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कमली और सुपरिवीज़र, नहीं बन रही सोसाइटी के बने हुए मॉडल घर में थे, ये सब सुरु हुआ था कुछ महीनो पहले. कमली के बाप को जुआ खेलने की लत लग चुकी थी, कई बार वो जित भी जाता था पर ज्यादातर वो हारता hi था, सुपरवाइजर को ये बात पता थी, की अक्सर कमली के बाप को पैसो की जरुरत पड़ती रहती है, तो उसे ये कमली को भोगने का रास्ता नजर आनेलगा था, एक बार कमली के साथ सेटिंग हो गयी तो भोली और झुमरी के साथ भी सेटिंग हो जनि थी. उसने सुरु में थोड़े थोड़े पैसे दिए, दो सौ पैसो से सुरु होते होते बात दस हजार तक पहुंच गयी, उसने पैसो पर व्याज लगाना सुरु कर दिया, दस ताका व्याज लगते हुए पैसे बढ़ने लगे, उसने पैसे उधर लिए है ऐसा प्रामिसरी नोट भी तैयार करवाके उसका अंगूठा ले लिया ताकि वो मुकरे न. वो ठहरा जुआरी, कहासे पैसे लौटता, धीरे धीरे पैसे पंद्रह हजार हो गए. अब सुपरवाइजर को लगने लगा की ये hi सही मौका है. एक दिन उसने कमली के सामने उसके बाप को पैसे लौटने को कहा, एक साथ पंद्रह हजार वो नहीं लौटा सकते थे, ऊपर से हर महीने पंद्रहसौ ब्याज चढ़ रहा था, एक दो बार कमली के सामने उसने उसके बाप को झालील किआ, और किसी भी तरह ब्याज चुकाने को कहा. वैसे बाप बेटी मिलकर पंद्रह हजार रुपया कमलते थे, पर उसका बाप अपने सरे पैसे जुए और शराब में उदा देता था, तो बचते थे सिर्फ कमली के पैसे, उसी में घर चलना होता रहता था, उसमे से अगर पंद्रह सो रुपए सुपरवाइजर को दे दिए जाये तो घर चलना मुश्किल था, फिर भी कैसे भी करके एक दो महीने तो उन्होंने दिए, पर फिर नहीं दे परहे थे, पिछले महीने उसकी माँ बीमार पद गयी थी तो उसी के इलाज में भी पैसे लग गए थे, जब उसने इस महीने पैसे देने से मन किआ तो सुपरवाइजर की आंखे चमक उठी, ब्याज के बदले में उसने कमली को हमबिस्तर होने को कहा, वैसे भी कमली उसके इरादे पहले से जानती थी, उसके बाप को वो पैसे किस लिए दे रहा है ये भी वो जानती थी. पर उसने मन कर दिया तो सुपरवाइजर ने वो कागज दिखते हुए पुरे पैसे एक साथ मांगे, और अगर न दिए तो पैसे न लौटने पर जेल भेजने की धमकी दी. कमली को इतना गुस्सा आया की उसने अपने बाप को hi सबके सामने मारा और वो रट हुए मार खता रहा, आखिर कर कमली ने हथियार दाल दिए और सुपरवाइजर की बात मन ने को तैयार हो गयी.
झुमरी और भोली ने भी पैसे देने को कहा और दूसरे लोगोने भी कहा, पर ये एक बार का तो था नहीं, और कमली बहोत ज्यादा गुस्से में थी, ये गुस्सा अपने बाप पर था, उसी की वजह से वो इस दसा में पहुंच गयी थी, इसलिए वो सुपरवाइजर के साथ उस रूम में पहुंच गयी थी. सुपरवाइजर ने दरवाजा बंद किआ और कमली की और जाते हुए.
सुपरवाइजर : शह्ह्ह्हह्ह, क्या कमल का बदन है ऋ तेरा, कितना तड़पाया है तूने, तेरी मटकती गांड देख कर तो हर समय लुंड खड़ा हो जाता था, आज पूरी कसार निकलूंगा. (वो कमली के चक्कर लगते हुए उसे हवसी नजरो से ददख रहा था, कमली अपनी नज़ारे झुकाये अपनी किस्मत को गालिया दे रही थी. थोड़ी देर देखने के बाद वो उसके कूल्हों को सहलाते हुए उसकी सख्ताई को जांचने laga)Shhhhh क्या कड़क कूल्हे है तेरे, (वो उसे दबाते हुए उसे महसूस कर रहा था, थोड़ी देर सहलाने के बाद उसने कमली को पलंग के सहारे घोड़ी बना दिया और उसका घाघरा ऊपर उठा दिया, निचे एक सस्ती से कच्छी पहनी हुई थी, जिस पर दो तीन तो छेड़ the)Are मेरी रानी, क्या फटेहाल जिंदगी जी रही है, में हु न, मेरे से नाता बनाये रक्खेगी तो फ़ायदेमए रहेगी, चल कल hi तेरे लिए नयी कच्छी ले आता हु, वैसे भी अगर नहीं भी पहनेगी तो चलेगा पर कच्ची में कमल लगती है, तो पक्का कल ले आऊंगा. (उसने कूल्हों से कच्छी सरकायी और उसके सामने कमली की गांड आ gayi)Shhhhhhh तेरे कूल्हे देख कर hi मेरा तो लुंड कड़ा हो गया, क्या कमल की है तू कमली, बाल वाल साफ़ नहीं करती क्या, कोई बात नहीं अब में हु न, सब करवाडुंगा. (वो उसके कूल्हे फैला कर छूट और गान के छेड़ को देखने लगा, वह कोई गीलापन नहीं था जो दर्शाता था की कमली बिना मान के ये सब कर रही है, पर उसे कोई फर्क नहीं पड़नेवाला था, वैसे भी मान हो की न हो छूट में लुंड जाते hi अपने आप पानी छोड़ने लगती है.) तेरी छूट देख कर तो अब रहा नहीं जाता, चल मेरा लुंड चूस फिर तेरी छूट बजाते है (वो पलंग पर बेथ गया और अपना पंत निकल दिया, कमली कड़ी रही, तो उसने उसका हाथ पकड़ कर खिंचा और अपने लुंड के पास धकेल के बिठा diya)Chal चूस मेरी रानी, देख कैसे तुजे देख कर कड़क हो गया है. (कमली ने मुँह फेर लिया, तो सुपरवाइजर अपने लुंड को उसके होठो के पास ले गया, और उसके होठो पर अपना लुंड लगाने की कोशिस करने लगा पर कमली अपना मुँह इधर उधर घुमा देती थी, सुपरवाइजर को गुस्सा आ रहा था, उसने दोनों और से कमली के बाल पकड़े और मुँह को सीधा पकड़े रक्खा और अपना लुंड उसके होठो पर लगाया पर कमली ने अपने अपना मुँह कास के बंद कर दिया, सुपरवाइजर को और गुस्सा आ रहा था, उसने धक्के से उसका शिर छोड़ा और उसके बाल पकड़ कर उसे खड़ा किआ और बीएड पर धकेला) तू ऐसे नहीं मानेगी, पहले तेरी छूट बजता हु. (उसने फिर से कमली का घाघरा ऊपर करदिया, वो निचे से नंगी थी, न वो कुछ बोल रही थी न उसकी और देख रही थी, उसकी आँखों में भी आंसू उतर आये थे, वो अपनी मजबूरी पर रो रही थी, सुपरविसोर ने उसकी टंगे फैलाई और उसके पैरो के बिच बेथ गया और अपने लुंड पर थूक लगाने लगा, गुस्से और जबरदस्ती करने के चाकर में लुंड थोड़ा ढीला पद गया था, पर फिर भी उसने अपनी पोसिटिव ली)
अभी उसने पोसिसिओं ली hi थी की दरवाजा खुल गया, जल्दी जल्दी और बेफिकरी में उसने दरवाजा अंदर से बंद नहीं किआ था, दरवाजे पर शिव को खड़े देख कर वो चौंक गया.
सुपरवाइजर : ोये, तू यहाँ क्या कर रहा है? (शिव वही खड़ा tha)Chal निकल यहाँ से, जा अपना काम कर.
शिव : (गुर्राते hue)Chhod उसे, और तू निकल यहाँ से. (मेने देखा की कमली निचे से नंगी थी और उसकी छूट साफ़ दिख रही थी, छूट पर लगे बालो से घिरी छूट साफ़ साफ़ दिख रही थी, उसने भी देखा की मेरी नजर उसकी छूट पर है तो उसने फ़ौरन अपनी घाघरा निचे किआ और छूट को धक् दिया)
सुपरवाइजर : इन सब से तेरा कोई लेने देना नहीं है, तू निकल यहाँ से, और अगर तुजे भी छोड़ना है तो बाद में छोड़ लेना, पहले तो में hi छोडूंगा. (में उसके नज़दीक गया और उसका गिरेबान पकड़ कर उसेपीछे खिंचा तो वो बीएड से उतर गया और खड़ा हो गया, उसका पंत अभी भी निचे था और उसका लुंड निचे लटक रहा था, उसका लुंड सिदद रहा था और ढीला पद गया था, शायद मेरी वजह से) छोड़ मेरा गिरे बन (उसने मेरा हाथ झटकना चाहा पर मेने मजबूती से पकड़ा था) छोड़ मुझे, ये हमारा हिसाब किताब है, तू अपना काम कर. वो अपनी मर्जी से मुझसे छुड़वाने आयी है.
शिव : (मेने कमली को देखा तो उसकी आँखों में उदासी थी और आंखे भी भरी हुई थी, मुझे नहीं पता था की उनका क्या माजरा है पर इतना तो समाज सकता था की वो मजबूरी में है) ये सब मुझे समाज आता है, मेने कहा न निकल यहाँ से, वर्ण अच्छा नहीं होगा.
सुपरवाइजर : इसके बाप ने मुझसे पैसे लिए थे और वो चूका नहीं रहा है, इसीलिए ये मेरे निचे है, (कमली se)Kamali इससे बोल जाये यहाँ से वर्ण तेरे बाप के लिए अच्छा नहीं होगा.
शिव : अगर इसके बाप से तेरा हिसाब है तो जा उसको छोड़, और जो करना है उसके साथ कर, उसके बाप का सहारा ले कर इसके साथ जबरदस्ती करने का तुजे कोई हक़ नहीं, चल अब निकल यहाँ से वर्ण तेरी खैर नहीं.
सुपरवाइजर : (एक लड़की के सामने अपनी बेइज्जती से वो थोड़ा टैक्स में आ गया, और अपना हाथ पीछे करके मेरे हाथ से अपना गिरेबान छुड़ाने की कोशिस करते हुए मेरी और घूमने लगा, वो गिरेबान छुड़ा नहीं पर रहा था तो उसने मेरे पर हाथ उठाया, में तैयार था, मेने उसका हाथ पकड़ा, और उसे गिरेबान से अपना हाथ हटा कर उसको एक चांटा मारा, चांटा पड़ते hi वो और गुस्सा हो गया और मुझे मरने के लिए बढ़ा तो मेने फिर से एक चांटा मारा) मुझे मरता है, देख में तेरा क्या हल करता हु (वो फिर मुझे मरने की कोशिस करने लगा, में हर बार उसे चांटा मर रहा था, तीन चार छंतो से उसका चेहरा लाल हो गया, उसे समाज आ गया की वो मुझसे लड़ नहीं सकता तो वो मुझे धमकिए देने लगा) में तुजे नौकरी से निकलवा दूंगा, सेल तूने मुझपर हाथ उठाया, देख अब में तेरा क्या हाल करवट हु.
शिव : निकल जा यहाँ से वर्ण नंगा करके बहार निकल दूंगा. (मेरे ऐसा कहते hi उसको अपनी स्थिति का बहन हुआ और उसने अपना पंत ऊपर चढ़ा लिया और बहार निकल गया, जाते जाते भी वो धमकिए दे रहा था)
सुपरवाइजर : अब में इसके बाप को जेल भिजवाऊंगा, और तुजे नौकरी से निकलवा दूंगा, सेल तूने मुज पर हाथ उठाया है. (बाद बढ़ाते ते हुए वो दरवाजा खोल कर बहार निकल गया, जैसे hi दरवाजा खुला मेने देख की सब लोग वह खड़े थे, तो में भी बहार निकल गया, भोली और झुमरी अंदर चली गयी. में कमली के बाप को पहचानता था तो मेने उसे भी डांटा और अपनी बेटी को ऐसे आगे करने के लिए खूब खरी खोटी सुनाई, वो अपना शिर झुकाये सब सुन रहा था)
सुपरवाइजर वह से निकला और उसने प्रकाशराओ को फ़ोन लगाया.
सुपरवाइजर : सर, पवनसीर के आदमी ने मुझे मारा.
प्रकाशराओ : किसने?
सुपरवाइजर : शिव ने?
प्रकाशराओ : (शिर का नाम सुनते hi उनके कान खड़े हो गए, उनको पता था की यही वो सख्स है जो उसके आड़े आ रहा है) हुआ क्या था?
सुपरवाइजर : कुछ नहीं सर, एक लड़की है, कमली, वो काम नहीं कर रही थी, तो मेने उसे डांटा, की काम करो, मुफ्त की पगार नहीं मिलेगी, पर वो शिव की चाहती है, पूरा दिन वो शिव के आगे पीछे घूमती रहती है, तो उसकी वजह से शिव ने मुझपर हाथ उठाया.
प्रकाशराओ : उसकी इतनी हिम्मत, में अभी पवन से बात करता हु, मेरे आदमी पर हाथ उठता है.
(सुपरवाइजर मान hi मान खुस हो रहा था, फिर वो पुलिस स्टेशन की और निकल गया, कमली के बाप के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाने)( आधे घंटे बाद मुझे पवनसीर का फ़ोन आया)
पवनसीर : क्या हुआ शिव, तूने सुपरवाइजर को मारा है?
शिव : सर, वो एक लड़की की इज्जत से खेल रहा था, तो मेने उसे रोका तो वो मुझे मरने लगा तो मेने भी उसे मारा.
पवनसीर : कोनसी लड़की?
शिव : कमली.
पवनसीर : पर प्रकाशराओ जी तो बता रहे थे की कोई लड़की काम नहीं कर रही थी और सुपरविसोर उसे दन्त रहा था, और वो तुम्हारी चाहती है इस्सलिये तुमने उसे मारा.
शिव : वो झूठ बोल रहा है. यहाँ सबने ये देखा है, आप किसी से भी पूछ शक्ति है.
पवनसीर : ठीक है, में प्रकाशरोजी से बात करता हु.
शिव : (थोड़ी देर बाद भोली मेरे पास आयी) ये माज़रा क्या है? (उसने मुझे सब बता दिया, की पैसो की वजह से ये सब हुआ था, अभी हम बात कर hi रहे थे की मुझे भार्गवी मैडम का फ़ोन aaya)Hello.
भार्गवी : तुमने किसी को मारा है क्या?
शिव : आप को कैसे पता चला?
भार्गवी : यहाँ एक आदमी कम्प्लेन करने आया है, वो कह रहा है की उसने किसी को पैसे उधर दिए थे, और जब वो अपने पैसे वापस मांग रहा था तो उस आदमीने पैसे देने से इंकार कर दिया और शिव नाम के लड़के से पिटवाया.
शिव : वो झूठ बोल रहा है मैडम, वो एक लड़की का गलत फायदा उठा रहा था, वो जिसकी बात कर रहा है वो इस लड़की का बाप है, उसने पैसे दिए थे और उसके बदले वो उस लड़की का गलत फायदा उठाने की कोशिस कर रहा था इसीलिए मेने उसे मारा है, और वो भी तब जब उसने मुज पर हाथ उठाया.
भार्गवी : ओह, ये बात है, तुम उस लड़की और उसके बाप को ले कर पुलिस स्टेशन आ जाओ.
और गवाही के लिए एक दो और लोगो को भी ले आओ.
शिव : ठीक है मैडम. (मेने जब कमली और उसके बाप को बताया तो वो दोनों दर गए, मेने जब उन्हें कहा की वो इंस्पेक्टर मेरी पहचान में है तब जा कर वो लोग मने, मेने झुमरी और भोली को भी साथ ले लिया.)
जब हम पुलिस स्टेशन पहुचेतो हमे देख कर सुपरवाइजर भार्गवी मैडम से कहने लगा.
सुपरवाइजर : यही है मैडम, इसिने मुझे मारा है, गिरफ्तार कर लीजिये इससे, और इसने मुज से पैसे लिए है, जिसकी पर्ची में पहले hi आपको दे चूका हु.
भार्गवी : पर ये लड़की तो तुम्हारे खिलाफ कम्प्लेन लिखवाने आयी है, की तुमने इसकी इज्जत पर हाथ डालने की कोशिस की. (कमली ने मेरी और देखा तो मेने उसे चुप रहने का इस्सर किआ)
सुपरवाइजर : ये झूठ है मैडम, एक तो पैसे नहीं दे रहे और ऊपर से मुज पर झूठा इल्जाम लगा रहे है.
भार्गवी : शिव, ये तो कह रहा है की ये झूठ है, है कोई गवाह जो ये कह शेक की ये सच है? (मेने भोली और झुमरी को दिखा कर कहा की ये गवाही देगी, वो दोनों इस इंस्पेक्टर को पहचान गयी थी, उस डिम जब वो मुझसे मिलने आयी थी तो मैंने कहा था की वो मेरी पहचान में है, तो अब उनका दर ख़तम हो गया था)
भोली : है मैडम, में गवाही दूंगी, ये जूथ बोल रहा है.
सुपरवाइजर : नहीं मैडम, ये सब मिले हुए है, मुझे फ़साना चाहता है.
भार्गवी : (टेबल पर पड़ा डंडा लेते hue)Hamare पास और भी रस्ते है, कोण सच बोल रहा है और कोण जूथ, ये पता करने का. (डंडा देख कर सुपरवाइजर डरने लगा) तो एक केस ये बनता है की ये आदमी तुम्हारे पैसे नहीं दे रहा, और दूसरा ये की तुमने इस लड़की के साथ जबरदस्ती करने की कोशिस की. एक में ये अंदर जायेगा और दूसरे में तुम. और तुम तो बहोत लम्बे जाओगे. (सुपरवाइजर के पशीने छूट रहे थे)
सुपरवाइजर : आप मुझे डरा रही है, में अपने साहब से बात करना चाहता हु.
भार्गवी : कर लो.
सुपरवाइजर : (प्रकाशराओ को फ़ोन लगता hai)Sir, में पुलिस स्टेशन से बोल रहा हु, में यहाँ कम्प्लेन लिखवाने आया था पर ये लोग मुझे जूते केस में फंसा रहे है, आप मला सर से बात करके कुछ कीजिये.
प्रकाशराओ : अबे बेवकूफ, वह क्यों पहुंच गया तू, और मुझे पवन का भी फ़ोन आया था, तूने उस लकड़ी की िज्जल लूटने की कोशिस की? मुझे कुछ और बता रहा है और वह कुछ और हुआ है.
सुपरवाइजर : नहीं सर, में सच कह रहा हु, ये सब मुझे फंसा रहे है.
प्रकसराओ : मुझे चुटिया समाज रहा है, और वह मला का नाम ले रहा है, सेल गोली मर देगा वो तुम्हे, फ़ोन रख और जो खुद रायता फैला है उसे खुद hi chat.(Usne फ़ोन काट दिया, सुपरवाइजर पशीने से पूरा भीग गया था, वो अपनी बेवकूफी पर पछता रहा था, उसे लगा की मला और प्रकसराओ के दम पर वो कुछ भी कर शक्ति है, पर उसकी हवा निकल गयी थी)
भार्गवी : (वो उसकी हालत देख कर समाज गयी थी) तो भाई, आ रहे है तुम्हारे साहब और मला साहब. (वो भीगी बिल्ली की तरह मैडम को देखने laga)Teri हालत देख कर तो लग रहा है की कोई नहीं आनेवाला, तो भाई तू इनके खिलाफ कम्प्लेन कर और लड़की तू इसकेख़िलाफ.
सुपरवाइजर : मुझे कोई कम्प्लेन नहीं करनी, मुझे कोई पैसे नहीं चाहिए, मुझे छोड़ दीजिये.
कमली : शिव, मुझे भी कोई कम्प्लेन नहीं करनी, मुझे इन चक्करो में नहीं पड़ना है.
शिव : कुछ नहीं होगा, में देख लूंगा सब.
कमली : नहीं शिव, मुझे इन करत कचेरी से बहोत दर लगता है, मुझे कोई कम्प्लेन नहीं करनी.
भार्गवी : और भाई तू (कमली के बाप se)Jue में पैसे लगता है और अपनी बेटी को hi देव पर लगा दिया, कहा खेलता है जुआ? (उसका बाप कंपनी लगा)
क का बाप : मुझे माफ़ कर दीजिये, में फिर कभी ऐसा नहीं करूँगा.
भार्गवी : में तुजे िसलयक छोडूंगी भी नहीं, कहा जुआ खेलता है उसकी पूरी जानकारी लिखवा, न रहेगा अड्डा न खेलेगा जुआ.
कमली बहोत दर रही थी तो उसने बहोत समजने पर भी कम्प्लेन नहीं की, मैडम ने भी बहोत कहा पर वो न मणि. तो मजबूरन उन्हें सुपरवाइजर को छोड़ना पड़ा, उन्होंने पैसो की वो पर्ची भी फाड़ दी, और उसके बाप से सब जानकारी लेने के बाद उसे भी वार्निंग दे दी. सब चले गए, में और मैडम hi बचे थे.
भार्गवी : मुझे लगता है अब तेरी कम्प्लेन करनी पड़ेगी.
शिव : ऐसा क्यों कह रही है आप.
भार्गवी : हर जगह तू अपनी तंग घुसता रहता है, क्या जरुरत थी तुजे इन सब में पड़ने की.
शिव : मैडम में किसी मामले में तंग नहीं डाटा, मामला खुद बा खुद मेरी तंग में आ के फंस जाता है, अब में क्या कर शक्ति हु. (हम दोनों हसने लगे, थोड़ी देर उनसे बात करने के बाद में वह से निकल गया, वो दिन फिर में साइट पर नहीं गया, वैसे भी मेरा स्टेडियम जाने का समय हो गया था) शाम को को मुझे काव्य मैडम का फ़ोन आया तो में उनसे मिलने चला गया. उन्होंने ऐसे hi बुलाया था, थोड़ी देर उनसे गैप सैप कर के में वापस घर आ गया.
दूसरे दिन जब में साइट पर गया तो पता चला की सुपरवाइजर आज आया hi नहीं था. मेने पवनसीर को बताया तो उन्होंने कहा की वो दूसरे किसी सुपरवाइजर को धुंध रहे है, तब तक हमे hi संभालना पड़ेगा. एक दो दिन में दूसरा सुपरवाइजर आ जायेगा. कमली मुझसे नज़ारे नै मिला रही थी, न hi बात कर रही थी. भोली बार बार मेरे पास आ जाती थी और मुझे छेड़ रही थी. में समाज रहा था की उसे क्या चाहिए. पर मेने अभी ज्यादा ध्यान न देना hi उचित समजा.
दो दिन बाद दूसरा सुपरवाइजर भी आ गया, ये शांत और अपने काम में अच्छा था, और इससे पवनसीर ने hi रखवाया था. एक शाम को मुझे मनीषा मैडम का फ़ोन आया और मुझे मिलने को बुलाया.
शिव : कहिये मैडम.
मनीषा : कल हमें एक पार्टी में जाना है. सूर्य है नहीं, और मुझे अकेले नहीं जाना. तो तुम्हे साथ चलना है.
शिव : पर में क्या करूँगा, और न hi में किसी को जनता हु.
मनीषा : तुम जानते हो, प्रकाशराओ के वह पार्टी है, पार्टी छुम पूजा. और पवनजी भी अपनी वाइफ के साथ आनेवाले है, तो तुम्हे कंपनी भी मिल जाएगी, और में तो हु hi. मेरा बच्चा भी साथ में होगा तो अकेले मैनेज करना मुश्किल होगा, तो तुम्हे साथ चलना hi है.
शिव : पर पार्टी किस बात की है.
मनीषा : वो सब तुम्हे पता चल जायेगा, कल शाम पांच बजे आ जाना. हमे 6 बजे निकलना है, खाना वही खा कर hi आएंगे.
इंकार करने का तो सवाल hi नहीं था, तो दूसरे दिन जो मेरे पास सबसे अच्छे कपडे थे वो पहन कर में मनीषा मैडम के घर पहुंच गया, वो एक खूबसूरत और बहोत महंगी साड़ी में सज्ज थी, उनको देख कर hi उनकी रैशी का पता चल रहा था. साथ में बच्चे को भी अच्छे कपडे पहनाये हुए थे. बच्चे को एक पहियों वाली गाड़ी में ले जाना था. में मैडम को hi देख रहा था, सच में वो बहोत सुन्दर लग रही थी. उनके सामने तो में फटीचर hi लग रहा था. मुझे पता था की प्रकाशराओ भी आमिर आदमी है तो उनके वह आनेवाले लोग आमिर hi होंगे, और ऐसे में में वह कैसा लगूंगा.
मनीषा : क्या हुआ, रुक क्यों गए, अंदर आओ.
शिव : आप बहोत खूबसूरत लग रही है.
मनीषा : (मुस्कुराते हुए) थैंक यू.

शिव : एक बात पुछु मैडम, प्रकाशरोजी बहोत बड़े आदमी है और उनके वह पार्टी है तो वह भी बहोत बड़े बड़े लोग आएंगे तो फिर आप मुझे वह क्यों ले जा रही है.
मनीषा : बड़े बड़े लोग आएंगे तो क्या हुआ, लोग hi तो है, उनसे क्या घबराना, क्या में आमिर हु तो मुझसे भी घबराते हो?
शिव : नहीं वैसी बात नहीं है, पर फिर भी थोड़ा अजीब लगेगा.
मनीषा : तुम मेरे कपडे देख कर ऐसा कह रहे हो, वह सब ऐसे hi कपडे पहने होंगे और तुमने सामान्य कपडे पहने है, पर शिव आदमी की पहचान उसके कपड़ो से नहीं उस से, खुद से होती है, में अगर सामान्य कपडे पह्नु तो में बदल नहीं जाउंगी, वैसे hi तुम जो हो सो हो, इसमें कुछ भी शर्माने की जरुरत नहीं, पर तुम्हारी जानकारी के लिए कह दू की मैंने तुम्हारे लिए भी कपडे रक्खे है, जाओ चेंज कर लो.
शिव : उसकी क्या जरुरत थी मैडम, और वैसे भी आपने कहा न की आप सामान्य कपडे पहनोगी तो आप सामान्य नहीं हो जाओगी, वैसे hi में ऐसे कपडे पहनूंगा तो आमिर नहीं हो जाऊंगा, जो जो है वो वो है, तो कपड़ो की जरुरत नहीं है, ऐसे hi चलता हु.
मनीषा : मैंने कपडे इस्सलिये नहीं मंगवाए है, तुम तो वैसे भी अच्छे hi दीखते हो, ऐसे चलोगे तो भी वह लड़कीअ तुम्हे hi देखेगी, पर मेरी इच्छा है की तुम वैसे कपडे पहनो, अब ज्यादा बहस मात करो, देर हो रही है, जाओ तैयार हो जाओ, उस रूम में कपडे है.
में अंदर गया तो वह एक ब्लू सूट रक्खा हुआ था, मैंने कभी सूट नहीं पहना था, ये पहला मौका था. में कपडे पहन कर बहार आया तो मुझे देखते हुए मनीषा मैडम की आंखे फटी की फटी रह गयी.
मनीषा : वाओ! शिव, तुम तो बहोत हैंडसम हो यार, मैंने सोचा नहीं था की तुम ऐसे भी दिख सकते हो, आज तो सबकी निगाहे तुम पर hi रहनेवाली है.

शिव : (वो जिस तरह से मुझे देख रही थी, एक बार तो मुझे भी शर्म आ गयी) चलिए.
आज उन्होंने ड्रिविएर लिया था, वो और बच्चा पीछे बेथ गए और में आगे की सीट पर बेथ गया, हम पार्टी के लिए, उनके घर पहुंच गए, घर रोशनीसे सजा हुआ था, ऐसा लग रहा था जैसे कोई खास बात हो, अब मुझे ये भी पता था की ये वैस्वी का घर है, और स्वर्णजी भी होंगी. अभी तक मुझे ये पता नहीं था की आखिर पार्टी किस बात की है, और पूजा भी है तो कोई न कोई खास बात तो जरूर होंगी.
कमली और सुपरिवीज़र, नहीं बन रही सोसाइटी के बने हुए मॉडल घर में थे, ये सब सुरु हुआ था कुछ महीनो पहले. कमली के बाप को जुआ खेलने की लत लग चुकी थी, कई बार वो जित भी जाता था पर ज्यादातर वो हारता hi था, सुपरवाइजर को ये बात पता थी, की अक्सर कमली के बाप को पैसो की जरुरत पड़ती रहती है, तो उसे ये कमली को भोगने का रास्ता नजर आनेलगा था, एक बार कमली के साथ सेटिंग हो गयी तो भोली और झुमरी के साथ भी सेटिंग हो जनि थी. उसने सुरु में थोड़े थोड़े पैसे दिए, दो सौ पैसो से सुरु होते होते बात दस हजार तक पहुंच गयी, उसने पैसो पर व्याज लगाना सुरु कर दिया, दस ताका व्याज लगते हुए पैसे बढ़ने लगे, उसने पैसे उधर लिए है ऐसा प्रामिसरी नोट भी तैयार करवाके उसका अंगूठा ले लिया ताकि वो मुकरे न. वो ठहरा जुआरी, कहासे पैसे लौटता, धीरे धीरे पैसे पंद्रह हजार हो गए. अब सुपरवाइजर को लगने लगा की ये hi सही मौका है. एक दिन उसने कमली के सामने उसके बाप को पैसे लौटने को कहा, एक साथ पंद्रह हजार वो नहीं लौटा सकते थे, ऊपर से हर महीने पंद्रहसौ ब्याज चढ़ रहा था, एक दो बार कमली के सामने उसने उसके बाप को झालील किआ, और किसी भी तरह ब्याज चुकाने को कहा. वैसे बाप बेटी मिलकर पंद्रह हजार रुपया कमलते थे, पर उसका बाप अपने सरे पैसे जुए और शराब में उदा देता था, तो बचते थे सिर्फ कमली के पैसे, उसी में घर चलना होता रहता था, उसमे से अगर पंद्रह सो रुपए सुपरवाइजर को दे दिए जाये तो घर चलना मुश्किल था, फिर भी कैसे भी करके एक दो महीने तो उन्होंने दिए, पर फिर नहीं दे परहे थे, पिछले महीने उसकी माँ बीमार पद गयी थी तो उसी के इलाज में भी पैसे लग गए थे, जब उसने इस महीने पैसे देने से मन किआ तो सुपरवाइजर की आंखे चमक उठी, ब्याज के बदले में उसने कमली को हमबिस्तर होने को कहा, वैसे भी कमली उसके इरादे पहले से जानती थी, उसके बाप को वो पैसे किस लिए दे रहा है ये भी वो जानती थी. पर उसने मन कर दिया तो सुपरवाइजर ने वो कागज दिखते हुए पुरे पैसे एक साथ मांगे, और अगर न दिए तो पैसे न लौटने पर जेल भेजने की धमकी दी. कमली को इतना गुस्सा आया की उसने अपने बाप को hi सबके सामने मारा और वो रट हुए मार खता रहा, आखिर कर कमली ने हथियार दाल दिए और सुपरवाइजर की बात मन ने को तैयार हो गयी.
झुमरी और भोली ने भी पैसे देने को कहा और दूसरे लोगोने भी कहा, पर ये एक बार का तो था नहीं, और कमली बहोत ज्यादा गुस्से में थी, ये गुस्सा अपने बाप पर था, उसी की वजह से वो इस दसा में पहुंच गयी थी, इसलिए वो सुपरवाइजर के साथ उस रूम में पहुंच गयी थी. सुपरवाइजर ने दरवाजा बंद किआ और कमली की और जाते हुए.
सुपरवाइजर : शह्ह्ह्हह्ह, क्या कमल का बदन है ऋ तेरा, कितना तड़पाया है तूने, तेरी मटकती गांड देख कर तो हर समय लुंड खड़ा हो जाता था, आज पूरी कसार निकलूंगा. (वो कमली के चक्कर लगते हुए उसे हवसी नजरो से ददख रहा था, कमली अपनी नज़ारे झुकाये अपनी किस्मत को गालिया दे रही थी. थोड़ी देर देखने के बाद वो उसके कूल्हों को सहलाते हुए उसकी सख्ताई को जांचने laga)Shhhhh क्या कड़क कूल्हे है तेरे, (वो उसे दबाते हुए उसे महसूस कर रहा था, थोड़ी देर सहलाने के बाद उसने कमली को पलंग के सहारे घोड़ी बना दिया और उसका घाघरा ऊपर उठा दिया, निचे एक सस्ती से कच्छी पहनी हुई थी, जिस पर दो तीन तो छेड़ the)Are मेरी रानी, क्या फटेहाल जिंदगी जी रही है, में हु न, मेरे से नाता बनाये रक्खेगी तो फ़ायदेमए रहेगी, चल कल hi तेरे लिए नयी कच्छी ले आता हु, वैसे भी अगर नहीं भी पहनेगी तो चलेगा पर कच्ची में कमल लगती है, तो पक्का कल ले आऊंगा. (उसने कूल्हों से कच्छी सरकायी और उसके सामने कमली की गांड आ gayi)Shhhhhhh तेरे कूल्हे देख कर hi मेरा तो लुंड कड़ा हो गया, क्या कमल की है तू कमली, बाल वाल साफ़ नहीं करती क्या, कोई बात नहीं अब में हु न, सब करवाडुंगा. (वो उसके कूल्हे फैला कर छूट और गान के छेड़ को देखने लगा, वह कोई गीलापन नहीं था जो दर्शाता था की कमली बिना मान के ये सब कर रही है, पर उसे कोई फर्क नहीं पड़नेवाला था, वैसे भी मान हो की न हो छूट में लुंड जाते hi अपने आप पानी छोड़ने लगती है.) तेरी छूट देख कर तो अब रहा नहीं जाता, चल मेरा लुंड चूस फिर तेरी छूट बजाते है (वो पलंग पर बेथ गया और अपना पंत निकल दिया, कमली कड़ी रही, तो उसने उसका हाथ पकड़ कर खिंचा और अपने लुंड के पास धकेल के बिठा diya)Chal चूस मेरी रानी, देख कैसे तुजे देख कर कड़क हो गया है. (कमली ने मुँह फेर लिया, तो सुपरवाइजर अपने लुंड को उसके होठो के पास ले गया, और उसके होठो पर अपना लुंड लगाने की कोशिस करने लगा पर कमली अपना मुँह इधर उधर घुमा देती थी, सुपरवाइजर को गुस्सा आ रहा था, उसने दोनों और से कमली के बाल पकड़े और मुँह को सीधा पकड़े रक्खा और अपना लुंड उसके होठो पर लगाया पर कमली ने अपने अपना मुँह कास के बंद कर दिया, सुपरवाइजर को और गुस्सा आ रहा था, उसने धक्के से उसका शिर छोड़ा और उसके बाल पकड़ कर उसे खड़ा किआ और बीएड पर धकेला) तू ऐसे नहीं मानेगी, पहले तेरी छूट बजता हु. (उसने फिर से कमली का घाघरा ऊपर करदिया, वो निचे से नंगी थी, न वो कुछ बोल रही थी न उसकी और देख रही थी, उसकी आँखों में भी आंसू उतर आये थे, वो अपनी मजबूरी पर रो रही थी, सुपरविसोर ने उसकी टंगे फैलाई और उसके पैरो के बिच बेथ गया और अपने लुंड पर थूक लगाने लगा, गुस्से और जबरदस्ती करने के चाकर में लुंड थोड़ा ढीला पद गया था, पर फिर भी उसने अपनी पोसिटिव ली)
अभी उसने पोसिसिओं ली hi थी की दरवाजा खुल गया, जल्दी जल्दी और बेफिकरी में उसने दरवाजा अंदर से बंद नहीं किआ था, दरवाजे पर शिव को खड़े देख कर वो चौंक गया.
सुपरवाइजर : ोये, तू यहाँ क्या कर रहा है? (शिव वही खड़ा tha)Chal निकल यहाँ से, जा अपना काम कर.
शिव : (गुर्राते hue)Chhod उसे, और तू निकल यहाँ से. (मेने देखा की कमली निचे से नंगी थी और उसकी छूट साफ़ दिख रही थी, छूट पर लगे बालो से घिरी छूट साफ़ साफ़ दिख रही थी, उसने भी देखा की मेरी नजर उसकी छूट पर है तो उसने फ़ौरन अपनी घाघरा निचे किआ और छूट को धक् दिया)
सुपरवाइजर : इन सब से तेरा कोई लेने देना नहीं है, तू निकल यहाँ से, और अगर तुजे भी छोड़ना है तो बाद में छोड़ लेना, पहले तो में hi छोडूंगा. (में उसके नज़दीक गया और उसका गिरेबान पकड़ कर उसेपीछे खिंचा तो वो बीएड से उतर गया और खड़ा हो गया, उसका पंत अभी भी निचे था और उसका लुंड निचे लटक रहा था, उसका लुंड सिदद रहा था और ढीला पद गया था, शायद मेरी वजह से) छोड़ मेरा गिरे बन (उसने मेरा हाथ झटकना चाहा पर मेने मजबूती से पकड़ा था) छोड़ मुझे, ये हमारा हिसाब किताब है, तू अपना काम कर. वो अपनी मर्जी से मुझसे छुड़वाने आयी है.
शिव : (मेने कमली को देखा तो उसकी आँखों में उदासी थी और आंखे भी भरी हुई थी, मुझे नहीं पता था की उनका क्या माजरा है पर इतना तो समाज सकता था की वो मजबूरी में है) ये सब मुझे समाज आता है, मेने कहा न निकल यहाँ से, वर्ण अच्छा नहीं होगा.
सुपरवाइजर : इसके बाप ने मुझसे पैसे लिए थे और वो चूका नहीं रहा है, इसीलिए ये मेरे निचे है, (कमली se)Kamali इससे बोल जाये यहाँ से वर्ण तेरे बाप के लिए अच्छा नहीं होगा.
शिव : अगर इसके बाप से तेरा हिसाब है तो जा उसको छोड़, और जो करना है उसके साथ कर, उसके बाप का सहारा ले कर इसके साथ जबरदस्ती करने का तुजे कोई हक़ नहीं, चल अब निकल यहाँ से वर्ण तेरी खैर नहीं.
सुपरवाइजर : (एक लड़की के सामने अपनी बेइज्जती से वो थोड़ा टैक्स में आ गया, और अपना हाथ पीछे करके मेरे हाथ से अपना गिरेबान छुड़ाने की कोशिस करते हुए मेरी और घूमने लगा, वो गिरेबान छुड़ा नहीं पर रहा था तो उसने मेरे पर हाथ उठाया, में तैयार था, मेने उसका हाथ पकड़ा, और उसे गिरेबान से अपना हाथ हटा कर उसको एक चांटा मारा, चांटा पड़ते hi वो और गुस्सा हो गया और मुझे मरने के लिए बढ़ा तो मेने फिर से एक चांटा मारा) मुझे मरता है, देख में तेरा क्या हल करता हु (वो फिर मुझे मरने की कोशिस करने लगा, में हर बार उसे चांटा मर रहा था, तीन चार छंतो से उसका चेहरा लाल हो गया, उसे समाज आ गया की वो मुझसे लड़ नहीं सकता तो वो मुझे धमकिए देने लगा) में तुजे नौकरी से निकलवा दूंगा, सेल तूने मुझपर हाथ उठाया, देख अब में तेरा क्या हाल करवट हु.
शिव : निकल जा यहाँ से वर्ण नंगा करके बहार निकल दूंगा. (मेरे ऐसा कहते hi उसको अपनी स्थिति का बहन हुआ और उसने अपना पंत ऊपर चढ़ा लिया और बहार निकल गया, जाते जाते भी वो धमकिए दे रहा था)
सुपरवाइजर : अब में इसके बाप को जेल भिजवाऊंगा, और तुजे नौकरी से निकलवा दूंगा, सेल तूने मुज पर हाथ उठाया है. (बाद बढ़ाते ते हुए वो दरवाजा खोल कर बहार निकल गया, जैसे hi दरवाजा खुला मेने देख की सब लोग वह खड़े थे, तो में भी बहार निकल गया, भोली और झुमरी अंदर चली गयी. में कमली के बाप को पहचानता था तो मेने उसे भी डांटा और अपनी बेटी को ऐसे आगे करने के लिए खूब खरी खोटी सुनाई, वो अपना शिर झुकाये सब सुन रहा था)
सुपरवाइजर वह से निकला और उसने प्रकाशराओ को फ़ोन लगाया.
सुपरवाइजर : सर, पवनसीर के आदमी ने मुझे मारा.
प्रकाशराओ : किसने?
सुपरवाइजर : शिव ने?
प्रकाशराओ : (शिर का नाम सुनते hi उनके कान खड़े हो गए, उनको पता था की यही वो सख्स है जो उसके आड़े आ रहा है) हुआ क्या था?
सुपरवाइजर : कुछ नहीं सर, एक लड़की है, कमली, वो काम नहीं कर रही थी, तो मेने उसे डांटा, की काम करो, मुफ्त की पगार नहीं मिलेगी, पर वो शिव की चाहती है, पूरा दिन वो शिव के आगे पीछे घूमती रहती है, तो उसकी वजह से शिव ने मुझपर हाथ उठाया.
प्रकाशराओ : उसकी इतनी हिम्मत, में अभी पवन से बात करता हु, मेरे आदमी पर हाथ उठता है.
(सुपरवाइजर मान hi मान खुस हो रहा था, फिर वो पुलिस स्टेशन की और निकल गया, कमली के बाप के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाने)( आधे घंटे बाद मुझे पवनसीर का फ़ोन आया)
पवनसीर : क्या हुआ शिव, तूने सुपरवाइजर को मारा है?
शिव : सर, वो एक लड़की की इज्जत से खेल रहा था, तो मेने उसे रोका तो वो मुझे मरने लगा तो मेने भी उसे मारा.
पवनसीर : कोनसी लड़की?
शिव : कमली.
पवनसीर : पर प्रकाशराओ जी तो बता रहे थे की कोई लड़की काम नहीं कर रही थी और सुपरविसोर उसे दन्त रहा था, और वो तुम्हारी चाहती है इस्सलिये तुमने उसे मारा.
शिव : वो झूठ बोल रहा है. यहाँ सबने ये देखा है, आप किसी से भी पूछ शक्ति है.
पवनसीर : ठीक है, में प्रकाशरोजी से बात करता हु.
शिव : (थोड़ी देर बाद भोली मेरे पास आयी) ये माज़रा क्या है? (उसने मुझे सब बता दिया, की पैसो की वजह से ये सब हुआ था, अभी हम बात कर hi रहे थे की मुझे भार्गवी मैडम का फ़ोन aaya)Hello.
भार्गवी : तुमने किसी को मारा है क्या?
शिव : आप को कैसे पता चला?
भार्गवी : यहाँ एक आदमी कम्प्लेन करने आया है, वो कह रहा है की उसने किसी को पैसे उधर दिए थे, और जब वो अपने पैसे वापस मांग रहा था तो उस आदमीने पैसे देने से इंकार कर दिया और शिव नाम के लड़के से पिटवाया.
शिव : वो झूठ बोल रहा है मैडम, वो एक लड़की का गलत फायदा उठा रहा था, वो जिसकी बात कर रहा है वो इस लड़की का बाप है, उसने पैसे दिए थे और उसके बदले वो उस लड़की का गलत फायदा उठाने की कोशिस कर रहा था इसीलिए मेने उसे मारा है, और वो भी तब जब उसने मुज पर हाथ उठाया.
भार्गवी : ओह, ये बात है, तुम उस लड़की और उसके बाप को ले कर पुलिस स्टेशन आ जाओ.
और गवाही के लिए एक दो और लोगो को भी ले आओ.
शिव : ठीक है मैडम. (मेने जब कमली और उसके बाप को बताया तो वो दोनों दर गए, मेने जब उन्हें कहा की वो इंस्पेक्टर मेरी पहचान में है तब जा कर वो लोग मने, मेने झुमरी और भोली को भी साथ ले लिया.)
जब हम पुलिस स्टेशन पहुचेतो हमे देख कर सुपरवाइजर भार्गवी मैडम से कहने लगा.
सुपरवाइजर : यही है मैडम, इसिने मुझे मारा है, गिरफ्तार कर लीजिये इससे, और इसने मुज से पैसे लिए है, जिसकी पर्ची में पहले hi आपको दे चूका हु.
भार्गवी : पर ये लड़की तो तुम्हारे खिलाफ कम्प्लेन लिखवाने आयी है, की तुमने इसकी इज्जत पर हाथ डालने की कोशिस की. (कमली ने मेरी और देखा तो मेने उसे चुप रहने का इस्सर किआ)
सुपरवाइजर : ये झूठ है मैडम, एक तो पैसे नहीं दे रहे और ऊपर से मुज पर झूठा इल्जाम लगा रहे है.
भार्गवी : शिव, ये तो कह रहा है की ये झूठ है, है कोई गवाह जो ये कह शेक की ये सच है? (मेने भोली और झुमरी को दिखा कर कहा की ये गवाही देगी, वो दोनों इस इंस्पेक्टर को पहचान गयी थी, उस डिम जब वो मुझसे मिलने आयी थी तो मैंने कहा था की वो मेरी पहचान में है, तो अब उनका दर ख़तम हो गया था)
भोली : है मैडम, में गवाही दूंगी, ये जूथ बोल रहा है.
सुपरवाइजर : नहीं मैडम, ये सब मिले हुए है, मुझे फ़साना चाहता है.
भार्गवी : (टेबल पर पड़ा डंडा लेते hue)Hamare पास और भी रस्ते है, कोण सच बोल रहा है और कोण जूथ, ये पता करने का. (डंडा देख कर सुपरवाइजर डरने लगा) तो एक केस ये बनता है की ये आदमी तुम्हारे पैसे नहीं दे रहा, और दूसरा ये की तुमने इस लड़की के साथ जबरदस्ती करने की कोशिस की. एक में ये अंदर जायेगा और दूसरे में तुम. और तुम तो बहोत लम्बे जाओगे. (सुपरवाइजर के पशीने छूट रहे थे)
सुपरवाइजर : आप मुझे डरा रही है, में अपने साहब से बात करना चाहता हु.
भार्गवी : कर लो.
सुपरवाइजर : (प्रकाशराओ को फ़ोन लगता hai)Sir, में पुलिस स्टेशन से बोल रहा हु, में यहाँ कम्प्लेन लिखवाने आया था पर ये लोग मुझे जूते केस में फंसा रहे है, आप मला सर से बात करके कुछ कीजिये.
प्रकाशराओ : अबे बेवकूफ, वह क्यों पहुंच गया तू, और मुझे पवन का भी फ़ोन आया था, तूने उस लकड़ी की िज्जल लूटने की कोशिस की? मुझे कुछ और बता रहा है और वह कुछ और हुआ है.
सुपरवाइजर : नहीं सर, में सच कह रहा हु, ये सब मुझे फंसा रहे है.
प्रकसराओ : मुझे चुटिया समाज रहा है, और वह मला का नाम ले रहा है, सेल गोली मर देगा वो तुम्हे, फ़ोन रख और जो खुद रायता फैला है उसे खुद hi chat.(Usne फ़ोन काट दिया, सुपरवाइजर पशीने से पूरा भीग गया था, वो अपनी बेवकूफी पर पछता रहा था, उसे लगा की मला और प्रकसराओ के दम पर वो कुछ भी कर शक्ति है, पर उसकी हवा निकल गयी थी)
भार्गवी : (वो उसकी हालत देख कर समाज गयी थी) तो भाई, आ रहे है तुम्हारे साहब और मला साहब. (वो भीगी बिल्ली की तरह मैडम को देखने laga)Teri हालत देख कर तो लग रहा है की कोई नहीं आनेवाला, तो भाई तू इनके खिलाफ कम्प्लेन कर और लड़की तू इसकेख़िलाफ.
सुपरवाइजर : मुझे कोई कम्प्लेन नहीं करनी, मुझे कोई पैसे नहीं चाहिए, मुझे छोड़ दीजिये.
कमली : शिव, मुझे भी कोई कम्प्लेन नहीं करनी, मुझे इन चक्करो में नहीं पड़ना है.
शिव : कुछ नहीं होगा, में देख लूंगा सब.
कमली : नहीं शिव, मुझे इन करत कचेरी से बहोत दर लगता है, मुझे कोई कम्प्लेन नहीं करनी.
भार्गवी : और भाई तू (कमली के बाप se)Jue में पैसे लगता है और अपनी बेटी को hi देव पर लगा दिया, कहा खेलता है जुआ? (उसका बाप कंपनी लगा)
क का बाप : मुझे माफ़ कर दीजिये, में फिर कभी ऐसा नहीं करूँगा.
भार्गवी : में तुजे िसलयक छोडूंगी भी नहीं, कहा जुआ खेलता है उसकी पूरी जानकारी लिखवा, न रहेगा अड्डा न खेलेगा जुआ.
कमली बहोत दर रही थी तो उसने बहोत समजने पर भी कम्प्लेन नहीं की, मैडम ने भी बहोत कहा पर वो न मणि. तो मजबूरन उन्हें सुपरवाइजर को छोड़ना पड़ा, उन्होंने पैसो की वो पर्ची भी फाड़ दी, और उसके बाप से सब जानकारी लेने के बाद उसे भी वार्निंग दे दी. सब चले गए, में और मैडम hi बचे थे.
भार्गवी : मुझे लगता है अब तेरी कम्प्लेन करनी पड़ेगी.
शिव : ऐसा क्यों कह रही है आप.
भार्गवी : हर जगह तू अपनी तंग घुसता रहता है, क्या जरुरत थी तुजे इन सब में पड़ने की.
शिव : मैडम में किसी मामले में तंग नहीं डाटा, मामला खुद बा खुद मेरी तंग में आ के फंस जाता है, अब में क्या कर शक्ति हु. (हम दोनों हसने लगे, थोड़ी देर उनसे बात करने के बाद में वह से निकल गया, वो दिन फिर में साइट पर नहीं गया, वैसे भी मेरा स्टेडियम जाने का समय हो गया था) शाम को को मुझे काव्य मैडम का फ़ोन आया तो में उनसे मिलने चला गया. उन्होंने ऐसे hi बुलाया था, थोड़ी देर उनसे गैप सैप कर के में वापस घर आ गया.
दूसरे दिन जब में साइट पर गया तो पता चला की सुपरवाइजर आज आया hi नहीं था. मेने पवनसीर को बताया तो उन्होंने कहा की वो दूसरे किसी सुपरवाइजर को धुंध रहे है, तब तक हमे hi संभालना पड़ेगा. एक दो दिन में दूसरा सुपरवाइजर आ जायेगा. कमली मुझसे नज़ारे नै मिला रही थी, न hi बात कर रही थी. भोली बार बार मेरे पास आ जाती थी और मुझे छेड़ रही थी. में समाज रहा था की उसे क्या चाहिए. पर मेने अभी ज्यादा ध्यान न देना hi उचित समजा.
दो दिन बाद दूसरा सुपरवाइजर भी आ गया, ये शांत और अपने काम में अच्छा था, और इससे पवनसीर ने hi रखवाया था. एक शाम को मुझे मनीषा मैडम का फ़ोन आया और मुझे मिलने को बुलाया.
शिव : कहिये मैडम.
मनीषा : कल हमें एक पार्टी में जाना है. सूर्य है नहीं, और मुझे अकेले नहीं जाना. तो तुम्हे साथ चलना है.
शिव : पर में क्या करूँगा, और न hi में किसी को जनता हु.
मनीषा : तुम जानते हो, प्रकाशराओ के वह पार्टी है, पार्टी छुम पूजा. और पवनजी भी अपनी वाइफ के साथ आनेवाले है, तो तुम्हे कंपनी भी मिल जाएगी, और में तो हु hi. मेरा बच्चा भी साथ में होगा तो अकेले मैनेज करना मुश्किल होगा, तो तुम्हे साथ चलना hi है.
शिव : पर पार्टी किस बात की है.
मनीषा : वो सब तुम्हे पता चल जायेगा, कल शाम पांच बजे आ जाना. हमे 6 बजे निकलना है, खाना वही खा कर hi आएंगे.
इंकार करने का तो सवाल hi नहीं था, तो दूसरे दिन जो मेरे पास सबसे अच्छे कपडे थे वो पहन कर में मनीषा मैडम के घर पहुंच गया, वो एक खूबसूरत और बहोत महंगी साड़ी में सज्ज थी, उनको देख कर hi उनकी रैशी का पता चल रहा था. साथ में बच्चे को भी अच्छे कपडे पहनाये हुए थे. बच्चे को एक पहियों वाली गाड़ी में ले जाना था. में मैडम को hi देख रहा था, सच में वो बहोत सुन्दर लग रही थी. उनके सामने तो में फटीचर hi लग रहा था. मुझे पता था की प्रकाशराओ भी आमिर आदमी है तो उनके वह आनेवाले लोग आमिर hi होंगे, और ऐसे में में वह कैसा लगूंगा.
मनीषा : क्या हुआ, रुक क्यों गए, अंदर आओ.
शिव : आप बहोत खूबसूरत लग रही है.
मनीषा : (मुस्कुराते हुए) थैंक यू.

शिव : एक बात पुछु मैडम, प्रकाशरोजी बहोत बड़े आदमी है और उनके वह पार्टी है तो वह भी बहोत बड़े बड़े लोग आएंगे तो फिर आप मुझे वह क्यों ले जा रही है.
मनीषा : बड़े बड़े लोग आएंगे तो क्या हुआ, लोग hi तो है, उनसे क्या घबराना, क्या में आमिर हु तो मुझसे भी घबराते हो?
शिव : नहीं वैसी बात नहीं है, पर फिर भी थोड़ा अजीब लगेगा.
मनीषा : तुम मेरे कपडे देख कर ऐसा कह रहे हो, वह सब ऐसे hi कपडे पहने होंगे और तुमने सामान्य कपडे पहने है, पर शिव आदमी की पहचान उसके कपड़ो से नहीं उस से, खुद से होती है, में अगर सामान्य कपडे पह्नु तो में बदल नहीं जाउंगी, वैसे hi तुम जो हो सो हो, इसमें कुछ भी शर्माने की जरुरत नहीं, पर तुम्हारी जानकारी के लिए कह दू की मैंने तुम्हारे लिए भी कपडे रक्खे है, जाओ चेंज कर लो.
शिव : उसकी क्या जरुरत थी मैडम, और वैसे भी आपने कहा न की आप सामान्य कपडे पहनोगी तो आप सामान्य नहीं हो जाओगी, वैसे hi में ऐसे कपडे पहनूंगा तो आमिर नहीं हो जाऊंगा, जो जो है वो वो है, तो कपड़ो की जरुरत नहीं है, ऐसे hi चलता हु.
मनीषा : मैंने कपडे इस्सलिये नहीं मंगवाए है, तुम तो वैसे भी अच्छे hi दीखते हो, ऐसे चलोगे तो भी वह लड़कीअ तुम्हे hi देखेगी, पर मेरी इच्छा है की तुम वैसे कपडे पहनो, अब ज्यादा बहस मात करो, देर हो रही है, जाओ तैयार हो जाओ, उस रूम में कपडे है.
में अंदर गया तो वह एक ब्लू सूट रक्खा हुआ था, मैंने कभी सूट नहीं पहना था, ये पहला मौका था. में कपडे पहन कर बहार आया तो मुझे देखते हुए मनीषा मैडम की आंखे फटी की फटी रह गयी.
मनीषा : वाओ! शिव, तुम तो बहोत हैंडसम हो यार, मैंने सोचा नहीं था की तुम ऐसे भी दिख सकते हो, आज तो सबकी निगाहे तुम पर hi रहनेवाली है.

शिव : (वो जिस तरह से मुझे देख रही थी, एक बार तो मुझे भी शर्म आ गयी) चलिए.
आज उन्होंने ड्रिविएर लिया था, वो और बच्चा पीछे बेथ गए और में आगे की सीट पर बेथ गया, हम पार्टी के लिए, उनके घर पहुंच गए, घर रोशनीसे सजा हुआ था, ऐसा लग रहा था जैसे कोई खास बात हो, अब मुझे ये भी पता था की ये वैस्वी का घर है, और स्वर्णजी भी होंगी. अभी तक मुझे ये पता नहीं था की आखिर पार्टी किस बात की है, और पूजा भी है तो कोई न कोई खास बात तो जरूर होंगी.


