Adultery Kundali Bhagya - Page 16 - SexBaba
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Adultery Kundali Bhagya

ज्यादा बड़ा अपडेट दे नहीं पाया इस्सके लिए सॉरी.
 
अपडेट 102

सुबह का वक़्त था, स्टेडियम में भी काफी सरे लोग बैठे हुए थे, दर्सको से ज्यादा तो खिलाड़िओ के रिस्तेदार थे जो उन्हें सपोर्ट करने आये थे. यहाँ पर सिर्फ दौड़ का आयोजन किआ गया था तो सिर्फ दौड़ hi होनेवाली थी. अलग अलग जगहों से पुरे स्टेट से खिलाडी आये हुए थे, में और जूही अपने अपने कपडे पहन ने चले गए. में कपडे बदल कर बहार आ गया और जूही को देखने लगा, थोड़ी देर बाद वो मुझे आती नजर आयी, चुस्त कपड़ो में उसके सरे उभर स्पस्ट दिख रहे थे, वो जैसे जैसे मेरी और आ रही थी में आंखे फाडे उसे hi देख रहा था, (जूही ने शिव को ऐसे देखते देखा तो उसे आज पहलीबार इन कपड़ो में शर्म आयी, पर फिर भी वो उसके पास पहुंच गयी, उसके पास पहुंचने पर भी जब शिव उसे घूरे जा रहा था तो वो बोली)

जूही : शिव.

शिव : हा.

जूही : ऐसे क्या देख रहे हो?

शिव : सॉरी यार, वो वो...

जूही : रहने दो, चलो अब. (हम दोनों मैदान में आ गायें हमारी तरह बहोत सरे खिलाडी थे, पहले थोड़ी देर सब घोसना हुई, उसमे काफी साडी इंस्ट्रक्शन दी गयी, वैसे तो सब पता hi होता है पर फिर भी वो ये सब दोहराते hi है. उसके बाद प्रतियोगिता सुरु हो गयी, यहाँ भी 8-8 की जोडिओ में दौड़ना था, पहले लड़को को बरी थी, पहले दो राउंड के बाद मेरी बरी आयी) आल थे बेस्ट शिव.

शिव : थैंक यू. (में अपने ट्रैक पर चला गया, 100 मत की रेस थी, मेने अपने प्रतिद्वन्दीओ को एक नज़र देखा, वो भी सबको देख रहे थे, फिर जैसे hi कहा गया हम अपनी अपनी लेन में खड़े हो गए, गेट सेट जो सुनते hi में दौड़ पड़ा, दौड़ते हुए में आस पास देख लेता था, में सेकंड आया, मेरे और पहले नंबर के बिच सिर्फ कुछ मिलीसेकंड का hi अंतर था. में जूही की और गया)

जूही : (चिंता se)Aisa क्यों हुआ शिव, तुम दूसरे नंबर पैर.

शिव : (मुस्कुराते hue)Time नहीं देखा मेरा.

जूही : वही तो कह रही हु, टाइम भी ज्यादा लिया तुमने.

शिव : ये अभी फर्स्ट राउंड hi तो है, इसमें सिर्फ पहले या दूसरे नंबर पैर आना है, ताकि हम अगले राउंड में जा शेक, अभी से अपनी पूरी क्षमता से दौड़ने का क्या लाभ.

जूही : (मुस्कुराते hue)Achchha तो तुम जान बुज कर धीरे दौड़े, फिर तो कोई बात नहीं. (एक घंटे बाद दूसरा राउंड हुआ, इसमें में कुछ hi मिलीसेकंड से पहला आया, फिर सेमीफइनल हुआ, उसममे दूसरा आया, अब सिर्फ फाइनल बचा था जो की लड़कीओ की रेस के बाद होना था. पहले hi राउंड में जूही की बरी आ गयी, मेने उसे बेस्ट ऑफ़ लक कहा और में साइड में चला गया, जब उनकी रेस ख़तम हुई तो जूही hi पहले नंबर पर थी, जब वो आयी तो मेने उसे गले लगा लिया, उसके साथ में दौड़नेवाली लड़कीअ हम दोनों को देखते हुए जा रही थी. फिर लड़कीओ का राउंड चला, साडी लड़कीअ ऐसे चुस्त कपड़ो में hi थी, एक नज़र में उनको देखलेता था पर अब इतना ध्यान नहीं जाता था, लड़कीओ का भी राउंड ख़तम हुआ, जूही भी फाइनल में पहुंच गयी थी. पहले लड़को की फाइनल की घोसना hui)Good लक Shiv.(Muje गले लगा कर उसने कहा)

हम अपनी ट्रैक पर पहुंच गए, फाइनल थी तो उत्साह भी ज्यादा था, लोग भी चिल्ला रहे थे, कुछ फोटो ग्राफर फोटोज ले रहे थे, और कुछ फिनिश लाइन पर भी दिख रहे थे. में ट्रैक पर खड़ा हो गया, मेने आंखे बंद की, और गहरी साँस ली, आंखे खोली और जूही की और देखा तो उसने तुमसुप किआ. हमने पोसिटिव ली और गेट सेट जो... में तेज रफ़्तार सेदौड पड़ा, मुझे कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था, में पूरी ताकत से दौड़ पड़ा था, जब अंतिम रेखा पर की तो रहत की साँस ली. सब लोग चिल्ला रहे थे, मेने अस्स पास देखा था तो कोई था नहीं, मुझे लगा की में hi पहले नंबर पर हु, हम सब फाइनल अनाउंसमेंट का वेट कर रहे थे, जब अनाउंसमेंट हुई तो में hi पहले नुम्बेर पर था और वो भी एक सेकंड से ज्यादा मार्जिन से. में दौड़ते हुए जूही की और बढ़ा वो भी मेरी और बढ़ी और मुझे गले लगा लिया. में पहले नंबर पर था. कुछ लड़कीअ भी मुझसे हाथ मिलाने आयी और मुझे कोंग्रटुलतिओं कहा. फिर लड़कीओ का फाइनल हुआ, जूही hi पहले नंबर पैर आयी. मेने भी उसे गले लगते हुए जमीं से ऊपर उठा लिया. बहोत लोगो ने उसे भी बधाई दी. उसके बाद मॉडल सेरेमनी हुई, हम दोनों गोल्ड जीत कर बहोत खुस थे. स्टेट चैंपियनशिप की और ये एक और कदम था. हम अपने होटल आ गए. अंदर आते hi हम दोनों ने एक दूसरे को पकड़ लिया और किश करने लगे. किश करने के बाद जब हमने एक दूसरे को देखा तो दोनों हुस पड़े. मेने उसे अपनी बहो में भर लिया.

जूही : आज यही रुक जाये?

शिव : अपने दिमाग के घोड़े ज्यादा मात चलाओ, पैकिंग करो, रात तक हम घर पहुंच जायेंगे. (जूठा गुस्सा दिखते हुए वो समाज पैक करने लगी, में भी मुस्कुराते हुए सामान पैक करने लगा, हम दोनों फिर से अपने सहर की और निकल गए)

बिना ने आज अपनी नानन्द को फ़ोन किआ था, फ़ोन करने का मकसद कुछ और था. अब डॉक्टर ने भी माहोर लगाडी थी की वो गर्भवती है. उसे अपनी ननद ममता की याद आयी, वो भी तो बच्चे न होने का दर्द झेल रही थी.

ममता : कैसी हो भाभी, आज मेरी याद कैसे आ गयी?

बिना : क्यों ?में अपनी ननद को फ़ोन नहीं कर शक्ति क्या?

ममता : कर शक्ति है, और चाहे तो रोज़ कर शक्ति है, सच कहु तो में आप को hi याद कर रही थी. (सच में वो अपनी भाभी को hi याद कर रही थी, क्यों की वो जानती थी की उसकी भाभी भी बच्चा न होने की वजह से दुखी है, वो ये सोच रही थी की अगर वो माँ बन गयी तो वो अपनी भाभी को भी माँ बनवा शक्ति है)

बिना: अच्छा, क्यों याद कर रही थी.

ममता : (मान में, भाभी, में जिस बात के लिए आप को याद कर रही थी वो कैसे बताऊ समाज नहीं आ रहा, शायद में माँ बन ने वाली हु और अगर में माँ बन शक्ति हु तो आप भी बन शक्ति है, मुझे कोई ऐसा मिला है जिस की वजह से में माँ बन ने वाली हु, पर में कैसे कहु की मेरे अपने पति के अलावा किसी और के साथ सम्बन्ध बनाये hai)Kyu, क्या में ऐसे hi याद नहीं कर शक्ति, आप ने मुझे कैसे याद किआ?

बिना : (मान में: क्या कहु तुम्हे, में माँ बाण नेवाली हु, है तो ये खुसी की बात पर में ये अभी नहीं बता शक्ति, पहले थोड़ा टाइम हो जाये, क्यों की जिस तरह से तुमने बताया था ये मुमकिन नहीं है, तो फिर ये गर्भ थोड़े समय तक टिका रहे, उसके बाद में बताउंगी, पर में तुम्हे इस लिए याद कर रही थी की अगर में माँ बन शक्ति हु तो तुम भी बाण शक्ति हो, पर में ये तुम्हे कैसे कहु की किसी और के साथ सम्बन्ध बना लो, क्यों की इसी तरह में माँ बन रही हु, ऐसा कहने के लिए मुझे ये भी कहना पड़ेगा की में किसी और के साथ सम्बन्ध बना कर माँ बन रही hu)Are कुछ नहीं, क्या में अपनी ननद का हल चल पूछ ने फ़ोन नहीं कर शक्ति.

ममता : बिलकुल कर शक्ति है, बल्कि मुझे तो अच्छा लगा की अपने मुझे फ़ोन किआ. क्या आप घर आयी है?

बिना : नहीं, में तो नौकरी वाले सहर hi हु.

ममता : चलो, ये तो अच्छी बात है, की अपने वह से मुझे फ़ोन किआ, मतलब आप को सच में मेरी याद आयी, क्यों की अगर आपने घर से किआ होता तो मतलब आप घर आयी होती और माँ से बात करके मेरी याद आयी होती, पर यहाँ तो आप सच में मुझे hi याद कर रही थी.

बिना : (तुम्हे hi याद कर रही थी, में चाहती हु की तुम्हारा भी माँ न बन ने का कलंक धूल जाये, पर कैसे कहु ये समाज नहीं आता, कैसे में अपनी मर्यादा तोड़ कर तुमसे बात karu?)Aur नहीं तो क्या, आप अच्छी तो हो न? और घर में सब शांति.

ममता : है भाभी, सब अच्छा है (और उपरवाले ने चाहा तो और भी अच्छा हो जायेगा, बस एक बार माँ बन जाऊ, में ये खुसी आप को भी देना चाहती हु, पर कैसे कहु समाज नहीं aata)Me, वो और मेरी सास hi रहते है, ससुरजी तो नौकरी की वजह से बहार रहते है और मेरी ननद अपने खेल की वजह से बहार रहती है. तो घर में बस हम तीन hi है, कोई ज्यादा काम भी नहीं होता.

बिना : तुम्हारी ननद भी है, कितनी अजीब बात है, मुझे ये पता भी नहीं.

ममता : अपने खेल की वजह से आप की शादी में भी वो नहीं आयी थी, तो फिर आप कैसे जानती होगी, और मेरी शादी तो आप से पहले हुई थी तो आप कभी मेरे ससुरालवालों से मिली भी नहीं, आपकी शादी में मेरे सास- ससुर और वो आये थे, तो आप उनसे मिली है पर याद भी नहीं होंगे क्यों की अपनी शादी में हम इतने लोगो से मिलते है की सब हमे याद भी नहीं रहते. और फिर आप अपनी नौकरी के चलते चली गयी तो वैसे भी हमारा मिलना काम होता है.

बिना : सच कहती है आप, लगता है, आप से मिलने आपके घर आना पड़ेगा, में बात करती हु आप के भैया से. अगर उनको टाइम मिला तो उनके साथ वर्ण में अकेली hi आ जाउंगी कभी.

ममता : है भाभी जरूर. (मुझे लगता है ये सब बाटे फ़ोन पर करना ठीक नहीं, अगर वो यहाँ आएगी तो आमने सामने बेथ कर hi बात की जा शक्ति hai)(Waha बिना के मान में भी यही चल रहा था)

भार्गवी पुलिस स्टेशन से अपने घर जा रही थी, पर उसके दिमाग में आज हुई घटना hi चल रही थी, आज भी एक तवोव्हीलर की चोरी की कम्प्लेन आयी थी. उसे कही न कही लग रहा था की इन सब के पीछे जाहिर गेराज का hi हाथ था पर उसके पास कोई साबुत नहीं था. उसे शिव की बात याद आयी, वो लोग वह गए थे, हो शक्ति है की वो लोग फिर से शिव के साथ कोई सौदा करने के लिए मान जाये, पर वो एक स्कूल जाता लक्का था, उसको वो ऐसे कामो में नहीं घसीट सकती थी, शिव की याद आते hi उसे उस दिन वाली घटना याद आ गयी, वो ये बात कई बार याद कर चुकी थी, वो चाहे या न चाहे वो उसे याद आ hi जाता था, वो घर पहुंच गयी. सोफे पे आंख बंद किये फिर से उसे वो याद आने लगा, वो अभी भी अपने कूल्हों के बिच उस दबाव को महसूस कर शक्ति थी, शिव की उस हरकत से उसे गुस्सा भी आता था, आज तक किसी की हिम्मत नहीं हुई थी की कोई उसके साथ इस हद तक हरकत कर जाये. वो अपने काम के बोज के निचे अपनी भावनाओ को कुचल कर रख देना चाहती थी. अपने टूटे सम्बन्ध के चलते उसने ये फैसला कर लिया था की अब दोबारा वो किसी के साथ कोई सम्बन्ध नहीं बनाएगी. शादी टूटने के बाद उसके घरवालों ने कई बार दूसरी शादी के लिए कहा था, कुछ लोग उसको मिलने भी आये थे, पर उसका रुतबा देख उनकी हिम्मत नहीं हो रही थी इस लड़की को अपनी बहु या बीवी बनाने की. और अब भार्गवी का भी कोई मान नहीं था, बस वो अकेले hi रहना चाहती थी. अपने खयालो से बहार निकल कर वो नहाने चली गयी, पुरे दिन की भगा दौड़ी से वो वैसे भी थक गयी थी, गर्म पानी में नाहा कर उसे अच्छा लगा.

रात को में और जूही सहर पहुंच गए. उसका स्कूटर पार्किंग में hi रक्खा था तो हमे कोई दिक्कत न हुई. मेने उसे स्कूटर सीधे अनाथालय लेने को कहा, वह हम सब ने साथ मिलकर खाना खाया, सुब ने जूही को भी बधाई दी. वो भी बहोत खुस हो गयी. खाना खाने के बाद वो घर चली गयी. पुरे दिन की भगा दौड़ी से में थका हुआ था तो जल्दी hi सो गया. सुबह उठ कर में स्कूल चला गया. मेने अपने दोस्तों को बता दिया की में जीत कर आया हु. दोपहर को मेने पवनसीर को फ़ोन किआ की में आ गया हु और साइट पर जा रहा हु. उन्होंने भी है कह दिया. में साइट का काम देख रहा था. ये एक सोसाइटी बन रही थी, एक माकन पूरा रेडी करवादिया था और दूसरे तैयार हो रहे थे. वह काम करनेवाले अब मुझे जान गए थे तो काम करने में कोई दिक्कत नहीं थी. वह तीन लड़कीअ था, झुमरी, भोली और कमली. वो बहोत चंचल थी और काम करते करते हमेशा हसी मज़ाक किआ करती थी.

झुमरी : ै बाबू, कहा चले गए थे, इतने दिनों से?

शिव : बहार गया था, क्यों?

कमली : बाबू, बहार आप गए थे और काम में दिल इसका नहीं लग रहा था. (ये कह के सब हुस्ने लगी)

झुमरी : मुझे क्या सुना रही है, तू खुद भी तो कितनी बार पूछ चुकी थी की बाबू क्यों नहीं aaya?(Wo बात कर रही थी की वो सुपरवाइजर आया)

सुपरवाइजर : ै लड़कीओ, यहाँ गप्पे क्यों लड़ा रही हो, जाओ अपना काम करो.

कमली : (अपना मुँह बनाते hue)Hum तो अपनी प्यास बजाने आये थे, पानी पिने आये थे.

सुपरवाइजर : अब पि लिया न, जाओ काम पे लगो.

झुमरी : पानी तो पि लिया पर प्यास नहीं buzi.(Fir वो सब हुस्ने लगी)

सुपरवाइजर : जाओ यहाँ से वर्ण काम से निकल दूंगा.

कमली : इ साहब, धमकी किसी और को देना, हमारे मुँह के साथ हाथ चलते है इसीलिए हमे काम देते हो, जितना काम हम करती है उतना काम कभी करके दिखाओ तो पता चले, और रही बात काम से निकलने की तो हमे कोई फर्क नहीं पड़ता, बहोत लोग है काम देनेवाले.

सुपरवाइजर : बहोत जुबान चलने लगी है तुम्हारी, तुम्हारे बाप से कहना पड़ेगा.

कमली : तो जाओ न, रोका किसने है, चल जुमारी. (वो तीनो वह से निकल गयी)

सुपरवाइजर : इन लोगो से ज्यादा बात करने की जरुरत नहीं है, अगर ऐसे hi रहोगे तो ये तुम्हारे शिर पर चढ़ जाएगी, और काम होने से raha.(Muje उसका व्यव्हार समाज में नहीं आ रहा था, मेने देखा था की ये लड़कीअ बहोत काम करती है, और सिर्फ इन लड़कीओ की बात नहीं थी, वो हर किसी पर चिल्लाता रहता था, वह काम कर रहे आदमीओ पर भी चिल्लाता रहता था, मुझे सुना कर वो आगे बने माकन में चला गया, में भी जहा काम चल रहा था वह आ गया)

झुमरी : क्या हुआ बाबू, चला गया वो.

शिव : है.

झुमरी : एक नंबर का कमीना है वो, अभी जा कर वह तैयार माकन में लेट जायेगा, जैसे पहाड़ खोद दिया हो.

दिनु : क्या हुआ Jhumari?(Waha काम करनेवाला एक और आदमी)

झुमरी : कुछ नहीं, हम थोड़ी देर पानी पिने क्या गए वो कमीना चिल्ला रहा था हम पर.

दिनु : तुम क्यों उस से उलझती रहती हो, अपने काम पर ध्यान दो.

झुमरी : हम तो काम hi कर रहे है, इंसान है कोई मशीन नहीं, प्यास लगती है तो पानी पीना पड़ता है.

दिनु : छोड़ उसे, उसे आदत है.

झुमरी : तुम्हे आदत होगी उसकी गालिया सुन ने की, में उसके बाप की गुलाम नहीं हु, और वो सब को डरा कर क्या करना चाहता है, पता है न.

दिनु : छोडो उसे, हर जगह ऐसे hi लोग होते है, तुम चाहे यहाँ काम करो चाहे कही और, तुम्हे ऐसे hi लोग मिलेंगे.

झुमरी : झुमरी की इज्जत इतने सस्ती नहीं है समजे तुम.

उनकी बातो से मुझे समाज आ रहा था की वो क्या कहना चाहती है. मेने नजर रक्खी तो मुझे झुमरी की बार सही लगी, मेने एक औरत को उस घर में जाते हुए थी देखा जहा वो सुपरवाइजर था. आधे घंटे बाद वो औरत आराम से बैठी रही, उसने कोई काम नहीं किआ. में उस औरत को देख रहा था की झुमरी फिर मेरे पास आयी.

झुमरी : क्या देख रहे हो?

शिव : कुछ नहीं.

झुमरी : (मुस्कुराते hue)Yahi देख रहे हो न की वो बिना काम किये बैठी है.

शिव : है, वो बस कब से आराम hi कर रही है.

झुमरी : आज उसने जितना काम करना था, कर लिया.

शिव : क्या मतलब है तुम्हारा.

झुमरी : आज उसे काम नहीं करना होगा, इसीलिए वो सुपरवाइजर के पास जा आयी, तो अब उसकी छूती, आज के दिन का काम ख़तम.

शिव : तुम कहना क्या चाहती हो?

झुमरी : अब तुम इतने भी भोले हो नहीं शक्ति, यहाँ यही चलता है, जिसको काम न करना हो वो सुपरवाइजर को खुस कर आती है, फिर उसकी छूती, पुरे दिन का पैसा भी मिलता है और काम भी नहीं करना पड़ता. में उसको घास नहीं डालती इसीलिए वो मुझपर चिल्लाता रहता है. आदमीओ का मुँह वो पैसो से बंद करता है, पैसे सेठ का होता है पर एडवांस दे कर वो उनका मुँह बंद कर देता है. लोगो को भी पैसो की जरुरत होती है तो वो उसकी गालिया सुनते है.

शिव : वैसे उस औरत के नज़रिये से देखा जाये तो उसके लिए तो अच्छा hi है न, है सेठ का नुकसान होता है पर उसका तो फायदा hi है न.

झुमरी : सही कहा तुमने.

शिव : तो तुम क्यों नहीं करती?

झुमरी : (मुझे घर कर देखते hue)Muje जरुरत नहीं है, अगर ऐसे hi पैसे कमाने होते तो यहाँ मजदूरी करने नहीं आती, रंडी बन जाती तो इस से ज्यादा पैसे कमेटी.

शिव : (मुस्कुराते hue)Gussa क्यों होती हो, मेने तो बस ऐसे hi कहा था, में जान न चाहता था की तुम क्या सोचती हो.

झुमरी : मुझे ऐसे पैसो की जरुरत नहीं है, में खुस हु जितने भी पैसे मिलते है.

शिव : ठीक है, अब काम पर लगो, काम तो करना hi पड़ेगा न.

झुमरी : में तो तुमको ढूंढते हुए आ गयी, हम जहा काम कर रहे है वही रहो तो काम करने में मज़ा आये.

शिव : ऐसा क्यों?

झुमरी : (मुस्कुराते hue)Tumhare जैसा चिकना लड़का कभी देखा नहीं न इस लिए, तुम्हे देखते देखते काम करने में थकन भी नहीं होती.

शिव : (उसकी बात से में है pada)Thik है चलो.

हम फिर से वह आ गए. में देख रहा था की वो तीनो काम करते हुए मुझे hi देखती रहती थी, उनके चेहरे की मुस्कान बता रही थी की वो बहोत खुस है. 5 बजे वो सब छूट जाती है. में वह से जूही के घर चला गया और फिर स्टेडियम. जूही के साथ थोड़ी देर रोमांस करने के बाद में घर की और निकल गया. रात को मेने लतादिदी को कान में कहा की आज रात मेरे साथ सोने आना है तो वो शर्मा गयी. में अपने कमरे में hi पढ़ाई कर रहा था की मुझे आहत सुनाई दी, मेने देखा तो लतादिदी दरवाजे पर कड़ी थी, मेने किताब बंद की और खड़ा हुआ, वो दरवाजे पर hi अपनी नज़ारे झुकाये कड़ी थी, इस वक़्त वो मेरी दीदी नहीं थी, मेरी प्रेमिका थी जो अपने प्रेमी से मिलने आयी थी और आनेवाले पालो को सोच कर वो शर्मा रही थी. में उनके पास गया और उन्हें बाह से पकड़ कर अंदर खिंचा और दरवाजा बंद कर दिया, वो वह कड़ी कड़ी शर्मा रही थी और मुस्कुरा भी रही थी.

शिव : क्या हुआ दीदी, इतना क्यों शर्मा रही हो? (उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, सिर्फ ना में गर्दन हिलायी, उनकी शर्म मुझे बहोत अच्छी लग रही थी, मेने उनका चेहरा उठाया तो भी वो नज़ारे नहीं उठा रही थी, मेने झुक कर उनके होठो को हलके से किश किआ, उन्होंने आंखे बंद कर ली, मेने उन्हें अपनी बहो में उठालिया और बिस्तर पर बिठा दिया. सो सिमट कर बेथ गयी. उनके चेहरे को सहलाते हुए,

शिव : क्या हुआ दीदी, आज इतनी शर्म क्यों आ रही है?

लता : (मुस्कुराते hue)Pata नहीं.

शिव : आप का मान है न? (उन्होंने नज़ारे उठायी और मुझे देखा, फिर शरमाते हुए नज़ारे झुकाते हुए उन्होंने हां का इस्सर किआ, अच्छी लड़कीओ की या शर्मीली लड़कीओ की ये निसानी होती है, चाहे वो कितनी भी बार सम्बन्ध बना ले, शुरुआत में शर्माना नहीं छोड़ती, मेने उनकी चुन्नी को खिंच लिया और साइड में रख दिया, में उनसे सात कर बेथ गया, और उनको गाल पे किश करने लगा तो मुस्कुराने लगी. मेने उन्हें लेता दिया, उनके खूबसूरत चेहरे को सहलाने लगा तो उनका चेहरा प्यार से दमकने लगा, वो बड़े प्यार से मुझे देख रही थी. मेने उनके सुडौल स्तन को सहलाना सुरु किआ तो उनकी आंखे बंद हो गयी, थोड़ी देर उनके दोनों स्तन को सहलाने के बाद मेने ब्लॉउज के हुक खोल दिए, ब्रा में कैद उनके स्तनों को सहलाते हुए दबाने लगा, वो बड़े प्यार से मुझे देख रही थी, मेने झुक कर उनके गले को किश करना सुरु कर दिया, वो प्यार के सागर में डूबने लगी, थोड़ी देर बाद मेने उनका ब्लाउज और ब्रा निकल दिए, उनके उबरे हुए स्तन को सहलाते हुए में उन्हें महसूस कर रहा था, अब उन्होंने मचलना सुरु कर दिया था और साथ में में भी उत्तेजित हो गया था, मेने उनके पेटीकोट का नाडा भी खोल दिया और उसे निकल दिया, अब वो सिर्फ पंतय में थी. मेने देखा की पंतय बहोत ज्यादा गीली हो चुकी थी, जब मेने उनकी और देखा तो वो शर्मा गयी, उनके चेहरे की लाली बता रही थी की वो मेरे प्यार के लिए तरस रही है, मेने उनकी गीली पंतय के ऊपर से hi उनकी छूट को सहलाया तो उन्होंने अपनी टंगे फैला दी. छूट को सहलाते हुए में उनके चुके से खेलने लगा और निप्पल को चूसने लगा.

लतादिदी : शह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्ह ष्ठीीिव शह्ह्ह्ह (मेने अपनी हाथ को पंतय के अंदर दाल दिया और छूट को सहलाते हुए एक ऊँगली छूट के छेड़ में दाल दी, अंदर आग लगी हुई थी, इतनी गर्म हो गयी थी की ऊँगली जला de)Shhhhhh सीईई सशह्ह्ह अह्ह्ह्हह shhhhhhh(Mene अपनी अंडरवियर उतर दी और उनके शिर के पास बेथ गया, मेरे लुंड को देख कर उन्होंने मेरी और देखा, तो में मुस्कुराया, उन्होंने शर्मा के नज़र झुका ली पर मेरे लुंड के टोपे को चाटने लगी. थोड़ी देर लुंड को चाटने के बाद उन्होंने लुंड को अपने मुँह में ले लिया, में उनकी छूट में ऊँगली कर रहा था, थोड़ी देर ये खेल चला, फिर में उनकी टंगे फैला कर बेथ गया, उन्होंने बहे फैलते हुए मुझे अपनी और आने का इस्सर किआ तो में उनके ऊपर झुकता चला गया और साथ में मेरा लुंड भी उनकी छूट को फैलते हुए अंदर उतरने लगा, उनके चेहरे पर सिकन आयी पर उन्होंने मेरे होठो को अपनी गिरफ्त में ले लिया और मेरे गले में बहे दाल कर मुझे चूमने लगी, थोड़ी देर बाद मेने हलके धक्को से शुरुआत कर दी. अब उनकी शर्म गायब थी, वो मुझे उकसा रही thi.)Shhhh जोर से शहहह अह्ह्ह सीईव शहहह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह जोर से शहहहहह अह्ह्ह्हह ऐसे hi शहहह. (काफी देर उनके साथ ऐसे hi चुदाई चलती रही, मेने उनकी टंगे फैला कर पूरा लुंड अंदर दाल दिया tha)Shhhhh अह्ह्ह उफ्फ्फ अहह शठ.

शिव : दीदी अच्छा लग रहा है?

लतादिदी : हाआआआआ शहहह है शिव शहहह बहोत अच्छा लग रहा है, शह्ह्ह्हह्ह, कितना तड़प रही थी में शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह.

शिव : मेने तो बोलै था, अपने hi मन कर दिया था.

लतादिदी : तेरी परीक्षा जो थी, शहहह आअह्ह्ह्ह में hi जानती हु की कैसे मेने मन किआ था शहहह अह्ह्ह्हह.

शिव : दीदी, उलटी हो जाओ. (मेरी बात मानते हुए वो फ़ौरन घोड़ी बन गयी, मेने उनके कूल्हों को किश किआ और फिर से लुंड छूट में दाल दिया, वो सिसकी पर मेने उनकी कमर पकड़ कर पूरा लुंड अंदर दाल diya)Dard तो नहीं हुआ न दीदी.





लतादिदी : होने दे, तू बस करता रह. शहहह आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

हम दोनों एक घंटे तक चुदाई करते रहे, आखिर कर मेने अपना वीर्य दीदी की छूट में भर दिया, उनके कहने पर hi क्यों की ये उनका सेफ पीरियड चल रहा था. वो मेरा लुंड बहार निकलने hi नहीं दे रही थी, वो साइड से ऐसे hi चिपकी रही. एक तो वो एक सुन्दर लड़की, ऊपर से दुनिया में सबसे प्यारी, में कहा संभालता, थोड़ी hi देर में मेरा लुंड फिर से कड़क हो गया, उन्होंने भी मन नहीं किआ. फिर से हमारा खेल सुरु हो गया, जब में तीसरी बार झाड़ा तबतक दीदी न जाने कितनी बार झाड़ चुकी थी.





वो थक कर इतना चूर हो चुकी थी की अपनी छूट से बहते वीर्य के साथ hi पेअर फैलाये hi सो गयी. में भी नंगा hi सो गया.

सुबह दरवाजे की दस्ता से नींद खुली, मेने देखा की दीदी अभी भी वैसे hi गहरी नींद में सोई हुई है. मेने दरवाजा खोला तो बहार सरितादिदी कड़ी थी. में नंगा hi खड़ा था, नींद की वजह से मुझे ध्यान hi नहीं रहा. मुझे ऐसे ननगा देख कर सरितादिदी भी चौंक गयी. जब उनके चौके हुए चेहरे को देखा तब मुझे अपनी स्थिति का बहन हुआ. उन्होंने अंदर नज़र दौड़ाई तो दीदी को नंगा लेता देखा. मुझे धकेल कर वो अंदर आ गयी और दरवाजा बंद कर दिया. वही घुटनो के बल बेथ कर मेरा लुंड अपने मुँह में भर लिया.

शिव : क्या कर रही हो दीदी?

सरितादिदी : सबका ख्याल रहता है, मेरा ख्याल नहीं रहता. कितने दिन हो गए है. (उन्होंने फिर मेरा लुंड अपने मुँह में भर लिया, दो मिनट चूसने के बाद वो कड़ी हुई और अपनी चड्डी निचे खिसकते हुए अपना पेटीकोट उठा कर दीवाल के सहारे कड़ी हो gayi)Jaldi दाल de.(Mene देखा तो उनकी छूट से पानी बह रहा था, मेने लतादिदी की और देखा तो वो सोई हुई थी, मेरा लुंड भी खड़ा हो चूका था, मेने लुंड छूट पर लगाया और उतरदिया, सरितादिदी ने अपना मुँह दबा दिया ताकि आवाज न निकले, अब लुंड छूट में जा चूका था तो में भी सुरु हो गया, दीदी को पकड़ कर खड़े खड़े hi छोड़ने लगा, वो भी अपनी गांड पीछे धकेल रही थी, दस मिनट तक चुदाई के बाद दीदी झड़ने लगी, दीदी अपनी छूट से मेरे लुंड को ऐसे निचोड़ रही थी की मेरा भी छूटनेवाला था, आखरी पल में मेने लुंड बहार निकल लिया और उनके कूल्हों पर अपना सारा माल निकल दिया. वो हांफ रही थी, पर उनके चेहरे पर संतुस्ती की मुस्कान थी. उन्होंने वापस चड्डी चढ़ा ली और कड़ी हो gayi.)Chal जल्दी बहार आ, स्कूल नहीं जाना क्या.

शिव : लतादिदी?

सरितादिदी : उसे सोने दे, लगता है बहोत थक गयी है, में संभल लुंगी सब.

हम दोनों बहार निकल गए. में तैयार हो कर नास्ता कर रहा था की लतादिदी बहार आयी. मुझे नास्ता करते देख वो जल्दी जल्दी सरितादिदी के पास पहोच गयी.

लता : मुझे जगाया क्यों नहीं?

सरिता : तेरी हालत ऐसी थी की सोने दिया. (दीदी शर्मा गयी)

लता : तू आयी थी?

सरिता : है आयी थी, पर तू तो टंगे फैलाये सो रही थी.

लता : (वो बहोत शर्मा gayi)Tune ऐसी हालत में मुझे देखा?

सरिता : तो क्या हुआ, हम दोनों में कुछ छुपा है काया. चल अभी जल्दी से सब काम निपटा, सब को स्कूल जाना है.

वो दोनों काम में लग गयी और में स्कूल चला गया.
 
अपडेट 103

दोपहर को साइट पे जाने से पहले मेने पवनसीर को फ़ोन किआ तो उन्होंने कहा की में घर पर हु तो में उनसे मिलने चला गया. डोरबेल बजने पर स्नेहमड़ाम ने दरवाजा खोला, मुझे देख कर स्माइल के साथ उन्होंने मेरा स्वागत किआ.

स्नेहा : आओ शिव, पवन तुम्हारा hi इंतजार कर रहे है. (में अंदर चला गया, पवनसीर हॉल में hi बैठे हुए थे)

पवनसीर : आओ शिव, बैठो. (स्नेहमड़ाम मेरे लिए पानी ले आयी, मुझे पानी देने के बाद वो वही बेथ गयी, मेने पानी पिने के बाद गिलास वही रख दिया) बोलो कैसे आना हुआ.

शिव : वो साइट के सुपरवाइजर के बारे में बात करनी थी.

पवनसीर : क्या हुआ, कुछ किआ क्या usne?(Me ऐसी बात स्नेहा के सामने नहीं बोलना चाहता था, तो मेने स्नेहा की और देखा, वो समाज गयी)

स्नेहा : तुम दोनों बाते करो, में तुम्हारे लिए मिल्कशेक बनती हु. (वो अंदर चली गयी)

पवनसीर : है बोलो शिव.

शिव : सर, वो सुपरवाइजर वह की लड़कीओ और औरतो के साथ गलत काम करता है, उनका फायदा उठता है.

पवनसीर : (मेरी बात सुन ने के बाद भी वो शांत the)Dekho शिव, जहा तक बुसिनेस्स की बात है, उस से हमें कोई मतलब नहीं है, रही बात उसके ऐसा करने की तो, उसके लिए पुलिस है, अगर किसी को लगता है की उसका गलत फायदा उठाया जा रहा है तो उसे पुलिस कम्प्लेन करनी चाहिए, या फिर मुझसे भी कम्प्लेन करनी चाहिए. जो औरते है वो और वो सुपरवाइजर, दोनों अपना फायदा देख रहे है. है में मंटा हु की उसके बदले वो उस से काम से छूती दे कर हमारा नुक्सान कर रहा है, पर वो निक्सन बहोत छोटा है, ऐसा थोड़ा बहोत तो हर जगह चलता है, और दूसरी बात, वो सुपरवाइजर हमारे बिज़नेस पार्टनर का आदमी है, में उस से शिकायत कर सकता हु, पर वो भी यही कहेगा. है अगर वो किसी के साथ जबरदस्ती करता है तो हम उसके खिलाफ पुलिस में केस दर्ज करवा शक्ति है और उसे निकल भी शक्ति है. तुम्हे शायद मेरी बात अच्छी न लगी हो पर इस दुनिया में ये सब चलता रहता है. वो जो भी औरत है वो अपने फायदे के लिए hi उसके पास जा रही है. ये जो प्रोजेक्ट है वो जॉइंट प्रोजेक्ट है, जमीं पर उसका कब्ज़ा है तो हमें कुछ बातो को नजर अंदाज करना पड़ता है. है अगर वो सामान का गमन करता है या किसी और तरीके से हमें नुकसान पंहुचा रहा है तो में कार्यवाही कर शक्ति हु. इस प्रोजेक्ट में जो मेरा पार्टनर है प्रकाश रओ. उसकी अच्छी खासी पहोच है, यहाँ का मला भी उसका खास मित्र है. तो ऐसे प्रोजेक्ट के लिए जमीं वो मुहैया करवाता है. ये ऐसा बिज़नेस है जिसमे कुछ काम अवैध तरीको से भी होते है, मेरी भी पहोच है पर अभी उतनी नहीं की में ये सब हैंडल कर शकु. (स्नेहा मेरे लिए मिल्कशेक और कुछ नास्ता ले आयी, हमारी बातचीत थोड़ी देर के लिए रुक गयी)

स्नेहा : यहाँ बेतहु की अंदर चली जाऊ?

पवनसीर : ऐसी कोई बात नहीं है, तुम बैठो, तुम्हारे सामने बात करने से ये शर्मा रहा था, पर वो बात हो चुकी है, तुम बेथ शक्ति हो. (स्नेहा ने मेरे सामने देखा, में मुस्कुराया, तो वो भी बेथ गयी) है, तो में कह रहा था की अगर मुझे बड़े प्रोजेक्ट करने है तो जमीनों के मसाले सोल्वे करने पड़ेंगे और उसके लिए पावर चाहिए. अभी की बात करो तो एक प्रोजेक्ट है, एक बड़ी फैक्ट्री का कंस्ट्रक्शन करना है. वो जमीं यहाँ के बहोत बड़े बुस्सिनेस्स्में सूर्यदेव महरा के नाम है, उन्होंने ये जमीं उस प्रोजेक्ट के लिए खरीदी थी पर उस जमीं पर कुछ लोगोने अवैध तरीके से कब्ज़ा किया हुआ है. जहा तक मुझे जानकारी है ये उस मला कमलनाथ के hi आदमी है. वो ये सब खुल कर नहीं कर शक्ति. पिछले 6 महीने से ये प्रोजेक्ट हवामे लटका हुआ है. कमलनाथ और प्रकाश रओ मिले हुए है, वैसे तो प्रकाश रओ और सूर्यदेव में भी अच्छे रिश्ते है, पर बुसिनेस्स, इन रिस्तो नाटो से अलग होता है. कमलनाथ, सूर्यदेव की नाक दबा रहा है, और प्रकाश रओ अपने सम्ब्धो से इसे सुलझाने की कोशिस करेगा, इस तरह ये प्रोजेक्ट उसके पास hi जायेगा. तो अगर मुझे काम करना है तो मुझे उसका साथ देना hi होगा.

स्नेहा : आप भी क्या इससे ये सब बता रहे है, इससे कैसे ये सब पता होगा, आपके बुसिनेस्स की बाते समझने के लिए अभी ये छोटा है. तुम मिल्कशेक पीओ शिव. (मुझे भी स्नेहा की बात सही लगी, वैसे भी मेरे पल्ले कुछ नहीं पड़ा था)

पवनसीर : ये तुम्हारी समाज में नहीं आएगा, जब में इस बुसिनेस्स में आया था तो मुझे भी कुछ पता नहीं था, पर ऐसे hi तो जानकारिया बढ़ती है और आगे बढ़ने के रस्ते खुलते है.

स्नेहा : है पर इससे काया बुसिनेस्स करना है, ये तो खिलाडी बनेगा, आप उसका ध्यान मात भटकाओ.

पवनसीर : (मुस्कुराते हुए) अरे बाबा, में तो बस ऐसे hi कह रहा था, ये इस काम में आया है तो अगर इसकी जानकारी उसे होगी तो उसे hi काम आएगा. क्या कहते हो शिव.

शिव : जी सर. वैसे ये प्रकाश रओ जी, कभी आते नहीं क्या साइट पर, कभी देखा नहीं उन्हें.

पवनसीर : आते है, पर कभी कभी, आज भी गए थे, पर सुबह तुम होते नहीं तो शायद तुम्हारा मिलना नहीं हुआ. अगर मिलना चाहते हो तो मिल शक्ति हो, मुझे उन्हें कुछ डॉक्यूमेंट पहुंचने थे, तुम दे आओ.

शिव : ठीक है.

पवनसीर : में तुम्हे उनकी ऑफिस का एड्रेस दे देता हु, है पर ये कवर उनके हाथ में hi देना, किसी और को नहीं.

शिव : ठीक है.

पवनसीर : मुझे भी एक काम से जाना है, चलो में तुम्हे रस्ते में ड्राप कर दूंगा, वह से तुम्हे ये ऑफिस नज़दीक पड़ेगा.

हम दोनों वह से निकल गए. उन्होंने मुझे एक जगह उतरदिया और फिर आगे का रास्ता समजा दिया. में वह से चलते हुए एक बहुमंजिला ईमारत में गया. उस ईमारत में ये ऑफिस था. ऑफिस में जा कर मेने रिसेप्शन पर पूछा तो उन्होंने बताया की सर अभी ऑफिस में नहीं है, वो घर गए है. मेने पवनसीर को फ़ोन कर दिया. थोड़ी देर बाद उनका फ़ोन आया की में प्रकाश रओ के घर चला जाऊ. मेने ऑफिस से एड्रेस लिया और उनके घर की और चल पड़ा.

साइट पर शिव अभी तक आया नहीं था तो लड़कीओ में काम करने का उत्साह hi नहीं था, वो बार बार उसका रास्ता देख रही थी.

भोली : कहा रह गया वो, अभी तक दिखा नहीं.

जुमारी : है, है जैसे तेरे लिए भगा चला आएगा.

भोली : क्यों नहीं आएगा, अगर में अपना घाघरा उठा दू तो दौड़ा चला आएगा.

जुमारी : कामिनी, सिर्फ नाम की भोली है, लक्षण तो एक भी मेल नहीं खता अपने नाम के साथ. तुजे क्या लगता है, तेरे घाघरे में ऐसा क्या है जो मेरे पास नहीं है.

भोली : मेरे पास कुवारी छूट है.

झुमरी : बड़ी आयी कुवारी छूट वाली, वो तो मेरे पास भी है, और में तेरे से लम्बी भी हु, समाजी.

भोली : लम्बी है तो क्या फर्क पड़ता है?

झुमरी : वो कितना लम्बा है, देखा नहीं तूने, अगर वो इतना लम्बा है तो सोच उसका वो कितना लम्बा होगा. तो तेरे बस की बात नहीं है, उसे लेने की.

भोली : जा, जा मुझे न बना, में भी ले लुंगी.

कमली : ये क्या लगा रक्खा है तुम दोनों ने, वो तो हमारे बारे में ऐसा सोचता भी नहीं होगा और तुम हो की आपस में hi लड़ रही हो. (तभी सुपरवाइजर आता है)

सुपरवाइजर : (ऊँचे आवाज me)Ye क्या टाइम पास कर रही हो, काम पे ध्यान दो.

झुमरी : कर तो रहे है, मु अपना काम कर रहा है और हाथ अपना.

सुपरवाइजर : बहोत जबान चलने लगी है, बहोत उड़ रही हो, लगता है पर कुतरने पड़ेंगे तुम्हारे.

झुमरी : अच्छा, और वो कैसे करेगा तू.

सुपरवाइजर : वो नया लौंडा क्या आया है, सब की सब उसके पीछे hi पद रही हो, तुम लोग भी देखती जाओ, उसे यहाँ से भगा न दिया तो मेरा नाम बदल देना.

झुमरी : अच्छा, फिर क्या नाम राख्नेगे? (सब हसने लगी)

सुपरवाइजर : बहोत पर निकल आये है, अब तू देखती जा में क्या करता हु. (वो वह से गुस्से में चला गया)

कमली : क्यों उसको मुँह लगाती है, हमे यहाँ काम भी करना है सामजी.

झुमरी : जैसे हमें काम की जरुरत है वैसे hi उसे काम करनेवालों की, हम म्हणत करते है तो उनका काम होता है, साला एक दिन तो मेरे जितना काम करके दिखाए, तब समाज आएगा.

कमली : तेरा बाप भी यहाँ काम करता है, वो यहाँ है इस लिए तेरा बाप तुजे काम करने दे रहा है, दूसरी जगह नहीं भेजेगा तुजे.

झुमरी : क्या नहीं भेजेगा, उसे तो अपनी दारू मिलनी चाहिए, सरे पैसे उसी में उदा देता है, अगर में काम न करू तो घर में खाना नहीं बनेगा, वो क्या रोकेगा मुझे काम करने से.

भोली : कहा की बात कहा आ गयी, सत्यानास हो उस मुए का, सारा मूड ख़राब कर दिया. चलो काम पे लगो, और ये अपना चिकना भी कहा रह गया.

भार्गवी भी सहेरे में हो रही चोरिओ से परेशान थी, ऊपर से भी उस पर दबाव बढ़ रहा था. उसने अपने आदमीओ को भी लगा दिया था, और खास करके जाहिर गेराज पर नजर रखने को बोलै था, पर कोई सुराग नहीं मिल रहा था. उसने अपने आदमी के जरिये बाइक को बेचने की भी कोशिस की थी पर ऐसा लग रहा था की वो चुकांना हो गया है. उसे शिव की भी याद आयी, वो कह रहा था की वो कोशिस कर शक्ति है, अब उसे लगने लगा था की एक बार शिव से मिल लिया जाये. क्यों की वो लोग एक बार वह जा चुके है तो हो शक्ति है की जाहिर उनकी बात मान ले. पर शिव का जीकर आते hi उसके जहँ में वो hi पल आ जाता था. वो बरसो से अकेली रह रही थी, शादीशुदा जीवन जीने के बाद वैसे भी अकेले रहना मुश्किल होता है, पर उसने अपने आप को काम में इस तरह डुबो दिया था की किसी और ख्याल के लिए जगह hi नहीं बची थी. इतने सालो में कोई भी इतना करीब नहीं आया था जितना शिव आया था, भले hi वो उसके साथ कसरत और प्रैक्टिस hi कर रही थी पर वो उसके शरीर को छूटा था, उसके पति के बाद शिव पहला व्यक्ति था जो उसे छू रहा था. वैसे भी वो जिस पोस्ट पर थी किसी की हिम्मत नहीं थी की उसकी और आंक उठा कर देखे. और शिव ने भी कुछ जान बुज कर तो किआ नहीं था, वो तो बस हो गया था, अब वो थी तो एक लड़की, और अगर कोई लड़की किसी लड़की के इतना करीब हो तो ऐसा हो जाना संभव है. वो पिछले कई दिनों से ये सोच रही थी की ऐसा क्या हुआ की शिव उत्तेजित हो गया था, उसको ऐसा क्या अच्छा लगा की वो उसके साथ ऐसी हरकत कर बैठा. उस घटना के बाद जब वो उस से मिली थी तो कितना घबरा रहा था. एक गलती तो किसी की भी माफ़ की जा शक्ति है, वैसे भी उसे शिव के साथ टाइम बिताना अच्छा लगता था. जान पहचान तो उसकी बहोत थी पर ऐसे निजी सम्बन्ध कह शेक ऐसा कोई नहीं था. शायद इसीलिए उसको शिव के साथ इस तरह टाइम बिताना अच्छा लगता था. पर अभी भी वो शिव से मिले की न मिले इस्सके लिए दुविधा में थी.

में बताये एड्रेस पर प्रकाश रओ जी से मिलने पहुंच गया था. बहोत आलीशान बांग्ला था उनका. और वैसे भी वो कस्ट्रक्शन लाइन में थे तो बंगलो तो ऐसा आलीशान बनाना hi था. बहार गेट पर चौकीदार भी था. मेने उसे अपने आने का कारन बताया तो उसने मुझे अंदर जाने दिया, शायद उसको पहले से कह दिया गया होगा, क्यों की पवनसीर ने फ़ोन कर दिया था. में अंदर गया तो एक बड़ा सा दरवाजा था जो खुला हुआ था. अंदर बहोत बड़ा हॉल दिख रहा था पर ऐसे अंदर जाना मुझे ठीक न लगा इस लिए में दरवाजे पर hi खड़ा रहा और दरवाजे को खत खतया, एक नौकर वह आया और मुझसे पूछने लगा, तभी अंदर से एक औरत की आवाज आयी.

आवाज : कोण है काका? (पूछते पूछते वो रसोई से बहार आयी तो में देखते hi चौंक गया, वो भी मुझे देख कर चौंक gayi)Tum??? यहाँ???

शिव : जी, प्रकाश रओ जी से मिलना था. (ये स्वर्ण थी)

स्वर्ण : आप जाओ काका, (वो नौकर चलागया तब तक वो कुछ न boli)Tum मेरे ससुरजी को जानते हो? (उसके चेहरे पर चिंता के बदल छाये हुए थे)

शिव : नहीं, जनता तो नहीं, पर में जहा काम करता हु वह से मुझे उन्हें देने के लिए कुछ दिया हुआ है तो में वही देने आया हु. (में उनके चेहरे के भाव समाज रहा था, में उनका दर साफ़ महसूस कर प् रहा था, मेने धीमी आवाज में कहा) आप चिंता मात कीजिये, आप को डरने की जरुरत नहीं है.

स्वर्ण : (उसके चेहरे पर रहत के भाव उभर आये, उसने स्माइल करने का प्रयत्न kia)Sorry, वो तुम्हे एकदम से सामने देख कर थोड़ा दर गयी थी, मुझे पता है तुम वैसे नहीं हो, आओ अंदर आओ. (में उनके पीछे पीछे अंदर चला gaya)Tum बैठो में, पापा को खबर करती हु. काका ो काका, जरा साहब को खबर दीजिये शिव उनसे मिलने आया है.

(में सोफे पर बेथ गया, घर बहोत hi एलिसन था में सब देख hi रहा था की अंदर के कमरे से एक आदमी बहार आया, चस्मा लगाए, उसने घर में पहन ने वाला ओवर कोट पहना हुआ था जो अक्सर आमिर लोग पहनते है. उन्हें देख कर में खड़ा हो गया, वो वह रक्खी एक चेयर पर बेथ गए, पर मुझे बैठने को नहीं बोलै तो में खड़ा hi रहा, मुझे ऊपर से निचे देखते हुए)

प्रकाश रओ : है बोलो?

शिव : जी, शिव, मुझे पवनसीर ने भेजा है, आप को ये देने के liye(Unke नजदीक जा कर मेने कवर उनकी और बढ़ा दिया, उन्होंने कवर खोला और देखने लगे, तभी स्वर्ण मेरे लिए पानी ले कर आयी)

प्रकाश रओ : ये क्या बहु, तुम क्यों पानी ले कर आयी, नौकर मर गए है क्या. (उनकी आवाज में कड़क पैन और बे रूखी थी)

स्वर्ण : (डरते hue)Ji जी वो काम कर रहे थे तो में ले आयी.

प्रकाश रओ : ये कोई मेहमान नहीं है, ये भी एक नौकर है हमारा, काम करता है हमारे वह. तुम जाओ. (मुझे उस सेल पर बहोत गुस्सा आ रहा था, घमंड उसके चेहरे से उसकी बातो से टपक रहा था, स्वर्ण बेचारी बड़ी दया से मुझे देख रही थी, मेने सिर्फ पलके झपका कर है कहा तो वो वापस चली गयी, जाते जाते भी उसने मेरी और dekha)Kya नाम है तुम्हारा?

शिव : जी, शिव.

प्रकाश रओ : ठीक है, में पवन से बात कर लूंगा. (ये मेरे लिए जाने का आदेश था, तभी मेने देखा की एक लड़की ऊपर से नीचे उतर रही थी, उसे देख कर भी में चौंक गया, ये वैस्वी थी, मुझे देख कर वो भी सीडीओ पर रुक गयी, मुझे सीडीओ की और देखता देख प्रकाश रओ ने भी उस तरफ देखा, फिर मुझे सख्त आवाज में kaha)Ab जाओ कहा न.

शिव : जी जी सर. (में फ़ौरन वह से निकल गया)

एक तरफ मुझे प्रकाश रओ के रवैये से गुस्सा आ रहा था वही में वैस्वी और स्वर्ण को देख कर चौंक गया था. मतलब स्वर्ण, वैस्वी की भाभी थी. स्वर्ण की हालत मेने देखि थी, मुझे उस बेचारी पर तरस आ रहा था, वही में समाज गया था की वैस्वी ऐसी क्यों है, अपने पैसो के घमंड और अपने बाप के जैसा व्यव्हार. ये सब सोचते सोचते में साइट पर पहुंच गया. वह पहुंचते hi मुझे सुपरवाइजर सामने hi मिल गया.

सुपरवाइजर : क्यों भाई कहा घूम रहे ho?(Uske बोलने का अंदाज hi ऐसा था की मुझे उस पर भी गुस्सा आ गया, एक तो पहले से hi प्रकाश रओ की वजह से दिमाग गरम था)

शिव : तुम्हे क्या, तुम मेरे बॉस नहीं हो समजे.

सुपरवाइजर : अभी आये 10 दिन भी नहीं हुए और ये तेवर, में यहाँ का सुपरवाइजर हु, यहाँ का सब कुछ मुझे hi देखना होता है समाज.

शिव : मुझे, तुजे सफाई देने की जरुरत नहीं है समजा. (में आगे बढ़ गया, वो मुझे गुस्से से घर रहा था)

सुपरवाइजर : बहोत चर्बी चढ़ी है न, अभी दिखता हु. (उसने प्रकाश रओ को फ़ोन लगा दिया) Hello सर.

प्रकाश रओ : बोलो.

सुपरवाइजर : सर, में यहाँ सुपरवाइजर हु फिर ये दूसरे लड़के को क्यों रक्खा है, वैसे भी वो टाइम पर नहीं आता, और कुछ पूछो तो सीधे मुँह जवाब भी नहीं देता, इसकी जरुरत क्या है?

प्रकाश रओ : तुजे क्या लेना देना इस से, पवन ने रखवाया है, जैसे मेने तुजे रखवाया है, तू अपना काम कर, ऐसी छोटी छोटी बातो के लिए मुझे फ़ोन मात कर, रख अब.

प्रकाश रओ की बात से सुपरवाइजर की गांड जल गयी, वो थोड़ी देर फ़ोन को hi देखता रहा. फिर गुस्से में तैयार माकन में चला गया. में जैसे hi अंदर पंहुचा तो भोली मेरे पास आ गयी.

भोली : कहा रह गए थे बाबू, ये टाइम है आने ka(Uske कहने में शिकायत थी, उसके ऐसे पूछने पर में सिर्फ मुस्कुरा दिया) में कब से तुम्हारी रह देख रही थी, क्यों इतनी देर लगा दी. (झुमरी और कमली भी आवाज सुन कर वह आ गयी)

झुमरी : कहा रह गए थे बाबू?

कमली : कितनी देर लगा दी?

शिव : अरे बापरे, तुम लोगो को क्या हो गया है, काम से बहार गया था तो देर हो गयी, तुम तो ऐसे पूछ रही हो जैसे वो सुपरवाइजर पूछ रहा था.

जुमारी : हम वैसे नहीं पूछ रही, हम तो बस ऐसे hi पूछ रही थी, पता है मान hi नहीं लग रहा था काम में.

शिव : (मुस्कुराते hue)Thik है बाबा, अब काम पे लग जाओ, वर्ण मेरी वजह से तुम्हे दन्त पद जाएगी.

जुमारी : एक बार इस्सर तो करो बाबू, तुम्हारे लिए मरने को भी तैयार हो जाउंगी.

तीनो अल्हड सी लड़कीअ थी, काम की वजह से कैसे हुए बदन की और चर्बी का नमो नीसाण नहीं. धुप में काम करने से थोड़ा सवाल पैन जरूर था पर चेहरा पूरी तरह खिला हुआ था. तभी मेरे फ़ोन पर कॉल आयी, मेने देखा तो भार्गवी मैडम का फ़ोन था. में सोचमे पद गया की इनका फ़ोन क्यों आया. मेने फ़ोन उठा लिया.

शिव : Hello मैडम.

भार्गवी : कहा हो तुम?

शिव : जी में काम पर हु, कोई काम था क्या?

भार्गवी : है, मिलना था, आ शक्ति हो?

शिव : आ तो जाता मैडम, पर अभी यहाँ आया हु, और इतना जल्दी नहीं निकल शक्ति, शाम को औ तो चलेगा?

भार्गवी : (वैसे भी वो किसी काम से बहार निकली थी to)Apana एड्रेस भेजो, में आती हु.

शिव : ठीक है मैडम.

मेने उनको एड्रेस भेज दिया, थोड़ी देर बाद पुलिस की जीप वह पहुंच गयी. पुलिस की जीप देख कर सब वह देखने लगे, सुपरवाइजर जो पहले hi माकन में था वो भगा भगा उनके पास पहुंच गया.

सुपरवाइजर : (भार्गवी, वर्दी में थी और चश्मे लगे हुए थे, उसकी पर्सनालिटी देख कर hi वो घबरा रहा था, घबराते हुए) मैडम, आप यहाँ? (उसके चेहरे पर ढेरो सवाल थे)

भार्गवी : शिव???

सुपरवाइजर : क्या किआ उसने? मुझे पता hi था, वो ठीक लड़का नहीं है.

भार्गवी : (अपना चस्मा निकलते हुए, उसे घर कर देखने lagi)Tumhe ऐसा क्यों लगा?

सुपरवाइजर : पता नहीं मैडम पर मुझे ऐसा लगता है, वैसे क्या किआ है उसने. (तभी में चलते हुए उन दोनों की और आ रहा था, तो भार्गवी मैडम ने मेरी और देखा तो उसने भी मेरी और dekha)Aa गया.

शिव : Hello मैडम.

भार्गवी : Hello.

शिव : कहिये मैडम क्या काम था की आप खुद यहाँ आयी.

भार्गवी : दरवाल wo...(Bolte बोलते रुक गयी, सुपरवाइजर की और देख kar)tum जाओगे यहाँ से, मुझे शिव से कुछ बात करनी है)

सुपरवाइजर : है है क्यों नहीं, आप बात कीजिये, वैसे यहाँ आप के बैठने के लिए कुछ नहीं है, अगर आप चाहे तो इस माकन में सोफे है अगर आप को बैठना हो तो.

भार्गवी : उसकी जरुरत नहीं, तुम जा शक्ति ho.(Supervisor अपना छोटा सा मुँह लेकर चला गया)
 
अपडेट 104

भार्गवी ने सुपरवाइजर को जाने को कहा तो वो वह से चला गया. अब में भी जान ने को उत्सुक था की आखिर वो यहाँ मुझसे मिलने क्यों आयी है.

शिव : तो कहिये मैडम, क्या काम था?

भार्गवी : क्या काम से क्या मतलब है तुम्हारा, इतने दिनों से तुम मिलने क्यों नहीं आये? (अपने ऐसे सवाल पर भार्गवी खुद चौंक गयी, वो किसलिए आयी थी और उसने क्या पूछ लिया, हलाकि वो शिव को मिस कर रही थी, क्यों की वो मिलने नहीं आया था, पर वो ऐसा पूछना नहीं चाहती थी, उसे अपनी पोशण का ख्याल था, और वो अपने आप को ऐसे निचे नहीं ला शक्ति थी पर पता नहीं क्यों उसके मुँह से ापिसा निकल गया)

शिव : क्या? आप ये पूछने के लिए यहाँ आयी है?

भार्गवी : नहीं, ये तो मेने ऐसे hi पूछ liya(Pata नहीं, वो क्यों हड़बड़ा रही थी, पर उसे जान न था की वो उस दिन की घटना की वजह से नहीं आ रहा क्या) अब पूछ लिया है तो बताओ, क्यों नहीं आये?

शिव : में बहार गया था, मैडम.

भार्गवी : क्या इसी वजह से नहीं आये थे?

शिव : है मैडम इसी वजह से नहीं आया tha(Ab में इन्हे कैसे बताऊ की में नहीं चाहता था की उस दिन जैसी घटना दोबारा हो और में किसी मुसीबत में फास जाऊ, क्यों की अगर भार्गवी मैडम गुस्सा हो गयी तो मेरी खेर नहीं थी, पर में ये तो नहीं कह शक्ति था)

भार्गवी : (पता नहीं पर उसे भी क्यों शिव को बुलाना था, वो जानती थी की अगर शिव आया और फिर से वो लोग प्रैक्टिस करेंगे तो उस दिन जैसी घटना फिर से होने के पुरे आसार थे, पर फिर भी वो चाहती थी की शिव आये, है वो ऐसा बिलकुल नहीं चाहती थी की उस दिन जैसी घटना फिर से हो पर फिर भी वो बुलाना चाहती थी, ये उसकी भी समाज से बहार था, एक और उसका रुतबा, उसकी पोसिटिव था जिसे वो किसी भी कीमत पर झुका नहीं शक्ति थी पर फिर भी उस से शिव के न आने से पता नहीं क्या खालीपन महसूस होता tha,)To अब तुम आओगे, है न?

शिव : (वो मेरी और ऐसे देख रही थी की में मन नहीं कर शक्ति था, तो मेने हारकर है कह di)Ha मैडम, में आऊंगा.

भार्गवी : (पता नहीं क्यों पर उसे ये सुन कर बहोत खुसी हुई, उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी, थोड़ी देर वो शिव को देखती रही, फिर उसे काम भी याद aaya.)Waise में तुम्हे एक और बात के लिए मिलने आयी थी. हमने जाहिर गेराज पर एक नकली ग्राहक भेज कर उसे फ़साने की कोशिस की पर उसने चोरी का मॉल खरीदने से साफ़ इंकार कर दिया. मेरी समाज में नहीं आ रहा की उसने ऐसा क्यों किआ.

शिव : (कुछ सोचते hue)Ho शक्ति है की हमारा अनुमान गलत हो की वो hi ये चोरी का सामान खरीद ता है, हलाकि उसकी सम्भावना काम hi है, पर हो शक्ति है. पर जिस तरह से लोगो में ये बात मशहूर है की यहाँ चोरी का सामान मिलता है, ये ऐसे hi तो नहीं हो शक्ति. और अचानक से वो चोरी का सामान खरीदने से इंकार कर दे ऐसा हो नहीं शक्ति, मुझे ऐसा लगता है की उसे जानकारी है की पुलिस मतलब आप लोग उसके बारे में जाँच कर रहे है, और ये भी हो शक्ति है की आप के उस ऑपरेशन का उसे पहले से पता हो.

भार्गवी : पर ये कैसे मुमकिन है?

शिव : पुलिसवालो का पला अक्सर चोर और गुनहगारों से hi पड़ता है तो ऐसे में उनके सम्बन्ध बन न स्वाभाविक है, हो शक्ति है की आप के यहाँ ऐसा कोई हो जो उसके साथ सम्बन्ध रखता हो और उसी ने ये जानकारी दे दी हो. वर्ण वो अपने फायदे की बात से क्यों इंकार करेगा.

भार्गवी : तुम्हारी बात सही है, ऐसा हो भी शक्ति है, तो ऐसे में तो में कुछ भी नहीं कर पाऊँगी, क्यों की अगर मुझे कोई एक्शन लेना है तो मुझे अपनी फाॅर्स को इन्फॉर्म करना hi होगा, और कई तरीके है की में उस इन्फॉर्मर को पकड़ भी लू पर उसमे टाइम लग शक्ति है. फ़िलहाल तो मेरे ऊपर बहोत दबाव है इस चोरी को रोकने का और उस गुनेहगार को पकड़ने का.

शिव : आपको उस गेराज पर नज़र गख्वानी चाहिए, में ये जनता हु की आपने ऐसा किआ भी होगा, पर वो पुलिस का आदमी होगा, हमें ऐसा कोई चाहिए जो पुलिस का न हो.

भार्गवी : उस दिन तुम कह रहे थे की तुम नकली ग्राहक बन के जा शक्ति हो.

शिव : जा तो शक्ति हु पर मुझे नहीं लगता की उस से कोई फायदा होगा, क्यों की अब वो चौकन्ना हो गया है, और दूसरी बात हम लोग सामान खरीदने गए थे न की बेचने. तो जैसा आपने कहा है वो हमसे भी सामान नहीं खरीदेगा, है शायद बेच सकता है पर फिर बात वो hi होगी की सामान तो किसी सेकंड हैंड गाड़ी का भी हो शक्ति है. चोरी की hi हो ये जरुरी तो नहीं.

भार्गवी : ठीक है, में कुछ और सोचती हु.

शिव : ठीक है मैडम, में भी कुछ सोचता हु. (वो जाने लगी पर फिर जाते जाते रुक गयी)

भार्गवी : तुम कब आ रहे हो?

शिव : बोलता हु मैडम, शायद कल.

भार्गवी : ठीक है. (वो चली गयी, में वापस जा रहा था तो देखा की सुपरवाइजर भी दूर से हमे देख रहा था और वो तीनो भी देख रही थी, में फिर से वह चला गया जहा काम चल रहा था, में जस्ट अभी पंहुचा था की पवनसीर का फ़ोन आया)

शिव : Hello, सर.

पवनसीर : वह पुलिस क्यों आयी थी?

शिव : (पवनसीर को कैसे पता चला की यहाँ पुलिस आयी थी) सर, वो भार्गवी मैडम को मुझसे कुछ काम था इस्सलिये मिलने आयी थी, ऐसी कोई खास बात नहीं थी. पर आप को कैसे पता चला?

पवनसीर : प्रकाश रओ का फ़ोन आया था, वो पूछ रहा था की पुलिस तुम्हारे आदमी से मिलने क्यों आयी है, शायद उसे, उस सुपरवाइजर ने फ़ोन किआ होगा.

शिव : (इस सुपरवाइजर की तो...) वो तो ऐसे hi मिलने आयी थी, कुछ पर्सनल काम था.

पवनसीर : Ok, ठीक है.

कमली : बाबू, ये पुलिस क्यों आयी थी?

शिव : अरे क्या तुम सब भी, वो मैडम मुज से मिलने आयी थी, अब वो पुलिस में है तो में क्या करू.

कमली : वो मैडम आप को जानती है?

शिव : है जानती है, वो पुलिस के तौर पर नहीं आयी थी. (मेने देखा की सुपरवाइजर वह चुपके से खड़ा है तो उसकी जलने के लिए मेने bola)Wo मेरी दोस्त है, तो मिलने आयी थी.

जुमारी : क्या दोस्त, पुलिसवाली दोस्त.

शिव : क्यों पोलिसवाले इंसान नहीं होते, वो मेरी दोस्त है तो ऐसे hi मिलने आयी thi.(Ye सुन कर सुपरवाइजर की गांड जल गयी थी, वो वह से चला गया, मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आ gayi)Kuchh काम था.

जुमारी : ऐसा क्या काम था, वीएस थी वो बड़ी खूबसूरत.

शिव : (उसने जिस ढंग से कहा था तो में muskuraya,)Wo शहर में गाड़िओ की चोरी हो रही है न उसी सिलसिले में बात कर रही थी.

जुमारी : तो ये तो उनका काम है, तुम्हे क्यों बता रही थी, क्या तुम पुलिस के आदमी हो?

शिव : नहीं, में कोई पुलिस का आदमी नहीं हु, पोलिसवाले भी इंसान है, वो कोई भगवन नहीं जो ऐसे hi किसी को पकड़ ले, उन्हें भी लोगो से सहकर चाहिए होता है, लोगो की मदद से hi वो गुनहगारों को पकड़ते है. वो मुझसे पूछने आयी थी की तुम ऐसे किसी को जानते हो जो इस से जुड़ा हो?

कमली : बाबू, तुम ऐसे काम करते हो?

शिव : पागल, वो बस ऐसे hi पूछ रही थी.

भोली : (जो अब तक खामोस कड़ी सब सुन रही thi)Agar में ऐसे किसी से मिलवौ तो?

शिव : (मेने भोली को देखा) तुम कहना क्या चाहती हो?

भोली : में ऐसे किसी को जानती हु जो बाइक की चोरी करता था, पर अब नहीं करता है.

झुमरी : किसकी बात कर रही है तू, और तू उसे कैसे जानती है?

भोली : तुम्हे याद हे वो लड़का तिकड़ी जो हमारे साथ काम करता था, जहा हम पहले काम करते थे.

जुमारी : है याद है, वैसे भी उसका नाम अजीब था और वो अपने पैसो की नुमाईस भी करता था.

भोली : है वही, उस समय वो मेरे पीछे पड़ा था, मेरे लिए तोहफे भी लता था, पर जब पुलिस उस से पूछताछ करने आयी थी तब मुझे पता चला था की वो ऐसी चोरिया करता है, तो मेने उसे डांटा और उसके सरे तोहफे वापस कर दिए. उसके बाद तो उसने सब काम छोड़ दिए है, पर शायद वो जनता हो?

शिव : (मुझे यकीं नहीं हो रहा था की, ऐसे hi बातो बातो में ये कितना बड़ा क्लू मेरे हाथ में आ गया tha)Kya तुम उस से मिलवा शक्ति हो?

भोली : मिलवा तो शक्ति हु पर उसके लिए तुम्हे हमारी बस्ती आना होगा.

शिव : ठीक है में आ जाऊंगा.

झुमरी : क्या तुम हमारी बस्ती में आओ गए?

शिव : क्यों, में नहीं आ शक्ति क्या?

झुमरी : तुम इतने बड़े आदमी हो तो हमारी बस्ती में?

शिव :किसने कहा की में बड़ा आदमी हु, में तो एक अनाथ लड़का हु, जिसके घर का भी ठिकाना नहीं है. (तीनो के मुँह खुले के खुले रह गए थे और वो मुझे आश्चर्य से देख रही thi)Aise क्या देख रही हो, में सच कह रहा हु.

झुमरी : बाबू, तुम्हे देख कर तो ऐसा नहीं लगता, हमें तो लगा था की तुम किसी बड़े बाप के बेटे होंगे जो यहाँ काम सिखने आते होंगे, क्यों की तुम हमारी तरह नियत टाइम पर भी नहीं आते.

शिव : (मुस्कुराते hue)wo एक अलग बात है. पर में अनाथ हु वो भी एक सच्चाई है.

कमली : बाबू, तुम लगते तो किसी राजकुमार जैसे हो, ऐसा कैसे हो सकता है.

शिव : अब जो है सो है, तो भोली, काब मिल शक्ति हु में उसे.

भोली : शाम को हमारे साथ hi चलना, वो बस्ती में मिल जायेगा.

शिव : ठीक है, फिर शाम को साथ hi चलेंगे. (फिर वो सब काम में लग गए और मेने जूही को फ़ोन कर दिया की आज में नहीं आऊंगा, उसने मुझे न आने का कारन पूछा तो मेने कहा की काम है, वो भी मान गयी)

शाम को छुट्टी के बाद हम तीनो चल कर नजदीकी रिक्शा स्टैंड पर पहुंचे, जहा सवारिओ के लिए रिक्साव कड़ी थी, नार्मल रिक्शा से विपरीत ये थोड़ी बड़ी रिक्शा थी जहा बीचमे भी सीट थी और पीछे भी सीट थी. हम चारो पीछे की सीट पर बेथ गए, सीट छोटी थी तो हमे एक दूसरे से सात कर बैठना पद रहा था. मेरे साथ में झुमरी बेथ गयी थी और सामने भोली और कमली बेथ गए. दूसरे भी लोग थे, जिनमे झुमरी का बाप भी था और दूसरे मजदुर भी थे. रिक्शा खचा खच भरी हुई थी, लोग पीछे की और साइड में भी लटक कर खड़े थे. इस रिक्शा में ज्यादा से ज्यादा 8 लोग बेथ शक्ति थे जब की ड्राइवर ने आगे भी चार लोगो को बिठा दिया था, कुल मिलकर बिस से ज्यादा लोग इस रिक्शा पर सवार थे. रिक्शा निकलने वाली थी की एक औरत आयी, अब उसके लिए जगह hi नहीं बची थी, उसको लटक के आना पद शक्ति था. सब सोच रहे थे, ड्राइवर भी उसे बिठाने की सोच रहा था, इस और जाने वाली सिर्फ यही रिक्शा थी तो उसे बिठाना जरुरी था, मेने कहा की में बहार चला जाता हु और दूसरे सब लड़के हुए है वैसे hi में लटक जाऊंगा. वो औरत खुस हो गयी. झुमरी को ये मंजूर नहीं था, वो थोड़ी ऊपर उठी और मेरी गॉड में बेथ गयी, वो औरत उस जगह पर बैठने लगी तो कमली वह बेथ गयी, उस औरत ने कमली को देखा तो उसने सामनेवाली सीट पर बैठने का इस्सर कर दिया. वो औरत मेरी और देखते हुए सामने की सीट पर बेथ गयी, उसके चेहरे से लग रहा था जैसे उसके मुँह से लड्डू चीन लिया गया हो. झुमरी का बाप आगे बहार लटका हुआ था तो उसे कुछ पता नहीं था. रिक्शा चलने लगी. रास्ता ऐसा था की उछाल कूद हो रही थी, झुमरी के गद्देदार कूल्हों की नर्माहट मुझे महसूस हो रही थी, रस्ते की वजह से बार पर झुमरी के कूल्हे मेरे लुंड पर कूद रहे थे तो मेरा लुंड खड़ा होने लगा. मेने अपना ध्यान भटकने की कोशिस की पर ये मुमकिन न हुआ, लड़की के पिछवाड़े की महक लुंड पहचान चूका था. थोड़ी hi देर में झुमरी को इसका एहसास हो गया. अपने कूल्हों में हो रही चुभन से उसे पता चल गया की ये किस चीज की चुभन हो शक्ति है, उसका बदन गंगना गया, अपने गांड में घुस रहे उस लुंड के एहसास से उसकी छूट में पानी आने लगा. उसने मुद कर मेरी और देखा, पर में इसमें कुछ नहीं कर शक्ति था, पर वो तो मुस्कुरा रही थी, और शर्मा रही थी. जैसे जैसे उछाल कूद हो रही थी, झुमरी इसका फायदा उठा रही थी. वो जानबुज कर अपना पिछवाड़ा मेरे लुंड पर रगड़ रही थी. झुमरी के चेहरे के भाव देख कर आखिर भोली ने तो पूछ भी लिया.

भोली : इतना क्यों मुस्कुरा रही है, बे शर्म कही की, सीधे उसकी गॉड में बेथ gayi(Bholi को बहोत जलन हो रही थी, उसको जलता देख झुमरी पीछे की और झुकी और मेरे पर अपना पूरा भर मेरे ऊपर रखते हुए चिपक गयी, उसके पशीने की गंध मेरे नथुनों में भरने लगी, उसने अपने आप को ऐसे एडजस्ट किआ की अब मेरा लुंड उसकी छूट पर चुभ रहा था, उसने अपनी टंगे थोड़ी फैलाई, उसको देख कर भोली भी समाज गयी की क्या चल रहा है, वो औरत भी हमे hi देख रही थी. भोली को गुस्सा आया तो उसने झुमरी की झंघ पर मारा, पर झुमरी और मुस्कुराने लगी, कमली भी समाज गयी थी, उसने भी जलन के मरे झुमरी की झंघ पर चिकोटी काट ली, झुमरी मुस्कुराते हुए अपने आपको और रगड़ रही थी. रिक्शा का शोर इतना था की दूसरे किसी को कुछ पता नहीं था, पुरे रस्ते झुमरी मेरे मज़े लेती रही. लगभग 20 मिनट बाद जब हमारी जगह आ गयी तो हम लोग उतर गए. मेने हम चारो के पैसे दे दिए, वैसे भी हम चारो के मिला कर सिर्फ चालीस रुपये हुए थे.)

निचे उतरने के बाद भी मेरा लुंड अकड़ा हुआ था जिसे मेने उतारते वक़्त थोड़ा साइड में कर दिया था, पर उभर फिर भी दिख रहा था. निचे उतर ते hi, वो दोनों झुमरी को मस्ती में मरने लगी तो वो खिलखिला कर मार कहती रही, सब लोग उनको hi देख रहे थे, किसी का ध्यान मेरी और नहीं था.

झुमरी का बाप : अब यहाँ मस्ती hi करती रहो गई की घर भी चलोगी, (मेरी और देख kar)Babu, आप यहाँ क्यों आये हो?

झुमरी : उनको बस्ती में किसी से मिलना था तो वो आये है.

झुमरी का बाप : किस से मिलना है?

झुमरी : आप जाओ, इन्हे तिकड़ी से मिलना है तो में आती हु.

झुमरी का बाप : ठीक है, जल्दी आ जाना. (वो चला गया)

कमली : बाबू, आपने ऐसा क्यों किआ?

शिव : मेने क्या किआ?

कमली : उसे अपनी गॉड में क्यों बिठाया?

शिव : मेने कहा बिठाया, वो खुद hi बेथ गयी थी.

कमली : अगली बार में bethungi.(Usne झुंझलाते हुए कहा)

झुमरी : (चिढ़ाते hue)Ab बाबू आनेवाला hi नहीं है तो कैसे बैठोगी.

भोली : बेशरम, तू तो बोल hi maat(Kehte हुए उसको एक दो और झापड़ उसकी बाह पर मर दी) बाबू को में लेकर आयी और मज़े तूने ले लिए. (मेरी और देख kar)Babu में आप को यहाँ ले कर आयी न तो मुझे बिठाना था. इससे क्यों बिठाया.

शिव : तुम तीनो पागल हो क्या, वह क्या हुआ तुम्हे पता भी है?

भोली : सब पता है, इस कामिनी की मुस्कान hi बता रही थी की क्या हो रहा है. आप को ऐसा नहीं करना चाहिए था बाबू. जाओ में नहीं मिलवाती किसी से.

झुमरी : तो में मिलवाडुंगी.

भोली : जा मिलवाडे, देखते है वो मेरी बात मंटा है की तुम्हारी, वो मेरे पीछे पड़ा था, तुम्हारे नहीं जो तुम्हारी बात मानेगा.

शिव : ये क्या बात हुई, मेने कुछ किआ भी नहीं और तुम मुज पर hi भड़क रही हो?

भोली : इसका बदला तो में ले कर रहूंगी, आप को मुझे भी गॉड में बिठाना पड़ेगा.

शिव : तुम लोग पागल हो क्या, ये क्या मज़ाक है?

भोली : में कुछ नहीं जानती, अगर आप को उस से मिलना है तो मुझे गॉड में बिठाना पड़ेगा, बोलो मंजूर है?

शिव : (अब में समाज रहा था की जब लड़की को लुंड चाहिए होता है तो वो किसी की नहीं सुनती, में इसमें कुछ नहीं कर शक्ति था, उस से मिलना भी जरुरी tha)Thik है, गली बार तुम बैठना ठीक है.

भोली : मुझे भोली समाज रहे हो क्या, अब तो तुम आनेवाले हो नहीं तो कैसे बिठाओगे? (उसकी बात भी सही थी) कल, साइट पर hi बिठाओ गए, बोलो है मंजूर.

शिव : ठीक है.

कमली : ये क्या बाबू, मेरा क्या होगा? में भी बेठुंगी.

शिव : पागल हो तुम सब, ठीक है, मुझे किसी को नहीं बिठाना और नहीं किसी से मिलना है, में जा रहा हु. (मेने थोड़ा गुस्से से कहा तो वो तीनो मुझे देखने लगी, भोली ने कमली के कानो में कुछ कहा तो वो मान gayi)Ab ये क्या था?

भोली : कुछ नहीं, आप चलो, में मिलवाती hu.(Hum सब उस तिकड़ी से मिलने चले गए, किस्मत से वो रस्ते में hi मिल गया, उसके साथ दो और लड़के भी थे. मेने देखा की मेरी hi आगे का वो था, पर थोड़ा सवाल आउट पांच फुट की हिघ्त का होगा, बाल स्टाइल में कतए हुए थे) तिकड़ी, मुझे तुज से बात करनी है?

तिकड़ी : तू तो मुझे इस नाम से मात बुला, लोगोने तो यु hi मेरा नाम रख दिया है, (मेरी और देख कर वो थोड़ा गंभीर हो gaya)Kya बात करनी है?

भोली : अकेले में बात करनी है.

तिकड़ी : (अपने दोस्तों को) तुमलोग जाओ, में आता हु.

भोली उसे साइड में ले गयी और वो दोनों बात करने लगे, बात करते हुए तिकड़ी बार बार मेरी और देख रहा था, और कई बार उसने ना में गर्दन हिलायी, भोली उसे समजा रही थी, करीब पंद्रह मिनट बाद वो दोनों हमारे पास आये.

भोली : बाबू, ये आप को वह ले जायेगा जहा चोरी की गाड़िया छुपा के राखहि जाती है.

तिकड़ी : में ले जाऊंगा वह, पर में अभी भी कह रहा हु, मुझे इसमें मात घसीट न, में ये सब छोड़ चूका हु, और मुझे जाहिर भाई से कोई पन्गा नहीं लेना. और ये सब में भोली के लिए कर रहा हु, वो बता रही थी की पुलिस भी तुम्हारे साथ है, पर में साफ़ कह देता हु, में पुलिस के लफड़े में नहीं पडूंगा.

शिव : ठीक है, तुम वो जगह दिखा दो, आगे में देखलूँगा.

तिकड़ी : है, तो चलो फिर.

वो अभी hi दिखने को तैयार हो गया था, तो हम दोनों वह से निकल गए, वो किसी की बाइक ले आया, सहर से बहार एक जगह उसने बाइक कड़ी कर दी और थोड़ी दूर तक हम चल कर गए. रात का अँधेरा होने लगा था पर शाम का थोड़ा सा उजाला था. वो के बड़ी सी जगह थी, ज्यादातर तो वो जगह खली hi थी, बिछ में कुछ झुग्गियां जैसा बना हुआ था और एक पतरे से बना हुआ शेड था.

शिव : ये तो जुग्गिया है, और एक शेड दिख रहा है.

तिकड़ी : इन्ही जुग्गियो में hi बाइक और दूसरी गाड़िया छुपा के रख देते है, ये देखने में hi जुग्गिया है, यहाँ कोई रहता नाह, सिर्फ जाहिरभै के आदमी रहते है, अगर कभी सरकारी आदमी यहाँ देखने आये तो औरते भी आ जाती है.

शिव : वो कैसे?

तिकड़ी : जाहिर भाई बहोत पहुंचे हुए है, उनके सम्बंद पुलिस में भी है और मला के साथ भी उनका उठना बैठना है. अगर ऐसा कुछ होता है तो उनको पहले से खबर मिल जाती है तो वो सब कुछ हटा देते है. अब चलो यहाँ se.(Bahar आ kar)Dekho भाई, मेने तुम्हे बता दिया, अब आगे का तुम देख लो, मुझे इसमें मात घसीटना, मुझे पता है की तुम ये सब पुलिस को बताओगे, पर अगर पुलिस मेरे पास आयी तो में कुछ नहीं बोलूंगा.

शिव : (उसके कंधे पर हाथ रख kar)Tum उसकी चिंता मात करो, में तुम्हारा नाम नहीं लूंगा, और मेरी मदद करने के लिए सुक्रिया.

तिकड़ी : तुम मुझे अच्छे लड़के लगते हो, तुम इन सब में क्यों पद रहे हो? ये सब खतरनाक है, ये लोग कई बार किसी को मार के फेंक देते है, उसका आज तक किसी को पता नहीं चला है. क्यों अपनी जान जोखिम में दाल रहे हो. पैसो के लिए?

शिव : नहीं भाई, यहाँ पैसो को बात नहीं है. ठीक है तुम्हारा सुक्रिया.

तिकड़ी : चलो में तुम्हे छोड़ देता हु.

उसने मुझे सहर में छोड़ दिया, में वह से घर चला गया. लतादिदी ने मुझे आज लकडिया काटने को कहा, वैसे भी बारिश की वजह से मेने कटी हुई लकडिया अब ख़तम होने आयी थी. इस बार रंजन और विणा दोनों मेरी मदद में आयी हुई थी, मेने भी बहोत साडी लकडिया काट दी. रंजन ने विणा को इस्सर कर दिया तो वो थक गयी है ये बोल कर चली गयी. जैसे hi वो गयी.

रंजन : क्या में तुजे अच्छी नहीं लगती?

शिव : ऐसा क्यों बोल रही hai?(Wo थोड़ा चीड़ चिड़े पैन से बोल रही थी)

रंजन : और नहीं तो क्या कहु, मेने सुना था की लड़के को अगर अपनी छूट दो तो वो बार बार उसके पीछे पीछे घूमता है, और तू है ki...Kya में तुजे अच्छी नहीं लगती?

शिव : तूने देखा नहीं, में बहार गया हुआ था.

रंजन : अगर करना च्छता तो बहोत सरे मौके the.(Wo रूखे स्वर में hi बोल रही थी)

शिव : तेरा मान था तो बोल देती, इसमें रुठनेवाली क्या बात है?

रंजन : इसमें में क्या बोलती, तेरा मान नहीं किआ?

शिव : (में उसके नजदीक गया, वो मेरी आँखों में देख रही थी, उसकी छूट को दबोचते hue)Bahot मान कर रहा है क्या?

रंजन : (एक hi पल में वो पिघलने लगी और उसकी सांसे भरी होने lagi)Haaaaaaaaa.

शिव : ठीक है, रात को मेरे कमरे में आ जाना.

रंजन : तू मेरे कमरे में आ जाना, तेरे साथ करने के बाद चलने में भी तकलीफ होती है.

शिव : तो फिर करना क्यों चाहती है?

रंजन : (मेरे लुंड को पकड़ ते hue)Jitna दर्द देता है उस से कही ज्यादा मज़ा देता है ये. में राह देखूंगी.

मेने, उसे किश किआ, फिर हम अंदर चले गए.
 
अपडेट 105

एक बड़ी हवेली जैसे माकन में चार लोग बैठे हुए थे. एक बड़ी कुर्शी पर उदयसिंह बैठे हुए थे और पास में hi उनकी पत्नी कामनादेवी बैठी हुई थी और नजदीकी सोफे पर चंद्रभान और निर्मलादेवी बैठे हुए थे. सबके चेहरों पर गंभीरता छायी हुई थी.

उदयसिंह :(अपनी रोबीली आवाज me)Chandrabhan, मेने सुना है की तुम उस ढोंगी बाबा की तलाश कर रहे हो, आखिर ऐसी क्या जरुरत आ पड़ी की तुम्हे उसे ढूँढना पद रहा है. (चंद्रभान ने अपनी पत्नी की और देखा, वैसे भी उसकी अपने बड़े भाई के सामने बोलने की हिम्मत नहीं होती थी) तुम बताओ निर्मला.

निर्मलादेवी : (उसने एक बार अपनी जेठानी की और देखा फिर वापस अपने जेठ की और देखते hue)Bhai सब आप तो जानते है की उस घटना के बाद क्या क्या हुआ है. तो उसी के लिए हमने सोचा की एक बार बाबा से बात कर ली जाये.

उदयसिंह : ऐसा क्या हो गया है जो तुम्हे उस ढोंगी से बात करनी पद रही है, क्या तुम्हे मालूम नहीं की उसकी कही एक भी बात सच नहीं थी. फिर तुमलोग ऐसा कैसे कर शक्ति हो.

नर्मदादेवी : भाई साहब, आप भी जानते हो की हमारे किसी भी बच्चे के वजा कोई बच्चा नहीं है, अगर एक के वह न हो तो हम इसे मान भी सकते है, पर आप hi सोचिये, क्या किसी भी बच्चे के वह कोई भी बच्चा पैदा हुआ? हमारे लड़को की बात तो छोड़ hi दीजिये, क्या हमारी बेटिओ के वह भी कोई बच्चा हुआ. हमको तो पता है की ये सब क्यों हो रहा है तो हम अपनी हहु पर इल्जाम नहीं लगा रहे पर हमारी लड़कीओ के ससुरालवालों को तो ये नहीं पता है न. अब वो लोग हमारी वजह से कुछ कह नहीं रहे पर अंदर hi अंदर वो हमारी बच्चीओ से नाखुश है और ये उनके व्यव्हार से छलक रहा है. मुझे माफ़ कीजियेगा की मुझे ये कहना पद रहा है पर आप की एक बेटी ने तो प्रेमविवाह किया है, उसको तो आपने खंडन से भी निकला दे दिया, क्या फिर भी वो माँ बन पायी?

उदयसिंह : ये तुम्हारे दिमाग का वहम है निर्मला, आज कल ये आम हो गया है, बहोत सरे लोगो के वह बच्चे पैदा नहीं हो रहे है, उसका कारन है आज कल का खाना पीना.

निर्मलादेवी : हमारे बच्चे तो यही पीला बड़े है, एक बार मान ले की बहुए बहार से आयी है, पर हमारी लड़कीअ तो यही पाली बड़ी है, गांव का सुद्ध खाना और हवा उनके नसीब हुई है, फिर क्यों वो माँ नहीं बन प् रही. भाभी में आप से पूछती हु, आखिर ऐसा क्या कारन हो सकता है की हमारे खंडन के किसी भी बच्चे को बच्चा नहीं हो raha?(Himaat तो कामनादेवी की की भी नहीं थी, अपने पति के सामने बोलने की तो वो बस चुप रही पर उसकी आंखे बहोत कुछ कह रही थी)

उदयसिंह : चलो एक बार मान भी ले की तुम्हारी बात में कोई सच्चाई है, पर फिर भी उसमे वो ढोंगी क्या कर शक्ति है, तुम्हे याद न हो तो में याद दिलदेता हु, उसीने कहा था नाकि वो सपोला बहोत लम्बी आयु जियेगा, और उसके नशीब में बहोत साडी धनसंपदा है, क्या हुआ उसका, क्या वो जिन्दा है आज.

निर्मलादेवी : (उसने अपने जेठ को घर कर देखा, और धीमी आवाज में badbadayi)wo सब आप के कारन hi हुआ है.

उदयसिंह : (उसकी बड़बड़ाहट को भांप kar)Tum क्या बड़बड़ा रही हो में समाज रहा हु, वो सब मेने नहीं किआ था, पुलिस ने भी ये माना था, वो एक हादसा था.

निर्मलादेवी :(वो अपने जेठ से इस बारे में कोई बाण नहीं करना चाहती thi)Dekhiye भाई साहब, मुद्दा वो नहीं है की वो हादसा था या..., मुद्दा ये है की हमारे बच्चे maa-baap क्यों नहीं बाण रहे. और अगर आपको ये सब याद है तो ये भी याद होगा की उस माँ ने क्या कहा था, उसने कहा था की अगर मेरी कोख उजड़ी है तो किसी की भी कोख नहीं भरेगी, और ये सच हो रहा है. उस माँ की है लगी है हमें. आप मनो या न मानो पर ये सच है.

उदयसिंह : फिर भी उसमे वो ढोंगी क्या कर शक्ति है?

निर्मलादेवी : अगर आप के पास कोई उपाय है तो बताइये, या आप के पास ऐसा को आदमी है तो बताइये. (उदयसिंह कुछ न बोलै, क्यों की इतने वर्षो में वो कितने hi लोगो के पास जा चूका था, पर आजतक कोई परिणाम नहीं मिला था)

उदयसिंह : ठीक है, तुम्हे जो करना है वो करो. (ये कह कर वो वह से चला गया, चंद्रभान भी उसके पीछे पीछे बहार निकल गया)

निर्मलादेवी : (अपनी जेठानी के पास जा kar)Aap क्या कहती है भाभी, क्या में गलत हु, पद्मा ने गलत कदम उठालिया था, फिर भी उसका कुछ न हुआ, क्या आप अब भी चुप रहेंगी?

कामनादेवी : मेरी तो कुछ समाज में नहीं आ रहा, इन मर्दो के कर्म हम औरतो को भोगने पड़ते है, मुझे नहीं पता वह क्या हुआ था पर आज उसका परिणाम हमारी संताने भुगत रही है, तुम करो जो तुम्हे सही लग रहा है, बस किसी तरह इन से हमें छुटकारा मिल जाये, जिस दौलत की वजह से ये सब हुआ, अगर वो दौलत का उपयोग करनेवाला hi कोई नहीं होगा तो ये दौलत किस काम की. तू आगे बढ़ में तेरे साथ हु. अब ये सब हमें hi ठीक करना होगा.

रंजन और विणा होमवर्क कर रही थी, शिव भी अपने कमरे में होमवर्क कर रहा था. रंजन ने विणा को बता दिया था की शिव आने वाला है. विणा को अजीब सी बेचैनी हो रही थी, उसका भी दिल कर रहा था की शिव उसके साथ भी करे पर वो ऐसा कह नहीं प् रही थी. और कभी शिव के साथउसका इस तरह से सामना भी नहीं हुआ था की वो उसे कह शेक और न शिव ने कभी उसके साथ कुछ किआ था. उसे आज भी याद है की उसने शिव का लुंड अपने मुँह में ले कर चूसा था, वो एहसास आज भी उसके मुँह में घुला हुआ था. विणा को ऐसे विचारो में देख रंजन ने पुछलिया.

रंजन : क्या सोच रही है?

विणा : (हड़बड़ाते hue)Nahi... कुछ nahi.(Usne नज़ारे झुका ली और अपनी किताब में देखने लगी)

रंजन : शिव से कहु?

विणा : Kya?(Usne चौंक कर रंजन को देखा)

रंजन : यही, की वो तेरे साथ भी करे.

विणा : ंन्न नहीं, तू तू क्यों ऐसा कह रही है?

रंजन : मुझे पता है की तेरे दिमाग में भी यही चल रहा है, जूथ मत बोल. (विणा ने नज़ारे झुका ली) तो प्रॉब्लम क्या है.

विणा : ऐसे hi कहते हुए अजीब नहीं लगता, और उसने मन कर दिया तो, न न, अगर उसकी मर्जी होगी तो कभी न कभी करेगा.

रंजन : वो कभी नहीं करेगा, अगर तुजे उसके साथ करना है तो तुजे hi आगे बढ़ना होगा. सामजी.

विणा : वो मुझसे नहीं होगा, मुझे बहोत शर्म आती है.

रंजन : (बेशर्मी से उसने विणा की छूट को दबोच liya)Yaha अगर खुजली है तो खुद hi मिटानी पड़ेगी.

विणा :Ouchhh...Ye क्या कर रही है kamini.(Ranjan ने छूट को छोड़ा नहीं बल्कि उसे मसलने lagi)Ahhhh छोड़ रंजन, क्या कर रही है. (विणा उसे रोक तो रही थी पर उसके पेअर अपने आप hi खुलने लगे the)Shhhhhh छोड़ न रंजन शहहहहह.

रंजन : अगर मज़े लेने है तो शर्म छोड़नी पड़ेगी, सामजी. मुझे पता है तुजे मज़ा आ रहा है. चल लेट जा.

विणा : क्या कर रही है?

रंजन : अगर मज़े लेने है तो लेट जा, वर्ण मुझे होमवर्क है. (विणा भले hi शर्मा रही थी पर उसे ये सब अच्छा लग रहा था, वो लेट गयी, रंजन मुस्कुरायी, वो भी जानती थी की उसकी सहेली को लुंड चाहिए पर वो सिर्फ शर्मा रही थी, विणा की फ्रॉक ऊपर उठा कर उसने पंतय में कैद उसकी छूट को देखा, उसे भी अजीब लग रहा था की अपनी hi सहेली की छूट के साथ वो खेलने जा रही है, पर एक अजीब तरह का मज़ा भी आ रहा था, उसने छूट को सहलाया तो विणा सिसकने लगी, और साथ में उसकी पंतय भी गीली होने लगी) जरा सा छूने से hi तेरी पंतय तो गीली होने लगी, अगर इतना hi छोड़ने का मान कर रहा है तो आज तैयार हो जा.





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विणा : शहहहहह अह्ह्ह्हह में ऐसा नहीं कह शक्ति शह्ह्ह्ह. (रंजन के द्वारा छूट को सहलाना उसे अच्छा लग रहा था)

रंजन : तो तेरा कुछ नहीं नोनेवाला (ये कहते हुए उसने पंतय निकल दी और उसकी नंगी छूट को देखने लगी, वैसे तो उसने छूट को देखा था, वो अपनी छूट को भी देखती थी पर आज कुछ अजीब लग रहा था, वो उसकी छूट को अंगूठे से सहलाने लगी, जैसे जैसे विणा सिसक रही थी उसे भी मज़ा आ रहा था, वो भी अपनी छूट को सहलाने लगी, थोड़ी देर बाद) अकेले अकेले मज़े ले रही है, तू भी तो कुछ कर.

विणा : क्या करू?

रंजन : तू भी मेरी छूट को सेहला.

विणा : मुझे शर्म आ रही है.

रंजन : तो में भी नहीं करती.

विणा : (वो इस मज़े को खोना नहीं चाहती thi)Thik है में करती हु. (दोनों एक दूसरे की छूट को सहलाने लगे) कितना अच्छा लग रहा है न, शह्ह्ह्हह्ह.





रंजन : है ऋ, शहहह अच्छा लग रहा है, ऊँगली अंदर दाल न.

विणा : (उसने ऊँगली अंदर डाली, तो अंदर गरम छूट में चली गयी) तेरी छूट में ऊँगली चली गयी.

रंजन : एक क्या, दो डालेगी तो भी चली जाएगी. शिव के लुंड ने खोल जो दिया है.

विणा : (छूट के अंदर अजीब लग रहा था, पर ऐसा करने से रंजन को बहोत मज़ा आ रहा tha)Tuje मज़ा आ रहा है?

रंजन : है यार, बहोत.

विणा : (कुछ सोचते hue)Tu भी ुन्डली दाल न मेरी छूट में, मुझे भी अंदर कुछ चाहिए. (रंजन ने एक ऊँगली अंदर सरकने की कोशिस ki)Ouchhh नहीं, मत दाल, दर्द हो रहा है. (रंजना ने ऊँगली बहार निकल di)Yar तेरी छूट में तो दो दो ऊँगली जा रही है, मुझे भी छूट के अंदर अजीब लग रहा है, मुझे भी अंदर कुछ डालना है, पर दर्द हो रहा है.

रंजन : एक बार तो दर्द सहना hi होगा, अब देख, मेरे तो मज़े hi मज़े है, अभी शिव आएगा और मुझे जी भर के छोड़ेगा.

विणा : तेरी किस्मत अच्छी है.

रंजन : मेने तो तुजे कहा था की तू भी कर ले, पर तू hi नहीं मानती.

विणा : पर शादी तो वो तुजसे hi करेगा, फिर मेरा क्या होगा?

रंजन : पागल है क्या तू, अभी तो हमे पढ़ना है, अभी से शादी शादी क्या कर रही है, है अगर वो मुझसे शादी करेगा तो में अपने आप को खुसनसीब सामजिनगी, पर अभी से ये सब क्या सोचना, जा समय आएगा तब देखि जाएगी.

विणा : पर मेने तो सुना है की जिसके साथ शादी करनी हो सिर्फ उसी के साथ ये सब करते है.

रंजन : वो हर एक के अपने अपने ख्याल होते है, ये तेरी जिंदगी है, जैसा तुजे ठीक लगे तू सोच सकती है. में तो मज़े से जीना चाहती हु, आनेवाली जिंदगी के लिए में अभी की जिंदगी क्यों ख़राब करू. और तूने नहीं देखा, अपनी hi स्कूल की कितनी hi लड़कीओ ने अब तक कितने बॉयफ्रेंड बदल लिए है. आज कल ये सब कोई नहीं सोचता. (तभी दरवाजे पर दस्तक हुई, दोनों ने चंक कर एक दूसरे को देखा, रंजन ने विणा को चुप रहने का इस्सर किआ, और उसे सो जाने को कहा, विणा भी समाज गयी और वो लेट गयी और अपनी आंखे बंद कर दी, रंजन उठी और दरवाजा खोला, सामने शिव hi था, उसने उसका हाथ पकड़ कर अंदर खिंच लिया और दरवाजा बंद कर diya)Sab सो गए?

शिव : है, सो गए. (विणा को dekh)Ye कब से सो रही है?

रंजन : काफी देर हो गयी, में तो तुम्हारा इंतजार था इस्सलिये जाग रही थी वर्ण में भी सो जाती. कितने दिनों बाद तुमसे ऐसे मिल रही हु na(Ye कहते hi वो शिव को किश करने लगी और साथ में शिव के लुंड को सहलाने लगी)

शिव : (थोड़ी देर किश करने से और लुंड सहलाने से मेरा लुंड खड़ा हो गया था, किश के baad)Itni क्या बेसबर हो रही हो?

रंजन : यहाँ आ दिखती हु (वो घोड़ी बन गयी और अपनी फ्रॉक ऊपर उठाते हुए अपनी पंतय निचे किसका दी) देख क्या हालत है. (मेने देखा की उसकी छूट पूरी भीगी हुई थी, छूट के होठ गीले थे और छेड़ से रास टपक रहा tha)Me कब से तेरा इंतजार कर रही थी, अब इंतजार नहीं हो रहा, पहले एक बार अंदर दाल दे अंदर.

शिव : सच में छूट तो बहोत ज्यादा पानी छोड़ रही है (मेने भी देर करना ठीक न समजा और अपनी चड्डी निकल दी और लुंड बहार निकल दिया, उसके ऐसे झुके होने का दृस्य देख कर लुंड वैसे भी कड़क हो गया था, मेने उसकी कमर को पकड़ कर मेरी और खिंचा तो वो अपनी गांड उठाये मेरी और खिसक गयी, मेने लुंड को छूट पर लगा दिया और छूट पर रगड़ दिया, लुंड भी छूट के रास से भीग गया. मेने छूट रास से भीगे हुए लुंड को उस छोटे से छेड़ पर सेट किआ तो वो इतनी बेसबर हो रही थी की उसने खुद अपनी गांड पीछे की ताकि लुंड अंदर चला जाये, पर थोड़ा लुंड अंदर जाते hi वो रुक गयी, ये दूसरी बार hi था उसका तो शायद दर्द हो रहा था, पर अब में भी नहीं रुक शक्ति था तो मेने उसकी कमर पकड़ी और अपनी और खिंचा तो लुंड अंदर उतरने लगा. उसने अपना मुँह निचे बिस्तर पर दबा दिया, ताकि आवाज न निकले, आधे से ज्यादा लुंड अंदर चला गया तो में रुक गया, थोड़ी देर उसे रिलैक्स होने दिया, में उसके उभरे हुए कूल्हों को मसलने लगा ताकि वो अच्छा महसूस करे, ये बहोत कामुक दृश्य था, मेरा लुंड उसकी छोटी सी छूट को फैलाये हुए अंदर घुसा हुआ tha)Tu ठीक है? (आखिर मेने उसे पूछा तो उसने मेरी और देखा और है में गर्दन हिलायी, उसकी कासी हुई छूट मेरे लुंड के इर्द गिर्द लिपटी हुई थी, मेने आहिस्ता आहिस्ता लुंड अंदर बहार करना सुरु किआ, लुंड पूरा छूट रास से भीग चूका था, उसकी छूट बहोत रास बहा रही थी, मेने हलके हलके धक्के लगाने सुरु कर दिए)





रंजन : शहहह अह्ह्ह्हह सीईव शह्ह्ह्ह, बहोत अच्छा लग रहा है शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह छूट के अंदर लुंड कितना मज़ा देता है शहहहहह, भले वो दर्द देता है पर कितना मज़ा आता है. (उसकी छूट और उसकी ये उत्तेजक बाटे मुझे और अक्सा रही थी, मेने उसकी छूट को एक ले से छोड़ना सुरु कर दिया, उसके थिरकते कूल्हों को देख कर मुझे और जोश आ रहा था,





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लगातार दस पंद्रह मिनट तक छोड़ने से वो अपना पानी बहाने lagi)Shhhhhhhhh शीइइइइव शहहहहह अह्ह्ह्हह में गयी शहहहहह शह्ह्ह्हह्ह shhhhhhhhh(Pani बहने के बाद वो बिस्तर पर उलटी लेट गयी जिस से मेरा लुंड उसकी छूट से बहार निकल गया, में उसके कूल्हों को शेहलाने लगा, थोड़ी देर बाद वो पलटी और बेथ गयी, वो नीचे झुकी और मेरे लुंड को अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसने लगी, ऐसे चूसने से उसकी गांड ऊपर उभर आयी थी, एक हाथ से में उसको सेहला रहा था और दूसरे हाथ से उसकी चूचिया मसलने लगा. थोड़ी देर बाद वो बेथ गयी और अपने सरे कपडे निकल दिए. और अपनी छूट को मेरे लुंड पर लगते हुए वो मेरी गॉड में बेथ गयी, और ऊपर निचे होने लगी, में बैठे बैठे उसको छोड़ ने लगा, वो भी अपनी कमर हिलाते हुए लुंड को अंदर बहार कर रही थी, हम दोनों एक दूसरे के होठो को चूसने लगे. लगातार मेरी गॉड में कूदने से वो एक बार फिर से झाड़ गयी और हांफने लगी, फिर से उसने मुझे किश किआ और मेरी आंखोमे देखने लगी)

शिव : क्या हुआ, क्या देख रही हो?

रंजन : तेरा लुंड मस्त है शिव, मेरी पूरी भोस को भर देता है, ये कितना स्वर्गीय आनंद है न?

शिव : है, तेरी भोस भी मस्त है, मेरे लुंड को अच्छी कास के पकड़ती है.

रंजन : दूसरी सील पैक छूट को छोड़ना है?

शिव : ऐसा क्यों पूछ रही है?

रंजन : (पास में लेती विणा की और इस्सर कर ke)Ye भी सील पैक है, छोड़ना है इससे?

शिव : पागल है क्या तू, तुजे शर्म नहीं आती ऐसा बोलते हुए?

रंजन : इसमें क्या शर्माना, लड़को को तो सील तोड़ने में मज़ा आता है, अगर तू कहे तो में इसको भी तेरे निचे लेता शक्ति हु.

शिव : अगर दोबारा ऐसी बात की तो एक खींचके मरूंगा, तुजे शर्म आणि चाइये, क्या मेने इस्सलिये तुजे छोड़ा क्यों की मुझे छूट चाहिए थी. क्या तू ये समझती है?

रंजन : (शिव की आँखों में गुस्सा देख वो शांत हो गयी, वो मुस्कुरायी और उसके होठो पे किश कर ke)Sorry, मेरा वो मतलब नहीं था शिव, मुझे लगा तुजे अच्छा लगेगा.

शिव : सिर्फ सेक्स हवस होती है और वो कभी नहीं बजती, मुझे तुजे छोड़ना इसलिए अच्छा लगता है क्यों की हमे एक दूसरे से प्यार है, हम एक दूसरे की परवाह करते है, मेने सिर्फ अपना पानी निकलने के लिए तुजे नहीं छोड़ा, सामजी. और हम जो कर रहे है, आपसी सहमति से कर रहे है, अगर ऐसी बाटे करोगी तो फिर भूल जाओ.

रंजन : (उसके गले से लगते hue)Muje माफ़ कर दे मेरा वो मतलब बिलकुल नहीं था. में तो बस इस्सलिये कह रही थी की उसको भी तेरे साथ करना है पर वो शर्मा रही है और कह नहीं प् रही, तो मेने कह दिया. मुझे लगा तू तैयार हो जायेगा? सॉरी यार, मेरा वो मतलब बिलकुल भी नहीं था, मुज पर गुस्सा मत हो, प्लीज.

शिव : उसका मान है तो वो खुद कहेगी, और दूसरी बात, कल जेक उसकी शादी होगी तो फिर उसको hi प्रॉब्लम होगी, तो वो इनसब से दूर रहे वो उसके लिए अच्छा है.

रंजन : शादी, शादी, शादी, हर कोई हम लड़कीओ को hi क्यों डरता रहता है, नहीं करनी हमें शादी समजा, अगर उसकी मर्जी है की वो तेरे साथ करे तो क्या लूट जायेगा. जैसे छूट न हुई कोई खजाना हो गया जो एक बार लूट गया तो खली हो जायेगा. क्या हम इंसान नहीं है क्या?

शिव : (रंजन थोड़ी गुस्सा हो गयी थी, में muskuraya)Chhod ये सब बाटे, वर्ण मेरा मूड ऑफ हो जायेगा, अभी जो करना है वो तो कर, या फिर तेरा हो गया तो फिर ख़तम.

रंजन : ऐसे कैसे ख़तम, मेरे तेरे लुंड को नाराज नहीं कर शक्ति, वो कितना प्यारा है, में तो बस विणा के लिए कह रही थी, अगर अभी तू उसको छोड़ेगा तो भी वो मन नहीं करेगी, अब तेरी marji(Wo मेरी गॉड से उठी और फिर से मेरे लुंड को चूसने लगी, मेने देखा की विणा सोई हुई है, पर उसके चेहरे के हावभाव बता रहे थे की वो जाग रही है, वैसे भी इतना सब बाजु में हो रहा हो और वो सोई रहे ये मुमकिन नहीं, तो वो हमेसा से hi जग रही होती होगी. उसने भी फ्रॉक पहनी थी जिस से उसके झांघो के निचे के पेअर नंगे थे, और शरीर से वो रंजन के मुकाबले ज्यादा भरी हुई thi)(Ranjan की जब नजर पड़ी तो उसने देखा की शिव, विणा को देख रहा tha)Kaho तो जगा दू.

शिव : (मेने रंजन को देखा जो लुंड चूस रही थी, और उसकी गांड ऊपर कर दिख रही थी, मेने लुंड बहार निकला और उसे सीधा लेता दिया और लुंड उसकी छूट में दाल diya)Kyu तू छुडवाके थक गयी है क्या?

रंजन : (मेरी पीठ को सहलाते हुए, अपनी टंगे फैलाकर मेरे धक्को का मज़ा ले रही thi)Me क्यों ठाकु गई, मुझे तो तेरा लुंड बहोत अच्छा लगता है, अगर तू सबके सामने भी कहेगा की मेरा लुंड ले ले तो में ले लुंगी, समजा. में तो बस विणा के लिए कह रही थी, वर्ण मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है, में तो चाहती हु की तू रोज मुझे चोदे. जब से तूने मुझे छोड़ा है तब से पता नहीं क्यों पर में तेरे बहोत करीब आ गयी हु, अभी जब तू मुझे छोड़ रहा है तो ऐसा लग रहा है की तू मेरे कितने करीब है, अब छोड़ वो सब, आगे विणा की किस्मत, अब मुझे जी भर के छोड़ और मुझे प्यार कर.

हम दोनों एक घंटे तक ये सब करते रहे, मुझे यकीं था की विणा ये सब देख रही है पर मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा, जब मेरा पानी निकला तब तक रंजन और दो बार झाड़ चुकी थी. उसे सुला कर में अपने कमरे में चला गया.

सुबह उठ कर जब में बाथरूम में जा रहा था तब मुझे गायत्रीदिदी दिखी, उनको भी गयम जाना था.

शिव : कैसी हो didi?(Gayatrididi ने आस पास देखा और आ कर मेरे गले लग गयी)

गायत्रीदिदी : में अच्छी हु, तू कैसा है?

शिव : (उनके ऐसे गले लगने से में खुस था, मेने भी उन्हें अपनी बहो में समेटा और पूछा) दीदी, गयम में सब ठीक है न, कोई परेशानी तो नहीं.

गायत्रीदिदी : तू उसकी टेंशन मात ले, में सब संभल लुंगी.

शिव : ठीक है दीदी, कुछ हो तो बताना, अब में जाऊ, मुझे स्कूल के लिए तैयार होना है.

गायत्रीदिदी : में तैयार कर दू?

शिव: अगर आप आएंगी तो और देर हो जाएगी. (हम दोनों मुस्कुराड़िये) आप उस बाथरूम में जाइये में इसमें जाता hu.(Hum दोनों मुस्कुराते हुए अंदर घुस गए)

स्कूल से में घर चला गया, जब में घरसे निकला तो बारिश हो रही थी, बारिस के चलते में लेट हो शक्ति था तो मेने सोचा एक बार पवनसीर से बात करलु फिर साइट पर जाऊंगा. उन्होंने कहा की वो मुझे लेने आ रहे है, मुझे आश्चर्य हुआ, में इंतजार करनेलगा, वो कार लेकर आये थे, में उनके साथ बेथ गया.

शिव : सर, आपने क्यों तकलीफ की.

पवनसीर : तकलीफ नहीं, एक्चुअली में किसी से मिलने जा रहा था, अकेले जाने में थोड़ा अजीब लग रहा था तो सोचा मोरल सपोर्ट के लिए किसी को साथ ले लू, तभी तुम्हारा फ़ोन आया.

शिव : ऐसा किस से मिलने जाना है जो आप को मोरल सपोर्ट की जरुरत पद गयी.

पवनसीर : उस दिन मेने तुम्हे बताया था न, उस प्रोजेक्ट के बारेमे, वो सूर्यदेवजी अभी सहर में आये हुए है तो मेने सोचा की एक बार मुलाकात करलेते है. वैसे चांस नहीं है की ये प्रोजेक्ट हमे मिले पर फिर भी एक बार तरय करना तो बनता है.

शिव : (उनके चेहरे पर टेंशन साफ़ दिख रहा था) तो इसमें टेंशन की क्या बात है सर.

पवनसीर : अरे यार, तुम से क्या छुपाऊ, तुम जाते हो की प्रकाशराओ के साथ में काम करता हु, अगर उसे पता चला की में डायरेक्ट सूर्यदेवजी से मिलने गया हु तो गड़बड़ हो शक्ति है, इसीलिए थोड़ी टेंशन है.

शिव : सर, गर तरक्की करनी है तो थोड़ा रिस्क तो लेना hi पड़ेगा, और आपने जिस तरह से कहा था की भले hi वो दोनों के बिच अच्छे सम्बन्ध है पर वो सूर्यदेवजी की नाक दबा रहे है तो वो भी तो उस से छुटकारा चाहते होंगे. आप डरिये मात, कुछ नहीं होगा.

पवनसीर : थैंक यू शिव, मुझे लगा hi था की तुम्हारे साथ टेंशन थोई काम होगी. (हम दोनों जा रहे थे की एक जगह उन्होंने गाड़ी रोकी) वो जमीं देख रहे हो, उसी जमीं के लिए ये मसाला अदा हुआ है.

शिव : (वो जमीं देख कर में चौंक गया, क्यों की ये वही जमीं थी जहा जाहिर का अड्डा था. मेने कन्फर्म करने के लिए फिर भी पूछ लिया) वो जमीं जिसके बिच में कुछ झुग्गियां बानी हुई है?

पवनसीर : है, वो hi जमीं, पता नहीं ये जुग्गिया कब बना दी थी इन्होने और अब ये दवा कर रहे है की ये बरसो से वह रह रहे है, ये उस जमीं के बीचो बिछ है तो बाकि की जमीं फ़ैक्ट्रोरी बनाने के लिए इस्तेमाल नहीं की जा शक्ति.

शिव : पर अगर ये जमीं सूर्यदेवजी की है तो कानूनन वो इस पर कब्ज़ा कर शक्ति है न.

पवनसीर : कर शक्ति है, पर उसके लिए केस करना पड़ेगा और उसमे काफी साल लग जायेंगे, उसके बाद भी कोई गारंटी नहीं की ये मसाला सुलझेगा hi.

शिव : मेने सुना है की ये जुग्गिया किसी जाहिरभै के कब्जे में है.

पवनसीर : तुम जानते हो, कैसे?

शिव : बस मेने सुना है.

पवनसीर : है, उसी के कब्जे में है, उसने ये अपने और अपने आदमीओ के नाम गुस्वादिये है, और ये भी सब उस मला की मदद से. अब जब तक वो मला नहीं कयेगा ये लोग वह से हटेंगे नहीं. (मेरे दिमाग में आया की ये सब तो सेल बहोत बड़े बड़े लोग है, क्या क्या गेम खेलते है)

शिव : क्या आप इसको खली करवशकते हो?

पवनसीर : नहीं यार, मेरी पहोच के बहार है ये.

शिव : तो फिर हम उनसे मिलने क्यों जा रहे है?

पवनसीर : मिलने से सम्बन्ध अच्छे बने रहते है, और तुम्हारी बात भी सही है की अगर में कुछ कर नहीं सकता तो उनसे क्यों मिलने जा रहा हु, पर बात करने से hi किसी चीज का हल मिल शक्ति है, तो सोचा मिलने में क्या प्रॉब्लम है.

मेरी तो समाजमे नहीं आरहा था की आखिर हमे उनसे मिलना क्यों है, अगर पवनसीर के पास वो जमीं छुड़ाने की कोई तरकीब हो तो ठीक है, वर्ण ख़म खा उसमे घुसने से उनका hi नुकसान होगा. पर में इन बातो में कुछ नहीं बोल शक्ति था. तो हम दोनों वह से आगे बढ़ गए. उन्होंने जिस घर के सामने गाड़ी रोकी वो घर देख कर में चौंक गया.
 
अपडेट 106

में और पवनसीर जिस घर के सामने रुके थे वो देख कर में समाजगया था की ये किसका घर है, क्यों की में पहले भी यहाँ आ चूका था. ये मनीषा मैडम का घर था. पवनसीर मुझे अंदर ले गए, वह काम करनेवाली औरत ने हमें बैठने को कहा और वो अंदर चली गयी, थोड़ी देर में एक आदमी हमारे सामने आया जिसे देख कर पवनसीर खड़े हो गए तो में भी खड़ा हो गया.

पवनसीर : गुड आफ्टरनून सर, कैसे है आप?

सूर्यदेव : में अच्छा हु, आप कैसे है पवनजी, बैठिये. (उन्होंने एक बार मेरी और देखा फिर पवनसीर की और देख kar)Kahiye कैसे आना हुआ?

पवनसीर : ऐसे hi मिलने चला आया सर, वैसे भी आप तो मिलते नहीं, बुसिनेस्स के वजह से आप हमेसा कही न कही बहार hi होते हो, मेने सुना की आप आये है तो मिलने चला आया.

सूर्यदेव : अच्छी बात है, पर में बुस्सिनेसमान हु और में जनता हु आप ऐसे तो मिलने आये नहीं होंगे. (तभी अंदर से मनीषा मैडम अपने बच्चे के साथ बहार आयी, वो दूसरे रूम की और जा रही थी पर मुज पर नजर पड़ते hi वो हमारी तरफ आयी)

पवनसीर : नमस्ते मैडम, कैसी है आप?

मनिषामदाम : अच्छी हु भाईसाहब, कैसे हो शिव? (उन्होंने मुझे पूछा तो सूर्यदेव और पवनसीर दोनों ताज्जुब से मुझे देखने लगे, मेने खड़े होते हुए कहा)

शिव : अच्छा हु मैडम, आप कैसी है?

सूर्यदेव : तुम जानती हो इससे?

मनीषा : है, ये शिव है, मेने तुम्हे बताया था न की में एक खेल महोत्सव में इनाम वितरण के लिए जा रही हु, वह इस से मुलाकात हुई थी, बहोत होनहार खिलाडी है ये.

सूर्यदेव : अरे वह, ये तो अच्छी बात है, पर तुम यहाँ kaise?(Me क्या जवाब देता तो मेने पवनसीर की और देखा)

पवनसीर : ये अभी पढ़रहा है और साथ में काम करता है ताकि अपना खर्चा निकल शेक, वैसे तो ये हमारे यहाँ काम करता है पर इतने काम वक़्त में hi ये हमारे घर के सदस्य जैसा हो गया है.

मनीषा : यू क्नोव सूर्य, हे इस ऑर्फ़न, बूत ब्रिलियंट बॉय.

सूर्यदेव : इम्प्रेससिवे! (पवनसीर की और देख kar)Ha तो कहिये पवनजी कैसे आना हुआ?

पवनसीर : और तो कुछ नहीं सर, बस आप का वो फैक्ट्री वाला प्रोजेक्ट कहा तक पंहुचा, बस ये जान न था. (मनीषा मैडम बार बार मुझे देख रही थी, में थोड़ा घबरा रहा था)

सूर्यदेव : वैसे तो तुम जानते hi हो, वो जमीं की वजह से वो रुका हुआ है, जब तक उस जमीं का मसाला हल नहीं होता आगे कुछ नहीं हो शक्ति, मेरे काफी पैसे उसमे ब्लॉक हो गए है.

पवनसीर : पर प्रॉब्लम क्या है सर, प्रकाशराओ तो आपके मित्र है, और मला से भी आपकी अच्छी पहचान है.

सूर्यदेव : आप तो जानते है, बुसिनेस्स में कोई मित्र या दुसमन नहीं होता, सब अपना अपना फायदा ढूंढते है, हमारी बात हुई थी पर वो कुछ ज्यादा hi डिमांड कर रहे है, और मुझे ऐसे झुक कर फैसले लेना मंजूर नहीं. अगर मसाला हल न हुआ तो में ये प्रोजेक्ट hi बंद कर दूंगा.

पवनसीर : अरे नहीं सर, आपके इस प्रोजेक्ट से सहर को कितना फायदा होगा, कई लोगो को काम धंधा मिलेगा.

सूर्यदेव : में जनता हु, पर बुरा न मन न, पर तुम्हारे पार्टनर प्रकाश रओ और मला दोनों मिल कर गेम खेल रहे है, मुझे ये भी पता है की जिसने जमीं पर अपना कब्ज़ा दिखाया है वो उन्ही का आदमी है. रातो रात उन्होंने सरे साबुत बना दिए है, पर ये सब साबित करने में बरसो निकल जायेंगे. सच कहु तो में प्रकाश रओ और तुम्हारी कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट देना hi नहीं चाहता, पर लगता है की अगर मुझे ये करना है तो तुम लोगो को hi काम देना पड़ेगा, ऊपर से वो मला इस प्रोजेक्ट में पार्टनरशिप मांग रहा है, मुझे नहीं लगता की ये प्रोजेक्ट होगा.

पवनसीर : ऐसा मात कहिये सर, में और प्रकाशराओ तो इस्सलिये साथ काम करते है की वो प्रोजेक्ट ले आते है, पर उनके पास न मन पावर है न इंफ्रास्ट्रक्चर तो उन्हें मेरे जैसे से hi काम करवाना पड़ता है, हम काम करते है और मलाई वो कहते है. प्रॉब्लम यही है की वो मला की मदद से सरे प्रोजेक्ट हांसिल कर लेते है.

सूर्यदेव : में तुम्हारी बात समाज रहा हु, पर कर भी क्या सकते है?

शिव : सर अगर हम वो जमीं उनके कब्जे से मुक्त करवा दे तो?

पवनसीर : ये क्या कह रहे हो शिव, ये मुमकिन नहीं है.

शिव : में जनता हु सर, ये मुमकिन नहीं है, पर अगर ऐसा हो जाये तो?

सूर्यदेव : अगर हो जाता है तो प्रोजेक्ट तुम्हारा. पर तुम जानते भी हो तुम क्या कह रहे हो, और ये करोगे कैसे?

शिव : सर, मेरा मान न है की अगर कुछ करना है तो पहले उसके बारे में सोचना पड़ता है, अगर हम ये मान कर चलते रहे की ये नहीं हो शक्ति तो वो होने से रहा, अगर हमे उस जमीं को छुड़ाना है तो ये सोचना होगा की हमे वो छुड़ानी है, तो हमारा दिमाग उस और सोचने लगेगा की कैसे, जब तक हम ये सोचेंगे नहीं तब तक रास्ता कैसे मिलेगा, कोशिस तो करनी hi चाहिए. अगर हम सोचे की हमें चाँद पर जाना है तभी तो हम उसका रास्ता धुंध पाएंगे, अगर सोचेंगे नहीं तो रास्ता कैसे ढूंढेंगे.

सूर्यदेव : (मुस्कुराते hue)Bilkul सही सोच है तुम्हारी, पर सिर्फ सोचने से कुछ नहीं होगा, करोगे कैसे?

शिव : अभी तो मुझे नहीं पता पर कोई न कोई रास्ता जरूर निकल आएगा. पर अगर निकल आया तो क्या आप पवनसीर को ये प्रोजेक्ट डोज?

सूर्यदेव : है जरूर दूंगा.

पवनसीर : (वो थोड़ा घबरा रहे the)Sir, पर ये बात प्रकाशराओ को पता न चले, एटलीस्ट तब तक जब तक इसका कोई हल न निकल आये.

सूर्यदेव : तुम फ़िक्र मात करो.

मनीषा : आप लोग बाते करो में आपके लिए कुछ बनती हु, शिव तब तक तुम इससे sambhalo(Unhone अपना बच्चा मुझे दे दिया, बड़ा hi प्यारा बच्चा था, वो मुझे देख कर मुस्कुराने laga)Agar रोने लगे तो अंदर ले आना.

सूर्यदेव : ऐसा क्यों कह रही हो, तुम्हे तो पता है की वो तुम्हे नहीं देखेगा तो रोयेगा, बिना वजह क्यों रुलाना उसे, तुम उसे अपने साथ hi ले जाओ.

मनीषा : तो आप सम्भालो उसे.

सूर्यदेव : अरे यार तुम्हे तो पता है वो मेरे पास आते hi रोने लगता है.

मनीषा : रोयेगा hi, तुम उसे दीखते कब हो, ज्यादातर बहार रहते हो और जब यहाँ होते हो तब भी काम काम काम. तो ये कैसे पहचानेगा.

सूर्यदेव : अरे बाबा, अब तुम सुरु मत हो जाओ.

मनीषा : चलो शिव, मेरे साथ किचन में खड़े रहना, वो मुझे देखता रहे गए तो नहीं रोयेगा. (मेने पवनसीर और सूर्यदेवसीर को देखा तो मैडम फिर से boli)Unhe क्या देख रहे हो, चलो. (में क्या करता, में और मैडम अंदर चले गए.)

सूर्यदेव : कोण है ये लड़का, हिम्मतवाला है, तरक्की करेगा.

पवनसीर : सही कहा सर, वैसे तो अनाथ है पर जहा जाता है रिश्ते बनालेता है, नेक लड़का है, कभी किसी का बुरा नहीं कहता न सोचता है.

सूर्यदेव : अपने साथ रखना, उसके चलते तुम्हे भी बहोत फायदा होगा.

(वो दोनों बहार बाते कर रहे थे)

मनीषा : तो आखिरकार किस्मत तुम्हे मेरे पास खिंच hi लायी. (में कुछ न बोलै) क्या यार, इतनी सी बात पे खफा हो, मेने जूथ बोलै था की में तुम्हे फंसा दूंगी. मुझे उस वक़्त कुछ सुजा नहीं तो ऐसा कह दिया था, सॉरी.

शिव : में जनता था. वैसे भी मेरे पास है hi क्या जो में घबराऊ. पर जिस तरह से आपने कहा वो मुझे अच्छा नहीं लगा था.

मनीषा : सॉरी यार, मिटटी डालो पिछली बातो पर. अब में कोई जबरदस्ती नहीं करुँगी, अगर तुम्हारी मर्जी हो तो आना, ठीक है. पर सच कहती हु, यार बेसबरी से इंतजार है उस पल का.

शिव : आप जानती है, अगर सर को पता चल गया तो क्या होगा.

मनीषा : में पागल दिखती हु तुम्हे, तुम से ज्यादा मुझे इस बात की फ़िक्र है समजे.

शिव : (सूर्यदेवजी की वजह से में अब इन्हे नाराज नहीं कर शक्ति था, और मेरा क्या नुकसान tha)Thik है, मेरा नंबर में दे दूंगा आप को.

मनीषा : (उनके चेहरे पर खुसी छलक आयी, जैसे उन्हें खजाना मिल गया ho)Thank यू शिव.

थोड़ी देर वह रहने के बाद में और पवनसीर वह से निकल गए, बारिश बंद हो चुकी थी पर जगह जगह पानी भरा हुआ था, और फिर से बारिस होने के भी असर थे. में और वो दोनों साइट पर चले गए, रस्ते में भी हम उसी बात पे चर्चा कर रहे थे, पर कोई रास्ता नहीं मिल रहा था. मेने वकील की सलाह लेने को कहा तो उन्होंने काव्य मैडम से मिलने के लिए फ़ोन लगा दिया. मैडम ने रात को मिलने को बुलाया. बारिस की वजह से साइट पर काम रुका हुआ था, सिर्फ अंदर अंदर का काम चल रहा था. उन सब को छूटने में अब सिर्फ एक hi घंटा बचा था तो हम दोनों साथ में hi वह से निकल गए. वो तीनो मुझे देख रही थी पर पवनसीर की वजह से कुछ बोली नहीं. में वह से जूही के घर चला गया. में आज जल्दी गया था, मेने डोरबेल बजायी तो उसने दरवाजा खोला. वो सायद सो रही थी तो उसके बाल बिखरे हुए थे, t-shirt और एक छोटी चड्डी पहने हुए hi थी वो. मुझे देख कर वो खुस हो गयी, मुझे अंदर खिंच कर दरवाजा बंद कर लिया, मेने भी उसे अपनी बाहोंमे बार लिया और उसके मीठे थोथो का रास पिने लगा. जब हम दोनों का दिल भर गया तो हम अलग हुए.

जूही : इतना जल्दी आ गए?

शिव : बारिस की वजह से आज काम बंद था तो जल्दी छुट्टी मिल गयी.

जूही : बारिस की वजह से स्टेडियम भी नहीं जाना है. तुम बैठो में तुम्हारे लिए कुछ बनती हु.

शिव : कोई जरुरत नहीं है, आओ मेरे पास बैठो (वो मुस्कुराती हुई मेरे पास बेथ गयी, उसकी प्यारी मुस्कान, बिखरी जुल्फे, प्यार से भरा चेहरा, आँखों में उमड़ता प्यार, उस से दूर रहना सचमे न मुमकिन सा लग रहा था)

जूही : ऐसे क्या देख रहे हो?

शिव : कुछ नहीं, बस ये प्यारा सा चेहरा, और तुम्हारी आंखे जिसमे ढेर सारा प्यार है.

जूही : आज बड़े रोमांटिक हो रहे हो? कोई खास बात?

शिव : कोई खास बात नहीं, तुम साथ हो वही खास है. (वो मेरी गॉड में शिर रखते हुए लेट गयी) क्या हुआ?

जूही : कुछ नहीं, बस मान किआ (में उसके चेहरे से बाल हटाने लगा, वो मुस्कुराते हुए मुझे देख रही thi)Muj पर बहोत प्यार आ रहा है.

शिव : वो तो हमेशा आता है जूही, पर में इस लायक नहीं की...

जूही : No बकवास सिर्फ प्यार. (उसके ऐसे बोलने से में भी मुस्कुरा दिया) मात सोचो इतना शिव, छोटी सी तो जिंदगी है, सोच सोच कर गवाने में क्या फायदा. जो होगा सो होगा, आज का मज़ा लो. (मेने उसका गाल सहलाया तो वो मुस्कुरायी, उसने मेरा हाथ पकड़ा और उसको चुम लिया, उसके बाद उसने उसको अपने एक स्तन पर रख दिया, में हटाने लगा तो वो बोली) कुछ मात करो, बस वह रक्खे रहो, मुझे अच्छा लगता है, मुझे ऐसा लगता है जैसे हम दोनों में कोई दुरी नहीं है, मुझे ऐसा लगता है जैसे मुझपर तुम्हार हक़ है, तुम मुझे कही भी छू सकते हो. (में मुस्कुराया और मेने हाथ वही रहने दिया, उसके सुडोल स्तन का एहसास मेरे हाथ में हो रहा था) लता कैसी है?

शिव : ठीक है, क्यों पूछ रही हो?

जूही : बस ऐसे hi, वो तुमको बहोत प्यारी है न, इसलिए.

शिव : सच कहती हो तुम, वो सबसे प्यारी है.

जूही : और बाकि सब कैसा चल रहा है? तुम्हारी नौकरी?

शिव : सब ठीक है, पवनसीर अच्छे है.

जूही : और स्नेहा? (पूछने के बाद वो नटखट सा मुस्कुरायी, में भी मुस्कुराया) लगता है तुम्हारा वो जाग रहा hai(Mere लुंड की बात कर रही थी)

शिव : ऐसे मेरी गॉड में लेतोगी और मेरे हाथ को अपने स्तन पर रक्खो गई तो और क्या होगा.

जूही : कोई बात नहीं, वो भी मुझे अच्छा लगता है.

हम दोनों काफी देर ऐसे hi बाटे करते रहे, वो भी आज बहोत खुस थी. आज टाइम था तो मेने सोचा की एक बार भार्गवी मैडम से भी मिल लू, मेने फ़ोन किआ तो वो पुलिस स्टेशन में hi थी, मेने उन्हें पूछा की कब निकलनेवाली है तो उन्होंने कहा की थोड़ी देर में वो घर hi जा रही है, मेने उन्हें रस्ते में मिलने को कहा और में जूही के घर से निकल गया. में रस्ते में खड़ा था की पुलिस जीप मेरे पास आके रुकी, में अंदर बेथ गया. वो पुलिस वर्दी में hi थी, मुझे देख कर वो मुस्कुरायी.

भार्गवी : आज मेरी याद कैसे आ गयी?

शिव : (उन्होंने जिस तरह से पूछा था, ये एक इंस्पेक्टर की तरह नहीं एक लड़की के जैसे पूछा था, पर मेरे मान में अभी भी दर था तो मेने उस भावना को दरकिनार किआ) मुझे कुछ पता चला है वो hi बताना था.

भार्गवी : किस बारे में?

शिव : जाहिर गेराज के बारे में.

भार्गवी : अच्छा क्या पता चला है?

शिव : यहाँ ऐसे खड़े रहकर बात करना क्या ठीक रहेगा?

भार्गवी : ठीक है, चलो घर चलते है. (उन्होंने गाड़ी आगे बढ़ा दी, थोड़ी देर में हम उनके घर पहुंच गए) तुम बैठो में चेंज करके आती हु. (थोड़ी देर बाद वो थ्री पीेछे गाउन पहन कर आ गयी, अब वो बिलकुल अलग लग रही थी, वो एक लड़की की तरह लग रही थी, बाल भी उन्होंने खोल दिए थे तो एक दो पल के लिए मेरी नजर उनके पुरे शरीर पर चली गयी, अब में था तो एक लड़का, क्या कर शक्ति हु, उन्होंने भी शायद ये नोटिस किआ, वो भी मेरे चेहरे पर आये भाव समझने की कोशिस कर रही थी, मेने उनकी आँखों में hi देखना सही samja)Ha तो बताओ क्या पता चला है?

शिव : मैडम, मुझे उस जगह का पता चला है जहा वो ऐसी गाड़िया छुपा के रखता है.

भार्गवी : (मेरी और आश्चर्य से देखते hue)Achchha, कहा?

शिव : वो सहर से बहार है, में आपको वह ले जा शक्ति हु.

भार्गवी : वैसे तुम्हे पक्का है न की उसी जगह गाड़िया रक्खी जाती है, मेरा मतलब है तुम्हे कैसे ये पता चला?

शिव : वो मात पूछिए, पर में सूरे हु की गाड़िया वही होगी.

भार्गवी : ठीक है तो फिर कल पूरी फाॅर्स के साथ वह छपा मरेंगे.

शिव : नहीं, अभी नहीं.

भार्गवी : क्या मतलब है तुम्हारा?

शिव : देखिये मैडम. जैसा की आपने कहा की में सूरे हु की नहीं तो मेने भी सुना hi है, है इतना यकीं से कह सकता हु की वो सही hi होगा, फिर भी हम रिस्क नहीं ले शक्ति, एक बार वह जाँच तो करनी चाहिए, पर अकेले, आपके डिपार्टमेंट में किसी को पता चले बगै, क्यों की इस से खबर लीक होने का खतरा है.

भार्गवी : (कुछ सोचते हुए) ठीक है, तुम्हारी बात में दम है, पर तुम अकेले नहीं जाओगे, में भी तुम्हारे साथ चलूंगी.

शिव : अगर आप मेरे साथ आयी तो उन्हें पता चल शक्ति है, आप पुलिस वर्दी में नहीं चल शक्ति.

भार्गवी : मुझे पता है, में बेवकूफ नहीं हु.

शिव : सॉरी, मैडम, मेरे कहने का वो मतलब नहीं था.

भार्गवी : (मुस्कुराते hue)Muje पता है, में सादे कपडे में आउंगी, कब चलना है?

शिव : वैसे तो आज भी जा शक्ति है, क्यों की अँधेरा होने के बाद जाना hi सही रहेगा, क्यों की आस पास खुली जगह है, अगर उजाले में जायेंगे तो किसी की भी नजर में आ शक्ति है. पर अभी मुझे काव्य मैडम से मिलने जाना है.

भार्गवी : काव्य मैडम से क्यों?

शिव : ये एक और मसाला है, वैसे है उसी जमीं से जुड़ा हुआ.

भार्गवी : ऐसी क्या बात है?

शिव : उस जमीं पर जाहिर ने अवैध तरीके से कब्ज़ा किया हुआ है, उसने कुछ नकली दस्तावेज बनाये है, में जहा काम करता हु उन्हें अपने नए प्रोजेक्ट के लिए उस जमीं को छुड़वाना पड़ेगा, तो उसी सिलसिलेमें बात करने जा रहे है.

भार्गवी : तुम तो सुपरवाइजर के तौर पर काम करते हो न? फिर तुम्हारा क्या लेना देना इस बात से?

शिव : वैसे तो कोई लेना देना नहीं है, पर पवनसीर मुज पर विस्वास करते है तो वो मुझे अपने साथ ले जा रहे है.

भार्गवी : तो फिर उसके बाद चलते है.

शिव : ज्यादा देर नहीं हो जाएगी?

भार्गवी : अरे यार क्या कहु तुमसे, ऊपर से बहोत प्रेशर है, मुझे ये केस जल्द से जल्द सोल्वे करना hi है.

शिव : ठीक है, में घर बोल देता हु की मुझे देर होगी. काव्य मैडम से मिलने के बाद में आपको कॉल करूँगा, आप आ जाना, पर पुलिस जीप में मात आना.

भार्गवी : तुम तो ऐसे मुझे सलाह दे रहे हो जैसे में कोई दूधपीती बच्ची हु, मुझे सब पता है. (में सॉरी बोलनेवाला था की उन्होंने मुझे रोक दिया) तुम्हे बाइक आती है?

शिव : है आती है?

भार्गवी : आओ मेरे साथ. (वो मुझे बहार ले गयी, उन्होंने एक ढकी हुई बाइक पे से कवर हटाया) ये बाइक तुम ले जाओ, वह काम ख़तम करने के बाद वापस यही आ जाना.

शिव : ये बाइक?

भार्गवी : मेरी है, नॉर्मली इसकी जरुरत नहीं पड़ती इस लिए यहाँ रक्खी हुई है. लो चाबी, और जब वापस आओ तो मुझे कॉल कर देना.

मेने बाइक ली और काव्य मैडम के घर चला गया. हम दोनों ऑफिस में बैठे थे, अभी तक पवनसीर नहीं आये थे.

काव्य : (थोड़ी नाराजगी se)Tum तो गायब hi हो गए शिव, कितने दिन बाद आये हो, तुम्हे पता है न में तुम्हारी वकील हु?

शिव : जी मैडम, पर में भी क्या करता, में ट्रेनिंग के लिए दस दिन बहार था, उसके बाद में एग्जाम फिर एक कॉम्पिटिओं, टाइम hi नहीं मिला.

काव्य : (नाराजगी से hi)Agar मिलना हो तो टाइम मिलहि जाता है, लगता है तुम्हे मेरी जरुरत नहीं है, ठीक है कोई दूसरा वकील देख लो.

शिव : (उनका चेहरा देख के दर गया, में कैसे दूसरा वकील कर शक्ति hu)Ye क्या कह रही है मैडम., आप तो जानती है में ऐसा नहीं कर शक्ति. (मेरी हालत सच में ख़राब हो गयी थी)

काव्य : (गंभीरता से थोड़ी देर मुझे देख रही थी, में भी बेबसी से उन्हें देख रहा था, अचानक वो हसने lagi)Ha है ha.......(Me अभी भी उन्हें देख रहा था, वो क्यों है रही थी मुझे समाज नहीं आया) अपना चेहरा तो देखो, कितना दर गए हो.

शिव : डरूंगा hi न मैडम, आपने बात hi ऐसी कही है.

काव्य : तो तुम मानते हो न की में तुम्हारे जीवन में इम्पोर्टेन्ट हु?

शिव : इसमें मान ने की क्या बात है, आप इम्पोर्टेन्ट हो.

काव्य : तो फिर उस हिसाब से hi कभी कभार मिल लिया करो, वकील न सही एक दोस्त समाज कर hi मिलने आ जाया करो.

शिव : दोस्त? (मेरी कुछः समाज नहीं आया)

काव्य : क्यों, मुझे दोस्त नहीं समाज सकते? में क्या इतनी बड़ी हो गयी हु?

शिव : नहीं, पर में आपको दोस्त समजू, मेरी इतनी औकात नहीं मैडम.

काव्य : दोस्ती औकात देख कर नहीं की जाती, अगर दोस्ती औकात देख कर की जाये तो वो दोस्ती नहीं सौदा होगा. मुझे तुम अच्छे लगे तो मेने तुमसे दोस्ती करने को कहा पर तुम शायद मुझे दोस्त नहीं मान शक्ति क्यों है न?

शिव : मैडम, आप मेरी दोस्त बनो ये तो मेरी खुशनसीबी होगी, में कभी सपने में भी सोच नहीं सकता की आप मेरी दोस्त बन सकती है.

काव्य : अब बोर मात करो शिव, अगर तुम्हे लगता है की तुम मुझे दोस्त बना शक्ति हो तो ठीक है, वर्ण जैसा चल रहा है चलने दो. में तुम्हारा केस नहीं छोडूंगी बस.

शिव : क्यों नहीं मैडम, मुझे खुसी होगी, आप को दोस्त बना कर. नोर्मल्ली ऐसी दोस्ती होती नहीं न, लोग अक्सर अपनी बराबरी के hi दोस्त बनाते है.

काव्य : वो सब मुझे नहीं मालूम, वैसे भी मेने किसी को अपना दोस्त नहीं बनाया, तुम्हारे साथ अच्छा लगा तो तुम्हे कह दिया, आगे तुम्हारी मर्जी.

शिव : क्या मैडम. मेरी मर्जी होगी, मेने कहा न की ये मेरी खुशनसीबी है.

काव्य : तो फिर ये मैडम मैडम बंद करो, मुझे सिर्फ काव्य कहो.

शिव : ये थोड़ा मुश्किल है, क्या मैडम दोस्त नहीं हो शक्ति? और वैसे भी सबके सामने में आप को ऐसे नहीं बुला शक्ति, थोड़ा ऑक्वर्ड लगता hai.(Tabhi निचे से कामवाली कहने आयी की पवनसीर आये है, तो मैडम ने उन्हें बुलाने को कहा)

काव्य: ठीक है, हम बाद में बात करेंगे.

थोड़ी देर बाद पवन सर आ गए.

काव्य : कहिये पवनजी, क्या बात hai?(Unhone साडी परिस्थिति मैडम को बता दी.) देखिये पवनजी, ऐसा तो है नहीं की ये छोटा मसाला है, और ये भी नहीं हो सकता की सूर्यदेव ने किसी वकील की सलाह न ली हो, जहा तक मुझे लगता है की जिस तरह से उस पर कब्ज़ा किया गया है ये सिर्फ परेशान करने के लिए है, जो भी साबुत उन्होंने बनाये है वो फालसे है वो हम कोर्ट में साबित कर सकते है, ये वो भी जानते होंगे, उनका मकसद इस जमीं को हथियाना नहीं है, वो ये कर भी नहीं सकते क्यों की कानूनन तौर पर ये जमीं बेचीं और खरीदी गयी है. उनका मकसद बस इतना है की सूर्यदेव को परेशान किआ जाये और इस केस को लम्बा खिंचा जाये, अगर वो ये केस करेंगे तो यक़ीनन जीतेंगे पर उसमे बहोत टाइम जायेगा, कोर्ट का तो आपको पता होगा की वो हर तरह से जाँच करेगी, कई बार सामनेवाला कोर्ट में न हाजिर रह कर भी अगली तारीख निकलवाता है, वो लोग ऐसे hi बिना वजह इस केस को लम्बा खींचेंगे, और उनका मकसद भी सिर्फ यही लगता है.

पवनसीर : तो इसमें क्या किआ जा शक्ति है मैडम?

काव्य : मेरे हिसाबसे तो आउट ऑफ़ कोर्ट सेटलमेंट hi बेस्ट ऑप्शन है.

पवनसीर : ये तो सूर्यदेवजी को भी पता है पर उनकी डिमांड कुछ ज्यादा hi है, अगर हमें इसमें कुछ करना है तो क्या कर शक्ति है?

काव्य : जैसे उन्होंने गैर कानूनन तरीके से कब्ज़ा किआ है वैसे hi गैर कानूनन तरीके से कब्ज़ा वापस लेना.

पवनसीर : आपका मतलब है की गुंडों के सहारे.

काव्य : रास्ता तो वही है, अगर जाहिर खुद अपना कब्ज़ा छोड़ देता है तो hi ये जल्दी निपटेगा, वैसे तो मुझे दूसरे कागजातों की जाँच भी करनी पड़ेगी की उन्होंने क्या क्या दावे किये है, पर जहा तक मुझे लग रहा है वह और भी लोगो के नाम पर घर और जमीं दिखाए होंगे, और वो काफी समय से वह रह रहे है ऐसा कुछ किआ होगा. तो हमें उनसब से नौ लेना होगा की ये उनकी जमीं नहीं है.

पवनसीर : ये तो बहोत मुश्किल है मैडम.

काव्य : सही कह रहे है आप, वो क्यों दस्तखत करेंगे? या तो उन्हें पैसे मिले या तो जान का खतरा, ये दो hi ऑप्शन है की वो दस्तखत करे. और अगर गैर कानूनन तरीके से ये किया जाये तो ये भी खतरा है की वो लोग कानून का सहारा ले और ऐसे में उनका केस और मजबूत हो जायेगा.

शिव : उनसे जिन कागजातों पर दस्तखत लेने है वो आप रेडी कर शक्ति हो?

काव्य : फरमाते तो मेरे पक में रेडी hi है, पर ये मुमकिन नहीं शिव.

शिव : में तो बस पूछ रहा था. क्यों की हमें हर तरीके से तैयार रहना चाहिए.

पवनसीर : ये मुमकिन नहीं शिव, हम गुंडों का सहारा नहीं ले शक्ति और न hi ऐसे लोग मेरे संपर्क में है, ये सब टेढ़ा काम है, हमे भूल जाना hi चाहिए.

शिव : वैसे तो आप सही कह रहे है पर जहा छह है वही रह है, कोई न कोई रास्ता तो निकल hi आएगा.

काव्य : ये बहोत खतरनाक है शिव.

शिव : में जनता हु मैडम, और मेने कब ऐसा कहा की में ये करने जाऊंगा, में तो बस ये कह रहा हु की हमें हर तरह से तैयार रहना है, न जाने कब कोई मौका हमारा दरवाजा खत खटाये, हमें हर मौके के लिए तैयार रहना चाहिए.

काव्य : तुम्हारी यही खूबी तुम्हे खास बनती है, गायत्रीवाले केस में भी कोई होप नहीं थी फिर भी पता नहीं कैसे तुमने उसे छुड़ा लिया. में बस इतना कहूँगी की बिना वजह खतरा लेने की कोई जरुरत नहीं है, ये सूर्यदेव का टेंशन है उसे हैंडल करने दो.

पवनसीर : ठीक है मैडम, आपका सुक्रिया, अब हम चलते है.

काव्य : ठीक है पवनजी, अगर आपकी इजाजत हो तो मुझे शिव से थोड़ा काम है.

पवनसीर : ठीक है, आप लोग बाटे कीजिये में चलता हु.

काव्य : (उनके जाने के baad)Kya खिचड़ी पाक रही है तुम्हारे मान में, ये बहोत खतरनाक काम है शिव, और तुम्हारा क्या लेना देना इन सब से, अगर जमीं वापस मिलेगी तो सूर्यदेव का फायदा होगा, तुम्हे क्या जरुरत है इन सब में पड़ने की.

शिव : अगर जमीं मिलेगी तो पवनसीर को उसका कॉन्ट्रैक्ट मिल जायेगा.

काव्य : पर फिर भी तुम्हारा क्या फायदा है, तुम क्यों जोखिम लेने की सोच रहे हो.

शिव : में कोई जोखिम नहीं ले रहा मैडम, और वैसे भी मेरा है hi कोण जो मुझे किसी बात की परवाह हो, ये hi सब तो है जो मेरे अपने है, इन्होने hi तो मेरे बुरे वक़्त में मेरा साथ दिया है, अगर में इनके काम नहीं आऊंगा तो किसके काम आऊंगा.

काव्य : एक खिंच के मरूंगी तुम्हे जो फिर ऐसा कहा की तुम्हारा कोई नहीं है, क्या लहू के सम्बन्ध hi सब होते है?

शिव : यही तो में कह रहा हु की आप सब hi तो है मेरे अपने, अगर में आपलोगो के hi काम न औ तो फिर क्या फैयदा.

काव्य : पर ये सब अलग है शिव, और मुझे समजाओ कैसे करोगे ये सब?

शिव : मेने कहा न की मुझे नहीं पता है और में अभी तो ये भी नहीं कह रहा की में ये सब करूँगा, में तो बस पूछ रहा था.

काव्य : (मेरे हाथ पर हाथ रख kar)Koi बेवकूफी मात करना.

शिव : (मेने उनकी आँखों में देखा, जहा मेरे लिए चिंता थी) मेने कहा न की में ऐसा वैसा कुछ नहीं करूँगा, और में कर भी क्या सकता हु, में कोई सुपर हीरो तोडना हु जो उनके साथ जाके लड़ लूंगा. में तो बस सब पूछ रहा था, आप भरोसा करिये, मेरे मान में ऐसा वैसा कुछ भी नहीं चल रहा.

काव्य : ठीक है, मुझे भरोसा है तुम पर.

थोड़ी देर बाद में वह से निकल गया, में भार्गवी मैडम के घर पहुंच गया.
 
अपडेट 107

दरवाजे की घंटी बजी, मनीषा दरवाजे के पास hi थी तो उसने दरवाजा खोला, सामने प्रकसराओ खड़ा था.

मनीषा : अरे अंकल आप, आईये आईये.

प्रकाश रओ : कैसी हो बेटी? तुमने तो घर आना hi छोड़ दिया है, वैसे स्वर्ण तुम्हे याद कर रही थी.

मनीषा : (वो जानती थी की प्रकाश रओ बस ऐसे hi कह रहा है क्यों की वो किस तरह का आदमी था उसे पता था, और वो उसके पति को परेशान भी कर रहा था ये भी पता था, पर फिर भी अपने चेहरे पर मुस्कान रखते हुए) आप तो जानते है अंकल, बच्चे की वजह से में घर से ज्यादा निकल नहीं पति, आइये न आप बैठिये, में सूर्य को कहती हु.

(वो जेक सोफे पर बेथ गया, थोड़ी hi देर में सूर्यदेव बहार आया)

सूर्यदेव : प्रकाश रओ जी आप, कैसे है आप?

प्रकाशराओ : में अच्छा हु, सुना की तुम आये हुए हो तो सोचा मिल लू.

सूर्यदेव : (थोड़ा जोर se)Manisha जरा चाय भिजवाना.

प्रकाश रओ : अरे रहने दीजिये, घर जा कर खाने का टाइम हो जायेगा.

सूर्यदेव : तो कहिये, कैसे आना हुआ?

प्रकाश रओ : में तो सिर्फ तुमसे मिलने hi आया था, अगर तुम पूछ hi रहे हो तो फिर पूछ hi लेता हु (थोड़ी देर रुक kar)to फिर क्या सोचा तुमने?

सूर्यदेव : (गंभीर मुद्रा me)Abhi तक कोई फैसला नहीं लिया मेने, देखते है, पर जो ऑफर आप दे रहे हो वो में सब से लास्ट में hi असेप्ट करूँगा, ये हो सकता है में ये प्रोजेक्ट hi ड्राप कर दू.

प्रकाश रओ : (इसके अलावा तुम्हारे पास कोई चारा भी नहीं है बेटे) अब क्या करे, गुत्थी hi ऐसी फांसी है तो कर भी क्या सकते है. फिर भी में अपनी और से पूरी कोशिस कर रहा हु की ये सुलझ जाये, मला साहब भी अपनी और से प्रयत्न कर रहे है, उन्होंने जाहिर से भी बात की थी, पर वो अपनी बात पर ऐडा है. और अगर सोचो तो मला साहब का ऑफर भी कोई बुरा नहीं है, वो अपनी पावर और प्रेस्टीज का इस्तेमाल कर के इस मसाले को सुलझाने की कोशिस कर रहे है, सोचो अगर ये बात बहार मीडिया में आ गयी तो क्या होगा, उनके कर्रिएर पे तो डेग लग जायेगा, तो इसके बदले में वो थोड़ी डिमांड कर रहे है. तुम्हारे लिए hi मेने उन्हें राज़ी किआ है, वर्ण वो तो इस मामले में अपने हाथ डालने से hi मन कर रहे थे.

सूर्यदेव : (वो अच्छे से इन दोनों की चालबाज़ी समाज रहा tha)Dekhte है, वैसे भी पिछले 6 महीने से तो ये गुथ्थी फांसी है तो आगे भी देखते है.

प्रकाश रओ : में फिर से कहता हु आप से, इस मसाले का और कोई हल है hi नहीं, और इतना बड़ा प्रोजेक्ट है, आपको फायदा थोड़ा काम होगा, पर नुकसान होने की तो कोई गुंजाइस hi नहीं है. तो फिर क्या ज्यादा सोचना, है बोल दो.

सूर्यदेव : मेने कहा न, अभी मेने इस बारेमे कोई फैसला नहीं लिया है, अगर कुछ होगा तो में आपको बता दूंगा.

प्रकाश रओ : जैसी आप की मर्जी, ठीक है में चलता हु. (वो वह से निकल गया, बहार जा कर उसने मला को फ़ोन किआ) वो अभी भी नहीं मान रहा, वो तो ये कह रहा था की वो प्रोजेक्ट hi नहीं करेगा.

मला : वो प्रोजेक्ट करेगा hi, तुम थोड़ा सबर रक्खो, वैसे भी इस जमीं में उसके बहोत सरे पैसे फसे हुए है, इतना पैसा देना उसके लिए मामूली बात है पर फिर भी वो अपने ईगो की वजह से रुका हुआ है, मेने जाहिर से भी बात की थी, वो भी नहीं फिरनेवाला, अगर सूर्यदेव डायरेक्ट जा कर भी सोडा करना चाहे तो भी जाहिर नहीं मानेगा, वैसे भी हमसे बैर ले कर वो खड़ा नहीं रह सकता. तुम चिंता मात करो, ये प्रोजेक्ट तुम्हे hi मिलेगा और फैक्ट्री में पार्टनरशिप मेरी होगी वो भी बिना एक भी रूपया लगाए.

(यहाँ प्रकाश रओ के जाते hi मनीषा आयी)

मनीषा : चलिए, खाना खा लेते है.

सूर्यदेव : तुम खा लो, मेरा मूड नहीं है.

मनीषा : क्या हुआ, क्या कहा अंकल ने.

सूर्यदेव : कहे का अंकल, सालो ने मिलकर सब खेल रचा है, अचानक जमीं पर आदमी आ गए, बस्ती आ गयी, क्या में समझता नहीं उनके खेल को, पर सब कुछ समाज कर भी कुछ नहीं कर शक्ति, भले hi मुझे जमीं का नुकसान होगा पर सच में मेरी कोई इच्छा नहीं है ये प्रोजेक्ट करने की. और ऐसे झुक कर तो बिलकुल भी नहीं.

मनीषा : आप ठन्डे दिमाग से सोचिये, ऐसे गुस्से में कोई भी फैसला मात कीजिये, में जानती हु की जमीं में आपने काफी पैसे डेल है, और अगर ये फैक्ट्री बन गयी तो लोगो का भी फायदा होगा, आप सबर रखिये, कोई न कोई हल निकल आएगा.

सूर्यदेव : तुम ये सब नहीं संजोगी, अगर मेने उस मला को पार्टनर बनाया तो वो पूरी जिंदगी हमे लूट ता रहेगा.

मनीषा : पवनभैसाहब और वो शिव भी तो आये थे, वो लोग कुछ न कुछ सोच लेंगे.

सूर्यदेव : मेरे पास इतना पैसा और पावर होने पर भी में कुछ नहीं कर प् रहा तो वो क्या कर पाएंगे.

मनीषा : आप शिव को काम मात समजिये, आप जानते नहीं होंगे पर उसने अपने सहर के पुलिस इंस्पेक्टर को भी मार मार कर जेल में डलवा दिया है, और सुना है की अपने अनाथालय की एक लड़की को छुड़ाने वो रेडलीगत में भी भीड़ गया था.

सूर्यदेव : लगता है तुम उसे बहोत अच्छे से जानती हो? (सूर्यदेव ने तो बहोत सहजता से hi पूछा था, पर मनीषा के मान में तो चोर था, वो थोड़ी घबरा गयी, पर फिर भी अपने आप को सँभालते हुए उसने कहा)

मनीषा : ये सब तो अखबारमे आया था, ये तो सबको पता है.

सूर्यदेव : पर यहाँ सब अलग है, यहाँ सिर्फ जोर जबरदस्ती से कुछ नहीं होनेवाला. में भी गुंडे हिरे कर के वो सब हटवा सकता हु पर अगर मैंने ऐसा किआ तो सारा इल्जाम मुज पर hi आ जायेगा. और में अपनी रेपुटेशन को नहीं खो सकता.

मनीषा : आप टेंशन मात लीजिये, मेरा दिल कहता है कुछ न कुछ जरूर होगा और वो आपके फायदे में hi होगा.

सूर्यदेव : (मुस्कुराते हुए) अच्छा, चलो खाना कहते है.

मेने जब दुर्बल बजायी तो भार्गवी मैडम ने दरवाजा खोला, वो सलवार कमीज़ में कड़ी थी, उन्हें देख कर कोई कह hi नहीं सकता की वो पुलिस की अफसर है, वो एक खूबसूरत कॉलेज गर्ल जैसी लग रही थी, में तो उन्हें देखता hi रह गया, थोड़ी देर के लिए तो में ये भी भूल गया की में यहाँ किसलिए आया हु. (शिव को अपनी और ऐसे देखते प् कर वो पहले तो आश्चर्य से उसे देख रही थी पर जब पता कला की वो उसके आकर्सन में खोया हुआ है तो उसके अंदर की लड़की बहोत खुस हो गयी और उसकी नज़ारे सहरम से झुक गयी, कुछ पल बाद उसने ऊपर देखा तो अभी भी वो जैसे बूत बना खड़ा था, वो उसकी आँखों के भाव पढ़ने की कोशिस कर रही थी, वो एक पुलिस अफसर थी और अब लोग उसे इस नजर से देखते hi नहीं थे या यु कहे की उसके सामने ऐसे देखने की किसी की हिम्मत hi नहीं थी, है उसके पीठपीछे लोग उसे घूरते होंगे पर उसके सामने ऐसे देखने की किसी की भी हिम्मत नहीं होती थी, अंदर से तो उसे बहोत अच्छा लग रहा था पर वो अपनी पोशण भी नहीं भूल सकती थी,

भार्गवी : क्या हुआ, ऐसे क्यों खड़े हो, अंदर आओ. (उनकी आवाज सुन के में हड़बड़ा गया, उनके चेहरे को देखा तो वह मुझे नाराजगी नजर आयी, मुझे भी अपनी भूल का एहसास हुआ तो में नज़ारे झुकाये अंदर दाखिल हो gaya)Kitni देर लगा दी, कहा रह गए थे?

शिव : जी, वो काव्यजि के वह देर हो गयी.

भार्गवी : कितना टाइम हो गया, अब तो मुझे भूख भी लग रही है.

शिव : अआप खाना खा लीजिये, हम बाद में चलते है.

भार्गवी : मुझे लगा की तुम जल्दी आ जाओगे इस्सलिये मेने खाना बनाने से मन करदिया था.

शिव : तो फिर अब.

भार्गवी : क्यों तुम्हे भूख नहीं lagi?(Bhukh तो मुझे भी लगी थी, पर मुझे आदत थी) एक काम करते है, पहले खाना कहते है फिर चलते है.

शिव : जी मैडम. (में उनकी और देखने से कतरा रहा था, क्यों की वो इतनी खूबसूरत लग रही थी की बार बार मेरी नजर उनसे चिपक रही थी, और मुझे दर लग रहा था की अगर उन्हें बुरा लग गया तो)

भार्गवी : (वो भी शिव की झिझक समाज रही थी, वैसे भी आज उसने कई दिनों बाद ऐसे कपडे पहने थे, उसे देख कर कोई भी नहीं कहेगा की वो एक पुलिसवाली hai)Chalo बाइक चालू करो में दरवाजा बंद कर के आती हु. (हम दोनों वह से निकल gaye)Kaha जायेंगे?

शिव : जहा आप कहे मैडम.

भार्गवी : में ऐसे कभी जाती नहीं, तुम्हे जो ठीक लगे वह ले चलो. (में और जूही एक बार जिस रेस्टोरेंट में गए थे वह में ले गया, हम दोनों अंदर गए, अंदर फॅमिली रूम था उसी में हम बेथ गए, वेटर मेनू दे गया, उन्होंने देखा और मुझसे puchha)Kya खाएंगे?

शिव : जो आपको ठीक लगे. (उन्होंने आर्डर दे दिया, जब तक खाना नहीं आएगा हम ऐसे hi बैठे थे, मेरी नज़र बार बार उनको देख रही थी, में अपने आप को सँभालने की कोशिस कर रहा था पर पता नहीं नज़र चली hi जाती थी, मुझे यकीं हो गया था की आज तो बीटा तेरी समेत पक्की है)

भार्गवी : क्या हुआ, चुप चुप क्यों हो? कोई बात करो.

शिव : क्या बात करू?

भार्गवी : ये बार बार तुम नज़ारे क्यों चुरा रहे हो, सीधे सीधे बात करो.

शिव : में तो सीधे सीधे hi बात कर रहा हु.

भार्गवी : देखो अभी भी तुम वैसे hi नज़ारे चुरा रहे हो.

शिव : सॉरी मैडम, पर आपको में ऐसे नहीं देख सकता?

भार्गवी : क्या मतलब है तुम्हारा?

शिव : आप गुस्सा हो जाएगी.

भार्गवी : में क्यों गुस्सा होउंगी.

शिव : में वो वो आपको देखता हु तो तो (भार्गवी उसके चेहरे को पढ़ने की कोशिस कर रही थी, उसके चेहरे पर दर साफ़ दिख रहा tha)wo नज़र चिपक जाती है.

भार्गवी : (शिव ने अपनी नज़ारे झुका ली थी, उसकी हालत देख और अपनी तारीफ सुन के भार्गवी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी, उसने जैसे तैसे अपने आपको sambhala)Sidhe सीधे मेरी और देख के बात करो. (उतने में खाना आ गया, मेने रहत की साँस ली, हम दोनों खाने में बिजी हो gaye)(Bhargavi बार बार शिव को देख लेती थी, वो देख रही थी की शिव कैसे उसकी और देखने से कतरा रहा है, उसके चेहरे पर बार बार मुस्कराहट आ जाती थी., खैर उन्होंने खाना ख़तम किआ, भार्गवी ने hi बिल चुकाया, वो दोनों बहार आये, शिव ने बाइक चालू की और भार्गवी उसके पीछे एक और पेअर किये बेथ गयी, जब वो बैठी तो उसने शिव के कंधे पर जेठ रख दिया, दोनों खामोस थे, अँधेरा हो चूका था, तक़रीबन 9 बज रहे थे.)

वह हाईवे पर थोड़ी दुकाने थी वही मेने बाइक रख दी. थोड़ी देर हम वह खड़े रहे, कुछ लोगो ने हमारी और देखा भी पर फिर वो सब अपने काम में लगे हुए थे, मेने भार्गवी मैडम को वो जगह दिखाई.

भार्गवी : वो तो काफी अंदर है, वह कुछ जल रहा है.

शिव : वह लाइट तो है नै तो रौशनी के लिए जलाया होगा.

भार्गवी : वैसे गाड़िया छुपाने के लिए परफेक्ट जगह दिख रही है. हम यहाँ पूछताछ नहीं कर सकते, हो सकता है की यहाँ भी उनका कोई इन्फॉर्मर हो, हमें वही चलकर hi देखना होगा. चलो.

शिव : मैडम, मेने आपको जगह दिखा दी, एक काम करते है में अपनी तरह से छानबीन करता हु, अभी आपका वह जाना ठीक नहीं होगा.

भार्गवी : पुलिस में, में हु तुम नहीं, और मुझे ये लड़की की तरह ट्रीट करना बंद करो, में कोई नाजुक लड़की नहीं हु जो तुम मुझे ले जाने से दर रहे हो, मात भूलो की में एक त्रिनेड अफसर हु, तुम्हे ले जाते हुए मुझे डरना चाहिए, क्यों की तुम एक आम नागरिक हो, तुम्हारी सुरक्षा मेरी जिम्मेदारी है. समजे. अब चलो, वह जा कर hi पता चलेगा की कितने सच्चाई है तुम्हारी इंफोर्मशन में.

वैसे तो उनकी बातो में सच्चाई थी, पर फिर भी वो थी तो एक लड़की, और ऐसी जगह उन्हें ले जाते हुए मुझे थोड़ी बेचैनी हो रही थी, पर में और कुछ कर भी नहीं सकता था. मेने एक बार वह दुकानों पर नजर दौड़ाई तो लग भाग सभी अपने अपने काम में मसगुल थे, हम दोनों चुपकेसे वह से अँधेरे में ओजिल हो गए. उन्होंने भी गहरे रंग के कपडे पहने थे और उन्होंने अपना चेहरा दुप्पटे से बांध दिया था और मेने भी गहरे रंग के hi कपडे पहने हुए थे, तो अँधेरे में हम दोनों जैसे गायब hi हो गए थे. वैसे तो जमीं सपाट थी पर फिर भी हम संभल कर चल रहे थे. हम दोनों की नज़ारे उस जलती हुई आग पर hi थी, हम दोनों चल रहे थे की अचानक मैडम को ठोकर लगी और वो गिरनेवाली थी की मेने उन्हें पकड़लिया, हमदोनो साथ साथ चल रहे थे, और उन्हें गिरने से बचने के लिए मेने अपना हाथ आगे कर दिया था तो वो गिरने से बच गयी. पर जब मुझे मेरी बाजु पर उनके स्तन का एहसास हुआ तो में दर गया, मेने अनजाने में उन्हें छाती से रोका था, अँधेरा इतना था की मुझे उनके चेहरे के भाव तो नहीं दिखे पर इतना पता चला की वो मेरी और देख रही है, अँधेरे में चमकती उनकी आंखे मेरी और देख रही थी.

शिव : सॉरी, थोड़ा संभल कर चलिए.

उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, फिर से हम दोनों आगे बढ़ गए. थोड़ी दूर पहुंच कर हम दोनों निचे बेथ गए और वह का जायजा लेने लगे. हमें वह कुछ चहल पहल दिखाई दे रही थी. हमदोनो उस झुग्गिओ से थोड़ी hi दुरी पर the.Andhere की वजह से हम छुपे हुए थे. बात करना खतरनाक था तो मेने अँधेरे में उनका हाथ पकड़ा और उन्हें आगे बढ़ने का इस्सर किआ. वो भी मौके की नजाकत समाज रही थी, हमदोनो हाथ थामे आगे बढ़ रहे थे. तभी मुझे उस जमीं की मिटटी को उड़ाती हुई एक बाइक उस तरफ आती दिखी. उस बाइक की रोशनी में हम दिख सकते थे, मेने उनका हाथ खिंचा और जुग्गिओ की तरफ दौड़ा, वो भी मेरे साथ खींचती हुई मेरे पीछे पीछे दौड़ी. हम दोनों जुग्गिओ की आड़ में छुप गए, वो बाइक जुग्गिओ के बीचमे जो जगह थी जहा आग जल रही थी वह रुक गयी. अब हम लोगो में उतना hi अंतर था की हम उनकी बात सुन सकते थे.

एक आदमी : एक और बाइक.

बाइक वाला आदमी : है, इससे भी अंदर रखवा दो, आज रात hi इन साडी गाड़िओ को लेके निकलना है.

आदमी : आज hi?

बाइक वाला : है, जाहिर भाई ने कहा है, पुलिस अभी ज्यादा hi सक्रिय है, तो ज्यादा गाड़िया इकठ्ठा करना खतरे से खली नहीं, वैसे कितनी गाड़िया है?

आदमी : इसको मिलके सोलह हो गयी. और खाना लाये हो की नहीं?

बीकेवाला : वो पीछे लटका हुआ है, बोतल भी है.

हम दोनों जहा छुपे हुए थे वो दीवाल की आड़ थी पर जगह उतनी थी थी की सिर्फ हम दोनों छुप सके वो भी अगर सटे हुए हो तो hi, तो हालत ये थी की में पीछे खड़ा था और वो मेरे आगे कड़ी थी, हम दोनों ने उनकी बाटे सुनी फिर हम दीधे खड़े हो गए. बात करना hi खतरनाक था, एक तो वो मुझसे पूरी तरह से सटी हुई थी, उनके पिछवाड़े का वो उभर मुझे अपना एहसास करवा रहा था, परिस्थिति बिगड़े उस से पहले hi हमें यहाँ से निकलना था. उनके कान के एकदम नजदीक जा कर में फुसफुसाया.

शिव : मैडम, अब हमे निकलना चाहिए, ये बात तो पता चल गयी की वो गाड़िया यहाँ hi रखता है, अब बादमे सोचेंगे की आगे क्या करना है.

भार्गवी : (शिव को अपने इतने करीब प् कर उसकी भी हालत ख़राब थी, वो जब उसके कानो में बोल रहा था तो उसके स्पर्श से एक बार तो उसकी आंखे भी बंद हो गयी थी, उसने अपने आपको संभाला और जैसे hi वो उसको बताने के लिए उसके कान की और घूमी, उसके होठ शिव के होठो से टकरा गए, एक जहर झूरी उसके शरीर से गुजर गयी, वो कुछ पल खामोश हो गयी, फिर अपने आप को संभल कर उसने कहा) तुमने सुना नहीं, वो लोग आज hi सब गाड़िया हटानेवाले है, अगर हमने उन्हें आज रेंज हाथो पकड़लिया तो काम हो जायेगा.

शिव : पर मैडम, यहाँ कुलमिलाकर कितने लोग है वो भी हमें पता नहीं hai.(Tabhi मुझे किसी की आहार सुनाई दी तो में खामोश हो गया, और मैडम को पेट से पकड़ कर अपने से सातलिया, वो आदमी बहोत नज़दीक आ गया था, मुझे जब एहसास हुआ की मेरा हाथ मैडम के स्तन के निचले हिस्से को छू रहा है तो मेने उसे हटाना चाहा पर जरा सी आवाज होती तो खतरा था, मेने हाथ वैसे hi रहने दिया, ये तो गनीमत थी की वो आदमी हमें देख नहीं सका, पर एक प्रॉब्लम हो गयी, वो साला उधर मूतने आया था, वो सामनेवाली दिवार पर मूतने लगा, मैडम को अपने से सताए में खड़ा था, ऐसी गंभीर परिस्थिति में भी मेरे लुंड ने उठना सुरु कर दिया एक तो मैडम के शरीर को में इ पकड़ा हुआ था और उनके गद्देदार कूल्हे मुझे अपना एहसास दिला रहे थे, में बे बस था )

(परिस्थितिया hi ऐसी थी की भार्गवी चुप चाप कड़ी रही, शिव के हाथो की मजबूत पकड़ उसे हो रही थी, उसके स्तन के निचले हिस्से को छू रहा उसका हाथ भी उसे महसूस हो रहा था, उसे गुस्सा आया पर वो अभी क्या कर शक्ति थी, ऊपर से उसके कूल्हों पर उसे कुछ चुभने लगा, उसे समजते देर न लगी की वो क्या है, उसे शिव पर गुस्सा आने लगा, पर वो आदमी थोड़ी hi दुरी पर खड़ा था, अगर थोड़ी भी आवाज होती तो यक़ीनन वो दोनों पकड़े जाते., वो चुप चाप कड़ी रही, उसके कूल्हों पर वो चुभन बढ़ती जा रही थी, वो महसूस कर रही थी की वो लगातार बढ़ रहा है, उसकी सांसे तेजहोने लगी. उसका पूरा ध्यान उस अंग को महसूस करने में चला गया, वो उसके आकर को अपने कूल्हे पर साफ़ महसूस कर रही थी, उसने देखा की वो आदमी अपनी चैन बंद कर रहा है, जैसे hi वो जानेलगा, भार्गवी ने अपने आपको दूर करने की कोशी की पर उस सरसराहट को उस आदमी ने सुन ली,

आदमी : कोण है, (उसने अँधेरे में ध्यान लगाया तो वह कड़ी एक लड़की को देखा और उसके पीछे खड़े लड़के ko)Kon हो तुम दोनों, (वो जोर से chillaya)Illiyas, ो इलियास, कोई है यहाँ. (चार आदमी दौड़ के वह आ गए, अब छुपने से कोई फायदा नहीं था, हम दोनों बहार आ गए.

जैसा सोचा था वैसा तो कुछ हुआ नहीं, हम दोनों पकड़े गए थे, हम दोनों लड़ के यहाँ से भाग सकते थे पर ऐसा करने से हाथ आया मौका छूट जायेगा, और अगर मैडम ने पुलिस स्टेशन जा कर फिर से छपा भी मारा तो तब तक ये लोग सब हटा चुके होंगे, और अगर न भी हटा पाए तो जाहिर बच जायेगा, क्यों की वो तो यहाँ मौजूद नहीं है और उसके आदमी उसका नाम बताने से रहे.

शिव : अरे भाई, शांत रहिये, हम तो ऐसे hi यहाँ आ गए थे, हमदोनो लवर्स है, और हमे एकांत में मिलना था तो हम इस और आ गए, हमे नहीं पता था की यहाँ कोई रहता है. (मैडम मेरे सामने देखने लगी पर मेने उनकी और नहीं देखा)

आदमी : ये आग जलती दिखाई नहीं दी तुम्हे?

शिव : दिखाई दी थी भाई, इसीलिए तो चेक करने आये थे की अगर कोई यहाँ है तो फिर वापस चले जायेंगे, आप तो जानते hi होंगे, हम जैसे लवर्स को खुले में मिलना कितन खतरनाक हो सकता है.

आदमी : तो यहाँ रंगरलिया मानाने आये थे?

शिव : नहीं भाई, आप गलत समाज रहे हो, हमे तो बस थोड़ी देर एकांत में बैठना था और थोड़ा खुलके प्यार करना था bas.(Wo सब भूखे भेडिओ की तरह मैडम को देख रहे थे, मैडम ने अपना मुँह दुपट्टे से ढाका हुआ था तो चेहरा तो नहीं देख प् रहे थे पर उनके शरीर को वो देख रहे थे, वैसे में जनता था की ये खतरनाक है पर इतने आदमीओ को तो में और मैडम मिलके आराम से काबू कर शक्ति थे, तो ज्यादा रिस्क नहीं था, मैं था जाहिर) सॉरी भाई, अगर हमने आप सबको डिस्टर्ब किआ हो तो, (मैडम se)Chalo डार्लिंग, कही और चलते है.

बीकेवाला : अबे रुक सेल, अगर ये छुड़वाने के लिए hi आयी थी तो हम भी है न सब, सब मिलके इसकी आग ठंडी कर देंगे.

शिव : (मैडम को सायद गुस्सा आ गया और वो आगे बढ़नेहीवाली थी की मेने उन्हें रोक दिया) देखो भाई, ऐसी गन्दी भाषा का प्रयोग मत कीजिये, में इस से प्यार करता हु और हम शादी करनेवाले hai.(Tabhi उस आदमी का फ़ोन बजा)

बीकेवाला : है जाहिर भाई (वो थोड़ी देर सामने से सुनता raha)Bhai, एक लड़का और लड़की यहाँ रंगरेलिया मानते पकड़े गए है, अगर आपका मान हो तो आ जाइये, सब मिल के मज़ा लूटेंगे. (थोड़ी देर सामने से बात चलती rahi)Are भाई कुछ नहीं होगा, अगर न नुकुर की तो दोनों को दफना देंगे यही पर. (फिर वो सामने की बात सुनता रहा) ठीक है भाई, आप आओ, हम आपका वेट कर रहे hai.(Phone काटने के baad)Bhai ने बोलै है, अभी कोई लफड़ा मात करो, वो आ रहे है, फिर सोचेंगे क्या करना है.

शिव : (शिव डरने का नाटक करते hue)Please भाई, हमे जाने दो, हम फिर दोबारा इस तरफ नहीं aayenge(Me खुस था की जाहिर आ रहा है)

बीकेवाला : अबे, बकवास नहीं, छू चाप चल हमारे साथ. (वो हमें ले कर वही आग के पास aagaye)Betho वह par.(Hume एक और इस्सर करके बैठने को कहा, मैडम ने मेरी और देखा तो मेने आँख से इस्सर किआ की शांत rahe)(Bhargavi को अपने आप पर गुस्सा आ रहा था, वो सलवार कमीज में आयी थी तो गन साथ नहीं लायी थी, और वो सिर्फ देखने hi तो आये थे)

भार्गवी : (फुसफुसाते hue)Tum यहाँ क्यों बैठे हो, चलो निकलते है, में संभल लुंगी इन सब को.

शिव : हमे ऐसा मौका फिर नहीं मिलेगा, शांत रहिये, एक बार जाहिर को आ जाने दीजिये, तब तक वो जैसा बोल रहे है कीजिये, वो समाज रहे है की हम डरे हुए है इस लिए उन्होंने हमें बंधा भी नहीं है तो अभी जैसा चल रहा है चलने दीजिये, और डरने का नाटक कीजिये.

थोड़ी देर बाद हमे एक जीप की रोशनी दिखाई दी, में समाज गया की ये जाहिर hi होगा, हम उसका इंतजार करने लगे.
 
उपडते 108

थोड़ी देर में वह जाहिर दूसरे 5 आदमीओ के साथ वह चलते हुए आया. उन्होंने जीप बहार रखड़ी थी, मेने जब उसे देखा तो थोड़ा गुस्से में लग रहा था, जैसे hi वह पंहुचा वो बीकेवाला आदमी उसे सामने मिलने गया, वो जैसे hi जाहिर के पास पंहुचा जाहिर ने जोर से एक चांटा जड़ दिया, वो अपना गाल सहलाते हुए दो कदम पीछे हैट गया.

जाहिर : (गुस्से me)Sale तुजे कितनी बार बोलै है, समाज नहीं आता तुजे. (वो आदमी दर से जाहिर को देख रहा था)

बीकेवाला : मेने क्या किआ भाई?

जाहिर : (गुस्से me)Abhi भी मुझे hi बताना पड़ेगा की क्या किआ hai(Wo उसकी और बढ़ा तो वो दर से थोड़ी दूर खिसक gaya)Kitni बार बोलै है की छूट के चक्कर यहाँ धंधेवाली जगह से दूर रक्खो, तुम्हारी समाज में नहीं आता, अगर छूट के चक्कर में कोई और लफड़ा हो गया तो बना बनाया खेल बिगड़ जायेगा, समाज नहीं आता तुजे, अगर लोडे में इतनी hi आग लगी है तो कोई रंडी ले के होटल चला जाता. कहा है वो लड़की? (उसने इससरए से हमें दिखाया, जाहिर ने हमारी और देखा, हम दोनों निचे जमीं पर बैठे हुए थे, मैडम मेरे पीछे बैठी थी, वो हमारी और aaya)Kon हो तुम? यहाँ क्या कर रहे हो?

शिव : (मेने डरते हुए kaha)Sir, हम तो बस यहाँ मिलने की जगह ढूंढते हुए आ गए थे, हमे छोड़ दीजिये, हम फिर कभी इस तरफ नहीं आएंगे.

जाहिर : (गुस्से me)Kon हो तुम, क्या करते हो?

शिव : जी, हम पढ़ते है सर, फिर कभी ऐसा नहीं करेंगे, प्लीज हमे जाने दो.

जाहिर : तुम्हारे माँ बाप पढ़ाई करने भेजते है और तुम ये सब कर रहे हो, इ लड़की क्या नाम है तेरा, कहा रहती है?

शिव : सर, प्लीज हमे छोड़ दीजिये, वो बहोत दर गयी है, हम फिर कभी ऐसा नहीं करेंगे, प्लीज हमे छोड़ दीजिये.

जाहिर : क्या देखा तुमने यहाँ?

शिव : ककुछ नहीं सर, हमे जाने दीजिये.

जाहिर : बेवकूफ, तुम जानते हो यहाँ क्या हो सकता है, इस लड़की के साथ क्या हो सकता है, और तुम में कोई शर्म है की नहीं, ऐसी जगह पर चली आयी, तुम्हारे माँ बाप को पता है की तुम कहा घूम रही हो.

शिव : सर, प्लीज हमे जाने दीजिये.

जाहिर : ठीक है, जाओ, फिर कभी यहाँ नहीं आना.

शिव : ठनक यू सर. (मेने मैडम का हाथ पकड़ा और उन्हें खड़ा किआ और में भी खड़ा hua)Chalo चलते है. (जाहिर इतने लम्बे युवक को देख के हैरान हुआ और साथ में लड़की भी अच्छी खासी लम्बी थी, दोनों को देख कर लगतहि नहीं था की ये स्कूल के बच्चे है)

जाहिर : रुको, तुम दोनों, कोनसे स्कूल में पढ़ते हो?

शिव : जी सर.

जाहिर : कोण से स्कूल में?

शिव : सर, जाने दीजिये न, क्यों सब पूछ रहे है?

जाहिर : मेने पूछा कोनसी स्कूल में?

शिव : जी, क्सक्सक्स स्कूल.

जाहिर : (अभी भी जाहिर को कुछ खटक रहा था, एक स्कूल का लड़का और लड़की ऐसी जगह आने की हिम्मत नहीं karenge)E लड़की अपना चेहरा दिखा.

शिव : सर, प्लीज जाने दीजिये सर, लड़की की बदनामी होगी, आपने मेरा चेहरा तो देख लिया है. (मैडम को मेने अपने पीछे किआ)

जाहिर : पकड़ो इस लड़के को, मुझे कुछ न कुछ तो गड़बड़ लग रही hai(Usne अपने आदमीओ को आदेश दिया तो दो लोगो ने मुझे हाथो से पकड़ लिया, )(अपने से लम्बे इस लड़के को पकड़ने में उन्हें दिक्कत हो रही thi,)(Me शांत hi रहा और डरने की एक्टिंग करने लगा ताकि उन्हें लगे की मुझसे कोई खतरा नहीं है, जाहिर ने ऊँची आवाज में मैडम से कहा ) अपना चेहरा दिखाओ लड़की. (मैडम ने मेरी और देखा, अब में क्या कहता, मैडम ने जाहिर की और देखा, और अपने चेहरे से दुपट्टा हटा दिया, दुपट्टा हैट ते hi जाहिर ध्यान से देखने laga)Tum तो बड़ी हो, स्कूल की लड़की नहीं लगती.

शिव : सर, वो कॉलेज में पढ़ती है, वो मुझसे थोड़ी बड़ी है, पर हम लवर्स है, प्लीज अब तो हमे जाने दीजिये.

जाहिर : (गौर से देखते hue)Mene तुम्हे कही देखा है? कोण हो तुम? (मैडम चुप रही, जाहिर सोच रहा था की कहा देखा है, थोड़ी देर में hi उसकी आंखे बड़ी होती चली gayi)Inspector भार्गवी. (जाहिर दो कदम पीछे हैट गया)

भार्गवी : है, इंस्पेक्टर भार्गवी, आज तुम रेंज हाथो पकड़े गए जाहिर.

जाहिर : (जाहिर पहले थो थोड़ा गभराया पर फ़ौरन सँभालते hue)Pakado इससे (उसके आदमीओ ने फ़ौरन मैडम को भी दोनों तरफ से पकड़ liya)Tumne ये अच्छा नहीं किआ. में इन सब लफड़ो से दूर रहना चाहता था पर तुमने मुझे मजबूर करदिया है. मुझे सिर्फ धंधा करना है, ये सब mar-dhad khun-kharaba, ये सब से में दूर रहता हु, अभी भी कह रहा हु, अगर अपनी जान की सलामती चाहती हो तो इन सब से दूर रहो.

भार्गवी : में तुम्हे जगह कर रही हु जाहिर, अपने आपको पुलिस के हवाले कर दो.

जाहिर : (मुस्कुराते hue)Police के हवाले कर दू, और वो किस खुसी में? मुझे पता है इस वक़्त तुम अकेली hi हो, क्यों की अगर तुमने पुलिस स्टेशन में कुछ कहा होता तो अब तक मुझे खबर मिल गयी होती, मतलब कोई नहीं जनता की तुम यहाँ हो, अब सोचो अगर तुम यहाँ से गायब हो गयी तो किसे पता चलेगा? इसीलिए कहता हु की सब भूल जाओ, में तुम्हे जाने दूंगा, पर एक शर्त पर, अब तुम मेरे रस्ते में तंग नहीं अदायगी.

भार्गवी : (मैडम भी muskurayi)Tuje पता है तू ऐसा नहीं कर शक्ति, क्यों की तू पकड़ा तो जायेगा hi, इस लिए में तुमसे कहती हु की अपने आप को पुलिस के हवाले कर दो.

जाहिर : वैसे दाद देनी पड़ेगी तुम्हारी हिम्मत को, आज तक सेल किसी मर्द में इतनी हिम्मत नहीं हुई की मुज पर हाथ दाल शेक और तुम एक औरत हो कर यहाँ चली आयी वो भी अकेले इस लड़के को ले कर. है कोण ये जो इसके भरोसे अकेले यहाँ चली aayi.(Wo मुझे देखने लगा, में भी उसे देख रहा tha)Ek बात तो मन नई पड़ेगी, तुम दोनों मेरे चंगुल में फंसे हुए हो फिर भी एक के भी चेहरे पर दर नहीं है, खैर तुम तो पुलिसवाली हो तो में समाज सकता हु पर, दर इसके चेहरे पर भी नहीं है, तुम दोनों को क्या लगता है यहाँ से जिन्दा चले जाओगे? अभी में तुम्हे कह रहा हु की चले जाओ यहाँ से और फिर कभी इस तरफ मात आना, और तुम्हे लगता है की तुम अपनी फाॅर्स ले कर वापस आओगी और मुझे पकड़ लोगी तो ये तुम्हारी भूल है, जब तक तुम वापस आओगी तब तक तो यहाँ एक भी साबुत नहीं बचेगा, तो तुम्हारी भलाई इसीमे है की मेरे रस्ते में मात aao.(Jab मैडम ने कोई जवाब न दिया to)Bandh दो इन दोनों को.

बीकेवाला : क्या जाहिर भाई इतना दर रहे है, इन्हे यहाँ से छोड़ न खतरे से खली नहीं, दोनों को यही मर कर दफना देते है, किसी को भनक तक नहीं लगेगी.

जाहिर : (कुछ सोचते hue)Thik है.

बीकेवाला : जाहिर भाई, अगर इससे मरना hi है तो मरने से पहले इसके मज़े लेते है, पुलिसवाली को छोड़ने में बहोत मज़ा आएगा, और वैसे भी ये तो पटाखा है.

जाहिर : (मैडम की और जाते hue)Tumne मेरी बात न मान कर मेरे सामने कोई रास्ता नहीं छोड़ा है, अभी भी कह रहा हु मान जाओ (मैडम ने कोई जवाब नहीं diya)Thik है जैसी तुम्हारी मर्जी अब में जिम्मेदार नहीं हु इन सब का. (अपने आदमीओ ko)Mar दो इस लड़के को और फिर इसको नंगी करो, साली की अकड़ ठिकाने लगता हु.

पता नहीं ये जाहिर की बेवकूफी थी या वो ज्यादा hi वरकॉन्फिडेंट था, सिर्फ दो आदमीओ ने hi मुझे पकड़ा था और दो आदमीओ ने मैडम को. और वैसे भी में डरने की एक्टिंग कर रहा था तो उन्हें लगा होगा की कोई खतरा नहीं है. मैडम ने मेरी और देखा, हमारी नज़ारे मिली, और मेने है में इस्सर किआ. (जाहिर की भी नज़र पड़ी की हम दोनों ने कोई इस्सर किआ, पर वो कुछ समझता इस से पहले hi मैडम ने जाहिर के लौड़े पर एक लात मरी, साथमे मेने भी एक लत उसकी छाती पर मरी, वो धड़ाम से पीछे गिरा और साथ में अपना लुंड पकड़ कर चिल्लाने लगा, उसके आदमी कुछ समझते उस से पहले में एक दम से घुटने मोड़ कर निचे बेथ गया तो उनके हाथो से छूट गया, वो लोग कुछ समझते उस से पहले hi मेने उठते हुए जोर से एक साथ दोनों को घुस मारा तो वो दोनों अपना अपना मुँह पकड़े साइड में लुढ़क गए, एक तरफ जाहिर कराह रहा था और दूसरी और ये दोनों, अचानक क्या हो गया ये किसी की समाज में नहीं आया, वो लोग हॉसमे आते उस से पहले hi मेने मैडम का हाथ पकड़े हुए मेरी तरफ वाले आदमी के मुँह पर जोर से लात मरी तो वो अपना मुँह पकड़ कर पीछे गिर गया, मैडम का जैसे hi हाथ छूटा उन्होंने दूसरे आदमी को घुसा मर दिया, जैसे hi उसने हाथ छोड़ा उन्होंने अपनी कोहनी से उसके गले पर मारा तो वो भी निचे गिर गया. हम दोनों ने पोसिटिव ले ली. सब लोग भी समाज गए थे की क्या हो रहा है तो कुछ लोग हमारी तरफ बढे, और दूसरे उन जोपदीओ की और. हम दोनों बीचमे खड़े थे वो लोग हाथ में पाइप होके और तलवार जैसे हथियार लिए बहार आ गए. मेने और मैडम ने एक दूसरे को देखा, तलवार खतरनाक थी, में तलवार वाले आदमी से दूर हटा और जिसके हाथ में पाइप थी उसकी और बढ़ा तो वो मुझे पाइप मरने आया तो मेने उसका जेठ पकड़ कर उसे जमीं पर पटक दिया और उसके हाथ से पाइप ले ली, तलवरवाले ने मेरी और तलवार से वार किआ पर मेने अपने आपको बचते हुए उसके हाथ पर पाइप दे मरी, हमला इतना जोर से किआ था की उसके हाथ की हड्डी भी टूट गयी होगी, उसने चिल्लाते हुए तलवार छोड़ दी. मेने तलवार को देखा और उसे अपने पेअर से दूर फेक दिया, मेरा ध्यान थोड़ा सा हटा था की किसी ने मेरे पीछे से हमला किआ, मैडम के चीखने से मेरा ध्यान गया, उनकी आँखों के देखने की दिशा से मुझे पता चला की कोई मेरे ऊपर हमला कर रहा है तो में थोड़ा साइड हो गया, जो वॉर शिर पर होने वाला था वो कंधे पर हुआ, एक लकड़ी का डंडा जोर से मेरे कंधे से टकराया, मुझे तेज दर्द का एहसास हुआ, पर मेने उसकी परवाह किये बगैर, पाइप से पीछे हमला कर दिया जो उसके पेअर में लगा और वो निचे गिर गया. अब वह जैम के लड़ाई सुरु हो गयी थी, ऐसा नहीं था की हमे नहीं लग रही थी, वह तक़रीबन पंद्रह लोग थे जाहिर भी उठ कर लड़ने लगा था, तो हमे भी लग रही थी और कई जगह से खून भी निकल रहा था, मेने मैडम को देखा तो उनकी भी हालत वैसी hi थी. उनका कमीज़ भी फैट गया था, तक़रीबन आधे घंटे तक ये सब चला, हम दोनों ने मिल कर सब को धूल छठा दी थी, सब लोग कराहते हुए वह जमीं पर पड़े हुए थे, जाहिर की भी हालत ख़राब थी, उसका पेअर भी टूट गया था, एहि हालत कई लोगो की थी, अपने टूटे फूटे सरीर के साथ सब वह गिर हुए थे, मैडम के शिर से भी खून निकल रहा था, मेरे हाथ से भी खून निकल रहा था. पर फिर भी हम दोनों खड़े थे, और तैयार थे की अगर कोई भी उठा तो उसे फिर से मरे, पर जब देखा की किसी की भी हालत नहीं है उठाने की तो में मैडम के पास गया.

शिव : आप ठीक हो madam?(Mene देखा की उनका कमीज कई जगह से फैट गया है, उनके शरीर के कुछ हिस्से भी दिखाई दे रहे है तो मेने फ़ौरन अपनी शर्ट निकली और उनकी और बढ़ा दी, उन्होंने भी अपनी हालत देखि और शर्ट पहन लिया.)

भार्गवी : (वो हांफ रही थी, उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा) में ठीक hu,Tum?

शिव : में ठीक हु, मैडम. (उन सबकी और देखते hue)ab?

भार्गवी : में पुलिस कंट्रोलरूम इन्फॉर्म करती हु, थोड़ी देर में पुलिस आ जाएगी.

जाहिर : तुम चाहे जो karlo(Wo हांफने लगा, थोड़ी देर baad)tum मेरा कुछ नहीं बिगड़ पाओगे.

भार्गवी : रेंज हाथ पकड़े गए हो तुम, यहाँ चोरी की बाइक भी है.

जाहिर : फिर भी तुम कुछ नहीं कर पाओगी, में ये साबित कर दूंगा की ये मेरी जगह है hi नहीं, में तो सिर्फ यहाँ किसी से मिलने आया था या और कुछ भी कह दूंगा, में कह दूंगा की तुम मुझे फ़साने जानबुज कर यहाँ लायी thi.(Wo अपने खून लगे दांतो को दिखते हुए हसने लगा)

शिव : (उसकी बातो से मुझे याद आया की ये तो सूर्यदेवजी की जमीं है, मेरे दिमाग में बत्ती जाली, मेने जाहिर से kaha)Tum कैसे कह शक्ति हो की ये तुम्हारी जमीं नहीं है, और ये लोग, ये सब जुग्गिया तुम्हारी नहीं है.

जाहिर : क्यों की ये मेरी नहीं है.

शिव : तुम जूथ बोल रहे हो, क्या तुम ये लिख कर दे शक्ति हो की ये तुम्हारी जमीं नहीं है?

जाहिर : नहीं है तो नहीं है, में लिखकर भी दे शक्ति हु.

भार्गवी : ये क्या है शिव, ये सबूतों के साथ पकड़ा गया है, इससे कोई नहीं बचा शक्ति.

शिव : (जाहिर को उकसाते hue)Aap सच कह रही है मैडम, मुझे भी लगता है की ये ऐसे hi फेंक रहा है, अभी पता चल जायेगा की ये फेंक रहा है, आप रुकिए (मेने अपना मोबाइल निकला, देखा तो थोड़ी स्क्रीन टूट गयी थी पर चल रहा था, मेने काव्य मैडम को फ़ोन लगा दिया, और उन्हें वो कागजात तैयार करने को कहा, उन्होंने पूछा भी पर मेने बाद में बताने को बोलै, फिर मेने पवनसीर को फ़ोन किआ, और उन्हें काव्य मैडम के यहाँ जा कर पेपर लेने को बोलै)

शिव : जब पेपर मिल जाये तो उसे ले कर सूर्यदेव सर की जमीं पर ले आना.

पवनसीर : सूर्यदेव की जमीं पर, तुम वह क्या कर रहे हो?

शिव : वो सब में आपको बाद में समजता हु, अभी जो कह रहा हु वो कीजिये.

पवनसीर : ठीक है.

शिव : (मैडम ko)Abhi पता चल जायेगा की ये कितना फेंक रहा है. (मेने आस पास देखा तो मुझे रस्सी नजर आयी, मेने जाहिर के आदमीओ को रस्सी से बांध दिया, कुछ बेहोश थे कुछ कराह रहे थे, अकेले जाहिर को खुल्ला रक्खा.

भार्गवी : तुम करना क्या चाहते हो शिव?

शिव : आप समाज जाएगी, थोड़ी देर शांत rahiye(Me उनके शिर पर लगे घाव को देखने लगा, वह से खून निकल रहा था तो मेने उनके hi दुप्पटे को वह बंद दिया ताकि खून न निकले, अपने हथरूमल से मेने उनके चेहरे पर से खून साफ़ किआ, और धूल मिटटी भी साफ़ ki)(Bhargavi, शिव को देख रही थी, कैसे वो उसकी परवाह कर रहा था, पता नहीं पर आज उसने कमल कर दिया था, वो किस लिए इतना पागल पैन कर गयी थी उसको खुद समाज नहीं आ रहा था, यहाँ की परिस्थितिओ को देख उसे लग रहा था की कुछ भी हो सकता था. उसकी जान भी जा शक्ति थी, कैसे उसने ये बेवकूफी कर दी थी, शिव उसके चेहरे को साफ़ कर रहा था और वो उसे hi देख रही thi)(Thodi देर बाद पवनसीर और काव्य मैडम दोनों वह आये. वह आते हुए दोनों के चेहरे पर दर था, जब वो उस खली जगह में आये तो वह का नज़र देख दोनों की आंखे खुली की खुली रह गयी. वो जल्दी जल्दी से हमारे पास आये.

काव्य : ये सब क्या है शिव, मैडम आप? यहाँ क्या हो रहा है?

शिव : वो सब में आप को बाद में समजता हु, आप मुझे वो कागज दीजिये. (उन्होंने फाइल से कागज निकला, जाहिर की और जाते hue)Le कागज भी आ गए, अब इस पर सिग्न कर और साबित कर की ये जगह तेरी नहीं है.

जाहिर : मुझे पागल समजा है क्या बच्चे, में क्यों सिग्न करने लगा, मुझे जो भी कहना होगा वो में कोर्ट में कहूंगा.

शिव : (मुस्कुराते hue)Dekha मैडम, ये कितना जूठा है, ये जमीं उसी की है, आप वो दूसरा कागज भी दीजिये मैडम, जिसमे लिखा है की ये जमीं उसकी hi है और यहाँ का सारा सामान भी उसी का है.

जाहिर : (हस्ते hue)Are बच्चे, मुझे क्या बेवकूफ समजा है, में किसी भी तरह के कागज पर सिग्न नहीं करूँगा.

शिव : अच्छा तो तू सिग्न नहीं करेगा. (मेने वो कागजात मैडम को वापस दिए, वह पड़ा एक लोहे का पाइप लिया और जाहिर की और बढ़ा)

भार्गवी : ये क्या कर रहे हो शिव?

शिव : इसमें क्या हुआ मैडम, यहाँ जो भी हुआ उसमे गलती से इसके शिर पर लोहे की पाइप लग गयी और ये मर गया.

जाहिर : तुम ऐसा नहीं कर शक्ति, मैडम समझाइये इससे, ये ऐसा नहीं कर सकता.

भार्गवी : (शिर ने मैडम की और देखा और आंख मरी, भार्गवी सब समाज gayi)Madam, अब याद आया की में मैडम हु, मेरे साथ क्या करनेवाला था तू, तुजे जो करना है तू कर शिव, में सब संभल लुंगी. (काव्य की और देखते hue)Kya कहती है वकील साहिबा.

काव्य : है है, कोई बात नहीं, लड़ाई में ये हादसे तो होते hi है, और मैडम से ये हो गया है ऐसा वो कह देगी, तो तुम कर शक्ति हो शिव. (जाहिर की गांड फैट रही थी)

शिव : तो जाहिर भाई, आप मेरी कबर खोड़नेवाले थे, अब आपकी कबर कुड़नेवाली है.

जाहिर : मैडम, मुझे गिरफ्तार कर लीजिये, मुझे सरे गुनाह काबुल है, मुझे बचाइए.

शिव : तो तुम सिग्न करने के लिए तैयार हो?

जाहिर : है में तैयार हु, मुझे छोड़ दो.

शिव : लाइए सर, वो कागज दीजिये. (पवनसीर वो कागज और पेन ले आये, मेने ठीक से जाहिर को बिठाया, जाहिर कागज देखने laga)Me तुम्हारी तरह नहीं हु, इसमें यही लिखा है की ये जमीं तेरी नहीं है, यहाँ की कोई भी चीज तेरी नहीं है, यहाँ की साडी जुग्गिया मेने गैर कानूनन तरीके से बनायीं है और में उसे अपनानी मर्जी से खली कर रहा हु. (जाहिर ने मेरी और देखा, में मुस्कुराया तो वो इतना दर गया की उसने फ़ौरन सिग्न कर दी, मेने वो पेपर लिया और काव्य मैडम को दिया, काव्य मैडम और पवनसीर दोनों मुझे हैरानी से देख रहे थे) अब आप जाइये, (भार्गवी मैडम se)Aap अब कण्ट्रोल रूम फ़ोन कर दीजिये.

जाहिर : अब तो मेने सिग्न कर दिया है, अब तो मुझे जाने दो.

शिव : अरे भाई, तुम जो कह रहे थे की ये सब तेरा नहीं है, तो मेने तो उसी बात पर सिग्न करवाया है, बाकि जो कुछ है वो तो तू कोर्ट में लड़ेगा न. मैडम आप फ़ोन कीजिये. (भार्गवी ने मुस्कुराते हुए कंट्रोलरूम में फ़ोन कर दिया, थोड़ी hi देर में वह पुलिस वन और बहोत सरे पोलिसवाले आ गए, मैडम को देख उन्हें सेलुटे किआ, मैडम ने सब को वन में डालने को कहा और अस्पताल ले जाने को कहा, और कुछ पुलिसवालो को वह सब बाइक और स्कूटर निकलने को कहा. जाहिर ने वो सब जुग्गिओ में छुपा के रक्खे थे, मैडम ने सब वीडियो से रिकॉर्ड कर लिया. उन्होंने जाहिर और उसके आदमीओ की फोटो और वीडियो दोनों बना ली थी ताकि वो इस बात से इंकार न कर सके. मैडम ने अपनी बाइक की चाबी एक हवलदार को दे दी, और हम दोनों पवनसीर और काव्य मैडम के साथ निकल गए, हम भी पहले अस्पताल गए. वह डॉक्टर ने हमे एक रात ऑब्जरवेशन में रुकने को कहा, क्यों की चोट तो हमें भी आई हुई थी, मने पवनसीर को मेरे घर इन्फॉर्म करने के लिए बोल दिया, ताकि वो चिंता न करे. मेरा कन्धा उतर गया था तो मुझे पुरे हाथ को सपोर्ट दे सके ऐसे पत्ते से बांध दिया. मैडम की भी मलहम पट्टी की गयी. रात को हम देर से सोये थे पर सुबह होते होते तो कई मीडिया वाले अस्पताल में जमा हो गए, और ये न्यूज़ आग की तरह सरे सहर में फ़ैल गयी, सुबह के सरे चेनलो पर यही खबर दिखाई जा रही थी. 10 बजे तक तो अस्पताल में रंजन, लतादिदी, सरितादिदी, जूही, बिना मैडम नाज़िआ दीदी, संयम उनके अम्मी, आबू सब वह पर थे, (भार्गवी और शिव का बीएड नजदीक hi था, शिव के आस पास घिरे इतने लोगो को भार्गवी आश्चर्य से देख रही थी, सब उसकी भी खबर ले रहे थे पर सब शिव को hi घेरे खड़े थे, नर्स भी कई बार हिदायत दे गयी थी पर हर कोई शिव को घेरे hi खड़ा था. ऐसा लग hi नहीं रहा था की शिव अनाथ है, उसका इस दुनिया में कोई नहीं है. नर्स ने सब को दन्त कर निकलना चाहा पर न बिना मैडम जाना चाहती थी, न नाज़िआ दीदी, नर्स ने सब को जबरदस्ती बहार निकला, फिर भी लतादिदी और जूही वह से नहीं गए. डॉक्टर ने भी दोपहर तक हमे छुट्टी दे दी.

भार्गवी, अपने काम में लग गयी थी, पुलिस स्टेशन भी पत्रकारों से भर गया था, सब को समजा कर बहार निकला गया पर वो सब भी वह पड़ी गाड़िओ का वीडियो देखा कर अपनी अपनी न्यूज़ चेनलो के लिए फुटेज जूता रहे थे. कई बड़े ओफ्फिसरो के भी फ़ोन चालू hi थे. हर न्यूज़ चैनलों पर यही दिखाया जा रहा था की कैसे एक जाबाज़ लेडी पुलिस अफसर ने सिर्फ एक स्कूल के लड़के के साथ मिल कर गाड़िओ की चोरी करनेवाले एक बड़े गिरोह को धार दबोचा था. जमीं सूर्यदेव के नाम थी तो उन्हें भी पुलिस स्टेशन बुलाया गया, पर पवनसीर ने और काव्य मैडम वह आ गए और भार्गवी मैडम को सारा मामला संजय, तब जेक उनकी समाज में आया की शिव ने क्यों सिग्न करवाए थे. पवनसीर ने भी सूर्यदेव को बतादिया की उन्होंने जाहिर के सिग्न ले लिए है की उस जमीं पर उसका कोई भी हुक नहीं है, सूर्यदेव भी आश्चर्य से पवनसीर को देख रहा था. ज्यादा तो डिटेल उन्हें नहीं पता चली पर इतना पता चल गया की ये सब शिव ने किआ है. वो भी वह से चले गए.

सब से ज्यादा परेशान थे मला और प्रकाश रओ. एक रात में ये क्या हो गया था उनकी समाज में नहीं आ रहा था, उन्हें जाहिर पर बहोत गुस्सा आ रहा था पर वो पुलिस कस्टडी में था तो फ़िलहाल कुछ नहीं कर सकते थे, सुबह सुबह hi उन्होंने वकीलों को बुलालिया था, क्यों की ये करोड़ो का मामला था.

में जब घर पंहुचा तो गायत्री दीदी भी आके मुझसे लिपट गयी, और रोने लगी, विणा दूर कड़ी सब देख रही थी तो मेने उसे भी इस्सर किआ तो वो भी आके मेरे गले लग गयी. थोड़ी hi देर में लतादिदी मुज पे चिल्लाने लगी.

लतादिदी : तू क्या समझता है अपने आप को, तू कोई हीरो है जो वह लड़ने चला गया, अगर तुजे कुछ हो जाता तो (वो चिल्ला रही थी और साथ में रो भी रही थी, सुबह से अपने अंदर दबाये हुए गुस्से को वो बहार निकल रही thi)Wo सब पुलिस का काम है, तुजे क्या जरुरत पद गयी थी इन सब में तंग अदने की, तुजे हमारा ख्याल नहीं आता, अगर तुजे कुछ हो गया तो हमारा क्या होगा, तुजे एक बार भी ख्याल नहीं आता.

जूही : दन्त इससे, में तो कह कह के थक गयी, पर ये है की सुनता hi नहीं, शरीर पर पत्तिया बांध गयी है इसके, हर जगह सामने से अपना सर ओखली में दे आता है. दन्त इससे और मेरी मान तो दो चार लगा भी दे, तब इससे अकाल आएगी. (उसने भी अपनी चालक आयी आँखों को पोछा)

शिव : सॉरी दीदी, वो सब अचानक से हो गया, मेरी कोई गलती नहीं थी.

लतादिदी : तू गया hi क्यों था वह पर, तुजे क्या पड़ी थी वह जाने की. तेरा हाथ hi टुटा है, अच्छा होता की तेरा पेअर भी टूट जाता, कमसे काम घर में तो रहता, जब देखो तब यहाँ वह अपनी तंग डाटा रहता है.

शिव : तो आप चाहती है की मेरी तंग भी टूट jaye(Mene मुस्कुराते हुए कहा)

लतादिदी : (मुझसे लिपट gayi)Tu क्यों ऐसा करता है?, तेरे बगैर में कैसे jiungi(Wo रोने लगी)

शिव : क्या दीदी आप भी, मुझे कुछ नहीं हुआ है, आपके सामने hi तो हु.

स्नेहा : इससे छोड़ना नहीं लता, दन्त इससे अच्छी तरह से दन्त (मेने देखा की स्नेहा मैडम अंदर आ रही थी)

शिव : आप की hi कमी थी, आप भी आ जाइये.

स्नेहा : और नहीं तो क्या, अपने आप को क्या समझते हो, तुम जानते हो कितने खतरनाक लोग है वो, पवन ने मुझे बताया था, उस इस्पेक्टर की भी में खबर लेती हु, क्या समाज कर वो तुजे अपने साथ ले गयी थी, अगर उसे इतना hi शौक चढ़ा था तो पुलिसवालो को ले जाती. दन्त इससे लता, मेरी और से भी दन्त.

शिव : आप सब यु hi परेशान हो रहे है, कुछ हुआ क्या मुझे?

जूही : तो क्या होने की वेट करे हम, इससे घर से निकलने मात देना तुम.

स्नेहा : अगर तुम्हारी नहीं मानता तो में ले जाती हु इससे, अपने घर में बांध कर रक्खूंगी.

रंजन : आप सब तो ऐसे hi उसे दन्त रही है, क्या आप को पता नहीं उसने कितना पड़ा काम किया है, वो बाकिओ जैसा आम नहीं hai,aap खामखा hi उसे दन्त रही हो. (मेरे बचाव में उतरी रंजन को में थैंक यू के भाव से देखने लगा)

लतादिदी : तू तो बोल hi मात, चमची कही की.

रंजन : है में हु उसकी चमची, और कुछ भी कहना है कह लो, पर बहार जा कर देखो, मेने न्यूज़ में भी देखा था, उन सरे गुंडों की क्या हालत है, इसने अकेले hi सब की बंद बजा दी है, मुझे नाज है शिव पे.

स्नेहा : (मुस्कुराते hue)Ye सही कह रही है लता, पवन भी कह रहे थे, उन्होंने तो खुद वह का हाल अपनी आँखों से देखा है, वह इतने लोग थे, सबकी हड्डी पसली टूटी पड़ी थी, कोई उठने के भी काबिल नहीं बचा था. ये सिर्फ दो थे और वो तक़रीबन पंद्रह लोग थे वो भी हथियारों के साथ, बहादुर तो है शिव, और ताकतवर भी, इस से तो इंकार नहीं किआ जा सकता.

जूही : तुम भी इसकी तरफ हो गयी, मन की वो हिम्मतवाला है, ताकतवर है तो क्या कही भी अपनी तंग अदाएगा.

स्नेहा : अब तुम लोग शांत हो जाओ, जो हुआ नहीं उसका क्या सोचना, अभी तो ये सोचो जो हुआ है, आज सहर में हर किसी की जुबान पर शिव का नाम है, ये कोई छोटी बात नहीं है. कल से ये अस्पताल में था, किसी ने इससे खाना भी खिलाया है क्या?

लतादिदी : इन सब भगा दौड़ी में तो मुझे याद hi नहीं रहा, में अभी बना देती हु.

गायत्री : मेने बना दिया है, में अभी लती हु.

लतादिदी : है ले आ, में इससे अपने हाथो से खिलाती हु. (गायत्री दीदी खाना ले आयी, वैसे भी मेरा दया हाथ बंधा था तो में खुद से खा नहीं सकता था, लतादिदी मुझे खिलने लगी, ये देख कर सब बरी बरी आगे आये और मुझे खिलने लगी)

में सब को देख रहा था, सबकी आँखों में मेरे लिए प्यार का सागर भरा हुआ था.
 
अपडेट 109

रात को खाना खाने के बाद में जल्दी सो गया, कल रात पूरी नींद नहीं मिली थी और शरीर में दर्द दर्दनिवारक की गोलिया और नींद की गोलिओ की वजह से मुझे जल्दी नींद आ गयी थी, रात के तक़रीबन चार बजे मेरी नींद खुल गयी, मेने देखा की लतादिदी मेरे बाजु में hi सो रही थी. वो कब मेरे साथ आकर सोइ थी मुझे पता नहीं था, मुझे पेशाब लगी थी शायद इसीलिए मेरी नींद खुल गयी थी, मेने देखा की मेरे कपडे भी बदले हुए थे, शायद ये दीदी ने hi किआ था, निचे खुला लेहंगा पहना था मेने, में उठा और बाथरूम में चला गया, नाडा बंधा हुआ था तो मेने खोल दिया और पेशाब करने लगा, पेशाब करने के बाद मुझे दिक्कत समाज आयी, मेने नाडा खोल तो दिया था पर एक हाथ से में उसे बांध नहीं शक्ति था. में ऐसे hi हाथ से लेहंगा पकड़ कर रूम में आ गया, जब में वापस आया तो दीदी बैठी हुई थी.

शिव : क्या हुआ दीदी, आप जाग क्यों गयी?

लतादिदी : तू बाजु में नहीं था तो नीं खुल gayi(Mere लहंगे को देख kar)isse ऐसे क्यों पकड़ा है?

शिव : एक हाथ से में बंद नहीं सकता था न.

लतादिदी : ला में बंद देती हु, अबसे इलास्टिकवाला hi कुछ पहनाऊँगी जिस से ये दिक्कत न हो. (में दीदी के नज़दीक गया, वो घुटनो के बल बेथ गयी और मेरा नाडा बांधने लगी, निचे अंडरवियर न पहन ने की वजह से लुंड का उभर स्पस्ट दिख रहा था, उसे देख कर दीदी शर्मा रही थी, उनको शर्माता देख मेरा लुंड कड़क होने लगा, दीदी बांधती उस से पहले hi वो पूरी तरह उत्तेजित हो गया था, उन्हें पता चल गया की में उन्हें देख उत्तेजित हो रहा हु तो वो और शर्माने लगी)

शिव : सॉरी दीदी. (उन्होंने मेरी आँखों में देखा, एक दो पल हम एक दूसरे को देखते रहे)

लतादिदी : इसमें सॉरी की क्या बात है? तेरा मान कर रहा है क्या?

शिव : नहीं, ऐसी बात नहीं है, पर आपको देख कर ऐसा हुआ, सॉरी.

लतादिदी : फिर सॉरी? (उन्होंने हलके से दन्त ते हुए कहा, फिर मुस्कुराते hue)Muje देख कर तू उत्तेजित होता है तो मुझे अच्छा लगता है Shiv(Unhone नाडा नहीं बंधा और लेहंगा निचे खिसका दिया, मेरा लुंड सामने की और तना हुआ उनके सामने था, उन्होंने मेरे लुंड को देखा, उनकी सांसे भी तेज होने लगी, उन्होंने मेरी और देखा, और शरमाते हुए अपनी नज़ारे लुंड की और कर di)Thoda निचे हो ja(Me उनकी बात का मतलब समाज रहा था, मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, में भी घुटने के बल बेथ गया, उन्होंने मेरे लुंड को हाथ से पकड़ा और sehlaya)(Garam गरम, कड़क लुंड को पकड़ते hi लटकी छूट पानी बहाने लगी, उसे शर्म भी आ रही थी, वो इतनी बार शिव के साथ कर चुकी थी पर हर बार उसे पहले जैसा hi अनुभव होता था, वो शिव से नज़ारे मिलाने भी शर्मा रही थी, वो थोड़ी ऊपर उठी और लुंड को अपने मुँह में भरने लगी, वो गरम लुंड उसके मुहमे समां गया)

शिव : शह्ह्हह्ह्ह्ह didiiiiii(Lata ने जिजकते हुए उसको देखा, उसके चेहरे पर आये आनंद को देख कर वो और शर्मा गयी, शिव उसके शिर को पकड़ कर अपना लुंड आगे पीछे करने लगा तो वो और शर्माने लगी, लुंड उसके गले तक छूने लगा था, अपने मुँह में अंदर बहार हो रहे लुंड को महसूस करके वो और उत्तेजित होने लगी थी, वो काफी देर तक उसके लुंड को चुस्ती रही, लुंड जब उसके गले में थोड़ा जोर से टकराया तो वो ख़ास पड़ी और उसने लुंड बहार निकल दिया, लुंड पूरा उसके थूक से सना हुआ tha)Sorry दीदी, (उसने शिव को देखा तो वो उसके लिए फिकरमंद था, उसने ना में इस्सर करके कहा की कुछ नहीं हुआ.

लतादिदी : (प्यार se)Shiv...let जा. (शिव निचे लेटने लगा, लेटने उसकी और पीठ कर ली और अपना ब्लाउज उतर दिया, उसे शर्म तो बहोत आ रही थी, पर ये उसे अच्छा भी लग रहा था, उसने घाघरे का नाडा खोला, वो जानती थी की शिव उसकी को देख रहा है, उसने पीछे मुड़कर देखा तो वो उसे hi देख रहा था, उसने शरमाते हुए नज़ारे झुका ली, जब शिव के हाथ ने उसकी नंगी पीठ को छुआ तो वो हल्का कैंप गयी, वो उसकी पीठ पर अपना हाथ घुमा रहा था, वो थोड़ी ऊपर उठी और अपना घाघरा उतरने लगी, शिर के हाथ उसके नितम्ब पर चले गए, वो उसे दबा कर महसूस कर रहा था, ये सब उसे अच्छा लग रहा था, घुटनो के बल होते हुए उसने अपना घाघरा निकल दिया, वो अब पूरी नंगी, शिव की और पीठ किये बैठी थी, शिर उसकी नंगी पीठ और उसके कूल्हों की दरार को सेहला रहा था, वो मुस्कुरा रही थी. वो उस से नज़ारे चुराते हुए सीधी हुई और उसके लुंड पर बैठने की तयारी करने लगी, उसका शरीर उत्तेजना से कैंप रहा था, शिव के हाथ में लगा था तो वो उसे निचे hi रखना चाहती थी. जब वो उसके ऊपर चढ़ने लगी तो शिव बोलै)

शिव : Didi...(Lata ने शरमाते हुए उसे देखा, वो आँखों से hi पूछ रही थी क्या हुआ) मेरे मुँह पर आ जाओ न. (उसकी बात सुन कर वो कंपनी लगी, वो उसे अपनी छूट खोले उसके मुँह पर बैठने को कह रहा था, उसे इतनी शर्म आ रही थी की पूछो मात, पर उसका दिल भी छह रहा था, वो शिव की और देखने से भी शर्मा रही थी, पर करना तो था hi, वो आगे की और खिसकी, पर ऐसे हो नहीं रहा था, वो कड़ी हुई और शिर के शिर के ऊपर अपने पेअर फैला कर कड़ी हो गयी, उसे पता था की शिव उसकी छूट को hi देख रहा है, वो कैसे उसके ऊपर नंगी कड़ी थी ये सोच कर hi वो शर्म से पानी पानी हो रही थी, पानी तो उसकी छूट से भी निकल रहा था, अपनी पानी बहती छूट की उत्तेजना चरम पर थी, वो घुटने मोड़ कर शिव के मुँह के ऊपर बैठने लगी, जब उसकी छूट पर उसे शिव के मुँह का स्पर्श हुआ तो वो अंदर तक कैंप गयी. शिव की जीभ फ़ौरन उसकी छूट के छेड़ पर अपना काम करने लगी, उसके शरीर में एक आनंद की लहर दौड़ गयी, वो खुद अपनी छूट उसके मुँह पर रगड़ने लगी. उसने शरमाते हुए नीचे देखा तो शिव उसकी हलके बालोंवाली छूट की फैंको को फैलाये उसकी छूट को चाट रहा था. आनंद से उसकी आंखे बंद हो गयी, वो अपनी कमर को हलके हलके लहराने लगी, वो इतना उत्तेजित हो गयी थी की उसे लगने लगा की अब वो ज्यादा सहन नहीं कर पायेगी और छूट जाएगी, वो फ़ौरन कड़ी हो gayi)(Shiv को अभी और वो मधुर सा नमकीन पानी पीना tha)Kya हुआ दीदी, बैठो न मेरे मुँह पर.

लतादिदी :(वो बहोत शर्मा गयी, पर वो अपने आप को संभल नहीं प् रही थी, उसने कांपते स्वर में kaha)Tumhara दर्द कैसा है शिव?

शिव : किस दर्द की बात कर रही हो दीदी?

लतादिदी : तुम्हे छोटे जो लगी है उसकी बात कर रही हु.

शिव : ठीक है, ज्यादा दर्द नहीं है क्यों?

लतादिदी : मुझसे रहा नहीं जा रहा, मुझे वो अंदर लेना है, हम कर शक्ति hai?.(Wo बोलते बोलते इतना शर्मा रही थी पर वो अपनी छूट की आग के सामने मजबूर थी, उसकी छूट इतना उत्तेजित हो रही थी की उसे वो मोटा लुंड अपने अंदर चाहिए था, वो शिव को बड़ी आस से देख रही थी.)

शिव : कोई दिक्कत नहीं है दीदी, कर शक्ति है. (शिव की अनुमति मिलते hi वो खुस भी हो गयी और शर्मा भी गयी, वो उठी और अपनी गांड मटकते हुए साइड से हो कर शिव के लुंड के पास गयी, (शिव उनकी उभरी हुई गांड को देख रहा था, वो नंगा जिस्म कामुकता से भरा हुआ था, छाती पर कड़क चुके झुकने का नाम नहीं ले रहे थे, उसका लुंड झटके खा रहा था)( लता जब लुंड के पास गयी तो उसने देखा की लुंड से पानी टपक रहा था और वो शिव के पेट पर लगा हुआ था, वो इतनी कामुक हो गयी थी की उसने लुंड को पकड़ा और उसके पेट पर लगा वो चिकना रास चाट ने लगी, रास चाटने से उसका दिल नहीं भरा, उसने वो लाल सूपड़ा अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसते हुए उसका रास खींचने की कोश्शि करने लगी, वो बैठी थी तो उसकी टंगे फैली हुई थी और चूर शिव के सामने थी, शिव ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और उसकी चित के छेद में ऊँगली दाल दी, वो उत्तेजना से भरने लगी और जोर जोर से लुंड को चाटने और चूसने लगी, दो मिनट चूसने के बाद वो उठी और शिव की कमर के इर्दगिर्द अपने पेअर फैलाये, एक नजर शिव पर डाली जो उसकी छूट और उसके नंगे श्री को देख रहा था, वो शरमाते हुए बैठने लगी, (में दीदी के हावभाव देख रहा था, वो बहोत ज्यादा उत्तेजित लग रही थी, उनका चेहरा उत्तेजना से लाल हो गया था, वो मेरे सामने देख नहीं रही थी, दीदी ने मेरा लुंड पकड़ा और अपनी छूट के छेड़ पर रगड़ा, लुंड पहले से hi गिला था, उपरसे छूट के रास से भीगने लगा. दीदी की ऐसी हरकते मेरे लुंड को और कड़ा कर रही थी, दीदी ने लुंड को छेड़ पर लगाया, वो आहिस्ता आहिस्ता उस पर बैठने लगी, उनकी आंखे बंद हो चुकी थी, मेरे लुंड पर छूट की गाजरमी और उसकी चिकनाहट का एहसास हो रहा था, ऐसे जैसे लुंड अंदर जा रहा था छूट फ़ैल रही थी और दीदी के चेहरे पर भाव बदल रहे थे, कभी दर्द तो कभी मज़े का एहसास साफ़ दिख रहा था, आधे से ज्यादा लुंड अंदर जाने के बाद वो रुक गयी, उन्होंने अपनी पोसिटिव ठीक की और अपनी गान उठाते हुए लुंड को अंदर बहार करने लगी, उनका चेहरा पूरा लाल हो चूका था, वो आगे से झुक गयी तो मेने उनके संतरे को पकड़ लिया और उसे मसलते हुए उसमे से रास निकलने की कोशिस करने लगा, मसलते हुए मेने चुकी के निप्पल को पकड़ा और उन्हें खींचने लगा, दीदी का चेहरा और कामुक होता गया, वो अपनी गांड उठा उठा कर मेरे लुंड पर पटकने लगी, उनकी आंखे बंद hi थी, वो काफी देर मेरे लुंड पर उछलती रही, लुंड पूरा छूट रास से चमक रहा था, उस कासी हुई छूट का एहसास मेरे लुंड पर मज़े का एहसास दे रहा था, में उनकी छूट के हर हिस्से को महसूस कर प् रहा था. छूट की सिकुड़न बढ़ने लगी और वो हांफ ते हुए अपना पानी बहाने लगी, वो संभल न पायी और मेरे ऊपर hi पसर गयी, लुंड पूरा अंदर चला गया हिज से एक आह उनके मुँह से निकल गयी, में एक हाथ से उनकी नंगी पीठ को सहलाने लगा, वो नंगा मखमली बदन मेरे ऊपर छाया हुआ था, में उनके कूल्हे सहलाते हुए, उनसे प्यार जाता रहा था. अपने स्खलन के बाद वो संभाली और मेरी और देखने लगी, हमारी आंखे टकराई, वो झुकाती गयी और मेरे होठो को चूसने लगी, उनके होठो को चूसते हुए में निचे से हलके हलके धक्के लगाने लगा, उनके मुँह से उम् उम् की आवाजे निकल रही थी. वो पशीने से भीग चुकी थी, वो थक गयी थी, फिर भी अपनी कमर हिला के मेरे लुंड को अपनी छूट से रगड़ रही थी. मुझे पता था ऐसे में छूटने वाला नहीं हु.

शिव : दीदी पीछे घूम जाओ. (उन्होंने मेरी आंखोमे देखा और मुस्कुरायी, वो उठी, में भी बेथ गया, वो साइड में hi घोड़ी बन गयी, मेने उनके कूल्हे सहलाये तो वो मेरी और देख कर शर्माने लगी) ये मस्त है दीदी (वो मुस्कुरायी, और आगे से और झुक गयी जिस से कूल्हे और उभर आये, में पीछे चला गया, हलके बालो वाली छूट के छूट के होठ हलके से खुल गए थे, रास झाटो के बालो से होते हुए टपक रहा था, ऐसा कामुक दृश्य देख में झुका और छूट के होठो को चूसने लगा)

लतादिदी : शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (जैसे जैसे में छूट के छेड़ को चाट रहा था उनकी सिस्किअ बढ़ती जा रही thi)Shhhh सीईव शहहहहह कितना अच्छा है न ये सब, शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह, तुजे मेरी वो पसंद है न shhhhhhhhhh. (वो जानती थी की शिव को ऐसी बाटे अच्छी लगती है तो वो खुल कर boli)Tuje मेरी भोश चेतना पसंद है न शिव, शह्ह्ह्ह मुझे बहोत अच्छा लगता है जब तू मेरी भोश को चाट ता है, मुझे अंदर से कुछ होता है शह्ह्ह्हह्ह, मुझे तेरा लुंड भी बहोत अच्छा लगता है शह्ह्ह्ह अब मुझे उस से दर नहीं लगता शह्ह्ह्ह बल्कि बहोत प्यार आता है शह्ह्ह्हह्ह. जब तू मुझे छोड़ता है तो ऐसा लगता है जैसे में सब भूल गयी हु बस वो पल hi याद रहता है. (लता ने महसूस किआ की शिव उसकी गांड का छे चाट रहा है, अब वो जानती थी की शिव एक न एक दिन उसकी गांड में भी अपना लुंड डेल गए) शह्ह्ह्हह्ह शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह (उसकी गांड का छेड़ khul-band हो रहा tha)tuje वह डालना है तो दाल दे शिव शह्ह्ह्हह्ह. मुझे कुछ नहीं होगा शह्ह्ह्हह्ह मेरे शरीर के हर हिस्से पर तेरा हक़ है शह्ह्ह्ह, मुझे भी महसूस करना है की वह कैसा लगता है शह्ह्ह्ह (जब उसने देखा की शिव कोई जवाब नहीं दे रहा है तो वो पीछे मुड़कर देखने lagi)tu सुन रहा है न?

शिव : (मेने अपना शिर गांड से हटाया और दीदी को देखा, वो अपनी बोजिल आँखों से मुझे देख रही थी, में मुस्कुराया और उठ कर उनके चेहरे के पास चला gaya)Jab उसका वक़्त आएगा तो वो भी करूँगा दीदी, (अपने लुंड की और इस्सर कर ke)Abhi इससे गिला कर do(Wo मुस्कुरायी और मेरे लुंड को साइड से hi अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी, मेने एक ऊँगली उनकी छूट में दाल दी, उन्होंने चूस चूस कर पूरा लुंड गिला कर दिया, में फिर से पीछे चला गया और लुंड को छूट के छेड़ में डालने लगा, जैसे hi लुंड छूट के अंदर गया दीदी फिर सिसकी, उनकी छोटी सी छूट फिर से फ़ैल गयी और मेरे लुंड पर लिपट गयी, मेने दो तीन हलके हलके धक्के लगाए, फिर एक हाथ हाथ से उनकी कमर पकड़ कर उन्हें छोड़ने लगा)

लतादिदी : शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह शिईयिव शठ अह्ह्ह्ह शहहह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह कितना मज़ा आता है शिव शह्ह्ह्ह है ऐसे hi छोड़ मुझे शह्ह्ह्ह मुझे छोड़ने में तुजे मज़ा आता है शिव? मेरी भोश में तुजे कैसा लगता है शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह तेरा लुंड कितना मज़ा देता है शिव शह्ह्ह्हह्ह. अह्ह्ह्ह तू मुझे मिला, में बहोत आभारी हु इस्वर की शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह जो तुजे मेरी जिंदगी में भेजा शह्ह्ह्हह्ह ैय्यियी शहहह अह्ह्ह्ह ऐसे hi शिव शह्ह्ह्ह. (में देख रहा था कैसे वो छोटा सा छेड़ फ़ैल कर मेरे लुंड की चौड़ाई के नाप का हो गया था, छूट के रास से चमक रहा वो लुंड अंदर बहार हो रहा था जिसे देख मेरी उत्तेजना और बढ़ रही थी, मेरी गति बढ़ गयी थी) ममी शहहह अह्ह्ह्हह ऐसेही शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह छोड़ ले मुझे शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह जोरसे सीईव शहहह तेरा लुंड मुझे अंदर तक महसूस हो रहा है शहहह वो मेरी छूट के आखरी छोर से टकरा रहा है शहहह ऐसे hi शह्ह्ह्ह. में झाड़नेवाली हु शिईयिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह. में गयी सीईव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह सीईव जोरसे शहहह अह्ह्ह्ह छोड़ मुझे शहहह जोरसे सीईव शहहह में गयी आह्ह्ह्ह में gayiiiiiiiiiii ahhhhhhhhhh. (वो जटके कहते हुए निचे लुढ़क गयी, में रुक गया, दीदी बुरी तरह से हांफ रही थी, मेने देखा की वो काफी थक गयी थी, में उन्हें सीधा लेता कर उनके ऊपर नहीं छड़ सकता था, मेरा एक हाथ बंधा हुआ था)

शिव : दीदी आप आराम करो, में आता हु.

लतादिदी : क्या हुआ शिव, कहा जा रहा है?

शिव : दीदी आप थक गयी है, में आता हु, बाथरूम जा रहा हु.

लतादिदी : (बैठते hue)Me ठीक हु शिव, में तेरे ऊपर आ जाती हु.

शिव : नहीं दीदी, आप बहोत थक गयी है, आप आराम करो में आता हु. (लता सचमे थक गयी थी, उसका मान किआ की कह दे की जा सरिता को जगा दे, पर वो ऐसा कह नहीं शक्ति थी, उसने मायूसी से कहा)

लतादिदी : ठीक है, जल्दी आना.

शिव : (में बहार निकला, जब में बहार निकला तो देखा की गायत्री दीदी जल्दी जल्दी जा रही thi)Ruko दीदी. (वो मेरी आवाज सुन कर रुक गयी, में नंगा hi उनके नजदीक पहुंच gaya)Bhag क्यों रही है आप.

गायत्रीदिदी : वो wo...(Shiv को पूरा नंगा देख उसकी हालत ख़राब होने लगी, जब कोई बहाना नहीं सुजा तो) सॉरी शिव, वो आवाजे आ रही थी तो में बहार कड़ी थी, सॉरी.

शिव : (मेने उनका हाथ पकड़ा और उन्हें ऑफिस में ले गया, (मेने दरवाजा बंद kia)Didi, अगर आपकी इच्छा है तो अपनी सलवार निकालिये, वो खुस हो गयी और अपनी सलवार का नाडा खोलने लगी, सलवार निचे गिरते hi अपने पैरो से निकल di)waha झुक जाइये (मेने कुर्शी की और इस्सर किआ तो वो कुर्शी पकड़ कर झुक गयी, मेने उनकी सलवार को ऊपर उठाया तो उनके नंगे कूल्हे मेरे सामने आ gaye)Didi आपका मान है न?

गायत्री : है शिव, मेरा बहोत मान है, तू ज्यादा सोच मात, दाल दे. (मेने छूट को सहलाया तो वो पहले से गीली थी, मेरे छूने से वो सिसकने lagi)Shhhhhh शह्ह्ह्ह शहहहहह.

शिव : कब से कड़ी थी आप?

गायत्री : थोड़ी देर हुई, जब में पेशाब कर के लौट रही थी तो आवाजे सुनाई दी थी. आवाजे सुन कर में भी गरम हो गयी हु शिव, शठ अब जल्दी दाल दे (मेने लुंड सेट किआ और अंदर डालने laga)Shhhhhh (वो अपनी टंगे और फैलते हुए झुकने लगी ताकि लुंड अंदर चला जाये, वो अपनी कमर हिलके लुंड को रास्ता दे रही थी, लुंड पूरा छूट में चला gaya)Shhhhh अह्हह्ह्ह्ह (अपनी आंखे बंद करते hue)Ab सुकून मिला शह्ह्ह्ह, तेरा जब भी मान करे मुझे बोल्दिया कर शिव, में कभी मन नहीं करुँगी, मुझे भी तेरे साथ ये सब करना बहोत अच्छा लगता है, शह्ह्ह्ह. (में धक्के लगाने लगा, पहले से में रेडी था तो में जल्दी जल्दी धक्के लगाने laga)Shhhh अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह आअह्ह्ह सीईव शहहह है ऐसे hi शहहह ऐसे hi शहहहहह छोड़ ले मुझे शिव शहहह अह्ह्ह्हह मुझे बहोत अच्छा लग रहा है शठ ाः ऐसे hi शह्ह्ह्ह हआ ऐसे hi. (में दे दाना दान धक्के लगा रहा था, उनके कूल्हे थिरक रहे थे, छूट पूरी तहा फैली हुई थी, और गांड का छेड़ खुल बंद हो रहा था, में कूल्हे सहलाते और दबाते हुए उन्हें छोड़ रहा था, में तेज तेज धक्के लगा रहा था, वो लगातार सिसक रही thi)Shhhh ऐसे hi शिव शहहह अह्ह्ह ऐसे hi अह्ह्ह जब भी तेरा मान करे मुझे बुला लिया कर शहहह ाः मुमीइ शहहह अह्ह्ह्ह आईईईई अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह (में इतनी तेज धक्के लगा रहा था की वो सेह न पायी और थोड़ी hi देर में झड़ने lagi)Me गईई शहहह में गयी शीइइइइव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह. (वो झटके खाने लगी, और आगे खिसक गयी तो मेरा लुंड बहार निकल आया, मेरा लुंड से उनकी छूट का रास टपक रहा था, तभी मुझे दरवाजे पर किसी की होने का एहसास हुआ तो मेने दरवाजा खोला, सरिता दीदी कड़ी थी, अचानक दरवाजा खोने से वो गभरा गयी, मेने देखा की वो आपै छूट को सेहला रही थी, वो पलट कर जाने लगी तो मेने उनकी बाह पकड़ी और उन्हें अंदर खिंच लिया और दरवाजा बंद कर दिया. (गायत्री अपने कूल्हे उठाये कड़ी थी, जैसे hi उसकी नज़र सरिता पर पड़ी वो सीधी हो गयी और दूसरी और देखने lagi)(Pata नहीं आज क्या हो रहा था, पर अब में थोड़ा खुल चूका था, सरिता दीदी बहार कड़ी थी मतलब उन्हें पता था की अंदर क्या हो रहा है, गायत्री दीदी को भी पता था की मेरे साथ अंदर लतादिदी थी. तो अब छुपाने को वैसे भी कुछ नहीं था)

शिव : दीदी, कुर्शी पकड़ कर झुक जाओ. (सरिता ने हिचकिचाते हुए गायत्री की और देखा, वो भी शर्मा रही थी, वैसे भी सरिता को सब पता था, उसने शिव को देखा जिसका लुंड खड़ा हुआ था, वो शिव के लिए कुछ भी कर शक्ति थी, उसने अपने पेटीकोट को ऊपर उठाया और अपनी पंतय निकल दी और अपना पेटीकोट अपनी कमर पर चढ़ाते हुए झुक gayi)(Mene लुंड उनकी छूट पर रगड़ते हुए puchha)Aap तैयार हो दीदी? (सरिता ने है में इस्सर किआ, आज वो पहली बार किसी और के सामने छुड़वाने जा रही थी, पर ये बात उसकी उत्तेजना बढ़ा रही थी, वो थोड़ी और झुक गयी और अपनी छूट को शिव के सामने खोल diya)(Mene लुंड को छूट पर रगड़ा, वो भी गीली hi थी, मेने लुंड छे पर लगया और हलके धक्के के साथ अंदर दाल दिया, वो सिसकी, लुंड अंदर उतरता चला गया, जब लुंड पूरा अंदर चला गया तो में धक्के लगाने लगा, मेने देखा तो सरिता दीदी मेरे लुंड का आनंद लेते हुए अपनी आंखे बंद किये सिसकते हुए छुड़वा रही थी, मेने गायत्रीदिदी को देखा तो वो अभी भी दूसरी और देखते हुए कड़ी थी, पर वो थोड़ी थोड़ी देर में पलट कर तिरछी नजरो से देख रही थी. ये सब मुझे भी अजीब लग रहा था पर इस से मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही thi)Gayatri दीदी (उन्होंने मेरी और देखा, दूसरी कुर्शी की और इस्सर कर ke)Yaha झुक जाइये. (वो हिचकिचाते हुए मुझे देखने लगी, वो थोड़ी देर ऐसे hi कड़ी रही, में लगातार सरितादिदी को छोड़ रहा tha,)(Gayatri को एक और शर्म आ रही थी दूसरी और सरिता को छुड़वाते देख उसकी छूट से पानी टपक रहा था, वो पहली बार ऐसे किसी लड़की को छुड़वाते हुए देख रही थी, वो सोचने लगी की जब वो चुदवाती होगी तो भी ऐसी hi लगती होगी, शिव का बड़ा लुंड उसे दिख रहा था, जिस तरह शिव अपनी कमर हिला रहा था वो उसको और उत्तेजित कर रहा था, सरिता को सिसकते देख उसकी छूट से पानी की धार निकल कर निचे गिरने लगी, एक लड़का एक लड़की को कैसे छोड़ रहा था वो उसके लिए उत्तेजना की पराकाष्ठा थी)( मुझे लगाने लगा की में कुछ ज्यादा hi कर रहा हु, वो हिचकिचा रही थी तो मेने kaha)Didi, अगर आपको जाना है तो आप जाइये. (गायत्री कभी शिव को देख रही थी तो कभी सरिता को, सरिता अपनी आंखे बंद किये हुए चुदाई का मज़ा ले रही थी, धक्को के साथ वो हिल रही थी और उसकी सिस्किअ उसकी आग को भड़का रही थी, सरिता के चेरे पर जो संतुस्ती थी वो उसे साफ़ दिख रही थी, उसे वो बड़ा लुंड कैसे मज़ा दे रहा था वो उसे महसूस कर रही थी, वो भी यहाँ से नहीं जाना चाहती थी पर उसे शर्म भी आ रही थी, उसने फहले कभी ऐसा नहीं किआ था, वो कभी किसी के सामने नहीं छुड़वाई थी, और जिनसे वो चुदवाती थी वो सब तो अनजान होते थे, सरिता तो जनि पहचानी थी, पर वो मज़े से शिव से छुड़वा रही थी, वो भी इस मज़े को खोना नहीं चाहती थी, वो नज़ारे झुकाये मुड़ी और वह रक्खी कुर्शी पर अपने हाथ झुकाये झुक गयी, उसे इतनी शर्म आ रही थी की उसने अपना मुद दूसरी तरफ कर लिया tha.)Didi अपनी कमीज उठाइये (अगर में चाहता तो उठा सकता था, क्यों की वो मेरी बायीं और hi थी, पर में चाहता था की वो अपनी मर्जी से उठाये, और उन्होंने अपना कमीज उठा दिया और अपने नंगे कूल्हे मेरे सामने परोस दिए. में सरिता दीदी को छोड़ रहा था, मेने गायत्री दीदी के लुल्हे सहलाये, ये सब मेरी कल्पना से भी बहार था, पता नहीं आज ये में कैसे कर गया था, एक और सरिता दीदी मेरे लुंड से चुद रही थी और दूसरी और गायत्री दीदी अपनी छूट मेरे सामने किये कड़ी थी, मेने उनके कूल्हे सहलाते हुए एक ऊँगली उनकी छूट में दाल दी. वो थोड़ी और झुक गयी, में उनकी गरम गरम छूट में ऊँगली अंदर बहार करने लगा, वो भी सिसकने lagi.)(Sarita ने जब इतना नजदीक सिसकी सुनी तो उसने आंखे खोल कर देखा तो गायत्री उसी की तरह झुकी हुई थी और शिव उसकी छूट में ऊँगली अंदर बहार कर रहा था, गायत्री उसी समय उसकी और देखा, जैसे hi उसकी नजर गायत्री से टकराई, शर्म के मरे दोनों ने अपनी नज़ारे घुमा ली, दोनों शर्मा रही थी, पर दोनों की सिस्किअ लगातार चल रही thi)(Mene सरिता दीदी की छूट से लुंड निकला तो दीदी ने मेरी और देखा, उन्हें मेरा लुंड निकलना अच्छा नहीं लगा था, मेने गायत्री दीदी की छूट से ऊँगली निकली तो उन्होंने भी मेरी और देखा)

शिव : दीदी, आप लोग अपनी जगह बदल लो. (वैसे भी में बाये हाथ से hi कर शक्ति था, तो अगर गायत्री दीदी को छोड़ता तो सरिता दीदी ऐसे hi कड़ी रहती तो मेने उन्हें जगह बदलने को कहा था, उन दोनों ने एक दूसरे को देखा और फिर से अपनी नज़ारे झुका ली, में देख रहा था की वो दोनों शर्मा रही hai)Didi जल्दी करो न. (वो दोनों कड़ी हुई और अपनी नज़ारे झुकाये हुए अपनी अपनी जगह बदल ली, और फिर से झुक कर कड़ी हो गयी, मेने गायत्री दीदी की छूट में लुंड दाल दिया और सरितादिदी की छूट में ऊँगली, फिर से वो दोनों सिसकने लगी, डोडो लकीओ को छोड़ने से मेरी उत्तेजना बढ़ गयी थी लुंड पूरी तरह अकड़ गया था, ऐसे hi में थोड़ी थोड़ी देर में उन्हें बदल रहा था, अब वो एक दूसरे को देख रही थी पर बोल कुछ नहीं रही थी, थोड़ी देर में सरितादिदी झाड़ गयी, तो मेने लुंड गायत्रीदिदी की छूट में दाल दिया, मेरे धक्को से वो भी फिर से झाड़ गयी, पता नहीं साला मेरा क्यों नहीं हो रहा था)

सरिता दीदी : शिव, जल्दी, थोड़ी देर में सब जग जायेंगे.

शिव : पता नहीं दीदी इतनी उत्तेजना बढ़ गयी है फिर भी लुंड से पानी नहीं निकल रहा.

गायत्रीदिदी : (हिचकिचाते hue)Mere पीछे कर ले, जल्दी निकल जायेगा. (मेने उन्हें देखा तो वो शर्मा गयी, में मुस्कुराया)

सरितादिदी : मुझे भी पीछे से कर शक्ति है, मेने तो कब से बोलै है तुजे.

शिव : आपने कभी करवाया नहीं है तो बाद में दीदी, में गायत्री दीदी के साथ में ये कर चूका हु तो उन्हें ज्यादा तकलीफ नहीं होगी.

सरितादिदी : (मायूसी se)Mene तुजे कितनी बार बोलै पर तू ने hi नहीं किआ.

गायत्री : अग़लिबर करवालेना, अभी टाइम नहीं hai(Pehli बार गायत्रीदिदी ने सरितादिदी से सीधे बात की थी, एक बार के लिए तो वो दोनों hi शर्मायी, फिर मुस्कुराने लगी, मेने ढेर सारा थूक लिया और लुंड पर लगाया)

शिव : सरितादिदी, आप अपना थूक गायत्रीदिदी के गांड के छेड़ पर लगा दो न. (दोनों ने एक दूसरे को देखा, फिर वो मुस्कुरायी, सरिता दीदी ने अपने मुँह में थूक इकठ्ठा किआ और गांड के छेड़ पर डाला, और अपनी ऊँगली से छेड़ पर फैलाया) ऊँगली अंदर डालो दीदी.

सरितादिदी : मरूंगी में तुजे, पता नहीं कैसे कैसे काम करवा रहा है, पता है कितनी शर्म आ रही है मुझे.

गायत्री : और नहीं तो क्या, दोनों को एक साथ रूम में ले आया, जरा भी शर्म नहीं है इसमें.

शिव : अच्छा, जरा अपने अपने चेहरे देखो, कैसे उत्तेजना से चमक रहे है, अगर इतनी hi शर्म आ रही थी तो चली जाती.

गायत्री : कैसे चली जाती, अगर तू नाराज हो जाता तो, न बाबा, में ऐसा रिस्क नहीं ले शक्ति, तेरे बगैर तो अब चैन hi नहीं है.

सरिता : (गायत्री के गांड के छे में वो ऊँगली दाल रही थी और थूक से उसे गिला बना रही थी, एक अजीब तरह की उत्तेजना से वो कैंप रही थी, एक लड़की को वो छुड़वाने के लिए तैयार कर रही थी, गरम गांड का वो छेड़ उसकी ऊँगली पर भी अपना असर दिखा रहा था, ऊँगली अंदर बहार करते हुए उसने kaha)Uske बगैर की उसके लुंड के बगैर.

गायत्री : लुंड तो सबके पास होता है सरिता, पर शिव जैसा हर कोई नहीं होता, लुंड छोटा हो या बड़ा, औरत को मज़ा मर्द के प्यार से आता है, झालील हो कर छुड़वाने में कोई मज़ा नहीं. (मेने लुंड गायत्री दीदी की गांड पर लगाया, वो थोड़ा और झुक गयी, मेने जोर लगाया तो गांड के छेड़ को फैलाये लुंड अंदर उतर gaya.)Ahhhhhhhh. (मेने देखा की सरिता दीदी बड़े ध्यान से देख रही थी, मेने लुंड अंदर जाने दिया और फिर बहार nikala)(Sarita उत्तेजना से कैंप रही थी, इतनी नजदीक से वो किसी लड़की की गांड में घुस रहे लुंड को देख रही थी, गांड इतनी फ़ैल गयी थी की उसके ऊपर लाल लाल लकीरे भी उभर आयी थी, छेद इतना फ़ैल गया था की उसे लगा अगर और ज्यादा फैलेगा तो फैट जायेगा. उसकी गांड में अंदर हो रहे लुंड को वो आश्चर्य से देख रही थी)

शिव : (सरितादिदी se)Lund पर थूक लगाओ दीदी. (उन्होंने मेरी और देखा, फिर वो मुस्कुरायी और अपने हाथ में थूक ले कर लुंड पर लगा दिया, मेने फिर से लुंड अंदर डाला, दो तीन बार ऐसा करने से लुंड अच्छे से गांड में अंदर बहार होने laga,Gayatrididi मज़े से सिस्किअ भरने लगी)

सरितादिदी :(उसने देखा की गायत्री की गांड में लुंड आराम से अंदर बहार हो रहा है, वो जिस तरह से सिसक रही थी, यक़ीनन उसे मज़ा आ रहा होगा, वो शिव से चुदवाती थी पर इतनी नज़दीक से उसने चुदाई देखि नहीं थी, गायत्रीदिदी se)Waha भी मज़ा आता है????

गायत्री : हआ, शहहह बहोत मज़ा आता है शहहहहह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह.

सरितादिदी : (गायत्री को मज़े में देख दीदी ने मुझे puchha)Muje कब वह करेगा शिव, मुझे भी वह करवाना है.

शिव : जल्दी hi करेंगे दीदी, अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्हह. (में लगातार धक्के लगा रहा था, सरिता दीदी हम दोनों को देख रही थी, मेने उन्हें मेरी और खिंचा और उन्हें किश करने लगा, वो भी मुझे किश करने लगी, में लगातार दीदी की गांड मर रहा था, गांड में घरसँ ज्यादा मिल रहा था और साथमे गांड मरने की एक अलग उत्तेजना थी, थोड़ी देर में hi चरम पर पहुंचने लगा, मेने दीदी की कमर पकड़ कर जोर जोर से धक्के लगाने लगा, (सरिता ये सब बड़े ध्यान से देख रही थी, साथ में वो अपनी चूतमे ऊँगली भी करने लगी, ऐसा कामुक दृश्य उसके लिए किसी सपने से काम नहीं था, वो बड़ा मुसल जैसा लुंड कैसे एक लड़की की गांड फाड़ रहा था, उसकी सिसकी उसे और उत्तेजित कर रही thi)(Latatar धक्को से ाखि मेरा स्खलन हो गया, मेने अपना पूरा वीर्य गायत्री दीदी की गांड में भर दिया, उनके पेअर कैंप रहे थे, वो कड़ी न रह पायी, वो घोड़ी बने hi जमीं पर बेथ गयी, उनकी गांड के छेड़ से वीर्य बहार बहने लगा, सरितादिदी ने मेरा लुंड अपने पेटीकोट से पोछा और उसे चाटने लगी, गायत्री की गांड चुदाई से वो उत्तेजित हो गयी thi.)Didi, अभी टाइम नहीं है.

सरितादिदी : शिव, थोड़ा छोड़ ले न मुझे, बस थोड़ी देर.

गायत्री : उसे जाने दे, उसे स्कूल के लिए देर हो जाएगी, तू मेरे साथ बाथरूम चल, में तुजे ठंडा करती हु.

में मुस्कुराया, उन्दोनो का एक नया रिस्ता बन गया था, में बहार निकला, अभी सब सोये हुए hi थे, में रूम में गया तो दीदी वापस सो गयी थी, सायद थकन से उन्हें नींद आ गयी थी. मेने कपडे लिए और में बाथरूम की और चला गया, मुझे दूसरे बाथरूम से सरितादिदी की सिस्किअ सुनाई दे रही थी, मेरा लुंड फिर से खड़ा होने लगा पर टाइम था नहीं. बाथरूम में जा कर मुझे एहसास हुआ की में खुद से नाहा नहीं सकता, तो मेने पेहसाब किआ और वापस चला गया. मेने दीदी को जगाया और कपडे पहनाने को कहा. उन्होंने नहाये का पूछा तो मेने कहा आ कर नहाऊंगा, क्यों की आप को नहलाना पड़ेगा, वो मुस्कुरायी, और मुझे कपडे पहनाने लगी. जब में और दीदी बहार आये तो, सब जाग गए थे और सरितादिदी और गायत्रीदिदी हस्ते हुए बाते कर रही थी और काम कर रही थी. तभी मेरे फ़ोन पर फ़ोन आया, मेने देखा तो ये जूही का था.

शिव : Hello.

जूही : है, सुनो, तुम स्कूल जानेवाले हो?

शिव : है.

जूही : तो मेरा इंतजार करना, में तुम्हे छोड़ने आउंगी. आज पवनसीर ने गयम बंद रक्खा है, तो में फ्री hi हु.

शिव : ठीक है. (मेने गायत्रीदिदी को भी बता दिया तो वो भी खुस हो गयी, वैसे भी गांड मरवाने के बाद उन्हें भी आराम की जरुरत थी)

जब जूही मुझे स्कूल छोड़न जा रही थी तो मेने देखा की संयम और नाज़िआ दीदी खड़े है, मेने जूही को स्कूटर रोकने को कहा. मुझे देख कर वो दोनों खुस हो गयी.

नाज़िआदिदी : तुम स्कूल जा रहे हो? तुम ठीक तो हो न?

शिव : है दीदी में ठीक हु.

संयम : अच्छा हुआ तुम आ रहे हो, आज मार्क्स देनेवाले है.

शिव : है मुझे याद है. (तभी वैस्वी आ गयी, उसने मुझे देखा, पर जैसे hi जूही पर नज्ज़ार पड़ी उसने नज़र फेर ली, वो संयम को ले कर निकल गयी, मेने भी नाज़िआदिदी को बी कहा और निकल गए)

पहले टेस्ट के रिजल्ट आज आनेवाले थे, महेश और हर्ष दर रहे थे, मुझे कोई चिंता नहीं थी, क्यों की में फ़ैल तो होनेवाला था नहीं, पर वैस्वी बहोत ज्यादा टेंशन में लग रही थी. मुझे उसकी बात याद आयी, वो मेरी आगे निकलना चाहती थी, और मुझे यकीं था की इस बार ऐसा होगा भी, क्यों की खेल की वजह से में स्टडी में इतना ध्यान नहीं दे पाया था, पर मेरे पेपर तो अच्छे hi गए थे. मेरे मान में उस से ऊपर आने की कोई चिंता नहीं थी क्यों की अगर मेरे मार्क उस से काम भी आये तो भी.
 
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