Adultery Kundali Bhagya - Page 29 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 206

बिना ने सुखदेवजी से बात करने के लिए उन्हें फ़ोन लगाया था, इतने दिनों से वो शिव के वह थी, और बिस्तर पर थी तो उसके दिमाग से hi निकल गया था, आज जैसे hi उसको याद आया उसने फ़ोन लगा दिया था, उसको शिव के बारे में जान न था.

बिना : Hello.

सुखदेव : यस.

बिना : जी में क्सक्सक्स सहर से (अपने ससुराल का सहर बता कर) बिना बोल रही हु, चन्द्रभानजी की बहु.

सुखदेव : नमस्ते बेटी, कैसी हो.

बिना : में ठीक हु, आप कैसे है?

सुखदेव : में भी ठीक हु, कहो कैसे कॉल किया.

बिना : मुझे आपसे कुछ पूछना था, में सोच रही थी की आपसे पेर्सनली मिलूंगी.

सुखदेव : ऐसी क्या बात है जो फ़ोन पर नहीं हो सकती. कोई विशेष बात है क्या?

बिना : में जब से शादी कर के यहाँ आयी हु मुझे कुछ जानकारी पता hi नहीं थी, कुछ समय पहले hi मुझे योगेंद्र अंकल के बारे में पता चला, तब तक तो मुझे पता भी नहीं था की मेरे चाचा ससुर भी है.

सुखदेव : है, वो क्यों बताएँगे. (उसने दुखी स्वर में कहा)

बिना : मेने सुना है वो आपके पास है, और ऐसा भी सुना है की उनकी तबियत भी ठीक नहीं है.

सुखदेव : (अफ़सोस जताते hue)Uska होना भी कोई होना है, कितने साल हो गए, वो बिस्तर पर hi है, बस सासे चल रही है.

बिना : और चंडीरिका आंटी?

सुखदेव : वो भी कुछ वैसी hi हालत में है, उनका भी होना न होना एक जैसा hi है. पर एक बात समाज में नहीं आयी, इतने सालो में तो किसी ने कोई खेर खबर नहीं ली, आज अचानक तुम्हे इन सब में क्यों दिलचस्पी हुई है?

बिना : मुझे पता hi नहीं था अंकल, अब जब पता चला है तो उनके बारे में जान ने की इच्छा हुई, आखिर वो और हम एक परिवार hi है न.

सुखदेव : जो उसके अपने है उन्हें तो कभी नहीं लगा की वो उनके अपने है, और तुम बहार से आयी हुई हो फिर भी तुम्हे फ़िक्र हो रही है.

बिना : उन्हें हुआ क्या है अंकल,.

सुखदेव : योगेंद्र तो पिछले कई सालो से कोमा में है, और भाभी अपने होश में नहीं है. बस यु कह सकते है की दोनों जिन्दा है, बाह यही तसल्ली है.

बिना : पर वो इन हालत में क्यों है?

सुखदेव : ये तो तुम्हे अपने घरवालों से पूछना चाहिए. (उन्होंने टॉन्ट में कहा)

बिना : मेने पूछा था, पर कोई कुछ नहीं बता रहा. या तो उन्हें जानकारी hi नहीं है.

सुखदेव : वो क्यों बताने लगे, सबने मिल कर पाप जो किया है.

बिना : सब से आपका क्या मतलब है अंकल, क्या मेरे ससुर भी?

सुखदेव : चुप रहना भी एक तरह से गुनाह hi है बेटी.

बिना : पर ये सब हुआ कैसे है अंकल.

सुखदेव : ये सब बात फ़ोन पर नहीं हो सकती बेटी.

बिना : में समझती हु, और इसीलिए में मिलना चाहती हु.

सुखदेव : फ़िलहाल तो में बहार हु, शायद अगले हफ्ते वापस आऊंगा, उसके बाद आ जाओ, वासे भी तुमसे मुलाकात हुई नहीं है, बस उस दिन पहलीबार hi मिला था, इस बहाने जान पहचान हो जाएगी.

बिना : जरूर अंकल, पर फिर भी क्या में एक सवाल पूछ सकती हु?

सुखदेव : है पूछो?

बिना : उनका एक बीटा भी है न?

सुखदेव : (एक आह सी निकल गयी उनके मुँह se)Hai नहीं था. (उनका गाला भी भर आया)

बिना : है, वही, पर मेने सुना है की उसकी lash........(Wo आगे बोल hi न सकीय)

सुखदेव : उस से क्या होता है, वो महज तीन साल का था, जिस पानी में बड़े बड़े नहीं बच सकते वह एक छोटे से बच्चे की क्या बिसात. (उनकी आवाज से लग रहा था की वो बहोत दुखी है और कभी भी रो सकते है, वो थोड़ी देर खामोश हो गए, बिना को भी लग रहा था की ये बात फ़ोन पर नहीं कर सकते, पर फिर भी उसको जान न था)

बिना : उसकी कोई फोटो है आपके पास?

सुखदेवी : (अपने आपको सँभालते hue)Tumhe क्यों जान न है ये सब, में नहीं याद करना चाहता उन मनहूस पालो को. (उन्होंने थोड़े गुस्से से कहा) जो भी जान न है वो उदयसिंह से पूछो. (उसने हलके गुस्से से कहा, बिना एक पल के लिए खामोश हो गयी)

बिना : में समझती हु अंकल, आप बहोत दुखी है.

सुखदेव : तुम क्या संजोगी, तुम्हे अंदाजा भी नहीं है की मेने क्या खोया है. (वो गुस्सा थे की रो रहे थे समाज नहीं आ रहा था)

बिना : अंकल, प्लीज सम्भालिये अपने आपको.

सुखदेव : में फ़ोन रख रहा हु, हम बाद में बात करेंगे.

बिना : सुनिए.....

सुखदेवजी ने फ़ोन रख दिया था, पर फिर भी बिना hello hello कर रही थी, वो थोड़ी देर फ़ोन को देखती रही, उसको भी लग रहा था की ऐसी बाते फ़ोन पर अच्छे से नहीं हो पायेगी, वो सोचने लगी की कैसे उनसे मिला जाये और मिलना जरुरी भी था, भले आज पूरी बात नहीं हो पायी थी पर बात की शुरुआत तो हो hi गयी थी. सुखदेवजी का इतना भावुक होना भी उसे समाज नहीं आया, वो समाज रही थी की वो उनके दोस्त है पर फिर भी इस बात को इतने साल हो गए है, अब तक तो उन्हें अपने आपको संभल लेना चाहिए था, ये बात उसकी समाज से बहार थी की आखिर ऐसी क्या बात है जिस की वजह से उनके वो जख्म अभी भी हरे hi है. अगर वो अपने दोस्त की फॅमिली के लिए दुखी है तो भी वो इस कदर क्यों दुखी है, वो काफी देर तक बेथ कर सोचती रही पर उसको कुछ भी समाज नहीं आ रहा था, इन सभी सवालो के जवाब सिर्फ और सिर्फ सुखदेवजी hi दे सकते थे, तो उनसे मिलना जरुरी था, आखिर ये शिव की जिंदगी से भी जुड़ा हुआ था, कैसे भी कर के उसको ये पता करना hi पड़ेगा, अभी भले hi वो गुस्सा है या दुखी है पर फिर भी वो दोबारा जरूर मिलेगी और और उनसे साडी सच्चाई जान कर रहेगी. फ़िलहाल तो वो कुछ नहीं कर सकती थी तो वो शाम के खाने की ऐयारी करने लगी. शिव और जूही भी आ गए, थोड़ी देर उनसे बात की, फिर शिव भी चला गया.

रात को खाने के बाद में बैठा था और फ़ोन देख रहा था की मुझे जहान्वी का मश्ग आया, मेने मश्ग खोला तो लिखा था

जहान्वी : पापा मन कर रहे है. (वैसे तो मुझे भी लगा था की वो मानेंगे नहीं.)

शिव : कॉल करसकती है? (पांच सेकंड में hi उनका फ़ोन आ गया, मेने कॉल रिसीव kiya)Hello.

जहान्वी : हम्म्म्म.

शिव : क्या हुआ?

जहान्वी : मेने कहा तो सही, पापा मन कर रहे है.

शिव : ये तो अच्छी बात है न. (मेने थोड़ा रिलैक्स हो कर कहा)

जहान्वी : (उसको कुछ समाज नहीं aaya)Achchhi बात है? वो कैसे?

शिव : वैसे भी आपको मेरे साथ काम नहीं करना था, तो आपके लिए तो अच्छी hi बात है न. (मेने हलके अंदाज में मुस्कुराते हुए कहा)

जहान्वी : मजाक मात करो, I’m सीरियस.

शिव : जरुरी नहीं की कोई एक बार में hi मान जाये, वैसे क्या कहा उन्होंने.

जहान्वी : उनसे ज्यादा तो वो छछूंदर कूद रहा था, वो hi मन करवा रहा था. (उसने थोड़े गुस्से से कहा)

शिव : (मेरी समाज में नहीं आया की वो किसकी बात कर रही hai)Kiski बात कर रही है?

जहान्वी : मिक्की और किसकी. वो hi पापा को भड़का रहा था, पता नहीं आज कहा से टाइम पर घर पर आ गया था, वैसे तो रोज़ बहार hi रहता है, आज hi आना था उसको भी.

शिव : पर आप ज्यादा अपसेट क्यों हो रही हो, क्या आपको सच में मेरे साथ काम करना है?

जहान्वी : शिव, मजाक नहीं.

शिव : में कहा मजाक कर रहा हु, में सीरियसली hi पूछ रहा हु. वैसे आपकी बातो से तो लग रहा है की आप काम करना चाहती है, पर क्यों ये समाज नहीं आ रहा. वैसे तो में आपको पसंद नहीं हु. (मेने मुस्कुराते हुए कहा)

जहान्वी : तुम्हारे पसंद होने न होने से क्या होता है, में इस प्रोजेक्ट की एहमियत समझती हु, ये प्रोजेक्ट मुझे मेरे कर्रिएर में बहोत काम देगा, इसका हिस्सा बन न मेरे लिए फायदेमंद होगा.

शिव : चलो इतनी तो अकाल है आपमें.

जहान्वी : आईईईई, मरूंगी जो कुछ ulta-sidha कहा तो, तुम्हे क्या में बेवकूफ लगती हु.

शिव : बिलकुल नहीं, अगर मुझे ऐसा कुछ भी लगता होता तो क्या में आपको काम के लिए पूछता. में सिर्फ मज़ाक कर रहा था, वैसे क्या बात हुई?

जहान्वी : खाने के बाद मेने उनसे बात की तो वो मिक्की भी वही बैठा था, तुम्हारा नाम सुन कर वो इतना भड़क गया की पापा को मुझे काम के लिए मन करने लगा.

शिव : क्यों?

जहान्वी : मुझे क्या पता, वो बस एक hi बात बोल रहा था की तुम्हारे साथ कोई काम न करू.

शिव : आपके पापा ने क्या कहा?

जहान्वी : वो बोलने कहा दे रहा था, बस वो hi अपनी चोंच डूबा रहा था, मम्मी ने भी कहा की अगर ये इतना मन कर रहा है तो फिर मात कर. वो मुझे कुछ बोलने hi नहीं दे रहा था.

शिव : अब ज्यादा अपसेट मात होइए, कल फिर से शांति से बात करना.

जहान्वी : मुझे भी यही लग रहा है.

शिव : अगर मेरी जरुरत हो तो मुझे बुला लेना.

जहान्वी : तुम आओगे पापा से बात करने? (उसने आश्चर्य से कहा)

शिव : क्यों नहीं आ सकता?

जहान्वी : तुम्हे पता है न वो तुमसे कितना चिढ़ते है.

शिव : वो उनकी सोच है, मुझे कोई दर नहीं उनसे बात करने में.

जहान्वी : ठीक है, तो में काल फ़ोन करुँगी तुम्हे.

शिव : है, पर स्कूल के बाद.

जहान्वी : पता है मुझे.

शिव : अच्छा ठीक है, मिलते है फिर कल.

जहान्वी : क्यों, बस काम की hi बात करनी थी?

शिव : (मेरे चेहरे पर मुस्कान आ gayi)To और क्या बात करनी थी?

जहान्वी : मुझे क्या पता, तुम्हे पता होगा.

शिव : मुझे कैसे पता होगा?

जहान्वी : इतनी लड़कीओ को फसाया है तो मेने सोचा की मुज पर भी तरय करोगे. (कहते हुए वो थोड़ा शर्मा रही थी)

शिव : में क्यों किसी को फ़साने लगा.

जहान्वी : ऐसे hi क्या सब है तुम्हारे साथ. सबको कुछ न कुछ उल्टा सीधा बोल कर फसाया hi होगा न.

शिव : मेने किसी को नहीं फसाया, और में फ़ोन रख hi रहा था, आपने hi कहा की कोई और बात करू, क्या आप चाहती है की में आपको फासो. (मेने भी मुस्कुराते हुए पूछा)

जहान्वी : जैसी तुम्हारी फितरत है, तरय तो करोगे hi.

शिव : मुझे कोई तरय नहीं करना.

जहान्वी : क्यों?

शिव : अब मुझे लग रहा है आप मुझे उकसा रही है.

जहान्वी : में कोई उकसा नहीं रही हु, (वो खामोस हो गयी, थोड़ी देर बाद वो boli)Achcha आज वो लड़की क्या कह रही थी?

शिव : कोनसी लड़की?

जहान्वी : वो hi, कैफ़े के बहार.

शिव : आपको कैसे पता की वो मुझसे बात कर रही थी?

जहान्वी : (थोड़ा ऐटिटूड se)Bas पता है, तुम बात को मात घुमाओ, जो पूछा है उसका सही सही जवाब दो.

शिव : वो पूछ रही थी की में किसका इंतजार कर रहा हु.

जहान्वी : तो तुमने क्या कहा?

शिव : में क्या कहता, मेने उस से कहा की में किसी का भी इंतजार करू, उसको क्या?

जहान्वी : तो उसने क्या कहा?

शिव : वो सीधे hi मुझे पूछने लगी की अगर गफ का इंतजार नहीं कर रहे हो, तो वो तैयार है.

जहान्वी : (जलन se)Badi आयी, बर्फ बनानेवाली, कोण थी वो?

शिव : मुझे क्या पता, और वैसे भी आप क्यों गुस्सा हो रही है, मेरी hi बुद्धि भ्रस्ट हो गयी थी जो मेने मन कर दिया, वो खुद चल कर आयी थी, मुझे है कर देना चाहिए था , नहीं? (मेने छेड़ने के िर्रादे से कहा)

जहान्वी : (हलके गुस्से se)|To कर देते, वैसे भी तुम इन सब में एक्सपर्ट जो हो.

शिव : सच में गलती कर दी, आपको क्या लगता है, कल वो मिलेगी (मुझे वैसे तो हसी आ रही थी पर मेने खुद को कण्ट्रोल रक्खा)

जहान्वी : (हलके गुस्से se)Muje क्या पता, तुम hi जाना और देख लेना.

शिव : आप भी आना, अगर वो न आयी तो में बोर हो जाऊंगा.

जहान्वी : तो में टाइम पास हु, क्यों?

शिव : मेने ऐसा कब कहा?

जहान्वी : तुमने ऐसा hi कहा, में फ़ोन रख रही हु, bye. (कह के उसने कॉल काट दिया)

जहान्वी के साथ ऐसे हसी मजाक कर के मुझे बहोत हसी आ रही थी, उसके बाद मेने लता से बात की, मेने उसका हलचल पूछा तो वो शर्मा रही थी, पर वो ठीक थी, फिर में रंजन और विणा के पास गया, वो दोनों पढ़ने बैठी थी, मेरी उनसे भी बात हुई, गायत्रीदिदी और सरिता से भी इधर उधर की बात हुई, फिर में पढ़ने बेथ गया. रात को जब पढ़ाई ख़तम की तब में बहार आया और हर कमरे में देखा तो सब सो गए थे, तो में भी सो गया.

सुबह उठ कर में एक्सेरसिस के लिए चला गया, वह से लौट कर स्कूल चला गया. छोटी रेसस्स में महेश और हर्ष मुझे कैंटीन ले गए, मेने मन किया पर वो नहीं मने. संयम और वैस्वी को मेने बोल्दिया की में कैंटीन जा रहा हु, वो दोनों भी बाथरूम के लिए चली गयी. दोनों चुप चुप चल रही थी, बाथरूम से आने के बाद दोनों जब क्लास की और जाने लगी तो वैस्वी ने संयम को रोका.

वैस्वी : संयम, मुझे कुछ बात करनी है.

संयम : तो बोल न. (उसने नोर्मल्ली hi कहा)

वैस्वी : मुझे शिव से मिलना है.

संयम : (उसको कुछ समाज नहीं aaya)Wo बोल कर तो गया की कैंटीन जा रहा हु, चल कैंटीन चलते है फिर.

वैस्वी : (थोड़ी उल्जन में thi)Waise नहीं. (संयम गौर से वैस्वी को देखने लगी, वैस्वी ने इधर उधर देखा वो सोच रही थी की कहे की न कहे, पर फिर संयम की आँखों में देखते hue)Muje उस से अकेले में मिलना है.

संयम : (वो थोड़ा चौंक गयी की वैस्वी उसको सीधे सीधे hi कह रही है) तो मुझसे क्यों कह रही है, उस से hi बोल. (वो अंदर hi अंदर असहज थी पर उसने चेहरे पर दिखने नहीं दिया)

वैस्वी : तेरे बगैर ये मुमकिन नहीं है.

संयम : में सामजी नहीं.

वैस्वी : हर वक़्त हम साथ hi होते है तो... (उसने बात अधूरी छोड़ दी थी पर संयम समाज रही थी सब)

संयम : मतलब में तुजे खटक रही हु. (संयम ने नाराजगी से कहा)

वैस्वी : (संयम का हाथ पकड़ते hue)Aisi बात नहीं है, (कुछ रुक kar)Tu रोज़ उस से अकेले में मिलती है, मेने कुछ कहा क्या?

संयम : में कब अकेले मिलती हु (संयम ने जूथ बोलै)

वैस्वी : रोज़ तू उसके साथ जाती है तो अकेली hi होती है न.

संयम : हम घर जाते है, रस्ते पर होते है, अकेले कहा हुए.

वैस्वी : फिर भी तुम्हे जो कहना होता है वो कह देती होगी तू.

संयम : ऐसा कुछ नहीं है. (उसने नज़ारे चुराई)

वैस्वी : देख संयम, हमे ये आँख मिचौली खेलना बंद कर देना चाहिए. मुझे पता है, तेरे दिल में क्या है.

संयम : (मजाक में हस्ते hue)Achchha... क्या है?

वैस्वी : तू जानती है, मुझे कोई एतराज नहीं है उस बात से, ये फैसला शिव को लेने देते है की उसको किसके साथ रहना है.

संयम : तुजे जितना भरोसा है उतना hi मुझे भी भरोसा है. (उसने टॉन्ट में कहा)

वैस्वी : तू गलत समाज रही है, जो में कह रही हु वो तू समाज नहीं रही है और ऐसे hi लड़ रही है.

संयम : में कहा लड़ रही हु.

वैस्वी : अपना टोन देख, (शांति se)Dekh संयम, में सीधे सब्दो में कहती हु, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता की तुम्हारे और उसके बिच क्या है, मुझे बस इतना पता है की मुझे बस उसके साथ रहना है.

संयम : तू कहना चाहती है की हम दोनों hi.

वैस्वी : अगर ऐसा है तो ऐसा hi सही, मेने बहोत सोचा है इस बारे में, मुझे पता है की हर लड़की चाहती है की उसका प्रेमी उसका hi हो, पर शायद ये मेरे नसीब में नहीं है, मेने देखा है की जब भी में उसके करीब गयी हु वो मुझसे दुरी बना ने की कोशिस करता है, शायद उसकी वजह तुम हो. (संयम गौर से वैस्वी को देखने lagi)Aise क्या देख रही है, हम दोनों के बिच बहोत कुछ हो चूका है.

संयम : (वो कहा पीछे रहनेवाली thi)Hamare बिच भी बहोत कुछ हो चूका है.

वैस्वी : में समाज सकती हु, इसलिए कही बार सोचा की में हैट जाऊ, पर में नहीं कर सकती, सॉरी. (वैस्वी के चेहरे पर दुःख था, जिसे देख कर संयम को भी बुरा लगा)

संयम : सच कहु तो मेने भी तरय किया था. (उसके चेहरे पर भी दुःख था)

वैस्वी : मुझे लग रहा है की वो हम दोनों के बिच कंफ्यूज है, तो उसको टाइम देते है, तब तक हम अपने अपने तरीके से उसके साथ टाइम बिताते है.

संयम : वो कैसे?

वैस्वी : दोनों एक दूसरे की हेल्प करेंगे तो उस से मिलना आसान हो जायेगा, वर्ण न तुजे तेरे घर से इजाजत मिलेगी, न मुझे मेरे घर से, हम दोनों एक दूसरे का नाम ले कर बहार भी निकल सकते है.

संयम : (हस्ते hue)Matlab, तू और में साथ में जायेंगे.

वैस्वी : है मात, एक तो वैसे hi इतनी टेंशन हो रही है, (थोड़ी देर रुक kar)Koi रास्ता निकालेंगे.

संयम : (रेसेस ख़त्म होने की बेल्ल बज gayi)Chal अभी तो क्लास में जाना है. (चलते chalte)Kitna अजीब है न, हम दोनों सहेलिया एक hi लड़के के साथ.

वैस्वी : (वो भी muskurayi)Ajeeb तो है, पर मेने रील्स में भी देखा है, आजकल होता है ये सब.

संयम : सच में? मुझे तो मोबाइल इतना मिलता नहीं.

वैस्वी : है यार, मुझे भी पहले अजीब लगा था की ऐसा कैसे हो सकता है, पर देख, आज हम दोनों उसी मोड़ पर है. (दोनों क्लास में एंटर होनेही वाले थे की सामने से शिव और उसके दोस्त आते दिखे तो वो रुक गयी)

संयम : हो गया तुम लोगो का? (हर्ष की और देख कर)

हर्ष : कभी कभी हमें भी टाइम दे दिया करो, हम दोस्तों को भी टाइम चाहिए होता है.

संयम : तो ले जाना पाने घर, हमने कब मन किया है. क्यों वैस्वी? (कहते हुए वो दोनों है पड़ी)

हर्ष : ये hi नहीं आता है, मेने तो कितनी बार बोलै है. (उतने में टीचर भी आ गए तो हम अंदर चले गए और अपनी अपनी जगह पर बेथ गए, दो पहर में रेसस्स में हम सब साथ में बैठे हुए थे)

महेश : चलो न यार, एक दिन सब पिक्चर चलते है. (हर्ष ने भी कहा)

हर्ष : है यार, मज़े करेंगे.

संयम : मुझे नहीं आने देंगे.

वैस्वी : मुझे भी नहीं आने देंगे.

शिव : मुझे भी बहोत काम है, में भी नहीं आ पाउँगा.

हर्ष : तुजे क्या काम है?, तू तो बोल रहा था की वो नौकरी छोड़ रहा है.

शिव : में नौकरी नहीं करता था. मेरे जो पार्टनर है उनकी साइट थी तो वह काम देखता था, अब दूसरी साइट चालू कर रहे है तो उसका सब देखना है.

हर्ष : तेरा भी अजीब है यार, यहाँ हम लोगो को ये पढ़ाई hi बूज लगती है, उसको करते करते hi दम निकल जाता है और तू है की इतना सब भी करलेता है.

संयम : वो तुम्हारी तरह नहीं है.

हर्ष : तू तो बोल hi मत छिपकली की दम.

संयम : क्या बोलै तुमने (वो घुटनो के बल कड़ी हो गयी और मरने का एक्शन करने lagi)Ek लगाउंगी न तो समाज आएगा.

शिव : तुम लोग लड़ो मात यार. (ये हसी मज़ाक तो अब आम था)

वैस्वी : कोनसा काम चालू कर रहे हो. (उसने बहोत शांति से पूछा)

शिव : वो एक फैक्ट्री का काम है.

महेश : फैक्ट्री का काम है मतलब? क्या करेगा तू?

शिव : हमारी कंपनी एक फैक्ट्री का कंस्ट्रक्शन कर रही है.

महेश : मतलब तुम लोग एक पूरी फैक्ट्री बनाओगे.

संयम : और नहीं तो क्या, तुम्हारी तरह मक्खिया नहीं मर रहा वो. (महेश बोलने वाला hi था पर वो चुप रहा)

शिव : है.

वैस्वी : तो फिर वो रेस?

शिव : वो भी चालू hi है, अभी सायद कुछ दिनों के लिए बहार भी जाना पड़ेगा.

वैस्वी : कितने दिन?

शिव : शायद महीना.

वैस्वी : फिर पढ़ाई?

हर्ष : उसको पढ़ाई की क्या जरुरत है? (संयम बोलनेवाली थी पर शिव ने उसको रोका)

शिव : जरुरत है भाई. (वैस्वी की और देख kar)Dekhte है, पर पढ़ाई भी करनी पड़ेगी hi.

ये रेसस्स भी ख़त्म हो गयी, हम सब क्लास में चले गए. स्कूल से निकलने के बाद जब हम पार्किंग में पहुंचे तो संयम और वैस्वी खड़े थे. वो दोनों कुछ बात कर रही थी, हमे देख कर वो चुप हो गयी, फिर हम अपने अपने घर की और निकल गए. रस्ते में मेने संयम से पूछा,

शिव : ऐसी क्या बात कर रही थी दोनों?

संयम : तुजे क्या, ये हम दोनों की बात है.

शिव : में तो ऐसे hi पूछ रहा था, दोनों बहोत गंभीर थी तो मुझे लगा की कोई प्रॉब्लम है, इस लिए पूछा.

संयम : प्रॉब्लम तो है, पर हम दोनों सुलजालेंगी.

शिव :ऐसी क्या प्रॉब्लम है, मुझे बताओ, में भी कुछ मदद कर दूंगा.

संयम : तू hi प्रॉब्लम है, तू क्या सुलझाएगा?

शिव : में समजा नहीं.

संयम : छोड़ न वो, चल घर चल.

शिव : नहीं चल सकता, मुझे कही जाना है.

संयम : ये तेरा हर वक़्त का नाटक है, थोड़ा भी टाइम नहीं निकल सकता. (उसने रूठते हुए कहा)

शिव : हस्ते हुए, तू थोड़ी देर में मानेगी क्या?

संयम : जब कुछ न मिल रहा हो तो थोड़े से काम चलना पड़ता है. (उसने मायूसी से कहा, में उसका चेहरा मिरर में देख रहा था)

शिव : अच्छा चल आता हु, पर ज्यादा नहीं रुकूंगा.

संयम : (खुस होते hue)Tu चल तो सही. (वो बहोत खुस थी, में उसके घर चला गया, अंदर गए तो आंटी थी, मेने उनको नमस्ते किया, उन्होंने भी हल्का झिझकते हुए नमस्ते kaha)Chal में तुजे वो किताब दे देती हु. (मेने आंटी की और देखा तो वो कुछ नहीं बोली, संयम मुझे खींचते hue)Chal न, कब से कह रहा था की देर हो रही है तो अब देर नहीं हो रही. (आंटी वापस किचन की और मुद गयी, वो मुझे खिंच कर ऊपर ले गयी, जैसे hi हम उसके रूम में गए उसने अपना बैग बिस्तर पर फैका और सीधी मुझसे लिपट ते हुए मुझे किश करने लगी,





मेने भी उसको कमर से पकड़ लिया और उसको किश करने लगा, वो बहोत गरम हो रही थी, अब इतनी गर्म लड़की मुझे किश करेगी तो में कैसे पीछे रहता, मेने अपने हाथ उसकी शर्ट से अंदर डेल और उसके स्तन को ब्रा के ऊपर से hi दबाया.)





उम्मंहहह ुम्मःहःहः ummmhhhh)Wo मेरे होठो को जोर जोर से चाटने लगी) मेने हाथ निचे किये और उसके कूल्हों को पकड़ लिया और मसल दिया, उसने किश तोड़ी और मेरे गले लगी rahi)Shhhhhhh शीइइइइइइइव. मुझसे नहीं रहा जा रहा यार.





शिव : (मेने उसके स्कर्ट हो थोड़ा ऊपर किया और उसकी पंतय के ऊपर से hi उसके कूल्हों को सहलाने laga)Kya हो रहा है जो रहा नहीं जा रहा. (कहते हुए में उसके कूल्हे मसलने लगा)

समयम : शह्ह्ह्ह पतानहीं क्या हो रहा है, मुझे हर पल तुम्हारी याद आती है शह्ह्ह्हह्ह, मेने पहले कभी ऐसा महसूस नहीं किया था शिव शह्ह्हह्ह्ह्ह, जिस दिन से तूने वह छुआ है में रोज़ तुजे याद करती हु.

शिव : (उसके कूल्हों को मसलते hue)Kaha छुआ है?

संयम : वह आगे.

शिव : (उसकी छूट पर हाथ रखते हुए मेने छूट को sehlaya)Yaha?

संयम : शहहहहह हआ शिव वह. (में उसकी छूट सहलाने लगा तो सिसकिया लेने lagi)Shhhhh शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह कितना अच्छा लग रहा है शह्ह्ह्हह्ह. (मेने उसका स्कर्ट ऊपर किया और उसकी छूट को पंतय के ऊपर से hi पकड़ लिया)





शहहहहह शीइइइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह मुझे कुछ हो रहा है सीईव शह्ह्ह्ह करते रहो वह शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (में लगातार उसकी छूट मसलता रहा, वो गर्म गर्म सिसकिया ले रही thi)Ander हाथ डालो न शिव. (मेने भी उसकी पंतय में हाथ दाल दिया, वह छूट के बालो का एहसास हो रहा था, साथ में छूट के नरम होठो का एहसास, मेरा लुंड भी कूदने लगा, मेने दरार में ऊँगली firayi)Shhhhhh शीइइइइव शहहहहह ये क्या हो रहा है मुझे)

निचे ज़ोया रह देख रही थी की वो दोनों कब निचे आये और वो उन्हें सरबत दे, पर थोड़ी देर लग गयी तो उसको कुछ शक हुआ, वो बिना आवाज किये ऊपर जाने lagi)(Waha में संयम की छूट को सेहला रहा था, वो अपनी कमर झटका रही थी, उसने पंत के ऊपर से hi मेरा लुंड पकड़ लिया और उसको दबाने लगी) शह्ह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा है यार. (में लगातार छूट सेहला रहा था, अचानक hi वो झटके कहते हुए झड़ने lagi)Shhhhhh शीइइइइइइव. (बहार ज़ोया पहुंच चुकी थी, उसको समझते देर न लगी की अंदर क्या हो रहा है, उसको गुस्सा आने लगा, वो सोच hi रही थी की अंदर जा कर दोनों को डाट दे)

शिव : शह्ह्ह्ह, तुमने उसको इतना जोरसे क्यों पकड़ा है? छोडो दर्द हो रहा है.

संयम : पता नहीं.... वो मुझे बहोत अच्छा लगता है.... , जिस दिन से उसको देखा है में रोज़ उसको याद करती हु. (अचानक मेरे दिमाग में आया की मेने इसको कब दिखाया)

शिव : तुमने ये कब देखा?

संयम : जब तुम ामी के साथ वो सब कर रहे थे. (संयम मदहोशी में सब सच बोल गयी)

शिव : कब?

संयम : आप के ससुराल में shhhhhhhhhh. (में उसको देखने लगा, मेने छूट से हाथ हटा लिए, उसने आंखे खोली, उसको एहसास हुआ की वो क्या बोल गयी है, वो मुझे देख रही थी और समझने की कोशिस करने लगी की में क्या सोच रहा हु)

शिव : तुम्हे पता था?

संयम : (अपनी गर्दन झुका ke)Haaa.

शिव : तो फिर तुमने क्यों कुछ कहा नहीं.

संयम : (मेरी आँखों में देखते hue)Kya कहती, उस वक़्त तो इतना गुस्सा आया था की मान कर रहा था की सबको बता दू.

शिव : तो फिर बताया क्यों नहीं?

संयम : क्या बताती, अगर बतादेति तो तुम्हारी और अम्मी की hi बेइज्जती होनी थी. नुकसान तो मेरा hi होना था.

शिव : सॉरी यार वो सब हो गया.

संयम : अब सॉरी कहने से क्या फायदा, और अब वो बात पुराणी हो चुकी है, अगर मेने तुम्हे माफ़ न किया होता तो क्या उसके बाद में तुम्हारे साथ होती. (बहार कड़ी ज़ोया की आँखों से ासु बह रहे थे, माँ के तौर पर उसको अपनी बेटी के लिए चिंता थी तो वो ऊपर आयी थी, पर यहाँ मामला उल्टा hi हो गया था, वो खुद गुनेहगार हो चुकी थी, वो वापस लौट hi रही थी की उसके कानो में शिव की बात पड़ी)

शिव : तुमने आंटी से बात की? (ज़ोया जाते जाते रुक गयी)

संयम : उनसे भी क्या बात करती? उनपर भी गुस्सा थी, अब्बू को सब बताना चाहती थी में, पर फिर मेने अम्मी की तड़प महसूस की, भले hi में नादाँ हु पर ित्नीभी नहीं की समाज न सकू, मुझे समाज है की वो क्यों तड़प रही है, कई बार मेने उनकी और अब्बू की लड़ाई सुनी है. शायद वो भी इस मज़े के लिए भावनाओ में बह गयी.

शिव : (मेरी अभी भी समाज में नहीं आ रहा था की जब उसको पता था तो उसने गुस्सा क्यों नहीं kiya)Tumhe उनपर या मुज पर गुस्सा नहीं आ रहा?

संयम : गुस्सा कर के भी क्या हासिल होगा, अब इतना तो समाज सकती हु की तुम वैसे नहीं हो, अगर तुम हवस के पुजारी होते तो यहाँ में तुम्हे इतनी मिन्नतें न कर रही होती, तुम्हे इतने मौके दिए फिर भी तुम दूर न भाग रहे होते, इतना तो समाज में आता है की तुमने कोई जबरदस्ती तो नहीं की होगी, जो भी हुआ है वो तुम दोनों की मर्जी से हुआ है. अगर में उन्हें अम्मी के तौर पर देखु तो गुस्सा आता है, पर फिर लगता है की वो भी एक औरत है, अगर कुछ पल खुसी प् ली तो क्या गुनाह कर दिया उन्होंने.

शिव : (उसको गले लगते hue)Sorry यार. ी ऍम रॉय सॉरी.

संयम : अब सॉरी बोल के क्या फायदा, जो होना था वो तो हो गया.

शिव : अब तू समाज रही है न की में क्यों तुमसे दूर रह रहा हु, मेरी जिंदगी ऐसे hi ुलजी हुई है, में नहीं चाहता की तुम भी उसमे उलझ कर रह जाओ.

संयम : अब बहोत देर हो चुकी है शिव. में उलझ चुकी हु, अब छह कर भी तुम मुझे अलग नहीं कर पाओगे.

शिव : क्या मतलब है तुम्हारा?

संयम : छोडो न ये सब, पता नहीं कैसे मेरे मुँह से निकल गया, अच्छा खासा मूड ख़राब हो गया.

शिव : क्या चाहती थी तुम? (मेने मुस्कुराते हुए उसकी लग हटते हुए कहा)

संयम : सब कुछ.

शिव : सॉरी डिअर, पर वो सब में अभी तुम्हे नहीं दे सकता.

संयम : क्यों?

शिव : इतना तो में समाज गया हु की तुम समझदार हो, सब कुछ सोच समाज कर कर रही हो, पर फिर भी अभी कुछ और वक़्त दो अपने आप को, और मुझे भी.

संयम : यही तुम गलती कर रहे हो, समझदार होने से कुछ नहीं होता, क्या अम्मी समझदार नहीं है, फिर भी उन्होंने गलती कर दी न, वैसे तो तुम भी समाज दर हो, फिर भी गलती करते hi हो न. (अब यहाँ रुकना ज़ोया को सही नहीं लगा, वो बिना कोई आवाज किये अपने कमरे में लौट गयी, पर ासु नहीं थम रहे थे उसके)

शिव : अब में चलता हु.

संयम : (उसका शर्ट पकड़ ते hue)Thodi देर रुक जाओ न.

शिव : निचे आंटी है, वो क्या सोचेगी.

संयम : अभी भी तुम्हे उनकी फ़िक्र है? अगर वो मुझे कुछ कहेंगी तो क्या में चुप रहूंगी?

शिव : पागल मात बनो, अगर उन्हें पता चला की तुम जानती हो तो वो अपनी hi नजर में गिर जाएँगी, मेहरबानी कर के उन्हें कुछ मात बताना.

संयम : उसमे मेरा क्या फायदा. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : मर जाएगी, देखा है न तुमने मेरा?

संयम : जा जा, किसी और को डरना, में नहीं डरनेवाली. (उसने भी इतराते हुए कहा)

शिव : अजीब हो तुम भी, पर सच में बहोत प्यारी हो.

संयम : अगर इतनी hi प्यारी लगती तो सिर्फ मुझसे प्यार करते, इसलिए मक्खन मात लगाओ. मुझे सब समाज आ रहा है. में और वैस्वी तुम्हारी hi बात कर रहे थे स्कूल में. कैसे तुम हम दोनों को उल्लू बना रहे हो.

शिव : अगर पता है की में उल्लू बना रहा हु तो फिर भगा क्यों नहीं देती मुझे.

संयम : यही तो प्रॉब्लम है, दिमाग सब समझता है पर ये दिल नहीं मान रहा.

शिव : तुमलोगो को समजना नामुमकिन है. चल अब में चलता हु.

संयम : फिर कब मिलेगा? (उसका शर्ट खींचते हुए)

शिव : मिलूंगा, पर इतना hi, समाज रही हो न?

संयम : वो में देखलूँगी. (उसने सरारती मुस्कान से कहा) वैसे वो भी तड़प रही है तुजसे मिलने के लिए.

शिव : कोण?

संयम : वैस्वी और कौन, वो तुजसे अकेले में मिलना चाहती है, मेरी मदद मांग रही थी.

शिव : तो तूने क्या कहा?

संयम : और क्या कहती, मदद करने का वडा कर दिया. (वो मुस्कुराते हुए boli)Wo भी तड़प hi रही है.

शिव : न मुमकिन है, सच में. (मेने शिर हिलाया)

संयम : जाते जाते एक किस तो करता जा, कुछ सुकून मिलेगा दिल को. (मेने उसकी आँखों में देखा, वह सिर्फ प्यार hi था, में झुकता चला गया और उसके नरम होठो को किश किया)

शिव : (थोड़ी देर baad)Chal अब. (हम दोनों निचे आये, आंटी नहीं दिखी हमे)

संयम : अम्मीईईई. (ज़ोया ने अपने ासु पोछे और बोली)

ज़ोया : है बेटीइ.

संयम : अम्मीय शिव जा रहा है.

ज़ोया : (वो अपने रूम से बहार नहीं aayi)Ha ठीक है.

संयम : (उसने अपने कंधे उंचकाये)

शिव : ठीक है, bye.

में वह से निकल गया, मेरे दिमाग में संयम की बात घूम रही थी, उलझने बढ़ती hi जा रही थी. में घर पहुंच गया, मेरे घर पर भी काम चल रहा था तो थोड़ी देर वह देखा, फिर खाना खाया. मेने जहान्वी को भी मश्ग कर दिया की क्या हुआ?. तो उसका रिप्लाई भी आ गया की उनके ऑफिस आ जाऊ. मेने लता को बोलै और वह से निकल गया.



 
अपडेट 207

शिव चला गया था, संयम उसको जाता हुआ देख रही थी, जब वो चला गया तो उसने दरवाजा बंद किया और अपनी आजमी को आवाज दी

संयम : ामीईई, भूख लगी है, कहा हो आप? (उसकी आवाज पर भी उसकी अम्मी ने कोई जवाब न दिया तो उसको आश्चर्य hua,wo अपनी ामी को ढूंढते हुए उनके रूम में गयी तो उसकी अम्मी अपने आपको सही कर रही थी और कड़ी हो रही थी, वो अपनी अम्मी को देख कर थोड़ा चौंक गयी) क्या हुआ अम्मी?

ज़ोया : क कुछ नहीं. (अपने आपको सँभालते हुए)

संयम : आप रो रही थी?

ज़ोया : नहीं तो.

संयम : क्यों जूथ बोल रही हो अम्मी, क्या हुआ?

ज़ोया : कुछ नहीं हुआ, बस तबियत थोड़ी ख़राब है.

संयम : (उनके माथे पर हाथ रखते hue)Bukhar तो नहीं है.

ज़ोया : तू छोड़ वो सब, जा खा ले, खाना बना हुआ hi है.

संयम : आप नहीं खायेगी?

ज़ोया : नहीं, तू खा ले?

संयम : (उसकी अम्मी उस से नज़ारे चुरा रही थी जो की अजीब बात thi)Kya हुआ अम्मी, कुछ हुआ है क्या?

ज़ोया : कुछ नहीं हुआ है, तू खा ले.

संयम : आप नहीं खाओगी तो में भी नहीं खाउंगी.

ज़ोया : क्यों ज़िद कर रही है, अब तू छोटी बच्ची नहीं है.

संयम : वो मुझे पता है, इसलिए समाज रही हु की आप को कोई परेशानी है.

ज़ोया : (संयम को देखने लगी, उसकी आँखों में फिर ासु चालक आये, संयम फ़ौरन अपनी अम्मी के गले लग गयी)

संयम : क्या हुआ अम्मी, आप क्यों रो रही हो?

ज़ोया : (भराये गले se)Muje मुआफ़ कर दे, में अच्छी अम्मी नहीं हु.

संयम : ये क्या कह रही हो आप, आप दुनिया की बेस्ट अम्मी हो.

ज़ोया : नहीं में अच्छी नहीं हु.

संयम : (उसको कुछ अजीब लगा, वो दर भी गयी की कही उसकी अम्मी ने उसकी और शिव की बात सुन तो नहीं ली) नहीं अम्मी, आप बेस्ट हो, आप रोइये मात. आप बेस्ट हो और हमेसा रहोगी. (दोनों समाज रही थी की किस बारे में बात हो रही है पर दोनों hi उस बात को अपने मुँह से नहीं कह सकती थी, दोनों के बिच एक मर्यादा thi)Ammi प्लीज, आप रोइये मात, चलिए खाना कहते है, मुझे बहोत भूख लगी है.

ज़ोया : तो खा ले न, मेरा मान नहीं है.

संयम : नहीं अम्मी, में आपके साथ hi खाउंगी.

ज़ोया : क्यों जिद कर रही है.

संयम : आप जो भी संजो, में अपनी अम्मी के बगैर नहीं खाउंगी, मतलब नहीं खाउंगी. (कहते हुए उसने अपनी अम्मी के गाल पर चुम्मी ले ली)

ज़ोया : (वो अपनी बेटी का प्यार महसूस कर रही थी, वो जानती थी की उसकी बेटी को उसके बारे में सब पता है फिर भी वो उस से प्यार जाता रही थी, और ये उसके लिए बहोत बड़ी रहत थी, उसने भी अपनी बेटी का माथा चूमा और kaha)Tu सच में बड़ी हो गयी है मेरी बच्ची.

संयम : (मुस्कुराते hue)Hai न, पर वो बुद्धू मुझे छोटी hi कहता है.

ज़ोया : (वो जानती थी की वो किसके बारे में बात कर रही hai)Wo समाज दर है, वो जनता है इसीलिए कह रहा है.

संयम : (रूठने का नाटक करते hue)Aap हमेसा उसकी hi साइड लेती हो, आप मेरी ामी हो की उसकी? (उसने मुँह फूलते हुए कहा)

ज़ोया : अब ज्यादा नौटंकी मात कर, चल साथ में कहते है.

संयम : (अपनी माँ की आँखों में देखते hue)ammi आप सबसे बेस्ट हो, और में ये दिल से कह रही हु, आप अपने मान में कोई गिला सिकवा मात रखिये. (कहते हुए वो उनके गले लग गयी, दोनों माँ बेटी प्यार से एक दूसरे से गले लगी, दोनों अपनी अपनी मर्यादा में थी, पर दोनों समाज रही थी, फिर दोनों साथ में खाने बेथ गयी, दोनों ने उस बारे में कोई भी बात नहीं की)

में कमलनाथजी के ऑफिस पहुंच गया, जब में अंदर गया तो वो और जहान्वी hi बैठे हुए थे.

शिव : नमस्ते सर.

कमलनाथ : (उसने शिव को देखा और फिर जहान्वी को तो जहान्वी ने नज़ारे झुका ली, वो समाज गया की जहान्वी ने hi उसको बुलाया hai)Namaste, आओ. (में अंदर गया और वही खड़ा रहा, कमलनाथ ने मुझे देखा और हलके से मुस्कुराये और bole)Betho. (में बेथ गया) कहो.

शिव : सर मुझे जहान्वी मैडम के लिए बात करनी थी.

कमलनाथ : (वो जनता था पर फिर भी bola)Bolo.

शिव : सर, मुझे पता है में आपके सामने बहोत छोटा हु, पर फिर भी में कहूंगा, आप जानते hi है की पवनसीर एक प्रोजेक्ट चालू कर रहे है, हमे जहान्वी जी की जरुरत है, अगर आप इजाजत दे तो.

कमलनाथ : तुम्हे क्यों लगता है की मुझे इजाजत देनी चाहिए, वैसे भी वो मेरा प्रोजेक्ट था, जो तुमने हथिया लिया है.

शिव : सर, छोटा मुँह बड़ी बात होगी, आप बरसो से इस बिज़नेस में है, आपने भी कई प्रोजेक्ट किये होंगे, और वो प्रोजेक्ट कई लोग हासिल करना चाहते होंगे, तो क्या आपने वो हथिया लिए थे, नहीं, जिसका भी प्रोजेक्ट हो उन्हें आप सही लगे होंगे तभी तो वो प्रोजेक्ट आपको मिले थे, इस बार शायद पवनसीर वो डेसेर्व करते थे, और आगे हो सकता है की उन्हें न मिल कर आपको भी कई प्रोजेक्ट मिलेंगे, ये बुसिनेस्स है, ये सब चलता रहता है.

कमलनाथ : बाटे तो बड़ी बड़ी करना सिख गए हो. पर मेरी बेटी ये काम नहीं करेगी.

शिव : (मेने एक बार झन्वीजी को dekha)Jaisa आप चाहोगे वैसा hi होगा, पर एक बार अपनी बेटी से भी पुछलीजियेगा, में जनता हु की आप उनके पिता है और उनके अच्छे बुरे से आप परिचित है, वो एक काबिल लड़की है, पर कल को वो जब भी मार्किट में जाएँगी तो लोग यही कहेंगे की उन्होंने जो भी काम किये है वो अपने पापा की फर्म में किये है, उनकी काबिलियत के दम पर नहीं. ये उनके लिए भी एक बड़ा मौका होगा अपने आपको साबित करने का, ये प्रोजेक्ट उनके करियर का एक माइलस्टोन हो सकता है, फिर जैसी आगे आपकी मर्जी. ये काम नहीं करेंगी तो कोई और करेगा, ये तो आप भी जानते है, किसी की वजह से कोई काम नहीं रुकता, न मेरी वजह से , न झन्वीजी की वजह से और न hi आपकी वजह से, काम तो चलता hi रहता hai,ye हमें तय करना है की आयी हुई ओप्पोर्तुनिटी को कैसे उसे करना है. है अगर आप चाहे तो हम काम करने की कंडीशन पर भी जरूर चर्चा कर सकते है, आपको अगर में छोटा लगता हु तो पवनसीर भी आपसे बात कर सकते है, आप बड़े है, तजुर्बेकार है, जैसा आप निर्णय लेंगे हमे वो मंजूर होगा, थैंक यू की आपने मेरी बात सुनी. में चलता हु, हैवे गुड डे सर. हैवे ा गुड डे मैडम. (में वह से बहार चला गया, में मायूस था की उन्होंने जहान्वी जी को मन कर दिया, अगर वो हमारे साथ काम करती तो हमे भी बहोत फायदा होता, पर क्या करसकते है.)

में घर पहुंच गया, काम तो मेरे वह भी चल रहा था, आज पवन सर भी आये थे देखने, मेने उन्हें भी कहा की मेरी कमलनाथजी से क्या बात हुई थी, उन्होंने कहा की देखते है, उनके भी कई कॉन्टेक्ट्स थे तो वो उन्हें काम देंगे. शाम को में बीनमदं के घर चला गया, वह से जूही को ले कर स्टेडियम चला गया.

रात को खाने के बाद मेने पढ़ाई की, पढ़ने के बाद सोने से पहले में बाथरूम गया, जब बहार निकला तो विणा को आते हुए देखा, शायद वो भी बाथरूम hi आ रही थी, मुझे देख कर वो मुस्कुरायी.

शिव : हो गयी पढ़ाई?

विणा : हम्म्म.

शिव : रंजन?

विणा : वो सो गयी.

शिव : अच्छा ठीक है, गुड नाईट. (कहते हुए में जाने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, मेने उसको देखा तो वो मुझे hi देख रही thi)Kya हुआ? (उसने ना में गर्दन हिलायी, पर उसके हावभाव कुछ और hi कह रहे थे, में समाज रहा था, मेने आस पास देखा तो और कोई भी नहीं था, में उसको ले कर फिर बाथरूम में घुस गया, दीवाल से लगा कर उसको देखने लगा तो वो मुझसे लिपग गयी, मेने भी उसको गले से लगाया और उसकी पीठ पर हाथ घुमाया, फिर उसकी आँखों में देखते हुए bola)Kya हुआ, कुछ चाहिए? (उसने ना में गर्दन हिलायी, में झुका और उसके होठो को चूमने लगा, वो भी मुझे चूमने लगी, थोड़ी देर बाद मेने उसको छोड़ा और उसकी आँखों में dekha)Me जनता हु तुम क्या चाहती हो, पर अगर इन सब में रहोगी तो पढ़ाई में ध्यान नहीं रहे गए.

विणा : मेरे लिए इतना hi बहोत है शिव, में सब समझती हु, बस तुमसे इस तरह से मिलने का मान हुआ था, और कुछ नहीं.

शिव : में जनता हु तुम समाज दर हो, और ऐसा भी नहीं है की तुम्हे देख कर मेरा मान नहीं हुआ, तुम महसूस कर रही हो न? (मेरा खड़ा लुंड उसको चूब रहा होगा इसका मुझे एहसास था, वो भी शर्मा gayi)Fir भी में अपने आपको कण्ट्रोल कर रहा हु, में भी समझता हु की ये जवानी बहकती है, पर हमे सयम रखना चाहिए, समाज रही हो न मेरी बात.

विणा : मेने कहा न की मुझे बस इतना hi चाहिए था, जब ज्यादा जरुरत होगी तो में खुद मांग लुंगी, और मुझे पता है की तुम मुझे मन नहीं करोगे. (उसने बहोत प्यार से कहा)

शिव : (उसके गाल पर किश कर ke)Kabhi मन नहीं करूँगा. (वो भी muskurayi)Thik है में चलता हु, तुम्हे भी लगी होगी. (मेने मज़ाक किया, वो भी मुस्कुरायी)

विणा : (शरमाते हुए boli)Tumhe वो आवाज पसंद है न, (में उसको देखने laga)Me जानती हु तुम सुनते थे. (उसने शरमाते हुए कहा) रुक जाओ थोड़ी देर अगर चाहो तो देख भी सकते ho(Usne नज़ारे झुकाते हुए शर्मा कर कहा).

शिव : पागल, अगर में रुक गया न तो फिर सब हो जायेगा, इतना भी कण्ट्रोल नहीं है मुजमे. (उसके माथे को चुम kar)Good नाईट.

विणा : गुड नाईट. (शिव बहार चला गया, उसने अपनी चड्डी निचे की और मूतने बेथ गई, वो शिव के बारे में hi सोच रही थी, उसको भी अच्छा लगा की शिव उसका ख्याल करता है, जब वो बहार आयी तो शिव नहीं था वह, वो मुस्कुरायी और अपने कमरे में चली गयी)

सुबह उठ कर में अपने रूटीन में लग गया. दौड़ना कितना जरुरी था मेरे लिए अब में ये अच्छी तरह समझता था, तो उसमे कोई भी ढील नहीं देना चाहता था. वह से आने के बाद में स्कूल के लिए निकल गया. वैसे भी में स्कूल अकेले hi पंहुचा था, बड़ी रेसस्स में हर्ष और महेश किसी लड़की के पीछे जानेवाले थे तो में नहीं गया और वैस्वी और संयम का इंतजार करने लगा, पर वैस्वी अकेले hi बहार आयी, वो मेरे पास आयी.

शिव : (दरवाजे की और देखते हुए) संयम?

वैस्वी : वो कुछ काम कर रही है तो नहीं आ रही.

शिव : ऐसा क्या काम कर रही है?

वैस्वी : उसका थोड़ा लिखना बाकि रह गया है तो वो वही लिख रही है.

शिव : ओह!

वैस्वी : क्यों उसके बगैर नहीं आओगे? (उसने अपने तीखे नैन मुज पर डालते हुए कहा.

शिव : (मुस्कुराते hue)Chalo.

वैस्वी : पहले मुझे बाथरूम जाना है. (उसने सामान्यतः hi कहा)

शिव : तो जा आओ.

वैस्वी : तुम भी chalo.(wo चलने लगी तो में भी उसके साथ चलने लगा, कितनी आसानी से वो मुझे ये सब भी बता रही थी, वैसे भी हम दोनों के बिच बहोत कुछ हो चूका था तो मुझे भी कोई आश्चर्य नहीं हुआ. हम बाथरूम के नजदीक पहुंच गए तो वो boli)Agar तुम्हे भी जाना है तो जा आओ, फिर वह पीछे मेरा वेट करना. (उसने जिस दिशा में इस्सर किया था में उसके िर्रादे समाज गया)

शिव : वह जाना ठीक नहीं है, कोई भी आ सकता है. (मेने उसको चेताया)

वैस्वी : मेने कहा न, वह वेट करना. (कह कर वो चली गयी, में भी जल्दी से फ्रेश हुआ और पीछे चला गया, थोड़ी hi देर में वैस्वी वह आ गयी, उसने एक बार मुझे देखा, उसकी आँखों में शर्म थी पर वो थोड़ा आगे चली गयी, में भी उसके पीछे पीछे चला गया, वो दीवाल का सहारा ले कर कड़ी हो गयी, में उसके पास गया)

शिव : यहाँ क्यों बुलाया?

वैस्वी : खाना बना न है. (उसने मुँह टेढ़ा करते हुए कहा, मुझे हसी आ गयी).

शिव : पागल. (वो मेरे गले लग गयी, और मुझे कास के पकड़ लिया, मेने भी उसकी पीठ को सहलाया, पता नहीं पर उसके ऐसे गले लगते hi मेरे लुंड ने अकड़ना सुरु कर दिया, एक मिनट हम वैसे hi rahe)Ye खतरनाक है.

वैस्वी : मुझे पता है, पर में क्या करू, कब मिलु तुमसे?

शिव : में समझता हु, पर ये जगह ठीक नहीं है, अगर किसी ने देख लिए तो दिक्कत हो जाएगी.

वैस्वी : तुम कुछ नहीं समझते, तुम्हे पता भी है की मेरी क्या हालत है. (उसने मुझे कस्ते हुए कहा)

शिव : (में समाज रहा था, पर फिर भी मेने kaha)Kyu ऐसा क्या हो गया?

वैस्वी : देखा, नहीं समझते न कुछ.

शिव : में सब समझता हु.

वैस्वी : कुछ नहीं समझते तुम, तुम्हे पता भी है में कितनी बेचैन रहती हु, हर पल तुम्हारा hi ख्याल रहता है, हर वक़्त तुम्हे hi याद करती हु में. (मेने उसका शिर ऊपर किया, वो सचमे बेचैन थी, उसके होठ कैंप रहे थे, में झुका और उसके होठो को चूसने लगा, वो और मुझसे चिपकने लगी और मेरी पीठ पर अपने नाख़ून गढ़ने लगी, मेरे भी हाथ उसके गुंडाज कूल्हों पर चले गए, और मेने उसके कूल्हों को सहलाया, उसने किश तोड़ी और मेरे गले लग gayi)Shhhhhh,I लव यू शिव. प्लीज लव में.

शिव : ये वक़्त और जगह सही नहीं है वैसु. (में भी मदहोश होनेलगा था पर मेने ककुद को कण्ट्रोल किया)

वैस्वी : में जानती हु, तुम्ही बताओ में क्या करू?

शिव : थोड़ा सबर करो. (मेने उसको थोड़ा ढीला छोड़ दिया, वो मुझे देखने lagi)Abhi यहाँ से चलो, में तुम्हारी बदनामी नहीं देख पाउँगा. (वो फिर से मेरे गले लग गयी)

वैस्वी : ी लवाए यू माय लव.

शिव : लव यू तू. अब चलो यहाँ से.

वैस्वी : पहले तुम जाओ, सब ठीक हो तो मुझे िःस्सारा करना. (मेने वैसे hi किया, जब में अंदर गया तो दो लड़किया कड़ी थी, उन्होंने मुझे देखा, में मुस्कुराया तो वो भी मुस्कुरायी और फिर बाथरूम में चली गयी, मेने तुरंत वैस्वी को इस्सर किया तो वो आ गयी और जल्दी जल्दी से अंदर की और चली गयी, में भी अस्स पास देखते हुए अंदर चला गया.

एक लड़की : (दोनों अंदर से झांक रही thi)Dekha, मेने कहा था न की इन दोनों का कुछ चल रहा है.

दूसरी लड़की : है, कितनी लकी है न वैस्वी. कस वो मेरा बॉयफ्रेंड होता.

पहली लड़की : अगर इतनी ची छूट में चल है तो इस्सर कर ले, आ जायेगा वो, वैसे भी लड़के हमेसा तैयार hi रहते है.

दूसरी लड़की : हैट गन्दी, ऐसे थोड़ी न, अगर वो मेरा बॉयफ्रेंड बने तब बात बने.

पहली : वो तो होने से रहा, वैस्वी और संयम दोनों कितनी खूबसूरत है, वो क्यों तुम्हे देखेगा. और वैसे भी तू उसका ले नहीं पायेगी, अगर वो इतना लम्बा है तो उसका लुंड भी कितना लम्बा होगा, तेरे जैसी तो ले कर hi मर जाएगी.

दूसरी : तू कितनी गन्दी हो गयी hai,kaisi कैसी बात करती है, लगता है तेरे बॉयफ्रेंड को सब दे चुकी है तू.

पहली : और क्या, वैसे भी उसका चौथा नंबर hai(Kehte हुए वो मुस्कुरायी)

उन्दोनो की ऐसी बाटे चल रही थी, में और वैसी वापस गार्डन में आ गए, थोड़ी hi देर में बेल्ल बज गयी तो हम दोनों वापस क्लास में चले गए. में अपनी जगह पर बेथ गया, वो दोनों उस लड़की की बात कर रहे थे जिसके पीछे वो गए थे, मेरी नजर वैस्वी पर थी, वो और संयम कुछ घुस पुस कर रहे थे, और मुस्कुरा रहे थे, मुझे लगा की वो कोई और बात कर रहे होंगे, क्यों की वो दोनों मेरे बारे में तो बात कर नहीं सकते, संयम भी मेरे बारे में क्या सोचती है वो मुझे पता था, तो दोनों एक दूसरे को तो ये नहीं बताएँगे की उनका और मेरा क्या सम्बन्ध है. टीचर भी आ गए और फिर पढ़ना सुरु हो गया. स्कूल छूटने के बाद हम मिले, संयम मेरे पीछे बेथ गयी और हम भी निकल गए, वैस्वी ने भी प्यारी सी स्माइल दी मुझे. संयम कुछ ज्यादा hi चिपक रही थी.

शिव : ठीक से बैठो, रस्ते पर है हम.

संयम : क्या रोज रोज टोकते रहते हो, मुझे पता है. (फिर वो थोड़ी देर रुकी) मुझे घर hi छोड़ने आना.

शिव : क्यों?

संयम :इस बहाने थोड़ी देर मेरे साथ....

शिव : पागल है तू, किसी दिन आंटी ने देख लिया न तो पता चलेगा.

संयम : (वो मान में मुस्कुरायी, और मान में hi boli)Tumhe क्या पता, उन्हें तो आलरेडी पता चल गया है, भले मुझे कन्फर्म नहीं है पर लगता तो ऐसा hi है, और उन्होंने मुझे कुछ कहा भी नहीं, क्या कहेगी वो खुद भी to....sochte हुए वो मुस्कुराने लगी)

शिव : अब मुस्कुरा क्यों रही हो?

संयम : मेरी मर्जी, अब मुस्कुराओ भी तुम्हे पूछ कर? (उसने शिव के पेट पर अपने नाख़ून गढ़ाए और हसने लगी, में कुछ नहीं bola)Chal रहा है न?

शिव : (वैसे भी में नहीं जा सकता tha)Nahi संयम, आज nahi,aaj मुझे थोड़ा काम है, तुजे पता है न मेरे वह भी काम चल रहा है.

संयम : ठीक है, कल आना.

शिव : तू भी न बहोत बेशर्म हो गयी है.

संयम : क्यों तुजे अच्छी नहीं लगती? (उसका घर आ गया तो मेने बाइक रोक दी, वो उतर gayi)Jawab नहीं दिया?

शिव : बहोत अच्छी लगती है, बस.

संयम : (मुस्कुराते hue)To फिर आएगा न?

शिव : तू जा अभी, मुझे जाना है. (कहते हुए में वह से निकल गया, संयम भी मुस्कुराती हुई अपने घर की और निकल गयी)

में घर पहुंच गया और खाना खाया, फिर मेरे वह का काम देखने लगा, निचे का बेस तैयार हो चूका था और पिलर भरने के लिए ढांचे बनाये जा रहे थे, तो लड़कीअ नहीं आयी थी, सिर्फ कुछ लड़के hi थे. तभी मुझे जहान्वी का फ़ोन आया.

शिव : Hello?

जहान्वी : (मायूस आवाज me)Kaha हो?

शिव : घर पर hi हु, क्या हुआ?

जहान्वी : में साइट पर हु, आ सकते हो?

शिव : (उनकी मायूस आवाज सुन कर मेने puchha)Aise क्यों बात कर रही हो, कुछ हुआ है?

जहान्वी : तुम आओ, फिर बात करते है.

शिव : ठीक है, आता हु. (मेरी समाज में नहीं आ रहा था, पर वो मायूस लग रही थी, शायद उनके पापा नहीं मने थे तो उसकी वजह से वो मायूस थी, मेने अंदर बतादिया और वह से बाइक ले कर निकल गया, साइट पर पंहुचा तो वह जहान्वी की गाड़ी पड़ी हुई थी, में सीधे ऑफिस में गया वो कुर्शी पर बैठी हुई thi,jaise hi मुज पर नजर पड़ी वो कड़ी हुई और उछलती हुई मेरे गले लग गयी, मेरी समाज में नहीं आ रहा था तो में वैसे hi खड़ा रहा, है बस उनके कंधे को पकड़ कर उन्हें हल्का सा आगोश में लिया पर वो कास के मेरे गले लग गयी थी) (गले लगने के बाद जहान्वी को एहसास हुआ की उसने क्या कर दिया है तो वो थोड़ी दूर हुई, पर शिव से नज़ारे बचने lagi)(Meri तो कुछ समाज में नहीं आ रहा था तो मेने puchha)Kya हुआ?

जहान्वी : वो पापा मान गए.

शिव : (ये सुन कर सचमे मुझे भी बहोत अच्छा लगा तो मेने उन्हें गले लगा liya)(Jhanvi अब शर्मा रही थी, उसको शिव के साथ ऐसे अच्छा भी लग रहा था, पर अभी भी उसके दिमाग से वो बात निकली नहीं थी की वो किसी और के साथ भी hai)(Mene उन्हें छोड़ा और puchha)wo तो मन कर रहे थे, फिर कैसे उन्होंने है कर दी?

जहान्वी : बताती हु (कहते हुए वो कुर्शी पर बेथ गयी, में भी सामने बेथ gaya)Tumhare जाने के बाद मेरी और पापा की काफी देर बहेश हुई, तुमने जो जो कहा था उस से मुझे भी अपने लिए बोलने में मदद मिली थी, उस टाइम तो वो फिर भी नहीं मने थे, पर में उदास हो गयी थी, जब भी वो मुझसे बात करने आते, मेरा बस एक hi सवाल होता की क्यों नहीं? इतनी बहेश के बाद आखिर कर वो मान गए, उन्होंने कल रात hi है करदी थी पर में तुम्हे मिल कर hi बताना चाहती थी. (उसके चेहरे पर खुसी समां नहीं रही थी)

शिव : पर आपकी आवाज से तो लग रहा था की आप उदास ho?(Uske चेहरे पर एक नटखट स्माइल आ gayi)Oh! तो आप नाटक कर रही थी. (उसकी स्माइल और गहरी हो गयी)

जहान्वी : में जान न चाहती थी की तुम्हे भी खुसी है या नहीं है, और ये भी की अगर में न आ पाव तो तुम्हे भी दुःख है की नहीं?

शिव : (मुस्कुराते hue)To क्या जाना आपने?

जहान्वी : मुझे जो जान न था वो पता चल गया. (कहते हुए वो निचे देख कर मुस्कुराने लगी)

शिव : चलो अच्छा है, आपको जो जान न था वो आपको पता चल गया और मुझे जो चाहिए था वो मुझे भी मिल गया. (मेने मुस्कुराते हुए कहा)

जहान्वी : तुम्हे क्या चाहिए था? (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : आप. (मेरे ऐसा कहने पर वो हलकी सी शर्मा गयी, मेने अपना वाक़्या स्पस्ट kiya)Mera मतलब है की आप का काम में साथ. अब आप विलायत से पढ़ कर आयी है तो हम भी तो उसका फायदा ले. (मेने मुस्कुरा कर कहा)

जहान्वी : (वो सब समाज रही थी की शिव क्या कह रहा है, पर फिर भी उसने वो भी अपने मुताबित hi लिया की उसको में चाहिए, वो मान hi मान मुस्कुराने लगी)

शिव : चलिए, अच्छा है, अब आप जुड़ hi गयी है तो चलिए उस साइट पर भी चलते है, और पवनसीर भी वही है, उनसे भी बात हो जाएगी. (जहान्वी को और वक़्त बिताना था पर वो कैसे कहती, उसने खुद hi मन कर दिया था तो अब वो भी आगे नहीं बढ़ सकती थी)

जहान्वी : ठीक है.

हम दोनों वह से निकल गए, उन्होंने कार नहीं ली और खुद hi मेरे पीछे बेथ गयी, में साइट पर ले आया, वह काम चल रहा था, कुछ मशीन गड्ढे खोद रही थी, मेने दूर बाइक पार्क की और चलते हुए हम दोनों वह पहुंच गए जहा पवनसीर खड़े थे.

पवनसीर : (हम दोनों को देख kar)Aao जहान्वी, आज इस तरफ? (वो जनता था की कमलनाथ ने मन कर दिया था)

शिव : ये अब हमारे साथ काम करेगी?

पवनसीर : क्या? सच में! (जहान्वी ने मुस्कुरा कर है कहा) मोस्ट वेलकम, पर कमलनाथजी तो मन कर रहे थे?

जहान्वी : वो मान गए है, आप एक बार उनसे मिल लेना.

पवनसीर : जरूर मिल लूंगा. चलो अच्छा है. में तुम्हे इस साइट के बारे में बता देता हु. (कहते हुए वो मुझे और उन्हें सब समजने लगे, काफी देर तक उनकी बात चली, में और जहान्वी सब सुन रहे थे, काफी कुछ मुझे पता भी था, पर में शांति से सुन रहा था, उन्होंने बात ख़तम की).

जहान्वी : बढ़िया प्रोजेक्ट है, काम करने में मज़ा आएगा.

पवनसीर : थॉट्स गुड, अगर आपको अपने काम में मज़ा आये तो काम भी अच्छे से होता है, हम तो ज्यादा मिले नहीं पर शिव सही था, तुम सच में काबिल हो. (जहान्वी ने प्यार से शिव की और देखा) पर एक बात है की ये यहाँ ज्यादा टाइम नहीं दे पायेगा, तुम तो जानती hi होगी. (जहान्वी ने हां कहा) आओ चाय पिटे है, ओह सॉरी, तुम तो कॉफ़ी पीती हो न? (जहान्वी फिर मुस्कुरायी) (हम सब एक टेंट के निचे आके बेथ गए, जो की टेम्पररी बनाया गया था. हमने कॉफ़ी पि और थोड़ी और बाते हुई, वो बैठे थे तो में जो काम चल रहा था वह देखने चला गया, अब पवनसीर और जहान्वी दोनों hi थे, जहान्वी की नजर शिव की और थी, अचानक उसके मुँह से निकला)

जहान्वी : एक बात पुछु पवनजी?

पवनसीर : (मुस्कुराते hue)Me जनता हु तुम क्या पूछना चाहती हो? (जहान्वी सवालिया नजरो से पवन को देखने लगी) तुम यही जान न चाहती हो न की मेने इसे अपना पार्टनर क्यों बनाया? (जहान्वी थोड़ी झेप भी गयी, पर उसने हां में गार्डन हिलायी)

पवनसीर : उसकी वजह है, पर पहले मेरे सवालो का जवाब दो, अगर तुम कोई प्रोजेक्ट सुरु कर रही होती तो क्या तुम इसको अपने साथ रखना पसंद करती? (जहान्वी थोड़ी शर्मा सी गयी, और हल्का सा मुस्कुरायी भी) वो है hi ऐसा, ईमानदार है, काम भी जल्दी सिख जाता है, उस पर भरोसा कर सकते है, और इस प्रोजेक्ट का मेरे हाथ में होने की वजह भी वो hi है, वो मुझे अपने छोटे भाई जैसा लगता है. (जहान्वी फिर मुस्कुरायी) तो तुम्हे अपने सावल का जवाब मिल गया? (जहान्वी ने हां में गर्दन हिलायी)

जहान्वी : जी सर.

उसके बाद हम वह से निकल आये, मेने जहान्वी को उनकी साइट पर छोड़ा, उन्होंने अपनी कार ली और घर की और निकल गयी, में अपने घर की और निकल गया. शाम को में अपनी प्रक्टिसे के लिए निकल गया. शाम को में पुलिस स्टेशन गया, पर भार्गवी मैडम नहीं थी वह, मेने पूछा तो पता चला की वो घर पर है तो में घर पर चला गया, मेने बेल्ल बजायी तो उन्होंने hi दरवाजा खोला.

भार्गवी : शीइइइइव. (उनकी आवाज में खुसी और आश्चर्य दोनों the)What ा प्लेसंट सरप्राइज!

शिव : है न. (में भी मुस्कुराते हुए अंदर आ गया) कैसी हो आप?

भार्गवी : अच्छी हु, तुम कैसे हो?

शिव : देख लीजिये. (उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया था तो मेने अपनी बहे फैलते हुए कहा, वो भी मुस्कुराती हुई मेरी बहो में आ गयी, मेने उन्हें कास के पकड़ लिया, उनके गले पर किश करते hue)Muje याद कर रही थी.

भार्गवी : है भी और ना भी. (मेने उनको थोड़ा दूर किया और उनकी आँखों में देखते हुए कहा)

शिव : में समजा नहीं.

भार्गवी : याद तो करती हु, पर आज कल बहोत बिजी भी हु. (वो नाईट ड्रेस में hi थी, मतलब लेहंगा और ढीला शर्ट)

शिव : ऐसा क्या करती हो?

भार्गवी : पुलिस स्टेशन का तो काम रहता hi है, साथ में एक एग्जाम की भी तयारी कर रही हु.

शिव : अब कैसी एग्जाम?

भार्गवी : तरक्की के लिए.

शिव : (टेबल पर पड़ी किताब को देखते hue)Oh तो मेने आपको डिस्टर्ब कर दिया.

भार्गवी : ऑफ़ कोर्स नॉट डार्लिंग, यू अरे ऑलवेज वेलकम इन माय हाउस. (कहते हुए वो मेरे गले लग गयी) पर तुम आज कैसे रास्ता भूल गए?

शिव : आपसे बात भी नहीं हुई थी तो मेने सोचा की मिल hi लू.

भार्गवी : अगर ऐसा है तो में बिलकुल फ़ोन नहीं करुँगी, इसी बहाने तुम आओगे तो सही. (फिर वो मुझसे अलग हुई और boli)Betho में पानी लती हु.

शिव : (उन्हें अपने साथ बिठाते hue)Uski जरुरत नहीं है, बस मेरे साथ रहिये.

भार्गवी : (मुसकरुआते हुए )बहोत रोमांटिक हो रहे हो, क्या बात है?

ऐसे hi उनके साथ एक घंटा बिताने के बाद में घर चला गया. रात को पढ़ाई की और सो गया. दो दिन ऐसे hi बिट गए, तीसरे दिन जब में स्कूल से लौट रहा था तो पवनसीर का फ़ोन आया.

शिव : है सर बोलिये?

पवनसीर : कहा हो?

शिव : घर जा रहा हु. क्या बात है?

पवनसीर : दो पहर को साइट पर आ रहे हो न, थोड़ा काम है.

शिव : जी सर. (उन्होंने फ़ोन रख दिया, मेने खाना वन खाया और फिर साइट पर चला गया, जहान्वी भी वही थी) Hello सर, Hello मैडम. (जहान्वी बस मुस्कुरायी)

पवनसीर : क्या तुम्हारे पास संडे टाइम है?

शिव :किस बात के लिए?

पवनसीर : वैसे तो में जानेवाला था, पर मेरी वशिस्ठजी से बात हो गयी है, पेपर रेडी है, उनकी सिग्न लेने जाना है.

शिव : में चला जाऊंगा सर.

पवनसीर : केस जाओगे?

शिव : बस से चला जाऊंगा.

पवनसीर : ठीक है. (वो वह से चले गए)

जहान्वी : में भी चालू? (जहान्वी ने मुझसे पूछा)

शिव : आप ख़म खा परेशान होगी, सिर्फ सींग hi तो करवाना है.

जहान्वी : मुझे कोई परेशानी नहीं है, लगता है तुम्हे परेशानी है मेरे साथ आने में. (उन्होंने नाराजगी से कहा).

शिव : अरे पर बस में आप को परेशानी होगी.

जहान्वी : बस से क्यों, कार से जायेंगे.

शिव : वो आपकी कार है, कंपनी के काम के लिए आपकी कार का उसे करना ठीक नहीं है.

जहान्वी : तो तुम्हारी बाइक से चलेंगे.

शिव : वो दूर है, दो तीन घंटे का सफर है.

जहान्वी : तो क्या हुआ, लगता है तुम hi मुझे ले जाना नहीं चाहते. (उसने मुँह टेढ़ा करते हुए कहा)

शिव : मुझे क्या दिक्कत होगी, पर आप परेशान हो जाएगी.

जहान्वी : कोई परेशानी नहीं होगी, और इसी बहाने सप्लायर से भी मुलाकात हो जाएगी, या फिर तुम मेरी उनसे पहचान नहीं करवाना चाहते, मुझसे सीक्रेट रखना चाहते हो?

शिव : आप भी न, (में muskuraya)Is में सीक्रेट क्या है?

जहान्वी : मुझे क्या पता, तुम्हे लगता हो की में उनसे मिल कर कभी अपने लिए डील न कर लू.

शिव : ऐसा कुछ भी नहीं है, अगर आप आना चाहती है तो आ जाना. ठीक है?, पर अपने पापा से पूछ लेना.

जहान्वी : में हर काम क्या उनसे पूछ पूछ कर करुँगी, में खुद अपने डिसिशन ले सकती हु.

शिव : ठीक है बाबा, चलना आप. (मेने हाथ जोड़ कर कहा तो वो मुस्कुरायी)

शाम को जब एक्सरसाइज कर के घर पंहुचा तब मुझे काव्य जी का फ़ोन आया, उनसे बात कर के में उनसे मिलने चला गया.
 
अपडेट 208

जब में उनके घर पंहुचा तो आंटी ने दरवाजा खोला.

शिव : नमस्ते आंटी.

आंटी : नमस्ते बीटा, कैसे हो?

शिव : अच्छा हु आंटी, आप कैसी हो, और अंकल?

आंटी : अच्छे है दोनों, जाओ वो ऊपर अपने ऑफिस में hi है.

शिव : (में ऊपर चला गया, ऑफिस का दूर नोके किया और bola)Ander आ जाऊ मैडम?





काव्य : (मुस्कुराते hue)Aa जाओ. (वो कुछ काम कर रही थी, सफ़ेद साड़ी पहने हुई थी, में सामने बेथ गया, में उन्हें hi देख रहा था, वो muskurayi)Aise क्या देख रहे हो?

शिव : क्यों अब देखु भी नहीं?

काव्य : (मुस्कुराते hue)Mene ऐसा तो नहीं कहा.

शिव : आज अकेली क्यों हो आप? और भी भी करत से आने के बाद कपडे भी नहीं बदले?

काव्य : अकेली कहा हु, मम्मी और पापा है निचे, और अभी कपडे नहीं बदले, क्यों अच्छी नहीं लग rahi?(Wo मुस्कुराते हुए बोली)

शिव : ऐसी बात नहीं है, मेने तो बस ऐसे hi कहा था, कहिये क्यों बुलाया?

काव्य : बुलाये बगैर तुम आते हो कभी? (में बस मुस्कुराया) क्या पिओगे?

शिव : (उनके होठो की और देख kar)Jo आप पीला दो. (कहते हुए में मुस्कुराया)





काव्य : अगर इतने hi पसंद है तो फिर आते क्यों नहीं (वो थोड़ा इतराते हुए बोली).

शिव : आप इतना बिजी रहती हो, ऊपर से मेरी भी हालत वैसी hi है.

काव्य : बहाने बना न तो कोई तुमसे सीखे. मुझे पता है तुम कहा बिजी रहते हो.

शिव : कहा रहता हु?

काव्य : (उसने शिव को देखा फिर boli)Chhodo वो सब (कहते हुए उन्होंने फाइल बंद की), मेने इसलिए तुम्हे बुलवाया था की गायत्री के केस की डेट है.

शिव : ये तो आप फ़ोन पर भी बता सकती थी. (वो भी मुस्कुरायी, क्यों की ये तो वो भी जानती थी, उसको तो शिव से मिलाना था, अब जैसे उसको शिव की जरुरत महसूस होने लगी thi)(Me उनके चेहरे पर आये भाव समाज रहा था, में उठा और उनकी और जाने लगा तो वो शर्माने लगी, में समाज रहा था की उनके भी इरादे कुछ ऐसे hi है, में उनके पीछे गया तू झुक कर उनके स्तन पर हाथ रखते हुए उनके गाल को पीछे से किश कर लिया)

काव्य : शह्ह्हह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो? (वो धीरे से फुसफुसाई)

शिव : आप को देख कर रहा नहीं गया. (मेने उनके गले को चाट ते हुए कहा)

काव्य : शह्ह्ह्ह मात करो न, मम्मी और पापा घर पर है. (मान तो उसका भी था पर दर भी था)

शिव : (स्तन को अच्छे से मसलते hue)Bas थोड़ी देर. (कहते हुए मेने उन्हें चेयर पर थोड़ा पीछे झुका दिया और उनके होठो को चूसने लगा तो वो मेरे बालो में हाथ घूमने लगी)

काव्य : ुम्मम्ह ुमंम्हह उम्मम्मम.

शिव : (मेने किस तोड़ी और उनके कान में kaha)Aap बहोत हॉट हो?

काव्य : शिईयिव शहहहहह ऐसा मात करो, मुझसे रहा नहीं जा रहा, तुमने मुझे बिगड़ दिया है. (कहते हुए वो कड़ी हो गयी और मेरे गले लग गयी, मेने उन्हें थोड दूर किया और उनके होठो को देखने लगा तो वो मुस्कुरायी )जो करना है जल्दी से कर लो. (में मुस्कुराया और उन्हें फिर से गले लगा लिया, वो मेरे कान की लौ को चूसने लगी, वो बहोत गरम हो चुकी थी)

शिव : क्या कर लू?

काव्य : जो भी करना है तुम्हे.

शिव : आंटी ऊपर आ गयी तो?

कयवा : जल्दी जल्दी कर लेना. (वो बहोत गर्म हो चुकी थी और उनकी सासे तेज तेज चल रही थी, मेने उन्हें घुमा दिया और उनके ब्लाउज में छुपे स्तन को दबाने laga)Shhhhh शीइइइइइव.





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शिव : क्या हुआ?

काव्य : तुम मुझे बिगड़ रहे हो. (वो बड़ी कामुकता से बोली).

शिव : आप मुझे बिगड़ रही हो. (जोरो से स्तन मसलने लगा तो उन्होंने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया)

काव्य : शहहह धीरे दबाओ, तुम्हे पता है अब ब्लाउज भी छोटे पड़ने लगे है.

शिव : वो क्यों?

काव्य : (शरमाते हुए मुस्कुरायी) तुम्हे पता, ये जो मेरे साथ करते रहते हो तो वो बड़े होने लगे है. (पीछे से मेने उठा हुआ लुंड चुत्तड़ो में दबा diya)Shhhhhh, तुमने पागल कर दिया है मुझे (कहते हुए वो घूम गयी और मेरे गले लग गयी और गले को छटने lagi)Jaldi करो न शिव, शठ कोई आ न जाये. ( ज्यादा टाइम नहीं था तो मेने उन्हें घुमाया और टेबल पर झुका दिया, और उनकी साड़ी को ऊपर कर दिया और पंतय को निचे सरका दिया, उनके भरे हुए कूल्हे मेरे सामने थे, में बेथ गया और कूल्हों को सहलाते हुए उनपे किश करने laga)Shhhhhh Shiiiiiiv,(Kavya मचलने लगी, जैसे जैसे शिव उसके कूल्हों को चाट रहा था वो मचल रही थी, शिव उसकी दरार में भी छत रहा था) शह्ह्ह्ह शीइइइइव, शह्ह्ह्हह्ह मात करो यार, (मेरा लुंड तो वैसे भी खड़ा हो चूका था, में खड़ा हुआ और मेने पंत के बटन खोले और ज़िप खोल कर लुंड को बहार निकला और कूल्हों की दरार में रगड़ने laga)(apane छुटद के बिछ गरम गरम लुंड को महसूस करते हुए काव्य की छूट पानी बहाने lagi)Shhhhhh शीइइइइइइव. दाल दो यार. (मेने थोड़ा दूर हुआ और झुक कर लुंड को छूट पर रगड़ने लगा, वो पहले से गीली हो चुकी थी, वो अपने कूल्हे हिला रही थी, मेने अपने लुंड पर थूक लगाया और छूट पर सेट कर दिया)

शिव : दाल दू? (उन्होंने मेरी और देख कर है में इस्सर किया, मेने लुंड दबा दिया तो वो गरम गरम छूट को फैलते हुए छूट में उतरने लगा)

काव्य : (काव्य ने अपना मुँह दबा दिया ताकि आवाज न nikale)Ummmm ( उसका चेहरा ऐसा हो गया जैसे उसको दर्द हो रहा हो, पर वो कुछ न बोली, लुंड अंदर जाता गया और आखिर कर उसकी छूट भर गयी, एक दो पल शिव रुका तो उसने रहत की सास ली पर थोड़ी hi देर में शिव उसकी कमर पकड़ी और उसको छोड़ने लगा, छूट लगातार नदी बहा रही थी तो पर्याप्त गिला पैन हो गया था, और शिव के धक्के लगने से वो धीमी आवाज में कराह ने लगी)

काव्य : अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (अंदर बहार हो रहे लुंड को महसूस कर के वो कामुक होने लगी, ये एहसास अब उसको बहोत भने लगा tha,)Shhhhh शीइइइइव आराम से shhhhhh(Shiv जोरो से धक्के लगा रहा tha)Ahhhh शहहह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह (लुंड उसके अंदर पूरा घुस गया था और छूट पूरी फ़ैल चुकी थी, लुंड उसको ऐसे छोड़ रहा था जो उस से बर्दास्त नहीं हो रहा था पर फिर भी उसने मन नहीं किया, क्यों की उसको वो अच्छा भी लग रहा tha,lagatar धक्को से से वो जल्द hi झड़ने lagi)Shhhhh Shiiiiiiiiiiv shhhhhhhhhhhhh में झाड़ रही हु शह्ह्हह्ह्ह्ह. (वो झाड़ रही थी तो मेने दो चार धक्के मरे और में रुक गया, वो अपनी कमर हिला रही थी, थोड़ी देर बाद वो शांत हो गयी, मेने लुंड बहार निकल liya)Shhhhhhhhh. (अपने अंदर से लुंड बहार निकला तो वो सीधी हो गयी और शिव के गले लग गयी और उसके होठो को चूसने लगी, शिव उसके कूल्हों को मसलने लगा, किश करने के baad)Me कितनी गन्दी हो गयी हु शिव, क्या क्या करने लगी हु.

शिव : क्यों आपको अच्छा नहीं लगता?

काव्य : बहोत अच्छा लगता है शिव, पर अजीब भी लगता है.

शिव : इसमें कुछ अजीब नहीं है, ये कुदरती है. (में उन्हें सोफे की और ले जाने लगा तो वो मुझे रोकने लगी)

काव्य : एक मिनट रुको, में मम्मी को देख लेती हु. (कहते हुए वो बहार निकली, वो जल्दी जल्दी निचे गयी, उसकी मम्मी टीवी पर सीरियल देख रही थी, , वो किचन में गयी और पानी की बोतल ली ताकि उसकी मम्मी को लगे की वो पानी लेने आयी थी, दोनों ने एक दूसरे को देखा और मुस्कुरायी, फिर वो वापस ऑफिस में आ गयी, शिव ने पंत पहन लिया था और सोफे पर बैठा था, उसने बोतल रक्खी और सीधे शिव के पास गयी और उसके सामने बेथ ते हुए उसके पंत पर हाथ रखते hue)Pant क्यों पहन लिया? (में कुछ नहीं bola)Mummy सीरियल देख रही है (कहते हुए वो पंथ खोने लगी, मेने उन्हें रोका)

शिव : क्यों रिस्क ले रही है?

काव्य : कोई रिस्क नहीं है, (वो मेरा बटन खोल चुकी थी और ज़िप भी खोल दी और लुंड को बहार निकल लिया और उसको पकड़ कर देखा वो इस लुंड की दीवानी हो चुकी थी, उसने सीधे उसे अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी, जोर जोर से चूसने के baad)Shhhh इसने पागल कर रक्खा है मुझे. (वो मुँह में ले कर गप गैप चूसने और चाटने लगी, और खुद hi अपनी साड़ी ऊपर की और पंतय निकलने लगी, थोड़ी देर बाद वो कड़ी हुई और मुझे खींच कर सोफे से उठाया, और खुद सोफे पर बेथ आगयी और अपनी साड़ी ऊपर कर के पेअर फैला कर मुझे अपनी छूट दिखाई और मेरी और देखने लगी जैसे कह रही हो की दाल दो, उनके चेहरे पर कामुकता छलक रही थी, में निचे बैठा और उनकी छूट को देखा, भरे हुए होठो के बिच की लकीर और उस से बह रहा सेहद देख कर मेरे भी मुँह में पानी आने लगा, मेने होठो को फैलाया और मुँह लगा कर सेहद को चाटने laga)(apani छूट पर लैप लापति जीभ को महसूस कर के काव्य भी मचलने lagi)Shhhhh शीइइइइव, शहहहहह कितना मज़ा आता है यार, शह्ह्ह्हह्ह, अब में बिना तुम्हारे ज्यादा दिन नहीं रह सकती (वो मेरा शिर सहलाने लगी और अपनी छूट पर दबाने लगी, थोड़ी देर छूट चाटने के बाद में खड़ा हुआ और पाना पंथ और शर्ट निकलने लगा, वो मुझे देखने लगी)

शिव : अपने कपडे उतरो. (वो दर रही thi)Uttaro न. (काव्य को दर लग रहा था पर फिर भी सेक्स के नशे में वो भी डूबी हुई थी और उसको भी ये सब अच्छा लगता था, तो वो भी कड़ी हुई और अपने सरे कपडे उतर दिए और पूरी नानाजी हो गयी, रिस्क तो था पर इतना भी नहीं, उसकी मम्मी आनेवाली नहीं थी)( वो पूरी नंगी हो गयी, उनका भरा बदन देख कर मेरा लुंड भी उछलने लगा, मेने उन्हें खड़े खड़े hi कुछ पल मसाला, उनके कूल्हे और स्तन से खेला, फिर मेने उन्हें सोफे पर बिठाया और लुंड फिर से छूट पर लगा दिया और अंदर दाल diya)Shhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह Shiiiiiiiiiiv. (में उनके पेअर पकड़ कर उन्हें छोड़ने लगा, थोड़ी hi देर में उनकी सिस्किअ गहरी होती चली गयी और वो और कामुक होने लगी)





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शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह जोर से बेबी शह्ह्ह्ह जस्ट फ़क में हार्ड शहहहहह. (में भी जोश से भर गया और जोर जोर से धक्के लगाने laga)(Dhakko से काव्य को और भी मज़ा आने लगा) आए आए आए आए ओमाआ अहह आए आ यस यस यस शहहहहह, छुम फॉर में बेबी शहहहहह जस्ट छुम फॉर में. (लगातार धक्को से सो झुकने लगी तो मेने उन्हें सोफे पर लेता दिया और पेअर फैला कर जोर जोर से धक्के लगाने laga)Yes यस शहहहहह फ़क में हार्ड शह्ह्ह्ह जोर से छोड़ो शहहहहह i’m क्युम्मिंग शह्ह्ह्हह्ह में झाड़नेवाली हु शह्ह्ह्ह (लगातार धक्को को वो बर्दास्त नहीं कर पायी और वो फिर से झाड़ गयी, मेने उन्हें पकड़ कर घोड़ी बना दिया, वो भी अपने कूल्हे फैला कर तैयार हो गयी, मेने लुंड छूट में डाला और फिरसे धक्के लगाने लगा, में जोर जोर से धक्के लगा रहा था ताकि में भी झाड़ जाऊ, इतने जोर से और जल्दी से वो पूरी हिल रही थी, कूल्हे थिरक रहे थे,

स्तन हवामे खुल रहे the,mene हाथ आगे बढ़ा कर स्तन को मसल दिया और बड़े बड़े कूल्हों के बिच आते जाते लुंड को में देख रहा था, और जोर जोर से धक्के लगा रहा था, अभी पांच मिनट भी नहीं हुए थे की वो ऐसे दकको से फिर हर गयी और वो फिर से झड़ने लगी) शह्ह्ह्हह्ह शीइइइइइइइव शह्ह्ह्ह पागल हो जाउंगी में यार, (उसने शिव को कामुक नजरो से देखा तो उसका भी चेहरा लाल हो चूका था, वो उसको जोर जोर से छोड़ रहा था, इतने बड़े लुंड की वजह से उसको दर्द भी होनेलगा था पर उसने रोका नहीं, शिव ने उसको फिर सीधा किया और फिर से लुंड अंदर दाल diya)Oooommaaa आराम se(Par शिव रुका नहीं और फिर से धक्के लगाने laga)ahhhh अह्हह्ह्ह्ह (वो कराहने लगी, कुंड उसकी बच्चेदानी में घुस रहा tha)Shhhhhh शीइइइइइव शहहहहह फ़क में हार्ड शहहह यू अरे अमेजिंग shhhhhh(Shiv के धक्के और तीव्र हो चुके थे, वो उसे रोकना चाहती थी पर वो जानती थी की अगर उसने रोक दिया तो वो झाड़ नहीं पायेगा तो वो बर्दास्त करने lagi)Mumaaaaa अह्हह्ह्ह्ह फूऊऊऊऊ शह्ह्ह्हह्ह (शिव की स्पीड बहोत फ़ास्ट thi)Aaaaahhh अह्ह्ह्ह अह्ह्ह (उसके चेहरे पर दर्द और मज़े का मिला जुला मिश्रण था, वो फिर झाड़नेवाली हो गयी) शह्ह्हह्ह्ह्ह बेबी, ी ऍम क्युम्मिंग शहहहहह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, कहते हुए वो फिर झड़ने लगी और तभी शिव ने अपना लुंड निकल कर उसके पेट पर अपने गरम गरम पानी की बौछार कर दी, वो लुंड से निकल रहे सफ़ेद पानी को देखने लगी और साथ में वो उपरवाले का सुकर मानाने लगी की आखिर वो झाड़ गया, वो जोर जोर से सासे लेते हुए अपने आपको सँभालने लगी, एक मिनट बाद वो जल्दी से उठने लगी पर उसकी छूट में उसको दर्द महसूस हुआ पर वो जल्दी से उठी और टिश्यू पपएर से अपने आपको साफ़ किया, शिव फर्श पर लेता हुआ था तो उसने उसके लुंड को मुँह में भर लिया और उसको छुस कर उसको भी साफ़ किया, अपनी पंतय पहन ली और जल्दी जल्दी कपडे पहने, और बहार नजर डाली, सब सही था, शिव अभी भी ननगा लेता था, उसके चेहरे पर शर्मीली मुस्कान आ गयी, वो उसके साथ hi फरसे पर लेट गयी और उस से चिपक गयी और साथ में उसके लुंड को सहलाने लगी, उसको बहोत सुकून मिल रहा था.

काव्य : अब उठो भी. (उसने प्यार से kaha)Me भी उठ गया और अपने कपडे पहन लिए.

जैसे hi शिव ने कपडे पहने वो फिर से उसके गले लग गयी और कास के उसकी पीठ सहलाने लगी. वो संतुस्ट थी और उसका प्यार उमड़ रहा था, और खुस भी थी. तभी निचे से उसकी मम्मी ने आवाज दी.

आंटी : काव्य, ो काव्याआ.

काव्य : है मम्मी?

आंटी : खाना नहीं खाना है क्या, तेरे पापा रह देख रहे है.

काव्य : अभी आयी मुम्मीईईई. (वो मेरी आँखों में देखने lagi)Chalo तुम भी खा लो.

शिव : में घर पर बोल कर नहीं आया, सब राह देख रहे होंगे.

काव्य : में समझती हु.

शिव : (हलके से उनके होठो पर किश कर ke)Ab में चालू?

काव्य : (शरमाते hue)Tumhe अच्छा लगा? (वो मुस्कुरा भी रही थी)

शिव : है, बहोत मज़ा आया. (वो फिर शर्मा गयी)

काव्य : जल्दी मिलना.

शिव : हम्म्म्म (उनके होठो पर किश ki)Bye.

काव्य : (उसनहोने भी किश ki)Bye.

हम दोनों साथ में निचे आये, आंटी ने भी मुझे खाने के लिए रुकने को कहा पर में नहीं रुका और घर की और निकल गया. सब मेरा hi वेट कर रहे थे, तो में खाने बेथ गया.

ऐसे hi वो दिन भी आ गया जब हमे वशिष्ठ से मिलने जाना था, सुबह hi पवनसीर का फ़ोन आया, उन्होंने अपने घर आने को कहा, मेने जहान्वी को फ़ोन कर दिया तो वो भी वही आने को राज़ी हो गयी, जब में पंहुचा तो जहान्वी आलरेडी आ चुकी थी, वो, पवनसीर और स्नेहा, तीनो बैठे हुए थे.

पवनसीर : लो ! शिव भी आ गया. (मेने सब को hello कहा, स्नेहा ने मुझे मुस्कुरा कर देखा पर उसकी आँखों में कुछ और भी था)

शिव : जी सर, कहिये, किस लिए बुलाया.

पवनसीर : अरे भाई, बिना कागज के जानेवाले हो क्या?

शिव : वो तो में लेने आने hi वाला था, मेने सोचा कुछ और बात होगी.

पवनसीर : जहान्वी बता रही थी की तुम दोनों बाइक से जानेवाले हो (में कुछ नहीं बोलै) इतनी दूर बाइक से जाना ठीक नहीं, तुम मेरी गाडी ले जाओ.

जहान्वी : मेरी भी गाडी है, उसी से चले जायेंगे.

पवनसीर : ठीक है, पर जो भी खर्चा हो वो लिख देना.

जहान्वी : उसकी जरुरत नहीं है.

पवनसीर : क्यों जरुरत नहीं है, ऑफिस के काम से जा रहे हो तो ऑफिस hi खर्चा उठाएगी. शिव तुम देख लेना.

शिव : जी सर.

पवनसीर : (एक फोल्डर देते hue)Isme फाइल है, सिग्न करवा लेना और जैसे हमारी बात हुई है मेने अभी तक उन्हें बताया नहीं है, जो भी चंगेस किये है वो उनसे डिस्कस कर लेना.

शिव : जी सर. (स्नेहा भी हमारे लिए कॉफ़ी बना लायी थी, मुझे उन्होंने दूध दिया था, दूध देते वक़्त भी वो मुझे अजीब नजरो से देख रही थी, सबके सामने तो पूछ नहीं सकता था तो में चुप hi रहा, उन्होंने कॉफ़ी पि, और मेने दूध, उसके बाद हम निकल गए, गाडी जहान्वी hi चला रही थी, थोड़ी hi देर में हम सिटी से बहार निकल गए, रास्ता अच्छा था तो जहान्वी फूल स्पीड से गाड़ी चला रही thi.)Itna स्पीड से क्यों चला रही हो, थोड़ा आराम से चलाओ, पूरा दिन है. (उसने स्पीड थोड़ी काम कर दी, मेने म्यूजिक लगा दिया, आवाज काम hi rakkhi)Agar चाहो तो में भी चला लूंगा.

जहान्वी : अभी जरुरत नहीं है, जब जरुरत होंगी तो में कह दूंगी. (उसने थोड़ा रूडली hi कहा)

शिव : आपको क्या हुआ अब, ऐसे क्यों बात कर रही है?

जहान्वी : कुछ नहीं. (एक्साक्ट्ली, जिस तरह से स्नेहा शिव को देख रही थी, उसको अजीब लगा था, और उसको कही न कही लग रहा था की उनके बिच कुछ है, इस वजह से उसका मूड थोड़ा ऑफ हो गया था)

शिव : क्या कुछ नहीं, बात ऐसे कर रही है जैसे गुस्सा है, बताएंगी तभी तो पता चलेगा.

जहान्वी : तुमने कहा था की तुम्हारे अफेयर्स है, किसके साथ है?

शिव : मेने ये भी कहा था की में ऐसे किसी का नाम नहीं उछाल सकता.

जहान्वी : तुम्हे यही सब पसंद है, वो मजदुर और शायद शादीशुदा.

शिव : (मेने गौर से उनका चेहरा dekha)Kiski बात कर रही है?

जहान्वी : में क्यों किसी की बात करने लगी. पता नहीं पति होते हुए भी किसी के साथ भी चक्कर चला लेती है, शर्म भी नहीं आती.

शिव : (मुझे लगने लगा की वो स्नेहा की hi बात कर रही है, मुझे थोड़ा गुस्सा aaya)Dekhiye, आप को क्या लगता है वो मुझे पता नहीं, पर ऐसे hi किसी के बारे में गलत बोलना सही नहीं है, बिना कुछ जाने, किसी पर भी इल्जाम लगाना ठीक नहीं है.

जहान्वी : मेने कहा किसी पर इल्जाम लगाया या किसी का नाम लिया.

शिव : किसी का नहीं पर मेरा तो नाम लिया न. और ये मेरी जिंदगी है, में चाहे जो भी करू.

जहान्वी : है तो मुझे भी क्या है, जो चाहे करो. (उसने भी मुँह फुला लिया, हम दोनों चुप hi रहे, मेने अपना मोबाइल लिया और उसमे देखने लगा, वैस्वी का मश्ग आया था, उसने कुछ रोमांटिक शायरी भेजी थी, जिसे पढ़ कर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी, मेने भी उसे गूगल में धुंध कर एक अच्छी सी शायरी भेज दी )(जहान्वी ने भी देखा की में मोबाइल में देख कर मुसकुरा रहा हु तो वो और भी चीड़ गयी. पर बोली कुछ नहीं, एक घंटे गाड़ी चलने के बाद उसने एक हाईवे होटल पर गाडी रोकी और उतर कर बाथरूम की और चली गयी, में भी कार से उतरा और हाथ और पेअर स्ट्रेच करने लगा, वो वापस आयी तो मेभी बाथरूम की और निकल गया, जब में वापस आया तो वो बाजूवाली सीट पर बैठी थी, कुछ लड़के थे जो उसको ताड़ रहे थे, जैसे hi में नजदीक गया तो वो इधर उधर देखने लगे, उन्होंने ड्राइविंग सीट छोड़ दी थी मतलब अब मुझे गाड़ी चलनी थी, पर मेने पूछा)

शिव : कुछ खाएंगी?

जहान्वी : (बना मेरी और dekhe)Nahi. (में भी मुस्कुराया और ड्राइविंग सीट पर बेथ गया और गाड़ी आगे बढ़ा दी, थोड़ी देर बाद भी वो अपने मोबाइल में hi देख रही थी)

शिव : इतना क्या इंट्रेस्टिंग है जो मोबाइल छोड़ hi नहीं रही hai.(Wo कुछ नहीं बोली) किस बात पर नाराज़ है वो तो बताइये तो समाज में आये.

जहान्वी : में क्यों नाराज़ होने लगी, में हु कोण जो तुम पर नाराज़ हो. (अपना मुँह टेढ़ा कर के वो बोली)

शिव : आप लड़कीओ को समजना बहोत hi कठिन है.

जहान्वी : तुम्हे तो बहोत एक्सपीरियंस है न, तुम्हे क्यों कठिन लग रहा है.

शिव : आपकी प्रॉब्लम क्या है वो जरा खुल कर बताएंगी? कुछ समाज भी आये.

जहान्वी : तुम मुझे क्यों नहीं बता रहे हो की तुम्हारे किसके साथ अफेयर्स है, या फिर ऐसे hi फेंक रहे हो.

शिव : में क्यों फेंकूँगा?

जहान्वी : मुझे तो लग रहा है बस फेंक hi रहे हो, क्यों की आज तक मेने तो तुम्हारे साथ कोई लड़की देखि नहीं, सिवाय उस भोली के.

शिव : आपकी प्रॉब्लम क्या है?

जहान्वी : कुछ नहीं. (वो फिर मुँह फुला के बेथ गयी, और सोचने लगी, सच hi है, कोई गर्लफ्रेंड, वोल्फ्रेंड नहीं है, बस ऐसे hi फेंक रहा है, और उस भोली की कपरिशन मेरे से कर रहा है, में कहा और वो कहा, मुझे मन कर रहा है और उसके साथ लगा हुआ है, बेवकूफ कही का)

पुरे रस्ते वो बहस करती रही, और मेरे मुँह से नाम निकलवाने की कोशिस करती रही पर मेने किसी का नाम नहीं बताया. ऐसे hi हम वशिस्ठजी के सहर पहुंच गए. मेने उनको फ़ोन किआ तो वो ऑफिस में hi थे, हम सीधे उनके ऑफिस चले गए. हम ऑफिस में गए तो पेओन हमें उनके केबिन तक ले गया, में और जहान्वी उनके सामने बेथ गए, मेने उनका परिचय जहान्वी से करवाया, फॉर्मेलिटी के बाद मेने उन्हें फाइल निकल के दी, वो फाइल देखने लगे, थोड़ी देर फाइल देखने के बाद वो मेरी और देखने लगे.

शिव : क्या हुआ सर?

वशिष्ठ : लगता है तुम्हारी कोई गलती हो रही है.

शिव : किस बारे में सर?

वशिष्ठ : यहाँ पर जो रेट तुमने सेंशन किया है वो पुराण वाला है, में आलरेडी नए रेट भेज चूका हु जैसी की हमारी बात हुई थी.

शिव : हमे पता है. हमने वही रेट सैंक्शन किये है जो आपने पहले दिए थे.

वशिष्ठ : में कुछ समजा नहीं.

शिव : इसमें समजनेवाली क्या बात है, हम पुराने रेट पर hi काम करने को तैयार है. (उनके चेहरे पर सवाल नजर आने lage)Me समाज रहा हु की आपको लग रहा होगा की अगर आप रेट काम कर रहे है तो फिर भी हम ऊपर के रेट क्यों सैंक्शन क्यों कर रहे है, इस से तो हमारा hi नुकसान है, पर ऐसा नहीं है, वो रेट सैंक्शन करने की दो वजह है, एक तो आपने वो रेट सब कैलकुलेशन के बाद दिए थे, तो हम नहीं चाहते की आप रेट की वजह से माल में कोई संजोता करे. और दूसरी बात, अब ये सिर्फ बुसिनेस्स नहीं रहा, अब आप हमारी भी पहचान वाले है तो थोड़ा नुकसान हम भी उठा hi सकते है, क्यों की फायदा तो घर में hi रहनेवाला है, इस से आप भी अच्छे से सपोर्ट कर पाएंगे.

वशिष्ठ : तुम भी अजीब हो यार, कोई भी बिज़नेस में होगा वो अपना फायदा hi ढूंढेगा, सामनेवाले की कोण सोचता है.

शिव : पर हम सोचते है. फायदा ढूंढने के चक्कर में आज कल इमारते और ब्रिज टूट रहे है.

वशिष्ठ : (वो है पड़ा, हम भी muskuraye)Sahi कह रहे हो तुम. अगर पैसे काम होंगे तो फिर क्वालिटी से hi संजोता होता है, आखिर कर सब अपना फायदा hi देखते है, काम मुनाफे से तो जैसे किसी का पेट भरता hi नहीं, और मुनाफा चाहिए सबको. सच में आप लोगो के साथ काम करने में मज़ा आएगा.

शिव : हम भी यही चाहते है. तो डील फाइनल कर ले.

वशिष्ठ : हो गयी फाइनल. (कहते हुए उसने पेपर पर सिग्न कर दिए, उसके बाद हम बिज़नेस के रिलेटेड काफी डिस्कस करते रहे, हम बात कर रहे थे की उनके मोबाइल पर कॉल aaya)Hello. (खुस हो कर)

कृपाली : (थोड़ा दर se)Aap खाने के लिए आ रहे है?

वशिष्ठ : आ रहा हु, और दो लोग और आ रहे है. (उसने उत्साहित हो कर कहा, कृपाली को समाज नहीं आया की वो क्यों इतने खुस है)

कृपाली : (हिचकिचाते hue)Kon दो लोग?

वशिष्ठ : तुम जानती हो उन्हें, मिलोगी तब पता चल जायेगा. थोड़ी देर में आते है हम. (उन्होंने फ़ोन रख दिया, मेने उनकी बात सुनी थी तो मेने जहान्वी को देखा वो भी मेरी और देख रही थी)

शिव : नहीं सर, हम निकलते है, आप मन कर दीजिये.

वशिष्ठ : क्यों भाई, अभी अभी तुमने hi तो कहा की अब ये बुसिनेस्स नहीं है, वैसे भी में किसी भी पार्टी को अपने घर नहीं ले जाता, तुम्हारे लिए भी मेने होटल में hi बुकिंग करवाई थी, पर जब अब तुम इतना कर रहे हो तो फिर में क्यों पीछे राहु. (कहते हुए उन्होंने कॉल लगाया और होटल में टेबल की बुकिंग सांक्ले करवा दी) अब में एक नहीं सुनूंगा, तुम्हे आना hi होगा.

अब मन तो कर नहीं सकते थे, तो हम भी उनके पीछे पीछे निकल गए. उनका भी काफी बड़ा बंगलो था, चौकीदार ने गेट खोला और दोनों गाड़ी अंदर चली गयी. हम अंदर गए, हमें सोफे पर बैठने के लिए बोलै और वो भी बेथ गए और एक नौकर को कह कर कृपालिजी को बुलवाया.

करअपलि जो पहले से परेशान थी की कोण आ रहा है, वो हॉल में आयी तो एक लड़के और लड़की को देखा, उनकी पीठ उसकी तरफ थी, पर वो पीछे से hi शिव को पहचान गयी, वो खुस हो गयी पर चेहरे से नार्मल hi रही.

कृपाली : जी. (अपने पति की और देख कर)

वशिष्ठ : अरे देखो तो कोण आया है. (कहते हुए उन्होंने मेरी और इस्सर किया, तो मेने पीछे देखा, कृपालिजी कड़ी थी तो में भी खड़ा हो गया और नमस्ते किया, उन्होंने भी नमस्ते किया)

शिव : कैसी है आप?

कृपाली :अच्छी हु. (उन्होंने जहान्वी की और देखा तो मेने उनका भी परिचय करवाया)

वशिष्ठ : (कृपाली का इतना ठंडा रिएक्शन देख कर उसको अंदाजा हो गया की ये दोनों एक दूसरे को जानते है पर इतना nahi)Khana तैयार है?

कृपाली : जी.

वशिष्ठ : ठीक है, mummy-papa को भी बुलवा लो.

फिर हम खाने बेथ गए, उन्होंने अपने mummy-papa का भी परिचय करवाया, वशष्ट ने अपने mummy-papa को भी डील के बारेमे बताया, वो भी खुस हो गए और शिव से अच्छे से बात करने लगे, ऐसे हे हमारा खाना ख़त्म हुआ. हम वह थोड़ी देर बैठे, सबसे बात की, कृपालिजी पता नहीं क्यों पर ज्यादा बात नहीं कर रही थी, और जितना हो सके मुझसे नज़ारे चुरा रही थी, मुझे तो कुछ समाज नहीं आया, वो खुद मुझे अपना नंबर दे कर गयी थी, फिर क्यों ऐसा कर रही है पता नहीं. उसके बाद उनसे विदा लेने लगे तो कृपालिजी ने हमें रुकने को कहा, वो एक बैग ले कर आयी जिसमे कुछ फल और पानी रक्खा हुआ था, वो हमें दे दी, ये कह कर की रस्ते में काम आएंगे, फिर हम विदा ले कर निकल गए. जाते वक़्त में hi गाड़ी चला रहा था, हमारी बिच बस उस डील और प्रोजेक्ट की hi बाते हुई. ऐसे hi हम वापस हमारे सहर पहुंच गए. हम सीधे पवनसीर के घर गए और उन्हें साडी बात बता दी. उसके बाद में अपने घर चला गया और जहान्वी अपने घर. घर में सब से थोड़ी बाते हुई, खाना खाया, फिर मेने अपनी किताबे ली, और अपने रूम में चला गया, पुरे दिन की थकावट की वजह से में जल्दी सो गया.

सुबह उठ कर में दौड़ने चला गया, वह से आ कर तैयार हुआ और स्कूल निकल गया. आज और कुछ खास नहीं हुआ, संयम की भी तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही थी तो वो ज्यादा कुछ बोली नहीं, मेने उसे घर तक छोड़ दिया. मेरी जहान्वी से फ़ोन पर बात हुई तो वो उनकी साइट पर थी, आज हमारी साइट पर उनका काम नहीं था, मेरे घर पर भी काम चल रहा था तो में वही रहा. शाम को स्टेडियम से लौट रहा था तो सूर्यदेवजी का फ़ोन आया, तो में उनसे मिलने चला गया. बहार चौकीदार से बात कर के में अंदर चला गया, मनीषजी बैठी हुई थी, मेने उन्हें नमस्ते किया तो उन्होंने भी मुस्कुरा कर नमस्ते कहा और मुझे बैठने के लिए कहा, नौकर को पानी लेने के लिए भेजा और दूसरे नौकर को सूर्यदेवजी को बुलाने के लिए कहा.

मनीषजी : और क्या चल रहा है?

शिव : जी सब ठीक है.

मनीषजी : तुम स्कूल और प्रैक्टिस में बिजी रहते हो तो मेने तुम्हे डिस्टर्ब नहीं किआ, दूसरे लोगो से पोलिटिकल काम करवालेति हु, पर इसका ये मतलब नहीं की तुम मुझसे मिलने तक न आओ. (उन्होंने अपने तीखे नैन से मुझे देखते हुए कहा)

शिव : सॉरी, वो कॉम्पिटिओं में गया था, फिर इस प्रोजेक्ट के काम के लिए दो बार बहार जाना पड़ा, कल भी गया था.

मनीषजी : समझती हु, पर कभी दोस्त समाज कर hi फ़ोन करलिया करो या मिलने आ जाया करो. (उन्होंने शिकायत की, तभी सूर्यदेवजी आते दिखे तो हमारी बात रुक गयी, मेने खड़े हो कर उन्हें नमस्ते किया)

सूर्यदेवजी : बैठो बैठो, और क्या चल रहा है?

शिव : चल रहा है सब.

सूर्यदेवजी : काम के अपडेट तो पवनजी से मिल जाते है, पर जब मेने मनीषा से तुम्हारे बारेमे पूछा तो कह रही थी की काफी दिन हो गए मिली नहीं तो सोचा बुला कर मिल लेते है, (हस्ते हुए वो bole)Disturb तो नहीं किया न मेने?

शिव : नहीं सर, अभी hi स्टेडियम से लौटा हु. कुछ दिनों बाद ट्रेनिंग के लिए भी जाना है.

सूर्यदेवजी : अच्छा है, कहा जा रहे हो ट्रेनिंग के लिए?

शिव : दो जगह है, अभी फाइनल नहीं हुआ है, शायद इस हफ्ते फाइनल हो जायेगा की कहा जाना है.

सूर्यदेवजी : वैसे एक बात कहु, बुरा मात मन न, तुम जिस रह पर चल रहे हो वह तुम्हे अपने देश से ज्यादा मदद नहीं मिल पायेगी. (में ध्यान से सुन ने laga)Bura मुझे भी लगता है पर जो सच है वो सच है. हमारे गिनेचुने एथलीट hi दौड़ में अन्तर्राष्ट्रीय कक्षा पर परफॉर्म कर पाए है, और जहा तक में समझता हु उन्होंने भी विदेशी कोच से ट्रेनिंग ली थी, सब का तो मुझे नहीं पता पर कुछ तो जरूर ऐसे है.

शिव : अभी तो में वो अफोर्ड नहीं कर सकता, इसलिए जो है उसी से काम चलना पड़ेगा. (मेने मायूस हो कर कहा)

सूर्यदेवजी : अरे भाई, में तुम्हे मायूस करने के लिए नहीं कह रहा हु, में तुम्हे आगे की रह दिखा रहा हु.

मनीषा : सिर्फ रह दिखने से कुछ नहीं होगा, आपको मदद भी करनी चाहिए.

सूर्यदेवजी : में कहा मन कर रहा हु, पर में एक हद तक मदद कर सकता हु, पर जहा तक मुझे पता है कुछ कंपनी होती है जो खिलाड़िओ को स्पांसर करती है, और उनसे कॉन्ट्रैक्ट करती है, वो hi सारा खर्चा उठती है. देखता हु, अगर मेरे कांटेक्ट में कोई ऐसा है तो.

मनीषजी : दूसरी कोम्पन्यो को क्यों धुंध रहे है, खिलाड़िओ को जो स्पांसर करते है है वो उनसे मुनाफा भी कमाते है न? तो आप hi स्पोंसर कर दीजिये.

सूर्यदेवजी : (मुस्कुराते hue)Aisa नहीं है डिअर, ये कम्पनिआ ऐसे खिलाड़िओ पर पैसा लगाती है, फिर उन्हें अड़ कैंपेन और दूसरी इवेंट करवा कर मुनाफा कमेटी है, किसी एक कंपनी पर वो निर्भर नहीं रहते. देने को तो में भी पैसे दे सकता हु, पर वो कम्पनिआ इस काम में माहिर होती है, उनके इस तरह के कॉन्टेक्ट्स भी होते है, वो hi किसी अच्छे कोच का रेकंडशन भी देंगे, इस लिए कह रहा था.

मनीषा : ठीक है, पर ये काम आप को hi करना पड़ेगा. (उसने जोर दे कर kaha)(Me मनीषजी को hi देख रहा था, वो मेरी कितनी तरफदारी कर रही थी, मेरी सोच उनके प्रति बदल रही थी, मुझे पता है की वो अच्छी है, पर कभी कभी लगता था की वो सिर्फ मुझे उस तरह से hi उसे करना चाहती है, पर में गलत साबित हो रहा था.

में थोड़ी देर वह रुका, उनसे बाते हुई, फिर में वह से निकल गया. रात को खाना खाया और मेने संयम की तबियत पूछी तो पता चला की उसकी तबियत ठीक नहीं है, उसको बुखार आया है तो में मिलने चला गया. वो अपनेरूम में hi सोई हुई थी, में और आंटी साथ में उस के कमरे में गए, अंकल निचे टीवी देख रहे थे. फिर वह में थोड़ी देर रुका और घर आ गया. पढ़ने बैठा पर संयम का सुन कर मान नहीं कर रहा था तो सो गया.
 
अपडेट 209

सुबह उठ कर में बाथरूम में गया, जब वापस आया तो विणा और रंजन उसी और आ रही थी, मेने दोनों से बात की, विणा दूसरे बाथरूम में चली गयी, रंजन मुझे खींचते हुए दूसरे बाथरूम में ले गयी.

शिव : क्या कर रही हो? (मेने फुसफुसाते हुए कहा.

रंजन : प्यार. (कहते हुए मेरे होठो को चूसने लगी तो मेने भी उसके होठ चूस लिए, और उसके नन्हे कूल्हों को मसल diya.)Shhhhhh जालिम, आहिस्ता से मसल न, दर्द होता है. (वो मुस्कुराते हुए बोली)

शिव : में तुजे लाया था की तू लायी मुझे.

रंजन : क्यों? तेरा मान नहीं है?

शिव : मेने कहा मन किया, इसीलिए तो मसल दिए.

रंजन : करना है? (मुस्कुराते हुए वो बोली)

शिव : अभी नहीं, मुझे जाना है.

रंजन : रात को?

शिव : देखता हु.

रंजन : हमारे रूम में hi आ जाना, अगर मान करे तो. (उसने मादकता से कहा)

शिव : पढ़ाई में ध्यान दे.

रंजन : वो तो दे hi रही हु, पर तुज पर भी तो ध्यान देना जरुरी है न. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : देखता हु. (कहते हुए मेने उसका माथा चूमा और बहार आ गया, कपडे पहन कर कसरत के लिए चला गया. उसके बाद स्कूल चला गया, आज संयम नहीं आयी थी, हर्ष और महेश भी अपने में लगे हुए थे तो में और वैस्वी hi बैठे थे, वो मंद मंद मुस्कुरा रही थी) क्या हुआ, ऐसे क्यों मुस्कुरा रही हो?

वैस्वी : कुछ नहीं, बॉस ऐसे hi.

शिव : मुझे पता है तेरे दिमाग में क्या चल रहा है. (मेने मुस्कुरा के कहा)

वैस्वी : अगर पता है तो फिर कहता क्यों नहीं?

शिव : क्या कहु?

वैस्वी : क्यों तू नहीं कह सकता की चल, पीछे चलते है. (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : तुजे पता है न की वह कितना रिस्क है, अगर पकड़े गए न तो बवाल हो जायेगा.

वैस्वी : जानती हु, पर इस दिल को केस संजो.

शिव : संभल कर रख, कही रुसवा न कर दे तुजे. (मेने मुस्कुराते हुए कहा)

वैस्वी : संभल के hi रक्खा था, किसी को आसपास फटकने तक नहीं दिया, पता नहीं तू कहा से अंदर घुस गया. (कहते हुए वो मुस्कुरायी)

शिव : तो निकल दे बहार. मेरे जैसे लड़के को वह रख के क्या फायदा.

वैस्वी : फायदा- नुकसान, सोचना बंद कर दिया है मेने, मुझे खुद यकीं नहीं होता की में ये सब कर रही हु, पर हकीकत है की ये हो रहा है.

शिव : उस दिन संयम जान बुज के नहीं आयी थी न रेसस्स में?

वैस्वी : में उस बारे में बात नहीं करना चाहती, में सिर्फ तुम्हारे और मेरे बारे में hi बात करना चाहती हु.

शिव : पर तुम चाहो की न चाहो, ये बात मटर करती है.

वैस्वी : करती होगी, मुझे उस बारे में नहीं सोचना है.

शिव : क्यों?

वैस्वी : पता नहीं, पर जब भी सोचती हु तो ऐसा लगता है की जो होगा देखा जायेगा, आगे का सोच कर अभी जो मिलरहा है उस से क्यों मुँह मोड़ लू.

शिव : ऐसा क्या मिल रहा है तुम्हे?

वैस्वी : तुम नहीं संजोगे, मेने ऐसा कभी महसूस नहीं किया था शिव, में कभी सोच भी नहीं सकती थी की में किसी को इतना महत्व दे सकती हु, पर तुम हो वो सख्स जिसको में सबसे ज्यादा महत्व देती हु, पता नहीं क्यों पर अब में तुम्हे नहीं खो सकती. (वो बहोत सिद्दत से बोल रही थी, मेने उसके हाथ पर हाथ रख दिया, उसने प्यार से मेरी और देखा और मुस्कुरायी.)

शिव : चल, पीछे चलते है. (मेने उसको बहोत प्यार से कहा)

वैस्वी : (अपनी घडी देखते hue)Ab टाइम नहीं है, कब से बोल रही थी तो आये नहीं और अब जब रेसस्स ख़तम होनेवाली है तब कह रहे हो. (उसने प्यारवाला गुस्सा दिखा कर कहा)

शिव : तुमने कब कहा?

वैस्वी : अगर मेरा चेहरा पढ़ सकते तो पता चल जाता.

शिव : चेहरा पढ़ने में सायद अभी कमजोर हु. (मेने मुस्कुरा के कहा)

वैस्वी : जूते कही के, सब समझते हो, पर जान बुज के तरसते हो.

शिव : में समाज नहीं प् रहा हु की क्या करू, इस लिए अपने कदम पीछे खिंच लेता हु.

वैस्वी : सब तुम्हारे हाथ में नहीं है शिव, न सब मेरे हाथ में है, जो होगा देख लेंगे. (तभी रेसस्स ख़त्म होने की बेल बज गयी, हम दोनों खड़े हुए और क्लास की और चल दिए)

छूट ते समय हर्ष और महेश थे तो वो ज्यादा रुकी नहीं और सबको bye बोल कर चली गयी, में अकेले hi घर की और निकल गया, रस्ते में संयम की गली आयी तो सोचा की एक बार मिल लू, पर फिर सोचा की बाद में आता हु, ये सोच कर घर चला गया. घर पर काम चल रहा था, पर कोई लड़कीअ नहीं थी, लोहे की रोड का काम चल रहा था तो कुछ लड़के hi थे, मेने उनसे बात की और अंदर चला गया. खाना खाने के बाद मेने पवनसीर को फ़ोन किआ तो उन्होंने बताया की अभी साइट पर खुदाई hi चल रही है, तो जाने की जरीरत नहीं है. में सीधे संयम के घर निकल गया, दरवाजा आंटी ने खोला, मुझे देख कर वो थोड़ा झिझक गयी, पर फिर मुस्कुराते हुए मुझे आने को कहा. मेने संयम का हल चल पूछा तो उन्होंने बताया की अभी बेहतर है पर कमजोरी है तो वो अपने बिस्तर पर hi सोई हुई है. मुझे ऊपर जाने को कहा तो संयम सो रही थी, में उसके पास बेथ गया तो उसने आंखे खोल दी. मुझे देख कर वो मुस्कुरायी.

संयम : तुम कब आये?

शिव : अभी अभी आया हु. कैसी हो तुम?

संयम : (फीका सा मुस्कुराते hue)Achchi हु.

शिव : अचानक क्या हो गया तुम्हे?

संयम : डॉक्टर ने कहा की वायरल है, दो चार दिन में ठीक हो जायेगा. (तभी आंटी हाथ में ट्रे ले कर आयी, मेने देखा तो उसमे खाना था और पानी भी था, खाना देख कर संयम boli)Muje नहीं खाना है अम्मी.

ज़ोया : खायेगी नहीं तो ठीक कैसे होगी, जब देखो तब मन करती रहती है, दवाई भी कहानी है, बिना खाये दवाई नहीं खा सकते, खा ले थोड़ा. (उन्होंने हलके से डांटा)

शिव : लाइए, में खिला देता हु, देखता हु कैसे नहीं कहती है. (मेने डिश लेते हुए कहा, संयम मुझे घर के देखने लगी, जैसे नाराज हो, में मुस्कुराया और उसको खिलने की सोचने लगा पर वो लेती हुई थी तो मेने डिश वापस राखी और उसको उठाने लगा, बीएड के सहारे तकिये लगा कर उसको बिठा दिया, फिर से डिश ले कर एक निवाला बनाया और उसकी और बढ़ा दिया, उसने फिर मेरी और नारजगीवाला चेहरा किया पर फिर मुँह खोल दिया, मेने निवाला उसके मुँह में रख दिया और वो खाने लगी, ज़ोया ये सब मुस्कुराते हुए देख रही थी, संयम न न करती रही पर मेने उसको काफी खिला दिया)

संयम : अब नहीं खाया जायेगा. (उसने बेबसी से कहा, तो मेने डिश रख दी, और उसको पानी पिलाया)

ज़ोया : थोड़ा hi देना, अभी दवाई भी कहानी है, तू hi खिला दे वर्ण फिर ये नाटक करने लगेगी.)

शिव : एक मुनुते (मेने अपने जूठा हाथ दिखते हुए कहा और निचे चला गया और हाथ दो कर वापस आ gaya)Laiye. (मेने दवाई ली और उसको खिलने लगा तो वो फिर मुँह इधर उधर करने लगी)

संयम : (मेरी और बेबसी से देखते hue)Kadavi है.

शिव : तो क्या हुआ, खा लेगी तो जल्दी अच्छी हो जाएगी, अब नाटक मात कर और खा ले. (उसने अपना मुँह बिगाड़ा, पर गोली खा ली)

ज़ोया : तू hi आ जाना इसको खिलने, वर्ण पता नहीं कितना नाटक करवाती है ये. (ज़ोया ने मुस्कुराते हुए कहा, में भी मुस्कुराया पर संयम ने नाराजगी से अपनी अम्मी को देखा)

संयम : खा तो लेती हु, क्यों जूथ बोल रही हो?

ज़ोया : पता है पता है, कैसे कहती है, कितनी मिन्नतें करनी पड़ती है तब जा के एक दो निवाले कहती है.

संयम : पर अच्छा नहीं लगता तो में क्या करू.

ज़ोया : तुम दोनों बाटे करो में जाती हु. (कहते हुए वो सब ले कर वह से चली गयी.

संयम : (मुस्कुराते हुए शिव को देखने लगी और boli)Muje पता होता की में बीमार होउंगी और तुम मेरा इतना ख्याल रक्खोगे तो में पहले hi बीमार हो जाती. (वो मुस्कुराते हुए बोली)

शिव : मर खायेगी जो ऐसा बोलै तो. (मेने उसका हाथ जो बिस्तर पर था उस पर अपना हाथ रखते हुए कहा) तू वैसे hi अच्छी लगती है, उछलती कूदती. (वो फीका सा मुस्कुरायी)

संयम : और, स्कूल में सब कैसा रहा?

शिव : सब अच्छा है, सब तुजे याद कर रहे थे.

संयम : तूने किया? (उसने मुस्कुराते हुए पूछा)

शिव : किया तभी तो तुमसे मिलने चला आया. (हम दोनों ऐसे hi कुछ देर बाते करने लगे, थोड़ी देर बाद आंटी जूस ले कर आयी, मेने संयम का हाथ छोड़ दिया, वो आयी और मुझे देने lagi)Iski क्या जरुरत थी, में खा कर hi आया हु.

संयम : अब तू क्यों नाटक कर रहा है, एक जूस से क्या फर्क पद जायेगा? (उसने जैसे मुझे डाटा तो मेने जूस ले लिया, आंटी उसके सिरहाने बेथ गयी और उसका शिर सहलाने लगी, वो नजदीक hi बैठी थी तो मेरा पेअर उनके पेअर से टच हो गया, अचानक हुआ था तो मेने पेअर खिंच लिया, पर एक बार हमारी नज़ारे टकरा गयी, मेने ध्यान हटाया और जूस पिने लगा, संयम उबासियाँ लेने लगी थी, शायद दवाई का आसार था, मेने जूस ख़तम कर लिया था, मेने गिलास साइड में रख दिया और कहा) तू सजा, में चलता हु.

संयम : रुक न थोड़ी देर.

शिव : पर तुजे नींद आ रही है.

संयम : तो क्या हुआ, बेथ न थोड़ी देर, में सो जाऊ तब चले जाना.

शिव : (मेने आंटी की और देखा पर वो मेरी और नहीं देख रही thi)Thik है. (आंटी उसका शिर सहलाने लगी, मेने आंटी से hi पूछा) डॉक्टर ने क्या कहा है?

ज़ोया : कुछ नहीं, वायरल hi है, दो तीन दिन में ठीक हो जाएगी.

शिव : नाज़िआ दीदी कब आ रही है?

ज़ोया : पता नहीं, अभी ऐसा कुछ तय नहीं हुआ है, कल hi फ़ोन आया था, तेरे बारे में भी पूछ रही थी. (मेरा ध्यान गया की जब में आया था और अब में कुछ फर्क है, जब में आया था तो आंटी थोड़ी अस्तव्यस्त थी, पर अभी सब ठीक था, शायद उन्होंने अपने बाल बना कर ठीक कए है और चेहरा भी दो दिया hai)(Ye सच भी था, शिव आया था ज़ोया काम कर रही थी तो वैसी हो गयी थी पर फिर उसने अपने आपको सही कर लिया था, मेने एक नजर संयम की और डाली तो वो आंखे बंद कर चुकी थी, मेने आंटी की और देखा तो हमारी नज़ारे मिली, मेने आंटी को ऊपर से निचे तक देखा, फिर उनकी आंक्खो में देखा तो वो शर्माने लगी और अपनी नज़ारे निचे कर li)(Zoya, शिव की आँखों में आये बदलाव को पहचान चुकी थी, उसका दिल धड़कने लगा था, वो अपने आपको समजती थी की अब वो ऐसा कुछ भी नहीं करेगी, पर उसका दिल नहीं मान रहा था, उसने आपने आपको नार्मल रखने की बहोत कोशिस की पर वो असहज होती चली gayi)(Unke चेहरे पर आये बदलाव में समाज रहा था, हम दोनों चुप थे, पर जैसे फिर भी बात हो रही थी, मेने आंटी के शरीर पर नजर डाली, उनके भरे हुए स्तन और भरे हुए नितम्ब, कपड़ो से भी अपना अस्तित्व बयां कर रहे थे, मेने भी अपने आप को रोकना चाहा पर दिल मान नहीं रहा था, पता नहीं क्या आकर्षण था उनमे, उनके पेअर जमीं पर थे, मेरे भी पेअर पास में hi थे, तो मेरा दिल मचलने लगा, पर मेने अपने आप को रोका की ऐसा कुछ नहीं करना है, पर थोड़ी देर की कस्मकस के बाद मेने अपने पेअर को थोड़ाएगे बढ़ाया और उनके पेअर की उंगलिओ को टच करवा दिया, उन्होंने एक पल मुझे देखा और अपनी नज़ारे झुका ली, वो ऐसा दिखा रही थी जैसे उन्हें कुछ पता hi नहीं है, सिर्फ उंगलिओ को छूने से hi मेरे लुंड में अकड़न आणि सुरु हो गयी, में उनके पैरो की उंगलिओ को अपने पैरो से छू रहा था, वो कुछ नहीं बोल रही थी, न अपना पेअर पीछे खिंच रही थी, मेने पेअर को थोड़ा आगे किया और उनके पेअर को सहलाने लगा.) (ज़ोया सब समाज रही थी, एक और तो उसको शर्म आ रही थी, जबसे उसको पता चला था की उसकी बेटी को उसके बारे में पता चल गया है वो अपने आपको तैयार कर रही थी की वो ऐसा कुछ भी नहीं करेगी, पर उसका दिल मचलने लगा था, वो वैसे hi बैठी रही, वो वह से उठ कर जा भी सकती थी पर न जाने क्यों वो नहीं उठी, शिव उसके पेअर को सेहला रहा था, उसका पूरा ध्यान उसकी हरकतों पर hi था, उसके शरीर के रोये भी खड़े हो गए थे, उसने एक बार फिर शिव को देखा, दोनों की आंखे आपस में टकराई, दोनों एक दूसरे को देख रहे the)(Mene संयम को देखा तो वो सो चुकी थी, मेने अपना हाथ बढ़ाया और ौंटी के घुटने पर रख दिया जो मेरे नजदीक hi था, वो ना में इस्सर करने लगी और संयम की और देखने लगी, पर मेने हाथ नहीं हटाया, संयम सो चुकी thi)(Zoya का दिल कर रहा था की जो होता है वो हो जाने दे, पर दूसरी और उसका मान मन भी कर रहा था, शिव का हाथ उसकी झांघो की और बढ़ रहा था तो उसने शिव के हाथ को पकड़लिया और ना में इस्सर करने लगी, पर उसका चेहरा साफ़ बयां कर रहा था की भले वो मन कर रही है पर वो पूरी सिद्दत से चाहती है की ये न रुके, वो बैठी हुई थी , शिव के हाथ उसकी झंगो पर आ गए थे और वो उसको सेहला रहा था, उसका भी दिल मचलने लगा था, पर वो खुद को रोक रही thi)(Waise भी में खुद पर हैरान था की में ऐसी हरकत क्यों कर रहा हु, पर कही न कही वो मुझे अच्छी लगती थी, वो एक मातुरे लेडी थी, और उनके अंग भी दुसरो की तुलना में काफी भरे हुए थे, ऊपर से संयम भी हमारे बारे में जानती थी, और उसको इस से को एतराज भी नहीं था, तो मेरी हिम्मत और बढ़ रही थी, मेने हाथ उनकी झांघो से होते हुए आगे की और बढ़ने लगे, वो झंगो के बिच तक पहुंचने लगे थे, वो ना में इस्सर कर रही थी, पर जैसे उनकी ना मुझे और भड़का रही थी, मेरा हाथ उनकी भरी झांघो को सेहला रहा था, लास्ट टाइम उन्होंने hi मुझे निमत्रण दिया था की में औ, इसलिए में भी बिंदास था. संयम वह थी तो ज्यादा कुछ नहीं कर सकते थे तो मेने झंघ को दबाते हुए आंटी को बहार चलने के लिए सिर्फ इस्सर किया, उन्होंने ना में गर्दन hilayi)(Zoya का दिल तो बहोत कर रहा था पर पता नहीं कैसे वो अपने आपको रोक रही थी) (मेने फिर उन्हें बहार चलने का इस्सर किया, पर वो फिर ना कह रही थी, मुझे भी थोड़ा गुस्सा आने लगा तो मेने सोचा की अब यहाँ से चलना hi ठीक रहेगा, मेने हाथ हटा लिया और उन्हें नाराजगी से देखा और संयम को देख कर कहा)

शिव : संयम (पर वो कुछ नहीं बोली क्यों की वो नींद में थी, मेने आंटी को देखा, और जैसे संयम को कह रहा हु वैसे hi bola)Me जा रहा हु संयम, फिर मिलते है. (उसने तो कोई जवाब नहीं दिया, मेने आंटी को देखा तो वो बेबसी से मुझे देख रही थी, मेने धीरे से उनको kaha)Me चलता हु. (वो कुछ नहीं बोली बस मुझे देख रही थी, में वह से बहार की और जाने लगा, दरवाजे पर आ कर रुका, मेने उन्हें फिर देखा तो वो बेबसी से मुझे देख रही थी, उनके चेहरे से साफ़ पता चल रहा था की वो क्या चाहती है पर फिर भी वो मन कर रही थी, तो में वह से निचे चला गया और बहार निकल गया, मेने बाइक ली और वापस घर की और निकल गया, वह काम अभी भी चालू hi था, में थोड़ी देर वह रुका पर धुप बहोत लग रही थी तो में अंदर चला गया, पता नहीं वो लोग कैसे इतनी धुप में भी काम कर लेते है) अंदर सब सोये हुए थे, में भी अपने कमरे में चला गया और लेट गया और अभी जो कुछ भी हुआ था उसके बारे में सोचने लगा, में समझने की कोशिस करने लगा की आखिर उन्होंने hi तो मुझे कहा था फिर क्यों मन कर रही थी. फिर मेने सोचा की उनकी मर्ज़ी है, में थोड़ी देर सो गया. शाम को जूही का फ़ोन आया तो जाग गया.

शिव : Hello.

जूही : कहा रह गए?

शिव : (मेने घडी dekhi)Sorry, में बस पांच मिनट में आया. (में फटा फैट तैयार हुआ और लता को बोल कर निकल गया, जब में वह पंहुचा तो वो मुझे डाटने लगी, बिना मैडम है रही thi)Aap क्यों हर रही हो? (मेने नाराजगी से कहा)

बिना : (मुस्कुराते hue)Ab क्या मुस्कुरा भी नहीं सकती.

फिर में और जूही स्टेडियम चले गए. वह हम दोनों ने कसरत की और फिर वापस घर की और निकल गए, में रस्ते में hi था की मेरे मोबाइल पर कॉल आया, मेने देखा तो संयम के घर से था, मेने फ़ोन उठाया.

शिव : Hello.

ज़ोया : Hello, में बोल रही हु. (मेने आंटी की आवाज पहचान ली)

शिव : है कहिये. (मेने थोड़ी जराजगी से कहा)

ज़ोया : क्या तुम अभी घर आ सकते हो?

शिव : क्या हुआ?

ज़ोया : वो इसके अब्बू अभी नहीं आ सकते, और संयम को डॉक्टर के पास ले जाना है.

शिव : (चिंता se)Kyu क्या हुआ?

ज़ोया : नहीं, बस रूटीन चेकउप के लिए hi जाना है, डॉक्टर ने दो दिन की दवाई दी थी तो आज दिखाना था.

शिव : ओह! ठीक है में आता हु.

जूही : कोण था? (मेने उसको सब बता दिया) ओह! Ok.(Mene जूही को घर छोड़ा और में सीधे संयम के घर चला गया, आंटी ने दरवाजा खोला, संयम निचे सोफे पर hi बैठी थी, में अंदर गया और संयम से उसका हल पूछा, उसने फीकी हसी के साथ कहा की ठीक है)

ज़ोया : यहाँ नज़दीक में hi है क्लिनिक, वो तुम्हे रास्ता दिखा देगी. (मेने एक बार उनको देखा फिर नज़ारे संयम की और कर ली)

शिव : ठीक है. पर ये बाइक पर बेथ सकेगी?

संयम : है, बेथ जाउंगी. (वो कड़ी हुई, आंटी ने उसको सहारा दिया, हम सब बहार aye,mene बाइक सीधी कर ली और बेथ गया, आंटी ने संयम को सहारा दे कर बिठा दिया, ये देख कर बाजूवाली आंटी वह आ गयी)

आंटी : क्या हुआ ज़ोया?

ज़ोया : नहीं कुछ नहीं, वो बस दवाखाने जा रहेहै, इसके अब्बू अभी नहीं आ सकते तो ये ले जा रहा है.

आंटी : ओह! (संयम को देख kar)Beth लोगी न बेटी. (संयम ने है में इस्सर किया, में बाइक ले कर निकल गया, क्लिनिक नजदीक महि था तो मेने बाइक वजा रोकी और थोड़ा पीछे घूम कर संयम को सहारा दिया और उसको मेरे पास में खड़ा किया, फिर में उतर गया और उसको सहर देते हुए अंदर ले गया. काफी लोग थे वह, वैसे भी ये वायरल का सेअशन था तो काफी लोग बीमार थे, हमने थोड़ी देर वेट किया, जब हमारा नंबर आया तो में उसको अंदर ले गया, डॉक्टर ने उसको छेदक किआ और उसको कुछ सवाल पूछे, उसने पेशाब के कलर के बारे में भी पूछा तो संयम शर्मा गयी, जवाब दिया और मेरी और तिरछी नजरो से देखा. उसके बाद डॉक्टर ने दवाई दी)

शिव : कैसा लग रहा है सर?

डॉक्टर : सब ठीक है, दो तीन रोज़ में ठीक हो जाएगी, दो दिन की दवाई दे रहा हु, फिर एक बार मुझे दिखा देना.

शिव : ठीक है सर. (में और वो बहार निकले, बहार एक आदमी ने हमे दवाई दी और कब लेना है वो समजा दिया, मेने दवाई अपनी जेब में रख दी, हम बहार आये, मेने संयम को सहारा दिया हुआ था, में बाइक पर बेथ गया और उसको सहारा दिया तो वो खुद hi बेथ गयी, हम वापस घर की और निकल गए, उसने मेरी पीठ पर अपना शिर टिका diya)Kya हुआ?

संयम : कुछ नहीं, बस थकन हो रही है.

शिव : मुझे पकड़ लो, कही गिर न जाओ.

संयम : (मुस्कुराते hue)Roz पकड़ती हु तो छोड़ने को कहते हो, और आज खुद hi पकड़ने को कह रहे हो.

शिव : अब ज्यादा नौटंकी मात कर, वो अलग बात है और ये अलग बात है. (संयम ने उसकी कमर में हाथ दाल दिया तो शिव ने उसके हाथ को एक हाथ से पकड़ लिया, वो उसके लिए परेशान हो रहा है ये देख कर संयम को बहोत अच्छा लग रहा था, वो दोनों घर पहुंच गए, आंटी बहार hi कड़ी थी, जैसे hi मेने बाइक रोकी उन्होंने संयम को सहारा दिया और निचे उतर दिया. हम अंदर गए, वो सोफे पर लेट गयी, मेने दवाई आंटी को दे दी, और उन्हें सब समजा दिया. में सोफे पर बेथ गया, आंटी हम दोनों के लिए पानी ले आयी, मेने पानी पि liya.)Ye ऊपर कैसे जाएगी?

आंटी : में सहारा दे कर ले जाउंगी. (में कहना चाहता था की में उठा कर पंहुचा दू पर कहा नहीं)

शिव : ठीक है, में चलता हु.

संयम : क्या चलता हु, मुझे ऊपर ले जाओ, में नहीं सीढिया चढनेवाली. (मेने आंटी की और देखा तो ज़मीन में भी अपनी अम्मी को देखा) बहोत थकन हो रही है अम्मी. (उसने मायूस चेहरा बनाते हुए कहा)

आंटी : ठीक हिअ, जा ऊपर ले जा इसको. (ज़ोया भी समाज रही थी की वो इतनी भी कमजोर नहीं है की चल न सके, पर वो कुछ नहीं boli)(Mene संयम को गॉड में उठाया और उसको ले कर ऊपर जाने लगा, ज़ोया दवाई ले कर अंदर चली गयी, वो इन दोनों के बिछ नहीं आना चाहती थी, संयम ने देखा की उसकी अम्मी अंदर चली गयी तो उसने शिव के गले में बहे दाल दी और मुस्कुराने लगी, में भी मुस्कुराया, मेने उसको बिस्तर पर लेटाया तो उसने मेरे गले से बहे नहीं हटाया ुर कास में मुझे अपनी और खिंच लिया)

शिव : क्या कर रही हो?

संयम : प्यार.

शिव : अभी तो इतनी कमजोर दिख रही थी और अभी देखो. (मेने मुस्कुराते हुए कहा)

संयम : वो तुम सब मेरा इतना ख्याल रख रहे हो तो में क्या करू, अगर अच्छे से रहूंगी तो मेरा ख्याल रक्खोगे?

शिव : पागल, छोड़, आंटी आ जाएगी.

संयम : एक किस तो दे पहले.

शिव : पागल है क्या, छोड़, आंटी ने देख लिया न तो तेरी समेत आ जाएगी.

संयम : पहले किश कर वर्ण नहीं छोडूंगी. (में जनता था की वो नहीं मानेगी तो मेने हलके से उसके होठो पर किश कर दिया, वो शर्मा गयी और मुझे छोड़ दिया)

शिव : चल में अब चलता हु.

संयम : बेथ न थोड़ी देर. (में उसको मन नहीं कर पाया और वह थोड़ी देर बेथ गया, अंकल भी आ गए )

अंकल : क्या बाटे हो रही है? (अंदर आते हुए वो मुस्कुराये)

शिव : (खड़े होते hue)Kuchh नहीं.

अंकल : अरे बैठो बैठो तुम (संयम का चेहरा सेहला kar)Kaise है मेरी बेटी?

संयम : अच्छी हु आबू. (थोड़ी नाराजगी से )आप क्यों नहीं आये, आपको पता है न की डॉक्टर के पास जाना था.

अंकल : थोड़ा काम आ गया था, ज़ोया ने बताया की शिव ले गया था तुम्हे. (मेरी और देख kar)sorry बीटा तुम्हे तकलीफ दी.

शिव : इसमें तकलीफ की क्या बात है, वैसे भी इसकी बकबक के बिना हम बोर हो रहे है तो हम भी चाहते है की ये जल्दी ठीक हो जाये. (में और अंकल हसने लगे तो संयम ने अपना मुँह फुला लिया)

संयम : में बक बक करती हु?

शिव : (हम muskuraye)Achchha में चलता हु अंकल.

अंकल : ठीक है, bye.

शिव : Bye संयम.

संयम : Bye. (में निचे आ गया, आंटी सामने hi मिल गयी, वो मुझसे देखने लगी, में कुछ नहीं बोलै और वह से निकल gaya)(Zoya उसको जाता हुआ देख रही थी, उसका दिल कस्मकश में था, क्या करे समाज नहीं आ रहा था)

मेने घर पहुंचकर खाना ख्य, और पढ़ने बेथ गया, काम ख़तम करने के बाद लता मेरे कमरे में आयी, और बिस्तर लगाने लगी, मेने उन्हें देखा तो वो मुस्कुरायी, मेने किताब बंद की तो उन्होंने मुझे डांटा.

लता : अगर मेरी वजह से पढ़ाई रोकी तो में चली जाउंगी. (मेने फिर किताब खोल ली और पढ़ने लगा, वो बिस्तर पर लेट गयी थी, में पढ़ रहा था, आधे पौने घंटे बाद मेने किताब बंद की और बिस्तर पर आ गया, मेने देखा तो वो सो चुकी थी, काम कर के वो भी थक जाती होगी, में उनकी बगल में लेट गया, और उनको देखने लगा, वो बिना चुन्नी के सोई थी, उनके उभर ऊपर निचे हो रहे थे, मान कर रहा था की उनके होठो को चुम लू, पर वो जाग न जाये इस लिए मेने कुछ नहीं किया और आंखे बंद कर के सोने लगा, कब नींद आ गयी पता hi नहीं था. सुबह अपने टाइम पर उठ गया में, वो सोई हुई थी तो में बिना आवाज किये वह से निकल गया, फ्रेश हुआ और वह से कसरत करने चला गया. जब में लौटा तो सब काम कर रहे थे, गायत्रीदिदी, विणा और रंजन चले गए थे, में भी तैयार हुआ और स्कूल के लिए निकल गया.

बड़ी रेसस्स हुई तो महेश ने मुझे कहा की उनके साथ चालू, पर मेने मन कर दिया.

हर्ष : चल न बे, मज़ा आएगा, हमारी दो लड़कीओ से दोस्ती हो गयी है, तुजे भी मिलवाते है.

शिव : उनको भी गार्डन में ले आ, साथ में बैठेंगे.

महेश : बात अभी इतनी आगे नहीं बढ़ी, वो नहीं आएँगी.

शिव : (हस्ते hue)Baat हुई भी है की नहीं?

हर्ष : बात नहीं हुई है, बस इससरए हुए है, वो हमें देख कर मुस्कुराती है.

शिव : तो जाओ बात करो उनसे.

हर्ष : तू चल न, थोड़ी हिम्मत आएगी.

शिव : अबे हर जगह मुझे ले जायेगा क्या, जा मर्द बन और बात कर, में नहीं आनेवाला.

महेश : तू चल हर्ष, ये कहा हमारा दोस्त है. (कह के वो दोनों जाने लगा, में है रहा था, वो दोनों चले गए, में भी बहार निकला तो थोड़ी दुरी पर वैस्वी कड़ी थी, में उसके पास गया)

वैस्वी : तुम्हारे दोस्त नहीं आये?

शिव : नहीं उनको कुछ काम है.

वैस्वी : ऐसा क्या काम है जो रोज़ नहीं आ रहे?

शिव : है उनका कुछ पर्सनल, चलो हम चलते है.

वैस्वी : (हल्का सा सरमते hue)Pehle मुझे फ्रेश होना है.

शिव : तो चलो. (हम दोनों बाथरूम की और चले गए, वो उनके बाथरूम में गयी और में हमारे, वह से आने के बाद मेने देखा की वो कड़ी थी, में उसके पास गया, उसने मेरी और देखा और पीछे बने उस गेट को देखा, में उसका इस्सर समाज रहा tha)Abhi नहीं, चलो यहाँ से. (उसको खींचते हुए में ले जाने लगा तो अपना मुँह बिगड़ने लगी, हम दोनों वापस आगे आ गए और एक जगह बेथ गए, वो मेरी और देख नहीं रही थी, में muskuraya)Abhi इतना टाइम नहीं होता यार, समजा कर न.

वैस्वी : में सब समझती हु, में hi तुजे पसंद नहीं हु, इस लिए मुझे इग्नोर कर रहे हो.

शिव : क्या पागलो जैसी बात कर रही हो, ऐसा कुछ भी नहीं है, क्या लायी हो नास्ते में?

वैस्वी : (अपना डिब्बा खोल के मेरे सामने देते hue)Lo खुद hi देख लो. (वो नाराज थी, मेने बात बदली)

शिव : संयम से मिलने गयी थी?

वैस्वी : नहीं, सिर्फ फ़ोन पर बात हुई थी. (फिर मेरी और घर kar)Us से मिलने जा सकतेहो, जब में कहु तभी बहाने होते है तुम्हारे पास. (वो फिर अपना मुँह टेढ़ा कर के बोली)

शिव : क्या यार तुम भी, वो बीमार है तो चला गया था.

वैस्वी : तो क्या में भी बीमार हो जाऊ?

शिव : अब रूठना छोडो और नास्ता करो, कहा की बात कहा ले जा रही हो तुम.

वैस्वी : मुझे नहीं खाना, तुम hi खाओ.

शिव : अगर तुम्हे नहीं खाना तो में भी नहीं खता हु, चलो चलते है (कहते हुए में डिब्बा बंद करने लगा तो उसने मेरा हाथ रोक दिया और अंदर से नास्ता ले कर खाने लगी और मेरी और गुस्से से देखने lagi)Tum भी अजीब हो यार. (कहते हुए मेने भी नास्ता लिया और खाने लगा, हम दोनों का ये चलता रहा, रेसस्स भी ख़तम हो गयी और हम स्कूल से छूट भी गए, में घर जाते जाते संयम को मिलता हुआ गया, वो थोड़ी ठीक थी, फिर में वह से निकल गया, आंटी से कोई बात नहीं हुई, मेने भी खाना खाया, मेने मोबाइल देखा तो पवनसीर का मश्ग था तो मेने उन्हें कॉल लगाया)

पवनसीर : है, आ गए स्कूल से?

शिव : जी सर, कहिये.

पवनसीर : ज्यादा कुछ नहीं था, बस सूर्यदेवजी का फ़ोन आया था, वो काम की जानकारी मांग रहे थे, वैसे फ़ोन पर बात हो गयी है, बस थोड़े कागजात उनतक पहुंचने है तो घर से ले कर पंहुचा डोज?

शिव : इसमें पूछने की क्या बात है सर, में दे आता हु.

पवनसीर : अच्छा ठीक है, में स्नेहा को बोल देता हु, तुम चले जाना.

शिव : ठीक है सर, अभी जाता हु.

में उनके घर चला गया, एक नुकरणी ने दरवाजा खोला, में अंदर चला गया, वह स्नेहा मैडम बैठी हुई थी. मेने उनसे hello कहा, उन्होंने नौकरानी को पानी लेन को कहा. में उस नौकरानी को देखने लगा तो स्नेहा मैडम ने कहा.

स्नेहा : पवन ने कहा की आराम करो, ज्यादा काम मात करो, तो ये नौकरनी रख ली है. (में बस मुस्कुराया, वो पानी ले आयी, मेने पिया, वो गिलास ले कर चली गयी)

शिव : सर ने फाइल के लिए कहा था.

स्नेहा : है अंदर है, देती हु, (किचन की दिशा में देख कर, धीरे se)Tum भी चलो. (मेने भी किचन की और देखा और हम दोनों उनके बैडरूम की और चले गए, अंदर जाते hi वो मेरे गले लग गयी, मेने भी उन्हें अपनी बहो में भर liya)Tumhe याद नहीं आती मेरी?

शिव : इसमें कोई कहने की बात है.

स्नेहा : तो फिर आते क्यों नहीं?

शिव : आता तो हु.

स्नेहा : वो तो जब पवन बुलाते है तब आते हो, ऐसे hi कभी आये क्या?

शिव : क्यों, आपको क्या काम है? (मेने मुस्कुराते हुए कहा)

स्नेहा : काम है तभी आओगे क्या? (उन्होंने रूत ते हुए कहा)

शिव : ऐसा नहीं है.

स्नेहा : तो फिर? क्या मेरी याद नहीं आती?

शिव : बहोत आती है. (कहते हुए मेने उनके होठो को चुम liya)Par अभी थोड़ी दुरी जरुरी है.

स्नेहा : ऐसा कुछ नहीं है, मेने डॉक्टर को भी पूछ लिया है, उन्होंने कहा है की कर सकते है. (वो शरमाते हुए बोली)

शिव : ठीक है, में आऊंगा?

स्नेहा : कब आओगे?

शिव : आप बता देना? (तभी बहार से आहत हुई तो हम दोनों अलग हो गए, उन्होंने फाइल मुझे दे दी, हम दोनों बहार आ गए, वो नौकरानी काम कर रही थी, मेने स्नेहा मैडम को bye कहा और वह से निकल गया, उसके बाद में सूर्यदेव जी की घर गया, उन्हें फाइल दी और थोड़ी देर बाते की और वह से भी निकल गया, शाम को स्टेडियम चला गया, लौट ते वक़्त में भार्गवी से भी मिल आया और फिर घर चला गया)

रात को और कुछ नहीं हुआ, में सो गया. सुबह फिर से वही हुआ, स्कूल में भी कुछ खास नहीं हुआ, में सीधे घर चला गया, खाना खा के में खड़ा hi हुआ था की ज़ोया आंटी का फ़ोन आया, मेने उठाया तो संयम थी.

संयम : कहा हो तुम, आये क्यों नहीं?

शिव : वो में घर आ गया था.

संयम : (नाराजगी se)Lo अम्मी को देती हु.

शिव :Hello, हलुओ.

ज़ोया : Hello(Bahot नरमी से)

शिव : क्या हुआ?

ज़ोया : उसने फ़ोन मुझे दे दिया, खा भी नहीं रही है, तुम आये क्यों नहीं?

शिव : ठीक है में आता हु. (मेने फ़ोन रख दिया)

ज़ोया : (संयम को देखते hue)Aa रहा है, क्यों परेशान करती रहती है उसे?

संयम : वो हमारी बात है.

कुछ सोचने लगी वो, ज़ोया का दिल धड़कने लगा.
 
अपडेट 210

दोपहर के खाने के बाद पद्मा अपने बीएड में लेती हुई थी, वो अपने जीवन के बारे में सोच रही थी, अभी थोड़ी देर पहले hi उसकी कृपाली से बात हुई थी. उसने भी बताया था की किस तरह वो अपने पति के साथ रह रही है, उसका पति थका हो फिर भी वो उसके साथ कैसे भी सेक्स कर रही है, पद्मा का खुद का भी यही हल था, वो नियमित दवाई खा रही थी, उसका गर्भाधान का समय अभी सुरु हुआ था, उसका पति जब कल रात आया था तो उसने सामने से उसको अपने साथ सेक्स करने के लिए उकसाया था, वो मन कर रहा था पर फिर भी उसने उसके लुंड को पदक लिया और खींचने लगी.

पृथ्वी : ये क्या रंडी पाना है? छूट में ज्यादा गर्मी बढ़ गयी है क्या?

पद्मा : (वो उसको रंडी कह रहा था पर फिर भी वो शांत रही, क्यों की वो अभी कोई जगहदा नहीं चाहती थी, उसने शांत रह कर hi kaha)Apko पता है, मेने आपको बताया भी था, में दवाई खा रही हु, और जैसा डॉक्टर ने बताया था, अभी उचित समय है, ये सब करने का.

पृथ्वी : तुम्हे क्या लगता है, ये सब कर के तुम माँ बन पाओगी?

पध्मा : तो आपको क्या लगता है, में कैसे माँ बन पाऊँगी? (वो थोड़ा गुस्सा हो गयी)

पृथ्वी : तू बांज है, तू कभी माँ नहीं बन सकती.

पद्मा : (उसको बहोत बुरा लगा, पर ये सब तो वो कई बार सुन चुकी थी, तो अब बुरा लगा कर भी कितना बुरा लगाती, उसने अपने आपको शांत किआ और boli)Thik है, में बांज हु बस, खुस, पर में प्रयत्न तो कर रही हु न, दवाई खा रही हु, अच्छा खाना खा रही हु ताकि जो भी कमी है वो ठीक हो जाये, अगर आप साथ hi नहीं डोज तो में कैसे माँ बन पाऊँगी.

पृथ्वी : ये भी बात सही है, वैसे भी तेरा यार तो अब रहा नहीं. (उसने कुटिलता से कहा)

पद्मा : (ये बात सुन कर उसको रोना आ रहा था, पर उसने अपने आप को sambhala)Me पहले भी कह चुकी हु, ऐसा कुछ भी नहीं था, आपको भी पता है की सुहागरात को hi मेरी सील टूटी थी, आप अच्छी तरह से जानते है. (उसने रोनी सूरत बना कर कहा)

पृथ्वी : तभी तो इस घर में अभी भी है, वर्ण कब की तुम्हे तुम्हारी गांड पर लात मर कर निकल दिया होता. पर ये भी पता है की तू उसके साथ भी सोई थी, चाहे तू कितना भी मन कर पर मुझे सब पता है.

पद्मा : आपने देखा था क्या जो ऐसा कह रहे है, या किसी ने भी देखा था क्या?

पृथ्वी : ज्यादा होशियार मात बन, मुझे सब पता है, भले hi किसी ने न देखा हो, पर ये तो देखा है न की तू उस से मिलने गयी थी.

पद्मा : में सिर्फ मिलने गयी थी, वो भी इस लिए की में उसको संजना चाहती थी, ये में पहले भी बता चुकी हु, अपने ख़म खा hi usko...(Wo आगे बोल नहीं पायी)

पृथ्वी : है है, सब पता है तेरी जूठी कहानिया, साली, शादी से पहले से तेरा चक्कर था.

पद्मा : (रोनी आवाज me)Me पहले भी बता चुकी हु की ऐसा कुछ नहीं था, और अगर ऐसा होता तो में कुवारी आपको न मिली होती, कितनी बार सफाई दू अपनी. और ये समय है ये सब कहने का, यहाँ में हमारे बच्चे के बारे में सोच रही हु और आप है की बेरुखी बातो को ले कर बैठे है, मार दिया न आपने उसे, फिर कहानी ख़तम हो गयी, अब क्या है जो आप सुना रहे है. इन चार दिवलो में कैदी बन कर रहती हु, कही आती जाती नहीं हु, फिर अब क्या है जो बार बार मुझे यु सुनते रहते है, अगर आपको बच्चा नहीं चाहिए, या फिर आपको लगता है की में hi बांज हु तो निकल दीजिये घर से, कर लीजिये दूसरी शादी. (उसने गुस्से से kaha)(Uski बात से पृथ्वी शांत हो गया, क्यों की उसको भी पता था की वो ये सब कर चूका था, उसने कई लड़कीओ को अपने निचे रोंडा था, पर आज तक कोई भी माँ नहीं बन पायी थी, उसको भी पता था की भले hi लोग उस से डरते हो पर पिक्थ पीछे उसके ऊपर हस्ते है, कुछ लड़कीअ तो ऐसी भी थी जिसको उसने कई बार भोगा हो, एक लड़की तो और भी खास थी, खुद पृथ्वी ने सोचा था की अगर ये माँ बन गयी तो वो उसको पद्मा की जगह दे देगा, पर कई बरसोंके मिलान के बाद भी वो माँ नहीं बानी थी, आखिर कर वो भी शादी कर के चली गयी थी, और दूसरे hi साल उसके वह भी बच्चा हो गया था)

पृथ्वी : ठीक है ठीक है, अब रोना बंद कर, तुजे जो करना है कर.

पद्मा : (वो भी शांत हो गयी, क्यों की वो भी इस झगडे को ज्यादा खींचना नहीं चाहती थी, वो बाथरूम में गयी, अपने आपको संभाला और मुँह धो के वापस आ गयी, पृथ्वी वैसे hi लेता हुआ था, वो उसके पास गयी और उसके ऊपर अपना पेअर दाल कर उसकी छाती को सहलाने लगी, पर उसने कोई ज्यादा तवज्जु नहीं दिया, वो धीरे धीरे अपने हाथ को उसके लुंड की और ले गयी, वो उसको मसलने लगी, थोड़ी देर मसलने के बाद भी उसमे कोई कड़ा पैन नहीं आया, वो निराश हो रही थी, पर फिर भी उसने अपने आपको संभाला और उसके कुर्ते को ऊपर कर के उसके लहंगे के नदी को खोला और उसको निचे खिंच दिया, पूरा निकलने के बाद उसके अंडरवियर को भी निकल दिया, फिर से उसके ढीले लुंड से खेलने लगी, तब भी वो नहीं उठा तो वो लुंड को मुँह में लेने के लिए झुकी, उसको वह से महक आ रही थी, वो समाज गयी की ये किस चीज की महक है, उसका पति किसी के साथ चुदाई कर के आया था, पर वो इस समय लड़ाई नहीं करना चाहती थी और ये कोई नयी बात भी नहीं थी, उसने अपने पति का लेहंगा hi लिया और उस से उसके लुंड को पोछ कर साफ़ किया, फिर उसको अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी, थोड़ी देर चूसने के बाद लुंड में जान आने लगी.

जैसे तैसे उसने अपने पति के साथ सम्भोग कर लिया और उसके वीर्य को अपने अंदर डलवाया. यही सब वो अभी सोच रही थी, उसने कृपाली के कहे अनुसार निर्णय कर लिया था की वो कैसे भी कर के इस हफ्ते अपने पति के साथ सेक्स करेगी, उसने अपने पति को भी ये बात कह दी थी, उसने भी है कहा था.

वो ये भी सोच रही थी की ममतादिदी, स्वर्णादिदी और बीनडीडी, ये सब माँ बन रही थी, तो अब तो ये भी प्रॉब्लम नहीं था की कोई बाद दुआ या श्राप की वजह से घर में कोई माँ न बन रहा हो, पहले तो वो खुद को ये दिलासा भी दे रही थी, पर अब तो वो भी नहीं था. उसने काफी बार जान न चाहा पर अभी तक उसको कोई कामियाबी नहीं मिली थी, उसको लगने लगा की सब ठीक hi है पर फिर भी कही न कही उसको वो लड़का याद आ रहा था, आखिर ये सब उसको इतना इम्पोर्टेंस क्यों दे रही थी ये उसकी समाज में नहीं आ रहा था. वो इन्ही खयालो में सोने लगी और उसको नींद भी आ गयी.

वह में संयम के घर पहुंच गया. मेने दरवाजा खटकाया तो आंटी ने hi दरवाजा खोला, उन्होंने मुस्कुरा के मेरा स्वागत किया, आज उनके चेहरे पर एक अलग hi खुसी थी, में अंदर गया, उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया.

शिव : संयम ने खाना खाया?

ज़ोया : नहीं, वो कह रही थी की तुम आओगे तभी वो खायेगी. (उन्होंने मुस्कुरा के कहा)

शिव : ठीक है, आप खाना ले आइये, में ऊपर जाता हु. (कह के में ऊपर जाने लगा)

ज़ोया : Suno...(Unhone मुझे टोका तो में रुक गया और उनकी और देखने लगा, वो बहोत प्यार से मुझे देख रही थी, में उन्हें सवालिया नजरो से देखने laga)Kya नाराज़ हो मुझसे?

शिव : नहीं तो, में क्यों नाराज होऊंगा.

ज़ोया : सच में नाराज़ नहीं हो?

शिव : है नहीं हु. (मेने नार्मल रहते हुए कहा)

ज़ोया : कल के लिए सॉरी. (ज़ोया को ये बोलते हुए भी बहोत शर्म आ रही थी, पर आखिर कार वो बोल hi दी)

शिव : (में समाज रहा था की वो सॉरी क्यों बोल रही है, मेने उन्हें कल आने को कहा था पर फिर भी वो नहीं आयी थी, शायद इसलिए में थोड़ा नाराज़ भी tha)Kal के लिए, क्या हुआ था कल? (मेने अनजान बनते हुए कहा)

ज़ोया : (वो शर्म से पानी पानी हो रही थी, वो किस तरह से कहे समाज नहीं आ रहा था, उसने धीमी आवाज में kaha)Tum जानते ho.(Unhone नज़ारे झुकाते हुए कहा, में उनके नजदीक गया)

शिव : तो फिर ऐसा क्यों किआ था आपने?

ज़ोया : तो क्या करती, कितनी शर्म आ रही है मुझे, अपनी बेटी के उम्र के लड़के के साथ, क्या ये सोभा देता है मुझे?

शिव : तो फिर ाभ्ही क्यों उस बात को बता रही है?

ज़ोया : (मायूसी से मुझे देखते hue)Kya करू कुछ समाज नहीं आता, कितनी गन्दी हो गयी हु में, कभी कभी खुद पर बहोत गुस्सा आता है, मेरी बेतिया भी जानती है की मेने क्या किया है, कैसे उनसे नज़ारे मिलौ यही समाज नहीं आता.

शिव : संयम ने कुछ कहा?

ज़ोया : नहीं, कुछ भी नहीं कहा.

शिव : तो फिर दिक्कत क्या है?

ज़ोया : तुम समाज नहीं रहे हो, कितना अजीब लगता है, कितनी निचे गिर गयी हु में.

शिव : अगर आप नहीं चाहती तो फिर में वैसा कुछ भी नहीं करूँगा, आप निश्चिंत रहिये.

ज़ोया : जानती हु में, तुम कुछ भी गलत नहीं करोगे, पर शायद इसी वजह से मेरा हौसला बढ़ रहा है, कैसे कैसे ख्याल आते है, मुझे तो कहते हुए भी शर्म आती है. (उनकी बातो से इतना तो में समज रहा था की उन्हें क्या चाहिए, वो बस शर्मा रही थी और थोड़ा गिलटी फील कर रही थी, में उनके और नजदीक गया और उन्हें अपनी बहो में ले liya)(Zoya भी न चाहते हुए उसकी भुजाओ में समां गयी, उसकी आंखे भी बंद हो गयी, वो खुद को बहोत रोकती थी पर उसका न अपने मान पर वश था न अपने शरीर पर, उसको सब पता था की ये गलत है, पर फिर भी वो बह रही thi)(Me उनके नरम शरीर को सहलाने laga)Shiiiiv(Kehte हुए उसने भी शिव की कमर से हाथ दाल के उस से चिपक gayi)Me कितनी गन्दी हु न, सब जानते हुए भी में अपने आपको रोक नहीं प् रही हु.

शिव : आप कोई गन्दी नहीं है, आप अच्छी hi है, सिर्फ ये सब करने से आप बुरी नहीं बन जाती, अगर वैसे होता तो आपकी बेतिया आप से नफ़रत करती.

ज़ोया : पर में अपने पति को धोखा देरही हु.

शिव : अगर ऐसा लग रहा है तो मात कीजिये.

ज़ोया : वही तो दिक्कत है, में रोक नहीं प् रही हु खुद को. ये सब करने में इज्जात जाने का खतरा होता है पर तुम पर इतना भरोसा है की इज्जत जाने का भी दर नहीं है, यही सब सोच के में खुद को रोक नहीं प् रही हु. ये सब उनकी वजह से हो रहा है, पर उनकी भी गलती नहीं है, में hi बुरी हु, इस उम्र में भी अपने आप पर काबू नहीं है. (उसने खुद को कोसा)

शिव : इस उम्र से क्या मतलब है आपका, आप कोई बूढी तो नहीं लगती. (मेने मुस्कुरा के कहा)

ज़ोया : (मुस्कुराते hue)Do बड़ी लड़कीओ की माँ हु, ये उम्र उपरवाले का नाम लेने की है, न की ये सब करने की, मुझे खुद पर काबू रखना चाहिए था.

शिव : (मेने उनके कूल्हों पर हाथ लगाया, सच में वो मस्त बड़े बड़े the)To काबू रखिये न.

ज़ोया : नहीं रख प् रही हु शिव, शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (में उनके कूल्हे मसलने लगा, वो हलकी हाली सिसकिया लेने lagi)Shiiiiiiv शह्ह्ह्हह्ह, क्या में सच में तुम्हे अच्छी लगती हु? (ज़ोया ने अपने मान की पूछ ली)

शिव : आप कितनी पसंद है ये आपको महसूस नहीं हो रहा है? (मेरा लुंड जो खड़ा हो गया था)

ज़ोया : (वो समाज गयी की शिव क्या कह रहा है, पर ये उसके लिए गर्व की बात थी की कोई लड़का उसको देख कर गर्म हो रहा है, एक और तो वो शर्मा रही थी पर दुअरी और उस लुंड को महसूस कर के उसकी छूट पानी बहाने lagi)Shiiiiiiiv (कहते हुए वो उसको छाती को चूमने लगी)

संयम : (ऊपर से hi आवाज देते hue)Ammiiiiiii, ammmmiiiiiiiiiii.

ज़ोया : (वो एक दम से दर गयी और शिव को छोड़ कर अलग हो gayi)H ह हाआआआ बेटीईईईई.

संयम : शीइइइइइइव नहीं आआआआआआ क्याआ?

ज़ोया : वो आए गया है, ऊपर hi आआ रहा है. (शिव को धक्क्क दे कर ऊपर की और भेजते hu)jaldi जाओ.

शिव : (अपने लुंड की और इस्सर करते hue)Kaise जाऊ?

ज़ोया : (वो भी जानती थी की खड़े लुंड को ले कर वो कैसे जाये, पर उसकी भी मजबूरी thi)Pleease, कसिए भी मैनेज कर लेना. (उसने रिक्वेस्ट की, सच में उसको बहोत शर्म आ रही थी) (में ऊपर जाने लगा, जैसे hi में अंदर गया, मेने खुद को जैसे तैसे संभाला और लुंड को छुपाते हुए संयम के पास चला गया)

संयम : (मुस्कुराते hue)Kab आये तुम? कब से वेट कर रही थी.

शिव : (बीएड पर बैठते hue)Ye क्या है, तुम्हे पता है में ऐसे नहीं आ शक्ति, खाना क्यों नहीं खाया?

संयम : इस बहाने तुम आये तो, अगर मन कर देते तो खा लेती में. (उसने प्यार से कहा, और उठ गयी, मेने तकिया पीछे से सही किया तो वो पीछे सहारा ले कर बेथ गयी)

शिव : तबियत कैसी है? (उसके शिर पर हाथ रख कर चेक करते हुए)

संयम : (शिव के हाथ पर हाथ रख kar)Achchhi हु, कल से तो काफी अच्छा लग रहा है. तुम्हे देख कर और भी अच्छी हो गयी. (वो मुस्कुराते हुए बोली)

शिव : पागल. (मेने हलके से उसको थपकी दी)

संयम : (मुस्कुराते hue)Ammi से मिले? (वो जिस तरह से है रही थी मुझे सब समाज आ रहा था)

शिव : नहीं, सीधे ऊपर hi आया.

संयम : जूते कही के (कहते हुए सीधे hi मेरे लुंड पर हाथ रख दिया जो अभी थोड़ा ढीला हुआ था)

शिव : क्या कर रही हो बेशर्म. (मेने उसका हाथ हटते हुए कहा)

संयम : तुम करो तो प्यार, हम करे तो बेशर्मी. (उसने हस्ते हुए कहा) कहो न मिले की नहीं?

शिव : है मिला, बस.

संयम : मेने डिस्टर्ब कर दिया, है न?

शिव : ऐसा कुछ नहीं है. तू वो सब बात छोड़, और अपना ख्याल रख, दवाई टाइम से खा, खाना अच्छे से खा और जल्दी ठीक हो जा.

ज़ोया : में कितना कहती हु, पर ये सुनती hi नहीं. (वो हाथ में थाली ले कर अंदर आयी, में बीएड से उठ गया और वह पड़ी एक चेयर ले कर बेथ गया, आंटी ने बीएड पर थाली रख दी और पानी का गिलास नजदीकी टेबल पर रख diya)Le खा ले.

संयम : में नहीं खाउंगी, ये खिलायेगा मुझे.

ज़ोया : ये क्या बचपना है संयम, तुजे शर्म नहीं आती, अब तो तू खा सकती है न.

संयम : में क्यों शर्मो, ये खिलायेगा तभी में खाउंगी, वर्ण नहीं खाउंगी. (उसे मुँह फूलते हुए कहा)

ज़ोया : अच्छा ठीक है, (मेरी और देख kar)Tu hi खिला दे, में निचे जाती हु.

संयम : (अपनी अम्मी का हाथ पकड़ kar)Aap भी यही बैठिये.

ज़ोया : क्या कहु इस लड़की को, तुजे शर्म नहीं आती, पर मुझे आती है.

संयम : वो बस खाना hi तो खिला रहा है, इसमें शरमानेवाली क्या बात है.

ज़ोया : बस शरीर से बड़ी हो गयी है.

संयम : में हर तरह से बड़ी हो गयी हु अम्मी, आप यही बैठो, और तू क्या देख रहा है, खुद तो खा कर आया होगा और ये नहीं देख रहा की में कितनी भूखी हु. (कहते हुए वो muskurayi)Chal जल्दी से खिला. (मेने आंटी की और देखा)

ज़ोया : खिला दे, (उन्होंने नाराजगी से मुस्कुराते हुए कहा, फिर संयम की और देख कर) एक नंबर की बेशर्म हो गयी है.

में संयम को खिलने लगा, वो मुस्कुराते हुए मुझे देख रही थी, में आंटी को भी देख लेता था पर वो कुछ नहीं कह रही थी, बस मुस्कुराते हुए हमें देख रही थी, ऐसे hi मेने उसको खाना खिला दिया और फिर दवाई भी खिला दी. वो न नुकुर कर रही थी पर आखिर उसने दवाई खा hi ली. आंटी थाली और दूसरी चीज़े ले कर निचे चली गयी, संयम मुझे मुस्कुराते हुए देखने लगी.

शिव : ऐसे क्या देख रही हो?

संयम : अम्मी आ जाये उस से पहले एक किश दे na(Usne प्यार से मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : Dekh....(Me कुछ बोलने hi वाला था पर उसने बिच में hi काट दी बात)

संयम : बहेश करता रहेगा तो अम्मी आ जाएगी, प्लीज. (मेने उसकी आँखों में देखा तो वो बहोत प्यार से निमंत्रण दे रही थी, मेने दरवाजे की और देखा और फिर उठ कर उसके ऊपर झुका, उसने अपने होठो पर जीभ फेरी और उसे गिला कर दिया, में मुस्कुराया और उसके नरम होठो पर किश किया, और दूर हो गया. वो नाराजगी से boli)Aise नहीं अच्छे से किश करो.

शिव : पागल, आंटी आ जाएगी.

संयम : में कुछ नहीं जानती, जितनी देर करोगे उतना hi अम्मी के आने का चांस बढ़ जायेगा. (में फिर झुका और उसके होठो को अच्छे से चूसने लगा, वो भी अपनी बहे डेल मुझसे लिपटने लगी और मुझे अपने ऊपर खींचने लगी, मेने हाथ आगे बढ़ाया और उसके स्तन को हलके हलके दबाने लगा, वो जोर जोर से सासे छोड़ने लगी, कुछ देर किश की और तभी सीडीओ से आहात हुई तो मेने उसको छोड़ दिया और सीधा बेथ गया, वो मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगी, तभी आंटी अंदर आयी)

आंटी : क्या हुआ, ऐसे चुप चुप क्यों बैठे हो दोनों?

शिव : कुछ नहीं आंटी, में जाने को कह रहा था तो ये नाराज हो रही है.

संयम : (उसने भी बात पकड़ li)Aur नहीं तो क्या, अभी तो आया है और अभी जाने की बात कर रहा है, थोड़ी देर बेथ, बाटे कर, पर नहीं जनाब को तो फुर्सत hi नहीं है.

आंटी : अब आये हो तो थोड़ी देर रुको न. (उन्होंने भी बहोत प्यार से अपने तरीके से कहा, में बस muskuraya)Samim बता रही थी कही जानेवाले हो? मेरा मतलब है कुछ दिनों के लिए? (कहते हुए वो संयम के पास बेथ गयी)

शिव : है आंटी, वो मुझे ट्रेनिंग के लिए जाना है, पर अभी तक फाइनल नहीं हुआ है लगता है, कोई दिक्कत है शायद, जूही कह रही थी की वो पता करेगी. (हम ऐसे hi थोड़ी देर बाते कर रहे थे की संयम पर दवाई का असर होने लगा और वो उबासियाँ लेने लगी, आंटी ने उसको सही से लेता दिया और उसके शिर पर हाथ फेरने लगी)

संयम : चले मात जाना, बैठना थोड़ी देर. (में बस मुस्कुराया, में और आंटी इधर उधर की बाटे कर रहे थे, वो फिर से नाज़िआ दीदी के बारे में भी बता रही थी, संयम ने आंखे बंद कर ली थी, हम दोनों खामोश हो गए ताकि वो सो सके, आंटी बिस्तर पर पेअर मोड़ कर बैठी थी तो उनके कूल्हे उभर कर बहार दिख रहे थे, में उन्हें देख रहा था की तभी आंटी ने मेरी और देखा और मुझे अपने कूल्हों को देखते हुए पकड़ लिया, वो शर्मा गयी और नज़ारे संयम की और कर दी, में भी समाज रहा था की वो कुछ नहीं कहेगी, मेरा भी मान कर रहा था तो मेने हाथ बढ़ाया और उनके पेअर पर रख दिया, उन्होंने फिर मेरी और देखा, हम दोनों की नज़ारे टकराई, उन्होंने फिर नज़ारे झुका ली, उनकी ये शर्म मुझे और भड़का रही थी, में हाथ ऊपर की और ले जाने लगा तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और ना में इस्सर करने लगी, पर मेने दूसरे हाथ से उनका हाथ पकड़ लिया और अपने हाथ को फ्री कर दिया, वो दर रही थी और ना में इस्सर कर रही थी, मेने देखा तो संयम की आंखे बंद hi थी, तो मेने हाथ को और ऊपर किया और उनकी झांघो को सहलाने लगा, आंटी शांत हो गयी, मेने आंटी के हाथ की उंगलिओ में अपनी उंगलिअ फसा दी तो उन्होंने भी मेरा हाथ पकड़ लिया, ये उनके समर्पण का इस्सर hi था, मेने हाथ आगे बढ़ाया और उनके भरे हुए नितम्बो को छुआ, उन गोल गोल नितम्बो को छूटे hi मेरे अंदर चिंगारिया फूटने लगी, में अच्छे से उनके नितम्बो को सहलाने लगा. (ज़ोया का भी रोआ रोआ खड़ा हो रहा था, उसकी भी आंखे बंद हो गयी थी, अपने नितम्बो पर घूम रहे हाथ से उसकी छूट भी गीली होने लगी थी, वो अपने आपको कई बार रोकने का प्रयास कर चुकी थी पर सब नाकामियाब हुआ था तो उसने भी समझौता कर लिया था की जो हो रहा है होने दे, शिव का हाथ उसके कूल्हों की दरार में घूम रहा था, उसका मुँह अजीब सा होने लगा, वो खुद की सिसकिया रोकने का प्रयास कर रही thi)(Unke बड़े बड़े कूल्हों को सहलाने से मेरा लुंड कड़क हो चूका था जो पंत में एडजस्ट नहीं हो रहा था तो मेने गांड से हाथ हटाया और लुंड को एडजस्ट करने laga)(Zoya ने भी देखा की शिव का लुंड खड़ा हो चूका है, उसके अंदर भी चिंगरीअ फूटने लगी, उसका दिल कर रहा था की वो लुंड को पकड़ ले पर अभी भी शर्म ने उसको रोक रक्खा था, ऊपर से उसकी बेटी भी पास में hi थी, अपनी बेटी के ऐसे पास होते हुए भी वो ये सब करने दे रही थी, दर और उत्तेजना के मिले झूले एहसास से उसका शरीर भी हल्का सा कैंप रहा था. शिव ने जब अंगूठा दबाया तो उसकी छूट के छेड़ पर दबाव पड़ा, उसकी आंखे बंद हो गयी, उसका अंगूठा अंदर डसने लगा, उसका मुँह अजीब सा हो चूका था, उसने अपना शिर बीएड के सिरहाने टिका दिया, शिव का हाथ अंदर को घुसने का प्रयास करने लगा पर उसकी झंगे आपस मेसाती हुई थी तो उसने एक पैर थोड़ा ऊपर कर दिया ताकि शिव को आसानी हो, शिव ने भी उसके हाथ को छोड़ दिया और उसके पेअर को सहारा दे दिया और दूसरे हाथ से छूट को सहलाने laga,bhale hi कपड़ो के ऊपर से hi वो सेहला रहा था पर उसके अंदर गर्मी बढ़ती जा रही थी, काफी देर हो चुकी थी तो संयम पूरी तरह से सो चुकी थी, उसको तो पता भी नहीं था की उसकी अम्मी इस वक़्त क्या कर रही hai)(Mene आंटी का कुरता थोड़ा ऊपर कर दिया ताकि पजामी में फसे दो बड़े गोले मुझे पूरी तरह से दिख सके, उन्होंने एक बार मुझे देखा पर रोका नहीं, में दोनों हाथो से उन बड़े बड़े गोलों को सहलाने लगा, सच में औरत के इन गोलों में कितना आकर्षण होता है जो हमें इतना उकसा देता है, मेने कुरता और थोड ऊपर कर दिया ताकि उनकी नंगी पीठ दिख सके, में वह भी हाथ फेरने laga)(Zoya कोई विरोध नहीं कर रही थी, बस ऐसे hi साइड के बल लेती हुई थी, वो शिव को सब करने की आज़ादी दे चुकी थी, वो उसको रोकने में असमर्थ थी, वैसे भी वो काफी दिनों से तड़प रही थी, शिव के अलावा वो किसी और के साथ ये रिस्क नहीं ले सकती थी, हलाकि शिव के साथ करने से भी उसका मान उसको धिक्कार रहा था पर वो इसके आगे बेबस थी, सब जानते बजते भी वो ये पाप करने को मजबूर थी.

शिव उसके लहंगे को निचे सरकने लगा पर नाडा बंधा हुआ था तो ये मुमकिन नहीं था, वैसे भी उसके कूल्हे बड़े थे तो सलवार निचे नहीं खिसक रही थी, उसका मान तो कर रहा था की अभी बहार चली जाये और शिव के लुंड को अपनी छूट में ले ले, पर संयम की नींद अभी कच्ची थी तो वो उठ सकती थी, इसलिए वो कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी. उसने अपने हाथ से hi पजामी का नाडा खोल diya)(Shiv ने देखा की अचानक पजामी ढीली हो गयी और वो निचे सरक गयी तो उसने आश्चर्य से आंटी को देखा, दोनों की नज़ारे मिली तो आंटी शर्माने लगी, में समाज गया की ये आंटी ने hi किया है, वो पूरी तरह से तैयार है तो मेने भी देर नहीं की और सलवार को और नीचे खिंच दिया, उनकी डार्क बुले कलर की पंतय मुझे दिखने लगी, पंतय में कैद बड़े बड़े कूल्हे मुझे उकसाने लगे, में कुर्शी से उठ गया और घुटनो के बल वह नजदीक बेथ गया और अपना मुँह उन कूल्हों पर लगा ददिया और उसको सूंघने लगा, अज्जेब से गंध मेरे नथुनों नमे घुलने लगी, एक हाथ से कूल्हे को दबाते हुए में अपनी नाक कूल्हे पर रगड़ने laga)(Zoya का शरीर गैन गण गया, उसने हाथ पीछे करते हुए शिव के शिव को सहलाया, जैसे कह रही हो की कर ले , जो करना है कर ले, वो उसके बालो को सहलाने लगी और अपने कूल्हों से खेलने के लिए उकसाने लगी, शिव ने उसकी पंतय को पीछे से खिंचा तो उसके कूल्हे नंगे होने लगे, उसको शर्म आने लगी पर उसने रोका nahi.,thandi ठंडी हवा लगने से वो महसूस कर रही थी की उसके आधे कूल्हे नंगे हो चुके है, वो बस संयम का शिर सहलाते हुए सब महसूस कर रही थी, शिव के होठ उसके कूल्हों पर घूम रहे थे, उसको चुम रहे थे, वो अच्छी तरह से समझती थी की मर्दो को औरत के ये कूल्हे कितने पसंद होते है, वो शिव को करने दे रही थी जो उसको करना tha)(Mere सामने गोर गोर अधनंगे कूल्हे थे, उन्हें देख कर में बहक रहा था, कूल्हों की दरार को में सेहला रहा था, थोड़ी देर बाद मेने पंतय और निचे कर दी तो उनकी गांड का छेड़ मुझे दिखने लगा, पर भरी कूल्हों के बिच वो छुप सा गया था, मेने ऊपर वाला कुल्हा पकड़ कर उसको ऊपर किया ताकि में छेड़ को अच्छे से देख सकू, गोर कूल्हों के बिच वो भूरा छेड़ मुझे देखने लगा, वह कुछ बाल भी थे, और वो खुल बंद हो रहा था, मेने अंगूठे से उसको छुआ तो आंटी के शरीर में कम्पन हुआ, मेने एडजस्ट होते हुए अपने मुँह को वह डालना छटा पर कूल्हों की वजह से मेरा मुँह वह नहीं पहुंच रहा था, मेने जीभ निकली और छेड़ तक पंहुचा दी, वह से आती गंध भी मुझे बहका रही थी. जीभ को नुकीली कर के में छेड़ को छत रहा tha)(Is अजीब एहसास से ज़ोया बेकाबू हो रही थी, वो शिव के शिर को अपने कूल्हों में दबाने लगी, वो अपनी सासू को काबू काने का प्रयास कर रही थी, उस से अब रह पाना मुकिल लग रहा था, उसने संयम को देखा जो गहरी नींद में पहुंच चुकी थी.

ज़ोया : (हलकी आवाज me)Samim... (वो संयम को पुकार रही थी तो मेने चौंक कर उन्हें देखा, और फिर संयम को पर वो सो रही थी, आंटी ने मुझे देखा और शर्मा गयी, वो शर्मा के मुस्कुरायी और फिर कड़ी होने लगी तो में भी खड़ा हो गया. वो बीएड से उतरी और अपने लहंगे को पकड़ लिया ताकि वो निचे न गिर जाये, कुर्ते से उनका नंगा पैन धक् चूका था, वो मुझसे नज़ारे चुराने लगी, उन्होंने एक बार संयम को देखा फिर मेरा हाथ पकड़ कर मुझे कमरे से बहार ले जाने लगी, में भी उनके पीछे पीछे चलने लगा, हम निचे आ गए और उनके कमरे में चले गए, अंदर जाते hi उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया और अपने लहंगे को छोड़ दिया तो वो निचे गिर गया, उन्होंने अपने पेअर उसमे से बहार निकल लिए, और मुझे देखने लगी, में भी समाज रहा था की अब क्या करना है तो मेने अपने पंत को खोल दिया और निचे खिसकते हुए लुंड बहार निकल liya)(Zoya की नज़ारे खड़े कड़क लुंड पर छिपा गयी, इतना होने के बाद भी वो शर्मा रही थी और झिझक रही थी, जब शिव ने उसका हाथ पकड़ा तो वो कैंप सी गयी, शिव ने उसका हाथ पकड़ कर लुंड पर रख दिया, उसने एक बार शिव की आँखों में देखा और लुंड को पकड़ लिया, एक और उसको बहोत शर्म आ रही थी पर दूसरी और उसका शरीर उत्तेजना में कैंप रहा था, शिव ने उसके कंधे पकड़ कर दबाये तो वो घुटनो के बल हो गयी और लुंड को अपने हाथ से हिलने लगी, इस लम्बे और कड़क लुंड के लिए तो वो कितने दिनों से तड़प रही थी, इसके लिए तो वो अपनी hi बेटी की नजरो में गिर गयी थी, पर इस लुंड का मोह नहीं छूट रहा था, जब शिव ने उसके शिर को अपने लुंड की और खिंचा तो उसने अपने मुँह को खोल दिया और लुंड को अपने मुँह में भर लिया,





वैसे भी अब शर्माने से काम नहीं चलनेवाला था, वो उस गरम डंडे को अपने थूक से नेहालने लगी, और जितना हो सके अपने मुँह में भरने लगी, उसको शर्म भी आ रही थी, वो ये भी सोच रही थी की शिव उसको ऐसा करते देख उसके बारे में क्या सोच रहा होगा, थोड़ी देर बाद उसने शिव की और देखा तो वो उसको hi देख रहा था, वो शर्मा गयी और नज़ारे झुका ली पर लुंड को चुस्ती रही. थोड़ी देर बाद शिव ने उसको खड़े होने के लिए कहा तो वो बिना नज़ारे मिलाये कड़ी हो गयी.

शिव : मेरी और देखिये. (उसने अपनी पलके ऊपर की और शिव को देखा) आप करना चाहती है न? (ज़ोया सोचने लगी की ये कैसा बेतुखा सवाल है, वो शिव को गौर से देखने lagi)Me इसलिए पूछ रहा हु की कभी आप मन करती हो कभी आगे बढ़ती हो, तो क्या अभी आगे बढ़ सकते है?

ज़ोया : (वो शिव के गले लग gayi)Me क्या करू शिव, एक और तो तू मेरे बेटे जैसा है, मेरी बेटी की उम्र का है, और में तुम्हारे hi साथ ये सब कर रही हु, कभी कभी अपने आप पर घिन आती है.

शिव : अगर आपका मान न कह रहा हो तो आप मात करो.

ज़ोया : अगर सच कहु तो मेरा मान सच में ये चाहता है की ये सब हो जाये, पर कही न कही लग रहा है की में एक बच्चे को बिगड़ रही हु, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए.

शिव : न में आपको बिगड़ रहा हु न आप मुझे, ये कुदरती है, अभी आप ऐसे मेरे साथ में हो तो सब सोच समाज कर hi आये होंगे, और में भी कोई दूधपीता बच्चा नहीं हु जो ये सब समाज न सकू, मुझे भी पता है की में अपनी hi दोस्त की अम्मी के साथ ये सब कर रहा हु, और ये इस्सलिये भी नहीं है की मुझे सेक्स करना है, ये इसलिए भी है की इस से आपको खुसी मिलेगी.

ज़ोया : शिव, इस से पहले की मेरा दिल फिर अगर मगर के चक्कर में उलझे, मुजमे समां जाओ, में कुछ सोचना नहीं चाहती, जो है जैसे है होजाने दो. (उन्होंने मेरी आँखों में देखते हुए कहा)

में उनकी हालत समाज रहा था, में झुका और उनके होःटो को चूसने लगा, वो भी मुझसे लिपट गयी और मेरे होठो को चूसने लगी, कितना अजीब है ये sab,wo सच में एक अच्छी औरत hai,apane बच्चोका ख्याल रखती है, अपने पति का ख्याल रखती है, पर क्या सिर्फ इस वजह से की उसको भी शरीर के इस आनंद की चाहत है वो गिरी हुई हो जाती है, में नहीं मंटा. और न hi उनके साथ ये सब करने से मेरा उन्हें देखने का नजरिया बदल जायेगा, वो मेरे लिए आंटी hi रहेगी, संयम की अम्मी hi, जिनकी में इज्जत करता हु. शारीरिक सुख इन सबसे परे है. मेने उन्हें उठाया और बीएड पर लेता दिया, और उनके पेअर खोल दिया, वो शर्मा गयी और अपना मुँह दूसरी और कर लिया, में उनकी शर्म भी समाज रहा था, फिर मेने उनकी छूट को देखा, ये सब से अलग थी, जहा दुसरो की छूट बहोत छोटी और संकरी दिखती थी वही उनकी छूट थोड़ी खुली हुई थी, वैसे भी दो बच्चो की माँ जो थी, पर मेरे लिए ये परफेक्ट थी, क्यों की इसको चढांए में मुझे कोई दर नहीं था, न उन्हें दर्द देने का, न कोई और, बस सिर्फ मज़ा hi आनेवाला था, में झुका और पेअर पकड़ कर उनकी छूट पर झुक गया और छूट को मुँह में भर लिया.





ज़ोया : शह्ह्हह्ह्ह्ह (वो बलखाने लगी, में रास बहती छूट को चाटने लगा और उसके होठो को चूसने laga)Shhhhhh शीइइइइइव. (वो लगातार सिस्किअ ले रही थी, और में उनकी छूट के होठो को चाट रहा था, वो मेरे शिर को पकड़ कर दबा रही थी, थोड़ी देर बाद में वह से उठा गया और अपने कपडे निकलने लगा, उन्होंने मुझे देखा और अपनी छूट को हाथ से छपते हुए पेअर से धक् दिया. उनकी ये शर्म मुझे और भड़का रही थी, मेने लुंड पर थूक लगाया और उनके पेअर को पकड़ कर फैलाया, और उनके हाथ को भी हटा diya)(Zoya उसे देख रही thi,usne लुंड को देखा, जो पूरी तरह से कड़क tha,wo ऐसे कड़क लुंड के लिए hi तरस रही थी, उसके देखते देखते hi लुंड छूट के छेड़ पर आ टिका और फिर अंदर उतरने लगा, उसने शिव बिस्तर पर रख दिया और अंदर जाते लुंड को महसूस करने lagi)Shhhhhhhhhhh. (उसने शिव को देखा और उसकी और बहे खोल दी, शिव जैसे hi उसकी और झुका उसने उसको कास के पकड़ लिया और अपने पेअर शिव के कूल्हे पर दबाते हुए लुंड को पूरा अपने अंदर सामने लगी, जब पूरा लुंड अंदर चला गया तो वो शिव के गले को चूमने लगी और उस से कास के लिपट gayi.)Shhhhhhhh (वो आनंद से भर गयी)

शिव : कैसा लग रहा है आंटी? (शिव ने उनके चेहरे को देखते हुए कहा, ज़ोया पूरी तरह से शर्मा गयी, क्यों की उसको अपने अंदर समाया वो लुंड बहोत अच्छा लग रहा tha)Kaho न आंटी, कैसा लग रहा है?

ज़ोया : ऐसा मात पूछो शिव, मुझे बहोत शर्म आती है. (उसके चेहरे पर शर्म साफ़ छलक रही थी)

शिव : इसमें शरमानेवाली क्या बात है, मुझे तो आपकी छूट बहोत अच्छी लग रही है, कितनी गर्म है वो.

ज़ोया : शह्ह्ह्ह ऐसा मत कहो (वो थोड़ी शर्मा गयी, पर फिर boli)Kya सच में तुम्हे अच्छी लग रही है वो?

शिव : है आंटी, कितनी गर्म है आपकी छूट, मेरे लुंड को पकड़ रही है वो. (मेने मुस्कुराते हुए कहा तो वो शर्माने लगी) आपको मेरा लुंड पसंद नहीं आया?

ज़ोया : (ऐसे खुले सब्दो से वो और उत्तेजित महसूस कर रही थी, पर हिचकिचा रही thi)Ha, बहोत अच्छा है वो, बहोत बड़ा भी है वो. (उसने शरमाते हुए कहा, शिव ने लुंड थोड़ा बहार निकला फिर अंदर किया, छूट से पानी बहने laga)Shhhhhhhh शीइइइइइइइव. (आनंद से ज़ोया सिसकने लगी, जैसे जैसे शिव लुंड अंदर बहार कर रहा था उसको मज़ा आने laga)Shhhhhh, कितना तड़प रही थी में शिव, शह्ह्ह्हह्ह तुम नहीं संजोगे इस कड़क लू.....





pictures of a safe

शिव : बोलो न आंटी, रुक क्यों गयी? (शिव लगातार हलके हलके धक्के लगा रहा था, लुंड पूरा अंदर बहार हो रहा था)

ज़ोया : शह्ह्ह्ह मुझे शर्म आ रही है शिव, में कितना गिर गयी हु शिव, अपने पति के अलावा मेने किसी को छूने नहीं दिया और तुम मेरे साथ.. शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : अगर आपको बुरा लग रहा है तो रोक दू?

ज़ोया : नहीं शिव, ऐसा मात करना, शह्ह्हह्ह्ह्ह, में जानती हु की ये गलत है पर फिर भी मुझे अच्छा लग रहा है, रुकना मात, शहहहहह करते रहो. (मेने उनका कमीज़ ऊपर कर दिया तो उनके स्तन निकल आये जो ब्रा में कैद थे, में उन्हें मसलते हुए चूमने laga)Shhhhh शीइइइइइइइव. (वशित्व के बालो में हाथ घूमने lagi,)(Mene ब्रा थोड़ी निचे की तो बड़ा सा निप्पल बहार निकल आया, गहरे रंग का मोटा सा तना हुआ निप्पल देख कर मेने उसको अपने मुँह में भर liya)Shhhhhhh shiiiiiiiiiiiiv (एक तो लुंड अंदर बहार हो रहा था, उसको इतना मज़ा आ रहा था और ऊपर से शिव उसके निप्पल को चूस रहा था, उसके शरीर में चींटिया रेंगने लगी, वो उसका शिर सहलाते हुए उसको अपना दूध पिलाने लगी, हलाकि दूध नहीं था usme)Shhhhh शिईयिव शह्ह्हह्ह्ह्ह (शिव के धक्के तेज होने लगे the)Shhhhh अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह हा ऐसे hi शीइइइइइइव shhhhhhhhhhh, जबसे तुमने मेरे साथ किया है में कितना याद कर रही थी तुम्हे shhhhhhhhhhh. (थप थप की ध्वनि, कमरे में गूंजने लगी thi)Shhhhh अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह shhhhhhh(Zoya मचल रही थी, वैसे भी उसको लुंड नशीब नहीं हो रहा था और जब मिला है तो इतना बड़ा की उसकी छूट पूरी भर गयी है, आखरी छोर तक वो घुस रहा tha)Shhhhhh शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह जोर से बीटा शह्ह्हह्ह्ह्ह. (में जोर जोर से धक्के लगाने लगा, उनकी छूट बहोत अच्छी थी, वो मेरे लुंड को जकड रही थी, में लगातार धक्के लगा रहा tha)Shhhhh अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह शह्ह्हह्ह्ह्ह कल नाराज हो गए थे न शिव. (मेने उन्हें देखा, वो भी मेरी आँखों में देख रही thi)Me जानती हु, तुम कल भी करना चाहते थे, शहहह अह्हह्ह्ह्ह पर क्या करती में, शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह एक और तो खुद पर गुस्सा आ रहा था, की मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए, शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह पर दूसरी और तुम्हारे वो धक्के याद आ रहे थे शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेने खुद को बहोत रोका शिईयिव शह्ह्हह्ह्ह्ह पर देख लो अभी तुम्हारे निचे हु शह्ह्ह्हह्ह ahhhhhhhhhh.





शिव : आपको गिलटी फील करने की जरुरत नहीं है आंटी.

ज़ोया :शह्ह्ह्ह क्या करू शिव शहहहहह, में जानती हु की मेरी बेटी तुजे पसंद करती है, शह्ह्ह्हह्ह और फिर भी में तेरे साथ ये सब कर रही हु, शह्ह्ह्ह कितना बुरा लगता है मुझे शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : पर वो तो अपने घर चली गयी न? (में संयम की बात छुपाना चाहता था)

ज़ोया : मुझे क्या बेवकूफ समजा है, शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह में संयम की बात कर रही हु. (में रुक गया और उन्हें देखने laga)Me सब समझती हु शिव, रुक क्यों गए (कहते हुए वो मेरी कमर खींचने लगी तो मेने फिर से धक्के चालू कर दिया)

शिव : वो में.....

ज़ोया : मुझे पता है की वो तुम्हारे पीछे पड़ी है, तुम भाग रहे हो दूर. क्यों मेरी बेटी अच्छी नहीं लगती तुम्हे?

शिव : वो बहोत अच्छी है, पर आप तो जानती है मेरे बारे में, में नहीं चाहता की उसको धोखा दू.

ज़ोया : इसीलिए वो तुम्हारे पीछे है, वो तुम्हे पहचानती है, सच कहु तो मुझे भी चिंता है उसकी, पर ये जवानी ऐसी hi होती है.

शिव : आप क्या चाहती है?

ज़ोया : में क्या छह सकती हु, जो उसका भाग्य, जो उपरवाले ने उसकी किस्मत में लिखा होता वही होगा. पर अभी वो छोटी है. (ज़ोया ने अपना दर जताया)

शिव : वो कोई छोटी नहीं है (मेने मुस्कुरा के कहा)

ज़ोया : जानती हु, पर माँ हु न, मेरी नजर में वो छोटी hi रहेगी.

शिव : आप चिंता मात करो, में उसको संभल लूंगा, में भी नहीं चाहता की वो ये सब करे, फील हल तो नहीं, फिर आगे का पता नहीं.

ज़ोया :तुम कुछ नहीं करपाओगे, जैसे में बेबस हु, वैसे तुम भी बेबस बन जाओगे.

शिव : देखते है, अभी फ़िलहाल तो उसकी माँ है मेरे साथ. (मेने मुस्कुराते हुए कहा)

ज़ोया : बे शर्म कही के, पता नहीं मुज बूढी में क्या दिख गया जो मेरे साथ वो सब कर बैठे. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : ख़बरदार जो अपने आपको बुद्धि कहा तो, कितनी खूबसूरत है आप, आपकी बेतिया भी आप पर hi गयी है.

ज़ोया : (वो मुस्कुराने लगी, शिव के धक्के तेज होने लगे the)Shhhhhh शिईयिव शह्ह्हह्ह्ह्ह सच में तुम कमल हो शहहहहह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, ऐसे hi नाज़िआ तुम्हे नहीं याद कर रही, अपने पति के पास है फिर भी जब भी फ़ोन आता है तो तुम्हारे बारे में पूछती है.

शिव : तो मुझे सीधे फ़ोन कर ले.

ज़ोया : उसको शर्म आती है, कह रही थी की अपने पति के पास हु तो शिव से बात करने में शर्म आती hai.Shhhhhhh अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आहिस्ता शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह. (लगातार चुदाई से वो झड़ने के कगार पर पहुंच gayi)Shhhhhhh मेरा होनेवाला है शह्ह्ह्हह्ह ahhhhhhh(Mene रफ़्तार बढ़ा di)Shhhhhh ैय्यियी शहहहहह अह्ह्ह्हह (ज़ोया की सकल रोनेजैसी हो रही thi)Shhhhh अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अहिस्ताआआ शहहहहह आह्ह्ह्हह, aaaaaaaaaaaa





(वो झटके खाने लगी और झड़ने लगी, मेने दो तीन छक्के मरे और रुक गया, उन्होंने मुझे खिंचा और मेरे होठो को चूसने lagi)Ummm उम्म्म्म ummmmm.(Wo हांफ रही थी, हम दोनों की नज़ारे टकराई, वो फिर शर्माने लगी, पर साथ में मुस्कुरा भी रही थी)

शिव : क्या हुआ?

ज़ोया : कितने दिनों बाद शांति मिली है.

शिव : अभी कहा, अभी तो बहोत बाकि है.

ज़ोया : (शरमाते hue)Tum में बहोत स्टैमिना है शिव, पता नहीं मेरी बच्ची का क्या हल होगा?

शिव : मेने कहा न की अभी में नहीं करनेवाला कुछ.

ज़ोया : देखते है.

शिव : अभी तो मुझे देखने दीजिये. (कहते हुए मेने लुंड बहार निकला और उनकी छूट को देखा, छेड़ खुल कर दिख रहा था)

ज़ोया : ऐसे मात देखो, शर्म आती है. (वो अपनी छूट ढकने लगी, मेने उनका हाथ पकड़ लिया और छूट को चूसने laga)Shhhhhh (वो मचलने लगी, में छूट चुस्त raha)Shhhhhh हआ शह्ह्ह्हह्ह haaaaaaa.(Thodi देर बाद मेने उन्हें पलट दिया और घोड़ी बना दिया, उनकी बड़ी बड़ी गांड मेरे सामने थी और गांड का छेड़ छूट के रास से गिला हो चूका था, मेने तुरंत अपना मुँह वह लगा दिया और गांड के छेड़ को चाटने laga)Shhhhhhh पागल शह्ह्ह्हह्ह वो गन्दा है शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह (में जीभ अंदर डालने laga)Shhhhhhhh क्या कर रहे हो शहहह वो गन्दी जगह है, शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : कुछ गन्दा नहीं है आंटी.

ज़ोया : पता नहीं तुम मर्दो को वो क्यों इतना पसंद आता है?

शिव : अंकल ने किया है वह?

ज़ोया : तो बाकि रहने देंगे क्या.

शिव : मुझे भी करना है आंटी.

ज़ोया : तुम्हारा मोटा है शिव.

शिव : कुछ नहीं होगा.

ज़ोया : (उसको भी पता था की ये मानेगा nahi)Achchha ठीक है, वह ड्रावर में क्रीम पड़ी है वो पहले लगा दे, और है आराम से करना, समाज रहा है न तू.

शिव : जी आंटी. (में तुरंत क्रीम ले आया, वो अपना शिर टिकाये लेती रही, मेने क्रीम ली और छेड़ पर लगा दी और ऊँगली अंदर दाल di.)(Zoya का मुँह थोड़ा बिगाड़ा पर फिर ठीक हो गया, शिव अंदर तक क्रीम लगा रहा था, वो भी अपने इस नन्हे आशिक को मन नहीं करना चाहती थी, हलाकि उसको दर भी था, भले hi उसने वह किया था पर इतना मोटा तो कभी नहीं गया था, पर वो लेती rahi)(Gaand के छेड़ के अंदर गरमगरम भट्ठी थी, जो मेरी ऊँगली को जला रही थी, मेने अच्छे से क्रीम लगा दी, मेने पोसिसिन ली और लुंड को छूट पे लगा दिया ताकि लुंड भी गिला हो जाये, मेने गांड में ऊँगली डेल हुए hi लुंड छूट में दाल दिया)

ज़ोया : शह्ह्ह्ह क्या कर रहा है शह्ह्ह्हह्ह. (ज़ोया पहली बार ऐसा अनुभव कर रही थी, गांड में भी ऊँगली थी जो किसी लुंड से काम नहीं थी और छूट में भी मोटा लुंड था, जैसे hi शिव के धक्के चालू हुए वो सिसकने lagi)Shhhhhh अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह (दोनों छेड़ में एक साथ चुदाई से उसको भी मज़ा आने laga)Shhhhhhh अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह. (लुंड पूरा गिला हो चूका था, मेने लुंड बहार निकला और गांड से ऊँगली भी निकल ली, मेने लुंड गांड पर लगा दिया, आंटी ने दर के मरे मेरा हाथ पकड़ liya)Aaram से करना. (उन्होंने रोनी सूरत से मुझे देखा, मेने है में शिर हिलाया, गोरी गोरी गांड के छेड़ पर मेने लुंड दबा दिया और जोर लगाया तो सूपड़ा छडे को फैला कर अंदर घुस gaya)Aaaaaahhhhhhhhh. (ज़ोया का चेहरा दर्द से भर गया, उसने कास के चद्दर पकड़ li)Aaaahhhhh आराम seeeeeee.(Me रुक गया, मेने थोड़ी देर छेड़ को एडजस्ट होने दिया, फिर लुंड अंदर दबाने लगा तो लुंड अंदर जाने laga)Ahhhhhhh बहोत मोटा है शीइइइइव. (उसने दर्द से kaha)(Mene लुंड के पीछे भी क्रीम लगा दी, आधे से ज्यादा लुंड अंदर चला गया था, में उसको आगे पीछे करने लगा, गांड की मासपेशिया ढीली होने lagi)Aaaahhhhh shhhhhhhhhh.

शिव : आप ठीक हो?

ज़ोया : हआ (रोनी आवाज में वो बोली)

शिव : आपको अच्छा नहीं लग रहा?

ज़ोया :ऐसी बात नहीं है, वो बहोत मोटा है. (उसने रोनी सकल से कहा)

शिव : निकल लू?

ज़ोया : नहीं, अब चला गया है तो कर ले. (में हलके हलके धक्के लगाने लगा, थोड़ी देर में ज़ोया को भी अच्छा लगने लगा)





शह्ह्ह्हह्ह फूऊऊऊ शह्ह्ह्हह्ह फूऊऊऊ. (में लुंड अंदर बहार कर रहा था, में आधे लुंड से hi धक्के लगाने लगा, गरम गरम भट्ठी जैसी गांड थी, छेड़ पूरा फ़ैल गया था, पर इतनी मस्त गांड को मरने में मज़ा आ रहा tha)(Zoya ने शिव को देखा जो उसकी गांड में आते जाते लुंड को देख रहा था, उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ gayi)Achchha लग रहा है तुजे waha?(Me muskuraya)Ab तो शिकायत नहीं है न मुझसे? (मेने ना में गर्दन हिलाया, वो भी मुस्कुरायी, में लुंड अंदर बहार करने लगा और साथ में मेने ऊँगली छूट में भी दाल दी, उनको भी अच्छा लगने laga)Shhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhh. अच्छा खिलाडी बन गया है तू, औरत को संतुस्ट करना जनता है. शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : आपको बुरा नहीं lagta,ki में ऐसा हु?

ज़ोया : तू किसी के साथ जबरदस्ती तो नहीं कर रहा, न किसी को फसा रहा है, जो भी हो रहा है वो हमारी मर्ज़ी से हो रहा है तो फिर बुरा क्यों manu.(Me लगातार उनकी गांड मर रहा था, मेने उन्हें निचे लेता दिया और फिर से लुंड अंदर बहार करने लगा, थोड़ी देर में वो थक gayi)Shhhh अभी कितना करेगा शहहहहह बस कर शहहहहह. (मेने लुंड बहार निकल लिया और लुंड छूट में दाल diya)Shhhhhh अम्मीईई shhhhhhhhh(Fir से में उन्हें छोड़ने laga)Ahhhhh शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह.

शिव : अब अच्छा लग रहा है?

ज़ोया : हआ शह्ह्हह्ह्ह्ह पहली बार तेरा लिया न वह तो दर्द हो रहा था, शह्ह्ह्हह्ह गली बार अच्छे से करने दूंगी. शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह.

शिव : मतलब फिर से आप करना चाहती है.

ज़ोया : शह्ह्ह्ह हा शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : और किसी को पता चल गया तो?

ज़ोया : दोनों बेतिया तो जानती है, अब बाकि भी क्या रहा है. शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह (मेने लुंड बहार निकल लिया और उनके ऊपर के भी सरे वस्त्र निकल दिए, वो पूरी नंगी हो चुकी थी, में भी पूरा नंगा हो गया, और फिर से उन्हें सीधा किया और लुंड अंदर दाल दिया, वो मुझसे लिपट gayi)Shhhhh शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह सच में तुम कमल हो शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह, मुज जैसे औरत को भी तुम पूरी तरह से संतुस्ट कर सकते हो शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्हह्ह्ह्ह (में जोर जोर से धक्के लगाने लगा, दोनों पेअर पकड़ कर में धक्के लगाने lagaa)Ahhhh शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्शह्ह्ह ahhhhhh.Ahista शहहह अह्ह्ह्हह्हह (थप थप की आवाजे आ रही thi)Aramse अह्हह्ह्ह्शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बहोत मोटा है शहहह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह.

शिव : (मेरा भी निकलनेवाला tha)Ander hi दालु न आंटी?

ज़ोया : हा शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शहहहहह, मेरा भी होनेवाला है शहहह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्हह शहहहहह (लुंड लगातार अंदर बहार हो रहा था, मेने लुंड जड़ तक दाल दिया tha)Shhhhh अह्हह्ह्ह्ह बहोत अंदर चला गया है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह शहहहहह.

शिव : आपको अच्छा लग रहा है?

ज़ोया : आह शहहह अह्ह्ह्हह बहोत शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : आप कमल हो आंटी.

ज़ोया : शहहहहह आआह उस से भी कमल तू है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्ह में झाड़नेवाली हु शह्ह्ह्ह aaahhhhhhhhhhh शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : मेरा भी होनेवाला है.

ज़ोया : शहहहहह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भर दे शह्ह्ह्ह आअह्हह्ह्ह्ह अंदर hi भर दे शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह.

(लगातार धुआँधार चुदाई चल रही थी, दोनों पसीना पसीना हो चुके थे, थप थप की आवाजे गूंज रही थी, छूट से पानी के फवारे उड़ रहे थे) शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह में झाड़ रही हु शहहहहह अह्ह्ह्हह में गईइइइइइइइ aahhhhhhhhhhh.

शिव : बस थोड़ी देर हम्म्म हम्म हम्म्म हम्म्म्म aaaaaaaaaaaaaaaa (कहते हुए में भी छूट में रास भरने लगा, आंटी ने मुझे जकड लिया, कुछ पल ऐसे hi रहे हम की हमे कुछ आहात सुनाई दी, मेने तुरंत पीछे देखा तो संयम कड़ी थी, ज़ोया ने भी देखा की संयम कड़ी है, वो एकदम से दर गयी और शिव को अपने ऊपर से धक्का देने लगी, जैसे hi शिव साइड में हुआ उसने अपने आपको चद्दर से धक् लिया और संयम को दर से देखने लगी)
 
अपडेट 211

संयम दरवाजे पर कड़ी थी, ज़ोया बिस्तर पर अपने आपको धक् कर दूसरी और देख रही थी, और में ठगा सा संयम को देख रहा था, अचानक वो कैसे निचे आ गयी समाज नहीं आया, में उसके चेहरे को देख कर समझने की कोशिस कर रहा था, और वो भी कभी मुझे तो कभी अपनी अम्मी को देख रही थी.

दरअसल संयम काफी टाइम पहले hi आ चुकी थी, वैसे उसका कोई इरादा नहीं था, वो सो चुकी थी पर अचानक उसकी नींद खुल गयी, वो कमरे में अकेले hi थी, तुरंत उसको शिव का ख्याल आया, अब वो बेहतर महसूस कर रही थी तो अपने बिस्तर से उठी, और बिना आवाज किये निचे आ गयी. वैसे तो उसको लगा था की शिव चला गया होगा, पर मान में कही न कही था की शायद वो उसकी अम्मी के साथ हो, इसलिए वो बिना आवाज किये निचे आ गयी थी, और रूम से आती आवाजों ने उसका शक यकीं में बदल दिया. वो बिना आहत किये हुए कदमो से रूम की और बढ़ी, शायद उसको सोता देख दोनों ज्यादा दी बिंदास थे तो दरवाजा भी बंद नहीं किया था. जब उसने अंदर देखा तो अंदर का नजारा उसकी अपेक्षा के मुताबित hi था, उसकी अम्मी निचे अपने पेअर फैला कर लेती हुई थी, शिव उन्हें छोड़ रहा था, ये पहली बार था जब वो दिन के उजाले में ये दृश्य देख रही थी, सबकुछ स्पस्ट दिख रहा था, उसकी अम्मी की छूट में वो बड़ा सा डंडा घुसा हुआ था, दोनों के चेहरे दूसरी और थे. शिव की कमर आगे पीछे हो रही थी और लुंड छूट में अन्दर बहार हो रहा था, वो इस दृश्य को देख कर गर्म होने लगी और अपनी सलवार केऊपर से hi अपनी छूट को दबोचने लगी. पर थोड़ी देर बाद hi दोनों का कार्यक्रम ख़तम हो गया, जब दोनों ने उसको देख लिया तो वो भी थोड़ा दर गयी थी, उसने ये भी देखा की जब शिव का लुंड, अम्मी की छूट से निकला तब उसमे से सफ़ेद सफ़ेद रास निकल रहा था. उसने अपने आपको संभाला, वो सोचने लगी की यहाँ से चली जाये, पर फिर कुछ सोच कर नहीं गयी, और वही कड़ी रही. शिव अभी भी नंगा hi था और उसका लुंड भी खड़ा hi था, जिसे देख कर उसकी नज़ारे वही चिपक गयी.

शिव : (में संयम के चेहरे को पढ़ रहा था, वह कोई भी गुस्सा नहीं था, वैसे भी उसको पता था की मेरे और आंटी के बिच क्या है, ऊपर से मेने ये भी देख लिया था की वो अपनी छूट को दबोच रही थी, तो में निश्चिंत था, पर एक बेटी के सामने में उसकी माँ को छोड़ रहा था तो मुझे भी थोड़ा बुरा लगा और मेने अपने लुंड को वह पड़ी सलवार से धक् दिया)

संयम : ये क्या हो रहा है? (उसने अंदर आते हुए सामान्य स्वर में hi kaha)Tum तो जानेवाले थे न?

शिव : में बस जा hi रहा था. (मेने भी सामान्य स्वर में कहा)

संयम : (थोड़ी नाराजगी se)Jab में कहती हु तो टाइम नहीं होता तुम्हारे पास, और ामी के लिए रुक गए. (उसने टॉन्ट मरते हुए कहा, ज़ोया तो शर्म से पानी पानी हो रही थी, अपनी ऐसी स्थिति देख कर उसकी आँखों में पानी भी भरने लगा था, और ये संयम ने भी देख लिया, वो अपनी ामी के पास hi gayi)Aap क्यों रो रही है?

ज़ोया : सॉरी. (वो बस इतना hi बोल पायी)

संयम : सॉरी किस लिए, आप ये कर रही थी इसलिए की आप मेरे शिव के साथ ये सब कर रही थी इस लिए. (संयम सीरियस मुँह से hi boli)(Zoya ने अपनी बेटी को देखा और उसकी आँखों से आंसू बहने lage)(Samim को बुरा लग गया, उसने तुरंत अपनी ामी को कहा) ये सब मुझे पहले से hi पता है, और शायद आप भी जानती हो की में जानती हु, फिर क्यों बुरा लग रहा है आपको? (उसने अपनी ामी के ासु पोछते हुए कहा)

ज़ोया : (रट hue)Muje ऐसा नहीं करना चाहिए था, मुझे माफ़ करदे.

संयम : क्यों जूथ बोल रही हो ामी, अभी मेने सब देखा, आप कितने मज़े से वो सब कर रही थी. (ज़ोया की आँखों से ासु बहने लगे, भले hi उसकी बेटी को पता था पर फिर भी अभी तक उन दोनों के बिच एक पर्दा था, और आज वो रेंज हाथो पकड़ी गयी थी, अपने शरीर की आग के चलते वो इस शर्मशार अवस्था में पहुंच गयी thi)(Zoya के बहते ासु देख kar)Aap रोइये मात अम्मी, में नाराज़ नहीं हु, अगर होती तो पहले hi अब्बू को सब बता चुकी होती. नाराजगी आपसे नहीं है, इस से है (शिव की और इस्सर कर ke)Jab में इसके नजदीक जाती हु तो ये भागता रहता है और आपके साथ सब करता है. (उसने मुँह बिगड़ कर कहा)

शिव : (मेने भी माहौल को हल्का करने के लिए कहा) क्यों की आंटी तुजसे भी ज्यादा खूबसूरत है.

संयम : (नाराज़ होते hue)Dekha अम्मी कैसे चिढ़ा रहा है मुझे, क्या में खूबसूरत नहीं हु? (ज़ोया क्या बोलती पर उसका मान थोड़ा हल्का जरूर हो चूका था, वो बस अपनी बेटी को देख रही thi)Batao न ामी, क्या में खूबसूरत नहीं हु?

ज़ोया : तू मुझसे भी ज्यादा खूबसूरत है.

संयम : Dekha(Apani जीभ निकल कर मुझे चिढ़ाते हुए)

शिव : वो तो बस तेरा दिल बहलाने के लिए कह रही hai.(Me मुस्कुराया)

संयम : ामीइइइइइइइ.

शिव : आप नहीं जानती इसको, अगर आपने थोड़ी भी छूट दी तो ये क्या करने की सोच रही है आपको पता भी नहीं है.

संयम : वो तो में कर के रहूंगी.

ज़ोया : नहीं बीटा, अभी तू छोटी है.

संयम : क्या छोटी हु, आपसे भी बड़ी हु, पता है न आपको.

शिव : वो उम्र की बात कर रही है और तू हाइट की बात कर रही है.

संयम : में छोटी हु और तू जैसे बहोत बड़ा हो गया है, जो ये सब करता फिरता है.

शिव : में बड़ा hi हु.

संयम : तो में भी बड़ी hi हु. मेरी उम्र में तो अम्मी की शादी भी हो गयी थी, है की नहीं अम्मी? (ज़ोया क्या बोलती, ये सच hi था, इन दोनों की बकवास से वो थोड़ा रिलैक्स हो गयी थी, उसके ासु निकलने बंद हो गए the)Ammi अगर आपकी इजाजत हो तो थोड़ी देर के लिए में इसको मेरे कमरे में ले जा सकती हु? (ज़ोया क्या कहती, वो दर रही थी की उसकी बेटी को कुछ हो न जाये, पर वो कुछ कह भी नहीं सकती थी, उसने शिव की और देखा, जैसे उस से कह रही हो की वो क्या कहे?)

शिव : क्यों जाना है तुजे अपने कमरे में, मुझे देर हो रही है, मुझे भी जाना है.

संयम : तुजे चलना hi होगा, अम्मी भी अब मन नहीं कर सकती. (वैसे भी सरे पत्ते संयम के हाथ में hi थे, मेने आंटी को देखा तो वो बेबसी से मुझे देख रही थी)

शिव : ठीक है तू जा, में कपडे पहन कर आता हु.

संयम : ऐसे hi चल. (वो शरमाते हुए muskurayi)Muje ऐसे hi काम hai.(Me सब समाज रहा था उसके इरादे और ज़ोया भी समाज रही थी पर जब वो खुद पकड़ी गयी थी की उसकी बेटी को क्या kehti)(Mene फिर भी अंडरवियर पहन लिया और अपने कपडे हाथ में ले लिए और उसके साथ ऊपर जाने लगा, जाते हुए मेने एक बार आंटी को देखा तो उनकी आँखों में बेबसी थी, जैसे कह रही हो की मेरी बेटी का ख्याल रखना. संयम ने मेरा हाथ खिंचा और ऊपर ले जाने लगी, हम दोनों ऊपर आ गए, अंदर कमरे में जाते hi संयम मुझसे लिपट गयी और मेरे होठो को चूसने लगी, अब जैसे उसको किसी का दर नहीं था, में उसको सब करने दे रहा था पर में वैसे hi खड़ा था, थोड़ी देर बाद वो मुझे नाराजगी से देखने lagi)Aise क्यों खड़ा है?

शिव : तो क्या करू?

संयम : (मुस्कुराते hue)Tu तो सब जनता है, फिर क्यों पूछ रहा है?

शिव : तुजे पता है न की तू बीमार है?

संयम : तो क्या हुआ?

शिव : पहले ठीक हो जा, फिर देखते है.

संयम : में ठीक hi हु. (उसने प्यार से मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : कहा न की पहले ठीक हो जा.

संयम : (वो जानती थी की शिव कुछ नहीं करेगा, शिव ऊपर से पूरा नंगा था, वो उसको बहोत पसंद भी था, वो उसकी छाती पर अपने होठो से हलके हलके चूमने lagi)Puuuch, पूउउच.

शिव : क्या कर रही है?

संयम : तू मुझे बहोत अच्छा लगता है शिव.

शिव : ठीक है, पर मेने कहा न भी नहीं.

संयम : तो में कहा कुछ कर रही हु, क्या छू भी नहीं सकती? (उसने मुँह बनाते हुए कहा)

शिव : मेने कहा न की पहले ठीक हो जा.

संयम : पर थोड़ा तो कर शक्ति है न?

शिव : है कर सकता हु, पर फिर अगर तू रुक न पायी तो गड़बड़ हो जाएगी.

संयम : कुछ नहीं होगा Shiv(Usne शिव के निप्पल को चूसते हुए कहा)

शिव : मात कर संयम, मेने कहा न बाद में.

संयम : (हलकी नाराजगी se)Thik है, जाओ फिर.

शिव : तू समझती क्यों नहीं (मेने उसको बहो में भर liya)Tu मेरे लिए खास है, में तुजे मुश्किल में नहीं देख सकता, कुछ दिन की तो बात है.

संयम : (वो भी मान gayi)Thik है, पर फिर मन नहीं करेगा न?

शिव : नहीं करूँगा, और हां, आंटी से अच्छे से बात करना, वो अभी परेशान होगी.

संयम : वो में देख लुंगी, अब एक अच्छे से किश तो दे. (मेने उसको देखा, वो अपना मुँह मेरी और किये अपने होठ बढ़ा रही थी, मेने उसको बहो में कास लिया और उसके होठो को चूमने लगा, वो भी लिपट गयी, थोड़ी देर बाद हम अलग हुए, मेरा लुंड फिर खड़ा हो गया था, जिसको संयम ने भी महसूस किया था, में अपने कपडे पहन ने लगा, वो बीएड पर बेथ gayi)(Samim अभी भी शिव के लुंड वाले भाग को hi देख रही थी, जब शिव पंत पहन ने लगा तो वो boli)Shiiiv. (मेने उसकी और देखा, वो हिचकिचाते हुए boli)Wo...(Mere लुंड की और इस्सर कर के) एक बार देखना था मुझे.

शिव : सब दिखाऊंगा, पर अभी नहीं.

संयम : बस एक बार. (उसने रिक्वेस्ट की, में कुछ बोलने hi वाला था की वो boli)Please.

शिव : ठीक है, में उसके नजदीक गया, देख ले. (उसने मुस्कुराते हुए मुझे देखा, फिर उसने लुंड की और dekha)Ab जल्दी से देख ले.

संयम : तू दिखा न. (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : (मेने अंडरवियर निचे खिसका दी, मेरा थोड़ा ढीला हो चूका लंडबहार tha)Le देख ले. (संयम पहली बार इतने नजदीक से लुंड को देख रही थी, उसके शरीर में चींटिया रेंगने लगी, उसका मान करने लगा की वो उसको पकड़ ले पर उसको शर्म आ रही थी, उसने अपनी ामी को उसको चूसते हुए भी देखा था, उसके मुँह में भी पानी आने लगा, उसने अपने होठो पर अपनी जीभ firayi)Bas देख लिया? (कहते हुए मेने लुंड वापस अंदर कर दिया)

संयम : (नाराजगी से देखते hue)Dekhne दे न ठीक से.

शिव : थोड़ा थोड़ा कर के सब बढ़ता जायेगा, में तेरे लिए कह रहा हु, (मेने पंत बंद कर दिया, और शर्ट भी पहन लिया, वो मुझे नाराजगी से देखने लगी, उसके चेहरे पर नाराजगी देख कर मेने kaha)Thode दिन रुक जा, फिर जो कहेगी वो में करूँगा, और जब करूँगा तब तू hi भागेगी.

संयम : में क्यों भागुंगी.

शिव : वो सब पता चल जायेगा. (में कपडे पहन चूका tha)Me चलता हु. (वो कड़ी हुई और फिर मेरे गले लग गयी, मेने उसके होठो पर हलके से चूमा और कहा) आंटी से बात कर लेना. वो अपसेट हो गयी है.

संयम : वो में देख लुंगी, जाते हुए उनको ऊपर भेज देना.

शिव : ठीक है, पर कोई बखेड़ा मात करना, सामजी, bye. (मेने उसके माथे पर किश की, उसने भी मुस्कुरा कर bye कहा, में निचे आ गया, आंटी अभी भी अपने कमरे में hi थी, में वह गया तो वो कपडे पहन कर बैठी हुई थी, मुझे देखते hi वो कड़ी हो gayi)Samim आपको बुला रही है.

ज़ोया : में कैसे उसके सामने जाउंगी शिव.

शिव : वो नाराज नहीं है आंटी, बस आप से बात करना चाहती है, और कुछ हो तो मुझे फ़ोन कर देना, में आ जाऊंगा, आप चिंता मात कीजिये.

ज़ोया : (थोड़े टेंशन me)Thik हिअ.

शिव : (में उनके पास गया, और उन्हें अपनी बहो में ले liya)(Zoya को भी अच्छा लगा की शिव को उसकी फ़िक्र है, वो ऐसे hi कड़ी rahi)Ab में चलता हु. (में उनसे अलग हुआ, उन्होंने सिर्फ शिर हिला कर है कहा, में वह से निकल गया, दो पहर ढलने लगी थी तो में सीधा घर गया और ट्रैक पहन कर बीनमदं के घर चला गया.)

वह ज़ोया धड़कते दिल से संयम के कमरे की और बढ़ गयी, अपनी परिस्थिति पर उसको रोना आ रहा था, उसकी बेटी के मान में उसके प्रति क्या इज्जात रह गयी होगी, ये सोच सोच कर hi वो अंदर से टूट रही थी, वो दरवाजे पर पहुंच कर कड़ी हो गयी, दरवाजा खुला hi था. आहात सुन कर संयम ने दरवाजे की और देखा, अपनी अम्मी को ऐसे शिर झुकाये खड़ा देख कर उसने कहा,

संयम : अम्मी, वह क्यों कड़ी है, अंदर आइये न. (ज़ोया भरी कदमो से अंदर दाखिल हुई, वो बीएड के पास कड़ी thi)Ammi मुझे सोना है, मुझे सुला दीजिये न. (संयम ने नॉर्मली hi कहा, ज़ोया ने एक बार संयम को देखा, वो बिलकुल नार्मल थी, वो बीएड पर चढ़ गयी और संयम के बाजु में लेट गयी, संयम उसकी आगोश में सामने लगी तो उसने भी अपनी बेटी को अपनी आगोस में ले लिया, उसकी बेटी कोई भी शिकायत नहीं कर रही थी न उसको उल्टा सीधा कह रही थी, उसको अपनी बेटी पर बहोत प्यार आने लगा, उसने उसका माथा चुम लिया. अपनी अम्मी के स्तनों में अपना शिर छुपाते हुए वो बोली)

संयम : एक बात पुछु अम्मी?

ज़ोया : (वो अंदर से हिल गयी, पता नहीं संयम क्या puchhegi)Ha पूछ न.

संयम : अम्मी, ....(वो थोड़ा रुक gayi)Ye सब करने में क्या सच में मज़ा आता है? (ज़ोया क्या जवाब देती, वो चुप hi rahi)Batao न अम्मी.

ज़ोया : बीटा, ये सब बात हमें नहीं करनी चाहिए.

संयम : आप मेरी ामी हो, आपसे नहीं पूछूँगी तो किस से पूछूँगी? बताइये न.

ज़ोया : है. (उसने सिर्फ इतना hi कहा)

संयम : पर अम्मी, मेरे वह तो जगह बहोत छोटी है. (उसने अपनी अम्मी को देखे बिना hi कहा, ज़ोया सब समाज रही थी, उसको भी पता था की वो क्या कह रही थी, जब वो खुद छोटी थी तब भी उसके मान में ऐसे सवाल आते थे)

ज़ोया : वो अपने हिसाब से बड़ी हो जाएगी. (उसको बहोत शर्म आ रही थी की वो कैसी बात कर रही है अपनी बेटी से)

संयम : आपको दर्द नहीं होता अम्मी?

ज़ोया : (वो कुछ पल खामोश रही फिर boli)Nahi.

संयम : कभी नहीं हुआ? मेरा मतलब है की पहली बार????

ज़ोया : (अपने पहली बार को याद कर ke)Hota है.

संयम : क्या बहोत ज्यादा होता है?

ज़ोया : होता है, पर फिर सब ठीक हो जाता है. अब सो जा.

संयम : बताओ न ामी, ऐसा क्यों कर रही हो.

ज़ोया : ऐसी बाते अपनी अम्मी से करेगी?

संयम : तो और किस से करुँगी? आप hi हो जो मुझे सही से समजा सकती हो.

ज़ोया : पर तुजे अभी से ये सब क्यों जान न है, तू बड़ी होती जाएगी तो अपने आप hi समाज जाएगी.

संयम : आप समाज गयी थी क्या? आपकी शादी हुई तब आपको सब पता था?

ज़ोया : नहीं.

संयम : तो फिर.

ज़ोया : अभी तो तेरी शादी नहीं हो रही है न, फिर कभी समजा दूंगी.

संयम : क्या बिना शादी के ये सब नहीं कर सकते? (उसने अपने मान की बात कर दी)

ज़ोया : (वो क्या जवाब deti)Muje नहीं पता, पर अभी तू अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे, बाद में ये सब करना hi है.

संयम : मुझे शिव बहोत अच्छा लगता है अम्मी.

ज़ोया : जानती हु. अभी सो जा. (संयम भी कुछ नहीं बोली, भले hi दोनों के बिच काफी कुछ खुल चूका था पर अभी भी एक माँ बेटी की मर्यादा थी बिच में, तो संयम ने भी कुछ नहीं पूछा और सोने लगी, उसकी अम्मी उसके शिर को सेहला रही थी, वो अपनी अम्मी का प्यार महसूस कर रही थी, थोड़ी देर पहले जो एक औरत थी, वो अब माँ थी, और अपनी बेटी को दुलार रही थी, संयम भी इन दोनों रूप को समाज रही थी, उसको अपनी अम्मी से कोई शिकायत नहीं थी, उसकी अम्मी अच्छी hi थी, इन्ही खयालो में वो नींद की गेहराइओ में चली gayi)(Zoya के मान का बोझ भी हल्का हो गया)

में और जूही स्टेडियम से लौट आये थे, बीनमदं ने मुझे रुकने को कहा पर मेने कहा की फिर कभी, कह कर में अपने घर चला गया. रात को खाने के बाद में पढ़ाई कर रहा था, अपना काम निपटा कर लता मेरे कमरे में आयी और मुझे देख कर वापस जाने लगी.

शिव : तुको, क्या हुआ?

लता : (मुस्कुराते hue)Kuchh नहीं, तू पढ़.

शिव : में बस रखनेही वाला था, आओ न, यही सो जाओ. (वो शर्माती संकुचती अंदर आ गयी और बिस्तर लगाने लगी, बिस्तर लगा कर वो अपनी चुन्नी साइड में रख कर बिस्तर पर लेट गयी, मेने भी अपनी किताब बंद की और बिस्तर पर आ गया, और उन्हें अपनी बाह पर शिर रख कर लेता दिया, मुझे चुप देख कर वो बोली)

लता : क्या सोच रहा है?

शिव : कुछ नहीं.

लता : अब मुझसे भी छुपायेगा?

शिव : ऐसा कुछ भी नहीं है, बस सोच रहा हु, सब के बारे में.

लता : मेने पहले भी कहा है, सोचने से कुछ नहीं होगा.

शिव : पर समाज में नहीं आता की क्या करू, क्या सबके साथ ऐसे रहना ठीक है?

लता : तो क्या किसी को छोड़ देगा?

शिव : में सबको रोकता तो हु, पर कोई तैयार hi नहीं है.

लता : (मुस्कुराते hue)Tune अपना काम कर दिया, छोड़ न फिर, सब समझदार है, हर किसी को अपने जीवन का फैसला करने का अधिकार होना चाहिए. और हर बार तुजे लड़कीओ की तरह सब को न न करने की जरुरत नहीं है, लड़का है तो लड़के की तरह रह, ये क्या हर बार लड़कीअ hi तेरे ऊपर हावी होती है, तूने बता दिया, तेरा काम ख़तम, फिर भी उन्हें तेरे साथ रहना है तो फिर तू क्यों कदम पीछे हटाता है. जो तेरी मर्जी हो कर.

शिव : में अगर अपनी मर्जी की करने लगा न तो सब की हवा टाइट हो जाएगी. (मेने मुस्कुरा के कहा)

लता : तो हो जाने दे.

शिव : (मेने मुस्कुरा कर उनकी और करवट ली और kaha)Sab से पहले तुम्हारी टाइट हो जाएगी.

लता : (वो भी मतलब समाज रही थी, वो शर्माने lagi)to मेने कहा रोका hai.(Unki शर्म मुझे उकसाने लगी, और में उनकी और बढ़ता गया)

सुबह उठ कर में अपने रूटीन में लाग गया. स्कूल में भी आज में और वैस्वी अकेले hi थे, पता नहीं हर्ष और महेश किस चक्कर में घूम रहे थे. में और वैस्वी नास्ता कर रहे थे. में उसको देखता तो वो मुस्कुरा के शर्मा जाती थी, सच में वो खूबसूरत थी.

वैस्वी : आज ऐसे क्या देख रहा है?

शिव : ऐसे मतलब कैसे, में तो बस देख रहा हु.

वैस्वी : मुझे सब समाज आता है, (वो मंद मंद मुस्कुराते हुए बोली), इस तरह से तो तू मुझे कभी नहीं देखता.

शिव : अभी भी में नहीं समजा. (मेने बस मुस्कुरा के कहा)

वैस्वी : जब कोई हमें उस तरह से देखता है तो हमे समाज आ जाता है, आज को खास बात जो तुम मुझे इस तरह से देख रहे हो. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : शाम को मिलेगी?

वैस्वी : (वो बुरी तरह से शर्मा gayi)Kab?

शिव : वही तो समाज में नहीं आ रहा, कैसे मिलेगी तू?

वैस्वी : तूने इतना सोचा वही मेरे लिए बहोत है, सच कह रही हु, तू मुझसे मिलना चाहता है यही सुन कर मुझे कितना अच्छा लगा है, रही बात मौके की तो वो मिल hi जायेगा. जहा छह होती है वह रह भी मिल hi जाती है. पर बता तो क्यों मिलना चाहता है? (उसने मंद मंद शरमाते हुए कहा).

शिव : वो तो में मिल कर hi बताऊंगा, (मेने उसको ऊपर से निचे देखते हुए कहा, उसके स्तन, उसका भरा हुआ शरीर मुझे बहोत आकर्षित कर रहा था, वो भी सब समाज रही थी, तो वो भी शर्माने lagi)Kya हुआ? (उसने ना में गर्दन हिलायी पर उसकी मुस्कराहट काम hi नहीं हो रही थी, रेसस्स भी खत्म हो गयी, हम क्लास में चले गए, घर जाते हुए में संयम के घर चला गया, पर आज अंकल भी थे, और संयम भी निचे hi बैठी हुई थी)

शिव : नमस्ते अंकल. कैसी हो संयम?

अंकल : नमस्ते beta,aao. (संयम ने मुझे मुस्कुरा के देखा)

शिव : कैसी तबियत है तेरी?

संयम : अच्छी हु, शायद कल से स्कूल भी आने लागु.

शिव : अच्छी बात है. और सुनाईये अंकल, आज घर पर?

अंकल : है थोड़ा काम था तो घर आया था.

शिव : कैसा काम? (मेने तो बस ऐसे hi पूछ लिया था)

अंकल : वो काम के सिलसिले में किसी से मिलना था, एक कॉन्ट्रैक्ट के लिए. (उन्होंने थोड़ी उदासी से कहा)

शिव : क्यों क्या हुआ अंकल?

अंकल : अरे कुछ नहीं, बस बुसिनेस्स की बात है.

शिव : (उनके चेहरे पर निराशा साफ़ छलक रही थी, वैसे तो उनका बिज़नेस था तो में कुछ कर नहीं सकता था पर बात करने से मान हल्का हो जाता है, ये सोच कर hi मेने बात आगे बधाई) अगर आपको बुरा न लगे तो बता सकते है की कोई गड़बड़ है क्या?

अंकल : (उन्होंने शिव को गौर से देखा, फिर muskuraye)Business है बीटा, चलता रहता है, वैसे कोई परेशानी नहीं है, पर एक जगह एक कॉन्ट्रैक्ट के लिए गया था तो इतना रेस्पॉन्स नहीं मिला, बहोत बड़ा कॉन्ट्रैक्ट था, अगर मिल जाता तो बहोत फायदा होता, खैर जो उपरवाले की मर्जी. (उनके चेहरे पर उदासी साफ़ चालक रही थी, आंटी भी मेरे लिए पानी ले कर आयी थी, पर अंकल की बात सुन कर वो वैसे hi कड़ी हो गयी थी)

ज़ोया : तो क्या हुआ, और कॉन्ट्रैक्ट मिल जायेंगे, आप उदास क्यों होते है, अच्छा खासा तो कमा लेते हो आप, हमे कोई शिकायत नहीं है आपसे, दिल छोटा मात कीजिये. (ज़ोया ने अपने पति की हिम्मत बधाई, अंकल ने भी अपनी बीवी को देखा, वो भी मुस्कुराये, उनकी पत्नी ने हर वक़्त उनका साथ दिया था, कभी कोई शिकायत नहीं की थी, कभी बुरा वक़्त भी था, पर उसने हमेसा उसका साथ दिया था)

अंकल : शिव के लिए पानी लायी हो तो हाथ में पकड़ कर क्यों कड़ी हो? (उन्होंने बात बदलने के इरादे से कहा)

ज़ोया : ओह! दिमाग से hi निका गया. (कहते हुए उन्होंने मुझे पानी दिया, मेने पानी पि लिया)

शिव : वैसे कोनसा कॉन्ट्रैक्ट था?

अंकल : था एक, एक बड़ी कंपनी पास में hi बन रही है, मेरे ट्रक भी है और बड़ी मशीन भी, सोचा की वह कॉन्ट्रैक्ट मिल जाता तो अच्छा रहता.

शिव : कोनसी कंपनी?

अंकल : क्सक्सक्स कंस्ट्रक्शन.

शिव : (नाम सुन कर में चौंक गया, क्यों की ये पवनसीर की कंपनी thi)Kya कहा उन्होंने?

अंकल : कुछ नहीं, पर उनको कोई इंट्रेस्ट नहीं था. शायद में गैर मजहबी हु तो.... आज कल माहौल भी ऐसा चल रहा है, क्या करे.

शिव : मतलब आपको उन्होंने कोई कारन नहीं बताया है.

अंकल : है, अब बड़े लोग है, ज्यादा क्या hi पूछेंगे. (उन्होंने उदास हो कर कहा)

शिव : एक मिनट अंकल, मुझे एक कॉल करना है. (उन्होंने हां में शिर हिलाया, में बहार आया और पवनसीर को फ़ोन लगाया) Hello.

पवनसीर : है शिव.

शिव : सर, एक बात पूछनी थी, आपके वह कोई हसनरज़ा कर के आये थे, ट्रक और मशीन के लिए.

पवनसीर : है आये थे, क्यों?

शिव : आपने मन कर दिया, कोई वजह थी क्या?

पवनसीर : तुम क्यों पूछ रहे हो?

शिव : वो मेरी पहचान के है, मुझे बात पता चली तो मेने बस पूछने के लिए फ़ोन किया.

पवनसीर : ओह! मेने तो बस ऐसे hi मन कर दिया था, तुम तो जानते हो, आज कल क्या माहौल चल रहा है, मेने सोचा की कोई हमारे पहचान का हो तो उसको hi काम देना चाहिए. अगर वो तुम्हारी पहचान के है तो अच्छी बात है, में बात करता हु उनसे.

शिव : अभी में उनके वह hi आया हु, वैसे उन्हें पता नहीं है की मेने आपको कॉल किया है.

पवनसीर : एक काम करो, अगर वो अभी मिल सकते है तो में साइट पर hi हु.

शिव : ठीक है सर, में बात कर के उन्हें ले आता हु, थैंक्यू सर.

पवनसीर : पागल है क्या (उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा).

शिव : में आता हु सर. (कह कर मेने फ़ोन काट दिया, वो पीछे घुमा तो ज़ोया कड़ी थी, शायद उन्होंने बात सुनी थी)

ज़ोया : तुम जानते हो उन्हें?

शिव : (मुस्कुराते hue)Haa, चलिए अंदर. (में अंदर गया और अंकल को kaha)Uncle, चलिए.

अंकल : कहा?

शिव : आप पवनसीर से मिले थे न?

अंकल : (आश्चर्य se)Ha, पर तुम्हे कैसे पता?

शिव : मेने उनसे hi बात की है, उन्होंने आपको बुलाया है, अगर अभी अप्पके पास टाइम है तो.

अंकल : है है क्यों नहीं. (उनके चेहरे पर खुसी साफ़ चालक रही थी) में फाइल ले लेता हु, केथे हुए वो अपने कमरे में गए, मेने लता को फ़ोन कर के बता दिया की में थोड़ा लेट आऊंगा, उसके बाद में और अंकल पवनसीर से मिलने चले गए, उनसे साडी बात हो गयी, उसके बाद हम वापस घर लौट आये, में और वो बाइक से hi गए थे, वो बहोत खुस थे, हम अंदर आये तो ज़ोयायन्तय ने hi दरवाजा खोला tha)Zoya (उन्होंने खुस हो कर कहा)

ज़ोया : क्या हुआ?

अंकल : तुम जानती हो ये कोण है? (उन्होंने मेरी और इस्सर कर के कहा, तब तक आवाज सुन कर संयम भी सीडीओ से निचे आ रही थी)

ज़ोया : ये क्या पूछ रहे है आप. (ज़ोया को कुछ समाज में नहीं आया)

अंकल : जी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट के लिए में गया था, ये उसका पार्टनर है. (उन्होंने खुस होते हुए कहा)

ज़ोया : क्या! (वो आश्चर्य से मुझे देखने लगी)

शिव : आप भी क्या अंकल, वो तो बस सर ने मुझे बना दिया है.

अंकल : ऐसे hi तो नहीं बनाया होगा, और तुम्हारे कहने भर से उन्होंने मुझे ये कॉन्ट्रैक्ट दे दिया, ये कोई छोटी बात है. (उन्होंने मेरा कन्धा पकड़ कर kaha)(Samim भी निचे आ चुकी थी और वो अपने पापा के चेहरे पर खुसी महसूस कर रही थी, उस से भी ज्यादा उसको इस बात की खुसी थी की, वो शिव की तारीफ कर रहे थे, और शिव की इज्जत उसके पापा के सामने कितनी बढ़ चुकी है वो ये महसूस कर के गड गड हो रही थी)

अंकल : ज़ोया तुम यकीं नहीं करोगी, जब शिव ने इतना hi कहा की ये मेरी पहचान के है तो उन्होंने कोई ज्यादा सवाल नहीं किआ, जो भी रेट मेने भरे थे वो पास कर दिए. (मेरी और देख kar)Tumhe पता नहीं है बेटे की तुमने क्या कर दिया है. (मुझे गले लगते हुए) कस तुम मेरे बेटे होते.

शिव : वो तो हु hi अंकल.

अंकल : ज़ोया, बहोत भूख लगी है, क्या बनाया है, शिव भी यही खायेगा.

शिव : नहीं अंकल, में...

अंकल : में कुछ नहीं सुन ने वाला, ये भी तुम्हारा hi घर है, ज़ोया खाना लगाओ.

ज़ोया : (खुस होते hue)Ji, अभी लगाती हु.

संयम : (वो भी खुस thi)Ammi में भी मदद करती हु.

ज़ोया : तू बेथ, अभी बीमारी से तो उठी है.

संयम : में ठीक हु अम्मी. (कहते हुए वो भी साथ में किचन में घुस गयी, मेने लता को फ़ोन कर के बता दिया की में खा कर आ रहा हु, फिर हम खाने बेथ बेथ गए, दोनों बहोत खुसी से खाना परोस रही थी, सब ने मिल कर साथ में खाना खाया, संयम बार बार शिव को hi देख रही थी, जैसे जैसे उसके पापा सब बता रहे थे की वह साइट पर क्या क्या हुआ तो वो बहोत खुस हो रही थी)

खाने के बात में घर के लिए निकल गया. वैसे तो मेने कुछ भी नहीं किया था पर अंकल मुझे hi सारा क्रेडिट दे रहे थे, में घर पहुंच गया और लता से बात हुई तो मेने भी उसे संयम के वह क्या हुआ वो बता दिया और क्यों में खा कर आया ये भी वो समाज गयी. हम बात hi कर रहे थे की बहार किसी कार का हॉर्न बजा, में बहार आया तो देखा की जहान्वी आयी थी.

शिव : आइये आइये.

जहान्वी : कहा घूम रहे हो, दिखाई hi नहीं दे रहे? (उन्होंने मुस्कुराते हुए मुझे कहा)

शिव : यही तो हु, वैसे सोच रहा था की आप साइट पर मिलोगी, पर आप वह नहीं थी.

जहान्वी : तुम गए थे वह? मुझे कॉल कर देते.

शिव : नहीं, मेरा भी ऐसे अचानक जाना हो गया था, (फिर मेने उन्हें हसन अंकल वाली बात बता दी)

जहान्वी : चलो अच्छी बात है, वैसे में भी उसी और जा रही थी, मेरी बात हुई पवनसीर से, मेने तुम्हारे बारे में पूछा तो उन्होंने बताया की तुम नहीं हो वह इस लिए तुम्हे लेने आ गयी. आने का इरादा है तो चलो.

शिव : ठीक है, चलिए.

में उनके साथ चला गया. शाम को वो वापस भी छोड़ गयी, उसके बाद में स्टेडियम चला गया. रात को खाने के बाद में टेरेस पर टहल रहा था.
 
अपडेट 212

रात को खाने के बाद में टेरेस पर टहल रहा था, तभी मुझे वैस्वी का फ़ोन आया. इस वक़्त फ़ोन से मुझे आश्चर्य हुआ.

शिव : Hello.

वैस्वी : कैसे हो? (उसने बहोत प्यार से पूछा)

शिव : कैसा होऊंगा, अच्छा hi तो हु. तुम कैसी हो, इस वक़्त कैसे फ़ोन किया?

वैस्वी : कुछ नहीं बस ऐसे hi. (मेरी समाज में नहीं आ रहा था की उसने ऐसे hi फ़ोन किया tha)Aur खाना खा लिया? (उसने जनरल सवाल पूछा)

शिव : है, खा लिया, तुमने?

वैस्वी : है मेने भी खा लिया. कहा हो अभी?

शिव : कहा होऊंगा, घर पर hi हु, क्यों?

वैस्वी : नहीं कुछ नहीं, बस ऐसे hi पूछ रही थी. संयम से मिलने गए थे?

शिव : नहीं, दोपहर में गया था वही, बाद में नहीं गया, क्यों?

वैस्वी : बस ऐसे hi.

शिव : लगता है आज फुर्सत में हो, बिना बात के फ़ोन किया. (मेने मुस्कुराते हुए कहा)

वैस्वी : वैसे भी तुमसे अकेलेमें बात होती नहीं. (उसने हलकी नाराजगी से कहा)

शिव : दोपहर को तो मिले थे हम, वो भी अकेले.

वैस्वी : वो भी मिलना हुआ क्या.

शिव : (छेड़ते hue)To फिर कैसे मिलना है?

वैस्वी : सब जानते हो फिर भी छेड़ रहे हो, (वो रुठनेवाले स्वर से बोली) वैसे दोपहर में मुझे उस तरह से क्यों देख रहे थे. (उसने मंद मंद मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : में तो बस ऐसे hi देख रहा था.

वैस्वी : जूथ मात बोलो, मेने कहा था न की हम लड़कीअ नज़ारे पहचान लेती है.

शिव : अच्छा, तो फिर कहो की में क्या देख रहा था? (मेने मुस्कुराते हुए कहा)

वैस्वी : (अपने दन्त के बिच ऊँगली दबा के मुस्कुराने लगी, फिर boli)Tumhe पता की तुम किस तरह से देख रहे थे.

शिव : मेने कहा न की में ऐसे hi देख रहा था. (मेने खिंचाई चालू रक्खी)

वैस्वी : ऐसे hi देख रहे थे तो मेरे चेहरे को देखते, वह क्यों देख रहे थे? (वो मंद मंद मुस्कुराते हुए बोली)

शिव : वह, में कहा देख रहा था.

वैस्वी : गंदे, सब जानते हो फिर भी मुझसे जूथ बोल रहे हो.

शिव : अच्छा बाबा, वो गलती से देख लिया, बस.

वैस्वी : गलती से क्यों, मेने मन किया है क्या?

शिव : तो क्या में सब देख सकता हु?

वैस्वी : (वो शर्मा gayi)Tumhare अलावा कोण देखेगा मुझे.

शिव : में क्या, सब घूरते रहते है तुम्हे. (मेने मुस्कुराते हुए कहा)

वैस्वी : में किसी को नहीं देखती तो मुझे क्या पता, में तो बस तुम्हे hi देखती हु, कहो न क्या देख रहे थे? (वैस्वी भी मूड में थी)

शिव : तुम्हारी खूबसूरती. (मेने मुस्कुराते हुए कहा)

वैस्वी : सूरत ऊपर होती है जनाब. वह नहीं. (उसने मंद मंद मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : तुम्हारा सौंदर्य देख रहा था, बस.

वैस्वी : तो क्या देखा? (उसको भी मज़ा आ रहा था)

शिव : तुम्हारा सौंदर्य बड़ा बड़ा है. (मेने मुस्कुराते हुए कहा)

वैस्वी : (वो पूरी तरह से शर्मा gayi)Dhat! बेशरम. (में बस मुस्कुराया तो बोलै कुछ नहीं, वैस्वी ने hi आगे बात badhayi)To तुम्हे अच्छा लगा?

शिव : बहोत.

वैस्वी : और क्या अच्छा लगा?

शिव : सब कुछ.

वैस्वी : सबकुछ मतलब. (वो भी अपने बिस्तर में करवाते ले रही थी, बिस्तर पर उलटी लेते हुए अपने पेअर हवामे हिला रही थी)

शिव : सब कुछ मतलब, सब कुछ, पूरी की पूरी रास मलाई हो तुम.

वैस्वी : (वो बहोत शर्मा गयी, पर उसको बहोत अच्छा भी लग रहा था) में खाने की चीज हु?

शिव : है, हर जगह से खाने की चीज हो.

वैस्वी : (वो शर्मा gayi)To फिर कहते क्यों नहीं? (वो फिर सीधी लेट गयी)

शिव : खा लूंगा, मेरी तो रसमलाई है, जब चाहे खा लूंगा.

वैस्वी : तुमसे पहले किसी और ने खा ली तो?

शिव : वो नहीं हो सकता, क्यों की मेरी रास मलाई किसी और के छूटे hi नागिन बन जाती है और उसको जोर से दस लेती है.

वैस्वी : इतना भरोसा है? (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : बिलकुल है.

वैस्वी : तो कब आ रहे हो खाने? (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : कहो तो अभी आ जाऊ.

वैस्वी : सब घर पर है, कैसे आओगे?

शिव : वही पीछे पाइप से.

वैस्वी : न बाबा, मुझे दर लगता है, कही तुम्हे कुछ हो जाये तो. कोई और रास्ता बताओ.

शिव : पहली बार देख रहा हु की मछली खुद काटने के लिए इतना तड़प रही है.

वैस्वी : मछलीकी किस्मत है काटना, तो फिर क्या पीछे हटना.

शिव : अरे वह, तुम तो काफिया मिलाने लगी.

वैस्वी : (मंद मंद मुस्कुराते hue)Kaho न कब आओगे?

शिव : सोचता हु कुछ.

वैस्वी : जल्दी सोचना, में इंतजार कर रही hu.(Usne बहोत प्यार से कहा)

शिव : ठीक है.

वैस्वी : (धीरे se)I लव यू.

शिव : क्या कहा? (वो फुसफुसाई थी तो मेने पूछा)

वैस्वी : वही जो तुमने सुना. (वो मंद मंद मुस्कुरायी)

शिव : तो खुल कर नहीं बोल सकती?

वासवी :हर बाटे खुल कर नहीं की जाती.

शिव : पर मुझे तो सब खोल कर करना पसंद है.

वैस्वी : गंदे कहिके. (वो शर्मा gayi)Achchha में रखती हु. Bye.

शिव : ी लव यू तू.

वैस्वी : उम्म्म्महहहहआ. (कहते हुए उसने फ़ोन रख दिया, में मुस्कुराने लगा)

आवाज : अच्छा ी लव यू, कोण थी वो? (मेने चौंक कर पीछे देखा तो रंजन कड़ी थी, वो मेरे पास आ gayi)Bol न कोण थी वो?

शिव : थी कोई, छोड़ न.

रंजन : (वो बिलकुल मेरे पास आ के कड़ी हो गयी थी) बता न.

शिव : छोड़ न, क्या करना है तुजे जान कर.

रंजन : (सीरियस हो kar)Ab मुज पर इतनभी भरोसा नहीं रहा?

शिव : ऐसा क्यों कह रही है, मेने सोचा की तुजे दुःख होगा इस लिए कह रहा था में, तुजे सच में जान न है?

रंजन : और नहीं तो क्या, यहाँ हम इंतजार करते रहे और वह दुसरो से प्यार जटाओगे तो जान न नहीं पड़ेगा.

शिव : वैस्वी थी. (मेने सीधे hi कह दिया)

रंजन : उसको ी लव यू तो मुझे? (उसने रूठने का बहाना किया)

शिव : तुजे क्या चाहिए?

रंजन : वही जो उसको दिया. (मेने उसको खिंच कर अपनी बहो में बर्लिया और उसके होठो को चूस लिया)

शिव : ी लव यू, (थोड़ा रुक kar)thik है.

रंजन : है ठीक है. (वो मुस्कुराने लगी)

शिव : कब से सुन रही थी सब?

रंजन : अभी hi आयी, कुछ मिस कर दिया क्या मेने? (वो सररत से बोली)

शिव : नहीं, ऐसे hi बात कर रहे थे.

रंजन : सब से प्यार जाता रहा है, करना क्या चाहता है तू?

शिव : पता नहीं. (में सीरियस हो गया)

रंजन : क्या में अच्छी नहीं लगती तुजे?

शिव : पागल, (मेने उसके चेहरे को sehlaya)aisa क्यों कह रही है?

रंजन : और क्या कहु, अगर तेरा मान होता है तो बोल दिया कर, में कभी तुजे मन नहीं करुँगी, जब कहे तब कपडे उतर दूंगी. (में उसको देखने लगा, वो भी मेरी आँखों में देख रही थी, कुछ पल ख़ामोशी छायी रही) या फिर इसीलिए तुजे कदर नहीं है मेरी, (वो रुकी) या फिर तुजे लगता है की ये तो जब चाहे तब निचे आ जाएगी, जो नहीं आ रही उसको अपने निचे लौ.

शिव : तू मेरे बारे में ऐसा सोचती है? (मुझे सच में बुरा लगा)

रंजन : अरे में तो बस ऐसे hi कह रही थी. तू टेंशन मत ले.

शिव : तुजे पता है वो कब से मुझे कह रही है, मेने उसको भी कहा की में अच्छा नहीं हु, मेरे और भी चक्कर है, पर फिर भी वो नहीं मान रही. तुजे ऐसा लगता है की मेने तेरा इस्तेमाल किया है?

रंजन : पागल है क्या? तूने मेरे साथ किया, क्यों की ये में भी चाहती थी, और आज भी चाहती हु, (फिर मुस्कुराते hue)Chal कोई नहीं, वो भी ले लेगी, वैसे भी तेरा बहोत बड़ा है, कोई घिस नहीं जायेगा. (कहते हुए वो मुस्कुरायी)

शिव : पढ़ने नहीं बैठी?

रंजन : आज तुजसे मिलने का मान था तो ढूंढते हुए आ गयी तुजे. (वो मुस्कुराते हुए बोली)

शिव : क्यों?

रंजन : अब ये भी मुझे बताना पड़ेगा. (उसने नाराजगी से कहा, पर मुझसे सात गयी, में उसकी मनसा समाज रहा था, मेने भी उसको अपने आगोस में लिया और उसकी पीठ से होते हुए उसके कूल्हों को सहलाया, वो भी मुझसे लिपट गयी, उसके कूल्हों की दरार में मेने हाथ डाला)

रंजन : शह्ह्हह्ह्ह्ह (वो गरम होने lagi,mera भी लुंड खड़ा होने लगा, पर फिर मुझे अचानक याद आया)

शिव : विणा? (मेरे कहने का मतलब था की विणा उसका इंतजार कर रही होगी, पढ़ने के लिए)

रंजन : कहो तो उसको भी बुला लू. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : पागल, मेरा वो मतलब नहीं था, में बस ये पूछ रहा था की वो तुजे ढूंढेगी तो नहीं?

रंजन : में उसको बता कर आयी हु की तेरे पास आ रही हु.

शिव : वो कुछ नहीं बोली?

रंजन : न, बस थोड़ी उदास हो गयी थी.

शिव : ऐसा क्यों?

रंजन : उसको भी तो तू चाहिए, (कहते हुए वो मुस्कुरायी, फिर अचानक जैसे कुछ सुझा हो) एक काम क्यों नहीं karta,aaj हमारे साथ hi सो जा. मेरा मतलब है हम दोनों के साथ.

शिव : ये क्या कह रही है तू?

रंजन : सच hi तो कह रही हु, अगर मेरे साथ रहा तो वो तरसेगी और उसके साथ रहा तो में, इस से अच्छा है की दोनों के साथ एक साथ. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : पागल है क्या? और ऐसा तुजे करना क्यों है?

रंजन : वो इसलिए की किसी अकेली की तो ताकत नहीं तुजे झेलने की, जान हलक में आ जाती है, तो दोनों मिल कर बात लेगी. (उसने मुस्कुरा के कहा)

शिव : तुजे शर्म नहीं आती ऐसी बात कहते हुए?

रंजन : इसमें शर्माने की क्या बात है, हम दोनों में कुछ भी नहीं छुपा है. (में सोच में पद gaya)Are इतना सोच मात, मज़ा आएगा.

शिव : (कुछ सोच कर) ठीक है. (वो खुस हो गयी) तुम पढ़ो, में भी पढ़ कर आता हु. अभी सब जाग रहे है.

रंजन : ठीक है. (कह कर वो मेरे होठो को चुम कर चली गयी, में सोचने लगा की क्या ये सही है, पर ये सोच कर hi की दोनों एक साथ आएगी, मेरा लुंड खड़ा होने लगा, मेरे लिए भी ये एक नया अनुभव था, में अपने कमरे में चला गया और पढ़ने laga)(Lata जब कमरे के सामने से गुजारी तो उसने शिव को पढ़ते हुए देखा तो वो बच्चोंवाले कमरे में चली गयी)

रंजन ने विणा को बता दिया की आज शिव आनेवाला है.

विणा : नहीं यार, मुझसे नहीं होगा?

रंजन : क्यों?

विणा : और नहीं तो क्या, ऐसे दोनों थोड़ी न कर शक्ति है, तू कर ले, में दूसरे कमरे में चली जाती हु.

रंजन : क्यों तेरा मान नहीं है?

विणा : है, पर ऐसे थोड़ी न कर शक्ति है, में फिर कभी उसके साथ रहलऊंगी.

रंजन : अब उसको इतना समजा कर आयी तब वो मन है, अब तू नाटक मात कर.

विणा : क्या सच में, वो मान गया?

रंजन : तभी तो तुजे कह रही हु.

विणा : (शिव दोनों के साथ करने को तैयार है तो फिर वो कैसे मन करे) ठीक है. (उसने बस इतना hi कहा, पर अभी भी उसको हिचकिचाहट थी, रंजन भी ये समाज रही थी और हिचकिचाहट तो उसको भी थी, पर एक रोमांच भी था, दोनों पढ़ने लगी, काफी टाइम हो गया पर शिव नहीं आया)

रंजन : (बुक बंद करते hue)Ye अभी तक आया क्यों नहीं, में देखती हु, कही लतादिदी तो उसके साथ नहीं चली गयी. (वो बहार निकली तो सब शांत था, उसने बच्चोंवाले कमरे में देखा तो वह लतादिदी, सरितादिदी और गायत्रीदिदी भी थी, उसको थोड़ी रहत हुई, वो जब शिव के कमरे में पहुंची तो शिव अभी भी पढ़ रहा था, वो दरवाजे पर कड़ी हो गयी, आहात से शिव ने पीछे मुड़कर देखा) और कितना टाइम लगेगा?

शिव : आता hu,bas पांच मिनट. (रंजन चली गयी, मुझे भी थोड़ा हिचकिचा रहा थी, इसलिए सायद में गया नहीं था, पर फिर मेने किताब बंद की, लाइट भी बंद कर दी, बाथरूम गया, बच्चोंवाले कमरे में सब को देखा, फिर में रणाजनवाले कमरे की और बढ़ गया, जब अंदर गया तो विणा लेती हुई थी जब की रंजन बैठी हुई थी, मुझे देख कर विणा ने नज़ारे घुमा ली, उसको शर्म आ रही थी शायद, हिचकिचाहट तो मुझे भी हो रही thi)(Me अंदर कमरे में गया)

रंजन : दरवाजा तो बंद कर ले. (उसने मुस्कुराते हुए कहा, मेने दरवाजा बंद कर दिया और अंदर आ गया, विणा दुअरी और मुँह कर ली, रंजन ने भी ये देखा और मेरे चेहरे पर आयी परेशानी भी उसने देखि) उसको छोड़ न, पता नहीं क्यों इतना शर्मा रही है, ये में भी जानती हु की तूने उसके साथ सब कर लिया है और वो भी जानती है की तूने मेरे साथ भी सब किया है, पता नहीं फिर किस बात की शर्म आ रही है.

शिव : अगर ऐसा है तो तू मेरे कमरे में चल.

रंजन : (विणा को हमारी और घूमते hue)Chale जाये क्या? (उसने विणा से पूछा, विणा ने मुझे देखा और फिर नज़ारे झुका ली)

शिव : (रंजन की और इस्सर कर ke)Ye मुझे ऐसा करने को कह रही है, अगर तू कम्फर्टेबले नहीं है तो रहने दे. (वो मेरी आँखों में देखने लगी)

रंजन : (मुँह फुला kar)Achchha, सब में hi छह रही हु, तुम दोनों को कुछ नहीं करना, है na?(Vina को कहते हुए) क्या हम दूसरे कमरे में चले जाये? (विणा ने ना में शिर हिलाया) देखा, चाहती तो ये भी है, पता नहीं क्यों इतना शर्मा रही है.

शिव : और तू बहोत बेशर्म हो गयी है, है न?

रंजन : (मुँह टेढ़ा कर ke)Me बेशर्म नहीं हो गयी हु, पर अगर हम दोनों एक दूसरे के सामने खुल जायेंगे तो फिर आगे साथ में रहने को सहूलियत होगी, मेने तो ये सोच कर hi कहा था.

शिव : में तुजे कुछ नहीं कह रहा, अपना मूड मात बिगड़, वो शर्मा रही है तो उसको सहज होने में थोड़ा टाइम तो दे.

रंजन : में कहा मन कर रही हु, उसको जितना टाइम लेने है ले. (कहते हुए वो कड़ी हुई और मेरी गॉड में बेथ गयी, उसका मुँह मेरी और hi था और अपने पेअर उसने मेरी कमर के इर्दगिर्द कर दिए, और विणा को देख kar)Tu शर्माती रह, में तो अपने शिव को जी भर के प्यार दूंगी. (कहते हुए वो मेरे होठो को चूसने लगी, मेने तिरछी नजर से विणा को देखा, वो हमें hi देख रही थी, जब हमारी नज़ारे मिली तो वो दूसरी और देखने लगी, रंजन मुझे किश किये जा रही थी, मेने रंजन को देखा, वो आंखे बंद किये हुए मेरे होठो को चूस रही थी, उसके होठो के गीले पैन ने मेरी भी आग भड़का दी और में भी उसको किश करने लगा और साथ में उसके कूल्हों को मसलने लगा, हम दोनों hi गर्म होने लगे, कमरे में किश और स्मूच की आवाजे आने लगी, विणा ने भी तिरछी नजर से देखा, थोड़ी देर किश करने के बाद रंजन को सास लेने में तकलीफ होने लगी तो उसने अपना मुँह हटाया और मेरे गले लग गयी, में उसके कूल्हों को फ्रॉक के ऊपर से hi मसल रहा था)

रंजन : शहहहहह, उम्म्म्मह कितना मज़ा आता है न शिव, तू कहे तो में रोज़ तेरे निचे लेट jau(Kehte हुए उसने मेरे गले को चुम liya)Ummmh उम्म्म्मह. (में उसके फ्रॉक को पीछे से ऊपर करने लगा तो वो थोड़ी ऊपर हो गयी ताकि फसा हुआ फ्रॉक ऊपर हो जाये, जैसे hi फ्रॉक ऊपर हुआ उअके कूल्हों को मेने फिर से पकड़ लिया, वह पंतय थी, पर ाचे नंगे कूल्हों का एहसास हो रहा था, गरम कूल्हों का एहसास होते hi में पंतय के ऊपर से hi उसके कूल्हों को दबोचने लगा) शह्ह्ह्हह्ह शीइइइइव उम्म्म्मह उम्मंहहहह,( रंजन को भी, शिव के खड़े हो चुके लुंड का एहसास हो रहा था, उसने अपनी कमर हिलनी सुरु कर दी और अपनी छूट को उसके लुंड पर रगड़ना सुरु कर diya)Shhhhhh शीइइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह. कितना मज़ा आता है इन सब में शह्ह्ह्हह्ह मुझे छूटे hi तेरा लुंड कड़क हो जाता है शह्ह्हह्ह्ह्ह मुझे पता है की में तुजे पसंद हु shhhhhhhhhh (वो मेरे बालो को नोच रही थी, और मेरी पीठ को सेहला रही थी, थोड़ी देर बाद उसने मेरी t-shirt निकालनी चाही तो मेने अपने हाथ ऊपर कर दिए, मेरी t-shirt निकल गयी थी, में ऊपर से नंगा हो gaya.)Mera भी फ्रॉक निकल दे शिव. मुझे खुल कर प्यार करना hai(Usne कहा तो मेने उसके पीछेकी चैन को खोला और फ्रॉक को ऊपर से निकल दिया, वो अब सिर्फ ब्रा और पंतय में थी, में उसे देख रहा था, संतरो के आकर के स्तन सफ़ेद ब्रा में कैद थे, वो पतली थी तो उसके स्तन बहोत बड़े लग रहे the)Achchhe लगते है न ये तुम्हे?

शिव : हआ.

रंजन : विणा के तो मुझसे भी बड़े है, है न?

शिव : हां. (अपनी बात सुन कर विणा को शर्म आने लगी, वो भी गरम हो चुकी thi)(Mene रंजन को बहो में लिया, उसका बदन गरम गरम था, में उसकी नंगी पीठ पर हाथ गुमने लगा और साथ में उसके कूल्हे भी मसल रहा था, वो मेरे गले और गाल को चुम रही थी और साथ में अपने नाखुनवाले हाथो से मेरी पीठ को सेहला रही थी, उसके ऐसा करने से मुझे बहोत अच्छा लग रहा था और शरीर में गुदगुदी हो रही थी जिस से मेरा रोआ रोआ खड़ा हो गया था, मेने उसकी पंतय में पीछे से हाथ डाला और उसके नंगे कूल्हों को पकड़ लिया और सहलाने लगा, वो और सिसकिया लेने लगी)

रंजन : शह्ह्ह्हह्ह, तुजे मेरी गांड नहीं मारनी क्या, विणा की तो पहली बार में hi मार ली थी, शह्ह्हह्ह्ह्ह मेने मन किया है क्या shhhhhhhh(Vina ये सब देख रही थी और सुन भी रही थी, वो अपनी झंगे आपस में सत्ता रही थी और हलके हलके रगड़ रही थी, उसके बदन की गर्मी भी बढ़ती जा रही थी, वो शिव के गठीले शरीर को देख कर उत्तेजित हो रही थी, वो सीधी हो गयी, वो शिव के चेहरे को देखने लगी की कब वो उसकी और देखता है, जब शिव ने उसकी और देखा तो वो ललचायी नजरो से उसको देखने लगी, जैस एकेह रही हो की में भी हु Shiv)(Me विणा की आँखों को पढ़ प् रहा था, मेने एक हाथ बढ़ाया और उसके स्तन को दबा दिया, उसका चेहरा अजीब हो गया और आंखे बंद हो गयी, वो बलखाने लगी)

विणा : शहहहहह . (उसकी सिसकी सुन कर रंजन ने उसको देखा, पर कुछ नहीं बोली, वो अपनी छूट शिव के लुंड पर रगड़ रही थी, उसकी पंतय भी आगे से पूरी गीली हो चुकी थी, वो गॉड से उठ गयी, शिव विणा के स्तन दबा रहा था)

रंजन : अब देख कैसे अपने दूध दबवा रही है. (विणा और रंजन की नज़ारे मिली, दोनों ने एक दूसरे को दो पल देखा, रंजन शर्मा गयी, पर उसके चेहरे पर मुस्कान थी) अब शर्माना छोड़ और अपना फ्रॉक निकल कर शिव को अपना बदन दिखा, वर्ण में तो उसको अपने अंदर hi समां लुंगी, तेरी और देखने भी नहीं दूंगी. (विणा ने रंजन को देख कर मुँह टेढ़ा किया, और शिव को देखने लगी जैसे कह रही हो की मुझे भी नंगी कर दो, मेरे भी कपडे निकल do)Ye कुछ नहीं बोलेगी शिव, पर चाहती है की तू hi उसके कपडे उतरे. (मेने विणा को देखा तो वो शर्मा गयी, मेने उसको पलट दिया, वो उलटी हो गयी थी, उसके भरे हुए कूल्हे मेरी आँखों के सामने आ गए, फ्रॉक कूल्हों तक आ गया था, मेने उसके कूल्हे को फ्रॉक के ऊपर से hi सहलाया, विणा काँप गयी, मेने उसके फ्रॉक को ऊपर किया तो ब्राउन पंतय में कैद उसके कूल्हे नजर आ रहे थे, में उसके कूल्हे सहलाने लगा, विणा अपना मुँह दबा के सिसकी रोक रही थी और मुस्कुरा भी रही थी) तुजे इसकी गांड बहोत पसंद है, है न? (रंजन ने हलकी जलन से कहा, मेने उसको dekha)Meri छोटी है न? (उसने उदास हो कर कहा)

शिव : पागल. (मेने उसका चेहरा सहलाया, फिर विणा की भी पीछे से चैन खोल दी, और फ्रॉक उतरने लगा पर वो सोई थी तो ुअत्तर नहीं रहा था, मेने उसको पकड़ कर बिठा दिया, और उसका फ्रॉक ऊपर से निकल दिया, वो भी ब्रा और पंतय में हो गयी थी, वो अपना बदन छुपाने लगी.)

रंजन : अब इतना भी क्या शर्मा रही है. (वो नजदीक आयी और पानी ब्रा को निचे कर के उसके निप्पल पर शिव को झुकाने लगी, शिव भी झुक गया और उसके निप्पल को चूसने laga)Shhhhhhh (कहते हुए वो उसके शिर को सहलाने lagi)Tu शर्माती रह. (मान तो विणा का भी कर रहा था पर उसकी शर्म काम नहीं हो रही थी, पर वो रंजन से पीछे नहीं रहना चाहती थी, वो भी घुटनो के बल हुई और अपनी ब्रा को निचे खिसका कर अपना निप्पल बहार निकल लिया, वैसे भी उसके स्तन रंजन से बड़े थे, वो थोड़ी और नजदीक खिसकी और शिव को देखने लगी, पर शिव रंजन के निप्पल को चूस रहा था, उसने हाथ आगे बाध्य और शिव के शिव को खिंचा, अचानक बाल खींचने से शिव ने रंजन के निप्पल से मुँह हटा लिया और देखने लगा, उसकी नजर विणा पर पड़ी जिसने उसके बाल खींचे थे, और उसके स्तन का एक निप्पल भी बहार था, उसने उसके शिर को अपने स्तन की और खिंचा, शिव भी झुक गया और विणा के निप्पल को मुँह में भर कर चूसने लगा, विणा ने रंजनजन को देखा जैसे कह रही हो की में भी सब कर सकती हु. रंजन मुस्कुरायी और अपनी ब्रा निकलने लगी, साथ में पंतय भी निकल दी और पूरी नागि हो गई. वो शिव के शिर के पास हुई और शिव को पकड़ कर अपनी छूट की और घूमने lagi)(Mene देखा तो रंजन पूरी नंगी थी और अपनी छूट को मेरे सामने कर के मेरा शिर खिंच रही थी, मेने उसको देखा और फिर उसकी छूट को, काळा बालो से सजी छूट ये बयां कर रही थी की वो पूरी तरह से परिपक्व है और छोड़ने को तैयार है, उसने अपने पेअर खोले और शिव के मुँह को अपनी छूट पर लगा दिया, शिव उसकी छूट को चाटने laga)Shhhhhhhh. (रंजन की सिसकिया निकलने लगी, अपनी जवानी का रास पिलाते हुए उसे बहोत अच्छा लग रहा था, वो अपनी छूट को दबा दबा कर उसको अपना रास पिलेने लगी, शिव भी बहोत चाव से उसकी छूट को चूस रहा था, उसने विणा को देखा जो हेरात से उसे देख रही थी, वो मुस्कुरायी, जैसे कह रही हो की मेरा मुकाबला करेगी, पर जल्द hi उसका ध्यान टुटा क्यों की शिव उसकी छूट के डेन को जोर से चूस रहा tha)Shhhhhh शीइइइइव शहहहहह खा जा इसे शहहहहह. (उसने अपने आनंद पर ध्यान लगाया और अपनी कमर हिला कर अपनी छूट शिव के मुँह पर रगड़ने लगी. विणा बैठे बैठे ये सब देख रही थी थी, उसका भी मान किया पर हिम्मत नहीं हुई, थोड़ी देर बाद रंजन अलग हुई, क्यों की अब उसको लुंड चाहिए थे, वो शिव के पेअर की और गयी और उसके पेअर खिंच कर सीधे किये और उसकी शार्ट निकलने लगी, शिव ने भी उसकी मदद की उसने साथ में अंडरवियर भी निकल दी और शिव को पूरा नंगा कर दिया) (मेरा लुंड पूरी तरह से खड़ा था, वो घुटनो के बल आगे हुई और झुक गयी और घोड़ी बन कर मेरे लुंड को अपने मुँह में भर लिया,





उसके गर्म मुँह का एहसास होते hi मेरी भी आह निकल गयी, में उसका शिर सहलाने लगा, थोड़ी देर बाद मेने विणा को देखा तो वो उसे hi देख रही थी, मेने उसे अपनी और खिंचा तो वो घुटनो के बल मेरे पास आ गयी, मेने उसके चेहरे को झुकाया और उसके होठो को चूसने लगा, उसने भी अपनी बहे मेरे कंधे पर रख दी और मेरे होठो को चूसने लगी, थोड़ी देर बाद हम अलग हुए)

शिव : ब्रा निकल दो. (विणा शर्मा रही थी पर उसने अपनी ब्रा निकल दी, उसके कड़क गोलाकार स्तन मेरे सामने थे, मेने उसको अपनी और खिंचा और उसके स्तन को चूसने लगा, बरी बरी दोनों स्तन चूस रहा था) (विणा का शरीर भी मचलने लगा, शिव उसके निप्पल को चूस रहा था तो कभी चाट रहा था, ऐसा अद्भुत आनंद उसको बहका रहा था, उसकी भी छूट से नदिया बह रही थी, वो भी अपना स्तन शिव को चुसवा रही थी, वो बरी बरी उसके निप्प्प्ले को शिव के मुँह में भर के चूसने लगी, वो उसके शिर को भी सहलाने लगी, जैसे कह रही हो की पि लो मेरी कुवारी चूँचियो का रास)

विणा : Shhhhhhhhhh, शह्ह्ह्हह्ह (उसको बहोत अच्छा लग रहा था, वो बरी बरी अपने स्तन चुसवाने लगी, शिव के हाथ उसकी गांड सेहला रहा था, उसने अपनी पंतय खुद hi निकल दी, ताकि शिव अच्छे से उसको छू सके, शिव उसके कूल्हों को सहलाते हुए छूट को भी सेहला रहा tha)Shhhhhhhh फूऊऊऊ शहहहहह फूऊऊऊऊ (वो शिव के बाल नोचने लगी और अपने स्तन को पिलाने लगी, शिव जोरो से चूस रहा था तो उसको दर्द भी हो रहा था पर उसने रोका nahi)Shhhhhhhh आहिस्ता Shiv(Usne रोनी आवाज में कहा).

उधर रंजन को अपना मनपसंद खिलौना मिल गया था, बड़े से लुंड को अपने मुँह में भर कर वो अच्छे से चूस रही थी, मेने भी उसको देखा, उसने भी मुझे देखा, वो मुस्कुरायी. मेने विणा को छोड़ा और घुटनो के बल हो गया, रंजन फिर से मेरे लुंड को अपने मुँह में भर कर चूसने लगी, मेने विणा को देखा और उसको भी मेरे लुंड को दिखते हुए इस्सर किया, वो शर्मा रही थी पर फिर निचे झुकने लगी, रंजन ने उसको देखा और अपने मुँह से लुंड बहार निकल दिया, उसके थूक से गीले लुंड को विणा देखने लगी.

रंजन : इतना क्या सोच रही है. अगर नहीं करना तो में hi करती हु. (विणा ने शिव को देखा, फिर निचे झुक कर उस मोठे लुंड को अपने मुँह में भर liya)Ye हुई न बात. इतना क्या शर्मा रही है, थोड़ी देर बाद तो अपनी छूट में भी लेना है. (विणा शर्माने लगी)





(दोनों पूरी नागि थी और मेरा लुंड चूस रही थी, मेने दोनों के शिर सहलाये. मेने हाथ निचे बढ़ाया और उनके शैतान सहलाने लगा, वो दोनों और जोश से मेरा लुंड चूसने लगी, थोड़ी देर बाद विणा ने ऊपर देखा जैसे कह रही हो की अब तो खुस हो न, में तुम्हारा लुंड चूस रही हु, मेने विणा को प्यार से देखा, तो वो भी मुझे देख कर मुस्कुरायी.

शिव : तुम्हे अच्छा लग रहा है? (वो मुझे बस देख रही thi)Aage बढ़ना चाहती हो? (रंजन ने भी उसको देखा और उसके जवाब का निटेजर करने लगी)

विणा : है. (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : शर्म तो नहीं आ रही? (उसने न में शिर हिलाया, रंजन के चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी, उसने शिव को लेटने को कहा, वो दोनों फिर सुरु हो गयी, रंजन साथ में अपनी छूट में ऊँगली भी करने लगी, थोड़ी देर बाद मेरी नजर पड़ी तो मेने kaha)Meri और घूम जाओ रंजन. (वो समाज गयी और मुस्कुराते हुए अपनी गांड मेरी और कर दी, मेने उसकी गांड के छोटे गोलों को देखा और उन्हें सहलाया, उसकी छूट पूरी गीली हो चुकी थी, बालो के बिच की दरार से पानी रिस रहा था, मेने अंगूठे से उस दरार को सहलाया और फिर ऊँगली अंदर दाल di)(Ranjan को बहोत अच्छा लगा, वो अपनी गांड हिलने लगी और ऊँगली को अपने अंदर महसूस करने लगी, वैसे भी ऊँगली उसके लिए लुंड hi थी, अभी उसकी छूट उतनी चौड़ी नहीं हुई थी. )(विणा की भी शर्म अब जाती रही, वो भी पुरे मज़े लेने चाहती थी, वैसे भी रंजना से कुछ छुपा नहीं था, दोनों एक दूसरे की छूट को भी चाट टी थी, वो शिव के मुँह की और घूम गयी और शिव के निप्पल को चूसने लगी और शिव को देख कर मुस्कुराने लगी, थोड़ी देर बाद वो कड़ी हो कर अपने पेअर शिव के शिर के आस पास कर दिए. उसने शिव को देखा तो वो उसकी छूट को देख रहा था, वो शर्मायी, पर निचे बैठने लगी और अपनी छूट को शिव के मुँह पर रख दी और अपनी कमर हिलने लगी,) (मेने उसकी और देखा तो वो शर्माने लगी पर अपनी कमर हिलना जारी रक्खा, उसकी छूट से निकलते रास को में चाट रहा था, थोड़ी देर बाद वो फिर उठ गयी और दूसरी और घूम गयी, अब उसका मुँह लुंड की और था, वो फिर बेथ गयी और शिव के लुंड की और झुक गयी, जहा रंजन लुंड से खेल रही थी, दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुरायी, रंजन ने शिव का लुंड उसकी और बढ़ा दिया तो उसने शर्मा के उसको अपने मुँह में भर लिया, शिव उसकी छूट चाट रहा था और वो लुंड चूस रही थी)





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रंजन : अब अकेले अकेले hi सब मज़ा लेगी क्या, (कहते हुए उसने विणा को हटाया, वो उठी और शिव के लुंड के दोनों और पेअर कर के लुंड पर बेथ गयी, और अपनी छूट लुंड पर रगड़ने लगी.





छूट से निकलते गरम गरम पानी से लुंड भीगने लगा, थोड़ी देर यही खेल चलता रहा, फिर रंजन ने थोड़ी ऊपर हुई और लुंड को अपनी छूट पर टिका दिया, विणा भी ध्यान से देख रही थी, लुंड आहिस्ता आहिस्ता अंदर जाने लगा और साथ में रंजन के चेहरे पर दर्द उभर आया, विणा जानती थी की उसको कैसा लग रहा होगा, उसने फ़ौरन उसके स्तन पकड़ लिए और उसको सहलाने लगी)

विणा : दर्द हो रहा है? (रंजन ने है में शिर hilaya)Dhire धीरे अंदर ले. (उसने हिदायत दी, उसने एक हाथ निचे बढ़ाया और रंजन की छूट के डेन को सहलाने लगी, रंजन आहिस्ता आहिस्ता बैठने लगी, लुंड उसकी छूट को फैलते हुए अंदर जा रहा tha,)(Me भी महसूस कर रहा था की रंजन क्या कर रही है, विणा की गांड मेरे चेहरे पर थी तो में देख नहीं सकता था, थोड़ी देर बाद वो रुक गयी, और फिर ऊपर हुई, और फिर निचे, ऐसे hi वो थोड़ी देर करती रही)( विणा देख रही थी की लुंड अभी आधा hi अंदर गया है, वो पहली बार इतने नजदीक से छूट में जाते लुंड को देख रही थी, छूट के मुकाबले लुंड बहोत बड़ा लग रहा था, छूट पूरी गोलाकार में फ़ैल गयी थी, उसने रंजन के चेहरे को देखा तो अभी भी उसके ऊपर दर्द की लकीरे थी, वो अच्छे से समझती थी की शिव के लुंड को लेना आसान नहीं है, वो झुकी और रंजन को किश करने लगी और साथ में उसके स्तन और छूट से भी खेल रही थी, थोड़ी देर बाद वो दूर हुई और रंजनसे पूछने lagi)Ab ठीक है? (रंजन ने मुस्कुरा कर हां कहा, और ऊपर निचे होने लगी,





लुंड छूट में फास के जा रहा था, दर्द के बावजूद रंजन को मज़ा आ रहा था, वो आहिस्ता आहिस्ता लुंड को अपनी छूट में अंदर बहार करवा रही थी, विणा शिव के चेहरे के ऊपर से उठ गयी और रंजन के पीछे चली गयी और उसके स्तन को सहलाने लगी, रणजन ऊपर निचे हो रही थी, और लुंड उसकी छूट की गहराइयो में अंदर बहार हो रहा था)

मेने देखा की विणा रंजन का ख्याल रख रही थी, रंजन को भी अब मज़ा आ रहा था और वो जल्दी जल्दी अपनी कमर हिला रही थी, विणा उसके स्तन चूसते हुए उसका हौसला बढ़ा रही थी, मेने भी एक हाथ बढ़ाया और रंजन के स्तन को सहलाने लगा तो विणा ने अपना हाथ हटा दिया और रंजन के शिर को पकड़ कर किश करने लगी.





थोड़ी देर तक यही चलता रहा रंजन जोर जोर से सिस्किअ ले रही थी पर उसकी साडी सिस्किअ विणा के मुँह में hi डैम तोड़ रही थी, मेने उसकी कमर पकड़ ली और जल्दी जल्दी निचे से धक्के लगाने लगा, रंजन झड़ने की और बढ़ने लगी, वो थक भी रही थी, मेने उसको खिंचा और अपने ऊपर लेता दिया और निचे से धक्के लगाने लगा,

रंजन : शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह शहहह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : मज़ा आ रहा है?

रंजन : शह्ह्ह्ह हआ शह्ह्ह्ह बहोत मज़ा आ रहा है शिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अच्छे से छोड़ ले मुझे शह्ह्ह्हह्ह तेरा बड़ा लुंड मुझे दर्द के साथ मज़ा भी दे रहा है. (विणा पीछे से देख रही थी की छूट में कैसे लुंड अंदर बहार हो रहा है, ये देख कर उसके भी मान में चींटिया रेंग रही थी, वो रंजन को और मज़ा देना चाहती थी तो वो झुकी और उसके कूल्हे को फैला कर उसकी गांड के छेड़ को चाट ने लगी. ये महसूस कर के रंजन और उत्तेजित हो gayi)Shhhhhh क्या कर रही है शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह shhhhhhhhhh(Ek और शिव जोर जोर से उसको छोड़ रहा था और दुअरी और विणा उसके गांड के छेड़ को चाट रही थी)

शिव : (मुझे दिख नहीं रहा था की विणा क्या कर रही है पर रंजन बहोत ज्यादा उत्तेजित हो रही thi)Kya हुआ? (मेने धक्के मरते हुए पूछा)

रंजन : शह्ह्ह्ह वो मेरी गांड के छेड़ को चाट रही है शह्ह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा है.

शिव : तुजे भी गांड मारवणी है?

रंजन : शहहह हा मारवणी है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह, शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : क्यों?

रंजन : शह्ह्ह्ह तूने उसकी भी तो गांड मरी थी, शह्ह्ह्ह मुझे क्यों छोड़ दिया शह्ह्ह्ह में भी सब कर सकती हु शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह आराम से छोड़ न शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह.

शिव : क्यों मज़ा नहीं आए रहा?

रंजन : बहोत मज़ा आ रहा है शहहह पर दर्द भी हो रहा है शहहह तेरा लुंड बहोत मोटा है शहहह और बड़ा भी.

शिव : लुंड ऐसा hi होता है.

रंजन : शहहह नहीं शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह सबके ऐसे नहीं होते.

शिव : तुजे कैसे पता?

रंजन : शह्ह्ह्ह मेने उस मैनेजर का देखा था, वो तो बहोत छोटा था, शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : तुजे मेरा लुंड अच्छा लगता है?

रंजन : शहहहहह हा शहहहहह बहोत अच्छा लगता है शह्ह्ह्ह में झाड़नेवाली हु शिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह (में जोर जोर से धक्के लगाने लगा और वह विणा ने एक ऊँगली उसकी गांड में दाल दी तो रंजन ये झेल नहीं पायी और झड़ने lagi,)Ahhhhh शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह में गईइइइइइइइ shhhhhhhhhh(thodi देर झटके खाने के बाद वो शांत हो गयी और मेरे ऊपर लुढ़क गयी. विणा भी शांति से बेथ गयी और दोनों को देखने लगी, रंजन की छूट में घुसा लुंड उसको साफ़ साफ़ दिख रहा था, वो अपनी छूट को सहलाने लगी, थोड़ी देर बाद मेने रंजन को हटाया और बेथ गया रंजन साइड में लुढ़क गयी, मेने विणा को देखा जो अपनी छूट में ऊँगली कर रही थी.

शिव : अपनी ऊँगली को क्यों कास्ट दे रही है. (वो शर्मा गयी और ऊँगली निकल ली, मेने उसको खिंचा और रंजन के बगल में लेता दिया और उसके पेअर फैला दिए, मेने छूट को देखा तो वो भी पूरी तरह से तैयार hi थी, फुले हुए होठो से रास बह रहा था और उसके ऊपर के बाल भी पुरे भीग चुके थे, उसने भी अपने पेअर फैला दिए, वो पूरी गीली थी तो मेने सीधे hi लुंड छूट पर सेट कर दिया.)

शिव : तैयार हो? (उसने हां में शिर हिलाया, में लुंड को धकेलने लगा तो उसके चेहरे पर भी दर्द उभर आया.

विणा : आआअह्ह्ह्ह. (में समाज रहा था की ये तो होना hi है तो में रुका नहीं और लुंड अंदर डालता गया, वो अपना हाथ मेरे पेट पर लगा कर मुझे हलके से धक्का दे रही थी, जैसे रोक रही हो, पर ये भी स्वाभाविक था, दरअसल वो रोक नहीं रही थी पर जब दर्द होता है तो शरीर ऐसी प्रतिक्रिया देता hi है, में लुंड अंदर डालता गया और आधा लुंड अंदर चला गया तो में रुक गया, मेने छूट को देखा जो फ़ैल गयी थी, छोटे से छेड़ में लुंड फसा हुआ था, मेने उसको देखा तो भी वो मुझे देखने लगी, में झुका और उसको किश करने लगा, वो भी मुझे किश करने लगी,)

शिव : ज्यादा दर्द तो नहीं है न? (उसने ना में शिर हिलाया, विणा एडजस्ट हो रही थी, लुंड उसकी छूट को पूरी तरह फैला चूका था, दर्द भी हो रहा था, पर अब वो समझती थी की अभी दर्द होगा पर फिर ठीक भी हो जायेगा,) तेरी छूट भी बहोत टाइट है विणा, और गरम भी (वो शर्माने lagi)Mujse छोड़ना चाहती है न? (है में शिर hilaya)Aise नहीं, बोल के बता.

विणा : (शिव के गले में बहे डेल hue)Ha शिव.

शिव : क्या है, ठीक से बता.

विणा : (शरमाते hue)Kya बताऊ?

शिव : यही की तू छोड़ना चाहती हे.

विणा : (शर्माते hue)Tu जनता तो है, फिर क्यों पूछ रहा है, मेने लुंड बहार खिंचा और फिर अंदर kiya)Ahhhhhhh shhhhhhhh.(mene उसको देखा और पूछा ki)Thik हो? (तो उसने हां कहा, पर दर्द भरे चेहरे से, मेने उसके एक निप्पल को मुँह में लिया और लुंड अंदर बहार करने लगा)

शिव : थोड़ी देर दर्द होगा, तू जानती है न? (उसने है कहा, में लुंड अंदर बहार करने लगा)

विणा : (दर्द और आनंद के मिले झूले हावभाव se)Ahhhh शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह (वो कराहने लगी पर उसकी कराह आग में घी का काम कर रही थी, में उसको और छोड़ने laga)(Vina को बहोत अच्छा लग रहा था, वो शिव की पीठ को सहलाते हुए उसको छोड़ने के लिए उकसाने लगी, वो एक जवान लड़की थी और नयी नयी चुदाई का आनंद ली थी तो उसको बहोत अच्छा लग रहा था ये खेल, वो अपने पेअर फैला कर लुंड का स्वागत कर रही थी, लगातार चुदाई से उसका भी दर्द काम हो गया और वो मज़े से लुंड का मज़ा लेने lagi)(Ranjan भी अब सही हो गयी थी, अपनी बगल में चुदती अपनी सहेली को वो देखने लगी, वो उस और घूम गयी और उसने हाथ बढ़ा कर उसके स्तन को सहलाया तो विणा ने उसकी और देखा)

रंजन : मज़ा आ रहा है? (विणा ने है में शिर हिलाया, में बैठे बैठे विणा को छोड़ने लगा, उसकी बालो वाली छूट में आते जाते लुंड को देख कर मेरा जोष और बढ़ रहा था, में और जल्दी धक्के लगाने लगा, वो कराहने lagi)Aaram से कर शिव, मरना है क्या इसको? मेरी नाजुक सी शैली है, उसकी छूट देख कैसे लाल हो गयी है. (कहते हुए वो उसके डेन को चाटने लगी, में दोनों के ये खेल देख रहा था, विणा अपने पेअर फैलाये अपनी छूट में आते जाते लुंड को और रंजन को देख रही थी)





(मेने लुंड बहार निकला तो और रंजन के मुहमे दाल दिया, उसने भी अपने मुँह में भर लिया, फिर वापस मेने लुंड छूट में दाल दिया, दो तीन बार मेने ऐसा किया, रंजन ने मुझे मुस्कुराते हुए kaha)Lagta है दोनों को एक साथ छोड़ने में तुम्हे मज़ा आ रहा है. कितनी जोर से मेरी सहेली को छोड़ रहा है, रहें नहीं आ रहा तुजे.

शिव : जो चुद रही है उसको पूछ, आराम से करू या ऐसे hi करू? (रंजन ने विणा को देखा)

रंजन : बोलना अगर दर्द हो रहा है तो?





the rose in the concrete poem

विणा : (कराहते hue)Karne दे उसको शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह शहहह अह्ह्ह्हह.

रंजन : (सीधी लेट gayi)Marwa फिर अपनी, बाद में मात कहना की दर्द हो रहा है. (मेने रंजन की छूट में ऊँगली दाल दी तो उसने भी अपने पेअर फैला दिए)

रंजन : शह्ह्ह्ह हा शह्ह्ह्ह हा शह्ह्ह्हह्ह. (में रंजन की और लेट गया और उसकी छूट को चाटने laga)Shhhhh हआ शहहह हआ शह्ह्ह्ह हा. (नजारा ये था की विणा लुंड खा रही थी और रंजन की छूट को में खा रहा था, कमरे में सिसकिया गूंज रही थी)





विणा : शहहहहह शीइइइइव शहहहहह मेरा पानी निकलनेवाला है शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह shhhhhh(Mene जोर जोर से धक्के लगाने सुरु कर दिए, थोड़ी hi देर में वो झड़ने lagi)Ahhhhhh shhhhhhhhhhhh. (मुझे पता था की अभी वो सुस्तायेगी पर मेरा लुंड भी छूटना चाहता था, मेने फ़ौरन लुंड बहार निकला और रंजन को घोड़ी बना दिया और लुंड अंदर दाल दिया)





रंजन : अह्ह्ह्हह्हह. मुमीइ एआरएम से (में रुका नहीं और धक्के लगाने laga)Shhhhh अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह, आराम से शिव शहहह अह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (में झुका और उसके स्तन को मसलते हुए kaha)Thodi देर सेह ले मेरी jaan(Me धक्के लगातार मार रहा था)

रंजन : ैई शह्ह्ह्ह तेरा लुंड बहोत बड़ा है यार शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह मर गयी शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह, पता नहीं इसने अपनी गांड में कैसे ले लिया था, शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह. (वह लेती विणा की छूट को वो चाटने लगी ताकि उसका ध्यान दर्द से हैट जाये)

शिव : क्यों तुजे नहीं लेना पानी गांड में?

रंजन : लेना है शहहह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह आआह्ह्ह पर शहहह अह्ह्ह्ह दर लगता है शहहह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह.

शिव : दर लगे की जो लगे, लेना तो पड़ेगा hi. हम्म हम्मह हम्म्म हम्म्म्म.

रंजन : शहहह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह आराम से छोड़ शहहह अह्हह्ह्ह्ह मेरी छूट फैट जाएगी शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह.

शिव : क्यों तुजे मज़ा नहीं आ रहा?

रंजन : आए रहा है, बहोत मज़ा आ रहा है शहहह अह्हह्ह्ह्ह पर दर्द होता है शहहह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्हह. थोड़ा इसको भी छोड़ ले. (मेने फिर लुंड बहार निकला और विणा को भी घोड़ी बना दिया और लुंड अंदर दाल दिया)

विणा : अह्ह्ह्हह्हह (में फिर से उसको छोड़ने laga)Shhhhh अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह.

रंजन : देखा में कह रही थी न की इसको अकेले नहीं झेल सकते, साथ में हो तो थोड़ी रहत रहती है. (विणा कुछ नहीं बोली बस निचे शिर टिकाये अपनी छूट का कचुम्बर बनते महसूस कर रही थी, में लगातार छोड़ रहा था, मेने फिर उसको छोड़ा और रंजन की छूट में लुंड दाल diya)Ahhhhhh शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह (रोनी सकल से उसने मुझे देखा, में लगातार धक्के मर रहा था, थोड़ी देर में वो फिर झाड़ गयी, मेने फिर विणा को सीधा लेता दिया और उसके ऊपर आ गया, और उसको छोड़ने लगा)

विणा :शहहहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह (में उसके ऊपर झुक गया और उसके होठो को चूसने लगा तो वो भी मुझसे लिपट गयी, में लगातार छोड़ रहा था, मेने उसको पूछा)

शिव : दर्द तो नहीं हो रहा न? (उसने ना में शिर hilaya)Bas थोड़ी देर मेरा होनेवाला hai,(Usne भी है में शिर हिलाया) कहा निकलू?

विणा : बहार hi निकलना शह्ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह शहहह अह्ह्ह्ह शहहह अह्हह्ह्ह्ह.

रंजन : उसको दर्द हो रहा है, शिव मुझे छोड़ ले.

विणा : नहीं शह्ह्ह्ह मुझे hi छोड़ शहहह ाः में सेह लुंगी शहहह मुझे hi छोड़ ाः अह्ह्ह मेरा भी पानी निकलनेवाला है शिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह. (मेरा लगातार धक्को से उसका पानी निकल गया और मेरा भी निकलने वाला था उसको जोरो से छोड़ने लगा, विणा मेरे लुंड का स्वागत करते हुए मुझसे लिपट गयी और मेरे धक्के सहने लगी, में छूटनेवाला hi था तो थोड़ी hi देर में मेरा पानी निकलने वाला हो गया तो मेने फ़ौरन लुंड बहार निकला और विणा के शरीर पर पिचकारियां मरने लगा, रंजन ने उठ कर मेरे लुंड को अपने मुँह में भर लिया और कुछ पिचकारियां उसके मुँह में भी चली गयी. मेने आंखे बंद कर ली और अपने स्खलन को महसूस करने लगा. रंजन मेरे लुंड को पूरा खली कर चुकी थी, वो फिर निचे लेट गयी, में दोनों के बिच में hi लेट गया, दोनों मुझसे लिपट गयी, दोनों के कूल्हे में सेहला रहा था) मज़ा आया (उसने विणा को पूछा तो विणा बस मुस्कुरायी, फिर उसने मुझसे puchha)Tuje मज़ा आया शिव?

शिव : बहोत मज़ा आया.

रंजन : अब तो हम दोनों को एकसाथ छोड़ेगा न?

शिव : ह्म्म्मम्म.

विणा : पर कभी कभी, ये पल मुझे अकेले में भी जीने है.

रंजन : है है, वो तो मुझे भी अकेले चाहिए, पर कभी कभी साथ में भी मज़ा आता है. (कह कर वो मुस्कुरायी, वो शिव के लुंड को सेहला रही thi)Ye छूट में चला जाता है, यकीं hi नहीं होता.

शिव : अब हिला मात वर्ण फिर खड़ा हो जायेगा.

रंजन : होने दे, दोनों है न, संभल लेंगी, क्यों विणा? (विणा बस मुस्कुरायी)

शिव : सुबह जल्दी भी उठना है, सो जाओ अभी. (बात सच hi थी तो तीनो वैसे hi सोने लगे, थोड़ी देर बाद तीनो को नींद आ गयी)

सुबह उठ कर में कसरत करने चला गया, विणा और रंजन स्कूल के लिए तैयार हो रही थी, पर दोनों की चल बदली हुई थी.

सरिता : (धीरे से विणा ko)Kya हुआ दोनों को, ऐसे क्यों चल रही हो? (विणा एक दम से दर गयी, वो क्या बोले समाज में नहीं आया, उसने रंजन को देखा पर रंजन अपने काम में लगी हुई थी)

विणा : वो दीदी... वो.... (वो कोई बहाना तलाशने लगी)

सरिता : पर फिसल गया था?

विणा : है... नहीं .....वो....

सरिता : (मुस्कुराते hue)Raat को आवाजे काम किया करो, बहार तक सुनाई देती hai.(Vina तो जड़ सी हो गयी, क्या कहे कुछ समाज में नहीं आया, वो नज़ारे झुकाये कड़ी rahi)Me बस बता रही हु, दन्त नहीं रही हु, (सरिता ने शांति से kaha)dono साथ में थी? (सरिता ने प्यार से पूछा तो विणा को थोड़ी रहत हुई, उसने शरमाते हुए हां kaha)Jyada दर्द तो नहीं है न? (विणा को बहोत शर्म आ रही थी, उसने न में शिर hilaya)Koi बात नहीं, जा तैयार हो जा. (वो वह से चली गयी, और सरिता मुस्कुराते हुए अपना काम करने लगी, वो रात को उठी थी तब उसने आवाजे सुनी थी, किसी और को पता नहीं था)

कुछ दिन ऐसे hi बिट गए, संयम भी आप स्कूल आने लगी थी, वो रोज़ मुझे अपने घर आने के लिए कहती पर में मन कर देता, क्यों की वो अभी अभी बीमारी से उभरी थी. वैस्वी भी कह रही थी पर में अभी कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता था, ऐसे hi हमारी ट्रेनिंग भी तय हो गयी तो मुझे और जूही को जाना पड़ा. पंद्रह दिन की ट्रेनिंग थी. जूही अपने कैंप चली गयी और में अपने कैंप चला गया. अच्छे से चल रहा था सब, लड़को से कॉम्पिटिओं हो रहा था और कोच भी अच्छे थे, वो मुझसे बहोत इम्प्रेस भी थे और लगातार मुझपर ध्यान भी दे रहे थे. में खूब म्हणत कर रहा था, वो कुछ तकनीक भी सीखा रहे थे, किस तरह से दौड़ना है, ज्यादा तर तो में जनता था पर फिर भी ध्यान से सब फॉलो कर रहा था. सुबह जल्दी उठना, दोपहर तक ट्रेनिंग, दोपहर में पढ़ाई, फिर शाम को ट्रेनिंग. कुछ पहचान भी हुई वह, पर मेरे पास टाइम hi नहीं था, वो लोग पढ़ाई को साइड में रख चुके थे, पर में नहीं रखना चाहता था. संयम और वैस्वी से भी बात होती थी, वो मुझे बता देते थे.

बिना भी अपने काम में व्यस्त थी, उसके दिमाग से सुखदेव जी से बात करने की बात गयी नहीं थी, एक दिन उसने सुखदेव जी को फ़ोन लगाया और उनसे बात की.

बिना : Hello अंकल, में बिना बोल रही हु.

सुखदेव : है बोलो बेटी, तुम्हारा नंबर है अब.

बिना : आप वापस आ गए क्या?

सुखदेव : है आ गया हु.

बिना : क्या में आपसे मिलने आ शक्ति हु?

सुखदेव : तू क्यों ये सब जान न चाहती हो, जो बिट गया वो बिट गया, अब पुराने पैन उलटने से क्या हासिल होगा?

बिना : अगर जरुरी न होता तो में कभी आपको डिस्टर्ब नहीं करती.

सुखदेव : क्या करोगी ये सब जान कर, तुम उदयसिंह का कुछ नहीं बिगड़ सकती, जानती होगी तुम.

बिना : में जानती हु अंकल, और उनका कुछ बिगड़ने का इरादा भी नहीं है, उसके लिए आप है, अगर कुछ हो सकता तो वो आप hi करते, पर फिर भी कुछ नहीं किया है आपने, और यही सब जान न है मुझे. और भी एक वजह है जो में अभी आपको नहीं बता सकती.

सुखदेव : ठीक है, आ जाओ फिर. पर एक मिनट, तुम प्रेग्नेंट हो, क्यों इतना सफर करना.

बिना : अगर जरुरी न होता तो में ये रिस्क नहीं लेती, आप भी समझते है की ये बच्चा मेरे लिए और हमारे खंडन के लिए कितना जरुरी है.

सुखदेव : सच कह रही हो तुम, आश्चर्य तो मुझे भी है, जो इतने सालो में नहीं हुआ वो अब कैसे हो रहा है, मुझे पता है की आज के ज़माने में ये अंधविस्वास hi कहा जायेगा, पर फिर भी इतने सालो में जो नहीं हुआ वो अब कैसे हो रहा है. मेरी तो उपरवाले से प्राथना है की तुम स्वस्थ रहो और तुम्हारा बच्चा भी. एक काम करता हु, में गाड़ी भेजदेता हु, तुम उसमे आ जाना.

बिना : में कैब बुक कर लुंगी.

सुखदेव : नहीं बेटी, कैब की कार और मेरी कार में बहोत अंतर है, तुम कहो कब आना चाहती हो तुम.

बिना : इस संडे को आ जाती हु.

सुखदेव : ठीक है, पर एक दो दिन का समय निकल कर आना, ऐसे hi नहीं जानेदुंगा तुम्हे. (उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा)

बिना : ठीक है अंकल, में छुट्टी की दरख्वास्त दे देती हु. थैंक यू अंकल.

सुखदेव : इसमें थैंक यू की कोई बात नहीं है बेटी, ये पुराने जख्म है जिन्हे कुरेदने से लहू hi बहेगा, पर अगर तुम्हारे लिए ये इतना hi जरुरी है तो ठीक है, आ जाओ, फिर मिल कर बात करते है.

(फ़ोन रखने के बाद एक बार फिर सुखदेव के सामने वो अतीत के पैन उजागर हो गए, वो अक्सर उन्हें भुला देना चाहता था पर अक्सर वो उसके सामने आ hi जाते थे)
 
अपडेट 213

सुबह का ट्रेनिंग सेशन ख़तम करने के बाद दो पहर को छुट्टी होती थी, बाकि सब आराम करने में और अपने फ़ोन को देखने में व्यस्त थे, खाना खाने के बाद में फिर से बुक लेकर बैठा था, तभी वह बने कुछ दोस्तों में से एक दोस्त जिसका नाम कारन था वो मेरे कमरे में आया.

कारन : तू फिर से किताबे ले कर बेथ गया? (शिव किताब में से शिर ऊपर कर के मुस्कुराया) दुर्वेश कहा है?

शिव : बहार निकला है.

कारन : तुजे कितनी बार संजय है की हम खिलाडी है, यही हमारा करियर है, क्या पढ़ाई के पीछे समय गवा रहा hai?(Me बस मुस्कुराया, क्यों की में इसके लिए पहले hi जवाब दे चूका था, तभी दुर्वेश भी अंदर आ gaya)Hi दुर्वेश, तू कहा गया था?

दुर्वेश : (मुस्कुराते hue)Kuchh नहीं, बस घर बात कर रहा था.

कारन : (मुस्कुराते hue)Gharwalo से की घरवाली से? (कहते हुए है पड़ा)

दुर्वेश : मेरी कोई घरवाली नहीं है.

कारन : घरवाली न सही, बाहरवाली तो होगी hi.

दुर्वेश : तू क्यों आ गया यहाँ, ये पढ़ रहा है, क्यों डिस्टर्ब करता है इसको.

कारन : रोज़ तो पढ़ता है, चलो न कही बहार चलते है, फिर शाम का सेशन भी सुरु हो जायेगा.

दुर्वेश : में तो तैयार हु, इसको पूछ. (मेरी और इस्सर कर के वो बोलै)

शिव : तुम जा आओ यार, मुझे पढ़ना है.

कारन :क्या सारा दिन पढ़ाई पढ़ाई करता है, थोड़ी देर जाने से कुछ नहीं हो जायेगा.

शिव : तुम लोग जाओ न यार. (मेने प्रयत्न किया)

कारन : अबे चल न (कहते हुए उसने मेरी किताबे बंद कर दी, मुझे पता था ये छोड़ेगा नहीं, इस लिए में खड़ा हुआ, कपडे पहने और हम तीनो बहार निकल गए)

शिव : अब कहा जाना है?

कारन : देखते है यार, जहा तितलियाँ दिखेगी वही जायेंगे.

शिव : तू सुधरनेवाला नहीं है. (कहते हुए में मुस्कुराया)

कारन : सुधर के फायदा भी क्या है, मजे करने का समय है, इस समय मजे नहीं करंगे तो जब उठाना बंद हो जायेगा तब मजे करेंगे क्या. (कहते हुए वो हांसे लगा, हम तीनो आगे बढ़ते रहे, वह से कुछ दुरी पर कुछ पेड़ थे और उसके निचे ठेले लगे हुए थे, वह कुछ लड़के लड़कीअ भी कुछ खा पि रहे the)Wo देख तितलियाँ. (उसने उसी और इस्सर कर के kaha)Chalo वही चलते है. (हम तीनो वह आ गए, मेने देखा की कुछ लड़के लड़कीअ बाटे कर रहे थे, कुछ ग्रुप में थे तो कुछ कपल में थे, हम भी एक जगह बेथ गए, तीनो ने जूस आर्डर किया) कोई पसंद आयी?

शिव : तू पसंद करता रह, मुझे कोई इंट्रेस्ट नहीं है.

कारन : सेल, लड़का hi है न? पहले से बता देता हु, में ऐसा वैसा नहीं हु. (कहते हुए वो ठहाका मर के हसने लगा, उसकी वजह से सब हमें देखने लगे, फिर अपने अपने काम में लग गए)

शिव : है है है, वैरी फनी. (हम लोग ऐसे hi गुप् सुप कर रहे थे की वह एक गाड़ी आ कर रुकी, काफी महंगी गाड़ी थी, उसमे से कुछ लड़कीअ उतरी)

कारन : क्या गाड़ी है यार, मालदार पार्टी लगती है. (लड़कीओ को देखते hue)Fuljhadiya है यार ये तो. (मेरा भी ध्यान वही था, अभी में नज़ारे फेरने hi वाला था की ड्राइविंग सीट से उतरती लड़की को देख मेरी नज़ारे वही रुक गयी, वो प्रकृति थी, वो बहार आयी और उसकी सहेलिया उसको फोर्स कर के आने के लिए कह रही थी पर वो मन कर रही थी, देख कर hi लग रहा था की उसको यहाँ आने की इच्छा नहीं थी पर उसकी सहेलिया उसको खिंच कर लायी थी, वो लोग भी एक ठेले के पास लगी चेयर पर बेथ gaye)Kya पटाखा है यार. (मेने कारन को देखा तो पाया की ये वो प्रकृति को देख कर hi कह रहा था)

शिव : ये किस तरह के उपनाम दे रहा है तू, वो लड़किया है, किसी की बहन होगी, किसी की बेटी होगी, तमीज़ से बात कर.

कारन : (उसको अपनी गलती का एहसास hua)Sorry यार, पर कितनी खूबसूरत है न, चल बात करते है.

शिव : क्या बात करनी है?

कारन : ऐसे hi जान पहचान करते है.

शिव : तुजे जाना है तो जा.

कारन : (दुर्वेश की और देख kar)Tu तो चल.

दुर्वेश : न भाई, मुझे भी कोई इंट्रेस्ट नहीं है.

कारन : बैठे रहो सालो, में तो जाता हु. (कहते हुए वो उठा और अपने आपको ठीक करते हुए उन लड़कीओ की और बढ़ चला, हम दोनों उसको hi देख रहे थे, उन लड़कीओ के पास पहुंच kar)Hi गर्ल्स. (सब लड़कीअ उसको देखने लगी, एक अजनबी लड़के को देख कर जैसे एक्सप्रेशन होते है वैसे hi एक्सप्रेशन उनके चेहरे पर the)Mera नाम कारन है, एथलीट हु, इस सहर में नया आया हु, सोचा आपसे दोस्ती कर लू.

लड़की : हमे कोई इंट्रेस्ट नहीं है.

कारन : में तो बस दोस्ती के लिए कह रहा हु, कोई प्रोपोज़ थोड़ी न कर रहा हु.

लड़की : मुझे सब पता है, तुम जैसे लड़को को में अच्छी तरह से जानती हु, अपना काम करो.

कारन : (कारन इतनी जल्दी हर मन ने वाला नहीं tha)Hum भी ऐसे वैसे लड़के नहीं है, देखो वो मेरे दोस्त भी बैठे है, वो लोग भी एथलीट है. (सब लड़कीअ हमारी और देखने लगी, तभी मेरी और प्रकृति की नजर टकराई, उसके चेहरे से hi लगा की वो मुझे पहचान गयी thi)Hey दोस्तों, यहाँ आओ यार. (उस सेल ने हमे भी जबरदस्ती घसीट लिया था, मेने और दुर्वेश ने एक दूसरे को देखा, सेल ने हमे घसीट hi लिया था तो हम दोनों भी खड़े हुए और उनके पास gaye)Ye मेरा दोस्त है शिव और ये दुर्वेश. (हमने सबको hi kaha)(Shiv को देख कर लड़कीओ की आंखे चमक उठी थी, उन्होंने भी hi कहा, पर यही लगा की सबने जैसे शिव को hi hi कहा ho)Kya हम यहाँ बेथ सकते है?

प्रकृति : नहीं, (उसने मेरी और देख कर hi कहा था). हम अजनबीओ के साथ दोस्ती नहीं करते.

कारन : मेने अपनी और अपने दोस्तों की पहचान करवाई तो, अब हम कहा अजनबी है.

प्रकृति : देखिये मिस्टर, आपको शायद समाज में नहीं आता, आप अपना काम कीजिये. (कारन कुछ बोलने hi वाला था)

शिव : तुम्हे अपनी बेइज्जती करवाने का शौक है तो यहाँ रुको. (मेने कारन को कहा और में अपनी चेयर की और लौट गया, दुर्वेश भी मेरे साथ hi आ गया तो कारन को भी आना पड़ा)

लड़की : क्या यार तू भी (प्रकृति ko)Wo लड़का कितना हैंडसम था, मन की उसका दोस्त पकौ था, पर वो लड़का तो अच्छा था, बैठने देती.

प्रकृति : (एक बार शिव की और देख कर जो अपने दोस्तों से बात कर रहा tha)Mene कितनी बार कहा है तुम लोगो को, की मुझे ये सब पसंद नहीं है, इसीलिए में मन कर रही थी, मुझे आना hi नहीं चाहिए था.

लड़की : तू भी न एक नंबर की पकौ है.

यहाँ में और दुर्वेश, कारन को खरी खोटी सुना रहे थे, और ऐसे hi बाटे कर रहे थे, एक दो बार मेरी और प्रकृति की नजर टकराई पर मेने भी फिर नहीं देखा. वैसे जब से मेने उसको बिना मैडम के ससुराल में देखा था मुझे अजीब सा लग रहा था, पता नहीं कोण थी वो, और वह क्या कर रही थी, पर जिस तरह से उसने बात की थी मुझे अच्छा नहीं लगा था. हम तीनो वापस अपने कैंप आ गए, शाम की ट्रेनिंग सुरु हो गयी, कोच सर हमे दौड़ की बारीकियां समजने लगे, वो जो समजा रहे थे वो सुन कर मुझे जूही की याद आने लगी, उसने भी मुझे ये सब संजय था, मुझे जूही पर मान हुआ की वो कितनी होशियार है, ऐसे hi रात हो गयी, रात के खाने के बाद में फिर से पढ़ने बेथ गया, संयम से फ़ोन पर बात की और स्कूल में क्या पढ़ाया वो सब जान लिया, उसके साथ थोड़ी मीठी बात भी हुई.

संयम : तुजे मेरी याद आती है?

शिव : ऐसा क्यों पूछ रही है?

संयम : बस ऐसे hi पूछ रही हु, बता न मुझे याद करता है?

शिव : है.

संयम : क्या याद करता है?

शिव : क्या से, क्या मतलब है तेरा?

संयम : वो तो तुजे पता होगा न, जब मुझे याद करता है तो क्या याद करता है? (संयम को अजीब लग रहा था, शिव से बात करते हुए भी उसके शरीर में अजीब सी हलचल हो रही थी)

शिव : और क्या याद करूँगा, तुजे और तेरी बातो को.

संयम : (मुस्कुराते hue)Konsi बातो को?

शिव : तेरी बक बक और क्या. (मेने भी उसको छेड़ते हुए कहा)

संयम : में बक बक करती हु? (उसने रूठते हुए कहा)

शिव : (मुस्कुराते hue)Me तो मज़ाक कर रहा था.

संयम : (वो फिर muskurayi)To बता न क्या याद करता है?

शिव : (में जनता था की वो क्या पूछ रही है, इसलिए मेने kaha)Teri किश को भी याद करता हु.

संयम : (वो शर्मा gayi)Sach???

शिव : है, तेरे मुलायम होठो को भी याद करता हु.

संयम : (वो शरमाते हुए मुस्कुराने lagi)Sach में तुम्हे वो सब याद आता है?

शिव : है, क्यों तुजे याद नहीं आता?

संयम : मुझे तो सोते जागते बस तू hi नजर आता है, पता नहीं क्या जादू कर दिया है तूने.

शिव : (मुस्कुराते hue)Aisa क्या कर दिया मेने?

संयम : तुजे पता, तूने क्या किया मेरे साथ. (अपने दन्त के बिच ऊँगली फसते हुए उसने कहा)

शिव : मेने तो ऐसा कुछ भी नहीं किया. (मेने मुस्कुराते हुए कहा)

संयम : चल जूते, इतना सब तो किया है. (वो शर्माने लगी)

शिव : अच्छा, ऐसा क्या किया है?

संयम : शह्ह्ह्ह, जल्दी आ जाना शिव, बहोत याद आती है तेरी. (उसने तड़प कर कहा)

शिव : पढ़ाई पर धुआं दे, इधर उधर की मत सोचा कर, सामजी.

संयम : (मुँह टेढ़ा करते hue)Wo भी करती हु, ऐसे hi नहीं सब बता रही तुजे.

शिव : अच्छा अच्छा, चल रखता हु, bye.

संयम : (फुसफुसाते hue)I लव यू शिव. (कहते हुए वो फिर शर्मा गयी)

शिव : लव यू तो बेबी.

संयम : जल्दी आना. (उसने प्यार से कहा)

शिव : ठीक है.

मेने फ़ोन रख दिया, फिर से संयम मेरी आँखों के सामने घूमने लगी, में सोचने लगा की में क्या कर रहा हु, पर ये सब मेरे कण्ट्रोल में नहीं था, में बस उसके बारे में सोच रहा था की आगे क्या होगा, तभी दुर्वेश अंदर आया.

दुर्वेश : ऐसे क्या सोच रहा है?

शिव : कुछ नहीं, कहा गया था तू?

दुर्वेश : ऐसे hi बहार गया था.

फिर थोड़ी देर मेने पढ़ई की और सो गया, दूसरे दिन वही रूटीन चला, कारन ने फिर घूमने को कहा पर मेने मन कर दिया, मेने घर पे भी बात की, जूही से भी बात की, उसकी भी ट्रेनिंग अच्छे से चल रही थी. रात को फिर मेने भार्गवी से भी बात की, वो घर पे hi थी, वो भी पढ़ाई कर रही थी, मेने थोड़ी देर बात की और रख दिया.

कारन तो कारन hi था, वो फिर हमे जिद कर के घूमने ले गया. नशीब देखो की आज भी वो सब हमे वह मिल गयी. पर मेने कारन को उनसे बात करने के लिए मन कर दिया, वो भी मान गया, हमने उनकी और ध्यान नहीं दिया, हम अपनी बाटे कर रहे थे. प्रकृति ने भी देखा था की वो लड़का वह बैठा हुआ है, पर उन जानबुज कर उसको इग्नोर कर दिया. उसकी सहेलिओ ने भी शिव को देखा था.

लड़की : (दूसरी लड़की को दिखते hue)Dekh, वो लड़का. (प्रकृति को पता था की वो किसकी बात कर रही है, पर उसने कोई रियेक्ट नहीं किया, वैसे भी उसकी सहेलिया hi बात कर रही थी)

दूसरी लड़की : है यार, कितना हॉट है न वो. उस दिन प्रकृति ने मन न करदिया होता तो आज वो हमारे साथ में बैठा होता.

प्रकृति : (चिढ़ते hue)Muje क्या सुना रही है, अगर तुजे बात करनी है तो जा न, रोका किसने है.

जेनी : (पहली ladki)Tuje तो इन सब में कोई इंट्रेस्ट नहीं है, पर हमे क्यों रोकती है.

प्रकृति : मेने क्या पकड़ रक्खा है तुम्हे, मेडिकल में पढ़ने आयी हो तो उस तरह से ध्यान भी दिया करो, तुम्हारे माता पिता ने कितनी उम्मीदे पल रक्खी होगी तुम्हारे लिए.

मंजीत : (दूसरर लड़की) तो हम पढ़ भी रही है न, अब क्या किसी से बात भी नहीं कर सकते?

प्रकृति : तो जाओ न, मेने कहा रोका है.

मंजीत : वो सामने से आये थे तो भगा दिया, अब क्या हम सामने से जाये?

जेनी : सच है, हम लड़किया है, लड़को को hi म्हणत करनी पड़ेगी, अगर हम सामने से गए तो वो पता नहीं क्या सोचेंगे हमारे बारे में.

प्रकृति : तुम्हे जो करना है करो, अभी जल्दी से निकालो वर्ण प्रैक्टिकल मिस हो जायेंगे.

हम अपनी बाते कर रहे थे, वो लोग उठ कर जाने लगी तो मेरी नजर गयी वह, मेरी और प्रकृति की नज़ारे टकराई पर उसने नज़ारे घुमा ली, मुझे महसूस हो रहा था की उसमे एक अजीब सा आकर्षण है, में नज़ारे हटाने की कोशिस कर रहा था पर फिर भी नज़ारे उस और मुद रही थी, मेने ये भी देखा की वो भी कार में बैठने से पहले मुझे देख रही थी. वो लोग वह से चली गयी, हम भी थोड़ी देर वह रुके और फिर अपने कैंप पर लौट आये. ट्रेनिंग के बाद मेने फिर घर का हल चल लिया. फिर संयम से बात हुई, उसकी बात ख़तम होने के बाद मेने देखा की वैस्वी का मश्ग था. मेने पढ़ा तो लिखा था” कैसे हो?” और पीछे हार्ट शेप बना हुआ था.

शिव : (मेने रिप्लाई कर diya)Achchha हु, तुम कैसी हो?

वैस्वी : (थोड़ी देर बाद उसका मश्ग aaya)Achchhi हु, क्या कर रहे हो? बात कर शक्ति हो?

शिव : (मेने फ़ोन लगाया, तुरंत hi उसने फ़ोन उठा liya)Hello?

वैस्वी : Hi. डिस्टर्ब तो नहीं किया? (उसने प्यार से कहा)

शिव : नहीं, कहो क्या हुआ?

वैस्वी : क्या होना है, बस तुम्हारी आवाज सुन नई थी. (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : कैसा चल रहा है सब?

वैस्वी : सब अच्छा है, कब आ रहे हो?

शिव : मेने बताया तो था की कब आ रहा हु.

वैस्वी : जानती हु, बस पूछ रही थी, कैसी चल रही है तुम्हारी ट्रेनिंग?

शिव : अच्छी चल रही है. (हम दोनों ऐसे hi थोड़ी देर इधर उधर की बाटे करते रहे, फिर हमने फ़ोन रख दिया)

वह कृपाली और पद्मा बात कर रही थी.

कृपाली : (दुखी स्वर me)Aapka कैसा चल रहा है?

पद्मा : जैसा तुमने बताया है मेने वैसे hi सब किया है, देखते है क्या होता है. तुम इतनी उदास क्यों लग रही हो?

कृपाली : पता नहीं, (वो रोनी आवाज में बोली)

पद्मा : बताइये न क्या हुआ?

कृपाली : मुझे नहीं लगता की इस बार भी कुछ होगा? (उसकी आँखों से आंसू टपक पड़े)

पद्मा : क्यों? क्या हुआ?

कृपाली : पेटमे दर्द सुरु हो गया है, और ऐसा दर्द अक्सर पीरियड्स सुरु होने से पहले होता है, मुझे लगता है कुछ दिनों में पीरियड्स सुरु हो जायेंगे. (ये सुन कर पद्मा भी दुखी हो गयी, दोनों और थोड़ी देर ख़ामोशी छायी रही, कृपाली ने अपने आपको smbhala)Me रखती हु भाभी.

पद्मा : अभी से क्यों इतना दुखी होती है, अभी पीरियड्स आये तो नहीं न, तू धैर्य रख, सब ठीक हो जायेगा. (वो बोल तो रही थी पर खुद उसकी भी सिटी पित्ती घूम हो रही थी, क्यों की कुछ दिनों बाद उसकी भी डेट थी)

कृपाली : पता नहीं मेरे साथ hi ऐसा क्यों हो रहा है, ऐसे कोनसे पाप किये है मेने.

पद्मा : आप सम्भालिये अपने आप को, इसमें हम क्या कर सकते है, जितना हो सकता है हम कर रहे है, शायद हमारा भाग्य hi ऐसा है.

कृपाली : पर हम hi क्यों?

पद्मा : इसका जवाब तो मेरे पास भी नहीं है.

कृपाली : मेरी सास ने तो यहाँ तक कह दिया है की अगर एक दो महीने में खुशखबरी नहीं सुनाई तो वो इनकी कही और शादी करवा देगी. (कहते हुए वो ासु बहाने लगी)

पद्मा : ऐसे कैसे वो कही और शादी करवा देगी, भले hi ye(Uske पति) कैसे भी हो, पर वो तुम्हारे साथ ऐसा नहीं होने देंगे, तुम चिंता मात करो, ऐसा कुछ भी नहीं होगा.

कृपाली : में क्या करू कुछ समाज में नहीं आ रहा.

पद्मा : तुम स्वर्णादिदी से भी बात कर लेना, वो जरूर कोई रास्ता दिखाएगी. (पद्मा को कही न कही लग रहा था की ऐसी कुछ तो बात है जो उसकी समाज में नहीं आ रही है और अगर कृपाली, स्वर्ण से बात करेगी तो वो जरूर उसको कोई रास्ता दिखाएगी, और अगर एक बात कृपाली का हो गया तो उसको भी पता चल जायेगा)

कृपाली : उन्होंने तो डॉक्टर से मिलवा तो दिया, अब मुजमे hi कोई खोट है तो में क्या करू.

पद्मा : आप मायूस मात होइए, आप एक बार उनसे बात जरूर करना, है पर पहले थोड़ा वेट कर लो, अभी पीरियड्स आये नहीं है, ठीक है.

कृपाली : हम्म्म. (फिर दोनों ने फ़ोन रख दिया, पर दोनों hi चिंतित थी, अपने भविष्य को ले कर, और कोई भी रास्ता उन्हें समाज नहीं आ रहा था)

बिना ने एक दिन की छुट्टी की अर्जी दे दी थी, उसने संडे को जाने का प्लान बना लिया था, सुखदेवजी से भी बात हो गयी थी.

आज भी हम तीनो उस जगह पर आके बैठे हुए थे, और जूस पि रहे थे, वह कुछ लड़के भी आये हुए थे जो अपनी hi मस्ती में थे, वो वह लड़कीओ पर कुछ कमेंट भी कर रहे थे, कुछ लड़कीअ और लड़का वह से निकल भी गए. जाते जाते उन्हें बद्तमीज़ और पता नहीं क्या क्या बोल रहे थे पर उस पर भी ये लोग ठहाका मर कर है रहे थे.

कारन : पता नहीं कैसे लोग है, सालो को जरा भी तमीज़ hi नहीं है.

दुर्वेश : (हस्ते hue)Teri hi बिरादरी के लगते है.

कारन : जा बे, में ऐसा नहीं हु, क्या में ऐसे लड़कीओ को छेड़ता हु? (हम ऐसे hi बाते कर रहे थे, थोड़ी देर बाद प्रकृति और उसकी सहेलिया आयी)

एक लड़का : इ देख, क्या मस्त माल है यार. (सब लड़के उनकी और देखने लगे)

दूसरा लड़का : सच में यार, कमाल की है यार. पूछ की हमारे साथ बैठेगी?

Ladka(Ek) : एक्सक्यूज़ में, िफ़ यू वांट, यू कैन ज्वाइन विथ उस.

जेनी : कोई जरुरत नहीं है. (उसने तीखे स्वर में कहा)

लड़का (दो) : अरे आ जाओ, तुम्हारा बिल भी में भर दूंगा.

जेनी : अपना काम करो. (उसने दन्त ते हुए कहा)

लड़का (दो): अपना काम hi तो कर रहे है. (कहते हुए उसने अपने दोस्त के साथ ताली मरी और हसने लगा)

जेनी : बद्तमीज़. (वो लड़के फिर हसने लगे)

प्रकृति : चलो चलते है यहाँ से.

मंजीत : हम क्यों जाये, हम डरते है क्या इनसे. (वो सब कुर्शी में बेथ gayi)E भैया, चार ऑरेंज जूस देना.

लड़का (एक) : हम भी बहोत साडी जगह से जूस निकल भी सकते है और पीला भी सकते है, क्या कहते हो? (कहते हुए वो ठहाका मर कर हसने लगे और आपस में एक दूसरे को hi फाइव देने लगे, गुस्सा मुझे भी आ रहा था, पर ऐसे hi किसी के जगडो में नहीं पड़ना चाहिए, और मेरा मन न है की उन लड़कीओ को hi अपना एतराज जाताना चाहिए, वो लोग वैसे hi भाग जायेगे).

प्रकृति : इ, अपनी औकात में रह.

लड़का (एक): (अपनी जगह से खड़े होते hue)Are जानेमन, अभी तुमने हमारी औकात देखि hi कहा है, एक बार मौका तो दो, खुस न करदिया तो थूक देना मुज पर. (सब लड़कीअ कड़ी हो गयी)

जेनी : प्रकृति, कॉल थे पुलिस.

लड़का (दो): है, है, बुला ले पुलिस को, (अपनी जेब पर हाथ रखते hue)Wo तो यहाँ रहती है. (वो प्रकृति के पास पहुंच गया tha)Sach में, तू एक दम करारा माल. (अभी वो इतना hi बोलै था की प्रकृति ने एक झापड़ रशीद कर दिया). साली, मुज पर हाथ उठाया तूने. (कहते हुए उसने गुस्से में झापड़ मरने के लिए हाथ उठाया पर मेने पहले hi भाप लिया था की ऐसा कुछ होगा तो में वह पहुंच गया और मेने उसका हाथ पकड़ लिया, उसको झापड़ मरने के लिए हाथ उठाते देख प्रकृति ने आंखे बंद कर ली थी, पर जब उसको कुछ नहीं हुआ तो उसने आंखे खोल कर देखा, उसने देखा की शिव ने उस लड़के का हाथ पकड़ लिया है)

शिव : अरे भाई, ये किस तरह का व्यव्हार कर रहे हो तुम, क्या लड़कीओ पर हाथ उठाओगे?

लड़का (दो) : (अपने सामने इतने लम्बे लड़के को देख, पहले hi उसकी सिटी पित्ती गम हो गयी थी, पर फिर भी अपने आपको सँभालते hue)Chhod मेरा हाथ, तू जनता नहीं की में कौन हु.

शिव : क्या यार, तुम लोगो के पास और कोई डायलॉग नहीं होता काया, क्या हर बार “ तुम मुझे जानते नहीं की में कौन हु”. (मेने उसको चिढ़ाते हुए कहा, उसके दोस्त आगे बढ़ने lage)Wahi रुक जाओ (मेने उन्हें चेताया, मेरी दुमदार आवाज से hi वो लोग रुक गए)

लड़का (दो) : उसको क्या देख रहे हो, मारो सेल को. (उसने जैसे hi अपना वाक़्या ख़तम किया मेने उसके हाथ को मरोड़ diya)Aiiiiiiii आईईईई aiiiiiiiiiii. (वो दर्द से तड़पने लगा)

शिव : वही रुक जाओ, (मेने ऊँगली दिखते हुए उसके दोस्तों को kaha)Me कोई लड़ाई जगदा नहीं चाहता, अगर में मरने पर आ गया न तो तुम में से एक भी अपने पैरो से चल कर नहीं जा पायेगा, सोच लो. (कहते हुए मेने फिर उस लड़के का हाथ जोर से मरोड़ा)

लड़का (दो): आईईईई, छूऊऊऊद दो मुझे aaaaaiiiiiiiiiii.

शिव : पहले बोल की चुप चाप चला जायेगा, बिना कोई लफड़ा किये.

लड़का (दो): हआ, आयआईईईई, प्लीज छोड़ दो मुझे आईइइइइइइइ. (मेने उसका हाथ छोड़ दिया, वो अपने हाथ को सहलाने लगा, उसके चेहरे पर दर्द साफ़ दिख रहा था, उसने डरते हुए मुझे देखा और फिर अपने दोस्तों से kaha)Chaloooo. (वो सब वह से निकल गए, जैसे hi वो वह से निकले में अपने दोस्तों के पास गया)

शिव : चलो. ( हम तीनो वह से निकल gaye)(Ladkia आँखे फाडे उन्हें जाते हुए देख रही थी).

दुर्वेश : तू तो बड़ा खतरनाक है यार.

कारन : अबे दो चार मार भी देता, हमे भी लड़कीओ के सामने हीरो बन ने का मौका मिल जाता.

शिव : बिना वजह लड़ाई नहीं करनी चाहिए, बात आगे बढ़जाये तो संभालना मुश्किल हो जाता है, हमे क्या है, कुछ दिन है हम फिर तो यहाँ से चले जायेंगे, उन लड़कीओ को तो यही पढ़ना है, बिना वजह उनकी मुस्किले क्यों बढ़ने की.

दुर्वेश : सही कहा भाई, पर देख कर मज़ा आ गया, सेल कैसे दर गए थे सब के सब. (ऐसे hi बाते करते हुए हम वह से निकल गए)

प्रकृति : कितना अकड़ू है, पता नहीं क्या समझता है अपने आप को. (सभी लड़कीअ वह कड़ी उनको जाता देखती रही, फिर वो भी अपने हॉस्टल लौट गयी)

रात को मेरी फिर घर बात हुई, उसके बाद मेने भार्गवी और काव्यजि से भी बात की. में पढ़ाई कर रहा था तो मेरे फ़ोन पर मश्ग आया, मेने देखा तो जहान्वी का था, गुड नाईट का मश्ग किआ था.

शिव : (msg)Kya बात है, आज हमारी याद कैसे आ गयी.

जहान्वी : (थोड़ी देर बाद मश्ग aaya)Tum तो याद करते नहीं, सोचा में hi याद कर लू.

शिव : इतनी देर लगा दी मश्ग लिखने में. (उनका मश्ग लेट आया था तो मेने पूछा)

जहान्वी : बस ऐसे hi. क्या हल चल है?

शिव : सब अच्छा चल रहा है, अगर बात करसकती है तो कॉल कीजिये.

जहान्वी : मुझे बात नहीं करनी.

शिव : क्यों?

जहान्वी : बस नहीं करनी.

शिव : ऐसे hi बात नहीं करनी या रूठगायी है.

जहान्वी : (जहान्वी के चेहरे पर मुस्कान तैर gayi)Jo तुम संजो.

शिव : कुछ बताएंगी तभी तो पता चलेगा.

जहान्वी : अगर इतनी hi फ़िक्र थी तो कॉल कर लेते.

शिव : मेने सोचा क्यों ख़म खा डिस्टर्ब करू.

जहान्वी : में क्यों डिस्टर्ब होने लगी. (बात करने को थी नहीं तो में कुछ पल रुका तो फिर से मश्ग aaya)Kya हुआ?

शिव : कुछ नहीं.

जहान्वी : कही गफ का तो मश्ग नहीं आ गया?

शिव : अरे नहीं, ऐसी बात नहीं है.

जहान्वी : एक बात पुछु?

शिव : पूछिए.

जहान्वी : क्या सच में तुम्हारी गफ है?

शिव : मेने बताया तो था.

जहान्वी : क्या बताया था, कुछ भी तो नहीं बताया, नाम क्या है, क्या करती है? कुछ भी तो नहीं बताया. मुझे तो लगता है कोई है hi नहीं, तुम मुझे बेवकूफ बना रहे हो.

शिव : उस से मुझे क्या फायदा होगा?

जहान्वी : शायद...

शिव : क्या शायद?

जहान्वी : कुछ नहीं.

शिव : बताइये तो.

जहान्वी : कुछ नहीं, छोडो उस बात को, कब आ रहे हो?

शिव : मेने बताया तो था, उसी दिन आ रहा हु.

जहान्वी : ठीक है, जल्दी आना.

शिव : क्यों?

जहान्वी : बस ऐसे hi कह रही थी, आगे तुम्हारी मर्जी.

शिव : ठीक है, गुड नाईट.

जहान्वी : क्यों क्या हुआ, सोना है?

शिव : नहीं, वो मेरा रूम पार्टनर आया है, बाद में बात करते है.

जहान्वी : ठीक है, bye.

शिव : Ok गुड नाईट.

जहान्वी : गुड नाईट.

दुर्वेश : किसके साथ चैटिंग चल रही थी?

शिव : नहीं, बस ऐसे hi.

दुर्वेश : जूही थी क्या?

शिव : नहीं, ऑफिस में साथ काम करती है.

दुर्वेश : ओफ्फिकेवली से इतनी रात को?

शिव : ऐसा कुछ नहीं है, बस ऐसे hi.

दुर्वेश : चल ठीक है, में तो सोता हु, सुबह जल्दी भी उठना है.

फिर वो सो गया, में थोड़ी देर पढ़ा फिर में भी सो गया. आज सुबह बिना, सुखदेवजी से मिलने के लिए निकल गयी थी, उन्होंने गाड़ी भेजी थी, सिर्फ ड्राइवर hi था, रास्ता लम्बा होने की वजह से वो रस्ते में सो भी गयी थी. करीब दोपहर को वो सुखदेवजी के वह पहुंच गयी थी. वो घर पर hi थे. उन्होंने बिना की आवभगत की और उसको वह मान से बिठाया, उनकी पत्नी ऐश्वर्यदेवी भी वही आ गयी थी.

ऐश्वर्यदेवी : कैसी आप, आने में कोई दिक्कत तो नहीं हुई?

बिना : नहीं आंटी, मुझे तो पता hi नहीं चला, में तो सो गयी थी. (बिना ने मुस्कुराते हुए कहा).

ऐश्वर्यदेवी : तुम बैठो बेटी, में खाने का प्रबंध करती हु. (कहते हुए वो वह से अंदर चली गयी).

सुखदेवजी : तो आखिर आप आ hi गयी, मणि नहीं.

बिना : उंक्लेजि, आप मुझे आप मत कहिये, मेरे नाम से बुलाइये.

सुखदेवजी : चलो ठीक है, जैसी तुम्हारी मर्जी. में जनता हु, तुम्हारे मान में कई सवाल है, पहले तुम खा पि लो, हम इत्मीनान से बात करेंगे.

बिना : जी अंकल. एक बात पुछु अगर बुरा न मने तो.

सुखदेवजी : अगर बुरा मान न होता तो तुम्हे आने hi नहीं देता, पूछो.

बिना : क्या में योगेन्द्राचाचा और चंद्रिकाचची से मिल सकती हु.

सुखदेवजी : वो मिलने की हालत में नहीं है.

बिना : में बस उन्हें देखना चाहती हु.

सुखदेवजी : ठीक है, खाना खाने के बाद चलते है.

उसके बाद उनके खाने का दौर चला, ऐश्वर्याजी ने अपने हाथो से खाना परोसा और आग्रह कर के बिना को खिलाया, बिना को लगा hi नहीं की वो किसी दूसरे के घर पर आयी है, उनके व्यव्हार में उसे एक अपना पैन सा लगा. खाना खाने के बाद ऐश्वर्याजी ने घर के हल चल पूछे और ऐसे hi दूसरी बाते की. उनकी बातो से लग रहा था की इतनी दौलत होने के बावजूद वो दुखी है, उनके व्यव्हार में एक उदासी सी दिखी, मेरी समज में नहीं आया की ऐसा क्यों है, पर अभी उनसे ज्यादा परिचय था नहीं तो मेने कुछ पूछा नहीं. उसके में सुखदेवजी के साथ योगेन्द्राचाचा से मिलने निकल पड़ी.

वो मुझे एक हॉस्पिटल में ले गए, बड़ा hi एलिसन हॉस्पिटल था, लिफ्ट में हम चौथे मेल पर पहुंचे जहा िक के एक आलीशान कमरे में उन्होंने मुझे योगेन्द्राचाचा से मिलवाया. वो बस जी रहे थे, शरीर में कोई हलचल नहीं थी. उन्हें देख कर सच में ऐसा लगा की वो शिव के hi पापा है, चेहरा भले hi थोड़ा फीका पद गया था, पर काफी लक्षण उनसे मिलते थे. वो मुझे इतने अपने लगे की उनकी इस हालत के लिए मेरी आँखों में आंसू छलक आये. में उनका हाथ पकड़ कर उनके बाजु में बेथ गयी.

सुखदेवजी : (उन्होंने भी बिना की हालत dekhi)Itne सालो में पहलीबार देख रहा हु की किसी को योगेंद्र की इतनी फ़िक्र हो रही है.

बिना : (अपने ासु पोछते hue)Akhir ये मेरे चछससुर है, इन्हे इस हालत में देख कर में अपने आप को रोक नहीं पायी.

सुखदेवजी : इसका परिवार है, इसके भाई है, पर किसी को इतनी फ़िक्र नहीं, है चन्द्रभानजी कभी कभार आते है.

बिना : पर ये इस हालत में क्यों है? आखिर ऐसा क्या हुआ था?

सुखदेवजी : आज भी उस दिन को याद करता हु तो रूह काँप जाती है, इतने भले व्यक्ति के साथ ऐसा हादसा, मुझे तो अभी भी यकीं नहीं होता.

बिना : पर ऐसा क्या हुआ था?

सुखदेवजी : अपने बेटे को बचते हुए इसकी ये हालत हुई है.

बिना : शिवांस को बचते हुए?

सुखदेवजी : है. में सब बताऊंगा, जितना मुझे पता है और समाज आया है, पर अभी चन्द्रिका से मिल लो.

बिना : (योगेन्द्रजी का शिर सहलाते हुए, धीरे se)Chachaji, मुझे यकीं है की मेरी आवाज आप सुन रहे है, में आपसे कहना चाहती हु की आपका बीटा जिन्दा है, आप फ़िक्र मात कीजिये, सब ठीक हो जायेगा. (फिर वो सुखदेवजी के साथ बहार निकल गयी, रस्ते में उसने पूछा) अंकल, आपके पास शिवांस की फोटो है?

सुखदेवजी : है है, क्यों?

बिना : आप मुझे दे सकते है क्या?

सुखदेवजी : तुम क्या करोगी?

बिना : प्लीज अंकल, अभी कुछ मात पूछिए, पर इतना यकीं रखिये की ये बेहद जरुरी है.

सुखददेवजी : है है, जरूर दूंगा, वैसे भी इतने सालो बाद सब बदलाव देख रहा हु, मुझे यकीं है कुछ न कुछ तो जरूर हुआ है.

बिना : में सामजी नहीं अंकल.

सुखदेवजी : मुझे आज भी याद है चन्द्रिका के वो शब्द, जो शायद उसके आखरी शब्द थे वो उदयसिंह को कह रही थी, “आज तुमने मेरी गॉड उजड़ी है, ये एक माँ का श्राप है तुम्हे, अगर मेरे बेटे को कुछ भी हुआ तो तुम्हारा वंस hi ख़तम हो जायेगा”. पहले तो मेने सिर्फ इसे एक माँ का आक्रन्द hi समजा था, पर जब तुम्हारे वह और सबके वह कोई भी औलाद नहीं हो रही थी तो यकीं होने लगा था की चन्द्रिका की कही बाटे सच हो रही है. पर जब सुना की तुम, ममताबेटी और स्वर्णबेटी भी माँ बन रही है तो लगा की जरूर कुछ हुआ है, ऐसे hi इतने सालो बाद अचानक ये बदलाव, कोई बात तो जरूर है.

बिना : (वो सुखदेवजी को देख रही थी, उसके गले तक आ गया था की वो शिव के बारे में बताये, पर वो इतना जल्दी कोई भी खुलासा नहीं करना चाहती थी, अभी उसको सब सही से पता नहीं था, वो ऐसा कोई भी काम नहीं करना चाहती थी जिस से शिव पर कोई मुसीबत आये, वो हर कदम फंक फंक कर रखना चाहती थी, चाहे छाछ hi क्यों न हो, पर वो फंक फंक कर hi उसको पीना चाहती थी)

सुखदेवजी : (वो भी अपनी अनुभवी आँखों से सब समज रहे थे, वो बिना के चेहरे की उल्जन भी समझने की कोशिस कर रहे थे, पर वो बोले कुछ नहीं, वो इतना तो समाज रहे थे की कुछ बात तो जरूर है)

वो दोनों एक मेन्टल हेल्थ केयर सेण्टर पहुंच गए. बिना अस्स पास सब देखते हुए सुखदेवजी के साथ उनके पीछे पीछे चल रही थी. आखिर कर वो एक कमरे में पहुंचे.
 
अपडेट 214

कमरा अंदर से एलिसन था, ऐसा लग hi नहीं रहा था की हम किसी हॉस्पिटल में है, मेने एक बात नोटिसकी की दिवलो पर भी गद्दे लगे हुए थे, वह एक नर्स बैठी हुई थी जो हमे देख कर कड़ी हो गयी. मेने देखा की वह एक लेडी निचे फारस पर बैठी हुई है, उनका शिर वह पड़े सोफे पर है, मेने सुखदेवजी की और देखा तो उन्होंने है में इस्सर किया, जिसका मतलब था की यही चंद्रिकाचची है, में उनके नजदीक जाने लगी, में उनके साइड में जा कर कड़ी हो गयी, मेने देखा की वो हॉस्पिटल का गाउन पहने हुए थी, बाल बंधे थे पर कही जगहों से बहार निकल कर बिखरे हुए थे, उनकी आंखे खुली हुई थी, पर ऐसा लग रहा था जैसे उनमे भी कोई जान नहीं है. ऐसे वक़्त में अगर आपको पता चले की ये मेन्टल पेटिएंट है तो आपको दर लगता है, पर पता नहीं क्यों मुझे कोई दर नहीं लग रहा था, में उनके बाजु में बेथ गयी.

बिना : चाचीजी. (मेने उनको पुकारा, पर उन्होंने कोई रिएक्शन नहीं दिया, मेने फिर सुखदेवजी को देखा, वो वैसे hi वह खड़े थे, मेने फिर pukara)Chachiji. (उन्होंने फिर कोई रिएक्शन नहीं दिया)

सुखदेवजी : वो कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगी, बरसो से ऐसी hi हालत में है.

बिना : ये दिवलो पर गद्दे क्यों लगे है?

सुखदेवजी : कभी कभार इन्हे दौरा पड़ता है और वो ऐसे hi भागने लगती है, अपने बेटे को पुकारती हुई वो किसी भी दिशा में दौड़ पड़ती है, टकराने से कई बार इन्हे चोट लग गयी थी इस लिए हमने ऐसा किया है ताकि इसे चोट न लगे.

बिना : चचीजीईई. (मेने उनके हाथ पर हाथ रखते हुए कहा, उनके हाथ में भी जैसे कोई जान नहीं थी, उन्हें इस हालत में देख कर मेरी आंखे फिर से भर आयी, मुझे महसूस हो रहा था की वो अपने बेटे से कितना प्यार करती होंगी जो उसकी जुदाई में उनकी ये हालत हो गयी, मेने उनका हाथ उठाया और उनके हाथ को चूमने lagi)Chachijiumm उम् उम् सब ठीक हो जायेगा चाचीजी. इतने बरसो की आपकी तपस्या व्यर्थ नहीं जाएगी, ऊपरवाला इतना बेरहम नहीं हो सकता, सब ठीक हो जायेगा. (में देख रही थी की इतना में उनसे बात कर रही थी पर उनके चेहरे पर कोई भी भाव नहीं थे, बस वो सुण्या में देखे जा रही थी, मेने सुखदेवजी से puchha)Inhe यहाँ क्यों रक्खा है, क्या इन्हे घर पर नहीं रख सकते?

सुखदेवजी : पहले मेने उन्हें घर पर hi रक्खा था, पर कभी कभी वो इतनी वाइल्ड तरीके से बेहवे करती है की इन्हे संभालना मुश्किल हो जाता है, ऐसा कभी कभी hi होता है, पर उस समय डॉक्टर की आवस्यकता होती है, इस लिए हमे मजबूरन इन्हे यहाँ रखना पद रहा है. हम अक्सर यहाँ आते रहते है, और प्रकृति तो जब भी छुट्टी होती है, यही वक़्त बिताती है.

बिना : प्रकृति???

सुखदेवजी : मेरी बेटी, इनकी ऐसी हालत देख कर hi वो डॉक्टरी पढ़ रही है, कह रही है की एक दिन इन्हे ठीक कर देगी. अभी वो हॉस्टल में है, इस हफ्ते ुकि एग्जाम है इस लिए hi नहीं आयी, वर्ण जब भी छुट्टी होती है वो आ hi जाती है.

हम दोनों वह से भी निकल गए, मेरे मान में बहोत सरे सवाल और उलझने घूम रही थी, मेरा मान कर रहा था की में यहाँ से जाऊ hi न, चाचाजी और चाचीजी को मेरी सख्त जरुरत है, में बुरी तरह से फास चुकी थी, क्या करू समाज में नहीं आ रहा था. चाचीजी को देखने के बाद तो मुझे पूरी तरह से यकीं हो रहा था की शिव hi शिवांस है, शिव की सकल काफी उनसे मिलती थी, मुझे उनकी सकल में शिव के नैन नक्श साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे. देख कर hi लग रहा था की वो hi शिव की माँ है, मुझे जल्द से जल्द ये गुत्थी सुलजानि होगी, पर दूसरी और शिव का भी सोचना था, क्या करू समाज में नहीं आ रहा था. हम घर पहुंच गए, सुखदेवजी को कुछ काम था तो वो शाम को मिलने का बोल के निकल गए.

उस दिन दोपहर में कारन मेरे रूम माया और मुझे चलने के लिए बोलने लगा.

शिव : मुझे नहीं आना है, अगर तुमलोगो को जाना है तो जाओ.

कारन : अरे यार चल न, अगर वो लोग फिर आ गए और उन्होंने फिर लड़कीओ के साथ बदतमीज़ी की तो.

शिव : तू और में, हर पल तो उनके साथ नहीं रह सकते न, उस समय हम थे तो हमने मदद कर दी, न में हमेशा यहाँ रहनेवाले हु न तू.

कारन : फिर भी चल न, आज तो वो हमसे दोस्ती करने से मन नहीं कर पायेगी, कितना अच्छा मौका है, चल न भाई.

शिव : देख कारन, मुझे उनसे दोस्ती करने में कोई इंट्रेस्ट नहीं है, और न hi में किसी लफड़े में पड़ना चाहता हु, तो तू hi जा.

कारन : तू चल रहा है (उसने दुर्वेश से पूछा)

दुर्वेश : नहीं, में आराम करूँगा.

कारन : देख ली तुम्हारी दोस्ती. (कहते हुए वो बहार चला गया, उसने दूसरे लड़को को तैयार किया और वो फिर वह पहुंच गया, आज वो लड़कीअ नहीं आयी थी, कारन का मूड ऑफ हो गया, पर आया था तो फिर वो अपने दोस्तों के साथ बेथ gaya,uski किस्मत कुछ ज्यादा hi अच्छी थी, आज फिर से वो लोग वह आये, वो लोग कार से उतर रहे थे की उनके पीछे एक और कार भी वह आयी, उसमे से दो आदमी निकले और थोड़ी दुरी पर खड़े हो गए. कारन उठा और बात करने के लिए लड़कीओ के पास पहुंच gaya.)Hi. (उसने मुस्कुराते हुए कहा, पर अभी वो समझता उस से पहले hi वो दो आदमी वह आये और उसको पकड़ लिया, वो दर गया और छूटने की कोशिस करने लगा).

प्रकृति : ये वो नहीं है, छोड़ दो उसे. (उन्होंने कारन को छोड़ दिया) देखिये मिस्टर, आप हमसे दूर रहे उसमे hi आपकी भलाई है.

कारन : में तो बस बात करने आया था.

प्रकृति : हमें आपसे कोई बात नहीं करनी, आप जा सकते है. (कारन मायूस हो कर वापस अपने दोस्तों के पास गया और वो सब वह से निकल गए)

जेनी : इन्हे बुलाने की क्या जरुरत थी, ऐसे तो कोई भी लड़का हमसे बात करने नहीं आएगा.

प्रकृति : मेने कल पापा को बताया की क्या हुआ है, वो तो पहले से hi मुझसे बोल रहे थे की ऐसे अकेले रहना ठीक नहीं है, पर मेने hi मन कर दिया था, हॉस्टल में तो वैसे भी कोई प्रॉब्लम नहीं होती, इसीलिए में कहती हु की बहार नहीं निकलना चाहिए, पर तुम मानती hi नहीं हो. वैसे भी अगर तुम्हे लड़को से दोस्ती करनी है तो तुम अकेले भी आ शक्ति हो, मेने थोड़ी न मन किया है, मुझे इन सब में कोई इंट्रेस्ट नहीं है, मुझे बस एक अच्छी डॉक्टर बन न है, और कुछ नहीं.

जेनी : जिंदगीभर कुवारी रहेगी क्या?

प्रकृति : है.

जेनी : पागल है क्या?

प्रकृति : यही मेरा भाग्य है.

जेनी : कहना क्या चाहती है तू, कुछ समाज में आये ऐसी बात कर.

प्रकृति : तू छोड़ ये सब, जा जूस का आर्डर de.(Usne आर्डर दे दिया, पर वापस आ कर फिर पूछा)

जेनी : तू आमिर है ये तो पता है, इनफैक्ट हम सब आमिर है, पर ऐसे सिक्योरिटी लेनी पड़े इतने आमिर नहीं है हम.

प्रकृति : तू छोड़ न ये सब.

जेनी : अच्छा छोड़ ये सब, कल वो लड़का आया था वो क्यों नहीं दिखा आज.

प्रकृति : मुझे क्या पता, और मुझे क्या लेना देना.

जेनी : ऐसा क्यों कह रही है, कल उसने तुम्हे बचाया था.

प्रकृति : मानती हु, पर मेने तो नहीं कहा था उसे, वो खुद बिच में पड़ा तो में क्या करू, वैसे भी इन लड़को को लड़कीओ की मदद करने का ज्यादा शौक होता है, छोड़ना उसे.

में पढ़ाई कर रहा था, कारन ने बताया की वह क्या हुआ, मुझे उस बेचारे की हालत पर तरस आया, पर सुन कर अच्छा भी लगा की उन लड़कीओ ने अपनी सिक्योरिटी का इंतजाम कर लिया है, वैसे ये मेरे लिए भी नया था की ऐसे किसी की सिक्योरिटी के लिए जरुरत पड़े, वो लोग जब उस फंक्शन में आये थे तब भी सिक्योरिटी के साथ hi आये थे, खैर मुझे क्या लेना, में फिर से अपनी पढ़ाई करने लगा. शाम को फिर से जो ट्रेनिंग थी. सर बता रहे थे की सर्कार खिलाड़िओ को ले कर काफी सीरियस है, और वो चाहती है की खिलाडी आगे आये, इसके लिए वो प्रयास भी कर रही है और खर्चा भी कर रही है, मुझे ऐसे मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए और जितना हो सके इसका फायदा लेना चाहिए.

(Beena)Sham को में और ाइसववर्य आंटी बाते कर रहे थे, हमारे बिच का टॉपिक योगेन्द्राचाचा और चंद्रिकाचची hi थे, वो उनके बारे में बता रही थी, उनकी बातो से इतना जरूर पता चल रहा था की चाचा और चची बहोत अच्छे इंसान थे, जब मेने उनके साथ हुए हादसे के बारे में पूछा तो उन्हें भी ज्यादा पता नहीं था. तो मेरे पास एक hi रास्ता बचता था वो थे सुखदेवनकले. रात को वो खाने के वक़्त hi लौटे थे, हमने खाना खाया और फिर वह बहार बगीचे में हम सब बेथ गए, वह बैठने के लिए भी सोफे लगे हुए थे.

सुखदेवजी : तुमने खाना ठीक से नहीं खाया बेटी, क्या इसे अपना घर नहीं समझती?

बिना : ऐसी बात नहीं है अंकल, बस खाने की इच्छा नहीं हो रही थी, पर फिर भी मेने इतना सारा तो खाया. (उसने मुस्कुराते हुए कहा). अंकल प्लीज बताइये न, उस दिन क्या हुआ था.

सुखदेवजी : उस दिन क्या हुआ था और क्यों हुआ था, ये जान ने के लिए तुम्हे उनके अतीत के बारे में पता होना चाहिए, तुम इतने सालो से उस घर में हो, क्या जानती हो योगेंद्र और चंडीरिका के बारे में?

बिना : कुछ भी नहीं अंकल, इनफैक्ट मुझे तो अभी कुछ समय पहले hi पता चला की मेरे ससुरजी के अलावा उनके दो भाई है, में तो बस यही जानती थी की वो दो hi भाई है.

सुखदेवजी : उदयसिंह के दर से कोई कुछ भी नहीं बोलता, उसने सबको डरा के रक्खा है, जिसके बिज़नेस को हड़प कर बैठा है, जिसके पैसो को उदा रहा है, उसी की साडी निसानी मिटा दी है उसने.

वैसे तो योगेंद्र से मेरी मुलाकात लंदन में हुई थी, पर उसके साथ रहने के बाद और उसके मुँह से सुन ने के बाद मुझे उसके बारे में काफी कुछ पता चला, तो में वैसे hi तम्हे बता रहा हु. शिवनारायण जो की योगेंद्र के पिता थे, उनकी चार संतान थी, उदयसिंह, चंद्रभान, योगेंद्र और सबसे छोटी मानसी. शिवनारायण बहोत बड़े जागीरदार थे तो पैसो की कोई कमी नहीं थी. पर इन्ही पैसो ने उदयसिंह को स्वछंद बना दिया था. ए दिन गांव की औरतो और लड़कीओ के साथ उसका नाम सुनाई देता था, जागीरदार का लड़का था तो कोई कुछ कर नहीं सकता था, और कही न कही शिवनारायणजी की भी गलती थी, उन्होंने भी अपने बेटे को रोका नहीं, दिन बा दिन उसके किस्से बढ़ते hi गए, तो उन्होंने उसकी शादी कर दी, सोचा सायद शादी के बाद सुधर जायेगा, पर कोई फर्क नहीं पड़ा. जिस तरह से वो पैसे और जायदाद उदा रहा था, धीरे धीरे जायदाद में कमी आने लगी थी. योगेंद्र को इन सब के कोई दिलचस्पी नहीं थी, उसके लिए किताबे hi सब कुछ थी, वो पढ़ाई में भी तेज था. बड़े होने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए वो लंदन आ गया, जाया कॉलेज में मेरी मुलाकात उस से हुई थी, उसके स्वाभाव के कारन जल्द hi हमारी दोस्ती गहरी हो गयी. वो बहोत महत्वकांशी था, इतना होशियार था की दो साल बाद hi उसने पढ़ते वक़्त hi एक ऑफिस सुरु कर दी, उसके प्रोजेक्ट के कारन उसका काम भी बढ़ता चला गया, उसने मुझे भी अपने साथ मिला दिया, मेरे पिताजी भी बहोत खुस थे उस से, उन्होंने भी उसके प्रोजेक्ट में अपना पैसा लगाया. कॉलेज के आखरी साल में उसकी मुलाकात चंडीरिका से हुई और मेरी ऐश्वर्या से. हम चारो का ग्रुप बन गया था. जब मानसी की शादी थी तो हम चारो यहाँ आये थे, उस वक़्त योगेंद्र ने चन्द्रिका की मुलाकात सब से करवाई. यहाँ शिवनारायणजी ने योगेंद्र के लिए लड़की देख राखहि थी और बात भी चला रक्खी थी तो उन्हें इस बात से धक्का लगा, पर योगेंद्र अपने पैरो पर खड़ा था, उसने न जमीं मांगी थी न जायदाद तो वो कुछ बोल नहीं सकते थे. वैसे भी यहाँ काफी कर्जे हो गए थे, उदयसिंह के कारन काफी जमीने विवादों में फास चुकी थी. उन्हें योगेंद्र के रूप में अपने कुल का उद्धारक नजर आ रहा था. उन्होंने अपनी सम्मति दे दी पर शर्त रक्खी की वो यही आ कर बसेगा.

योगेंद्र ने भी बात मान ली. दो शाल बाद उनकी तबियत बिगड़ने पर हम फिर वह गए थे, मेने और ऐश्वर्या ने शादी कर ली थी. हमारी शादी के पीछे भी योगेंद्र का बहोत बड़ा हाथ था, उसने hi ऐश्वर्या के घरवालों को मनाया था. हमने लंदन में hi शादी की थी. उन्होंने मरने से पहले योगनिद्रा की शादी देखने को कहा तो योगेंद्र और चन्द्रिका की शादी भी हो गयी. वापस आने का वचन दे कर फिर हम लंदन चले आये, पर एक शाल में hi उनके निधन की खबर आयी तो योगेंद्र को वापस आना पड़ा. उनके निधन के बाद उनकी वसीयत में साडी जमीनों का कर्ताधर्ता योगेंद्र को hi बना दिया था, अगर दूसरे भइओ को कुछ लेना हो तो भी उन्हें योगेंद्र से hi इजाजत लेनी पड़ती. चंद्रभान को कोई दिक्कत नहीं थी पर उदयसिंह को ये कतई मंजूर नहीं था. योगेंद्र को इन सब में कोई दिलचस्पी नहीं थी, उसके खुद के पास इतने पैसे थे की उसको अपने बाप दादा की जायदाद से कोई सरोकार नहीं था, पर शिवनारायणजी ने वसीयत में ऐसी शर्ते रक्खी थी की योगेंद्र छह कर भी जायदाद उनके नाम नहीं कर सकता था. जो जिम्मेदारी उसके पापा ने उसको सौंपी थी उसके लिएए और उसने वादा भी किया था तो उसने यही बसने का फैसला करलिया.

उसने नजदीकी सहर से अपना काम सुरु करदिया और देखते hi देखते उसके नाम का डंका यहाँ भी बजने लगा. अपने छोटे भाई के सामने झुक कर रहने के कारन उदयसिंह अंदर hi अंदर बहोत ज्यादा गुस्सा था, पर वो कुछ कर नहीं सकता था, उसको पता था की अगर उसने कुछ किया तो वो सड़क पर आ जायेगा, तो उसने ऐसे बताना सुरु करदिया जैसे वो सुधर गया है. उदयसिंह के वह एक बीटा और दो बेश्या थी, चन्द्रभानके वह भी एक बीटा और एक बेटी थी, मानसी भी दो बेशक़ी माँ बन चुकी थी, पर मेरे वह और योगेंद्र के वह अभी कोई भी संतान नहीं थी. उदयसिंह को भी लग रहा था की योगेंद्र के वह तो कोई संतान है नहीं तो उसके बाद साडी जायदाद उसके बेटे के नाम hi होनेवाली है. योगेंद्र के मान में भी शायद यही बात आ गयी थी. उसने अपने बढ़ते कारोबार में भी अपने भइओ को शामिल कर लिया और उनको भी कुछ सत्ता देने लगा. उदयसिंह का काम भी आसान होनेलगा था, वैसे भी योगेंद्र का काम बढ़ता जा रहा था, हमदोनो ने मिल कर कई राज्यों में अपनी ब्रांच ओपन कर्ली थी. विदेशो में भी हमारा कारोबार बढ़ रहा था, तो वह की जिम्मेदारियां उसने उदयसिंह और चंद्रभान को पूरी तरह से दे दी थी, आखरी फैसला योगेंद्र का hi रहता, पर काफी हद तक उसने वो सब उनको सौंप दिया था. बहार से उदयसिंह इतना सीधा होने का दिखावा कर रहा था की हमको भी यकीं हो गया था की वो सुधर गया है. साडी जायदाद जो चली गयी थी वो भी साडी वापस आ गयी थी और ऊपर से बढ़ती जा रही थी. घर में पैसे इतने थे की कुछ नुकसान को योगेंद्र नजर अंदाज करदेता था, मेने भी कई बार उसको बताया था पर उसने कहा की वो उसके बड़े भाई hi तो है. ऐसे hi कुछ साल बिट गए. उपरवाले की महेरबानी हुई और चन्द्रिका गर्भवती हुई, मेरे वह भी खसुखबरी आनेवाली थी. हम सब खुस थे, पर उदयसिंह ने जब ये खबर सुनी तो उसको अपने अरमानो पर पानी फिरता नजर आया. पर वो कुछ नहीं कर सकता था, मेरे वह बेटी का जन्म हुआ और योगेंद्र के वह बेटे का जन्म हुआ. घर में खुसिया जैसे दोगुनी हो गयी थी. उसका पहला जन्मदिन उसने बड़ी धूम धाम से मनाया था, उसने जैसे पुरे सहर को नौटा दिया था, इस से पहले किसी ने ऐसा बड़े सेलिब्रेशन देखा नहीं होगा.

ऐश्वर्यदेवी : लगता है आपकी बाते काम नहीं होंगी, में बीनबेटी के लिए जूस ले आती हु.

बिना : अरे नहीं आंटी, मुझे जरुरत नहीं है.

ऐश्वर्यदेवी :ऐसे कैसे जरुरत नहीं है, तुम माँ बन ने वाली हो, कहते पिटे रहना चाहिए. में ले आती हु. (कहते हुए वो उठी और अंदर चली गयी)

बिना : आगे क्या हुआ अंकल.

सुखदेवजी : आगे जो हुआ उसकी तो हमने कल्पना भी नहीं की थी. ऐश्वर्या भी इसीलिए उठ कर चली गयी, वो ऐसा दिन था जिसको हम कभी याद करना नहीं चाहते है. वो क्या मनहूस दिन था, आज भी सोचता हु तो लगता है की ये सारा प्लानिंग से किया गया था, पर क्या करे, कोई साबुत नहीं है.

बिना : ऐसा क्या हो गया था?

सुखदेवजी : शिवांश करीब ढाई तीन साल का था, सक्ष्भ का मेला लगा हुआ था. उदयसिंह ने hi वह जाने का प्रस्ताव रक्खा था, हमने भी इस मेले के बारे में बहोत सुना था, तो हमने भी जाने का फैसला ले लिया. मेरा पूरा परिवार, योगेंद्र उसकी वाइफ और शिवांस, उदयसिंह, चंद्रभान और उनकी पत्नी, इतने लोग हम गए थे. हम हमारे साथ सिक्योरिटी भी ले कर गए थे पर जब दर्शन के लिए जाना था तो हम बिना सिक्युरिटी के hi गए थे. वह जैसे लोगो का सैलाब आया हुआ था, इतने लोग थे की पूछो hi मात. सुबह सवेरे hi हम लोग घाट पर स्नान करने पहुंच गए थे, वह का नजारा अद्भुत था, सेकड़ो लोग वह स्नान कर रहे थे, हमने भी वह स्नान किया. सब मज़मे थे. इतनी सुबह भी जैसे लोग थम ने का नाम नहीं ले रहे थे, सूर्योदय अभी हुआ नहीं था, पर वह लाइट का इंतजाम बढ़िया था, हम वह से वापस लौट रहे थे, वह टेम्पररी पल बनाया हुआ था, सब आराम से चल रहे थे, भीड़ इतनी थी की साथ चल पाना भी मुश्किल हो रहा था. उदयसिंह ने शिवांस को उठा रखा था, योगेंद्र, चन्द्रिका को संभल रहा था, मेने भी प्रकृति को उठाया हुआ था और ऐश्वर्या भी मेरे साथ में hi थी, ऐश्वर्या को चलने में दिक्कत हो रही थी तो हम थोड़ा पीछे रह गए थे, आगे सिर्फ उदयसिंह, शिवांस और उनके थोड़ी दुरी पर योगेंद्र और चन्द्रिका चल रहे थे. पता नहीं वह क्या हुआ की धक्का मुक्की की वजह से और बहोत ज्यादा बोज आ जाने की वजह से पल की एक रस्सी टूट गयी, और कुछ लोग पानी में गिर गए, पानी का बहाव तेज था तो लोगो में भगदड़ मच गयी, लोगो का शोर इतना था की कुछ समाज में hi नहीं आ रहा था, जैसे तैसे में, मेरी बेटी को उठाये हुए था और ऐश्वर्या को संभल रहा था, आगे क्या हुआ पता नहीं चला, पर मुझे चन्द्रिका की चीख सुनाई दी, वो इतना तेज चीखी थी की इतनी आवाज में भी में उसको सुन सकता था, मेने प्रकृति को ऐश्वर्या को दिया और में उस और भगा, चन्द्रिका चिल्ला रही थी और कुछ लोगो ने उसको पकड़ रक्खा था, वो पानी में देखते हुए चिल्ला रही थी, पानी के अंदर काफी लोग गिर चुके थे, मुझे योगेंद्र नहीं दिख रहा था और न hi शिवांस दिख रहा था. मेने उदयसिंह को पूछा की क्या हुआ?

उदयसिंह : (थोड़ा गभराते hue)Wo शिवांस पानी में गिर गया है और योगेंद्र उसको बचने के लिए पानी में कूद गया है.

सुखदेवजी : (ये सुन कर मुझे गहरा सदमा सा laga)Mene पानी में देखा पर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, पानी का बहाव इतना ज्यादा था की दोनों बह कर काफी दूर निकल गए थे, में चन्द्रिका के पास pahucha)Chandrikaaaa. (चन्द्रिका ने मुझे देखा)

चन्द्रिका : भाईसाहब वो.... (उसने पानी की और इस्सर किया, उसके ासु बह रहे थे, वो गुस्से से उदयसिंह की और gayi)Ye सब इसी का किया धरा है, (कहते हुए वो उसको थप्पड़ मरने लगी)

उदयसिंह : मेने क्या किया है, भीड़ इतनी थी, और धक्कामुक्की हो रही थी, एक जोर का धक्का ऐसा लगा की वो छूट गया मेरे हाथ से. (उसने अपना बचाव किया)

चन्द्रिका : (उसको अपने बेटे और पति की चिंता थी, न की उसकी सफाई ki)Shivanssssssssss, Shivansssssssss(wo जोर जोर से चिल्ला रही थी, फिर उसने गुस्से से उदयसिंह को देखा) “आज तुमने मेरी गॉड उजड़ी है, ये एक माँ का श्राप है तुम्हे, अगर मेरे बेटे को कुछ भी हुआ तो तुम्हारा वंस hi ख़तम हो जायेगा”.

उदयसिंह : मेने कुछ नहीं किया है मेरा यकीं मनो, तुमभी देख रहे हो की कितनी धक्कामुक्की हो रही थी, हम पल के किनारे पर the(Wo मेरी और देख कर कहने लगा, मुझे तो पता hi नहीं था की क्या हुआ है तो में क्या कहता)

सुखदेवजी: वो जोर जोर से चिल्लाती रही, आखिर कर वो बेहोश हो गयी, वह खड़े सुरक्षा कर्मी भी अपनी बोट ले कर लोगो को बचने में जुट गए थे, चन्द्रिका भी बेहोश हो चुकी थी, मेने जैसे तैसे एक सुरक्षा कर्मी को इन्फॉर्म किया, वो सुसरो को बुला लाया, जैसे तैसे हमने चन्द्रिका को वह कैंप में एडमिट करवाया, में, चंद्रभान और उदयसिंह, योगेंद्र और शिवांस की खोज में लग गए. काफी म्हणत मस्सकत के बाद हमे एक कैंप में योगेंद्र मिला, जिस के शिर से खून निकल रहा था, डॉक्टर उसके इलाज में लगे हुए थे. मेने फ़ोन कर दिए, हेलीकॉप्टर इमर्जेन्सी सर्विस भी आ गयी, योगेंद्र और चन्द्रिका को नजदीकी सहर के बड़े अस्पताल में भेजदिया गया. मेने वह शिवांस की बहोत खोज की पर वो नहीं मिला. (ये सब कहते हुए सुखदेवजी की आँखों में भी ासु बह रहे थे, ासु तो मेरी भी आँखों से बह रहे थे, वह पड़े जग से मेने पानी निकला और उन्हें दिया)

बिना : सम्भालिये अपने आप को अंकल. (उन्होंने पानी पिया, पर वो कुछ बोल नहीं रहे थे, मेने भी कुछ नहीं पूछा, उन्हें सँभालने का मौका दिया)

सुखदेवजी : मेने शिवांस को बहोत ढूंढा, कई लोग लापता थे, कई लोगो की लाशे मिली थी, जिस तरह से चन्द्रिका ने उदयसिंह पर इल्जाम लगाए थे मेने पुलिस कम्प्लेन भी कर दी, उदयसिंह की पूछताछ भी हुई, पर कोई नतीजा नहीं निकला. एक और चन्द्रिका और योगेंद्र भी थे, मुझे उनको भी संभालना था, योगेंद्र का ऑपरेशन हुआ था, वो कोमा में चला गया था, चन्द्रिका अपने होश खो चुकी थी. हमने टीवी और अखबारों में भी इस्तिहार दिए, पर शिवांस का कोई भी पता नहीं चला. बड़े बड़े लोग लापता हो गए थे वह एक छोटे से बच्चे के बचने की कोई उम्मीद नहीं थी. मेरे लिए योगेंद्र और चन्द्रिका इम्पोर्टेन्ट थे, उनकी सेहत मेरे लिए ज्यादा मायने रखती थी, तो में उदयसिंह के केस पर ध्यान नहीं दे पाया, साबुत न होने के कारन उसपर कोई इल्जाम साबित नहीं हुआ, और सच कहु तो मुझे भी पता नहीं था की वह क्या हुआ तो में भी क्या कर सकता था. पर इतने सालो के तजुर्बे से मुझे लगता है की ये सब उसीक का किया धरा है, उसने वह का सारा कारोबार हथिया लिया था, पता नहीं कब उसने योगेंद्र से पेपर सिग्न करवा लिए थे, जहा जहा उनकी हिस्सेदारी थी वह सब के लिए उन्होंने पावर ऑफ़ अटॉर्नी पे सिग्न करवलिये थे. जब मेने उस से पूछा तो उन्होंने बताया की ये सब योगेंद्र ने hi किया है. वैसे भी मेरे पास कोई साबुत तो थे नहीं, और कभी सपने में भी नहीं सोचा था की ऐसा कुछ हो जायेगा, तो मुझे कुछ पता नहीं था उस बारे में.

बिना : आप को क्या लगता है, क्या शिवांस बच सकता है?

सुखदेवजी : मुझे नहीं लगता, अगर ऐसा हुआ तो ये चमत्कार hi होगा.

बिना : मेने उसकी फोटो के लिए कहा था?

सुखदेवजी : दिखता हु. (कहते हुए वो खड़े हुए और अंदर चले गए, वो जैसे hi अंदर पहुंचे उनकी पत्नी ऐश्वर्या अंदर बैठी mili)Yaha क्यों बैठी हो, तुम जूस लेने आयी थी?

ऐश्वर्या : क्या आपने सबकुछ बता दिया? मेरा मतलब है प्रकृति के बारे में?

सुखदेवजी : नहीं, पर उसे कभी न कभी पता चल hi जायेगा, वो समझदार है.

ऐश्वर्या : वो जो भी हो, पर आप सामने से कुछ मात बताना.

सुखदेवजी : मुझे पता है, तुम जूस लेकर जाओ, में एल्बम ले कर आता हु.

ऐश्वर्या : कोनसा एल्बम?

सुखदेवजी : तुम कुछ ज्यादा hi चिंता कर रही हो, वो मेरी भी बेटी है, मुझे उसका ख्याल है, तुम जाओ में आता हु.

ऐश्वर्या : (उसके चेहरे पर चिंता दिख रही थी, मायूस कदमो से वो अंदर गयी और जूस ले कर वो बहार आ गयी, बिना भी किसी गहरी सोच में डूबी हुई thi)Lo बेटी. (जूस देते हुए वो बोली और फिर बेथ गयी, बिना फिर सोच में गम जूस के सिप पिने लगी, उसको इंतजार था तो शिवांस के फोटो का, उसका दिल धक् धक् कर रहा था, क्या वो शिव hi होगा?)
 
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