Adultery Kundali Bhagya - Page 27 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 187

आज शिव नहीं आया था तो जहान्वी भी ज्यादा देर साइट पर नहीं रुकी, पिंकेश ने भी रिपोर्ट दिखाए पर उसको कोई इंट्रेस्ट नहीं था और तबियत का बहाना कर के वो वापस लौट गयी थी. करुणा ने भी उसको फ़ोन किया था तो उसको भी यही कह दिया था की उसका मान नहीं है तो मिलने नहीं गयी. वो बेचैन हो रही थी, और उसकी वजह से थोड़ा चीड़ भी रही थी. न उसने ठीक से खाना खाया न किसी से बात की. उसकी माँ ने भी पूछा था पर उसने बात को ताल दिया. रात को भी वो अपने बिस्तर पर करवाते बदल रही थी. जब उस से रहा नहीं गया तो अपने पुरे कपडे उतर दिए उसने,





पुरे बदन में एक अजीब सी सरसराहट महसूस हो रही थी, अपने आप hi वो अपने बदन से खेल रही थी, इस वक़्त थी उसको शिव की याद hi आ रही थी.

जहान्वी : कहा हो शिव? क्यों मुझसे दूर जा रहे हो? (कहते हुए उसने अपने निप्पल को मरोड़ diya)Shhhh आए जावा शिव, शह्ह्ह्ह तुम्हे जो चाहिए वो दूंगी यार, जो करना है कर लेना, बस आ जाओ. ऐसी तड़प तो मेने कभी महसूस नहीं की है शिव, शहहहहह (कहते हुए उसने अपनी योनि को छुआ तो वह योनि से रास निकल रहा था, उसने एक ऊँगली अपनी छूट में दाल di)Shhhhh शीइइइइव, में बुरी हु शिव शह्ह्ह्हह्ह पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही यार, तुम क्या सोचोगे मेरे बारे में शह्ह्ह्हह्ह कस में अच्छी लड़की होती शह्ह्हह्ह्ह्ह (वो जैसे जैसे अपनी छूट में ऊँगली कर रही थी उसकी छूट से रास और निकल रहा था)





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अब जो भी हो शह्ह्ह्हह्ह में अब और नहीं रुक शक्ति शह्ह्हह्ह्ह्ह, तुम चाहे जो भी सोचो शहहहहह पर मुझे अपना लो सीईव शहहहहह. में बहोत गन्दी हु शह्ह्हह्ह्ह्ह पर क्या करू शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह आए जाओ न शह्ह्हह्ह्ह्ह. (वो जल्द hi झाड़ gayi)Shhhhhh shiiiiiiiiiiiiv. (वो वैसे hi लेती रही और कब नींद आ गयी उसको पता hi नहीं चला)





वही दूसरी तरफ बिना भी अपने बिस्तर पर करवाते बदल रही थी, अपने पति के साथ रहने के लिए उसने सब किआ था, उसने पूरी नंगी हो कर अपने पति का साथ दिया था, और पहले के मुकाबले उसके पति ने भी उसके बदन से खेला था और सम्भोग भी किआ था, पर वो संतुस्ट न हो पायी थी. सम्भोग के बाद जिग्नेश तो सो गया था पर बिना को नींद नहीं आ रही थी. उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी की वो शिव के पास जाये, पर जब उस से रहा न गया तो आखिर वो वह पहुंच hi गयी, उसने सिर्फ गाउन पहना हुआ था. जब वो शिव के कमरे के पास पहुंची तो उसको हलकी हलकी सिस्किअ सुनाई दी, वो समाज गयी की अंदर क्या चल रहा है. उसको शिव पर भी गुस्सा आया की यहाँ वो तड़प रही है और वो किसी और के साथ है. पर फिर वो सोचने लगी की कोण है उसके साथ, ममतादिदी या फिर स्वर्णादिदी, उसने कान लगा कर सुन ने का प्रयास किया पर स्वर बहोत धीमा था, उसने आस पास देखा, पुरे घर में सन्नाटा छाया हुआ था, उसने हिम्मत कर के के होल से देखा, लड़की का नंगा बदन दिख रहा था उसे, शिव निचे लेता था और औरत उसके ऊपर थी, उसकी योनि में उसका वो बड़ा लुंड अंदर बहार हो रहा था, ये देख कर बिना की हालत ख़राब होने लगी, उसके बदन में भी चीटिया रेंगने लगी. देखते हुए उसका हाथ कब अपनी योनि पर चला गया उसको भी पता नहीं चला. तभी वो औरत हटी और निचे लेट गयी, उसने देखा की ये स्वर्ण थी, वैसे तो उसको जतका नहीं लग्न चाहिए था पर उसको यकीं नहीं हो रहा था की इतना कुछ कहने के बाद भी वो उसके साथ है. रिश्ते में वो दोनों भाई बहन लगते थे अगर उसका शक सही है तो, और ये बात स्वर्ण भी जानती थी फिर भी वो अभी उसके साथ थी. उनकी कामलीला देख कर वो भी काफी गर्म हो गयी थी, आखिर जब उसने देखा की उनका हो गया तो वो आहिस्ता से अपने कमरे में लौट गयी थी, वह जा कर भी उसको चैन नहीं था, वो करवाते बदल रही थी, उसने देखा कहि उसका पति आराम से सोया हुआ है. उसने जिग्नेश को पुकारा भी पर वो बेसुध सोया हुआ था. आधे घंटे बाद भी जब उसको नींद नहीं आयी तो फिर वो उठी और शिव के रूम की और चल पड़ी, क्यों वो तो उसको भी नहीं पता था. इतने समय से वो शिव से दुरी बनाये हुए थी, और उसको ये सही hi लग रहा था, आखिर वो कैसे अपने देवर के साथ ये सब कर सकती थी, पर फिर ममता और स्वर्ण का ख्याल आता था, जब वो लोग रह रही है तो में क्यों नहीं रह सकती. यही सब सोचते हुए वो शिव के दरवाजे के बहार पहुंच गयी, वो वह कड़ी कड़ी सोच hi रही थी की दरवाजा खुला, शिव ने उसको देखा, वो कुछ समझती उस से पहले hi शिव ने पकड़ कर उसको रूम में खिंच लिया, और दरवाजा बंद कर दिया. अचानक ये सब हो गया था, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, वो शिव को डरते हुए देखने लगी, दर शिव से नहीं था पर परिस्थितिओ से था. शिव उसके होठो की और बढ़ा तो उसने मुँह घुमा लिया.

बिना : (हलकी नाराजगी se)Kya कर रहे हो? (धीरे से वो बोली)

शिव : (मेने किश नहीं की बस उनको dekha)Itni रात को यहाँ क्या कर रही हो आप?

बिना : में... में वोऊ... (वो चुप हो गयी क्यों की उसके पास कोई तर्क नहीं tha)(Me समाज रहा था की वो क्यों आयी है, तो में फिर झुकने लगा, तो उन्होंने मेरी छाती पर हाथ रख कर मुझे roka)Nahi.

शिव : क्यों?

बिना : जाओ दीदी के साथ hi रहो. (उसने जलन के मरे कहा)

शिव : (में muskuraya)To आप hi आयी थी पहले? (उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, बस मुझे देखती रही) अगर दूर hi रहना है तो फिर क्यों चक्कर लगा रही हो? (बिना कुछ नहीं boli)(Me फिर उनके होठो की और झुकने लगा, वो मुझे रोक रही थी पर में रुका नहीं, उन्होंने मुँह घुमा लिया, मेने उनके गाल पर किश करना सुरूर कर diya)(Beena बेचैन हो उठी, वो खुद चाहती थी पर फिर भी एक झिझक थी)

बिना : कोई आ जायेगा शिव. (उन्होंने धीमी आवाज में कहा, पर में रुका नहीं, में उनके गाल और गर्दन पर चाटने laga)Kya कर रहे हो (उनकी सांसे भरी हो रही थी, वो मुझे धकेल रही थी पर उनकेहाथो में दम नहीं था, में दो हाथ निचे ले गया और उनके कूल्हों को थम लिया और सहलाने laga)Shhhhh शिईयिव मुझे जाना है शहहहहह वो जाग जायेंगे. (अब धकेलने की बजाये वो शिव के हाथ को दबा रही थी, क्यों की वो खुद गरम हो रही थी, पर उसको दार लग रहा था, पर जैसे जैसे शिव उसके कूल्हों को मसल रहा था वो पिघलती जा रही थी, पर फिर भी आपने आपको रोकने का प्रयास कर रही thi)Shhhh नहीं शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह मात करो शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (पर वो तो उसको जैसे सुन hi नहीं रहा था, वो उसका गाउन ऊपर उठाने laga)Shhh नहीं शीइइइइइइव (उसने रोकना चाहा पर शिव ने गाउन उठा दिया और उसकेनंगे कूल्हों को थम लिया और उसे दबाते हुए सहलाने लगा, वो अंदर से पूरी तरह नंगी hi thi)(Unke प्रूस्त कूल्हों को सहलाते hi मेरा लुंड पूरी औकात में आ गया था, दीवाल से चिपकाये उनके गले को चूमते और चाट ते में लुंड को उनकी योनि पर दबाने laga)(Apani योनि पर लुंड का एहसास होते hi बिना शीयर उठी, उसकी आंखे भी बंद हो gayi)Shhhhhh शीइइइइव मात कर न शह्ह्हह्ह्ह्ह. (वो बोल तो रही थी पर उसको रोकना नहीं चाहती थी, उसके हाथ भी शिव की बाह को सहलाने लगे the)Shhhhh सुन न शह्ह्हह्ह्ह्ह, वो जाग जायेंगे शहहहहह.

शिव : आप क्यों आयी थी फिर?

बिना : शहहह नहीं पता शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (शिव जो की अभी सिर्फ अंडरवियर में था, वो उसकी छाती पर हाथ फिरने lagi)Ruk जा न सीईव शह्ह्ह्हह्ह. (उसने बेबसी से कहा पर वो काफी गर्म हो चुकी थी, शिव भी उसकी सुन नहीं रहा था, उसने उसको बहो में उठा लिया और बीएड पर लेता दिया, वो संकुचन लगी और जैसे अपने आपको छुपाने lagi)Nahi शिईयिव प्लीज. (मेने उनकी आँखों में देखा पर लगा नहीं की वो जाना चाहती है, तो मेने उनकी बात का ध्यान नहीं दिया और बिस्तर पर चढ़ गया और अपनी अंडरवियर उतर दी, मेरा लुंड बहार झूलने laga)(Beena की भी नजर उसके लुंड पर पड़ी, वो फिर सिमटने लगी और अपने गाउन को सही कर के खुद को छुपाने lagi)Nahi शीइइइइइव. (में जनता था की वो यहाँ किस लिए आयी थी और काफी समय से वो मुझसे दूर रहने की कोशिस कर रही थी, पर में जनता था की वो क्या चाहती है तो मेने उनके दोनों पेअर पकड़ कर मेरी और खिंचा, और गाउन को कमर तक ऊपर कर दिया, वो नंगी hi थी जो में देख चूका था, उनकी गीली छूट मेरे सामने थी, उनके भी बाल काम hi थे. वो अपनी छूट छुपाने का प्रयास करने लगी तो मेने उनके हाथ पकड़ कर हटा दिए और झङगे पकड़ कर उनकी योनि को मुँह में भर liya)Shhhhhhhh Shiiiiiiiiiiiv





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(उन्होंने मेरे शिव को धकेलने का प्रयास किआ पर में उनकी छूट के रास को चूसने और चाटने laga)Shhhhhhh शीइइइइइइव शहहहहह (में बड़ी सिद्दत से छूट को चाट रहा था, वो सिस्किअ ले रही थी, कभी कभी उन्हें याद आ जाता तो वो मुझे धकेलती पर में उनकी छूट को चाट ता रहा, अब वो मेरे शिर को सहलाने लगी थी और आंखे बंद किये सिसकिया ले रही थी, मेने गाउन को और ऊपर किआ तो उन्होंने अपने कूल्हे उचक कर मुझे सहायता की. में थोड़ ऊपर हुआ और उनके गाउन को पूरा निकल दिया, अब वो पूरी नंगी hi थी. वो मुझे देख रही थी पर मेने ध्यान नहीं दिया और उनके ऊपर हो कर फिर से उनकी छूट को चाटने लगा, हम 69 में थे, पर मेरा लुंड थोड़ा ऊपर था) (शिव उसकी छूट को चूस और चाट रहा था, और उसका लुंड उसकी आँखों के सामने था, वो उसे ललचायी नजरो से देख रही थी, पर छू नहीं रही थी, पर जैसे जैसे शिव उसकी छूट को चाट रहा था उसने भी शर्म छोड़ना hi बेहतर समजा, कपट हाथो से उसने लुंड पकड़ लिया और अपना शिव थोड़ा ऊपर कर के लुंड को मुँह में ले hi लिया, उसको बहोत मज़ा आ रहा था, न जाने कब से वो तड़प रही थी, उसने खुद को बहोत रोका था संजय था पर वो बेबस हो गयी थी, वो लुंड को अच्छे से चूसने लगी, अपना शिर ऊपर निचे करते हुए लुंड को अपने मुँह की शेर करवाने लगी)





(में भी खुस था की आखिर वो मान गयी थी, थोड़ी देर बाद में उठा और उनके पैरो के बिछ आ गया, हमारी नज़ारे मिली तो उन्होंने मुँह फेर लिया, मेने लुंड छूट से सत्ता दिया था और में उनके ऊपर झुक गया, वो दूसरी और देख रही थी)

शिव : मेरी और देखिये (वो कुछ न बोली न dekha)Meri और देखिये तो (मेने फिर कहा, उन्होंने हलकी नाराजगी से मुझे देखा, मेरा लुंड छूट से सत्ता हुआ था पर टोपा हम दोनों के पेट के बिच tha)Nahi चाहती की में ये करू? (वो कुछ नहीं बोली बस मुझे देखती रही, मेने उनके बाल को पीछे क्या जो गाल पर आ गए the)Kahiye न, आप सच में नहीं चाहती की में ये करू? (वो फिर भी कुछ नहीं बोली, बस मुझे देख रही थी, मुझे लगा की वो नहीं चाहती है, तो मेने नज़ारे झुकाई और उठने laga)(Shiv को उठता देख बिना ने तुरंत उसकी कमर थम ली और उसको रोक liya)(Mene फिर उनको देखा, वो कुछ नहीं बोली बस मुझे देखती rahi)Akhir आप चाहती क्या है, न मुझे कुछ करने दे रही है न उठने दे रही है.

बिना : तुम बहोत गंदे हो. (जूठी नाराजगी से वो बोली, में उन्हें देख रहा था और समझने की कोशिस कर रहा था, वो भी ये समाज रही थी की मेरे मान में क्या चल रहा है) ऐसे hi में चक्कर नहीं काट रही थी. (वो हल्का सा मुस्कुराते हुए, शरमाते हुए boli)(Mere चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी, और में झुक गया और उनके होठो को चूसने लगा, वो भी मुझसे लिपट गयी और मुझे सामने से किश करने लगी,





मेने उनके स्तन को मसाला, उन्होंने मुँह chhudaya)Shhhhhh आराम se(Unhone मुझे डाटा, में मुस्कुराया और उनके स्तन को हलके से मसलते हुए निप्पल को चूसने लगा और लुंड को छूट पर रगड़ने laga)Shhhhhhh शीइइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह बहोत तड़प रही थी शह्ह्हह्ह्ह्ह, क्यों दूर नहीं रह सकती यार शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (निप्पल निकल kar)Rehna क्यों है दूर?

बिना : तो क्या करू, अपने देवर के साथ ये सब karu(Unhone बे बेबसी से कहा)

शिव : मुझे नहीं लगता ऐसा.

बिना : तुम नहीं समझोगे शिव, तुम कुछ नहीं जानते, पर मुझे पूरा यकीं है की तुम hi शिवांस हो, और ऐसे में में तुम्हारे साथ रह के पाप कर रही हु. (उन्होंने बेबसी से कहा) और दूर भी नहीं रह प् रही हु.





शिव : भूल जाओ सब, बस इतना याद रक्खो की में शिव हु, बस शिव. वो अंश था और में पूरा शिव हु. (कहते हुए मेने अपने लुंड का टोपा छूट पर लगाया और हलके से दबा दिया)

बिना : (अपनी छूट में घुसते लुंड को महसूस कर ke)Shhhhhhh Shiiiiiiiiiiiv. (मेने आधे से ज्यादा लुंड आहिस्ता से छूट में उतर दिया, वो पहले से hi बहोत गीली थी, पर कसावट बरक़रार थी, छूट ने भी मेरे लुंड का स्वागत किया और लुंड से लिपट गयी, में उनके होठो को चूसने लगा, वो भी मेरी पीठ को सहलाते हुए मुझे किश करने लगी, थोड़ी देर बाद में थोड़ा ऊपर हुआ और लुंड अंदर बहार करना सुरु कर दिया, वो नशीली आँखों से मुझे देख रही thi)Shhhhh अह्ह्ह्हह श अह्ह्ह्ह शहहहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह.

शिव : क्यों इतने दिनों से भाग रही थी? (वो मुझे रोनी सूरत से देख रही थी, वो पूरी तरह लुंड को महसूस कर रही थी, में धक्के लगा रहा था वो मचल रही thi)Iske लिए hi आयी थी न, बताओ?

बिना : हा शहहहहह मेने कोशिस की सीईव शह्ह्ह्हह्ह पर नहीं रह पायी शह्ह्हह्ह्ह्ह (में झुका और उनके निप्पल को चूसने laga)Shhhhhh अह्ह्ह्हह पागल कर दिया है तुमने मुझे शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह क्या करू कुछ समाज नहीं आ रहा शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : तो फिर दूर क्यों भाग रही हो?

बिना : ये ठीक नहीं है शिईयिव शहहहहह अह्ह्ह्हह तुम समझते क्यों नहीं शहहहहह ेयीईइ शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह (छूट में आ जा रहा लुंड उसको बहोत अच्छा लग रहा था, ऐसा सिर्फ वो शिव के साथ hi महसूस करती थी, वो अपनी छूट कास रही thi)Ahhhhh शह्ह्ह्ह ऐसे hi करो शिईयिव शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह शहहहहह करते रहो शह्ह्ह्हह्ह बहोत अच्छा लग रहा है शहहहहह अह्ह्ह्हह ऐसे hi शहहहहह, करते रहो शहहहहह अह्ह्ह्हह शह्ह्हह्ह्ह्ह. (थोड़ी देर ये चलता रहा, और वो झड़ने lagi)Shhhhhh अह्ह्ह्हह शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह में गयी यार शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह शह्ह्ह्हह्ह. (कितने दिनों से जमा पानी बहने लगा, उसने शिव के कंधे पर दन्त गधा diye)Ummmmmm , फूऊऊऊ फूऊ उम्मम्मम. (में रुक गया, थोड़ी देर बाद में उठा और लुंड बहार निकला, वो मुझे देखने लगी)

शिव : घूम जाओ. (बिना समाज गयी और अपने घुटनो के बल हो गयी और शिर निचे बिस्तर पर टिका diya)(Unki चौड़ी गांड मेरे सामने थी, छूट पूरी गीली हो चुकी थी, और उसमे से रस निचे टपक रहा था, गांड का छेड़ भी पूरा गिला हो चूका था, में झुका और गांड के छेड़ को चाटने laga)(Beena तड़पने लगी, जैसे जैसे शिव उसके गांड के छेड़ को जीभ से कुरेद रहा था वो सिस्किअ ले रही थी, उसका छेड़ खुल बंद हो रहा था, कूल्हों पर रक्खे शिव के हाथ को उसने सख्ती से पकड़ liya)Shhhhh शिईयिव shhhhhhhh(Wo अपनी कमर हिलने लगी (मेने छूट केहोठो को फैलाया और जीभ अंदर दाल di)Shhhhh शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह शहीइइइइइइ (वो बहोत गर्म सिस्किअ ले रही थी, उनकी सिस्किअ सुन मेरा लुंड कूद रहा था, में छूट को फैला कर अंदर के लाल भाग को अच्छे से चूस और चाट रहा tha)Shhhhh शीइइइइव शह्ह्ह्ह पागल बना दिया है तुमने शहहहहह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेने अंगूठे को छूट रास से गिला किया और गांड के छेड़ पर दबाने laga)(Beena समाज रही थी पर वो उत्तेजना में थी और उसको ये अनुभव भी अच्छा लग रहा था, शिव ने जैसे hi जोर डाला अंगूठा गांड के छेड़ को फैला कर अंदर घुस gaya)Shhhhhahhhhhh शह्ह्ह्ह (उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया था, पर में न रुका, गांड के छेड़ के अंदर बहोत गर्मी थी, मेरे अंगूठे पर वो महसूस हो रही थी, में ऊपर हुआ और लुंड को फिर छूट के छेड़ पर लगाया और अंदर उतरने laga)(Gaand में अंगूठा था और छूट में लुंड, वो सिसक उठी)

शहहहहह शीइइइइइव अह्ह्ह्हह्हह. (वो झटके खा रही थी, दोनों छेड़ में ऐसी सरसराहट उस से बर्दास्त नहीं हो रही थी, उसने आंखे बंद कर ली और शिव को करने दिया जो वो कर रहा था, लुंड अंदर बहार हो रहा था और साथ में अंगूठा भी अंदर बहार हो रहा था, ऐसा अनुभव वो पहली बार महसूस कर रही थी)





शह्ह्ह्ह शीइइइइव शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह (एक हाथ से उसकी कमर पकड़ कर शिव उसको छोड़ रहा था, और उसको बहोर मज़ा आ रहा tha)Shhhhh शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह शह्ह्ह्हह्ह. (लगातार चुदाई से उसका पानी निचे गिर रहा था, लुंड पूरा गिला हो गया था, थोड़ी देर ऐसे hi चलता रहा, फिर शिव ने लुंड निकल लिया, वो बिस्तर पर उलटी लेट गयी और हांफ ने लगी, शिव उसके कूल्हों को मसल रहा था और उसे चाट रहा था, उसका ऐसा करना उसे बेहद अच्छा लग रहा था, थोड़ी देर बाद शिव ने अपना लुंड उसके कूल्हों के बिच लगाया और वह घिसने लगा, लुंड उसके गांड के छेड़ पर रगड़ रहा था, वो आंखे बंद किये लेती रही, वो उसको किसी बात के लिए रोक नहीं रही थी, जब लुंड उसके गांड के छेड़ पर रुक गया तो वो सिहर उठी, शिव ने दबाव बढ़ाया तो उसने शिव के हाथ को पकड़ liya)Shiiiiiiiiiv. (में ज्यादा छूट को छोड़ नहीं सकता था, तो मेरे लिए यही रास्ता बचा था, मेने थोड़ा और दबाव बढ़ाया तो लुंड का टोपा गांड के छेड़ को फैलते हुए अंदर घुस गया)





(बिना को लगा की छेड़ अभी फैट jayega)Oooo माआआ shhhhhhhhhh. (में रुक गया, गांड का छेड़ एकदम टाइट हो गया था और मेरे लुंड का गाला घोट रहा tha)Shhhhh शीइइइइइव shhhhhhhhhh.(Beena की सकल रोने जैसी हो गयी थी, पर शिव रुका हुआ था तो उसको रहत मिली, थोड़ी देर बाद वो थोड़ी संभल गयी और उसने अपने छेड़ को ढीला छोड़ दिया और शांति से लेती rahi)(Mene लुंड को वापस खिंच लिया, छेड़ ो आकर में खुला था, मेने वह ढेर सारा थूक लगाया, और लुंड पर भी थूक लगाया, और फिर लुंड को गांड पर लगाया और दबाया तो लुंड फिर से अंदर चला gaya)Ahhhhh शह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेने लुंड को थोड़ा दबाया तो वो अंदर जाने लगा, मेने देखा की मैडम ने कास के चद्दर पकड़ ली थी, में फिर रुक गया, में कोई जल्द बजी नहीं करना चाहता था, में लुंड को थोड़ा आगे पीछे करने लगा, लुंड दो तीन इंच hi अंदर था)

(बिना अपनी गांड के छेड़ में लुंड महसूस कर रही थी, उसका छेड़ फटने की कगार पर था, उसको दर्द भी हो रहा था पर वो उसको सेहन कर रही थी, थोड़ी देर लुंड अंदर बहार होता रहा, वो थोड़ी रिलैक्स होने लगी, इस नए अनुभव से वो और उत्तेजित हो रही थी, उसने ये सब सुना था पर आज उसके साथ ये हो रहा tha)(Me थोड़ी देर करता रहा पर मुझे आगे बढ़ने में थोड़ा खतरा लग रहा था, क्यों की मेरा लुंड अब पीछे की और मोटा था तो मेने रिस्क नहीं लिया, मुझे अच्छा लग रहा था पर मेने लुंड वापस निकल लिया, मेने देखा तो गांड के छेड़ के अंदर की मासपेशिया भी दिख रही थी, मेने मैडम को सीधा कर दिया, वो सीधी हो गयी, में उनके ऊपर हो आ गया और उन्हें देखने लगा, वो भी मुझे देख रही thi)Kya हुआ?

शिव : कुछ नहीं. (मेने मुस्कुरा के कहा)

बिना : (उसको बोलते हुए भी शर्म आ रही thi)Ruk क्यों गए फिर?

शिव : ऐसे hi. (उनके गाल पर से बाल हटते हुए, जो की पशीने की वजह से चिपक गए थे) दर्द हुआ?





बिना : (मुस्कुरा ke)Hua, पर इतना भी नहीं था. अगर मान है तो वह कर शक्ति हो. (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : अपने घर पर करेंगे. (मेने मुस्कुरा के कहा तो वो भी मुस्कुरायी)

बिना : (शरमाते hue)Aage कर लो.

शिव : रहने दीजिये.

बिना : क्यों? (उसको समाज नहीं आया)

शिव : ज्यादा करना ठीक नहीं है.

बिना : ऐसा क्यों कह रहे हो, दीदी के साथ तो पूरा किया था न. (मेने आंखे चौड़ी कर के देखा तो वो शर्मा गयी)

शिव : तो सब देख रही थी आप? (वो कुछ न बोली बस शर्मा गयी, मेने उनके होठो को चुम लिया, थोड़ी देर बाद में उनको देखने लगा, वो फिर बोली)

बिना : करो न शिव, ऐसा क्यों कर रहे हो, कुछ नहीं होगा. मुझे वो सब अपने अंदर महसूस करना है (उन्होंने शरमाते हुए कहा, मेरा लुंड फिर कूदने लगा, वो शर्मा गयी, मेने उनके पेअर फैलाये और पैरो के बिच बेथ गया, और छूट को देखा, वो शरमाते हुए मुझे देखने लगी, मेने लुंड फिर से छूट पर लगाया और अंदर उतर दिया, और पोसिटिव ले कर फिर से छोड़ने laga)Shhhhh शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह. (वो कभी आंखे बंद करती तो कभी मुझे देखती, उनके चेहरे पर कामुकता छलक रही थी)

शिव : अच्छा लग रहा है?

बिना : शह्ह्ह्ह हआ शहहहहह तुम समाज नहीं पाओगे सीईव शह्ह्ह्ह कितना मज़ा आता है शहहहहह. मेने कैसे अपने आपको रोका है ये में hi जानती हु, शहहहहह ऐसे hi करते रहो शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह. (मेने उनके उछाल कूद कर रहे स्तन को पकड़ लिया और मसलने लगा, वो फिर से muskurayi)Shhhhh तुम्हे में अच्छी लगती हु न शिव शह्ह्ह्ह (में बस muskuraya)Kaho न शिव में अच्छी लगती हु न. (में मुस्कुराते हुए उनके ऊपर हो गया और उनके होठो को चूसने लगा, फिर कहा)

शिव : है, बहोत अच्छी लगती हो.

बिना : (वो धक्को से ऊपर निचे हो रही thi)Muje भी तुम बहोत अच्छे लगते हो शिव शहहह, मुझे मत छोड़ना कभी शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : आपको ऐसा क्यों लगता है.

बिना : बस ऐसे hi कह रही हु, (वो धक्को से ऊपर निचे हो रही thi)Muje ऐसे hi प्यार करते रहना शहहह.





शिव : (मुस्कुराते hue)Ise प्यार नहीं चुदाई कहते है.

बिना : गंदे कही के (कहते हुए वो मुस्कुरायी, फिर मेरी आँखों में देखते hue)Ye प्यार है शिव, सिर्फ प्यार (उन्होंने अपने पेअर मेरी कमर में लपेट liye)Bhar दो मुझे अपने प्यार से शह्ह्ह्हह्ह (उनकी बाटे बहोत अच्छी थी, वो भी बहोत अच्छी थी, और उनकी छूट में भी बहोत अच्छा लग रहा था, में भी झड़ने के करीब पहुंच रहा था)

शिव : मेरा भी निकलने वाला है. (मेने धक्के लगते हुए कहा)





बिना : अंदर hi डालना.

शिव : (मुस्कुराते hue)Ander कहा?

बिना : (वो शर्मा गयी, पर फिर मुझे अपनी और खींचा और मेरे कान में धीरे से boli)Meri छूट में. (मेने उन्हें देखा तो वो शर्मा गयी, में भी मुस्कुराया, मेरे धक्के तेज हो गए the)Shhhhhh में भी झाड़नेवाली हु शिव शहहहहह (वो मुझे अपनी और खिंच कर मेरे बालो को नोचने lagi)Shhhhhh शीइइइइव शहहह अह्ह्ह्हह भर दो मुझे शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह





(लगातार धक्को से वो झड़ने लगी और उनकी छूट कास गयी, मेने भी अपना लावा छोड़ diya)Shhhhhh शीइइइइइइव शहहहहह मेरे शिईयिव शह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेरे धक्के चले जब तक मेरा वीर्य आना रुक न गया, थोड़ी देर हम ऐसे hi चिपके रहे, थोड़ी देर बाद में उठने लगा, उन्होंने मुझे कास के पकड़ liya)Abhi नहीं शिव, ऐसे hi रहो. (उन्होंने मुझे उठने नहीं दिया, में भी वैसे hi रहा, फिर थोड़ी देर बाद उन्होंनेअपनी पकड़ ढीली की, में उठा और लुंड बहार निकला तो वीर्य भी निकलने laga)Shhhhhhhh (उन्होंने आंखे बंद कर ली, में उनके चेहरे की खुसी देख रहा था, उन्होंने मुझे देखा और शर्मा गयी, और चद्दर खींच कर अपने आपको ढकने लगी, में बस मुस्कुराया, थोड़ी देर बाद वो बेथ गयी, उन्होंने घडी dekhi)Baap रे, तीन बज गए. (कहते हुए वो अपने गाउन को लेने लगी, और फिर उसे पहन लिया, में वैसे hi बैठा उन्हें देख रहा था, वो कड़ी होने लगी तो थोड़ी karahi)Ahhhhh.

शिव : क्या हुआ (चिंता से)

बिना : (मुस्कुराते हुए शर्मा gayi)Kuchh नहीं हुआ. सो जाओ. (कहते हुए वो कड़ी हो गयी, में भी खड़ा हो गया, मुझे ऐसे नंगा खड़ा देख वो फिर शर्मा gayi)Kapade तो पहन लो.

शिव : नहीं पहन ने (कहते हुए मेने उन्हें अपनी और खिंचा तो वो मुस्कुरा के मुझे देखने लगी)

बिना : मान नहीं भरा क्या? (में बस मुस्कुराया, तो वो शर्मा के boli)Ghar जा के जो करना है कर लेना. अभी मुझे जाने दो. (मेने झुक कर उनको किश किआ और वो मुस्कुराती हुई चली गयी, मेने बिस्तर को थोड़ा सही किया और चद्दर को उलट दिया और सो गया)

आदत के कारन सुबह जल्दी मेरी आंख खुल गयी, पर कसरत के लिए जाना नहीं था तो में लेता रहा की तभी दरवाजा खुला, मुझे याद आया की मेने दरवाजा बंद hi नहीं किया था. मेने आंखे बंद कर ली. और थोड़ी खोल कर देखा तो वो जूही थी.

जूही : (कमरे को देखते hue)In जनाब को मज़े है, कैसे फ़ैल कर सो रहे है. (उसने देखा की शिव ने चादर दाल रक्खी है पर लुंड वाला भाग उभरा हुआ है, उसका मान मचल गया, वो आहिस्ता से नजदीक आयी और शिव को देखने लगी, उसे लगा की वो सोया है तो उसने लुंड को हलके से पकड़ा और dabaya)Kas अभी में आपने घर में होती. (वो धीरे से बोली, में सुन hi रहा था तो मेने उसका हाथ पकड़ा और उसको बिस्तर पर लेता दिया, वो अभी अभी नाहा कर आयी थी, बाल भी गीले थे, वो एक डैम घबरा गयी थी)

शिव : तो क्या करती? (वो मुस्कुराने लगी)

जूही : तो जग रहे थे तुम.

शिव : बताओ न क्या करती? (उसके ऊपर आते हुए)

जूही : (नखरे se)Me क्यों बताऊ, उठो अभी. (मुझे धक्का देने लगी, में उसके होठो की और बढ़ा तो वो खिल खिला कर हसने लगी और अपना मुँह दूसरी और कर liya)Gande कही के, ब्रश तो करो. (मेने भी मुस्कुरा कर उसको छोड़ दिया, वो बिस्तर से कड़ी हो गयी और अपने आपको सही करने लगी, वो सलवार कमीज़ में थी)

शिव : अरे वह, तुम तो बहोत सुन्दर लग रही हो. (मेने तारीफ वाले अंदाज में कहा)

जूही : (थोड़ी इतराते hue)Wo तो में हु. (फिर जान बुज कर अपने बाल पीछे करने लगी और अपने ड्रेस को झटक कर ठीक करने लगी, चेहरे पर तो मुस्कान थी, फिर उसने शिव को देखा जो अभी भी उसे hi देख रहा tha,wo फिर muskurayi)Ab उठ भी जाओ, और नाहा लो, भाभी कह रही थी की हमें निकलना है.

शिव : में जल्दी से ब्रश कर के आता हु, तुम थोड़ी देर रुको.

जूही : (शरमाते hue)Me जा रही हु (फिर बाद badayi)Kaha है जरा भी ख्याल नहीं करता. (दरवाजे पर जा कर वो रुकी और पलट कर देखने लगी और मुस्कुरायी, में भी मुस्कुराया, मेने एक फ्लाइंग किश दी तो उसने भी सामने वैसे hi किआ और मुस्कुराती हुई चली गयी)

में भी बिस्तर से उठा और बाथरूम में चला गया. नाहा कर कमरे में कपडे पहन रहा था की दरवाजे पर दस्तक हुई.

शिव : खुला hi है. (दरवाजा खुला और स्वर्णाभाभी अंदर आयी, उन्हें देख कर में मुस्कुराया तो वो भी शरमाते हुए मुस्कुरायी)

स्वर्ण : दरवाजा हमेसा खुला hi रखते हो क्या?

शिव : अब मेरे पास ऐसा क्या है जो कोई लूट के ले जायेगा.

स्वर्ण : (मुस्कुरायी, फिर थोड़ा उदास हो kar)Mamta जाने को बोल रही है.

शिव : है, जूही ने बताया मुझे. (उनके चेहरे की उदासी dekh)Kya हुआ आपको?

स्वर्ण : कुछ नहीं. (में उनके नजदीक गया)

शिव : क्या हुआ? (मेने प्यार से पूछा)

स्वर्ण : यहाँ रुकते तो शायद फिर मिल सकती. (उदास हो कर बोली)

शिव : एक hi सहर में तो रहते है.

स्वर्ण : वह में एक बहु हु, बहोत नियम होते है वह. (उन्होंने उदास हो कर कहा)

शिव : मिल जायेंगे.

स्वर्ण : आओगे न तुम?

शिव : आऊंगा. (दरवाजा खुला था तो कोई रिस्क नहीं ले सकते the)Udas मात होइए, जोर मिलूंगा. (उन्होंने फीकी से मुस्कान दी, क्यों की वो भी जानती थी की इतना आसान नहीं tha)Chaliye. (जैसे hi मेने कहा वो मुज से लिपट गयी, मेने दरवाजे की और देखा, वह कोई नहीं था तो मेने भी उन्हें बहो में भर लिया, थोड़ी देर बाद हम लग हुए और बहार आ गए, और निचे चल दिए, वह सब नास्ते की टेबल पर बैठे हुए थे, में भी एक कुर्शी पर बेथ गया, स्वर्ण भी ममता के बाजु में बेथ गयी)

ममता : (धीमे se)Badi देर लगा दी? (ये सिर्फ स्वर्ण ने hi सुना था, वो शर्मा गयी, ममता भी मुस्कुरा दी, अभी नास्ता परोस hi रहे थे की अंकल और मैडम के पति भी वह आ गए, वो भी बेथ गए, पर अंकल मुझे देख रहे थे, मेने नमस्ते कहा वो बस मुस्कुराये, उन्होंने मुझे लगा जैसे वो मुझसे ध्यान हटाने की कोशिस कर रहे थे पर फिर भी वो देख रहे थे, मुझे थोड़ा अजीब लगा)

ममता : पापा, हम अभी थोड़ी देर में निकल रहे है.

चंद्रभान : क्यों?

ममता : Wo..unki तबियत भी देखनी है न, अभी पट्टी हटी नहीं है तो सब देखना पड़ता है, और इन्हे भी वापस जाना है. (उन्होंने फिर एक बार मेरी और देखा)

चंद्रभान : एक बाप पुछु (कुछ सोच कर वो बोले, उन्होंने मेरी और देख कर पूछा था तो में उनकी और देखने लगा) मुझे पता चला की तुम अनाथ हो (वो थोड़ी देर रुके, लगभग सब उनको hi देख रहे the)Tum वह, मेरा मतलब है की अनाथालय में कैसे आये? मेरा मतलब है की तुम्हारे maa-baap ... मतलब कुछ .... कोई jankari....(Wo बहोत नाप टोल कर पूछ रहे थे)

शिव : नहीं अंकल, मुझे कुछ पता नहीं, में वह आया तब शायद 3-4 साल का रहा होऊंगा. जो वह लिखा है उस हिसाब से मुझे किसी भिखारी महिला के पास से बरामद किया गया था, उसने बताया की उसको में किसी शराबी भिखारी के पास से मिला था, और कुछ पता नहीं है. (मेने उन्हें गौर से देखा, वो कुछ सोच रहे थे)

ममता : आप क्यों पूछ रहे है पापा? (ममता जानती थी पर वो अपने पापा के मुँह से कुछ सुन ने की उम्मीद कर रही थी)

चंद्रभान : (थोड़ा संभल kar)Nahi, में तो बस ऐसे hi पूछ रहा था. (वो बस ऐसे hi तो नहीं पूछ रहे थे, कुछ तो उनके मान में चल रहा था जो मुझे उनके चेहरे से पता चल रहा था) तुम बहु के सहर में रहते हो, मतलब यहाँ से बहोत दूर, वैसे किस सहर से मिले थे तुम.

शिव : जी, क्सक्सक्स सहर से.

चंद्रभान : ओह! वो भी काफी दूर है यहाँ से, और उस भिखारी से मेरा मतलब वो शराबी, उसको कहा से मिले थे?

शिव : वो तो पता नहीं. पुलिस ने भी छानबीन की थी पर कुछ पता नहीं चला.

चंद्रभान : हम्म्म्म. में तो बस ऐसे hi पूछ रहा था, तुम्हे बुरा तो नहीं लगा न?

शिव : नहीं अंकल, इसमें बुरा मन ने वाली क्या बात है.

स्वर्ण : चाचाजी, आप कुछ ढूंढने की कोशिस नहीं कर रहे न? (स्वर्ण को भी ये बात जान नई थी)

चंद्रभान : (वो कुछ भी ऐसा वैसा नहीं कहना चाहता था अभी, क्यों की ऐसा कुछ भी नहीं था जो ये बताये की ये योगेंद्र का लड़का है, तो उन्होंने संभल कर kaha)Are नहीं बीटा, में तो बस ऐसे hi पूछ रहा tha,aap लोग शांति से नास्ता करो, मेरा हो गया. (कहते हुए वो वह से चला गया)

निर्मलादेवी : (बात बदलते hue)Kuchh दिन रुक जाती बेटी (ममता की और देख कर)

ममता : मेने कहा न माँ, उनकी वजह से नहीं रुक सकती अभी, उनकी पट्टी खुलने के बाद आउंगी.

निर्मलादेवी : जैसी तेरी मर्जी.

स्वर्ण : में भी जाउंगी चची.

निर्मलादेवी : अरे तू तो रुक जा, बहु भी आज जाने को बोल रही है, सब एक साथ hi जाओगे क्या?

स्वर्ण : में तो एक दो दिन घर रुकूंगी चची, बाद में जाउंगी. अब इतने समय बाद आयी हु तो ऐसे hi तो नहीं जा सकती. (ममता की और देख kar)Jate हुए मुझे भी घर छोड़ देना तुम.

निर्मलादेवी : अब में क्या कहु इसमें (फिर बिना को आवाज देते हुए जो किचन में thi)Are बहु, तू भी बेथ जा, क्यों ीनता कर रही है, वो सब कर लेंगे. (बिना भी किचन से बहार aayi)Beth तू भी, वैसे भी कह रही थी की तबियत ठीक नहीं, ऐसे में ज्यादा काम नहीं करते बेटी. बरसो बाद तो इस घर में खुशखबरी आयी है, ख्याल रख अपना.

बिना : जी माजी.

ममता : (चिंतित स्वर me)Kya हुआ भाभी?

बिना : (सँभालते hue)Nahi कुछ नहीं, बस थोड़ा दर्द हो रहा है.

ममता : कहा दर्द हो रहा है, डॉक्टर के पास जाना है क्या?

बिना : नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है, वैसे भी आज जा रही हु तो कल डॉक्टर को दिखा दूंगी.

ममता : दिखा देना, लापरवाही मत करना. (बिना ने हां में इस्सर किआ, में भी उन्हें hi देख रहा था, उन्होंने भी एक बार मुझे देखा फिर नज़ारे झुका ली, चिंता मुझे भी हो रही थी)

नास्ता वास्ता कर के फिर हम सब वह से निकले. गाड़ी मेने hi चला ली थी. बाजु में जूही बैठी थी और पीछे मंतभाभी और स्वर्णाभाभी बेथ गयी. सब हमे छोड़ने आये थे, बिना मैडम ने मंतभाभी के कान में कुछ कहा, उन्होंने हां में शिर हिलाया, फिर हम वह से निकल गए. रस्ते में.

ममता : शिव (मेने पीछे मुद कर dekha)Apana मास्क पहन लो.

शिव : क्यों?

ममता : कहा न पहन लो. (उन्होंने मुझे जैसे दन्त दिया, मेने गाड़ी साइड में रोकी और मास्क पहन लिया, फिर हम वह से स्वर्णाभाभी के घर पहुंच गए, (जब वो लोगवाहा पहुंचे तो पृथ्वी घर से बहार निकल रहा था, और पीछे पद्मा भी थी, हमारी गाड़ी देख कर वो एक पल रुका फिर आगे बढ़ने लगा, तब तक हम वह पहुंच गए थे)

ममता : कैसे हो पृथ्वी?

पृथ्वी : (जाते जाते रुक गया, और थोड़े रूखे स्वर से bola)Thik हु. (कह कर वो निकल गया)

ममता : ये ऐसा क्यों कर रहा है? (जीप से उतारते हुए वो बोली)

स्वर्ण : मेरी वजह से, उसने एक बार भी मुझसे बात नहीं की है.

ममता : कैसे भाभी?

पद्मा : (फीकी मुस्कान के sath)Achchhi हु.

ममता : अब हम चलते है स्वर्ण.

पद्मा : ऐसे कैसे? आइये न अंदर.

ममता : नहीं, हमे निकलना है, बाद में आउंगी.

पद्मा : ऐसे कैसे दीदी, माजी ने सुना तो मुझे डाँटेगी.

ममता : ठीक है चलो, में मिल लेती हु उन्हें. (शिव और जूही ko)Tum यही बैठो में आयी. (पद्मा ने फिर शिव को देखा, पर बोली कुछ नहीं, वो लोग अंदर गए, पद्मा के बुलाने पर कामनादेवी भी आ गयी)

कामनादेवी : (ममता के पेअर छूने par)Jiti रहो, बहु क्या कह रही है, बहार से hi जा रही हो तुम, क्यों ये तुम्हारा घर नहीं hai(Unhone नाराजगी से कहा)

ममता : ऐसी बात नहीं है तेजी, वो घर भी जाना है और मेरी नानन्द को भी आज hi निकलना है तो जल्दी थी.

कामनादेवी : अरे इतनी भी क्या जल्दी है की दो पल बेथ भी नहीं सकती. कल तो भागादौड़ी में ठीक से बात भी नहीं कर पाए हम.

ममता : में फिर आउंगी, ताऊजी कहा है?

कामनादेवी : वो तो सुबह hi निकल गए थे. (ममता ने थोड़ी रहत की सास ली) कितने दिनों बाद आयी है, ऐसे hi थोड़ी न जा सकती है तू, मेने बादाम केसर का दूध बनवाया है.

ममता : नहीं तेजी, अभी नास्ता किया है.

कामनादेवी : तो दूध से क्या हो जायेगा, वैसे भी इस हालत में ये सब अच्छा hi होता है, जा अपनी नानन्द को भी बुला, वो क्या सोचेगी की कैसे रिस्तेदार है भाभी के जो घर में भी नहीं बुलाते, वैसे भी में कल मिल नहीं पायी उस से. (ममता के पास कोई जवाब नहीं था) जा बहु, बुला उन्हें अंदर.

पद्मा : जी माजी. (वो बहार आयी, वो दोनों कुछ बात कर रहे the)Suniye. (हम दोनों ने उनकी और dekha)Aap को अंदर बुला रहे है. (मेने चाबी निकली और में और जूही उनके पीछे पीछे अंदर आ gaye)(Ander वो सब कुछ बात कर रहे थे की हमारी आहत सुन कर सब ने हमे देखा)

ममता : ये मेरी नानन्द है जूही. (कामनादेवी ने अपनी आंखे चौड़ी कर के जूही को देखा, जूही ने झुक कर प्रणाम किआ, वो उस लड़के को भी देख रही थी)

कामनादेवी : जीती रहो बेटी, बहोत ऊँची हो tum(Unhone मुस्कुराते हुए कहा) और ये? (शिव की और इशारा कर के)

ममता : वो हमारे साथ आया है, हम दोनों अकेले आ रहे थे न तो ये साथ आया था.

कामनादेवी : ओह अच्छा, पर इसने मास्क क्यों पहन रक्खा है?

ममता : वो उसको फ्लू हुआ है न, इस लिए.

कामनादेवी : (मुस्कुराते hue)Are सीधे सीधे कह न की झुकाम हुआ है, इसमें क्या मास्क पहन न.

ममता : नहीं, वो झुकाम वैसे भी फ़ैल जाता है न तो किसी को न लगे इस लिए इसने पहन रक्खा है.

कामनादेवी : कोई बात नहीं, आओ बैठो, ये भी बहोत लम्बा है, क्यों स्वर्ण? (उसने मुस्कुराते हुए कहा) में तो सोचती थी की हमारे खंडन में hi सब लम्बे है, पर आज पता चला की उनसभी लम्बा कोई है. (पद्मा की और देख kar)Bahu, सबके लिए दूध तो मंगवाओ.

पद्मा : जी माजी. (वो अंदर चली गयी. हम सब बेथ गए थे, वो और ममता भाभी बाते कर रही थी, उनकी बहु किसी नौकरानी के हाथ में ट्रे पकड़वाए वह आयी और सबको दूध देने लगी, उन्होंने दूध देते हुए मेरी आँखों में देखा, मेने शिर हिलाया)

कामनादेवी : मास्क निकल दो बीटा, कुछ नहीं होता. (वैसे भी मुझे दूध पीना था तो मेने मास्क निकल दिया और दूध पिने laga)(Kamnadevi, उसको बोल कर फिर ममता से बाटे करने लगी थी, फिर अचानक उनकी निगाह शिव पर पड़ी, एक बार ऐसे hi देखा फिर पलट कर फिर से देखा और देखने लगी, और ध्यान से देखने लगी, ये देख कर ममता की सांसे बढ़ने लगी, उसका दिल धड़कने लगा, पद्मा ने भी अपनी सास को ऐसे आश्चर्य से देखते हुए देखा, कुछ देर ख़ामोशी छायी रही).

पद्मा : क्या हुआ माजी?

कामनादेवी : हहह... नहीं कुछ nahi...(Wo फिर खामोश हो गयी पर वो शिव को hi देख रही थी)

ममता : (सबने दूध पि लिया था, मेने फिर मास्क पहन liya)Ab हम चलते है तेजी.

कामनादेवी : हहह... हआ. (उसने अपने आपको sambhala)Ye कौन है ममता?

ममता :मेने बताया तो तेजी, ये हमारे साथ आया है, इसका नाम शिव है.

कामनादेवी : हआ, पर ये है कोण?

ममता : वो जूही का दोस्त है.

कामनादेवी : ओह!.

ममता : अच्छा तेजी हम चलते है.

कामनादेवी : हहह, हा. आते रहना बेटी. (हम वह से बहार निकल गए, जब तक हम वह से निकले वो मुझे hi देख रही थी, हम वह से निकल gaye)(Padma ने भी ये देखा था)

पद्मा : उस लड़के को आप ऐसे क्यों देख रही थी माजी?

कामनादेवी : नहीं... कुछ नाहीई.... (बात को बदलते hue)Kappu कहा है, निचे नहीं आयी.

पद्मा : वो आराम कर रही है. कह रही थी की शिर में दर्द है.

कामनादेवी : क्या हो गया है इस लड़की को भी.

स्वर्ण : क्या हुआ है उसे? (तीनो अंदर आ चुकी थी)

कामनादेवी : अब क्या बताऊ, तुम सबकी माँ बन ने की बात से उसके ससुरालवाले उसको तना दे रहे है, क्या कहे हम भी, क्या हमने कभी अपनी बहु को ऐसे तना दिया है क्या, लोग समझते नहीं इतनी सी बात को, अरे आज नहीं तो काल हो जायेगा बच्चा. जा तू hi कुछ समजा उसको. (कहते हुए वो अपने कमरे की और बढ़ गयी, स्वर्ण उस कमरे की और जाने लगी तो पद्मा भी पीछे पीछे हो ली, वो भी सब जान न चाहती थी क्यों की माँ तो उसको भी बन न था)

स्वर्ण : (दरवाजा खोलने का प्रयास किया तो वो अंदर से बंद था, उसने खत khataya)Kappuuu, ोोू कप्पूउऊउउउ. (थोड़ी देर बाद दरवाजा khula)Kya हुआ तुजे. (उसके शिर पर हाथ रख कर वो चिंता से बोली, उसको देख कर hi लग रहा था की वो रो रही thi)Tu रो रही थी? (वो अपनी बहन से लिपट गयी और फिर रोने lagi)Kyu रो रही है, क्या हुआ? (वो बस रो रही thi)Chal अंदर chal.(Wo उसको कमरे में ले गयी, उसको बिठाया, वह पड़े जग से पानी निकल कर दिया उसको, वो थोड़ी शांत hui)Kya हुआ, रो क्यों रही है तू?

कृपाली : में माँ नहीं बन पायी उसमे मेरी क्या गलती है दीदी, क्या करू में? (फिर आँखों से आंसू टपकने लगे)

स्वर्ण : अरे इसमें रोनेवाली क्या बात है, जो जायेगा सब, तू रो मात.

कृपाली : इस अनुष्ठान की वजह से वो कह रहे है की दोष मुज में hi है, अगर ऐसा न होता तो तुम्हारे घरवालों को ये अनुष्ठान रखने की जरुरत hi न पड़ती. आप hi बताओ दीदी क्या दोष है मेरा, क्या मेरी वजा से में माँ नहीं बन रही हु? (वो फिर रोने लगी).

स्वर्ण : (उसको चुप करते hue)Isme रो क्यों रही है तू, सब ठीक हो जायेगा, आज नहीं तो कल माँ बन hi जाएगी तू, इसमें रोनेवाली क्या बात है. (पद्मा भी वह बेथ गयी)

पद्मा : दीदी, उसका रोना जायज है, ऐसी क्या कमी है हम में जो हम माँ नहीं बन सकती, आप hi बताओ हमे.

स्वर्ण : (वो अंदर hi अंदर डरने लगी thi)Are ऐसी कोई बात नहीं है, हो जायेगा सब ठीक.

पद्मा : (स्वर्ण का हाथ पकड़ kar)Nahi दीदी, आपको बताना पड़ेगा की आप कैसे माँ बानी.

स्वर्ण : (हकलाते hue)Kaise से क्या मतलब है भाभी, जैसे सब माँ बनते है.

पद्मा : वही पूछ रही हु दीदी, कैसे? क्या कोई ट्रीटमेंट लिया आपने, कोई मन्नत मांगी? क्या किआ ऐसा जो आप माँ बन रही हो और हम नहीं. (दुखी तो पद्मा भी थी, वो भी अब तंग आ गयी थी ये सब सुन सुन कर, माँ तो उसको भी बन न था)

स्वर्ण : (उसका शिर फटने लगा था, उसने अपने आपको sambhala)Are सब ठीक हो जायेगा, बाबाजी ने अनुष्ठान किया है न, अब सब ठीक हो जायेगा.

कृपाली : पर आप तो अनुष्ठान से पहले hi माँ बन रही हो, और ममता दीदी भी, और तो और बीणाभाभी भी माँ बन रही है. दीदी बताओ न आखिर कहा कमी रह गयी हम से?

स्वर्ण : कोई कमी नहीं है आप दोनों में, में बाबाजी से बात करती हु, बॉस.

कृपाली : दीदी प्लीज कुछ करो, वर्ण में मर jaungi.(Usne रट हुए कहा)

स्वर्ण : एक मरूंगी जो ऐसी बात मुँह से निकली तो, मेने कहा न सब ठीक हो जायेगा.

पद्मा : (उसकी भी आंख में ासु आ gaye)Nahi दीदी आपको कुछ करना hi होगा, में भी थक गयी हु लोगो के तने सुन सुन कर. मेरा भी मान करता है मि मार जाऊ.

स्वर्ण : तुम दोनों पागल हो गयी हो, मेने कहा न में बात करती हु. (दोनों रो रही थी और स्वर्ण का दिमाग फैट रहा था, वो कैसे बता सकती है की वो माँ कैसे बन रही है, उसको कुछ समाज नहीं आ रहा था, उसका भी मान कर रहा था की अपनी परिस्थिति पर रोये पर वो बैठी रही और उन दोनों को संभालती रही)

वह बिना भी तैयार हो चुकी थी, उसको भी ट्रैन से जाना था, जित्नेष उसको छोड़ने स्टेशन जानेवाला था. जिग्नेश बार गाड़ी साफ़ कर रहा था, अंदर सास ससुर के साथ बिना थी.

निर्मलादेवी : क्या बहु तुम भी, छोड़ क्यों नहीं देती नौकरी को, क्या कमी है तुम्हे, ऐसी परिस्थिति में जाना जरुरी है क्या? (बिना अपनी नज़ारे झुकाये कड़ी थी)

चंद्रभान : तुम नहीं संजोगी भाग्यवान, जाने दो उसे, लड़कीओ का अपने पैरो पर खड़ा होना जरुरी होता है. बात सिर्फ पैसो की नहीं है. (बिना ko)Tum जाओ बहु, पर अपना ख्याल रखना, वैसे तुमसे बहोत साडी बाटे करनी थी पर समय न मिल पाया.

बिना : किस बारे में पापा?

चंद्रभान : (वो बहोत कुछ पूछना चाहता था, पर समाज नहीं आ रहा था की क्या बात करे, और समय भी काम hi tha)Nahi, कोई खास बात नहीं है बहु, बस ऐसे hi, अग़लिबर आओगी तो आराम से बात करेंगे.

बिना : आप फ़ोन कर देना.

चंद्रभान : ठीक है, अगर मुझे लगा तो फ़ोन करूँगा. (बहार से जिग्नेश ने आवाज दी, बिना ने दोनों के पेअर chhue)Jiti रहो.

निर्मलादेवी : सदा सुहागन रहो, दूधो नहाओ पुतो फलो. (उसने अपनी बहु को गले से लगा लिया) अपना ख्याल रखना बेटी, हमे चिंता लगी रहती है.

बिना : जी माजी. (वो भी वह से निकल गयी)

हम सब भी जूही के घर पहुंच गए थे, दो पहर को खाना खाया हमने. हमे भी निकलना था, ममता को शिव से मिलना था पर कोई ऐसा मौका hi नहीं मिला. वो समझती थी की उसको मर्यादा का पालन भी करना होता है. उसने मुस्कुराते हुए शिव को विदा किया.

में और जूही भी ट्रैन से निकल गए.
 
अपडेट 188

हम तक़रीबन रात को अपने सहर पहुंच गए थे, हमने रिक्शा कर ली और पहले जूही को घर छोड़ा फिर में अपने घर पहुंच गया. मुझे देख कर सब बहोत खुस हुए. सब सोने चले गए थे पर मुझे आया देख सब बहार आ गए और मुझसे मिले. सबने बहोत बाते की और मेरे वह के सफर के बारे में पूछा, फिर हम सोने चले गए, लतादिदी मेरे साथ hi सोई.

बिना भी अपने घर पहुंच गयी थी, पर वो बेचैन थी, उसको दर्द महसूस हो रहा था, करीब रात 12 बजे उसने जूही को फ़ोन कर दिया. जूही सो गयी थी, पर फ़ोन की आवाज से वो उठ गयी, फ़ोन देख कर उसने तुरंत फ़ोन उठा लिया,

जूही : है भाभी, क्या हुआ?

बिना : तू मेरे घर आ शक्ति है?

जूही : अभी?, क्या हुआ, कोई दिक्कत है क्या?

बिना : तू आ जा. (उनकी आवाज में हल्का दर्द था)

जूही : ठीक है में अभी आती हु. (कहते हुए वो उठी और तैयार होने लगी, उसके मान में अजीब अजीब से ख्याल आ रहे थे, वो तुरंत घर बंद कर के निकल गयी, थोड़ी hi देर में वो पहुंच गयी, रात थी तो सब घर की लाइट बंद थी पर बिना के वह लाइट जाली हुई थी, उसका दिल घबरा रहा था, उसने दरवाजा खटखटाया तो थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला, बिना के चेहरे से hi पता चल रहा था की उसको दर्द hai)Kya हुआ भाभी, कोई दिखात है क्या?

बिना : है, थोड़ा दर्द हो रहा है. (दोनों अंदर आ गए)

जूही : कहा दर्द हो रहा है? (उसने चिंता से पूछा)

बिना : (उसको शर्म आने लगी, क्यों की दर्द निचे था, वो चुप रही)

जूही : (उसको कुछ समाज नहीं आया, पर बात उसको गंभीर लग रही thi)Doctor के पास जाना है क्या?

बिना : यही सोच रही थी, इसीलिए तुम्हे बुलाया है. (फाइल टेबल पर hi पड़ी हुई थी, उसने उसमे से देख कर डॉक्टर को फ़ोन lagaya)Hello?

डॉक्टर : Hello. (थोड़ा इर्रिटेशन से)

बिना : सॉरी डॉक्टर, मेने आपको इस वक़्त डिस्टर्ब किया, में बिना बोल रही हु.

डॉक्टर : (वो लगभग शामे आगे की hi थी तो उनकी अच्छी बात होती थी तो वो फ़ौरन पहचान gayi)Ha बिना कहो.

बिना : क्या आप इस वक़्त मिल सकती है?

डॉक्टर : क्या हुआ?

बिना : (एक बार उसने जूही की और देखा, फिर boli)Wo निचे पैन हो रहा है.

डॉक्टर : (कुछ पल वो खामोश rahi)Thik है, आ जाओ.

बिना : थैंक यू डॉक्टर.

उसने फ़ोन रक्खा और फिर दोनों हॉस्पिटल पहुंच गयी, डॉक्टर पहलेसे hi आ गयी थी, वो ऊपर hi रहती थी.

डॉक्टर : कहो बिना, क्या प्रॉब्लम है?

बिना : (वो जूही की वजह से हिचकिचाने लगी)

डॉक्टर : तुम थोड़ी देर बहार बैठोगी. (जूही वह से उठ कर बहार चली gayi)Ha तो बताओ, क्या प्रॉब्लम है.

बिना : (शरमाते hue)Wo निचे दर्द हो रहा है.

डॉक्टर : निचे कहा?

बिना : वो wo...(Wo बोलने से हिचकिचा रही थी)

डॉक्टर : में देख लेती हु, तुम वह लेट जाओ. (बिना वह बानी जगह पर लेट गयी, डॉक्टर ने रबर के ग्लोब्स पहन लिए) साड़ी तो ऊपर करो. (बिना ने हिचकिचाते हुए साड़ी ऊपर करि) पंतय भी निकालो यार, सब संजना पड़ेगा क्या मुझे. (उसने मुस्कुराते हुए कहा, बिना ने शरमाते हुए पंतय भी निकल दी, वैसे भी गिनेस के पास ये आम बात thi)Ha तो बताओ, कहा दर्द हो रहा है?

बिना : वो... ander.(Doctor ने अपने टूल से छूट को फैलाया, अंदर देखा, फिर हाथ को अंदर दाल कर चेक किया, फिर सोनोग्राफी मशीन ों किआ और फिर अंदर सब चेक करने लगी, अच्छे से जाँच करने के बाद)

डॉक्टर : डरने की कोई बात नहीं है, बच्चा तो ठीक hi है, बस थोड़ी उतेरुस के मुख पे सूजन है. (बिना ने भी रहत की सास li)Uski वजह से इतना दर्द नहीं हो सकता, अब ठीक ठीक बताओ की कहा दर्द हो रहा है?

बिना : वही अंदर hi दर्द हो रहा है और wo...(Bolte बोलते वो रुक गयी)

डॉक्टर : डॉक्टर के सामने शरमाओगी तो कैसे चलेगा, सही सही बताओ.

बिना : वो वो... पिछीये. (बोलते बोलते वो इतना शर्मिंदा हो रही थी की ठीक से बोल भी नहीं प् रही थी)

डॉक्टर : पीछे कहा? पीठ में?

बिना : नहीं वो... वो niche....pichheee...

डॉक्टर : सही सही बताओ न, कहा दिक्कत है?

बिना : (शिर दूसरी और घुमा kar)Wo पीछे छेड़ में.

डॉक्टर : यू मैं अनुस में? (बिना ने है में गर्दन hilayi)Pair उठाओ (बिना को बहोत शर्म आ रही थी, पर दर्द था तो वो भी क्या करती, उसने पेअर उठा दिए, डॉक्टर वह देखने लगी, कुछ साधनो की मदद से वह सब चेक kia)Yaha स्किन थोड़ी फैट गयी है, कुछ हुआ था क्या? (बिना शर्म से गाढ़ी जा रही थी, वो क्या बोलती, वो चुप रही, पर उसका चेहरा देख कर डॉक्टर सब समाज gayi)waha सेक्स किया था? (बिना बुरी तरह से शर्मा रही थी, उसका चेहरा देख कर hi डॉक्टर समाज गयी, वो मुस्कुराने lagi)Sidhe सीधे hi बोल देती तो मुझे इतनी जांच hi न करनी पड़ती. (कहते हुए उसने एक क्रीम ली और उसको छेड़ में अच्छे से लगा diya)Aa जाओ अब. (उसने ग्लोब्स उतरे और बाथ धो कर अपनी चेयर पर बेथ गयी, बिना भी पंतय पहन कर सामने बेथ गयी, वो बहोत शर्मा रही thi)Sex hi किआ था या किसी चीज का इस्तेमाल किया था? (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

बिना : (वो बुरी तरह झेप gayi)Nahi वो सेक्स hi...

डॉक्टर : आम तौर पर ऐसा होता नहीं, (थोड़ा रुक kar)Kya बहोत बड़ा है तुम्हारे पति का? (बिना शर्म से पानी पानी हो रही थी, वो क्या जवाब देती, उसने बस नज़ारे नीची कर के शिर है में hilaya)Lucky हो तुम. (वो कुछ दवाइया निकलने लगी) उनको बोलो थोड़ा सबर रक्खे, आगे भी किआ था क्या? (बिना ने फिर है kaha)Lagta है दीवाने है तुम्हारे पीछे.

बिना : मेने hi कहा था, वो तो बच्चे की वजह से मन hi कर रहे थे.

डॉक्टरों : (उसको शर्माता dekh)Isme शर्माने की क्या जरुरत है, अगर पति के पास इतना बड़ा हथियार हो तो कोई भी नहीं रुक सकती, पर थोड़ा ध्यान से, और पीछे शायद पेहलीही बार किआ था है न? (बिना ने फिर है कहा, डॉक्टर ने एक और तुबे निकल कर di)Ab फिर करना हो तो इस जेल का उसे कर लेना, पर कुछ दिनों बाद hi, और अभी सफर मात करना, कुछ दिन आराम करो. पीछे की वजह से नहीं कह रही, वो तो ठीक हो hi जायेगा, पर आगे भी थोड़ी दिक्कत है तो रिस्क नहीं लेना चाहिए. समाज रही हो न? (डॉक्टर ने दवाई वगैरह दी, बिना ने पैसे चूका दिए, और दोनों बहार आ गए, जूही कड़ी हो गयी और चिंता से देखने लगी, पर दोनों के चेहरे पर मुस्कान थी तो उसने रहत की सास ली)

जूही : सब ठीक है न भाभी? (बिना ने है में इस्सर किया)

डॉक्टर : सब ठीक है पर अभी कुछ दिन उन्हें आराम करने देना, और अभी दो तीन दिन बीएड रेस्ट में रखना. कोई भरी काम मात करने देना.

जूही : जी मैडम. (फिर दोनों वह से वापस घर आ गए, घर में दाखिल हो कर बिना सोफे पर बेथ गयी, जूही पानी ले आयी, उसने गोलिया भी खा li)Kya हुआ था आपको?

बिना : कुछ नहीं, बस अंदर दर्द था. (उसने हिचकिचाते हुए कहा)

जूही : सब ठीक है न?

बिना : है ठीक है, सॉरी मेने तुजे दौड़ाया.

जूही : क्या भाभी, ये तो मेरा फ़र्ज़ था, (फिर कुछ सोच kar)Shiv को फ़ोन करू?

बिना : (सीधे शिव का नाम सुन कर वो शर्मा गयी और उसने नज़ारे निचे कर li)Nahi, रहने दो. (भले hi जूही और बिना में इस बारे में खुल कर बात नहीं हुई थी पर दोनों जानती थी की हकीकत क्या है, जूही ने बस ऐसे hi कहा था, उसको ये नहीं मालूम था की कल रात क्या हुआ tha)Itni रात को क्यों फ़ोन करना, सब ठीक है. तुम यही सो जाओ.

जूही : वो तो रुकना hi पड़ेगा, डॉक्टर ने आपको रेस्ट के लिए कहा है तो कोई तो चाहिए होगा. (फिर दोनों सोने चले गए)

सुबह में उठा, मुझे आश्चर्य हुआ की जूही आज क्यों नहीं आयी, शायद कल रात देर हुई थी तो सो रही होगी, में भी देर से hi उठा था, में तैयार हुआ और स्कूल के लिए निकल गया. में जब पंहुचा तो संयम के वह कोई नहीं था, आज वैसे भी में लेट था, और उनको पता था की में सुबह अब नहीं आता तो किसी ने मेरा इंतजार नहीं किया था. में स्कूल पहुंच गया, नशीब से पहला लेक्चर फ्री hi था, पता चला की बिना मैडम नहीं आयी, मेने सोचा की शायद वो भी कल देर से आयी होगी तो नहीं aayi.Recess में हम सब साथ में बैठे थे.

संयम : कब आये तुम?

शिव : रात को hi आया था. (वैस्वी की और देख kar)Tumlog कब आये थे?

वैस्वी : (मुस्कुराते hue)Hum शाम को पहुंच गए थे.

संयम : तुम कहा गयी थी?

वैस्वी : हम दोनों एक hi जगह गए थे. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

संयम : एक जगह मतलब?

शिव : जिस फंक्शन में में गया था वह ये और इसकी फॅमिली भी आयी थी.

संयम : ऐसा कैसे? (उसको कुछ समाज नहीं आ रहा था)

वैस्वी : ये अपनी फ्रेंड की फॅमिली के साथ आया था, और में अपनी भाभी के वह गयी थी, पर इसके फ्रेंड की भाभी और मेरी भाभी दोनों बहाने है तो सब एक hi जगह थे.

संयम : ओह! (उसको ज्यादा कुछ समाज नहीं आया पर उसको ज्यादा इंटरेस्ट नहीं था, फिर ऐसे hi इधर उधर की बाटे चली) स्कूल ख़तम करने के बाद में बहार निकला. और मोबाइल देखा तो जूही का मश्ग था, जहान्वी का भी था. और भी दो तीन मश्ग थे. मेने जूही का मश्ग देखा तो उसने लिखा था की कॉल करो., मेने तुरंत कॉल किआ)

शिव : Hello.

जूही : कहा हो?

शिव : अभी स्कूल से बहार निकला हु, क्या हुआ?

जूही : बीणाभाभी के घर आ जाओ.

शिव : क्यों?

जूही : बोलै न आ जाओ. (उसने मुझे डाटा)

शिव : है ठीक है, आता हु. (संयम मेरे साथ आनेवाली थी तो मेने वैस्वी को kaha)Tum संयम को ड्राप कर डौगी?

संयम : (उसको अच्छा नहीं laga)Kyu?

शिव : मुझे कही जाना है.

संयम : तो में भी चलती हु. फिर घर छोड़ देना.

शिव : अरे पर मुझे वह कितना टाइम लगेगा मुझे नहीं पता.

संयम : कोई बात नहीं, अगर देर हो रही होगी तो घर फ़ोन कर देंगे.

शिव : ठीक है मेरी माँ, चलो. (संयम मुस्कुराने लगी, वैस्वी को ये अच्छा तो नहीं लगा पर वो जानती थी की यहाँ कुछ नहीं हो सकता, वो अपने घर निकल गयी, हम दोनों बिना मैडम के घर की और निकल गए)

संयम : कहा जा रहे है हम? (संयम बहोत खुस थी, उसकी जवानी उफान मार रही थी, अभी ये हाल था की रात को उसका हाथ अपनी नन्ही सी छूट पर पहुंच जाता था, वो अपनी ामी और शिव के बिच हुई चुदाई को याद करती रहती थी)

शिव : बिना मैडम के घर.

संयम : क्यों? (बात करने के लिए वो शिव के नजदीक खिसक कर बेथ गयी)

शिव : मुझे नहीं पता. (मेने थोड़ा झुंझलाते हुए कहा)

संयम : गुस्सा क्यों हो रहे हो (वो बहोत प्यार से बोली, और कहते हुए वो और नजदीक आयी और मुझसे सात गयी, उसके स्तन के नुकीले निप्पल मेरी पीठ में धस gaye)(Samim को वो सख्त पीठ की बिच में पिस्टे अपने कोमल स्तन बहोत भ रहे थे, उसकी आंखे भी बंद हो गयी, और सासे भरी, अपने सुकोमल शरीर में वो बहोत कुछ महसूस कर रही थी, पूरा शरीर उसका हिलोरे ले रहा tha)(Uske ऐसे छूने से मुझे भी कुछ होने लगा, में थोड़ा शांत हुआ और नार्मल हो के बोलै)

शिव : में गुस्सा नहीं हो रहा, मुझे भी नहीं पता, बस जूही ने कहा की में वह आ जाऊ.

संयम : ओह ऐसा. (कहते हुए वो मुझसे और सात गयी और अपना हाथ मेरी झंघ पर रख दिया, मुझे लग रहा था जैसे वो अपने नुकीले स्तन को मेरी पीठ पर रगड़ रही थी, और उसके हाथ मेरी झांघो को कास रहे थे)

शिव : क्या कर रही हो, रस्ते पर है हम. (मेने बेचैन होते हुए कहा)

संयम : (संयम के चेहरे पर एक नटखट मुस्कराहट तैर gayi)Me कहा कुछ कर रही हु, में तो बस तुमसे बात कर रही हु.

शिव : ज्यादा भोली मात बनो, मुझे समाज आ रहा है सब.

संयम : (मुझे छेड़ते hue)Achchha क्या समाज आ रहा है? (उसने अपने स्तन और दबा दिए, पर ऐसा करने से उसके मुँह से भी सिसकी निकल gayi)Shhhhhhh. (भले hi उसने बहोत धीमी सिसकी ली थी पर मुझे सुनाई दे गयी)

शिव : अच्छे से बैठो न. (मेने उस से बिनती की, पर उसके ऊपर तो जैसे मस्ती चढ़ी हुई थी)

संयम : (अपनी छाती पीठ पर रगड़ते hue)Abhi और कितना अच्छे से bethu?(Mene उस से बहस नहीं की और बाइक भागने लगा, और सीधे बिना मैडम के घर जा कर रोकी, वो अपनी बैग ले कर उतर गयी और मुझे देख कर मुस्कुराने लगी, मेने भी अपनी बैग ली और बाइक रख कर उतर गया और, दरवाजे पर जा कर बेल बजायी, थोड़ी देर बाद जूही ने hi दरवाजा खोला, संयम को देख कर उसने मेरी और देखा, पर मेने ध्यान नहीं दिया)

शिव : क्या हुआ?

जूही :अंदर आओ. (वो थोड़ी गंभीर थी, हम दोनों अंदर आ गए) भाभी बीमार है. (उसने कहा)

शिव : (चिंतित हो kar)Kya हुआ? कहा है वो? (कहते हुए में उनके कमरे की और hi बढ़ गया, अंदर गया तो वो लेती हुई थी, जूही और संयम भी पीछे पीछे वह आ गयी, उनको ऐसे देख कर मुझे चिंता हो रही थी तो में सीधे उनके बीएड पर जा कर बेथ गया और चिंता से पूछने laga)Kya हुआ आपको?

बिना : (उसने शिव के चेहरे पर ढेर साडी चिंता देखि, अपनी इतनी फ़िक्र देख कर उसके चेहरे पर मुस्कान तैर गयी, उसने भी बहोत प्यार से kaha)Thik हु में, चिंता करने की जरुरत नहीं है. (कहते कहते उन्होंने जूही और संयम की और देखा तो मुझे उनकी उपस्थिति का बहन हुआ, में थोड़ा पीछे हो कर सही से बेथ gaya)Tum भी आयी हो? (संयम को देख कर वो बोली)

संयम : जी मैडम. (अब उसको शर्म आ रही थी)

शिव : जूही ने फ़ोन कर के बताया तब पता चला, आपको दिक्कत थी तो मुझे नहीं बता सकती थी? (मेने नाराजगी से कहा)

जूही : ोये हीरो, में आगयी तो क्या हो गया. (उसने मुझे danta)Bhulo मात ये मेरी रिस्तेदार है.

शिव : बड़ी आयी रिस्तेदारवाली, (फिर में बीनमदं की और देखा) हुआ क्या है आपको? (बिना ने जूही और संयम की और देखा, वो उनके सामने तो नहीं बता सकती थी)

बिना : कुछ नहीं हुआ, बस थोड़ा दर्द हो गया था. (उनके चेहरे की शर्म और संकोच बहोत कुछ बयां कर रहे थे, मेरी भी बत्ती जल गयी, मुझे अपने आप पर गुस्सा आने लगा)

शिव : सॉरी. (मेरे चेहरे पर ढेर सारा पछतावा उभर aaya)(Beena शिव को कुछ कहना चाहती थी पर सबके सामने क्या कहती, तो बस शिव को देखती रही, पर उसकी आंखे बहोत कुछ कह रही थी)

जूही : तू किस बात की सॉरी बोल रहा है? (उसकी बात से में थोड़ा हिल गया और बिना के चेहरेपर भी गभरहट छलक आयी)

शिव : (संभल kar)Wo इस्सलिये की मेरे होते हुए इन्हे तुम्हारी सहायता लेनी पड़ी, पता नहीं क्या hi ख्याल रक्खा होगा. (मैंने उसको चिढ़ाने के लिए कहा)

जूही : (वो चीड़ भी gayi)Mene hi ख्याल रक्खा है उनका, समजे, आप बताओ भाभी, क्या मेने सही से ख्याल नहीं रक्खा?

बिना : (मुझे डाट ते hue)Kyu उसको चिड़ा रहा है, सुबह से मुझे बिस्तर से उठने भी नहीं दिया उसने, सारा काम वही कर रही है. (वो मुस्कुराते हुए बोली)

जूही : सुना, सबको अपने जैसा समजा है क्या? (उसने मुँह बना कर कहा)

बिना : क्यों लड़ रहे हो dono,(Juhi को देख कर) वो बस तुम्हे चिड़ा रहा है. (में भी मुस्कुराया).

शिव : अगर इतना hi ख्याल रख रही थी तो मुझे फ़ोन कर के क्यों बुलाया?

जूही : कोई सोख नहीं था मुझे, वो तो रात को ऐसे hi आ गयी थी तो मुझे अपने कपडे लेने घर जाना था, इन्हे अकेला नहीं छोड़ सकती थी तो तुम्हे बुला लिया, पर अब लग रहा है की गलती कर दी. (उसनेमुह डेढ़ा किया)

शिव : (मुस्कुराते hue)Ab ज्यादा नौटंकी मात कर, में हु यहाँ, जा ले आ. और है संयम को भी उसके घर छोड़ देना. (संयम ने थोड़ी उदासी से शिव को देखा, पर वो परिस्थिति समाज रही थी तो कुछ न boli)(Juhi और संयम वह से निकल गए, मेने दरवाजा बंद किया और फिर मैडम के पास आ गया, मेने उनका हाथ pakkada)Sorry, मेरी वजह से hi हुआ है न सब.

बिना : सिर्फ तुम्हारी गलती नहीं है शिव, में भी जिम्मेदार हु. पर सब ठीक है, में रात को hi हॉस्पिटल चली गयी थी, डॉक्टर ने देख लिया है सब. चिंता की कोई बात नहीं है.

शिव : पर मुझे सय्यम रखना चाहिए था, मेरी hi गलती है. (जैसे मेने अपने आप को डांटा)

बिना : मेरी भी गलती है, पर डॉक्टर ने कहा की कोई चिंता की बात नहीं है, (थोड़ा रुक कर) उन्होंने कहा है की में कर शक्ति हु, बस थोड़ा ध्यान रख कर. (कहते कहते वो शर्मा गयी), और ये सिर्फ तुम्हारी बात नहीं है शिव, मुझे भी सब करना होता है. (उन्होंने प्यार से मुझे कहा, हम दोनों मुस्कुराये)

शिव : दवाई खायी? (मेने प्यार से पूछा, उन्होंने है में इस्सर किया, फिर हम दोनों ऐसे hi बाते करते रहे, तक़रीबन एक घंटे बाद जूही वापस आ गयी, मेने दरवाजा खोला तो उसके पास एक बाग़ था, वो मुझे देख कर मुस्कुरायी, में भी मुस्कुराया, हम दोनों अंदर आ गए)

जूही : शाम को क्या करेंगे?

शिव : क्या करेंगे, आज छुट्टी.

बिना : पागल हो क्या, में इतनी भी बीमार नहीं हु जो छुट्टी करोगे.

शिव : पर आपको अकेला नहीं छोड़ सकते न.

बिना : इसमें क्या है, आराम hi करना है न.

शिव : वो में देख लूंगा. अभी में जाता हु, शाम को आता हु फिर. (में वह से निकल कर घर की और निकल गया)

वही दूसरी और पद्मा ने दोपहर के खाने के बाद सब ठीक कर दिया और अपनी सास के पास बेथ गयी जो टीवी देख रही थी. कुछ देर वो ऐसे hi बैठी रही, वो उनसे बात करना चाहती थी पर उनका ध्यान टीवी में hi था, तभी ब्रेक हुआ तो उन्होंने अपनी बहु को देखा.

कामनादेवी : हो गया सब? (मुस्कुराते हुए)

पद्मा : जी माजी.

कामनादेवी : स्वर्णी और कप्पू कहा है?

पद्मा : जी वो अपने कमरे में है.

कामनादेवी : जाओ तुम भी आराम करो बेटी, थक गयी होगी.

पद्मा : नहीं माजी, मुझे क्या काम जो में थक जाउंगी. (दोनों मुस्कुराये, पद्मा को समाज नहीं आ रहा था की कैसे बात करे)

कामनादेवी : कोई काम था बेटी?

पद्मा : नहीं वैसा तो कोई काम नहीं था, पर....

कामनादेवी : कहो बेटी, इसमें झिझक किस बात की?

पद्मा : ऐसी कोई बात नहीं है माजी, बस कुछ जान न था (कामनादेवी ने टीवी का वॉल्यूम काम किआ और अपनी बहु को गौर से dekha)Mamta दीदी के साथ वो लड़का था न... (उसने बात अधूरी छोड़ दी, कामनादेवी के आँखों में फिर से उस लड़के की तस्वीर उभर आयी) आप उसको वैसे क्यों देख रही थी?

कामनादेवी : (थोड़ा संभल kar)Aisi कोई बात नहीं थी, में तो बस ऐसे hi देख रही थी? कितना लम्बा था न वो (मुस्कुराते हुए उसने जैसे बात को टालना चाहा)

पद्मा : मुझे ऐसा लगा जैसे आप उसे पहचान ने की कोशिस कर रही थी.

कामनादेवी : (कुछ सोच kar)Ha, वो कुछ जाना पहचाना लग रहा था मुझे.

पद्मा : अच्छा, तो फिर पहचाना आपने की वो कोण है?

कामनादेवी : नहीं बेटी (उसने जान बुज कर जूथ बोलै)

पद्मा : (पद्मा ने जैसे जिद पकड़ ली thi)Wo हमारे वह क्यों आया था? मेरा मतलब है की हमने तो सिर्फ खास रिस्तेदारो को hi बुलाया tha...(Usne बात अधूरी छोड़ दी)

कामनादेवी : आरी, ममता ने बताया तो था की वो उसके साथ आया है, अब वो दो अकेली कैसे आती, ममता के पति को तो पत्तिया लगी हुई है न, तो साथ में ले आयी थी.

पद्मा : (उसको समाज आ गया की उसकी सास ऐसे सीधे सीधे नहीं batayegi)Apko वो जाना पहचाना लगा था, क्या किसी के जैसा था वो? क्यों की वो पहलीबार hi हमारे वह आया था जैसे की ममतादिदी ने कहा था, तो फिर आप उस से पहले मिली हो ये तो हो नहीं सकता.

कामनादेवी : (सोचते hue)Ha, एक पल के लिए ऐसा लगा ki....(Bolte बोलते वो रुक गयी)

पद्मा : क्या माजी?

कामनादेवी : तूने तो योगेंद्र को देखा नहीं न, न hi तू चन्द्रिका से मिली है.

पद्मा : योगेंद्र मतलब छोटे चाचा?

कामनादेवी : है, मुझे ऐसा लगा की जैसे में उन्हें देख रही हु.

पद्मा : मतलब वो योगेन्द्राचाचा जैसा लगता था?

कामनादेवी : ऐसा नहीं कह सकते, पर काफी हद तक कुछ बाटे मिलती थी उसकी.

पद्मा : ये कैसे मुमकिन है माजी.

कामनादेवी : (बात को बदलने के liye)Hota है बहु, कई लोग एक जैसे दीखते है, पर कभी भूल के भी ये बात उनके सामने या पृथ्वी के सामने मात करना. (उन्होंने चेताया)

पद्मा : ऐसा क्यों माजी.

कामनादेवी : तू अपने पति को और ससूस को तो जानती hi है, और जो बाटे हुई है, उनका नाम भी इस घर में लेना खतरनाक है.

पद्मा : पर ऐसा क्यों माजी?

कामनादेवी : अब क्या कहु बहु, दौलत की चमक अच्छे अच्छा को अँधा कर देती है.

पद्मा : (थोड़ा डरते hue)To क्या बाबूजी ने उस लड़के को... (उसने बात अधूरी छोड़ दी)

कामनादेवी : मेने उनसे पूछा था, पर उन्होंने यही कहा की वो एक हादसा था, वो उनके हाथो से फिसल गया था, वह फीड और धक्कामुक्की hi इतनी थी.

पद्मा : तो सब ऐसी बाते क्यों फैला रहे है?

कामनादेवी : कोई नहीं फैला रहा, किसकी मजाल है जो ऐसी बात जबान पर भी लाये.

पद्मा : पर काना फुंसी तो हो hi रही है न.

कामनादेवी : उसमे हम क्या कर सकते है. और में तुम्हे भी कह रही हु, ज्यादा टाक झक मात करना वर्ण कही.... (पद्मा भी अंदर तक काँप गयी)

पद्मा : नहीं माजी, में तो बॉस आपसे hi बात कर रही हु, अब आपसे नहीं बात करुँगी तो किस से बात करुँगी. (उसने जैसे चापलूसी की)

कामनादेवी : सही है बेटी, पर कुछ बातो को कुरेदना hi नहीं चाहिए. जो हो गया सो हो गया, न में कुछ कर सकती हु न तुम. जाओ अब आराम करो.

पद्मा : जी माजी. (वो अपने कमरे की और निकल गयी, एक बार मान हुआ की स्वर्णादिदी से बात करे पर फिर वो अपने कमरे में hi चली गयी, बिस्तर पर लेट कर वो सोचने lagi)Koi तो बात है उस लड़के की, क्या है ऐसा? जैसा माजी बता रही है की वो योगेन्द्राचाचा जैसा दीखता है, कैसे हो सकता है ये, जहातक मुझे पता है उनका लड़का तो मर गया है, तो फिर ये कोण है? हो सकता है की वो उनके जैसा दीखता हो, कई लोग होते है जिनमे समानता होती है, पर अगर ऐसा है तो फिर ये तीनो उसके साथ क्यों है, और यक़ीनन वो धागा उन्होंने hi बंधा होगा क्यों की मेने किसी बाहरवाले के हाथ में वो धागा नहीं देखा, पर उसके हाथ में क्यों बंधा, आखिर कोण है वो? इनसे तो बात करना hi बेकार है (अपने पति के बारे में बोल रही थी) कभी ढंग से मुझसे तो बात करते नहीं, क्या बात करू उनसे. बड़े मर्द बने फिरते है, औरतो को दबाना hi इनकी मर्दानगी है, (उसको गुस्सा आ रहा था) पता नहीं मेरे माँ बाप ने क्या देखा जो मेरी शादी इनसे करवा दी, क्या पैसा hi सबकुछ होता है क्या? और यहाँ तो जो समाज आ रहा है वो ये की ये पैसा भी इनका नहीं है, षड्यंत्र कर के हथियाया हुआ पैसा है, तभी ये हालत है, वंस hi नहीं आगे बढ़ रहा इनका. पर इतने सालो में जो नहीं हुआ वो कैसे होने लगा, मन की ममतादिदी और स्वेतादिदी तो अब परायी हो चुकी है, पर बीनडीडी तो इसी घर की बहु है, फिर वो कैसे माँ बन रही है? क्या मुज में hi कोई कमी है? मेने तो अपने प्रेमी से भी तरय कर लिया, वो भी मुझे माँ नहीं बना पाया, मतलब मुजमे hi कोई कमी होगी. किस्मत hi ख़राब है फिर दुसरो को क्या दोष दे. (ऐसे hi सब सोचते सोचते उसकी आंख लग गयी)

वह कृपाली और स्वर्ण भी आपस में बाते कर रही थी, कृपाली ने बताया की उसके पति का फ़ोन आया था, उनकी सास उनपे दबाव बना रही है.

कृपाली : क्या करू दीदी कुछ समाज नहीं आ रहा.

स्वर्ण : तू क्यों परेशान होती है, सब ठीक हो जायेगा.

कृपाली : कैसे होगा दीदी? आप भी बता नहीं रही की आपने क्या किया जो आप माँ बन रही हो.

स्वर्ण : इसमें बताना क्या है यार, जैसे सब बनते है में भी बन रही हु.

कृपाली : आपने कोई ट्रीटमेंट वगैरह करवाई थी क्या?

स्वर्ण : (उसको लगा की यही कहना उचित hoga)Ha दवाई तो चल रही थी.

कृपाली : (उसको भी उम्मीद jagi)Didi मुझे भी उस डॉक्टर से मिलवाओ न, में भी वही इलाज करवाउंगी.

स्वर्ण : ठीक है, में वही ले चलूंगी तुजे बस.

कृपाली : थैंक यू दीदी.

स्वर्ण : पागल हो गयी है क्या, तेरी परेशानी मेरी परेशानी है, बहन हु तेरी. (कृपाली उस से लिपट गयी, उसका तो दिमाग बस इतना hi चल रहा था की कैसे भी माँ बन जाये, उसके दिमाग से शिव वाली बात निकल hi गयी थी, और वैसे भी उसको कोई इंट्रेस्ट नहीं था उस बात को ले कर, उसे तो बस अपनी परेशानी दिख रही थी.)

में घर पंहुचा तो मेने देखा की भार्गविजई की जीप कड़ी हुई थी, में अंदर गया तो वो बैठी हुई थी और लता और सरिता बात कर रही थी, सब है रहे थे.

शिव : मैडम आप?

भार्गवी : तुम तो घूमते रहते हो, मुझे hi तो ख्याल रखना पड़ता है यहाँ. (उन्होंने मुस्कुरा कर कहा)

सरिता : जब तुम यहाँ नहीं होते तो ये अक्सर यहाँ आ जाती है, अब तो मुझे भी लगने लगा है की ये घर की hi है. (उसने मुस्कुरा कर कहा)

भार्गवी : तो कोई शक है तुम्हे (मुस्कुरा कर वो बोली) वैसे भी अकेली रहती हु, यहाँ आती हु तो लगता है की अपने घर में हु.

लता : इससे में आपका तो घर नहीं कह शक्ति, ये तो हम अनाथो का बसेरा है.

भार्गवी : नाम चाहे जो भी हो लता, घर दीवारों से नहीं, घर के लोगो से बनता है, और यहाँ तुम सब मुझे अपने hi लगते हो, है ये अलग बात है की तुम्हे में अपनी न लगती हो.

लता : क्या बात कर रही हो दीदी, मेरे कहने का वो मतलब नहीं था.

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Me तो बस ऐसे hi कह रही थी. (मेरी और देख kar)Aur हीरो, कहा से सवारी आ रही है, स्कूल ख़तम हुए तो काफी टाइम हो गया. (मुझे स्कूल यूनिफार्म में देख कर कहा).

शिव : वो बिना मैडम की तबियत ठीक नहीं थी तो उनसे मिलने गया था.

लता : क्या हुआ दीदी को?

शिव : उनको दर्द हुआ था तो डॉक्टर ने उन्हें बेडरेस्ट करने की सलाह दी है. शाम को आप मेरे साथ उनके घर चल शक्ति हो क्या?

लता : है इसमें क्या दिक्कत है.

शिव : पर आपका यहाँ का काम?

सरितादिदी : वो हम देख लेंगे, तू उसकी फ़िक्र मात कर.

मेरी प्रॉब्लम सोल्वे हो गयी थी, पर मान में ये भी था की यहाँ के काम में भी दिक्कत आएगी, मेरे मान में ये सब चल रहा था. भार्गविमडम थोड़ी देर रुकी फिर वो भी चली गयी. में अपने कमरे में गया और मेने स्नेहा मैडम को फ़ोन लगाया.

स्नेहा : कोण?

शिव : में शिव बोल रहा हु.

स्नेहा : कोण शिव? (में अपने फ़ोन को देखने लगा की मेने सही नंबर hi डायल किया है न, नंबर तो सही hi था)

शिव : में शिव बोल रहा हु. (मेने फिर कहा, मुझे आश्चर्य हो रहा था की वो पूछ रही थी की में कौन?)

स्नेहा : में किसी शिव को नहीं जानती. (उन्होंने नाराजगी से कहा)

शिव : ऐसा क्यों कह रही हो आप?

स्नेहा : तो और क्या कहु, कभी भूले से भी ख्याल आता है मेरा (उनकी बात से hi लग रहा था की वो नाराज है)

शिव : सॉरी वो वो...

स्नेहा : है है सब पता है, बहोत बिजी हो, पर इतना भी क्या बिजी होना की मिल hi न पाओ. (में चुप हो गया, क्यों की बात तो उनकी सही thi)kaho क्यों फ़ोन किया? (वो थोड़ी शांत हो गयी थी)

शिव : नहीं बस ऐसे hi. (मेने कुछ कहना मुनासिब न समजा)

स्नेहा : अब कहो भी, में तो बस ऐसे hi कह रही थी. क्या हुआ? (मेने उन्हें बिना मैडम के बारेमे bataya)Thik है, में देख लुंगी.

शिव : आप नाराज तो नहीं हो न?

स्नेहा : ऐसी बात नहीं है शिव, मेरी भी परिस्थिति कुछ ऐसी hi है, में भी मिलना चाहती हु पर खुद को रोकना पड़ता है. हम मिलेंगे तो बात करेंगे, तुम बिना की फ़िक्र मात करो, में जा आउंगी वह.

शिव : शाम को तो लता वह जा रही है, मेने बस आपको इंफोम किया ताकि जरुरत पड़े तो आप मदद कर शेक.

स्नेहा : ठीक है, में देखती हु.

शिव :थैंक यू.

स्नेहा : अब तुम नाराज कर रहे हो मुझे. (वो है के बोली तो में भी मुस्कुरा दिया, फिर हमने थोड़ी देर बात की aur,mene फ़ोन रख दिया.

स्नेहा मैडम से बात कर के में थोड़ी देर पढ़ने बेथ गया. शाम को स्टेडियम भी जाना था और बिना मैडम के घर भी.
 
अपडेट 189

में पढ़ रहा था तभी रंजन आयी.

शिव : वह क्यों कड़ी हो? अंदर आओ. (वो दरवाजे पर hi कड़ी थी, वो लहराती हुई चल से अंदर आयी, वो बस मुझे देख रही thi)Kya हुआ? (उसने सिर्फ न में सर हिलाया, वो बस मुझे देख रही थी, न hi कुछ बोल रही थी न कुछ कह रही थी) कुछ तो बोल.

रंजन : बस ऐसे hi तुजसे मिलने आयी थी. (उसने हलकी उदासी से कहा)

शिव : कुछ हुआ है क्या? (उसने फिर ना में शिर हिलाया)

रंजन : पहले कितना अच्छा था न, हम दोनों लकडिए काटने के बहाने से मिल लेते थे.

शिव : ऐसा क्यों कह रही है.

रंजन : अब तो जैसे तेरे पास समय hi नहीं है. (उसने उदास हो कर कहा)

शिव : ऐसा क्यों बोल रही है, (मेने बहार दरवाजे की और dekha)Sab क्या कर रहे है?

रंजन : अभी सब उठे है, शाम की तयारी कर रहे है. (में उठा और उसको खिंच कर दरवाजे के पीछे ले गया, वो बस मुझे देख रही थी, में झुका और उसके होठो को चूसने laga)(Ranjan को तो यही चाहिए था, पर वो थड़ा नखरा करने लगी और जैसे शिव छूटना चाहती हो वैसे उसको हलके से दूर धकेलने lagi)(Mene उसको छोड़ा और उसकी आँखों में देखा)

शिव : क्या हुआ, क्यों मुझे धक्का दे रही है?

रंजन : ये तो में आयी तो तू मुझे किश कर रहा है, तेरा मान नहीं होता क्या की मुझे किश करे. (उसने हलकी उदासी से कहा)

शिव : ऐसा क्यों कह रही है.

रंजन : और क्या कहु, न मुझे बुलाता है न कुछ करता है.

शिव : (मुस्कुराते हुए उसके चेहरे को सहलाते hue)Aisa कुछ नहीं है, तू hi तो देख रही है न, समय की कहा मिल रहा है.

रंजन : वो hi तो कह रही हु, में दिखती नहीं क्या तुजे?

शिव : पागल, (उसके गाल पर हलकी सी चपत लगा kar)Aisa कुछ नहीं है. (उसकी आँखों में देखते hue)Bahot मान कर रहा है क्या? (वो मुस्कुराने लगी, पर बोली कुछ nahi)Thik है आज रात को... (मेने वाकया अधूरा छोड़ दिया. (उसने ना में शिर हिलाया, मुझे समाज नहीं aaya)Kyu?

रंजन : क्यों की में आयी हु इस लिए, जब तेरा मान करे की तुजे मेरे साथ रहना है तब तू आना, में रहूंगी तेरे साथ. (तभी बहार से आवाज आयी)

लता : शिव ो शिव. (रंजन दर गयी और वह से जाने लगी, मेने उसको पकड़ लिया और जाने नहीं दिया)

शिव : हा.

लता : जाना नहीं है क्या?

शिव : दो मिनट में आया. (फिर वह से कोई आवाज नहीं आयी, मेने रंजन को देखा तो वो मुझे hi देख रही thi)Tu तैयार रहना रात को. (कहते हुए में झुका और फिर उसको किश करने लगा और साथ में उसके छोटे छोटे कड़क स्तन को दबा दिया, उसने जोर से आंखे बंद कर ली पर वैसे hi कड़ी रही, थोड़ी देर बाद मेने उसको छोड़ा तो वो बस मुझे देखे जा रही थी, में मुस्कुराया) चल अब. (कहते हुए उसके कंधे पर हाथ रक्खे hi में बहार आया. (जब बहार आया तो सामने hi लतादिदी ुर सरितादिदी कुछ काम कर रही थी, हम दोनों को ऐसे देख कर वो दोनों hi मुस्कुरायी)

लता : क्या हुआ इसे?

शिव : कुछ नहीं, थोड़ी नाराज है. (मेने मुस्कुरा कर कहा तो रंजन ने मेरी और देखा और शर्मा गयी, विणा भी कुछ काम कर रही थी उसने भी देखा.)

लता : क्या हुआ तुजे? (रंजन को, वो कुछ नहीं बोली) बोल न, क्या हुआ तुजे?

शिव : कुछ नहीं, कह रही है की में बहोत बहार रहने लगा हु.

लता : (मुक्सुराते hue)Kahegi न, पहले हमेसा साथ में खेला करती थी और अब तू मिलता hi नहीं तो कहेगी hi.

शिव : अब ये छोटी बच्ची थोड़ी न है जो में इसके साथ खेलता राहु. (मेने बस चिढ़ाने के लिए कहा)

लता : अभी बच्ची hi है वो, और तुजसे नहीं कहेगी तो किसको कहेगी.

शिव : अरे पर में अकेला hi हु, हर पल हर जगह तो नहीं रह सकता न.

सरिता : तो हम क्या करे इसमें, हम सबकी जिम्मेदारी ली है तो निभा फिर. (सरिता भी बीचमे कूद पड़ी). ये तो फिर भी बोलती है, वह देख वो (विणा की और इस्सर कर ke)Kaise बड़ी बड़ी आँखों से टुकुर टुकुर देख रही है, वो तो कुछ बोलती भी नहीं. (सब उसकी और देखने लगे तो वो शर्मा गयी और अपनी नज़ारे निचे कर ली, सब हसने लगे)

शिव : वीणा (मेने उसको आवाज दी तो वो मेरी और देखने lagi)Yaha आ. (उसने एक बार लतादिदी और सरितादिदी को dekha)Unhe क्या देख रही है, आ यहाँ. (वो कड़ी हुई और शिर झुका कर चलते हुए मेरे पास aayi)Tuje भी शिकायत है मुझसे? (उसने एक पल मुझे देखा फिर नज़ारे झुका ली और ना में गर्दन हिलायी, में मुस्कुराया और उसको भी खिंच कर मेरी दूसरी और खड़ा कर लिया और उसको साइड से पकड़ कर मुझसे सत्ता दिया.) देखा, ये सबसे अच्छी है, कभी शिकायत नहीं करती.

रंजन : तुम्हे कुछ नहीं कहती, मुझे पता है वो कितना बोलती है. (उसने विणा को देख कर कहा तो विणा शर्माने lagi)(Tabhi गायत्रीदिदी भी तैयार हो कर बहार आयी, सब को ऐसे देख कर वो ठिठक गयी और समझने की कोशिस करने लगी की क्या हो रहा hai)Aap भी आ जाओ.

गायत्री : (लता और सरिता की और देख kar)Kya हुआ?

शिव : सब शिकायत कर रहे है की में ज्यादा घर पे टाइम नहीं देता, आपको शिकायत है?

गायत्री : नहीं कोई शिकायत नहीं है (उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा) वैसे किसको शिकायत है ये?

शिव : इसको (मेने रंजन के शिर पर हलके से मरते हुए कहा).

गायत्री : (मुस्कुराते hue)To फिर ठीक है, वो अभी छोटी है, उसे अभी जिम्मेदारिओं का पता नहीं है, वो शिकायत कर सकती है.

रंजन : (नाराजगी se)Me क्यों जिम्मेदारी उठाऊ, ये इतना बड़ा खम्भा किस काम का फिर, ये उठाये मेरी जिम्मेदारी. (सब हसने लगे)

शिव : आप गयम जा रही हो दीदी?

गायत्री : नहीं अभी देर है, पहले कुछ काम करुँगी फिर जाउंगी.

शिव : (लता की और देख kar)Aapko कितनी देर लगेगी?

लता : में तैयार hi हु. (रंजन और विणा को देख kar)Sarita का साथ देना, वो अकेली है. (उन दोनों ने है में इस्सर किया)

गायत्री : में भी थोड़ा देर से hi जाउंगी, तुम चिंता मात करो, हम सब देख लेंगे.

उसके बाद में और लतादिदी दोनों वह से निकल गए. बिना मैडम के घर पहुंचे. जूही ने hi दरवाजा खोला. लतादिदी को देख कर उसनका हाथ पकड़ कर.

जूही : कैसी हो लता.

लता : (मुस्कुराते hue)Thik हु, तुम कैसी हो.

जूही : में भी ठीक हु, आओ. (वो उन्हें ले कर सीधे बैडरूम में गयी, में भी पीछे पीछे वह पहुंच गया)

बिना : अरे लता, कैसी हो?

लता : (बिस्तर पर उनके पास बैठते hue)Ye तो मुझे पूछना चाहिए, आप कैसी हो?

बिना : ठीक हु, ख़म खा तुम्हे परेशान किया मेने. मेने मन किआ था की कोई जरुरत नहीं है, पर ये नहीं मन. (मेरी और देख कर)

लता : ठीक hi तो है, सबके होते हुए आप क्यों अकेली रहेंगी.

शिव : (जूही ko)Ready हो?

बिना : उसके लिए दूध बना लेना, कह रही थी न तुम. (उन्होंने जूही को हिदायत दी)

जूही : है बना देती हु. (वो मुस्कुरायी)

लता : क्या बना न है, में बना देती हु.

जूही : तुम्हे कुछ करने की जरुरत नहीं है, बस इनके साथ बैठो और गप्पे लड़ाओ. (कहते उहइ वो मुस्कुरायी और बहार चली गयी)

बिना : और सब कैसे चल रहा है?

लता : सब ठीक है मैडम.

बिना : मैडम की बच्ची, में तेरी मैडम नहीं हु, कितनी बार कहु तुजे. (उन्होंने मुस्कुराते हुए डांटा)

लता : सॉरी दीदी. वो ये मैडम मैडम बोलता रहता है न तो वही जुबान पर आ जाता है.

बिना : उसे कहने दो. (कहते हुए उन्होंने मुझे देखा और मुस्कुरायी, में भी मुस्कुराया, जूही ने आवाज दी)

जूही : बहार आ जाओ, दूध तैयार है. (में बहार गया और हम दोनोने दूध पिया और फिर वह से निकलने lage)Lataaaa.... (वो बहार aayi)Darwaja बंद कर लेना, हम दो घंटे में आ जायेंगे.

फिर हम वह से निकल गए, अब हम दोनों का स्टेमिना बढ़ चूका था तो प्रैक्टिस भी जोरो से हो रही थी, हमने मिल कर खूब म्हणत की, जब हम निकलने वाले थे तो वो वाश रूम गयी और में वही खड़ा था. थोड़ी देर बाद वो आ गयी और हम दोनों बिना मैडम के घर की और निकल गए. जब हम वह पहुंचे तो वह मेने भार्गवी मैडम की जीप देखि. मेरा दिल घबरा गया, मेने फ़ौरन दरवाजा खत खतया तो लतादिदी ने दर्जा खोला, और अंदर से हसने की आवाजे आ रही थी, में थोड़ा शांत हो गया.

लता : (मेरे चेहरे पर दर देख kar)Kya हुआ?

शिव : कुछ नहीं वो पुलिस की जीप?

लता : भार्गवीडीडी आयी है. और वो वकील दीदी भी आयी है. (में अंदर गया तो भार्गविमडम, काव्यमादाम और स्नेहमड़ाम वह बैठे हुए थे, और सब बाते कर रहे थे और है रहे थे. हम अंदर गए तो सबने मुझे देखा)

शिव : आप सब?

भार्गवी : क्यों नहीं आना चाहिए था?

शिव : नहीं में तो बस ऐसे hi कह रहा था. (में झेप गया, स्नेहा मैडम का में समाज सकता था की मेने hi उन्हें कहा था)

भार्गवी : में काव्य के वह गयी थी एक काम था तो, वह से निकलते वक़्त मेरे मुहसे निकल गया की मुझे बिना के घर जाना है तो उन्होंने पूछा तो मेने बताया तो वो भी आ गयी. (बिना मुस्कुराते हुए शिव को देख रही थी, कहा वो अकेले अकेले रहती थी और कहा अभी इतने लोग उसके साथ है)

लता : आपकी जीप देख कर वो दार गया था पता है? (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

भार्गवी : अब इसमें में क्या कर शक्ति हु, पुलिसवाली को दोस्त बनाया है तो वो तो आएगी hi. अब आदत दाल लो, पुलिस की जीप हर जगह कुछ होने पर hi नहीं दिखती, कभी कभी ऐसे hi भी आती है. क्यों मैडम (उन्होंने काव्य को देख कर कहा)

काव्य : यहाँ तो वकील भी है और पुलिस भी है, (फिर कुछ याद कर ke)jab हम यहाँ आये थे तो आस पास के लोग भी देख रहे थे. में भी कोर्ट से hi आयी थी तो इन्ही कपड़ो में थी. अरे भाई हम भी इंसान है और हम भी रिश्ते निभाते है, क्या कहती हो भार्गवी?

भार्गवी :बिलकुल. और में भी आती जाती रहूंगी, तो लोगो को भी आदत हो जाएगी.

स्नेहा : और लता को परेशान मात करना, में आ जाउंगी शाम को.

बिना : मेरी वजह से सबको परेशान कर दिया isne(Wo मीठे गुस्से से शिव को देखते हुए बोली)

स्नेहा : इसमें परेशानी कैसी, मन की हम सब एक दूसरे से इतने परिचित नहीं है पर अनजान भी नहीं है और ऐसे hi तो पहचान बढ़ती है.

काव्य : और हम सबका तो कनेक्शन भी एक hi है.

स्नेहा : वो कैसे? (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

काव्य : अगर हम सब मोती है तो ये है न लम्बा वाला धागा. (सब जोर जोर से हसने लगे)

स्नेहा : सही कहा आपने, आज हम सब इसकी वजह से hi एक दूसरे से परिचित है. (में बस साइड में खड़ा शर्मा रहा था, क्यों की सब सिर्फ ये समाज रहे थे की मेरी वजह से सब एक दूसरे से परिचित है पर सबको ये नहीं पता था की में सब के साथ एक खास रिश्ते से जुड़ा हुआ हु)

शिव : मेरी वजह से आप सबको परेशानी हुई (मेने शरमाते हुए कहा, सब हसने लगे)

लता : में क्या कहती हु दीदी (बिना की और देख कर), किसी को कोई परेशानी लेने की जरुरत नहीं है, आप हमारे साथ हमारे घर पर रहिये न, भले hi कुछ दिन के लिए hi सही, हम वह पांच लड़किया है और कोई न कोई वह होता hi है, हम अच्छे से ख्याल रख लेंगे. (सब सोच में पद गए) है गर आपको वैसी जगह पर रहने में दिक्कत न हो तो. (वो झिझकते हुए बोली)

बिना : मार खायेगी जो ऐसा बोली तो, पर मेरी वजह से सब परेशान हो जायेंगे.

लता : हमे कोई परेशानी नहीं होगी दीदी, हमे तो अच्छा लगेगा.

भार्गवी : वैसे आईडिया बुरा नहीं है, यहाँ जूही अकेले परेशान होती रहेगी, वह सब होंगे तो अच्छे से हो जायेगा.

जूही : मुझे कोई परेशानी नहीं है, बस मुझे प्रैक्टिस के समय hi कोई चाहिए.

भार्गवी : तुम दोनों की प्रैक्टिस भी जरुरी है, मुझे तो ये सही लगता है.

शिव : पर हमारे वह इतनी सुविधाएं नहीं है. (में अभी भी हिचकिचा रहा था क्यों की इन सबके मुकाबले हम बहोत साडी जिंदगी जीते थे, और वो कुछ भी हो पर था तो एक अनाथालय hi न)

बिना : ऐसा क्यों कह रहे हो, मुझे कोई ऐसो आराम नहीं करना है, बस आराम hi करना है.

भार्गवी : चलो तो फिर ये तय रहा, स्नेहा, तुम अपनी कार में इन्हे वह ले जाओ, हम दूसरी सब चीजे, इनके कपडे और दवाई वगैरह ले कर आते है.

सब काम पर लग गए, जो जो मैडम बताती रही वो सब लता और जूही ने पैक कर दिया और फिर स्नेहा, जूही, लता और बिना, वह से निकल गए. लता ने बिना को अपनी गॉड में शिर रख कर लेता दिया और जूही और स्नेहा आगे बेथ गए. में, भार्गवी मैडम और काव्य मैडम, सामान के साथ जीप में पीछे पीछे चल दिए. अनाथालय में सब सेट कर दिया और मेरे रूम को hi उनका रूम बना दिया. दिक्कत सिर्फ इतनी थी की उनका बिस्तर जमीं पर लगा था, बीएड नहीं था. फिर काव्यमादाम और भार्गवी मैडम थोड़ी देर रुक कर चले गए, पवनसीर का फ़ोन आया तो स्नेहमड़ाम भी चली गयी. जूही वही रुकी और खाना खा कर वो गयी. सब लोग जैसे बिना मैडम की सेवा में लग गए थे. उनको बिस्तर पर hi खाना खिलाया. रात को लता hi उनके साथ सोनेवाली थी. सरितादिदी ने मुझे रंजन और विणा वाले कमरे में सोने को कहा पर रंजन और विणा को अपने साथ सोने के लिए कहा. रंजन तो पहले हे सुन कर खुस हो गयी थी पर फिर वो मान गयी, और वैसे भी आज की बात नहीं थी, में अब उसके कमरे में hi सोनेवाला था क्यों की जब तक बिना मैडम है तो मेरे कमरा तो उनके पास hi रहनेवाला था. तो रंजन ने सोचा की आज नहीं तो कल उसको शिव के साथ सोने को मिल hi जाना है.

आज भी शिव के न आने से जहान्वी बहोत अपसेट थी. उसको शिव पर गुस्सा आ रहा था की कह कर भी वो नहीं आया.

जहान्वी : समझता क्या है अपने आपको, क्या में मरी जा रही हु उस से मिलने के लिए, अगर उसको इतनी hi अकड़ है तो में भी जहान्वी हु, नहीं मिलना मुझे भी. में कल जाउंगी hi नहीं, उसको भी पता चले की में क्या हु. (ऐसे hi सोचते सोचते वो सो गयी)

वही वैस्वी भी अपने कमरे में बिस्तर पर लेती थी पर आज उसको नींद hi नहीं आ रही थी, जिसकी वजह थी आज हुई बात. जब वो लोग खाने बैठे थे तब उसकी मम्मी ने बताया की उनको कल किसी की शादी में जाना है.

वैस्वी : में नहीं आनेवाली हु.

संध्यादेवी : क्यों?

वैस्वी : अभी तो आपके साथ भाभी के ससुराल भी आयी थी न, अब रोज़ रोज़ ऐसे घूमती रहूंगी तो पढ़ाई का कितना नुकसान होगा, उस दिन का भी अभी काम बाकि है और आप फिर कह रही हो.

संध्यादेवी : तो क्या फर्क पड़ता है, तुजे कोनसा पढ़लिख कर कलेक्टर बन न है, ऐसे आएगी तो समाज के तौर तरीके सिख लेगी.

वैस्वी : (नाराजगी se)Muje नहीं सिखने ये तौर तरीके, में नहीं आनेवाली बस.

संध्यादेवी : आरी कल जा के शादी हो जाएगी, फिर यही तो करना है, अभी से सिख लेगी तो तेरे hi काम आएगा सब.

वैस्वी : मेने कहा न की अभी मुझे शादी नहीं करनी है, और अभी बहोत समय है, में सिख लुंगी.

प्रकाशराओ : (अपनी पत्नी ko)Kyu जिद कर रही हो तुम भी, वैसे भी कोई खास नहीं है, ये तो बुसिनेस की जान पहचान है तो जाना पद रहा है, नहीं आना तो रहने दो न.

संध्यादेवी : कल आकाश भी बहार जा रहा है, अकेली हो जाएगी ये.

प्रकाशराओ : अकेली क्यों, घर में नौकर चाकर भी है और बहार दरवाजे पर भी सिक्योरिटी है, क्या फर्क पड़ता है.

संध्यादेवी : मुझे क्या, में तो इसके भले के लिए hi बोल रही थी. (फिर आगे बात न हुई, पर वैस्वी खुस थी, खुस इस लिए थी की उसकी मान मणि हो रही थी पर फिर अचानक उसको दिमाग में आया की कल अकेली है तो शिव को बुला ले, वैसे भी पिछली बार जब शिव उसके घर आया था तो दोनों के बिच बहोत कुछ हुआ था, और उसकी वजह से hi वो शिव को मिलना चाहती थी, पहली बार वो किसी लड़के के साथ ऐसे पूरी नंगी हो कर रही थी, और उसको वो बहोत अच्छा लगा था, अक्सर वो उन पालो को याद करती थी, कल मौका भी था और कोई बंदिश भी नहीं थी, उसके दिल में लड्द्दू फूटने लगे, फिर वो सोचने लगी की कैसे वो शिव को बुलाये, क्यों की घर में नौकर भी होंगे और बहार सिक्योरिटी वाला भी होगा, वो नए नए तरीके ढूंढने लगी, क्यों की उसको दर भी लग रहा था की अगर घरवालों को पता चल गया तो क्या होगा, पर उसके दिमाग पर शिव के साथ मिलनेवाले उन कामुक पालो ने कब्ज़ा कर लिया था, वो कैसे भी शिव से मिलना चाहती थी, वो देर रात तक उसी बारे में सोचती रही और नए नए बहाने और परिस्थितिया सोचती रही.

आज भी कृपाली और स्वर्ण साथ में सो रहे थे, दोनों के बिच एक hi मुद्दा था.

स्वर्ण : मेने कहा न सब ठीक हो जायेगा, तू क्यों फ़िक्र करती है.

कृपाली : दीदी आप समाज नहीं रही हो, आप तो शादी कर के चली गयी थी, आपके पीछे मुझे कितना सहना पड़ा है आप नहीं जानती, हर वक़्त मुज पर पहरा लगा रहता था, जैसा आपने किया कही में न कर दू ये सोच सोच कर hi मेरी पूरी आज़ादी ख़तम कर दी गयी थी, वैसे भी मेरा ऐसा कोई चक्कर था भी नहीं तो मुझे कोई दिक्कत नहीं थी, पापा ने मेरे लिए लड़का ढूंढा और मेने वही शादी कर ली, सब सही चल रहा था पर अब ये बच्चे न होने के कारन सबका व्यव्हार बदल गया है, आज भी मेरी उनसे (उसके पति वशिष्ठ) से बात हुई थी, मुझे पूछ रहे थे की कब आनेवाली हो, मेने कह दिया की में आपके साथ जा रही हु तो तरह तरह के सवाल करने लगे, मेने भी कह दिया की दीदी ने जिस डॉक्टर से अपना इलाज करवाया था और माँ बानी में भी उसी डॉक्टर के पास अपना इलाज करवाने जानेवाली हु, तब जा के वो माने. (स्वर्ण की और घूम कर उसकी आँखों में देखते hue)Didi सब ठीक हो जायेगा न? में भी माँ बनुगी न?

स्वर्ण : (वो मान hi मान सोचने लगी की क्या जवाब दू इससे, वो कैसे माँ बन रही है वो, वो hi जानती है, अब अपनी hi छोटो बहन को वो ये तो नहीं कह सकती की वो किसी और का बच्चा अपने गर्भ में पीला हुई hai)Sab ठीक हो जायेगा, तू फ़िक्र मात कर. (कहने को तो उसने कह दिया पर कैसे होगा वो खुद नहीं जानती थी, उसके मान में ऐसा कुछ भी नहीं चल रहा था की वो कृपाली और शिव को आपस में मिलाएगी, क्यों की वो ऐसा नहीं कर शक्ति थी, वो दुविधा में थी और भगवन से प्राथना कर रही थी की कैसे भी उसको माँ बना दे)

दूसरे दिन सुबह सब नास्ता कर के अपने अपने काम में लगे थे तब पद्मा और कृपाली एक जगह खड़े हो कर बात कर रहे थे.

पद्मा : क्या हुआ, कुछ पता चला आपको?

कृपाली : किस बारे में पूछ रही हो आप?

पद्मा : (उसको बहोत बड़ा झटका लगा क्यों की उसने सोचा नहीं था की कृपाली इतनी लापरवाह है, उसने अपने आप को संभाला और शांति से kaha)Are में उस लड़के के बारे में पूछ रही हु, आपकी बात हुई दीदी से?

कृपाली : क्या फर्क पड़ता है भाभी, हमें क्या लेने देना उस लड़के से, वो जो भी हो हमें क्या? (पद्मा आश्चर्य और हलके गुस्से से कृपाली को देखने लगी, पर वो कुछ कर नहीं सकती थी क्यों की वो उसकी नानन्द थी, कृपाली ने भी ये देखा, फिर वो boli)Bhabhi हमारी समस्या वो लड़का नहीं है, हमारी समस्या है की हम माँ क्यों नहीं बने, में उसके बारे में जाँऊगी की उस लड़के के बारे में. आपको उस लड़के के बारे में जान न है तो आप जानो. (उसने थोड़ी नाराजगी से कहा)

पद्मा : (वो शांत हुई, उसको भी लगा की कृपाली सही कह रही है, क्यों की सब से बड़ी प्राथमिकता तो यही थी, उसने बहोत प्यार से puchha)Sahi कह रही हो आप, तो क्या बात हुई आपकी?

कृपाली : दीदी कह रही थी की उन्होंने जिस डॉक्टर से अपना इलाज करवाया था उस से वो मेरा इलाज करवाएगी.

पद्मा : फिर मुझे अकेला कर दिया न आपने, आप इलाज करवाऊंगी और मेरा क्या होगा?

कृपाली : मेने कोई अकेला नहीं कर दिया आपको, में आपसे पूछने hi वाली थी की अगर आपको चलना है तो आप भी चलो.

पद्मा : (कुछ सोचते hue)Muje उनसे पूछना पड़ेगा.

कृपाली : तो पुछलना आप. वैसे भी भैया अभी घर पर hi है, जाओ और पूछ लो.

पद्मा : ठीक है में अभी पुछलेति हु. (कहते हुए वो अपने रूम की और बढ़ गयी, अंदर गयी तो उसका पति तैयार हो रहा था, अभी नाहा कर निकला था और कपडे पहन रहा था, उसने अभी पद्मा को देखा पर जैसे अनदेखा कर दिया, पद्मा भी उस से डर्टी थी तो पहले दरवाजा बंद किया और आहिस्ता से उसके पास गयी)

पृथ्वी : (हलकी नाराजगी से देखते hue)Kya हुआ?

पद्मा : नहीं, में तो ये देखने आयी थी की आपको कुछ चाहिए तो नहीं?

पृथ्वी : कुछ नहीं चाहिए. (उसने बेरुखी से जवाब दिया, रूम में थोड़ी देर ख़ामोशी शयी रही, पद्मा वही कड़ी रही, और अपने पल्लू से खेल रही, पूछे की न पूछे उसको दर लग रहा tha)Ab बकोगी भी.

पद्मा : (वो कैंप गयी) वो ... वो में कह रही thi...wo कृपाली दीदी...

पृथ्वी : किसी की चुगली या फरियाद लेकर आयी हो क्या? (उसने गुस्से से कहा)

पद्मा : नहीं, में क्यों किसी की फरियाद करुँगी, वो ..वो कृपाली दीदी स्वर्ण दीदी के साथ जा रही hai...(wo बोलते बोलते रुक गयी)

पृथ्वी : तो में क्या करू, पता नहीं पापा ने उसको घर में क्यों घुसने diya.(Usne गुस्से से कहा)

पद्मा : नहीं वो, वह किसी डॉक्टर से मिलने जा रही है. (उसने डरते हुए कहा)

पृथ्वी : (घर के देख kar)Doctor से....

पद्मा : है वो वह अपना इलाज करवाने जा रही है, ताकि वो माँ बन सके.

पृथ्वी : तो वो डॉक्टर उसे माँ बनाएगा क्या? (उसने गुस्से से कहा)

पद्मा : (वो दर गयी, और उसको पता नहीं था फिर भी उसने कह diya)Wo तो लडीडॉक्टर है, वो इलाज करेगी.

पृथ्वी : तो...

पद्मा : में क्या कह रही थी, (वो थोड़ा रुक gayi)Me भी....

पृथ्वी : (वो चल के उसके पास आया तो पद्मा पूरा कैंप gayi)Tuje क्यों जाना hai?(Padma कुछ नहीं बोल payi)tu बांज है पता है न, गयी थी न अपने यार के pass...(Usne दन्त पिस्टे हुए कहा) बन गयी माँ????)

पद्मा : (दर के मरे उसके पशीने निकल aaye)Me मेने कुछ नहीं किया (लगभग वो रो hi पड़ी थी)

पृथ्वी : (उसका गाला पकड़ कर दबाते hue)Muje समजायेगी साली, तुजे भी भेज दू क्या उसके पास. मनहूस कही की. (पद्मा की आँखों से आंसू निकल गए) तू बांज है और बांज hi रहेगी, कही जाने की जरुरत नहीं है. (कहते हुए वो कमरे से बहार चला गया, पद्मा फुट फुट कर रो पड़ी, काफी देर रोने के बाद वो अपने आपको ठीक कर के बहरा ayi,Krupali टीवी देख रही थी)

कृपाली : (उसका चेहरे देख कर. )क्या हुआ भाभी?

पद्मा : (ना में शिर हिलाते hue)Kuchh nahi.(Bolte बोलते भी जैसे उसकी आवाज फसने लगी)

कृपाली : (वो सब समाज गयी, वो कड़ी हुई और पद्मा को अपने पास बिठाते hue)Aap फ़िक्र मात करो भाभी, में डॉक्टर से आपके बारे में भी बात करुँगी, और वो जो भी इलाज बताएँगे में आपको बता दूंगी. (पद्मा ने कृपाली को देखा तो उसकी आँखों से ासु छलक आये) आप क्यों रो रही हो भाभी, वो ऐसा hi है आप जानते हो न. (वो कुछ नहीं बोली और रोने लगी, कृपाली ने उसे शांत करवाया)

पद्मा : कभी कभी तो लगता है की मर जाऊ, पर फिर अपने माँ बाप का ख्याल आ जाता है.

कृपाली: ऐसा उल्टा सीधा सोचना भी मात, सब ठीक हो जायेगा, अगर कुछ होगा तो में खुद आपको वह ले चलूंगी.

में स्कूल में लेट आया था, क्यों की सुबह प्रैक्टिस के लिए जाना होता है. दो पहर को रेसस्स में हम सब इकठ्ठा थे. (वैस्वी को शिव से बात करनी थी पर संयम के होते हुए वो बात नहीं कर प् रही थी, उसने कई बार कोशिस की पर वो बात कर hi नहीं पायी) जब स्कूल छूटा तब भी संयम साथ में hi थी, और वो शिव के साथ hi जानेवाली थी, तो वो मायूसी से शिव को देखने लगी.

वो मुझे ऐसे क्यों देख रही थी मेरी समाज में नहीं आया, शायद वो कुछ कहना चाहती थी पर कह नहीं रही थी, शायद सबके सामने कहने से कटरा रही थी, पर ऐसी क्या बात हो सकती है मेरी समाज में नहीं आ रहा था. वो अपने घर के लिए निकल गयी, जाते जाते भी पीछे मुद कर देख रही थी, में और संयम निकल गए, रस्ते में संयम कुछ बात कर रही थी पर मेरा ध्यान वैस्वी पर hi था. संयम ने मुझे डांटा भी की में उसकी बात नहीं सुन रहा, तो मेने बिना मैडम की तबियत का बहाना बना दिया. में घर पंहुचा और बाइक रख कर पहला फ़ोन वैस्वी को किआ.

वैस्वी : Hello. (उसकी आवाज में कंपन और खुसी दोनों दिख रही थी)

शिव : Hello, घर पहुंच गयी?

वैस्वी : (उसके चेहरे पर मुस्कान आ gayi)Ha पहुंच गयी.

शिव : कुछ कहना चाहती थी क्या?

वैस्वी : (वो बहोत खुस हुई की शिव को ध्यान hai)Ha.

शिव : कहो फिर.

वैस्वी : अभी मेरे घर आ शक्ति हो?

शिव : अभी? क्यों?

वैस्वी : आ शक्ति हो की नहीं? (उसने नाराजगी से कहा)

शिव : आ जाता हु, पर बात क्या है वो तो बताओ.

वैस्वी : तुम पहले आ जाओ, मिल कर बताती हु.

शिव : ठीक है, खाना खा कर आता हु.

वैस्वी : यही खा लेना.

शिव : तुम्हारे वह? (मुझे आश्चर्य हुआ, क्यों की उसके घर में मेरे ऐसे सम्बन्ध नहीं थे की में ऐसे ही खाने के लिए चला जाऊ)

वैस्वी : क्यों, नहीं खा सकते?

शिव : ऐसी बात नहीं है, पर वो तुम्हारे घरवाले?

वैस्वी : (धीमे se)Koi नहीं है. (बोलते बोलते वो खुद hi शर्मा गयी)

शिव : क्या? (उसको यकीं नहीं हो रहा था की कोई नहीं है और वैस्वी उसे बुला रही hai)Kaha गए?

वैस्वी : सब फ़ोन पर hi पुछलोगे क्या? और है अपनी किताबे साथ ले कर आना.

शिव : किताबे?

वैस्वी : तुम सवाल बहोत पूछते हो, आ रहे हो की नहीं? (उसने हलके गुस्से से कहा)

शिव : ठीक है आता हु.

मेने फ़ोन रख दिया. में सोच में पद गया की घर में कोई नहीं है और वो मुझे बुला रही है, जरूर उसके दिमाग में खिचड़ी पाक रही है, सच कहु तो ये सुन कर मुझे भी कुछ होने लगा, क्यों की हम दोनों पिछली बार मिले थे तब बात बहोत आगे बढ़ गयी थी. उस टाइम तो मेने अपने आपको कैसे भी रोक लिया था, क्या आज रोक पाउँगा. फिर मेने अपने आपको संजय की उसने किताबे ले कर आने को कहा है तो कोई और भी बात हो सकती है. में अंदर गया, सब खाने बैठने की तयारी कर रहे थे. रंजन और विणा भी आ गए थे. में अपने कमरे में गया, पर वह बिना मैडम थी, में उनसे मिला और उनका हल चल पूछा, थोड़ी देर बात की, उन्होंने खाना खाया की नहीं पूछा. अपनी अलमारी से कपडे निकले और रंजन वाले रूम में गया और कपडे बदलने लगा. कपडे बदल कर बहार आया तो सबने खाना लगा दिया था और मेरा hi इंतजार कर रहे थे. अब में मन तो नहीं कर शक्ति था तो में भी बेथ गया. थोड़ा खाना खाया और हाथ धो दिए.

सरिता : अरे, इतनी जल्दी क्यों खाना ख़तम कर दिया?

शिव : वो मुझे कही जाना है, जल्दी है.

सरिता : अब कहा जाना है तुजे?

शिव : काम है. (कजेहते हुए कमरे में गया और अपनी बैग ले कर बहार निकला)

सरिता : बैग ले कर कहा जा रहा है?

शिव : स्कूल का काम है थोड़ा, क्यों नहीं जा शक्ति क्या?

लता : क्यों इतनी पूछताछ कर रही है, जाने दे न उसको.

सरिता : मेने कहा रोका है, बस पूछ रही हु की कहा जा रहा है? क्या गलत पूछा मेने? (उसने नाराज हो कर कहा)

शिव : में वैस्वी के घर जा रहा हु, स्कूल का कुछ काम पेंडिंग रह गया है तो उसको पूरा करना है, और वह से साइट चला जाऊंगा, और कुछ?

सरिता : (अपना मुँह टेढ़ा कर ke)Ja जहा जाना हो, अब कभी नहीं पूछूँगी. (वो नाराज हो गयी थी, में उनके पास गाय और उनके पीछे बेथ गया और उनके गले में हाथ दाल कर उनके गाल पर किश किया, वो खाना खा रही thi)Chhod मुझे, क्या कर रहा है (कहते हुए वो मुस्कुराने लगी)

शिव : अब जाऊ? (मेने प्यार से कहा)

सरिता : मेने पहले भी नहीं रोका था.

शिव : में जाऊ?

सरिता : है बाबा, जा.

में मुस्कुराते हुए वह से निकल गया, सब मुझे मुस्कुराते हुए जाते देख रहे थे.

लता : (सरिता को डाट ते hue)Kyu उसको तंग करती रहती है?

सरिता : मेने क्या किया, क्या पुछु भी नहीं की कहा जा रहा है?

लता : मेरा मतलब वो नहीं था, में तो बस...

सरिता : तू तो रहने hi दे.

लता : जो करना है कर. (कहते हुए वो खाने लगी, सरिता मुस्कुराने लगी)

में वैस्वी के घर पहुंच गया, वह दरवाजे पर दरवान ने मुझे देखा, वो मुझे जनता था.

दरवान : कैसे हो शिव भाई?

शिव : आप कैसे हो? (उसने दरवाजा खोल दिया)

दरवान : बीबीजी कह कर गयी थी की आप आनेवाले हो. आईये, बाइक अंदर ले लीजिये. (में बाइक अंदर ले गया और स्टैंड कर के घर के अंदर चला गया, एक नौकरानी ने मुझे सोफे पर बैठने को कहा और वो वैस्वी को बुलाने चली गयी, थोड़ी देर बाद वैस्वी हाथ में किताबे ले कर वह आयी, मेरी कुछ समाज में नहीं आ रहा था)

वैस्वी : कैसे हो?

शिव : ठीक हु?

वैस्वी : (उसी नौकरनी को आवाज लगते hue)Hamara खाना लगा दो. (में कुछ नहीं बोलै, और मेने वैस्वी को देखा तो वो बस मुस्कुरा रही थी, थोड़ी देर बाद उस नौकरानी ने आवाज lagayi)Aao शिव. (हम दोनों खाने की टेबल पर गए, नौकरानी खाना परोसने को हुई तो वैस्वी बोली) तुम जाओ, में परोक्ष दूंगी. (वो चली गयी, वैस्वी मेरी प्लाट में खाना निकलने लगी)

शिव : थोड़ा hi डालना.

वैस्वी : क्यों? खा कर आइये क्या?

शिव : वह सब बैठे hi थे तो मुझे थोड़ा खाना पड़ा. (वैस्वी मुस्कुरायी और थोड़ी सब्जी डाली, फिर एक करोरी में दाल डाली, एक दूसरी भी सब्जी थी, गुलाबजामुन भी रक्खा) अरे बस, इतना सब में नहीं खा पाउँगा.

वैस्वी : इतना hi तो है. सुरु करो. (हम दोनों खाने लगे, थोड़ी देर बाद हमारा खाना ख़तम हुआ और फिर हम वापस सोफे पर बेथ गए, उसने एक किताब और नोट निकली, एक टॉपिक मुझे दिखते hue)Tumhe इसमें कुछ समाज आया था क्या? (मेने टॉपिक देखा, आसान सा टॉपिक था, और वैस्वी जैसी होशियार लड़की ये न समजे ये हो नहीं सकता था)

शिव : है, इजी तो है.

वैस्वी : जरा मुझे समजा डोज. (में उसे समजने लगा, पर मेने देखा की उसका ध्यान समाज ने से ज्यादा आस पास हो रही गतिविधिओ पर hi था)
 
अपडेट 190

में और वैस्वी हॉल में सोफे पर बैठे हुए पढ़ रहे थे, थोड़ी देर में hi मुझे पता चल गया की उसको पढ़ने में कोई इंटरेस्ट नहीं है,

शिव : लगता है तुम्हे पढ़ना तो है नहीं, है न? (मेने उसको देखते हुए कहा)

वैस्वी : (वो नटखट सा मुस्कुरायी और मुझे चुप रहने का इस्सर kiya)Dire बोलो. (में उसे देख रहा था और वो आसपास देख रही थी, सभी अपने काम में जुटे the)Aao निचे बेथ जाते है. (कहते हुए वो निचे कालीन पर बेथ गयी, में भी उसके साथ निचे बेथ गया)

शिव : आखिर चल क्या रहा है तुम्हारे मान में? (मेने सवालिया नजरो से देखते हुए उसे कहा)

वैस्वी : (वो थोड़ी शर्मा गयी और मुस्कुराते हुए boli)Kuchh नहीं, तुम बस एक्टिंग करते रहो जैसे मुझे पढ़ा रहे हो. अभी थोड़ी देर में सब चले जायेंगे, उन्हें शक नहीं होना चाहिए. (उसके इरादे जान कर मेरी हालत ख़राब होने लगी, मेने उसे ध्यान से देखा तो जैसे वो सब तयारी कर के बैठी थी, उसने एक स्कर्ट पहना हुआ था जो घुटनो के निचे तक था, और ऊपर एक टॉप जो शरीर से चिपका हुआ था, मेरा ध्यान पहले भी गया था पर अभी में समाज रहा था की वो जैसे तयारी कर के बैठी है, मेरा भी मान मचलने लगा था. मेने भी अस्स पास देखा तो सब काम में hi थे, किसी का ध्यान हमारी और नहीं था, मेने एक हाथ आगे बढ़ाया और वैस्वी की भरी हुई झंघ पर रख दिया, मेरे छूटे hi उसने मेरे हाथ पर हाथ रखदिया और उसे दबा दिया, उसके चेहरे पर मुस्कान तैर गयी, और वो मुझे बड़े प्यार से देखने लगी, उसको भी दर लग रहा था तो उसने एक बार आस पास देखा, जब उसको लगा की कोई नहीं देख रहा तो उसने मुझे फिर प्यारी स्माइल देते हुए देखा, ये उसकी और से ग्रीन सिग्नल था, वो क्या छह रही थी ये अब मुझे समाज आ गया था, में उसकी झंघ को अच्छे से सहलाने लगा तो उसकी सासे तेज होने लगी, और साथ में मेरे लुंड ने भी करवट ली और वो खड़ा होने लगा. नशो में खून तेजी से दौड़ने लगा था, उसका हाथ अभी भी मेरे हाथ में hi था, उसने अपने पेअर आगे की और लम्बे किये हुए थे. और में पतली मर के बैठा था. मेने हाथ आगे बढ़ाया और झांघो के बिच ले गया. उसके चेहरे से hi लगा की उसे कुछ हो रहा है तो उसने अपने निचले होठ को दांतो से काट लिया, उसका ये एक्सप्रेशन बहोत कामुक था. उसने मेरा हाथ दबा दिया और धीरे से बोली.) शठ, थोड़ी देर रुक जाओ न. (बात उसकी सही थी पर मेरा दिल मचल रहा था)

शिव : (मुस्कुराते hue)Kyu, क्या हुआ?

वैस्वी : (वो भी शरमाते हुए muskurayi)Tum जानते हो क्या हुआ है. अभी सब चले जायेंगे फिर जो चाहे कर लेना. (वो बोलते हुए तो बोल गयी फिर शर्मा गयी)

शिव : (मेने उसको chheda)Jo चाहे वो? (वो शर्मा गयी और हां में इस्सर किआ, उसके चेहरे की मासूमियत उसके नटखट पैन ने मेरे दिल में हलचल मचा रक्खी थी, में उसकी भरी हुई जहांहो को सहलाने लगा वो थोड़ा दर भी रही थी और आस पास भी देख रही थी पर मुझे रोक नहीं रही थी, उसने स्कर्ट पहना हुआ था तो मेने सकिरक के अंदर हाथ डाला और उसकी नंगी झांघो को सहलाया, वो बेबसी से मुझे देखने लगी पर मुझे रोका नहीं, में मुस्कुराया तो वो शर्मा गयी, में उसकी झांघो को सहलाने लगा वो मेरे हाथ को दबा रही थी, और अस्स पास नजर रख रही थी, में हाथ को थोड़ा और अंदर ले गया, उसने घबरा के मुझे देखा, में मुस्कुराया तो वो शर्मा गयी, उसने अपनी झंघे थोड़ी खोल दी, ये मेरे लिए एक और सिग्नल था, ऐसे चोरी छुपी ये सब करने का एक अलग hi मज़ा था, अंदर का तापमान काफी गरम था और झंघे इतनी चिकनी थी की मेरा हाथ फिसल रहा tha)(Vaiswi भी काफी गरम हो रही थी, उसको शिव का ऐसे छूना बहोत अच्छा लग रहा था, बस वो थोड़ा दर रही थी, वो चाहती थी की सब जल्दी से सब चले जाये और वो खुल कर शिव से प्यार कर सके. शिव का हाथ उसके खजाने के नजदीक पहुंच गया था, उसकी मोती झांखो की वजह से उसका हाथ फास रहा था तो उसने अपने पेअर और फैला दिए, उसको जितनी शर्म आ रही थी उस से कही ज्यादा मज़ा आ रहा था. एक हाथ से वो अपने मुँह को बंद रक्खे हुए थी ताकि सिसकी न निकल जाये और अस्स पास नजर रक्खे हुए थी, जिअसे जैसे काम ख़तम हो रहा था नौकर बहार जा रहे थे, शिव का हाथ और अंदर खिसका और उसकी छूट को छूने लगा, उसकी सस्से बे काबू होने लगी थी, उसने अपने hi हाथ को अपने दांतो से काट liya)(Mera हाथ उस फूली हुई छूट तक पहुंच गया था, वो वह से बहोत गर्म थी, में उसके बायीं और बैठा था और मेरा दाहिना हाथ उसकी झांघो के बिच था, में अपने हाथ को उसकी पंतय में छुपी योनि पर घिसने लगा, मुझे वह गीले पैन का एहसास हुआ, पर दाहिने हाथ से में ज्यादा कुछ कर नहीं सकता था क्यों की में जिस तरह बैठा था वह से वो उल्टा था, तो मेने वो हाथ बहार निकल लिया और बहा हाथ अंदर दाल दिया, वो मुझे देखने लगी पर बोली कुछ नहीं. अब मेरे बाये हाथ की पहली ऊँगली अपना कमल दिखने लगी और में उसकी फूली हुई योनि की दरार को सहलाने लगा, पंतय वैसे भी चिप छिपी हो रही थी, वैस्वी हलकी हलकी सिसकिया ले रही थी जो सिर्फ में सुन सकता था. उसने बेबसी से मेरी और देखा जैसे कह रही हो की मुझे सब करना है यार, मेने ऊँगली को उसकी छूट की दरार में फिराया, में दरार का तापमान और गिला पैन दोनों महसूस कर रहा था. उसने अपना बया हाथ मेरी झंघ पर रख दिया और उसे दबाने लगी. उसकी सकल रोने जैसी हो रही थी, में जैसे जैसे उसकी योनि को कुरेद रहा था वो और रोनी सूरत बना रही थी. मेने एक बार आस पास का जायजा लिया. वो नौकरनी अकेली काम कर रही थी और उसका ध्यान भी हमारी और नहीं था, मेने पंतय की साइड से ऊँगली को अंदर करना चाहा तो वैस्वी ने रोनी सूरत से मुझे देखा पर रोका नहीं, जैसे तैसे एक हाथ से hi मेने पंतय को संभाला और चारो ऊँगली पंतय के अंदर दाल दी, छूट पर उगे बालो का एहसास होते hi मेरा लुंड झुटकेखाने लगा, मेने बायीं और के छूट के होठ को मेरी और खींचा और उंगलिअ दरार में अंदर दाल दी, वह पूरा चिप छिपा हुआ पड़ा था, में उंगलिओ से दरार सहलाने laga)(Vaiswi से बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था, उसने अपना हाथ बढ़ाया और शिव के लुंड को दबा दिया, वो पूरी औकात पर था, एकदम सख्त, वो उसको दबाने लगी, उसके शरीर में चींटिया रेंगने लगी, शिव की उंगलिअ उसकी छूट को सेहला रही थी, उसके डेन को छेड़ रही थी, वो रोनी सूरत लिए अपनी सिसकीओ को रोकने का प्रयास कर रही थी, पर फिर भी हलकी हलकी सिस्किअ वो ले रही थी. उसने उभरे हुए लुंड को देखा, वो उसे बहार निकलना चाहती थी पर अभी ये मुमकिन नहीं था, वो बस उसे महसूस कर सकती थी, वो उसे दबाने लगी और उसे खींचने lagi.Wo थोड़ी शिव की और झुक गयी और boli)Shhhh शीइइइइइइव. (मेने उसकी और देखा तो वो बेबसी से मुझे देखने lagi)Muje कुछ हो रहा है शिव. (मेने थोड़ी ऊँगली छेड़ में dali)Ahhhhh शीइइइइइव, चलो न मेरे रूम में चलते है. शहहहहह मुझसे रहा नहीं जा रहा है. (उसकी सकल देखने लायक थी, में उस छोटे से छेड़ को सहलाने लगा, वह से रास निकल रहा tha)Shhhh शिईयिव शह्ह्ह्ह में नहीं रुक शक्ति शह्ह्ह्ह, चलो न ऊपर चलते है.

शिव : जाते है, अभी वो है. (मेने नौकरानी की और इस्सर किया, जो अब अकेली बची थी)

वैस्वी : (उसने नौकरानी को देखा, उसको बहोत गुस्सा आ रहा था उस पर, फिर उसने शिव की और dekha)Wo चली जाएगी, हम चलते है. (उसने बिनती की)

में उसकी बात समाज रहा था, अगर मेने और ज्यादा किया तो वो यही सुरु हो जाएगी, तो मेने हाथ को बहार खिंच लिया, वो मुझे नाराजगी से देखने लगी, मेने उसको संजय और कहा.

शिव : बस थोड़ी देर, क्यों रिस्क लेना. (वो समाज रही थी, वो मेरे कंधे पर अपना शिर रख कर बेथ गयी, हम बैठे hi थे की तभी आवाज आयी)

आवाज : कोई है? (अस्वाज सुन कर हम दोनों सही से बेथ गए, हम निचे बैठे थे तो न हमे वो सख्स दिखा न उसको हम दिखे, नौकरनी उस और badhi)Vaiswi कहा है? (मेने वैस्वी की और देखा तो उसके चेहरे पर बारे बजे हुए थे, वो शायद उस आवाज को पहचानती थी)

नौकरानी : जी यही है.

आवाज : यहाँ कहा? (उसने थोड़ा दन्त ते हुए कहा)

नौकरानी : (थोड़ी गभराते hue)Wo वह. (उसने सोफे की और इस्सर करते हुए कहा, वैस्वी कड़ी हो गयी, पर बोली कुछ नहीं, ये मिक्की था)

मिक्की : ओह यहाँ हो तुम. (कहते हुए वो आगे बढ़ा की उसकी नजर मुज पर पड़ी, अभी जहा उसके चेहरे पर हसी थी वह अब गुस्सा नजर आने laga)Tu यहाँ क्या कर रहा है? (में भी खड़ा हो गया, में कुछ जवाब देता उस से पहले)

वैस्वी : तुम्हे उस से क्या? क्यों आये हो? (उसने बेरुखी से कहा)

मिक्की : पहले ये बताओ ये यहाँ क्या कर रहा है?

वैस्वी : मेने काया न की तुम हे उस से क्या?

मिक्की : (उसने मुझे घर कर देखा, वो पहले भी मुझसे मार खा चूका था तो ज्यादा नजदीक नहीं आया पर वही से आप रॉब दिखने laga)E फर्तीचर, निकल यहाँ से.

वैस्वी : जबान संभल के बात करो, ये मेरा दोस्त है. (वैस्वी ने सख्ती से कहा)

मिक्की : दोस्त है की यार है? (उसने ऐसे ढंग से कहा की गुस्सा तो मुझे भी आ गया).

वैस्वी : वो जो भी है, तुम्हारा कोई लेना देना नहीं है.

मिक्की: क्यों लेना देना नहीं है, भूल गयी में कोण हु?

वैस्वी : तुम कोई भी नहीं हो समजे, अब जाओ यहाँ से. मुझे कोई बात नहीं करनी.

मिक्की : पहले इसको यहाँ से निकालो, वर्ण में अंकल को फ़ोन कर रहा हु.

वैस्वी : तुम्हे जिसको फ़ोन करना है करो, ये यहाँ से नहीं जायेगा, जाना है तो तुम जाओ.

मिक्की : साली मुज से जबान लड़ती है (कहते हुए वो आगे बढ़ने वाला था पर मुझे देख कर फिर रुक गया, और मुझे घूरने लगा)

वैस्वी : (उसने भी देखा की शिव को देख कर वो रुक गया तो उसके चेरहे पर मुस्कान आ gayi)Kyu हवा टाइट हो गयी? (वो व्यंग से मुस्कुरायी).

मिक्की : में देख लूंगा तुम्हे. (कहते हुए वो वह से निकल गया, दरअसल प्रकाशराओ और कमलनाथ साथमे किसी शादी में जा रहे थे, जहान्वी भी उनके साथ hi थी, मिक्की तो वैसे भी कभी उनके साथ जाता नहीं था तो वो घर पर hi था, उसे पता था की आज वैस्वी घर पर अकेली है तो उसने सोचा की वो जा कर उसके साथ समय बिताएगा, पर यहाँ सब उल्टा हो गया, वह से निकल कर उसने प्रकसराओ को फ़ोन कर दिया और बता दिया की आपके घर कोई लड़का आया है, प्रकाशराओ के पूछने पर उसने बतादिया की वो अनाथालय का लड़का शिव है, वैसे भी वो शिव को पसंद नहीं करता था और वो उसकी बेटी के साथ था तो वो गुस्सा हो गया)

वैस्वी : (मिक्की के ऐसे दम दबाकर भागने से पहले तो वो मुस्कुरायी पर फिर शांत हो गयी, उसके चेहरे पर चिंता झलक आयी, क्यों की उसको पता था की कई सवाल खड़े होनेवाले है).

शिव : क्या हुआ? ये इस तरह से क्यों बात कर रहा tha?(Thodi रोनी सूरत से मेरी और देखने लगी, मेने फिर पूछा) क्या हुआ? (उसने न में शिर हिलाया, में समाज रहा था की यहाँ मामला गंभीर हो चूका hai)Thik है, में चलता हु.

वैस्वी : नहीं शिव, तुम क्यों जा रहे हो (फिर गुस्से se)Kamine ने सारा मूड ख़राब कर दिया.

शिव : पर वो तुम्हारे साथ इस तरह से क्यों बात कर रहा था?

वैस्वी : (उसने बहोत गंभीरता से मुझे dekha)Mere पापा, मेरी शादी इसके साथ करुणा चाहते है. मला का बीटा है, पर मेने साफ़ मन कर दिया है. (उसने जैसे मुझको सफाई दी)

शिव : तुम जो कह रही थी वो ये लड़का है? (उसने हां में शिर hilaya)Tum पागल हो क्या? और तुम्हारे पापा को कोई अकाल है की नहीं.

वैस्वी : (वैस्वी को कुछ समाज नहीं aaya)Ye क्या कह रहे हो तुम?

शिव : तुम्हे पता है ये वही लड़का है जिसने संयम को रस्ते पर तंग किया था, और मेने उसको मारा भी था, इसके लिए तो तुम और संयम साथ में स्कूल आती जाती हो.

वैस्वी : क्या? वो मिक्की था?

शिव : है, (कुछ सोचते hue)To इसीलिए वो अब उसको तंग नहीं कर रहा, तुम्हे देखा होगा न उसके साथ तो वो फिर दोबारा नहीं आया.

वैस्वी : तुमने बताया क्यों नहीं, और संयम ने भी नहीं बताया.

शिव : बताया तो था, है नाम नहीं बताया था, क्यों की नाम तो पहले हमे भी नहीं पता था और मुझे क्या पता था की ये वही लड़का है. (वैस्वी अपना शिर पकड़ कर सोफे पर बेथ गयी, मेने देखा की वो परेशान है, वो नौकरानी भी थोड़ी दुरी पर कड़ी थी और हमे देख रही थी, मेने उसे इस्सर किआ और पानी के लिए कहा, उसने है में इस्सर किआ और पानी ले आयी, मेने गिलास वैस्वी की और badhya)Lo पानी पीओ. (उसने मेरी और देखा और पानी पि गयी, अभी उसने गिलास ख़तम किया hi था की उसका मोबाइल बजा)

वैस्वी : (उसने फ़ोन देखा, फिर मेरी और dekha)Papa. (वो बस इतना hi बोली, फिर उसने फ़ोन उठा liya).Hello.

प्रकाशराओ : वो वह क्या कर रहा है? (उसने सीधा hi कहा)

वैस्वी : हम पढ़ाई कर रहे थे.

प्रकाशराओ : पर उसको क्यों बुलाया, मेने कहा था न की ऐसे लड़को से दूर रहो.

वैस्वी : आप मुझे अपने साथ ले गए थे तो मेरे एक दिन स्कूल नहीं गयी थी तो मेरा छूट गया था, और उसके पास नोट थे, तो मेने उसको बुलाया था ताकि वो मुझे समजा दे. (उसने भी सख्ती से कहा)

प्रकाशराओ :ऐसे लोगो से दोस्ती अच्छी नहीं है, मेने कहा था न तुम्हे? (वो भी गुस्से से बोल रहा था)

वैस्वी : क्यों अच्छी नहीं है, वो आपका, वो आके मुझसे गली गलोच से बात करता है वो अच्छा है, और ये अच्छा नहीं है. (वैस्वी भी जैसे आज गुस्से में थी) हम दोनों निचे हॉल में बेथ कर hi पढ़ रहे थे, सरे नौकर भी आस पास hi थे, अगर चाहो तो पूछ लो. (कहते हुए उसने नौकरानी की और फ़ोन बढ़ाया)

नौकरानी : (डरते hue)Ji मालिक.

प्रकाशराओ : (वो समाज गया था की उसकी बेटी सही बोल रही है, तो उसने नौकरानी से कुछ नहीं puchha)Vaiswi को फ़ोन दो. (नौकरानी ने फ़ोन वैस्वी की और बढ़ा दिया)

वैस्वी : Hello.

प्रकाशराओ : तुम अभी के अभी उसको कहो की हमारे घर से चला जाये.

वैस्वी : अभी हमारी पढ़ाई बाकि है, वो थोड़ी देर में चला जायेगा. और आप जिसकी वकालत कर रहे है न वो कैसा है आपको पता भी है, वो रस्ते पर लड़कीओ को परेशान करता रहता है, उसी ने मेरी सहेली संयम को बिछ रस्ते छेड़ा था और उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिस की थी, आप उसकी बात मान रहे हो.

प्रकाशराओ : (वो जानताथा की मिक्की कैसा है, अभी फ़ोन पर बहस करना उसने ठीक नहीं समाज, वैसे भी वो घर से काफी दूर था, वो कुछ नहीं कर सकता tha)Muje कुछ नहीं सुन न, अभी के अभी उसको घर से बहार करो. ( उसने गुस्से से फ़ोन काट दिया)

वैस्वी : (जैसे hi उसके पापा ने फ़ोन कटा उसने फ़ोन को देखा, फ़ोन कट गया था)

शिव : (परिस्थितिओ को गंभीर देख kar)Muje चलना चाहिए.

वैस्वी : सॉरी शिव. (उसके चेरहे पर बहोत शर्मिंदगी थी)

शिव : तुम क्यों सॉरी बोल रही हो. (मेने अपना बैग liya)Kal मिलते है.

वैस्वी : ठीक है. (उसका भी मूड ऑफ हो गया था)

में वह से निकल गया, और सोचने लगा था अभी जो कुछ हुआ था उसके बारे में. मुझे समाज आया की वैस्वी पूरी तरह से तैयार थी हर सिचुएशन के लिए, उसने बहोत बुद्धि से काम लिया था, वो क्या चाहती थी वो उसने बता दिया था, पर फिर भी अगर कुछ ऐसा वैसा होता है तो वो पूरी तरह से तैयार थी, में बस मुस्कुरा दिया. और मान hi मान उसकी बुद्धि की तारीफ करने लगा. सच में वो जितनी खूबसूरत थी उल्टी hi बुद्धिमान भी थी. उसने इस तरह से सब ार्डगेमेन्ट किया था की उस पर कोई ऊँगली भी नहीं उठा सकता. अभी टाइम था तो में साइट की और निकल गया. वह काम चल रहा था. मेने देखा की जहान्वी की गाडी नहीं थी. में पिंकेशभाई से मिला. उनसे थोड़ी बातचीत की, वो मुझे पूछने लगे की में क्यों नहीं आ रहा, मेने उन्हें बता दिया की अब शायद मेरा आना रोज न भी हो और लम्बे वक़्त क लिए भी न आ पाव.

पिंकेश : सही है भाई, वो hi तुम्हारा सही करियर है, यहाँ क्या धूल मिटटी में शिर खपाने का.

शिव : ऐसी बात नहीं है भाई, ये भी अच्छा hi है, पर फील हल मेरा सारा फोकस दौड़ पर hi है.

पिंकेश : अच्छा, जहान्वी मैडम से बात हुई तुम्हारी?

शिव : नहीं तो, क्यों कोई खास बात?

पिंकेश : नहीं, वो पूछ रही थी, की तुम आये की नहीं? एक बार बात कर लो.

शिव : ठीक है, में बात करता हु. (हूँ बात कर hi रहे थे की वह भोली आ गयी)

भोली : इ बाबू, कहा घूम रहे हो, लगता है आज रास्ता भटक गए. (उसने टॉन्ट मारा)

शिव : (मुस्कुराते hue)Aisa hi कुछ हुआ है, कैसी हो तुम?

भोली : जैसी है वैसी hi है, लगता है भूल गए आप हमे.

शिव : ऐसी बात नहीं hai,bas थोड़ा व्यस्त था.

भोली : अब तो ईद के चाँद हो गए हो बाबू, नौकरी छोड़ दी क्या?

शिव : ऐसा hi समाज लो.

भोली : (चिंता se)Kya सच कह रहे हो आप, में तो मजाक कर रही थी.

शिव : ऐसी बात नहीं है, आता रहूँगा.

भोली : हमने बताया था न, कमली की शादी है, उस वक़्त भी नहीं आओगे क्या?

शिव : नहीं, बता देना, आ जाऊंगा. (वो भी चली गयी, पिंकेशभाई की वजह से ज्यादा बात नहीं की, में वह से ऑफिस में आ गया और सोचने लगा की जहान्वी से बात करू की न करू, मुझे पता था की वो मिक्की की बहन है, पर वो उसके जैसी तो नहीं थी, पर कही न कही मान में मिक्की के प्रति गुस्सा था. तो मेने फ़ोन नहीं किआ)

शाम को में घर निकल गया. जूही पहले से वह मौजूद थी, वो बिना मैडम के साथ hi बैठी हुई थी. मेने उनका हल चल पूछा. फिर में और जूही स्टेडियम के लिए निकल गए.

बिना लेते लेते बोर हो रही थी तो उसने ममता को फ़ोन लगाया.

ममता : Hello भाभी, कैसी हो आप?

बिना : ठीक हु, आप कैसी हो?

ममता : अच्छी हु, और स्कूल से आ गए आप?

बिना : नहीं, में स्कूल नहीं गयी थी, छुट्टी ली है.

ममता : क्यों?

बिना : बस ऐसे hi. तबियत ठीक नहीं थी.

ममता : (चिंता se)Kya हुआ आपको? डॉक्टर को दिखाया? में जूही को फ़ोन करती हु.

बिना : अरे सुनिए तो, उसे पता है, वो hi मुझे डॉक्टर के पास ले गयी थी. में ठीक हु.

ममता : पर हुआ क्या आपको? (बिना चुप हो गयी, वो क्या बताती)

बिना : नहीं कुछ नहीं हुआ, वो थोड़ा दर्द हो रहा था तो दर गयी थी, और कुछ नहीं है, डॉक्टर ने अभी रेस्ट करने को बोलै है. सब ठीक है.

ममता : रेस्ट करने को बोलै है, क्यों? बच्चा तो ठीक है न?

बिना : है सब ठीक है, वो थोड़ी बच्चेदानी के मुँह पर सूजन थी तो डॉक्टर ने एतिहात बारात ते हुए रेस्ट करने को बोलहाइ, और कुछ नहीं है, सब ठीक है.

ममता : वह कैसे सूजन आ गयी? (फिर सोच kar)Kahi भैया के साथ? (उसने बात अधूरी छोड़ दी)

बिना : (वो एक दम शर्मा गयी, वो कैसे कहती की ये तुम्हारे भैया की नहीं हमारे सैया की वजह से हुआ है, उसने बात को सँभालते hue)Sab ठीक है, उनकी वजह से कुछ नहीं हुआ, आप फ़िक्र मात करो, में ठीक हु.

ममता: चिंता कैसे न करू, इतने सालो बाद तो ये खुसी नशीब हुई है, आप लापरवाही मात करो, ध्यान रक्खा करो अपना.

बिना : में ठीक हु, शिव के वह hi रह रही हु. वो सब मेरा ख्याल रख रहे है.

ममता : शिव के वह? मतलब अनाथालय में?

बिना : है, और ये अनाथालय नहीं है, ऐसा लग रहा है जैसे मेरा घर है, सब बहोत ख्याल रखते है, मुझे बिस्तर से उतरने hi नहीं देते. सिर्फ बाथरूम जाना होता है तभी उतरती हु में.

ममता : (छेड़ते hue)Oo हो, तो मज़े में हो आप, कैसा है वो?

बिना : (वो थोड़ी शर्मा gayi)Achchha है, अभी स्टेडियम गया है.

ममता : ध्यान रखना, कही उसके sath...(Bolte बोलते वो है पड़ी)

बिना : क्या आप भी, में फ़ोन रखती हु. (वो इतना शर्मा गयी की उसने फ़ोन hi रख दिया)

ममता भी मुस्कुराने लगी. उसको ये पता नहीं था की ये शिव की वजह से hi हुआ है. उसके बाद ममता ने ऐसे hi स्वर्ण से बात की, वो भी अभी वही थी, उसने भी बिना के बारे में बताया. स्वर्ण ने भी फ़ोन कर के बिना का हलचल पूछा.

में और जूही दोनों स्टेडियम से लौट आये, वो भी मेरे साथ hi घर आ गयी थी. खाना खाने के वक़्त में अपनी थाली ले कर बिना मैडम के पास पहुंच गया, वो बिस्तर में बेथ कर hi खा रही थी, मुझे देख कर वो मुस्कुरायी, में भी उनके साथ hi बेथ गया.

बिना : (मुस्कुराते hue)Yaha बेथ कर क्यों खा रहे हो, वही आराम से बेथ कर खाओ.

शिव : आप अकेली खा रही थी तो में भी साथ में आ गया.

बिना : (वो मुस्कुरा रही थी, उसको बहोत अच्छा लग रहा tha)Yaha अचार है क्या?

शिव : अचार तो नहीं है, क्यों खाना था क्या?

बिना : नहीं बस ऐसे hi कह रही थी. (दरअसल प्रेग्नेंट औरतो को को ऐसी चीजे खाने की बहोत इच्छा होती है, इस लिए वो पूछ रही थी, यहाँ तो वैसे hi सब नौ सीखिए थे, किसी को क्या पता होगा, शिव ने थाली रक्खी और बहार निकलने laga)Are कहा जा रहे हो?

शिव : अभी आया.

बिना : (कहते हुए वो बहार निकल गया, बिना देख रही थी की कहा गया ये, वो बार बार बहार देख रही थीम जब वो नहीं आया तो उसने आवाज di)Shiiiiiiiv.

लता : (अंदर आते hue)Kya हुआ दीदी?

बिना : शिव कहा गया, कहते कहते बहार निकला था.

लता : पता नहीं दीदी, कह रहा था की पांच मिनट में आता हु. (तभी शिव अंदर आया, उसके हाथ में एक थैली thi)Kaha गया था तू?

शिव : (थैली में से अचार की बर्निया निकलते hue)Ye लेने गया था.

लता : ये क्या है?

शिव : अचार है दीदी. एक चम्मच ले आओ तो. (लता चम्मच लेने बहार चली गयी)

बिना : क्या जरुरत थी. (वो अंदर hi अंदर इतनी खुस हो रही थी की शिव उसके एक बार कहने पर hi खाने से उठ कर उसके लिए अचार लेने चला गया)

शिव : आपको खाना था न. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

बिना : अरे पर अभी के अभी थोड़ी न कहा था.

शिव : आपको अभी खाने की इच्छा हुई थी न, फिर कल लता तो क्या फायदा. (बिना शिव को देख कर मुस्कुरा रही थी, तभी लता चम्मच ले आयी और शिव के हाथ से बरनी ले कर उसमे से अचार निकलने लगी)

लता : कोनसा वाला दू?

बिना : वो निम्बू वाला देना. (लता ने उसकी थाली में अचार रख दिया, बिना ने थोड़ा सा ऊँगली पर लिया और उसे मुँह में रखते hi उसने आंखे बंद कर दी, पारा नहीं आज ये आचार उसको इतना स्वादिस्ट क्यों लग रहा था, उसने जब आंखे खोली तो लता और शिव उसको hi देख रहे थे, वो शर्मा gayi)Kisi और को चाहिए तो उसको भी दो. (उसने लता से कहा)

लता : ठीक है? (कहते हुए वो अचार बहार ले गयी)

बिना : (शिव को देखते hue)Ab तो खा लो. (मेने थाली उठा li)Pagal. (बिना बाद बड़ाई और मुस्कुराने लगी)

शिव : (मुझे सुनाई नहीं diya)Kya कहा?

बिना : कुछ नहीं, खा lo.(Shiv खाने लगा, बिना, बिच बिच में शिव को प्यार से देख रही थी)

हम दोनों ने खाना ख़तम किया. जूही थोड़ी देर बैठी, बाते हुई फिर वो घर चली गयी, विणा और रंजन अपना काम ख़तम कर के अपनी किताबे ले कर बिना मैडम के साथ बेथ गयी थी. दूसरे लोग काम कर रहे थे. मेने मोबाइल देखा तो उसमे वैस्वी का मश्ग था.

“ इतना न याद आओ की खुद को तुम समाज बेतहु,

मुझे एहसास रहने दो की मेरी अपनी भी हस्ती है”

में सोच में पद गया की वैस्वी ने ऐसा मश्ग क्यों भेजा? में सोचने लगा की कॉल करू, पर फिर सोचा की कॉल नहीं करता हु, पता नहीं वह क्या चल रहा हो, मेने भी बस मश्ग कर दिया. “ सब ठीक है न”

वैस्वी : है सब ठीक है, क्या कर रहे हो?

शिव : कुछ नहीं, अब पढ़ने बेथ रहा था. तुम्हारे पापा ने कुछ कहा क्या?

वैस्वी : तुम उसकी फ़िक्र मात करो, में देख लुंगी सब.

शिव : तुम तो बहोत दरिंगवाली हो.

वैस्वी : इश्क़ सब सीखा देता है.

शिव : अकेली हो?

वैस्वी : हम्म्म.

शिव : कॉल करू?

वैस्वी : न, हम कल बात करेंगे. अभी तुम पढ़ो, bye, गुड नाईट.

शिव : गुड नाईट.

मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था, पर में कुछ पूछ भी नहीं सकता था, मेने सोचा की कल मिल कर बात करूँगा. उसके बाद में पढ़ने बेथ गया.

वैस्वी जो हुआ था उसके बारे में सोचने लगी, शिव के जाने के बाद उसका मूड ख़राब हो गया था, उसको मिक्की पर बहोत गुस्सा आ रहा था, उसके मन करने के बावजूद वो क्यों वह आया था, ये तो अच्छा हुआ की वो और शिव निचे hi बैठे हुए थे, वर्ण उसका तो पूरा मान था की जैसे hi नौकरानी चली जाये वो शिव को लेकर अपने रूम में जाने वाली थी. वो इतने गुस्सा हो गयी थी की अपने रूम में जा कर वो सो गयी. उसका कुछ भी करने का मान नहीं था. शाम को उसका भाई घर पर आ गया था, उसने भी हल चल पूछा पर वो ज्यादा बात नहीं की, उसके ऑफिस का वर्क था तो वो अपना लैपटॉप ले कर बेथ गया था, वो ऐसे ही टीवी देखने लगी. जब वो खाना खा कर बैठी थी तभी उसके मम्मी और पापा आये थे, उसने जान बुज कर देखा भी नहीं उस और. उसके पापा भी गुस्सा hi थे तो उन्होंने भी उसको कुछ भी नहीं पूछा और अपने रूम में चले गए, पर उसकी मम्मी उसके पास आयी और बात करने लगी.

संध्या : जब तेरे पापा को पसंद नहीं तो क्यों उसके साथ दोस्ती रख रही है.

वैस्वी : क्यों पसंद नहीं उनको? (उसने तीखा सवाल किया)

संध्या : देख बेटी, वो तेरे पापा है, वो तेरे भले के लिए hi कह रहे है.

वैस्वी : और मिक्की के साथ मेरी क्या भलाई है?

संध्या : अभी तू छोटी है, तू नहीं समझेगी.

वैस्वी : अच्छा में छोटी हु?

संध्या : तू सिर्फ शरीर से बड़ी हो गयी है, पर अभी तजुर्बा नहीं है तुजे.

वैस्वी : तजुर्बा भले hi न हो पर अकाल जरूर है, आपको पता भी है वो मिक्की कैसा है?

संध्या : मुझे कोई बहेश नहीं करनी तुजसे, और क्या जरुरत थी उस लड़के को बुलाने की?

वैस्वी : वो मेरा दोस्त है, हम साथ में पढ़ते है और सब साथ में hi मिलते है नास्ता करते है, बाटे करते है, अगर वो घर आ गया तो क्या बुरा हो गया. और आप लोग अच्छे से जानते है की ये वही लड़का है जिसने मुझे उन दरिंदो से बचाया था, याद है न.

संध्या : तुम बाप बेटी से तो बात करना hi बेकार है (कहते हुए वो कड़ी हो gayi)Karo जो करना है. (कहते हुए वो अपने रूम में चली गयी, वैस्वी भी अपने रूम में चली गयी और बिस्तर पर लेट गयी, और शिव के बारेमे सोचने लगी, फिर उसने शिव को मश्ग कर दिया था)

जब नींद आने लगी तो मेने किताबे बंद की और एक बार बहार निकला और बाथरूम चला गया. मेने देखा की रंजन और विणा दोनों बिना मैडम वाले कमरे से बहार निकल रही थी. में मुस्कुराया तो दोनों मुस्कुरायी.

शिव : अभी तक पढ़ रही थी?

रंजन : हम्म्म. (में बिना मैडम के कमरे की और बढ़ा तो वो boli)Wo सो गयी है, लतादिदी भी सो गयी है. (में रुक गया, और अपने कमरे की और बढ़ा जो की उनका कमरा था, उनका सामान तो वही पड़ा था तो वो दोनों किताबे रखने वही आयी.)

किताबे रखने के बाद दोनों भी बाथरूम गयी, जब वो बड़े वाले कमरे में गयी तो वह भी सब सो चुके थे.

रंजन : (विणा को देखते hue)Me तो शिव के साथ सोने जा रही हु. (विणा उसको देखने लगी) तुजे आना है? (विणा कुछ नहीं बोली, वो अभी सोच रही थी) ज्यादा सोचेगी तो कुछ हासिल नहीं होगा, अगर मान है तो आ जा.

विणा : (संकुचाते hue)Wo दीदी?

रंजन : वो सब सो गए है, और वैसे भी हम अपने कमरे में hi सोने जा रहे है, तुजे आना है तो चल. (कहते हुए वो अपना बिस्तर उठा कर उस रूम की और चल दी, शिव अभी लेता hi था)

शिव : (रंजन को देख kar)Kya हुआ? (वो बिस्तर लिए हुए थी, में सिर्फ अंडरवियर में लेता हुआ था)

रंजन : में यही सोनेवाली हु. (में कुछ नहीं बोलै बस मुस्कुराते हुए उसे देखने लगा, वो अपना बिस्तर मेरे बाजु में hi लगाने लगी, वो फ्रॉक पहने हुए थी और उसके घुटनो तक वो खुली hi थी, उसके झुकने से वो थोड़ी और ऊपर हो गयी थी, और पवन की वजह से थोड़ा थोड़ा उड़ भी रही थी, में जनता था की आज वो आयी है तो अब कुछ न कुछ तो जरूर होगा, में उसके पैरो को hi देख रहा था. तभी विणा भी अपना बिस्तर ले कर रूम में आती दिखाई दी, मेने अपने ऊपर एक चादर खिंच दी. )रंजन उसे देख कर मुस्कुरायी, वो शर्मा गयी, वो भी एक फ्रॉक hi पहने हुए थी, में चुप चाप दोनों को देख रहा था, विणा ने मेरी और देखा और मुस्कुरायी, में भी मुस्कुराया, उसने अपना बिस्तर रंजन के बाजु में hi लगा दिया, वैसे तो विणा के साथ भी मेरा बहोत कुछ हो चूका था, पर दोनों साथ में थी तो में कुछ कर नहीं सकता था, उन्होंने बिस्तर लगा दिया और लेट गयी और निघटबुलब चालू कर के दरवाजा बंद किया और लेट गयी. हम तीनो में से कोई कुछ नहीं बोल रहा था)

शिव : सो गयी क्या? (मेने करवट लेते हुए कहा)

रंजन : नहीं.

शिव : कैसा चल रहा है सब?

रंजन : अच्छा है.

शिव : टेस्ट कब से है तुम्हारे?

रंजन : अभी कहा नहीं है. (फिर हम खामोश हो गए, मेने भी आंखे बंद कर ली और सोने की कोशिस करने लगा, थोड़ी देर बाद मेने आंखे खोल कर देखा तो रंजन मुझे hi देख रही थी, हलके उजाले में उसकी आंखे चमक रही थी, में भी उसको देखने लगा. विणा की वजह से में हिचकिचा रहा था. और अभी वो सोई तो नहीं होगी वो मुझे पता था, थोड़ी देर बाद मेने आंखे बंद कर di)(Ranjan ने भी डीडे कर लिया था की वो आगे नहीं बढ़ेगी, अगर शिव का मान होगा तो वो खुद hi आगे बढ़ेगा, ऐसे hi उसको भी नींद आ गयी.)

सुबह जब में उठा तो रंजन मुझसे चिपक कर सो रही थी, वो कब मेरा साथ आ गयी थी मुझे भी नहीं पता था. उसकी गर्म सांसे मेरे गले से टकरा रही थी. मुझे जाना था तो आहिस्ता से में उसके निचे से निकला, उसने फिर करवट ले ली. में उठ कर बहार चला गया. जब फ्रेस हो कर बहार निकला तो लतादिदी मुझे सामने मिली, वो भी बाथरूम जा रही थी. मुझे देख कर वो शर्मा गयी, मेने उनका हाथ पकड़ कर अपनी और खिंच लिया. वो मेरे शाइन से टकरा गयी.

लता : क्या कर रहा है, कोई देख लेगा.

शिव : कोई नहीं देखेगा.

लता : (शरमाते hue)Jane देना, कोई देख लेगा तो मुझे बहोत शर्म आएगी. (मेने उनके गाल पर एक किश की और उन्हें छोड़ दिया, वो मुस्कुराती हुई बाथरूम में घुस गयी)

में तैयार हो कर अपनी प्रैक्टिस पर निकल गया. स्कूल में भी मेरी और वैस्वी की बात नहीं हो पायी, क्यों की संयम और सब साथ में hi थे. दो पहर को में साइट पर चला गया. जहान्वी की गाड़ी कड़ी हुई थी. में ऑफिस में चला गया, पर वो वह नहीं थी. में वापस निचे आया और सोसाइटी में अंदर की और चला गया, वह एक माकन में काम चल रहा था, वो और पिंकेश साथ में खड़े थे, में वह चला गया.

शिव : गुड आफ्टर नून.

पिंकेशभाई : गुड आफ्टर नून. (मेने जहान्वी को देखा पर वो न कुछ बोली न मेरी और देखा)

शिव : क्या चल रहा है?

जहान्वी : तुम देख लो, में ऑफिस में जा रही हु. (कहते हुए वो वह से निकल गयी)

पिंकेश : (मेरे नजदीक आ कर धीमे se)Lagta है तुमसे बहोत नाराज है. (में कुछ नहीं बोलै, में थोड़ी देर वह रुका और काम देखने लगा, पिंकेशभाई से मेरी बात हुई, दूसरे मजदूर और भोली और झुमरी से भी बात हुई. कुछ समय बाद वो सब खाने बेथ रहे थे तो में ऑफिस की और चला गया.
 
अपडेट 191

अकेले में अक्सर जहान्वी शिव को याद करती रहती और उसके साथ सेक्स करने को सोच कर एक्सीटेंड हो जाती, पर सामने आते hi कही न कही उस पर ऐटिटूड हावी हो जाता था. वो अभी भी उस से बात करने को तरस रही थी पर सामने आते hi वो ऐसा जताती जैसे उसको कोई इंट्रेस्ट hi नहीं है, वो खुद समाज नहीं प् रही थी की आखिर ऐसा क्यों हो रहा है. आज कई दिनों बाद उसने शिव को देखा था, वो उस से बात करने की कोशिस भी कर रहा था पर वो खुद वह से चली आयी थी. अभी ऑफिस में बैठी वो यही सब सोच रही थी. की तभी दरवाजे से शिव अंदर आया, उसे देखते hi वो सीधी बेथ गयी और इधर उधर देखने लगी, जैसे कुछ धुंध रही हो.

में कुछ नहीं बोलै बस उनके सामने की कुर्शी पर बेथ गया, और उन्हें देखने लगा, वो कभी एक पल के लिए मुझे तिरछी नजर से देखती फिर कुछ ढूंढने लगती.

शिव : क्या धुंध रही है?

जहान्वी : (Rudhli)Tumhe उस से क्या?

शिव : आप इस तरह से क्यों बात कर रही है?

जहान्वी : कैसे बात कर रही हु? (मेने देखा की उन्होंने अपना मुँह थोड़ा टेढ़ा भी किआ, उनका ये बेहेवियर मेरी समाज में नहीं आ रहा था)

शिव : आपको मुझसे कोई परेशानी है?

जहान्वी : मुझे क्यों परेशानी होने लगी, तुम इतने भी खास नहीं हो. (उसने फिर अजीब ढंग से कहा)

शिव : क्या मुझसे कोई गलती हो गयी है? (मेने जान ने के लिए कहा)

जहान्वी : वो तुम्हे पता. (उन्होंने सपाट सा उत्तर दिया, मेरी समाज में नहीं आ रहा था की वो ऐसा बेहेवियर क्यों कर रही है, मेरा भी दिमाग ख़राब हो रहा था, मुझे पता था की वो छिड़ी हुई है पर किस बात से समाज नहीं आ रहा था, में खड़ा हुआ, वो मुझे hi देखने लगी, में दरवाजे के पास गया और रुक gaya)(Jhanvi ने सोचा की वो चला जायेगा, वो ये तो नहीं चाहती थी, पर वो कुछ कहना नहीं चाहती थी, वो बस उसे देख रही thi)(Mene दरवाजा बंद कर दिया और चिटकनी लगा di)(Shiv के ऐसा करने पर जहान्वी चौंक गयी) दरवाजा क्यों बंद कर दिया? (उसने जैसे डांटा, पर उसकी धड़कने तेज होने लगी थी, वो समाज रही थी की शिव क्या करेगा, कही न कही उसका दिल भी उसके लिए तरस रहा था, दरवाजा बंद कर के शिव उसकी और hi आया, उसका दिल तेजी से धड़कने लगा, उसकी सासे भी चढ़ने लगी, वो घुटी आवाज में hi boli)Shiiiiiiv. (तब तक वो उसके करीब आ चूका था, उसने उसकी चेयर घुमाई और अपने सामने कर दिया)

शिव : क्या प्रॉब्लम है? (जहान्वी बस जोर जोर से सासे ले रही थी, पर बोली कुछ नहीं, शिव झुका और उसकी बाजुए पकड़ कर उसको खड़ा कर दिया, वो उसको देखने लगी, सस्से तेज चल रही thi)Batao क्या प्रॉब्लम है? (वो कुछ नहीं बोली बस देखती rahi)Batao, वर्ण कहोगी की जबरदस्ती कर रहा हु. (जहान्वी उसके चेहरे को hi देख रही थी, उसकी आँखों में देख रही थी, वो तो चाहती थी की कर लो jabardasti)Tum लड़कीअ भी अजीब होती हो, जितना समझने की कोशिस करो उतना hi समाज से बहार होती जाती हो. अगर आप को नहीं बता न तो आपकी मर्जी (कहते हुए में कुछ पल रुका, हम दोनों एक दूसरे को देख रहे the)Ek बात कहु? (वो बस देख रही thi)Aap बहोत खूबसूरत हो. (में मुस्कुराया, वो भी मुस्कुराना चाहती थी ऐसा लग रहा था पर अपने आपको जैसे रोक रही thi)Aap भले hi गुस्सा हो पर मुझे तो किश करने का मान कर रहा है. (मेने उनके होठो की और देख कर कहा, में बस उनको उकसा रहा था ताकि वो कुछ बोले, पर वो बस मेरे चेहरे को देखे जा रही थी, भले hi में सिर्फ दिखावा कर रहा था पर अब मुझे भी कुछ होने लगा था, मेने सोचा की अब किश कर hi लेता हु, देखता हु क्या करती hai)Agar कुछ बोलोगी नहीं तो सचमे किश कर दूंगा. (मेने उन्हें चेताया, पर वो फिर भी कुछ नहीं बोली, मेने सोचा की फिर यही सही, मेने उन्हें पीछे धकेला और दीवाल के सहारे खड़ा कर दिया, वो नाराजगी से मुझे देखने लगी, और जोर जोर से सासे ले रही थी, वो गुलाबी t-shirt और दुल्ल ब्लू जीन्स पहने हुई थी, सासे लेने से उनके स्तन ऊपर निचे हो रहे थे, मेने उनकी दाहिनी बाजु पर हाथ से sehlaya)Lagta है आपभी यही चाहती है की में किश करू. (में मुस्कुराया तो उन्होंने अपना चेहरे दूसरी और कर लिया, में झुका और उनके सुराहीदार गले से नाक सत्ता दी, पिफमे की खुसबू मेरे नथुनों में भरने लगी, में अपने हाथ निचे ले गया और उनकी उंगलिओ में अपनी उंगलिअ फसा दी और उनके हाथ को ऊपर उठाने लगा, धीरे धीरे हाथ पुरे ऊपर कर दिए, में पूरा सात गया, वैसे भी लुंड तो खड़ा हो hi गया था, में अपनी नाक गर्दन पर रगड़ने laga)Achchhi खुसबू है. (मेने जोर से सास लेते हुए kaha)(Jhanvi की आंखे भी बंद हो गयी थी, एक तो शिव उसकी गर्दन को छू रहा था और ऊपर से उसका वो कड़क लुंड उसको चुभ रहा था, वो पूरी गंगना रही थी, इस स्पर्श के लिए तो वो कितने दिनों से तड़प रही थी, और शायद इसी बात का गुस्सा भी था, शिव उसकी गर्दन पर नाक रगड़ रहा था, और उसको लगा की जान बुज कर वो अपना लुंड उसको चुभो रहा है, वो मचलने लगी थी, उसकी सासे तेज हो गयी थी, वो उसकी गर्दन को चाटने लगा, और वो ऊपर उसके चेहरे की और बढ़ने लगा, उसने अपना चेहरा और ऊपर उठा दिया, पर शिव रुका नहीं, वो लगातार उसके चेरहे से खेलते हुए उसके होठो की और बढ़ा तो उसने अपना चेहरे दूसरी और घूमना चाहा पर शिव ने अपने चेहरे से जैसे उसको दीवाल से दबा दिया था, वो कसमसाने लगी और छूटने का जूठा प्रयास करने lagi)Kya सचमे छूटना चाहती हो? (मेने चेहरे को चाट ते हुए kaha)Ek बार बोल दो, चला जाऊंगा, फिर कभी नहीं छुऊंगा. (इतना सुनते hi उनका विरोध समाप्त हो गया, अब वो बिलकुल शांत हो गयी, में होठो के करीब गया, होठ के कोने पर पहुंच गया, पर होठो को नहीं छुआ, में फिर से निचे की और बढ़ा और गर्दन को चाटने laga)Kaho न, कहती क्यों नहीं हो? (वो कुछ नहीं बोली, में गर्दन से और नीचे आया और चुकी की और बढ़ने लगा, उन्होंने अपनी उंगलिअ मेरी उंगलिओ में जोर से कास ली, पर मुझे रोका नहीं न कुछ बोलै. मुझे उनके स्तन का ऊपरी नरम मांश महसूस होने लगा, वो अपनी सिसकी रोकने का प्रयास कर रही थी, सासे बेकाबू thi.)(Jhanvi शिव के आगे बढ़ने का इंतजार करने लगी, वो बहोत ज्यादा उत्तेजित हो गयी thi.)(Me स्तन की और नीचे नहीं बढ़ा, और वापस ऊपर जाने लगा, और फिर गर्दन पर आ गया, उन्होंने अपनी गर्दन दूसरी और घुमा ली, और जैसे कह रही हो की इस और भी करो, में वह भी चाटने लगा, अब में फिर से गाल पर पहुंच गया, और होठो की और बढ़ने लगा, वो होठो के कोनो पर जा कर फिर रुक gaya)(Jhanvi बेचैन हो रही थी, उसने थोड़ी देर इंतजार किया पर जब शिव उसके होठो की और नहीं बढ़ा तो उसने चेहरे थोड़ा सीधा किया ताकि दोनों के होठ आपस में टकराये, होठो के कोने एक दूसरे को छूने भी लगे थे, पर शिव जैसे उसको तड़पा रहा tha)(Me उनकी बेचैनी सैफ महसूस कर रहा था, पर में कोई जबरदस्ती नहीं करना चाहता था, में जनता था की वो भी यही चाहती है, पर में जानबुज कर आगे नहीं बढ़ रहा था, बस उनको तरसा रहा था, उन्होंने और चेहरे को सीधा किया तो में दूर हो गया, और उनको देखने लगा, थोड़ी देर वो वैसे hi रही पर मुझे कुछ करता न देख कर वो अपने चेरहे को पूरा सीधा कर के मुझे देखने लगी)

शिव : सॉरी, लगता है में फिर जबरदस्ती करने लगा था. (मेने उनको छेड़ने के लिए कहा और उनके हाथ छोड़ दिए, और उनसे दूर भी होने laga)(Jhanvi ठगी सी कड़ी थी, अब उसको सचमुछ गुस्सा आने लगा tha)(Me उनसे दूर हो गया)

जहान्वी : (वो गुस्से से जोर जोर से सासे लेने लगी, अपने दन्त पिस्टे hue)Tum समझते क्या हो अपने आपको.

शिव : मेने कहा न सॉरी. (मेने मासूमियत से कहा, वो और भड़क गयी, और मेरा गिरेबान पकड़ लिया और मुझे अपनी और खींचने lagi)Ye क्या कर रही हो आप?

जहान्वी : नाटक करते हो मेरे साथ.

शिव : (मेने फिर मासूमियत से kaha)Mene क्या किया?

जहान्वी : ज्यादा भोले मात बनो, एक नंबर के कमीने हो तुम.

शिव : पर मेने किया क्या?

जहान्वी : अभी बताती हु की किया क्या. (कहते हुए वो मुझे धक्का देने लगी, और धकेलते धकेलते मुझे सोफे पर गिरा दिया और मेरे ऊपर आ गया रु मेरे होठो पर टूट पड़ी, वो मेरे होठो को चूसने लगी, में मुस्कुराया तो वो और भड़क gayi)Bahot हसी आ रही है न किसी को तरसा कर. (वो फिर टूट पड़ी मेरे होठो पर, मेने उन्हें खिंचा और अपने ऊपर कर लिया और उनके कूल्हों को दबाने लगा, मेरा लुंड पूरा कड़क था, उनके जीन्स को फाड़ने को उतावला था, उसकी चुंबन वो खुद महसूस कर रही थी, वो उत्तेजित हो कर मुझे किश कर रही थी और में उन्हें, थोड़ी देर हम दोनों ऐसे hi करते रहे, और में कूल्हों को दबा कर लुंड की ठोकर मार रहा, उनकचेहरा लाल हो गया था, आखिर कर उन्होंने ने किश तोड़ी और जूते गुस्से से मुझे देखने लगी, में भी उन्हें मुस्कुराते हुए देखने laga)Bahot गंदे हो तुम. (उन्होंने मेरी छाती पर के t-shirt को मुठी में दबाते हुए कहा)

शिव : पर मेरी खता तो बता दो जो आप इतनी गुस्सा हो.

जहान्वी : अब वो भी में hi बताऊ, शर्म तो आती नहीं तुम्हे, ये नहीं की एक फ़ोन hi कर दे.

शिव : मेने बताया तो था आपको.

जहान्वी : क्या बताया था, परसो आनेवाले थे तुम, आये?

शिव : उसके लिए सॉरी, वो बीनमदं की वजह से में फास गया था.

जहान्वी : क्यों? क्या हुआ?

शिव : अब ऐसे hi रहोगी?, उठो तो बताऊ न. (वो शरमाते हुए सीधी बेथ गयी, मेने उन्हें सब बता दिया)

जहान्वी : कमसे काम फ़ोन तो कर शक्ति थे न, यहाँ में पता नहीं क्या क्या सोचती रहती हु.

शिव : (मुस्कुराते hue)Kya क्या सोचती हो?

जहान्वी : (नखरे se)Me भी कुछ नहीं बतानेवाली. (फिर कुछ याद आते hi)Darwaja तो खोलो, अगर कोई ऊपर आया तो क्या सोचेगा. (में मुस्कुराते हुए खड़ा हुआ और दरवाजा खोल्दिया, और सचमे थोड़ी देर बाद पिंकेशभाई hi ऊपर आये, हम पहले hi संभल चुके थे तो परेशानी नहीं हुई, किसी काम के लिए वो आये थे तो फिर हम दोनों उस काम के लिए उनके साथ गए, तक़रीबन चार बजे हम फ्री हुए)

जहान्वी : यार में तो थक गयी, चलो कॉफ़ी पिने चलते है. (पिंकेशके सामने hi उन्होंने मुझसे कहा, मेने पिंकेशभाई को देखा)

पिंकेश : है है, आप जाओ, वैसे भी अब कोई काम नहीं है.

हमदोनो वह से निकल गए, वो अपनी गाड़ी से और में अपनी बाइक से. हमे वही कॉफ़ी सोप पर पहुंच गए, हम दोनों अंदर गए और एक टेबल पर बेथ गए. उन्होंने hi दो कॉफ़ी का आर्डर दिया.

जहान्वी : (उसने देखा की कुछ लड़कीअ शिव को देख रही है पर उसने इग्नोर kia)Aaj के बाद अगर मुझे इग्नोर किआ न तो देख lena(Usne मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : (मुस्कुराते hue)Me कोई इग्नोर नहीं कर रहा था, और आप जानती हो, मुझे अब कुछ दिनों के लिए बहार जाना है.

जहान्वी : इसका ये मतलब नहीं की तुम मुझसे मिलोगे भी नहीं. (उसने नारजगीसे कहा)

शिव : मेने ऐसा कब कहा, पर मिलके भी क्या फायदा. (मेने आहिस्ता से कहा)

जहान्वी : (वो जानती थी की में क्या बात कर रहा हु तो वो शर्मा गयी, फिर भी उसने puchha)Aisa क्यों भला?

शिव : वैसे भी आप डर्टी hi हो.

जहान्वी : (नज़ारे झुकाते hue)Aisa कुछ भी नहीं है.

शिव : एक बात पुछु?

जहान्वी : पूछो न (मेरी और देखते हुए)

शिव : आप मेरे साथ दोस्ती क्यों रखना चाहती है?

जहान्वी : क्या मतलब है तुम्हारा?

शिव : सीधा सा सवाल है, आप क्यों दोस्ती रख रही हो मुझसे, ऐसा तो है नहीं हमारी दोस्ती सिंपल है, मेरा मतलब है की हम dono....(Mene बात अधूरी छोड़ दी, वो समाज गयी थी, वो बस शर्माने lagi)Waise भी आपको आगे बढ़ना नहीं है, फिर क्यों आप मुझसे ये सब एक्सपेक्ट कर रही हो? (में भी सीधे सीधे पूछ लेना hi चाहता था, उन्होंने पहले आंखे झुका ली, पर फिर मेरी और देखने लगी)

जहान्वी : तुम चाहते हो ऐसा?

शिव : बात मेरे चाहने की नहीं है, आप क्या चाहती है?

जहान्वी : बात क्यों तुम्हारे चाहने की नहीं है, क्या तुम नहीं चाहते ऐसा हो?

शिव : ये बहोत कॉम्प्लिकेटेड है.

जहान्वी : ऐसा क्यों कह रहे हो? (उसको कुछ समाज नहीं आया, फिर कुछ सोचते hue)Kya में बड़ी हु इस लिए?

शिव : बात वो नहीं है, बात वो है की आप इस रिश्ते को किस तरीके से देखती है.

जहान्वी : कहना क्या चाहते हो तुम?

शिव : आप में और मुजमे बहोत अंतर है, उम्र का hi नहीं, हैसियत का भी, सच कहु तो इस रिलेशन का कोई भविस्य नहीं है. (में सीधी बात hi कर देना चाहता था, आगे चल के कोई कन्फूसिओं नहीं होना चाहिए, मेरी बात सुन का वो भी सोचमे पद गयी थी)

जहान्वी : सच कहु तो में अभी इस बारे में कोई बात करना नहीं चाहती, और ये जगह भी ठीक नहीं है ऐसी बात करने के लिए, तो फिलहाल इस बात को यही ख़तम करते है. एक दोस्त की तरह तो तुम मेरे साथ रह सकते हो न? (कॉफ़ी भी आ गयी थी)

शिव : सच कहु तो आपके साथ दोस्ती करने की भी हैसियत नहीं है मेरी. (मेने मुस्कुरा कर कहा)

जहान्वी : (जूठा गुस्सा दिखते hue)Maar खाओगे अब, ज्यादा सोचना बंद करो और कॉफ़ी पीओ. (हम दोनों कॉफ़ी पिने lage)Kab जा रहे हो तुम?

शिव : अभी सही से पता नहीं है, पर शायद एक दो दिन में पता चल जायेगा.

जहान्वी : कितने दिनों के लिए जा रहे हो?

शिव : शायद 15 -20 दिन.

जहान्वी : (गहरी सास लेते hue)Jana तो है hi, करियर का सवाल जो है. (फिर दोनों शांत हो गए और कॉफ़ी पिने लगे, मेने देखा की वो थोड़ी उदास थी) वैसे भी ये पहली बार तो नहीं है और न आखरी बार, तुम्हे देख कर लगता है की तुम बहोत आगे जाओगे, और उसके लिए तुम्हे कही भी जाना पद सकता है. (उनकी बात बिलकुल सही थी) वैसे फिर लड़कीअ अकेली हो जाएगी न? (उन्होंने अनाथालय की चिंता जताई)

शिव : में भी यही सोच रहा था, अभी तो भार्गवी मैडम ध्यान रख रही है, पर और कोई सलूशन सोचना पड़ेगा.

जहान्वी : सिक्योरिटी क्यों नहीं लगवाडेते.

शिव : बात तो सही है, वैसे भी अब पैसो की परेशानी तो है नहीं, में देखता हु कुछ.

ये लोग बात कर रहे थे की वह मिक्की और उसके दोस्त दाखिल हुए. ये सब सिर्फ लड़कीअ ताड़ने के लिए आये थे. वो सब जा कर एक टेबल पर बेथ गए. मिक्की की नजर अपनी बहन पर नहीं पड़ी थी. पर एक लड़के ने देख लिया.

लड़का : मिक्क्यीय.

मिक्की : हां..

लड़का : वो देख (एक टेबल की और इस्सर कर ke)Jhanvi दीदी. (मिक्की ने उस और देखा, वह उसने जहान्वी और शिव को देखा, जहान्वी का वह होना उसको कोई खास नहीं लगा पर शिव के होने से वो फिर गुस्से से भर गया, वैस्वी की वजह से भी वो गुस्सा था और अब उसकी बहन भी उसके साथ थी, वो उठा और सीधे उस टेबल के पास चला गया)

मिक्की : इसके साथ क्या कर रही हो यहाँ?

जहान्वी : (अचानक मिक्की को देख कर वो चौंकी, पर उसके ऐसे पूछने पर वो गुस्सा हो gayi)Tumhe क्या? तुम क्या कर रहे हो यहाँ?

मिक्की : ऐसे लोगो के साथ घूमती हो? (उसने शिव की और गुस्से से देखा)

जहान्वी : तुम अपना काम देखो, मुझे किसके साथ बैठना है वो में देखूंगी, और यहाँ तमसा मात करो, जाओ यहाँ से.

मिक्की : तमसा तुम कर रही हो, चुप चाप यहाँ से निकल जाओ, (मेरी और देख kar)Dur रहो मेरी बहन से.

जहान्वी : ये क्या बदतमीजी है मिक्की, में पापा को बतादूंगी.

मिक्की : पापा को तुम क्या बताओगी, में hi बतादूँगा की कैसे कैसे लड़को के साथ घूमती हो तुम.

जहान्वी : (जहान्वी कड़ी हो गयी, और जाने लगी, वेटर दौड़ कर आया)

वेटर : मैडम बिल?

जहान्वी :(मिक्की की और इस्सर कर ke)Wo साहब देंगे.

मिक्की : में क्यों दू?

जहान्वी : भाई की दुति नहीं निभानी? (उसने टॉन्ट मारा और बहार निकलने लगी, वेटर वही खड़ा मिक्की को देखने लगा, उसको अपनी सैलरी से पैसे कूटने का दर सताने लगा)

शिव : ये लो भाई. (मेने अपनी जेब से पैसे निकले और वेटर को दे दिए, वो खुस हो कर चला गया, में निकलने लगा तो मिक्की ने मेरे कंधे पर हाथ रख कर फिर मुझे चेताया)

मिक्की : दूर रह मुझसे, ये मत समाज की मुझे मार लिया तो तू बहोत बड़ा हीरो हो गया है, तू जनता नहीं पैसो की ताकत को. (मेने उसका हाथ अपने कंधे से हटाया और बहार निकल आया, जहान्वी कार में बेथ चुकी थी पर गयी नहीं थी, में उसके पास पहुंच गया)

जहान्वी : सॉरी शिव.

शिव : आपको जरुरत नहीं है सॉरी बोलने की.

जहान्वी : कल आओगे न?

शिव : लगता तो है (कहते हुए में मुस्कुराया)

जहान्वी : जो भी हो मुझे बता देना, में चलती हु, bye.

शिव : Bye. (वो चली गयी, में भी बाइक से निकल गया)

दूसरा दोस्त : भाई थोक देते सेल को यही, जाने क्यों दिया?

मिक्की का दोस्त: मुझे नहीं लगता की उनके बिच ऐसा वैसा कुछ था, वो तो छोटा है दीदी से, शायद वो ऐसे hi बैठे थे.

मिक्की : मुझे पता है, दीदी ऐसे फर्तीचरो को घास भी नहीं डालेगी, मेरा और उसका और hi पन्गा है. (उसने दन्त पिस्टे हुए कहा)

दूसरा दोस्त : भाई थोक देते सेल को यही, जाने क्यों दिया?

मिक्की : वो भी करूँगा, पर वक़्त आने पर. (फिर वो लोग अपनी मस्ती करने लगे)

में घर पंहुचा, मुझे स्टेडियम भी जाना था, पर मेरे घर के बहार दो बड़ी बड़ी गाड़िया कड़ी हुई थी. मुझे समाज नहीं आया की ये कोण लोग है. में अंदर गया तो मेरे कमरे से आवाजे आ रही थी. में अंदर गया तो में हैरान रह गया, वह बिना मैडम के saas-sasur, स्वर्णाभाबी और उनकी बहन कृपालीडीडी भी वही थे, में हैरान हो कर अंदर दाखिल हुआ. बिना मैडम की सास बीएड पर बैठी हुई थी, और दूसरे लोग कुर्सिओं पर बैठे हुए थे, लता और सरिता खड़े हुए थे.

लता : लो शिव भी आ गया. (सब मेरी और देखने लगे, मेने अंकल आंटी को पेअर छू कर प्रणाम किआ, उन्होंने भी मुस्कुरा कर जवाब दिया, मेने हाथ जोड़ कर स्वर्ण और कृपाली को भी नमस्ते किआ, दोनों ने भी मुस्कुरा कर जवाब दिया)

शिव : आप सब???

निर्मलादेवी : (अपनी बहु की और देख kar)Ye तो हमे कुछ बताती hi नहीं, ये तो अच्छा हुआ की स्वर्ण से बात हो गयी, उसने बताया की बहु की तबियत ख़राब है तो हम आ गए.

बिना : मेने कहा न माजी, कोई परेशानी नहीं है, ये सब तो एहतियात के तौर पर करने को कहा है, और कुछ भी नहीं, चाहत तो आपकी बात में डॉक्टर से भी करवा शक्ति हु.

निर्मलादेवी : मुझे नहीं बात करनी, और न में तेरी बात सुनुँगी, क्या जरुरत है तुजे नौकरी करने की, छोड़ ऐसी नौकरी को, क्या कमी है तुजे?

बिना : कोई कमी नहीं है, मुझे अच्छा लगता है ये, और में पहली औरत नहीं जो माँ बन रही है, आप भी माँ बानी थी, क्या आप सिर्फ आराम hi कर रही थी?

निर्मलादेवी : हमारी बात और थी, तुम आज कल की लड़कीअ कितनी नाजुक हो गयी हो, जरा सी बात पर खटिया पकड़ लेती हो, में कुछ सुन ने वाली नहीं हु, यहाँ तू अकेली रहेगी तो मुझे चिंता लगी रहती है.

चंद्रभान : पर बहु, तुम अनाथालय में रहो ये कैसा लगता है, कोई सुनेगा तो क्या कहेगा की हमारी बहु एक अनाथालय में रहती है. (पहले तो मुझे गुस्सा आया, पर फिर सोचने पर लगा की सही तो है, आखिर है तो हम अनाथालय में hi न)

बिना : (उसकी नजर तुरंत शिव पर गयी, फिर लता और सरिता पर भी, सब उदास दिख रहे the)Papa, आप कबसे आये हुए हो, क्या आपको लगा की ये सिर्फ अनाथालय है, आपने देखा न की सब मेरी कितनी देखभाल कर रहे है.

चंद्रभान : (उसे अभी अपनी गलती का एहसास hua)Mera मतलब वो नहीं है बेटी, पर अगर कोई सुनेगा तो हम सबको तो सफाई नहीं दे पाएंगे न.

स्वर्ण : आप चिंता मात करो चाचाजी, में भाभी को अपने साथ ले जाती हु.

बिना : (स्वर्ण को देख kar)Kya आपको लगता है की मुझे यहाँ किसी भी तरह की परेशानी हो शक्ति है?

स्वर्ण : (उसकी भी नजर शिव पर चली gayi)Mera मतलब वो नहीं है भाभी, में जानती हु की आपको यहाँ कोई परेशानी नहीं हो शक्ति, में तो बस चाचाजी के लिए कह रही थी. (कृपाली कबसे कड़ी कड़ी सब सुन रही थी, उसकी समाज में hi नहीं आ रहा था की आखिर भाभी क्यों यहाँ रहने की जिद कर रही है, आखिर ये अनाथालय hi तो है, और ऐसी कोई खास सुविधाएं भी नहीं है, पर वो चुप रही)

बिना : आप जानते हो माजी, ये लता न मुझे एक पल के लिए भी अकेला नहीं छोड़ती, अगर इसको कही जाना हो तो वो किसी न किसी को यहाँ बिठा कर hi जाएगी, मेरे खाने से ले कर दवाई, सब का ये ख्याल रखती है, इतना तो मेरी बहन भी न करती जितना ये ख्याल रखती है. (सब लता की और देखने लगे, वो बस शिर झुकाये कड़ी रही) आप एक दिन यहाँ रह कर देखिये तो आपको पता चलेगा की ये सब कितने अपने है. क्या रिस्ता सिर्फ खून का hi होता है?

चंद्रभान : ठीक है बेटी, जैसी तुम्हारी मर्जी. आप लोग बाटे कीजिये, में शिव से कुछ बात करना चाहता हु. (उन्होंने खड़े होते हुए कहा, फिर मेरी और देख kar)Kya हम अकेले में बात कर शक्ति है?

शिव : जी आइये. (में उन्हें ऑफिस वाले कमरे में ले गया, उन्होंने आस पास सब देखा, फिर कुर्शी पर बेथ गए)

चंद्रभान : अब बहु की इच्छा है तो में ताल नहीं सकता, और में ये भी नहीं कह रहा की तुमलोग अच्छे से देखभाल नहीं करोगे, पर (कहते हुए उन्होंने अपनी जेब से पैसे निकले, 500-500 के कुछ नोट थे, उन्होंने मेरी और badhaya)Isse रखलो.

शिव : इसकी जरुरत नहीं है अंकल.

चंद्रभान : रखलो बीटा, तुम्हे जरुरत होगी.

शिव : ऐसी कोई दिक्कत नहीं है अंकल, और मैडम की देखभाल हम अच्छे से कर लेंगे, अगर वो किसी भी कमी की शिकायत करे तो आप के सामने में अपना गाल पेश कर दूंगा.

चंद्रभान : (मुस्कुराते hue)Chalo ठीक है, ये मात संजो की में अपनी बहु के लिए दे रहा हु, में दूसरे बच्चो के लिए दे रहा हु, अब तो रख लो. (मेरा मान नहीं था फिर भी मेने रख लिया, उन्होंने बच्चो का जो नाम दिया tha)Tum कबसे यहाँ हो बेटे.

शिव : पंद्रह सोला साल हो गए यहाँ मुझे. क्यों?

चंद्रभान : नहीं बस ऐसे hi पूछ रहा था. (फिर वो मेरे बारे में बहोत कुछ पूछने लगे और में उन्हें जवाब देता गया, वो किसी गहरी सोच में the)(Chandrabhan मान में: ये सिर्फ इत्तेफाक है की सचमे ये वही है? शिवांस भी करीब ढाई तीन साल का hi था जब उसकी मौत हुई थी, मौत तो नहीं कह सकते क्यों की उसका कोई पुख्ता साबुत भी नहीं है, और ये भी उसके कुछ महीनो या एक साल बाद hi यहाँ आया है, इस बिच का इसको कुछ पता नहीं है न किसी और को, अनाथालय में जब ये आया तब तो शिवांस को गायब हुए काफी समय हो गया था, मतलब ये वो नहीं हो सकता)

शिव : क्या सोच रहे हो अंकल?

चंद्रभान : नहीं कुछ नहीं बीटा (फिर कुछ सोच kar)Tumhari कोई फोटो है बचपन की.

शिव : है है न, जब में यहाँ आया था तब की मेरी फोटो है फिर रजिस्टर के लिए कुछ कुछ समय बाद ली गयी फोटो है.

चंद्रभान : दिखाओगे मुझे?

शिव : अभी तो नहीं है, (कुछ पल रुक kar)Wo हमारी वकील है उनके पास सब कागजात है.

चंद्रभान : ओह?

शिव : कोई खास बात अंकल?

चंद्रभान : नहीं नहीं, बस ऐसे hi देखना चाहता था.

शिव : एक मिनट, शायद मैडम के पास है मेरी वो फोटो, में अभी ले कर आया. (बिना मैडम ने मेरी फोटो अपने मोबाइल में खींची हुई थी, में उनके पास गया, वो सब बाटे कर रहे थे) मैडम, वो अपने मेरी बचपनवाली फोटो को अपने मोबाइल से खींची थी न, वो देना तो.

बिना : क्यों?

शिव : वो अंकल देखना चाहते है?

बिना : क्यों? (बिना को टेंशन होने लगी)

शिव : क्यों क्या, बस देखना चाहते है. (मेने नोर्मल्ली hi kaha)(Beena के चेरहे पर बल पद गए, अगर ये शिवांस भी है तो भी वो अभी उसकी पहचान सामने नहीं ानेदेना चाहती थी)

बिना : पता नहीं अभी होगी की नहीं. (उसने बात टालने के लिए कहा)

शिव : आप फ़ोन दीजिये में देखलेता हु. (फ़ोन पास में टेबल पर hi पड़ा था तो लता ने उसे वो दे दिया, बिना उसे रोकना चाहती थी पर सबके सामने कैसे kehti)(Mene गल्लारी खोली और फोटो देखे तो मुझे वो मिल gaya)Hai तो सही.

निर्मलादेवी : मुझे भी दिखाना (वो फ़ौरन बोल padi)(Mene फ़ोन उनको दिया, वो फोटो को ध्यान से देखने लगी और कुछ याद करने की कोशिस करने lagi)(Beena उनके चेहरे को hi देख रही थी, उनके चेहरे को पढ़ने की कोशिस कर रही थी, बिना का दिल जोरो से धड़क रहा था, उसने एक बार स्वर्ण की और भी dekha)(Swarna, बिना के चेहरे पर आये टेंशन को समाज नहीं प् रही थी) (निर्मलादेवी boli)Bachpan में भी तुम बहोत क्यूट लगते थे, है न. (वो मुस्कुरा कर बोली)

स्वर्ण : मुझे भी दिखाइए चची. (उसने भी फ़ोन लिया और फोटो को देखा, फिर मेरी और देखा और मुस्कुरायी)

निर्मलादेवी : मान में: कितने साल हो गए है, मुझे तो सकल भी ठीक से याद नहीं है, भाईसाहब ने एक भी फोटो घर में नहीं छोड़ी उसकी, पर जहँ में जो तस्वीर उभर रही है वो शायद यही है, पर फिर भी पक्के तौर पर नहीं कह सकती, क्या ये हमारा hi खून है? (वो शिव को देखने lagi)(Beena भी उन्हें hi देख रही थी, वो जिस आशा से शिव की और देख रही थी बिना का दिल बैठा जा रहा था, सबको देखने के बाद शिव वो फ़ोन ले कर बहार चला गया, बिना ने स्वर्ण की और लाचारी से देखा, वो बहोत कुछ कहना चाहती थी पर कैसे कहे समाज नहीं आ रहा था, उसने हलके से स्वर्ण को इस्सर भी kiya)(Swarna वो समाज गयी, की वो शिव के पीछे जाने को कह रही है, क्यों वो पता नहीं था पर फिर भी वो जानती थी की शिव hi शिवांस है की नहीं ये प्रश्ना काफी टाइम से चल रहा है, तो वो कड़ी हुई और आती हु कह कर बहार निकल गयी, जब वो ऑफिस में पहुंची तो उसके चाचा बहोत गौर से तस्वीर को देख रहे थे, वो अंदर गयी और सामान्य तरीके से hi बोली)

स्वर्ण : क्यूट है न चाचाजी?

चंद्रभान : (वो थोड़ा हड़बड़ा गया, क्यों की उसके मान में भी वही चल रहा था जो उसकी पत्नी के मान में आया था, वो भी याद करने की कोशिस कर रहा था, पर इतने सालो से उन्होंने उसकी फोटो देखि नहीं थी तो दिमाग में तस्वीर स्पस्ट नहीं थी, पर बचपन की तस्वीर काफी ज्यादा योगेंद्र से मिलती जुलती थी, योगेंद्र और उनकी तस्वीर तो उनके पास थी hi, भले बचपन की हो. और वो शिव से काफी मिलती झूलती थी. उनके मान में भी अब शाक और गहराता जा रहा था, पर कैसे पता करे उसका कोई जरिया दिमाग में नहीं आ रहा था, उन्होंने स्वर्ण की बात का उत्तर diya)Ha बेटी.

स्वर्ण : आप बहोत गौर से देख रहे थे?

चंद्रभान : (अपने आपको सँभालते hue)Wo दीखता hi ऐसा है, तुमने देखि की नहीं तस्वीर?

स्वर्ण : है देखि.

चंद्रभान : (खड़े होते हुए उन्होंने मोबाइल फ़ोन शिव को वापस दिया, और ऑफिस से बहार निकले)

स्वर्ण : (धीरे se)Kya कह रहे थे अंकल?

शिव : वो मैडम की देखभाल के लिए पैसे दिए उन्होंने.

स्वर्ण : मुझे कह देते? (उन्होंने नाराजगी से कहा)

शिव : मेने नहीं मांगे, मेने तो मन hi किआ, फिर उन्होंने बच्चो का नाम दे कर मुझे दिए.

स्वर्ण : कोई बात नहीं, अगर और चाहिए तो मुझसे कहना.

शिव : आपको पता है की ऐसी कोई जरुरत नहीं है.

स्वर्ण : में तो बस ऐसे hi कह रही हु. (हम दोनों भी अंकल के पीछे वह पहुंच गए the)(Beena सबको ध्यान से देखने लगी, पर अंकल उस बारे में कुछ नहीं बोले)

चंद्रभान : स्वर्ण, तुम्हारी भाभी यही रहना चाहती है तो कोई बात नहीं, पर तुम्हे भी उनका ख्याल रखना है. (उन्होंने हिदायत दी)

स्वर्ण : इसमें कहने की क्या बात है चाचाजी. में रोज़ आ जाउंगी, और अगर भाभी मान गयी तो उन्हें अपने साथ भी ले जाउंगी, ठीक है. (वो बस मुस्कुराये, तभी जूही कमरे में दाखिल हुई, वो सबको देख कर ठिठक गयी)

निर्मलादेवी : अरे बेटी तुम? (वो जूही को भी पहचान गयी)

स्वर्ण : ये दोनों साथ में hi तो तयारी करते है.

चंद्रभान : कैसी तयारी?

स्वर्ण : ये दोनों ाठलाते है, दौड़ते है, नेशनल की तैयारी कर रहे है दोनों.

चंद्रभान : बहोत अच्छी बात है.

स्वर्ण : पढ़ाई में भी अव्वल है शिव, हमेसा पहले नंबर पर hi आता है.

चंद्रभान : बिलुल योगेंद्र की तरह. (अचानक उनके मुँह से निकल गया, बिना , स्वर्ण और निर्मलादेवी ने चौक कर देखा, बाकि किसी को कुछ समाज नहीं आया)

बिना : किसके जैसा पापा?

चंद्रभान : अरे कुछ नहीं बेटी (अपने आप को सँभालते hue)Wo मुझे बस अपने छोटे भाई की याद आ गयी. (उन्होंने बात को संभाला, बाकि सब तो संतुस्ट थे पर बिना, स्वर्ण और निर्मलादेवी काफी कुछ समाज रहे थे, पर कोई कुछ नहीं बोलै) अच्छा बेटी, हम चलते है.

स्वर्ण : ऐसे कैसे चाचाजी, आपको पहोचते पहोचते देर रात हो जाएगी. कल चलेजाइयेगा, आज मेरे घर रुक जाइये.

चंद्रभान : नहीं बेटी, फिर कभी.

स्वर्ण : अगर मेरे ससुर को पता चला की आप यहाँ तक आये और मिले भी नहीं तो में क्या जवाब दूंगी, आपको चलना hi होगा.

निर्मलादेवी : अगर आप रुक रहे है तो में बहु के साथ hi रुकनेवाली हु.

चंद्रभान : ठीक है, जैसी तुम्हारी मर्जी.

फिर स्वर्ण, कृपाली और चंद्रभान अंकल वह से निकल गए, हम भी स्टेडियम की और निकल गए. रात को में और जूही वापस आये तो आंटी मैडम के साथ hi थी, में फिर उनसे मिला. रात को खाने के लिए हम सब बैठे, हमने पहले बिना मैडम, आंटी और जूही को खाना दिया, उस कमरे में hi. आंटी अपने साथ बहोत सरे फल भी लाये थे तो वो भी एक प्लेट में काट कर दिए.

निर्मलादेवी : (खाना खाने के baad)Khana भले hi सिंपल है पर बहोत स्वादिस्ट बनती हो beti.(Lata की और देख कर उन्होंने कहा)

फिर हम सब खाने बेथ गए.

बिना : आप वो फोटो देख कर इतना हैरान क्यों थी? (दोनों अकेले थे तो वो बोली)

निर्मलादेवी :ऐसी कोई बात नहीं है बेटी.

बिना : आपको लगता है की वो शिवांस हो सकता hai?(Itne सीधे सवाल से निर्मलादेवी चौंक सी गयी)

निर्मलादेवी : तू जानती है?

बिना : मेरे जान ने से कोई फर्क नहीं पड़ता, मेने कभी उसे नहीं देखा न छोटे चाचाजी को. क्या आपको लगता है?

निर्मलादेवी : पता नहीं बेटी, पर दिल ऐसा hi कुछ कह रहा है.

बिना : आप अभी किसी को ये बात मात बताना मम्मी, पापा से भी बोल देना की वो किसी से ये बात न करे.

निर्मलादेवी : ऐसा क्यों?

बिना : आप जानती हो न ताऊजी को, अगर उन्हें शक भी हुआ तो शिव की जान को खतरा हो सकता है, और अगर वो शिवांस न हुआ तो बिना वजह... आप समाज रही है न?

निर्मलादेवी : सही कह रही हो बेटी तुम. हो सकता है की ये सिर्फ गलत फेहमी hi हो, पर जबतक सही बात का पता न चले हमे चुप hi रहना चाहिए. पर तुम्हे क्यों ऐसा लगता है?

बिना : (इस सवाल से थोड़ी विचलित हो गयी, क्यों की वो सच्चाई नहीं बता सकती थी, उसने संभल कर kaha)Muje नहीं, ममता दीदी को ऐसा लगा था. उन्होंने मुझे बताया, में अपने तौर पर पता करने की कोशिस कर रही हु, पर तब तक किसी को पता नहीं चलना चाहिए.

निर्मलादेवी : नहीं बेटी, में किसी को नहीं बताउंगी, पहले hi उस दुखियारी माँ की आह से पूरा खंडन प्रभावित है, अगर ये वही है तो में नहीं चाहूंगी की उसको कोई आंच भी आये. में उनसे बात करुँगी, तू फ़िक्र मात कर. और वैसे भी ये अभी कोई कन्फर्म थोड़ी न है की ये वही है. तू चिंता मात कर, और है अभी अपना ख्याल रख, ये सब बाद में भी हो सकता है, जहा इतने साल बाईट वही कुछ और समय hi सही. समाज रही है न तू?

बिना : है मम्मी.

आज लतादिदी बड़े कमरे में सो रही थी, बिना मैडम और आंटी साथ में सोये थे. में विणा और रंजन आज भी साथ में सोये थे. वही दुअरी और प्रकाश रओ और चंद्रभान बैठे बाटे कर रहे थे, शराब का भी नशा था.

प्रकाशराओ : आपकी बहु को वह अनाथालय में रक्खा है आपने? बात कुछ जमी नहीं.

चंद्रभान : ऐसी बात नहीं है, वह सब अच्छा hi है, निर्मला ने तो कहा भी की वापस चलो पर बहु को यही ठीक लग रहा है.

प्रकाशराओ : है, आज कल के बच्चे कहा हमारी मानते है, अपनी hi मर्जी की करनी होती है उनको. और पता नहीं उस लड़के में ऐसा क्या खास है जो सबको वो अनाथालय hi अच्छा लगता है. (वो नशे में बोलै)

चंद्रभान : ऐसा क्यों कह रहे है आप?

प्रकाशराओ : (वो थोड़ा संभल गया, वो अपनी बेटी की बात नहीं करना चाहता tha)Are नहीं में तो बस ऐसे hi कह रहा था.

चंद्रभान : नहीं आप उस लड़के की बात कर रहे थे.

प्रकाशराओ : वो लड़का, है वो साला फर्तीचर, है क्या उसके पास... अनाथ hi तो है, हरामी साला, पता नहीं सब क्या देखते है उसमे?

चंद्रभान : (वो समाज रहा था की वो नशे में बोल रहे hai)Achchha लड़का है वो.

प्रकाशराओ :अच्छा होने से क्या होता है, खंडन, ...खंडन .... है को आता पता.

चंद्रभान : लगता तो किसी ऊँचे खंडन का hi है.

प्रकाशराओ : ख़ाक ऊँचे खंडन का, किसी ने रंगरलिया मन कर छोड़ दी होगी, ऊँचा खंडन. (वो सच में नशे में hi बोल रहा tha)Sala... मेरी बेटी के ख्वाब देखता है...

चंद्रभान : (उसको समाज में आया की यहाँ तो बात कोई और hi चल रही hai)Aapne ज्यादा पि ली है, चलिए खाना कहते है.

प्रकाशराओ : सही कह रहे है aap.(Kehte हुए वो थोड़ा लड़खड़ाए उठा गया, दोनों अंदर चले गए)





हम तीनो साथ में सो रहे थे, काफी टाइम से लेते हुए थे हम तीनो. आज भी रंजन साथ में hi थी, वो आज रात को t-shirt और शार्ट पहना कर आयी थी और विणा टॉप और कापरी, वो विणा की और करवट ले कर सो रही थी, उसका पेअर मेरे ऊपर पड़ा तो मेरी आंख खुली, मेने देखा की वो आंखे बंद कर के hi सो रही है, मेने उसका पेअर साइड में हटा दिया. थोड़ी देर बाद उसने फिर से विणा की और करवट ले ली थी, मेने देखा की रंजन की चद्दर हटी हुई थी उसकी शार्ट दिख रही थी,





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उसके कूल्हे मेरे सामने थे, अभी अभी जो नींद आणि सुरु hi हुई वो पूरी तरह से उड़ गयी. में कुछ देर लेता रहा, कोई भी हरकत नहीं कर रहा था, उसके छोटे कूल्हे देख कर मेरे लुंड में अकड़न आणि सुरु हो गयी थी, मेने ऊपर हो कर विणा को देखा तो उसका मुँह भी दूसरी और था. मेने रंजन के कूल्हे पर हाथ रखा और हल्का सा दबाया, वो वैसे hi रही, में खिसकते हुए रंजन के पास पहुंच गया और उस से पीछे से सात कर लेट गया. वो वैसे hi लेती रही शायद सो गयी थी. मेने एक बार सोचा की डिस्टर्ब नहीं करता हु, पर वैसे भी वो मेरा साथ छह रही थी और मेरा भी मूड बन गया था तो मेने अपने हाथ को आगे बढ़ा कर उसको कमर से पकड़ कर अपने से सत्ता लिया, लुंड उसके कूल्हों से सात गया, उसके शरीर की गर्माहट मुझे महसूस होने लगी और मेरा लुंड अकड़ने लगा. थोड़ी देर में रुक गया, वो थोड़ी हिली थी पर फिर शांत हो गयी थी. वो मेरी दाहिनी और सो रही थी तो मेने अपने बाये हाथ को थोड़ा ऊपर किया और उसके नन्हे से स्तन को हलके से दबाते हुए सहलाया. वो वैसे hi लेती थी, में हलके हलके स्तन सहलाते हुए दबाने लगा. वो थोड़ी हिली पर फिर शांत हो गयी. (शिव के छूने से रंजन की नींद खुल गयी थी, पर वो शांत रही. शिव खुद उसके शरीर से खेल रहा था जो उसे अच्छा लग रहा था, उसके चेहरे पर मुस्कान भी थी और स्तन को सहलाने से उत्तेजना भी हो रही थी, ऊपर से उसके कूल्हों के बिच चुभ रहा वो कड़क लुंड महसूस हो रहा था. शिव उसके स्तन को बरी बरी दबा रहा था और हलके हलके मसल रहा था, वो पीछे से सत्ता हुआ था और उसकी गर्दन पर उसकी सासे महसूस हो रही थी, चेहरे पर मुस्कान लिए वो बस लेती रही. थोड़ी देर बाद शिव की कमर में हलके हलके धक्के लगने लगे थे और साथ में वो उसकी गर्दन पर भी अपने होठ रगड़ रहा था, और उसके हाथ की सख्ताई भी स्तन पर बढ़ रही थी, उसकी सासे तेज चलने लगी थी, पर वो अभी भी सोने का नाटक कर रही थी, शिव का ऐसा करना उसको अच्छा लग रहा था. थोड़ी देर बाद शिव ने स्तन से हाथ हटाया और उसकी चड्डी को निचे सरका दिया, और फिर पंतय को पीछे से खिंच कर थोड़ा निचे कर दिया, उसके कूल्हे नंगे हो गए, उसको शर्म आने लगी पर उसके चेहरे पर मुस्कराहट भी. उसने जोर से अपनी आंखे बंद कर दी, शिव उसके कूल्हे को सहलाने लगा और हलके हलके दबाने लगा, उसकी सिस्किअ निकलने लगी थी पर वो आवाज नहीं कर रही थी, बस ससो से सिस्किअ ले रही थी, वो भी बहोत हलके हलके. उसके चेहरा अजीब हो रहा था, शिव उसके कूल्हे को दबाते हुए उसकी दरार को सहलाने लगा. कभी उसकी ऊँगली उसके गांड के छेड़ बार ठहर रही थी, एक अज्जेब सी सरसराहट वो महसूस कर रही thi.)(Un गरम कूल्हों की दरार को सहलाने से मेरा लुंड पूरी औकात में आ गया था, मेरे इतना करने के बावजूद वो उठी नहीं थी, मुझे समाज नहीं आ रहा था, पर उसकी सासे बता रही थी की वो उत्तेजित हो रही है, मेने उसके चेहरे को साइड से ध्यान से देखा तो उसका चेहरा लाल हो गया था, वो सोने का नाटक कर रही थी. मेने अपना अंडरवियर निचे खिसकाया और लुंड को बहार निकल कर कूल्हों की दरार में घुसा दिया, लुंड सीधा गांड के छेड़ पर जा लगा, मेने फिर बाये हाथ को आगे बढ़ा कर स्तन को सेहलाएंए लगा. और हलके हलके लुंड को दबाने लगा. लुंड से निकल रहे रास की वजह से गांड का छेड़ गिला होने लगा tha.)(Ranjan अपनी गांड के छेड़ पर लुंड का दबाव महसूस कर रही थी, उसके शरीर में कुछ कुछ हो रहा था, वो शिव को किसी चीज़ के लिए रोकना नहीं चाहती थी, उसकी जो मर्ज़ी हो वो करने देना चाहती थी, वो उस से कई बार चुद चुकी थी, तो उसको दर भी नहीं था. शिव ने उसका दाहिना हाथ उसके गले के निचे से डाला तो उसने अपना शिर थोड़ा ऊपर कर लिया, अब उसका दाहिना हाथ उसके स्तन सेहला रहा था, और बया हाथ उसकी पंतय के अंदर से छूट पर जाने लगा, वो करवट ले कर सोई थी तो उसकी झंघे आपस में चिपकी हुई थी, शिव का हाथ उसकी छूट के बालो पर hi जा रहा था, वो अपने पेअर खोलना चाहती थी पर नहीं खोला. शिव का लुंड उसकी गांड पर ठोकर मार रहा था, वो जानती थी की शिव ने विणा की गांड का उद्घाटन कर दिया है तो उसको भी कोई आपत्ति नहीं थी, एक न एक दिन तो ये होना hi था. उसने अपने गांड के छेड़ को ढीला छोड़ दिया था, उसे महसूस हो रहा था की उसके गांड का छेड़ धीरे धीरे फ़ैल रहा है. पर थोड़ी देर बाद शिव ने लुंड वह से हटा लिया और उसको सीधा करने लगा, वो सीधी लेट गयी पर आंखे नहीं खोली.)

शिव : आंखे क्यों बंद कर रक्खी है? (शिव के कहने पर उसके चेहरे पर मुस्कान तैर गयी पर उसने आंखे नहीं खोली) मुझे पता है तू जाग रही है. (फिर भी उसने आंखे नहीं खोली, मेने उसको अपनी और घूमते हुए खिंचा और उसके होठो को चूसने लगा, वो बस लेती रही, सामने से किश भी नहीं कर रही थी) अच्छा तो तू चाहती है की आज सब में hi करू. (उसके चेहरे पर मुस्कान तैर gayi)Jaisi तेरी मर्जी. (में फिर से उसके होठो को चूसने लगा और उसकी पंतय को उतरने लगा, उसके होठ पुरे गीले हो गए थे, और पंतय भी निकल गयी थी. में उसकी टीशर्ट उतरने लगा पर वो ऊपर न हुई. मेने कोशिस की पर वो ऊपर नहीं हो रही था, मेने उसको थोड़ा ऊपर किया और t-shirt निकल दी, इतना हिलने पर भी वो नहीं उठी मतलब वो जग hi रही थी, वो नंगी लेती हुई थी, कुछ पल में उसके बदन को देखने लगा, शरीर पर कोई अतिरिक्त चर्बी नहीं थी, पतली सी कमर और ऊपर माध्यम आकर के स्तन. छूट पर हलके बल थे, मेने उसके सपाट पेट को सहलाया और हाथ को ऊपर ले जाते हुए उसके स्तन को मसलने लगा, उसके चेहरा वैसा हो गया जैसे दर्द में होता है पर ये दर्द नहीं था, ये उत्तेजना थी, में उसके निप्पल को मसलने लगा, उसका चेहरा और अज्जेब हो गया, निप्पल कड़क हो कर ऊपर उठे हुए थे, छोटे से गहरे गोलाकार में वो स्पस्ट दिख रहे थे, मेने उस कड़क डेन को मुँह में लिया और चूसने लगा )शहहहहह





(हलकी सी सिसकी निकली उसके मुँह से, में पहले आहिस्ता आहिस्ता उसको चूस रहा था पर फिर थोड़ा जोर से चूसने laga)Shhhhhh, शह्ह्हह्ह्ह्ह, शह्ह्हह्ह्ह्ह. (वो अपने पारी आपस में रगड़ रही थी और हलकी हाली सिस्किअ ले रही थी, में बाये हाथ को निचे ले गया और उसकी छूट को दबोच liya)Shhhhhh, ahhhhhhh.(Meri ऊँगली छूट के अंदर चली gayi)Shhhhh अह्हह्ह्ह्ह. (में ऊँगली को अंदर बहार करते हुए उसके निप्पल को बरी बरी चूसने laga)Shhhhhh अह्ह्ह्हह्हह.





(गरम खून में उबाल जल्दी आ जाता है, यही रंजन के साथ भी हो रहा था, वो अभी अभी फूल बानी थी तो खून में उबाल कुछ ज्यादा hi था, उसने अपने हाथ को टटोल कर लुंड को धुंध लिया और उसको दबाने लगी, उस गरम डंडे को छूटे hi उसके अंदर हजारो चींटिया रेंगने lagi)Shhhhhhh अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (में उसकी बेचैनी समाज रहा था तो में उठा और उसके मुँह की और लुंड कर के लेट गया और उसके कूल्हे पकड़ कर उसकी छूट को अपनी मुँह की और खिंच लिया, वो अपने पेअर फैलाती हुई अपनी छूट को मेरे मुँह पर रगड़ने लगी और साथ में मेरे लुंड को पकड़ कर अपने मुँह में भर ली, वो बहोत उतावली हो चुकी thi)Ummmhhh ुम्मःहः सलरपपप सलूयर्प, उम्म्म्मह्ह्ह्ह. (वो लुंड पर जैसे टूट पड़ी थी, और अपनी छूट मेरे मुँह पर जोरो से दबा रही thi)Shhhhh अह्हह्ह्ह्ह (वो लुंड को हाथो से जोर से हिलाते हुए जैसे साँसे ले रही थी, वापस लुंड को मुँह में भर liya)Ummmm उम्म्म्म उम्म्म्म. (कुछ देर बाद में उठा और उसके पेअर पकड़ कर फैला कर मेरी और खिंच लिया, वो मुझे देख रही थी, में मुस्कुराया तो वो भी मुस्कुरायी, मेने लुंड छूट पर रगड़ा, वो मेरी आँखों में देख रही थी)

शिव : दाल दू? (मेने उस से पूछा तो उसने हां में इस्सर किया, मेने लुंड को उसके छोटे से छेड़ पर लगाया और कमर को आगे धकेल दिया, उसके चेहरे के भाव बदल गए, उसके चेहरे पर हल्का दर्द उभर आया, मेने प्यार से puchha)Dard हुआ? (उसने तुरंत ना में शिर हिलाया, में लुंड को अंदर डालते हुए उसके ऊपर चढ़ गया, उसने मुझे अपनी बहो में भर लिया और अपने पैरो को मेरी कमर पर लपेट दिया, लुंड आधा अंदर चला गया tha)Ahhhhh . (वो हल्का सा करहि, मेने फिर puchha)Dard हो रहा है?





रंजन : होने दो, तुम बस छोड़ो मुझे. (उसने जैसे मुझे डांटा)

शिव : (में muskuraya)Badi बेशरम हो गयी हो. (वो शरमाते हुए मुस्कुरायी, में हलके हलके धक्क्के मरने लगा)

रंजन : शहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह (वो मेरे गले को और गाल को चुम रही थी और मेरे शिर के बालो को नोच रही thi)Shhhhh अह्हह्ह्ह्ह, शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह.

उसकी गरम गरम कासी हुई छूट में लुंड फास फास कर जा रहा था, हर धक्के के साथ वो कराह रही थी. धक्के लगते हुए में थोड़ा ऊपर हुआ, और अचानक मेरी नजर विणा पर पड़ी, वो हमे hi देख रही थी. में एकदम से रुक गया. में विणा को तो भूल hi गया था की वो भी हमारे साथ hi सो रही है.
 
अपडेट 192

में रंजन को करते करते रुक गया तो उसने मुझे अपनी और खींचा और मेरे कूल्हे को पकड़ कर धक्के मरने के लिए इस्सर करने लगी, में उसे कैसे बताता की विणा देख रही है, वो बस अपने में मगन थी, मुझे अपनी और देखते देख विणा फिर से दूसरी और घूम गयी, अब में उस मोड पर था की में रुक नहीं सकता था तो में धक्के लगाने लगा, पर मेरी नजर बार बार विणा पर जा रही थी.

रंजन : शहहह क्या कर रहे हो शिव, करो न. (उसने मुझे बहो में भरते हुए कहा, अब में वैसे भी कुछ नहीं कर शक्ति था, वैसे कोई छुपानेवाली बात नहीं थी, मुझे पता था की दोनों एक दूसरे के बारे में जानती है पर फिर भी एक मर्यादा होती है, में एक के सामने दूसरी से प्यार नहीं जाता सकता था, पर अभी में कुछ नहीं कर सकता था, तो मेने विणा की और से ध्यान हटा कर रंजन को छोड़ना सुरु कर दिया.

रंजन एक मई नयी जवान लड़की थी, उसके शरीर में शेयर अरमान अपनी चरम पर थे, वो इस बड़े से मेहमान को अपने अंदर समां कर बहोत उत्तेजित हो रही थी, उसकी छोटी सी संकरी गली में वो फास कर अंदर बहार हो रहा था, उस से मिलने वाले घर्षण से उसकी योनि से ढेर सारा तरल बह रहा था, हर धक्के के साथ वो मर्सी में गोते खा रही थी.

रंजन : शहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह मेरे शिव शहहह अह्ह्ह्ह उम्म्म्म उम्म्म उम्. (वो उसे किश करने lagi)Shhhh बहोत मज़ा आ रहा है शिईयिव शहहहहह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (धक्के मरते hue)Dard नहीं हो रहा न?

रंजन : इस मज़े के लिए तो में हर दर्द सहने को तैयार हु शह्ह्ह्हह्ह तू नहीं समाज सकता शिईयिव शह्ह्ह्ह वो जब अंदर बहार होता है तो कितना मज़ा आता है शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह शहहहहह. (फिर वो बात बोली जो मेने एक्सपेक्ट नहीं की thi)Wo देख रही है? (वो बहोत धीमे से मेरे कान में फुसफुसाई थी)

शिव : कोण? (में अनजान बना)

रंजन : में जानती हु की विणा हमें देख रही है. (वो फिर मेरे कान में धीरे से फुसफुसाई, में कुछ नहीं bola)Wo भी चाहती है की तुम उसके साथ ये करो. (में फिर कुछ नहीं bola)Me जानती हु की तुम उसके साथ कर चुके हो, वो कुछ कहती नहीं है पर उसको भी तुमसे ये चाहिए शिव. (में फिर भी चुप raha)Tum चाहो तो हम दोनों को एक साथ कर शक्ति हो. (वो मेरी आँखों में देखने लगी)

शिव : ये पल बहोत निजी और खास होते है, और उसका पहली hi बार है, उसके साथ में फिर कभी कर लूंगा. (वो बस मुस्कुरायी, फिर हम अपने काम में लग गए)

विणा को कुछ सुनाई तो नहीं दिया पर उसको इतना पता चला की वो लोग कुछ बात कर रहे है, अब वो भी जवान हो चुकी थी और उसका दिल भी ये सब करने को मचल रहा था, शिव के साथ वो अंतरंग पल बिता चुकी थी और अपनी गांड में उसका मोटा लुंड ले चुकी थी, पर वो अपनी छूट में वो लेना चाहती थी, रंजन के मुँह से वो सुन चुकी थी की कितना मज़ा आता है, पर साथ में उसने कहा था की दर्द भी होता है, पर अब उसको दर्द की परवाह नहीं थी, पास में hi चल रहे इस गरम दृश्य को देख कर वो बहोत गर्म हो चुकी थी, शर्म के मरे वो पहले हिचकिचा रही थी पर उसका हाथ अपनी छूट पर पहुंच गया था, वो उसे कपड़ो के ऊपर से hi कुरेद रही थी, उसने देखा था की शिव ने उसे देखलिया है और इस लिए वो घूम गयी थी पर उसको वो सब देखना था, वो थोड़ी सी घूमी और उसने देखा तो शिव रंजन को पीछे से छोड़ रहा था, उसकी कमर पकड़ कर वो धक्के लगा रहा था, रंजन की आवाज बता रही थी की उसको बहोत मज़ा आ रहा है, वो उसकी जगह खुद को िमागिन करने लगी, और उसकी ुंलिया उसकी छूट की दरार को सहलाने लगी. तभी उसने देखा की शिव उसको देख रहा है, पहले वो शर्मा गयी और फिर नज़ारे घुमा ली, पर उसका शरीर उसको बहका रहा था, उसने डरते डरते फिर उस और देखा तो शिव उसको hi देख रहा था, वो भी शिव की आँखों में देखने लगी, उसकी ुंलिया अभी भी छूट पर hi थी, अब उसकी शर्म की जगह सेक्स की खुमारी ने ले ली थी. वो शिव की आँखों में देखते हुए hi अपनी छूट को रगड़ रही थी.

विणा : (मन me)Ohhhh शिईयिव शहहहहह में भी हु शहहहहह मुझे भी तुम्हारा प्यार चाहिए शिव.

शिव : (में विणा को देख रहा था, और उसकी आंखे उसका हल बयां कर रही थी, में रंजन की कमर पकड़ कर जोर जोर से धक्के लगा रहा था, और थप थप की आवाजे हो रही थी)

रंजन : अह्ह्ह्हह शहहहहह आहिस्ता जहां शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह कही मर न जाऊ में. (मेरा ध्यान रंजन की और गया, उसके छोटे छोटे कूल्हों के बिच से मेरा लुंड पूरा अंदर बहार हो रहा था, तेज धक्को से वो झड़ने lagi)Shhhhhh अह्ह्ह्हह्हह (कहते हुए उसकी कमर अकड़ गयी, में उसे उल्टा लेता दिया और उसके ऊपर होकर पीछे से hi उसे छोड़ने laga)Shhhhhh अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह, रुक तो.

शिव : क्यों मज़ा नहीं आ रहा ?

रंजन : हआ शहहह बहोत मज़ा आ रहा है.

शिव : मेने कहा था न की ज्यादा इस पर ध्यान मात दो, पर तुम्हे तो यही करना था है न?

रंजन : मेने खुद को बहोत रोका शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्ह पर बहोत मान हो रहा था शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : क्या मान हो रहा था?

रंजन : शह्ह्ह्ह यही मान कर रहा था, शहहह की तू मुझे ऐसे hi चोदे शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : तू जानती है न मेरी क्या हालत है?

रंजन : तो में कहा रोज़ रोज़ करने को कह रही हु, पर कभी कभी तो चाहिए hi न. (में उसको देखने लगा, और मेरी स्पीड थोड़ी काम भी हो गयी क्यों की में सोच रहा था, उसने मुझे रुका देख कर घूमने लगी, मेने लुंड निकल लिया, वो फिर सीधी लेट gayi)Kya सोच रहा है? (मेने ना में इस्सर किया, वो muskurayi)Me जानती हु तू क्या सोच रहा है. (में उसे देखने लगा, उसने मेरा लुंड पकड़ा और फिर अपनी छूट के मुहाने पर रख दिया और मुझे अपनी और खिंच कर लुंड अपनी छूट में उतर लिया, और अपने पेअर मेरी कमर पर लगा कर मुझसे चिपक gayi)Shhhhhhhhhh. (फिर मुस्कुराते हुए boli)Me किसी और के पास नहीं जाउंगी, चिंता मात कर.

शिव : (सच में उसने मेरे मान की बात पकड़ ली thi)Par क्यों?

रंजन : पहली वजह ये है की और कोई मुझे अच्छा hi नहीं लगता, अगर यकीं न हो तो विणा से पूछ लेना, कितने लड़के है जो आगे पीछे घूमते है हमारे, पर हम किसी को हमारे पास फटकने तक नहीं देती.

शिव : और दूसरी वजह?

रंजन : तुम्हे लगता है की किसी के पास तुम्हारे जैसे होगा? (वो मुस्कुरायी)

शिव : ऐसी क्या खास बात है? (मेने मुस्कुराते हुए पूछा)

रंजन : वो तू नहीं समाज सकता, ये एक लड़की hi समाज सकती है. (उसने मुस्कुराते हुए मेरे होठ चूमे)

शिव : पर तुम ऐसे तड़पती रहो वो भी तो अच्छा नहीं है न.

रंजन : सच कहु तो में सेक्स के लिए नहीं तड़प रही थी, तेरे साथ ऐसे रहने के लिए तड़प रही थी, वर्ण मेने अपना जुगाड़ ढूंढ लिया है.

शिव : (मुझे उसकी बात पर हसी आ gayi)Achchha, क्या जुगाड़ दूध लिया है?

रंजन : (वो शर्मा गयी)

शिव : बोल न.

रंजन : वो जो बाजु में लेती हुई है न, हम दोनों एक दूसरे का ख्याल रख लेते है. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : ओह! (वो मुस्कुरायी)

रंजन : और तुम्हारी जानकारी के लिए बता दू, सरितादिदी और लतादिदी भी आपसे में एक दूसरे से लगी हुई है. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : तुम सबकी जानकारी रखती हो, है न?

रंजन : रखनी पड़ती है. (कहते हुए वो muskurayi)Isiliye कह रही हु की विणा को भी उसके हिस्से का प्यार दे दो, और ज्यादा सोचो मात, हम अपनी मर्जी से सब कर रहे है, और अभी से आगे की ज्यादा सोचने की जरुरत नहीं है.

शिव : (में मुस्कुराया और उसको किश करने laga)Kabhi कभी तो लगता है की ऊपर वाले ने किसी खास कलम से मेरा भाग्य लिखा है, दुसरो को किसी और के साथ के सम्बन्ध छुपाने पड़ते है, में बता देता हु फिर भी सब खुस है, ऐसा क्यों है समाज नहीं आ रहा.

रंजन : (मुस्कुराते hue)Tumhara भाग्य किस कलम से लिखा है पता नहीं, पर हमारा भाग्य तो इस कलम से लिखा गया है जो अभी मेरे अंदर है. (में मुस्कुराया, वो भी muskurayi)Ab बहोत बाते हो गयी, फिर से मुझे मज़े की सैर करवाओ. (में फिर उसे छोड़ने लगा, लगातार चुदाई से वो फिर झड़ने लगी, और मेरा भी होनेवाला था, आखरी समय में मेने लुंड बहार खिंच लिया और उसके पेट पर वीर्य की बरसात कर दी, और में साइड में लुढ़क गया, दोनों हांफ रहे थे, थोड़ी देर बाद वो उठी और अपनी पंतय से अपने पर लगे वीर्य को साफ़ किआ, फिर कपडे पहने और बहार चली गयी, तभी मेरा ध्यान बाजु में लेती विणा पर गया, वो दूसरी और मुँह कर के लेती हुई थी, में बस उसे hi देख रहा था और सोचने लगा की अब इसका क्या करू, में नंगा hi लेता हुआ था, मेने उसे ऊपर से निचे तक देखा, वो अपने पेअर मोड़ कर लेती हुई थी, मुझे पता था की वो जाग रही है, उसके कूल्हे उभरे हुए थे, उसकी काप्री कूल्हों की दरार में फांसी हुई थी, में उसकी और घुमा और उसके कूल्हे पर हाथ रखा, वो कैंप गयी. मेने उसके कूल्हे को सहलाया तो वो और संकुचन लगी, मेरे लिए ये जान न जरुरी था की वो क्या चाहती है, तो मेने उसके कंधे से पकड़ा और मेरी और घुमाया, वो घूम गयी पर आंखे बंद किये हुए थी.)

शिव : आंखे खोलो,. (उसने आंखे खोली और मुझे देखने लगी, उसकी आँखों में सब साफ़ साफ़ लिखा हुआ था की वो क्या चाहती है, मेने उसका चेहरा सहलाया तो वो मुझे hi प्यार से देख रही थी, तभी रंजन के आने की आहत हुई तो वो तुरंत पलट गयी, मेने देखा की रंजन अंदर आयी, और मेरे बिस्तर पर लेट गयी जो सबसे आखिर में था, में बीचवाले बिस्तर पर था, उसने मेरी और देखा और विणा की और इस्सर कर के मुझे आगे बढ़ने को कहा और मुस्कुराते हुए वो दूसरी और मुँह कर के लेट गयी. में इन सब की आपस में बॉन्डिंग देख कर खुस था, वो सब आपस में एक दूसरे का ख्याल रख रही थी, में उठा और शार्ट पहन कर बाथरूम चला गया.)

रंजन : (जैसे hi शिव बहार nikala)Vina..(Usne विणा को पुकारा) मुझे पता है तू जग रही है. (विणा ने रंजन को dekha)Aaj मौका है, सब कर ले, समाज रही है न तू? (वो कुछ नहीं बोली बस उसे देखती rahi)Daar मात कुछ नहीं होगा, एक बार दर्द सेहन कर ले, फिर देख रही है न कितना मज़ा आता है. (वो उसे देख टी rahi)Abhi वो वापस आएगा, सोने मात देना उसे, सामजी. (विणा ने हां में शिर hilaya)Aur शर्माना मात, समाज रही है न? (उसने फिर है कहा, तभी बाथरूम के दरवाजे की बंद होने की आवाज aayi)Wo आ रहा है, मेरी फ़िक्र मात करना, में दूसरी और hi देखूंगी, तू आराम से कर ले, सामजी. (विणा शर्मा गयी और हां में इस्सर किया, रंजन ने अपना अंगूठा उठा कर जैसे आल थे बेस्ट कहा, और जैसे hi शिव की आहत हुई वो पलट कर दूसरी और हो गयी)

में अंदर आया तो पहले मेरी नजर विणा पर गयी जो मुझे hi देख रही थी, मेने रंजन को देखा तो वो दुअरी और मुँह कर के लेती हुई थी, मुझे पता था की वो जाग hi रही होगी, पर में अपने बिस्तर पर लेता और विणा की और घूम कर उसे देखने लगा, वो लेती तो सीधी थी पर उसका चेहरा मेरी और hi था. वो बस मुझे देख रही थी, मेने उसके हाथ पर हाथ रक्का, वो शर्मा गयी पर मुस्कुरायी, वो पूरी तरह से तैयार थी सब कुछ करने के लिए, में खिसकते हुए उसके बिस्तर पर पहुंच गया, वो थोड़ी और खिसक गयी ताकि मुझे जगह मिल जाये. अब हम दोनों साथ में लेते हुए थे, में उसकी और मुँह कर के लेता और वो सीधी लेती हुई थी पर मुझे hi देख रही थी. दोनों कुछ नहीं बोल रहे थे बस एक दूसरे को देख रहे थे. वो क्या चाहती है वो सब उसने हमारी पिछली चुदाई में hi बता दिया था, वो भले hi शांत स्वाभाव की थी पर वो बहोत सुलजी हुई थी. पर फिर भी में एक बार उसके मुँह से सुन न चाहता था की वो इन सब के लिए तैयार है.

शिव : विणा तुम... (में कुछ बोलू उसके पहले hi उसने मेरे मुँह पर हाथ रख दिया)

विणा : आज कुछ मत कहो, न कुछ सोचो शिव, मुझे अपनी बना लो.

शिव : पर...

विणा : नहीं शिव, कुछ भी नहीं... (कहते हुए उसने मुझे अपनी और खींचा और मेरे होठो को चूमने लगी, में भी उसके मुलायम होठो को चूमने लगा और साथ में मेरा हाथ उसके कठोर स्तन पर पहुंच गया और उसको दबाते हुए सहलाने laga)Ummmmm उम्मम्मम्मम (उसकी सासे बहोत तेज हो गयी थी, उसको चूमते हुए मेने उसके टॉप का बटन खोलना सुरु किया, ऊपर के दो बटन खुलते hi मेने अपना हाथ अंदर डाला, उसने ब्रा नहीं पहनी थी, मेरा हाथ सीधा उसके कुंवारे कठोर स्तन पर पाउच गया, उसकी गोलाई अपना पूरा एहसास दे रही थी, और निप्पल एकदम कड़क हो चूका था, अपने कुंवारे स्तन पर हाथ को महसूस करते hi उसकी सासे उखाड़ने लगी, उसने किश तोड़ दी और सीधी लेट gayi)Shhhhhhh शीइइइइइइइव. (उसका रोम रोम पिघल रहा था. उसका जो हाथ हमारे बिच में था वह उसको शिव के लुंड का स्पर्श होने लगा, वो यही तो चाहती थी, उसने बिना संकोच के लुंड को पकड़लिया, और उसे दबाने lagi)Shhhhhhh शीइइइइइइइव (शिव उसके स्तन को मसल रहा था जिस से उसको हल्का दर्द भी हो रहा था, पर आज वो शिव को किसी बात के लिए नहीं रोकना चाहती थी. वो उसकी कठोर छातिओ को नरम करने में लगा हुआ था और उसके निप्पल की अकड़ को ठिकाने लगा रहा था, जब वो उसके निप्पल को मसलता था तो उसकी झांघो के बिच सर सराहत महसूस हो रही thi)Shhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (शिव ने उसके टॉप के सरे बटन खोल दिए, और दोनों स्तन हवा में नंगे हो गए, शिव बरी बरी दोनों को सेहला रहा था और दबा कर निचोड़ रहा था, उसकी छूट में जो सरसराहट हो रही थी वो बर्दास्त के बहार थी, वो अपनी झंघे रगड़ने lagi)Shhhh शीइइइइव शहहहहह (वो उसके लुंड को दबाते हुए हिलने लगी, वो लुंड उसको बहोत प्यारा लग रहा था, उस गरम डंडे को छूने से लाखो चिंगारिया उसके अंदर फुट रही थी, जब शिव ने उसके दाहिने निप्पल को अपने मुँह में भरा और चूसा तो वो अकड़ gayi)Shhhhhhhh शीइइइइइइइव (वो चारांत उस से लिपट गयी और उसके मुँह को अपने स्तन पर दबा दिया) (उसके ऐसा करने से में हिल भी नहीं प् रहा था, उसका निप्पल मेरे मुँह में था, में उस मटर के डेन को चूस रहा था, थोड़ी देर बाद मेने उसको मुझसे दूर किया और फिर से सीधा लेता दिया, वो मचल रही थी, में फिर से उसके स्तन को सहलाने लगा और साथ में उसके पेट पर भी हाथ घूमने लगा)

शिव : क्यों करना चाहती हो? तुम जानती हो सब फिर भी.

विणा : मुएज तुम अच्छे लगते हो शिव, मुझे तुम hi पसंद हो, में अपना पहला सुख तुमसे hi पाना चाहती हु.

शिव : तुम बहोत अच्छी और खूबसूरत हो विणा.

विणा : सच शिव, में तुम्हे अच्छी लगती हु?

शिव : (उसके निप्पल को मसलते hue)Tum बैठो अच्छी हो विणा.

विणा : शह्ह्हह्ह्ह्ह (उसके चेहरे पर मुस्कान thi)Muje प्यार करो शिव, जी भर के प्यार करो. (कहते हुए वो मेरे लुंड को हिलने लगी)

शिव : लगता है तुम्हे ये बहोत पसंद है.

विणा : (मुस्कुराते hue)Ha शिव, मुझे वो बहोत अच्छा लगता है. (कहते कहते वो शर्मा गयी, में एक हाथ को निचे ले गया और उसकी छूट को दबा दिया) शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : इससे खोल दू?

विणा : तुम्हारी जो मर्जी है वो करो शिव. (में उसकी काप्री निचे खिसकने लगा तो उसने अपने कूल्हे उठा कर मदद की, उसने सफ़ेद पंतय पहनी थी, मेने उसकी छूट को पेंटी के ऊपर से hi sehlaya)Shhhhhh.

शिव : ये तो पूरी भीगी हुई है. (मेने उसे छेड़ा तो वो शर्मा gayi)Ye इतनी भीगी क्यों है? (मेने उसक छेड़ते हुए उसको कहा)

विणा : (शरमाते hue)Tumhe ज्यादा पता होगा सब, एक्सपर्ट जो हो. (उसने मुस्कुराते हुए टॉन्ट मरते हुए कहा)

शिव : तो किसी नौसिखिये के पास जाती, एक्सपर्ट के पास आने की क्या जरुरत थी?

विणा : (मुस्करात hue)Nayi गाड़ी किसी नौसिखिये को चलने नहीं दे सकते. (वो फिर खिल खिलाई)

शिव : में जनता नहीं था की तुम ऐसी भी हो.

विणा तुमने जाना hi कहा muje(Usne प्यार से मुझे कहा)

शिव : में तो समझता था की तुम एक सीधी सदी लड़की हो.

विणा :सीधी सदी तो हु, पर साथ में लड़की भी तो हु, और इस लड़की को ये लड़का बहोत पसंद है, तो उसके साथ नहीं खुलेगी तो किसके साथ खुलेगी. (उसने मुस्कुरा के कहा)

शिव : रुक तू, आज तुजे अच्छे से खोलता हु. (वो मेरा मतलब समाज कर शर्मा गयी, मेने उसकी पंतय के ऊपर से छूट को सहलाना सुरु कर दिया, वो मचलने लगी, मेने दरार में ऊँगली घुसाई तो और पानी निकलने laga)Isse निकल दू?

विणा : है शिव.

शिव : शर्म तो नहीं आएगी?

विणा : नहीं. (शिव नेउसकी पंतय निकल दी, वो तो कबसे तड़प रही थी, पंतय निकल कर शिव उसके पैरो के बिच चला गया, और उसे देखने लगा, एक और तो उसको बहोत शर्म आ रही थी पर अगर शिव नहीं देखेगा तो कोण देखेगा, वो बस शिव के चेहरे के बदलते भाव को देख रही thi)(Mere सामने उसकी कुवारी छूट थी, हलके बल थे उसके ऊपर, फुले हुए होठ उसकी सोभा बढ़ा रहे थे, मेने उसके होठो को थोड़ा फैलाया, वह एक छोटा सा छेड़ था, जो पानी से भीगा हुआ था और अभी भी वह से पानी निकल रहा था, कमरे में मादक गंध फल गयी थी, कुवारी छूट से आती मादक गंध मेरे नथुनों में भरने लगी, में छूट को फैला कर उसके बड़े होठो के अंदर छुपे छोटे होठो को फ़ैलाने laga)(Vina इस छुअन को पहले भी महसूस कर चुकी थी, रंजन उसकी छूट से खेलती थी पर शिव की बात अलग थी, वो एक लड़की थी और ये एक लड़का था, उसके छूने से hi उसके शरीर में खास तरंगे उठने लगी थी, वो उसकी छूट को जैसे जाँच रहा था, जब शिव ने अपना मुँह वह लगाया और जोर से उसको चूसा तो जैसे उसकी जान hi बहार आने को हो गयी, उसका शरीर हवा में उठ gaya)Shhhhhhhh Shiiiiiiiiiiiiv. (पर शिव कहा रुका, वो तो और जोर से उसकी छूट को चूसने लगा, वो धड़ाम से वापस बिस्तर पर giri)Shhhhhhh (जैसे जैसे शिव उसकी छूट को चूस रहा था वो बलखा रही थी, कभी अकड़ जाती तो कभी शांत हो जाती, उसके छोटे से छेड़ में जब उसकी जीभ प्रवेश करने का प्रयास करने लगी तो उस से बर्दास्त न हुआ और वो भलभलाकर झड़ने लगी, उसने अपना पानी शिव के मुँह पर hi छोड़ दिया, और जोर जोर से हाफने lagi)(Uski कुवारी छूट से निकलते पानी को मेने जरा भी बर्बाद नहीं किआ और पूरा पि गया, में फिर भी उसे चाट रहा था, थोड़ी देर बाद मेने मुँह हटाया और विणा को देखा, वो जैसे बेजान सी पड़ी हुई थी. में उसके बाजु में लेट गया, थोड़ी देर बाद वो घूमी और मुझसे लिपट गयी और मेरे होठो को चूमने लगी, में भी उसके होठो को चूमने लगा. थोड़ी देर बाद मेने उसके होठो को छोड़ दिया, वो मुझे और किश करना चाहती थी, पर मेने उसे रोक दिया)

विणा : क्या हुआ शिव, मेने कोई गलती कर दी?

शिव : कोई गलती नहीं की है, पर आज के लिए यही रुक जाओ.

विणा : क्यों शिव? तुमने तो कहा न की में तुम्हे अच्छी लगती हु.

शिव : वो तो लगती hi हो, पर अभी नहीं.

विणा : क्यों?

शिव : तुम्हारा पहली बार है, और तुम्हे पता है की हमारे घर में मेहमान है, अगर कुछ हुआ और उन्हें पता चला तो अच्छी बात नहीं है, और फिर तुम कल चल भी नहीं पाओगी, तो सबको क्या कहोगी, घरवालों की बात और है, पर किसी के सामने हम अपनी निजी जिंदगी नहीं खोल सकते, समाज रही हो न तुम?

विणा : (वो समझदार थी, पर अभी वो कुछ समझना नहीं चाहती thi)Fir कब करेंगे?

शिव : जल्द hi करेंगे, में भी यही हु और तुम भी यही तो हो. (मेने उसे समजते हुए कहा)

विणा : में तुम्हारी बात समाज रही हु शिव, पर मुझे आज hi करना है, कुछ नहीं होगा, तुमने पीछे भी किआ था न, आज आगे कर लो, प्लीज मान जाओ.

शिव : (में समाज रहा था की वो किस दौर से गुजर रही है, फिर भी मेने समजने का प्रयास kiya)Tumhe दर्द होगा, पता है न?

विणा : है पता है, में देख लुंगी शिव, तुम फ़िक्र मात करो, में आवाज भी नहीं करुँगी, सच कह रही हु. (वो मुझे समजने ने में लगी हुई थी, में चुप हो गया और उसे देखने laga)Please मान जाओ न, बड़ी मुश्किल से तो हम आज मिले है, पता नहीं फिर कब मौका मिले. (मेरे लुंड को पकड़ kar)Ye भी यही चाहता है.

शिव : (मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी, मुझे पता है की मेरा लुंड क्यों खड़ा है, ऐसी कमसिन लड़की खुद कहेगी की मुझे छोड़ो तो वो थोड़ी न बैठा rahega)Achchha ठीक है. पर आवाज मात करना. (उसने खुस हो कर है kaha)Isse गिला कर दो. (वो समाज गयी, क्यों की उसकी गुरु रंजन जो थी, वो उठी और घुटनो के बल हो गयी और मेरे लुंड को पकड़ कर अपने मुँह में ले लिया, उसके कूल्हे हवा में ऊपर थे, मेने उन्हें देखा और उसने दबाया तो वो थोड़ी मेरी और हो गयी और अपने कूल्हों को मेरे सामने कर दिया, वो बहोत उतावली हो रही थी, मेने उसके कूल्हों को फैला कर छूट को देखा, वो पूरी तरह से बंद थी, एक छोटा सा छेड़ hi था, मुझे पता था की अभी उसका क्या हल होनेवाला है, में आखरी बार उस छेड़ को देख रहा था, अब वो वैसा नहीं रहनेवाला था, मेने उसे अपनी और खींचा तो वो अपने पेअर फैला कर मेरे ऊपर आ गयी और अपनी छूट खुद hi मेरे मुँह पर लगा दी, उसकी यही हरकते मुझे उकसा रही थी, मेने फिर से उसकी छूट को अपने मुँह में भर लिया और उसको चूसने लगा, वो बहोत ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी, उस से सास भी न ली गयी तो उसने लुंड मुँह से बहार निकल दिया, मेने उसको साइड में लदखा दिया और उसके ऊपर आ गया, लुंड छूट को छू रहा था, में उसके ऊपर हुआ और उसके होठो को चूसने लगा, वो अपनी खुली आँखों से मुझे देख रही थी और अपने होठो को चुसवा रही थी, मेने कमर थोड़ी सही की और लुंड को छूट पर लगा दिया, छूट पहले से hi पनियाई हुई थी, मेने उसके मुँह को होठो से दबाये रक्खा और लुंड को धक्का दे दिया, छोटे से छेड़ को फाड़ता हुए लुंड अंदर घुस गया)

विणा : उम्मम्मम उम्मम्मम. (वो तड़प उठी, और अपना मुँह छुड़ाने की कोशिस करने लगी, उसको जबरदस्त दर्द हुआ था, उसकी छूट फैट गयी थी, और उसको तेज मिर्ची जैसे जलन होने lagi)(Ye तो होना hi था, मेने उसका मुँह नहीं छोड़ा और फिर एक धक्का दे दिया, अब बरी उसकी कौमार्य पटल की थी, वो तार तार हो गया और फैट गया और लुंड छूट में प्रवेश कर गया, विणा छटपटाने लगी, पर मेने उसको दबोचे रक्खा, थोड़ी देर में वैसे hi रुका रहा, मेने देखा तो उसकी आँखों से ासु बह रहे थे, वो आंखे फाडे मुझे hi देख रही थी, उसकी आंखे कह रही थी की मुझे छोड़ दो, पर अब जो होना था वो हो चूका था, मेने एक और धक्का दिया तो लुंड आधा अंदर घुस गया, उसकी आंखे बहार निकलने को हो गयी और वो छटपटाने लगी, में रुक गया, आज इतना hi काफी था उसके लिए, में उसके होठो को लगातार चूस रहा था और ध्यान रख रहा था की वो छूटना jaye)(Vina तेज दर्द और जलन से दोहरी हो गयी थी, ये दर्द उसके अनुमान से कही ज्यादा था, जिद उसीने की थी, पर अब वो उसका परिणाम समाज रही थी, एक मर्द क्या होता है वो महसूस कर रही थी, वो शिव की पकड़ से जरा भी छूट नहीं प् रही थी, ये तो अच्छा था की शिव ने और धक्का नहीं दिया था, वो अपनी आँखों से आंसू बहती बस दर्द को बर्दास्त कर रही थी, लुंड तो पुरे लोहे जैसा कड़क था, करीब पांच सात मिनट शिव वैसे hi उसके ऊपर लेते रहा, उसका दर्द शांत होने लगा था, वो बस लुंड को अपनी छूट में फसा हुआ महसूस कर प् रही थी, थोड़ी देर बाद शिव ने उसके होठ छोड़े वो सुबक कर रो पड़ी.)

शिव : बहोत दर्द हो रहा है? (उसने सुबकते हुए हां में शिर hilaya)Isiliye में मन कर रहा था, अब और अंदर नहीं दलुन्दा, तुम शांत हो जाओ, अभी सब ठीक हो जायेगा. (मेने उसे सांत्वना दी, उसने भी हां में शिर हिलाया, वो शांत होने का प्रयास करने लगी पर वो बस सुबक रही thi)(Ranjan ने ये देखा की वो रो रही है, पर ये तो होना hi था, और वो शिव को जानती थी, वो संभल लेगा, वो विणा के इस पल में बिच में नहीं आना चाहती थी, भले hi दर्द था पर ये उसके जीवन का सबसे खास पल था, वो अपने मर्द को अपना सब ज़ौप चुकी थी और उसके प्यार दुलार को महसूस कर रही थी, शिव उसके शिर को सेहला रहा था और वो उसे देख रही थी)

शिव : तुम्हे पता था न की दर्द होगा? (उसने हां में शिर hilaya)Fir क्यों करना चाहती थी तुम? (वो कुछ नहीं boli)Tum लड़कीओ का भी अजीब होता है, सब कुछ जानते हुए भी मौत के कुए में कूद पड़ती हो. वैसे तुम पूछ रही थी न में कैसी लगती हु, तो सच में तुम खूबसूरत हो.

विणा : तुम जूथ बोलते हो, क्यों की मेने तुम्हारी दोस्त देखि है, वो सब कितनी खूबसूरत है. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : खूबसूरती सिर्फ शरीर की नहीं होती, सुका मान भी खुबसुआरत होना चाहिए, और तुम्हारा मान बहोत खूबसूरत है, और शरीर से भी तुम खूबसूरत hi हो.

विणा : (उसके चेहरे पर मुस्कान आ gayi)Sach कह रहे हो न तुम?

शिव : तुम्हे लगता है की में जूथ बोल रहा हु. (उसने मुस्कुराते हुए ना में शिर हिलाया, में उसके स्तन को हलके हलके सहलाने laga)Ye तुम्हारे निप्पल इंटने कड़क क्यों हो रहे है (वो शर्मा gayi)Batao न?

विणा : (शरमाते hue)Muje क्या पता, तुम छू रहे हो.

शिव : इन्हे चूस लू? (विणा है पड़ी और शर्माने लगी, में झुका और उसके निप्पल को चूसने लगा और उसके स्तन को सहलाने लगा, विणा ने आंखे बंद कर ली और उस सुखद अनुभव का एहसास करने लगी, शिव की बाटे और उसकी हरकतों ने उसके दर्द को भुला दिया था, वो शिव के शिर को सहलाने लगी, उसके छूट में फिर से पानी आने लगा था, वो शिव के नंगे बदन को सहलाने लगी)

विणा : तुम बहोत अच्छे हो शिव, में हमेसा से तुम्हे पाना चाहती थी, मेने हमेशा तुम्हारे hi सपने देखे hai.(Me उसको देखने लगा, वो मुस्कुरायी, मेने उसके होठो को चूमा तो वो मुझसे लिपट गयी और मुझे जोरो से चूमने लगी, वो अपनी कमर भी हिला रही थी, मेने लुंड को थोड़ा बहार खिंचा और फिर अंदर डाला, वो मुझे जोरो से किश करने लगी, में समाज गया की अब वो तैयार है, मेने आहिस्ता आहिस्ता लुंड अंदर बहार करना सुरु कर दिया, वो मुझे जोरो से किश करने लगी और मेरी पीठ को सहलाने लगी, में लगातार आहिस्ता आहिस्ता ढक्क्के लगाने लगा, वो मुझे बेतहासा किश कर रही thi)(Vina को दर्द हो रहा था पर साथ में जो मज़ा आ रहा था वो बहोत ज्यादा था, वो अपनी कमर हिलाते हुए उस लुंड को महसूस कर रही थी, लगातार धक्को से वो फिर से झड़ने के करीब पहुंच गयी थी, दर्द होने के बावजूद वो अपनी कमर को हिला कर लुंड को अंदर और अंदर लेने का प्रयास कर रही थी, ये अध्भुत सुख उसकी कल्पना से भी बहार था, वो लगातार रास बहा रही थी और जब कही वो लुंड छू रहा था तो उसको एक अजीब सी सरसराहट महसूस हो रही थी, उसको पाने के लिए वो लगातार अपनी कमर हिला रही थी, शिव तो उसको छोड़ hi रहा था पर वो खुद भी अपनी छूट उस लुंड पर रगड़ रही थी, आखिर कर उस से बर्दास्त नहीं हुआ और वो फिर झड़ने लगी, वो शिव से पूरी तरह लिपट गयी, पशीने से भीगे उस शरीर को वो चाटने lagi)Shhhhhhh ी लव यू शिईयिव shhhhhhhhhh. (में कुछ पल रुक गया,, फिर मेने लुंड बहार निकल लिया, मेने देखा की वह से खून निचे बह रहा tha)Kya हुआ शिव?

शिव : कुछ नहीं हुआ?

विणा : में जानती हु शिव, ज्यादा खून निकल रहा hi क्या?

शिव : नहीं, तुम रुको में दवाई ले आता हु.

विणा : वो बाद में दे देना, अभी जो बाकि है वो पूरा करो शिव? (उसने बहोत प्यार से खा)

शिव : हो गया न तुम्हारा.

विणा : पर तुम्हारा तो नहीं हु न.

शिव : उसकी जौरात नहीं है, तुम्हारा ख्याल रखना भी मेरा कर्त्तव्य है.

विणा : में ठीक हु शिव, सच में अभी मुझे दर्द नहीं हो रहा है, प्लस मुझे और करो न, मुझे ये चाहिए. (वो बेथ गयी और मेरे लुंड को पकड़ कर सहलाने लगी, में कुछ बोलनेवाला था पर उसने मेरे होतो को अपने होठो से बंद कर दिया, वो काफी गरम थी, पहली बार की चुदाई से वो बहोत ज्यादा उत्साहित थी, उसको इतना गर्म देख कर मेरा भी मान हो गया, और मेरा लुंड जो थोड़ा ढीला हुआ था वो फिर से कड़क हो गया. वो मुझे अपने ऊपर खींचते हुए निचे लेटने लगी, में उसके ऊपर आ गया था, में उसके भरे हुए छोटे स्तन को दबाते हुए चूस रहा था, वो मेरा लुंड पकड़ कर अपनी छूट में घुसाने का प्रयास करने लगी, जब मुझे एहसास हुआ की लुंड छूट के छेड़ पर है तो मेने लुंड दबा दिया, गर्म छोटी सी छूट में लुंड फिर से अंदर उतरने laga)Shhhhhhhhh शीइइइइइइइव. (मेने उसको देखा तो उसके चेहरे पर कामुकता भरी हुई थी, लुंड आधा अंदर घुस गया था, में रुक गया, वो अपनी कमर हिलने lagi)Shhhhhhh छोड़ो शिव शह्ह्ह्ह मुझे ये बहोत अच्छा लग रहा है वह. Shhhhhh(Wo गर्म सिसकिया ले रही थी)

शिव : तुम्हारे पीरियड्स कब है?

विणा : कल परसो में आ जायेंगे, क्यों?

शिव : कुछ नहीं. (में लुंड को अंदर बहार करने लगा, लुंड पूरा कास के अंदर बहार हो रहा था, उसकी छूट अंदर से बहोत कड़क थी, मेरे लुंड को बहोत घरसँ महसूस हो रहा था, में एक ले में धक्के मरने लगा)

विणा : शहहहहह कितना मज़ा आता है शिव शह्ह्ह्हह्ह और जोर से करो शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह शहहहहह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह.

शिव : दर्द तो नहीं हो रहा न?

विणा : नहीं शह्ह्ह्ह मज़ा आ रहा है शिईयिव शह्ह्ह्ह अंदर बहोत कुछ हो रहा है मुझे शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : कहा हो रहा है?

विणा : (खुमारी me)Shhhhh अंदर हो रहा है. (उसने अपनी आंखे बंद करते हुए कहा)

शिव : अंदर कहा?

विणा : (उसने मेरी और dekha)Pata नहीं, अंदर कही शह्ह्हह्ह्ह्ह कुछ हो रहा है शह्ह्ह्ह.

शिव : किसके अंदर? (मेने तेज धक्के लगते हुए पूछा)

विणा : (उसने शिव की आँखों में देखा, वो समाज गयी की शिव क्या पूछ रहा है, वो शर्मा गयी और शिव को अपनी और खिच्च कर उस से लिपट गयी और मुस्कुराने lagi)Gande, शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह (मोटा लुंड अंदर बबहार हो रहा था, जो उसको बहोत अच्छा लग रहा था, ऊपर से वो पूरी गर्म थी, वो शिव के कान को काटने lagi)Shhhhhhh मेरी छूट मेष्ठ्हहहहहह. (मेने उसे देखा और मुस्कुराया तो वो शर्मा गयी, में धक्के जोर जोर से लगाने laga)(Vina समाज रही थी की ऐसी बातो से शिव और उत्तेजित हो रहा है, उसे भी मज़ा आ रहा था, भले दर हो रहा था पर उसे दर्द की परवाह नहीं थी, उसको तो जो खुसी मिल रही थी वो ज्यादा अछ्छी लग रही thi)Shhhhhhh मेरी छूट में शिव श तुम्हारा लुंड बहोत प्यारा है शहहह अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह माआआ shhhhhhhh(Shiv तेजी से छोड़ने लगा tha)Shhhhhh अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह ऐसे hi छोड़ो शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह बहोत अच्छा लग रहा है शहहहहह आअह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह. (वो फिर झाड़नेके कगार पर हो गयी थी , पर मेरा अभी नहीं हुआ था क्यों की पहले hi में रंजन को छोड़ चूका tha)Ahhhhh शह्ह्हह्ह्ह्ह शीइइइइइ शह्ह्ह्हह्ह. (मेने उसको पलट दिया और उल्टा लेता दिया, थोड़े पेअर फैला कर फिर से लुंड छूट में दाल diya)Ahhhhhh माआ शहहहहह ahhhhhhh(Uske नरम नरम कूल्हों के एहसास से में और जोर से धक्के लगाने laga)Shhhhh अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ahhhhhh(Vina कराह रही थी पर ये दर्द उसको और मज़ा देरहा tha)Ahhhhh अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह ahhhhhhh(Wo अपने होठो को दांतो से दबा रही थी, उसके चेहरे पर अजीब से भाव आ गए थे, दर और मज़े के मिले जुले भाव )शहहहहह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह (लुंड उसकी छोटी सी छूट को खोल रहा था वो बस उसे महसूस कर रही थी, और धक्को से हिल रही थी, उस से बर्दास्त नहीं हुआ और वो झड़ने lagi)Ahhhhhh shiiiiiiiiiiv shhhhhhhhhhhh (उसने चद्दर को जोर से पकड़ लिया और अपनी कमर बिस्तर पर दबाते हुए झड़ने लगी, शिव के धक्के चालू hi थे, उसे लग रहा था शिव आज उसकी जान hi ले लेगा, पर उसको वो भी मज़ा दे रहा था, वो आज पूरी तरह से तृप्त हो जाना चाहती थी, ये उसकी जिंदगी की पहली रात थी, वो अपने पसंदीदा मर्द से चुद रही थी, वो पशीने से भीगी हुई थी, उसके कूल्हों पर थप थप की आवाजे हो रही थी, शिव ने उसे अपने निचे दबोचा हुआ था, वो पूरी तरह उसके काबू में थी, पर वो यही तो चाहती थी, उसकी छूट को फैट hi चुकी थी, मोटा लुंड उसे और फाड् रहा था, थप थप की आवाजे कमरे में गूंज रही थी, रंजन ये सब देख कर बहोत गर्म हो गयी थी, वो भी अपनी छूट में ऊँगली कर रही थी, शिव ने अपना लुंड बहार निकला और विणा को घोड़ी बना दिया और फिर से लुंड अंदर दाल दिया, बिस्तर पर शिर टिकाये विणा अपनी कुटाई करवाने लगी, उसके नरम नरम कूल्हे थिरक रहे थे, और लुंड उसकी छूट को फैलते हुए अंदर बहार हो रहा tha)Ahhhh अह्ह्ह्ह शहहहहह शीइइइइव शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह. (10 मिनट तक शिव ने उसको घोड़ी बना कर छोड़ा, रंजन को भी विणा की दया आ रही थी, वो कराह रही थी, उसका हल बेहाल था पर वो शिव को और छोड़ने के लिए कह रही थी, वो समाज सकती थी की उसे कितना मज़ा आ रहा होगा, वो उसके मज़े में खलेल नहीं डालना चाहती थी पर उसने सोच लिया था की वो एक दिन उसके साथ में hi छुड़ेगी)

शिव : (उसके कूल्हे मसलते हुए में उस छोटे से छेड़ को छोड़ रहा था, में ध्यान रख रहा था की पूरा लुंड अंदर न दाल दू, मान तो बहोत कर रहा था, पर में जनता था की उसकी क्या हालत होगी, तो में ऐसे hi उसे छोड़ रहा था, फिर मेने उसे सीधे लेता दिया, मेने उसको देखा तो वो बेहाल थी पर न वो मुझे रोक रही थी न कुछ कह रही थी, बाल पशीने से भीग कर चिपक गए थे, मेने एक पल उसे देखा तो उसने भी मुझे देखा, उसने अपने पेअर फैला दिए और अपनी छूट के होठो को भी फैला दिया, वो पूरी तरह से समर्पित थी, मेने फिर से लुंड छूट में उतर दिया, उसने मुझे अपनी और खिंच liya)Tum ठीक तो हो न?

विणा : मेरी फ़िक्र मात करो शिव, मुझे बहोत मज़ा आ रहा है, तुम्हे जो करना है करो शहहहहह में नहीं रोकूंगी.

शिव : पागल हो क्या?

विणा : जो समझना हिअ संजो, बस मुझे जी भर के प्यार करो, मुझे तुम्हारा प्यार चाहिए, और कुछ नहीं. (वो मेरे गले और कंधे को चूमने लगी, में धक्के लगाने लगा, उसके पेअर हवा में उठे हुए the)Shhhhh अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्शह्ह्ह्ह और छोड़ो शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह में फिर से झाड़नेवाली हु सीईव शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह तुम बहोत अच्छे हो शहहहहह अह्ह्ह्हह, मुझे बहोत मज़ा आ रहा है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : मेरा भी होनेवाला है.

विणा : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह झाड़ जाओ तुम भी शहहह अह्ह्ह्हह, मेरे साथ तुम्हे अच्छा लग रहा है न शिव?

शिव : है, बहोत अच्छा.

विणा : मुझे भी शिव, तुम मुझे फिर से करोगे न?

शिव : है करूँगा.

विणा : जब भी तुम्हारा मान कर मुझे बुला लेना शिव शहहहहह अह्ह्ह्हह में आ जाउंगी.

शिव : क्यों?

विणा : मुझे बहोत मज़ा आ रहा है शिव शहहह में बता नहीं सकती की में क्या महसूस कर रही हु शह्ह्ह्ह तुम्हारा वो बहोत मज़ा देता है शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह छोड़ो मुझे शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह जितना मरज़ीहो छोड़ो शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शहहहहह, में मन नहीं करुँगी तुम्हे शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ऐसे hi शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह. में झाड़नेवाली हु शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : (उसकी बातो से मेरा भी होनेवाला था )में भी.

विणा : अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह माआ शहहहहह में गयी शिईयिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह मुम्मीईईई अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह (मेने भी कुछ धक्को में अपना लावा उसकी छूट में छोड़ diya)Shhhhhhh शीइइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह (अपने अंदर गर्म गर्म तरल को महसूस करते hue)Bahot अच्छा लग रहा है शिईयिव, शह्ह्ह्हह्ह (वो पूरी तरह से शिव से चिपक गयी और अपनी कमर हिला कर लुंड से निकल रहे तरल को और निचोड़ने lagi)Shhhhhhh.

हु म दोनों बस ऐसे hi चिपके रहे, मेरे लुंड से निकल रहा लावा उसकी छूट में भर गया था. मेने उसे देखा

शिव : सचमे तुम्हारा एक दो दिन में पीरियड होनेवाला ह्हैई न?

Vina:Ha, क्यों बार बार पूछ रहे हो?

शिव : बस ऐसे hi.

विणा : (मुस्कुराते hue)Kuchh नहीं होगा, तुम फ़िक्र मात करो, में एक और विणा इस दुनिया में आने नहीं दूंगी.

शिव : क्या मतलब?

विणा : में मेरे बच्चे को अनाथ जन्म नहीं दूंगी.

शिव : मेरा वो मतलब नहीं था.

विणा: में बेवकूफ नहीं हु शिव, में सब समझती हु. अगर कभी मेरा बच्चा होगा तो वो अपने बाप के नाम के साथ आयेगा, तुम फ़िक्र मात करो.

शिव : अगर तुम सब समाज रही हो तो फिर ये सब क्यों किआ तुमने?

विणा : तो क्या बुरा किया मेने, क्या प्यार करना गुनाह है, में चाहती हु तुम्हे तो तुम्हारे साथ सब करुँगी, आगे का में नहीं सोचती, अभी बहोत समय है शिव, अभी मुझे अपने पैरो पर खड़ा होना है, उसके बाद में सोचूंगी.

शिव : तुम कहना चाहती हो की प्यार मुझसे करोगी और शादी किसी और से करोगी?

विणा : मेने ये कब कहा, भविस्य में क्या लिखा है क्या पता, अभी जो है वो वर्तमान है, और में तुम्हारे साथ खुस हु, चाहे जिस भी हल में हु, मुझे अपनी जिंदगी से कोई गिला नहीं है, पहले में डर्टी थी पर अब नहीं डर्टी, तुम जो हो मेरे साथ.

शिव : और अगर में तुम्हारे साथ न राहु तो?

विणा : (मुस्कुराते hue)Muje पता है तुम ऐसा क्यों कह रहे हो, मेने कहा न की भविष्य के गर्भ में क्या छुपा है क्या पता, आज सोच के क्यों दुखी होना, और में तुमसे भी यही कहूँगी, क्यों इतना सोचना, तुमने मुझे तो कोई धोखा नहीं दिया, न मेरा फायदा उठाया है, मेने जो किआ अपनी मर्जी से किआ, फिर तुम क्यों अफ़सोस करोगे, क्या मुझे नहीं पता की मुझे अपनी जिंदगी में क्या करना है, तुम क्या समझते हो की हम लड़कीअ पागल होती है क्या, सब समझती है, इसलिए कह रही हु की ज्यादा सोचा मात करो, मुझे तुम्हारा साथ अच्छा लगा तो में आ गयी तुम्हारे साथ, अगर तुम्हे भी मेरा साथ अच्छा लगता है तो आ जाना. वार्ना में संजुगी की तुम मेरी किस्मत में hi नहीं थे.

शिव : मतलब छोड़ डौगी मुझे?

विणा : पता नहीं, कहा न क्यों सोचते हो इतना, न में कही जा रही न तुम कही जा रहे हो, फिर ककययु वो सोचना जो पता hi नहीं है. (में उसके ऊपर से उठने लगा तो उसने मुझे फिर पकड़ liya)Thodi देर रहो न ऐसे hi, में तुम्हे अपने बहोत करीब मेहसूस कर रही हु, उसने मुस्कुरा के kaha)(Me थोड़ी देर वैसे hi रहा, वो मुझे किश करने लगी, उसके नरम स्तन का एहसास होते hi मेरे लुंड में अकड़न आणि सुरु हो गयी, मेने अपने आपको संभाला और उस से अलग हुआ, उसने मुझे नाराजगी से dekha)Kya हुआ?

शिव : अगर ऐसा hi करोगी तो फिर से... (विणा समाज गयी, वो शर्मा गयी पर अब उसमे भी हिम्मत नहीं थी तो वो रुक गयी, में उसके ऊपर से उठा और लुंड को बहार निकला, लुंड के साथ लाल वीर्य बहार निकलने लगा, में थोड़ी देर देखता रहा पर मुझे और खून निकलता नहीं दिखाई दिया, घाव भर चुके थे, में संतुस्ट था)

विणा : सब ठीक है? (ऐसे पानी छूट को देखते देख उसे शर्म आ रही थी पर वो hi था जो उसके इस निजी अंग को देख शक्ति था)

शिव : है, में तुम्हे पैन किलर देता हु.

विणा : मुझे बाथरूम जाना है शिव.

शिव : में तुम्हे ले चलता हु. (मेने उसे कपडे पहन ने में मदद की, फिर उसे उठाने लगा तो उसको दर्द महसूस हुआ)

विणा : अह्ह्ह्हह.

शिव : मेने कहा न तुम्हे.

विणा : तो क्या हुआ, ये दर्द तो चला जायेगा शिव. (उसने प्यार से कहा)

शिव : में तुम्हे ले चलता हु (कहते हुए मेने उसे उठा लिया, बहार सब शांत था, में उसे बाथरूम ले गया, उसने अपनी कापरी निचे खिसकायी, उसके कूल्हे फिर मेरे सामने आ गए, मेरा हाथ पकड़ कर वो आहिस्ता से निचे बैठगयी, वो थोड़ी करहि, में बहार जाना चाहता था पर उसने मेरा हाथ पकड़ा हुआ था, शायद उसे बैठने में दर्द हो रहा था, उसने मूतना सुरु कर दिया, उसकी सिटी की आवाज मुझे जोर से आयी और मूत की गंध बाथरूम में फ़ैल गयी, जब उसने मूत लिया तो मेने उसे सहारा देकर खड़ा किआ और उसकी काप्री ऊपर कर दी, वो मुझे देख कर मुस्कुराने लगी और शर्मा भी रही थी)

विणा : तुम्हे नहीं करनी?

शिव : में बाद में आता हु.

विणा : (शरमाते hue)Muje देख रहे थे और अब शर्मा रहे हो. (दरअसल वो उसे देखना चाहती थी, उसे भी ऐसा नजारा देखना था, और शिव ने उसकी इच्छा पूरी कर दी, वो अपने लुंड को बहार निकल कर मूतने लगा, विणा ध्यान से देख रही थी, लड़के ऐसे खड़े खड़े hi करते है ये उसे पता था, पर इतने नजदीक से वो पहलीबार देख रही थी, करने के बाद शिव ने अपने लुंड को हिलाया, वो शिव को देखने lagi,,,,wo मुस्कुराया तो वो शर्मा गयी)

शिव : देख लिया?

विणा : तुमने देखा तो मेने कुछ कहा ? और पहले भी बहार खड़े रह कर सब सुनते थे तो मेने कुछ कहा क्या? (वो मुस्कुराने लगी, में भी muskuraya)Ab चलो, कोई जाग न जाये. (में उसे उठा कर फिर से रूम में ले गया, किचन से पानी ला कर उसको गोली di)Mere साथ hi सो जाओ न. (उसने प्यार से कहा तो में वही सो गया, सुबह जब उठा तो रंजन भी हमारे साथ में hi थी, वो एक और से चिपकी थी और विणा दूसरी और se,mene दोनों को हटाया और उठ गया, फ्रेस हो कर में बहार जा रहा था की बिना मैडम बहार आती दिखाई दी )

शिव : क्या हुआ मैडम?

बिना : (शिव को देख कर थोड़ा जुझाक gayi)K कुछ नहीं.

शिव : कहा जा रही है, मुझसे कहिये में ले आता हु.

बिना : मजे hi जाना hoga.(Usne शरमाते हुए कहा)

शिव : अरे में ले आता हु न, आप कहिये तो क्या चाहिए.

बिना : (धीमी आवाज में शरमाते hue)Bathroom जाना है बुद्धू, जा आओगे मेरे बदले? (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : (में भी झेप गया और मुस्कुराने laga)Nahi, वो तो आपको hi जाना होगा, किसी को उठा दू?

बिना : नहीं, सब ठीक है, में चली jaungi.(Usko बहोत शर्म आ रही थी साथ में अच्छा भी लग रहा था की वो शिव के इतने करीब है की वो उस से ऐसी भी बाटे कर शक्ति hai)Tum प्रैक्टिस पर जा रहे हो?

शिव : है.

बिना : ठीक है. (में वह से निकल गया, बिना बाथरूम में गयी, टॉयलेट करने के बाद अपने साथ छुपा कर लायी हुई तुबे को उसने अपने गुदा के अंदर लगाया, उसके चेरहे पर शर्म के साथ मुस्कान भी आ गयी, अब सब ठीक था, पर एहतियात के तौर पर वो लगा रही थी, वो शिव को याद कर रही थी, कैसे वो उसके साथ अपने आपको रोक नहीं पति थी ये सोच कर उसको शर्म आने लगी, फिर वो बहार आ गयी, उसकी सास भी उठ गयी थी)

निर्मलादेवी : क्या हुआ बहु, कहा गयी थी, मुझे उठा देती.

बिना : फ्रेस होने गयी थी, अब ठीक हु में, आप फ़िक्र मात कीजिये.

निर्मलादेवी : कैसे फ़िक्र न करू बेटी, इतने सालो बाद तो ये खुसी मिली है, मेरा तो मान hi नहीं कर रहा था तुजे यहाँ अकेले छोड़ने का, पर देखा मेने सब कैसे तेरा ख्याल रखते है, शायद इतना ख्याल तो में भी न रख पति. (उसने बहोत प्यार से कहा) तूने शिव को बताया है ये सब?

बिना : क्या माजी?

निर्मलादेवी : क्या बताएगी तू भी, पर ये समाज में नहीं आ रहा बहु, क्या ये वो हो सकता है? सच कहु तो ये सोच कर hi दिल में एक अजीब सी खुसी मिल रही है, खास ये वही लड़का हो, दिल से एक बोझ उतर जायेगा, जब भी चन्द्रिका को देखती हु तो एक दर्द उभर आता है, उस माँ ने कितना सहा होगा जो वो अपने hi कुल को श्राप दे बैठी, आज कल के समय में ये बात गले भी नहीं उतरती पर जब सब देखती हु तो एहसास होता है की उसकी कही बात सही हो रही है. क्या तू माँ बन ने से पहले hi शिव को जानती है?

बिना : (इस सवाल से वो थोड़ा हिल गयी, पर अपने आपको सँभालते hue)Ha माजी, वो मेरे क्लास में hi पढता है तो जानती तो होउंगी hi. वो अच्छा लड़का है, कई बार वो मेरी मदद भी करता है, मेरे वह पढ़ने भी आता था.

निर्मलादेवी : शायद यही वजह हो सकती है की तुम्हे ये खुसी मिली है और उस माँ के श्राप से आज़ादी मिले है तुम्हे. मुझे लग रहा है बहु की ये शिवांस hi है, मेरा दिल कह रहा है, उसे देख कर पता नहीं दिल में ममता जाग जाती है, बचपन में वो मेरी गॉड में कितना खेला है.

बिना : हम इतने यकीनी तौर पर नहीं कह सकते माजी, और आपको क्या लगता है की बड़े ताऊजी इस बात को मान लेंगे?

निर्मलादेवी : वो क्यों मानेंगे, अगर मान लिया तो उनको दौलत लौटानी पड़ेगी. (उन्होंने अपना मुँह टेढ़ा करते हुए kaha)Pata नहीं इतनी दौलत होने के बावजूद ऐसी क्या दौलत की भूख.

बिना : में एक बार ठीक हो जाऊ फिर इस गुत्थी को सुलझाने का प्रयास करती हु.

निर्मलादेवी : तू ध्यान रखना बेटी, तू जानती है पहले भी खुनी खेल खेला जा चूका है, में नहीं चाहती की तुम्हे कुछ झेलना पड़े. में तुम्हारे बाबूजी से बात करती हु, वो अपने तरीके से छानबीन करेंगे. तू अभी अपना ध्यान रख.

बात वह रुक गयी थी, वही दूसरी और स्वर्ण तैयार हो कर सुआबाह के काम में लग गयी थी, कृपाली भी तैयार हो कर आ गयी थी, वो भी अपनी बहन की मदद करने लगी, आज उन्हें डॉक्टर के पास जाना था.

कृपाली : जीजाजी आ रहे है दीदी?

स्वर्ण : उनका क्या काम है, और वैसे भी उनकी मीटिंग है, हम दोनों चले जायेंगे न?

कृपाली : मुझे बहोत दर लग रहा है दीदी, सब ठीक होगा न?

स्वर्ण : तू फ़िक्र मात कर सब ठीक हो जायेगा. (तभी वैस्वी भी वह तैयार हो कर आ गयी)

वैस्वी : गुड मॉर्निंग भाभी, गुड मॉर्निंग दीदी. (उसने दोनों को विश किया)

स्वर्ण : हो गयी तैयार, नास्ता कर ले स्कूल के लिए लेट हो जाएगी.

वैस्वी : टिफ़िन में क्या दे रही हो भाभी?

स्वर्ण : पराठे बनाये है.

वैस्वी : वाओ! भाभी, थोड़े ज्यादा रखना, शिव को भी बहोत पसंद है.

स्वर्ण : (मुस्कुराते hue)Janti हु.

कृपाली: (धीमे se)Ye अनाथलेवाले शिव की बात कर रहियी है?

स्वर्ण : है.

कृपाली : लगता है वो लका कोई जादू वगैरह जनता है (उसने मुँह टेढ़ा करते हुए कहा)

स्वर्ण : ऐसा क्यों कह रही हो, वो अच्छा लड़का है, और वैस्वी के साथ पड़ता है तो उसका फ्रेंड है.

कृपाली : ऐसे लड़के से दोस्ती, समाज नहीं आता, आज कल की लड़कीओ का कोई स्टैण्डर्ड hi नहीं रह गया लगता है.

स्वर्ण : ये किस तरह की बात कर रही हो तुम?

कृपाली : में तो वही कह रही हु जो सच है, कहा वो बिन माँ बाप का लड़का, और कहा तुम्हारी नानन्द, उसको अपने परिवार की इज्जत का जरा भी ख्याल नहीं जो ऐसे लड़के से दोस्ती की है. कुछ स्टैण्डर्ड तो देखती.

स्वर्ण : पता नहीं तुम्हारी क्या प्रॉब्लम है, में जानती हु उससे वो बहोत काबिल लड़का है.

कृपाली : आपक तो अच्छ hi लगेगा (उसने फिर टॉन्ट मारा)

स्वर्ण : तुम और तुम्हारे ये ख़यालात, समाज नहीं आता क्या जवाब दू तुम्हे. तुम भी नास्ता कर लो फिर हमे हॉस्पिटल भी जाना है. (कृपाली भी नास्ता करने बेथ गयी, वैस्वी वह से चली गयी)

करीब 11 बजे कृपाली और स्वर्ण हॉस्पिटल गयी, ये वही हॉस्पिटल था जहा स्वर्ण की दवाई चल रही थी. कृपाली का केस निकलवाकर दोनों वेटिंग में बेथ गयी, जब उनका नंबर आया तो दोनों डॉक्टर से मिली, वो एक लेडी डॉक्टर hi थी. वो स्वर्ण को पहचानती थी.

डॉक्टर : आइये मरस. स्वर्ण, काफी जल्दी आ गयी, कहिये क्या प्रॉब्लम हो गयी?

स्वर्ण : मुझे कोई दिक्कत नहीं है डॉक्टर, ये मेरी छोटी बहन है, कृपाली, इसके लिए आये है.

डॉक्टर : कहिये.

स्वर्ण: इसकी शादी को तीन चार साल हो गए है, पर अभी तक माँ नहीं बन पायी.

डॉक्टर : इनके हस्बैंड साथ नहीं आये?

स्वर्ण : नहीं अभी तो नहीं आये है.

डॉक्टर : बच्चा न होने के कई कारन हो सकते है, कभी कभी उसके लिए पुरुष भी जिम्मेदार होता है, अगर सही से बताना हो तो मुझे दोनों की जांच करनी होगी.

स्वर्ण : में समझती हु डॉक्टर, अभी फिलहाल आप इसकी जांच कर ले, फिर देखते है.

डॉक्टर : में समझती हु आपकी बात, अक्सर हमारे वह ऐसे hi केस आते है, मर्द कभी अपनी गलती स्वीकार नहीं करता, सारा दोष वो औरत पर hi डालता है. ठीक है आइए में जांच करलेती हु. (एक नर्स ko)Inhe अंदर ले जा कर तैयार करो. (कृपाली पहली बार hi किसी गिनेस के पास आयी थी तो थोड़ी दर रही थी, वो स्वर्ण के सामने देखने lagi)Darti क्यों है, हम सब औरते hi तो है.

कृपाली को समाज आ गया की जाना तो होगा है, वैसे भी उसको hi बच्चा चाहिए थे, वो अंदर गयी, जहा चार पांच नर्स थी, उसने देखा की कुछ औरते वह लेती हुई थी, परदे के पीछे थी पर फिर उसको दिख गया की वो निचे से नंगी थी और अपने पेअर फैलाकर लेती हुई थी, उसको एक झटका लगा, उसने कभी इस तरह की परिस्थिति देखि नहीं थी, वो हिचकिचाने लगी.

नर्स : आप यहाँ लेट जाइये, अपनी पंतय निकल दीजिये. (कृपाली जो की साड़ी hi पहने हुई थी, उसको शॉक सा लगा, उसने नर्स को देखा, नर्स इस तरह के व्यव्हार की आदि thi)Jyada सोचिये मात, जल्दी कीजिये, बहार कई औरते इंतजार कर रही है. (कृपाली को लगा की अब और कोई चारा नहीं है तो उसने अपनी पंतय निकली और साइड में रख दी और ऐसे hi लेट गयी, उसने साड़ी ऊपर नहीं की थी, थोड़ी देर में नर्स वापस aayi)Are अभी तक ऐसे hi लेती है आप, साड़ी ऊपर कीजिये (कृपाली हिचकिचा रही थी, नर्स ने hi उसकी साड़ी ऊपर कर दी )औरते hi है यहाँ, लोग तो मर्द गिनेस के पास भी नंगी हो जाती है, और ये क्या, इतने बाल है यहाँ. (उसने छूट को देखते हुए कहा, कृपाली को बहोत शर्म आ रही थी, एक तो पहलीबार अपने पति के अलावा वो किसी और के सामने ऐसी अवस्था में थी. वो कुछ नहीं बोली, नर्स फिर बहार चली गयी और अपने साथ कुछ सामान लेकर वापस आयी, उसके हाथ में रेजर देख कर कृपाली बेथ गयी और अपनी छूट को धक् liya)Aap कड़ी क्यों हो गयी, लेट जाइये, वर्ण डॉक्टर गुस्सा करेगी, लेट जाइये जल्दी. (कृपाली को बहोत शर्म आ रही थी, पर वो लेट gayi)Saree ऊपर करो (कृपाली ने खुद hi साड़ी ऊपर कर दी, नर्स वह झांटो पर क्रीम लगाने लगी, कृपाली को इतनी शर्म आ रही थी की उसने अपना मुँह दूसरी और कर लिया, पर जब नर्स ने रेजर लगाया तो वो हड़बड़ा gayi)Sidhi लेते रहिये वर्ण आप को लग जाएगी, समाज नहीं आता की घर से सब साफ़ कर के आना चाहिए. ये पहलीबार है इस लिए में कर रही हु, समाज रही है न, अगली बार से जब भी आना हो घर से hi सब साफ़ कर के आना. (कृपाली ने हां में शिर हिलाया, वो अपना काम करने लगी, कृपाली को बहोत दर लग रहा था की कही उसको ब्लेड लग न जाये, पर वो करती भी क्या, वो लेती रही, और नर्स ने अपना काम कर दिया, थोड़ी देर बाद डॉक्टर आयी, उसने छूट को देखा, फिर ग्लोब्स पहन लिए, और छूट के अंदर ऊँगली दाल दी, कृपाली ऊपर को होने लगी)

डॉक्टर : सीधी लेते रहिये. (कृपाली मान मर कर लेती रही, डॉक्टर अंदर ऊँगली घुमा कर सब चेक करने लगी, वो क्या चेक कर रही थी ये भी कृपाली नहीं पूछ पायी, वो बस लेती रही, फिर डॉक्टर ने इसरा किया तो नर्स ने छूट के ऊपर के भाग पर पेट की तरफ जेल लगाया, डॉक्टर ने सोनोग्राफी मशीन की मदद से वह सब चेक करने लगी, फिर साड़ी थोड़ी और ऊपर करवाई, और फिर चेक करने लगी, थोड़ी देर बाद वो सब चेक कर के चली गयी, नर्स ने एक कोटों की मदद से सब साफ़ किया और कृपाली को उठने को बोलै, वो बेचारी सेहमी सी उठ गयी.)

नर्स : पंतय पहन लीजिये, और इतना क्या डर्टी हो आप, ये सब रूटीन चेकउप होता है, हर जगह करवाना पड़ता है. आदत दाल लीजिये. (कृपाली कुछ नहीं बोली और अपनी पंतय पहन ली और बहार आ गयी)

डॉक्टर : उऋण टेस्ट और ब्लड टेस्ट भी करवाना है, आप अपना उऋण दे दीजिये, थोड़ी देर में आपका ब्लड सैंपल भी ले लिया जायेगा.

स्वर्ण : क्या लगता है आपको?

डॉक्टर : (मुस्कुराते hue)Hum जादूगर नहीं है, डॉक्टर है, सब जाँच करने के बाद hi बता पाऊँगी, वैसे तो सब ठीक hi लग रहा है, तुबे भी खुली हुई है, देखते है. आपको लास्ट तीन महीने में पीरियड्स कब आये थे, डेट याद है? (कृपाली ने है कहा और डेट्स लिखवाडिये) वैसे आपको पता है न की अगर बच्चा प्लानिंग कर रहे हो तो कोनसे दिनों में आपको सेक्स करना है. (कृपाली थोड़ी शर्मा गयी, उसने नज़ारे झुका ली, डॉक्टर muskurayi)Isme शरमानेवाली क्या बात है, तुम्हारी बहन प्रेग्नेंट है तो क्या बिना सेक्स किये प्रेग्नेंट हो गयी. (स्वर्ण अब थोड़ी आदि हो गयी थी, पर अपनी hi बहिन के सामने ऐसी बात से वो भी थोड़ी शर्मिंदा हो गयी, पर जो हकीकत है वो हकीकत hi है. डॉक्टर ने फिर उसे समय बताया की कब कब उन्हें अपने पति के साथ सेक्स करना है जिस से सम्भावनाये बढ़ जाये, फिर उन्होंने कुछ दवाइया भी लिख di)Ye विटामिन और ऐसी hi कुछ दवाइया है, जिस से आपका शरीर बच्चे के लिए तैयार होगा, बाकि सब तो में रिपोर्ट आने के बाद hi बातपाउंगी.

स्वर्ण : जी डॉक्टर, थैंक यू. (डॉक्टर मुस्कुरायी, वो लोग बहार निकल गए, और फिर उऋण और ब्लड दे कर वो हॉस्पिटल से निकल गए, दोनों गाड़ी में बैठे हुए the)Dekh कप्पू, रिपोर्ट चाहे जो भी हो, अगर तुम में कोई प्रॉब्लम हो तो भी या तुम में प्रॉब्लम न हो तो भी, तुम अपने पति को यही बताना की तुम्हे कुछ पता नहीं है, डॉक्टर ने दवाइया दी है, समाज रही हो न.

कृपाली : ऐसा क्यों दीदी.

स्वर्ण : में जो कह रही हु करो न (थोड़ी नाराजगी से वो बोली, दरअसल उसके मान में सब चल रहा था, वो जानती थी की उनकी क्या परिस्थितिया है, भले hi वो आजके साइंस के युग में थी पर साइंस भी इन बातो को नहीं समाज प् रहा था, उसे यकीं होने लगा था की अगर कोई बच्चा पैदा कर पायेगा तो शिव hi है, पर वो कैसे अपनी बहन से ये सब कहे उसकी समाज में नहीं आ रहा था, इसलिए फ़िलहाल उसने बिच का रास्ता अपनाया था, क्यों की अगर वो ये कहे की वो ठीक है तो फिर बात उसके पति पर आ जाएगी और अगर उसके पति में कोई खोट निकली तो आगे चल कर कृपाली की मुस्किले बढ़ सकती थी, वो कैसे भी शिव और कृपाली को मिलवाना चाहती थी, पर उसको समाज नहीं आ रहा था की ये कैसे मुमकिन होगा, और जिस तरह से कृपाली शिव के बारेमे बोल रही थी उसको नहीं लग रहा था की इन दोनों का कोई मेल हो पायेगा, उसने सब उपरवाले के ऊपर छोड़ दिया था, वो दोनों घर आ गए, उसके चाचाजी निकलने के लिए तैयार थे)

आप तैयार क्यों हो गए, एक दो दिन रुक जाइये न.

प्रकाशराओ : मेने भी यही कहा पर ये मान hi नहीं रहे.

चंद्रभान : नहीं बेटी, हमे निकलना होगा. (चची भी वह आ गयी थी, प्रकाशराओ ने गाड़ी भिजवा कर उन बुलवालिया tha)Aur बेटी के वह तो पानी भी नहीं पिटे, पर अब हम इतना हो कर hi रहे है, पर ज्यादा रुकना सही नहीं है.

प्रकाशराओ : क्या आप भी पुरानेजमाने की बाटे करते है, हमे कोई एतराज नहीं अगर आप रुक रहे है तो. (उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा)

चंद्रभान : नहीं समधीजी, अब हमे आज्ञा दीजिये. (कृपाली ko)Tum कब तक आनेवाली हो?

कृपाली : में वह नहीं आउंगी, यही से सीधे घर चली जाउंगी.

चंद्रभान : जैसा तुम ठीक संजो. (ऐसे hi सब बात कर के वो दोनों वह से निकल गए, रस्ते में फिर से एक बार उन्दोनो की चर्चा हुई और वो शिव के बारे में बात करने लगे, निर्मलादेवी ने भी जो बाते बिना से हुई थी वो बताई) समाज नहीं आ रहा निम्मू, क्या ये मुमकिन हो सकता है?

निर्मलादेवी : ऊपरवाला क्या खेल खेलता है हम जैसे मनुस्य कहा समाज सकते है.

चंद्रभान : (अपने ड्राइवर se)Gadi क्सक्सक्स सहर ले लो.

निर्मलादेवी : वह क्यों?

चंद्रभान : सुखदेव जी से बात करते है.

निर्मलादेवी : आप भी क्या बात कर रहे है, अभी हमे hi कुछ समाज नहीं आ रहा, ऐसे अचानक हम कैसे ऐसी बात कर सकते है, और सोचिये की अगर वो न हुआ तो, आपको तो सब पता है, मुझे सही नहीं लग रहा अभी, बहु ने कहा है की वो सब अपने तरीके से बात करेगी, और फिर बड़ेभैसाहब का भी सोचना पड़ेगा न, अगर ये सच में वही है और भाईसाहब को पता चल गया तो आप जानते hi है की क्या हो सकता है.

चंद्रभान : सही कह रही हो तुम. (ड्राइवर ko)Ghar hi ले चलो. (उनकी गाड़ी अपने hi सहर की और निकल पड़ी)
 
अपडेट 193

स्कूल में हम सब बेथ कर नास्ता कर रहे थे, विस्वी आज पराठे लायी थी, स्वादिस्ट पराठे खा कर सब का दिल खुस हो गया था, फिर हम सब ऐसे hi बाटे करते रहे और क्लास में चले गए, बिना मैडम की गैर मौजूदगी में एक और टीचर को हमारे क्लास की जिम्मेदारी सौपी गयी थी. पर जिस तरह बिना मैडम पद्धति थी उस तरह से वो नहीं पढ़ा प् रही थी, सब बिना मैडम को मिस कर रहे थे. स्कूल से छूट ते वक़्त संयम मेरे साथ hi बेथ गयी, सबको bye बोलकर हम वह से निकल गए, वो बात करने के बहाने मुझसे सात कर बेथ गयी, मुझे अपनी पीठ पर उसके स्तन का स्पस्ट आभास हो रहा था, पर मेने ध्यान नहीं दिया, पर मुझे लग रहा था जैसे वो जानबुज कर मेरे पीठ पर अपने स्तन का दबाव दे रही थी. (ये सच hi था, संयम जानबुज कर अपने स्तन को शिव की पीठ पर दबा रही थी, उसके निप्पल भी तन गए थे उसको ऐसा करना बहोत अच्छा लग रहा था, ऐसा करते हुए उसके झांघो के बिच एक अजीब सी सरसराहट हो रही थी, वो मान hi मान मुस्कुरा रही थी, पर शिव को ऐसे दिखा रही थी जैसे उसको कुछ पता hi नहीं है, हम दोनों बात करते हुए उसके घर के नाके पर पहुंच गए, वो उतर गयी और bye कह कर मुस्कुराती हुई उछाल कूद करती हुई वह से घर की और निकल गयी, मेने उसके थिरकते कूल्हों को देखा और अपने लुंड को एडजस्ट किया जो उसके छूने से अकड़ने लगा था, आगे जा कर वो मुड़ी और मुझे देख कर मुस्कुरायी, और फिर से कूदती हुई गायब हो गयी, में वह से घर की और निकल गया, और संयम के बारे में hi सोच रहा था, में जितना उनलोगो को बचाना चाहता था उतना hi वो मुझे उकसा रही थी, में अपने बारे में तो जनता hi था, मुझे खुद समाज नहीं आ रहा था की आगे क्या करूँगा, न में लतादिदी को छोड़ सकता था न, भार्गवी मैडम को न किसी को, कुछ समाज में नहीं आ रहा था की आगे क्या करूँगा, ऐसे hi सोचते हुए में अपने घर पहुंच गया, सब थार पर hi थे, विणा और रंजन भी आज स्कूल नहीं गए थे, विणा की तबियत ख़राब है ऐसा सरितादिदी ने बताया था, में जनता था की किस वजह से ख़राब है, में अपने कपडे लेने मेरे कमरे में गया तो वह बिना मैडम को मिला, उनसे थोड़ी देर स्कूल की बात की, फिर कपडे ले कर बहार निकल गया, फ्रेस हुआ कपडे बदले और खाने बेथ गया, मेने देखा की एक लड़की गायत्रीदिदी के आस पास घूम रही थी, छोटी hi थी, करीब चार पांच साल की, मेने पहली बार उसे देखा था, गायत्री दीदी जब मेरी थाली देने आयी तो वो भी उनके साथ hi आ गए, मेने उसकी और देखा तो वो गायत्रीदिदी के पीछे चुप गयी.

शिव : कोण है ये? (मेने उस बच्ची की और मुस्कुराते हुए गायत्रीदिदी से पूछा)

गायत्रीदिदी : वो मदनजी की लड़की है, उनके सास ससुर यात्रा पर गए है तो इससे उनके पास छोड़ गए है, उनको नौकरी जाना होता है तो घर पर ये अकेली रह नहीं सकती तो में इससे अपने साथ ले आयी. (गायत्री ने थोड़ा झिझकते हुए कहा)

शिव: (मुस्कुराते hue)Achchha किया आपने, इतने बच्चो के साथ इसका भी मान लग jayega.Baki सब ठीक चल रहा है न?

गायत्री : (थोड़ा झिझकते hue)Ha. (और वह से चली गयी, मेरी समाज में नहीं आ रहा था की वो इतना क्यों झिझक रही है, पर मेने पूछा नहीं, रंजन अपना खाना ले कर विणा के साथ चली गयी थी, और लतादिदी बिना मैडम के लिए खाना ले गयी थी)

गायत्री को बहोत बुरा लग रहा था की वो कुछ शिव से छुपा रही है, पर वो कुछ बता कर शिव को परेशान करना नहीं चाहती थी, और वैसे भी वो अनाथ थी, आज तक अपनी साडी मुसीबते उसने खुद झेली थी, और ऐसी छोटी छोटी बातो के लिए वो शिव को परेशान नहीं करना चाहती थी, वो एक बार मदन से सेक्स कर चुकी थी, पर उसके बाद बार बार मदन उसको बोलते रहते थे पर उसने मन कर दिया था. कुछ दिन पहले की hi बात है, वो रिसेप्शन पर बैठी हुई थी और मदन ावः आ गए.

मदन : आखिर तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है? क्यों मुझे अवॉइड कर रही हो.

गायत्री : देखिये मदन जी में आपकी इज्जत करती हु, क्यों अपने आप को मेरी नजरो से गिरा रहे है, अगर आपको इतनी hi जरुरत है तो आपको शादी कर लेने चाहिए.

मदन : मेने बताया था न की ये में नहीं कर सकता.

गायत्री : इसका मतलब ये नहीं की आप अपनी जरुरत पूरी करने के लिए मेरा इस्तेमाल करे, उस दिन पता नहीं क्यों मुझे आप पर तरस आ गया तो मेने आप को इजाजत दे दी, पर अब नहीं, में ऐसा नहीं कर शक्ति.

मदन : पर प्रॉब्लम क्या है?

गायत्री : कोई प्रॉब्लम नहीं है? (उसने तीखे नैनो से मदन को देखा) आपको लगता होगा की ये तो वैस्य है, इसको क्या फर्क पड़ेगा, चाहे एक के साथ करे या दस के साथ.

मदन : मेने ऐसा तो नहीं कहा.

गायत्री : भले hi आप कह नहीं रहे, पर मतलब तो आपका यही है, वर्ण क्यों कहते की प्रॉब्लम क्या है, प्रॉब्लम है मुझे, क्या ये सब बस इतना hi होता है, की ...(कहते कहते वो रुक गयी, उसने गहरी सास li)App कभी समाज नहीं सकते, है मेरा भूतकाल वैसा रहा है, पर में वैसी नहीं हु, है औरो की तरह मुझे भी जरुरत होती है, पर मेने अपने आपको संभालना सिख लिया है, में ऐसी दलदल में दोबारा नहीं गिरना चाहती. सॉरी, और अगर आपने आगे फिर मेरे साथ ऐसी वैसी बात की तो में ये नौकरी छोड़ कर चली जाउंगी.

मदन : सॉरी, गायत्री, मेरा वो मतलब नहीं था, ठीक है, में आगे से तुम्हे परेशान नहीं करूँगा.

और फिर मदन ने उसे परेशान नहीं किआ, दो दिन पहले उनके साथ उनकी बेटी भी गयम आयी. जिया उनके साथ थी, वो उसे अपने साथ लिए घूम रहे थे, पर आखिर वो थक गयी और बहार बैठी थी, गायत्री ने ऐसे hi उसके साथ बात की तो उसे अच्छा लगा, वैसे भी वो बहोत प्यारी लड़की थी, गायत्री ने उसको अपने पास बुलाया, तो वो आ गयी, मदन ये सब अंदर से देख रहा था.

उस शाम जब फिर से वो उसको ले कर आया तो जिया सीधे गायत्री के पास चली गयी, मदन अपना काम करता रहा और जिया गायत्री के साथ खेलती रही. जब शाम को गयम ख़तम हुआ तो मदन वह आया

मदन : सॉरी, इसने ज्यादा परेशान तो नहीं किया.

गायत्री : (बिना मदन से नज़ारे milaye)Nahi, बहोत प्यारी है ये.

मदन : वो मेरे सास ससुर यात्रा पर गए है, वह भीड़ ज्यादा होती है तो इसको नहीं ले गए, कुछ दिन ये मेरे साथ hi रहेगी.

जिया : में आपके साथ hi रहूंगी पापा, मुझे वापस नहीं जाना.

मदन : (मुस्कुराते hue)Kyu? नाना नानी के साथ अच्छा नहीं लगता?

जिया : ऐसी बात नहीं है, पर मुझे आपके साथ रहना है.

मदन : तुम देख रही हो न बेटी, मुझे कैसे तुम्हे अपने साथ काम पर ले कर चलना पड़ता है, फिर तुम्हारा स्कूल भी सुरु हो जायेगा.

जिया : मुझे आपके पास hi रहना है (उसने रोनी सूरत बना कर कहा)

गायत्री : आप इसे अपने साथ ऑफिस भी ले जाते है?

मदन : अकेला भी तो नहीं छोड़ सकता न.

गायत्री : दिन में आप इसे मेरे साथ छोड़ सकते है, (जिया se)Kyu रहोगी न मेरे साथ? (जिया ने मुस्कुराते हुए है kaha)Tumhe पता है वह बहोत लड़के लड़किया है, और तुमसे भी छोटे छोटे बच्चे है. तुम्हे खेलने के लिए बहोत सरे दोस्त मिल जायेंगे.

जिया : सच्ची??? (अपने पापा की और देख kar)Papa में आंटी के साथ जाउंगी.

मदन : क्यों परेशान हो रही हो आप?

गायत्री : मुझे कोई परेशानी नहीं है, और वैसे भी वह सब है, इसे अकेला नहीं लगेगा. आप कल सुबह इसके कपडे साथ ले आना, में ख्याल रखलूँगी.

(और ऐसे आज जिया उसके साथ थी, वैसे तो कोई बात नहीं थी, पर उसको अच्छा नहीं लग रहा था की उसने मदन से सेक्स कर लिया था, उसने किसी के साथ ये सब नहीं करने को सोचा था, और वैसे भी शिव था, उसको जब भी जरुरत महसूस होती थी शिव उसका ख्याल रखता था, उसने फिर ये गलती न करने का मान बना लिया था) मेने खाना ख़तम किआ और बिना मैडम के पास गया, दीदी वही बैठी थी, मेने बिना मैडम से पूछ की कुछ चाहिए तो उन्होंने मुस्कुराते हुए न कहा, फिर में वह से विणा को मिलने चला गया, वो बिस्तर में बेथ कर hi खाना खा रही थी, मुझे देख कर वो शर्मगाई और अपनी नज़ारे झुका के खाना खाने लगी. पर रंजन नार्मल hi थी, मेने उस से बात की और फिर विणा को तबियत का पूछा, वो हिचकिचाते हुए जवाब दे रही थी, फिर में वह से बहार आ गया, थोड़ी देर में मैडम के साथ बैठा और आज क्या पढ़ाया वो बताने लगा, उन्होंने मुझे थोड़ा संजय, जो डाउट थे वो क्लियर हो गए. में साइट जाने के लिए निकला, में जा रहा था की रास्तेमे मुझे भार्गवी मैडम कही जाते हुए दिखी, में गाड़ी उनके पास ले गया, उनकी नजर मुझपर पड़ी तो उन्होंने अपनी गाड़ी साइड में रुकवाई और जीप से उतर कर मेरे पास आयी.

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Kis और?

शिव : साइट पर जा रहा था. (मेने भी मुस्कुरा के जवाब diya)Aap कहा जा रही है?

भार्गवी : हमे कहा चैन होता है, जा रही हु एक काम से कोर्ट की और. बिना कैसी है?

शिव : अच्छी है, उनके घर से भी मिलने आये थे, आज hi गए है.

भार्गवी : चलो अच्छा है, मुझे जाना है में फिर मिलती हु.

शिव : ठीक है. (वो निकल गयी, में साइट की और निकल गया, आज वह कुछ ज्यादा hi काम था, ज्यादा मजदूर भी थे, तो हम सब बिजी थे, जहान्वी को शिव से मिलाना था पर आज ऑफिस में भी हलचल ज्यादा थी, तो जिस तरह से वो मिलना चाहती थी उस तरह से मिल नहीं पायी, चार बजे के आस पास मुझे स्वर्णाभाभी का फ़ोन आया)

शिव : Hello.

स्वर्ण : में बोल रही हु. (उनका ऐसे कहने पर मुझे हसी आ गयी)

शिव : में जनता हु की आप बोल रही है, कहिये कैसे याद किया?

स्वर्ण : (वो भी मुस्कुरा रही thi)Kya कर रहे हो? मेरा मतलब है बिजी हो क्या?

शिव : नहीं कहिये न.

स्वर्ण : तुम घर आ सकते हो?

शिव : Ha,aa जाता हु, कोई काम था क्या?

स्वर्ण : तुम आओ में बताती हु.

शिव : ठीक है. (मेने जहान्वी को बताया की मुझे जाना है तो उसने मन नहीं किआ, दरअसल सब काम ख़तम हो गया था और अब मजदूर सब निपटा hi रहे थे, तो वो भी घर के लिए निकल गयी, में वैस्वी के घर पहुंच गया, में अंदर सोफे पर बैठा था की स्वर्णअभ्भी और उनकी बहन आयी)

स्वर्ण : सॉरी, तुम्हे डिस्टर्ब तो नहीं किआ न? (उन्होंने बहोत प्यार से कहा)

शिव : नहीं, स्टेडियम जाने में अभी थोड़ा टाइम है, कुछ काम था क्या?

स्वर्ण : (वो भी वही सोफे पर बेथ gayi)Darasal हॉस्पिटल जाना था, वह से रिपोर्ट्स लेन है, वो (उनके pati)late आनेवाले है तो तब तक हॉस्पिटल का समय ख़तम हो जायेगा, अगर तुम्हारे पास टाइम हो तो कृपाली को अपने साथ ले जाओगे. (मेने कृपालिजी की और देखा, वो बस ऐसे hi बैठी थी, उन्होंने मुझे देखा तक नहीं, उनको देख कर लग रहा था की उनको ये पसंद नहीं है, पर मुझे स्वर्णाभाभी बोल रही थी तो में मन तो कर नहीं सकता था, तो मेने है कह diya)Thank यू शिव, वो वैस्वी भी कही गयी है वर्ण में उसको hi भेज देती.

शिव : नहीं कोई बात नहीं, में चला जाऊंगा.

स्वर्ण : ये रेडी hi है.

हम दोनों वह से निकल गए, कृपाली बे मन से शिव की बाइक पर बेथ गयी, पर थोड़ी दुरी बना कर. इस बारे में उसकी अपनीब्याहें से दोपहर में hi बात हुई thi,usne बहोत मन किया था पर उसकी दीदी नहीं मणि. दरअसल स्वर्ण भी उसे अपने यहाँ के ड्राइवर के साथ भेज सकती थी, पर वो चाहती थी की शिव के साथ hi जाये ताकि इस बहाने वो एक दूसरे को थोड़ा जाने, क्यों की उसको कही न कही लग रहा था की यही रास्ता है उसका माँ बन ने का, वो सीधे तौर पर तो नहीं बता सकती थी तो उसने ये रास्ता अपनाया था, कृपाली को ये बिलकुल पसंद नहीं था, वैसे भी वो शिव को जानती नहीं थी और सबके ज्यादा भाव देने से वो कही न कही थोड़ी चिढ़ती भी थी शिव से. पर उसकी बहन ने उसको जबरदस्ती उसके साथ भेज दिया था. वो दुरी बना कर बैठी थी पर रस्ते में एक कुत्ता अचानक बीचमे आ गया तो शिव ने ब्रेक लगाडी जिस से वो जा कर उसकी पीठ से टकरा गयी.

कृपाली : (गुस्से se)Jhahil कही के, चलना नहीं आता क्या?

शिव : सॉरी, वो कुत्ता...

कृपाली : ध्यान से चलाओ. (नाराजगी से कहते हुए वो फिर थोड़ी पीछे हो गए, उसको अपने स्तन पर दर्द हो गया था क्यों की वो थोड़ा जोर से टकराई थी, उसने मुँह टेढ़ा किआ और अपने स्तन को हलके से dabaya,ye दर्द की वजह से किया था उसने)

मेने फिर स्पीड काम hi रक्खी, हम दोनों हॉस्पिटल पहुंच गए, मेने बाइक पार्क की, वो हॉस्पिटल में गयी, में थोड़ी दुरी बना कर उनके पीछे hi था, वो रिसेप्शन पर गयी, वह उन्होंने कुछ बात की, थोड़ी देर उस रिसेप्शनिस्ट ने यहाँ वह कुछ ढूंढा और उनको एक फाइल दी, में बस ऐसे hi इधर उधर देख रहा था. हम फाइल ले कर वह से निकल गए, हम रस्ते में थे की जूही का फ़ोन आया. मेने बाइक साइड में की और फ़ोन उठाया.

जूही : (डट ते hue)Kaha रह गए?

शिव : बस आ रहा हु थोड़ी देर में.

जूही : क्या थोड़ी देर में, कितना टाइम हुआ है पता है?

शिव : आ रहा हु मेरी माँ, कुछ अर्जेंट काम था तो आना पड़ा, अब बात कर के ज्यादा टाइम तुम ख़राब कर रही हो.

जूही : ठीक है जल्दी आओ. (मेने फ़ोन वापस जेब में रक्खा और बाइक चला दी)

कृपाली : (मान me)Kisi लड़की का फ़ोन था, बात तो ऐसे कर रहा था जैसे उसकी कोई खास थी, शायद वो उसे डाट रही थी, लगता है कुछ अर्जेन्ट था, पर फिर भी दीदी के कहने पर वो आ गया यहाँ.

हमदोनो उनके घर पहुंच गए, मेने दरवाजे पर बाइक रोकी hi थी की वैस्वी भी आ गयी.

वैस्वी : Hi शिव, तुम यहाँ?

शिव : वो भाभी ने बुलाया था तो आना पड़ा. (तब तक दरबान ने गेट खोल दिया था तो हम अंदर गए, मेने बाइक दरवाजे के पास hi रोकी, कृपाली उतर गयी, बाइक की आवाज सुन कर स्वर्ण भी बहार आयी. मेने बाइक चालू hi रक्खी थी)

स्वर्ण : बाइक बंद तो करो, आओ अंदर दूध बनती हु.

शिव : नहीं, मुझे प्रैक्टिस पर जाना है, जूही का फ़ोन भी आ गया, मुझे निकलना होगा.

स्वर्ण : (उसको और वैस्वी को शिव का पता था तो वो दोनों ने रोका नहीं) ठीक है, पर फिर आना.

शिव : जी (फिर में सबको bye बोल कर वह से निकल गया)

स्वर्ण : (कृपाली se)Le आयी रिपोर्ट? डॉक्टर ने कुछ कहा?

कृपाली : वो ऑपरेशन में बिजी थी, कल मिलने को बोलै है. (वैस्वी सब सुन रही थी)

वैस्वी : क्या हुआ भाभी?

स्वर्ण : कुछ नहीं हुआ है, बस जनरल चेकउप है. (वैस्वी अंदर चली गयी, और वो दोनों भी अंदर सोफे पर बेथ gayi)Koi दिक्कत तो नहीं हुई न?

कृपाली : (उसको शिव से टकराना याद आ गया, पर सँभालते हुए )नहीं, कोई दिक्कत नहीं हुई.

स्वर्ण : इसीलिए उसको भेजा था, वो बहोत काररिंग है, और भरोसा भी कर शकतेहै.

कृपाली : पर ये है कौन जो आप सब उसको इतना महत्व दे रही हो?

स्वर्ण : कहना क्या चाहती है तू?

कृपाली : है तो वो अनजान hi न, और ऊपर से अनाथ, ऐसे लड़के पर भरोसा करना आपको ठीक लग रहा है, मेरी तो समाज के बहार है.

स्वर्ण : (स्वर्ण को समाज नहीं aaya)Usne कुछ किया क्या?

कृपाली : वो क्या करेगा, उसका मुँह न तोड़ दू.

स्वर्ण : तुजे चीड़ किस बात की है उस से?

कृपाली :मुझे क्या लेने देना उस से, ये तो अपने कहा इस लिए उसके साथ चली गयी, वर्ण ऐसे लड़के को तो में अपने पास क्या घर में भी न फटकने दू. (स्वर्ण उसको देखने लगी, उसके चेहरे पर जैसे एक धृणा थी शिव के लिए, उसको समाज नहीं आ रहा था की ऐसा क्यों है)

स्वर्ण : पता नहीं क्या प्रॉब्लम है तेरी, उसको प्रैक्टिस पर जाना था पर फिर भी वो तुम्हारे लिए तुम्हारे साथ आया.

कृपाली : मेरे लिए नहीं, आपके कहने पर, और किस चीज की प्रैक्टिस पर जाना है जो इतनी इम्पोर्टेन्ट है.

स्वर्ण : तुजसे तो बात करना hi बेकार है, ऐसी तो बिलकुल नहीं थी तू, क्या हो गया है तुजे?

कृपाली :में जैसी थी वैसी hi हु, में नजाने जा रही हु. (कहते हुए वो अपने कमरे की और चली गयी)

स्वर्ण : (मान me)Kya होगा इस लड़की का, शायद माँ न बन पाने की वजह से और अपने घरवालों के व्यव्हार की वजह से थोड़ी चीड़ छिड़ी हो गयी है, क्या करू कुछ समाज नहीं आ raha,bhagwan करे की सिर्फ दवाइओ से hi वो माँ बन जाये, और कुछ करने को जरुरत न पड़े, समाज नहीं आता की विज्ञानं पर भरोसा करे या ऐसी बातो पर, अगर ये माँ बन जाये तो अच्छा है, एक भ्रम जो बंधा है वो तो टूटे. (वो भी अपने काम में लग गयी)

कृपाली बाथरूम में गयी, पुरे कपडे उतर कर वह लगे मिरर में अपने स्तन को देखने लगी, पूर्ण गोलाई लिए स्तन बहोत आकर्षक लग रहे थे, पर वो ध्यान से देख रही थी की उसको दर्द हुआ था तो सब ठीक है न, दर की याद के साथ उसको शिव के साथ वो टकराना भी याद आ गया, कही न कही उसको लग रहा था की शिव ने जानबुज कर ये किया था. उसने ऐसा फिल्मो में देखा था, जान बुज कर लड़के ऐसा करते है, वो शावर के निचे कड़ी हो गयी और अपने शरीर को रगड़ रगड़ कर साफ़ करने लगी जैसे शिव का छूना उसको पसंद नहीं आया हो, उसके पति के अलावा वह उसको किसी मर्द ने नहीं छुआ था, रगड़ने से उसके निप्पल कड़े हो गए, साबुन धोने के बाद अनायास hi उसने अपने कड़क निप्पल को दबाया, उसके मुँह से हलकी सिसकी निकल गयी, उसको डॉक्टर की कही बात याद आयी, डॉक्टर ने उसको कहा था की जब औरत गर्भाधान के लिए तैयार होती है तब उसके शरीर का तापमान बढ़ जाता है, उसको सेक्स करने की तीव्र इच्छा होती है, वो ये सब समाज रही थी, कई ऐसे दिन होते थे जब उसको सेक्स चाहिए होता था पर उसका पति तब नींद में सोया होता था, ऐसा नहीं था की वो सेक्स नहीं करता था, पर जब उसको जरुरत होती तब कई बार ऐसा नहीं होता था, कभी होता भी था, वो अपनी डेट्स याद करने लगी और डॉक्टर के कहे अनुसार उसने सेक्स किया था की नहीं किआ था वो याद करने लगी. उसको कुछ ठीक से याद नहीं था, पर डॉक्टर के कहे अनुसार अभी उसका समय चल रहा था, वो जल्द से जल्द अपने पति के पास लौट जाना चाहती थी ताकि इस समय का वो सदुपयोग कर सके. वो जैसे तैसे नहायी और अपने बीएड पर लेट गयी.

में और जूही स्टेडियम में गए और प्रैक्टिस करने लगे. हम दोनों ने बदन तोड़ प्रैक्टिस की, आखिर थक कर हम अपने घर लौट गए, पहले जूही के घर गए, वो फ्रेश हुई और जल्दी जल्दी नाहा भी ली, जब वो टॉवल लपेट कर बहार आयी तो मेरी नजर उस पर पड़ी, मुझे ऐसे देखते देख वो शर्मा गयी, और अपने रूम में चली गयी, में पीछे पीछे उसके रूम में गया, उसने मुझे देख लिया था, और वो मुस्कुरा रही thi,mene उसको पीछे से पकड़ते हुए उसके स्तन दबा दिए.

जूही : शह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो, छोडो मुझे. (उसने मुस्कुराते हुए hi कहा था, और अक्सर लड़कीअ चाहती तो है पर नखरा दिखाना नहीं छोड़ती, मेने उसके गले को चहुमा तो वो पलट गयी और मुझसे लिपट कर मुझे किश करने लगी, मेने उसके नंगे कूल्हों को मसल diya)Me चेता रही हु तुम्हे, अगर ऐसा वैसा कुछ किया न तो में छोडूंगी नहीं तुम्हे, फिर मात कहना की देर हो gayi(Usne मुस्कुराते हुए बहोत प्यार से कहा, में भी जनता था की अभी ऐसा कुछ टाइम नहीं है)

शिव : अब यार ऐसे मेरे सामने आओगी तो छूने का मान तो करेगा न.

जूही : तो मेने कहा मन किया है, जितना मर्जी है छुओ, पर फिर देर हो रही है ये मात कहना. (उसने मेरा चेहरा सहलाते हुए प्यार से कहा)

शिव : क्यों कण्ट्रोल नहीं होता?

जूही : में क्यों करू कण्ट्रोल, और वो भी तुम्हारे साथ, (मेरे लुंड को पकड़ते hue)Isse देख कर कण्ट्रोल नहीं होता फिर.

शिव : (में समाज रहा था की ये जंगली बिल्ली है, पूरा खा जाएगी muje)Achchha ठीक है, नहीं करता में कुछ.

जूही : क्यों दर गए?

शिव : डरना पड़ता है, जब सामने ऐसी खूंखार बिल्ली हो.

जूही : में बिल्ली नहीं शेरनी हु, कितना बार कहना पड़ेगा तुम्हे.

शिव : अच्छा मेरी शेरनी, चल तैयार हो जा, (में वही बीएड पर बेथ गया, वो मेरे सामने hi कपडे पहन ने लगी, सच में मेरा मान बहक रहा था, पर खुद को संभाला, उसने कपडे पहन लिया और फिर हम मेरे घर आ गए. खाने के बाद में उसको घर छोड़ने गया. वो मुझे अंदर बुलाने लगी पर मेरे मान में कुछ और चल रहा था तो मेने उसे कल सुबह मिलने का बोल कर वह से निकल गया, आज रस्ते में मुझे भार्गवी मैडम मिली थी तो आज उनसे मिलने का मान कर रहा था, में उनके घर की और निकल गया, मेने उनके घर की बेल बजायी तो वो गाउन पहने हुई थी, मुझे देखते hi वो खुस हो गयी.

भार्गवी : व्हाट ा प्लीजेंट सरप्राइज! (कहते हुए वो मुझसे लिपट गयी)

शिव : अंदर तो आने दो, कोई देख लेगा तो? (उन्होंने मुझे अंदर खिंच लिया और दरवाजा बंद कर दिया और मुझको किश करने लगी, मेने भी उन्हें पकड़ लिया और किश करने laga.(Thodi देर बाद वो अलग हुई और मुझे देख कर बोलने लगी)

भार्गवी : आज मेरे घर का रास्ता कैसे भूल गए?

शिव : भूल नहीं गया, याद कर के आया हु. (मेने देखा की उन्होंने आज गाउन पहना हुआ है, आज वो एक लड़की ज्यादा लग रही थी, और उन्हें ऐसे देख कर मेरा मान मचलने लगा, में फिर उन्हें किश करने लगा, किश करते हुए में उनके कूल्हे मसलने लगा, (भार्गवी को तो जैसे यही चाहिए था, वो कबसे शिव को hi याद कर रही थी, पता नहीं आज उसको शिव की जरुरत महसूस हो रही थी और उसके दिल की पुकार सुन कर hi वो यहाँ आ गया था शायद, वो और जोरो से उसको किश करने lagi)thodi देर बाद हम दोनों ने किश तोड़ी, वो मेरी आँखों में देख कर मुस्कुराने लगी.

शिव : क्या हुआ?

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Kuchh नहीं, बस तुम्हे देख रही हु.

शिव : आज तो में भी देखने hi आया हु (वो मुस्कुराती हुई मेरे चेहरे को सहलाने लगी)

भार्गवी : तुम्हे कैसे पता की में तुम्हे याद कर रही थी?

शिव : शायद आपके दिल की पुकार मेरे दिल ने सुन li.(Mene मुस्कुराते हुए कहा, वो भी मुस्कुराने लगी) वैसे क्यों याद कर रही थी?

भार्गवी : (उसके चेहरे पर शर्म की लाली छ gayi)Bas ऐसे hi.

शिव : कुछ तो बात होगी, ऐसे hi तो याद नहीं कर रही थी.

भार्गवी : (वो क्या बताती की आज उसके बदन को उसका प्यार चाहिए था, वो कबसे बेचैन हो रही thi)Bolana कुछ नहीं बस ऐसे hi. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : आज गाउन पहने हुए हो?

भार्गवी : क्यों अच्छा नहीं लगा.

शिव : आज लड़की ज्यादा लग रही हो.

भार्गवी : तो क्या रोज़ लड़का दिखती hu.(Usne मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : लड़का तो नहीं दिखती, पर आज कुछ ज्यादा hi हॉट दिख रही हो आप, कोई गुस्ताखी न हो जाये मुझसे.





भार्गवी : (वो भी मूड में hi thi)Kya गुस्ताखी करने का इरादा hai?(Mene उनकी कमर में हाथ डाला और उनके स्तन को सीधे hi पकड़ लिया, वो सिसक uthi)Shhhhhhhh, शीइइइइइइव.

शिव : ये गुस्ताखी.





भार्गवी : (उनका चेहरा नशे से भरने लगा, आवाज भी मादक होने lagi)To रोका किसने है (उन्होंने खुद मेरे हाथ पर हाथ रख दिया और अपने hi स्तन को दबवाने lagi)Me तो तुम्हारी hi हु, जो चाहे कर लोग. (हल में खड़े खड़े hi में उनके स्तन मसलने लगा, और साथ में उनके कूल्हों पर हाथ ले जा कर ुंहसेहलाने लगा, मेरा लुंड पूरी औकात में आ गया था, में लुंड को छूट पर रगड़ने laga)Shhhhh शीइइइइइव. (भार्गवी से उस लैंड की चुभन बर्दास्त न हुई, उसने लुंड दबोच लिया और दबाने lagi)Shhhhhhiiiiiiiv. (वो उसका बेल्ट खोलने लगी और देखते hi देखते उसने पंत भी खोल दिया, और उसको निचे खिसका कर लुंड को बहार निकल दिया और नंगे लुंड को hi पकड़ लिया, इतने कड़क और गरम लुंड को अपनी हथेली में महसूस करते hi उसकी छूट में ढेरो विस्फोट होने लगे, उस से रहा नहीं गया और वो घुटनो के बल बेथ गयी, पीछे टेबल था तो शिव को वही खड़ा कर दिया उसने और लुंड को अपने मुँह में भर liya)(Wo बहोत बेताब हो रही थी, उनके गर्म मुँह में लुंड को महसूस कर के hi मेरी भी आह निकल गयी)





शिव :शहहहहह भागूउउ, (भार्गवी ने मुस्कुरा के शिव को देखा, उसका ऐसा करना उसके प्रेमी को पसंद आ रहा था, वो उसे जोर जोर से चूसने लगी, वो उसके शिर को सेहला रहा था और उसको अपने लुंड पर दबा रहा था, उसको कोई एतराज नहीं था, वो बहोत चाव से लुंड को चूसने लगी, कभी पकड़ कर हिलती तो कभी लुंड को ऊपर से निचे तक चाट लेती, उसके सपाट पेट पर अपने नाख़ून गढ़ते हुए उसको उकसाने lagi)Shhhh क्या कर रही हो शह्ह्ह्हह्ह.,





भार्गवी : प्यार कर रही हु और अपने यार को खुस कर रही हु, इसे देख कर में रह नहीं सकती शिव. (वो फिर लुंड को चूसने लगी, थोड़ी देर बाद वो उठी और मुझे खींचते हुए boli)Chalo बीएड पर चलते है.

शिव : आप क्यों कास्ट करती है में ले चलता हु न (कहते हुए मेने अपने पंत को ऊपर चढ़ाया और उन्हें अपनी गॉड में उठा लिया, उन्होंने भी मुस्कुराते हुए अपनी बहे मेरे गले में दाल दी, में उन्हें उठा कर बैडरूम में ले गया और उन्हें बीएड पर रख दिया और उनके स्तन को चूसने लगा)

भार्गवी: शह्ह्ह्ह कपडे तो उतरो यार. (में फटाफट अपने कपडे उतरने लगा और अंडरवियर में आ गया, उन्होंने खुद hi अपने कपडे उतर दिए और वो भी ब्रा और पंतय में आ गयी, मेहरून कलर की ब्रा और पंतय उनके बदन पर जाँच रही थी, आधे जानते स्तन देख कर मुझसे रहा नहीं गया और उन्हें लेटते हुए उनके ऊपर आ gaya,unhone भी मुझे कसके पकड़ liya)Shhhhhhh शीइइइइव शहहहहह कितना गर्म कर देते हो मुझे शह्ह्ह्हह्ह पता नहीं तुम्हे देखकर hi क्या हो जाता है मुझे (में उनके स्तन मसलते हुए उन्हें दबाने लगा)





ओह्ह्ह सीईव शह्ह्ह्ह ये अंडरवियर क्यों पहन रक्खा है shhhh(Wo उसे नोचते हुए उतरने लगी, मेने भी निकल दिया और उनकी पंतय को भी खिंच दिया, उन्होंने मुझे अपने ऊपर खिंच लिया और मेरे लुंड को पकड़ कर अपनी छूट में घुसाने लगी)

शिव : इतनी बेसबर क्यों हो रही है, मुझे देखने तो दीजिये.





भार्गवी : बादमे देख लेना, अभी अंदर दाल दो. (कहते हुए उन्होंने मेरे लुंड को अपनी छूट पर लगा दिया, छूट पूरी पानी से लबालब थी, मेने भी धक्का मर दिया और लुंड छूट को फैलते हुए अंदर घुस gaya)Mar gayiiiiiiiiiiii. (उन्होंने अपने नाख़ून मेरी पीठ में गड़हड़िये, और मुझसे लिपट गयी, में कुछ पूछता उस से पहले hi उन्होंने अपनी कमर हिलनी सुरु कर दी, मेने भी धक्के लगाने सुरु कर diya)Shhhhhhhh अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह धीरीई शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह (मेने कोई स्पीड काम नहीं की और धक्के लगाने laga)Aahhhh अह्ह्ह्हह धीरीई शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (छूट पूरी पनियाई हुई थी और लुंड को जकड रही थी)





शिव : में तो ऐसे hi छोडूंगा (कहते हुए में धक्के लगाने लगा)

भार्गवी : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह बहोत बड़ा है यार शहहह अह्ह्ह्हह धीरीई (उसने रोनी आवाज में कहा, पर में रुका नहीं और धक्के लगता raha)Shhhhh अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह (भले उसको दर्द हुआ पर अब मज़ा आ रहा था और यही तो वो चाहती thi,Shiv के लगातार धक्को के सामने वो टिक नहीं पायी और भल भला कर झड़ने lagi)Shhhhhh अह्ह्ह्हह्हह ahhhhhhh(unka शरीर अकड़ गया और वो झड़ने लगी, वो मुहसे ऐसे चिपक गयी की मुझसे हिला भी नहीं जा रहा था, मेने जोर से धक्का मारा और पूरा लुंड अंदर थोक दिया, उनकी पकड़ ढीली पद gayi)Ahhhhh मर गईइइइइइइइइ. (मेने लुंड बहार निकल लिया और पेअर फैला कर छूट को चूसने laga)Shhhhhhhh shiiiiiiiiv.(Me लगातार छूट चाटने लगा, छूट से निकलनेवाला सारा रास पि गया, वो कड़ी हुई और मुझे धक्का दे कर मुझे छूट से दूर कर दिया, अपनी ब्रा निकली और घुटनो के बल हो कर मेरे लुंड को फिर से मुँह में भर लिया,





जोरो से वो मेरे लुंड को चूसने लगी, मेने हाथ आगे बढ़ाये और उनके ऊपर उठे कूल्हों को मसलने लगा, वो मेरी मनसा समाज गयी और खुद hi मुझे लेटते हुए मेरे ऊपर आ गया और अपनी छूट मेरे मुँह पर रख दी और खुद लुंड को चूसने लगी, दोनों काफी गर्म थे,





पशीने से भीग चुके थे, थोड़ी देर बाद वो घूमी और छूट में लुंड दाल के उस पर बेथ gayi)Shhhhhh, पागल बना दिया है मुझे (कहते हुए वो लुंड पर कूदने lagi)Ahhhh शहहह अह्हह्ह्ह्ह इतना बड़ा मुसल जैसा रख लिया है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह क्या हालत होती है मेरी शहहह अह्हह्ह्ह्ह, (कहते हुए वो अपनी बड़ी बड़ी गांड पटकने लगी)

शिव : इतनी hi हालत ख़राब होती है तो लेती क्यों हो?





भार्गवी : मेरा है तो में लुंगी hi शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह वर्ण तू भाग जायेगा शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह. (मेने लुंड निचे से ठोकना सुरु कर दिया, उन्होंने अपने कूल्हे खुद फैला diya)Shhhhh अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह, वो लगातार कूदती रही, फिर मेरे ऊपर सवारी करने लगी, उनके स्तन ऊपर निचे कूद रहे थे,





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वो जोर जोर से लुंड पर कूद रही थी, थोड़ी देर में वो थक गयी, मेने उन्हें हटाया और खड़ा हो गया, उन्हें बिस्तर से निचे उतरा और टेबल के सहारे झुका दिया और लुंड वापस दाल दिया)





शहहह मा अह्ह्ह्हह (में फिर धक्के लगाने laga)Ahhhh अह्ह्ह्ह शिईयिव अह्ह्ह्हह (थप थप की आवाजे गूंज रही थी, मेने उनका पेअर उठा लिया और लुंड अंदर तक ठोकने laga)Ahhhh शह्ह्ह्ह मरने का िर्रादा है क्या अह्ह्ह्ह शहहहहह.





शिव : मेरी जान को ऐसे थोड़ी न मरने दूंगा. (में लगातार धक्के लगा रहा था, उनकी झंगो से रास बह रहा था)

भार्गवी : पेअर दुःख रहा है अह्हह्ह्ह्ह. (मेने उन्हें फिर बिस्तर पर घोड़ी बना दिया और धक्के लगाने laga)Ahhhh अह्ह्ह्ह शहहहहह आज मर hi दाल मुझे शहहह अह्हह्ह्ह्ह (लगातार थप थप की आवाजों से उनके कूल्हे थिरक रहे थे)





शिव : इन्हे देख कर और जोश बढ़ रहा है तो में क्या करू.

भार्गवी : शहहह अह्ह्ह्हह अच्छे लगते है न तुम्हे ये शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह.

शिव : बहोत.

भार्गवी : मेरे साथ मज़ा आता है न तुम्हे?

शिव : है बहोत.

भार्गवी : मुझे भी शिव शहहह अह्हह्ह्ह्ह और जोर से कर ले शहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह.

शिव : क्या करू?

भार्गवी : (मेरी और देखा और muskurayi)Chod ले और क्या शहहह अह्ह्ह्ह जितना मर्जी है मुझे छोड़ ले शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह तेरा लुंड कितना बड़ा है शहहह अह्हह्ह्ह्ह.

शिव : मेरा लुंड बड़ा नहीं है आपकी छूट छोटी है, हम्म्म हम्म्म हम्म्म (धक्के लगते हुए)

भार्गवी : शहहह अह्ह्ह्ह मर गयीईइ अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह मेरे ऊपर आजा शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह. (मेने उन्हें लेटाया और ऊपर आ गया लुंड फिर से छूट में चला गया, वो मेरा पशीने से लिप्त चेहरा सहलाने lagi)Shhhhh तुजे मज़ा आ रहा है न शिव शठ अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : ऐसा क्यों पूछ रही हो?

भार्गवी : ऐसे hi पूछ रही hu(Use पता था की शिव औरो को भी छोड़ता है तो कही न कही थोड़ी इन्सेक्युरित्य आ hi जाती थी उसमे) जैसे मर्जी हो छोड़ मुझे, में मन नहीं करुँगी शहहह अह्ह्ह्हह ?(में उनसे लिपट गया और धक्के मरने laga)(Lund उसकी बच्चेदानी में घुस रहा था, दर्द होने के बावजूद वो बस शिव को खुस करना चाहती thi)Shhhh अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह (उसके चेहरे पर भी दर्द छलक आया था, पर उसको मज़ा भी उतना hi आ रहा tha)Ahhh अह्ह्ह्हह शीइइइइव शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह shhhhhh(wo फिर झाड़नेवाली हो gayi)Shhhhh में झाड़ जाउंगी शिव शहहह ahhhhhh.(Me कुछ नहीं बोलै और धक्के लगता raha)Ahhhh मेरी चूऊऊऊत अह्ह्ह्हह शहहहहह अह्ह्ह्हह ahhhhh.(Wo फिर झड़ने लगी, में धक्के लगता raha)Ahhhh बायस शिईयिव अह्हह्ह्ह्ह थोड़ी देर रुक जा (पर में नहीं रुक सकता tha)Shhhhh अह्ह्ह्हह्हह शीइइइइइव दर्द हो रहा है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह धीर कर अह्ह्ह्ह ahhhhhh(Me भी झड़ने के कगार पर था तो धक्के भी बहोत जोर से मार रहा था)

शिव : थोड़ी देर जाएं बस थोड़ी देर. (भार्गवी भी समाज गयी थी की वो झाड़नेवाला है, पर धक्के बहोत जोर से लग रहा थे, उसको दर्द हो रहा था पर वो सेह रही थी, घोड़े जैसा मर्द चुना था तो सहना तो था hi, उसका बड़ा लुंड छूट की धज्जिया उदा रहा था, उसकी कमर भी दर्द करने लगी थी)

भार्गवी : (रोनी आवाज me)Ahhhhhh कितनी देर बाबूउ अह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह, मर जाउंगी में अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह. (मेरा छूटने वाला हो गया तो मेने लुंड बहार निकल लिया और उनके पेट पर सारा लावा छोड़ diya)(Bhargavi ने रहत की सास ली, वो निढाल हो कर सासे ले रही थी, उसका पूरा शरीर निचोड़ गया था. शिव बाजु में लुढ़क गया.

पांच सात मिनट तक दोनों में से कोई नहीं बोलै, आखिर शिव फिर उसके ऊपर आया, और उसके गाल सेहला कर.

शिव : ठीक हो आप?

भार्गवी : (मुस्कुराते हुए थोड़ी नाराजगी दिखते hue)Pehle तो सुनते नहीं और फिर प्यार जताते हो.

शिव : सॉरी वो,,,

भार्गवी : सॉरी किस लिए, में ठीक हु. (फिर चेहरे सहलाते hue)Sach में तुम्हे सहना किसी अकेले की बस की बात नहीं है शिव, अच्छा है की इतनी है वर्ण मेरी क्या हालत करते तुम.

शिव : आपको अच्छा लगता है की में किसी और के साथ भी ये सब करता हु?

भार्गवी : अच्छा तो नहीं लगता पर मेने कहा न की तुम्हे सहना किसी अकेली के बस का नहीं है, एक दिन में मेरी ये हालत कर देते हो तो सोचो रोज़ अगर मेरे साथ ये करोगे तो में तो घर से बहार hi नहीं निकल पाऊँगी. (मेने फिर उनके स्तन चूसना सुरु कर दिया)

भार्गवी : शहहहहह शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह छोडो मुझे, में थक गयी हु.

शिव : इतनी जल्दी कहा. (कहते हुए में उन्हें फिर से गरम करने लगा और वो मुझसे भाग रही थी.

भार्गवी :नहीं शिव अह्ह्ह्हह में मर जाउंगी शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : कुछ नहीं होगा, में हु na.(Me उनके स्तनों को चूसने लगा, वो मेरे बालो को नोचने लगी और अपने स्तन पर दबाने lagi)Shhhhh चूस लो इन्हे शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह जितना मर्जी हो चूस lo(Bhargavi फिर से गर्म हो गयी thi)Chuso सीईव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (में उनके निप्पल चूस रहा था और वो मेरे लुंड को दबाने lagi)Shhhhhh शीइइइइव शहहहहह, खुद तो पागल हो मुझे भी कर रहे हो शहहहहह ahhhhhhh.(Humdono फिर सुरु हो गए, थक के चूर होने के बाद फिर हम दोनों ने बाटे की हमने अच्छा वक़्त बिताया. जब में जाने लगा तो वो मुझसे लिपट गयी, वो पूरी शारीरिक तौर पर संतुस्ट थी पर मान जैसे अभी भी नहीं भरा था.

भार्गवी : ऐसे आते रहा करो शिव. (उसने मुस्कुराते हुए प्यार से कहा)

शिव : आता तो हु.

भार्गवी : जानती हु, पर फिर भी तुम्हारे साथ hi रहने को दिल करता है. (फ़िलहाल गाउन के निचे वो नंगी hi थी, मेने उनके कूल्हों को सहलाते हुए बात कर रहा था, उन्हें भी कोई एतराज नहीं था)

शिव : जल्द hi आऊंगा फिर. (हमने किश की और फिर वह से निकल गया)

काफी देर हो गयी थी, सब सो गए थे, पर मेरे एक बार खत खतने पर hi लतादिदी आ गयी.

लता : कितनी देर लगा दी, कहा गया था.

शिव : वो में वो...

लता : रहने दे, जा सो ja.(Mene उन्हें पकड़ लिया, वो दर गयी) क्या कर रहे हो, बीनडीडी है.

शिव : तो क्या हुआ, क्या में थोड़ा प्यार भी नहीं कर सकता. (मेने उनके होठो को चूसना सुरु किआ तो वो मुझे धकेलती रही पर फिर शांत हो गयी, मेने अच्छे से उनके रसीले होठो को चूसा, फिर में अलग हुआ, अभी भी वो मेरी बहो में hi थी)

लता : (जूठा गुस्सा दिखते hue)Khus????(Mene भी रूठने का नाटक किया तो मुस्कुरा uthi)ja सजा, सुबह जल्दी भी उठता है.

में रूम में गया तो विणा और रंजन सो चुकी थी, में भी चुप चाप कपडे बदल कर वही लेट गया, कब नींद आ गयी पता hi नहीं चला.

सुबह उठ कर में फिर से अपने रूटीन में लग गया. दो पहर को फिर स्वर्णाभाभी का फ़ोन आया, उन्होंने मुझे बुलाया था, मेने जहान्वी को फ़ोन किआ तो वो भी किसी काम की वजह से नहीं आनेवाली थी. स्वर्णाभाभी ने मुझे हॉस्पिटल hi बुलाया था. मुझे समाज नहीं आ रहा था की वो क्यों मुझे बुला रही है. जब में वह पंहुचा तो वो दोनों हॉस्पिटल के बहार hi मिल गयी. मेने उन्हें नमस्ते किआ और उनकी बहन को भी. उनके चेहरे से hi लग रहा था की वो किसी बात को ले कर नाराज है.

शिव : है भाभी.

स्वर्ण : कितनी बार बोलै है तुजे, में तेरी भाभी नहीं हु. (उन्होंने नाराज होते हुए कहा)

शिव : ठीक है स्वर्णजी, कहिये क्या काम था. (मेने थोड़ा नाटक करते हुए कहा तो वो मुस्कुराने लगी)

स्वर्ण : तुम्हे वो शिव मंदिर पता है न जो नदी के पास बना हुआ है?

शिव : कोनसा? (फिर वो मुझे सब समजने लगी, मुझे पता चल gaya)Ha, तो?

स्वर्ण : इसको वह ले जा न, बाकि सब मेने उसे समजा दिया है.

शिव : है ठीक है. (भाभी की बहिन मेरे पीछे बेथ गयी, उनके चेहरे से hi पता चल रहा था की वो नाराज है, पर वो बेथ गयी, मेने बाइक दौड़ा दी)

स्वर्ण दोनों को जाता हुआ देख रही थी, उसने खुद कृपाली को कहा था की वह जाये और मन्नत मान आये, वैसे तो वो खुद भी उसके साथ जा सकती थी पर उसने काम का बहाना बना दिया था, ताकि ये दोनों साथ में रह सके, इस बात से कृपाली नाराज हो गयी थी, उसको शिव के साथ नहीं जाना था, पर जब स्वर्ण ने कहा की वो कल चली जाएगी तो रह जायेगा तब जा के वो तैयार हुई.

स्वर्णाभाभी के प्लान से बेखबर हम दोनों रस्ते पर जा रहे थे. मौसम खुशनुमा था, बदल थे तो धुप नहीं थी, रास्ता हाईवे था तो में थोड़ी रफ़्तार से गाड़ी चला रहा था. कृपाली को दर लग रहा था, वो कभी ऐसे बाइक पर नहीं घूमी थी, और ऊपर से वो शिव को पकड़ कर भी नहीं बेथ सकती थी तो वो ऐसे hi बैठी थी जिस से उसको ज्यादा दर लग रहा था.

कृपाली : बाइक थोड़ी धीरे चलाओ. (उसने कहा पर पवन की वजह से शिव को सुनाई नहीं दिया, वो अपनी hi धुन में बाइक चला रहा था, वो थोड़ा जोर से boli)Sunayi नहीं दे रहा है क्या?

शिव : (मुझे कुछ सुनाई दिया तो मेने पीछे मुद कर dekha)Aapne कुछ कहा क्या?

कृपाली : मेने कहा बाइक ढीरे चलाओ.

शिव : क्या कह रही है आप, कुछ सुनाई नहीं दे रहा है. (पवन जोरो से मेरे कान से टकरा रहा था तो मुझे सुनाई नहीं दे रहा tha)(Majburan कृपाली थोड़ी नजदीक आयी और उसके कान के पास जा के बोली, पर ऐसा करने से उसके बूब्स शिव को छू गए)

कृपाली : धीरे चलाओ.
 
अपडेट 194

कृपाली बाइक पर बैठी हुई थी, आज उसने पायजामी और कुरता पहना हुआ था, बालो की छोटी बंधी हुई थी, पवन की वजह से उसने अपने दुपट्टे से शिर को ढाका हुआ था, उसको बाइक पर दर लग रहा था, पर वो छह कर भी शिव का सहारा नहीं ले रही थी, वो समाज नहीं प् रही थी की क्या करे, वैसे वो शिव को जानती नहीं थी, फिर किस बात को ले कर वो उस से खफा है. शयद लोग उसको ज्यादा महत्व दे रहे है इस बात से वो थोड़ी चीड़ रही थी, या फिर उसके अनाथ होने से या फिर किसी और बात से, उसको खुद समाज नहीं आ रहा था. मौसम बेहद खुशनुमा था, बदलो से घिरी दोपहर थी, चेहरे पर लगती ताज़ी ठंडी हवा उसके रोम रोम को प्रफुल्लित कर रही थी, अगर इस वक़्त वो अपने हस्बैंड के साथ होती तो वो उस से लिपट कर बैठी होती, हलाकि उसके हस्बैंड को ये सब पसंद नहीं है, वो सिंपल सी लाइफ जीना पसंद करते है, ज्यादा रोमांस दिखते नहीं है, जब भी वो सामने से कुछ करती तो वो गुस्सा हो जाते और उसको डाट देते और कहते की बच्चो जैसी हरकते बंद करो. उसको ये सब अच्छा नहीं लग रहा था पर अब शादी हो गयी थी तो निभानी तो थी hi. उसका हस्बैंड हमेसा अपनी माँ की hi तरफदारी करता था, वो कतई ये नहीं चाहती थी की वो अपनी माँ की तरफदारी न करे, पर जब वो गलत होती तो भी वो उनकी hi तरफदारी करता था, और उसको hi डाट कहानी पड़ती थी, कही न कही उसको इस बात से अपने हस्बैंड पर गुस्सा आता था, पर करती भी क्या.

वो खुद भी काफी ऊँची थी, उसके खंडन में सब ऊँचे hi थे, वो लगभग अपने हस्बैंड के बराबर थी, जब उसने शिव को देखा था तो उसको लगा था की खास उसका हस्बैंड भी इसके जैसा ऊँचा होता और ऊपर से शिव इतना हैंडसम दीखता था तो कही न कही उसके मान में जलन सी होने लगी थी, जब वो नयी नहीं जवान हुई थी तब वो ऐसे hi किसी लड़के के सपने देखती थी, अगर उस समय शिव उसके करीब आया होता तो वो एक पल न लगाती उसको अपनाने में, पर अब वक़्त गुजर चूका था, और शायद इसीलिए उसको शिव से चीड़ हो रही थी. भले hi दोनों चुप बैठे थे पर उसके मान में अभी शिव hi घूम रहा था, वो उसी के बारे में सोच रही थी, वो स्वर्ण पर भी गुस्सा हो रही थी की क्यों उसको शिव के साथ भेज रही है, पर उसको अंदर hi अंदर अच्छा भी लग रहा था. वो जानती थी की अब उसके और शिव के बिच ऐसा वैसा कुछ नहीं हो सकता इस बात से वो और ज्यादा चीड़ रही थी. उसके लिए अब उसका पति hi सबकुछ था चाहे वो जैसा भी हो, वो कभी अपने पति को दोखादेने के बारे में सोच भी नहीं सकती थी. वो एक साइड में पेअर कर के बैठी हुई थी, वो कभी आस पास देख रही थी तो कभी शिव की पीठ और उसके शिर ko.Dono चुप थे.

शिव : शायद आप पहले कभी बाइक पर नहीं बैठी, है न?

कृपाली : (वो अपने खयालो से बहार aayi)Kya? (उसको ठीक से सुनाई नहीं दिया या वो सामजी नहीं)

शिव : (थोड़ा पीछे की और झुकते hue)Me कह रहा था की आप पहली बार बाइक पर बेथ रही है, है न?

कृपाली : है. (उसने ऐसे hi जवाब दिया)

शिव : तभी आप इतना दर रही है.

कृपाली : (झेपते hue)Aisa कुछ भी नहीं है.

शिव : एक बात पुछु? बुरा तो नहीं मानेगी?

कृपाली : पूछो.

शिव : मुजसे कोई खास दुश्मनी है क्या?

कृपाली : (झेप gayi)Aisa कुछ भी नहीं है.

शिव : अब आप जूथ बोल रही है.

कृपाली : (बात काने की वजह से वो दोनों काफी नजदीक the)Muje क्या जरुरत है जूथ बोलने की, में तो तुम्हे जानती भी नहीं.

शिव : यही तो में कह रहा हु, आप मुझे जानती भी नहीं फिर भी मुझे देखते hi आपके चेहरे पर बारे बज जाते है, ऐसा क्यों?

कृपाली : ये तुम्हारा वहम है, ऐसा कुछ भी नहीं है, मेरा क्या लेना देना तुमसे, ये तो दीदी ने कहा इसलिए आ गयी, पता नहीं उनको भी क्या जरुरत थी. (उसने मुँह टेढ़ा किया)

शिव : आपको भुट्टा पसंद है?

कृपाली : क्या?

शिव : अरे मक्के का भुट्टा पसंद है?

कृपाली : क्यों पूछ रहे हो?

शिव : वो रस्ते में उसके ठेले आ रहे है, अगर पसंद हो तो ले लेता हु, वैसे भी बारिस के मौसम में खाने में मज़ा अत है.

कृपाली : कोई जरुरत नहीं है. (फिर दोनों चुप हो gaye,aage एक ठेले पर शिव ने बाइक रोक di)Muje नहीं खाना, कहा न. (पर शिव ने कुछ न मन और दो भुट्टे ले लिए, और एक कृपाली की और बढ़ा दिया, ठेलेवाले के सामने वो कोई तमसा नहीं करना चाहती थी तो उसने ले liya,Shiv ने पैसे चुकाए और फिर से दोनों का सफर सुरु हो गया) मेने मन किया था न (उसने जूठी नाराजगी से कहा)

शिव : आप मुझसे नाराज है, भुट्टे ने क्या बिगाड़ा है आपका.

कृपाली : में क्यों नाराज होने लगी, में...

शिव : है है पता है की आप का मुझसे कोई लेना देना नहीं है. पर भुट्टा तो मेने नहीं बनाया, खा लीजिये. (पता नहीं क्यों पर कृपाली के चेहरे पर मुस्कान आ गयी, पर वो जिस तरह से बैठी थी वो एक हर छुड़ा कर भुट्टा नहीं खा सकती थी)

कृपाली : मुझे दर लग रहा है.

शिव : दर? किस बात का?

कृपाली : ऐसे में नहीं खा सकती, गिर जाउंगी. (शिव ने बाइक साइड में रोक दी)

शिव : आप दोनों पेअर बाइक के दोनों और कर के बैठिये, दर नहीं लगेगा. (कृपाली निचे उतरी और पेअर दोनों और कर के बेथ गयी, शिव ने बाइक फिर आगे बढ़ा di)Ab ठीक है.

कृपाली : है.

शिव : वैसे में कह सकता था की आप मुझे पकड़ कर बैठिये, ऐसे भी आप अच्छे से भुट्टा खा सकती थी, पर मेने कहा नहीं, क्यों की में जनता था की आप मुझको पकड़ेगी नहीं. (कृपाली कुछ नहीं बोली क्यों की वो सही कह रहा tha)Jawab नहीं दिया आपने. (कृपाली फिर भी कुछ नहीं boli)Mera अनुमान सही था. (फिर दोनों भुट्टा खाने लगे, थोड़ी देर दोनों में कोई बातचीत नहीं hue)Kaisa लगा?

कृपाली : क्या?

शिव : भुट्टा, और क्या?

कृपाली : अच्छा है.

शिव : और में? (कृपाली कुछ नहीं बोली, बस मुस्कुरायी, फिर थोड़ी देर बाद)

कृपाली : तुम दीदी को कैसे जानते हो?

शिव : (मेने सही बताना ठीक नहीं samja)wo वैस्वी की भाभी है तो जनता हु.

कृपाली : पर बात इतनी hi तो नहीं है, उस नाते वो तुम पर इतना भरोसा करती है की अपनी बहन को तुम्हारे साथ भेज दे.

शिव : ये तो सबकी अपनी अपनी सोच होती है, कभी कभी लोग अपने बहोत करीबी पर भी भरोसा नहीं कर पते और कभी कभी अंजानो पर भी भरोसा हो जाता है. वैसे वो हमारे अनाथालय पर कई बार आयी है और उस नाते भी मुझे जानती है.

कृपाली : एक बात पुछु?

शिव : पूछिए, आपको इजाजत लेने की जरुरत नहीं है.

कृपाली :तुम्हारे हाथ में ये धागा कैसा है?

शिव : (अपने हाथ को दिखते hue)Ye?

कृपाली : है.

शिव : क्यों पूछ रही हो आप?

कृपाली : क्यों कुछ खास है जो बताना नहीं चाहते.

शिव : ऐसी बात नहीं है, वैसे भी एक धागा hi तो है, इसमें क्या खास हो सकता है.

कृपाली : क्यों की शामे धागा मेरे हाथ में भी है.

शिव : फिर भी क्या खास है, ऐसे धागे तो हजारो लोग पहनते होंगे.

कृपाली : तुमने क्यों पहना है.

शिव : आपको क्यों जान न है?

कृपाली : अभी तो तुम कह रहे थे की ये एक आम धागा है तो बताने में क्या दिक्कत है.

शिव : यही तो में कह रहा हु की ये आम धागा hi है, जैसे आपके हाथ में है वैसे hi मेरे हाथ में है. (कृपाली चुप हो गयी, वो कैसे बताती की उसको शक है की उसकी hi बहनो नए धागा बंधा है, वैसे भी उसके पास इस बात का कोई प्रमाण तो नहीं था.)

शिव : क्या हुआ? चुप क्यों हो गयी.

कृपाली : जब तुम कुछ बता नहीं रहे हो तो क्या पुछु.

शिव : आप को क्या खास लगता है इस धागे में, आपने क्यों पहना है, कुछ खास है क्या इसमें?

कृपाली : तुमने भी तो बंधा है, तुम्हे नहीं पता क्या?

शिव : छोड़िये इन बातो को, क्या रक्खा है इसमें, अभी हम मंदिर पहुचनेवाले है.

कृपाली भी चुप हो गयी, बदल और गहरे हो गए थे, उनको यहाँ पहुंचने में करीब एक घंटा लग गया था. शिव ने बाइक पार्क की और कृपाली ने एक ठेले से थोड़ा पूजा का सामान लिया और कुछ फूल और माला भी ली. दोनों अंदर आ गए, उन्होंने पुजारी को फूल और माला दी, पुजारी उन्हें ले कर अंदर गया, भगवन को चढ़ाया और फिर टोकरी वापस कृपाली को दी.

पुजारी : सदा सुहागन रहो, दूधो न्हावो पुतो फलो, भगवन शिव आप दोनों की जोड़ी सदा बनाये रक्खे. (कह कर वो टोकरी थमा कर वह से चला गया, कृपाली के गले तक आ गया, वो कुछ बोलने वाली थी पर पुजारी जा चूका था, उसने शिव की और dekha,)(Me ने भी उन्हें देखा, पर में इसमें क्या कर सकता था, मेने सिर्फ कंधे उचकाए, और बताया की इसमें में क्या कर सकता हु, हम दोनों थोड़ी देर प्रार्थना कर के वह से बहार आ गए, वो कुछ बोल नहीं रही थी, हम मंदिर के पीछे गए, वह से अद्भुत नजारा दिख रहा था, पीछे एक खूबसूरत नदी बह रही thi)(Krupali अभी भी गुस्सा थी)

शिव : क्या हुआ?

कृपाली : जरा भी दिमाग नहीं है क्या उसमे, ऐसे कैसे कह दिया.

शिव : उनको थोड़ी न पता है, और वैसे भी यहाँ ऐसे कई लोग आते होंगे, भूल से कह दिया, इसमें क्या सोचना इतना.

कृपाली : उनको दीखता नहीं की हम दोनों में कितना फर्क है.

शिव : क्या फर्क है, वैसे भी आप इतनी बड़ी लगती नहीं, निकल गया भूल से. (शिव की इस बात से की वो इतनी बड़ी लगती नहीं से कृपाली थोड़ा शर्मा गयी और मन hi मन मुस्कुराने lagi)(Hum दोनों ऐसे hi आस पास देख रहे थे की बारिश सुरु हो गयी, और जोरो की बारिश चलने लगी, हम सब मंदिर के अंदर आ गए. सब लोग बहार हो रही बारिश को hi देख रहे थे, काफी देर तक बारिश होती रही, सब निचे बेथ गए थे)

कृपाली : ये तो रुक hi नहीं रही है, अब क्या करेंगे.

शिव : हम कर भी क्या सकते है, देखते है, जब रुक जाएगी तब निकालेंगे. (मुझे भी टेंशन हो रही थी, क्यों की मुझे स्टेडियम भी जाना था, मेने जूही को फ़ोन किआ)

जूही : Hello.

शिव : है जूही, कहा हो तुम?

जूही : घर पर, और कहा? बहार इतनी बारिश हो रही है तो कहा जाउंगी.

शिव : अच्छा वह पर भी बारिश हो रही है.

जूही : वह पर भी हो रही है से क्या मतलब है, तुम कहा हो?

शिव : में बहार हु, यहाँ भी बारिश हो रही है तो मुझे देर हो सकती है इस लिए मेने फ़ोन किआ था.

जूही : बारिश तो यहाँ भी है, ऐसे में स्टेडियम भी बंद hi होगा. वैसे बिना बताये कहा कहा घूमते रहते हो.

शिव : में आ कर बात करता हु.

जूही : अच्छा ठीक है. (मेने फ़ोन रख दिया)

शिव : हमारे वह भी बारिश चल रही है.

कृपाली : किस से बात की?

शिव : वो मेरी दोस्त है, जूही.

कृपाली : लगता है तुम उस से बहोत डरते हो.

शिव : (मुस्कुराते hue)Darna पड़ता है, बहोत सख्त है वो.

कृपाली : सख्त है से क्या मतलब है, दोस्त है की कोई और? (कृपाली को जैसे जलन हुई)

शिव : दोस्त कहो या कोच, सबकुछ यही है, प्रैक्टिस के मामले में वो मेरी एक नहीं चलने देती.

कृपाली : अच्छा वो एथलिट की प्रैक्टिस. दीदी ने बताया था. (हम दोनों ऐसे hi इधर उधर की बाटे करते रहे, करीब पौने घंटे बाद बारिश ruki)Thank गॉड, आखिर कर बारिश रुकी तो सही.

शिव : सही कहा आपने, चलिए, जल्दी निकलते है कही फिर सुरु न हो जाये.

हम दोनों वह से निकल गए, जगह जगह पानी भरा हुआ था, ट्रैफिक भी बहोत काम हो गया था, बदल इतने घने थे की जैसे अँधेरा hi हो गया था, कई जहाज पानी भरा हुआ था तो गधे पता नहीं चल रहे थे और बाइक ज्यादा hi उछाल कूद कर रही थी, कृपाली को दर लग रहा था, उसने दोनों हाथो से शिव के कंधो को पकड़ लिया.

शिव : सॉरी वो गढ्ढे समाज नहीं आ रहे. (कृपाली भी समाज रही थी तो कुछ नहीं बोली, बारिश होने की वजह से ठण्ड भी बढ़ गयी थी, उसका बदन कैंप रहा tha)(Wo मेरे कंधे को जोर से दबा रही थी, और उनके हाथ काँप रहे थे जिस से मुझे समाज आ रहा था की उनको ठण्ड लग रही है, और ऊपर से हलकी हलकी बूंदा बंदी भी सुरु हो गयी thi)Agar आपको ठीक लगे तो थोड़ा नजदीक बेथ जाइये, पवन नहीं लगेगा. (कृपाली को शर्म आ रही थी पर और कोई चारा भी नहीं tha,wo थोड़ी नजदीक खिसक गयी, वो इस तरह बैठी की शिव और उसके बिच एक दो सेंटीमीटर का फैसला hi रहा. अब उसको अच्छा लग रहा था, एक तो पवन नहीं आ रहा था, और दूसरा शायद शिव की गर्माहट भी उसे महसूस हो रही थी, फिर रास्ता सामान्य था तो बाइक आराम से चल रही थी, बारिश की बुँदे थोई बढ़ गयी थी, पर इतनी भी नहीं की बाइक रोकनी पड़े, शिव लगातार बाइक चला रहा था, अब उन दोनों के कपडे भी थोड़े गीले होने लगे थे, तभी फिर से गड्ढो वाला थोड़ा पोरशन आया तो कृपाली की छाती शिव की पीठ से टकराने लगी, उसने बचने के लिए अपने हाथ बिच में रख दिए ताकि शिव की पीठ पर उसके स्तन का एहसास न हो. अभी थोड़ा hi आगे गए थे की बारिश तेज सुरु हो गयी, रास्ता भी तक़रीबन सुमसान hi था और अस्स पास कुछ था भी नहीं की में रुक सकू, मेने बाइक थोड़ी तेज दौड़ा दी, थोड़ी hi दुरी पर मुझे एक पेड़ दिखा तो में बाइक वह ले गया, खुशकिस्मती से वह एक छोटा स्सा स्टाल जैसा बना हुआ था, मेने बाइक रख दी और हम दोनों उस छोटे से स्टाल में चले गए, चारो और से खुला hi था वो बस ऊपर छत बानी हुई थी, बारिश थोड़ी तेज चल रही थी, एक और से बारिश अंदर आ रही थी, हम दोनों साथ में खड़े थे, बारिश में थोड़े भीग भी गए थे हम दोनों, उनका ड्रेस थोड़ा भीग कर चिपक गया था और उनके शरीर का भूगोल साफ़ दिख रहा था, न चाहते हुए भी मेरी नजर वह जा रही thi)(Krupali को ठण्ड भी लग रही थी, उसने तिरछी नजर से शिव को देखा तो पाया की वो उसके शरीर को देख रहा था, उसको बहोत शर्म आ रही थी, पर अभी वो और क्या कर शक्ति थी, उसने अपने स्तन पर हाथ रख कर उसको छुपाने की कोशिस की, उसने देखा की शिव ने नज़ारे फेर ली थी, शायद उसको पता चल गया था की उसको पता चल रहा है की वो क्या देख रहा है, उसको भी अजीब लग रहा था, वो किसी लड़के के साथ इस अवस्था में पहली बार थी, उसकी और बारिश की बुँदे आ रही थी तो वो थोड़ी शिव की और खिसक गयी, पर फिर भी बारिश उसकी साइड को भिगो रही थी तो वो और उस और खिसकी, पर अब जगह नहीं थी, बारिस से बचने के लिए hi वो और खिसकी और शिव के आगे कड़ी हो गयी, उसका दिल जोरो से धड़क रहा tha)(Krupaliji का पिछवाड़ा मेरी और था और कुछ कम hi दूर था, वो आगे की और देख रही थी, पर उनके भरे हुए कूल्हे मेरे लुंड से कुछ hi दुरी पर थे, तभी बारिश से बचने के चक्कर में वो थोड़ी पीछे हुई तो मेरे लुंडवाले भाग से उनके उभरे हुए कूल्हे टकरा गए, में अपने आप को कण्ट्रोल करने लगा पर शायद मेरे लुंड को वो स्पर्श अच्छा लग रहा था तो वो खड़ा होने laga)(Krupali को एहसास हो रहा था की वो शिव से पीछे से चिपक गयी है पर उसके गर्म शरीर से उसको रहत महसूस हो रही थी, और पता नहीं एक अजीब सी सरसराहट भी हो रही थी, वो वैसे hi कड़ी रही, थोड़ी देर बाद उसको अपने कूल्हों पर कुछ कड़क चुभता महसूस हुआ, वो उस छुअन से कैंप गयी, उसको समझते देर न लगी की वो क्या है, वो आगे हो जाना चाहती थी पर बारिश की वजह से या फिर किसी और वजह से वो आगे नहीं हुई, वो वैसे hi कड़ी रही, वो दिखा तो ऐसे रही थी की उसको कुछ पता नहीं है पर उसका पूरा ध्यान उस कड़क अंग पर hi tha)(Mera लुंड खड़ा होने लगा था, में अपने आपको कण्ट्रोल कर रहा था पर सब बेकार था, लुंड खड़ा हो hi गया था, कूल्हों की गोलाई को महसूस कर के वो बस में नहीं था, में जल्दी से बारिस रुक जाये उसकी प्राथना करने लगा, पर बारिस जोरो से हो रही थी, मेने कृपालिजी की और देखा तो वो बहार hi देख रही थी, पर उनके चेहरे पर कुछ अजीब से रंग थे, मेने निचे देखा तो मेरा लुंड उनके कूल्हों की दरार के बिच hi tha)(Krupali खुद को बहोत कण्ट्रोल कर रही थी, उसको पता था की ये गलत है पर अभी वो जिस हल में थी उसको शरीर में गर्माहट महसूस होने लगी थी, वैसे भी उसके शरीर को सम्भोग की जरुरत थी, इसीलिए वो घर लौटजाना चाहती थी, पर अभी वो किसी अनजान लड़के के साथ थी, पर अपने कूल्हों में चुभते उस कड़क अंग को महसूस कर के वो पिघल रही थी, मन hi मान वो अपने आपको कोष रही थी पर उसका शरीर भी उसके बस में नहीं था, उसका शरीर थोड़ा और पीछे हुआ तो वो अंग उसके कूल्हों की दरार में और चुभने लगा, उसकी आंखे बंद हो गयी, उसको ये एहसास बहोत सुखद महसूस हो रहा था, वो कहा है वो भी वो भूल गयी थी, उसको महसूस हो रहा था तो बस वो चुभता अंग. भले hi वो कपड़ो के अंदर था पर भीड़ भी उसको वो पूरा एहसास दे रहा था, उसकी छूट में रास आना सुरु हो गया था, शर्म के मरे वो और ज्यादा कुछ नहीं कर रही थी पर वो वैसे hi कड़ी थी)

मुझे समाज नहीं आ रहा था की क्या करू, पर मेरा लुंड पूरी औकात में आ चूका था, और मुझे ये भी एहसास था की शायद उनको भी एहसास है, पर वो कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी, मेने अनजाने hi लुंड को और दरार में धकेल दिया, वो कुरता पहने थी, कुरता पानी से भीग चूका था और कूल्हों की दरार उजागर हो रही थी, मेरे हाथ में कुछ होने लगा तो मेने अपनी मुठी बंद कर दी और हाथ को रोक दिया, पर कमर हलके से आगे चली गयी. (कृपाली की हालत ख़राब हो रही थी, अगर कोई और वक़्त होता तो वो शिव को थप्पड़ लगा चुकी होती, पर अभी उसको ये अच्छा लग रहा था, उसके मुँह पर अजीब हावभाव थे, वो सिसकना चाहती थी पर उसने जैसे तैसे अपने आपको संभाला था. उसको महसूस हो रहा था की शिव का वो अंग कभी कभी उसको धक्का दे रहा था, पर गुस्सा होने की बजाये उसका मान छह रहा था की और धक्के lage)(Me क्या करू समाज में नहीं आ रहा था, पर लुंड अपना काम करना चाहता था, पानी की वजह से कुर्ती चिपक गयी थी तो और अंदर जाना मुश्किल था, कुछ समय में वैसे hi खड़ा रहा, पर लुंड बगावत करने लगा था, मेने थोड़ा पीछे होना चाहा पर पीछे लकडिए बंधी हुई थी तो में पीछे नहीं हो पाया, पता नहीं मुझे क्या हुआ की मेने कुर्ते को निचे से पकड़ कर पीछे वाला हिस्सा ऊपर करने laga(Krupali को तुरंत महसूस हुआ की शिव क्या कर रहा है, पर शायद वो भी यही चाहती थी, पहली बार वो किसी दूसरे मर्द का वो अंग महसूस कर रही थी, उसके पति के साथ तो कभी ऐसा हुआ hi नहीं था, वह तो बस सेक्स हो जाता था, पर आज बारिश के सुहाने मौसम ने उसके मान के तार छेड़ दिए थे, उसको पता था की शिव उसके कुर्ते को ऊपर कर रहा है वो बस कड़ी rahi)(Mene कुर्ते का सिर्फ निचे का भाग जो की पीछे लम्बा था वो hi उठाया, अब मेरा लुंड पजामी पहनी गांड की दरार में था, पर लुंड अब और अंदर जा रहा था, उभरे हुए कूल्हों में वो घुस रहा था, में वैसे hi खड़ा रहा, क्या मस्त फीलिंग आ रही thi)(Krupali का दिल जोरो से धड़क रहा था, लुंड उसके कूल्हों में काफी अंदर पहुंच गया था, उसकी पंतय भी भीगना सुरु हो गयी थी, उसका मुँह अजीब सा हो रहा था, उसका शरीर भी इस सुखद स्पर्श को महसूस करना चाहता था तो वो थोड़ी और पीछे हुई, और लुंड उसकी छूट पर पहुंच गया, भले hi उसकी पजामी थी, पंतय थी पर फिर भी लुंड का दबाव वो छूट पर महसूस कारण रही थी. न शिव कुछ बोल रहा था न कृपाली, बस दोनों अनजान बन ने का नाटक करते हुए ये खेल खेल रहे थे. आज पहली बार क्रुअलि इतनी उत्तेजना महसूस कर रही थी, वो काफी गर्म हो गयी थी, वो शिव को पूरा मौका दे रही थी, उसको लग रहा था की शिव सब जान बूझकर कर रहा है, पर अभी उसको कोई एतराज नहीं था, वो बस मज़े ले रही थी, जब शिव ने कुछ न किया तो उसको गुस्सा आने लगा, उसने खुद लुंड पर हल्का धक्का दिया, जैसे कह रही हो की कुछ karo)(Me अपने आपको रोकने की और सँभालने की कोशिस कर रहा था पर कृपालिजी शायद कुछ और hi छह रही थी, वो खुद मेरे लुंड पर अपनी छूट दबा रही थी, क्या करू कुछ समाज नहीं आ रहा था, पर लुंड तो जैसे यही चाहता था, और न चाहते हुए भी मेने एक दो बार धक्का मर diya)(Krupali ने अपने होठ काट लिए, वो लुंड का दबाद सीधे छूट पर महसूस कर रही थी, अगर अभी शिव उसकी सलवार उतर कर लुंड दाल भी दे तो भी वो शायद मन नहीं करेगी, वो बहोत गर्म हो गयी थी, उसको जैसे कुछ सूद बुध नहीं थी. उसका दिल चीख चीख कर कह रहा था की आगे बढ़ो, और जो करना है कर lo)(Me सोच रहा था की क्या करू, ऐसे में कुछ करना उचित भी नहीं है, में आस पास देखने लगा, पर ऐसा कुछ भी नहीं था, पता नहीं मेरा मान क्यों इतना मचल रहा tha)(Shiv भले hi समाज नहीं प् रहा था पर अक्सर ऐसा होता है, जब कोई तुम्हे इग्नोर करे और तुम्हारे प्रति रुखा व्यव्हार करे तो इंसान उसके रूखे व्यव्हार को पसंद नहीं करता, पर जब वो सामने से आपके प्रति झुकने लगे तो दिल को सुकून मिलता है, ऊपर से ये मौसम, दोनों को भटका रहा था)

अभी में सोच hi रहा था की एक बाइक वह आ कर रुकी, मेने उनकी और देखा तो दो आदमी थी और पिच्छे वाले के हाथ में शराब की बोतल भी थी, वो दोनों हमें देखने लगे, में भी उन्हें देखने लगा. (कृपाली ने भी ये देखा और वो दर गयी, अब दर के मरे वो थोड़ी पीछे हो गयी और शिव से और चिपक गयी) मुझे खतरे का एहसास होने लगा, मेरा सारा सरूर जाता रहा, में थोड़ा साइड हुआ और कृपालिजी को अपने पीछे कर लिया और उन दोनों को देखने लगा. उन्दोनो ने रस्ते को आगे पीछे देखा और बाइक से उतर गए, मेने भी रस्ते को देखा तो रास्ता लगभग सुमसान hi था.

आदमी1 : क्या कर रहे हो दोनों?

शिव : (अपने आपको नार्मल दिखते hue)Barish की वजह से खड़े है. (एक बच्चे जैसे दिखनेवाले लड़के की इतनी भरी आवाज सुन कर hi दोनों चौंक गए)

आदमी1 : कोण है वो, जरा दिखा तो उसको. (कृपाली ये सुन कर दर गयी, उसने शिव की बाह को पीछे से पकड़लिया.

शिव : आप को उस से क्या मतलब. (मेने थोड़ी सख्ती से कहा)

आदमी1: (दूसरे आदमी की ार देख kar)Lagta है बच्चा गुस्सा हो गया (दोनों हसने लगे, फिर मेरी और देख kar)Dekh बे, अपनी सलामती चाहता है तो चुप चाप यहाँ से फुट ले.

शिव : (में भी कोई बखेड़ा नहीं करना चाहता था, और कृपालिजी भी दर रही थी तो मेने यही सही समजा, भले hi बारिश हो रही थी, पर मेने वह से चले जाना hi ठीक samaja)Thik है, हम चले जाते है.

आदमी1 : (गन्दी हसी हस्ते hue)Abe हम नहीं, ये बोल की में चलाजाता हु. (फिर दोनों हसने lage)Aur अगर चाहे तो एकड़ घंटे बाद इसको भी ले जाना. (फिर दोनों हसने लगे, कृपाली पूरी तरह से दर गयी, उसने शिव की बाह को जोर से पदक लिया)

शिव : (मुझे गुस्सा तो बहोत आ रहा था, पर कृपालिजी की वजह से में कोई बखेड़ा नहीं चाहता था, मेने अपने आपको सँभालते हुए kaha)Dekhiye, हमे जाने दीजिये, में कोई बखेड़ा नहीं चाहता.

आदमी2 : भाई, ये तो धमकी दे रहा है.

शिव : (मेने और शांत स्वर में kaha)Me कोई धमकी नहीं दे रहा, आप हमे जाने दीजिये.

आदमी1 : (उसने अपने पीछे रक्खी एक तमंचा निकल लिया और मेरी और तान diya)Nahi जाने देता, क्या करलेगा tu.(Krupali जो शिव के पीछे चुप कर देख रही थी, उसकी आँख से आंसू निकल आये, उसको लगने लगा की अब उसकी खैर नहीं है)

शिव : (वो मुझसे दो तीन कदम की दुरी पर खड़ा था और उसके हाथ में तमंचा भी था, गलती की कोई गुंजाईश नहीं thi)Dekhiye सर, हमे जाने दीजिये (मेने हाथ जोड़ते हुए कहा)

आदमी1 : (जोर से हस्ते hue)Dekh बे, हाथ जोड़ रहा है, साडी अकड़ उसके पिछवाड़े में चली गयी. (फिर दोनों जोरो से हसने लगे, में बस दोनों को देख रहा था, फिर वो शांत hue)Us छमिया को छोड़ और अपनी जान बचा, निकल यहाँ से.

आदमी 2 : पर भाई ये पुलिस को ले आया तो?

आदमी1 : पुलिस क्या घंटा उखड लेगी मेरा, जब तक वो आएंगे हम निकल लिए होंगे. (कृपाली बुरी तरह से दर गयी थी, वो रोने लगी, उसको यकीं हो गया की अब वो नहीं बचेगी, वैसे भी वो गुंडे बहोत खतरनाक दिख रहे थे, और शिव एक बच्चा hi tha,upar से उनके पास तमंचा भी था)

शिव : ठीक है, में चला जाता हु. (इतना सुनते hi कृपाली फुट फुट कर रोने लगी और शिव को जोरो से पकड़ ली जैसे कह रही हो की मुझे छोड़ कर मात जाओ)

आदमी2 : भाई, मेरी मनो तो इसको मात जाने दो, आप तमंचा मुझे दो, में इसको संभालता हु, तब तक आप अपना काम कर लो, फिर आप संभालना में अपना काम कर लूंगा.

आदमी1 : (सोचते hue)Sahi कह रहा है तू. ले (कहते हुए उसने अपना तमंचा उसकी और बढ़ाया, बस यही पल मेरे लिए बहोत था, जैसे hi तमंचे का रुख मेरी और से घुमा, मेने दिखे छलांग लगाडी, और तमंचे पर झपट्टा मारा, वो उनके हाथ से दूर गिर गया, वो कुछ समझते उस से पहले मेने आदमी1 को जोर से घुसा मर दिया, घुसा सीधे नाक पर मारा था, वो अपनी नाक पकड़ कर पीछे गिर गया, वो दूसरा तमंचे की और बढ़ा पर मेने जोर से लात उसके पेअर में मारी तो वो वही धड़ाम से गिर गया और अपने पारी को पकड़ लिया. आदमी1 को यकीं hi नहीं हो रहा था की एक लड़के ने उसको मारा, वो गुस्से से उठने लगा की उसके चेहरे पर इतनी जोर की लात पड़ी की उसको टारे दिखने लगे, और वो धड़ाम फिर से निचे ौंचे मुँह गिरा. अभी वो गिरा hi था की उस लड़के ने उसकी पीठ पर पॉ रख कर उसके हाथ को पकड़ कर इतना जोर से पीछे खींचा की लगा उसका कन्धा hi उखड गया, वो तेज दर्द से चिल्लाया. अपने बॉस की ऐसी चीख सुन कर वो दूसरा भी दर gaya,par वो कुछ समझता उस से पहले hi उस लड़के ने उसको दो चार मुक्के उसके चेहरे पर मार दिए, उसको लगा की जैसे उसका शिर hi फैट जायेगा, उसके नाक से भी खून बहने लगा. (कृपाली शिव के इस रूप को देख कर काँप सी गयी, शिव उन्दोनो को बरी बरी ऐसे मार रहा था जैसे कोई कपड़ो को धो रहा हो. कुछ hi मिनट में दोनों अधमरी हालत में हो गए थे, दोनों कराह रहे थे पर हिल भी नहीं प् रहे थे, ऐसा लग रहा था जैसे कई हड्डिया टूट गयी है)

शिव : चलिए. (कृपाली काँप सी गयी उसकी आवाज सुन कर, शिव बाइक पर बैठा, और उसने बाइक चालू की, कृपाली कापति हुई उसके पीछे बेथ gayi)(Mene एक नजर उन्दोनो पर डाली और बाइक आगे बढ़ा दी)

कृपाली को अभी भी यकीं नहीं हो रहा था जो उसने देखा था, आज उसने शिव को एक अलग रूप में देखा था, वो जैसा दिख रहा था वैसा तो बिलकुल नहीं था, कृपाली ने कभी सोचा भी नहीं था की इतना मासूम सा दिखनेवाला लड़का ऐसा भी कर सकता है, पर आज उसने उसकी जान और इज्जत दोनों बचायी थी. उसने कापते हाथ को शिव के कंधे पर रख दिया.

शिव : आप ठीक तो हो? (में अब शांत हो चूका था, मेने शांति से hi कहा)

कृपाली : है. (वो सच में शांत हो चुकी थी, पर अभी भी उसको यकीं नहीं हो रहा था जो उसने देखा था, पर शिव ने उसकी इज्जत बचायी थी, उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान छायी हुई थी)

हम दोनों भीग गए थे तो में उन्हें अपने अनाथालय hi ले गया. मेने लतादिदी को आवाज दी, वो आ गए.

शिव : ये भीग गयी है, इन्हे कपडे दे दीजिये.

लता : क्या हुआ तुजे, ये तेरे कपडे क्यों गंदे हो गए है, और ये चोट कैसी है. (उन्होंने जहा इस्सर किया वह मेने देखा तो थोड़ा खून था वह जो जैम चूका था)

शिव : कुछ नहीं, वो में चल रहा था तो फिसल गया था.

लता : जरा भी अकाल नहीं है, देख कर नहीं चल सकता, तू बाथरूम में जा में अभी कपडे देती हु और दवाई लगाडेति हु. (में मुस्कुराते हुए वह से बाथरूम की और चला गया, कृपाली शिव को hi देख रही थी, कितना शांत था वो, जैसे कुछ हुवा hi नहीं tha)Aapko में कपडे देती हु, आईये. (लता उन्हें भी एक कमरे में ले गयी और उन्हें तौलिया और कपडे दिए.

कृपाली अभी कपडे बदल hi रही थी की स्वर्ण का फ़ोन आया, मंदिर से निकलते वक़्त hi उन्होंने फ़ोन को प्लास्टिक में रख दिया था तो अच्छा था. उसने फ़ोन उठाया और बताया की वो अभी अनाथालय है, स्वर्ण ने कहा की वो आती है वह. कपडे बदलने के बाद वो बीणाभाभी को मिलने गयी.

कृपाली : कैसी हो भाभी?

बिना : कृपाली, आप यहाँ? (और कपडे देख kar)Ye क्या पहना है? (उसने चनिया चोली पहनी थी)

कृपाली : वो में मंदिर गयी थी तो आते आते भीग गयी, तो लता ने कपडे दिए. (लता भी गरम दूध ले कर आयी)

लता : इनके नाप का ड्रेस तो था नहीं, तो मेने यही दे दिया.

कृपाली : स्वर्णादिदी आ रही है मेरे कपडे ले कर.

बिना : तू कोनसे मंदिर गयी थी ऐसे अकेले.

कृपाली : अकेले नहीं गयी थी, वो शिव के साथ गयी थी.

बिना : शिव के साथ? (उसको आश्चर्य हुआ, कृपाली ने उस हादसे को छोड़ कर सब बता दिया, सब सुन ने के बाद) अरे पर ऐसे बाइक पर जाने की क्या जरुरत थी, स्वर्णादिदी नहीं आ शक्ति थी.

कृपाली : उनको कोई काम था, तो शिव आ गया. (वो बहोत प्यार से बोल रही थी)

बिना : अच्छा अच्छा, ठीक है.

वो ऐसे hi बाटे करते रहे, स्वर्ण भी वह आ गयी, थोड़ी देर बाते चली, कृपाली ने कपडे भी बदल लिए फिर वो दोनों लौट गयी.

स्वर्ण के पूछने पर भी करअपलि ने कुछ नहीं बताया, बस बारिश में भीग गए यही बताया. स्वर्ण ने भी सोचा की वैसे भी इतनीजल्दी कुछ नहीं होनेवाला, और वो शिव को जानती थी, वो आईसीआईसी कोई हरकत करेगा भी नहीं, उसने सब उपरवाले के भरोसे छोड़ दिया.

रात को सोने के लिए में अकेला hi था, विणा को पीरियड्स आ गए थे, और वो दोनों पढ़ते पढ़ते बीनमदं वाले कमरे में hi सो गयी थी. लता शिव के पास जाना चाहती थी पर बच्छोवाले कमरे में भी काफी जरुरत थी तो वो वही सो गयी.
 
अपडेट 195

सुबह स्वर्ण नास्ता बना रही थी और कृपाली साथ में कड़ी थी. वो अभी अभी तैयार हो कर आयी थी.

स्वर्ण : (मुस्कुराते hue)Taiyrar हो गयी? (कृपाली ने भी मुस्कुरा कर है कहा, फिर स्वर्ण काम में लग गयी, अचानक उसको कुछ याद aaya)Kappu, कल रस्ते में कुछ हुआ था क्या?

कृपाली : (अचानक हुए सवाल से थोड़ा विचलित हो गयी, हकलाते hue)N न नहीं तो. क्यों?

स्वर्ण : अरे आज के अख़बार में आया है की कल तुम जिस रस्ते गए थे न वह दो तड़ीपार गुंडे पुलिस ने गिरफ्तार किये है, वो दोनों घायल अवस्था में वह पड़े हुए थे और किसी ने जानकारी दी तो पता चला की दोनों छाते हुए बदमाश थे. (कृपाली को उन दोनों की याद आ गयी, कितने खतरनाक थे दोनों, पर वो बोली कुछ nahi)Tum जिस रस्ते आये थे उसी रस्ते में पड़े हुए थे दोनों, शायद तुम्हारे आने के बाद हुआ hoga.(Krupali कुछ नहीं बोली, बोलती भी क्या, उसको फिर शिव की याद आयी, वो शिव के बारे में hi सोचने लगी)

कल जो कुछ भी हुआ उसके लिए वो कई बार खुद को कोष चुकी थी, उसको लग रहा था की उसने जो किया वो गलत किया, उसको ऐसा नहीं करना चाहिए था, वो एक शादीशुदा है, अपने पति को ऐसे धोखा नहीं दे सकती वो, वो कई बार अपने को जिम्मेदार महसूस कर चुकी थी, उसको लग रहा था की उसको शिव को रोकना चाहिए था, पर फिर लग रहा था की ऐसा कुछ शिव ने किया hi नहीं था, वो तो परिस्थितिया hi ऐसी हो गयी थी की ये सब हो गया, रात को भी बार बार उसको शिव का वो कड़ा अंग अपने पीछे महसूस हो रहा था और बार बार उसकी छूट से पानी रिसने लगता था, उसने बहोत संभाला था अपने आप को पर वो इस बात से भी इंकार नहीं कर प् रही थी की कही न कही उसको भी वो सब बहोत अच्छा लगा था.

स्वर्ण : क्या सोच रही हो?

कृपाली : नहीं कुछ नहीं दीदी. (बात बदलते hue)Wo आज गाड़ी भिजवानेवाले है, मुझे घर आने को कहा है.

स्वर्ण : मेरी बात करवाडेति, पहली बार तो आयी है मेरे घर, कुछ दिन रुक जाती.

कृपाली : नहीं दीदी, मेने hi उन्हें कहा था की मुझे आना है.

स्वर्ण : (आश्चर्य se)Kyu?

कृपाली : वो सरे टेस्ट तो हो चुके है, डॉक्टर ने बस दवाई दी है, तो अब रुक के क्या फायदा. और wo...(Bolte बोलते रुक गयी)

स्वर्ण : रुक क्यों गयी, बोल न. (कृपाली शर्मा रही थी और संकोच भी कर रही thi)Ari बोल न, क्या हुआ?

कृपाली : वो डॉक्टर ने साथ रहने के लिए जो समय कहा था वो अभी चल रहा है तो मेने सोचा की में वापस चली जाती हु.

स्वर्ण : ओह ऐसा. (उसको खुसी से ज्यादा चिंता हो रही thi)SAch कहु तो मुझे भी तुजसे कुछ बाटे करनी थी, तू नास्ता कर ले फिर इत्मीनान से बात करते है.

कृपाली : जी दीदी. (नास्ता करने के बाद स्वर्ण जब फ्री हुई तो दोनों उसके hi कमरे में बैठे हुए थे. ) है दीदी क्या बात करनी थी आप को.

स्वर्ण : (उसके चेहरे से hi पता चल रहा था की वो किसी दुविधा में है, कृपाली को भी समाज नहीं आ रहा था, आखिर कर वो boli)Dekh, कप्पू, तू मेरी छोटी बहन है, में जो बात कहना चाहती हु वो सुन कर पता नहीं तू क्या सोचेगी, पर में जो कुछ कह रही हु वो तेरी भलाई के लिए कह रही हु. (कृपाली बहोत गौर से सुन ने लगी, उसको भी लग रहा था की बात कुछ गंभीर है, स्वर्ण ने कृपाली का हाथ अपने हाथ में liya)Dekh, मेने पहले भी कहा था, और अभी भी कह रही हु, तेरे रिपोर्ट्स सरे नार्मल है ये बात तू अपने घरवालों को या पति को मात बताना.

कृपाली : है अपने कहा था, पर उस वक़्त भी मेरी समाज में नहीं आया था दीदी, ऐसा क्यों? अगर में नार्मल हु तो फिर उनको बताना चाहिए न, आप नहीं जानती वो लोग मुझे कितना तना मरते है.

स्वर्ण : में जानती हु, और मुझे पता भी है, पर फिर भी में यही कहूँगी की तू मात बताना.

कृपाली : पर क्यों दीदी? आप ऐसा क्यों करने को कह रही है?

स्वर्ण : अब कैसे कहु तुजे (वो उल्जन में थी) अगर उन्हें पता चला की उनमे कोई कमी है तो सब गड़बड़ हो जाएगी. और ये बात वो लोग मानेंगे भी नहीं, चाहे डॉक्टर hi क्यों न कहे, हमारा समाज hi ऐसा है को वो मर्द की कमी मानेंगे hi नहीं, सारा दोष तेरे पर hi लगाएंगे.

कृपाली : पर आप तो खुद सारा दोष मुझे hi लेने को कह रही है.

स्वर्ण : है, उसकी एक वजह है.

कृपाली : तो कहिये न दीदी.

स्वर्ण : कैसे कहु यही समाज में नहीं आ रहा है, तू गलत मत समाज, पर अगर तूने बता दिया तो किसी और से बच्चा होने का चांस भी निकल जायेगा.

कृपाली : ये क्या कह रही हो दीदी, किसी और का बच्चा, आप सोच भी कैसे सकती हो ऐसा.

स्वर्ण :मेने कहा था न तू नहीं समझेगी, में तेरे भले के लिए hi कह रही हु.

कृपाली : (उसकी आँखों में नमी आ gayi)Meri hi किस्मत ख़राब है, आप माँ बन रही है तो आप कुछ भी बोलोगी.

स्वर्ण : ऐसी बात नहीं है कप्पू.

कृपाली : अगर मेरी जगह आप होती तो क्या आप अपने पति के अलावा किसी और के बारे में सोचती?

स्वर्ण : (मान में )अब तुजे कैसे संजो, में तो वो कर चुकी.

कृपाली : अब चुप क्यों हो गयी, कहिये, आप को अगर कोई कहे की जीजू के अलावा किसी और के साथ... (वो पूरा बोल भी नहीं पायी)

स्वर्ण : तुजे संजना मेरा फर्ज था, अब क्या करना है वो तू खुद hi सोच ले, कोई नहीं पूछे गए की ये किसका बच्चा है, तुजसे कोई सवाल नहीं करेगा, और किसी और से तू पेट से हो गयी तो ये साबित भी हो जायेगा की तुजमे कोई कमी नहीं है.

कृपाली : आप क्या बोल रही है पता भी है दीदी आपको. में ऐसा नहीं कर शक्ति, अगर आपको ऐसा करना होता तो क्या आप करती.

स्वर्ण : है, करती.

कृपाली : ये क्या कह रही है आप?

स्वर्ण : में तुजसे बड़ी हु, मेने दुनिया देखि है, में ये नहीं कहती की तुजे समाज नहीं है, इसीलिए कह रही हु की तू खुद सोचना और फिर निर्णय करना.

कृपाली : पर दीदी, ऐसे कैसे किसी और के साथ, और किसके साथ?

स्वर्ण : वो में क्या बताऊ तुजे, और मेने ये नहीं कहा की अभी के अभी तू ये निर्णय ले, सोच समाज कर फैसला करना, और रही बात किसके साथ तो आपने आस पास देखेगी तो तुजे कोई न कोई मिल जायेगा, है पर ऐसा होना चाहिए की जो तेरी मजबूरी का फायदा न उठाये, जिस पर तू भरोसा कर सके, औलाद भी अपने माँ बाप का रूप होती है, अगर कोई अच्छी सूरत और सीरत वाला मिले तो मन मत करना. (कृपाली के मान में फिर से एक बार शिव की छबि उभर आयी, पर फिर उसमे अपने मान को कोशा)

कृपाली: नहीं दीदी, में ऐसा नहीं कर सकती, जो भाग्य में लिखा होगा वैसा होगा, पर में ऐसे अपने पति को देखा नहीं दे सकती.

स्वर्ण : कोई बात नहीं कप्पू, तेरे हर फैसले में में तेरे साथ हु. (बात को बदलते hue)to कब आनीले है जीजाजी.

कृपाली : वो नहीं आ रहे, उन्होंने गाड़ी भेजी है. दोपहर तक निकल जाउंगी में.

फिर उन्होंने इस बारे में और बात नहीं की, बस ऐसे hi इधर उधर की बाते की. उधर में स्कूल में था, रेसस्स में मेने महसूस किया की संयम कुछ अलग नजरो से मुझे देख रही थी, वो बार बार ऐसे देख रही थी की मुझे लगने लगा की कोई तो बात है, पर सबके होने की वजह से मेने पूछा नहीं. वैस्वी को भी शिव से अकेले मिलना था पर यहाँ ये संभव नहीं था, इस लिए वो नार्मल hi थी. स्कूल ख़तम होने के बाद में और संयम घर के लिए निकल गए, संयम एक बार फिर मुझसे सात कर बेथ गयी, ऐसा करने सेउसके स्तन का एहसास मुझे हो रहा था, पर मेने कुछ कहा नहीं. पर वो जैसी किसी और मूड में hi थी, उसने अपना हाथ मेरी झंघ पर रख दिया और मुझे पता चल रहा था की वो हरकत भी कर रही थी, वो अपनी नाजुक उंगलिओ से वह दबा रही थी.

संयम को आज कुछ अलग hi महसूस हो रहा था, वो शिव के साथ किश तक आगे बढ़ चुकी थी, अक्सर वो शिव को hi सोचती रहती थी, आज कल गाने सुन न तो जैसे आम बात हो गयी थी, अक्सर वो गाने में शिव को तलाशती रहती, जबसे उसने अपनी hi अम्मी को शिव के साथ देखा था उसके मान और शरीर में बहोत से बदलाव महसूस कर रही थी, उसको पता था की लड़के और लड़की में किस तरह का सम्बन्ध होता है, वो अक्सर नहाते वक़्त भी अपनी छोटी सी छूट के छेड़ को भी देखती और उसको सहलाती, उसको बहोत मज़ा आता था, अब उसका शरीर इस संगम को तरस रहा था. उसने शिव को कई बार हिंट दिए थे पर शिव जैसे जान बुज कर उसको अवॉयड करता था, ये उसकी आग में घी का काम कर रहा था, वो समझती थी की वैस्वी और शिव के बिच कुछ है, और वो ये बर्दास्त नहीं कर प् रही थी, वो शिव को ऐसे नहीं जाने दे सकती थी, शिव उसको बेहद पसंद था, ऐसे hi वो वैस्वी को नहीं दे सकती थी, वैस्वी उसकी पक्की सहेली थी, और वो उसे भी नहीं छोड़ सकती थी, न hi उस से खफा थी, पर वो उनके बिच से हैट नहीं सकती थी, न उसने कभी कोशिस की न उसने अपने मान में एक बार भी लाया की वो उनके बिच से हैट जाये, वो शिव के प्रति इतनी पागल थी की वो ऐसा सोच भी नहीं सकती थी. वो थोड़ी आगे हुई और शिव के कान में बोली,

संयम : सुनो न.

शिव : (वो इतना पास से बोल रही थी की उसकी सासे भी मेरे कान से टकरा रही थी, ऊपर से वो पूरी सात के बैठी thi)Ha बोलो. (मेने अपने आपको सँभालते हुए कहा)

संयम : आज घर तक hi बाइक ले लेना.

शिव : क्यों?

संयम : क्यों क्या, में कह रही हु तो ले लो.

शिव : पर बताओ तो सही की क्यों?

संयम : (उसको कुछ नहीं सुजा तो बोल diya)Ammi बुला रही थी.

शिव : क्यों? (आंटी का नाम सुन कर मेरे सामने वो सन आ गया जब मेने उनके साथ वो सब किया था)

संयम : हर बात पे क्यों पूछना जरुरी है क्या, और उनसे hi पूछ लेना की क्यों बुला रही थी.

शिव : ठीक है.

संयम : (चिढ़ाते hue)Ammi की बात पर कैसे मान गए. में कहती हो तो कोई मतलब नहीं है न?

शिव : ऐसी कोई बात नहीं है.

संयम : तो मेरे कहने पर क्यों नहीं आये?

शिव : मेने कहा मन किया था, में तो बस पूछ रहा था की क्यों?

संयम : रहने दो में सब समझती हु.

शिव : क्या समझती हो?

संयम : कुछ नहीं. चलो. (घर चलो सब बताती हु, वो मान में boli)(Hum दोनों उसके घर आ गए, मेने बाइक वह कड़ी कर दी, उसने बेल्ल बजायी तो आंटी ने hi दरवाजा खोला, मुझे देख कर वो थोड़ा हिचकिचाई, मेरी समाज में नहीं आया. हम दोनों अंदर चले गए.

संयम : अम्मी में थोड़ी देर बाद खाना खाउंगी, मुझे कुछ काम है.

अम्मी : क्यों, क्या हुआ?

संयम : वो स्कूल का काम है तो थोड़ी देर बाद खाना कहूँगी.

अम्मी : वो में पड़ोस में रहना के वह जा रही थी. (शिव की वजह से वो थोड़ा हिचकिचा कर बोली, उसका प्रोग्राम बना हुआ था, वो बस निकल hi रही थी, वो संयम का hi इंतजार कर रही थी, पर शिव की वजह से वो थोड़ा हिचकिचा रही थी)

संयम : क्यों?

अम्मी : काम है कुछ.

संयम : ठीक है, जा आओ.

अम्मी : Par...(Wo शिव की वजह से हिचकिचा रही थी, वो जाये की न जाये यही सोच रही थी, उसने बोल दिया था की वो आ रही है तो जाना तो था hi)

संयम : पर क्या??

अम्मी : नहीं कुछ नहीं, में आती हु. (जैसे hi उसकी अम्मी गयी, संयम ने दरवाजा बंद कर दिया, उसको पता था की अब उसकी अम्मी आधे पौने घंटे तक नहीं aanewali)(Usne दरवाजा बंद कर दिया, और आंटी ने भी मुझसे कुछ नहीं कहा, मेरी कुछ समाज में नहीं आ रहा था, में उसको सवालिया नजरो से देखने लगा)

संयम : (वो शिव की उल्जन समाज गयी और है padi)Mene जूथ कहा था, अम्मी ने नहीं बुलाया था. आओ ऊपर चलते है. (वो इतनी बेफिक्र थी की मेरी समाज में नहीं आ रहा था, और नाज़िआदिदी भी निचे नहीं दिख रही थी, शायद ऊपर होगी, में उसके पीछे पीछे ऊपर चला गया, उसने रूम में अपना बस्ता रक्खा, मेने रूम में देखा तो वह भी नाज़िआ दीदी नहीं थी, उसने मेरी और dekha)Kya हुआ? (उसने अपनी आंखे नाचते हुए मुस्कुरा के पूछा)

शिव : नाज़िआदिदी???

संयम : वो अपने घर गयी है, जीजू लेने आये थे, क्यों? कोई काम था उनसे?

शिव : तूने जूथ क्यों बोलै?

संयम : तुजसे बात करनी थी, और तू बिना वजह आता नहीं, इसलिए मेने जूथ बोलै.

शिव : पागल हो गयी है क्या, घर में कोई नहीं है और तुजे बात करनी है, क्या बात करनी है?

संयम : मुझे थोड़ी न पता था की अम्मी भी जानेवाली है, वैसे अच्छा हुआ की वो भी नहीं है, अभी आधा एक घंटा हम दोनों अकेले है. (उसने मुस्कुरा के कहा)

शिव : (मुझे उसके िर्रादे कुछ ठीक नहीं लग रहे the)Kya बात करनी है, बता?

संयम : (मुस्कुराते hue)Koi बात नहीं करनी.

शिव : ये क्या लगा रक्खा है तुमने, में जाता हु. (उसने मेरा हाथ पकड़ लिया)

संयम : में लड़की हु की तू?

शिव : क्या मतलब है तेरा? (मेने उसको देखते हुए कहा)

संयम : ऐसी सिचुएशन में मुझे गभरणा चाहिए, और मुझे कहना चाहिए की में जाती हु, यहाँ तो सब उल्टा है, तू भाग रहा है. (वो व्यंग से मुस्कुराने लगी)

शिव : पागल हो गयी है ऐसा लगता है मुझे.

संयम : (मेरे और नजदीक आते hue)Ha हो गयी हु, क्या करेगा? (में कुछ नहीं बोलै बस उसको देखने लगा, वो आज पुरे मूड में थी, न चाहते हुए भी मेरी नज़ारे उसके नाजुक से चेहरे को देखने लगी, उसकी काली आंखे, उसका मुस्काता चेहरा, प्यारे से होठ, वो मेरी आँखों में देखने लगी और boli)Me तुजे जरा भी अच्छी नहीं लगती?

शिव : पागलो जैसी बात मात कर. (मेने थूक निगलते हुए कहा)

संयम : तो फिर भागता क्यों है?

शिव : तू समझती क्यों नहीं.

संयम : कुछ नहीं समझना मुझे (उसने मेरे गले में बहे दाल di)Kya में इतनी बुरी हु? (उसके चेहरे पर सच में मायूसी छ गयी)

शिव : मर jayegi(Mene उसको चेताया)

संयम : वैसे भी कोनसा जी रही हु. (वो जैसे थान कर बैठी थी, में उसकी आँखों में देखने लगा, उसके इतना नजदीक होने से और उसके इरादे जान कर मेरे लुंड में अकड़न आणि सुरु हो गयी, उसकी भी सासे तेज होने लगी थी और मेरी भी, वो भी जैसे तैयार hi थी, में उसको बीएड पर धकेलते हुए उसके ऊपर हो गया, हम दोनों के पेअर अभी निचे जमीं पर hi थे, दोनों जोर जोर से सासे लेने लगे, जैसे दोनों हाफ रहे हो, वो बस मुझे देख रही थी, उसकी बहे अभी भी मेरे गले में hi thi)Jyada मात सोच. (जैसे वो मेरा मान पढ़ रही थी, में भी झुक गया और उसके होठो पर मेरे होठ रख दिए और उसको जोरो से चूसने लगा, वो जोरो से सासे लेनी lagi)Fuuuuu फूऊऊऊ फूऊऊऊ (में उसके नाजुक होठो को जोरो से चूसने लगा, वो मुझसे जोरो से लिपटने लगी, में उसको होतो को पूरी तरह भिगोने लगा, मेरा लुंड पूरी औकात में आ गया था, में उसके पैरो के बिच hi था, और मेरा लुंड उसकी छूट वाले भाग पर hi था तो में, कमर हिलने laga)(Samim पागल होने लगी, उसने सोचा नहीं था की इतना सब हो जायेगा, शिव का वो कड़क लुंड उसकी छोटी सी कुवारी छूट पर दस्तक दे रहा था, उसने सोचा था उस से कही ज्यादा उत्तेजक और आनंद दायक था, वो जोरो से उसको खींचते हुए उसके होठो पर अपने होठ दबाने लगी, थोड़ी hi देर में उस से सास लेना मुश्किल होने लगा, उसने मुँह घुमा लिया और मुँह खोल कर जोर जोर से सासे लेने लगी, पर शिव उसकी गर्दन और उसके गाल को चाटने लगा, ये सब उसकी कल्पने से कही ज्यादा मजेदार था, उसकी आंखे भी बंद हो gayi)(Pata नहीं पर में भी बहोत ज्यादा उत्तेजित हो गया था, मेने एक हाथ से उसके छोटे स्तन को मसल diya)Ahhhhhhh (ये दर्द से ज्यादा एक उत्तेजक आह थी, संयम को दर्द तो हुआ पर उस से कही ज्यादा उत्तेजना महसूस हुई, किसी ने पहली बार उसके कच्चे संतरो को निचोड़ा tha)Ahhhhhh शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (वो छटपटाने लगी, एक तो लुंड उसकी छूट पर ठोकर मर रहा था और दूसरी और शिव उसके एक स्तन को दबोचे हुए दूसरे पर अपना मुँह रगड़ रहा था, ये सब उसकी कल्पना से कही ज्यादा था, पर वो पूरी तरह से मस्त हो रही thi)Shhhhhh शीइइइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, ी लव यू मेरी जान (उसने शिव के बालो को पूरी ताकत से खिच्च liya)(Uske ऐसा करने से मुझे दर्द महसूस हुआ पर में और ज्यादा उत्तेजित हो गया और उसके स्तन को काट liya)Ammmmiiiiiiiiii. शह्ह्हह्ह्ह्ह (मेने दन्त ज्यादा नहीं गढ़ाए, बस हलके हलके उसको काटने laga)Shhhh क्या कर रहे हो शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, ये कैसा मज़ा है शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह, (वो मेरे बालो को नोचने lagi)Kha जाओ उसे शह्ह्ह्हह्ह. (में थोड़ा ऊपर हुआ और उसके शर्ट के बटन खोलने laga)(Samim को एकदम से शर्म आने लगी, पर उसने शिव को रोका नहीं, बस मुँह दूसरी और कर लिया)

शिव : (मेने देखा की उसने मुँह दूसरी और कर liya)Meri और देख. (उसने ना में गर्दन hilayi)Meri और देख कहा न. (मेने जैसे उसको आदेश दिया, वो मुझे देखने लगी, में उसको देखते हुए उसके शर्ट के बटन खोलने लगा, वो बस मुझे देख रही थी, तीन बटन खोलते hi उसकी ब्रा दिखने लगी, अंडर हाथ दाल कर ब्रा के ऊपर से hi मेने उसके स्तन को हलके सेदबाया)

संयम : Shhhhhhhhh(Uski सकल रोने जैसी हो गयी थी, पर वो उत्तेजना वाली सकल थी, में उसके शर्ट को और रैला कर उसके दोनों स्तन को खोल दिया, ब्रा में कैद दोनों संतरे मेरे सामने थे, उन्हें दबाते हुए में झुका और बिच में चूमने और चाटने लगा )शहहहहह Shiiiiiiiiiiv. कब से तरस रही थी में शह्ह्हह्ह्ह्ह मुझे प्यार करो शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेने उसके बायीं और के स्तन को ब्रा निचे खींच कर नंगा किया और मेरे सामने उसका कड़क छोटा निप्पल थे, उसके आस पास का घेरा भी गेहुए रंग का था, में उस छोटे से निप्पल को देखने laga)(Samim को अब शर्म नहीं आ रही थी, वो बहोत ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी, वो बस शिव के चेहरे के बदलते भाव देख रही थी, कोई लड़का पहली बार उसके स्तन को नंगा देख रहा था, वो उसके चेहरे को समझने की कोशिस कर रही थी, एक बार शिव ने उसकी आँखों में देखा जैसे पूछ रहा हो की आगे बधु, वो रो पूरी तरह से तैयार थी, उसने आंखे झपका कर हां में इसारा kiya,Shiv झुक गया और उसके छोटे से डेन को अपने मुँह में भर लिया)





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शह्ह्हह्ह्ह्ह Shiiiiiiiiiiiiiv (उसने शिव के शिर को दबोच लिया और अपने स्तन पर दबाने लगी, उसके गरम गरम मुँह में अपने निप्पल को महसूस करके उसकी छूट से रास की नदी बहने lagi)Shhhhh Shiiiiiiiiiiiiiiv. (जैसे जैसे शिव उसके निप्पल को चूस रहा था उसके अंदर चिंगारिया फुट रही थी, ऐसा एहसास वो जीवन में पहली बार कर रही थी, इतना मज़ा आता होगा उसने सपने में भी नहीं सोचा था. उसने दूसरी और की ब्रा को भी खींच कर अपने दूसरे निप्पल को भी बहार कर diya)Shiiiiv शह्ह्ह्ह इसे भी चुसो. (वो उत्तेजना से पागल हो चुकी थी, मेने बिना उसकी और देखे hi दूसरे निप्पल को भी मुँह में भर लिया, में बरी बरी दोनों निप्पल को चूस रहा था और जोरो से चूस रहा tha)Shhhhhh शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था, में उठ गया और उसको बीएड में ऊपर धकेलते हुए उसकी स्कर्ट को ऊपर कर दिया, उसकी सफ़ेद रंग की छोटी सी पंतय मेरे सामने थी जो पूरी तरह से भीग चुकी थी)

(संयम अचानक हुई इस क्रिया से शर्मा गयी और उसने अपनी छूट के भाग को हाथ से धक् दिया, शिव उसको देखने लगा, उसने भी शिव को देखा, फिर अपना हाथ हटा लिया, पर उसको बहोत शर्म आ रही थी, उसने चद्दर को मुट्ठी में भर लिया. और दूसरी और देखने lagi)(Mene देखा की वो शर्मा रही है, पर इस बार मेने उसको कुछ नहीं कहा. मेने पंतय को देखा, संयम को और बीएड पर पीछे धकेला और उसकी पंतय के नजदीक गया, उस से आती मादक गंध मेरे नथुनों में भर गयी, मेरी आंखे भी बंद हो गयी, मेने जोर से सास अंदर खींची, और नाक को वह रगड़ने laga)Shhhhhhhhh Shiiiiiiiiiiv (संयम ने चद्दर को जोरो से मसल दिया, जिसे जैसे शिव वह अपनी नाक रगड़ रहा था वो बेहाल होती जा रही थी, वो सब भूल चुकी थी, बस उसको अपनी छूट पर हो रहा स्पर्श hi महसूस हो रहा था, शिव उसकी पंतय के ऊपर से hi उसको छूट को मुँह में भरने की कोशिस करने लगा और उसे चूसने लगा





)शहहहहह शीइइइइइव शहहहहह में पागल हो जाउंगी शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह मुझे ये क्या हो रहा है. (में उसकी हालत समाज रहा था, वो झड़ने के कगार पर थी, मेने भी देरी नहीं की और उसकी पंतय को साइड में खिसकाया, चुप पूरी चिप छिपी हो गयी थी, फुले हुए होठ पूरी तरह से बंद थे, मेने ज्यादा देर नहीं की और वह होठ लगा दिए और उसको चूसने laga)Shhhhhhhhh Shiiiiiiiiiiiiv (संयम अकड़ गयी, जैसे जैसे शिव उसकी छूट को चाट रहा था वो पागल हो रही थी, ये किस तरह का आनंद है वो समाज hi नहीं प् रही थी, शिव की जीभ उसके छेड़ में घुसने का प्रयास कर रही थी, उसने अपने पेअर पूरी तरह से खोल दिए ताकि शिव और अंदर जा सके, शिव जैसे जैसे उसके छेड़ को जीभ से कुरेद रहा था उसके शरीर में कुछ हो रहा था, कमरे में मादक गंध फ़ैल गयी thi)(Muje महसूस हो रहा था की हर लड़की की गांड कुछ हद तक अलग होती है, उस अजीब गांड से में और उत्तेजित हो रहा था, में जोरो से उस कुवारी छूट को चाटने लगा, और जैसा अनुमान था वो थोड़ी hi देर में अपने चरम पर पहुंचने वाली thi)Shhhhhhhh हआ शह्ह्हह्ह्ह्ह हाआआआआ शह्ह्ह्हह्ह haaaaaaa(Samim की आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा था, वो काँप रही थी, वो अपनी कमर को ऊपर निचे कर रही थी, वो पागल हुई जा रही थी, अचानक उसकी आँखों के सामने तारे नाचने लगे और उसके शरीर में एक अजीब सा आनंद सामने लगा, उसकी छूट से कुछ निकलने लगा, उसने अपने पेअर से शिव के शिव को जकड लिया और उसके बालो को हाथो से खींच कर अपनी छूट पर दबा दिया. वो पूरी तरह से अकड़ gayi)(Muje दर्द होने लगा था, उसके पैरो की पकड़ बहोत मजबूत थी और उसने मेरे बाल इतनी जोरो से खिंच लिए थे की मेरी भी कराह निकल गयी, पर साथ में उसकी छूट से निकलता अमृत मेरे मुँह में भरने लगा, वो रास तो छोड़ रही थी और साथ में मूत भी दी थी, पर उसकी पकड़ मजबूत थी और में भी छूटना नहीं चाहता tha,)(Jab उसके अंदर से सब निकल गया तो संयम शांत हो गयी, और उसकी पकड़ ढीली पद गयी, वो बस हाफ रही थी, मेने उसके पेअर हटाए और खड़ा हो गया, में उसे देख रहा था, ऊपर के बटन खुले हुए थे, और छूट थोड़ी झक रही थी और वो हाफ रही थी, जब वो संभाली और मेरी और देखा तो वो शर्मा गयी और अपने आपको छपते हुए साइड में हो गयी और अपनी छूट को स्कर्ट से धक् दिया और अपने शिर को भी सही करने लगी. में मुस्कुराया और फिर से उसको सीधा कर दिया और उसके ऊपर आ गया.

शिव : सब दिखने के बाद अब क्यों शर्मा रही हो? (मेने उसको छेड़ा)

संयम : (वो बहोत ज्यादा शर्माने लगी, उसका चहेरा वैसे भी लाल हो चूका tha)Chhodo मुझे. (वो मुस्कुराते हुए शर्माने लगी)

शिव :अब छोडो, और कबसे मुझे पकड़ कर मेरे मुँह में hi सब कर दी.

संयम : (वो बहोत ज्यादा एम्ब्रोस फील करने lagi)Sorry, वो वो...

शिव : तुम्हारा तो हो गया, अभी मेरा नहीं हुआ है.

संयम : वो मुझे देखने लगी. (अभी फ़िलहाल उसके ऊपर से सेक्स का बहुत उतर चूका था, वो समझने की कोशिस कर रही थी की अब में क्या करूँगा, पर अब उसको दर लग रहा था की उसकी अम्मी न आ जाये, क्यों की काफी वक़्त हो चूका tha)Wo अम्मीय. (बस इतना hi वो बोलपयी)

शिव : तुम्हे सब करना था न (मेने उसे छेड़ा, वो मुझे देखने लगी, में मुस्कुराया और उसको बीएड से खींच कर खड़ा कर दिया, फिर से हम दोनों जमीं पर खड़े थे, में उसके शर्ट के बटन बंद करने लगा, वो मुझे प्यार से देखने lagi)Aise क्या देख रही हो?

संयम :तुम सच में अलग हो शिव, तुम दूसरे लड़को के जैसे नहीं हो.

शिव : कैसा नहीं हु?

संयम : अगर कोई लड़की इतना खुल जाये तो वो उसे कभी नहीं छोड़ेगा.

शिव : तो मेने भी कहा छोड़ा है, में जब भी चौंगा तुम ाही जाओगी, है न?

संयम : जब भी तुम कहो Shiv(Kehte हुए वो शिव से लिपट गयी.

शिव : जल्दी अपना हुलिया ठीक कर और मुझे जाने दे, वर्ण आज hi सब हो जायेगा. (वो शर्मा गयी और अपना हुलिया ठीक करने लगी, हम दोनों निचे आ गए, में दरवाजे की और बढ़ा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया. मेने उसकी और देखा)

संयम : में तुम दोनों के बिच नहीं आना चाहती थी शिव, पर में अपने आपको नहीं रोक सकती.

शिव :अब ज्यादा सोच मात. (मेने उसके चेहरे को सहलाया)

संयम : तू नाराज तो नहीं है न?

शिव : किस बात पर.

संयम : किसी भी बात से.

शिव : नहीं हु. (वो फिर मेरे गले लग गयी, मेने उसके माथे को चूमा, फिर दरवाजा खोला और बहार निकल गया, में बाइक पर बैठा hi था की आंटी मुझे आती दिखाई दी, में रुक गया, वो हिचकिचा रही थी)

ज़ोया : जा रहे हो?

शिव : आप कहे तो रुक जाऊ. (मेने बस उन्हें छेड़ने के इरादे से कहा था)

ज़ोया : (वो शर्मा गयी और नज़ारे झुका li)Samim? (ज़ोया का भी मान हो गया था, उसने नक्की किया था की वो शिव के साथ अब ऐसा कुछ नहीं करेगी पर आज शिव के सामने होने पर जैसे वो अपने आपसे किया वडा hi भूल गयी)

शिव : में जनता हु, फिर आऊंगा. (ज़ोया शर्मा gayi)Bye.

ज़ोया : (मुस्कुराते hue)Bye, (और फिर बोल भी diya)Me इंतजार करुँगी. (फिर वो खुद hi शर्मा गयी, में वह से निकल gaya)(Zoya अपने घर में दाखिल हुई, वो कबसे सोच रही थी की संयम और शिव अकेले है घर पर, अगर कुछ हो गया तो, पर जब उसने संयम को देखा तो वो सही सलामत लगी उसको, वो अच्छे से चल फिर रही थी, पता नहीं पर उसके दिल ने रहत महसूस की, फिर उसने संयम को खाना परोसा, और उसके शिर पर हाथ फिरते हुए खाना भी खिलने लगी)

संयम : क्या हुआ अम्मी, आज ज्यादा प्यार आ रहा है मुझपर.

ज़ोया : क्या में प्यार नहीं करती अपनी बच्ची से? (संयम बस मुस्कुरायी और खाना खाने लगी)

में घर पहुंच गया, देर से आने के लिए डाट भी खायी, फिर में साइट के लिए निकलने लगा.

सरिता : अब कहा जा रहा है?

शिव : साइट पर.

सरिता : बहार हर जगह इतना पानी भरा है और तुजे साइट पर जाना है.

शिव : कुछ नहीं है ज्यादा, में स्कूल जा कर तो आया. (फिर वो कुछ नहीं बोली, में निकल गया, पर सच में पानी भरा हुआ था, कई जगहों पर रस्ते में भी पानी भरा हुआ था, में जैसे तैसे साइट पर पंहुचा तो गिने चुने hi मजदूर थे, मेने उनसे बात की तो पता चला की पिंकेशभाई भी नहीं आये है और जहान्वी भी नहीं आयी है, मेने जहान्वी को फ़ोन लगाया)

जहान्वी : Hello.

शिव : कहा है आप?

जहान्वी : घर पर hi हु, तुम कहा हो?

शिव :में साइट पर आया था.

जहान्वी :मेने सुना की रास्तो पर पानी भरा हुआ है तो में नहीं आयी, तुम रुको में आती हु.

शिव : आप मात आईये, सच में रास्तो पर पानी भरा हुआ है, कही फास गयी तो मुसीबत हो जाएगी, और मजदूर भी बहोत काम है, वो भी वापस जाने के लिए पूछ रहे थे.

जहान्वी : तो जाने दो उन्हें, अगर फिर बारिश हुई तो फास जायेंगे.

शिव : ठीक है. कल मिलते है.

जहान्वी : (उसने सोचा की शिव अकेला हो जायेगा वह, तो ऐसा मौका नहीं मिलता fir)Kya सचमे बहोत पानी भरा है?

शिव : है, कई जगहों पर तो घुटनो के ऊपर पानी है. (जहान्वी निराश हो गयी)

जहान्वी : ठीक है. (उसने उदास हो कर कहा)

शिव : क्या हुआ?

जहान्वी : कुछ नहीं. ठीक है, कल मिलते है.

शिव : ठीक है, bye.

जहान्वी : Bye (उदास हो कर)

मेने फ़ोन रख दिया और मजदूरों को जाने को बोल दिया. अब मेरा भी काम नहीं था तो मेने घर जाने का सोचा, फिर मेरे दिमाग में क्या आया तो मेने काव्यजि को फ़ोन कर दिया.

काव्य : Hello. (वो बहोत खुस हो गयी थी)

शिव : Hello.

काव्य : आज मेरी याद कैसे आ गयी? (उसने तना मारा)

शिव : कहा हो आप?

काव्य : घर पर, क्यों?

शिव : इस वक़्त आप कोर्ट होती है न?

काव्य : बारिश की वजह से वापस आ गयी, क्यों पूछ रहे हो? (उसने मुस्कुराते हुए पूछा)

शिव : बस ऐसे hi पूछ रहा था, बारिश की वजह से पानी भर गया है तो मेने सोचा की आपका हल चल पूछ लू.

काव्य : तो जनाब को हमारा भी ख्याल आता है. (उसको बहोत अच्छा लग रहा था की शिव उसको याद कर रहा था) तुम कहा हो?

शिव : में भी साइट पर आया था, यहाँ भी काम रुका हुआ है तो फिर घर जा रहा था.

काव्य : अच्छा. (वो कुछ कहना चाहती थी पर उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी)

शिव : एक बात पुछु? (शिव के भी दिमाग में सायद यही चल रहा था)

काव्य : (शरमाते hue)Puchho. (उसको शर्म इस लिए आ रही थी की वो अपने मान में ख़याली पुलाव पका रही थी)

शिव : में आ जाऊ वह?

काव्य : (ये सुन कर तो जैसे वो शर्म से गाढ़ी जा रही थी, और चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान फ़ैल gayi)Kyu? (उसने नारी सहज नखरा दिखाया)

शिव : बस ऐसे hi, मिल भी लूंगा.

काव्य : (उसको बहोत शर्म आ रही थी, ऊपर से उसके मां पापा भी घर पर नहीं the)Jaisa तुम्हे ठीक लगे. (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : ठीक है में आता hu.(Mene भी ज्यादा बात को नहीं खिंचा, में काफी टाइम से मिला नहीं था उनसे, तो मिलने का मान कर रहा था, वैसे ज्यादा कोई चांस नहीं था क्यों की उनके मम्मी पापा होते है, पर दिल कह रहा था की मिल लू, मेरे सामने उनका भरा हुआ मस्त शरीर नाच रहा था, मेने बाइक उठायी और उनके घर की और निकल गया)
 
अपडेट 196

एक तरफ तो कृपाली शिव से मिलने से कतरा रही थी, पर जब अब घर जाना था तो उसको लग रहा था की एक बार शिव मिल जाता तो अच्छा रहता, उसका मान किया की वो स्वर्ण से शिव के बारे में पूछ ले या फिर उसका मोबाइल नंबर hi ले ले, पर हिम्मत hi नहीं हुई, उसके मान में द्वंद्व चल रहा था, एक तरफ वो ये सोच रही थी की ये सब गलत है, पर उसका दिल मान नहीं रहा था, जब वो घर से निकली तब भी उसका दिल बार बार शिव का नंबर लेने के लिए कह रहा था पर वो नहीं कर पायी, वो अपनी कार में बेथ गयी, सब से विदा ले कर वो वह से निकल पड़ी, पर मान उदास था, वो खिड़ की पर बैठी बस शिव के बारे में सोच रही थी, ये उसकी किस्मत कहो की उसके दिल की पुकार उसको शिव दिख गया, वो बाइक पर था, अचानक उसने शिव को आवाज दी,

कृपाली : शीइइइइइव. (में चौंक गया, मेने देखा तो मुझे कार में कृपालिजी दिखाई di)(Krupali, ड्राइवर se)Bhaiya, जरा गाड़ी रोकना. (ड्राइवर ने गाड़ी रस्ते के साइड में रोक दी, वो दरवाजा खोल कर बहार निकली, एक तरफ तो उसको बहोत शर्म आ रही थी और दिल में बहोत सी उलझन थी, पर अब वो कदम बढ़ा चुकी थी, उसने देखा की शिव ने भी बाइक उसकी गाड़ी के पीछे hi रोकी और वो बाइक से उतरा, वो उसके पास आता उस से पहले hi वो उसके पास पहोच गयी, उसका दिल तेजी से धड़क रहा था)

शिव : Aap???(Mene कृपाली जी को देखा और उनकी कार को)

कृपाली : (हिचकिचाते hue)Wo में जा रही हु.

शिव : कहा?

कृपाली : घर.

शिव : क्यों?

कृपाली : क्यों क्या, घर नहीं जाउंगी क्या. (उसके चेहरे पर हलकी सी मुस्कराहट आ गयी)

शिव : (झेपते hue)Mera मतलब वो नहीं है, पर अचानक?

कृपाली : यहाँ काम ख़तम हो गया था तो जा रही हु, अच्छा हुआ तुम मिल गए.

शिव : (मेरी समाज में नहीं aaya)Koi काम था?

कृपाली : (वो एक दो पल रुकी, उसका दिल कह रहा था की नंबर ले ले, पर उसको अजीब लग रहा था)

शिव : क्या हुआ, कोई दिक्कत है? (मेने उनके चेहरे पर उलझन देख कर पूछा)

कृपाली : तुम्हारा नंबर (उसने हिचकिचाते हुए कहा)

शिव : मोबाइल नंबर? (उसने है में इस्सर किया, मेने अपना मोबाइल नंबर उन्हें दे दिया, उन्होंने उसको अपने मोबाइल में सेव कर लिया और मुझे मिस्ड कॉल किआ)

कृपाली : ये मेरा नंबर है, अगर कभी याद आये to.(Usne झिझकते हुए शर्मा के kaha)(Mene भी उनका नंबर सेव कर liya)(Krupali, कुछ सोच kar)Thank यू.

शिव : किस बात के लिए?

कृपाली : मुझे बचने के लिए, उस वक़्त तो मेरा दिमाग hi काम नहीं कर रहा था, पर आज पेपर में उनलोगो के बारे में पढ़ा तब पता चला की वो दोनों कितने खतरनाक थे, तुम्हारी जान भी जा शक्ति थी, पर तुमने मुझे बचा लिया.

शिव : इसमें थैंक यू की क्या बात है, मेरे रहते आपको कुछ हो जाये तो क्या में अपने आपको कभी माफ़ कर पता, थैंक यू की कोई आवस्यकता नहीं है. (मेने मुस्कुरा कर कहा)

कृपाली : तुम सचमे अच्छे हो शिव. में चलती हु, क्सक्सक्सक्साहेर में रहती हु, कभी उस और आओ तो मुझे फ़ोन करना.

शिव : जी, जरूर.

कृपाली : Bye.

शिव : Bye. (वो जा कर फिर से कार में बेथ गयी और जाते जाते भी हाथ हिला कर उन्होंने bye किया, मेने भी उन्हें bye किया, वो चली गयी, मेने बाइक ली और फिर काव्यजि के घर की और निकल गया.

कृपाली कार में बेथ कर शिव के बारे में hi सोच रही थी, वो जितना उसको मान से दूर रखने की कोशिस कर रही थी उतना hi वो उसके बारे में सोच रही थी. रात को भी उसके साथ बिताये पल उसको बार बार याद आ रहे थे, वो देर रात तक जग रही थी, इसलिए सीट पर शिर रख कर वो कब सो गयी उसको पता hi नहीं चला.

में काव्यजि के घर पहुंच गया था, मेने दुर्बल बजायी तो काव्यजि ने hi दरवाजा खोला, वो साड़ी पहने हुए थी, हरे रंग का ब्लाउज और बादामी कलर की बॉर्डरवाली साड़ी थी, ऊपर से उन्होंने गजरा भी लगाया हुआ था, उनको ऐसे देख कर में चकित रह गया, आज वो एक घरेलु औरत की तरह दिख रही थी, मुझे अपनी और ऐसे देखते देख वो शर्माने लगी.





काव्य : (शरमाते hue)Wahi खड़े रहोगे की अंदर बही आओगे. (में झेपते हुए अंदर आ गया, मेने मेंसूस किआ की घर में सन्नाटा छाया हुआ है, कोई भी चहल पहल नहीं hai)(Kavya भी दरवाजा बंद कर के शिव को बैठने के लिए बोल कर पानी लेने चली गयी, आज उसकी चल में एक लचक थी, उसके कूल्हे कुछ लहरा के हिल रहे थे, जब शिव ने कहा की वो आ रहा है तो वो फटाफट तैयार हो गयी थी, सो खुद समाज नहीं प् रही थी की वो ऐसा क्यों कर रही है पर उसका दिल जैसे कह रहा था की उसको अच्छे से तैयार हो जाना चाहिए, वो चाहती थी की शिव को वो अच्छी लगे, और हुआ भी ऐसे hi, वो उसको जिस तरह से देख रहा था उसको शर्म के साथ साथ बहोत अच्छा लगा था, वो अभी भी मुस्कुरा रही थी और अपने कूल्हों को मटकती हुई पानी लेने गयी थी, उसको यकीं था की शिव उसको hi देख रहा होगा, पर उसकी हिम्मत नहीं हुई की वो पीछे मुद कर देखे, वो किचन में जल्दी से घुस गयी और पानी ले कर बहार आयी.

काव्य : लो. (वो अपने आपको नार्मल दिखने का भरचक प्रयास कर रही थी)

शिव : कोई दिख नहीं रहा है, अंकल आंटी सो रहे है क्या? (मेने ऐसे hi पूछा)

काव्य : (शरमाते हुए, वो सामने सोफे पर बेथ gayi)Nahi वो बहार गए है. (बोलते बोलते उसको इतनी शर्म आ रही थी की वो उसके साथ नज़ारे भी नहीं मिला प् रही थी, उसका दिल भी धड़क रहा था क्यों की वो दोनों अकेले hi थे और उसको पता था की आज जरूर कुछ hoga,aur उसका भी पूरा मान था आज सब कुछ करने का, पर फिर भी एक झिझक थी, उसको बहोत शर्म आ रही थी)

शिव : कहा गए hai?(Mene पानी पिने के बाद पूछा)

काव्य : एक रिलेटिव के वह गए है, शाम तक आएंगे. (हलाकि शिव ने पूछा नहीं था पर फिर भी उसने बता दिया की शाम तक कोई नहीं आनेवाला, वो नयी नवेली दुल्हन की जैसे शर्मा रही थी और संकुचा भी रही थी, ऐसा तो वो पहली बार महसूस कर रही थी, शिव के साथ वो एक लड़की बन जाती थी और उसके सरे अरमान जागने लगते थे, वो उसके साथ सब कर चुकी थी पर फिर भी उसको बहोत शर्म महसूस हो रही थी, वो शिव को ये बताना चाहती थी की सब कुछ सही है, कोई दिक्कत नहीं है, तुम्हे जो करना है कर सकते हो, पर वो मुँह से कुछ बोल नहीं रही थी, उसको बहोत शर्म आ रही थी)

शिव : (शाम तक अंकल और आंटी आनेवाले नहीं थे, मेने उनको देखा तो उनकी शर्म बहोत कुछ बयां कर रही थी, फिर भी मेने कन्फर्म किया) और नौकर?

काव्य : (उसने एक बार शिव को देखा और फिर शर्म से नज़ारे झुका li)Wo भी नहीं है, उनके घर की तरफ पानी भर गया है तो वो नहीं आये है. (मेने देखा की रास्ता पूरा साफ़ है, मेने काव्यजि को ध्यान से देखा, अब मेरी समाज में आ रहा था की वो इस तरह से क्यों तैयार है, इसका एक hi मतलब था की वो मेरेलिए hi तैयार हुई है, मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी)

शिव : (अपने सोफे से उठते hue)Matlab घर में कोई नहीं है.

काव्य : (शिव को उठते देख उसका दिल धड़कने लगा, उसने शरमाते हुए शिव को देखा, वो खड़ा हो कर उसकी और आ रहा था, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, उसने अपना शिर झुकालिया और ना में इस्सर किया, उस से बोलै भी नहीं जा रहा था)

शिव : (में जा कर उनके बाजु में बेथ गया, उनके शरीर से ित्तर की खुसबू भी आ रही थी और गजरे की महक भी आ रही thi)Aaj आप बहोत ज्यादा खूबसूरत लग रही है. (मेने जोर से सास लेकर खुसबू को महसूस करते हुए कहा)

काव्य : (बहोत शर्मा गयी, और मुस्कुराने lagi)Kyu पहले नहीं लगती थी?

शिव : आपको सदा, प्रोफेशनल ड्रेस में hi देखा है न, आज कुछ अलग लग रही हो आप. ऊपर से आपको बड़ीबड़ी आँखे झुकी हुई है आज.

काव्य : (काव्य मंद मंद मुस्कुराने lagi)Aaj मान किआ तो तैयार हो गयी.

शिव : (उनके हाथ पर हाथ रखते hue)Par फिर मुझसे कोई भूल हो जाये तो केस मात कर देना.

काव्य : (एक और तो हाथ पकड़ ने से वो कैंप सी गयी, और दूसरी और उसकी बात सुन कर मुस्कुरा uthi)Kyu दर लग रहा है? (उसने भी जैसे उकसाया)

शिव : दर तो लगेगा न, इतनीबड़ी वकील हो आप, कही हमेसा के लिए अंदर करवादिया तो.

काव्य : रिस्क तो है, फिर क्या करने का िर्रादा है. (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : अब जब कदम बढ़ा hi दिया है तो फिर अंजाम से क्या डरना, चाहे फ़ासी लगवाओ या उम्रकैद, पीछे हटना तो मुश्किल hi लग रहा है. (उनके नाजुक हाथ को अच्छे से पकड़ कर सहलाते हुए मेने kaha)(Kavya बस मुस्कुरा उठी, इस तरह की बात उसके साथ किसी ने नहीं की थी, किसी की हिम्मत hi नहीं थी, पर शिव को जैसे सब आज़ादी थी, उसके hi घर में वो उसका हाथ पकड़ कर बैठा था) मेरी और देखिये न.

काव्य : क्यों? (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : मुझे आपकी बड़ी बड़ी आंखे देखनी है.

काव्य : (उसने गर्दन घुमाई और शिव की और तिरचिहि नजरो से dekha)Kya देखना है? (उसने मुस्कुराते हुए पूछा)

शिव : बहोत कुछ. (कहते हुए मेने उनका चेहरा घुमाया और उनकी आँखों को देखने लगा)

काव्य : (उसको बहोत शर्म आ रही thi)Kya देख रहे हो aise?(Uski आवाज भरी होती जा रहे थी)

शिव : इन आँखों में अपने आप को देख रहा हु (काव्य मुस्कुरा उट्ठी) सच में बस में hi में दिखाई दे रहा हु.

काव्य : और तुम्हारी आंखोमे में खुद को देख रही हु.

शिव : आज तो जैसे आप खिली हुई बहार hi लग रही है (कहते हुए मेने अपनेहाथ उनके होठो से लगा दिए, वो जैसे इसी का इंतजार कर रही थी, उनकी आंखे बंद हो गयी, में उनके होठो को हलके सेचुसा और छोड़ दिया, वो मेरी आँखों में देखने लगी जैसे कह रही हो की क्यों रुक गए, मेने उनकी आँखों की भासा को समजा और उन पर झुकने लगा और वो सोफे पर hi निचे होने लगी, मेरा हाथ उनके स्तन पर चला गया और उन्हें दबाने laga)(Kavya को जैसे इसी का इंतजार था, वो अच्छे से निचे लेटने लगी और उसको अपनी मान मणि करने का अधिकार देने लगी) (में उनके होठो से रास निचोड़ने लगा, और वो भी मेरे होठो को जोरोसे चूसने लगी, थोड़ी देर बाद मेने उनके होठो को छोड़ा और उनकी आँखों में देखा, वो भी मेरी आँखों में देख रही थी)

शिव : आज तो मन नहीं करोगी न? (काव्य उसकी बातो का मतलब समाज रही थी, वो मुस्कुराने और शर्माने lagi)Kahiye न, आज तो नहीं रोकेगी न मुझे.

काव्य : मेने कब रोका है तुम्हे, हमेसा तो अपनी मान की करते हो. (उसने बहोत प्यार से कहा).

शिव : पछली बार भी तो दार रही थी आप.

काव्य : वो तो मम्मी पापा थे तो दर तो लगेगा न.

शिव : आज दार नहीं है? (उन्होंने ना में गर्दन हिलायी, में फिर उनके होठो को चूसने लगा और साथ में एक हाथ को निचे छूट पर ले गया और साड़ी के ऊपर से ही मसल दिया)

काव्य : उम्मंहहह, ummmhhhh.(wo गर्म हो गयी, शिव उसकी छूट को बिना किसी संकोच के मसल रहा था, उसने अपने पेअर थोड़े और खोल दिए, ताकि शिव को सहूलियत हो, शिव उसकी साड़ी उठाने लगा और उसके हाथ उसकी नंगी झांघो पर रेंगने लगे, वो कामुकता से भरने लगी, उस से सास लेने भी मुश्किल होने लगा, जब शिव ने उसकी पंतय पर हाथ रख दिया तो उसने जोर से अपने होठ छुड़ा liya)Shhhh यहाँ नहीं, अंदर चलो.

शिव : कहा?

काव्य : (शिव को यु मुस्कुराता देख वो शर्मा गयी और शरमाते हुए boli)Bedroom me.(Shiv को जैसी इसका इंतजार था, वो उठा और उसको भी अपनी गॉड में उठा लिया, वो पहले दर gayi)Kya कर रहे हो? गिर जाउंगी. (उसने डरते हुए कहा, और अपने हाथ उसके गले में दाल diye)(Me कुछ नहीं बोलै और उनको उठा कर उनके बैडरूम की और चलने लगा, वो मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगी, में उन्हें जब बैडरूम में ले आया अउ उन्हें बीएड पर बिठाया तो वो शर्मा गयी)

शिव :(उनको इतना शर्माता देख मेने पूछा) क्या हुआ?

काव्य : बहोत गंदे हो तुम. (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : अभी तो मेने कुछ किया भी नहीं. (मेरी बात से वो शर्मा गयी)

काव्य : तो वह क्या कर रहे थे, शर्म भी नहीं आती. (उसने हलके नखरे से कहा)

शिव : आपको देख कर रहा नहीं गया.

काव्य : ऐसा क्या है जो इतना भी सबर नहीं है. (उसने शरमाते हुए कहा, उसको बहोत मज़ा आ रहा था ऐसे बाते करने से, शिव उसके जीवन का पहला लड़का था जिसके साथ उसने इस तरह का समय व्यतीत किया था, भले वो उस से छोटा था पर जैसे वो खुद को उसकी प्रेमिका समझने लगी थी, और उसको पूरा हक़ दे रही थी की वो उसके साथ जो करना चाहे कर शक्ति है, वो एक बड़ी वकील थी और साथ में समाज में बहोत नाम था उसका पर पता नहीं वो अपने निजी पालो में एकदम खली थी, पर शिव के साथ उसको अच्छा लगा था, उसने शिव को अपनी विर्जिनिटी सौपी थी, और वो खुस भी थी)

शिव : आप बहोत खूबसूरत हो, और आप में कुछ खास है जो मुझे इस तरह से खींचता है.

काव्य : ऐसा तो कुछ खास नहीं है.

शिव : वही तो समझने की कोशिस कर रहा हु, की क्या खास है (कहते हुए मेने उनकी साडी का पल्लू पकड़ा और उन्हें खींचने लगा तो केव्या ने उसको पकड़ लिया)

काव्य : (जूथ मुठ ka)Ye क्या कर रहे हो, शर्म नहीं आती.

शिव : अगर इसको उतरूंगा नहीं तो देखूंगा कैसे?

काव्य : (काव्य शर्मा गयी, उसको सच में बहोत शर्म आ रही थी, उसने शिव को देखते हुए kaha)Yaar सच में बहोत शर्म आ रही है. कितना अजीब लगता है. (उसने अपनी हिचकिचाहट जाहिर की)

शिव : में समझता हु, पर मुझे आपको वैसे hi देखना है. अगर आपको शर्म आ रही है तो में पहले अपने कपडे निकल देता हु. (कहते हुए मेने उनकी साड़ी छोड़ दी, उन्होंने उसे वापस अपने कंधे पर दाल दी, मेने अपने कपडे निकलना सुरु कर diya)(Kavya को उसमे भी शर्म आ रही थी, वो शिव को hi देख रही थी, एक एक कर के वो अपने कपडे निकल रहा था, जब वो ऊपर से नंगा हो गया तो उसका आकर्षक शरीर देख उसके दिल में हलचल होने लगी, शिव एक पूर्ण पुरुष था, शायद तभी वो उसकी और इतना आकर्षित हो रही थी, उसके सख्त शरीर को देख ाउसके अंदर अजीब सी हलकल होने लगी, जब उसने पंत उतर दिया और सिर्फ अंडरवियर में आ गया तो उसका फुला हुआ उत्तेजित लुंड उसको स्पस्ट दिख रहा था, वो और शर्माने लगी, पर उसको वो अपनी नज़ारे नहीं हटा प् रही थी, वो उसको बहोत पसंद tha.)Lo उतरदिये मेने अपने कपडे.

काव्य : (अब उसकी शर्म और बढ़ गयी थी पर साथ में उसकी उत्तेजना भी बढ़ चुकी thi)Abhi भी वो पहना है. (उसने मुस्कुराते हुए कहा, उसका मान उस अंग को देखने के लिए मचल रहा था)

शिव : अब शर्म नहीं आ रही आपको. (वो मुस्कुराने लगी, में उनके नजदीक gaya)ab इससे आप hi निकालिये. (काव्य हिचकिचाते हुए शिव को देखने लगी, उसको बहोत शर्म आने लगी, पर ये सब तो इस खेल का हिस्सा hi था, वो शरमाते हुए उसकी और घूमी, और अपने पेअर बीएड के निचे किये और बीएड में बैठे बैठे hi उसने कपट हुए अपने हाथ को बढ़ाया, वो शिव से नज़ारे भी नहीं मिला प् रही थी पर उस कड़े अंग का आकर्षण hi इतना था की वो रुक न पायी और उसने अंडरवियर के ऊपर से hi उस लुंड को छुआ, हलके से सहलाया फिर उसको पकड़ लिया, और उसकी सख्ताई महसूस करने lagi)Kaisa लगा? (अब में भी इस खेल का खिलाडी हो चूका था, तो थोड़ी बेशर्मी बनती थी)

काव्य : (Sharmagayi)Besharm कही के. (वो बोली पर लुंड से हाथ नहीं हटाया, शिव उसकी साड़ी उतरने लगा तो उसने उसकी सहायता की, साड़ी ऊपर से निकल चुकी थी)

शिव : अब इतना क्या सोच रही है, निकल दीजिये.

काव्य : मुझे शर्म आ रही है शिव, तुम hi निकल दो न.

शिव : (वैसे भी में काफी गर्म हो चूका था, पहले संयम के साथ की वजह से अधूरा रह गया था, तो अब में अपने आपको खली करना चाहता था, में उनके शिर को पकड़ कर अपने लुंड से सत्ता दिया)

काव्य : ये क्या कर रहे हो बेशरम. (कहते हुए वो दूर हो गयी)

शिव : आप चाहती है की में hi सब करलु, आपको कुछ नहीं करना?

काव्य : (शिव की और देख kar)Aisi बात नहीं है, पर मुझे बहोत शर्म आ रही है यार.

शिव : कुछ नहीं होगा, में हु न. (कहते हुए मेने फिर उनके शिर को मेरे लुंड से सत्ता दिया, इस बार वो वैसे hi rahi)(Lund की गंध उसके नथुनों में घुसने लगी, ये एक अजीब गंध थी जो उसके जहँ में घुलने लगी, ये गंध उसको आकर्षित कर रही थी और साथ में उसको उत्तेजित कर रही थी, उसका चेहरा लुंड से सत्ता हुआ था, उसने आंखे बंद की और उस गंध को जोर से सास ले कर महसूस किआ, और अपने हाथ से शिव के कूल्हों को थम लिया, जैसे जैसे उसके जहँ में वो गंध फैलती जा रही थी वो अपना आप खोने लगी और अपने चेहरे को लुंड पर रगड़ने lagi)Achchha लग रहा है?

काव्य : (वो मदहोश हो रही thi)Hmmmmmm. (वो लुंड पर अपना चेहरा रगड़ रही थी, शिव उसके ब्लाउज को खोल रहा था पर उसको जैसे उसकी परवाह hi नहीं थी, उस से रहा नहीं गया और उसने अंडरवियर के शिरो को पकड़ा कर निचे खिंच दिया, ुंडेरवेरा निचे झंघ तक आ गयी और लुंड उछाल कर बहार निकल आया. चेहरे पर लुंड के टकराने से वो थोड़ी पीछे हो गयी और लुंड को देखने लगी, उसने एक बार शिव की और देखा तो वो जैसे उसको पूछने लगा, क्या हुआ, तो उसने ना में शिर हिलाया, वो फिर लुंड को देखने लगी. आज उसके पास पूरा मौका था, उसको किसी का दर भी नहीं था, जो शर्म और झिझक थी वो भी काम हो रही thi.)Ye कितना बड़ा है न शिव? (वो मदहोश थी, मेने कोई जवाब नहीं दिया, वो मेरे लुंड के साथ खेलने लगी, मुझे भी मज़ा आ रहा था, थोड़ी देर बाद मेने कहा)

शिव : इससे मुँह में लीजिये न.

काव्य : (वो शर्मा gayi)Bahot बेशर्म हो गए हो तुम, पहली बार देखा तो लगा hi नहीं था की तुम ऐसे होंगे. (उसने मीठे गुस्से से कहा)

शिव : वो तो आपको देख कर भी नहीं लगता की आप ऐसा भी कुछ करती होंगी, पर देखिये अभी आपके हाथ में क्या है. (मेरी बात से वो शर्मा गयी, पर बात तो सही hi थी, आप कैसे भी हो पर अपने निजी पालो में आप अलग hi होते हो, और यही मेरे साथ भी हो रहा था और उनके साथ भी, में भी चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो, पर अगर में इन निजी पालो में नॉटी नहीं बनूँगा तो उनको भी मज़ा नहीं आएगा)

काव्य : (उसने लुंड को एक बार देखा, फिर हिचकिचाते हुए अपनी जीभ निकली और उसके सुपडे पर लगायी, वह के रास का स्वाद उसके मुँह में दस्तक देने लगा, उसने बड़े प्यार से उस सुपडे को अपने गर्म मुँह में प्रवेश करवा दिया, वो सुपड अभी काफी गर्म था, उसकी आंखे बंद हो गयी उस एहसास से. वो प्यार से लुंड को चूसने लगी और साथ में अपने एक हाथ से उसके कूल्हे में नाख़ून गढ़ने लगी)

शिव : शह्ह्हह्ह्ह्ह. (शिव की सिसकी सुन कर उसने ऊपर देखा, लुंड मुँह में hi tha,Shiv के चेहरे पर अशीम आनंद था, ये देख कर उसका जोश और बढ़ने लगा और वो लुंड को और जोरो से चूसने लगी)





शहहहहह (उनके गर्म मुँह में मुझे बहोत मज़ा आ रहा था, वो जोरो से उसे चूस रही thi,mene उनके शिर पर हाथ रख दिया और उसे हलके हलके अपनी और खींचने लगा)

काव्य : (उसको पता था की शिव को मज़ा आ रहा है, पर उसने puchha)Achchha लग रहा है तुम्हे शिव?

शिव : बहोत अच्छा लग रहा है काव्यजि.

काव्य : बेशरम, ये काव्यजि क्या है, मुझे मेरे नाम से बुलाओ. (मेने उनकी और देखा, वो muskurayi)Mere साथ इतना सब कर रहे हो और मुझे नाम से भी नहीं बुला सकते. (उन्होंने जूते गुस्से से कहा, में मुस्कुराया, वो फिर मेरा लुंड चूसने लगी)

शिव : काव्य, आप बहोत अच्छा चुस्ती हो. (मेने जैसे hi ये कहा उन्होंने मेरे कूल्हे पर साइड से तपाली मरी)

काव्य : (मुस्कुराते hue)Besharam, कोई ऐसा बोलता है क्या.

शिव : अब जो है वही तो कहा मेने.

काव्य : बहोत गंदे हो तुम. (उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : कबसे गंदे हो गंदे हो, कह रही हो अब दिखाना hi पड़ेगा की में कितना गन्दा हु. (कहते हुए मेने उन्हें खड़ा किया और उनकी पूरी साड़ी निकल दी, ब्लाउज मेने खोल दिया था उसे मेने निकल दिया, वो ब्रा और पेटीकोट में thi)Aap सच में बहोत हॉट हो.

काव्य : (मुस्कुराते hue)Gande. (मेने उनके पेटीकोट का नैरा खिंच दिया तो वो निचे गिर पड़ा, मेने उनके कूल्हों को जोरो से पकड़ कर दबाते हुए अपनी और खिंच लिया तो मेरा लुंड उनकी छूट को ठोकर मरते हुए उनकी झांघो के बिछ घुस gaya)Shhhhhhhhh shiiiiiiiiiiv. (में उनके गले को चूमते हुए उनके कूल्हों को मसलने लगा, भरे हुए कूल्हों के स्पर्श से मेरे लुंड में और सख्ती आ गयी और में उन्हें झांघो के बिच में धक्का देने laga)(Kavya उत्तेजना में काँप ने लगी, वो शिव से लिपट gayi)Shhhhhh शीइइइइइइव shhhhhhhhhh. ी लव ोुउउउउउउ, उम्म्म उम्म्म्म उम्म्म्म. (मेने पंतय में हाथ दाल के नंगे कूल्हों को मसलना सुरु कर दिया. शह्ह्ह्हह्ह हा शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हाआआआ, मुझे पागल कर डोज तुम शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, मेरी याद नहीं आती टी तुम्हे shhhhhhhhhh. (वो उसे चूमने lagi)Ummmm उम्म्म्म उम्म्म्म. में रोज़ तुम्हे याद करती हु सीईव शहहहहह, में पागल हो रही हु तुम्हारे पीछे शह्ह्ह्ह (अपनी छूट पर लुंड की ठोकर महसूस करते hue.)Tumne पागल कर दिया है मुझे शहहहहह, ये कैसा जादू है शीइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह. उम्म्म्म उम्म्म्म उम्मम्मम. (वो बहोत गर्म हो गयी थी, मेने उन्हें बीएड पर लेता दिया, और में उनके ऊपर आ गया, हम दोनों जोर जोर से किश करने लगे, और में साथ में उनके स्तन मसलते हुए लुंड की ठोकर छूट पर मरने laga)Ummmm उम्मम्मम्म उम्मम्मम्म. (वो उसको अपने से जकड रही थी, अपनी छूट पर लुंड के प्रहार से वो बेकाबू हो रही थी, उसने जैसे तैसे अपने होठो को छुड़ाया और हफ्ते हुए boli)Ander दाल दो शिईयिव फूऊऊऊ फूऊऊऊ फूऊऊऊ.

शिव : इतनी भी क्या जल्दी है?

काव्य : मुझे कुछ हो रहा है शिव.

शिव : कहा?

काव्य : वह निचे.

शिव : निचे कहा?

काव्य: वह निचे अंदर. उम्म्म उम्म्म्म उम्म्म्म.

शिव : वही तो पूछ रहा हु नकिहे कहा?

काव्य : (अब उसको समाज आया की शिव क्या पूछ रहा hai)Gande, गंदे गंदे. (कहते हुए वो मुझे चूमने lagi)Bahot बेशर्म हो गए हो तुम.

शिव : तो अच्छा नहीं लग रहा हु में आपको?

काव्य : बहोत अच्छे लगते हो मुझे. ुम्मम्ह उम्म्म उम्म्म्म.

शिव : तो फिर कहो न कहा कुछ हो रहा है.

काव्य : मुझे शर्म आती है शिव इस तरह की बाटे मेने कभी किसी के साथ नहीं ki(Kehte हुए वो मुस्कुरायी)

शिव : एक बार. (मेने जैसे रिक्वेस्ट की)

काव्य : शीइइइइव (वो शर्म से लाल हो gayi)Aisa मात करो न, बहोत शर्म आती है, संजो न.

शिव :बस एक बार.

काव्य : Meri.....Shiiiiiiiv, मुझसे नहीं होगा यार.

शिव : सिर्फ एक बार.

काव्य : (वो उत्तेजना में काँप रही thi)Pehle अंदर दाल दो, फिर में बोलूंगी.

शिव : इतनी भी क्या जल्दी है.

काव्य : है, बस एक बार वह दाल दो, फिर तुम जो कहोगे वो में बोलूंगी. (में उनकी हालत समाज रहा था, मेने पंतय को निकल दिया और लुंड को छेड़ पर रख कर दबा diya)Aaaaaaaaaaaa. (में रुक gaya)aaaram से शिव, बहोत मोटा है यार वो. (में धीरे से फिर धक्का diya)Aaaiiiiiii mummiiiiiiiiiii. (उसने शिव के कंधे पर काट liya)Kitna बड़ा है तुम्हारा, शहहहहह (मेने फिर हल्का धक्का diya)Ahhhhhh शीइइइइइइव. (मेने फिर धक्का diya)Mar जाउंगी शीइइइइइइव.

शिव : कुछ नहीं होगा.

काव्य : तुम्हारे अंदर जाये तब तुम्हे पता chale.(Mene फिर दबा दिया) मुमीइइइइइइ, शहहहहह (वो दर्द से तड़प रही थी)

शिव : हमने पहले भी तो किया था, फिर क्यों इतना दर्द हो रहा है?

काव्य : इतने दिन बाद आओगे तो ऐसा hi होगा न. (आधे से ज्यादा लुंड घुस चूका था तो में कुछ पल रुक गया. पर लुंड अंदर कूद रहा tha)Shhhhh क्या कर रहे हो. (वो फिर करहि)

शिव : अब मेने क्या किया?

काव्य : वो अंदर कूद क्यों रहा है? मुमीइइइइइइ.

शिव : मम्मी मम्मी मात करो वर्ण वो सच में आ jayegi.(Mene मुस्कुराते हुए कहा)

काव्य : यहाँ मेरी जान अटकी पड़ी है और तुम्हे मज़ाक सूज रहा है. (मेरी बाह पर मरते हुए वो बोली, में उनके स्तन को चूसने laga)Ruko न सीईव.





(में कुछ नहीं बोलै बस निप्पल चूसने laga)(Kavya के निप्पल बहोत सेंसटिव थे, शिव उसके निप्पल चूस रहा था तो उसमे मस्ती भरने लगी, थोड़ी देर में वो सिस्किअ लेने lagi)Shhhhhhh शिईयिव, कितना अजीब है यार, शह्ह्ह्हह्ह, मेने कभी सोचा नहीं था कोई मेरे साथ भी ये सब करेगा, shhhhhhh,kitna अच्छा लगता है ये सब शह्ह्ह्हह्ह. (में देख रहा था की वो अब दर्द की शिकायत नहीं कर रही थी, और मस्त होती जा रही थी, मेने लुंड थोड़ा पीछे kincha)Ahhhhh (उनके मुँह से निकला, हम दोनों की नज़ारे मिली, पर उन्होंने रोका नहीं, मेने फिर लुंड अंदर dala)Shhhhhhh (छूट में गिला पैन आना फिर से सुरु हो गया, मेने फिर लुंड पीछे खिंचा और फिर aage)Shhhhhhh आरामसे करना शिव.

शिव : क्या करू?

काव्य : (मुस्कुराते hue)Besharam, सब जानते हो तुम. (उनकी प्यारी मुस्कराहट सब कुछ कह रही थी, उन्हें अपनी छूट में अब अच्छा महसूस हो रहा था, छूट पूरी तरह से टाइट थी, मेरे लुंड पर पुअर दबाव बनाये हुए थे, मेने हलके हलके धक्के मरने सुरु कर diye)Shhhhh हाआआआ. शह्ह्ह्ह हाआआ.





(अपनी छूट में हो रही ये अजीब सी सनसनाहट काव्य को और गरम कर रही थी, इतनी उम्र के बाद वो इस नए अनुभव को ले रही थी, अपनी छूट को फैलाये हुए लुंड अंदर बहार हो रहा था जिसे महसूस कर के वो मज़े ले रही thi)Shhhhh हआ शहहह हआ शह्ह्हह्ह्ह्ह हआ.

शिव : अच्छा लग रहा है?

काव्य : हाआआ.

शिव : कहा?

काव्य : बेशरम (कहते हुए वो मुस्कुरायी, में धक्के लगा रहा tha)Shhhh हआ शह्ह्ह्ह हा. (उसने आंखे बंद कर ली और लुंड को महसूस करने lagi)Shhhhhhh शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह कितना अजीब है न शहहहहह.

शिव : क्या अजीब है?





काव्य : ये सब, शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह, मेने कभी सोचा नहीं था की इतना अच्छा लगता होगा शह्ह्ह्ह हाआआ. (वो शिव के गले को और कंधे को चूमने लगी, उसने अपने पेअर उठा कर शिव के कूल्हों पर रख diye)Shhhhhh हा शह्ह्ह्ह हआ. वो मुझे बहोत अच्छा लग रहा है शीइइइइइव. (में कुछ नहीं बोलै, वो धीरे धीरे खुल रही थी, वैसे भी उनकी संकरी छूट मुझे बहोत मज़ा दे रही थी, उसकी मास्सपेशिया मुझे महसूस हो रही थी, उसकी रगड़ से मेरे लुंड में तनाव बरक़रार tha)Shhhhh हा शहहहहह, वो बहोत कड़क है शिईयिव शहहहहह. (वो अपने अंदर लुंड को महसूस कर के मस्त हुई जा रही थी)

शिव : क्या?

काव्य : (उसको शर्म आ गयी पर उसको इतना मज़ा आ रहा था तो उसने भी शर्म को छोड़ना hi सही samja)Wo वो (उसको शर्म आ रही थी, उसने शरमाते हुए kaha)tum क्या कहते हो उसे?

शिव : लुंड.

काव्य : (शब्द सुन कर काव्य को अजीब सी झनझनाहट हुई, वो शर्म से मुस्कुरायी, और शिव के कान को चूमते हुए boli)Haaaa वही, लुङद. (बोलते बोलते वो शर्मा गयी और शिव को खास के अपनी बहो में भर ने लगी)

शिव : (मेरा जोश बढ़ता जा रहा tha)Ek बार फिर से कहो.

काव्य : (वो शरमाते हुए muskurayi)Luuuund. (और फिर शर्मा गयी)

शिव : आपको लुंड अच्छा लग रहा है?

काव्य : हआ.

शिव : कहा अच्छा लग रहा है? (ऐसी बाटे मेरा जोश बढ़ा रही थी और मेरे धक्के थोड़े गहरे और तेज होने लगे थे)

काव्य : (वो महसूस कर रही थी की शिव उसकी बातो से और उत्तेजित हो रहा है और उसके धक्के तेज हो रहे है, उसको हल्का दर्द भी हो रहा था पर उसको मज़ा भी आ रहा था, और उसको ये सब बोलते हुए अजीब सी उत्तेजना हो रही thi)Shhhhhh हआ शहहहहह हआ.





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शिव : कहिये न?

काव्य : (उसको बहोत मज़ा आ रहा tha)Pehle तुम अच्छसे से पूछो फिर बताउंगी. (काव्य को भी मस्ती चढ़ी हुई थी)

शिव : (में थोड़ा ऊपर हुआ और उनकी आँखों में dekha)wo कैसे?

काव्य : मुझसे पूछो की काव्य तुम्हे कहा अच्छा लग रहा है? तब बताउंगी.

शिव : काव्य, आपको कहा अच्छा लग रहा है? (मेने भी मुस्कुराते हुए कहा)

काव्य : उउउहुउउउ, कहो काव्य तुम्हे कहा अच्छा लग रहा है?

शिव : पर में आपको...

काव्य : (मेरे मुँह पर हाथ रख kar)Mere साथ ये सब कर रहे हो न, फिर क्यों मुझसे दुरी बना रहे हो, मुझे तुम्हारी गर्लफ्रेंड बन न है शिव, मुझे महसूस करवाओ की में तुम्हारे जितनी hi हु, मुझे महसूस करवाओ की में तुम्हारे निचे हु. (मेने देखा की उनका चेहरा उत्तेजना से लाल हो रहा था, में सोचने laga)Jyada सोचो मात शिव, मेने hi तुम्हे अपने ऊपर जगह दी है, मुझे अपनी प्रेयसी की तरह प्यार करो शिव, मुझे मात महसूस करवाओ की में बड़ी हु, अभी इन पालो में तो हरगिज नहीं.

शिव : (में झुका और उनके गाल को चूमते हुए kaha)Agar ऐसा करोगी तो बहोत पछताओगी. (मेरे मुहसे अपने लिए टुकर सुन कर वो खुस हो गयी)

काव्य : शायद में यही चाहती हु. शहहह हआ शठ हआ.

शिव : अब बताओ, तुम्हे कहा अच्छा लग रहा है?

काव्य : (वो मुस्कुरायी और मेरे होठो को चुम लिया, फिर मेरी आँखों में देखते हुए boli)Meri....bhooosh में. Shhhhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhh. (उनके मुँह से सुन कर मेने जोर से धक्के मर दिए, और मेरी स्पीड भी बढ़ गयी thi)Ahhhhh शहहहहह आराम से शिव शहहहहह दर्द होता है शहहहहह.





(में धक्के लगाने लगा, लुंड और अंदर और अंदर जा रहा था) शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह फैट जाएगी यार शह्ह्ह्ह. (शिव के धक्को से उसकी हालत ख़राब हो रही थी पर साथ में वो अपने स्खलन पर पहुंच रही थी, वो और कुछ नहीं बोली बस शिव को करने diya)Shhhhhh Shiiiiiiv(Wo अपने ही होठो को काटने lagi)Shhhh अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह माआ अह्हह्ह्ह्ह (उसका चेहरा अजीब हो गया, वो लुंड को गेहराइओ में महसूस कर रही thi)Jaldi शिईयिव शहहहहह जोरसे अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मुम्मीईई शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : आपकी छूट बहोत टाइट है.

काव्य : शह्ह्ह्हह्ह शह्ह्ह्हह्ह ahhhhhh(Wo कुछ नहीं बोली बस धक्के खा रही थी, लगातार धक्को से वो झड़ने के करीब आ gayi)Shhhhh मुझे कुछ हो रहा है सीईव शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह शहहहहह (उसने अपने दांतो को जोर से भींच दिया, और वो भल भला कर झड़ने लगी और शिव को जोरो से जकड लिया)

बास्स्स्स shhhhhhhhhhhhh बससससस. (वो पूरी ताकत से शिव से लिपट गयी ताकि शिव हिल भी न सके, पर लुंड उसकी छूट में पूरा घुस gaya)Uuuufffff स्स्स्सस्ठ्ठ आअह्हह्ह्ह्हह. (वो कराह ने लगी पर शिव को छोड़ा नहीं, वो थोड़ी देर ऐसे hi लिपटी रही, आखिर उन्होंने अपनी पकड़ ढीली की. मेने उन्हें देखा तो वो शर्मा gayi)Kya हो जाता है तुम्हे? ऐसा क्या कह दिया था मेने?

शिव : अज्जेब सा महसूस होता है जब आप (उन्होंने आंखे दिखाई), सॉरी तुम ऐसा कहती हो to.(wo फिर मुस्कुराने लगी)

काव्य : (काव्य को बहोत शर्म आ रही थी पर अच्छा भी लग रहा था, वो उसके इतना करीब था की वो ऐसी भी बाते उस से कर रही thi)Tum क्या कहते हो उससे? (शरमाते हुए उसने पूछा)

शिव : वही जो तुमने कहा, भोश या छूट.

काव्य: में कितनी गन्दी बाटे कर रही हु न शिव?

शिव : इसमें गन्दा क्या, जो है वही तो कह रहे है हम, क्या तुम्हे अच्छा नहीं लग रहा?

काव्य : पता नहीं, थोड़ा अजीब लगता है, मेने कभी ऐसी बात नहीं की.

शिव : बात नहीं की पर करवा जरूर रही हो.

काव्य : (मेरी छाती में हलके से मरते hue)tumne मुझे बहकाया है, अच्छी भली जिंदगी गुजार रही थी पता नहीं कहा से आ गए तुम.

शिव : तो चला जाता हु फिर. (मेने मज़ाक किया)

काव्य : मार न दालु तुम्हे जो कभी मुझे छोड़ने की बात की तो. (में उन्हें देखने लगा, में थोड़ा सीरियस भी tha)Kya हुआ, ऐसे क्यों देख रहे हो?

शिव : में आपको कुछ बताना चाहता हु.

काव्य : मरूंगी जो मुझे फिर से आप कहा तो. और तुम क्या समझते हो में क्या बेवकूफ हु, ऐसे hi इतनी बड़ी वकील नहीं हु.

शिव : क्या जानती हो आप?

काव्य : अभी ये वक़्त नहीं है इन बातो का, बस इतना समाज लो की मेने तुम्हे सोच समाज कर ये हक़ दिया है और तभी तुम मेरे साथ इस अवस्था में हो. (में अभी भी सोच में डूबा हुआ tha)Shiiiiiv. (उन्होंने मुझे सोच से बहार लाया, में उन्हें देखने laga)Mene कहा न की इन बातो का ये वक़्त नहीं है, अभी बस इतना hi देखो की में और तुम हमारे बेहतरीन पल एन्जॉय कर रहे है, बाकि सब बाते होती रहेगी. (में मुस्कुराया और उनको किश करने लगा, बात तो सच hi थी की में कुछ भी नहीं कर सकता, जो होगा देखा जायेगा, किश कर के मेने लुंड बहार खिंच liya)Shhhhh बहार क्यों निकल रहे हो. (काव्य को अपने अन्दर खली खली फील हुआ)

शिव : क्यों की मुझे आपकी भोश देखनी है.

काव्य : (Muskurayi)Besharam. (वो बस इतना बोली, शिव उसकी छूट को फैलते हुए देखने लगा, वो उसको देख रही थी, कैसे वो उसकी छूट को देख रहा था, एक और तो उसको शर्म आ रही थी पर उसको अपनी छूट को ऐसे घूरते देख अच्छा भी लग रहा था, आखिर उसको hi तो हक़ था इसे देखने का, शिव ने उसके पेअर फैला दिए और उसकी छूट को फैला कर देखने लगा, उसके छूने से फिर से वो बहकने lagi)shhhh क्या देख रहे हो वह.

शिव : इससे देखना इतना अच्छा क्यों लगता है?

काव्य : मुझे क्या पता, में तो रोज़ देखती हु, मुझे तो कुछ नहीं होता.

शिव : मेरे लुंड को देख कर कैसा लगता है?

काव्य : (वो शर्मा गयी और मुस्कुराने lagi)Gande. (वो बस इतना बोली)

शिव : ये भी गन्दी हो गयी है, में इससे साफ़ कर देता हु. (कहते हुए में झुका और उनकी छूट को अपने होठो में दबोचते हुए उसे चूसने लगा)





काव्य : (उसकी आंखे बंद हो gayi)Shhhhhhhhh (ऐसी अजीब क्रिया hi उसको अच्छी लग रही थी, जहा से वो पेशाब करती थी वह उसका प्रेमी बड़े प्यार से उसको चूस रहा था, उसने अपने पेअर और फैला दिए ताकि उसको आसानी ho)Shhhhh शिईयिव. (वो मचलने लगी, और अपनी मुट्ठी में चद्दर को दबोचने lagi)Tumhe ये अच्छी लगती है शिव?

शिव : (अपना मुँह हटा ke)Ha. (मेने फिर मुँह लगा दिया)

काव्य : तुम्हे ये करना गन्दा नहीं लगता शिव?

शिव : आपने भी तो मेरा लुंड अपने मुँह में लिया था, क्या आपको गन्दा लगा था.

काव्य : शठ नहीं. (वो अपनी छूट को चटवाने का आनंद लेने लगी, शिव ने उसके पैरो को ऊपर कर दिया और उसकी गांड के छेड़ को चाटने laga)Shhhhhh वह नहीं वो गन्दा है शिव (पर वो तो उसकी सुन hi नहीं रहा था और वो उसके उस गंदे छेड़ को बहोत चाव से चाटने लगा, एक अजीब सी सरसराहट उसके शरीर में दौड़ रही थी,





फिर वो उसकी छूट को चाटने लगा और साथ में एक ऊँगली छूट में दाल के आगे पीछे करने laga)Shhhhh शीइइइइव, कितना मज़ा आ रहा है यार, शहहहहह, तुम पहले क्यों नहीं मिले मुझे शह्ह्ह्हह्ह. (थोड़ी देर चाटने के बाद में ने उनकी कमर पकड़ कर उनको घोड़ी बना दिया, वो बस वही कर रही थी जो में कर रहा tha)Kya कर रहे हो अब (वो पीछे मुद कर उसको देखने लगी, शिव ने उसके कूल्हे फैला कर अपना मुँह फिर से वह लगा दिया और उसकी छूट को चाटने लगा, उसके लिए ये सब नया था, इसलिए वो शिव को जो करना है करने दे रही thi)shhhhhhh.

शिव : (उनके भरे हुए कूल्हों के देख कर मेरा लुंड कूदने लगा था, ऊपर से उनकी गांड का छेड़ खुल बंद हो रहा था, मेने वह ढेर सारा थूका और अंगूठे से उसे सहलाने लगा)

काव्य : शह्ह्ह्ह वो गन्दी जगह है शिव, वह क्या कर रहे हो तुम. (शिव उसको कोई जवाब नहीं दे रहा था, बस उसके गांड के छेड़ को सेहला रहा था, वो बस महसूस कर रही thi)(Mene अपनी पोसिटिव ली और लुंड को छूट पर लगा दिया और अंदर डालने laga)Ahhhhhhhh शिईयिव, आराम से शहहहहह. (काव्य के चेहरे पर हल्का दर्द उभर आया, उसकी सकल फिर एक बार रोने जैसी हो गयी, पर लुंड अंदर जाता रहा, थोड़ी देर बाद शिव रुक गया तो उसने रहत की सास ली, उसकी कमर पकड़ कर शिव फिर से लुंड अंदर बहार करने लगा, उसने अपनी पोसिटिव सही कर ली ताकि लुंड अच्छे से अंदर बहार हो, एक बार फिर उसकी सिस्किअ गूंजने लगी)





शहहहहह ह्ह्ह शठ हां शहहह हा. (लुंड अंदर तक जा रहा tha)Shhhhhh बस सीईव शह्ह्ह्ह और जगह नहीं है शह्ह्ह्हह्ह (लुंड उसकी छूट के आखिरी छोर पर दस्तक दे रहा tha)Shhhhh अह्ह्ह्हह्हह बहोत मज़ा आ रहा है शिव शह्ह्ह्ह अज्जेब है ये सब पर कितना अच्छा लगता है shhhhhhhh.(Shiv उसके कूल्हों को मसलने laga)Shhhhhh तुम्हे ये इतने अच्छे क्यों लगते है सीईव शह्ह्हह्ह्ह्ह. (एक बार फिर शिव का अंगूठा उसके गुदा द्वार को सहलाने laga)Shhhhhh वह क्या कर रहे हो तुम शहहह वो गन्दी जगह है शहहह सुनते क्यों नहीं तुम. (शिव ने कोई जवाब नहीं दिया और वह ज्यादा थूक लगाया और फिर अंगूठे को दबा दिया, काव्य ने अपनी गांड को सिकुड़ liya)Shhhhh क्या कर रहे हो वह. (उसने डाटा)

शिव : ज्यादा सोचो मात, ढीला छोड़ दो अपने छेड़ को.

काव्य :पता नहीं क्या क्या करते हो तुम. (कहते हुए उसने अपने छेड़ को ढीला छोड़ दिया, और शिव का अंगूठा उसके गांड के छेड़ में घुस gaya)Shhhhhhh पागल, क्या कर रहे हो. (पर मेने कोई जवाब नहीं दिया, गांड के छेड़ में अंदर बहोत गर्मी थी, एक और उसकी छूट में लुंड अंदर बहार हो रहा था और दूसरी और में उसकी गांड में अंगूठा अंदर बहार करने laga)ahhhhhhh शह्ह्ह्हह्ह shiiiiiiiiiiv.





(काव्य की सूरत रोनी हो गयी, उसकी उत्तेजना बढ़ गयी थी, पहले अजीब लग रहा था पर अब उसको भी अच्छा लग रहा था, उसने रोनी सूरत से शिव को देखा

)

शिव : क्या हुआ?

काव्य : (उसने शिर हिला कर ना में इस्सर किया जैसे कह रही हो कुछ नहीं)

शिव : अच्छा लग रहा है?

काव्य : हा, अजीब है पर अच्छा लग रहा है (अपने दोनों छेड़ में उसे मज़ा आने laga)Shhhh अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह. पागल करदोगे मुझे तुम. क्या क्या अजीब करते रहते हो. शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : आपकी गांड भी बहोत गर्म है. (मेने मुस्कुराते हुए कहा)

काव्य : गंदे. (कहते हुए वो मुस्कुरायी, में भी मुस्कुराया, थोड़ी देर ऐसे hi छोड़ने के बाद मेने गांड से अंगूठा बहार निकला और लुंड अंदर डेल रक्खे hi उन्हें बिस्तर से उतरा और खड़ा कर दिया, लुंड अंदर होने की वजह से वो थोड़ी टेढ़ी हो गयी, मेने उनके बूब्स पकड़ लिए और धक्के लगाने laga)aahhh अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह. (ऐसे खड़े खड़े छोड़ने में काव्य को शर्म आ रही थी, पर वो कुछ नहीं boli)Shhhh शह्ह्ह्ह

(शिव उसको ऐसे पकड़ कर जोर जोर से धक्के लगाने laga)Dhireee शहहहहह, पता नहीं क्या क्या जानते हो तुम शहहहहह, जितने भोले दीखते हो उस से कही ज्यादा घंट हो तुम शह्ह्हह्ह्ह्ह. (पीछे देखते हुए वो मुस्कुरायी, मेने उनके होठो को किश कर लिया)





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तुम्हारी भोली सुकरात देख कर तो लगता है की कितना सीधा होगा य इ लड़का, पर हरकते देखो. (में धक्के लगा रहा tha)Shhhh अह्हह्ह्ह्ह shhhhhhhhhh. (थोड़ी देर बाद मेने फिर लुंड बहार निकल liya,)(Kavya जो पूरी नंगी कड़ी थी उसको बहोत शर्म आ रही thi)(Mene उनको अपनी और खिंचा, उनका मखमली बदन फिर से मुझसे सात गया,





उनके कूल्हे मसलते हुए में उनके होठो को चूसने laga)(Kavya को बहोत अच्छा लग रहा था सब, उसने भी अपनी बहे उसके गले में दाल दी और उसका साथ देने लगी, तभी शिव उसका एक पेअर पकड़ कर उठाने लगा, उसने किश तोड़ी और boli)Ab क्या कर रहे हो? (वो बस मुस्कुराया और ऐसे खड़े खड़े hi अपने लुंड को छूट पर सेट करने laga)Nahi शिव, बिस्तर पर करो जो करना है.

शिव : बस थोड़ी देर. (मेने लुंड अंदर दाल दिया)

काव्य : अह्हह्ह्ह्ह. (फिर शिव सुरु हो गया और उसको ऐसे hi खड़े खड़े छोड़ने लगा, ऐसे खड़े रहने से उसकी छूट का दाना लुंड से पइसस रहा था, और उसको और मज़ा आने laga)Shhhhhh शीइइइइइइइव आज पागल बना कर छोड़ोगे मुझे.





शिव : मज़ा आ रहा hai?(Kavya ने हां कहा)

काव्य : बहोत ख़राब हो तुम (कहते हुए वो उसके चेहरे को सहलाने लगी, और मुस्कुराने लगी)

शिव : ये कैसा ख़राब हु, जो इतना मुस्कुरा रही हो और प्यार से देख रही हो. (में भी मुस्कुराया)

काव्य : क्यों की तुम ख़राब हो पर बहोत प्यारे लगते हो मुझे. (मेने स्पीड बढ़ा दी तो उनका चेहरा फिर बदलने laga)Ahhh अह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह. (में एक हाथ से उनके कूल्हे को मसलते हुए उन्हें छोड़ रहा tha)Shhhh अह्ह्ह अह्ह्ह्हह shhhhhh.(Mene उन्हें थोड़ी देर ऐसे hi खड़े खड़े छोड़ा, वो एक बार फिर झाड़ gayi)Shhhhh पेअर दर्द कर रहा है शिव. (मेने उनका पेअर छोड़ दिया और लुंड बहार निकल लिया, उन्होंने पेअर निचे रक्खा और मेरे गले लग गयी, उनके नंगे जिस्म का एहसास मुझे अजीब सी खुसी दे रहा tha)Aur कितनी देर करो गए तुम. (उसने मीठा गुस्सा किया).

शिव : थक गयी क्या?

काव्य : म्हणत तुम कर रहे हो, इसलिए पूछ रही हु, तुम्हे थकन नहीं होती क्या? (अपनी छूट पर ठोकर मर रहे लुंड का एहसास उसे मस्त कर रहा था)

शिव : नहीं. (मेने उनके कूल्हों को सहलाया)

काव्य : इसके पीछे क्यों पड़े हो, इतनी पसंद है ये तुम्हे? (उसने प्यार से kaha)(Mera लुंड उनकी छूट पर था तो में उसे अंदर डालने की कोशिस करने laga)Shhhhh ऐसे नहीं. (कहते हुए मुझे खींचते हुए बिस्तर पर लेट गयी और मुझे अपने ऊपर khinchliya)Aise करो.

शिव : (मुस्कुराते hue)Kya करू?

काव्य : मुझे नहीं पता (फिर मुस्कुरायी और अपने हाथ से लुंड को पकड़ कर अपनी छूट के छेड़ पर सेट कर diya)Khud तो बेशरम हो, मुझे भी बेशरम बना रहे हो. (में वैसे hi रहा, मेने लुंड अंदर नहीं डाला, वो मुझे खींचने लगी, पर में वैसे hi raha)Kya कर रहे हो, डालो न. (में बस muskuraya)Shiiiiiv (उन्होंने नखरा kiya)Karo न. (अपना मुँह रोने जैसा बनाते हुए मुझे रिक्वेस्ट करने लगी, मेने भी लुंड अंदर दबा diya)Shhhhhhhhh.

शिव : इसे छोड़ना कहते है.

काव्य : (अपनी आंखे बंद किये हुए लुंड को महसूस करते hue)Shhhhh जानती हूउउउउ. शहहहहह.

शिव : फिर बोलती क्यों नहीं.

काव्य : मुझे शर्म आती है शिव, (में धक्के लगाने laga)aaaahhh अह्ह्ह्ह आआह्ह.

शिव : क्या कर रहा हु में?

काव्य : शह्ह्ह्ह छुडाईइइइइ अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह.

शिव : किसकी?

काव्य : शहहह अह्ह्ह्हह मेरी शहहहहह तुम्हारी काव्य की शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह. (मेने दोनों बूब्स मसल दिए और धक्के मरने laga)Shhhh अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह डीईईडीए अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह.

शिव : दर्द हो रहा है?





काव्य : (कराहते hue)Haaa थोड़ा हो रहा है ाः अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह.

शिव : पर ये तभी निकलेगा जब में जल्दी जल्दी करूँगा.

काव्य : अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : करू?

काव्य : हआ शहहहहह आआअह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह मुमीइ अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह. अह्ह्ह्हह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (जल्दी जल्दी लुंड अंदर बहार हो रहा था, तो उसकी छूट ने नदिया बहनी सुरु कर दी थी, लुंड उसकी बच्चे दानी को थोड़ाक मर रहा tha)Ahhhh अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह आईई अह्ह्ह्हह. करो शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह और करो अह्हह्ह्ह्ह.

शिव : क्या करू? (में भी कामुक हो चूका था, और जोर जोर से धक्के मर रहा था)

काव्य : अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह चूऊदूऊऊओ अह्हह्ह्ह्ह अअअअअअअ शह्ह्ह्हह्ह, दर्द हो रहा हैईईई अह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह. (में दे धना धन छोड़ रहा था, वो कराह रही थी, पर मुझे भी छूटना tha)Ahhhhh डीईडीई अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह (मेने उनके पेअर पकड़ लिए और साथ में मिला कर उनकी छाती से लगा दिए, उनकी छूट हवा में ऊपर हो गयी, में भी थोड़ा ऊपर हो कर धक्के लगाने लगा)





आह्ह्ह्हह शहहहहह आएगी जगह नहीं है शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह आह्ह्हह्ह्ह्ह आखरी दीवाल पर टकरा रहा है वो अह्हह्ह्ह्ह शहहहहह ahhhhhhhhhhh.(Me दे धना धन छोड़ रहा tha)Shhhh अह्हह्ह्ह्ह आईईईई अह्ह्ह्हह मुमीइ अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ऊऊफफफफफ अह्हह्ह्ह्ह माआ अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह, )वो फिर झड़ने लगी )बास्स्स्स शहहहहह बायसस्स्स शिईयिव अह्ह्ह्हह्हह शह्ह्ह्हह्ह बायस्स्सस्स्स्स.

शिव : थोड़ी देर जान. हम्म हम्म हम्म हम्म हम्म.

काव्य : (अपनी कुटाई करवा रही thi)Ahhhh अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह (उसकी सकल रोने जैसी हो गयी thi)Ahhhhh माआ ऊऊफफफफ अह्ह्ह अह्ह्ह्हह शीइइइइइव अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : मेरा होनेवाला है बस थोड़ी देर.

काव्य : (वो समझती थी पर उसकी हालत पतली हो गयी थी, नयी नयी चूड़ी लड़की थी वो, और इतने बड़े मुसल को लेना कोई बच्चो का खेल नहीं tha)Ahhhh अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह ऊऊफफफ अह्ह्ह अअअअअ शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह. (मेरा बस होनेही वाला था तो मेने दो चार जोर जोर से धक्के लगाए और लुंड बहार खिंच लिया और उनके पेट पर अपना माल छोड़ने लगा, पहली एक दो पिचकारी तो उजड़ कर उनके चेहरे तक पहुंच gayi)Ahhhh क्या कर रहे हो





(झुंझलाते हुए वो बोली, पर उसको रहत महसूस हो रही थी की आखिर चुदाई ख़तम हुई थी, अपने श्री पर हो रही गर्म बरसात को वो देख रही थी, लुंड से निकल रहा पानी, उसके लिए नया अनुभव था, उसका पूरा शरीर सफ़ेद वीर्य से सना हुआ था, थोड़ी देर बाद शिव हांफ ते हुए बैठा था और उसको hi देख रहा था, वो हसने lagi)ha है हां.

शिव : क्या हुआ? (मेने भी मुस्कुराते हुए पूछा)

काव्य : क्या क्या करती हु में तुम्हारे साथ, मुझे यकीं hi नहीं हो रहा. (थोड़ी देर बाद वीर्य बह कर उनके श्री में साइड में गिरने लगा तो वो कड़ी हो gayi)Pura गन्दा कर दिया मुझे,( कहते हुए वो बाथरूम की और भागी, चलने में भी दिक्कत हो रही थी उन्हें) (में अंदर गया तो वो शावर चालू कर के खुद को साफ़ कर रही थी, में गया और उनको पीछे से दबोच liya)|Ouchhh (मुस्कुराते hue)Chhooodo मुझे. (मेने उन्हें सीधा किया और दीवाल से लगा दिया, शावर ों था, में उनके होठो को चूमने लगा, थोड़ी देर बाद, मुझे धकेलते hue)Chhodonaaaa (वो बहोत प्यार से बोल रही थी)

शिव : मेने गन्दा किया है तो में hi साफ़ कर देता हु. (मेने उनके स्तन सहलाये)

काव्य : छोड़ूऊओ, मुझे पता है तुम कैसा साफ़ करोगे (वो शर्मा भी रही थी और मुस्कुरा भी रही थी)

शिव : (उनके हाथ पकड़ कर दीवाल पर लगा दिए और उनको फिर से किश किया, फिर उनकी आँखों में देखते hue)Ander तक साफ़ कर दूंगा.

काव्य : (शरमाते hue)Kyu मान नहीं भरा अभी? (मेने न में इस्सर किया, और उनको किश करने लगा, उनके गले में भी किश करने लगा, वो फिर गरम हो gayi)Shhhhh पागल करदिया है तुमने सीईव शह्ह्ह्हह्ह. (फिर हमारी चुदाई सुरु हो गयी, वही बाथरूम में hi मेने उन्हें फिर छोड़ा, उसके बाद नाहा कर हम दोनों बहार आये, उन्होंने तौलिया लपेटा हुआ था, मेने भी निचे तौलिया लपेट लिया था, उनके मटकते कूल्हे देख कर मेने फिर उन्हें पकड़ liya)Kya कर रहे हूऊऊ, छुडो यार.

शिव : (उन्हें बिस्तर पर गिरते हुए में उनके साइड में लेट gaya)Thak गयी?

काव्य : (मेरा चेहरा सहलाते hue)Agar थकी भी होती तो भी मन नहीं करती, पर मम्मी पापा कभी भी आ शक्ति है.

शिव : मज़ा आया?

काव्य : बहोत, तुम्हे?

शिव : है मुझे भी. (फिर दोनों शांत हुए, और एक दूसरे को निहारने लगे, मुझे कुछ याद aaya)Tum क्या कह रही थी मेरे बारे में.

काव्य : छोडो न उस बात को.

शिव : नहीं बताओ.

काव्य : मुझे पता है तुम्हारे सम्बन्ध किसी और के साथ भी है.

शिव : (मेने कोई सफाई नहीं di)Fir आप इतने प्यार से मेरे साथ क्यों हो?

काव्य : अब मार खाओगे तुम (उन्होंने जूठा गुस्सा किया)

शिव : सॉरी, वो जब आप डट टी हो तो वकील दिखती हो मुझे, इस लिए. जवाब दो.

काव्य : सच कहु तो पहले मुझे भी गुस्सा आया था, पर फिर सोचा की जो में कर रही हु वो भी तो गलत hi है न, तुम मेरी उम्र के भी नहीं हो, फिर में कैसे तुमसे कुछ एक्सपेक्ट कर सकती हु. (उसने थोड़े उदास हो कर कहा)

शिव : में अपने दिल से कहता हु काव्य, मुझे खुद को दुःख है, पर मेरी समाज में नहीं आता की किसको मन करू और किसको अपनौ, पता नहीं क्यों में बहक जाता हु, रोक नहीं पता अपने आपको.

काव्य : इसमें तुम क्या कर सकते हो, अगर में तुम्हे सामने से कहूँगी तो तुम क्यों मन करने लगे.

शिव : बात सिर्फ वो नहीं है, मेरे किसी के साथ भी सिर्फ सेक्स के रिलेशन नहीं है, और प्रॉब्लम hi वही है.

काव्य : (शिव को गौर से देखते hue)Kitno के साथ रिलेशन है तुम्हारे? (में भी उन्हें देखने लगा, शायद मुझसे कुछ गलती हो गयी थी, में झेप गया)

शिव : आपको क्या लगता है?

काव्य : मेरी छदो, मुझे जो लगा वो लगा, क्या तुम मुझे बताओगे?

शिव : (उनकी आँखों में देखते hue)Ha.

काव्य : मुज पर इतना भरोसा है?

शिव : भरोसा न होता तो में आपके साथ ये सब करता hi nahi,aur मुझे पता है की आप भी सिर्फ सेक्स के लिए मुझसे नहीं जुडी.

काव्य : (वो भी मुस्कुरा di)Thank यू.

शिव : किस लिए?

काव्य : मुझे हमेसा ये लगता था की पता नहीं तुम मेरे बारे में क्या सोचते होंगे, मुझे लग रहा था की शायद तुम्हे लग रहा होगा की में कितनी गन्दी होउंगी जो सेक्स की चाहत में तुम्हारे साथ ये सब कर रही है. पर तुम मुझे समझते हो इसकी खुसी है. (वो मुस्कुरायी)

शिव : सबसे बड़ी प्रॉब्लम hi तो यही है. इसीलिए उलझने पैदा हो रही है, मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा, में सबको मन करता हु पर कोई सुन ने को तैयार hi नहीं है.

काव्य : कुछ नहीं होगा, में हु न. (फिर माहौल को ठीक करने के इरादे से) एक बात पुछु? तुम्हारी लिस्ट में भार्गवी भी है न? (में बस उनको देखने लगा पर मेरा चेहरा hi सब बयां कर रहा tha)Me जानती थी.

शिव : कैसे?

काव्य : पता चल जाता है यार, और मुझे भी यकीं है की उन्हें भी पता होगा की में भी तुम्हारे साथ हु.

शिव : मेरी समाज में नहीं आता की मेरे साथ जुडी सब लड़कीअ क्यों इतनी सहज रहती है.

काव्य : ज्यादा ऊधो मात, कभी एक भी विरुद्ध हुई न तो खटिया कड़ी कर देगी तुम्हारी. (फिर मुझे धक्का देते हुए वो उठ gayi)Ab कपडे पहन लो, फिर आराम से बात करते है. (मेने फिर उन्हें पकड़ liya)Kya कर रहे हो?

शिव : एक बहार???

काव्य : नहीं, छोडो मुझे. (कहते हुए मुस्कुराते हुए वो मुझसे दूर हो gayi)Pata नहीं क्या कहते हो. (वो अपने कपडे ले कर फिर बाथरूम में घुस गयी और इस बार दरवाजा भी बंद कर दिया)

थोड़ी देर बाद वो आ गयी, में भी तैयार हो गया था, की तभी जूही का भी फ़ोन आ गया.

शिव : Hello.

जूही : कहा हो?

शिव : बस आ रहा हु. (मेने डरते हुए कहा)

जूही : जल्दी आओ.

काव्य : ये जूही थी, है न? (मेने है में इस्सर किया, वो मुस्कुरायी, हम हॉल में आ gaye)Tum बैठो, में दूध बनती हु.

शिव : रहने दीजिये, उसने बना के तैयार रक्खा होगा.

काव्य : क्यों मेरा दूध पसंद नहीं? (वो अर्थपूर्ण मुस्कुरायी)

शिव : (में झेप gaya)Aisi बात नहीं है.

काव्य : आदत दाल लो, ये खींचतान हमेसा रहनेवाली है. (मुस्कुराते हुए वो किचन में चली गयी, में भी सोचने लगा की उनकी बात भी सही है, कोई मुझसे शिकायत नहीं करती पर सब मुझे अपनी और खींचने में लगी हुई है, फिर वो दूध ले कर आयी, मेने वो पि लिया, की तभी उनके mummy-papa भी आ गए)

आंटी : अरे शिव तुम? कैसे हो?

शिव : (मेने उन्हें और अंकल को पेअर छू कर प्रणाम kiya)Achchha हु आंटी.

आंटी : जीते रहो, कहा गायब रहते हो, आया करो कभी कभी.

काव्य : टाइम नहीं है इसके पास. (उन्होंने तना मारा, और मुस्कुरायी)

शिव : नहीं ऐसी बात नहीं है आंटी.

काव्य : आप उसको दस मिनट रोक के दिखाओ, पता चल जायेगा आपको. (उनको पता था की जूही फ़ोन करेगी, में झेप gaya)Jao, पर जल्दी आना. (उन्होंने प्यार से कहा)

शिव : जी. (में सबको bye बोल के वह से निकल गया).

आंटी : क्या हुआ तुजे? (अपनी बेटी को देख कर)

काव्य : (वो थोड़ा दर गयी पर अपने आपको सँभालते hue)Kyu क्या हुआ?

आंटी : ऐसे क्यों चल रही है, कुछ लगा क्या तुम्हे?

काव्य : (उसके पशीने छूट गए, पर वो सँभालते हुए boli)Wo चलते चलते पेअर टकरा गया था तो थोड़ा दर्द हो रहा है.

आंटी : ध्यान से चला कर. शिव क्यों आया था? (उन्होंने ऐसे hi पूछा था, उनके मान में कुछ भी नहीं था)

काव्य : (पर काव्य के मान में चोर था तो उसको दर लग रहा था, उसने हलकी गब्रहत से kaha)Wo आया नहीं था, मेने बुलाया था, उसके केस के रिलेटेड काम था.

आंटी : एक दिन तो काम से छुट्टी कर, जब देखो तब काम काम काम.

काव्य : मुझे अच्छा लगता है माँ.

आंटी : कभी अपने लिए भी टाइम निकल लिया कर, कब तक ऐसे बैठी रहेगी?

काव्य : तुम फिर सुरु मात हो जाओ, मेने सब सोच लिया है.

आंटी : क्या?

काव्य : वक़्त आने पर बता दूंगी, आप फ़िक्र मात करो, अपने पोते पॉश के साथ खेले बगैर आपको मरने नहीं दूंगी, बस. (उसने अपनी मम्मी के गाल पर किश करते हुए कहा)

आंटी : (वो भी मुस्कुरा di)Kaas वो दिन जल्दी आये.

काव्य : आ जायेगा मम्मी, जल्द hi आएगा.

में जूही के घर पहुंच गया. हम स्टेडियम पहुंचे तो वह मैदान में पानी भरा था तो हम दोनों गयम में चले गए.
 
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