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आज शिव नहीं आया था तो जहान्वी भी ज्यादा देर साइट पर नहीं रुकी, पिंकेश ने भी रिपोर्ट दिखाए पर उसको कोई इंट्रेस्ट नहीं था और तबियत का बहाना कर के वो वापस लौट गयी थी. करुणा ने भी उसको फ़ोन किया था तो उसको भी यही कह दिया था की उसका मान नहीं है तो मिलने नहीं गयी. वो बेचैन हो रही थी, और उसकी वजह से थोड़ा चीड़ भी रही थी. न उसने ठीक से खाना खाया न किसी से बात की. उसकी माँ ने भी पूछा था पर उसने बात को ताल दिया. रात को भी वो अपने बिस्तर पर करवाते बदल रही थी. जब उस से रहा नहीं गया तो अपने पुरे कपडे उतर दिए उसने,

पुरे बदन में एक अजीब सी सरसराहट महसूस हो रही थी, अपने आप hi वो अपने बदन से खेल रही थी, इस वक़्त थी उसको शिव की याद hi आ रही थी.
जहान्वी : कहा हो शिव? क्यों मुझसे दूर जा रहे हो? (कहते हुए उसने अपने निप्पल को मरोड़ diya)Shhhh आए जावा शिव, शह्ह्ह्ह तुम्हे जो चाहिए वो दूंगी यार, जो करना है कर लेना, बस आ जाओ. ऐसी तड़प तो मेने कभी महसूस नहीं की है शिव, शहहहहह (कहते हुए उसने अपनी योनि को छुआ तो वह योनि से रास निकल रहा था, उसने एक ऊँगली अपनी छूट में दाल di)Shhhhh शीइइइइव, में बुरी हु शिव शह्ह्ह्हह्ह पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही यार, तुम क्या सोचोगे मेरे बारे में शह्ह्ह्हह्ह कस में अच्छी लड़की होती शह्ह्हह्ह्ह्ह (वो जैसे जैसे अपनी छूट में ऊँगली कर रही थी उसकी छूट से रास और निकल रहा था)

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अब जो भी हो शह्ह्ह्हह्ह में अब और नहीं रुक शक्ति शह्ह्हह्ह्ह्ह, तुम चाहे जो भी सोचो शहहहहह पर मुझे अपना लो सीईव शहहहहह. में बहोत गन्दी हु शह्ह्हह्ह्ह्ह पर क्या करू शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह आए जाओ न शह्ह्हह्ह्ह्ह. (वो जल्द hi झाड़ gayi)Shhhhhh shiiiiiiiiiiiiv. (वो वैसे hi लेती रही और कब नींद आ गयी उसको पता hi नहीं चला)

वही दूसरी तरफ बिना भी अपने बिस्तर पर करवाते बदल रही थी, अपने पति के साथ रहने के लिए उसने सब किआ था, उसने पूरी नंगी हो कर अपने पति का साथ दिया था, और पहले के मुकाबले उसके पति ने भी उसके बदन से खेला था और सम्भोग भी किआ था, पर वो संतुस्ट न हो पायी थी. सम्भोग के बाद जिग्नेश तो सो गया था पर बिना को नींद नहीं आ रही थी. उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी की वो शिव के पास जाये, पर जब उस से रहा न गया तो आखिर वो वह पहुंच hi गयी, उसने सिर्फ गाउन पहना हुआ था. जब वो शिव के कमरे के पास पहुंची तो उसको हलकी हलकी सिस्किअ सुनाई दी, वो समाज गयी की अंदर क्या चल रहा है. उसको शिव पर भी गुस्सा आया की यहाँ वो तड़प रही है और वो किसी और के साथ है. पर फिर वो सोचने लगी की कोण है उसके साथ, ममतादिदी या फिर स्वर्णादिदी, उसने कान लगा कर सुन ने का प्रयास किया पर स्वर बहोत धीमा था, उसने आस पास देखा, पुरे घर में सन्नाटा छाया हुआ था, उसने हिम्मत कर के के होल से देखा, लड़की का नंगा बदन दिख रहा था उसे, शिव निचे लेता था और औरत उसके ऊपर थी, उसकी योनि में उसका वो बड़ा लुंड अंदर बहार हो रहा था, ये देख कर बिना की हालत ख़राब होने लगी, उसके बदन में भी चीटिया रेंगने लगी. देखते हुए उसका हाथ कब अपनी योनि पर चला गया उसको भी पता नहीं चला. तभी वो औरत हटी और निचे लेट गयी, उसने देखा की ये स्वर्ण थी, वैसे तो उसको जतका नहीं लग्न चाहिए था पर उसको यकीं नहीं हो रहा था की इतना कुछ कहने के बाद भी वो उसके साथ है. रिश्ते में वो दोनों भाई बहन लगते थे अगर उसका शक सही है तो, और ये बात स्वर्ण भी जानती थी फिर भी वो अभी उसके साथ थी. उनकी कामलीला देख कर वो भी काफी गर्म हो गयी थी, आखिर जब उसने देखा की उनका हो गया तो वो आहिस्ता से अपने कमरे में लौट गयी थी, वह जा कर भी उसको चैन नहीं था, वो करवाते बदल रही थी, उसने देखा कहि उसका पति आराम से सोया हुआ है. उसने जिग्नेश को पुकारा भी पर वो बेसुध सोया हुआ था. आधे घंटे बाद भी जब उसको नींद नहीं आयी तो फिर वो उठी और शिव के रूम की और चल पड़ी, क्यों वो तो उसको भी नहीं पता था. इतने समय से वो शिव से दुरी बनाये हुए थी, और उसको ये सही hi लग रहा था, आखिर वो कैसे अपने देवर के साथ ये सब कर सकती थी, पर फिर ममता और स्वर्ण का ख्याल आता था, जब वो लोग रह रही है तो में क्यों नहीं रह सकती. यही सब सोचते हुए वो शिव के दरवाजे के बहार पहुंच गयी, वो वह कड़ी कड़ी सोच hi रही थी की दरवाजा खुला, शिव ने उसको देखा, वो कुछ समझती उस से पहले hi शिव ने पकड़ कर उसको रूम में खिंच लिया, और दरवाजा बंद कर दिया. अचानक ये सब हो गया था, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, वो शिव को डरते हुए देखने लगी, दर शिव से नहीं था पर परिस्थितिओ से था. शिव उसके होठो की और बढ़ा तो उसने मुँह घुमा लिया.
बिना : (हलकी नाराजगी se)Kya कर रहे हो? (धीरे से वो बोली)
शिव : (मेने किश नहीं की बस उनको dekha)Itni रात को यहाँ क्या कर रही हो आप?
बिना : में... में वोऊ... (वो चुप हो गयी क्यों की उसके पास कोई तर्क नहीं tha)(Me समाज रहा था की वो क्यों आयी है, तो में फिर झुकने लगा, तो उन्होंने मेरी छाती पर हाथ रख कर मुझे roka)Nahi.
शिव : क्यों?
बिना : जाओ दीदी के साथ hi रहो. (उसने जलन के मरे कहा)
शिव : (में muskuraya)To आप hi आयी थी पहले? (उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, बस मुझे देखती रही) अगर दूर hi रहना है तो फिर क्यों चक्कर लगा रही हो? (बिना कुछ नहीं boli)(Me फिर उनके होठो की और झुकने लगा, वो मुझे रोक रही थी पर में रुका नहीं, उन्होंने मुँह घुमा लिया, मेने उनके गाल पर किश करना सुरूर कर diya)(Beena बेचैन हो उठी, वो खुद चाहती थी पर फिर भी एक झिझक थी)
बिना : कोई आ जायेगा शिव. (उन्होंने धीमी आवाज में कहा, पर में रुका नहीं, में उनके गाल और गर्दन पर चाटने laga)Kya कर रहे हो (उनकी सांसे भरी हो रही थी, वो मुझे धकेल रही थी पर उनकेहाथो में दम नहीं था, में दो हाथ निचे ले गया और उनके कूल्हों को थम लिया और सहलाने laga)Shhhhh शिईयिव मुझे जाना है शहहहहह वो जाग जायेंगे. (अब धकेलने की बजाये वो शिव के हाथ को दबा रही थी, क्यों की वो खुद गरम हो रही थी, पर उसको दार लग रहा था, पर जैसे जैसे शिव उसके कूल्हों को मसल रहा था वो पिघलती जा रही थी, पर फिर भी आपने आपको रोकने का प्रयास कर रही thi)Shhhh नहीं शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह मात करो शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (पर वो तो उसको जैसे सुन hi नहीं रहा था, वो उसका गाउन ऊपर उठाने laga)Shhh नहीं शीइइइइइइव (उसने रोकना चाहा पर शिव ने गाउन उठा दिया और उसकेनंगे कूल्हों को थम लिया और उसे दबाते हुए सहलाने लगा, वो अंदर से पूरी तरह नंगी hi thi)(Unke प्रूस्त कूल्हों को सहलाते hi मेरा लुंड पूरी औकात में आ गया था, दीवाल से चिपकाये उनके गले को चूमते और चाट ते में लुंड को उनकी योनि पर दबाने laga)(Apani योनि पर लुंड का एहसास होते hi बिना शीयर उठी, उसकी आंखे भी बंद हो gayi)Shhhhhh शीइइइइव मात कर न शह्ह्हह्ह्ह्ह. (वो बोल तो रही थी पर उसको रोकना नहीं चाहती थी, उसके हाथ भी शिव की बाह को सहलाने लगे the)Shhhhh सुन न शह्ह्हह्ह्ह्ह, वो जाग जायेंगे शहहहहह.
शिव : आप क्यों आयी थी फिर?
बिना : शहहह नहीं पता शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (शिव जो की अभी सिर्फ अंडरवियर में था, वो उसकी छाती पर हाथ फिरने lagi)Ruk जा न सीईव शह्ह्ह्हह्ह. (उसने बेबसी से कहा पर वो काफी गर्म हो चुकी थी, शिव भी उसकी सुन नहीं रहा था, उसने उसको बहो में उठा लिया और बीएड पर लेता दिया, वो संकुचन लगी और जैसे अपने आपको छुपाने lagi)Nahi शिईयिव प्लीज. (मेने उनकी आँखों में देखा पर लगा नहीं की वो जाना चाहती है, तो मेने उनकी बात का ध्यान नहीं दिया और बिस्तर पर चढ़ गया और अपनी अंडरवियर उतर दी, मेरा लुंड बहार झूलने laga)(Beena की भी नजर उसके लुंड पर पड़ी, वो फिर सिमटने लगी और अपने गाउन को सही कर के खुद को छुपाने lagi)Nahi शीइइइइइव. (में जनता था की वो यहाँ किस लिए आयी थी और काफी समय से वो मुझसे दूर रहने की कोशिस कर रही थी, पर में जनता था की वो क्या चाहती है तो मेने उनके दोनों पेअर पकड़ कर मेरी और खिंचा, और गाउन को कमर तक ऊपर कर दिया, वो नंगी hi थी जो में देख चूका था, उनकी गीली छूट मेरे सामने थी, उनके भी बाल काम hi थे. वो अपनी छूट छुपाने का प्रयास करने लगी तो मेने उनके हाथ पकड़ कर हटा दिए और झङगे पकड़ कर उनकी योनि को मुँह में भर liya)Shhhhhhhh Shiiiiiiiiiiiv

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(उन्होंने मेरे शिव को धकेलने का प्रयास किआ पर में उनकी छूट के रास को चूसने और चाटने laga)Shhhhhhh शीइइइइइइव शहहहहह (में बड़ी सिद्दत से छूट को चाट रहा था, वो सिस्किअ ले रही थी, कभी कभी उन्हें याद आ जाता तो वो मुझे धकेलती पर में उनकी छूट को चाट ता रहा, अब वो मेरे शिर को सहलाने लगी थी और आंखे बंद किये सिसकिया ले रही थी, मेने गाउन को और ऊपर किआ तो उन्होंने अपने कूल्हे उचक कर मुझे सहायता की. में थोड़ ऊपर हुआ और उनके गाउन को पूरा निकल दिया, अब वो पूरी नंगी hi थी. वो मुझे देख रही थी पर मेने ध्यान नहीं दिया और उनके ऊपर हो कर फिर से उनकी छूट को चाटने लगा, हम 69 में थे, पर मेरा लुंड थोड़ा ऊपर था) (शिव उसकी छूट को चूस और चाट रहा था, और उसका लुंड उसकी आँखों के सामने था, वो उसे ललचायी नजरो से देख रही थी, पर छू नहीं रही थी, पर जैसे जैसे शिव उसकी छूट को चाट रहा था उसने भी शर्म छोड़ना hi बेहतर समजा, कपट हाथो से उसने लुंड पकड़ लिया और अपना शिव थोड़ा ऊपर कर के लुंड को मुँह में ले hi लिया, उसको बहोत मज़ा आ रहा था, न जाने कब से वो तड़प रही थी, उसने खुद को बहोत रोका था संजय था पर वो बेबस हो गयी थी, वो लुंड को अच्छे से चूसने लगी, अपना शिर ऊपर निचे करते हुए लुंड को अपने मुँह की शेर करवाने लगी)

(में भी खुस था की आखिर वो मान गयी थी, थोड़ी देर बाद में उठा और उनके पैरो के बिछ आ गया, हमारी नज़ारे मिली तो उन्होंने मुँह फेर लिया, मेने लुंड छूट से सत्ता दिया था और में उनके ऊपर झुक गया, वो दूसरी और देख रही थी)
शिव : मेरी और देखिये (वो कुछ न बोली न dekha)Meri और देखिये तो (मेने फिर कहा, उन्होंने हलकी नाराजगी से मुझे देखा, मेरा लुंड छूट से सत्ता हुआ था पर टोपा हम दोनों के पेट के बिच tha)Nahi चाहती की में ये करू? (वो कुछ नहीं बोली बस मुझे देखती रही, मेने उनके बाल को पीछे क्या जो गाल पर आ गए the)Kahiye न, आप सच में नहीं चाहती की में ये करू? (वो फिर भी कुछ नहीं बोली, बस मुझे देख रही थी, मुझे लगा की वो नहीं चाहती है, तो मेने नज़ारे झुकाई और उठने laga)(Shiv को उठता देख बिना ने तुरंत उसकी कमर थम ली और उसको रोक liya)(Mene फिर उनको देखा, वो कुछ नहीं बोली बस मुझे देखती rahi)Akhir आप चाहती क्या है, न मुझे कुछ करने दे रही है न उठने दे रही है.
बिना : तुम बहोत गंदे हो. (जूठी नाराजगी से वो बोली, में उन्हें देख रहा था और समझने की कोशिस कर रहा था, वो भी ये समाज रही थी की मेरे मान में क्या चल रहा है) ऐसे hi में चक्कर नहीं काट रही थी. (वो हल्का सा मुस्कुराते हुए, शरमाते हुए boli)(Mere चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी, और में झुक गया और उनके होठो को चूसने लगा, वो भी मुझसे लिपट गयी और मुझे सामने से किश करने लगी,

मेने उनके स्तन को मसाला, उन्होंने मुँह chhudaya)Shhhhhh आराम se(Unhone मुझे डाटा, में मुस्कुराया और उनके स्तन को हलके से मसलते हुए निप्पल को चूसने लगा और लुंड को छूट पर रगड़ने laga)Shhhhhhh शीइइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह बहोत तड़प रही थी शह्ह्हह्ह्ह्ह, क्यों दूर नहीं रह सकती यार शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.
शिव : (निप्पल निकल kar)Rehna क्यों है दूर?
बिना : तो क्या करू, अपने देवर के साथ ये सब karu(Unhone बे बेबसी से कहा)
शिव : मुझे नहीं लगता ऐसा.
बिना : तुम नहीं समझोगे शिव, तुम कुछ नहीं जानते, पर मुझे पूरा यकीं है की तुम hi शिवांस हो, और ऐसे में में तुम्हारे साथ रह के पाप कर रही हु. (उन्होंने बेबसी से कहा) और दूर भी नहीं रह प् रही हु.

शिव : भूल जाओ सब, बस इतना याद रक्खो की में शिव हु, बस शिव. वो अंश था और में पूरा शिव हु. (कहते हुए मेने अपने लुंड का टोपा छूट पर लगाया और हलके से दबा दिया)
बिना : (अपनी छूट में घुसते लुंड को महसूस कर ke)Shhhhhhh Shiiiiiiiiiiiv. (मेने आधे से ज्यादा लुंड आहिस्ता से छूट में उतर दिया, वो पहले से hi बहोत गीली थी, पर कसावट बरक़रार थी, छूट ने भी मेरे लुंड का स्वागत किया और लुंड से लिपट गयी, में उनके होठो को चूसने लगा, वो भी मेरी पीठ को सहलाते हुए मुझे किश करने लगी, थोड़ी देर बाद में थोड़ा ऊपर हुआ और लुंड अंदर बहार करना सुरु कर दिया, वो नशीली आँखों से मुझे देख रही thi)Shhhhh अह्ह्ह्हह श अह्ह्ह्ह शहहहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह.
शिव : क्यों इतने दिनों से भाग रही थी? (वो मुझे रोनी सूरत से देख रही थी, वो पूरी तरह लुंड को महसूस कर रही थी, में धक्के लगा रहा था वो मचल रही thi)Iske लिए hi आयी थी न, बताओ?
बिना : हा शहहहहह मेने कोशिस की सीईव शह्ह्ह्हह्ह पर नहीं रह पायी शह्ह्हह्ह्ह्ह (में झुका और उनके निप्पल को चूसने laga)Shhhhhh अह्ह्ह्हह पागल कर दिया है तुमने मुझे शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह क्या करू कुछ समाज नहीं आ रहा शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह.
शिव : तो फिर दूर क्यों भाग रही हो?
बिना : ये ठीक नहीं है शिईयिव शहहहहह अह्ह्ह्हह तुम समझते क्यों नहीं शहहहहह ेयीईइ शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह (छूट में आ जा रहा लुंड उसको बहोत अच्छा लग रहा था, ऐसा सिर्फ वो शिव के साथ hi महसूस करती थी, वो अपनी छूट कास रही thi)Ahhhhh शह्ह्ह्ह ऐसे hi करो शिईयिव शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह शहहहहह करते रहो शह्ह्ह्हह्ह बहोत अच्छा लग रहा है शहहहहह अह्ह्ह्हह ऐसे hi शहहहहह, करते रहो शहहहहह अह्ह्ह्हह शह्ह्हह्ह्ह्ह. (थोड़ी देर ये चलता रहा, और वो झड़ने lagi)Shhhhhh अह्ह्ह्हह शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह में गयी यार शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह शह्ह्ह्हह्ह. (कितने दिनों से जमा पानी बहने लगा, उसने शिव के कंधे पर दन्त गधा diye)Ummmmmm , फूऊऊऊ फूऊ उम्मम्मम. (में रुक गया, थोड़ी देर बाद में उठा और लुंड बहार निकला, वो मुझे देखने लगी)
शिव : घूम जाओ. (बिना समाज गयी और अपने घुटनो के बल हो गयी और शिर निचे बिस्तर पर टिका diya)(Unki चौड़ी गांड मेरे सामने थी, छूट पूरी गीली हो चुकी थी, और उसमे से रस निचे टपक रहा था, गांड का छेड़ भी पूरा गिला हो चूका था, में झुका और गांड के छेड़ को चाटने laga)(Beena तड़पने लगी, जैसे जैसे शिव उसके गांड के छेड़ को जीभ से कुरेद रहा था वो सिस्किअ ले रही थी, उसका छेड़ खुल बंद हो रहा था, कूल्हों पर रक्खे शिव के हाथ को उसने सख्ती से पकड़ liya)Shhhhh शिईयिव shhhhhhhh(Wo अपनी कमर हिलने लगी (मेने छूट केहोठो को फैलाया और जीभ अंदर दाल di)Shhhhh शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह शहीइइइइइइ (वो बहोत गर्म सिस्किअ ले रही थी, उनकी सिस्किअ सुन मेरा लुंड कूद रहा था, में छूट को फैला कर अंदर के लाल भाग को अच्छे से चूस और चाट रहा tha)Shhhhh शीइइइइव शह्ह्ह्ह पागल बना दिया है तुमने शहहहहह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेने अंगूठे को छूट रास से गिला किया और गांड के छेड़ पर दबाने laga)(Beena समाज रही थी पर वो उत्तेजना में थी और उसको ये अनुभव भी अच्छा लग रहा था, शिव ने जैसे hi जोर डाला अंगूठा गांड के छेड़ को फैला कर अंदर घुस gaya)Shhhhhahhhhhh शह्ह्ह्ह (उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया था, पर में न रुका, गांड के छेड़ के अंदर बहोत गर्मी थी, मेरे अंगूठे पर वो महसूस हो रही थी, में ऊपर हुआ और लुंड को फिर छूट के छेड़ पर लगाया और अंदर उतरने laga)(Gaand में अंगूठा था और छूट में लुंड, वो सिसक उठी)
शहहहहह शीइइइइइव अह्ह्ह्हह्हह. (वो झटके खा रही थी, दोनों छेड़ में ऐसी सरसराहट उस से बर्दास्त नहीं हो रही थी, उसने आंखे बंद कर ली और शिव को करने दिया जो वो कर रहा था, लुंड अंदर बहार हो रहा था और साथ में अंगूठा भी अंदर बहार हो रहा था, ऐसा अनुभव वो पहली बार महसूस कर रही थी)

शह्ह्ह्ह शीइइइइव शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह (एक हाथ से उसकी कमर पकड़ कर शिव उसको छोड़ रहा था, और उसको बहोर मज़ा आ रहा tha)Shhhhh शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह शह्ह्ह्हह्ह. (लगातार चुदाई से उसका पानी निचे गिर रहा था, लुंड पूरा गिला हो गया था, थोड़ी देर ऐसे hi चलता रहा, फिर शिव ने लुंड निकल लिया, वो बिस्तर पर उलटी लेट गयी और हांफ ने लगी, शिव उसके कूल्हों को मसल रहा था और उसे चाट रहा था, उसका ऐसा करना उसे बेहद अच्छा लग रहा था, थोड़ी देर बाद शिव ने अपना लुंड उसके कूल्हों के बिच लगाया और वह घिसने लगा, लुंड उसके गांड के छेड़ पर रगड़ रहा था, वो आंखे बंद किये लेती रही, वो उसको किसी बात के लिए रोक नहीं रही थी, जब लुंड उसके गांड के छेड़ पर रुक गया तो वो सिहर उठी, शिव ने दबाव बढ़ाया तो उसने शिव के हाथ को पकड़ liya)Shiiiiiiiiiv. (में ज्यादा छूट को छोड़ नहीं सकता था, तो मेरे लिए यही रास्ता बचा था, मेने थोड़ा और दबाव बढ़ाया तो लुंड का टोपा गांड के छेड़ को फैलते हुए अंदर घुस गया)

(बिना को लगा की छेड़ अभी फैट jayega)Oooo माआआ shhhhhhhhhh. (में रुक गया, गांड का छेड़ एकदम टाइट हो गया था और मेरे लुंड का गाला घोट रहा tha)Shhhhh शीइइइइइव shhhhhhhhhh.(Beena की सकल रोने जैसी हो गयी थी, पर शिव रुका हुआ था तो उसको रहत मिली, थोड़ी देर बाद वो थोड़ी संभल गयी और उसने अपने छेड़ को ढीला छोड़ दिया और शांति से लेती rahi)(Mene लुंड को वापस खिंच लिया, छेड़ ो आकर में खुला था, मेने वह ढेर सारा थूक लगाया, और लुंड पर भी थूक लगाया, और फिर लुंड को गांड पर लगाया और दबाया तो लुंड फिर से अंदर चला gaya)Ahhhhh शह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेने लुंड को थोड़ा दबाया तो वो अंदर जाने लगा, मेने देखा की मैडम ने कास के चद्दर पकड़ ली थी, में फिर रुक गया, में कोई जल्द बजी नहीं करना चाहता था, में लुंड को थोड़ा आगे पीछे करने लगा, लुंड दो तीन इंच hi अंदर था)
(बिना अपनी गांड के छेड़ में लुंड महसूस कर रही थी, उसका छेड़ फटने की कगार पर था, उसको दर्द भी हो रहा था पर वो उसको सेहन कर रही थी, थोड़ी देर लुंड अंदर बहार होता रहा, वो थोड़ी रिलैक्स होने लगी, इस नए अनुभव से वो और उत्तेजित हो रही थी, उसने ये सब सुना था पर आज उसके साथ ये हो रहा tha)(Me थोड़ी देर करता रहा पर मुझे आगे बढ़ने में थोड़ा खतरा लग रहा था, क्यों की मेरा लुंड अब पीछे की और मोटा था तो मेने रिस्क नहीं लिया, मुझे अच्छा लग रहा था पर मेने लुंड वापस निकल लिया, मेने देखा तो गांड के छेड़ के अंदर की मासपेशिया भी दिख रही थी, मेने मैडम को सीधा कर दिया, वो सीधी हो गयी, में उनके ऊपर हो आ गया और उन्हें देखने लगा, वो भी मुझे देख रही thi)Kya हुआ?
शिव : कुछ नहीं. (मेने मुस्कुरा के कहा)
बिना : (उसको बोलते हुए भी शर्म आ रही thi)Ruk क्यों गए फिर?
शिव : ऐसे hi. (उनके गाल पर से बाल हटते हुए, जो की पशीने की वजह से चिपक गए थे) दर्द हुआ?

बिना : (मुस्कुरा ke)Hua, पर इतना भी नहीं था. अगर मान है तो वह कर शक्ति हो. (उसने शरमाते हुए कहा)
शिव : अपने घर पर करेंगे. (मेने मुस्कुरा के कहा तो वो भी मुस्कुरायी)
बिना : (शरमाते hue)Aage कर लो.
शिव : रहने दीजिये.
बिना : क्यों? (उसको समाज नहीं आया)
शिव : ज्यादा करना ठीक नहीं है.
बिना : ऐसा क्यों कह रहे हो, दीदी के साथ तो पूरा किया था न. (मेने आंखे चौड़ी कर के देखा तो वो शर्मा गयी)
शिव : तो सब देख रही थी आप? (वो कुछ न बोली बस शर्मा गयी, मेने उनके होठो को चुम लिया, थोड़ी देर बाद में उनको देखने लगा, वो फिर बोली)
बिना : करो न शिव, ऐसा क्यों कर रहे हो, कुछ नहीं होगा. मुझे वो सब अपने अंदर महसूस करना है (उन्होंने शरमाते हुए कहा, मेरा लुंड फिर कूदने लगा, वो शर्मा गयी, मेने उनके पेअर फैलाये और पैरो के बिच बेथ गया, और छूट को देखा, वो शरमाते हुए मुझे देखने लगी, मेने लुंड फिर से छूट पर लगाया और अंदर उतर दिया, और पोसिटिव ले कर फिर से छोड़ने laga)Shhhhh शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह. (वो कभी आंखे बंद करती तो कभी मुझे देखती, उनके चेहरे पर कामुकता छलक रही थी)
शिव : अच्छा लग रहा है?
बिना : शह्ह्ह्ह हआ शहहहहह तुम समाज नहीं पाओगे सीईव शह्ह्ह्ह कितना मज़ा आता है शहहहहह. मेने कैसे अपने आपको रोका है ये में hi जानती हु, शहहहहह ऐसे hi करते रहो शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह. (मेने उनके उछाल कूद कर रहे स्तन को पकड़ लिया और मसलने लगा, वो फिर से muskurayi)Shhhhh तुम्हे में अच्छी लगती हु न शिव शह्ह्ह्ह (में बस muskuraya)Kaho न शिव में अच्छी लगती हु न. (में मुस्कुराते हुए उनके ऊपर हो गया और उनके होठो को चूसने लगा, फिर कहा)
शिव : है, बहोत अच्छी लगती हो.
बिना : (वो धक्को से ऊपर निचे हो रही thi)Muje भी तुम बहोत अच्छे लगते हो शिव शहहह, मुझे मत छोड़ना कभी शह्ह्ह्हह्ह.
शिव : आपको ऐसा क्यों लगता है.
बिना : बस ऐसे hi कह रही हु, (वो धक्को से ऊपर निचे हो रही thi)Muje ऐसे hi प्यार करते रहना शहहह.

शिव : (मुस्कुराते hue)Ise प्यार नहीं चुदाई कहते है.
बिना : गंदे कही के (कहते हुए वो मुस्कुरायी, फिर मेरी आँखों में देखते hue)Ye प्यार है शिव, सिर्फ प्यार (उन्होंने अपने पेअर मेरी कमर में लपेट liye)Bhar दो मुझे अपने प्यार से शह्ह्ह्हह्ह (उनकी बाटे बहोत अच्छी थी, वो भी बहोत अच्छी थी, और उनकी छूट में भी बहोत अच्छा लग रहा था, में भी झड़ने के करीब पहुंच रहा था)
शिव : मेरा भी निकलने वाला है. (मेने धक्के लगते हुए कहा)

बिना : अंदर hi डालना.
शिव : (मुस्कुराते hue)Ander कहा?
बिना : (वो शर्मा गयी, पर फिर मुझे अपनी और खींचा और मेरे कान में धीरे से boli)Meri छूट में. (मेने उन्हें देखा तो वो शर्मा गयी, में भी मुस्कुराया, मेरे धक्के तेज हो गए the)Shhhhhh में भी झाड़नेवाली हु शिव शहहहहह (वो मुझे अपनी और खिंच कर मेरे बालो को नोचने lagi)Shhhhhh शीइइइइव शहहह अह्ह्ह्हह भर दो मुझे शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह

(लगातार धक्को से वो झड़ने लगी और उनकी छूट कास गयी, मेने भी अपना लावा छोड़ diya)Shhhhhh शीइइइइइइव शहहहहह मेरे शिईयिव शह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेरे धक्के चले जब तक मेरा वीर्य आना रुक न गया, थोड़ी देर हम ऐसे hi चिपके रहे, थोड़ी देर बाद में उठने लगा, उन्होंने मुझे कास के पकड़ liya)Abhi नहीं शिव, ऐसे hi रहो. (उन्होंने मुझे उठने नहीं दिया, में भी वैसे hi रहा, फिर थोड़ी देर बाद उन्होंनेअपनी पकड़ ढीली की, में उठा और लुंड बहार निकला तो वीर्य भी निकलने laga)Shhhhhhhh (उन्होंने आंखे बंद कर ली, में उनके चेहरे की खुसी देख रहा था, उन्होंने मुझे देखा और शर्मा गयी, और चद्दर खींच कर अपने आपको ढकने लगी, में बस मुस्कुराया, थोड़ी देर बाद वो बेथ गयी, उन्होंने घडी dekhi)Baap रे, तीन बज गए. (कहते हुए वो अपने गाउन को लेने लगी, और फिर उसे पहन लिया, में वैसे hi बैठा उन्हें देख रहा था, वो कड़ी होने लगी तो थोड़ी karahi)Ahhhhh.
शिव : क्या हुआ (चिंता से)
बिना : (मुस्कुराते हुए शर्मा gayi)Kuchh नहीं हुआ. सो जाओ. (कहते हुए वो कड़ी हो गयी, में भी खड़ा हो गया, मुझे ऐसे नंगा खड़ा देख वो फिर शर्मा gayi)Kapade तो पहन लो.
शिव : नहीं पहन ने (कहते हुए मेने उन्हें अपनी और खिंचा तो वो मुस्कुरा के मुझे देखने लगी)
बिना : मान नहीं भरा क्या? (में बस मुस्कुराया, तो वो शर्मा के boli)Ghar जा के जो करना है कर लेना. अभी मुझे जाने दो. (मेने झुक कर उनको किश किआ और वो मुस्कुराती हुई चली गयी, मेने बिस्तर को थोड़ा सही किया और चद्दर को उलट दिया और सो गया)
आदत के कारन सुबह जल्दी मेरी आंख खुल गयी, पर कसरत के लिए जाना नहीं था तो में लेता रहा की तभी दरवाजा खुला, मुझे याद आया की मेने दरवाजा बंद hi नहीं किया था. मेने आंखे बंद कर ली. और थोड़ी खोल कर देखा तो वो जूही थी.
जूही : (कमरे को देखते hue)In जनाब को मज़े है, कैसे फ़ैल कर सो रहे है. (उसने देखा की शिव ने चादर दाल रक्खी है पर लुंड वाला भाग उभरा हुआ है, उसका मान मचल गया, वो आहिस्ता से नजदीक आयी और शिव को देखने लगी, उसे लगा की वो सोया है तो उसने लुंड को हलके से पकड़ा और dabaya)Kas अभी में आपने घर में होती. (वो धीरे से बोली, में सुन hi रहा था तो मेने उसका हाथ पकड़ा और उसको बिस्तर पर लेता दिया, वो अभी अभी नाहा कर आयी थी, बाल भी गीले थे, वो एक डैम घबरा गयी थी)
शिव : तो क्या करती? (वो मुस्कुराने लगी)
जूही : तो जग रहे थे तुम.
शिव : बताओ न क्या करती? (उसके ऊपर आते हुए)
जूही : (नखरे se)Me क्यों बताऊ, उठो अभी. (मुझे धक्का देने लगी, में उसके होठो की और बढ़ा तो वो खिल खिला कर हसने लगी और अपना मुँह दूसरी और कर liya)Gande कही के, ब्रश तो करो. (मेने भी मुस्कुरा कर उसको छोड़ दिया, वो बिस्तर से कड़ी हो गयी और अपने आपको सही करने लगी, वो सलवार कमीज़ में थी)
शिव : अरे वह, तुम तो बहोत सुन्दर लग रही हो. (मेने तारीफ वाले अंदाज में कहा)
जूही : (थोड़ी इतराते hue)Wo तो में हु. (फिर जान बुज कर अपने बाल पीछे करने लगी और अपने ड्रेस को झटक कर ठीक करने लगी, चेहरे पर तो मुस्कान थी, फिर उसने शिव को देखा जो अभी भी उसे hi देख रहा tha,wo फिर muskurayi)Ab उठ भी जाओ, और नाहा लो, भाभी कह रही थी की हमें निकलना है.
शिव : में जल्दी से ब्रश कर के आता हु, तुम थोड़ी देर रुको.
जूही : (शरमाते hue)Me जा रही हु (फिर बाद badayi)Kaha है जरा भी ख्याल नहीं करता. (दरवाजे पर जा कर वो रुकी और पलट कर देखने लगी और मुस्कुरायी, में भी मुस्कुराया, मेने एक फ्लाइंग किश दी तो उसने भी सामने वैसे hi किआ और मुस्कुराती हुई चली गयी)
में भी बिस्तर से उठा और बाथरूम में चला गया. नाहा कर कमरे में कपडे पहन रहा था की दरवाजे पर दस्तक हुई.
शिव : खुला hi है. (दरवाजा खुला और स्वर्णाभाभी अंदर आयी, उन्हें देख कर में मुस्कुराया तो वो भी शरमाते हुए मुस्कुरायी)
स्वर्ण : दरवाजा हमेसा खुला hi रखते हो क्या?
शिव : अब मेरे पास ऐसा क्या है जो कोई लूट के ले जायेगा.
स्वर्ण : (मुस्कुरायी, फिर थोड़ा उदास हो kar)Mamta जाने को बोल रही है.
शिव : है, जूही ने बताया मुझे. (उनके चेहरे की उदासी dekh)Kya हुआ आपको?
स्वर्ण : कुछ नहीं. (में उनके नजदीक गया)
शिव : क्या हुआ? (मेने प्यार से पूछा)
स्वर्ण : यहाँ रुकते तो शायद फिर मिल सकती. (उदास हो कर बोली)
शिव : एक hi सहर में तो रहते है.
स्वर्ण : वह में एक बहु हु, बहोत नियम होते है वह. (उन्होंने उदास हो कर कहा)
शिव : मिल जायेंगे.
स्वर्ण : आओगे न तुम?
शिव : आऊंगा. (दरवाजा खुला था तो कोई रिस्क नहीं ले सकते the)Udas मात होइए, जोर मिलूंगा. (उन्होंने फीकी से मुस्कान दी, क्यों की वो भी जानती थी की इतना आसान नहीं tha)Chaliye. (जैसे hi मेने कहा वो मुज से लिपट गयी, मेने दरवाजे की और देखा, वह कोई नहीं था तो मेने भी उन्हें बहो में भर लिया, थोड़ी देर बाद हम लग हुए और बहार आ गए, और निचे चल दिए, वह सब नास्ते की टेबल पर बैठे हुए थे, में भी एक कुर्शी पर बेथ गया, स्वर्ण भी ममता के बाजु में बेथ गयी)
ममता : (धीमे se)Badi देर लगा दी? (ये सिर्फ स्वर्ण ने hi सुना था, वो शर्मा गयी, ममता भी मुस्कुरा दी, अभी नास्ता परोस hi रहे थे की अंकल और मैडम के पति भी वह आ गए, वो भी बेथ गए, पर अंकल मुझे देख रहे थे, मेने नमस्ते कहा वो बस मुस्कुराये, उन्होंने मुझे लगा जैसे वो मुझसे ध्यान हटाने की कोशिस कर रहे थे पर फिर भी वो देख रहे थे, मुझे थोड़ा अजीब लगा)
ममता : पापा, हम अभी थोड़ी देर में निकल रहे है.
चंद्रभान : क्यों?
ममता : Wo..unki तबियत भी देखनी है न, अभी पट्टी हटी नहीं है तो सब देखना पड़ता है, और इन्हे भी वापस जाना है. (उन्होंने फिर एक बार मेरी और देखा)
चंद्रभान : एक बाप पुछु (कुछ सोच कर वो बोले, उन्होंने मेरी और देख कर पूछा था तो में उनकी और देखने लगा) मुझे पता चला की तुम अनाथ हो (वो थोड़ी देर रुके, लगभग सब उनको hi देख रहे the)Tum वह, मेरा मतलब है की अनाथालय में कैसे आये? मेरा मतलब है की तुम्हारे maa-baap ... मतलब कुछ .... कोई jankari....(Wo बहोत नाप टोल कर पूछ रहे थे)
शिव : नहीं अंकल, मुझे कुछ पता नहीं, में वह आया तब शायद 3-4 साल का रहा होऊंगा. जो वह लिखा है उस हिसाब से मुझे किसी भिखारी महिला के पास से बरामद किया गया था, उसने बताया की उसको में किसी शराबी भिखारी के पास से मिला था, और कुछ पता नहीं है. (मेने उन्हें गौर से देखा, वो कुछ सोच रहे थे)
ममता : आप क्यों पूछ रहे है पापा? (ममता जानती थी पर वो अपने पापा के मुँह से कुछ सुन ने की उम्मीद कर रही थी)
चंद्रभान : (थोड़ा संभल kar)Nahi, में तो बस ऐसे hi पूछ रहा था. (वो बस ऐसे hi तो नहीं पूछ रहे थे, कुछ तो उनके मान में चल रहा था जो मुझे उनके चेहरे से पता चल रहा था) तुम बहु के सहर में रहते हो, मतलब यहाँ से बहोत दूर, वैसे किस सहर से मिले थे तुम.
शिव : जी, क्सक्सक्स सहर से.
चंद्रभान : ओह! वो भी काफी दूर है यहाँ से, और उस भिखारी से मेरा मतलब वो शराबी, उसको कहा से मिले थे?
शिव : वो तो पता नहीं. पुलिस ने भी छानबीन की थी पर कुछ पता नहीं चला.
चंद्रभान : हम्म्म्म. में तो बस ऐसे hi पूछ रहा था, तुम्हे बुरा तो नहीं लगा न?
शिव : नहीं अंकल, इसमें बुरा मन ने वाली क्या बात है.
स्वर्ण : चाचाजी, आप कुछ ढूंढने की कोशिस नहीं कर रहे न? (स्वर्ण को भी ये बात जान नई थी)
चंद्रभान : (वो कुछ भी ऐसा वैसा नहीं कहना चाहता था अभी, क्यों की ऐसा कुछ भी नहीं था जो ये बताये की ये योगेंद्र का लड़का है, तो उन्होंने संभल कर kaha)Are नहीं बीटा, में तो बस ऐसे hi पूछ रहा tha,aap लोग शांति से नास्ता करो, मेरा हो गया. (कहते हुए वो वह से चला गया)
निर्मलादेवी : (बात बदलते hue)Kuchh दिन रुक जाती बेटी (ममता की और देख कर)
ममता : मेने कहा न माँ, उनकी वजह से नहीं रुक सकती अभी, उनकी पट्टी खुलने के बाद आउंगी.
निर्मलादेवी : जैसी तेरी मर्जी.
स्वर्ण : में भी जाउंगी चची.
निर्मलादेवी : अरे तू तो रुक जा, बहु भी आज जाने को बोल रही है, सब एक साथ hi जाओगे क्या?
स्वर्ण : में तो एक दो दिन घर रुकूंगी चची, बाद में जाउंगी. अब इतने समय बाद आयी हु तो ऐसे hi तो नहीं जा सकती. (ममता की और देख kar)Jate हुए मुझे भी घर छोड़ देना तुम.
निर्मलादेवी : अब में क्या कहु इसमें (फिर बिना को आवाज देते हुए जो किचन में thi)Are बहु, तू भी बेथ जा, क्यों ीनता कर रही है, वो सब कर लेंगे. (बिना भी किचन से बहार aayi)Beth तू भी, वैसे भी कह रही थी की तबियत ठीक नहीं, ऐसे में ज्यादा काम नहीं करते बेटी. बरसो बाद तो इस घर में खुशखबरी आयी है, ख्याल रख अपना.
बिना : जी माजी.
ममता : (चिंतित स्वर me)Kya हुआ भाभी?
बिना : (सँभालते hue)Nahi कुछ नहीं, बस थोड़ा दर्द हो रहा है.
ममता : कहा दर्द हो रहा है, डॉक्टर के पास जाना है क्या?
बिना : नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है, वैसे भी आज जा रही हु तो कल डॉक्टर को दिखा दूंगी.
ममता : दिखा देना, लापरवाही मत करना. (बिना ने हां में इस्सर किआ, में भी उन्हें hi देख रहा था, उन्होंने भी एक बार मुझे देखा फिर नज़ारे झुका ली, चिंता मुझे भी हो रही थी)
नास्ता वास्ता कर के फिर हम सब वह से निकले. गाड़ी मेने hi चला ली थी. बाजु में जूही बैठी थी और पीछे मंतभाभी और स्वर्णाभाभी बेथ गयी. सब हमे छोड़ने आये थे, बिना मैडम ने मंतभाभी के कान में कुछ कहा, उन्होंने हां में शिर हिलाया, फिर हम वह से निकल गए. रस्ते में.
ममता : शिव (मेने पीछे मुद कर dekha)Apana मास्क पहन लो.
शिव : क्यों?
ममता : कहा न पहन लो. (उन्होंने मुझे जैसे दन्त दिया, मेने गाड़ी साइड में रोकी और मास्क पहन लिया, फिर हम वह से स्वर्णाभाभी के घर पहुंच गए, (जब वो लोगवाहा पहुंचे तो पृथ्वी घर से बहार निकल रहा था, और पीछे पद्मा भी थी, हमारी गाड़ी देख कर वो एक पल रुका फिर आगे बढ़ने लगा, तब तक हम वह पहुंच गए थे)
ममता : कैसे हो पृथ्वी?
पृथ्वी : (जाते जाते रुक गया, और थोड़े रूखे स्वर से bola)Thik हु. (कह कर वो निकल गया)
ममता : ये ऐसा क्यों कर रहा है? (जीप से उतारते हुए वो बोली)
स्वर्ण : मेरी वजह से, उसने एक बार भी मुझसे बात नहीं की है.
ममता : कैसे भाभी?
पद्मा : (फीकी मुस्कान के sath)Achchhi हु.
ममता : अब हम चलते है स्वर्ण.
पद्मा : ऐसे कैसे? आइये न अंदर.
ममता : नहीं, हमे निकलना है, बाद में आउंगी.
पद्मा : ऐसे कैसे दीदी, माजी ने सुना तो मुझे डाँटेगी.
ममता : ठीक है चलो, में मिल लेती हु उन्हें. (शिव और जूही ko)Tum यही बैठो में आयी. (पद्मा ने फिर शिव को देखा, पर बोली कुछ नहीं, वो लोग अंदर गए, पद्मा के बुलाने पर कामनादेवी भी आ गयी)
कामनादेवी : (ममता के पेअर छूने par)Jiti रहो, बहु क्या कह रही है, बहार से hi जा रही हो तुम, क्यों ये तुम्हारा घर नहीं hai(Unhone नाराजगी से कहा)
ममता : ऐसी बात नहीं है तेजी, वो घर भी जाना है और मेरी नानन्द को भी आज hi निकलना है तो जल्दी थी.
कामनादेवी : अरे इतनी भी क्या जल्दी है की दो पल बेथ भी नहीं सकती. कल तो भागादौड़ी में ठीक से बात भी नहीं कर पाए हम.
ममता : में फिर आउंगी, ताऊजी कहा है?
कामनादेवी : वो तो सुबह hi निकल गए थे. (ममता ने थोड़ी रहत की सास ली) कितने दिनों बाद आयी है, ऐसे hi थोड़ी न जा सकती है तू, मेने बादाम केसर का दूध बनवाया है.
ममता : नहीं तेजी, अभी नास्ता किया है.
कामनादेवी : तो दूध से क्या हो जायेगा, वैसे भी इस हालत में ये सब अच्छा hi होता है, जा अपनी नानन्द को भी बुला, वो क्या सोचेगी की कैसे रिस्तेदार है भाभी के जो घर में भी नहीं बुलाते, वैसे भी में कल मिल नहीं पायी उस से. (ममता के पास कोई जवाब नहीं था) जा बहु, बुला उन्हें अंदर.
पद्मा : जी माजी. (वो बहार आयी, वो दोनों कुछ बात कर रहे the)Suniye. (हम दोनों ने उनकी और dekha)Aap को अंदर बुला रहे है. (मेने चाबी निकली और में और जूही उनके पीछे पीछे अंदर आ gaye)(Ander वो सब कुछ बात कर रहे थे की हमारी आहत सुन कर सब ने हमे देखा)
ममता : ये मेरी नानन्द है जूही. (कामनादेवी ने अपनी आंखे चौड़ी कर के जूही को देखा, जूही ने झुक कर प्रणाम किआ, वो उस लड़के को भी देख रही थी)
कामनादेवी : जीती रहो बेटी, बहोत ऊँची हो tum(Unhone मुस्कुराते हुए कहा) और ये? (शिव की और इशारा कर के)
ममता : वो हमारे साथ आया है, हम दोनों अकेले आ रहे थे न तो ये साथ आया था.
कामनादेवी : ओह अच्छा, पर इसने मास्क क्यों पहन रक्खा है?
ममता : वो उसको फ्लू हुआ है न, इस लिए.
कामनादेवी : (मुस्कुराते hue)Are सीधे सीधे कह न की झुकाम हुआ है, इसमें क्या मास्क पहन न.
ममता : नहीं, वो झुकाम वैसे भी फ़ैल जाता है न तो किसी को न लगे इस लिए इसने पहन रक्खा है.
कामनादेवी : कोई बात नहीं, आओ बैठो, ये भी बहोत लम्बा है, क्यों स्वर्ण? (उसने मुस्कुराते हुए कहा) में तो सोचती थी की हमारे खंडन में hi सब लम्बे है, पर आज पता चला की उनसभी लम्बा कोई है. (पद्मा की और देख kar)Bahu, सबके लिए दूध तो मंगवाओ.
पद्मा : जी माजी. (वो अंदर चली गयी. हम सब बेथ गए थे, वो और ममता भाभी बाते कर रही थी, उनकी बहु किसी नौकरानी के हाथ में ट्रे पकड़वाए वह आयी और सबको दूध देने लगी, उन्होंने दूध देते हुए मेरी आँखों में देखा, मेने शिर हिलाया)
कामनादेवी : मास्क निकल दो बीटा, कुछ नहीं होता. (वैसे भी मुझे दूध पीना था तो मेने मास्क निकल दिया और दूध पिने laga)(Kamnadevi, उसको बोल कर फिर ममता से बाटे करने लगी थी, फिर अचानक उनकी निगाह शिव पर पड़ी, एक बार ऐसे hi देखा फिर पलट कर फिर से देखा और देखने लगी, और ध्यान से देखने लगी, ये देख कर ममता की सांसे बढ़ने लगी, उसका दिल धड़कने लगा, पद्मा ने भी अपनी सास को ऐसे आश्चर्य से देखते हुए देखा, कुछ देर ख़ामोशी छायी रही).
पद्मा : क्या हुआ माजी?
कामनादेवी : हहह... नहीं कुछ nahi...(Wo फिर खामोश हो गयी पर वो शिव को hi देख रही थी)
ममता : (सबने दूध पि लिया था, मेने फिर मास्क पहन liya)Ab हम चलते है तेजी.
कामनादेवी : हहह... हआ. (उसने अपने आपको sambhala)Ye कौन है ममता?
ममता :मेने बताया तो तेजी, ये हमारे साथ आया है, इसका नाम शिव है.
कामनादेवी : हआ, पर ये है कोण?
ममता : वो जूही का दोस्त है.
कामनादेवी : ओह!.
ममता : अच्छा तेजी हम चलते है.
कामनादेवी : हहह, हा. आते रहना बेटी. (हम वह से बहार निकल गए, जब तक हम वह से निकले वो मुझे hi देख रही थी, हम वह से निकल gaye)(Padma ने भी ये देखा था)
पद्मा : उस लड़के को आप ऐसे क्यों देख रही थी माजी?
कामनादेवी : नहीं... कुछ नाहीई.... (बात को बदलते hue)Kappu कहा है, निचे नहीं आयी.
पद्मा : वो आराम कर रही है. कह रही थी की शिर में दर्द है.
कामनादेवी : क्या हो गया है इस लड़की को भी.
स्वर्ण : क्या हुआ है उसे? (तीनो अंदर आ चुकी थी)
कामनादेवी : अब क्या बताऊ, तुम सबकी माँ बन ने की बात से उसके ससुरालवाले उसको तना दे रहे है, क्या कहे हम भी, क्या हमने कभी अपनी बहु को ऐसे तना दिया है क्या, लोग समझते नहीं इतनी सी बात को, अरे आज नहीं तो काल हो जायेगा बच्चा. जा तू hi कुछ समजा उसको. (कहते हुए वो अपने कमरे की और बढ़ गयी, स्वर्ण उस कमरे की और जाने लगी तो पद्मा भी पीछे पीछे हो ली, वो भी सब जान न चाहती थी क्यों की माँ तो उसको भी बन न था)
स्वर्ण : (दरवाजा खोलने का प्रयास किया तो वो अंदर से बंद था, उसने खत khataya)Kappuuu, ोोू कप्पूउऊउउउ. (थोड़ी देर बाद दरवाजा khula)Kya हुआ तुजे. (उसके शिर पर हाथ रख कर वो चिंता से बोली, उसको देख कर hi लग रहा था की वो रो रही thi)Tu रो रही थी? (वो अपनी बहन से लिपट गयी और फिर रोने lagi)Kyu रो रही है, क्या हुआ? (वो बस रो रही thi)Chal अंदर chal.(Wo उसको कमरे में ले गयी, उसको बिठाया, वह पड़े जग से पानी निकल कर दिया उसको, वो थोड़ी शांत hui)Kya हुआ, रो क्यों रही है तू?
कृपाली : में माँ नहीं बन पायी उसमे मेरी क्या गलती है दीदी, क्या करू में? (फिर आँखों से आंसू टपकने लगे)
स्वर्ण : अरे इसमें रोनेवाली क्या बात है, जो जायेगा सब, तू रो मात.
कृपाली : इस अनुष्ठान की वजह से वो कह रहे है की दोष मुज में hi है, अगर ऐसा न होता तो तुम्हारे घरवालों को ये अनुष्ठान रखने की जरुरत hi न पड़ती. आप hi बताओ दीदी क्या दोष है मेरा, क्या मेरी वजा से में माँ नहीं बन रही हु? (वो फिर रोने लगी).
स्वर्ण : (उसको चुप करते hue)Isme रो क्यों रही है तू, सब ठीक हो जायेगा, आज नहीं तो कल माँ बन hi जाएगी तू, इसमें रोनेवाली क्या बात है. (पद्मा भी वह बेथ गयी)
पद्मा : दीदी, उसका रोना जायज है, ऐसी क्या कमी है हम में जो हम माँ नहीं बन सकती, आप hi बताओ हमे.
स्वर्ण : (वो अंदर hi अंदर डरने लगी thi)Are ऐसी कोई बात नहीं है, हो जायेगा सब ठीक.
पद्मा : (स्वर्ण का हाथ पकड़ kar)Nahi दीदी, आपको बताना पड़ेगा की आप कैसे माँ बानी.
स्वर्ण : (हकलाते hue)Kaise से क्या मतलब है भाभी, जैसे सब माँ बनते है.
पद्मा : वही पूछ रही हु दीदी, कैसे? क्या कोई ट्रीटमेंट लिया आपने, कोई मन्नत मांगी? क्या किआ ऐसा जो आप माँ बन रही हो और हम नहीं. (दुखी तो पद्मा भी थी, वो भी अब तंग आ गयी थी ये सब सुन सुन कर, माँ तो उसको भी बन न था)
स्वर्ण : (उसका शिर फटने लगा था, उसने अपने आपको sambhala)Are सब ठीक हो जायेगा, बाबाजी ने अनुष्ठान किया है न, अब सब ठीक हो जायेगा.
कृपाली : पर आप तो अनुष्ठान से पहले hi माँ बन रही हो, और ममता दीदी भी, और तो और बीणाभाभी भी माँ बन रही है. दीदी बताओ न आखिर कहा कमी रह गयी हम से?
स्वर्ण : कोई कमी नहीं है आप दोनों में, में बाबाजी से बात करती हु, बॉस.
कृपाली : दीदी प्लीज कुछ करो, वर्ण में मर jaungi.(Usne रट हुए कहा)
स्वर्ण : एक मरूंगी जो ऐसी बात मुँह से निकली तो, मेने कहा न सब ठीक हो जायेगा.
पद्मा : (उसकी भी आंख में ासु आ gaye)Nahi दीदी आपको कुछ करना hi होगा, में भी थक गयी हु लोगो के तने सुन सुन कर. मेरा भी मान करता है मि मार जाऊ.
स्वर्ण : तुम दोनों पागल हो गयी हो, मेने कहा न में बात करती हु. (दोनों रो रही थी और स्वर्ण का दिमाग फैट रहा था, वो कैसे बता सकती है की वो माँ कैसे बन रही है, उसको कुछ समाज नहीं आ रहा था, उसका भी मान कर रहा था की अपनी परिस्थिति पर रोये पर वो बैठी रही और उन दोनों को संभालती रही)
वह बिना भी तैयार हो चुकी थी, उसको भी ट्रैन से जाना था, जित्नेष उसको छोड़ने स्टेशन जानेवाला था. जिग्नेश बार गाड़ी साफ़ कर रहा था, अंदर सास ससुर के साथ बिना थी.
निर्मलादेवी : क्या बहु तुम भी, छोड़ क्यों नहीं देती नौकरी को, क्या कमी है तुम्हे, ऐसी परिस्थिति में जाना जरुरी है क्या? (बिना अपनी नज़ारे झुकाये कड़ी थी)
चंद्रभान : तुम नहीं संजोगी भाग्यवान, जाने दो उसे, लड़कीओ का अपने पैरो पर खड़ा होना जरुरी होता है. बात सिर्फ पैसो की नहीं है. (बिना ko)Tum जाओ बहु, पर अपना ख्याल रखना, वैसे तुमसे बहोत साडी बाटे करनी थी पर समय न मिल पाया.
बिना : किस बारे में पापा?
चंद्रभान : (वो बहोत कुछ पूछना चाहता था, पर समाज नहीं आ रहा था की क्या बात करे, और समय भी काम hi tha)Nahi, कोई खास बात नहीं है बहु, बस ऐसे hi, अग़लिबर आओगी तो आराम से बात करेंगे.
बिना : आप फ़ोन कर देना.
चंद्रभान : ठीक है, अगर मुझे लगा तो फ़ोन करूँगा. (बहार से जिग्नेश ने आवाज दी, बिना ने दोनों के पेअर chhue)Jiti रहो.
निर्मलादेवी : सदा सुहागन रहो, दूधो नहाओ पुतो फलो. (उसने अपनी बहु को गले से लगा लिया) अपना ख्याल रखना बेटी, हमे चिंता लगी रहती है.
बिना : जी माजी. (वो भी वह से निकल गयी)
हम सब भी जूही के घर पहुंच गए थे, दो पहर को खाना खाया हमने. हमे भी निकलना था, ममता को शिव से मिलना था पर कोई ऐसा मौका hi नहीं मिला. वो समझती थी की उसको मर्यादा का पालन भी करना होता है. उसने मुस्कुराते हुए शिव को विदा किया.
में और जूही भी ट्रैन से निकल गए.
आज शिव नहीं आया था तो जहान्वी भी ज्यादा देर साइट पर नहीं रुकी, पिंकेश ने भी रिपोर्ट दिखाए पर उसको कोई इंट्रेस्ट नहीं था और तबियत का बहाना कर के वो वापस लौट गयी थी. करुणा ने भी उसको फ़ोन किया था तो उसको भी यही कह दिया था की उसका मान नहीं है तो मिलने नहीं गयी. वो बेचैन हो रही थी, और उसकी वजह से थोड़ा चीड़ भी रही थी. न उसने ठीक से खाना खाया न किसी से बात की. उसकी माँ ने भी पूछा था पर उसने बात को ताल दिया. रात को भी वो अपने बिस्तर पर करवाते बदल रही थी. जब उस से रहा नहीं गया तो अपने पुरे कपडे उतर दिए उसने,

पुरे बदन में एक अजीब सी सरसराहट महसूस हो रही थी, अपने आप hi वो अपने बदन से खेल रही थी, इस वक़्त थी उसको शिव की याद hi आ रही थी.
जहान्वी : कहा हो शिव? क्यों मुझसे दूर जा रहे हो? (कहते हुए उसने अपने निप्पल को मरोड़ diya)Shhhh आए जावा शिव, शह्ह्ह्ह तुम्हे जो चाहिए वो दूंगी यार, जो करना है कर लेना, बस आ जाओ. ऐसी तड़प तो मेने कभी महसूस नहीं की है शिव, शहहहहह (कहते हुए उसने अपनी योनि को छुआ तो वह योनि से रास निकल रहा था, उसने एक ऊँगली अपनी छूट में दाल di)Shhhhh शीइइइइव, में बुरी हु शिव शह्ह्ह्हह्ह पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही यार, तुम क्या सोचोगे मेरे बारे में शह्ह्ह्हह्ह कस में अच्छी लड़की होती शह्ह्हह्ह्ह्ह (वो जैसे जैसे अपनी छूट में ऊँगली कर रही थी उसकी छूट से रास और निकल रहा था)

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अब जो भी हो शह्ह्ह्हह्ह में अब और नहीं रुक शक्ति शह्ह्हह्ह्ह्ह, तुम चाहे जो भी सोचो शहहहहह पर मुझे अपना लो सीईव शहहहहह. में बहोत गन्दी हु शह्ह्हह्ह्ह्ह पर क्या करू शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह आए जाओ न शह्ह्हह्ह्ह्ह. (वो जल्द hi झाड़ gayi)Shhhhhh shiiiiiiiiiiiiv. (वो वैसे hi लेती रही और कब नींद आ गयी उसको पता hi नहीं चला)

वही दूसरी तरफ बिना भी अपने बिस्तर पर करवाते बदल रही थी, अपने पति के साथ रहने के लिए उसने सब किआ था, उसने पूरी नंगी हो कर अपने पति का साथ दिया था, और पहले के मुकाबले उसके पति ने भी उसके बदन से खेला था और सम्भोग भी किआ था, पर वो संतुस्ट न हो पायी थी. सम्भोग के बाद जिग्नेश तो सो गया था पर बिना को नींद नहीं आ रही थी. उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी की वो शिव के पास जाये, पर जब उस से रहा न गया तो आखिर वो वह पहुंच hi गयी, उसने सिर्फ गाउन पहना हुआ था. जब वो शिव के कमरे के पास पहुंची तो उसको हलकी हलकी सिस्किअ सुनाई दी, वो समाज गयी की अंदर क्या चल रहा है. उसको शिव पर भी गुस्सा आया की यहाँ वो तड़प रही है और वो किसी और के साथ है. पर फिर वो सोचने लगी की कोण है उसके साथ, ममतादिदी या फिर स्वर्णादिदी, उसने कान लगा कर सुन ने का प्रयास किया पर स्वर बहोत धीमा था, उसने आस पास देखा, पुरे घर में सन्नाटा छाया हुआ था, उसने हिम्मत कर के के होल से देखा, लड़की का नंगा बदन दिख रहा था उसे, शिव निचे लेता था और औरत उसके ऊपर थी, उसकी योनि में उसका वो बड़ा लुंड अंदर बहार हो रहा था, ये देख कर बिना की हालत ख़राब होने लगी, उसके बदन में भी चीटिया रेंगने लगी. देखते हुए उसका हाथ कब अपनी योनि पर चला गया उसको भी पता नहीं चला. तभी वो औरत हटी और निचे लेट गयी, उसने देखा की ये स्वर्ण थी, वैसे तो उसको जतका नहीं लग्न चाहिए था पर उसको यकीं नहीं हो रहा था की इतना कुछ कहने के बाद भी वो उसके साथ है. रिश्ते में वो दोनों भाई बहन लगते थे अगर उसका शक सही है तो, और ये बात स्वर्ण भी जानती थी फिर भी वो अभी उसके साथ थी. उनकी कामलीला देख कर वो भी काफी गर्म हो गयी थी, आखिर जब उसने देखा की उनका हो गया तो वो आहिस्ता से अपने कमरे में लौट गयी थी, वह जा कर भी उसको चैन नहीं था, वो करवाते बदल रही थी, उसने देखा कहि उसका पति आराम से सोया हुआ है. उसने जिग्नेश को पुकारा भी पर वो बेसुध सोया हुआ था. आधे घंटे बाद भी जब उसको नींद नहीं आयी तो फिर वो उठी और शिव के रूम की और चल पड़ी, क्यों वो तो उसको भी नहीं पता था. इतने समय से वो शिव से दुरी बनाये हुए थी, और उसको ये सही hi लग रहा था, आखिर वो कैसे अपने देवर के साथ ये सब कर सकती थी, पर फिर ममता और स्वर्ण का ख्याल आता था, जब वो लोग रह रही है तो में क्यों नहीं रह सकती. यही सब सोचते हुए वो शिव के दरवाजे के बहार पहुंच गयी, वो वह कड़ी कड़ी सोच hi रही थी की दरवाजा खुला, शिव ने उसको देखा, वो कुछ समझती उस से पहले hi शिव ने पकड़ कर उसको रूम में खिंच लिया, और दरवाजा बंद कर दिया. अचानक ये सब हो गया था, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, वो शिव को डरते हुए देखने लगी, दर शिव से नहीं था पर परिस्थितिओ से था. शिव उसके होठो की और बढ़ा तो उसने मुँह घुमा लिया.
बिना : (हलकी नाराजगी se)Kya कर रहे हो? (धीरे से वो बोली)
शिव : (मेने किश नहीं की बस उनको dekha)Itni रात को यहाँ क्या कर रही हो आप?
बिना : में... में वोऊ... (वो चुप हो गयी क्यों की उसके पास कोई तर्क नहीं tha)(Me समाज रहा था की वो क्यों आयी है, तो में फिर झुकने लगा, तो उन्होंने मेरी छाती पर हाथ रख कर मुझे roka)Nahi.
शिव : क्यों?
बिना : जाओ दीदी के साथ hi रहो. (उसने जलन के मरे कहा)
शिव : (में muskuraya)To आप hi आयी थी पहले? (उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, बस मुझे देखती रही) अगर दूर hi रहना है तो फिर क्यों चक्कर लगा रही हो? (बिना कुछ नहीं boli)(Me फिर उनके होठो की और झुकने लगा, वो मुझे रोक रही थी पर में रुका नहीं, उन्होंने मुँह घुमा लिया, मेने उनके गाल पर किश करना सुरूर कर diya)(Beena बेचैन हो उठी, वो खुद चाहती थी पर फिर भी एक झिझक थी)
बिना : कोई आ जायेगा शिव. (उन्होंने धीमी आवाज में कहा, पर में रुका नहीं, में उनके गाल और गर्दन पर चाटने laga)Kya कर रहे हो (उनकी सांसे भरी हो रही थी, वो मुझे धकेल रही थी पर उनकेहाथो में दम नहीं था, में दो हाथ निचे ले गया और उनके कूल्हों को थम लिया और सहलाने laga)Shhhhh शिईयिव मुझे जाना है शहहहहह वो जाग जायेंगे. (अब धकेलने की बजाये वो शिव के हाथ को दबा रही थी, क्यों की वो खुद गरम हो रही थी, पर उसको दार लग रहा था, पर जैसे जैसे शिव उसके कूल्हों को मसल रहा था वो पिघलती जा रही थी, पर फिर भी आपने आपको रोकने का प्रयास कर रही thi)Shhhh नहीं शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह मात करो शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (पर वो तो उसको जैसे सुन hi नहीं रहा था, वो उसका गाउन ऊपर उठाने laga)Shhh नहीं शीइइइइइइव (उसने रोकना चाहा पर शिव ने गाउन उठा दिया और उसकेनंगे कूल्हों को थम लिया और उसे दबाते हुए सहलाने लगा, वो अंदर से पूरी तरह नंगी hi thi)(Unke प्रूस्त कूल्हों को सहलाते hi मेरा लुंड पूरी औकात में आ गया था, दीवाल से चिपकाये उनके गले को चूमते और चाट ते में लुंड को उनकी योनि पर दबाने laga)(Apani योनि पर लुंड का एहसास होते hi बिना शीयर उठी, उसकी आंखे भी बंद हो gayi)Shhhhhh शीइइइइव मात कर न शह्ह्हह्ह्ह्ह. (वो बोल तो रही थी पर उसको रोकना नहीं चाहती थी, उसके हाथ भी शिव की बाह को सहलाने लगे the)Shhhhh सुन न शह्ह्हह्ह्ह्ह, वो जाग जायेंगे शहहहहह.
शिव : आप क्यों आयी थी फिर?
बिना : शहहह नहीं पता शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (शिव जो की अभी सिर्फ अंडरवियर में था, वो उसकी छाती पर हाथ फिरने lagi)Ruk जा न सीईव शह्ह्ह्हह्ह. (उसने बेबसी से कहा पर वो काफी गर्म हो चुकी थी, शिव भी उसकी सुन नहीं रहा था, उसने उसको बहो में उठा लिया और बीएड पर लेता दिया, वो संकुचन लगी और जैसे अपने आपको छुपाने lagi)Nahi शिईयिव प्लीज. (मेने उनकी आँखों में देखा पर लगा नहीं की वो जाना चाहती है, तो मेने उनकी बात का ध्यान नहीं दिया और बिस्तर पर चढ़ गया और अपनी अंडरवियर उतर दी, मेरा लुंड बहार झूलने laga)(Beena की भी नजर उसके लुंड पर पड़ी, वो फिर सिमटने लगी और अपने गाउन को सही कर के खुद को छुपाने lagi)Nahi शीइइइइइव. (में जनता था की वो यहाँ किस लिए आयी थी और काफी समय से वो मुझसे दूर रहने की कोशिस कर रही थी, पर में जनता था की वो क्या चाहती है तो मेने उनके दोनों पेअर पकड़ कर मेरी और खिंचा, और गाउन को कमर तक ऊपर कर दिया, वो नंगी hi थी जो में देख चूका था, उनकी गीली छूट मेरे सामने थी, उनके भी बाल काम hi थे. वो अपनी छूट छुपाने का प्रयास करने लगी तो मेने उनके हाथ पकड़ कर हटा दिए और झङगे पकड़ कर उनकी योनि को मुँह में भर liya)Shhhhhhhh Shiiiiiiiiiiiv

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(उन्होंने मेरे शिव को धकेलने का प्रयास किआ पर में उनकी छूट के रास को चूसने और चाटने laga)Shhhhhhh शीइइइइइइव शहहहहह (में बड़ी सिद्दत से छूट को चाट रहा था, वो सिस्किअ ले रही थी, कभी कभी उन्हें याद आ जाता तो वो मुझे धकेलती पर में उनकी छूट को चाट ता रहा, अब वो मेरे शिर को सहलाने लगी थी और आंखे बंद किये सिसकिया ले रही थी, मेने गाउन को और ऊपर किआ तो उन्होंने अपने कूल्हे उचक कर मुझे सहायता की. में थोड़ ऊपर हुआ और उनके गाउन को पूरा निकल दिया, अब वो पूरी नंगी hi थी. वो मुझे देख रही थी पर मेने ध्यान नहीं दिया और उनके ऊपर हो कर फिर से उनकी छूट को चाटने लगा, हम 69 में थे, पर मेरा लुंड थोड़ा ऊपर था) (शिव उसकी छूट को चूस और चाट रहा था, और उसका लुंड उसकी आँखों के सामने था, वो उसे ललचायी नजरो से देख रही थी, पर छू नहीं रही थी, पर जैसे जैसे शिव उसकी छूट को चाट रहा था उसने भी शर्म छोड़ना hi बेहतर समजा, कपट हाथो से उसने लुंड पकड़ लिया और अपना शिव थोड़ा ऊपर कर के लुंड को मुँह में ले hi लिया, उसको बहोत मज़ा आ रहा था, न जाने कब से वो तड़प रही थी, उसने खुद को बहोत रोका था संजय था पर वो बेबस हो गयी थी, वो लुंड को अच्छे से चूसने लगी, अपना शिर ऊपर निचे करते हुए लुंड को अपने मुँह की शेर करवाने लगी)

(में भी खुस था की आखिर वो मान गयी थी, थोड़ी देर बाद में उठा और उनके पैरो के बिछ आ गया, हमारी नज़ारे मिली तो उन्होंने मुँह फेर लिया, मेने लुंड छूट से सत्ता दिया था और में उनके ऊपर झुक गया, वो दूसरी और देख रही थी)
शिव : मेरी और देखिये (वो कुछ न बोली न dekha)Meri और देखिये तो (मेने फिर कहा, उन्होंने हलकी नाराजगी से मुझे देखा, मेरा लुंड छूट से सत्ता हुआ था पर टोपा हम दोनों के पेट के बिच tha)Nahi चाहती की में ये करू? (वो कुछ नहीं बोली बस मुझे देखती रही, मेने उनके बाल को पीछे क्या जो गाल पर आ गए the)Kahiye न, आप सच में नहीं चाहती की में ये करू? (वो फिर भी कुछ नहीं बोली, बस मुझे देख रही थी, मुझे लगा की वो नहीं चाहती है, तो मेने नज़ारे झुकाई और उठने laga)(Shiv को उठता देख बिना ने तुरंत उसकी कमर थम ली और उसको रोक liya)(Mene फिर उनको देखा, वो कुछ नहीं बोली बस मुझे देखती rahi)Akhir आप चाहती क्या है, न मुझे कुछ करने दे रही है न उठने दे रही है.
बिना : तुम बहोत गंदे हो. (जूठी नाराजगी से वो बोली, में उन्हें देख रहा था और समझने की कोशिस कर रहा था, वो भी ये समाज रही थी की मेरे मान में क्या चल रहा है) ऐसे hi में चक्कर नहीं काट रही थी. (वो हल्का सा मुस्कुराते हुए, शरमाते हुए boli)(Mere चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी, और में झुक गया और उनके होठो को चूसने लगा, वो भी मुझसे लिपट गयी और मुझे सामने से किश करने लगी,

मेने उनके स्तन को मसाला, उन्होंने मुँह chhudaya)Shhhhhh आराम se(Unhone मुझे डाटा, में मुस्कुराया और उनके स्तन को हलके से मसलते हुए निप्पल को चूसने लगा और लुंड को छूट पर रगड़ने laga)Shhhhhhh शीइइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह बहोत तड़प रही थी शह्ह्हह्ह्ह्ह, क्यों दूर नहीं रह सकती यार शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.
शिव : (निप्पल निकल kar)Rehna क्यों है दूर?
बिना : तो क्या करू, अपने देवर के साथ ये सब karu(Unhone बे बेबसी से कहा)
शिव : मुझे नहीं लगता ऐसा.
बिना : तुम नहीं समझोगे शिव, तुम कुछ नहीं जानते, पर मुझे पूरा यकीं है की तुम hi शिवांस हो, और ऐसे में में तुम्हारे साथ रह के पाप कर रही हु. (उन्होंने बेबसी से कहा) और दूर भी नहीं रह प् रही हु.

शिव : भूल जाओ सब, बस इतना याद रक्खो की में शिव हु, बस शिव. वो अंश था और में पूरा शिव हु. (कहते हुए मेने अपने लुंड का टोपा छूट पर लगाया और हलके से दबा दिया)
बिना : (अपनी छूट में घुसते लुंड को महसूस कर ke)Shhhhhhh Shiiiiiiiiiiiv. (मेने आधे से ज्यादा लुंड आहिस्ता से छूट में उतर दिया, वो पहले से hi बहोत गीली थी, पर कसावट बरक़रार थी, छूट ने भी मेरे लुंड का स्वागत किया और लुंड से लिपट गयी, में उनके होठो को चूसने लगा, वो भी मेरी पीठ को सहलाते हुए मुझे किश करने लगी, थोड़ी देर बाद में थोड़ा ऊपर हुआ और लुंड अंदर बहार करना सुरु कर दिया, वो नशीली आँखों से मुझे देख रही thi)Shhhhh अह्ह्ह्हह श अह्ह्ह्ह शहहहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह.
शिव : क्यों इतने दिनों से भाग रही थी? (वो मुझे रोनी सूरत से देख रही थी, वो पूरी तरह लुंड को महसूस कर रही थी, में धक्के लगा रहा था वो मचल रही thi)Iske लिए hi आयी थी न, बताओ?
बिना : हा शहहहहह मेने कोशिस की सीईव शह्ह्ह्हह्ह पर नहीं रह पायी शह्ह्हह्ह्ह्ह (में झुका और उनके निप्पल को चूसने laga)Shhhhhh अह्ह्ह्हह पागल कर दिया है तुमने मुझे शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह क्या करू कुछ समाज नहीं आ रहा शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह.
शिव : तो फिर दूर क्यों भाग रही हो?
बिना : ये ठीक नहीं है शिईयिव शहहहहह अह्ह्ह्हह तुम समझते क्यों नहीं शहहहहह ेयीईइ शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह (छूट में आ जा रहा लुंड उसको बहोत अच्छा लग रहा था, ऐसा सिर्फ वो शिव के साथ hi महसूस करती थी, वो अपनी छूट कास रही thi)Ahhhhh शह्ह्ह्ह ऐसे hi करो शिईयिव शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह शहहहहह करते रहो शह्ह्ह्हह्ह बहोत अच्छा लग रहा है शहहहहह अह्ह्ह्हह ऐसे hi शहहहहह, करते रहो शहहहहह अह्ह्ह्हह शह्ह्हह्ह्ह्ह. (थोड़ी देर ये चलता रहा, और वो झड़ने lagi)Shhhhhh अह्ह्ह्हह शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह में गयी यार शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह शह्ह्ह्हह्ह. (कितने दिनों से जमा पानी बहने लगा, उसने शिव के कंधे पर दन्त गधा diye)Ummmmmm , फूऊऊऊ फूऊ उम्मम्मम. (में रुक गया, थोड़ी देर बाद में उठा और लुंड बहार निकला, वो मुझे देखने लगी)
शिव : घूम जाओ. (बिना समाज गयी और अपने घुटनो के बल हो गयी और शिर निचे बिस्तर पर टिका diya)(Unki चौड़ी गांड मेरे सामने थी, छूट पूरी गीली हो चुकी थी, और उसमे से रस निचे टपक रहा था, गांड का छेड़ भी पूरा गिला हो चूका था, में झुका और गांड के छेड़ को चाटने laga)(Beena तड़पने लगी, जैसे जैसे शिव उसके गांड के छेड़ को जीभ से कुरेद रहा था वो सिस्किअ ले रही थी, उसका छेड़ खुल बंद हो रहा था, कूल्हों पर रक्खे शिव के हाथ को उसने सख्ती से पकड़ liya)Shhhhh शिईयिव shhhhhhhh(Wo अपनी कमर हिलने लगी (मेने छूट केहोठो को फैलाया और जीभ अंदर दाल di)Shhhhh शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह शहीइइइइइइ (वो बहोत गर्म सिस्किअ ले रही थी, उनकी सिस्किअ सुन मेरा लुंड कूद रहा था, में छूट को फैला कर अंदर के लाल भाग को अच्छे से चूस और चाट रहा tha)Shhhhh शीइइइइव शह्ह्ह्ह पागल बना दिया है तुमने शहहहहह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेने अंगूठे को छूट रास से गिला किया और गांड के छेड़ पर दबाने laga)(Beena समाज रही थी पर वो उत्तेजना में थी और उसको ये अनुभव भी अच्छा लग रहा था, शिव ने जैसे hi जोर डाला अंगूठा गांड के छेड़ को फैला कर अंदर घुस gaya)Shhhhhahhhhhh शह्ह्ह्ह (उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया था, पर में न रुका, गांड के छेड़ के अंदर बहोत गर्मी थी, मेरे अंगूठे पर वो महसूस हो रही थी, में ऊपर हुआ और लुंड को फिर छूट के छेड़ पर लगाया और अंदर उतरने laga)(Gaand में अंगूठा था और छूट में लुंड, वो सिसक उठी)
शहहहहह शीइइइइइव अह्ह्ह्हह्हह. (वो झटके खा रही थी, दोनों छेड़ में ऐसी सरसराहट उस से बर्दास्त नहीं हो रही थी, उसने आंखे बंद कर ली और शिव को करने दिया जो वो कर रहा था, लुंड अंदर बहार हो रहा था और साथ में अंगूठा भी अंदर बहार हो रहा था, ऐसा अनुभव वो पहली बार महसूस कर रही थी)

शह्ह्ह्ह शीइइइइव शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह (एक हाथ से उसकी कमर पकड़ कर शिव उसको छोड़ रहा था, और उसको बहोर मज़ा आ रहा tha)Shhhhh शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह शह्ह्ह्हह्ह. (लगातार चुदाई से उसका पानी निचे गिर रहा था, लुंड पूरा गिला हो गया था, थोड़ी देर ऐसे hi चलता रहा, फिर शिव ने लुंड निकल लिया, वो बिस्तर पर उलटी लेट गयी और हांफ ने लगी, शिव उसके कूल्हों को मसल रहा था और उसे चाट रहा था, उसका ऐसा करना उसे बेहद अच्छा लग रहा था, थोड़ी देर बाद शिव ने अपना लुंड उसके कूल्हों के बिच लगाया और वह घिसने लगा, लुंड उसके गांड के छेड़ पर रगड़ रहा था, वो आंखे बंद किये लेती रही, वो उसको किसी बात के लिए रोक नहीं रही थी, जब लुंड उसके गांड के छेड़ पर रुक गया तो वो सिहर उठी, शिव ने दबाव बढ़ाया तो उसने शिव के हाथ को पकड़ liya)Shiiiiiiiiiv. (में ज्यादा छूट को छोड़ नहीं सकता था, तो मेरे लिए यही रास्ता बचा था, मेने थोड़ा और दबाव बढ़ाया तो लुंड का टोपा गांड के छेड़ को फैलते हुए अंदर घुस गया)

(बिना को लगा की छेड़ अभी फैट jayega)Oooo माआआ shhhhhhhhhh. (में रुक गया, गांड का छेड़ एकदम टाइट हो गया था और मेरे लुंड का गाला घोट रहा tha)Shhhhh शीइइइइइव shhhhhhhhhh.(Beena की सकल रोने जैसी हो गयी थी, पर शिव रुका हुआ था तो उसको रहत मिली, थोड़ी देर बाद वो थोड़ी संभल गयी और उसने अपने छेड़ को ढीला छोड़ दिया और शांति से लेती rahi)(Mene लुंड को वापस खिंच लिया, छेड़ ो आकर में खुला था, मेने वह ढेर सारा थूक लगाया, और लुंड पर भी थूक लगाया, और फिर लुंड को गांड पर लगाया और दबाया तो लुंड फिर से अंदर चला gaya)Ahhhhh शह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेने लुंड को थोड़ा दबाया तो वो अंदर जाने लगा, मेने देखा की मैडम ने कास के चद्दर पकड़ ली थी, में फिर रुक गया, में कोई जल्द बजी नहीं करना चाहता था, में लुंड को थोड़ा आगे पीछे करने लगा, लुंड दो तीन इंच hi अंदर था)
(बिना अपनी गांड के छेड़ में लुंड महसूस कर रही थी, उसका छेड़ फटने की कगार पर था, उसको दर्द भी हो रहा था पर वो उसको सेहन कर रही थी, थोड़ी देर लुंड अंदर बहार होता रहा, वो थोड़ी रिलैक्स होने लगी, इस नए अनुभव से वो और उत्तेजित हो रही थी, उसने ये सब सुना था पर आज उसके साथ ये हो रहा tha)(Me थोड़ी देर करता रहा पर मुझे आगे बढ़ने में थोड़ा खतरा लग रहा था, क्यों की मेरा लुंड अब पीछे की और मोटा था तो मेने रिस्क नहीं लिया, मुझे अच्छा लग रहा था पर मेने लुंड वापस निकल लिया, मेने देखा तो गांड के छेड़ के अंदर की मासपेशिया भी दिख रही थी, मेने मैडम को सीधा कर दिया, वो सीधी हो गयी, में उनके ऊपर हो आ गया और उन्हें देखने लगा, वो भी मुझे देख रही thi)Kya हुआ?
शिव : कुछ नहीं. (मेने मुस्कुरा के कहा)
बिना : (उसको बोलते हुए भी शर्म आ रही thi)Ruk क्यों गए फिर?
शिव : ऐसे hi. (उनके गाल पर से बाल हटते हुए, जो की पशीने की वजह से चिपक गए थे) दर्द हुआ?

बिना : (मुस्कुरा ke)Hua, पर इतना भी नहीं था. अगर मान है तो वह कर शक्ति हो. (उसने शरमाते हुए कहा)
शिव : अपने घर पर करेंगे. (मेने मुस्कुरा के कहा तो वो भी मुस्कुरायी)
बिना : (शरमाते hue)Aage कर लो.
शिव : रहने दीजिये.
बिना : क्यों? (उसको समाज नहीं आया)
शिव : ज्यादा करना ठीक नहीं है.
बिना : ऐसा क्यों कह रहे हो, दीदी के साथ तो पूरा किया था न. (मेने आंखे चौड़ी कर के देखा तो वो शर्मा गयी)
शिव : तो सब देख रही थी आप? (वो कुछ न बोली बस शर्मा गयी, मेने उनके होठो को चुम लिया, थोड़ी देर बाद में उनको देखने लगा, वो फिर बोली)
बिना : करो न शिव, ऐसा क्यों कर रहे हो, कुछ नहीं होगा. मुझे वो सब अपने अंदर महसूस करना है (उन्होंने शरमाते हुए कहा, मेरा लुंड फिर कूदने लगा, वो शर्मा गयी, मेने उनके पेअर फैलाये और पैरो के बिच बेथ गया, और छूट को देखा, वो शरमाते हुए मुझे देखने लगी, मेने लुंड फिर से छूट पर लगाया और अंदर उतर दिया, और पोसिटिव ले कर फिर से छोड़ने laga)Shhhhh शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह. (वो कभी आंखे बंद करती तो कभी मुझे देखती, उनके चेहरे पर कामुकता छलक रही थी)
शिव : अच्छा लग रहा है?
बिना : शह्ह्ह्ह हआ शहहहहह तुम समाज नहीं पाओगे सीईव शह्ह्ह्ह कितना मज़ा आता है शहहहहह. मेने कैसे अपने आपको रोका है ये में hi जानती हु, शहहहहह ऐसे hi करते रहो शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह. (मेने उनके उछाल कूद कर रहे स्तन को पकड़ लिया और मसलने लगा, वो फिर से muskurayi)Shhhhh तुम्हे में अच्छी लगती हु न शिव शह्ह्ह्ह (में बस muskuraya)Kaho न शिव में अच्छी लगती हु न. (में मुस्कुराते हुए उनके ऊपर हो गया और उनके होठो को चूसने लगा, फिर कहा)
शिव : है, बहोत अच्छी लगती हो.
बिना : (वो धक्को से ऊपर निचे हो रही thi)Muje भी तुम बहोत अच्छे लगते हो शिव शहहह, मुझे मत छोड़ना कभी शह्ह्ह्हह्ह.
शिव : आपको ऐसा क्यों लगता है.
बिना : बस ऐसे hi कह रही हु, (वो धक्को से ऊपर निचे हो रही thi)Muje ऐसे hi प्यार करते रहना शहहह.

शिव : (मुस्कुराते hue)Ise प्यार नहीं चुदाई कहते है.
बिना : गंदे कही के (कहते हुए वो मुस्कुरायी, फिर मेरी आँखों में देखते hue)Ye प्यार है शिव, सिर्फ प्यार (उन्होंने अपने पेअर मेरी कमर में लपेट liye)Bhar दो मुझे अपने प्यार से शह्ह्ह्हह्ह (उनकी बाटे बहोत अच्छी थी, वो भी बहोत अच्छी थी, और उनकी छूट में भी बहोत अच्छा लग रहा था, में भी झड़ने के करीब पहुंच रहा था)
शिव : मेरा भी निकलने वाला है. (मेने धक्के लगते हुए कहा)

बिना : अंदर hi डालना.
शिव : (मुस्कुराते hue)Ander कहा?
बिना : (वो शर्मा गयी, पर फिर मुझे अपनी और खींचा और मेरे कान में धीरे से boli)Meri छूट में. (मेने उन्हें देखा तो वो शर्मा गयी, में भी मुस्कुराया, मेरे धक्के तेज हो गए the)Shhhhhh में भी झाड़नेवाली हु शिव शहहहहह (वो मुझे अपनी और खिंच कर मेरे बालो को नोचने lagi)Shhhhhh शीइइइइव शहहह अह्ह्ह्हह भर दो मुझे शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह

(लगातार धक्को से वो झड़ने लगी और उनकी छूट कास गयी, मेने भी अपना लावा छोड़ diya)Shhhhhh शीइइइइइइव शहहहहह मेरे शिईयिव शह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेरे धक्के चले जब तक मेरा वीर्य आना रुक न गया, थोड़ी देर हम ऐसे hi चिपके रहे, थोड़ी देर बाद में उठने लगा, उन्होंने मुझे कास के पकड़ liya)Abhi नहीं शिव, ऐसे hi रहो. (उन्होंने मुझे उठने नहीं दिया, में भी वैसे hi रहा, फिर थोड़ी देर बाद उन्होंनेअपनी पकड़ ढीली की, में उठा और लुंड बहार निकला तो वीर्य भी निकलने laga)Shhhhhhhh (उन्होंने आंखे बंद कर ली, में उनके चेहरे की खुसी देख रहा था, उन्होंने मुझे देखा और शर्मा गयी, और चद्दर खींच कर अपने आपको ढकने लगी, में बस मुस्कुराया, थोड़ी देर बाद वो बेथ गयी, उन्होंने घडी dekhi)Baap रे, तीन बज गए. (कहते हुए वो अपने गाउन को लेने लगी, और फिर उसे पहन लिया, में वैसे hi बैठा उन्हें देख रहा था, वो कड़ी होने लगी तो थोड़ी karahi)Ahhhhh.
शिव : क्या हुआ (चिंता से)
बिना : (मुस्कुराते हुए शर्मा gayi)Kuchh नहीं हुआ. सो जाओ. (कहते हुए वो कड़ी हो गयी, में भी खड़ा हो गया, मुझे ऐसे नंगा खड़ा देख वो फिर शर्मा gayi)Kapade तो पहन लो.
शिव : नहीं पहन ने (कहते हुए मेने उन्हें अपनी और खिंचा तो वो मुस्कुरा के मुझे देखने लगी)
बिना : मान नहीं भरा क्या? (में बस मुस्कुराया, तो वो शर्मा के boli)Ghar जा के जो करना है कर लेना. अभी मुझे जाने दो. (मेने झुक कर उनको किश किआ और वो मुस्कुराती हुई चली गयी, मेने बिस्तर को थोड़ा सही किया और चद्दर को उलट दिया और सो गया)
आदत के कारन सुबह जल्दी मेरी आंख खुल गयी, पर कसरत के लिए जाना नहीं था तो में लेता रहा की तभी दरवाजा खुला, मुझे याद आया की मेने दरवाजा बंद hi नहीं किया था. मेने आंखे बंद कर ली. और थोड़ी खोल कर देखा तो वो जूही थी.
जूही : (कमरे को देखते hue)In जनाब को मज़े है, कैसे फ़ैल कर सो रहे है. (उसने देखा की शिव ने चादर दाल रक्खी है पर लुंड वाला भाग उभरा हुआ है, उसका मान मचल गया, वो आहिस्ता से नजदीक आयी और शिव को देखने लगी, उसे लगा की वो सोया है तो उसने लुंड को हलके से पकड़ा और dabaya)Kas अभी में आपने घर में होती. (वो धीरे से बोली, में सुन hi रहा था तो मेने उसका हाथ पकड़ा और उसको बिस्तर पर लेता दिया, वो अभी अभी नाहा कर आयी थी, बाल भी गीले थे, वो एक डैम घबरा गयी थी)
शिव : तो क्या करती? (वो मुस्कुराने लगी)
जूही : तो जग रहे थे तुम.
शिव : बताओ न क्या करती? (उसके ऊपर आते हुए)
जूही : (नखरे se)Me क्यों बताऊ, उठो अभी. (मुझे धक्का देने लगी, में उसके होठो की और बढ़ा तो वो खिल खिला कर हसने लगी और अपना मुँह दूसरी और कर liya)Gande कही के, ब्रश तो करो. (मेने भी मुस्कुरा कर उसको छोड़ दिया, वो बिस्तर से कड़ी हो गयी और अपने आपको सही करने लगी, वो सलवार कमीज़ में थी)
शिव : अरे वह, तुम तो बहोत सुन्दर लग रही हो. (मेने तारीफ वाले अंदाज में कहा)
जूही : (थोड़ी इतराते hue)Wo तो में हु. (फिर जान बुज कर अपने बाल पीछे करने लगी और अपने ड्रेस को झटक कर ठीक करने लगी, चेहरे पर तो मुस्कान थी, फिर उसने शिव को देखा जो अभी भी उसे hi देख रहा tha,wo फिर muskurayi)Ab उठ भी जाओ, और नाहा लो, भाभी कह रही थी की हमें निकलना है.
शिव : में जल्दी से ब्रश कर के आता हु, तुम थोड़ी देर रुको.
जूही : (शरमाते hue)Me जा रही हु (फिर बाद badayi)Kaha है जरा भी ख्याल नहीं करता. (दरवाजे पर जा कर वो रुकी और पलट कर देखने लगी और मुस्कुरायी, में भी मुस्कुराया, मेने एक फ्लाइंग किश दी तो उसने भी सामने वैसे hi किआ और मुस्कुराती हुई चली गयी)
में भी बिस्तर से उठा और बाथरूम में चला गया. नाहा कर कमरे में कपडे पहन रहा था की दरवाजे पर दस्तक हुई.
शिव : खुला hi है. (दरवाजा खुला और स्वर्णाभाभी अंदर आयी, उन्हें देख कर में मुस्कुराया तो वो भी शरमाते हुए मुस्कुरायी)
स्वर्ण : दरवाजा हमेसा खुला hi रखते हो क्या?
शिव : अब मेरे पास ऐसा क्या है जो कोई लूट के ले जायेगा.
स्वर्ण : (मुस्कुरायी, फिर थोड़ा उदास हो kar)Mamta जाने को बोल रही है.
शिव : है, जूही ने बताया मुझे. (उनके चेहरे की उदासी dekh)Kya हुआ आपको?
स्वर्ण : कुछ नहीं. (में उनके नजदीक गया)
शिव : क्या हुआ? (मेने प्यार से पूछा)
स्वर्ण : यहाँ रुकते तो शायद फिर मिल सकती. (उदास हो कर बोली)
शिव : एक hi सहर में तो रहते है.
स्वर्ण : वह में एक बहु हु, बहोत नियम होते है वह. (उन्होंने उदास हो कर कहा)
शिव : मिल जायेंगे.
स्वर्ण : आओगे न तुम?
शिव : आऊंगा. (दरवाजा खुला था तो कोई रिस्क नहीं ले सकते the)Udas मात होइए, जोर मिलूंगा. (उन्होंने फीकी से मुस्कान दी, क्यों की वो भी जानती थी की इतना आसान नहीं tha)Chaliye. (जैसे hi मेने कहा वो मुज से लिपट गयी, मेने दरवाजे की और देखा, वह कोई नहीं था तो मेने भी उन्हें बहो में भर लिया, थोड़ी देर बाद हम लग हुए और बहार आ गए, और निचे चल दिए, वह सब नास्ते की टेबल पर बैठे हुए थे, में भी एक कुर्शी पर बेथ गया, स्वर्ण भी ममता के बाजु में बेथ गयी)
ममता : (धीमे se)Badi देर लगा दी? (ये सिर्फ स्वर्ण ने hi सुना था, वो शर्मा गयी, ममता भी मुस्कुरा दी, अभी नास्ता परोस hi रहे थे की अंकल और मैडम के पति भी वह आ गए, वो भी बेथ गए, पर अंकल मुझे देख रहे थे, मेने नमस्ते कहा वो बस मुस्कुराये, उन्होंने मुझे लगा जैसे वो मुझसे ध्यान हटाने की कोशिस कर रहे थे पर फिर भी वो देख रहे थे, मुझे थोड़ा अजीब लगा)
ममता : पापा, हम अभी थोड़ी देर में निकल रहे है.
चंद्रभान : क्यों?
ममता : Wo..unki तबियत भी देखनी है न, अभी पट्टी हटी नहीं है तो सब देखना पड़ता है, और इन्हे भी वापस जाना है. (उन्होंने फिर एक बार मेरी और देखा)
चंद्रभान : एक बाप पुछु (कुछ सोच कर वो बोले, उन्होंने मेरी और देख कर पूछा था तो में उनकी और देखने लगा) मुझे पता चला की तुम अनाथ हो (वो थोड़ी देर रुके, लगभग सब उनको hi देख रहे the)Tum वह, मेरा मतलब है की अनाथालय में कैसे आये? मेरा मतलब है की तुम्हारे maa-baap ... मतलब कुछ .... कोई jankari....(Wo बहोत नाप टोल कर पूछ रहे थे)
शिव : नहीं अंकल, मुझे कुछ पता नहीं, में वह आया तब शायद 3-4 साल का रहा होऊंगा. जो वह लिखा है उस हिसाब से मुझे किसी भिखारी महिला के पास से बरामद किया गया था, उसने बताया की उसको में किसी शराबी भिखारी के पास से मिला था, और कुछ पता नहीं है. (मेने उन्हें गौर से देखा, वो कुछ सोच रहे थे)
ममता : आप क्यों पूछ रहे है पापा? (ममता जानती थी पर वो अपने पापा के मुँह से कुछ सुन ने की उम्मीद कर रही थी)
चंद्रभान : (थोड़ा संभल kar)Nahi, में तो बस ऐसे hi पूछ रहा था. (वो बस ऐसे hi तो नहीं पूछ रहे थे, कुछ तो उनके मान में चल रहा था जो मुझे उनके चेहरे से पता चल रहा था) तुम बहु के सहर में रहते हो, मतलब यहाँ से बहोत दूर, वैसे किस सहर से मिले थे तुम.
शिव : जी, क्सक्सक्स सहर से.
चंद्रभान : ओह! वो भी काफी दूर है यहाँ से, और उस भिखारी से मेरा मतलब वो शराबी, उसको कहा से मिले थे?
शिव : वो तो पता नहीं. पुलिस ने भी छानबीन की थी पर कुछ पता नहीं चला.
चंद्रभान : हम्म्म्म. में तो बस ऐसे hi पूछ रहा था, तुम्हे बुरा तो नहीं लगा न?
शिव : नहीं अंकल, इसमें बुरा मन ने वाली क्या बात है.
स्वर्ण : चाचाजी, आप कुछ ढूंढने की कोशिस नहीं कर रहे न? (स्वर्ण को भी ये बात जान नई थी)
चंद्रभान : (वो कुछ भी ऐसा वैसा नहीं कहना चाहता था अभी, क्यों की ऐसा कुछ भी नहीं था जो ये बताये की ये योगेंद्र का लड़का है, तो उन्होंने संभल कर kaha)Are नहीं बीटा, में तो बस ऐसे hi पूछ रहा tha,aap लोग शांति से नास्ता करो, मेरा हो गया. (कहते हुए वो वह से चला गया)
निर्मलादेवी : (बात बदलते hue)Kuchh दिन रुक जाती बेटी (ममता की और देख कर)
ममता : मेने कहा न माँ, उनकी वजह से नहीं रुक सकती अभी, उनकी पट्टी खुलने के बाद आउंगी.
निर्मलादेवी : जैसी तेरी मर्जी.
स्वर्ण : में भी जाउंगी चची.
निर्मलादेवी : अरे तू तो रुक जा, बहु भी आज जाने को बोल रही है, सब एक साथ hi जाओगे क्या?
स्वर्ण : में तो एक दो दिन घर रुकूंगी चची, बाद में जाउंगी. अब इतने समय बाद आयी हु तो ऐसे hi तो नहीं जा सकती. (ममता की और देख kar)Jate हुए मुझे भी घर छोड़ देना तुम.
निर्मलादेवी : अब में क्या कहु इसमें (फिर बिना को आवाज देते हुए जो किचन में thi)Are बहु, तू भी बेथ जा, क्यों ीनता कर रही है, वो सब कर लेंगे. (बिना भी किचन से बहार aayi)Beth तू भी, वैसे भी कह रही थी की तबियत ठीक नहीं, ऐसे में ज्यादा काम नहीं करते बेटी. बरसो बाद तो इस घर में खुशखबरी आयी है, ख्याल रख अपना.
बिना : जी माजी.
ममता : (चिंतित स्वर me)Kya हुआ भाभी?
बिना : (सँभालते hue)Nahi कुछ नहीं, बस थोड़ा दर्द हो रहा है.
ममता : कहा दर्द हो रहा है, डॉक्टर के पास जाना है क्या?
बिना : नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है, वैसे भी आज जा रही हु तो कल डॉक्टर को दिखा दूंगी.
ममता : दिखा देना, लापरवाही मत करना. (बिना ने हां में इस्सर किआ, में भी उन्हें hi देख रहा था, उन्होंने भी एक बार मुझे देखा फिर नज़ारे झुका ली, चिंता मुझे भी हो रही थी)
नास्ता वास्ता कर के फिर हम सब वह से निकले. गाड़ी मेने hi चला ली थी. बाजु में जूही बैठी थी और पीछे मंतभाभी और स्वर्णाभाभी बेथ गयी. सब हमे छोड़ने आये थे, बिना मैडम ने मंतभाभी के कान में कुछ कहा, उन्होंने हां में शिर हिलाया, फिर हम वह से निकल गए. रस्ते में.
ममता : शिव (मेने पीछे मुद कर dekha)Apana मास्क पहन लो.
शिव : क्यों?
ममता : कहा न पहन लो. (उन्होंने मुझे जैसे दन्त दिया, मेने गाड़ी साइड में रोकी और मास्क पहन लिया, फिर हम वह से स्वर्णाभाभी के घर पहुंच गए, (जब वो लोगवाहा पहुंचे तो पृथ्वी घर से बहार निकल रहा था, और पीछे पद्मा भी थी, हमारी गाड़ी देख कर वो एक पल रुका फिर आगे बढ़ने लगा, तब तक हम वह पहुंच गए थे)
ममता : कैसे हो पृथ्वी?
पृथ्वी : (जाते जाते रुक गया, और थोड़े रूखे स्वर से bola)Thik हु. (कह कर वो निकल गया)
ममता : ये ऐसा क्यों कर रहा है? (जीप से उतारते हुए वो बोली)
स्वर्ण : मेरी वजह से, उसने एक बार भी मुझसे बात नहीं की है.
ममता : कैसे भाभी?
पद्मा : (फीकी मुस्कान के sath)Achchhi हु.
ममता : अब हम चलते है स्वर्ण.
पद्मा : ऐसे कैसे? आइये न अंदर.
ममता : नहीं, हमे निकलना है, बाद में आउंगी.
पद्मा : ऐसे कैसे दीदी, माजी ने सुना तो मुझे डाँटेगी.
ममता : ठीक है चलो, में मिल लेती हु उन्हें. (शिव और जूही ko)Tum यही बैठो में आयी. (पद्मा ने फिर शिव को देखा, पर बोली कुछ नहीं, वो लोग अंदर गए, पद्मा के बुलाने पर कामनादेवी भी आ गयी)
कामनादेवी : (ममता के पेअर छूने par)Jiti रहो, बहु क्या कह रही है, बहार से hi जा रही हो तुम, क्यों ये तुम्हारा घर नहीं hai(Unhone नाराजगी से कहा)
ममता : ऐसी बात नहीं है तेजी, वो घर भी जाना है और मेरी नानन्द को भी आज hi निकलना है तो जल्दी थी.
कामनादेवी : अरे इतनी भी क्या जल्दी है की दो पल बेथ भी नहीं सकती. कल तो भागादौड़ी में ठीक से बात भी नहीं कर पाए हम.
ममता : में फिर आउंगी, ताऊजी कहा है?
कामनादेवी : वो तो सुबह hi निकल गए थे. (ममता ने थोड़ी रहत की सास ली) कितने दिनों बाद आयी है, ऐसे hi थोड़ी न जा सकती है तू, मेने बादाम केसर का दूध बनवाया है.
ममता : नहीं तेजी, अभी नास्ता किया है.
कामनादेवी : तो दूध से क्या हो जायेगा, वैसे भी इस हालत में ये सब अच्छा hi होता है, जा अपनी नानन्द को भी बुला, वो क्या सोचेगी की कैसे रिस्तेदार है भाभी के जो घर में भी नहीं बुलाते, वैसे भी में कल मिल नहीं पायी उस से. (ममता के पास कोई जवाब नहीं था) जा बहु, बुला उन्हें अंदर.
पद्मा : जी माजी. (वो बहार आयी, वो दोनों कुछ बात कर रहे the)Suniye. (हम दोनों ने उनकी और dekha)Aap को अंदर बुला रहे है. (मेने चाबी निकली और में और जूही उनके पीछे पीछे अंदर आ gaye)(Ander वो सब कुछ बात कर रहे थे की हमारी आहत सुन कर सब ने हमे देखा)
ममता : ये मेरी नानन्द है जूही. (कामनादेवी ने अपनी आंखे चौड़ी कर के जूही को देखा, जूही ने झुक कर प्रणाम किआ, वो उस लड़के को भी देख रही थी)
कामनादेवी : जीती रहो बेटी, बहोत ऊँची हो tum(Unhone मुस्कुराते हुए कहा) और ये? (शिव की और इशारा कर के)
ममता : वो हमारे साथ आया है, हम दोनों अकेले आ रहे थे न तो ये साथ आया था.
कामनादेवी : ओह अच्छा, पर इसने मास्क क्यों पहन रक्खा है?
ममता : वो उसको फ्लू हुआ है न, इस लिए.
कामनादेवी : (मुस्कुराते hue)Are सीधे सीधे कह न की झुकाम हुआ है, इसमें क्या मास्क पहन न.
ममता : नहीं, वो झुकाम वैसे भी फ़ैल जाता है न तो किसी को न लगे इस लिए इसने पहन रक्खा है.
कामनादेवी : कोई बात नहीं, आओ बैठो, ये भी बहोत लम्बा है, क्यों स्वर्ण? (उसने मुस्कुराते हुए कहा) में तो सोचती थी की हमारे खंडन में hi सब लम्बे है, पर आज पता चला की उनसभी लम्बा कोई है. (पद्मा की और देख kar)Bahu, सबके लिए दूध तो मंगवाओ.
पद्मा : जी माजी. (वो अंदर चली गयी. हम सब बेथ गए थे, वो और ममता भाभी बाते कर रही थी, उनकी बहु किसी नौकरानी के हाथ में ट्रे पकड़वाए वह आयी और सबको दूध देने लगी, उन्होंने दूध देते हुए मेरी आँखों में देखा, मेने शिर हिलाया)
कामनादेवी : मास्क निकल दो बीटा, कुछ नहीं होता. (वैसे भी मुझे दूध पीना था तो मेने मास्क निकल दिया और दूध पिने laga)(Kamnadevi, उसको बोल कर फिर ममता से बाटे करने लगी थी, फिर अचानक उनकी निगाह शिव पर पड़ी, एक बार ऐसे hi देखा फिर पलट कर फिर से देखा और देखने लगी, और ध्यान से देखने लगी, ये देख कर ममता की सांसे बढ़ने लगी, उसका दिल धड़कने लगा, पद्मा ने भी अपनी सास को ऐसे आश्चर्य से देखते हुए देखा, कुछ देर ख़ामोशी छायी रही).
पद्मा : क्या हुआ माजी?
कामनादेवी : हहह... नहीं कुछ nahi...(Wo फिर खामोश हो गयी पर वो शिव को hi देख रही थी)
ममता : (सबने दूध पि लिया था, मेने फिर मास्क पहन liya)Ab हम चलते है तेजी.
कामनादेवी : हहह... हआ. (उसने अपने आपको sambhala)Ye कौन है ममता?
ममता :मेने बताया तो तेजी, ये हमारे साथ आया है, इसका नाम शिव है.
कामनादेवी : हआ, पर ये है कोण?
ममता : वो जूही का दोस्त है.
कामनादेवी : ओह!.
ममता : अच्छा तेजी हम चलते है.
कामनादेवी : हहह, हा. आते रहना बेटी. (हम वह से बहार निकल गए, जब तक हम वह से निकले वो मुझे hi देख रही थी, हम वह से निकल gaye)(Padma ने भी ये देखा था)
पद्मा : उस लड़के को आप ऐसे क्यों देख रही थी माजी?
कामनादेवी : नहीं... कुछ नाहीई.... (बात को बदलते hue)Kappu कहा है, निचे नहीं आयी.
पद्मा : वो आराम कर रही है. कह रही थी की शिर में दर्द है.
कामनादेवी : क्या हो गया है इस लड़की को भी.
स्वर्ण : क्या हुआ है उसे? (तीनो अंदर आ चुकी थी)
कामनादेवी : अब क्या बताऊ, तुम सबकी माँ बन ने की बात से उसके ससुरालवाले उसको तना दे रहे है, क्या कहे हम भी, क्या हमने कभी अपनी बहु को ऐसे तना दिया है क्या, लोग समझते नहीं इतनी सी बात को, अरे आज नहीं तो काल हो जायेगा बच्चा. जा तू hi कुछ समजा उसको. (कहते हुए वो अपने कमरे की और बढ़ गयी, स्वर्ण उस कमरे की और जाने लगी तो पद्मा भी पीछे पीछे हो ली, वो भी सब जान न चाहती थी क्यों की माँ तो उसको भी बन न था)
स्वर्ण : (दरवाजा खोलने का प्रयास किया तो वो अंदर से बंद था, उसने खत khataya)Kappuuu, ोोू कप्पूउऊउउउ. (थोड़ी देर बाद दरवाजा khula)Kya हुआ तुजे. (उसके शिर पर हाथ रख कर वो चिंता से बोली, उसको देख कर hi लग रहा था की वो रो रही thi)Tu रो रही थी? (वो अपनी बहन से लिपट गयी और फिर रोने lagi)Kyu रो रही है, क्या हुआ? (वो बस रो रही thi)Chal अंदर chal.(Wo उसको कमरे में ले गयी, उसको बिठाया, वह पड़े जग से पानी निकल कर दिया उसको, वो थोड़ी शांत hui)Kya हुआ, रो क्यों रही है तू?
कृपाली : में माँ नहीं बन पायी उसमे मेरी क्या गलती है दीदी, क्या करू में? (फिर आँखों से आंसू टपकने लगे)
स्वर्ण : अरे इसमें रोनेवाली क्या बात है, जो जायेगा सब, तू रो मात.
कृपाली : इस अनुष्ठान की वजह से वो कह रहे है की दोष मुज में hi है, अगर ऐसा न होता तो तुम्हारे घरवालों को ये अनुष्ठान रखने की जरुरत hi न पड़ती. आप hi बताओ दीदी क्या दोष है मेरा, क्या मेरी वजा से में माँ नहीं बन रही हु? (वो फिर रोने लगी).
स्वर्ण : (उसको चुप करते hue)Isme रो क्यों रही है तू, सब ठीक हो जायेगा, आज नहीं तो कल माँ बन hi जाएगी तू, इसमें रोनेवाली क्या बात है. (पद्मा भी वह बेथ गयी)
पद्मा : दीदी, उसका रोना जायज है, ऐसी क्या कमी है हम में जो हम माँ नहीं बन सकती, आप hi बताओ हमे.
स्वर्ण : (वो अंदर hi अंदर डरने लगी thi)Are ऐसी कोई बात नहीं है, हो जायेगा सब ठीक.
पद्मा : (स्वर्ण का हाथ पकड़ kar)Nahi दीदी, आपको बताना पड़ेगा की आप कैसे माँ बानी.
स्वर्ण : (हकलाते hue)Kaise से क्या मतलब है भाभी, जैसे सब माँ बनते है.
पद्मा : वही पूछ रही हु दीदी, कैसे? क्या कोई ट्रीटमेंट लिया आपने, कोई मन्नत मांगी? क्या किआ ऐसा जो आप माँ बन रही हो और हम नहीं. (दुखी तो पद्मा भी थी, वो भी अब तंग आ गयी थी ये सब सुन सुन कर, माँ तो उसको भी बन न था)
स्वर्ण : (उसका शिर फटने लगा था, उसने अपने आपको sambhala)Are सब ठीक हो जायेगा, बाबाजी ने अनुष्ठान किया है न, अब सब ठीक हो जायेगा.
कृपाली : पर आप तो अनुष्ठान से पहले hi माँ बन रही हो, और ममता दीदी भी, और तो और बीणाभाभी भी माँ बन रही है. दीदी बताओ न आखिर कहा कमी रह गयी हम से?
स्वर्ण : कोई कमी नहीं है आप दोनों में, में बाबाजी से बात करती हु, बॉस.
कृपाली : दीदी प्लीज कुछ करो, वर्ण में मर jaungi.(Usne रट हुए कहा)
स्वर्ण : एक मरूंगी जो ऐसी बात मुँह से निकली तो, मेने कहा न सब ठीक हो जायेगा.
पद्मा : (उसकी भी आंख में ासु आ gaye)Nahi दीदी आपको कुछ करना hi होगा, में भी थक गयी हु लोगो के तने सुन सुन कर. मेरा भी मान करता है मि मार जाऊ.
स्वर्ण : तुम दोनों पागल हो गयी हो, मेने कहा न में बात करती हु. (दोनों रो रही थी और स्वर्ण का दिमाग फैट रहा था, वो कैसे बता सकती है की वो माँ कैसे बन रही है, उसको कुछ समाज नहीं आ रहा था, उसका भी मान कर रहा था की अपनी परिस्थिति पर रोये पर वो बैठी रही और उन दोनों को संभालती रही)
वह बिना भी तैयार हो चुकी थी, उसको भी ट्रैन से जाना था, जित्नेष उसको छोड़ने स्टेशन जानेवाला था. जिग्नेश बार गाड़ी साफ़ कर रहा था, अंदर सास ससुर के साथ बिना थी.
निर्मलादेवी : क्या बहु तुम भी, छोड़ क्यों नहीं देती नौकरी को, क्या कमी है तुम्हे, ऐसी परिस्थिति में जाना जरुरी है क्या? (बिना अपनी नज़ारे झुकाये कड़ी थी)
चंद्रभान : तुम नहीं संजोगी भाग्यवान, जाने दो उसे, लड़कीओ का अपने पैरो पर खड़ा होना जरुरी होता है. बात सिर्फ पैसो की नहीं है. (बिना ko)Tum जाओ बहु, पर अपना ख्याल रखना, वैसे तुमसे बहोत साडी बाटे करनी थी पर समय न मिल पाया.
बिना : किस बारे में पापा?
चंद्रभान : (वो बहोत कुछ पूछना चाहता था, पर समाज नहीं आ रहा था की क्या बात करे, और समय भी काम hi tha)Nahi, कोई खास बात नहीं है बहु, बस ऐसे hi, अग़लिबर आओगी तो आराम से बात करेंगे.
बिना : आप फ़ोन कर देना.
चंद्रभान : ठीक है, अगर मुझे लगा तो फ़ोन करूँगा. (बहार से जिग्नेश ने आवाज दी, बिना ने दोनों के पेअर chhue)Jiti रहो.
निर्मलादेवी : सदा सुहागन रहो, दूधो नहाओ पुतो फलो. (उसने अपनी बहु को गले से लगा लिया) अपना ख्याल रखना बेटी, हमे चिंता लगी रहती है.
बिना : जी माजी. (वो भी वह से निकल गयी)
हम सब भी जूही के घर पहुंच गए थे, दो पहर को खाना खाया हमने. हमे भी निकलना था, ममता को शिव से मिलना था पर कोई ऐसा मौका hi नहीं मिला. वो समझती थी की उसको मर्यादा का पालन भी करना होता है. उसने मुस्कुराते हुए शिव को विदा किया.
में और जूही भी ट्रैन से निकल गए.





































