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लता : आ गया तू, हाथ मुँह धो ले फिर नास्ता देती हु और है थोड़ी लकडिया भी काट देना.
मेने नास्ता किआ और लकडिया काट ने चल दिया. में लकडिया काट रहा था तो वह रंजन आ गयी. मैंने अभी लकडिया काटना सुरु किआ था तो इतनी लकडिया थी नहीं तो वो पास में बेथ गयी और मुझे देखते हुए.
रंजन : कैसा रहा तेरी नौकरी का पहला दिन?
शिव : (मायने रुक कर उसकी और देखा और जवाब दिया) अच्छा था.
रंजन : तू भी फिर यहाँ से चला जायेगा?.
शिव : (मैंने उसकी और सवालिया नजरो से देखते हुए) कहा चलजाउँगा?
रंजन: जो पैसे कमाने लगता है वो फिर यहाँ से चला जाता है, तो तू भी चला जायेगा?
शिव : (मुस्कुराते hue)Nahi.
रंजन : (चहकते हुए) सच्ची?
शिव : है बाबा, में क्यों जाऊंगा. ये नौकरी तो में हम सब के लिए कर रहा हु.
रंजन : (सोच में पद जाती है) हम सब के liye,Matlab?
शिव : हम पढ़ाई करते है तो अच्छी पढ़ने के लिए टेक्स्टबुक के अलावा भी दूसरी बुक्स चाहिए होती है और दूसरे छोटी मोती चीजे जैसे पेन, पेन्सिल ेट्स. हमे कोण पैसे देगा तो इसीलिए जॉब ढूंढी है.
रंजन : मतलब तू हमे भी वो चीजे ला कर देगा?
शिव : है तो.
रंजन : (खुस हो कर )तू कितना अच्छा है.
शिव : चल बाते छोड़ और लकडिया इक्कठी कर.
रंजन : वो तो हो जाएगी. अभी मुहे बैठने दे.
शिव मुस्कुराकर अपना काम करने लगा और वो दोनों इधर उधर की बाते करने लगे. यु hi थोड़ी देर हुई होगी और रंजन हलके से चीखी “ आउच”. और वो अपने शाइन पे हाथ रगड़ने लगी.
रंजन : आउच ! आउच! आईई ! (दरअसल एक कीड़ा उसके अंडर घुस गया था और सायद उसे काट रहा tha.Wo आउच आउच किये जा रही थी.)
शिव : (चिंतित स्वर me)Kya हुआ ऐसे क्यों कर रही है?
रंजन : कुछ अंदर घुस गया है, Ouch,,aaiii अह्ह्ह काट रहा है.
वो ऐसे वैसे हिल रही थी और कीड़ा निकल ने की कोशिस कर रही थी जब उससे न रहा गया तो उसने अपना कुरता निचे से उठा दिया. शिव के तो होश hi उड़ गए. वो उसके सामने कुरता उढ़ाये थी जिस, वजह से उसके ब्रा में कैद चुचिअ दिख रही थी. उस बिचारि को तो और कुछ सूज hi नहीं रहा था कीड़े से बचने के लिए. उसे तो ये भी ध्यान नहीं रहा की वो शिव के सामने अपनी ब्रा में है. जब कीड़े ने काटना अभी बंद न किया तो उसने अपनी ब्रा निचे से पकड़ कर ऊपर उठा दी. उसके चुके बहार आ गए और शिव ने देखा के एक कीड़ा वह से जमीं पर गिरा. फिर शिव की नज़ारे उन चुचो पर अटक सी गयी.

ये उसके जीवन का पहला अनुभव था जब वो किसी लड़की को इस अवस्था में देख रहा था. दो उभरे हुए गोलों पे एक घेरा बना हुआ था और उनके बिच छोटे छोटे डेन लगे हुए थे. जैसे नारियल के दो टुकड़े को उल्टा करके लगा दिए हो. कीड़े के काट ने की वाहह से लाल निशान बन गए थे. वो जहा खड़े थे ये जगह ऐसी थी की लकड़ियों का ढेर लगा होने के कारन कोई उन्हें देख नहीं सकता था. जब कीड़ा निकल गया तो रंजन को एहसास हुआ की वो शिव के सामने किस अवस्था में कड़ी है. उसने शिव की तरफ देखा जो उसकी चुचिओ को hi देख रहा था. उसे इतनी शर्म आयी की जैसे वो धरती में गड जाये. उसने फ़ौरन अपनी ब्रा निचे की और कुरता भी निचे किआ और वह से भाग गयी. शिव बूत बना वह खड़ा रहा. कुछ देर बाद उसे होस आया की वो कैसे खड़ा है. उसे ध्यान हुआ की उसका पंत कैसे उभरा हुआ है और उसको अपने निचे का अंग जो उसने आज तक पेशाब करने के लिए hi उपयोग किआ था वो कैसे अकड़ा हुआ है. उसके दिल में हलचल मची हुई थी. उसने जैसे तैसे काम ख़तम किया और लकडिया खुद hi इकट्ठी कर के किचेन में रख आया. और हाथ पाव धो के अपने कमरे में जा के लेट गया. उसकी आँखों के सामने वो नजारा hi घूम रहा था. उसे रंजन अपना कुरता उठाये नग्न उभारो के साथ नजर आ रही थी. उसने आंखे बंद की फिर भी वो उसके दिमाग से हैट नहीं रही था. उसे तब होश आया जब लता उसे खाने के के लिए बुलाने आयी. वो तो जैसे कुछ सुन hi नहीं रहा था. उसने लता की और न देख कर उसके उभारो की और देखा. लता ने भी ये नोटिस किआ की वो उसके उभारो को देख रहा है. आज तक कभी उसने ऐसा नहीं किआ था. वो उसके पास गयी और उसे हिलाया तो हड़बड़ा गया.
शिव : (लतादिदी की आँखों में देखते hue)K क क्या हुआ?
लता : कहा खोया है तू? चल खाना खाने.
शिव : H..h..ha ch..chalo. (फिर एक बार उसकी नजर लता के उभारो पर चली गयी). आप चलिए में आता hu.(Fir उसने नज़ारे फेर ली).
लता :जल्दी आना (कह कर मुद गयी और चली गयी)
थोड़ी देर बाद शिव भी चल दिया. जब वो खाने बैठा तो उसकी नजर रंजन को धुंध रही थी. जब उसने देखा तो वो नज़ारे झुकाये खाना खा रही थी. शिव का दिल जोर जोर से धड़क रहा था. रंजन की भी हालत कुछ काम न थी. जब उसे पता चला की शिव खाने आ चूका है तो नज़ारे उठाने की उसकी हिम्मत hi नहीं हो रही थी. उसका दिल भी जोर जोर से धड़क रहा था. एक बार उसने हिम्मत कर के शिव की और देखा तो दोनों की नज़ारे आपस में मिलगई तो दोनों ने hi नज़ारे चुरली. रंजन को शर्म आरही थी पर फिर भी उसके चेहरे पर हलकी सी मुस्कान थी. विणा उसके बाजु में hi बैठी थी.
विणा : (कोहनी मरते hue)Kyu अकेले अकेले मुस्कुरा रही है.
रंजन : (विणा की और देखा और फिर शर्मा के निचे देखने lagi)Kuchh nahi(Par उसकी मुस्कराहट अभी भी उसके चेहरे पर थी)
विणा को अजीब लगा पर उसने ज्यादा बात को नहीं खींचा. खेर खाना ख़तम हो गया और शिव कमरे में चला गया. लता दीदी भी काम ख़तम कर के आ गयी. उसने शिव को आंखे बंद कर्म लेते हुए देखा. वो उसके बगल में जा के बेथ गयी. उसे वो याद आया जब शिव उसके उभारो की तरफ देख रहा था. ये पहलीबार था और शिव का ऐसा बेहेवियर उसे अजीब लगा पर साथ में उसके दिल में कुछ हलचल भी मचा गया.
लता : (उसके माथे पे हाथ लगा कर धीरे se)Kya हुआ शिव?
शिव : (उसने आंखे खोली और सामने लता का मुस्कुराता चेहरा देख कर वो भी मुस्कुरा diya.)Kuchh नहीं दीदी, में तो बस ऐसे hi लेता था.
लता : शाम को कितने बजे जाना है.
शिव : 7 बजे दीदी.
लता : वह सब ठीक है न?
शिव : है दीदी सब अच्छा है. कोई इतना काम नहीं है बस देखरेख रखनी होती है.
लता : फिर वो बगल में लेट जाती है और इधर उधर की बाते करने के बाद वो थोड़ी देर सो जाते है.
शाम को में गयम पहुंच गया, इस टाइम भी कुछ लड़के और आदमी आये हुए थे. 8:30 तक वो निकल गए और में भी घर पहुंच gaya.(Anathalay को hi घर समजे). में फ्रेश हुआ, लता दीदी मेरा hi वेट कर रही थी, सब खाना खा चुके थे. हम दोनों मिलकर खाना खा रहे थे. रंजन कही नजर नहीं आ रही थी. सरिता दीदी और बाकि लड़कीअ काम कर रही थी. विणा हमारे पास आयी.
विणा : कुछ चाहिए दीदी?
लता : नहीं विणा. तुम काम करो कुछ चाहिए होगा तो में ले लुंगी.
विणा : ठीक है दीदी, शिव एक बात पुछु?
शिव : पूछो न इसमें पूछनेवाली क्या बात है.
विणा : वो में कह रही थी की हम आज से hi पढ़ना शुरू कर शक्ति है. स्कूल जाने से पहले थोड़ी तयारी हो जाएगी.
लता : अरे वह ये तो अच्छी बात है की तुम पढ़ने में इतना इंट्रेस्ट दिखा रही हो.
विणा : वो शिव ने संजय तो लगा हमे भी पढ़ना चाहिए जिस से हमारी लाइफ अच्छी बन सके.
लता

मुस्कुराकर शिव की तरफ देखती hai)Achchhi बात है.
शिव : ठीक है थोड़ी देर बाद बेथ ते है तुम्हारे कमरे में.
फिर विणा चली गयी. हम लोगोने खाना ख़तम किआ और थोड़ी देर सब अपना काम निपटने में लग गए. फिर लतादिदी और सरितादिदी हमारे रूम में आयी. वो दोनों बाते करना चाहती थी तो में उठके रंजन और विणा के पास चल दिया अपनी कुछ किताबो के साथ. जब में पंहुचा तो रंजन अकेली बीएड पे लेती हुई थी और छत को घर रही थी. उसे मेरे आने तक का पता न चला. मेने उसे देखा तो मुझे वो मंजर दिखने लगा. तो मेरी नजर उसके उभारो की और चली गयी. सीधी लेट रहने की वजह से उसके उभर साफ़ दिख रहे थे. आकर में छोटे थे पर अपनी उपस्थिति जाता रहे थे. जब रंजन को लगा के कोई कमरे में है तो उसकी नजर शिव पर पड़ी उसने देखा की वो उसके उभारो की और देख रहा है तो वो शर्मा गई और उठ बैठी. उसे उठते देख शिव हड़बड़ा गया और उसके चेहरे की और देखने लगा. वो आंखे झुकाये मुस्कुरा रही थी. उसके चेहरे पर शर्म की लालिमा बिखरी हुई थी. उतने में विणा आ गयी और मुझे देख कर बोली.
विणा : आ गए तुम.
शिव : (विणा की और देख kar)Ha.
विणा : चल उठ रंजन मेने शिव को पढ़ने के लिए बुलाया है.
रंजन :पर अभी तो स्कूल खुलने बाकि है न?
विणा : तो क्या हुआ, जब हमने सोच लिया है की पढ़ना है तो फिर पढ़ना है.
रंजन फिर उठी और हमारे पास आ गयी अभी भी वो मुझसे नज़ारे नहीं मिला रही थी और मुझे भी उस से नज़ारे मिलाने में संकोच हो रहा था. खैर हम तीनो निचे जमीं पर hi बेथ गए. दोनों मेरे सामने बेथ गयी. हम लोग ऐसे hi पढ़ रहे थे जब की दूसरी तरफ लता और शारिता बातो में लगी हुई थी. और आज भी उनका टॉपिक शिव hi था.
सरिता : तो शिव अब कमाने लगा है. तो जल्द hi वो यहाँ से चला जायेगा दूसरे लड़को की तरह.
लता : नहीं वो ऐसा नहीं है. वो मुझे छोड़ कर कही नहीं जायेगा.
सरिता : (छेड़ते हुए) O...ho.ooo.. मुझे छोड़ कर, क्या बात है तुजे बड़ा भरोसा है उस पर.
लता : (थोड़ा हड़बड़ाकर ) ह्ह्ह्ह (फिर अपने आप को नियंत्रित कर kar)Ha वो मुझे छोड़ कर नहीं जायेगा, उसी ने कहा है. और अगर कभी जाना हुआ तो वो मुझे अपने साथ ले जायेगा.
सरिता : (मुस्कुरा कर) अच्छा और फिर वो तेरे साथ किस रिश्ते से रहेगा.
लता : किस रिश्ते से क्या मतलब है तेरा, वो मुझे दीदी बोलता है न फिर?
सरिता : वो तुजे दीदी बुलाता है तो क्या तू उसकी बहन हो गयी. और दुनिया वाले मानेंगे की तुम दोनों भाई बहन हो.
लता : क्यों खून का रिस्ता hi सबकुछ होता है क्या. हमारा दिल का रिस्ता है.
सरिता : ठीक है बाबा में तुमसे इस बारे में बहस नहीं करना चाहती. जब वक़्त आएगा तो देखेंगे. चल ये बता तुम दोनों कैसे सोते हो.
लता : कैसे सोते है मतलब, जैसे सोया जाता है.
सरिता : अरे मेरी जान कहने का मतलब पास पास सोते हो या दूर दूर.
लता : पास में hi सोते है क्यों.
सरिता : (आह भरते hue)Haaye एक खूबसूरत जवान लड़का मेरे पास सोता तो में तो सो hi न पति, उस से लिपट hi जाती. तुम दोनों अलग अलग सोते हो या लिपट के?
लता : कभी अलग अलग कभी लिपट के, क्यों उसमे क्या बात है.
सरिता : Haiiii...yar तुजे कुछ होता नहीं क्या?
लता : क्या होता है?
सरिता : तू तो बिलकुल बुद्धू है, चल छोड़ तुजे क्या पता जवानी के रंग क्या होते है. अच्छा चल ये बता शिव कभी तुजे घर के देखता है?
लता : (चिढ़ते hue)Aab ये घर के देखना क्या होता है?
सरिता : अरे मेरी लड़ो, मेरे कहने का मतलब वो तेरे पिछवाड़े को या तेरे शाइन के उभारो को कभी घूरता है क्या?
लता : (उसे वो याद आया जब शिव उसकी छाती की तरफ घर रहा था, वो थोड़ा असहज होती है पर फिर अपने आप को संभल लेती है) नहीं.
सरिता : लगता है वो भी तेरी तरह लल्लू hi है.
लता

उसको मरते hue)Kya बोल रही है?
सरिता : तो और क्या कहु, दोनों जवान हो चुके हो पर फिर भी तुम में कोई अरमान नहीं जगे.
लता : क्या कहना चाहती है तू.
सरिता : अरे में ये कहना चाहती हु की जब लड़का और लड़की जवान होते है तो वो एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते है. लड़के को लड़की आकर्षित करती है और लड़की को लड़का आकर्षित करताहै.
तेरा तो खैर कुछ नहीं हो सकता क्यों की तू शिव के अलावा किसी के संपर्क में नहीं है पर शिव तो तेरे अलावा कई लड़कीओ से मिलता है, देखता है फिर भी उसको लड़कीओ के प्रति कोई आकर्षण नहीं है. अक्षर इस उम्र में लड़के लड़कीओ के अंगो के प्रति आकर्षित हो hi जाते है. ये नेचुरल है. वो लड़कीओ को ऐसे घूरते है जैसे अभी उसे पकड़ कर खा hi जायेंगे. और लड़कीअ भी यही चाहती है की कोई लड़का उसके साथ वो सब करे. पर लगता है तुम दोनों तो किसी और गृह के प्राणी हो.
लता को अब पता चला के क्यों शिव ऐसे उसे घर रहा था तो क्या शिव उसके अंगो के प्रति आकर्षित है. ये सोच कर hi उसके गाल लाल होने लगे. कैसे वो उसके उभारो को घर रहा था. उसके मन में कई सवालो ने जनम ले लिए थे. पर वो सरिता को इस बारेमे कुछ बताना नहीं चाहती थी. तो वो चुप hi रही. पर सरिता कहा मन ने वाली थी.
सरिता : तुम दोनों में कोई गड़बड़ तो नहीं? मुझे चेक करना पड़ेगा.
लता : क्या चेक करना पड़ेगा?
सरिता: यही की तुम लोग नार्मल hi हो न?
लता : (उसको हसी आ रही थी) और तू डॉक्टर है जो तू हमको चेक करेगी.
सरिता : मेरी जान ये सब चेक करने के लिए डॉक्टर होना जरूति नहीं है, तजुर्बेकार होना चाहिए जो की में हु.
लता : (कन्फूसिओं me)Tu क्या करना चाहती है?
सरिता : तुजे जान न है की नहीं की तू नार्मल है की नहीं?
लता : (कुछ सोच कर ) है.
सरिता : तो फिर मुझे चेक काने दे. पहले में दरवाजा बंध कर देती hu.(Wo जा कर दरवाजा बंद कर देती है, लता बस उसे देख रही थी) अब अपनी आंखे बंद kar(Jab वो नहीं करती to)Aariiii कर न.
लता : (अपनी आंखे बंद कर देती है और तभी उसे अपने एक उभर पर सरिता का हाथ महसूस होता है वो तुरंत अपनी आंखे खोल देती है और थोड़ा गुस्से me)Ye क्या कर रही है तू?
सरिता : तुजे जान न है की नहीं? अगर नहीं जान न तो रहने दे में जाती हु.
लता : (सच में मुझे पता तो करना पड़ेगा की में नार्मल हु की नहीं तो वो हथियार दाल देती है) ठीक है.
सरिता : तो फिर अपनी आंखे बंद कर और अब्ब अपनी आंखे मत खोलना और सोच की कोई लड़का हे जो तेरे साथ ये सब कर रहा है और फील कर की तुजे क्या महसूस होता है.
लता कोई जवाब नहीं देती और अपनी आंखे बंद कर लेती है. पर अब वो किसके बारे में सोचे. वो तो एक hi लड़के को जानती थी, शिव. तो क्या ये सोचे की ये शिव कर रहा है. इतना सोचते hi उसके दिल में हलचल होने लगती है. और उतने में hi वो एक हाथ को अपनी चुकी पर महसूस करती है, और वो उसकी चुकी को सेहला रहा है. इतना सोच कर की शिव उसकी चुकी सेहला रहा है उसके सरीर में अजीब सी गुदगुदी होने लगती है और उसकी सांसे तेज तेज चलने लगती है. सरिता जैसे जैसे उसकी चुकी सेहला रही थी उसे अजीब सा नशा चढ़ने लगता है. सरिता अब अपने दोनों हाथो से उसकी चूचिया सेहला रही थी तो लता अपने आंखे जोर से बंद कर लेती है और अपने निचले होठ को अपने दांतो से दबाने लगती है. उसके मुँह से उम्म्म , उम्म्म की कराह निकल ने लगती है. इसका नतीजा ये होता है की उसकी छूट से रास टपकना सुरु होजाता है अपनी छूट में हो रही सरसराहट को महसूस करके वो अपनी झांघो को और सत्ता लेती है. उसको ये एहसास इतना आनंदित कर रहा था की वो बता नहीं सकती. थोड़ी देर के बाद सरिता उसे छोड़ देती है. जब लता ने देखा की सरिता ने उसको छोड़ दिया है तो उसने आंखे खोल दी और सवालिया नजरो से उसे देखने लगी की क्यों बंद कर दिया. सरिता मंद मंद मुस्कुरा रही थी तो लता शर्मा गयी और उसने अपनी नज़ारे झुका ली.
सरिता : इसमें शर्माने की जरुरत नहीं है. ये सब कुदरती है. चल अब इतना पता तो चल गया की तू नार्मल है. तुज में भी लड़कीओ वाली भावनाये है.
लता : (संभल चुकी थी, फिर मुस्कुरा कर ) और क्या पता चला डॉक्टर साहिबा.
सरिता

डॉक्टर वाले टोन me)Aur ये पता चला मिस. लता की आप ये छह रही थी की आप के साथ जो हो रहा है वो चलता रहे. क्यों सही कहा न?
लता

शर्मा कर नज़ारे झुका लेती है)
सरिता : मेरी लड़ो इसमें शर्माने वाली कोई बात नहीं है, ये तो हर आम लड़की चाहती है की उसका मनपसंद लड़का उसके साथ ये सब करे. अब आगे जो करवाना है वो सब उसकी के साथ करवाना जिसके बारे में तू आंखे बंद करके सोच रही थी.
ये कह कर वो है कर बहार चली गयी. और पीछे छोड़ गयी उलझनमे खोयी लता को. लता काफी देर तक ऐसे hi बैठी रही उसे पता hi न चला कब शिव आया.