Adultery Kundali Bhagya - Page 26 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Adultery Kundali Bhagya

वेकेशन सेअसोंस की वजह से टाइम की बहोत दिक्कत है, तो ये महीना थोड़ा ऐसा hi रहे गए, माफ़ी चाहता हु.
 
अपडेट 178

हम दोनों गांव की और जा रहे थे, जैसे hi सिटी से बहार निकले रास्ता थोड़ा सुमसान हो गया, एकल दोकल गाड़िया आ जा रही थी, मेरी निगाये रस्ते पर hi थी, पर मुझे लगा की वो मुझे देख रही है तो मेने उनकी और देखा, सो मुस्कुरायी, में भी मुस्कुराया.

मनीषा : (एक की हवा से अपने लहराते बाल को ठीक करते हुए) एक बात पुछु, सच सच बताओ गए? (में उनकी और सवालिए नजरो से देखने लगा, वो फिर मुस्कुरायी, वैसे भी वो खूबसूरत थी तो अच्छी hi लगती thi)Me कैसी हु?

शिव : (जो में सोच रहा था वही उन्होंने puchha)Me समजा नहीं.

मनीषा : सिंपल सा सवाल पूछा मेने, में कैसी हु?

शिव : अच्छी है, पर ऐसा क्यों पूछ रही हो आप?

मनीषा : नहीं, में जान न चाहती हु की तुम मेरे बारे में क्या सोचते हो? में एक शादीशुदा हु, एक बच्चे की माँ हु, फिर भी तुम्हारे साथ मेने वो सब किआ तो तुम क्या सोचते हो मेरे बारे में?

शिव : क्या सोचना चाहिए?

मनीषा : सवाल मेने पूछा है.

शिव : आपकी जिंदगी है, आप जैसे चाहे जी सकती है, इसमें में क्या सोचूंगा.

मनीषा : में तुम्हारी राइ जान न चाहती हु, क्या तुम्हे लग रहा है की में अपने पति को धोका दे रही हु, या में गिरी हुई हु, वैसा कुछ.

शिव : मेने कहा न की ये आपकी जिंदगी है, आपको जो ठीक लगे वैसे आप जी सकती है.

मनीषा : (मुस्कुराते हुए) वैसे तुम ठीक कह रहे हो, पर इसमें सबका अपना अपना नजरिया होता है, हाई सोसाइटी में ये सब आम होता है, में ये नहीं कह रही की सब ऐसा करते है, पर ज्यादातर सब अपनी जिंदगी जीते है, और कोई बुरा नहीं मंटा, पर में तुम्हारा नजरिया जान न चाहती हु.

शिव : जहा तक में समझता हु ये आपकी अपनी सोच होनी चाहिए, अगर आपको सही लगता है तो सही है, आपके पति को इस से एतराज नहीं है तो में क्या कह सकता हु.

मनीषा : मेरे पति को क्यों एतराज नहीं होगा, आखिर वो मर्द है और मर्द औरत को अपनी जागीर समझते है, वो तो मेरे पति है, अगर तुम्हे भी पता चले की में किसी और के साथ ऐसा कर रही हु तो तुम भी बुरा मानोगे.

शिव : में क्यों बुरा मानुगा?

मनीषा : क्यों की तुम भी एक मर्द हो, और मर्दो की ऐसी फिरट्रेट होती है, इसमें बुरा भी कुछ नहीं है, सदीओ से सब ऐसे hi चलता आ रहा है और चलता रहेगा. क्या तुम मुझे मेरे पति के अलावा किसी और के साथ देख पाओगे? (उन्होंने मेरी और गौर से dekha)(Wo सच hi कह रही थी, शायद में उन्हें वैसे नहीं देख सकता हु, पर में बोलै कुछ नहीं बस उन्हें देखता raha)Dekha, तुम्हारा चेहरा hi बता रहा है की तुम नहीं देख सकते (वो मुस्कुरा रही थी)

शिव : तो इसमें बुरा क्या है?

मनीषा : मेने कब कहा की बुरा है, हम औरतो को भी ऐसा hi पसंद आता है, कोई हम पर अपना हक़ जमाये, वो हमें अपनी समजे, में तो बस पूछ रही थी. अब बताओ, फिर से में पूछ रही हु, में कैसी हु?

शिव : पता नहीं, पर मुझे आप बुरी नहीं लगती.

मनीषा : मतलब अच्छी भी नहीं लगती.

शिव : मेने ऐसा तो नहीं कहा.

मनीषा : ऐसा कहा नहीं पर मतलब वही था (में थोड़ा सीरियस हो गया, वो हसने lagi)Mene कहा न की इसमें कुछ गलत नहीं है, सेक्स, सेक्स होता है, अगर ये आकर्षण hi न रहे तो दुनिया ख़तम हो जाएगी, और तुम जो मेरे लिए फील करते हो ये जान कर मुझे अच्छा hi लग रहा है, अगर मुज पर अपना हक़ समझते हो तो फिर मुझसे दूर क्यों रहते हो? (उन्होंने मनमोहक स्माइल से कहा)

शिव : ऐसी बात नहीं है, में सच कह रहा हु, टाइम की hi कमी रहती है मुझे.

मनीषा : मान लेती हु, पर कभी कभार तो आ सकते हो न, मेने सुना है की भरे हुए दूधवाली स्तरीय मर्दो को ज्यादा अच्छी लगती है, तुम्हे अच्छी नहीं लगती में?

शिव : (शरमाते hue)Achchhi लगती हो.

मनीषा : तो फिर आते क्यों नहीं, सच कह रही हु, तुम में कुछ खास है, कभी कभी तो मान करता है की उड़ कर तुम्हारे पास पहुंच जाऊ, पर क्या करू, समाज के बंधन है, छह कर भी वैसा नहीं कर सकती, और ये मात संजना की में सूर्य से खुस नहीं हु, वो भी मुझे उतना hi प्यार देते है, पर टाइम की कमी तो उनको भी है. यही वजह होती है की ऐसे सम्बन्ध बांध जाते है. (टॉपिक बदलते hue)Swarna से बात होती है?

शिव : ज्यादा नहीं, वो अनाथालय आयी थी.

मनीषा : कब?

शिव : में जब कॉम्पिटिओं में जानेवाला था तब आयी थी.

मनीषा : उसके बारे में क्या कहोगे, में उसे बरसो से जानती हु, वो बहोत अच्छी और नेक भी है, फिर भी उसके तुम्हारे साथ सम्बन्ध बन गए, सम्बन्ध क्या वो तो तुम्हारे बच्चे की माँ बन बैठी, ये गलत नहीं लगा तुम्हे?

शिव : सही या गलत, ये सब बहोत पेचीदा शब्द है, सही कभी गलत होता है तो गलत कभी सही होता है, हम इन सब्दो को किसी दायरे में बांध नहीं सकते.

मनीषा : सही कहा तुमने, ये सब कुदरती है, ये न्यायम इसलिए बनाये गए है की जो सामाजिक व्यवस्था है वो सही से चलती रहे, पर कभी कभी उसको सही से चलने के लिए भी गलत करना पड़ता है, तो मुझे कोई रिग्रेट नहीं है.

हम दोनों ऐसे hi बाते करते हुए गांव पहुंच गए, उन्होंने गाड़ी सीधे दिव्या के घर hi ले ली. शाम होने वाली थी, तभी मुझे कॉल आया, मेने देखा की जूही का कॉल था, इस सब में में उसको बताना तो भूल hi गया था.

शिव : Hello. (मेने थोड़ा डरते हुए कहा)

जूही : (दन्त ते hue)Kaha हो तुम? अभी तक आये क्यों नहीं?

शिव : सॉरी यार, में बताना भूल गया, एक काम से में बहार आया हु.

जूही : बता नहीं सकते थे, में कबसे इंतजार कर रही thi(Wo लगातार मुझे दन्त रही थी)

शिव : सॉरी कहा न, वो दिमाग से hi निकल गया. (मेने देखा की मनीषा जी मुस्कुरा रही थी) में बाद में कॉल करता हु, सॉरी.

जूही : सॉरी के बच्चे, प्रैक्टिस पर ध्यान नहीं है तुम्हारा.

शिव : अब ीनता मात दांतो, में कर लूंगा.

जूही : ठीक है, रखती हु. Bye.

शिव : (लम्बी साँस छोड़ते hue)Bye.

मनीषा : गर्लफ्रेंड?

शिव : नहीं वो....

मनीषा : रहने भी दो, ऐसे सिर्फ बीवी दन्त टी है या गर्लफ्रेंड. (वो मुस्कुरायी, में भी क्या कहता, हम दोनों बहार निकले, मोतीलाल जी दरवाजा खोल कर बहार hi आ रहे थे, शायद उन्होंने गाड़ी की आवाज सुनी थी)

मोतीलाल : मनीषा जी आइये आइये. ये कहा से मिल गया? (शिव की और देख कर)

मनीषा : (वो भी बस muskurayi)Kya हुआ फिर?

मोतीलालजी : आप अन्दर तो आईये. (हम अंदर gaye)Bethiye, अरे बहु, जरा पानी तो लाना.

माधुरी : जी बाउजी (अंदर से आवाज आयी, थोड़ी देर बाद वो पानी ले कर आयी, शिर पर पल्लू लिए थी वो, उन्होंने मनीषजी को पानी दिया फिर मुझे देने लगी, मेने बस ऐसे hi उनकी और देखा पर वो मुझे कुछ अलग तरह से देख रही थी, उनके चेरे की वो मुस्कान, वो ऐसे देख रही थी जैसे हमारी बहोत पहचान हो, में पानी की और हाथ बढ़ा कर उन्हें hi देखने लगा, वो थोड़ी शर्मा गयी और धीरे से boli)Pani लीजिये.

शिव : (में झेप gaya)Ji. (मेने पानी ले लिया, पर फिर मेरी नजर उन पर गयी, उनकी मुस्कराहट कुछ कह रही थी मुझे, पर मेरी समाज में नहीं आ रहा था, मेने पानी पि लिया, वो अंदर चली गयी, में उनके बारे में hi सोच रहा था, ऐसा तो नहीं था की में पहली बार मिल रहा था, पर पिछली बार हमारे बिच ऐसा कुछ नहीं हुआ था की वो मुझसे इतना फ्रेंडली बहाव करे)

माधुरी : (वो पानी दे कर अंदर तो चली गयी थी पर उसके चेहरे पर अभी भी मुस्कान थी, वो मान में सोचने lagi)Me सामने गयी पर फिर भी उसको पता नहीं है की में वही हु जिसके साथ वो मश्ग पर बाटे करता है. (वो मुस्कुराते हुए चाय बनाने लगी, उसे याद आ रहा था की कैसे ये सिलसिला सुरु हुआ था, उस दिन दिव्या ने उसके फ़ोन से मश्ग किआ था शिव को, उसे पता नहीं था, और फिर शिव ने जब कॉल किआ तो पहले वो सामजी नहीं, पर फिर उसको पता चल गया की ये मश्ग दिव्या ने hi किआ होगा, उसका नंबर तो शिव के पास था नहीं क्यों की कुछ समय पहले hi उसको मोबाइल मिला था, पहले तो उसने ऐसे hi बात कर ली पर फिर उसको इस सिचुएशन पर मस्ती करने की इच्छा हुई, वैसे भी वो एक लड़की hi तो थी, कॉलेज से निकलते hi शादी हो गयी थी, उसने ऐसे hi मज़ाक में ये सुरु किआ था पर फिर उसको भी मज़ा आने लगा, दिव्या की वजह से वो शिव को नंगा देख चुकी थी, अपने पति के कारन उसके शरीर की इच्छाएं पूरी नहीं हो प् रही थी, वो अपने पति के पास बिलकुल सील पैक आयी थी, पर जिस तरह की बाटे उसने अपनी सहेलिओ से सुनी थी वैसा कुछ भी नहीं हुआ था उसके साथ, है उसकी सील जरूर टूट गयी थी पर जैसा मज़ा वो एक्सपेक्ट कर रही थी वैसा कुछ भी नहीं महसूस हो रहा था, पहले तो उसने सोचा था की शायद ये उसकी hi सोच होगी, पर जब उसने शिव को और दिव्या को देखा था तब शिव ने बिना संसर्ग किये दिव्या को कितना मज़ा दिया था, ये बात उसके जहँ में बेथ गयी थी, पर वो एक अच्छी लड़की थी तो उसने उस बात को दरकिनार hi रक्खा, पर शादी के इतने समय बाद भी उसको वो सुख नहीं मिल प् रहा था, ऊपर से उसने शिव का वो अंग देखा था, उसके मुकाबले परम कही भी नहीं ठहरता था, उसको लगने लगा था की परम का छोटा है उस वजह से hi वो ये सुख नहीं भोग प् रही है, जब से शिव के साथ सिलसिला सुरु हुआ था उसने शिव को सोच कर अपनी छूट में ऊँगली भी की थी, वो इतनी उत्तेजित हो गयी थी की उसको स्खलन का अनुभव हुआ था, अपने जहँ में शिव के बारे में सोच सोच कर hi वो उसको अपने करीब महसूस कर रही थी, और बेचारे शिव को तो ये सब पता hi नहीं था, तो उसके चेहरे पर दुविधा देख कर वो अंदर hi अंदर खुस हो रही थी)

(बहार)

मोतीलाल : मेने कई गाववालो से बात की, वो सब समाज भी रहे है, पर सरपच मुझे धमका रहा है, खुले सब्दो में तो नहीं पर घुमा फिर कर मुझे इन सब से दूर रहने को कह रहा है.

मनीषा : आपको क्या लगता है, आपको क्या करना चाहिए?

मोतीलाल : गांव की भलाई के लिए किसी को तो आगे आना होगा.

मनीषा : ठीक कह रहे है आप, में यही जान न चाहती थी, जब तक आप खुद नहीं समझते दुसरो को नहीं समजा सकते. में भी गांव वालो से मिलना चाहती हु, कहा मिल सकते है?

मोतीलाल : अभी शाम को दुधमंडली के पास बहोत से लोग मिल जायेंगे, में खबर भिजवाडेटा हु.

(वो किसी को फ़ोन करने लगे, करीब पंद्रह मिनट बाद वो भाभी फिर आयी, उनके पास नास्ता था, दो चाय थी और एक दूध का गिलास था,)

माधुरी : शिव, वो टेबल यहाँ रख डोज? (उन्होंने बहोत प्यार से कहा)

शिव : जी, (कहते हुए में उठा और टेबल वह रख दिया, उन्होंने चाय मनीषजी को दी और दूधवाला गिलास मुझे दिया, वो फिर मुझे दूध देते हुए मुस्कुरायी, में भी मुस्कुराया, एक चाय उन्होंने वह टेबल पर रख दी और नास्ता भी)

माधुरी : और कुछ खाओगे? (उन्होंने मुझे देखते हुए कहा)

शिव : जी नहीं, थैंक यू. (वो अंदर चली गयी, जाते हुए भी वो मुड़ी और मुस्कुरायी, मेरी समाज में नहीं आ रहा था की आखिर माजरा क्या है, दिव्या भी नहीं दिख रही थी, में पूछ भी नहींसकता था, में दूधी लगा, मनीषा जी चाय पिने लगी, थोड़ी देर बाद मोतीलाल जी भी बेथ गए)

मोतीलाल : मेने बात कर ली है, (फिर चाय पिटे हुए वो सब बाटे बताने लगे, में उन दोनों की बाटे सुन रहा था, उनकी बातो से मुझे पता चल रहा था की क्या चल रहा है, हमने चाय नास्ता ख़तम कर लिया था और बाटे कर रहे थे, भाभी आयी और सब वापस ले गयी, उनके चेरहे पर वही मुस्कान थी, काफी देर चर्चा चली, मुझे पेशाब लगी थी, में खड़ा हुआ)

शिव : में अभी आता हु. (कहते हुए में अंदर की और चला गया, मुझे पता था की बाथरूम पीछे है, अंदर आंटी बैठी मिली, वो कुछ काम कर रही thi)Namste आंटी.

गंगा आंटी : कैसे हो शिव, बहोत दिन बाद आये?

शिव : टाइम hi कहा मिलता है. दिव्या नहीं दिखाई दे रही?

आंटी : आज सुबह hi वो अपनी सहेली की बहन की शादी में गयी है.

शिव : और पारंभैया?

आंटी : उसका काम hi ऐसा है की बहार जाना पड़ता है, कभी दो दिन तो कभी तीन दिन, वो hi दिव्या को छोड़ने गाय था. कल आते हुए उसे लेते आएगा.

शिव : जी अच्छा. में आता हु आंटी. (मुझे पेशाब लगी थी तो मुझे जाना था, में बहार की और निकल गया, मेने जैसे hi बाथरूम का दरवाजा खोला में हक्का बक्का रह गया, भाभी वह साड़ी उठाये पेशाब कर रही थी, जैसे hi दरवाजा खुला माधुरी भी चौंक गयी, उसने देखा की शिव खड़ा है, वो आनन फानन में कड़ी होने लगी पर पेशाब चलु थी तो उसकी साड़ी भीगने लगी, में तुरंत पीछे होगया और दरवाजा बंद कर दिया, मेरी धड़कने तेज चल रही थी, मुझे समाज नहीं आया की ये क्या हो गया)

माधुरी : (वो भी दर गयी थी, उसे भी समाज नहीं आया की ये कैसे हो गया, वो बर्तन कर रही थी की उसको पेशाब लगी और वो अंदर आयी, उसने चिटकनी भी बंद की थी, पर शायद ठीक से बंद नहीं हुई थी, वो शर्म से गाढ़ी जा रही थी की शिव ने उसको किस हालत में देख लिया, वो कुछ पल कड़ी रही, पर उसको पेशाब लगी थी तो वो फिर से बेथ गयी, पेशाब करने के बाद वो बहार को निकल ने लगी, उसने धड़कते दिल से दरवाजा खोला, तो देखा की शिव उल्टा हो कर खड़ा है, उसको इतनी शर्म आ रही थी की उसका दिल कर रहा था की जमीं में समां जाये, उसके बहार आने की आवाज से शिव ने मुद कर देखा तो उसने फ़ौरन अपनी नज़ारे निचे कर ली, उसको बहोत शर्म आ रही थी, वो बिना कुछ बोले वह से अंदर की और भागने लगी, दरवाजे के पास जा कर उसने पीछे मुद कर देखा तो शिव उसको hi देख रहा था, और उसकी निगाये उसके कूल्हों पर थी, शायद वो सोच रहा था की अभी इन्हे नंगा देखा था, वो शर्म से पानी पानी हो गयी और अंदर भाग गयी)

शिव : (में बहार खड़ा अभी भी उस खली दरवाजे को देख रहा था, मेने ऐसा बिलकुल भी नहीं सोचा था, पर मेने जो देख लिया था वो मेरे जहँ में जैसे छाप गया था, थोड़ी देर बाद मुझे होश आया और में बाथरूम में घुस गया, मेने देखा की मेरे लुंड में अकड़न आ गयी थी, मेने अपने जहँ से वो निकलने के लिए आंखे बंद की तो वो दृश्य क्लियर मेरे आँखों सामने दिखने लगा, बड़ी मुश्किल से मेने अपने आपको शांत किआ और पेषाब की)

माधुरी : (उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, उसको बहोत शर्म आ रही थी, वो आपने आपको कोष रही थी की उसने ठीक से चिटकनी बंद नहीं की, पता नहीं शिव क्या सोच रहा होगा, वो उसके पिछवाड़े को नंगा देख चूका था, तभी उसको एहसास हुआ की शिव ने बाथरूम का दरवाजा बंद किआ, उसके कान वही लगे हुए थे, उसको शिव की आहात भी सुनाई दी की वो अंदर आया है, पर उसकी हिम्मत hi नहीं हो रही थी, उसकी सास अंदर गयी थी, उसने महसूस किआ की शिव शायद वही खड़ा है, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, उसने कनखीओं से पीछे देखना चाहा, पर उसको कुछ न दिखा, उसने थोड़ा शिर मोड़ा तो उसको शिव के पेअर दिखाई दिए, वो वही खड़ा था, माधुरी की सांसे तेज चल रही थी, तभी शिव आगे बढ़ गया, उसने मुद कर देखा तो वो जा रहा था, उसकी पीठ दिख रही थी, तभी वो रुका और पीछे मुदा, दोनों की नज़ारे टकराई, तुरंत माधुरी ने अपनी निगाहे झुकाते हुए शिर आगे कर लिया. शिव चला गया, पर माधुरी के मान में ढेरो सवाल खड़े हो गए थे.)

में बहार आया तो उनकी बाटे चल रही थी, पर मेरा ध्यान भाभी पर hi था, मुझे ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए क्यों की ये एक एक्सीडेंट था, अचानक हो गया था, वो परमभाई की बीवी थी, मेने अपने आपको संभाला और वह से ध्यान हटाया. कुछ देर बाद तुम तीनो वह से छुपाल आ गए, वह डेरी भी थी तो लोग दूध जमा करवाने वह आये थे. मोतीलालजी वह सब से मिल रहे थे और मनीषजी का परिचय करवा रहे थे, थोड़ी देर बाद वह तक़रीबन पचास से ऊपर लोग जमा हो गए थे, में, अंकल और मनीषा जी खड़े थे, सब सामने खड़े थे.

मनीषा : नमस्ते भइओ और बहनो, में मनीषा हु, में एक सामाजिक कार्यकर्ता हु, आपमें से कुछ लोग मुझे जानते भी होंगे, आज में मोतीलालजी की वजह से यहाँ आयी हु. मोतीलालजी जो प्रश्न उठा रहे है वो आपकी भलाई के लिए hi है, ये आपका अधिकार है, आप वोट देते हो, सर्कार बनाते हो तो आपको उसका लाभ मिलना चाहिए, और अगर आप उस लाभ से वंचित रहते हो तो सवाल करना आपका अधिकार है, अब गांव बड़ा हो रहा है, साल दर साल यहाँ की बस्ती भी बढ़ रही है तो सुविधाएं भी बढ़नी चाहिए, शिक्षा, स्वस्थ और स्वतंत्रता, ये हर नागरिक का अधिकार होता है, यहाँ के बच्चो को आगे पढ़ाई करने के लिए बहार जाना पड़ता है, उसकी वजह से कही लड़कीओ ने अपनी पढ़ाई बीचमे hi छोड़ दी है, मन की सहेरे नजदीक है, पर फिर भी अगर आपके गांव में वो सुविधा उपलब्ध हो तो क्या बुराई है, वैसे hi स्वस्थ के लिए भी जो व्यवस्था है वो पर्याप्त नहीं है, इन सुविधाओं के नाम पर हर साल लाखो रुपये खर्च हो रहे है तो फिर वो सुविधाएं आपको मिल क्यों नहीं रही है, सवाल पूछना आपका अधिकार है और वही मोतीलालजी कर रहे है, में ये नहीं कहती की हमारे सरपंचजी कोई काम नहीं कर रहे, पर जितना होना चाहिए वो नहीं हो रहा है, और जितनी ग्रांट हमे मिल रही है उसके सामने उतना काम नहीं दिख रहा है, तो सवाल पूछना हमारा अधिकार है, वो हमें रोक नहीं सकते. (में देख रहा था की सब बहोत ध्यान से सुन रहे थे, मनीषजी अच्छा बोल रही थी, सब तालिया भी बजा रहे थे, अभी वो बात कर hi रही थी की सरपंच अपने कुछ आदमीओ के साथ वह आया, सब उनकी और देखने लगे, वैसे भी गांव के लोग उनसे डरते थे, तो वो गभरने लगे, सरपंच वह आया और मनीषजी के पास जा कर हाथ जोड़ कर नमस्ते किआ, उसका ऐटिटूड ऐसा था जैसे एहसान कर रहा हो)

सरपंच : कहिये, ऐसी क्या समस्या हो गयी जिसके लिए मुझे बुलाये बिना सब इकठ्ठा हुए है? (उसने गांव वालो की और देख कर कहा, सब अगल बगल झाकने लगे)

मनीषा : इसका जवाब में देती हु, सब ये जान न चाहते है की जितनी ग्रांट आती है उस हिसाब से यहाँ काम क्यों नहीं हुए है?

सरपच : देखिये मैडम, आप सहर में रहती है, आपको कुछ पता नहीं है, पहले अपने अकड़े ठीक कीजिये, जितनी ग्रांट आती है वो साडी यहाँ खर्च हो रही है और उसका पूरा हिसाब दिया जाता है, चाहे तो आप रजिस्टर देख सकती है, सब मिल जायेगा आपको.

मनीषा : मेने देखा है तभी में कह रही हु, आपने पंचायत बिल्डिंग, प्राथमिक स्वस्थ केंद्र और प्राथमिक शाला के रख रखाव का जितना खर्च बताया है उस पैसो से तो दूसरी बुल्डिंग कड़ी हो सकती है.

सरपंच : (घर कर देखते हुए) आप बड़े लोग है, आपको आते दल का भाव पता नहीं होता मैडम, (उसने दन्त पिस्टे हुए kaha)Aaj कल महंगाई कितनी बढ़ गयी है, मटेरिअल और मजदूरी कितनी महंगी हो गयी है.

मनीषा : मोतीलालजी, जरा वो कागज दीजिये. (अंकल ने एक कागज दिया) शिव, जरा इसमें देख कर बताओ की ये जो खर्च बता रहे है क्या ये इतना होता है?

शिव : (मेरी समाज में नहीं आया की अचानक मुझे क्यों पूछ रही है, जबकि में कुछ भी नहीं जनता tha,par मेने उस कागज को ध्यान से देखा, अंदर खर्च लिखा हुआ था, मटेरियल और मजदूरी का खर्च था, एरिया तो लिखा नहीं था पर पैर पर्सन मजदूरी ज्यादा लिखी हुई थी और मटेरियल का भाव भी ज्यादा लिखा हुआ था) जो लिखा हुआ है उस हिसाब से तो ये बहोत ज्यादा है, तक़रीबन दो गुना से भी ज्यादा.

सरपंच : ये क्या बताएगा, ये तो अभी बच्चा है, अगर पूछना है तो दफ्तर जा कर पूछ लो, अधिकारिओ ने ये खर्च पास किआ है तभी इनका भुगतान किया गया है.

मनीषा : आपकी जानकारी के लिए बता दू की जिसे आप बच्चा कह रहे हो न वो एक कन्स्ट्रुडिओं कंपनी का पार्टनर है, जो बड़ी बड़ी फैक्ट्रीज बनती है.

सरपंच : (आश्चर्य से देखने लगा, दूसरे गांववाले और खुद मोतीलालजी भी मुझे आश्चर्य से देखने लगे, हलाकि ये जूथ नहीं था, पर मनीषजी ने बखूबी इस बात का इस्तेमाल किआ था, सरपंच ने थोड़ा संभल कर kaha)To होगा, ये जो कुछ भी है वो सर्कार की जानकारी में और उनकी देखरेख में hi हुआ है, चाहे तो जाँच करवालो.

मनीषा : (हस्ते hue)Janch? में सबसमाजति हु की ये सब कैसे होता है, मुझे उस से कोई मतलब नहीं है की आपने क्या किआ है, मेरा कहना बस इतना hi है की जो सुविधाएं गांव वालो को मिलनी चाहिए वो मिलनी hi चाहिए.

सरपंच : जो आप कह रही है उसका बजट अभी नहीं है, में आगे अर्जी कर दूंगा.

मनीषा : आपको वो पहले hi कार्डेनि चाहिए थी, और बजट की जो बात कर रहे है वो अभी फ़िलहाल hi इतना है की इसमें ये काम हो सकता है. (गांववाले आपस में बाते करने लगे, ये फुसफुसाहट देख कर सरपंच तिलमिला गया)

सरपंच : ये सब मनघडंत बाटे है, कितने खर्चे होते है गांव में आपको पता भी है, बाते बनाने से कुछ नहीं होता मैडम.

मोतीलाल : वो hi तो पूछ रहे है सरपंच जी, की कहा क्या खर्च हो रहा है, और अगर मजदूरी चुकानी है तो गांव के लोगो को क्यों नहीं काम दिया गया, बहार के लोगो को काम दे कर गांव का पैसा बहार बता गया, अगर गांव के लोगो को इतनी मजदूरी मिलती तो गांव के कितने लोगो का भला होता. (सरपंच दांत पइसस कर रह गया, उसका चमचा निहालसिंह वह खड़ा था)

निहालसिंह : तुम कुछ ज्यादा hi बोल रहे हो, ये मैडम तो आएगी और चली जाएगी, तुम्हे हमारे साथ hi रहना है. (उसने धमकी भरे स्वर में कहा)

मनीषा : कोई हाथ लगाकर तो दिखाए इन्हे, हिसाब माँगा गया तो धमकिए देने लगे, इसी से पता चलता है की तुमने गलत किआ है.

निहालसिंह : ो मैडम, ये तुम्हारा सहर नहीं है, हमारा गांव है, पुलिस की धमकी दे रही हो तो वो हमारी जेब में रहती है, जबतक पुलिस आएगी किसी का अत पता hi नहीं मिलेगा, सामजी. (में आगे बढ़ने hi वाला था की मनीषा मैडम ने मेरा हाथ पकड़ लिया)

मनीषा : तुम्हारा यही रवैया बताता है की तुम यहाँ क्या कर रहे हो, इसका जवाब तुम्हे अगले इलेक्शन में मिलेगा, अगले इलेक्शन में खुद मोतीलालजी खड़े रहेंगे, फिर देखते है कितना खर्च होता है और कितना काम होता है.

सरपंच : दो बाटे बना लेने से कोई सरपंच नहीं बन जाता, आपको जो करना है कर लो, चलो निहाल. (वो अब हमारी और घूरते हुए वह से निकल गए)

निहालसिंह : आपने सुना न वो क्या कह रहे है, आप हुकुम करो, में अभी के अभी उनको ठीक करता हु.

सरपंच : ये जोश से काम लेने का वक़्त नहीं है, थोड़ा होश से काम लेना पड़ेगा. हमे ऐसा कोई काम नहीं करना है जिस से आनेवाले इलेक्शन में लोग हमारे खिलाफ हो जाये.

निहालसिंह : पर अगर ऐसा hi चलता रहा तो वो तो वैसे भी लोग हमारे खिलाफ हो जायेंगे.

सरपंच : वो हमारे खिलाफ खड़ा होगा तब तो ऐसा होगा, जैसे हम हर बार जित ते आ रहे है वैसे hi इस बार भी बिनहारीफ hi जीतेंगे.

हम वह खड़े थे और सब से बाटे कर रहे थे, गांव वाले भी उत्साहित थे क्यों की सरपंच मैदान छोड़ कर चला गया था. शाम ढल चुकी थी तो हम सब वापस घर आ गए. मोतीलालजी हमे जोर देने लगे की खा कर hi जाईये.

मनीषा : मेरा तो रुकना मुकिल है, मेरा बच्चा अकेला है घर पर, है अगर शिव रुकना चाहे तो वो रुक शक्ति है.

मोतीलालजी : है बीटा, तुम रुक जाओ, वैसे भी बहोत दिनों बाद आये हो. (हम बाटे कर रहे थे की भाभी हमारे लिए पानी ले कर आयी, इस बार वो मुझसे नज़ारे चुरा रही थी) और दूसरी बात, में तुम्हे दूसरे गांव वालो से भी परिचय करवाडुंगा, ताकि आगे चल कर फायदा हो.

मनीषा : ये बात सही है आपकी, (मुझे देखते hue)Agar रुक सकते हो तो रुक जाओ, आगे तुम्हारी मर्ज़ी.

शिव : (सोचते hue)Thik है, में रुक जाता हु, वैसे भी मुझे सरपंच कुछ ठीक नहीं लगा, देखते है दूसरे लोग क्या कहते है.

मोतीलालजी : चलो अच्छा है, (तब तक उनकी पत्नी भी वह आ गयी थी तो उनसे bole)Shiv का भी खाना बनवादेना, और कुछ खास बनाना.

शिव : कुछ खास बनाने की जरुरत नहीं है.

गंगादेवी : क्यों जरुरत नहीं है, तुम उसकी चिंता मात करो.

थोड़ी देर बात करने के बाद, मनीषजी चली गयी.

मोतीलालजी : तुम हाथमुँह धो लो फिर हम गांव में चलते है.

शिव : जी.

मोतीलालजी : बहु, जरा शिव के लिए पानी निकल देना. (वो अंदर चली गयी थी तो अंदर से hi है बोली)

माधुरी का दिल जोरो से धड़क रहा था, उसको बहोत शर्म आ रही थी, शिव ने उसे वैसी परिस्थिति में जो देख लिया था, वो जल्दी से बाथरूम में गयी और पानी निकलने लगी, जैसे hi वो बहार आयी तो शिव वही खड़ा था, जैसे hi शिव कुछ बोलने वाला था वो वह से निकल गयी, शर्म और संकोच की वजह से वो शिव का सामना करने से कटरा रही थी.

में उनसे माफ़ी मांगना चाहता था, जो हुआ था वो गलती से हो गया था, पर वो बात hi नहीं कर रही थी, वैसे भी उनका शर्माना लाज़मी था, वो पल hi ऐसा था, एक बार फिर मेरे सामने वो दृश्य आ गया, वो गोर गोर कूल्हे मेरे आँखों के सामने थे, में वो नहीं सोचना चाहता था पर उनको देखते hi वो दृश्य सामने आ जाता था. मेने हाथ मुँह धोये, में अंदर आया तो आंटी और वो खाने की तैयारियां कर रही थी, में आगे चला गया, मोतीलालजी मेरी hi रह देख रहे थे, हम दोनों गांव में निकल गए, ज्यादातर एक मंजिला माकन थे, कुछ ईंटो के बने हुए थे तो कुछ कच्चे थे, हम किसी के घर गए, उन्होंने परिचय करवाया और उनसे बात करने लगे.

वह माधुरी काम तो कर रही थी पर बार बार उसे शिव hi जहँ में आ रहा था, उसने सोचा भी नहीं था की ऐसा कुछ हो जायेगा. वो एक सीधी सदी लड़की थी, नयी दुल्हन की तरह उसके कई अरमान थे, वो कुवारी hi यहाँ आयी थी, वैसे परम भी अच्छा था और घर के लोग भी अच्छे थे, तकलीफ एक hi थी की परम थोड़ा शांत स्वाभाव का था. पहली रात वो थोड़ा घबराया हुआ था, वो तो बेचारी कुछ ज्यादा नहीं जानती थी तो जो वो कर रहा था करने दे रही थी, उसके कपडे उठाते hi परम बहोत ज्यादा उत्तेजित हो जाता था और अपनी उत्तेजना को काबू नहीं कर पता था, पहले दो तीन दिन तो उसकी छूट को छूटे hi वो झाड़ जाता था, एक रात उसने जैसे तैसे लुंड छूट में घुसा दिया, पर अंदर जाते hi वो झाड़ गया, वो कुछ समाज नहीं पति थी की क्या हो रहा है. पर वो उत्तेजित hi रह जाती थी, शान नहीं होती थी. ऐसे hi सिलसिला चलता आ रहा था, उसकी सील तो टूट चुकी थी पर संतुस्ती नहीं मिल रही थी न hi सेक्स का सुख समाज प् रही थी, उसके शरीर को किसी बात की चाहत थी, पर अच्छे संस्कारो के कारन वो अपना दुःख किसी को कह नहीं प् रही थी. उसकी नानन्द दिव्या उसकी अच्छी सहेली थी पर वो उस से भी ये कह नहीं सकती थी, और कहती भी तो क्या कहती, वो खुद hi नहीं समाज प् रही थी की उसे क्या चाहिए था, क्या कमी महसूस हो रही है.

गंगादेवी : (उन्होंने देखा की साक चढ़ा कर वो कही खोई कड़ी hai)Kya हुआ बीटा, क्या सोच रही हो?

माधुरी : (हड़बड़ाते hue)K क कुछ नहीं मजी. (गंगादेवी समाज रही थी की शायद वो अपने पति को याद कर रही है, पर उसकी नौकरी की वजह से उसको ऐसे बहार रहना पद रहा था, वो भी क्या करे, दोनों फिर काम में जुट गए)

में और मोतीलाल जी एक घर को गए, में पहचान गया की ये कुसुम का घर है, क्यों की में यहाँ आ चूका था. हम अंदर गए, जैसे की गांव में होता है वैसे hi दरवाजा पार करते hi पहले काफी जगह थी, और बरामदा भी काफी बड़ा था, दरवाजा खुला था तो हम अंदर चले गए और मोतीलालजी ने hi आवाज दी, तो कुसुम hi दौड़ती हुई बहार आयी, पर जैसे hi मुज पर नजर पड़ी वो ठिठक गयी.

मोतीलाल : कुसुम बेटी, पापा कहा है?

कुसुम : (जैसे तैसे मुझसे नजर चुरा रही thi)J जी वो अंदर hi है, बुलाती हु, आप बैठिये. (कहते हुए वो अंदर चली गयी, थोड़ी देर में उसके पापा बहार आये)

पापा : अरे मोतीलालजी, आइये आइये. (मेरी और देख कर उन्होंने स्माइल दी तो में भी मुस्क़ुयर्य)

मोतीलाल : कैसे है आप?

क पापा : में तो बढ़िया हु, पर आपने ये क्या पन्गा मोल ले लिया है, हम जैसे लोगो के लिए ये सब नहीं है.

मोतीलाल : में समझता हु आपकी बात, पर अगर सब लोग ऐसे hi सोचते रहेंगे तो फिर गांव का भला कैसे होगा?

क पापा : पर सरपंच जैसे लोगो से पन्गा नहीं लेना चाहिए.

शिव : वो भी तो इंसान hi है, ऐसे दर कर रहने से hi उनको बल मिलता है, वैसे भी अंकल क्या कह रहे है, गांव की भलाई के लिए hi तो कह रहे है, अगर वो नहीं कर सकते तो फिर किसी न किसी को तो जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी.

क पापा : (मुस्कुराते hue)Waise ये है कोण, परम की शादी में भी देखा tha(Unhone मोतीलालजी से पूछा)

मोतीलाल : ये शिव है, वकसे तो दिव्या की सहेली का भाई है, पर अब तो जैसे हमारे घर का सदस्य बन गया है, इसिने तो मेरी जान बचायी थी, वर्ण पता नहीं शादी में क्या अनर्थ हो जाता.

शिव : क्या अंकल आप भी, वो छोटा सा हादसा था, और मेने कुछ नहीं किआ था, बस उसको आप पर गिरने से बचाया था.

क पापा : बीटा मेने भी वो देखा था, वो किसी अचम्बे से काम नहीं थम, सामान्य आदमी की ताकत नहीं होती, पता नहीं तुमने कैसे कर लिया था वो.

शिव : अंकल आप भी कुछ बढ़ा चढ़ा कर कह रहे है, उस वक़्त वो हो गया सो हो गया. (तभी कुसुम पानी ले कर आयी)

क पापा : तुम इससे जानती हो बीटा?

कुसुम : है पापा, ये शिव है, रंजन का भाई है.

क पापा : ये क्या बेटी, सिर्फ पानी, नास्ता और शरबत भी ले आती.

कुसुम : अभी लायी पापा.

मोतीलाल : अरे नहीं भाईसाहब, सब जगह घूम रहे है तो, हर जगह यही पूछ रहे है, वैसे भी फिर खाना खाया नहीं जायेगा.

क पापा : इससे तो खाने दीजिये, ये पहली बार हमारे घर आया है.

शिव : नहीं अंकल, मुझे भी इच्छा नहीं है.

मोतीलाल : छोड़िये वो सब, वैसे जो में कह रहा हु आप उस से सहमत है की नहीं, जो सुविधाएं हमारे गांव को मिलनी चाहिए वो मिलनी चाहिए की नहीं?

क पापा : उसमे क्या कहना भाई साहब, अगर वो सब मिल जाये तो बच्चो को भी आसानी हो जाएगी और जो बूढ़े है उनकी सेहत का भी ख्याल रख सकते है. पर आप तो जानते है की सरपंच को कमलनाथजी का फुल सपोर्ट है.

मोतीलाल : मनीषजी को भी काम मात समजिये, वो भी एक बहोत बड़े बुसिनेस्स मन की बीवी है, उनकी भी बहोत पहोच है, और वो नेक काम कर रही है तो हमे साथ देना चाहिए.

क पापा : भाई हमारे पूरा सहयोग है आपको, बस थोड़ा संभल कर रहिएगा, वो निहालसिंह भी अच्छा आदमी नहीं है, आप तो बेहतर जानते है.

मोतीलाल : ऐसे कब तक दर कर रहना, देखा जायेगा, कानून नाम की भी कोई चीज़ है की नहीं.

ये सब बाटे चल रही थी, कुसुम वही थोड़ी दुरी पर बैठी हुई थी, पर वो बार बार शिव को hi देख रही थी, पर शिव का ध्यान बातो में hi था, उसको अच्छा नहीं लग रहा था की शिव उसकी और नहीं देख रहा, वो बस बार बार शिव को देख रही थी, तभी शिव ने उसकी और देखा तो वो घबरा गयी, पर उसकी आंखे शिव पर चिपकी रही, शिव मुस्कुराया तो जैसे उसको जीवतदान मिल गया हो, वो शर्मा गयी, और नज़ारे झुका ली. उसके बाद कई बार ऐसा हुआ की उन दोनों की नज़ारे टकराई, कुसुम बहोत खुस थी की शिव उसे देख रहा है.

खाना बन गया था, गंगादेवी ने घडी देखि, गांव में वैसे भी लोग जल्दी खाना खा लेते है.

गंगादेवी : बहु, जरा अपने ससुरजी को फ़ोन लगा तो, कहा रह गए वो दोनों.

माधुरी : (उसने फ़ोन लगाया तो फ़ोन वही बजने laga)Lagta है पिताजी अपना फ़ोन यही भूल गए है.

गंगादेवी : ये भी न, किसी बात का ध्यान नहीं है इन्हे, लोगो से बाते करना तो जैसे पसंदीदा काम है, एक बार लग गए तो छोड़ते hi नहीं. (सोचते hue)Kaha होंगे? (फिर अचानक कुछ याद aaya)Shiv के पास भी फ़ोन है न, उसको फ़ोन कर तो.

माधुरी : जी माजी. (उसने शिव को फ़ोन लगाया)

शिव : (मेरे फ़ोन पर फ़ोन आया, ये उसी अननोन नंबर से था, मेरी समाज में नहीं आया की ये अभी क्यों फ़ोन कर रही है, में उठा और थोड़ी दूर गया और फ़ोन uthaya)Hello.

माधुरी : पिताजी कहा है?

शिव : कोण पिताजी?

माधुरी : (उसने अपना फ़ोन देखा, की शिव को hi फ़ोन लगा है न, फिर अचानक उसके दिमाग में लाइट हुई, उसने अपना शिर पिट लिया, शिव को तो पता hi नहीं था की जो उसके साथ इतने दिनों से मश्ग पर बात कर रही है वो, वो खुद है, सामने उसकी साँस बैठी हुई थी, अब वो बिना बात किये रख भी नहीं सकती थी, उसने हिचकिचाते हुए kaha)Shiiiiiv, में बोल रही हु माधुरी, पिताजी को फ़ोन दो, माँ बात करना चाहती है.

शिव : (ो तेरी! ये भाभी थी, तभी उसकी गुत्थी सुलझ गयी, वो मश्ग दिव्या ने किआ था, पर अपना नाम लिखना भूल गयी थी वो, पर भाभी ने क्यों नहीं बताया, वो कन्फ्यूज्ड हो गया, पर उसने फ़ोन मोतीलालजी को diya)Ghar से फ़ोन है.

मोतीलाल : (फ़ोन ले kar)Hello.

माधुरी : माजी को देती हु. (कहते हुए उसने फ़ोन गंगादेवी को दिया)

गंगादेवी : Hello, कहा रहगये आप, खाना तैयार है.

मोतीलाल : है, थोड़ी देर में आते है, कुसुम के वह बैठे है.

गंगादेवी : जल्दी आइये. (कहते हुए उन्होंने फ़ोन रख दिया)

माधुरी थोड़ी घबरा गयी थी की शिव को पता चल गया है की मश्ग उसने hi किये थे, वो क्या सोचेगा उसके बारे में, ये सोच सोच कर hi उसको गभरहट और शर्म आ रही थी. उसको बहोत अच्छा लगता था ऐसे बात करते हुए, पर अब ये सिलसिला भी ख़तम हो जायेगा.

में भी सोच रहा था की उन्होंने ऐसा क्यों किआ, वो सीधे सीधे बता भी तो सकती थी की दिव्या ने मश्ग किआ था, में वही सब सोच रहा था, हम कुसुम के घर से निकले, रस्ते में बात करते हुए जा रहे थे की सामने से निहालसिंह और दो तीन लोग आते हुए दिखे, उन्होंने भी हमे देखा.
 
अपडेट 179

में और मोतीलाल जी कुसुम के घर से निकल कर घर की और जा रहे थे, गांव का रास्ता था, धूल मिटटी वाला, लोग आ जा रहे थे, आते जाते लोग मुझे देखते और मोतीलालजी को नमस्ते करते थे, सबकी बोलचाल से पता चल रहा था की लोग उन्हें काफी मानते थे, हम दोनों बात करते हुए जा रहे थे और सामने से मेने निहालसिंह और उसके साथ दो तीन आदमीओ को आते देखा, मोतीलालजी ने भी उन्हें देखा, निहालसिंह और वो सब बाटे करते हुए आ रहे थे, उनकी भी निगाह हम पर पड़ी, वो नजदीक आ गए.

निहालसिंह : नमस्ते मोतीलालजी (उसने ऐसे कहा जैसे मजाक उदा रहा हो)

मोतीलाल : नमस्ते (उन्होंने सपाट सा उत्तर दिया)

निहालसिंह : आपको कितना समजा रहे है फिर भी आप समझते hi नहीं, क्यों इन सब में पद रहे है, अपजैसे भले लोगो के लिए ये सब नहीं है.

मोतीलाल : तुम अपने काम से काम रक्खो, मुझे क्या करना है और क्या नहीं वो मुझे पता है. (उन्होंने फिर सपाट लहजे में उत्तर दिया)

निहालसिंह : में तो आपके भले के लिए hi कह रहा था, आप तो जानते hi हो मनोहरलालजी को, हमे भी अच्छी पहचानते हो, फिर क्यों कुल्हाड़ी पर पेअर मर रहे हो.

शिव : आप इस तरह से बात मात कीजिये, उन्हें जो सही लगेगा वो करेंगे.

निहालसिंह : जब दो बड़े बात कर रहे हो तो बच्चो को बीचमे नहीं बोलना चाहिए, ये तो बहोत पुराणी कहावत है, पतानहीं है तुम्हे? (मोतीलालजी की और देख kar)Aap भी क्या इन बच्चो और औरतो के चक्कर में पद रहे हो, औरतो का काम नहीं है ये, और बच्चो का तो बिलकुल भी नहीं, किसिदिन ऊंच नीच हो गयी तो दोनों hi रट हुए बैठे रहेंगे. (कहते हुए वो हँसा तो दूसरे भी उसके सुर में सुर मिलते हुए हसने लगे)

मोतीलाल : तुम अपना काम करो, (शिव को देख kar)Chalo शिव.

निहालसिंह : (रास्ता नहीं दे रहा था, था वो भी हत्ता कट्टा, 6 फिट के करीब हिघ्त होगी और बदन भी तगड़ा था) में तो अपना काम hi कर रहा हु, सरपंचजी ने कहा था की अच्छे से समजा दू तो वही कर रहा हु. अप्प तो खुद समझदार है, में क्या संजो, जबतक सब ठीक चल रहा है तब तक सब ठीक है, अगर बात बिगड़ गयी तो फिर कही लेने के देने न पद जाये.

मोतीलाल : तुम धमकी दे रहे हो?

निहालसिंह : (अपने साथी को देख kar)Mene धमकी दी क्या? (कहते हुए वो हसने लगा) अरे भाई साहब, इससे धमकी नहीं कहते, मेने ऐसा कहा क्या की आपकी टंगे तोड़ दूंगा, या हड्डी पसली एक कर दूंगा, (अपने साथी की और देख kar)Mene कहा क्या ऐसा, (मोतीलाल की और देख kar)Mene तो ऐसा कुछ भी नहीं कहा, आप बल बच्चो वाले आदमी हो, लड़के की अभी अभी शादी की है, जवान बहु है, बेटी भी जवान हो चुकी है, संभल कर रही ये, में तो बस समजा रहा हु.

शिव : आप अपनी सिमा लाँघ रहे है.

निहालसिंह : मेने कहा न बच्चे, जब दो बड़े बात कर रहे हो तो बच्चो को बीचमे नहीं बोलना चाहिए (अस्स पास लोग दूर से देख रहे थे, कोई भी बीचमे बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा था) अगर ज्यादा बीचमे चपड़ चपड़ की न तो तेतुवा दबा दूंगा समजे. (अपने हाथ का पंजा दिखते हुए, मुझे गुस्सा आ रहा था, पर में अभी भी अपने आप को संभाले हुए था, में नहीं चाहता था की कोई भी बबल हो, मुझे ऐसे घूरते देखते देख, वो हसने laga)Are देखो, बच्चे को तो गुस्सा भी आता है (कहते हुए वो हसने लगा, दूसरे लोग भी हसने लगे, फिर वो मुझे घर के देखते hue)Bachche, ये सहर नहीं है, कहा गायब हो जायेगा पता भी नहीं चलेगा.

शिव : में जनता हु की ये सहर नहीं है, आप दुसरो की बहु बेटिओ की बात कर रहे है, आपके घर में भी बहु बेश्या होंगी न?

निहालसिंह : मेरे घर की बहु बेटिओ पर हाथ dalega(Usne गुर्राते हुए कहा)

शिव : में किसी की बहु बेटी पर हाथ नहीं डालता, मर्द हु, मर्दो तरह लड़ता हु, औरतो को बीचमे नहीं लाता, वो काम आपजैसे लोग करते है. (मेरे ऐसा कहने पर जैसे सबको साप सूंघ गया, गांव के लोग भी एक दूसरे का मुँह देखने लगे, किसीने तो यहाँ तक कह दिया की ये लड़का गया अब, मोतीलालजी भी घबरा गए)

निहालसिंह : क्या कहा बे तूने, तू मर्द है और हम नामर्द.

शिव : (मुस्कुराते hue)Mene तो ऐसा नहीं कहा, आप खुद hi अपने आपको नामर्द कह रहे हो, मर्द होते तो ऐसे बहु बेटिओ की धमकी नहीं देते.

निहालसिंह : बच्चा समाज कर कुछ कह नहीं रहा था, तू तो सेल मेरे ऊपर hi चढ़ रहा है, अभी दिखता हु तुजे. (कहते हुए वो आगे बढ़ा और मुझे थप्पड़ मरने लगा, में पहले से hi तैयार था, में निचे झुक गया, उसका हाथ हवा में hi घूम गया, उसका गुस्सा बढ़ गया, उसने सीधे मेरे मुँह पर घुसा मरना चाहा तो में साइड में हो गया, उसने दो तीन बार तरय किआ पर वो मुझे मार नहीं saka)Kab तक बचेगा सेल, कहते हुए वो मेरा गिरबान पकड़ने लगा hi था की मेने उसका हाथ पकड़ कर मरोड़ दिया, )अह्ह्ह्हह्हह. (वो कराह उठा हाथ को मुड़ने से बचने के लिए ओर पलट गया, और दूसरे हाथ से पीछे प्रहार किआ, मेने वो भी हवा में hi पकड़ लिया और उसको भी घूमते हुए पीछे कर दिया, अब उसके दोनों हाथ पीछे थे, मेने दोनों को एक साथ जोर से मरोड़ diya)Aaaaaaaa. (वो जोर से चिल्लाया, उसे यकीं नहीं हो रहा था की एक लड़के के सामने ये हालत है उसकी, यकीं तो किसी को भी नहीं हो रहा था, मेने और जोर से हाथ मरोड़ा वो छूटने के लिए छटपटाने लगा, मेने उसके घुटने के पीछे पेअर मारा तो वो घुटनो के बल हो गया मेने उसके पेअर पर पेअर रख दिया वो हिल भी नहीं प् रहा था, पर वो खुद को छुड़ाने का प्रयास करने लगा, पर पकड़ इतनी मजबूत थी की वो अपना हाथ छुड़ा hi नहीं प् रहा था, उसे इतना दर्द हो रहा था की वो रो देता, पर वो ऐसा नहीं कर सकता था, उसके चेहरे से hi पता चल रहा था की उसको कितना दर्द है, सब अच्चमबे से ये देख रहे थे, कराहते hue)Chhodooooooo मुजीईई.

शिव : अरे भाई साहब, हम तो लाडे भी नहीं अभी तक, सिर्फ हाथ पकड़ा है मेने और आप कराह रहे ho(Mene और जोर दिया)

निहालसिंह : आआआआआ, बायस्स्सस्स. (उसके साथ जो थे वो तो निहालसिंह की हालत देखते hi दो कदम पीछे हो गए थे, वो कराहते हुए bola)Motilal जी, इससे कहिये छोड़ डीएई.

मोतीलाल : (होश में आते hue)Hhhhh, हा. शीइइइइव, छोड़ो उसे.

शिव : (मेने उसके हाथ छोड़ दिए, वो अपने हाथ खुद hi दबाने लगा)

मोतीलाल : चलो शिव. (मोतीलालजी ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे ले जाते हुए कहा)

शिव : एक मिनट अंकल. है तो भाई, कभी अपनी ताकत पर घमंड नहीं करना चाइये, और उसका दुरुपयोग तो बिलकुल नहीं करना चाहिए. (में और मोतीलाल जी आगे बढ़ गए, भीड़ में कड़ी कुसुम अचम्बे से शिव को देख रही थी, बिना कोई मारपीट किये उसने निहालसिंह जैसे आदमी को घुटनो पे ला दिया था, उसके पापा भी वही खड़े थे)

क पापा : बीटा में मोतीलालजी के घर जेक आता हु.

कुसुम : में भी चालू पापा.

क पापा : है चल. (में और मोतीलाल जी घर पहुंच गए थे की पीछे पीछे कुसुम और उसके पापा आ गए, अंदर आते hi वो अचम्बे से मुझे देख रहे the)Motilalji.

मोतीलाल : अरे भाई साहब आप?

क पापा : में वही था, भीड़ इकट्ठा हो गयी थी तो देखने आया था की क्या हो रहा है, तभी मेने वो देखा, क्या हुआ था वह? (आवाज सुन के गंगादेवी भी वह आ गयी थी, और बाटे सुन कर वो बोली)

गंगादेवी : क्या हुआ जी, कुछ हुआ है क्या, भाईसाहब क्या कह रहे है.

मोतीलाल : वो निहालसिंह रास्ता रोक रहा था.

गंगादेवी : आपको कितनी बार संजो, ये सब छोड़ दीजिये, इनलोगो से उलझना अच्छी बात नहीं है, हम उनके जैसे नहीं बन सकते, आपको कुछ हुआ तो नहीं न, (अपने पति को ऊपर से निचे तक देखते हुए)

मोतीलाल : मुझे कुछ नहीं हुआ है, में बिलकुल ठीक हु. (इतनी आवाजे सुन कर माधुरी भी अंदर के दरवाजे के पास आ गयी थी)

क पापा : ारी भाभी, इन्हे नहीं निहालसिंह की हालत ख़राब हो गयी थी.

गंगादेवी : Hi दिया, वो कैसे?

क पापा : इसकी वजह से (शिव की और इस्सर कर के)

गंगादेवी : में सामजी नहीं भाईसाहब.

क पापा : पूरी बात तो मुझे भी पता नहीं भाभी, में भी देरी से hi पंहुचा था वह पर, जब पंहुचा तो निहालसिंह घुटनो पर बैठा कराह रहा था.

गंगादेवी : वो क्यों कराह रहा था? (आश्चर्य से)

क पापा : इसने निहालसिंह के हाथ को मरोड़ रक्खा था, वो छटपटा रहा था पर छूट नहीं प् रहा था.

गंगादेवी : (संदेह se)Kisne? शिव ने?

क पापा : है भाभी, में भी देख कर दांग रह गया, पर जो इन आँखों ने देखा वो मान न तो पड़ेगा hi.

गंगादेवी : क्या हुआ था जी, आप कुछ बोलते क्यों नहीं. (अपने पति पर हलके गुस्से से)

मोतीलाल : कोई मुझे बोलने देगा तो न बोलूंगा.

गंगादेवी : आप बोलिये, बताइये क्या हुआ था.

मोतीलाल : में और शिव, भाईसाहब के घर से निकल कर घर आ रहे थे, रस्ते में निहालसिंह आड़े आया, वो मुझे धमकाने लगा, मेने भी सामने सुना दी तो वो... (बोलते बोलते रुक गए)

गंगादेवी : तो क्या?

मोतीलाल : (अपनी बहु की और देख kar)Wo बहु और दिव्या की धमकी देने लगा.

गंगादेवी : हे राम, में इसीलिए मन करती हु आपको, उनसे क्या पन्गा लेना.

मोतीलाल : पूरी बात तो सुनो. (वो चुप हो गयी) उसके ऐसे कहने पर गुस्सा तो मुझे भी आ गया था पर शिव ने उसका जवाब दिया, तो वो उसे मरने आगे बढ़ा, पर शिव ने बिना कोई मार पिट किये उसकी हालत ख़राब करदी, वो तो दर्द से तड़प कर रह गया.

गंगादेवी : अरे पर में कहती हु उनसे उलझाने की जरुरत क्या है?

शिव : हमारे चुप रहने से hi ऐसे लोगो को बढ़ावा मिलता है, हम डरते है तो वो डरते है.

क पापा : एक बात तो मन नई पड़ेगी, तुम दीखते छोटे हो, पर ताकत बहोत है तुम में.

मोतीलाल : में खुद हैरान हु, उस दिन भी इसने वो सब मेरे ऊपर गिरने से रोक दिया था, आज भी निहालसिंह की हालत देख कर लग रहा था की उसकी हालत ख़राब हो गयी है.

क पापा : सच कह रहे है आप, इसकी कद काठी और इसकी हड्डिया कितनी चौड़ी है, दिक्खणे में hi बच्चा है, बाकि ताड जितना लम्बा है. (थोड़ा मजाकिए अंदाज में)

गंगादेवी : (शिव की बलैया लेते hue)Najar न लगाइये मेरे बच्चे par(Muskurate हुए वो बोली). पर बीटा ऐसे लोगो से उलझना ठीक नहीं है.

मोतीलाल : जब इसके बारे में सुना था तब मुझे भी यकीं नहीं हो रहा था, में इस से मिल चूका था, जब अख़बार में और न्यूज़ में इसके बारे में देखा था और पढ़ा था तब मुझे लग रहा था की लोग बढ़ा चढ़ा कर न्यूज़ पेश कर रहे है, क्यों की ये कितना सीधा और शांत बच्चा है, पर आज इसका रूप देख कर लग रहा है की ये जितना शांत दिख रहा है उतना hi ताकतवर भी है.

शिव : ऐसा कुछ नहीं है अंकल, में भी आम लड़का hi हु.

मोतीलाल : (हस्ते hue)Wo तो हमें दिख hi रहा है.

गंगादेवी : बाटे तो होती रहेगी, पहले खाना खा लीजिये, ठंडा हो जाएगा, चलिए भाईसाहब आप भी.

क पापा : नहीं भाभी, फिर कभी, आज तो घर पे खाना बन गया है.

गंगादेवी : तो क्या हुआ, थोड़ा यहाँ भी खा लीजिये.

क पापा : नहीं भाभी, फिर कभी, हम चलते है, आप खाना कहिये. (माधुरी कबसे शिव को hi देख रही थी, उसको यकीं hi नहीं हो रहा था जो ये सब कह रहे थे, जैसा शिव दीखता है, जितनी शालीनता से वो बात करता है वो मान hi नहीं शक्ति थी की ये शिव की बात हो रही है, वो बस शिव को देखे जा रही थी और सबकी बात सुन रही थी, कुसुम भी यही कर रही थी, वो भी शिव को hi देख रही थी, कुसुम और उसके पापा जाने लगे बहार जा कर भी कुसुम ने मुद कर शिव को देखा, वो मुस्कुराया तो उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी, उसको नहीं जाना था पर दिव्या भी नहीं थी तो उसको जाना पड़ा)

मोतीलाल : बहु, (शिव की और इस्सर कर ke)iske हाथ पेअर धुलवा दे तो.

माधुरी : जी बाबूजी. (उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, वो घूँघट सँभालते हुए पीछे चली गयी, बाथरूम देख कर फिर से उसको वो सचिन याद आ गया, उसने जैसे तैसे अपने आपको संभाला, शिव वही आ गया था, वो टॉवल ले कर कड़ी रही, शिव ने उसकी और देखा तो उसने नज़ारे झुका ली, शिव अंदर गया और हाथ धो कर वापस आया, माधुरी ने उसको टॉवल diya.)(Shiv ने टॉवल लिया और कुछ बोलने hi वाला था की माधुरी वह से चली गयी, वो जैसे भाग रही थी)

में हाथ पोछ कर अंदर गया, मोतीलाल जी बैठे थे, में उनकी बगल में बेथ गया, भाभी ने हम दोनों को थाली दी, मेने उनकी और देखा पर वो नहीं देख रही थी, हमने खाना सुरु किआ, खाना स्वादिस्ट था पर दाल में नमक नहीं था, पर में कुछ न बोलै. मोतीलालजी ने बोलै.

मोतीलाल : दाल में नमक नहीं डाला है क्या? (माधुरी थोड़ा दर गयी, क्यों की दाल उसने hi बनायीं थी)

माधुरी : (डरते hue)Galti हो गयी बाबूजी, लाइए, में ठीक कर देती हु.

मोतीलाल : (उसको डरता dekh)Are बीटा, इसमें डरनेवाली क्या बात है, हो जाता है कभी कभी, लाओ में खुद दाल देता हु.

गंगादेवी : पता नहीं आज इसका ध्यान क्यों खोया खोया था, मेने एक दो बार टोका भी था. (मेने उनकी और देखा, हम दोनों की नज़ारे टकराई, उन्होंने नज़ारे झुका ली)

मोतीलाल : हो जाता है कभी कभी. (फिर हम खाने lage)Aap लोग भी ले लो, शिव तो घर का hi है, क्यों शिव?

शिव : है, आंटी, आप भी ले लीजिये. (उन्होंने भी खाना सुरु कर दिया, बिच बिच में थोड़ी बाते हो रही थी, माधुरी ने फिर सुना की शादी के टाइम शिव ने बाबूजी को बचाया था, तो उसने पूछ hi लिया)

माधुरी : क्या हुआ था मजी?

गंगादेवी : तुजे नहीं पता क्या, किसी ने बताया नहीं तुजे? (माधुरी ने ना में गर्दन hilayi)Teri शादी में भरी तब्लो की थप्पी तेरे ससुरजी पर गिरनेवाली थी, शिव ने अकेले hi उसको रोक दिया था, वर्ण अनर्थ हो जाता. (भाभी ने फिर मेरी और देखा, इस बार वो कुछ पल देखती रही) अगर ये नहीं होता तो शायद शादी hi रुक जाती. (वो मेरी बधाई कर रहे थे पर मुझे शर्म आ रही थी, ऐसे बधाई सुन न मुझे अच्छा नहीं लग रहा था)

शिव : छोड़िये न आंटी, जो हो गया सो हो गया.

गंगादेवी : देखा, कितना सरल है ये, कोई मानेगा की निहालसिंह जैसे आदमी को बिना मरे इसने घुटनो पर ला दिया. (माधुरी को बहोत अच्छा लगा की उनके खिलाफ बोलने पर शिव ने निहाल सिंह की ये हालत की, ऐसे hi बाते करते हुए हमने कहना खाया, फिर हम बहार आ गए, अंकल न्यूज़ चैनल देख रहे थे, में भी ऐसे hi देख रहा था, थोड़ी देर बाद आंटी और भाभी भी आ gaye)Me क्या कह रही थी, शिव ऊपर hi सो जायेगा न, ऊपर हवा भी अच्छी चल रही होती है. (माधुरी का दिल जोरो से धड़कने लगा, क्यों की वो भी ऊपर hi सोती थी और आज तो उसका पति भी नहीं था और दिव्या भी नहीं थी)

मोतीलाल : सही कह रही हो तुम.

गंगादेवी : आज दिव्या भी नहीं है, बहु को अकेले दर भी नहीं लगेगा. (में सोच में पद गया की ये लोग क्या कह रहे है, भाभी मेरे साथ में सोयेगी क्या, में अभी सोच hi रहा था की आंटी boli)Kya कहती हो बहु, वो बाजूवाले कमरा साफ़ hi है न?

माधुरी : जी माजी, सुबह hi साफ़ किआ था.

गंगादेवी : शिव ऊपर hi सो जायेगा, तुजे भी दर नहीं लगेगा.

माधुरी : जैसा आप कहे मजी. (उसने सहजता से hi कहा, क्यों की उसने भी कुछ उल्टा सुलटा सोचा नहीं था, है कुछ बाटे जरूर ऐसी हुई थी जिसकी वजह से उसका दिल बेचैनी अनुभव कर रहा था, पर फिर भी अभी भी वो अपने आप में hi थी)

गंगादेवी : जाओ बीटा.

शिव : जी आंटी. (में ने भी है hi कहा, क्यों की मेरे मान में भी ऐसी कोई भी गलत बात थी hi नहीं, उनको वैसी हालत में देखना एक इत्तेफाक hi था, और ऐसी घटना हो जाती है कभी कभी, वही गंगादेवी एक सीधी घरेलु औरत थी, उन्हें शिव के ऊपर सोने में कोई बुराई नहीं लग रही थी, और सच में कोई बुराई थी भी नहीं, पर आग और घी, साथ में हो तो कुछ कहा नहीं जा सकता)

में किसी तयारी से तो आया नहीं था, और रुकना पड़ा था तो कपडे तो थे नहीं, मेने मनीषजी को घर पर खबर भिजवाने को बोल दिया था तो वो भी टेंशन नहीं था. ऊपर जाने का रास्ता पीछे से था, वो आगे आगे चल रही थी, में उनके पीछे चल रहा था, किचन में पहुंच कर वो बोली,





माधुरी : तुम ऊपर चलो, में पानी ले कर आती हु.

शिव : ठीक है. (में बहार चला गया, और सीढिया चढ़ कर ऊपर पहुंच गया, अभी दरवाजे बांध थे तो में ऊपर किनारे पर जा कर खड़ा हो गया, यहाँ से पीछे का भाग स्पस्ट दिख रहा था, तभी मुझे भाभी जाती दिखाई दी, मेने देखा की वो बाथरूम की और hi जा रही थी, में अभी कुछ सोचता उस से पहले hi उन्होंने ऊपर देखा, उन्होंने मुझे देखा तो में फ़ौरन उल्टा घूम गया. माधुरी ने भी सावधानी के तौर पर hi देखा था, बाथरूम की और जाते hi उसको शिव याद आया और उसे पता था की वो ऊपर है तो उसने देखा था, और शिव वही खड़ा था, पर जैसे hi उसने देखा वो उलटी दिशा में घूम गया, ये देख कर वो मुस्कुरायी, वो जानती थी की शिव एक अच्छा लड़का है, वो थोड़ी शर्माती हुई बाथरूम में घुस गयी, उसने अपने कपडे ऊपर उठाये और चड्डी निचे की, और पेशाब करने बेथ गयी, मधुर सिटी के साथ पेशाब निकलने लगी, उसने आंखे बंद कर ली, उसको शिव दिखा, और शिव का वो बड़ा सा लुंड आँखों के सामने आ गया जो उसने पिछली बार देखा था, भले hi उसने शिव को उस हालत में देखा था पर फिर भी वो यही सोचती थी की वो दिव्या का बॉयफ्रेंड है.

पर आज वो अकेली थी उसके साथ, उसकी भावनाये बहार आने को मचल रही थी, जिसे उसने बड़ी मुश्किल से संभाला था, वो ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहती थी जिस से उसके दमन पे डेग लगे. पर शरीर कुछ और hi प्रतिक्रिया दे रहा था, पेशाब रुक चुकी थी, उसको अपनी छूट में सर सराहत महसूस हो रही थी, उसने जब अपनी छूट को छुआ तो उसको छेड़ के पास चिकनाहट महसूस हुई, उसकी सांसे तेज हो गयी, वो जानती थी की ये शिव की वजह से हो रहा है, उसने गहरी साँस ली और अपने आप को संभाला, पानी से अच्छी तरह से छूट को साफ़ किआ, मान में ये भी ख्याल आया की क्या शिव के लिए तो नहीं कर रही, पर तुरंत अपने आपको hi उसने दन्त दिया.

में ऊपर खड़ा सोच रहा था, भाभी फिर बाथरूम गयी थी मेरे सामने भी उनकी गोर कूल्हे दिख गए, पता नहीं पर बार बार वो जहँ में आ जा रहा था, पर मेने अपने आप को शांत किआ. थोड़ी देर बाद मुझे उनके पायल की आवाज आने लगी पर में पलटा नहीं.

वो बहार निकली तो शिव अभी भी उल्टा hi खड़ा था, उसको शिव का ऐसा करना बहोत अच्छा लगा, वो आवारा नहीं था, ये सोच कर hi उसको शिव पर मान हुआ, रात के सनते में उसके पायल की छान छान की आवाज आ रही थी, वो फिर से अंदर गयी और पानी की दो बोतल ली और ऊपर की और जाने लगी. ऐसी तो कोई बात नहीं थी फिर भी उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, कुछ सीढिया चढ़ने के बाद जब उसका शिर ऊपर हुआ जहा से शिव उसको दिख रहा था तो वो रुक गयी.

शिव सोचने लगा की पायल की आवाज क्यों रुक गयी, उसने सीढियो की और देखा तो उसे हलके उजाले में शिर का थोड़ा हिस्सा दिखा, दोनों hi एक दूसरे को देख रहे थे पर दोनों को एक दूसरे की आंखे नहीं दिख रही थी, फिर से पायल की छान छान चालू हो गयी, वो ऊपर आयी, जब वो थोड़ी नजदीक आयी तो मुझे उनका चेहरा स्पस्ट दिखा, वो नज़ारे झुकाये हुए hi थी, वो बिना कुछ बोले एक कमरे के पास गयी और बोतल निचे रक्खी और दरवाजा खोला, अंदर जा कर लाइट ों की और चदार को झटकने लगी, उनकी चुडिओ की खान खान सुनाई दे रही थी, चद्दर को अच्छे से बिछा दिया, पानी की एक बोतल उन्होंने वही रख दी और बहार आयी.

माधुरी : (अपनी मधुर आवाज में धीरे से boli)Bistar लगा दिया है. (वो बोल कर कड़ी रही, शायद उन्हें मेरे बोलने का इंतजार था पर में क्या बोलता, मुझे कुछ न बोलता देख वो अपने कमरे की और जाने लगी, जिसका दरवाजा साथ में hi था)

शिव : भाभी. (जैसे hi में बोलै वो रुक गयी, वो निचे hi देख रही थी, में थोड़ा नजदीक gaya)(Madhuri की धड़कन तेज होने लगी) भाभी वो गलती से हो गया था, सॉरी अगर आप उस वजह से बात नहीं कर रही हो तो. (वो चुप रही, कुछ नहीं बोली, मेने कुछ पल इंतजार किआ पर वो कुछ नहीं बोली, तो मेने फिर kaha)Sorry, (कहकर में वापस पीछे मुद गया और किनारे जा कर फिर खड़ा हो गया, में निचे का नजारा देखने लगा)

माधुरी कुछ बोलना चाहती थी पर शर्म आ रही थी, और बोले भी तो क्या बोले, उसने अपने कमरे का दरवाजा खोला और अंदर चली गयी, उसने दरवाजा बंद किआ और कुछ पल वही कड़ी रही और सोचने लगी. उसके दिल में भी उथल पुथल मची हुई थी, वो अकेली थी ऊपर, वो शिव और दिव्या को देख चुकी थी, उसके और शिव के बिच कुछ भी हो सकता था, पर वो एक शरीफ लड़की थी, इसीलिए शादी तक कुवारी hi थी, शादी के बाद उसके कपडे उतर चुके थे और कुछ हद तक शर्म भी, पर अभी भी वो शिव के साथ ऐसा कुछ भी करने की स्थिति में नहीं थी, शायद शिव अगर आगे बढे तो शायद वो मन न भी kare.Par फिर भी अभी उसका मान hi उलझा हुआ था. उसने अपनी साड़ी निकली, और रात को पेहेन ने वाला गाउन पेहेन लिया, साड़ी को वही रख दी, और बिस्तर पर बेथ कर सोचने लगी, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, क्या कुछ हो सकता है, यही बार बार मन में चल रहा था, एक और दर भी था की अगर किसी को पता चल गया तो? वो बदनामी से भी डर्टी थी. उसने पानी की बोतल ली और कुछ घूंट पानी पिया. वो कड़ी हुई और फिर दरवाजे के पास आ गयी, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, वो माँके चल रही थी की शिव अपने कमरे में चला गया होगा. उसने दरवाजा खोला तो शिव अभी भी वही खड़ा था, कमरों की रौशनी में वो साफ़ साफ़ दिख रहा था. (मुझे भी दरवाजा खुलने की आवाज आयी, मेने पीछे गर्दन घुमा कर देखा तो भाभी कड़ी थी, में फिर आगे घूम गया, तोड़ी देर शांति छायी रही) माधुरी बेचैन हो रही थी, शिव ने उसे देखा था तो उसने वह जाने का मान बनालिया, उसने अपने कमरे की लाइट बंद की, वो आहिस्ता से चलते हुए शिव की और बढ़ी, उसके पैरो की पायल की छान छान हो रही थी. शिव ने फिर पीछे मुद कर उसे देखा, दोनों की आंखे चार हुई, माधुरी अपने आप को नार्मल दिखने का पूरा प्रयास कर रही थी.)

माधुरी : नींद नहीं आ रही? (में पीछे मुदा, वो पिंक गाउन पहने हुए थी, गाउन के ऊपर एक गहरे पर्पल कलर का ओवरकोट जैसा था. वो छरहरे बदन की एक खूबसूरत लड़की थी, अभी भी लडकिओवाळी hi बात थी, वो अपने आपको नार्मल दिखा रही थी पर अभी भी हिचकिचाहट भी उनमे)

शिव : इतना जल्दी सोने की आदत नहीं है. (मेने मुस्कुराते हुए कहा) (कमरे से आती लाइट की वजह से माधुरी थोड़ा दर रही थी, अड़ोस पड़ोस से कोई देख न ले)

माधुरी : लाइट बंद कर दू? (उसने हिचकिचाते हुए कहा)

शिव : में कर देता हु. (में गया और लाइट बंद कर दी और वापस आया तो वो बॉर्डर का सहारा ले कर कड़ी थी, अब अँधेरा था पर हल्का उजाला था जिस से हम एक दूसरे को देख सकते the)Aap नहीं सोई? (उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, वो बस खामोश कड़ी थी, मुझे लगा की शायद वो अभी भी उस बात से असहज है, पर अगर वो असहज है तो फिर मेरे साथ क्यों है, क्या उनके मान में कुछ चल रहा है, में उनकी और देख रहा था और समझने की कोशिस कर रहा था)

माधुरी : (धीमी आवाज में) वो सब गलती से हो गया था, में कोई नाराज नहीं हु. (माधुरी ने बहोत मुश्किल से कहा)

शिव : आप बहोत अच्छी है भाभी. (वो बस मुस्कुरायी) एक बात पुछु?

माधुरी : हम्म्म्म (हवा में लहराती लत को ठीक करते हुए वो बोली)

शिव : मेने सोचा नहीं था की आप मश्ग करती थी.

माधुरी : (मुस्कुराते हुए अपनी नजर झुका ke)Kyu?

शिव : मुझे लगा की कोई लड़की होगी.

माधुरी : तो में कोण हु?

शिव : मेरा मतलब है की कोई स्कूल की लड़की होगी.

माधुरी : क्यों, बहोत लड़कीअ है जो ऐसा करती है? (उन्होंने स्माइल के साथ पूछा)

शिव : नहीं, ऐसी बात नहीं है, पर मेने सोचा की कोई लड़की है जो शायद मुझसे दोस्ती करना चाहती है और वो ऐसा कर रही है, आप से में मिला था तो आप बहोत शांत और सीधे स्वाभाव की लगी थी मुझे, तो में आपके बारे में ऐसा नहीं सोच सकता था.

माधुरी : इसका मतलब अब में अच्छी नहीं रही, है न?

शिव : मेरा वो मतलब नहीं है, सच कहु तो मुझे भी अच्छा लगा था, पर शायद अब ऐसा नहीं होगा, है न?

माधुरी : ऐसा क्यों लग रहा है तुम्हे?

शिव : क्यों की शायद आप मेरी खिंचाई कर रही थी, और अब आपका भेद खुल गया है तो फिर आप मश्ग नहीं करोगी, है न.

माधुरी : क्या तुम चाहते हो की में बात करू?

शिव : है, क्यों नहीं.

माधुरी : क्यों? अभी तो तुम कह रहे थे की में अच्छी हु, ऐसा नहीं कर सकती, तो क्या अब में अच्छी नहीं रही.

शिव : मुझे तो आप अभी भी अच्छी hi लग रही हो, आप मेरी बात का गलत मतलब निकल रही हो.

माधुरी : अगर तुम्हारी गर्लफ्रेंड को पता चल गया तो बुरा मान जाएगी.

शिव : मेरी गर्लफ्रेंड?

माधुरी : क्यों, दिव्या तुम्हारी गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?

शिव : (मुस्कुराते hue)Achchha वो, मेने उसे साफ़ साफ़ कह दिया था, की ऐसा नहीं हो सकता.

माधुरी : क्यों, वो अच्छी नहीं है क्या, या फिर उसने तुम्हारे साथ वो सब किआ तो तुम उसे बुरा समाज रहे हो.

शिव : (उनकी बात से मुझे याद आया की पिछली बार क्या हुआ था, मेने तुरंत puchha)Aap ने सब देखा था न? (माधुरी झेप गयी, उसने नज़ारे झुका li)muje पता है, और आपको भी पता है की मुझे पता hai.(Wo कुछ नहीं बोली, बस खामोस rahi)Kyu देख रही थी आप?

माधुरी : (उसको बहोत शर्म आने लगी थी, वो कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थी, तो वो वह से जाने lagi)Me जाती हु. (वो जैसे hi आगे बढ़ी, पता नहीं क्यों पर मेने उनका हाथ पकड़ लिया, और मेरी और खिंच भी लिया, वो उलटी hi मेरे साइन से टकरा gayi)(Madhuri की धड़कन अचानक बढ़ गयी, उसने सोचा नहीं था की शिव उसका हाथ पकड़ lega)(Turant मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ और मेने उनका हाथ छोड़ दिया, पर वो वैसे hi कड़ी रही, उनकी पीठ मेरी और थी और उनके कूल्हों का एहसास मुझे निचे हो रहा था, हम दोनों कुछ भी बोले बिना खड़े थे, में देख रहा था की अगर वो जाना चाहती तो चली जाती, पर वो वही रुकी थी, ये इस बात का संकेत था की उनके मान में भी कुछ चल रहा है, वक़्त की नजाकत और उनके बदन के स्पर्श से मेरे लुंड में अकड़न आणि सुरु हो गयी, मेने अपना हाथ आगे बढ़ाया और उनके पेट पर रख दिया, वो कैंप रही थी, पर भाग नहीं रही थी, ये एक और संकेत था)

शिव : (उनके कान me)Bhabhiiii. (उनकी सांसे तेज चल रही थी, उनकी सांसो की आवाज भी सुनाई दे रही thi)Bhabhi, आप जाओ वर्ण कुछ हो जायेगा. (मेने भी साँस लेते हुए कहा, पर वो नहीं गयी, वो बस वैसे hi कड़ी रही, मेरा हाथ उनके पेट पर चल रहा था, वो मखमली कपड़ा और ऊपर से वो गरम बदन, मेरी उत्तेजना भड़का रहा था, वो जा नहीं रही थी और विरोध भी नहीं कर रही थी, उनके कान को होठो से छूटे हुए मेने kaha)Kya आप भी यही चाहती हो? (वो कुछ नहीं बोली बस सांसे तेज चल रही थी, और सांसो की फुकर सुनाई दे रही थी)

माधुरी : (वो क्या बोलती, उसकी तो वैसे भी हालत ख़राब थी, अपने कूल्हे पर उसको को कड़क अंग महसूस हो रहा था, उसकी सांसे बहोत तेज चल रही थी, उसकी सोचने समाज ने की ताकत ख़त्म हो चुकी थी, वो बस इस पल को जी लेना चाहती थी, उसने शिव के हाथ पर हाथ रख दिया और अपना शिर पीछे उसके शाइन पर टिका दिया, ये उसकी मूक सहमति थी)

शिव : (वो पूरा ग्रीन सिग्नल दे चुकी थी, मौका hi ऐसा हो गया था की मेरे शरीर का तापमान भी बढ़ चूका था, मेने भी सोच लिया की अब जो होगा देखा जायेगा, और मेने अपना हाथ ऊपर उठाया और उनके बहे स्तन को मसल दिया)

माधुरी : शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (उनकी गर्म सिसकारी फुट पड़ी)

शिव : भाभीइइइइइइइ. (में उनके स्तन को सहलाने और मसलने लगा, माध्यम आकर का स्तन मेरे हाथ में समां गौए था, मेने दूसरे स्तन को भी मसलना सुरु कर दिया)

माधुरी : (उसका एक हाथ शिव के हाथ के ऊपर था तो दूसरे हाथ से उसने अपने गाउन को मुठी में पकड़ रक्खा था, उसका मान तो यही चाहता था पर ये हो जायेगा उसको यकीं नहीं था, उसकी सांसे उखाड़ने लगी थी, और उसके पेअर कंपनी लगे थे, शिव के सख्त हाथो को वो अपने स्तन पर महसूस कर रही थी, हलके दर्द के बावजूद उसको एक खुसी मिल रही थी, शिव ने जब उसके कड़क हो चुके निप्पल को मसला तो उसके पैरो के बिच सर सराहत होने लगी, उसके पैरो की उंगलिअ भी मुद गयी और उसकी झंघ भी आपस में सात gayi)Shiiiiiiiiiiiv.(Uske मुख से गरम सिसकी फुट पड़ी, में हलके हलके से उनके स्तन को सहलाते हुए मसलने लगा) कोई देख लेगा शिव, शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : (वो पूरी तरह से तैयार थी पर फिर भी उनकी सहमति जरुरी thi)Aap ये चाहती हो न भाभी? (वो कुछ नहीं boli)Batao न भाभी, आप चाहती हो न की में ये सब करू? (उन्होंने फिर भी जवाब नहीं दिया)

माधुरी : कोई देख लेगा शिव, (तो मेने स्तन पर से अपनी पकड़ ढीली कर दी, क्यों की में कोई भी जबरदस्ती नहीं करना चाहता था)

माधुरी : (वो सहरम और संकोच के कारन कुछ भी नहीं बोल प् रही थी पर शिव ने जैसे hi पकड़ ढीली की वो समाज गयी की शिव उसकी मर्जी के बगैर उसके साथ कुछ नहीं करेगा, शिव का इस कदर उसकी इच्छा का सम्मान करना उसे अच्छा लगा, वो उसके साथ कोई जबरदस्ती नहीं करना चाहता था, पर उसको बहोत शर्म आ रही थी, पर अगर वो सहमति न देती तो शिव पीछे हैट जाता, उसने शिव के ऊपर रक्खे हाथ को दबाया और boli)Yahao कोई देख सकता है, अंदर चलो न. (बोलते बोलते उसकी जबान भी लड़खड़ा गयी, ये खुला आमंत्रण था, उसकी बात का असर हुआ और शिव ने उसको गॉड में उठा लिया, वो एकदम से दर गयी पर वो शिव के मजबूत हाथो में महफूज थी, उसने शरमाते हुए शिव के गले में बहे दाल दी, हिचकिचाते हुए उसने शिव को देखा तो वो उसे देख कर मुस्कुरा रहा था, उसको इतनी शर्म आयी की उसने मुस्कुराते हुए अपनी आंखे बंद कर ली और उसके शाइन पर शिर रख दिया, शिव उसको उठा कर उसके hi कमरे में ले गया, ये वही कमरा था जहा उसकी सील भी टूटी थी और उसने बेचैनी में कई रेट गुजारी थी, शिव उसे फूल की तरह उठाये था, ऐसा सब उसने फिल्मो में देखा था. उसको शिव का इस तरह से उठाना इतना च्छ लगा था की वो फूली नहीं समां रही थी, शिव ने उसको बिस्तर पर लेटाया तो वो दूसरी और घूम गयी, उसको बहोत शर्म आ रही थी, उसको दरवाजा बंद होने की आवाज आयी और लाइट चालू होने की भी, उसने आंखे खोल कर देखा तो शिव उसकी और hi आ रहा था, उसने फिर आंखे बंद कर ली, उसको महसूस हो रहा था जैसे आज उसकी सुहागरात है और वो शर्मायी संकुचाई उस पल का इंतजार कर रही है)

में उनके पास गया, सो साइड से लेती हुई थी, उनके कुल्होवाला भाग ऊपर उठा हुआ था और कमर वाला भाग जैसे खाई बन गया था, में उनके कूल्हे देखने लगा हिनहे में नंगा देख चूका था. मेने उनके कूल्हे पर हाथ लगाया, वो संकुचाई, में अपने हाथ को कमर से फिसलते हुए कंधे तक ले गया, मेने उनको सीधा करना चाहा तो वो नहीं हुई.

माधुरी: (शरमाते hue)Light बंद कर दो न.

शिव : क्यों?

माधुरी : मुझे शर्म आ रही है शिव, प्लीज. (उन्होंने बहोत प्यार से कहा, मेने नजर दौड़ाई तो नाईट बल्ब भी था, मेने वो चालू कर दिया और लाइट बंद कर दी, फिर में उनके पास आ गया, मेने अपना शर्ट और पंत उतर दिया, बनियान भी उतर di)(Madhuri ने ये कनखीओं से देखा, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, शिव उसके साथ लेट गया और उसको अपनी और घूमने लगा, उसको बहोत शर्म आ रही थी पर वो घूम गयी और सीधी लेट गयी, उसने आंखे बंद hi रक्खी, शिव ने अपना हाथ उसके पेट पर रक्खा तो उसके शरीर में कम्पन सा दौड़ गया, उसने फिर से शिव का हाथ पकड़ लिया, और अपनी आंखे खोल कर शिव को dekha)Kisi को बताओगे तो नहीं न? (उसने घबराते हुए अपना दर बताया)

शिव : (मुस्कुराते hue)Me तो सबको बतादूँगा. (माधुरी उसके चेहरे पर मजाक के भाव देख रही थी, वो शर्मा गयी, वो जानती थी की शिव ऐसा नहीं है, उसको अंदाजा था, पर फिर भी वो तसल्ली कर लेना चाहती थी)

माधुरी : कहना शिव, किसी को बताओगे तो नहीं न?

शिव : आपको क्या लगता है?

माधुरी : में जानती हु, पर दर लगता है.

शिव : नहीं बताऊंगा, और मुझे क्या जरुरत है किसी को बताने की.

माधुरी : में जानती हु, पर फिर भी दर लगता है, अगर किसी को पता चल गया तो में किसी को मुँह दिखने के काबिल नहीं रहूंगी शिव, शायद बदनामी से मर जाउंगी.

शिव : अगर इतना hi दर लग रहा है तो फिर ऐसा काम करना hi क्यों.

माधुरी : में खुद समाज नहीं प् रही हु शिव, एक और तो दर लग रहा है और दूसरी और उतना hi अच्छा लग रहा है.

शिव : क्या अच्छा लग रहा है?

माधुरी : तुम्हारा इस तरह से मेरे साथ होना.

शिव : तो फिर चिंता छोड़िये, में किसी को नहीं बताऊंगा. अब अगर भरोसा हो गया हो तो आगे बधु.

माधुरी : (शरमाते hue)Ha शिव, मुझे इतना प्यार करो की मेरा पूरी तरह से मान भर जाये, में जानती हु की ये गलत है पर जब मेने तुम्हे पहली बार देखा था तभी तुम मुझे पसंद आ गए थे, मेने सोचा नहीं था की ये दिन भी आएगा (उन्होंने खुद मेरा हाथ पकड़ कर अपने स्तन पर रख diya)Muje प्यार करो शिव, में तड़प रही हु. (में उनके स्तन को दबाने लगा और उनके ऊपर होते हुए उनके होठो को चूसने लगा, वो भी मेरा शिर पकड़ कर मुझे चूमने लगी, में उनके ऊपर हो गया उन्होंने पेअर फैला दिए, मेरा तना हुआ लुंड छूट पर जा टिका. जिसे वो महसूस कर रही थी, किश लगातार गहरी होती जा रही थी, और मेरे हाथ से स्तन को दबाना भी , वो सेह नहीं पायी और उन्होंने अपने होठ छुड़ा लिया और जोर जोर से हांफ ने lagi)Fuuuuu हूउउउउउ फूऊऊऊऊ. (वो मदहोशी में hi थी, मेने उन्हें थोड़ा ऊपर उठाया और उनके गाउन के ऊपर का कपड़ा उतर दिया, अब वो एक मिनी स्कर्ट जैसे कपडे में थी, उनके आधे स्तन दिख रहे थे, में झुका और उनके स्तन के ऊपर के भाग को चाटने laga)Shhhhhh शीइइइइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह. (मधुर आज बहोत ज्यादा उत्तेजना महसूस कर रही थी, सुरु में अपने पति के साथ महसूस किआ था पर फिर उसको वो सुख न मिला तो फिर उसको इतनी उत्तेजना नहीं होती थी, पर शिव के छूने से वो बहोत गर्मी महसूस कर रही थी, शिव लगातार उसके स्तन को मसल रहा था और उसकी छूट पर वो कड़क अंग दबाव दे रहा था, उसकी कमर खुद बा खुद चलने लगी, वो शिव की पीठ को सहलाने लगी, थोड़ी देर बाद फिर शिव ने उसको बिठाया और उसका वो स्कर्ट भी निकलने लगा, उसको बहोत शर्म आ रही थी पर ये सब तो होना hi था, उसने अपने हाथ उठा कर उसकी सहायता की, अब वो सिर्फ ब्रा और पंतय में hi थी, उसको बहोत शर्म आ रही थी, उसने अपने आपको हाथो से ढकने की नाकाम कोशिस की पर शिव ने उसके हाथो को पकड़ कर हटा दिया और वो उसके हुस्न का दीदार करने लगा, देकते hi देखते उसने फिर उसको निचे लेता दिया और उसकी गर्दन, उसके स्तन पर हर जगह चूमने और चाटने लगा, ये वो दूसरा लड़का था जसके सामने वो इस अवस्था में थी, शर्म तो थी पर उत्तेजना भी बहोत थी, उसे अच्छा भी लग रहा था, जिस तरह से शिव उसके बदन से खेल रहा था उसको बहोत मज़ा आ रहा था, वो एक लड़के का प्यार क्या होता है वो महसूस कर रही थी, शिव ने उसे पलट दिया और उसकी पीठ पर चुम्बन करने लगा, वो सिर्फ सिस्किअ hi ले रही थी, चूमते हुए जब शिव ने उसके कूल्हों को मसाला तो वो तड़प उठी, उसकी छूट से जैसे नदिया बह रही थी, वो इतनी ज्यादा गर्म हो गयी थी की अपनी झंघे आपस में रगड़ रही थी, वो पूरी तरह छोड़ने को तैयार थी, पर जैसे शिव को तो कोई जल्दी नहीं थी, इतनी देर में तो उसके पति के साथ सब कर के वो सो भी चुकी होती. और शिव ने कुछ सुरु भी नहीं किआ था, तभी शिव ने उसकी ब्रा के हुक खोल दिए, वो बस सब महसूस कर रही थी, वो बस अपने आपको सूप चुकी थी, तभी शिव का हाथ उसके पंतय के अंदर उसके कूल्हों पर गया, उसके नंगे कूल्हों पर हाथ महसूस करते hi उसकी कमर जटके खाने लगी)

माधुरी भाभी अपने नाम की तरह मधुर थी, नाईट बल्ब की रौशनी में उनका बदन एक अलग hi आभा दे रहा था, उनके बदन और लता के बदन में ज्यादा अंतर नहीं था, ये थोड़ी ज्यादा ऊँची थी, पर शरीर कोमल और नाजुक hi था, पतली कमर के निचे फैले हुए कूल्हों को देख कर किसी का भी खड़ा हो जाये, कूल्हों की दरार मुझे दिख रही थी, आधे नंगे कूल्हों पर से मेने पंतय और निचे खिसकायी तो आधे कूल्हे पुरे बहार आ गए, वो उभरे हुए कूल्हे आकर में अपनी गोलाई लिए थे, आकर में अभी भी छोटे hi थे जो उनके शरीर के हिसाब से थे, पर आकर्षक थे, में उन्हें नजदीक से देखना चाहता था तो में कूल्हों की और घूम गया और आधे नंगे कूल्हों पर अपने होठ फिरने लगा, तो भाभी ने एक हाथ पीछे किआ और मेरा हाथ पकड़ लिया.

माधुरी : शह्ह्हह्ह्ह्ह गुदगुदी हो रही है शीइइइइव.

शिव : मेने इन्हे hi देखा था भाभी, कितने आकर्षक है ये.

माधुरी : ऐसा मात बोलो शिव, शर्म आ रही है.

शिव : उस वक़्त अचानक हो गया था, अभी में जानबुज कर देख रहा हु, आपको कोई आपत्ति तो नहीं है न.

माधुरी : शहहहहह शीइइइइइइव, ऐसी बाटे मात करो शह्ह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा है यार.

शिव : में तो बोलूंगा और देखूंगा भी (मेने कूल्हों पर से पंतय और निचे खिसका दी और दरार को फैलते हुए देखा, गांड का गहरे रंग का छेड़ दिख रहा था और वो खुल बंद हो रहा था, मेने दरार के अंदर मुँह घुसा दिया, गर्म गर्म एहसास मेरे नाक और मुँह पर होने लगा)

माधुरी : शह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो शिव, मुझे शर्म आ रही है शह्ह्ह्हह्ह (परम कभी उसके शरीर के साथ इस तरह से नहीं खेला था, ये सब उसके लिए एकदम नया था, उसकी उत्तेजना चरम पर थी, इस तरह के एहसास से उसकी छूट छू रही थी और कमर झटके खा रही thi)Shhhhh Shiiiiiiiiiiiiiiiv अह्ह्ह्ह शहहहहह . (वो अपना शिर तकिये में रगड़ रही थी, तभी उसे गिला पैन महसूस हुआ, शिव उसके गांड के छेड़ को अपनी जीभ से चाट रहा था, उसका पूरा शरीर गंगना gaya)Shhhhhhhh वो गन्दी जगह है Shiiiiiiiiiiiv. (उसको यकीं नहीं हो रहा था की शिव उसके गांड के छेड़ को चाटेगा, उसके पति ने कभी उसकी छूट भी नहीं छाती थी, वो इस सुख और एहसास से वन्धित थी, वो जानती थी की ऐसा लोग करते है पर ये इतना सुखद होता है उसका अनुमान नहीं था, शिव उसके कूल्हों को मसलते हुए चाट रहा था और वो अपना मुँह तकिये में छुपा के सिस्किअ रोकने का प्रयास कर रही थी, वो तकिये को काट रही thi)Shhhhhh बस शिईयिव मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा है शहहहहह.

शिव : आप बहोत खूबसूरत हो भाभी, मुझे अच्छा लग रहा है. (मेने उनकी पंतय पूरी निकल दी, और उन्हें सीधा कर दिया तो वो अपनी छूट और अपने स्तन छुपाने लगी)

माधुरी : शहहहहह शीइइइइइइव.

शिव : (मेने उनके हाथ पकड़े और हटाने laga)Muje देखना है भाभी.

नधुरी : मुझे शर्म आ रही है शिव, जो करना है जल्दी कर लो न.

शिव : आपको कही जाना है क्या?

माधुरी : ऐसा क्यों पूछ रहे हो?

शिव : वो सब करने में अभी बहोत टाइम है, हाथ हटाइये.

माधुरी : (शर्मा कर रोनेवाली सकल se)Muje शर्म आ रही है शिव.

शिव : कुछ नहीं होगा, मुझे देखने दीजिये.

माधुरी : वह सब गन्दा हो गया है.

शिव : क्या गन्दा हो गया है?

माधुरी : वो सब चिप छिपा हो गया hai(Unhone शरमाते हुए कहा)

शिव : कुछ गन्दा नहीं है, हाथ हटाइये (में उनके पैरो के बिच बेथ गया और उनका हाथ हटाया, उन्होंने अपनी झंघ आपस में स्टेट हुए अपनी छूट को छुपाने की कोशिस की पर मेने उनके घुटने पकड़ कर पेअर फैला दिए, वो जोर लगाने लगी पर मेरे सामने कहा चलती, मेने छूट को देखा तो हलके बालोंवाली छूट थी, सच में वो छूट रास से भीग चुकी थी, उन्होंने फिर हाथ से ढकने का प्रयास किआ, मेने उनका हाथ पकड़ लिया और छूट पर मुँह लगा दिया, वो चिकना रास मेरे मुँह में अपना स्वाद देने लगा, में छूट को अच्छे से चूसने और चाटने लगा)

माधुरी : Shhhhhhhhhhh आआआआह shiiiiiiiiiiv shhhhhhhhhh (माधुरी बावली होने लगी, जैसे जैसे शिव उसकी छूट को चाट रहा था उसकी सिस्किअ लगातार निकल रही थी, वो उसकी छूट को ऐसे चाट रहा था जैसे वो कोई खाने की चीज हो, उसको इतना मज़ा आ रहा था पर साथ में एक अजीब सी गुदगुदी हो रही थी, वो मचल रही थी, वो अपने हाथ पेअर मार रही थी, वो कभी अकड़ जाती तो कभी थोड ऊपर हो जाती, वो कभी शिव के शिर को धक्का देती तो कभी अपनी छूट पर दबा देती, जैसे जैसे शिव उसकी छूट को चाट रहा था वो अपने hi होतो को काट रही thi)Shhhhhh शिईयिव ये क्या कर रहे हो शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (ऊपर देख kar)Maza आ रहा है?

माधुरी : (माध भरी आवाज me)Shhhhhh हाआआ बहोत मज़ा आ रहा है शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आअह्हह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो यार shhhhhhhhhhh में पागल हो जाउंगी (वो शिव के बालो को नोचने लगी, शिव की जीभ उसकी योनि के छेड़ में दाखिल hui)Shhhhhhhhh शीइइइइइइव ahhhhhhhhhhh (वो चाट पटाने लगी, उसने सोचा नहीं था की ऐसा भी होता hai)Muje कुछ हो रहा है शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह, में मर जाउंगी शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ये क्या हो रहा है मेरे साथ shhhhhhhhhhhh (में जनता था की वो झाड़ जाएगी, पर में अभी इतनी जल्दी उन्हें झाड़ जाने नहीं देना चाहता था, मेने मुँह हटा लिया और उनके ऊपर होने laga)(Madhuri को लगा की शिव अब उसके साथ सेक्स करेगा, वो तो पूरी तरह से तैयार थी, वो शिव को अपनी बहो में बाहरणे लगी, शिव ने उसकी ब्रा ऊपर कर दी और उसके निप्पल को चूसने laga)Shhhhhh शीइइइइइइव (वो मदहोश हो रही थी, वो शिव को देखने लगी की कैसे वो उसके स्तन को और निप्पल को चूस रहा है, उसकी हालत ख़राब हो रही थी, वो शिव के अंडरवियर को निचे खिसकने लगी, उसे जल्द से जल्द अपने अंदर वो चाहिए था, अपने हाथ और पैरो की मदद से उसने शिव का अंडरवियर निचे खिसका दिया, उसको महसूस हुआ की शिव का लुंड बहार आ गया है, क्यों की अब वो सीधे उसकी छूट को छू रहा था, वो उसे निचे की और खींचने लगी, पर शिव निचे नहीं हो रहा था, वो अपनी कमर उचकते हुए लुंड को महसूस करने लगी, लुंड उसकी छूट के आस पास यहाँ वह छू रहा था, उसको वो अपने छेड़ में चाहिए था, वो इतनी मदहोश हो चुकी थी की उसने खुद लुंड को पकड़ लिया ताकि उसे अपने छेड़ पर रख सके, पर जैसे hi उसने लुंड पकड़ा वो कैंप गयी, वो जानती थी की उसका लुंड बहोत बड़ा है पर इतना बड़ा उसने सोचा नहीं था, उसने दूर से देखा था पर अभी वो उसके हाथ में था, वो उसे दबा कर जाँच रही थी, पूरी तरह से सख्त था वो, वो इतनी मदहोश हो चुकी थी की वो सोच hi नहीं प् रही थी की उसका क्या हल होगा, उसे बस हर हल में वो चाहिए था, वो उसको अपनी छूट पर घिसने लगी, उसकी आग और भड़क रही थी, उसने लुंड को अपने छेड़ पर टिका दिया और उसे खींच कर अंदर डालने का प्रयास करने लगी, शिव निचे नहीं हो रहा था, वो छटपटाने lagi)Shiiiiiiiv शहहहहह क्या कर रहे हो शह्ह्ह्हह्ह अंदर डालो न शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (में जनता था की वो बहोत गर्म है, और यही सही मौका भी था, मेने उनके होतो को अपने गिरफ्त में लिया और लुंड पर दबाव दाल दिया, लुंड उस छोटे से छेड़ को फैलते हुए अंदर घुस gaya)(Madhuri की चीख निकल गयी, उसने सोचा नहीं था ऐसा, पर वो उसकी छूट को चीरता हुआ अंदर जा चूका था, उसको इतना दर्द हुआ की उसकी आँखों में पानी भी आ गया, वो चिल्लाई पर उसकी आवाज शिव के मुँह में hi दबी रह गयी, वो छटपटाने लगी पर शिव ने और झटका मारा तो लुंड और अंदर चला गया, उसकी जान हलक में आ गयी, वो चाट पटाने लगी, और छूटने का प्रयास करने लगी, पर शिव उसको मजबूती से पकड़े हुए था, वो हिल भी नहीं प् रही थी, शिव ने और एक धक्का मारा तो लुंड उसकी छूट को फाड़ता हुआ और अंदर घुस गया,





best dice rolling app

उसके शिर से सहारा नशा उतर गया था और उसकी जगह दर्द ने ले ली थी, वो अपना मुँह भी छुड़ाना चाहती थी ताकि वो चीख सके पर शिव ने वो मौका भी नहीं दिया,

एक और झटके से वो बेहाल हो गयी और शांत हो गयी, अब उसकी सहने की ताकत ख़तम हो चुकी थी, वो बस जोर जोर से सांसे ले रही थी और भगवन से बचने के लिए प्रार्थना कर रही थी, शिव रुक गया था, वो वैसे hi उसके ऊपर लेता था पर वो कड़क कहता उसकी छूट में घुसा हुआ था, इतना दर्द तो उसकी सील टूटने पर भी नहीं हुआ था, वो पसीना पसीना हो चुकी thi)(Me जनता था, की ये होगा, पर मुझे ये नहीं पता था की वो कुवारी लड़कीओ जैसी टाइट होगी, में सोचने लगा की इन्होने सेक्स किआ भी है की नहीं, पर मुझे जो करना था वो करना hi था, मेरा लुंड छूट में फंस गया था, अंदर बहते गर्म खून को में महसूस कर रहा था, मेने नहीं सोचा था की ये अभी ऐसी होगी, वो शादी सुदा थी तो मेने सोचा था की वो थोड़ी अभ्यस्त होगी. में उनके ऊपर ऐसे hi लेता रहा, मेने उनको सँभालने का मौका दिया, अब वो चटपटा नहीं रही थी तो मेने अपना मुँह हटाया, उनके आंसू निकल आये थे, वो बेजान सी लग रही थी)

शिव : भाभीयी. (उन्होंने गीली आँखों से मेरी और dekha)Sorry, मुझे नहीं पता था की आप अभी कुवारी हो. (वो कुछ नहीं बोली बस मुझे देख रही thi)Bahot दर्द हो रहा है क्या? (उन्होंने रोनी सूरत से बस है में शिर hilaya)Abhi सब ठीक हो जायेगा. (मेने उनके आंसू पोछे और उनके गाल और गले पर किश करने लगा) तो इसीलिए आप ने मुझे रोका नहीं है न, बहिया ने ठीक से किआ नहीं है, सही कह रहा हु न में. (वो बस मुझे देख रही थी, में उनसे बात कर रहा था, उनको चुम रहा था, उनकी तारीफ भी कर रहा था, मेने चेक करने के लिए लुंड थोड़ा बहार खिंचा, तो उनके चेहरे पर दर्द उभर आया, में उनको चूमे और चाटने लगा और थोड़ी थोड़ी देर में लुंड थोड़ा थोड़ा आगे पीछे करने लगा, वो थोड़ी शांत हो गयी थी, में दोनों पैरो के बिच बेथ गया और छूट का जायजा लिया, निचे खून लग गया था, मेने उनकी और देखा तो वो मुझे hi देख रही थी) जो होना था हो गया, अब दर्द नहीं होगा. (मेने उन्हें संजय तो उन्होंने है में गर्दन हिलायी, में उनको खुस करना चाहता था तो फिर उनके ऊपर लेट गया, और उनका शिर सहलाते हुए kaha)Lagta है मेरे साथ hi सुहागरात मन रही हो, है न? (मेरे ऐसा कहते hi वो शर्मा gayi)Ab क्यों शर्मा रही हो आप, मेने कहा था न की सो जाओ, तब तो गयी नहीं आप. (उनके चेहरे पर हलकी मुस्कान आ गयी, मेने फिर लुंड बहार निकला और अंदर किआ)

माधुरी : अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : अभी भी दर्द हो रहा है?

माधुरी : हआ.

शिव : ज्यादा हो रहा है क्या?

माधुरी : (रोनी सकल se)pehle से काम है.

शिव : अभी पूरा चला जायेगा, बस थोड़ी देर सहन कर लो. (उन्होंने हां में शिर हिलाया, में लुंड अंदर बहार करने लगा,





मुझे अभी भी ताकत लगनी पद रही थी, में महसूस कर प् रहा था की दीवाले कितनी संकरी है, पर मेरा शेर फुल फॉर्म में था, वो उसको फैलते हुए अंदर बहार हो रहा था, छूट में पानी भी आने लगा था जिस से और मदद हो रही थी)

माधुरी : शह्ह्हह्ह्ह्ह shiiiiiiiiiiv (ये उनके मज़े की सिसकारी थी, में समाज गया की वो अब तैयार है, में थिरे धीरे लुंड अंदर बहार करने लगा, वो कभी दर्द की तो कभी मजे की सिस्किअ ले रही थी,





में उनकी आँखों में देखते हुए लुंड अंदर बहार करने लगा तो वो भी मेरी आँखों में देख रही थी पर उनका पूरा ध्यान अपनी छूट में tha)(Madhuri पहली बार ऐसा कुछ महसूस कर रही थी, उसकी छूट पूरी भर गयी थी, कड़क लुंड उसकी छूट को खोलने में लगा हुआ था, दर्द तो हो रहा था पर एक अज्जेब सा मज़ा भी आ रहा था, लुंड बहोत बड़ा था, पर शायद मर्दो का ऐसा hi होता होगा,





आज उसकी सचमे सुहागरात hi हो रही थी, उसको शिव पर बहोत प्यार आ रहा था, वो उसको दर्द दे रहा था पर फिर भी एक सुकून था, वो कभी चिहुँक जाती तो कभी दर्द से कराह निकल जाती, अंदर हलकी जलन भी हो रही थी, पर वो सब सेह रही थी, आज वो औरत जो बन गयी थी, औरत होने का सुख वो महसूस कर रही थी, वो अपने पेअर फैला कर उस अंग को रास्ता दे रही थी, जो लगातार उसकी छूट के अंदरूनी भाग को रगड़ रहा था, वो मोटा सूपड़ा उसकी छूट की मासपेशिओ को ढीला करने में लगा हुआ था, वो पूरी तरह से नंगी थी और शिव भी नंगा था, लुंड के घरसँ से उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, वो शिव को अपनी और खिंच रही थी, आज पहली बार था की उसकी छूट में लुंड ऐसे अंदर बहार हो रहा था, वो चुदाई का मतलब समाज रही थी,





शिव उसको लगातार छोड़ रहा था, ऐसे सब्द उसने सुने थे जो उसको गंदे लगते थे पर अभी वो इसी का मज़ा ले रही थी, लुंड के लगातार धक्को से उसके अंदर तूफान इकठ्ठा हो रहा tha)Shhhhh शीइइइइव अह्ह्ह्हह शहहहहह अह्ह्ह्हह आईईईई शह्ह्ह्हह्ह (छूट से लगातार चिकना रास बह रहा था और लुंड के घरसँ से उसको बहोत ज्यादा आनंद मिल रहा था, दर्द के बावजूद वो शिव के कूल्हों को अपनी और खींचने लगी)

शिव : अच्छा लग रहा है?

माधुरी : हआ शहहहहह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह.

शिव : अब दर्द तो नहीं है न?

माधुरी : शह्ह्ह्ह नाहा अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह. मुझे कुछ हो रहा है शिव शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा है, (सो शिव को अपनी और खिंच कर उसको बहो में भरने का प्रयास करने लगी, और उसके कंधे पर चूमने और चाटने lagi)Shhhhhh अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह मुझे कुछ हो रहा है शह्ह्ह्ह में बर्दास्त नहीं कर प् रही शह्ह्हह्ह्ह्ह. (में समाज गया की वो झाड़नेवाली है, मेने थोड़ी स्पीड बढ़ा di)Shhhhh अह्ह्ह्हह शिईयिव अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइइइव आईईईई शह्ह्हह्ह्ह्ह (उसने शिव के कंधे पर दन्त गधा दिए और झटके कहते हुए झड़ने lagi)Ahhhhhhh मुंईईईई shhhhhhhhhhhh. रुक जाओ माआ शह्ह्ह्ह बर्दास्त नहीं हो रहा है यार शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (में रुक गया, मेरे लुंड पर गरम पानी की बरसात हो रही थी, वो मुझसे लिपट गयी, थोड़ी देर बाद वो शांत हुई, मेने उन्हें देखा तो वो शर्माने लगी)

शिव : (मुस्कुराते hue)Kya हुआ? (वो और शर्माने lagi)Bataiyena..... क्या हुआ?

माधुरी : पता नहीं.

शिव : अच्छा लगा?

माधुरी : बहोत अच्छा लगा शिव, ऐसा कभी नहीं हुआ था.

शिव : अभी तो शुरुआत है.

माधुरी : तुम्हारा क्यों नहीं निकला?

शिव : इतनी जल्दी नहीं निकलेगा, अभी बहोत म्हणत करनी पड़ेगी. (में उठने लगा और लुंड बहार निकला)

माधुरी : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (वो मचल गयी, उसे लगा की उसके अंदर से कुछ खली हो गया तो उसने अपने पेट को सहलाया, जैसे वह कुछ था जो अब नहीं hai)(Mene उनकी छूट का जायजा लिया, बिस्तर पर खुंड लगा हुआ था, और छूट पर भी खून लगा हुआ था, मुझे ऐसे छूट को देखते देख वो शरण गयी और अपनी झंघे आपस में सत्ता दी और अपनी छूट को हाथो से छुपा लिया)

शिव : क्या हुआ, देखने दीजिये न.

माधुरी : मुझे शर्म आ रही है.

शिव : अब कैसी शर्म (कहते हुए मेने पेअर फैलाये पर वो अपनी छूट को हाथ से धक् रही थी, मेने उनकी पंतय ली और हाथ को हटाया और छूट पर लगा खून साफ़ किआ, सो थोड़ी करहि, मेने देखा की छूट का कोना फैट गया था और लहू जैम गया tha)Dard हो रहा है?

माधुरी : (रोनी सूरत se)Ha. (में झुक गया और छूट को चाटने laga)Shhhhh शीइइइइइव. (में छूट को चाटने लगा तो वो सिस्किअ लेने लगी, में थोड़ी देर छूट को चाट ता raha)Shhhhhhhhh शह्ह्ह्ह.

शिव : अब अच्छा लग रहा है?

माधुरी : Haaa.....tumhe गन्दा नहीं लगता शिव?

शिव : क्या?

माधुरी : तुम वह मुँह लगा रहे हो, वो गन्दी जगह होती है न?

शिव : मेरे ऐसा करने से आपको मज़ा नहीं आ रहा क्या?

माधुरी : (शरमाते hue)Aa रहा है.

शिव : तो फिर, इसमें गन्दा कुछ भी नहीं होता, में भी अपना आपके मुँह में डालूंगा तो आपको गन्दा लगेगा?

माधुरी : पता नहीं. (उसको याद आया की कैसे दिव्या शिव के लुंड को चूस रही थी, उसको भी ऐसा करने की इच्छा हो रही थी पर वो शर्मा रही थी)

शिव : ऐसे hi एक दूसरे के अंगो के साथ खेल के दुसरो को मज़ा दे सकते है.

माधुरी : तुम चाहते हो की में भी करू?

शिव : वो आप पर डिपेंड करता है, आपको अच्छा लगे तो hi करना.

माधुरी : पर मेने कभी किआ नहीं है. (उसने हिचकिचाते हुए कहा)

शिव : जब आपका मान करे तब कह देना.

माधुरी : (दो पल शिव को देखती rahi)Abhi करू? (उसने शरमाते हुए kaha)(Me समाज गया की उनका भी मान है, तो में खड़ा हुआ, उनकी नजर मेरे लुंड पर hi टिक गयी, मेने उनका हाथ पकड़ कर बिठाया और उनके सामने खड़ा हो गया, वो कभी मेरे लुंड को तो कभी मेरी और देख रही थी)

शिव : क्या हुआ?

माधुरी : (हिचकिचाते hue)Ye बहोत बड़ा है.

शिव :(मुस्कुराते hue)To?

माधुरी : कुछ नहीं (फिर वो लुंड को देखने लगी, फिर मेरी और देख के boli)Kaise करू?

शिव : पहले पकड़िए तो सही. (वो शर्मा गयी, थोड़ी नजदीक आयी और हिचकिचाते हुए मेरे लुंड की और अपना हाथ बढ़ाया, एक बार मेरी और देखा फिर लुंड को पकड़ liya)(Lund को पकड़ ते hi माधुरी को अजीब लगा, थोड़ी देर पहले भी पकड़ा था पर देखा नहीं था, अब वो देख रही थी, उसके मुँह में कुछ होने लगा तो उसने अपने सूखे होठो पर जीभ फिराई, शिव ने लुंड होठो के सामने किआ, उसने फिर शिव को देखा और हिचकिचाते हुए अपना मुँह खोला, उसको अजीब लग रहा था पर उसको करना था, वो आगे बढ़ी और थोड़ा सा लुंड मुँह में लिया, अजीब लग रहा था, जहसे लड़के मूत ते है उसको उसने अपने मुँह में लिया था, उसने फिर बहार निकल दिया, उसको अजीब लग रहा था, एक बार फिर उसने शिव को देखा, वो उसके चेहरे को hi देख रहा था, उसने अपने आपको कण्ट्रोल किआ और फिर मुँह खोला और सुपडे को मुँह में भर लिया, एक अजीब तरह की खुसी महसूस हुई उसे, उसका मुँह भर गया था, वो वैसे hi रही, शिव ने उसके शिर पर हाथ रक्खा और उसको लुंड की और दबा दिया, लुंड थोड़ा अंदर चला गया, उसने फ़ौरन अपना शिर पीछे कर लिया) आपको करना है तो hi करिये, कोई जबरदस्ती नहीं है.

माधुरी : अजीब लग रहा है, (वो फिर थोड़ी देर लुंड को देखती रही, फिर उसको मुँह में भर liya)(Mene उनको समजने के लिए उनका शिर पकड़ा और लुंड को थोड़ा अंदर बहार किआ,





वो मुझे देखने लगी, मेने फिर उनका शिर छोड़ diya)(Madhuri थोड़ा समाज गयी थी, उसने फिर लुंड को मुँह में लिया और खुद अंदर बहार करने लगी, अजीब लग रहा था पर उसको मज़ा आ रहा था, ऐसे लुंड को चूसने से उसके बदन में फिर गर्मी बढ़ने लगी, वो थोड़ी देर ऐसा करती रही, फिर उसने लुंड बहार निकला और शिव को देखा, जैसे पूछ रही हो की ठीक किआ न mene)(Me मुस्कुराया, में तो पहले से hi गरम था, में निचे घुटनो पर बेथ गया और उनकी कमर पकड़ कर उन्हें घोड़ी बनाया, उनके चेहरे पर परेशानी थी, वो समझने की कोशिस कर रही thi,)(Tabhi माधुरी की नजर वह लाल धब्बे पर पड़ी, वो चौंक गयी)

माधुरी : खून?

शिव : क्या हुआ भाभी?

माधुरी : (लाल धब्बे की और इस्सर कर के) ये खून?

शिव : जो होना था वो हो गया, अब नहीं होगा. (वो थोड़ी परेशान थी पर मेने उन्हें घोड़ी बनाया और उनके कूल्हे फैला कर फिर से गांड के छे और छूट को चाटने लगा, वो ाँकेः बंद कर के सिस्किअ लेने लगी, थोड़ी देर बाद मेने लुंड को छूट पर घिसा तो वो मुझे देखने लगी, मेने लुंड सेट किआ और अंदर दबा दिया, एक बार फिर लुंड छूट में घुसने लगा, उनके चेहरे पर दर्द उभर आया पर मेने लुंड अंदर दाल hi दिया)

(माधुरी को दर्द हुआ पर उसने भी रोका नहीं, वो हर तरह का मज़ा लेना चाहती थी, उसे सब नया नया लग रहा था पर उसको पता था की ऐसे hi सेक्स होता होगा, लुंड फिर उसकी छूट में चला गया था, शिव उसकी कमर पकड़ कर अंडर बहार करने लगा, एक बार फिर उसको मज़ा आने लगा, वो अच्छे से पोसिटिव बना के उसके लुंड को अपनी छूट में लेने लगी, लगातार लुंड अंदर बहार हो रहा tha)Shhhhhhh अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह. (वो नंगी थी और किसी के सामने ऐसे थी, उसने कभी सोचा भी नहीं था पर जो मज़ा उसे मिल रहा था उसके लिए वो सब करने को तैयार थी, शिव उसके कूल्हे मसलते हुए उसकी छूट में धक्के लगा रहा था, कभी लुंड ज्यादा अंदर चला जाता तो उसको दर्द होता पर उसने शिव को रखा नहीं, लगातार चुदाई से वो एक बार फिर उसी खुसी को पाने की और बढ़ chali)Shhhhh शीइइइइव अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह हआ शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह ahhhhh.(Shiv लगातार अंदर बहार कर रहा था, वो बस आह उह्ह्ह किये जा रही थी, और शिव लगातार उसकी छूट में लुंड अंदर बहार कर रहा था,





उसने सोचा था उस से कई गुना ज्यादा मज़ा आ रहा था, उसकी टंगे कंपनी लगी थी, उसका शरीर अकड़ने लगा था, एक बार फिर वो चरम को प्राप्त hui)Shhhhhhh shiiiiiiiiiiiv (उसने अपने गरम पानी से शिव के लुंड को नेहला दिया, उस से रहा नहीं गया और वो बीएड पर उलटी लेट गयी और जोर जोर से सांसे लेने लगी, अभी वो संभाली भी नहीं थी की शिव ने फिर से उसकी छूट में लुंड दाल diya)Ahhhh रुको शिईयिव (पर वो नहीं रुका, एक बार फिर लुंड उसकी छूट में अंदर बहार होने लगा,





वो उलटी लेती थी और बस आहे भर रही थी, थोड़ी देर बाद शिव ने उसको सीधा कर दिया, वो बस शिव को देख रही थी, शिव ने उसके पेअर फैलाये और फिर से लुंड अंदर दाल diya)Ahhhhhhh (फिर से लुंड अंदर बहार होना चालू हो गया, उसने अपनी टंगे फैला दी और हवा में उठा दी थी, वो लुंड को लगातार अंदर जाता महसूस कर रही थी, दर्द और मज़े का मिला जुला रूप था, कभी दर्द तो कभी मज़ा आ रहा था, उसकी सकल रोने जैसी हो गयी थी, पर जो मज़ा मिल रहा था उसकी वजह से उसने शिव को रोका नहीं, वो उसके स्तन दबा रहा था उसको चुम रहा था, उसके होठो को चूस रहा था, पर लगातार लुंड अंदर बहार हो रहा था, लुंड इतना अंदर पहुंच गया था की उसको लगा की अब आगे जगह hi नहीं bachi)Ahhhh शीइइइइव शहहहहह बस करो शह्ह्ह्हह्ह कटनी देर करोगे शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शहहहहह शीइइइइइइइव.

शिव : भाभी? (माधुरी ने dekha)Periods कब आये थे?

माधुरी : क्यों?

शिव : बताइये न.

माधुरी : तीनदिन पहले hi बल धोये है. (शिव ने आगे कुछ नहीं पूछा और लगातार धक्के लगता रहा, शिव ने लुंड इतनी जोर से दबाया तो माधुरी को लगा की लुंड अंदर कही घुस गया hai)Ahhhhh शिईयिव दर्द हो रहा है (वो करहि)

शिव : भाभी थोड़ा सेह लो.





(माधुरी को दर्द भी हो रहा था पर मज़ा भी आ रहा था, पर शिव के धक्के लगातार बढ़ रहे थे और गहरे भी होते जा रहे थे, अंदर भी कही उसका लुंड घुस रहा था, एक अजीब सी सनसनाहट उसको महसूस हो रही थी, वो अपने होठ काट रही थी, और ाः आह किये जा रही थी, वो फिर से अपने चरम को प्राप्त हुई hi थी की शिव ने पूरा लुंड उसकी छूट में घुसा दिया और उसके अंदर गर्म पानी की बौछार होने लगी, उसने शिव को कास के पकड़ लिया और अपनी छूट को पूरी ताकत से दबा दिया ताकि लुंड बहार न निकल जाये, अंदर हो रही बरसात उसको रहत और खुसी दोनों पहुंचने लगी, शिव रुक गया था पर अभी भी वो उस से चिपका हुआ था, आज उसको समाज आ रहा था की सेक्स क्या होता है, वो पूरी तरह से तृप्त हो चुकी थी, वो शिव को अपनी बहो में लिए लेती रही. काफिर देर बाद शिव थोड़ा ऊपर हुआ और उसको देखने लगा तो उसको बहोत शर्म आयी, वो दूसरी और देखने लगी, शिव उठने लगा तो उसने अपने पैरो से उसको पकड़ liya)Kya हुआ?

माधुरी : (शरमाते hue)Aise hi रहो अभी. (में रुक गया, वो शरमाते हुए मुस्कुरा रही थी)

शिव : मज़ा आया भाभी.

माधुरी : मुझे भाभी क्यों कह रहे हो, में तुम्हारी नहीं दिव्या की भाभी हु.

शिव : तो में क्या कहु?

माधुरी : मेरा नाम माधुरी है, पता तो है न. (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : वो तो पता है पर में थोड़ी न नाम से बुला सकता हु, और भाभी कहने में क्या बुराई है.

माधुरी : अपनी भाभी के साथ ऐसा करता है कोई, शर्म नहीं आती तुम्हे. (मुस्कुराते हुए वो बोली)

शिव : मेने किया?

माधुरी : है तुमने hi किआ.

शिव : (मुस्कुराते hue)Mujpar इल्जाम.

माधुरी : है, सब तुम्हारी hi गलती है, तुमने hi मेरे साथ सब kia.(Unhone मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : अब इल्जाम लगा hi दिया है तो बता दो की सजा क्या डौगी?

माधुरी : तुम्हारी यही सजा है की ये गलती दोबारा भी करना. (बोलते बोलते वो शर्मा गयी, में मुस्कुराया और उनके होठो को चूमने लगा, वो भी मुझे चूमे लगी, थोड़ी देर की किश से hi लुंड वापस कड़क हो गया और मेने अंदर बहार करना सुरु किआ, अपना मुँह छुड़ा kar)Shhhh क्या कर रहे हो, अभी तो किआ था.

शिव : तो क्या हुआ, फिर एक बार.

माधुरी : में मर जाउंगी यार.

शिव : कुछ नहीं होगा (में फिर सुरु हो गया, वीर्य से भरी हुई छूट की वजह से पूछ पूछ और चाप चाप आवाज होने लगी, थोड़ी देर ऐसे hi छोड़ने के बाद मेने उन्हें गॉड में बिठा दिया और बैठे बहते hi उनको ऊपर निचे करने लगा)

माधुरी : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह शीइइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह, दीखते hi भोले हो बाकि हो नहीं शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह कैसे कैसे कर रहे हो शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : आपको मज़ा आ रहा है न?

माधुरी : है, बहोत आ रहा है, पर वो बहोत बड़ा है.

शिव : उस से कोई फर्क नहीं पड़ता, अपक्की छूट में जगह बन गयी है.

माधुरी : (शरमाते hue)Chiii कितना गन्दा बोलते हो तुम.

शिव : मेने क्या गलत कहा, छूट को छूट नहीं बोलूंगा तो क्या बोलूंगा.

माधुरी : गंदे, दीखते कितने सीधे हो, ऐसा भी कोई बोलता है क्या.

शिव : आप बताओ फिर, कैसे बोलते है?

माधुरी : (शरमाते hue)Muje नहीं पता. (मेने उनके स्तन को चूसना सुरु कर diya)Shhhhhh शीइइइइव क्या कर रहे हो ahhhhhhh(Me अपना काम करता रहा, वो भी मेरा शिर सहलाने लगी और अपनी कमर हिलाते हुए लुंड अंदर लेने lagi)Shhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कितना मज़ा आता है इसमें शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : किस में मज़ा आ रहा है? (मेने उन्हें छेड़ा)

माधुरी : (उन्होंने मुस्कुराते हुए मेरी और dekha)Gande, तुम जानते हो फिर भी पूछ रहे हो.

शिव : मुझे क्या पता की आपको किस्मे मज़ा आ रहा है.

माधुरी : बेशरम, शहहह जो तुम कर रहे हो, उसमे.

शिव : क्या कर रहा हु में?

माधुरी : मुझे नहीं पता, शहहहहह ahhhhhhh(Wo अपनी कमर हिलने lagi)Shhhhhh शीइइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह (में उनके कूल्हे मसलते हुए उन्हें ऊपर निचे और अपनी और खींचने laga)Aiiiiii शहहहहह बहोत मोटा है यार शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : क्या मोटा है?

माधुरी : (उस से लिपट ते hue)Tumhara वो. शहहहहह शिईयिव मुझे फिर कुछ हो रहा है शहहहहह कैसी फीलिंग है ये, शह्ह्हह्ह्ह्ह (वो अपनी कमर जोर जोर से लुंड पर दबाने lagi)Shhhhhh शीइइइइव ईई शह्ह्ह्हह्ह. (वो झड़ने lagi)Ahhhhhhhh shhhhhhhh(Wo रुक गयी, मेने उन्हें निचे लिटाया और फिर उनकी टंगे ऊपर करके धक्के लगाने laga)Ahhhhhh शीइइइइव और अंदर नहीं शह्ह्ह्हह्ह दर्द हो रहा है शहहहहह शीइइइइइइव अह्ह्ह्हह्हह बहोत अंदर जा रहा है शह्ह्हह्ह्ह्ह आईईईई शह्ह्हह्ह्ह्ह थोड़ी देर रुक जाओ शह्ह्ह्हह्ह ahhhhhhhh(Me रुका नहीं और धक्के लगता raha)Shhhhh सीईव अह्हह्ह्ह्ह आरामसे शहहहहह धीरे करो शह्ह्ह्हह्ह दर्द हो रहा है shhhhhhhhh(Lagatar चुदाई से में भी झाड़नेवाला था, मेरे धक्के जोर जोर से लग रहे थे, वो पूरी हिल रही थी, वो अपने दन्त से अपने हाथ को काट रही thi)Shhhhh आरामसे शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह मर जाउंगी यार शह्ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह>

शिव : कुछ नहीं होगा (में लगातार धक्के लगा रहा था, उनके कूल्हे भी बिस्तर से ऊपर हो गए थे, पैरो में हाथ फसा कर में लगातार उन्हें छोड़ रहा था)

माधुरी : धीमे शहहहहह अअअअअ अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह बहोत बड़ा है शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह (में लगातार धक्के लगा रहा था, वो मेरे हाथ पकड़ कर मुझे रोक रही थी, पर में चरम पर था तो में जोर जोर से धक्के लगता रहा, वो फिर झड़ने लगी और में भी उनकी छूट में झड़ने laga)Shhhhhhhhhhh Shiiiiiiiiiiiiiiiv (वो झटके खा रही थी और में भी, थोड़ी देर ऐसे hi रहने के बाद मेने उन्हें छोड़ा और साइड में लुढ़क गया, वो पेअर फैलाये पड़ी रही, हिल ने की भी ताकत नहीं थी शायद.)

शिव : (थोड़ी देर बाद में उनकी और घुमा और उनके स्तन को सहलाया)

माधुरी : शहहहहह बस शिव में थक गयी हु.

शिव : नहीं कर रहा में.
 
अपडेट 180

आज छुट्टी थी तो जूही सुबह उठ गयी, और सोचने लगी की आज सुबह भी स्टेडियम चली जाये, उसने शिव को फ़ोन लगाया, थोड़ी देर रिंग बजती रही पर शिव ने नहीं उठाया, दूसरी बार कॉल करने पर शिव ने उठाया,

शिव : Hello.

जूही : कहा हो?

शिव : क्या हुआ?

जूही : मेने जो पूछा उसका जवाब दो, कहा हो?

शिव : में बहार हु, क्या हुआ?

जूही :तुम सीरियस कब होंगे, तुम्हे क्या लगता है की ये कॉम्पिटिओं जित लिया तो सब हो गया, अभी और कड़ी म्हणत की जरुरत है, और तुम प्रैक्टिस पर गुलिया मर रहे हो.

शिव : सॉरी वो एक काम था तो आया था.

जूही : सब काम बाजु में रक्खो, वो इम्पोर्टेन्ट है की ये. तुम्हारी आवाज से लग रहा है की अभी सो कर उठे हो, है न?

शिव : है वोऊ..... (में क्या बोलता, क्यों की यही सच भी था)

जूही : इसका मतलब सुबह भी एक्सेरसिस नहीं की, है न?

शिव : वो वो....

जूही : कब आ रहे हो?

शिव : निकलता हु थोड़ी देर में.

जूही : जल्दी आओ. (कहते हुए उसने फ़ोन रख दिया)

मेने फटाफट कपडे पहने और बहार आया, भाभी वाले रूम को देखा तो वो बंद था, में निचे गया, और सीधा बहतरूम में घुस गया और पेशाब की. वह से में बहार निकला और अंदर जानेवाले दरवाजे पर खड़ा रहा, वो किचन था तो वह भाभी कुछ बना रही थी और आंटी कड़ी थी, वो अच्छे कपडे पहने हुए तैयार दिख रही थी, मुझे देख कर वो बोली,

आंटी : तुम उठ गए, (में बस मुस्कुराया).

शिव : (हिचकिचाते hue)Brush???

भाभी : में देती हु (वो मेरी और देख नहीं रही थी, पर उनके चेरे पर शर्मीली मुस्कान थी, वो कड़ी हुई और बहार आयी, उनकी चल में थोड़ी लंगड़ाहट थी, उन्होंने मुझे पेस्ट लता कर ब्रश दिया, एक पल मुस्कुरा के मेरी और देखा फिर अंदर चली गयी, में ब्रश करने लगा.

आंटी : बहार आयी, बीटा हमे पास के गांव में एक फंक्शन है तो जाना है, वो अकेले hi जानेवाले थे पर तुम थे तो उन्होंने मुझेभी चलने को कहा, बहु अकेली है तो में जा नहीं सकती थी पर तुम हो तो मेने सोचा की जा आती हु. (अब में उन्हें क्या बता ता की मुझे भी जाना है, मेरे मुँह में ब्रश था तो में कुछ नहीं बोलै) हम जल्दी आ जायेंगे, तुम तो हो न अभी. (अब उन्होंने इतना कह दिया था और मेरे भरोसे अपना प्रोग्राम बना लिया था, तैयार भी हो चुकी थी तो में क्या कहता, मेने बस है में शिर हिलाया, वो अंदर चली गयी, ब्रश कर के में अंदर गया तो वो वही कड़ी थी, मुझे वही बैठने के लिए कहा, भाभी ने मेरे लिए घी का पराठा एक डिश में रक्खा और मुझे दिया, और दूध भी दिया, तभी अंकल भी वह आये.

अंकल : जाना नहीं है क्या? (उन्होंने आंटी को देख कर कहा)

आंटी : है है चलिए (वो वापस मुद गए, आंटी ने भाभी को देख कर kaha)Madhu, हम जल्दी hi आ जायेंगे, शिव है तो में जा शक्ति हु, हम तो खा कर आएंगे, शिव और तेरे लिए कुछ अच्छा बना देना.

भाभी : जी मजी.

आंटी : अच्छा बीटा, हम जल्दी hi आ जायेंगे. (में बस मुस्कुराया और वो चली गयी, अब बचे थे में और भाभी, उन्होंने शिर से पल्लू हटा दिया और पराठा बना ने लगी. वो निचे hi बेथ कर बना रही थी. मेने एक नजर उनको देखा तो वो शरमाते हुए मुस्कुराने लगी पर मेरी और देख नहीं रही थी, में नास्ता करने laga.)(Madhuri नजर बचा के शिव को hi देख रही थी, उसके चेहरे पर परेशानी थी)

माधुरी : क्या हुआ? (मेने उनको देखा तो वो मुझे देख रही थी, मेने न में गर्दन hilayi)Paresani है कोई?

शिव : नहीं, कोई परेशानी नहीं है. (में नास्ता करने लगा, और अपनी hi सोच में था, जूही जिस तरह से दन्त रही थी, आज तो सहमत पक्की थी, पर में यहाँ से भी नहीं निकल सकता था, क्या करू समाज में नहीं आ रहा था, ऐसे hi सोचते हुए मेने नास्ता ख़तम किआ, उन्होंने भी मेरे साथ hi नास्ता किआ, उन्होंने थोड़ा सा hi खाया, में खड़ा हुआ और नहाने का सोचने लगा)

माधुरी : क्या हुआ, कुछ बोलोगे भी.

शिव : नहाना है.

माधुरी : क्या जल्दी है, नाहा लेना फिर. (में कुछ नहीं बोलै) अच्छा ठीक है, तुम चलो में टॉवल ले कर आती हु. (में बहार चला गया, और उनका इंतजार करने लगा, वो धीरे धीरे चलते हुए आई, में जनता था की शायद उनको दिक्कत है) अभी तक खड़े hi हो, नहाने नहीं बैठे.

शिव : वो टॉवल....

माधुरी : तो नहाने से पहले hi टॉवल का काम है क्या.

शिव : नहीं, पर... (में बोलते बोलते रुक गया, दरअसल मुझे नंगा हो कर hi नहाना था, कपडे तो दूसरे थे नहीं, तो वही कपडे वापस पहन ने थे)

माधुरी : क्या दिक्कत है बोलोगे नहीं तो कैसे पता चलेगा?

शिव : दूसरे कपडे है नहीं, तो... (माधुरी समाज गयी और शर्मा भी गयी)

माधुरी : तो क्या, मेरे अलावा और कोई नहीं है घर में. (उन्होंने शरमाते हुए कहा, में उनका मतलब समाज गया) और अगर भिगो डोज तो भी कोई दिक्कत नहीं है, में धो के सूखा दूंगी, सुख जायेंगे. (में क्या कहता, मेने शर्ट निकल दी, आस पास एक नजर दौड़ाई तो कोई था नहीं, वैसे भी गांव में घर पर टेरेस काम hi होते है, और यहाँ सब दिवार से कवर्ड था, मेने पंत और बनियान भी निकल दी, और खड़ा रहा, मेने भाभी की और देखा, वो मुस्कुराते हुए मुझे hi देख रही थी, में बाथरूम में गया, तो वो boli)Isse भी उतर दो, में धो देती हु.

शिव : नहीं रहने दीजिये, वैसे भी मुझे जल्दी जाना है.

माधुरी : (थोड़ी हैरानी se)Kyu?

शिव : काम है कुछ. (उनके चेहरे पर उदासी आ गयी, थोड़ी देर वो खामोस कड़ी रही, में समझने की कोशिस कर hi रहा था की उन्होंने आस पास देखा और मेरे पास आ गयी)

माधुरी : क्यों जाना है?

शिव : काम है.

माधुरी : मुझसे भी ज्यादा? (में क्या जवाब देता, में उनको देख रहा था) में अच्छी नहीं लगी? (उन्होंने मेरी आँखों में देखते हुए कहा) कोई गलती हो गयी क्या मुझसे? (मेरी प्रॉब्लम कुछ और थी और वो कुछ और समाज रही thi)(Madhuri को लग रहा था की शायद वो ठीक से साथ नहीं दे पायी, इस लिए शिव को उसके साथ मज़ा नहीं आया, शर्म और संकोच की वजह से वो सब नहीं कर पायी जो शिव चाहता tha)Me सब करुँगी शिव (कहते हुए उन्होंने मेरे लुंड पर हाथ रख दिया और उसे दबाने लगी, उनके छूटे hi मेरा लुंड खड़ा होने laga)Tum जैसे कहोगे वो में करुँगी.

शिव : आप गलत समाज रही है, वो बात नहीं है.

माधुरी : तो क्या बात है, घर में कोई भी नहीं है और तुम जाने की बात कर रहे हो, मेने ठीक से सब नहीं किआ था न, (में उन्हें देख रहा tha)Mene कभी नहीं किआ है शिव, शायद इस लिए नहीं पता था, पर में सब करुँगी (कहते हुए उन्होंने मेरे अंडरवियर में हाथ दाल दिया और मेरे लुंड को पकड़ लिया, मेरी भी सिसकी निकल गयी, वो कुछ और hi समाज रही थी पर उनकी हरकते मुझे उत्तेजित कर रही thi)Tum जो कहोगे में करुँगी (कहते हुए उन्होंने मेरी अंडरवियर निचे खिसका दी और मेरे लुंड को बहार निकल लिया, मेरे लुंड को पकड़ कर वो दबाने lagi)Muje सिखाओ कैसे करते है, में सब करुँगी शिव (उन्होंने मेरा लुंड मुँह में भर लिया, मेरी आंखे एक पल के लिए बंद हो गयी, वो घुटनो के बल बेथ गयी)

शिव : आपकी साड़ी ख़राब हो जाएगी.

माधुरी : (अपने मुँह से लुंड बहार निकलते hue)Ho जाने दो (उन्होंने फिर लुंड मुँह में भर लिया, वो अच्छे से तो नहीं कर रही थी क्यों की उन्हें आता hi नहीं था पर वो कोशिस कर रही थी, उनका ये उतावला पैन देख कर में मुस्कुराया, तभी उनकी नजर ऊपर hui)Kyu है रहे हो, मुझे नहीं आता इसलिए न (उन्होंने रोनी सूरत से कहा) इसीलिए जा रहे हो न?

शिव : (मेने उन्हें खड़ा किआ और बाथरूम की दीवाल से चिपका दिया और उनके होठो को चूसने लगा, मेने उन्हें हाथ से पकड़ रक्खा था, वो बस अपने होठ से मेरा जवाब दे रही थी, थोड़ी देर में उनके होठो को चुस्त रहा, उनकी सांसे उखाड़ने लगी, मेने उनके होठ छोड़े और उन्हें देखने लगा, वो उदास आँखों से मुझे देख रही थी, मुझे सच में उनपे प्यार आ रहा था, हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे और सांसे दुरुस्त कर रहे थे, थोड़ी देर बाद मेने kaha)Aap जैसा सोच रही hi वैसा नहीं है, मुझे प्रैक्टिस पर जाना होता है, कल भी नहीं गया था, वह एक हिटलर बैठी हुई है, उसका सुबह सुबह फ़ोन आ गया, मुझे दन्त रही थी तो मुझे जाना था, आपकी वजह से नहीं जा रहा था)

माधुरी : में अच्छी हु न, साठ सच बताना. (उनकी आँखों में अभी भी सवाल थे)

शिव : आप बहोत भोली हो भाभी, मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं है.

माधुरी : तो फिर रुक जाओ न. (उन्होंने रिक्वेस्ट भरे अंदाज में कहा)

शिव : अंकल आंटी के आने तक तो रुका हुआ hi हु न, पर उसके बाद मुझे जाना होगा, मुझे अगले कॉम्पिटिओं की तैयारियां करनी होती है.

माधुरी : मुझसे तो नाराज नहीं हो न?

शिव : पागल हो क्या? में क्यों नाराज होने लगा?

माधुरी : तुम मुझे सब सीखा देना, में सब अच्छे से करुँगी. (उन्होंने बहोत प्यार से कहा)

शिव : आप सब अच्छे से hi कर रही थी.

माधुरी : तुम नाराज नहीं हो न.

शिव : नहीं.

माधुरी : में नेहलौ?

शिव : आप भीग जाओगी. (उन्होंने दो पल के लिए सोचा, फिर वो पलट गयी और अपनी साड़ी उतरने लगी, में आश्चर्य से उन्हें hi देखने लगा, वो क्यों ये सब कर रही है समाज hi नहीं आ रहा था, उन्होंने साड़ी उतर दी और बहार रख दी, एक बार मुझे देखा और अपना ब्लाउज उतरने लगी, में बस उन्हें देख रहा था, ब्लाउज भी उन्होंने बहार फेंक दिया, फिर अपना पेटीकोट भी निकल दिया, मेरा लुंड पहले से hi खड़ा था जो अब ठुमके मारने लगा, वो थोड़ी साइड में हुई और मेरी और संकुचाते हुए देखा. मुझसे रहा नहीं गया और मेने उन्हें सीधा किआ और फिर से उन्हें दीवाल से लगा दिया और उनके होठो को चूमने लगा और साथ में उनके स्तन को ब्रा के ऊपर से hi दबाने लगा)

माधुरी : उम्मम्मम्मम उम्मम्मम्म (उन्होंने मेरा लुंड पकड़ लिया और दबाने लगी, मेने उनके हाथ को पकड़ा और उन्हें लुंड को आगे पीछे हिला कर संजय तो वो वैसा hi करने लगी, हम दोनों गहरी किश कर रहे थे, मेने उनकी ब्रा भी खोल दी और नंगे चुचो को मसलने लगा, उनसे बर्दास्त नहीं हुआ तो उन्होंने अपना मुँह घुमा लिया ताकि किश टूट जाये और जोर जोर से सांसे लेने lagi)haaaa फूऊऊऊ फूऊऊऊ हाआआ. (में झुक गया और उनके गले को चाट ते और चूमते हुए निचे गया और उनके स्तन को और निप्पल को चूसने laga)Shhhhhhh शहीीीिव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मुझे छोड़ के मात जाओ शहहहहह में सब करुँगी शह्ह्हह्ह्ह्ह जो कहोगे वो करुँगी शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (निप्पल को चूसते हुए में उनके कोहलो पर हाथ ले गया और उन्हें पंतय के साथ hi मसल diya)Shhhhhhh शीइइइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह में सब करुँगी शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (में मसलता रहा और वो सिस्किअ लेती रही, मेने उनकी पंतय को निचे खिसकाया और नंगे कूल्हे मसलने लगा, साथ में कूल्हों को फैला भी रहा था, वो एक हाथ से मेरा लुंड हिला रही थी और दूसरे हाथ को मेरे शिर में घुमा रही thi)Shiiiiiiiv शह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेने एक हाथ आगे ले गया और उनकी छूट को दबोच liya)Shhhhhhh हाआआआआ. (माधुरी को हल्का दर्द हो रहा था, पर वो कुछ नहीं boli)Shhhhhhh शीइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह (शिव की एक ऊँगली उसकी छूट में घुसने लगी, उसके चेहरे पर खुसी और दर्द के मिले झूले भाव चालक aaye)Shhhhh ahhhhhhhhhh शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : (मुझे याद आया की उन्हें दर्द hai)Apka दर्द?

माधुरी : नहीं है. (उन्होंने अपने आपको कराहते हुए रोक कर कहा)

शिव : जूथ बोल रही है न? (मुझे पता था उन्हें दर्द है)

माधुरी : जो होना है वो होने दो, मुझे परवाह नहीं.

शिव : में हमेसा के लिए नहीं जा रहा, वापस भी आऊंगा.

माधुरी : में कुछ नहीं जानती, अभी जो हो रहा है वो होने दो (वो कमरुत हो चुकी थी)

शिव : दर्द होगा. (मेने चेताया)

माधुरी : मर जाऊ तो भी परवाह नहीं .

शिव : इतनी बेसबर क्यों हो रही हो?

माधुरी : पता नहीं, शायद इतने दिनों तदपि हु इसलिए.

शिव : और कोई नहीं मिला? (उनके हाथ अचानक रुक गए, वो मुझे गुस्से से देखने लगी)

माधुरी : क्या समझते हो मुझे?

शिव : मेरे साथ किआ न, मेरी जगह कोई और होता तो, क्या नहीं करती? (वो मुझसे छूटने का प्रयास करने लगी, पर मेने छोड़ा नहीं)

माधुरी : छोड़ो मुझे.

शिव : क्यों?

माधुरी : कहा न छोडो मुझे.

शिव : मेने कुछ गलत तो नहीं कहा. (वो थोड़ी देर छत पाते फिर शांत हो गयी, और मुझे देखने लगी, उनकी आँखों में पानी आ गया)

माधुरी : रोनी आवाज में, सही कहा तुमने, अगर वो अच्छे होते तो ऐसे तुम्हारे सामने झालील न होना पड़ता मुझे (उनकी आँखों से आंसू टपक पड़े)

शिव : मेरे कहने का गलत मतलब निकल रही है आप, मेने तो वही कहा जो मुझे लगा.

माधुरी : (दो पल मुझे देखती रही फिर boli)Ho सकता है, पर अभी तुम मिल गए हो, मुझे जो पाना था वो में प् चुकी, अब किसी और की जरुरत नहीं मुझे.

शिव : अगर में न आया तो?

माधुरी : तो भी किसी और के साथ तो नहीं. मेने तुम्हारे साथ किआ तो तुम मुझे ऐसी वैसी समाज रहे हो क्या?

शिव : में बस पूछ रहा था, बुरा लगा हो तो माफ़ी चाहता हु.

माधुरी : मन की मुझे जरुरत थी पर में ऐसी नहीं की किसी के भी साथ ये सब कर लू, गांव में और भी लोग है, उनके साथ तो नहीं किआ मेने, मुझे तुम अच्छे लगे तो बहक गयी, अगर तुम मेरे बारे में ऐसा hi सोचते हो तो मुझे तुम्हारे साथ भी नहीं करना, में जैसे भी हो रह लुंगी, छोडो मुझे.

शिव : सॉरी बाबा, आइंदा ऐसा नहीं कहूंगा.

माधुरी : मुझे भी अपनी इज्जत प्यारी है, में मरना पसंद करुँगी, बे इज्जत हो कर जीना नहीं.

शिव : सॉरी कहा न.

माधुरी : आइंदा ऐसी बात की न तो देख लेना.

शिव : (मुस्कुराते hue)Kya देख लू?

माधुरी : (मेरे साइन में मुक्का मरते hue)Pehle रुलाते हो फिर मानते हो.

शिव : अभी मूड ठीक कर देता हु, (कहते हुए में घुटनो पर बेथ गया और उनकी पंतय को पूरा निकलते हुए उनकी छूट को चाटने और चूमने लगा, बालो से घिरा वो त्रिकोण आकर्षक था, कुछ hi पालो में वो सिस्किअ लेने लगी)

माधुरी : शहहहहह शीइइइइइइव, में तड़प रही हु इसका ये मतलब नहीं की किसी को भी अपने साथ ये करने दूंगी. शह्ह्हह्ह्ह्ह शह्ह्हह्ह्ह्ह (शिव अपनी जीभ अंदर दाल रहा था, उसने अपने पेअर और फैला दिए ताकि उसको और रास्ता mile)Shhhhhhh अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (मेने उनका पेअर ऊपर उठा दिया और नीचे झुक कर उनकी छूट को अच्छे से चाटने laga)Shhhhhh शीइइइइव. (छूट से टपकता रास में चाटने लगा, वो मेरे बाल नोच रही थी, में खड़ा हो गया और लुंड को छूट पर घिसने laga)Shhhhhhh अंदर चलो शिव. (मेने लुंड छेद पर लगाया और धक्का mara)Ahhhhhh माआआआ (वो मेरे कंधे पर दन्त गाड़ते हुए मुझसे लिपट गयी, मेने धीरे धीरे लुंड अंदर बहार करना सुरु किआ, एक तिहाई hi डाला tha)Shhhhhh शीइइइइइइइव शहहहहह अह्ह्ह्हह शह्ह्हह्ह्ह्ह (लुंड पर ढेर साफा पानी लगने लगा था जिस से लुंड चिकना हो चूका tha)Shhhhhh में वैसी नहीं हु शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : में जनता हु, सॉरी कहा न, अब नहीं कहूंगा आपको. दर्द हो रहा है?

माधुरी : होने दो, शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह, वो बहोत बड़ा है शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : क्या?

माधुरी : (शिव की आँखों में देखा फिर उसके गले लग गयी और कान के पास जा के धीरे से boli)Tumhara लुंड.

शिव : (मेरे चेहरे पर मुस्कान आ gayi)Achchha नहीं लगा?

माधुरी : बहोत अच्छा है शह्ह्ह्ह पर दर्द करता है शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह.

शिव : वो इस लिए की आपकी छूट बहोत छोटी है, एक दम टाइट.

माधुरी : शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तुम्हे अच्छी लगी न वो शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : है, बहोत मस्त है, मेरे लुंड को जकड रही है हम्म्म हम्म्म हम्म्म.

माधुरी : तुम्हारे लुंड से ढीली हो जाएगी शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह माआ शह्ह्ह्हह्ह शिईयिव शह्ह्ह्ह बहोत मज़ा आता है शह्ह्ह्ह, पहले क्यों नहीं किआ शह्ह्ह्ह इतने दिन तड़पना न पड़ता शहहहहह.

शिव : मुझे थोड़ी न पता था की आप मेरे साथ ऐसा करेगी. पता होता तो पहले hi आपको छोड़ देता.

माधुरी : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह सच में शहहहहह में अच्छी लगी तुम्हे शहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह.

शिव : है हम्म हम्म हम्म्म (मेने दूसरी भी तंग ऊपर उठा दी तो वो अब मेरी गॉड में थी)

माधुरी : मंईईई शहहहहह तुम बातो ताकतवाले हो शिव शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह अब बहोत अंदर तक जा रहा है शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह हा ऐसे hi शहहहहह मेरा निकलनेवाला है सीईव शहहहहह आईईईई शह्ह्ह्हह्ह तुम्हारा लुंड मस्त है शह्ह्हह्ह्ह्ह जितना दर्द देता है उतना hi मज़ा भी देता है शहहहहह आईई शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह जल्दी करो शिव शहहहहह अह्ह्ह्हह में गयीईइ शहहहहह ahhhhhhhh(Wo झटके खाने लगी, में रुक गया, थोड़ी देर वैसे hi रहा, वो थोड़ी शांत हुई तो उन्हें निचे उतरा, पर लुंड बहार नहीं निकला, उनके पेअर सीधे थे पर में लुंड अंदर बहार करने लगा, उन्होंने थोड़े पेअर फैला दिए और अंदर आते जाते लुंड को देखने लगी, वो कमर से थोड़ी आगे हो गयी ताकि लुंड अंदर जा sake)Shhhhh अह्ह्ह्ह शिईयिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह.

शिव : क्या देख रही है?

माधुरी : (मुस्कुराते hue)wo कैसे अंदर चला गया न, शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह shhhhhhh.(Thodi देर में हूँहे वैसे hi छोड़ता रहा, उनके कूल्हे पकड़ कर अपनी और खिंच रहा tha)Shhhh शहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शहहहहह. (में रुक गया और लुंड बहार निकल लिया, वो मुझे देखने लगी, मेने उन्हें पलट दिया और उन्हें झुकने के लिए बोलै तो वो शरमाते हुए झुक गयी और दीवाल पर अपने हाथ रख दिए, मेने फिर लुंड छूट में दाल diya)Ahhhhhh (फिर में छोड़ने laga)Shhhhh अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह शहहह शहहह कितना मज़ा आता है शिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह कास तुम मेरे पति होते शह्ह्ह्ह मुझपे ये बेवफाई का इलज़ाम नहीं लगता शहहहहह अह्ह्ह्हह, एक औरत को सब मिलता रहे तो वो क्यों किसी दूसरे के पास जाये शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह कस्सस शहहहहह. (मुझे दुःख हुआ की मेने वैसा कहा, उनके दिल पर लग गयी थी, में उनकी कमर पकड़ कर धक्के लगता रहा, लगातार चुदाई के बाद में झड़ने को हुआ, वो एक बार फिर झाड़ चुकी थी और फिर जड़ने को तैयार थी, अंदर तक धक्के मरते हुए मेने लुंड अंदर थोक दिया और वीर्य की पिचकारी उनके अंदर दाल di)Shhhhhhh shiiiiiiiiiiiv(Unhone मेरा एक हाथ पकड़ लिया, मेने लुंड बहार निकला तो साथ में वीर्य भी छूट से टपकने लगा, वो कड़ी हुई और मुझसे लिपट गयी, थोड़ी देर baad)Chalo अब में नेहला देती हु. (वो मेरे ऊपर पानी डालने लगी, और साबुन लगाने लगी, मेने भी उन पर पानी डाला, तो वो मुस्कुराने लगी, मेने भी साबुन लिया और उनको नहलाने लगा, उनके स्तन और गांड पर साबुन लगाने से मेरे लुंड में फिर से अकड़न आने लगी, जिसे देख कर वो शर्माने और मुस्कुराने लगी, शरमाते हुए hi सही पर उन्होंने मेरे लुंड पर भी साबुन लगाया, फिर उन्होंने पानी भी dala)Shir धो दू.

शिव : जैसा आपको ठीक लगे.

माधुरी : बेथ जाओ, मेरा हाथ ऊपर तक ठीक से नहीं पहुंचेगा. (में मुस्कुराते हुए बेथ गया, वो मेरे सामने hi कड़ी थी और मेरे शिर पर साबुन लगाने लगी, छूट मेरे सामने थी तो मेने उसे sehlaya)Shhh क्या कर रहे हो.

शिव : मेरे सामने है तो रहा नहीं गया. (वो बस मुस्कुरायी, में छूट में ऊँगली करने लगा, थोड़ी hi देर में वो साबुन लगा ते लगते रुक गयी और अपनी टंगे और फैला के मुझे ऊँगली डालने में मदद करने लगी)

माधुरी : शह्ह्ह्ह पागल कर दिया है तुमने. (कहते हुए उन्होंने मेरा हाथ हटाया और मेरी गॉड में बैठने लगी, साथ में लुंड को एडजस्ट किआ और छूट में लेने लगी, छेड़ पर लुंड टिका के वो बेथ गयी, लुंड अंदर चला gaya)Shhhhhhh. (में उनकी कमर पकड़ कर उन्हें ऊपर निचे करने लगा तो उन्होंने मेरे हाथ पकड़ liye)Aise hi रहने do.(Me रुक गया, वो ऐसे hi लुंड अंदर डलवाये मेरे शिर पर साबुन लगाने लगी, और साथ में कभी कभी ऊपर निचे हो कर लुंड को अंदर बहार करलेती थी, में उन्हें देख कर मुस्कुराया तो वो शर्मा gayi)Tum hi बिगड़ रहे हो मुझे. (कहते हुए साबुन लगाने लगी)

कुसुम के maa-baba भी दिव्या के मां पापा के साथ गए थे, वो अकेली hi घर पर थी, उसको पता था की शिव अभी भी दिव्या के घर पर hi है, दिव्या है नहीं तो यही चांस है की वो शिव से कुछ बाटे कर सके, उसने जल्दी जल्दी घर का काम निपटाया और दिव्या के घर की और निकल गयी, घर पर पहुंच कर उसने दरवाजा खत खतया, पर किसी ने जवाब नहीं दिया, वो सोच में पद गयी.

कुसुम : भाभीयी. (उसने आवाज लगायी, पर कोई जवाब नहीं था) जाली जैसा दरवाजा था तो अंदर दिख रहा था, घर में भी कोई नहीं दिख रहा था, उसको समाज hi नहीं आ रहा था, उसने ऐसे hi दरवाजे को खिंचा तो उसके आश्चर्य के साथ वो खुल गया, (आंटी और अंकल निकले थे तो उन्होंने दरवाजा अटका दिया था, और उसके बाद हम दोनों सुरु हो गए थे तो हमे पता hi नहीं था) वो अंदर आ गयी पर उसने आवाज नहीं लगायी, पता नहीं क्यों पर उसका दिल तेजी से धड़क रहा था, एतिहातन उसने दरवाजा अंदर से बंद कर दिया, वो बिना आवाज किये अंदर गयी, सब तरफ शांति थी, वो किचन में गयी वह भी कोई नहीं था, वो आगे बढ़ी, और पीछे के दरवाजे के पास पहुंच गयी, उसने वह भाभी के कपडे पड़े हुए देखे, शायद भाभी नाहा रही थी. उसने आस पास देखा पर उसको शिव कही नजर नहीं आ रहा था, शायद वो ऊपर होगा, उसका दिल छह रहा था की वो भी ऊपर चली जाये, पर उसको दर लग रहा था, अगर किसी ने पूछ तो वो क्या बताएगी, यही सोच कर वो वह कड़ी रही. फिर उसने ऊपर जाने का ख्याल निकल दिया क्यों की उसमे इतनी हिम्मत नहीं थी, वो भाभी से बात करने के लिए बाथरूम की और गयी पर जैसे hi नजदीक पहुंची तो उसे भाभी की आवाज सुनाई दी, उसके कान खड़े हो गए, क्यों की भाभी सिस्किअ ले रही थी. एक बार उसने सोचा की सायद परम भैया आ गए है, ये भी उसके लिए किसी अजूबे से काम नहीं था, उसने कभी ऐसा वैसा कुछ देखा नहीं था, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, वो बिना कोई आवाज किये थोड़ी और नजदीक गयी और आवाजे सुन ने लगी.

माधुरी : शह्ह्ह्हह्ह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह.

कुसुम के रोंगटे खड़े हो गए, उसको यकीं नहीं हो रहा था की उसने जो सुना वो सही सुना क्या? भाभी ने शिव का नाम बोलै था, वो दर के मरे कंपनी लगी, उसने सोचा नहीं था की भाभी और शिव साथ में है. वो चुप चाप सुन ने लगी की उसको कोई भ्रम तो नहीं हुआ न, पर फिर भाभी ने शिव का नाम लिया, अब उसको यकीं हो गया था की अंदर शिव और भाभी hi है. उसका शरीर कंपनी लगा, वो भाग जाना चाहती थी पर अंदर से आती गर्म गर्म सिसकीओ ने उसके पाव जकड लिए थे.

(अंदर)

माधुरी : क्या कर रहे हो, पहले ठीक से नाहा लो, अंदर जा के जो करना है कर लेना.

शिव : (भाभी को बैठे बैठे hi छोड़ रहा tha)Kyu आपको मज़ा नहीं आ रहा?

माधुरी : (मुस्कुराते hue)Aa रहा है, पर वैसे ज्यादा मजा आएगा. (वो लुंड पर से उठ गयी, और शिव पर पानी डालने लगी, शिव उनके कूल्हों पर और झांग पर हाथ फेर रहा tha)Sidhe बैठो न, क्यों तंग कर रहे हो. (ऐसे hi उन्होंने शिव को नेहला diya)Tum जाओ में थोड़ी देर में आती हु.

शिव : कहा जाऊ.

माधुरी : (सोचते hue)Niche रूम है, वह बैठो में आती हु.

शिव : आप भी चलो न.

माधुरी : जाओ न, क्यों तंग कर रहे हो, पांच मिनट में आती हु न. (उसने प्यार से कहा)

शिव : ठीक है. (में कपडे हाथ में ले कर दरवाजा खोल कर बहार निकला, मेने आस पास देखा, कोई दिख नहीं रहा था, में अंदर गया, और रूम में चला गया. (कुसुम पहले hi उनकी बाते सुन कर वह से भाग ली थी, बिना आवाज किये वो आगे वाले रूम के सोफे के पीछे चुप गयी थी, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, वो क्या करे कुछ समाज में नहीं आ रहा था, वो बभी को जानती थी, और शिव को भी, उसकी नजर में दोनों hi बहोत अच्छे थे, तो फिर ये दोनों ऐसा क्यों कर रहे है)

कुसुम ने देखा की शिव, दिव्या के रूम में चला गया, वो दरी हुई थी की कोई उसको देख न ले, तभी उसने भाभी को आते देखा, वो सिर्फ टॉवल लपेट कर आ रही थी, वो हैरान थी की शिव के होते भी वो सिर्फ टॉवल में है, वो भी रूम में चली गयी, थोड़ी देर तक वो रुकी रही, रूम से कुछ आवाजे आ रही थी पर उसको ठीक से सुनाई नहीं दे रहा था, वो बिना आवाज किये बहार निकली और छुपते छुपाते दीवाल के सहारे दरवाजे के पास गयी, दरवाजा खुला hi था, जैसे दोनों को किसी का दर नहीं था, उसने देखा की शिव लेता हुआ है और भाभी पूरी नंगी हो चुकी है और शिव का लुंड चूस रही है, दो बाटे उसके लिए शॉकिंग थी, एक तो भाभी का ऐसा करना और दूसरा शिव का वो बड़ा लुंड, उसके पशीने छूटने लगे, वो देख रही थी की जिसे वो इतनी सीधी समाज रही थी वो भाभी शिव के लुंड को अपने मुँह में ले कर चूस रही थी,





वो पहली बार ऐसा कुछ देख रही थी, दर और उत्तेजना से उसका शरीर कैंप रहा था, तभी शिव ने भाभी को अपने ऊपर कर लिया, शिव का मुँह नहीं दिख रहा था पर वो भाभी के दो पैरो के बिच में था, भाभी लुंड चूस रही थी जो उसको स्पस्ट दिख रहा था, उसको अपने मुँह में सर सराहत होने लगी, उसने अपने होठो पर जीभ फिराई, उसका गाला सुख रहा था, वो चुपके से सब देख रही थी, उसको अजीब लग रहा था की भाभी कैसे उस लुंड को चूस रही है, उन्हें गन्दा भी नहीं लग रहा था. थोड़ी देर बाद शिव ने उन्हें अपनी और कर लिया, भाभी अपने पेअर फैला कर शिव के ऊपर बेथ गयी, उनकी छूट पूरी गीली थी, भाभी थोड़ी ऊपर उठी और शिव ने लुंड छूट पर सेट किआ, वो वापस निचे हुई तो उसके आश्चर्य के बिच लुंड छूट में जाने लगा, इतना बड़ा डंडा भाभी के छेड़ में घुस रहा था, वो ध्यान से देख रही थी, दोनों के मुँह दूसरी और थे तो उसे थोड़ा दर काम लग रहा था.

माधुरी : Ahhhhhhhhhh shhhhhhhhhhhh (वो रुक गयी और boli)Muje निचे लेता लो न.





शिव : वो भी करूँगा, अभी आप ऐसे hi रहिये (कहते हुए शिव उनके कूल्हे दबाने लगा और उनको ऊपर निचे करने लगा, लुंड अंदर बहार हो रहा था, कुसुम की उत्तेजना ने दर की जगह ले ली थी, उसको अपने पेअर के बिच चिकनाहट और सर सराहत महसूस होने लगी, जैसे जैसे लुंड अंदर बहार हो रहा था, उसकी छूट गीली होती जा रही थी, उसके हाथ अपनी छूट पर पहुंच गए और वो उसे दबाने लगी, अंदर से भाभी की सिस्किअ आ रही थी)





माधुरी : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शहहहहह शह्ह्ह्ह शिईयिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह. (कुसुम छूट में आते जाते लुंड को स्पस्ट देख रही thi)Shhhhh अह्हह्ह्ह्ह, उम्म्म उम्मम्मम (वो शिव को चूमने लगी, थोड़ी hi देर में शिव के धक्के तेज हो gaye)ahhhh अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ahhhhh.(Bhabhi शिव की छाती पर लेती आहे भर रही थी) (कुसुम चुपके से सब देख रही थी, शिव ने उन्हें घोड़ी बना दिया, और पीछे से छोड़ रहा था,

शिव का मजबूत शरीर दिख रहा था और भाभी की आहे सुनाई दे रही थी, थोड़ी देर बाद उन्हें निचे उलटी लेता कर शिव धक्के लगा रहा था, भाभी को दर्द हो रहा था या मज़ा आ रहा था वो समाज नहीं प् रही थी, भाभी ने एक बार भी शिव को रोका नहीं tha)Shhhhh शिईयिव मेरा निकलने वाला है शहहहहह)

शिव : मेरा भी (दोनों लगे हुए थे, शिव उन्हें निचे दबोचे लगातार लुंड अंदर बहार कर रहा था, कुसुम खड़े खड़े अपनी छूट को दबोच रही थी, एक अजीब सं सनहत उसके शरीर में महसूस हो रही थी, हुंकार लगते हुए शिव जोर जोर से लुंड अंदर बहार कर रहा था, आखिर कर वो पूरा दाल के रुक गया, बहभी कराह उठी, थोड़ी देर बाद शिव साइड में हुआ तो उसने देखा की भाभी की छूट से सफ़ेद सफ़ेद गधा तरल निकल रहा था, वो वैसे hi उलटी लेती हुई थी, थोड़ी देर बाद शिव उठा तो वो दर गयी और हड़बड़ाहट से भागी और सोफे के पीछे छुप गयी)

मेने कोई आवाज सुनी, पहले तो मुझे लगा की वहम है, पर फिर भी में टॉवल लपेट कर बहार आया, बहार कोई नहीं था, में सब ध्यान से देखने लगा तभी मुझे एहसास हुआ की किसी की सांसे सुनाई दे रही है, बहोत धीमी थी पर आवाज थी, में आस पास देखते हुए घूम रहा था की मेरी नजर सॉफ्ट के पीछे किसी लड़की पर गयी, में सच में दर गया की कोण है, दर इस बात का था की अभी मेरे और भाभी के बिच जो हुआ है वो यक़ीनन इस लड़की ने देखा है, में घूम कर उसके शिर के पास गया तो उसने ऊपर देखा, वो भी दर रही थी, ये कुसुम थी, मुझे देख कर वो कड़ी हो गयी, दर मुझे भी लग रहा था, मेने उसका हाथ पकड़ा और साइड में ले गया.

शिव : तुम यहाँ? (वो भी दरी हुई थी और मुझे देख रही थी) आवाज मात करना (मेने फुसफुसाते हुए कहा, उसे वही खड़ा कर के में भाभी को देखने गया तो वो अभी भी वैसे hi नंगी उलटी लेती थी, में वापस कुसुम के पास आया, उसके एक दम नजदीक खड़ा था में, मेने फुसफुसाते हुए kaha)Kab आयी तुम? (वो कुछ बोल नहीं रही थी बस मुझे देख रही थी और जोर जोर से सांसे ले रही thi)Tum जाओ, भाभी ने देख लिया तो गजब हो जायेगा. प्लीज किसी को बताना मत (वो अभी भी मूर्ति बानी कड़ी थी, एक एक पल मुझे टेंशन दे रहा tha)Tum सुन रही हो na(Mene उसको झंझोड़ते हुए कहा तो वो मेरे शाइन से लग गयी, में उलझन में tha)Kusum, मेरी बात suno(Usko दूर करते हुए मेने कहा, वो मेरी आँखों में देख रही thi)Hum बाद में बात करते है, समाज रही हो na(Usne है में गर्दन hilayi)Abhi तुम जाओ.

कुसुम : (उसको भी पता नहीं क्या सूजी तो boli)Me घर पे अकेली हु. (उसने धीरे से कहा)

शिव : तो?

कुसुम : कुछ नहीं (कहते हुए वो दरवाजे की और बढ़ी, और दरवाजा खोल कर चली गयी, में थोड़ी देर वही खड़ा रहा और सोच रहा था की ये क्या हो गया, कही ये दिव्या को न बता दे, उस से बात करना जरुरी था, मेने दरवाजा बंद किआ और रूम में आया, भाभी कड़ी हो रही थी)

माधुरी : दरवाजे की आवाज आयी?

शिव : (में क्या bolta)Ha वो खुला था तो मेने बंद कर दिया. (मुझे और कुछ नहीं सुजा तो मेने कहा)

माधुरी : (घबराते hue)Hay राम, पिताजी और मजी गए तो मेने देखा hi नहीं था, इतनी बड़ी गलती कैसे कर सकती हु me(apane आपको दोष देते हुए वो boli)Agar कोई आ जाता तो क्या होता? जल्दी मेरे कपडे ले आओ, बहार पड़े है. (जितना मज़ा किआ था वो सब एक पल में रफू चक्कर हो गया था, उसकी जगह दर ने ले ली थी, में क्या बता ता की जो होना था वो हो चूका है, मेने उन्हें कपडे दिए और अपने भी कपडे पहन लिए, कपडे पहन के वो बहार निकली और आस पास का जायजा लिया, सब ठीक लग रहा था, उसकी जान में जान आयी, वो वापस अंदर aayi)Bal बल बच गए, मुझे ध्यान hi नहीं रहा, (वो पानी ले आयी और मुझे देने लगी, मेने पानी पिया, सब सही देख कर अब वो निश्चिंत हो गयी थी, उन्होंने भी पानी pia)Kitni देर हो गयी, क्या खाओगे?

शिव : कुछ भी चलेगा.

माधुरी : (मुस्कुराते hue)Thik है तुम बैठो, टीवी देखो में अभी बना देती हु.

शिव : आप बनाइये में थोड़ी देर में आया.

माधुरी : कहा जा रहे हो?

शिव : काम है, बस थोड़ी देर में आया.

माधुरी : ठीक है, जल्दी आना.

में वह से निकल गया, कुसुम के घर के पास पंहुचा, एकल दोकल लोग आ जा रहे थे, मेने दरवजा खटकाया तो कुसुम ने hi खोला, वो भी दर रही थी, उसने आस पास देखा और मुझे अंदर आने के लिए रास्ता दिया, जैसे hi में अंदर आया, उसने दरवाजा बंद कर दिया, में उस से वही बात कर के जानेवाला था.

शिव : देखो कुसुम....

कुसुम : शहहहहह (मुझे चुप रहने का इस्सर करते हुए वो मेरा हाथ पकड़ कर अंदर खिंच के ले गयी, में भी अंदर चला गया, अंदर जाते hi वो दरवाजे के पीछे कड़ी हो गयी, उसने मेरा हाथ पकड़ा था तो में उसके सामने था, वो हांफ ते हुए मुझे देख रही थी)

शिव : किसी को बोलना mat(Mene रिक्वेस्ट की)

कुसुम : (हलकी सी muskurayi)Me किसी को नहीं बताउंगी.

शिव : दिव्या को भी nahi(Mene जोर दे कर कहा)

कुसुम : है, उसे भी नहीं कहूँगी कुछ.

शिव : थैंक यू कुसुम, तुमने दिल का बोझ हल्का कर दिया, जैसा तुम समाज रही हो waisaaaa.....(Mera वाकया पूरा होता उस से पहले hi वो मुझे किश करने लगी, में हड़बड़ा गया, पर उसने मेरा शिर पकड़ लिया था और मेरे होठो पर होठ रख दिए थे, किस करने में तो ये भी अनादि hi थी, शायद पहली hi बार कर रही थी, में वैसे hi खड़ा रहा, थोड़ी देर वो मुझसे चिपकी रही फिर अलग हुई, उसके चेहरे पर एक खुसी थी, वो शर्मा भी रही थी पर साथ में मुस्कुरा भी रही थी)

कुसुम : ी लव यू शिव (उसने मुझे ी लव यू कहा था, पर में समाज सकता था की ये प्यार वाला ी लव यू नहीं है, पर इस उम्र में जैसा लगता है की हमे प्यार हो गया है उस तरह का ी लव यू था, अट्रैक्शन वाला)

शिव : देखो कुसुम...

कुसुम : तुम दिव्या को प्यार करते हो, में जानती हु.

शिव : तुम समाज नहीं रही हो, ये प्यार नहीं है.

कुसुम : मुझे तुम बहोत अच्छे लगते हो शिव, ी रॉय लव यू.

शिव : (बा में क्या संजो isko)Achchha ठीक है, पर तुम तो जानती हो न की Divya...(Mene बात अधूरी छोड़ दी)

कुसुम : बूत ी रियली लव यू.

शिव : हम बाद में बात करेंगे.

कुसुम : तुम दिव्या की होते माधुरी भाभी के साथ प्यार कर सकते हो तो मेरे साथ क्यों नहीं?

शिव : तुम्हे अच्छा लगेगा की में दुसरो से भी प्यार करू.

कुसुम : मुझे नहीं पता, मुझे इतना पता है की में तुमसे प्यार करती हु, में पहले hi कह देती पर दिव्या ने पहले बोल दिया. (उसने मायूसी से कहा)

शिव : हम शांति से बात करेंगे, अभी मुझे जाना है.

कुसुम : मम्मी पापा को आने में देर है abhi(Usne शरमाते हुए कहा, में उसकी बात का मतलब समाज रहा था, पर में क्या जवाब देता)

शिव : हम बाद में बात करेंगे.

कुसुम : (मायूस होते hue)Me खूबसूरत नहीं हु?

शिव : (अब में क्या कहु इस लड़की ko)Tum हो, पर इसका मतलब ये नहीं की में...

कुसुम : में किसी से नहीं कहूँगी, प्रॉमिस.

शिव : तुम आखिर चाहती क्या हो? (उसने शिर झुका लिया और जमीं पर अपने पेअर के नाख़ून से जमीं कुतरने लगी, मेने उसे samjaya)Dekho कुसुम, तुम जानती हो की मेरे पास टाइम नहीं होता, सिर्फ है कह देने से कुछ नहीं होगा, में वैसे कभी टाइम नहीं दे पाउँगा.

कुसुम : चलेगा, जब किस्मत में होगा तब मिलेंगे, बस, कभी कभी फ़ोन कर लेना, इतना तो दे सकते हो न (उसने उदास हो कर कहा)

शिव : ठीक है, अब में जाऊ.

कुसुम : (उदास हो कर मुझे देखते हुए boli)Abhi पापा को आने में देर है. पता नहीं फिर कब मिलोगे.

शिव : (वो मेरी और बड़ी चाहत से देख रही थी, वैसे भी उसका मुँह बंद रखना जरुरी था, मेने ुको हाथ से पकड़ कर दीवाल से चिपका diya)Tum लड़कीओ को एक बार मन करू समाज में नहीं आता, क्यों मरना चाहती हो (वो मेरी आँखों में देख रही थी, बोल कुछ नहीं रही थी, वो क्या चाहती थी में पहचानता tha)Me निचे झुका और उसके होठो पर होठ रख दिए और उसको निचोड़ने लगा, वो आंखे बंद किये हुए मुझे किश करने दे रही थी, मेने उसके हाथ छोड़े और एक हाथ से उसकी कमर पकड़ी और दूसरा हाथ उसके बूब्स के निचे पेट पर रक्खा, जैसे hi मेने उसके हाथ छोड़े वो मेरे गले में बहे दाल कर लिपट गयी, मेने बिना देरी किये उसके एक स्तन को मसल दिया तो वाइल्ड तरीके से मुझे किश करने लगी, लड़कीओ के जैसे hi माध्यम आकर के स्तन थे, वो इतनी उत्तेजित हो गयी थी की उस से साँस लेना दूभर हो गया तो उसने अपना मुँह छुड़ा लिया, में उसके गले को चूमने लगा और एक हाथ को निचे ले जा कर कूल्हों को दबोचने लगा, मेरा लुंड फुदकने लगा, उसके कूल्हों को जोर से मसल दिया)

कुसुम :शह्ह्हह्ह्ह्ह shhhhhhhhhh (शिव पहला लड़का था जो उसके साथ ये सब कर रहा था, जबसे जवान हुई थी उसकी भी चाहत थी की कोई लड़का हो जो उसके साथ ऐसे प्यार करे, पर उसको कोई पसंद hi नहीं आता था, शिव से वो इम्प्रेस हो गयी थी पर दिव्या की वजह से वो कुछ कह नहीं पायी, आज अनायास hi उसको मौका मिल गया था, वो इस सुनहरे मौके का फायदा उठा लेना चाहती thi)Shhhhhh (सिस्किअ लेते हुए वो शिव से लिपट रही thi)(Mere भी मान में लळलच जागने लगा था था, मेने उसकी छूट को सलवार के ऊपर से hi दबाया तो वो चिहुँक गयी, उसने मेरा हाथ आपकद liya)Shhhhhhh वह नहीं शीइइइइव.

शिव : अभी तो कह रही थी की कोई नहीं आएगा?

कुसुम : (बेबसी से शिव की आँखों में देखते hue)Muje दर लग रहा है.

शिव : किस बात का?

कुसुम : वो बहोत बड़ा है. (उसकी बात सुन कर में मुस्कुराया तो वो शर्मा गयी)

शिव : तुमने तो सब देखा न, कैसे वो उनके अंदर जा रहा था.

कुसुम : है, देखा था, पर वो बड़ी है, मेने सुना भी है की लड़की पहली बार करती है तो बहोत दर्द होता है और खून भी निकलता है, सच में ऐसा होता है? (उसने मासूमियत से पूछा)

शिव : है होता है.

कुसुम : इसीलिए मुझे दर लग रहा है.

शिव : तो फिर तुमने मुझे बुलाया क्यों, चाहती क्या हो तुम?

कुसुम : मुझे नहीं पता, बस इतना पता है की तुम मुझे अच्छे लगते हो, जब भी कोई फिल्म देखती हु तो हीरो की जगह तुम hi दिखाई देते हो.

शिव : (में muskurya)Me कोई हीरो नहीं हु.

कुसुम : मुझे तो लगते हो, मेने देखा है की हीरो के पीछे कैसे लड़कीअ पागल होती है, वो अच्छा होता है और ताकतवर भी, तुम में सब है. (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : पर अभी अभी तुमने जो देखा वो हीरो तो नहीं करता.

कुसुम : वो सब फिल्म में थोड़ी न दिखते है, क्या पता करता हो वो.

शिव : अच्छा ठीक है, तुम्हे जो समझना है वो संजो, पर अब मुझे जाना होगा.

कुसुम : क्यों?

शिव : मुझे वापस भी जाना है और अभी भाभी ने खाना भी बनाया है तो वो इंतजार कर रही होगी.

कुसुम : तुम्हे बुरा लगा क्या, मुझे सच में दर लग रहा है, फिर भी अगर तुम वही सब करना चाहते हो तो कर सकते हो.

शिव : अरे पागल, इसलिए में नहीं कह रहा, मुझे सच में जाना है.

कुसुम : थोड़ी देर रुको न.

शिव : ऐसे रुकना ठीक नहीं, अगर कुछ कर दूंगा तो तुम hi चिल्लाओगी.

कुसुम : अगर तुम्हे वो hi करना होता तो अब तक दिव्या के साथ कर चुके होते.

शिव : तो तुम्हे सब पता है.

कुसुम : हम अच्छी सहेलिया है.

शिव : मेने उस से भी कहा था, में ये प्यार व्यार के चक्कर में नहीं पड़ना चाहता, तुम्हे भी दूर hi रहना चाहिए.

कुसुम : मेने भी यही सोचा था, पर तुम्हे देख कर में रोक नहीं पायी.

शिव : ऐसी बाटे मात करो यार, में कुछ कर न दू.

कुसुम : क्या करना चाहते हो?

शिव : अगर में कहु की मुझे तुम्हे देखना है तो?

कुसुम : वो तो तुम देख hi रहे हो.

शिव : ऐसे नहीं, बिना कपड़ो के.

कुसुम : (वो शर्मा गयी, एक दो पल वो खामोस रही, उसके दिल में भी उमंगें उठ रही थी, उसको पता था की लड़के लड़कीअ क्या क्या करते है, वो सब सुन के उसको भी मज़ा आता था, वो शिव को पसंद करती थी, उसका भी दिल कर रहा था, ज्यादा नहीं तो थोड़ा hi सही, उसने शरमाते हुए kaha)Kya तुम सच में मुझे वैसे देखना चाहते हो? (में कुछ नहीं bola)Kya देखना है? (उसने शरमाते हुए कहा)

शिव : में बस मज़ाक कर रहा था.

कुसुम : अगर देखना चाहो तो देख सकते हो (उसने नज़ारे झुका के शरमाते हुए कहा)

शिव : (वो पूरा मौका दे रही थी, मेने बात को टालने के लिए hi kaha)Thik है, किसी दिन देखूंगा.

कुसुम : फिर कभी क्यों?. (वो बोलते बोलते शर्मा रही थी, उसका शरीर उत्तेजना से कंपनी लगा था, मेने उसको ऊपर से नई छे तक देखा, तो वो संकुचन लगी, एक और तो उसको शर्म आ रही थी पर फिर भी उसे सब करना था)

शिव : अभी टाइम नहीं है कुसुम, भाभी खाने पे इंतजार कर रही होगी.

कुसुम : (मेरे गले लग gayi)Fir मिलोगे न मुझे, में दिव्या को कुछ नहीं बताउंगी, उसके वह आओ तो मुझसे भी मिलना. मिलोगे न?

शिव : है मिलूंगा, पर मेने पहले hi कहा, मेरे पास टाइम नहीं होता है, तुम जानती hi हो, यहाँ भी में नहीं आ सकता.

कुसुम : ठीक है, पर जब भी आओ तो मुझसे मिलने आना पड़ेगा.

शिव : ठीक है, अब में जाऊ?

उसके बाद वो मुझे दरवाजे तक छोड़ने आयी, में वापस दिव्या के घर चला गया. भाभी मेरा hi इंतजार कर रही थी, हमने खाना खाया, अभी हम उठे hi थे की अंकल और आंटी आ गए. उसके बाद में वह से सहर की और निकल गया, बस तो मिली नहीं पर कुछ रिक्शा थी जो सबको ले जाती थी, में उसमे hi बेथ गया, मेने जूही को फ़ोन कर दिया था वो मुझे लेने आ गयी, उस टाइम पर तो कुछ नहीं बोली पर वो सीधे मुझे अपने घर ले गयी. घर में घुसते hi वो सुरु हो गयी

जूही : तुम्हे क्या लगता है, ये सब इतना आसान है, नेशनल लेवल के खिलाडी होंगे अब और नेशनल hi क्यों में चाहती हु की तुम इंटरनेशनल भी खेलो, पर क्या ये सब ऐसे hi हो जायेगा, जब देखो तब किसी न किसी काम के लिए चले जाते हो, ऐसा कोनसा काम होता है तुम्हारा बताओ मुझे?

शिव : (वो सच में भड़की हुई thi)wo मनीषा मैडम ने कहा था इस लिए जाना पड़ा.

जूही : कभी मनीषा मैडम का काम होता है, कभी किसी को ससुराल छोड़ने जाना होता है, कभी ये कभी वो, सब के लिए टाइम है बस स्पोर्ट्स के लिए नहीं है क्यों?

शिव : (उसका हाथ पकड़ते हुए मेने kaha)Aisa नहीं है यार.

जूही : हाथ मत लगाओ मुझे, दूर से बात करो. (उसने गुस्से से कहा)

शिव : इतना भी क्या गुस्सा, में कर रहा हु न सब.

जूही : मेने क्या कहा, इतने से कुछ नहीं होगा, अब ज्यादा म्हणत करनी पड़ेगी, अब बिना मुझसे पूछे कही गए न तो तुम्हारी खेर नहीं.

शिव : ठीक है बाबा, नहीं जाऊंगा, बस. अभी घर तो जा सकता हु न की वो भी नहीं जाना है.

जूही : वो में तुम्हे छोड़ दूंगी, और कल में तुम्हारी स्कूल भी आ रही हु, तुम्हारे प्रिंसिपल से मिलने के लिए.

शिव : अब प्रिंसिपल से क्या काम है?

जूही : तुम्हे पता है मेने स्पोर्ट्स के लिए अपनी पढ़ाई तक छोड़ दी, तुम्हे भी कोम्प्रोमाईज़ करना पड़ेगा, सुबह तुम प्रैक्टिस करोगे, में आ रही हु बात करने. और वैसे भी अब कुछ दिनों में तुम्हे और मुझे कैंप जाना पड़ेगा, तब भी स्कूल मिस होगा hi.

शिव : स्कूल क्यों बिगड़ रही हो, में और टाइम तो कर लूंगा न.

जूही : तुम्हारा स्कूल सुबह का है, और प्रैक्टिस सुबह और शाम को hi की जाती है, दो पहर को धुप होती है. मेने बिनाभाभी से भी बात कर ली है, सुबह उनके hi लेक्चर होते है, वो तुम्हे दोपहर में पढ़ा देगी.

शिव : में जॉब कब जाऊंगा?

जूही : वो में नहीं जानती, टाइम हो तो जाना वर्ण नहीं, और एक साल जॉब नहीं की तो क्या लूट जायेगा तुम्हारा. एक बार नाम और ख़िताब कमा लो जॉब अपने आप मिल जाएगी. और ये इधर उधर घूमना है न तुम्हारा वो बंद कर दो समजे. रात को जहा जाना है जाओ.

शिव : तुम तो हुकुम चलने लगी. (मेने ऐसे hi मुँह बना के कहा)

जूही : है चलाऊंगी, हुकुम भी चलाऊंगी और लगाम भी अपने हाथ में रक्खूंगी, जो करना है कर लो.

शिव : अभी तो फ़िलहाल घर छोड़ दो, वही बहोत है.

जूही : (मुस्कुराते hue)Chalo. (वो मुझे घर छोड़ने आयी, पर रस्ते भर सुना रही थी, वो घर के अन्दर भी आयी, लतादिदी को बुलाया)

लता : (मुझे और जूही को देख kar)Kya हुआ?

जूही : क्या हुआ, क्या? अब इसका फालतू घूमना फिरना बंद, इसको प्रैक्टिस करवानी है, समाज रही हो न.

लता : (मेरा बचाव करते hue)Wo करता तो है.

जूही : उतने से नहीं चलेगा, तुम चाहती हो नाकि ये बड़ा खिलाडी बने?

लता : है, इसमें पूछनेवाली क्या बात है.

जूही : तो क्या ऐसे hi बड़ा खिलाडी बन जायेगा, यहाँ वह घूमता रहता है हर समय.

रंजन : (वो और विणा भी वह आ गयी thi)Sach कहती हो दीदी, इसके पेअर घर पे टिकते hi नहीं है.

लता : (उसको दन्त ते hue)Chup.

रंजन : मुझे चुप करने से क्या होगा, बिना बताये चला जाता है कब आएगा पता नहीं, बस यहाँ वह घूमता रहता है. (मेरे सामने नटखट स्माइल देते हुए वो बोली)

शिव : है अब तू hi बाकि थी.

रंजन : मेने क्या गलत कहा, सबको पता है. पूछो सरितादिदी से.

सरितादिदी : (जो उसके पास hi कड़ी thi)Aisa नहीं है, वो सब करता है, ये तो बस ऐसे hi कह रही है.

रंजन : मुझे क्या, में तो इसके भले के लिए hi कह रही थी.

जूही : अब इसको ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस करनी है, उसका पूरा सेडुल में देख लुंगी, अभी पांच बजे लेने आउंगी, समजे? (मेने बस है में शिर हिलाया, वो चली गयी)

लता : क्या हुआ, क्यों भड़क रही थी ये?

शिव : उसको छोडो में देख लूंगा, वो थोड़ी परेशान है, अब कॉम्पिटिओं का लेवल बढ़ गया है न.

लता : तो तुजे म्हणत तो करनी hi पड़ेगी न, उसमे वो क्या गलत कह रही है. (वो मुझे समजा रही थी)

शिव : (मुस्कुराते hue)To मेने कब मन किआ है. (अभी में बात कर रहा था की जहान्वी का फ़ोन आया, लता की और फ़ोन दिखा kar)Ab ये देखो, जॉब पर नहीं गया तो ये फ़ोन कर रही है.

लता : जायेगा नहीं तो पूछे गई hi, बात कर ले.

शिव : (मेने फ़ोन uthaya)Hello.

जहान्वी : कहा हो? आये क्यों नहीं?

शिव : में बहार था, अभी घर पे आया हु.

जहान्वी : (उदास हो kar)To तुम आजभी नहीं आओगे?

शिव : आज तो मुश्किल है.

जहान्वी : थोड़ी देर के लिए आ जाओ.

शिव : कोई खास काम था क्या?

जहान्वी : काम हो तभी hi आओगे क्या?

शिव : पांच बजे मुझे प्रैक्टिस पर भी जाना है इस लिए पूछ रहा था.

जहान्वी : ठीक है, रखती हु (उसने उदास हो कर कहा, और फ़ोन रख दिया, में समाज सकता था की वो उदास है पर में इसमें कुछ नहीं कर सकता था, जूही की बात मुझे सही लग रही थी की अभी मेरा पूरा फोकस स्पोर्ट्स पर hi होना चाहिए, मेने सबसे बात की तब तक तो शाम भी हो गयी और जूही मुझे लेने आ गयी)

शिव : में तुम्हारे घर की और hi आ रहा था.

जूही : मुझे भरोसा नहीं है, लो चला लो. (वो स्कूटर से निचे उतर गयी, में स्कूटर पर बेथ गया, वो मेरे पीछे बेथ गयी, जैसे hi हम बहार निकले मेरी कमर में हाथ डालते हुए वो मेरे नजदीक हो गयी, इतना नजदीक की उसके स्तन मुझे महसूस हो रहे थे. पर मेने ज्यादा ध्यान नहीं दिया हम स्टेडियम पहुंच गए)

वह हम प्रैक्टिस करने लगे. वो अंदर से एक छोटे परकटे जैसा कुछ ले आयी और मेरे साथ बंद दिया और मुझे दौड़ने को कहा. हवा मुझे बहोत ताकत से पीछे खिंच रही थी, मुझे बहोत ताकत लगनी पद रही थी. एक राउंड में लगता तो वो बिना उस पाराकीट के दौड़ती और दूसरी बार वप पाराकीट ले साथ दौड़ती, उसने पैरो की भी बहोत प्रैक्टिस करवाई और खुद भी की, हम दोनों थक के चूर हो गए थे, में घर जा के खाना खाया और सीधा सो hi गया, जल्दी सोने से सुबह जल्दी आँख खुल गयी, मेने मोबाइल देखा तो बहोत सरे मश्ग थे, वैस्वी का था, मधुरिभाभी का भी था, और कॉल भी था, फ़ोन साइलेंट पे था तो सुनाई नहीं दिया, कॉल के बाद मश्ग भी था जिसमे लिखा था की ‘घर आये और मुझसे मिले बिना चले गए, मुझे कह के तो आते, जल्दी फिर आना, दिव्या’. दूसरे भी मश्ग थे, मेने सबको गुड मॉर्निंग कह दिया और फिर तैयार हो कर बहार दौड़ लगाने लगा. जब में स्कूल में था तो पेओन मुझे बुलाने आया की प्रिंसिपल के ऑफिस में बुलाया है. में गया तो वह जूही बैठी हुई थी, वीरेनसिर भी बैठे हुए थे.

प्रिंसिपल : जूही, तुम्हारे लिए परमिशन लेने आयी है, मुझे पता है की इस से तुम्हारी पढ़ाई में नुकसान होता पर ये बहोत बड़ा मौका है, अगर तुम कामियाब हुए तो तुम्हारा तो नाम होगा साथ में स्कूल का भी नाम होगा, में बीनाजी सेबात कर लूंगा, तुम सुबह प्रैक्टिस पर जा सकते हो.

शिव : (मेने जूही की और देखा तो वो मुस्कुरा रही थी, मेने प्रिंसिपल सर को थैंक यू कहा, फिर हम बहार निकले)

जूही : तो हीरो, तैयार हो जाना कल से.

शिव : जी मैडम. (मेरे ऐसा कहने से वो मुस्कुरायी)

स्कूल चालू था तो वो रुकी नहीं, रेक्सेस में मेने सबको बता दिया की कैसे में लेट आऊंगा.

महेश : यार तेरे तो मज़े है.

शिव : एक दिन मेरे साथ आ कर देख पता चल जायेगा की कैसे मज़े है. (सब हसने लगे)

स्कूल की छूती होते hi में और संयम घर की और निकल गए. उसने भी घर आने को बोलै पर मेने कह दिया की मुझे मैडम के वह जाना पड़ेगा. वो थोड़ी उदास हो गयी. मेने उसको गली के नाके छोड़ा और में अपने घर चला गया.

दोपहर को में साइट पर चला गया, जहान्वी मुझसे खफा दिख रही थी, वो मेरी और देख भी नहीं रही थी. मेने उन्हें hi बोलै तो भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. में अपने काम में लग गया. जहान्वी को भी अफ़सोस हो रहा था की उसने बात क्यों नहीं की, पर अब क्या करती. उसको कोई भी मौका नहीं मिला बात करने का. पिंकेशसथ में hi था. छुट्टी का टाइम हुआ hi था की जूही का कॉल आ गया और मुझे सीधे स्टेडियम आने को कहा. में वह से स्टेडियम चला गया. उसने फिर से मेरी लेफ्ट राइट करा दी, देर तक हमने प्रैक्टिस की. घर आ कर मेने खाना खाया, थोड़ी पढ़ाई की और सो गया.

दूसरे दिन सुबह में hi वो मुझे लेने घर आ गयी, में अपने यूनिफार्म और बैग ले कर उसके साथ चला गया, हमने वह प्रैक्टिस की, वही चेंजिंग रूम में मेने ूनीफॉम पहना और स्कूल चला गया. दोपहर में खाने के बाद में बिना मैडम के घर गया तो वो वह भी मौजूद थी. एक घंटा उनके साथ पढ़ाई की, फिर में साइट पर चला गया, अब मुझे भी लग रहा था की में अब साइट पर ज्यादा टाइम नहीं दे पाउँगा, मुझे पवन सर से बात करनी पड़ेगी.
 
ी क्नोव यू अरे वेटिंग, बूत I'm आउट ऑफ़ टाउन. कुछ दिन सबर कीजिये, प्लीज.
 
अपडेट 181

माधुरी काम कर रही थी, पर बार बार उसके मान में शिव के साथ बिताये पल आ रहे थे, उस रात जब परम भी आया तो वो उस से नजर नहीं मिला पायी, पेट में दर्द का बहाना कर के उसने ज्यादा काम भी नहीं किआ, वो कर भी नहीं सकती थी, जब भी उठती या बेथ टी उसकी छूट में मीठा मीठा दर्द होने लगता था, और बार बार उसको शिव का ध्यान आ जाता था. दिव्या को बहोत अफ़सोस हो रहा था की वो यहाँ नहीं थी, अगर वो होती तो जरूर शिव के साथ रहने का मौका मिल जाता, ऊपर से उसने सुना की सुबह मम्मी पापा भी चले गए थे तो उसको बहोत अफ़सोस हुआ, इस से ज्यादा सुनेहरा मौका उसको कहा मिलने वाला था. दिव्या माधुरी से बार बार पूछ रही थी, माधुरी को भी ावक्वार्ड लग रहा था, वो क्या बताती की उसके न होने से उसको मौका मिल गया. एक और वो खुस भी थी और दुखी भी, दुखी इस लिए की उसको ये अनुचित कार्य करना पड़ा था, अपने पति को देखा दिया था, वही दूसरी और उसको स्त्री होने का सुख प्राप्त हुआ था, वो बार बार उस पल को जहँ में याद कर रही थी, वो खुद समाज नहीं प् रही थी की खुस होये या दुखहि होये.

दिव्या के आने के बाद कुसुम भी आयी थी, भाभी को ऐसे देखा तो उसने पूछ भी लिया तो माधुरी ने वही बहाना बनाया जो सबको कहा था, कुसुम को सब पता था की सही वजह क्या है, दिव्या बार बार अपने आप को कोष रही थी की वो क्यों यहाँ नहीं थी, पर माधुरी भी खुस थी और कुसुम भी, उसने न अपने और शिव के बारे में बताया न माधुरी भाभी के बारेमे, मधुरिभाभी को देख कर वो सोच रही थी

कुसुम : भाभी किडनी मासूम और सरीफ दिखती है, इन्हे देख कर कोई कह सकता है की वो नंगी हो कर शिव के लुंड के ऊपर कूद रही थी, मुझे तो ये भी नहीं पता की ये सब कब से चल रहा है, दिव्या को भी इस बात की भनक तक नहीं है. में भी बेवकूफ हु, कितना अच्छा मौका था, सबकी बात सुन कर दर न गयी होती तो में भी वो सब कर चुकी होती, उसने जब मेरे स्तन छुए, मुझे निचे भी हाथ लगाया तो कितना मज़ा आ रहा था, भाभी भी तो लगभग मेरे जितनी हिघ्त की hi रो है, अगर वो कर सकती है तो में भी कर hi सकती थी, बेवकूफ हु में, पता नहीं अब कभी ऐसा मौका मिलेगा की नहीं.

साइट पर मेने जहान्वी को देखा, कल वो मुझसे बात नहीं की थी, तो मेने सोचा की आज भी बात नहीं करेगी, मेने उनकी और देखा तो वो भी बस देख रही थी, न में मुस्कुरातया न वो मुस्कुरायी, में आगे बढ़ गया, और पिंकेशभाई के साथ बाते करने लगा.

जहान्वी : देखो तो कितना भाव खा रहा hi, खुद बिना बताये गायब हो जाता है और अब बात भी नहीं करेगा, मुझे क्या पड़ी है, आएगा उसे बात करनी होगी तो. (उसको गुस्सा भी आ रहा था, वो इधर उधर टहल रही थी, आधे घंटे तक भी शिव नहीं आया तो वो वह चली गयी, सब काम कर रहे थे और शिव और पिंकेश कुछ बाटे कर रहे थे, उसे देख कर पिंकेश बोलै.

पिंकेश : सब ठीक चल रहा है मैडम, इतनी धुप में आप क्यों आयी?

जहान्वी : (एक बार शिव को देखा, फिर पिंकेश की और देख kar)Nahi, में तो बस ऐसे hi आयी थी. ये कब तक ख़तम हो जायेगा?

पिंकेश : इस रूम का और वो वाले रूम का आज ख़तम हो जायेगा, 5 नंबर में स्लैब डालना है तो उसी की तयारी चल रही है, (ऐसे hi उसने कुछ जानकारी दी)

जहान्वी : ठीक है, में ऑफिस में hi हु. (कहते खेह्ते उसने फिर शिव को देखा, पर वो कुछ बोल hi नहीं रहा था, अपने पेअर पटकते हुए वो वापस ऑफिस आ gayi)Pata नहीं क्या समझता है, में कोई ऐरी गैरी हु क्या, कमसे काम गुड आफ्टर नून hi बोल देता, मुझे क्या, न बोलता है तो न बोले. (अभी वो सोच hi रही थी की शिव अंदर आया)

शिव : Hi. (जहान्वी ने कोई जवाब नहीं दिया, उसने एक नजर डाली और एक फाइल को खोल कर कुछ देखने लगी, में है पड़ा, वैसे भी वो मुझे hi देख रही थी, बस ढोंग कर रही थी तो वो चीड़ गयी)

जहान्वी : किस बात पर हसी आ रही है?

शिव : फाइल उलटी है.

जहान्वी : (उसका भी ध्यान गया की फाइल उलटी है, पर तभी उसकी नजर वह बने नक़्शे पर padi)Tumhe क्या लगता है तुम्ही एक होशियार हो, मुझे पता है की फाइल उलटी है, में नक्शा देख रही thi,(Thode ऐटिटूड से) यहाँ क्यों आये?

शिव : नहीं आना चाहिए था?

जहान्वी : सीधे सवाल का सीधा जवाब दो, कोई काम था? (उसने ऐसे दिखाया जैसे कोई इंट्रेस्ट न हो)

शिव : में तो बस ऐसे hi आया था.

जहान्वी : जैसे तुम्हारे पास टाइम नहीं है न वैसे hi में भी फालतू नहीं बैठी. (उसने हलके ऐटिटूड से कहा)

शिव : ओह! सॉरी, मेने आपको डिस्टर्ब किआ. अप्प काम कीजिये में चलता हु. (कहते हुए में वह से जाने लगा)

जहान्वी : (जहान्वी तो बस ऐसे hi नाटक कर रही थी, पर जब शिव जाने लगा तो उसने तुरंत हाथ उठाया उसे रोकने के लिए पर मुँह से कुछ भी नहीं बोल पायी, शिव ने ये देखा नहीं और वो चला गया, वो फिर गुस्सा करने lagi)Kitna ऐटिटूड भरा है, वो जनता है की गलती उसने की है, फिर भी सॉरी बोलने की बजाये, ऐटिटूड दिखा रहा है, हँ! मुझे क्या, उसे पता नहीं कितने मेरे आगे पीछे घूमते है. उसके लिए वो मजदूर hi ठीक है. उसको चैन hi नहीं आ रहा था, थोड़ी देर बाद वो फिर से बालकनी में भी गयी, पर शिव नहीं दिखा, वो फिर अपने आप को डांटने लगी) तुम्हारे hi नखरे है, वो तुमसे मिलने आया था न, तू hi ज्यादा ऐटिटूड दिखा रही थी. (वो ऐसे hi बाद बड़ा ते हुए बेथ गयी)

में फिर काम में लग गया, में जनता था की वो क्यों नाराज है, पर में जान बुज कर उनके साथ ऐसा कर रहा था, वैसे भी मेने पहले hi कह दिया था की में रोज़ रोज़ शायद न भी आ पाव, उन्हें भी ये समझना चाहिए, वो बिना बात के गुस्सा कर रही थी. उसके बाद वो दो तीन बार वह आयी भी पर में अपने काम में hi लगा था.

जहान्वी झुंझला रही थी, कभी खुद को तो कभी शिव को कोष रही थी, शाम को में सीधे स्टेडियम के लिए निकल गया, ये बात जहान्वी को पता नहीं थी, जब वो नीचे आयी तो सब मजदूर हाथ मुँह धो रहे थे, उसने पिंकेश से पूछा,

जहान्वी : शिव कहा है?

पिंकेश : जी वो तो अभी चला गया. कोई काम था क्या?

जहान्वी : (अंदर hi अंदर जल भून गयी, पर चेहरे से दिखने नहीं diya)Koi काम नहीं था, में भी जा रही hu.(Usne रूखे पैन से कहा)

पिंकेश : जी मैडम.

वो वह से निकली hi थी की उसके फ़ोन पर करुणा की कॉल आयी.

जहान्वी : (गुस्से se)Isko भी चैन नहीं है, इतनी तो क्या आग लगी है छूट में की जब देखो तब शिव शिव करती रहती है, फ़ोन उठा कर थोड़ा rudhli)Hello.

करुणा : कहा है तू?

जहान्वी : अभी साइट से निकली हु, घर जा रही हु.

करुणा : में कॉफ़ी शॉप जा रही हु, तू भी आजा.

जहान्वी : नहीं तुम लोग जाओ, में नहीं आ रही.

करुणा : और कोई भी नहीं है, में अकेले hi निकली थी, मुझे पता था की तू अभी साइट से निकलेगी, aajana(Usne रिक्वेस्ट भरे स्वर में कहा)

जहान्वी : ठीक है, आती हु. (वो कॉफ़ी शॉप चली गयी, गाड़ी पार्क करके अंदर गयी तो एक टेबल पर करुणा अकेली hi बैठी थी, वो वह बेथ gayi)bol क्या बात है?

करुणा : कोई बात नहीं है, मेने सोचा बस गप्पे मरेंगे.

जहान्वी : Achchha???(Usne टॉन्ट मारा)

करुणा : (हलकी हड़बड़ाते hue)Ha और क्या? (उसे भी पता था और जहान्वी को भी पता था की अभी बात घूम फिर के शिव पर hi आनेवाली है)

जहान्वी : तेरी राग राग से वाकिफ हु, तुजे कितनी बार संजय है की ये सब भूल जा.

करुणा : तुजे क्या प्रॉब्लम है मुझे समाज नहीं आ रही, वो थोड़ी न तुम्हारा बॉयफ्रेंड है.

जहान्वी : (उसने हलके गुस्से से देखा और boli)To क्या में उसको ये कहु की वो तेरे साथ.... देख, तुजे जो करना है वो अपने आप कर, मुझे बिच में मत घसीट.

करुणा : क्या यार तू भी, में तो तेरे फायदे के लिए hi कह रही थी.

जहान्वी : इसमें मेरा क्या फायदा? (उसने आंख छोटी कर के पूछा)

करुणा : मज़े करेंगे न (उसने नॉटी तरह से मुस्कुराते हुए कहा)

जहान्वी : तुजमे बिलकुल भी शर्म नहीं है, है न?

करुणा : इसमें क्या शर्माना यार, न उसका घिस जायेगा न मेरी. उसे भी मज़ा hi आएगा न.

जहान्वी : आज के बाद अगर इस टॉपिक पे चर्चा की न तो में तुजसे मिलने नहीं आउंगी.

करुणा : ऐसा क्या करती है यार, तू पक्किवली सहेली है, तूने भी पोर्न देखे है, उसमे जैसे होता है वैसे दोनों मिलकर उसको खुस कर देंगे, उसका भी तो फायदा hi है.

जहान्वी : (कड़ी होते हुए) मुझे ऐसी बकवास नहीं सुन नई, में जा रही हु, तू बेथ. (करुणा उसे रोकती रही पर जहान्वी नहीं रुकी, उसने कार घर की और दौड़ा di)(Maan में सोचने lagi)Wo ऐसा बोल रही है तो मुझे क्यों जलन हो रही है, अगर उसको सेक्स करना है तो करे, मुझे क्या? (एक और तो वो ये सोच रही थी पर दूसरी और उसको शिव अगर करुणा के साथ कुछ करता है तो अच्छा नहीं लग रहा था, वो इसी उधेड़बुन में वह से घर पहुंच गयी)

में और जूही स्टेडियम चले गए, हमने मिल कर खूब म्हणत की, रात को खाने के बाद मेने सोचा की भार्गवी मैडम के घर चला जाता हु, बहोत दिनों से उनकी बाइक मेरे पास hi थी, लतादिदी को बोल कर में उनके घर की और निकल गया, मेने दूर बेल्ल बजायी तो थोड़ी देर बाद उन्होंने दरवाजा खोला, मुझे देख कर वो सरप्राइज हो गयी.

भार्गवी : आज हमारे घर का रास्ता कैसे याद आ गया?

शिव : यहाँ कड़ी रख कर hi पूछताछ करनी है क्या?

भार्गवी : (मुस्कुराते हुए, साइड में हो गयी, में अंदर गया, वो भी दरवाजा बंद कर के आ गयी और मेरे पास hi बेथ gayi)Aaj कैसे रास्ता भूल गए?

शिव : क्या आप भी, में स्पेशलय आपसे hi मिलने आया हु, काफी दिनों से बाइक मेरे पास hi थी तो सोचा लौटा दू.

भार्गवी : वो अपने पास hi रक्खो, वैसे भी मुझे ज्यादा जरुरत नहीं है.

शिव : है पर में उसे अपने पास रख नहीं सकता न.

भार्गवी : क्यों नहीं रख सकते? में परायी हु क्या?

शिव : ऐसी बात नहीं है, बाइक की वजह से मेरी भी आदत बिगड़ रही है.

भार्गवी : कुछ नहीं होता, रक्खो अपने पास. और क्या चल रहा है?

शिव : बस रूटीन hi चल रहा है, जूही मेरा कचुम्बर बना रही है और कुछ नहीं.

भार्गवी : (नॉटी तरह से मुस्कुराते hue)Wo कैसे?

शिव : अगले कॉम्पिटिओं की तयारी, और क्या. (मेने मुँह बना कर कहा)

भार्गवी : (वो है padi)Oh वैसे, में कुछ और hi सामजी थी.

शिव : क्या आप भी, इस मामले में वो बहोत सख्त है, जरा भी रहें नहीं करती.

भार्गवी : ये तो अच्छी बात है न, तुम्हारे फ्यूचर का hi सोच रही है वो.

शिव : है ये तो सच है, आप का कैसा चल रहा hai?(Mene उनका हाथ पकड़कर सहलाते हुए कहा)

भार्गवी : हम पुलिस वालो को फुर्सत कहा है, कभी भी फ़ोन आ जाता है तो जाना पड़ता है. खाना खा कर आये की बाकि है.?

शिव : खा कर आया. आपने खा लिया?

भार्गवी : है अभी थोड़ी देर पहले hi खाया है. घर में सब कैसे है?

शिव : सब ठीक है, आप कैसी हो?

भार्गवी : हमारा क्या है, ड्यूटी और घर, अकेले जिंदगी गुजर रहे है.

शिव : ऐसा क्यों कह रही है, में नहीं हु क्या?

भार्गवी : मेने कब मन किआ, पर हर रोज़ तो नहीं मिलते हो न.

शिव : अब में इसमें क्या कर शक्ति हु.

भार्गवी : छोडो वो सब, कुछ पिओगे?

शिव : नहीं, सिर्फ मुँह मीठा करूँगा. (उनको समाज नहीं आया तो वो मुझे सवालिया नजरो से देखने लगी, मेने उनके होठो की और देखा तो वो शर्मा गयी)

भार्गवी : बे शर्म कही के.

शिव : इसमें शर्माने वाली क्या बात है.

भार्गवी : (शरमाते hue)Aur कुछ नहीं होगा.

शिव : क्यों?

भार्गवी : नहीं होगा (उन्होंने हलकी नाराजगी से कहा)

शिव : वही तो पूछ रहा हु, क्यों?

भार्गवी : (उसे बहोत शर्म आ रही thi)Samaj नहीं आता की क्यों मन कर रही हु.

शिव : मुझे कैसे पता चलेगा?

भार्गवी : पीरियड्स (बोलते बोलते वो बहोत शर्मा रही थी)

शिव : ओह! (थोड़ी उदासी से, फिर सँभालते hue)Koi बात नहीं, रोमांस तो कर hi सकता हु न (मेने उन्हें अपनी और खिंचा तो वो मेरी गॉड में लेट गयी, में उनके चेहरे पर आये बाल को सही करने लगा, वो भी मुस्कुराते हुए मुझे देख रही थी)

भार्गवी : क्या देख रहे हो?

शिव : इस खूबसूरत चेहरे को.

भार्गवी : (मुस्कुराते हुए वो boli)Agar इतनी hi अच्छी लगती हु तो आते क्यों नहीं हो? (मेने कोई जवाब नहीं दिया और उनके चेहरे पर झुक गया वो भी यही चाहती थी, हम दोनों किश करने लगा, में एक घंटे तक वह रुका, भले हमने सेक्स नहीं किआ पर अच्छा टाइम स्पेंड किआ, उनसे मिल कर बहोत अच्छा लगा, फिर में घर चला गया.

दूसरे दिन वैसे प्रैक्टिस फिर स्कूल चला गया, दोपहर को बिना मैडम के घर चला गया, आज जूही नहीं थी, हम दोनों पढ़ाई कर रहे थे, वो गाउन पहने हुई थी, हम दोनों साथ में बेथ इ थे, जब वो मुझे समजा रही थी तब मेरी नजर उनके गाउन के अंदर से दिख रही स्तन की घातिओ पर चली गयी, बिना ने भी ये नोटिस किआ तो वो थोड़ी सीधी हो गयी और बोलते बोलते रुक गयी.

शिव : क्या हुआ?

बिना : (आंखे दिखते hue)Tumhara ध्यान किधर है?

शिव : सॉरी वो गलती से हो गया.

बिना : पढ़ाई पर ध्यान do(Thode रूखे स्वर में वो बोली)

शिव : आपकी प्रॉब्लम क्या है? ऐसा तो कुछ है नहीं जो मेने देखा न हो, बस नजर चली गयी. (वो मुझे देख रही thi)(Beena को भी लगा की सही तो है, ऐसा क्या देख लेगा जो उसने देखा नहीं, वो थोड़ी शांत हुई)

शिव : (उनका हाथ पकड़ते hue)Kya हुआ? (वो मुझे देख रही thi)Bataiyena.

बिना : वो अनुष्ठान की डेट फिक्स हो गयी है.

शिव : तो?

बिना : तुम्हे आना है.

शिव : मेरा कोई इरादा नहीं है, वैसे भी मुझे स्पोर्ट्स कैंप जाना है.

बिना : तुम्हे आना hi पड़ेगा.

शिव : क्यों आना पड़ेगा, हमारी पहले भी बात हो चुकी है, आप सिर्फ हवाई किल्ले बना रही है और कुछ नहीं.

बिना : उस वजह को भूल भी जाये तो भी तुम्हे आना है.

शिव : किस लिए?

बिना : क्यों की बाबाजी ने कहा था की बच्चे के बाप का होना जरुरी है.

शिव : तो आपको याद है की इस बच्चे का बाप में हु. (वो मेरी और मायूसी से देखने लगी).

बिना : में क्या करू कुछ समाज नहीं आ रहा शिव. (मेने उनको मेरी और खिंचा और उनके होठो को किश करने लगा (बिना, शिव को रोक नहीं रही थी पर कुछ कर भी नहीं रही थी, कुछ पल वो शिव को देखती रही, फिर उसकी आंखे बोझिल हो गयी और बंद होगयी, शिव उसके होतो को बड़े प्यार से चूस रहा था, होठो का वो गिला पैन उसके दिल में हलचल मचने लगा, वो चाहती थी पर साथ नहीं दे प् रही थी, थोड़ी देर तक उसके होठो का रास पिने के बाद शिव अलग हुआ तो उसने आंखे खोली और शिव को देखने लगी)

शिव : एक और आप मुझे मन करती हो और दूसरी और मुझे रोक भी नहीं रही. (मेने पीछे सोफे पर पीठ लगा दी, वो बस मुझे देख रही थी) इतना ज्यादा मात सोचिये (कहते हुए मेने उन्हें अपने पहलु में लिया तो वो मुझसे चिपक कर बेथ गयी)

बिना : में क्या करू समाज में नहीं आ रहा शिव. अगर तुम वो हुए जिसका मुझे शक है तो ये पाप होगा.

शिव : अगर वैसा हुआ तो फिर आप क्या करेंगी? आप इस बच्चे ko????....(Me बोलता इस से पहले hi उन्होंने मेरा मुँह अपने हाथ से बंद कर दिया, कुछ पल हम दोनों एक दूसरे को देखते रहे, मेने उनका हाथ अपने मुँह से हटाया, वो ख़ामोशी से मेरी आँखों में देख रही थी) एक तरफ तो आप कहती है की ये पाप होगा और दूसरी तरफ आप इस बच्चे को कुछ होने देना नहीं चाहती, मेरी समाज में नहीं आ रहा की आखिर आप चाहती क्या है.

बिना : (अपनी नज़ारे झुका kar)Muje नहीं पता शिव, में समाज नहीं प् रही हु, में ये भी जानती हु की ये बच्चा भी हकीकत है जिसे जुठला नहीं सकती.

शिव : तो भूल जाइये सब, और जो आप सोच रही है वो हकीकत नहीं हो सकती, वो मर चूका है और में जिन्दा हु, वो और में एक नहीं हो सकते. (मेने उनके चेहरे पर आयी लत को सवार और उनके कान के पीछे किया, वो बहोत प्यार से मुझे देख रही थी, में फिर से उनकी और झुका और उनके होठो पर किश करने लगा, इस बार वो मेरा साथ देने लगी, मेने उन्हें सोफे पर झुकता गया और वो पूरी लेट गयी, आधा सोफे पर आधा निचे रहते हुए में उनके ऊपर हो गया और उनके होठो का रास पिने लगा, वो मेरी पीठ को सहलाते हुए मुझसे चिपकने लगी, थोड़ी देर किश करने के बाद मेने होठो को छोड़ा और उनकी आँखों में देखने लगा, वो भी मेरी आँखों में देख रही थी, वो शर्मा गयी और मुझे खिंच कर अपने शाइन से लगा लिया, थोड़ी देर ऐसे hi रहने के बाद में अलग हुआ, और बेथ गया, वो भी बेथ गयी और मेरे कंधे पर अपना शिर रख diya.)Kab जाना है?

बिना : इस पूर्णिमा को. (कुछ सोच kar)Par तुम आओगे कैसे?

शिव : कैसे आऊंगा से क्या मतलब, आप और में साथ में जायेंगे.

बिना : में ऐसे नहीं ले जा सकती, क्या कहूँगी सबको, और ऊपर से सरे रिस्तेदार आये होंगे, क्या कहूँगी की तुम मेरे साथ क्यों हो.

शिव : तो फिर???

बिना : मेरी तो कुछ समाज में नहीं आ रहा, और भी एक बात है, जैसे ममता दीदी को लग रहा था वैसे hi अगर किसी और को लगा, या खास कर के ताऊजी को तो दिक्कत हो सकती hai,(Wo दर gayi)nahi नहीं, बे वजह में तुम पर कोई खतरा नहीं आने दे सकती.

शिव : मेने कहा न की ये आपकी गलत फैमि hi है.

बिना : वो में नहीं जानती, पर ऐसे hi में तुम्हे वह नहीं ले जा सकती.

शिव : तो फिर ???

बिना : तुम हुलिया बदल कर आना, पर आओगे कैसे? (कहते हुए वो खुद hi सोचने लगी, में उनके चेहरे पर आयी परेशानी को देख रहा था, अचानक उनकी आँखों में चमक aayi)Tum जूही के साथ आना, उसका दोस्त बन कर, है यही सही रहेगा. में ममता दीदी से भी बात कर लुंगी, उनके साथ hi तुम आना.

शिव : ठीक है, जैसा आप कहे.

वही दूसरी और गायत्री गयम में बैठी हुई थी, रोज़ की आदत के मुताबित मदनसीर वह पहुंच गए, उन्होंने आस पास देखा तो सब अपने काम में लगे हुए थे, पवनसीर आये नहीं थे.

मदनसीर : कैसी हो?

गायत्री : (हलके गुस्से se)Aapko क्या.

मदन : अरे में तो बस पूछ रहा था, अब साथ में काम करते है तो पूछ भी नहीं सकता.

गायत्री : मुझे सब पता है, जाइये अपना काम कीजिये.

(पिछले काफी टाइम से मदन, गायत्री के पीछे लगा हुआ था, उसे पता था की गायत्री एक वैस्य रह चुकी है, वो भी अकेला hi था, उसकी बीवी मर चुकी थी तो उसको भी सेक्स की जरुरत थी, उसने गायत्री को कई बार घुमा फिर के कहा था, पर गायत्री ने हमेसा मन hi कर दिया था)

मदन : काम तो चलता hi रहता है, पर दूसरे काम के लिए भी वक़्त निकलना पड़ता है (वो गन्दी हैंसी हँसा, गायत्री ने कोई जवाब नहीं दिया, वो अब आदि हो चुकी थी) मेरी समाजमे नहीं आता तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है, में किसी को कुछ नहीं कहूंगा, ये बात हम दोनों के बिच hi रहेगी.

गायत्री : देखिये मदनजी, में आपको कई बार समजा चुकी हु की आप अपनी हद में रहिये, अगर मेने कम्प्लेन कर दी तो लेने के देने पद जायेंगे.

मदन : क्या कम्प्लेन करोगी, मेने कोई जबरदस्ती की क्या, में तो बस सीधे तरीके से पूछ रहा हु, और अगर तुमने किसी से कहा भी तो में कह दूंगा की तुम जूथ बोल रही हो, मुझे बदनाम करना चाहती हो, तुम hi मुझसे पैसे ऐंठने के लिए मुझसे कह रही थी, अरे में ये भी कह दूंगा की तुम मेरे साथ सो भी चुकी हो और अब मुझे ब्लैकमेल कर रही हो, सब मेरी बात का hi यकीं करेंगे, क्यों की सबको तुम्हारा भूतकाल पता है.

गायत्री : (बिना dare)Aapko जो करना है करलो, पर जो आप चाहते है वो नहीं होगा.

मदन : तुम्हे क्या दिक्कत है समाजमे नहीं आ रहा, ऐसा तो कुछ है नहीं जो तुमने पहले न किआ हो, में पैसे भी देने को तैयार हु, फिर क्या प्रॉब्लम है तुम्हे?

गायत्री : में वैसी नहीं हु, कितनी बार आपको संजना पड़ेगा (उसने हलके गुस्से से kaha)me अभी भी आपका मुँह तोड़ सकती हु, पर में कोई तमसा नहीं चाहती, मुझे अपने हल पर छोड़ दीजिये.

मदन : में भी अकेला हु, तुम भी अकेली हो, फिर क्या प्रॉब्लम है, तुम्हारा भी फायदा हो जायेगा और मेरा भी.

गायत्री : शर्म नहीं आती आपको ऐसी बाटे करते हुए. (तभी एक लड़का बहार आया)

लड़का : सर.

मदन : क्या है? (झुंझलाते हुए)

लड़का : यहाँ के मुस्कले के लिए एक्सेरसिस बताइयेना.

मदन : ठीक है में आता हु (वो लड़का वापस अंदर चला gaya)Chutne के बाद साथ में कॉफ़ी तो पि सकते है न, इतना भी नहीं कर सकती. (गायत्री ने हलके गुस्से से देखा, मदन में अपना मुँह banaya)Please (उसने रिक्वेस्ट की)

गायत्री : (कुछ सोच kar)Thik है.

मदन : (उसको यकीं नहीं हो रहा था, उसने फिर से एक बार puchha)Sach में?

गायत्री : (हलकी मुस्कराहट के sath)Ha, पर सिर्फ कॉफ़ी.

मदन : (खुस हो कर अंदर की और जाते जाते मुस्कुराया, उसको तो जैसे अपनी मुराद मिल गयी थी, वो कितने hi दिनों से गायत्री के पीछे पड़ा हुआ था, उसको लग रहा था की ये एक वैस्य रह चुकी है तो आसानी से मन जाएगी, पर उसकी ये भूल थी, है गायत्री ने कभी हंगामा नहीं किआ था, कही न कही उसको भी गायत्री अच्छी लगती थी, सुन्दर तो वो थी hi, और वो अकेला था, अपनी इच्छाएं पूरी करने का उसको गायत्री आसान जरिया लग रही थी, गयम ख़तम करने के बाद टाला लगा कर उसने अपना स्कूटर निकला, गायत्री वही कड़ी थी, उसने स्कूटर रोका तो वो बेथ गयी, वही नजदीकी कॉफ़ी शॉप पर वो दोनों गए, गायत्री आस पास देख रही थी, वो कभी ऐसी जगह पर आयी नहीं थी, दोनों एक टेबल पर जा कर बेथ गए, मदन ने दोनों के लिए कॉफ़ी आर्डर की, वो खुस दिख रहा था)

मदन : थैंक यू गायत्री.

गायत्री : (उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे, उसने शांति से बोलना शुरू kiya)Isme थैंक यू की कोई बात नहीं है, मुझे hi आपसे बात करनी थी, पता नहीं आप मेरे बारे में क्या सोच रहे है, है मेरा पास्ट कला जरूर है पर में वैसी नहीं हु, में वैसी थी क्यों की मेरी मजबूरी थी, उस वक़्त मेरी उम्र भी नहीं थी, और न hi कोई समाज, कीर तरह में चंगुल में फास गयी मुझे नहीं पता, पर अब में उस दलदल में नहीं उतरूंगी, आप एक अच्छे व्यक्ति है, क्यों खुद की इज्जत ख़राब करना चाहते है, मेरे पास ऐसा कुछ भी नहीं है जो आपके काम आये, आप खुद जानते है की में क्या थी, फिर जान बुज कर आप क्यों ऐसे सम्बन्ध बनाना चाहते है.

मदन : (वो थोड़ा गंभीर हो gaya)Insan की कुछ जरूरते होती है, कुछ हसरते होती है.

गायत्री : अगर इतनी hi जरुरत है तो शादी करलीजिये, क्यों यहाँ वह भटक कर अपनी जिंदगी ख़राब करना चाहते है.

मदन : वो में नहीं कर शक्ति.

गायत्री : क्यों?

मदन : मेरी एक 4 साल की बेटी है, अभी मेरे ससुराल में रह रही है, दो साल पहले मेरी बीवी का स्वर्गवास हो गया था, में अपनी बेटी के लिए दूसरी शादी नहीं करना चाहता.

गायत्री : उसमे क्या दिक्कत है? (कॉफ़ी वाला कॉफ़ी रख गया, दोनों थोड़ी देर खामोश रहे)

मदन : घरवालों के कहने पर मेने कई जगह रस्ते भी देखे, पर कोई बेटी को साथ रखने के लिए तैयार नहीं, और फिर सोचने पर मुझे भी लगा की अगर कोई अभी तैयार हो जाये और बाद में मेरी बेटी का ख्याल न रक्खे तो.

गायत्री : नजरिये का कितना अंतर है मदनजी, अभी कुछ समय पहले तक आप मुझे हवस के पुजारी लग रहे थे, और अभी आप मुझे एक अच्छे पिता दिख रहे है, में सचमे आपकी इज्जत करती हु, मेरे साथ ऐसी हरकते कर के अपने आपको मात गिराइये. (गायत्री की बात सुन कर मदन का शिर झुक गया, वो अपनी hi सोच में घूम कॉफ़ी पिने लगा, गायत्री भी उन्हें hi देख रही थी, उसे मदन पर दया आ रही thi)Me आपको झालील करना नहीं चाहती thi(Madan ने नज़ारे उठा के देखा, दोनों की कॉफ़ी ख़तम हो चुकी थी, मदन ने बिल चुकाया और दोनों बहार आ गए)

मदन : चलिए, में आपको छोड़ देता हु. (गायत्री कुछ नहीं बोली, वो स्कूटर पर बेथ गयी और स्कूटर चल पड़ा. दोनों चुप hi थे, गायत्री को मदन पर दया आ रही थी, उसने हिचकिचाते हुए पूछा)

गायत्री : अगर में आपको है कहती तो आप मुझे कहा ले जाते?

मदन : (वो थोड़ा चौंका, उसने पीछे dekha)Kya कहा तुमने?

गायत्री : वो hi जो अपने सुना. (गायत्री ने नज़ारे झुका ली)

मदन : में अकेला hi रहता हु. (उसने हिचकिचाते हुए कहा, मदन को समाज नहीं आ रहा था की अचानक गायत्री ऐसा क्यों कह रही है)

गायत्री : कब चलना है?

मदन : (स्कूटर को साइड में रोकते hue)Abhi तक तो मन कर रही थी, अचानक क्या हो गया?

गायत्री : मुझसे कोई सवाल मत कीजिये, मेरे पास कोई जवाब नहीं है, अभी नहीं चल सकती, दिन का टाइम हो तो कहियेगा.

मदन : (वो भी हड़बड़ा गया था, जैसे तैसे वो bola)Kal, दोपहर में.

गायत्री : (नज़ारे झुका kar)Thik है, में निकलूंगी तो कही से फ़ोन करुँगी, अभी मुझे घर छोड़ दीजिये.

मदन : हम्म है. (वो खुद हड़बड़ा गया था तो उसको भी कुछ समाज नहीं आ रहा था, उसने गायत्री को अनाथालय छोड़ा और वह से निकल गया, जो लड़की हमेसा से उसको मन कर रही थी वो अचानक क्यों मान गयी उसको समाज नहीं आ रहा था, पर अब वो संभल चूका था, वो खुस भी हो रहा था की कल गायत्री आएगी, रात को भी काफी देर बाद उसे नींद आयी.

वही गायत्री भी सोच में दुब जाती थी की वो सही कर रही है की गलत, वैसे भी उसे अब इस शरीर का कोई मोह नहीं था, वो इतना कुछ देख चुकी थी की अब उसको ये सब बेमानी लगता था, जब खाना खाने बैठे थे तब भी शिव सबसे बाते कर रहा था, एक दो बार उसने गायत्री को भी पूछा तो उसने ठीक से सुना भी नहीं था, बस हु है में जवाब दिया था. आज गायत्री को थोड़ी बेचैनी लग रही थी तो रात को काम निपटने के बाद लता को बोल कर वो छत पर चली गयी, खुली हवा में उसको थोड़ा अच्छा महसूस हुआ. आसमान में टारे टीम टीम रहे थे और बदल अपनी गति से चल रहे थे, कभी चाँद छुप रहा था तो कभी बदलो से झक रहा था, वो उन्हें देखने में इतनी खो गयी थी की पीछे आ कर खड़े शिव का भी उसको आभास न हुआ, जब उसके कंधे पर हाथ रक्खा तब वो एक दम से हड़बड़ा गयी.

शिव : इतना कहा खोई हो दीदी?

गायत्री : ओह! शीइइइइइव. (वो तेज तेज सांसे ले रही thi)Tune तो डरा hi दिया.

शिव : (वो भी आसमान को देखते हुए साइड में खड़ा हो gaya)Kya सोच रही थी इतना?

गायत्री : (संभल कर मुस्कुराते hue)Kuchh भी तो नहीं, बस ऐसे hi कड़ी थी.

शिव : कोई परेशानी है?

गायत्री : नहीं, कोई परेशानी नहीं है, अपनी सुना, कैसा चल रहा है सब.

शिव : मेरा क्या है, वही पढ़ाई और practice,aagale पड़ाव की तयारी चल रही है, शायद कुछ महीनो के लिए बहार भी जाना पड़े.

गायत्री : तू दिल से म्हणत करता है तो कामियाबी जरूर मिलेगी.

शिव : कभी कभी लोगो की इतनी एक्सपेक्टेशन से दर लगता है.

गायत्री : इसमें डरने की क्या बात है.

शिव : कही फ़ैल न हो जाऊ.

गायत्री : (उसकी और घूम कर हाथ पर हाथ रखते hue)To क्या हुआ, फ़ैल होना बुरी बात नहीं है, हर बार तो जीत नहीं सकते, कभी हार भी सकते है, उस से खेल या जिंदगी ख़तम थोड़ी न हो जाती है, दोबारा म्हणत करनेकी और कोशिस करने की.

शिव : आप बहोत सुलजी हुई बाते करती हो दीदी.

गायत्री : जिन्दगीने इतना उलझा दिया है तो सुलझना तो पड़ता है.

शिव : सच सच बताना दीदी, कोई परेशानी तो नहीं है न?

गायत्री : नहीं शिव, कोई परेशानी नहीं है, तू फ़िक्र मात कर, अपनी पढ़ाई और प्रैक्टिस पर ध्यान दे. (उसने मुस्कुरा कर कहा, मेने भी उन्हें गले लगा लिया, तभी किसी के खस्ने की आवाज आयी, हम दोनों के चौंक कर उस और देखा तो सरितादिदी थी)

सरिता : लगता है डिस्टर्ब कर दिया, सॉरी. (कहते हुए वो वापस जाने लगी)

गायत्री : वापस क्यों जा रही है, आ न. (सरिता रुक गयी, और वह चली आयी) ऐसा क्यों कह रही है की डिस्टर्ब किआ? हम बाटे कर रहे थे.

सरिता : क्या बाटे कर रहे थे?

गायत्री : बस इधर उधर की, हो गया सब?

सरिता : है हो गया, लता भी अभी रूम में गयी है, में बस टहलने ऊपर आयी थी, मुझे नहीं पता था की तुम दोनों हो, वर्ण में नहीं आती.

गायत्री : ऐसा कुछ भी नहीं है, इसको लगा की में परेशान हु तो पूछ रहा था.

सरिता : ये तो मेने भी देखा था, कुछ हुआ है क्या?

गायत्री : नहीं यार, कुछ खास नहीं है, तुम सब ख़म खा परेशान हो रहे हो, ऐसा कुछ भी नहीं है, और वैसे भी मेरे पास है क्या जो कोई ले जायेगा. कभी कभी सोचती हु की हमारी जिंदगी आखिर है क्या?

शिव : हम एक परिवार है दीदी, अगर कोई भी परेशानी हो तो आप बता सकती है.

गायत्री : वो तो बताउंगी न, पर अभी कोई परेशानी नहीं है.

शिव : ठीक है, चलिए निचे चलते है.

हम तीनो निचे चले गए, बाड़ेवाले कमरे से बच्चो की आवाजे आ रही थी तो दोनों कमरे में चली गयी और में अपने कमरे में चला गया. सुबह उठा और प्रैक्टिस पर चला गया. स्कूल में भी रेसस्स में सब साथ थे, इधर उधर की बाटे चली. स्कूल के बाद वैस्वी hi संयम को छोड़ने गयी थी तो में सीधा घर चला गया. फिर वह से बिना मैडम के घर, वह पढ़ाई की और सामान्य hi बाते हुई. वह से में साइट पर चला गया, आज जहान्वी नहीं आयी थी, एक बार हुआ की फ़ोन कर लू फिर रहने दिया.

इधर गायत्री दोपहर को, लता को काम हे कह कर निकल गयी, उसने एक जगह से फ़ोन किआ तो मदन उसे वह लेने आ गया, गायत्री बहोत ऑक्वर्ड फील कर रही थी पर फिर भी वो उनके साथ चली गयी. मदन उसे अपने घर ले गया, दोपहर का टाइम था तो कोई परेशानी नहीं थी, नशीब से सोसाइटी में भी किसीने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, दो मंजिला घर था. दोनों अंदर आ गए, गायत्री संकुचती हुई सोफे पर बेथ गयी. मदन बहोत उत्साहित था, आज खास अच्छे कपडे पहने थे और परफ्यूम भी लगाया हुआ था. घर थोड़ा बिखरा था क्यों की वो अकेला hi रहता था.

मदन : तुम बैठो में सरबत लता हु (कहते हुए वो अंदर गया और सरबत और नास्ता ले आया, गायत्री नज़ारे झुकाये हुए hi बैठी थी, उसने सरबत लिया और पिने लगी) नास्ता भी करो न, तुम्हारे लिए hi लाया हु. (नास्ते में समोसे और नमकीन था)

गायत्री : नहीं, ाभो थोड़ी देर पहले hi खाया है तो...

मदन : तुम आयी तो मुझे बहोत अच्छा लगा, एक बात पुछु अगर बुरा न मनो तो.

गायत्री : जी पूछिए.

मदन : इतने टाइम से में तुम्हे कह रहा था, हमेसा तुम मन कर रही थी, फिर ऐसा क्या हो गया जो तुमने है कह दी.

गायत्री : पता नहीं, पर में एक बात आपको कह देती हु, में यहाँ पैसो के लिए नहीं आयी हु तो प्लीज आप वो मात समझना. मुझे कोई पैसे नहीं चाहिए.

मदन : तो फिर तुम आयी क्यों?

गायत्री : पता नहीं. (उसने नजर झुका के कहा, सरबत का गिलास जो ख़तम हो चूका था उसने टेबल पर रख दिया और हिचकिचा के वो boli)Muje वापस भी जाना है.

मदन समाज रहा था, उसको भी काफी समय बाद औरत का सुख नशीब हो रहा था तो वो भी एक्सीटेंड हो रहा था.

मदन : आओ, वह बैडरूम है (गायत्री कड़ी हुई और संकुचती हुई रूम की और बढ़ चली, मदन भी पीछे पीछे चला गया, अंदर जाते hi उसने दरवाजा बंद कर दिया)

तक़रीबन एक घंटे बाद वो दोनों रस्ते पर थे, वो गायत्री को छोड़ने के लिए जा रहा था, वो काफी खुस था, गायत्री को बहोत शर्म आ रही थी, वो चुप चाप बैठी हुई थी, वो घर से थोड़ी दुरी पर hi उतर गयी.

मदन : शाम को मिलते है. (उसने मुस्कुरा कर कहा)

गायत्री : हम्म्म्म. (बिना नज़ारे मिलाये वो बोली, और घर की और चलने lagi)(Madan उसको जाता हुआ देख रहा था, उसके थिरकते कूल्हों पर नजर गढ़ गयी थी उसकी, उसको यकीं नहीं हो रहा था की अभी थोड़ी देर पहले वो इस लड़की को भोग चूका है, जब तक वो अंदर न चली गयी तब तक वो खड़ा रहा और फिर मुस्कुराते हुए सिटी बजता हुआ लौट गया.

दोपहर का वक़्त था, बाकि सब आराम कर रहे थे, दरवाजा खत खतने पर विणा ने hi दरवाजा खोला था, वो भी जा कर बाड़ेवाले कमरे में लेट गयी और जो उसने आज किआ था उसके बारे में सोचने लगी. अभी भी उसकी समाज में नहीं आ रहा था की उसने ऐसा क्यों किआ पर अब सब हो चूका था. वो सो गयी क्यों की शाम को गयम भी जाना था.

साइट पर से में घर आ गया, और फिर स्टेडियम चला गया, जूही ने मुझे बताया की मंतभाभी की उस से बात हुई है और उन्होंने बुलाया है, और मुझे भी साथ चलने को बोलै है.

शिव : ठीक है.

जूही : हम यहाँ से पहले मेरे घर जायेंगे उसके बाद वह से भाभी के वह कोई पूजा है वह जायेंगे.

शिव : ठीक है.

फिर जूही मुझे सारा प्रोग्राम समजती गयी, वो टिकट बुक करवाने वाली थी और दो दिन बाद हमे निकलना था.

शाम को मदन बार बार गायत्री से बात करने के लिए आ जाता था, गायत्री नज़ारे नहीं मिला रही थी, बस हु है में जवाब दे रही थी. मदन ने फिर शाम को कॉफ़ी के लिए पूछा तो उसने मन कर दिया, पर मदन ने उसे घर छोड़ने की बात जबर दस्ती की तो वो मन नहीं कर पायी और वो उसे घर तक छोड़ने आया. में भी उसी समय घर पंहुचा था. गायत्री दीदी उनके स्कूटर से उतर hi रही थी)

शिव : मदन सर आप? (मुझे देख कर दोनों थोड़ा चंक गए, दीदी के चेहरे पर थोड़ा दर दिखा मुझे)

मदन : (सँभालते hue)Are शिव, कैसे हो, अब तो दीखते hi नहीं, क्या चल रहा है.

शिव : में अच्छा हु, आप कैसे है?

मदन : अच्छा हु, इस और से जा रहा था तो सोचा की गायत्री को ड्राप करता चालू.

शिव : अच्छा किआ सर, थैंक यू.

मदन : अरे इसमें थैंक यू की क्या बात है, साथ में काम करते है तो इतना तो कर hi सकता हु, अच्छा चलता हु.

शिव : अंदर आईएनए सर.

मदन : नहीं, फिर कभी आऊंगा. अभी थोड़ा काम है. (वो निकल गए, दीदी थोड़ा दर रही थी)

शिव : क्या हुआ दीदी, दर क्यों रही हो? (मेने नोर्मल्ली hi पूछा)

गायत्री : नहीं वो,... मेने उन्हें मन भी किआ की में चली जाउंगी, पर वो बोले की छोड़ दूंगा.

शिव : अरे तो क्या हुआ, इसमें डरनेवाली क्या बात है.

गायत्री : नहीं वो मुझे लगा तुम्हे बुरा लगा होगा.

शिव : (अंदर जाते hue)Kya दीदी आप भी, आप पर कोई बंधन थोड़ी न है, आप समझदार हो, आपकी जिंदगी है.

गायत्री : तू इतना अच्छा क्यों है (उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : में क्या आप भी अच्छी hi हो. (हम दोनों अंदर चले गए)

ऐसे hi दो दिन निकल गए, आज मुझे और जूही को निकलना था. वह बिना भी अपने ससुराल के लिए निकल गयी थी.
 
अपडेट 182

बिना ससुराल पहुंच गयी थी, वो और स्वर्ण दोनों साथ में आयी थी, स्वर्ण के ससुर ने ड्राइवर के साथ कार भेजी थी तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं हुई थी. रस्ते में ड्राइवर की वजह से वो दोनों जनरल hi बाते कर रही थी, और कभी कभी शिव और बच्चे का मुद्दा आ जाता तो दोनों गुसपुस बात करलेती थी. वो दोनों जब पहुंची तो निर्मलादेवी ने दोनों का स्वागत किया. स्वर्ण शादी के बाद पहलीबार आयी थी तो निर्मलादेवी ने दरवाजे पर hi उसकी नजर उतरी और अंदर आने को कहा.

निर्मलादेवी : आओ बेटी, बरसो हो गए तुम्हे इस घर में आये हुए, कितनी छोटी थी तुम और आज देखो एक गृहिणी बन गयी हो पूरी.

स्वर्ण : (अपनी चची के पेअर छूटे hue)Muje तो लगता hi नहीं की में इतनी बड़ी हो गयी हु चची, आज भी यही लगता है की में वही स्वर्ण हु जो यहाँ वह दौड़ती रहती थी. (वो मुस्कुरा कर बोली)

निर्मलादेवी : हमरेलिए तो तुम वही स्वर्ण रहोगी, पर तब तुम फ्रॉक पहन कर घुमा करती थी और आज देखो साड़ी पहने कितने सलीके से रह रही हो, वक़्त बदलते कहा देर लगती है.

स्वर्ण : सही कह रही हो चची, पर आप आज भी वैसी hi हो (निर्मलादेवी के गाल खिंच कर वो बोली)

निर्मलादेवी : चल हैट बदमाश, देख नहीं रही मेरी बहु भी है अब, बच्चे कब बड़े हो गए पता hi नहीं चला.

बिना : (हलकी narajgise)Beti को मिल के बहु को तो भूल hi गयी आप. (उसने भी पेअर छू कर आशीर्वाद लिया)

निर्मलादेवी : जीती रहो, सदा सुहागन रहो, दूधो नहावो, पुतो फलो. (अपनी बहु के शिर पर हाथ रख कर आशीर्वाद देते हुए वो boli)Tumhe कैसे भूल सकती हु बेटी, ये बेतिया तो परायी हो गयी, तुम्ही तो मेरी बेटी हो जो मेरे साथ रहोगी, ये तो बस बहोत समय बाद आयी तो मान भर आया.

बिना : में तो ऐसे hi कह रही थी मजी (उसने मुस्कुराकर कहा)

निर्मलादेवी : तुम दोनों फ्रेस हो जाओ, में खाना लगवाती हु.

स्वर्ण : अरे नहीं चची, में फिर कभी आउंगी, पहले घर जाती हु, कितने साल हो गए, घर गए हुए.

निर्मलादेवी : ये भी तो तुम्हारा hi घर है, इतने समय बाद आयी हो तो बिना खाये तो जाने नहीं दूंगी, भले hi थोड़ा खाना, पर खा लो.

स्वर्ण : ठीक है चची.

फिर सब खाने बैठे, और उनकी भूतकाल की बाते चलती रही, निर्मलादेवी, स्वर्ण के बचपन के किस्से सुनती रही और ऐसे hi सबने खाना खाया. बिना का पति और ससुर तो घर पर थे नहीं तो तीनो खुल के बाटे कर रही थी. खाने के बाद स्वर्ण ने फिर आशीर्वाद लिया और अपने घर की और निकल गयी, उसका दिल वैसे भी जोरो से धड़क रहा था, मन मर्जी शादी कर्ली थी उसने तो घर छोड़ना पड़ा था उसको, पर आज किस्मत से उसको घर आने का मौका मिला था, वो रस्ते भर गालिओ और घरो को देख रही थी, तब और अब में कितना बदलाव आ गया है ये वो मान hi मान सोच रही थी, गाड़ी जब हवेली पहुंची तो दरवान ने गेट खोल दिया और गाड़ी अंदर दाखिल हो गयी, जैसी हवेलिया होती है वैसे hi चारो तरत बहोत बड़ा गार्डन था, कई लोग अंदर काम कर रहे थे, उनकी नजर भी गाड़ी पर चली गयी थी, वो जैसे जैसे दरवाजे के नजदीक पहुंची उसकी दिल की धड़कने तेज हो रही थी. जब गाड़ी दरवाजे के नजदीक पहुंची तो उसने देखा की उसका भाई पृथ्वी अपनी खुली जीप में बेथ रहा है, उसकी भी नजर आती गाड़ी पर पड़ी, दो पल के लिए वो रुक गया की कोण है, पर जब उसने बहार आती अपनी बहन स्वर्ण को देखा तो उसने नजर फेर ली और गाड़ी में बेथ गया, स्वर्ण थोड़ी दरी हुई उसके नजदीक पहुंची पर वो गाड़ी चालू कर चूका था और बिना कुछ बोले वो वह से निकल गया, स्वर्ण उसे जाता देखती रही. उसको बहोत बुरा लगा की उसने बात तक नहीं की, वो अभी सोच में डूबी hi थी की उसकी माँ की आवाज आई.

कामनादेवी : आ गयी बेटी! (उसने खुस हो कर कहा)

स्वर्ण : (जब उसने अपनी माँ के मुस्कुराते चेहरे को देखा तो वो जा कर उनके गले लग गयी और रोने lagi)Maaaa.

कामनादेवी : स्वर्णाआ (कहते हुए स्वर्ण को अपनी बहो में ले लिया, दोनों की आँखों में आंसू थे, थोड़ी देर बाद दोनों sambhale)Ab यही कड़ी रहेगी की अंदर भी आएगी. (वो दोनों अंदर की और जा hi रहे थे की सामने hi पद्मा आरती की थाली सजा कर आती दिखाई दी, अपनी बहु को ऐसे आरती की थाली के साथ देख कर कामनादेवी खुस हो gayi)Beti को मिलने की खुसी में में तो भूल hi गयी थी की बेटी आज पहली बार अपने मायके आ रही है.

पद्मा : में जानती हु माजी, पर में हु न, मेरे रहते आपको फ़िक्र करने की कोई जरुरत नहीं है.

कामनादेवी : में जानती हु बेटी, तू है तो सब कुछ सही से चल रहा है, सब कुछ अच्छा है बस एक पोते या पोती की कमी रह गयी, अब आशा है की सब सही हो जायेगा.

स्वर्ण : क्या मां आप भी, सब ठीक हो जायेगा. (पद्मा आरती की थाली अपनी सास को देने लगी)

कामनादेवी : नहीं बेटी, तू hi आरती उतर इसकी. (पद्मा मुस्कुरायी और अपनी नानन्द की आरती उतरने लगी और फिर उसकी नजर भी उतरी, स्वर्ण अपनी भाभी के गले लग गयी)

स्वर्ण : भाभीइइइइइइ. (पद्मने भी मुस्कुरा कर उसे गले लगाया)

कामनादेवी : हे भगवन, मेरे घर को ऐसे hi सदा खुस रखना, बड़ो के पाप की सजा मेरी बच्चीओ को मात देना. (कामनादेवी ने अपनी आंखे पोछते हुए कहा)

स्वर्ण : सब ठीक हो जायेगा मम्मी. (फिर आस पास देख kar)Papa नहीं है?

कामनादेवी : उनके पॉ घर में टिकते hi कहा है, कही बहार गए है, रात तक आ जायेंगे. (वो सब अंदर आये और सोफे पर बैठने लगे)

पद्मा : अरे आप यहाँ क्यों बेथ रही हो, खाना तैयार है, आप की hi प्रतीक्षा कर रहे थे.

स्वर्ण : में तो चची के घर खा कर आयी, उन्होंने बिना खये आने hi नहीं दिया.

कामनादेवी : तो क्या हुआ, थोड़ा खा ले.

स्वर्ण : ठीक है मम्मी. (सबने मिलकर खाना खाया, घर में नौकर नौकरानियाँ थी तो कोई दिक्कत नहीं थी, फिर तीनो साथ में हॉल में बैठे, स्वर्ण ने डरते डरते puchha)Mummy एक बात पुछु?

कामनादेवी : इसमें पूछने की क्या बात है, पूछ जो पूछना है.

स्वर्ण : क्या पापा अभी भी गुस्सा है?, भैया ने तो बात भी नहीं की मुझसे.

कामनादेवी : इनलोगो का तो ऐसा hi है, पता नहीं किस बात का घमंड है, बाप दादा की इतनी मिल्कियत के बावजूद इनका लालच कम होता hi नहीं, और इनकी करतूतों की सजा आज पुरे खंडन को भुगतनी पद रही है, भले hi वो लोग कुछ भी कहे पर आज उपरवाले ने उन्हें झुका दिया, अब उनकी समाजमे आ रहा है की इतनी दौलत भी किसी काम की नहीं जब घर में चिराग hi न जले. पहले कहते थे की कभी स्वर्ण का मुँह भी नहीं देखूंगा, पर आज देखो, किस्मत की ऐसी लात पड़ी है की ये सब करने को भी तैयार हो गए.

स्वर्ण : उस वक़्त में दार गयी थी मम्मी, अगर में उन्हें बताती की में ाक्ष से प्यार करती हु और शादी करना चाहती हु तो वो कभी नहीं मानते और शायद आकाश को भी नुकसान पंहुचा सकते थे.

कामनादेवी : जो हो गया सो हो गया, मिटटी दाल उस पर, बस अब तो भगवन से यही प्राथना है की सब सही हो जाये, जो भी बुरी शक्तिया है या साया है या मनहूसियत है वो हैट जाये और फिर से ये खंडन खुश से महक उठे. उनके लालच ने आज हमे किस माउद पर लेक खड़ा करदिया है, न बहु न बेटी, किसी को भी संतान सुख प्राप्त नहीं है, तू hi एक खुशनशीब है जिस पर भगवन की मेहर हुई hai(Upar देख कर हाथ जोड़ kar)Hey इस्वर, अब रहें कर इस परिवार पर, हमें जो सजा देनी है दे पर इन बच्चीओ पर रहें कर.

स्वर्ण : (उसके गले तक आ गया की वो बोल दे की ममतादिदी और बीणाभाभी भी माँ बन ने वाली है पर वो रुक गयी, बिना भाभी ने अभी किसी को भी बताने से मन किया था, वर्ण ये अनुष्ठान करने की बात को ताल दिया जाता क्यों की उनके मुताबित तो ये अनुष्ठान बच्चो के लिए था पर वो hi जानते थे की ये अनुष्ठान उनके बच्चो के बाप के लिए था, तीनो आपस में बात कर के आगे क्या करना है वो प्लान बना रहे थे.) सब ठीक हो जायेगा मम्मी, भाभी भी जल्द hi अच्छी खबर सुनाएगी.

कामनादेवी : अब क्या क्या बताये तुजे, हम किस हद तक प्रयत्न कर चुके है ये हम hi जानते है, बहु भी अपने तरीके से प्रयत्न कर चुकी पर कोई फायदा नहीं. (वो खुल कर तो नहीं बोली पर पद्मा ने नज़ारे झुका ली, क्यों की वो अपने पति के अलावा भी किसी और के साथ सम्बंद बना चुकी थी, सिर्फ बच्चे के लिए, इस बात को ले कर आज भी उसके और उसके पति के बिच जगहदा हो जाता था, उसके चलते उस लड़के को भी जान गावनि पड़ी थी, बड़ी बे रही से मार कर उसके शव को पेड़ से लटका दिया था, बात ज्यादा बहार नहीं आयी और कोई खुल कर बोल भी नहीं पाया क्यों की सब डरते थे पर अंदर अंदर गुसपुस तो हुई hi thi)Chhodo ये सब, अब बाबाजी का hi भरोसा है, देखते है क्या होता है, तुम थक गयी होगी आराम करो, शाम को बाटे करेंगे.

स्वर्ण : जी मम्मी.

पद्मा : आइये, मेने आपका कमरा तैयार hi रक्खा है.

स्वर्ण : (मुस्कुराते hue)Thank यू भाभी. (पद्मा बस मुस्कुरायी, स्वर्ण अपने कमरे में चली गयी और पद्मा भी अपने कमरे में चली गयी)

में और जूही ट्रैन से निकले थे, आज दिन की ट्रैन थी तो हम दोनों विंडो के पास hi बैठे थे, वो विंडो के पास और में उसकी बगल में, दूसरे भी लोग थे वह, और हाइट की वजह से लोगो के आकर्षण का केंद्र भी हम hi थे, हमारे साथ एक आंटी, अंकल और उनका एक बीटा भी था, आंटी जूही के सामने hi बैठी थी, जिस तरह से जूही मेरा ख्याल रख रही थी आंटी ने पूछ hi लिया

आंटी : बुरा मात मान न बेटी, पर क्या तुम दोनों की शादी हो गयी है, वैसे लगता तो नहीं है. (उनकी बात सुन कर जूही शर्मा गयी, मेने संभल कर जवाब दिया था)

शिव : नहीं आंटी, हम दोनों दोस्त है.

आंटी : (मुस्कुराते hue)Aisa कहो न की बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड है, क्यों की लगता नहीं की सिर्फ दोस्त हो. (अब में क्या जवाब देता उन्हें, जूही तो बहोत शर्मा रही thi)Waise तुम्हारी जोड़ी है परफेक्ट, दोनों की हाइट भी अच्छी है, अच्छे लगते हो दोनों साथ में.

शिव : (में क्या कहता, मेने बस इतना kaha)Thank यू आंटी.

ऐसे hi इधर उधर की बाते करते हुए हमने हमारा सफर ख़तम किया, लगभग शाम ढलते हम दोनों जूही के सहर पहुंच गए थे, चंद्रपाल भाई तो आ नहीं सके थे तो विष्णु भाई लेने आये थे. मुझे देखते hi वो मुझसे गले मिले.

विष्णु : कैसा है भाई?

शिव : बहोत बढ़िया, आप कैसे हो?

विष्णु : में भी अच्छा हु, कैसी हो जूही?

जूही : (थोड़ी नाराजगी se)Ha अच्छी हु.

विष्णु : क्या हुआ तुजे?

जूही : आप पहले मुझे जानते है की इसको.

विष्णु : (मुस्कुराते hue)Aisa क्यों कह रही है .

जूही : मुझसे पहले आप इस से क्यों मिले, क्या ये मुझसे भी खास हो गया आपका. (थोड़ा रूठते हुए वो बोली)

विष्णु : तू भी न? (मुस्कुराते हुए उन्होंने जूही का सामान लिया और जीप में रखा, मेने अपना बैग खुद रख diya)Chal आजा, जीप चलाएगी? (जूही ने मुस्कुराते हुए चाबी ले ली और ड्राइविंग सीट पर बेथ गयी, में उसके बाजु में और विष्णुभाई पीछे बेथ गए, इधर उधर की बाटे करते हुए हम घर की और चल पड़े, उन्होंने हमे घर छोड़ा और वो चले गए, जैसे hi में अंदर पंहुचा मुझे मुस्कुराती हुई ममता भाभी के दरसन हुए. जूही उनके गले लग गयी और मेने उन्हें नमस्ते कहा. मुझे देख कर उनके चेहरे पर हलकी सी शर्म थी और साथ में ढेर सारा प्यार.

शिव : नमस्ते.

ममता : (ढेर सारा प्यार, शर्म और हलकी नाराजगी se)Akhir याद आ गयी.

जूही : दांतो, और दांतो, कितनी बार कहा की घर चलना है, भाभी ने बुलाया है, पर फुर्सत hi नहीं जनाब को.

ममता : (शरमाते hue)Me दन्त नहीं रही हु.

जूही : है, आप क्यों दांतो गई, सब इसकी तरफ हो गए है. (वो और में मुस्कुराये तभी जूही की मम्मी भी बहार आयी)

रागिनिदेवी : आ गए बीटा?

शिव : (पेअर छूटे hue)Namaste आंटी, कैसी है आप?

रागिनिदेवी : जीते रहो, अच्छी हु, तुम कैसे हो, बहोत समय बाद आये.

जूही : फुर्सत कहा जनाब को. (उसने फिर टॉन्ट मारा)

रागिनिदेवी : है, जैसे तुजे बहोत फुर्सत है न, कितने दिनों बाद आयी तू (उसके कान पकड़ते हुए)

जूही : ोुछः! दुःख रहा है मम्मी.

रागिनिदेवी : चल जूठी, नाटक करती है अपनी माँ से. (जूही मुस्कुरायी और अपनी माँ के गले लग gayi)Chal चल, अब जूठा प्यार मत दिखा.

फिर हम सब अंदर गए. चंद्रपाल भाई अंदर hi बैठे हुए थे, अभी भी उनके पेअर में और हाथ में प्लास्टर लगा हुआ था. उनसे hi hello करने के बाद मेने पूछा,

शिव : ये प्लास्टर कब तक रखना है भैया.

चंद्रपाल : बस अब कुछ hi दिन रखना है. (भाभी हमारे लिए पानी ले आयी, हमने पानी पिया, फिर बाते चली और फिर खाना खाया, भाभी ने बहोत सारा खाना बनाया था, जूही ने फिर खिंचाई की)

जूही : मेरे आने की खुसी में कुछ ज्यादा hi म्हणत नहीं करदी भाभी. (भाभी शर्मा गयी, और एक नजर मेरी और देखा, में समाज रहा था की ये सब मेरे लिए किया है उन्होंने)

रागिनिदेवी : चुप चाप खाना खा, जब देखो तब बोलती रहती है. (हम सबने ऐसे hi बाटे करते हुए खाना खाया, फिर हम हॉल में बैठे थे)

रागिनिदेवी : (मंतभाभी की और देख kar)Tere बाबूजी को तो छूती मिली नहीं है, और चंदू तो आ नहीं सकता, फिर कैसे जाओगी बहु. (उन्हें पता नहीं था की हम सब प्लान बना कर hi आये है)

जूही : कहा जाना है मम्मी (अनजान बनते हुए)

रागिनिदेवी : तेरी भाभी के वह अनुष्ठान है, वह जाना है, तू जाएगी भाभी के साथ?

जूही : है क्यों नहीं, में और शिव दोनों चले जायेंगे, क्यों शिव? (में क्या कहता, मेने बस है में शिर हिलाया)

रागिनिदेवी : ठीक है तो तुम hi चले जाना. (हम बाटे कर hi रहे थे की विष्णुभाई और पारुल वह आये)

जूही : पारो, (कहते हुए वो उसके गले mili)Kaisi है तू (उसके गले लगे हुए पारुल ने मेरी और देखा, में मुस्कुराया तो वो भी मुस्कुरायी)

पारुल : (नाराजगी se)Ab तेरे पास टाइम नहीं है तो में hi मिलने आ गयी. (ये बात पारुल ने मेरी और देख कर कही थी, में समाज रहा था, पर मेने कोई प्रतिभाव नहीं दिया)

जूही : ऐसा क्यों कह रही है, फ़ोन पे तो बात करते है न.

पारुल : है, महीने में एक दो baar.(Usne टॉन्ट मारा)

जूही : (वह बैठते hue)Kyu नाराज हो रही है इतना, अगर में नहीं करती तो तू करलिया कर, किसी ने रोका है क्या तुम्हे. (विष्णु भाई मेरे पास बेथ चुके थे)

विष्णु : अब तो ये किसी और के साथ घंटो लगी रहती है, तुजसे क्या खाक बात करेगी.

जूही : किसके साथ भैया?

विष्णु : क्यों तुजे बताया नहीं इसने, इसकी शादी पक्की हो गयी है.

जूही : (आश्चर्य se)Kamini कही की, इतनी बड़ी बात नहीं बताई मुझे.

पारुल : (शरमाते hue)Abhi बात hi हुई है, कुछ पक्का नहीं हुआ है. और में क्यों बताऊ, तेरे पास टाइम है क्या?

जूही : कमसे काम फ़ोन तो कर देती, कोण है हमारे जीजाजी?

विष्णु : सब तय hi है, हमारे पहचान के hi लोग है, सगाई और शादी साथ साथ hi करदेनेवाले है. (में देख रहा था की पारुल बहोत शर्मा रही थी और कभी कभी मेरी और देख रही थी, करीब बिस पच्चीस मिनट वो दोनों रुके और घर आने का न्योता दे कर वो चले गए)

रागिनिदेवी : तुम लोग बाटे करो, मुझे तो नींद आ रही है, बहु शिव के सोने का इंतजाम कर देना, और तू कहा सोयेगी?

जूही : कही भी सो जाउंगी.

रागिनिदेवी : आज मेरे साथ सो जा, कितने दिन हो गए मेरे साथ सोये हुए.

जूही : ठीक है, आप जाओ में आती हु. (वो चली गयी, चंद्रपाल भाई भी अपनी घोड़ी का सहारा ले कर खड़े हुए और अपने कमरे की और जाने लगे, भाभी उन्हें सहारा दे रही thi)Chalo में तुम्हारा कमरा ठीक कर देती हु. (उसने जिस तरह से मुझे देखा में समाज गया की वो कुछ नॉटी करनेवाली है, हम दोनों ऊपर आये, उसने कमरा खोला, वैसे तो सब ठीक hi था, भाभी ने पहले से hi सब ठीक कर के रक्खा था, मेने अपना बैग जैसे hi रक्खा जूही आ के मुझसे लिपट गयी और मुझे किश करने लगी, मेने भी उसको बहो में भर लिया और उसको किश करने लगा, थोड़ी देर बाद हमने किस तोड़ी पर अभी भी एक दूसरे को बहो में hi थे) ट्रैन में वो आंटी क्या कह रही थी, हमारी जोड़ी परफेक्ट है (उसने मुस्कुराके कहा)

शिव : (मेने उसको छेड़ने के इरादे से kaha)Muje तो लगता है आंटी की आंखे कमजोर थी शायद.

जूही : बड़े आये, अपने आप को बहोत स्मार्ट समझते हो na(Usne रूठे स्वर से कहा)

शिव : (मुस्कुराते hue)Me तो ये कह रहा था की तुम कितनी खूबसूरत हो, तुम्हारे सामने में कहा.

जूही : (अपनी तारीफ सुन कर वो भी मुस्कुरा उठी और मुझे किश करने लगी और साथ में मेरे कड़क हो चुके लुंड को दबाने लगी, में भी अपने हाथ उसके कूल्हों पर ले गया और उसको मसलने लगा, तो वो गरम होने लगी, उसने बिनती भरे स्वर में kaha)Shhhhh मात करो न, मुझे जाना है, मम्मी के साथ सोना है, लेट हो गयी तो क्या कहूँगी?

शिव : तो फिर चिपकी क्यों थी? (मेने उसके कूल्हों को जोर से मसल दिया)

जूही : शहहहहह मात करो यार, वर्ण अपने आप को रोक नहीं पाऊँगी, और मुझे पता है की तुम इतनी जल्दी छोड़ोगे नहीं, घर जा के जो करना है वो कर लेना. (उसकी बात सही थी, वैसे भी यहाँ रिस्क लेना ठीक नहीं था, पर उसके छूने से मेरा मान मचल रहा था, जैसे तैसे मेने अपने आप को संभाला और शांत होने लगा, उसने मेरी आँखों में देखा, और मेरे लुंड को दबाते हुए boli)Agar बहोत मान कर रहा है तो जल्दी जल्दी कर लो. (मान तो उसका भी मचल रहा था)

शिव : रहने दो, रिस्क क्यों लेना, तुम जाओ.

जूही : नाराज हो गए?

शिव : नहीं जान, में क्यों नाराज़ होऊंगा, तुम्हारी मजबूरी भी समाज रहा हु, और तुम कहा भागी जा रही ho.(Mene मुस्कुरा के कहा)

जूही : (वो भी मुस्कुरायी और एक बार फिर मुझे छोटी सी किश ki)I लव यू शिव.

शिव : लव यू तू जान.

जूही ने अपने आप को सही किआ और वह से निचे चली गयी, में भी अभी अभी जो हुआ था वो सोचते हुए बिस्तर पर लेट गया, लुंड अभी भी अपनी ोकत में था. जूही निचे पहुंची तो सब शांत था, उसने दरवाजा बंद किआ और अंदर गयी hi थी की तभी मंतभाभी ने दरवाजा खोला और बहार निकली, दोनों की नज़ारे मिली, एक बार के लिए तो दोनों की नज़ारे hi झुक गयी, जैसे दोनों की चोरी पकड़ी गयी हो, झुहि का तो समाज में आ रहा था पर ममता क्यों दर रही थी?

दरअसल शिव को देख कर शाम से hi वो मचल रही थी, पर बार बार उसे बीणाभाभी की कही याद आ रही थी, उनको लग रहा था की शिव hi शिवांश है, और कही न कही उसे भी लग रहा था की वो शिवांश है, पर जो सम्बन्ध बन चुके थे उस से भी वो इंकार नहीं कर सकती थी, वो अपने पति को ले कर अपने कमरे में चली गयी थी पर बार बार उसका दिल शिव से मिलने को तड़प रहा था, उसने अपने पति को दवाई दी थी, रात को दर्द न हो उसकी वजह से उनकी दवाई में नींद की गोली भी होती थी, तो वो अक्सर गहरी नींद में सो जाते थे, आज भी वही हुआ था, पर ममता की आँखों से नींद गायब थी, उसका दिल कर रहा था की वो शिव के पास चली जाये, पर उसको दर भी लग रहा था. कही किसी को पता न चल जाये, और ऊपर से वो हिचकिचाहट की अगर शिव hi शिवांस है तो क्या उसके सम्बन्ध ठीक है, पर अभी कुछ भी जाहिर नहीं था तो उसका दिल उस और से आंखे मुंड लेने चाहता था, इतने दिनों में वो सेक्स से वंचित थी, क्यों की उसके पति की हालत भी ठीक नहीं थी. पर आज शिव को देख कर वो अपने आपको रोक नहीं प् रही थी, बहोत तर्क वितर्क के बाद वो कमरे से बहार आयी थी पर सामने जूही को देख कर उसे लगा जैसे उसकी चोरी पकड़ी गयी थी, उसने अपने आपको संभाला और बोली,

ममता : काफी देर हो गयी? (हलाकि वो जानती थी की शिव और जूही के बिच कैसे सम्बन्ध है)

जूही : (हिचकिचाते hue)Ha वो कमरा ठीक किआ और फिर बाते करने लग गयी thi.(Usne नज़ारे चुरा के कहा)

ममता : (वो हलके से मुस्कुरायी क्यों की वो जानती थी की कमरा तो ठीक hi था, और जूही का रुकना सही भी था, वैसे भी जवान जोड़े ऐसे मौके की तो तलाश में रहते hai)Wo सो गया क्या?

जूही : नहीं, अभी hi बिस्तर पर लेता होगा.

ममता :दूध दिया था उसको?

जूही : नहीं.

ममता : में गरम कर देती हु, जा दे आ. (वैसे तो ममता का दिल कर रहा था की वो जाये पर ऐसा कह नहीं सकती थी) तू पीयेगी?

जूही : नहीं भाभी, में सोने जा रही हु, मम्मी इंतजार कर रही होगी, आप दे aana.(Ye कहते हुए उसने अपनी भाभी को देखा, दोनों की नज़ारे एक पल के लिए मिली और ममता की नज़ारे झुक गयी, जूही के चेहरे पर मुस्कान thi)Bhaiya सो गए?

ममता : है.

जूही : जाते वक़्त बहार से दरवाजा बंद कर के जाना. (ममता अंदर से कैंप गयी की जूही क्या कह रही है, वो उसको देखने लगी) अरे आप ऊपर गयी और बाते करने लग गयी तो कही बिल्ली अंदर न घुस जाये, इस लिए कह रही थी, में सोने जाती हु, गुड नाईट. (कहते हुए वो कमरे की और बढ़ गयी, उसके चेहरे पर मुस्कान थी, वो अपनी भाभी को ज्यादा परेशान नहीं करना चाहती थी, पर वो जानती थी की शिव ऊपर गरम है और वो भाभी को छोड़ेगा नहीं, दिल तो उसका कर रहा था की उन दोनों को देखे पर ये संभव नहीं था, क्यों की उसको अपनी मम्मी के साथ सोना था, अगर सोना न होता तो वो खुद अभी शिव के निचे होती, वो अपने कमरे में चली गयी, दरवाजे की आहत से उसकी मम्मी उठ गयी)

मम्मी : आगयी?

जूही : है मम्मी.

मम्मी : आजा. (कहते हुए उन्होंने अपनी साथवाली जगह को सही किआ, जहा जूही लेट गयी, और वो शिव और अपनी भाभी के बारेमे सोचने लगी, उसने खुद उनको ये मौका दिया था और उसका नतीजा भी वो जानती थी, उसके चेहरे पर मुस्कान थी और उसने आंखे बंद कर ली)

ममता दूध गरम कर के बहार निकली और उसने दरवाजा बहार से बंद कर दिया, वैसे तो उसको जरुरत नहीं थी क्यों की सिर्फ दूध दे कर वापस आ जाना था, पर कही न कही उसका दिल भी जनता था की देर हो सकती है, वो धड़कते दिल से सीढिया चढ़ने लगी, उसने रात को पेहेन ने वाला गाउन पहना था, वो आस पास भी देख रही थी की कही कोई देख तो नहीं रहा, वैसे तो कोई चांस नहीं था पर कहते है न की जिसके दिल में चोर हो वो सररक रहता है, वो ऊपर आ गयी, शिव का दरवाजा खुला hi था, रात के सनते में उसकी पायल की आवाज आ रही थी, वो बहोत एतिहात से कदम बढ़ा रही थी ताकि ज्यादा आवाज न आये, वो दरजे तक पहुंच कर रुक गयी.

शिव सिर्फ लेता हुआ था और उसको पायल की आवाज आयी तो उसने दरवाजे की और देखा तो उसको अँधेरे में एक साया खड़ा दिखा, कद काठी से वो समाज गया की मंतभाभी है.

शिव : रुक क्यों गयी, अंदर आ जाईये. (ममता की धड़कने बढ़ चुकी थी, पिछले काफी दिनों से उसके अंदर एक तूफान भरा हुआ था, वो अक्सर ये सोचती थी की जब उसका सामना शिवांस से होगा तो क्या होगा, क्या वो उसे अपने चाहा का लड़का समझेगी या उसके बच्चे का होनेवाला बाप, शिव की आवाज सुन कर वो कैंप गयी थी पर वो अपने आप को रोक नहीं प् रही थी, वो आहिस्ता आहिस्ता चलते हुए कमरे में दाखिल हो गयी और बिस्तर से थोड़ी दुरी पर कड़ी हो गयी, शिव के लिए भी ये एक अलग hi एहसास था, ये जरूर था की उन दोनों के बिच सम्बन्ध बन चुके थे पर इतने दिनों बाद वो आमने सामने थे, एक हिचकिचाहट उन दोनों के बिच आ चुकी थी, वैसे भी वो न पति पत्नी थे न प्रेमी, समाज के लिए ये अवैध सम्बन्ध था, उनको खड़े देख कर वो बिस्तर पर बेथ गया और अपने पेअर निचे लटका लिए.

शिव : (अपने आपको सँभालते hue)Waha क्यों रुक गयी? (अँधेरा था पर दरवाजे से आती हलक रौशनी में वो उन्हें देख सकता था)

ममता : (हिचकिचाते hue)Dudh लायी थी (बड़ी मुश्किल से वो बोली)

शिव : रख दीजिये. (ममता आगे बढ़ी और वह पड़ी टेबल पर दूध का गिलास रख दिया, पर वो वापस गयी नहीं बस वैसे hi कड़ी रही, शिव भी समाज रहा था, वो हिचकिचाहट वो शर्म, वो लड़का था और उसको पता था की ये शर्म और हिचकिचाहट का पर्दा उसे hi गिरना पड़ेगा, उसने हाथ बढ़ा कर भाभी का हाथ पकड़ा, उनकी उंगलिअ कैंप gayi)Kya हुआ?

ममता : क क कुछ नहीं.

शिव : भैया सो गए?

ममता : है. (भले hi बात में कुछ नहीं था पर इतनी सी बात ये कहने के लिए काफी थी की सब सही है, और वो सब ठीक कर के hi आयी है)

शिव : (हल्का सा हाथ खिंच kar)Bethiye न. (ममता कटी पतंग की तरह शिव के बाजु में बेथ गयी, उसकी सांसे ऊपर निचे हो रही थी, शिव ने हाथ अच्छे से पकड़ा और sehlaya)Kya हुआ? (ममता कुछ नहीं बोली, बोलती भी क्या, उसकी हालत ख़राब थी, शिव थोड़ा उनकी और घूम gaya)Meri याद आयी? (इतना सुन न था की ममता शिव की और घूमते हुए उस से लिपट गयी, शिव ने उन्हें बहो में भर लिया, ममता के शरीर को बहो में भर ने से उनके शेयर शरीर का भूगोल समाज में आने लगा, उनके ब्रा की स्ट्राप भी महसूस हुई, और उनके मखमली शरीर का स्पर्श भी महसूस होने लगा, ममता भी पूरी तरह से शिव से लिपट गयी जैसे बरसो की तड़प हो, शिव मुस्कुराते हुए bola)Are बापरे, इतनी तड़प.

ममता : (शर्मा gayi)Tum बहोत गंदे हो.

शिव : अभी तो कुछ क्या भी नहीं और गन्दा भी हो गया. या कुछ किया नहीं इस लिए गन्दा हु हु? (ममता शर्मा गयी और मुस्कुराने लगी, वो सब भूलजाने चाहती थी, उसे बस शिव का प्यार चाहिए था, शिव उसको बिस्तर में लेटने लगा तो वो लेट गयी, और शिव उसके ऊपर झुक गया और उसके तड़पते होठो को अपने होठो से चूसने लगा, उसने अभी अपने हाथ उसकी पीठ पे लगा दिए और उसको अपनी बहो में बरते हुए उसके चूमने का जवाब देने लगी, दोनों के होठो थूक से भीगने लगे, पर दोनों को कोई परवाज नहीं थी, बल्कि वो मुखरास और उत्तेजित कर रहा था, शिव उसको चूमते हुए उसके पेट पर हाथ घूमने लगा और दूसरे hi पल उसके उन्नत उरोजों को सहलाने लगा, वो पहले से hi उत्तेजित थी, शिव को सोच सोच कर hi गरम हो चुकी थी, शिव के द्वारा स्तन दबाने से उसकी सांसे भी उखाड़ने लगी और उस से साँस लेना भी दूभर हो गया, उसने अपने होठ छुड़ाए और दूसरी और मुँह कर के जोर जोर से सांसे लेने लगी)

ममता : फूऊऊऊ फूऊऊऊ fuuuuuuuuuu. (जैसे जैसे शिव उसके स्तन दबा रहा था उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, वो अपने पेअर के बिच हो रही सर सराहत को महसूस कर रही थी और अपनी झंघे आपसमे रगड़ने lagi)Shhhhhhh Shiiiiiiiiiiiiiv. (वो शिव के कपडे ऊपर करने लगी, जैसे कह रही हो की इन्हे निकल दो, शिव ने बैठते हुए अपना शर्ट निकल दिया और बनियान भी निकल दी, ममता उसको hi देख रही थी, शिव बिस्तर पर खड़ा हुआ और अपना पंत निकलने लगा, पंत के साथ उसने अपना अंडरवियर भी निकल दिया, हलके अँधेरे में भी वो फनफनाता हुवा लुंड अपनी उपस्थिति दर्शा रहा था, ममता की निगाहे वही चिपक गयी, शिव ने हाथ बढ़ाया तो उसने अपना हाथ दिया, शिव ने उसको बिठा दिया और उसके गाउन को उतरने लगा, अपने कूल्हे उंचका कर और हाथ ऊपर कर के उसने पूरी मदद की, वो अब सिर्फ ब्रा और पंतय में hi थी, शिव फिर बेथ गया और उसको बिस्तर पर लेता दिया और उसके ऊपर आ गया, दो गरम जिस्म आपस में रगड़ने लगे, टांड वातावरण के बावजूद दोनों के शरीर पर पसीना उभर आया, ममता के हाथ ऊपर कर के शिव उसके चेहरे को और गले को चाट रहा था, इस स्पर्श से ममता पूरी तरह मचल रही थी और बार बार सिसकीओ के साथ शिव का नाम ले रही थी, उसकी चुडिया और पायल की आवाज वातावरण में गूंज रही थी, ये तो अच्छा था की उसका पति नींद की गोली के असर में सो रहा था और उसकी सास और नानन्द कमरा बंद कर के सो रहे थे, वर्ण उन्हें ये आवाज सुनाई दे जाती. ममता को अपनी योनि पर लुंड की चुभन और रगड़ महसूस हो रही थी, लुंड से निकलते रास और छूट से निकलते रास से कच्छी पूरी गीली हो रही थी, ममता से बर्दास्त नहीं हो रहा था वो लुंड को जल्द से जल्द अपनी योनि के अंदर लेना चाहती थी, वो अपनी कमर हिला रही थी, अपनी कच्छी भी उसे बेरन सी महसूस हो रही थी, वो इस बलिस्त गर्म शरीर को अपने अंदर समां लेना चाहती थी, शिव की पीठ में नाख़ून गधा के अपने आनंद का इजहार कर रही थी वो, शिव उसकी चुचिओ को ब्रा के ऊपर से hi चूस रहा tha)Shhhhhh Shiiiiiiiiiiv, मेरे हाथ छोडो. (उसने शिव से इल्तेजा की, शिव ने उनके हाथ जैसे hi छोड़े उसने अपनी पीठ पर हाथ ले जा कर अपनी ब्रा खोल दी और अपने शरीर से अलग कर दी, और अपनी कच्ची को भी उतरने लगी, उनका उतावला पैन देख कर में मुस्कुराया, उन्होंने वो देख liya)Tum बहोत गंदे ho(Kehte हुए वो शर्मा गयी)

शिव : मेने क्या किया?

ममता : सब जानते हो, बस मुझे सत्ता रहे हो.

शिव : किस बात की जल्दी है आपको?

ममता : तुम नहीं संजो गए, बस मुज में समां जाओ शिव, इस से पहले की में कमजोर पद जाऊ मुज में समां जाओ, में सब भूल जाना चाहती हु.

शिव : क्या भूल जाना चाहती हो?

ममता : बाते नहीं शिव, एक बार मुजमे समां जाओ और मुझसे जुड़ जाओ. (कहते हुए वो अपना हाथ निचे ले गयी और लुंड को ढूंढने लगी, जैसे hi लुंड हाथ में आया उन्होंने अपने पेअर पूरी तरह से फैला दिए और लुंड को सीधे छूट के छेड़ पर लगा दिया, शिव की कमर को पकड़ कर अपनी और खींचने लगी, लुंड छूट को फैलते हुए अंदर उतरने लगा, हलके दर्द की वजह से उसने अपने होठो को दन्त से काट लिया अपर शिव को अपनी और खींचती रही, लुंड गीली छूट को फैलते हुए अंदर जा रहा था, वो अपनी कमर हिला कर अपनी छूट को एडजस्ट कर रही थी, आखिर कर उसकी म्हणत रंग लायी और छूट पूरी लुंड से भर गयी, हलाकि लुंड अभी भी थोड़ा बहार था पर उसकी छूट भर गयी थी, उसने शिव की पीठ पर अपने नाख़ून गढ़ते हुए उसको बहो में भर लिया और सुकून से अपनी आंखे बंद कर ली, शिव बिना कुछ किये उनके चहेरे को देख रहा था, एक सुकून था चेहरे पर, वो बस लेता रहा, गरम गरम छूट उसके लुंड से लिपट गयी थी और वो खुद उसके साथ लिपट गयी थी, थोड़ी देर बाद ममता ने आंखे खोली और शिव को देखा, वो उसको hi देख रहा था, वो बड़े प्यार से उसे देखने लगी, उसके चेहरे पर संतुस्ती थी, वो शिव से जुड़ चुकी थी, उसकी आँखों में ढेर सारा प्यार था. शिव झुका और उसके होठो को प्यार से चुम कर बोलै)

शिव : किस बात की जल्दी थी आपको?

ममता : तुम नहीं संजोगे शिव, कितनी बेचैन थी में, दुविधाओं से मान घिरा हुआ था, कितने सवाल थे मान में, पर आज एक बात स्पस्ट हो गयी है शिव, में तुम्हारे बगैर नहीं रह पाऊँगी, बात सिर्फ शारीरिक सम्बन्ध की नहीं है, पर इस सम्बन्ध के चलते में तुम्हे अपने बहोत करीब महसूस करती हु, में तुम्हारी हो चुकी हु शिव, मुझे कभी मात छोड़ना.

शिव : ऐसा क्यों लगता है आपको?

ममता : पता नहीं शिव, मुझे दर लग रहा है, बस मुझे ऐसे hi प्यार करना, चाहे परिस्थितिया कुछ भी हो. में कुछ सोचना और समझना नहीं चाहती, मुझे नहीं पता सही क्या है और गलत क्या है, मुझे बस इतना पता है की में तुमसे बहोत प्यार करती हु, तुम मेरे अंदर समाये हुए हो. तुम्हारा अंश मेरे शरीर में है. (वो बहोत भावुक हो रही थी, में उनके होठो को प्यार से चूमने लगा, वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी, में कोई धक्के नहीं लगा रहा था, बस हम दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए थे)

वही दूसरी और उदयसिंह के घर सब जमा हुए थे, आज सबका खाना यही था, बिना के saas-sasur, उसका पति, पद्मा, पृथ्वी, उदयसिंह और चंद्रभान की बहन यही बिना की बुआ साँस मान्सिबुआ भी आयी हुई थी, वो सबसे छोटी थी और उनकी दो बेतिया अंजलि और वैदेही भी आये हुए थे, उनके पति गजेन्द्रसिंह कल आनेवाले थे, सब के मिलने पर सब खुस थे, हलाकि उदयसिंह और पृथ्वी ने अभी तक स्वर्ण से ठीक से बात भी नहीं की थी, पर सबके होते हुए उन्होंने कुछ ऐसा वैसा भी नहीं कहा था, बस दुरी बनाये हुए थे. मान्सिबुआ अपने स्वाभाव के अनुरूप चुप नहीं बेथ पायी और स्वर्ण को सुना hi दी थी.

मान्सिबुआ : तो आखिर घर में आने का रास्ता मिल hi गया.

बिना : ऐसा क्यों कह रही हो बुआजी.

मान्सिबुआ : तुम तो चुप hi रहो, घरबार छोड़ कर पता नहीं क्या कमाने निकल गयी हो, इतना बड़ा घर मिला है, क्या कमी है घर में जो नौकरी करने की जरुरत आ पड़ी. में तो इस से कह रही हु, खुद पति धुंध लिया, खुद शादी कर ली, ये तो भैया अच्छे है जो घर में घुसने दिया, वर्ण में तो कभी मुँह भी न देखु, जिसको अपने घर की इज्जात तक की परवाह न हो उस से क्या नाता रखना. (स्वर्ण की आँखों में आंसू आ गए, वही उसकी छोटी बहन बैठी थी कृपाली, जो भी अपने ससुराल से आयी थी, उसको भी कोई बच्चा नहीं था, उसने अपनी बहन के कंधे पर हाथ रक्खा, कामनादेवी से रहा नहीं गया)

कामनादेवी : जब सब सही हो रहा है तो क्यों जानबुज कर आग लगा रही है आप?

मान्सिबुआ : में आग लगा रही हु? जो सही है वही कह रही हु.

चंद्रभान : (अपनी छोटी बहन को डाट ते hue)Mansi, चुप रहो तुम, इतने बड़ी हो गयी पर अभी भी कब क्या बात करनी चाहिए उसकी तमीज नहीं आयी तुम्हे.

(अब जब सब इकट्ठा हुए है तो क्या शिवांस की बात होगी?, अगले अपडेट में देखेंगे.)
 
अपडेट 183

उदयसिंह की हवेली में सब इकठ्ठा हुए है, कल घर में पूजा है, पृथ्वी और उदयसिंह को इस से कोई मतलब नहीं है, सिर्फ घरवालों के दबाव में वो लोग ये सब होने दे रहे है. स्वर्ण के भाग कर शादी करने से उदयसिंह अभी भी नाराज hi है, पर अपनी पत्नी के दबाव में उसने स्वर्ण को घर में आने दिया है. उनकी छोटी बहन मानसी वैसे तो दो बच्चो की माँ है पर है अभी भी बच्चो जैसी, कब क्या बोलना है अभी भी नहीं पता, या फिर जान बुज कर वो ऐसा बोलती है.

चंद्रभान : (अपनी बात आगे बढ़ाते hue)Mat भूलो की तुम भी दो लड़कीओ की माँ हो, आज जो हमें देखना पद रहा है वो कल तुम्हे भी देखना पद सकता है, यहाँ कोई अपनी मर्जी से नहीं बल्कि एक मजबूरी की वजह से इकठ्ठा हुए है.

मान्सिबुआ : ये सब मान घडन्त बाटे है, ये तो माँ बन रही है, अगर ऐसा कुछ होता तो ये कैसे माँ बनती (उसने स्वर्ण की और इस्सर कर के कहा)

चंद्रभान : इस बारे में भी मेरी बात बाबाजी से हुई थी, उन्होंने कहा की ये सब इसीलिए हुआ की तुमने इस अनुष्ठान का निश्चय किआ, अगर मान से तुमने अपनी भूल काबुल कर ली तो फिर प्रायश्चित का फल मिलना सुरु हो जाता है, उन्होंने कहा है की और भी खुसखबरिया मिलेगी, क्यों की सबकी कुंडली में एक गृह ने प्रवेश किया है तो अब सब सुबह hi होगा, है कुछ लोगो को वो गृह भरी भी पद सकता है.

मानसी : ऐसा कोनसा गृह है?

चंद्रभान : वो सब मेने नहीं पूछा, तुम्हे अगर जान न है तो वो आये तब hi पूछ लेना. (उन्होंने दन्त ते हुए कहा, फिर उदयसिंह की और देख कर वो bole)Bhaisahab, वो तश्वीरो का कुछ हुआ?

मानसी : कोनसी तस्वीरें?

चंद्रभान : तुम चुप नहीं रह सकती (वो ऊँची आवाज में बोले, मानसी ने अपना मुँह टेढ़ा किआ और चुप हो gayi)Me योगेंद्र और उसकी फॅमिली की तस्वीर की बार कर रहा हु.

उदयसिंह : उनकी कोई तस्वीर नहीं है. (उसने सख्त आवाज में कहा)

बिना : (वो जानती थी फिर भी जान बुज कर boli)Aap किसकी बात कर रहे है पापा?

चंद्रभान : मेरे छोटे भाई योगेंद्र और उसकी फॅमिली की.

बिना : आप के छोटे भाई, मतलब मेरे चाचा ससुर, मेने तो आज तक कभी उनके बारे में नहीं सुना.

चंद्रभान : तुम क्या, इस घर के बच्चे तक उन्हें भूल गए है.

बिना : ऐसा क्यों पापा?

चंद्रभान : (उन्होंने एक बार अपने बड़े भाई की और देखा जो दूसरी और देख रहे थे और उनके चेहरे पर गुस्सा भी नजर आ रहा tha)Wo सब बाटे अभी करना जरुरी नहीं है बीटा.

बिना : पर जहा तक में समाज रही हु ये पूजा और अनुष्ठान उसी की वजह से करना पद रहा है है न?

चंद्रभान : है.

बिना : तो सबको जान ने का हक़ है, जिसकी वजह से सब पर मुसीबत आयी है वो जान ने का अधिकार है हमें.

उदयसिंह : (अपने दन्त पीस कर ऊँची आवाज me)Wo एक हादसा था, जिसका इल्जाम मुज पर लगाया जा रहा है, वो अपनी मौत मारा, न की मेरी वजह से, कोनसी मनहूस घडी थी जो मेने उसे अपनी गॉड में उठाया, जी का जंजाल बन गया है, नहीं है कोई तस्वीर उसकी, सब जल गया, करना है तो करो वर्ण जैसा चल रहा है चलने do.(Kehte हुए वो अपने कमरे की और गुस्से से चला गया, सब सुन्न पद गए, न कोई कुछ बोल रहा था न कोई हिल रहा था)

पृथ्वी : आप इस घर की बहु है, मालकिन नहीं जो इतने सवाल कर रही है, बहु है तो अपनी औकात मात भूलिए.

कामनादेवी : ये क्या बदतमीजी है पृथ्वी, कोई अपनी भाभी से ऐसे बात करता है?

पृथ्वी : इन्हे भी समझाइये की अपनी हद में रहे.

बिना : क्या गलत पूछा मेने, आज सभी इस खंडन के वंसज न होने पर इकठ्ठा हुए है, और इसकी वजह जान ने का भी हक़ नहीं है क्या, हमारी बात छोड़िये, पद्मा भी अभी तक माँ नहीं बन पायी, क्यों???

पृथ्वी : क्यों की वो बांज hai(Wo गुस्से से बोलै)

बिना : (वो भी गुस्से में आ गयी थी, क्यों की ये सब्द उसने भी अपनी पीठ पीछे सुने the)Wo बांज है और तुम बड़े मर्द हो, तो दूसरी, तीसरी, चौथी कितनी भी बीवी ला कर साबित करो की वो बांज है और तुम मर्द. (पृथ्वी खा जाने वाली नजरो से बिना को देखने लगा, वो गुस्सा तो कर सकता था पर वो जनता था की जो उसकी भाभी बोल रही है वो हो नहीं सकता क्यों की वो आलरेडी ये तरय कर चूका था, उसके निचे सोनेवाली किसी भी औरत या लड़की को वो माँ नहीं बना पाया था, वो भी गुस्से से पैर पटकता हुआ वह से बहार की और चला गया और जीप ले कर कही निकल गया)

निर्मलादेवी : बहु, ऐसे बात करते है क्या? (निर्मलादेवी ने अपनी बहु को हलके से डांटा, हलाकि वो जानती थी की वो कुछ गलत नहीं कर रही है)

बिना : सॉरी मम्मीजी, पर अब पानी गले तक आ गया है, अगर अभी भी कुछ नहीं किआ तो सब दुब जायेंगे, आखिर वो कोनसा राज़ है जो कोई जनता नहीं या बताना नहीं चाहता, कोण है ये छोटे चाचा, क्यों उनकी कोई भी तस्वीर तक नहीं है घर में, और मेने सिर्फ एहि सुना है की उनका लड़का मर गया था तो चाचा और चची कहा है?

चंद्रभान : बीटा उनका इलाज चल रहा है, चन्द्रिका अपने होश खो बैठी है और योगेंद्र कोमा में है, कोई भी नहीं जनता की उस दिन क्या हुआ, क्यों की ये इन तीनो के अलावा किसी को नहीं पता.

बिना : शिवांश मर गया है इस बात का क्या प्रमाण है?

चंद्रभान : इसमें प्रमाण की क्या जरुरत है, वो जिस नदी में गिरा था वह किसी तैराक के लिए भी बचना न मुमकिन था तो ये तो महज तीन या चार साल का बच्चा था, उसकी लाश तक नहीं मिली हमें.

बिना : मतलब की वो मर गया है उसका कोई भी प्रमाण नहीं है, है न?

चंद्रभान : तुम कहना क्या चाहती हो?

बिना : ऐसा नहीं हो सकता की वो बच गया हो?

चंद्रभान : Shhhhhh(Udesinh के कमरे की और देखते hue)Dhire बोलो बेटी, ये क्या बोल रही हो तुम, अगर भाई साहब ने सुन लिया तो वो... (वो आगे नहीं बोल पाया)

बिना : तो क्या पापा, वो किस बात पे इतना गुस्सा हो रहे है, क्यों इस बारे में बात करना गुनाह है?

चंद्रभान : निर्मला, तुम इसे घर ले चलो, जिग्नेश, गाड़ी निकालो.

जिग्नेश : जी पापा.

चंद्रभान : भाभी, हम चलते hai(Usne हाथ जोड़ कर kaha)Kal सब अच्छे से हो जाये.

कामनादेवी : जी भाई साहब. (वो सब निकल gaye,)Krupa, जाओ बेटी तुमभी स्वर्णी को ले जाओ, आराम करो.

कृपाली : जी मम्मी. (दोनों बहने एक रूम में आ गयी, अंदर आते hi)Ye सब हो क्या रहा है दीदी, और आप माँ बन ने वाली हो, बताया तक नहीं.

स्वर्ण : क्या बताती, और कैसे बताती, तूने कोई कांटेक्ट भी रक्खा मुझसे?

कृपाली : सॉरी दीदी, वो पापा की वजह से में डर्टी थी, (स्वर्ण को गले लगते hue)Congratulation दीदी, आप बहोत लकी हो. (एक और तो खुसी थी और दूसरी और उसकी आवाज में भी एक उदासी थी)

स्वर्ण : तू खुस है की उदास है? (उसकी आँखों में देखते हुए कहा)

कृपाली : आपके लिए खुस hi हु दीदी.

स्वर्ण : तो फिर ये उदासी कैसी?

कृपाली : आप तो जानती hi हो दीदी, शादी के इतने साल में भी मुझे बच्चा नहीं हुआ, इस अनुष्ठान का नौटा आया तो भी मेरी साँस ने धमकी hi दी थी, की अगर इन सब के बावजूद अगर वंस नहीं दे सकती तो अपने मायके चली जाना. क्या करू दीदी कुछ समाज में नहीं आता.

स्वर्ण : सब ठीक हो जायेगा.

कृपाली : वैसे दीदी क्या आपको लगता है की इस अनुष्ठान से कुछ होनेवाला है, क्या सच में किसी खास वजह से ये सब हो रहा है?

स्वर्ण : सब कुछ इस्सर तो यही कर रहे है?

कृपाली : पर आप कैसे माँ बन रही हो दीदी, अगर वैसा होता तो फिर आप भी माँ नहीं बन नई चाहिए.

स्वर्ण : (आस पास नजर दौड़ा कर धीमी आवाज me)Me अकेली नहीं, बीणाभाभी और ममतादिदी भी माँ बन ने वाली है, कल अनुष्ठान के वक़्त या तो बाद में इस बात को जाहिर कर दिया जायेगा.

कृपाली : (अपने मुँह पर हाथ रख kar)Kya बात कर रही हो दीदी? ये कैसे संभव हुआ?

स्वर्ण : अभी तो बताया था चचाजिने, अनुष्ठान का संकल्प लेते hi सुबह परिणाम का आगमन होनेलगा है.

कृपाली : (उदास चेहरे se)Agar ऐसा था तो फिर में kyu...(Bolte बोलते उसकी आँखों से आंसू निकल आये, स्वर्ण ने उसे गले लगा लिया)

स्वर्ण : सब ठीक हो जायेगा. (स्वर्ण अपनी छोटी बहन को सांत्वना दे रही थी, पर वो उसे बता नहीं सकती थी की वो आखिर माँ कैसे बन रही है, बताती तो भी कैसे बताती की वो किसी और के साथ हमबिस्तर हो कर माँ बन रही है, उसने सब किस्मत पर छोड़ दिया, थोड़ी देर बाते करने के बाद वो दोनों सो गए, वह घर जाते hi चंद्रभान ने बिना को डांटा)

चंद्रभान : तुम्हे पता भी है तुम क्या कर रही थी वह? (बिना शिर झुकाये कड़ी थी, उसको समाज नहीं आ रहा था की उसने आखिर क्या गलत कहा tha)Me जनता हु की तुमने कुछ गलत नहीं कहा था पर तुम जानती नहीं उदैसिंहभाईजी को, भले hi वो कुछ भी कहे या कोई कुछ भी कहे पर सबको लगता है की उन्होंने hi शिवांस को जान बुज कर मारा है, वो कितने खतरनाक है वो तुम नहीं जानती क्यों की तुम यहाँ नहीं रहती, उनका कोई भरोसा नहीं बीटा, वो तुम्हे भी नुकसान पंहुचा सकते है. (उन्होंने चिंता जताई)

बिना : पर में तो बस छोटे चाचाजी के बारेमे जान न चाहती थी, और उनके बेटे के साथ क्या हुआ वही जान न था.

चंद्रभान : किसी को कुछ नहीं पता, पर हम सबने देखा है की योगेंद्र की साडी जायदाद पर उनका कब्ज़ा है, और यही बात ये बताने के लिए काफी है की उनकी hi नियत में खोट थी, उन्होंने hi कुछ गलत किया है, तुम इन सब में मात पदों बेटी, वो बहोत खतरनाक लोग है, में भाई हो कर भी डरता हु, वो एक भाई के साथ ऐसा कर सकते है तो वो मेरे साथ भी ऐसा कर सकते है, उनसे दूर hi रहो इसमें तुम्हारी भलाई है.

बिना : मुझे बस ये जान न है की शिवांस के साथ क्या हुआ, वो जिन्दा क्यों नहीं हो सकता?

चंद्रभान : तुम्हे क्यों लगता है की वो जिन्दा है जबकि तुम तो उस वक़्त यहाँ थी भी नहीं, मुझे तो दर है की अगर वो जिन्दा बचकर आ भी गया तो ये लोग उसे दोबारा मर देंगे, अब तो ये लोग किसी भी कीमत पर ये जायदाद नहीं छोड़ेंगे. इनके लिए पैसा hi सबकुछ है, उसके लिए वो किसी भी हद तक जा सकते है.

बिना : (उसको भी दर लग रहा था की अगर सचमे शिव hi शिवांस हुआ और इनको पता चल गया तो वो शिव के साथ कुछ गलत न कर दे, और शिव कल यहाँ आनेवाला था, ये तो अच्छा है की कोई उसे जनता नहीं, पर अगर ममतादिदी को वो जानापहचाना लग सकता है तो उसके ससुर और चछससुर तो उसे पहचान hi लेंगे. उसने डरते हुए और संभल कर बात kahi)Papa, अगर उनकी तस्वीर देखनी हो तो कोई भी जरिया नहीं है क्या?

चंद्रभान : (कुछ सोच कर) योगेंद्र और चन्द्रिका तो जिन्दा hi है, पर उनकी और शिवांस की कोई पुराणी तसवीव चाहिए तो शायद सुखदेवजी के पास मिल सकती है.

बिना : ये सुखदेवजी कोण है?

चंद्रभान : योगेंद्र का करीबी दोस्त है, योगेंद्र अभी उनके hi पास है.

बिना : वो उनके पास क्यों है, उनको तो आप लोगो के पास होना चाहिए था.

चंद्रभान : सुखदेव को दर था की योगेंद्र और चन्द्रिका की जान को खतरा है तो वो उन्हें अपने साथ ले गया, वैसे भी वो दोनों बुसिनेस्स पार्टनर भी थे, और अभी वह का कारोबार वो hi संभल रहे है.

बिना : उनकी जान को खतरा है ये उन्हें कैसे लगता है?

चंद्रभान : देखो बीटा, में इन सब से दूर hi रहा हु, मुझे नहीं पता की क्या है ये सब.

बिना : आपने कभी पूछा नहीं?

चंद्रभान : मेरी हिम्मत hi नहीं हुई कभी, मेरा कहना मनो तो तुम भी दूर hi रहो इन सब से, रात बहोत हो गयी है सो जाओ अब.

बिना : पर पापा....

जिग्नेश : पापा ने कहा न, अब बस भी करो, तुम अभी उदैसिंहचहा और पृथ्वी को जानती नहीं हो, क्यों जान बुज कर खतरा मोल ले रही हो, चलो अब. (जिग्नेश, बिना को अपने कमरे की और ले गया, कमरे में अब चंद्रभान और उसकी पत्नी hi थे)

चंद्रभान : नर्मदा, समजाओ बहु को, क्यों जान बुज कर आग में कूद रही है.

नर्मदा : आप फ़िक्र मात करिये, वैसे भी वो यहाँ नहीं रहती, एक दो दिन में चली जाएगी, चलिए आप भी सो जाइये.

बिना बिस्तर में लेती हुई थी, पर नींद उसकी आँखों में नहीं थी, जब की जिग्नेश सो चूका था, बिना को अब शिव की चिंता हो रही थी, अगर वो कल आया और कुछ हुआ तो क़यामत आ जाएगी, वो उसकी जान को खतरे में नहीं दाल सकती थी, हलाकि उसके चांस काम hi थे क्यों की उसे कोई पहचानता नहीं था और वो hi शिवांस है ये तो अभी भी एक पहेली hi थी, पर फिर भी वो कोई चांस नहीं लेना चाहती थी, क्या करे क्या न करे इसी उधेड़बुन में वो लगी हुई थी.

दूसरी और इन सब से बेखबर शिव और ममता सम्भोग में लिप्त थे.





online photo hosting

ममता : (अपनी छूट में लुंड अंदर बहार हो रहा महसूस कर रही थी वो, उसकी छूट से ढेर साडी चिकनाहट, शिव के लुंड पर लग रही thi)Shhhhhh आराम से करना शिईयिव, शह्ह्ह्ह ज्यादा अंदर तक मत करना.

शिव : क्यों, मज़ा नहीं आ रहा?

ममता : (उसका चेहरा प्यार से सहलाते hue)Maza न आये ये हो सकता है भला, पर मेरी कोख में हमारा बच्चा है, उसको कुछ हो जाये ये में सेह नहीं पाऊँगी. (में भी उनकी बात को समाज रहा था, में प्यार से हलके हलके धक्के hi मार रहा था, वो इतनी प्यारी थी की उन्हें छोड़ना बहोत अच्छा लग रहा था, कासी हुई छूट मेरे लुंड को निचोड़ रही थी, मान तो कर रहा था की पूरी गहरायी तक लुंड उदार कर छोड़ू पर मेने अपने आपको संभाला हुआ था, पर फिर भी में अच्छे से छोड़ रहा था unhe)Shhhhhhh अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह shhhhhhhhhhh. (में उनके स्तन को चूसने लगा, पहले से वो बड़े हो चुके थे और निप्पल भी मोठे होने लगे थे)





शह्ह्ह्ह शीइइइइइव shhhhhhh(Lagatar अंदर बहार हो रहे लुंड से वो कामुकता से भरी जा रही थी, छूट अपने चरम तक फ़ैल चुकी थी, उसने अपने पुरे पेअर फैला दिए थे और शिव को बहो में लिए वो चुद रही thi)Shhhhh शीइइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह मेरी याद नहीं आती थी तुम्हे शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह में तो रोज़ तुम्हे याद करती थी शिव शह्ह्ह्हह्ह, पागल कर दिया है तुमने मुझे शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह आरामसे चुसो न शह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है.

शिव : (स्तन की और इस्सर karke)Ye बड़े हो गए है.

ममता : (शरमाते हुए) अब में माँ बन ने वाली हु तो बड़े तो होंगे hi, तुम्हे अच्छे नहीं लगे? (उसने मुस्कुराते हुए कहा)

शिव : बहोत अच्छे लगे (कहते हुए मेने उन्हें मसाला और चूसने लगा)

ममता : शह्ह्ह्हह्ह फूऊऊऊ फूऊऊऊ शह्ह्हह्ह्ह्ह. तुम चूसते हो तो बहोत अच्छा लगता है सीईव शहहहहह (निचे धक्के भी लग रहे the)Shhhhhh कितना मज़ा आता है न इन सब में शह्ह्ह्हह्ह, तुम्हारा बहोत बड़ा है शह्ह्ह्हह्ह कितना अच्छा लगता है shhhhhhhh(Wo अपनी छूट को कास रही थी और लुंड को निचोड़ रही थी)





upload pictures online

शिव : मेरा बड़ा है पर आपकी तो बहोत छोटी है (मेने मुस्कुरा के कहा तो वो शर्मा गयी)

ममता : तुम्हे कैसा लग रहा है शिव?

शिव : आपको छोड़ना?

ममता : (ऐसी सीधी बात सुन कर वो शर्मा गयी, पर उसको भी मज़ा आ रहा tha)Haaaaa.

शिव : आपके छोटे से छेड़ को छोड़ना बहोत अच्छा लग रहा है, पूरा गिला है और बहोत गर्म भी है.

ममता : (ऐसी बातो से वो और गर्म हो रही थी और अपनी कमर उचक कर लुंड को और अंदर लेने की कोशिस करने lagi)Shhhhh ऐसा सीधा मात बोलो शिव शहहहहह अजीब लगता है शह्ह्ह्हह्ह.

शिव : जो है वही तो बोल रहा हु, आपकी छूट छोटी है तो और क्या कहु.

ममता : (उसको बहोत शर्म आ रही थी पर मज़ा भी आ रहा tha)Wo छोटी नहीं है पर tumhara...(Wo बोलते बोलते रुकी पर फिर हिम्मत कर के बोली) ल ल लुंड बड़ा है. (बोलते बोलते उसके शरीर में अजीब सी जुड़ जुड़ी हो रही थी, शिव ने थोड़ा जोर से धक्का मर diya)Ahhhhh धीरे करो बाबू शहहहहह (वो उस से लिपट कर उसके गले को चूमने और चाटने लगी और साथ में अपने पेअर उसके कमर में लपेट diye)Shhhhhh ऐसे hi छोड़ो मुझे शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह मुझे बहोत अच्छा लग रहा है शह्ह्ह्ह इसके लिए में कितना तड़प रही थी शह्ह्ह्हह्ह मुझे तुमसे प्यार हो गया है सीईव शह्ह्ह्हह्ह पर तुम्हारे साथ ये सब करने का भी एक अलग hi मज़ा है शहहहहह (वो अपनी कमर से उलटे धक्के मर रही thi)Shhhhhh मेरा निकलनेवाला है सीईव शह्ह्ह्हह्ह थोड़ा जल्दी करो शह्ह्ह्ह ahhhhhh(Me जल्दी जल्दी छोड़ने लगा पर ध्यान रख रहा था की लुंड बच्चेदानी में न घुस जाये, क्यों की उसका मुँह बंद हो चूका था, पर लुंड बच्चे दानी को छू जरूर रहा tha)Shhhhh अह्ह्ह्हह ऐसे hi करो शह्ह्ह्हह्ह तुम्हारा लुंड बहोत अच्छा है शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह ऐसे hi छोड़ो मुझे शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्ह हा शह्ह्ह्ह ऐसेही शहहहहह हा शीइइइइइइव shhhhhh(dhakko की वजह से वो हिल रही थी और लिपट रही thi)Shhhhhhh मुझे वह निचे बहोत अच्छा लग रहा है शह्ह्ह्हह्ह और करो शहहहहह अह्ह्ह्हह शीइइइइइव अह्हह्ह्ह्ह लव यू सीईव शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्हह्ह्ह्ह में झाड़नेवाली हु शह्ह्ह्हह्ह (उनकी आवाज रोने जैसी हो गयी थी, वो मुझसे कास के लिपट रही thi)Shhhhhh मुम्म्मीईई शह्ह्ह्हह्ह तुम्हारा लुंड मस्त है शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह में झाड़नेवाली हु शह्ह्हह्ह्ह्ह आआआईईई शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (वो झटकेखाने लगी और झड़ने लगी, में धक्के मर रहा tha)Shhhhhh बस्सस शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्ह रुकुओ शह्ह्हह्ह्ह्ह थोड़ी देर शह्ह्ह्हह्ह. (में रुक गया, वो मुझसे लिपट रही थी और साथ में अपनी छूट को कास के मेरे लुंड को निचोड़ रही थी, गर्म गर्म पानी मेरे लुंड पर गिर रहा था, थोड़ी देर तक ये सब चला और फिर वो शांत हो गयी, में उनके चेहरे को देख रहा था, उन्होंने नशीली आंखे खोली और मुझे देख कर muskurayi)Tum बहोत अच्छे हो शिव.

शिव : में अच्छा हु की वो?

ममता : (शरमाते hue)Dono. (में ऊपर हुआ और दोनों पेअर के बिच बेथ गया और छूट को देखने लगा, पूरी गीली हो रक्खी थी वो, वह बाल भी नहीं थे, फूली हुई छूट बहोत अच्छी लग रही थी, मुझे ऐसे देखते देख वो शर्मा गयी और अपनी छूट छुपाने lagi)Aise मत देखो वह, मुझे शर्म आ रही है.

शिव : (उनके हाथ हटते hue)Muje देखने दो (उन्होंने भी ज्यादा जोर नहीं लगाया और अपने हाथ हटा diye)Baal कब साफ़ किये? (मेरी बात से वो शर्मा गयी)

ममता : डॉक्टर को दिखने गयी थी तो उन्होंने कहा था की यहाँ साफ़ रखना (उसने शरमाते हुए कहा, मेने छूट के होठो को फैलाया और छेड़ को देखने लगा तो वो शर्मा रही thi)Shhhhhh ऐसे मत देखो सीईव शहहह शर्म आती है.

शिव : ये छूट मेरी है na?(Chut को सहलाते हुए)





ममता : (शरमाते हुए muskurayi)Haaaaaa.

शिव : तो फिर मुझे जो करना है वो करूँगा. (कहते हुए में झुका और छूट को जीभ से चाटने लगा)

ममता : (शिव का हाथ जोर से पकड़ kar)Shhhhhh शीइइइइव (छूट के कहते जाने पर उसको बहोत मज़ा आ रहा था, उसने अपने पेअर और फैला दिए ताकि शिव अच्छे से चाट सके,





शिव की जीभ उसके छूट को अच्छे से चाट रही थी, कभी भग्नासाय को तो कभी छेड़ को कुरेद रही थी, एक हाथ से उसने शिव का हाथ पकड़ा था तो दूसरे हाथ में चद्दर पकड़ी हुई थी, शिव जैसे जैसे उसकी छूट को चाट रहा था वो फिर से गरम होने लगी थी, वो थोड़ी ऊपर हुई और शिव को अपनी छूट चाट ते हुए देखने लगी, जिस खजाने को वो सबसे छुपाती थी उसी को वो परोस कर बैठी हुई थी, उसको शिव पर बहोत प्यार आ रहा था, वो इतना गरम हो गयी की उस से बर्दास्त नहीं हुआ और वो शिव को धकेल कर बिस्तर पर लेता दी और उसके लुंड को पकड़ कर अपने मुँह में भर ली, और जोर जोर से उसे चूसने lagi)Slurrpp श्रुणु, सलूरर्पपप, शरररररर (उसका पूरा मुँह भर गया था, पर उसका दिल नहीं भर रहा था, वो उसको बहोत प्यार से और उग्रता से चूस और चाट रही थी, उसको अपनी छूट का पानी और लुंड के पानी का स्वाद आ रहा था, वो इस अध्भुत बड़े लुंड पर अपना प्यार लुटा रही थी)

शिव : लगता है बहोत अच्छा लगता है ये आपको.

ममता : (मुस्कुराते hue)Achchha क्यों नहीं लगेगा, कितना मज़ा देता है ये और ऊपर से इसने मुझे दुनिया की सबसे बड़ी खुसी दी है, माँ बन ने की, अच्छा तो लगेगा hi.

शिव : अपनी प्यारी चीज से तो प्यार कर रही हो, मुझे भी अपनी प्यारी चीज दे दो. (मेरी बात सुन कर वो शर्मा गयी, पर अपनी पेअर फैला कर वो मेरे चेहरे की और हो गयी और अपनी छूट को मेरे मुँह पर रख दिया, मेरे सामने छूट और गांड का छेड़ था, वह पर भी गिला पानी लगा हुआ था, मेने गोर कूल्हों को फैलाया और फिर से छूट और गांड के छेड़ को चूसने और चाटने लगा, मंतभाभी भी जोर जोर से मेरे लुंड को चूसने लगी, दोनों एक दूसरे को मज़ा देने लगे, थोड़ी देर में hi मुझसे बर्दास्त नहीं हुआ तो मेने उन्हें साइड में लुढ़काया और बेथ गया, मेने उनकी कमर पकड़ कर उन्हें घोड़ी बना दिया तो वो भी अपनी पोसिटिव सही करते हुए मेरे लुंड के सामने अपनी छूट ले आयी और मुझे देखने लगी, में मुस्कुराया तो वो भी शरमाते हुए मुस्कुरायी, मेने फिर से लुंड को छूट पर लगाया और अंदर उतरने लगा, उनके चेहरे पर हल्का सा दर्द उभर आया पर अगले hi पल उनका चेहरा कामुकता से भर गया, लुंड अंदर उतर कर में हलके हलके धक्के लगाने लगा तो वो मुझे hi देख रही thi)Kya देख रही है?

ममता : ये करते हुए तुम्हे मज़ा आ रहा है न?

शिव : क्या करते हुए? (मेने मुस्कुराते हुए कहा)

ममता : (वो फिर शर्मा गयी, पर फिर मुस्कुरा के boli)Muje ऐसे छोड़ते हुए, मुझे ऐसे छोड़ना अच्छा लगता है न tumhe(Unka चेहरा खुसी से और कामुकता से दमक रहा था)





शिव : मुझे आपको हर तरह से छोड़ना अच्छा लगता है (में उनकी कमर पकड़ कर धक्के लगाने लगा, उनकी सिस्किअ कमरे में गूंजने लगी, मेने उन्हें chetaya)Dhire आवाज करो, कही कोई सुन न ले. (वो मुस्कुरायी और अपना मुँह दबा दिया, में कूल्हों के बिच से जाते लुंड को देखते हुए उन्हें छोड़ने लगा, काफी देर तक में उन्हें ऐसे hi छोड़ता रहा वो झाड़ गयी थी पर में रुका नहीं, अब मेरा भी निकलने वाला था तो मेने उन्हें सीधा लेता दिया और फिर से ऊपर आ गया)

ममता : शह्ह्ह्ह सीईव अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह (लगातार छुड़ई चल रही थी, कभी किश कर रहे थे तो कभी में उनके स्तन चूस रहा था, लगातार धक्को से एक बार फिर वो झड़ने को तैयार थी और में bhi)Shhhhh अह्ह्ह्ह मेरा फिर होनेवाला है सीईव शह्ह्हह्ह्ह्ह.

शिव : मेरा भी होनेवाला है भाभी.

ममता : में तुम्हारी भाभी नहीं हु शह्ह्ह्हह्ह मुझे अपनी ममता बना कर छोड़ो शिव. शहहहहह अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : हम्म हम्म हम्म्म ममता हम्म्म हम्म्म्म.

ममता : है शिव शठ छोड़ो मुझे शहहह अह्ह्ह्ह छोड़ो शहहह भर दो मुझे शहहहहह.

शिव : मेरा होनेवाला है.

ममता : शहहह मेरा भी शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह मेरे साथ झाड़ो सीईव शह्ह्ह्हह्ह भर दो अपने प्यार से मुझे शहहहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह (लगातार धक्को से आखिर वो झड़ने लगी और में भी अपना लावा उनकी छूट में छोड़ने लगा, वो मुझसे पूरी ताकत से लिपट गयी और मेने भी लुंड अंदर उतर दिया पर ध्यानसे, दोनों का पानी छूट में भरने लगा, दोनों बस हांफ रहे थे, दोनों ऐसे hi लेते रहे बिना कुछ किये बिना कुछ बोले, करीब दस मिनट ऐसे hi गुजर गए, में थोड़ा ऊपर उठा और उनको देखा तो शर्मा गयी और फिर से मुझसे लिपट गयी, में भी बस मुस्कुराया, थोड़ी देर बाद मेने लुंड बहार nikala)Ahhhhhhh. (पक की आवाज के साथ लुंड बहार निकला और छूट से ढेर सारा रास निकल कर बिस्तर को भिगोने लगा, में साइड में लेट गया पर वो वैसे hi पारी फैला कर लेती रही, उनकी आंखे बंद थी पर चेहरे पर खुसी थी. थोड़ी देर बाद उन्होंने आंखे खोली और मुझे देखा, मुझे ऐसे देखते देख वो शर्मा गयी और साइड में होते हुए मुझसे फिर लिपट गयी मेने भी उन्हें बहो में ले लिया और उनके कूल्हों को दबा दिया, वो और शर्मा गयी)

शिव : क्या हुआ?

ममता : कुछ नहीं. (फिर दोनों थोड़ी देर शांत रहे, वो मेरी बहो से निकलने लगी)

शिव : क्या हुआ?

ममता : (शर्माते hue)Abhi आती हु. (कहते हुए उन्होंने चादर से अपने आपको ढाका और बहार चली गयी, में भी पीछे पीछे बहार गया तो देखा की वो एक कोने में बेथ कर मूत रही थी, उनके कूल्हे नजर आ रहे थे, जिसे देख कर मेरा लुंड फिर से हरकत करने लगा, उन्हें पता नहीं था की में खड़ा हु, वो इत्मीनान से मूत रही थी, पेशाब की आवाज भी मुझे सुनाई दे रही थी, थोड़ी देर बाद वो उठी और जैसे hi पलटी मुझे देखा तो वो शर्मा gayi)Yaha क्या कर रहे हो?

शिव : मुझे भी लगी है. (वो शर्मा गयी और मेरे साइड से रूम में चली गयी, में मुस्कुराते हुए वह गया जहा उन्होंने मुता था, में भी वह मूतने लगा, उनके मूत पर मूत ते हुए एक अज्जेब सी खुसी मिल रही थी, में मुस्कुराते हुए मुता और वापस रूम में आ गया, वो चद्दर ओढ़े लेती हुई थी, में भी बाजु में लेट gaya)Jana नहीं है?

ममता : (शरमाते हुए मुझे देखने lagi)Fir चली जाउंगी.

शिव : किसी को पता चल गया तो?

ममता : सब सो रहे है. (मेरी आँखों में देखते hue)Waise hi काम मिलते हो, आज मिले हो तो में अपने आपको रोक नहीं प् रही हु. (उन्होंने बड़े प्यार से कहा, मेने उन्हें शाइन से लगा लिया और वो भी मेरे शाइन से लग गयी, मेने चद्दर हटा दी, उन्होंने कोई विरोध नहीं किआ, हम दोनों ऐसे hi नंगे लेते हुए थे) जूही के साथ कहा तक पहुंची?

शिव : क्यों पूछ रही हो?

ममता : बस पूछ रही हु.

शिव : सब हो गया है.

ममता : (मेरी और देखते hue)Sach में?

शिव : आपको अच्छा नहीं लगा?

ममता : ऐसी बात नहीं है, अच्छा एक बात बताओ, क्या वो हमारे बारे में जानती है?

शिव : वैसे तो उसने ऐसा कुछ कहा नहीं पर मुझे लगता है की वो जानती है.

ममता : मुझे भी ऐसा लगता है, मुझे लगा की शायद तुमने बताया होगा.

शिव : में क्यों किसी को बताने लगा.

ममता : मेने तो बस ऐसे hi कहा.

शिव : में कभी किसी को आपके बारे में नहीं बताऊंगा, है ये अलग बात है की आप खुद बताये.

ममता : मुझे पता है शिव, तुम पर भरोसा है तभी तो तुम्हारे साथ हु, मेने तो बस ऐसे hi कहा था, मेरे दिलमे ऐसा कुछ भी नहीं था, मुझे लगा की उसको पता है तो शायद तुमने बताया होगा, और यकीं मनो मुझे बुरा भी नहीं लगा की तुमने बताया होगा, क्यों की मुझे अपने से ज्यादा तुम पर यकीं है, अगर बताया भी हो तो भी मेरी इज्जत का ख्याल रख कर hi बताओगे और उस पर अगर तुमको खुद से ज्यादा भरोसा हो तो hi. शादी करोगे उस से?

शिव : वो खुद नहीं करना चाहती, फील हल तो नहीं, और मेरी जिंदगी में भी इतनी उलझाने है की में कुछ कह नहीं सकता, ये वो भी जानती है.

ममता : मुझे यकीं है शिव, तुम किसी का भी गलत फायदा नहीं उठाओगे, और मेरी बातो का बुरा भी मात मनो, अपने दिल की बात तुमसे नहीं करुँगी तो किस से करुँगी.

शिव : मेने कहा कुछ कहा, सही हो या गलत, आप जो पूछना चाहे पूछ सकती हो, इतना तो हक़ रखती हो आप.

ममता : (उसके शाइन से चिपकते hue)Tum बहोत अच्छे हो शिव. (वो नंगी hi मुझसे लिपटी थी तो मेरा लुंड फिर से खड़ा हो गया, जिसे महसूस कर के ममता शर्मा गयी, और शरमाते हुए boli)Fir से करना है?

शिव : वो तो बस आपके करीब रहने से खड़ा हो गया है, अभी बेथ जायेगा.

ममता : (लुंड को पकड़ कर सहलाते hue)Mere होते हुए वो क्यों अपने आप बैठेगा.

शिव : रहने दीजिये, आपकी सेहत का भी ख्याल करना है न.

ममता : में ठीक हु, मुझे कुछ नहीं हुआ है (कहते हुए वो बेथ गयी और मेरे लुंड को चूसने लगी, उनके चेहरे से hi लग रहा था की उन्हें लुंड बहोत पसंद है,





वो बहोत प्यार से उसेचुस्ने लगी, एक प्यारी लड़की मेरे लुंड को बहोत प्यार से चूस रही थी, उन्हें देख कर कोई कह नहीं सकता की इन्हे ये सब भी आता होगा, मासूम चेरे वाली थी वो, पर थी तो वो एक लड़की hi, वो बहोत प्यार से लुंड के साथ खेल रही थी, पूरी नंगी थी वो उनके कूल्हे ऊपर उठे हुए थे, मेने उनका शिर सहलाया तो वो शरमाते हुए मुझे देखने लगी, पर लुंड को चुस्ती रही, अब वो पूरी गर्म हो गयी थी, उन्होंने मुझे देखा और सीधी लेट गयी, हमारी नज़ारे मिली तो वो शर्मा गयी पर उन्होंने अपने पेअर खोल दिए और मुझे देखने लगी जैसे कह रही हो की आ जाओ और मुज में समां जाओ, में बस उन्हें देख रहा था, थोड़ी देर वो भी मुझे देखती रही पर उनसे रहा नहीं गया और वो उठी और मेरा शिर पकड़ कर वापस लेट गयी और मेरे मुँह को अपनी छूट पर लगा दिया, जैसे कह रही हो की इसे छतो, मेने छूट को चेतना सुरु किया

और उन्होंने खुद अपनी छूट के होठो को अपनी उंगलिओ की मदद से खोल दिया, छूट का गिला छेड़ अब स्पस्ट दिक् रहा था, में छेड़ में जीभ दाल कर चाटने laga)Shhhhhhh हा सीईव शह्ह्ह्ह ऐसे hi छतो शहहहहह (में छूट चाट ता रहा और वो सिस्किअ लेती रही, मेने उन्हें पलट दिया, उनके कूल्हे मेरे सामने थे, वो मुझे देखने लगी, में उनके कूल्हे दबाने लगा उन्होंने अपन शिर निचे रख दिया और मज़ा लेने लगी, मेने कूल्हे फैलाये तो मुझे गांड का भूरा छेड़ और छूट का छेद





नजर आया, जो खुल बंद हो रहा था, मेने जीभ लगायी तो वो सिसक uthi)Shhhhh शीइइइइइव, (में चाटने लगा तो सिसक रही थी, गांड का छेड़ मेरे थूक से गिला हो गया, मेने ढेर सारा थूक वह लगाया और ऊँगली अंदर डालने लगा तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ liya)Kya कर रहे हो शिव. (में कुछ नहीं बोलै और ऊँगली गांड के छेड़ में दाल di)Ahhhhhhh (उन्होंने गांड को sikudliya)wo गन्दी जगह है शिव शह्ह्ह्ह. (मेने कोई जवाब नहीं दिया और वह और थूक लगाया, और ऊँगली अंदर दाल दी, उन्होंने चले को ढीला छोड़ दिया तो ऊँगली अंदर चली गयी, अंदर बहोत गर्म था, मेने और थूक लगाया और ुन्डली अंदर घुसाने लगा, ममता पहली बार ऐसा कुछ महसूस कर रही थी, वो कुछ नहीं बोली बस शिव को जो करना था करने दे रही थी, थूक की वजह से ऊँगली अच्छे से अंदर बहार हो रही थी, उसको एक अजीब सा ानदण्ड आने लगा, वो बस पड़ी रही और अपनी गांड में अंदर बहार हो रही ऊँगली को महसूस करने lagi)(Mera मान तो बहोत कर रहा था पर में जनता था की कल जाना है तो वह आज करना तो मुमकिन नहीं था, मेने उनकी कमर पकड़ कर उन्हें उठाया तो उन्होंने अपने कूल्हे ऊपर उठा दिए पर शिर अभी भी बिस्तर पर था, मेने और थूक लगाया और ऊँगली को अंदर बहार करने लगा, वो बस सिसक रही थी, छूट से रास टपक रहा था, ऊँगली अंदर डेल हुए hi मेने पोजीशन ली और लुंड को छूट पर लगाया और अंदर किआ. ममता बस आंखे बंद किये हुए hi सब महसूस कर रही थी, उसके दोनों छेड़ भरे हुए थे, एक में ऊँगली थी और दूसरे में लुंड था, वो पहली बार ऐसा कुछ महसूस कर रही थी, उसको भी अच्छा लग रहा था तो वो कुछ नहीं बोली, लुंड और ऊँगली दोनों साथ में अंदर बहार होने लगे तो वो सिसकने लगी,





उसने चढ़ार को पकड़ लिया और दोनों छेड़ में छोड़ने lagi.)Shhhhh शीइइइइइव शहहहहह (लगातार दोनों छेड़ में छोड़ने से वो थोड़ी hi देर में झाड़ gayi)Shhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह shiiiiiiiiiiiiiiiv. (वो बिस्तर पर उलटी hi लेट गयी, लुंड और ऊँगली दोनों निकल चुके थे, मेरा मान कर रहा था तो मेने लुंड को गांड के छेड़ पर रगड़ा, छेड़ पूरा गिला था, वो मुझे देखने लगी, मेने उन्हें देखा, वो कुछ भी नहीं कह रही थी बस मुझे देख रही थी, में बस लुंड को गांड पर रगड़ रहा था, जब मेने नहीं डाला तो वो boli)Agar मान कर रहा है तो दाल दो न.

शिव : दर्द होगा.

ममता : (उसने जैसे सुना hi nahi)Muje भी महसूस करना है शिव. (मेने उन्हें एक बार देखा और फिर चीड़ पर ढेर सारा थूक लगाया और लुंड को छेड़ पर लगाया, और दबाया, वो आंखे बंद किये हुए लेट गयी, मेने थोड़ा जोर लगाया तो सूपड़ा छले को फैला कर अंदर घुस गया)





अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (उन्होंने दन्त भींच लिए, उनके चेहरे पर दर्द उभर आया तो मेने लुंड वापस खिंच लिया, वो फिर karahi)ahhhhhhhhh. (में उन्हें देखने लगा, थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे देखा और boli)Kya हुआ? निकल क्यों लिया?

शिव : आपको दर्द हुआ न.

ममता : वो इतना बड़ा है तो दर्द तो होगा न. (वो मुस्कुरायी)

शिव : सॉरी.

ममता : पागल, सॉरी क्यों बोल रहे हो, फिर डालो. मुझे भी महसूस करना है.

शिव : (में उनकी बगल में लेट गया और उन्हें अपनी और घुमा लिया तो उन्होंने अपन एक पैर मेरे ऊपर चढ़ा diya)Pagal तो आप हो, दर्द हो रहा है फिर भी रोक नहीं रही हो.

ममता : में क्यों रोकू, तुम्हारा जो मान हो वो करो (उन्होंने बहोत प्यार से कहा)

शिव : (मेने उनका चेहरे sehlaya)Aaj नहीं, फिर कभी, वर्ण कल चल नहीं पाओगी. (वो शर्मा गयी और मुझसे लिपट गयी)

ममता : एक बात कहु शिव, में खुद को तुम्हारे साथ बहोत नजदीक महसूस कर रही हु, इतना खुल कर तो कभी उनके साथ भी नहीं रह पायी. (उसने कड़क लुंड को अपनी छूट पर एडजस्ट किआ और अपनी कमर आगे खिसका कर लुंड को अंदर ले लिया) में जो चाहे तुम्हारे साथ कर सकती हु शिव, मुझे बहोत अच्छा लगता है (वो हलके हलके अपनी कमर हिलने लगी ताकि लुंड अंदर बहार हो sake)Mujse ऐसे hi प्यार करते रहना शिव.

फिर एक बार हमारा खेल सुरु हो गया,

















upload image free





वो कभी मेरे ऊपर आ जाती तो में कभी उन्हें अपने निचे लेता लेता, कभी खड़े खड़े तो कभी दीवाल के सहारे, तो कभी बीएड पे झुक कर, हम दोनों पूरी मस्ती से चुदाई करने लगे, रात के करीब तीन बजे वो निचे चली गयी, में भी सो गया. सुबह ममता जल्दी उठ गयी, आज उसे अपने मायके जाना था, रात देर से सोने के बावजूद वो उठ गयी थी, नाहा धो कर वो पूजा कर रही थी की उसके फ़ोन की घंटी बजी, पर पूजा कर रही थी तो उसने उठायी नहीं, पूजा ख़तम करने के बाद उसने देखा की बीणाभाभी का फ़ोन है तो उसने सामने फ़ोन किआ, जैसे hi फ़ोन उठा,

ममता : Hello.

बिना : Hello, क्या कर रही थी आप, फ़ोन क्यों नहीं उठाया. (आवाज से hi पता चल रहा था की वो चिंतित है)

ममता : पूजा कर रही थी, क्या हुआ, क्यों चिंतित है आप?

बिना : मुझे दर लग रहा है दीदी.

ममता : किस बात का दर लग रहा है?

बिना : शिव को ले कर, अगर वो शिवांस हुआ और यहाँ किसी ने पेहचानलिया तो?

ममता : कोण पहचाने गए, और कैसे पहचानेगा?

बिना : आपको वो जाना पहचाना नहीं लगा था? तो पापा को या चाहा को भी ऐसा लग सकता है न?

ममता : आप यु hi सब सोच रही है, कुछ नहीं होगा.

बिना : मुझे दर लग रहा है दीदी.

ममता : आप क्या चाहती है, क्या में उसे वह न लेकर औ?

बिना : ऐसा भी नहीं कर सकते, उसका यहाँ रहना भी जरुरी है. अगर बड़े चाचा को पता चल गया तू उन्होंने उसको कुछ कर दिया तो?

ममता : आप बहोत ज्यादा सोच रही हो भाभी, हम है न, और ऐसा कोई साबुत भी नहीं है की वो hi शिवांस है, आप कुछ जयदा hi सोच रही हो (ममता खुद अब उसको शिवांस के रूप में नहीं देखना चाहती थी) और हम है न, में हु आप हो स्वर्ण है, किसीको शिव को छूने भी नहीं देंगे. आप डरिये मात, कुछ नहीं होगा.

बिना : (उसका दिल बहोत घबरा रहा tha)Thik है, शायद आप सही कह रही है, कब तक आनेवाले हो आप?

ममता : दो पहर तक पहुंच जायेंगे.

बिना : अच्छा ठीक है. (उसने फ़ोन रख दिया, पर दिल उसका घबरा रहा था)

ममता ने नास्ता बनाया, तब तक उसकी सास भी उठ गयी, उन्होंने जूही को भी उठाया, वो ब्रश कर के अंदर आयी.

जूही : गुड मॉर्निंग भाभी.

ममता : (मुस्कुराते hue)Good मॉर्निंग. नास्ता तैयार है, जा तो शिव को भी उठा दे.

जूही : जी भाभी. (कहते हुए वो उछलती कूद टी ऊपर चली गयी, शिव अंडरवियर पहने hi सो रहा था, कमरे से आती खुसबू बहोत कुछ बयां कर रही थी, उसने गीले गिस्तार को भी देखा, वो जानती थी की रात को क्या हुआ होगा, उसने चादर हटाई तो सुबह की वजह से अभी भी लुंड उठा हुआ था, वो मुस्कुराते हुए वह बेथ गयी और निचे झुक कर लुंड को सूंघने लगी, छूट रास और वीर्य की मिली झूली गंध उसके नथुनों में भरने लगी, उसने अपने चेहरे से लुंड को सहलाया तो शिव की नींद टूटने लगी, पर वो रुकी नहीं और लुंड पर अपना चेहरा रगड़ने लगी, शिव हड़बड़ा के जाग गया और बेथ गया तो जूही है पड़ी.)

शिव : क्या कर रही थी?

जूही : (मुस्कुराते hue)Wohi जो करना चाहिए. (में उसको देख कर थोड़ा हड़बड़ा गया और आस पास ेखने लगा, बिस्तर पर गिला पैन था, में उसे छुपाने लगा, वो मुस्कुराते हुए boli)Kya किआ रात को?

शिव : कुछ भी तो नहीं.

जूही : (वो जानती थी पर अभी कुछ कहना नहीं चाहती थी तो उसने बात को बदल diya)Agar इतनी hi याद आ रही थी तो मुझे मश्ग कर देते, में आ जाती, यु खुद तो गिला न होना पड़ता. (वो हसने लगी)

शिव : ये क्या कह रही हो तुम.

जूही : (कड़ी होते hue)Jaldi से निचे आ जाओ, भाभी बुला रही है. (कहते हुए वो चली गयी)

मेने जल्दी से कपडे पहने और बिस्तर को ठीक कर के निचे चला गया, और ब्रश किआ और नास्ते के लिए किचन में बेथ गया, भाभी ने मुझे दूध और नास्ता दिया, जूही पहले से hi कर रही थी.

जूही : भाभी, जाने से पहले इसका कमरा ठीक कर देना. (वो नास्ता करते हुए बड़ी शांति से बोली, ममता ने चौंक कर उसको देखा पर वो निचे hi देख रही थी, वो शिव को देखने लगी, दोनों एक दूसरे को देख रहे थे, पर जूही तो ऐसे बेहवे कर रही थी जैसे कुछ हुआ hi न हो, ममता को बहोत शर्म आ रही थी, उसका शक यकीं में बदल रहा था की वो सब कुछ जानती है, वो इतनी शर्मिंदा महसूस कर रही थी की एक पल भी वह थझारना उसको भरी पद रहा था)

ममता : तुम दोनों नास्ता करो में देख लेती हु. (कहते हुए वो तुरंत किचन से बहार निकल गयी)

मेने जूही को देखा तो वो शांति से नास्ता कर रही थी. उसने मेरी और देखा,

जूही : क्या हुआ, नास्ता करो. (उसने मुस्कुराते हुए कहा, में झेप गया और नास्ता करने लगा, नाहा धो कर हम भी तैयार हो गए, जूही hi गाड़ी चलने वाली थी, विष्णुभाई को फ़ोन कर के बुलाया था, जीप खुली थी तो उसका टॉप लगाना था, हम दोनों ने मिल कर टॉप लगा दिया ताकि धुप न लगे. हम तीनो सफर पर निकल गए, जूही जीप चला रही थी, भाभी बाजु में बैठी थी और में पीछे. थोड़ी देर ऐसे hi बाटे चली पर रात नींद कच्ची रह गयी थी तो में सो गया, और भाभी भी सो गयी, जूही पुरे रस्ते जीप चलती रही, जब हम उस सहर के नजदीक थे तो जूही ने दोनों को उठाया, उसने एक ढाबे पर गाड़ी रोकी हुई thi)Ab उठ भी जाओ दोनों, कितना सो रहे हो.

ममता : (वो बातो ेम्बरके फील कर रही thi)Sorry, वो आंख लग गयी थी, कहा पहुंचे?

जूही : नजदीक hi है, मेने सोचा थोड़ा फ्रेस हो जाये. (शिव को उठाते hue)O महाशय, उठ भी जाओ अब. (में हड़बड़ाते हुए जाग gaya)Kitna सोते हो दोनों, रात को सोये नहीं थे क्या? (फिर हम दोनों ने एक दूसरे को देखा और फिर हम दोनों जूही को देखने लगे, पर वो तो ढाबे को देख रही थी, ये लड़की भी समाज से बहार thi)Chalo भाभी, फ्रेश हो जाते है. (ममता बिना कुछ बोले निचे उतरी और उसके साथ बाथरूम की और चल पड़ी, में दोनों को जाते हुए देख रहा था, थोड़ी देर बाद वो दोनों आ गयी, फिर में बाथरूम चला गया, जब वापस आया तो दोनों एक टेबल पर बैठी थी और कुछ नास्ता और कॉफ़ी मंगवाई थी उन्होंने, में वही बेथ गया, जूही ने मुझे देखा और boli)Tum जीप चला लोगे न?

शिव : है, चला लूंगा, क्यों?

जूही : अरे सब वह देखेंगे की तुम बैठे हो और लड़की गाड़ी चला रही है तो लोग क्या सोचेंगे?

शिव : इसमें क्या सोचना, जो है सो है.

जूही : (मुस्कुराते hue)Me जानती हु, पर में किसी को मौका नहीं देना चाहती, और न hi में ये चाहती हु की कोई तुम्हारे बारेमे गलत सोचे, अब तुम hi गाड़ी चलना ठीक है.

शिव : (मुस्कुराते hue)Thik है मैडम. (हम सब है पड़े, हमने नास्ता क्या और फिर मेने जीप चला ली और हम अपनी मजिल की और निकल पड़े, वो एक सिटी थी पर मंतभाभी का घर सिटी से लगे एक गांव hi था. हम गांव के अंदर पहुंच गए थे, रस्ते में लोग हमारी जीप को देख कर देखने लगते और जैसे hi उनकी नजर मंतभाभी पर पड़ती वो लोग हाथ जोड़ देते थे.)

शिव : लगता है आपको सब जानते है?

ममता : ये गांव पूरा हमारा बसाया हुआ hi है, वैसे तो पापा की बड़ी खेती है पर भैया भी नौकरी करते है, बड़े चाचा का सेहरो में भी कारोबार है तो पापा का भी हिस्सा है उस में. और भाभी का तो तुम्हे पता hi है.

शिव : मुझे नहीं पता था की बिना मैडम इतने बड़े घर से ताल्लुकात रखती है.

ममता : अभी तुमने देखा hi कहा है. (हम रास्तो से बढ़ते हुए मंतभाभी के घर पहुंच गए, ये भी एक बहोत बड़ा घर था, हवेली hi कह सकते है, जैसे hi हमारी जीप रुकी, एक आदमी दौड़ता हुआ आया और मंतभाभी को प्रणाम किआ और सामान उतरने laga)Aao. (उन्होंने मुझे और जूही को कहा, वो आगे आगे और हम पीछे पीछे चलने लगे, अभी हम घर के दरवाजे पर पहुंचे hi थे की बिना मैडम हाथ में आरती की थाली लिए हुए दिखी, में तो देखता hi रह गया, उन्होंने एक बहोत महंगी साड़ी पहनी हुई थी, कपड़ो से hi लग रहा था की वो कितने बड़े घर की है, उनका ऐसा रूप तो मेने कभी नहीं देखा था, पूरा शरीर गहनों से लड़ा हुआ था, और उनके साथ में एक महिला थी जो भीमेहँगे वस्त्रोमे सज्ज थी.) मा (मंतभाभी ने माँ कह कर बुलाया तो में समाज गया की ये बीनमदं की सास और मंतभाभी की माँ है, वो बस मुस्कुरायी और उन्हें वही खड़े रहने का इस्सर किआ, उन्होंने बिना मैडम के हाथ से थाली ली और मंतभाभी को टिका लगाया और आरती उतरी. फिर एक पानी के लोटे को उनके शिर पर घुमाया और एक काम वाली को वो लोग दे दिया, वो उसे ले कर चली गयी, उसके बाद उन्होंने आरती की थाली मैडम को दे di,Mamtabhabhi ने उनके पेअर छुए और उनके गले लग गयी, निर्मलादेवी ने अपनी बेटी को शाइन से लगा लिया, तभी उनकी नजर पीछे खड़े लड़के और लड़की (शिव और जूही) पर गयी, दोनों को देख कर उनकी निगाहे जैसे जाम सी गयी, खास कर के लड़के (शिव) को देख कर, वो बिना पलके झपकाए शिव को देख रही थी)
 
अपडेट 184

निर्मलादेवी की नजर शिव पर तिकी हुई थी, ममता जब अपनी माँ से अलग हुई तो उसने देखा की वो किसी को देख रही है, उसने पीछे देखा.

ममता : तुमने पहचाना नहीं माँ, ये जूही है मेरी नानन्द. (नर्मदादेवी ने जूही को देखा वो आगे आयी और उसके पेअर छूने लगी, तो उसने आशीर्वाद दिया पर फिर वो शिव को देखने लगी)

नर्मदादेवी : ये?

ममता : (वो अपनी माँ का चेहरा पढ़ने की कोशिस कर रही थी, उनके चेहरे पर भी वही भाव थे जो उसने पहली बार शिव को देखा था तब उसके चेहरे पर the)Ye शिव है माँ, फॅमिली फ्रेंड है. (ममता ने जानबुज कर जूही का फ्रेंड नहीं कहा)

नर्मदादेवी : (शिव भी आगे आया और उसने पेअर छुए, नर्मदादेवी ने अपने आप को सँभालते हुए आशीर्वाद diya)Jite रहो, आओ अंदर आओ. (बिना का दिल जोरो से धड़क रहा था, उसको जिस बात का अंदेशा था वो hi हो रहा था, उसकी सास का चेहरा साफ़ बता रहा था की वो शिव को पहचान ने की कोशिस कर रही है, पर अभी कुछ पूछना सही नहीं था, वो कुछ नहीं बोली, नर्मदादेवी अपनी बेटी को साथ लिए अंदर की और मुड़ी पर एक बार फिर उसने शिव को देखा, फिर वापस मुद कर दोनों अंदर जाने लगे, बिना ने देखा की ममता की चल में थोड़ी लंगड़ाहट है, उसकी आँखों में अविश्वास था, उसने गौर से देखा, तो महसूस किआ की वो संभल कर चल रही है, उसका माथा ठनका)

बिना : (मान me)Shiv उनके वह था, कही दीदी ने कल रात शिव के साथ सम्बन्ध तो नहीं बनाये, वो कैसे कर सकती है ऐसा, नहीं कोई और बात होगी, पर उनकी चल तो यही बता रही है. वो सब जानती है, अगर अंदेसा सही हुआ तो फिर शिव क्या हो सकता है वो उन्हें भी पता है फिर वो ऐसा कैसे कर सकती है. (पर मौके की नजाकत को देखते हुए वो कुछ नहीं बोली, सब अंदर आ गए, नर्मदादेवी बार बार शिव को देख रही थी)

ममता : (धीरे se)Kya हुआ माँ, ऐसे क्या देख रही हो उसे?

नर्मदादेवी : नहीं, कुछ नहीं (थोड़ा सँभालते हुए वो बोली, फिर अपनी बेटी को हल्का दन्त ते hue)Aise कैसे आगयी, घर में फंक्शन है और तू ऐसे आएगी, तैयार क्यों नहीं हुई?

ममता : घर से तैयार हो कर आती क्या, कपडे और गहने साथ ले कर आयी हु, अभी तैयार हो जाउंगी.

नर्मदादेवी : जल्दी कर बीटा, हमे भाईसाहब के घर जाना है.

ममता : थोड़ी देर लगेगी, माँ. (जूही की और देख kar)Chalo, तुम भी तैयार हो जाओ.

जूही : में ठीक हु.

ममता : ऐसे कैसे, कई लोग पहलीबार तुम्हे देखेंगे, क्या कहेंगे की ममता की नानन्द तैयार भी नहीं हुई, चलो तुम, (शिव ko)Tum भी तैयार हो जाओ.

बिना : आप तैयार हो जाइये, में इसको दूसरे कमरे में तैयार होने के लिए ले जाती हु. आओ शिव.

नर्मदादेवी : (जिस तरह से बिना बात कर रही थी, नर्मदादेवी को लगा की उसकी बहु इस लड़के को जानती है) तुम जानती हो बीटा इसे?

बिना : ह है, माजी, वो मेरी hi स्कूल में पढता है. (नर्मदादेवी ने आंखे छोटी कर के देखा, बिना नज़ारे बचते hue)Chalo शिव. (में अपना बैग लिए उनके पीछे पीछे चल पड़ा)

नर्मदादेवी : (मान me)Ye इतना जाना पहचाना क्यों लग रहा है, या मेरा भ्रम है, इसे देख कर ऐसा क्यों लग रहा है जैसे में इससे जानती हु, पहले भी देख चुकी हु. ऐसा कैसे हो सकता है? (वो सोच में पद गयी thi)Mamta कह रही है की फॅमिली फ्रेंड है, बहु कह रही है उसके स्कूल में पढता है, समाज नहीं आ रहा. और सबसे बड़ी बात वो उसे यहाँ क्यों ले कर आयी है? (वो सोचने lagi)Shyada दामादजी आ नहीं सकते है तो दोनों अकेले कैसे आती, है इसीलिए उसे अपने साथ लायी होगी. पर उसका चेहरा क्यों इतना जाना पहचाना लग रहा है?

बिना : (शिव को अपने कमरे में ले आयी, और अंदर जाते hi)Kal ममतादिदी के साथ रहे थे?

शिव : (अचानक हुए सवाल से में उन्हें देखने लगा, वैसे वो सब जानती थी तो छुपाने का कोई मतलब नहीं tha)Ha. क्यों?

बिना : (उसको यकीं नहीं हो रहा था की सब जानते हुए भी ममतादिदी ने शिव के साथ रात गुजारी, भले hi अभी ये बात कन्फर्म नहीं है पर फिर भी अंदेशा तो है hi, फिर कैसे वो इसके साथ रह सकती है)

शिव : (बिना को सोच में डूबा dekh)Kya हुआ, क्या सोच रही है? (उसने नार्मल तरीके से hi कहा)

बिना : (अपनी सोच से बहार आते hue)Kuchh नहीं, कपडे लाये हो?

शिव : इसमें क्या बुराई है, आपके वह फंक्शन है, में ऐसे hi ठीक हु.

बिना : ज्यादा बोलो मात (नाराजगी से वो एक और गयी और अपनी अलमारी से कपडे निकलने लगी, कपडे ले कर वो शिव के पास aayi)Isse पहन लो.

शिव : (मेने देखा की वो नए कपडे थे, शर्ट और pant)Iski क्या जरुरत है, किसके है?

बिना : (उसको घर कर देख kar)Kisi के कपडे तुम्हे आएंगे क्या? में ले कर आयी थी, अब पहन लो ise.(Wo भले hi नाराज दिख रही थी पर उनका मेरे प्रति प्यार भी दिख रहा था, मेने उनके हाथ से कपडे ले कर साइड में रख कर मेने उनको बाजु से पकड़ लिया, वो दर गयी और दरवाजे की और देखने lagi)Kya कर रहे हो? कोई देख लेगा. (में उनको थोड़ा साइड में ले गया, वो दर रही थी)

शिव : क्या हुआ? किस बात पर गुस्सा हो? (वो मेरी आँखों में देखने लगी, हम दोनों एक दूसरे को देख रहे थे, वो पूरी तरह से तैयार थी, इस रूप में में उन्हें पहली बार देख रहा था, में उनके चेहरे को देख रहा था, वो शर्मा गयी और नज़ारे झुका कर)

बिना : तुम पर गुस्सा नहीं हु.

शिव : तो किस पर हो?

बिना : छोडो उस बात को, तैयार हो जाओ.

शिव : पहले एक किश दो.

बिना : क्या? (वो चौंकी) पागल हो गए हो क्या? (उन्होंने घर के देखा, में वैसे hi खड़ा रहा, वो अपने आपको छुड़ाने lagi)Koi आ जायेगा शिव (उन्होंने धीमी आवाज में कहा)

शिव : एक किश दो.

बिना : (बेबसी se)Kyu तंग कर रहे हो, कोई आ जायेगा न. (मुझे भी पता था की ज्यादा देर करना ठीक नहीं है तो मेने उनका चेहरा थमा तो वो मेरी आँखों में hi देखने लगी, में झुकने लगा, वो मुझे देख रही थी)

शिव : आप आज ऐसे बहोत खूबसूरत लग रही है. (उनके चेहरे पर हलकी मुस्कराहट आ गयी, वो तैयार थी इस लिए मेने हलके से उनके होठो पर किश किआ, उन्होंने कोई विरोध नहीं किआ)

बिना : (मुस्कुराते hue)Pagal, जल्दी से तैयार हो जाओ. (मेने उन्हें छोड़ दिया तो वो मुस्कुराते हुए बहार चली गयी, में कपडे पहन ने लगा, बिना, ममता वाले कमरे में गयी, दरवाजा अंदर से बंद था तो उसने खत खतया, थोड़ी देर बाद थोड़ा सा दरवाजा जूही ने खोला, बिना को देख कर उसने उन्हें अंदर आने दिया, ममता साड़ी पहन रही थी)

जूही : (बिना ko)Bhabhi, इसे बांध दीजिये न (वो चोली पहने हुए थी जो पीछे से खुली थी, बिना उसकी डोरो बांधने लगी)

बिना : सचमे तू कितनी लम्बी है. (जूही मुस्कुराने लगी, डोरी बांधने के बाद वो मेकअप करने लगी, बिना, ममता के पास पहुंच गयी, उसने एक बार जूही को देखा फिर धीरे से उसके कान में boli)Langda कर क्यों चल रही हो आप? (ममता झेप गयी, दोनों की नज़ारे मिली पर फिर ममता ने नज़ारे झुका ली, बिना ने अपनी बात आगे badhyi)Sab जानते हुए भी.... (उसने अपनी बात अधूरी छोड़ दी)

ममता : (वो संभल चुकी thi)Ab बाकि क्या है भाभी, वो हमारी कोख में पल रहे बच्चे का बाप है, ये आप जुठला नहीं सकती.

बिना : (वो जानती थी की ममता सही कह रही है, तो उसने बात को नहीं खिंचा, बात को बदलते hue)apne देखा की माजी उसको कैसे देख रही थी. मुझे तो दर लग रहा है.

ममता : देखो भाभी, अगर ये वही है तो फिर ये बात किसी न किसी दिन तो बहार आणि hi है, वैसे मम्मी ने कुछ भी कहा क्या? नहीं न, ऐसे कोई कुछ भी नहीं कह सकता, और वैसे भी कितने hi लोग होते है जिनकी सकल कुछ कुछ मिलती होती है.

बिना : पर फिर भी ख्याल रखना होगा, जितना हो सके शिव को बड़े चाचा से दूर hi रखना होगा, समाज रही हो न आप.

ममता : पर वो वह आएगा तो सब देखेंगे hi, और वो है hi ऐसा की किसी की नजर न पड़े ऐसा हो नहीं सकता.

बिना : आप समाज नहीं रही हो, बाबाजी ने भी कहा था की उसकी जान को खतरा है, मेरा तो दिल बैठा जा रहा है, क्या आप उसे खो सकती है?

ममता : मरूंगी एक जो ऐसी बात मुँह से भी निकली तो, किसी की मजाल है जो उसे छू भी सके, में जिन्दा हु अभी. (वो हलके गुस्से से बोली, फिर बिना को समजते hue)Aap खामखा चिंता कर रही है, कुछ नहीं होगा, क्या आप उसे कुछ होने देगी?

बिना: (बिना ने भी ना में शिर हिलाया) पर अभी वो छोटा है. (उसने चिंता जताई)

ममता : (मुस्कुराते hue)Muje तो नहीं लगता, और मुझे यकीं है की आपको भी नहीं लगा होगा की वो छोटा hai(Wo नटखट सा मुस्कुरायी)

बिना : (शरमाते hue)Aap बहोत ख़राब हो गयी हो, में यहाँ चिंता से मरी जा रही हु और आप उसके साथ...

ममता : वो जो भी हो, पर अब वो किसी और नाते से जुड़ा हुआ है हमसे, और में या आप उसे बदल नहीं सकते, तो क्यों इतनी फ़िक्र करने की, सब उपरवाले पर छोड़ दीजिये, वो जो भी करेगा सही करेगा, और अगर जैसा आप कह रही है की ये वो hi है, तो भी डरने की बात नहीं है, क्यों की अगर ये वही है तो इसका मतलब हुआ की वो बच गया है, तो सोचो की जब वो एक छोटा बच्चा था तब कोई उसका कुछ नहीं बिगड़ पाया तो अब तो वो बांस सा लम्बा हो गया है, किस की मजाल है जो उसे हाथ भी लगाए.

जूही : (उस और आते hue)Me तैयार हु, आप दोनों क्या गुसुर पुसुर कर रही है?

बिना : (जूही को देखते hue)Ye कितनी बड़ी हो गयी है न, और कितनी खूबसूरत भी, पूरी शादी के लायक हो गयी है. (उनकी बात सुन कर जूही शर्मा गयी)

ममता : घर में तो सब कब से कह रहे है, ये hi भाग रही है.

बिना : कब तक भागेगी, इसको भी कहते से बांधना hi पड़ेगा.

ममता : (उसको छडते hue)Ha वो भी बादवाला कहता.

जूही : (शर्म से पानी पानी हो रही thi)aap दोनों बहोत गन्दी हो में बहार जा रही hu,(Kehte हुए वो बहार भाग गयी, दोनों जोर जोर से हसने लगी)

बिना : आप जल्दी से तैयार हो कर निचे आओ, में जाती हु, जो जो लेकर जाना है वो एक बार देख लेती हु.

ममता : मेरा भी बस हो hi गया है, बस दस मिनट.

बिना निचे चली गयी, उसकी सास नौकरो को सब कह रही थी और सामान गाड़ी में रखवा रही थी.

बिना : में रखवाडेति हु माजी, आप बैठो.

नर्मदादेवी : इसमें क्या बहु, में थोड़ी न कुछ कर रही हु, बस कह रही हु, वैसे भी सब हो गया है, सब तैयार हो गए क्या?

बिना : है बस हो hi गए है, आ रहे है. (अपनी सास की आँखों में देख kar)Ek बात पुछु माजी?

नर्मदादेवी : (मुस्कुराते hue)Are पूछ न बेटी, इसमें पूछनेवाली क्या बात है?

बिना : आप शिव को ऐसे क्यों देख रही थी?

नर्मदादेवी: (उनके चेहरे से मुस्कान गायब हो गयी, वो अपनी बहु को गौर से देखने लगी, फिर कुछ सोच कर) पता नहीं बहु, पर मुझे लगा की जैसे में उसको जानती हु, कुछ जाना पहचाना सा लग रहा था, वैसे है कोण वो, किसका लड़का है?

बिना : वो एक अनाथ है.

नर्मदादेवी : (उनके माथे पर बल पद gaye)Sach में?

बिना : वो यहाँ पहले कभी नहीं आया, फिर आपको कैसे लगा की वो जाना पहचाना है?

नर्मदादेवी : पता नहीं बेटी.

बिना : हो सकता है की आप उसके जैसे किसी सख्स को जानती हो.

नर्मदादेवी : पता नहीं बेटी.

बिना : आपने योगेन्द्राचाचा को तो देखा hi होगा?

नर्मदादेवी : (मुस्कुराते hue)Dekha कैसे नहीं होगा (पर बोलते बोलते hi उनकी आंखे चौड़ी होने लगी, फिर उनके चेहरे पर अजीब से भाव आने लगे, जैसे वो कुछ सोच रही हो, वो कभी बिना को देखती तो कभी कही और)

बिना : क्या हुआ माजी?

नर्मदादेवी : (असमजंस में थी वो जैसे उनको विस्वास नहीं आ रहा था अपनी hi सोच पर)

बिना : क्या सोच रही हो आप माजी?

नर्मदादेवी : मेरी समाज में नहीं आ रहा है कुछ, में कब से सोच रही थी की इसको कहा देखा है, पर जब अब तुमने योगेंद्र का नाम लिया तो चेहरा स्पस्ट हो रहा है, वो योगेंद्र और चन्द्रिका का hi मिला झूला रूप लग रहा है, पर ये कैसे हो सकता है?

बिना : (उसका शरीर कैंप रहा था, उसकी जबान साथ नहीं दे रही thi)aa आप को यकीं है की ये उनके जैसा है?

नर्मदादेवी : (उनके चेहरे पर भी हवइया उडी हुई थी, वो भी विस्वास नहीं कर प् रही thi)Yogendra hi इस घर में सह से ऊँचा है, और चन्द्रिका का चेहरा तो कोई पागल hi भूल सकता है, इस लड़के का चेहरा ज्यादा तर चन्द्रिका से मिलता झूलता है, पर ये कैसे मुमकिन है? (तभी वह ममता आयी)

ममता : क्या हुआ भाभी (अपनी माँ को देखते hue)Kya हुआ माँ? कोई गड़बड़ है क्या?

बिना : माजी को लगता है की शिव का चेहरा चन्द्रिका चची जैसा है.

ममता : क्या कह रही हो माँ, क्या सच में?

बिना : हम शिव को वह नहीं ले जा सकते. (उसने जैसे फैसला सुनाया)

ममता : अरे पर भाभी...

बिना : अगर उसको बड़े चाचा ने देख लिया तो? (वो दर रही थी)

ममता : भाभी आप कुछ ज्यादा hi सोच रही हो (अपनी माँ को देखते hue)Maa तुम्हे यकीं है की वो चची के जैसा दिख रहा है, मतलब क्या ये शिवांश हो सकता है?

नर्मदादेवी : पता नहीं बेटी, पर ऐसा लग तो रहा है, पर वो तो मर चूका है. (तभी शिव और जूही आते दिखाई दिए)

ममता : इसके सामने अभी कोई बात मात करना. (सब चुप हो गए पर तीनो की निगाहे मुज पर hi तिकी हुई थी, बिना मैडम और मंतभाभी मुझे देख रही थी वो समाज में आ रहा था पर वो ाउंटी मुझे जैसे देख रही थी समाज नहीं आ रहा था, वो मुझे देख कर जैसे पहचान ने की कोशिस कर रही थी, में उनके नजदीक पंहुचा)

जूही : हम तैयार है.

बिना : तुम नहीं आ रहे वह. (बिना ने जैसे हुकुम दिया, मेरी समाज में कुछ नहीं आ रहा था, में उन्हें देख रहा था)

जूही : क्यों?

ममता : (सँभालते हुए muskurayi)Are वो तो ऐसे hi कह रही है, तुम जाओ, वो कुछ सामान है वो जीप में रखवा दो. (मेने बीनमदं को देखा, उनके चेहरे पर चिंता थी, पर मंतभाभी ने कहा था तो में और जूही जीप की और बढ़ gaye)Kya कर रही हो भाभी?

बिना : (अपनी सास को देख kar)Kya लगता है माजी? क्या अभी भी आप वही कहेंगी?

नर्मदादेवी : है बेटी, वो वैसा hi लग रहा है, पर ये कैसे मुमकिन है?

बिना : देखलिया, अगर माजी को लगता है तो दुसरो को भी लग सकता है, उसे हम वह नहीं ले जा सकते.

ममता : आप तो ऐसे कह रही है की वो शिवांस hi है, में मानती हु की माँ जूथ नहीं बोल रही, पर बाबाजी ने जैसे कहा था शिव को वह अनुष्ठान में हाजिर रहना है.

नर्मदादेवी : (चौकते hue)Babaji ने ऐसा कहा? क्यों? वो उसको कैसे जानते है?

ममता : (ममता खुद उलझती जा रही थी, क्या कहे क्या न कहे कुछ समाज में नहीं आ रहा tha)Maa वो.. मा . (उसको कुछ सूज hi नहीं रहा था)

नर्मदादेवी : ये चल क्या रहा है, कोई कुछ बताएगा मुझे? (तभी मोबाइल बजा, ये चंद्रभान का फ़ोन tha)Hello.

चंद्रभान : कहा रह गए तुम लोग, सब लोग आ रहे है, तुम लोगो का hi पता नहीं है. कर क्या रही हो तुम?

नर्मदादेवी : हम बस आ hi रहे है, ममता भी आ गयी है वो बस तैयार हो रही थी.

चंद्रभान : जल्दी आओ (कहते हुए उसने फ़ोन काट दिया)

नर्मदादेवी : जी. (उन्होंने फ़ोन रख diya)Jaldi चलो, तुम्हारे बाबूजी का फ़ोन था.

बिना : पर माजी हम उसको कैसे ले जा सकते है? (उन्होंने शिव की और देखा)

नर्मदादेवी : (सोचते hue)Meri कुछ समाज में नहीं आ रहा, पर उसको मरे हुए सालो हो चुके है, ये वो कैसे हो सकता है?

बिना : एक बार मान भी ले की ये वो नहीं है, पर फिर भी अगर ऐसा अंदेसा भी हुआ तो इसके लिए दिक्कत हो सकती है न? आप ताऊजी को तो जानती hi है.

नर्मदादेवी : ये तो सच है, ये वो है की नहीं वो बाद की बात है पर अगर बड़ेभाई साहब को शक भी हुआ तो... (डरते hue)Nahi नहीं.

ममता : तो क्या करे? (कुछ सोच kar)Iska हुलिया बदल दे?

बिना : अभी इतना टाइम नहीं है (कुछ सोच kar)Ek काम कर सकते है, मास्क! है यही सही रास्ता है.

ममता : पर वो अकेला मास्क लगाकर घूमेगा तो वैसे भी सब उसको hi देखेंगे.

बिना : देखने दो, पर मास्क की वजह से कोई पेहचानतो नहीं पायेगा, मुझे तो अभी सही लग रहा है, और अगर कोई पूछेगा तो बोल देंगे की फ्लू की वजह से उसने मास्क पहना हुआ है, ताकि किसी और को वायरस न लगे.

नर्मदादेवी : जो करना है जल्दी करो, वह तुम्हारे बाबूजी गुस्सा हो रहे होंगे.

ममता : ठीक है, चलिए, पर मास्क कहा से मिलेगा?

बिना : यहाँ मेडिकल में देख लेंगे वर्ण जूही और शिव को सहर भेजेंगे.

ममता : ठीक है चलो. (सब बहार आ गए, नर्मदादेवी अब और शिव को देख रही thi)Chalo मम्मी (कार का दरवाजा खोलते हुए वो बोली, नर्मदादेवी उसमे बेथ गयी, ममता भी वह बेथ गयी)

बिना : आप चलो, में उनके साथ आती हु (कहते हुए वो जीप की और बढ़ गयी, आगे बेथ कर) चलो. (वो जिस और बता रही थी शिव उस और गाड़ी चला रहा था, एक मेडिकल शॉप के सामने रुक kar)Wo मेडिकल मास्क होता है न, जो डॉक्टर पहनते है वो ले आओ. (उसने शिव को कहा)

शिव : मास्क!, उसकी क्या जरुरत है?

बिना : जो कहा है वो करो. (में गया और पूछा तो उनके पास था)

शिव : है, कितने लेने है?

बिना : चार पांच ले लो. (मेने मास्क ले लिए)

शिव : (उनको मास्क देते hue)Lijiye.

बिना : अपने पास रक्खो और एक पहन लो.

शिव : (आश्चर्य se)Me पहलू? क्यों?

बिना : जो बोलै है वो करो, और है वह मास्क मात निकल न, किसी के सामने भी नहीं, अगर कोई पूछे तो बोल्डेन की फ्लू है, थोड़ी जुकाम की एक्टिंग भी कर देना ताकि किसी को शक न हो. जूही, तुम इसका ध्यान रखना.

जूही : पर बात क्या है भाभी?

बिना : अभी समजने का टाइम नहीं है, बाद में बात करेंगे, अभी जितना कह रही हु वो करो. (मेने मास्क पहन लिया, उन्होंने मुझे गौर से dekha)Thik है चलो.

बिना टेंशन में थी, उसको तो पूरा यकीं हो गया था की ये शिवांस hi है, उसे ये भी पता था की सिर्फ सकल मिलने से ये साबित नहीं हो जाता की ये शिवांस hi है, क्यों की कई लोगो की सकल मिलती है, ये तो नहीं होता की बच्चे अपने maa-baap की कार्बन कॉपी हो, पर कई लक्षण होते है जो उनके साथ मेल कहते है, और ये रोज़ देखने वालो को पता नहीं चलता पर कोई पहलीबार अगर उसको देख रहा हो तो उसे फ़ौरन पता चल जाता है. वो बिच बिच में शिव को सब समजती रही, किसी से ज्यादा बात करने से भी मन करती रही, अगर बाबाजी का आदेश न होता तो वो इसे वह लती hi नहीं. आखिर कर वो वह पहुंच गए.

हम वह पहुंचे तो गेट खुला हुआ hi था, पर दरवान खड़ा था, आज मेहमान ज्यादा थे तो गेट खुला hi रखा था, वो बिना मैडम को पहचानता था तो उसने सलाम किआ, में आराम से गाड़ी चला रहा था, ये एक बहोत बड़ी कोठी थी, ऐसा लग रहा था जैसे कोई महल हो, मैं गेट से हवेली काफी अंतर पर थी, एक जगह मंडप लगाया गया था, उसके निचे सोफे लगाए गए थे, काफी लोग आ चुके थे, वह चहल पहल लगी हुई थी, मेहमानो से ज्यादा तो नौकर चाकर लग रहे थे, वो सारा काम कर रहे थे, हम जैसे hi अंदर पहुंचे तो एक आदमी दौड़ कर आया, उसने दरवाजा भी खोला, वो लोग निचे उतर गए, में बैठा था.

बिना : तुम भी उतर जाओ शिव, वो गाड़ी पार्क कर देगा. (में उतर गया और उनके पास गया, बिना मैडम किसी नौकर को कुछ हिदायते दे रही थी, मेने जूही को धीरे से कहा)

शिव : ये महल है क्या?

जूही : (मुस्कुराते hue)Muje क्या पता?

शिव : मैडम और भाभी तो बहोत बड़े खंडन से लग रहे है, उन्हें देख कर लगता नहीं की वो इतने बड़े घर की है.

जूही : क्यों?

शिव : दोनों कितनी सरल रहती है, कभी लगा hi नहीं की वो इतने बड़े खंडन की बहु बेटी है.

जूही : तो क्या हम छोटे है? (उसने नखरे से कहा) ऐसे hi नहीं वो हमारी भाभी है.

शिव : (मुस्कुराते hue)Mene ऐसा कब कहा. (तभी बिना मैडम आ गयी और मंतभाभी भी वह आ गयी, वो मुझे देख रही थी)

ममता : (बिना ko)Ye सही है, ऐसे कोई अनजान उसे पहचान नहीं पायेगा. (जूही ko)Tum इसे ले कर साइड में बैठो)

जूही : ठीक है. (वह काफी लोग बैठे हुए थे, में और जूही एक और बढ़ने लगे, पर जैसा की होता है हमारी हाइट की वजह से हर किसी का ध्यान हमारी और जा रहा था, हम दोनों एक जगह जा कर बेथ गए, एक वेटर पानी ले आया, हमने पिया.) पता नहीं सबको क्या हो जाता है, ऐसे घूरते है जैसे कोई एलियन देख लिया हो.

शिव : (मुस्कुराते hue)Ye कोई नयी बात थोड़ी न है, रिलैक्स यार.

जूही : तुम्हे मास्क क्यों पहनाया है?

शिव : मुझे क्या पता?

जूही : कुछ अजीब चल रहा है, तुम्हे नहीं लगता?

शिव : छोडो न, हमे क्या करना है.

बिना और ममता अंदर गयी, अंदर भी सब भगा दौड़ी चल रही थी, अभी बाबाजी आये नहीं थे पर उनके चेले आ गए थे और वो सब इंतजाम कर रहे थे, वो दोनों स्वर्ण से मिलने पहुंची, वो भी तैयार hi बैठी थी, कृपाली भी वही थी.

ममता : कैसी हो?

स्वर्ण : तो टाइम मिल गया?

ममता : कैसी है कापू?

कृपाली : अच्छी हु दीदी, आप कैसी हो, नमस्ते भाभी.

उनमे बस इधर उधर की बाते हो रही थी, तीनो अंदर से बेचैन थी, पर कृपाली की वजह से बात नहीं कर रही थी.

स्वर्ण : कापू, देख तो बाबाजी आये की नहीं?

कृपाली : कहा दीदी, आये होते तो पता नहीं चल जाता.

स्वर्ण : (हलके गुस्से se)Ak बार देख तो, बस ऐसे hi बोलती है.

कृपाली : (नखरे से उठते hue)Jab देखो तब दन्त टी रहती हो, में कोई छोटी बच्ची नहीं हु. (कहते हुए वो बहार निकल गयी)

स्वर्ण : (जैसे hi वो बहार gayi)Kya हुआ?

बिना : माजी ने भी उसे पहचान ने की कोशिस कर रही थी, जैसे उनको जानती हो.

स्वर्ण : (चिंता se)To अब क्या होगा?

बिना : अभी तो टेम्पररी सलूशन किआ है, आगे देखते है.

स्वर्ण : वो क्या? (फिर बिना ने सब बाते बताई, वो तीनो गुसपुस hi कर रही थी, अभी उनकी बात ख़तम hi हुई थी की कृपाली अंदर आयी, उसने देखा की तीनो कुछ गुसपुस कर रही है पर जैसे hi वो आयी तीनो चुप हो गयी, पर तीनो के चेहरे पर चिंता जरूर थी)

कृपाली : थोड़ी देर में आने वाले है. (उनको देखते hue)Kya हुआ?

स्वर्ण : कुछ नहीं, हम तो ऐसे hi बात कर रही थी.

कृपाली : मुझे बुद्धू समझते हो क्या, आप तीनो कोई बात कर रही थी, मुझे देखते hi चुप हो गयी, नहीं बतानी तो कोई बात नहीं, आप बात करो, में जाती हु (कहते हुए वो जाने लगी)

ममता : अरे सुन तो, ऐसी कोई बात नहीं है, तू तो ख़म खा नाराज हो रही है. हम भी बहार hi चल रहे है. (कहते हुए वो तीनो भी बहार निकल आयी, पद्मा भी काम में लगी हुई थी, आज बड़ा दिन था, वो बहार आयी और सब देखने लगी, काफी लोग आये हुए थे, वो उनसे मिलने लगी, तभी स्वर्ण की नजर अंदर आते हुए अपने सास ससुर नानन्द और पति पर पड़ी, वो उस और चल दी)

स्वर्ण : (सास ससुर को प्रणाम किआ, पति को मुस्कुरा कर देखा और वैस्वी से गले mili)Aa गए आप, आईये. (वो उन्हें एक और ले जाने lagi)(Me कोने में बैठा था, मेने भी वैस्वी को देखा पर में बैठा raha)(Swarna ने ममता और बिना को भी मिलवाया, उसकी मम्मी भी आ गयी और पद्मा भी, उन्हें आगे की क़तर में लगे सोफे पर बिठाया, वो लोग पहली बार यहाँ आये थे तो स्वागत तो बनता था. पृथ्वी ने भी देखा था पर वो दूर hi रहा, वैसे भी उसको इन सब में कोई खास रूचि नहीं थी, पर मजबूरी में रुकना पद रहा था, क्यों की वो भी परेशान था की बच्चा नहीं हो रहा था, लोग उसकी मर्दानगी पर पीठ पीछे है रहे थे, उदयसिंह अभी नजर नहीं आ रहा था, चंद्रभान और आकाश तो सब देखने में लगे हुए थे)

में और जूही अपनी hi बातो में लगे हुए थे, की तभी बाबाजी का आगमन हुआ, घर के सब दरवाजे की और बढे और दूसरे मेहमान कौतुहल से देख रहे थे, कुछ नौकरानियाँ उन पर फूलो की वर्षा कर रही थी, चंद्रभान, नर्मदादेवी , कामनादेवी और घर के सब लोग उनको प्रणाम करते हुए उन्हें यज्ञकुंड की और ले जा रहे थे. में भी उन बाबाजी को देख रहा था, वो बहोत शांत थे, उन्हें जैसे कोई फर्क hi नहीं पद रहा था, वो बस शांति से चले जा रहे थे, और हाथ उठा कर सबको आशीर्वाद दे रहे थे. उनको वह लगी एक बड़ी सी कुर्शी पर बिठाया, और चंद्रभान और उसकी पत्नी ने उनके पेअर धोये, खबर मिलने पर उदयसिंह भी वह आया, इतने सरे मेहमान थे तो सबको दिखने के लिए उसने हाथ जोड़े पर उसके चेहरे से लग रहा था की उसको हाथ जोड़ना भी गवारा नहीं.

बाबाजी : (मुस्कुराते hue)Lagta है आपको मेरा आना पसंद नहीं है.

उदयसिंह : (उसने दन्त पइसे पर चेहरे पर आने नहीं diya)Aisi कोई बात नहीं है.

बाबाजी : (मुस्कुराते hue)Muje ज्ञात है की आपको इन सब में कोई दिलचस्पी नहीं है, पर अब इसमें में क्या कर सकता हु, आपको बुलाना पड़ा और मुझे आना पड़ा.

चंद्रभान : ऐसा कुछ भी नहीं है बाबाजी, वो उनको ये सब पसंद नहीं, (पानी देते hue)Lijiye पानी पीजिये)

बाबाजी : (मुस्कुराते hue)Me अभी कुछ भी ग्रहण नहीं करूँगा, सब अनुष्ठान के बाद.

चंद्रभान : जैसा आप कहे.

बाबाजी : सब लोग आ गए है?

चंद्रभान : की बाबाजी, तक़रीबन सभी लोग आ गए है, पर जैसा मेने आपको बताया था की योगेंद्र की फॅमिली से कोई भी नहीं है.

बाबाजी : ठीक है वो सब में देख लूंगा, आप सब को यज्ञ कुंड के पास आने के लिए कहिये.

चंद्रभान : जी. (वो सबको बुला बुला कर इकठ्ठा करने लगे, उदयसिंह परिवार, उनके खुद का परिवार, सब तक़रीबन वह मौजूद थे, तभी उनकी निगाह दरवाजे से आती एक गाड़ी पर पड़ी, बहोत महंगी गाड़ी थी, और उनमे से जो सख्स उतरा उन्हें देख कर वो उस और जाने लगे)

उदयसिंह : इन्हे क्यों बुलाया है?

चंद्रभान : जरुरी था भैया. (वो उस और चल पड़े, उन्हें जाता देख वेब उस और देखने lage)(Mehmano की निगाह भी उस और थी, सब जानते थे की इतनी महंगी गाडी देश में कुछ गिनेचुने लोगो के पास hi थी, तो ये जो भी है वो बहोत बड़ा आदमी है, में और जूही भी उस और देख रहे थे, उसमे से जो सख्स निकला वो सूट बूट में था और कुछ गुर्द भी उनके साथ में थे)

शिव : कोण है ये?

जूही : मुझे क्या पता, में थोड़ी न किसी को जानती हु.

शिव : (मुस्कुराते hue)Chid क्यों रही हो, मेने तो बस ऐसे hi पूछा था. (मेने देखा की दूसरी और से एक औरत निकली और एक लड़की भी जिसने सफ़ेद वस्त्र पहने हुए थे. शिर पर पल्लू भी था, देख कर मुझे वो कुछ जनि पहचानी लगी तो में गौर से देखने लगा)

चंद्रभान उन्हें मंडप की और ले आया, उनलोगो को सब देख रहे थे और खास कर के उस लड़की को जो सफ़ेद वस्त्रोमे थी. सोनेरी रंगो से कलाकारी की गयी थी, वो अपनी नज़ारे झुकाये बड़ी शालीनता से चल रही थी, देखने भी बहोत ज्यादा खूबसूरत थी वो.

बिना : (पास में कड़ी ममता ko)Kon है ये लोग, पहले तो कभी नहीं देखा इन्हे?

ममता : में भी नहीं जानती, में भी कभी नहीं मिली इनसे. कोई बहोत बड़े लोग लग रहे है. (वो चलते हुए वह पहुंच गए थे, उसने उदयसिंह और उनकी पत्नी को देख कर हाथ जोड़ कर नमस्कार किया, उदयसिंह ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि उसके चेहरे पर हल्का रोष था, पर कामनादेवी ने मुस्कुराते हुए हाथ जोड़ कर जवाब दिया)

कामनादेवी : आइये भाईसाहब, आइये बहनजी, कैसे है आप?

सुखदेव : (मुस्कुराते hue)Me अच्छा हु बहनजी, आप कैसी है?

कामनादेवी : इस्वर की कृपा है भाई साहब, बहोत आरसे बाद देख रही हु आपको, आप तो इस और आना भूल hi गए.

सुखदेवी : क्या करे बहनजी, कुछ लोगो को हमारा आना पसंद नहीं, और वैसे भी यहाँ है कोण जो हम आये?

कामनादेवी : ऐसा क्यों कह रहे है, क्या हम नहीं है, आप तो ऐसा कह रहे है की सिर्फ योगेन्द्रभाई साहब से hi आपका रिस्ता है.

चंद्रभान : बाटे हो होती रहेगी भाईसाहब, आप बिराजिये. (उनको एक और ले जाते हुए, वो तीनो उस और चलने लगे to)Tum नहीं बेटी, तुम यही रुको. (उस लड़की ने अपने maa-baap को देखा तो उसकी माँ ऐश्वर्या ने आँखों से है का इस्सर किआ तो वो रुक गयी, चंद्रभान ने अपनी पत्नी नर्मदादेवी की और देख kar)Dekh क्या रही है, इसे अपने साथ बिठाइये. (नर्मदादेवी मुस्कुराते हुए आगे आयी तो उस लड़की ने झुक कर उनके पेअर छुए)

नर्मदादेवी : जीती रहो बेटी, सदा खुस रहो.

कामनादेवी :(कामनादेवी भी aayi)Kaisi हो बेटी, बहोत बड़ी हो गयी हो, अगर सुखदेवभाई के साथ न होती तो पहचान भी न पति (उस लड़की ने उनके भी पेअर छुए, उन्होंने भी आशीर्वाद diya)Jiti रहो बेटी, सदा खुस रहो. आओ, हमारे साथ बैठो. (कहते हुए वो उन्हें ले जाने लगी)

बिना : ये इन्हे हमारे साथ क्यों बिठा रहे है, क्या ये इस परिवार से है?

ममता : मुझे क्या पता, वो उन्हें हमारे बिच बिठा रहे है तो लगता तो ऐसा hi है की वो हमारे परिवार से hi है. पता नहीं क्या क्या छुपा हुआ है इस परिवार में?

थोड़ी देर में पूजा सुरु हो गयी, सबके हाथो में मंगल कामना के साथ लाल धागा बंधा गया, एक धागा बाबाजी ने बिना के हाथ में दिया और उसके कान में कुछ कहा.

बिना : जी बाबाजी. (फिर ममता और स्वर्ण की और देख kar)Aap मेरे साथ आईये. (वो तीनो अंदर घर की और जाने लगी, मान्सिबुआ से रहा नहीं गया)

मान्सिबुआ : कहा जा रहे है ये लोग?

बाबाजी : (मुस्कुराते hue)Lagta है आप को सब जान न होता है क्यों?

मान्सिबुआ : (जिस तरह से बाबाजी ने कहा था, दूसरे लोग हसने लगे, झेपते hue)Me तो बस ऐसे hi कह रही थी. (वैसे तो दुसरो को भी कुछ पता नहीं था पर कोई कुछ बोलै नहीं, सोचा की बाद में पूछ लेंगे, वही वो तीनो अंदर गयी और जाते हुए hi बिना ने फ़ोन लगाया)

शिव : (मेरे फ़ोन पर बिना मैडम का फ़ोन देख कर में चौंक गया, मेने फ़ोन uthaya)Hello.

बिना : तुम अकेले घर के अन्दर आओ.

शिव : कहा?

बिना : तुम दरवाजे पर आओ तो.

शिव : ठीक है. (जूही ko)Me अभी आया.

जूही : कहा जा रहे हो? किसका फ़ोन था?

शिव : बहोत सवाल पूछती हो, में थोड़ी देर में आया. (वह सब का ध्यान पूजा की और था, आस पास के लोगो ने मुझे देखा पर ऐसे hi देखा, में वह से निकल कर घर की और गया, दरवाजे पर hi मुझे बिना मैडम दिखी)

बिना : मेरे साथ चलो. (में उनके पीछे हो लिया, वो मुझे एक कमरे के पास ले गयी, वो एक पूजा घर था, बहार सब चल रहा था तो घर में वैसे भी बहोत काम लोग hi थे और जो थे वो नौकर hi the)Jute बहार निकल दो. (मेने जुटे निकले और अंदर गया, अंदर देखा तो स्वर्णाभाभी और मंतभाभी भी थे, मेरी कुछ समाज में नहीं आ रहा tha)Mask हटाओ. (मेने मास्क निकल दिया, वो स्वर्णअभ्भी मुझे देख कर मुस्कुरायी, मेने भी स्माइल से जवाब diya)Daya हाथ आगे बढ़ाओ. (मेरी तो कुछ समाज में नहीं आ रहा था पर मेने हाथ आगे बाध्य, उन्होंने तीनो ने एक साथ एक धागा मेरे हाथ में बंधा, में बस देख रहा था, वो तीनो बहोत प्यार से मुझे देख रही थी, धागा बांधने के baad)Ab तुम जाओ, और है, मश्ग देखते रहना, अगर आगे जरुरत पड़ी तो में तुम्हे मश्ग करुँगी. (मेरी तो कुछ भी समाज में नहीं आ ररः था तो में वापस लौट गया)

वह शिव के जाते hi तीनो एक दूसरे को देखने लगी, तीनो एक दूसरे की राज़दार थी, तीनो के चेहरे पर एक अशीम खुसी थी, तीनो आपस में गले मिली, भले hi कोई कुछ बोल नहीं रहा था पर, जैसे हजारो बाते हो रही थी. फिर तीनो ने बागवान को प्रणाम किआ और वापस यज्ञ की और चल पड़ी. वो वह पहुँचिहि और अपने अपने स्थान पर बेथ गयी. सबके मान में कई विचार चल रहे थे. पर कोई कुछ बोलै नहीं. बाबाजी ने अनुष्ठान सुरु किआ, तक़रीबन एक घंटे बाद अनुष्ठान पूरा हुआ. बाबाजी ने फिर तीनो के हाथ से hi आखरी नारियल का होम करवाया.

पद्मा : (अपनी सास ko)Babaji ऐसा क्यों कर रहे है, ये तीनो hi क्यों सब कर रही है, क्या में इस घर की बहु नहीं हु?

बाबाजी : जो कहना है मुझसे कहो बेटी?

पद्मा : कुछ नहीं बाबाजी.

बाबाजी : में जनता हु की आप सबके मान में कई प्रश्न है, हम ये हवन क्यों करवा रहे है वो शायद कई लोग नहीं जानते, ये अनुष्ठान, ये हवन हम इस लिए करवा रहे है की आपके परिवार में अगली पीढ़ी का आगमन हो. आज ये हवन हो रहा है तो उनके hi प्रयास से हो रहा है बेटी.

कामनादेवी : में कुछ सामजी नहीं बाबाजी.

बाबाजी : पुत्री, आप ये तो जानती है की आपकी पूर्ति यानि स्वर्णबेटी माँ बन ने वाली है, पर आप ये नहीं जानती की ये दोनों भी माँ बन ने वाली है.

कामनादेवी : क्या?

नर्मदादेवी : क्या?

सबके चेहरे पर आश्चर्य और खुसी दोनों थे.

उदयसिंह : मतलब आपने ख़म खा ये सब करवाया (उसने बेरुखी से कहा)

बाबाजी : (मुस्कुराते hue)Kuchh लोगो के कर्मो की सजा पूरा परिवार भुगत रहा है उदैसिंहजी, जिस वक़्त से इनलोगो के मान में इसके लिए पछतावा आया उसी वक़्त से उनके शिर से काळा साये हटने लगे, इनपर भोलेनाथ की कृपा हुई, और इन्हे ये सुख प्राप्त हुआ.

नर्मदादेवी : बताया नहीं तूने, और तूने भी. (नाराजगी से अपनी बहु और बेटी को देखते हुए वो बोली)

बाबाजी : इन्हे कुछ मात कहिये, मेने hi मन किया था, अभी खतरा टाला नहीं है, ये अनुष्ठान उनकी सलामती के लिए hi किया गया था.

पृथ्वी : अगर ये माँ बन रही है तो ये क्यों नहीं? (उसने गुस्से से अपनी पत्नी पद्मा की और इस्सर किया)

बाबाजी : ये तो शिव hi जाने. (उन्होंने मुस्कुरा कर कहा)

पृथ्वी : (खड़े होते hue)Mene तो पहले hi कहा था की ये सब ढोंग है, मुझे कोई विस्वास नहीं इन सब में, (अपनी माँ को देख kar)aap के कहने पर में यहाँ आया, देख लिया न सब. (कहते हुए वो वह से चला गया, पद्मा ासु बहाने लगी)

उदयसिंह : ये सब हो क्या रहा है? (उसने गुस्से से बाबाजी की और देखा)

बाबाजी : (उन्हें जैसे कोई दर hi नहीं tha)Ye क्या हो रहा है वो तुम्हे समझना है, उसकी तो महेर बरसने लगी है, तुम पर क्यों नहीं हुई वो तुम्हे सोचना है.

चंद्रभान : (बात को बिगड़ते dekh)Bhaisahab, आप शांत हो जाइये, ये काम खुसी की बात है की हमारी तीन बेतिया माँ बन ने वाली है, पद्मबेटी भी बन जाएगी, अगर आज ऊपरवाली की कृपा इन पर हुई है तो उस पर भी होगी, आपके घर की बेटी भी माँ बन रही है न. (उदयसिंह ने गुस्से से देखा पर इतने मेहमानो के सामने वो अपना तमसा नहीं बनाना चाहता था, तो वो चुप हो गया, सब मेहमानो की और हाथ जोड़ kar)Us और भोजन का प्रबंध किया गया है, आप प्रस्थान कीजिये. (सब उठ कर उस और जाने lage)(Waha एक और सख्स था जो बोलै तो कुछ नहीं पर अंदर बहोत ज्यादा दुखी था, वो सख्स था कृपाली, वो खुद ये सब तने सेहन कर रही थी, आज उसकी ससुराल वालो को भी पता चल गया था की उसकी बहन भी माँ बन ने वाली है, तो वो टेंशन में थी)
 
अपडेट 185

(पिछले अपडेट में मेने गलती से बिना की सास निर्मलादेवी को नर्मदादेवी लिख दिया था)

कृपाली की सास थोड़ी तेज स्वाभाव वाली थी, यहाँ हो रहा ड्रामा वो देख चुकी थी, वो ये भी जानती थी की ये सब विधि किस लिए की जा रही थी, उसकी बहु भी अभी तक कोई खुशखबरी सुना नहीं पायी थी, और इसी वजह से वो लोग भी इस अनुष्ठान में शामिल होने आये थे, अब तक वो कई उपाय आजमा चुके थे, मंत्र तंत्र और डॉक्टर, सबकुछ तो वो तरय कर चुके थे, इस बात को लेकर कई बार वो अपनी बहु को सुना भी चुकी थी. Wo(Daminidevi) उसका pati(Raghvendrasinh) और उसका बीटा (वशिष्ठ) भी भोजन जहा था उस और चल दिए. साडी व्यवस्था सुयोजित तरीके से की गयी थी, वह टेबल कुर्शी भी लगे हुए थे, पर वो वह बैठे नहीं, बस एक जगह पर खड़े रहे, वैसे भी वो लड़केवाले थे तो इजात लेना तो जैसे उनका हक़ था.

दामिनिदेवी : मेने कितनी बार कहा था पर मेरी बात कोई सुनता hi कहा है, आज देख लिया न, उसकी बहन भी माँ बन रही है, में न कहती थी की इसमें hi खोट है, पर तुम लोगो को मेरी बात सुनाई कहा देती है.

राघवेंद्रसिंह : अब यहाँ भी मात सुरु हो जाना, देख नहीं रही, वो लोग भी चिंतित है तभी तो इतना सब कर रहे है.

दामिनिदेवी : आप तो बोलिये hi मात, आपको तो बस मुझे चुप करना होता है, आप खुद देख लो, ये सब क्यों हो रहा है? क्यों की दिक्कत इन लोगो में में hi है, इनकी वजह से hi हमारा वंस आगे नहीं बढ़ प् रहा है, बात सिर्फ कृपाली की नहीं है, उसका सारा खंडन वैसा hi है, आपको तो बस पैसे hi दिखे थे, शादी करने से पहले कितना कुछ देखना पड़ता है, वैसे भी उसकी बहन भाग गयी थी, ऐसे घर की लड़की को लाना hi नहीं चाहिए था. (वशिष्ठ चुप hi रहा, क्यों की वो जनता था की उआकी माँ से बहस करके कोई फायदा नहीं, और अब तो उसको भी बात सही hi लग रही thi)(Wahi दूसरी और)

कामनादेवी : बेटी (कृपाली ko)Tumhare घरवाले खाने की और गए है, जरा उनका ध्यान रख.

कृपाली : (उसकी सकल रोने जैसी हो गयी thi)Muje नहीं जाना.

कामनादेवी : ऐसा क्यों कह रही है, जा देख उन्हें, कही कुछ चाहिए होगा तो.

कृपाली : तुम कुछ नहीं जानती माँ, वैसे भी मेरी सास हमेसा मुझको सुनती रहती है और अब तो और सुनाएगी, स्वर्णादिदी माँ बन रही है, और me...(Bolte बोलते उन्स्की आँखों में ासु भर आये)

कामनादेवी : अरे बाबाजी ने कहा न की अब सब ठीक हो जायेगा, तू क्यों चिंता करती है, चल में भी तेरे साथ चलती हु, वो लड़केवाले है, ख्याल रखना हमारा कर्त्तव्य है. (कृपाली ने ासु पोछे और दोनों उस और चल पड़ी, वो लोग अभी भी वह खड़े the)Are आप लोग खड़े क्यों है, बैठिये न. (उसने मुस्कुरा कर कहा, कृपाली की सास ने भी नकली मुस्कराहट से जवाब दिया)

दामिनिदेवी : हम बस बेथ hi रहे थे.

कामनादेवी : (एक वेटर को bulaya)Yaha सब अच्छे से सर्वे करना, ये हमारे खास मेहमान है. (वो है कह के चला gaya)Aap लोग बैठिये (वो सब एक एक कुर्शी पर बैठने लगे, अपनी बेटी ko)Tum भी बेथ जाओ बेटी, और ध्यान रखना की इन्हे किसी किस्म की तकलीफ न हो)

कृपाली : जी मम्मी. (वो भी बेथ गयी, वेटर आके खाना परोसने लगे)

कामनादेवी : आप लोग इत्मीनान से खाना खाइये, में दूसरे मेहमानो को देखती हु. (फिर दामिनिदेवी ने जूठी मुस्कान से हामी भरी, वो चली गयी).

दामिनिदेवी : अब तो पता चल गया न तुम्हे की दिक्कत तुम्हारी और से hi है. (कृपाली क्या बोलती, बस नज़ारे झुकाये बैठी रही)

वशिष्ठ : माँ, अभी ये सब बाटे करना जरुरी है क्या, जो बाटे करनी है वो घर जा कर करेंगे न.

दामिनिदेवी : घर जा कर क्यों, अगर दिक्कत इनलोगो में है तो हम क्यों डरे, बड़े लोग होंगे तो अपने घर में, हम क्या कम है क्या? देखो बहु, में साफ़ साफ़ कह देती हु, अगर 6 महीनो में कोई खुस खबरि न मिली तो फिर तुम अपना देख लेना. (कृपाली की आंखे नुम होने लगी, एक दो बुँदे टपक भी पड़ी).

वशिष्ठ : माआ...

दामिनिदेवी : तू तो चुप hi रह, में जो कह रही हु तेरे भले के लिए hi कह रही हु, ये ासु देख के में पिघलने वाली नहीं हु.

राघवेंद्रसिंह :अच्छा ठीक है, अब शांत भी रहो. (वो फिर कुछ भी नहीं बोली, कृपाली भी नज़ारे झुकाये बैठी रही, न खाना खाया न किसी ने उसको खाने के लिए कहा भी)

वही कुछ दुरी पर एक टेबल पर वैस्वी और उसके घरवाले भी खाने के लिए बैठे हुए थे, स्वर्ण उनका ध्यान रख रही थी, पर वैस्वी की नजर बार बार शिव की और hi जा रही थी, वो और जूही एक जगह खड़े हुए थे, भले hi शिव ने मास्क पहना हुआ था पर वो उसको पहचान गयी थी, पर अपने घरवालों की वजह से वो वह नहीं जा प् रही थी, वो शिव से मिलना चाहती थी.

बिना के घरवाले भी वह आये हुए थे, वो भी खाने बैठे हुए थे और बिना वही थी. उसकी माँ( हर्षदेवी) के चेहरे पर खुसी साफ़ छलक रही थी.

हर्षदेवी : तूने बताया भी नहीं, हमसे क्या छुपाना था?

बिना : (शरमाते हुए) ऐसी बात नहीं है माँ, मुझे भी अभी अभी पता चला है (जूथ).

हर्षदेवी : पागल है क्या तू, ऐसी बाते पता नहीं चलती क्या?

बिना : (अपने पापा की वजह से वो शर्मा रही thi)Aisi बात नहीं है माँ, वो कभी कभी दिन ज्यादा हो जाते थे तो मेने सोचा था की वैसा hi होगा, इतने सालो में तो कभी ऐसा हुआ नहीं था.

हर्षदेवी : डॉक्टर के पास गयी थी की नहीं?

बिना : है माँ, मेने चेकउप करवलिया है, सब ठीक है.

हर्षदेवी : चलो, उपरवाले का सुकर है, में तो हमेसा चिंतित रहती थी, आज कल वैसे भी ऐसे केस बढ़ते जा रहे है, भले मेने कुछ कहा नहीं पर अंदर hi अंदर दार लगा रहता था.

बिना : (उसको बहोत शर्म आ रही thi)Aap को, में दूसरे मेहमानो को देखती हु. (वो शर्माती और मुस्कुराती वह से निकल गयी, वो जा रही थी की उसको उसकी सास मिल गयी)

निर्मलादेवी : कहा भागी जा रही है, थोड़ा आराम से चल. (बिना रुक गयी, निर्मलादेवी ने मुस्कुराते हुए kaha)Tu घर चल, तुजे तो में देखती हु. (बिना भी मुस्कुरा रही thi)Itni बड़ी बात थी और तूने मुझे भी बताना ठीक नहीं समजा. (जूठी नाराजगी से वो बोली)

बिना : ऐसी बात नहीं है माजी, मुझे भी थोड़े दिन पहले hi पता चला है, में बतानेवाली hi थी. (उसने शिर झुका के जवाब दिया)

निर्मलादेवी : चल कोई नहीं, अभी सब मेहमानो का ख्याल रख, हम आराम से बात करेंगे, वैसे भी तूने जो खुशखबरी दी है उसके सामने तो तेरी हर गलती माफ़ है. (उसने गाल सहलाते हुए अपनी बहु को कहा, और उसके शिर पर हाथ रखते hue)Sada सुखी रहो, और दूधो नहावो पुतो फलो. (उनके चेहरे पर खुसी मनो छलक रही थी, दो आंखे उनको hi देख रही थी, वो आंखे थी पद्मा की, की तभी उसके कंधे पर एक हाथ आया)

कामनादेवी : क्या देख रही है? (पद्मा ने पलट कर देखा तो उसकी सास थी, उसने तुरंत नज़ारे झुका ली,)

पद्मा : कुछ नहीं माजी.

कामनादेवी : तू क्यों दिल छोटा करती है, तेरे नशीब में भी ये खुसी जरूर आएगी. (अपनी सास से ये बात सुन कर उसने जो ासु रोक रक्खे थे वो छलक आये) अरे पगली रोटी क्यों है, सब ठीक हो जायेगा, जा अभी सबका ख्याल रख, हमारी एक hi तो बहु है.

पद्मा : जी माजी (कहते हुए उसने अपने ासु पोछे और एक और बढ़ गयी)

चंद्रभान अपनी पत्नी को लिए सुखदेवजी के पास आया.

चंद्रभान : आप खड़े क्यों है, खाना खा लीजिये.

सुखदेव : नहीं, हमे इजाजत दीजिये, हम निकलते है.

निर्मलादेवी : ऐसे कैसे जाने दे भाई साहब, वैसे भी आप इस और का रास्ता तो जैसे भूल hi गए है, आज हमने इससे भी कितने सालो बाद देखा है. तुम तो हमें जानती भी नहो होगी क्यों बेटी?

प्रकृति : हम जानते है आपको, पापा ने सबकी तस्वीर हमें दिखाई है.

निर्मलादेवी : कितना मीठा बोलती है ये, कही मेरी hi नजर न लग जाये, और खूबसूरत तो ऐसी है जैसे अप्सरा धरती पर आ गयी हो. (ये सब सुन कर जहा सबके चेहरे खिल जाने चाहिए थे वही, सब के चेहरे पर उदासी थी) निर्मलादेवी, एक बात कहु भाईसाहब, बुरा मात मानियेगा.

सुखदेव : कहिये न, में क्यों बुरा मानुगा.

निर्मलादेवी : पिछली बातो को बुरा सपना समाज कर भुला दीजिये और आगे की सोचिये, ऐसी प्यारी बच्ची का ये हाल मुझसे बर्दास्त नहीं हो पायेगा, आज के ज़माने में कोण इन बातो को इतनी ज्यादा तवज्जु देता है, वो सब कोई मैंने नहीं रखता है, आप इस फूल सी बेटी का सोचिये और वो सब भूल जाइये.

सुखदेव : में भी यही चाहता हु भाभी, पर भाग्य को कोई बदल सका है, और कुंडली जो कहती है वो हो कर रहता है, एक बार में ये गलती कर चूका हु, अब दोबारा करने की हिम्मत नहीं है.

निर्मलादेवी : आप hi संजय ये भाभी (ऐश्वर्यदेवी), ऐसी बातो क्या क्या मतलब है इस ज़माने में.

ऐश्वर्यदेवी : (दुखी मान se)Ek बात पुछु आपको, अगर आप ये सब नहीं मानती तो फिर आज का ये दिन hi न होता, आज अपने जो भी अनुष्ठान रकवाया, ये पूजा रखवाई, वो क्यों रखवाई फिर?

निर्मलादेवी : अब क्या कहु इसमें, डूबता को तिनके का सहारा समाज लीजिये. वो जो मनहूसियत कहे या किसी का पाप कहे, जिसका प्रभाव था इस घर पर, पर आप hi देखिये, आज हमारे घर में भी खुसिया लौटी है, तो इस से आप यही समाज सकते है की जिसकी वजह से ये सब था उसने हमे माफ़ किया है, तभी तो आज हम ये दिन देख रहे है.

सुखदेवी : शायद आप सही कह रही है की उसने सायद आपको माफ़ कर दिया है पर में नहीं कर पाउँगा, आज भी में इसीलिए आया था की देख सकू की इतना सब करने के बाद भी वो इंसान कैसा है, क्या आपको लगता है की उसको अपने किये पर कोई पछतावा है, उसने हम सब को वो घाव दिया है जो कभी नहीं भर सकता, वैसे भी अब इन सबका कोई मतलब नहीं रह जाता, आप हमे इजाजत दीजिये, हमे जाना होगा.

चंदरभान : खाना खा कर तो जाइये.

सुखदेव : इस घर का खाना तो क्या, पानी भी मेरे लिए हराम है. मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं है, पर कही न कही आप सब भी उसका हिस्सा हो, (हाथ जोड़ kar)hume इजाजत दीजिये.

निर्मलादेवी : बस एक मिनट रुकिए भाई साहब. (वो वह से तुरंत गयी और स्वर्ण, बिना और ममता को लेकर आयी, और साथ में एक थाली में मिठाई भी ले कर आयी) देखिये भाई साहब, आज इस घर में खुसिया आयी है, और में दिल से प्राथना करती हु और आशीर्वाद देती हु की इस बच्ची का भाग्य भी उसको वो सभी खुसी दे जिसकी ये हक़दार है, आप भले hi कुछ न खाये, और में आपको कह भी नहीं सकती, पर इस बच्ची पर तो मेरा अधिकार है, आप चाहो या नहो चाहो पर आप इस बात को जुठला भी नहीं सकते, में इसे ऐसे बिना कुछ खाये नहीं जाने दे सकती, मेरी इतनी तो बात आप मान hi सकते है न? (बिना, स्वर्ण और ममता, तीनो एक दूसरे को देख रही थी, वैसे भी वो इन्हे जानती नहीं थी और न hi कुछ पता था उन्हें, पर वह मामला बहोत ज्यादा गंभीर दिख रहा था, तो वो तीनो चुप hi rahi)Ye दो मेरी बेतिया है, ममता और स्वर्ण और ये मेरी बहु बिना है, जैसा की आपने आज सुना ये उम्मीद से है तो ये बात साबित हो गयी की इनको तो माफ़ी मिल गयी है, मेरे हाथ से न सही पर इनके हाथ से तो बिटिया का मुँह करवा hi सकती हु. (सुखदेव और ऐश्वर्यदेवी ने एक दूसरे को देखा, वह कड़ी प्रकृति को तो कुछ भी समाज में नहीं आ रहा था, वह बिना, ममता और स्वर्ण भी इस खूबसूरत लड़की को देख रहे थे, वो भी उसे नहीं पहचानते थे)

सुखदेव : ठीक है भाभी, जैसा आपको ठीक लगे, में जनता हु की आप के दिल में कोई मेल नहीं है और आप इसका अच्छा hi चाहती हो.

निर्मलादेवी : स्वर्ण, बेटी इसका मुँह मीठा करवाओ. (उन्होंने प्रकृति की और इस्सर किया)

स्वर्ण : जी, चची. (वो आगे बढ़ी और एक टुकड़ा ले कर प्रकृति को खिलने लगी, दोनों एक दूसरे को जानते नहीं थे, तो एक दूसरे को देख रहे थे)

निर्मलादेवी : आप जानते hi है, ये उदैसिंहभै साहब की लड़की है, आप उनसे hi खफा है पर फिर भी मेने इसके हाथो से मुँह मीठा करवाया है.

सुखदेव : मेने कहा न भाभी, मुझे कोई एतराज नहीं है, जैसा आपको ठीक लगे. (स्वर्ण के शिर पर हाथ रख kar)Sukhi रहो बेटी. तुम्हारे बाप के कर्मो की सजा में तुम्हे नहीं दे सकता. (अपने एक बॉडी गॉर्ड को इस्सर किआ तो वो बाग़ ले कर आगे आया, बैग खोल कर उसमे से एक 500 ले नोटों की गद्दी निकल कर स्वर्ण के हाथ में दी, इतने सरे पैसे देख कर स्वर्ण ने चौंक कर अपनी चची को देखा). उन्हें क्या देख रही हो, अगर ये उनका हक़ है तो ये मेरा हक़ है, क्यों भाभी. (निर्मलादेवी बस मुस्कुरायी, ममता भी आगे आयी और प्रकृति तो मिठाई खिलाई, सुखदेव ने उन्हें भी वैसी hi गद्दी दी. फिर बरी आयी बिना की, उसने भी प्रकृति को मिठाई खिलाई, और जब सुखदेव उसे भी आशीर्वाद दे रहे थे)

बिना : में आपको क्या कहु पता नहीं, इसलिए अंकल hi कह रही हु, अगर कोई भूल हो तो माफ़ करना.

सुखदेव : तुम इस घर की बहु हो तो मेरी बेटी hi हुई. (उन्होंने मुस्कुरा कर कहा)

बिना : में आपको जानती हु, (अपनी बात को सही करते hue)Matlab की मेने सुना है. (वो हिचकिचा रही थी, क्या बात करे कैसे बात करे समाज नहीं आ रहा था)

सुखदेव : (वो उसकी हिचकिचाहट को महसूस कर प् रहा tha)Kya बात है बेटी, जो कहना है कहो.

बिना : नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है. (वो क्या कहे कुछ समाज नहीं आ रहा था)

सुखदेव : (मुस्कुराते hue)Thik है, (फिर अपनी जेब से पर्स निकल कर उसमे से एक विजिटिंग कार्ड और पैसे की गद्दी देते hue)Ye मेरा कार्ड है.

बिना : जी अंकल, थैंक यू.

सुखदेव : (निर्मलादेवी की और देख kar)Ab तो इजाजत है न? (उन्होंने मुस्कुराते हुए हाथ जोड़ कर कहा)

निर्मलादेवी : (मुस्कुराते हुए, प्रकृति की और देख kar)Beti, अब सब सही हो रहा है, तू फ़िक्र मात कर तेरा भी भाग्य बदलेगा, मुझे यकीं है की खुसिया अब दस्तक दे रही है.( और निर्मलादेवी ने तो उसको गले से लगा लिया और ढेर सरे आशीर्वाद दिए)

सुखदेवी : (प्रकृति की देख kar)Beta, सबके आशीर्वाद ले लो. (प्रकृति ने सबके पेअर छुए, बिना, स्वर्ण और ममता हिचकिचा रहे थे, पर उन्होंने आशीर्वाद दिया, वो लोग चले गए, पर निर्मलादेवी नाम आँखों से देखती रही)

ममता : कोण थे माँ ये?

निर्मलादेवी : बहोत लम्बी कहानी है बेटी, बाद में बात करेंगे, अभी सब मेहमानो का ख्याल रक्खो.

ममता : पर माँ इतने पैसे?

निर्मलादेवी : तुम्हारी दी हुई खुशखबरी के बदले तुम्हे आशीर्वाद के तौर पर दिए गए है, अब चलो, दूसरे मेहमानो का भी ख्याल रखना है, और वो लड़का कहा है?

बिना : शिव की बात कर रहे हो आप?

निर्मलादेवी : है वही, उसका मुँह तुमने बंद करवादिया है वो खायेगा कैसे? उसका ख्याल रक्खो.

चंद्रभान : किसकी बात कर रहे हो तुम लोग?

निर्मलादेवी : किसी की नहीं, आप चलिए. (वो उन्हें खिंच कर ले जाने लगी)

चंद्रभान : किसी लड़के की बात कर रही थी और अब मुझसे कह रही हो किसी की नहीं.

निर्मलादेवी : अभी चलिए, बाद में बताती हु.

वासवी बहाना बना कर hi अपने घरवालों से छुप कर शिव के पास पहुंच गयी.

वैस्वी : Hi (शिव को देख कर मुस्कुराते हुए, फिर जूही को देख kar)Hi दीदी.

शिव : तुम यहाँ?

वैस्वी : ये मेरी भाभी का घर है तो में तो होउंगी hi, सवाल तो मुझे पूछना चाहिए की तुम यहाँ?

जूही : ये हमारे साथ आया है.

वैस्वी : तुमने मास्क क्यों पहन रक्खा है?

शिव : ताकि तुम्हारी नजर न पड़े न. (मजाक में)

वैस्वी : वैरी, फनी. तुमने मास्क पहना हो या मुँह धक् कर रक्खा हो, में क्या नहीं पेहचानूँगी? (मुस्कुरा के वो boli)(Juhi ने हलकी नाराजगी से मुझे देखा तो में थोड़ा घबरा गया और वैस्वी को देखने लगा, उसने अपनी बात सही ki)Mera मतलब है इतना लम्बा तो मेने आज तक कोई देखा hi नहीं, कमसे काम अपनी पहचान में तो नहीं hi देखा फिर कैसे न पहचानती. आप लोग यहाँ क्यों खड़े हो, खाना नहीं खाना क्या?

जूही : नहीं, अभी बाद में कहते है.

वैस्वी : यहाँ आनेवाले हो बताया भी नहीं मुझे. (उसने मीठे गुस्से से डांटा)

शिव : मुझे भी नहीं पता था (मेने भी डरते हुए कहा, ये दर उसके डांटने का था या जूही के पास होने का मुझे समाज नहीं आ रहा था)

वैस्वी : वापस कब आनेवाले हो?

शिव : शायद कल. (मेने जूही की और देख कर कहा, जैसे पूछ रहा हो).

वैस्वी : अच्छा ठीक है, में चलती हु. (कहते हुए वो मुस्कुरा कर चली गयी, और जाते जाते पलट कर भी मुझे देखा और मुस्कुरायी, मेने डरते डरते जूही को देखा तो वो मुझे घर hi रही थी, तभी बीनमदं वह आ गयी, मेने रहत की सास ली)

बिना : (मुस्कुराते hue)Bhukh तो नहीं लगी न?

शिव : लगी है, पर खो कैसे? (मेने मास्क की और इस्सर कर के कहा)

बिना : (आस पास देख kar)Waise खाना है तो खा लो, अब ज्यादा दिक्कत नहीं है, ज्यादातर लोग खा कर जा चुके है.

शिव : में तो मजाक कर रहा था, आप सब कब खानेवाले हो?

बिना : (मुस्कुरा कर )बस थोड़ी देर में.

शिव : ठीक है, तो फिर सब साथ में hi खाएंगे. (बिना मुस्कुराते हुए चली गयी, जूही की और देख kar)Tumhara मुँह तो खुला hi है न, तुम कुछ खा लो. (जूही और मेरे बिच कब से यही बाटे चल रही थी की आखिर मुझको मास्क क्यों पहनाया गया है, पर न कोई जवाब मेरे पास था और न जूही को कुछ समाज आ रहा था, पर जिस तरह से मुझको मास्क पहने रखने के लिए बोलै था मुझे पहनके रखना hi पड़ा, वैसे मुझको थोड़ी थोड़ी बात पता थी और कब से में यही सब देख रहा था, पर वैसे भी में किसी को जनता नहीं था तो मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था, में किसी भी तरह से इस फॅमिली में फिट नहीं बेथ रहा था, में बातो और मिलवाये गए लोगो को मिला कर सब समझने की कोशिस कर रहा था पर कुछ समाज में नहीं आ रहा था, और वैसे भी में यहाँ ज्यादा लोगो से मिला भी नहीं था. पर इतनी बात तो वो समाज रहा था की बात गंभीर थी, वर्ण ऐसे hi बिना मैडम मुझको मुँह ढकने को नहीं कहती, पर अभी वक़्त नहीं था पूछने का तो मेने अभी चुप रहना hi सही समजा. पर मुझे लग रहा था की बिना मैडम को कोई गलत फेहमी hi हुई है)

कृपाली के परिवार के लोग भी जा चुके थे, और पद्मा के घरवाले भी जा चुके थे, और वैसे भी उन दोनों का मान नहीं लग रहा था. जब पद्मने एक कोने में बैठी कृपाली को देखा तो वो उसके पास चली गयी.

पद्मा : (मुस्कराहट लेन का प्रयास करते hue)Aap यहाँ अकेली क्यों बैठी है, कुछ खाया आपने?

कृपाली : (मुस्कराहट लेन का प्रयास करते hue)Nahi भाभी, कुछ मान नहीं कर रहा.

पद्मा : (उसके पास बैठते hue)Me समाज सकती हु. (उसके चेहरे पर उदासी थी)

कृपाली : ऐसा क्यों हुआ भाभी?

पद्मा : (वो उसकी बात को समाज रही thi)Ab इसमें में क्या कह सकती हु, जैसा तुम्हारा हल है वैसा hi मेरा भी है.

कृपाली : हमसे कहा गलती रह गयी भाभी, में तो एक अच्छी बेटी बानी अच्छी बहु भी बानी और एक अच्छी पत्नी भी बानी, फिर मेरा नशीब ऐसा क्यों?

पद्मा : (उसके हाथ पर हाथ रखते hue)Sab किस्मत का खेल है, पर एक बात कहु अगर बुरा न मनो तो.

कृपाली : कहिये न भाभी, अब बुरा मन ने को रह hi क्या गया है.

पद्मा : (थोड़ा नजदीक आते hue)Muje लग रहा है की कोई न कोई बात जरूर है जो सबसे छुपाई जा रही है.

कृपाली : (गौर से देखते hue)Aisa क्या है, और आपको ऐसा क्यों लग रहा है?

पद्मा : आप तो थी नहीं यहाँ, पर एक बार बाबाजी घर पर आये थे, उन्होंने एक अलग रूम में ममतादिदी और बीनडीडी से बात की थी.

कृपाली : (गौर से देखते hue)Kya बात की थी?

पद्मा : वो तो पता नहीं, पर उनका इस तरह अलग जा कर बात करना मुझे अजीब लगा.

कृपाली : क्या अजीब लगा?

पद्मा : ये अनुष्ठान किस लिए रक्खा गया? क्यों की हमारे घर में बच्चे नहीं हो रहे थे, है न? (कृपाली ने है कहा) तो उस वक़्त तो उनकी भी ऐसी कोई बात नहीं थी और न में माँ बन रही थी, तो अगर उस बारे में hi बात करनी थी तो बातो में मुझे भी शामिल करना चाहिए था, पर बाबाजी ने सिर्फ उन्दोनो से hi बात की.

कृपाली : ऐसा क्यों?

पद्मा : मुझे क्या पता? पर बात कुछ तो है.

कृपाली : ऐसी क्या बात हो सकती है?

पद्मा : तुम देख रही हो न की आज भी बीनडीडी, ममतादिदी और स्वर्णादिदी को hi भेजा गया, न तुम्हे कहा न मुझे, क्यों? (कृपाली शंका से देख रही thi)Aur एक बात, ये तीनो अब आपस में कितना घुलमिल गयी है, और जब भी मौका मिलता है कुछ न कुछ घुसार पुसार करती रहती है, जैसे hi कोई नजदीक आता है बाते बंद हो जाती है.

कृपाली : है, सही कहा आपने, मेने भी महसूस किया है.

पद्मा : है न, कोई तो बात जरूर है जो सबसे छुपाई जा रही है.

कृपाली : ऐसी क्या बात हो सकती है?

पद्मा : मेने जान ने की कोशिस की थी पर कोई फायदा नहीं हुआ, आप और स्वर्णादिदी तो सगी बहने है, आप उनसे पूछोगी तो वो जरूर बताएगी. (उसने गौर से कृपाली को देखा, वो सोच में पद गयी थी)

कृपाली : ठीक है भाभी.

पद्मा : पर फिर आप भी उनके दाल में शामिल मात हो जाना, जो कुछ भी हो मुझे जरूर बताना (उसने जैसे रिक्वेस्ट की)

कृपाली : ऐसा क्यों कह रही हो आप?

पद्मा : मुझे ऐसा लग रहा है जैसे सबने मुझसे किनारा कर लिया है, अब मेरी क्या गलती है इसमें की मेरी शादी उनसे हुई है, हमें कोई पूछता है क्या, मुझे तो यहाँ आके सब पता चला, अब में इसमें क्या कारशक्ति हु की वो और आपके papa...(Bolte बोलते वो रुक गयी)

कृपाली : (वो सब समाज रही थी, वो अपने पापा और अपने भाई को जानती thi)Aap फ़िक्र मात करो भाभी, चचे कुछ भी हो, में आपके साथ hi हु, और में जरूर पता करने की कोशिस करुँगी की आखिर बात क्या है, वैसे भी ये मेरी भी जिंदगी से जुड़ा हुआ है. (तभी वह मान्सिबुआ भी आ गयी)

मान्सिबुआ : यहाँ बेथ कर दोनों क्या बाटे कर रही हो? (उसने भी जूठी मुस्कान के साथ कहा)

कृपाली : कुछ नहीं बुआ, आईएनए. (उसने भी मुस्कुराने का प्रयास करते हुए कहा)

मनीशाबा : क्या बाटे हो रही थी नानन्द और बभाभी में?

पद्मा : कुछ नहीं बुआजी, हम तो ऐसे hi बाटे कर रहे थे.

मान्सिबुआ : में सब समाज रही हु, में कोई बच्ची नहीं हु, न बताना हो तो मात बताओ. (उसने अपने चेहरे पर नाराजगी लेन का प्रयास करते हुए कहा)

पद्मा : ऐसी कोई भी बात नहीं है बुआजी, हम सच में ऐसे hi बात कर रहे थे. (उसने सफाई देने का प्रयास किआ)

मान्सिबुआ : कोई बात नहीं, एक बात कहु, मुझे तो ये सब एक ढोंग लग रहा है.

कृपाली : किस बारेमे बात कर रही हो आप?

मान्सिबुआ : अरे यही सब, एक और तो ये कहा गया की ये सब बच्चो के लिए किआ जा रहा है और पता चल रहा है की बच्चे तो पहले से hi आ चुके है, सब ढोंग hi तो है. (दोनों कुछ नहीं boli)Mene कुछ जूथ कहा क्या? मन वो तुम्हारी बहने है और भाभी भी पर उन्होंने ये बात सबसे छुपा के रक्खी थी, मन की भाभी को स्वर्ण के बारेमे पता था, पर वह निर्मलाभभी को तो अपनी बेटी और बहु किसी के बारे में नहीं पता था, ऐसा कैसे चल रहा है सब. (दोनों चुप hi रही, क्या बोलती dono)Tum दोनों क्या चुप बैठी हो, कुछ समाज भी आ रहा है की नहीं.

पद्मा : इसमें हम क्या कहे बुआजी.

मान्सिबुआ : गाढ़ी हो गाढ़ी दोनों, यहाँ कोई न कोई खिचड़ी तो पाक hi रही है, बैठी रहो दोनों. (कहते हुए वो कड़ी हुई और वह से चली गयी, कृपाली और पद्मा दोनों एक दुआरे का मुँह तकती रही, तभी कामनादेवी आयी)

कामनादेवी : तुम दोनों यहाँ क्या बैठी हो, खाना नहीं है क्या? सब खाने बेथ रहे है. (दोनों कड़ी हो gayi)Chalo अब मेरा मुँह क्या तक रही हो. (वो उनके पीछे पीछे चलने लगी, एक तरफ चंद्रभान, जिग्नेश और कुछ और मर्द बैठे हुए थे, और दूसरी और निर्मलादेवी और कुछ औरते बैठी हुई थी)

पद्मा : स्वर्णादिदी और सब कहा है?

कामनादेवी : वो सब अंदर बैठे है.

पद्मा : क्यों?

कामनादेवी : अब मुझे क्या पता.

पद्मा : खाने hi बैठे है न वो?

कामनादेवी : है.

पद्मा : हम भी वही बैठेंगे.

कामनादेवी : ठीक है, पर खा लेना (प्यार से अपनी बहु और बेटी को कहते hue)Aur दिल छोटा मात करो, तुम्हारा भी दिन आएगा. (दोनों ने मुस्कुराने की कोशिस ki)Jao.

पद्मा : चलिए दीदी. (उसने कृपाली का हाथ पकड़ा और अंदर की और चलने lagi)Dekha दीदी, यहाँ सबके साथ बैठने की बजाये वो अलग अंदर बैठी है, कुछ तो बात जरूर है.
 
Back
Top