अपडेट 205
हमने सारा सामान सेट कर दिया था, काफी टाइम हो गया था, सबको भूख भी लगी हुई थी, तो हमने बहार से खाना मंगवाने का सोचा, पर मुझे पता था की घर पर भी खाना बना होगा, पर बिना मैडम यहाँ थी तो फ़ोन भी नहीं कर सकते थे, मुझे महसूस हुआ की मुझे मोबाइल ले hi लेना चाहिए.
जूही : क्या सोच रहा है, जा कर नास्ता ले आ.
शिव : ये खाने का वक़्त भी हो रहा है, और सिर्फ नास्ता करना सही नहीं होगा, वैसे भी मैडम को बहार का खाना नहीं देना है, में सोच रहा था की घर hi चलते है, वैसे भी हमारा खाना तो बना hi होगा, आप सब के लिए जा कर थोड़ा और पका देंगे.
बिना : लता को परेशान करने की जरुरत नहीं है, में कुछ बना देती हु.
शिव : नहीं, आप भी थक गयी होंगी, हम घर hi चलते है. (फिर ये तय हुआ की सब घर hi चलते है, मेने सबको जाने के लिए कहा, बिना मैडम का भी स्कूटर था, तो फिर बिना मैडम और जूही, उनके स्कूटर पर बेथ गए, वैस्वी और संयम उनके स्कूटर पर, महेश और हर्ष ने जूही का स्कूटर ले लिया और में रंजन और विणा बाइक पर बेथ gaye)Aap लोग चलिए हम बाजार होते हुए आते है.
जूही : बाजार क्यों?
शिव : अभी मुझे ख्याल आया की लता से बात कर लू पर वह कोई फ़ोन नहीं है, मैडम थी तब तक प्रॉब्लम नहीं थी, तो में सोच रहा हु की एक मोबाइल ले लेता हु.
जूही : अभी के अभी क्या जरुरत है, कल ले लेना.
शिव : कल कल कर के में भूल जाता हु. आप लोग चलो में फटा फैट ले कर आता हु, वैसे भी महंगा नहीं लेना है. (फिर वो लोग वह से निकल गए, मेने एक मोबाइल लिया और सिम डलवाई और घर आ गया, जूही, संयम और वैस्वी काम में मदद कर रही थी, जाते hi रंजन और विणा भी जुट गयी, मेने मोबाइल कमरे में रक्खा और वह आ गया, मेने मदद करनी चाही तो सबने मन कर दिया. अभी ये सब चल रहा था की मेरे मोबाइल पर कॉल आया, मेने देखा तो कृपालिजी का फ़ोन था, मेरी समाज में नहीं आया की ये फ़ोन क्यों कर रही है? मेने फ़ोन उठालिया) Hello.
कृपाली : Hello. (वो बोल कर खामोस हो गयी)
शिव : Hello,..
कृपाली : (हिचकिचाते hue)Me कृपाली बोल रही हु.
शिव : आपका नंबर है मेरे पास, कहिये?
कृपाली : वो तुमसे कुछ बात करनी थी. (उनकी आवाज में हिचकिचाहट साफ़ महसूस हो रही थी)
शिव : है कहिये न.
कृपाली : (उसको समाज नहीं आ रहा था की क्या कहे, फिर भी वो हिचकिचाते हुए boli)Me ये कह रही थी ki...wo...
शिव : क्या बात है, कुछ परेशानी है kya?(Unki आवाज से मुझे थोड़ी चिंता हुई)
कृपाली : नहीं पर wo....(Thoda रुक kar)Kya स्वर्णादिदी का फ़ोन आया था?
शिव : (मेरे दिमाग की बत्ती जाली, मेने नहीं सोचा था की वो बिज़नेस के रिलेटेड फ़ोन karegi)Ha आया था. (कृपाली चुप हो गयी, वैसे भी अगर फ़ोन आया था और आगे कोई बात नहीं बढ़ी मतलब साफ़ था की शिव और उनके पार्टनर को ये डील मंजूर नहीं थी, उसको शर्मिंदगी महसूस होने लगी)
कृपाली : है, ठीक है, बस यही पूछने के लिए फ़ोन किया था, में रखती हु.
शिव : (तुरंत hi)Rukiye. (कृपाली अपने कान से फ़ोन हटा hi रही थी की वो रुक गयी) क्या आपने डील के लिए फ़ोन किया है? (कृपाली कुछ नहीं boli)Helloooo.
कृपाली : (वो क्या कहे कुछ समाज hi नहीं आ रहा था)
शिव : हलुओ.
कृपाली : (मायूस और धीमी वजाज me)Sun रही हु.
शिव : क्या हुआ, कोई समस्या है.
कृपाली : (उसको लगा की अब बात करनी hi पड़ेगी तो वो boli)Sorry, ये तुमलोगो के बुसिनेस्स का मामला है, मुझे नहीं बोलना chahiye.(Wo थोड़ी देर ruki)Ek बात पुछु, अगर बुरा न मनो तो?
शिव : है पूछिए?
कृपाली : अगर डील में कोई दिक्कत है तो मुझे बता सकते हो, में बात करुँगी उनसे. (वो बहोत सेहमी सेहमी बात कर रही थी, हम पहले hi तय कर चुके थे तो मेने उन्हें खुल कर बता दिया)
शिव : हमारी और से डील में कोई दिक्कत नहीं है, इनफैक्ट हम उस को फाइनल कर चुके है, बस थोड़ा बिजी था तो में बता नहीं पाया, वैसे भी आपका नाम आया तो फिर बात घर की हुई, और घर में नफा नुकसान नहीं देखा जाता, हमने डील करने का सोच hi लिया है. (कृपाली ने जब ये सुना की उसका नाम आते hi डील फाइनल कर दी थी तो उसको बहोत अच्छा लगा)
कृपाली : सच में? (अब उसकी आवाज में खुसी थी)
शिव : इसमें कहने की क्या बात है, वो आपके हस्बैंड है, तो फिर ज्यादा सोचना क्या.
करअपलि : (उसको बहोत अच्छा लग रहा था, की उसकी वजह से ये डील हो रही है, फिर भी उसने कन्फर्म kiya)Agar वो मेरे हस्बैंड न होते तो?
शिव : तो शायद हम सोचते, दूसरे सप्लायर को भी कांटेक्ट करते.
करुअपाली : (ये सुन कर तो जैसे उसकी खुसी का ठिकाना नहीं tha)Kya तुम सच में मेरी hi वजह से ये डील कर रहे हो?
शिव : बिलकुल, आप स्वर्णजी की बहन है, आपको भी में जनता हु, तो फिर बाहरवाले को क्यों फायदा करवाए.
कृपाली : में उनको अभी बताती हु.
शिव : आप मत बताना.
कृपाली : क्यों?
शिव : अगर उन्होंने पूछा की आपकी वजह से हमने क्यों डील की तो क्या जवाब देंगी आप?
कृपाली : (सोचते hue)Baat तो सही है तुम्हारी, पर वो बहोत परेशान है, तो में चाहती हु की उनकी परेशानी काम हो जाये.
शिव : ठीक है, फिर जैसी आपकी मर्जी. वैसे में ऑफिशियली कल उनसे बात कर लूंगा.
कृपाली : ठीक है, में अभी अपने तरीके से बात कर लेती हु (फिर थोड़ा रुक kar)Thank यू.
शिव : अरे नहीं, इसमें थैंक यू की क्या बात है.
कृपाली : नहीं शिव, थैंक यू तो बनता है, तुमने मेरी इज्जत रक्खी है.
शिव : मेने कहा न की घर की बात है.
कृपाली : थैंक यू, bye.
शिव : Bye.
कृपाली बहोत खुस हो गयी, वो सीधे अपने पति के पास गयी, वो लैपटॉप में कुछ काम कर रहा था.
कृपाली : सुनो.
वशिष्ठ : क्या है? (थोड़ा चिढ़ते हुए)
कृपाली : (वो थोड़ा हिचकिचाई, पर फिर kaha)Meri दीदी से बात हुई, उन्होंने कहा की उनकी शिव से बात हो गयी है, वो डील के लिए राज़ी है, वो आपको कल ऑफिस के टाइम फ़ोन करेंगे.
वशिष्ठ : सच में? (उसके चेहरे पर खुसी थी, पर फिर मायूसी आ गयी)
कृपाली : क्या हुआ, इतनी खुसी की बात बताई फिर मायूस क्यों हो गए?
वशिष्ठ : क्यों की फिर मुझे तुम्हारे घरवालों का एहसान लेना पड़ा.
कृपाली : (पास में बैठते hue)Aap ऐसा क्यों सोचते है, और अगर आपको लगता है की उनकी वजह से ये हुआ है तो क्या आप ने अच्छी डील नहीं दी थी, आप भी एक बिजनेसमैन है, आप hi सोचिये, अगर आपको दो जगह से डील मील रही है और एक आपकी जान पहचान का है तो आप किस से डील करेंगे? (वशिष्ठ को भी बात सही लगी, पर फिर भी उसके मान में थोड़ा रंज तो था hi) आप न ज्यादा मात सोचिये, सब ठीक हो जायेगा. (वैसे भी डील की बात से वो खुस तो था hi)
वशिष्ठ : अच्छा ठीक है.
दूसरी तरफ में, जूही, मेरे दोस्त, सब ने खाना खा लिया, लता, विणा, रंजन और सरिता बाद में कहनेवाले थे. थोड़ी देर बाद सब जाने लगे, तो में भी उनके साथ गया, हमने मैडम का स्कूटर उनके घर रख दिया और फिर में हर्ष और महेश को उनके घर छोड़ आया. जब में घर लौटा तो सब ने खाना खा लिया था. पुरे दिन काम से अब मेरा मान शांत हुआ था, मुझे लता के साथ हुआ हल्का झगड़ा याद आ गया, में सोचने लगा की इसमें लता की क्या गलती है, में hi बेवकूफ था जो रूत गया था, वो एक लड़की है, वो कोई मेरी बीवी नहीं है जो कह दे की वो अपने पति के साथ है, अभी नहीं आएगी, मुझे बुरा लग रहा था, वो कितनी उदास दिख रही थी, मुझे मोबाइल याद आया, में उनके लिए hi लाया था, तो में उन्हें दे कर उन्हें खुस करना चाहता था, तो में बहार आया और उन्हें ढूंढने लगा, मुझे सरिता मिल गयी.
शिव : लता कहा है?
सरिता : वो बच्चोंवाले रूम में है. (में जाने hi लगा था की उन्होंने मुझे roka)Ek बात पुछु?
शिव : है पूछो.
सरिता : तुम दोनों के बिच कुछ हुआ है?
शिव : क्यों क्या हुआ?
सरिता : उसने सुबह से कुछ नहीं खाया.
शिव : क्या? (मुझे जैसे सदमा लगा) क्यों?
सरिता : सुबह तो उसने कहा था की उसका पेट ख़राब है तो वो नहीं खायेगी, तो मेने मान लिया था, पर अभी भी उसने नहीं खाया, और वो सुबह से उदास है, रात को क्या हुआ था. (मेने कोई जवाब नहीं दिया, और में सीधे उस रूम में गया, वह रंजन, विणा और गायत्रीदिदी भी थे, सब बच्चो को सुला रहे थे)
शिव : लता. (मेने आराम से उन्हें आवाज दी, सब मेरी और देखने लगे, लता ने भी मेरी और देखा) यहाँ आना. (वो ऐसे उठी जैसे शरीर में जान hi न हो, आहिस्ता से चलते हुए वो मेरे पास आयी, नज़ारे अभी भी झुकी हुई थी) खाना खाया? (वो कुछ नहीं बोली, बस शिर झुकाये कड़ी थी, सब देख रहे थे पर मुझे कोई परवाह नहीं थी, मेने फिर puchha)Khana खाया? (उन्होंने है में शिर हिलाया) मेरी और देख कर कहो. (उन्होंने शिर नहीं उठाया, मेने उन्हें कंधे से pakada)Meri और देखो. (फिर भी उन्होंने नहीं देखा, मेने उनका शिर पकड़ा और ऊपर उठाया, तो उनकी आंखे बंद थी और कोनो से आंसू निकल रहे थे, मेने तुरंत उन्हें अपने गले से लगा लिया, वो सुबकने लगी)
गायत्री : क्या हुआ? ये रो क्यों रही है? (रंजन और विणा भी सब देख रही थी)
शिव : कुछ नहीं. में बेवकूफ, जरा सी बात पर नाराज हो गया तो इसने सुबह से खाना नहीं खाया है.
गायत्री : क्या? (फिर लता की और देख kar)Mene पूछा भी था की क्यों नहीं खा रही है तो बोली की तबियत ख़राब है. मुझे क्या पता की तुम्हारी वजह से खाना नहीं खा रही है, क्या हुआ था?
शिव : कुछ नहीं. (कहते हुए में उन्हें अपनी आगोश में ले कर ले जाने लगा तो वो नहीं आ रही थी, में सबके सामने उनसे वो सब बाते नहीं करना चाहता था तो मेने उन्हें अपनी गॉड में hi उठा लिया और बहार ले जाने laga)Aap अपना काम करो, में खिला देता हु इसे. (लता अपना शिव मेरी छाती में छुपा रही थी, में उन्हें उठा कर बहार ले आया, बहार सरिता ने भी देखा) खाना निकालो. (मेने उन्हें कहा)
लता : (रट hue)Muje नहीं खाना. (सरिता मुझे देखने लगी)
शिव : तुम खाना निकालो. (उसने फटाफट एक थाली में खाना निकला, मेने लता को निचे उतर दिया, पर वो बेथ नहीं रही थी.
सरिता : पर हुआ क्या है, ये तो बताओ. (उसको समाज नहीं आ रहा था)
शिव : में आपको बाद में समझाऊंगा, अभी आप जाओ, और है ये आज मेरे साथ hi सोनेवाली है.
लता : (रट hue)Muje नहीं सोना है.
शिव

सरिता फिर मुझे देखने lagi)Tum जाओ, में देखता हु. (सरिता चली गयी), तुम चाहती हो की में सबके सामने बात करू. (उसने पानी से भरी आँखों से मुझे dekha)Sorry बाबा, गलती हो गयी, मुझे वैसा बर्ताव नहीं करना चाहिए था. तुम सही थी, में hi बेवकूफ था, वैसे तो खुद को बहोत समझदार समझता हु पर बेवकूफी कर गया, सॉरी. (मेने कान पकड़ते हुए कहा, तो उन्होंने मेरा हाथ कान से हटड़िया और हलके से muskurayi)Dobara गलती नहीं करूँगा. प्लीज खा लो. (मेने बहोत प्यार से रिक्वेस्ट की, वो मुझे देख रही थी, मेने उनके ासु pochhe)Please. (मेने दोबारा रिक्वेस्ट ki)Chaho तो दो थप्पड़ मर लो (कहते हुए मेने उसका एक हाथ पकड़ा और अपने गाल पर मारने लगा तो उसने अपना हाथ पीछे खिंच लिया)
लता : (रोनी आवाज me)Pehle रुलाओ, फिर मनाओ.
शिव : सॉरी कहा न, सच में गलती हो गयी, अब गुस्सा थूको और खाना खा लो, वर्ण.
लता : वर्ण क्या? (मुँह फूलते हुए वो बोली)
शिव : कल से में भी भूख हड़ताल पर. (वो मुस्कुरायी और अपने ासु पोछने लगी, मेने उन्हें निचे बिठाया तो वो बेथ गयी, में भी बेथ गया, मेने खुद एक निवाला बनाया और उनकी और बढ़ाया, उन्होंने मुँह खोला और निवाला खाने लगी, एक एक कर के में निवाले खिलता गया, अब वो शांत हो चुकी थी, ासु भी थम चुके थे, तभी फिर सरितादिद वह आयी, हम दोनों को ऐसे देख कर वो भी मुस्कुरायी और पानी का गिलास ले कर हमारे पास रख दिया, और वही बेथ गयी)
सरिता : तो सुलह हो गयी. (में उन्हें देखते हुए मुस्कुराया और लता अपनी नज़ारे झुकाते हुए मुस्कुरायी). वैसे किस बात पर लाडे थे? मुझे तो अभी भी यकीं नहीं हो रहा की तुम दोनों लाडे.
लता : हम लाडे नहीं थे. (उसने शिर झुका कर कहा)
सरिता : अगर लाडे नहीं थे तो भूखी क्यों थी पूरा दिन. (वो कुछ नहीं बोली, बस शिर झुकाये रही)
शिव : तुम जाओ न यार, ये हम दोनों की बात है.
सरिता : तुम दोनों चाहो की न चाहो, मुझे तो झेलना hi पड़ेगा, में कही नहीं जानेवाली. (उसने मुस्कुराते हुए कहा, फिर वो कड़ी हुई और रूम की और जानेलगी, पर जाते जाते फिर ruki)Agar मेरी जरुरत हो तो बुला लेना. (कहते हुए वो अर्थपूर्ण मुस्कुरायी और चली गयी)
लता ने खाना खा लिया, में थाली उठा कर खड़ा होने लगा तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया.
लता : में रख देती हु.
शिव : में रख देता हु, (कहते हुए में थाली रख aaya.)aur पानी चाहिए? (मेने पूछा तो उन्होंने न में गर्दन हिलायी, में सब रख कर उनके पास आया और उनकी और हाथ बढ़ाया तो उन्होंने भी अपना हाथ मुझे दे दिया, मेने उन्हें उठा दिया और अपने रूम की और ले जाने laga)(Lata शिव को देख रही थी और उसके पीछे कटी पतंग की तरह जा रही थी, उसने अंदर जा कर लता को अंदर लिया और दरवाजा बंद कर दिया, लता सहरमते हुए शिर झुकाये कड़ी रही, शिव ने खुद hi बिस्तर लगाया, जब उसने लता को देखा तो वो उसको hi देख रही thi)Aise क्या देख रही हो, आ जाओ. (बिस्तर की और इस्सर कर के शिव ने कहा, तो वो धीमे कदमो से वह आयी तो शिव ने हाथ पकड़ कर अपनी गॉड में बिठा दिया, और उसकी कमर में हाथ दाल kar)Sorry लता, सच में मुझे लग रहा है की मेने कितनी बड़ी बेवकूफी कर दी थी, तुम सही थी.
लता : अब समाज आ रहा है, उस वक़्त समाज नहीं आ रहा था, ऊपर से मुँह फुला कर बेथ गए थे, पता है कितना रोई हु में.
शिव : सच में सॉरी, पर इसमें रोनेवाली क्या बात थी.
लता : और नहीं तो क्या, ऐसे रूत जाओगे तो में तो मर hi जाउंगी.
शिव : ै, ये मरने वर्ण की बात मात करो.
लता : और नहीं तो क्या, ऐसे मुँह फुला लिया, मुझसे मुँह मोड़ लिया जैसे में तो कोई हु hi नहीं. बीनडीडी ने बुलाया तो क्या कहती में?
शिव : मेरे लिया वो गैर नहीं थी, तो मुझे कोई दिक्कत नहीं थी की अगर उन्हें पता भी चलता.
लता : तुम्हारी बात सही है पर उन्होंने मुझसे aisi-waisi कभी बात नहीं की है, में कैसे उनके सामने वैसे बेहवे करती, में समझती हु की तुम्हारे उनके साथ सम्बन्ध है, पर क्या तुमने कभी मेरे बारे में कहा है उन्हें, और कहा है तो भी क्या मुझे ये बताया है? अभी भी हमारे जीवन में एक पर्दा है, और में चाहूंगी की अभी ये पर्दा ढाका hi रहे.
शिव : सच कह रही हो तुम, तुम जान न चाहती हो की मेरे और उनके बिच कैसे सम्बन्ध है?
लता : सब समाज आता है मुझे, ऐसे hi वो यहाँ रहने नहीं आ गयी थी.
शिव : तुम्हे बुरा नहीं लगता?
लता : किस बात का बुरा मनु? तुम समझदार हो, ऐसे hi कोई निर्णय नहीं लिया होगा तुमने, और मुझे ये भी पता है की मुझे तुम कभी नहीं छोड़ोगे, फिर किसलिए बुरा मनु. अगर बात सिर्फ जिस्मानी सम्बन्ध की होती तो यहाँ तुम्हे कोई कमी नहीं है, तुम्हारे इससरए की देरी है, फिर तुम सिर्फ जिस्मानी सम्बन्ध के लिए तो वो सब नहीं कर रहे होंगे.
शिव : सच कहु तो कभी कभी मुझे hi समाज नहीं आता की में क्या कर रहा हु, और में ये भी नहीं मान सकता की मुझे बस ऐसे hi प्यार हो जाता है, ये प्यार है या कुछ और कुछ समाज नहीं आता.
लता : तुम्हारे लिए बहोत साडी है इस लिए तुम कंफ्यूज हो, पर हमारे लिए तुम एक hi हो, तो यक़ीनन में कह सकती हु की कोई भी ऐसी नहीं है जो तुमसे प्यार न करती हो, और उनके प्यार के आगे तुम झुक जाते हो.
शिव : पर क्या ये सही है, ऐसे तो में तुम सबको देखा दे रहा हु.
लता : ये बस नजरिये की बात है, और तुम पहले ऐसे नहीं हो जो इतनी साडी लड़कीओ के साथ सम्बन्ध बनाये हुए हो, इतिहास गवाह है की लोगो को बहोत साडी बीविया होती थी, और आज भी कई लोग होंगे, और तुमने किसी के साथ जबरदस्ती तो नहीं की, फिर क्यों फ़िक्र करते हो, जैसे तुम्हे हक़ है अपनी जिंदगी का फैसला करने का, उस तरह उन्हें भी हक़ है अपनी जिंदगी का फैसला करने का, वो बेवकूफ नहीं है जो सब जानते बजते तुम्हारे साथ सम्बन्ध बनाये हुए है.
शिव : कभी कभी समाज नहीं आता की ये खुस नसीबी है की bad-nasibi.
लता : सब भाग्य का खेल है, तो भाग्य पर छोड़ दो. मुझे तो अपने भाग्य से कोई शिकायत नहीं है. (उसने मुस्कुराते हुए साइड से मुझे देखते हुए कहा)
शिव : (में उसकी बात समाज रहा था पर फिर भी मेने भी मुस्कुराते हुए puchha)Kyu?
लता : क्यों की मेरे भाग्य ने तुम्हे मेरे भाग्य में लिखा है, उसने चाहे जो भी छिना हो मुझसे पर तुम्हे दे कर उसने सब कुछ दे दिया.
शिव : ऐसा क्यों लगता है तुम्हे? (मेने उनका नरम नरम पेट सहलाते हुए कहा)
लता : (इस छुअन से उसके चेहरे पर भी मुस्कान तैरने lagi)Aur नहीं तो क्या, तुम जैसा लड़का मुझे मिला ये क्या खुशनसीबी नहीं है मेरी.
शिव : में तो एक सामान्य सा लड़का हु, ऐसा मुजमे कुछ भी खास नहीं है. (मेने उनकी गर्दन पर किस करते हुए कहा)
लता : ये तुम्हे लगता है, क्या में देख नहीं सकती, कितनी सुन्दर सुन्दर लड़कीअ तेरे साथ के लिए तड़पती है, ऐसे में तू मुझे इतनी एहमियत देता है, ये क्या काम है.
शिव : वो सुन्दर है तो तुम भी काम नहीं हो (कहते हुए मेने उनके दोनों स्तन को हलके से दबाते हुए sehlaya)(Un बड़े बैंजो में अपने छोटे स्तनों को महसूस कर के लता की आंखे बंद हो गयी) तुम स्पेशल हो लता, सुंदरता सिर्फ जिस्म की नहीं होती, उसका मान भी सुन्दर होना चाहिए, और तुम्हारा मान सबसे सुन्दर है, इसका ये मतलब भी नहीं है की तुम्हारा जिस्म सुन्दर नहीं है, वो भी बहोत सुन्दर है.
लता : (अपने माध्यम आकर के स्तन मसाले जाने पर उसके बदन से चिंगारिया छूटने lagi)Kya में सच में तुजे इतनी पसंद हु?
शिव : है, बहोत पसंद हो. (शिव उसका ब्लाउज खोलने लगा तो उसने कोई विरोध नहीं किया, एक एक कर के उसके सरे हुक खुल गए, उसने ब्लाउज को भी निकल दिया, वो अब ब्रा में थी,

और फिर से शिव उसके स्तन मसलने लगा, उसकी सिस्किअ फूटने लगी, और अपने निचे कड़क लुंड को वो महसूस कर रही थी, उसको पता था की अभी थोड़ी देर में वो उसकी छूट में होगा, और यही सोच कर उसकी छूट से पानी फूटने laga)(Lund कड़क होने पर उसको एडजस्ट करना था तो मेने लता को थोड़ा ऊपर उठाया और लुंड को है कर के फिर से बिठा दिया, वो एक दम से शर्मा gayi)Kya हुआ? (वो बस शरमाते हुए मुस्कुरायी और ना में गर्दन हिलायी, जैसे कह रही हो की कुछ नहीं) तुम्हे वो पसंद है? (लता को पता था की शिव उसके लुंड के लिए पूछ रहा था तो उसने शरमाते हुए हां में गर्दन हिलायी, ऐसे hi हमारा थोड़ी देर चलता रहा, मेने उन्हें पूरा नंगा कर दिया और में भी पूरा नंगा हो गया था,

मेने उसकी भीगी छूट में ऊँगली डाली और अंदर बहार करने लगा तो वो जोर जोर से सिस्किअ लेने lagi)Tumhari छूट बहोत गर्म है लता. (लता को ये सुन कर बहोत शर्म आ रही थी पर एक अजीब सी खुसी भी मिल रही थी, अपनी छूट में वो लम्बी ऊँगली अंदर बहार हो रही थी, उसकी छूट और पानी बहा रही थी, आज वो शिव को पूरी तरह तृप्त करना चाहती थी, थोड़ी देर में hi उसको लगा की वो झाड़ जाएगी तो उसने शिव के हाथ को हटा दिया और वो खिसक कर बेथ gayi)Kya हुआ? (ना में गर्दन हिलाते हुए वो घोड़ी बन गयी और शिव के लुंड को अपने हाथ में ले कर हिलने लगी, शिव बैठा हुआ था, सो उसका शिर सहलाने लगा, उसने शिव का चेहरा देखा और फिर लुंड को अपने मुँह में भर लिया, उसका पूरा मुँह फ़ैल रहा था, उसको पता था की अभी ये वैसे hi उसकी छूट को भी फैलाएगा और उसको मज़ा देगा तो उसको इस अंग पर बहोत प्यार आने लगा और वो उसको जोर जोर से चूसने लगी और अपने शिर को आगे पीछे करने लगी, शिव उसके स्तन को सहलाने लगा, थोड़ी देर लुंड चूसने के बाद उसने शिव को देखा और उसको देखते हुए उसकी गॉड में चढ़ गयी और लुंड को अपनी छूट पर सेट करते हुए वो बैठने लगी, लुंड उसकी छूट को फैलते हुए अंदर उतरने लगा, एक बार फिर उसके चेहरे पर तनाव उभर आया पर थोड़ी ही देर में लुंड उसकी छूट को फैला चूका था, वो पूरी तरह से लुंड को अपने अंदर समाते हुए बेथ गयी और शिव को अपने गले से लगा लिया)
लता : Shhhhhhhhhhh. (वो उसका गाला और कन्धा चूमने लगी, वो थोड़ी देर वैसे hi रही ताकि उसकी छूट सही से एडजस्ट हो jaye)Me तुम्हे पसंद हु न शिव?
शिव : है, पर ऐसा क्यों पूछ रही हो?
लता : बस ऐसे hi, (फिर वो थोड़ी ऊपर निचे हुई, अब लुंड एडजस्ट हो गया था, और उसको मज़ा आने लगा tha)Aaj में कही नहीं जाउंगी शिव, तेरी जो मर्जी हो वो कर ले. (उसके कान को चाट ते हुए वो बोली)

शिव : (गर्म गर्म छूट मुझे महसूस हो रही थी, वो एकदम कासी हुई थी, में उनके कूल्हे मसल रहा था और उन्हे अपने लुंड पर ऊपर निचे करने laga)Aisi छूट डौगी तो पता है न क्या होगा?
लता : (वो मदहोशी में boli)Shhhhh, जो मर्जी कर ले, शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह चाहे मार दे मुझे. शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह ahhhhhhhhhh.(wo अपनी छूट में अंदर बहार हो रहे लुंड को महसूस करते हुए बोली)
शिव : तू मेरी जान है, ऐसे कैसे मरने दू.

लता : (अपनी कमर को धक्का देते हुए लुंड को महसूस कर रही thi)Muje पता है, इसीलिए तो कहती हु की मेरे भाग्य से तू मिला है, शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह जैसे मर्जी हो कर मेरे साथ, आज पूरी आज़ादी है तुजे, जरा भी रेहम मात करना मुज पर, आज में चाहती हु की तू मुझे जी भर के चोदे.
(वो मदहोश हो कर क्या क्या बोल रही थी उसको hi पता नहीं tha)Shhhhhhh तुजे मेरी छूट अच्छी लगती है न शहहहहह तो अच्छे से छोड़ उसको शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, वो तुजे छोड़ कर भाग गयी थी शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सजा दे उसे शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह shhhhhhhhhh, कितना बड़ा है तेरा शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह शीइइइइइइव, मुझे कभी मात छोड़ना शहहहहह एक पल के लिए भी नहीं shhhhhhhhhhh, में तेरे जिस्म की दुरी तो बर्दास्त कर लुंगी पर नाराज हो कर मुझसे दुरी मात कर लेना, शह्ह्ह्हह्ह में मर जाउंगी तेरे बगैर. (वो जोर जोर से अपनी छूट को लुंड पर मार रही थी, उसको दर्द हो रहा था पर दर्द भी उसको मज़ा दे रहा था, वो जैसे अपने आपको सजा दे रही थी, उसने अपने प्रेमी को नाराज़ किया था, भले hi वो कितनी भी सही थी पर उसने नाराज़ किया tha)Shhhhhhhh शीइइइइइव, शह्ह्ह्हह्ह मुझे अपने निचे लेता कर छोड़ शह्ह्ह्हह्ह, मुझे सजा दे shhhhhhhhhh.
शिव : मेने कहा न आपकी कोई गलती नहीं थी. (वो मुझे अपने ऊपर खींचते हुए निचे लेटने लगी तो में भी उनके ऊपर आ गया, और उनकी छूट को देखा, छोटी सी छूट को फैला कर मेरा लुंड अंदर घुसा हुआ था)
लता : उस पर कोई रहें मात कर शिव, वो दिखती मासूम है शह्ह्ह्ह पर उसने तुम्हे प्यासा छोड़ा था. (उनकी बात सुन कर में उनके ऊपर झुक गया और उनके होठो को अच्छी निचोड़ दिया फिर उनकी आँखों में देखते हुए बोलै)
शिव : मेने कहा न की कोई गलती नहीं थी तुम्हारी.
लता : गलती तो थी, अगर उन्हें पता चल भी जाता तो कोई आसमान नहीं टूटनेवाला था, आखिर एक दिन तो सबको पता चलना hi है, (वो मुझे खींच कर अपनी और खींचने lagi)Shhhhhhh सजा दे मुझे शिव शहहहहह सजा दे.
शिव : में कोई सजा नहीं दे सकता तुम्हे.
लता : तुजे मेरी कसम है शिव.
शिव : (चौंके hue)Ye क्या कह रही हो?
लता : (मेरा चेहरा सेहलते hue)Muje पता है की तू मुझे कोई सजा नहीं देगा, पर में आज छति हु की तू पूरी तरह से तृप्त हो, मुझे कुछ नहीं होगा, आज मुझे ऐसे छोड़ की मेरा शरीर थक जाये. (में जनता था की वो बाहेक रही है, पर उन्होंने अपनी कसम दी थी)
शिव : ठीक है, में करता हु, पर पहले अपनी कसम वापिस लो.
लता : पहले वडा कर की तेरी जैसी मर्ज़ी होगी वैसा करेगा तू.
शिव : ठीक है, पर पहले अपनी कसम वापिस लो.
लता : ठीक है, में अपनी कसम वापस लेती हु, मुझे सजा मत दे पर जैसी तेरी मर्ज़ी हो वैसे मेरे साथ करेगा, कर्जा न?
शिव : (में झुका और उन्हें किश करने लगा और साथ में जोर जोर से धक्के लगाने लगा)
लता : ुम्मम्ह ुम्मम्ह ुम्मम्ह (उसकी छूट में लुंड तेजी से अंदर बहार हो रहा था, धक्के भी तेज थे तो थप थप की आवाजे आ रही थी, उसको दर्द भी महसूस हो रहा था और लुंड उसकी बच्चेदानी के मुँह को ठोकर मर रहा था, पर वो आज अपने मर्द से औरत बन कर छोड़ना चाहती थी, दर्द के बावजूद उसको अजीब सी खुसी मिल रही थी, उस से सास लेना भी मुश्किल हो रहा था, उसने अपना मुँह साइड में कर लिया ताकि शिव के होठो से छूट जाये, और जोर जोर से सासे लेने लगी)

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लता : (तेज ढको से वो झड़ने के करीब पहुंच gayi)Shhhh फूऊ शह्ह्ह्ह फूऊऊऊ शह्ह्ह्ह फूऊऊऊ शहहह फूऊऊऊऊ. आआआ शहहहहह आआआ shhhhhhhhhhh अअअअअअअ शह्ह्ह्हह्ह आआआआ, में झाड़नेवाली हु जाएं शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (में उनके स्तन को जोरो से चूसते हुए धक्के लगाने लगा, मुझे भी बहोत मज़ा आ रहा था, उनकी छूट मेरे लुंड को खिंच रही थी, दे दाना दान धक्को से में उन्हें छोड़ने लगा, में थोड़ा ऊपर हो गया और अपने हाथ टिका कर धक्के लगाने लगा)

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अह्ह्ह्हह शहहहहह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बसससससस mumiiiiiiiiiiiiii (वो अकड़ गयी और झड़ने लगी, में झुका और चिपक गया उस से तो वो भी मुझसे लिपट गयी और अपनी छूट को मेरे लुंड पर दबा दिया, एक मिनट में रुका रहा, फिर उनकी पकड़ ढीली हुई तो में उठ गया और उन्हें पलट कर घोड़ी बना दिया, और नाइके कूल्हे को चाटने लगा, वह गांड का छेड़ खुल बंद हो रहा था तो मेने उस पर जीभ लगायी और चाटने लगा, मन तो कर रहा था की इसको भी आज छोड़ दू, पर मेने अपने आपको संभाला, में फिर से छूट को चाटने लगा)
लता : (पीछे गर्दन करते hue)Usko क्यों छोड़ दिया?
शिव : किसको? (में जनता था की वो क्या बोल रही है पर में अनजान बना)
लता : जिसे अभी चाट रहा था. मेने कहा न की अपने मान की कर.
शिव : अपने मान की hi कर रहा हु, अभी उसकी बरी नहीं आयी है, जिस दिन उसकी बरी आएगी तब तुमसे पूछूंगा भी नहीं. (कहते हुए मेने लुंड छूट के छेड़ पर लगाया और अंदर दाल दिया, फिर धक्को की बरसात सुरु हो गयी, आज सच में मेने उनके दर्द को थोड़ा दर किनार कर दिया और उन्हें अच्छे से छोड़ने लगा)
लता : (दर्द हो रहा था पर उसको बहोत मज़ा आ रहा tha)Shhhhhh आह्हः अह्ह्ह्ह शहहहहह.

शिव : (उसके उछालते कूदते नितम्ब मुझे और उत्तेजित कर रहे थे)
लता : अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह बहोत बड़ा है ये शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेने उन्हें हर तरह से छोड़ा, दो बार में झाड़ा, ओफ़्कौर्से बहार hi, और वो न जाने कितनी hi बात झड़ी थी, जब मेने तीसरी बार उनके पेट पर वीर्य छोड़ा तो वो थक कर चूर हो गयी थी, वो हिल भी नहीं रही थी, में भी बाजु में लुढ़क गया, थोड़ी देर बाद मेने उनके शरीर पर फैला मेरा वीर्य साफ़ किआ वो वो अधखुली आँखों से मुजेदेखने लगी.
शिव : बाथरूम जाना है? (मुझे जाना था इसलिए मेने पूछा, उन्होंने हां में गर्दन हिलायी, मेने अंडरवियर पहना और उन्हें चद्दर से लपेटा और उन्हें गॉड में उठा कर बाथरूम में ले गया, चद्दर हटा कर मेने उन्हें बिठाया तो वो मूतने लगी, में भी मूतने लगा, हम दोनों साथ में hi थे, मुझे उनकी छूट से निकलती मूत की धार दिख रही thi)(Lata को अजीब लग रहा था पर परेसुरे इतना था की उसने कुछ भी नहीं सोचा, पर जैसे hi उसका परेसुररे थोड़ा काम हुआ उसने देखा की शिव भी मूत रहा है तो उसने लुंड को देखा और उसमे से निकलती मूत की धार देखि, पता नहीं पर उसको अच्छा लगा, वो बस देखती hi रही, जब उसका मूतना पूरा हुआ तो वो उठने लगी पर जैसे उसमे ताकत hi नहीं बची थी, वो देवर का सहारा ले कर उठने लगी पर तब तक शिव ने उसको पकड़ लिया और उठा दिया, फिर चद्दर से लपेट कर उसको फिर से कमरे में ले गया, जैसे hi उसने उसको बिस्तर पर लेटाया वो फिर से लिपट गयी, में भी बगल में लेट गया, वो फिर मेरा लुंड सहलाने लगी.
शिव : क्या हुआ, मान नहीं भरा.
लता : सब कुछ भर गया है, पर क्या में इसको छू भी नहीं sakti?,isko पकड़ना अच्छा लगता है मुझे. (उनके छूने से लुंड फिर से जागने लगा था, पर मेने कुछ नहीं किया)
शिव : तुम ठीक हो न?
लता : ऐसा क्यों पूछ रहा है, (थोड़ी देर रुक kar)Me लड़की हु, इस से भी ज्यादा बरसस्त कर सकती हु, तुम्हे क्या लगता है की हम लड़कीअ नाजुक होती है?, बस दिखती वैसी है, उपरवाले ने हमे तुम्हारे जितनी ताकत भले न दी हो पर तुमसे ज्यादा सहने की ताकत दी है.
शिव : (मुस्कुराते hue)Sach में तुम लड़कीओ को समझना बहोत मुश्किल है.
लता : तो कोशिस भी क्यों करते हो.
शिव : सो जाओ अब.
लता : वही तो कर रही हु. (कहते हुए उसने आंखे बंद कर ली पर लुंड को नहीं छोड़ा, वो इतनी थक गयी थी की थोड़ी hi देर में सो गयी, में भी सो गया)
सुबह उठ कर में फिर से अपने रूटीन में लग गया, स्कूल में बीनमदं भी आयी थी, मेने रेसस्स में उन्हें उनकी तबियत पूछ ली, दोपहर को खाने के बाद मेने जहान्वी को फ़ोन किया.
जहान्वी : Hello. (उसको आश्चर्य हो रहा था की शिव ने उसको फ़ोन किया)
शिव : कहा है आप?
जहान्वी : तुम्हे क्या जरुरत पद गयी, या उनसे मान भर गया? (उसने तना मारा)
शिव : आप कहा की बात कहा ले जा रही है, मेरा उनसे कभी मान नहीं भर सकता, मेने दूसरी बात के लिए फ़ोन किआ था.
जहान्वी : वो तो होगा hi, तुम्हे कहा जरुरत है मेरी. (उसने फिर तना मारा)
शिव : आपकी प्रॉब्लम क्या है, में वैसी बात करू तो भी प्रॉब्लम है, और न करू तो भी प्रॉब्लम है.
जहान्वी : (अपना मुँह टेढ़ामेढ़ा करते hue)Kyu फ़ोन किया?
शिव : मिलना था आपसे?
जहान्वी : किस लिए?
शिव : काम है.
जहान्वी : क्या काम है. (उसने फिर टेढ़ा उत्तर दिया)
शिव : मुझे किश करनी है.
जहान्वी : क्याआ. (में कुछ नहीं bola)Kya कहा तुमने?
शिव : मिलोगी की नहीं ये बताओ.
जहान्वी : कहा?
शिव : (उनकी बात से मुझे हसी आ gayi)Kis लिए मिलना चाहती हो आप, किश के लिए की काम के लिए?
जहान्वी : (झेप गयी, पर थोड़ा संभल कर boli)Jyada ओवर स्मार्ट मात बनो, बताओ कहा मिलना है?
शिव : इसीलिए पूछ रहा था न, की किस लिए मिलना चाहती हो तो जगह सही से बातपौ, किश के लिए हो तो एकांत में और काम के लिए मिलना हो तो फिर पब्लिक प्लेस में. (मेने उनकी खिंचाई की)
जहान्वी : मुझे नहीं मिलना है, किसी भी काम के लिए नहीं. (उसका मान तो बहोत था पर वो बस नखरा कर रही थी)
शिव : आपके hi फायदे की बात है, फिर मात कहना की कहा नहीं था मेने.
जहान्वी : क्या बात है, फ़ोन पर hi बता दो.
शिव : बात फ़ोन पर बतानेवाली नहीं है, मिलना है तो कहो.
जहान्वी : ठीक है, कॉफ़ी शॉप पर आ जाओ.
शिव : सहित, चलो कोई बात नहीं. (मेने जान बुज कर उन्हें छेड़ने के लिए hi ऐसा कहा था)
जहान्वी : (उसने मुस्कुराते हुए फ़ोन रख diya)Nautankibaj, ऐसे hi फसता होगा लड़कीओ को. पर में नहीं फस्नेवाली बच्चू. (फिर वो कड़ी हुई और तैयार होने लगी, लिपस्टिक लगायी और हल्का सा मकूप भी किया, एक मस्त टाइट टॉप और निचे स्कर्ट पहन कर वो अपनी गाडी से कॉफ़ी शॉप के लिए निकल गयी. जब वो वह पहुंची तो शिव आलरेडी वह पहुंच गया था, उसने गाड़ी थोड़ी दूर कड़ी की और शिव को देखने लगी, वो बाइक लिए खड़ा था, वह आती जाती लड़कीअ उसको देख रही थी, इवन अपने बॉयफ्रेंड के साथ वाली लड़कीअ भी उसको देख रही थी, पर वो किसी को नहीं देख रहा था, वो बस रस्ते पर इधर उधर देख रहा था, जैसे उसका इंतजार कर रहा हो, वो थोड़ी देर वह कड़ी रही और शिव को देखती रही, एक दो लड़कीओ ने शिव से बात करने की कोशिस की पर उसने ज्यादा भाव नहीं दिया, उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, उसने गाड़ी आगे बधाई और वह पहुंच गयी, उसने गाड़ी पार्क की और शिव की और बढ़ी, शिव उसको ऊपर से निचे तक देख रहा था, वो जानती थी की वो कैसी लगती है तो इतराते हुए थोड़ी और लचक के चलते हुए उसके पास पहुंची.
जहान्वी : Hi.
शिव : Hi. आज साइट पर नहीं गयी?
जहान्वी : मेरी मर्जी. (उसने इत्र का जवाब दिया) कहो क्या काम है?
शिव : यही खड़े रहने का िर्रादा है क्या?
जहान्वी : क्यों, तुम तो कहते थे की तुम मुझे अफोर्ड नहीं कर सकते, रहने दो खामखा खर्चा हो जायेगा तुम्हारा.
शिव : वो तो हो hi जायेगा, पर में जो बात करना चाहता हु वो ऐसे अच्छी नहीं लगेगी, आइये अंदर बैठते है. (जहान्वी अदा से आगे बढ़ गयी, और अंदर जा कर फ्री टेबल ढूंढने लगी, उसने देखा फिर लड़कीअ शिव को देख रही थी वो एक खली टेबल की और बढ़ी और वह बेथ गयी, शिव आ कर उसके सामने बेथ गया, जहान्वी ने एक बार फिर कैफ़े में नजर दौड़ाई, लड़कीअ उसको जलन से देख रही थी, ये देख कर उसको बहोत अच्छा लगा, पर उसने जाहिर नहीं किया, एक वेटर उनके पास आया तो उसने आर्डर दे दिया, फिर शिव को देखते हुए बोली)
जहान्वी : अब बताओ, क्या बात है. (मेने उन्हें सब बता दिया, मेने उन्हें हमारे साथ काम करने के लिए कहा, वो सोच में पद गयी)
शिव : क्या हुआ?
जहान्वी : मुझे पापा से बात करनी पड़ेगी.
शिव : है तो कर लीजिये.
जहान्वी : पर मुझे नहीं लगता की वो मानेंगे.
शिव : में जनता हु, पर बात कर के तो देखिये. शायद मान जाये.
जहान्वी : तुम्हे पता है की ये प्रोजेक्ट तुमने छिना है उनसे, फिर वो क्यों तुम्हारा साथ देंगे.
शिव : मेने उनका साथ नहीं माँगा, मेने आपका साथ माँगा है, ये आपको सोचना है की आप अपने पापा की ऊँगली पकड़ कर hi चल सकती है की खुद भी कुछ कर सकती है.
जहान्वी : पर तुम्हे में नहीं, उनकी मचिनार्य चाहिए.
शिव : आप गलत सोच रही है, ये में किसी और से भी ले सकता हु, और ये आप अच्छी तरह से जानती है, पर में चाहता हु की आप हमसे जुड़े.
जहान्वी : (मुस्कुराते hue)wo क्यों?
शिव : (मजाक me)Shayad मेरा कोई चांस लग जाये?
जहान्वी : वैरी फनी. (फिर रुक kar)me सीरियसली पूछ रही हु.
शिव : भरोसा, मुझे आप पर भरोसा है, काम तो आप अच्छा करती hi है पर काम संभालती भी अच्छा है.
जहान्वी : तो अब तुम मुझे अपने वह काम पर रखना चाहते हो.
शिव : मेरी इतनी औकात नहीं है, में बस आपको अपने साथ चाहता हु. मेरा मतलब है की काम के लिए.
जहान्वी : है, उनसब के लिए तो आलरेडी स्टॉक है तुम्हारे पास. (उन्होंने जिस तरह से कहा मुझे हसी आ गयी, हमने कॉफ़ी पि ली थी, मेने बिल चुकाया और वह से बहार निकल आये)
शिव : थैंक यू फॉर कमिंग.
जहान्वी : अब इतनी भी परायी मात बनाओ की फॉर्मेलिटी करनी पड़े. (उसका मान नहीं कर रहा था जाने का, वो उसके साथ और रहना चाहती थी, पर उसको ये भी खटकता था की वो किसी और के साथ भी है, फिर अचानक उसको कुछ याद aaya)Us दिन के लिए सॉरी.
शिव : (मुझे समाज नहीं आया की वो किस बारेमे बात कर रही hai)Kon से दिन के लिए?
जहान्वी : वो उस दिन मेने तुम्हे वो bas....(Wo बास्टर्ड बोलना चाहती थी पर बोली नहीं) सॉरी यार, वो बस ऐसे hi निकल गया था, मेरा वो मतलब नहीं था.
शिव : अब जो सच है वो तो सच hi है.
जहान्वी : इसीलिए तो सॉरी बोल रही हु, वो तो बस जेनेरली निकलता है वैसे मेरे मुँह से निकल गया था, मेरा सच में वो मतलब नहीं था, (उसने मेरा हाथ पर हाथ रखते हुए कहा, में देख रहा था की वो सच में गिलटी फील कर रही है)
शिव : मेने बुरा नहीं मन था, भूल जाइये वो सब.
जहान्वी : थैंक यू.
शिव : मेने कहा न भूल जाइये.
जहान्वी : ये थैंक यू था की तुमने मेरी बात का बुरा नहीं माना.
शिव : में क्यों बुरा मानूंगा, में जनता हु आपको, आप कैसी है मुझे पता है. (वो बस मुस्कुरायी)
जहान्वी : ठीक है, में पापा से बात कर के बताती हु. Bye.
शिव : Bye.
वो वह से चली गयी, मेने पवनसीर को फ़ोन किया तो वो बहार थे, मेने उनके साथ वशिस्ठजी के बारे में बात की और कुछ डिस्कस किया, उसके बाद मेने वशिस्ठजी को फ़ोन लगाया.
वशिष्ठ : Hello.
शिव : नमस्ते सर, में शिव बोल रहा हु.
वशिष्ठ : है बोलिये.
शिव : सर, आपसे एक रिक्वेस्ट थी, आप मुझे इस तरह से मात बुलाइये, ये तो पवनसीर की मेहरबानी है की उन्होंने मुझे अपना पार्टनर बनाया, वर्ण में कुछ भी नहीं हु, आप मुझसे तुम कहके बात कीजिये.
वशिष्ठ : ठीक है, पर एक बात कहूंगा, अगर तुम काबिल न होते तो वो तुम्हे अपना पार्टनर नहीं बनाते, कहो कैसे फ़ोन किया.
शिव : सर, हमने डीडे किया है की हम आपके साथ डील करेंगे.
वशिष्ठ : थैंक यू.
शिव : मेरी पवनसीर से बात हो गयी है, वो कागजात तैयार करवा रहे है, शायद दो चार रोज़ बाद में ले कर आ जाऊंगा.
वशिष्ठ : ठीक है, मुझे इंतजार रहेगा.
शिव : Ok सर, फिर मिलते है.
वशिष्ठ : Ok, मिलते है.
उनसे बात करने के बाद मेने कृपालिजी को भी मश्ग कर दिया की मेरी वशिस्ठजी से बात हो गयी है, उनका थैंक यू का भी रिप्लाई आ गया.
शाम को में जूही को लेने बीनमदं के घर चला गया. वो रेडी hi थी. बिना मैडम ने हम दोनों के लिए दूध बनाया, उसके बाद हम वह से स्टेडियम चले गए.
शिव के जाते hi जैसे बिना को कुछ याद आया, उसने अपने पर्स से सुखदेवजी का कार्ड निकला और उन्हें फ़ोन लगाया.
बिना : Hello.
सुखदेव : यस.
बिना : जी में क्सक्सक्स सहर से (अपने ससुराल का सहर बता कर) बिना बोल रही हु, चन्द्रभानजी की बहु.
सुखदेव : नमस्ते बेटी, कैसी हो.
तो बे कंटिन्यू.....