अपडेट 179
में और मोतीलाल जी कुसुम के घर से निकल कर घर की और जा रहे थे, गांव का रास्ता था, धूल मिटटी वाला, लोग आ जा रहे थे, आते जाते लोग मुझे देखते और मोतीलालजी को नमस्ते करते थे, सबकी बोलचाल से पता चल रहा था की लोग उन्हें काफी मानते थे, हम दोनों बात करते हुए जा रहे थे और सामने से मेने निहालसिंह और उसके साथ दो तीन आदमीओ को आते देखा, मोतीलालजी ने भी उन्हें देखा, निहालसिंह और वो सब बाटे करते हुए आ रहे थे, उनकी भी निगाह हम पर पड़ी, वो नजदीक आ गए.
निहालसिंह : नमस्ते मोतीलालजी (उसने ऐसे कहा जैसे मजाक उदा रहा हो)
मोतीलाल : नमस्ते (उन्होंने सपाट सा उत्तर दिया)
निहालसिंह : आपको कितना समजा रहे है फिर भी आप समझते hi नहीं, क्यों इन सब में पद रहे है, अपजैसे भले लोगो के लिए ये सब नहीं है.
मोतीलाल : तुम अपने काम से काम रक्खो, मुझे क्या करना है और क्या नहीं वो मुझे पता है. (उन्होंने फिर सपाट लहजे में उत्तर दिया)
निहालसिंह : में तो आपके भले के लिए hi कह रहा था, आप तो जानते hi हो मनोहरलालजी को, हमे भी अच्छी पहचानते हो, फिर क्यों कुल्हाड़ी पर पेअर मर रहे हो.
शिव : आप इस तरह से बात मात कीजिये, उन्हें जो सही लगेगा वो करेंगे.
निहालसिंह : जब दो बड़े बात कर रहे हो तो बच्चो को बीचमे नहीं बोलना चाहिए, ये तो बहोत पुराणी कहावत है, पतानहीं है तुम्हे? (मोतीलालजी की और देख kar)Aap भी क्या इन बच्चो और औरतो के चक्कर में पद रहे हो, औरतो का काम नहीं है ये, और बच्चो का तो बिलकुल भी नहीं, किसिदिन ऊंच नीच हो गयी तो दोनों hi रट हुए बैठे रहेंगे. (कहते हुए वो हँसा तो दूसरे भी उसके सुर में सुर मिलते हुए हसने लगे)
मोतीलाल : तुम अपना काम करो, (शिव को देख kar)Chalo शिव.
निहालसिंह : (रास्ता नहीं दे रहा था, था वो भी हत्ता कट्टा, 6 फिट के करीब हिघ्त होगी और बदन भी तगड़ा था) में तो अपना काम hi कर रहा हु, सरपंचजी ने कहा था की अच्छे से समजा दू तो वही कर रहा हु. अप्प तो खुद समझदार है, में क्या संजो, जबतक सब ठीक चल रहा है तब तक सब ठीक है, अगर बात बिगड़ गयी तो फिर कही लेने के देने न पद जाये.
मोतीलाल : तुम धमकी दे रहे हो?
निहालसिंह : (अपने साथी को देख kar)Mene धमकी दी क्या? (कहते हुए वो हसने लगा) अरे भाई साहब, इससे धमकी नहीं कहते, मेने ऐसा कहा क्या की आपकी टंगे तोड़ दूंगा, या हड्डी पसली एक कर दूंगा, (अपने साथी की और देख kar)Mene कहा क्या ऐसा, (मोतीलाल की और देख kar)Mene तो ऐसा कुछ भी नहीं कहा, आप बल बच्चो वाले आदमी हो, लड़के की अभी अभी शादी की है, जवान बहु है, बेटी भी जवान हो चुकी है, संभल कर रही ये, में तो बस समजा रहा हु.
शिव : आप अपनी सिमा लाँघ रहे है.
निहालसिंह : मेने कहा न बच्चे, जब दो बड़े बात कर रहे हो तो बच्चो को बीचमे नहीं बोलना चाहिए (अस्स पास लोग दूर से देख रहे थे, कोई भी बीचमे बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा था) अगर ज्यादा बीचमे चपड़ चपड़ की न तो तेतुवा दबा दूंगा समजे. (अपने हाथ का पंजा दिखते हुए, मुझे गुस्सा आ रहा था, पर में अभी भी अपने आप को संभाले हुए था, में नहीं चाहता था की कोई भी बबल हो, मुझे ऐसे घूरते देखते देख, वो हसने laga)Are देखो, बच्चे को तो गुस्सा भी आता है (कहते हुए वो हसने लगा, दूसरे लोग भी हसने लगे, फिर वो मुझे घर के देखते hue)Bachche, ये सहर नहीं है, कहा गायब हो जायेगा पता भी नहीं चलेगा.
शिव : में जनता हु की ये सहर नहीं है, आप दुसरो की बहु बेटिओ की बात कर रहे है, आपके घर में भी बहु बेश्या होंगी न?
निहालसिंह : मेरे घर की बहु बेटिओ पर हाथ dalega(Usne गुर्राते हुए कहा)
शिव : में किसी की बहु बेटी पर हाथ नहीं डालता, मर्द हु, मर्दो तरह लड़ता हु, औरतो को बीचमे नहीं लाता, वो काम आपजैसे लोग करते है. (मेरे ऐसा कहने पर जैसे सबको साप सूंघ गया, गांव के लोग भी एक दूसरे का मुँह देखने लगे, किसीने तो यहाँ तक कह दिया की ये लड़का गया अब, मोतीलालजी भी घबरा गए)
निहालसिंह : क्या कहा बे तूने, तू मर्द है और हम नामर्द.
शिव : (मुस्कुराते hue)Mene तो ऐसा नहीं कहा, आप खुद hi अपने आपको नामर्द कह रहे हो, मर्द होते तो ऐसे बहु बेटिओ की धमकी नहीं देते.
निहालसिंह : बच्चा समाज कर कुछ कह नहीं रहा था, तू तो सेल मेरे ऊपर hi चढ़ रहा है, अभी दिखता हु तुजे. (कहते हुए वो आगे बढ़ा और मुझे थप्पड़ मरने लगा, में पहले से hi तैयार था, में निचे झुक गया, उसका हाथ हवा में hi घूम गया, उसका गुस्सा बढ़ गया, उसने सीधे मेरे मुँह पर घुसा मरना चाहा तो में साइड में हो गया, उसने दो तीन बार तरय किआ पर वो मुझे मार नहीं saka)Kab तक बचेगा सेल, कहते हुए वो मेरा गिरबान पकड़ने लगा hi था की मेने उसका हाथ पकड़ कर मरोड़ दिया, )अह्ह्ह्हह्हह. (वो कराह उठा हाथ को मुड़ने से बचने के लिए ओर पलट गया, और दूसरे हाथ से पीछे प्रहार किआ, मेने वो भी हवा में hi पकड़ लिया और उसको भी घूमते हुए पीछे कर दिया, अब उसके दोनों हाथ पीछे थे, मेने दोनों को एक साथ जोर से मरोड़ diya)Aaaaaaaa. (वो जोर से चिल्लाया, उसे यकीं नहीं हो रहा था की एक लड़के के सामने ये हालत है उसकी, यकीं तो किसी को भी नहीं हो रहा था, मेने और जोर से हाथ मरोड़ा वो छूटने के लिए छटपटाने लगा, मेने उसके घुटने के पीछे पेअर मारा तो वो घुटनो के बल हो गया मेने उसके पेअर पर पेअर रख दिया वो हिल भी नहीं प् रहा था, पर वो खुद को छुड़ाने का प्रयास करने लगा, पर पकड़ इतनी मजबूत थी की वो अपना हाथ छुड़ा hi नहीं प् रहा था, उसे इतना दर्द हो रहा था की वो रो देता, पर वो ऐसा नहीं कर सकता था, उसके चेहरे से hi पता चल रहा था की उसको कितना दर्द है, सब अच्चमबे से ये देख रहे थे, कराहते hue)Chhodooooooo मुजीईई.
शिव : अरे भाई साहब, हम तो लाडे भी नहीं अभी तक, सिर्फ हाथ पकड़ा है मेने और आप कराह रहे ho(Mene और जोर दिया)
निहालसिंह : आआआआआ, बायस्स्सस्स. (उसके साथ जो थे वो तो निहालसिंह की हालत देखते hi दो कदम पीछे हो गए थे, वो कराहते हुए bola)Motilal जी, इससे कहिये छोड़ डीएई.
मोतीलाल : (होश में आते hue)Hhhhh, हा. शीइइइइव, छोड़ो उसे.
शिव : (मेने उसके हाथ छोड़ दिए, वो अपने हाथ खुद hi दबाने लगा)
मोतीलाल : चलो शिव. (मोतीलालजी ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे ले जाते हुए कहा)
शिव : एक मिनट अंकल. है तो भाई, कभी अपनी ताकत पर घमंड नहीं करना चाइये, और उसका दुरुपयोग तो बिलकुल नहीं करना चाहिए. (में और मोतीलाल जी आगे बढ़ गए, भीड़ में कड़ी कुसुम अचम्बे से शिव को देख रही थी, बिना कोई मारपीट किये उसने निहालसिंह जैसे आदमी को घुटनो पे ला दिया था, उसके पापा भी वही खड़े थे)
क पापा : बीटा में मोतीलालजी के घर जेक आता हु.
कुसुम : में भी चालू पापा.
क पापा : है चल. (में और मोतीलाल जी घर पहुंच गए थे की पीछे पीछे कुसुम और उसके पापा आ गए, अंदर आते hi वो अचम्बे से मुझे देख रहे the)Motilalji.
मोतीलाल : अरे भाई साहब आप?
क पापा : में वही था, भीड़ इकट्ठा हो गयी थी तो देखने आया था की क्या हो रहा है, तभी मेने वो देखा, क्या हुआ था वह? (आवाज सुन के गंगादेवी भी वह आ गयी थी, और बाटे सुन कर वो बोली)
गंगादेवी : क्या हुआ जी, कुछ हुआ है क्या, भाईसाहब क्या कह रहे है.
मोतीलाल : वो निहालसिंह रास्ता रोक रहा था.
गंगादेवी : आपको कितनी बार संजो, ये सब छोड़ दीजिये, इनलोगो से उलझना अच्छी बात नहीं है, हम उनके जैसे नहीं बन सकते, आपको कुछ हुआ तो नहीं न, (अपने पति को ऊपर से निचे तक देखते हुए)
मोतीलाल : मुझे कुछ नहीं हुआ है, में बिलकुल ठीक हु. (इतनी आवाजे सुन कर माधुरी भी अंदर के दरवाजे के पास आ गयी थी)
क पापा : ारी भाभी, इन्हे नहीं निहालसिंह की हालत ख़राब हो गयी थी.
गंगादेवी : Hi दिया, वो कैसे?
क पापा : इसकी वजह से (शिव की और इस्सर कर के)
गंगादेवी : में सामजी नहीं भाईसाहब.
क पापा : पूरी बात तो मुझे भी पता नहीं भाभी, में भी देरी से hi पंहुचा था वह पर, जब पंहुचा तो निहालसिंह घुटनो पर बैठा कराह रहा था.
गंगादेवी : वो क्यों कराह रहा था? (आश्चर्य से)
क पापा : इसने निहालसिंह के हाथ को मरोड़ रक्खा था, वो छटपटा रहा था पर छूट नहीं प् रहा था.
गंगादेवी : (संदेह se)Kisne? शिव ने?
क पापा : है भाभी, में भी देख कर दांग रह गया, पर जो इन आँखों ने देखा वो मान न तो पड़ेगा hi.
गंगादेवी : क्या हुआ था जी, आप कुछ बोलते क्यों नहीं. (अपने पति पर हलके गुस्से से)
मोतीलाल : कोई मुझे बोलने देगा तो न बोलूंगा.
गंगादेवी : आप बोलिये, बताइये क्या हुआ था.
मोतीलाल : में और शिव, भाईसाहब के घर से निकल कर घर आ रहे थे, रस्ते में निहालसिंह आड़े आया, वो मुझे धमकाने लगा, मेने भी सामने सुना दी तो वो... (बोलते बोलते रुक गए)
गंगादेवी : तो क्या?
मोतीलाल : (अपनी बहु की और देख kar)Wo बहु और दिव्या की धमकी देने लगा.
गंगादेवी : हे राम, में इसीलिए मन करती हु आपको, उनसे क्या पन्गा लेना.
मोतीलाल : पूरी बात तो सुनो. (वो चुप हो गयी) उसके ऐसे कहने पर गुस्सा तो मुझे भी आ गया था पर शिव ने उसका जवाब दिया, तो वो उसे मरने आगे बढ़ा, पर शिव ने बिना कोई मार पिट किये उसकी हालत ख़राब करदी, वो तो दर्द से तड़प कर रह गया.
गंगादेवी : अरे पर में कहती हु उनसे उलझाने की जरुरत क्या है?
शिव : हमारे चुप रहने से hi ऐसे लोगो को बढ़ावा मिलता है, हम डरते है तो वो डरते है.
क पापा : एक बात तो मन नई पड़ेगी, तुम दीखते छोटे हो, पर ताकत बहोत है तुम में.
मोतीलाल : में खुद हैरान हु, उस दिन भी इसने वो सब मेरे ऊपर गिरने से रोक दिया था, आज भी निहालसिंह की हालत देख कर लग रहा था की उसकी हालत ख़राब हो गयी है.
क पापा : सच कह रहे है आप, इसकी कद काठी और इसकी हड्डिया कितनी चौड़ी है, दिक्खणे में hi बच्चा है, बाकि ताड जितना लम्बा है. (थोड़ा मजाकिए अंदाज में)
गंगादेवी : (शिव की बलैया लेते hue)Najar न लगाइये मेरे बच्चे par(Muskurate हुए वो बोली). पर बीटा ऐसे लोगो से उलझना ठीक नहीं है.
मोतीलाल : जब इसके बारे में सुना था तब मुझे भी यकीं नहीं हो रहा था, में इस से मिल चूका था, जब अख़बार में और न्यूज़ में इसके बारे में देखा था और पढ़ा था तब मुझे लग रहा था की लोग बढ़ा चढ़ा कर न्यूज़ पेश कर रहे है, क्यों की ये कितना सीधा और शांत बच्चा है, पर आज इसका रूप देख कर लग रहा है की ये जितना शांत दिख रहा है उतना hi ताकतवर भी है.
शिव : ऐसा कुछ नहीं है अंकल, में भी आम लड़का hi हु.
मोतीलाल : (हस्ते hue)Wo तो हमें दिख hi रहा है.
गंगादेवी : बाटे तो होती रहेगी, पहले खाना खा लीजिये, ठंडा हो जाएगा, चलिए भाईसाहब आप भी.
क पापा : नहीं भाभी, फिर कभी, आज तो घर पे खाना बन गया है.
गंगादेवी : तो क्या हुआ, थोड़ा यहाँ भी खा लीजिये.
क पापा : नहीं भाभी, फिर कभी, हम चलते है, आप खाना कहिये. (माधुरी कबसे शिव को hi देख रही थी, उसको यकीं hi नहीं हो रहा था जो ये सब कह रहे थे, जैसा शिव दीखता है, जितनी शालीनता से वो बात करता है वो मान hi नहीं शक्ति थी की ये शिव की बात हो रही है, वो बस शिव को देखे जा रही थी और सबकी बात सुन रही थी, कुसुम भी यही कर रही थी, वो भी शिव को hi देख रही थी, कुसुम और उसके पापा जाने लगे बहार जा कर भी कुसुम ने मुद कर शिव को देखा, वो मुस्कुराया तो उसके चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी, उसको नहीं जाना था पर दिव्या भी नहीं थी तो उसको जाना पड़ा)
मोतीलाल : बहु, (शिव की और इस्सर कर ke)iske हाथ पेअर धुलवा दे तो.
माधुरी : जी बाबूजी. (उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, वो घूँघट सँभालते हुए पीछे चली गयी, बाथरूम देख कर फिर से उसको वो सचिन याद आ गया, उसने जैसे तैसे अपने आपको संभाला, शिव वही आ गया था, वो टॉवल ले कर कड़ी रही, शिव ने उसकी और देखा तो उसने नज़ारे झुका ली, शिव अंदर गया और हाथ धो कर वापस आया, माधुरी ने उसको टॉवल diya.)(Shiv ने टॉवल लिया और कुछ बोलने hi वाला था की माधुरी वह से चली गयी, वो जैसे भाग रही थी)
में हाथ पोछ कर अंदर गया, मोतीलाल जी बैठे थे, में उनकी बगल में बेथ गया, भाभी ने हम दोनों को थाली दी, मेने उनकी और देखा पर वो नहीं देख रही थी, हमने खाना सुरु किआ, खाना स्वादिस्ट था पर दाल में नमक नहीं था, पर में कुछ न बोलै. मोतीलालजी ने बोलै.
मोतीलाल : दाल में नमक नहीं डाला है क्या? (माधुरी थोड़ा दर गयी, क्यों की दाल उसने hi बनायीं थी)
माधुरी : (डरते hue)Galti हो गयी बाबूजी, लाइए, में ठीक कर देती हु.
मोतीलाल : (उसको डरता dekh)Are बीटा, इसमें डरनेवाली क्या बात है, हो जाता है कभी कभी, लाओ में खुद दाल देता हु.
गंगादेवी : पता नहीं आज इसका ध्यान क्यों खोया खोया था, मेने एक दो बार टोका भी था. (मेने उनकी और देखा, हम दोनों की नज़ारे टकराई, उन्होंने नज़ारे झुका ली)
मोतीलाल : हो जाता है कभी कभी. (फिर हम खाने lage)Aap लोग भी ले लो, शिव तो घर का hi है, क्यों शिव?
शिव : है, आंटी, आप भी ले लीजिये. (उन्होंने भी खाना सुरु कर दिया, बिच बिच में थोड़ी बाते हो रही थी, माधुरी ने फिर सुना की शादी के टाइम शिव ने बाबूजी को बचाया था, तो उसने पूछ hi लिया)
माधुरी : क्या हुआ था मजी?
गंगादेवी : तुजे नहीं पता क्या, किसी ने बताया नहीं तुजे? (माधुरी ने ना में गर्दन hilayi)Teri शादी में भरी तब्लो की थप्पी तेरे ससुरजी पर गिरनेवाली थी, शिव ने अकेले hi उसको रोक दिया था, वर्ण अनर्थ हो जाता. (भाभी ने फिर मेरी और देखा, इस बार वो कुछ पल देखती रही) अगर ये नहीं होता तो शायद शादी hi रुक जाती. (वो मेरी बधाई कर रहे थे पर मुझे शर्म आ रही थी, ऐसे बधाई सुन न मुझे अच्छा नहीं लग रहा था)
शिव : छोड़िये न आंटी, जो हो गया सो हो गया.
गंगादेवी : देखा, कितना सरल है ये, कोई मानेगा की निहालसिंह जैसे आदमी को बिना मरे इसने घुटनो पर ला दिया. (माधुरी को बहोत अच्छा लगा की उनके खिलाफ बोलने पर शिव ने निहाल सिंह की ये हालत की, ऐसे hi बाते करते हुए हमने कहना खाया, फिर हम बहार आ गए, अंकल न्यूज़ चैनल देख रहे थे, में भी ऐसे hi देख रहा था, थोड़ी देर बाद आंटी और भाभी भी आ gaye)Me क्या कह रही थी, शिव ऊपर hi सो जायेगा न, ऊपर हवा भी अच्छी चल रही होती है. (माधुरी का दिल जोरो से धड़कने लगा, क्यों की वो भी ऊपर hi सोती थी और आज तो उसका पति भी नहीं था और दिव्या भी नहीं थी)
मोतीलाल : सही कह रही हो तुम.
गंगादेवी : आज दिव्या भी नहीं है, बहु को अकेले दर भी नहीं लगेगा. (में सोच में पद गया की ये लोग क्या कह रहे है, भाभी मेरे साथ में सोयेगी क्या, में अभी सोच hi रहा था की आंटी boli)Kya कहती हो बहु, वो बाजूवाले कमरा साफ़ hi है न?
माधुरी : जी माजी, सुबह hi साफ़ किआ था.
गंगादेवी : शिव ऊपर hi सो जायेगा, तुजे भी दर नहीं लगेगा.
माधुरी : जैसा आप कहे मजी. (उसने सहजता से hi कहा, क्यों की उसने भी कुछ उल्टा सुलटा सोचा नहीं था, है कुछ बाटे जरूर ऐसी हुई थी जिसकी वजह से उसका दिल बेचैनी अनुभव कर रहा था, पर फिर भी अभी भी वो अपने आप में hi थी)
गंगादेवी : जाओ बीटा.
शिव : जी आंटी. (में ने भी है hi कहा, क्यों की मेरे मान में भी ऐसी कोई भी गलत बात थी hi नहीं, उनको वैसी हालत में देखना एक इत्तेफाक hi था, और ऐसी घटना हो जाती है कभी कभी, वही गंगादेवी एक सीधी घरेलु औरत थी, उन्हें शिव के ऊपर सोने में कोई बुराई नहीं लग रही थी, और सच में कोई बुराई थी भी नहीं, पर आग और घी, साथ में हो तो कुछ कहा नहीं जा सकता)
में किसी तयारी से तो आया नहीं था, और रुकना पड़ा था तो कपडे तो थे नहीं, मेने मनीषजी को घर पर खबर भिजवाने को बोल दिया था तो वो भी टेंशन नहीं था. ऊपर जाने का रास्ता पीछे से था, वो आगे आगे चल रही थी, में उनके पीछे चल रहा था, किचन में पहुंच कर वो बोली,

माधुरी : तुम ऊपर चलो, में पानी ले कर आती हु.
शिव : ठीक है. (में बहार चला गया, और सीढिया चढ़ कर ऊपर पहुंच गया, अभी दरवाजे बांध थे तो में ऊपर किनारे पर जा कर खड़ा हो गया, यहाँ से पीछे का भाग स्पस्ट दिख रहा था, तभी मुझे भाभी जाती दिखाई दी, मेने देखा की वो बाथरूम की और hi जा रही थी, में अभी कुछ सोचता उस से पहले hi उन्होंने ऊपर देखा, उन्होंने मुझे देखा तो में फ़ौरन उल्टा घूम गया. माधुरी ने भी सावधानी के तौर पर hi देखा था, बाथरूम की और जाते hi उसको शिव याद आया और उसे पता था की वो ऊपर है तो उसने देखा था, और शिव वही खड़ा था, पर जैसे hi उसने देखा वो उलटी दिशा में घूम गया, ये देख कर वो मुस्कुरायी, वो जानती थी की शिव एक अच्छा लड़का है, वो थोड़ी शर्माती हुई बाथरूम में घुस गयी, उसने अपने कपडे ऊपर उठाये और चड्डी निचे की, और पेशाब करने बेथ गयी, मधुर सिटी के साथ पेशाब निकलने लगी, उसने आंखे बंद कर ली, उसको शिव दिखा, और शिव का वो बड़ा सा लुंड आँखों के सामने आ गया जो उसने पिछली बार देखा था, भले hi उसने शिव को उस हालत में देखा था पर फिर भी वो यही सोचती थी की वो दिव्या का बॉयफ्रेंड है.
पर आज वो अकेली थी उसके साथ, उसकी भावनाये बहार आने को मचल रही थी, जिसे उसने बड़ी मुश्किल से संभाला था, वो ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहती थी जिस से उसके दमन पे डेग लगे. पर शरीर कुछ और hi प्रतिक्रिया दे रहा था, पेशाब रुक चुकी थी, उसको अपनी छूट में सर सराहत महसूस हो रही थी, उसने जब अपनी छूट को छुआ तो उसको छेड़ के पास चिकनाहट महसूस हुई, उसकी सांसे तेज हो गयी, वो जानती थी की ये शिव की वजह से हो रहा है, उसने गहरी साँस ली और अपने आप को संभाला, पानी से अच्छी तरह से छूट को साफ़ किआ, मान में ये भी ख्याल आया की क्या शिव के लिए तो नहीं कर रही, पर तुरंत अपने आपको hi उसने दन्त दिया.
में ऊपर खड़ा सोच रहा था, भाभी फिर बाथरूम गयी थी मेरे सामने भी उनकी गोर कूल्हे दिख गए, पता नहीं पर बार बार वो जहँ में आ जा रहा था, पर मेने अपने आप को शांत किआ. थोड़ी देर बाद मुझे उनके पायल की आवाज आने लगी पर में पलटा नहीं.
वो बहार निकली तो शिव अभी भी उल्टा hi खड़ा था, उसको शिव का ऐसा करना बहोत अच्छा लगा, वो आवारा नहीं था, ये सोच कर hi उसको शिव पर मान हुआ, रात के सनते में उसके पायल की छान छान की आवाज आ रही थी, वो फिर से अंदर गयी और पानी की दो बोतल ली और ऊपर की और जाने लगी. ऐसी तो कोई बात नहीं थी फिर भी उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, कुछ सीढिया चढ़ने के बाद जब उसका शिर ऊपर हुआ जहा से शिव उसको दिख रहा था तो वो रुक गयी.
शिव सोचने लगा की पायल की आवाज क्यों रुक गयी, उसने सीढियो की और देखा तो उसे हलके उजाले में शिर का थोड़ा हिस्सा दिखा, दोनों hi एक दूसरे को देख रहे थे पर दोनों को एक दूसरे की आंखे नहीं दिख रही थी, फिर से पायल की छान छान चालू हो गयी, वो ऊपर आयी, जब वो थोड़ी नजदीक आयी तो मुझे उनका चेहरा स्पस्ट दिखा, वो नज़ारे झुकाये हुए hi थी, वो बिना कुछ बोले एक कमरे के पास गयी और बोतल निचे रक्खी और दरवाजा खोला, अंदर जा कर लाइट ों की और चदार को झटकने लगी, उनकी चुडिओ की खान खान सुनाई दे रही थी, चद्दर को अच्छे से बिछा दिया, पानी की एक बोतल उन्होंने वही रख दी और बहार आयी.
माधुरी : (अपनी मधुर आवाज में धीरे से boli)Bistar लगा दिया है. (वो बोल कर कड़ी रही, शायद उन्हें मेरे बोलने का इंतजार था पर में क्या बोलता, मुझे कुछ न बोलता देख वो अपने कमरे की और जाने लगी, जिसका दरवाजा साथ में hi था)
शिव : भाभी. (जैसे hi में बोलै वो रुक गयी, वो निचे hi देख रही थी, में थोड़ा नजदीक gaya)(Madhuri की धड़कन तेज होने लगी) भाभी वो गलती से हो गया था, सॉरी अगर आप उस वजह से बात नहीं कर रही हो तो. (वो चुप रही, कुछ नहीं बोली, मेने कुछ पल इंतजार किआ पर वो कुछ नहीं बोली, तो मेने फिर kaha)Sorry, (कहकर में वापस पीछे मुद गया और किनारे जा कर फिर खड़ा हो गया, में निचे का नजारा देखने लगा)
माधुरी कुछ बोलना चाहती थी पर शर्म आ रही थी, और बोले भी तो क्या बोले, उसने अपने कमरे का दरवाजा खोला और अंदर चली गयी, उसने दरवाजा बंद किआ और कुछ पल वही कड़ी रही और सोचने लगी. उसके दिल में भी उथल पुथल मची हुई थी, वो अकेली थी ऊपर, वो शिव और दिव्या को देख चुकी थी, उसके और शिव के बिच कुछ भी हो सकता था, पर वो एक शरीफ लड़की थी, इसीलिए शादी तक कुवारी hi थी, शादी के बाद उसके कपडे उतर चुके थे और कुछ हद तक शर्म भी, पर अभी भी वो शिव के साथ ऐसा कुछ भी करने की स्थिति में नहीं थी, शायद शिव अगर आगे बढे तो शायद वो मन न भी kare.Par फिर भी अभी उसका मान hi उलझा हुआ था. उसने अपनी साड़ी निकली, और रात को पेहेन ने वाला गाउन पेहेन लिया, साड़ी को वही रख दी, और बिस्तर पर बेथ कर सोचने लगी, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, क्या कुछ हो सकता है, यही बार बार मन में चल रहा था, एक और दर भी था की अगर किसी को पता चल गया तो? वो बदनामी से भी डर्टी थी. उसने पानी की बोतल ली और कुछ घूंट पानी पिया. वो कड़ी हुई और फिर दरवाजे के पास आ गयी, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, वो माँके चल रही थी की शिव अपने कमरे में चला गया होगा. उसने दरवाजा खोला तो शिव अभी भी वही खड़ा था, कमरों की रौशनी में वो साफ़ साफ़ दिख रहा था. (मुझे भी दरवाजा खुलने की आवाज आयी, मेने पीछे गर्दन घुमा कर देखा तो भाभी कड़ी थी, में फिर आगे घूम गया, तोड़ी देर शांति छायी रही) माधुरी बेचैन हो रही थी, शिव ने उसे देखा था तो उसने वह जाने का मान बनालिया, उसने अपने कमरे की लाइट बंद की, वो आहिस्ता से चलते हुए शिव की और बढ़ी, उसके पैरो की पायल की छान छान हो रही थी. शिव ने फिर पीछे मुद कर उसे देखा, दोनों की आंखे चार हुई, माधुरी अपने आप को नार्मल दिखने का पूरा प्रयास कर रही थी.)
माधुरी : नींद नहीं आ रही? (में पीछे मुदा, वो पिंक गाउन पहने हुए थी, गाउन के ऊपर एक गहरे पर्पल कलर का ओवरकोट जैसा था. वो छरहरे बदन की एक खूबसूरत लड़की थी, अभी भी लडकिओवाळी hi बात थी, वो अपने आपको नार्मल दिखा रही थी पर अभी भी हिचकिचाहट भी उनमे)
शिव : इतना जल्दी सोने की आदत नहीं है. (मेने मुस्कुराते हुए कहा) (कमरे से आती लाइट की वजह से माधुरी थोड़ा दर रही थी, अड़ोस पड़ोस से कोई देख न ले)
माधुरी : लाइट बंद कर दू? (उसने हिचकिचाते हुए कहा)
शिव : में कर देता हु. (में गया और लाइट बंद कर दी और वापस आया तो वो बॉर्डर का सहारा ले कर कड़ी थी, अब अँधेरा था पर हल्का उजाला था जिस से हम एक दूसरे को देख सकते the)Aap नहीं सोई? (उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, वो बस खामोश कड़ी थी, मुझे लगा की शायद वो अभी भी उस बात से असहज है, पर अगर वो असहज है तो फिर मेरे साथ क्यों है, क्या उनके मान में कुछ चल रहा है, में उनकी और देख रहा था और समझने की कोशिस कर रहा था)
माधुरी : (धीमी आवाज में) वो सब गलती से हो गया था, में कोई नाराज नहीं हु. (माधुरी ने बहोत मुश्किल से कहा)
शिव : आप बहोत अच्छी है भाभी. (वो बस मुस्कुरायी) एक बात पुछु?
माधुरी : हम्म्म्म (हवा में लहराती लत को ठीक करते हुए वो बोली)
शिव : मेने सोचा नहीं था की आप मश्ग करती थी.
माधुरी : (मुस्कुराते हुए अपनी नजर झुका ke)Kyu?
शिव : मुझे लगा की कोई लड़की होगी.
माधुरी : तो में कोण हु?
शिव : मेरा मतलब है की कोई स्कूल की लड़की होगी.
माधुरी : क्यों, बहोत लड़कीअ है जो ऐसा करती है? (उन्होंने स्माइल के साथ पूछा)
शिव : नहीं, ऐसी बात नहीं है, पर मेने सोचा की कोई लड़की है जो शायद मुझसे दोस्ती करना चाहती है और वो ऐसा कर रही है, आप से में मिला था तो आप बहोत शांत और सीधे स्वाभाव की लगी थी मुझे, तो में आपके बारे में ऐसा नहीं सोच सकता था.
माधुरी : इसका मतलब अब में अच्छी नहीं रही, है न?
शिव : मेरा वो मतलब नहीं है, सच कहु तो मुझे भी अच्छा लगा था, पर शायद अब ऐसा नहीं होगा, है न?
माधुरी : ऐसा क्यों लग रहा है तुम्हे?
शिव : क्यों की शायद आप मेरी खिंचाई कर रही थी, और अब आपका भेद खुल गया है तो फिर आप मश्ग नहीं करोगी, है न.
माधुरी : क्या तुम चाहते हो की में बात करू?
शिव : है, क्यों नहीं.
माधुरी : क्यों? अभी तो तुम कह रहे थे की में अच्छी हु, ऐसा नहीं कर सकती, तो क्या अब में अच्छी नहीं रही.
शिव : मुझे तो आप अभी भी अच्छी hi लग रही हो, आप मेरी बात का गलत मतलब निकल रही हो.
माधुरी : अगर तुम्हारी गर्लफ्रेंड को पता चल गया तो बुरा मान जाएगी.
शिव : मेरी गर्लफ्रेंड?
माधुरी : क्यों, दिव्या तुम्हारी गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?
शिव : (मुस्कुराते hue)Achchha वो, मेने उसे साफ़ साफ़ कह दिया था, की ऐसा नहीं हो सकता.
माधुरी : क्यों, वो अच्छी नहीं है क्या, या फिर उसने तुम्हारे साथ वो सब किआ तो तुम उसे बुरा समाज रहे हो.
शिव : (उनकी बात से मुझे याद आया की पिछली बार क्या हुआ था, मेने तुरंत puchha)Aap ने सब देखा था न? (माधुरी झेप गयी, उसने नज़ारे झुका li)muje पता है, और आपको भी पता है की मुझे पता hai.(Wo कुछ नहीं बोली, बस खामोस rahi)Kyu देख रही थी आप?
माधुरी : (उसको बहोत शर्म आने लगी थी, वो कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थी, तो वो वह से जाने lagi)Me जाती हु. (वो जैसे hi आगे बढ़ी, पता नहीं क्यों पर मेने उनका हाथ पकड़ लिया, और मेरी और खिंच भी लिया, वो उलटी hi मेरे साइन से टकरा gayi)(Madhuri की धड़कन अचानक बढ़ गयी, उसने सोचा नहीं था की शिव उसका हाथ पकड़ lega)(Turant मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ और मेने उनका हाथ छोड़ दिया, पर वो वैसे hi कड़ी रही, उनकी पीठ मेरी और थी और उनके कूल्हों का एहसास मुझे निचे हो रहा था, हम दोनों कुछ भी बोले बिना खड़े थे, में देख रहा था की अगर वो जाना चाहती तो चली जाती, पर वो वही रुकी थी, ये इस बात का संकेत था की उनके मान में भी कुछ चल रहा है, वक़्त की नजाकत और उनके बदन के स्पर्श से मेरे लुंड में अकड़न आणि सुरु हो गयी, मेने अपना हाथ आगे बढ़ाया और उनके पेट पर रख दिया, वो कैंप रही थी, पर भाग नहीं रही थी, ये एक और संकेत था)
शिव : (उनके कान me)Bhabhiiii. (उनकी सांसे तेज चल रही थी, उनकी सांसो की आवाज भी सुनाई दे रही thi)Bhabhi, आप जाओ वर्ण कुछ हो जायेगा. (मेने भी साँस लेते हुए कहा, पर वो नहीं गयी, वो बस वैसे hi कड़ी रही, मेरा हाथ उनके पेट पर चल रहा था, वो मखमली कपड़ा और ऊपर से वो गरम बदन, मेरी उत्तेजना भड़का रहा था, वो जा नहीं रही थी और विरोध भी नहीं कर रही थी, उनके कान को होठो से छूटे हुए मेने kaha)Kya आप भी यही चाहती हो? (वो कुछ नहीं बोली बस सांसे तेज चल रही थी, और सांसो की फुकर सुनाई दे रही थी)
माधुरी : (वो क्या बोलती, उसकी तो वैसे भी हालत ख़राब थी, अपने कूल्हे पर उसको को कड़क अंग महसूस हो रहा था, उसकी सांसे बहोत तेज चल रही थी, उसकी सोचने समाज ने की ताकत ख़त्म हो चुकी थी, वो बस इस पल को जी लेना चाहती थी, उसने शिव के हाथ पर हाथ रख दिया और अपना शिर पीछे उसके शाइन पर टिका दिया, ये उसकी मूक सहमति थी)
शिव : (वो पूरा ग्रीन सिग्नल दे चुकी थी, मौका hi ऐसा हो गया था की मेरे शरीर का तापमान भी बढ़ चूका था, मेने भी सोच लिया की अब जो होगा देखा जायेगा, और मेने अपना हाथ ऊपर उठाया और उनके बहे स्तन को मसल दिया)
माधुरी : शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (उनकी गर्म सिसकारी फुट पड़ी)
शिव : भाभीइइइइइइइ. (में उनके स्तन को सहलाने और मसलने लगा, माध्यम आकर का स्तन मेरे हाथ में समां गौए था, मेने दूसरे स्तन को भी मसलना सुरु कर दिया)
माधुरी : (उसका एक हाथ शिव के हाथ के ऊपर था तो दूसरे हाथ से उसने अपने गाउन को मुठी में पकड़ रक्खा था, उसका मान तो यही चाहता था पर ये हो जायेगा उसको यकीं नहीं था, उसकी सांसे उखाड़ने लगी थी, और उसके पेअर कंपनी लगे थे, शिव के सख्त हाथो को वो अपने स्तन पर महसूस कर रही थी, हलके दर्द के बावजूद उसको एक खुसी मिल रही थी, शिव ने जब उसके कड़क हो चुके निप्पल को मसला तो उसके पैरो के बिच सर सराहत होने लगी, उसके पैरो की उंगलिअ भी मुद गयी और उसकी झंघ भी आपस में सात gayi)Shiiiiiiiiiiiv.(Uske मुख से गरम सिसकी फुट पड़ी, में हलके हलके से उनके स्तन को सहलाते हुए मसलने लगा) कोई देख लेगा शिव, शह्ह्ह्हह्ह.
शिव : (वो पूरी तरह से तैयार थी पर फिर भी उनकी सहमति जरुरी thi)Aap ये चाहती हो न भाभी? (वो कुछ नहीं boli)Batao न भाभी, आप चाहती हो न की में ये सब करू? (उन्होंने फिर भी जवाब नहीं दिया)
माधुरी : कोई देख लेगा शिव, (तो मेने स्तन पर से अपनी पकड़ ढीली कर दी, क्यों की में कोई भी जबरदस्ती नहीं करना चाहता था)
माधुरी : (वो सहरम और संकोच के कारन कुछ भी नहीं बोल प् रही थी पर शिव ने जैसे hi पकड़ ढीली की वो समाज गयी की शिव उसकी मर्जी के बगैर उसके साथ कुछ नहीं करेगा, शिव का इस कदर उसकी इच्छा का सम्मान करना उसे अच्छा लगा, वो उसके साथ कोई जबरदस्ती नहीं करना चाहता था, पर उसको बहोत शर्म आ रही थी, पर अगर वो सहमति न देती तो शिव पीछे हैट जाता, उसने शिव के ऊपर रक्खे हाथ को दबाया और boli)Yahao कोई देख सकता है, अंदर चलो न. (बोलते बोलते उसकी जबान भी लड़खड़ा गयी, ये खुला आमंत्रण था, उसकी बात का असर हुआ और शिव ने उसको गॉड में उठा लिया, वो एकदम से दर गयी पर वो शिव के मजबूत हाथो में महफूज थी, उसने शरमाते हुए शिव के गले में बहे दाल दी, हिचकिचाते हुए उसने शिव को देखा तो वो उसे देख कर मुस्कुरा रहा था, उसको इतनी शर्म आयी की उसने मुस्कुराते हुए अपनी आंखे बंद कर ली और उसके शाइन पर शिर रख दिया, शिव उसको उठा कर उसके hi कमरे में ले गया, ये वही कमरा था जहा उसकी सील भी टूटी थी और उसने बेचैनी में कई रेट गुजारी थी, शिव उसे फूल की तरह उठाये था, ऐसा सब उसने फिल्मो में देखा था. उसको शिव का इस तरह से उठाना इतना च्छ लगा था की वो फूली नहीं समां रही थी, शिव ने उसको बिस्तर पर लेटाया तो वो दूसरी और घूम गयी, उसको बहोत शर्म आ रही थी, उसको दरवाजा बंद होने की आवाज आयी और लाइट चालू होने की भी, उसने आंखे खोल कर देखा तो शिव उसकी और hi आ रहा था, उसने फिर आंखे बंद कर ली, उसको महसूस हो रहा था जैसे आज उसकी सुहागरात है और वो शर्मायी संकुचाई उस पल का इंतजार कर रही है)
में उनके पास गया, सो साइड से लेती हुई थी, उनके कुल्होवाला भाग ऊपर उठा हुआ था और कमर वाला भाग जैसे खाई बन गया था, में उनके कूल्हे देखने लगा हिनहे में नंगा देख चूका था. मेने उनके कूल्हे पर हाथ लगाया, वो संकुचाई, में अपने हाथ को कमर से फिसलते हुए कंधे तक ले गया, मेने उनको सीधा करना चाहा तो वो नहीं हुई.
माधुरी: (शरमाते hue)Light बंद कर दो न.
शिव : क्यों?
माधुरी : मुझे शर्म आ रही है शिव, प्लीज. (उन्होंने बहोत प्यार से कहा, मेने नजर दौड़ाई तो नाईट बल्ब भी था, मेने वो चालू कर दिया और लाइट बंद कर दी, फिर में उनके पास आ गया, मेने अपना शर्ट और पंत उतर दिया, बनियान भी उतर di)(Madhuri ने ये कनखीओं से देखा, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, शिव उसके साथ लेट गया और उसको अपनी और घूमने लगा, उसको बहोत शर्म आ रही थी पर वो घूम गयी और सीधी लेट गयी, उसने आंखे बंद hi रक्खी, शिव ने अपना हाथ उसके पेट पर रक्खा तो उसके शरीर में कम्पन सा दौड़ गया, उसने फिर से शिव का हाथ पकड़ लिया, और अपनी आंखे खोल कर शिव को dekha)Kisi को बताओगे तो नहीं न? (उसने घबराते हुए अपना दर बताया)
शिव : (मुस्कुराते hue)Me तो सबको बतादूँगा. (माधुरी उसके चेहरे पर मजाक के भाव देख रही थी, वो शर्मा गयी, वो जानती थी की शिव ऐसा नहीं है, उसको अंदाजा था, पर फिर भी वो तसल्ली कर लेना चाहती थी)
माधुरी : कहना शिव, किसी को बताओगे तो नहीं न?
शिव : आपको क्या लगता है?
माधुरी : में जानती हु, पर दर लगता है.
शिव : नहीं बताऊंगा, और मुझे क्या जरुरत है किसी को बताने की.
माधुरी : में जानती हु, पर फिर भी दर लगता है, अगर किसी को पता चल गया तो में किसी को मुँह दिखने के काबिल नहीं रहूंगी शिव, शायद बदनामी से मर जाउंगी.
शिव : अगर इतना hi दर लग रहा है तो फिर ऐसा काम करना hi क्यों.
माधुरी : में खुद समाज नहीं प् रही हु शिव, एक और तो दर लग रहा है और दूसरी और उतना hi अच्छा लग रहा है.
शिव : क्या अच्छा लग रहा है?
माधुरी : तुम्हारा इस तरह से मेरे साथ होना.
शिव : तो फिर चिंता छोड़िये, में किसी को नहीं बताऊंगा. अब अगर भरोसा हो गया हो तो आगे बधु.
माधुरी : (शरमाते hue)Ha शिव, मुझे इतना प्यार करो की मेरा पूरी तरह से मान भर जाये, में जानती हु की ये गलत है पर जब मेने तुम्हे पहली बार देखा था तभी तुम मुझे पसंद आ गए थे, मेने सोचा नहीं था की ये दिन भी आएगा (उन्होंने खुद मेरा हाथ पकड़ कर अपने स्तन पर रख diya)Muje प्यार करो शिव, में तड़प रही हु. (में उनके स्तन को दबाने लगा और उनके ऊपर होते हुए उनके होठो को चूसने लगा, वो भी मेरा शिर पकड़ कर मुझे चूमने लगी, में उनके ऊपर हो गया उन्होंने पेअर फैला दिए, मेरा तना हुआ लुंड छूट पर जा टिका. जिसे वो महसूस कर रही थी, किश लगातार गहरी होती जा रही थी, और मेरे हाथ से स्तन को दबाना भी , वो सेह नहीं पायी और उन्होंने अपने होठ छुड़ा लिया और जोर जोर से हांफ ने lagi)Fuuuuu हूउउउउउ फूऊऊऊऊ. (वो मदहोशी में hi थी, मेने उन्हें थोड़ा ऊपर उठाया और उनके गाउन के ऊपर का कपड़ा उतर दिया, अब वो एक मिनी स्कर्ट जैसे कपडे में थी, उनके आधे स्तन दिख रहे थे, में झुका और उनके स्तन के ऊपर के भाग को चाटने laga)Shhhhhh शीइइइइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह. (मधुर आज बहोत ज्यादा उत्तेजना महसूस कर रही थी, सुरु में अपने पति के साथ महसूस किआ था पर फिर उसको वो सुख न मिला तो फिर उसको इतनी उत्तेजना नहीं होती थी, पर शिव के छूने से वो बहोत गर्मी महसूस कर रही थी, शिव लगातार उसके स्तन को मसल रहा था और उसकी छूट पर वो कड़क अंग दबाव दे रहा था, उसकी कमर खुद बा खुद चलने लगी, वो शिव की पीठ को सहलाने लगी, थोड़ी देर बाद फिर शिव ने उसको बिठाया और उसका वो स्कर्ट भी निकलने लगा, उसको बहोत शर्म आ रही थी पर ये सब तो होना hi था, उसने अपने हाथ उठा कर उसकी सहायता की, अब वो सिर्फ ब्रा और पंतय में hi थी, उसको बहोत शर्म आ रही थी, उसने अपने आपको हाथो से ढकने की नाकाम कोशिस की पर शिव ने उसके हाथो को पकड़ कर हटा दिया और वो उसके हुस्न का दीदार करने लगा, देकते hi देखते उसने फिर उसको निचे लेता दिया और उसकी गर्दन, उसके स्तन पर हर जगह चूमने और चाटने लगा, ये वो दूसरा लड़का था जसके सामने वो इस अवस्था में थी, शर्म तो थी पर उत्तेजना भी बहोत थी, उसे अच्छा भी लग रहा था, जिस तरह से शिव उसके बदन से खेल रहा था उसको बहोत मज़ा आ रहा था, वो एक लड़के का प्यार क्या होता है वो महसूस कर रही थी, शिव ने उसे पलट दिया और उसकी पीठ पर चुम्बन करने लगा, वो सिर्फ सिस्किअ hi ले रही थी, चूमते हुए जब शिव ने उसके कूल्हों को मसाला तो वो तड़प उठी, उसकी छूट से जैसे नदिया बह रही थी, वो इतनी ज्यादा गर्म हो गयी थी की अपनी झंघे आपस में रगड़ रही थी, वो पूरी तरह छोड़ने को तैयार थी, पर जैसे शिव को तो कोई जल्दी नहीं थी, इतनी देर में तो उसके पति के साथ सब कर के वो सो भी चुकी होती. और शिव ने कुछ सुरु भी नहीं किआ था, तभी शिव ने उसकी ब्रा के हुक खोल दिए, वो बस सब महसूस कर रही थी, वो बस अपने आपको सूप चुकी थी, तभी शिव का हाथ उसके पंतय के अंदर उसके कूल्हों पर गया, उसके नंगे कूल्हों पर हाथ महसूस करते hi उसकी कमर जटके खाने लगी)
माधुरी भाभी अपने नाम की तरह मधुर थी, नाईट बल्ब की रौशनी में उनका बदन एक अलग hi आभा दे रहा था, उनके बदन और लता के बदन में ज्यादा अंतर नहीं था, ये थोड़ी ज्यादा ऊँची थी, पर शरीर कोमल और नाजुक hi था, पतली कमर के निचे फैले हुए कूल्हों को देख कर किसी का भी खड़ा हो जाये, कूल्हों की दरार मुझे दिख रही थी, आधे नंगे कूल्हों पर से मेने पंतय और निचे खिसकायी तो आधे कूल्हे पुरे बहार आ गए, वो उभरे हुए कूल्हे आकर में अपनी गोलाई लिए थे, आकर में अभी भी छोटे hi थे जो उनके शरीर के हिसाब से थे, पर आकर्षक थे, में उन्हें नजदीक से देखना चाहता था तो में कूल्हों की और घूम गया और आधे नंगे कूल्हों पर अपने होठ फिरने लगा, तो भाभी ने एक हाथ पीछे किआ और मेरा हाथ पकड़ लिया.
माधुरी : शह्ह्हह्ह्ह्ह गुदगुदी हो रही है शीइइइइव.
शिव : मेने इन्हे hi देखा था भाभी, कितने आकर्षक है ये.
माधुरी : ऐसा मात बोलो शिव, शर्म आ रही है.
शिव : उस वक़्त अचानक हो गया था, अभी में जानबुज कर देख रहा हु, आपको कोई आपत्ति तो नहीं है न.
माधुरी : शहहहहह शीइइइइइइव, ऐसी बाटे मात करो शह्ह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा है यार.
शिव : में तो बोलूंगा और देखूंगा भी (मेने कूल्हों पर से पंतय और निचे खिसका दी और दरार को फैलते हुए देखा, गांड का गहरे रंग का छेड़ दिख रहा था और वो खुल बंद हो रहा था, मेने दरार के अंदर मुँह घुसा दिया, गर्म गर्म एहसास मेरे नाक और मुँह पर होने लगा)
माधुरी : शह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो शिव, मुझे शर्म आ रही है शह्ह्ह्हह्ह (परम कभी उसके शरीर के साथ इस तरह से नहीं खेला था, ये सब उसके लिए एकदम नया था, उसकी उत्तेजना चरम पर थी, इस तरह के एहसास से उसकी छूट छू रही थी और कमर झटके खा रही thi)Shhhhh Shiiiiiiiiiiiiiiiv अह्ह्ह्ह शहहहहह . (वो अपना शिर तकिये में रगड़ रही थी, तभी उसे गिला पैन महसूस हुआ, शिव उसके गांड के छेड़ को अपनी जीभ से चाट रहा था, उसका पूरा शरीर गंगना gaya)Shhhhhhhh वो गन्दी जगह है Shiiiiiiiiiiiv. (उसको यकीं नहीं हो रहा था की शिव उसके गांड के छेड़ को चाटेगा, उसके पति ने कभी उसकी छूट भी नहीं छाती थी, वो इस सुख और एहसास से वन्धित थी, वो जानती थी की ऐसा लोग करते है पर ये इतना सुखद होता है उसका अनुमान नहीं था, शिव उसके कूल्हों को मसलते हुए चाट रहा था और वो अपना मुँह तकिये में छुपा के सिस्किअ रोकने का प्रयास कर रही थी, वो तकिये को काट रही thi)Shhhhhh बस शिईयिव मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा है शहहहहह.
शिव : आप बहोत खूबसूरत हो भाभी, मुझे अच्छा लग रहा है. (मेने उनकी पंतय पूरी निकल दी, और उन्हें सीधा कर दिया तो वो अपनी छूट और अपने स्तन छुपाने लगी)
माधुरी : शहहहहह शीइइइइइइव.
शिव : (मेने उनके हाथ पकड़े और हटाने laga)Muje देखना है भाभी.
नधुरी : मुझे शर्म आ रही है शिव, जो करना है जल्दी कर लो न.
शिव : आपको कही जाना है क्या?
माधुरी : ऐसा क्यों पूछ रहे हो?
शिव : वो सब करने में अभी बहोत टाइम है, हाथ हटाइये.
माधुरी : (शर्मा कर रोनेवाली सकल se)Muje शर्म आ रही है शिव.
शिव : कुछ नहीं होगा, मुझे देखने दीजिये.
माधुरी : वह सब गन्दा हो गया है.
शिव : क्या गन्दा हो गया है?
माधुरी : वो सब चिप छिपा हो गया hai(Unhone शरमाते हुए कहा)
शिव : कुछ गन्दा नहीं है, हाथ हटाइये (में उनके पैरो के बिच बेथ गया और उनका हाथ हटाया, उन्होंने अपनी झंघ आपस में स्टेट हुए अपनी छूट को छुपाने की कोशिस की पर मेने उनके घुटने पकड़ कर पेअर फैला दिए, वो जोर लगाने लगी पर मेरे सामने कहा चलती, मेने छूट को देखा तो हलके बालोंवाली छूट थी, सच में वो छूट रास से भीग चुकी थी, उन्होंने फिर हाथ से ढकने का प्रयास किआ, मेने उनका हाथ पकड़ लिया और छूट पर मुँह लगा दिया, वो चिकना रास मेरे मुँह में अपना स्वाद देने लगा, में छूट को अच्छे से चूसने और चाटने लगा)
माधुरी : Shhhhhhhhhhh आआआआह shiiiiiiiiiiv shhhhhhhhhh (माधुरी बावली होने लगी, जैसे जैसे शिव उसकी छूट को चाट रहा था उसकी सिस्किअ लगातार निकल रही थी, वो उसकी छूट को ऐसे चाट रहा था जैसे वो कोई खाने की चीज हो, उसको इतना मज़ा आ रहा था पर साथ में एक अजीब सी गुदगुदी हो रही थी, वो मचल रही थी, वो अपने हाथ पेअर मार रही थी, वो कभी अकड़ जाती तो कभी थोड ऊपर हो जाती, वो कभी शिव के शिर को धक्का देती तो कभी अपनी छूट पर दबा देती, जैसे जैसे शिव उसकी छूट को चाट रहा था वो अपने hi होतो को काट रही thi)Shhhhhh शिईयिव ये क्या कर रहे हो शह्ह्हह्ह्ह्ह.
शिव : (ऊपर देख kar)Maza आ रहा है?
माधुरी : (माध भरी आवाज me)Shhhhhh हाआआ बहोत मज़ा आ रहा है शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आअह्हह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो यार shhhhhhhhhhh में पागल हो जाउंगी (वो शिव के बालो को नोचने लगी, शिव की जीभ उसकी योनि के छेड़ में दाखिल hui)Shhhhhhhhh शीइइइइइइव ahhhhhhhhhhh (वो चाट पटाने लगी, उसने सोचा नहीं था की ऐसा भी होता hai)Muje कुछ हो रहा है शिईयिव शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह, में मर जाउंगी शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ये क्या हो रहा है मेरे साथ shhhhhhhhhhhh (में जनता था की वो झाड़ जाएगी, पर में अभी इतनी जल्दी उन्हें झाड़ जाने नहीं देना चाहता था, मेने मुँह हटा लिया और उनके ऊपर होने laga)(Madhuri को लगा की शिव अब उसके साथ सेक्स करेगा, वो तो पूरी तरह से तैयार थी, वो शिव को अपनी बहो में बाहरणे लगी, शिव ने उसकी ब्रा ऊपर कर दी और उसके निप्पल को चूसने laga)Shhhhhh शीइइइइइइव (वो मदहोश हो रही थी, वो शिव को देखने लगी की कैसे वो उसके स्तन को और निप्पल को चूस रहा है, उसकी हालत ख़राब हो रही थी, वो शिव के अंडरवियर को निचे खिसकने लगी, उसे जल्द से जल्द अपने अंदर वो चाहिए था, अपने हाथ और पैरो की मदद से उसने शिव का अंडरवियर निचे खिसका दिया, उसको महसूस हुआ की शिव का लुंड बहार आ गया है, क्यों की अब वो सीधे उसकी छूट को छू रहा था, वो उसे निचे की और खींचने लगी, पर शिव निचे नहीं हो रहा था, वो अपनी कमर उचकते हुए लुंड को महसूस करने लगी, लुंड उसकी छूट के आस पास यहाँ वह छू रहा था, उसको वो अपने छेड़ में चाहिए था, वो इतनी मदहोश हो चुकी थी की उसने खुद लुंड को पकड़ लिया ताकि उसे अपने छेड़ पर रख सके, पर जैसे hi उसने लुंड पकड़ा वो कैंप गयी, वो जानती थी की उसका लुंड बहोत बड़ा है पर इतना बड़ा उसने सोचा नहीं था, उसने दूर से देखा था पर अभी वो उसके हाथ में था, वो उसे दबा कर जाँच रही थी, पूरी तरह से सख्त था वो, वो इतनी मदहोश हो चुकी थी की वो सोच hi नहीं प् रही थी की उसका क्या हल होगा, उसे बस हर हल में वो चाहिए था, वो उसको अपनी छूट पर घिसने लगी, उसकी आग और भड़क रही थी, उसने लुंड को अपने छेड़ पर टिका दिया और उसे खींच कर अंदर डालने का प्रयास करने लगी, शिव निचे नहीं हो रहा था, वो छटपटाने lagi)Shiiiiiiiv शहहहहह क्या कर रहे हो शह्ह्ह्हह्ह अंदर डालो न शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (में जनता था की वो बहोत गर्म है, और यही सही मौका भी था, मेने उनके होतो को अपने गिरफ्त में लिया और लुंड पर दबाव दाल दिया, लुंड उस छोटे से छेड़ को फैलते हुए अंदर घुस gaya)(Madhuri की चीख निकल गयी, उसने सोचा नहीं था ऐसा, पर वो उसकी छूट को चीरता हुआ अंदर जा चूका था, उसको इतना दर्द हुआ की उसकी आँखों में पानी भी आ गया, वो चिल्लाई पर उसकी आवाज शिव के मुँह में hi दबी रह गयी, वो छटपटाने लगी पर शिव ने और झटका मारा तो लुंड और अंदर चला गया, उसकी जान हलक में आ गयी, वो चाट पटाने लगी, और छूटने का प्रयास करने लगी, पर शिव उसको मजबूती से पकड़े हुए था, वो हिल भी नहीं प् रही थी, शिव ने और एक धक्का मारा तो लुंड उसकी छूट को फाड़ता हुआ और अंदर घुस गया,

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उसके शिर से सहारा नशा उतर गया था और उसकी जगह दर्द ने ले ली थी, वो अपना मुँह भी छुड़ाना चाहती थी ताकि वो चीख सके पर शिव ने वो मौका भी नहीं दिया,
एक और झटके से वो बेहाल हो गयी और शांत हो गयी, अब उसकी सहने की ताकत ख़तम हो चुकी थी, वो बस जोर जोर से सांसे ले रही थी और भगवन से बचने के लिए प्रार्थना कर रही थी, शिव रुक गया था, वो वैसे hi उसके ऊपर लेता था पर वो कड़क कहता उसकी छूट में घुसा हुआ था, इतना दर्द तो उसकी सील टूटने पर भी नहीं हुआ था, वो पसीना पसीना हो चुकी thi)(Me जनता था, की ये होगा, पर मुझे ये नहीं पता था की वो कुवारी लड़कीओ जैसी टाइट होगी, में सोचने लगा की इन्होने सेक्स किआ भी है की नहीं, पर मुझे जो करना था वो करना hi था, मेरा लुंड छूट में फंस गया था, अंदर बहते गर्म खून को में महसूस कर रहा था, मेने नहीं सोचा था की ये अभी ऐसी होगी, वो शादी सुदा थी तो मेने सोचा था की वो थोड़ी अभ्यस्त होगी. में उनके ऊपर ऐसे hi लेता रहा, मेने उनको सँभालने का मौका दिया, अब वो चटपटा नहीं रही थी तो मेने अपना मुँह हटाया, उनके आंसू निकल आये थे, वो बेजान सी लग रही थी)
शिव : भाभीयी. (उन्होंने गीली आँखों से मेरी और dekha)Sorry, मुझे नहीं पता था की आप अभी कुवारी हो. (वो कुछ नहीं बोली बस मुझे देख रही thi)Bahot दर्द हो रहा है क्या? (उन्होंने रोनी सूरत से बस है में शिर hilaya)Abhi सब ठीक हो जायेगा. (मेने उनके आंसू पोछे और उनके गाल और गले पर किश करने लगा) तो इसीलिए आप ने मुझे रोका नहीं है न, बहिया ने ठीक से किआ नहीं है, सही कह रहा हु न में. (वो बस मुझे देख रही थी, में उनसे बात कर रहा था, उनको चुम रहा था, उनकी तारीफ भी कर रहा था, मेने चेक करने के लिए लुंड थोड़ा बहार खिंचा, तो उनके चेहरे पर दर्द उभर आया, में उनको चूमे और चाटने लगा और थोड़ी थोड़ी देर में लुंड थोड़ा थोड़ा आगे पीछे करने लगा, वो थोड़ी शांत हो गयी थी, में दोनों पैरो के बिच बेथ गया और छूट का जायजा लिया, निचे खून लग गया था, मेने उनकी और देखा तो वो मुझे hi देख रही थी) जो होना था हो गया, अब दर्द नहीं होगा. (मेने उन्हें संजय तो उन्होंने है में गर्दन हिलायी, में उनको खुस करना चाहता था तो फिर उनके ऊपर लेट गया, और उनका शिर सहलाते हुए kaha)Lagta है मेरे साथ hi सुहागरात मन रही हो, है न? (मेरे ऐसा कहते hi वो शर्मा gayi)Ab क्यों शर्मा रही हो आप, मेने कहा था न की सो जाओ, तब तो गयी नहीं आप. (उनके चेहरे पर हलकी मुस्कान आ गयी, मेने फिर लुंड बहार निकला और अंदर किआ)
माधुरी : अह्ह्ह्हह्हह.
शिव : अभी भी दर्द हो रहा है?
माधुरी : हआ.
शिव : ज्यादा हो रहा है क्या?
माधुरी : (रोनी सकल se)pehle से काम है.
शिव : अभी पूरा चला जायेगा, बस थोड़ी देर सहन कर लो. (उन्होंने हां में शिर हिलाया, में लुंड अंदर बहार करने लगा,

मुझे अभी भी ताकत लगनी पद रही थी, में महसूस कर प् रहा था की दीवाले कितनी संकरी है, पर मेरा शेर फुल फॉर्म में था, वो उसको फैलते हुए अंदर बहार हो रहा था, छूट में पानी भी आने लगा था जिस से और मदद हो रही थी)
माधुरी : शह्ह्हह्ह्ह्ह shiiiiiiiiiiv (ये उनके मज़े की सिसकारी थी, में समाज गया की वो अब तैयार है, में थिरे धीरे लुंड अंदर बहार करने लगा, वो कभी दर्द की तो कभी मजे की सिस्किअ ले रही थी,

में उनकी आँखों में देखते हुए लुंड अंदर बहार करने लगा तो वो भी मेरी आँखों में देख रही थी पर उनका पूरा ध्यान अपनी छूट में tha)(Madhuri पहली बार ऐसा कुछ महसूस कर रही थी, उसकी छूट पूरी भर गयी थी, कड़क लुंड उसकी छूट को खोलने में लगा हुआ था, दर्द तो हो रहा था पर एक अज्जेब सा मज़ा भी आ रहा था, लुंड बहोत बड़ा था, पर शायद मर्दो का ऐसा hi होता होगा,

आज उसकी सचमे सुहागरात hi हो रही थी, उसको शिव पर बहोत प्यार आ रहा था, वो उसको दर्द दे रहा था पर फिर भी एक सुकून था, वो कभी चिहुँक जाती तो कभी दर्द से कराह निकल जाती, अंदर हलकी जलन भी हो रही थी, पर वो सब सेह रही थी, आज वो औरत जो बन गयी थी, औरत होने का सुख वो महसूस कर रही थी, वो अपने पेअर फैला कर उस अंग को रास्ता दे रही थी, जो लगातार उसकी छूट के अंदरूनी भाग को रगड़ रहा था, वो मोटा सूपड़ा उसकी छूट की मासपेशिओ को ढीला करने में लगा हुआ था, वो पूरी तरह से नंगी थी और शिव भी नंगा था, लुंड के घरसँ से उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, वो शिव को अपनी और खिंच रही थी, आज पहली बार था की उसकी छूट में लुंड ऐसे अंदर बहार हो रहा था, वो चुदाई का मतलब समाज रही थी,

शिव उसको लगातार छोड़ रहा था, ऐसे सब्द उसने सुने थे जो उसको गंदे लगते थे पर अभी वो इसी का मज़ा ले रही थी, लुंड के लगातार धक्को से उसके अंदर तूफान इकठ्ठा हो रहा tha)Shhhhh शीइइइइव अह्ह्ह्हह शहहहहह अह्ह्ह्हह आईईईई शह्ह्ह्हह्ह (छूट से लगातार चिकना रास बह रहा था और लुंड के घरसँ से उसको बहोत ज्यादा आनंद मिल रहा था, दर्द के बावजूद वो शिव के कूल्हों को अपनी और खींचने लगी)
शिव : अच्छा लग रहा है?
माधुरी : हआ शहहहहह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह.
शिव : अब दर्द तो नहीं है न?
माधुरी : शह्ह्ह्ह नाहा अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह. मुझे कुछ हो रहा है शिव शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा है, (सो शिव को अपनी और खिंच कर उसको बहो में भरने का प्रयास करने लगी, और उसके कंधे पर चूमने और चाटने lagi)Shhhhhh अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह मुझे कुछ हो रहा है शह्ह्ह्ह में बर्दास्त नहीं कर प् रही शह्ह्हह्ह्ह्ह. (में समाज गया की वो झाड़नेवाली है, मेने थोड़ी स्पीड बढ़ा di)Shhhhh अह्ह्ह्हह शिईयिव अह्हह्ह्ह्ह शीइइइइइइव आईईईई शह्ह्हह्ह्ह्ह (उसने शिव के कंधे पर दन्त गधा दिए और झटके कहते हुए झड़ने lagi)Ahhhhhhh मुंईईईई shhhhhhhhhhhh. रुक जाओ माआ शह्ह्ह्ह बर्दास्त नहीं हो रहा है यार शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (में रुक गया, मेरे लुंड पर गरम पानी की बरसात हो रही थी, वो मुझसे लिपट गयी, थोड़ी देर बाद वो शांत हुई, मेने उन्हें देखा तो वो शर्माने लगी)
शिव : (मुस्कुराते hue)Kya हुआ? (वो और शर्माने lagi)Bataiyena..... क्या हुआ?
माधुरी : पता नहीं.
शिव : अच्छा लगा?
माधुरी : बहोत अच्छा लगा शिव, ऐसा कभी नहीं हुआ था.
शिव : अभी तो शुरुआत है.
माधुरी : तुम्हारा क्यों नहीं निकला?
शिव : इतनी जल्दी नहीं निकलेगा, अभी बहोत म्हणत करनी पड़ेगी. (में उठने लगा और लुंड बहार निकला)
माधुरी : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह. (वो मचल गयी, उसे लगा की उसके अंदर से कुछ खली हो गया तो उसने अपने पेट को सहलाया, जैसे वह कुछ था जो अब नहीं hai)(Mene उनकी छूट का जायजा लिया, बिस्तर पर खुंड लगा हुआ था, और छूट पर भी खून लगा हुआ था, मुझे ऐसे छूट को देखते देख वो शरण गयी और अपनी झंघे आपस में सत्ता दी और अपनी छूट को हाथो से छुपा लिया)
शिव : क्या हुआ, देखने दीजिये न.
माधुरी : मुझे शर्म आ रही है.
शिव : अब कैसी शर्म (कहते हुए मेने पेअर फैलाये पर वो अपनी छूट को हाथ से धक् रही थी, मेने उनकी पंतय ली और हाथ को हटाया और छूट पर लगा खून साफ़ किआ, सो थोड़ी करहि, मेने देखा की छूट का कोना फैट गया था और लहू जैम गया tha)Dard हो रहा है?
माधुरी : (रोनी सूरत se)Ha. (में झुक गया और छूट को चाटने laga)Shhhhh शीइइइइइव. (में छूट को चाटने लगा तो वो सिस्किअ लेने लगी, में थोड़ी देर छूट को चाट ता raha)Shhhhhhhhh शह्ह्ह्ह.
शिव : अब अच्छा लग रहा है?
माधुरी : Haaa.....tumhe गन्दा नहीं लगता शिव?
शिव : क्या?
माधुरी : तुम वह मुँह लगा रहे हो, वो गन्दी जगह होती है न?
शिव : मेरे ऐसा करने से आपको मज़ा नहीं आ रहा क्या?
माधुरी : (शरमाते hue)Aa रहा है.
शिव : तो फिर, इसमें गन्दा कुछ भी नहीं होता, में भी अपना आपके मुँह में डालूंगा तो आपको गन्दा लगेगा?
माधुरी : पता नहीं. (उसको याद आया की कैसे दिव्या शिव के लुंड को चूस रही थी, उसको भी ऐसा करने की इच्छा हो रही थी पर वो शर्मा रही थी)
शिव : ऐसे hi एक दूसरे के अंगो के साथ खेल के दुसरो को मज़ा दे सकते है.
माधुरी : तुम चाहते हो की में भी करू?
शिव : वो आप पर डिपेंड करता है, आपको अच्छा लगे तो hi करना.
माधुरी : पर मेने कभी किआ नहीं है. (उसने हिचकिचाते हुए कहा)
शिव : जब आपका मान करे तब कह देना.
माधुरी : (दो पल शिव को देखती rahi)Abhi करू? (उसने शरमाते हुए kaha)(Me समाज गया की उनका भी मान है, तो में खड़ा हुआ, उनकी नजर मेरे लुंड पर hi टिक गयी, मेने उनका हाथ पकड़ कर बिठाया और उनके सामने खड़ा हो गया, वो कभी मेरे लुंड को तो कभी मेरी और देख रही थी)
शिव : क्या हुआ?
माधुरी : (हिचकिचाते hue)Ye बहोत बड़ा है.
शिव

मुस्कुराते hue)To?
माधुरी : कुछ नहीं (फिर वो लुंड को देखने लगी, फिर मेरी और देख के boli)Kaise करू?
शिव : पहले पकड़िए तो सही. (वो शर्मा गयी, थोड़ी नजदीक आयी और हिचकिचाते हुए मेरे लुंड की और अपना हाथ बढ़ाया, एक बार मेरी और देखा फिर लुंड को पकड़ liya)(Lund को पकड़ ते hi माधुरी को अजीब लगा, थोड़ी देर पहले भी पकड़ा था पर देखा नहीं था, अब वो देख रही थी, उसके मुँह में कुछ होने लगा तो उसने अपने सूखे होठो पर जीभ फिराई, शिव ने लुंड होठो के सामने किआ, उसने फिर शिव को देखा और हिचकिचाते हुए अपना मुँह खोला, उसको अजीब लग रहा था पर उसको करना था, वो आगे बढ़ी और थोड़ा सा लुंड मुँह में लिया, अजीब लग रहा था, जहसे लड़के मूत ते है उसको उसने अपने मुँह में लिया था, उसने फिर बहार निकल दिया, उसको अजीब लग रहा था, एक बार फिर उसने शिव को देखा, वो उसके चेहरे को hi देख रहा था, उसने अपने आपको कण्ट्रोल किआ और फिर मुँह खोला और सुपडे को मुँह में भर लिया, एक अजीब तरह की खुसी महसूस हुई उसे, उसका मुँह भर गया था, वो वैसे hi रही, शिव ने उसके शिर पर हाथ रक्खा और उसको लुंड की और दबा दिया, लुंड थोड़ा अंदर चला गया, उसने फ़ौरन अपना शिर पीछे कर लिया) आपको करना है तो hi करिये, कोई जबरदस्ती नहीं है.
माधुरी : अजीब लग रहा है, (वो फिर थोड़ी देर लुंड को देखती रही, फिर उसको मुँह में भर liya)(Mene उनको समजने के लिए उनका शिर पकड़ा और लुंड को थोड़ा अंदर बहार किआ,

वो मुझे देखने लगी, मेने फिर उनका शिर छोड़ diya)(Madhuri थोड़ा समाज गयी थी, उसने फिर लुंड को मुँह में लिया और खुद अंदर बहार करने लगी, अजीब लग रहा था पर उसको मज़ा आ रहा था, ऐसे लुंड को चूसने से उसके बदन में फिर गर्मी बढ़ने लगी, वो थोड़ी देर ऐसा करती रही, फिर उसने लुंड बहार निकला और शिव को देखा, जैसे पूछ रही हो की ठीक किआ न mene)(Me मुस्कुराया, में तो पहले से hi गरम था, में निचे घुटनो पर बेथ गया और उनकी कमर पकड़ कर उन्हें घोड़ी बनाया, उनके चेहरे पर परेशानी थी, वो समझने की कोशिस कर रही thi,)(Tabhi माधुरी की नजर वह लाल धब्बे पर पड़ी, वो चौंक गयी)
माधुरी : खून?
शिव : क्या हुआ भाभी?
माधुरी : (लाल धब्बे की और इस्सर कर के) ये खून?
शिव : जो होना था वो हो गया, अब नहीं होगा. (वो थोड़ी परेशान थी पर मेने उन्हें घोड़ी बनाया और उनके कूल्हे फैला कर फिर से गांड के छे और छूट को चाटने लगा, वो ाँकेः बंद कर के सिस्किअ लेने लगी, थोड़ी देर बाद मेने लुंड को छूट पर घिसा तो वो मुझे देखने लगी, मेने लुंड सेट किआ और अंदर दबा दिया, एक बार फिर लुंड छूट में घुसने लगा, उनके चेहरे पर दर्द उभर आया पर मेने लुंड अंदर दाल hi दिया)
(माधुरी को दर्द हुआ पर उसने भी रोका नहीं, वो हर तरह का मज़ा लेना चाहती थी, उसे सब नया नया लग रहा था पर उसको पता था की ऐसे hi सेक्स होता होगा, लुंड फिर उसकी छूट में चला गया था, शिव उसकी कमर पकड़ कर अंडर बहार करने लगा, एक बार फिर उसको मज़ा आने लगा, वो अच्छे से पोसिटिव बना के उसके लुंड को अपनी छूट में लेने लगी, लगातार लुंड अंदर बहार हो रहा tha)Shhhhhhh अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह. (वो नंगी थी और किसी के सामने ऐसे थी, उसने कभी सोचा भी नहीं था पर जो मज़ा उसे मिल रहा था उसके लिए वो सब करने को तैयार थी, शिव उसके कूल्हे मसलते हुए उसकी छूट में धक्के लगा रहा था, कभी लुंड ज्यादा अंदर चला जाता तो उसको दर्द होता पर उसने शिव को रखा नहीं, लगातार चुदाई से वो एक बार फिर उसी खुसी को पाने की और बढ़ chali)Shhhhh शीइइइइव अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्हह्ह हआ शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह ahhhhh.(Shiv लगातार अंदर बहार कर रहा था, वो बस आह उह्ह्ह किये जा रही थी, और शिव लगातार उसकी छूट में लुंड अंदर बहार कर रहा था,

उसने सोचा था उस से कई गुना ज्यादा मज़ा आ रहा था, उसकी टंगे कंपनी लगी थी, उसका शरीर अकड़ने लगा था, एक बार फिर वो चरम को प्राप्त hui)Shhhhhhh shiiiiiiiiiiiv (उसने अपने गरम पानी से शिव के लुंड को नेहला दिया, उस से रहा नहीं गया और वो बीएड पर उलटी लेट गयी और जोर जोर से सांसे लेने लगी, अभी वो संभाली भी नहीं थी की शिव ने फिर से उसकी छूट में लुंड दाल diya)Ahhhh रुको शिईयिव (पर वो नहीं रुका, एक बार फिर लुंड उसकी छूट में अंदर बहार होने लगा,

वो उलटी लेती थी और बस आहे भर रही थी, थोड़ी देर बाद शिव ने उसको सीधा कर दिया, वो बस शिव को देख रही थी, शिव ने उसके पेअर फैलाये और फिर से लुंड अंदर दाल diya)Ahhhhhhh (फिर से लुंड अंदर बहार होना चालू हो गया, उसने अपनी टंगे फैला दी और हवा में उठा दी थी, वो लुंड को लगातार अंदर जाता महसूस कर रही थी, दर्द और मज़े का मिला जुला रूप था, कभी दर्द तो कभी मज़ा आ रहा था, उसकी सकल रोने जैसी हो गयी थी, पर जो मज़ा मिल रहा था उसकी वजह से उसने शिव को रोका नहीं, वो उसके स्तन दबा रहा था उसको चुम रहा था, उसके होठो को चूस रहा था, पर लगातार लुंड अंदर बहार हो रहा था, लुंड इतना अंदर पहुंच गया था की उसको लगा की अब आगे जगह hi नहीं bachi)Ahhhh शीइइइइव शहहहहह बस करो शह्ह्ह्हह्ह कटनी देर करोगे शह्ह्हह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शहहहहह शीइइइइइइइव.
शिव : भाभी? (माधुरी ने dekha)Periods कब आये थे?
माधुरी : क्यों?
शिव : बताइये न.
माधुरी : तीनदिन पहले hi बल धोये है. (शिव ने आगे कुछ नहीं पूछा और लगातार धक्के लगता रहा, शिव ने लुंड इतनी जोर से दबाया तो माधुरी को लगा की लुंड अंदर कही घुस गया hai)Ahhhhh शिईयिव दर्द हो रहा है (वो करहि)
शिव : भाभी थोड़ा सेह लो.

(माधुरी को दर्द भी हो रहा था पर मज़ा भी आ रहा था, पर शिव के धक्के लगातार बढ़ रहे थे और गहरे भी होते जा रहे थे, अंदर भी कही उसका लुंड घुस रहा था, एक अजीब सी सनसनाहट उसको महसूस हो रही थी, वो अपने होठ काट रही थी, और ाः आह किये जा रही थी, वो फिर से अपने चरम को प्राप्त हुई hi थी की शिव ने पूरा लुंड उसकी छूट में घुसा दिया और उसके अंदर गर्म पानी की बौछार होने लगी, उसने शिव को कास के पकड़ लिया और अपनी छूट को पूरी ताकत से दबा दिया ताकि लुंड बहार न निकल जाये, अंदर हो रही बरसात उसको रहत और खुसी दोनों पहुंचने लगी, शिव रुक गया था पर अभी भी वो उस से चिपका हुआ था, आज उसको समाज आ रहा था की सेक्स क्या होता है, वो पूरी तरह से तृप्त हो चुकी थी, वो शिव को अपनी बहो में लिए लेती रही. काफिर देर बाद शिव थोड़ा ऊपर हुआ और उसको देखने लगा तो उसको बहोत शर्म आयी, वो दूसरी और देखने लगी, शिव उठने लगा तो उसने अपने पैरो से उसको पकड़ liya)Kya हुआ?
माधुरी : (शरमाते hue)Aise hi रहो अभी. (में रुक गया, वो शरमाते हुए मुस्कुरा रही थी)
शिव : मज़ा आया भाभी.
माधुरी : मुझे भाभी क्यों कह रहे हो, में तुम्हारी नहीं दिव्या की भाभी हु.
शिव : तो में क्या कहु?
माधुरी : मेरा नाम माधुरी है, पता तो है न. (उसने शरमाते हुए कहा)
शिव : वो तो पता है पर में थोड़ी न नाम से बुला सकता हु, और भाभी कहने में क्या बुराई है.
माधुरी : अपनी भाभी के साथ ऐसा करता है कोई, शर्म नहीं आती तुम्हे. (मुस्कुराते हुए वो बोली)
शिव : मेने किया?
माधुरी : है तुमने hi किआ.
शिव : (मुस्कुराते hue)Mujpar इल्जाम.
माधुरी : है, सब तुम्हारी hi गलती है, तुमने hi मेरे साथ सब kia.(Unhone मुस्कुराते हुए कहा)
शिव : अब इल्जाम लगा hi दिया है तो बता दो की सजा क्या डौगी?
माधुरी : तुम्हारी यही सजा है की ये गलती दोबारा भी करना. (बोलते बोलते वो शर्मा गयी, में मुस्कुराया और उनके होठो को चूमने लगा, वो भी मुझे चूमे लगी, थोड़ी देर की किश से hi लुंड वापस कड़क हो गया और मेने अंदर बहार करना सुरु किआ, अपना मुँह छुड़ा kar)Shhhh क्या कर रहे हो, अभी तो किआ था.
शिव : तो क्या हुआ, फिर एक बार.
माधुरी : में मर जाउंगी यार.
शिव : कुछ नहीं होगा (में फिर सुरु हो गया, वीर्य से भरी हुई छूट की वजह से पूछ पूछ और चाप चाप आवाज होने लगी, थोड़ी देर ऐसे hi छोड़ने के बाद मेने उन्हें गॉड में बिठा दिया और बैठे बहते hi उनको ऊपर निचे करने लगा)
माधुरी : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह शीइइइइइव शह्ह्हह्ह्ह्ह, दीखते hi भोले हो बाकि हो नहीं शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह कैसे कैसे कर रहे हो शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्हह.
शिव : आपको मज़ा आ रहा है न?
माधुरी : है, बहोत आ रहा है, पर वो बहोत बड़ा है.
शिव : उस से कोई फर्क नहीं पड़ता, अपक्की छूट में जगह बन गयी है.
माधुरी : (शरमाते hue)Chiii कितना गन्दा बोलते हो तुम.
शिव : मेने क्या गलत कहा, छूट को छूट नहीं बोलूंगा तो क्या बोलूंगा.
माधुरी : गंदे, दीखते कितने सीधे हो, ऐसा भी कोई बोलता है क्या.
शिव : आप बताओ फिर, कैसे बोलते है?
माधुरी : (शरमाते hue)Muje नहीं पता. (मेने उनके स्तन को चूसना सुरु कर diya)Shhhhhh शीइइइइव क्या कर रहे हो ahhhhhhh(Me अपना काम करता रहा, वो भी मेरा शिर सहलाने लगी और अपनी कमर हिलाते हुए लुंड अंदर लेने lagi)Shhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कितना मज़ा आता है इसमें शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.
शिव : किस में मज़ा आ रहा है? (मेने उन्हें छेड़ा)
माधुरी : (उन्होंने मुस्कुराते हुए मेरी और dekha)Gande, तुम जानते हो फिर भी पूछ रहे हो.
शिव : मुझे क्या पता की आपको किस्मे मज़ा आ रहा है.
माधुरी : बेशरम, शहहह जो तुम कर रहे हो, उसमे.
शिव : क्या कर रहा हु में?
माधुरी : मुझे नहीं पता, शहहहहह ahhhhhhh(Wo अपनी कमर हिलने lagi)Shhhhhh शीइइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह (में उनके कूल्हे मसलते हुए उन्हें ऊपर निचे और अपनी और खींचने laga)Aiiiiii शहहहहह बहोत मोटा है यार शह्ह्ह्हह्ह.
शिव : क्या मोटा है?
माधुरी : (उस से लिपट ते hue)Tumhara वो. शहहहहह शिईयिव मुझे फिर कुछ हो रहा है शहहहहह कैसी फीलिंग है ये, शह्ह्हह्ह्ह्ह (वो अपनी कमर जोर जोर से लुंड पर दबाने lagi)Shhhhhh शीइइइइव ईई शह्ह्ह्हह्ह. (वो झड़ने lagi)Ahhhhhhhh shhhhhhhh(Wo रुक गयी, मेने उन्हें निचे लिटाया और फिर उनकी टंगे ऊपर करके धक्के लगाने laga)Ahhhhhh शीइइइइव और अंदर नहीं शह्ह्ह्हह्ह दर्द हो रहा है शहहहहह शीइइइइइइव अह्ह्ह्हह्हह बहोत अंदर जा रहा है शह्ह्हह्ह्ह्ह आईईईई शह्ह्हह्ह्ह्ह थोड़ी देर रुक जाओ शह्ह्ह्हह्ह ahhhhhhhh(Me रुका नहीं और धक्के लगता raha)Shhhhh सीईव अह्हह्ह्ह्ह आरामसे शहहहहह धीरे करो शह्ह्ह्हह्ह दर्द हो रहा है shhhhhhhhh(Lagatar चुदाई से में भी झाड़नेवाला था, मेरे धक्के जोर जोर से लग रहे थे, वो पूरी हिल रही थी, वो अपने दन्त से अपने हाथ को काट रही thi)Shhhhh आरामसे शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह मर जाउंगी यार शह्ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह>
शिव : कुछ नहीं होगा (में लगातार धक्के लगा रहा था, उनके कूल्हे भी बिस्तर से ऊपर हो गए थे, पैरो में हाथ फसा कर में लगातार उन्हें छोड़ रहा था)
माधुरी : धीमे शहहहहह अअअअअ अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह बहोत बड़ा है शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह (में लगातार धक्के लगा रहा था, वो मेरे हाथ पकड़ कर मुझे रोक रही थी, पर में चरम पर था तो में जोर जोर से धक्के लगता रहा, वो फिर झड़ने लगी और में भी उनकी छूट में झड़ने laga)Shhhhhhhhhhh Shiiiiiiiiiiiiiiiv (वो झटके खा रही थी और में भी, थोड़ी देर ऐसे hi रहने के बाद मेने उन्हें छोड़ा और साइड में लुढ़क गया, वो पेअर फैलाये पड़ी रही, हिल ने की भी ताकत नहीं थी शायद.)
शिव : (थोड़ी देर बाद में उनकी और घुमा और उनके स्तन को सहलाया)
माधुरी : शहहहहह बस शिव में थक गयी हु.
शिव : नहीं कर रहा में.