Adultery Kundali Bhagya - Page 19 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 127

सरितादिदी मेरे बिस्तर पर बैठी हुई थी, में समाज गया की ये आज मेरे साथ hi सोनेवाली है, पता नहीं पर अब मुझे किसी चीज का दर नहीं था, मुझे ये भी लग रहा था की यहाँ हर कोई सब कुछ जनता है, सब एक दूसरे के बारे में जानते है, भले hi कोई खुल कर बात नहीं करता. मेने किताब बंद की और बिस्तर पर जा कर लेट गया.

शिव : दीदी आप यहाँ? (मेने बस ऐसे hi पूछा था)

सरितादिदी : क्यों नहीं आना चाहिए था? (उन्होंने एक ऐडा से मेरी और देखते हुए कहा, वैसे भी लड़कीओ का थोड़ा नखरा करना बनता है, इस से उनके प्रति एक अलग hi खिंचाव महसूस होता है, वैसे भी में आज पुरे दिन से गरम था, पहले नाज़िआदिदी की वजह से फिर काव्य मैडम की वजह से, मुझे भी सेक्स की सख्त जरुरत थी, और दीदी आयी थी मतलब वो भी तड़प रही थी)

शिव : (उनको खिंच कर मेरे बाजु में लेटाया तो वो बिना किसी विरोध के लेट गयी और मेरी आंखोमे देखने lagi)Mene ऐसा थोड़ी न कहा था, मेने तो बस ऐसे hi कहा था, में ये पूछ रहा था की थोड़ी देर रुकने आयी हो की पूरी रात?

सरितादिदी : (उनके चेहरे पर शर्मीली मुस्कान आ gayi)Jaisa तू कहे.

शिव : (मेने उनके स्तन को कास के दबा दिया तो उनकी सिसकी निकल gayi)Ye कुछ बड़े नहीं हो गए दीदी?

सरितादिदी : शहहहहह इतनी जोर से दबाएगा तो बड़े तो होंगे hi, शहहह थोड़ा धीरे सीईव.

शिव : (हलके हाथो से दबाते hue)Aap को देख कर रहा नहीं जाता, सॉरी.

सरितादिदी : सॉरी मात बोल, वैसे भी तेरे साथ करना है तो दर्द की आदत डालनी hi पड़ती है, (थोड़ी देर उनके स्तन दबाने और किश करने के बाद मेने उनके सरे कपडे निकल दिए और में खुद भी नंगा हो गया, वो बिस्तर पर बैठी हुई थी मेने लुंड उनके मुँह के सामने कर दिया जिसे उन्होंने बड़े प्यार से अपने मुँह में भर लिया, में उनका शिर सेहला रहा था और वो चूस रही थी, वो कभी मेरे लुंड को बहार निकल कर हिला रही थी तो कभी अपने मुँह में ले रही थी, मेने उन्हें थोड़ी देर करने दिया.

शिव : (तक़रीबन दस मिनट बाद मेने अपना लुंड बहार निकला, उन्होंने मेरी और देखा, वो भी समाज गयी और लेट गयी और अपनी टंगे घुटनो से मोड़ कर पकड़ ली और फैला दी, हम दोनों अब एक दूसरे को समझते थे तो कहने की जरुरत नहीं पड़ती थी, मेने उनकी टैंगो के बिच बेथ गया और उनकी छूट को चाट कर उन्हें भी मज़ा देने लगा)

सरितादिदी : शह्ह्ह्ह शीइइइइव शह्ह्ह्हह्ह शह्ह्ह्हह्ह (वो लगातार सिस्किअ ले रही थी, थोड़ी देर उनकी छूट को अच्छे से चाटने के बाद मेने लुंड लगाया और हलके धक्के के साथ लुंड अंदर दाल diya)Ahhhhhh शह्ह्हह्ह्ह्ह. (दीदी मेरे सामने किसी छोटी लड़की की तरह लगती थी, उनका शरीर मेरे सामने बहोत छोटा था, छोटी सी छूट भी पूरी फ़ैल गयी, मेने उन्हें पकड़ कर धक्के लगाने laga)Ahhhhh शह्ह्ह्ह शहहहहह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्हह शहहहहह अह्ह्ह अह्ह्ह शहहह शिईयिव शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह.

शिव : मज़ा आ रहा है दीदी?

सरितादिदी : हा शह्ह्ह्ह बहोत मज़ा आ रहा है शह्ह्ह्ह तेरा बड़ा लुंड मुझे बहोत मज़ा दे रहा है शहहहहह.

पंद्रह मिनट तक में उन्हें छोड़ता रहा, कभी घोड़ी बनाया तो कभी बैठे बैठे, वो झाड़ गयी, और मुज से लिपट कर हांफ रही थी. में उनके कूल्हों को मसलते हुए हलके हलके उन्हें ऊपर निचे कर रहा था.

सरितादिदी : शहहहहह शिईयिव शह्ह्ह्ह, मेरे शिव शहहह. तेरे साथ इतना मज़ा आता है की में बयां नहीं कर शक्ति.

शिव: अभी पूरा मज़ा कहा लिया है, अभी मेरे बाकि है.

सरितादिदी : में जानती हु, मेरा शेर इतनी जल्दी ढेर नहीं होनेवाला, आज में अपने शेर का मेरे पिछवाड़े में लेना चाहती हु.

शिव : दर्द होगा. (मेने उन्हें चेताया)

सरितादिदी : होने दे, ये नया अनुभव मेरे दिमाग में हमेशा के लिए छाप जायेगा, तू हमेशा के लिए मेरे दिल में कैद हो जायेगा. तू रुक में तेल ले कर आती हु. (पता नहीं उनके दिमाग में क्या चल रहा था, वो उठी और दरवाजा खोला और झक के बहार देखा, वो नंगी hi थी, में उनके कूल्हों को देख रहा था, आज उनका उद्घाटन होनेवाला था. बहार सब शांत देख कर वो बहार चली गयी और थोड़ी देर में हाथ में तेल की कटोरी लिए वापस आ गयी, आते हुए वो मुस्कुरा रही थी)

शिव : क्या हुआ?

सरितादिदी : वो में नंगी घर में घूम रही थी न तो ये सोच कर hi हसी आ गयी.

शिव : आप बहोत नटखट हो. में भी यही सोच रहा था की आप बिना कपड़ो के क्यों गयी.

सरितादिदी : ऐसी अतरंगी चीजे करने में मज़ा आता है, ले अब इसे लगा दे. (उन्होंने मेरी और कटोरी बधाई और वो बिस्तर पर उलटी लेट गयी)

शिव : कहा लगाना है? (मेने मज़े लेते हुए पूछा)

सरितादिदी : आ है, अनजान तो ऐसे बन रहा है जैसे कुछ पता न हो, में सब जानती हु की तू सब जनता है, अब ज्यादा नाटक मत कर और अपना काम कर, वैसे भी ये सोच कर मेरी जान हलक में फांसी है की आज तेरा बड़ा लुंड मेरे पिछवाड़े में घुसनेवाला है.

शिव : (मेने तेल लिया और उनके सुडौल कूल्हों पर डाला, अब में बड़े बड़े कूल्हे देख चूका था तो उनके मुकाबले ये छोटे थे पर आकर्षक वैसे hi थे, में कूल्हों को मसलने लगा)

सरितादिदी : कूल्हों पर क्यों तेल दाल रहा है, वह छेड़ में डालना था.

शिव : पता है, पर इन्हे भी थोड़ा चमका दू, वैसे भी आकर्षक है थोड़े और आकर्षक हो जायेंगे.

सरितादिदी : (मंद मंद मुस्काते hue)Achchha शिव ये तो बता, तुम लड़को को ये कूल्हे क्यों इतने पसंद होते है?

शिव : वो तो पता नहीं है दीदी, पर लड़कीओ के कूल्हे उनकी और आकर्षित करते है.

सरितादिदी : वैसे कितनी लड़कीओ के कूल्हे ऐसे नंगे देख चूका है?

शिव : छोडो न दीदी, वो बताने की बात नहीं है.

सरितादिदी : क्यों, इसमें छुपानेवाली कोनसी बात hai.(Mene ऊँगली को तेल में डुबो कर उनकी गांड के छेड़ में dala)Shhhhhhh (अंदर गरम गरम भाठी थी, अजीब लग रहा था, मेने कूल्हे को थोड़ा फैलाकर छेड़ में जाती ऊँगली को देखा, बाटे हमारी जारी थी)

शिव : अभी आप पूछोगी की कितनी फिर पूछोगी कोण, तो में बता नहीं पाउँगा.

सरितादिदी : क्यों? मुझसे कैसी शर्म. (में ऊँगली अंदर बहार करते हुए और तेल लगा रहा था, छडे अंदर से भी चिकना हो रहा था)

शिव : ऐसी बात नहीं है दीदी, पर सोचो , में आपके बारे में किसी को बताऊ तो कैसा लगेगा.

सरितादिदी : ये निर्भर करता है की तू किस को बता रहा है, सिर्फ अपनी बड़ाई करने के लिए किसी लड़के को या किसी अपनी चाहेवाली को, जिस तरह तू मुझे बता सकता है, वैसे hi अगर तू मेरे जैसी किसी और को बताएगा तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है, हो सकता है की इस बात के चलते हम दोनों नजदीक आ जाये.

शिव : ये बात तो आपकी सही है. पर अभी नहीं, अभी तो पहले इस छेड़ ने मेरा हल ख़राब कर रक्खा है, थोड़ा ऊपर हो जाइये (मेने उन्हें घोड़ी बना दिया और फिर से तेल अंदर तक दाल दिया, फिर अपने लुंड पर भी तेल लगा दिया, और लुंड को गांड के छेड़ पर घिसने laga)Aap तैयार हो दीदी?

सरितादिदी : है शिव, पर ध्यान से, मुझे पता नहीं है की क्या होगा?

शिव : चिंता मात कीजिये, कुछ नहीं होगा.

सरितादिदी : है तुजे तो सब पता hi होगा, ठीक है पर आराम से (मेने लुंड को छेड़ पर सताया और अंदर धकेलने लगा, मुझे पता था की थोड़ा जोर लगेगा, एक बार छल्ला पर हो जाये तो फिर कोई दिक्कत नहीं, छेड़ फ़ैल रहा था, लुंड के दबाव से छेड़ अंदर तक डांस रहा tha)Ammmmmm(Unhe शायद दर्द हो रहा था जो वो अपना मुँह दबाये हुए थी, आधेसे ज्यादा सूपड़ा अंदर चला गया था, मेने थोड़ा जोर से धक्का दिया तो छेड़ फैलते हुए लुंड अंदर घुस गया, और टोपा छेड़ में चला gaya)Ahhhhhhh. (में रुक गया, और हाथ आगे बढ़ा कर उनके लटकते स्तन सहलाने लगा)

शिव : दर हो रहा है दीदी?

सरितादिदी : है, ऐसा लग रहा है की छेड़ पूरी तरह फ़ैल गया है, इतना तंग हो गया है की अभी फैट जायेगा.

शिव : कुछ नहीं होगा दीदी, वैसे भी वो छेड़ रोज फैलता सिकुड़ता है तो उसे आदत होती है. पर आपकी इच्छा पूरी हो गयी, आपकी गांड में मेरा लुंड है दीदी.

सरितादिदी : (दर्द में भी मुस्कुराते hue)Tuje कैसा लग रहा है वह?

शिव : बहोत गरम गरम है अंदर.

सरितादिदी : अपने पानी से उसे ठंडी कर देना.

शिव : आप बहोत अच्छी हो दीदी. (वो मुस्कुरायी, थोड़ी देर इंतजार करने के बाद में ने लुंड को थोड़ा हिलाया तो उन्हें रहत थी, में लुंड अंदर डालने लगा जो अब आराम से अंदर जा रहा था, वैसे भी गांड का अंदर का हिस्सा छूट की तरह सिकुड़ा नहीं होता, तो आहिस्ता आहिस्ता मेने पूरा लुंड अंदर दाल diya)Didi, पूरा अंदर चला गया.

सरितादिदी : में महसूस कर प् रही हु शिव, मुझे यकीं नहीं हो रहा है की तेरा इतना बड़ा अंदर चला गया.

शिव : कैसा लग रहा है?

सरितादिदी : अभी तो पता नहीं, पर ये सोच कर की तूने मेरी गांड में अपना लुंड दाल दिया है ये सोच कर hi एक अजीब सी खुसी मिल रही है.





शिव : थोड़ी देर में दूसरी भी खुसी मिलेगी आपको (में हलके हलके धक्के लगाने लगा, तेल की चिकनाहट और मेरे लुंड से निकल रहे रास की चिकनाहट से छेड़ चिकना हो गया था तो लुंड आराम से अंदर बहार हो रहा था, पतली कमर और उसीके हिसाब से चौड़े कूल्हे, उनको और आकर्षक बना रहा था, गोलाकार कूल्हे दबाते हुए में उन्हें छोड़ रहा था, दीदी की आवाजे बता रही थी की उन्हें दर्द भी है पर इसमें में कुछ नहीं कर शक्ति था, में उनकी गांड के छेड़ को देख रहा था, वो बहोत फ़ैल गया था, और छले पर कई जगह खिंचाव से लाला लाल दिखाई दे रहा था, गोलाकार दो कूल्हों के बिच में छोटेसे छेड़ में अंदर बहार हो रहा मेरा लुंड देख कर मुझे जोश आ रहा था, थोडिएर देर उन्हें ऐसे छोड़ते रहने के बाद में थोड़ी तेजी से में धक्के लगाने लगा, अब उनकी सिस्किअ बढ़ गयी थी जो बताता था की अब उन्हें मज़ा आ रहा hai)Achchha लग रहा है दीदी?





सरितादिदी : हआ शिव शहहह अच्छा लग रहा है, छूट जितना तो नहीं पर मज़ा आ रहा है.

शिव : अगर छूट में ज्यादा मजा आता है तो फिर छूट में दालु?

सरितादिदी : नहीं अभी थोड़ी देर इस नए मज़े का मज़ा लेने दे, मुझे पता है की लड़को को लड़कीओ की गांड मरने में बहोत मज़ा आता है, में वो मज़ा तुजे देना चाहती हु, अपनी गांड में तेरे लुंड को अच्छे से महसूस करना चाहती hu(Didi बहोत समर्पित थी मेरे प्रति, में उनका प्यार देख रहा था, मेरी खुसी के लिए वो कुछ भी करने को तैयार थी, थोड़ी देर तक में उनकी गांड मरता रहा, और साथ में उनकी छूट में भी ऊँगली दाल कर छूट का भी मज़ा देने लगा.) दो जगह पर एक साथ छोड़ने का एक अलग hi मज़ा है शिव, तेरी ऊँगली भी मुझे लुंड जैसी लग रही है, शह्ह्ह्हह्ह बहोत अच्छा लग रहा hai.(Thodi देर में उनकी गांड मरता रहा, फिर मेने लुंड बहार nikaldiya)Kya हुआ, बहार क्यों निकल लिया?

शिव : अब में छूट में लुंड डालता हु, आपको वह ज्यादा मज़ा आता है न.

सरितादिदी : तुजे जो करना है कर शिव, मुझे हर तरह से मज़ा hi मिल रहा है.





मेने लुंड बहार निकला और छूट में दाल दिया, तेज तेज धक्को से वो पूरी हिल रही थी, और उनकी सिसकीओ से पूरा कमरा गूंज रहा था, शायद उन्हें इसकी कोई फ़िक्र नहीं थी, लगातार मेरे लुंड से छोड़ने पर वो फिरसे झाड़ गयी, वो बिस्तर पर उलटी लेट गयी थी और हांफ रही थी, मेने फिर से गांड में लुंड दाल दिया, वो थोड़ी करहि पर फिर मजे से सिस्किअ लेने लगी, अपने निचे दबोच कर में उनकी गांड में लुंड डेल जा रहा था, वो पशीने से भीग चुकी थी और में भी, मेने उन्हें निचे दबोच कर उनकी पीठ और गले पर किश करते हुए उन्हें छोड़ रहा था, ऐसे hi हम दोनों काफी देर तक लगे रहे,





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मेने उन्हें सीधा किआ और टंगे पकड़ कर ऊपर ले जाते हुए लुंड गांड के छेड़ में दाल दिया, उन्होंने अपनी टंगे खुद पकड़ ली, में लगातार उनकी गांड में लुंड दाल कर छोड़ रहा था, वो आहे भर रही थी, छूट के मुकाबले गांड में ज्यादा घर्षण मिल रहा था जिस वजह से मेरा भी होनेवाला था.

शिव : दीदी मेरा होनेवाला है.

सरितादिदी : हम्म्म्म शहहहहह अंदर hi डालदे शहहहहह, में भी झाड़नेवाली हु शहहहहह तेरे साथ छोड़ने पर असली सुख मिलता है शहहहहह अह्ह्ह्हह मेरी गांड शहहह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शहहह में गयी शहहह अह्हह्ह्ह्ह maaaaaa(wo झाड़ गयी और आखिर कर मेने भी अपना लावा उनकी गांड में भर दिया, दोनों थक गए थे. (में जैसे hi साइड में लेता दीदी मेरी साइड से मेरी बाहोंमे आ gayi)Kaisa लगा तुजे? (उन्होंने मेरा लुंड पकड़ लिया और सहलाने लगी)

शिव : बहोत मज़ा आया, आपको?

सरितादिदी : मुझे भी (वो मुझे किश करने लगी और में उनके कूल्हों को मसल रहा था, थोड़ी देर हम दोनों ऐसे hi किश करते रहे).

शिव : यही सोनेवाली हो?

सरितादिदी : है, क्यों कोई दिक्कत है तुजे?

शिव : नहीं, ऐसे hi पूछ रहा था. (वो मेरा लुंड सेहला रही thi)Fir से करना है?

सरितादिदी : (उन्होंने शर्मा के मुझे देखा फिर मुस्कुराते हुआ kaha)Ha.

शिव : थकी नहीं?

सरितादिदी : थक गयी हु पर दिल नहीं मंटा, ऐसा लगता है की तेरा ये अंदर लिए hi rahu.(Unki बात सुन कर में मुस्कुराया, थोड़ी देर बाद फिर से मेने उन्हें छोड़ा,





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मेरा दूसरी बार था तो पानी निकलने में वैसे भी देर लगी, आखिर कर हम दोनों थक कर वैसे hi सो गए)

दूसरी और काव्य को नींद hi नहीं आ रही थी, आज जो कुछ भी हुआ था वो उसे बार बार महसूस कर रही थी, उसका दिल बेचैन था, कभी वो अपनी झांघो को सेहला देती तो कभी उसका हाथ अपनी छूट पे चला जाता था, उसको इस बेचैनी की वजह समाज नहीं आ रही थी, वो बार बार शिव को याद कर रही थी. अपनी बेचैनी को काम करने के लिए उसने सोने का प्रयास किआ पर नीं भी जैसे कोसो दूर थी.

यहाँ सुबह दरवाजा खत खतने की आवाज से मेरी नींद खुल गयी, सरितादिदी अभी भी नंगी hi लेती हुई थी.

शिव : कोण?

लतादिदी : में हु, स्कूल नहीं जाना क्या?

शिव : (लतादिदी की आवाज थी, पर में नार्मल hi रहा, में इतना तो समज चूका था की ये दोनों आपस में अच्छी सहेलिया है और एक दूसरे की राजदार भी है तो मेने नॉर्मली hi जवाब diya)Jana है दीदी, आप चलिए, में आता हु.

लतादिदी : ठीक है. (उनके कदमो की आवाज दूर जाती सुनाई दे रही थी, में उठा और सरितादिदी को उठाया)

शिव : डीडीई, उठो, सुबह हो गयी है.

सरितादिदी : नींद में hi, में आती हु तू जा. (अब में क्या कहता, में दरवाजा ऐडा के बहार निकल गया, और बाथरूम में घुस गया)

सरिता उठी, अपने कपडे पहने, उसकी गांड के छेड़ में दर्द हो रहा था, पर बहार तो जाना hi था. उसने थोड़ा सा दरवाजा खोला और बहार देखा, किचन से आवाजे आ रही थी, पर वह कोई नहीं था, वो बहार निकली और चलते हुए बाथरूम की और जाने लगी, गांड में दर्द हो रहा था तो वो अपनी टंगे फैलाये चल रही थी. बाथरूम से जब वो किचन में पहुंची तो वह सब थे, लता गैस पर कुछ पका रही थी, विणा और रंजन रोटीआं बेल रही थी और गायत्री रोटीआं सेक रही थी, सरिता ने बहोत सँभालने की कोशिस की पर वो ठीक से चल नहीं प् रही थी, वो अपनी टंगे फैलाये हुए चल रही थी, जब रंजन की नजर पड़ी तो वो अपना मुँह दबाये हसने लगी, जिसे देख विणा ने भी सरितादिदी को देखा, वो बड़े गौर से उन्हें देख रही थी, उनकी हालत से वो समाज रही थी की क्या हुआ होगा, पर उसको हसी नहीं आ रही थी बल्कि दीदी पर दया आ रही थी. गायत्री की भी नज़र पड़ी, वो जानती तो थी पर फिर भी सरीतकी खिंचाई करते हुए बोली

गायत्री : ऐसे क्यों चल रही है, कुछ हुआ है क्या? (बोलते बोलते उनकी भी हसी निकल गयी)

लतादिदी : क्यों उसको तंग कर रहे हो, अपना अपन काम करो (सरिता ko)Tu क्यों आयी, थोड़ी देर आराम कर लेती.

सरिता : (थोड़ा शरमाते hue)Nahi में ठीक हु, बस वो बाथरूम में पेअर फिसल गया तो दर्द हो रहा है. (गायत्री और रंजन जोर जोर से हसने लगे)

लता : चुप, चुप बोलै न.

यहाँ सब को पता था की क्या हुआ होगा, पर फिर भी सब खुल कर नहीं बोल रहे थे, सब जानते थे की उनकी भी ऐसी hi हालत होती है, हर कोई सब कुछ जानते हुए भी एक दूसरे की इज्जत नहीं उछाल रहे थे, सब आपस में एक दूसरे से जुड़े हुए थे. विणा को ये देख कर बहोत आश्चर्यहो रहा था.

सरिता : ला, में सब्जी का ध्यान रखती हु तू कुछ और कर ले.

में पंहुचा तो सब काम में लगे हुए थे. थोड़ी देर बाद में नास्ता कर के वह से निकल गया. आज भी रस्ते में मुझे वैस्वी और संयम मिल गए, नाज़िआ दीदी भी थी. जब में वह पंहुचा तो संयम बोली.

संयम : लो शिव आ गया, अब चले?

शिव : क्यों क्या हुआ?

संयम : कुछ नहीं, मेने कहा की स्कूल चलते है तो ये वैस्वी कह रही थी की शिव को आ जाने दो साथ में चलते है.

शिव : मतलब तू नहीं चाहती थी की में स्कूटर पर औ.

संयम : मेने ऐसा कब कहा, पर ये अब बदल गयी है, पहले तुजसे दूर भगति थी, और अब जब देखो तब शिव शिव करती रहती है. (उसकी बाते सुन कर मेने देखा की वैस्वी बहोत शर्मा रही थी, और अपनी नज़ारे झुकाये कड़ी थी)

नाज़िआ : अब देर नहीं हो रही तुमलोगो को?

संयम : में तो कब से कह रही थी, आइये शिव महाराज, बिराजिये ताकि हम जा सके. (में हस्ते हुए स्कूटर पर बेथ गया, संयम फिर से मेरे पीछे hi बैठी, और आखिर में वैस्वी, जैसे hi हम नाज़िआ दीदी से दूर हुए, संयम ने मेरी कमर में हाथ दाल दिया, मुझे ऐसा लग रहा था की जैसे उसने जितनी जरुरी था उस से ज्यादा जोर से पकड़ा हुआ था, और साथ में वो अपने स्तन भी मेरी पीठ पर दबा रही थी, अक्सर लड़कीअ ऐसे बैठती है की उसके स्तन आगे पीठ पर न लगे, पर संयम के स्तन मुझे अपनी पीठ पर महसूस हो रहे थे, मेने उसे नॉर्मली hi लेने का सोचा, और में स्कूल की ार बढ़ता रहा.)

स्कूल में भी आज हम सब साथमे hi बैठे थे, वैस्वी ऐसे बैठी थी की उसका शरीर मुज से टच हो रहा था, एक बार तो उसने मेरे हाथ पर भी अपना हाथ रख दिया, सब खाने में लगे हुए थे तो किसी का ध्यान नहीं गया, मेने उसकी और देखा तो वो शर्मा के मुस्कुराने लगी. स्कूल से लौट ते वक़्त भी संयम वैसे hi बैठी थी, उसका हाथ फिसल कर मेरे लुंड वाले भाग पर भी चला गया था, वैसे भी उसके ऐसे पकड़ने से लुंड में थोड़ा तनाव तो था hi, उसने और कोई तो हरकत नहीं की पर अपना हाथ वैसे hi राख्छोडा. मेरी समाज में नहीं आ रहा था की ये सब वो जानबूझकर कर रही है की अनजाने में. मेने उसे घर छोड़ा और में अपने रस्ते निकल गया. कंस्ट्रक्शन साइट पैर जब में पंहुचा तो जैसे भोली मेरा hi इंतजार कर रही थी. में अपने काम में लग गया, भोली से ज्यादा झुमरी मेरे सामने नखरे दिखा रही थी.

ऐसा इस लिए हो रहा था की जुमारी, कमली और भोली में उस कल की बात को ले कर चर्चा हुई थी, जुमारी, भोली के पीछे hi पद गयी थी, क्या हुआ क्या हुआ पूछे जा रही थी, भोली कुछ नहीं बता रही थी, जुमारी ने बहोत मनाया तब जेक भोली ने जो कुछ हुआ वो बताया, जिसे सुन कर झुमरी आश्चर्य से भर गयी,

झुमरी : क्या सच में तूने उसका लुंड चूसा था?

भोली : है, अगर तू अपनी तंग न ादती तो शायद बाबू मुझे छोड़ भी लेता. तेरी वजह से सब ख़राब हो गया, कितना मज़ा आ रहा था, बाबुका लुंड कितना मस्त गोरा गोरा था, और बड़ा इतना की मुँह में भी नहीं समां रहा था, मेरी तो छूट पानी पानी हो गयी थी. कामिनी तू न आती तो बाबू का वो लुंड में अपनी छूट में ले भी चुकी होती.

झुमरी : क्या सच में इतना बड़ा था? (कमली भी शांति से सब सुन रही थी)

भोली : तो क्या में झूठ बोल रही हु, बाबू का लुंड कितना मस्त था, मुझे तो अभी भी वही दिखाई दे रहा है, मेरी छूट में तो अभी भी पानी आ रहा है.

झुमरी : तुजे दर नहीं लगता?

भोली : इसमें डरना कैसा, मेने तो सुना है की इतना बड़ा लुंड तो नसीबवाली को मिलता है, कल तो में बाबू को पकड़ hi लुंगी, और तुजे कह देती हु, अबकी बार बिच में आयी तो तेरी खैर नहीं.

झुमरी : क्यों, वो तेरा खसम है क्या, में भी बाबूसे छुडवाउंगी. (ऐसे hi दोनों लड़ झगड़ रही थी)

आज भी झुमरी बार बार मुझे रिझाने की कोशिस में मेरे आगे पीछे घूम रही थी, वो मेरे सामने अपनी गांड मटकते हुए चलती और मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी, झुमरी के बार बार ऐसा करने से भोली को चांस नहीं मिल रहा था, वो दोनों कभी कभी आपस में उलझ भी रही थी.

भोली : तू क्यों बार बार मेरे रस्ते में आ रही है?

झुमरी : तो क्या, बाबू सिर्फ तेरा hi है, मुझे भी वो पसंद है, अगर वो मेरे साथ भी करे तो तुजे क्या दिक्कत है?

भोली : बाबू को सिर्फ में hi पसंद हु, वो मेरे साथ hi करेगा, देखलेना.

झुमरी : देखलेंगे.

में उन्दोनो की हरकते देख रहा था, पर सुपरवाइजर और में दोनों साथ में काम देख रहे थे तो कोई मौका नहीं मिला था उन दोनों को. शाम को मेने भार्गवी मैडम को भी फ़ोन किआ तो वो बिजी थी. मेने सोचा की एक बार काव्य मैडम को भी पूछ लू की अब कैसा है तो मेने उन्हें फ़ोन लगा दिया.

काव्य : Hello.

शिव : Hello, में शिव बोल रहा हु.

काव्य : तुम्हारा नंबर सेव है, मुझे पता है, कहो. (काव्य को बहोत शर्म आ रही थी, शिव से बात करने में, कल की घटना के बाद वो देर तक सो नहीं पायी थी, बार बार उसे अपनी योनि के पास शिव का वो स्पर्श महसूस हो रहा था, कैसे उसने शिव को वह छूने दिया था ये सोच सोच कर hi उसे शर्म आजाती थी, कभी कभी वो अपने आप पर गुस्सा भी हो जाती thi,ki कैसे वो ऐसा कर सकती है, पर फिर खुद को hi वो समजती थी की कबतक वो ऐसे कुवारी रहेगी, शादी उसे करनी नहीं थी, पर क्या सेक्स भी नहीं कर शक्ति. कभी कभी उसका मान कहता की अगर सेक्स hi करना है तो शादी कर ले, पर फिर मान और भी कहता की सिर्फ सेक्स के लिए शादी? न जाने कितनी hi बार वो ऐसे तर्क वितर्क कर चुकी थी.)

शिव : मेने बस तबियत पूछने के लिए फ़ोन किआ था, अब दर्द कैसा है? (अब उसे दर्द नहीं था, पर फिर भी उसने कोई जवाब नहीं diya)hello , क्या हुआ मैडम? मेने पूछा, की दर्द कैसा है?

काव्य : है अभी थोड़ा थोड़ा. (उसे खुद समाज नहीं आ रहा था की वो जूथ क्यों बोल रही है)

शिव : (थोड़ा चिंतित होते hue)Agar दर्द था तो फिर डॉक्टर के पास गयी थी आप?

काव्य : नहीं, उतना नहीं है, रहत है.

शिव : क्या में आजौ? (काव्य खामोश हो गयी, एक तरफ तो वो चाहती थी, पर दूसरी और उसे ऐसा करना चिप भी लग रहा था, उनको खामोस देख मेने फिर puchha)Kya में फिर आ जाऊ?

काव्य : में तुम्हे तकलीफ देना नहीं चाहती. (उसने सीधे सीधे इंकार भी नहीं किआ)

शिव : इसमें तकलीफ कैसी, ठीक है में आता हु थोड़ी देर में.

शिव ने फ़ोन काट दिया था, पर काव्य फ़ोन को हाथ में लिए फ़ोन को hi देख रही थी. वो समझने का प्रयत्न कर रही थी की वो क्या कर रही है, उसे ऐसा कोई दर्द नहीं है की उसे शिव से मालिस करवानी पड़े, पर उसको शिव का ऐसे छूना अच्छा लगने लगा था, वो सिर्फ पंतय में उसके सामने थी, ये सोच कर hi उसकी छूट में रिसाव होने लगा था, और जिस तरह शिव ने उसके अंग को छुआ था वो इतनी ज्यादा उत्तेजित महसूस कर रही थी की उसको अपने मान पर काबू hi नहीं था. पता नहीं आज क्या होगा, क्या वो फिर से उसके साथ वैसा hi करेगा, या और कुछ भी करेगा, क्या वो उसे करने देगी, मान तो उसका बहोत कर रहा था पर फिर भी कही न कही एक झिझक थी, वैसे तो उसको पता था की मर्द और औरत के बिच कैसे रिश्ते होते है पर फिर भी वो सब सुनी हुई बाटे थी, कभी उसने महसूस नहीं किआ था, न hi इतना ज्यादा खुल कर उसे पता था. वो बैठे बैठे न जाने क्या क्या सोच रही थी की दरवाजे की घंटी बजी, आज उसने गाउन पहन रक्खा था, उसकी धड़कने तेज चलने लगी, वो भरी कदमो से दरवाजे की और बढ़ी, धड़कते दिल से उसने दरवाजा खोला, सामने शिव hi था, उसकी मुस्कान देख उसके चेहरे पर मुस्कान तो आयी पर फिर अपने खयालो को सोच कर उसको शर्म आयी और उसने नज़ारे झुकाली और शिव को अंदर आने को कहा.

मैडम का व्यव्हार कुछ अजीब था, वो शर्मा रही थी और थोड़ी परेशान भी लग रही थी, शायद कल की वजह से, वो मेरे साथ किस परिस्थिति में थी, ये सोच कर मुझे भी एक अजीब सी उल्जन हो रही थी, मेने अंदर आते हुए कहा.

शिव : गुड इवनिंग मैडम.

काव्य : हम्म्म, गुड इवनिंग, बैठो में पानी लती hu(wo किन्ही खयालो में थी, वो किचन की और बढ़ गयी, पर मेने नोटिस किआ की वो ठीक से चल रही थी, मेरी समाज में नहीं आया की अगर उनको दर्द है तो वो ठीक से कैसे चल रही है, और अगर दर्द नहीं है तो फिर उन्होंने मुझे क्यों कहा, में सोचते हुए सोफे पर बेथ गया, वो पानी ले कर आयी और मुझे दिया, मेने जब उनकी आँखों में देखा तो उन्होंने अपनी नज़ारे झुका ली, मेने पानी लिए और पि लिया, गिलास देने के बाद मेने कहा)

शिव : आप तो अच्छे से चल प् रही है.

काव्य : (उनके चेहरे पर उल्जन आ गयी फिर वो शांत हो गयी) वो दर्द है पर हल्का हल्का.

शिव : तो क्या आपको मालिस की जरुरत है?

काव्य : (कुछ देर वो मेरी आँखों में देख रही थी, जैसे जान न चाहती हो की में क्या सोच रहा हु, क्या बिना दर्द के मेरी इच्छा है उनकी मालिस करने ki)Tumhe जैसा ठीक लगे. (उन्होंने धीमी आवाज में hi जवाब दिया, मुझे लग रहा था की कुछ न कुछ तो जरूर है, शायद वो कुछ और चाहती है, पर फिर में संभल गया क्यों की अगर मेरी सोच गलत निकली तो गड़बड़ हो सकती है)

शिव : ठीक है चलिए अंदर चलते है. (मेने भी सोचा की देखा तो जाये की जो में सोच रहा हु वो सही है की नहीं)

काव्य : हम्म्म. (हम दोनों अंदर की और चलने लगे, मेरा दिल जोरो से धाकड़ रहा था, ऐसे सोचो तो कुछ भी अजीब नहीं था पर फिर भी मुझे ऐसा लग रहा था की जैसे आज शिव कुछ न कुछ जरूर करेगा, अगर उसने कुछ किआ तो में क्या करुँगी, मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा था, मेरी धड़कने इतनी तेज चल रही थी की में उसे सुन प् रही थी, एक के होते हुए भी मुझे पसीना आ रहा था, मेने एक का तापमान और काम कर दिया, मेरी हालत ऐसी थी की में शिव की और देख भी नहीं प् रही थी, मुझे इतनी शर्म आ रही थी की बोलने की भी हालत में नहीं थी)
 
अपडेट 128

वैस्वी, स्वर्ण, उसका पति, मम्मी और पापा सब आज कमल नाथ के घर आये हुए थे, ऐसी कोई खास बात नहीं थी, बस एक गेट तोगाथेर जैसा था, सब बेथ के बाते कर रहे थे. कमलनाथ, उसकी बीवी और उसकी खूबसूरत बेटी भी वह बैठे हुए थे. मिक्की नहीं दिखाई दे रहा था. बड़े लोग अपनी बातो में लगे हुए थे और वैस्वी और जहान्वी अपनी. जहान्वी अभी अभी विदेश से पढ़ाई कर के लौटी थी.

जहान्वी : और क्या चल रहा है वैस्वी?

वैस्वी : कुछ खास नहीं दीदी, बस स्कूल और घर.

जहान्वी : कोई बॉयफ्रेंड?

वैस्वी : (शरमाते hue)Nahi दीदी.

जहान्वी : कागता है सब के होते हुए शर्मा रही हो, वो सब तो अपनी बातो में लगे हुए है, अच्छा चलो, बहार लॉन में चलते है. (अपनी मां se)Mummy हम दोनों बहार बैठे है.

शिवकहदेवी: इसमें पूछने की क्या बात है, वैसे भी हम बड़ो की बाटे तुम्हे बोर hi करती होगी. जाओ जाओ बहार बैठो. और मिक्की कहा है? जब से आया है बस सोता hi रहता है, जा उसे भी बुला, सब से मिले तो सही.

जहान्वी : में नहीं जाती, आपको बुलाना है तो आप जाओ, चलो वैस्वी. (वो दोनों बहार चली गयी)

शिखादेवी : ये लड़की भी न किसी की नहीं सुनती, बिलकुल अपने बाप पे गयी है.

कमलनाथ : आरी भाग्यवान तुम भी क्या उसके पीछे पड़ी हुई हो, वो एक hi तो है मेरी लायक औलाद, वर्ण तुम्हारे लत साहब को तो घूमने फिरने से hi फुर्सत नहीं.

शिखादेवी : आप न उसके पीछे मात पड़े रहिये, वो hi है जो आपके बुढ़ापे का सहारा बनेगा समजे, बेटी तो कब चली जाएगी पता भी नहीं चलेगा.

कमलनाथ : है है पता है कैसा सहारा बनेगा, किसी दिन सहारा बनते बनते मेरा hi शिर न फोड़ दे.

शिखादेवी : देखिये न भाई साहब, जब देखो तब उसके पीछे hi पड़े रहते है, आप hi बताइये, ये साडी धन दौलत किसके लिए है, वो hi तो एकलौता चिराग है, अब वो खर्चा नहीं करेगा तो क्या पदोषीओ को देना है ये पैसा.

प्रकाशराओ : सही कहा आपने भाभीजी, यार तुम भी क्या हर वक़्त उसके पीछे पड़े रहते हो, अभी दिन है उसके, अभी नहीं खेलेगा कूदेगा तो फिर कब मज़े करेगा.

कमलनाथ : अब तुम भी उसकी तरफदारी मात करो, अगर उसके ऐसे hi लक्षण रहे तो कोण उसको अपनी बेटी देगा, और अगर ऐसी वैसी लड़की आ गयी तो बुढ़ापा सवारने की बजाये बिगड़ जायेगा.

प्रकाशराओ : अरे तुम उसकी चिंता मात करो, एक से एक बढ़कर लड़कीअ आएँगी, तुम्हारा नाम इतना बड़ा है की कोई भी खुसी खुसी अपनी बेटी दे देगा.

कमलनाथ : (उसने अपनी बीवी की और देखा, उन्दोनो की आँखों ने इस्सर किआ) अगर तुम्हे ऐसा लगता है तो एक बात कहना चाहूंगा, अगर तुम बुरा न मनो तो.

प्रकाशराओ : इसमें बुरा मन ने वाली क्या बात है, हम दोनों के सम्बन्ध ऐसे है की बुरा मन ने वाली तो कोई बात hi नहीं है, तुम कहो.

कमलनाथ : हमे वैस्वी बिटिया बहोत पसंद है. (वो बोलने के बाद रुक गया)

प्रकाशराओ : (उसे कुछ समाज नहीं आया) तुम कहना क्या चाहते ho?Agar आप सबको पसंद हो तो में वैस्वी को अपने घर की बहु बनाना चाहता hu.(Prakashrao चौंक गया, उसने ये अंदाजा नहीं लगाया था की कमलनाथ ऐसा कुछ कहेगा, साथ में स्वर्ण भी चौंक गयी, वो मिक्की के बारे में जानती थी, उसने उसके बारे में सब सुना हुआ था, और ऐसा नहीं था की प्रकाशराओ को पता नहीं था, वो भी जनता था, पर उसके लिए ये सब आम बात थी.) क्यों क्या हुआ, अगर तुम्हे ये बात पसंद नहीं आयी तो यही मिटटी डालो.

प्रकाशराओ : नहीं यार ऐसी बात नहीं है, पर यु अचानक वैस्वी के बारे में सुन कर झटका लगा, अभी वो छोटी है.

कमलनाथ : तो हमे कोनसी कल के कल शादी करनी है, वैस्वी जैसी बेटी हमारे घर में आये उस से अच्छी क्या बात हो सकती है.

स्वर्ण : बाबूजी, हमे एक बार वैस्वी से भी पुछलना चाहिए.

प्रकाशराओ : (उसने अपनी बहु की और घर के देखा, वैसे भी बहु को बिच में बोलने की इजाजत नहीं होती थी, पर सबके सामने वो बहु को डांटना नहीं चाहता था)

कमलनाथ : (उसने बात की डोर अपने हाथ में hi li)Swarna बेटी, हम कोनसा रिस्ता पक्का कर रहे है, ये तो मेरे मान में बात आयी तो मेने कह दी, शादी तो उन्हें hi करनी है, अगर उन दोनों का आपस में जमता है तभी हम बात आगे बढ़ाएंगे. पर इस बारे में सोचा तो जा शक्ति है न.

संध्यादेवी : सही कहा आपने भाई साहब, हम आपके घर से भली भाटी परिचित है, अगर बच्चो को सही लगता है तोहि हम बात आगे बढ़ाएंगे. (उसने भी अपनी बहु को थोड़ा गुस्से से देखा, स्वर्ण सहम कर चुप हो गयी, बहार वैस्वी और जहान्वी बाते कर रही थी)

जहान्वी : तो बताओ वैस्वी, कोई बॉयफ्रेंड है क्या?

वैस्वी : नहीं दीदी, कोई बॉयफ्रेंड नहीं है, क्या आपका है?

जहान्वी : (मुस्कुराते hue)Boyfriend तो कई हुए, तुम तो जानती हो, विदेश में रहती थी तो वह तो ये सब आम बात hai.(Vaiswi आश्चर्य से उसे देख रही thi)Are इसमें ऐसे मुझे क्यों देख रही हो, कोनसे ज़माने में जी रही हो, आज कल ये सब आम बात है, जब लड़के शादी तक कुंवारे नहीं रहते तो हम क्यों कुवारी रहे, जस्ट एन्जॉय थे लाइफ.

वैस्वी : पर कोई ऐसा हो जिसके साथ पूरी जिंदगी रहने का मान करे तो?

जहान्वी : तुम्हारी बात सही है, पर ऐसा ढूंढने के लिए भी तो उनके साथ रहना पड़ता है, पहली पहली बार तो सब अच्छे बन ने की कोशिस करते है, पर फिर जैसे hi उनका काम ख़तम हुआ अपना असली रंग दिखाना सुरु कर देते है. अगर शादी के चंगुल में फास गए तो फिर निकलना मुश्किल होता है, इस से बेटर है की पहले से hi देख लिया जाये, अगर जमा तो ठीक है वर्ण तू कौन और में कौन. वैसे तुम हो बहोत स्वीट, अगर लड़का होती न तो पक्का तुम्हे प्रोपोज़ कर देती.

वैस्वी : (शरमाते hue)Kya दीदी आप भी. (तभी अंदर से शिखादेवी की आवाज आयी)

सिखादेवी : अरे बच्चीओ, अब अंदर भी आ जाओ, चलो खाना कहते है. (वो दोनों अंदर चली गयी, वैस्वी ने देखा की अंदर माहौल बहोत खुशनुमा था, पर भाभी के चेहरे पर प्रसन्ता नहीं थी, वो अपनी भाभी के पास जेक बेथ गयी, उसने हाथ पकड़ कर इसरो में पूछ भी क्या हुआ पर स्वर्ण ने न में शिर हिला दिया)

यहाँ में और काव्य मैडम रूम में आ गए थे. काव्य का दिल जोरो से धड़क रहा था, और ऐसा इस्सलिये था की उसके मान में चोर था. आज उतना दर्द न होने के बावजूद उसने शिव को बुलाया था, इतनी आगे होने के बावजूद वो सेक्स जैसे एहसास से अनभिग्न थी, ऐसा नहीं था की वो सेक्स से दूर भगति थी पर कभी ऐसा मौका hi नहीं बना था, शिव के साथ वो जिस अवस्था में थी, उसे लग रहा था की शिव के साथ वैसा कुछ होने की सम्भावना है, ऐसी बाटे सोच कर hi उसका दिल जोरो से धड़क रहा था.

में शिव के साथ अपने बैडरूम में थी, दिल इतना जोरो से धड़क रहा था की मुझे खुद हर धड़कन सुनाई दे रही थी, आगे क्या होगा कुछ पता नहीं था और वो सोच सोच कर hi धड़कने और तेज हो रही थी. रूम में आने के बाद भी दोनों में से कोई बोल नहीं रहा था, शायद उसका भी वैसा hi हल था, वो भी हिचकिचा रहा था, और हो भी क्यों न, वैसे भी में उस से बड़ी थी और पेशे से एक वकील, तो डरना लाज़मी था, शादी का भी यही हाल था, लड़की वकील है यही सुन कर अधेलोग शादी नहीं करना चाहते थे और जो आते थे वो मुझे पसंद नहीं आते थे, तो मेने भी शादी का िर्रादा छोड़ hi दिया था. मुझे भी शर्म आ रही थी पर मेने hi आगे बढ़ने का निश्चय किआ.

काव्य : में कल वाली चद्दर निकलती हु, उस पर वैसे भी तेल के दाग लगे हुए है, तो दूसरी चद्दर क्यों बिगड़नी.

शिव : हम्म्म. (मेने चद्दर निकली और निचे फर्श पर hi बिछा दी, फिर ख़ामोशी छै रही, हम दोनों खड़े the)Wo तेल...

काव्य : अरे है, में अभी लायी (मेने अलमारी से मालिसवाले तेल की बोतल निकली और शिव को थमा दी, मुझे पता था की अब मुझे लेटना है पर फिर भी मुझे शर्म आ रही थी तो में कड़ी रही, में चाहती थी की वो मुझसे कहे, और मेरी हालत को समाज कर उसने hi कहा)

शिव : आप लेट जाइये.

काव्य : हम्म्म (कहते हुए में लेट गयी, मेरी धड़कने फिर से बढ़ने लगी, वो भी मेरे पेरो के पास बेथ गया, उसने मेरा गाउन घुटनो तक ऊपर उठाया और पेअर की मालिश करने लगा, थोड़ी देर तक वो मेरे पेअर के निचले हिस्से की मालिस करता रहा, मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी, शर्म और झझक के बावजूद मेने कह hi diya)Dard ऊपर है.

शिव : (में जनता था की उनको दर्द नहीं है पर फिर भी वो ये सब करवा रही थी, अब में औरतो को समझने लगा था, मुझे पता था की वो क्या चाहती है, पर में कोई जल्दी नहीं करना चाहता था, मेने उनके गाउन को और ऊपर उठा दिया, और ऐसे रक्खा की पंतय ढकी रहे, उनकी गोरी गोरी झंघे अपना असर दिखने लगी और मेरा लुंड अकड़ने लगा था, पर मेने अपने आपको सँभालते हुए हाथ में तेल लिया और झांग को रगड़ना सुरु कर दिया, हाथ झांग के जोड़ तक जाता तो वह की गर्मी मुझे अपनी उंगलिओ पर महसूस हो रही थी, मुझे पता था की वो ऐसे hi मालिस करवा रही है तो मेने दूसरे पेअर पर भी तेल लगाया और मालिस करने लगा)

काव्य : (मेरा दिल खुस हो रहा था, दूसरे पेअर पर तो मेने नहीं कहा था पर फिर भी वो कर रहा था, वो अपने आप hi आगे बढ़ रहा था, में चुप चाप पड़ी रही और उसके स्पर्श का आनंद ले रही थी, मेरी योनि में हलचल हो रही थी, जब उसका हाथ झंघ की जोड़ो तक पहुँचता तो मेरे अंदर कुछ कुछ होने लगता था. उसने अभी भी मेरी पंतय धक् रक्खी थी, मेरा गाउन वह तक hi चढ़ा हुआ था, मुझे आगे बढ़ना था, मेरा दिल मचल रहा था, मेने अपनी उंगलिओ को हरकत दी और आहिस्ता आहिस्ता से अपने गाउन को ऊपर की और खिंचा, ये में इतना आहिस्ता आहिस्ता कर रही थी की उसको पता न चले)

शिव : (उनकी झांघो की मालिस करते हुए में गरम हो रहा था, थोड़ी देर बाद जब मेरी नजर पड़ी तो मेने देखा की उनकी पंतय दिख रही थी, गाउन आधे ज्यादा ऊपर हो चूका था, में सोचने लगा की ये कैसे हुआ, मालिस करते हुए hi मेने ध्यान रक्खा तो देखा की आहिस्ता आहिस्ता गाउन ऊपर हो रहा है, और मेने ये भी देखा की वो गाउन को ऊपर खिंच रही है, ये मेरे लिए ग्रीन सिग्नल था, में समाज रहा था की वो क्या चाहती है, उनकी पंतय भी एक जगह से गीली हो गयी थी, मेने भी मालिस करते हुए अपने हाथ को आगे बढ़ाया और अंगूठे से उस गीले हिस्से को छुआ, उनके शरीर में कम्पन हुआ, मेने फिर ऐसा किआ, वो फिर काँपी, अब में मालिस करते हुए बार बार अंगूठे से उस गीले हिस्से को छू रहा था, वह गिला पैन बढ़ता जा रहा था)

काव्य : (मेरी युक्ति काम कर गयी थी, वो मेरी योनि को छू रहा था, हलाकि वो ऐसा दिखा रहा था की मालिस करते हुए उसका अंगूठा वह लग रहा है पर में समाज रही थी की वो जानबुज कर वह छू रहा है, में यही तो चाहती थी, कुछ देर बाद उसका हाथ झांघो के जोड़ पर रुक रहा था और उसका अंगूठा मेरी योनि के छेड़ को दबा रहा था, में आनंद में डूबी जा रही थी, और थोड़ी देर बाद तो वो अंगूठे से मेरी योनि को सहलाने लगा था, एक अजीब तरह का आनंद में महसूस कर रही थी, जैसे जैसे वो मेरी योनि को सेहला रहा था मेरा आनंद बढ़ रहा था, मेरा दिल कर रहा था की वो और अच्छे से उसे सहलाये, पर में ऐसा कह नहीं सकती थी.)

शिव : (में काफी देर से उनके पैरो की मालिस कर रहा था तो में रुक गया) पैरो की तो मालिस हो गयी, अगर आप चाहो तो में पीछे से भी पैरो को मालिस कर दू?

काव्य : (में क्यों मन karti)Hmmm...

शिव : तो उल्टा लेट जाइये. (वो उलटी लेट गयी, पीछे से उनका गाउन पंतय को पूरा ढके हुए थे, पर फिर भी उनके बड़े बड़े कूल्हे अपना आकर दिखा रहे थे, में फिर से सुरु हो गया और उनकी झांघो को मसलने लगा, मेरा दिल कर रहा था की में उन कूल्हों को देखु, पर अभी भी हिम्मत नहीं हो रही थी, थोड़ी देर झंघे मसलने के बाद मेने हिम्मत कर के गाउन को थोड़ा ऊपर खिसका दिया, और लुल्हो के ऊपर कर दिया, ये मैंने इतना आहिस्ता से किया था की उनको पता न चले. पंतय ने आधा कुल्हा छिपा रक्खा था पर फिर भी आधा कुल्हा दिख रहा था, यही मेरे लिए काफी था, में अब झांघो को मसलते हुए उन मसल कूल्हों को भी छूने लगा, उनकी सख्ताई मेरे अंदर हलचल पैदा करने लगी, लुंड तो कब से ठुमके मार hi रहा था)

काव्य : (शहहहहह, वो मेरे कूल्हों को छू रहा था, शह्ह्ह्ह मेरा मन कर रहा था की जोर से सिस्किअ लू पर शर्म से मेने मुँह से आवाज बहार नहीं आने दी, उसे मेरे कूल्हे देखने थे तो खुद उसने गाउन ऊपर कर दिया था, मुझे भी पता था की वो क्या चाहता है, पर वो भी शायद दर रहा है, या झिझक रहा है, हम दोनों पहली बार इस तरह का खेल खेल रहे थे तो झिझक होना लाज़मी है, और वैसे भी वो एक स्कूल जानेवाला लड़का है, अभी वो सेक्स के बारे में क्या जनता होगा? में खुद इतनी बड़ी हो गयी हु फिर भी सेक्स से दूर हु, है मुझे सब पता है पर फिर भी मेने खुद तो कभी अनुभव नहीं किआ, तो वो तो अभी छोटा है, में महसूस कर रही थी की उसके मालिस का दायरा बढ़ता जा रहा था, अब उसके हाथ मेरी पंतय के अंदर भी जाने की कोशिस कर रहे थे, मेरे कूल्हों को मालिस करने की बजाये वो दबा रहा था, मेरी योनि से रास का बहाव तेज होता जा रहा था. थोड़ी देर ये खेल चलता रहा पर फिर उसे भी ख़तम होना था)

शिव : यहाँ भी हो गया मैडम. (मुझे जरा भी अच्छा नहीं लगा, मेने कोई जवाब न दिया, तो वो फिर से bola)Madam....

काव्य : हम्म्म्म..

शिव : सो गयी क्या?

काव्य : है, शायद, अच्छा लग रहा था न. (मेने भी जूथ बोल दिया)

शिव : पैरो की मालिस ख़तम हो गयी.

काव्य : क्या तुम कमर पर मालिस करदोगे, कुर्शी पे बैठे बैठे वह भी जकड़न हो गयी है (पता नहीं ये मैंने कैसे कह दिया था, पर में नहीं चाहती थी की ये सुहाने पल रुके, शायद वो भी यही चाहता था, इस बार उसने मेरा गाउन बिना किसी झिझक के ऊपर उठाया और कमर के ऊपर तक चढ़ता गया, कुछ हिस्सा मेरे निचे फंसा हुआ था तो में थोड़ी ऊपर उठी तो उसने गाउन को ऊपर ऊपर उठा दिया, मुझे लग रहा था जैसे उसने इतना ऊपर उठा दिया था की उसे मेरी ब्रा भी देख रही होगी, शर्म तो आ रही थी पर दिल मान hi नहीं रहा था तो में कुछ न बोली, फिर से उसके हाथ मेरी कमर पर चलने लगे)

शिव : (मेने देखा की उनकी कमर इतनी ज्यादा बड़ी नहीं है, कपड़ो में वो ज्यादा भरी हुई लगती थी, शायद उनके कूल्हे और उनके स्तन ज्यादा भरे होने की वजह से वो ज्यादा भरी हुई लगती थी, पर उनकी कमर काम hi thi)Ek बात कहु मैडम?

काव्य : है कहो.

शिव : आप जैसी दिखती हो वैसी हो नहीं.

काव्य : क्या मतलब है तुम्हारा?

शिव : अप्प कपड़ो में ज्यादा ...

काव्य : मोती लगती हु, है न?

शिव : नहीं मैडम, आप मोती नहीं हो, बस भरी हुई ज्यादा हो, पर अब तो ये भी नहीं कह शक्ति, आप हर जगह से सुडौल हो.

काव्य : (अपनी तारीफ सुन कर सच में बहोत अच्छा लग रहा था, में और ज्यादा सुन न चाहती थी इस्सलिये puchha)Kehna क्या चाहते हो?

शिव : आपकी कमर ज्यादा नहीं है, पर आपके हिप्पस और ब्रैस्ट ...(में चुप हो गया क्यों की मुझे ऐसा नहीं बोलना चाहिए था)

काव्य : (उसके मुँह से हिप्पस और ब्रैस्ट सुन के अजीब लगा पर उसके यही नाम the)ha कहो, रुक क्यों गए?

शिव : (मुझे लगा की वो गुस्सा होगी पर वो नार्मल थी तो मेने कहा) आपके ब्रैस्ट और हिप्पस ज्यादा भरे हुए है तो ऐसा लगता था की आपकी कमर भी बड़ी है, पर वो तो सही नाप में है.

काव्य : मुझे पता है, इसीलिए तो में गयम जाती हु ताकि वो दोनों जगह से चर्बी काम की जा शेक.

शिव : उसकी जरुरत नहीं मैडम, वैसे भी वो बहोत आकर्षक है (फिर गलती kardi)Sorry मैडम.

काव्य : (में कहा बुरा मान रही थी, उल्टा मुझे तो अच्छा लग रहा था, मेने कोई जवाब नहीं दिया, पर चेहरे पर मुस्कान थी)

शिव : मैडम, इससे खोल दू? पूरी पीठ की अच्छे से मालिस हो जाएगी. (मेरी भी हिम्मत बढ़ती जा रही थी)

काव्य : हम्म्म्म. (उसने मेरी ब्रा के हुक खोल दिए, में पीछे से सिर्फ पंतय में थी, कभी किसी के साथ में इस हालत में नहीं हुई थी, पर पता नहीं क्यों मुझे ये सब करना था, वो मेरी पीठ को रगड़ रगड़ कर मसल रहा था, मुझे समज hi नहीं आ रहा था की में किश बात के लिए इतना आनंदित हु, एक और तो किसी मर्द के स्पर्श से में उत्तेजना महसूस कर के आनंदित थी और दूसरी और उसकी मालिस करने की कला से में भी आनंदित थी, मेरे शरीर मो बहोत आराम मिल रहा था)

शिव : मैडम, गाउन को पूरा निकल hi दीजिये, वैसे भी उस पर तेल लग रहा है और उसका कोई काम भी नहीं रह गया है.

काव्य : (बात तो उसकी सही थी, जब में पूरी नंगी हो गयी थी तो गाउन को गलेमे डेल रहने का क्या मतलब था, तो मेने गाउन को निकल hi दिया, वो एक एक कर के मेरे कपडे निकल रहा था और में उसे निकलने दे रही थी, अब वो मेरी पीठ को गर्दन तक मालिस कर रहा था और ये सच में एक अच्छा एहसास था, वो मेरी ब्रा को भी कंधो से निकल रहा था)

शिव : मैडम, ये भी गन्दी हो रही है, तेल लग रहा है.

काव्य : (वैसे भी में उलटी लेती हुई थी और ब्रा तो पीछे से खुली हुई hi थी तो मेने ब्रा भी निकल दी और साइड में रख दी, में सिर्फ पंतय में थी, ये में कैसे कर गयी थी पता नहीं, पर बहोत अच्छा लग रहा था)

शिव : (वो सब करने दे रही थी, तो मेने भी आगे बढ़ने का socha)Madam, ऐसे साइड से ठीक से हो नहीं रहा, मुझे लग रहा है मि में बिछ में आ जाऊ.

काव्य : ठीक है.

शिव : पर ऐसे मेरे कपडे तेल वाले हो शक्ति है, तो में निकलडेता हु.

काव्य : (वो अपने कपडे भी निकल रहा था, मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा, जब वो मेरे इर्दगिर्द पेअर रखते हुए बैठा तो मुझे उसकी नंगी झांघो का स्पर्श हो रहा था, मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा, अभी जो में मालिस का मज़ा ले रही थी अब वापस उत्तेजित होने लगी, क्या उसने सरे कपडे निकल दिए है, नहीं नहीं वो ऐसा नहीं कर शक्ति, तो क्या वो अंडरवियर में है, पता नहीं, वो किस परिस्थि में था, वो मेरी झंगो पे बैठा हुआ था, हलाकि उसका वजन नहीं दाल रहा था, वो फिर से मेरी पीठ पर मालिस करने लगा, अब वो साइड से भी मालिस कर रहा था, उसके हाथ अब मेरे स्तन के साइड में भी स्पर्श हो रहे थे, मेरी हालत ख़राब हो रही थी, थोड़ी देर बाद वो थोड़ा ऊपर खिसका, मेरी तो हालत ख़राब हो गयी, मुझे कुछ कड़क चीज मेरे कूल्हों के बिछ महसूस हुई, में अनुमान लगा सकती थी की वो क्या है, ये पहली बार था की कोई मर्द मेरे इतना नजदीक था, मेरी योनि से रास बहना सुरु हो गया था, जैसे जैसे वो मालिस कर रहा था, वो कड़ा अंग मेरे कूल्हों पर रगड़ खा रहा था, मेरा पूरा ध्यान वही अटका हुआ था, काफी देर तक वो मेरी मालिस करता रहा, अचानक मुझे कुछ हुआ और मेरे आँखों के सामने अँधेरा छ गया, शरीर में एक आनंद की लहर उठी और मेरी योनि से कुछ निकलने लगा, में झटके खाने लगी, थोड़ी देर ऐसा चला फिर में शांत हो गयी, पता नहीं ये कैसा एहसास था, इतना आनंददायक था की में बयां नहीं कर शक्ति.

शिव : (में समाज गया था की मैडम का पानी निकल गया है, मुझे अभी यही रुक जाना सही laga)Ho गया मैडम.

काव्य : (में कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं थी, में बस लेती हुई थी)

शिव : (अपने कपडे पहन ने के baad)Me चलता हु मैडम, आप नाहा lijiyega.(Me वह से निकल गया.)

काव्य : (थोड़ी देर में वैसे hi लेती रही, क्या हुआ था मुझे कुछ समाज नहीं आया, वो चला गया था, मेने अपना हाथ बढ़ाया और योनि को छुआ तो वह पूरी पंतय गीली हो चुकी थी, ऐसा लग रहा था जैसे मेने पेशाब कर दिया हो, पर ये रास चिकना था, मेने वहासे हाथ हटाया और अपने नाक के पास लायी और सूंघने लगी, ये पेशाब तो नहीं था, एक अलग तरह की गंध थी, में उठी और बाथरूम में घुस गयी)
 
अपडेट 129

कॉम्पिटिओं पास आ रहा था, आज सुबह में जल्दी उठ गया था, लतादिदी मेरी बगल में नंगी लेती हुई थी, मेने उनके ऊपर चद्दर डाली और बहार निकल गया, अभी सब सो रहे थे, में बहार निकला और जॉगिंग सुरु कर दी, हमारे मैदान में hi चक्कर लगता रहा. आसमान में उजाला होने लगा था, थोड़ी देर और कसरत करने के बाद में बाथरूम में घुस गया. तैयार हो कर में स्कूल के लिए निकल गया. संयम और वैस्वी मेरा hi इंतजार कर रही थी, मेने देखा की वैस्वी का चेहरा बुझा बुझा है, पता नहीं क्या बात होगी, अभी फ़िलहाल के लिए मेने पूछना सही नहीं समजा, हम तीनो स्कूल के लिए निकल गए.

सिर्फ 10 मं का रास्ता था, जैसे hi हम निकले शमीम का हाथ वैसे hi मेरी कमर पर आ गया, और उसके स्तन मेरी पीठ पर चुभने लगे. वो जिस तरह से बैठती थी मेरी समाज में नहीं आ रहा था की वो ये सब जानबुज कर कर रही है की अनजानेमें. उसका हाथ मेरी कमर के निचले हिस्से में था, थोड़ी देर बाद मुझे ऐसा लगा की उसकी सबसे छोटी ऊँगली निचे की तरफ जा रही है, वैसे भी रस्ते के गड्ढे के कारन थोड़ी उछाल कूद हो रही थी पर मुझे यकीं हो जा रहा था की वो ये जान बुज कर कर रही है, उसकी ऊँगली शायद कुछ ढूंढ रही थी, में उसकी तलाश को पहचान गया था, और मेरे लुंड ने भी लड़की के स्पर्श को पहचान लिया था, वो उठने लगा.

संयम के लिए ये छोटा सा सफर बहोत मायने रखता था, यही वो समय होता था जब वो शिव के साथ ऐसे चिपक कर बेथ सकती थी, और उसने थोड़ी और हिम्मत दिखा दी थी, उसे इतना तो पता था की लड़के और लड़की में क्या अंतर होता है, और उसे ये भी पता था की अभी जहा उसका हाथ है उसके ठीक निचे क्या है, वो दर रही थी की शिव क्या सोचेगा, पर जिस तरह शिव और वैस्वी की नजदीकिआ बढ़ रही थी उसे जलन हो रही थी, उसने भी शिव की और कदम बढ़ने का निश्चय कर लिया था, आज हलके से उसने लड़को की उस जगह को छुआ था जहा वो खास अंग होता है, उसके अंदर एक अजीब सी गुदगुदी हो रही थी और साथ में थोड़ा दर भी लग रहा था की शिव को पता चला तो वो क्या सोचेगा, पर फिर भी उसका दिल नहीं मान रहा था, उसने अपनी छोटी ऊँगली को थोड़ी हरकत दी, थोड़ी hi देर में नतीजा उसके सामने था, जहा उसकी ऊँगली थी उसके निचे उसके कुछ कड़क अंग महसूस होने लगा, उसका दिल धक् धक् करने लगा, कुछ पल के लिए वो रुक गयी, उसकी सांसे भी तेज हो चुकी थी, उसने अपनी ऊँगली से hi उस अंग का जायजा लिया तो उसे बस इतना hi पता चला की वो कुछ कड़क कड़क है, अभी तक वह ऐसा कुछ उसे महसूस नहीं हुआ था, पर ऊँगली की हरकत करते hi वह उस अंग का एहसास होने लगा. अपनी ऊँगली से hi उसने उस अंग का जायजा लेना चाहा पर उसे कुछ समाज नहीं आ रहा था, उतने में तो स्कूल भी आ गया, वो मायूसी से निचे उतर गयी, शिव ने स्कूटर पार्क किआ और बैग को ऐसे पकड़ा था की उसके आगे का हिसस दिख न पाए, जब शिव ने उसकी और देखा तो उसने घबराकर अपनी नज़ारे फेर ली. सब बाते करते हुए स्कूल की और बढ़ गए. स्कूल के दौरान न ज्यादा वैस्वी ने बात की न संयम ने, दोनों अपनी अपनी सोच में दुबे हुए थे. दोपहर को छूटने के बाद उसकी हिम्मत hi नहीं हुआ फिर से ऐसी हरकत करने की.

आज जहान्वी भी अपने पापा के साथ उनके ऑफिस में आयी हुई थी, कई सरे लोग उनको मिलने आ रहे थे, प्रकाशराओ भी उनसे मिलने आये हुए थे.

प्रकाशराओ : अरे बेटी तुम यहाँ?

जहान्वी : नमस्ते अंकल, है, घर में बोर हो जाती हु तो सोचा की ऑफिस चालू.

प्रकाशराओ : अच्छा सोचा है, पढ़ाई लिखाई का इस्तेमाल तो करना hi चाहिए.

जहान्वी : अभी क्या काम काज चल रहा है अंकल?

प्रकाशराओ : अभी फ़िलहाल तो दो चार छोटे मोठे प्रोजेक्ट चल रहे है.

जहान्वी : क्यों अंकल, कोई बड़ा प्रोजेक्ट हाथ नहीं लगा?

प्रकाशराओ : एक प्रोजेक्ट है तो सही, पर लगता है अब वो हाथ में नहीं आएगा.

जहान्वी : ऐसा क्यों अंकल?

प्रकाशराओ : अभी तुम नहीं संजोगी, बुसिनेस्स में तो ये सब चलता रहता है.

जहान्वी : नहीं संजोगी, ये कह के बात ताल देने से तो में कभी समाज नहीं पाऊँगी, एक बार बताइये तो सही, फिर अगर न समाज में आये तो मुझे कहना की में अभी छोटी हु और नहीं समाजसाक्ति.

प्रकाशराओ : आपकी बेटी आपके जैसी hi है कमलनाथ, किसी भी बात को छोड़ती नहीं (कमलनाथ मुस्कुराया). तो सुनो बेटी, हम लोग पिछले कुछ समय से एक प्रोजेक्ट पे काम कर रहे थे, ये प्रोजेक्ट था सूर्यदेव की एक फैक्ट्री बनानेका, बड़े लेवल की फ़ैक्ट्रोरी थी, हमने किसी तरह से सूर्यदेव पर ये दबाव बनाया था की उसे ये काम सिर्फ और सिर्फ हमसे hi करवाना पड़े, पर एक लड़के ने सारा खेल ख़राब कर दिया.

जहान्वी : लड़का? कोण लड़का?

प्रकाशराओ : वैसे तो हमारे सामने उस लड़के की कोई हैसियत नहीं है, एक अनाथ लड़का है, न कोई बैकग्राउंड है और न कुछ, पर पता नहीं कैसे उसने ये सब कर दिया, उसने वो जमीं जिस पर ये फैक्ट्री बन ने वाली थी उस फैक्ट्री को फ्री करवा दिया. हम चाहते थे की वो जमीं फ्री हो हमारी वजह से, ताकि सूर्यदेव हमे कॉन्ट्रैक्ट दे.

कमलनाथ : अभी भी कुछ नहीं बिगाड़ा है, प्रकाशराओ, सिर्फ जमीं छुडवालेने से फैक्ट्री नहीं बन जाती, उसके लिए गवर्नमेंट से बहोत साडी पमिशन लेनी पड़ती है, उसे झख मर के मेरे पास hi आयना पड़ेगा.

प्रकाशराओ : आप सही है, पर क्या उन लोगोने ये नहीं सोचा होगा, जिस तरह से मनीषा सोशल कार्यो में दिलचस्पी ले रही है, उस से तो यही लग रहा है की उसका मकसद और hi है.

कमलनाथ : वो क्या समझती है, ऐसे कुछ गांव में जाने से या लोगो से मिलने से वो कुर्शी हांसिल कर पायेगी?

प्रकाशराओ : वो बाद की बात है, पर वो उस दिशा में अग्रेसर है, ये तो दिख hi रहा है. और वह बी वो उसी लड़के के साथ जा रही है.

कमलनाथ : तुम्हे क्या लगता है प्रकाशराओ, क्या ये सब इतना आसान है, ये मेरा खड़ा किया हुआ साम्राज्य है, बरसो लग जाते है, ऐसे दो चार लोगो से मिलने से कुछ नहीं होनेवाला, वो लोग कहा कहा जा रहे है, किन लोगो से मिल रहे है, सब खबर है मुझे.

जहान्वी : आप जिस लड़के का जीकर कर रहे है, वो लड़का है कोण?

प्रकाशराओ : शिव नाम है, एक दो प्रोजेक्ट में हमारे पार्टनर पवन का hi आदमी है, उसके लिए काम करता है.

जहान्वी : मतलब आपके पार्टनर के वह काम करनेवाला एक लड़का, मतलब वो हमारा भी नौकर hi हुआ न, तो प्रॉब्लम क्या है, कॉन्ट्रैक्ट अगर हमारे hi पार्टनर को मिल रहा है तो वो हमे hi मिला ऐसा हुआ न.

प्रकाशराओ : नहीं, वो हमारा प्रोजेक्ट पार्टनर है, बुसिनेस्स पार्टनर नहीं है, वो अलग प्रोजेक्ट करने के लिए आजाद है.

जहान्वी : मतलब आप कह रहे है की वो इस प्रोजेक्ट को अलग से करनेवाले है?

प्रकाशराओ : लगता तो यही है, क्यों की अगर वो हमारे साथ मिल कर करनेवाला होता तो अब तक तो कुछ न कुछ हमे बताता, पर अभी तक उसने इस बारे में हमसे कोई सलाह मस्वारा नहीं किआ है.

जहान्वी : जहा तक में समाज प् रही हु, ये लड़का, क्या नाम बताया, है शिव, वो काम करता है पवनजी के यहाँ, तो फिर वो मनीषजी के साथ क्या कर रहा है?

प्रकाशराओ : वो पता नहीं, मनीषा, सूर्यदेव की पत्नी है, और सूर्यदेव अपनी पत्नी को सत्ता में बिठाना चाहता है और उसमे शिव साथ दे रहा है, मतलब साफ़ है, पवन और सूर्यदेव में कोई डील हुई है.

जहान्वी : प्रोजेक्ट गया शिव की वजह से, प्रोजेक्ट आगे बढ़ने के लिए सत्ता चाहिए, और सत्ता दिलाने में मदद कर रहा है शिव, आखिर ये शिव है क्या? क्या उसके पास इतनी पावर है की वो सत्ता दिला सकता है?

प्रकाशराओ : नहीं, हरगिज नहीं, वो एक स्कूल का लड़का है, मेरी बेटी के साथ स्कूल में पढता है, और अनाथ है, तो कोई बैकग्राउंड भी नहीं है.

जहान्वी : क्या? वो स्कूल का एक लड़का है? क्या अंकल आप भी, में तो सामजी थी की कोई पढ़ालिखा, लड़का होगा, आप तो किसी बच्चे की बात कर रहे है.

प्रकाशराओ : है तो वो बच्चा hi, पर देख लो, आज प्रोजेक्ट हमारे हाथ से निकल ले गया है.

जहान्वी : अगर वो उतना hi काबिल है तो उसे अपनी और कर लो, बात ख़तम.

कमलनाथ : ऐसे प्यादो सो हमे कोई फर्क नहीं पड़ता बेटी, अभी मेरे इतने बुरे दिन नहीं आये की मुझे उसकी मदद चाहिए, उसे जो करना है करे, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता.

जहान्वी : शिव, हम्म्म्म, मिलना तो बनता है इस लड़के से, देखे तो सही की चीज क्या है ये.

प्रश्रव : पवन को फ़ोन कर दूंगा तो वो उसे भेज देगा.

जहान्वी : नहीं अंकल, ऐसे नहीं, आपने कहा की वो हमारे प्रोजेक्ट पे काम कर रहा है तो में उसे वही मिल लुंगी, वैसे भी मुझे भी प्रोजेक्ट देखना है.

प्रकाशराओ : ठीक है बेटी, चली जाना, में तुम्हे अड्रेस दे देता हु.

जहान्वी साइट पर हाहुच गयी, भोली और झुमरी वही नज़दीक hi काम कर रही थी जब ये बड़ी सी गाडी वह दाखिल हुई, उन्होंने एक नजर उस और देखा और काम करते करते रुक गयी, अंदर से एक बेहद खूबसूरत लड़की जो की चस्मा पहने हुए थी वो उतरी और इधर उधर देखने लगी, दोनों ने पहली बार इस लड़की को देखा था, वैसे भी कई लोग घर देखने के लिए आते जाते रहते थे तो ये कोई नयी बात नहीं थी, पिंकेश भी इस बड़ी गाडी को देख कर वह आ पंहुचा.

पिंकेश : नमस्ते मैडम, कहिये क्या सहायता कर सकता हु?

जहान्वी : (पिंकेश को ध्यान से देखते hue)Mera नाम जहान्वी है, तुम सीईव?

पिंकेश : नहीं मैडम, मेरा नाम पिंकेश है, शिव तो अभी तक नहीं आया, कोई काम था?

जहान्वी : में मला कमलनाथजी की बेटी हु, साइट का काम काज देखने आयी थी.

पिंकेश : ओह आप सर की बेटी है, सॉरी, पहले कभी आपको देखा नहीं न, आईये, (भोली की और देखते hue)Suno भोली, वो तैयार माकन खोल कर अंदर अच्छे से साफ़ कर दो, ये बड़े मालिक की बेटी है.

जहान्वी : (रोबीली आवाज se)Abhi नहीं, पहले में सब काम देख लू उसके बाद में.

पिंकेश : जी ठीक है मैडम, आइये में दिखता हु. (वो उसे सब दिखने लगा, कितना काम हुआ है क्या बाकि है वो सब)

जहान्वी : अच्छा पिंकेश, ये शिव अभी तक क्यों नहीं आया, काम चालू हुए तो काफी टाइम हो गया.

पिंकेश : मैडम वो दोपहर के बाद hi आता है, वो पढता है न तो स्कूल के बाद hi आता है.

जहान्वी : ऐसा क्यों, नौकरी करता है तो टाइम से आना चाहिए न, वर्ण नौकरी छोड़ दे और पढ़ाई करे.

पिंकेश : वो सब मुझे नहीं पता मैडम, पवनसीर ने hi बोलै हुआ है, वो दोपहर के बाद hi आता है.

जहान्वी : कितने बजे आता है वो?

पिंकेश : तकरीबन दो बजे.

जहान्वी : (अपनी घडी देखते hue)Abhi तो 12 hi बजे है, (फिर कुछ सोचते hue)wo आता है 2 बजे और शाम को 5 बजे तो काम बंद हो जाता है, मतलब वो तीन घंटे hi काम करता है.

पिंकेश : जी मैडम, और वो रोज भी नहीं आता, तो मेरा ख्याल है की पहले उस से पूछ लेना चाहिए की वो आनेवाला है की नहीं, वर्ण आप को ख़म खा इंतजार करना पड़ेगा.

जहान्वी : अरे वह! क्या नौकरी है लात साहब की, सिर्फ तीन घंटे वो भी कभी कभी, कहना पड़ेगा, नौकर नहीं मालिक लगता है.

पिंकेश : ऐसी बात नहीं है मैडम, वो तो सिर्फ part टाइम काम करता है, पढ़ाई के साथ प्रैक्टिस भी करनी पड़ती है न उसको.

जहान्वी : किस चीज की प्रैक्टिस?

पिंकेश : वो एथलीट है मैडम, दौड़ता है, अभी स्टेट लेवल में भाग लेनेवाला है.

जहान्वी : इम्प्रेससिवे! पढता है, नौकरी करता है, स्पोर्ट्समैन है. एक काम करो, में मेरा मोबाइल नंबर देती हु, अगर वो आता है तो मुझे मश्ग कर देना, में दोपहर के बाद आ जाउंगी.

पिंकेश : जी मैडम.

स्कूल ख़तम कर के में घर गया और फिर साइट की और निकल गया, जब वह पंहुचा तो पिंकेशभाई ने मुझे सब बताया, और मेरे सामने hi मश्ग भी कर दिया की शिव आ गया है. मेरी समाज में नहीं आरहा था की वो क्यों मुझसे मिलना चाहती है. करीब एक घंटे बाद वो गाड़ी फिर साइट पर दाखिल हुई, पिंकेश ने hi उन्हें रइवे किआ और पहले माकन में बने टेम्पररी ऑफिस में उन्हें बिठाया, और मुझे फ़ोन किआ की में वह आ जाऊ. में वह पंहुचा तो एक लड़की वह कुर्शी पर बैठी हुई थी और सामने कुर्शी पर पिंकेशभाई बैठे हुए थे. पिंकेशभाई ने मुझे पहले hi बता दिया था की वो कोण है तो मेने जा कर कहा,

शिव : गुड आफ्टरनून मैडम.

जहान्वी : (उसने कोई जवाब नहीं दिया, वो बस मुझे ऊपर से निचे तक देख रही थी, में भी उन्हें देख रहा था, शाप में कटे हुए खुले बाल और ऊपर शिर में चस्मा लगा हुआ था, हलके मेकउप, स्टाइलिश टॉप जो उनके भरे हुए स्तन को ढकने का प्रयास कर रहा था, पर बड़ा गाला उभारो के बिच की घाटी को थोड़ा दिखा रहा था, एकदम मॉडर्न ऑउटफिट में खूबसूरत लड़की थी wo.)To तुम शिव हो.

शिव : जी मैडम (में वही खड़ा raha)Kahiye क्या काम था?

जहान्वी : (जहान्वी वैसे इम्प्रेस थी उसे देख कर, वैसे भी इतने हैंडसम लड़के को देख कर कोण इम्प्रेस नहीं होता, पर उसने अपने चेहरे से वो जाहिर नहीं होने दिया, थोड़े रोड लहजे में बात ki)Hum कहे की मैडम, साहब तो आप हो, जब चाहे नौकरी पर आना, जब चाहे नहीं आना, और आना भी कैसा सिर्फ दो तीन घंटे, भाई मालिक तो तुम hi लगते हो.

शिव : (उनका टन और बात करने का तरीका दोनों hi मुझे पसंद नहीं आया) में यहाँ part टाइम काम करता हु और मेने पहले hi ये सब बाटे पवनसीर को बता दी थी.

जहान्वी : वो hi तो मेरी समाज में नहीं आ रहा है, और उसी को समाज ने की कोशिस कर रही हु की आखिर पवनजी ने तुम्हे काम पर रक्खा क्यों है, सारा काम तो पिंकेश देखते है, तुम तो सिर्फ साहब की तरह आते हो, चले जाते हो, तो आखिर तुम्हारा काम क्या है, क्या जरुरत है तुम्हारी यहाँ?

शिव : (अब मुझे थोड़ा गुस्सा आ रहा था) देखिये अगर आपको कोई दिक्कत है तो आप पवनसीर से बात करलीजिये गए.

जहान्वी : वो तो में करुँगी hi, पर पहले मुझे तुमसे कुछ बात करनी है, पिंकेश जरा हमें कुछ समय के लिए अकेला छोड़ दीजिये.

पिंकेश : (खड़े होते hue)Ji madam(Wo बहार चला गया)

जहान्वी : (मेरी और देखते hue)Betho (मेरा कोई मन नहीं था बैठने का फिर भी में बेथ gaya)Tumhari तनख्वा कितनी है?

शिव : क्या?

जहान्वी : (अपने शब्दों पर जोर देते hue)Tumhari तनख्वा कितनी है?

शिव : क्यों?

जहान्वी :सीधे सवाल का सीधा जवाब नहीं दे शक्ति, मेने बस पूछा की तुम्हारी तनख्वा कितनी है?

शिव : पर अभी भी मेरा सवाल यही है की आपको क्यों जान न है?

जहान्वी : क्यों की मुझे काम है, और तुम्हारे फायदे के लिए hi पूछ रही हु.

शिव : मुझे पता नहीं है.

जहान्वी : क्या मतलब है तुम्हारा, तुम काम करते हो और तुम्हे अपनी तनख्वा तक पता नहीं है.

शिव : में part टाइम नौकरी करता हु, और इस बारे में मेरी सर से बात नहीं हुई है, उन्हें जो अच्छा लगेगा देंगे.

जहान्वी : (आश्चर्य से मुँह बनाते hue)Chalo मान लेते है की अभी तनख्वाह पता नहीं है, पर अंदाजा तो होगा hi, चार हजार, पांच हजार...

शिव : मुझे नहीं पता (मेने थोड़ा रूढली जवाब दिया)

जहान्वी : छोडो, ये बताओ की अगर मेरे लिए काम करोगे तो कितनी तनख्वाह loge?(Me उन्हें ध्यान से देखने laga)Aise क्या देख रहे हो? बताओ?

शिव : पर में क्यों आपके लिए काम करूँगा, और एक तरह से देखा जाये तो में काम कर hi रहा हु.

जहान्वी : (अपनी कुर्शी पर तक लगते hue)Ek तरह से कहा जाये तो तुम हमारे लिए hi काम करते हो, पर मेरे कहने का मतलब है की सिर्फ हमारे लिए काम करो, और तुम्हारे उस सवाल के लिए की क्यों, तो उसका जवाब है पैसो के लिए. आदमी काम क्यों करता है, पैसो के लिए, तो अगर में तुम्हे अच्छे पैसे दू तो तुम्हे मेरे लिए काम करना चाहिए.

शिव : में पैसो के लिए काम नहीं करता.

जहान्वी : है है हां, मुझे तुम्हारे बारे में पता है, अनाथालय में रहते हो, अनाथ हो, न कोई बैकग्राउंड है न कोई जायदाद, तो ये फालतू की बात मात करो की में पैसो को लिए काम नहीं करता.

शिव : सही कहा आपने, में पैसो के लिए hi काम करता हु पर सिर्फ पैसो के लिए काम नहीं करता.

जहान्वी : (व्यंग से अपना मुँह बनाते hue)Achchha, तो फिर किस के लिए काम करते हो?

शिव : में रिस्तो के लिए काम करता हु.

जहान्वी : (जोर से हस्ते hue)Risto के लिए, है है है... गुड ओने, ये जोके तो पहले से भी अच्छा था. रिस्तो के लिए है है है. (में शांति से बैठा उन्हें देख रहा था, मुझे शांत देख कर उन्होंने भी अपनी हसी रोक di)Risteeee, कैसे रिश्ते, तुम अनाथ हो, हो की नहीं?

शिव : है हु, पर हर रिस्ता खून का हो ये जरुरी तो नहीं, कुछ रिश्ते दिल के भी होते है, खून के रिश्ते थोप दिए गए होते है, जब की दिल के रस्ते हमारी मर्जी से बने होते है, तो ज्यादा मायने रखते है.

जहान्वी : (फिर से अपना मुँह बनाते hue)Hmmm, बाते तो बड़ी बड़ी करते हो, चलो ठीक है में सीधे सीधे कहती हु, पवनजी से रिस्ता तोड़ो और हमसे हाथ मिला लो, फायदे में रहोगे.

शिव : मुझे तो ऐसा कोई फायदा नजर नहीं आता.

जहान्वी : मुझे तो लगा था की तुम स्मार्ट होंगे, जिस तरह की बाते सुनी थी तो लगा था की तुम में कुछ तो होगा, पर तुम तो बच्चे निकले, तुम्हे पवनजी और हमारे बिच का फर्क तक नजर नहीं आ रहा, मात भूलो की एक तरह से पवनजी भी हमारे लिए hi काम कर रहे है, हमारे प्रोजेक्ट के जरिए वो कमाते है, तो बेहतर है की तुम सीधे हमारे साथ काम करो, तरक्की करोगे.

शिव : मुझे जरुरत नहीं है, और वैसे भी में तरक्की कर hi रहा हु, आज आप सामने चल के मुझे अपने साथ काम करने को कह रही है, मतलब तो यही है की मेने तरक्की की है, वन आप जैसे बड़े लोग मुज जैसे अनाथ को सामने से नौकरी देने नहीं आते, सॉरी मैडम, में जहा हु खुस हु, अगर इजाजत हो तो में चलता हु, मुझे और भी काम है. (में बिना उनका जवाब सुने वह से निकल gaya)(Jhanvi गुस्से से उसे जाता हुआ देख रही थी, उसकी अकड़ देख कर वो अंदर hi अंदर गुस्सा हो रही थी, वो उठी और अपनी गाड़ी ले कर वह से निकल गयी)

पिंकेशभाई मेरे साथ में hi थे तो उन तितलिओं को कोई मौका नहीं मिला. शाम को में घर लौट गया और फिर स्टेडियम. मेने भार्गवी जी को भी फ़ोन किआ पर वो बहार थी. मेने काव्य जी को भी फ़ोन लगाया और उनकी तबियत पूछी, उन्होंने कहा की वो ठीक है. रात को में पढ़ाई करने बेथ गया.

काव्य अपने बैडरूम में सोच रही थी, आज उसको शिव का फ़ोन आया था तो उसने कह दिया था की वो ठीक है. भले hi दर्द नहीं था पर और कुछ था जो ठीक नहीं था. अपनी हालत पर उसे खुद पर गुस्सा आ रहा था. तिस साल की हो चुकी थी पर फिर भी अभी वो कुवारी थी, ऐसा नहीं था की वो सेक्स के लिए मरी जा रही थी, पर इतनी आगे होने के बावजूद वो इन सब से दूर थी, पहले तो पढ़ाई और कार्रिओर के चलते उसने हमेसा इस बात को ताल दिया था, उसकी मम्मी हमेशा उसके लिए रिस्तो की बात चलती रहती थी, पर उसके वकील होने से hi कई लोग इंकार कर देते थे, और जो है कहते थे वो काव्य को पसंद नहीं आये थे, कभी प्रेम के चक्कर में भी वो नहीं पड़ी थी, अब इस उम्र में ज्यादातर लड़को की शादी हो चुकी होती है, और जो बचे हुए है उनमे काव्य को मज़ा नहीं आ रहा था. पिछले कुछ दिनों से उसके शरीर में कुछ खास हो रहा था, शिव के साथ बिताये पालो ने उसके अंदर एक हलचल कर दी थी, बार बार उसे वो hi सब याद आ रहा था. फिर भी वो अभी भी हिम्मत नहीं जूता पायी थी, उसके सामने शिव बहोत छोटा था, उसे ये भी दर लगता था की अगर ऐसी बात बहार आ गयी तो उसकी इज्जत का क्या होगा, तो वो अपने कदम पीछे खिंच लेती थी. ऐसे hi खयालो में वो कब सो गयी उसे पता hi न चला.

सैटरडे आ रहा था तो मेने जूही को पूछ की उसके घर जाने का क्या प्रोग्राम बना तो उसने कहा की भाभी को कुछ काम है तो वो अपने मायके जानेवाली है. तो शायद अगली बार जाना हो. सैटरडे को कोर्ट बंद था तो में सीधे काव्य मैडम से मिलने चला गया.
 
तबियत और टाइम के चलते अपडेट लेट देने के लिए माफ़ी चाहता हु.
 
अपडेट 130

पिछले दो चार रोज़ से वैस्वी बुजी बुजी रहती थी, स्कूल से आने के बाद भी वो अपने कमरे में चली गयी और बिस्तर पर बैठे बैठे न जाने कहा देख रही थी, उसके चेहरे से hi पता चल रहा था की वो किसी गहन सोच में डूबी हुई है, ये स्वर्ण ने भी नोटिस किआ था, उसने वैस्वी को आते देखा था, उसके चेहरे की उदासी से वो भली भाटी परिचित थी, उस दिन मला के घर से आने के बाद जब उन दोनों की बातचीत हुई तो स्वर्ण ने hi वैस्वी को वह हुई बातचीत के बारे में बताया था. ये सुन कर तो जैसे वैस्वी के कदमो टेल से जमीं hi खिसक गयी थी.

वैस्वी : ये कैसे हो सकता है भाभी, अभी से मेरी शादी की बात कर रहे है, अभी तो मुझे पढ़ना है.

स्वर्ण : शादी नहीं कर रहे है, बस कानो में बात डाली है, ताकि आगे चल कर इस बात को आगे बढ़ाया जा शेक.

वैस्वी: मुझे नहीं करनी शादी वादी.

स्वर्ण : शादी से पहले हर लड़की यही कहती है, ये कोई नयी बात नहीं है.

वैस्वी : लेकिन में सीरियस hu,aur मिक्की से शादी, ये पापा ने सोचा भी कैसे, क्या वो जानते नहीं उसके बारे में?

स्वर्ण : सब जानते है, पर लड़को के लिए ये कोई खास बात नहीं है, वो सब ऐसा समझते है की लड़के ये सब कर शक्ति है, उन्हें कोई रोक टोक नहीं होती. या यु कहे की ये उनकी मर्दानगी की निशानी होती है.

वैस्वी : मुझे नहीं चाहिए ऐसा लड़का, में कह देती हु भाभी, अगर मेरे साथ जबरदस्ती की तो में अपनी जान दे दूंगी.

स्वर्ण : मरूंगी एक तुजे जो ऐसी वैसी बाते सोची तो, तुजे किसने कह दिया की कल के कल तेरी शादी हो रही है, अभी तो सिर्फ बात की है, शादी थोड़ी न फिक्स की है (स्वर्ण ये सिर्फ वैस्वी का दिल बहलाने के लिए कह रही थी, क्यों की वो जानती थी की जिस तरह से उनलोगो में बात हो रही थी, दोनों और से सब राज़ी है, वैसे भी लड़कीओ को कोण पूछता है).

वैस्वी : भाभी में शादी नहीं करुँगी (उसकी नाखो में आंसू आ गए)

स्वर्ण : अरे अभी से इतना उदास क्यों होती है, मेने कहा न की अभी के अभी शादी थोड़ी की जा रही है, और में वडा करती हु की में तेरे साथ हु, तू चिंता मात कर जहा तू चाहेगी वही तेरी शादी करवाउंगी, चाहे उसके लिए मुझे किसी के साथ भी क्यों न लड़ना पड़े.

वैस्वी : (स्वर्ण के गले लगते hue)Bhabhiiiiiii.

स्वर्ण : चल रोना बंद कर, में तेरे साथ हु, तू चिंता मात कर.

ये उस दिन बात हुई थी. आज भी वैस्वी को उदास देख कर स्वर्ण जूस का गिलास ले कर उसके कमरे में पहुंच गयी.

स्वर्ण : क्या हुआ, ऐसे क्यों उदास बैठी है, ले जूस पि ले.

वैस्वी : नहीं भाभी, मुझे कुछ नहीं चाहिए, मुझे अकेला छोड़ दीजिये.

स्वर्ण : क्या हुआ, बता तो सही.

वैस्वी : कुछ नहीं हुआ है, बस मेरा मूड ठीक नहीं है.

स्वर्ण : आरी मेरी प्यारी नानन्द रानी, तू बताएगी नहीं तो मुझे कैसे पता चलेगा, तुजे पता है न में तुजे ऐसे दुखी नहीं देख शक्ति, ले जूस पि और बता क्या hua?(Wo अपनी भाभी का प्यार महसूस कर रही थी, उसने गिलास लिया और एक दो घूंट पिए, स्वर्ण ने उसका गाल सहलाया और puchha)Bata, क्या हुआ?

वैस्वी : भाभी, वो लोग नहीं मानेंगे, मेने मम्मी से इस बारे में बात करना चाही तो वो लोग तो राज़ी है, मम्मी कह रही थी की ऐसा दौलत वाला लड़का कहा मिलेगा. मुझे नहीं चाहिए उसकी दौलत वॉलेट. (उसकी आंखे फिर नुम हो गयी)

स्वर्ण : (उसको शांत करवाते हुए, अपनी सास को कोशने lagi)Itne बड़े हो गए फिर भी अकाल नहीं आयी इन में, सहेरो में रहते है पर सोच अभी भी वही दकियानूसी है. और तू भी क्या बात बात पे आंसू बहाने लगती है, इतनी भी कमजोर मत बन, इस दुनिया में रहना है तो लड़ कर रहना पड़ता है, अगर ऐसे hi आंसू बहती रहेगी तो हर कोई तुजे दबाता रहेगा. मेने कहा न की अभी के अभी तेरी शादी नहीं हो रही है, और वैसे भी तू मिक्की को जानती कितना है, पहले जान तो ले, क्या पता वो तेरे लिए सही हो.

वैस्वी : नहीं भाभी, वो मुझे पसंद नहीं है. (वैस्वी ने पूरी मक्कमता से ये कहा)

स्वर्ण : (उसको ध्यान से देखते hue)Kyu पसंद नहीं है?

वैस्वी : बस नहीं पसंद है तो नहीं है.

स्वर्ण : कोई और पसंद है? (सवाल के साथ hi वो वैस्वी के चेहरे के बदलते भाव देख रही थी)

वैस्वी : N...nahi.

स्वर्ण : (उसके चेहरे पर मुस्कान आ gayi)Chal जूठी, तेरा चेहरा hi बता रहा है की कोई तो है, कोण है वो?

वैस्वी : (शरमाते hue)Koi नहीं है भाभी.

स्वर्ण : (मुस्कुराते hue)Apana चेहरा तो देख, कैसे शर्म से लाल हो रहा है, तू चाहे बताये या न बताये, में समाज गयी की कोई तो है जिसने हमारी नानन्द रानी का दिल चुरा लिया है.

वैस्वी : भाभीइइइइइइ.

स्वर्ण : कोई बात नहीं, जब तेरा दिल करे तब बताना, ले शांति से जूस पि, और अपना मूड ठीक कर, कुछ नहीं होगा, में हु न. में चलती हु, निचे बहोत काम है, और तू भी आजा, और खाना खा ले.

स्वर्ण वह से चली गयी, और वैस्वी अपनी भाभी को जाते हुए देख रही थी, अब उसके चेहरे पर सुकून था, वो शिव को याद करते हुए जूस पिने लगी.

आज सैटरडे था, साइट पे जाने में देर थी, या यु कहे की आज ज्यादा काम नहीं था, तो सोचा एक बार काव्य मैडम से मिल लू. वैसे भी मुझे पता था की आज कोर्ट में छुट्टी थी. में उनके घर चला गया और बेल्ल बजायी, उन्होंने hi दरवाजा खोला, मुझे देखते hi उनके चेहरे पर आश्चर्य चालक आया, और साथ में शर्म भी.

शिव : अंदर औ की यही से लौट जाऊ?

काव्य : नहीं, ऐसा क्यों कह रहे हो, आओ अंदर आओ. (उनके बोलने में भी झिझक थी, में मैडम को कई दिनों से जनता था, वो एक कॉंफिडेंट लड़की थी, अपने पेशे में माहिर भी थी, और अच्छी समाज रखती थी, आज उनकी हिचकिचाहट मुझे दिख रही थी, शायद ये उस वजह से था की हम दोनों में कुछ हुआ था)

शिव : कैसी तबियत है आपकी?

काव्य : ये तुम फ़ोन पर पूछ चुके ho(Unka शिर निचे था पर सिर्फ निगाहे उठा कर उन्होंने कहा).

शिव : उस वक़्त भी आप हिचकिचा रही थी तो मुझे लगा शायद आप जूथ बोल रही है. (में सोफे पर बेथ गया)

काव्य : में क्यों जूथ बोलूंगी? (वो कड़ी hi थी)

शिव : आप कड़ी क्यों है, बैठिये. (उन्होंने फिर मेरी और देखा, में मुस्कुराया, ऐसी सिचुएशन थी जैसे वो मेरे घर में आयी हुई है) बैठिये मैडम, आपका hi घर है. (उनके चेहरे पर भी मुस्कान आ गयी और वो सामने बड़े सोफे पर बेथ gayi)Muje इसलिए ऐसा लगा की शायद आप सोच रही हो की ज्यादा दर्द नहीं है फिर क्यों ख़म खा शिव को तकलीफ दे, तो आपने ऐसा कह दिया हो की दर्द नहीं है, क्या सच में दर्द नहीं है?

काव्य : (शिव की और देखने लगी, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा, दर्द तो था नहीं, या कहे तो बहोत काम hi था, पर दर्द कही और था, और ये दिमाग में आते hi उसकी धड़कन तेज होने लगी, साथ में उसे शर्म भी आने लगी, वो शिव की और देखने से भी कटरा रही थी)

शिव : (वो खामोश बैठी कुछ सोचने लगी थी तो मेने kaha)Dekha, यही बात थी न, मेने आपको कहा था की आप कोई औपचारिकता मत कीजिये, मुझे खुसी है की में आपके काम आ रहा हु, चलिए में आपकी मालिश कर देता हु.

काव्य: (उसका दिल इतनी जोरो से धड़कने लगा की उसको साँस लेने भी मुश्किल होने लगी, उसने बड़ी मुश्किल से कहा ki)Nahi शिव, इसकी कोई जरुरत नहीं है, m..m में ठीक हु.

शिव : (पता नहीं पर में अब हक़ करने लगा tha)Me एक भी नहीं सुनूंगा, चलिए अंदर चलिए, वर्ण में आपको उठा कर ले चलता हु.

काव्य : (में जिस चीज से बचना चाहती थी, वो hi हो रहा था, अब में उसे कैसे संजो की अगर में उसके साथ गयी तो न जाने काया हो जायेगा, में अपने आप पर काबू नहीं रख पाऊँगी, में अभी भी सोचमे बैठी हुई थी, वो उठा और मेरे पास आ गया, में अभी भी मूर्ति की तरह बैठी हुई थी, जब उसने मेरा हाथ पकड़ा तो मेरे पूरी शरीर में एक कम्पन दौड़ गयी, उसने एक हक़ से मेरा हाथ पकड़ा और मुझे उठाने लगा, में किसी कटी पतंग की तरह उसके इससरए पर नाचने लगी थी, में कड़ी तो हो गयी पर जैसे मेरे पैरो में जान hi नहीं थी, मुझसे कदम भी नहीं बढ़ाया जा रहा था, आज छूती थी तो में गउवन पहने हुए hi थी, अचानक उसने मुझे अपने हाथो में उठा लिया, मेने दर के मरे उसके गले में बहे दाल दी, वो मुझे किसी गुड़िया की तरह उठाये बैडरूम की और चलने लगा, में उसे देख रही थी, में शर्म से पानी पानी हो रही थी, क्यों की मुझे ऐसा लग रहा था की जैसे वो मुझे उठाये सुहाग की सेज़ पर ले जा रहा है, आज कुछ न कुछ होना तय था, मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था, उसकी ताकत देख कर में और ज्यादा उसकी और आकर्षित हुए जा रही थी, उसके लिए तो जैसे में एक छोटी सी गुड़िया थी, वो मुझे उठाये, रूम में ले गया और मुझे बिस्तर पर लेता दिया, में शर्म के मरे उस से नज़ारे भी नहीं मिला प् रही थी, जैसे तैसे में अपने आपको समेटने लगी, मेने अपने हाथ से अपना शरीर ढकना चाहा जैसे मुझे लग रहा था की वो अब मेरे कपडे उतरेगा, ये सोच सोच कर hi में पसीना पसीना हो रही थी. उसे पता था की तेल कहा है तो वो अलमारी की और बढ़ गया और तेल लिए वापस लौट आया. मेने आखरी कोशिस ki)Rehne दो शिव, में ठीक हु. (उसने मेरी और देखा और मुस्कुराया, वो मेरी सुन hi नहीं रहा था, उसने मेरा गाउन घुटनो तक उठाया और मेरे पैरो की मालिश करने लगा, उसकी छुअन से में पिघलने लगी और आंखे बंद किये हुए पड़ी रही, में बस उसके हाथो की हरकते महसूस कर रही थी, आहिस्ता आहिस्ता उसके हाथ ऊपर की और बढ़ने लगे और मेरे कपडे ऊपर उठते चले गए, कभी कभी मुझे ऐसा लग रहा था जैसे वो मालिस नहीं कर रहा पर अपने हाथो से मेरी झंघ को सहलाते हुए महसूस कर रहा है, मेरी हालत ख़राब हो रही थी, वो बिना झिझक के मेरी दोनों झांघो को मसल रहा था, मेरे अंदर जैसे तूफान उठा हुआ था. उसके छूने से मेरी सिस्किअ तक निकलने को बेक़रार थी जिसे मेने जैसे तैसे रोक रक्खा था.)

शिव : (उनकी भरी हुई झंघे मुझे आकर्षित कर रही थी, पता नहीं पर मुझे अंदर से लग रहा था की काव्यजि सेक्स चाहती है, और ये सोच सोच कर hi मेरा लुंड कड़क हो रहा था, में ये भी जनता था की उन्हें मासपेशिओ का दर्द नहीं है, पर फिर भी में चला आया था, क्यों की कहना कही में भी जनता था की यहाँ बात मालिस की नहीं है, में मालिस तो कर रहा था पर बिच बिच में मेरे हाथ उनके शरीर का आनंद भी ले रहे थे, मेने उनकी झंगो पर से कपड़ा थोड़ा और ऊपर उठा दिया, उनकी सफ़ेद पंतय मुझे दिख रही थी, उनकी पंतय एक जगह से पूरी गीली हो गयी थी, मेरे हाथ भी झांघो के जोड़ के नजदीक hi रेंग रहे थे, मेरा मान कर रहा था की में उनकी छूट को दबोच लू पर मेने अपने आपको संभाला हुआ था, में कोई जल्द बजी नहीं करना चाहता tha,thodi देर उनकी झांघो को फैलाये में बिच में बैठे बैठे उनकी मालिस कर रहा था, कभी कभी उनके मुँह से हलकी सिस्किअ भी सुनाई दे रही थी. मेने आगे बढ़ने की सोची) मैडम, आप निचे लेट जाइये, में आपकी पीठ पर भी मालिस कर देता हु, ऊपर तेल गिरेगा तो चद्दर ख़राब होगी.

काव्य : Hmmmm....(Vaise तो काव्य भी समाज रही थी की ये सब बहाने है, वो उसे नंगी करना चाहता है, पर उसका खुद का दिल भी तो यही चाहता था, भले hi उसे शर्म आ रही थी पर उसे ये भी पता था की अगर आगे बढ़ना है तो कपडे तो निकलने hi पड़ेंगे, वो उठी, वो शिव की और पीठ किये हुए hi थी, उसके मान में थोड़ी हिचकिचाहट भी थी, पर फिर आखिर कर वो पेट के बल निचे लेट गयी, आनेवाले पालो को सोच कर उसने अपनी आंखे भी बंद कर दी, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था, खड़े होने से जो उसका शरीर वापस धक् गया था, फिर से शिव उसे बेपर्दा करने लगा, अपने गाउन को ऊपर की और सरकते वो महसूस कर रही थी, निचे लेटने की वजह से जो हिस्सा उसके निचे दबा हुआ था, उसने खुद अपने शरीर को थोड़ा ऊपर उठा कर उसे निकलने में मदद की, वो पीछे से नंगी होती जा रही थी, शिव ने गाउन उसकी पीठ तक ऊपर चढ़ा दिया, वो निचे सिर्फ पंतय पहने हुए थी, वो अपने शरीर को भी जानती थी, उसके बड़े बड़े कूल्हे अब शिव के सामने थे, उसके अंडे अजीब सी हलचल थी, वो महसूस कर प् रही थी की कैसे शिव उसके उन कूल्हों को देख रहा होगा, वो बस आंखे बंद किये हुए पड़ी थी.

शिव : (वो क़यामत लग रही थी, ऊपर के मुकाबले उनका निचे का हिस्सा ज्यादा भरा हुआ था, उनकी झंघे और कूल्हे अतिरिक्त चर्बी से भरे हुए थे, उभरे हुए कूल्हे देख कर मेरी हालत ख़राब हो रही थी, मेरा लुंड पूरी तरह से तन गया था, मेने अपने लुंड को एडजस्ट करना चाहा पर मेरे हाथ में तेल लगा हुआ था, अगर में एडजस्ट करता तो तेल पंत पर लग jata.)Me भी कपडे निकल देता हु, तेल मेरे कपड़ो पर भी लग शक्ति है.

काव्य : (मेरा दिल धड़क रहा था, वो भी कपडे उतर रहा था, मेरा पूरा ध्यान उन आवाजों पर hi था, जो उसके कपडे उतरने से आ रही थी, पता नहीं उसने कितने कपडे उतरे थे, क्या वो अंडरवियर में था या पूरा ननगा? मेरी हालत और ख़राब हो रही थी, फिर से उसके हाथ चलने लगे, वो मेरी कमर पर मालिस करने लगा, और धीरे धीरे ऊपर उठता गया, मुझे पता था अभी वो मेरी ब्रा के बारे में कुछ कहेगा, और उसे निकलने की बात कहेगा, थोड़ी देर बाद में आश्चर्य से भर गयी, उसने न मुझे कुछ कहा न इजाजत ली, और मेरी ब्रा के हुक खोलने लगा, उसकी हिम्मत बढ़ती जा रही थी और मेरी हालत ख़राब होती जा रही थी, उसने ब्रा के हूक खोल दिए, और मेरी पीठ पर अपने दोनों हाथो से मालिस करने लगा)

शिव : मैडम, गाउन पर तेल लग रहा है, उसे पूरा निकल दीजिये.

काव्य : (मेने कोई आना कनै नहीं की और मेने, गाउन को अपने शिर के ऊपर से निकल दिया, मेरी हालत में hi जानती थी)

शिव : ब्रा भी...

काव्य : (बाप रे, ये लड़का, जैसे मुझपर हुकुम चला रहा था, और में सब किये जा रही थी, मेने ब्रा भी निकल दी, वैसे भी उलटी लेती थी तो मेरे स्तन निचे hi थे, में सिफत पंतय में थी, आज जैसे में भी कुछ कर गुजरने के मूड में थी, वैसे भी कब तक इन सब से दूर रहूंगी, इज्जत- इज्जत करके इतने सालो से तो सेक्स से दूर थी, आज सामने से मौका आया है तो मेरा भी मान ललचाने लगा था, भले hi मुज में आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं थी पर में मन कर के उसे रोकना भी नहीं चाहती थी, वो मेरी नंगी पीठ पर मालिस कर रहा था, सेक्स को अगर बाजु में रख दू तो भी उसकी मालिस भी मुझे बहोत अच्छी लग रही थी, श्री का रोआ रोआ जैसे नांच रहा था, वो जिस तरह से मेरे शरीर पर अपनी उंगलिओ का जादू चला रहा था, में किसी भी चीज के लिए उसे मन नहीं कर शक्ति थी)

शिव : में ठीक से बेथ जाता हु, साइड से अच्छे से नहीं कर प् रहा. (मेने उनकी झांग के आस पास अपने पेअर रक्खे और उनकी झांघो पर बेथ गया, हलाकि वजन नहीं डाला था, पर उन्हें निचे जरूर दबा दिया था, वैसे भी मेरी हालत ख़राब थी, हलकी चर्बी वाला उनका शरीर इतना मुलायम और मखमली था की में रुक नहीं प् रहा था, गोर रंग का वो जिस्म मुझे बुला रहा था, में सिर्फ अंडरवियर में था, मेरा लुंड पूरी तरह तना हुआ था, मेरा मान कर रहा था की उन बड़े बड़े कूल्हों के बिच अपने लुंड को रगड़ू. पर अभी भी थोड़ी झिझक थी, में वैसे hi बैठे बैठे मालिस करने लगा, थोड़ी देर बाद मेरे साबरा ने जवाब दे दिया, मेने अपनी स्थिति एडजस्ट की और लुंड को उनके कूल्हों की दरार की और बढ़ा दिया, हलाकि में ये बड़ी कुशलता से कर रहा था, मालिस करते हुए जब में आगे झुकता तो लुंड को आगे बढ़ा देता और फिर वापस निकल देता, कभी मेरा लुंड कूल्हों के बिच तो कभी दो झांघो के बिच जा रहा था, में भी सब भूल कर अपनी आंखे बंद किये हुए वही क्रिया दोहरा रहा था.)

काव्य : (शह्ह्ह्ह माआ, क्या ये वही है, क्या वो नंगा है, वो अपना अंग मेरे वह चुभो रहा है, शहहहहह, मुझे यकीं नहीं हो रहा था की शिव इतनी हिम्मत करेगा, उसके दोनों हाथ तो मेरी पीठ पर थे, और फिर भी मुझे अपने कूल्हों पर कुछ चुभ रहा था, यक़ीनन वो उसका वही अंग था, ये सोच कर hi मेरी सांसे फूलने लगी, उसकी रगड़ से मेरी योनि में सरसराहट होने लगी, उसका वो अंग मेरी योनि पर भी दस्तक दे रहा था, मेरी हालत ख़राब थी, मेरी सांसे तेज चल रही थी, में आंखे बंद किये हुए सब महसूस कर रही थी. अब उसकी हिम्मत इतनी बढ़ रही थी की वो मेरी पंतय को भी आहिस्ता आहिस्ता निचे सरका रहा था, मालिस करते हुए उसके हाथ बड़ी चालाकी से ये काम कर रहे थे, जब उसके हाथ मेरे कूल्हों की दरार के शुरुआती भाग पर महसूस हुए तब मुझे एहसास होने लगा. थोड़ी देर वो मुझे वैसे hi मालिस करता रहा, फिर वो रुक गया और उठने लगा, में मायूस हो गयी, क्यों की मुझे लगा की ये खेल ख़तम हो गया, में उसे रोकना चाहती थी पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी. पर जल्द hi मेरी खुसी का ठिकाना नहीं रहा, वो आगे आ गया था, मेने हलके से आंख खोल कर देखा तो वो मेरे चेहरे के पास बेथ रहा था, मेने दर के मरे आंखे बंद कर दी, वो फिर से मालिस करने लगा, अब वो ऊपर से निचे की और कर रहा था, मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी, मेने फिर से थोड़ी आंख खोली तो में दार गयी, क्या मेने वही देखा? मुझे यकीं नहीं हो रहा था, मेने फिर से डरते डरते आंख खोली, अंडरवियर में बड़ा सा तम्बू दिख रहा था, मेरी हालत ख़राब होने लगी, तम्बू के आगे का हिस्सा गिला लग रहा था, वो मेरे इतना नजदीक था की में उसकी खुसबू भी महसूस कर रही थी, उसकी अजीब सी गंध मेरे नथुनों में भरने लगी, पतानहीं पर मेरे शरीर में एक अजीब सी हलचल होने लगी, मेरी आंखे नशे में डूबने लगी, मेने महसूस किआ की अब शिव के हाथ मेरी पंतय के अंदर घुस रहे है, वो मेरे कूल्हे की ऊपरी भाग को सेहला रहा है)





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शिव : (मेरे हाथ, पंतय के अंदर जा रहे थे, अंदर की गर्मी महसूस कर मेरा लुंड ठुमके मार रहा था, मैडम कोई विरोध नहीं कर रही थी न मुझे टोका था, अब मेरी भी हालत ख़राब हो रही थी, मेने हिम्मत कर के अपने हाथ को और अंदर किआ और कूल्हों को मसल दिया, मेने हाथ पीछे खिंच लिया और मैडम की प्रतिक्रियाका इंतजार करने लगा, पर उन्होंने कुछ न कहा, मेरी हिम्मत बढ़ गयी और मेने फिर से अपने हाथ को अंदर डाला और कुछ पल वही रहने दिया, थोड़ी देर बाद फिर से मेने अपने हाथ को पीछे खिंचलीया, मैडम कोई विरोध नहीं कर रही थी, अब में फूल कॉन्फिडेंस में था, मेने फिर से हाथ को अंदर डाला, और इस बार ऐसे डाला की पंतय थोड़ी निचे खिसक गयी, में उन मांसल कूल्हों को दबाते हुए सहलाने लगा, मेने अपने हाथ पीछे भी नहीं खींचे और कूल्हों को मसलने लगा, यहाँ तक की मेने कूल्हों की दरार में अपनी ऊँगली भी चलायी, मुझे लगा की मेने मैडम की सिसकी सुनी, मुझे मैडम के बड़े बड़े कूल्हे ऊपर से देख रहे थे, आधे पंतय में ढके थे, कूल्हों की दरार देख मेरा लुंड उछाल रहा था, मेने निचे देखा तो मेरा लुंड मैडम के चेहरे से थोड़ी hi दुरी पर था, मैडम आँखे बंद किये हुए थी, मेने एक पल सोचा फिर जोर से साँस छोड़ी और लुंड को आगे करते हुए उनके गाल पर रगड़ दिया, उनकी सांसे तेज होने लगी, में उनके रिएक्शन का वेट करने लगा, पर उन्होंने कोई रिएक्शन नहीं दिया, में निश्चिंत हो गया था, मेने उनके चेहरे पर अपने लुंड को रहने दिया और उनके कूल्हों की और बढ़ गया, अब में हर बार पंतय को निचे खिसका रहा था, पंतय धीरे धीरे और निचे खिसक रही थी.)

काव्य : (ओह्ह शिईयिव शह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो शहहहहह मेरी आवाज निकल जाएगी, शह्ह्ह्हह्ह, मेरे चेहरे पर वो अंग है, उसका गिला पैन में अपने गाल पर महसूस कर रही थी, उसकी अजीब सी गंध मुझे पागल कर रही थी, वो मेरे नाक के इतना नजदीक था की उसकी गंध से मेरे नथुने भर गए थे, मेरा चेहरा भी हिलने लगा था, में उस अंग को अपने चेहरे से रगड़ने लगी थी, कैसा अजीब कार्य था पर मुझे अच्छा लग रहा था, वो मेरे कूल्हों को नानग कर रहा था, में जानते हुए भी अनजान बानी हुई थी. मुझे महसूस हो रहा था की मेरे कूल्हे लगभग पुरे नंगे हो चुके थे, मुझे इतनी शर्म आ रही थी की क्या बताऊ, पर में फिर भी उसे रोक नहीं रही थी, थोड़ी देर बाद वो रुका और खड़ा हुआ, में कुछ समझती उस से पहले hi फिर वो बेथ गया, मेरे चेहरे पर मुझे कोई गरम गरम डंडा महसूस हुआ, मेरी सांसे hi रुक गयी, क्या सच में शिव ने अपना वो अंग मेरे चेहरे पर लगाया है, मेरा साँस लेना भी दूभर हो गया था, एक और इतनी उत्तेजना और दूसरी और उलझन, मुझे यकीं नहीं हो रहा था की शिव ने ऐसा किआ है. मेरी हिम्मत भी नहीं हो रही थी की में आंखे खोलू. फिर से वो मालिस करने लगा, मेरी पंतय निचे खिसक गयी थी, कूल्हे निर्वस्त्र थे, ऊपर से उस डंडे से कुछ चिकनाहट मेरे गाल पर लग रही थी, ये सब मेरे लिए बहोत ज्यादा था, में उसे रोकना चाहती थी, पर में कुछ भी कह नहीं प् रही थी, थोड़ी देर बाद वो उठा और नीचे जा कर मेरी पंतय उतरने लगा, मेने फ़ौरन पंतय पकड़ ली.

शिव : क्या हुआ मैडम?

काव्य : नहीं शिव, उसे मात निकालो.

शिव : क्या आप सचमे ऐसा चाहती है?

काव्य : हम बहोत आगे बढ़ गए है शिव, अब और नहीं.

शिव : में भी वही कह रहा हु, हम बहोत आगे बढ़ गए है, क्या आप सचमे अब रुकना चाहती है?

काव्य : मुझे शर्म आ रही है शिव.

शिव : (अब में इसका क्या मतलब समजू, वो चाहती तो है पर शर्म की वजह से आगे नहीं बढ़ना चाहती) कुछ नहीं होगा मैडम, मेने उनका हाथ छुड़ाया और पंतय निकलने लगा)

काव्य : नहीं शिव (में उसे रोक नहीं प् रही थी, उसने मेरी पंतय पूरी निकल di)Shiiiv (में कुछ समझती उस से पहले मेने महसूस किआ की वो मेरे ऊपर लेट रहा hai)Shiiiiiv, क्या कर रहे हो? (वो मेरे ऊपर लेट गया, उसका नंगा बदन मुझे महसूस हो रहा था और साथ में उसका वो अंग मेरे कूल्हे की दरम में घुस रहा था, मेने छतना chhaha)Shiiiiiiiiv, शह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो छोडो मुझे. (हलाकि में विरोध कर रही थी पर वो इतना भी ज्यादा नहीं था, उसने मुझे अपने निचे दबा दिया था, में हिल भी नहीं प् रही थी, उसके निचे में नंगी दबी हुई थी, कितना अजीब एहसास था, पहली बार किसी लड़के के साथ थी, पूरी नंगी, ये एहसास मुझे अंदर तक भिगो रहा था, पर शर्म और झिझक अभी भी अपना काम कर रही thi)Shiiiv, ऐसा मात करो, मुझे शर्म आ रही hai.(Wo मेरी पीठ और गले को चूमने लगा, मेरी हालत ख़राब होने लगी, ये किस तरह का एहसास था में समाज नहीं प् रही थी, मेरी हालत ख़राब हो रही थी, वो अपना शरीर मेरे शरीर से रगड़ रहा था और उसका वो अंग भी कितना कड़क था, वो पता नहीं कहा कहा लग रहा tha)Shhhhhhhh, शीइइइइव शह्ह्ह्ह क्या कर रहे हो?

शिव : आप बहोत खूबसूरत हो मैडम (मेने सोचा की अब शर्म छोड़नी hi पड़ेगी)

काव्य : (उखड़ती आवाज se)Ye क्या कह रहे हो शिव?

शिव : यही की आप बहोत hi ज्यादा खूबसूरत है, में रुक नहीं शक्ति.

काव्य : जूथ मात बोलो, में मोती हु. (काव्य को भी अपनी तारीफ पसंद आ रही थी पर वो और सुन न चाहती थी)

शिव : किस बेवकूफ ने कहा ऐसा, जिस जगह को आप मोटा कह रही है वो और ज्यादा आकर्षक है, उसे देख कर hi तो रहा नहीं जा रहा (मेने उनकी गर्दन और पीठ को छठा और साथ में अपने लुंड को अंदर दबाया तो वो छूट के नजदीक पहुंच गया)

काव्य : शहहहहह सीईव ऐसा मात करो शह्ह्ह्हह्ह, ये गलत hai.(Muje अच्छा तो लग रहा था पर कही न कही झिझक भी थी)

शिव : कुछ गलत नहीं है, आप भी यही चाहती है. (उनके गाल से गाल रगड़ते हुए में जीभ से चाटने लगा)

काव्य : किसने कहा शहहहहह, में कुछ नहीं चाहती, शठ मुझे कुछ नहीं करना है शह्ह्ह्ह छोडो मुझे.

शिव : जूथ बोल रही हो आप, अगर न चाहती तो अब तक आप मुझे दन्त चुकी होती.

काव्य : (वो सही बोल रहा था, अगर मुझे पसंद न होता तो मुझे अभी तक उसे दन्त देना चाहिए था, पर में ऐसा नहीं कर पायी थी, और न करना चाहती थी, पर लड़की के नाते में झिझक भी रही thi)Par ये ठीक नहीं है शिव, शह्ह्ह्ह, हमे ऐसा नहीं करना चाहिए. (मेरी बात सुन के वो उठने लगा, शायद उसने मेरी बात मान ली थी, पर उसका उठना भी मुझे अच्छा नहीं लगा, में अपने आपको कोसने लगी, क्यों रोका उसे कर लेने देती जो वो चाहता है, पर शर्म भी आ रही थी, और पता नहीं एक झिझक सी थी, अभी में कुछ सोचती उस से पहले उसने मुझे पलट दिया, में उसके सामने थी, पूरी नंगी, मेने अपने स्तन ढकने की कोशिस की और वापस पलटने की कोशिस की पर उसने मेरे कंधे पकड़ते हुए मुझे अपने निचे दबा दिया, मेने जोर लगाया पर उसके सामने में बेबस थी और ऊपर से उसने मुझे ऐसे दबा रक्खा था की उसका वो कड़क अंग आगे से मेरी योनि पर टच होने लग गया, में सिहर उठी, उस अंग की छुअन से मेरी आंखे तक बंद हो gayi)Shhhhhhhhhh shiiiiiiiiiiv.(Mene विरोध करना बंद कर दिया और शांतिसे लेती रही और अपनी योनि पर लगे उस कड़क डंडे को महसूस करने लगी. थोड़ी देर तक वो बस मुझे अपने निचे दबाये लेता रहा, जब मेने देखा की वो कोई हरकत नहीं कर रहा तो मेने झिझकते हुए उसकी और देखा, में बोली तो नहीं पर मेरे आँखों में सवाल थे, की क्यों रुके हुए हो, जैसे वो मेरे मन की दशा को समाज रहा था, वो मुस्कुराया तो में शर्मा गयी, कितनी शर्म आ रही थी, पहली बार ये सब हो रहा था, में सब जानती थी, मर्द और औरत के बिच क्या होता है, बस ये नहीं पता था की कैसा लगता है, उसके साथ पूरी नंगी थी में, मेरी योनि पर उसका वो अंग लगा हुआ था, इस नंगे पैन के स्पर्श से में अंदर से पागल हो रही थी, पर शर्म नहीं छूट रही थी. में उसकी आँखों में देख रही थी, और वो मेरी, पल जैसे थम गया था, वो मेरी और झुकने लगा, में समझने की कोशिस कर रही थी, क्या वो सच में मुझे किश करने जा रहा था, आज तक मेने कभी किसी के साथ किश तक नहीं किआ था, वो मुझे किश करने जा रहा था, मेरे जीवन की पहली किश, में उसको hi देख रही थी, में उसकी आँखों में देख रही थी, उसकी आँखों में उभरते भाव देख रही थी, वो झुकता गया, झुकता गया, है वो मुझे किश hi करने जा रहा था, उसकी नाक से निकलने वाली गर्म हवा मेरे चेहरे को छू रही थी, मेरी धड़कने तेज हो चुकी थी, जब उसके होठो ने मेरे होठो को छुआ, मेरी आंखे hi बंद हो गयी, वो मेरे होठो को चूसने लगा, ये किस तरह का एहसास था, जहा में किसी का जूठा नहीं कहती वही सीधे मुँह से मुँह लग गया था, कई बार फिल्मो में देखा था पर कभी महसूस नहीं किआ था, कैसा अजीब एहसास था, उसके मुँह से रास निकल कर मेरे होठो को भिगो रहा था, गन्दा लगने की बजाये मुझे अच्छा लग रहा था, उसकी जीभ भी मेरे अंदर जा रही थी, मेने अपना मुँह खोल कर उसे अंदर जाने दिया, जब हमारी जिव्हा आपस में टकरा रही थी मेरी हालत ख़राब हो रही थी, मेरे हाथ उसके शिर पर चले गए और में उसके शिर को सहलाने लगी, वो मेरे पैरो को फ़ैलाने लगा तो मेने कोई विरोध नहीं किआ, मेरे पेअर फ़ैल चुके थे, वो मेरे पैरो के बिच में था, उसका वो अंग मेरी योनि पर रगड़ रहा था और वो मेरे होठो को चूस रहा था,





में आंखे बंद किये हुए इस अद्भुत आनंद को महसूस कर रही थी, मेरा एक हाथ उसकी नंगी पीठ को सेहला रहा था, आज पता चल रहा था की किसी की बहो में होने का क्या मतलब था, कितना सुकून था, कितना अच्छा लग रहा था, पता नहीं कैसे पर में भी उसके होठो को चूसने लगी थी, और अपनी जिव्हा से उसकी जिव्हा के साथ खेल रही थी, हम दोनों काफी देर तक किश करते रहे, मेरा मान hi नहीं कर रहा था की ये ख़तम हो. पर सांसे फूलने की वजह से मेने hi अपना मुँह फेर लिया, और मुँह खोल कर जोर जोर से सांसे लेने लगी, पर वो हरजाई रुका नहीं, अचानक से वो मेरे स्तन को चूसने लगा, अभी एक एहसास से बहार नहीं निकली थी की ये दूसरा एहसास मुझे आनंद देने लगा, कैसा अजीब एहसास था, वो मेरे निप्पल को चूस रहा था, एक और तो गुदगुदी हो रही थी और दूसरी और एक अजीब एहसास हो रहा था, हमेसा जिस स्तन को छुपके रक्खा था, जिसकी थोड़ी सी भी झलक कोई नहीं देख पाया था, उसे वो चूस रहा था, मेरी छाती और ऊपर हो gayi)Shhhhhhhh शीइइइइव शहहहहह क्या कर रहे हो शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह आहिस्ता shhhhhhhhhh. (वो मेरे स्तन को दबाते हुए मेरे निप्पल चूस रहा था, में पागल हो रही थी, मेरे दो पैरो के बिछ भी हलचल हो रहीथी, उसकी हर हरकत मुझे आनंद दे रही थी, में फिर से उसके शिर को सहलाते हुए उसे अपने स्तन को चुसवाने लगी. इस खेल में इतना आनंद आता है इस बात का तो मुझे एहसास hi नहीं था, मेरे पुरे शरीर में चींटिया रेंग रही थी, उसका वो कड़क अंग मेरी योनि के आस पास लग रहा था तो में तड़प कर रह जाती थी, ये मेरा पहला अनुभव था, में एक लड़के के निचे नंगी लेती हुई थी, पर मुझे अब नंगी होना अजीब नहीं लग रहा था, बल्कि मुझे अच्छा लग रहा था, उसके नंगे पैन का एहसास मुझे उत्तेजित कर रहा था, वो मुझे मसल रहा था, मेरे स्तन को दबा रहा था, दर्द के साथ साथ मज़ा भी आ रहा था, मेने कभी सोचा नहीं था की स्तन दबवाने में इतना मज़ा आता होगा, में उसके साथ चिपक रही थी, मेरे कमर हिल रही थी, में उसके कड़क अंग को अपनी योनि पर महसूस करना चाहती थी, वो अगर साइड में हो जाता तो में अपनी योनि को उसके पास ले जाती, मेरी तड़प चरम पर थी, मुझे पता था की लड़के अपना वो अंग योनि में अंदर डालते है, तो में उस अंग को अपनी योनि में दाखिल करवाने के लिए तड़प रही थी, में बार बार अपनी योनि को उसके कड़क अंग के सामने करदेती थी, कई बार तो उसका वो अंग मेरे छेड़ पर भी लग रहता. पर पता नहीं शिव को क्या हुआ था, वो अंदर दाल hi नहीं रहा था, फिर मुझे एहसास हुआ की शायद अभी वो छोटा है, उसे भी मेरी तरह सेक्स के बारे में पता नहीं होगा, मेने सोचा की अभी वो थोड़ी देर में समाज जायेगा और उसे अंदर डालेगा, पर वो सिर्फ मेरे स्तन चूस रहा था और योनि पर अपना अंग घिस रहा था, मेरी बेचैनी जवाब दे रही थी, में इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी की में सब कुछ भूल चुकी थी, में भूल चुकी थी की हम दोनों कोण है, क्या हैसियत है हमारी, क्या अंतर है हमारी उम्र में, मुझे बस उस कड़े अंग की चुभन hi महसूस हो रही थी. जब शिव ने अंदर नहीं डाला तो मुझसे रहा नहीं गया और में बोल padi.)Shiv, उसे अंदर डालना होता है.

शिव : (उनके मुँह से ये सुन कर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी, मेने उनके लाल हो चुके निप्पल को छोड़ा और उनकी आँखों में देखा, वो शर्मा गयी और अपनी नज़ारे दूसरी और घुमा ली, वो मुझे अनादि समाज रही थी, मुझे भी मज़ा आ रहा था तो मेने भी अनजान बनते हुए puchha)Kaha डालना होता hai?(Unke चेहरे पर ढेर साडी शर्म उभर आयी thi)(Kavya इस सवाल से पूरी तरह शर्मा गयी थी, वो कुछ बोल नहीं प् रही thi)(Mene फिर puchha)Kya डालना है madam?(Wo मेरी और देखने लगी, उनके चेहरे पर उल्जन साफ़ दिख रही thi)(Kavya सोच रही थी की क्या कहे और कैसे कहे, एक तो उसे शर्म आ रही थी पर उसे वो करना था, आज वो अपनी हर हद तोड़ देना चाहती थी, उसका पूरा शरीर उत्तेजना में जाल रहा था, उसे बस वो अंदर चाहिए था)

काव्य : (हकलाते hue)Wo वो तुम्हारा वो... वह निचे ... अंदर ...

शिव : क्या कह रही है मैडम, मुझे कुछ भी समाज नहीं आरहा है?

काव्य : शिव वो वो है न तुम्हारा उसे निचे ... अंदर डालना होता है.

शिव : (में अनजान बन ने की पूरी एक्टिंग कर रहा tha)Kiski बात कर रही है आप?

काव्य : कैसे संजो तुम्हे (काव्य अपना हाथ निचे ले गयी और उसने लुंड को pakada)Isse (ये कहते कहते तो मेरी सांसे hi थमने लगी, ये क्या था, मेने पहली बार उसे छुआ था, मेने घबरा कर उसे छोड़ दिया)

शिव : कहा डालना है मैडम?

काव्य : (मेरी हालत ख़राब थी, ऊपर से उसका ये अनादि पैन, कैसे उसे संजो, पर संजना तो था hi, वो छोटा था, जब में ज्यादा नहीं जानती तो वो बेचारा क्या जनता होगा, मेने एक गहरी साँस ली और कहा) वह निचे, मेरे दो पैरो के बिच में (बोलते बोलते तो मेरी सांसे भी अटक रही थी)

शिव : वह निचे, में देखु कहा डालना है? (मैडम ने मुझे देखा, उनके चेहरे पर शर्म और उलझन दोनों थे, पर उन्होंने नज़ारे फेर कर है में इस्सर किआ, में उनके ऊपर से उठते हुए बेथ गया, वो साइड में देख रही थी, और में उनके शरीर को, जिन स्तनों को मेने चूसा था वो लाल हो गए थे, उनके श्री पर चर्बी थी तो स्तन भी बड़े दिख रहे थे, मेरी नजर निचे जाने लगी, मुझे उनकी गहरी नाभि दिखाई दी, बड़े गहरे कुए सी वो दिख रही थी, मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, मेने अपनी निगाहे और निचे की तो मुझे छूट के ऊपर के झांट के बाल नजर आने लगे, गोरी गोरी चमड़ी पर वो काळा काळा बल बहोत ज्यादा उत्तेजक लग रहे थे, मेने नजर और निचे की तो मुझे बालो से ढंके हुए छूट के होठ नजर आये, मेरा लुंड कूदने लगा, मेरी उत्तेजना और बढ़ गयी थी क्यों की में जनता था की इस नायब छूट को देखनेवाला में पहला व्यक्ति था, और उस भरी फूली हुई छूट आज मेरे लुंड से छुड़नेवाली है, मेने अपने आप को सँभालते हुए kaha)Madam, यहाँ तो कुछ भी नहीं है.

काव्य : (एक पल शिव को देखा फिर अपनी नज़ारे वापस घुमा li)Kya नहीं है?

शिव : मैडम, जैसे हमरे निचे होता है वैसा तो यहाँ कुछ भी नहीं है.

काव्य : (उनके चेहरे पर मुस्कान आ gayi)Me लड़की हु.

शिव : वो तो मुझे पता है पर आप को यहाँ कुछ नहीं होता?

काव्य : (शिव की ऐसी अजीब बातो से उसकी उत्तेजना और बढ़ रही थी, वो उसे भोला समाज रही thi)Tu कहना क्या चाहता है?

शिव : हमारे पेशाब करने के लिए जैसे ये होता है वैसे आपको कुछ नहीं होता?

काव्य : (उसकी बात सुन कर में मुस्कुराने लगी, कैसी अजीब बात पूछ रहा था, मुझे उसके भोलेपन पर प्यार आने लगा, उसे समजने में भी मुझे शर्म आ रही थी, कैसे संजो वो मेरी समाज में नहीं आ रहा tha)Hum वही से करते है. (बड़ी मुश्किल से मेने बोलै)

शिव : यहाँ से, यहाँ तो दो होठ जैसा है, कोई जगह तो नहीं दिख रही.

काव्य : (उत्तेजना मेरी बढ़ती जा रही thi)Un होठो के बिच में छेड़ है, वही से.

शिव : (ढूंढने की एक्टिंग करते hue)Chhed, यहाँ तो कोई छेड़ नहीं है.

काव्य: (वो उत्तेजना से कैंप रही thi)Un होठो को फैलाकर देख, तुजे छेड़ दिख जायेगा. (वो बोल भी नहीं प् रही थी, उसकी सांसे तेज तेज चल रही थी)

शिव : (में उनकी बढ़ती सांसो को महसूस कर रहा था, वो बहोत ज्यादा उत्तेजित thi)Mene छूट के होठो को छुआ तो वो जोर से सिसकी, में छूट के होठो को फ़ैलाने लगा पर चिकनाहट से वो फिसल रहे थे, जैसे जैसे में फ़ैलाने की कोशिस करता, मैडम की सिसकी निकल रही थी, मेरा अंगूठा उनके छेड़ को लग रहा था तो और रास निकल रहा था, मैडम ने चद्दर को खास के पकड़ लिया था, में छूट के इतना नजदीक था की वह से आती गंध मेरे नथुनों में भर रही थी, मेरी भी हालत ख़राब थी, मस्त फूली हुई छूट को देख कर मुझसे भी नहीं रहा जा रहा था, में झुका और छूट के होठो को किश करने लगा और जीभ से छेड़ कुरेदने लगा)









काव्य : (अपनी छूट पर गर्म गर्म होठो और जीभ का एहसास होते hi मेरी हालत ख़राब होने लगी, मुझे यकीं नहीं हो रहा था की शिव ने ऐसा किआ था, वो मेरी योनि को छत रहा था, मेरा पूरा वजूद कैंप रहा था, मुझे इतना अच्छा लग रहा था की मेरी जोर जोर से सिस्किअ निकलने lagi)Shhhhhhhh शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह Shiiiiiiiiiiiiv शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ये क्या शह्ह्हह्ह्ह्ह क्या कर शह्ह्ह्हह्ह शीइइइइइव शहहहहह (वो ऐसे मेरी योनि को चाट रहा था जैसे वह से कोई मीठा रास निकल रहा हो, जब उसकी जीभ मेरे छेड़ के अंदर जाने की कोशिस करती तो में तड़प के रह जाती, मेने पेअर फैला दिए, और उसके शिर को अपनी योनि पर दबाने lagi)Shhhhhh क्या कर रहे हो शहहहहह वो गन्दी जगह है शह्ह्हह्ह्ह्ह shhhhhhh(Meri कमर झटके खा रही थी, पहली बार कोई मेरी योनि को चाट रहा था, ये मेरी कल्पना के भी बहार था, वो इतनी तीव्रता से छत रहा था की में पागल हुए जा रही थी, मुझे अंदर कुछ चाहिए था, में उसके शिर को दबाने lagi)Shhhhh अंदर शिव शहहह अह्ह्ह और अंदर shhhhhhhhhhh. (में कमर को झटकते हुए अपनी योनि को उसके मुँह पर मार रही थी, मुझे कोई फर्क नहीं पद रहा था की वो क्या सोचेगा या उसे कैसा लग रहा होगा, मुझे बस मेरा hi मज़ा दिखाई दे रहा था, इस एहसास से में पागल हो रही thi)ohhhh शीइइइइइइव शहहहहह ये क्या हो रहा है शहहहहह में पागल हो जाउंगी shhhhhhhhhh (अचानक से मुझे लगा की कुछ निकल रहा है, में दर गयी की मेने पेशाब कर दिया, में उसे दूर धकेलने लगी, पर वो और मेरी योनि से चिपक ने लगा, आखिर कर मेने प्रयास छोड़ दिया और निकलने दिया जो निकल रहा था, मेरे सामने अँधेरा छ गया, एक अजीब सा आनंद महसूस हुआ, मेरे शरीर से जैसे शक्ति hi चली गयी, में हांफ ते हुए लेट गयी. वो अभी भी मेरी योनि को छत रहा था, थोड़ी देर बाद मेने अपना शिर उठा कर उसे देखा, वो मेरी नंगी योनि को चाट रहा था ये देखते hi फिर से मुझे शर्म आने लगी, मेने उसे धकेलते हुए अपनी झंघे सताने की कोशिस की, वो भी बहार निकल गया, मुझे इतनी शर्म आ रही थी की में साइड में पलट गयी, पर वो कहा रुक रहा था, वो मेरे नंगे कूल्हों को दबाने लगा, में उसका हाथ हटाने का प्रयास करने लगी, पर वो मान hi नहीं रहा था, वो मेरे कूल्हों को मसल रहा था, मेने उसका हाथ पकड़ लिया तो वो अपने मुँह से मुझे चूमने laga)Shhhh शिव अह्ह्ह्ह छोडोऊ शह्ह्ह्ह छोडोऊ सीईई गुदगुदी हो रही है shhhhhh(Wo सुन hi नहीं रहा था, वो मेरे कूल्हों को चाट रहा था, मेरे हाथ पकड़ने से भी वो नहीं रुक रहा था, उसने अपने हाथ छुड़ाए और फिर से मेरे कूल्हों को मसलने लगा, में फिर से गरम होने लगी, वो मेरे कूल्हों को फैला कर वह भी चाट रहा था, पता नहीं उसे कुछ भी गन्दा नहीं लग रहा था, उसकी जीभ को में हर जगह महसूस कर रही थी, यहाँ तक की उसने जीभ को मेरे पीछे वाले छेड़ बार भी lagaya)Shhhhh सीईव क्या कर रहे हो, वो गन्दी जगह है शह्ह्हह्ह्ह्ह, (वो मेरी एक नहीं सुन रहा था, तो मेने उसे करने दिया, में फिर से गरम हो चुकी थी, मुझे वो अंदर चाहिए था और वो वैसा कुछ कर नहीं रहा था तो मेने उसको दूर dhakela)Chhodo मुझे शिव बस अब और नहीं शह्ह्ह्ह (उसे ढ़ाकेकते hue)Bas कहा न छोडो मुझे (मेने थोड़ा जोर से कहा, वो रुक गया, मेने अपने अपने आपको छुड़ाया और अपने आपको घुटनो से मोड़ते हुए समेटने लगी)

शिव : क्या हुआ (मेने उन्हें सीधा करना चाहा, पर वो हो नहीं रही थी)

काव्य : कुछ नहीं. (मुझे जो चाहिए था वो मिल नहीं रहा था और में उसे सीधे सीधे कह नहीं प् रही थी तो मुझे अपने आप पर और उस पर गुस्सा आ रहा था, पर उसने मुझे जोर से सीधा किया और जबर दस्ती मेरे पेअर फैला कर मेरे ऊपर आगया, और मेरे हाथ को भी फैला दिया, में सिर्फ अपने शिव को हिला प् रही थी, मेने उसकी और देखा, वो भी मुझे देख रहा था, मेने उसे ऐसे hi kaha)Chhodo मुझे.

शिव : क्या आप सचमे चाहती है की में उसे अंदर dalu?(Uske सवाल से में उसको देखने लगी) कहिये न?

काव्य : है (मेने हलके गुस्से से कहा)

शिव : आपके वह छेड़ बहोत छोटा है. (में उसकी आँखों में देखने लगी, हम दोनों ख़ामोशी से एक दूसरे को देख रहे the)Aapko दर्द होगा.

काव्य : (सच कहु तो उसके मुँह से ये सुन कर मुझे खुसी hi हुई, जितना भोला में उसे समाज रही थी, वो नहीं था, वो जनता था की औरत को पहलीबार में दर्द होता है, और उसकी हरकते मुझे बता रही थी की वो अनुभवी भी है, वो परफेक्ट था मेरे liye)Muje पता है, में कोई छोटी बच्ची नहीं हु जिसे पता न हो, दर्द होता है तो होने दो. (इतने सालो से तो में कुवारी रही हु, अब क्या अफ़सोस करना या डरना)

शिव : मेरा वो बहोत बड़ा है.

काव्य : (में अब शांत हो गयी थी, और मुझे अब उत्तेजना फिर से महसूस होने लगी thi)Me जानती हु.

शिव : आपने तो देखा hi नहीं, फिर कैसे पता है?

काव्य : (शरमाते hue)Muje एहसास है.

शिव : देखना नहीं है?

काव्य : अभी नहीं.

शिव : तो में दाल दू?

काव्य : (में तो तड़प रही thi)Ha शिव.

शिव : सच कहु तो मुझे यकीं hi नहीं हो रहा की में आपके साथ ये सब कर रहा हु (मेने अपने लुंड को पकड़ा और छूट के छेद पर सेट किआ)

काव्य : (अपने छेड़ पर उस कड़क अंग को महसूस कर के अंदर hi अंदर मुझे दर लगने लगा, पता नहीं क्या होगा, पर में मानसिक तौर पर तैयार thi)Yakin तो मुझे भी नहीं हो रहा शिव, मेने सोचा नहीं था की इतनी काम उम्र के लड़के के साथ ये सब करुँगी.

शिव : में कोई छोटा बच्चा नहीं हु (मेने दबाव बढ़ाया तो छूट का छेड़ अंदर धसने लगा, पर लुंड अंदर नहीं गया था, मेने मैडम को कंधे से पकड़ रक्खा था, दबाव बनाने से उनके चेहरे पर भी तनाव साफ़ दिख रहा था, लुंड पूरी तरह से कड़क था, मेने दबाव और बढ़ाया, आगे जैसे कोई दिवार थी, छेड़ था hi नहीं, अचानक लुंड फिसल गया)

काव्य : अह्ह्ह्हह्हह.

शिव : ओफ्फफ्फ्फ्फ़. सॉरी.

काव्य : आराम से शिव. (उन्होंने मुझे चेताया, अब में क्या संजो उनको की आराम से करने के चक्कर में hi ऐसा hua)(Muje सनका हो रही थी की वो अंदर जायेगा भी की नहीं, क्यों की मेने महसूस किआ था की उसके अंग ने बहोत दबाव बढ़ाया था पर फिर भी वो अंदर नहीं गया, मेरी तो कुछ समाज में नहीं आ रहा था तो में उसे hi देख रही थी) (मेने अपने हाथो में थूक लिया और छूट पर लगाया, फिर से थोडा थूक लुंड पर भी लगाया, और फिर से लुंड को छेड़ पर सेट किआ, में जनता था की क्या करना है, मेने अपनी पोजीशन ठीक की और उन्हें कंधे से अच्छे से पकड़ लिया, वो मेरी आँखों में hi देख रही थी और समझने की कोशिस कर रही थी की में क्या कर रहा हु, मेने एक गहरी साँस ली और अपनी कमर से जोर से धक्का दिया, उनके चेहरे पर पीड़ा उभर आयी और उनकी आंख बंद होगयी साथ में वो चिल्लाई)

काव्य : शहहहहह माआआआआ शीइइइइइइइव (मेरा लुंड छूट को फैलते हुए अंदर घुस गया था, वो संभालती उस से पहले मेने फिर से धक्का mara)Ahhhhhhhh शीइइइइइइइव नाहीइइइइइइइ mummiiiiiiiiiiii. (मेरे लुंड ने उनका कौमार्य भांग कर दिया था, उनकी संकरी गली में मेरा लुंड घुस चूका था, अंदर से बहोत ज्यादा दबाव था, फिर भी मेने एक और झटका diya)Margayiiiiiiiiii मायआ रुक जाओ शह्ह्ह्हह्ह दर्द हो रहा है शह्ह्ह्हह्ह रुक जाओ. (मुझे पता था की अभी में रुक नहीं शक्ति, मेने एक और झटका mara)Shiiiiiiv नाहीईई और नहीं माआआआ (मेने और एक झटका मार diya)Me मर जाउंगी शीइइइइव नाहीईई (आधा लुंड अंदर चला गया था, मुझे भी दर्द हो रहा था, छूट बहोत सख्त थी, में रुक गया और उनके गाल और गले पर किश करने लगा)

शिव : बस हो गया (में उन्हें बहो में लिए गले और गाल पर किश कर रहा था, वो पशीने से भीग गयी थी, दर्द की वजह से उनकी आंखे जोर से बंद थी, मुझे पता था की वो दर्द में hai)Shant हो जाइये हो गया है सब.

काव्य : बहोत दर्द हो रहा है शिव, बर्दास्त नहीं हो रहा. (वो दर्द से कराह रही थी)

शिव : अभी थोड़ी देर में सब ठीक हो जायेगा, आप शांत हो जाइये. (में उनके होठो को चूसने लगा, साथ में उनका शिर सहलाने लगा और उन्हें सांत्वना देने लगा)

काव्य : (किश के baad)Shhhhh सीईव बहोत दर्द हो रहा hai(Unhone मेरी आँखों में देखते हुए कहा)

शिव : अभी सब ठीक हो जायेगा.

काव्य : मुझे बहोत जलन हो रही है शिव. अंदर सब फैट गया है, मुझे बहोत दर्द हो रहा है.

शिव : पहली बार है न, अभी सब ठीक हो जायेगा.

काव्य : कितना दर्द होता है शिव, शहहहहह, मुझे लग रहा है की खून निकल रहा है. (वो मुझे मन रही थी की में लुंड बहार निकल लू पर में ऐसा नहीं कर शक्ति था)

शिव : मुझे पता है, होता है ऐसा, अभी सब ठीक हो जायेगा.

काव्य : लगता है तुम एक्सपेरिएंस्ड हो, है न?

शिव : तो आपने क्या सोचा था, में बच्चा हु?

काव्य : सकल से तो वैसे hi लगते हो, शायद इसी भोले पैन को देख कर में फिसल गयी.

शिव : (में मुस्कुराया) मेने तो नहीं कहा था की में भोला हु.

काव्य : (वो भी muskurayi)Kabhi कभी हम सकल से धोखा खा जाते है. (हम दोनों थोड़ी देर बाते करते रहे, थोड़ी देर बाद उन्होंने kaha)Bas शिव, आज के लिए यही रुक जाते है.

शिव : अब इतना हो गया है तो फिर अब क्यों रुकना. (दर्द की वजह से उनके शिर से सेक्स का बहुत उतर गया था, और मेरा लुंड भी थोड़ा ढीला हो गया था जिस की वजह से उन्हें रहत थी)

काव्य : फिर करेंगे न शिव. (वो मुझे मानाने लगी)

शिव : (छेड़ते hue)Itni हॉट लड़की को में ऐसे hi छोड़ दू, ये तो हो नहीं शक्ति (वो भी muskurayi)Mera यकीं कीजिये, कुछ नहीं होगा (में उन्हें फिर से किश करने लगा, और उनके स्तन दबाने लगा, वो भी मेरी पीठ सहलाने लगी, मेरा लुंड फिर से कड़क होने लगा, मेने थोड़ा लुंड बहार खिंचा)

काव्य : अह्ह्ह्हह शिईयिव.

शिव : कुछ नहीं होगा (मेने फिर से आहिस्ता से लुंड अंदर किआ, वो फिर से करहि, दो तीन बार ऐसा करने से छूट से फिर से रास टपकने लगा, में उनको किश करते हुए ऐसे hi थोड़ी देर आगे पीछे करता रहा, अब वो भी मुझे किश कर रही थी, थोड़ी देर बाद मेने puchha)Ab कैसा लग रहा है?

काव्य : (मेरी आँखों में देखते hue)Dard काम है.

शिव : अच्छा नहीं लग रहा?

काव्य : (वो muskurayi)Thoda थोड़ा.





शिव : अभी और अच्छा लगेगा. (उनके चुके को दबाते हुए में निप्पल को चूसने लगा और साथ में हलके हलके धक्को के साथ अंदर बहार करने लगा, छूट से बहते रास से मुझे पता चल रहा था की अब वो एन्जॉय कर रही है, वो मेरी पीठ को भी सेहला रही थी, छूट बहोत कासी हुई थी, अंदर की दिवलो का कड़क पैन मुझे महसूस हो रहा था, में धक्के लगाने लगा तो वो आहे भरने लगी)

काव्य : शहहह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह शहहह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह.

शिव : कैसा लग रहा है?

काव्य : अच्छाआ शहहह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह.

शिव : आखिर कर आप कुवारी नहीं रही.

काव्य : शठ अह्ह्ह हा शिव शह्ह्ह्ह पर में खुस हु शहहह अच्छा लग रहा है, शह्ह्ह्ह कितना मज़ा आता है न शह्ह्ह्ह वो कितना बड़ा है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह आराम से शिव शहहहहह, अभी भी दर्द है शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.





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शिव : आप मस्त है मैडम, एकदम नरम नरम और बहोत गरम.

काव्य : (शरमाते hue)Aisi बाते बोलते तुम्हे शर्म नहीं आती, पता है न में कौन हु?

शिव : पता है, आप मेरी परमिका है जो अभी मुज से प्यार कर रही है.

काव्य : (मुस्कुराते hue)Me तुम्हे कैसी लगती हु शिव?

शिव : आप बहोत खूबसूरत हो, मुझे क्या किसी को भी अच्छी लगोगी.

काव्य : तुम्हे कैसी लगती हु?

शिव : पहले तो बहोत दर लगता था, पर अब नहीं.

काव्य : पहले क्यों दर लगता था? क्या में इतनी बुरी हु?

शिव : बुरी नहीं हो, पर आप वकील हो, दर तो लगेगा hi, कही आप मुझे जेल भिजवा दो तो.

काव्य : वो तो में अभी भी कर शक्ति हु.

शिव : (मुस्कुराते hue)To कर दो, मुझे कोई दिक्कत नहीं है.

काव्य : (मुस्कुराते hue)Kyu?

शिव : आपके साथ ये सब करने का जो मौका मिल गया, अब चाहे जेल भेजो या फांसी, कोई दिक्कत नहीं है.





काव्य : (उसके किश करते hue)Me क्यों तुम्हे जेल भेजने लगी, पता नहीं पर तुम मुझे बहोत अच्छे लगते हो, अभी तुम मेरे साथ हो तो मुझे ऐसा लग रहा है की में भी कोई स्कूल की लड़की हु.

(लुंड लगातार अंदर बहार हो रहा था)

शिव : स्कूल की लड़की हो तो शर्म नहीं आती ये सब करते hue(Maine नाटक किआ)

काव्य :(मुस्कुराते hue)Ab नहीं आती, पहले बहोत सोचती थी की ऐसे किसी के सामने बिना कपड़ो के कैसा लगेगा, पर अब पता चल रहा है की ये सब इतना भी अजीब नहीं है. (धक्के लगातार चल रहे थे) शह्ह्ह्ह आहिस्ता शिव शह्ह्ह्ह अभी भी थोड़ा थोड़ा दर्द है शह्ह्ह्ह.

शिव : आपको मज़ा आ रहा है?

काव्य : हा शठ बहोत मज़ा आ रहा है शह्ह्ह्ह, तुम्हे?

शिव : में तो स्वर्ग में हु, और अपसरा मेरे निचे है.

काव्य : (मेरी छाती पर मुक्का मरते hue)Bahot गंदे हो तुम, ऐसा कोई बोलता है भला.

शिव : अब जो है सो है, अभी आप मेरे निचे हो और मेरे से chu...(Unhone मेरा मुँह दबा दिया)

काव्य : गंदे, गंदे गंदे, मुझे नहीं पता था की तुम इतने गंदे हो, क्या बोन जा रहे थे तुम? शर्म नहीं आती ऐसा बोलते हुए.

शिव : अब जो कर रहा हु वही बोल रहा था.

काव्य : बोलना जरुरी है क्या?

शिव : थोड़े दिनों बाद अआप खुद सब बोलोगी.

काव्य : में तुम्हारी तरह गन्दी नहीं हु जो ऐसा सब बोलूंगी, और तुमसे किसने कह दिया की में फिर से ये सब करुँगी.

शिव : वो तो वक़्त hi बताएगा.





काव्य : बहोत ज्यादा ओवर कॉंफिडेंट हो शहहहहह धीरे शिव मरूंगी में तुम्हे.

शिव : अब आखरी बार है तो थोड़ा ढंग से करू न (में धक्के लगाने लगा, मेने उन्हें निचे दबा दिया और धक्के लगाने लगा)

काव्य : शहहह अह्ह्ह्हह शिईयिव आहिस्ता शहहहहह दर्द हो रहा है शहहहहह धीरे अह्ह्ह्हह माआ शह्ह्ह्हह्ह (वो लगातार धक्के लगा रहा था, मेरे अंदर तूफान उमड़ रहा था, जितनी वो मेरे साथ जबरदस्ती कर रहा था, दर्द के साथ साथ एक मज़ा मिल रहा था, पता नहीं ये कैसा खेल है, एक और तो मेरी हालत ख़राब थी वही दूसरी और मुझे वो hi चाहिए tha)Shhhhh शिईयिव अह्ह्ह्हह धीरे शहहहहह आराम से शह्ह्हह्ह्ह्ह (वो लगातार मुझे रोड रहा था, उसका वो बड़ा अंग मेरे अंदर तूफान मचाये हुए था, सच कहु तो दर्द भी अब मीठा लगने लगा था, में उसको अपनी बाहोंमे भरे उसे चुम रही थी, पर जुबान मन कर रही thi)Shhhhh बस शिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह धीरे शहहहहह अह्ह्ह्हह शिईयिव में मर जाउंगी शहहहहह अह्ह्ह्हह मुझे कुछ हो रहा है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह ढीरे शहहहहह मुझे दुःख रहा है शह्ह्ह्ह उम्म्म्म उम्म्म्म (में उसे चूमने लगी, मुझे फिर से वही लग रहा था, मेरे अंदर से कुछ निकलनेवाला tha)Shhhhh आह्ह्ह्हह जल्दी जल्दी शिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह जल्दी शहहहहह मेरा फिर से निकलनेवाला है शहहहहह और जल्दी शह्ह्ह्ह.

शिव : (सो सामने से धक्के लगा रही थी, दर्द तो था फिर भी वो सामने से धक्के लगा रही थी, इतनी हॉट बातो से और कासी हुई छूट से मेरा भी होनेवाला tha)Mera भी होनेवाला है मैडम, कहा निकलू?

काव्य : शह्ह्ह्ह और जोर से आआह जल्दी सीईव शहहहहह (वो उछाल रही थी, शायद उन्होंने मेरी बात सुनी भी नहीं थी, मेने भी सोचा की अंदर hi कर देता हु, बाद में िपिल्ल दे दूंगा, तो में भी उन्हें निचे दबाये हुए धक्के लगाने laga)Shhhhh सीईव इतनी जोर से नहीं आह्हः मा सीईव वो अंदर जा रहा है शह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह मा शीइइइइव इतनी जोर से नहीं शह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है शहहहहह अह्ह्ह्हह में पागल हो जाउंगी शहहहहह आह्ह्ह्हह दर्द है की मज़ा है शहहहहह शहहहहह आअह्ह्ह्हह सीईव में गयी शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह में गयी शह्ह्हह्ह्ह्ह (उनकी छूट ने अपना बांध तोड़ दिया, मेभी करीब था, में उन्हें निचे दबाये धक्के लगा रहा था, लुंड और अंदर घुस गया था, मुझे कोई परवाह नहीं थी, में लगातार धक्के लगा रहा tha)Shiiiiiiv अह्ह्ह्हह दर्द हो रहा है आह्ह्ह्ह आहिस्ता अह्हह्ह्ह्ह मुंईईई शीइइइइव अह्ह्ह्हह्हह.





शिव : बस थोड़ी देर मैडम, मेरा होनेवाला hi है, थोड़ी देर सेह लो.

काव्य : (उसके तेज जातको से मुझे दर्द हो रहा था पर में उसे रोकना नहीं चाहती थी, वो मुझे अपने निचे दबाये जोर जोर से कर रहा था, अभी मुझे पता चल रहा था की किसी लड़के के साथ ये सब करने का क्या मतलब होता है, में उसके द्वारा दिया जा रहा दर्द सेह रही थी पर वो मुझे अच्छा लग रहा था. में उसके तेज जातको को सेहती रही, और भगवन से दुआ कर रही थी की जल्दी ये ख़तम हो, अचानक वो गुर्राते हुए मुझसे लिपट गया और मेरी योनि कन्दर गरम गरम तरल भरने लगा, वो लगातार झटके खा रहा था और मेरे अंदर कुछ गरम गरम गिर रहा था, क्या एहसास था ये, मुझे इतनी रहत मिल रही थी, में उस से लिपट गयी और उसके साथ सख्ती से चिपक गयी, थोड़ी देर वो झटके खता रहा और फिर शांत हो गया, में अपने जीवन के इस पहले सेक्स से पूरी तरह थकी हुई थी फिर भी पूरी तरह संतुस्ट थी. उसका वो अंग मेरे अंदर घुसा हुआ था, वो एहसास मुझे इतना अच्छा लग रहा था की मेने अपने पेअर उसकी कमर के इर्दगिर्द लपेट लिए और उसे अपनी और खिंच लिया, में उसकी पीठ और शिर को सेहला रही थी, उसके पशीने से भीगे मजबूत शरीर का एहसास कर रही थी. में हर तरह से संतुस्ट थी.)

शिव : (थोड़ी देर तक हम दोनों वैसे hi रहे, अगर में ऐसे ज्यादा देर रहता तो फिर से मेरा खड़ा होने लगता, इस लिए में उनके ऊपर से थोड़ा उठा, और उनको देखने लगा, सेक्स का नशा उतर चूका था, तो अब फिर से शर्म ने अपनी जगह बना ली थी, वो दूसरी और देखने लगी और मुस्कुरा रही थी, मेने puchha)Maza आया?

काव्य : (शरमाते hue)Shiv, ऐसी बाटे मात करो, मुझे शर्म आ रही है.

शिव : अब क्यों शर्मा रही है, हमने सब तो कर लिया है.

काव्य : इसीलिए तो ज्यादा शर्म आ रही है.

शिव : क्या आप ये नहीं चाहती थी.

काव्य : (मेरी और देखते hue)Aisa कभी सोचना भी मत, ये जो कुछ भी हुआ है वो मेरी मर्ज़ी से हुआ है, बस थोड़ी शर्म आ रही hai.(Me मुस्कुराया और अपना लुंड बहार निकला और वही बेथ gaya)Ahhhhhh. (मेने देखा की उनकी छूट से ढेर सारा वीर्य निकल रहा था जो लाल हो चूका था, उन्होंने मेरी और देखा, और अपनी छूट को ढकने का प्रयास करने lagi)Waha मत देखो.

शिव : देखना तो पड़ता है न, की सब ठीक है की नहीं.

काव्य : क्यों, ऐसा क्या हो गया है?

शिव : आप खुद देख लो (वो कड़ी होने लगी तो उन्हें तेज दर्द हुआ)

काव्य : उईईईईई मायआ.

शिव : आराम से (मेने उन्हें सहारा दिया और खड़ा किआ, वो अपनी छूट की और देखने लगी)

काव्य : इतना सारा खून. (वो घबरा रही थी, मेने उन्हें मेरी छाती के सहारे बिठाया था)

शिव : सब खून नहीं है, इसमें वीर्य भी है. (उन्होंने अपना गाउन खिंचा और अपने आप को धक् दिया)

काव्य : शिव, अह्ह्ह्हह बहोत दर्द हो रहा है यार.

शिव : रुको, में पेनकिलर देता हु. (मेने उन्हें बीएड के सहारे बिठाया और गोली और पानी ले आया, में नंगा hi गया था तो जब में वापस आया तो वो मेरे लुंड को देख रही थी, जो अभी आधा रह गया था, जब हमारी नजर मिली तो वो शर्मा गयी, में मुस्कुराया और उन्हें गोली और पानी diya)Aap गरम पानी से नाहा लो तब तक में बहार जेक आता हु.

काव्य : कहा जा रहे हो?

शिव : I-pill लेने. (वो फिर से शर्मा गयी) और कुछ चाहिए?

काव्य : (शरमाते hue)Nahi, पर दो तीन ले आना. (मेने उनकी और मुस्कुराते हुए देखा तो वो शर्मा gayi)Aise मात देखो शिव, मुझे शर्म आ रही है.

शिव : आप तो मन कर रही थी न.

काव्य : वो तो बस ऐसे hi कहा था.

शिव : ठीक है, में टब में पानी भर देता हु, आप नाहा लीजिये. (वो कड़ी होने लगी पर दर्द की वजह से वो वापस बेथ gayi)Me ले चलता हु. (मेने उन्हें उठाया तो गाउन गिर गया और वो फिर से नंगी हो गयी, मेने वैसे hi उन्हें बाथरूम तक पंहुचा दिया. गरम पानी चालू कर के कपडे पहन कर में बहार निकल गया)

वो मुझे कमोड पर बिठा कर गया था, पर जब में वह से भी उठी तो अपनी योनि के अंदर तेज दर्द महसूस कर रही थी. एक और तो लग रहा था की ऐसा मेने क्यों किया, पर फिर भी हर लड़की यही चाहती है, जैसे तैसे में टब में बेथ गयी, दर्द के बावजूद अभी जो हुआ था उसे सोच कर मुझे कुछ कुछ हो रहा था, में शरमाते हुए मुस्कुरा रही थी. आज में बहोत खुस थी.

शाम को स्टेडियम से लौटने के बाद मेने भार्गविजई को फ़ोन किआ.

शिव : Hello, कहा हो आप?

भार्गवी : तुम्हारे केस के सिलसिलेमें hi बहार हु, हमे सुराग मिला है, विक्रम और उसके साथिओ का तो उसी के पीछे दूसरे सहर आयी हुई हु.

शिव : अपना ध्यान रखियेगा. अगर कोई जरुरत हो तो मुझे बुला लीजियेगा.

भार्गवी : अरे वह, बड़ी फ़िक्र हो रही है मेरी, भूलो मत में इंस्पेक्टर हु.

शिव : पता है, की आप बहोत बहादुर हो पर फिर भी अपना ध्यान रखना.

भार्गवी : ठीक है, अभी ज्यादा बात नहीं कर शक्ति, बाद में बात करती हु.

शिव : Ok bye.

भार्गवी : Bye.

थोड़ी hi देर में उनका मश्ग आया “ ी लव यू”. मॉग देख कर में मुस्कुराया. मेने भी रिप्लाई कर दिया, “ी लव यू तो मेरी लेडी सिंघम”.

में घर चला गया.
 
अपडेट 131

घर जा कर में अपने रूटीन में लग गया. रात का खाना खाने के बाद में पढ़ने बेथ गया, मुझे काव्य मैडम का ख्याल आया तो मेने मश्ग किआ.

शिव : Hi.

काव्य : (तुरंत hi सामने से मश्ग aaya)Hi.

शिव : आप कैसी हो?

काव्य : ठीक हु.

शिव : दर्द तो नहीं हो रहा? (थोड़ी देर सामने से कोई मश्ग नहीं आया तो मेने फिर puchha)Aap ठीक तो हो न?

काव्य : है ठीक हु.

शिव : तो फ्री जवाब देने में इतनी देर क्यों लगी?

काव्य : मुझे शर्म आ रही थी.

शिव : हमारे बिच जो कुछ हुआ उस से आप परेशान तो नहीं हो न?

काव्य : नहीं शिव, ऐसी कोई बात नहीं है, बस शर्म आ रही है.

शिव : नव्हे दर्द कैसा है?

काव्य : सब ठीक है (हकीकत में उसे दर्द था, पर कोई ज्यादा परेशानी नहीं थी, बल्कि उसे ये दर्द अच्छा लग रहा था, वो बिस्तर पर अपनी टंगे फैलाये लेती हुई थी और ये दर्द उसे बार बार शिव की याद दिला रहा था)

शिव : ठीक है, आराम कीजिये, अगर कोई दिक्कत हो तो फ़ोन कर दीजियेगा, वैसे भी आप अकेली हो.

काव्य : ठीक है, bye (हार्ट सिम्बोल)

शिव : (लास्ट में हार्ट का सिम्बोल देख कर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गयी, वो शर्म की वजह से बोल नहीं प् रही थी तो सिम्बोल भेज दिया tha)Ok, bye एंड टेक केयर (मेने दो हार्ट के सिम्बोल भेज दिए)

दोबारा मेने पढ़ने में ध्यान लगाया. में पढ़ रहा था की रंजन आयी.

रंजन : यहाँ अकेले अकेले क्यों पढ़ रहा है, हमारे कमरे में चल न.

शिव : तुम सब काम कर रही थी तो में पढ़ने बेथ गया, ठीक है तुम चलो में आता हु.

में उनके कमरे में चला गया, हम तीनो पढ़ने बेथ गए, थोड़ी थोड़ी देर में रंजन मुझे देख रही थी. में उसकी बात समाज रहा था पर विणा भी थी तो कुछ नहीं हो सकता था. थोड़ी देर बाद मेने देखा की उसने अपना फ्रॉक थोड़ा ऊपर कर दिया, मुझे उसकी सफ़ेद पंतय दिख रही थी, मेने उसकी और देखा तो वो मुस्कुराने लगी. वो जान बुज कर मुझे सत्ता रही थी. दो घंटे तक हम पढ़ते रहे, विणा जाग रही थी तो और कुछ नहीं हुआ. में अपने कमरे में चला गया. कपडे निकल कर अंडरवियर में बिस्तर पर लेट गया. लतादिदी नहीं आयी थी. थोड़ी देर मेने इंतजार किआ पर वो नहीं आयी, शायद वो सो गयी होगी, वैसे भी वो बहोत काम करती है तो सो गयी होंगी. में भी सोने लगा. अभी आंख लगी थी की मुझे लगा की कोई मेरा लुंड चूस रहा है, मेने शिर उठा कर देखा तो वो रंजन थी. उसके चूसने से लुंड खड़ा हो चूका था, उसने मेरी पूरी अंडरवियर खिसका कर निकल दी, वो पूरी नंगी थी, अंडरवियर निकलने के बाद वो 69 पोजीशन में आ गयी, रास टपकती अपनी छूट को मेरे होठो पर रगड़ते हुए फिर से मेरा लुंड अपने मुँह में भर लिया. मेने भी जीभनीकल कर उसकी छूट को चेतना सुरु कर दिया. थोड़ी देर बाद मेने उसको ऊपर से उठाया और निचे लेता दिया, वो मुस्कुराती हुई अपनी टंगे फैलाये लेट गयी, मेने अपने लुंड को छूट में उतर दिया और उसके ऊपर लेट ते हुए उसके चेहरे को देखने लगा, वो मुस्कुरा रही थी.

शिव : विणा सो गयी?

रंजन : है.

शिव : तू क्यों नहीं सोई?

रंजन : वो सोने नहीं दे रही थी.

शिव : कोण?

रंजन : मेरी छूट.

शिव : क्यों?

रंजन : उसे तेरा लुंड चाहिए था.

शिव : अब शांति मिल गयी.

रंजन : अभी नहीं, अभी तो वो अंदर गया है, वो मार खायेगी तब शांत होगी. (वो मुस्कुराते हुए बोली)

हम दोनों फिर शुरू हो गए, उसकी छूट मेरे लुंड के हिसाब से खुल चुकी थी तो वो बड़े मजे से छुड़वा रही थी. (बहार कड़ी विणा चुपके से ये सब देख रही थी और अपनी छूट को सेहलरहि थी, उसने पूरी चुदाई देखि, उसने देखा की कैसे रंजन इतने बड़े लुंड को अपनी छोटी सी छूट के अंदर लेते हुए मजे से सिस्किअ ले रही है, उसे दर लग रहा था की कोई देख न ले, पर वो ये दृस्य देखे बगैर रह न पायी, उसका पानी भी निकल गया, और वो चुपके से अपने कमरे में लौट गयी, थोड़ी देर बाद रंजन भी आ गयी)

रंजन : विणा (उसने आहिस्ता से पुकारा पर विणा ने जवाब नहीं दिया) मुझे पता है तू जाग रही है. (विणा ने आँखे kholi)Kya हुआ?

विणा : क्या हुआ?

रंजन : इतनी अपसेट क्यों लग रही है?

विणा : कुछ नहीं.

रंजन : अगर इतना hi मान था तो अंदर आ जाती. (विणा उसे देख रही थी, हलके उजाले में उसकी आंखे चमक रही थी, विणा को अपनी और देखते हुए देख रंजन फिर boli)Kyu क्या हुआ?

विणा : में ऐसा नहीं कर शक्ति (वो उदासी से बोली)

रंजन : देख यार, अगर तुजे कुछ करना है तो कदम तो आगे बढ़ाना पड़ेगा न.

विणा : (उदास स्वर me)Jab में शिव को पसंद hi नहीं तो फिर में कैसे आगे बधु?

रंजन : तुजे किसने कहा की तू शिव को पसंद नहीं?

विणा : अगर पसंद होती तो वो मेरे साथ कोई न कोई हरकत तो करता न.

रंजन : आरी पागल, वो वैसा नहीं है, वो लड़कीओ को हवस की नजर से नहीं देखता, वो वैसा नहीं है की हर लड़की पर तरय करता फायर, क्या वो तेरे साथ अच्छे से बात नहीं करता?

विणा : करता है.

रंजन : तो फिर, और कितने लड़के स्कूल में तुजे घूरते है, गुरते है की नहीं?

विणा : है.

रंजन : तो फिर, क्यों मायूस हो रही है, वैसे भी तेरा सब तो मेरे से भी बड़ा है, लोग तेरी चुचिओ को और गांड को घूरते है की नहीं (विणा शर्मा गयी) तो फिर, और तुजे लगता है की शिव तुजे लाइन नहीं दे रहा तो किसी और को लाइन दे दे.

विणा : ये क्या कह रही है तू.

रंजन : तो और क्या कहु, अगर तुजे कोई पसंद आ जाये तो उसके साथ कर ले, वैसे भी हमारा कोनसा खंडन है जिसकी इज्जत चली जाएगी.

विणा : नहीं, मुझे किसी और के साथ नहीं करना.

रंजन : क्यों?

विणा : मुझे शिव hi अच्छा लगता है.

रंजन : तो फिर खुद आगे बढ़, चल सो जा अभी, सुबह स्कूल भी जाना है. वैसे भी मेरा और तेरा, दोनों का पानी निकल गया है तो शांति से सो पाएंगे.

विणा : (शरमाते hue)Tuje कैसे पता?

रंजन : दरवाजे के पास गिला हो रक्खा था, तो में समाज गयी.

विणा : Hi दिया (वो उठने लगी)

रंजन : (उसको पकड़ते hue)So जा, मेने साफ़ करदिया है.

विणा शरमाते हुए मुस्कुरायी, फिर दोनों एक दूसरे को गले लगाए सो गयी. सुबह में उठा और बाथरूम की और गया, जैसे hi मेने दरवाजा खोला तो सामने मुझे मूतने बैठी हुई विणा नजर आयी, दो बड़े बड़े गोर गोर गोले को देख कर मेरा लुंड ठुमका मर गया. उसने अपने कूल्हे थोड़े ऊपर उठा रक्खे थे तो उसकी गांड का छेड़ और छूट का कुछ हिस्सा भी नजर आ रहा था. छूट से मूत की आखरी बुँदे टपक रही थी. विणा ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, शायद उसे ये पता hi नहीं था की में दरवाजे पर खड़ा हु, वो अपने कूल्हे हिलाते हुए मूत की आखरी बूंदो को झटकने लगी, उसके हिलते कूल्हों को देख कर मेरी हालत ख़राब होने लगी, मेरा लुंड खड़ा हो गया था, मेने सोचा की अंदर जा कर छूट में लुंड दाल दू, जैसे तैसे मेने अपने आपको संभाला और आहिस्ता से दरवाजा वापस बंद किआ, में थोड़ी देर वह खड़ा रहा और अपने आपको सँभालने लगा, अभी भी मेरे सामने वो कूल्हे दिख रहे थे, मेने लम्बी साँस छोड़ी और दूसरे बाथरूम की और बढ़ने लगा की दरवाजा खुला, में रुक गया. विणा मेरे सामने देख कर मुस्कुरायी, में भी मुस्कुराया.

विणा : गुड मॉर्निंग शिव.

शिव : गुड मॉर्निंग.

विणा : कहा जा रहे हो?

शिव : मुझे लगा की कोई है तो में दूसरे बाथरूम में जा रहा था.

विणा : मेरा हो गया है, तुम जा शक्ति हो. (में जल्दी से अंदर घुस gaya)(Vina, शिव की हड़बड़ाहट देख कर मुस्कुरायी, वो कब से शिव का इंतजार कर रही थी, उसने जान बुज कर दरवाजा भी खुला hi छोड़ा था, वो शर्माती हुई अपने कमरे की और बढ़ गयी.)

में तैयार हो कर स्कूल के लिए निकल गया. रस्ते में संयम और वैस्वी मेरा वेट कर रही थी. नाज़िआ दीदी भी कड़ी थी.

शिव : गुड मॉर्निंग दीदी, hi संयम, hi वैस्वी.

नाज़िआदिदी : गुड मॉर्निंग.

दोनों : Hi

शिव : चले?

संयम : हम तो तुम्हारा hi वेट कर रहे थे.

शिव : Bye दीदी. (मुझे लगा की दीदी कुछ कहना चाहती है, एक दो बार मेने उनकी और देखा भी पर शायद संयम और वैस्वी की वजह से वो कुछ नहीं बोली, वो दोनों बेथ ने में बिजी थी तो मेने मेरे मोबाइल फ़ोन की और इस्सर करके दीदी को बताया तो वो मुस्कुरायी और अपनी गर्दन हिला कर है में इस्सर किआ, सब स्कूटर पर बेथ गए, दीदी ने अपना हाथ हिला कर सबको विदा किया.)

संयम के स्तन मेरी पीठ पर अपना आभास दिखने लगे, वो जान बुज कर चिपक कर बैठती थी. उसने मेरी कमर पकड़ रक्खी थी. थोड़ी देर बाद वो अपने नाख़ून भी मेरे पेट में चुभोने लगी. उसकी हरकतों से मेरे लुंड में तनाव आने लगा, मेने उसका हाथ पकड़ लिया.

संयम : (मुस्कुराते हुए, शिव के कान के पास अपना मुँह ले गयी, और fusfusayi)Kya हुआ? (वो नहीं चाहती थी की उसकी आवाज वैस्वी को सुनाई de)(Mene साइड से उसे देखा तो वो मस्ती से मुस्कुरा रही थी, मेने कोई जवाब नहीं दिया, एक हाथ से तो चला नहीं सकता था तो मेने वापस दोनों हाथ रक्खे और स्कूटर चलने लगा. उसको तो जैसे लाइसेंस मिल गया, वो मेरे पेट पर अपने नाख़ून से कुरेदने लगी, मुझे गुदगुदी से ज्यादा उत्तेजना हो रही thi)(Pichhe बैठी वैस्वी देख रही थी की कैसे संयम शिव से चिपक कर बैठी हुई है, उसको अच्छा नहीं लग रहा था पर वो कुछ नहीं कर शक्ति थी, वो जानती थी की संयम. शिव को पसंद करती है, और वो पहलेसे hi शिव की दोस्त भी है तो चुप चाप बैठी रही.)

हम सब स्कूल पहुंच गए. बिना मैडम भी आ गयी, हमारा पढ़ना सुरु हो गया. रेसस्स में मेने फ़ोन चैक किआ तो देखा की नाज़िआदिदी का मश्ग आया हुआ था.

नाज़िआदिदी : आअज अब्बू बहार जा रहे है, अगर हो शेक तो दोपहर को घर आना. (मेरी समाज में नहीं आया की अंकल बहार जा रहे है तो क्या हुआ, आंटी और संयम तो घर पर hi होगी न)

शिव : आंटी और संयम?

नाज़िआदिदी : (वो फ़ोन के साथ hi thi)Ammi पदोष में जाने वाली है और संयम दो पहर को सो जाती है.

शिव : (में ज्यादा बात नहीं कर शक्ति था तो मेने कह diya)Thik है.

नाज़िआ ये पढ़ के खुस हो गयी, शिव आनेवाला है ये सोच कर hi उसके अंदर एक ताजगी छ गयी, वो गुनगुनाते हुए काम करने लगी.

अम्मी : (नाज़िआ को खुस हो कर गुनगुनाते हुए देख kar)Kya हुआ, क्यों इतनी चहक रही है?

नाज़िआ : कुछ नहीं ामी, बस ऐसे hi.

अम्मी : जमाई जी आनेवाले है क्या?

नाज़िआ : (अंदर से: है ामी, आपका जमाई hi तो आ रहा है) नहीं अम्मी, ऐसी कोई बात नहीं है.

अम्मी : कब लेने आनेवाले है वो?

नाज़िआ : अभी तो नहीं, वो कह रहे थे की अभी आराम करो, वो भी बच्चे को ले कर बहोत खुस है और घर पर भी सब खुस है तो उन्होंने भी इजाजत दे दी है.

अम्मी : ठीक है, पर अपने घर से ज्यादा देर दूर रहना अच्छी बात नहीं है.

नाज़िआ : क्या ामी, आप मुझे निकलना चाहती हो?

अम्मी : नहीं, पर अपने घर को संभालना भी तुम्हारी जवाबदारी है.

नाज़िआ : में समझती हु ामी, पर जब से बच्चे की खुस खबरि सुनी है तब से मुझे ऐसा लग रहा है की में खास हु. सब मेरा इतना ध्यान रख रहे है की सच में मुझे लगता है की में खास हु.

अम्मी : ये तो सच है बेटी, ये औरत के लिए बहोत बड़ी बात है, और पहली संतान के वक़्त तो उसे और ज्यादा तवज्जु मिलती है. ठीक है तू अपने इन सुनहरे पालो को जी भर के जी.

रेसस्स में हम सब नास्ता करने बैठे तो संयम और वैस्वी दोनों मेरे लिए ज्यादा नास्ता लायी हुई थी, दोनों मुझे अपना अपना खाना दे रही थी, महेश और हर्ष अपने अपने टिफ़िन से खा रहे थे. उनको नज़र आ रहा था की कैसे दोनों की दोनों लगी हुई है शिव को खिलने में. खैर ऐसे hi नास्ता ख़तम हुआ और फिर हम पढ़ाई में लग गए. स्कूल से छूटने के बाद मेने संयम के घर के पास संयम को उतरा और खुद भी स्कूटर से उतर गया.

वैस्वी : तुम बैठे रहो, में तुम्हे घर छोड़ देती हु.

शिव : (मेने संयम की और देखा तो वो सवालिया नजरो से वैस्वी को देख रही thi)Uski जरुरत नहीं है, में चला जाऊंगा.

वैस्वी : मुझे उस और काम है तो में उस और hi जा रही हु.

शिव : (मेने संयम को देखा तो उसे अभी भी वैस्वी पर यकीं नहीं हो रहा था, पर वो कुछ कह नहीं शक्ति thi)Thik है. (में वापस बेथ गया)

वैस्वी : (मुस्कुराते hue)Bye संयम.

संयम : (बिना कोई प्रतिक्रिया diye)Bye. (उसने मेरी और मायूसी से देखा, में कुछ नहीं बोलै और स्कूटर आगे बढ़ा दिया)

वैस्वी : (आगे खिसकते हुए शिव की पीठ से चिपक गयी, उसकी सख्त पीठ पर उसके भरे हुए उन्नत स्तन डाब गए, उसकी आंखे बंद हो गयी, उसने भी शिव की कमर को पकड़ लिया)

शिव : (थोड़ा घबराते hue)Ye क्या कर रही हो?

वैस्वी : क्यों, बैठी हुई हु. (वो मुस्कुरायी)

शिव : ठीक से बैठो, कोई देखेगा तो क्या कहेगा?

वैस्वी : क्या कहेगा? और यहाँ है कोण?

शिव : ये आती जाती गाड़िओ से सब घर रहे है.

वैस्वी : तो क्या हुआ, में तो बस बैठी हु, क्यों तुम्हे अच्छा नहीं लग रहा?

शिव : में तुम्हारे लिए कह रहा हु, कोई देखेगा तो तुम्हे hi मुश्किल होगी.

वैस्वी: यहाँ कोण है जो देखेगा, वैसे भी इस तरफ गाड़िया बहोत काम है.

शिव : तुम्हे कहा जाना था?

वैस्वी : कही नहीं, में तो बस तुम्हारे साथ आना चाहती थी.

शिव : इसका मतलब, तुमने जूथ बोलै.

वैस्वी : कभी कभी बोलना पड़ता है, अगर में सीधे सीधे कहती तो संयम बुरा मान जाती. छोडो उस बात को, में इसलिए आयी थी की मुझे तुमसे बात करनी है.

शिव: कैसी बात?

वैस्वी : अभी नहीं, कही और चल कर इत्मीनान से बात करनी है.

शिव : ऐसी क्या बात है जो यहाँ नहीं हो शक्ति?

वैस्वी : है, क्यों तुम्हे कोई एतराज है?

शिव : मुझे क्या एतराज होगा, कब चलना है?

वैस्वी : वो में बताउंगी, एक दो दिन में चलेंगे.

शिव : कोनसे टाइम?

वैस्वी : स्कूल के बाद hi चलेंगे, मुझे पता है तुम्हे काम पर जाना होता है, और शाम को स्टेडियम भी जाना होता है, बस एक दो घंटे के लिए जायेंगे.

शिव : नहीं ऐसी कोई बात नहीं, बस तुम मुझे बता देना ताकि में एडजस्ट कर शकु.

वैस्वी : तुमसे ज्यादा मुझे एडजस्ट करना पड़ेगा, क्यों की में टाइम पर घर नहीं गयी तो कई सवाल पूछेंगे.

शिव : ठीक है, लो मेरा घर तो आ गया (मेने स्कूटर को अनाथालय के पास रोका, मेने देखा की बहार कोई नहीं था, वो स्कूटर से उतरी, में भी उतर गया, उसने स्कूटर बंद कर diya)Scooter बंद क्यों किआ, जाना नहीं है क्या?

वैस्वी : तुम्हे बहोत जल्दी है मुझे भागने की. वैसे भी कभी मिलते नहीं, अभी थोड़ा टाइम मिला है तो भी तुम मुझे भगा रहे हो, कोई दिक्कत है क्या?

शिव : ऐसी बात नहीं है, मुझे लगा की तुम्हे जाना होगा. (हम दोनों दरवाजे से थोड़ा साइड में खड़े थे तो अंदर से तो कोई हमें नहीं देख सकता था)

वैस्वी : तुम मुझे याद करते हो?

शिव : हम रोज तो मिलते है.

वैस्वी : (मेरी आँखों में देख रही थी, उसकी आँखों में प्यार hi प्यार भरा हुआ tha)To क्या हुआ, उसके बाद पूरा दिन तो हम दूर hi होते है न, में तो तुम्हे पूरा दिन याद करती हु, और सबसे ज्यादा तुम्हारे साथ बंधे हुए बिताये वो पिकनिक वाले पल याद करती हु. कितना अच्छा वक़्त था न, हर वक़्त एक दूसरे के साथ थे हम. (में उसे देख रहा था, वो जैसे उन पालो को याद करके वापस वही पहुंच गयी थी) तुम याद नहीं करते?

शिव : करता हु.

वैस्वी : खास फिर से हम वैसे hi एक हथकड़ी में बांध जाये.

शिव : (मुस्कुराते hue)Aur वैसी hi ठण्ड में ठिठुरते हुए रात बितानी पड़े.

वैस्वी : (मुझे मरते hue)Me इतनी रोमांटिक बात कर रही हु और तुम्हे परेशानिया याद आ रही है, मुझे तो बस वो पाल याद है जो मेने तुम्हारे साथ बिताये थे. (वो ऐसे मेरी आँखों में देख रही थी की अभी मुझसे चिपक जाएगी, में उसके जज्बातो को रोकना चाहता था पर मुझे समाज नहीं आ रहा था की कैसे रोकू, वो मुझसे प्यार करती थी ये तो मुझे यकीं था, पर मेरी हालत उसको नहीं पता थी, जैसे दूसरी सब अच्छी थी वैसे hi वैस्वी भी बहोत अच्छी थी, पर में सबके साथ तो वैसे नहीं रह सकता था न)

शिव : देखो वैस्वी, तुम में और मुज में बातो फर्क है में...

वैस्वी : (बीचमे hi)Ha है मुझे पता है, अब फिर से सुरु मात हो जाओ, में कुछ समझना नहीं चाहती और न hi कुछ सोचना चाहती हु, जब देखो तब वो hi बाटे सुरु कर देते हो. ये नहीं की एक लड़की खुद तुम्हारे साथ आयी है, तो उस से दो प्यार भरी बात करो, कमसे काम एक किश hi करो. (उसने ऐसे मुस्कुरा कर प्यार से कहा था की, मुझे लगा की अभी पकड़ कर किश कर दू)

शिव : हम रस्ते पर है.

वैस्वी : तो क्या हुआ, क्या हर वक़्त ट्रैफिक है, कभी कभी एकांत भी है न.

शिव : देखो वैस्वी...

वैस्वी : मेने मन किआ न, मुझे कोई बात नहीं सुन नई. (उसने नज़ारे फेर ली)

शिव : (मेने उसका हाथ पकड़ा तो वो मेरी आँखों में देखने लगी, मेने आस पास देखा तो फ़िलहाल कोई गाडी नहीं थी, रास्ता रूमसँ था, मेने फिर वैस्वी को देखा तो जैसे वो तैयार कड़ी थी, और मेरा इंतजार कर रही थी, मेने उसे कमर से पकड़ा और अपनी और खिंचा और उसके होठो पर अपने होठ रख दिए, उसने मुझे कास के पकड़ लिया, हम दोनों एक दूसरे के होठो को चूसने लगे, उसके होठो की मिठास मेरे मुँह में घुलने लगी, उसका भरा हुआ नरम शरीर मेने कास लिया, वो मेरे होठो को जोरो से चूसने लगी, तभी फिर से एक गाडी की आवाज आयी तो हम दोनों अलग हो गए, वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी, में भी muskuraya)Ab खुस?

वैस्वी : है (अपने स्कूटर पर बैठते hue)Jana तो नहीं चाहती पर तुम इतना दार रहे हो तो चली जाती हु (उसने मुस्कुरा कर kaha)Me लड़की हु फिर भी इतना नहीं डर्टी जितना तुम डरते हो. Bye.

शिव : (मुस्कुराते hue)Bye.

वैस्वी : (उसने स्कूटर आगे बढ़ा दिया और जाते jate)I लव यू. (बोलते बोलते वो आगे निकल गयी, थोड़ी दूर जा कर उसने पीछे मुद कर देखा तो मेने हाथ हिलाया, और फ्लाइंग किश दी, वो मुस्कुराती हुई चली गयी, अभी में उस और देख hi रहा था की पीछे से आवाज आयी)

रंजन : अरे वह, बड़ी फ्लाइंग किश दी जा रही है, कोण थी वो?

शिव : (मेने पीछे मुड़कर देखा तो रंजन और विणा थी, जो स्कूल से आयी थी, में हड़बड़ा gaya)Tuuum, तुम कब आयी?

रंजन : हमने सब कुछ देखा, कोण थी वो? (वो मुस्कुरा कर पूछ रही थी तो मुझे थोड़ी रहत हुई)

शिव : वो वो, कोई नहीं, मेरी दोस्त है, मेरे स्कूल में पढ़ती है, वैसे क्या देखा तुमने?

रंजन : क्या देखा वो सब में लतादिदी को बताती हु, तुम अंदर तो चलो.

शिव : (गिड़गिड़ाते hue)Latadidi को... नहीं जैसा तुम समाज रही हो वैसा कुछ भी नहीं है वो तो bas...(Mene देखा की विणा बस मुझे देखे जा रही थी, उसके चेहरे पर भी थोड़ा गुस्सा tha)Dekho में तुम्हे सब समजदुन्गा, पर प्लीज अभी दीदी से कुछ मात कहना.

रंजन : कब समजाओगे?

शिव : रात को, जब हम पढ़ने बैठेंगे, पर प्लीज अभी दीदी से कुछ मात कहना.

रंजन : ठीक है, रात तक में कुछ नहीं बताउंगी, पर अगर बात मेरे पल्ले नहीं पड़ी तो में दीदी को सब कुछ बता दूंगी.

शिव : ठीक है. (हम तीनो घर में चले गए)

फ्रेश हो कर मेने खाना खाया, में फटाफट अपना थोड़ा होमवर्क था वो कर रहा था की मेरे फ़ोन पर मश्ग आया, उन्होंने मुझे ढाई बजे आने को कहा था, अभी दो बज गए थे तो मेने फटाफट कपडे पहने और निकल गया, वैसे भी सबको पता था की मुझे साइट पर जाना होता है तो किसी ने कोई सवाल नहीं किआ. रस्ते से मेने पिंकेश भाई को फ़ोन लगा दिया.

पिंकेशभाई : है शिव, बोलो.

शिव : पिंकेश भाई, शायद में थोड़ा लेट हो जाऊंगा, चलेगा न?

पिंकेशभाई : मुझे क्या प्रॉब्लम है, पर वो जहान्वी मैडम आयी हुई है, थोड़ी देर पहले भी वो तुम्हारे बारेमे पूछ रही थी.

शिव : वो क्यों आयी है, ठीक है में जितना जल्दी हो शेक आने का प्रयत्न करता हु, में पवनसीर को भी फ़ोन कर देता हु ताकि कोई परेशानी न हो.

मेने फ़ोन रखदिया और पवनसीर को भी बोल्दिया की स्कूल का काम है तो जाने में थोड़ी देर लगेगी, उन्होंने भी है बोल दिया. में निश्चिंत हो कर संयम के घर पहुंच गया. दोपहर का वक़्त था तो बहार एकल दोकल hi लोग थे, मेने हलके से दरवाजा खटखटाया तो तुरंत hi दरवाजा खुल गया, सामने नाज़िआदिदी hi कड़ी थी, शायद वो नजदीक hi थी. वो मुझे देख कर शरमाते हुए मुस्कुरायी और मुझे अन्दर आनेका रास्ता दिया, में अंदर चला गया तो उन्होंने वापस दरवाजा बंद कर दिया. मेने पीछे मुड़कर देखा तो वो दरवाजे पर hi पीठ लगाए कड़ी थी और शरमाते हुए मुझे देख रही थी. में फिर से मुस्कुराया तो वो और शर्माने लगी. हम दोनों को पता था की हम क्यों मिले है तो ये सोच कर hi उन्हें शर्म आ रही थी, मेने अपनी बहे खोली तो वो दौड़ती हुई मेरी बहो में समां गयी, मेने उन्हें कास के पकड़ liya,unhone मुझे भी कास लिया. कुछ पल हम ऐसे hi खड़े रहे.

शिव : संयम?

नाज़िआदिदी : (उन्होंने मेरी और देखा, और शरमाते हुए kaha)Wo ऊपर सो रही है, अम्मी पडोशमे गयी है, दो तीन घंटे बाद आएगी.

शिव : सब तयारी करके बैठी है आप. (वो शर्मा गयी, में झुका और उनके होठो को किश करने लगा तो उन्होंने भी मुझे कस लिया और मुझे किश करने लगी, मेरा लुंड खड़ा हो गया, जिसे महसूस करके उनकी सांसे तेज चलने लगी, मेने उनकी कमर से हाथ निचे किये और उनके कूल्हों को मसलने लगा, वो और जोरो से मुझे किश करने लगी, में उनके नरम बड़े बड़े कूल्हों को मसलने लगा, उन गोलाईओ का एहसास मेरे लुंड को और कड़क कर रहा था, वो भी मेरे कूल्हों को मसलने लगी, और अपना शरीर मेरे लुंड पर रगड़ने लगी, थोड़ी देर हम दोनों ऐसे hi करते रहे, उनकी साँस उखाड़ने लगी तो उन्होंने किश तोड़ी और मेरे गले लग गयी, उनकी गर्म गर्म सांसे मेरी गर्दन पर महसूस हो रही थी, मेने भी उनकी गर्दन पर किश किआ और उनके कान में kaha)Yahi सब करने का िररद्दा है क्या?

नाज़िआ : (ये सुन कर वो बहोत शर्मा गयी, वो मुस्कुरायी और धीमे से kaha)Ammi –अब्बू के कमरे में चलते है. (ये सुनते hi मेने उन्हें अपनी गॉड में उठा लिया, उन्होंने भी मेरे गले में बहे दाल di)Us तरफ. (उन्होंने रास्ता बताया तो में उस और चल दिया, अंदर जाते hi मेने उन्हें बीएड पर रक्का और कमीज़ के ऊपर से hi उनके स्तन दबाने लगा, उन्होंने मेरी कलाई पकड़ रक्खी थी, पेअर फैले हुए थे तो में अपने लुंड के उभर को उनकी छूट वाले भाग पर रगड़ते हुए उनपर छ गया और स्तन दबाते हुए उनके होतो को फिर से किश करने लगा, वो भी मेरी पीठ पर अपने हाथ चला रही थी, थोड़ी देर बाद में थोड़ा ऊपर हुआ और उनकी कमीज़ ऊपर करने लगा, मेरी और देखते hue)Puri मात निकलना (में समाज रहा था, मेने उसे ऊपर उठाया तो ब्रा में कैद उनके स्तन मेरे सामने आ गए, उन्हें ब्रा के ऊपर से मसलते हुए में दरार में किश करने लगा) ओह्ह्ह्हह शहीीीव शह्ह्ह्हह्ह कितनी तड़प रही थी में शह्ह्ह्हह्ह उम्म्म्म उम्म्म्म उम्म्म्म (वो मेरे माथे पर किश करने लगी, मेने ब्रा को थोड़ा निचे खिसकाया और एक निप्पल को अपने मुँह में भर liya)Shhhhhhh चुसो उसे शहहहहह दूसरे को भी चुसो shhhhhhhhh(Unhone खुद अपनी दूसरी तरफ की ब्रा निचे खिसका कर निप्पल बहार निकल दिया, अपने लुंड के उभर को में उनकी छूट पर रगड़ रहा tha)Shhhh सीईव शहहह अह्ह्ह्हह चुसो शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह चुसो उसे शह्ह्ह्हह्ह, कितने दिन लगा दिए शह्ह्ह्ह में रोज याद करती हु तुम्हे शह्ह्ह्ह ऐसे hi शहहह. (वो एक हाथ निचे ले गयी और मेरे लुंड को दबाने लगी) शह्ह्ह्ह इससे बहार निकालो शह्ह्ह्ह (वो खुद मेरी चैन खोलने लगी, चैन खोल कर अपना हाथ अंदर दाल दिया और मेरे लुंड को बहार निकलने लगी, पर लुंड बहार निकल नहीं रहा था, वैसे भी वो अंडरवियर में था, उन्होंने झुंझलाते हुए kaha)Isse बहार निकालो शिव जल्दी.

शिव : (अपना बेल्ट खोलते hue)Itni क्या बेशब्री है दीदी.

नाज़िआदिदी : तुम नहीं संजोगे शिव, तुम्हारे इंतजार में क्या हालत हो जाती है तुम नहीं समाज सकते (मेने पंत खोल दिया और अंडरवियर समेत घुटनो तक उतरदिया, उन्होंने मुझे सीधा किआ और फ़ौरन मेरे लुंड को पकड़ लिया और अपने मुँह में ले कर चूसने लगी, वो मेरे पेट को सेहला रही थी और मेरे लुंड को चूस रही थी, अभी कुछ देर hi हुई थी की दरवाजे पर दस्ता की आवाज आयी, वो रुक गयी, और ध्यान से सुन ने लगी की दरवाजे पर दस्तक hi है न, थोड़ी देर बाद फिर से दस्तक हुई)

शिव : कोण होगा?

नाज़िआदिदी : (उनके चेहरे पर भी गभरहट थी) पता नहीं (वो अपना हुलिया ठीक करने लगी, मेने भी अपने लुंड को जैसे तैसे अंदर kia)Tum रुको में देखती hu.(Jate जाते वो रूम का दरवाजा बंद करके गयी)

नाज़िआ को समाज नहीं आ रहा था की इस वक़्त कोण है, वो अपने आपको ठीक करते हुए दरवाजे तक गयी, फिर दरवाजा खोला तो सामने उसकी अम्मी थी.

नाज़िआ : अम्मीी आप?

अम्मी : तो और कोण होगा इस वक़्त.

नाज़िआ : पर आप इतनी जल्दी कैसे आ गयी?

अम्मी : राबिया को किसी का फ़ोन आया तो उसे जाना है, पहले खुद बुलाती है और फिर खुद hi कही जाने का प्रोग्राम बना लिया, अब तू दरवाजा रोके क्यों कड़ी है, मुझे अंदर तो आने दे. और तू इतनी घबराई हुई क्यों है? क्या हुआ?
 
अभी तक मेने आप सब के कमेंट पढ़े नहीं है फिर भी मेरा इंतजार करने का सुक्रिया, किसी ने कुछ भी कहा हो पर मेने कहा था की स्टोरी बंद नहीं होगी, फॅमिली में डेथ हो गयी थी तो में बहार था, और पक घर पर तो में अपडेट दे नहीं पाया उसके लिए सॉरी.
 
30 तक ये प्रॉब्लम रहेंगी, उसके बाद अपडेट रेगुलर हो जायेंगे.
 
30 नोव से टाइम मिलेगा ऐसा कहा था, दो दिन से टाइम मिलने पर लिख रहा हु, आज अपडेट देने की पूरी कोशिश है. शायद रात तक...
 
अपडेट 132

वैस्वी स्कूल से घर पहुंची तो मिक्की वह पहले से बैठा हुआ था, उसे देख कर वैस्वी चौंक गयी क्यों की आज तक कभी वो उसके घर नहीं आया था और वो भी इस वक़्त जब पापा घर पर न हो. वैस्वी की मम्मी बेथ कर मिक्की से बात कर रही थी, जैसी hi उसकी नजर वैस्वी पर पड़ी वो बोली.

संध्यादेवी : लो आगयी. (वैस्वी को देख कर मिक्की खड़ा हुआ)

मिक्की : Hi वैस्वी ?

वैस्वी : Hiiii(usne बड़े बे मान से kaha)Tum ...यहाँ?

संध्यादेवी : ऐसे कैसे बात कर रही है, वो तुमसे मिलने आया है.

वैस्वी : (उसके मुँह से hi लग रहा था की उसको जरा भी अच्छा नहीं लगा tha)Par इस वक़्त?

संध्यादेवी : इस वक़्त से तेरा क्या मतलब है, वो कभी भी आ शक्ति है.

वैस्वी : मेरा मतलब है, अभी अभी में स्कूल से आयी हु, थक गयी हु, मुझे आराम करना है, खाना है.

मिक्की : आंटी अगर आपकी इजाजत हो तो क्या हम बहार लंच कर शक्ति है, इसका खाना भी हो जायेगा और हमारी बाटे भी.

संध्यादेवी : है है क्यों नहीं, जाओ बेटी तुम तैयार हो जाओ.

वैस्वी की समाज में कुछ नहीं आ रहा था, वो अंदर गयी और फ्रेस हो कर तैयार होने लगी, उसने सिंपल से hi कपडे पहने. तभी उसकी भाभी स्वर्ण कमरे में दाखिल हुई.

वैस्वी : ये सब क्या है भाभी, मुझे नहीं जाना.

स्वर्ण : इसमें क्या प्रॉब्लम है, खाना खाने hi तो जाना है, और ऐसे कपडे क्यों पहने है, कुछ ढंग का पहन लेती.

वैस्वी : यही ठीक है, सिर्फ खाना खाने तो hi जाना है, क्यों है न. (उसने मुँह बनाते हुए कहा)

स्वर्ण : ठीक है, जैसी तेरी मर्जी. चल मम्मी बुला रही है.

वैस्वी : में इनके इरादे कभी कामियाब नहीं होने दूंगी, देख लेना. और इस मिक्की को तो में देखती हु, बड़ा आया मुझे बहार ले जाने वाला. (वो दोनों बहार निकली)

संध्यादेवी : ये कैसे कपडे पहने है? तूने कहा नहीं बहु?

वैस्वी : (स्वर्ण बोलती उस से पहले hi वो बोल padi)Kyu क्या खराबी है, मुझे यही अच्छा लगा और में यही पहनूंगी.

मिक्की : क्या आंटी, इतनी अच्छी तो लग रही है, आप ख़म खा उसे दन्त रही है, (वैस्वी se)Tum ऐसे hi अच्छी लग रही हो, चलो चलते है.

वो दोनों वह से निकल गए, संध्यादेवी अपनी बेटी की हरकते देख परेशां दिख रही थी. मिक्की कार ले कर आया था, लुगरी कार से वो वैस्वी को एक रेस्टोरेंट ले गया. दोनों वह बैठे थे, काफी महंगा रेस्टोरेंट था. दोनों ने खाना आर्डर किआ. फिर मिक्की ने hi बात सुरु की.

मिक्की : तुम जानती हो, हमारे घरवालों ने कुछ बात की है?

वैस्वी : (अनजान बनते hue)Kya बात की है?

मिक्की : वो चाहते है की हमारी शडीई......

वैस्वी : क्या शादी?????? पागल हो गए है वो लोग, ये कोई शादी करने की उम्र है, अभी तो मुझे बहोत पढ़ना है.

मिक्की : अभी शादी नहीं कर रहे है, शादी तो बाद में hi होगी, अभी तो सिर्फ बात पक्की कर रहे है.

वैस्वी : जब शादी अभी नहीं करनी तो अभी से बात क्या पक्की करना, जब करनी होगी तब देखेंगे. (उसने बड़ी बेफिकरी से जवाब दिया)

मिक्की : तुम कहना क्या चाहती हो, क्या तुम्हे मुझसे शादी नहीं करनी?

वैस्वी : तुमसे क्या किसी से नहीं करनी, एक्य उम्र है, ये सब सोचने की, और तुम्हे क्या इतनी जल्दी है इन सब की, मेरी तो कुछ भी समाज में नहीं आ रहा, अभी तो में सिर्फ 11तह में पढ़ रही हु, अभी तो मुझे पढ़ना है, ग्रेजुएशन करना है, उसके बाद में मास्टर. अभी से क्या शादी शादी लगा रक्खा है.

मिक्की : क्यों की आज कल अच्छी लड़की मिलना मुश्किल है, तो पहले से hi लोग तय कर देते है.

वैस्वी : ये कैसा दकियानुशी विचार है, किसने कहा की बाद में अच्छी लड़की नहीं मिलती?

मिक्की : आज कल का माहौल hi ऐसा है, आज कल वर्जिन लड़की मिलना मुश्किल है?

वैस्वी : वर्जिन लड़की, वो क्या होती है?

मिक्की : ये क्या, तुम इतना भी नहीं समझती?

वैस्वी : नहीं, मुझे नहीं पता? तुम बताओ.

मिक्की : अपनी भाभी से पुछलना वो तुम्हसे बताएंगी, अभी खाना खाओ. (खाना आ चूका था तो उन्होंने खाना सुरु किआ)

वैस्वी सोचने लगी, की ये क्या होता है, उसने कई हिंदी फिल्मो में किश वगैरह तो देखा हुआ था, कैसे लड़का लड़की एक दूसरे से चिपकते है किश करते है, ये सब उसे पता था, पर आज तक उसने कभी वर्जिन लड़की ऐसा कुछ नहीं सुना था. वैसे भी समाज में सेक्स के रिलेटेड बाते लोग बहोत काम करते है और छोटी सी उम्र में तो ज्ञान भी होता नहीं तो लोग वैसे hi बाते बनाते रहते है. वैस्वी ने सेक्स जैसे वर्ड भी सुने थे, पढ़ने भी ये सब आता है, पर एक्साक्ट्ली ये सब होता क्या है उसे नहीं पता था, उसे याद है जब उसने किताब में लड़के का वो अंग देखा था उसे अजीब लगा था, उस चित्र को देख कर hi उसके अंदर कुछ कुछ हो रहा था, पर किताबी ज्ञान संक्षिप्त में था, इतना कुछ उसे पता नहीं था.

वैस्वी : वो जो कुछ भी हो, मुझे शादी नहीं करनी है.

मिक्की : (उसका एहम घायल हो रहा था, एक लड़की मन कर रही थी, ये उसके एहम पर चोट thi)Gharwalo ने सब तय किआ है, और मुझे तुम अच्छी भी लगती ho(Usne वैस्वी की और घर कर देखते हुए कहा)

वैस्वी : मुझे कोई शादी वाड़ी नहीं करनी है.

मिक्की : (थोड़े गुस्से se)Tumse शांति से बात कर रहा हु तो शिर पर चढ़ रही हो, तुम्हारी मर्ज़ी हो या न हो, ये शादी तो हो कर रहेगी. (वैस्वी को रोना आ गया, उसकी आँखों से आंसू टपक pade)Ye रोना धोना बंद करो और चुप चाप खाना खाओ.

वैस्वी : (अपनी प्लेट दूर खिसकते hue)Muje नहीं खाना. (मिक्की को गुस्सा तो बहोत आ रहा था पर ये पब्लिक प्लेस था और वो कोई तमाशा नहीं करना चाहता था तो उसने बिल पाय किआ और वह से वैस्वी को लेकर निकल गया, उसने वैस्वी से बात करने की कोशिस की पर वैस्वी उसकी और देख hi नहीं रही थी, आखिर उसने वैस्वी को घर छोड़ diya.Wo बहार से hi छोड़ कर चला गया. वैस्वी घर में दाखिल हुई तो उसे स्वर्णाभाभी दिखी, उसकी आँखों से आंसू टपक पड़े, भाभी उसकी और बढ़ी पर वो दौड़ते हुए अपने रूम की और भाग गयी.

यहाँ संयम की ामी अपनी बेटी को घबराया हुआ देख उसे कुछ शक हो रहा था, पर उसकी समाज में नहीं आ रहा था की वो घबरा क्यों रही है.

अम्मी : क्या हुआ, तू बोल क्यों नहीं रही है, जवाब दे मेने कुछ पूछा है तुज से.

नाज़िआ : अम्मी धीरे बोलो, वो सुनलेगा.

अम्मी : कोण सुनलेगा, कोण आया है?

नाज़िआ : अम्मी, वो ..वो...

अम्मी : (उन्हें लगा शायद उसका शौहर है तो वो घबरा रही hai)Tere शौहर आये हुए है?

नाज़िआ : नहीं ामी वो सीईव...

अम्मी : तू पागल हो गयी है, अब क्या है, क्यों उसे बुलाया है?

नाज़िआ : अम्मी प्लीज धीरे बोलिये, में सब समजदूंगी, पर अभी आप चुप रहिये.

अम्मी : तुजे शर्म नहीं आती, ये सब करते हुए?

नाज़िआ : अम्मी में रेज नहीं शक्ति.

अम्मी : (अपने दन्त पिश्ते hue)Kya मतलब है की रह नहीं शक्ति? उसे अभी के अभी बहार निकल.

नाज़िआ : नहीं ामी, मेने उसे ऐसे निकला तो फिर वो कभी नहीं आएगा, में ऐसा नहीं कर शक्ति, ामी प्लीज संजो मुझे, आप भी एक औरत हो, वो मेरी कोख में पल रहे बच्चे का बाप है, और में उसके साथ किये हुए नहीं रह पति हु.

अम्मी : कितनी बेशरम हो गयी है, अपनी अम्मी से ऐसी बाते कर रही है, तुजे तो...

नाज़िआ : अम्मी, आपको जितना डांटना है या मरना है आप मर लेना, में कुछ नहीं कहूँगी, पर अभी प्लीज आप ऊपर चली जाइये.

अम्मी : (झुंझलाते hue)Kitni बेशर्म हो गयी है, जल्दी निपटा अपना, तुजसे तो में बाद में निपट टी हु.

नाज़िआ : अम्मी, थोड़ी देर लगेगी.

अम्मी : क्या मतलब है तेरा, जल्दी जल्दी ख़तम कर.

नाज़िआ : अम्मी, वो वो मुझे आधे घंटे से पहले तो छोड़ेगा नहीं.

अम्मी : या क्सक्सक्सक्सक्स, ये क्या क्या सुन न पद रहा है मुझे, besharm(Wo झुंझलाते हुए सीढिया चढ़ने लगी और ऊपर की और चली गयी)

जब संयम की अम्मी (नाम Zoyabegum)upar पहुंची तो देखा की संयम घोड़े बेच कर सो रही है.

ज़ोयबेगम : इसे देखो, कैसे घोड़े बेच कर सो रही है, घर में क्या हो रहा है कुछ खबर hi नहीं है (वो बिस्तर पर बेथ गयी और जो कुछ हुआ है वो सोचने लगी, उसे पता था की निचे उसकी बेटी चुद रही है, ये सोच कर hi उसके शरीर में कुछ कुछ होने लगा, उम्र के इस पड़ाव पर अब उसे ज्यादा सेक्स मिल नहीं रहा था, संयम के अब्बू महीनो में कभी कभार चुदाई करते थे, उनकी भी उम्र हो चली थी, अम्मी अकेले अकेले बड़बड़ा रही thi)Iske अब्बू को अब इन सब में इंट्रेस्ट नहीं है, वैसे भी उनकी कोई गलती नहीं है, अब उम्र भी हो चली है, पर मेरी ख्वाहिसे है की शांत hi नहीं हो रही, दो लड़कीओ की माँ हु, और लड़कीअ भी बड़ी बड़ी हो गयी है, पर क्या करू की ये शरीर hi नहीं मान रहा, मान मार कर इन सब से दूर रह रही हु, इस उम्र में जब मुझे इतनी कमी महसूस हो रही है तो नाज़िआ तो अभी जवान है, उसकी भी ख्वाहिसे होंगी, पर शिव, शिव तो अभी छोटा है, वो कैसे उसकी ख्वाहिसे पूरी कर पता है? इस उम्र में लड़के ज्यादा उत्तेजित हो जाते है और लड़की को शांत किये बगैर hi झाड़ जाते है, तो ये क्यों इतनी पागल हो रही है उसके पीछे, क्या मुझे देखना चाहिए? (ये विडम्बना है इस जीवन की, यहाँ हर इंसान के दो चेहरे होते है, एक जो वो सब को दिखता है, जो बहोत hi शालीन और साफ़ सुथरा होता है, और दूसरा जिसमे उसकी कई ख्वाहिशे होती है, अक्सर लोग उस चेहरे को देख नहीं पते है, शरीफ औरते और मर्द भी कई निजी ख्वाहिसे रखते है, यही हाल संयम की अम्मी का भी था, थोड़ी देर वो बैठी रही पर फिर रह न पायी और बिना आवाज किये सीढिया उतरने लगी, उसकी धड़कने तेज चल रही थी, जब वो निचे पहुंची तो उसको कमरे से नाज़िआ की गरम गरम सिस्किअ सुनाई दे रही थी, वो सिसकारियां सुन कर उसकी हालत ख़राब होने लगी, वो दरवाजे के पास कड़ी अंदर से आती आवाजे सुन रही थी.

(Ander)(Nazia पूरी नंगी हो चुकी थी, पहले वो घबरा रही थी पर जब अब उसे अम्मी का खतरा नहीं था तो वो पूरी नंगी हो कर छुड़वाना चाहती थी, उसकी गोरी झांघो के बिच गुलाबी छूट को शिव चाट रहा था और वो उसका शिर अपनी छूट पर दबाते हुए गरम गरम आवाजे निकल रही थी, एक हाथ से वो अपने स्तन दबा रही थी और उसके निप्पल को भी मरोड़ रही थी)

नाज़िआ : शह्ह्ह्ह सीईव शह्ह्ह्हह्ह और छतो शहहहहह कितना अच्छ लग रहा है शह्ह्ह्हह्ह, और शिव शह्ह्ह्ह अंदर जीभ डालो शहहह अह्ह्ह्हह ऐसे hi शह्ह्ह्हह्ह.





(बहार ज़ोया की हालत ख़राब हो रही थी, उसे पता चल रहा था की अंदर क्या चल रहा है, उसका मान कर रहा था की अंदर देखे, पर कैसे, उसने दरवाजे के छेड़ से अंदर देखना चाहा पर ज्यादा कुछ नजर नहीं आ रहा था, उसने ऐसे hi दरवाजे के हैंडल को धक्का दिया तो दरवाजा हल्का सा अंदर खुल गया, उसे आश्चर्य हुआ की उसकी बेटी ने दरवाजा बंद करना भी उचित न समजा, पर ये उसके लिए अच्छा था, दरवाजे की दरार से अब उसे सामने का नज़ारा दिख रहा था, उसकी शरीफ बेटी अपनी टंगे फैलाये अपनी छूट चटवा रही थी, उसने देखा की शिव बड़े चाव से उसके गुलाबी होठो को चाट रहा था, ये देख कर hi उसके मुँह से सिसकी निकलने वाली थी, उसने अपने आपको बड़ी मुश्किल से रोका, ऐसा गरम दृश्य देख कर उसकी हालत ख़राब होने लगी, उसका खुद का हाथ अपनी छूट पर चला गया, उसने अपनी छूट को दबोच लिया, शिव भी पूरा नंगा था, वो बीएड के निचे बैठा हुआ था, ऐसा लम्बा तगड़ा शरीर देख कर अम्मी की छूट में चींटिया दौड़ने लगी, जब शिव खड़ा हुआ तो उसकी नजर उसके लुंड पर पड़ी, पूरी तरह से तना हुआ लम्बा और मोटा लुंड, उसकी हालत खरब होने लगी, एक तो इतना कड़क लुंड वो कई महीनो बाद देख रही थी, अब उसके पति का लुंड इतना कड़क नहीं हो रहा था और दूसरा वो बहोत बड़ा था, उसके पति से भी बड़ा, उसकी निगाहे उस लुंड पर hi चिपक गयी थी, बिस्तर पर लेती उसकी बेटी बेथ गयी, वो थोड़ा पीछे हो गयी, कही उसकी बेटी उसे देख न ले, पर जब उसने देखा तो उसकी बेटी को कोई परवाह hi नहीं थी, वो बड़े चाव से उस बड़े लुंड को चूस रही थी,





वो पहली बार अपनी इस मासूम और शरीफ बेटी को ऐसा करते देख रही थी, वो जानती थी की उसकी बेटी कितनी अच्छी और शरीफ है, पर िःस्वक़्त वो किसी रंडी से काम नहीं लग रही थी, वो इतनी सिद्दत से लुंड को चूस रही थी जैसे उसका पसंदीदा खिलौना हो. उसलूण्ड चुस्त देख उसके मुँह में भी पानी आने लगा, वो अपनी ऊँगली अपने मुँह में दाल कर चूसने लगी. उसकी बेटी को इस लुंड से जरा भी दर नहीं लग रहा था, वो उसे पूरा चाट रही थी, जब वो हाथ से लुंड हिला रही थी तो सुपडे पर की चमड़ी ऊपर निचे हो रही थी, ये उसने पहली बार देखा था, उसके पति के लुंड के सुपडे पर चमड़ी नहीं थी, ऐसा चमड़ी वाला लुंड वो पहली बार देख रही थी, उसकी बेटी बड़े चाव से उस सुपडे को चाट रही थी, अपनी बेटी की हरकते देख कर उसकी हालत ख़राब हो रही थी, थोड़ी देर वो उसे चाट टी रही.

नाज़िआ : (अपनी टंगे फैला कर लेट ते hue)Ab दाल दो शिव, अब मुज से रहा नहीं जा रहा है.

शिव : आपकी छूट देख कर तो मुझसे भी रहा नहीं जा रहा है दीदी. (मेने अपना लुंड छूट पर लगाया और उनपर झुकते हुए लुंड अंदर डालने लगा)





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नाज़िआ : (शिव को अपने ऊपर खींचते हुए उसे अपनी बहो में भरने lagi)Shhhhhhhhh अम्मीईई शह्ह्ह्हह्ह ahhhhhhhhhhh.

ज़ोया : (मान me)Ya क्सक्सक्सक्सक्स, इतना बड़ा लुंड (वो छूट में उतारते लुंड को बड़े गौर से देख रही थी, धीरे धीरे करके पूरा लुंड अंदर समां गया)

नाज़िआ : ओह्ह्ह शिईयिव, इस एहसास के लिए में कितना तड़प रही थी, ये एहसास सिर्फ तेरा लुंड hi दे सकता है, मेरी पूरी छूट भर गयी है सीईव.

ज़ोया : (अपनी बेटी की भरी हुई झांघो के बिच में गुलाबी छूट को फैलाये हुए वो बड़ा सा कहता अंदर घुसा हुआ था, उसकी बेटी की सिसकी बता रही थी की उसे कितना अच्छा लग रहा था, वो लगातार उसको चुम रही थी और उसको अपनी आगोश में भर रही थी, छूट में घुसे लुंड को देख कर उसकी हालत ख़राब हो गयी, वो अपनी छूट को और ज्यादा दबोचने लगी, अंदर वो बड़ा लुंड अब छूट में अंदर बहार हो रहा था, और उसकी बेटी गरम गरम सिस्किअ ले रही थी, उसने अपने लहंगे के अंदर अपना हाथ डालना चाहा पर वो बंधा हुआ था तो उसने उसका नाडा खोल दिया और लेहंगा थोड़ा निचे सरका कर अपनी छूट पर अपना हाथ दबा दिया, जैसे जैसे लुंड अंदर बहार हो रहा था वो अपनी ऊँगली छूट में अंदर बहार कर रही थी, थप थप की आवाजे और उसकी नाजुक सी बेटी इतने बड़े लुंड से चुद रही थी,





ये देख कर उसकी हालत और ज्यादा ख़राब होने लगी. थोड़ी देर शिव उसकी बेटी को ऐसे hi छोड़ता रहा, थोड़ी hi देर में उसकी बेटी झड़ने लगी और साथ में वो भी झड़ने लगी, उस से खड़ा न रहा गया और वो वही जमीं पर बेथ गयी और हांफ रही थी, जब फिर से उसने अंदर देखा तो शिव ने लुंड बहार निकला, उसका पूरा लुंड छूट के रास से चमक रहा था, उसका मान किआ की वो उसे अपने मुँह में भर ले और उसे चाट ने लगे, पर वो कुछ नहीं कर शक्ति थी.)

शिव : दीदी घोड़ी बन जाइये.

नाज़िआ : शिव, में झाड़ गयी हु, और अब में वह ज्यादा नहीं कर शक्ति.

शिव : क्या कहना चाहती हो दीदी.

नाज़िआ : देख तू नाराज़ मात हो पर मेरी प्रेगनेंसी के शुरुआती दिन चल रहे है तो में इतना ज्यादा वह नहीं कर शक्ति, तू समाज रहा है न?

शिव : है दीदी (मेने थोड़ी मायूसी से कहा)

नाज़िआ : अरे मायूस क्यों होता है, मेरी पूरी बात तो सुन. (में उन्हें देखने laga)Me ये कह रही हु की तू मुझे पीछे से कर ले.

शिव : पीछे मतलब gaa....(Me बोलते होलटे रुक गया)

नाज़िआ : है वही.

शिव : नहीं दीदी, रहने दीजिये, कोई बात नहीं.

नाज़िआ : में कह रही हु न. जा निचे के बाथरूम में एक विंटर क्रीम रक्खी है वो ले आ.

ये सुन के ज़ोया हड़बड़ा गयी, वो उठ के जाती उस से पहले hi शिव बहार आ गया, पूरा नंगा, वो अपना लेहंगा निचे किये हुए hi बैठी थी. शिव को देख कर hi वो मूर्ति बन गयी, वो किस अवस्था में उसके सामने थी, जब उसकी नजर शिव के चेहरे पर पड़ी तो उसके चेहरे पर भी शॉक था, वो भी यकीं नहीं कर प् रहा था, उसकी नजर झुक गयी, पर उसकी नजर उस लुंड पर भी पड़ी, इतने नजदीक से वो और भी बड़ा लग रहा था, वो अपने आपको समेटने और छुपाने लगी, उसे शर्म आ रही थी, वो पकड़ी गयी थी, अपनी hi बेटी की चुदाई देखते हुए, और साथ में अपनी छूट में ऊँगली करते हुए. वो अपन शिर झुकाये बैठी रही. शिव बिना कुछ बोले बाथरूम की और निकल गया, वो अपना लेहंगा ऊपर चढाने लगी.

में बाथरूम से क्रीम लिए वापस आया. मेने देखा की आंटी अभी भी वही बैठी हुई है, मेरे लिए ये शॉकेड था, पर में अपने जीवन में इतने शॉक देख चूका था की अब मुझे ज्यादा फर्क नहीं पद रहा था, में अब समाज गया था की औरते हो या लड़कीअ हो, सबकी अपनी जरुरत होती है, हलाकि कभी मेने आंटी के लिए ऐसा नहीं सोचा था पर वो भी तो एक औरत hi थी. उनके जीवन में क्या चल रहा था वो मुझे थोड़ी न पता था. अभी वो जिस हालत में थी वो बता रही थी की वो भी सेक्स चाहती है, में जाते जाते उनके पास रुक गया, वो अभी भी अपने आपको समेत रही थी, में समाज सकता था की वो शर्मिंदा है, पता नहीं मुझे क्या सूजी, में उनके नजदीक गया, उन्होंने एक बार मेरी और देखा और फिर अपनी नज़ारे झुका ली. में थोड़ा और नज़दीक गया और अपने घुटने मोड़ कर थोड़ा निचे हुआ, मेरा लुंड उनके चेहरे के सामने था, में क्या कर रहा था मुझे भी पता नहीं था. (ज़ोया को एहसास हुआ की शिव उसके पास खड़ा है, लुंड से आती महक उसके नथुनों में भरने लगी, वो पूरा नंगा था, सो शर्म से गाढ़ी जा रही थी, अपनी छोटी बेटी का दोस्त और अपनी बड़ी बेटी के होनेवाले बच्चे का बाप था वो, उसका बड़ा लुंड उसके एकदम नजदीक था, उसने सोचा नहीं था की शिव इस तरह की हरकत भी करेगा, लुंड से आती खुसबू उसको बेचैन कर रही थी, वैसे भी वो रेंज हाथो पकड़ी गयी थी, शिव के सामने उसकी इज्जत बेपर्दह हो hi चुकी थी, उसने डरते हुए लुंड को देखा, इतनी नजदीक से वो और ज्यादा बड़ा दिख रहा था, उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी शिव को देखने की. उसने फिर अपना चेहरा घुमा लिया.) (में उनकी झिझक समाज सकता था, पर में ये भी जनता था की कहना कही उन्हें ये चाहिए, वो मेरी दोस्त की मम्मी थी, पर मुझे अभी वो एक जरूरतमंद औरत नजर आ रही थी, मेने अपने लुंड को और आगे किआ जिस से मेरा लुंड उनके चेहरे को छू गया)( ज़ोया लुंड की छुअन से कैंप गयी, शिव अपने लुंड को उसके चेरे से टच करवा रहा था, एक बार तो हुआ की वो उसे दन्त दे और धक्का दे कर वह से चली जाये, पर उसके अंदर की औरत को ये गवारा नहीं था, वो लुंड की इस छुअन से पिघल रही थी, उसकी सांसे जोर जोर से चलने लगी, शिव वही नहीं रुका, वो लुंड को उसके होठो के पास ले आया, उसके नाक के निचे था लुंड, उसकी तीव्र गंध उसके अंदर कामुकता भर रही थी, शिव उसके होठो पर लुंड रगड़ रहा था, उस गरम डंडे की छुअन से उसके होठ थोड़े थोड़े खुलने लगे और उसकी जीभ बहार निकलने के लिए लालायित thi.)(Pata नहीं में कैसे इतनी बेशर्मी पर उतर आया था, अंदर नाज़िआ दीदी अपनी गांड उठाये मेरा इंतजार कर रही थी, पर फिर भी मुझे आंटी के साथ ये सब करना अच्छा लग रहा था, उनके चेहरे पर सिकन थी पर वो मुझे रोक नहीं रही थी, में समाज रहा था की वो क्या चाहती है, वो शर्मा रही थी, मेने उनके चेहरे को हाथ से सीधा किआ और अपने लुंड को उनके होठो पर लगा दिया, एक पल के लिए उन्होंने मुझे देखा पर फिर अपनी नज़ारे झुका दी. में उनकी शर्म तोडना चाहता था)

शिव : आंटी, अगर आपको ये चाहिए तो अपना मुँह खोलो, वर्ण में जा रहा हु. (ज़ोया ये सुन कर हिल गयी, वो शिव को जाने देना नहीं चाहती थी, उसका शरीर लुंड मांग रहा था, शर्म के बावजूद उसने धीरे धीरे मुँह खोला)

जॉय : (पता नहीं क्यों पर में मन नहीं कर शक्ति थी, मेरा मुंहखुल गया और वो लुंड मेरे मुँह के अंदर प्रवेश करने लगा, मुझे बहोत शर्म आ रही थी पर फिर भी अपने मुँह में उस लुंड को महसूस करके मेरी उत्तेजना बढ़ रही थी, वो अपने लुंड को अंदर करता गया, जब लुंड काफी अंदर हुआ तो मेरी हलक तक पहुंच गया, मेने उसकी झंघ को पकड़ लिया, वो रुक गया, मेरा पूरा मुँह भर गया था, कितना बड़ा था ये, मेरे होठ पूरी तरह फ़ैल गए थे, मेने उसका लुंड अपने मुँह में ले लिया था ये सोच कर hi मेरी छूट से ढेर सारा रास टपक रहा था, वो अपने लुंड को आहिस्ता आहिस्ता अंदर बहार करने लगा और में अपना मुँह एडजस्ट करने लगी, वो आहिस्ता आहिस्ता लुंड अंदर बहार कर रहा था, मुझे अच्छा लग रहा था, मेने भी लुंड को चूसना सुरु कर दिया, हलाकि मुझे शर्म आ रही थी पर में अपने आपको रोक नहीं प् रही थी, अपनी जीभ और मुँह से में लुंड को चूस रही थी.)





नाज़िआ : सीईव, कहा रह गए? क्रीम मिलीयई? (आंटी ने मेरी और देखा, मेने भी उनकी और देखा, में लुंड बहार निकलने लगा, उनकी आंखे कह रही थी की मत निकालो, पर में क्या करता, मेने लुंड बहार निकला, एक नज़र आंटी पर डाली और अंदर रूम में चला गया) कहा रह गए थे?

शिव : कुछ नहीं, वो हल्का हो रहा था. (वो घोड़ी बन गयी, उनकी गोरी गोरी गांड मेरे सामने थे, भरे हुए बड़े बड़े कूल्हे मेरे सामने थे, गांड का भूरा छेड़ भी दिख रहा था, गोर कूल्हों के बिच वो गहरे रंग का छेड़ फुदक रहा था)

नाज़िआ : पीछेवाले छेड़ में थोड़ी क्रीम लगा दो. (में झुका और उनकी गांड के छेड़ को चाटने लगा और उनके कूल्हों को मसलने लगा) शहहहहह सीईव शह्ह्ह्ह तुम्हे ये पसंद आयी न?

शिव : है दीदी, आपकी गांड मस्त है.





नाज़िआ : मर्दो को ये बहोत पसंद होती है इसीलिए में इससे तुम्हे देना चाहती हु, अब देर मात कर और क्रीम लगा de(Mene क्रीम निकली और गांड के छेड़ में लगाने लगा, वो दूसरी तरफ मुँह करके थी, मेने दरवाजे की और देखा तो मुझे आंटी नज़र आयी, वो हलकी दरार से देख रही थी, जैसे hi मेने उस और देखा वो हैट गयी, मेने क्रीम छेड़ पर लगाया और ऊँगली से अंदर डालने laga)Shhhhhhh शीइइइइइइइव.

शिव : क्या हुआ?

नाज़िआ : तुम्हारी ऊँगली भी कितनी बड़ी है शिव, ऐसा लग रहा है की लुंड है.

शिव :आप कितना खुल कर बोल रही हो दीदी.

नाज़िआ : अब तुजसे कैसी शर्म, मुझे पता है की तुजे भी अच्छा लगता है.

शिव : है दीदी, आप इतनी खूबसूरत और शरीफ दिखती हो तो आपके मुँह से ये सब और ज्यादा उत्तेजक लगता है.

नाज़िआ : (मुस्कुराते hue)Meri गांड के छेड़ में अच्छे से क्रीम लगाना और अपने लुंड पर भी, में पहली बार ये सब करने जा रही हु, अपने सौहार को भी कभी वह नहीं करनेडिया मेने.

शिव : तो फिर मुज से क्यों करवाना चाहती है?

नाज़िआ : तेरे लिए तो सब कुछ गवारा है, चल अब दाल दे, ज्यादा टाइम भी नहीं है, कही वो जग गयी तो क़यामत हो जाएगी.

शिव : (में जनता था की वो संयम की बात कर रही है, पर उनको अपनी अम्मी की फ़िक्र नहीं थी, और क्यों वो में अब जनता tha)Aur आपकी अम्मी?

नाज़िआ : मेने कहा था न की वो वापस लौट गयी थी, पर वो भी वापस आ शक्ति है, इसीलिए तो कह रही हु की जल्दी करो.

शिव : (में जनता था की वो जूथ बोल रही है, जब वो वापस आयी थी तो मेने उन्हें पूछा था की कोण था तो उन्होंने बताया था की अम्मी आयी थी पर वो कुछ लेने आयी थी और वापस चली गयी, इसीलिए में आंटी को बहार देख कर ज्यादा चौंक गया था, वो जूथ बोल रही थी पर मुझे उस से कोई परेशानी नहीं थी, कोई भी हो अपनी अम्मी के रहते छुड़वाना उसे अजीब लगे गए, और वो भी सोचेगी की अगर वो ऐसा बताती तो में उसकी अम्मी के बारे में क्या सोचता, तो उन्होंने जूथ बोल दिया)

इतने बड़े लुंड से मेरी बेटी गांड मरवाने जा रही थी, वो अपनी प्रेग्नन्सी के चलते ध्यान रख रही थी, में खुस भी थी की वो समझदार है, पर इतना बड़ा लुंड उसकी गांड में कैसे जायेगा, मेने भी अपनी गांड मरवाई थी, वैसे भी मर्द कहा मानते है, पर इसके अब्बुका लुंड इतना बड़ा नहीं था, तो मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई थी, पता नहीं वो क्यों करवाना चाहती है. एक औरत के नाते सोचु तो वो कुछ भी गलत नहीं कर रही, हर औरत को हक़ होता है की वो ऐसे सरे सुख पाए. मुझे पता था की शिव को पता है की में देख रही हु, पर में अपने आपको रोक नहीं प् रही थी, मेने फिर निगाहे थोड़े खुले दरवाजे पर लगा दी. शिव ने लुंड गांड के छे पर लगा दिया था, मेरी बेटी कितनी खूबसूरत थी, उसके कूल्हे भी लाजवाब थे, बेदाग गोर कूल्हों के बिच वो खूंटा लगा हुआ था, मेने मान में प्रार्थना की की मेरी बच्ची को हिम्मत देना. शिव ने अपनी पोसिटिव ठीक की और कमर से पकड़ कर धक्का मारा.





नाज़िआ : Aiiiiiiiiii. (उसने अपना मुँह दबा दिया)

ज़ोया : (मान me)Thodi देर मेरी बच्ची, कुछ नहीं होगा, बस हो गया. (लुंड का सूपड़ा गांड के छेड़ को फैला कर अंदर चला गया था, और शिव रुक गया था, उसको इस लड़के की समझदारी पर आश्चर्य हो रहा था, और वो ये भी समाज रही थी की वो अनुभवी है, वो उसकी बेटी के झूलते स्तन को दबा रहा था और उसकी नंगी पीठ पर चाट रहा था, थोड़ी hi देर में उसकी बेटी शांत हो गयी, उसने और क्रीम अपने लुंड पर लगायी और अंदर बहार करने लगा, उसकी बेटी कराह रही थी, उसको दर्द हो रहा था, वो समाज सकती थी की इतने बड़े लुंड से दर्द होना लाज़मी है, वो थोड़ी देर उसको वैसे hi करता रहा, उसकी बेटी कराह रही थी,





अपनी बेटी का दर्द देख कर वो मान hi मान शिव से बिनती करने लगी, बस छोड़ दे मेरी बेटी को, आज के लिए बहोत हो गया बीटा, जैसे उसकी आवाज शिव तक जा रही थी, शिव ने उसकी और देखा, उसने दरवाजा और थोड़ा खोल दिया और शिव को देख कर जैसे आँखों से बिनती करने लगी)

शिव : (मेने आंटी को देखा तो वो अपनी बेटी के लिए चिंतित थी, में समाज सकता था, वैसे तो जो होना था वो हो गया था, अब और ज्यादा दर्द नहीं होनेवाला था, पर मुझे आंटी की आँखों में दया के लिए बिनती नजर आयी तो मेने लुंड बहार निकल लिया)

नाज़िआ : आईईईई. (वो बिस्तर पर उलटी लेट गयी, उसे दर्द हो रहा था, पर फिर भी वो शिव के लिए सब कुछ करना चाहती thi)Kyu निकल लिया शिव?

शिव : आपको ज्यादा दर्द हो रहा था, इस्सलिये.

नाज़िआ : वो तो थोड़ी देर बाद ठीक हो जायेगा, तुम कर लो.

शिव : आज एहने दीजिये, वैसे भी जगह बन गयी है, अगली बार इतनी दिक्कत नहीं होगी.

नाज़िआ : पर तुम्हारा नहीं हुआ है न.

शिव : में बाथरूम जा कर आता हु, आप आराम कीजिये. (जैसे hi ज़ोया ने सुना वो साइड में हो गयी, उसका दिल जोरो से धड़कने लगा)( शिव बहार आया, उसने दरवाजा बंद किया और मुझे देखने लगा, में बैठी हुई थी, उसने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे खड़ा किआ, में उसे देख रही थी, वो मुझे बाथरूम की और ले जाने लगा, में किसी सूखे पत्ते की तरह उसके साथ जा रही थी, बाथरूम में ले जाकर उसने मुझे खड़ा किआ, मेने उसकी और देखा पर में ज्यादा सामना नहीं कर पायी और अपनी नज़ारे झुका दी, उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने लुंड पर रख दिया, वो गरम गरम लुंड मेरे हाथ में था, में समाज रही थी की वो क्या चाहता है, पर मुझे शर्म आ रही थी, उसने मेरे हाथ को अपने लुंड पर लपेटा और उसे हिलने लगा, उसके इस बड़े लुंड को महसूस कर के में पागल होने लगी, में सब भूल चुकी थी, मुझे बस छोड़ना था, में कबसे गरम हो रक्खी थी, जब मेरा ध्यान गया तो मेने देखा की शिव ने मेरा हाथ छोड़ दिया है, पर फिर भी में उसका लुंड हिला रही थी, मुझे इतनी शर्म आयी की क्या कहु, मेने उसकी आँखों में देखा तो वो है रहा था, मेने शर्मा के लुंड छोड़ दिया.

शिव : आंटी, क्या आप करना चाहती है?

अम्मी : (ये कैसा सवाल है, क्या में अपने मुँह से कहूँगी, मेने उसकी और देखा, पर मेरी नज़ारे फिर झुक गयी)

शिव : आंटी, में इस्सलिये पूछ रहा हु की आपकी मर्जी भी जरुरी है, हम दोनों ऐसी परिस्थिति में है की दोनों को जरुरत है, पर फिर भी मेरे लिए ये जरुरी है ये जान न की आपको मंजूर है की नहीं. (वो चुप चाप कड़ी थी, में जनता था की वो चाहती है पर फिर भी मेरे लिए ये जरुरी tha)Agar अआप बोल नहीं प् रही है तो कोई इस्सर hi दे दीजिये.

अम्मी : (कितनी शर्म आ रही थी मुझे, पहली बार में किसी गैर मर्द के साथ थी, पहली बार में अपने शौहर के अलावा किसी नंगे आदमी को देख रही थी, मुझे भी सब करना था, पर में ऐसे कह नहीं सकती थी)

शिव : आंटी अगर आप नहीं कहेंगी तो में चला जाऊंगा, में समाज सकता हु की आपको शर्म आ रही है पर फैसला भी आपको hi करना पड़ेगा, अगर आप कह नहीं प् रही है तो एक काम कीजिये, अगर आप चाहती है की हम आगे बढे तो आप अपना लेहंगा और अपनी पंतय खुद निकल दीजिये, में समाज जाऊंगा.

अम्मी : (क्या अजीब लड़का है, क्या में खुद अपने कपडे उतरूंगी, हमारे बिच थोड़ी देर ख़ामोशी छायी रही, वो जाने लगा तो में हड़बड़ा gayi)Ruko (अचानक मेरे मुँह से निकल गया, मुझे कितनी शर्म आ रही थी, में अपने बेटे के उम्र के एक लड़के के साथ ये सब करने के लिए राज़ी हो गयी थी, में शर्म से गाड़ी जा रही थी, पर वो जाने लगा तो में उसे रोकने से खुद को रोक न पायी, मेरे मुँह से सहमति पते hi वो मेरे नजदीक आया मेरी धड़कने बढ़ चुकी थी, वो झुका और मेरे होठो को चूसने laga,kitna अजीब था, वो जैसे जैसे मेरे होठो को चूस रहा था में पिघलती जा रही थी, एक अजीब तरह का अनुभव हो रहा था, में बहोत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी, वो मेरे कूल्हों को भी मसल रहा था, और मेरे स्तन को भी मसल रहा था, कितना अजीब एहसास था, ये सब भी मेरे सौहार ने किआ था पर ये सब मुझे नया लग रहा था, में उत्तेजना में कैंप रही थी.)





शिव : (आंटी के साथ ये सब अजीब लग रहा था पर मेरे शिर पर भी सेक्स की खुमारी छायी हुई थी, संयम की अम्मी थी वो, कभी मेने उन्हें इस तरह से नहीं देखा था, पर अभी बात अलग थी, उनका शरीर लड़कीओ के हिसाब से ज्यादा भरा हुआ था, वो सबसे ज्यादा भरी हुई थी, उनके कूल्हे और स्तन भी ज्यादा बड़े और भरे हुए थे, मेने उनके सलवार को निचे गिरा दिया और उनके कमीज को ऊपर उठा कर उनके भरे हुए कूल्हों से खेलने लगा, ज्यादा टाइम था नहीं तो मेने उनकी कमीज को ऊपर उठाने लगा तो उन्होंने हाथ पीछे ले जाकर उसकी चैन खोली और खुद अपने हाथ ऊपर उठा दिए, अब सिर्फ ब्रा में थी वो, पंतय मेने घुटनो तक खिसका दी थी, मेने ब्रा भी खोल दी, वो शर्मा रही थी पर ज्यादा टाइम था नहीं, मेने उनके स्तन मसलना सुरु कर दिया, अब तक के सबसे बड़े स्तन थे वो, जैसे जैसे में मसल रहा था वो सिसक रही थी, में झुका और निप्पल चूसना सुरु कर दिया, वो सिस्किअ लेने लगी, थोड़ी देर चूसने के बाद में निचे बेथ गया, बालो से भरी हुई छूट मेरे सामने थी, मेने ऊपर उनकी और देखा तो उन्होंने अपना मुँह फेर लिया, में समाज सकता था की वो शर्मा रही है, छूट के बल हटा कर मेने छूट को देखा तो वो पूरी गीली हो चुकी थी, वह से रास बह रहा था, मेने सीधा वह मुँह लगा दिया और उसे चाटने लगा)

अम्मी : शहहहहह शीइइइइव (कितने hi सालो बाद कोई मेरी छूट चाट रहा था, कई सालो से संयम के अब्बू ने ये सब बंद कर दिया था, मेरी टंगे फ़ैल गयी और में उसे और रास्ता देने लगी, जैसे जैसे वो मेरी छूट चाट रहा था मेरी सिस्किअ बेकाबू हो रही थी, मेरी कमर हलके हलके धक्के मरने लगी थी, थोड़ी देर चाटने के बाद वो खड़ा हुआ और मुझे निचे बिठाने लगा, में शर्म से बेहाल थी पर फिर भी बेथ गयी, उसने अपने लुंड को मेरे सामने किआ और मेरा शिर पकड़ कर अपनी और खिंचा, जैसे hi लुंड होठो से टकराया मेने मुँह खोल दिया, उसका बड़ा गरम लुंड मेरे मुँह में फिर से उतर गया,





वो फिर से धक्के लगाने लगा तो में उसे चूसने लगी, कितना अजीब था, चुदाई के लिए हम दोनों अपनी उम्र का लिहाज भी भूल गए थे, में कितनी बड़ी थी उसके लिए और वो मेरे बेटे जैसा पर फिर भी वो मुझे अपना लुंड चुसवा रहा था और में उसका लुंड चूस रही थी. थोड़ी देर बाद उसने मुझे खड़ा किआ और पलट कर झुकाने लगा, में अपनी बड़ी गांड उसकी और किये झुक भी गयी, पहले उसने मेरे कूल्हों और छूट को फिर से छठा





फिर वो खड़ा हुआ और पाना लुंड मेरे कूल्हों की दरार में घिसने लगा, उसके कड़क लुंड का एहसास पते hi में और झुक गयी, उसने अपना लुंड मेरी छूट पर लगाया और छूट पर रगड़ने लगा, में छोड़ने के लिए मचल रही थी, में और थोड़ा झुक गयी और उसके लुंड के लिए तैयार हो गयी, में उसके लुंड को महसूस कर प् रही थी, एकदम कड़क लोहे जैसा था, उसका कड़ा पैन मुझे पागल कर रहा था, आखिर उसने अपना लुंड मेरे छेड़ पर लगा दिया और मेरी कमर पकड़ कर अंदर दबाया, छूट को फैला कर वो अंदर उतरने लगा. दो बच्चो की माँ थी तो ज्यादा दिक्कत तो होनी नहीं थी, पर फिर भी उसका लुंड सच में बहोत बड़ा था, मेरी छूट को वो फैलते हुए उसके अंदर घुस गया, मेरी छूट पूरी तरह से भर गयी थी, में पहली बार इतने बड़े लुंड को महसूस कर रही थी, वो पूरी तरह मेरे अंदर समां गया, जब उसकी झांग मेरी झंघ से सटी तो मेने महसूस किआ की उसका लुंड मेरी बच्चेदानी को अंदर दबा रहा है, ये एक नया अनुभव था मेरे लिए, में आंखे बंद किये हुए उसके बड़े लुंड को महसूस कर रही थी)

शिव : आंटी की छूट में लुंड डालने में कोई परेशानी नहीं हुई, सब की छूट के मुकाबले यहाँ ज्यादा जगह थी, अंदर से वो बहोत गरम थी, और चिकनी भी हो गयी थी, मेरे लुंड पर वो दबाव बना रही थी, सबसे ज्यादा मुझे सकूँ इस बात का था की उन्हें दर्द नहीं हो रहा था, मेने फ़ौरन चुदाई सुरु कर दी, में संयम की अम्मी को छोड़ रहा हु ये सोच कर hi मेरी उत्तेजना बढ़ रही थी, पहले हलके हलके धक्को के साथ मेरी स्पीड बढ़ रही थी, में जल्दी जल्दी धक्के लगाने लगा.





ज़ोया : (इतने बड़े लुंड से छोड़ने का ये मेरा पहला अनुभव था, वो लुंड मेरी छूट के हर कोने को रगड़ रहा था, इतने अंदर तक लगते धक्को से में बहोत ज्यादा उत्तेजित हो गयी थी, वो मुझे इतनी ताकत से छोड़ रहा था की में पूरी हिल रही थी,





उसके धक्को से मुझे दर्द भी महसूस हो रहा था, पर इस सुख के लिए में सब बर्दास्त करने को तैयार थी, वो लगातार तेज तेज धक्को से मुझे छोड़ रहा था तो में ज्यादा देर टिक न पायी और में जड़ने लगी, पता नहीं ये कितने समय बाद हुआ था, शायद में झड़ने का ये अनुभव भूल भी चुकी थी, कई महीनो में चुदाई तो होती थी पर में झड़ना जैसे भूल hi गयी thi,muje मज़ा आने लगता हुस से पहले hi वो झाड़ जाते थे. में लगातार झाड़ रही थी और वो मेरी छूट की धज्जिया उदा रहा था, उसका इतना बड़ा सूपड़ा मेरी छूट को अच्छे से रगड़ रहा था, में सब भूल चुकी थी, मुझे बस ये चुदाई hi महसूस हो रही थी. हम दोनों hi बात करने से शर्मा रहे थे पर फिर भी चुदाई लगातार जारी थी. थोड़ी देर बाद उसने अपना लुंड बहार निकला और मुझे सीधा खड़ा किआ उसकी और देखने से भी मुझे शर्म आ रही थी, वो झुका और फिर से मेरे होठो को चूसते हुए मेरे स्तन दबाने लगा, मेरी बहे उसके गले में पहुंच गयी और में भी उसको किश में साथ देने लगी, उसका कड़क लुंड मेरे पेट पर था जो मुझे बहोत अच्छा लग रहा था, वो झुका और और मेरी एक तंग उठा कर अपना लुंड फिर से अंदर दाल दिया, में इतनी खुस थी की में उस से लिपट गयी, इस तरह की चुदाई हुए तो जैसे बरसो बिट गए थे, उसका लुंड फिर से मेरी छूट में उतर गया, मेरे कूल्हे पकड़ कर वो खड़े खड़े मुझे छोड़ने लगा,





में उसकी पीठ सहलाते हुए उसके बड़े लुंड का मज़ा लेने लगी, वो लगातार स्पीड से मुझे पेल रहा था, थप थप की आवाज आ रही थी, में लगातार सिसक रही थी, मुझे कुछ भी होश नहीं था, वो लगातार मुझे छोड़ रहा था, मेरी छूट से तो नदिया बह रही थी.

नाज़िआ : (उसने एक दो बार शिव को आवाज दी पर शिव नहीं आया तो वो जैसे तैसे बहार निकली और बाथरूम की और बढ़ गयी, अंदर से आती गर्म सिसकीओ से वो समाज गयी की अंदर क्या हो रहा hai)Bathroom में शिव किसके साथ है? घर में तो में, अम्मी और संयम hi है, संयम तो हो नहीं सकती तो क्या अम्मी, (उसका दिमाग सुन्न पद gaya)Par अम्मी कैसे, और शिव अम्मी के साथ कैसे कर शक्ति है, (पर थोड़ी hi देर में वो शांत होने lagi)Kyu नहीं हो सकता, वो वैसे भी उत्तेजित था, वो मेरा ख्याल करके मेरे साथ नहीं कर रहा था, पर अम्मी कैसे आ गयी और वो शिव के साथ करने को राज़ी भी हो गयी, अम्मी तो वैसी नहीं है, कैसे हुआ होगा ये सब. (वो कान लगा कर सुन ने lagi)Hai तो अम्मी hi, उनकी आवाज से पता चल रहा है, वो है भी मज़े में, पर उनको क्या जरुआत पद गयी शिव के साथ करने की (वो ध्यान लगा के अंदर की आवाजे सुन ने lagi)(Iss बात से बेखबर में अंदर शिव के धक्को से चुद रही थी, उसने फिर से अपना लुंड बहार निकला)

शिव : आंटी, यहाँ निचे लेट जाइये. (में बिना किसी न नुकुर के निचे फर्श पर लेट गयी, उसने मेरी टंगे फैलाई और अपने लुंड को फिर से मेरी छूट पर सेट किआ, मेरे ऊपर आते हुए उसने अपना पूरा लुंड अंदर उतर दिया)

ज़ोया : अह्ह्ह्हह.

शिव : दर्द हुआ आंटी? (मेने न में इस्सर किआ, वो फिर से धक्के लगाने लगा)

ज़ोया : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह शहहह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह उम्म्म. (वो मेरे होठो को जोर जोर से चूसने लगा, और मेरे स्तन को भी निचोड़ रहा tha)Ummm उम्म्म्म उम्म्म्म ummmm(Bathroom में थप थप की आवाजे गूंज रही थी), वो थोड़ा ऊपर हुआ और जोर जोर से मुझे छोड़ ने laga)Ahhh अह्ह्ह शहहह शहहह शह्ह्ह्ह (इतना ज्यादा छोड़ने की मुझे आदत नहीं थी, मुझे दर्द भी हो रहा tha)Shhh आहिस्ता बीटा शहहह अह्ह्ह्हह धीरे करो बीटा शह्ह्हह्ह्ह्ह.





शिव : (उनका मुझे बीटा कहना मुझे अजीब लग रहा था, पर पता नहीं क्यों मेरी उत्तेजना बढ़ रही थी, में और जोर से धक्के लगाने लगा)

ज़ोया : शहहह आराम से शहहह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह आरामसे बीटा शठ अह्ह्ह्हह.

नाज़िआ : (अंदर से आ रही गरम सिसकीओ की आवाज मुझे भी उत्तेजित कर रही थी, अपनी hi अम्मी को चुड़ते हुए महसूस कर के में क्यों उत्तेजित हो रही थी, कुछ भी हो सकता है, पर मुझे अम्मी के बारे में गलत नहीं सोचना चाहिए, आखिर वो भी तो एक औरत है, उन्होंने भी तो मेरी मदद की थी, (ये सोच कर वो वापस कमरे की और चली गयी)

ज़ोया : शह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह (में फिर से झड़ने वाली थी, उसके बड़े लुंड के आगे में बेबस थी, में इतना उत्तजित महसूस कर रही थी की में झड़ने से रोक न पायी, और झटके कहते हुए फिर से झड़ने लगी)

शिव : आंटी मेरा भी होनेवाला है, कहा दालु?

ज़ोया : (इस उम्र में तो में माँ बन ने से रही, वैसे भी मेरा मोनोपौसे हो चूका tha)Ander hi दाल दो.

शिव : आंटी, एक बात कहु, आप बहोत खूबसूरत है, आपकी खूबसूरती hi आपकी बेटिओ को मिली है. (मुझे उसकी बातो से शर्म आ रही थी, मेने उसकी और देखा, वो मुझे लगातार छोड़ रहा था, मेरे चेहरे पर मुस्कान उभर आयी, वो मुझे पसंद करता था यही सोच कर एक अलग hi एहसास हो रहा था, उम्र के इस पड़ाव पर भी में किसी को पसंद thi)aap मुस्कुरा क्यों रही हो, में सच कह रहा हु, भले hi ये जैसे भी हुआ हो, पर आपके साथ मुझे मज़ा आ रहा है, आपको मज़ा आ रहा है (वो मेरी आँखों में देख रही thi)Kahiye न आंटी, क्या आपको मज़ा आ रहा है (मुझे मज़ा तो आ hi रहा था, पर शर्म आ रही थी ये कहने से, मेने सिर्फ है में गर्दन हिलायी, वो मुझे जोर जोर से छोड़ रहा था, में फिर से झड़ने के करीब पहुंच गयी, ये क्या हो रहा था मुझे, मेने उसको अपनी बहो में भर लिया और अपनी टंगे उसकी कमर में लपेट di)Aunty मेरा निकलने वाला है (में उसको चूमने लगी, उसके गाल पर उसकी पीठ पर, वो इतने तेज धक्के लगा रहा था की में क्या कहु, आखिर के धक्के उसने बड़े जोर से लगाए और मेरी छूट में गरम गरम रास भरने लगा, सुकून से मेरी आंखे बंद हो गयी)

नाज़िआ : (करीब पंद्रह मिनट बाद शिव कमरे में आया) बहोत देर लगा दी?

शिव : (हड़बड़ाते hue)Ha वो वो...

नाज़िआ : इसमें इतना डरने की क्या जरुरत है, अपने हाथ से करने की क्या जरुरत थी, मुझे कह देते, में अपने मुँह से कर देती.

शिव : नहीं ऐसी बात नहीं है, में फ्रेस हो रहा था तो टाइम लग गया.

नाज़िआ : मुझे सफाई देने की जरुरत नहीं है तुम्हे, अगर भी भी मान कर रहा हो तो में ठीक हु अभी, मेरे साथ कर शक्ति हो.

शिव : नहीं दीदी, आप आराम करो, हम फिर कभी करेंगे. (में अपने कपडे पहन ने लगा)

नाज़िआ : जा रहे हो?

शिव : जाना तो पड़ेगा, मुझे साइट पर भी जाना है.

नाज़िआ : ठीक है, जल्दी आना.

में उन्हें किश करके बहार निकला तो आंटी बाथरूम से बहार आ रही थी, मुझे देखते hi वो ठिठक गयी, मेने रूम का दरवाजा बंद किआ और उनकी और चला गया, वो निचे hi देख रही थी.

शिव : (धीमी आवाज me)Sorry आंटी, आपको बुरा तो नहीं लगा न? (अपनी नज़ारे झुकाये हुए hi उन्होंने ना में गर्दन hilayi)Pata नहीं सब कैसे हो गया. अभी मुझे जाना है, अगर आपको ठीक लगे तो हम बाद में बात करेंगे. (वो कुछ न boli)Baat करेंगे न आंटी? (मेने फिर से पूछा, उन्होंने एक नज़र मुझे देखा फिर नज़ारे झुका कर है में गर्दन hilayi)Thik है आंटी, मिलते है.

वो शिव को जाता हुआ देख रही थी, जो कुछ भी हुआ था उस से वो खुस भी थी, शर्मिंदा भी थी और न जाने क्या क्या फीलिंग्स आ रही थी. वो काफी देर तक वह कड़ी रही.
 
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