- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 31,779
अपडेट 130
लेक्टर्स ख़तम होने क बाद मैं कल्पना और मोहित साइंस ब्लॉक की तरफ चल दिए .
कल्पना : वैसे ये रीमा की क्या स्टोरी है ? मुझे कभी बताया नहीं
मोहित : अमित की चाहने वाली है और क्या
कल्पना: शॉकेड ) क्या मतलब ?
अमित : कुछ नहीं ऐसे hi बोलता रहता है ये . तुम्हे भी तो यही कहता है क तुम मेरी चाहने वाली हो.
कल्पना : स्माइल ) मेरी बात और है , , पर मुझे भी कुछ ऐसा hi लग रहा था उसे देख कर . जैसे वो तुम्हे देख रही थी
अमित : तो तुम यही सब नोट करती हो क कौन कैसे देखता है मुझे
कल्पना : और नहीं तो क्या अब तुम्हारे ध्यान तो रखना पड़ेगा न.
अमित : शी इस ा गुड गर्ल , बहुत अछि है वो और इनोसेंट भी. सच कहूं तो उसकी हालत देख कर मुझे खुद पर गुस्सा आ रहा था . उसकी इस हालत का ज़िम्मेदार कहीं न कहीं मैं hi हूँ. जब मुझे पता लगा क वो शीना और मोंटी की बहिन है तो मैंने उसे एक डैम से बुलाना बंद कर दिया और मेरी वजह से बाकि सब ने भी. वो हमारे साथ खुश रहती थी पर उसके बाद देखो क्या हल बना लिया. फिर भी उसने मेरी मदद hi की. अगर वो न बताती तो राधा क साथ कुछ भी हो सकता था.
कल्पना : व्हॉट ?? वो उन दोनों की बहिन है? फिर भी तुमने उसको दोस्त बना लिया.
अमित : पहले उसने नहीं बताया था इसी लिए तो मैंने उसे छोड़ दिया था . मगर उसने मोंटी क खिलाफ मेरी मदद की है तो तुम खुद hi बताओ क मैं कैसे उसे इग्नोर करूँ?
मोहित : बिलकुल ठीक, मुझे भी पहले यही लगा था क वो कोई गेम न खेल रही हो पर उसने सच में मदद की.
कल्पना : अगर ऐसा है तो फिर उसके बारे में जानना चाहिए , ी मैं एक बहिन अपने भाई क खिलाफ जा कर किसी की मदद क्यों करेगी ?
अमित : इस लिए क वो उन जैसी नहीं है . अब तुम अपना शक्की दिमाग चलना बंद करो. शी इस ा गुड गर्ल और वो हमारी दोस्त है.
कल्पना : जो हुकुम मालिक
अमित : अब ये क्या था ?
कल्पना : कुछ नहीं , तुम सबके बारे में सोचते हो बस मेरे लिए टाइम नहीं है
अमित : ऐसा क्यों कह रही हो ? तुम तो मेरी सबसे अछि दोस्त हो. तुम हो तो मुझे चिंता नहीं राधा और नेहा दीदी की. तुम्हारा एहसान तो मैं चूका hi नहीं सकता.
कल्पना : एक दूंगी रख कर , एहसान कह कर गली मत दो. तुम्हारे लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ. तुम मेरी लाइफ क पहले लड़के हो जिस पर मुझे भरोसा है और पता है पापा को मैं तुम्हारे बारे में सब बताती रहती हूँ. उनका भी यही कहना है क तुम बहुत अचे हो .
मोहित : मतलब बात घर तक पहुँच चुकी है. देख लेना किसी दिन शगुन hi न लगा दे
कल्पना ने मोहित की बाजु पकड़ कर मरोड़ दी
कल्पना : कुछ ज्यादा hi नहीं बोलने लगे तुम
मोहित : आआह्ह्ह सॉरी सॉरी यार मैं तो मज़ाक कर रहा था
‘ अरे अरे ये क्या कर रही हो ? मेरे बर्फ का हाथ तोड़ेगी क्या ‘
लेक्चर ख़तम हो गया था और मीनल कल्पना को ऐसा करता देख कर भगति हुई पास आ गयी. उसके पीछे पीछे नेहा दीदी राधा और रीमा भी आ रही थी और सबके चेहरे पर हंसी थी .
कल्पना : संभल कर रखो अपने मजनू को. पता नहीं क्या क्या बोलता रहता है.
मीनल : अब क्या कह दिया इसने?
मोहित : कुछ नहीं मैंने अमित से बस इतना hi कहा क बच कर रहना कहीं ये अपने पापा से बोल कर शगुन hi न लगवा दे .
मोहित की बात सुन कर सब है रहे थे
कल्पना : सुना क्या कह रहा है
मीनल : वैसे इसमें गलत भी क्या है ? तुम नहीं चाहती अमित से रिश्ता जोड़ना
कल्पना : तुम भी शुरू हो गयी , अभी बताती हूँ तुझे.
नेहा दीदी ने बीच बचाव किया .
नेहा दीदी : अरे अरे बस करो. वो तुम्हारे साथ मज़ाक कर रहे हैं और तुम गुस्सा कर रही हो.
राधा : कोई कुछ भी कहे तुम क्यों गुस्सा करती हो हम सब जानते हैं क तुम अमित की अछि दोस्त हो और हमारी भी. अब चलें ?
कल्पना: चलो वर्ण ये दोनों मेरा दिमाग ख़राब कर देंगे
कल्पना चाहे बातों में गुस्सा दिखा रही थी मगर उसके चेहरे की स्माइल कुछ अलग hi कहानी कह रही थी.
ऐसे hi हंसी मज़ाक करते हम सब बहार आये और सब अपने अपने रस्ते हो लिए . जाते जाते रीमा क चेहरे पर वही मनमोहक स्माइल थी. मीनल को घर छोड़ने क बाद मैंने मोहित को मुझे मंजू म क घर ड्राप करने को कहा .
मोहित : खाने का टाइम है और तू मम क घर जाना चाहता है बात क्या है?
अमित : यार उनसे कुछ ज़रूरी बात करनी है. कॉलेज में नहीं कर सकता इस लिए घर जा रहा हूँ.
मोहित : पर घर पे क्या कहूं?
अमित : कुछ भी बोल देना. और मैं जब फ़ोन करूँ तो लेने आ जाना.
मोहित ने मुझे मंजू म क घर पर ड्राप कर दिया . वो घर आ चुकी थी शायद कुछ देर पहले hi. मैंने बेल्ल बजायी तो उन्होंने अंदर से hi पहले पूछ
मंजू म : हु इस थिस ?
अमित : आपका स्टूडेंट
मंजू म ने मेरी आवाज़ पहचान ली और एक झटके में hi दरवाज़ा खोल दिया. मुझे सामने देख कर वो वहीँ मेरे गले लग गयी.
मंजू म : तुम आ गए ? मैं तुम्हे कितना मिस कर रही थी. तुम्हे क्लास में देख कर मैंने खुद को कैसे कण्ट्रोल किया ये मैं hi जानती हूँ. इतने दिन मुझे खुद से दूर क्यों रखा ?
अमित : बस इसी लिए
मंजू म : मतलब ?
अमित : मतलब ये क हम दरवाज़े पर खड़े हैं अंदर तो आने दीजिये. ऐसे hi आप सबके सामने करती तो क्या जवाब देता मैं ? वो तो ाचा था उस दिन मोहित था अगर कोई और होता तो ?
मंजू म ने मुझे अंदर खिंच कर दरवाज़ा लोच कर दिया . और फिर से मेरे गले लग कर मुझे किश करने लगी.
मंजू म : मैं कितना तड़प रही थी ये मैं hi जानती हूँ. तुम्हे उस हालत में देख कर मैं कैसे रह सकती थी?
अमित : चिंता मत कीजिये कोई बड़ी चोट नहीं लगी मुझे . और अब पहले से काफी हद तक ठीक हूँ .
मंजू म : बैठो मैं तुम्हारे लिए कुछ लती हूँ.
अमित : आपने लंच कर लिया क्या ?
मंजू म : नहीं , तुमने किया ?
अमित : इसी लिए तो आया हूँ. आज आपके साथ hi लंच करूँगा और शाम तक मैं यहीं हूँ आपके पास. इतने दिन जो आपको दूर रखा आज साडी कसार निकल दूंगा.
मंजू म : स्माइल ) रहने दी अभी तुम पूरी तरह ठीक नहीं हुए.
अमित : मैं उसके लिए नहीं कह रहा . आज बस आपके साथ वक़्त बिताने आया हूँ . और बहुत सी बातें करनी हैं मुझे आपसे .
मंजू म : सच !! मैं खाना बनती हूँ तुम रेस्ट करो फिर बाद में बातें करेंगे.
मैं सोफे पर बैठ गया और मंजू म खाना बनाने लगी . उसके बाद हम दोनों ने साथ में खाना खाया . मंजू म मुझे अपने हाथों से खाना खिला रही थी.
मंजू म : अब बताओ क्या बात करनी है
अमित : आप बताइये , नाराज़ तो नहीं हैं न मुझसे ?
मंजू म : सच कहूं तो पहले मुझे बुरा लगा था क तुम हॉस्पिटल में और मुझे अपने पास आने नहीं दे रहे पर फिर मैं समझ गयी क तुम किस लिए मन कर रहे थे. अब कोई नाराज़गी नहीं. तुम आज न आते तो पक्का गुस्सा करती .
अमित : आपके पास तो आना hi था . आज hi घर से निकला हूँ और देखिये आपके पास हूँ. वैसे अभी मैं बाइक चला नहीं सकता तो मोहित hi मुझे ड्राप कर क गया है.
मंजू म : उसे भी ले आते , वैसे वो भी तो तुम्हारे फॅमिली मेम्बर जैसे hi है.
अमित : हाँ ऐसा hi है मगर उसे ले अत तो जैसे अपने दरवाज़ा खोल कर स्वागत किया है न वो सब समझ जाता.
मंजू म : शरमाते हुए ) ऐसा भी नहीं है कुछ
अमित : ाचा एक बात बताइये , मोंटी या शीना का साइंस क टीचर्स से क्या कनेक्शन है ?
मंजू म : मैं समझी नहीं तुम क्या कहना चाहते हो ?
अमित : मुझे लगता है राधा का किडनैप करने में स्टाफ में से किसी ने उनकी मदद की है . वर्ण इतनी सफाई से बिना किसी को पता चले ये कैसे पॉसिबल है.
मंजू म : तो इसी लिए प्रिंसिपल सर ने उन लोगों को बुलाया था? इसका मतलब कोई बात ज़रूर है . पर मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता . स्टाफ में तो ऐसा कोई नहीं जो उनके लिंक में हो.
अमित : चलिए कोई बात नहीं . शायद कहीं और से पता चल जाये . पर इस बात का पता लगाना ज़रूरी है .
मंजू म : मैं भी कोशिश करुँगी पता करने की. वैसे अब राधा कैसी है?
अमित : वो ठीक है . आप अपनी सुनाओ . मैं सच में ये महसूस कर रहा था क मैं आपको दूर रख कर सही नहीं कर रहा.
मंजू म : जो हुआ सो हुआ अब छोडो उसे . तुम मेरे पास हो इतना hi बहुत है. आओ अंदर चलते हैं यहाँ बैठे बैठे थक जाओगे तुम .
मम मुझे अपने बीएड रूम में ले गयी और मुझे बीएड पर लिटा दिया और खुद मेरे साइन पर सर रख कर लेट गयी.
अमित : आपको ऐसे ाचा लगता है मेरे साथ लेटना?
मंजू म : सच कहूं तो मुझे तुम्हारे ऊपर लेटना ाचा लगता है पर अभी तुम्हारे ज़ख़्म ठीक नहीं हैं तो ऐसे hi ठीक है.
अमित : मुझे भी ाचा लगता है ऐसे आपको बाँहों में लेना.
मैंने मंजू म को अपनी बाँहों में कास लिया तो वो भी किसी छोटी बची की तरह मेरी बाँहों में संकुचित हो गयी. हम दोनों ऐसे hi एक दूसरे की बाँहों में पड़े प्यार भरी बातें करते पता नहीं कब सो गए.
दूसरी तरफ एक बड़े हॉस्पिटल में डॉ क केबिन में बैठ मोंटी वेट कर रहा था अपनी रिपोर्ट की. कल रत जब लाख कोशिश करने क बाद भी मोंटी क लैंड में हल्का सा भी तनाव न आया तो उसे भी टेंशन होने लगी थी क ऐसा कैसे हो सकता है. अपने बाप की तरह वो भी हवस का पुजारी था और पता नहीं किस किस को वो अपने लैंड पर बिठा चूका था और कइयों को निशने पर रखा हुआ था ऐसा करने क लिए .
डॉ : ी ऍम सॉरी मर मोंटी , आपकी प्रॉब्लम कुछ ज्यादा hi बड़ी है.
मोंटी : शॉकेड ) मैं समझा नहीं डॉ आप क्या कह रहे हैं?
डॉ : मेरा कहने का मतलब है क आपके पेनिस में अब कभी तनाव नहीं आएगा .
मोंटी : क्या ???? मगर ऐसे ाचा ये कैसे हो गया मेरा मतलब मैं तो बिलकुल ठीक था और सब कुछ अचे से चल रहा था फिर ये सब अचानक कैसे ?
डॉ : ये तो मुझे भी समझ नहीं आ रही क इसकी वजह क्या है. पर जो रिपोर्ट है उसके मुताबिक आपके पेनिस में ेररक्शन नहीं आएगी . आपकी बॉडी में स्पर्म प्रोडक्शन बंद हो गयी है.
मोंटी क तो पाऊँ टेल से ज़मीन hi निकल गयी थी. उसे समझ नहीं आये था वो क्या करे . उसके कानो ने जो सुना उस पर उसे यकीन नहीं हो रहा था.
मोंटी : डॉ कहीं टेस्ट में तो कोई गड़बड़ नहीं हुई ? आप एक बार फिर से टेस्ट ले लीजिये .
डॉ : कोई गड़बड़ नहीं हुई है मर मोंटी .
मोंटी : तो इसका इलाज कीजिये न डॉ , पैसे परवाह मत कीजिये बस मेरी ये प्रॉब्लम ठीक कर दीजिये.
डॉ : ी ऍम सॉरी मोंटी पर हमारे यहाँ इसका इलाज नहीं है. बल्कि इंडिया में इसका कहीं भी इलाज इतना अचे से नहीं हो सकेगा. हाँ अगर तुम जा सकते हो तो ुक या उसे में इसका ाचा इलाज हो सकता है या फिर जर्मनी में. पर 100 % तो वो भी नहीं कर पाएंगे हाँ तुम शादी करने जितना हो सकते हो.
मोंटी : क्या मतलब.?
डॉ : मतलब क 40-50 % तक hi ठीक हो सकता है वो भी लम्बे इलाज क बाद . जिसके लिए तुम्हे वही रहना पड़ेगा और शायद सर्जरी भी करनी पड़े . पर यहाँ तो इतना भी पॉसिबल नहीं है . फिर भी तुम किसी और से डिसकस करना चाहो तो कर सकते हो. दिल्ली और मुंबई में काफी बड़े बड़े हॉस्पिटल हैं जहाँ लेटेस्ट मचिनेस हैं इलाज है.
डॉ की बातें सुन कर मोंटी काफी निराश हो गया और सर झुकाये वहां से उठ कर वापिस चला आया. कहाँ कल तक वो राधा और नेहा को अपने नीचे लेन का प्लान बना दिया रहा था और आज उसके साथ इतना बुरा हो गया जो उसने कभी सोचा भी नहीं था. मोंटी क बाप क पास पैसों की कोई कमी नहीं थी . पर वो अपने बाप से क्या कहता क उसके साथ क्या हुआ है? मोंटी को कुछ भी सूझ नहीं रहा था क आखिर वो क्या करे. किसे बताये और कैसे बताये . पर इस बात का कोई हल तो ढूंढना hi था. वो कहते हैं न क पडोसी क घर में आग बाद में लगा लेना पहले अपने घर को तो आग से बचा लो. मोंटी क दिमाग से सब बातें निकल चुकी थी . अब बस कोई बात दिमाग में थी तो उसकी डूबती हुई मर्दानगी. मोंटी की हालत ऐसी थी क जैसे उसका सब कुछ जैसे किसी ने लूट लिया हो. मोंटी अपने फार्म हाउस चला गया और अपना फ़ोन बंद कर क खुद को अलग थलग कर लिया पर ये कोई हल नहीं था. फिर उसने इंटरनेट पर अपनी बीमारी क बेस्ट डॉ देखने शुरू कर दिए . और वहां भी रिजल्ट्स वही बता रहे थे जो डॉ ने उसे बताया था . आखिर कर मोंटी ने मन hi मन फैसला कर लिया क वो पहले वो अपना इलाज करवाएगा बाकि सब बाद में. प्रॉब्लम अब ये थी क अपने बाप से वो क्या कहे. इस तरह पड़े बीच में छोड़ कर विदेश जाना वो भी किस ज़रूरी काम क लिए . मगर अब मोंटी क लिए सब से ज़रूरी था अपनी मर्दानगी को बचाना.
इधर मैं और मंजू म सोये पड़े थे क मेरा फ़ोन बजने से हमारी नींद टूटी. फ़ोन मोहित का था .
अमित : हाँ मोहित
मोहित : सो रहा था क्या ? कितनी देर से फ़ोन कर रहा हूँ ? जल्दी से उठ जा मैं तुझे लेने आ रहा हूँ तेरे बाबा आये हैं घर .
अमित : बाबा आये हैं ? ऐसे अचानक ? चल अजा तू मैं तैयार hi हूँ.
मंजू म : क्या हुआ ?
अमित : बाबा आये हैं मुझे जाना होगा. पता hi नहीं चला कब आँख लग गयी
मंजू म : मुझे तो बहुत अछि नींद आयी . तुम्हारी बाँहों में जो सुकून मिलता है वो कहीं भी नहीं मिल सकता . काश क रोज़ ऐसी hi नींद मिले मुझे.
मैंने मंजू म क होंठो पर किश किया तो वो भी प्रतिउत्तर देने लगी. मैंने टाइम देखा तो 5 बजने वाले थे जल्दी से मैं हाथ मुँह धो कर तैयार हो गया.
थोड़ी देर में मोहित बहार आ गया और कार का हॉर्न बजते hi मैं मंजू म से एक बार फिर गले मिला और मोहित क साथ वापिस चल पड़ा. घर ए तो बाबा आंटी क साथ हॉल में hi बैठे हुए थे. मैंने जैसे hi उनके पाऊँ छुए तो उन्होंने उठ कर मुझे गले से लगा लिया.
विजय मां : कैसा है मेरा बीटा ? तूने मेरा सीना गर्व से चौड़ा कर दिया . शाबाश मेरे बचे .
अमित : बाबा आपको किसने बताया ?
विजय मां : तेरी बड़ी मौसी ने बताया है .
अमित : पर मैंने मन किया था सबको . माँ टेंशन ले लेती है
विजय मां : चिंता मत कर उसे नहीं पता बस मुझे पता है घर में. और तू खुद hi बता देना जब घर आएगा. तेरी चोट कैसी है ? कहीं ज्यादा तो नहीं लगी?
अमित : नहीं बाबा मैं ठीक हूँ . बस कमज़ोरी आ गयी थी खून बहने से .
आंटी : आप इसकी चिंता मत करने भाई साहब ये हमारा भी तो बीटा है. हम इसका अचे से ख्याल रख रहे हैं .
विजय मां : तुम लोगों क पास है इसी लिए तो मैं चिंता नहीं करता. राघव इसे अपना बीटा hi तो मंटा है .
अमित : बाबा घर पर क्या बता कर आये हैं?
विजय मां : क्या बताना है ? तेरी माँ को पता है मैं दिव्या क पास हो कर hi अत हूँ जब भी शहर आऊं . अभी भी मैं उसके पास से hi आ रहा हूँ. दोपहर का खाना खाये बगैर आने नहीं देती वो.
बाबा ज्यादा देर नहीं रुके क्यूंकि उन्हें वापिस भी जाना था तो वो चले गए .
शीना जो कॉलेज नहीं जा रही थी और बस अपने कमरे में hi बैठी रहती थी , शिवानी एक अछि दोस्त की तरह उसका साथ निभा रही थी इस घडी में उसके साथ रह कर. शिवानी की बातों से शीना क मन में अमित क लिए और भी जगह बन गयी थी . आज अमित कॉलेज गया था ये बात शिवानी को पता चली तो उसने शीना को भी बताया
शिवानी : शीना कल से हम भी कॉलेज चलते हैं , कितने दिन तक घर बैठी रहेगी ? देख अमित ने भी कॉलेज आना शुरू कर दिया है . तू उससे कॉलेज में तो मिल hi सकती है न. उससे माफ़ी भी मांग लेना , मैं तुम्हारी मदद करुँगी.
शीना : क्या वो सच में कॉलेज गया था? वो इतनी जल्दी ठीक हो गया ? अभी तो उसके ज़ख़्म ठीक भी नहीं हुए होंगे . मैं उससे माफ़ी कैसे मांगूंगी वो तो मेरी शकल भी देखना नहीं चाहता .
शिवानी : उस दिन वो गुस्से में था इस लिए ऐसा कह गया वो. देखा नहीं मुझे भी क्या नहीं कहा उसने. पर वो दिल का ाचा है ज्यादा देर गुस्सा नहीं रहता वो. और फिर मैं हूँ न? मैं बात करुँगी उससे .
शीना : वो माफ़ कर तो देगा न?
शिवानी : हाँ कर देगा , वैसे भी तुमने कहाँ कुछ किया है ? ये सब तो मोंटी hi कर रहा था न और मोंटी का गुस्सा वो तुम पर निकले ये कैसे हो सकता है ?
शीना : क्या सच में मोंटी ऐसा है जैसा तुमने और अमित ने कहा ? मेरा भाई ऐसा कैसे हो सकता है ?
शिवानी : मोंटी ऐसा hi है शीना , साडी सचाई तुम्हारे आगे आ hi जाएगी.
शीना : मैं मोंटी से भी कहूँगी वो अमित से माफ़ी मांगे. उसका एहसान तो मैं कभी चूका hi नहीं सकती . मुझे लगता था क पैसा hi सब कुछ है . पापा का नाम सुनते hi हर कोई हाथ जोड़ देता था तो लगता था क हम कोई राजा महाराजा हैं. पर उस दिन जब मेरी इज़्ज़त उतरने वाली थी तो एहसास हुआ क हम असल में कुछ नहीं हैं . इंसान क हालत कब बदल जाएँ कोई कुछ नहीं जनता . मैं उस दिन बिना कपड़ों क नंगी बिस्टेर पर पड़ी थी जहाँ वो सब गुंडे मुझे नोचने वाले थे मगर अमित ने एक बार भी मुझे नहीं देखा. मैंने आज तक एक भी लड़का ऐसा नहीं देखा जो लड़कियों बुरी नज़र से न देखता हो और इसने तो मुझे नंगी होते हुए भी नहीं देखा. कहा लोग कपड़ों क ऊपर से hi मेरी खूबसूरती को खा जाने वाली नज़रों से ताड़ते रहते हैं और उसने जैसे मुझे इस काबिल भी नहीं समझा क एक बार देख ले.
शिवानी : वो सब से अलग है शीना . क्या मैंने कोशिश नहीं की थी उसे सडके करने की ? मगर वो तब भी नहीं पिघला था.
शीना : वो ऐसा क्यों है ? देखने में इतना हैंडसम और ताकत भी कितनी है. हिम्मत वाला भी है जो अकेला सब से भीड़ गया . फिर वो लड़कियों से दूर क्यों रहता है ? उसे देख कर तो कोई भी लड़की उसे दिल दे बैठेगी .
शीना मन में यद् करने लगती है अमित का वो बलशाली बदन जो शीना ने उस दिन देखा था जब अमित ने अपनी T-shirt निकल कर राधा को पहना दी थी. कितना छोड़ा सीना था और शरीर जैसे मांस से गुंडा हुआ . मजबूत कंधे और बाज़ुओं में बड़ी बड़ी मचियाँ साबुत थे क जिस्म में कितनी ताकत होगी और हठी जैसे भरी भरकम इंसान को उठा कर पटकना भी जैसे अनहोनी सी बात थी.
शिवानी : कहूं तू भी तो उस पर फ्लैट नहीं हो गयी ?
शीना जो अपने ख्यालों में hi अमित को देख रही थी शिवानी की उस बात पर हड़बड़ा गयी.
शीना : न न नहीं तो , मैं तो ा ऐसे hi कह रही थी.
शिवानी : वो सच में एक आइडियल है और जैसे उसके विचार हैं , क्या कहूं यार . काश क वो मुझे पहले मिला होता . बहुत लकी होगी वो लड़की वो जिसे चाहेगा.
शीना शिवानी की इस बात पर फिर से अमित क बारे में hi सोचने लगी . शिवानी की हर बात जो अमित से जुडी होती थी वो शीना को अमित क प्रति आसक्त करती जा रही थी .
इधर मैं घर पर hi रहा क्यूंकि अभी मैं स्टेडियम जाने और प्रैक्टिस करने क काबिल नहीं था तो घर पर hi रेस्ट करता रहा. फ़ोन पर सब से बात कर क मैंने सबका हलचल जाना . दीपिका ममी और माँ मुझे बहुत मिस कर रही थी वहीँ करुणा दीदी और नैना दीदी मुझसे जल्द मिलना चाहती थी . जब से मैं हॉस्पिटल से घर आया था उनसे मुलाकात नहीं हुई थी . रीता मौसी तो मुझे ु के घर आने का कह रही थी . रत का खाना खाने क बाद मैं रूम में आराम कर रहा था तो राधा का फ़ोन आ गया और कुछ देर उससे बात करने क बाद मैं अभी सोने की तयारी कर रहा था क रीमा का भी फ़ोन आ गया .
रीमा : मैंने डिस्टर्ब तो नहीं किया ?
अमित : बिलकुल नहीं , वैसे भी मैं जल्दी नहीं सोता. तुम क्या कर रही थी ?
रीमा : तुम्हे यद् कर रही थी
अमित : मुझे ? वो क्यों भला ?
रीमा : यद् तो तुम्हे हर पल हर रोज़ hi करती हूँ पर आज तुमने जैसे मुझे गले लगाया वो पल अभी भी मैं महसूस कर रही हूँ. ये किसी सपने की तरह लग रहा है मुझे. क्या सच में ऐसा हुआ था न ?
अमित : मैंने कब गले लगाया तुम्हे ?
रीमा : क्या ?? इसका मतलब मैं सपना देख रही थी ? सपना hi होगा मैं तो लाइब्रेरी में थी .
अमित : मुझे क्या पता
रीमा : लगता है मुझे अब खुली आँखों से भूल तुम्हारे सपने आने लगे हैं
अमित : इसका मतलब तुम पहले भी मेरे सपने देखती हो?
रीमा : हम्म , तुमसे हकीकत में बात तो कर नहीं पति थी तो अक्सर सपने में hi बात होती थी
रीमा की ये बात सुन कर मुझे एहसास हुआ क वो मुझे किस कदर चाहती है और मैंने उसे बिना वजह hi इतनी बड़ी सजा दे दी
अमित : ी ऍम सॉरी रीमा मैंने तुम्हे बहुत दुःख दिया न
रीमा : बार बार सॉरी क्यों कहते हो? अब तुम मुझे मिल गए हो न तो मैं सब भूल गयी हूँ अगर न मिलते तो शायद मैं खुद को hi भूल जाती
अमित : ऐसा मत कहो रीमा , ऐसा मत कहो . मैं अब कभी तुम्हे दुःख नहीं दूंगा. मैं वो पल वापिस तो नहीं ला सकता हो तूने दुःख में गुज़ारे हैं मगर अब तुम्हे और दुखी नहीं होने दूंगा.
रीमा : मुझे बस तुम और तुम्हारा प्यार चाहिए. एक छोटा सा कोना अपने दिल में मुझे दे देना और कुछ मैं नहीं मांगती. तुम्हारे लिए मैं उम्र भर इंतज़ार करने को तैयार हूँ .
अमित : ऐसा नहीं होगा , पर मुझे लगता है मैं तुम्हारे प्यार क लायक नहीं हूँ.
रीमा : ऐसा क्यों कह रहे हो?
अमित : मैंने तुम्हे बताया था न क मैं पहले भी किसी से प्यार कर चूका हूँ और इसके इलावा भी मेरी ज़िन्दगी में कोई है.
रीमा : मैं जानती हूँ तुम कभी किसी को धोखा नहीं दे सकते इस लिए मुझे ये सब बता रहे हो. मुझे कोई परवाह नहीं क तुम्हारी ज़िन्दगी में कौन है , मुझे बस अपने लिए प्यार चाहिए. और मैं जानती हूँ तुम कभी गलत नहीं करोगे , जो भी तुम्हारी लाइफ में है वो ज़रूर कोई खास hi होगा जिसे तुम्हारी ज़रूरत होगी . तुम कभी किसी क साथ गलत रिश्ता नहीं बना सकते मैं जानती हूँ.
अमित : क्या इतना भरोसा है मुझ पर ?
रीमा : अपने से भी ज्यादा.
अमित : अगर कभी कोई ऐसी बात तुम्हे पता चले जो तुम्हे बुरी लगे तो ?
रीमा : तो क्या ? चाहे कुछ भी हो मैं तुम्हे नहीं छोडूंगी. अब बताओ क्या सच में मैंने सपना देखा था या तुमने सच में मुझे गले से लगाया था .
अमित : वो सब सच था और अगर फिर भी यकीन न आये तो कल फिर से गले लगा लूँ क्या सबके सामने?
रीमा : ऐसा मत करना , क्या कहेंगे सब . मीनल और राधा तो मेरी क्लास में hi हैं. और कल्पना भी तो काम नहीं. वैसे क्या वो लड़की कल्पना है ?
अमित : नहीं कल्पना सिर्फ मेरी दोस्त है. वो बहुत अछि है और सच कहूं तो उसके होते मुझे परवाह नहीं राधा और नेहा दीदी की. उन दोनों को उसी क भरोसे तो छोड़ा हुआ है अकेले.
रीमा : फिर तो वो बहुत खास है. वैसे मैं कुछ कहूं?
अमित : कहो
रीमा : मोंटी और शीना .......
अमित : मैं उनके बारे में कुछ नहीं सुन्ना चाहता कोई और बात करो
रीमा : पर मैं ....
अमित : प्लीज रीमा मैं उनके बारे में कुछ सुन्ना नहीं चाहता
रीमा : ाचा ठीक है. एक बात कहूं?
अमित : उन दोनों क इलावा कोई और बात है तो कहो
रीमा : धीमी आवाज़ में ) ी लव यू
अमित : ??????
रीमा : चुप क्यों हो ? बोलो
अमित : क्या बोलूं ?
रीमा : कुछ भी
अमित : क्या कुछ भी ?
रीमा : जो मैंने कहा उस का जवाब hi देदो
अमित : तुम्हे अभी भी जवाब चाहिए ?
रीमा : हम्म्म
अमित : अल्फ़ाज़ों से बयान क्या करें हम चाहत अपनी ,, कभी दिल में उतर कर धड़कनों से पूछ क वो बेकरार कितनी हैं.
रीमा : भरी गले से ) ी लव यू , ी लव यू , ी लव यू सूऊऊ मच. प्लीज मुझे कभी खुद से अलग मत करना कभी भी नहीं.
अमित : कभी भी नहीं . और मुझे तुम मुस्कुराती हुई अछि लगती हो ऐसे रोना धोना ाचा नहीं लगता मुझे.
रीमा : मैं कहाँ रो रही हूँ . ये तो ख़ुशी से ऐसा हो रहा है
अमित : तुम्हे जवाब मिल गया न ? अब खुश हो ?
रीमा : बहुत ज्यादा, काश इस वक़्त तुम मेरे सामने होते तो
अमित : तो क्या ?
रीमा : कुछ नहीं
अमित : बताओ न
रीमा : तुम्हारे गले लग जाती
अमित : और फिर ?
रीमा : कुछ नहीं बस इतना hi .
अमित : लगता है तुम्हे बहुत कुछ सीखना पड़ेगा.
रीमा : मुझे कुछ नहीं सीखना
अमित : ऐसे कैसे नहीं सीखना , मेरी गफ हो तो तुम्हे सब आना चाहिए न.
रीमा : ाचा ? ये ज़रूरी है क्या ?
अमित : और नहीं तो क्या , वर्ण सब कहेंगे क मैंने तुम्हे कुछ सिखाया नहीं
रीमा : तो तुम सबको बताने वाले हो? नेहा दीदी और राधा को भी
अमित : पागल हो क्या उनको पता चला तो सबको पता चल जायेगा. मैं तो मोहित को भी नहीं बताऊंगा क्यूंकि वो मीनल को बता देगा और फिर बात सब को पता चल जाएगी.
रीमा : मैं भी नहीं चाहती क किसी को पता चले वर्ण सब बातें करेंगे.
अमित : ठीक है अब हमें सो जाना चाहिए कल कॉलेज मिलते हैं .
रीमा : मुझे तो अब नींद hi नहीं आएगी
अमित : वो क्यों भला?
रीमा : तुमने अभी अभी जो कहा है वो मुझे सपना सा hi तो लग रहा है कहीं मैं सो कर उठूं और ये सपना टूट जाये तो?
अमित : ऐसा नहीं होगा. तुम जितनी बार कहोगी उतनी बार तुम्हे ी लव यू कहूंगा . कल अगर मुझे मिलना है तो अब सोना पड़ेगा और क्या पता सपना में फिर से मुलाकात हो जाये.
रीमा : ठीक है जैसा तुम कहो . ी लव यू गुड नाईट
अमित : ी लव यू 2 गुड नाईट एंड स्वीट ड्रीम्स
उसके बाद रीमा से मेरी बात ख़त्म हुई . रीमा से बात कर क मुझे ाचा लग रहा था. मुझे उससे बात करते हुए उसका निर्मल प्रेम महसूस हो रहा था. उसे मुझ पर बहुत विश्वास है और पता नहीं मैं उसके काबिल हूँ क नहीं मगर उसने खुद hi कहा क उसे फरक नहीं पड़ता क मेरा किसी और क साथ भी कोई रिश्ता है .
खैर उसके बाद मैं सो गया अगले दिन भी सुबह का नाश्ता करने क बाद हम दोनों एक साथ कॉलेज क लिए चल दिए.
फ्री लेक्चर में हम सब कैंटीन में बैठे थे. आज रीमा कल से कहीं अछि लग रही थी . हम सब बातों में लगे थे क वहां शिवानी और शीना दोनों आ गए . शीना को देख कर मुझे फिर से गुस्सा आ गया . मैं उठ कर पहले hi उनके पास पहुँच गया. बाकि साब मुझे इस तरह उठ कर जाता देखने लगे मगर अगले hi पल जब उनकी नज़र शीना पर पड़ी तो वो समझ गए.
शिवानी : अमित कैसे हो ? मुझे पता है तुम्हे ाचा नहीं लग रहा होगा पर क्या शीना को एक मौका नहीं दे सकते तुम ? वो सच में शर्मिंदा है. एक बार उसकी बात सुन लो उसे माफ़ कार्डो .
अमित : मैंने तुमसे पहले भी कहा था क मैं इसकी शकल भी देखना नहीं चाहता . इसे कहो चली जाये यहाँ से.
शीना : प्लीज ऐसा मत कहो . मैं बहुत शर्मिंदा हूँ एक बार मुझे माफ़ कर दो प्लीज. गलतियां सब से होती हैं , मैंने भी गलतियां की हैं पर क्या अब मुझे अपनी भूल सुधरने का मौका भी नहीं डोज तुम? प्लीज एक बार माफ़ कार्डो , तुम कहो तो तुम्हारे पाऊँ पद जाती हूँ .
अमित : बंद करो ये नाटक , तुम पैसे वाले लोग बस पैसे को hi सब कुछ मानते हो. बहुत घमंड है न तुम्हे पैसों का इसी लिए किसी को कुछ समझती नहीं हो. क्या कहती हो तुम मुझे , हाँ ‘देहाती ‘ अब इस देहाती से माफ़ी मांगने में इज़्ज़त काम नहीं हो रही तुम्हारी ? जाओ जा कर किसी और को बेवक़ूफ़ बनाओ. एक बार पहले भी मुझे तुम लोग बेवक़ूफ़ बना चुके हो अब मैं तुम्हारे झांसे में नहीं आने वाला
शीना हाथ जोड़ती हुई घुटनो पर बैठ गयी . सब लोग शीना को hi देखने लगे और वो रो रो कर मुझे माफ़ी मांगने लगी.
शीना : मैं कसम कहती हूँ मैं अब बदल गयी हूँ , मैं पहले जैसी नहीं रही. प्लीज माफ़ कार्डो मुझे . तुम जो कहोगे मैं करुँगी एक बार मुझे माफ़ कार्डो.
शीना को देख कर सब हैरान थे मुझे भी लग रहा था क ये कुछ ज्यादा hi हो रहा है . वो शीना जो किसी से सीधे मुँह बात नहीं करती थी आज सबके सामने घुटनो पर बैठी मुझसे माफ़ी मांग रही थी . मैं कुछ कहता उससे पहले राधा जाने कब हमारे पास आ गयी .
राधा : दीदी आप उठिये नीचे से , अमित ने आपको माफ़ किया. प्लीज आप चुप हो जाइये.
राधा ने जब शीना को ऐसा कहा तो उसके आंसू थम गए ुर वो कभी राधा को कभी मुझे देखने लगी . मैं भी राधा की इस बात पर हैरत से उसे देख रहा था . राधा ने वही कहा था जो मैं चाहता था पर मैं कह नहीं पता शायद . मेरे दिल की बात राधा ने समझ ली थी.
अमित : ये तुम क्या कह रही हो राधा ? तुम्हे पता भी है तुम्हारे साथ जो कुछ भी हुआ उसमे इसका hi हाथ था .
राधा : मुझे बस इतना पता है क ये अपने किये पर शर्मिंदा हैं और ये तुम भी जानते हो. गलतियां सब से होती हैं पर सुधरने का मौका तो सबको मिलना चाहिए न. वैसे भी उस दिन उनके साथ भी तो वही सब होने वाला था न. शायद इन्हे समझ आ गयी है क ये क्या कर रही थी. अब तुम भी इन्हे एक बार अपने मुँह से कह कर माफ़ी दे दो.
अमित : मगर राधा
नेहा दीदी : राधा ठीक कह रही है , माफ़ कार्डो इसे. मेरे अछि भाई हो न तुम . माफ़ कार्डो इसे.
अमित : ठीक है पर इसे केहदो क वो उन सब से माफ़ी मांगे जिनके साथ इसने और इसके भाई ने बुरा किया है तब जाकर मैं इसे माफ़ करूँगा .
शीना : मैं सब से माफ़ी मांगूंगी. जिससे कहोगे मैं माफ़ी मांगूंगी . प्लीज एक बार अपने मुँह से कह दी तुमने मुझे माफ़ किया .
अमित : राधा ने अभी कहा न क मैंने माफ़ किया तो किया . पर तुम्हे सब से माफ़ी मांगनी होगी . जिस किसी क साथ भी तुमने गलत किया है.
शीना : थैंक यू वैरी मच , मैं अब कभी कोई गलत काम नहीं करुँगी. तुम सच में बहुत अचे हो . थैंक यू वैरी मच . तुमने उस दिन मेरे लिए जो किया मैं उसका एहसान कभी नहीं चूका सकती .
अमित : तुम्हारी जगह कोई भी होता तो मैं ऐसा hi करता. लड़कियों की इज़्ज़त की हिफाज़त करना मर्द की ज़िम्मेदारी है. अफ़सोस क कुछ लोग औरतों लड़कियों की इज़्ज़त से खेलना hi मर्दानगी समझते हैं जैसे क तुम्हारा भाई
शीना : मैं उसे भी समझाउंगी और तुम से माफ़ी मँगवाउंगी .
अमित : खुद को सुधर लो इतना hi बहुत है. रही बात मोंटी की तो वो कभी नहीं सुधरने वाला. जो अपनी बहिन का इस्तेमाल कर सकता है किसी क बहिन को उठाने क लिए वो कितना घटिया होगा तुम अंदाज़ा भी नहीं लगा सकती. ज़रा एक बार शालू से मिल लेना वो बेहतर बता देगी तुम्हे तुम्हारे घटिया भाई क बारे में.
इतना कह कर मैं नेहा दीदी और राधा को लेकर वापिस अपनी जगह पर आ गया. मैंने देखा क रीमा की आँखों में आंसू थे . शायद वो अपनी बहिन क साथ मेरे ऐसे बिहेवियर से दुखी थी.
अमित : ी ऍम सॉरी रीमा , पर शीना ने जो किया है उसकी वजह से मैं उस पर गुस्सा था .
रीमा : ये तो होना hi था बूत ी ऍम हैप्पी क वो अब बदल रही हैं.
अमित : वैसे मुझे लगता है तुम्हे होनी बहिन क पास जाना चाहिए इस वक़्त. वो काफी दुखी लग रही है. उसे सम्भालो जा कर.
रीमा : तुम बहुत अचे हो सबका सोचते हो. मैं जाती हूँ bye .
रीमा उठ कर बहार चली गयी जिधर शीना और शिवानी गयी थी. रीमा क जाते hi सब फिर से मुझे देखने लगे .
अमित : अब क्या हुआ?
कल्पना : रियली यू अरे तू गुड. शीना को तुमने सच में माफ़ भी कर दिया और अब उसकी परवाह भी कर रहे हो .
मीनल : सही कहा यार , मुझे तो लगा था क इतनी आसानी से नहीं मानोगे तुम.
राधा : स्माइल ) ऐसा hi है अमित , किसी से ज्यादा देर नाराज़ नहीं रह सकता ये . जब वो नीचे बैठी रो रही थी तभी इसने उसे माफ़ कर दिया था बाद ऊपर ऊपर से गुस्सा दिखा रहा था.
अमित : तुम्हे कैसे पता ?
राधा : बस महसूस किया मैंने , किसी लड़की की आँखों में आंसू नहीं दे सकते न तुम , स्पेशलय जब वो तुम्हारी वजह से हो
नेहा दीदी : मेरा भाई लाखों में एक है. काश हर कोई तुम्हारे जैसा होता तो दुनिया कितनी अछि होती .
कल्पना : ये एक hi ओने एंड ओनली पीेछे है वर्ण मैंने तो आज तक नहीं देखा ऐसा अजूबा हे हे हे
लेक्टर्स ख़तम होने क बाद मैं कल्पना और मोहित साइंस ब्लॉक की तरफ चल दिए .
कल्पना : वैसे ये रीमा की क्या स्टोरी है ? मुझे कभी बताया नहीं
मोहित : अमित की चाहने वाली है और क्या
कल्पना: शॉकेड ) क्या मतलब ?
अमित : कुछ नहीं ऐसे hi बोलता रहता है ये . तुम्हे भी तो यही कहता है क तुम मेरी चाहने वाली हो.
कल्पना : स्माइल ) मेरी बात और है , , पर मुझे भी कुछ ऐसा hi लग रहा था उसे देख कर . जैसे वो तुम्हे देख रही थी
अमित : तो तुम यही सब नोट करती हो क कौन कैसे देखता है मुझे
कल्पना : और नहीं तो क्या अब तुम्हारे ध्यान तो रखना पड़ेगा न.
अमित : शी इस ा गुड गर्ल , बहुत अछि है वो और इनोसेंट भी. सच कहूं तो उसकी हालत देख कर मुझे खुद पर गुस्सा आ रहा था . उसकी इस हालत का ज़िम्मेदार कहीं न कहीं मैं hi हूँ. जब मुझे पता लगा क वो शीना और मोंटी की बहिन है तो मैंने उसे एक डैम से बुलाना बंद कर दिया और मेरी वजह से बाकि सब ने भी. वो हमारे साथ खुश रहती थी पर उसके बाद देखो क्या हल बना लिया. फिर भी उसने मेरी मदद hi की. अगर वो न बताती तो राधा क साथ कुछ भी हो सकता था.
कल्पना : व्हॉट ?? वो उन दोनों की बहिन है? फिर भी तुमने उसको दोस्त बना लिया.
अमित : पहले उसने नहीं बताया था इसी लिए तो मैंने उसे छोड़ दिया था . मगर उसने मोंटी क खिलाफ मेरी मदद की है तो तुम खुद hi बताओ क मैं कैसे उसे इग्नोर करूँ?
मोहित : बिलकुल ठीक, मुझे भी पहले यही लगा था क वो कोई गेम न खेल रही हो पर उसने सच में मदद की.
कल्पना : अगर ऐसा है तो फिर उसके बारे में जानना चाहिए , ी मैं एक बहिन अपने भाई क खिलाफ जा कर किसी की मदद क्यों करेगी ?
अमित : इस लिए क वो उन जैसी नहीं है . अब तुम अपना शक्की दिमाग चलना बंद करो. शी इस ा गुड गर्ल और वो हमारी दोस्त है.
कल्पना : जो हुकुम मालिक
अमित : अब ये क्या था ?
कल्पना : कुछ नहीं , तुम सबके बारे में सोचते हो बस मेरे लिए टाइम नहीं है
अमित : ऐसा क्यों कह रही हो ? तुम तो मेरी सबसे अछि दोस्त हो. तुम हो तो मुझे चिंता नहीं राधा और नेहा दीदी की. तुम्हारा एहसान तो मैं चूका hi नहीं सकता.
कल्पना : एक दूंगी रख कर , एहसान कह कर गली मत दो. तुम्हारे लिए मैं कुछ भी कर सकती हूँ. तुम मेरी लाइफ क पहले लड़के हो जिस पर मुझे भरोसा है और पता है पापा को मैं तुम्हारे बारे में सब बताती रहती हूँ. उनका भी यही कहना है क तुम बहुत अचे हो .
मोहित : मतलब बात घर तक पहुँच चुकी है. देख लेना किसी दिन शगुन hi न लगा दे
कल्पना ने मोहित की बाजु पकड़ कर मरोड़ दी
कल्पना : कुछ ज्यादा hi नहीं बोलने लगे तुम
मोहित : आआह्ह्ह सॉरी सॉरी यार मैं तो मज़ाक कर रहा था
‘ अरे अरे ये क्या कर रही हो ? मेरे बर्फ का हाथ तोड़ेगी क्या ‘
लेक्चर ख़तम हो गया था और मीनल कल्पना को ऐसा करता देख कर भगति हुई पास आ गयी. उसके पीछे पीछे नेहा दीदी राधा और रीमा भी आ रही थी और सबके चेहरे पर हंसी थी .
कल्पना : संभल कर रखो अपने मजनू को. पता नहीं क्या क्या बोलता रहता है.
मीनल : अब क्या कह दिया इसने?
मोहित : कुछ नहीं मैंने अमित से बस इतना hi कहा क बच कर रहना कहीं ये अपने पापा से बोल कर शगुन hi न लगवा दे .
मोहित की बात सुन कर सब है रहे थे
कल्पना : सुना क्या कह रहा है
मीनल : वैसे इसमें गलत भी क्या है ? तुम नहीं चाहती अमित से रिश्ता जोड़ना
कल्पना : तुम भी शुरू हो गयी , अभी बताती हूँ तुझे.
नेहा दीदी ने बीच बचाव किया .
नेहा दीदी : अरे अरे बस करो. वो तुम्हारे साथ मज़ाक कर रहे हैं और तुम गुस्सा कर रही हो.
राधा : कोई कुछ भी कहे तुम क्यों गुस्सा करती हो हम सब जानते हैं क तुम अमित की अछि दोस्त हो और हमारी भी. अब चलें ?
कल्पना: चलो वर्ण ये दोनों मेरा दिमाग ख़राब कर देंगे
कल्पना चाहे बातों में गुस्सा दिखा रही थी मगर उसके चेहरे की स्माइल कुछ अलग hi कहानी कह रही थी.
ऐसे hi हंसी मज़ाक करते हम सब बहार आये और सब अपने अपने रस्ते हो लिए . जाते जाते रीमा क चेहरे पर वही मनमोहक स्माइल थी. मीनल को घर छोड़ने क बाद मैंने मोहित को मुझे मंजू म क घर ड्राप करने को कहा .
मोहित : खाने का टाइम है और तू मम क घर जाना चाहता है बात क्या है?
अमित : यार उनसे कुछ ज़रूरी बात करनी है. कॉलेज में नहीं कर सकता इस लिए घर जा रहा हूँ.
मोहित : पर घर पे क्या कहूं?
अमित : कुछ भी बोल देना. और मैं जब फ़ोन करूँ तो लेने आ जाना.
मोहित ने मुझे मंजू म क घर पर ड्राप कर दिया . वो घर आ चुकी थी शायद कुछ देर पहले hi. मैंने बेल्ल बजायी तो उन्होंने अंदर से hi पहले पूछ
मंजू म : हु इस थिस ?
अमित : आपका स्टूडेंट
मंजू म ने मेरी आवाज़ पहचान ली और एक झटके में hi दरवाज़ा खोल दिया. मुझे सामने देख कर वो वहीँ मेरे गले लग गयी.
मंजू म : तुम आ गए ? मैं तुम्हे कितना मिस कर रही थी. तुम्हे क्लास में देख कर मैंने खुद को कैसे कण्ट्रोल किया ये मैं hi जानती हूँ. इतने दिन मुझे खुद से दूर क्यों रखा ?
अमित : बस इसी लिए
मंजू म : मतलब ?
अमित : मतलब ये क हम दरवाज़े पर खड़े हैं अंदर तो आने दीजिये. ऐसे hi आप सबके सामने करती तो क्या जवाब देता मैं ? वो तो ाचा था उस दिन मोहित था अगर कोई और होता तो ?
मंजू म ने मुझे अंदर खिंच कर दरवाज़ा लोच कर दिया . और फिर से मेरे गले लग कर मुझे किश करने लगी.
मंजू म : मैं कितना तड़प रही थी ये मैं hi जानती हूँ. तुम्हे उस हालत में देख कर मैं कैसे रह सकती थी?
अमित : चिंता मत कीजिये कोई बड़ी चोट नहीं लगी मुझे . और अब पहले से काफी हद तक ठीक हूँ .
मंजू म : बैठो मैं तुम्हारे लिए कुछ लती हूँ.
अमित : आपने लंच कर लिया क्या ?
मंजू म : नहीं , तुमने किया ?
अमित : इसी लिए तो आया हूँ. आज आपके साथ hi लंच करूँगा और शाम तक मैं यहीं हूँ आपके पास. इतने दिन जो आपको दूर रखा आज साडी कसार निकल दूंगा.
मंजू म : स्माइल ) रहने दी अभी तुम पूरी तरह ठीक नहीं हुए.
अमित : मैं उसके लिए नहीं कह रहा . आज बस आपके साथ वक़्त बिताने आया हूँ . और बहुत सी बातें करनी हैं मुझे आपसे .
मंजू म : सच !! मैं खाना बनती हूँ तुम रेस्ट करो फिर बाद में बातें करेंगे.
मैं सोफे पर बैठ गया और मंजू म खाना बनाने लगी . उसके बाद हम दोनों ने साथ में खाना खाया . मंजू म मुझे अपने हाथों से खाना खिला रही थी.
मंजू म : अब बताओ क्या बात करनी है
अमित : आप बताइये , नाराज़ तो नहीं हैं न मुझसे ?
मंजू म : सच कहूं तो पहले मुझे बुरा लगा था क तुम हॉस्पिटल में और मुझे अपने पास आने नहीं दे रहे पर फिर मैं समझ गयी क तुम किस लिए मन कर रहे थे. अब कोई नाराज़गी नहीं. तुम आज न आते तो पक्का गुस्सा करती .
अमित : आपके पास तो आना hi था . आज hi घर से निकला हूँ और देखिये आपके पास हूँ. वैसे अभी मैं बाइक चला नहीं सकता तो मोहित hi मुझे ड्राप कर क गया है.
मंजू म : उसे भी ले आते , वैसे वो भी तो तुम्हारे फॅमिली मेम्बर जैसे hi है.
अमित : हाँ ऐसा hi है मगर उसे ले अत तो जैसे अपने दरवाज़ा खोल कर स्वागत किया है न वो सब समझ जाता.
मंजू म : शरमाते हुए ) ऐसा भी नहीं है कुछ
अमित : ाचा एक बात बताइये , मोंटी या शीना का साइंस क टीचर्स से क्या कनेक्शन है ?
मंजू म : मैं समझी नहीं तुम क्या कहना चाहते हो ?
अमित : मुझे लगता है राधा का किडनैप करने में स्टाफ में से किसी ने उनकी मदद की है . वर्ण इतनी सफाई से बिना किसी को पता चले ये कैसे पॉसिबल है.
मंजू म : तो इसी लिए प्रिंसिपल सर ने उन लोगों को बुलाया था? इसका मतलब कोई बात ज़रूर है . पर मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता . स्टाफ में तो ऐसा कोई नहीं जो उनके लिंक में हो.
अमित : चलिए कोई बात नहीं . शायद कहीं और से पता चल जाये . पर इस बात का पता लगाना ज़रूरी है .
मंजू म : मैं भी कोशिश करुँगी पता करने की. वैसे अब राधा कैसी है?
अमित : वो ठीक है . आप अपनी सुनाओ . मैं सच में ये महसूस कर रहा था क मैं आपको दूर रख कर सही नहीं कर रहा.
मंजू म : जो हुआ सो हुआ अब छोडो उसे . तुम मेरे पास हो इतना hi बहुत है. आओ अंदर चलते हैं यहाँ बैठे बैठे थक जाओगे तुम .
मम मुझे अपने बीएड रूम में ले गयी और मुझे बीएड पर लिटा दिया और खुद मेरे साइन पर सर रख कर लेट गयी.
अमित : आपको ऐसे ाचा लगता है मेरे साथ लेटना?
मंजू म : सच कहूं तो मुझे तुम्हारे ऊपर लेटना ाचा लगता है पर अभी तुम्हारे ज़ख़्म ठीक नहीं हैं तो ऐसे hi ठीक है.
अमित : मुझे भी ाचा लगता है ऐसे आपको बाँहों में लेना.
मैंने मंजू म को अपनी बाँहों में कास लिया तो वो भी किसी छोटी बची की तरह मेरी बाँहों में संकुचित हो गयी. हम दोनों ऐसे hi एक दूसरे की बाँहों में पड़े प्यार भरी बातें करते पता नहीं कब सो गए.
दूसरी तरफ एक बड़े हॉस्पिटल में डॉ क केबिन में बैठ मोंटी वेट कर रहा था अपनी रिपोर्ट की. कल रत जब लाख कोशिश करने क बाद भी मोंटी क लैंड में हल्का सा भी तनाव न आया तो उसे भी टेंशन होने लगी थी क ऐसा कैसे हो सकता है. अपने बाप की तरह वो भी हवस का पुजारी था और पता नहीं किस किस को वो अपने लैंड पर बिठा चूका था और कइयों को निशने पर रखा हुआ था ऐसा करने क लिए .
डॉ : ी ऍम सॉरी मर मोंटी , आपकी प्रॉब्लम कुछ ज्यादा hi बड़ी है.
मोंटी : शॉकेड ) मैं समझा नहीं डॉ आप क्या कह रहे हैं?
डॉ : मेरा कहने का मतलब है क आपके पेनिस में अब कभी तनाव नहीं आएगा .
मोंटी : क्या ???? मगर ऐसे ाचा ये कैसे हो गया मेरा मतलब मैं तो बिलकुल ठीक था और सब कुछ अचे से चल रहा था फिर ये सब अचानक कैसे ?
डॉ : ये तो मुझे भी समझ नहीं आ रही क इसकी वजह क्या है. पर जो रिपोर्ट है उसके मुताबिक आपके पेनिस में ेररक्शन नहीं आएगी . आपकी बॉडी में स्पर्म प्रोडक्शन बंद हो गयी है.
मोंटी क तो पाऊँ टेल से ज़मीन hi निकल गयी थी. उसे समझ नहीं आये था वो क्या करे . उसके कानो ने जो सुना उस पर उसे यकीन नहीं हो रहा था.
मोंटी : डॉ कहीं टेस्ट में तो कोई गड़बड़ नहीं हुई ? आप एक बार फिर से टेस्ट ले लीजिये .
डॉ : कोई गड़बड़ नहीं हुई है मर मोंटी .
मोंटी : तो इसका इलाज कीजिये न डॉ , पैसे परवाह मत कीजिये बस मेरी ये प्रॉब्लम ठीक कर दीजिये.
डॉ : ी ऍम सॉरी मोंटी पर हमारे यहाँ इसका इलाज नहीं है. बल्कि इंडिया में इसका कहीं भी इलाज इतना अचे से नहीं हो सकेगा. हाँ अगर तुम जा सकते हो तो ुक या उसे में इसका ाचा इलाज हो सकता है या फिर जर्मनी में. पर 100 % तो वो भी नहीं कर पाएंगे हाँ तुम शादी करने जितना हो सकते हो.
मोंटी : क्या मतलब.?
डॉ : मतलब क 40-50 % तक hi ठीक हो सकता है वो भी लम्बे इलाज क बाद . जिसके लिए तुम्हे वही रहना पड़ेगा और शायद सर्जरी भी करनी पड़े . पर यहाँ तो इतना भी पॉसिबल नहीं है . फिर भी तुम किसी और से डिसकस करना चाहो तो कर सकते हो. दिल्ली और मुंबई में काफी बड़े बड़े हॉस्पिटल हैं जहाँ लेटेस्ट मचिनेस हैं इलाज है.
डॉ की बातें सुन कर मोंटी काफी निराश हो गया और सर झुकाये वहां से उठ कर वापिस चला आया. कहाँ कल तक वो राधा और नेहा को अपने नीचे लेन का प्लान बना दिया रहा था और आज उसके साथ इतना बुरा हो गया जो उसने कभी सोचा भी नहीं था. मोंटी क बाप क पास पैसों की कोई कमी नहीं थी . पर वो अपने बाप से क्या कहता क उसके साथ क्या हुआ है? मोंटी को कुछ भी सूझ नहीं रहा था क आखिर वो क्या करे. किसे बताये और कैसे बताये . पर इस बात का कोई हल तो ढूंढना hi था. वो कहते हैं न क पडोसी क घर में आग बाद में लगा लेना पहले अपने घर को तो आग से बचा लो. मोंटी क दिमाग से सब बातें निकल चुकी थी . अब बस कोई बात दिमाग में थी तो उसकी डूबती हुई मर्दानगी. मोंटी की हालत ऐसी थी क जैसे उसका सब कुछ जैसे किसी ने लूट लिया हो. मोंटी अपने फार्म हाउस चला गया और अपना फ़ोन बंद कर क खुद को अलग थलग कर लिया पर ये कोई हल नहीं था. फिर उसने इंटरनेट पर अपनी बीमारी क बेस्ट डॉ देखने शुरू कर दिए . और वहां भी रिजल्ट्स वही बता रहे थे जो डॉ ने उसे बताया था . आखिर कर मोंटी ने मन hi मन फैसला कर लिया क वो पहले वो अपना इलाज करवाएगा बाकि सब बाद में. प्रॉब्लम अब ये थी क अपने बाप से वो क्या कहे. इस तरह पड़े बीच में छोड़ कर विदेश जाना वो भी किस ज़रूरी काम क लिए . मगर अब मोंटी क लिए सब से ज़रूरी था अपनी मर्दानगी को बचाना.
इधर मैं और मंजू म सोये पड़े थे क मेरा फ़ोन बजने से हमारी नींद टूटी. फ़ोन मोहित का था .
अमित : हाँ मोहित
मोहित : सो रहा था क्या ? कितनी देर से फ़ोन कर रहा हूँ ? जल्दी से उठ जा मैं तुझे लेने आ रहा हूँ तेरे बाबा आये हैं घर .
अमित : बाबा आये हैं ? ऐसे अचानक ? चल अजा तू मैं तैयार hi हूँ.
मंजू म : क्या हुआ ?
अमित : बाबा आये हैं मुझे जाना होगा. पता hi नहीं चला कब आँख लग गयी
मंजू म : मुझे तो बहुत अछि नींद आयी . तुम्हारी बाँहों में जो सुकून मिलता है वो कहीं भी नहीं मिल सकता . काश क रोज़ ऐसी hi नींद मिले मुझे.
मैंने मंजू म क होंठो पर किश किया तो वो भी प्रतिउत्तर देने लगी. मैंने टाइम देखा तो 5 बजने वाले थे जल्दी से मैं हाथ मुँह धो कर तैयार हो गया.
थोड़ी देर में मोहित बहार आ गया और कार का हॉर्न बजते hi मैं मंजू म से एक बार फिर गले मिला और मोहित क साथ वापिस चल पड़ा. घर ए तो बाबा आंटी क साथ हॉल में hi बैठे हुए थे. मैंने जैसे hi उनके पाऊँ छुए तो उन्होंने उठ कर मुझे गले से लगा लिया.
विजय मां : कैसा है मेरा बीटा ? तूने मेरा सीना गर्व से चौड़ा कर दिया . शाबाश मेरे बचे .
अमित : बाबा आपको किसने बताया ?
विजय मां : तेरी बड़ी मौसी ने बताया है .
अमित : पर मैंने मन किया था सबको . माँ टेंशन ले लेती है
विजय मां : चिंता मत कर उसे नहीं पता बस मुझे पता है घर में. और तू खुद hi बता देना जब घर आएगा. तेरी चोट कैसी है ? कहीं ज्यादा तो नहीं लगी?
अमित : नहीं बाबा मैं ठीक हूँ . बस कमज़ोरी आ गयी थी खून बहने से .
आंटी : आप इसकी चिंता मत करने भाई साहब ये हमारा भी तो बीटा है. हम इसका अचे से ख्याल रख रहे हैं .
विजय मां : तुम लोगों क पास है इसी लिए तो मैं चिंता नहीं करता. राघव इसे अपना बीटा hi तो मंटा है .
अमित : बाबा घर पर क्या बता कर आये हैं?
विजय मां : क्या बताना है ? तेरी माँ को पता है मैं दिव्या क पास हो कर hi अत हूँ जब भी शहर आऊं . अभी भी मैं उसके पास से hi आ रहा हूँ. दोपहर का खाना खाये बगैर आने नहीं देती वो.
बाबा ज्यादा देर नहीं रुके क्यूंकि उन्हें वापिस भी जाना था तो वो चले गए .
शीना जो कॉलेज नहीं जा रही थी और बस अपने कमरे में hi बैठी रहती थी , शिवानी एक अछि दोस्त की तरह उसका साथ निभा रही थी इस घडी में उसके साथ रह कर. शिवानी की बातों से शीना क मन में अमित क लिए और भी जगह बन गयी थी . आज अमित कॉलेज गया था ये बात शिवानी को पता चली तो उसने शीना को भी बताया
शिवानी : शीना कल से हम भी कॉलेज चलते हैं , कितने दिन तक घर बैठी रहेगी ? देख अमित ने भी कॉलेज आना शुरू कर दिया है . तू उससे कॉलेज में तो मिल hi सकती है न. उससे माफ़ी भी मांग लेना , मैं तुम्हारी मदद करुँगी.
शीना : क्या वो सच में कॉलेज गया था? वो इतनी जल्दी ठीक हो गया ? अभी तो उसके ज़ख़्म ठीक भी नहीं हुए होंगे . मैं उससे माफ़ी कैसे मांगूंगी वो तो मेरी शकल भी देखना नहीं चाहता .
शिवानी : उस दिन वो गुस्से में था इस लिए ऐसा कह गया वो. देखा नहीं मुझे भी क्या नहीं कहा उसने. पर वो दिल का ाचा है ज्यादा देर गुस्सा नहीं रहता वो. और फिर मैं हूँ न? मैं बात करुँगी उससे .
शीना : वो माफ़ कर तो देगा न?
शिवानी : हाँ कर देगा , वैसे भी तुमने कहाँ कुछ किया है ? ये सब तो मोंटी hi कर रहा था न और मोंटी का गुस्सा वो तुम पर निकले ये कैसे हो सकता है ?
शीना : क्या सच में मोंटी ऐसा है जैसा तुमने और अमित ने कहा ? मेरा भाई ऐसा कैसे हो सकता है ?
शिवानी : मोंटी ऐसा hi है शीना , साडी सचाई तुम्हारे आगे आ hi जाएगी.
शीना : मैं मोंटी से भी कहूँगी वो अमित से माफ़ी मांगे. उसका एहसान तो मैं कभी चूका hi नहीं सकती . मुझे लगता था क पैसा hi सब कुछ है . पापा का नाम सुनते hi हर कोई हाथ जोड़ देता था तो लगता था क हम कोई राजा महाराजा हैं. पर उस दिन जब मेरी इज़्ज़त उतरने वाली थी तो एहसास हुआ क हम असल में कुछ नहीं हैं . इंसान क हालत कब बदल जाएँ कोई कुछ नहीं जनता . मैं उस दिन बिना कपड़ों क नंगी बिस्टेर पर पड़ी थी जहाँ वो सब गुंडे मुझे नोचने वाले थे मगर अमित ने एक बार भी मुझे नहीं देखा. मैंने आज तक एक भी लड़का ऐसा नहीं देखा जो लड़कियों बुरी नज़र से न देखता हो और इसने तो मुझे नंगी होते हुए भी नहीं देखा. कहा लोग कपड़ों क ऊपर से hi मेरी खूबसूरती को खा जाने वाली नज़रों से ताड़ते रहते हैं और उसने जैसे मुझे इस काबिल भी नहीं समझा क एक बार देख ले.
शिवानी : वो सब से अलग है शीना . क्या मैंने कोशिश नहीं की थी उसे सडके करने की ? मगर वो तब भी नहीं पिघला था.
शीना : वो ऐसा क्यों है ? देखने में इतना हैंडसम और ताकत भी कितनी है. हिम्मत वाला भी है जो अकेला सब से भीड़ गया . फिर वो लड़कियों से दूर क्यों रहता है ? उसे देख कर तो कोई भी लड़की उसे दिल दे बैठेगी .
शीना मन में यद् करने लगती है अमित का वो बलशाली बदन जो शीना ने उस दिन देखा था जब अमित ने अपनी T-shirt निकल कर राधा को पहना दी थी. कितना छोड़ा सीना था और शरीर जैसे मांस से गुंडा हुआ . मजबूत कंधे और बाज़ुओं में बड़ी बड़ी मचियाँ साबुत थे क जिस्म में कितनी ताकत होगी और हठी जैसे भरी भरकम इंसान को उठा कर पटकना भी जैसे अनहोनी सी बात थी.
शिवानी : कहूं तू भी तो उस पर फ्लैट नहीं हो गयी ?
शीना जो अपने ख्यालों में hi अमित को देख रही थी शिवानी की उस बात पर हड़बड़ा गयी.
शीना : न न नहीं तो , मैं तो ा ऐसे hi कह रही थी.
शिवानी : वो सच में एक आइडियल है और जैसे उसके विचार हैं , क्या कहूं यार . काश क वो मुझे पहले मिला होता . बहुत लकी होगी वो लड़की वो जिसे चाहेगा.
शीना शिवानी की इस बात पर फिर से अमित क बारे में hi सोचने लगी . शिवानी की हर बात जो अमित से जुडी होती थी वो शीना को अमित क प्रति आसक्त करती जा रही थी .
इधर मैं घर पर hi रहा क्यूंकि अभी मैं स्टेडियम जाने और प्रैक्टिस करने क काबिल नहीं था तो घर पर hi रेस्ट करता रहा. फ़ोन पर सब से बात कर क मैंने सबका हलचल जाना . दीपिका ममी और माँ मुझे बहुत मिस कर रही थी वहीँ करुणा दीदी और नैना दीदी मुझसे जल्द मिलना चाहती थी . जब से मैं हॉस्पिटल से घर आया था उनसे मुलाकात नहीं हुई थी . रीता मौसी तो मुझे ु के घर आने का कह रही थी . रत का खाना खाने क बाद मैं रूम में आराम कर रहा था तो राधा का फ़ोन आ गया और कुछ देर उससे बात करने क बाद मैं अभी सोने की तयारी कर रहा था क रीमा का भी फ़ोन आ गया .
रीमा : मैंने डिस्टर्ब तो नहीं किया ?
अमित : बिलकुल नहीं , वैसे भी मैं जल्दी नहीं सोता. तुम क्या कर रही थी ?
रीमा : तुम्हे यद् कर रही थी
अमित : मुझे ? वो क्यों भला ?
रीमा : यद् तो तुम्हे हर पल हर रोज़ hi करती हूँ पर आज तुमने जैसे मुझे गले लगाया वो पल अभी भी मैं महसूस कर रही हूँ. ये किसी सपने की तरह लग रहा है मुझे. क्या सच में ऐसा हुआ था न ?
अमित : मैंने कब गले लगाया तुम्हे ?
रीमा : क्या ?? इसका मतलब मैं सपना देख रही थी ? सपना hi होगा मैं तो लाइब्रेरी में थी .
अमित : मुझे क्या पता
रीमा : लगता है मुझे अब खुली आँखों से भूल तुम्हारे सपने आने लगे हैं
अमित : इसका मतलब तुम पहले भी मेरे सपने देखती हो?
रीमा : हम्म , तुमसे हकीकत में बात तो कर नहीं पति थी तो अक्सर सपने में hi बात होती थी
रीमा की ये बात सुन कर मुझे एहसास हुआ क वो मुझे किस कदर चाहती है और मैंने उसे बिना वजह hi इतनी बड़ी सजा दे दी
अमित : ी ऍम सॉरी रीमा मैंने तुम्हे बहुत दुःख दिया न
रीमा : बार बार सॉरी क्यों कहते हो? अब तुम मुझे मिल गए हो न तो मैं सब भूल गयी हूँ अगर न मिलते तो शायद मैं खुद को hi भूल जाती
अमित : ऐसा मत कहो रीमा , ऐसा मत कहो . मैं अब कभी तुम्हे दुःख नहीं दूंगा. मैं वो पल वापिस तो नहीं ला सकता हो तूने दुःख में गुज़ारे हैं मगर अब तुम्हे और दुखी नहीं होने दूंगा.
रीमा : मुझे बस तुम और तुम्हारा प्यार चाहिए. एक छोटा सा कोना अपने दिल में मुझे दे देना और कुछ मैं नहीं मांगती. तुम्हारे लिए मैं उम्र भर इंतज़ार करने को तैयार हूँ .
अमित : ऐसा नहीं होगा , पर मुझे लगता है मैं तुम्हारे प्यार क लायक नहीं हूँ.
रीमा : ऐसा क्यों कह रहे हो?
अमित : मैंने तुम्हे बताया था न क मैं पहले भी किसी से प्यार कर चूका हूँ और इसके इलावा भी मेरी ज़िन्दगी में कोई है.
रीमा : मैं जानती हूँ तुम कभी किसी को धोखा नहीं दे सकते इस लिए मुझे ये सब बता रहे हो. मुझे कोई परवाह नहीं क तुम्हारी ज़िन्दगी में कौन है , मुझे बस अपने लिए प्यार चाहिए. और मैं जानती हूँ तुम कभी गलत नहीं करोगे , जो भी तुम्हारी लाइफ में है वो ज़रूर कोई खास hi होगा जिसे तुम्हारी ज़रूरत होगी . तुम कभी किसी क साथ गलत रिश्ता नहीं बना सकते मैं जानती हूँ.
अमित : क्या इतना भरोसा है मुझ पर ?
रीमा : अपने से भी ज्यादा.
अमित : अगर कभी कोई ऐसी बात तुम्हे पता चले जो तुम्हे बुरी लगे तो ?
रीमा : तो क्या ? चाहे कुछ भी हो मैं तुम्हे नहीं छोडूंगी. अब बताओ क्या सच में मैंने सपना देखा था या तुमने सच में मुझे गले से लगाया था .
अमित : वो सब सच था और अगर फिर भी यकीन न आये तो कल फिर से गले लगा लूँ क्या सबके सामने?
रीमा : ऐसा मत करना , क्या कहेंगे सब . मीनल और राधा तो मेरी क्लास में hi हैं. और कल्पना भी तो काम नहीं. वैसे क्या वो लड़की कल्पना है ?
अमित : नहीं कल्पना सिर्फ मेरी दोस्त है. वो बहुत अछि है और सच कहूं तो उसके होते मुझे परवाह नहीं राधा और नेहा दीदी की. उन दोनों को उसी क भरोसे तो छोड़ा हुआ है अकेले.
रीमा : फिर तो वो बहुत खास है. वैसे मैं कुछ कहूं?
अमित : कहो
रीमा : मोंटी और शीना .......
अमित : मैं उनके बारे में कुछ नहीं सुन्ना चाहता कोई और बात करो
रीमा : पर मैं ....
अमित : प्लीज रीमा मैं उनके बारे में कुछ सुन्ना नहीं चाहता
रीमा : ाचा ठीक है. एक बात कहूं?
अमित : उन दोनों क इलावा कोई और बात है तो कहो
रीमा : धीमी आवाज़ में ) ी लव यू
अमित : ??????
रीमा : चुप क्यों हो ? बोलो
अमित : क्या बोलूं ?
रीमा : कुछ भी
अमित : क्या कुछ भी ?
रीमा : जो मैंने कहा उस का जवाब hi देदो
अमित : तुम्हे अभी भी जवाब चाहिए ?
रीमा : हम्म्म
अमित : अल्फ़ाज़ों से बयान क्या करें हम चाहत अपनी ,, कभी दिल में उतर कर धड़कनों से पूछ क वो बेकरार कितनी हैं.
रीमा : भरी गले से ) ी लव यू , ी लव यू , ी लव यू सूऊऊ मच. प्लीज मुझे कभी खुद से अलग मत करना कभी भी नहीं.
अमित : कभी भी नहीं . और मुझे तुम मुस्कुराती हुई अछि लगती हो ऐसे रोना धोना ाचा नहीं लगता मुझे.
रीमा : मैं कहाँ रो रही हूँ . ये तो ख़ुशी से ऐसा हो रहा है
अमित : तुम्हे जवाब मिल गया न ? अब खुश हो ?
रीमा : बहुत ज्यादा, काश इस वक़्त तुम मेरे सामने होते तो
अमित : तो क्या ?
रीमा : कुछ नहीं
अमित : बताओ न
रीमा : तुम्हारे गले लग जाती
अमित : और फिर ?
रीमा : कुछ नहीं बस इतना hi .
अमित : लगता है तुम्हे बहुत कुछ सीखना पड़ेगा.
रीमा : मुझे कुछ नहीं सीखना
अमित : ऐसे कैसे नहीं सीखना , मेरी गफ हो तो तुम्हे सब आना चाहिए न.
रीमा : ाचा ? ये ज़रूरी है क्या ?
अमित : और नहीं तो क्या , वर्ण सब कहेंगे क मैंने तुम्हे कुछ सिखाया नहीं
रीमा : तो तुम सबको बताने वाले हो? नेहा दीदी और राधा को भी
अमित : पागल हो क्या उनको पता चला तो सबको पता चल जायेगा. मैं तो मोहित को भी नहीं बताऊंगा क्यूंकि वो मीनल को बता देगा और फिर बात सब को पता चल जाएगी.
रीमा : मैं भी नहीं चाहती क किसी को पता चले वर्ण सब बातें करेंगे.
अमित : ठीक है अब हमें सो जाना चाहिए कल कॉलेज मिलते हैं .
रीमा : मुझे तो अब नींद hi नहीं आएगी
अमित : वो क्यों भला?
रीमा : तुमने अभी अभी जो कहा है वो मुझे सपना सा hi तो लग रहा है कहीं मैं सो कर उठूं और ये सपना टूट जाये तो?
अमित : ऐसा नहीं होगा. तुम जितनी बार कहोगी उतनी बार तुम्हे ी लव यू कहूंगा . कल अगर मुझे मिलना है तो अब सोना पड़ेगा और क्या पता सपना में फिर से मुलाकात हो जाये.
रीमा : ठीक है जैसा तुम कहो . ी लव यू गुड नाईट
अमित : ी लव यू 2 गुड नाईट एंड स्वीट ड्रीम्स
उसके बाद रीमा से मेरी बात ख़त्म हुई . रीमा से बात कर क मुझे ाचा लग रहा था. मुझे उससे बात करते हुए उसका निर्मल प्रेम महसूस हो रहा था. उसे मुझ पर बहुत विश्वास है और पता नहीं मैं उसके काबिल हूँ क नहीं मगर उसने खुद hi कहा क उसे फरक नहीं पड़ता क मेरा किसी और क साथ भी कोई रिश्ता है .
खैर उसके बाद मैं सो गया अगले दिन भी सुबह का नाश्ता करने क बाद हम दोनों एक साथ कॉलेज क लिए चल दिए.
फ्री लेक्चर में हम सब कैंटीन में बैठे थे. आज रीमा कल से कहीं अछि लग रही थी . हम सब बातों में लगे थे क वहां शिवानी और शीना दोनों आ गए . शीना को देख कर मुझे फिर से गुस्सा आ गया . मैं उठ कर पहले hi उनके पास पहुँच गया. बाकि साब मुझे इस तरह उठ कर जाता देखने लगे मगर अगले hi पल जब उनकी नज़र शीना पर पड़ी तो वो समझ गए.
शिवानी : अमित कैसे हो ? मुझे पता है तुम्हे ाचा नहीं लग रहा होगा पर क्या शीना को एक मौका नहीं दे सकते तुम ? वो सच में शर्मिंदा है. एक बार उसकी बात सुन लो उसे माफ़ कार्डो .
अमित : मैंने तुमसे पहले भी कहा था क मैं इसकी शकल भी देखना नहीं चाहता . इसे कहो चली जाये यहाँ से.
शीना : प्लीज ऐसा मत कहो . मैं बहुत शर्मिंदा हूँ एक बार मुझे माफ़ कर दो प्लीज. गलतियां सब से होती हैं , मैंने भी गलतियां की हैं पर क्या अब मुझे अपनी भूल सुधरने का मौका भी नहीं डोज तुम? प्लीज एक बार माफ़ कार्डो , तुम कहो तो तुम्हारे पाऊँ पद जाती हूँ .
अमित : बंद करो ये नाटक , तुम पैसे वाले लोग बस पैसे को hi सब कुछ मानते हो. बहुत घमंड है न तुम्हे पैसों का इसी लिए किसी को कुछ समझती नहीं हो. क्या कहती हो तुम मुझे , हाँ ‘देहाती ‘ अब इस देहाती से माफ़ी मांगने में इज़्ज़त काम नहीं हो रही तुम्हारी ? जाओ जा कर किसी और को बेवक़ूफ़ बनाओ. एक बार पहले भी मुझे तुम लोग बेवक़ूफ़ बना चुके हो अब मैं तुम्हारे झांसे में नहीं आने वाला
शीना हाथ जोड़ती हुई घुटनो पर बैठ गयी . सब लोग शीना को hi देखने लगे और वो रो रो कर मुझे माफ़ी मांगने लगी.
शीना : मैं कसम कहती हूँ मैं अब बदल गयी हूँ , मैं पहले जैसी नहीं रही. प्लीज माफ़ कार्डो मुझे . तुम जो कहोगे मैं करुँगी एक बार मुझे माफ़ कार्डो.
शीना को देख कर सब हैरान थे मुझे भी लग रहा था क ये कुछ ज्यादा hi हो रहा है . वो शीना जो किसी से सीधे मुँह बात नहीं करती थी आज सबके सामने घुटनो पर बैठी मुझसे माफ़ी मांग रही थी . मैं कुछ कहता उससे पहले राधा जाने कब हमारे पास आ गयी .
राधा : दीदी आप उठिये नीचे से , अमित ने आपको माफ़ किया. प्लीज आप चुप हो जाइये.
राधा ने जब शीना को ऐसा कहा तो उसके आंसू थम गए ुर वो कभी राधा को कभी मुझे देखने लगी . मैं भी राधा की इस बात पर हैरत से उसे देख रहा था . राधा ने वही कहा था जो मैं चाहता था पर मैं कह नहीं पता शायद . मेरे दिल की बात राधा ने समझ ली थी.
अमित : ये तुम क्या कह रही हो राधा ? तुम्हे पता भी है तुम्हारे साथ जो कुछ भी हुआ उसमे इसका hi हाथ था .
राधा : मुझे बस इतना पता है क ये अपने किये पर शर्मिंदा हैं और ये तुम भी जानते हो. गलतियां सब से होती हैं पर सुधरने का मौका तो सबको मिलना चाहिए न. वैसे भी उस दिन उनके साथ भी तो वही सब होने वाला था न. शायद इन्हे समझ आ गयी है क ये क्या कर रही थी. अब तुम भी इन्हे एक बार अपने मुँह से कह कर माफ़ी दे दो.
अमित : मगर राधा
नेहा दीदी : राधा ठीक कह रही है , माफ़ कार्डो इसे. मेरे अछि भाई हो न तुम . माफ़ कार्डो इसे.
अमित : ठीक है पर इसे केहदो क वो उन सब से माफ़ी मांगे जिनके साथ इसने और इसके भाई ने बुरा किया है तब जाकर मैं इसे माफ़ करूँगा .
शीना : मैं सब से माफ़ी मांगूंगी. जिससे कहोगे मैं माफ़ी मांगूंगी . प्लीज एक बार अपने मुँह से कह दी तुमने मुझे माफ़ किया .
अमित : राधा ने अभी कहा न क मैंने माफ़ किया तो किया . पर तुम्हे सब से माफ़ी मांगनी होगी . जिस किसी क साथ भी तुमने गलत किया है.
शीना : थैंक यू वैरी मच , मैं अब कभी कोई गलत काम नहीं करुँगी. तुम सच में बहुत अचे हो . थैंक यू वैरी मच . तुमने उस दिन मेरे लिए जो किया मैं उसका एहसान कभी नहीं चूका सकती .
अमित : तुम्हारी जगह कोई भी होता तो मैं ऐसा hi करता. लड़कियों की इज़्ज़त की हिफाज़त करना मर्द की ज़िम्मेदारी है. अफ़सोस क कुछ लोग औरतों लड़कियों की इज़्ज़त से खेलना hi मर्दानगी समझते हैं जैसे क तुम्हारा भाई
शीना : मैं उसे भी समझाउंगी और तुम से माफ़ी मँगवाउंगी .
अमित : खुद को सुधर लो इतना hi बहुत है. रही बात मोंटी की तो वो कभी नहीं सुधरने वाला. जो अपनी बहिन का इस्तेमाल कर सकता है किसी क बहिन को उठाने क लिए वो कितना घटिया होगा तुम अंदाज़ा भी नहीं लगा सकती. ज़रा एक बार शालू से मिल लेना वो बेहतर बता देगी तुम्हे तुम्हारे घटिया भाई क बारे में.
इतना कह कर मैं नेहा दीदी और राधा को लेकर वापिस अपनी जगह पर आ गया. मैंने देखा क रीमा की आँखों में आंसू थे . शायद वो अपनी बहिन क साथ मेरे ऐसे बिहेवियर से दुखी थी.
अमित : ी ऍम सॉरी रीमा , पर शीना ने जो किया है उसकी वजह से मैं उस पर गुस्सा था .
रीमा : ये तो होना hi था बूत ी ऍम हैप्पी क वो अब बदल रही हैं.
अमित : वैसे मुझे लगता है तुम्हे होनी बहिन क पास जाना चाहिए इस वक़्त. वो काफी दुखी लग रही है. उसे सम्भालो जा कर.
रीमा : तुम बहुत अचे हो सबका सोचते हो. मैं जाती हूँ bye .
रीमा उठ कर बहार चली गयी जिधर शीना और शिवानी गयी थी. रीमा क जाते hi सब फिर से मुझे देखने लगे .
अमित : अब क्या हुआ?
कल्पना : रियली यू अरे तू गुड. शीना को तुमने सच में माफ़ भी कर दिया और अब उसकी परवाह भी कर रहे हो .
मीनल : सही कहा यार , मुझे तो लगा था क इतनी आसानी से नहीं मानोगे तुम.
राधा : स्माइल ) ऐसा hi है अमित , किसी से ज्यादा देर नाराज़ नहीं रह सकता ये . जब वो नीचे बैठी रो रही थी तभी इसने उसे माफ़ कर दिया था बाद ऊपर ऊपर से गुस्सा दिखा रहा था.
अमित : तुम्हे कैसे पता ?
राधा : बस महसूस किया मैंने , किसी लड़की की आँखों में आंसू नहीं दे सकते न तुम , स्पेशलय जब वो तुम्हारी वजह से हो
नेहा दीदी : मेरा भाई लाखों में एक है. काश हर कोई तुम्हारे जैसा होता तो दुनिया कितनी अछि होती .
कल्पना : ये एक hi ओने एंड ओनली पीेछे है वर्ण मैंने तो आज तक नहीं देखा ऐसा अजूबा हे हे हे