत करो मेरे सामने.

शीना को मेरे साथ देख अंदर से पूरी पल्टन हमारे पास आ कर खरी हो गयी .

शिवानी : अमित प्लीज शीना को गलत मत समझो वो तो बस तुम्हे ऐसे देख कर पूछ रही थी

अमित : मुझे ज़रूरत नहीं है चालबाज़ फ़िक़रमंदों की.

शीना : आखिर तुम्हे कब यकीन आएगा मुझ पर क मैं बदल गयी हूँ . एक मौका तो भगवन भी दे देता है.

अमित : मैं भगवन नहीं हूँ.

नेहा दीदी : ये कैसे बात कर रहा है तू अमित ?

मेरा भाई क्या ऐसा है ? शीना तुम इसकी बात का बुरा मत मनो. इसे हमने hi सजा दी थी कान पकड़ने की. चली आओ तुम भी हमारे साथ बैठो.

मैंने दीदी को देखा तो मेरे चेहरे पर अभी भी गुस्सा देख कर वो मुझसे बोली .

नेहा दीदी : क्या मेरी बात का कोई मोल नहीं है ? गुस्सा थूक दो अब. अगर हम किसी को मौका hi नहीं देंगे तो वो कैसे साबित करेगा क वो अब बदल गया है.

सबने दीदी की बात का समर्थन किया और अंदर चले गए . रीमा की आँखों में भी एक इल्तिजा थी तो मैं भी बात मन कर अंदर चल पड़ा और अब शीना शिवानी क आने से हमारा ग्रुप और बड़ा हो गया था . हम दो टेबल जोड़ कर घेरा बना कर बैठे थे.

शीना : थैंक यू नेहा थैंक यू वैरी मच . मैं आप सब को कभी शिकायत का मौका नहीं दूंगी ट्रस्ट में

कल्पना : हमारे ग्रुप का सीधा सा उसूल है. ने लॉयल ने ऑनेस्ट . और दोस्तों क लिए कुछ भी कर जाओ. यहाँ पर आपस में सबका हंसी मज़ाक चलता है और कोई बुरा नहीं मंटा. अगर तुम्हे मज़ाक ाचा नहीं लगता तो तुम्हारी हमारे साथ नहीं बनने वाली . बी थे वे ी ऍम सॉरी , मैंने भी तुम्हारे साथ थोड़ा सख्ती दिखाई थी.

शीना : it’s ok तुम सही थी. मैं hi गलत थी माफ़ी तो मुझे मांगनी चाहिए . ी ऍम सॉरी . और मुझे तुम्हारी साडी शर्तें मंज़ूर हैं .

कल्पना : that’s फाइन और आपको

शिवानी : मुझे भी और मैं बुरा नहीं मानती किसी बात का.

नेहा दीदी : तो अब सब क्लियर है . अमित तुम भी अब गुस्सा छोड़ दो . शीना ने जो भी गलतियां की हैं उसके लिए हम सब इसे माफ़ करते हैं .

अमित : दीदी मैं पहले भी कह चूका हूँ क मैंने इसे माफ़ किया पर मुझे अभी भी इस पर विश्वास नहीं है.

राधा : शीना दीदी कुछ भी गलत नहीं करेंगी , मेरा दिल कहता है .

शीना : थैंक यू सो मच राधा तुम सच में बहुत अछि हो.

रीमा : प्लीज अमित एक मौका तो दे कर देखो दीदी को

मीनल / कल्पना : यस

अमित : ठीक है अगर तुम सब की यही ीचा है तो एक टेस्ट मैं लूँगा अगर इसने पूरा कर दिया तो मैं इसे दोस्त मन लूंगा .

शीना : मुझे सब मंज़ूर है. ी विल दो एनीथिंग .

कल्पना : लो भाई हो गया फैंसला, मुझे तो पूरी उम्मीद है शीना दीदी क्लियर कर hi लेगी बशर्ते हमारे पहलवान जी जानबूझकर इन्हे न हराएँ तो.

नेहा दीदी : शीना मुझे भी भरोसा है तुम पर और अमित पर भी क ये कोई चीटिंग नहीं करेगा.

हम सब अपनी बातों में इतने मगन थे क लेक्चर का ख़तम होने का टाइम हो रहा था और हमें पता भी नहीं था. उधर बेल्ल बजी और इधर सब क मुँह लटक गए .

कल्पना : आज लेक्चर इतनी जल्दी कैसे ख़तम हो गया ? शीट यार पार्टी तो बीच में hi रह गयी.

मीनल : कोई बात नहीं हम लेक्चर मिस कर देते हैं.

नेहा दीदी : नहीं , कोई लेक्चर मिस नहीं करेगा . चलो बाकि कल देखते हैं.

सब उठ कर बहार चल दिए . नेहा दीदी राधा रीमा और मीनल अपने ब्लॉक में चली गयी और इधर कल्पना मोहित और मैं अपने ब्लॉक की तरफ . शीना और शिवानी भी हमारे साथ hi आ रही थी. शीना मेरे साथ चल रही थी और बार बार मुझे देखने लगती , उसके चेहरे पर ख़ुशी साफ झलक रही थी . तभी मैं रुक गया.

अमित : मोहित अपनी कार की के देगा मुझे?

मोहित : ये ले , पर काम क्या है ?

कल्पना : तुम किधर जा रहे हो ? हम भी आएं साथ?

अमित : मुझे ज़रा शीना से काम है .

अपना नाम सुनते hi शीना मेरी तरफ देखने लगी जबकि मोहित समझ गया था क मैंने के क्यों मांगी. कल्पना भी चुप हो गयी शायद उसे लगा होगा क मैं शीना का कोई टेस्ट लेने लगा हूँ.

कल्पना : बे जेंटल , हमें शर्मिंदा मत करना.

अमित : शिवानी शीना तुम दोनों मेरे साथ आओ.

मैं दोनों को लेकर कार पार्किंग की तरफ चल दिया और मोहित कल्पना क साथ अपनी क्लास में. शीना और शिवानी दोनों hi मेरे साथ चुपचाप कार तक आ गयी और कोई सवाल नहीं पूछा. मैंने कार से लैपटॉप निकला तो शीना उसे गौर से देखने लगी.

अमित : इसे पहचानती हो न ?

शीना : ये तो मोंटी का है , तुम्हारे पास कहाँ से आया ?

अमित : मेरे पास कैसे आया ये ज़रूरी नहीं फ़िलहाल इसे खोलो और साबित करो तुम बदल चुकी हो.

शीना : इसमें कौन सी बड़ी बात है ? ये तो कोई भी खोल लेगा.

अमित : इसमें पासवर्ड लगा है और वो सिर्फ तुम्हे hi पता हो सकता है .

शीना : तुम लोग करना क्या चाहते हो मोंटी क लैपटॉप क साथ ?

अमित : मुझे पता था तुम सिर्फ बदलने का नाटक कर रही थी .

शिवानी : शीना खोल न इसे , तू सवाल क्यों पूछ रही है?

शीना : मैं तो बस जानना चाहती थी . लाओ इधर दो.

शीना ने मेरे हाथ से लैपटॉप लिया और उसे चालू कर क पासवर्ड लगाया तो लैपटॉप की स्क्रीन ओपन हो गयी . जिसे देख कर मुझे अंदर से बहुत ख़ुशी हुई.

शीना : लो अब आ गया यकीन या कुछ और भी करूँ?

अमित : नहीं बस इतना बहुत है. शिवानी ज़रा उसने से वीडियोस ढूंढ़ना जो मोंटी ने बनायीं हैं.

शीना : कौन सी वीडियोस??

अमित : अभी पता चल जायेगा तुम्हे . अपनी आँखों से देख लेना अपने भाई क कारनामे.

शिवानी : मेरे ख्याल से हमें लाइब्रेरी में चलना चाहिए यहाँ कोई भी आ सकता है.

शीना : नहीं , इससे ाचा हम थर्ड फ्लोर पर खली क्लास रूम में चलते हैं. वहां कोई नहीं अत.

शिवानी : हाँ वो भी ठीक है :

हम तीनो वापिस अपने ब्लॉक में आये और 3 रद फ्लोर पर पहुँच गए . यहाँ पर कभी कभी hi क्लास लगती थी इस लिए ये पूरा फ्लोर खली था हम तीनो एक क्लास रूम में घुस गए और शीना जल्दी से वीडियो सर्च करने लगी. मोंटी ने भी बहुत कुछ कर्क वीडियोस कहीं छिपा कर राखी हुई थी जो एक्सपर्ट क बिना कोई ढूंढ hi नहीं सकता था और मैंने शिवानी से इसी लिए कहा था क्यूंकि वो कंप्यूटर क बारे में अचे से जानती थी. जैसे hi उसे वो सीक्रेट वीडियोस मिली तो उसने मुझे चेक करने को कहा. मैंने देखा क एक फोल्डर शालू क नाम का बना हुआ था उसे शिवानी ने ओपन किया तो काफी साडी वीडियोस निकल आयी. जिनमे मोंटी और उसके दोस्तों की बहुत साडी वीडियोस थी शालू की चुदाई करते हुए. शिवानी को तो पता hi था मगर शीना हैरानी से देख रही थी . जैसे जैसे मैं वीडियोस चेक कर रहा था शीना क चेहरे क भाव बदलते जा रहे थे . मैंने सारा फोल्डर देलेट कर दिया और दूसरे फोल्डर देखे तो उन पर भी किसी न किसी का नाम लिखा हुआ था.

अमित : देख लिए अपने भाई क कारनामे? लड़कियों को अपने जाल में फैसाकार उनकी वीडियो बना कर उनकी ज़िन्दगी बर्बाद करता था तुम्हारा प्यारा भाई. और यही वो उस दिन राधा क साथ करने वाला था . मेरा बस चले तो उसे ज़िंदा ज़मीन में गाड़ दूँ. शालू बेचारी गरीब घर की इनोसेंट लड़की थी देखो क्या किया तुम्हारे भाई ने उसके साथ

शीना : आँखों में आंसू ) मैं नहीं जानती थी मोंटी ऐसा है. कसम से ये सब मुझे नहीं पता था वर्ण मैं खुद उसे सजा देती . ी ऍम सॉरी ी ऍम सॉरी . मैं मोंटी को कभी माफ़ नहीं करुँगी. मुझे खुद पर शर्म आ रही है क मैं उसकी बहिन हूँ.

अमित : शिवानी प्लीज बाकि सब वीडियोस भी पूरी तरह से ख़तम कर देना ताकि फिर मोंटी किसी को मजबूर न कर सके.

शिवानी : मैं अभी कर देती हूँ.

शीना : रुको , मैं देखना चाहती हूँ क किस किस की ज़िन्दगी उस दरिंदे ने बर्बाद की है ताकि मैं सब से माफ़ी मांग सकूँ.

अमित : क्या तुम सच कह रही हो?

शीना : क्या अब भी तुम्हे यकीन नहीं मुझ पर ? चलो खुद अपने हाथों से डिलीट कार्डो पर फिर उससे उन लड़कियों को कैसे पता चलेगा क वो अब आज़ाद हैं और उन्हें मोंटी से डरने की ज़रूरत नहीं.

शिवानी : शीना ठीक कह रही है . तुम भी साथ में बैठ जाओ और अपनी आँखों से देख लो.

अमित : नहीं तुम शीना क साथ रुको मैं किसी से मिल कर अत हूँ.

शीना : प्लीज अमित ी ऍम सॉरी . मैं सच में नहीं जानती थी क मोंटी ऐसा है. मैं कसम कहती हूँ आज क बाद कभी उसे अपना भाई नहीं कहूँगी . ऐसे घटिया इंसान से तो किसी का भी रिश्ता नहीं हो सकता.

अमित : तुम्हे सचाई पता चल गयी और अपनी गलती का एहसास हुआ मुझे इसी में ख़ुशी है . बस अब ज़िन्दगी में कभी किसी क साथ गलत मत करना.

शीना : मैंने तुम्हे कहा था न क मुझे अपना दोस्त बना लो

अमित : ????

शीना : ये सब देखने क बाद अब मुझे एहसास हो रहा है क तुम सही थे. मैं तुम लोगों की दोस्ती क काबिल हूँ hi नहीं. ऐसा घटिया इंसान की बहिन होना hi सबसे बड़ा पाप है. चीईंईंन , पता नहीं किस जनम की सजा मिली है मुझे.

अमित : ऐसा मत कहो , पहले मुझे जो लगता था अब तुमने उसे गलत साबित कर दिया है. अब से तुम बाकि सब की तरह मेरी दोस्त हो और मैं उम्मीद करता हूँ तुम मेरी पुराणी बातों को भूलकर मेरी अछि दोस्त बनोगी.

मेरी बात सुन कर शीना क रट हुए चेहरे पर भी मुस्कराहट आ गयी. मैंने उससे हाथ मिलाना चाहा तो वो हाथ मिलाने की जगह खुद hi मेरे गले लग गयी और मेरे सीने से लगी आंसू बहाने लगी .

अमित : ये क्या तुम तो रोने लगी , प्लीज ऐसा मत करो . मैंने तो सुना था शीना बहुत स्ट्रांग है मगर तुम तो बच्चों की तरह रोने लगी . देखो शिवानी तुम्हारी दोस्त तो छोटे बच्चों की तरह तो रही है. अगर ये ऐसे hi रोटी रहेगी तो मैं इससे दोस्ती नहीं करूँगा . इसे कह दो क मुझे हसने हँसाने वाले दोस्त hi पसंद हैं .

शीना : मैं कब रो रही हूँ? ये तो ख़ुशी क आंसू हैं . तुम बहुत अचे हो सच में बहुत अचे हो. थैंक यू वैरी मच .

अमित : ाचा तुम दोनों अपना काम करो मैं थोड़ी देर में अत हूँ.

मैं शीना को शिवानी क पास छोड़ कर जल्दी से बहार निकला. अब मुझे ये खुश खबरि शालू को सुननी थी . आज मैंने अपना वचन पूरा कर लिया था . शालू को ये सब जान कर कैसा लगेगा मैं सोच भी नहीं सकता था . मैं तुरंत शालू को फ़ोन लगाया .

शालू : शुक्र है तुम्हे यद् आया क हम अभी भी दुनिया में हैं. वर्ण हम तो सोच रहे थे शायद तुम हमारी कबर ढूंढने hi आओगे.

अमित : ये कैसी बातें कर रही हो? Hi कहाँ तुम? मुझे तुमसे मिलना है

शालू : खैरियत तो है जो मुझसे मिलना छह रहे हो ? तुमने तो मुझसे मिलने से साफ मन कर रखा है .

अमित : मैंने कब मन किया था ? ाचा पहले मुझे बताओ तुम कहाँ हो इस समय?

शालू ; और कहाँ होउंगी ? भला उजड़े लोगों का भी कोई और ठिकाना होता है वीरानों क सिवा?

अमित : ऐसी बातें मत करो, तुम्हारी ज़िन्दगी फिर से गुलज़ार करने का वडा किया है मैंने और तुम ऐसी बातें कर रही हो ? तुम रुको मैं अभी वहां अत हूँ.

इतना कह कर मैंने कॉल काट दी और शालू से मिलने क लिए लाइब्रेरी में चला गया . शालू की बातों से साफ़ ज़ाहिर था क वो अपनी ज़िन्दगी से कितना ुब्ब चुकी है पर मैं उसे ऐसे ज़िन्दगी से हरने भी नहीं दे सकता था आखिर मुझे भी तो दोस्ती का फ़र्ज़ ऐडा करना था. मैं लगभग भागता हुआ लाइब्रेरी में गया तो शालू एक कोने में बैठी जैसे मेरा hi इंतज़ार कर रही थी. मुझे देखते hi वो अपनी जबह पर कड़ी हो गयी .

अमित : शालू !!

शालू : बात क्या है ? आज बड़े खुश नज़र आ रहे हो

अमित : यहाँ नहीं मेरे साथ चलो फिर बताता हूँ.

शालू : ऐसी क्या बात है जो यहाँ नहीं बता सकते ?

अमित : तुम चलो तो सही .

शालू : ाचा ाचा !! चल तो रही हूँ मैं

मैं शालू का हाथ पकड़ कर खींचता हुआ अपने साथ ले गया . वो भी मेरे साथ चल रही थी वो बार बार पूछे जा रही थी क हम कहाँ जा रहे हैं मगर मैं बस उसे खींचता हुआ लीजिये जा रहा था . मैं शालू को लेकर फिर से 3रद फ्लोर पर आ गया . मगर मैं उसे उस क्लासरूम में नहीं ले कर गया जहाँ शीना और शिवानी थी. मैं दूसरे किसी रूम में शालू को ले गया.

शालू : अब तो बताओ बात क्या है जो मुझे यहाँ तक ले आये हो ?

अमित : आज से तुम आज़ाद हो मोंटी क चंगुल से.

शालू : मैं कुछ समझी नहीं तुम क्या कह रहे हो?

अमित : मैंने वडा किया था न मैं तुम्हे उसके चंगुल से आज़ाद करवाऊंगा ? आज मैंने अपना वडा पूरा किया. मैं वो सब वीडियोस ढूंढ ली शालू . और उन्हें डिलीट भी कर दिया .

शालू एक डैम से शॉकेड hi हो गयी और उसकी आँखों में आंसू आने लगे . वो बस मुझे देखे जा रही थी . मैंने जब उसे पकड़ कर हिलाया तो वो रट हुए मेरे गले लग गयी .

अमित : क्या हुआ शालू ? तुम रो क्यों रही हो ? तुम्हे तो खुश होना चाहिए . अब से तुम आज़ाद हो. अब तुम नै ज़िन्दगी शुरू कर सकती हो .

शालू मेरे सीने से अलग नहीं हो रही थी और बस रोये जा रही थी. मैंने उसे चुप करवाने की कोशिश की पर वो चुप नहीं हो रही थी तो मैंने उसे खुद से अलग किया मगर जैसे hi मैंने उसे खुद से दूर किया वो एक झटके में नीचे बैठ गयी और मेरे पाऊँ में अपना सर रख दिया .

अमित : ये तुम क्या कर रही हो शालू , उठो नीचे .

मैंने शालू को उठा ने की कोशिश की पर वो मेरे पाऊँ को दोनों बाज़ुओं में पाकर कर पाऊँ पर सर रखे बस रोये जा रही थी .

शालू : रट हुए ) नहीं ,, नहीं ,, मुझे यहीं रहने दो मुझे अपने पाऊँ पे सर रख कर रो लेने दो. तुम मेरे भगवन हो . तुमने वो किया जो कोई नहीं कर सकता था. तुम मेरे देवता हो. मुझे इन पैरों में अपना सर रख कर आज रो लेने दो. मुझ जैसी बदनसीब को तुमने मुक्ति दे कर कितना बड़ा एहसान किया है ये तुम खुद भी नहीं जानते. जिसे लोग अपने पाऊँ की जूती समझते थे अपनी रखैल समझते थे तुमने उसे अपना कर आज़ाद कर दिया . मैं मर कर भी तुम्हारा ये एहसान नहीं चूका सकती . मुझे रो लेने दो आज मैं दिल खोल कर रोना चाहती हूँ . मुझे अपनों कदमो से दूर मत करना , मेरे लिए ये hi स्वर्ग है. काश क तुम्हे मेरी उम्र भी लग जाये .

अमित : बच्चों जैसी बातें मत करो . उठो नीचे से. तुम मेरी दोस्त हो और दोस्तों पर कभी कोई एहसान नहीं करता. भूल गयी ? एहसान तो तुमने मुझ पर किया था. मैंने तो बस अपना फ़र्ज़ निभाया है.

शालू मेरे कहने क बाद भी उठ नहीं रही थी तो मैंने कहा

अमित : अगर तुम अभी भी उठी तो मैं तुमसे बात नहीं करूँगा.

शालू : ऐसा मत कहो , मैं तो तुम्हारी दादी हूँ . अगर तुमने मुझसे मुँह फेर लिया तो मैं खुद को माफ़ नहीं कर पाऊँगी.

शालू रट हुए जल्दी से कड़ी हो गयी . मैंने उसके आंसू साफ़ किये और वो फिर से मेरे गले लग गयी .

शालू : प्लीज मुझसे नाराज़ मत होना. तुम जो कहोगे मैं करुँगी .

अमित : ऐसी बातें क्यों कर रही हो शालू ? तुम मेरी दोस्त हो कोई गुलाम नहीं हो.

शालू : मैं तुम्हारी गुलाम hi हूँ आज से . मेरी ज़िन्दगी तो पहले hi बर्बाद हो चुकी थी . तुमने मुझे जो नै ज़िन्दगी दी है ये सिर्फ तुम्हारी मेहरबानी है.

अमित : अब बस भी करो मुझे ाचा नहीं लग रहा. अगर तुमने यही सब करना है तो मैं जाता हूँ.

शालू : नहीं नहीं ऐसा मत कहो . ाचा अब मैं नहीं रोटी .

अमित : that’s गुड, चलो अब थोड़ा मुस्कुराओ.

शालू मुस्कुराने की कोशिश कर रही थी पर उसकी आँखों से फिर से आंसू बहने लगे

अमित : अब बस करो शालू. बहुत रो लिया तुमने अब तुम और नहीं रोओगी. आज क बाद कोई भी तुम्हे तंग करने की कोशिश करे तो मुझे बस एक आवाज़ दे देना फिर मैं देख लूंगा. अब कोई तुम्हे ब्लैकमेल नहीं कर सकता. तुम नए सिरे से अपनी ज़िन्दगी शुरू करना . जो कुछ हो चूका वो बदला तो नहीं जा सकता पर मेरा विश्वास करो ज़िन्दगी में आगे तुम्हे कोई तकलीफ नहीं होने दूंगा मैं. और रही बात मोंटी को सजा देने की तो वो भी उसे मिल चुकी है.

शालू : शॉकेड ) क्या मतलब ? कैसे ? क्या किया तुमने उसके साथ ?

अमित : अब वो कभी किसी लड़की क साथ कुछ कर hi नहीं पायेगा .

शालू : ???????

अमित : मैंने उससे उसकी मर्दानगी hi छीन ली है. अब वो किसी क साथ गलत करने का सोचेगा भी नहीं.

शालू ये सुनते hi ख़ुशी से उछाल पड़ी और मेरे गले लग गयी .

शालू : क्या सच में तुमने ऐसा किया ? ो ,,,,, ी ऍम सो हैप्पी . इससे बड़ी और कोई सजा हो hi नहीं सकती थी उसके लिए . अब पता चलेगा उसे. जब तक ज़िंदा रहेगा पछताता रहेगा. वैसे ये तुमने किया कैसे?

अमित : बस कर दिया , ये मत पूछो क कैसे किया. और हाँ ये बात किसी को बताना मत . खुद मोंटी भी नहीं जनता क उसके साथ क्या हुआ किसने किया .

शालू : समझ गयी , मुझे यकीन नहीं हो रहा तुमने इतना कुछ कर दिया मेरे लिए ी ऍम सो हैप्पी

इतना कह कर शालू ने मेरे गाल पर किश कर दी और कास क मेरे गले लग गयी. उसका नाज़ुक बदन मुझे अपने कोमलता का एहसास करवा रहा था और वो उसी तरह मेरे गले लगी रही. मैंने उसकी पीठ थपथपाते हुए उसे खुद से अलग किया.

अमित : आज से तुम हम सब क साथ रहोगी बिना किसी दर क. पर उससे पहले मैं तुम्हे किसी से मिलवाना चाहता हूँ जिसने इसमें मेरी मदद की है . चलो उससे भी मिल लो.

मैं शालू को उस क्लास रूम में ले गया जहाँ शीना और शिवानी बैठी हुई थी . लैपटॉप बंद पड़ा था और शीना क चेहरे पर गुस्सा और दर्द था.

अमित : आओ शालू , शीना अगर मदद न करती तो मैं शायद मोंटी क इस लैपटॉप को खोल नहीं पता और शिवानी ने भी बहुत मदद की है मेरी .

शालू : थैंक्स शिवानी , थैंक यू वैरी मच शीना.

शीना शालू क थैंक यू कहते hi अपनी जगह से कड़ी हुई और रट हुए शालू क गले लग गयी .

शीना : मुझे माफ़ कार्डो शालू . मैं हमेश तुम्हे गलत समझती रही और पता नहीं क्या क्या कहती रही. जबकि तुम्हारे साथ इतनी दरिंदगी हो रही थी . तुमने मुझे कभी बताया क्यों नहीं ? मैं शर्मिंदा हूँ क मैं ऐसे इंसान की बहिन हूँ जो इंसान कहलाने क भी लायक नहीं है .

शालू : इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है शीना , ये सब मेरी बदकिस्मती थी. तुमने तो वही किया जो कोई भी ऐसी लड़की क साथ कर सकता है . मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं है बल्कि तुमने तो मेरी मदद hi की है.

शीना : पर मुझे खुद पर शर्म आ रही है , मैंने भी तो तुम्हारा इतना दिल दुखाया है.

शालू : वो सब भूल जाओ , आज से हम अचे दोस्तों की तरह रह सकते हैं न?

शीना : क्यों नहीं मेरी बहिन , हम दोस्त नहीं बहनो की तरह रहेंगी . आज से तुम्हे किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो कुछ भी काम हो मैं तुम्हारा साथ दूंगी .

शालू : तुमने इतना कह दिया यही बहुत है . और फिर अमित क होते मुझे कोई चिंता है hi नहीं.

शीना : सही कहा तुमने , जिसके पास इतना ाचा दोस्त हो उसे चिंता हो भी नहीं सकती . आज इसने मुझे अपना दोस्त बना कर देखो पहले hi दिन तुम जैसे दोस्त काम बहिन मिला दी. थैंक्स अगेन अमित .

शिवानी : मुझे बहुत ख़ुशी है क मुझे मेरी पुराणी दोस्त शीना वापिस मिल गयी और शालू भी . ये सब सिर्फ अमित की वजह से .

अमित : अरे बस बस तुम तीनो मेरी hi तारीफ किये जा रही हो. चलो अब पार्टी हो जाये आज की दोस्ती की नयी शुरुआत क नाम.

शालू : आज पार्टी मेरी तरफ से .

शीना : नहीं मेरी तरफ से .

अमित : तुम दोनों अपना अपना संभल कर रखो आज पार्टी मैं दूंगा . चलो अब सब .

उसके बाद शीना फिर से शालू क गले मिली और हम सब चल दिए कैंटीन की तरफ. मैंने मैसेज कर क मोहित को और कल्पना को कैंटीन में आने को कहा. हमारा लास्ट लेक्चर hi चल रहा था जो जल्दी hi ख़त्म हो गया और मोहित कल्पना हमारे पास आ गए . शालू शिवानी और शीना को मेरे साथ देख कर कल्पना खुश हो गयी. मोहित भी समझ गया क काम हो गया है. कल्पना अपने स्टाइल में शालू से भी मिली . और शालू को भी ाचा लगा उसके बाद नेहा दीदी रीमा मीनल और राधा को भी हमने कैंटीन में बुला लिया.

अमित : आप सब को जान कर ाचा लगेगा क हमारे ग्रुप में आज तीन दोस्त जुड़ गए हैं . शालू शिवानी और शीना. वैसे तो तीनो hi हमारी सीनियर हैं बूत वे अरे फ्रेंड्स नाउ. शालू क बारे में कुछ बताना चाहता हूँ मैं.

जब मैंने ऐसे कहा तो शीना और शालू दोनों मेरी तरफ देखने लगी की क्या कहने जा रहा हूँ मैं.

अमित : शालू वो लड़की जिसने तब मेरी मदद की थी जब मेरी मदद करने वाला कोई नहीं था इस लिए शी इस स्पेशल तो में. मुझ पर जब रपे एटेम्पट की शिकायत की गयी थी तब शालू ने hi मेरी बेगुनाही क सुबूत दिए थे. शालू बहुत hi अछि लड़की है.

जब मैंने ये कहा तो शीना और शिवानी ने अपने सर झुका लिए और बाकि सब शालू को थैंक्स कहने लगे.

अमित : शीना और शिवानी , आप दोनों को शर्मिंदा होने की ज़रूरत नहीं है . वो सब बिट चूका वक़्त है जिसे न तुम बदल सकती हो न मैं. इस लिए उसे भूल जाओ और आज से तुम भी सबकी तरह हम में से एक हो. आज तुमने साबित कर दिया है क तुम भी एक अछि इंसान हो इसी लिए तुमने मदद की मेरी. ी अप्प्रेसियते यू.

सबने शीना और शिवानी क लिए भी तालियां बजे.

कल्पना : चलो इसी बात पर पार्टी हो जाये. वैसे भी कल संडे है तो हम सब मंडे को hi मिलेंगे .

शीना : आज यहाँ पार्टी जैसे तुम लोग चाहो करो पर मैं चाहती हूँ क मैं सबको अपनी तरफ से पार्टी दूँ अपने स्टाइल में और कोई मन नहीं करेगा .

कल्पना: no प्रॉब्लम, बस पार्टी अछि होनी चाहिए .

शीना : बेस्ट ऑफ़ थे बेस्ट होगी. मुझे पहली बार इतने अचे और सच्चे दोस्त मिले हैं. मतलबी दोस्तों क साथ तो बहुत वक़्त बिता लिया अब तुम जैसे अचे दोस्तों क साथ भी मैं कुछ पल जीना चाहती हूँ.

नेहा दीदी : ज़रूर , हम भी चाहेंगे क तुम हमारे साथ खुश रहो.

मीनल / मोहित : फिर तो मज़ा आएगा .

शीना : मैं पूरी कोशिश करुँगी क तुम सब को ाचा लगे .

अमित : अब बातें छोडो और आर्डर करो फिर घर भी जाना है .



उसके बाद सबने अपना अपना आर्डर किया और हस्ते खेलते बातें करते हुए सबने खाया और फिर पार्किंग की तरफ चल दिए . मोंटी का लैपटॉप अब शीना क पास था. जाते जाते शीना फिर से बार बार मुझे थैंक्स कहती हुई शिवानी को साथ लिए चली गयी और शालू भी नाम आँखों से मुझे थैंक्स कहे जा रही थी. शालू को राधा बड़े गौर से देख रही थी और कल्पना भी जैसे कुछ समझने की कोशिश कर रही थी . शालू क जाने क बाद सब अपने अपने रस्ते हो लिए. राधा और रीमा दोनों hi मुझे आखिरी वक़्त तक देखती हुई गयी जैसी की दोनों की आदत थी. और फिर मैं भी फाइनली मोहित क साथ घर आ ज्ञान एक बहुत बड़ा बोझ मेरे दिल से उतर गया था . आज इतने दिनों बाद मैंने घर जाना था तो घर से भी फ़ोन आने लगे थे पूछने क लिए क मैं कब आ रहा हूँ. माँ मेरा रास्ता देख रही थी और बाबा ने भी मुझसे पूछा क मैं वापिस कैसे आऊंगा ? उन्हें मेरी चोट की वजह से चिंता थी पर मैंने बता दिया क मैं बाइक चला सकता हूँ. मैं घर से खाना खाने क बाद आंटी और मोहित से मिल कर घर से रवाना हो गया और एक बार जाने से पहले मंजू मम से भी मिल लिया . उन्होंने भी प्यार बहरे कुछ चुम्बन मुझे दिए और जल्दी वापिस आने को कहा. इसी तरह मैं घर को रवां हो गया और शाम अँधेरा होने से पहले घर पहुँच गया. जहाँ एक सवाल मेरे आगे खड़ा था जो मैं भूल चूका था.
 
अपडेट 135



निधि क ऑफिस में आज वीकेंड की वजह से हर कोई काम को जल्दी करने में लगा था और निधि भी सबकी तरह अपना काम जल्दी समेटने में लगी थी जब पेओन ने उसे आ कर बताया की मैनेजर ने उसे अपने केबिन में बुलाया है . लंच क बाद इस वक़्त ऑफिस में शांति थी और हर कोई अपने काम को ख़तम करने में लगा था और कुछ लोग शाम की वीकेंड पार्टी की प्लानिंग कर रहे थे.

निधि : मई ी के इन सर ?

मैनेजर : आओ आओ निधि वेलकम .

निधि : आप ने मुझे बुलाया था सर ?

मैनेजर : यस माय डिअर , तुम्हारी परफॉरमेंस से मैं बहुत खुश हूँ , खास कर क कल जो तुमने ऐटिटूड दिखाया ी रियली लिखे तहत . बहुत काम लड़कियां यहाँ ऐसी आती हैं जो अपनी शर्तों पर काम करती हैं वर्ण हर कोई बस गलत ढंग से तरक्की पाने में लगी रहती हैं. पर तुम वैसी नहीं हो. तुम्हारे पेरेंट्स ने तुम्हे बहुत अचे संस्कार दिए हैं.

निधि : थैंक यू वैरी मच सर.

मैनेजर : मैंने तुम्हारी परफॉरमेंस रिपोर्ट हेड ऑफिस भेज दी है और तुम्हे हर मैनेजर की पोस्ट क लिए रेकमेंड कर दिया है.

निधि : थैंक यू वैरी मच सर. ी रियली ग्रेटफुल फॉर थिस.

मैनेजर : इसमें मैंने कुछ भी नहीं किया माय डिअर. ये तुम्हारी अपनी कमाई है. और मैं पर्सनली तुम्हे अपनी तरफ से भी इनाम देना चाहता हूँ. आखिर मैनेजर को इतनी पावर तो होती hi है.

निधि : सर आप पहले hi इतना कुछ कर चुके हैं और कुछ करने की ज़रूरत hi नहीं है.

मैनेजर : ज़रूरत है . यू क्नोव तुम मेरी सब से फेवरेट एम्प्लोयी हो. ी रियली लिखे यू

निधि : ??????

मैनेजर : ी मैं ी रियली लिखे योर एम्बिशन योर डेडिकेशन योर आनेस्टी . इसी लिए ये लो मेरी तरफ से एक छोटा सा गिफ्ट. के हेरे एंड टेक आईटी

मैनेजर ने निधि को पास बुलाय और वो टेबल क दूसरी तरफ से घूम कर मैनेजर क पास गयी. मैनेजर ने उसे एक व्राप्पेड बॉक्स दिया जो निधि ने पकड़ लिया.

मैनेजर : ओपन आईटी

निधि : सर इसमें क्या है ?

मैनेजर : खुद hi देख लो

निधि ने रेपर खोला तो अंदर से एक लाल रंग की पतली और लम्बी सी डब्बी थी. निधि ने जैसे hi उसे खोला तो अंदर एक बेहद hi खूबसूरत गोल्ड चैन थी.

निधि : सर ये क्या है ?

मैनेजर : क्यों पसंद नहीं आयी ? ये मैंने खास तुम्हारे लिए ली है. ये तुम और बहुत अछि लगेगी . तुम इसी तरह म्हणत करो मेरे साथ कोआपरेट करो , देखना तुम्हे मैं मैनेजर बना दूंगा और जल्दी hi तुम्हारे पास अपना फ्लैट अपनी कार होगी . ज़रा इसे पेहेन कर तो दिखाओ.

निधि : गुस्से में ) आप क्या कहना छह रहे हैं , मैं अछि तरह से जानती हूँ सर . इसे अपने पास hi रखिये. मैं ऐसी लड़की नहीं हूँ. मैं अपनी सैलरी और अपनी जॉब से खुश हूँ और अगर आप ये समझते हैं क मैं इन सब चीज़ों क लालच बाकि लड़कियों की तरह वो सब करुँगी जो आप सोच रहे हैं तो आप गलत सोच रहे हैं.

मैनेजर : पेंटर बदलते हुए ) अरे अरे तुम तो बुरा मन गयी , यकीन करो ये सिर्फ तुम्हारे काम से खुश हो कर मैं कर रहा हूँ . आईटी जस्ट ान एप्लीकेशन अवार्ड.

निधि : तो ऑफिस में ऐसा सबको मिलना चाहिए न सर, जब आप सब को देंगे तो मैं भी ले लुंगी तब तक आप इसे अपने पास hi रखिये.

मैनेजर : बाकियों की बात क्यों कर रही हो? जो जिस काबिल है उसे वही दिया जायेगा न. तुम इसे रख लो और उनका इनाम उनकी परफॉरमेंस क हिसाब से उन्हें मिल जायेगा.

निधि : सॉरी सर मैं इसे नहीं ले सकती .

मैनेजर : सोच लो निधि तुम मेरी बात न मन कर मुझे मजबूर कर रही हो क मैं तुम्हारी मैनेजर की पोस्ट की रिकमेन्डेशन रोक दूँ.

निधि : सर आप को जैसा ठीक लगे आप वैसा कर सकते हैं . बूत ी ऍम सॉरी मैं ये नहीं ले सकती. कोई और काम है सर या मैं जॉन ?

मैनेजर : यू मई लीव .

निधि क जाते hi मैनेजर ने गुस्से में टेबल पर पड़ी सब फाइल्स निचे फेंक दी. और गुस्से में बड़बड़ाने लगा. तभी उसका साथी उसका चमचा भी केबिन में आ गया .

जूनियर : क्या बात है सर बड़ा गुस्से में हैं? लगता है फिर से मन कर गयी आपको ?

मैनेजर : कब तक बचेगी , हरामज़ादी खुद को समझती क्या है? उसका वर्क लोड बड़ा दो , इसे सांस लेने की भी फुर्सत नहीं मिलनी चाहिए. देखता हूँ कब तक अकड़ में रहती है.

जूनियर : पर आप तो कह रहे थे क बर्थडे पार्टी करनी है?

मैनेजर : अबे भोसड़ी क अभी कुछ भी किया तो वो समझ जाएगी और सारा प्लान फ़ैल हो जायेगा. कुछ दिन रुक जाओ. वो तो करना hi पड़ेगा पर इसे हमारे प्लान को समझने का मौका नहीं मिलना चाहिए .

जूनियर : वैसे एक बात कहूं सर ?

मैनेजर : भोंक भी अब?

जूनियर : सर मुझे नहीं लगता क ये बहार कहीं पर भी पार्टी में शामिल होने आएगी.

मैनेजर : तुम ठीक कह रहे हो मैं भी ये सोच रहा था. इसके लिए ऑफिस में hi प्लान करना पड़ेगा तभी ये काबू आएगी. बहार ये जाएगी नहीं.

जूनियर : पर सर ऑफिस में कैसे होगा ?

मैनेजर : वो भी सोच लिया है मैंने . बस कुछ दिन इसे सिर्फ काम में उलझा कर रखो और कोई गलती बात नहीं ताकि ये हमारी तरफ ध्यान देना बंद कर दे.

जूनियर : जी सर .

उधर निधि मैनेजर की हर हरकत को समझ रही थी और अब उसने मन बना लिया था क वो अब ये जॉब छोड़ देगी . मैनेजर अपनी पावर और पोजीशन का गलत इस्तेमाल कर रहा था और आगे भी वो कोई न कोई चल चल सकता था इस लिए निधि ने रेसिग्नेशन देने का hi फैसला किया. पर किसी भी लिमिटेड फर्म में जॉब लेना और जॉब छोड़ना आसान नहीं होता . इसके लिए पहले नोटिस देना ज़रूरी होता है. निधि ये बात अछि तरह जानती थी इस लिए उसने अपनी चेयर पर एते hi अपना रेसिग्नेशन टाइप करना शुरू कर दिया पर उसके आगे एक मुश्किल और थी क यहाँ से जॉब छोड़ कर वो जाएगी कहाँ? फ़िलहाल वो जिस फर्म में काम कर रही थी वो hi सबसे बड़ी फर्म थी इस शहर की. मगर उससे ज़रूरी था क जिस माहौल में वो घिरती जा रही थी वो उसे घुटन भरा लगने लगा था. इस बारे में वो किसी से बात भी क्या करे , कोई समझने वाला तो था नहीं . वो खुद भी तो हर बात अपने तक hi छुपा लेती थी पर अब उसे ज़रूरत थी ऐसे दोस्त या साथी की जो उसकी मनोदशा समझ सके और उसे हौंसला दे सके. निधि अभी टाइपिंग कर hi रही थी क पेओन उसके पास कुछ फाइल्स ले आया .

पेओन : मम ये कुछ फाइल्स हैं फाइनेंस डिपार्टमेंट से आयी हैं आप इन्हे देख ले और सर ने कहा है क जाने से पहले इनके बारे में रिपोर्ट सेंड कर दें.

निधि : क्या ?? अभी इस वक़्त ? अभी तो छुट्टी होने में टाइम hi कितना रह गया है ?

पेओन : मम मैं क्या कह सकता हूँ? आप सर से बात कर लीजिये .

इतना कह कर पेओन चला गया पर निधि टेंशन में आ गयी . एक तो वो पहले से hi मैनेजर की बातों से अपसेट थी और ऊपर से ये काम. खैर वो अपना रेसिग्नेशन बीच में hi छोड़ कर पहले फाइल्स देखने लगी.

शाम को मैं घर पहुंचा तो मुझे देख कर माँ बहुत खुश हुई. मुझे गले लगा कर वो मेरे चेहरे पर किश करने लगी. आज फिर मैं माँ क बड़े बड़े स्तन अपनी छाती पर धंसते हुए महसूस कर रहा था और हॉस्पिटल वाला सन मेरी आँखों क सामने आ गया . न चाहते हुए भी मेरी नज़र माँ क सतानो पर चली गयी. ब्लाउज में कैद होने क बावजूद वो अपना आकर बता रहे थे और दोनों पहाड़ो क बीच की ढलान वाली घाटी जो कुछ हद तक नज़र आ रही थी मेरी नज़र को अपनी तरफ खिंच रही थी जैसे उस घाटी से फिसल कर मैं भी ब्लाउज क अंदर hi घुस जाऊंगा.

गौरी ममी : तू आ गया अमित , कितने दिनों बाद तुझे देख रही हूँ . तुझे यद् नहीं आती क्या घर की ? पिछले हफ्ते भी तू घर नहीं आया ?

दीपिका ममी : इसे किसी की यद् कहाँ आएगी ? शहर में दिल जो लग गया है. घर में नन्हा मेहमान भी आया है मगर इसे किसी की परवाह है hi नहीं.

दीपिका ममी अपने बेटे यानि हमारे बेटे को अपनी गॉड में लिए चलती हुई थोड़ा नज़दीक आयी और फिर मुँह बनती हुई अपने कमरे में चली गयी.

गौरी ममी : देखा कितना नाराज़ हो रही है वो भी तुमसे ? जा मिल ले उससे पहले मैं तुम्हारे लिए पानी का गिलास ले कर अति हूँ.

इतना कह कर माँ किचन में चली गयी और मैं दीपिका ममी को मानाने क लिए उनके पीछे उनके कमरे में चला गया . मैं अंदर गया तो बचे को बीएड पर लिटा कर वो करवट क बल दरवाज़े की तरफ पीठ कर क लेती हुई थी . मैं दबे पाऊँ उनके पास गया और उनके ऊपर झुकते हुए उनके गाल को चुम लिया.

अमित : तो आप मुझ से नाराज़ हैं . क्या पूछेंगी भी नहीं क मैं इतने दिन क्यों नहीं आया?

दीपिका ममी : हटो पीछे मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी. अभी अभी बीटा हुआ है और तुम्हे कोई परवाह hi नहीं , कोई बाप ऐसा करता है क्या ?

अमित : भाई ये तो आपने सही कहा मगर फिर तो नाराज़ मेरे बेटे को होना चाहिए और मुँह आप ने फुला रखा है .

दीपिका ममी : बेटे क साथ उसकी माँ नाराज़ नहीं हो सकती क्या ? जब दिल किया बात कर ली जब दिल किया घर आये नहीं तो नहीं . ये कोई बात है क्या

अमित : आप का गुस्सा वाजिब है मगर मैं मजबूर था.

दीपिका ममी : सब जानती हूँ मैं सब समझती हूँ. शहर अछि अछि परियां जो आसपास मंडरा रही हैं अब गाओं का कुछ ाचा कहाँ लगेगा .

अमित : ये आप कैसी बातें कर रही हैं? आप ने ऐसा सोचा भी कैसे?

दीपिका ममी : और नहीं तो क्या, रमा दीदी क साथ तो चक्कर चला hi रखा है और वो तेरी जो मैडम आयी थी मुझे तो वो भी तेरी दीवानी लगती है और पता नहीं कौन कौन लिस्ट में होगा . तभी तुम्हे टाइम नहीं मिलता यहाँ आने का.

अमित : मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नहीं थी. आप जानना चाहती हैं न क मैं पिछली बार गाओं क्यों नहीं आया तो ये देखिये.

इतना कह कर मैंने अपनी T-shirt पीछे से ऊपर उठा कर अपने ज़ख़्म वाली जगह नंगी कर दी और सर से कैप भी उतर दी. ज़ख़्म तो सुख चुके थे मगर अभी भी उनकी परत ठीक नहीं हुई थी . स्किन अपने आप hi बता रही थी क यहाँ पर अभी अभी सुधर आया है. ज़ख़्म क निशान देखते hi दीपिका ममी झटके से उठ गयी और ज़ख़्म वाली जगह पर अपने हाथ से छू कर देखने लगी

दीपिका ममी : ये क्या हो गया ? कैसे हुआ ये? तुमने किसी को बताया क्यों नहीं ? बताओ मुझे ये चोट कैसे लगी तुम्हे .

मैंने जब दीपिका ममी की तरफ देखा तो उनकी आँखों में पानी था. मैं उनके आंसू साफ किये और उन्हें रिलैक्स होने को कहा.

अमित : आप रो क्यों रही हैं ? मैं बिलकुल ठीक हूँ. ये चोट भी अब ठीक हो चुकी है . बस थोड़ा सा निशान hi है बाकि.

दीपिका ममी : रट हुए ) मुझे सच सुन्ना है ये सब कैसे हुआ ? तुमने किसी को बताया क्यों नहीं ?

अमित : बस इसी लिए क वो न हो जो आप अभी कर रही हैं. मैं नहीं चाहता था क कोई परेशां हो . अब सुनिए , पिछले हफ्ते राधा को कुछ गुंडों ने कॉलेज टूर पर किडनैप कर लिया था और उसे बचते हुए मुझे ये चोट लग गयी .

दीपिका ममी : शॉकेड ) क्याआ???? इतना कुछ हो गया और घर पर किसी को खबर तक नहीं ? कैसी है राधा ? उसे कुछ हुआ तो नहीं ? दिव्या कैसी है ? हमें किसी ने कुछ बारे क्यों नहीं?

अमित : इस लिए क सब ठीक थक है. राधा भी ठीक है और मौसी भी . मैंने hi उनको मन किया था क वो घर पर न बताएं. वैसे रीता मौसी और रजनी मौसी को पता चल गया था और वो हॉस्पिटल भी मिलने आयी थी मुझसे .

दीपिका ममी : क्या ???? तू हॉस्पिटल में था?

दीपिका ममी जहाँ शॉकेड हो रही थी वहीँ एक और आवाज़ ने हम दोनों का ध्यान उस और किया. ये आवाज़ थी गिलास गिरने की जो गौरी ममी क हाथ से गिरा था . वो शायद मेरे लिए पानी ले कर आयी थी और पता नहीं कब से हमारी बातें सुन रही थी. मैंने जब पलट कर उनकी तरफ देखा तो उनकी आँखों से आंसू बह रहे थे.

अमित : माँ आप ?

गौरी ममी : रट हुए ) तेरे साथ इतना कुछ हो गया और किसी ने मुझे बताना भी ज़रूरी नहीं समझा , क्या इतनी hi जगह है मेरी तेरी नज़रों में?

माँ की आँखों में आंसू देख कर और उनकी बातें सुन कर मेरा दिल भी पिघल गया . मैं जैसे hi माँ की तरफ बढ़ने लगा तो वो दौड कर मुझसे लिपट गयी . और रट हुए मुझे किश करने लगी. दीपिका ममी की भी ऑंखें नाम थी मगर वो अपने बचे को संभल रही थी जो गिलास गिरने की आवाज़ से रोने लगा था.

गौरी ममी : तुम ने एक पल में hi मुझे पराया कर दिया .

अमित : ऐसा मत कहो माँ, मैं ऐसा सोच भी नहीं सकता . मैं आपकी आँखों में आंसू नहीं देखना चाहता था . मैं जनता हूँ मुझे कुछ होता है सब से ज्यादा तकलीफ आपको hi होती है.

गौरी ममी : तो क्या अब नहीं हो रही? अब तो मुझे ज्यादा दुःख हो रहा है ये जानकर क तुम हॉस्पिटल में भर्ती थे और मैं आराम से घर पर सोई थी.

अमित : मुझे पता है मेरी माँ आराम से नहीं सोती . वो सबका ध्यान रखती है हमेशा और यहाँ आप वो hi कर रही थी. कामिनी ममी और दीपिका ममी का ध्यान तो आप को रखना ोाद रहा है न तो मैं आपको चिंता में क्यों डालता. और फिर यहाँ इन सब का ख्याल कोण रखता ? मेरे पास तो वहां सब मौजूद थे. सुबह से शाम तक कोई न कोई मेरी देखभाल में लगा रहा और जानती हो माँ सब से ज्यादा दिव्या मौसी hi मेरे पास रही और अपने हाथों से मुझे खाना खिलाती रही .

गौरी ममी : वो है hi ऐसी , सब से ज्यादा वो तुमसे hi प्यार करती है बस जताती नहीं. वैसे अब तो वो तुमसे नाराज़ नहीं होगी ?

अमित : नहीं माँ , अब तो वो मुझे अपना बीटा बना कर प्यार कर रही हैं और पता है तीनो माइयों ने ये फैसला किया है क मैं 1-1 हफ्ता सबके घर रहा करूँ.

गौरी ममी : ये तो बहुत hi अछि बात है. अब तुम्हे सबका प्यार मिलेगा बस मैं hi नहीं इनमे.

अमित : ऐसा क्यों कहती हैं आप? आप तो मेरे दिल में हैं. आप नहीं जानती मैं आपसे कितना प्यार करता हूँ.

गौरी ममी : नखरा करते हुए ) पता है मुझे कितना प्यार करता है. हफ्ते बाद अत है वो भी सिर्फ एक रत क लिए जिसमे बात करने का भी टाइम नहीं मिलता और दिन तो तेरा बहार hi निकल जाता है.

अमित : ाचा ये बात है ? तो ठीक है इस बार मैं 2 रत यहीं रहूँगा अब खुश?

गौरी ममी : बहुत खुश

अमित : ाचा माँ आप तो मेरे लिए कुछ लेने गयी थी न?

गौरी ममी : तेरे चक्कर में हाथ से hi गिर गया था सब कुछ , रुक मैं अभी ले कर अति हूँ.

इतना कह कर माँ कमरे से बहार निकली तो मेरी नज़र दीपिका ममी पर गयी जिनकी ऑंखें अभी भी नाम थी.

अमित : अब आप क्यों रो रही हैं ? बताया न मैंने सब कुछ

दीपिका ममी : मुझे पहले क्यों नहीं बताया था? और मैं तुमसे नाराज़ हो रही थी.

मैंने दीपिका ममी को गले लगा लिया .

अमित : आप ऐसा क्यों सोचती हैं हाँ? मैं ाचा भला आपके सामने खड़ा हूँ और आप ऐसे रो रही हैं जैसे मैं .......

मैंने इतना hi कहा था क दीपिका ममी ने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया.

दीपिका ममी : ख़बरदार जो इससे आगे कुछ भी गलत बोलै तो.

गौरी ममी : ये ऐसे नहीं मानेगा छोटी , उसे सबक सीखना hi पड़ेगा .

‘ अरे कौन किसे सबक सीखा रहा है भाई ‘ ये आवाज़ बाबा की थी जो शायद मेरी बाइक देख कर समझ गए होंगे क मैं घर आ चूका हूँ इस लिए हम लोगों की आवाज़ सुन कर पीछे hi आ गए.

गौरी ममी : आपके इस सपूत की बात कर रही हूँ. बहुत बड़ा हो गया है ये , हमसे बातें छुपाने लगा है अब. देखो चोट लगवा कर हॉस्पिटल में रह कर आया है और हमें बताया तक नहीं.

मैंने आगे बाद कर बाबा क पाऊँ छुए और उन्होंने मुझे गले से लगा लिया.

विजय मां : तो इसका मतलब तुम्हे पता चल hi गया ,

( मेरी तरफ देखते हुए ) ाचा किया जो बता दिया वर्ण बाद में डंडे पड़ते तुझे.

गौरी ममी : इसका मतलब आपको पता था ??

विजय मां : हाँ वो . वो ...

गौरी ममी : क्या वो वो ? इसकी तो बाद में खबर लुंगी पहले आप से hi बात करती हूँ.

अमित : माँ मैंने hi बाबा को अपनी कसम दे कर मन किया था.

गौरी ममी : तू चुप कर , मैं इनसे बात कर रही हूँ. आप आओ ज़रा मेरे साथ.

इतना कह कर माँ कमरे से बहार निकली तो एक बार बाबा ने मुझे बेचारगी से देखा और कहा.

विजय मां : देख लिया ? अब आ गयी मेरी सहमत .

और बाबा भी बहार निकल गए . दोनों क जाते hi दीपिका ममी ने मुझे T-shirt से पकड़ कर खींचते हुए मुझे अपने पास किया .

दीपिका ममी : देखा एक पत्नी अपने पति की खबर कैसे लेती है ? अब मैं भी ज़रा अपने पति की खबर ले लूँ.

इतना कह कर दीपिका ममी ने मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए और हम एक दूसरे क होंठ चूमते हुए किश करने लगी तभी फिर से हमारा बीटा रोने लगा और मैंने किश तोड़ते हुए कहा

अमित : पहले इसे सम्भालिये , वैसे भी अभी हम कुछ कर तो सकते नहीं . आपको अभी 6 महीने तो रुकना hi पड़ेगा.

दीपिका ममी ने बेटे को अपनी छाती से लगा कर एक स्तन बहार निकल के उसे दूध पिलाना शुरू कर दिया.

दीपिका ममी : किसने कहा मैं इतनी देर रुकने वाली हूँ ? आगे से बंद है रास्ता पीछे से नहीं . मैं तुम्हे वहां से प्यार करुँगी .

अमित : फिर तो आपका पिछवाड़ा सब से भरी हो जायेगा.

दीपिका ममी : कोई बात नहीं वैसे अभी तो बड़ी दीदी का hi सब से भरी है.

दीपिका ममी ने इतना कहा तो मैं उन्हें देखने लगा .

दीपिका ममी : ऐसे क्या देख रहे हो? मैंने कुछ गलत कहा क्या ? वैसे आज उस अधूरे प्यार को मुकम्मल कर देना जो हॉस्पिटल में किया था .

अमित : आप क्या कह रही हैं ?

दीपिका ममी : मैं उस दिन सब देख और सुन रही थी सोई नहीं थी समझे. दीदी ने खुद से hi सब कुछ किया और तुम बस सोये रहे . कब तक ये नाटक करोगे ? उन्हें तुम्हारी ज़रूरत है और तुम ऐसा कर रहे हो . किसी को इतना भी मजबूर नहीं करना चाहिए क वो अपनी नज़रों में hi गिर जाये . क्या तुम चाहते हो क दीदी अपनी नज़रों में गिर जाएँ ?

अमित : पर मुझसे नहीं होता , मुझे ये सब गलत लगता है .

दीपिका ममी : इसमें सही गलत कुछ नहीं है. तुम्हे बस वो hi करना जिससे उन्हें सुख मिले और फिर जब वो खुद ऐसा चाहती हैं तो तुम मन क्यों कर रहे हो? क्या उनको दुखी करना चाहते हो तुम?

अमित : नहीं मैं ऐसा कभी नहीं चाहता.

दीपिका ममी : तो फिर उनकी तड़प ख़तम करो वर्ण वो चैन से नहीं रह पाएंगी. अब थोड़ी देर तुम कामिनी दीदी से भी मिल लो वो अपने कमरे hi हैं. आजकल वो दर्द में रहती हैं और तुम्हे बहुत यद् करती हैं .

मैंने दीपिका ममी की बात सुन कर कमरे से निकल गया . जाने से पहले मैंने मेरे बेटे को चुम लिया जो अपनी माँ क एक स्तन को खली करने क बाद दूसरे से दूध निकल रहा था.

कामिनी ममी क रूम में गया तो वो बिस्टेर पर लेती हुई थी . मुझे देखते hi उठने लगी तो मैंने उन्हें मन किया और खुद hi उनके पास बैठ गया . मुझे गले से लगा कर थोड़ी देर उन्होंने भी गिला किया मेरे न आने का. फिर मैंने भी उन्हें साडी बात बता hi दी जिसे सुनकर वो भी नाराज़ हुई पर मैंने उन्हें मन hi लिया . कमरे से जाने से पहले हम दोनों ने एक दूसरे को किश किया और फिर मैं अपना बैग ले कर अपने कमरे में चला गया. कुछ देर मैंने अपने कमरे में आराम किया और किसी ने मुझे डिस्टर्ब नहीं किया .

रत क खाने क वक़्त सभी साथ बैठ कर कहाँ खा रहे थे. अजय मां और कमलेश मां भी साथ खाना खा रहे थे उनसे भी पहले hi मैं मिल चूका था और सब कुछ उन्हें बता भी दिया था.

कमलेश मां : बड़े भैया बचे क नामकरण का क्या करना है ? आप बड़े हैं आप को hi पता होगा .

विजय मां : मैंने पंडित जी से बात की है . पंडित जी ने कहा है कहा है क बचे क सवा महीने क होने क बाद नामकरण होगा पूजा क साथ. मैंने और तुम्हारी भाभी ने सोचा है क हम सब को इन्विते करेंगे और एक बड़ा फंक्शन रख कर गाओं वालों को भी भोज करवा देंगे .

अजय मां : ठीक सोचा है भैया अपने . घर में पहला बचा आया है तो इस ख़ुशी में सबको शामिल करना hi चाहिए.

कमलेश मां : रजनी दीदी रीता दीदी और दिव्या को पहले hi बुला लेना आप. भाभी अकेले कैसे संभालेगी सब कुछ .

गौरी ममी : वो मैंने पहले hi सोच रखा है सब. 2 दिन पहले hi बुला लुंगी बड़ी दीदी और रीता को . दोनों क पीछे घर सँभालने क लिए बेटियां हैं. दिव्या राधा को अकेला छोड़ कर नहीं आ सकती फिर भी उसे पूछ लुंगी. तुम उसकी चिंता मत करो .

गरमा गरम रोटी सबकी प्लेट में रखने क बाद माँ वापिस किचन में चली गयी.

अमित : बाबा क्या मैं भी अपने दोस्तों को बुला सकता हूँ यहाँ ?

विजय मां : तू जिसे चाहे बुला बीटा इसमें पूछने वाली क्या बात है.

अजय मां : और हाँ भैया राघव को भी बुला लेना .

विजय मां : उसे तो बुलाना hi है , वो हमारे परिवार की hi तरह तो है. वैसे भी अमित को अपना बीटा मानते हैं दोनों. इसी लिए तो ये वहां से आने का नाम नहीं लेता आज कल.

अमित : क्या बाबा आप भी अब कहने लगे .

गौरी ममी : बिलकुल ठीक कह रहे हैं , तुझे तो वहीँ घर जैसा प्यार मिल रहा है तभी यहाँ नहीं अत तू. रमा ने खूब प्यार से बांध रखा है तुझे

माँ की इस बात पर मैं झेंप गया और सब हसने लगे और माँ फिर से किचन में चली गयी. अब मैं किस लिए झेंप रहा था अब ये तो मैं hi जनता था . रमा आंटी ने जिस प्यार से मुझे बांध रखा था ये तो या वो जानती हैं या मैं. खैर ऐसे hi बातें करते हुए हमने खाना खाया और मैं अपने कमरे ने वापिस आ गया . मैं अपने बीएड पर लेता था क रीमा की कॉल आ गयी . रीमा इस बात पर खुश थी क मैंने शीना को माफ़ कर क अपने ग्रुप में जगह दी . कुछ देर उससे बात करने क बाद मैं फिर से लेटने लगा तो कल्पना की कॉल भी आ गयी .

कल्पना : कैसे हो ? घर पर सब कैसे हैं ?

अमित : सब ठीक हैं तुम बताओ इतनी रत को कैसे यद् किया?

कल्पना : कुछ नहीं बस ऐसे hi लेती थी सोच तुमसे बात hi कर लूँ . वैसे एक बात बाटोगे ? ये शालू का क्या सन है? लैपटॉप में ऐसा क्या था जो तुमने इतना कुछ किया ? और लैपटॉप कैसे तुम्हारे हाथ लगा?

अमित : ो मेरी जेम्स बांड अपना दिमाग ज़रा काम चलाया करो. लैपटॉप कैसे आया वो छोड़ो बस समझ लो किसी ने मेरी मदद की है इसमें. और रही शालू की बात तो वो मैं नहीं बता सकता . मैं उसे शर्मिंदा नहीं करना चाहता . हाँ वो खुद कुछ कहे तो वो और बात है.

कल्पना : तुम्हारी यही बातें तो मुझे अछि लगती हैं . यू अरे रियली नीस गाए , काश सब तुम्हारे जैसे होते.

अमित : लगता है आज तुम रोमांटिक मूड में हो ? कोई बात नहीं कोई न कोई मिल जायेगा तुम्हे भी .

कल्पना : मुझे नहीं चाहिए कोई समझे . अब ज्यादा बात की न तो दांत तोड़ दूंगी तुम्हारे.

अमित : बस इसी लिए तो कोई लड़का तुम्हे पर्पस नहीं करता . तुम तो किसी को भी मरने पीटने को तैयार रहती हो.

कल्पना : मुझे कोई ऐरा गैर चाहिए भी नहीं. ऐसे सड़क छओ रोमिओ बहुत देखें हैं मैंने. बूत ी लिखे समवन स्पेशल.

अमित : तो इसका मतलब है तुम्हे कोई पसंद है. कौन है वो ? बताओ मुझे , क्या पता मैं कोई मदद hi कर दूँ

कल्पना : जस्ट शट उप ok. मुझे कोई पसंद नहीं है . तुम बताओ वापिस कब आ रहे हो ?

अमित : मंडे को hi आऊंगा अब .

कल्पना : कल नहीं आ सकते ?

अमित : नहीं कल रत भी मैं यहीं रहूँगा . तुम क्यों पूछ रही हो?

कल्पना : कुछ नहीं , बस ऐसे hi सोच रही थे क संडे साथ बिताते हैं .

अमित : ग्रेट , मैं नहीं हूँ तो क्या हुआ बाकि सब तो हैं वहां पर . तुम सबसे बात कर क प्लान करो और संडे एन्जॉय करो.

कल्पना : ज्यादा स्मार्ट मत बनो , देख लुंगी मैं खुद hi , मुझे मत समझाओ मैंने क्या करना है . खुद तो जा कर घर बैठ गए हो और मुझे बता रहे हो क क्या करूँ.

अमित : तुम्हे भी बहुत जल्द घर के क आऊंगा मैं. मेरी बाबा से बात हुई है . बचे क नामकरण पर मैं तुम सब को गाओं में फंक्शन पर इन्विते करूँगा.

कल्पना : रियली !!! ओह ी लव आईटी. शुक्र है इसी बहाने तुम्हारा गाओं देखने को मिलेगा. तुम तो मुझे ऐसे ले जाने नहीं वाले थे.

अमित : मैंने कब मन किया ?

कल्पना : पूछा भी तो नहीं कभी साथ चलने को. खुद hi भाग जाते हो अकेले.

अमित : चलो तुम्हारा ये शिकवा भी दूर कर hi दूंगा फंक्शन में बुलाकर. ाचा अब बहुत देर हो चुकी तुम्हे अब आराम करना चाहिए इधर माँ भी अति होगी मुझे देखने.

कल्पना : ाचा ठीक है . गुड नाईट स्वीट ड्रीम्स

अमित : गुड नाईट

जैसे hi मैंने फ़ोन रखा तो राधा का फ़ोन आने लगा . अब राधा को कैसे मन कर सकता था उसका भी फ़ोन उठा लिया और कुछ देर उससे बात हुई. वो बेचारी तो बस आज जो मुझे सजा दी गयी उसी के लिए बार बार माफ़ी मांग रही थी. बड़ी भोली है जो इतना सा मज़ाक भी नहीं समझती या फिर मेरी कुछ ज्यादा hi परवाह करती है. कुछ संस वगैरह आये हुए थे जिनमे नैना दीदी करुणा दीदी शिवानी और कुछ अननोन no. से मैंने अननोन को छोड़ कर सबको जवाब दिया .

अभी मैं फ़ोन को साइड में रख कर लेता hi था क कमरे का दरवाज़ा खुला और माँ कमरे में आ गयी. इतनी रत को वो मेरे कमरे में थी और मुझे शक हो गया क माँ कहीं फिर से मेरे साथ वही सब करने तो नहीं आयी . मैंने अपनी ऑंखें बंद किये सोने की एक्टिंग करने लगा . माँ पहले मेरे पास आयी और मुझे सोया हुआ देख कर मेरे चेहरे पे हाथ फेरा.

गौरी ममी : कितना प्यारा लग रह है सोते हुए, सबकी फ़िक्र करता है बस मेरी hi परवाह नहीं कोई . अब कैसे अपने hi बेटे से कहूं क मुझे तुम्हारी ज़रूरत है जैसे बीवी को पति की होती है.

इतना कह कर माँ मेरे ऊपर झुकी और मेरे माथे पर एक किश कर क फिर से कड़ी हो गयी और जाकर लाइट ऑफ कर दी. अब कमरे में अँधेरा था , मैंने ऑंखें खोल कर देखने की कोशिश की पर सही से दिख नहीं रहा था. मगर माँ की पायल की आवाज़ से मुझे पता चल गया वो मेरे करीब आ रही है . कुछ hi पलों में वो मेरे बगल में लेती हुई थी और मेरी तरफ करवट कर क शायद मुझे hi देख रही थी. अँधेरे में अब कुछ कुछ करीब से दिखने लगा तो मैं थोड़ी सी ऑंखें खोल कर माँ को hi देख रहा था. मेरा मन अंदर से विचलित था मैं समझ तो रहा था क माँ को मेरी ज़रूरत है और दीपिका ममी की बात से मैं कन्विंस भी था मगर पता नहीं क्यों मेरे अंदर से एक झिझक जो थी वो जा नहीं रही थी. मैं छह कर भी उनके साथ खुल कर कुछ कर नहीं पता था.

मैं फिर से अपने hi अंदर इस “सवाल” का जवाब तलाश रहा था जो कब से मेरे सामने था माँ क रूप में. मेरी इस तंदरा को माँ ने hi तोड़ते हुए अपने होंठ मेरे होंठों से लगा दिए मगर बड़े प्यार से . शायद उन्हें किश करना अत नहीं था मगर वो कोशिश कर रही थी . वो बस अपने होंठों से मेरे होंठों को छुआ रही थी. अपनी एक तंग को घुटने से बेंड कर क मेरे ऊपर चढ़ा कर वो अपने नरम मुलायम बड़े बड़े बूब्स मेरी छाती पर दबती मेरे साथ चिपक रही थी. पता नहीं कैसे पास मेरा लैंड जैसे मेरे hi खिलाफ जा कर झटके मरता हुआ उठ खड़ा हुआ . माँ की तंग जो मेरे ऊपर थी उसकी जांघ पर जब मेरा लैंड टकराया तो माँ ने अपना घुटना मेरे लैंड से रगड़ कर उसे और हवा दे दी और अपने हाथ वो मेरी टी शर्ट क अंदर दाल कर मेरी छाती पर फिरने लगी . साथ hi लगातार वो मेरे होंठों गाल और गर्दन पर किश करती जा रही थी . मैं बड़ी मुश्किल से खुद को रोकने की कोशिश कर रहा था मगर माँ का गदराया हुआ बदन मेरे जिस्म में वो आग भड़का रहा था जिसे मैं काबू में नहीं कर प् रहा था. ऐसी गर्मी तो मुझे किसी और क साथ कभी फील hi नहीं हुई थी जो माँ में थी . तभी एक कदम और बढ़ते हुए माँ ने मेरे लोअर में हाथ दाल कर अंडरवियर क अंदर से मेरे खड़े हुए लैंड को पकड़ लिया और मुझे अपने पूरे वजूद में एक कंपकपी सी महसूस हुई. माँ अब प्यार से मेरे लैंड को सेहला रही थी.! मैं अपने आप को काबू में रखने की कोशिश तो कर रहा था पर मेरा जिस्म जैसे अब माँ क हाथों का खिलौना बन गया था .



तो बे कॉन्टिनोएड....
 
अपडेट 135 (2)



अँधेरे में मुझे सोया हुआ समझ कर माँ मेरे साथ अपनी काम क्रीड़ा खेल रही थी और मैं खुद को सोया हुआ hi बताने क लिए अपने आप को हिलने से रोकने की पूरी कोशिश कर रहा था . माँ ने मेरे लैंड को कुछ देर मसलने क बाद अपना हाथ बहार निकल लिया और मेरे ऊपर से हैट गयी . मैंने अपनी उखड रही साँसों को काबू करने की कोशिश की . अगले hi पल माँ मेरी कमर क पास घुटनो के बल बैठ गयी और मेरे लोअर को अंडरवियर क साथ आगे से थोड़ा निचे खिसका कर मेरा लैंड बहार निकल लिया. अपना एक घुटना मेरे ऊपर से निकल कर दूसरी तरफ करते हुए माँ मेरे ऊपर आ गयी. साडी उनकी कमर तक ऊपर हो चुकी थी और उनकी नंगी गोरी चिकनी जांघें अँधेरे में भी मुझे कुछ हद तक दिखाई दे रही थी . जैसे hi मुझे अपनी कमर क पास से उनकी नंगी जांघें अपने जिस्म से लगती हुई महसूस हुई तो फिर से मैं मचल गया. माँ ने एक हाथ निचे ले जा कर मेरा लैंड पकड़ कर जब अपनी छूट पर लगाया तो मुझे एहसास हुआ क उन्होंने अंदर पेंटी नहीं पहनी थी. छूट भी पनिया गयी थो और सूपड़ा छूट से लगते hi कुछ बूंदे सुपडे से लग कर लैंड क नीचे की और बहने लगी. बहती हुई छूट बता रही थी क वो कितनी छुडासी हो रही है . अगले hi पल माँ छूट में सूपड़ा फसाये नीचे को बैठने लगी तो मेरा लैंड उनकी रास बहती छूट में घुसने लगा.

‘ ह्म्मम्म्म्म ‘ बस इतनी hi आवाज़ माँ क दबे होंठों से बहार आयी जब लैंड आधे से कुछ ज्यादा छूट की गहराई में घुसा. खुद को सँभालते हुए माँ अब ऊपर निचे होने लगी. माँ ने अपना मुँह अपने हाथों से खुद hi बंद कर लिया था ता की कोई आवाज़ न हो जिससे मैं नींद से जाग जॉन पर उन्हें क्या पता मैं तो पहले से hi जग रहा था . माँ धीरे धीरे ऊपर निचे हो रही थीं और उसी तरह लैंड छूट में अंदर बहार हो रहा था. वो लैंड को सुपडे तक लती और फिर से नीचे आ जाती. अभी तक पूरा लैंड छूट में नहीं ले रही थी वो और मैं नीचे से तड़प रहा था . मैं माँ क अपने हाथों से दबाना मसलना छह रहा था पर एक झिझक अब भी मुझे रोके हुए थी. वहीँ माँ की गति धीरे धीरे बढ़ती है रही थी और वो अपने होंठ दबा कर अपनी सिसकियों को रोक रही थी . कमरे में बस हाली हाली बीएड हिलने की hi आवाज़ आ रही थी या फिर माँ की गरम साँसों की.

माँ जो पहले से hi बहुत गरम थी ज्यादा देर खुद को रोक नहीं पायी और 5 मिनट में hi वो धराशायी हो गयी और झटके लेती हुई एक डैम से लैंड पर बैठ कर अपना पानी निकलने लगी . मुझे अपने लैंड पर गरम पानी की फव्वारा चलता महसूस हो रहा था. एक डैम बैठ जाने से एक लैंड पूरा छूट की गहराई में उतर गया और उन्होंने बड़ी मुश्किल से अपने मुस से बहार आ रही आवाज़ को रोका

‘ हममममममममम ह्म्मम्म्म्म आअह्हह्ह्ह्हह ‘ न न करते भी एक आखिरी सिसकी उनके होंठों से निकल hi पड़ी . अब वो मेरी छाती पर लेट कर लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी जबकि मुझसे अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था. पिछली बार भी माँ ऐसे hi अपना पानी निकलने क बाद हैट गयी थी और अब भी वैसा hi होने वाला था. जैसे hi माँ की सांसे कुछ संभाली वो मेरी साइड में लुढ़क गयी और सीधी लेट गयी. मगर अब मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था . मुझे दीपिका ममी की बातें यद् आने लगी की मुझे माँ को और मजबूर नहीं करना चाहिए वो पहले hi इतनी मजबूर हो चुकी थी क खुद hi ये सब कर रही थी और ये मिलान भी उनके लिए अधूरा hi था. मैंने अपने मन को पक्का करते हुए धीरे से अपनी कमर ऊपर उठा कर अपने लोअर और अंडरवियर एक झटके में अपने पाऊँ से अलग कर दिया. माँ तो अभी भी मदहोशी क आलम में थी. अभी तक न वो कुछ बोली थी और न hi मैं कुछ बोलने की हिम्मत कर सकता था इस लिए मैं चुपचाप उठा और उनके पाऊँ को पकड़ कर फैला दिया . माँ का जिस्म एक झटके से हिला मगर वो कुछ बोली नहीं. सदी अभी तक कमर तक ऊपर थी जिस वजह से उनकी टंगे अभी भी नंगी थी . मैंने उनकी नंगी टैंगो को फैलते हुए घुटनो क बल आगे हो कर उनकी कमर क पास अपनी पोजीशन ली और उनकी टांगों को घुटनो से पकड़ कर उनके पेट से लगा दिया जिससे उनकी छूट कुछ हद तक ऊपर उठ गयी और लैंड छूट एक लेवल पर आ गए. मैंने सुपडे को छूट में फसाया और हल्का झटका देते हुए आधे से ज्यादा लैंड माँ की छूट में घुसा दिया.

‘ हम्म्म ‘ एक छोटी सी सिसकी जो माँ क मुँह से निकलने वाली थी उसे माँ ने इस तरह दबा लिया पर मैं नहीं रुका और लैंड को थोड़ा सा पीछे खींचते हुए एक तेज़ झटका मर कर पूरा का पूरा जड़ तक छूट में घुसा दिया .

‘ hmmmmmmmmmmm ह्म्म्मम्म्म्म ‘ इस बार फिर से माँ ने अपना मुँह अपने हाथों से दबा कर बंद किया मगर कुछ बोली नहीं. मैंने अब लैंड को फिर से बहार निकल कर झटका दिया और फिर से वही दबी आवाज़ मुझे सुनाई दी. माँ मुझसे बोल नहीं रही थी और मेरी हिम्मत नहीं थी . मैं चाहता था क वो खुद कुछ कहें और बात शुरू हो इस लिए मैंने ज़ोरदार झटके मरने शुरू कर दिए . मैंने माँ की टांगों को पूरा उनके सर तक दबा कर अपना वजन उनकी कमर पर डालते हुए ज़ोर से धक्के पेलने शुरू कर दिए .

‘ हममममममममम ह्म्म्मम्म्म्म ह्म्म्मम्म्म्म ‘

माँ को तकलीफ hi हो रही थी मगर वो भी पूरी ज़िद दिखते हुए कुछ बोल नहीं रही थी और अपना मुँह बंद किये हुए थी. मैं भी बिना रुके ताबड़तोड़ धक्के मर रहा था . अब लैंड छूट में रवानी से जाने लगा था तो माँ की आवाज़ काम हो गयी मगर इससे मुझे ाचा नहीं लगा . मेरी तरकीब फ़ैल हो गयी थी तो मैंने पोज़ चेंज करते हुए माँ की टैंगो को ढीला छोड़ा और उन्हें पलट दिया . अब वो मेरे सामने पेट क बल लेती थी. मैंने उनकी कमर क नीचे हाथ दाल कर कमर को ऊँचा किया और उन्हें घुटनो पर करते हुए कमर को दोनों हाथों से थम कर सूपड़ा छूट में फसकर एक करारा धक्का पेल दिया. ‘ हम्मम्मम्मम्म ‘ फिर से एक दबी दबी आवाज़ आयी मगर माँ फिर भी कुछ न बोली. तो मैंने फिर से अपनी रेल चला दी. माँ का पूरा बदन मेरे धक्को से हिल रहा था . मैंने अपने T-shirt उतर कर एक साइड को फेंक दी तो मेरा ध्यान माँ क कपड़ों पर गया. माँ अभी भी साइड ब्लाउज में थी. मैंने सोचा क माँ की शर्म को उतरने क लिए उन्हें नंगा करना hi पड़ेगा तो मैंने उनकी साइड जो अस्त व्यस्त थी पकड़ कर ऐसे hi कमर से नीचे खींचनी शुरू की. थोड़ी जद्दोजेहद क साथ सदी उनकी कमर से नीचे हुई तो मैंने उसे उनकी टैंगो से खिंच कर निकल दिया और उनके बड़े बड़े हिप्स पर किश करता हुए मैं पीठ तक किश करता गया. माँ अभी भी अपनी आवाज़ दबा रही थी. मैंने उनके ब्लाउज को खोलना चाहा तो वो मुझसे खुल नहीं रहा था मैं ज़ोर लगा कर उसे फाड़ने hi लगा था क खुद hi माँ ने उसके हुक खोल दिए . मैंने ब्लाउज भी उनके जिस्म से अलग कर दिया. अब वो पूरी की पूरी मेरे आगे नंगी पड़ी थी मगर अँधेरे में कहाँ देख सकता था मैं उनके इस गदराया हुए जिस्म को . लाइट जलने की हिम्मत मुझसे भी न हुई . मैंने फिर से पोजीशन ली और न को घुटनो क बल कर क ठुकाई शुरू कर दी. माँ अपना मुँह बिस्टेर में छुपाये अपनी आवाज़ दबा रही थी जबकि मैं पूरी जान लगा कर उन्हें बोलने क लिए मजबूर कर रहा था. कमरे में अब उनकी दबी दबी सिसकियों क इलावा उनके कूल्हों से टकरा रही मेरी जांघों और गीली छूट में पिस्टन की तरह चल रहे लैंड की भी आवाज़ आ रही थी . एक बार फिर से माँ चरम पर पहुँच गयी और उनका जिस्म झटके खाने लगा . छूट रास बेहटा हुआ बिस्टेर पर गिरने लगा था. मैंने उन्हें साँसे सँभालने का वक़्त दिया और जैसे hi वो कुछ नार्मल हुई तो मैंने उन्हें सीधा कर दिया और खुद बिस्टेर से निचे उतर कर खड़ा हो गया. माँ को झांगों से पकड़ कर खींचते हुए मैं उन्हें किनारे तक ले आया और उनके पाऊँ अपने कंधे पर रख कर फिर से लैंड उनकी छूट में पेल दिया. मैं उनके बदन को जैसे चाहे मसल रहा था मरोड़ रहा था मगर वो फिर भी कुछ नहीं बोल रही थी. अब बीएड भी तेज़ धक्कों की वजह से कुछ ज्यादा hi आवाज़ करने लगा था. मगर जो आवाज़ मैं सुन्नी चाहता था वो अभी भी नदारद थी. मैंने माँ क ऊपर झुकते हुए उनके बड़े बड़े बूब्स को अपने हाथों में लिया और मसलते हुए धक्के पेलने लगा. मैं पूरे ज़ोर से उनके बूब्स मसल रहा था मगर वो दर्द को बर्दाश्त करती हुई अभी भी अपनी आवाज़ दबाये हुए थी.

इतने पर भी जब माँ कुछ नहीं बोली तो मैंने उनकी कमर क निचे से हाथ दाल कर एक झटके से उन्हें हवा में उठा लिया . गिरने क दर से जल्दी से उन्होंने अपने हाथ अपने मुँह से हटाए और मेरी गर्दन को पकड़ लिया. मैं उन्हें ऐसे hi हवा में उठाये बिस्तर से दूर हो गया और तेज़ी से अपनी कमर हिलने लगा. माँ क मुँह से अब सिसकियाँ बहार आने लगी

‘ हम्म्म्म ुह्ह्ह्ह कक्कक्क्स उम्म्म्म ुह्ह्ह्हह्ह उम्म्म्म ुह्ह्ह्ह ‘

वो फिर भी कुछ नहीं बोली मगर इस पोजीशन में उनकी पायल अब अपनी झंकार सुना रही थी . मुझसे भी अब और रुका नहीं जा रहा था और मैं अपने आखिरी धक्के पूरे ज़ोर से लगता हुए उन्हें लिए बिस्टेर पर गिर गया. माँ मेरे नीचे डाब गयी थी और आखिरी ज़ोरदार धक्कों क साथ hi मैंने जड़ तक लैंड घुस कर अपना पानी निकल दिया. पता नहीं कितने झटके मुझे अपने बदन में लगते हुए महसूस हुए पर मैं निढाल हो कर उनके ऊपर hi पसर गया .

माँ भी लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी . कमल की हिम्मत थी माँ में भी क इतनी धुआंधार चुदाई क बाद भी एक शब्द उनके मुँह से न निकला. कुछ देर यूँही हम लेते रहे . फिर माँ ने मुझे एक तरफ को लुढ़का दिया और खुद अपनी छूट पर हाथ रख कर उठ गयी. जैसे hi वो बिस्टेर से नीचे उतर कर चलने लगी तो उनके मुँह से सिसकी निकल गयी

उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ कक्कक्कक्स ‘ शायद उन्हें दर्द महसूस हो रहा था. वो आहिस्ता आहिस्ता कमरे क आत्ताच बाथरूम की तरफ बाद गयी. रत की इस ख़ामोशी में मुझे उनकी पायल की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी जिसने मेरे अंदर पता नहीं कैसा नशा भर दिया और मेरे लैंड में करंट आ गया और उसने झटका खाया. माँ बाथरूम में घुस गयी और इधर मेरा लैंड पायल की आवाज़ से hi फिर से खड़ा हो गया. मुझे खुद इस बात पर हैरानी हो रही थी.

कुछ देर बाद माँ धीरे धीरे कदम बढ़ती हुई बीएड क पास आयी . फिर से पायल की आवाज़ सुन कर लैंड महाराज आप खोने लगे . जैसे hi माँ बीएड से अपने कपडे उठाने लगी तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिए और उन्हें बीएड पर गिरा दिया. माँ मुझे रोकने की कोशिश कर रही थी मगर कुछ बोल नहीं रही थी. मैंने फिर से उनकी टांगों को फैलाया और पोजीशन लेते हुए एक झटके में जड़ तक लैंड छूट क अंदर घुसा दिया . ‘ ह्म्मम्म्म्म ‘ फिर से वही दबी हुई आवाज़ मेरे कानो में पड़ी मगर मैं रुका नहीं और उनके पाऊँ अपने कंधे पर रख कर धक्के मरते हुए उनकी पायल का मधुर संगीत सुनने लगा. मैं उनके पाऊँ को चूमने लगा और फिर ऐसा शुरू हुआ क पता नहीं कितनी पोजीशन बदल बदल कर माँ का जिस्म तोड़ कर रख दिया मगर माँ फिर भी न कुछ बोली बाद उनकी सिसकियों से hi अंदाज़ा लगा पाया क उन्हें भी मज़ा आया. मैं देर तक माँ को रोंदने क बाद फिर से उनकी छूट को अपने काम रास से भर कर उनके ऊपर hi देह गया. और कब मेरी आंख लगी मुझे भी पता नहीं लगा.

उधर रत में अपने कमरे अकेली बैठी शीना मोंटी क लैपटॉप का पूरा पोस्टमार्टम कर रही थी . शिवानी क साथ वीडियो चेक करते हुए उसकी नज़र एक फोल्डर पड़ी थी जिसका नाम पड़ते hi शीना ने लैपटॉप बंद कर दिया था और गुस्से से दिमाग फटने लगा था. अब उसी फोल्डर को खोल कर उसने देखा तो फिर से वही हालत हो रही थी उसकी. वीडियो देखते हुए उसका दिमाग घूमने लगा क्यूंकि ये वीडियो उसकी सगी चची रुपाली का था . एक वीडियो में वो उसके बाप से चुद रही थी और एक वीडियो मोंटी ने खुद बनाया था रुपाली की चुदाई करते हुए. एक बार तो वीडियो देख कर शीना को लगा क उसकी चची कितनी गलत है जो उसके बाप क साथ सेक्स रिलेशन में है मगर जब उसने अपनी चची क बारे में सोचा तो उसे कहीं से भी अपनी चची ऐसी न लगी. क्यूंकि वो बहुत संस्कारी थी और उसने वही संस्कार अपने बच्चों को भी दिए थे. शीना भी अपनी माँ से ज्यादा अपनी चची को hi प्यार करती थी. सचाई जानने क लिए शीना ने हैडफ़ोन लगा कर दोनों वीडियोस को दुबारा से प्ले किया और एक एक लफ्ज़ सुनने की कोशिश की तो उसे समझ आया क रुपाली कहीं से भी ये सब मर्ज़ी से नहीं कर रही थी . बल्कि वो तो जैसे कुछ कर hi नहीं रही थी . अब शीना को क्लियर हो गया क उसकी चची को साथ भी गलत किया गया है मगर ये किसने किया है ? उसके पापा ने या मोंटी ने ? शीना को अभी तक एक झटका लगा था मोंटी की सचाई जान कर और अब ये दूसरा झटका था क उसका बाप भी ऐसा hi है . शीना को खुद पर रोना आ रहा था क वो कैसे घटिया लोगों क परिवार से है . उसे अपनी चची क लिए बुरा लग रहा था मगर वो इस बारे में उनसे बात भी नहीं कर सकती थी . आखिर वो क्या कहती उनसे क उसे उनके साथ हुए अत्याचार का पता चल गया है ? इसके बाद रुपाली बेचारी शर्मिंदगी से hi मर जाती. मगर शीना से भी जैसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था फिर भी उसने हिम्मत कर क और आगे उस फोल्डर को देखना शुरू किया तो कुछ तस्वीरें जो बिना बताये ली गयी थी रुपाली की वो इस बात का संकेत थी क मोंटी काफी देर पहले से hi रुपाली पर बुरी नज़र लगाए था और जैसे hi आगे की तस्वीरों में उसने अपनी दोनों कौसिन्स की तस्वीरें देखि तो उसने गुस्से में ज़ोर से लैपटॉप दीवार पर दे मारा. तस्वीरें देख कर शीना समझ गयी क मोंटी की गन्दी नज़र अपनी कौसिन्स पर भी थी . शीना फुट फुट कर रोने लगी. और जब उससे ये और बर्दाश्त न हुआ तो वो उठ कर अपने रूम से बहार निकल कर अपनी चची क रूम में चली गयी. रुपाली क रूम का दरवाज़ा बंद था मगर नॉक करते hi रुपाली ने दरवाज़ा खोल दिया . अपने सामने रत क इस वक़्त शीना को रट हुए देख कर वो भी सेहम गयी क कहीं कुछ अनहोनी तो नहीं हो गयी?

रुपाली : घबराते हुए ) क्या हुआ शीना तुम उस वक़्त इस हालत में ? क्या हुआ बेटी बताओ मुझे ?

रुपाली क इतना कहते hi शीना उसके गले लग गयी और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी . रुपाली उसे अपने कमरे में ले गयी और बीएड पर अपने साथ बिठा कर एक माँ की तरह hi उसे चुप करवाने लगी.

रुपाली: चुप बीटा चुप हो जाओ ऐसे नहीं रट . मुझे बताओ तो सही बात क्या है ? तुम तो मेरी स्ट्रांग गर्ल हो न ? फिर क्यों रो रही हो ऐसे बच्चों की तरह ?

शीना : ी हेट माय सेल्फ , मैं बहुत बुरी हूँ सब बुरे हैं . मुझे नफरत हो गयी है अपने आप से . ी ऍम ा ब्लडी सहित part ऑफ़ थिस इम्मोर्टलिटी.

रुपाली : ये तुम क्या कह रही हो बेटी आखिर हुआ क्या है कुछ तो कहो ?

शीना : मोंटी बहुत बुरा है चची जी आज मुझे उसकी सचाई पता चली है तो मुझे अपने आप से नफरत हो गयी है क मैं ऐसे इंसान , इंसान नहीं जानवर की बहिन हूँ . ी हेट माय सेल्फ

रुपाली अंदर से घबरा गयी क ऐसी क्या बात पता चल गयी है शीना को ? कहीं उसके बारे में hi तो पता नहीं चल गया.?

रुपाली : कुछ बाँटोगी क बात क्या है ? क्या पता चला है तुम्हे मोंटी क बारे में? और कैसे पता चला?

शीना : सब कुछ चची जी मुझे आज पता चला क वो कितना घटिया जानवर है . पता नहीं कितनी लड़कियों की ज़िन्दगी बर्बाद की है उसने . और हर किसी को गन्दी नज़र से hi देखता है वो. ऐसे भाई क होने से ाचा था क मेरा भाई hi न होता .

शीना खुद को मुश्किल से कण्ट्रोल कर रही थी क कहीं गलती से भी उसके मुँह से इस बात का ज़िकर न हो जाये क उसे रुपाली क बारे में पता है. और रुपाली ने चैन की साँस ली क शीना को मोंटी क बारे में तो पता चल गया मगर उसके बारे में नहीं .

रुपाली : पर तुझे क्या कैसे चला ये सब ? कहीं तू किसी की बातों में तो नहीं आ गयी ? हो सकता है कोई झूठ बोल रहा हो?

शीना : मैंने अपनी आँखों से देखा है चची जी. मोंटी क लैपटॉप में बहुत सरे वीडियोस पड़े हैं जो उसने बनाये थे लड़कियों क. मैं समझती थी क मेरा भाई थोड़ा बिगड़ा हुआ है पर ाचा है मगर अब पर चला क गन्दगी उसकी नस नस में भरी हुई है .

शीना ने जब लैपटॉप का ज़िकर किया तो रुपाली का मैथ ठनका. लैपटॉप तो वो खुद अमित को देकर आयी थी . तो क्या अमित ने शीना को वो लैपटॉप दिया मगर क्यों ? कहीं ये उसकी कोई चल तो नहीं ?

रुपाली : तुम्हारे पास मोंटी का लैपटॉप कहाँ से आया ? मेरा मतलब है वो तो घर पर नहीं है ?

शीना : ये तो भला हो उस इंसान का जिसने न सिर्फ मेरी इज़्ज़त बचाई बल्कि मुझे मोंटी की सचाई भी बताई और मुझे सही रस्ते पर ला दिया. वो बहुत ाचा है चची जी. हमारे hi कॉलेज में पड़ता है. उस दिन मोंटी क भेजे गुंडे उसकी बहिन और मेरे साथ भी दरिंदगी करने वाले थे मगर ऐन मौके और उसने आ कर हम दोनों को बचा लिया. और पता नहीं किन किन बेचारी मजबूर लड़कियों की ज़िन्दगी बचा ली उसने मोंटी से , उसका लैपटॉप उठवा कर.

रुपाली को शीना की बातों से यकीन हो गया क वाकई में अमित क ाचा लड़का है और उसने जो भी बताया था सब सच था. रुपाली मन में अमित को यद् कर क एक बार खुद hi मुस्कुरा दी .

रुपाली : फिर तो सचमुच वो एक ाचा लड़का है . ऐसे इंसान बहुत काम मिलते हैं दुनिया में.

शीना : आप सही कह रही हैं चची जी . मैंने भी उसके साथ गलत किया था मगर देखि उसने मुझे भी माफ़ कर दिया . हे इस सुच ा ग्रेट गाए

रुपाली : कहीं तुम्हे वो लड़का पसंद तो नहीं आ गया ?

शीना : शर्मा कर ) आओ कैसी बातें कर रही हैं चची जी .

रुपाली : देख देख अभी कैसे रोटी हुई आयी थी और अब उसकी बात करते हुए शर्मा रही है. कभी मिलवाना मुझे भी उससे . मैं भी तो देखूं कौन है वो जिसने तुम्हे इतना बदल दिया.

शीना : रीमा भी जानती है उसे और उसकी बहिन रीमा की hi क्लास में है. आप उससे भी पूछ लेना वो बताएगी आपको क वो कैसा है.

रुपाली : ज़रूर पूछूँगी पर अब तू बिलकुल नहीं रोयेगी समझी. तू मेरी सबसे बहादुर बेटी है तेरी आँखों में ये आंसू अचे नहीं लगते.

रुपाली की इस बात पर शीना अंदर से भर गयी और फिर से रट हुए रुपाली से गले लग गयी.

शीना ( मन में ) आप कितनी अछि हो चची काश मैं आपकी hi बेटी होती . पापा और मोंटी ने आपके साथ कितना गलत किया फिर भी आप मुझे इतना प्यार करती हैं . आप सच में महँ हैं.

रुपाली : अरे तू फिर से रोने लगी. लगता है कोई और बात भी है जो तुझे परेशां कर रही है . बता क्या बात है?

शीना : चची जी , मोंटी ने और पापा ने जिनके साथ भी गलत किया है क्या वो मुझे माफ़ कर देंगे ?

रुपाली शीना की इस बात से फिर से सोच में पद गयी . मोंटी क साथ अपने बाप का ज़िकर कर क शीना ने रुपाली को सोचने पर मजबूर कर दिया.

शीना : बोलो न चची , क्या वो सब लोग मुझे माफ़ कर देंगे ?

रुपाली : क्यों नहीं बेटी ? तुमने तो किसी क साथ गलत नहीं किया फिर तुम कोई तुमसे नाराज़ क्यों होगा?

शीना : थैंक यू चची आप सच में बहुत अछि हैं.

रुपाली ने शीना को गले से लगा लिया और फिर ऐसे hi शीना किसी छोटी बची की तरह रुपाली क गले लगे हुए hi सो गयी. रुपाली शीना को सुलाते हुए अमित क बारे में hi सोच रही थी क कहीं वो रीमा क साथ उसके रिश्ते क बारे में जनता तो नहीं ? अगर जानते हुए भी उसने ये सब किया है तो वो गलत है और अगर अब उसे पता चला है तो वो क्या सोच रहा होगा? रुपाली अमित को लेकर दुविधा में आ गयी थी. एक तरफ अमित ने मोंटी को जैसे सजा दी , रुपाली क साथ हमदर्दी दिखाई, उसके दुःख को समझा और उसे वो ख़ुशी भी दी जो वो भूल hi गयी थी वहीँ आज शीना क रूप में उसे अमित का एक और ाचा काम देखने को मिला. रुपाली देर तक अमित क बारे में अपने अंदर hi विचार करती हुई रत देर तक जागने क बाद सो गयी .

अगले दिन सुबह जब मेरी आँख खुली तो मैं अकेला बिस्टेर पर पड़ा था. कमरे में छै रौशनी बता रही थी क सूरज सर पर आ चूका होगा . जैसे hi मैं अंगड़ाई लेने लगा तो चादर क निचे खुद को बिलकुल नंगा पाया. अचानक मुझे रत का सारा सन यद् आ गया. मैंने देखा क कमरे में माँ का तो नमो निशान तक न था . मुझे लगा कहीं मैंने सपना तो नहीं देखा पर सपने में मैं नागा कैसे हो सकता हूँ. मैंने बेडशीट को जब देखा तो उस पर लगे हुए सफ़ेद दाग रत की कहानी की पुष्टि कर रहे थे.

अमित ( मन में ) इसका मतलब सब सच था. मैंने सच में माँ क साथ ऐसा किया ? माँ क्या सोच रही होगी ?

मैं जल्दी से बीएड से उठा और दौड कर बाथरूम में घुस गया नहाने क लिए. जिसे hi मैं तैयार होकर निचे आया तो अंगना में कोई नज़र नहीं आ रहा था . शायद तीनो मां बहार निकल गए होंगे. किचन से आवाज़ें आ रही थी तो मैंने जा कर देखा क कहीं माँ वहां तो नहीं? पर वहां पर भी गाओं की hi एक औरत काम कर रही थी जो माँ का हाथ बताने क लिए राखी गयी थी जब तक छोटी ममी काम करने लायक नहीं हो जाती . मैं माँ को देखने क लिए उनके कमरे में गया पर वो वहां भी नहीं थी . अब मुझे फ़िक्र होने लगी क कहीं मैंने माँ को कुछ ज्यादा hi दर्द तो नहीं दे दिया? मुझे खुद पर गुस्सा आने लगा . मैं भाग कर माँ क बारे में जानने क लिए दीपिका ममी क कमरे की तरफ गया तो मुझे बहार से माँ और दीपिका ममी की आवाज़ आने लगी .

दीपिका ममी : सच सच बताओ दीदी रत को क्या हुआ? लगता है अमित ने कल काम कर hi दिया आपका ?

गौरी ममी : चुप बेशरम ! कैसी बातें करती है.

दीपिका ममी : अब बता भी दो दीदी , मुझसे कैसा पर्दा? आप भी तो सब कुछ जानती hi हैं .

गौरी ममी : ऐसा कुछ नहीं जो तू सोच रही है .

दीपिका ममी : ाचा !! कुछ नहीं हुआ ?? तो ये आपको चल कैसे एक रत में बदल गयी ? कल तक तो अछि भली थी और आज पाऊँ फैला कर क्यों चल रही हो ?

गौरी ममी : ये ये तू कैसी बातें कर ररर रही है ?

दीपिका ममी : अब इतना क्या शर्माना दीदी हम तीनो में कोई पर्दा नहीं होना चाहिए . जब पता है क हम सब क पेट में एक hi इंसान का बीज है तो हम आपस में खुल क नहीं रह सकती क्या ?

गौरी ममी : कुछ तो शर्म कर , किसी ने सुन लिया तो ?

दीपिका ममी : तो आप बता क्यों नहीं देती ?

गौरी ममी : मुझे काम है मैं अभी आयी और अमित को भी देखूं अभी तक उठा नहीं .

दीपिका ममी : आप बताये न बताएं मैं सब समझ गयी दीदी . और देखना कहीं सुबह सुबह उसका देख कर शुरू मत हो जाना .

दीपिका ममी इतना कहती गयी और माँ तेज़ कदमो से कमरे से बहार निकल आयी. मैं पहले hi कुछ कदम पीछे हैट गया था मगर जैसे hi माँ ने मुझे सामने देखा तो उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया जैसे उसकी कोई चोरी पकड़ी गयी हो .

गौरी ममी : तू उठ गया ? मैं तुझे hi उठाने आ रही थी . चल अजा तेरा खाना लगा दूँ.

इतना कह कर माँ किसी युवती की तरह शर्मा कर तेज़ कदमो से चलती हुई किचन में चली गयी और मेरी नज़र अपने आप उनके तेज़ी से थिरक रहे कूल्हों पर चली गयी. एक रत में hi मेरा माँ को देखने का नजरिया बदल गया था. अब मैं एक मर्द की नज़र से माँ क गदराये बदन को देख रहा था . मगर एक शर्म एक झिझक अभी भी हमारे बिच थी जिसे कैसे गिराया जाये शायद हम दोनों इसी मुश्किल में थे.

माँ ने मुझे प्यार से खाना खिलाया और खाना खिलते हुए हमारी नज़रें जब भी मिलती माँ शर्मा कर नज़र झुका लेती . उनके चेहरे पर एक मुस्कराहट लगातार थी जो मुझे काफी दिनों क बाद देखने को मिल रही थी. ये इस बात का साबुत था क उन्हें मेरे साथ ाचा लगा . हालाँकि उनका पाऊँ फैला कर चलना उनकी छूट की दुर्दशा का प्रमाण था.

खाना खाने क बाद मैं घर से बहार निकला. आज इतने दिनों बाद गाओं में था तो सोचा सब से मिला जाये. पहले मैं राजू क घर गया. राजू में अब काफी बदलाव आ गया था इतने hi दिनों में. वो अपनी नौकरी से खुश था और मुझे बता रहा था क कैसे ओवरटाइम लगा कर वो ज्यादा पैसे बना रहा है और इसी लिए उसे भी किसी से मिलने का वक़्त नहीं मिलता. राजू क बाद मैं डरा भैय्या से भी मिला . दोपहर का खाना मैंने उन्ही क साथ खाया और फिर वहां से निकल कर जब घर आ रहा था तो मुझे पूजा भाभी का भी ख्याल आ गया. जब मैं पूजा भाभी क घर गया तो अंकल घर पर hi थे मगर मेरे आते hi आंटी ने बड़ी सफाई से अंकल को नींद की गोली देकर सुला दिया और फिर शुरू हो गया हमारा कार्य क्रम. दो हफ़्तों से न आने क कारन दोनों hi मुझसे शिकवा कर रही थी और मैंने भी उनका गिला दूर करने क लिए दोनों को एक साथ रगड़ा. कभी पूजा भाभी की सास से पूजा भाभी की छूट चाटता तो कभी पूजा भाभी से उनकी सास की . दोनों का hi 2-2 बार पानी निकला तब वो शांत हुई. और मैंने भी अपना पानी दोनों को घुटनो पर बिठा कर उनके मुँह पर छोड़ा. दोनों hi मेरी पालतू की तरह मेरे आगे अपनी अपनी गांड दिखा कर चूसने को तैयार हो जाती थी मगर अभी तक मैंने पूजा भाभी की गांड नहीं मरी थी जो मैंने आज भी छोड़ दी. मगर एक बात ज़रूर थी क दोनों सास बहु एक दूसरे से बेहतर दिखने की होड़ में ज्यादा से ज्यादा कामुक अदाओं से मुझे लुभाने की कोशिश करती थी. और आज तो मैंने भी दोनों को जैसे चाहे मसल मसल कर रबड़ की तरह उनके जिस्मो को मरोड़ते हुए भोगा था. पूजा भाभी तो फिर भी जवान थी मगर उनकी सास तो इस उम्र में भी जवानी लिए फिर रही थी अपने आप में.

घर आने क बाद सब क साथ हस्ते खेलते हुए रत हो गयी. आज कुछ वक़्त मैंने अपने बेटे क साथ बिताया. दीपिका ममी मुझे उसका नाम रखने को कह रही थी. मगर मैंने अभी इस बारे में सोचा नहीं था. ममी ने साफ कह दिया क बेटे का नाम मैं रखूं चाहे कोई कुछ भी कहे . खैर रत का खाने क बाद फिर से रत को माँ मेरे कमरे में आ गयी जबकि मुझे लगा था क शायद आज वो नहीं आएँगी मगर वो फिर से आ गयी यानि क वो फिर से वो सब करना चाहती थी. आज भी वो चुप चाप लगी रही बिना बात किये मगर आज मैंने उनके साथ सब कुछ आराम से किया ता की उन्हें तकलीफ न हो. सुबह जल्दी उठ कर कॉलेज भी जाना था तो मैंने एक hi बार अपना पानी उनकी छूट में छोड़ा और सो गया .

कल से मुझे दिव्या मौसी क घर रहने क लिए जाना था जैसा क तय हुआ था और साथ hi डॉ रीना को भी वडा किया था उनके साथ शादी में जाने का . दोनों काम एडजस्ट करना मुश्किल होने वाला था .



इस सब से परे मोंटी 2 दिन से अपने शहर से बहुत दूर दिल्ली में आ कर बैठ गया था. वो कल से hi 2 बड़े डीआरएस से मिल चूका था और टेस्ट भी करवाए थे . आज उसकी रिपोर्ट्स देखते हुए डॉ ने वही कहा जो उसे अपने शहर वाले डॉ ने बताया था. मोंटी की सच में गांड गति पड़ी थी ये सोच कर क क्या वो अब सच में कभी कुछ कर नहीं पायेगा? मोंटी को अब किसी भी तरह अपना इलाज करवाना था , उसे तो ये समझ hi नहीं आ रहा था क उसके साथ ये सब हुआ कैसे ? अब वो बस यही सोच रहा था क वो जल्द से जल्द से विदेश कैसे जाये? और घर पर क्या बताये. कॉलेज की तो अब उसे कोई परवाह थी hi नहीं. वो कहते हैं न क पहले अपनी गति हुई सील लो बाद में दुसरो की देखना . मोंटी बस अब विदेश जाने का जुगाड़ लगाने लगा . उसने किसी का भी फ़ोन उठाना बंद कर दिया था इस बात क दर से क वो किसी को क्या जवाब देगा .
 
Back
Top