अपडेट 109
रात को खाना खाने के बाद में जल्दी सो गया, कल रात पूरी नींद नहीं मिली थी और शरीर में दर्द दर्दनिवारक की गोलिया और नींद की गोलिओ की वजह से मुझे जल्दी नींद आ गयी थी, रात के तक़रीबन चार बजे मेरी नींद खुल गयी, मेने देखा की लतादिदी मेरे बाजु में hi सो रही थी. वो कब मेरे साथ आकर सोइ थी मुझे पता नहीं था, मुझे पेशाब लगी थी शायद इसीलिए मेरी नींद खुल गयी थी, मेने देखा की मेरे कपडे भी बदले हुए थे, शायद ये दीदी ने hi किआ था, निचे खुला लेहंगा पहना था मेने, में उठा और बाथरूम में चला गया, नाडा बंधा हुआ था तो मेने खोल दिया और पेशाब करने लगा, पेशाब करने के बाद मुझे दिक्कत समाज आयी, मेने नाडा खोल तो दिया था पर एक हाथ से में उसे बांध नहीं शक्ति था. में ऐसे hi हाथ से लेहंगा पकड़ कर रूम में आ गया, जब में वापस आया तो दीदी बैठी हुई थी.
शिव : क्या हुआ दीदी, आप जाग क्यों गयी?
लतादिदी : तू बाजु में नहीं था तो नीं खुल gayi(Mere लहंगे को देख kar)isse ऐसे क्यों पकड़ा है?
शिव : एक हाथ से में बंद नहीं सकता था न.
लतादिदी : ला में बंद देती हु, अबसे इलास्टिकवाला hi कुछ पहनाऊँगी जिस से ये दिक्कत न हो. (में दीदी के नज़दीक गया, वो घुटनो के बल बेथ गयी और मेरा नाडा बांधने लगी, निचे अंडरवियर न पहन ने की वजह से लुंड का उभर स्पस्ट दिख रहा था, उसे देख कर दीदी शर्मा रही थी, उनको शर्माता देख मेरा लुंड कड़क होने लगा, दीदी बांधती उस से पहले hi वो पूरी तरह उत्तेजित हो गया था, उन्हें पता चल गया की में उन्हें देख उत्तेजित हो रहा हु तो वो और शर्माने लगी)
शिव : सॉरी दीदी. (उन्होंने मेरी आँखों में देखा, एक दो पल हम एक दूसरे को देखते रहे)
लतादिदी : इसमें सॉरी की क्या बात है? तेरा मान कर रहा है क्या?
शिव : नहीं, ऐसी बात नहीं है, पर आपको देख कर ऐसा हुआ, सॉरी.
लतादिदी : फिर सॉरी? (उन्होंने हलके से दन्त ते हुए कहा, फिर मुस्कुराते hue)Muje देख कर तू उत्तेजित होता है तो मुझे अच्छा लगता है Shiv(Unhone नाडा नहीं बंधा और लेहंगा निचे खिसका दिया, मेरा लुंड सामने की और तना हुआ उनके सामने था, उन्होंने मेरे लुंड को देखा, उनकी सांसे भी तेज होने लगी, उन्होंने मेरी और देखा, और शरमाते हुए अपनी नज़ारे लुंड की और कर di)Thoda निचे हो ja(Me उनकी बात का मतलब समाज रहा था, मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, में भी घुटने के बल बेथ गया, उन्होंने मेरे लुंड को हाथ से पकड़ा और sehlaya)(Garam गरम, कड़क लुंड को पकड़ते hi लटकी छूट पानी बहाने लगी, उसे शर्म भी आ रही थी, वो इतनी बार शिव के साथ कर चुकी थी पर हर बार उसे पहले जैसा hi अनुभव होता था, वो शिव से नज़ारे मिलाने भी शर्मा रही थी, वो थोड़ी ऊपर उठी और लुंड को अपने मुँह में भरने लगी, वो गरम लुंड उसके मुहमे समां गया)
शिव : शह्ह्हह्ह्ह्ह didiiiiii(Lata ने जिजकते हुए उसको देखा, उसके चेहरे पर आये आनंद को देख कर वो और शर्मा गयी, शिव उसके शिर को पकड़ कर अपना लुंड आगे पीछे करने लगा तो वो और शर्माने लगी, लुंड उसके गले तक छूने लगा था, अपने मुँह में अंदर बहार हो रहे लुंड को महसूस करके वो और उत्तेजित होने लगी थी, वो काफी देर तक उसके लुंड को चुस्ती रही, लुंड जब उसके गले में थोड़ा जोर से टकराया तो वो ख़ास पड़ी और उसने लुंड बहार निकल दिया, लुंड पूरा उसके थूक से सना हुआ tha)Sorry दीदी, (उसने शिव को देखा तो वो उसके लिए फिकरमंद था, उसने ना में इस्सर करके कहा की कुछ नहीं हुआ.
लतादिदी : (प्यार se)Shiv...let जा. (शिव निचे लेटने लगा, लेटने उसकी और पीठ कर ली और अपना ब्लाउज उतर दिया, उसे शर्म तो बहोत आ रही थी, पर ये उसे अच्छा भी लग रहा था, उसने घाघरे का नाडा खोला, वो जानती थी की शिव उसकी को देख रहा है, उसने पीछे मुड़कर देखा तो वो उसे hi देख रहा था, उसने शरमाते हुए नज़ारे झुका ली, जब शिव के हाथ ने उसकी नंगी पीठ को छुआ तो वो हल्का कैंप गयी, वो उसकी पीठ पर अपना हाथ घुमा रहा था, वो थोड़ी ऊपर उठी और अपना घाघरा उतरने लगी, शिर के हाथ उसके नितम्ब पर चले गए, वो उसे दबा कर महसूस कर रहा था, ये सब उसे अच्छा लग रहा था, घुटनो के बल होते हुए उसने अपना घाघरा निकल दिया, वो अब पूरी नंगी, शिव की और पीठ किये बैठी थी, शिर उसकी नंगी पीठ और उसके कूल्हों की दरार को सेहला रहा था, वो मुस्कुरा रही थी. वो उस से नज़ारे चुराते हुए सीधी हुई और उसके लुंड पर बैठने की तयारी करने लगी, उसका शरीर उत्तेजना से कैंप रहा था, शिव के हाथ में लगा था तो वो उसे निचे hi रखना चाहती थी. जब वो उसके ऊपर चढ़ने लगी तो शिव बोलै)
शिव : Didi...(Lata ने शरमाते हुए उसे देखा, वो आँखों से hi पूछ रही थी क्या हुआ) मेरे मुँह पर आ जाओ न. (उसकी बात सुन कर वो कंपनी लगी, वो उसे अपनी छूट खोले उसके मुँह पर बैठने को कह रहा था, उसे इतनी शर्म आ रही थी की पूछो मात, पर उसका दिल भी छह रहा था, वो शिव की और देखने से भी शर्मा रही थी, पर करना तो था hi, वो आगे की और खिसकी, पर ऐसे हो नहीं रहा था, वो कड़ी हुई और शिर के शिर के ऊपर अपने पेअर फैला कर कड़ी हो गयी, उसे पता था की शिव उसकी छूट को hi देख रहा है, वो कैसे उसके ऊपर नंगी कड़ी थी ये सोच कर hi वो शर्म से पानी पानी हो रही थी, पानी तो उसकी छूट से भी निकल रहा था, अपनी पानी बहती छूट की उत्तेजना चरम पर थी, वो घुटने मोड़ कर शिव के मुँह के ऊपर बैठने लगी, जब उसकी छूट पर उसे शिव के मुँह का स्पर्श हुआ तो वो अंदर तक कैंप गयी. शिव की जीभ फ़ौरन उसकी छूट के छेड़ पर अपना काम करने लगी, उसके शरीर में एक आनंद की लहर दौड़ गयी, वो खुद अपनी छूट उसके मुँह पर रगड़ने लगी. उसने शरमाते हुए नीचे देखा तो शिव उसकी हलके बालोंवाली छूट की फैंको को फैलाये उसकी छूट को चाट रहा था. आनंद से उसकी आंखे बंद हो गयी, वो अपनी कमर को हलके हलके लहराने लगी, वो इतना उत्तेजित हो गयी थी की उसे लगने लगा की अब वो ज्यादा सहन नहीं कर पायेगी और छूट जाएगी, वो फ़ौरन कड़ी हो gayi)(Shiv को अभी और वो मधुर सा नमकीन पानी पीना tha)Kya हुआ दीदी, बैठो न मेरे मुँह पर.
लतादिदी

वो बहोत शर्मा गयी, पर वो अपने आप को संभल नहीं प् रही थी, उसने कांपते स्वर में kaha)Tumhara दर्द कैसा है शिव?
शिव : किस दर्द की बात कर रही हो दीदी?
लतादिदी : तुम्हे छोटे जो लगी है उसकी बात कर रही हु.
शिव : ठीक है, ज्यादा दर्द नहीं है क्यों?
लतादिदी : मुझसे रहा नहीं जा रहा, मुझे वो अंदर लेना है, हम कर शक्ति hai?.(Wo बोलते बोलते इतना शर्मा रही थी पर वो अपनी छूट की आग के सामने मजबूर थी, उसकी छूट इतना उत्तेजित हो रही थी की उसे वो मोटा लुंड अपने अंदर चाहिए था, वो शिव को बड़ी आस से देख रही थी.)
शिव : कोई दिक्कत नहीं है दीदी, कर शक्ति है. (शिव की अनुमति मिलते hi वो खुस भी हो गयी और शर्मा भी गयी, वो उठी और अपनी गांड मटकते हुए साइड से हो कर शिव के लुंड के पास गयी, (शिव उनकी उभरी हुई गांड को देख रहा था, वो नंगा जिस्म कामुकता से भरा हुआ था, छाती पर कड़क चुके झुकने का नाम नहीं ले रहे थे, उसका लुंड झटके खा रहा था)( लता जब लुंड के पास गयी तो उसने देखा की लुंड से पानी टपक रहा था और वो शिव के पेट पर लगा हुआ था, वो इतनी कामुक हो गयी थी की उसने लुंड को पकड़ा और उसके पेट पर लगा वो चिकना रास चाट ने लगी, रास चाटने से उसका दिल नहीं भरा, उसने वो लाल सूपड़ा अपने मुँह में भर लिया और उसे चूसते हुए उसका रास खींचने की कोश्शि करने लगी, वो बैठी थी तो उसकी टंगे फैली हुई थी और चूर शिव के सामने थी, शिव ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और उसकी चित के छेद में ऊँगली दाल दी, वो उत्तेजना से भरने लगी और जोर जोर से लुंड को चाटने और चूसने लगी, दो मिनट चूसने के बाद वो उठी और शिव की कमर के इर्दगिर्द अपने पेअर फैलाये, एक नजर शिव पर डाली जो उसकी छूट और उसके नंगे श्री को देख रहा था, वो शरमाते हुए बैठने लगी, (में दीदी के हावभाव देख रहा था, वो बहोत ज्यादा उत्तेजित लग रही थी, उनका चेहरा उत्तेजना से लाल हो गया था, वो मेरे सामने देख नहीं रही थी, दीदी ने मेरा लुंड पकड़ा और अपनी छूट के छेड़ पर रगड़ा, लुंड पहले से hi गिला था, उपरसे छूट के रास से भीगने लगा. दीदी की ऐसी हरकते मेरे लुंड को और कड़ा कर रही थी, दीदी ने लुंड को छेड़ पर लगाया, वो आहिस्ता आहिस्ता उस पर बैठने लगी, उनकी आंखे बंद हो चुकी थी, मेरे लुंड पर छूट की गाजरमी और उसकी चिकनाहट का एहसास हो रहा था, ऐसे जैसे लुंड अंदर जा रहा था छूट फ़ैल रही थी और दीदी के चेहरे पर भाव बदल रहे थे, कभी दर्द तो कभी मज़े का एहसास साफ़ दिख रहा था, आधे से ज्यादा लुंड अंदर जाने के बाद वो रुक गयी, उन्होंने अपनी पोसिटिव ठीक की और अपनी गान उठाते हुए लुंड को अंदर बहार करने लगी, उनका चेहरा पूरा लाल हो चूका था, वो आगे से झुक गयी तो मेने उनके संतरे को पकड़ लिया और उसे मसलते हुए उसमे से रास निकलने की कोशिस करने लगा, मसलते हुए मेने चुकी के निप्पल को पकड़ा और उन्हें खींचने लगा, दीदी का चेहरा और कामुक होता गया, वो अपनी गांड उठा उठा कर मेरे लुंड पर पटकने लगी, उनकी आंखे बंद hi थी, वो काफी देर मेरे लुंड पर उछलती रही, लुंड पूरा छूट रास से चमक रहा था, उस कासी हुई छूट का एहसास मेरे लुंड पर मज़े का एहसास दे रहा था, में उनकी छूट के हर हिस्से को महसूस कर प् रहा था. छूट की सिकुड़न बढ़ने लगी और वो हांफ ते हुए अपना पानी बहाने लगी, वो संभल न पायी और मेरे ऊपर hi पसर गयी, लुंड पूरा अंदर चला गया हिज से एक आह उनके मुँह से निकल गयी, में एक हाथ से उनकी नंगी पीठ को सहलाने लगा, वो नंगा मखमली बदन मेरे ऊपर छाया हुआ था, में उनके कूल्हे सहलाते हुए, उनसे प्यार जाता रहा था. अपने स्खलन के बाद वो संभाली और मेरी और देखने लगी, हमारी आंखे टकराई, वो झुकाती गयी और मेरे होठो को चूसने लगी, उनके होठो को चूसते हुए में निचे से हलके हलके धक्के लगाने लगा, उनके मुँह से उम् उम् की आवाजे निकल रही थी. वो पशीने से भीग चुकी थी, वो थक गयी थी, फिर भी अपनी कमर हिला के मेरे लुंड को अपनी छूट से रगड़ रही थी. मुझे पता था ऐसे में छूटने वाला नहीं हु.
शिव : दीदी पीछे घूम जाओ. (उन्होंने मेरी आंखोमे देखा और मुस्कुरायी, वो उठी, में भी बेथ गया, वो साइड में hi घोड़ी बन गयी, मेने उनके कूल्हे सहलाये तो वो मेरी और देख कर शर्माने लगी) ये मस्त है दीदी (वो मुस्कुरायी, और आगे से और झुक गयी जिस से कूल्हे और उभर आये, में पीछे चला गया, हलके बालो वाली छूट के छूट के होठ हलके से खुल गए थे, रास झाटो के बालो से होते हुए टपक रहा था, ऐसा कामुक दृश्य देख में झुका और छूट के होठो को चूसने लगा)
लतादिदी : शह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह (जैसे जैसे में छूट के छेड़ को चाट रहा था उनकी सिस्किअ बढ़ती जा रही thi)Shhhh सीईव शहहहहह कितना अच्छा है न ये सब, शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह, तुजे मेरी वो पसंद है न shhhhhhhhhh. (वो जानती थी की शिव को ऐसी बाटे अच्छी लगती है तो वो खुल कर boli)Tuje मेरी भोश चेतना पसंद है न शिव, शह्ह्ह्ह मुझे बहोत अच्छा लगता है जब तू मेरी भोश को चाट ता है, मुझे अंदर से कुछ होता है शह्ह्ह्हह्ह, मुझे तेरा लुंड भी बहोत अच्छा लगता है शह्ह्ह्ह अब मुझे उस से दर नहीं लगता शह्ह्ह्ह बल्कि बहोत प्यार आता है शह्ह्ह्हह्ह. जब तू मुझे छोड़ता है तो ऐसा लगता है जैसे में सब भूल गयी हु बस वो पल hi याद रहता है. (लता ने महसूस किआ की शिव उसकी गांड का छे चाट रहा है, अब वो जानती थी की शिव एक न एक दिन उसकी गांड में भी अपना लुंड डेल गए) शह्ह्ह्हह्ह शीइइइइइव शह्ह्ह्हह्ह (उसकी गांड का छेड़ khul-band हो रहा tha)tuje वह डालना है तो दाल दे शिव शह्ह्ह्हह्ह. मुझे कुछ नहीं होगा शह्ह्ह्हह्ह मेरे शरीर के हर हिस्से पर तेरा हक़ है शह्ह्ह्ह, मुझे भी महसूस करना है की वह कैसा लगता है शह्ह्ह्ह (जब उसने देखा की शिव कोई जवाब नहीं दे रहा है तो वो पीछे मुड़कर देखने lagi)tu सुन रहा है न?
शिव : (मेने अपना शिर गांड से हटाया और दीदी को देखा, वो अपनी बोजिल आँखों से मुझे देख रही थी, में मुस्कुराया और उठ कर उनके चेहरे के पास चला gaya)Jab उसका वक़्त आएगा तो वो भी करूँगा दीदी, (अपने लुंड की और इस्सर कर ke)Abhi इससे गिला कर do(Wo मुस्कुरायी और मेरे लुंड को साइड से hi अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी, मेने एक ऊँगली उनकी छूट में दाल दी, उन्होंने चूस चूस कर पूरा लुंड गिला कर दिया, में फिर से पीछे चला गया और लुंड को छूट के छेड़ में डालने लगा, जैसे hi लुंड छूट के अंदर गया दीदी फिर सिसकी, उनकी छोटी सी छूट फिर से फ़ैल गयी और मेरे लुंड पर लिपट गयी, मेने दो तीन हलके हलके धक्के लगाए, फिर एक हाथ हाथ से उनकी कमर पकड़ कर उन्हें छोड़ने लगा)
लतादिदी : शहहहहह अह्हह्ह्ह्ह शिईयिव शठ अह्ह्ह्ह शहहह शह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह कितना मज़ा आता है शिव शह्ह्ह्ह है ऐसे hi छोड़ मुझे शह्ह्ह्ह मुझे छोड़ने में तुजे मज़ा आता है शिव? मेरी भोश में तुजे कैसा लगता है शह्ह्ह्हह्ह अह्हह्ह्ह्ह तेरा लुंड कितना मज़ा देता है शिव शह्ह्ह्हह्ह. अह्ह्ह्ह तू मुझे मिला, में बहोत आभारी हु इस्वर की शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह जो तुजे मेरी जिंदगी में भेजा शह्ह्ह्हह्ह ैय्यियी शहहह अह्ह्ह्ह ऐसे hi शिव शह्ह्ह्ह. (में देख रहा था कैसे वो छोटा सा छेड़ फ़ैल कर मेरे लुंड की चौड़ाई के नाप का हो गया था, छूट के रास से चमक रहा वो लुंड अंदर बहार हो रहा था जिसे देख मेरी उत्तेजना और बढ़ रही थी, मेरी गति बढ़ गयी थी) ममी शहहह अह्ह्ह्हह ऐसेही शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह छोड़ ले मुझे शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह शह्ह्ह्ह जोरसे सीईव शहहह तेरा लुंड मुझे अंदर तक महसूस हो रहा है शहहह वो मेरी छूट के आखरी छोर से टकरा रहा है शहहह ऐसे hi शह्ह्ह्ह. में झाड़नेवाली हु शिईयिव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह. में गयी सीईव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह सीईव जोरसे शहहह अह्ह्ह्ह छोड़ मुझे शहहह जोरसे सीईव शहहह में गयी आह्ह्ह्ह में gayiiiiiiiiiii ahhhhhhhhhh. (वो जटके कहते हुए निचे लुढ़क गयी, में रुक गया, दीदी बुरी तरह से हांफ रही थी, मेने देखा की वो काफी थक गयी थी, में उन्हें सीधा लेता कर उनके ऊपर नहीं छड़ सकता था, मेरा एक हाथ बंधा हुआ था)
शिव : दीदी आप आराम करो, में आता हु.
लतादिदी : क्या हुआ शिव, कहा जा रहा है?
शिव : दीदी आप थक गयी है, में आता हु, बाथरूम जा रहा हु.
लतादिदी : (बैठते hue)Me ठीक हु शिव, में तेरे ऊपर आ जाती हु.
शिव : नहीं दीदी, आप बहोत थक गयी है, आप आराम करो में आता हु. (लता सचमे थक गयी थी, उसका मान किआ की कह दे की जा सरिता को जगा दे, पर वो ऐसा कह नहीं शक्ति थी, उसने मायूसी से कहा)
लतादिदी : ठीक है, जल्दी आना.
शिव : (में बहार निकला, जब में बहार निकला तो देखा की गायत्री दीदी जल्दी जल्दी जा रही thi)Ruko दीदी. (वो मेरी आवाज सुन कर रुक गयी, में नंगा hi उनके नजदीक पहुंच gaya)Bhag क्यों रही है आप.
गायत्रीदिदी : वो wo...(Shiv को पूरा नंगा देख उसकी हालत ख़राब होने लगी, जब कोई बहाना नहीं सुजा तो) सॉरी शिव, वो आवाजे आ रही थी तो में बहार कड़ी थी, सॉरी.
शिव : (मेने उनका हाथ पकड़ा और उन्हें ऑफिस में ले गया, (मेने दरवाजा बंद kia)Didi, अगर आपकी इच्छा है तो अपनी सलवार निकालिये, वो खुस हो गयी और अपनी सलवार का नाडा खोलने लगी, सलवार निचे गिरते hi अपने पैरो से निकल di)waha झुक जाइये (मेने कुर्शी की और इस्सर किआ तो वो कुर्शी पकड़ कर झुक गयी, मेने उनकी सलवार को ऊपर उठाया तो उनके नंगे कूल्हे मेरे सामने आ gaye)Didi आपका मान है न?
गायत्री : है शिव, मेरा बहोत मान है, तू ज्यादा सोच मात, दाल दे. (मेने छूट को सहलाया तो वो पहले से गीली थी, मेरे छूने से वो सिसकने lagi)Shhhhhh शह्ह्ह्ह शहहहहह.
शिव : कब से कड़ी थी आप?
गायत्री : थोड़ी देर हुई, जब में पेशाब कर के लौट रही थी तो आवाजे सुनाई दी थी. आवाजे सुन कर में भी गरम हो गयी हु शिव, शठ अब जल्दी दाल दे (मेने लुंड सेट किआ और अंदर डालने laga)Shhhhhh (वो अपनी टंगे और फैलते हुए झुकने लगी ताकि लुंड अंदर चला जाये, वो अपनी कमर हिलके लुंड को रास्ता दे रही थी, लुंड पूरा छूट में चला gaya)Shhhhh अह्हह्ह्ह्ह (अपनी आंखे बंद करते hue)Ab सुकून मिला शह्ह्ह्ह, तेरा जब भी मान करे मुझे बोल्दिया कर शिव, में कभी मन नहीं करुँगी, मुझे भी तेरे साथ ये सब करना बहोत अच्छा लगता है, शह्ह्ह्ह. (में धक्के लगाने लगा, पहले से में रेडी था तो में जल्दी जल्दी धक्के लगाने laga)Shhhh अह्ह्ह्ह शह्ह्ह्ह आअह्ह्ह सीईव शहहह है ऐसे hi शहहह ऐसे hi शहहहहह छोड़ ले मुझे शिव शहहह अह्ह्ह्हह मुझे बहोत अच्छा लग रहा है शठ ाः ऐसे hi शह्ह्ह्ह हआ ऐसे hi. (में दे दाना दान धक्के लगा रहा था, उनके कूल्हे थिरक रहे थे, छूट पूरी तहा फैली हुई थी, और गांड का छेड़ खुल बंद हो रहा था, में कूल्हे सहलाते और दबाते हुए उन्हें छोड़ रहा था, में तेज तेज धक्के लगा रहा था, वो लगातार सिसक रही thi)Shhhh ऐसे hi शिव शहहह अह्ह्ह ऐसे hi अह्ह्ह जब भी तेरा मान करे मुझे बुला लिया कर शहहह ाः मुमीइ शहहह अह्ह्ह्ह आईईईई अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह (में इतनी तेज धक्के लगा रहा था की वो सेह न पायी और थोड़ी hi देर में झड़ने lagi)Me गईई शहहह में गयी शीइइइइव शह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह. (वो झटके खाने लगी, और आगे खिसक गयी तो मेरा लुंड बहार निकल आया, मेरा लुंड से उनकी छूट का रास टपक रहा था, तभी मुझे दरवाजे पर किसी की होने का एहसास हुआ तो मेने दरवाजा खोला, सरिता दीदी कड़ी थी, अचानक दरवाजा खोने से वो गभरा गयी, मेने देखा की वो आपै छूट को सेहला रही थी, वो पलट कर जाने लगी तो मेने उनकी बाह पकड़ी और उन्हें अंदर खिंच लिया और दरवाजा बंद कर दिया. (गायत्री अपने कूल्हे उठाये कड़ी थी, जैसे hi उसकी नज़र सरिता पर पड़ी वो सीधी हो गयी और दूसरी और देखने lagi)(Pata नहीं आज क्या हो रहा था, पर अब में थोड़ा खुल चूका था, सरिता दीदी बहार कड़ी थी मतलब उन्हें पता था की अंदर क्या हो रहा है, गायत्री दीदी को भी पता था की मेरे साथ अंदर लतादिदी थी. तो अब छुपाने को वैसे भी कुछ नहीं था)
शिव : दीदी, कुर्शी पकड़ कर झुक जाओ. (सरिता ने हिचकिचाते हुए गायत्री की और देखा, वो भी शर्मा रही थी, वैसे भी सरिता को सब पता था, उसने शिव को देखा जिसका लुंड खड़ा हुआ था, वो शिव के लिए कुछ भी कर शक्ति थी, उसने अपने पेटीकोट को ऊपर उठाया और अपनी पंतय निकल दी और अपना पेटीकोट अपनी कमर पर चढ़ाते हुए झुक gayi)(Mene लुंड उनकी छूट पर रगड़ते हुए puchha)Aap तैयार हो दीदी? (सरिता ने है में इस्सर किआ, आज वो पहली बार किसी और के सामने छुड़वाने जा रही थी, पर ये बात उसकी उत्तेजना बढ़ा रही थी, वो थोड़ी और झुक गयी और अपनी छूट को शिव के सामने खोल diya)(Mene लुंड को छूट पर रगड़ा, वो भी गीली hi थी, मेने लुंड छे पर लगया और हलके धक्के के साथ अंदर दाल दिया, वो सिसकी, लुंड अंदर उतरता चला गया, जब लुंड पूरा अंदर चला गया तो में धक्के लगाने लगा, मेने देखा तो सरिता दीदी मेरे लुंड का आनंद लेते हुए अपनी आंखे बंद किये सिसकते हुए छुड़वा रही थी, मेने गायत्रीदिदी को देखा तो वो अभी भी दूसरी और देखते हुए कड़ी थी, पर वो थोड़ी थोड़ी देर में पलट कर तिरछी नजरो से देख रही थी. ये सब मुझे भी अजीब लग रहा था पर इस से मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही thi)Gayatri दीदी (उन्होंने मेरी और देखा, दूसरी कुर्शी की और इस्सर कर ke)Yaha झुक जाइये. (वो हिचकिचाते हुए मुझे देखने लगी, वो थोड़ी देर ऐसे hi कड़ी रही, में लगातार सरितादिदी को छोड़ रहा tha,)(Gayatri को एक और शर्म आ रही थी दूसरी और सरिता को छुड़वाते देख उसकी छूट से पानी टपक रहा था, वो पहली बार ऐसे किसी लड़की को छुड़वाते हुए देख रही थी, वो सोचने लगी की जब वो चुदवाती होगी तो भी ऐसी hi लगती होगी, शिव का बड़ा लुंड उसे दिख रहा था, जिस तरह शिव अपनी कमर हिला रहा था वो उसको और उत्तेजित कर रहा था, सरिता को सिसकते देख उसकी छूट से पानी की धार निकल कर निचे गिरने लगी, एक लड़का एक लड़की को कैसे छोड़ रहा था वो उसके लिए उत्तेजना की पराकाष्ठा थी)( मुझे लगाने लगा की में कुछ ज्यादा hi कर रहा हु, वो हिचकिचा रही थी तो मेने kaha)Didi, अगर आपको जाना है तो आप जाइये. (गायत्री कभी शिव को देख रही थी तो कभी सरिता को, सरिता अपनी आंखे बंद किये हुए चुदाई का मज़ा ले रही थी, धक्को के साथ वो हिल रही थी और उसकी सिस्किअ उसकी आग को भड़का रही थी, सरिता के चेरे पर जो संतुस्ती थी वो उसे साफ़ दिख रही थी, उसे वो बड़ा लुंड कैसे मज़ा दे रहा था वो उसे महसूस कर रही थी, वो भी यहाँ से नहीं जाना चाहती थी पर उसे शर्म भी आ रही थी, उसने फहले कभी ऐसा नहीं किआ था, वो कभी किसी के सामने नहीं छुड़वाई थी, और जिनसे वो चुदवाती थी वो सब तो अनजान होते थे, सरिता तो जनि पहचानी थी, पर वो मज़े से शिव से छुड़वा रही थी, वो भी इस मज़े को खोना नहीं चाहती थी, वो नज़ारे झुकाये मुड़ी और वह रक्खी कुर्शी पर अपने हाथ झुकाये झुक गयी, उसे इतनी शर्म आ रही थी की उसने अपना मुद दूसरी तरफ कर लिया tha.)Didi अपनी कमीज उठाइये (अगर में चाहता तो उठा सकता था, क्यों की वो मेरी बायीं और hi थी, पर में चाहता था की वो अपनी मर्जी से उठाये, और उन्होंने अपना कमीज उठा दिया और अपने नंगे कूल्हे मेरे सामने परोस दिए. में सरिता दीदी को छोड़ रहा था, मेने गायत्री दीदी के लुल्हे सहलाये, ये सब मेरी कल्पना से भी बहार था, पता नहीं आज ये में कैसे कर गया था, एक और सरिता दीदी मेरे लुंड से चुद रही थी और दूसरी और गायत्री दीदी अपनी छूट मेरे सामने किये कड़ी थी, मेने उनके कूल्हे सहलाते हुए एक ऊँगली उनकी छूट में दाल दी. वो थोड़ी और झुक गयी, में उनकी गरम गरम छूट में ऊँगली अंदर बहार करने लगा, वो भी सिसकने lagi.)(Sarita ने जब इतना नजदीक सिसकी सुनी तो उसने आंखे खोल कर देखा तो गायत्री उसी की तरह झुकी हुई थी और शिव उसकी छूट में ऊँगली अंदर बहार कर रहा था, गायत्री उसी समय उसकी और देखा, जैसे hi उसकी नजर गायत्री से टकराई, शर्म के मरे दोनों ने अपनी नज़ारे घुमा ली, दोनों शर्मा रही थी, पर दोनों की सिस्किअ लगातार चल रही thi)(Mene सरिता दीदी की छूट से लुंड निकला तो दीदी ने मेरी और देखा, उन्हें मेरा लुंड निकलना अच्छा नहीं लगा था, मेने गायत्री दीदी की छूट से ऊँगली निकली तो उन्होंने भी मेरी और देखा)
शिव : दीदी, आप लोग अपनी जगह बदल लो. (वैसे भी में बाये हाथ से hi कर शक्ति था, तो अगर गायत्री दीदी को छोड़ता तो सरिता दीदी ऐसे hi कड़ी रहती तो मेने उन्हें जगह बदलने को कहा था, उन दोनों ने एक दूसरे को देखा और फिर से अपनी नज़ारे झुका ली, में देख रहा था की वो दोनों शर्मा रही hai)Didi जल्दी करो न. (वो दोनों कड़ी हुई और अपनी नज़ारे झुकाये हुए अपनी अपनी जगह बदल ली, और फिर से झुक कर कड़ी हो गयी, मेने गायत्री दीदी की छूट में लुंड दाल दिया और सरितादिदी की छूट में ऊँगली, फिर से वो दोनों सिसकने लगी, डोडो लकीओ को छोड़ने से मेरी उत्तेजना बढ़ गयी थी लुंड पूरी तरह अकड़ गया था, ऐसे hi में थोड़ी थोड़ी देर में उन्हें बदल रहा था, अब वो एक दूसरे को देख रही थी पर बोल कुछ नहीं रही थी, थोड़ी देर में सरितादिदी झाड़ गयी, तो मेने लुंड गायत्रीदिदी की छूट में दाल दिया, मेरे धक्को से वो भी फिर से झाड़ गयी, पता नहीं साला मेरा क्यों नहीं हो रहा था)
सरिता दीदी : शिव, जल्दी, थोड़ी देर में सब जग जायेंगे.
शिव : पता नहीं दीदी इतनी उत्तेजना बढ़ गयी है फिर भी लुंड से पानी नहीं निकल रहा.
गायत्रीदिदी : (हिचकिचाते hue)Mere पीछे कर ले, जल्दी निकल जायेगा. (मेने उन्हें देखा तो वो शर्मा गयी, में मुस्कुराया)
सरितादिदी : मुझे भी पीछे से कर शक्ति है, मेने तो कब से बोलै है तुजे.
शिव : आपने कभी करवाया नहीं है तो बाद में दीदी, में गायत्री दीदी के साथ में ये कर चूका हु तो उन्हें ज्यादा तकलीफ नहीं होगी.
सरितादिदी : (मायूसी se)Mene तुजे कितनी बार बोलै पर तू ने hi नहीं किआ.
गायत्री : अग़लिबर करवालेना, अभी टाइम नहीं hai(Pehli बार गायत्रीदिदी ने सरितादिदी से सीधे बात की थी, एक बार के लिए तो वो दोनों hi शर्मायी, फिर मुस्कुराने लगी, मेने ढेर सारा थूक लिया और लुंड पर लगाया)
शिव : सरितादिदी, आप अपना थूक गायत्रीदिदी के गांड के छेड़ पर लगा दो न. (दोनों ने एक दूसरे को देखा, फिर वो मुस्कुरायी, सरिता दीदी ने अपने मुँह में थूक इकठ्ठा किआ और गांड के छेड़ पर डाला, और अपनी ऊँगली से छेड़ पर फैलाया) ऊँगली अंदर डालो दीदी.
सरितादिदी : मरूंगी में तुजे, पता नहीं कैसे कैसे काम करवा रहा है, पता है कितनी शर्म आ रही है मुझे.
गायत्री : और नहीं तो क्या, दोनों को एक साथ रूम में ले आया, जरा भी शर्म नहीं है इसमें.
शिव : अच्छा, जरा अपने अपने चेहरे देखो, कैसे उत्तेजना से चमक रहे है, अगर इतनी hi शर्म आ रही थी तो चली जाती.
गायत्री : कैसे चली जाती, अगर तू नाराज हो जाता तो, न बाबा, में ऐसा रिस्क नहीं ले शक्ति, तेरे बगैर तो अब चैन hi नहीं है.
सरिता : (गायत्री के गांड के छे में वो ऊँगली दाल रही थी और थूक से उसे गिला बना रही थी, एक अजीब तरह की उत्तेजना से वो कैंप रही थी, एक लड़की को वो छुड़वाने के लिए तैयार कर रही थी, गरम गांड का वो छेड़ उसकी ऊँगली पर भी अपना असर दिखा रहा था, ऊँगली अंदर बहार करते हुए उसने kaha)Uske बगैर की उसके लुंड के बगैर.
गायत्री : लुंड तो सबके पास होता है सरिता, पर शिव जैसा हर कोई नहीं होता, लुंड छोटा हो या बड़ा, औरत को मज़ा मर्द के प्यार से आता है, झालील हो कर छुड़वाने में कोई मज़ा नहीं. (मेने लुंड गायत्री दीदी की गांड पर लगाया, वो थोड़ा और झुक गयी, मेने जोर लगाया तो गांड के छेड़ को फैलाये लुंड अंदर उतर gaya.)Ahhhhhhhh. (मेने देखा की सरिता दीदी बड़े ध्यान से देख रही थी, मेने लुंड अंदर जाने दिया और फिर बहार nikala)(Sarita उत्तेजना से कैंप रही थी, इतनी नजदीक से वो किसी लड़की की गांड में घुस रहे लुंड को देख रही थी, गांड इतनी फ़ैल गयी थी की उसके ऊपर लाल लाल लकीरे भी उभर आयी थी, छेद इतना फ़ैल गया था की उसे लगा अगर और ज्यादा फैलेगा तो फैट जायेगा. उसकी गांड में अंदर हो रहे लुंड को वो आश्चर्य से देख रही थी)
शिव : (सरितादिदी se)Lund पर थूक लगाओ दीदी. (उन्होंने मेरी और देखा, फिर वो मुस्कुरायी और अपने हाथ में थूक ले कर लुंड पर लगा दिया, मेने फिर से लुंड अंदर डाला, दो तीन बार ऐसा करने से लुंड अच्छे से गांड में अंदर बहार होने laga,Gayatrididi मज़े से सिस्किअ भरने लगी)
सरितादिदी

उसने देखा की गायत्री की गांड में लुंड आराम से अंदर बहार हो रहा है, वो जिस तरह से सिसक रही थी, यक़ीनन उसे मज़ा आ रहा होगा, वो शिव से चुदवाती थी पर इतनी नज़दीक से उसने चुदाई देखि नहीं थी, गायत्रीदिदी se)Waha भी मज़ा आता है????
गायत्री : हआ, शहहह बहोत मज़ा आता है शहहहहह अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह.
सरितादिदी : (गायत्री को मज़े में देख दीदी ने मुझे puchha)Muje कब वह करेगा शिव, मुझे भी वह करवाना है.
शिव : जल्दी hi करेंगे दीदी, अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्हह. (में लगातार धक्के लगा रहा था, सरिता दीदी हम दोनों को देख रही थी, मेने उन्हें मेरी और खिंचा और उन्हें किश करने लगा, वो भी मुझे किश करने लगी, में लगातार दीदी की गांड मर रहा था, गांड में घरसँ ज्यादा मिल रहा था और साथमे गांड मरने की एक अलग उत्तेजना थी, थोड़ी देर में hi चरम पर पहुंचने लगा, मेने दीदी की कमर पकड़ कर जोर जोर से धक्के लगाने लगा, (सरिता ये सब बड़े ध्यान से देख रही थी, साथ में वो अपनी चूतमे ऊँगली भी करने लगी, ऐसा कामुक दृश्य उसके लिए किसी सपने से काम नहीं था, वो बड़ा मुसल जैसा लुंड कैसे एक लड़की की गांड फाड़ रहा था, उसकी सिसकी उसे और उत्तेजित कर रही thi)(Latatar धक्को से ाखि मेरा स्खलन हो गया, मेने अपना पूरा वीर्य गायत्री दीदी की गांड में भर दिया, उनके पेअर कैंप रहे थे, वो कड़ी न रह पायी, वो घोड़ी बने hi जमीं पर बेथ गयी, उनकी गांड के छेड़ से वीर्य बहार बहने लगा, सरितादिदी ने मेरा लुंड अपने पेटीकोट से पोछा और उसे चाटने लगी, गायत्री की गांड चुदाई से वो उत्तेजित हो गयी thi.)Didi, अभी टाइम नहीं है.
सरितादिदी : शिव, थोड़ा छोड़ ले न मुझे, बस थोड़ी देर.
गायत्री : उसे जाने दे, उसे स्कूल के लिए देर हो जाएगी, तू मेरे साथ बाथरूम चल, में तुजे ठंडा करती हु.
में मुस्कुराया, उन्दोनो का एक नया रिस्ता बन गया था, में बहार निकला, अभी सब सोये हुए hi थे, में रूम में गया तो दीदी वापस सो गयी थी, सायद थकन से उन्हें नींद आ गयी थी. मेने कपडे लिए और में बाथरूम की और चला गया, मुझे दूसरे बाथरूम से सरितादिदी की सिस्किअ सुनाई दे रही थी, मेरा लुंड फिर से खड़ा होने लगा पर टाइम था नहीं. बाथरूम में जा कर मुझे एहसास हुआ की में खुद से नाहा नहीं सकता, तो मेने पेहसाब किआ और वापस चला गया. मेने दीदी को जगाया और कपडे पहनाने को कहा. उन्होंने नहाये का पूछा तो मेने कहा आ कर नहाऊंगा, क्यों की आप को नहलाना पड़ेगा, वो मुस्कुरायी, और मुझे कपडे पहनाने लगी. जब में और दीदी बहार आये तो, सब जाग गए थे और सरितादिदी और गायत्रीदिदी हस्ते हुए बाते कर रही थी और काम कर रही थी. तभी मेरे फ़ोन पर फ़ोन आया, मेने देखा तो ये जूही का था.
शिव : Hello.
जूही : है, सुनो, तुम स्कूल जानेवाले हो?
शिव : है.
जूही : तो मेरा इंतजार करना, में तुम्हे छोड़ने आउंगी. आज पवनसीर ने गयम बंद रक्खा है, तो में फ्री hi हु.
शिव : ठीक है. (मेने गायत्रीदिदी को भी बता दिया तो वो भी खुस हो गयी, वैसे भी गांड मरवाने के बाद उन्हें भी आराम की जरुरत थी)
जब जूही मुझे स्कूल छोड़न जा रही थी तो मेने देखा की संयम और नाज़िआ दीदी खड़े है, मेने जूही को स्कूटर रोकने को कहा. मुझे देख कर वो दोनों खुस हो गयी.
नाज़िआदिदी : तुम स्कूल जा रहे हो? तुम ठीक तो हो न?
शिव : है दीदी में ठीक हु.
संयम : अच्छा हुआ तुम आ रहे हो, आज मार्क्स देनेवाले है.
शिव : है मुझे याद है. (तभी वैस्वी आ गयी, उसने मुझे देखा, पर जैसे hi जूही पर नज्ज़ार पड़ी उसने नज़र फेर ली, वो संयम को ले कर निकल गयी, मेने भी नाज़िआदिदी को बी कहा और निकल गए)
पहले टेस्ट के रिजल्ट आज आनेवाले थे, महेश और हर्ष दर रहे थे, मुझे कोई चिंता नहीं थी, क्यों की में फ़ैल तो होनेवाला था नहीं, पर वैस्वी बहोत ज्यादा टेंशन में लग रही थी. मुझे उसकी बात याद आयी, वो मेरी आगे निकलना चाहती थी, और मुझे यकीं था की इस बार ऐसा होगा भी, क्यों की खेल की वजह से में स्टडी में इतना ध्यान नहीं दे पाया था, पर मेरे पेपर तो अच्छे hi गए थे. मेरे मान में उस से ऊपर आने की कोई चिंता नहीं थी क्यों की अगर मेरे मार्क उस से काम भी आये तो भी.