Adultery Kundali Bhagya - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

hotaks

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Dec 5, 2013
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डिअर रीडर्स,

में ये थ्रेड चालू कर रहा हु अंडर टाइटल 'कुंडली भाग्य'. क्या सच में कुंडली हमारे जीवन में इतना प्रभाव डालती है? पता नहीं. मेने ये स्टोरी ऐसे लिखी है की सुरु में आप को लगेगा की इस टाइटल और इस कहानी का कोई लेना देना नहीं है, पर ये कहानी शिव नाम के ऐसे युवक की है जो किसी कारणवस अपने परिवार से दूर हो गया और पहुंच गया एक अनाथालय में. अब क्या वो अपने परिवार से मिल पायेगा, क्या लिखा है उसके भाग्य में, दूसरे किरदारों के बारेमें आप को पता चल जायेगा पर हेरोइन कोण है वो आप देख लेना. जल्द hi सुरु करते है ये सफर.

इस कहानी का टीवी सीरियल से कोई लेना देना नहीं है, ये काल्पनिक है और दिखाए गए फोटो नेट से लिए गए है.
 
इंडेक्स



फॅमिली इंट्रोडक्शन

अपडेट 01अपडेट 02अपडेट 03अपडेट 04अपडेट 05अपडेट 06अपडेट 07अपडेट 08अपडेट 09अपडेट 10अपडेट 11अपडेट 12अपडेट 13अपडेट 14अपडेट 15अपडेट 16अपडेट 17अपडेट 18अपडेट 19अपडेट 20अपडेट 21अपडेट 22अपडेट 23अपडेट 24अपडेट 25अपडेट 26अपडेट 27अपडेट 28अपडेट 29अपडेट 30अपडेट 31अपडेट 32अपडेट 33अपडेट 34अपडेट 35अपडेट 36अपडेट 37अपडेट 38अपडेट 39अपडेट 40अपडेट 41अपडेट 42अपडेट 43अपडेट 44अपडेट 45अपडेट 46अपडेट 47अपडेट 48अपडेट 49अपडेट 50अपडेट 51अपडेट 52अपडेट 53अपडेट 54अपडेट 55अपडेट 56अपडेट 57अपडेट 58अपडेट 59अपडेट 60अपडेट 61अपडेट 62अपडेट 63अपडेट 64अपडेट 65अपडेट 66अपडेट 67अपडेट 68अपडेट 69अपडेट 70अपडेट 71अपडेट 72अपडेट 73अपडेट 74अपडेट 75अपडेट 76अपडेट 77अपडेट 78अपडेट 79अपडेट 80अपडेट 81अपडेट 82अपडेट 83अपडेट 84अपडेट 85अपडेट 86अपडेट 87अपडेट 88अपडेट 89अपडेट 90अपडेट 91अपडेट 92अपडेट 93अपडेट 94अपडेट 95अपडेट 96अपडेट 97अपडेट 98अपडेट 99अपडेट 100अपडेट 101अपडेट 102अपडेट 103अपडेट 104अपडेट 105अपडेट 106अपडेट 107अपडेट 108अपडेट 109अपडेट 110अपडेट 111अपडेट 112अपडेट 113अपडेट 114अपडेट 115अपडेट 116अपडेट 117अपडेट 118अपडेट 119अपडेट 120अपडेट 121अपडेट 122अपडेट 123अपडेट 124अपडेट 125अपडेट 126अपडेट 127अपडेट 128अपडेट 129अपडेट 130अपडेट 131अपडेट 132अपडेट 133अपडेट 134अपडेट 135अपडेट 136अपडेट 137अपडेट 138अपडेट 139अपडेट 140अपडेट 141अपडेट 142अपडेट 143अपडेट 144अपडेट 145अपडेट 146अपडेट 147अपडेट 148अपडेट 149अपडेट 150अपडेट 151अपडेट 152अपडेट 153अपडेट 154अपडेट 155अपडेट 156अपडेट 157अपडेट 158अपडेट 159अपडेट 160अपडेट 161अपडेट 162अपडेट 163अपडेट 164अपडेट 165अपडेट 166अपडेट 167अपडेट 168अपडेट 169अपडेट 170अपडेट 171अपडेट 172अपडेट 173अपडेट 174अपडेट 175अपडेट 176अपडेट 177अपडेट 178अपडेट 179अपडेट 180अपडेट 181अपडेट 182अपडेट 183अपडेट 184अपडेट 185अपडेट 186अपडेट 187अपडेट 188अपडेट 189अपडेट 190अपडेट 191अपडेट 192अपडेट 193अपडेट 194अपडेट 195अपडेट 196अपडेट 197अपडेट 198अपडेट 199अपडेट 200

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अपडेट 1

डिअर फ्रेंड्स,

ये कहानी एक ऐसे लड़के की है जो सचमुच बेसहारा हो गया. एक अनाथालय में पला बड़ा. न कोई bhai-behan, न ma-baap न रिस्तेदार. इस कहानी के चरक्टेर्स कहानी के दौरान hi आएंगे उनका कोई इंट्रोडक्शन नहीं दिया जायेगा. आशा रखता हु अप्प लोगो को पसंद ए.

एक तीन -चार साल के बच्चे को लेकर एक औरत भीख मांग रही थी. रस्ते पे आने जाने वाले लोगो को अपने bête के खाने के लिए मदद करने की गुहार लगा रही थी. वैसे तो ये एक आम नजारा होता है पर यहाँ एक खास बात ये थी की औरत तो मोती और काली थी पर उसके साथ में जो बच्चा था वो बहोत गोरा और खूबसूरत था. है दुबला जरूर दिख रहा था. जब वो औरत एक कार वाले से भीख मांग रही थी तो वो कार वाला उस लड़के को बड़े ध्यान से देख रहा था.

औरत : बाबूजी कुछ दे दीजिये, मेरा बीटा दो दिन से भूखा है.

आदमी: ये तुम्हारा बीटा है?

औरत : है ये मेरा बीटा है. कुछ दे दीजिये, भगवन आपका भला करेगा.

आदमी ने 50 का नोट निकल कर उसको दिया. उसने उस वक़्त तो कुछ न कहा पर अपनी गाड़ी साइड में लगाने के बाद उसने पुलिस को फ़ोन किआ और वह आने के लिए कह दिया. जब पुलिस आयी तो उस औरत को पकड़ कर वह लाया गया और उसे उस बच्चे के बारेमे पूछताछ की गयी.

पुलिस : ये तुम्हारा बच्चा है?

औरत : (पुलिस को देख कर घबरा gayi)hhhaaa ये ममम मेरा hi बच्चा है.( बार बार पूछने पर वो औरत यही कह रही थी की वो उसका hi बच्चा है. जब एक लेडी कांस्टेबल ने सख्ती से पूछा तो वो दर गयी)

औरत : माफ़ कर दो साहब, ये मेरा बच्चा नहीं है ये मुझे अकेला मिल गया था. उसका कोई नहीं था तो मेने उसे अपने पास रख लिया.

पुलिस : कहा से मिला था और कब?

औरत : साहब, ये एक शराबी के पास था और वो उसे शराब के नशे में मर रहा था तो मेने उसे बचाया और अपने साथ रख लिया. नशे में उस आदमीने बताया था के वो उसका नहीं है और उसे बेचना चाहता है. वो नशे में था तो में उसे लेकर वह से भाग निकली.

पुलिस: कहा से उसे ये बच्चा मिला?

औरत: कलकत्ता में मिला था. में इस बच्चे को अपने साथ ले आयी.

उस औरत को हिरासत में ले लिया गया और उस बच्चे को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया. पुलिस ने उस बच्चे के माता पिता को खोजने के लिए काफी म्हणत की पर उसके बारे में कही कुछ पता न चला. कलकत्ता में भी बहोत ढूंढा यहाँ तक की नेवसपपेर में भी दिया गया पर उसका कुछ पता न चला तो उसे एक अनाथालय भेज दिया गया, ये अनाथालय उसी आदमी का था जिनका नाम जानकीदास था. जानकीदास उस बच्चे को अनाथालय ले गए और वाहके मैनेजर जिसका नाम देवीलाल था उसके हवाले कर दिया. जानकीदास वह से बहोत दूर रहते थे. उन्होंने ये अनाथालय बनवाया था. कभी कभी वो वह आते थे पर ज्यादातर देवीलाल hi सब संभालता था. वह कई बच्चे थे, ज्यादातर लड़किया थी. पता नहीं समाज को क्या दुश्मनी है लड़कीओ से जो उन्हें ठुकरा देते है या फेक देते है जैसे वो कोई कचरा हो. जब बच्चा वह आया था तो वो रो रहा था तो एक लड़की जिसका नाम लता था जिसकी उम्र 5-6 साल के करीब होगी वो उसके पास गयी और उसे चुप करने लगी. लड़के को भी वो अच्छी लगी और वो चुप हो गया. वह कुछ बड़े लड़के लड़कीअ भी थे. जो बड़ी लड़कीअ थी वो बच्चो को सँभालने और अनाथालय की देखभाल करने का काम करती थी. देवीलाल सब से काम करवाता था, चाहे छोटा hi क्यों न हो, काम न करने की सूरत में वो उन्हें मरता, या खाना न देता. देवीलाल एक निहायती कमीना इंसान था, वो अनाथालय के बहाने लोगो से पैसे ऐठता था. वह की लड़कीओ का शोषण भी करता था, जो उसकी बात न मंटा उसे वो मरता. जो लड़के लड़कीअ बड़े हो जाते वो वह से भाग जाते थे. किसी को इन बच्चो की कोई पड़ी न थी. कुछ अच्छे लोग कभी कभी दान धरम करने के लिए अनाथालय आते, खाना और कपडे और दूसरी चीजे दे जाते. ऐसे hi दिन बिट रहे थे, दिन महीनो में बदल गए पर पुलिस को इस लड़के के बारे में कुछ पता न चला, ऐसे hi कुछ साल बिट गए पर जब कुछ पता न छाला तो पुलिस ने भी फाइल बांध कर दी. लता सारा दिन उस लड़के के साथ hi रहती थी, उसी ने उसका नाम शिव रख दिया था. वो शिव के साथ खेलती, सोती, खाना कहती. शिव भी लता के साथ इतना घुलमिल गया था की वो उसके साथ hi रहता था. लता hi उसे नहलाती, खिलाती, अपने hi साथ सुलाती. हलाकि लता भी ज्यादा बड़ी नहीं थी पर शायद लड़कीअ ये सब अच्छे से सिख जाती है. वो दोनों आपस में इतने घुलमिल गए थे की जब कोई दोनों हमेशा साथ hi रहते थे. जब अनाथालय में कोई बच्चा गॉड लेने के लिए आता तो उनकी पहली पसंद शिव hi होता, पर वो लता को छोड़ ने को तैयार hi नहीं होता. जब वो लोग थोड़े बड़े हुए तो लता hi उसकी अच्छे से देखभाल करती और अपने साथ hi स्कूल ले जाती और उसे पद्धति. लता के जितनी hi उम्र की एक और लड़की थी सरिता और दो और लड़कीअ थी जो की शिव की आगे के आस पास की hi थी रंजन और विणा. और भी कई बच्चे थे वह पर. शिव, रंजन और विणा के साथ hi खेलता था. वो सब अभी बच्चे थे तो मैनेजर की मर सहन करते रहते. खेलते कूदते दिन बीतने लगे, कई बार खेलते हुए रंजन और विणा, शिव के सामने hi अपनी चड्डी निकल कर मूतने बेथ जाती, व्हिव गौर से उन्हें मूत ते हुए देखता रहता. और जब शिव मूत ता तो वो दोनों भी देखती थी, बच्चे थे तो ये आम बात थी, पर उनको ये तो पैट चल रहा था की उनके अंदर क्या अलग है. सब मिलके साथ में नंगे hi नहाते थे, जैसे जैसे साल बिट रहे थे, लड़कीओ की छाती में उभर आना सुरु हो गया था. कुछ साल तो ऐसे बाईट पर जब वो और बड़े होने लगे तो सब अलग अलग नहाने लगे. हलाकि शिव को लता उसके साथ कभी कभी नेहला देती थी.

ऐसे hi कई साल बिट गए और आज दसवीं का रिजल्ट था. इतनी तकलीफो के बावजूद शिव बहोत अच्छे नुम्बरो से पास हुआ था. लता एक जवान लड़की बन चुकी थी और शिव भी लम्बे कद का गाभरू जवान बन चूका था. जब वो रंजन और विणा तीनो अपना अपना रिजल्ट ले कर अनाथाश्रम ए तो शिव दौड़ते हुए लता को ढूंढने लगा. लता उसे किचन में काम करते हुए दिखी तो उसने पीछे से उसकी कमर में हाथ दाल कर उसे हवा में उठा लिया. अचानक हुए इस हमले से लता दर गयी और उसके मुँह से चीख निकल गयी. पर शिव कहा रुकने वाला था वो उसे हवा में उठाये gol-gol घूमने लगा. वह काम करती बाकि लड़किया भी jor-jor से हसने लगी. जब लता को पता चला की ये शिव है तो वो भी हसने लगी और बोली

लता : क्या कर रहा है, मुझे निचे उतर में गिर जाउंगी.

शिव : (Gol-gol घूमते हुए) दीदी, में आपको गिरने दूंगा क्या. आप को कुछ हो उस से पहले में अपनी जान न दे du.(Ye कहते हुए उसने लता को निचे उतर दिया.)

लता : (जूठा गुस्सा दिखते हुए उसके गाल पर हलके से चपत लगा ke)Mare तेरे दुसमन. वो तो मुझे दर लग रहा था इस लिए कहा. और बता क्या रिजल्ट आया. तुजे देख कर hi लग रहा है की तू पास हो गया है.

शिव : सिर्फ पास, देखो जरा मेरी मार्कशीट कितने अच्छे नुम्बरो से पास हुआ हु. ये सब आप की hi म्हणत है. आप ने मुझे इस काबिल बनाया है.

लता : (मार्कशीट देखते हुए खुश हो रही थी और चहकते हुए बोली) अरे वह! तू तो मुझसे भी अच्छे नुम्बरो से पास हुआ हे.

शिव : में स्कूल में फर्स्ट आया हु दीदी. टीचर्स और प्रिंसिपल भी मेरी टैरिफ कर रहे थे.

लता : वो तो करेंगे hi, आरी तुम दोनों का क्या हुआ, तुम क्यों पीछे कड़ी हो?

रंजन : हम भी पास हो गए है दीदी, है हमारे नंबर इस बन्दर जितने नहीं है.

शिव : आए तू किसे बन्दर केहरहि है छिपकली?

रंजन : टूजी को कह रही हु खम्भे.

शिव : तूने मुझे खम्भा कहा?

रंजन : है कहा, क्या गलत कहा, खम्भे जितना लम्बा तो हो गया है.

शिव : रुक तू अभी बताता hu(Ye कह कर वो उसकी और बढ़ा तो रंजन भागने लगी.)

लता : तुम दोनों रुक जाओ, क्या बच्चो की तरह लड़ रहे हो, शिईयिव रऊउउक जाआ.

शिव : आज में इसे नहीं छोडूंगा दीदी.

रंजन : बन्दर तू सिर्फ गुलाटी खा, मुझे पकड़ना तेरे बस की बात नहीं.

वो भगनेलगी और शिव उसके पीछे दौड़ने लगा, कभी वो यहाँ भगति कभी वह, कभी किसी खम्भे के पीछे तो कभी लतादिदी के पीछे. ये लोग मस्ती कर रहे थे की वह अनाथालय का मैनेजर देवीलाल वह आया और गुस्से से बोलने लगा.

देवीलाल : ये क्या शोर लगा रक्खा है.

उसकी आवाज शी सब शहीम जाते है. वो था hi ऐसा खड़ूस और एक नंबर का कमीना. वो सबको परेशान करता रहता था. उसने शिव और लता को परेशां करने में भी कोई कसार नहीं छोड़ी थी. शारिता ने हिम्मत करके कहा

शारिता :(दरी आवाज में) वो शिव का रिजल्ट आया है और वो अच्छे नुम्बरो से पास हुआ है इसी लिए.

देवीलाल: (घर कर शारिता को देखता है) तो उसमे इतना हल्ला मचने की क्या जरुरत है. अपने काम में ध्यान दो नहीं तो यहाँ से निकलडूँगा. (शिव को देखते हुए) तू भी जा और काम पे लग जा. पीछे लकडिया पड़ी है उसे काट दे नहीं तो खाना नहीं बनेगा और किसी को खाना नहीं milega.(aur वो वह से चला गया)

शारिता ((धीमी आवाज में ) कमीना साला.

सब दर के मरे अपने अपने काम में लग गए और शिव अपने कमरे में गया हो लता का भी कमरा था वह उसने मार्कशीट रक्खी और कपडे बदल के एक पुराणी t-shirt और एक चड्डा पहना और पीछे बने रूम की और चल दिया. वो भी मान में मैनेजर को गालिया दे रहा था पर कर कुछ नहीं सकता था, क्यों की उसे यहाँ रहना जो था. वर्ण वो कमीना और ज्यादा परेशां करता. अनाथालय के कई लड़के और लड़कीअ थोड़ा बड़े होने पर उसी की वजह से भाग जाते थे. पर वो भाग नहीं सकता था. जाता तो भी कहा जाता. और वो अकेला भी नहीं था लतादिदी भी साथ में थी. वो उन्हें छोड़ नहीं शक्ति था. और अब ये hi उसका घर था.

यहाँ लता और सरिता और दूसरी लड़किया जो छोटी थी और रंजन और विणा सब काम में लग गयी.

शारिता : ऐसे कमीने को यहाँ का मैनेजर बना दिया है. मान करता है उसका खून hi कर दू.

लता : छोड़ न. जब उपरवाले ने हमारी किस्मत hi ऐसी लिखी है तो किसी को क्या दोष देना.

शारिता : सच में लता ये साला ऊपरवाला भी पता नहीं किस से लड़ के बैठा था हमारी किस्मत लिखने. Ma-baap ने तक हमे कचरे में फेक दिया. कमीने पाल नहीं सकते थे तो पैदा क्यों किआ. उनके दस मिनट के मजे के लिए कमीनो ने हमारी पूरी जिंदगी नरक बना दी.

लता : छोड़ न इन बातो को. हम उसमे कुछ नहीं कर सकते.

शारिता : सच कहती हु कभी वो सेल मेरे सामने आ जाये न तो मर मर के कमीनो की हालत ख़राब करदु.

लता : बस कर मेरी माँ, जब देखो तब चंडी बन जाती है. मैनेजर से भी भीड़ जाती है. कभी निकल दिया तो कहा जायेंगे.

शारिता : वो कमीना क्या निकलेगा मुझे. मुफ्त में मजे करने को जो मिलते है मेरे साथ. कभी कह के तो देखे सेल के सरे कारनामे न खोल दू. कमीना यहाँ के पैसे, चीजे जो हमारे लिए लोग दान में दे जाते है वो खुद खा जाता है और ऊपर से यहाँ की लड़कीओ को ख़राब करता है वो अलग. हमारी किस्मत hi ख़राब है. हम जैसी लड़कीओ से कोई शादी भी नहीं करता वर्ण में तो कब से भाग जाती. यहाँ ये एक है और बहार कदम कदम पे ऐसे जानवर भरे पड़े है. और ये ऊपरवाला भी हमे भेज के हमारे बारे में भूल hi गया.

लता कोई जवाब नहीं देती बस उसकी आँखों में भी आँसू भर आते है. वो खुद जानती है कैसे उसने अपने आप को इस मैनेजर से बचके रक्खा हुआ है. आये दिन वो उसे किसी न किसी बहाने से तंग करता रहता है और उस से गन्दी गन्दी बाते कहता है. वो इतना तंग करता है की उसकी 10 वि के बाद पढ़ाई भी छूट गयी. स्कूल के टाइम पे hi उसको काम दे देता था. अक्सर सब को स्कूल दौड़ते हुए hi जाना पड़ता था. रोज दो किलोमीटर से ज्यादा दौड़ना पड़ता था. ऊपर से स्कूल लेट होने पर वह भी पनिशमेंट मिलती थी. वो लड़कीअ थी तो हलकी फुलकी सजा दे के उन्हें छोड़ देते थे पर शिव को 5 या 10 चक्कर पुरे ग्राउंड के लगाने पड़ते थे. इसी लिए उसने शिव की वजह से स्कूल छोड़ दिया ताकि वो समय पर स्कूल पहुंच सके. फिर भी वो शिव को भी ऐसे hi तंग करता रहता था, लकडिए काटना, अनाज की बोरिया रखवाना, बड़े बड़े बर्तन साफ करवाना और उन्हें उठके lana-rakhana वगेरा वगेरा. वैसे तो 6-7 छोटे कमरे और एक बड़ा सा हॉल था वह पर. बड़े हॉल में छोटे बच्चो को रखते थे और साथ में कोई न कोई बड़ा रहता था. ज्यादातर सरिता दीदी उनके साथ रहती थी और कभी कभी लता दीदी, कभी में भी वह सो जाता था. पर ज्यादातर में और लता दीदी एक कमरेमे सोते थे. एक कमरे में रंजन और विणा सोती थी. दोनों के बिच अच्छी दोस्ती थी. एक कमरे में कभी कभी सरिता दीदी सोती थी. बाकि कमरों में सामान रखा था. एक कमरा ऑफिस के लिए था जहा ऑफिस का सामान था. एक कमरा मैनेजर के लिए था. पहले तो वो यही रहता था पर पिछले कुछ सालो से पता नहीं क्यों पर वो ज्यादातर बहार hi रहता है. ये अनाथालय जिनका था वो जानकीदासजी अब यहाँ नहीं आते थे. देवीलाल जब यहाँ होता ता तब वो लड़कीओ को अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिस करता रहता था. पर अब उसकी भी उम्र होने लगी थी. पहले कई लड़कीओ को अपनी हवस का शिकार बना चूका था जिसकी वजह से कई लड़कीअ यहाँ से भाग गयी थी.

रात में शिव लता के साथ में hi रहता था जिसकी वजह से मैनेजर कभी कामियाब न हो पाया वर्ण कई लड़कीओ की तरत लता की भी इज्जत लूट ली होती उसने. अनाथ होने की वजह से उनके बारेमे कोई पूछने वाला नहीं होता. यही सब सोचते हुए वो अपनी आंखे पोछती है और रंजन को कहती है.

लता : रंजन, जा तो जरा शिव के पास उसकी मदद कर देना.

रंजन : जी दीदी.( और रंजन पीछे की और चालिजाति है जहा शिव गुस्से में लकडिया काट रहा होता है.)

रंजन अनाथालय में शिव के पहले से है वो दो तीन दिन की थी जब वो यहाँ आई थी. पर वो शिव के अस्स पास की उम्र की hi है. रंग गेहुआ है पर साफ और उजाला है, दिखने में खूबसूरत है और आंखे भी बड़ी बड़ी है, तीखी नाक के निचे पतले होठ जो देखने में आकर्षक बनाते है. ऐसे माहौल में बड़ी हुई है तो शरीर से थोड़ी पतली hi है. पर जवानी की देहलीज पे है तो शरीर थोड़ा भरने लगा है. छतिया निकल आयी है और अपने चरम पर है, कमर के निचे का हिस्सा भी थोड़ा फ़ैल गया है जो अक्सर लड़कियों के बड़े होने पर होता है. वो उछलती कूदती हुई पीछे पहुँचती है और देखती है की शिव जोर जोर से लकडिया काट रहा है. वो थोड़ी देर उसे देखती है. अब वो जवान होने लगी है तो लड़को को देखने का नजरिया भी बदल चुक्का है. ये वही शिव था जो बचपन से उसके साथ था. उसके साथ खेला, लड़ा, हँसा. बचपन में दोनों एक साथ नहाया भी कर ते थे. पर वो सब बचपन था. अब दोनों बड़े हो चुके थे. वैसे अभी तक शिव ये लड़के लड़कीओ के संभंधो से अनजान था पर रंजन अनाथालय में ये खेल देख चुकी थी तो वो इस मामले में थोड़ी समझदार थी.
 
अपडेट 2

रंजन जब शिव के पास पहुँचती है तो देखती है की वो गुस्से में लकडिया काट रहा है. मैनेजर के ऐसे सितम सेह सेह कर hi वो बड़ा हुआ है तो उसकी बॉडी भी वैसी हो गयी है. रंजन देख रही थी के कैसे वो पसीने से भीग चुक्का है. वैसे उसका शरीर भी ज्यादा भरा नहीं है पर फिर भी म्हणत की वजह से उसके मसल्स कटीले हो चुके है. लम्बे कद और गोर रंग के कारन वो सबसे अलग दीखता था. चेहरा तो इतना भोला भला था की कोई भी उस पे मोहित हो जाये. मुछो के रोए दिखने लगे थे और हलकी हलकी दाढ़ी भी थी. पर अभी वो गुस्से में था जो उसके चेहरे पे साफ़ दिख रहा था. रंजन ने पुराण कुरता पायजामा पहना हुआ था. वो उसको देखते हुए उसके नजदीक जाती है और प्यार से बोलती है.

रंजन : क्या हुआ शिव इतना गुस्से में क्यों हो?

शिव : (घर के उसे देखता है और रूखे स्वरमे कहता hai)Tu क्यों आयी है? जा यहाँ से.

रंजन : वो लता दीदी ने कहा तेरी मदद करने को.

शिव : मुझे किसीकी मदद नहीं चाहिए.

रंजन : (उदास स्वर me)Kisi का गुस्सा मुज पे क्यों निकल रहा है? में तो बस दीदी ने कहा इसी लिए आयी थी.

ये कह के वह पे कटी हुई लकड़ियों को उठा के उनको एक जगह इकठ्ठा करने लगी. वो चुप चाप अपना काम करने लगी. थोड़ी देर बाद शिव ने रंजन को देखा तो वो बजे मन से लकडिया इकठ्ठा कर रही थी. उसका उदास चेहरा देख कर शिव को बुरा लगा तो उसने दुःख भरे स्वर में कहा

शिव : सॉरी!

जब रंजन ने ये सुना तो वो उसके सामने देखने लगी. दोनों एक दो पल एक दूसरे को देख रहे थे. दोनों बचपन से साथ बड़े हुए थे तो लड़ाई झगड़ा चलता रहता है पर वो किसी को दुःख में नहीं देख सकते. रंजन मस्तीखोर थी पर वो शिव के साथ गलत होता देख दुखी हो जाती थी. रंजन ने देखा की उसको दुखी देख शिव का भी चेहरा उतर गया है तो रंजन मुस्कुराई

रंजन : कोई बात नहीं. पर तुम उस कमीने के कारन अपना मूड मत ख़राब किआ करो. तुम बचपन से जानते हो उसे. (ऐसे hi बाते करते हुए दोनों अपना अपना काम करने लगे. जब काफी लकडिया कट गयी तो शिव कुल्हाड़ी रख कर लकडिया िकर्ता करने में हेल्प करने लगा. ये देख रंजन फिर मुस्कुराई तो शिव भी मुस्कुरा दिया.

रंजन : तू न ऐसी छोटी छोटी बातो को दिल से न लगाया कर. उस कमीने की तो आदत है. और हम लोग मजबूर है.

शिव : (गुस्से में ) किसी दिन न में उसका मुँह तोड़ दूंगा.

रंजन : चल अब गुस्सा छोड़. थोड़ी लकडिया लेले दीदी को दे देते है.

दोनों लकडिया ले कर किचन में रख दिया और मुँह हाथ धो कर शिव अपने रूम में चला गया और रंजन किचन में हेल्प करने लगी. जितनी भी लड़कीअ थी वो सब मिलकर यहाँ के काम देखती थी. लता , सरिता और दूसरी दो चार लड़कीअ थी जो थोड़ी बड़ी थी. दूसरे कुछ लड़के लड़कीअ जो अभी बहोत छोटे थे. ज्यादातर बड़े लड़के अनाथालय छोड़ के जा चुके थे. बड़े होने पर या तो वो आवारा बन गए थे या तो पैसे कमाने लगे तो अनाथालय छोड़ कर कही चले गए. वैसे भी मैनेजर सब को डरा धमका कर रखता था जिस वजह से बड़े होने पर सब वह से चले hi जाते थे. लता और सरिता अभी यहाँ तिकी हुई थी और उनसे hi यहाँ का काम चलता था तो मैनेजर उनसे ज्यादा सख्ती नहीं दिखता था. और दूसरा, वो था भी थोड़ा ठरकी तो लड़कीओ को डरा धमका कर या बेहला फुसलाकर उनका शारीरिक शासन करता रहता था. कई लड़कीअ उस से तंग आकर भी चली जाती थी. उसने कई बार लता से भी करना चाहा पर वो किसीने किसी तरह से बच जाती थी. लता के लिए तो जैसे शिव hi सब कुछ बन गया था तो वो उसे छोड़ कर नहीं जाना चाहती थी. तो वो मैनेजर के जुल्म सहते हुए थी वह तिकी हुई थी.

मैनेजर के इसी रवैये की वजह से उनकी पढ़ाई भी छूट गयी थी. वो इतना काम करवाता था के स्कूल के लिए हमेशा लेट हो जाते थे. शिव को भी वो तंग करता रहता था ताकि वो वह से भाग जाये और वो लता पे हाथ साफ कर शेक. स्कूल के समय hi वो उसे कोइना कोई काम दे देता जिस से वो न जप ए. पर लता कैसे न कैसे उसकी मदद कर देती, फिर भी वो लेट hi स्कूल पहुँचता. पुरे रस्ते उसको भागते हुए जाना पड़ता ऊपर से लेट होने पर स्कूल के ग्राउंड के चक्कर लगाने पड़ते वो अलग से. ऐसी सिचुएशन में भी वो अच्छे नुम्बरो से पास हुआ था. वो भी अब बड़ा हो चूका था तो उसका भी मान करता था की वो यहाँ से भाग जाये पर लता उसे ये कह के समजा देती की पहले पढ़ ले जिससे उसको अच्छी नौकरी मिल सके तो वो मन मर कर वह रह रहा था.

वह रसोई में सब लड़कीअ काम कर रही थी. जब रंजन आयी तो लता ने शिव के बारे में पूछा

लता: हो गया सब, शिव कहा गया?

रंजन : हो गया दीदी और आपका लाडला अपने कमरे में गया है. वैसे वो थोड़ा गुस्से में लग रहा था. लकडिया तो ऐसे काट रहा था जैसे मैनेजर का शिर hi काट रहा हो. मुझे लगता है किसी दिन वो सच मच उसका शिर काट देगा.

लता : चुप कर कामिनी, कुछ भी बोले जा रही है. वो बहोत सीधा और अच्छा लड़का है. कभी कभी गुस्सा हो जाता है पर बहोत प्यारा भी है.

सरिता : है और बहोत हैंडसम भी है, एक दम चिकना.

लता : (घूरकर): तू तो चुप hi रह, उसे नजर न लगा.

सरिता : में क्यों नजर लगाउंगी, (अर्थपूर्ण ढंग से मुस्कुराते hue)me तो किसी दिन उसे खा hi जाउंगी.

लता : मुँह न तोड़ दू तेरा जो तू उसे कुछ भी करे तो.

सरिता : (अंगड़ाई लेते हुए) : Hi कितना गोरा चिट्टा है और खम्भे जैसा लम्बा हो गया है. तो उसका सबकुछ लम्बा hi hoga(sab लड़कीअ hi hi करने लगती है).

लता : चुप कर कामिनी क्या बाके जा रही है.

सरिता : हाय… सच कहु तो अगर वो मेरे साथ सोता होता न तो अबतक तो me…(hi hi..)

लता : मरूंगी अब में तुजे. तुजे इतनी आग लगी हुई है तो जा मैनेजर के पास.

सरिता : (चेहरे पर थोड़ी उदासी आ जाती है फिर तुरंत अपने आप को संभल कर) अरे जो बात

शिव में है वो किसी और में कहा. तू hi बता है कोई शिव की टक्कर का?.

लता : (उसे भी सरिता की उदासी दिख गयी और उसे पछतावा हुआ के वो क्या बोल गयी, फिर मुस्कुराती हुई) सच है उसके जैसा लड़का तो यहाँ आस पास कोई भी नहीं. वो है hi ऐसा.

चल अब्ब बाटे छोड़ और काम पे ध्यान दे सब बच्चे भूखे है.

फिर सब ऐसे hi बाते करते हुए जल्दी से खाना बनाते है और सब छोटे बच्चो को पहले खाना खिला देते है. फिर सब बड़े खाने बैठते है.

लता : आरी रंजन जा तो जरा शिव को बुला ला.

रंजन : ठीक है दीदी.

वो शिव को बुलाने उसके कमरेमे जाती है. शिव आंखे बंद करके लेता हुआ था. उसने ऊपर के कपडे उतर दिए थे जो पशीने में भीग गए थे. रंजन ने जब उसको देखा तो बस उसे देखती hi रही. शरीर की साडी मास्स पेशिया दिख रही थी. वो कुछ पल यु hi उसे निहारती रही. उसके दिल में जैसे हलचल सी हो रही थी. वो जवान हो चुकी थी और उसके दिल में एक अलग सी भावनाये पनपने लगी थी. शिव को ऐसे देख कर उसे लग रहा था जा के उस से लिपट जाये. पर जैसे तैसे अपने आप को संभाला और

रंजन : ुहु uhu..(Khasi)

शिव : (बिना देखे रुचे स्वर me)kya है.

रंजन : खाने चलो.

शिव : मुझे नहीं खाना.

रंजन : ठीक है में दीदी को भेजती हु.

शिव : (घूर कर उसे देखते हुए): आता हु.

रंजन मुस्कुराई और चली गयी. जब वो रसोई पोहचा तो सब उसी का वेट कर रहे थे तो वो बेथ गया और खाने लगा. खाने के बाद वापस वो अपने कमरे में आ गया. थोड़ी देर बाद लता भी कमरे में आ गयी. शिव लेता हुआ था जो उसे देखते hi वो उठ के खड़ा हो गया.

लता: क्या हुआ तुजे?

शिव : दीदी आप तो ऐसे बाण रही है जैसे आपको कुछ पता hi नहीं?

लता : देख मुझे पता है पर तुजे भी पता होना चाहिए के ये सब तो रोज का है तो तुजे उसपे ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए. वैसे बहोत अच्छे मुम्बरो से पास हुआ है तू.

ये कह कर वो उसे गले लगा लेती है. शिव का भी मूड ठीक हो जाता है और वो भी लता को कास के अपने शाइन में दबा लेता है.

लता : आउच! थोड़ा आहिस्ता, कितनी ताकत आ गयी है तुजमे पता भी है.

शिव : सॉरी दीदी, पर अभी में तो बच्चा हु, मुज में कहा से ताक़त आ गयी है?

लता : बच्चा है? कितना लम्बा हो गया है, अब तो में तेरे सामने बच्ची लगती हु. किसी की नजर न लगे tujko(keh कर उसका सर सेहला देती है). अब्ब तो तू बड़े स्कूल जायेगा. कल जा के एडमिशन करवा देना.

शिव : हमारे एक टीचर है उन्होंने स्कूल में बात कर ली है और स्कॉलरशिप भी मिली है तो एडमिशन तो हो hi जायेगा.

लता : ऐसे hi मान लगा कर पढ़, इन छोटी छोटी बातो पे ध्यान न दिया कर. हमारे पास और तो कुछ है नहीं तो तू अच्छे से पढ़ाई करेगा तो अच्छी नौकरी कर पायेगा और अपनी जिंदगी सवार पायेगा.

शिव : अपनी नहीं दीदी हमारी. में आप को अपने साथ hi रखूँगा.

लता : (मुस्कुराकर उसका सर सहलाती hai)Baad की बात बाद में देखेंगे.

शिव : नहीं दीदी आप मेरे साथ hi रहेंगी, खाओ मेरी कसम.

लता : (मुस्कुराते हुए) ठीक है बाबा, बस अब इसमें कसम कहा से आ गयी. चल अब आराम कर मुझे भी आराम करना है.

ऐसे hi दोनों लेतेगाये और थोड़ी देर में सो भी गए. उस दिन ज्यादा कुछ नहीं हुआ. दोपहर के बाद सब ने मिलके कपडे धोये और शिव भरी बाल्टियां उठा कर सूखने के लिए देने लगा जो रंजन और विणा मिलकर सूखा रही थी. दूसरे दिन शिव को एडमिशन के लिए जाना था तो सुबह लता ने उसे जगाया. फिर चाय नास्ता करवा कर उसे कहा

लता : चल जल्दी से तुजे नेहला देती हु.

वैसे लता उसे कई बार नेहला देती थी. बचपन में तो रोज दोनों साथ hi नाहा ते थे. दोनों क्या कई लड़के लड़कीअ साथ hi नहाते थे. पर बड़े होने के बाद सब अपने आप नहाने लगे पर कभी कभी लता उसे नेहला देती थी. तो ये कोई नयी बात नहीं थी. आज भी वो उसे रगड़ रगड़ के नेहला रही थी. पर अब दोनों बड़े हो चुके थे तो जाने अनजाने दोनों में कुछ भावनाये जागने लगी थी. अभी दोनों उस से अनजान थे पर शिव को दीदी का यु नहलाना और अपने पुरे बदन को ऐसे छूना अच्छा लग रहा था वही लता को भी ऐसा करना अच्छा लग रहा था. जब नाहा न ख़तम हो गया तो वो तैयार हो कर अड्मिशन के लिए निकल रहा था की मैनेजर ने उसे बुलाया.

मैनेजर : कहा को चल दिए?

लता : (शिव की जगह लता ने जवाब दिया): वो स्कूल में एडमिशन के लिए जा रहा है.

मैनेजर : क्या करे गए पढ़ के? इसे कहो कोई काम धंधा देखे और यहाँ से चलता बने.

लता : उसे अभी पढ़ना है.

मैनेजर ने भी कोई ज्यादा बात को नहीं खींचा और शिव निकल गया. अपने अड्मिशन के लिए.

मैनेजर : तुजे कितनी बार कहा है उसे अपने से चिपकना बांध कर. तुजे यहाँ रहना है तो रह तुजे तो मन नहीं किआ.

लता : वो अभी छोटा है, पहले उसे पढ़ लिख लेने दो हम अपने आप hi चले जायेगे.

मैनेजर को पता था की अगर उसने शिव को निकल दिया तो लता भी चली जाएगी और उसको उसकी जवानी लूटनी थी तो उसने ज्यादा कुछ नहीं कहा. लता अपने काम में लग गयी. शिव नए स्कूल पहुंच गया. ये उसके स्कूल से काफी बड़ा स्कूल था. अनाथालय का एकलौता बच्चा था जो इस स्कूल तक पहुंच सका था. ये भी सेमि गोरनमेंट स्कूल hi था तो यहाँ की फीस भी काम hi थी पर उसको स्कूलरशिप मिली थी तो उसे उतनी भी फीस जमा करने की जरुरत नहीं थी. कई लड़के और लड़कीअ अपने maa-baap के साथ आये हुए थे. जब शिव उनके बिच से गुजर रहा था तो कई लड़के जलन से और लड़कीअ उसे आहे भरके देख रही थी. वैसे वो था भी ऐसा लम्बा ऊँचा की सब में वो अलग hi दीखता था, जिस वजह से वो लोगो की निगाहो का आकर्षण बन hi जाता था. उसने ऑफिस में जा कर सब फॉर्मलिटीज कम्प्लीट की. एक हफ्ते बाद स्कूल खुलने वाले थे तो फिर वो वापस अनाथालय आ गया.

मैनेजर कही बहार गया हुआ था. लड़कीअ सब काम में लगी हुई थी. लता ने उसे देखा और पूछा

लता : हो गया सब ठीक से?

शिव : जी दीदी.

लता : ठीक है कपडे बदल ले. थोड़ी देर में खाना बन जायेगा.

शिव वह से अपने कमरे में चला गया. कपडे बदल के वो छोटे बच्चो के साथ खेल ने लगा वह रंजन और दूसरी लड़कीअ उनके साथ खेल रही थी. वो भी सब में शामिल हो गया. वो बच्चो के साथ बच्चा बन के उन्हें हँसा रहा था ये देख कर रंजन है रही थी.

रंजन : स्कूल में हो गया सब?

शिव : (नोर्मल्ली) है हो गया. एक बात पुछु?

रंजन: (सवालिया नजरो से देखते हुए) इस में पूछ ने वाली क्या बात है, जो पूछ न है पूछ न.

शिव : तुम दोनों को स्कूल में एडमिशन नहीं लेना क्या?

रंजन : लेना तो चाहती हु पर अब तू अलग स्कूल में जायेगा और हमारा स्कूल अलग हो जायेगा तो दर लग रहा है.

शिव : इसमें डरने की क्या बात है. और तुजे दर भी लगता है क्या, तू ऐसी है की किसी की भी हवा टाइट कर दे.

रंजन: (मुस्कुराते हुए शर्मा के नज़ारे झुका कर) क्या में इतनी बुरी हु?

शिव : मेरे कहने का मतलब है की तुम इतनी हिम्मतवाली हो. और में तो हु hi. अगर तुम्हे कुछ बी दिक्कत हो तो मुझे कह देना.

रंजन : (उसकी और दुविधा में देख रही थी पर बोली कुछ नहीं)

शिव : कोई और बात है?

रंजन : (जपते हुए) : नहीं नहीं और कोई बात नहीं?

शिव : (मान में: जरूर कोई बात है) देख तू बताएगी नहीं तो पता कैसे चलेगा.

विणा : तुम्हे पता है न हमारे साथ क्या होता है, हम अनाथालय से आते है ये सुनकर कोई हमसे बात नहीं करता था. अबतक तो हम तीनो थे पर अब तो हम दोनों लड़कीअ hi है तो दर लगता है.

शिव : तो तुम भी इसी लिए स्कूल छोड़ना चाहती हो. तुम्हे क्या लगता है मेरे साथ ये सब नहीं होगा क्या. हम अनाथ है तो इसमें हमारी कोई गलती नहीं है. और लोग बोलते है तो बोलने दो. पर उनकी बातो से हम अपना तो नुकसान नहीं कर सकते. अगर हमे आगे बढ़ना है और अच्छी जिंदगी जिनि है तो हमे पढ़ाई करनी hi पड़ेगी. हमे कोई क्या बोलता है उसे हमे नजर अंदाज कर देना चाहिए. वो भी बच्चे hi है उन्हें क्या पता अनाथ होना क्या होता है. उनको फॅमिली है तो उनको ये सब नहीं पता होता तो वो बोलते है. हमे क्या, हमे तो अपना भविस्य बनाना है न. तो इग्नोर करो ऐसे लोगो को.

रंजन : वो मैनेजर भी कितना तंग करता है.

शिव : में दीदी से बात करूँगा इस बारे में. पर तुम तो मान बनाओ पढ़ने का.

रंजन : ठीक है अगर तू हमारी हेल्प करने के लिए तैयार है तो में भी स्कूल ज्वाइन करुँगी.

विणा : में भी.

इतने में शारिता दीदी आयी और सबको खाने को बोलै. सब लोग छोटे बच्चो को ले कर खाने चले गए और बच्चो को खिलने के बाद सब खाने बेथ गए.

शिव : दीदी आप से कुछ बात करनी thi.(Lata उसकी और देखती है) दीदी ये रंजन और विणा ने पढ़ाई छोड़ ने का फैंसला किआ था पर मैंने उन्हें संजय है तो वो आगे पढ़ने के लिए स्कूल जाने को सहमत हो गयी है.

लता : (दोनों लड़कियों की और देख कर) तो जाओ न इसमें कोण सी पूछ ने वाली बात है.

रंजन : पर वो manager...(baat ाचुरी छोड़ देती है)

सरिता : उसका क्या है, में देखलूँगी उस सेल को. तुम चिंता मूत करो. अगर तुम्हे पढ़ना है तो तुम पढ़ो बाकि सब हम देख लेंगे. क्यों लता?

लता : है तुम लोग चिंता न करो.

शिव : आप ने भी तो पढ़ाई छोड़ दी हे दीदी. आप भी ज्वाइन कर लो.

लता : यहाँ हम hi बड़े है तो हमे ये जिम्मेदारियां उठानी पड़ेगी. तो तुम्ही पढ़ो बाकि सब हम देख लेंगे.

आगे कोई बहेश नहीं हुई. सब ने खाना खाया और में अपने रूम में आ कर लेते गया. कुछ टाइम बाद दीदी भी आ गयी.

लता : बड़ा समझदार हो गया है. अपने साथ साथ दुसरो की थी चिंता करने लगा है.

शिव : (मुस्कुरा कर) आप से hi सीखा हु दीदी. आप सबकी इतनी फ़िक्र करती हो तो में तो सीखूंगा न. पर दीदी आप का पढ़ना भी तो जरुरी है न.

लता : जरुरी तो है पर क्या कर सकते है. और पढ़ाई के लिए स्कूल जाना hi जरुरी नहीं. पढ़ाई हमारा बौद्धिक स्टार बढ़ता है तो अब तू मुझे पढ़ा दिया करना.

शिव : ये सही है. अब तक आप मुझे पद्धति थी अब में आप को पढ़ाऊंगा.

लता : (मुस्कुराते हुए) ठीक है. कल इनका दाखिला भी करवा आना. और तेरा क्या हुआ, सब अच्छे से हो गया न.

शिव : जी दीदी हमारे एक टीचर ने पहले से बात कर ली थी तो वह कोई दिक्कत नहीं हुई. पर दीदी एक बात में सोच रहा था.

लता : क्या?

शिव : दीदी अगर में पढ़ाई के साथ कोई काम धुंध लू तो?

लता : क्यों क्या जरुरत है?

शिव : दीदी पढ़ाई के लिए एक्स्ट्रा किताबे फिर यूनिफार्म और ऐसे hi छोटे मोठे खर्चो के लिए पैसे तो चाहिए होते है. हमे यहाँ रहना और खाना तो मिल जाता है पर... आप समाज रही हो न मेरी बात को.

लता : बोल तो तू सही रहा है, पर उस से तेरी पढ़ाई का नुकसान होगा न.

शिव : नहीं दीदी में सब मैनेज कर लूंगा.

लता : ठीक है पर काम क्या करेगा.

शिव : अभी तक सोचा नहीं पर कुछ कर लूंगा.

लता : ठीक है जैसा तुजे सही लगे.
 
योर रिस्पांस इस माय मोटिवेशन.
 
अपडेट 3

उस दिन और कुछ खास न हुआ. दूसरे दिन रंजन और विणा का एडमिशन करवा दिया. उन्होंने 11वि में एडमिशन ले लिया. उनका भी स्कूल हफ्ते बाद hi सुरु होना था. में मार्किट में घूमने चला गया ताकि कोई काम धुंध सकू. चलते चलते एक जगह बोर्ड देखा जहा उनको कोई काम के लिए लड़का चाहिए था. ये एक गयम था. में वह पहुंच गया. पूरा गयम खली था. ऑफिस में एक आदमी बैठा हुआ था. में वह चला गया.

शिव : क्या में अंदर आ सकता हु?

आदमी : (मुझे उपरसे निचे देखते हुए) आइये.

शिव : थैंक यू सर, वो मैंने बहार बोर्ड पढ़ा आप को एक लड़का चाहिए काम के लिए.

आदमी: है चाहिए तो. कोण हो तुम.

शिव : सर मेरा नाम शिव है.

आदमी : कहा रहते हो?

शिव : जी जानकीदास अनाथालय में.

आदमी : (आश्चर्य से मेरे सामने देखते hue)Tum अनाथ हो?

शिव : जी सर.

आदमी : तो तुम्हे काम नहीं दे सकता.

शिव : पर क्यों सर.

आदमी : मुझे ऐसा लड़का चाहिए जो यहाँ सब देखभाल कर सके और पैसे की लेनदेन कर सके. तुम्हारी गुरंटी कोण लेगा अगर तुम पैसे ले कर भाग गए तो.

शिव : सर अगर किसी ने किसी की गुरंटी ली और वो चोरी कर के चला जाये तो उस गुरांतर की कोई गलती नहीं होगी जो आपका नुकसान भरेगा. और अगर मेरा कोई गुरंटी लेने वाला नहीं तो में कही काम नहीं कर सकता क्या. क्या एक इंसान की कोई अहमियत नहीं. आप बड़े और तजुर्बेकार हो क्या आप किसी को नहीं पहचान सकते की वो कैसा इंसान है. में सालो से यही रहता हु आप चाहे तो मेरे बारे में अनाथालय से पता कर सकते है की मई कैसा हु. है आप हमारे मैनेजर के अलावा किसी से भी पूछ सकते है. मैनेजर हमारा अच्छा आदमी नहीं है इस लिए कह नहीं सकता की वो क्या राइ दे पर उसके अलावा या तो मेरे पिछले स्कूल के किसी भी टीचर से पूछ सकते है मेरे बारे में.

आदमी : (उसकी और गौर से देखता है और फिर मुस्कुरा देता है) कितना पढ़े हो?

शिव : सर अभी 10 पास किया है और 11 में केंद्रीय विद्यालय में एडमिशन लिया है.

आदमी : तो part टाइम जॉब धुंध रहे हो. अच्छी बात है. यहाँ सुबह और शाम को hi आना होगा. और 2500 सैलरी मिले गई. सब का ध्यान रखना होता है कोण कितने बजे आया कोण कितने बजे गया. किसके पैसे जमा है किसके बाकी ये सब हिसाब किताब रखना होगा. कर पाओगे.

शिव : जी बिलकुल कर पाउँगा, थैंक यू सर.

आदमी : कल सुबह 6 बजे आ जाना. और शाम को 7 बजे. बाकि सब कल समजा दूंगा.

शिव : जी सर, (फिर हिचकिचाते हुए) सर आप का नाम जान सकता हु.

आदमी : (हसकर) मेरा नाम पवन है.

शिव : थैंक यू सर, में कल से आ जाऊंगा.

शिव वह से निकल कर अनाथालय आ गया और उसने लता को ये खुस खबरि सुनाई. वो भी बहोत खुस हो गयी. रात को खाने की तैयारियां चल रही थी और शिव और लड़कीअ बच्चो के साथ खेल रहे थे.

शिव : (रंजन और विणा को) अब तुम दोनों की एडमिशन हो गयी है तो तुम्हे पढ़ाई पे ध्यान देना होगा.

रंजन : तुम ने कहा था न की तुम हमारी हेल्प करो गए.

शिव : है तो क्या हेल्प चाहिए.

रंजन : रोज तुम हमारे साथ पढ़ने बैठना.

शिव : ठीक है कल से रोज तुम मेरे साथ पढ़ाई करने बैठना.

वह लता और सरिता बाते कर रहे थे. लता ने जब बताया की शिव ने काम धुंध लिया है तो सभी खुस हो गए.

सरिता : लता तुम्हे नहीं लगता ये लड़का हम सब से अलग है?

लता : (सवालिया नजरो से उसकी और देखती है) नहीं तो तुम्हे क्यों ऐसा लगता है?

सरिता : देख न हम सब को देख कर hi लगता है की हमारे माँ बाप कैसे होंगे. मेरा मतलब है की गरीब परिवार से hi होंगे जो हमारी देखभाल न कर सके. और हमें यु छोड़ दिया. पर शिव दिखने में hi किसी आमिर घर का लगता है. उसका रंग रूप ऐसा है जैसे कोई बहोत बड़े घर का चिराग हो. ऊँचा लम्बा कद गोरा रंग और दीखता भी कितना खूबसूरत है. हम सब तो उसके सामने कुछ भी नहीं. है तेरी बात अलग है. तू अच्छी दिखती है. तेरा रंग भी थोड़ा उजाला है. पर शिव की तो बात hi कुछ अलग है.

लता : (सोच में पद जाती hai)Ha तेरी बात सही है. पर मुझे जितना पता है उसके maa-baap को ढूंढने की बहोत कोशिश हुई थी पर कुछ पता न चला. पता नहीं उसकी कुंडली में क्या लिखा है जो वो यहाँ आ गया.

सरिता : (मजाकिए मुस्कुराते hue)Uski कुंडली का तो पता नहीं पर हमारी कुंडली जरूर अच्छी होगी जो वो हमारे साथ है.

लता : (आंखे दिखते hue)Kya कहना चाहती है तू?

सरिता : यार इतना सोना, सजीला युवक हमारे साथ जो रह रहा है. यार हमारी किस्मत से वो हमारे साथ है तो हमे भी अपनी किस्मत का फायदा उठाना चाहिए न.

लता : कामिनी तू ऐसा वैसा सोचना भी मत. वो बहोत अच्छा लड़का है.

सरिता : अच्छा है तो क्या वो कभी किसी के साथ कुछ भी नहीं करेगा. अगर वो मेरे साथ सोता होता तो अबतक तो उसे अपने ऊपर चढ़ा चुकी होती.

लता : तुजे शर्म नहीं आती ऐसा कहते हुए.

सरिता : अरे मेरी जान जिसने की शर्म उसके फूटे करम. में तो ऐसा मौका नहीं छोड़ने वाली. वो अगर कभी भी मुझसे कहेगा न तो में तो अपने पायजामे का नाडा खोल दूंगी. है ऐसा लड़का कहा मुज जैसी को मिलेगा. वो इतना लम्बा है तो उसका वो भी तो लम्बा होगा. यार ये सोच कर hi मेरे तो पानी आ रहा है. खास वो भी मुज पे ध्यान दे.

लता : अब मर खायेगी तू जो मेरे शिव के बारे में ऐसा बोलै तो.

सरिता : ए है मेराआ शिव.

लता : (हड़बड़ाते hue)Kamini मेरा मतलब है मेरे भाई के बारे में ऐसा बोलै तो.

सरिता : अरे तुम कहे की उसकी बहिन बन गयी. और में कहती हु ये गलती करना भी मात. तेरी अच्छी किस्मत से वो तेरी जिंदगी में आया है तो अब अपना मुँह धोने मात जाना. मौका देख कर चढले अपने ऊपर. तेरी ये खूबसूरत जवानी का क्या अचार डालेगी.

लता : (उसकी बात सुनकर तो एक बार लता को लगा की शिव उसके ऊपर चढ़ गया है ये सोच कर hi उसके अंदर न जाने क्या हलचल हो उठी. उसके दो पैरो के भींच कुछ सरसराहट सी होने लगी पर अपने आप को सँभालते hue)Kamini अपनी गन्दी सोच अपने पास hi रख. वो मेरा भाई है और भाई hi रहेगा. भले खून का रिस्ता न सही पर कोई तो रिस्ता है हमारे बिच.

सरिता : क्यों अपनी किस्मत को ठोकर मर रही है. वो अब बड़ा हो चूका है. और जब लाडलका बड़ा होता है तो उसे भी किसी लड़की का साथ चाहिए होता है. अगर कोई उसे बहार पसंद आ गयी तो फिर उसके पल्लू से बांध जायेगा और तू यु hi हाथ मल्टी रह जाएगी. आगे टीई मर्जी.

लता : तू अब ये बकवास बंद कर और काम में ध्यान दे.

फिर दोनों काम में लग जाती है. रात का खाना खाने के बाद सब अपने अपने ठिकाने सोने चले जाते है. अनाथालय बड़ा था तो सोने में किसी को कोई दिक्कत नहीं थी. बच्चो के रूम में या अलग रूम में सब अपने हिसाब से सो जाते थे. शिव और लता बचपन से hi साथ में सोते थे तो ये अब भी चल रहा था. आज जब लता रूम में आयी तो वो चोरी चोरी शिव को देख रही थी. लगता था आज उस पे सरिता की बातो का जादू चढ़ा हुआ था. वो भी अब पूरी जवान हो चुकी थी तो उसके मन में किसी लड़के की और आकर्षित होना स्वाभाविक था. पर उसने कभी इस बारे में सोचा नहीं था. पर आज सरिता ने उसका दिमाग बिगड़ दिया था. वो अजीब निगाहो से शिव को देख रही थी. उसके मान में जैसे युद्ध चल रहा था. शिव ने भी नोटिस किआ की लता दीदी कुछ अजीब बेहवे कर रही है. जब भी उसकी नजर जाती तो वो कनखियों से उसे hi देख रही होती थी पर नजर मिलते hi वो इधर उधर देखने लगती थी.

शिव : क्या हुआ दीदी?

लता : कक्क कुछ नहीं, कककुछ भी तो नहीं.

शिव : कुछ तो हुआ है, आप क्यों मुझे यु देख रही हो.

लता : (उसका तो गाला hi सुख gaya)kkkKaise दीख रही हु?

शिव उठता है और लता के पास जा कर उसको देखता है लता भी एक तक उसे दखती है और शिव उसे गले लगा लेता है, ऐसे लम्बे कद के लड़के के साथ लता जैसे किसी छोटी बच्ची सी लग रही थी वो बस उसके शाइन तक hi पहुंच प् रही थी. जब शिव ने उसे अपने शाइन से लगाया तो उसकी आंखे hi बंद हो गयी और उसके हाथ भी शिव की कमर का घेरा बनाने लगे. कुछ पल यु hi गुजर गए पर लता तो जैसे किसी और hi दुनिया में थी.

शिव : (बड़े प्यार se)Kya हुआ दीदी?

लता : तू तू ...तू मुझे छोड़ तो नहीं देगा न?

शिव : क्या दीदी आप bhi(Usko और कस्ते hue)Me क्यों भला आप को छोडूंगा.

लता : (लता भी उसे और कास लेती है) तेरी शादी हो गयी तब भी?

शिव : Ha..ha..ha(Haste hue)Kya दीदी आप क्या क्या सोच रही हो. अभी में इतना बड़ा नहीं हो गया की आप ये सब सोच रही हो. और आप को तो पता है हम जैसो के साथ कोण शादी करता है.

लता : हमारी बात अलग है. पर तू अलग है.

शिव : क्या मतलब?

लता : तू तो कितना खूबसूरत और अच्छा दीखता है. तेरे लिए तो लड़कीअ आपस में लाड पड़ेगी. तेरी शादी तो जरूर होगी hi.

शिव : तो भी में आप को साथ hi रखूँगा. और अगर मेरी शादी होगी तो आप की भी तो होंगी.

लता : हम जैसी लड़कीओ से कोण शादी करता है.

शिव : क्यों दीदी आप भी तो कितनी खूबसूरत हो. आप की भी शादी जरूर होंगी.

लता : अगर न हुई तो.

शिव : तो में आप को अपने साथ hi रखूंगा.

लता : और अगर तेरी बीबी न मणि तो.

शिव : (चिढ़ते hue)Kya दीदी आज आपने क्या खाया है जो ऐसी बातो को लेकर बेथ गयी. चलिए अब मुझे नीड आ रही है.

दोनों अलग होते है और दोनों बिस्टेर पर लेट जाते है. शिव अपनी आंखे बंद कर के सोने लगता है पर लता की नींद तो जैसे कोसो दूर थी. वो एक तक शिव को निहार रही थी. उसे वो आज पहली बार एक लड़की की निगाह से देख रही थी.

लता : (मान में : सरिता सच hi बोल रही थी, कितना प्यारा है मेरा भाई)

जैसे hi उसको भाई सुजा एकदम से उसे अपने आप पे शर्म आने लगी की कैसे वो उसे देख रही है. पर शायद आज उसके दिल पे उसका काबू नहीं था. वो शिव की एक बाजु पे अपना सर रख देती है तो शिव भी उसको अपनी आगोश में ले लेता है. ये कोई नयी बात नहीं थी अक्षर ऐसा होता था पर आज लता को एक अजीब सा शुकुन मिल रहा था. थोड़ी देर में वो भी नींद की वदीओ में चली गयी.

सुबह वो उठी तो देखा की शिव गहरी नींद में सोया हुआ है. उसके चेहरे पर एक शुकुन था. वो झुकी और उसके माथे को चूमि. और उसे देखने लगी. न जाने उसको उसके होंठ दिखे और उसकी और बढ़ने लगी. पर जल्द hi संभल गयी. उसने शिव को जगाया क्यों की आज उसे काम पर जाना था तो वो भी उठा और तैयार हो कर गयम चला गया.

सुबह 5:45 को में गयम के बहार खड़ा था. थोड़ी देर में पवन सर आये तो मेने उन्हें गुड मॉर्निंग सर विश किआ तो वो भी गुड मॉर्निंग बोले. फिर हम अंदर गए और उन्होंने साडी लाइट जला दी. गयम काफी शानदार था. गयम के सभी साधन वह मौजूद थे. बड़े बड़े कद के शीशे लगे हुए थे. एक केबिन जो की पवन सर का था और एंटर होते hi रिसेप्शन एरिया जहा एक कार्नर टेबल और चेयर था जिसके पीछे दो तिजोरिया थी. गयम के साधनो वाला एक बड़ा कमरा और एक कमरा खली था जिस पर कालीन बिछा हुआ था जहा भी बड़े बड़े शीशे लगे हुए थे. उसके अलावा एक चेंजिंग रूम और एक स्टोर रूम था. कुल मिलकर काफी बड़ा गयम था.

पवन : अंदर आओ. क्या नाम बताया था तुम ने..?

शिव : जी सर शिव.

पवन : देखो शिव, यहाँ के कई आमिर लोग यहाँ आते है तो उनसे रेस्पेक्ट से बात करना. दो ट्रेनर भी आते है जो अभी आने वाले होंगे. में बाद में उनसे मिलवा दूंगा. फी स्ट्रक्चर के बारे में अभी थोड़ी देर में बताऊंगा जो की एक फाइल में लिखा हुआ है. उसके अल्वा क्या का फैसिलिटीज हम प्रोवाइड करते है उसका एक ब्रोचर है तुम उसे अच्छे से पढ़ लेना. आज सारा काम में hi डील करूँगा तुम्हे सिर्फ मुझे देखना है.

शिव : जी सर.

उतने में एक लड़की अंदर आयी. वो पवन सर को गुड मॉर्निंग विश की और मेरे सामने एक नजर डाली फिर वो चेंजिंग रूम में चली गयी, जब वो बहार आयी तो उसने जैकेट निकल दिया था, कसरत करने वाले चुस्त कपड़ो में आयी थी. ऐसे कपड़ो में मेने कभी लड़कीओ को नहीं देखा था तो उनकी तरफ देख कर में थोड़ा हैरान रह गया. उनके शरीर के सरे उभर स्पस्ट दिख रहे थे. एक दो सेकंड देखा और मैंने नज़ारे घुमा ली. मेरे चेहरे पे आयी शर्म और झिझक देख कर लड़की के चेहरे पर स्माइल तैर गयी. वो 21-22 साल की लड़की लग रही थी. गोर रंग और सुन्दर चेहरे की मालकिन थी. मेने इतनी लम्बी लड़की आज तक नहीं देखि थी. लम्बाई में वो मुज से थोड़ी hi काम थी. उन्होंने अपने बालो को पोनी बनायीं हुई थी. पवन सर वह आये और उन्हों ने मेरा परिचय करवाया.

पवनसीर : जूही ये शिव है. आज से रिसेप्शन संभालेगा और दूसरे काम देखेगा.

जूही : (मैंने उन्हें hello कहा और उन्हों ने एक स्माइल दी, उन्होंने भी मुझे ऊपर से निचे तक देखा) इस बार रिसेप्शन के लिए लड़की नहीं राखी सर.

पवनसीर : तुम्हे पता है जूही, लड़कीअ इतनी जल्दी नहीं आती और अगर मैरिड हुई तोउन्हें घर के काम भी होते है. और अगर ुनमर्रिएद हुई तो शादी की वजह से और दूसरे करने से भी वो थोड़े समय में hi वो चली जाती है. और हमने उसे सीखने में जो म्हणत की होती है वो दोबारा करनी पड़ती है तो इस बार लड़का hi रखा.

जूही : सही सोचा है आप ने.

इतने में कुछ औरते अंदर दाखिल हुई. कुछ ज्यादा उम्र वाली थी तो कुछ काम उम्र वाली थी. उनके पहनावे से hi पता चल रहा था की वो आमिर घरानो से है. हम बहार आ गए. सभी ने जूही मैडम को गुडमॉर्निंग विश किआ जिनका उन्होंने स्माइल के साथ गुड मॉर्निंग कह कर रिप्लाई किआ फिर उन्होंने hi एक रजिस्टर निकला और सभी ने अपने नाम और सिग्न कर दिए और टाइम भी मेंशन कर दिया. और फिर कुछ औरते चेंजिंग रूम में चालीगयी. कुछ औरते घरसे hi कसरत के चुस्त कपडे पहन कर आयी थी और बैग में फॉर्मल कपडे ले कर आयी थी जबकि कुछ फॉर्मल कपडे पहन कर आयी थी और कसरत के कपडे ले कर आयी थी. थोड़ी देर में दूसरी कुछ औरते आयी और कुछ लड़कीअ भी आयी. ऐसे hi सब आते चले गए. सब मुझे एक नजर देख रही थी क्यों की में एक नया चेहरा जो था. उन्होंने कुछ खास रिएक्शन नहीं दिया. कुछ खली रूम में चली गयी और कुछ इक्विपमेंट वाले रूम में. हर जगह ट्रांसपैरंट दरवाजे और शीशे लगे हुए थे तो वह से सब मुझे दिख रहे थे. ऐसा नजारा मेने आज तक नहीं देखा था तो मेरी नजर उस तरफ चली जाती थी पर फिर भी मेने इग्नोर किआ वह देखना. मैंने सोचा ऐसे औरतो को देखना अच्छा नहीं है तो वह पड़े ब्रोचेरस को पढ़ने लगा. कई तरह के ऑफर लिखे हुए थे उनमे. महीने के हिसाब से, 3 महीने के हिसाब, से 6 महीने के हिसाब से और एक साल के हिसाब से पैसे और उसके हिसाब से लाकर का रेंट ेट्स. लिखा हुआ था. में ध्यान से सब पढ़ रहा था और याद करने की कोशिश कर रहा था. एक घंटा कैसे बिट गया पता hi नहीं चला. फिर साडी औरते एक एक करके बहार निकल ने लगी और चेंजिंग रूम में जाकर चेंज करके बहार निकल ने लगी. सब आपस में बाते कर रही थी और सिग्न कर के गयम से निकल गयी. थोड़ी देर में आदमी और लड़के आने लगे. वही रूटीन चला. सब ने सिग्न की कपडे चेंज किए और कसरत करने लगे. मैंने देखा के एक आदमी सबको गाइड कर रहा था. खैर में सब को अलग अलग एक्सरसाइज कर ते देख रहा था. कुछ ने अच्छी बॉडी बनायीं हुई थी तो कुछ लोग अपना वजन काम करने के लिए एक्सरसाइज कर रहे थे. इतने में पवनसीर मेरे पास आये.

पवनसीर: कैसा लगा शिव, काम कर सकोगेना यहाँ.

शिव : जी सर.

पवनसीर : ये बचे 8 बजे ख़तम हो जाता है. उसके बाद थोड़ी साफ सफाई और सब इंस्ट्रूमेंट्स सही जगह रख कर तुम free.(Fir उन्होंने इसारे से उस सख्स को बुलाया जो सब को गाइड कर रहा tha.)Ye शिव है रिसेप्शन और दूसरे काम के लिए रखा है और ये मदन है.

शिव : Hello सर, (वो भी कसरती बदन वाले इंसान थे पर ऊंचाई औसत से थोड़ी hi ज्यादा थी, उन्होंने स्माइल के साथ मेरी पीठ थपथपाई)

पवनसीर : तुम्हे भी एक्सेरसिस का सौक हो तो तुम फ्री समय में कर सकते हो.

शिव : थैंक यू सर.

ऐसे hi टाइम हो गया और मेने सब सेट करदिया और सब जगह साफ सफाई कर दी. वैसे तो पूरा गयम एक था एंड हर जगह से बंद था तो डस्ट तो आने का सवाल hi नहीं था. सब ख़तम करके में अनाथालय चला गया
 
ी नेवर वांट तो गेट आउट ऑफ़ बीएड व्हेन I'm लाइंग नेक्स्ट तो यू.





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अपडेट 4

लता : आ गया तू, हाथ मुँह धो ले फिर नास्ता देती हु और है थोड़ी लकडिया भी काट देना.

मेने नास्ता किआ और लकडिया काट ने चल दिया. में लकडिया काट रहा था तो वह रंजन आ गयी. मैंने अभी लकडिया काटना सुरु किआ था तो इतनी लकडिया थी नहीं तो वो पास में बेथ गयी और मुझे देखते हुए.

रंजन : कैसा रहा तेरी नौकरी का पहला दिन?

शिव : (मायने रुक कर उसकी और देखा और जवाब दिया) अच्छा था.

रंजन : तू भी फिर यहाँ से चला जायेगा?.

शिव : (मैंने उसकी और सवालिया नजरो से देखते हुए) कहा चलजाउँगा?

रंजन: जो पैसे कमाने लगता है वो फिर यहाँ से चला जाता है, तो तू भी चला जायेगा?

शिव : (मुस्कुराते hue)Nahi.

रंजन : (चहकते हुए) सच्ची?

शिव : है बाबा, में क्यों जाऊंगा. ये नौकरी तो में हम सब के लिए कर रहा हु.

रंजन : (सोच में पद जाती है) हम सब के liye,Matlab?

शिव : हम पढ़ाई करते है तो अच्छी पढ़ने के लिए टेक्स्टबुक के अलावा भी दूसरी बुक्स चाहिए होती है और दूसरे छोटी मोती चीजे जैसे पेन, पेन्सिल ेट्स. हमे कोण पैसे देगा तो इसीलिए जॉब ढूंढी है.

रंजन : मतलब तू हमे भी वो चीजे ला कर देगा?

शिव : है तो.

रंजन : (खुस हो कर )तू कितना अच्छा है.

शिव : चल बाते छोड़ और लकडिया इक्कठी कर.

रंजन : वो तो हो जाएगी. अभी मुहे बैठने दे.

शिव मुस्कुराकर अपना काम करने लगा और वो दोनों इधर उधर की बाते करने लगे. यु hi थोड़ी देर हुई होगी और रंजन हलके से चीखी “ आउच”. और वो अपने शाइन पे हाथ रगड़ने लगी.

रंजन : आउच ! आउच! आईई ! (दरअसल एक कीड़ा उसके अंडर घुस गया था और सायद उसे काट रहा tha.Wo आउच आउच किये जा रही थी.)

शिव : (चिंतित स्वर me)Kya हुआ ऐसे क्यों कर रही है?

रंजन : कुछ अंदर घुस गया है, Ouch,,aaiii अह्ह्ह काट रहा है.

वो ऐसे वैसे हिल रही थी और कीड़ा निकल ने की कोशिस कर रही थी जब उससे न रहा गया तो उसने अपना कुरता निचे से उठा दिया. शिव के तो होश hi उड़ गए. वो उसके सामने कुरता उढ़ाये थी जिस, वजह से उसके ब्रा में कैद चुचिअ दिख रही थी. उस बिचारि को तो और कुछ सूज hi नहीं रहा था कीड़े से बचने के लिए. उसे तो ये भी ध्यान नहीं रहा की वो शिव के सामने अपनी ब्रा में है. जब कीड़े ने काटना अभी बंद न किया तो उसने अपनी ब्रा निचे से पकड़ कर ऊपर उठा दी. उसके चुके बहार आ गए और शिव ने देखा के एक कीड़ा वह से जमीं पर गिरा. फिर शिव की नज़ारे उन चुचो पर अटक सी गयी.





ये उसके जीवन का पहला अनुभव था जब वो किसी लड़की को इस अवस्था में देख रहा था. दो उभरे हुए गोलों पे एक घेरा बना हुआ था और उनके बिच छोटे छोटे डेन लगे हुए थे. जैसे नारियल के दो टुकड़े को उल्टा करके लगा दिए हो. कीड़े के काट ने की वाहह से लाल निशान बन गए थे. वो जहा खड़े थे ये जगह ऐसी थी की लकड़ियों का ढेर लगा होने के कारन कोई उन्हें देख नहीं सकता था. जब कीड़ा निकल गया तो रंजन को एहसास हुआ की वो शिव के सामने किस अवस्था में कड़ी है. उसने शिव की तरफ देखा जो उसकी चुचिओ को hi देख रहा था. उसे इतनी शर्म आयी की जैसे वो धरती में गड जाये. उसने फ़ौरन अपनी ब्रा निचे की और कुरता भी निचे किआ और वह से भाग गयी. शिव बूत बना वह खड़ा रहा. कुछ देर बाद उसे होस आया की वो कैसे खड़ा है. उसे ध्यान हुआ की उसका पंत कैसे उभरा हुआ है और उसको अपने निचे का अंग जो उसने आज तक पेशाब करने के लिए hi उपयोग किआ था वो कैसे अकड़ा हुआ है. उसके दिल में हलचल मची हुई थी. उसने जैसे तैसे काम ख़तम किया और लकडिया खुद hi इकट्ठी कर के किचेन में रख आया. और हाथ पाव धो के अपने कमरे में जा के लेट गया. उसकी आँखों के सामने वो नजारा hi घूम रहा था. उसे रंजन अपना कुरता उठाये नग्न उभारो के साथ नजर आ रही थी. उसने आंखे बंद की फिर भी वो उसके दिमाग से हैट नहीं रही था. उसे तब होश आया जब लता उसे खाने के के लिए बुलाने आयी. वो तो जैसे कुछ सुन hi नहीं रहा था. उसने लता की और न देख कर उसके उभारो की और देखा. लता ने भी ये नोटिस किआ की वो उसके उभारो को देख रहा है. आज तक कभी उसने ऐसा नहीं किआ था. वो उसके पास गयी और उसे हिलाया तो हड़बड़ा गया.

शिव : (लतादिदी की आँखों में देखते hue)K क क्या हुआ?

लता : कहा खोया है तू? चल खाना खाने.

शिव : H..h..ha ch..chalo. (फिर एक बार उसकी नजर लता के उभारो पर चली गयी). आप चलिए में आता hu.(Fir उसने नज़ारे फेर ली).

लता :जल्दी आना (कह कर मुद गयी और चली गयी)

थोड़ी देर बाद शिव भी चल दिया. जब वो खाने बैठा तो उसकी नजर रंजन को धुंध रही थी. जब उसने देखा तो वो नज़ारे झुकाये खाना खा रही थी. शिव का दिल जोर जोर से धड़क रहा था. रंजन की भी हालत कुछ काम न थी. जब उसे पता चला की शिव खाने आ चूका है तो नज़ारे उठाने की उसकी हिम्मत hi नहीं हो रही थी. उसका दिल भी जोर जोर से धड़क रहा था. एक बार उसने हिम्मत कर के शिव की और देखा तो दोनों की नज़ारे आपस में मिलगई तो दोनों ने hi नज़ारे चुरली. रंजन को शर्म आरही थी पर फिर भी उसके चेहरे पर हलकी सी मुस्कान थी. विणा उसके बाजु में hi बैठी थी.

विणा : (कोहनी मरते hue)Kyu अकेले अकेले मुस्कुरा रही है.

रंजन : (विणा की और देखा और फिर शर्मा के निचे देखने lagi)Kuchh nahi(Par उसकी मुस्कराहट अभी भी उसके चेहरे पर थी)

विणा को अजीब लगा पर उसने ज्यादा बात को नहीं खींचा. खेर खाना ख़तम हो गया और शिव कमरे में चला गया. लता दीदी भी काम ख़तम कर के आ गयी. उसने शिव को आंखे बंद कर्म लेते हुए देखा. वो उसके बगल में जा के बेथ गयी. उसे वो याद आया जब शिव उसके उभारो की तरफ देख रहा था. ये पहलीबार था और शिव का ऐसा बेहेवियर उसे अजीब लगा पर साथ में उसके दिल में कुछ हलचल भी मचा गया.

लता : (उसके माथे पे हाथ लगा कर धीरे se)Kya हुआ शिव?

शिव : (उसने आंखे खोली और सामने लता का मुस्कुराता चेहरा देख कर वो भी मुस्कुरा diya.)Kuchh नहीं दीदी, में तो बस ऐसे hi लेता था.

लता : शाम को कितने बजे जाना है.

शिव : 7 बजे दीदी.

लता : वह सब ठीक है न?

शिव : है दीदी सब अच्छा है. कोई इतना काम नहीं है बस देखरेख रखनी होती है.

लता : फिर वो बगल में लेट जाती है और इधर उधर की बाते करने के बाद वो थोड़ी देर सो जाते है.

शाम को में गयम पहुंच गया, इस टाइम भी कुछ लड़के और आदमी आये हुए थे. 8:30 तक वो निकल गए और में भी घर पहुंच gaya.(Anathalay को hi घर समजे). में फ्रेश हुआ, लता दीदी मेरा hi वेट कर रही थी, सब खाना खा चुके थे. हम दोनों मिलकर खाना खा रहे थे. रंजन कही नजर नहीं आ रही थी. सरिता दीदी और बाकि लड़कीअ काम कर रही थी. विणा हमारे पास आयी.

विणा : कुछ चाहिए दीदी?

लता : नहीं विणा. तुम काम करो कुछ चाहिए होगा तो में ले लुंगी.

विणा : ठीक है दीदी, शिव एक बात पुछु?

शिव : पूछो न इसमें पूछनेवाली क्या बात है.

विणा : वो में कह रही थी की हम आज से hi पढ़ना शुरू कर शक्ति है. स्कूल जाने से पहले थोड़ी तयारी हो जाएगी.

लता : अरे वह ये तो अच्छी बात है की तुम पढ़ने में इतना इंट्रेस्ट दिखा रही हो.

विणा : वो शिव ने संजय तो लगा हमे भी पढ़ना चाहिए जिस से हमारी लाइफ अच्छी बन सके.

लता :(मुस्कुराकर शिव की तरफ देखती hai)Achchhi बात है.

शिव : ठीक है थोड़ी देर बाद बेथ ते है तुम्हारे कमरे में.

फिर विणा चली गयी. हम लोगोने खाना ख़तम किआ और थोड़ी देर सब अपना काम निपटने में लग गए. फिर लतादिदी और सरितादिदी हमारे रूम में आयी. वो दोनों बाते करना चाहती थी तो में उठके रंजन और विणा के पास चल दिया अपनी कुछ किताबो के साथ. जब में पंहुचा तो रंजन अकेली बीएड पे लेती हुई थी और छत को घर रही थी. उसे मेरे आने तक का पता न चला. मेने उसे देखा तो मुझे वो मंजर दिखने लगा. तो मेरी नजर उसके उभारो की और चली गयी. सीधी लेट रहने की वजह से उसके उभर साफ़ दिख रहे थे. आकर में छोटे थे पर अपनी उपस्थिति जाता रहे थे. जब रंजन को लगा के कोई कमरे में है तो उसकी नजर शिव पर पड़ी उसने देखा की वो उसके उभारो की और देख रहा है तो वो शर्मा गई और उठ बैठी. उसे उठते देख शिव हड़बड़ा गया और उसके चेहरे की और देखने लगा. वो आंखे झुकाये मुस्कुरा रही थी. उसके चेहरे पर शर्म की लालिमा बिखरी हुई थी. उतने में विणा आ गयी और मुझे देख कर बोली.

विणा : आ गए तुम.

शिव : (विणा की और देख kar)Ha.

विणा : चल उठ रंजन मेने शिव को पढ़ने के लिए बुलाया है.

रंजन :पर अभी तो स्कूल खुलने बाकि है न?

विणा : तो क्या हुआ, जब हमने सोच लिया है की पढ़ना है तो फिर पढ़ना है.

रंजन फिर उठी और हमारे पास आ गयी अभी भी वो मुझसे नज़ारे नहीं मिला रही थी और मुझे भी उस से नज़ारे मिलाने में संकोच हो रहा था. खैर हम तीनो निचे जमीं पर hi बेथ गए. दोनों मेरे सामने बेथ गयी. हम लोग ऐसे hi पढ़ रहे थे जब की दूसरी तरफ लता और शारिता बातो में लगी हुई थी. और आज भी उनका टॉपिक शिव hi था.

सरिता : तो शिव अब कमाने लगा है. तो जल्द hi वो यहाँ से चला जायेगा दूसरे लड़को की तरह.

लता : नहीं वो ऐसा नहीं है. वो मुझे छोड़ कर कही नहीं जायेगा.

सरिता : (छेड़ते हुए) O...ho.ooo.. मुझे छोड़ कर, क्या बात है तुजे बड़ा भरोसा है उस पर.

लता : (थोड़ा हड़बड़ाकर ) ह्ह्ह्ह (फिर अपने आप को नियंत्रित कर kar)Ha वो मुझे छोड़ कर नहीं जायेगा, उसी ने कहा है. और अगर कभी जाना हुआ तो वो मुझे अपने साथ ले जायेगा.

सरिता : (मुस्कुरा कर) अच्छा और फिर वो तेरे साथ किस रिश्ते से रहेगा.

लता : किस रिश्ते से क्या मतलब है तेरा, वो मुझे दीदी बोलता है न फिर?

सरिता : वो तुजे दीदी बुलाता है तो क्या तू उसकी बहन हो गयी. और दुनिया वाले मानेंगे की तुम दोनों भाई बहन हो.

लता : क्यों खून का रिस्ता hi सबकुछ होता है क्या. हमारा दिल का रिस्ता है.

सरिता : ठीक है बाबा में तुमसे इस बारे में बहस नहीं करना चाहती. जब वक़्त आएगा तो देखेंगे. चल ये बता तुम दोनों कैसे सोते हो.

लता : कैसे सोते है मतलब, जैसे सोया जाता है.

सरिता : अरे मेरी जान कहने का मतलब पास पास सोते हो या दूर दूर.

लता : पास में hi सोते है क्यों.

सरिता : (आह भरते hue)Haaye एक खूबसूरत जवान लड़का मेरे पास सोता तो में तो सो hi न पति, उस से लिपट hi जाती. तुम दोनों अलग अलग सोते हो या लिपट के?

लता : कभी अलग अलग कभी लिपट के, क्यों उसमे क्या बात है.

सरिता : Haiiii...yar तुजे कुछ होता नहीं क्या?

लता : क्या होता है?

सरिता : तू तो बिलकुल बुद्धू है, चल छोड़ तुजे क्या पता जवानी के रंग क्या होते है. अच्छा चल ये बता शिव कभी तुजे घर के देखता है?

लता : (चिढ़ते hue)Aab ये घर के देखना क्या होता है?

सरिता : अरे मेरी लड़ो, मेरे कहने का मतलब वो तेरे पिछवाड़े को या तेरे शाइन के उभारो को कभी घूरता है क्या?

लता : (उसे वो याद आया जब शिव उसकी छाती की तरफ घर रहा था, वो थोड़ा असहज होती है पर फिर अपने आप को संभल लेती है) नहीं.

सरिता : लगता है वो भी तेरी तरह लल्लू hi है.

लता :(उसको मरते hue)Kya बोल रही है?

सरिता : तो और क्या कहु, दोनों जवान हो चुके हो पर फिर भी तुम में कोई अरमान नहीं जगे.

लता : क्या कहना चाहती है तू.

सरिता : अरे में ये कहना चाहती हु की जब लड़का और लड़की जवान होते है तो वो एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते है. लड़के को लड़की आकर्षित करती है और लड़की को लड़का आकर्षित करताहै.

तेरा तो खैर कुछ नहीं हो सकता क्यों की तू शिव के अलावा किसी के संपर्क में नहीं है पर शिव तो तेरे अलावा कई लड़कीओ से मिलता है, देखता है फिर भी उसको लड़कीओ के प्रति कोई आकर्षण नहीं है. अक्षर इस उम्र में लड़के लड़कीओ के अंगो के प्रति आकर्षित हो hi जाते है. ये नेचुरल है. वो लड़कीओ को ऐसे घूरते है जैसे अभी उसे पकड़ कर खा hi जायेंगे. और लड़कीअ भी यही चाहती है की कोई लड़का उसके साथ वो सब करे. पर लगता है तुम दोनों तो किसी और गृह के प्राणी हो.

लता को अब पता चला के क्यों शिव ऐसे उसे घर रहा था तो क्या शिव उसके अंगो के प्रति आकर्षित है. ये सोच कर hi उसके गाल लाल होने लगे. कैसे वो उसके उभारो को घर रहा था. उसके मन में कई सवालो ने जनम ले लिए थे. पर वो सरिता को इस बारेमे कुछ बताना नहीं चाहती थी. तो वो चुप hi रही. पर सरिता कहा मन ने वाली थी.

सरिता : तुम दोनों में कोई गड़बड़ तो नहीं? मुझे चेक करना पड़ेगा.

लता : क्या चेक करना पड़ेगा?

सरिता: यही की तुम लोग नार्मल hi हो न?

लता : (उसको हसी आ रही थी) और तू डॉक्टर है जो तू हमको चेक करेगी.

सरिता : मेरी जान ये सब चेक करने के लिए डॉक्टर होना जरूति नहीं है, तजुर्बेकार होना चाहिए जो की में हु.

लता : (कन्फूसिओं me)Tu क्या करना चाहती है?

सरिता : तुजे जान न है की नहीं की तू नार्मल है की नहीं?

लता : (कुछ सोच कर ) है.

सरिता : तो फिर मुझे चेक काने दे. पहले में दरवाजा बंध कर देती hu.(Wo जा कर दरवाजा बंद कर देती है, लता बस उसे देख रही थी) अब अपनी आंखे बंद kar(Jab वो नहीं करती to)Aariiii कर न.

लता : (अपनी आंखे बंद कर देती है और तभी उसे अपने एक उभर पर सरिता का हाथ महसूस होता है वो तुरंत अपनी आंखे खोल देती है और थोड़ा गुस्से me)Ye क्या कर रही है तू?

सरिता : तुजे जान न है की नहीं? अगर नहीं जान न तो रहने दे में जाती हु.

लता : (सच में मुझे पता तो करना पड़ेगा की में नार्मल हु की नहीं तो वो हथियार दाल देती है) ठीक है.

सरिता : तो फिर अपनी आंखे बंद कर और अब्ब अपनी आंखे मत खोलना और सोच की कोई लड़का हे जो तेरे साथ ये सब कर रहा है और फील कर की तुजे क्या महसूस होता है.

लता कोई जवाब नहीं देती और अपनी आंखे बंद कर लेती है. पर अब वो किसके बारे में सोचे. वो तो एक hi लड़के को जानती थी, शिव. तो क्या ये सोचे की ये शिव कर रहा है. इतना सोचते hi उसके दिल में हलचल होने लगती है. और उतने में hi वो एक हाथ को अपनी चुकी पर महसूस करती है, और वो उसकी चुकी को सेहला रहा है. इतना सोच कर की शिव उसकी चुकी सेहला रहा है उसके सरीर में अजीब सी गुदगुदी होने लगती है और उसकी सांसे तेज तेज चलने लगती है. सरिता जैसे जैसे उसकी चुकी सेहला रही थी उसे अजीब सा नशा चढ़ने लगता है. सरिता अब अपने दोनों हाथो से उसकी चूचिया सेहला रही थी तो लता अपने आंखे जोर से बंद कर लेती है और अपने निचले होठ को अपने दांतो से दबाने लगती है. उसके मुँह से उम्म्म , उम्म्म की कराह निकल ने लगती है. इसका नतीजा ये होता है की उसकी छूट से रास टपकना सुरु होजाता है अपनी छूट में हो रही सरसराहट को महसूस करके वो अपनी झांघो को और सत्ता लेती है. उसको ये एहसास इतना आनंदित कर रहा था की वो बता नहीं सकती. थोड़ी देर के बाद सरिता उसे छोड़ देती है. जब लता ने देखा की सरिता ने उसको छोड़ दिया है तो उसने आंखे खोल दी और सवालिया नजरो से उसे देखने लगी की क्यों बंद कर दिया. सरिता मंद मंद मुस्कुरा रही थी तो लता शर्मा गयी और उसने अपनी नज़ारे झुका ली.

सरिता : इसमें शर्माने की जरुरत नहीं है. ये सब कुदरती है. चल अब इतना पता तो चल गया की तू नार्मल है. तुज में भी लड़कीओ वाली भावनाये है.

लता : (संभल चुकी थी, फिर मुस्कुरा कर ) और क्या पता चला डॉक्टर साहिबा.

सरिता :(डॉक्टर वाले टोन me)Aur ये पता चला मिस. लता की आप ये छह रही थी की आप के साथ जो हो रहा है वो चलता रहे. क्यों सही कहा न?

लता :(शर्मा कर नज़ारे झुका लेती है)

सरिता : मेरी लड़ो इसमें शर्माने वाली कोई बात नहीं है, ये तो हर आम लड़की चाहती है की उसका मनपसंद लड़का उसके साथ ये सब करे. अब आगे जो करवाना है वो सब उसकी के साथ करवाना जिसके बारे में तू आंखे बंद करके सोच रही थी.

ये कह कर वो है कर बहार चली गयी. और पीछे छोड़ गयी उलझनमे खोयी लता को. लता काफी देर तक ऐसे hi बैठी रही उसे पता hi न चला कब शिव आया.
 
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