Adultery Kundali Bhagya - Page 18 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

अपडेट 119

कमली और सुपरिवीज़र, नहीं बन रही सोसाइटी के बने हुए मॉडल घर में थे, ये सब सुरु हुआ था कुछ महीनो पहले. कमली के बाप को जुआ खेलने की लत लग चुकी थी, कई बार वो जित भी जाता था पर ज्यादातर वो हारता hi था, सुपरवाइजर को ये बात पता थी, की अक्सर कमली के बाप को पैसो की जरुरत पड़ती रहती है, तो उसे ये कमली को भोगने का रास्ता नजर आनेलगा था, एक बार कमली के साथ सेटिंग हो गयी तो भोली और झुमरी के साथ भी सेटिंग हो जनि थी. उसने सुरु में थोड़े थोड़े पैसे दिए, दो सौ पैसो से सुरु होते होते बात दस हजार तक पहुंच गयी, उसने पैसो पर व्याज लगाना सुरु कर दिया, दस ताका व्याज लगते हुए पैसे बढ़ने लगे, उसने पैसे उधर लिए है ऐसा प्रामिसरी नोट भी तैयार करवाके उसका अंगूठा ले लिया ताकि वो मुकरे न. वो ठहरा जुआरी, कहासे पैसे लौटता, धीरे धीरे पैसे पंद्रह हजार हो गए. अब सुपरवाइजर को लगने लगा की ये hi सही मौका है. एक दिन उसने कमली के सामने उसके बाप को पैसे लौटने को कहा, एक साथ पंद्रह हजार वो नहीं लौटा सकते थे, ऊपर से हर महीने पंद्रहसौ ब्याज चढ़ रहा था, एक दो बार कमली के सामने उसने उसके बाप को झालील किआ, और किसी भी तरह ब्याज चुकाने को कहा. वैसे बाप बेटी मिलकर पंद्रह हजार रुपया कमलते थे, पर उसका बाप अपने सरे पैसे जुए और शराब में उदा देता था, तो बचते थे सिर्फ कमली के पैसे, उसी में घर चलना होता रहता था, उसमे से अगर पंद्रह सो रुपए सुपरवाइजर को दे दिए जाये तो घर चलना मुश्किल था, फिर भी कैसे भी करके एक दो महीने तो उन्होंने दिए, पर फिर नहीं दे परहे थे, पिछले महीने उसकी माँ बीमार पद गयी थी तो उसी के इलाज में भी पैसे लग गए थे, जब उसने इस महीने पैसे देने से मन किआ तो सुपरवाइजर की आंखे चमक उठी, ब्याज के बदले में उसने कमली को हमबिस्तर होने को कहा, वैसे भी कमली उसके इरादे पहले से जानती थी, उसके बाप को वो पैसे किस लिए दे रहा है ये भी वो जानती थी. पर उसने मन कर दिया तो सुपरवाइजर ने वो कागज दिखते हुए पुरे पैसे एक साथ मांगे, और अगर न दिए तो पैसे न लौटने पर जेल भेजने की धमकी दी. कमली को इतना गुस्सा आया की उसने अपने बाप को hi सबके सामने मारा और वो रट हुए मार खता रहा, आखिर कर कमली ने हथियार दाल दिए और सुपरवाइजर की बात मन ने को तैयार हो गयी.

झुमरी और भोली ने भी पैसे देने को कहा और दूसरे लोगोने भी कहा, पर ये एक बार का तो था नहीं, और कमली बहोत ज्यादा गुस्से में थी, ये गुस्सा अपने बाप पर था, उसी की वजह से वो इस दसा में पहुंच गयी थी, इसलिए वो सुपरवाइजर के साथ उस रूम में पहुंच गयी थी. सुपरवाइजर ने दरवाजा बंद किआ और कमली की और जाते हुए.

सुपरवाइजर : शह्ह्ह्हह्ह, क्या कमल का बदन है ऋ तेरा, कितना तड़पाया है तूने, तेरी मटकती गांड देख कर तो हर समय लुंड खड़ा हो जाता था, आज पूरी कसार निकलूंगा. (वो कमली के चक्कर लगते हुए उसे हवसी नजरो से ददख रहा था, कमली अपनी नज़ारे झुकाये अपनी किस्मत को गालिया दे रही थी. थोड़ी देर देखने के बाद वो उसके कूल्हों को सहलाते हुए उसकी सख्ताई को जांचने laga)Shhhhh क्या कड़क कूल्हे है तेरे, (वो उसे दबाते हुए उसे महसूस कर रहा था, थोड़ी देर सहलाने के बाद उसने कमली को पलंग के सहारे घोड़ी बना दिया और उसका घाघरा ऊपर उठा दिया, निचे एक सस्ती से कच्छी पहनी हुई थी, जिस पर दो तीन तो छेड़ the)Are मेरी रानी, क्या फटेहाल जिंदगी जी रही है, में हु न, मेरे से नाता बनाये रक्खेगी तो फ़ायदेमए रहेगी, चल कल hi तेरे लिए नयी कच्छी ले आता हु, वैसे भी अगर नहीं भी पहनेगी तो चलेगा पर कच्ची में कमल लगती है, तो पक्का कल ले आऊंगा. (उसने कूल्हों से कच्छी सरकायी और उसके सामने कमली की गांड आ gayi)Shhhhhhh तेरे कूल्हे देख कर hi मेरा तो लुंड कड़ा हो गया, क्या कमल की है तू कमली, बाल वाल साफ़ नहीं करती क्या, कोई बात नहीं अब में हु न, सब करवाडुंगा. (वो उसके कूल्हे फैला कर छूट और गान के छेड़ को देखने लगा, वह कोई गीलापन नहीं था जो दर्शाता था की कमली बिना मान के ये सब कर रही है, पर उसे कोई फर्क नहीं पड़नेवाला था, वैसे भी मान हो की न हो छूट में लुंड जाते hi अपने आप पानी छोड़ने लगती है.) तेरी छूट देख कर तो अब रहा नहीं जाता, चल मेरा लुंड चूस फिर तेरी छूट बजाते है (वो पलंग पर बेथ गया और अपना पंत निकल दिया, कमली कड़ी रही, तो उसने उसका हाथ पकड़ कर खिंचा और अपने लुंड के पास धकेल के बिठा diya)Chal चूस मेरी रानी, देख कैसे तुजे देख कर कड़क हो गया है. (कमली ने मुँह फेर लिया, तो सुपरवाइजर अपने लुंड को उसके होठो के पास ले गया, और उसके होठो पर अपना लुंड लगाने की कोशिस करने लगा पर कमली अपना मुँह इधर उधर घुमा देती थी, सुपरवाइजर को गुस्सा आ रहा था, उसने दोनों और से कमली के बाल पकड़े और मुँह को सीधा पकड़े रक्खा और अपना लुंड उसके होठो पर लगाया पर कमली ने अपने अपना मुँह कास के बंद कर दिया, सुपरवाइजर को और गुस्सा आ रहा था, उसने धक्के से उसका शिर छोड़ा और उसके बाल पकड़ कर उसे खड़ा किआ और बीएड पर धकेला) तू ऐसे नहीं मानेगी, पहले तेरी छूट बजता हु. (उसने फिर से कमली का घाघरा ऊपर करदिया, वो निचे से नंगी थी, न वो कुछ बोल रही थी न उसकी और देख रही थी, उसकी आँखों में भी आंसू उतर आये थे, वो अपनी मजबूरी पर रो रही थी, सुपरविसोर ने उसकी टंगे फैलाई और उसके पैरो के बिच बेथ गया और अपने लुंड पर थूक लगाने लगा, गुस्से और जबरदस्ती करने के चाकर में लुंड थोड़ा ढीला पद गया था, पर फिर भी उसने अपनी पोसिटिव ली)

अभी उसने पोसिसिओं ली hi थी की दरवाजा खुल गया, जल्दी जल्दी और बेफिकरी में उसने दरवाजा अंदर से बंद नहीं किआ था, दरवाजे पर शिव को खड़े देख कर वो चौंक गया.

सुपरवाइजर : ोये, तू यहाँ क्या कर रहा है? (शिव वही खड़ा tha)Chal निकल यहाँ से, जा अपना काम कर.

शिव : (गुर्राते hue)Chhod उसे, और तू निकल यहाँ से. (मेने देखा की कमली निचे से नंगी थी और उसकी छूट साफ़ दिख रही थी, छूट पर लगे बालो से घिरी छूट साफ़ साफ़ दिख रही थी, उसने भी देखा की मेरी नजर उसकी छूट पर है तो उसने फ़ौरन अपनी घाघरा निचे किआ और छूट को धक् दिया)

सुपरवाइजर : इन सब से तेरा कोई लेने देना नहीं है, तू निकल यहाँ से, और अगर तुजे भी छोड़ना है तो बाद में छोड़ लेना, पहले तो में hi छोडूंगा. (में उसके नज़दीक गया और उसका गिरेबान पकड़ कर उसेपीछे खिंचा तो वो बीएड से उतर गया और खड़ा हो गया, उसका पंत अभी भी निचे था और उसका लुंड निचे लटक रहा था, उसका लुंड सिदद रहा था और ढीला पद गया था, शायद मेरी वजह से) छोड़ मेरा गिरे बन (उसने मेरा हाथ झटकना चाहा पर मेने मजबूती से पकड़ा था) छोड़ मुझे, ये हमारा हिसाब किताब है, तू अपना काम कर. वो अपनी मर्जी से मुझसे छुड़वाने आयी है.

शिव : (मेने कमली को देखा तो उसकी आँखों में उदासी थी और आंखे भी भरी हुई थी, मुझे नहीं पता था की उनका क्या माजरा है पर इतना तो समाज सकता था की वो मजबूरी में है) ये सब मुझे समाज आता है, मेने कहा न निकल यहाँ से, वर्ण अच्छा नहीं होगा.

सुपरवाइजर : इसके बाप ने मुझसे पैसे लिए थे और वो चूका नहीं रहा है, इसीलिए ये मेरे निचे है, (कमली se)Kamali इससे बोल जाये यहाँ से वर्ण तेरे बाप के लिए अच्छा नहीं होगा.

शिव : अगर इसके बाप से तेरा हिसाब है तो जा उसको छोड़, और जो करना है उसके साथ कर, उसके बाप का सहारा ले कर इसके साथ जबरदस्ती करने का तुजे कोई हक़ नहीं, चल अब निकल यहाँ से वर्ण तेरी खैर नहीं.

सुपरवाइजर : (एक लड़की के सामने अपनी बेइज्जती से वो थोड़ा टैक्स में आ गया, और अपना हाथ पीछे करके मेरे हाथ से अपना गिरेबान छुड़ाने की कोशिस करते हुए मेरी और घूमने लगा, वो गिरेबान छुड़ा नहीं पर रहा था तो उसने मेरे पर हाथ उठाया, में तैयार था, मेने उसका हाथ पकड़ा, और उसे गिरेबान से अपना हाथ हटा कर उसको एक चांटा मारा, चांटा पड़ते hi वो और गुस्सा हो गया और मुझे मरने के लिए बढ़ा तो मेने फिर से एक चांटा मारा) मुझे मरता है, देख में तेरा क्या हल करता हु (वो फिर मुझे मरने की कोशिस करने लगा, में हर बार उसे चांटा मर रहा था, तीन चार छंतो से उसका चेहरा लाल हो गया, उसे समाज आ गया की वो मुझसे लड़ नहीं सकता तो वो मुझे धमकिए देने लगा) में तुजे नौकरी से निकलवा दूंगा, सेल तूने मुझपर हाथ उठाया, देख अब में तेरा क्या हाल करवट हु.

शिव : निकल जा यहाँ से वर्ण नंगा करके बहार निकल दूंगा. (मेरे ऐसा कहते hi उसको अपनी स्थिति का बहन हुआ और उसने अपना पंत ऊपर चढ़ा लिया और बहार निकल गया, जाते जाते भी वो धमकिए दे रहा था)

सुपरवाइजर : अब में इसके बाप को जेल भिजवाऊंगा, और तुजे नौकरी से निकलवा दूंगा, सेल तूने मुज पर हाथ उठाया है. (बाद बढ़ाते ते हुए वो दरवाजा खोल कर बहार निकल गया, जैसे hi दरवाजा खुला मेने देख की सब लोग वह खड़े थे, तो में भी बहार निकल गया, भोली और झुमरी अंदर चली गयी. में कमली के बाप को पहचानता था तो मेने उसे भी डांटा और अपनी बेटी को ऐसे आगे करने के लिए खूब खरी खोटी सुनाई, वो अपना शिर झुकाये सब सुन रहा था)

सुपरवाइजर वह से निकला और उसने प्रकाशराओ को फ़ोन लगाया.

सुपरवाइजर : सर, पवनसीर के आदमी ने मुझे मारा.

प्रकाशराओ : किसने?

सुपरवाइजर : शिव ने?

प्रकाशराओ : (शिर का नाम सुनते hi उनके कान खड़े हो गए, उनको पता था की यही वो सख्स है जो उसके आड़े आ रहा है) हुआ क्या था?

सुपरवाइजर : कुछ नहीं सर, एक लड़की है, कमली, वो काम नहीं कर रही थी, तो मेने उसे डांटा, की काम करो, मुफ्त की पगार नहीं मिलेगी, पर वो शिव की चाहती है, पूरा दिन वो शिव के आगे पीछे घूमती रहती है, तो उसकी वजह से शिव ने मुझपर हाथ उठाया.

प्रकाशराओ : उसकी इतनी हिम्मत, में अभी पवन से बात करता हु, मेरे आदमी पर हाथ उठता है.

(सुपरवाइजर मान hi मान खुस हो रहा था, फिर वो पुलिस स्टेशन की और निकल गया, कमली के बाप के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाने)( आधे घंटे बाद मुझे पवनसीर का फ़ोन आया)

पवनसीर : क्या हुआ शिव, तूने सुपरवाइजर को मारा है?

शिव : सर, वो एक लड़की की इज्जत से खेल रहा था, तो मेने उसे रोका तो वो मुझे मरने लगा तो मेने भी उसे मारा.

पवनसीर : कोनसी लड़की?

शिव : कमली.

पवनसीर : पर प्रकाशराओ जी तो बता रहे थे की कोई लड़की काम नहीं कर रही थी और सुपरविसोर उसे दन्त रहा था, और वो तुम्हारी चाहती है इस्सलिये तुमने उसे मारा.

शिव : वो झूठ बोल रहा है. यहाँ सबने ये देखा है, आप किसी से भी पूछ शक्ति है.

पवनसीर : ठीक है, में प्रकाशरोजी से बात करता हु.

शिव : (थोड़ी देर बाद भोली मेरे पास आयी) ये माज़रा क्या है? (उसने मुझे सब बता दिया, की पैसो की वजह से ये सब हुआ था, अभी हम बात कर hi रहे थे की मुझे भार्गवी मैडम का फ़ोन aaya)Hello.

भार्गवी : तुमने किसी को मारा है क्या?

शिव : आप को कैसे पता चला?

भार्गवी : यहाँ एक आदमी कम्प्लेन करने आया है, वो कह रहा है की उसने किसी को पैसे उधर दिए थे, और जब वो अपने पैसे वापस मांग रहा था तो उस आदमीने पैसे देने से इंकार कर दिया और शिव नाम के लड़के से पिटवाया.

शिव : वो झूठ बोल रहा है मैडम, वो एक लड़की का गलत फायदा उठा रहा था, वो जिसकी बात कर रहा है वो इस लड़की का बाप है, उसने पैसे दिए थे और उसके बदले वो उस लड़की का गलत फायदा उठाने की कोशिस कर रहा था इसीलिए मेने उसे मारा है, और वो भी तब जब उसने मुज पर हाथ उठाया.

भार्गवी : ओह, ये बात है, तुम उस लड़की और उसके बाप को ले कर पुलिस स्टेशन आ जाओ.

और गवाही के लिए एक दो और लोगो को भी ले आओ.

शिव : ठीक है मैडम. (मेने जब कमली और उसके बाप को बताया तो वो दोनों दर गए, मेने जब उन्हें कहा की वो इंस्पेक्टर मेरी पहचान में है तब जा कर वो लोग मने, मेने झुमरी और भोली को भी साथ ले लिया.)

जब हम पुलिस स्टेशन पहुचेतो हमे देख कर सुपरवाइजर भार्गवी मैडम से कहने लगा.

सुपरवाइजर : यही है मैडम, इसिने मुझे मारा है, गिरफ्तार कर लीजिये इससे, और इसने मुज से पैसे लिए है, जिसकी पर्ची में पहले hi आपको दे चूका हु.

भार्गवी : पर ये लड़की तो तुम्हारे खिलाफ कम्प्लेन लिखवाने आयी है, की तुमने इसकी इज्जत पर हाथ डालने की कोशिस की. (कमली ने मेरी और देखा तो मेने उसे चुप रहने का इस्सर किआ)

सुपरवाइजर : ये झूठ है मैडम, एक तो पैसे नहीं दे रहे और ऊपर से मुज पर झूठा इल्जाम लगा रहे है.

भार्गवी : शिव, ये तो कह रहा है की ये झूठ है, है कोई गवाह जो ये कह शेक की ये सच है? (मेने भोली और झुमरी को दिखा कर कहा की ये गवाही देगी, वो दोनों इस इंस्पेक्टर को पहचान गयी थी, उस डिम जब वो मुझसे मिलने आयी थी तो मैंने कहा था की वो मेरी पहचान में है, तो अब उनका दर ख़तम हो गया था)

भोली : है मैडम, में गवाही दूंगी, ये जूथ बोल रहा है.

सुपरवाइजर : नहीं मैडम, ये सब मिले हुए है, मुझे फ़साना चाहता है.

भार्गवी : (टेबल पर पड़ा डंडा लेते hue)Hamare पास और भी रस्ते है, कोण सच बोल रहा है और कोण जूथ, ये पता करने का. (डंडा देख कर सुपरवाइजर डरने लगा) तो एक केस ये बनता है की ये आदमी तुम्हारे पैसे नहीं दे रहा, और दूसरा ये की तुमने इस लड़की के साथ जबरदस्ती करने की कोशिस की. एक में ये अंदर जायेगा और दूसरे में तुम. और तुम तो बहोत लम्बे जाओगे. (सुपरवाइजर के पशीने छूट रहे थे)

सुपरवाइजर : आप मुझे डरा रही है, में अपने साहब से बात करना चाहता हु.

भार्गवी : कर लो.

सुपरवाइजर : (प्रकाशराओ को फ़ोन लगता hai)Sir, में पुलिस स्टेशन से बोल रहा हु, में यहाँ कम्प्लेन लिखवाने आया था पर ये लोग मुझे जूते केस में फंसा रहे है, आप मला सर से बात करके कुछ कीजिये.

प्रकाशराओ : अबे बेवकूफ, वह क्यों पहुंच गया तू, और मुझे पवन का भी फ़ोन आया था, तूने उस लकड़ी की िज्जल लूटने की कोशिस की? मुझे कुछ और बता रहा है और वह कुछ और हुआ है.

सुपरवाइजर : नहीं सर, में सच कह रहा हु, ये सब मुझे फंसा रहे है.

प्रकसराओ : मुझे चुटिया समाज रहा है, और वह मला का नाम ले रहा है, सेल गोली मर देगा वो तुम्हे, फ़ोन रख और जो खुद रायता फैला है उसे खुद hi chat.(Usne फ़ोन काट दिया, सुपरवाइजर पशीने से पूरा भीग गया था, वो अपनी बेवकूफी पर पछता रहा था, उसे लगा की मला और प्रकसराओ के दम पर वो कुछ भी कर शक्ति है, पर उसकी हवा निकल गयी थी)

भार्गवी : (वो उसकी हालत देख कर समाज गयी थी) तो भाई, आ रहे है तुम्हारे साहब और मला साहब. (वो भीगी बिल्ली की तरह मैडम को देखने laga)Teri हालत देख कर तो लग रहा है की कोई नहीं आनेवाला, तो भाई तू इनके खिलाफ कम्प्लेन कर और लड़की तू इसकेख़िलाफ.

सुपरवाइजर : मुझे कोई कम्प्लेन नहीं करनी, मुझे कोई पैसे नहीं चाहिए, मुझे छोड़ दीजिये.

कमली : शिव, मुझे भी कोई कम्प्लेन नहीं करनी, मुझे इन चक्करो में नहीं पड़ना है.

शिव : कुछ नहीं होगा, में देख लूंगा सब.

कमली : नहीं शिव, मुझे इन करत कचेरी से बहोत दर लगता है, मुझे कोई कम्प्लेन नहीं करनी.

भार्गवी : और भाई तू (कमली के बाप se)Jue में पैसे लगता है और अपनी बेटी को hi देव पर लगा दिया, कहा खेलता है जुआ? (उसका बाप कंपनी लगा)

क का बाप : मुझे माफ़ कर दीजिये, में फिर कभी ऐसा नहीं करूँगा.

भार्गवी : में तुजे िसलयक छोडूंगी भी नहीं, कहा जुआ खेलता है उसकी पूरी जानकारी लिखवा, न रहेगा अड्डा न खेलेगा जुआ.

कमली बहोत दर रही थी तो उसने बहोत समजने पर भी कम्प्लेन नहीं की, मैडम ने भी बहोत कहा पर वो न मणि. तो मजबूरन उन्हें सुपरवाइजर को छोड़ना पड़ा, उन्होंने पैसो की वो पर्ची भी फाड़ दी, और उसके बाप से सब जानकारी लेने के बाद उसे भी वार्निंग दे दी. सब चले गए, में और मैडम hi बचे थे.

भार्गवी : मुझे लगता है अब तेरी कम्प्लेन करनी पड़ेगी.

शिव : ऐसा क्यों कह रही है आप.

भार्गवी : हर जगह तू अपनी तंग घुसता रहता है, क्या जरुरत थी तुजे इन सब में पड़ने की.

शिव : मैडम में किसी मामले में तंग नहीं डाटा, मामला खुद बा खुद मेरी तंग में आ के फंस जाता है, अब में क्या कर शक्ति हु. (हम दोनों हसने लगे, थोड़ी देर उनसे बात करने के बाद में वह से निकल गया, वो दिन फिर में साइट पर नहीं गया, वैसे भी मेरा स्टेडियम जाने का समय हो गया था) शाम को को मुझे काव्य मैडम का फ़ोन आया तो में उनसे मिलने चला गया. उन्होंने ऐसे hi बुलाया था, थोड़ी देर उनसे गैप सैप कर के में वापस घर आ गया.

दूसरे दिन जब में साइट पर गया तो पता चला की सुपरवाइजर आज आया hi नहीं था. मेने पवनसीर को बताया तो उन्होंने कहा की वो दूसरे किसी सुपरवाइजर को धुंध रहे है, तब तक हमे hi संभालना पड़ेगा. एक दो दिन में दूसरा सुपरवाइजर आ जायेगा. कमली मुझसे नज़ारे नै मिला रही थी, न hi बात कर रही थी. भोली बार बार मेरे पास आ जाती थी और मुझे छेड़ रही थी. में समाज रहा था की उसे क्या चाहिए. पर मेने अभी ज्यादा ध्यान न देना hi उचित समजा.

दो दिन बाद दूसरा सुपरवाइजर भी आ गया, ये शांत और अपने काम में अच्छा था, और इससे पवनसीर ने hi रखवाया था. एक शाम को मुझे मनीषा मैडम का फ़ोन आया और मुझे मिलने को बुलाया.

शिव : कहिये मैडम.

मनीषा : कल हमें एक पार्टी में जाना है. सूर्य है नहीं, और मुझे अकेले नहीं जाना. तो तुम्हे साथ चलना है.

शिव : पर में क्या करूँगा, और न hi में किसी को जनता हु.

मनीषा : तुम जानते हो, प्रकाशराओ के वह पार्टी है, पार्टी छुम पूजा. और पवनजी भी अपनी वाइफ के साथ आनेवाले है, तो तुम्हे कंपनी भी मिल जाएगी, और में तो हु hi. मेरा बच्चा भी साथ में होगा तो अकेले मैनेज करना मुश्किल होगा, तो तुम्हे साथ चलना hi है.

शिव : पर पार्टी किस बात की है.

मनीषा : वो सब तुम्हे पता चल जायेगा, कल शाम पांच बजे आ जाना. हमे 6 बजे निकलना है, खाना वही खा कर hi आएंगे.

इंकार करने का तो सवाल hi नहीं था, तो दूसरे दिन जो मेरे पास सबसे अच्छे कपडे थे वो पहन कर में मनीषा मैडम के घर पहुंच गया, वो एक खूबसूरत और बहोत महंगी साड़ी में सज्ज थी, उनको देख कर hi उनकी रैशी का पता चल रहा था. साथ में बच्चे को भी अच्छे कपडे पहनाये हुए थे. बच्चे को एक पहियों वाली गाड़ी में ले जाना था. में मैडम को hi देख रहा था, सच में वो बहोत सुन्दर लग रही थी. उनके सामने तो में फटीचर hi लग रहा था. मुझे पता था की प्रकाशराओ भी आमिर आदमी है तो उनके वह आनेवाले लोग आमिर hi होंगे, और ऐसे में में वह कैसा लगूंगा.

मनीषा : क्या हुआ, रुक क्यों गए, अंदर आओ.

शिव : आप बहोत खूबसूरत लग रही है.

मनीषा : (मुस्कुराते हुए) थैंक यू.





शिव : एक बात पुछु मैडम, प्रकाशरोजी बहोत बड़े आदमी है और उनके वह पार्टी है तो वह भी बहोत बड़े बड़े लोग आएंगे तो फिर आप मुझे वह क्यों ले जा रही है.

मनीषा : बड़े बड़े लोग आएंगे तो क्या हुआ, लोग hi तो है, उनसे क्या घबराना, क्या में आमिर हु तो मुझसे भी घबराते हो?

शिव : नहीं वैसी बात नहीं है, पर फिर भी थोड़ा अजीब लगेगा.

मनीषा : तुम मेरे कपडे देख कर ऐसा कह रहे हो, वह सब ऐसे hi कपडे पहने होंगे और तुमने सामान्य कपडे पहने है, पर शिव आदमी की पहचान उसके कपड़ो से नहीं उस से, खुद से होती है, में अगर सामान्य कपडे पह्नु तो में बदल नहीं जाउंगी, वैसे hi तुम जो हो सो हो, इसमें कुछ भी शर्माने की जरुरत नहीं, पर तुम्हारी जानकारी के लिए कह दू की मैंने तुम्हारे लिए भी कपडे रक्खे है, जाओ चेंज कर लो.

शिव : उसकी क्या जरुरत थी मैडम, और वैसे भी आपने कहा न की आप सामान्य कपडे पहनोगी तो आप सामान्य नहीं हो जाओगी, वैसे hi में ऐसे कपडे पहनूंगा तो आमिर नहीं हो जाऊंगा, जो जो है वो वो है, तो कपड़ो की जरुरत नहीं है, ऐसे hi चलता हु.

मनीषा : मैंने कपडे इस्सलिये नहीं मंगवाए है, तुम तो वैसे भी अच्छे hi दीखते हो, ऐसे चलोगे तो भी वह लड़कीअ तुम्हे hi देखेगी, पर मेरी इच्छा है की तुम वैसे कपडे पहनो, अब ज्यादा बहस मात करो, देर हो रही है, जाओ तैयार हो जाओ, उस रूम में कपडे है.

में अंदर गया तो वह एक ब्लू सूट रक्खा हुआ था, मैंने कभी सूट नहीं पहना था, ये पहला मौका था. में कपडे पहन कर बहार आया तो मुझे देखते हुए मनीषा मैडम की आंखे फटी की फटी रह गयी.

मनीषा : वाओ! शिव, तुम तो बहोत हैंडसम हो यार, मैंने सोचा नहीं था की तुम ऐसे भी दिख सकते हो, आज तो सबकी निगाहे तुम पर hi रहनेवाली है.





शिव : (वो जिस तरह से मुझे देख रही थी, एक बार तो मुझे भी शर्म आ गयी) चलिए.

आज उन्होंने ड्रिविएर लिया था, वो और बच्चा पीछे बेथ गए और में आगे की सीट पर बेथ गया, हम पार्टी के लिए, उनके घर पहुंच गए, घर रोशनीसे सजा हुआ था, ऐसा लग रहा था जैसे कोई खास बात हो, अब मुझे ये भी पता था की ये वैस्वी का घर है, और स्वर्णजी भी होंगी. अभी तक मुझे ये पता नहीं था की आखिर पार्टी किस बात की है, और पूजा भी है तो कोई न कोई खास बात तो जरूर होंगी.
 
अपडेट 120

जब हम दरवाजे तक गए तो मेने वह कुछ पुलिस के लोग भी खड़े हुए देखे, और क्यों न हो सहर का मला और दूसरे विप मेहमान जो आनेवाले थे तो सुरक्षा हेतु उन्कहोना आवश्यक था. बच्चे को पहिआवली गाड़ी में बिठा कर हम दोनों अंदर की और जाने लगे, दरवाजे पर मेहमानो के स्वागत के लिए प्रकाशराओ जी और उनका बीटा खुद खड़े थे, जैसे hi उनकी नजर मनीषजी पर पड़ी वो दो कदम आगे बढ़ कर उनका स्वागत करने लगे और सूर्यदेवजी के न आनेका कारन पूछने लगे, मनीषजी ने उनके बुसिनेस्स ट्रिप का बता कर उनके न आने की माफ़ी मांगी. उन्होंने मेरी और देखा और मुझे पहचान ने की कोशिस करने लगे. मनीषजी ने मेरा परिचय करवाया तो उनको में याद आ गया, पर उनके चेहरे परप्रसनता नहीं थी, उन्होंने जैसे तैसे मुस्कुराने की कोशिस की पर उनके चेहरे से साफ़ पता चल रहा था की मेरा आना उन्हें अच्छा नहीं लगा. पर वो कुछ कर नहीं शक्ति थे क्यों की में मनीषजी के साथ था, उन्होंने हमें आगे बढ़ने का इस्सर किआ तो हम दोनों अंदर की और बढ़ने लगे. अंदर एक बड़ी सी जगह थी जहा ये सारा कार्यक्रम किआ जाना था, बजट सरे लोग अपने हाथो में कुछ न कुछ उठाये यहाँ वह टहल रहे थे और कुछ लोग आपस में बाते कर रहे थे.

शिव : शायद उन्हें मेरा आना अच्छा नहीं लगा.

मनीषजी : इग्नोर करो उन्हें, वैसे भी तुम्हारी वजह से उन्हें इतना बड़ा नुकसान हुआ है तो तुम्हारी और उनका रवैया समाज आता है. छोड़े उन्हें, तुम्हे यहाँ लेन की एक खास वजह है, जो तुम्हे पता चल jayegi.(Unhone मुस्कुरा कर कहा, मेरी समाज में नहीं आया की वो मुझे क्यों यहाँ लायी है) वैसे सब औरते और लड़कीअ तुम्हे hi घर रही है. (मैंने देखा तो कई औरते सचमे मुझे hi देख रही थी और कुछ लड़कीअ जो आपस में बाते कर रही थी मेरी और hi इस्सर कर के अंदर अंदर बात कर रही थी. मुझे थोड़ी झझक होने लगी, पता नहीं वो सब क्या बाटे कर रही थी, मेरी झीखक देख कर मनीषजी मुस्कुरायी) चिंता मात करो, वो सब तुम्हारी अच्छी hi बाते कर रही है, उनका चेहरा देख के पता नहीं चल रहा की कैसे उनके मुँह में पानी आ रहा है.

शिव : क्या आप भी.

मनीषजी : (आस पास नजर दौड़ते हुए) वो देखो, पवनजी और उनकी पत्नी. उनके साथ तो तुम्हे असहज नहीं लगेगा, चलोँसे मिलते है. (मेने देखा की पवनसीर और स्नेहजी किसी से बात कर रहे थे) Hello पवनजी, Hello स्नेहा.

पवनजी : Hello मनीषा जी, ओह शिव, क्या तुम हो? वाओ यार, लुकिंग हैंडसम.

शिव : (झिझकते hue)Thank यू सर (मेने स्नेहा की और देखा तो उसके चेहरे पर कई भाव आये और गए, फिर उसने अपने आप को संभाला और मुस्कुरायी, में भी muskuraya)Hello मैडम. (मेने स्नेहा से कहा)

स्नेहा : Hello शिव, तुम यहाँ, आनेवाले थे तो मुझे कह नहीं शक्ति थे, हमारे साथ आ जाते.

मनीषा : वो नहीं आनेवाला था, में hi उसे जबरदस्ती ले आयी हु. (पवनसीर और मनीषजी बात करने लगे तो स्नेहा ने मुझे चिकोटी कटी, मेरे मुँह से आवाज निकल जाती पर मेने कण्ट्रोल किआ, में उन्हें सवालिया नजरो से देखने लगा)

स्नेहा : (धीमी आवाज me)Itna बन थान के आने की क्या जरुरत थी (आस पास देखते hue)Sab की सब तुम्हे hi घर रही है.

शिव : ये तो मनीषजी ने दिए है, में तो अपने कपड़ो में hi था, में कैसे मन करता.

स्नेहा : उसे क्या जरुरत थी, वो क्यों तुम्हे अपने साथ लायी है, क्या चल रहा है? (उनके चेहरे पर जलन साफ़ दिख रही थी, में क्या जवाब देता) वैसे सच में बहोत हैंडसम दिख रहे हो, पार्टी में न होती तो बताती.

मनीषा : क्या खुसुर फुसुर कर रहे हो तुम दोनों?

स्नेहा : कुछ नहीं, में पूछ रही थी की क्या खाओगे, उसका हाथ खली है न तो में पूछ रही थी, पर वो झिझक रहा है.

मनीषा : इसमें झिझकने की क्या बात है, चलो में भी कुछ लेती हु. (हम सब एक काउंटर की और बढ़ गए)

घर के अंदर का महल भी बहोत खुशनुमा था, कई औरते आपस में बाते कर रही थी, वही एक जगह वैस्वी कड़ी थी, उसी के घर में फंक्शन था तो सजी सवारी कड़ी थी, बादामी और गुलाबी रंग के मिश्रण में उसने लॉन्ग फ्रॉक जैसा कुछ पहना हुआ था, ऐसे सज धज के तैयार हुई थी की किसी पारी सी खूबसूरत दिख रही थी, साथ में hi संयम और नाज़िआ दीदी भी कड़ी हुई थी.

संयम : तेरे कहने से में आ गयी, मुझे आप को भी साथ लाना पड़ा, पर हम जल्दी चले जायेंगे.

वैस्वी : ऐसे कैसे चले जाओगे, खाना खा कर जाना है, इतना बड़ा फंक्शन है, पूजा भी है और उसके बाद में खाना भी.

नाज़िआ : वैसे जिनके लिए ये कार्यक्रम रक्खा है वो तुम्हारी भाभी कहा है?

वैस्वी : आओ मिलवाती हु, वो अंदर शायद तैयार हो के बैठी है. (वो तीनो अंदर गयी) भाभी... (स्वर्ण ने अपनी नानन्द को देखा) वाओ भाभी, यू लुक्स वैरी बुटीफुल्ल. कितनी प्यारी लग रही हो आप.

स्वर्ण : (मुस्कुराते हुए) तुजसे तो काम hi लग रही होउंगी, कितनी खूबसूरत लग रही हो तुम, किसी की नज़र न लगे.

वैस्वी : ये मेरी सहेली है संयम और ये दीदी है नाज़िआदिदी. ये मेरी भाभी है, सच बताना संयम, भाभी बहोत प्यारी लग रही है न?

संयम : (मुस्कुराते हुए) आप दोनों बहोत सुन्दर लग रही हो, और कोंग्रटुलतिओं भाभी, वैस्वी ने बताया था, आपको बहोत बहोत सुभकामनाये.

स्वर्ण : थैंक यू संयम, आप दोनोने भले हमारे जितना साज श्रीनगर नहीं किआ है पर आप की खूबसूरती भी बहोत बेमिसाल है, आप दोनों भी बहोत अच्छी लग रही हो, खास करके तुम्हारी दीदी.

संयम : वो भी तो आपकी hi तरह खुसखबरी सुननेवाली है, तो चेहरा तो दमकेगा hi.

स्वर्ण : क्या सच में? बहोत बहोत बधाई हो आपको.

नाज़िआदिदी : (शरमाते hue)Bahot बहोत सुक्रिया आपका. आप की और आपके आनेवाले बच्चे की सेहत अच्छी रहे यही मेरी दुआ है.

स्वर्ण : हम भी आपके और आपके बच्चे की मंगल कामना की प्रार्थना करते है. (तभी कुछ लड़कीअ, आपस में घुसूर पुसुर कर कर रही थी और खिलखिलाकर है रही थी) इ जिया, इतना क्या खुसुरपुसुर कर रही हो और है रही हो?

जिया : कुछ नहीं भाभी, वो बहार एक लड़का है, उसीकी बात कर रहे है.

स्वर्ण : लगता है तुम्हारी शादी की बात तुम्हारी मम्मी से करनी पड़ेगी, लड़की बड़ी हो गयी है जो लड़को की बातो पर खुसुरपुसुर करने लगी है.

जिया : भाभी अगर उस हैंडसम से मेरी बात चलवाडो तो अभी के अभी शादी करने को तैयार हु. (और सब हसने लगी)

स्वर्ण : ऐसा कोण है जो इतना चहक रही हो?

जिया : पटना नहीं भाभी, पहले कभी नहीं देखा, पर हैंडसम इतना है की सब की सब उसे hi देख रही है, अगर आप भी देखोगी तो देखती रह जाओगी, भैया का पत्ता काटने का सोचने लगो गई.

स्वर्ण : मरूंगी एक जो ऐसी बकवास की तो, जा तू hi देख.

जिया : नहीं सच्ची भाभी, लम्बा तो इतना है की दूर से hi दिख जाये, और गोरा भी इतना है की में भी काली लगूंगी. आप एक बार देखोगी तो पता चलेगा. (संयम, वैस्वी, नाज़िआ और स्वर्ण, चारो के जहँ में एक hi चेहरा उभरा)

वैस्वी : (मान me)Kya शिव आया है? पर कैसे? (स्वर्ण के शिव सब के मान में यही बात उभरी, पर स्वर्ण समाज गयी की ये शिव hi है, क्यों की उसीने मनीषा से उसे लेके आने को कहा था)

जिया : में तो बहार hi जा रही हु, वो तो में इन्हे लेने आयी थी, चलो sab(Wo अपनी सहेलिओ को ले कर बहार निकल गयी, यहाँ संयम, वैस्वी और नाज़िआ तीनो को बहार जाना था और अपना यकीं मजबूत करना था परइसे hi वो नहीं जा शक्ति थी, थोड़ी देर बाते करने के बाद वो तीनो बहार आयी और उनकी निगाहे शिव को ढूंढने लगी)

जब तीनो की निगाहे शिव पर पड़ी तो तीनो का मुँह खुला का खुला रह गया, वो किसी छोटे बच्चे को उठाये उस से खेल रहा था, उसके चेहरे की मुस्कान देखा किसी का भी दिल पिघल सकता था, नाज़िआ और संयम का दिल सुकून से भर गया, वही वैस्वी थोड़ी जलन से शिव को देख रही थी, उसने देखा की लग भाग हर लड़की या औरत उसे hi देख रही थी.

संयम : वाओ, आप वो शिव hi है, कितना हैंडसम लग रहा है, पहचान में hi नहीं आ रहा.

नाज़िआ : सचमुच.

वैस्वी : लगता है किसी से कपडे मांग के लाया है.

संयम : तो क्या हुआ, कपडे hi तो है, और ऐसे hi तो कोई किसी को नहीं देता, उसमे कुछ है तभी सब उसे देते है, चलो, उस से मिलते है.

नाज़िआ : नहीं, अभी वो किसी के साथ है, बाद में मिलेंगे.

वैस्वी : (संयम की बात से उसे मिर्ची लगी पर वो कुछ न बोली, वो जानती थी की शिव हैंडसम है तभी तो उसे शिव पर गुस्सा आता था, एक तो वो उस से भी होशियार है, और सबसे अच्छा दीखता है, कही न कही वो उसको पसंद करती थी पर फिर उसकी हैसियत देख के अपने कदम पीछे खिंचलती थी, और पता नहीं किश बात कर उसे गुस्सा था शिव पर, वो उसे निचा hi दिखाना चाहती थी, वो साबित करना चाहती थी की वो उस से बेहतर hai)Chaliye दीदी कुछ कहते है, अभी पूजा में थोड़ी देर है और खाना रात को है तब तक कुछ हल्का फुल्का कहते है.

संयम का मान था की वो जा कर शिव से मिले पर वैस्वी की वजह से वो कुछ न बोली, और वैसे भी अभी एक hi जगह है तो मुलाकात तो हो hi जाएगी. वो देख रही थी की वो किसी बड़े लोगो के साथ है, उसने देखा की कुछ लड़कीअ बार बार उसके आजु बाजु चक्कर काट रही है.

में मनीषा मैडम के बच्चे के साथ खेल रहा था और साथ में स्नेहा भी थी, की तभी मेरे कंधे पर किसी ने हाथ रक्खा तो मेने पीछे मुद कर देखा.

शिव : मैडम आप?

काव्य : है क्यों, कैसे हो तुम?

शिव : में ठीक हु.

काव्य : (बच्चे की और इस्सर कर के) किसका बच्चा है?

शिव : (मनीषा मैडम की और इशारा करते hue)Inka.

काव्य : बहोत प्यारा है, और स्नेहजी, कैसी है आप?

स्नेहा : अच्छी हु काव्यजि.

हम सब ऐसे hi बाते कर रहे थे, कुछ समय बाद पूजा के लिए सब को अंदर जाने को कहा, कुछ लोग अंदर गए कुछ बहार hi रुक गए. पूजा सुरु हो गयी, मेने देखा की स्वर्ण जी और उनके पति पूजा करने बैठे थे.

पंडितजी : ये पूजा आनेवाले बच्चे के उज्जवल भविस्य और अच्छी सेहत के उद्देस्य से की जा रही है, आप सब फूल और चावल अपने हाथ में ले ले और बच्चे और उसकी माँ को अपना आशीर्वाद दे.

फिर पूजा सुरु हो गयी, एक घंटे बाद पूजा समाप्त हुई.

पंडितजी : (स्वर्ण se)Ab आप अपने होनेवाले बच्चे के पिता के चरण स्पर्श कर के आशीर्वाद ले.

स्वर्ण : पंडितजी, क्या में इस से पहले हमारे घर में स्थापित मंदिर के भगवन का आशीर्वाद ले औ?

पंडितजी : जरूर बेटी, ये तो बहोत अच्छी बात है, हमारे घर में स्थापित देवता hi सदा हमारी रक्षा करते है, और उनका ये पहला हक़ भी है, तुम निश्चिंत हो कर आशीर्वाद ले आओ.

वो उठी और अंदर की और चली गयी, यहाँ मनीषा मैडम ने मुझे कान में कहा की मेरे साथ आओ. मेरी कुछ समाज में नहीं आ रहा था, में उनके साथ गया. अंदर एक रूम के पास जा कर उन्होंने दरवाजा खोला.

शिव : क्या हुआ मैडम?

मनीषा : मुझे फ्रेश होना है, तुम इससे सम्भालो में आयी (उन्होंने मुझे बच्चा दिया और वो अंदर चली गयी, में वह खड़ा था की दरवाजे से स्वर्ण जी अंदर दाखिल हुई और दरवाजा बंद करदिया, मेरी समाज में नहीं आ रहा था)

शिव : स्वर्ण जी, आप यहाँ? (उन्होंने अपने होठो पर ऊँगली रख कर चुप रहने का इस्सर किआ, में कुछ समाज नहीं प् रहा था, वो मेरे नजदीक आयी और निचे झुकने लगी, में कुछ समझता उस से पहले वो मेरे पेअर छूने लगी, में थोड़ा पीछे हैट gaya)Ye क्या कर रही है आप?

स्वर्ण : (मेरी और देखते hue)Panditji ने कहा है की बच्चे की अच्छी सेहत के लिए मुझे बच्चे के होनेवाले बाप से आशीर्वाद लेना है तो वो hi कर रही हु.

शिव : ये क्या कह रही है आप?

स्वर्ण : यही सच है शिव, में कबसे तुम्हे कहना चाहती थी पर मौका hi नहीं मिला और न hi हिम्मत हो रही थी, में जल्द hi तुमसे मिलूंगी, अभी मुझे आशीर्वाद do(Wo फिर झुकने लगी)

शिव : में ऐसा नहीं कर शक्ति, आप बड़ी है.

स्वर्ण : होनेवाले बच्चे के लिए मुझे आशीर्वाद दे दो शिव, जल्दी, कोई आये उस से पहले मुझे जाना भी है. (मुझे अजीब लग रहा था पर में क्या करता, वो मेरे पेअर छू रही थी, मेने उनके शिर पर हाथ रख कर उनकी और बच्चे की अच्छी सेहत के लिए आशीर्वाद दिया, वो कड़ी हुई और मेरे गाल पर पप्पी देते hue)Thank यू शिव, थैंक यू, मेरे जीवन में ये दिन दिखने के लिए. (में कुछ कहता उस से पहले hi वो बहार निकल गयी, थोड़ी देर बाद मनीषा मैडम बहार आयी)

मनीषा : चलो, चलते है.

हम निचे आ गए. मेने देखा की स्वर्ण जी अपनेपति के पेअर छू रही थी, फिर बाकि बड़ो के पेअर छू कर आशीर्वाद ले रही थी, पूजा समाप्त हो गयी थी तो हम सब खाने चले गए, मेरी नजर संयम और नाज़िआदिदी पर पड़ी तो में उनसे मिलने चला गया.

शिव : Hi संयम, कैसी हो दीदी?

संयम : तो अब नजर पड़ी हम पर, कब से देख रही थी तुम्हे.

शिव : मुझे देखा था तो मिलने क्यों नहीं आयी?

संयम : कैसे आती, तुम तो कितने लोगो से घिरे हुए थे, वैसे बहोत हैंडसम लग रहे हो, क्यों दीदी?

शिव : है है, में तो वैसा hi हु, खूबसूरत तो दीदी लग रही है.

संयम : और में?

शिव : तुम ठीक थक हो.

संयम : डीडीइइइइइ.

नाज़िआ : क्यों तंग कर रहा है उसे, वैसे संयम ठीक कह रही है, तुम बहोत अच्छे दिख रहे हो.

शिव : थैंक यू दीदी. (हम बात कर hi रहे थे की स्नेहा मैडम आयी फिर काव्य मैडम फिर मनीषा मैडम, हम सब मिलकर खाना खाने लगे और बाटे करने लगे. हम खाना खा रहे थे की स्वर्ण जी एक वैस्वी के साथ मिठाई ले कर हमारे पास आयी.

स्नेहा : अरे स्वर्णजी आप.

स्वर्ण : में अपने हाथो से सब का मुँह मीठा करवाना चाहती थी, लीजिये आपसे hi शुरुआत करती हु. (ये कह कर वो सब का बरी बरी मुँह मीठा करवाने लगी, वो सबकी और मिठाई बढ़ा रही थी तो सब अपने हाथ में ले रहे थे, वैस्वी बार बार मेरी और देख रही थी, सबको खिलने के बाद उन्होंने मेरी और मिठाई बधाई, मेने भी उनके हाथ से मिठाई लिनी चाही तो उन्होंने मन कर दिया) में खिला रही हु न. (वैस्वी आश्चर्य से अपनी भाभी को देख रही थी) यहाँ सब बड़े है तो शर्मा रहे है तुम तो मेरे हाथो से खा hi सकते हो, चलो मुँह खोलो. (सब मुस्कुराये, मेने स्वर्णजी को देखा तो उन्होंने अपने आँखों से मुझे बिनती की तो मेने अपना मुँह खोल दिया, मुझे मिठाई खिलाई पर मेरे मुँह में ऐसे रक्खा की आधा hi में खा सकू, मेने देखा की उन्होंने आधा अपनी मुठी में छुपा कर रख लिया और वह से वो लोग लौट गए, पता नहीं में कितनो के साथ इस तरह बांधता जा रहा था)

खाने के बाद संयम और नाज़िआदिदी ने जाने को कहा क्यों की उन्हें देर हो रही थी. मेने भी जाने को कहा तो मनीषा जी ने कहा की साथ hi चलते है, हम सब वह से निकल गए, उन्होंने पहले संयम और नाज़िआ को घर छोड़ा और फिर मुझे घर छोड़ने आयी. जब में घर में पंहुचा तो सब मुझे देख कर खुस हो गए, पहली बार वो मुझे ऐसे कपड़ो में देख रहे थे.

सरितादिदी : वाओ, कितना अच्छा लग रहा है शिव, पहचान में hi नहीं आ रहा.

लतादिदी : अब नजर न लगा उसे, रंजन, जा तो मिर्ची ले आ, नजर उतरनी पड़ेगी, न जाने कितनो ने नज़र लगायी होगी. (में मुस्कुरा रहा था, उन्होंने मेरी नज़र उतरी, फिर वो रात में भी मेरे साथ hi सोने चली आयी)

दो दिनों की छुट्टी आ रही थी तो हमारी स्कूल में दो दिन की जंगल सफारी का प्रोग्राम घोसित हुआ, मेने मन किआ पर हर्ष और महेश न मने और संयम ने भी बहोत जोर दिया तो में तैयार हो गया. तय दिन पर हम उस जगह चले गए, स्कूल के काफी लड़के लड़कीअ आये हुए थे, जब हम वह पहुंचे तो एक दो और स्कूल के लड़के लड़कीअ भी आये हुए थे. जंगल था पर ज्यादा खतरनाक नहीं था फिर भी कुछ जंगली जानवर तो होते hi है तो हमे ये हिदायत दी गयी की कोई भी अकेले इधर उधर न घूमे. पर लड़को को कोण संभाले, सब अपनी मस्ती में लग गए थे. विक्रम और उसके दोस्त भी आये हुए थे. कही से वो लोग दारू और बियर ले आये थे, जब अँधेरा हुआ तो वो लोग एक जगह इकठ्ठा हो कर शराब की पार्टी करने लगे.

रिज़वान : विक्रम, यार यु अकेले अकेले शराब का मज़ा नहीं आ रहा, लड़की वड़की होती तो मज़ा आ जाता.

विक्रम : सब इंतजाम किआ है, अपनी रंडी है न और उसकी सहेलिया, अभी आती hi होगी. (तभी छुपते छुपाते तीन लड़कीअ aayi)Lo आ गयी.

लड़की1 : अकेले अकेले hi सुरु हो गए.

विक्रम : सबके लिए है, चिंता क्यों करती hai(Beer का कैन बढ़ाते hue)Le जितना पीना है पि le.(Usne एक हथकड़ी दिखाई) उसके बाद इस से बंद कर तुजे छोड़ेंगे.

रिज़वान : हाथ कड़ी की क्या जरुरत है, वो तो वैसे भी छुडवायेगी. (सब हसने लगे)

विक्रम : अरे थोड़ा नाटक करेंगे, कोई थीम बना कर छोड़ेंगे तो और मज़ा आएगा.

रिज़वान : (मुस्कुराते hue)Tu और तेरा ये नाटक कभी ख़तम hi नहीं होता, आज क्या थीम सोचा है?

विक्रम : हम सब डाकू है और हम इन्हे उठा कर लाये है, ये बेचारिया हम से छोड़ देने को कहेगी और हम इन्हे जबरदस्ती छोड़ेंगे. (लड़की1 को) क्यों करोगी न?

लड़की1 : (आधी बियर पि चुकी थी, वो नाटक करने lagi)Please हमे छोड़ दो, भगवन के लिए हमे जाने दो, हम सरीफ लड़कीअ है प्लीज हमारे साथ ऐसा मात करो. (उसकी नौटंकी देख कर सब हसने lage)(Ek और हम सब अपने अपने कैंप में सोने की तैयारियां कर रहे थे पूरा दिन खेल कूद और धमाल मस्ती में निकल गया था पता hi नेह चला था, बहोत सरे खेल खेले थे, किसीने गण गया, किसीने डांस किआ, कोई जोके सुना रहा था तो कोई मिमिक्री कर रहा था, वैस्वी की वजह से संयम थोड़ी देर दूर रही पर फिर वो हमारे साथ आ hi जाती थी, ऐसे hi पुरे दिन की धमाल मस्ती के बाद हम सब सोने की तयारी कर रहे थे. और दूसरी और इन सब का जंगल में मंगल चल रहा था)

रात के करीब एक बजे उन सब की नौटंकी ख़त्म हुई और लड़कीअ वापस लौट गयी, अब सिर्फ विक्रम और उसके तीन दोस्त बैठे हुए थे.

रिज़वान : यार मज़ा नहीं आया, ये जूथ मुठ की नौटंकी से वो किक नहीं मिली, अगर सही में किसी को छोड़ते तो मज़ा आ जाता.

विक्रम : (सब पर नशा सवार था) सच कहा, साली रणदीव को छोड़ने में क्या मज़ा, कोई कड़क माल होता तो मज़ा आ जाता. पर क्या कर शक्ति है, चलो अब चलते है सोने. (सब लड़खड़ाते कदमो से कैंप की औ आये, कैंप में सन्नाटा था, एक जगह आग जल रही थी जिसकी रौशनी आस पास फैली हुई thi)Thodi देर रुको दोस्तों, पहले टंकी तो खली कर लू, दारू पि पि कर भर गयी है.

रिज़वान : में भी खली कर देता हु. (सब मूत रहे थे की रिज़वान ने विक्रम का हाथ पकड़ा) विक्रम.

विक्रम : क्या है बे, मूतने तो दे ठीक से.

रिज़वान : वो देख लड़की. (उसने जिस और इस्सर किआ उस और एक लड़की अस्सपस्स देखते हुए थोड़ा झाड़िओ के बिच जा रही थी, वैसे भी ये जंगल कैंप था तो और सुविधाएं तो थी नहीं तो पेशाब और टॉयलेट के लिए खुले में hi जाना पद रहा था, वो लड़की और कोई नहीं वैस्वी थी, जिसे पेशाब लगी थी, उसने संयम को कहा पर वो नींद में थी तो उठी नहीं, वैस्वी को जोरो से लगी थी तो वो बहार आ गयी थी, आसपास देखते हुए वो एक पेड़ के पीछे चली गयी, उसने अस्स पास देखा तो कोई नहीं था, सिर्फ झींगुरो की आवाज सुनाई दे रही थी, पास में hi एक झरना बह रहा था तो रात में उस झरने की आवाज आ रही थी, उसका दिल जोरो से धड़क रहा था पर पेशाब इतनी जोरो से लगी थी की वो बहार चली आयी थी)

अस्स पास देख कर फिर से उसने सब चेक किआ, जब उसे लगा की कोई नहीं है तो उसने अपने सलवार का नाडा खोला और मूतने बेथ गयी. हलकी रौशनी में उन बड़े बड़े गोर कूल्हों को देख कर रिज़वान और विक्रम की आंखे चमक उठी, नशे की वजह से उन्हें और कोई होश नहीं था. दोनों ने एक दूसरे की और देखा, वैसे अभी तक उन्हें ये भी पता नहीं था की लड़की है कोण, बस उन्हें तो एक लड़की hi दिखाई दे रही थी. दोनों की आँखों में हवस दिखाई दे रही थी.

वैस्वी मूतने के बाद उठी और कपडे ठीक कर के लौट hi रही थी की किसी ने पीछे से उसे पकड़ लिया, वो दर के मरे चीखना चाहती थी पर उसका मुँह किसी ने सख्ती से बंद कर दिया था, वो कुछ समझती उस से पहले hi वो लोग उसे पकड़ कर खिंच कर जंगल की और ले जाने लगे, कोण है वो भी उसे पता नहीं चल रहा था पर तीन चार लोग थे, वो छूटने का जोर लगा रही थी पर सबने उसे मजबूती से पकड़ रक्खा था, उसकी आँखों में आंसू आने लगे, उसको रोना आ रहा था.
 
इंतजार के लिए माफ़ी चाहता हु पर अभी मेरी कुंडली में ऐसा चल रहा है की मुझे टाइम नहीं मिल रहा फिर भी कोशिस पूरी करता हु.
 
अपडेट 121

हर्ष और महेश सो चुके थे, मोबाइल में नेटवर्क इतना मिल नहीं रहा था की बात कर शेक, तो में और जूही कब से चाट कर रहे थे, रात का कब एक बज गया पता hi न चला, हमने चाट ख़तम की. हमारे नशीब से आज बारिश नहीं हुई थी पर कल की बारिश की ठंडक थी जिस की वजह से मुझे पेशाब लगी, में बहार निकला तो देखा की सब अपने अपने टेंट में सो रहे थे, बिछे में लकडिया जल रही थी जिसकी हलकी रौशनी चारो और फैली हुई थी, में निकला और थोड़ी दूर जेक झाड़िओ के पीछे खड़ा हो कर पेशाब करने लगा, अभी मेरा पेशाब चल hi रहा था की मुझे एक चीख जैसा सुनाई दिया, में ने आस पास देखा पर कुछ नजर न आया, मेने ध्यान लगा कर सुन ने की कोशिस की पर कोई आवाज नहीं थी, रात के सन्नाटे को चीरती झींगुरो की आवाज के अलावा हलकी हलकी पानी बहने की आवाज आ रही थी, अपने मान का वहम समाज कर में फिर से पेशाब करने लगा. में पंत की चैन बंद hi कर रहा था की मुझे फिर से आवाज सुनाई दी, अब मुझे यकीं हो गया की कोई तो गड़बड़ है, और इस बार मुझे आवाज की दिशा भी पता चल गयी थी, अँधेरा था तो मुझे समाज नहीं आया की ये किसकी आवाज है, मेने अपने कैंप की और देखा तो हर जगह सन्नाटा छाया हुआ था. एक और तो मुझे थोड़ा दर भी लग रहा था की क्या हो सकता है, कही कोई जानवर की तो आवाज नहीं है. पर मेरा दिल कह रहा था की कोई तो गड़बड़ है, में अँधेरे में hi आवाज की दिशा में चलने लगा, में संभल कर चल रहा था, हमारा कैंप ऐसी जगह था जो बाकि जगहों से साफ़ था तो जमीं पर झाडिया बहोत काम थी, में आगे बढ़ रहा था, तक़रीबन तिस चालीस कदम चलने के बाद भी मुझे कुछ दिखाई नहीं दिया तो मेने सोचा की ये वहम होगा. तभी मुझे किसी आदमी की कराहने की आवाज आयी. यक़ीनन कुछ तो था, में सावधानी से आगे बढ़ा तो मुझे हलकी राशि दिखाई देने लगी, ऐसे जंगल में रौशनी देख मुझे आश्चर्य हो रहा था. में सावधानी से आगे बढ़ता गया. जब थोड़ा नजदीक गया तो देखा की ये रौशनी किसी मोबाइल की टोर्च की रौशनी है. और कुछ साये भी दिखाई दे रहे थे.

में सावधानी से आगे बढ़ा, पता नहीं कोण लोग हो. एक पेड़ के पीछे से मेने देखा की चार लोग थे, दो खड़े हुए थे और दो बैठे हुए थे और उन्होंने किसी लड़की को पकड़ के रक्खा था. लड़की का चेहरा तो नहीं दिख रहा था, पर ऐसा लग रहा था की उसके मुँह पर कपड़ा बांध दिया है ताकि वो आवाज न निकल शेक. मेने देखा की एक लड़के ने उस लड़की के पेअर पकड़ रक्खे है और दूसरे ने हाथ, वो लड़की छूटने के लिए छटपटा रही थी. तभी मोबाइल की रौशनी वह खड़े सख्स की और हुई तो मेने देखा की वो हमारी स्कूल का लड़का विक्रम था.

विक्रम : ठीक से पकड़ साली को, लात मरती है, अभी इसकी हेकड़ी निकलता हु.

पार्थ : भाई, ये वैस्वी है, बड़े बाप की लड़की है, कोई गड़बड़ न हो जाये?

विक्रम : बड़े बाप की लड़की है तो अपने घर में, में डरता हु क्या, और आज सब मिल कर इसकी बंद बजायेंगे तो ये किसी को क्या बताएगी, ये कहेगी की मेरी इज्जत लूट ली, अगर कहेगी तो इसकी hi बदनामी होगी, बहोत अकड़ दिखती थी न, आज हाथ लगी है, इसकी साडी अकड़ ठिकाने लगता हु.

रिज़वान : इसकी सहेली भी आयी होती तो मज़ा आ जाता.

विक्रम : आज ये तो आ गयी है न, आज इसको छोड़ते हुए इसकी वीडियो बना लेंगे, फिर देखते है ये क्या करती है, ये खुद अपनी सहेली को भी हमसे छुड़वाने ले आएगी. (मुझे ये जान कर आघात लगा की ये वैस्वी है, मेने ध्यान से देखा तो उसके कपडे मिट्टीसे साणे हुए थे, उसके बाल बिखरे थे जिस से उसका चेहरा ठीक से दिख नहीं रहा था. विक्रम अपना पंत खोलने लगा तो वैस्वी और छपटने लगी, मुँह पर बंधे कपडे की वजह से ुह्ह्ह्हह्ह उन्न्हठ की hi आवाज हो रही थी और वो अपने आपको छुड़ाने की पूरी कोशिस कर रही थी. विक्रम ने एक लात मरी तो वो कराह उठी, और दर्द के मरे शांत हो गयी, मेरा गुस्सा बढ़ गया और में पेड़ के पीछे से बहार निकला)

शिव : छोड़ दो ूसीएई (में गरजा, अचानक हुई आवाज से सब चौंक गए, मोबाइल की रौशनी मेरी और मुड़ी) छोड़ दो उसे विक्रम. (मेने गुस्से में एक एक शब्द को दांतो से पीस कर kaha)(Vaiswi ने जब आवाज सुनी तो उसने देखा की शिव है, वो कबसे बेबस इन भूखे भेडिओ के बिच में थी, वो अपनी हालत पर रो रही थी, अपनी ऐसी हालत पर वो दर और आघात से रोए जा रही थी, जब उसने शिव की आवाज सुनी तो उसने आसुओ से भरी आँखों से शिव की और देखा, शिव के रूप में उसे भगवन नजर आ रहा था, वो आँखों से hi शिव को अपने आप को बचने के लिए बिनती करने लगी, पर अभी उसके चेहरे पर अँधेरा था तो शिव उसे देख नहीं सकता था)

विक्रम : तू यहाँ भी आ गया, हर बार हमारे काम में रोड डालता है, आज तेरा भी हिसाब बराबर करना है, सेल जब देखो तब इन्ही के आस पास घूमता रहता है न, खुद को बहोत बड़ा हीरो समझता hai,aat तेरा भी हिसाब बराबर करता हु. (वो और रिज़वान मेरी और बढे, रिज़वान मुझे मरने गया तो मेने उसका वॉर चूका दिया, पर विक्रम ने भी वॉर किआ था तो उसका मुक्का मेरे मुँह पर लगा, हम तीनो में हाथ पायी सुरु हो गयी, कभी में उन्हें मर रहा था तो कभी वो मुझे मर रहे थे, जमीं पर गिरने से मेरे और उनके कपडे भी ख़राब हो गए थे, वो दूसरे दो लड़के भी वैस्वी को छोड़ मेरे साथ लड़ने आ गए थे, चार लोगो से एक साथ लड़ाई चल रही थी, मुझे भी मार पद रही थी पर मेने सबके मुँह लाल कर दिए थे, मोबाइल तो छिटक कर निचे पड़ा हुआ था और उसकी हलकी रौशनी में लड़ाई चल रही थी, की तभी रिज़वान चिल्लाया.

रिज़वान : रुक जा वर्ण इससे मार दूंगा. (मेने देखा की रिज़वान के हाथ में चाकू था, पता नहीं कब वो वह चला गया, में रुक गया क्यों की चक्कू वैस्वी की गर्दन पर लगा हुआ था, अभी के लिए रुकना hi मुझे सही लगा वर्ण वैस्वी की जान को खतरा हो सकता था, मुझे रुका देख वो फिर bola)Maar उसे विक्रम, साला बड़ा हीरो बनता है.( तीनो मिल कर मुझे धोने लगे, पर में कुछ नहीं कर शक्ति tha)(Vaiswi पूरी तरह दर गयी थी, ऐसा तो उसने सिर्फ फिल्मो में देखा था, आज जब उसकी गर्दन पर चाकू रक्खा हुआ था तब उसे पता चला की ये कितना खतरनाक है, वो देख रही थी की उसकी वजह से शिव मार खा रहा है, उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे, काफी देर तक वो तीनो मिलकर शिव को मरते रहे, शिव उलटे मुँह पड़ा tha)Isse भी हथकड़ी से बांध दे विक्रम. (वो वैस्वी को ले कर मेरे नज़दीक आने लगा, चाकू अभी भी उसकीगर्दन पर hi था, विक्रम में अपनी जेब टटोली और उसमे से कबि निकली, हथकड़ी वैस्वी के हाथो में बंधी हुई थी उसने एक शिरा खोला और उसे मेरे हाथ में लगा दिया, अब में और वैस्वी एक hi हथकड़ी से बंधे हुए थे.)

विक्रम : बहोत बड़ा हीरो बन रहा था, (एक और लात मेरे पेट में मारी उसने) इससे बचने आया था (एक और लात मेरे पेट में mari)Ab तेरे सामने hi इसको छोड़ेंगे. (मेरी कोई भी हरकत न करने से रिज़वान निश्चिंत हो गया और उसने वैस्वी के गले से चाकू उठा लिया, पर सच में सालो ने मुझे अच्छे से धोया था तो मेरी हालत ख़राब थी, पुरे बदन में दर्द हो रहा था, में मौके की तलाश में tha)Aaj सही में मज़ा आएगा, साली गदरायी घोड़ी जैसी है, और इसके नखरे देख कर लगता है की सील पैक है, आज हीरो के सामने hi हेरोइन छोड़ने वाली है (वो हसने लगा और सब भी हसने लगे) ऐसा लग रहा है जैसे पिक्चर चल रही हो, पर यहाँ हीरो कुछ नहीं कर शक्ति क्यों की ये पिक्चर नहीं है. पकड़ो इसके पेअर, पहले में इसकी सील तोड़ता हु, और तू वीडियो बना, अगर इसने नाटक किआ तो फिर इसकी सील टूटने की वीडियो पूरा देख देखेगा. (दो लोगो ने विवि के पेअर पकड़े और विक्रम अपनी पंत खोलने लगा और रिज़वान मोबाइल चालू कर के वीडियो बनाने लगा, यही मौका था मेने अपनी पूरी ताकत इकठ्ठा की और जोर से उन दोनों को मरी जो पेअर पकड़े थे, और साथ में खड़े होते हुए, विक्रम के लुंड पर लात मरी, रिज़वान नजदीक आया तो मेने उसके पेअर में इतना जोर से मारा की वो वही गिर पड़ा, अभी लड़ने का समय नहीं था, पहले मुझे वैस्वी को बचाना था तो मेने विस्वी को खड़ा किआ और एक और भागने लगा, वैसे भी हमारे हाथ बंधे हुए थे तो मेने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे ले कर भागने लगा, अँधेरे में किस और जा रहा हु पता नहीं था, पर बस यहाँ से दूर जाने की सोच कर में आगे बढ़ने लगा( विक्रम अपना लुंड पकड़ कर खड़ा हुआ)

विक्रम : पकड़ो mad***od को, आज उसकी खैर नेह. (वो लोग भी हमारे पीछे निकले जिस और हम गए थे)

में जैसे तैसे आगे बढ़ रहा था, में चाहता उनसे लड़ शक्ति था पर एक तो मेरा एक हाथ वैस्वी के साथ बंधा हुआ था, और वो लोग वैस्वी को नुकशान पंहुचा सकते थे, तो अभी फ़िलहाल यहासे भागना hi सही लगा. झाड़िओ से टकराते हुए हम आगे बढ़ रहे थे, वैस्वी इतना तेज भाग नहीं रही थी, में जैसे तैसे उसे खींचते हुए आगे बढ़ रहा था, मुझे पानी आवाज तेज होती सुनाई दे रही थी, पर अँधेरे की वजह से कुछ समाज नहीं आ रहा था, तभी मुझे लगा की वो लोग नज़दीक आ रहे है, उनकी मोबाइल की रौशनी मुझे दिखाई दे रही थी. वो लोग काफी नज़दीक आ गए थे, वो सरे लड़के थे और अकेले थे तो उनकी स्पीड ज्यादा थी, मेरी समाज में नहीं आ रहा था की क्या करू, में जैसे तैसे वासवी को खींचते हुए आगे बढ़ रहा था की एक दम से ढलान आ गयी, में अपने आपको संभालता उस से पहले hi में फिसलने लगा, और गिर गया, साथ में वैस्वी भी गिरी, हम ढलान में फिसलते गए, फिशलते गए, पथ्थर और टहनिओ से शरीर पर मिशन बन रहे थे, की अचानक ढलान ख़तम हो गयी और में हवामे गिरने लगा, में दर गया, पता नहीं कहा से गिर रहा हु, की अचानक में पानी में गिरा.

विक्रम और उसके दोस्त भी वह तक आ गए थे, शिव और वैस्वी को गिरता देख वो रुक गए.

रिज़वान : वो लोग तो गिर गए.

विक्रम : (गुस्से से) है मेने देखा.

रिज़वान : अब क्या होगा?

विक्रम : मुझे क्या पता?

रिज़वान : क्या वो मार गए?

विक्रम : अबे चूतिये, में कोई भगवन हु जो मुझे पता hoga(Jhunjhalate हुए विक्रम ने कहा)

रिज़वान : अगर वो बच गए और पुलिस के पास चले गए तो?

विक्रम : तो में क्या करू, एक तो पहले से मेरे दिमाग की दही हो रक्खी है, चलो निकालो यहाँ से, हम लोग भाग जाते है, आगे जो होगा सो होगा. ये दारू और छूट के चक्कर में क्या हो गया.

रिज़वान : पर इतनी रात को कहा जायेंगे?

विक्रम : तो यहाँ रह कर क्या पुलिस का इंतजार करे?, चुप चाप अपना सामान उठाओ और निकल चलो, फिर देखेंगे. चलो अब.

तैरना तो मुझे आता नहीं था, और ऊपर से चोट भी लगी हुई थी, पर किस्मत से पानी ज्यादा गहरा नहीं था, पर बहाव तेज था, फेफड़ो में भी पानी जा रहा था, वैस्वी मेरे साथ बंधी हुई थी तो हम साथ hi थे, जैसे तैसे मेने वैस्वी को अपनी और खिंचा, उसकी भी हालत ख़राब थी, पर वो भी जिन्दा थी, पता नहीं कहा तक हम बहते रहे, जैसे तैसे में उसे खिंच कर किनारे पर ले गया, और पानी से बहार निकला, अँधेरा भले था पर आंखे अभ्यस्त हो गयी थी तो थोड़ा थोड़ा दिखाई दे रहा था, जैसे तैसे मेने उसे पानी से निकला, वो हांफ रही थी, और बार बार लेट जा रही थी, मेने खींचते हुए उसे पानी से बहार निकला, वह छोटे छोटे पथ्थर थे पर गोलाई वाले पथ्थर थे तो चुभ नहीं रहे थे, मेने उसके मुँह से कपड़ा खोला और गाल पर थपकी दी.

शिव : Vaiswi...Vaiswi...tum ठीक हो? Vaiswiiii.(Addhere में उसने मेरी और देखा, उसकी आंखे चमक रही थी) तुम ठीक हो?

वैस्वी : आआह, अअअअअ.

शिव : कही दर्द हो रहा है, चोट लगी है?

वैस्वी : (उसने देखा की शिव उसका शिर, अपनी गॉड में लिए उसको पूछ रहा है, हलकी सी परछाई hi दिखाई दे रही थी पर फिर भी उसकी आवाज में उसे चिंता दिख रही thi)Meeiiii थीइक हूउउ.

मेने रहत की साँस ली और आस पास देख कर जायजा लेने लगा, मेने देखा की ये सपाट इलाका था, शायद हम नदी के अंदर थे, दूसरी और ऊँची दिवार जैसा था, और ऊपर पेड़ दिख रहे थे, मुझे अंदाजा हो गया की हम लोग किस ऊंचाई से गिरे है. शरीर में जान hi नहीं बची थी तो में काफी देर तक वह बैठा रहा, अब क्या करू समाज में नहीं आ रहा था, रात की ठंडक की वजह से भीगे हुए कपड़ो में ठण्ड लग रही थी. मेने सोचा की कपड़ो से पानी तो निकलना hi पड़ेगा वर्ण ठण्ड से कुल्फी जैम जाएगी. मेने अपने शर्ट के बटन खोले, जैसे तैसे एक साइड से निकला, दूसरी साइड हाथ वैस्वी के साथ हथकड़ी से बंधा हुआ था तो पूरा शर्ट निकल नहीं शक्ति था. मुझे शर्ट निकलता देख वो उठ कर बेथ गयी.

शिव : सॉरी, वो भीगे कपड़ो में ठण्ड लग रही है. (वैसे भी मुझे अजीब लग रहा था, उसके सामने शर्ट निकलने में पर ठण्ड से मर जाने से तो अच्छा hi था, मेने जैसे तैसे बनियान और शर्ट को निकला निचोड़ कर जितना पानी निकल शक्ति था निकलने की कोशिस की, वो मुझे देख रही थी क्यों की उसका एक बया हाथ मेरे दाहिने हाथ से बंधा था तो उसको भी अपना हाथ मेरी और करना पद रहा था, पर में अपने काम में लगा रहा, जितना जोर लगा शक्ति था लगा कर मेने पानी निकला और फिर से कपडे पहन लिए, पंत भी गिला था, कुछ देर के लिए मेने socha)Mera पंत भी बहोत गिला हो गया है, तुम उस और देखो, मुझे इस से भी पानी निकलना है. (वो कुछ न बोली और दूसरी और देखने लगी, मेने पंत भी निकला और उस से भी पानी निकल कर वापस पहन लिया, वो भी पूरी भीगी हुई थी पर में उस से नहीं कह शक्ति था, में आस पास फिर से देखने लगा, थोड़ी दूर पर मुझे एक बड़ी चट्टान नजर आयी) चलो उस चट्टान के पास चलते है, हवा तेज चल रही है तो ठण्ड लग रही hai(Usko भी ठण्ड लग रही थी और वो कैंप रही थी, उसने है में शिर हिलाया, वो कड़ी हुई, हम चलने लगे पर पथ्थर की वजह से चलने में दिक्कत हो रही थी और ऊपर से हम दोनों थके हुए थे, वो लड़खड़ाई तो मेने उसका हाथ पकड़ लिया जो मेरे हाथ से बंधा हुआ था, उसने मेरी और देखा, पर वो जानती थी की इस वक़्त उसकी हालत ख़राब है, उसने दूसरे हाथ से भी मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरा सहारा ले कर चलने लगी, दोनों लड़खड़ाते हुए उस चट्टान के पास पहुंच गए, मेने हवा का रुख देखते हुए चट्टान के पास बैठने की जगह ढूंढी, हमारे नशीब से हमें अच्छी जगह मिल gayi)Hum यही बैठते है.

वैस्वी : हमे वापस चलना चाहिए (उसने धीमी और कनपटी आवाज में कहा.)

शिव : में भी यही चाहता हु, पर अभी हम कहा है ये मुझे समाज नहीं आ रहा, और सामने वो जगह दिवार की तरह ऊँची है, अँधेरे में ऊपर कैसे जायेंगे?

वैस्वी : पर हम यहाँ बेथ कर भी क्या करेंगे?

शिव : फ़िलहाल तो सुबह होने का इंतजार करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है.

वैस्वी : (कांपते hue)Muje ठण्ड लग रही है.

शिव : में जनता हु, पर क्या कर शक्ति है, जैसा मेने किआ वैसे तुम भी अपने कपड़ो से पानी निकल शक्ति हो, उस से ठण्ड थोड़ी काम लगेगी. (वो कुछ न बोली, में समाज सकता था, वो एक लड़की है तो उसे हिचकिचाहट हो रही hai)Me समाज सकता हु वैस्वी, पर अगर इस परिस्थिति का सामना करना है तो कुछ तो करना hi पड़ेगा, में दूसरी और घूम जाता हु, मेरा विस्वास करो, में नहीं देखूंगा. आगे तुम्हारी मर्जी.

वैस्वी : (वो जानती थी की अभी वो किन परिस्थितिओ में है, ऊपर से उसे बहोत ज्यादा हैंड लग रही thi,uske पास और कोई चारा नहीं था, उसने धीमी आवाज में kaha)Thik है. (में थोड़ा दूसरी और घूम गया, मेरा हाथ पीछे की और हो गया क्यों की वो बंधा हुआ था, में देख तो नहीं रहा था पर मेरा हाथ खींचने से, ऊपर निचे होने से मुझसे सब समाज आ रहा था. उसने सलवार पहनी हुई थी तो ज़िप पीछे की और थी, उसने वो खोलने की कोशिस की पर कपडे भीगे होने की वजह से खुल नहीं रही थी, उसने कुछ देर कोशिस की पर न हो शका)

शिव : अगर तुम बुरा न मनो तो में खोल दू?

वैस्वी : (थोड़ी देर ख़ामोशी के baad)Hmmmm. (में घुमा और उसकी ज़िप पूरी खोल दी, मुझे उसके बदन का कुछ हिस्सा दिख गया पर ज़िप खोने के बाद में वापस घूम गया, वो अपना कमीज़ निकलने लगी, मेरा हाथ उसको कभी कभी छू जाता था, श्री से एक कप कपि गुजर जाती थी, उसकी भी यही हालत थी, उसने ऊपर से कमीज़ निकल दी, में समाज सकता था की वो किस हल में है, पर में शांत बैठा रहा, उसने कपडे से पानी निकलने के लिए उसे निचोड़ना सुरु किआ. जब वो रुकी तो मेने कहा)

शिव : मुझे दो, में सख्ती से निकल देता हु, (वो कुछ न बोली, उसने कपड़ा मेरी और किआ तो मेने पकड़ लिया और सख्ती से पानी निकल diya)lo अब पहन लो. (कपड़ा गिला था तो उसे पहन ने में बहोत टाइम लग गया, हम दोनों एक दूसरे की और पीठ किये हुए बैठे थे, अब पहले से थोड़ी रहत थी, ठण्ड तो लग रही थी पर kaam.)Abhi बहोत रात बाकि है, आंखे बंद कर के सोने की कोशिस करो, में जाग रहा हु, और ध्यान रख रहा हु.

वैस्वी : (कनपटी आवाज me)Aisi ठण्ड में नींद कैसे आएगी?

शिव : एक उपाय है, पर तुम्हे शायद अच्छा न लगे.

वैस्वी : क्या?

शिव : मुज से सात कर बैठो, तो तुम्हे और मुझे दोनों को ठण्ड काम लगेगी. (वो खामोस रही, न बोली न करीब aayi)Me जनता हु, तुम मुझे पसंद नहीं करती, पर इन हालत में हमदोनो के लिए ये अच्छा है, अगर मुज पर यकीं हो तो. (वो फिर से कुछ नहीं बोली, तक़रीबन दस मिनट तक हम दोनों खामोस बैठे रहे, सर दोनों कैंप रहे थे और अपने घुटने मोड़ कर ठण्ड काम करने की कोशिस कर रहे थे, थोड़ी देर बाद वो मेरी और खिसकने लगी, में भी खिसका और हम दोनों एक दूसरे से सात कर बेथ गए, बदन की गर्मी से कुछ रहत तो मिल रही थी. उसका शरीर भी ठण्ड से कैंप रहा था और मेरा भी, उसके शरीर का कम्पन में महसूस कर रहा था और वो भी मेरा कम्पन महसूस कर रही थी., ऐसे hi आधा एक घंटा गुजर गया, हम दोनों खामोस बैठे हुए थे. रात जैसे जैसे गहरा रही थी ठण्ड बढ़ रही थी, मेने कदम आगे बढ़ने का सोचा, मेने हिचकिचाते हुए kaha)Thand बहोत बढ़गयी है, सॉरी वैस्वी, पर में तुम्हे अपनी बहो में ले रहा हु (उसकी भी हालत ख़राब थी, उसको भी पता था की कोई उपाय तो करना hi पड़ेगा, वो खामोश रही, वो बैठी हुई थी, मेने अपने पेअर फैलाये और उसके साइड में कर दिए और हाथ को घुमा कर दूसरी और ले गया और उसको बैठे बैठे hi बहो में भर लिया, उसका अधिकांश बदन मेरे पेअर औरहाथो में समां गया, इस से उसे भी रहत महसूस हुई और मुझे भी, मेरे बदन की गर्मी उसे रहत पंहुचा रही थी, उसके बदन की गर्मी उसे. और ऐसे बहो में भरने से मेरी और उसकी दोनों की सांसे थोड़ी तेज चलने लगी, क्यों की इस एहसास से बदन में गर्मी भरने लगी थी.) सॉरी वैस्वी, पर अभी यही सही hai(Wo कुछ न बोली, एक लड़की को ऐसे बहो में भरने से मेरे शरीर में उत्तेजना भरने लगी और शायद उसकी भी यही हालत थी, उसकी भी सांसे तेज हो गयी थी, पर अब ठण्ड काफी हद तक काम हो गयी थी, मेने माहौल हल्का करने के लिए बात करना सुरु किआ)

शिव : तुम वह कैसे पहुंच गयी थी?

वैस्वी : में फ्रेस होने के लिए बहार निकली थी, पता नहीं वो लोग कहा से आ गए, में छोडूंगी नहीं उनलोगो को, पापा से कह के पुलिस के हवाले करवाउंगी. (कहते कहते उसकी आवाज भर आयी और आंसू भी निकल आये)

शिव : सॉरी यार, मेने तो बस बात करने के लिए hi पूछा था, में तुम्हे रुलाना नहीं चाहता था.

वैस्वी : नहीं, तुम क्यों सॉरी बोल रहेहो, अगर तुम न आते तो पता नहीं अभी में किस हालत में होती.

शिव : (मुस्कुराते hue)Waise अभी भी कोई अच्छे हालत में नहीं ho.(Meri बात पर वो भी मुस्कुरायी)

वैस्वी: तुम उनके जैसे नहीं हो.

शिव : क्यों? लड़का तो में भी हु, अगर मेने कुछ किआ तो?

वैस्वी : तुम वैसे नहीं हो, में तुम्हे जानती हु.

शिव : कैसे जानती हो, तुम तो मुझसे बात भी नहीं करती, हमेशा मुझसे दूर भगति हो, और मुझसे नफ़रत भी करती हो.

वैस्वी : किसने कहा की में नफ़रत करती हु? (थोड़ी देर रुक kar)Mera मतलब है, में तुम पर गुस्सा हु, नफ़रत नहीं करती.

शिव : मुझे एक बात समाज नहीं आती की तुम किस बात पर मुझपर गुस्सा हो?

वैस्वी : वैसी बात नहीं है, पर सब तुम्हारी hi तारीफ करते है तो मुझे गुस्सा आ गया.

शिव : इससे गुस्सा नहीं, जलन कहते है. अब में इसमें क्या करसकता हु की मेरे मार्क्स ज्यादा आ गए.

वैस्वी : सच कह रहे हो तुम, तुम ज्यादा होशियार हो तो मार्क्स ज्यादा आएंगे hi, पर पता नहीं मुझे क्यों गुस्सा आता था.

शिव : आता था से क्या मतलब है तुम्हारा, अब नहीं आ रहा?

वैस्वी : पता नहीं.

शिव : वैसे तुम चिंता मात करो, अब मेरा ज्यादा ध्यान स्पोर्ट्स पर है तो शायद ज्यादा पढ़ाई न कर पाव, तो तुम hi फर्स्ट आ जाओगी.

वैस्वी : ऐसा क्यों कह रहे हो? तुम पढ़ाई में अच्छे हो तो, पढ़ाई तो करनी hi चाहिए.

शिव : पढ़ाई तो करूँगा hi, पर उतनी अच्छे से न कर पाव, जितनी करता आया हु, इस बार तो संयम ने मेरी मदद कर दी थी, और टाइम भी मिल गया था तो हो गया, शायद आगे न हो.

वैस्वी : वो तो दोबारा भी मदद करेगी hi, वो तुम्हे बहोत पसंद करती है.

शिव : अच्छा, और ये तुमसे किसने कहा?

वैस्वी : और कोण कहेगा, पहले दिन से hi वो तुम्हे पसंद करती है, उसे लगा था की तुम mere...(Wo कहते कहते रुक गयी)

शिव : क्या हुआ? चुप क्यों हो गयी?

वैस्वी : कुछ नहीं.

शिव: अब बोलो भी, पूरी रात कटनी है. उसे क्या लगा था.?

वैस्वी : उसे लगा था की तुम मेरे पीछे हो.

शिव : तुम्हारे पीछे? में तो तुम्हारे पीछे नहीं पड़ा था, उसे ऐसा क्यों लगा?

वैस्वी : क्यों तुम मुझे बार बार नहीं देखते थे?

शिव : देखता था, पर वो उस तरह से नहीं देखता था.

वैस्वी : वो तो हमे भी पता है, पर पहले तो ऐसा hi लगा था, और फिर पता चला की तुम वैसे नहीं देखते थे. (उसकी आवाज में थोड़ी उदासी छलक आयी थी)

शिव : मेरे वैसे न देखने से तुम क्यों उदास हो रही हो? क्या तुम चाहती थी की में वैसे देखु?

वैस्वी : में क्यों उदास होने लगी, और मुझे क्या तुम कैसे भी देखो, मुझे क्या पड़ी है. (वो थोड़ा ऐटिटूड से बोली)

शिव : मुझे तो लग रहा है की मेरे वैसे न देखने से hi तुम मुझपर गुस्सा हो.

वैस्वी : ऐसा कुछ भी नहीं है, मुझे क्या फर्क पड़ता है.

शिव : तुम्हारे बोलने के तरीके से तो लगता है की तुम्हे फर्क पड़ता है, पर मेरी जिंदगी अलग है, में तुमलोगो की तरह नार्मल हालत में नहीं हु, तो में इन सब से दूर hi रहता हु.

वैस्वी : तो में क्या मरी जा रही हु, में भी इन सब चक्करो में नहीं पड़ती.

शिव : ठीक है बाबा, चलो अब थोड़ी देर सोते है. अब सच में नींद आ रही है.

वैस्वी : ऐसे बैठे बैठे मुझे नींद नहीं आएगी.

शिव : ठीक है तो फिर लेट जाते है.

वैस्वी : में तुम्हारे साथ ऐसे कैसे लेट शक्ति हु?

शिव : यार तुम्हारे बहोत नखरे है, में तो लेट रहा हु, तुम्हे जो करना है करो. (में वैसे भी बैठे बैठे थक गया था तो मेने उसे छोड़ा और पेअर फैला दिए, और पठार की तक लगा कर आंखे बंद कर दी, उसके साथ लिपटा था तो अच्छा लग रहा था, अब अलग हुआ तो फिर से ठण्ड लगने लगी, पर मेने आँख बंद कर के सोने की कोशिस की, वैसे भी इतनी देर से हम यहाँ थे तो खतरा तो कोई लगा नहीं.

वैस्वी : (थोड़ी देर शिव को देखती रही, उसे भी ठण्ड लगने लगी thi)Shiiiiv.

शिव : बोलो?

वैस्वी : मुझे ठण्ड लग रही है.

शिव : तो में क्या करू?

वैस्वी : शिईयिव (मुझे हिलाते हुए)

शिव : क्या hai(Mene थोड़ा ऊँची आवाज में कहा)

वैस्वी : मुझे सचमे ठण्ड लग रही hai.(Mene उसे पकड़ा और मेरी बगल में लेता दिया और उसको अपनी बहो में भर लिया, उसके ऊपर पेअर भी chadhadiye)Ye क्या कर रहे हो?

शिव : चुप चाप सो जाओ, वर्ण छोड़ दूंगा.

वैस्वी : (अजीब था पर इस समय यही सही था, उसको शिव का उसे बहो में भर लेना बहोत अच्छा लगा, वो मुस्कुरायी और शिव से और सात गयी और मुस्कुराते हुए अपनी आंखे बंद कर दी, ये कैसा अजीब इत्तेफाक था, कल तक जिस लड़के से वो गुस्सा थी, उस से दूर भाग रही थी, आज वो उसी की बहो में थी, ये पहला मौका था जब वो किसी लड़के की बहो में थी, उसको ये एहसास बहोत अच्छा लग रहा था, उसे शिव से कोई दर भी नहीं लग रहा था न उसे बुरा लग रहा था की शिव उस से ऐसे चिपक कर लेता है, बल्कि उसको एक सुकून मिल रहा था, ऐसी परिस्थिति में भी वो अपने आपको सलामत महसूस कर रही थी, उसने आंखे बंद कर दी)
 
अपडेट 122

सुबह अचानक पेशाब लगने से संयम की आंख खुल गयी, ठण्ड की वजह से ऐसे मौसम में सुबह सुबह पेशाब लगने से hi ज्यादातर नींद खुलती है, अलसाईसी वो उठी, उसने देखा की वैस्वी पास में नहीं है, उसने सोचा की शायद वो भी बहार फ्रेस होने गयी होगी, उसका मोबाइल भी वही पड़ा हुआ था. वो बहार निकली और देखा की एक दो लड़के और एक दो लड़कीअ बहार ब्रश कर रहे थे. सबको पता था की यहाँ फ्रेस होने के लिए बहार hi जाना था, और सबको हिदायत दी हुई थी की लड़कीअ किस और जाएँगी और लड़के किस और. तो लडकिओवाळी जगह की और चली गयी, सामने से आती एक दो लड़कीअ भी उसे मिली. जब वो वह पहुंची तो वह भी वैस्वी नहीं थी. उसे जोरो की पेशाब लगी थी तो उसने अस्स पास देखा, और एक झड़ी के पीछे बेथ गयी, उसे टॉयलेट भी आई हुई थी तो उसने वो भी निपटा लिया, वही पानी का इंतजाम भी किआ गया था तो दिक्कत न आयी. सब निपटा कर वो वैस्वी को ढूंढने लगी पर वो उसे कही न दिखी, टेंट में आ कर वो उसका इंतजार करने लगी पर पंद्रह मिनट हो गए वो न दिखी, उसे चिंता होने लगी, रात में वो ऐसे सो गयी थी की और तो उसे कुछ पता hi नहीं था. तभी उसे हर्ष दिखा.

संयम : Harsh(Usne आवाज लगायी)

हर्ष : (उसके नजदीक आते hue)Kya हुआ संयम?

संयम : वैस्वी कही दिखाई नहीं दे रही है, तुमने देखा उसे कही?

हर्ष : नहीं, हम भी शिव को धुंध रहे है, वो भी नहीं दिखाई देरहा है.

संयम : वो कहा जा शक्ति है, कब से वो नहीं दिख रहा?

हर्ष : सुबह से hi नहीं देखा, पहले सोचा फ्रेस होने गया होगा पर काफी टाइम हो गया.

संयम : मुझे लगता है हमे टीचर को इन्फॉर्म करना चाहिए.

हर्ष : मुझे भी यही लगता है, क्यों की काफी देर हो गयी है. (तभी उसे महेश दिखाई diya)Dikha कही? (महेश ने भी न में इस्सर किआ) चलो, टीचर को hi बताते है. (हम तीनो तीचेवाले टेंट के पास चले गए, वो बहार बेथ कर ब्रश कर रहे थे, और दूसरे टेंट के पास लेडी टीचर भी थे)

संयम : सर, वैस्वी नहीं दिख रही है.

हर्ष : शिव भी नहीं दिख रहा है.

सर : यही कही होंगे, आ जायेंगे.

संयम : मेने सब जगह धुंध लिया है, वो कही नहीं दिख रही.

हर्ष : हमने भी शिव को बहोत ढूंढा.

सर : (कुछ सोचते hue)Kya उन्दोनो के बिछ कुछ है? (उनका ऐसा सोचना बिलकुल लाज़मी था, एक लड़का और एक लड़की गायब हो तो इसका एहि मतलब हो शक्ति था की दोनों कही कुछ कर रहे हो)

संयम : नहीं सर, बिलकुल नहीं, शिव और वैस्वी दोनों हमारे दोस्त है, हमे पता है, ऐसा वैसा कुछ भी नहीं है.

सर : देखो बच्चो, हमने दुनिया देखि है, कभी कभी पता नहीं चलता, हो सकता है की उन्दोनो के बिछ कुछ हो पर तुम्हे न पता हो, थोड़ी देर रह देखो, अगर वो नहीं आते तो फिर कुछ करते है.

संयम : (वो तीनो वह से निकल गए) क्या तुम्हे लगता है की सर की बातो में कुछ भी सच्चाई हो सकती है?

महेश : बिलकुल नहीं, जहा तक मुझे पता है, उन्दोनो के बिच तो छत्तीस का अकड़ा है.

संयम : मुझे भी पता है, तो फिर दोनों गए कहा?





यहाँ रात इतनी भागादौड़ी के कारन थके हुए शिव और वैस्वी दुनिया जहाँ से बे खबर एक दूसरे को बहो में कैसे हुए सो रहे थे, उन दोनों के बिच प्यार वाली कोई बात नहीं थी न कोई सेक्स वाली पर कुदरत के सामने दोनों लचर थे, ठण्ड एक ऐसी मज़बूरी थी जिसके चलते दोनों इस तरह सो रहे थे. कैंप से विपरीत इनकी सुबह थोड़ी जल्दी हो गयी थी. अक्षर सुबह सुबह जैसा होता है, कुदरती हाजत के दबाव की वजह से वैस्वी की नींद खुल गयी, ऊपर से चिडिओ की आवाजे भी बहोत आ रही थी, थोड़ा होश आने पर उसने महसूस किआ की वो कहा है, शिव ने उसे कास के जकड रक्खा है, उसे कल रात वाली पूरी घटना याद आ गयी, शिव ने उसे उन हैवानो से छुड़वाया था, उसके लिए शिव ने कितनी मार भी खायी थी, अगर शिव न होता तो शायद वो अभी बुरी दशा में होती, ये याद आते hi उसने शिव को देखा, उसने खुद को भी देखा की वो कैसे शिव से पूरी तरह से लिपट कर सो रही थी, उसने खुद शिव को बहो में जकड रक्खा था, भले hi ये सब ठण्ड की वजह से हुआ था पर वो पहली बार किसी लड़के की बहो में थी, उसे पता था की अगर वो हिली तो शिव जग जायेगा, वो आंखे खोले सोचने लगी, कैसे कल रात उन कमीनो ने उसके साथ गन्दी गन्दी हरकते की थी, ये सोच कर hi उसके सरीर में एक दर की लहर दौड़ गयी, वो लोग कैसे उसके शरीर को छू रहे थे, उसके कूल्हे और स्तन को भी दबाया था, लड़के और लड़कीओ के सम्बन्धो के बारे में उसे कुछ कुछ पता था, पर ये उसकी कल्पना से बहार था, उसके साथ ऐसा भी हो शक्ति है उसने कभी सोचा नहीं था, अगर शिव सही समय पर न आता तो वो लोग उसके साथ क्या क्या कर चुके होते. अचानक उसे शिव पर ढेर सारा प्यार उमड़ आया, वैसे भी वो स्कूल में सबसे अच्छा था, खेलकूद की बात करो, पढ़ाई की बात करो या दिखने की बात करो, वो हर तरीके से सब से बेस्ट था. संयम ने भी कितनी बार कहा था की वो बहोत अच्छा है पर वो कभी यकीं नहीं कर पायी थी, या तो वो यकीं hi नहीं करना चाहती थी. पर अभी वो उसकी बहो में थी, उसने फिर से आंखे बंद कर दी और उसकी बहो के घेरे में चैन महसूस करने लगी, पर उसे जोरो की पेहसाब आयी हुई थी और टॉयलेट भी. अचानक उसे याद आया की वो तो शिव के साथ हथकड़ी से बंधी हुई है. ये सोच कर hi उसकी हालत ख़राब होने लगी, अब क्या होगा, वो थोड़ा हिली तो शिव भी जग गया, उसने अधखुली आँखों से देखा तो उसे वैस्वी नजर आयी, उसने फ़ौरन अपने हाथ हटा लिए तो वैस्वी उठ बैठी, उसके बैठने से hi शिव का हाथ थोड़ा खींचा तो उसने अपने हाथ में बंधी हथकड़ी को देखा. उसको भी कल रात का साब याद आ गया और वो उठ कर बेथ गया, और अस्स पास देखने लगा. अभी सब कुछ उजाले में साफ़ साफ़ दिख रहा था. वो जहा पर थे वो बड़ी चट्टान थी, पीछे की और थोड़ी दूर पर फिर से घने पेड़ दिखाई दे रहे थे, सामने की और नदी के उस तरफ एक ऊँची चट्टान जैसा था, उसे पता है उस और hi उनका कैंप है. पर अभी उसका ध्यान भांग हो रहा था, उसे जोरो की पेशाब लगी हुई थी और टॉयलेट भी जाना था, तो अभी फ़िलहाल के लिए तो यही प्राथमिकता थी.

मेने वैस्वी को देखा तो वो शांत बैठी हुई थी, वो नदी के पानी को देख रही थी, पर उसके चेहरे से साफ़ पता चल रहा था की वो किसी उल्जन में है, उसके कपडे भी थोड़े मैले हो चुके थे और साथ में बाल भी बिखरे हुए थे, पर फिर भी एक बात तो मान नई पड़ेगी, वो काफी खूबसूरत है, अब प्रॉब्लम ये थी की मुझे जोरो की लगी हुई थी, पता नहीं वो क्या सोच रही थी पर मेरी हालत ख़राब हो रही थी, मेने सोचा की बात करने से शायद ध्यान भटके तो कोई रहत मिले.

शिव : क्या सोच रही हो?

वैस्वी : Hmmmmm....nahi कुछ नहीं.

शिव : कुछ तो सोच रही हो, बोल भी नहीं रही हो.

वैस्वी : हम कहा है शिव, हम कैसे वापस जायेंगे?

शिव : कैसे जायेंगे, कब जायेंगे ये अभी पता नहीं है (फिर से हम दोनों में ख़ामोशी छ गयी, जैसे जैसे वक़्त गुजर रहा था, मेरी हालत ख़राब हो रही थी, में जैसे तैसे अपने आप को कण्ट्रोल करने की कोशिस कर रहा था पर साला प्रेस्सुर बढ़ता hi जा रहा था, मेने वैस्वी को देखा तो वो भी अपने आप को समेटने की कोशिस कर रही थी और बार बार अपने आप को एडजस्ट करने की कोशिस कर रही थी, उसकी हालत ऐसी क्यों थी वो पता नहीं पर मेरी हालत और ज्यादा ख़राब हो रही थी, ज्यादा देर लगी तो कपड़ो में hi हो सकता था, तो हार कर मेने kaha)Vaiswi....Ek प्रॉब्लम है. (उसने मेरी और देखा, अब परिस्थिति तो बदलने वाली थी नहीं, तो कहना तो था hi)Muje फ्रेश होना है. (में उसके चेहरे के हावभाव समझने की कोशिस करने लगा, उसके चेहरे पर कोई रिएक्शन नहीं आया, बस उसने नज़ारे झुका ली, पर उसके चेहरे पर छायी परेशानी दिख रही थी तो मेने पूछा) क्या तुम्हे भी? (मेने सवाल पूछा, जिसके जवाब में वो खामोस रही, में उसकी स्थिति समाज रहा था) सॉरी वैस्वी, पर हम दोनों जिस परिस्थिति में फसे है उसमे हम दोनों hi लचर है, में जनता हु की हम दोनों की परिस्थिति बहोत शर्मनाक है पर क्या कर शक्ति है. नेचर कॉल है, रोक भी नहीं शक्ति और रुकेगी भी नहीं. अजीब है पर और कोई चारा नहीं है. (वो कुछ बोल नहीं रही थी, बस नीची नज़ारे किये सुन रही थी, मेने आस पास देखते हुए कहा) उस और पेड है, वह चलते hai.(Wo उन पेड़ो की और देखने लगी, पर खामोस thi)Hamare पास और कोई विकल्प नहीं है, में तुम्हारे साथ कुछ गलत नहीं करूँगा, इतना तो भरोसा है न तुम्हे?

वैस्वी : (हिचकिचाते hue)Aisi बात नहीं है शिव, हम दोनों कल से किन परिस्थितिओ में गुजरे है, अगर तुम कुछ गलत करना चाहते तो अब तक कर चुके होते, बात ऐसी नहीं है शिव, पर ...

शिव : में जनता हु, तुम्हे शर्म आ रही है, सच कहो तो मुझे भी बहोत शर्म आ रही है, पर क्या कर शक्ति है, इस हथकड़ी की वजह से हम दोनों दूर भी नहीं हो शक्ति.

वैस्वी : पर कैसे शिव, में कैसे तुम्हारे सामने...

शिव : एहि परिस्थिति मेरी भी है, मेने भी कभी ऐसा नहीं किआ, वह चलते है, कोई न कोई उपाय जरूर निकल aayega.(Aur कोई रास्ता तो था नहीं, हम दोनों साथ में चलने लगे, हालत ऐसी थी की चलने में भी दिक्कत हो रही थी, प्रेशर इतना बढ़ गया था की एक एक कदम आहिस्ता आहिस्ता रखना पद रहा था, रात की बात और थी, उस वक़्त अँधेरा था तो हम दोनों ने कपडे उतरे थे, पर अभी उजाला था, सब कुछ साफ़ साफ़ नज़र आ रहा था, ऐसे में सोच के लिए बैठना कुछ अजीब था. जैसे तैसे हम दोनों वह पहुंच गए जहा पेड सुरु होते है, हम अंदर दाखिल हुए, में जगह तलाशने लगा, मेने एक पेड़ देखा जिसका तना करीब एक डेढ़ फिट चौड़ा था, कुछ सोचते हुए मेने kaha.)Aao वह चले. (वो मुझे देखने लगी, पर बोली कुछ नहीं, हम दोनों वह पहुंच गए, मेने उसे पेड़ की एक और खड़ा किआ और में दूसरी और चला गया, पेड़ इतना चौड़ा नहीं था, पर ज्यादा चूडा होने से भी परेशानी हो शक्ति थी, हम दोनों के हाथ एक दूसरे तक न पहुंच पते, अब ज्यादा सोचने का समय नहीं था, में अपना पंत खोलने लगा, मेने पूरा पंत निकल दिया, क्यों की मुझे ऐसी hi आदत थी, में जब पंत खोल रहा था तो उसका हाथ थोड़ा मेरी और खिंच रहा था जिस से उसे भी पता चल गया की में क्या कर रहा हु, वो अभी वैसे hi कड़ी hi थी) वैस्वी, ज्यादा सोचो मात, जल्दी करो, फिर हमे कैंप भी ढूँढना है. थोड़ी देर बाद मेरा हाथ उस और खिंचा तो मुझे पता चल गया की वो अपना सलवार निकल रही है., जब हरकत रुक गयी तो मेने puchha)Taiyar हो? (कोई आवाज न aai)Taiyar हो?

वैस्वी : हम्म्म्म.

में निचे बैठने लगा, उसका हाथ खींचा तो वो भी बैठने लगी, हम दोनों बेथ गए थे, मेरी पेशाब निकलने लगी और आगे दूर तक जाने लगी, अजीब परिस्थिति में था, किसी लड़की के साथ में इन हालत में था, तभी मुझे उसके पेशाब की सिटी भी सुनाई दी, न चाहते हुए भी मेरी नज़र उस और चली गयी, उसके चेहरे का आगे का भाग थोड़ा दिख रहा था, मेने देखा की उसके मूत की धार भी आगे तक आयी थी, में वो देख रहा था, एक अजीब सी गुड़ गुड़ी पुरे शरीर में दौड़ गयी, ये सोच कर की वैस्वी मेरे साथ निचे से नंगी है, अजीब सी अनुभूति होने लगी. मेने देखा की उसकी भी नज़र मेरे सामने बने पेशाब के निशान पर थी, अब कुदरत तो कुदरत है, रात से भरा हुआ कचरा निकलने में कुछ आवाजे तो हो hi जाती है. मेरी भी निकल गयी और उसकी भी सुनाई दी. मेरी एक दम से हुसी छूट गयी. हस्ते हुए मेने उसकी और देखा तो हमारी नज़र टकराई, उसके चेहरे पर भी हसी थी पर साथ में बहोत ज्यादा शर्म थी, उसने अपना चेहरा पेड़ के पीछे छुपा लिया. हम दोनों अपना अपना काम कर रहे थे, परेसुरे काम होने से मुझे रहत मिली, एक खूबसूरत लड़की मेरे साथ इस स्थिति में है ये सोच कर में अपनी लालच रोक न पाया, मेने थोड़ा सा पीछे झुक कर देखा तो मुझे वैस्वी की गोरी गोरी गांड नजर आ रही थी, उसका कमीज़ ऊपर चढ़ी हुई थी, साइड से उसके बड़े कूल्हे का थोड़ा सा भाग दिख रहा था, वो ग्रोइ थी और उसका वो कुल्हा पूर्ण गोलाई लिए अपना आकर्षण दिखा रहा था, उसे देख कर मेरा लुंड खड़ा होने लगा, मेने अपने आप को रोका और अपने काम में ध्यान दिया. जैसे तैसे मेने सब ख़तम किआ, सारा पेट खली हो चूका था, अब बरी थी धोने की. पानी तो दूर था, मेने आस पास के सूखे पत्तो से साफ़ किआ, पर बिना पानी से धोये पंत तो पहन नहीं सकता था. में थोड़ी देर बैठा रहा और वैस्वी का ख़तम होने का इंतजार करने लगा, जब कोई हलचल नहीं आ रही थी तो मेने पूछा,

शिव : हो गया? (पूछते पूछते फिर मेरी हसी निकल गयी)

वैस्वी : शीइइइइइव, मरूंगी, एक तो वैसे hi अजीब स्थिति में फसे है और तुम्हे हसी आ रही है.

शिव : हसी तो तुम्हे भी आ रही है.

वैस्वी : आएगी hi, कैसी अजीब सी परिस्थिति है, में एक लड़के के बाजु में बेथ कर ये सब कर रही हु, कितनी शर्म आ रही है और ऐसी परिस्थिति सोच कर हसी भी आ रही है.

शिव : पर अब हमे ऐसे hi नदी तक जाना पड़ेगा, साफ़ जो करना है. वैसे तुम्हारा कमीज़ लम्बा है तो तुम्हे कोई दिक्कत नहीं होगी पर वह हमारे बिछ ये पेड़ नहीं होगा.

वैस्वी : तो क्या हुआ, तुम अपनी आंखे बंद कर लेना.

शिव : अच्छा ठीक है चलो. (हम दोनों खड़े हो गए, हम पेड की आउट से बहार निकले, मेरी नजर जैसे hi उस से टकराई फिर से मेरी हसी छूट गयी, वो भी शरमाते हुए मुस्कुराने लगी,

वैस्वी : अब बस भी करो, कितना अजीब लग रहा है.

शिव :सॉरी यार, सच में कितना अजीब हुआ. (उसने जहा टट्टी की थी वह मेरी नज़र चली गयी.)

वैस्वी : (थोड़ जोर se)Waha क्या देख रहे हो, आगे देखो और चलो यहाँ से. (मेरी फिर से हसी निकल गयी, उसने मुझे कंधे से धक्का mara)Shiiiiiiv.

शिव : वैसे ये पूरी जिंदगी याद रहेगा. (हम दोनों साथ में चल रहे थे, में और वो दोनों निचे से नंगे थे, मेने आगे अपना लुंड छुपाते हुए पंत पकड़ा हुआ था, और उसने अपनी सलवार.)

वैस्वी : है है, वैरी फनी. (हम दोनों पानी तक पहुंच गए थे, उसने थोड़ा शरमाते हुए अपना सलवार मेरी और badhaya)Isse पकड़ो, और अपनी आंखे बंद कर लो. मेने मुस्कुराते हुए आंखे बंद कर दी, थोड़ी देर में मुझे पानी की आवाजे आने लगी तो मेने आंखे खोल कर देखा तो वो निचे देखते हुए अपनी गांड साफ़ कर रही थी, यहाँ से उसके दोनों कूल्हे साफ़ नज़र आ रहे थे, पता नहीं ये नज़ारा नजरो को क्यों इतना अच्छा लग रहा था, उसके बड़े बड़े दो आकर्षक गोले अपने आकर्षण से मुझे सम्मोहित कर रहे थे. जब मुझे लगा की उसका ख़तम होने वाला है तो मेने आंखे बंद कर दी. अपनी कमीज़ ठीक करते हुए वो कड़ी हो गयी, मेने उसे सलवार और मेरी पंत दे दी.)

शिव : तुम्हे आंखे बंद करनी है तो करो, नहीं करनी तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.

वैस्वी : में तुम्हारी तरह बेशरम नहीं हु.

शिव : कहना क्या चाहती हो?

वैस्वी : कुछ नहीं, तुम अपना काम करो. (मेने भी अपना काम निपटाया, पानी से बहार निकल कर मेने पंत पहना, उसने भी अपनी सलवार पहनाने लगी, फिर से मेरी नजर उसकी भरी हुई झांघो पर चली गयी, पता नहीं साला दिमाग समझता hi नहीं था, नज़र चली hi जाती थी, कपडे पहन ने के baad)Ab क्या करेंगे?

शिव : पानी का बहाव इस और है मतलब हम उस और गिरे होंगे, तो हमे उस और hi चलना चाहिए, देखते है कही से ऊपर चढ़ने का रास्ता दिख जाये.

वैस्वी : ठीक है (हम दोनों चलने लगे, वो पथरीले रस्ते में लड़खड़ा रही थी तो शिव ने उसका हाथ पकड़ लिया, ये देख कर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, काफी देर वो दोनों ऐसे hi देखते हुए चलते रहे, थोड़ी देर baad)Me थक गयी हु.

शिव : इतना शरीर ले कर घूमोगी तो थक hi जाओगी न.

वैस्वी : क्या कहा? क्या में मोती हु?

शिव : मोती तो नहीं हो पर भरी जरूर हो.

वैस्वी : अगर इतनी hi बुरी लग रही हु तो घर क्यों रहे थे मुझे?

शिव : (उसकी और देखते hue)Mene कब घुरा?

वैस्वी : में बेवकूफ नहीं हु, मुझे सब पता है.

शिव : अच्छा, क्या पता है?

वैस्वी : (घर कर उसे देखते hue)Muje पता है तुम मुझे वह घर रहे थे.

शिव : कहा?

वैस्वी : में कोई छोटी बच्ची नहीं हु, मुझे सब समाज आता है, वह पेड़ के पीछे से भी तुम मुझे देख रहे थे और पानी में भी तुम मुझे देख रहे थे, में अंधी नहीं हु.

शिव : (में सच में पकड़ा गया था, मेने कान पकड़ते हुए kaha)Sorry यार, वो पता नहीं नजर चली जाती है.

वैस्वी : सब लड़के एक जैसे hi होते है, अब तुम ये सब अपने दोस्तों को भी कहोगे, है न?

शिव : में क्यों कहने लगा, में कोई पागल थोड़ी न हु, मुझे पता है की ऐसा कहने से तुम्हारी बदनामी होगी, वो तो बस नज़र चली गयी थी, उसके लिए सॉरी में सॉरी बोल रहा हु न.

वैस्वी : (शिव की बात सुन के उसे अच्छा लगा, की वो उसकी बदनामी की परवाह करता है) ऐसा क्या होता है जो नजर रोक नहीं पाते? ये बाद मन्नेर है.

शिव : जनता हु यार, पर जब ऐसा खूबसूरत नज़र सामने हो तो नज़र अपने आप चली जाती hai(Ye सुन कर hi वैस्वी शर्म से लाल हो गयी, और अपनी नज़ारे झुका के मुस्कुराने लगी, में आस पास नजर दौड़ने लगा तभी मुझे एक जगह दिखी जहा से ऊपर चढ़ा जा शक्ति tha)wo देखो, वह से तरय कर शक्ति है.

वैस्वी : (उस और देखते hue)Wo तो सीधी चढ़ाई है, में नहीं चढ़ पाऊँगी.

शिव : कोशिस तो करनी पड़ेगी न, वर्ण यही रहना पड़ेगा.

वैस्वी : (धीरे se)Chalega.

शिव : क्या? क्या कहा तुमने?

वैस्वी : क क कुछ नहीं.

शिव : चलो अब (मेने उसकी और हाथ बढ़ाया तो उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया, मेने उसको खींचते हुए उठाया, हम दोनों नदी की और गए और पानी में उतरने लगे, वैसे पानी ज्यादा गहरा नहीं था पर घुटनो के ऊपर तक आ रहा था और बहाव तेज होने की वजह से काफी संभल कर चलना पद रहा था, (वैस्वी को इतना दर लग रहा था की उसने मुझे जोरो से पकड़ लिया था, में भी समाज रहा था की वो दर रही है तो मेने भी उसे मज़बूती से पकड़ा और हम दोनों ने नदी पार की, अब मेने उस जगह का जायजा लिया जहा से ऊपर चढ़ना था, नशीब से वह ढलान थी और पेअर रखने की भी जगह दिख रही थी, जैसे तैसे वैस्वी को खींच कर और धकेल कर हम दोनों ऊपर चढ़ने लगे, कई बार जब में उसे खींच रहा था तो ऐसी परिस्थिति बन रही थी की जैसे वो मेरे गले लग गयी हो, वो भी परिस्थिति समाज रही थी, में उसके शरीर को कही जगह से छू रहा था, में ध्यान रख रहा था की उसके निजी अंग को न छू लू पर, उसको दखीचते और धकेलते हुए कभी कभी उसके स्तन और कूल्हों को भी मेरा श्री और हाथ छू जा रहा था, पर और कोई रास्ता नहीं था तो न उसने बुरा मन न में कुछ कर शक्ति था, हम दोनों जैसे तैसे करके ऊपर चढ़ hi गए. अब हम दोनों ऊपर आये थे जहा बहोत सरे पेड़ थे, में आस पास देख कर आगे जाने के लिए दिशा देख रहा था, हम दोनों इतना थक गए थे की दोनों हांफ रहे थे)

वैस्वी : थोड़ी देर बैठो न शिव, में सचमे बहोत थक गयी हु.

शिव : (हफ्ते hue)Thak तो में भी गया हु, पर ये जंगल है, यहाँ कुछ भी हो सकता है, लगता है जंगल तुम्हे में दर नहीं लग रहा.

वैस्वी : तुम साथ जो हो, फिर दर कैसा.

शिव : में कोई हीरो नहीं हु और न hi ये कोई फिल्म चल रही है, कोई जंगली जानवर आ गया तो हम दोनों की खैर नहीं.

वैस्वी : (धीरे se)Mere तो हीरो hi हो.

शिव : क्या? क्या फिर बाद बड़ाई तुम? (वो मुस्कुरायी और न में गर्दन हिलायी) ये क्या बड़बड़ाती रहती हो, ठीक है थोड़ी देर बैठते है. (एक साफ़ जगह देख कर वो पेड़ की तक लगाए बेथ गयी, हाथ बांचे थे तो में भी उसके सामने बेथ गया)

वैस्वी : एक बात पुछु?

शिव : पूछो.

वैस्वी : तुम्हारे और संयम के बिच कुछ है क्या?

शिव : अचानक ये संयम की बात कहा से आ गयी?

वैस्वी : में कुछ सोच रही थी, बताओ न, क्या तुम्हारे और संयम के बिछ कुछ है क्या?

शिव : है, वो मेरी दोस्त है.

वैस्वी : मेरा मतलब वो नहीं था, में पूछ रही थी की वो वाला चक्करररर?

शिव : वो तुम्हारी भी सहेली है, तुम दोनों हमेसा साथ रहती हो, तुम्हे नहीं पता क्या?

वैस्वी : मुझे पता है, पर कभी कभी जो दीखता है वो होता नहीं, में तुमसे जान न चाहती हु, मुझे सच सच बताओ प्लीज.

शिव : पर तुम्हे क्यों जान न है?

वैस्वी : मेरे लिए ये बहोत जरुरी है, प्लीज शिव, बताओ न.

शिव : मेने कहा न की हम दोनों दोस्त है, और कुछ नहीं. (ये सुन कर पता नहीं उसके चेहरे पर क्यों खुसी छलक आयी, उसका चेहरा देख ऐसा लग रहा था मनो उसे सब मिल गया हो) अब तुम क्यों इतना खुस हो रही हो?

वैस्वी : कुछ नहीं, एक और बात पुछु?

शिव : है पूछो.

वैस्वी : में तुम्हे कैसी लगती हु?

शिव : एक दम पागल.

वैस्वी : शीइइइइव (नखरे से मुझे देखते hue)Agar इतनी hi बुरी लगती हु तो मुझे हर जगह घर क्यों रहे the?(Usne थोड़े गुस्से से कहा)

शिव :मेने कहा न, गलती से देख लिया था, तुमने कहा न की सब लड़के एक जैसे hi होते है तो वैसा hi है, हम लड़के ऐसे hi होते है, जहा कोई अच्छा नज़र दीखता है तो नज़र चली जाती है.

वैस्वी : (शरमाते hue)Aisa क्या अच्छा लगा तुम्हे?

शिव : देखो वैस्वी, हमे ऐसी बाते नहीं करनी चाहिए.

वैस्वी : क्यों नहीं करनी चाहिए, पिछले कुछ घंटो में मेरे जीवन में कितना कुछ हो गया, उन बुरे लड़को ने मेरे साथ इतनी गन्दी हरकत की, में तुम्हारे साथ कैसी कैसी अवस्था में रही, हम दोनों पूरी रात कैसे सोये, कितना कुछ हो गया है इतने समय में, मेरे लिए तो जैसे सब कुछ बदल गया है, मुझे जान न है शिव, तुम्हे वो सब क्यों अच्छा लगता है, मुझे कहो न, मुझे जान न है, मेने कभी किसी के साथ ऐसी बाते नहीं की, मुझे ये सब समाज में नहीं आता, पर अब मुझे जान न है. और तुमसे अच्छा कोण होगा जो मुझे समजा सके. जब लोग मुझे वैसे देखते थे तो मुझे गुस्सा आता था, कल रात वो लोग मुझे छू रहे थे तो मुझे इतना गुस्सा आ रहा था शिव, पर मुझे पता था की तुम मुझे वैसे देख रहे हो, तुमने भी मुझे छुआ पर फिर भी मुझे गुस्सा नहीं आ रहा था, ऐसा क्यों? एक लड़की के नाते में अपना शरीर हमेसा छुपकेरखती थी, पार आज तुम्हारे देखने से मुझे कोई सिकवा नहीं हो रहा, बल्कि अच्छा लग रहा था, ऐसा क्यों? में हमेशा तुमसे दूर भगति थी, हमेशा तुमसे जलन की है, पर आज तुम मुझे सबसे करीबी लग रहे हो, ऐसा क्यों है शिव?

शिव : (उसकी बाते सुन कर मेरी हालत ख़राब हो रही थी, मुझे समाज में नहीं आ रहा था की इसको क्या जवाब दू, वो जो बोल रही थी उसका मतलब में साफ़ साफ़ समाज रहा था, पर में उसका जवाब नहीं देना चाहता था) देखो, मेरे पास तुम्हारे किसी भी क्यों का कोई जवाब नहीं है, पर अभी मुझे लग रहा है की अब हमे चलना चाहिए, दिन के रहते हमे कैंप ढूँढना hi होगा, वर्ण फिर से हमे ऐसे जंगल में रात गुजारनी पड़ेगी.

वैस्वी : Sach(Uske चेहरे पर जो खुसी थी में बता नहीं सकता)

शिव : मुझे लगता है, तुम्हारा दिमागी संतुलन बिगड़ गया है, जंगल में ऐसे भूखे प्यासे हम नहीं रह शक्ति, हमे कैंप ढूँढना hi पड़ेगा. (में खड़ा हुआ, पर वो कड़ी नहीं हो रही थी) उठो वैस्वी. (वो फिर भी कड़ी न हुई तो, मेने उसकी दोनों बगल में हाथ दाल कर उसे उठाने लगा तो उसने अपनी बहे मेरे गले में दाल दी, वो उठी तो सही पर उठते hi वो मेरे गले लग गयी)

वैस्वी : शिव, ी थिंक ी ऍम इन लव विथ यू.

शिव : देखो वैस्वी...

वैस्वी : मुझे कुछ नहीं सुन न, (वो थोड़ी दूर हुई और मेरी आँखों में देखने lagi)please किश में शिव. (में बोलने गया पर उसने मेरे होठो पर हाथ रख दिया, और ना में इस्सर kia)Please किश में. (उसकी सांसे भरी होने लगी थी, वो तेज तेज सांसे लेने लगी थी, में उसकी आँखों में देख रहा tha)Kuchh मात सोचो शिव, जस्ट किश में. (पता नहीं उसकी आँखों में क्या समोहन था, में उसकी और झुकने लगा, अब वो मेरे होठो को देख रही थी, में उसकी आँखों में देख रहा था, जैसे hi हमारे होठ टकराये उसकी आंखे बंद हो गयी, वो बस कड़ी थी, में उसके होठो को चूसने लगा,





उसकी और मेरी सांसे तेज चलने लगी, वो बस मुझे किश करने दे रही थी, मेरे किश करने से उसे समाज आ गया की क्या करना है तो वो भी मेरे होठो को चूसने लगी, उसकी ये पहली किश थी, और में माहिर खिलाडी हो चूका था, किश करते हुए मेने उसकी कमर पकड़ ली, एक हाथ से वो मेरे बाल को पकड़ कर अपनी और खींचने लगी, में सब भूल गया था, किश करते हुए मेरे हाथ कमर से होते हुए अपने आप hi ऊपर उठने लगे, जैसे जैसे मेरे हाथ ऊपर उठ रहे थे, दोनों की सांसे तेज हो रही थी, दिल जोरो से धड़क रहा था, लुंड पूरी तरह से उत्तेजित हो चूका था, मेरा हाथ उसके स्तन के निचे तक पहुंच गया, उसके भरे हुए स्तन का एहसास मुझे होने लगा था, शायद उसने भी मेरे हाथ को अपने स्तन के नजदीक महसूस कर लिया था, वो एक दो पल रुक गयी, में भी एक पल के लिए रुका पर वो फिर से मेरे होठो को चूसने लगी, और मेरे बालो को सहलाने लगी, साला शरीर कहा मेरी मन रहा था, मेरे हाथ उसके उन्नत भरे हुए स्तन पर फ़ैल गए और उन उन्नत स्तन को दबाने लगे, मेरे ऐसा करते hi वो और ज्यादा उत्तेजित हो गयी, वो मुझे जोरो से किश करने लगी और साथ में अपनी जिव्हा को मेरी जिव्हा से रगड़ने लगी, वो मेरे बालो को सख्ती से नोच रही थी, सांसे इतनी तेज चल रही थी की उसकी छाती तेजी से ऊपर निचे हो रही थी, मेरा लुंड उसकी छूट के पास लग रहा था, उस से बर्दास्त न हुआ और उसकी सांसे टूटने लगी तो उसने फ़ौरन मेरे होठो से अपने होठ छुड़ाए और मुझसे पूरी ताकत से लिपट गयी, मेरा एक हाथ पीछे की और खिंच गया क्यों की वो हथकड़ी से बंधा हुआ था, मेने दूसरा हाथ भी स्तन से हटा लिया और उसकी कमर को पकड़ कर अपने आपसे चिपका लिया.





वैस्वी : ी लव यू शिव, ी लव यू. (में कुछ नहीं कह शक्ति था, पता नहीं ये क्या हो रहा था, पर में अपने आप को रोक नहीं पाया, हम दोनों, ऐसे hi खड़े थे की हमे कुछ आवाजे सुनाई दी, कोई हमारा नाम चिल्ला रहा था, हम दोनों ने एक दूसरे को देखा और अलग हुए. आवाजे अंजनी थी पर कई लोग बरी बरी हमारा नाम पुकार रहे थे, हम आवाज की दिशा में देखने लगे, थोड़ी देर बाद हमे कुछ लोग दिखाई दिए, वो खाकी वर्दी में थे, पर पुलिस नहीं लग रहे थे)

हमे देख कर वो हमारे नजदीक आये. मुझे देख कर.

आदमी : तुम शिव हो? (मेने है कहा) और तुम वैस्वी? (वैस्वी ने है कहा, हथकड़ी देख kar)Tumhare हाथ में हाथ कड़ी?

शिव : आप कोण है?

आदमी : में फारेस्ट डिपार्टमेंट से हु, क्या हो रहा है यहाँ?

शिव : हमारे स्कूल के चार लड़के कल रात को इसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिस कर रहे थे, हमारी हाथापाई हुई और उन्होंने hi हमे ये हथकड़ी लगा दी, हमने भागने की कोशिस की और हम निचे झरने में गिर गए थे, सुबह होते hi हम अपने कैंप को धुंध रहे थे.

आदमी : तुम्हारे टीचर ने तुम्हारे गम होने की खबर दी थी तो हम तुमदोनो को ढूंढ रहे थे, चलो बाकि बाते कैंप में चल कर करते है.
 
अपडेट 123

हम सब चलते हुए कैंप की और बढ़ रहे थे, वो सब आगे चल रहे थे और में और वैस्वी पीछे चल रहे थे, उसने मेरा हाथ पकड़ रक्खा था, वैसे भी हम हथकड़ी में बंधे थे फिर भी उसने मेरा हाथ पकड़ रक्खा था और बार बार मुझे देख कर मीठी सी मुस्कुराहट दे रही थी, जो लड़की हमेसा मुझे देख कर चिढ़ती रहती थी वो मुझे देख कर इतना मुस्कुरा रही थी, कभी कभी वो दोनों हाथो से मेरी बाह पकड़ लेती थी, वो बहोत खुस थी, उसने मुझे ी लव यू कहा था पर में क्या कहता, मेने सोचा की फिर शांति से उसे सब समजा दूंगा, वैसे भी मेरी जिंदगी में काम लोग थे क्या, अगर सब नार्मल होता तो में सच में बहोत खुस होता, क्यों की वो सच में बहोत hi खूबसूरत थी और होशियार भी थी. पर पहले से hi मेरी जिंदगी में इतनी लड़कीअ थी तो मुझे थोड़ी टेंशन होने लगी थी, ऊपर से में जनता था की इसका बाप एक पंहुचा हुआ आदमी था, अगर उससे इस बारे में पता चला तो मेरी खटिआ कड़ी कर देगा. पर अभी फ़िलहाल में कुछ नहीं कर सकता था. काफी देर चलने के बाद जब हम सब जब कैंप पहुंचे थे तो मेने देखा की सब लोग टेंट के बिछवाली जगह में इक्कट्ठा हो कर बैठे हुए थे, हमे देखते hi सब खड़े हो गए, संयम और मेरे दोस्त दो चार कदम आगे आये पर जैसे hi उनकी नजर हमारे हाथ में लगी हथकड़ी पर पड़ी वो सब ठिठक कर रुक गए. हम सब वह पहुंच गए, हमारे हाथ में लगी हथकड़ी देख कर वरुणसीर ने पूछ hi लिया,

वरुणसीर : (फारेस्ट अफसर se)Sir, इनको हथकड़ी क्यों पहनाई है, क्या किआ है इन्होने. (वरुणसीर के साथ साथ वह खड़े हर लड़के और लड़की के मान में यही सवाल था, और जवाब किसी के पास नहीं था, सुब हमे आश्चर्य से देख रहे थे)

अफसर : ये हथकड़ी हमने नहीं लगायी है, और नहीं हमने इन्हे गिरफ्तार किआ है, जैसा की इन्होने बताया, आपके कैंप के कुछ लड़को ने ये किआ है, वो लोग इस लड़की के साथ जबरदस्ती करने के िर्रादे से इसे ले गए थे, इस लड़के ने इस लड़की को उन सब से बचाया है, उन्ही लड़को ने इन दोनों को हथकड़ी पहनाई है.

वरुणसीर : हमारे कैंप के लड़के? (शिव की और देखते hue)Kon थे वो लोग शिव?

शिव : विक्रम और उनके दोस्त (सब अपने आस पास देखने लगे, पर विक्रम और उनके दोस्त होते तो नज़र आते न)

वरुणसीर : कहा है विक्रम? (सब अपने आस पास देख रहे थे) ये दोनों गायब थे तो हमारा ध्यान hi नहीं गया की दूसरे लड़के भी इस कैंप से गायब hai(Ek लड़के ko)Deko तो उनके टेंट में. (वो लड़का भाग कर वह गया पर कोण मिलता, वह कोई होता तो मिलता न)

लड़का : कोई नहीं है सर, और उनका सामान भी नहीं है.

वरुण : ये बहोत बड़ी घटना हो गयी है, हमे पुलिस को इन्फॉर्म करना पड़ेगा, ऐसे किसी लड़की के साथ ऐसा व्यव्हार, हमे पुलिस को कहना hi होगा. (वैस्वी को देखते hue)Hume तुम्हारे पापा को भी इन्फॉर्म करना होगा.

अफसर : वो हम कर hi रहे है, पर पहले इन दोनों को कुछ khana-pani, दीजिये, कल रात से ये दोनों किन हालातो से गुजरे होंगे.

वरुणसीर : है है, आओ बच्चो, पहले बेथ जाओ, (उनकी हथकड़ी को देखते hue)inki हाथ कड़ी???

अफसर : चाबी के बगैर ये नहीं खुलेगी, और यहाँ ऐसे साधन भी नहीं है की इससे कटा जा सके, इन्हे किसी लोहार के पास ले जाना पड़ेगा. उसमे अभी टाइम लगेगा. यहाँ से फ़ोन लगेगा नहीं, हमे ऑफिस से फ़ोन करना पड़ेगा.

वो लोग वह से चले गए, सब लड़के लड़कीअ हमे घेरे खड़े हो गए थे, सब हमे ऐसे देख रहे थे जैसे कोई एलियन देख रहे हो. वरुणसीर ने सब को अपने अपने टेंट में जाने को कहा. और संयम को हमारे लिए कुछ खाना देने को कहा. संयम और हर्ष जा कर हमारे लिए खाना ले आये, हमने थोड़ा खाना क्यया, वैसे भी पेट में चूहे कूद रहे थे, कहते वक़्त भी संयम और मेरे दोस्त बहोत सरे सवाल कर रहे थे, मेने और वैस्वी ने संभल कर सब के जवाब दिए, जो कुछ बता सकते थे वो हमने बताया.

शिव : मेरा फ़ोन कहा है?

महेश : (अपनी जेब से मेरा फ़ोन देते हुए) लो. (में मश्ग टाइप करने laga)Kisko मश्ग भेज रहा है?

शिव : पुलिस को. (ये कहते हुए मेने भार्गवी मैडम को मश्ग भेज दिया जो कुछ इस तरह था : मैडम, में क्सक्सक्स जगह पर स्कूल के कैंप में हु, हमारी स्कूल के चार लड़के जिनका नाम विक्रम, रिज़वान, पार्थ और जीवन है, उन्होंने वैस्वी नाम की एक लड़की पर जबरदस्ती करने की कोशिस की थी, मेने उसे बचालिया है पर वो चारो भाग गए है, हमारे सर यहाँ पुलिस को इन्फॉर्म कर रहे है, मेरा फ़ोन नेटवर्क की वजह से लगेगा नहीं) (थोड़ी देर बाद मुझे मश्ग आया)

भार्गवी : तुम ठीक हो न? मेरी वह के इंस्पेक्टर से बात हो गयी है, उन्हें सूचना मिल चुकी है, वो वही आ रहे है पूछताछ के लिए, में उन लड़को की खोज करती हु. वो लड़की कैसी है?

शिव : वो ठीक है, मेने बचालिया है.

भार्गवी : ठीक है, अपना ध्यान रखना.

में और वैस्वी साथ में hi बैठे थे तो उसने भी देखा की में क्या बात कर रहा हु, वो मुस्कुराते हुए मुझे देख रही थी. उसका ऐसे मुस्कुराके मेरी और देखना संयम को अच्छा नहीं लग रहा था. वो बड़े गौर से वैस्वी की और देख रही थी, हथकड़ी की वजह से हमदोनो नजदीक बैठे हुए थे, पर जितना नजदीक वो बैठी थी उतना नजदीक बैठने की जरुरत नहीं थी पर वैस्वी बिलकुल सात कर hi बैठी हुई थी, और ये देख कर संयम बेचैन हो रही थी, उसे खुसी थी की उसकी सहेली के साथ कुछ गलत नहीं हुआ पर उस से ज्यादा उसे इस बात से तकलीफ हो रही थी की कल तक उसकी सहेली जिस शिव से चीड़ रही थी वो उसके इतने नजदीक हो गयी है, उसके चेहरे से उसे लग रहा था की उसे शिव के साथ बैठने से कोई तकलीफ नहीं है बल्कि वो खुस दिख रही थी.

थोड़ी देर बाद पुलिस भी कैंप में आ गयी, उन्होंने मुझसे और वैस्वी से बहोत सरे सवाल पूछे, एक लेडी अफसर भी थी, हमने जो कुछ उन्हें बताने लायक था वो सब बतादिया. उन्होंने भार्गवी मैडम के बारे में भी पूछ की तुम जानते हो? मेने वो भी उन्हें बतादिया. जब सरे सवाल ख़तम हो गए तो उन्होंने वैस्वी से पूछा की वो कम्प्लेन करने के लिए तैयार है न, तो उसने है कहा. हमारी पूछताछ अकेले में हो रही थी, उसके बाद हम बहार आ गए, जहा सब स्टूडेंट और फारेस्ट के अफसर भी थे.

शिव : सर, ये हथकड़ी?

पोलिसवाले : ये पुलिसवाली हथकड़ी नहीं है, वर्ण में उसे खोल शक्ति था, ये ऐसे hi खरीदी हुई है तो इसकी चाबी के बगैर इससे नहीं खोल शक्ति, इससे काटना hi पड़ेगा.

अफसर : इससे काटने के लिए तुम्हे हमारे साथ चलना पड़ेगा, क्यों की इसे काटनेवाले साधन यहाँ नहीं चलेंगे, यहाँ के नजदीकी सहर जा कर इसे काटना पड़ेगा.

वरुणसीर : इस हादसे की वजह से हमने कैंप कैंसिल कर दिया है और हमे भी वापस जाना है, हम अपने सहर में ये करवा देंगे. हम आपकी hi रह देख रहे थे ताकि आपकी इन्काइरी के बाद हम जा शेक. क्या हम जा शक्ति है न?

पोलिसवाले : अभी थोड़ा टाइम लगेगा, हमे उस जगह पर जाँच पड़ताल करनी पड़ेगी जहा हे सब हुआ था, तो करीब एक दो घंटा और लगेगा, उसके बाद आप लोग जा शक्ति हो.

ये सब एक दो घंटे चला, उन्होंने सारा सन रेक्रेट किआ, वैस्वी को जहा से उठाया गया था वह से ले कर जहा उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिस की गयी थी, सारा कुछ उन्होंने देखा और फोटो भी लिए, वैस्वी दर रही थी पर मेने उसका हाथ पकड़ कर उसे हिम्मत दी. ये सारा ख़तम करते करते शाम हो गयी थी, फिर हम सब वह से वापस अपने सहर की और निकले. जैसे hi हम नेटवर्क में आये वरुणसीर ने प्रिंसिपल से बात की, वैसे उन्हें पहले hi इन्फॉर्म करदिया गया था, उन्होंने वैस्वी के पापा को भी फ़ोन किआ, शायद वो बहोत चिल्ला रहे थे क्यों की सर उन्हें समजने की कोशिस कर रहे थे, उन्होंने वैस्वी से भी बात की, बात करते हुए वैस्वी रो रही थी.

इन सब भगा दौड़ी में सब ने सुबह से ले कर अब तक ठीक से खाना नहीं खाया था, थोड़ा नास्ता hi नशीब हुआ था तो सर ने सब से खाने का पूछा और एक हाईवे होटल पर रुकने का फैसला किआ. में और वैस्वी साथ में hi बैठे थे. सब लोग उतर कर सीधे बाथरूम की और भाग रहे थे, मुझे भी लगी हुई थी, पर अब परिस्थिति अलग थी, उस वक़्त हम दोनों अकेले थे, यहाँ हम सब साथ थे.

महेश : चलो न बैठे क्यों हो?

शिव : तुम लोग जाओ, हम आते है. (महेश जनता था की हम दोनों बंधे हुए थे तो उसने ज्यादा बहस नहीं की और वो और हर्ष वह से निकल गए, पर संयम वही कड़ी thi)Tum भी जाओ.

संयम : ऐसा क्यों कह रहे हो, साथ में चलते है न.

शिव : मेने कहा न की तुम जाओ, हम दोनों आते है.

संयम : सब तो चले गए है, हम तीनो hi बचे है.

शिव : तुम नहीं संजोगी, तुम जाओ हम आते है.

संयम : क्या नहीं संजुगी.

शिव: (हथकड़ी कीखते hue)Hum दोनों बंधे हुए है.

संयम : वो सबको पता है, तो?

शिव : यहाँ से उतर कर सब कहा गए?

संयम : सब वाशरूम गए तो? (बोलने के बाद उसे परिस्थिति समाज आयी, ये सोच कर hi उसका खुला हुआ मुँह खुला रह गया, उसने वैस्वी की और देखा जो नज़ारे झुकाये बैठी थी, संयम का दिमाग hi हिल गया था ये सोच कर hi की ये दोनों कैसे बाथरूम में जायेंगे) तुम दोनों साथ में? (वो बोलते बोलते रुक गयी)

शिव : पागलो जैसी बात मत कर, वह टॉयलेट होगा, उसका दरवाजा भी होगा, में बहार खड़ा रहूँगा, और फिर ये बहार कड़ी रहेगी.

संयम : पर फिर bhi(Abhi भी उसे यकीं नहीं हो रहा था)

शिव : तो और क्या करे बता? इसीलिए सब के जाने का इंतजार कर रहे थे.

संयम : (वो ये सोच कर hi अंदर से हिल चुकी थी की शिव और वैस्वी इतना नजदीक आ गए है, भले hi परिस्थितिया कुछ भी हो, वो यकीं नहीं कर प् रही थी, पर वो फिर भी उन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहती थी) है फिर भी, तुम दोनों अंदर होनेगे तो कोई तो साथ चाहिए न, वर्ण लोग क्या कहेंगे, अगर में साथ होउंगी तो कमसे काम ये तो कह सकते है न की में थी वह पर.

शिव : (मुझे भी उसकी बात सही lagi)Sahi कहा तुमने, ठीक है चलो तुम भी.

हम तीनो बस से बहार आये. सब लोग होटल के अंदर चले गए थे, और इक्का दुक्का दूसरे वहां थे, पर ज्यादातर सब पुरुष टॉयलेट में hi जा रहे थे, हम तीनो लड़िएड टॉयलेट के पास गए. ये एक अजीब स्थिति थी, तुम तीनो एक साथ टॉयलेट में थे, वह दो टॉयलेट बने हुए थे, में पहली बार महिला शौचालय में आया था, मेने देखा की पुरुष शौचालय की तरह अंदर खड़े रह कर पेशाब करने के लिए कुछ भी नहीं था, वह बेथ कर करने के लिए hi जगह बानी हुई थी. उस जगह का तो हम उपयोग नहीं कर शक्ति थे तो हमने दरवाजेवाले टॉयलेट का hi उपयोग करने का सोचा. पहले वैस्वी को hi अंदर भेजा. अंदर जा कर उसने दरवाजा बंद किआ, मेने दरवाजा पकड़ के रक्खा ताकि वो खुल न जाये, पर दरवाजा थोड़ा खुला होने की वजह से जब वो मूतने लगी तो उसकी सिटी बहार खड़े हम दोनों को स्पस्ट सुनाई दे रही थी, सिटी की आवाज सुन कर मेरी और संयम की नज़ारे आपस में टकराई, उसने शर्मा के अपनी नज़ारे झुका ली. थोड़ी देर तक उसकी सिटी की आवाज आ रही थी, जिस से पता चल रहा था की वो काफी देर से अपनी पेशाब रोके हुए थे. थोड़ी देर बाद वो बहार आयी, वो अपनी नज़ारे झुकाये हुए hi थी. फिर में अंदर गया. वो दोनों बहार कड़ी थी, दोनों एक दूसरे से नज़ारे मिलाने से कतरा रही थी. पर जब अंदर खड़े शिव के पेशाब करने की आवाज बहार आने लगी तो दोनों की नज़ारे एक दूसरे से टकराई, सिटी की आवाज तो नहीं थी पर पेशाब गिरने की आवाज जरूर आ रही थी, दोनों के चेहरे पर शर्म की मुस्कान आ गयी. मेरा भी ख़तम हो गया, अब बरी थी संयम की तो उसको तो कोई प्रॉब्लम थी नहीं तो हम दोनों बहार आ गए. आस पास कोई नहीं था, वैस्वी ने मेरे हाथ की उंगलिओ में अपनी उंगलिअ फसा ली और मेरे सामने देखते हुए मुस्कुराने लगी. मेने इससरए से पूछा की क्या हुआ, पर उसने ना में गर्दन हिलायी, पर वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. थोड़ी देर बाद जब संयम बहार आयी तो उसने मेरा हाथ छोड़ दिया. (संयम की निगाहो ने ये दृश्य देख लिया था, उसने देखा था की वैस्वी, शिव का हाथ पदाकडे कड़ी थी. उसे समाज नहीं आ रहा था की इन दोनों ने ऐसे क्यों हाथ पकड़ा था और उसके आते hi छोड़ क्यों दिया. वो अंदर से जलन के मरे सुलग रही थी. इनकी बढ़ती नजदीकियां उस से बर्दास्त नहीं हो रही थी.

वैस्वी : ऐसे हथकड़ी लगे हम अंदर सबके सामने कैसे जायेंगे, सब हमारी और hi देखते है, और ऊपर से यहाँ तो दूसरे भी लोग है.

शिव : एक काम करते है, हम दोनों साथ में चलते है और पाना हाथ पीछे रक्खेंगे और पीछे संयम चलेगी तो किसी को नहीं दिखेगा.

वैस्वी : हम्म्म्म. (हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर चलने लगे और संयम ठीक हमारे पीछे थी, तो किसी का ध्यान नहीं गया, वैसे भी हमारे ग्रुप में तो सबको पता hi था, हम कोने में एक जगह पर चले गए, में और वैस्वी साथ बैठे और संयम सामने. हर्ष और महेश भी हमे देख कर वही आ गए. संयम सामने से कड़ी हुई और हर्ष और महेश को जगह दी, क्यों की वह दो कुर्शी थी और दीवाल की और बेंच थी बैठने को तो शिव के साथ जा कर बेथ गयी, वैस्वी ने हैरानी से संयम को देखा, क्यों की उसे, उसके साथ आके बैठना चाहिए था, पर वो शिव के पास जा कर बैठी थी. वो कुछ न बोली, थोड़ी देर में खाना आ गया और पांचो इधर उधर की बाते करते हुए खाने लगे, फिर से हम सुब अपनी जगह पर बेथ गए, बस चलने लगी, रात का वक़्त था तो पीछे की एक लाइट को छोड़ कर सब लाइट बंद कर दी, अँधेरा हो गया था, और खाने की वजह से सब शांति से आंखे बंद किये हुए थे. वैस्वी ने फिर से मेरा हाथ पकड़ लिया. तवो शीटर बस थी तो हम दोनों साथ थे, और किसी को पता भी नहीं चल शक्ति था, वो मेरे कंधे पर अपना शिर रख कर बैठी थी, संयम को बेचैनी हो रही थी, उसने उन दनो की और देखा तो हलकी रौशनी में भी उसे पता चल गया की वैस्वी कैसे बैठी है. पता नहीं पर वो अंदर से जल रही थी. उसे लग रहा था की जैसे शिव पर उसी का अधिकार है. वो वैस्वी को शिव के नजदीक बर्दास्त hi नहीं कर प् रही थी. पर अभी वो कुछ नहीं कर शक्ति थी.

जब हम हमारे स्कूल पहुंचे तो वह सरे पेरेंट्स अपने अपने बच्चो को लेने आये हुए थे. सब के उतरने के बाद में वैस्वी और संयम उतरे, हमे देखते प्रिंसिपल हमारी और बढे और हमे ऑफिस में ले गए, वह पहले से hi वैस्वी के पापा और उसकी माँ बैठे हुए थे, हमे देखते hi उसके पापा हमारी और बढे, नजदीक पहुचेही उन्होंने देखा की हम दोनों हथकड़ी में है.

प्रकाशराओ : ये क्या है, कहा है teacher?(Varunsir जो नजदीक hi खड़े हुए the)Aisa ध्यान रखते हो, ऐसे कैसे ये हादसा हो गया, में छोडूंगा नहीं तुम लोगो को, में स्कूल पर केस करूँगा. और इससे क्यों हथकड़ी लगायी हुई है, और वो भी किसी लड़के के sath.(Uski माँ भी कड़ी हो कर अपनी बेटी के पास पहुंच गयी और उसे गले लगा लिया, वैस्वी फिर से रोने लगी)

प्रिंसिपल : सर, ये हमारी गलती नहीं है, हमने पुलिस को भी इन्फॉर्म कर दिया है, वो भी आते hi होंगे.

प्रकाशराओ : पर इससे हथकड़ी में क्यों रक्खा है, अभी के अभी खोलो उसे.

वरुणसीर : सर, इसकी चाबी नहीं है, इससे काटना पड़ेगा.

प्रकाशराओ : तो कटवाओ.

वरुणसीर : इतनी रात को कहा से कोई मिलेगा?

प्रकसराओ : वो में कुछ नहीं जनता, ऐसे किसी अनजान लड़के के साथ मेरी बेटी बंचि हुई है, खुलवाओ इससे.

भार्गवी : (अंदर आते hue)Issi अनजान लड़की की वजह से आपकी बेटी सही सलामत है.

प्रश्रव : (भार्गवी को देखते hue)Par ये हुआ hi क्यों? ये इनलोगो की hi गलती है.

भार्गवी : गलती किसी की भी नहीं है, कुछ जानवर जो समाज में खुले घूम रहे है, ये उनकी वजह से हुआ है, हमने पहले hi उनकी तलाश करनी सुरु करदी है, जल्द hi वो पकड़े जायेंगे. (भार्गवी मैडम को देख कर मुझे रहत हुई)

प्रकाशराओ : पहले मेरी बेटी की हथकड़ी खुलवाओ.

भार्गवी : हम प्रयास कर शक्ति है, पर हमे इन्हे वह ले जाना पड़ेगा और इसमें काफी टाइम लग शक्ति है, क्यों की अभी साडी दुकाने बंद हो गयी होगी, हमे ऐसे व्यक्ति को धुंध कर दुकान खुलवानी पड़ेगी और उसके बाद सब होगा, क्या आपकी बेटी तैयार है, क्यों की उसे देख कर तो लग रहा है की वो काफी थकी हुई है. (ये सच भी था, हम दोनों की हालत ख़राब थी, पिछली रात को भी ठीक से सोने को नहीं मिला था, अब उसका असर दिख रहा था, प्रकाशराओ ने अपनी बेटी को देखा)

वैस्वी : (अपनी मां को देखते hue)Me बहोत थक गयी हु मम्मी, मुझे सोना है.

प्रश्रव : पर फिर भी इन्हे अलग तो करना hi पड़ेगा, कैसे वो किसी अनजान लड़के के साथ रहेगी.

भार्गवी : में शिव को अच्छे से जानती हु, और रही बात आपकी बेटी की तो वो कल से उसके साथ है, पूछ लो अपनी बेटी से, क्या शिव ने उसके साथ कुछ गलत किया?

वैस्वी : नहीं पापा, उसने तो मुझे सब से बचाया है.

भार्गवी : देख लिया, प्रकाशराओ जी, फिर भी ऐसे ये दोनों नहीं रह शक्ति, में इन्हे अपने घर ले जाती हु, कल इनकी हथकड़ी खोल के इसे आपके घर पंहुचा दूंगी.

प्रकाशराओ : नहीं, मेरी बेटी कही नहीं जाएगी.

भार्गवी : तो फिर शिव को अपने साथ ले जाइये.

प्रकाशराओ समाज रहा था की वो अभी कुछ नहीं कर शक्ति, तो बिना मान के भी उसने रजामंदी दे दी, वो दोनों को कार में बिठा कर अपने घर की और निकल गया. (मेने भार्गवी मैडम को मेरे बारे में घर बताने के लिए बोल दिया था, और जयदा कुछ बताने से मन किया था, वैसे भी कैंप से आज तो आनेवाले थे नहीं तो कोई फ़िक्र नहीं थी)

हम सब वैस्वी के घर पहुंचे, में देख रहा था की वैस्वी बहोत शर्मा रही थी, अभी वो अपने hi maa-baap के सामने किसी लड़के के साथ जुडी हुई थी, ये सोच कर hi वो और शर्मा रही थी, हमदोनो गाड़ी से बहार निकल कर खड़े हो गए, प्रकाशराओ ने गाड़ी लॉक की और एक नजर हमारी और डाली और घर की और चले गए, उसकी मम्मी ने भी हमे देखा और अंदर आने का इस्सर किआ. हमदोनो साथ में चलते हुए घर में दाखिल हुए, प्रकाशराओ वही सोफे पर बैठा हुआ था. जैसे hi हम अंदर दाखिल हुए वो हमारी और देखने लगा, गाड़ी की आवाज से स्वर्ण और उसका पति आकाश भी वह आ गए थे, मुझे और वैस्वी को ऐसे बंधे देख कर वो भी आश्चर्य चकित थे.

आकाश : ये सब क्या है, और ये कोण hai?(Unka इस्सर मेरी और था, स्वर्ण मेरी और एक नजर दाल कर वैस्वी के पास कड़ी हो गयी और उसको दिलासा देने lagi)Aapne बताया था की किसी ने छोटी के साथ बदतमीजी करने की कोशिस की थी, तो इससे क्यों हथकड़ी पहनाई हुई है?

प्रकाशराओ : मेरा दिमाग मात छतो, पहले से hi मेरे दिमाग की नशे फैट रही है, मेने मन किआ था न की उसे ऐसे घर से बहार मात भेजो, पर नहीं अपने आशु दिखा कर चली गयी, अब पता चला बहार कैसे कैसे लोग hai(Wo वैस्वी को सुना रहे थे, वैस्वी की आँखों से आंसू निकलने लगे)

वैस्वी की माँ : अब जो हो गया सो हो गया, अब सोचो की आगे क्या करना है. आपने खाना भी नहीं खाया, खाना लगवाओ.

प्रकाशराओ : मेरी तो भूख hi मर गयी है, ये सब तुम्हारे चढ़ावे का नतीजा है संध्या.

संध्या : इसमें मेरी क्या गलती है, सभी अपने बच्चो को थोड़ी बहोत छूट देते है, क्या पूरी उम्र इससे घर में बिठाके रक्खोगे, अब बड़ी हो रही है तो दुनियादारी तो सीखनी hi पड़ेगी.

प्रकाशराओ : अभी क्या करना है वो भी बता दो.

संध्या : कहना क्या चाहते है आप?

प्रकाशराओ : ये इसको अपने साथ लटकाये घूम रही है तो क्या में इससे उसके साथ सोने दू?

आकाश : ये क्या कह रहे है आप पापा.

प्रकाशराओ : तो और क्या कहु, ये दोनों ऐसे बंधे हुए है तो सोयेंगे कैसे?

संध्या : बहु उनके साथ रहेगी, आप चिंता मात कीजिये, एक रात की hi तो बात है (स्वर्ण ko)Bahu, तुम सब वैस्वी के कमरे में hi जाओ.

स्वर्ण : जी मम्मी जी. (में सब शांति से सुन रहा था, उनकी उल्जन में भी समाज रहा था) चलो वैस्वी.

सब हमे जाता देख रहे थे, पर वो कुछ नहीं कर शक्ति थे.

आकाश : उस लड़के को क्यों वैस्वी के कमरे में भेज रहे हो पापा?

प्रकाशराओ : तो तुम क्या चाहते हो, में अभी कैसे उनकी हथकड़ी खुलवाओ?

आकाश : किसी को भी बुलवाइए, पर ऐसे कैसे छोटी को उसके साथ सोने दे शक्ति है.

संध्या : ये सब बाते पहले hi हो चुकी है, वो लड़का कल रात से उसके साथ है, उसी ने वैस्वी को बचाया है, कल रात वो दोनों अकेले hi थे, और बहु भी साथ में है, अब छोडो इन बातो को और अपने अपने कमरे में सो जाओ. (प्रकाशराओ पेअर पटकता हुआ अपने कमरे की और चला गया, आकाश भी चला गया)

हम तीनो वैस्वी के कमरे में आ गए, कमरा तो बहोत आलीशान था, डेस्क पर लैपटॉप था, टीवी भी थी, एक भी था, और कमर कई फर्नीचर से सजा हुआ था, रंग भी वाइट और पिंक का कॉम्बिनेशन था. अंदर जाते hi स्वर्ण ने एक चालू कर दिया और दरवाजा बंद कर दिया, वैस्वी शिर झुकाये हुए थी, स्वर्ण ने मेरी और देखा, मेने स्माइल दी तो वो भी मुस्कुरायी.

स्वर्ण : तुम दोनों को खाना खाना है?

शिव : हमने रस्ते में खा लिया था.

स्वर्ण : वैस्वी?

वैस्वी : नहीं भाभी, मुझे भी नहीं खाना.

स्वर्ण : ठीक है, तुम दोनों बैठो में कपडे बदल कर आती हु, वैसे तुम्हारे कपडे भी बहोत गंदे है, तुम्हे नहीं बदलना?

वैस्वी : (हथकड़ी दिखते hue)Iski वजह से कपडे नहीं निकल शक्ति भाभी.

स्वर्ण : ठीक है, में थोड़ी देर में आयी. (ये कह कर वो निकल गयी, वैस्वी नज़ारे झुकाये बैठी हुई थी)

शिव : क्या हुआ?

वैस्वी : पापा...

शिव : उन्हें तुम्हारी फ़िक्र है, इसलिए... हम भी क्या कर शक्ति है, बस आज रात की hi बात है.

वैस्वी : मुझे बाथरूम जाना है शिव. (उसने बड़ी सरलता से बात कही थी, जैसे ये सामान्य बात हो, और सच भी था, हम दोनों ने चौबीस घंटे में ये कितनी बार किआ था, उसके रूम में hi बाथरूम था, तो में दरवाजे पर रुका और उसने अपना काम निपटाया, वैसे hi मेने भी कर लिया और हम वापस आ कर बीएड पर बेथ गए, थोड़ी देर में एक पूरा गाउन पहने सवांरा वह आ गयी)

स्वर्ण : तुम दोनों ऐसे hi बैठे हो, सोना नहीं है क्या?

वैस्वी : आपका hi इंतजार कर रहे थे, कैसे सोयेंगे?

स्वर्ण : तुम दोनों बीएड पर सो जाओ, में वह सोफे पर सो जाती हु.

वैस्वी : ऐसे कैसे, बीएड पर काफी जगह है, हम तीनो सो सकते है.

स्वर्ण : ठीक है, तो शिव, किनारे पर सोयेगा, तुम बिच में और में तुम्हारे बाजु में.

वैस्वी : भाभी मुझे बिच में नीं नहीं आएगी.

स्वर्ण : वैसे hi सोना पड़ेगा, में शिव के साथ थोड़ी न सो सकती hu(Vaise तो उसका यही मान था पर वो अपनी नानन्द को तो नहीं कह शक्ति थी)

वैस्वी : उसकी आप चिंता मात करो, शिव बहोत अच्छा लड़का है.

स्वर्ण : है में जानती हु, पर फिर भी...

वैस्वी : आप शिव को कैसे जानती हो भाभी? (थोड़ी देर के लिए स्वर्ण के पशीने छूट गए)

स्वर्ण : अभी निचे बात हुई न की कल से तुम उसके साथ हो और फिर भी कह रही हो की वो अच्छा है मतलब तुम उसके साथ रहते हुए भी उसे अच्छा कह रही हो तो वो अच्छा hi होगा, इसीलिए मेने कहा की में जानती हु. (पता नहीं वो क्या बोल रही थी, पर कुछ तो बोलना था)

वैस्वी : आप उस और hi सो जाओ.

स्वर्ण : ठीक है तुम कहती हो तो सो जाती हु. (स्वर्ण मान hi मान बहोत खुस थी, उसको अपने मान की जो मिल रही थी)

नाईट लैंप को छोड़ कर बत्ती बजा दी और सब लेट गए. थोड़ी hi देर में वैस्वी ने मेरा हाथ पकड़ा, मेने उसकी और देखा तो वो मुस्कुरायी, में भी मुस्कुराया, अभी चौबीस घंटे भी नहीं हुए थे हमे ऐसे मिले हुए पर वो जैसे मुजमे खोटी जा रही थी, मेने उसका हाथ पकड़ लिया तो उसने मेरी और करवट ले ली, मुझे दर था की स्वर्ण भी साथ में hi सो रही है, मेने उसे इससरए से कहा भी पर वो कहा मान रही थी, उसने अपना चेहरा नजदीक खिसकाया और मुझे देखने लगी, मेने उसको इससरए से मन भी किआ पर वो नहीं मानी, और मेरे होठो के कबीर आने लगी, मेरे होठो पर हलके से उसने पप्पी दी, मेने फिर उसे मन किआ, तो वो भी समाज राइ थी की उसकी भाभी यही है तो वो मुस्कुरायी और फिर अपनी आंखे बंद कर दी. मेने स्वर्ण की और देखा तो उन्होंने भी मेरी और देखा, में मुस्कुराया तो वो भी मुस्कुरायी, में उसकी भावनाओ को समाज रहा था, तो मेने अपना हाथ उनके हाथ पर रख दिया, वो शर्माने लगी, हम दोनों थोड़ी देर ऐसे hi लेते रहे. में जनता था की वो क्या चाहती है, और सच कहु तो मेरा भी मान कर रहा था, में हलके हलके उनके हाथ को सहलाने लगा तो उन्होंने कोई विरोध न किआ, बस मुझे देख रही थी, मेरी धड़कने तेज चल रही थी, मेने आगे बढ़ने की सोची और मेरे हाथ को उनकी झंघ पर रख दिया और हलके हलके दबाने लगा, वो भी थोड़ी दर रही थी, उन्होंने थोड़ा ऊपर उठ कर वैस्वी को देखा जो आंखे बंद किये हुए थी, फिर भी अभी इतना रिस्क नहीं ले शक्ति थे. थोड़ी देर उनकी झंघ पर हाथ फेरने के बाद मेने उनकी छूट वाले भाग पर अपनी उंगलिओ से छुआ तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया, वो दर रही थी, पर में हलके हलके उनकी छूट को महसूस करने लगा, उनका भी विरोध काम होता गया और उन्होंने मेरा हाथ छोड़ दिया, में आराम से उनकी छूट के होठो को महसूस करते हुए उसे सेहला रहा था, मेरा लुंड पूरी तरह से उतेजित हो गया था, मेने वैस्वी की और देखा तो उसके हलके हलके खर्राटे सुनाई देने लगे थे, वो सो चुकी थी, मेने स्वर्ण का हाथ पकड़ा और अपने उभरे हुए लुंड पर रख दिया, वो ना में शिर हिलने लगी, पर मेने उनका हाथ मेरे लुंड पर hi रखे रक्खा. थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरी और करवट ली और फिर से ऊपर उठ कर वैस्वी को देखा, वो भी समाज गयी की वो सो चुकी है, उन्होंने मेरी आँखों में देखा तो मेने मेरे लुंड की और इस्सर किआ, वो शर्मा गयी पर मेरे लुंड को सेहला रही थी.

शिव : (फुसफुसाते hue)Bahar निकलना भाभी.

स्वर्ण : में तुम्हारी भाभी नहीं हु.

शिव : तो में क्या कहु?

स्वर्ण : स्वर्ण.

शिव : ठीक है स्वर्ण, उसे बहार निकालो न. (वो शर्मा रही थी, पर फिर उन्होंने मेरे पंत को खोलना सुरु किआ, एक हाथ से उन्हें नहीं फाय तो वो थोड़ी ऊपर उठी और दोनों हाथो से मेरे पंत को खोलने लगी, में उन्हें hi देख रहा था, वो बहोत शर्मा रही थी पर मेरी बात मान भी रही थी. उन्होंने पंत को नीचे खिसकाया) पूरा खोल दो. (उन्होंने एक बार मुझे देखा, फिर शरमाते हुए मेरा ुंडेरवेर भी निचे खिसका दिया, और मेरे लुंड को देखने लगी, मेरी उत्तेजना बढ़ रही थी, और मेरा लुंड भी ठुमके मर रहा tha)Kya हुआ? (उन्होंने न में शिर हिलाया, और एक बार फिर वैस्वी की और देख कर इत्मीनान किआ, में उनके गाल को सहलाया और उनके शिव को मेरे लुंड की और ले जाने लगा, वो बिना किसी विरोध के झुकने लगी, उनका ऐसा समर्पण मुझे और उत्तेजित कर रहा था, जब उनका चेहरा मेरे लुंड से टकराया तो मेरी आंखे बंद हो गयी, मेने उनके चेहरे को मेरे लुंड के साथ रगड़ा तो उन्होंने मेरी झंघ को कास के पकड़ लिया. में इस नज़ारे को देखना चाहता था तो मेने आंखे खोली और उनको देखने लगा, में उनका चेहरा मेरे लुंड पर रगड़ रहा था तो उनके चेहरे पर कामुकता छलक आयी थी, उनका गोरा चेहरा लाल हो गया था, मेने उनका चेहरा छोड़ दिया तो मेरी और देखने लगी, मेने है में इस्सर किआ तो वो शर्मा गयी, और खुद hi मेरे लुंड पर अपना चेहरा रगड़ने लगी, अब उनकी जीभ भी बहार निकल आयी थी और वो मेरे लुंड को छत रही थी, उनके चेहरे की मासूमियत देख मेरा लुंड और उछाल रहा था, ऐसी मासूम सी लड़की जब लुंड के साथ खेलती है तो उत्तेजना बढ़ जाती है. मेने अपना हाथ बढ़ा के उनके एक स्तन पर रक्खा और उसे हलके हलके दबाने लगा. मेने अपना हाथ अंदर घुसाने की कोशिस की, पर ठीक से नहीं जा रहा था, उन्होंने अपने गौण की रस्सी खोल दी पर अभी भी बराबर नहीं हो रहा था तो वो उठी और नज़ारे झुकाये hi उन्होंने ऊपर का गौण निकल दिया और साथ में अपनी ब्रा भी निकल दी, अब वो ऊपर से बिना बाह के एक कपडे में थी, गुलाबी कलर के कपडे से झक्ति उनकी चूचिया कमल लग रही थी, वो फिर से मेरे लुंड से खेलने लगी, मेने कपड़ा निचे से उठाया और नंगे चुके को थम लिया, उनके निप्पल को में मसल रहा था.

शिव : स्वर्ण (उन्होंने मेरी और dekkha)Muh में लो न (वो ना में शिर हिलने lagi)Please (उन्होंने मेरी और देखा और फिर शरमाते हुए नज़ारे झुकाई और वो भी झुकती चली गयी, और मेरे लुंड को पकड़ कर अपने मुँह में भरने लगी, उनके गरम मुँह का एहसास होते hi मेरी हलकी आह निकल ने लगी, उन्होंने मेरी और देखा, मेरे चेहरे की खुसी देख वो और शर्माने लगी पर लुंड चुस्ती रही. ज्यादा देर करना मुज से बर्दास्त नहीं हो रहा था, पर में उनकी छूट को देखना चाहता था, पर में अपनी जगह से नहीं उठ सकता tha)Swarna (उन्होंने मेरी और dekha)Muje तुम्हारी छूट देखनी है. (मेरे मुँह से सीधी बात सुन कर वो शर्मा गयी, और न में शिर हिलने lagi)Muje देखना है स्वर्ण. (वो भी कामाग्नि में जल रही थी, शर्म तो बहोत आ रही थी पर वो भी सब कुछ चाहती थी, नज़ारे झुकाये हुए hi उन्होंने अपनी पंतय निकली, पर फिर सिमट कर बैठी रही, मेने उनकी गोरी झांघो पर हाथ फेरा और kaha)Dikhao न (वो मेरी और नहीं देख रही थी पर फिर मेरे सामने अपनी टंगे फैलते हुए बैठने लगी, उनकी शर्म मेरी जान ले रही थी, हलके बालो से भरी हुई छूट मेरे सामने थी, वो दूसरी और देख रही थी, एक पर उनका खुला था पर दूसरा पेअर पूरा नहीं खोल पायी थी क्यों की मेरी वजह से वो आगे नहीं फैला शक्ति थी, मेने उनका पेअर पकड़ा और मेरी छाती पर ले गया, अब वो टंगे फैलाये अपनी कोहनी पर पीछे झुकी हुई थी, मेने उनकी छूट को छुआ तो वो कैंप गयी, छूट को छूने से पता चला की वो पहले से गीली है, मेने छूट के होठो को सहलाया और अंगूठे से पूरी दरार को रगड़ा, वो अपना मुँह दबाये आवाज न हो उसका प्रयास कर रही थी, में छूट को रगड़ते हुए अंगुष्ठे से छेड़ को कुरेदने लगा, पानी अपनी रफ़्तार से बहार निकल रहा था जिस से पूरी छूट भीगने लगी थी, में छूट के रास को पूरी छूट पर फैला रहा था और छूट के होठो को रगड़ रहा था, वो अपना मुँह दबाये आवाज रोकने में मसगुल थी. में उस प्यारी छूट को चूसना चाहता था पर मेने अपने आप को रोका क्यों की मेरे उठने से अगर गलती से हाथ खिंच गया तो वैस्वी जग शक्ति थी., मेने उनकी और हाथ बढ़ाया तो उन्होंने अपना हाथ मुझे दिया, मेने उन्हें मेरी और खिंचा, और उस और मेने करवट ले ली और अपने हाथ को पीछे hi रक्खा ताकि हथकड़ी खिंच न जाये. स्वर्ण भी मेरी और करवट लिए हुए थी पर में इस से ज्यादा नहीं कर शक्ति था क्यों की मेरा दाहिना हाथ किसी काम का नहीं tha.)Swarna, तम्हे hi उसे सही रह दिखानी होगी, (वो कुछ न बोली बस वैसे hi लेती rahi)Aapka मान नहीं है क्या, आप करना नहीं चाहती? (उन्होंने मेरी और देखा, और फिर नज़ारे झुका ली, पर फिर एक तंग ऊपर उठाते हुए अपनी छूट को मेरे लुंड की और खिसकाया, खुद hi अपनी छूट को एडजस्ट करते हुए मेरे लुंड को पकड़ कर अपनी छूट के छेड़ पर रख दिया. लुंड पर छूट के छेड़ को महसूस करते hi मेने अपनी कमर आगे बढ़ा दी और मेरा लुंड अंदर उतरने लगा, उन्होंने अपने मुँह को कास के दबा दिया, मेरा हाथ जो उनके निचे से निकल कर उनके पीछे था उस से मेने उनके कूल्हे पकड़ लिए और अपनी और खींचा तो लुंड आधे से ज्यादा अंदर चला गया, उन्होंने जोर से अपने मुँह को दबा दिया, में थोड़ी देर रुक गया और उनकी छूट को लुंड के हिसाब से एडजस्ट होने दिया, थोड़ी देर बाद उन्होंने अपना मुँह छोड़ diya)Swarna.

स्वर्ण : (बिना मेरी और dekhe)Hmmmmm.

शिव : मेरी और देखो न.

स्वर्ण : मुझे शर्म आ रही है शिव.

शिव : पर मुझे आपकी वो शर्म से भरी आँखे बहोत उत्तेजित कर रही है, आप खुस तो है न, आप करना चाहती थी न?

स्वर्ण : में खुस हु शिव, बस शर्म आ रही है.

शिव : (मेने हलके हलके धक्के लगाने सुरु कर diye)Hum सब तो कर चुके है, अब कैसी शर्म.

स्वर्ण : पता नहीं, पर बहोत शर्म आती है.

शिव : और मज़ा?

स्वर्ण :(मुस्कुराते hue)Wo भी आ रहा है. (में भी मुस्कुराया और उन्हें ऐसे hi थोड़ी देर छोड़ता रहा, साइड से करने में इतनी गति नहीं मिल रही थी, और उन्हें भी ये महसूस हो रहा था, उन्होंने शरमाते हुए kaha)Me सही से निचे लेट जाती हु. (में मुस्कुराया तो वो फिर शर्मा के अपनी नज़ारे चुराने लगी, मेने उन्हें छोड़ा और ऊपर उठने लगा, मेरा दाहिना हाथ बंधा था तो सीधे तो हम लेट नहीं सकते थे, वो पलंग की दूसरी और अपना मुँह कर के लेट गयी पर अपनी टंगे आपस में सताए हुए थी, मुझे उनकी शर्म बहोत पसंद थी, मेने उनके पैरो को फैलाया तो उन्होंने फैला भी दिए, में इस तरह से रहा ताकि मेरा हाथ न खींचे, वो शर्माती हुई और निचे खिसकी और मेरे लुंड के हिसाब से एडजस्ट हो गयी, उनको ऐसा करते देख में मुस्कुराया तो वो शर्मा गयी, मेने अपने लुंड को छूट पर लगाया और अंदर दाल दिया, और ज्यादा बीएड हिले नहीं उस तरह से उनकी छूट में लुंड अंदर बहार करने लगा, उनके ऊपर के वस्त्र को मेने ऊपर खिसका दिया जिस से उनके स्तन नंगे हो गए और उन्हें चूसते हुए में धक्के लगाने लगा, वो मेरा शिर सहलाते हुए चुद रही थी और साथ में अपने एक हाथ से अपना मुँह दबाये अपनी आवाज रोक रही थी. धीरे धीरे छोड़ रहा था तो टाइम भी बहोत लग रहा था, अपने निचे लेताये हुए में करीब आधे घंटे तक उन्हें छोड़ता रहा, वो दो बार झाड़ गयी थी)

शिव : अच्छा लग रहा है स्वर्ण?

स्वर्ण : है शिव, तुम्हारे साथ एक बार किआ था पर हर रात में तुम्हे सोचती थी, और जब से पता चला था की में माँ बन ने वाली हु में तुमसे मिलने के लिए तड़प रही थी, आज किस्मत से तुम मुझे मिल गए, में तुम्हारा सुक्रिया भी करना चाहती थी की तुमने मुझे माँ बन ने का सुख दिया है, में अपने पति से भी प्यार करती हु पर तुमसे भी करने लगी हु शिव, में तुम्हे भी वो हक़ दे चुकी हो जो मेने मेरे पति को दिया है, में तुम्हारी हो चुकी हु शिव, बस थोड़ी शर्म आती है पर में तुम्हे कभी मन नहीं करुँगी, मेरा फिर से होनेवाला है शिव, शठ ऐसा सिर्फ तुम्हारे साथ hi होता है, की में इतनी बार झाड़ जाती हु. इतना मज़ा सिर्फ तुम hi मुझे दे पाए हो, में कितना याद करती थी तुम्हे शहहहहह.

शिव : आहिस्ता ,वो बाजु में सो रही है.

स्वर्ण : मुझसे रहा नहीं जा रहा शिव, मुझे कभी ऐसी जगह ले जाओ जहा कोई रोक न हो, में खुल कर तुम्हे अपना प्यार दिखा सकू, में बता सकू की मुझे तुम्हारे साथ कितना मज़ा आता है.

शिव : जरूर ले चलूँगा. अभी मेरा भी निकलनेवाला है.

स्वर्ण : अंदर hi करो शिव, मुझे वो बहोत अच्छा लगता है, में संतुस्ट हो जाती हु, तुम और तुम्हारा वो दोनों मुझे संतुस्ती से भर देते है, वो भी मुझे खुस रखते है पर तुम बहोत ज्यादा खुसी दे शक्ति हो. एक औरत के नाते मुझे तुम बहोत पसंद हो शिव, में हमेसा तुम्हारे साथ ऐसे hi रहना चाहती हु, मुझसे मिलते रहा करो. (मेरी गति से उन्हें पता चल गया की में झाड़नेवाला hu)Shhhhh भर दो शिव शहहहहह भर दो मुझे, तृप्त कर दो shhhhhhh(Mera गरम गरम लावा उनकी छूट में भरने laga)Shhhhhhh तुम्हारे स्पर्म ने hi मुझे ये सुख दिया है शिव शह्ह्ह्हह्ह कितना अच्छा लग रहा है, शह्ह्ह्हह्ह.
 
अपडेट 124

स्वर्ण की छूट से मेने लुंड बहार निकला तो साथ में बहोत सारा वीर्य बहार निकल आया, जिसे वो अपनी आंखे बंद किये हुए महसूस कर रही थी. थोड़ी देर बाद उन्होंने आँखे खोल कर मुझे देखा और मुस्कुरायी, और मुझे अपनी और खिंच कर मुझे किश करने लगी, में भी उन्हें किश करते हुए उनके स्तन दबाने लगा, हमारी ये किश कुछ ज्यादा hi चली और मेरा लुंड जो थोड़ा ढीला हुआ था फिर कड़क हो गया, (अपनी छूट पर टकराते कड़क लुंड को महसूस कर के स्वर्ण फिर से गरम होने लगी और उसने लुंड को पकड़ कर अपनी छूट पर घिसना सुरु कर दिया, इतनी बार झड़ने के बाद भी उसके शरीर को वो लुंड फिर चाहिए था, उसने लुंड को अपनी छूट के छेड़ पर टिका दिया और शिव की कमर पकड़ कर अपनी और खींचे लगी जिस से लुंड फिर से उसकी छूट में सामने लगा, ये एहसास कुछ खर hi था, शायद उसके बड़े आकर के कारन उसे इतना मज़ा आता था, और वो इस मौके को गवाना नहीं चाहती थी, वैसे भी उसके ऊपर बहोत सरे रेस्ट्रिक्शन थे जिस से ऐसे मौके उसे मिलना ज्यादा संभव नहीं था तो वो इस मौके का भरपूर फायदा उठाना चाहती थी, और शिव का शरीर भी उसकी ख्वाहिशो को पूरा करने में एकदम सक्षम था, वो फिर से उस बलिस्त शरीर की आगोश में समां गयी और फिर से उसके द्वारा अपनी चुदाई का आनंद लेने लगी, पास में hi उसकी नानन्द थी पर वो कोई भी रिस्क लेने को तैयार थी, शिव ने भी उसे अपनी ताकत से निचोड़ दिया, फिरसे वो एक घंटे तक उसके निचे पिसती रही और कई बार अपने शरीर से अमृत धरा बहा कर संतुस्ट होती रही, आखिरकार फिर से उसकी छूट की गेहराइओ में वो गरम गरम तरल भर गया, उसने शिव को पूरी तरह अपनी बाहोंमे भर कर उसके लुंड को अपनी गेहराइओ में पंहुचा दिया था. आखिर कर वो पूरी तरह से संतुस्ट हो गयी. फिर से वो शिव को किश करने लगी और फिर से शिव का वो जादुई डंडा खड़ा हो कर उसकी छूट पर ठोकर मरने लगा, वो आश्चर्य से शिव को देखते हुए बोली.

स्वर्ण : तुम थकते नहीं हो शिव? (फरियाद से ज्यादा उसके स्वर में प्रसंसा थी, में मुस्कुराया)

शिव : क्यों, आप थक गयी?

स्वर्ण : नहीं शिव, पर में जानती हु की वैस्वी की तरह तुम भी कल से थके हुए हो, में खुदगर्ज हो गयी थी और इस सुख को पाने से अपने आपको रोक नहीं पायी, पर अब तुम्हे आराम करना चाहिए. मुझे बाथरूम भी जाना है.

शिव : जाना तो मुझे भी है.

स्वर्ण : तुम कैसे जा शक्ति हो, तुम तो वैस्वी के साथ बंधे हुए हो.

शिव : में जनता हु, पर इससे साफ़ भी करना है और पेशाब भी लगी है.

स्वर्ण : तुम दोनों कल से बंधे हुए हो, तो फिर ये सब कैसे करते थे?

शिव : क्या कर शक्ति थे हम.

स्वर्ण : मतलब, एक दूसरे के सामने hi? (स्वर्ण को आश्चर्य हुआ)

शिव : हम दोनों अपनी अपनी आंखे बंद कर लेते थे.

स्वर्ण : (मुस्कुराते hue)Tabhi ये कह रही थी की तुम अच्छे हो, अभी उठो मुझे बाथरूम जाना है.

शिव : और में?

स्वर्ण : करती हु कुछ. (कहते हुए वो उठी और बाथरूम की और जाने लगी, मेने देखा तो वो लेहरके चल रही थी और उनके कूल्हे कामुकता से हिल रहे थे, जिन्हे देख कर मेरा लुंड सच में ठुमके मर रहा था, मेने लुंड को पकड़ा और सहलाने लगा) (स्वर्ण को क्या हुआ जो वो रुकी और पीछे मुद कर देखने लगी, उसके अनुमान के मुताबिक hi शिव उसके कूल्हों को देख रहा था, उसकी नजर अपने लुंड को सहलाते शिव पर पड़ी तो वो शर्मा के मुस्कुराने लगी, ये भी एक संतुस्ती थी की उसका मर्द उसके प्रति आकर्षित है, ये एक स्त्री को बहोत सुकून पहुँचता है, वो मुस्कुराते हुए बाथरूम में चली गयी, अपनी छूट से टपक ते वीर्य को देख वो शर्माने लगी, उसे शिव पर बहोत प्यार आ रहा था, पेशाब करने के बाद वह पड़ी एक छोटी दोल को ले कर वो बहार आयी. शिव के पास पहुंच कर

स्वर्ण : लो, तुम इसमें कर लो. (वो दोल शिव को दे कर घूम गयी)

शिव : (अब में लड़कीओ से बहोत खुलने लगा था, और मुझे इन सब में मजा भी आता था तो मेने kaha)Aise क्यों घूम गयी, ये दोल पकड़ो.

स्वर्ण : तुम खुद कर शक्ति हो शिव. (उन्होंने बिना पीछे मुड़े कहा, हलाकि वो निचे से नंगी hi थी और उनके मस्त कूल्हे अपना जलवा बिखेर रहे थे)

शिव : है, में कर शक्ति हु पर आप hi पकड़ो, और ये मत कहना की शर्म आ रही है. (शिव ने इतने हक़ से कहा था की वो मन नहीं कर पायी, और वो शरमाते हुए घूमी और दोल को पकड़ कर बेथ गयी, उसने शिव को देखा तो उसकी मुस्कराहट देख वो शर्माने लगी, ऐसा तो उसने कभी अपने पति के साथ भी नहीं किआ था, वो शिव को मूत ते हुए देखनेवाली थी, आज सिर्फ दूसरी बार hi था जब वो उसके साथ इस अवस्था में थी, पर वो उसकी किसी भी बात को मन नहीं कर रही थी, हाथ कड़ी का ध्यान रखते हुए शिव अपने घुटनो पर बेथ गया, उसने दोल को उसके लुंड के निचे सेट कर दिया, वो शर्मा भी रही thi)(Muje भी पता नहीं क्या क्या सूज रहा था, मेने kaha)Use पकड़ो वर्ण कही बहार न होने लगे.

स्वर्ण : (शरमाते हुए) पकड़ा तो है.

शिव : दोल नहीं, मेरा लुंड पकड़ो, वर्ण बहार सब गिला हो जायेगा. (वो जानती थी की शिव उसे जान बुज कर परेशान कर रहा है, पर उसका दिल भी ऐसी हरकतों से खुस हो रहा था, उसने हिचकिचाते हुए लुक को पकड़ा और दोल के अंदर सिदा पकड़ के रक्खा, उसे इतनी शर्म आ रही थी की वो अपनी नज़ारे झुका लेती थी पर फिर भी बार बार तिरछी नजरो से शिव के लुंड को देख भी रही थी, अचानक से उसके अंदर से मूत निकलना सुरु हो गया, वो पहली बार किसी मर्द को मूत ते हुए देख रही थी, और वो भी उसका वो लुंड उसके हाथ में था, उसकी छूट में फिर से पानी आना सुरु हो गया, वो लुंड से निकलते पेशाब को बड़े गौर से देख रही थी, ऐसा कुछ भी नया नहीं था, पर एक अजीब तरह की खुसी उसे मिल रही थी, जब शिव की आखरी बून्द भी टपक गयी तो उसने दोल साइड में रक्खी और वह पड़े अपने गाउन से उसने शिव के लुंड को पोछ कर साफ़ किआ, कभी कभी वो शिव को देख रही थी, और उसकी मुस्कराहट से वो शर्मा भी रही थी, पर शिव से इतनी नजदीकियां उसे बहोत अच्छी भी लग रही थी. वो गयी और सब बाथरूम में फेंक कर वापस आ गयी, शिव अपना पंत ऊपर खींच कर बंद करने की कोशिस कर रहा था, उसने उसकी मदद की और लुंड को पकड़ कर अंदर डालना चाहा, पर उसके छूने से लुंड कड़क हो चूका था, तो अंदर नहीं जा रहा था.)

स्वर्ण : ये तो अंदर नहीं जा रहा शिव.

शिव : आपके छूने से ऐसा हो गया है, थोड़ी देर बाद वो शांत हो जायेगा तो में अंदर कर दूंगा, चलिए अब सोते है.

स्वर्ण : ठीक hai,(Unhone कपडे पहने और फिर से वो मेरी बगल में लेट गयी, पर इस बार तकिये की बजाये मेरी बाह पर hi लेट गयी)

थकावट की वजह से हम कब सो गए हमे पता hi नहीं चला. में भी लुंड बहार रक्खे hi सो गया.

रात भर गहरी नीं में सोने के बाद सुबह फिर से पेशाब के प्रेसर की वजह से वैस्वी की नींद खुल गयी. वो आधी नीं में hi थी, वो कड़ी होने लगी की उसका हाथ कही बंधा था, उसने देखा तो उसका हाथ शिव से बंधा हुआ था, अपने हाथ को बंधा हुआ देख उसे याद आ गया की वो किस परिस्थितिमे है, उसकी नींद उड़ गयी और वो पूरी तरह से होस में आ गयी. वो तो शिव से बंधी हुई थी, वो सोचने लगी की अब क्या करे, तभी उसकी नजर शिव की बगल में लेती आपै भाभी पर गयी, वो शिव से लिपट कर सो रही थी और शिव ने भी उसे अपनी आगोश में लिया हुआ था, उसको एक झटका लगा, भाभी ऐसे कैसे सो रही है.

वैस्वी :(मान में) ये क्या, भाभी शिव के साथ ऐसे क्यों सो रही है, भाभी तो शिव को जानती भी नहीं, फिर कैसे वो उसके साथ ऐसे सो रही है, (उसका दिमाग हिल गया था, उसे समाज नहीं आ रहा था, अपने दिमाग में तर्क वितर्क करने पर उसके दिमाग ने hi जवाब diya)Ho शक्ति है की ऐसा नींद में हो गया हो, है यही हो शक्ति है, भाभी को भैया के साथ सोने की आदत है तो नींद में शिव को भैया समाज कर ऐसे सो रही hai(Usko यही सच लगा, क्यों की उसका दिमाग शिव और अपनी भाभी के बिच किसी भी प्रकार के रिलेशन नहीं सोच प् रहा था, वैसे भी वो अपनी भाभी को जानती थी, वो ज्यादातर घर में hi रहती थी और व्यव्हार से एकदम सरल और बहोत अच्छी थी. तभी उसकी नजर शिव के बहार झाकते लुंड पर पड़ी, सुबह की उत्तेजना के कारन वो किसी हद तक कड़क था, उसे देखते hi उसकी सांसे चढ़ने lagi)Ye क्या है (वो अपने जीवन में पहली बार किसी मर्द के अंग को देख रही थी, वो भी इतने नजदीक से, उसकी सांसे तेज होने लगी, उसकी निगाहे उस अंग पर चिपक सी गयी, उसकी छूट के अंदर कुछ होने लगा, वो समाज नहीं प् रही थी की उसे क्या हो रहा है, उसने डरके मरे एक बार शिव के चेहरे को देखा, जो नींद में था, उसने भाभी को देखा, जो भी गहरी नींद में थी, उसे समाज नहीं आ रहा था की वो क्या करे, उसे ये भी दर लग रहा था की कही उसकी भाभी जाग गयी और शिव को इस हालत में देखा तो क्या होगा, वो दुविधा में थी पर फिर उसकी नजर उस मरदाना अंग पर चिपक गयी, अपनी उखड़ती सांसो के साथ वो उसको देख रही थी. थोड़ी देर वो बस ऐसे hi बैठी रही, पर उसका दिल कुछ और कह रहा था, उसको उस अंग को अच्छे से देखने की लालसा जगी, उसने एक बार दोनों को देखा, जब उसे इत्मीनान हुआ तो वो डरते हुए उस अंग के थोड़ा नजदीक गयी, और नजदीक गयी अब वो करीब पांच छे इंच की दुरी पर hi थी, वो गौर से उस अंग को देखने लगी, पता नहीं क्या समोहन था उस अंग में, उसके शरीर में एक अजीब तरह की हलचल हो रही थी, उसकी झांघो के बिच उसे चिकनाहट महसूस होने लगी, वो इस एहसास से अनजान थी, आज पहली बार उसको ऐसा कुछ महसूस हो रहा था, वो अपनी सांसो को सँभालने की कोशिस कर रही थी, थोड़ी देर तक वो उस अंग को बड़े गौर से देख रही थी, पता नहीं क्या जादू था की वो अपनी निगाहे हटा hi नहीं प् रही थी, उसका दिल कर रहा था की एक बार उसे छू कर देखे, ये सोच ते hi उसकी सांसे बे काबू होने लगी, उसने एक बार शिव की और देखा, डरते डरते वो अपना हाथ बढ़ने लगी पर उसको दर लग रहा था, उसका हाथ एक इंच की दुरी पर रुक गया, वो नक्की नहीं कर प् रही थी की छुए की न छुए, उसने अपनी उंगलिओ से मुठ्ठी बंद कर दी और अपनी उंगलिओ को मसलने लगी, पर उसके अंदर से एक बार छू के देखने की तीव्र इच्छा हो रही थी, उसने फिर अपना हाथ खोला और हलके से उस अंग को छुआ, छूटे hi जैसे उसे करंट लगा और उसने अपना हाथ हटा दिया. अजीब कस्मकस चल रही थी, उसे समाज नहीं आ रहा था की उसे वो इतना अच्छा क्यों लग रहा था, अपनी हिम्मत को फिर से उसने बटोरा और फिर से उसने उस अंग को स्पर्श किआ, इस बार उसने अपनी उंगलिअ हटाई नहीं, उस अंग की गर्माहट उसकी उंगलिओ पर महसूस हो रही थी, उसने और हिम्मत दिखते हुए, उस अंग को पूरी तरह पकड़ लिया पर हलके हाथो से, उसकी धड़कन राजधानी से भी तेज चल रही थी. और तो क्या करना है उसको पता नहीं था तो वो बस उसे पकड़ कर बैठी रही और उसको महसूस कर रही थी. अचानक अंग ने झटका मारा तो वो पूरी तरह से दर गयी और अपने बिस्तर पर पीछे की और गिरते गिरते बची, वो हांफ रही थी, बड़ी मुश्किल से उसने अपने आप को संभाला. उसने शिव को उठाने की सोची, पर अगर शिव उठा तो उसे भी पता चल जायेगा की उसका वो अंग बहार है और मेने देखा होगा ऐसा भी उसे लगेगा, वो ऐसा नहीं चाहती थी, इस लिए उसने एक चद्दर को उसके ऊपर दाल दिया.)

वैस्वी : (उसको हिलाते hue)Shiiiiv. (थोड़ी देर हिलने के बाद शिव ने आंखे खोली, वो भी गहरी नींद में था तो पहले उसे भी कुछ समाज नै आया, उसने वैस्वी को देखा फिर अपनी बगल में लेती स्वर्ण को देखा, वो हड़बड़ा गया, वो मान में सोचने लगा की वैस्वी ने उसे और स्वर्ण को देख लिया है, पर वैस्वी उसे शांत रहने का इस्सर कर रही थी, उसे कुछ समाज नहीं आ रहा था, उसने वैस्वी की और सवालिए नजरो से देखा तो उसने अपनी आखरी ऊँगली से पेशाब का इस्सर किआ, शिव का दिमाग अब काम पर लग गया था, उसने है में इस्सर किआ, आहिस्ता से अपनी बगल में लेती स्वर्ण के निचे से हाथ निकला और बेथ गया.)

(मेरी समाज में नहीं आ रहा था की अब में वैस्वी को क्या समझाऊंगा, पर अब में क्या कर शक्ति था, में खड़ा होने लगा, मेने अपने ऊपर की चद्दर हटाई तो मेरा लुंड बहार था, मुझे याद आ गया की कल रात को उसे अंदर किये बिना hi में सो गया था, मेने फ़ौरन वैस्वी की और देखा तो वो दूसरी और देख रही थी, मेने फिर से चादर ढँक दी. हड़बड़ाते हुए मेने कहा)

शिव : एक मिनट...

वैस्वी : (दूसरी और देखते हुए hi)Hmmmmm. (वो जानती थी पर अनजान बन ने का नाटक kia)(Mene जैसे तैसे लुंड को अंदर करना छः, और चैन बंद करने के लिए दूसरे हाथ का भी उपयोग किआ जिस से वैस्वी का हाथ भी थोड़ा मेरी और खिंच गया, पर अच्छी बात ये थी की उसने देखा नहीं, मुझे तो पता hi नहीं था की उसे पता है, मेने अंदर करने के बाद कहा)

शिव : चलो. (में बाथरूम के बहार रुका, और उसके अंदर जाने का इंतजार करने लगा, पर वो वही दरवाजे के पास hi कड़ी thi)Kya हुआ, जाओ.

वैस्वी : Wo...toilet... (अब यहाँ वो पेड़ भी नहीं था जो कल हमारे बिच में था, पर अब में और ज्यादा कुछ बढ़ावा नहीं देना चाहता था, में वैस्वी की फीलिंग्स जनता था, तो मेने दुरी बनाये रखने का hi फैसला किआ)

शिव : ठीक है, चलो में आंखे बंद कर लेता हु. (मेने आंखे बंद कर दी, सिर्फ मेरे कानो में आवाजे hi आ रही थी, भले मेरी आंखे बंद थी पर आवाजों से में अंदाजा लगा शक्ति था की वो क्या कर रही है, इस बार मेने आंखे बंद किये हुए दूसरी और hi मुँह घुमा लिया था ताकि उस और नजर hi न जाये. करीब दस मिनट बाद उसने अपना काम निपटा दिया, अपने कपडे पहन ने के बाद वो बोली)

वैस्वी : तुम भी फ्रेश हो जाओ, सबके जागने से पहले, फिर मौका मिले न मिले. (मुझे उसकी बात सही लगी, में भी अपने काम में लग गया, मुझे लग रहा था की वैस्वी देख रही है तो मेने उसकी और देखा और वो मुझे देखते हुए पकड़ी गयी)

शिव : क्या देख रही हो, शर्म नहीं आती?

वैस्वी : (हड़बड़ाते hue)Kkk कुछ nahi(Fir संभल kar)kyu तुम भी तो मुझे देख रहे थे. (इस बार मेने कुछ भी नहीं देखा था)

शिव : मेने कुछ भी नहीं देखा (मेने मक्कमता से कहा)

वैस्वी : कल तो देख रहे थे न.

शिव : तो क्या बदला ले रही हो?

वैस्वी : ऐसा hi समाज लो. तुम्हे भी तो पता चले की जब को तुम्हारी और इन हालातो में देखता है तो कैसा लगता है.

शिव : मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, तुम्हे जो देखना है देखो.

वैस्वी : है पता चल गया है मुझे, एक नंबर के बेशर्म हो, जितने भोले दीखते हो उस से एकदम उलट हो. (थोड़ी देर में मेने भी अपना काम निपटा दिया, और में बहार जाने लगा पर वो अपनी जगह से नहीं हिली, उसकी और देखते हुए)

शिव : क्या हुआ, चलो. (वो बस मुझे देख रही थी, में इसका मतलब समाज रहा था पर में वो नहीं चाहता था, तो अनजान बनते hue)Chalo, बहार नहीं जाना क्या? (उसने ना में गर्दन hilayi)Tumhari भाभी जाग जाएगी, वो क्या सोचेगी?

वैस्वी : (भाभी का याद आते hi)Wo तुम्हारे साथ ऐसे क्यों सो रही थी?

शिव : (अब में क्या जवाब deta)Muje क्या पता? में तो सो रहा था.

वैस्वी : क्या तुम्हे नहीं पता था?

शिव : नहीं (मेने झूठ बोलना hi बेहतर समजा) अब चलो.

वैस्वी : (मेरे नजदीक आते हुए वो मुज से पूरी तरह से सात के कड़ी हो gayi)Thodi देर रुको न.

शिव : नहीं, चलो, मेने उसका हाथ पकड़ा और बहार ले आया.

वैस्वी : (नाराजगी se)tum बहोत बुरे हो.

शिव : जनता हु, अब अपनी भाभी को उठाओ. (वो नाराजगी से मुझे देख रही थी, फिर जा के स्वर्ण को उठाने लगी, जैसे hi वो जगी उसकी नजर हम दोनों पर पड़ी)

स्वर्ण : क्या हुआ?

वैस्वी : कुछ नहीं, बस आपको जगा रही थी, इससे बहोत जल्दी है जाने की.

स्वर्ण : क्या हुआ शिव?

शिव : कुछ नहीं, ये तो बस ऐसे hi कह रही है, वैसे भी सुबह के 7 बज रहे है, अब सब उठेंगे तो मेने सोचा की हम भी तैयार हो जाये.

स्वर्ण : हम्म्म, तुम दोनों ब्रश वृष कर लो में चाय नास्ता बनती हु.

वैस्वी : भाभी आपको पता है आप शिव को भैया सामान के सो रही थी.

स्वर्ण : (अंदर तक हिल gayi)Kkk क्या मतलब?

वैस्वी : आप दर क्यों रही हो, में जानती हु की वो सब अनजाने में हुआ होगा, नींद में आपको लगा होगा की भैया है तो आप शिव से लिपट कर सो रही थी. (मेने और स्वर्ण ने एक दूसरे को देखा, वैसे भी वैस्वी ने खुद हमे रास्ता दिखा दिया था तो स्वर्ण थोड़ी संभल गयी)

स्वर्ण : ओह, ऐसा हुआ था? सॉरी, शिव शायद नींद में ऐसा हो गया होगा. (वैस्वी ko)Tum ऐसा किसी को बताना मात.

वैस्वी : में पागल थोड़ी न हु जो ऐसा कुछ बताउंगी.

वैस्वी की नादानी कहो या अच्छाई, पर हम दोनों बल बल बच गए थे, वैसे भी कहावत है न की सावन के अंधे को हरा hi नजर आता है, इस कहावत को हम ऐसे भी समाज सकते है की अगर हमारे मान में गंडकी है तो सामने कितना भी अच्छा हो हमे उसमे भी गंडकी hi नजर आती है और अगर हम अच्छे है हमारी सोच अच्छी है तो अगर सामने कुछ गलत भी दिख जाये तो उसमे भी हम अच्छी hi देखते है, वैस्वी अच्छी थी तो उसे सब अच्छा hi दिख रहा था, वैसे भी हमने कोई पाप नहीं किआ था, समाज के बनाये हुए नियमो में ये पाप था पर कुदरत के नियम अनुसार ये महज एक प्यार था, और ये समाज के बनाये नियमो का hi परिणाम था, क्यों की समाज hi बिना बच्चो की स्त्री को चैन से रहने नहीं देता, तभी वो अपने कदम ऐसे रास्तो पर बढ़ने को मजबूर हो जाती है.

में और वैस्वी निचे सोफे पर दुरी बनाये बैठे हुए थे. उसकी मम्मी हमसे बात कर रही थी की तभी प्रकाशराओ भी आ गए. उन्होंने बड़ी बेरुखी से मेरी और देखा. मेने भी बड़ी बेफिक्री से उनसे निगाहे हटा दी.

प्रकाशराओ : (बैठते हुए, अपनी पत्नी se)Sab ठीक है? (कल रात इन दोनों के बिच काफी बात चित हुई थी, प्रकाशराओ को अपनी बेटी की चिंता नहीं थी पर अपनी इज्जत की चिंता थी, और वो यही जान न चाहता था, उसने अपनी पत्नी को ध्यान रखने को कहा था, और जहा तक संध्या ने महसूस किआ था सब ठीक hi था, उसे यकीं था की उसकी बेटी अभी तक सही सलामत hi है)

संध्या : जी, सब ठीक hi है, बहु उनके साथ hi थी.

प्रकाशराओ : (अपने फ़ोन से किसी को फ़ोन लगाने laga)Hello, में प्रकाशराओ बोल रहा हु, ये हथकड़ी कब तक निकलेगी (सामने से कोई बात कर रहा tha)Thik है, जल्दी से इस मुसीबत से पीछा छुड़वाओ. (पता नहीं वो मुझे मुसीबत कह रहे थे की इन परिस्थितिओ को, फ़ोन रखने के बाद) अभी 9 बजे पुलिस आएगी और वो इनदोनो को अपने साथ ले जाएगी, मुझे काम है तो मुझे निकलना है, इनको अपनी गाड़ी में hi भेजना ताकि ये जांझल से छुटकारा पाने के बाद वैस्वी को घर ले आये. बहु या तुम साथ में चली जाना.

संधुआ : जी.

प्रकाशराओ : (वैस्वी se)Ab आईन्दा से कभी मेरे सामने ऐसे कही भी जाने की कोई भी बात मात करना सामजी?

वैस्वी : (अपने पापा की दन्त सुन कर उसकी आँखों में आंसू आ gaye)Ji पापा.

शिव : गलती उनलोगो की और सजा आप वैस्वी को दे रहे है?

प्रकाशराओ : तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई, हमारे मामले में बोलने की.

शिव : जो गलत है उसे गलत कहने में मुझे कोई दर नहीं लगता, वैस्वी एक बहादुर लड़की है, उसने सब का डट कर सामना किआ था, जब में वह पंहुचा तो मेने देखा था की कैसे वो उन सब से अकेले लड़ रही थी, अपनी बेटी को ऐसे घर में बदन करने की बजाये उसे इस काबिल बनाओ की वो अपनी रक्षा खुद कर शेक, और ऐसे हादसों की वजह से आप अपनी बेटी की आज़ादी छिनलो ये कहा का इंसाफ है, गलत वो लोग थे, गलती उनकी थी, उनके अंदर हैवान थे, उनकी सोच गन्दी थी, तो अगर सजा देनी है तो उनको दो.

प्रकाशराओ : इ लड़के, मुझे क्या करना है मुझे पता है, मुझे तुम्हारी सलाह की जरुरत नहीं है, लड़कीओ को कैसे रखना है हमे तुमसे सिखने की जरुरत नहीं है, तुम जैसे अनाथो को क्या पता होगा की घर की इज्जत क्या होती है?

शिव : अगर पता न होता तो मेने आपकी बेटी को बचाया नहीं होता, और दो दिन से ये मेरे साथ ऐसे hi बंधी हुई है, जो अभी अपनी पत्नी से पूछ रहे थे न की सब ठीक है की नहीं, तो में खुद जवाब देता हु, आपकी बेटी पूरी तरह से सुरक्षित और सलामत है, आज तो में आपके घर में था, पर कल वो मेरे साथ अकेली hi थी, दुनिया में सब एक जैसे नहीं होते, आपको भले hi इंसानो की कदर न हो पर मुझे है, मेरे लिए सब की इज्जत मायने रखती है चाहे फिर वो लड़की हो या लड़का. इज्जत का मतलब शरीर नहीं होता, कल से में देख रहा हु, क्या आपने अपनी बेटी को एक बार भी पूछा की बेटी तुम कैसी हो, चिंता मात करो, में हु न, में सब ठीक कर दूंगा, तुम्हे डरने की कोई जरुरत नहीं है. कहा आपने ऐसा? नहीं, लड़की के साथ ऐसा कुछ गलत हो जाये तो इसका कसूरवार लड़की को ठहरा कर उसके साथ ऐसा सुलूक करना की जैसे उसका जीवन hi समाप्त हो गया है, क्या हो जाता है ऐसा, आज कल कई लड़कीअ कई बार शादी करती है तो क्या लूट गया उनका?

प्रकाशराओ : (गुस्से में खड़ा होता है) मुझे समजने चला है, तेरी औकात क्या है?

संध्या : (अपने पति को सँभालते hue)Aap गुस्सा मात कीजिये, वो बच्चा है, शिव तुम चुप रहो.

प्रकाशराओ : अभी क्या दुनिया देखि है इसने जो मुझे समजने चला है.

संध्या : आप शांत रहिये, बहु ो बहु... अपने ससुरजी के लिए नास्ता लगवाओ.

स्वर्ण : जी माजी (आवाज सुन कर वो भी किचन के दरवाजे पर hi कड़ी थी)

संध्या : आप चलिए (वो प्रकाशराओ को खींचते हुए वह से ले गयी)

शिव : तुम क्यों रो रही हो?

वैस्वी : तुम मेरे लिए पापा से क्यों उलझ रहे थे?

शिव : वो बात hi गलत कह रहे थे, तुम चिंता मात करो, उन चारो की तो हालत ख़राब होनेवाली है, तुम भार्गवी मैडम को जानती नहीं, वो उन्हें कही से भी धुंध निकलेगी.

थोड़ी देर बाद नास्ता कर के प्रकाशराओ अपने कमरे में चले गए, स्वर्ण हमे अंदर ले गयी और नास्ता दिया. थोड़ी देर बाद भार्गवी मैडम खुद आ गयी, वो हम दोनों को अपने साथ ले जाने आयी थी, पर में और वैस्वी कार में hi गए. में वैस्वी और स्वर्ण तीनो पीछे बैठे थे. वो हमे किसी वर्कशॉप पर ले गए, वह मशीन की मदद से हमारी हाथ कड़ी कटी गयी, आखिर कर हम दोनों अलग हुए. अब हम दोनों अपने अपने रस्ते जानेवाले थे. जब हम अलग होने लगे तो वो मेरे पास आयी

वैस्वी : थैंक यू शिव, फॉर एव्री थिंग.

शिव : (मुस्कुराते hue)Tum तो ऐसे कह रही हो जैसे फिर हम मिलनेवाले hi न हो.

वैस्वी : (मुस्कुराते hue)Aisi बात नहीं है, पर पिछले कितने समय से में तुम्हारे साथ हर पल थी, अब मुझे अच्छा नहीं लग रहा है.

शिव : (मजाक करते hue)Kya फिर से मेरे साथ हथकड़ी में बांधना है?

वैस्वी : कस ऐसा हो शक्ति.

शिव : तुम पागल हो गयी हो, तुम जाओ, कल स्कूल में मिलते है.

वैस्वी : ठीक है (अपना हाथ बढ़ाते hue)Bye.(Uska तो दिल कर रहा था की वो शिव के गले लग जाये)

शिव : Bye. (तभी स्वर्ण भी हमारे नजदीक आयी)

स्वर्ण : थैंक यू शिव.

शिव : आप क्यों थैंक यू कह रही है?

स्वर्ण : क्यों की तुमने मेरी प्यारी नानन्द का ख्याल रक्खा इस लिए, थैंक यू.

शिव : कोई बात नहीं, इसमें थैंक यू की जरुरत नहीं है.

फिर वो दोनों निकल गए.

भार्गवी : अब हम भी चले हीरो.

शिव : क्या आप भी. उनलोगो के बारेमे कुछ पता चला?

भार्गवी : उनकी मोबाइल लोकेशन से पता करने की कोशिस कर रहे है, जल्द hi मिल जायेंगे, जायेंगे कहा. गुनाह करते वक़्त इंसान का दिमाग बंद हो जाता है पर फिर जब वो भागता है तब उसे पता चलता है की उसके अपनो की कितनी जरुरत पड़ती है, और अपनो के संपर्क में आते hi वो पकड़े जाते है, कोई जल्दी तो कोई देर से पर पकड़ा जरूर जाता है, उनके माँ बाप भी अपने बच्चो की सलामती के लिए पुलिस स्टेऑन के और वकीलों के चक्कर लगा रहे है.

शिव : पता नहीं ये लोग ऐसा करते hi क्यों है?

भार्गवी : कहा जाना है?

शिव : घर hi जाऊंगा, और कहा, कल से नहाया नहीं हु, हालत तो देख रही है आप मेरी.

भार्गवी : चलो कोई बात नहीं, तुम्हारे घर hi चलते है.

उन्होंने मुझे घर छोड़ा. वह भी मुझे सबके सवालो के जवाब देने पड़े. सब ने मुझे डांटा भी, पर फिर खुस भी हुए.
 
अपडेट 125

सबके सवालो के जवाब देते देते रात हो गयी. ये तो अच्छा था की में आते hi बाथरूम में घुस गया था, वर्ण ये लोग मुझे छोड़ते hi नहीं. रात को दीदी मेरे साथ सोने आ गयी थी. थोड़ी देर वो शांत hi बैठी रही तो मेने पूछा hi लिया.

शिव :क्या हुआ दीदी?

लतादिदी : तू उस लड़की के साथ ऐसे हथकड़ी में hi बंधा रहा, क्या नाम था उस लड़की ka...(Wo शायद भूल गयी थी, क्यों की मेने जब बताया था तो वैस्वी का नाम भी बताया था) है वैस्वी.

शिव : और क्या करता दीदी, हथकड़ी लोहे की थी तो बिना कटे निकलती नहीं.

लतादिदी : तुम दोनों अकेले थे न.

शिव : (में उनकी उल्जन समाज सकता tha)Ha अकेला hi था दीदी, पर मेने ऐसा वैसा कुछ भी नहीं किआ.

लतादिदी : नहीं, मेरा वो मतलब नहीं था में तो बस...

शिव : रहने दीजिये आप, आपके चेहरे से सब पता चल रहा है. मेने कहा न ऐसा वैसा कुछ नहीं हुआ था. और मुझे क्या जरुरत थी, आप जैसी खुबसुआरत लड़की है न मेरे साथ फिर मुझे क्यों उसकी जरुरत पड़ने लगी. (मेरी बात से उनके चेहरे पर ख़ुशी छलक आयी और साथ में शर्म भी)

लतादिदी : सच?

शिव : और नहीं तो क्या, है अगर आप मुझसे दूर रहोगी तो पक्का उसके पास चला जाऊंगा. (मेने मज़ाक करते हुए कहा)

लतादिदी : में क्यों दूर रहूंगी, में तो हर पल तेरे साथ hi रहना चाहती हु. और मेने किसी भी चीज केलिए तुजे रोका है क्या?

शिव : (उनको अपनी बाहोंमे लेते हुए मेने उनकी पीठ को मेरी पीठ से लगा दिया और उनके थोड़े बड़े हो चुके स्तन को अपने हाथो में भर कर मसलने लगा) आज भी नहीं रोकेगी? (उन्होंने शरमाते हुए ना में इस्सर किआ)

में जनता था की वो कभी मन नहीं करेगी, मेने उनके गले पर किश करते हुए उनके संतरो को मसलना चालू कर दिया, और देखते hi देखते हम दोनों प्यार के सागर में डूबने लगे.

सुबह में स्कूल के लिए निकल गया. जब में संयम के घर के पास पंहुचा तो तीनो कड़ी दिखाई दी. मुझे आश्चर्य हुआ क्यों की वो लोग बाते कर रही थी. में उनके पास पहुंच गया.

शिव : Hello नाज़िआ दीदी, hi संयम, hi वैस्वी. (सब ने जवाब दिया, वैस्वी ने थोड़ा शरमाते हुए जवाब दिया, संयम ने उसे घर कर dekha)School नहीं जाना क्या?

संयम : जाना है, पर ये (वैस्वी) आप से बाते कर रही है, हर बार में उसे रोकती थी पर ये रूकती नहीं थी, आज में इससे कह रही हु की चल पर पता नहीं ये चल hi नहीं रही है.

वैस्वी : (उसने एक पल मुझे देखा. फिर संयम की और देखते hue)Aapa पूछ रही थी तो में बता रही थी, मेने कहा मन किआ चलने को.

शिव : ठीक है, तुम आओ, में निकलता हु. (में निकलने लगा)

वैस्वी : शिव, सुनो. (में रुक गया, और उसे देखने laga)Hum तीनो साथ भी चल सकते है. (में उसे गौर से देखने लगा, संयम भी आश्चर्य से उसे देख रही थी)

संयम : क्या कहा तूने?

वैस्वी : (वो थोड़ी शर्मा रही थी) ममम में ये कह रही हु की तुम तीनो साथ भी चल सकते है, है न दीदी?

नाज़िआ : (उसे भी आश्चर्य हो रहा था इस लड़की के बदले हुए रूप को देख कर) है है क्यों नहीं, वैसे भी तुम टिनोमे कोई भी मोटा नहीं है तो तीनो आसानी से एक स्कूटर पर जा शक्ति हो.

संयम : पर तुजे तो शिव से बात करना भी पसंद नहीं.

वैस्वी : मेने ऐसा कब कहा, वैसे भी ये दौड़ते हुए स्कूल आता है, पशीने से इसकी यूनिफार्म भीग जाती है, तो मेने कहा. अब यही बाटे करनी है की स्कूल भी चलना है, देर हो रही है. लो शिव तुम स्कूटर चला लो. (संयम और नाज़िआ को तो यकीं hi नहीं हो रहा था की ये वही वैस्वी है. जैसे hi शिव स्कूटर पर बैठा, वैस्वी ने उसका बैग ले लिया, तब तक संयम, शिव के पीछे बेथ गयी, वैस्वी ने उसे नाराजगी से देखा, क्यों की वो बैठना चाहती थी, पर वो कुछ नहीं बोली, संयम ने अपना बैग साइड में कर दिया.

शिव : बैग्स यहाँ आगे रख दो, हाथ में क्यों पकड़ना. (वैस्वी ने दोनों बैग वह रख दिए)

संयम : मेरा भी रख दे. (वो वैस्वी को बैग देने लगी)

वैस्वी : अब जगह नहीं है, दोनों बैग के ऊपर रखना पड़ेगा तो शिव को दिक्कत होगी, उसे हाथ में hi रख. (संयम ने उसे घर कर देखा, पर बोली कुछ नहीं, वैस्वी उसके पीछे बेथ गयी, और मेने स्कूटर दौड़ा दी, संयम ने अपना हाथ मेरी कमर और झंघ के बिछ रख दिया था. उसका हाथ मेरे लुंड से कुछ hi दुरी पर था, और उसके स्तन का दबाव मेरी पीठ पर हो रहा था, उसके ऐसे पकड़ ने से मेरे शरीर में एक बार के लिए तरंग दौड़ गयी. पर मेने आगे hi ध्यान रक्खा.)

शिव : तुम कम्फर्टेबले हो न वैस्वी?

वैस्वी : है.

संयम : सिर्फ उसे hi क्यों पूछा?

शिव : क्यों की वो आखिर में बैठी है, अगर जगह काम हो तो उसे hi दिक्कत होगी, इस्सलिये उस से पूछा.

संयम : और में बिच में पीस रही हु, उसका क्या?

शिव : अगर तुम्हे पीछे बैठना है तो में स्कूटर रोक देता हु.

संयम : कोई जरुरत नहीं है, में ठीक hu(Wo वैस्वी को शिव के करीब नहीं ानेदेना चाहती थी)

खैर हम सुब स्कूल पहुंच गए, हर्ष और महेश वही खड़े थे, हम तीनो को साथ में देख कर उनका मुँह खुला का खुला रह गया. स्कूटर स्टैंड कर के हम तीनो उनके पास पहुंचे.

संयम : (मुस्कुराते hue)Hi, हर्ष, Hi, महेश.

दोनों : Hi.

वैस्वी : (मुस्कुराते hue)Hi, Hi.

दोनों : Hi. तुम सब साथ में?

वैस्वी : है, सब को एक hi जगह आना था तो साथ आ गए. (में भी वह पहुंच गया, मेरे दोनों दोस्त मुझे देख रहे थे, और वैस्वी के बदले हुए रूप को, जो लड़की कभी सीधे मुँह हमसे बात नहीं करती थी वो आज सामने से बात कर रही थी)

शिव : क्या हुआ?

महेश : (इन दोनों लड़कीओ के सामने तो वो बोल नहीं सकता था to)Kuchh नहीं, चले?

हम तीनो अंदर जाने लगे. रेसस्स में भी जब हम क्लास से बहार निकले तो वो दोनों बहार hi कड़ी थी और हमारा इंतजार कर रही थी, वो हमारे साथ हो गए. हर्ष और महेश नास्ता लाये नहीं थे तो वो कैंटीन में जाने की कहने लगे, तो हम डाब वह चले गए, में कुर्शी पे बैठा तो वैस्वी मेरे बाजु में hi बेथ गयी, ये देख संयम ने घर कर उसे देखा तो उसने नज़ारे झुका ली, संयम भी कहा पीछे रहती, वैस्वी की बाजु में बैठने की जगह वो मेरी दूसरी और बेथ गयी. में उन दोनों की ये शांत लड़ाई को देख रहा था, बाते करते हुए हम सब ने साथ में नास्ता किआ. स्कूल के बाद भी हम बहार आये तो वो दोनों वही पार्किंग में कड़ी थी. फिर से हम तीनो स्कूटर पर hi गए, में संयम के घर के पास hi उतर गया, और वह से अपने घर लोट गया. खाना खाने के बाद में साइट पर भी चला गया. मुझे देखते hi भोली ने सवालो की बौछार कर दी. झुमरी भी कहा पीछे रहती. पर पहले के मुकाबले कमली शांत थी.

शिव : इससे क्या हुआ है?

झुमरी : कुछ नहीं, अभी तो अच्छी भली थी, तुम्हे देख कर चुप हो गयी.

शिव : ऐसा क्यों?

झुमरी : वो तो ये hi जाने.

शिव : ठीक है, अपना काम करो, में एक चक्कर लगा के आता हु. (में वह से निकल गया, एक दूसरे माकन के पास मुझे वो नया सुपरवाइजर दिखा, में उनके पास चला gaya)Kaise है पिंकेशभाई?

पिंकेश : अरे शिव भाई? आइये आइये, कैसे है आप?

शिव : क्या पिंकेश भाई, में तो आपसे बहोत छोटा हु, आप मुझे शिव कह के hi बुलाइये.

पिंकेशभाई : ठीक है. (फिर हम दोनों काम के बारे में बाते करने लगे, थोड़ी देर बाद वो अपने काम में लग गए और में अपने)

में सीमेंट की बोरिया गईं रहा था की वह भोली आ गयी.

भोली : क्या कर रहे हो बाबू?

शिव : (मुस्कुराते hue)Dikh नहीं रहा क्या, बोरिया गईं रहा हु.

भोली : छोडो न, सब सही hi है, ये सुपरवाइजर अच्छा है, सब ठीक hi होगा.

शिव : फिर भी नजर तो रखनी पड़ती है न.

भोली : तो कभी हम पर भी नजर रखलिया करो.

शिव : वो भी रख रहा हु, में देख रहा हु की तुम अपना काम छोड़ कर यहाँ गप्पे लगाने आ गयी.

भोली : में काम छोड़ कर नहीं आयी, मेरा काम कर के आयी हु, रेट को छान ने का काम था जो मेने पूरा कर दिया, अब जब तक वो ख़तम नहीं होती में फ्री हु.

शिव : वो ख़तम हो गया तो और कोई काम देख लेती. (मेने बोरिअ साडी गईं ली थी और एक कागज में उसे लिख रहा था)

भोली : तुम से मिलने के लिए जल्दी जल्दी काम किआ है मेने.

शिव : क्यों, मुज से क्यों मिलना था?

भोली : बाबू तुम बहोत लुच्चे हो, मेने तुम्हारा इतना काम कर के दिया पर तुमने मुझे इनाम नहीं दिया.

शिव : (मुस्कुराते hue)Achchha, क्या इनाम चाहिए तुम्हे?

भोली : (वो बात करते करते अपनी जगह पर hi लहरा रही thi)Jaise तुम जानते hi नहीं. (उसके चेहरे पर जूठा गुस्स्सा था)

शिव : (में मुस्कुरा रहा tha)Tum पागल हो भोली, तुम एक लड़की हो, तुम्हे इन सब से दूर रहना चाहिए.

भोली : क्यों दूर रहना चाहिए, मेरा भी मान करता है.

शिव : तो मान को काबू में रक्खो, कल जेक तुम्हारी शादी होगी, क्या जवाब डौगी अपने पति को?

भोली : वो में देख लुंगी, तुम्हे क्या दिक्कत है, क्या में अच्छी नहीं dikhti(Wo गोल गोल घूम कर मुझे सब दिखने लगी, मेरी नजर उसकी चुचिओ और उस्सकी घाघरे में छुपी हुई गांड के उभर पर पड़ी, पर मेने अपने आपको संभल लिया)

शिव : तुम पागल हो भोली, जाओ अपना काम करो, कोई आ गया तो तुम्हे hi दिक्कत होगी.

भोली : में नहीं तुम पागल हो, एक लड़की सामने से तुम्हे न्योता दे रही है और तुम हो की पीछे हैट रहे हो, तुम्हारी जगह और कोई होता तो मौके का फायदा उठा कर अब तक तो मेरे साथ सब कुछ कर चूका होता.

शिव : तुमने कहा था न की तुम कुवारी हो.

भोली : है तो हु में.

शिव : तो तुम्हे लगता है ये सब आसानी से हो जायेगा.

भोली : तो क्या होगा, मुझे थोड़ा दर्द होगा, पर क्या. मेरे से छोटी छोटी लड़कीअ भी सब करवालेति है, किसी को पता भी नहीं चलता.

शिव : उनका पता नहीं, पर तुम थिकसे चल भी नहीं paogi(Uski ऐसी बातो से पता नहीं मेरे लुंड में हल्का हल्का तनाव आना सुरु हो गया था)

भोली : कुछ नहीं होगा, तुम ऐसे hi दर रहे हो, मेरी एक सहेली थी, अब तो उसकी शादी भी हो गयी है, आज से दो साल पहले, वो मुझे अपने साथ ले गयी थी, वो अपने प्रेमी को मिलने गयी थी, जब वापस आयी तो उसे थोड़ा दर्द हो रहा था तो मेने पूछ की क्या हुआ तो उसने बताया की वो सब करके आयी है, पर फिर हम दोनों साथ में hi घर गए थे, किसी को कुछ भी पता नहीं चला था.

शिव : तो उसने जो किआ था वो शादी के लिए किआ होगा, और वो लड़का मेरे जैसा भी नहीं होगा.

भोली : क्या शादी के लिए, उसकी शादी तो किसी और के साथ हुई है. और मेरे जैसा नही होगा उस से क्या मतलब है तुम्हारा?

शिव : मेरे जैसा ऊँचा, और तुम क्यों ऐसी बाते कर रही हो, में तुम्हे वो सब नहीं समजा सकता.

भोली : नहीं मुझे समझना है, या फिर में मजदूर हु तो तुम मुझे अपने लायक नहीं समझते.

शिव : ऐसी बात नहीं है भोली, तुम मजदूर हो उस से क्या फर्क पड़ता है, अच्छा ठीक है, क्या तुमने किसी लड़के का देखा है?

भोली : (नाम भले भोली था पर वो जानकर thi)Ha देखा है.

शिव: में किसी बच्चे की बात नहीं कर रहा.

भोली : मुझे पता है, मेने वो सब करते हुए भी देखा है.

शिव : (वो समाज ने को तैयार hi नहीं थी, तो मेने सोचा की इसे संजना hi पड़ेगा) कितना बड़ा था वो?

भोली : (अपनी हथेली पर दिखते hue)Itna.

शिव : मेरा इतना है (मेने भी उसे इससरए से संजय)

भोली : तुम जूथ बोल रहे हो, इतना किसीका नहीं होता.

शिव : अब जो है सो है, मेरा उतना hi है, अब समाज सकती हो की क्या होगा.

भोली : तुम मुझे उल्लू बना रहे हो.

शिव : में झूठ नहीं बोल रहा.

भोली : मुझे विस्वास नहीं है, दिखाओ मुझे.

शिव : तुम पागल हो, तुम क्या बोल रही हो तुम्हे पता भी है?

भोली : देखा, मुझे पता था, तुम यु hi मुझे बेवकूफ बना रहे हो. अगर सच बोल रहे हो तो मुझे दिखाओ.

शिव : तुम पागल हो भोली, ये सब दिखने की चीजे है क्या.

भोली : मुझे पता था, तुम मुझे बेहला रहे हो, अगर तुम मुझे दिखने को कहोगे तो में तो अपनी दिखा सकती हु, तुम चेक करना चाहो तो चेक भी कर शक्ति हो की में कुवारी हु की nahi(Bholi के शिर पर जैसे बहुत सवार था)

शिव : तुम्हे शर्म नहीं आती ऐसा कहते हुए?

भोली : आती है, पर तुम वैसे तो मन ने वाले हो नहीं, न सामने से मुझे बुलाओगे, तो मुझे hi कदम आगे बढ़ाना पड़ेगा न, मेने तो पक्का मान बनालिया है. अब बोलो देखनी है मेरी?

शिव : (उसकी बातो से मेरा लुंड hi खड़ा होने लगा था, वो अपनी कुवारी छूट दिखने की बात कर रही थी, मुझे पता था की वो दिखा भी देगी, पर मेने kaha)Muje पता है तुम मुझे उकसाने के लिए कह रही हो, तुम नहीं दिखनेवाली, कोई लड़की ऐसा नहीं करती.

भोली : अच्छा, तुम्हे ऐसा लगता है, रुको (वो बहार गयी और थोड़ी hi देर में आ गयी, वो बहार चेक करने गयी थी की कोई इस तरफ है तो nahi)tumhe देखनी है न? (वो अपने घाघरे को थोड़ा उठा के उसमे से अपनी कच्छी निकलने लगी, में इस पागल लड़की का रूप देख रहा था, उसने कच्छी मुझे दिखते हुए साइड में रख दी, और मुझे देखने लगी) अब निचे कुछ भी नहीं है, है तुम में हिम्मत की इससे उठा कर देखो की चाहते हो की में hi dikhau?(Wo मुझे उक्षा रही थी, मेने सोचा की अगर इसको कोई फर्क नहीं पद रहा तो में क्यों ज्यादा सोचु, में उसके पास गया तो वो मुस्कुरा रही थी, मेने उसको धकेलते हुए दिवार से सत्ता दिया और उसके सामने बेथ गया, मेने उसकी और देखा तो वो अभी भी मुस्कुरा रही थी, मेने उसके छूट वाले भाग को देखा और उसको घाघरे के उसपर से hi छुआ, और उसे महसूस करने लगा, मुझे उसकी छूट के होठो का एहसास हो रहा था, मेने उसकी और देखा तो अब मुस्कान की जगह कामुकता थी, वो अपनी छूट को सहलाये जाने का आनंद ले रही थी, और मेरी आँखों में देखते हुए अपने घाघरे को उठने का इंतजार कर रही थी, मेने आहिस्ता आहिस्ता उसके घाघरे को उठाना सुरु किआ, उसके पेअर नंगे होते चले गए, फिर झंघे, उसको देख कर मेरा लुंड पूरी औकात में आ गया था, एक हाथ से घाघरा पकड़ते हुए दूसरे हाथ से में उसकी झांघो को सहलाने लगा तो उसने अपनी टंगे थोड़ी फैला दी, वो तैयार थी, सब कुछ करने को तैयार थी, मेने उसका घाघरा और उठाया, अब उसकी छूट दिखनेवाली थी, मेने उसकी और देखा तो उसने कामुकता से भरी आँखों से मुझे देखा और अपनी आँखों से hi मुझे आगे बढ़ने को कहने लगी, उसकी आँखों से hi लग रहा था की मुज से ज्यादा उसे जल्दी है अपनी छूट दिखने की. मेने आगे का कपड़ा ऊपर उठा दिया तो उसकी छूट मेरे सामने थी, फुले हुए होतो वाली और बालो से सजी हुई छूट मेरे सामने थी, उसने अपनी कमर थोड़ी आगे करते हुए मुझे अच्छे से देखने के लिए सहूलियत कर दी, छूट का आकर्षण मुझे उसकी और खींचने लगा, मेने छूट के बालो पर हाथ फिराया तो उसकी कमर में कम्पन होने लगा. वो अपना मुँह दबाये निकलने वाली आवाजों को रोकने का प्रयास करने लगी. पता नहीं लड़कीओ को भी क्या हो जाता है, खुद अपनी छूट परोस कर दे देती है. मेने छूट के होठो को छुआ तो उसका शरीर कंपनी लगा, में छूट के होठो को सहलाने लगा साथ में दरार में भी अंगूठा दबाने लगा, उसने अपने घाघरे से अपना मुँह दबा दिया, अब मेरा दूसरा हाथ भी फ्री हो चूका था, मेने उसकी नंगी झांघो को सहलाते हुए अपना मुँह छूट के नजदीक किआ (भोली बड़ी उत्सुकता से शिव को देख रही थी, आज जिंदगी में पहली बार वो किसी मर्द को अपनी छूट दिखा रही थी, सुना और देखा तो बहोत कुछ था पर पहली बार वो महसूस कर रही थी, शिव के छूने से उसके बदन में चिंगारिया फुट रही थी, जब शिव उसकी छूट को छूटा तो अजीब तरह की तरंगे उसके शरीर में महसूस हो रही थी, ऐसा तो उसने कभी महसूस नहीं किआ था. कई बार उन लोगो में शिव को ले कर चर्चा हुई थी, कमली ने तो यहाँ तक कहा था की वो इतना लम्बा है तो उसका लुंड भी बहोत लम्बा होगा, भोली भी जानती थी की शिव का लुंड बड़ा hi होगा, उसे शिव का लुंड देखने की बहोत इच्छा हो गयी थी, रोज वो उसका इंतजार करती थी पर वो नहीं दिखा, आज जब वो आया तो वो उसके पास चली hi आयी, वो कैसे भी शिव को पाना चाहती थी, वो भली भाटी जानती थी की सेक्स के आगे ये सामान्य बढ़ेगा नहीं पर फिर भी वो अपनी पहली चुदाई शिव के साथ करने का मान बना चुकी थी, इसके लिए hi उसने आज शिव के सामने अपनी छूट परोस दी थी, वार्ना कितने hi लड़के उसके आगे पीछे चक्कर काट ते थे, अगर वो चाहती तो कब से चुद जाती, पर वो अपनी पहली चुदाई अपने पसंद के लड़के से करना चाहती थी. और उसके लिए उसने शिव को चुना था. और आज वो मौका आ भी गया था, शिव उसकी छूट को गौर से देख रहा था, जैसे जैसे उसका मुँह उसकी छूट के करीब हो रहा था उसकी धड़कने बढ़ती जा रही थी, उसे पता था की लड़के छूट को चूसते है, पर उसे ये पता नहीं था की लड़की को लगता कैसा है. वो इस एहसास को महसूस करने के लिए तड़प रही थी, उसने खुद अपनी छूट को थोड़ा आगे किआ और शिव के मुँह की और बढ़ाया)

में उसकी तड़प साफ़ साफ़ महसूस कर रहा था, मुझसे ज्यादा तो उसे जल्दी थी अपनी छूट को चटवाने की, वैसे भी छूट से आती खुसबू से मेरा लुंड कूद रहा था, मेने छूट के होठो को फैलाया तो देखा की वो पूरी तरह से आपसमे चिपके हुए है, जब मेने ज्यादा फैलाया तो मुझे छूट के डेन के निचे छोटा सा छेड़ दिखाई दिया, छेड़ तो था पर ऊँगली से भी छोटा और छोटे छोटे होठो से वो ढाका हुआ था. मेने अंगूठे से छेड़ और डेन को सहलाया तो छेड़ से निकलते चिकने रास से उसका दाना भी चिकना हो गया, में जैसे जैसे सेहला रहा था छेड़ से और रास निकल रहा था, भोली के मुँह से दबी हुई आहे निकलने लगी थी, वो अपनी झांघो को और फैला रही थी, मेने उसकी और देखा तो वो नशीली आँखों से मुझे hi देख रही थी और मुझे और करने की इल्तेजा कर रही थी.

भोली : शहहह, बहोत अच्छा लग रहा है शिव, और करो.

में भी उसकी हालत समाज रहा था, मेने अपनी जीभ निकली और डेन को कुरेदा तो उसकी कमर झटके खाने लगी, और उसकी छूट मेरे मुँह पर रगड़ने लगी, वो इतनी बावली हो रही थी की एक हाथ से मेरे शिर को पकड़ कर मुझे अपनी छूट पर दबाने लगी.

भोली : शह्ह्ह्ह कितना मज़ा आता है शिव शह्ह्ह्ह, मुझे पता नहीं था की इतना मज़ा आएगा, छतो शिव शहहह और छतो शह्ह्ह्ह.

उसकी उत्तजेना में समाज रहा था और उसकी उत्तेजना देख कर में भी उत्तेजित हो रहा था. मेने अपनी झिबह उस छोटे से छेड़ में डालने की कोशिस की पर वो छेड़ छोटा था, पर फिर भी मेने जीभ को और नुकीला किआ और छूट के छेड़ को कुरेदने लगा.

भोली : शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह वह कुछ हो रहा है शह्ह्ह्ह ोू मा शहहह और अंदर शह्ह्ह्ह वह कुछ हो रहा है शिव.

भोली पागल हो रही थी, ये एहसास उसके अनुमान से कही ज्यादा था, उसकी छूट में चींटिया काटने लगी थी, वो शिव की जीभ को और अंदर तक घुसना चाहती थी, वो अपनी छूट से झिबह पर झटके मरने लगी, शिर भी उसकी छूट को चाट रहा था, चूस रहा था और साथ में छेड़ के अंदर जीभ डालने की कोशिस कर रहा था, उसके लिए ये बहोत ज्यादा था और अचानक उसकी छूट ने पानी छोड़ दिया, उसकी टंगे कंपनी लगी और उसकी आँखों के सामने अँधेरा छाने लगा, उस से खड़ा भी न रहा गया और वो वही बैठने लगी. शिव ने उसे सहारा दिया और वो वही बैठे बैठे हांफ रही थी, उसके साथ जो भी हुआ था उसे वो समझने की कोशिस कर रही थी, अपनी अधखुली आँखों से वो शिव को देख रही थी और हांफ फही थी.) मेने उसके गाल को सहलाया और पूछा.

शिव : भोली, तुम ठीक हो?

भोली : ये क्या हुआ शिव?

शिव : तुम्हारा पानी निकला था.

भोली : कितना सुखद एहसास था ये शिव, ऐसा तो मेने कभी महसूस नहीं किआ था. कितना मज़ा आता है न शिव? शायद इसीलिए लड़कीअ लड़को के पास दौड़ी चली जाती है.

शिव : अच्छा चलो उठो, कोई आये इस से पहले जाओ यहाँ से वर्ण तुम्हारी बदनामी होगी.

भोली : जो होना है वो हो, में उसे देखे बगैर नहीं जाउंगी. (में उसे देखने लगा) मुझे देखना है शिव. (वो बड़ी मिन्नत कर रही थी, मेने भी सोचा की उसने अपनी छूट मेरे सामने खोल दी थी, और उसने पहली बार किसी लडकेके सामने ऐसा किआ था, छूट देख कर मेरा भी मान कर रहा था, पर अभी इतना वक़्त नहीं था) शिव अभी इतना वक़्त नहीं है भोली फिर कभी.

भोली : सिर्फ दिखा दो. (उसने जिस तरह से कहा था तो मेने भी अपने पंत की ज़िप खोली और कड़क हो चुके लुंड को जैसे तैसे बहार निकला, जैसे hi लुंड बहार निकला मेने भोली को देखा, मेरे लुंड को देख कर उसकी आंखे चौड़ी हो गयी थी)

शिव : देख लिया, अब समाज में आया में क्या कह रहा था (में वापस अपने लुंड को अंदर करने लगा, पर फ़ौरन उठी और मेरे हाथ को पकड़ते हुए)

भोली : एक मिनट रुको तो, क्या जल्दी है तुम्हे. (उसने मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए और मेरे लुंड को देखने लगी, वो हर तरफ से मेरे लुंड को देख रही thi)Sach में कितना बड़ा है ये.

शिव : और तुम्हारा छेड़ एकदम छोटा, इस लिए में मन कर रहा हु सामजी.

भोली : छेड़ छोटा है तो क्या हुआ, वो बड़ा हो जायेगा, पर अभी मुझे इससे देखने दो, मेने दूर से देखा था पर इतना नजदीक से में पहली बार देख रही हु. क्या में इससे छू के देखु?

शिव : फिर कभी, अभी बहोत देर हो गयी है.

भोली : क्या फिर कभी, में नहीं रुक शक्ति, (उसने लुंड को पकड़ liya)Kitna कड़क है ये, मेरे हाथ में भी नहीं आ रहा, शह्ह्ह्ह और गरम गरम है शिव, मुझे पता था की तुम इतने लम्बे हो तो तुम्हारा ये भी लम्बा होगा पर इतना लम्बा और मोटा होगा ये मेने नहीं सोचा था. (वो उसे हिलने लगी, जो उसने अपनी सहेली को करते देखा था, वो उसे बड़े गौर से देखे जा रही थी और हलके हलके सेहला रही थी, एक कुवारी लड़की के ऐसा करने से और जब वो पहली बार मेरे लुंड को देख और छू रही है ये सोच कर hi मेरा लुंड कूद रहा था, अगर उसने ज्यादा कुछ किआ तो मुझे शक था की में अभी के अभी उसे न पेल दू. पर वो बावली हो कर मेरे लुंड से खेल रही थी, उसे हिला रही थी, उसे दबा रही थी, मेरी हालत ख़राब होती जा रही थी, उसने मेरी और देखा, मेने उसे देखा, उसके दिमाग में जैसे कुछ चल रहा था, में समझने की कोशिस कर hi रहा था की उसने अपना मुँह खोला और लुंड को अपने मुँह में लेने लगी, मुझे नहीं लगा था की वो ऐसा कुछ करेगी, पर वो सब कुछ कर लेना चाहती थी, वो लुंड को मुँह में लेने की कोशिस करने लगी, उसका अनादि पैन hi बता रथा था की वो ऐसा पहली बार कर रही है. लुंड को बहार निकलते हुए) हम्म हम्म्म कितना बड़ा है ये, मेरे मुँह में भी नहीं आ रहा. (कहते कहते उसने फिर से लुंड अपने मुँह में ले लिया, इस बार उसने अच्छे से लुंड को मुँह में लिया था और उसे चूस भी रही थी. मेरा मान कर रहा था की उसका शिर पकड़ कर लुंड अंदर थोक दू, पर में जनता था की ऐसा करने से उसकी क्या हालत होती, मेने अपने आप को रोक दिया.

झुमरी : भोली ो भोली, कहा है तू (हमे बहार से झुमरी की आवाज सुनाई दी, मेने फ़ौरन अपना लुंड बहार निकला, और उसे पंत अंदर करने की कोशिस करने लगा, पर वो अंदर हो नहीं रहा था, की तभी झुमरी उस रूम में दाखिल हो गयी, उसने देखा की शिव दूसरी और अपना मुँह किये हुए है और अपना पंत बंद करने की कोशिस कर रहा है और भोली निचे बैठी हुई है और उसकी कच्छी साइड में पड़ी हुई hai)Kya कर रहे हो तुम दोनों?

भोली : (थोड़ चिढ़ते hue)Tu क्यों आयी?

झुमरी : वो सब पूछ रहे थे की भोली कहा गयी, तो में तुजे बुलाने आ गयी. पर तुम दोनों कर क्या रहे थे?

भोली : मुझे कोण ढूंढ़ने लगा, में तो अपना काम कर के आयी थी न, और तुजे क्या की हम क्या कर रहे थे, तू जा में आती हु.

झुमरी : तेरा हो गया?

शिव :(मेने लुंड अंदर दाल दिया और ज़िप बंद कर दी, में उनकी और घुमा तो झुमरी मेरे तने हुए लुंड के उभर को देख रही थी, वैसे भी मुझे कोई दर नहीं था, भले hi झुमरी को पता चल गया की यहाँ क्या हो रहा tha)Me बहार जाता हु. (कहते हुए में बहार निकल गया, झुमरी मुझे जाता हुआ देख रही थी, में बिना उसकी और देखे बहार निकल गया)

झुमरी : तूने करवलिया?

भोली : क्या करवलिया? कुछ भी नहीं हुआ, और अभी हो भी नहीं सकता. (वो कड़ी हो गयी)

झुमरी : क्यों?

भोली : क्यों क्या, उसका देखेगी तो तेरी भी फैट जाएगी. अगर अभी करवाया होता तो में चल भी नहीं pati.(Wo अपनी कच्छी पहन ने लगी)

झुमरी : तूने कच्छी भी उतरी हुई है और कह रही है की कुछ नहीं हुआ, बताना क्या हुआ?

भोली : अब देर नहीं हो रही तुजे, सब धुंध रहे है न मुझे, कामिनी, ये क्यों नहीं कहती की अपनी दाल गलने आ गयी थी तू.

झुमरी : (झेपते hue)aisa कुछ नहीं है, में तो बस...

भोली : में सब समझती हु, चल अब यहाँ से.

झुमरी : रुक न, बता न क्या हुआ?

भोली : में कुछ नहीं बतानेवाली, तूने मेरा काम बिगाड़ा न अब में कुछ नहीं बतानेवाली, तुजे आना है तो आ वर्ण में चली. (वो जाने लगी, झुमरी उसके पीछे पीछे दौड़ी)

झुमरी : इ रुक न, ऐसा क्या करती है, इ भोली, सुन तो (पर भोली न रुकी)

में वह से निकला और थोड़ी देर दूसरे काम में लग गया. जब भी मेरी नजर भोली और उसकी टोली पर पड़ती तो झुमरी उसके पीछे पीछे घूमती नजर आयी. पता नहीं उन में क्या चल रहा था, टाइम ख़तम हो गया और में वह से निकल गया. स्टेडियम जाना था तो में जूही के घर पहुंच गया. उसने मुस्कुराते हुए दरवाजा खोला. में अंदर दाखिल हो गया. वैसे भी वो बाला की खूबसूरत थी, उसको देख के hi मुझे कुछ कुछ होता है और ऊपर से भोली के साथ के सन की वजह से में थोड़ा गरम भी था, मेने अंदर दाखिल होते hi उसका हाथ पकड़ा तो वो मेरी और आश्चर्य से देखने लगी, वो कुछ समझती उस से पहले मेने उसे अपनी और खिंचा, वो मेरी और चली आयी.

जूही : (मुस्कुराते hue)Me देखना भूल गयी थी की सूरज आज पश्चिम से तो नहीं निकला.

शिव : ऐसा क्यों कह रही हो?

जूही : हर वक़्त में hi तुम्हारे करीब आती हु, कभी सामने से तुमने मुझे पकड़ा हो ये हुआ नहीं, आर आज हुआ है तो आश्चर्य तो होगा hi.

शिव : ऐसा नहीं है यार, पर कभी कभी मुझे लगता है की में कही तुम्हारे दुःख का कारन न बन जाऊ.

जूही : तुम यु hi सब सोचते हो, ये मेरी जिंदगी है और मेने चुना है की तुम मेरी जिंदगी में आओ, अब जो होगा सो देखा जायेगा, अभी से क्यों सोचना. अब मुझे आज पहली बार सामने से अपनी और खींचाहै तो फिर आगे बढ़ो. (सच मच कमल की लड़की थी ये, मेने उसके होठो को अपनी गिरफ्त में लिया और उसे चूसने लगा, वो भी बड़े प्यार से मेरे होतो को चूस रही थी, मेरा लुंड फिर से खड़ा हो गया, मेने उसके ट्रॉउज़र के ऊपर से hi उसकी छूट दबोच ली और उसे मसलने लगा, तो वो और जोर से मुझे किश करने लगी, उसने मेरे लुंड पर अपना हाथ रख दिया और उसे दबाने लगी, में उसकी छूट को और जोर से मसलने लगा, हम दोनों इतने हांफ रहे थे की किश भी न कर पाए, मेने उसकी छूट छोड़ दी और उसे गले से लगा लिया और अपने आप को शांत करने लगा. उसने भी मेरा लुंड छोड़ दिया और मुझे बहो में भर लिया. थोड़ी देर बाद हम दोनों की सांसे दुरुस्त हुई. मेने उसे देखा तो वो भी मुझे देख रही थी.

जूही : क्या हुआ?

शिव : सॉरी यार, मेने कुछ ज्यादा तो नहीं कर दिया.

जूही : में तो कब से कह रही हु, तुम hi हो जो पीछे हैट रहे हो, अगर इतना मान कर रहा है तो फिर हो जाने दो. आज इतना आगे बढे हो तो और थोड़ा बढ़ जाओ.

शिव : उसके होठो को चुम कर, जल्द hi करेंगे स्वीटी.

जूही : मुझे इंतजार रहे गए sweeeeeetiiii(Wo मुस्कुराने लगी, हम दोनों फिर से एक दूसरे के गले लग गए) तुम बैठो में दूध लती हु और, एक खुस खबरि भी है.

शिव : अच्छा, क्या hai?(Wo किचन से बात कर रही थी)

जूही : वैसे एक नहीं दो खुस खबरि है, एक तो तुम्हारा स्टेट लेवल के लिए सिलेक्शन हो गया है, इतना जल्दी किसी का नहीं होता पर तुम्हारा रिकॉर्ड देखते हुए तुम्हे चांस दिया जा रहा है, और दूसरा...

शिव : तुम्हारा भी सिलेक्शन हो गया hai(Mene उसकी बात पूरी की)

जूही : (दूध का गिलास लेट hue)Wo तो है hi, पर दूसरी बात है.

शिव : तो फिर बताओ न.

जूही : ममता भाभी का फ़ोन आया था, वो माँ बन ने वाली है.

शिव : (एक पल के लिए मेरे सामने ममता भाभी का दमकता चेहरा आ gaya)Are वह ये तो अच्छी खबर है.

जूही : में उनसे मिलने जानेवाली हु, भाभी कह रही थी की शिव को भी पूछ न अगर वो आ शेक तो, तो क्या कहते हो? चलोगे?

शिव : कब चलना है?

जूही : वो तुम बताओ, Saturday-Sunday ठीक रहेगा?

शिव : ठीक है में सोच के बताता हु. (फिर हम दोनों वह से स्टेडियम चले गए, मुझे नाज़िआ दीदी का मश्ग आया की अगर स्टेडियम से जाते हुए मिल शक्ति हो तो मिलते हुए जाना, मेने ok कहा)
 
अपडेट 126

में स्टेडियम से निकला तो मेने जूही को संयम के घर के पास छोड़ने को बोल दिया. उसने पूछा भी की क्यों जाना है तो मेने कह दिया की काम है, उसने भी ज्यादा कोई सवाल नहीं किआ. में संयम के घर पंहुचा और बेल बजायी तो नाज़िआदिदी ने hi दरवाजा खोला. मुझे देखते hi उनके चेहरे पर आश्चर्य और खुसी दोनों दिखाई दे रहे थे. खुसी तो समाज में आयी पर आश्चर्य क्यों हुआ ये समाज में नहीं आया.

नाज़िआदिदी : व्हाट ा प्लेसंट सरप्राइज, तुम कैसे रास्ता भूल गए?

शिव : (मुझे समाज न aaya)Aapne hi तो बुलाया था.

नाज़िआदिदी : मेने?

शिव : आपने hi तो मुझे मश्ग किआ था की स्टेडियम से जाते हुए मिलते जाना.

नाज़िआदिदी : मेने कोई मश्ग नहीं किआ था, खैर तुम अंदर तो आओ. (उतने में ऊपर से संयम आती दिखाई दी)

संयम : तुम आ गए?

नाज़िआदिदी : तुमने मश्ग किआ था?

संयम : है आप, मुझे थोड़ा काम था, आज एक टॉपिक था जो मुझे समाज नहीं आया था तो मेने इससे बुला लिया था.

नाज़िआदिदी : अगर तुमने मश्ग किआ था तो उसे बताना था की तुमने मश्ग किआ था.

संयम : सॉरी, वो ध्यान नहीं रहा. तुम आओ शिव, ऊपर चलते है.

नाज़िआदिदी : उसे पानी तो पिने दे, स्टेडियम से सीधा आया है.

संयम : तुम ऊपर जाओ में पानी ले कर आती हु. (मेरी समाज में नहीं आ रहा था की संयम ने ऐसा क्यों किआ, खैर में ऊपर पंहुचा तो पीछे पीछे संयम भी पानी लिए आ गयी, उसने मुझे पानी दिया, में पानी पि रहा था, वो चुप थी, पानी पिने के बाद मेने उसे गिलास दिया तो उसने साइड में रख दिया)

शिव : है बोलो, क्या समाज में नहीं आया?

संयम : तुम्हारे और वैस्वी के बिच क्या चल रहा है?

शिव : (उसके ऐसे सवाल की अपेक्षा नहीं थी muje)Kya कहना चाहती हो, साफ़ साफ़ कहो.

संयम : जो कल तक तुम से नफ़रत करती थी वो अचानक कैसे बदल गयी, क्या हुआ था तुम दोनों के बिच?

शिव : कुछ भी तो नहीं.

संयम : में बेवकूफ नहीं हु, ऐसे अचानक वो कैसे बदल गयी, अब वो तुम्हारे करीब रहने के बहाने ढूंढती है, ऐसा क्या हुआ तुम दोनों के बिच. (उसकी सकल रोने जैसी हो गयी थी)

शिव : तुम इतना क्यों रियेक्ट कर रही हो, मेने कहा न कुछ भी नहीं हुआ.

संयम : ऐसा हो नहीं सकता, कुछ तो हुआ है, वो अचानक कैसे बदल गयी, अब वो तुम्हारे नजदीक रहना चाहती है, तुम मुझे साफ़ साफ़ बता दो, मुझे भी तो पता चले.

शिव : पहली बात की हमारे बिच कुछ भी नहीं हुआ है, शायद मेने उसको बचाया इस्सलिये उसका रवैया बदल गया है और कुछ भी नहीं है.

संयम : सच बोल रहे हो न तुम?

शिव : इसमें जूथ बोलनेवाली क्या बात है. और तुमने क्यों रोनी सूरत बना रक्खी है?

संयम : हम दोनों दोस्त है न, फिर वो अचानक हम दोनों के बिच कहा से आ गयी? मेने तुम्हे पहले भी पूछा था न की तुम्हे वैस्वी पसंद है की नहीं, जब तुम उसे देखते थे? तुमने क्या कहा था, तुम क्यों देखते थे? की तुम्हे सिर्फ ये देखना था की वो कोण है बस न.

शिव : है मेने कहा था.

संयम : तो फिर अचानक वो तुम्हारे नजदीक क्यों आ रही है?

शिव : देखो संयम, तुम ये उटपटांग सोचना बंद करो, ऐसा वैसा कुछ भी नहीं है, तुम ख़म खा बात को खिंच रही हो, और तुम्हे क्या फर्क पड़ता है की वो ऐसा कर रही है तो?

संयम : क्यों फर्क नहीं पड़ेगा, तुम मेरे दोस्त हो, हो की नहीं?

शिव :है हु.

संयम : फिर, वो क्यों अपनी तंग ऐडा रही है?

शिव : तो क्या हुआ, तुम तो मेरी दोस्त हो hi, अगर उसे भी दोस्ती करनी है तो क्या फर्क पड़ता है, हम सब साथ में दोस्त बने रहेंगे.

संयम : में बाकिओ जैसी नहीं हु, समजे?

शिव : क्या कहना चाहती हो?

संयम : क क कुछ nahi.(Uski हड़बड़ाहट मुझे समाज नहीं आ रही थी, तभी नाज़िआदिदी की निचे से आवाज आयी)

नाज़िआदिदी : संयम ो संयम.

संयम : है आप?

नाज़िआदिदी : घर में नास्ता नहीं है, जा तो बहार से कुछ ले आ, शिव के लिए.

संयम : ठीक है आप, में आती हु. (मुझसे) चलो, निचे चलते है. (हम दोनों निचे आ गए, मेने भी सुना था जो दीदी ने कहा था)

शिव : रहने दीजिये दीदी, वैसे भी मुझे निकलना है.

नाज़िआदिदी : ऐसे कैसे, कितने दिन बाद आये हो, अम्मी सुनेगी तो मुझे डाँटेगी, तुम जाओ संयम कुछ ले आओ. (संयम बहार चली गयी, दीदी ने दरवाजा बंद कर diya)Kyu मुझसे मिलने का मान नहीं करता?

शिव : ऐसी बात नहीं है दीदी.

नाज़िआदिदी : बाते बाद में करना.

शिव : (मुस्कुराते hue)To अभी क्या करू (वो मुझे ऐसे देख रही थी की में समाज गया था उनके इरादे, देर करना मेने सही नहीं समजा और उनके होठो को किश करने लगा और साथ में उनके भरे हुए स्तन को दबाने लगा.

नाज़िआदिदी : (किश तोड़ते hue)Shiv ज्यादा टाइम नहीं है (कहते कहते तो उन्होंने अपनी सलवार का नाडा खोल दिया, और पंतय के साथ निचे सरका दी, और दीवाल का सहारा ले कर झुक कर कड़ी हो गयी, मेने ऐसा नहीं सोचा था की दीदी ऐसा करेगी)

शिव : दीदी...

नाज़िआदिदी : ज्यादा सोच मात. जल्दी जल्दी थोड़ा कर ले, वैसे भी मौका नहीं मिलता, जल्दी कर. (वैसे भी मेरा लुंड किश करने से hi खड़ा हो गया था, मेने लुंड बहार निकला और उस पर थूक लगते हुए छूट पर सेट कर दिया, और अंदर दबा दिया, उन्होंने अपना मुँह बंद कर दिया, उनकी बड़ी बड़ी गांड को पकड़ कर मेने अपना पूरा लुंड अंदर उतर diya)Shhhh आह्ह्ह्हह्ह (में तुरंत जल्दी जल्दी अंदर बहार करने लगा, मखमली छूट की गर्माहट से में गरम होने लगा, और ऐसे अचानक ऐसा करने से एक अलग तरह का मज़ा आ रहा था, में जल्दी जल्दी धक्के लगाने लगा, दीदी और झुक गयी, मेने उनकी कमर पकड़ कर दाना दान धक्के लगाने सुरु कर दिए, आवाज रोकने के लिए दिदिने अपना मुँह जोरो से बंद कर रक्खा था, मुझे पता था की टाइम नहीं है, मेरा पूरा होगा की नहीं ये भी नहीं पता था, पर में चाहता था की दीदी का पूरा हो जाये, इस लिए में जल्दी जल्दी धक्के लगाने लगा, दीदी शायद कब से ये सोच कर hi गरम थी और मौके की तलाश में थी तो वो थोड़ी hi देर में झड़ने लगी, उनको झाड़ता महसूस कर के मेने लुंड बहार निकल liya)Kya हुआं बहार क्यों निकल लिया?

शिव : आपका हो गया न दीदी, मेरा इतने समय में नहीं होगा, और संयम आती hi होगी. (वो भी समाज रही थी तो उन्होंने अपना सलवार फिर से बांध दिया, और मुझे किश करने लगी)

नाज़िआदिदी : सबके होते हुए मिल नहीं पति हु न, तुजे देख कर कण्ट्रोल नहीं हुआ.

शिव : कोई बात नहीं दीदी, आपके मस्त कूल्हे देख कर मुझे तो अच्छा hi लगा.

नाज़िआदिदी : (मुस्कुराते हुए, मुझे mara)Badmash ! अगर इतने hi पसंद है तो टाइम निकल कर आ जा न, सब कुछ टेरेलिए hi तो है.

शिव : जल्द hi आऊंगा. (तभी दरवाजे पर दस्तक हुई, में जेक सोफे पर बेथ गया, दीदी ने अपने आपको सही किआ और मुझे इससरए से पूछा की सब ठीक है, मेने है कहा तो उन्होंने दरवाजा खोला)

संयम : दरवाजा क्यों बंद किआ था, में खा ज्यादा दूर गयी थी, वो तो वह भीड़ ज्यादा थी तो थोड़ी देर हो गयी.

नाज़िआदिदी : (उसके हाथ से पैकेट लेते hue)Kuchh नहीं, ला तू मुझे पैकेट दे और तू बेथ शिव के साथ, में अभी आयी.

संयम : (शिव के पास बैठते hue)Tumhe क्या हुआ?

शिव : क्या हुआ?

संयम : तुम्हारी सांसे क्यों तेज चल रही है? (अचानक उसे याद आया की आप की भी सांसे थोड़ी तेज hi चल रही थी, नाज़िआ ने भी ये सुना, तो उसकी सांसे गभरहट से थोड़ी तेज हो गयी)

शिव : कुछ नहीं, वो दीदी सोफे के नीचे कुछ धुंध रही थी तो उन्होंने मुझे सोफे उठाने को कहा था इस लिए शायद हो गयी होगी. (नाज़िआ ने भी ये सुना, उसके चेहरे पर शिव की हाजिर जवाबी से मुस्कान आ गयी)

में थोड़ी देर वह रुका, नास्ता कर hi रहा था की अंकल और आंटी भी आ गए, वो भी मुझसे मिले, संयम ने hi बताया की में वह क्यों हु तो दोनों को कोई आपत्ति नहीं हुई. थोड़ी देर बाद में वह से निकल गया. वह से निकलने के बाद में जा रहा था तो मुझे भार्गवी मैडम की याद आयी, चलते चलते मेने उनको फ़ोन लगा दिया.

भार्गवी : है शिव, बोलो?

शिव: कैसी है आप?

भार्गवी : कैसी होउंगी, तुमने एक और काम में जो लगा दिया है.

शिव : मेने?

भार्गवी : और नहीं तो क्या, वो तुम्हारी स्कूल के चार लड़को को ढूंढने में लगी हुई हु.

शिव : क्यों ऐसा क्या हो गया है?

भार्गवी : मुझे लगता है की यहाँ के किसी ने उनकी मदद की है, क्यों की उनके फ़ोन इस सहर में आ कर hi स्विच ऑफ हो गए है, मतलब कोई तो है जो उनकी मदद कर रहा है, और वो ये भी जनता था की पुलिस किस तरह उनको पकड़ सकती है. अभी तो वो नहीं मिले पर कोशिस जारी है.

शिव : ठीक है, अगर मेरी कोई मदद की जरुरत हो तो बता देना.

भार्गवी : अच्छा, तुम क्या मदद करो गए?

शिव : कुछ भी, और कुछ नहीं तो आपका मूड hi ठीक कर शक्ति हु. (मेने हस्ते हुए कहा)

भार्गवी : (वो भी है padi)Ha ये तो है, ठीक है अगर तुम्हारी जरुरत हुई तो में तुम्हे कॉल करती हु, bye.

शिव : Bye. (मेने फ़ोन कटा hi था की मुझे काव्य जी का फ़ोन आया) Hello मैडम, कैसी है आप?

काव्य : जब में फ़ोन करू तब, कैसी है आप, कभी सामने से तुम फ़ोन करो ऐसा होता है?

शिव : मश्ग तो करता hi हु न.

काव्य : है वो तो रेगुलर आते है.

शिव : तो फिर, कहिये, कैसे याद किआ?

काव्य : काम तो पर्सनल था, तुम आ शक्ति हो घर?

शिव : अभी?

काव्य : अभी के अभी आने की जरुरत नहीं है, थोड़ी देर बाद भी आओगे तो चलेगा.

शिव : ठीक है, में मेरे घर के पास पहुंच गया हु, में उनको बोल के फिर निकलता हु.

काव्य : में खाना मँगवाडेति हु, आज मेरे साथ hi खाना.

शिव : ठीक है, में आता हु थोड़ी देर में.

मेरी समाज में नहीं आया की उनको कोनसा पर्सनल काम हो सकता है, खैर में मन तो कर नहीं शक्ति था, में घर गया और दीदी को बोलै,

शिव : दीदी, में काव्यजि के वह जा रहा हु, खाना खा कर आऊंगा.

सरितादिदी : (में लतादिदी से कह रहा था पर वो बीचमे hi बोल padi)Khana क्यों वह खायेगा? काम है तो निपटा के आजा.

लतादिदी : तू क्यों हर वक़्त उसके पीछे पड़ी रहती है, (Mujse)Tu जा. (में वह से निकल गया)

सरितादिदी : तू इससे कुछ ज्यादा hi छूट नहीं दे रही?

लतादिदी : वो बांध कर रहेगा भी नहीं, और वो लड़का है, कोई लड़की नहीं जो चिंता हो.

सरितादिदी : पता नहीं कोई न कोई उसको बुला hi लेती है, यहाँ हम उसके इंतजार में hi रहते है.

लतादिदी : रात को आएगा न मिल लेना.

सरितादिदी : पहले hi यहाँ इतने नंबर लगे हुए है, और उसे बहार से फुर्सत नहीं.

लतादिदी : क्या बोल रही है तू?

सरितादिदी : तो और क्या बोलू, आने दे आज तो उसे छोडूंगी नहीं.

लतादिदी : तू जाने और वो जाने, चल अब काम में ध्यान दे.

में वह से काव्य जी के घर की और निकल गया. दिमाग में यही था की ऐसा क्या काम हो सकता है, खैर मेने जा कर घर की घंटी बजायी तो काव्य मैडम ने hi दरवाजा खोला. इस वक़्त तो हमेशा आंटी hi दरवाजा खोलती थी, पर मैडम के दरवाजा खोलने से में थोड़ा सरप्राइज था.

शिव : गुड इवनिंग मैडम.

काव्य मैडम : गुड इवनिंग शिव, कैसे हो तुम?

शिव : में ठीक हु, आंटी नहीं दिखाई दे रही?

काव्य : है वो बहार गए है. आओ तुम अंदर आओ. (में अंदर दाखिल हो gaya)Tum बैठो में पानी ले कर आती हु. (में सोफे पर बैठा, पर जैसे hi मेरी नजर मैडम पर गयी, वो थोड़ा लंगड़ा के चल रही थी, मेरी समाज में नहीं आया की क्या हुआ है उन्हें, वो पानी ले कर आयी तब भी थोड़ा लँगड़ाके चल रही थी और उनके चेहरे पर दर्द भी नजर आ रहा था, उन्होंने मुझे पानी दिया)

शिव : (पानी लेते हुए मेने puchha)Kya हुआ मैडम, आप ऐसे क्यों चल रही है?

काव्य : कुछ नहीं, उस दिन जैसा हुआ था न वैसा hi फिर से हुआ था, आज में कोर्ट भी नहीं गयी.

शिव : आपने दवाई ली की नहीं, डॉक्टर को दिखा देना था.

काव्य : पहले मेने भी सोचा था, पर फिर सोचा की पिछली बार अपने आप hi ठीक हो गया था तो हो जायेगा, पर अभी तक नहीं हुआ.

शिव : (मेरे पानी पि लेने के बाद वो मेरे हाथ से गिलास लेने लगी तो मेने मन कर diya)Aap बैठो में रख आता हु. (ये कह के में गिलास अंदर रख आया, वो सोफे पर बैठी हुई थी, में भी बेथ gaya)Kahiye क्या काम था?

काव्य : वो hi जो तुम देख रहे हो.

शिव : मतलब?

काव्य : पिछली बार जब ऐसा हुआ था तो तुमने hi ठीक किआ था, तो मेने तुम्हे फिर से बुला लिया.

शिव : ओह ! ऐसा. (में थोड़ा कंफ्यूज होगया, क्यों की उन्हें मुझे नहीं डॉक्टर के पास जाना चाहिए था, और पिछली बार तो जूही भी थी, मेने तो सिर्फ ऊपर ऊपर से मालिस की थी, दवाई वगैरह तो उन्होंने hi लगायी थी.)

काव्य : क्यों क्या हुआ, मेने कुछ गलत कर दिया?

शिव : नहीं वैसी कोई बात नहीं है, आपके पास पेनकिलर स्प्रे है? या पैन किलर दवाई?

काव्य : स्प्रे तो नहीं है, है दवाई होगी, पर वो अंदर कमरे में है.

शिव : एक काम करते है, में वो स्प्रे ले आता हु, और दवाई भी ले hi आता हु.

काव्य : पैसे अंदर ड्रावर में पड़े है, वह से ले लो.

शिव : अरे नहीं, उसकी जरुरत नहीं है, उतने पैसे तो है मेरे पास. आप बैठो में ले आता हु. (में वह से बहार निकला और नजदीकी मेडिकल स्टोर से स्प्रे और दवाई ले आया, पता नहीं पर मुझे लगा की शायद तेल की भी जरुरत पड़े तो में मालिस का तेल भी ले आया., रस्ते भर में सोच रहा था की कैसे लगाऊंगा, पर कोई रास्ता नहीं मिल रहा tha)Pehle ये पैन किलर खा लीजिये, आधे एक घंटे में आराम हो जायेगा, वैसे कहा दर्द हो रहा है?

काव्य : (थोड़ झिझकते hue)Wahi, जहा पहले हुआ था.

शिव : (सोचते hue)Thik है में मालिस कर देता हु, क्या यहाँ करेंगे?

काव्य : (मालिश की बात सोच कर hi काव्य को शर्म आ रही थी, पर पिछले कुछ दिनों सो उसके दिल में यही चल रहा था, इतनी उम्र होने के बावजूद वो सेक्स जैसे अनुभव से अनजान थी, काम के चलते उसने कभी इस बारेमे नहीं सोचा था, पर अब उसको भी अपने शरीर से आवाजे सुनाई दे रही थी, उसके शरीर को भी इस नए अनुभव को पाना था, कई बार उसने शिव के साथ ये सब करते हुए सपना भी देखा था, पता नहीं शिव hi क्यों उसके सपने में आता, उसने कई बार अपने आपको संजय की ऐसा सोचना गलत है पर दिल नहीं मान रहा था न शरीर, उसे ये भी नहीं पता था की उसने शिव को बुला तो लिया है पर क्या ये संभव है, अपनी पिछली मालिस का एहसास अभी भी उसके मान मस्तिक में तजा था, पर अभी भी मंजिल बहोत दूर थी)

शिव : (उनको सोच में डूबा देख कर मेने फिर से puchha)Yahi कर दू मैडम?

काव्य : (वो जानती थी की शिव ने सीधे मतलब से hi कहा था पर उसको लगा की शिव उसके साथ यही सेक्स करने की बात कर रहा है तो वो थोड़ी झेप गयी, उसने बड़ी मुश्किल से kaha)Nahi, अंदर चलते है. तुम दरवाजा बंद कर आओ. (ये कहते हुए भी उसके दिल में न जाने क्या काया हो रहा था, वो शिव के साथ बंद दरवाजे में थी, उसको पता नहीं इतनी शर्म आ रही थी की वो शिव से नज़ारे भी नहीं मिला प् रही थी)

शिव : (मुझे भी थोड़ा अजीब लगा पर दरवाजा तो बंद करना hi था, में गया और मैं गेट बंद कर aaya)Chaliye (वो उठी पर उनके चेहरे पर दर्द था, तो मेने उन्हें सहारा diya)Aap उस पेअर पर ज्यादा जोर मात दीजिये, सुबह से आपने संभाला नहीं इसीलिए सायद दर्द बढ़ गया है.

काव्य : पर में फिर चलूंगी कैसे?

शिव : में आपको सहारा देता हु (मेने उनकी एक और की बाह पकड़ ली, पर वो थोड़ी भरी थी, तो सिर्फ हाथ पकड़ने से उनको सहारा नहीं मिल रहा था, तो मेने उनकी कमर में हाथ दाल कर उनको पकड़ लिया, मुझे थोड़ी हिचकिचाहट हुई पर मुझे यही सही लगा, ऐसे में उनको अच्छे से सहारा दे प् रहा tha)(Jis तरह से शिव ने मुझे पकड़ा मेरी तो धड़कने hi तेज हो गयी थी, एक बार के लिए मेरी नजर उसकी और चली गयी पर फिर न जाने क्यों मेरी नजर झुक गयी, उसका ऐसा पकड़ना मुझे अंदर से बहोत अच्छा लग रहा था, इतनी उम्र के बाद पहली बार कोई लड़का मेरे इतने करीब था, मुझे शर्म भी आ रही थी और अच्छा भी लग रहा था, उसने मुझे जिस तरह पकड़ा था में उसके हाथ की ताकत को अच्छी तरह से महसूस कर प् रही थी, वैसे भी मेने उसके जलवे देखे थे, वो किस तरह से अच्छे अच्छा पर भरी था ये मेने देखा था, शायद में इसीवजह से उसके प्रति आकर्षित थी, जैसा मेने फिल्मो में देखा था वैसा hi वो था, फिल्मे भलेही काल्पनिक होती है पर वो सचमुच का हीरो जैसा hi था, देखने में हैंडसम और ताकत से भरपूर, अगर वो मेरी उम्र का होता तो एक पल न लगाती उसको प्रोपोज़ करने में, वो छोटा था इसीलिए मेने उसे अनदेखा किआ था पर वो ऐसा था की में उसे अनदेखा भी नहीं कर प् रही थी, वो मुझे सहारा दिए बैडरूम की और ले जा रहा था, पता नहीं मेरे अंदर अजीब सी हलचल थी, मुझे पता था की ऐसा वैसा कुछ भी नहीं होनेवाला पर फिर भी एक बेचैनी सी थी. मुझे खुद समाज नहीं आ रहा था की आखिर में क्या चाहती हु, उसने मुझे बीएड पर लेता दिया और वो मेरे पास बेथ गया, मुझे इतनी शर्म आ रही थी की में उस की और देखने से भी कतरा रही थी)

शिव : (गयम में हमारे साथ जूही थी तो मुझे दिक्कत नहीं थी पर यहाँ हम दोनों अकेले थे, में झिझक रहा था उन्हें छूने से पर उनको दर्द था तो छूना तो था hi)Me ऊपर से hi मस्सगे कर देता हु.

काव्य : Hmmmmm(Wo बस उतना hi बोल पायी, जब शिव ने उसके पेअर को छुआ तो उसके अंदर एक कम्पन सा दौड़ गया, वो घुटने के नीचे के पेअर को hi मस्सगे दे रहा था, पर दर्द ऊपर था, मेरी हिम्मत hi नहीं हो रही थी ये कहने की)

शिव : (मुझे पता था की उन्हें दर्द कहा है, उनकी झांघो की जोड़ में पर में आगे नहीं बढ़ प् रहा था, उन्होंने लेंगिज और कुरता पहना हुआ था, कुर्ते की साइड से उनकी भरी हुई झंघे दिख रही थी, भले hi वो लेंगिज में थी पर फिर भी उसका आकर स्पस्ट था, मेरे अंदर भी हलचल थी, में उनके पेअर के निचले हिस्से को hi मस्सगे दे रहा था)

काव्य : (में शिव की झिझक को भी समाज रही थी, पर शर्म मुझे भी आ रही थी, में चाहती तो डॉक्टर के पास जा शक्ति थी पर फिर भी मेने शिव को hi बुलाया था, थोड़ी देर बाद भी जब शिव ऊपर न बढ़ा तो मुझे hi कहना पड़ा, मेने थोड़ा हिचकिचाते हुए kaha)Dard ऊपर है. (कहते कहते भी मेरी जबान लड़खड़ा रही थी)

शिव : हम्म्म्म. (मुझे पता था पर में झिझक रहा था, पर करना तो था hi, मेने एक गहरी साँस ली और अपने हाथ को ऊपर की और बढ़ाया, उनकी भरी हुई झंघ को मसलते हुए में ऊपर की और बढ़ने लगा, आधे से ज्यादा झंघ को में मसल रहा था, अपने अंगूठे और हथेली और उंगलिओ से में उस हिस्से को मस्सगे दे रहा था, कमीज उनकी दो झांघो के बिछ में हो गयी थी, उनकी पूरी झांग मेरे सामने थी, वो मेने देखि झांघो में सबसे भरी हुई थी, मेरी भी धड़कन तेज हो गयी थी और मुसीबत ये थी की लुंड भी उठने लगा था, मेने अपने आप को सँभालने की कोशिस की पर मेरे बस में कुछ नहीं था. मेने मस्सगे पर hi ध्यान देना उचित समजा. में आहिस्ता आहिस्ता ऊपर की और बढ़ रहा था, मेने उनके पारी को भी फैलाया तो उन्होंने खुद थोड़ा फैला दिया, मेने भी झिजक छोड़ते हुए पुरे पेअर को मसलने लगा, पर अभी भी में ध्यान रक् रहा था की ऊपर तक मेरा हाथ न चला jaye)(Kavya आंखे बंद किये हुए शिव के हाथ के स्पर्श को महसूस कर रही थी, थोड़ी देर तो उसे शर्म आयी पर अब उसका दिल छह रहा था की शिव और ऊपर तक उसे छुए, वो शिव hi था जिसने पहली बार उसे छुआ था, पर वो बात अलग थी, उस वक़्त वो उससे जानती नहीं थी पर अब वो शिव को अच्छे से जानती थी, उसे ेहराज नहीं था अगर शिव उसकी झांघो की जोड़ तक भी उसे छूटा, पर वो उसे ऐसा कह नहीं शक्ति थी, थोड़ी देर बाद शिव रुक गया, उसे कितना अच्छा लग रहा था, वो कुछ पल इंतजार करती रही पर जब शिव ने कुछ न किआ तो उसने शिव को देखा, वो अपनी नज़ारे झुकाये कुछ सोच रहा था, वो थोड़ी देर उसे देखती रही पर फिर उसने पूछ hi लिया)

काव्य : क्या हुआ? रुक क्यों गए?

शिव : आप बुरा मात मानिये, पर सिर्फ ऐसे ऊपर ऊपर से मस्सगे करने से कुछ नहीं होगा, वो स्प्रे लगा कर तेल से भी मालिस करनी पड़ेगी. (मेने हिचकिचाते हुए कह hi दिया) मुझे लगता है हमे डॉक्टर के पास hi जाना चाहिए.

काव्य : (वो जानती थी की शिव क्या कह रहा है, थोड़ी देर वो सोचती रही, और अपनी हिम्मत इक्कट्ठा करने लगी, उसने एक गहरी साँस ली और धीमी आवाज में kaha)Tum कर दो. (मेरा दिल जोरो से धड़क रहा था, में जानती थी की में क्या कह रही हु, पर न जाने कहा से मुज में हिम्मत आ गयी थी, पता नहीं क्यों में उसके सामने अपने कपडे निकलने को तैयार हो गयी थी, पर मेने उसे कह hi दिया था)

शिव : (थूक गटकते hue)Par मैडम वो...

काव्य : प्लीज शिव, ज्यादा सवाल मात करो, वैसे भी मुझे बहोत शर्म आ रही है, में ज्यादा बोल नहीं पाऊँगी, तुम्हे जो करना है करो. (इतना कहते कहते तो उसकी सांसे जैसे काबू से बहार हो गयी थी, पता नहीं वो कैसे ये कह गयी थी)

शिव : (उनकी बात सुन कर मेरी हालत ख़राब हो गयी, मैडम ने जो कहा उसे सोच कर hi मुझे पसीना आने लगा था, मेरा लुंड भी कड़क हो रहा था, मेने उनकी और देखा तो वो दूसरी और देख रही थी, में दुविधा में था, पर जैसा उन्होंने कहा था की उन्हें बहोत शर्म आ रही है मेने कुछ भी पूछ न मुनासिब न समजा, मेने एक गहरी साँस ली और पास पड़े स्प्रे और तेल को ले आया, में मैडम को देखा तो उन्होंने अपनी आंखे अपने एक हाथ से धक् दी थी, मुझे अभी भी यकीं नहीं हो रहा था की उन्होंने मुझे लेंगिज उतरने की इजाजत दे दी है, मेने एक बार उन्हें देखा, फिर उनकी झंघ के बिच के कमीज के कपडे को देखा, मेने उसे पकड़ कर ऊपर कर दिया, मेने मैडम की और देखा तो उन्होंने अपनी आंखे अपने हाथ से धक् दी थी तो में देख नहीं पर रहा था पर उनके चेहरे पर उल्जन साफ़ दिख रही थी, मेरी नजर छूट के फुले हुए भाग पर पड़ी, लेंगिज में कैद होने पर भी छूट का भाग फूल कर अपना अस्तित्वा बयां कर रहा था, मेरा लुंड कूदने लगा था, मेने कांपते हुए हाथ बढ़ाया और उनकी लेंगिस के शैर को पकड़ा, उंगलिओ पर उनके पेट की मखमली त्वचा का एहसास हुआ, मेरे छूने से उनके शरीर में एक कम्पन हुआ, और उनकी मुट्ठी, चद्दर पर कास गयी, पर उन्होंने मुझे रोका नहीं, मेने भी गहरी साँस ली, और लेंगे को निचे खिसकने लगा, सबसे पहले मुझे उनकी काली पंतय दिखना सुरु हो गयी, मेरी सांसे भरी हो रही थी, मेने और नीचे खिसकाया तो उनके भरी कूल्हों की वजह से वो खिसक नहीं रही थी, में कुछ सोचता उस से पहले उन्होंने खुद अपने कूल्हे उठाये, मेने उन्हें आश्चर्य से देखा पर वो अपनी आंखे बंद किये हुए थे, मेने जोर लगा कर लेंगे को नीचे खिंचा, अब पूरी पंतय मेरे सामने थी, छूट के होठ भी अलग अलग दिख रही थे, मेने उनकी लेंगी को खिसकना जारी रक्खा, उनकी गोरी बेदाग झंघे मेरे सामने बेपर्दा होती चली गयी. मेने पूरी लेंगे निकल दी और साइड में रख दी, पता नहीं मेरी नजर बार बार उनकी छूट पर hi जा रही थी, डरते हुए मेने उन्हें देखा पर उनकी आंखे बंद थी तो दर थोड़ा काम हो गया था. मेने स्प्रे लिया और झांग के पुरे अंदरूनी हिस्से पर लगता चला गया, स्प्रे लगाने के बाद में रुक गया, और स्प्रे को अपना काम करने दिया. मेने तेल की सीसी उठायी और अपनी हथेली में थोड़ा तेल लिया, हथेलिओ को आपस में रगड़ कर मेने झांग पर लगाना सुरु किआ, उनकी भरी झंघ को मसलते हुए में तेल लगाने लगा, मेरे हाथ काफी ऊपर तक जा रहे थे)

काव्य : (पता नहीं ये में कैसे कर गयी थी, पर उसका इस तरह से छूना मुझे बहोत अच्छा लग रहा था, दर्द तो में कब का भूल गयी थी, ऐसा नहीं था की दर्द नहीं था पर दर्द को भूल कर में उसके स्पर्श का hi आनंद ले रही थी, आज पहलीबार कोई लड़का मुझे इस अवस्था में देख रहा था, वैसे तो ये शर्मिंदा करने की बात है पर पता नहीं मुझे अच्छा लग रहा था, मुझे पता था की में उसके सामने सिर्फ पंतय में हु, पर एक अजीबसी खुसी मिल रही थी, शायद मेरे शरीर को एक लड़के का स्पर्श अच्छा लग रहा था, पहली बार मुझे अंदर कुछ कुछ हो रहा था, और खास कर के मेरी झांघो के बिछ में, मुझे तो उसका नाम बोलने में भी शर्म आती है, फिर भी उसके अंदर कुछ अजीब सा लग रहा था, मुझे ऐसा लग रहा था की उसके अंदर से कुछ बहार निकल रहा है, क्या शिव को ये पता होगा, मेरी हालत ख़राब थी, में चाहती थी की शिव मुझे वह छुए पर ऐसा तो में कह नहीं शक्ति थी, जब भी शिव की उंगलिअ उस और बढ़ती मेरी सांसे अटक जाती थी, पर जब उसकी उंगलिअ वापस लौट जाती तो एक निराशा सी होती थी, मेरा पूरा ध्यान उसकी उंगलिओ पर hi था)

शिव : (में सब कुछ भूल कर उनके पेअर की मालिस कर रहा था, वैसे भी वो वकील थी, और मेरी बहोत मदद भी करती थी, तो मेने उन्हें इस दर्द से निजाद दिलाना hi बेहतर समजा, में उनकी झांघो को मसलते हुए मालिश कर रहा tha,us मुस्कले को अच्छे से दबा कर मस्सगे कर रहा था. काफी देर करने के बाद मेरी नजर उनकी पंतय पर पड़ी तो मुझे लगा की वो गीली है, मेने थोड़ा ध्यान से देखा तो सचमे वो गीली थी, काळा रंग की पंतय की वजह से वो क्लियर तो नहीं दिख रहा था पर फिर भी मुझे यकीं हो गया था की वो गीली है, में सोचने लगा की क्या मैडम को मेरा छूना, गरम कर रहा है. पर पहले मुझे कन्फर्म करना था की वो सच में गीली है की नहीं, मेने एक बार उनकी और देखा और फिर झंघ को मसलते हुए पंतय के उस हिस्से को ऐसे छुआ जैसे की गलती से छू गया हो, मेरी ऊँगली पर चिकनाहट साफ़ महसूस हो रही थी, मुझे यकीं हो गया की वो गरम हो गयी है. उनकी छूट से पानी निकल रहा है. मेने उन्हें थोड़ा और मज़ा देने की सोची, एक दो बार के अंतर पर में छूट के उस हिस्से को छूने लगा. मेने देखा की मैडम की मुट्ठी चद्दर को मसल रही है.)

काव्य : (शह्ह्ह्हह्ह उसकी ऊँगली बार बार मुझे वह छू रही थी, जब पहली बार उसने छुआ था तो मुझे लगा की गलती से लग गया होगा पर अब थोड़ी थोड़ी देर में उसकी ुंली वह लग रही थी, वो ये जान बुज कर कर रहा था, ये सोचते hi मेरी हालत ख़राब होने लगी, वो मेरी उस जगह को देख रहा था, छू रहा था, मेरी हालत और ख़राब हो रही थी, वो ऐसे छू रहा था की जैसे अनजाने में छू रहा हो, पर में जानती थी की वो जान बुज कर छू रहा है, मेरा दिल कहने लगा की अच्छे से छू लो शिव, मुझे बहोत अच्छा लग रहा है, पर में ऐसा कह नहीं सकती थी, में अपनी आंखे बंद किये हुए ऊँगली के उस स्पर्श को महसूस करने लगी, शायद वो भी समाज रहा था की मुझे पता है, पर न वो खुल कर कह शक्ति था न में)

शिव : (मुझे यकीं हो गया था की मैडम को मेरे छूने से कोई एतराज नहीं है, वो मेरे लिए इतना कुछ कर रही थी तो में उन्हें स्पर्श का सुख तो दे hi सकता था, मेने कदम आगे बढ़ने का सोचा, में झांग के जोड़ पर गोल गोल मस्सग करने लगा, इस तरह से मेरी उंगलिअ झंघ के जोड़ पर पूरी तरह से चल रही थी, एक बार मेने ऊँगली को छूट के होठ पर भी घुमाया तो मैडम थोड़ी कैंप गयी, पर बोली कुछ नहीं, में अब निश्चिंत हो गया था, झंघ को मसलते हुए मेने ऊँगली को पंतय के साइड से थोड़ा अंदर खिसकाया, छूट के आस पास के बल मुझे महसूस होने लगे)

काव्य : (शिव की उंगलिअ मेरी पंतय के अंदर जाने लगी थी, शहहह मेरी हालत ख़राब हो रही थी, ये लड़का कितना फ़ास्ट था, वो बिना डरे मेरी छू... शहहह में क्या बोल रही हु, वो उसे छू रहा था, मुझे उसे रोकना चाहिए था पर में उसे नहीं रोक रही थी, मुझे उसका वह छूना अच्छा लग रहा था)

शिव : मैडम.

काव्य : (ये क्यों मुझे बुला रहा है, कर न जो करना है, कही मालिस हो गयी ऐसा तो नहीं कह रहा)

शिव : मदाम..

काव्य : (प्लीज शिव, ये मात कहना की हो गया, और थोड़ी देर प्लीज)

शिव : मदाम .

काव्य : (मुझे गुस्सा आ रहा tha,)Hmmmmm?

शिव : दूसरे पेअर की भी मालिस कर दू?

काव्य : (ओह गॉड, ये तो दूसरे पेअर की मालिस की बात कर रहा है, जिओ शिव जिओ मेरे शेर, में किसी भी चीज को मन नहीं करुँगी करो तुम्हे जो करना है) ह्म्म्मम्म.

शिव : (उनकी हालत से मुझे पता था की वो मन नहीं करेगी, पर पूछना जरुरी था, मेने तेल लिया और दूसरी झंघ को भी मसलने लगा, अब दोनों हाथो से दोनों झंगो को मसल रहा था, थोड़ी देर बाद मेने दोनों अंगूठो की मदद से छूट के आस पास वाले झंघ के जोड़ को अच्छे से मसलना सुरु कर दिया, उनके शरीर का कम्पन में महसूस कर रहा था, मेने देखा की पंतय अब बहोत गीली हो चुकी थी, में जोड़ को सहलाते हुए अंगूठो को थोड़ा पंतय के अंदर तक घुसाने लगा, फुले हुए होठ और उसके आस पास के बाल मुझे महसूस हो रही थे, में सिर्फ साइड से hi होठो को छू रहा था, इतना जल्दी आगे बढ़ना खतरे से खली नहीं था, वैसे तो में अब समाज सकता था की वो भी यही चाहती है पर फिर भी में रिस्क नहीं ले सकता था)

काव्य : (शहहह ओह शिव शहहहहह और अंदर डालो शह्ह्ह्ह क्यों तरसा रहे हो शह्ह्ह्ह थोड़ा सा और, शायद शिव ने उसकी बात सुन ली और पंतय के ऊपर से hi उसकी पूरी छूट को उसने अंगूठे से सेहला दिया, आनंद के मरे उसकी आवाज निकलते निकलते रह गयी, वो उसकी झंगो को सहलाते हुए उसके छेड़ को भी दबा दे रहा था, उसका मान कर रहा था की शिव से कहे की पंतय निकल दो पर वो ऐसा नहीं कर शक्ति थी)

शिव : (काफी देर मस्सगे करने के बाद में रुक गया, क्यों की अब और ज्यादा आगे नहीं बढ़ सकता था तो मेने kaha)Ho गया मैडम.

काव्य : (उसकी बात सुन कर मुझे इतना गुस्सा आ रहा था की क्या बताऊ, पर में गुस्सा भी नहीं कर सकती थी, मेने सिर्फ इतना kaha)Hmmmmm.

शिव : अब दर्द कैसा है?

काव्य : (दर्द का तो में कब से भूल गयी थी, पर फिर महसूस हुआ की दर्द अब नहीं है, सच में वो जादूगर hai)Thik है, दर्द महसूस नहीं हो रहा है.

शिव : में हाथ धो लेता हु, आप, कपडे पहन लीजिये.

काव्य : (निकले थे तुमने तो अब खुद pehnao)Thik है.

में हाथ धोने चला गया, थोड़ी देर बाद वो बहार आ गयी. वो मेरे सामने देखने से कटरा रही थी. तो मेने माहौल को ठीक करने के लिए कहा.

शिव : प्लीज मैडम, ऐसे शर्माइये नहीं, इलाज के लिए ये सब तो करना hi पड़ता है, अब दर्द वह था तो में और आप क्या कर शक्ति थे, अच्छी बात ये है की अब दर्द नहीं है.

काव्य : में खाना लगाती हु.

शिव : आप बैठिये, में लगा देता हु.

काव्य : तुम्हे थोड़ी न पता है सब?

शिव : आप बताती जाइये, क्या कहा है, में लता जाऊंगा.

काव्य : (मुस्कुराते hue)Thik है (वो बताती गयी, में सब लता गया, फिर हम दोनों खाने लगे) ये फिर से तुमने क्या काण्ड कर दिया?

शिव : मेने थोड़ी न किआ है, मेने तो सिर्फ बचाया है.

काव्य : जानती हु, प्रकाशरोजी का फ़ोन आया था, वो उन लड़को पर केस करनेवाले है, मेने भार्गविजई से भी बात की थी, तुम हर जगह क्यों अपनी तंग ऐडा देते हो?

शिव : (मुस्कुराते hue)Me अपनी तंग नहीं डाटा, वो खुद बा खुद मेरी तंग में अड़ जाता है. (वो भी हसने लगी)

ऐसे hi बाते करते हुए, हमने खाना खाया. फिर में वह से घर लौट गया. रात के करीब 10 बज रहे थे, अभी सोने में देर थी तो में किताब निकल कर पढ़ने बाथ गया. लतादिदी आज नहीं आयी थी. वो सरितादिदी और गायत्रीदिदी के साथ बच्चोंवाले कमरे में सो रही थी. में पढ़ रहा था की मुझे पीछे आहत सुनाई दी, मेने पीछे मुद कर देखा तो सरितादिदी कड़ी थी.

शिव : दीदी आप?

सरितादिदी : है. (वो अंदर आयी और दरवाजा बंद कर दिया, और मेरे बिस्तर पर बेथ गयी)
 
सॉरी फ्रेंड, फेस्टिवल टाइम, की वजह से टाइम नहीं मिल प् रहा, पर जल्द hi मिलेंगे.
 
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